बहू नगीना और ससुर कमीना
06-10-2017, 09:15 AM,
#71
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
राजीव मालिनी को आँख मारा और लूँगी हटाकर उसके हाथ में अपना लौड़ा पकड़ा कर बोला: अरे नहीं मेरी बहु तो नगीना है। हाँ यहाँ वहाँ मुँह मैं भी मार लेता हूँ। पर बहु के बारे में ऐसा नहीं सोचा। मालिनी उसका लौड़ा सहलाते हुए सोची कि कितना झूठ बोल रहे हैं। इधर मेरे हाथ में लौड़ा दे दिए है और कहते हैं की बहु के बारे में गन्दा नहीं सोचते। 

डॉली: रहने दो अब तो भाभी भी नहीं है आपको रोकने वाली। अब तो आप महक को भी नहीं छोड़ोगे , बहु क्या चीज़ है। 

मालिनी चौक कर उसे देखी और वो उसके होंठ चूम लिया और बोला: अरे वो बाहर रहती है उसकी क्यों बात कर रही हो। वैसे अब तुम कभी आ जाओ तो पुरानी यादें ताज़ा हो जाएँगी। 

डॉली: मैं आऊँगी तो शिवा से भी चुदवाऊँगी । बोलो मंज़ूर है?

मालिनी अब चौकी और राजीव को देखी, वो बोला: तुम जानो और शिवा या उसकी बीवी जाने। मुझे इससे क्या। हाँ अगर तुम मेरी भांजी को लाओगी तो मैं ज़रूर उसे पटा कर चोद लूँगा।

मालिनी इन भाई बहन की बातों से बहुत हैरान हो गयी थी। 

डॉली: चलो कुछ प्रोग्राम बना तो बताऊँगी। बाई।

राजीव अब मालिनी को देखा तो वह उत्तेजित दिख रही थी। वह बोला: बहु , एक बार और चूस दूँ तुम्हारी बुर? 

मालिनी: नहीं नहीं पापा जी। ये सब ग़लत है। 

राजीव: अच्छा मेरे लौड़े को ही चूस दो प्लीज़। 

मालिनी ने अपने हाथ में रखे लौड़े को देखा और पता नहीं उसे क्या हुआ कि वह झुक कर उसे चूसने लगी। हालाँकि वो चूसने के मामले में अभी भी अनाड़ी थी, पर राजीव तो सिर्फ़ यह सोचकर कि आख़िर में उसकी बहु उसकी पकड़ में आने वाली है, वह बहुत गरम हो गया। वह अब उसके बदन में भी हाथ फेर रहा था और मस्त हुए जा रहा था।क़रीब २० मिनट की चुसाई के बाद वो उसके मुँह में आऽऽऽँहहह बेटीइइइइइइ करके झड़ने लगा। मालिनी उसका पूरा वीर्य पी गई। वो अभी भी उसका लौड़ा चूसती रही जब तक एक एक बूँद रस निकल नहीं गया। 

राजीव बहुत ख़ुश होकर बोला: आऽऽऽह बेटी मस्ती आ गयी तुमसे चूसवा कर। आज का दिन बहुत अच्छा है जब हम दोनों ने एक दूसरे के अंगों को चूस ही लिया। 

मालिनी चुपचाप जाकर वाशबेसिन में मुँह साफ़ की और अपने कमरे में चली गयी। वहाँ जाकर एक बार से वह आत्मग्लानि से भर गयी कि वो ऐसा कैसे कर सकती है। अपने पति को जो कि उससे बेइंतहा प्यार करता है को कैसे धोना दे सकती है।उसने सोच लिया कि जो हुआ सो हुआ । अब वो अपने ससुर को बिलकुल ही लिफ़्ट नहीं देगी। और उसके साथ कोई भी ग़लत काम नहीं करेगी और ना ही उसे करने देगी। यह सोचकर उसे तसल्ली हुई और वो शिवा को फ़ोन लगाने लगी। उसने शिवा को बताया कि पापा उसके लिए एक महँगी गिफ़्ट लाए है और उसके लिए भी एक बढ़िया घड़ी लाए हैं तो वो बहुत ख़ुश हुआ। शिवा से बात करके उसको अच्छा लगा और वह अपनी आत्मग्लानि से काफ़ी हद तक बाहर आ गई। अब उसका विश्वास और बढ़ गया कि अब तक उसके ससुर और उसके बीच में जो भी हुआ था ग़लत था और उसे ये सबको यहाँ ही रोकना पड़ेगा। उसने सोचा कि पता नहीं पापा जी उसके इस नए निर्णय को कैसे लेंगे। पता नहीं क्या नई मुसीबत खड़ी होगी उसके इस निर्णय से । वह थोड़ी चिन्ता में डूब गयी।
शाम को शिवा आया और उसके पापा ने उसे घड़ी उपहार में दी तो वो बोला: थैंक्स पापा जी बहुत सुंदर घड़ी है। पर कार का क्या फ़ैसला किए। 

राजीव: अरे बेटा सब कुछ तो तुम दोनों का ही है, वो भी बदल लेना। 

शिवा ख़ुश होकर अपने कमरे में आया और फिर सब कुछ रूटीन सा हुआ। 

अगले दिन सुबह मालिनी ने नायटी के नीचे पेटिकोट और पैंटी भी पहन ली। जब वो राजीव को चाय दी तो उसने उसकी गाँड़ पर हाथ फेरकर कहा: कैसी हो मेरी जान । रात कि चुदाई का सुनाओ। कितनी बार ठोका मेरा बेटे ने तुमको?
फिर उसे यह अहसास हुआ कि वो नायटी के नीचे बहुत कुछ पहनी है । तो वह बोला: ये क्या बेटी। आज नायटी के नीचे ये सब क्या पहन लिया? 

मालिनी: पापा जी मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूँ। 

राजीव अब भी उसकी गाँड़ में हाथ फेरकर बोला: बोलो बेटी। क्या बात है?

मालिनी उसका हाथ अपनी गाँड़ से हटाती हुई बोली: पापा जी, मैंने आपके और अपने रिश्ते के बारे में बहुत सोचा और फ़ैसला किया है कि अब मैं आपसे इस तरह का कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती। आप मेरे ससुर हैं बस मेरे लिए यही सच है और कुछ नहीं। 

राजीव हैरान होकर बोला: अरे बेटी, रात भर में ऐसा क्या हो गया? बताओ तो सही।

मालिनी: पापा जी कुछ नहीं हुआ। बस मुझे समझ में आ गया है कि मैं ग़लत रास्ते पर बहक रही थी और अपने पति अव धोका करने जा रही थी। बस इतना ही है और कुछ नहीं। 
फिर पापा जी सासु माँ भी तो इसके ख़िलाफ़ थीं। मैं भी उनके पद चिन्हों पर चलूँगी। रिश्तों की पवित्रता बनाए रखूँगी। 

राजीव उलझन में पड़कर बोला : क्या कह रही हो पता नहीं? अच्छा अगर तुमने ऐसा ही सोच लिया है तो यही सही। अब मैं तुमको तंग नहीं करूँगा। 

मालिनी फिर अपने कमरे से वो ईयरिंग ला कर राजीव को देते हुए कहा: पापा जी यह आप वापस लीजिए। मैं इसे नहीं रख सकती। 

राजीव मुस्कुरा कर बोला: यह मैं अपनी बहु को दिया था नाकि अपनी प्रेमिका को। ठीक है ना, ये तुम्हारे पास ही रहेगी। चलो सम्भाल लो। 
राजीव उसे वापस करके वहाँ से चला गया। अपने कमरे में आकर वो सोचा कि ये क्या गड़बड़ हो गयी? आख़िर सब बढ़िया चल रहा था और वह उसकी बुर चूस चुका था और अपना लौड़ा भी चुसवा लिया था उससे , फिर ये अचानक इतना बड़ा बदलाव क्यों और वो भी एकदम से । उसने सोचा कि चलो देखते हैं आगे आगे क्या होता है। 

उधर मालिनी सोचने लगी कि पता नहीं पापा जी इस इंकार को कैसे लेंगे? फिर वो शिवा को उठाई और चाय दी। नाश्ता भी शांति से गुज़रा और शिवा दुकान चला गया। मालिनी कमरे में जाकर नहाई और फिर किचन में जाकर कमला से काम करवाने लगी। मालिनी सोचने लगी कि पापा क्या फिर से अपनी दूसरी शादी करने की ज़िद करेंगे। फिर वह क्या करेगी? इसे शिवा की दुकान की रीमा की याद आइ और वो सोची कि उसका ससुर भी उसे ज़बरदस्ती चोद दिया था पर यहाँ पापाजी उसे दूसरी तरह से मजबूर करके चोदना चाहते हैं। बात तो एक ही थी। वहाँ शारीरिक जनरदस्ती थी रीमा के साथ और यहाँ पापा उसके साथ मानसिक ज़बरदस्ती कर रहे थे । 

वो सोच रही थी कि अभी तो नूरी है कुछ दिन पापा जी की प्यास बुझाने के लिए। उसके बाद क्या होगा? वो फिर से अपनी शादी की ज़िद करेंगे। उफफफ क्या मुसीबत है। 

उधर राजीव सोचने लगा कि क्या किया जाए अब आगे का। ये तो हाथ आया हुआ शिकार हाथ से निकला जा रहा था। फिर क्या उसे वही शादी का ड्रामा फिर से चलाना होगा? पता नहीं क्या किया जाए। उलझने थीं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं। 

ससुर बहु में कोई बात नहीं हुई उस दिन। खाना भी चुप चाप खाए। थोड़ी देर में नूरी आयी और बच्चे को मालिनी के कमरे में सुला कर राजीव के कमरे में चली गयी और एक राउंड की चुदाई के बाद वो बोली: आज आप कुछ चुपचाप से लग रहे हो क्या बात है? 

वो: अरे कुछ ख़ास नहीं। 

नूरी: बताइए ना , शायद मैं कोई काम आ सकूँ। 

राजीव ने अब उसको बहु के बारे में सब कुछ बता दिया और बोला: सब कुछ बढ़िया चल रहा था, कि अचानक वो फिर से मुकर गयी चुदाई के लिए। कुछ समझ नहीं आया। 

नूरी मुस्कुराकर बोली: मुझे तो पहले से ही शक था कि आप दोनों के बीच कुछ चल रहा है, पर आप मानते ही नहीं थे। अच्छा मैं कोशिश करती हूँ। 

राजीव: तुम क्या करोगी ? 

नूरी: कोशिश करने में क्या हर्ज है। 

राजीव: पर तुम उसे यह पता नहीं चलने देना कि मैंने तुमको ये बता दिया है। 

नूरी मुस्कुराकर उसके लौड़े को सहला कर बोली: जानू इतना तो समझती हूँ। देखो मैंने अब तक आपको भी नहीं बताया है कि मैं भी अपने ससुर से फँसी हुईं हूँ। वो आपसे भी ६/७ साल बड़े हैं। और इस उम्र में भी मेरे पति से ज़्यादा मज़ा देते हैं। पर उनके वीर्य में बच्चा पैदा करने की शक्ति नहीं बची है। इसीलिए मैं वापस आपके पास आइ हूँ। 

राजीव: ओह, कबसे चुदवा रही हो उनसे? 

नूरी: पहले उनकी पोस्टिंग दूसरे शहर में थी पर रेटायअर होकर वो अब हमारे साथ ही रहते हैं। 

राजीव: और तुम्हारी सास का क्या? 

नूरी : उसे सब पता है और उसे इसमे कोई समस्या नहीं है। असल में ससुर की सेक्स ड्राइव बहुत ज़्यादा है और वह उसे झेल नहीं पाती। इसलिए वो ख़ुश है कि ससुर उसे भी ज़्यादा तंग नहीं करता और बाहर भी मुँह नहीं मारता।घर की बात घर में ही रहती है। मेरे सास और ससुर को पता है कि मैं आपसे यहाँ चुदवाने आयी हूँ बच्चा पाने के लिए। उनको पहले बच्चे के बारे में भी पता है कि उसका बाप भी उनका बेटा नहीं है। 

राजीव: ओह ये तो अनोखी बात बताई है तुमने। 

नूरी: मैं आपको यह बात नहीं बताती अगर आप अपनी बहु का क़िस्सा नहीं छेड़ते। चलिए मैं कोशिश करती हूँ। अभी मेरे पास कुछ दिन हैं। मैं थोड़ा समय मालिनी के साथ बिताती हूँ और फिर सेकंड राउंड के लिए आऊँगी। ठीक है मेरे जानू? 

राजीव उसकी चूचियाँ चूसकर बोला: ठीक है मेरी जान।

नूरी उठकर कपड़े पहनी और बाहर आकर मालिनी के कमरे में गयी। वहाँ मालिनी और उसका बेटा खेल रहे थे। 

नूरी: ये कब उठा? 

मालिनी: थोड़ी देर हुए उठा है। मैंने इसे दूध दे दिया है तबसे खेल रहा है। वह मालिनी की गोद में बैठे हुए एक खिलोने से खेल रहा था। 

नूरी: सच में तुम बहुत अच्छी लड़की हो जो मेरे लिए इतना कुछ कर रही हो। 

मालिनी: आज आप जल्दी आ गयी बाहर। क्या बात है? 

नूरी : अरे आज तो अंकल का मूड कुछ उखड़ा सा है। एक बार ही किए और लगता है कि पता नहीं दूसरा राउंड करेंगे भी कि नहीं। 

मालिनी अनजान बन कर: क्या हुआ ? उनकी तबियत तो ठीक है ना? 

नूरी : तबियत तो ठीक ही है। पर मूड सही नहीं है लगता है। 

तभी बच्चे ने मालिनी की छाती को पकड़ लिया और वहाँ कुर्ते में लगे एक मछली के आकार के छाप से खेलने लगा। मालिनी ने उसका हाथ वहाँ से हटाया तो वह ज़िद करके फिर उसकी छाती में हाथ मारा उस मछली के प्रिंट को पकड़ने के लिए।
नूरी हँसकर : नालायक वही करेगा जो कि इसके बड़े करेंगे। 

मालिनी: क्या मतलब?

नूरी हँसते हुए: अरे ये तुम्हारी छाती पकड़ रहा है ना, वैसे ही इसका पापा , दादा और दादी भी मेरी छातियाँ पकड़ते रहते हैं। आख़िर है तो उसी खानदान का । 

मालिनी हैरानी से : मतलब? क्या सब लोग आपकी छातियाँ पकड़ते हैं? ये कैसी बात हुई। 

नूरी : बड़ा अजीब खानदान है। सब मेरे पीछे पड़े रहते हैं दिन रात। ख़ासकर इसके दादा तो मेरे पीछे पागल ही हैं। 

मालिनी सकपका कर: क्या कह रही हो दीदी? मतलब आपके ससुर जी? 

नूरी : और क्या? वो तो मुझे दिन भर अपने से चिपटाए रहते हैं। और रात को इसका पापा । बस यही है मेरी ज़िन्दगी। तेरे ससुर तो बहुत अच्छे हैं जो हम जैसे बाहर वालों से मज़ा लेते हैं। मेरी सास तो कहती है कि उनका पति घर में चाहे जो कर ले पर बाहर वाली से मज़े नहीं ले सकता। 

मालिनी: ओह ये बड़ी अजीब बात है । सोचकर भी अजीब लगता है। इसका मतलब है कि आपकी सासु मा को पता है कि आपके ससुर आपके साथ ग़लत काम करते हैं? 

नूरी : उनको क्या पता होना है। अरे वही तो मुझे और ससुर जी को चुदाई के लिए मनाई थीं। 

मालिनी ने आश्चर्य से अपने मुँह पर हाथ रखा और बोली: हाय राम ! क्या कह रही हो? घोर कलयुग। इसके पहले कि कोई कुछ कहता राजीव आवाज़ दिया: नूरी ज़रा पानी लाना प्लीज़।

मालिनी ने नोटिस किया कि उन्होंने उसको आवाज़ नहीं दी बल्कि नूरी का नाम लिया। नूरी: जी लाई अंकल जी। 

वह उठी और बोली: पानी तो बहाना होगा । एक बार और चोदने का मूड बन गया होगा। मैं आती हूँ। वह आँख मारकर चली गई और मालिनी हैरान सी नूरी की कही बातों के बारे में सोचती रह गयी। 

जब नूरी दस मिनट तक वापस नहीं आइ तो मालिनी समझ गयी कि उनकी चुदाई चालू हो गयी होगी। उसका मन बोला कि चलो एक बार देख लेते हैं पर उसने अपने मन को समझाया कि अगर पापा जी ने देख लिया तो वो फिर से पीछे पड़ जाएँगे। उसने ख़ुद को कंट्रोल किया और बच्चे से खेलने लगी। 

उधर राजीव उसको चोदते हुए पूछा: कुछ बात हुई? 

नूरी ने नीचे से गाँड़ उछालके चुदवाते हुए कहा: आऽऽऽह हाँ हुई। हाय्य्य्य्य्य्य । मैंने बात शुरू की है। उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽऽ। 


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06-10-2017, 09:15 AM,
#72
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
राजीव ने भी हाँफते हुए और ज़ोर से धक्का मारते हुए कहा: क्या बोली तुम उसको? 

नूरी: उग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ उसे बताया कि मेरे ससुर मुझे चोद रहे हैं और सासु माँ को भीइइइइइइइइइ माआऽऽऽऽऽलूम हैएएएएएएए। हाऽऽऽऽऽऽऽययय। और जोओओओओओर से चोओओओओओदो । 

फिर चिल्लाते हुए दोनों झड़ने लगे। 

बाद में साथ लेटकर एक दूसरे को चूमते हुए राजीव बोला: तुमको लगता है वो इसमें इंट्रेस्टेड होगी? 

नूरी: मुझे विश्वास है कि वो मेरे पीछे पीछे घूमेगी डिटेल्ज़ जानने के लिए कि ये सब कैसे हुआ और क्या क्या करते हैं हम लोग। 

राजीव: अगर ऐसा हुआ तो इसका मतलब साफ़ है की वह ख़ुद भी मुझसे चुदवाना चाहती है। 

नूरी: चुदवाना तो चाहती है पर उसका ज़मीर बार बार बीच में आ जाता है। उसको इतना उत्तेजित करना होगा कि वो सही ग़लत का फ़ैसला ना कर सके और चुदाई की मस्ती में डूब जाए। यही तरीक़ा है उसको क़ाबू में करने का। 

राजीव: तो जान तुमको क्या लगता है तुम कर लोगी ये काम? ये कहते हुए उसने उसकी मोटे चूतरों को दबाया और गाँड़ में एक ऊँगली डाला और कहा: जानू तुम्हारा ससुर गाँड़ भी मारता है क्या? काफ़ी खुली हुई गाँड़ है तुम्हारी। 

नूरी : अरे वो तो महा गाँड़ प्रेमी हैं। सासु माँ बोलती हैं कि वो उनकी गाँड़ सुहागरत को ही मार दिए थे । 

राजीव: यार तेरा ससुर तो मेरे से भी बड़ा कमीना है। फिर उसकी गाँड़ में ऊँगली करके उसको बोला: कल एक राउंड गाँड़ भी मरवा लेना। 

नूरी हँसकर: जो हुक्म मेरे आका। कल बुर की एक बार तो चुदाई कर दीजिएगा। फिर भले ही गाँड़ भी मार लीजिएगा। लेकिन पानी गाँड़ में नहीं बुर में ही छोड़िएगा। माँ बुर से ही बनूँगी गाँड़ से तो नहीं। हा हा । 

दोनों हँसने लगे। फिर वो उसकी गाँड़ से ऊँगली निकाला और पकककक से आवाज़ हुई और वो दोनों सफ़ाई करके बाहर आए। 

नूरी मालिनी के कमरे में आयी और बच्चे को लेकर जाने लगी तो उत्सुकता से भरी मालिनी बोली: जा रही हो दीदी? 

नूरी : हाँ अब चलती हूँ। कल मिलेंगे। 

मालिनी: थोड़ा रुक जाती तो साथ में चाय पी लेते? 

नूरी मन में मुस्कारायी और बोली: नहीं अब देरी हो रही है चलती हूँ। वो जानती थी कि मालिनी उसको इसलिए रोकना चाहती है ताकि वो उसकी कहानी सुन सके। पर वो उसकी उत्सुकता को बरक़रार रखना चाहती थी। 

वो चली गयी और पीछे छोड़ गयी बेकरार मालिनी जो अभी उसके ख़यालों में उलझी हुई थी। वो सोची कि लो एक और औरत अपने ससुर से मज़े ले रही है और वो भी सास की मंज़ूरी से । हे भगवान ! क्या सही है और क्या ग़लत ? समझ ही नहीं आ रहा। 

वो शाम को पापा को चाय के लिए आवाज़ दी। दोनों ने चुपचाप चाय पी । तब राजीव बोला: बेटी, ये सही है कि तुम अब मेरे साथ आगे नहीं बढ़ना चाहती। मैं तो सोचा था कि आजकल में हमारे बदन एक हो जाएँगे। पर अगर तुमको मंज़ूर नहीं तो ठीक है। पर हम दोस्त तो बन सकते हैं। या इसमे भी कोई समस्या है। 

मालिनी: पापा जी हम दोस्त कैसे बन सकते हैं? मैं तो आपकी बहू हूँ तो वही रहूँगी ना। दोस्त कैसे बनूँगी। 

राजीव: अरे चलो मेरी बहु के साथ साथ दोस्त बनने में क्या हर्ज है? 

मालिनी: ठीक है पापा जी आप जैसा कहें। 

राजीव अपना हाथ बढ़ा कर : तो फिर फ़्रेंड्स ?? 

मालिनी हँसकर हाथ मिलाई और बोली: जी फ़्रेंड्स। 

दोनों मुस्कुराने लगे। अब वातावरण का तनाव ख़त्म हो गया था। 
उस दिन और कुछ ख़ास नहीं हुआ। रात को शिवा से चुदवाते समय मालिनी के कानों में नूरी की बातें घूम रही थीं। वो सोच रही थी कि कल नूरी से पूरी बात सुनेगी। 

अगले दिन भी राजीव सुबह मालिनी के लिए जलेबी लाया और उसके मुँह में डालकर उसे ख़ुद खिलाया। 

मालिनी: पापा जी रोज़ रोज़ इतना मीठा खाऊँगी तो मोटी हो जाऊँगी।

राजीव: अच्छा तो है थोड़ी मोटी होगी तो और सेक्सी लगोगी। 

मालिनी: धत्त मुझे ना मोटी होना है और ना ही सेक्सी दिखना है। 

राजीव: सेक्सी तो तुम हो ही । हाँ अगर थोड़ा सा और भर गई तो और ज़्यादा सेक्सी हो जाओगी। 

मालिनी हँसकर वहाँ से चली गई। 

दोपहर को नूरी आइ और बच्चे को मालिनी को सौंप कर राजीव से चुदवाने चली गई। चुदवाने के बाद राजीव से बोली: आज तो मस्त चोदे । कल कुछ हुआ क्या मेरे जाने के बाद। 

राजीव हँसकर: हाँ हम ससुर बहु दोस्त बन गए हैं। 

नूरी मुस्कुराके: यानी पटाने का काम चालू रहेगा? सही है जानू। 

राजीव: अरे अब तुम जाओ ना और उसे उत्तेजित करो अपनी कहानी सुनाकर । 

नूरी हँसते हुए बोली: अच्छा जाती हूँ । आपको भी सुनना है तो मैं फ़ोन चालू कर दूँगी आप सुनते रहना। 

राजीव अपना लौड़ा मसलकर बोला: नहीं मैं उसके चेहरे की प्रतिक्रिया भी देखना चाहूँगा। मैं खिड़की में आकर झाँकता हूँ। तुम उसे बिस्तर पर बिठाए रखना तो खिड़की से उसका साइड दिखेगा और वो मुझे नहीं देख पाएगी। 

नूरी: अच्छा जी जैसा आप चाहो। फिर उसके लौड़े को चूमकर वह कपड़े पहनकर मालिनी के कमरे में आइ। 

मालिनी उसे देखकर ख़ुश हो गई मानो उसका ही इंतज़ार कर रही थी। आज बच्चा सो रहा था। 

मालिनी: दूध पीकर थोड़ी देर खेला और अब सो गया है। 

नूरी: थैंक्स डीयर अगर तुम ना होती तो पता नहीं मेरा क्या 
होता। 

मालिनी: अरे बार बार आप क्यों ऐसा बोलती हैं। और आपका पहला राउंड हो गया? 

नूरी : हाँ हो गया। आज अंकल अच्छे मूड में थे और मस्त चुदाई किए। अब वो आराम कर रहे हैं तो मैं इधर आ गयी। 

मालिनी: दीदी आपको लगता है कि आप अब तक प्रेगनेंट हो चुकी होगी? 

नूरी: अरे अंकल की ताक़त पर मुझे पूरा विश्वास है। पक्का ही मैं अब तक प्रेगनेंट हो चुकी हो गयी हूँगी। उसने खिड़की की तरफ़ देखा तो वहाँ उसको अंकल खड़े नज़र आए। उसने उसे आँख मारी। 

मालिनी: आप कल कह रही थी कि ना आप अपने ससुर से भी मज़ा लेती हो तो फिर आप उनसे ही प्रेगनेंट क्यों नहीं हो गयी? यहाँ पापा जी के पास क्यों आयीं? 

नूरी : अरे मेरे ससुर के वीर्य में अब बच्चा पैदा करने की ताक़त नहीं है। पर चुदाई बिलकुल अंकल की तरह करते हैं। 

मालिनी: तो उनको क्या पता है कि आप यहाँ किसलिए आइ हो। 

नूरी : बिलकुल पता है। बल्कि वो तो रोज़ मेरा हाल पूछते हैं। 

मालिनी: ओह ऐसा क्या। एक बात पूछूँ ? ये सब शुरू कैसे हुआ? ना बताना चाहो तो ना बताना। 

नूरी: अरे इसमे छिपाने वाली कोई बात नहीं है। असल में जब डैड रेटायअर होकर हमारे साथ रहने आए तो शुरू में मुझे बहुत अजीब लगा। मुझे लगता था कि वो मेरी छातियों और मेरे पिछवाड़े को देखते रहते थे ।मैं मॉम को देखती तो पाती कि उनको सब पता है पर वो अनदेखी सी करती ।ऐसे ही चल रहा था। तब एक दिन हमारे घर की नौकरानी जो करींब ३५ साल की थी , एकदम से रोती हुई मेरे पास आइ और बोली कि मुझे नौकरी नहीं करनी ।मैंने पूछा कि क्या हुआ ? वो बोली कि आपके ससुर ने मुझे अभी पकड़ लिया था और मेरे साथ ज़बरदस्ती की कोशिश की। मैं किसी तरह से अपने को बचाया और भाग कर आपके पास आइ। मेरा हिसाब कर दो। मैंने अपने सास को बताया और उसका हिसाब कर दिया। फिर मैंने सास को कहा कि ये सब क्या है ? डैड ऐसा क्यों कर रहे हैं। मॉम बोली कि उनकी सेक्स ड्राइव बहुत ज़्यादा है और मैं आजकल उनकी प्यास बुझा नहीं पाती। मैं बोली कि इसका मतलब तो नहीं कि वो रेप करेंगे। मॉम रोने लगी। मैंने उनको चुप कराया। फिर वो डैड के पास गयीं शायद उनको समझाने। पर थोड़ी देर बाद जब वो वापस नहीं आइ तो मुझे चिंता हुई तो मैं उनके कमरे की ओर गयी और वहाँ मैंने सिसकी की आवाज़ सुनी। मैंने खिड़की से झाँका और मैं हैरान रह गयी। डैड मॉम को उलटी पेट के बल लिटाके उनके ऊपर चढ़ के उनको चोद रहे थे। और मैंने देखा कि वो उनकी गाँड़ मार रहे थे। मॉम दर्द से बिलख रहीं थीं। साफ़ लग रहा था कि वो दर्द से कराह रही थी। फिर वो बोली कि आप तेल तो लगा लो। उफफफफ सूखे में बहुत दुखता है। डैड ने अपना लौड़ा बाहर किया और मैंने देखा कि उनका बड़ा और मोटा लौड़ा बिलकुल अंकल के जैसा ही बड़ा था। मेरे पति से बहुत बड़ा और मोटा। अब डैड ने तेल लगाया और फिर मॉम की गाँड़ मारने लगे। क़रीब १५ मिनट की चुदाई के बाद वो झड़े और मॉम ने राहत की साँस ली। मैंवहाँ से हट गयी। 

मालिनी: ओह तो वो बहुत ही कामुक है? उसने अपनी गीली होती हुई बुर को सलवार के ऊपर से खुजाया। उसने ऐसा दिखाया जैसे वो सलवार ऐडजस्ट कर रही हो। पर राजीव की आँखों से वह बच नहीं पाई और वो देख लिया कि वो अपनी बुर खुजा रही है। वो मुस्कुराया और अपना लौड़ा दबाने लगा। 

उधर नूरी बोली : बाद में मॉम ने बताया कि डैड ने उनकी गाँड़ मारी और मैंने ऐसा दिखाया कि जैसे मुझे पता नहीं है। मैंने पूछा कि मॉम इसका इलाज क्या है ? वो बोली कि बेटी वो तो तुमको चोदना चाहते है । अगर तुम मान जाओ तो वो दिन में तुमको मज़ा देंगे और रात में अपने पति से चुदवा लेना। मुझे भी डैड का लौंडा पसंद आया था और मैं मान गयी। बस फिर क्या था वो अगले दिन ही मेरी चुदाई का प्रोग्राम बना लीं। अगले दिन मॉम और डैड मुझे बिस्तर पर नंगा किए और तुम विश्वास नहीं करोगी मॉम और डैड दोनों ने मेरी एक एक चूची मुँह में ली और चूसने लगे। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या अनुभव था एक बहु के लिए जब उसकी चूचियाँ उसके सास और ससुर मिलकर चूस रहे थे। 

मालिनी की आँखें फैल गयीं थीं और उसका हाथ अपने आप अपनी सलवार के ऊपर से बुर पर चला गया और वो उसको अनजाने में रगड़ने लगी। राजीव ध्यान से उसकी हरकत देख कर ख़ुश हो रहा था। वो अब अपना लौड़ा भी रगड़ रहा था। 

मालिनी: ओह क्या ऐसा भी हो सकता है? सच में आपको बड़ा अजीब नहीं लगा? 

नूरी: मुझे तो बड़ा मज़ा आया। सच में डैड ने उस दिन मेरी ऐसी चुदाई की जो कि मैं कभी भूल नहीं सकती। तुमको पता कि उनका लौड़ा मॉम ने अपने हाथ में पकड़कर मेरी बुर में सेट किया था। वो पल मैं कभी नहीं भूल सकती। यह कहते हुए वो अपनी बुर खुजाई और बोली : आऽऽह याद करके मेरी बुर में खुजली हो रही है। 

मालिनी का हाथ भी अपनी बुर पर ही था। 

नूरी बोली: तुमको एक बात और बताऊँ कि मॉम बाई सेक्शूअल है। वो मेरी चूचियाँ दबाती हैं और मेरे साथ भी लेज़्बीयन सेक्स भी करती हैं। उनको मेरी बुर चूसना बहुत पसंद है। अब तो मैं भी उनकी बुर चूसती हूँ। 

मालिनी जैसे बेहोश होते बची। ये क्या कह कर रही है ये लड़की। इसकी सास और ये सेक्स करती हैं । वैसे ही शायद जैसे उसने कुछ ब्लू फ़िल्म में शिवा के साथ देखी है। 

तभी नूरी उसको देख कर बोली: तुम तो बहुत उत्तेजित हो गयी हो। ये क्या बहुत खुजा रही हैं? उसकी बुर की ओर इशारा करके बोली। फिर बोली: कुछ करूँ इसके लिए? 

मालिनी: क्या करोगी? 

नूरी: चलो अभी बताती हूँ। फिर वह उठ कर उसके पास आइ और उसके होंठ पर अपने होंठ रखे और उसे चूमने लगी ।फिर वो उसकी चूचियाँ दबाने लगी। मालिनी आऽऽँहह कर उठी। उसकी चुम्बन का अब मालिनी भी जवाब दने लगी। वो दोनों एक दूसरे से चिपक गयीं। नूरी ने मालिनी के हाथ को अपनी चूचियों पर रखा और वो भी उनको दबाने लगी। अब नूरी उसको गिरा कर उसके ऊपर आ गयी और उसको चूमते हुए उसकी क़ुर्ती उठा दी। अब वो ब्रा के ऊपर से उसकी चूची दबाने और चूमने लगी। 

राजीव की आँखें ये देखकर बड़ी बड़ी हो गयीं थीं। अब वह नीचे आकर उसकी सलवार और पैंटी उतारी और फिर उसकी बुर चूमकर उसे चूसने लगी। मालिनी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके अपनी गाँड़ उछालकर मज़े लेने लगी। नूरी उसकी बुर चाट कर मालिनी को पागल कर रही थी और जल्दी ही वो हाऽऽऽयययय कहकर झड़ गयी। 

तभी दरवाज़ा खुला और मालिनी ने देखा कि पापा जी अंदर आए और उनकी लूँगी उनके हाथ में थी। वो नीचे से नंगे थे और उनका लौड़ा पूरा तना हुआ था। वो आकर नूरी को लिटाए और उसकी सलवार उतारकर उसकी टांगों को उठाया और फैलाकर वहाँ अपना लौड़ा पेल दिया और उसको ज़बरदस्त तरीक़े से चोदने लगा। 

मालिनी हड़बड़ा कर वहाँ से उठने की कोशिश की पर नूरी उसके हाथ को पकड़कर अपनी छाती पर रखी और उसको दबाने लगी। उधर राजीव ज़ोर ज़ोर से धक्का मारकर नूरी को पागल कर रहा था। मालिनी सोची कि ये क्या हो रहा है। उसके और शिवा के बिस्तर पर पापा नूरी को उसके सामने चोद रहे हैं। हे राम ये क्या हो रहा है? और लगता है पापा जी ने उसे नूरी से मज़ा लेते देख लिया है। क्योंकि जब वह आए थे तो उसकी बुर नंगी थी और नूरी उसको चूस कर उठी थी। पता नहीं क्या होने वाला है।अब चुदाई की फ़च फ़च से कमरा गूँज रहा था। तभी पापा और मालिनी की नज़रें मिलीं। मालिनी तो शर्म से जैसे गड़ गयी। तभी पापा और नूरी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर झड़ने लगे । मालिनी की बुर फिर से गरम होने लगी थी। वह उठकर बाहर आ गयी। 

थोड़ी देर में दोनों बाहर आए। नूरी जल्दी से चली गयी क्योंकि उसको बहुत देर हो चुकि थी। पापा भी अपने कमरे में चले गए। मालिनी ने अपने कमरे में जाकर चादर पर पड़े धब्बों को देखा जोकि उसकी बुर के रस और पापा जी और नूरी के रस के धब्बे भी थे। उसने चादर बदल दी। वह सोच रही थी कि आज उसके बेडरूम में क्या क्या हो गया। वो ख़ुद नूरी से लेज़्बीयन सेक्स की और पापा ने नूरी को यहीं चोद लिया। उफफफफ वो क्या करे क्या ना करे । उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो थक कर लेटी और सो गयी। सपने में उसने देखा कि वो पूरी नंगी पड़ी है और दो लोग उसकी चूचियाँ चूस रहे हैं। वो देख नहीं पा रही थी कि कौन कौन उसकी चूची चूस रहा है। दिर उन दोनों ने अपना मुँह ऊपर किया और ये तो पापा जी और उसकी सरला मम्मी थीं। वह चौंक कर उठी और उसका दिल बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था। उसकी बुर पानी छोड़ चुकी थी। वो अपने सपने पर हैरान थी। वह बहुत परेशान थी कि उसने इतना अजीब सा सपना कैसे देखा??
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06-10-2017, 09:15 AM,
#73
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
मालिनी सोकर उठी और सपने के बारे में सोचते हुए किचन में जाकर काम करने लगी। थोड़ी देर बाद राजीव ने चाय माँगी और वह चाय लाकर उसे दी। वह सोफ़े पर बैठा था।उसने मालिनी को ग़हरी निगाहों से देखा और बोला: बेटी, आज जो भी हुआ उसके लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ। असल में मैं खिड़की से नूरी की बातें सुन रहा था और नूरी को तुम्हारी बुर चूसते देखा तो बहुत गरम हो गया। मैं तो बड़ा हैरान हुआ कि वो बाइसेक्शूअल है। इसी कारण मैं बहुत गरम हो गया और तुम्हारे कमरे में आकर तुम्हारे ही बिस्तर पर उसे चोद दिया। तुमने चादर बदल दी है ना? 

मालिनी: जी बदल दी है। वह शर्म से लाल होकर बोली। 

राजीव: बेटी, एक बात पूछूँ सच सच बताना। बताओगी ना! 

मालिनी: जी पापा पूछिए ।

राजीव: ये बताओ कि कौन अच्छा चूसता है तुम्हारी बुर ,मैं या नूरी ? देखो तुमने कहा था कि जवाब दोगी। 

मालिनी खड़ी हो गयी वहाँ से जाने के लिए। राजीव ने उसका हाथ पकड़ा और उसको बिठाकर बोला: जवाब दो ना? 

मालिनी : आआऽऽऽप । बस अब जाने दीजिए। प्लीज़। 

राजीव: देखो मेरे चूसने से ज़्यादा मज़ा आया ना ? फिर उस मज़े को रोज़ लेने में क्या बुराई है बेटी? और सच कहता हूँ एक बार मेरे से चुदवा लो फिर हमेशा के लिए मेरी भी हो जाओगी। बोलो क्या कहती हो? वह अभी भी उसका हाथ पकड़े हुए था। मालिनी की छातियाँ कड़ी होने लगी। उसके बुर में भी खुजली मचने लगी थी। 

राजीव: बेटी, एक बार और मुझे बुर चूसने दो। मैं बड़े प्यार से चूसूँगा। और सच कहता हूँ कि चोदने को कोशिश नहीं करूँगा। प्लीज़ एक बार अपनी बुर चुसवा लो। ये कहते हुए उसने सलवार के ऊपर से उसकी बुर सहला दी जो कि गीली हुई जा रही थी। मालिनी ने हिलने की कोशिश की पर जैसे पैर में पत्थर भर गए थे, वो हिले ही नहीं। राजीव की उँगलियाँ उसकी सलवार के ऊपर से बुर के अंदर उँगलियाँ घुसेड़कर वह उसको मस्ती से भर रहा था। 

जब राजीव ने देखा कि उसका विरोध अब कम हो गया था तो वह इसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसको नीचे गिरा कर वह ज़मीन पर आकर उसकी जाँघों के बीच आकर उनको फैलाया और उसकी बुर को सूँघा और बोला: ह्म्म्म्म्म क्या मस्त गंध है बेटी , उफफफ । फिर वो उसको चूमने लगा। उसने पूरी फाँक अपने मुँह में लेकर चूसा और बाद में उसकी बुर की फाँकों को अलग किया और उसकी गुलाबी बुर को जीभ से कुरेदने लगा। मालिनी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके अपनी गाँड़ उछालकर उसके मुँह में रगड़ने लगी। आऽऽऽ पाआऽऽऽऽऽपा जीइइइइइइइ मैं मरीइइइइइइइइइ। उईइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽ। 

अचानक राजीव ने अपना मुँह नीचे किया और उसकी गाँड़ के छेद को चाटने लगा। मालिनी: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पापा जी आऽऽऽह क्या कर रहे हैं। हाऽऽऽययह । राजीव अब उसकी गाँड़ के छेद को भी जीभ से कुरेदने लगा। वह मस्ती से भर के उफफफफ कर उठी। फिर वो अपनी जीभ वापस से उसकी बुर में डाला और चोदने लगा। अब उसने एक थूक लगी ऊँगली उसकी गाँड़ में डाल दी और उसे भी अंदर बाहर करके उसे मस्ती से भरने लगा। 

अब मालिनी की बुर में उसकी दो उँगलियाँ और उसकी गाँड़ में एक ऊँगली अंदर बाहर हो रहीं थीं और उसकी जीभ उसकी clit से छेड़छाड कर रही थी। मालिनी अपनी गाँड़ उछालकर अपनी जाँघों को चिपका कर राजीव के सिर को दबाने लगी और आऽऽहहहह पाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽपा जीइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। राजीव उसका रस पीता गया। फिर राजीव ने उसकी सलवार उठाई और उसकी जाँघें फैलाकर उसकी पूरी गीली जाँघें और बुर को पोछा और फिर वहाँ चूमने लगा। 
अब अपना मुँह उठाकर उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा: बेटी, उफफफ क्या क़यामत ढा रही है तुम्हारी बुर। फिर उसे अपनी हथेली से सहला कर कहा: ऐसी सुंदर और चिकनी बुर किसे ना पागल कर देगी। बेटी, कब होगी ये मेरी भी? बताओ ना? वह फिर से बुर को चूम लिया। 

मालिनी झड़ने के बाद थकी हुई बैठी थी बोली: आऽऽऽह पापा जी मुझे अब छोड़िए। बाथरूम जाना है। 

राजीव खड़ा हुआ तो उसकी लूँगी से फूला हुआ लौड़ा अलग से हो दिखाई से रहा था । पता नहीं उसे क्या सूझा कि वह नीचे से नंगी मालिनी को गोद में उठाकर उसके बाथरूम में ले गया और टोयलेट की सीट पर बिठा दिया। फिर उसने अपनी लूँगी खोली और अपना लौड़ा उसके मुँह के सामने झूला दिया। मालिनी का मुँह खुला और उसने लौड़े को उसके होंठों पर रगड़ा और वो उसके लौंडे को चूसने लगी। राजीव अपनी कमर हिलाकर मानो उसके मुँह को चोदने लगा। तभी सीसी की आवाज़ आइ और वो समझ गया कि मालिनी मूत रही है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या दृश्य था कि उसकी प्यारी बहु मूत रही है और उसका लौड़ा भी चूस रही है। अब वो अपने दोनों हाथ उसकी क़ुर्ती के ऊपर से उसकी मस्त छातियों पर रखा और उनको दबाते हुए अपनी कमर दबाकर उसके मुँह को चोदने लगा। अचानक मालिनी ने अपना हाथ उसके बड़े बड़े बॉल्ज़ के नीचे रख कर उनको पकड़ा और उनको सहलाने लगी। अब राजीव के लिए अपने आप को रोकना मुश्किल हुआ और वो आऽऽहहहह बेएएएएएएटी कह कर झड़ने लगा। मालिनी मज़े से उसका रस पीते चली गयी और आख़िर तक उसको चूसती रही। फिर अपनी जीभ से उसके लौड़े को साफ़ किया। अब राजीव शांत होकर मालिनी के गाल को चूमा और प्यार करते हुए बोला: आऽऽह थैंक्स बेटी। आज जो तुमने मुझे सुख दिया है मैं कभी नहीं भूलूँगा। तुम्हारा मूतना हो गया क्या? मुझे भी मूतना है। 

मालिनी राजीव के बड़े लटके लौंडे को देखकर उठी और उसके पहले हैंड शॉवर से अपनी बुर और गाँड़ में पानी डाली। उसके हटने के बाद राजीव उसके हाथ को अपने लौड़े पर रखा और बोला: बेटी हमको सू सू करवाओ ना। 

मालिनी मुस्कुराती हुई उसके लौड़े को कोमोड की ओर मोड़ा और वो मूतने लगा। मालिनी की आँखें उसके लौड़े से हट ही नहीं पा रही थी। अब वो पिशाब करके हटा और मालिनी को बाहों में भरकर चूमा और बोला: थैंक्स मेरी बच्ची , आज का दिन मेरे जीवन का बहुत ही सुंदर दिन है।

मालिनी: पापा जी अब आप चलिए। अभी शिवा आने वाले होंगे। 

राजीव मुस्कुराकर फिर से ज़मीन पर बैठा और उसकी क़ुर्ती को उठाकर उसकी पानी से गीली बुर को एक तौलिए से सुखाया और फिर से उसको चूमा और फिर खड़े होकर वो उसके गाल को चूमकर अपने कमरे में चला गया। 

मालिनी ने भी अपने कपड़े बदले। फिर वह बिस्तर पर बैठकर दिन भर की घटनाओं के बारे में सोचने लगी। कैसे वो सुबह कुछ सोचती है और शाम तक क्या से क्या हो जाता है। पर इसमें कोई शक नहीं था कि पापा जी से मज़ा लेना ही होगा। उफफफफ क्या सुख देते हैं। उनको अपने मज़े से ज़्यादा मेरे मज़े की चिंता रहती है। कितने मर्द होंगे पापा जी जैसे । इसकी आँखें थकान से बोझिल होने लगी। वह उन लमहों को फिर से जीने लगी जब पापा जी ने उसकी जाँघों के बीच अपना मुँह डाला हुआ था और वो आनंद के समुद्र में गोते लगा रही थी। उफफफ क्या अपार सुख था उन लमहों का जब वो उसकी बुर और गाँड़ दोनों बड़े प्यार से चाट रहे थे उसका हाथ अपने आप ही अपनी बुर पर चला गया। 

उधर राजीव भी आज बहुत ख़ुश था । उसे लग रहा था कि उसका लौड़ा मालिनी की बुर से अब सिर्फ़ दो क़दम ही दूर है। वो भी अपना लौड़ा सहला कर चुदाई के सपने देखने लगा था। 

रात को खाना खाने के बाद शिवा को उसने बुर चूसने को कहा और वह बुर चूसवाते हुए तुलना करने लगी पापा और शिवा के चूसने की कला में। उफ़्फ़्फ़क पापा जी की बात ही कुछ और है। आऽऽंहहह क्या मज़ा दिए थे। फिर वह उसको हटाई और ख़ुद उसका लौड़ा चूसने लगी। बाद में चुदाई के बाद वो सोचने लगी कि आख़िर क्या किया जाए। पापा जी को और आगे बढ़ने दूँ या नहीं? वो अभी भी ऊहापोह में ही थी। फिर वह नींद की आग़ोश में चली गयी। 

अगले दिन वो नायटी पहनने लगी तभी उसे ख़याल आया कि पेटिकोट नीचे पहने या नहीं? वो जानती थी कि पापा जी तो ध्यान से देखेंगे और कामेंट्स भी देंगे। सो उसने एक सलवार क़ुर्ती पहनी और नीचे ब्रा भी पहन ली। पैंटी तो वो पहनती ही नहीं थी घर पर। वो बाद में पापा जी को चाय के लिए आवाज़ दी और राजीव आकर उसको बाहों में लेकर चूमा और गाल पर प्यार किया। मालिनी ने उसे धीरे से हटाया और चाय दी। मालिनी की ठंडी प्रतिक्रिया को देखकर राजीव फिर से सोचने लगा कि ये गिरगिट तो आज लगता है फिर से रंग बदल रही है। वह चुपचाप चाय पीने लगा। 

बाद में राजीव ने नूरी को फ़ोन किया और बोला: यार ये बहु तो फिर आज ठंडी दिखाई दे रही है। क्या किया जाये?

नूरी: ओह ऐसा क्या? एक काम करती हूँ डैड मतलब मेरे ससुर और सास को कहती हूँ कि वो मुझे फ़ोन करें और उसके सामने अश्लील बातें करें ताकि ये थोड़ा सा सोच में पड़ जाए और उत्तेजित भी हो जाए। 

राजीव ख़ुश होकर: हाँ ये ठीक रहेगा। 

नूरी: एक बात है कि आप उसके साथ किसी क़िस्म की ज़बरदस्ती मत कीजिएगा वरना सब काम ख़राब हो जाएगा। 

राजीव: अरे नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा। ठीक है फिर दोपहर को मिलते हैं। बाई। 

राजीव खाना खाते हुए भी मालिनी से इधर उधर की बात ही किया । और पूछा: सरला से बात हुई क्या हाल में? 

मालिनी : जी पापा कल बात हुई थी । सब मज़े में हैं वहाँ। 

राजीव: इधर आने का कोई प्लान नहीं बनाया क्या उन लोगों ने? 

मालिनी: अभी तो ऐसा कुछ कहा नहीं। फिर मुस्कुराकर बोली: मैंने भी आने को नहीं कहा वरना आपके और नूरी के रंग में भंग पड़ जाता। 

राजीव हँसकर: सही कहा तुमने। अब नूरी के भी वापस जाने का समय आ रहा है। कल बोल रही थी कि तीन दिनों में वापस चली जाएगी। 

मालिनी: उसका काम तो बन चुका होगा अब तक? 

राजीव: बेटी, ये सब तो भगवान के हाथ में है। हाँ मैंने पूरी कोशिश की है कि वो माँ बन जाए। अब इसका नतीजा तो कुछ दिनों बाद ही मिलेगा। वैसे अगर रानी के केस से नूरी की तुलना करें तो नूरी का चान्स सौ प्रतिशत है क्योंकि वो एक बार मॉ बन चुकी है और दूसरे उसका खान पान उस ग़रीब रानी से बहुत बेहतर है। 

मालिनी हँसकर : पापा जी अब आप इसकी फ़ीस लेनी शुरू कर दीजिए। हा हा । 

राजीव: मेरी फ़ीस तो चुदाई ही है। इतनी जवान लड़की मज़े से चुदवाती है और क्या चाहिए। 

मालिनी हँसने लगी। फिर वो उठकर अपने कमरे में चली गयी। थोड़ी देर में नूरी आ गयी अपने बच्चें के साथ। वो मालिनी के कमरे में बच्चे को सुलाकर बोली: फिर पापा जी के साथ बात आगे बढ़ी? 

मालिनी: क्या दीदी कुछ भी बोल रही हो? 

नूरी: कल तो अंकल ने तुम्हारे सामने ही मुझे चोद दिया था। तो मैं सोची कि बाद में शायद तुमको भी पकड़े होंगे। 

मालिनी: नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ। आप व्यर्थ ही कल्पना कर रही हैं। 

नूरी: अच्छा मैं अंकल के पास जाती हूँ, अपनी माँ बनने के अभियान को पूरा करने। वो ये कहकर वो हँसते हुए आँख मारकर बाहर चली गयी। 

नूरी राजीव के कमरे में पहुँची और उसके ऊपर जाकर चढ़ गयी और उसके होंठ चूमने लगी। राजीव के हाथ उसके शरीर पर घूमने लगे। जल्दी ही वो चुदाई में लग गए। चुदाई के बाद राजीव हाँफते हुए बोला: नूरी अपने डैड और मॉम से बात हो गयी? 

नूरी : हाँ हो गयी मैं जैसे ही मिस्ड कॉल दूँगी वो फ़ोन करेंगे। और अश्लील बातें करेंगे। तो मैं चलती हूँ आप भी आ जाओ। 
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06-10-2017, 09:15 AM,
#74
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
नूरी बाहर जाने के पहने बिना ब्रा के अपनी टी शर्ट और बिना पैंटी के स्कर्ट पहनी और बाहर आकर मालिनी से बोली: मैं चाय बनाती हूँ। ठीक है ना? 

मालिनी: अरे आप क्यों बनाओगी? मैं बनाती हूँ। 

नूरी : ये तो सो रहा है चलो दोनों बनाते हैं। वो दोनों किचन में गयीं तो राजीव भी आवाज़ लगाया: मैं भी चाय पीयूँगा । 

जब सब सोफ़े पर बैठे थे तो चाय पीते हुए राजीव बोला: नूरी तुम कल बोल रही थी ना कि वापिस जाना है। क्या हुआ कोई बात हो गयी है ससुराल में? 

नूरी: अरे नहीं अंकल, वो बस मेरे ससुर और सास मुझे मिस कर रहे हैं। और यहाँ भी तो अब तक सब कुछ हो ही चुका होगा जो होना है। वो अपने पेट पर हाथ फेर कर बोली। राजीव भी उसके पेट पर हाथ फेरकर बोला: सच में बेबी आ गया होगा भगवान ने चाहा तो। अब वह उसकी जाँघ सहलाने लगा। और उसने उसे इशारा किया कि वो मिस्ड कॉल करे। नूरी ने मालिनी की आँखें बचाकर मिस्ड कॉल किया और फिर फ़ोन काट दिया। 

अब नूरी का फ़ोन बजा और वो उसे देखकर बोली: अरे आज डैड को मेरी याद कैसे आ गयी। फिर वह चाय पीते हुए फ़ोन को स्पीकर मोड में डालकर बोली: हेलो डैड कैसे हैं? 

डैड: अरे बहु कैसी हो? 

नूरी: जी डैड ठीक हूँ। मॉम ठीक है ना? और ये भी ठीक हैं ना? 

डैड: अरे यहाँ सब ठीक है। तुम अपनी बताओ बेटी, चुदाई कैसी चल रही है अंकल से ? कितनी बार चोदतें हैं एक दिन में? 
मालिनी यह सुनकर सन्न रह गयी।
नूरी: दो बार तो चोद ही लेते हैं। और उतना ही मज़ा देते हैं जितना आप देते हैं। और उनका लौड़ा भी आपकी तरह ही काफ़ी बड़ा है। यह कहते हुए उसने राजीव की लूँगी से उसका लौड़ा पकड़ लिया और उसको दबाने लगी। राजीव ने भी उसकी टी शर्ट उठा दी और उसकी बड़ी बड़ी नंगी चूचियाँ दबाने लगा। 

मालिनी यह देख और सुनकर थोड़ी उत्तेजित होने लगी। 

डैड: और बेटी ,अब तक तो तुम प्रेगनेंट हो गयी होगी? 

नूरी : हाँ डैड अब तक तो हो चुकी होंगी। पर मैं कोई चान्स नहीं लेना चाहती इसलिए पूरा अन्सेफ़ पिरीयड में चुदवा कर ही आऊँगी। उसने लूँगी से लौंडा बाहर निकाल कर इसको सहलाने लगी। मालिनी की बुर अब गीली होने लगी थी।

डैड: चलो अब जल्दी से वापस आओ । मेरा लौड़ा तुम्हारी बुर की याद मे बार बार खड़ा होता रहता है ।

नूरी: डैड मैं मॉम को तो वहाँ छोड़ कर आयी हूँ। उनको नहीं चोद रहे हैं क्या? 

डैड: अरे बेटी, उसकी ढीली बुर में अब मज़ा नहीं आता। 

नूरी राजीव के लौड़े को सहलाते हुए बोली: पर डैड उनकी गाँड़ तो आपको पसंद है ना? फिर क्या समस्या है? 
तभी राजीव ने उसकी स्कर्ट उठायी और उसकी बुर को सहलाने लगा। 
मालिनी उसकी बातें सुनकर और ये सब देखकर हैरानी और उत्तेजना से भर रही थी। उसका हाथ अपनी बुर पर चला गया। 

डैड : अरे फ़ोन क्यों छीन रही हो? अच्छा बेटी,अपनी मॉम से बात करो। 

मॉम : बेटी। वापस आ जा जल्दी से ।इन्होंने तो मेरे जीना मुश्किल कर रखा है। दिन भर मेरी गाँड़ मारते रहते है। उफ़ क्या बताऊँ। पहले बुर चोदतें है और फिर साथ में गाँड़ भी मार लेते हैं। मेरी हालत ख़राब हो गयी है। 

नूरी: ओह डैड आप भी ना। बंद करिए मॉम को तंग करना। मैं जल्दी ही वापस आऊँगी और आपको पहले की तरह मज़ा दूँगी। मॉम बस कुछ दिन की बात है । 

मॉम : चलो कोई बात नहीं बस जल्दी से प्रेगनेंट हो जाओ और वापस आ जाओ ।

नूरी : ठीक है मॉम। बस तीन दिन में आती हूँ। 

मॉम : अच्छा चल रखती हूँ। कहते हुए फ़ोन काट दिया। 

अब राजीव का लौड़ा उसकी मूठ्ठी में खड़ा था। राजीव मालिनी से बोला: बेटी ज़रा तेल लाना तो। मालिनी जाके तेल लेकर वापस आयी और वहाँ का नज़ारा देखकर सन्न रह गयी। राजीव ने नूरी की स्कर्ट निकाल दी थी और वह सोफ़े को पकड़कर आगे को झुकी हुई थी और राजीव नीचे बैठ कर उसकी भूरि गाँड़ चाट रहा था। मालिनी के हाथ में तेल देखकर वह उठा और मालिनी से लौड़े पर तेल गिराने को कहा। मालिनी कांपते हाथ से तेल उसके लौड़े पर गिराई। फिर वह अपने लौड़े पर तेल मला और दो उँगलियों में तेल लगाया और उसकी गाँड़ में डालकर अंदर बाहर करने लगा। फिर उसने मालिनी के सामने ही अपने लौड़े को नूरी की खुली हुई गाँड़ में डाल दिया। नूरी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी।

मालिनी के सामने ही उसने नूरी की गाँड़ मारनी शुरू कर दी। मालिनी उसके लौड़े को नूरी की गाँड़ के अंदर बाहर होते देख कर मूर्ति बनकर वहीं खड़ी रह गयी और उत्तेजना वश अपनी बुर को खुजा दी। उसे गरम होते हुए देखकर राजीव ने मालिनी का हाथ पकड़कर अपने पास खींच लिया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा।अब वो एक हाथ से नूरी की कमर पकड़कर उसकी गाँड़ मार रहा था और दूसरे हाथ से क़ुर्ती के ऊपर से मालिनी की चूचियाँ बारी बारी से दबा रहा था। 

मालिनी भी बहुत गरम हो कर अपनी बुर खुजा दी। तब राजीव ने नूरी की गाँड़ में धक्के मारते हुए कहा: बेटी। ज़रा सलवार उतार दो। तुम्हारी बुर खुजा दूँगा। 

मालिनी उत्तेजना वश जैसे सोचने समझने की शक्ति ही खो बैठी थी। उसने चुपचाप अपनी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार उसके पैर चूमने लगी। राजीव ने अब अपना हाथ उसकी बुर पर रखा और उसमें ऊँगली डालकर मालिनी को मज़े से भरने लगा। उधर नूरी भी अब जोश में आकर अपनी गाँड़ राजीव के पेट पर दबाने लगी ताकि पूरा लौड़ा उसकी गाँड़ में जड़ तक समा जाए। अब नूरी की सिसकियाँ गूँज रहीं थीं : आऽऽऽऽऽहहहह फ़ाआऽऽऽऽऽऽड़ दो मेंरी गाँड़ आऽऽऽऽऽऽऽह। आऽऽऽऽप वहाँ झड़नाआऽऽऽऽऽऽ नहीं आऽऽऽहहह। पाआऽऽऽऽऽनि बुर में ही छोओओओओओओओड़ना। ह्म्म्म्म्म्म । 

अब राजीव ने अपना लौड़ा बाहर निकाला। उफफफफ कितना मोटा लग रहा था वो मालिनी सोची। फिर उसने मालिनी से उसकी चुन्नी माँगी जो उसने दे दी। राजीव ने अपने लौड़े को मालिनी की चुन्नी से अच्छी तरह से साफ़ किया और फिर नूरी को दीवान में पटककर उसकी टाँगें उठाकर अपना लौड़ा एक ही झटके में डालकर बुरी तरह से चोदने लगा। मालिनी को अपनी जगह से उसका लौड़ा उसकी बुर में अंदर बाहर होते साफ़ साफ़ दिख रहा था और उसके बड़े बॉल्ज़ उसकी गाँड़ के छेद का मानो चुम्बन ले रहे थे। मालिनी की उँगलिया अब तेज़ी से बुर में चल रही थीं। नूरी भी पागलों की तरह चिल्ला कर उइइइइइइइ माँआऽऽऽऽ हाऽऽऽऽऽऽय चोओओओओओओदो कहकर झड़ने लगी। राजीव भी अब अपना पानी उसकी बुर में गिराने लगा। 

राजीव ने सिर उठाकर देखा कि मालिनी अब उत्तेजना वश अपनी बुर में ऊँगली डाल रही थी। वो मुस्कुराया और नूरी को बोला: ज़रा उसकी बुर चाट दो ना। नूरी उठकर मालिनी को सोफ़े में गिराई और उसकी टांगों के बीच ज़मीन में बैठी और उसकी बुर चाटने लगी। अब मालिनी आऽऽऽहहह करने लगी और अपनी कमर उछालकर उसके मुँह में दबाने लगी तभी राजीव उठा और उन दोनों के पास आया और मालिनी की चूचि दबाने लगा। मालिनी हाऽऽऽऽऽय करके मज़े से भर गयी। 

अब जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना किसी ने नहीं की थी यहाँ तक कि मालिनी ने भी नहीं की थी।

अचानक मालिनी बोली: आऽऽऽँहह पापा जी अब आप चूसिए मेरी बुर आऽऽऽऽऽहहह आऽऽऽऽप बहुत अच्छाआऽऽऽऽ चूसते हैं हाऽऽऽय्यय पापा जी चूसियेएएएएएएए ना प्लीज़। 

राजीव नूरी को हटाया और ख़ुद नीचे बैठ कर अपना मुँह उसकी बुर में रखा और उसकी बुर चूसने लगा। साथ ही वो उसकी गाँड़ में ऊँगली भी डालकर हिलाने लगा। अब मालिनी की सिसकियाँ चरम सीमा पर आने लगीं और वो उफ़्ग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कहकर गाँड़ उछाल कर झड़ने लगी। राजीव भी उसकी रस की धार को पीने लगा। राजीव ने अब अपना मुँह उसकी बुर से और ऊँगली गाँड़ से निकाला। मालिनी अब भी नीचे से नंगी अपनी जाँघें फैलायी लेटीं हुई थी ।

अब राजीव उठते हुए उसकी बुर का और गाँड़ का एक एक चूम्मा लिया और बोला : बेटी, ये दोनों कब दोगी चोदने के लिए। 

मालिनी अब शर्मा रही थी क्योंकि उसकी वासना अब शांत हो चुकी थी। उसने अपनी सलवार हाथ में ली और अपने कमरे की ओर भाग गयी। 

राजीव: नूरी क्या लगता है? अब चुदवाएगी ये, या और नख़रे करेगी? 

नूरी: मुझे तो लगता है कि अब जल्दी ही चुदवा लेगी। आज तो पहली बार मेरे सामने आपको ख़ुद बोली चूसने के लिए। 

राजीव: सच मैं मुझे तो विश्वास ही नहीं हुआ जब वो ख़ुद बोली कि पापा जी मेरी बुर चूसो। आऽऽऽऽऽह मारे कानों को कितना अच्छा लगा। और अब मेरे कान ये सुनना चाहते हैं कि पापा जी मुझे चोदिए। और मैं उसे पागलों की तरह चोदूँगा। आऽऽऽऽँहह देखो सोच कर ही मेरा फिर से खड़ा होने लगा है। 

नूरी हँसकर बोली: अंकल अब मैं और नहीं चुदवाऊँगी । दो बार चुदवा चुकी हूँ। आज के लिए बहुत है। 

राजीव भी हँसकर: अरे नहीं अब तुमको और तंग नहीं करूँगा। 

फिर नूरी तय्यार होकर चली गयी। राजीव कुछ सोचकर मालिनी के कमरे में गया । वहाँ मालिनी बिस्तर पर करवट लेकर लेटी हुई थी। उसकी पीठ दरवाज़े की तरफ़ थी। राजीव अंदर आया और उसकी गाँड़ के उभार को देखा जो क़ुर्ती के ऊपर उठ जाने के कारण मस्त उभरी हुई दिख रही थी। उसकी गोरी कमर भी नंगी दिखाई दे रही थी। उसका लौड़ा टाइट होने लगा। अब वह आकर बिस्तर पर बैठा तो मालिनी को लगा कि कोई है । वह सीधी हुई और उसके सामने पापा जी को देख कर चौकी और बोली: पापा जी आप ? कुछ चाहिए क्या? मुझे आवाज़ दे देते। 
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06-10-2017, 09:16 AM,
#75
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
राजीव झुका और उसके गाल को चूमकर बोला: बेटी, मुझे तो तुमसे एक ही चीज़ चाहिए और वो है ये। यह कहकर वो उसकी बुर पर सलवार के ऊपर से सहला दिया। 

मालिनी: उफफफफ पापा जी अभी तो इसको चूसा है आपने। अब फिर से वही चाहिए। 

राजीव: बेटी, चूसने और चोदने में बहुत फ़र्क़ है। जैसे चूसवाने में मज़ा आया है ना , वैसे ही एक बार चुदवा कर देख लो और भी ज़्यादा मज़ा आएगा मेरी रानी बेटी। वह अब भी उसकी बुर सहला रहा था। 

अब मालिनी उठी और बोली: पापा जी मुझे समय चाहिए प्लीज़ । मैं अभी भी मानसिक रूप से इसके लिए तय्यार नहीं हूँ। नूरी का पति उसको सेक्स का सुख नहीं देता और उसका वो भी पतला है और ना ही उसको माँ भी बना पाता है। इसलिए उसके पास कारण है पति से बात छिपाने का और उसे धोका देने का। पर पापा जी आप ही बताइए कि मेरे पास क्या कारण है शिवा को धोका देने का। वो तो मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करते हैं ,उनका भी आपके जैसा ही बड़ा भी है, फिर क्यों धोका दूँ मैं उनको? सच में मैं बहुत ही उलझन में हूँ। प्लीज़ पापा जी अभी भी मैं तय्यार नहीं हूँ इसके लिए। 

राजीव: अच्छा एक बात बताओ , कि तुम मुझसे बुर चूसवाने का और मेरा लौड़ा चूसने का कार्यक्रम तो बंद नहीं करोगी। या यह भी बन्द कर दोगी? 

मालिनी: उफफफ पापा जी आप भी कैसे कैसे सवाल पूछते हैं। 

राजीव: बेटी, और क्या पूछूँ ? चुदवाने को तो तुम अब भी तय्यार नहीं हो तो यही सही? 

मालिनी: ठीक है पापा जी ये सब हम आगे भी करते रहेंगे। पर आप लिमिट क्रॉस नहीं करेंगे? ठीक है ना? 

राजीव: ठीक है बेटी, पर एक बात और है कि मैंने अब तेरी चूचियाँ नहीं देखी हैं। एक बार उनको दिखा दे और चुसवा ले। 

मालिनी: पापा जी वो बिलकुल नहीं हो सकता। असल में मेरी छातियाँ मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी है। अगर वो आपने नंगी करके दबायीं और चूसीं तो मैं इतना गरम हो जाऊँगी कि बिना चुदवाए रह ही नहीं पाऊँगी। और वो अभी मैं नहीं चाहती इस समय।इसलिए प्लीज़ आप मुझे इसके लिए मजबूर नहीं करिएगा। 

राजीव: ठीक है जैसा तुम चाहोगी बेटी वैसा ही होगा। पर इनको इस तरह से कपड़ों के ऊपर से तो सहला सकता हूँ ना? वो उसकी चूची दबाकर बोला ।

मालिनी अब मुस्कुरा कर बोली: ये तो आप करते है ही रहते हैं । चलिए अब चाय बनाती हूँ। मुझे उठने दीजिए ना। 

राजीव ने उसे छोड़ दिया और बोला: सच में बेटी, अब चाय पीने की बड़ी इच्छा हो रही है। चलो मैं भी तुम्हारी मदद करता हूँ। 

मालिनी हँसी और बोली: आप किचन में आए तो मुझे सब जगह से दबाएँगे। चाय तो बनाने नहीं देंगे। आप सोफ़े पर बैठिए मैं अभी चाय बनाकर लाती हूँ। 

राजीव हँसते हुए सोफ़े पर बैठा और चाय का इंतज़ार करने लगा। उसे लगा कि बात सही दिशा में जा रही है लगता है जल्दी ही काम बन जाएगा। 

उधर मालिनी चाय बनाते हुए सोच रही थी कि पापा जी को आज उसने जो छूट दी है उसका अंत क्या होगा? वो सोचने लगी कि वो क्या करे ? अगर पापा जी को चूस कर भी शांत नहीं किया तो वो फिर से दूसरी शादी की बात करेंगे। और वो ऐसा किसी भी क़ीमत पर होने नहीं दे सकती थी। उसका बदन भी पापा जी से मिलन के लिए लगभग तय्यार ही था बस उसकी अपराध भावना उसे चुदवाने से रोक रही थी। वो चाय बनाई और लेकर ड्रॉइंग रूम में आयी जहाँ उसका ससुर या आशिक़ उसका इंतज़ार कर रहा था।

मालिनी चाय लेकर आयी और राजीव को दी। दोनों आमने सामने बैठ कर चाय पीने लगे। 
राजीव: बेटी, नूरी तो लगता है कि तीन दिन में चली जाएगी। अब तक तो तुमको मैं मना नहीं पाया हूँ चुदवाने के लिए। अब क्या मैं तुम्हारी मम्मी सरला को बोल दूँ तीन दिनों के बाद जब भी सुविधा हो आ जाए एक हफ़्ते के लिए । क्या कहती हो? 

मालिनी सब समझ रही थी कि ये भी उसके ऊपर दबाव डालने का एक तरीक़ा है पापा जी का । पर वह सामने से बोली: आप देख लीजिए। ये तो आप दोनों के बीच की बात है । इसमें मैं भला क्या कह सकती हूँ। 

राजीव: पर अगर वो आ गयी तो मैं जो तुमसे अभी ओरल सेक्स कर रहा हूँ वो भी बंद हो जाएगा। 

मालिनी: तो क्या हुआ । मम्मी तो आपको ओरल के अलावा टोटल सेक्स भी देगी। आपको क्या फ़र्क़ पड़ेगा? 

राजीव: और तुमको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा? 

मालिनी: पापा जी मेरे लिए शिवा है ना। आप क्यों उनको भूल जाते है। 

राजीव: हाँ है तो। पर तुम कहती हो ना कि मैं ही तुम्हारी बुर सबसे अच्छी चूसता हूँ। फिर क्या करोगी? 

मालिनी मुस्कुराकर: इंतज़ार करूँगी मम्मी के वापस जाने का। 

राजीव भी मुस्कुरा कर बोला: बड़ी बदमाश हो गयी हो। फिर से प्यार आ रहा है तुम पर। 

मालिनी हँसती हुई: आपका बस चले तो मुझे दिन भर ही प्यार करते रहें। पर मुझे बहुत काम है और अभी बाई आएगी और खाना भी बनाना है। ये कहकर वो किचन में चली गयी। 

उस शाम या रात को और कुछ ख़ास नहीं हुआ। रात को सामान्य चुदाई के बाद शिवा और मालिनी सो गए। 

सुबह उठकर मालिनी ने ब्रा पहनी और एक नयी स्लीवलेस नायटी पहनी। पेटिकोट उठाई पहनने के लिए , फिर शरारत से मन ही मन मुस्करायी और उसे नहीं पहनी। पैंटी तो मानो उसने पहनना ही छोड़ दिया था। उसने शीशे में अपने आप को देखा तो वह ख़ुद ही अपने रूप पर मुग्ध हो गयी। एक तो वैसे ही दूधिया गोरा बदन और उस पर से स्लीवलेस नायटी से उसकी गदराई बाँहें जैसे क़यामत ढा रही थीं। और इस नायटी से थोड़ा सा कलिवेज भी दिख रहा था। गोरे गोरे गोलाइयों की झलक बहुत ही कामुक दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। वह सोची कि बेचारे पापा जी का आज क्या होगा? 

वो एक बार फिर से वाशरूम गयी और मूत कर अपनी बुर और गाँड़ को अच्छी तरह से धोयी। फिर उसे सुखाकर वह बाहर आकर किचन में जाकर चाय बनाई। 

चाय बनाकर वह आवाज़ दी: पापाजी आइए चाय बन गयी है। 

राजीव: बेटी, चाय आज यहीं दे दो। थोड़ा पैर में चोट लग गयी है। 

मालिनी चाय लाकर: क्या हुआ पापा जी ? चोट कैसे लगी? 

राजीव अभी ट्रैक सूट में ही था। वो बोला: बेटी, वॉक पर एक ऊँची नीची जगह में ठोकर लगी और गिर गया हूँ। थोड़ी सी छिल गयी है चमड़ी और कुछ नहीं। 

मालिनी हँसते हुए: ज़रूर लड़कियों को देख रहे होंगे इसलिए रास्ते से ध्यान हट गया होगा। 

राजीव: अरे बेटी, जिसके घर में तुमसी हसीन लड़की हो उसे बाहर देखने की क्या ज़रूरत है। वैसे आज ये नायटी तुम पर बहुत फ़ब रही है। वह उसकी नंगी बाँह सहला कर बोला। 

मालिनी: मैं डेटोल लाती हूँ आप बताइए कहाँ खरोंच लगी है। 

वह डेटोल लायी तब तक उसने अपनी क़मीज़ उतार दी थी और उसकी नंगी चौड़ी छाती उसके सामने थी जिसमें बाँह पर कुछ चोट के निशान थे। फिर उसने अपनी पैंट उतारी और अपनी चड्डी में आ गया। उसकी जाँघ और नीचे पिंडली पर भी चोट के 
निशान थे। 
राजीव अब चड्डी में था और चड्डी में से उसके बड़े बॉल्ज़ और आधा खड़ा लौंडा काफ़ी भरा हुआ से दिख रहा था और उसने रुई में डेटोल लिया और उसकी बाँह में लगाने लगी। वह बिस्तर पर बैठे हुए था। उसने हाथ बढ़ाकर मालिनी के मस्त चुतरों को सहलाया और बोला: बेटी , आज पेटिकोट नहीं पहना है इसलिए मस्त लग रहा है तुम्हारा पिछवाड़ा। उफफफ क्या नरम गाँड़ है। वह अब उसकी गाँड़ के छेद में ऊँगली डाल नायटी के ऊपर से बहुत ज़्यादा मस्त हो गया। 

मालिनी चुपचाप अपनी गाँड़ में ऊँगली करवा रही थी और अब उसकी जाँघ में भी दवाई लगाई और अब तो उसकी चड्डी में से उसका लौंडा खड़ा होकर अचानक उसकी चड्डी से बाहर आ गया। मोटा सुपाड़ा बाहर आकर बाहर झाँक रहा था और उसके छेद से एक बूँद प्रीकम भी दिख रहा था। अब मालिनी की बुर भी गीली होने लगी। 

राजीव: बेटी, जल रहा है, फूँक मारो ना। 

मालिनी हँसकर : क्या पापा जी आप भी बच्चों जैसे हल्ला मचा रहे हैं। वो फूँक मारने लगी। अब वो नीचे बैठी और उसकी पिंडलियों में दवाई लगाई और तभी नीचे बैठी मालिनी की छातियाँ बैठने के कारण उसके घुटनों में दबी और काफ़ी सारी छाती का गोरा मांसल हिस्सा बाहर झाँक रहा था। अब राजीव हाथ बढ़ाकर उसके छातियों के नंगे हिस्से को सहलाने लगा। वह उनको दबा भी दिया। मालिनी अब गरम होने लगी। वह झट से खड़ी हुई और अब राजीव ने उसका हाथ अपने लौंडे पर रख दिया। मालिनी भी मज़े से सुपाड़े को दबायी और उसकी प्रीकम को उसके सुपाड़े पर मलने लगी। फिर वह उसको अपनी गोद में खिंचा और उसकी छातियाँ दबाकर उसको चूम लिया। मालिनी हँसकर बोली: पापा जी ये क्या सुबह सुबह ही चालू हो गए। चलिए अभी छोड़िए ना, शिवा को भी उठाना है। प्लीज़ । 

राजीव : बाद में तो मज़ा दोगी ना? 

मालिनी: अच्छा अगर मैं नहीं दूँगी मज़ा ,बोलती हूँ तो आप क्या मानोगे। 

फिर वह हँसती हुई बोली: अच्छा अभी तो जाने दीजिए ना प्लीज़। 

राजीव : ठीक है बेटी, चलो जाओ पर आज थोड़ी मस्ती करेंगे ठीक है ना, शिवा के जाने के बाद। 

मालिनी बाहर जाते हुए बोली: वो तो आप करेंगे ही हा हा। 

अब मालिनी शिवा को चाय देकर उसको भी उठाई। वो पेट के बल लेटे हुए था। मालिनी के उठाने से वो सीधा हुआ और मालिनी के सामने उसका खड़ा लौंडा था। 

मालिनी: उसके लौंडे को दबा कर बोली: ये मॉर्निंग इरेक्शन है या सपने में किसी को चोद रहे थे? 

शिवा उसको अपने ऊपर खींच कर गिरा दिया और बोला: अरे जागते हुए और सपने में भी सिर्फ़ तुमको ही चोदता हूँ। 
अब दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। फिर मालिनी हँसकर बोली: चलो अब उठो और नहाओ। 

शिवा: चलो ना साथ में नहाते हैं। 

मालिनी: इतवार को हम साथ में नहा लेंगे। आपकी छुट्टी के दिन। ठीक है चलिए अब आप तय्यार हो जाओ। 

शिवा उठके बाथरूम में चला गया। मालिनी किचन में जाकर बाई से काम करवाने लगी और नाश्ते की तय्यारी में लग गई। 

शिवा के जाने के बाद बाई भी काम करके चली गई और मालिनी भी एक तौलिए से अपना पसीना पोंछने लगी। तभी राजीव लूँगी और बनयान में आया तो वह थोड़ा सा लँगड़ा रहा था । वह बोला: बेटी, कोई दर्द कम करने की दवाई दो। पैर दुःख रहा है। 

मालिनी उठकर दवाई और पानी लाकर उसे दी जो वह खा लिया और मालिनी बोली: पापा जी डॉक्टर को दिखा दीजिए ना। 

राजीव: बेटी, ज़रा सरसों का तेल गरम कर दो ना। जाँघ में मालिश करना पड़ेगा। 

मालिनी तेल गरम करके लायी और नीचे ज़मीन पर बैठ गयी। उसने राजीव की लूँगी हटाई और उसकी जाँघ में तेल लगाने लगी। अब राजीव ने कहा: बेटी, लूँगी उतार देता हूँ वरना तेल लग जाएगा। यह कहकर उसने लूँगी निकाल दिया। 
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06-10-2017, 09:16 AM,
#76
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
अब वो नंगा सोफ़े पर बैठा था। मालिनी उसकी जाँघ में तेल मलने लगी। उसकी बालों से भरी पुष्ट जाँघ को वो सहला रही थी और मज़े से भर रही थी। उफफफफ क्या मर्दाना बदन है पापा का। 

राजीव का लौंडा मालिनी के नरम स्पर्श से गरम होकर सिर उठाने लगा। अब मालिनी को भी मज़ा आने लगा था। 

राजीव: बेटी, बहुत अच्छा लग रहा है । आराम मिल रहा है बहुत। 

मालिनी: पापा आपको अच्छा लग रहा है ये तो मुझे भी दिख रहा है। वो उसके खड़े होते हुए लौंडे को देखकर मुस्कुराकर बोली। 

राजीव हँसकर: बड़ी शरारती हो गयी हो तुम मेरी प्यारी बेटी। ज़रा इसकी भी मालिश कर देना। 

वो आँख मारकर बोली: पापा ठीक है मैं तेल मल देती हूँ। अब मालिनी गरम हो गयी थी और उसकी इच्छा हो रही थी कि बुर को खुजा दे पर हाथ में तेल लगे होने के कारण वह अपनी जाँघें रगड़ कर ख़ुद को शान्त की। अब राजीव भी मस्ती में आकर अपने पैर फैला दिया और उसका खड़ा लौड़ा मालिनी की आँखों के सामने हिले जा रहा था। उसके बड़े बॉल्ज़ को देख कर मालिनी मस्त हो गई। 

वो बोली: पापा आप सोफ़े पर बैठे रहेंगे तो वो तेल से गन्दा हो जाएगा। मैं एक चादर लाती हूँ आप उस पर बैठिएगा। 

वह उठके एक पुरानी चादर लायी और सोफ़े पर बिछा दी। अब वो फिर से उसपर बैठ गया और अपनी कमर को हिला कर ऐसे बैठा कि उसके बॉल्ज़ एकदम सोफ़े के किनारे पर आ गए थे। 
अब मालिनी ने तेल अपने हाथ में लिया और उसको लौडे पर मला। अब वो उसकी मालिश करने लगी। अब उसने सुपाड़े पर भी तेल मला और उसकी भी मालिश करने लगी। उफफफफ क्या मज़ा आ रहा था। अब वो उसके बॉल्ज़ को भी तेल लगाकर मालिश करने लगी। राजीव की आँखें मज़े से बंद हो रही थीं। वह अब हाथ बढ़ाकर उसकी छातियाँ दबाने लगा। मालिनी की बुर पनिया गई थी। वो लौड़ा सहलाते हुए सीइइइइइइइ कर उठी। 

अब मालिनी ने उसके लौडे को मूठीयाने लगी। और दूसरे हाथ से उसके बॉल्ज़ को सहलाने लगी। राजीव अब अपनी कमर हिलाकर मज़े लेने लगा। राजीव अब आऽऽऽऽऽऽहहह बेटीइइइइइइइ क्या मस्त लग रहा है। और जोओओओओओओओर से करोओओओओओओओओ। मैं गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽऽ। अब वो सफ़ेद गाढ़ा वीर्य मालिनी की नायटी पर छोड़ने लगा। फिर मस्ती से मालिनी ने भी उसकी दिशा अपने मुँह की ओर कर दिया और कुछ रस उसके मुँह में भी गिर गया। वह चाटकर मस्ती से भरने लगी। जब राजीव झड़कर शान्त हो गया तो वो वहीं लुढ़ककर लेट गया। मालिनी उठी और बाथरूम में जाकर हाथ मुँह धोकर किचन में जाते हुए बोली: पापा जूस पिएँगे ? 

राजीव आँख मारते हुए: तुम्हारी बुर का? 

मालिनी: नहीं संतरे का? 

राजीव: अरे तुम्हारे संतरे का ? 

मालिनी मुस्कुरा कर: मेरे नहीं असली संतरे का।

राजीव: चलो पी लेंगे बेटी। 

मालिनी थोड़ी देर में जूस बना कर लाई और राजीव को भी दी। राजीव उसे पकड़कर गोद में बिठा लिया और बोला: बेटी इसे मीठा कर दो ना। 

मालिनी हंस कर: अच्छा लायिए , मैं पहले पी लेती हूँ। वो उसमें से एक घूँट पी ली और फिर राजीव उसको पीने लगा। वो बोला: सच में मीठा हो गया है अब वो उसके गाल चूमा और बोला: बेटी बहुत मीठी हो तुम। 

मालिनी: पापा अब मैं नहा लूँ? आप तो नहा लिए हैं। 

राजीव : बेटी मैं नहला दूँ? 

मालिनी: आज क्या हुआ है जो बाप बेटा दोनों साथ में ही नहाने को बोल रहे हैं। 

राजीव: क्या शिवा भी यही बोला था? 

मालिनी: हाँ पर मैंने कहा इतवार को नहा लीजिएगा। हा हा । 

राजीव: आज मेरे साथ नहा लो और इतवार को उसके साथ नहा लेना। 

मालिनी: मैं उनके साथ नहाती हूँ तो पूरा कार्यक्रम हो जाता है। आपके साथ नहाऊँगी तो भी वही होगा। 

राजीव: अरे बेटी, मैं नहीं चोदूँगा बस नहा लेना मेरे साथ। 

मालिनी: आप नहीं करेंगे तो मैं ख़ुद करवा लूँगी। मैं बहुत उत्तेजित हो जाती हूँ साथ नहाने पर। 

राजीव उसकी छाती मसल कर बोला: तो ठीक है चुदवा लेना। इसमें क्या समस्या है। 

मालिनी : अच्छा अब जाती हूँ नहाने। बहुत पसीना आया था किचन में। 

राजीव: सच पसीना आया था? देखूँ तो कैसी गंध है तुम्हारे पसीने की? वो उसकी बाँह उठाया और और अपनी नाक उसकी बग़ल में ले जाकर वहाँ सूँघने लगा। आऽऽऽह बेटी क्या मादक गंध है, सच में बहुत कामुक लग रही है । फिर उसने दूसरे हाथ के साथ भी वही किया । फिर उसको बोला: सच बेटी मस्त गंध है। और एक बात बताऊँ तुम्हारी बुर और गाँड़ की गंध भी बहुत मस्त है। 

यह कहते हुए वह बोला: सच में बेटी, एक बार तुम्हारी बुर सूँघना है। वह अब नीचे बैठा और उसे खड़ा करके उसकी नायटी उठा कर उसकी बुर को देखा और वहीं नाक ले जाकर वह उसे सूँघने लगा उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मालिनी को लगा कि वह अभी झड़ जाएगी। वह थोड़ी देर सूँघा और बोला: आऽऽऽन्भ्ह्ह्ह क्या मस्त गंध है। अब वह बुर चूमने लगा। फिर वह उसे घुमाया और अब उसके चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ में अपनी नाक लगाया और बोला: हम्म कितनी मादक गंध है बेटी। पागल हो रहा हूँ इनको सूंघ कर। आऽऽऽऽऽऽऽहहहह। फिर उसने जीभ से उसकी गाँड़ चाटी। अब मालिनी उसको हटाई और बोली: पापा हटिए ना, उफफफफ क्या कर रहे हैं ? छोड़िए ना। मुझे नहाना है अभी । प्लीज़ । 

राजीव : चलो जाओ नहा लो। बेटी, तुम्हारी झाँटें बढ़ गयीं हैं , लगता है कई दिन से काटी नहीं हैं । मैं साफ़ कर दूँ?

मालिनी: मैं ख़ुद साफ़ कर लूँगी। अब चलती हूँ। 

मालिनी ने अपनी नायटी नीचे की और अपने कमरे में चली गयी। उफफफ पापा भी कितने हॉट हैं। हर समय उसकी बुर को गीला कर देते हैं। फिर वो नहाने के लिए गयी और अपनी बुर को चेक की, सच में थोड़े बाल आ गए थे। उसने वीट क्रीम ली और वहाँ लगाकर सफ़ाई कर दी। फिर नहा के साड़ी और स्लीव्लेस ब्लाउस में बाहर आयी। पापा अपने कमरे में जा चुके थे। अब वो टी वी देखने लगी। थोड़ी देर बाद उसने खाने के लिए पापा को आवाज़ दी।
वो: बेटी आज मैं बेड पर ही खाऊँगा। पैर मैं अभी भी दर्द है। 

मालिनी कमरे में जाकर उसको बिस्तर पर लेटे हुए देखी तो उसके पास जाकर बिस्तर पर बैठी और पूछी: पापा क्या बहुत दर्द हो रहा है? 

राजीव: नहीं ज़्यादा तो नहीं पर हो रहा है। वह अब उसकी नंगी बाहों को सहला कर बोला: बेटी बहुत प्यारी लग रही हो इस साड़ी में।अब तक दर्द हो रहा था पर अब तुमको देख कर दर्द भाग गया है। 

मालिनी: तो खाना यहाँ लगा दूँ? 

राजीव: हाँ बेटी यहाँ ही लगा दो। वह अपनी जाँघ दबा कर बोला। 

मालिनी: पापा आज नूरी की कैसे लोगे फिर ? 

राजीव उसकी साड़ी को एक तरफ़ करके उसके चिकने पेट को सहलाया और फिर नाभि में एक ऊँगली डाल कर उसकी गहरी नाभि को छेड़ने लगा। फिर वह अपने हाथ उसके साड़ी के अंदर डालने की कोशिश किया और बोला: नूरी को आज अपने ऊपर चढ़ा लूँगा बेटी। तुम भी तो ऊपर चढ़ कर शिवा को चोदते होगी। 

वो मज़े से हंस कर उठ खड़ी हुई और बोली: पापा मैं खाना लाती हूँ। आपकी बातों का कोई अंत नहीं है। 

राजीव: ठीक है चलो अब खाना लगा दो। 

मालिनी थोड़ी देर में उसे खाना निकाल कर दे गयी। 

क़रीब एक घंटे के बाद नूरी आ गयी। मालिनी उसे पापा की चोट का बतायी। वो पापा के कमरे में गयी। फिर बाहर आकर वो हँसकर बोली: ज़्यादा चोट नहीं है। बोले हैं आज मैं ऊपर रहकर उनको चोदूँगी। मैं बोली वैसे भी आधे समय तो मैं ही ऊपर रहती हूँ। हा हा ।

मालिनी शर्मा कर: दीदी आप भी ना कुछ भी बोलते हो। चलो आप जाओ जो करना है करो। मैं इसको सुला देती हूँ। 

नूरी राजीव के कमरे में घुस गयी। राजीव उसको दरवाज़ा खुला रखने को बोला। वो चाहता था कि मालिनी को आवाज़ें सुनाई दें और वो चाहे तो सब कुछ देख भी ले और गरम हो जाए। 

थोड़ी देर में वहाँ से आवाज़ें आने लगीं। सिसकियाँ और आऽऽह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ वग़ैरह। मालिनी उतसुक़्ता से वहाँ देखी और उसे दरवाज़े से साफ़ साफ़ नूरी पापा के ऊपर चढ़ी नज़र आयी और उसकी गाँड़ ऊपर नीचे हो रही थी और पापा के बड़े बॉल्ज़ साफ़ साफ़ दिख रहे थे जो कि उसकी गाँड़ को ठोकर मार रहे थे। वो अब मज़े से भरने लगी। जल्दी ही नूरी की आऽऽऽहहहह हाऽऽऽऽय्य और उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ सुनाई दी। और वो कुछ बोली। राजीव अब उसके ऊपर आ गया और उसे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। जल्दी ही उन दोनों के क्लाइमेक्स आ गए और वो झड़ गए। मालिनी की बुर गीली होने लगी। 

वो किचन में जाकर पानी पी कर ख़ुद को शांत करी। नूरी बाहर आयी और बोली: आज अंकल बोले है कि एक राउंड ही करेंगे। मुझे भी कुछ काम है, मैं चलती हूँ। तुम अंकल का ख़याल रखना। यह कर वह आँख मारकर मुस्कुराई। 

फिर वो चली गयी। पीछे रह गयी अशांत मालिनी। फिर वो दोनों अपने अपने कमरे में आराम करने लगे। 

शाम को जब उसने चाय के लिए पापा को आवाज़ दी और बोली: पापा आइए चाय पी लीजिए। 

राजीव: बेटी चाय भी यहीं दे दो। अब मालिनी को चिंता हुई किकहीं पापा को ज़्यादा चोट तो नहीं लग गयी। वो चाय लाकर बोली: पापा आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 

यह कहते हुए मालिनी ने उसकी लूँगी जाँघ से हटाई और उस जगह को हल्के से दबाया। वह धीरे से उफफफफ कर उठा। अब उसका सोया हुआ लौड़ा लूँगी से दिखाई दे रहा था। अब मालिनी बोली: पापा और तेल लगा दूँ। 

राजीव: हाँ बेटी, प्लीज़ लगा दो। वो बाहर जाकर तेल गरम की और वापस आइ और उसकी जाँघ में तेल लगाने लगी। राजीव बग़ल में बैठी अपनी जवान बहु की कमर सहलाने लगा। फिर उसके नंगे पेट को भी दबाया। 

मालिनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की तो राजीव का हौसला बाधा और अब वो उसकी साड़ी को हटाकर उसके ब्लाउस के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। मालिनी अब गरम होने लगी। राजीव ने कहा: बेटी, झाँटे साफ़ की? 

मालिनी ने शर्मा कर हाँ में सिर हिलाया। वह मस्ती से भर गया और बोला: बेटी फिर एक काम करो ना ? मेरे मुँह पर बैठो ना। मुझे बहुत अच्छा लगता है जब कोई जवान लड़की अपनी बुर मेरे मुँह में रखकर बैठती है। प्लीज़ । 
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06-10-2017, 09:16 AM,
#77
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
मालिनी ने चुप चाप उसकी तरफ़ देखा ।उसकी उत्तेजना भी अब चरम सीमा पर थी और वह जैसे रोबॉट की तरह बिस्तर पर खड़ी हुई और अपनी साड़ी और पेटिकोट एक साथ उठाई और अपनी बुर को राजीव के मुँह पर रख कर बैठ गयी। उसकी दोनों जाँघें उसकी एक एक कान को छू रहीं थीं। 

राजीव ने कभी सोचा भी नहीं था कि बहु एकदम से उसके लिए मान जाएगी। वह हैरानी से उसके चिकने खुले हुए बुर को देखा और बोला: आऽऽऽह बेटी क्या मस्त चिकनी बुर है अच्छे से साफ़ किया है। झाँट का नामोंनिशान नहीं है। फिर वह उसकी कमर को पकड़कर उसकी बुर को अपने मुँह पर रखा और उसे नीचे से चूमने लगा। मालिनी ने बेड का हेड रेस्ट पकड़ा हुआ था और अब वो अपनी कमर हिलाकर बुर को उसके मुँह पर रगड़ रही थी। राजीव के होंठ उसकी बुर से जैसे चिपक गए थे। वह खुली हुई बुर में जीभ डालकर मानो उसे चोद रहा था। 

अब मालिनी की आऽऽऽह हाय्यय पापाआऽऽऽऽऽ जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। जल्दी ही वह अपनी कमर को जोर ज़ोर से हिलाकर अपनी ऑर्गैज़म की तरफ़ बढ़ने लगी। राजीव भी उसके बड़े चूतरों को दबाकर उसकी गाँड़ में भी ऊँगली करने लगा। मालिनी दोहरे मज़े से भर गयी और अब आऽऽऽह्ब्ब्ब्ब पाआऽऽऽऽऽऽऽऽपा कहकर झड़ने लगी। राजीव भी मज़े में उसकी बुर को चूस कर उसका पानी पीने लगा। 

अब मालिनी उसके ऊपर से उठी और उसके बाथरूम में मूतने गयी। बाहर आकर वो बोली: पापा आपके इस कड़क हथियार का अब क्या होगा? 

राजीव : बेटी इसे अकेले रहने की आदत है। कोई बात नहीं। शांत हो जाएगा। पर आज तुम्हारी बुर चूसने में बहुत मज़ा आया। 

मालिनी: पापा सच में आप मस्त मज़ा देते है। मुझे भी मज़ा आ गया। अब चलती हूँ। 

राजीव: बेटी, एक बार अपने चूतर तो दिखा दो साड़ी उठाके। 

मालिनी हँसी और बोली: लो देख लो । आप भी क्या याद करोगे? 
यह कहते हुए उसके दरवाज़े के पास से अपनी साड़ी और पेटिकोट उठाकर अपने चूतर दिखाए । 

राजीव: आऽऽऽऽह बेटी, अब चूतरों को अलग करके अपनी गाँड़ भी दिखाओ ना।

मालिनी ने वो भी किया और अपने छेद को दिखाई और बोली: बस अब जाऊँ? 

राजीव: बेटी, आगे की ओर झुको और बुर भी दिखाओ। 

मालिनी ने हँसते हुए आगे की ओर झुक कर बोली: पापा कई बार तो देख चुके हो। अभी चूसे भी हो।वही है कोई बदल नहीं गयी है। हा हा । फिर वो साड़ी नीचे करके चली गयी।

राजीव अपने लौड़े को सहलाता हुआ सोचा कि वाह रे मेरी संस्कारी बहु । आज अपने चूतर फैलाकर अपनी गाँड़ और बुर दिखा रही है। जल्दी ही अब मुझसे चुदवाएगी भी। 
वह कमीनी मुस्कान के साथ अपने लौड़े को हिलाकर अपना रस गिरा दिया। 

मालिनी भी अपने कमरे में आकर सोची कि हाय आज उसे क्या हो गया था जो वो पापा की हर बात मानते चली गई? वह अब पापा के गिरफ़्त में आ रही थी। उसे लगा कि वो अब एक क़दम ही दूर थी शिवा को धोका देने से । वह सोच रही थी कि क्या अपनी वासना के आगे सम्पर्ण कर दे या शिवा के प्यार का सम्मान करे । आज सच में उसकी बहुत इच्छा हो रही थी कि अभी जाए और पापा को बोले कि मुझे चोद दो। फिर वो सोची कि पता नहीं क्या सही है और क्या ग़लत?????

अगले दो दिन कुछ नया नहीं हुआ ।नूरी आती चुदवा कर चली जाती और राजीव मालिनी के साथ ओरल सेक्स करते रहा। फिर नूरी वापस दिल्ली चली गयी। राजीव सोच रहा था कि बात आगे नहीं बढ़ रही थी। मालिनी अभी भी वही राग दुहरा रही थी कि जब शिवा उसके प्रति वफ़ादार है तो वो उससे बेवफ़ाई कैसे कर सकती है।राजीव बोलता था कि शिवा तब तक ही वफ़ादार है जब तक उसे कोई हॉट माल नहीं मिलता। गरम माल मिलेगा तो वो भी उसको छोड़ेगा नहीं। पर मालिनी उसकी बात मानने को तय्यार ही नहीं थी। 

अचानक राजीव के दिमाग़ में एक बात आयी और वो सोचा कि शिवा की वफ़ादारी से मालिनी का विश्वास हट गया तो मालिनी को उसकी बाहों में आने में वक़्त नहीं लगेगा। पर ये काम किया कैसे जाए? वो सोचने लगा और एक दिन उसके दिमाग़ की बत्ती जली । वह सरला यानी शिवा की सास को क्यों ना यूज़ करे शिवा को जाल में फँसाने के लिए। वह मुस्कुराया और सरला को फ़ोन किया। 

सरला: हाय समधी जी आज कैसे याद आइ हमारी? 

राजीव: अरे हम तो रोज़ आपको याद करते हैं आपको ही हमारी याद नहीं आती। 

सरला: मैं भी आपको बहुत याद करती हूँ। 

राजीव: अरे आपको तो श्याम मिला हुआ है , आप मुझे क्यों याद करोगी। 

सरला: वो अपनी जगह हैं और आप अपनी जगह। आप तुलना क्यों करते हैं ? 

राजीव: अरे मैं तो मज़ाक़ कर रहा था। और सब परिवार में मस्त ?

सरला: हाँ जी सब बढ़िया। और मालिनी और दामाद कैसे हैं? 

राजीव : वो भी मस्त है और जवानी के मज़े लूट रहे हैं। दोनों बहुत ख़ुश रहते हैं। मालिनी तो मस्त भर गयी है सब जगह से । 

सरला: छी क्या बोलते हो आप भी? आपकी बहू है वो उसे इस तरह से देखते हो क्या आप? 

राजीव: मैं क्या करूँ? वो तो मेरे सामने दिन भर रहती है। और उसके उभार को मैं कैसे नज़र अन्दाज़ करूँ? उफफफ क्या जवानी उभरी है उसकी। लगता है शिवा का रस उसे बहुत रास आ रहा है। 

सरला: छी आप भी ना? कोई अपने बच्चों के बारे में भी ऐसी बातें करता है। 

राजीव: अब क्या करूँ ? दिन भर उसकी मस्त जवानी को देखकर सिवाय मूठ्ठ मारने के और क्या कर सकता हूँ। 
उसने जानबूझकर उसको अपने और मालिनी की सेक्स गतिविधियों के बारे में नहीं बताया। 

सरला: ओह ये तो बहुत चिंता की बात है। 

राजीव: मैं तुम्हारी बेटी का बलात्कार नहीं करने वाला हूँ, चिंता मत करो। इसीलिए अब मैंने फ़ैसला किया है कि मैं जल्दी ही एक मस्त जवान लड़की से शादी करूँगा, चाहे वो बहु से उम्र में छोटी ही क्यों ना हो। 

सरला: ये क्या कह रहे हैं आप? उफ़्फ़ आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। 

राजीव: अच्छा चलो नहीं करता तो तुम मुझसे शादी कर लो। 

सरला: हे भगवान ये क्या बोल रहे हैं आप? ये बिलकुल नहीं हो सकता। कुछ तो सोचिए आप बोलने से पहले। 

राजीव: ठीक है अगर तुम शादी के लिए तय्यार नहीं हो तो मैं अब दूसरी शादी ही कर लेता हूँ। मालिनी को भी एक सहेली मिल जाएगी हालाँकि वो उसकी सास होगी। 

सरला: मैं तो बस यही कह सकती हूँ कि आप प्लीज़ ऐसा ना करें। नहीं तो घर में बहुत माहोल ख़राब हो जाएगा। 

राजीव का काम हो चुका था। वह सोचा कि आज के लिए इतना ही काफ़ी है। वो बाई कहकर फ़ोन काट दिया। 

सरला एकदम से सकते में आ गयी थी। उसकी बेटी को उसका ससुर गंदी नज़र से देखता है और वो अब दूसरी शादी की बात भी कर रहा है। उसका माथा घूमने लगा। उसने मालिनी की फ़ोन लगाया। 

मालिनी: हाँ मम्मी बोलो क्या हाल? 

सरला: अरे बेटी मैं तो ठीक हूँ पर तेरे ससुर को क्या हो गया है? 

मालिनी: क्यों मम्मी उनको क्या हुआ? वो तो भले चंगे है। फिर वो सोची कि अभी तो एक घंटे पहले हमने ओरल सेक्स किया है। 

सरला: अरे वो मुझे बोले कि मैं उनसे शादी कर लूँ? जब मैंने मना किया तो अब कहते हैं कि वो एक जवान लड़की से शादी करेंगे। बताओ भला ऐसा भी कोई इस उम्र में करता है?

मालिनी सोचने लगी कि ये भी क्या पापा की कोई सोची समझी चाल है? वो मम्मी को दबाव में डालकर मुझे पाना चाहते है। पता नहीं क्या चल रहा है उनके मन में? वो बोली: मम्मी वो पहले मुझे भी बोले थे दूसरी शादी का। पर बाद में मान गए थे। पता नहीं लगता है फिर से भूत सवार हो गया है। बात करती हूँ उनसे।

सरला: हाँ बेटी बात करो और उनको समझाओ कि ये ग़लत है। 

मालिनी: ठीक है मम्मी। 

सरला: एक बात और बताओ कि क्या वो तुमको भी ग़लत नज़रों से देखते हैं? 

मालिनी क्या कहती, कि वो दोनों क्या क्या करते हैं आपस में। सिर्फ़ चुदाई छोड़कर सब कुछ तो कर ही लिए हैं। वो बोली: मम्मी मैंने ध्यान नहीं दिया और शायद ऐसा कुछ नहीं है। वो जानती थी कि वो सफ़ेद झूठ बोल रही है। 

सरला: मैं तो बहुत परेशान हूँ बेटी तेरे लिए। अगर ये शादी कर लिए तो शिवा का हिस्सा भी बँट जाएगा। हैं ना? 

मालिनी: हाँ मम्मी वो तो होगा ही। दूसरी शादी से बच्चे भी हक़ माँगेंगे ही। 

सरला: ठीक है बेटी अभी रखती हूँ। पता नहीं क्या होने वाला है। फिर उसने फ़ोन काट दिया। 

सरला श्याम से भी इसके बारे में बात की। पर उसे भी कुछ रास्ता दिखाई नहीं दिया।उधर मालिनी भी राजीव से बात की और पूछी: पापा आप मम्मी से शादी की बात किए थे क्या?

राजीव : हाँ मज़ाक़ किया था बेटी। पर हाँ मैंने उसको ये बताया कि मैं फिर से शादी का सोच रहा हूँ। 

मालिनी: आपने ये विचार तो त्याग दिया था ना, फिर अब ये सब क्यों? 

राजीव: बेटी तुम अभी भी पूरी हमारी कहाँ हुई हो? इसीलिए रह रह कर शादी की उमंग उठती है जान। 

मालिनी: ओह चलो आपके जो मन में आए वह करो। वह बुरा सा मुँह बना कर वहाँ से चली गयी। 

अगले दिन सरला दिन भर बेचैन रही और शाम को राजीव को फ़ोन लगायी। 

राजीव उसके फ़ोन का रास्ता ही देख रहा था सो वह कुटीलता से मुस्कुराया: हाय सरला कैसी हो? मेरी बात पर विचार किया क्या? करोगी मुझसे शादी? 

सरला: बस भी करिए आप। वो नहीं हो सकता। मैं तो आपसे बस इसके लिए फ़ोन की हूँ कि आप रानी जैसी एक जवान नौकरानी रख लीजिए और उससे मज़ा कीजिए। मैं मालिनी को समझा दूँगी कि पिछली बार की तरह समस्या नहीं खड़ी करेगी। 

राजीव: अरे जब रानी से भी जवान लौंडियां मिल जाएगी तो क्या ज़रूरत है नौकरानी की। हाँ तुम अगर मान जाओ तो ठीक होगा । बोलो शादी करोगी ना मुझसे ? 

सरला: आप भी ना , आपको पता ही है कि ये हो नहीं सकता। मैं आपको ये बोलने को फ़ोन की हूँ कि आप शादी का विचार छोड़ दो वरना आपके घर की शांति भंग हो जाएगी। 

राजीव: अब मैं घर की शांति का सोचूँ या अपने लौडे की शांति का सोचूँ? तुम ही बोलो। मालिनी पूरे दिन अपनी जवानी लहराती हुए मेरे सामने घूमती रहती है, आख़िर मैं क्या करूँ? 

सरला: हे भगवान आप भी अपनी बहू पर बुरी नज़र रखें हैं। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। 

राजीव: क्यों श्याम भी तुमको पटाने में सफल रहा था जबकि वो तुम्हारा ज़ेठ था। देखो जानू, जब लौड़ा खड़ा होता है या बुर खुजाती है ना तो बस चुदाई ही दिखाई देती है और कुछ नहीं। समझी मेरी जान? अब हम दोनों भी तो समधी समधन है और चुदाई करते हैं। बोलो करते हैं ना? 

सरला: देखिए आपकी और मेरी बात दूसरी है। मेरे तो पति भी है नहीं। और आपकी पत्नी नहीं है तो कम से कम हम किसी को धोका तो नहीं ना से रहे हैं। 

राजीव: अरे किसी और से मज़ा लेना धोका थोड़ी है। अगर हम अपने जीवन को रंगीन बनाना चाहते हैं तो इसने कोई बुराई नहीं है। 

सरला: पर आपको अपनी बहू को कम से कम बक्श देना चाहिए। 

राजीव: देखो मुझे लगता है मालिनी भी अब मेरी ओर आकर्षित हो रही है। पर उसके मन में एक भावना है कि वो शिवा को धोका नहीं देना चाहती। 

सरला: एकदम सही भावना है। इसमें ग़लत क्या है?

राजीव: देखो मैं तुमको चैलेंज करता हूँ कि अगर शिवा को भी ऐसा अवसर मिले जिसमें उसे कोई हसीन औरत उससे चुदावने को तय्यार हो तो वो भी इस मज़े से नहीं चूकेगा। तब क्या वो मालिनी के प्रति उसकी बेवफ़ाई नहीं होगी? 

सरला: आप अपने बेटे के बारे में भी ऐसा कैसे बोल देते हो? 

राजीव: अरे बेटा है तो क्या हुआ ? है तो भी एक आदमी और उसके पास भी एक लौड़ा है ना। क्या करेगा वो भी? 

सरला: जहाँ तक मैंने देखा है शिवा एक पत्नीव्रत आदमी है और वो दूसरी औरत के चक्कर में नहीं पड़ेगा। 

राजीव: अरे जाने दो वो भी एक आम इंसान है। मैंने उस दिन पार्टी में तुम्हारी ब्लाउस से झाँक रहे मोटे दूध को घूरते देखा था। 

सरला: ओह आप भी ना। छी मैं उसकी मॉ जैसे हूँ। 

राजीव: माँ जैसी होना और माँ होने में बहुत फ़र्क़ है। अब सुनो अगर तुम मेरी शादी रोकना चाहती हो तो एक आख़री उपाय है? 

सरला: हाँ हाँ बोलिए ना। मैं पूरी कोशिश करूँगी। 

राजीव: देखो मैं जो भी बोलूँगा उस पर अच्छी तरह से सोचना। एकदम से मत नकार देना। 

सरला: ठीक है बोलिए। 

राजीव: मैं चाहता हूँ कि तुम शिवा को सिड्यूस करो यानी अपनी ओर आकर्षित करो। फिर जब वो तुम्हारे बस में आ जाए तो तुम उससे चुदवा लेना और मैं ये मालिनी को दिखाऊँगा और वो मुझसे चुदवा लेगी। जब उसका पति बेवफ़ा है तो वो ख़ुद भी बेवफ़ाई करने के लिए तय्यार हो जाएगी। यह है मेरी शर्त शादी ना करने की। बोलो क्या कहती हो?
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06-10-2017, 09:16 AM,
#78
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
सरला एकदम से भौनचक्की रह गयी और बोली: ये आप क्या बोल रहे है ? मैं शिवा को अपने बेटे जैसा समझती हूँ । मैं उसके साथ ये सब कैसे कर सकती हूँ? 

राजीव: सोच लो। अगर अपनी बेटी जा घर बचाना है तो तुम्हें ये करना ही पड़ेगा। 

सरला: पर इस सबसे मालिनी का क्या लेना देना? 

राजीव: अरे वो मुझसे चुदावने को इसी लिए राज़ी नहीं हो रही है क्योंकि वो शिवा से बेवफ़ाई नहीं करना चाहती। पर अगर शिवा ही बेवफ़ाई करेगा तो वो मेरी बाहों में आ जाएगी। 

सरला को अब समझ में आया और वो स्तब्ध रह गयी और बोली: तो ये सब आप मालिनी को पाने के लिए कर रहे हैं? 

राजीव: अरे इसमें बुराई क्या है? वो दिन में मुझसे मज़े करेगी और रात में शिवा उसको मज़े देगा। एक साथ दो दो मर्द उसके ग़ुलाम रहेंगे। 

सरला: साफ़ साफ़ कहिए ना कि वो दो दो मर्दों की ,जो कि बाप बेटे हैं, जोरू बन जाएगी। कैसी अजीब सोच है आपकी? और आप इसमें मुझे भी शामिल कर रहे हो। मुझे तो सोच कर भी अजीब लग रहा है। 

राजीव: मेरी जान अच्छी तरह से सोच लो। या तो ये करो और या फिर अपनी बेटी के सास की आने की तय्यारी करो। 
कल तक बता देना जो भी करना है। क्योंकि पंडित जी मेरे पीछे पड़ा है शादी के लिए। गाँव की लड़की है १८/१९ साल की। मस्त कड़क जवानी है। ऐसा वो बोल रहा था। 

सरला कांप उठी और बोली: ठीक है कल बताती हूँ। और फ़ोन काट दिया। 

राजीव भी सोचा कि अब उसने अपने पूरे पत्ते दिखा दिए हैं। देखें वो क्या करती है? तभी मालिनी अंदर आयी और बोली: पापा मैं बाज़ार जा रही हूँ। आपको कुछ चाहिए क्या? 

राजीव उसे खींच लिया और अपनी गोद में बिठा लिया और उसके गाल को चूमकर बोला: मुझे तो बेटी बस तुम चाहिए। और कुछ नहीं चाहिए। वह अब उसकी क़ुर्ती के ऊपर से उसकी चुचि दबाने लगा जो कि क़ुर्ती ने से आधी नंगी थी और मानो बाहर आने को फड़फड़ा रही थीं। 

मालिनी: उफफफ पापा। अभी छोड़िए ना। मुझे बहुत सा राशन का सामान लाना है। 

राजीव: तो चलो मैं भी चलता हूँ । मेरी नाज़ुक सी बहू इतना सामान कैसे उठाएगी? एक नौकर तो चाहिए। सो बंदा हाज़िर है। 

मालिनी ख़ुश होकर बड़े से प्यार से उसको देखी और फिर अपने होंठ से उसके गाल चूमती हुए बोली: पापा आप बहुत अच्छे हो। तो चलो साथ में थैला उठाने के लिए। 

राजीव ख़ुश होकर उसको अपने ऊपर से उठाया और पैंट और टी शर्ट आलमारी से निकाला । अब वो मालिनी के सामने ही अपनी टी शर्ट पहना और फिर लूँगी खोलकर पूरा नंगा हो गया। उसका लम्बा लौड़ा लटका हुआ भी बहुत हसीन लग रहा था। उसके बड़े बॉल्ज़ तो मालिनी की कमज़ोरी थे ही। अब वह उसको हिलाकर मालिनी से बोला: बेटी इसको कब तक प्यासा रखोगी? 

मालिनी हँसकर: फ़ालतू बात ना करो और आप जल्दी से तय्यार हो जाओ। अब राजीव ने चड्डी पहनी और पैंट भी पहनकर तय्यार होने लगा। 

मालिनी और वो बाहर को निकले तो उसने पीछे से उसके पिछवाड़े को सहला कर कहा: बेटी ये सलवार मस्त फ़िट है तुम्हारी गाँड़ पर। गोल गोल चूतर बहुत सेक्सी दिख रहे हैं। वो उनको सहलाते हुए बोला। मालिनी सिर्फ़ मुस्कुरा दी। वो कार से बाज़ार पहुँचे। सब सामान लेने के बाद वो मालिनी को बोला: चलो काफ़ी पीते हैं। 
वो कार पार्क किया और मालिनी को बोला: बेटी चुन्नी को यहीं छोड़ दो कार के अंदर।

मालिनी: क्यों पापा? 

राजीव: अरे बेटी तुम्हारी क्लिवेज़ आज ग़ज़ब ढा राही है। इसे ऐसे ही रहने दो। 

मालिनी मुस्कुराकर अपनी चुन्नी वहीं कार में छोड़कर बाहर आकर बोली: पापा आजकल आप बहुत मस्ती में रहते है । मैं देख रही हूँ। 

राजीव: बेटी जिसके घर में तुम्हारी जैसे मस्त बहू हो वो कैसे मस्ती में ना रहे। अच्छा मेरे आगे आगे चलो क्योंकि मुझे तुम्हारी मटकती हुई गाँड़ देखनी है। 

मालिनी हँसते हुए आगे चलने लगी। वो उसकी मटकती गाँड़ देखकर मस्ती से भर गया। जब दोनों लिफ़्ट में अकेले थे तो राजीव बोला: बेटी,मस्त मटक रही है तुम्हारी गाँड़ आज।पैंटी नहीं पहनी हो क्या? वो उसकी गाँड़ पर हाथ फेरा और पैंटी की साइड ढूँढने लगा पर उसे नहीं मिली। 

मालिनी हँसकर: आप चेक कर लिए ना कि मैं पैंटी नहीं पहनी हूँ। असल में आपने मेरी आदत ही छुड़वा दी, पैंटी पहनने की। अब मैं सिर्फ़ जींस और स्कर्ट के नीचे ही पहनती हूँ। 
रेस्तराँ में जाकर वो बैठे और वहाँ काफ़ी पीते हुए वह बोला: बेटी, आज तुम बला की ख़ूबसूरत लग रही हो।देखो वो दोनों लड़के तुमको कैसे घूर रहे हैं मानो खा ही जाएँगे। 

मालिनी ने अपना सिर घुमाया और देखा कि सच में दो लड़के उसको बुरी तरह से घूर रहे थे। वो उसकी क्लिवेज़ ही देखे जा रहे थे। वो बोली: पापा आप ठीक कह रहे हो। वो तो मुझे ऐसा देख रहे हैं कि अगर मैं उनको अकेले में मिल गयी तो मेरा रेप ही कर देंगे। 

राजीव : वो दूसरी तरफ़ देखो। वो जो एक अधेड़ जोड़ी बैठी है। वो भी तुमको घूर रहे हैं। 

मालिनी ने उनको भी देखा और हैरान रह गयी कि वो दोनों यानी क़रीब ४५ साल का आदमी और क़रीब ४० साल की औरत उसे घूरे जा रहे थे। 

राजीव: बेटी ये आदमी तो ठरकी लगता है पर औरत भी नूरी की सास की तरह बाइसेक्शूअल लग रही है। वैसे आज तुम्हारी चूचियाँ बहुत ग़ज़ब ढा रही हैं। वो क़ुर्ती से झाँकती उसकी आधी नंगी चूचियों को घूरते हुए बोला। 

काफ़ी पीने के बाद वो दोनों उठे और लिफ़्ट में एक बार फिर राजीव उसकी चूचियों को जो बाहर झाँक रहीं थी झुककर चूमने लगा। उसके हाथ अब भी उसकी गाँड़ पर ही घूम रहे थे। लिफ़्ट से बाहर आकर दोनों कार में बैठे और घर की ओर चल पड़े।

रास्ते में मालिनी बोली: पापा आज बहुत मस्ती में हो आप? कोई ख़ास वजह?

राजीव: अरे बस तुम साथ हो तो और क्या चाहिए। अचानक उसने कार एक दुकान पर रोक दी और मालिनी को उतरने को बोला। सामने एक शानदार ब्रानडेड कपड़ों की दुकान थी। दोनों दुकान पर पहुँचे तो राजीव उसे लेकर एक लेडीज़ शॉप में गया और उसने मालिनी से कुछ बढ़िया ड्रेस ख़रीदने को कहा। मालिनी बोली: पापा मैं ये सब कब पहनूँगी? 

राजीव: अरे ले लो । पहनने के कई अवसर आएँगे। और कोई नहीं भी हुआ अवसर तो मुझे ही पहन कर दिखा देना। अब उसने सेल्ज़्गर्ल को कहा: इनके लिए सुंदर सी सेक्सी ड्रेस दिखाओ। 

वो मुस्कुराती हुई बोली: जी सर अभी दिखाती हूँ। फिर उसने कई ड्रेस दिखाए जिनमे छिपता कम था और दिखता ज़्यादा था। मालिनी बोली: पापा ऐसी ड्रेस थोड़ी पहनूँगी। आधी नंगी दिखूँगी। 

राजीव ने इधर उधर देखा तो आसपास कोई नहीं था। उसने अपना हाथ उसकी जाँघ पर रखा और बोला: बेटी, अरे इसी में तो मज़ा है और जब तुम सेक्सी दिखोगी तो शिवा भी तुमको ज़ोर से चोदेगा। और मुझे पहन के दिखाओगी तो मैं भी फाड़ दूँगा तुम्हारी । ये कहते हुए उसने उसकी सलवार के ऊपर से बुर को सहला दिया। मालिनी सिहर उठी। उसने कहा: पापा हाथ हटाओ ना प्लीज़। उफफफफ गीली होने लगेगी और मैंने पैंटी भी नहीं पहनी है। 

राजीव ने नोटिस किया कि आजकल वो उसे पापा जी नहीं बोलती है बल्कि पापा बोलती है। और अब कहिए या जाइए भी नहीं बोलती बल्कि जाओ या कहो बोलती है। इसका मतलब वो उसके अंतरंग हो रही है। वह यह सोचकर ख़ुश हो गया और बोला: बेटी ये ड्रेस पहन कर देखो। 

मालिनी शर्मीली मुस्कान के साथ ट्राइयल रूम में गयी और ड्रेस पहन कर शीशे ने ख़ुद को देखकर शर्मा गयी। उसकी आधी कमर,आधे दूध ,पूरे कंधे और आधी जाँघें ऊपर से भी नंगी दिखाई दे रही थी। 

राजीव : अरे बाहर आओ ना। 

मालिनी: पापा मैं बाहर नहीं आ सकती । आप अंदर आ जाओ।

राजीव अंदर छोटे से ट्राइयल रूम में गया और मालिनी को इस रूप में देखकर मस्त हो गया। वो बोला: बेटी उफफफफ क्या माल दिख रही हो। वो उसकी कमर और जाँघ को सहला कर मस्ती से भर गया। फिर उसके दूध को ऊपर से चूमा और बोला: आऽऽऽह बेटी आज तो चुदाई बनती है। देखो कैसे खड़ा हो गया है मेरा? वो उसका हाथ अपने पैंट के ऊपर रख कर बोला। मालिनी भी मज़े से दबाई और बोली: फिर ये ड्रेस ले लूँ? 

राजीव: हाँ हाँ बेटी ले लो। जब मेरे साथ सुहाग रात मनाओगी तो यही पहनना। वह उसे चूमते हुए बोला। वह हँसकर बोली: अभी तो यहाँ से चलें। 

फिर दोनों घर पहुँचे और जैसे ही वो घर के अंदर आए राजीव उसको गोद में उठा लिया और अपने बिस्तर पर लिटाया और पागलों की तरह चूमने लगा जल्दी ही दोनों गरम हो गए। राजीव ने अपने कपड़े खोले और फिर मालिनी की भी सलवार खोल दी। फिर दोनों ६९ की पोज़ीशन में आए और मालिनी को उसने अपने ऊपर खींच लिया था। अब मालिनी भी उसका लौड़ा बॉल्ज़ चाटी और अब चूसने भी लगी। उधर राजीव भी उसकी बुर को चूमकर चाटने और जीभ से चोदने लगा। उफफफ क्या मस्त बुर है वो और ज़ोर से चूसने लगा। जल्दी ही दोनों एक दूसरे के मुँह में अपना अपना कामरस छोड़ने लगे और पूरा का पूरा पी भी गए। 

थोड़ी देर बाद वो अपने अपने कमरे में आराम कर रहे थे। राजीव सोच रहा था कि देखो कल सरला का क्या जवाब आता है। 
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06-10-2017, 09:16 AM,
#79
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
उधर सरला की रात करवट लेते हुए बीत गयी थीं। वो सोच रही थी कि क्या जवाब दे वो राजीव को? अगर मना करती है तो वो शादी करेगा और मालिनी की ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी। और अगर मान जाती है तो वो शिवा के साथ ये सब कैसे कर सकती है। क्या मुसीबत है इधर कुआँ और उधर खाई? वो करे तो क्या करे?

सुबह चाय पीते हुए मालिनी बोली: पापा आपने मम्मी को फ़ालतू टेन्शन में डाला है अपनी दूसरी शादी का बोल कर। 

राजीव ने सिर उठाया और देखा कि वो एक काली नायटी में बहुत ही सुंदर दिख रही थी। वह बोला: देखो बेटी ज़रा शीशे में अपने आप को। काली नायटी में तुम्हारा दूधिया और जवान बदन कैसे दमक रहा है। उफफफफ ऐसी मस्त खिली जवानी देखकर कोई कैसे शांत रह सकता है। अब तुम तो अपनी देती नहीं हो तो मैं और क्या करूँ? अच्छा ये बताओ मम्मी से क्या बात हुई? 

मालिनी: बस आपकी शादी का बोल रही थीं और मेरे लिए चिंता कर रहीं थीं। 

राजीव : और कोई बात हुई? 

मालिनी: नहीं बस यही हुई। 

राजीव सोचा कि शिवा को फाँसने वाली बात सरला मालिनी को नहीं बताई है। चलो ठीक ही है। चाय के ख़ाली प्याले लेकर मालिनी जब वापस गयी किचन में, तो वो उसके पीछे ही किचन में जा पहुँचा। वह बोला: बेटी नूरी से कोई बात हुई क्या? 

मालिनी: हाँ जी बात हुई थी , वो आज पेशाब का टेस्ट कराएगी और उसका महीना चार दिन ऊपर हो गया है। अब मालिनी ने मस्ती करते हुए लूँगी के ऊपर से उसके लौड़े को दबाकर कहा: बहुत ही तगड़ा है ये , देखो ना एक और लड़की को माँ बना दिया। 

राजीव उसके गाल को चूमकर उसकी बुर को नायटी के ऊपर से दबोच कर बोला: बेटी, ये दे दो और देखो तुम भी माँ बन जाओगी। 

मालिनी उसके लौड़े को दबाकर बोली: पापा ,क्या सच में हमारी शादी को अब तो कई महीने हो गए और मैं अब तक माँ नहीं बनी। कहीं मुझमें कोई गड़बड़ तो नहीं? 

राजीव अब उसे अपने से चिपका लिया और उसकी गरदन और कंधे चूमकर बोला: अरे बेटी, कोई गड़बड़ नहीं होगी तुममें । वो क्या है ना शायद तुमको भी भगवान मेरे इस हथियार से ही माँ बनाना चाहते हैं। हा हा । 

मालिनी प्यार से उसकी छाती पर दो मुक्के मारी और बोली : उफफफफ पापा आप भी ना, मुझे शिवा के बेटे की माँ बनना है। आप तो उसके दादा होंगे। 

राजीव: अरे मैं दादा हूँ या बाप उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है, माँ तो तुम्हीं होगी ना। यह कहकर वो झुका और अपनी मस्त गदराई हुई जवान बहु के होंठ चूम लिया। 

अब मालिनी की बुर गरम होने लगी थी सो वो बोली: पापा अब मुझे शिवा को चाय देना है और उसे उठाना भी है। छोड़िए मुझे। 

राजीव पीछे हटा और बोला: बेटी एक चुम्बन तो बनता है। 

मालिनी अपने गाल आगे करके बोली: ले लो। 

वह उसे चूमा और बोला: बेटी गाल के साथ बुर को भी चूमना है। वो ये कहकर नीचे घुटनो के बल बैठ गया। मालिनी नीचे देखी और बोली: पापा जो करना है जल्दी से करो। 

राजीव मज़े से मुस्कुराया और बोला: बेटी, तुम अपनी नायटी उठाओ ना । मैं उठाऊँगा तो वो मज़ा नहीं आएगा जो कि तुम ख़ुद उठाओगी तो आएगा। 

मालिनी मुस्कुराती हुई बोली: ओह पापा आप बहुत नॉटी हो। ठीक है लो उठायी पर जल्दी से करो। ये कहकर वो अपनी नायटी कमर से ऊपर तक उठा दी और अपनी बुर का पूरा दर्शन उसको करा दी। राजीव थोड़ी देर मंत्रमुग्ध सा उसकी बुर की ख़ूबसूरती को देखता रहा फिर उस पर हाथ फिराया और उसके गीलेपन और चिकनेपन का अहसास किया और फिर धीरे से उसकी जाँघ को चूमता हुआ उसकी बुर को चूमने लगा। फिर जीभ से चाटकर मस्ती से भर उठा। 

मालिनी: आऽऽऽऽह पापा अब छोड़ो। बस करो। शिवा के जाने के बाद कर लेना। 

राजीव ने उसको घुमाया और उसकी कमर को साइड से चूमते हुए अब उसके बड़े चूतरों को सहलाया और फिर वहाँ भी चुंबनों की झड़ी लगा दी। फिर उसने उसके चूतरों को फैलाया और उसकी गाँड़ केछेद में अँगूठा फिराया और वहाँ भी चूम लिया। अब मालिनी हाऽऽऽऽऽऽय्य करके पीछे हटी और बोली: उफफफफ पापा मार ही डालोगे क्या? पूरी गीली हो गयी हूँ मैं। वह नायटी से अपने बुर को पोंछते हुए बोली। 

राजीव हँसकर खड़ा हुआ और उसका अकड़ा हुआ लौड़ा भी लूँगी से साफ़ उठा हुआ दिख रहा था। वह बोला: अरे एक बार उसे दे दो मस्त कर दूँगा जान। वह उसकी बुर की ओर इशारा किया। 

मालिनी अब चाय बनाती हुई बोली: अब आप जाओ मुझे काम करने दो। शिवा के लिए चाय लेकर जा रही हूँ। 

वह अपने कमरे में पहुँची तो शिवा एक चादर ओढ़े सो रहा था। उसका लौड़ा खड़ा था जो कि चादर को उस जगह से उठा रखा था। वो उसकी हालत देखकर मुस्करायी और अपनी बुर खुजायी। फिर उसने चादर उतार दी और नीचे शिवा पूरा नंगा अपने मोर्निंग इरेक्शन के साथ सोया हुआ था। वो अब अपनी नायटी एक झटके में उतारी और अब वो सिर्फ़ ब्रा में थी। उसकी बुर में जैसे आग लगी थी। वो उसके लौड़े को सहलाई और फिर उसे चूसने लगी ताकि ख़ूब सा थूक लग जाए। अब शिवा उठ गया और हैरानी से मालिनी को देखने लगा। इसके पहले कि वो कुछ बोल पाता मालिनी उसके ऊपर आकर बैठी और उसके लौड़े को अपनी मूठ्ठी में लेकर अपनी बुर पर लगाई और नीचे होकर उसे अंदर डालने लगी। 

जब तक शिवा की पूरी नींद खुली तब तक उसका लौड़ा उसकी बुर में पूरा समा गया था। शिवा: आऽऽऽऽह क्या हो गया जान। आज सुबह सुबह। आऽऽऽहहह । 

मालिनी: आऽऽऽऽह चुप रहो और काम करो। ये कहकर उसने अपनी ब्रा का हुक खोला और अपने मस्त चूचियों को नंगा की और उसके दोनों हाथ पकड़कर अपनी छातियों पर रख दी और उसे दबाने का इशारा की। अब तक शिवा भी चुदाई के लय में आ चुका था। उसने उसकी चूचियाँ दबाते हुए नीचे से अपनी कमर उछालना शुरू किया। अब मालिनी की मस्ती भरी सिसकारियाँ निकलने लगी। वो भी ऊपर नीचे हो कर मज़े से चुदवा रही थी। जल्दी ही चुदाई पूरे शबाब पर आ गई और पलंग बुरी तरह से हिलने लगा। मालिनी: उइइइइइइइ मॉआऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽऽ मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है मेरेएएएएएए राऽऽऽऽऽऽऽऽजा । और जोओओओओओओओर से चोओओओओओओओओदो। 

शिवा भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर मालिनी के साथ ही झड़ गया क़रीब १५ मिनट की चुदाई के बाद। 

मालिनी उठी और अपनी ब्रा और नायटी लेकर बाथरूम में जाकर फ़्रेश होकर वापस आयी। शिवा वैसे ही अलसाया हुआ लेता था और उसका सोया हुआ लौड़ा उसकी जाँघ पर सांप के जैसे पड़ा हुआ था। वह बोला: क्या हुआ जान आज इतनी गरम कैसे हो गयी सुबह सुबह? 

मालिनी हँसकर: आपने रात को एक बार ही किया था ना इसलिए सुबह सुबह ही गरम हो गयी। चलो उठो चाय फिर से गरम कर लाती हूँ। वह सोची कि आपको क्या बताऊँ कि आपके पापा ने ही मुझे इतना गरम कर दिया था कि आपसे चुदवाना ही पड़ा। अब वो शांत थी और एक गाना गुनगुना रही थी। तभी राजीव आकर बोला: क्या बात है बहुत ख़ुश हो? कुछ ख़ास बात है क्या? 

मालिनी शरारत से बोली: गेस करिए क्या बात हो सकती है? 

राजीव: ह्म्म्म्म्म नहीं मैं हार गया । बताओ ना क्या हुआ? 

मालिनी शरारत से बोली: आपने इतना गरम कर दिया था कि अभी जाकर आपके बेटे का रेप करके आ रही हूँ। और वो खिलखिला कर हँसने लगी। 

राजीव हतप्रभ होकर बोला: वाह बेटी तुमने तो कमाल कर दिया। शिवा पूछा नहीं कि इतनी गरम क्यों हो गयी? 

मालिनी: पूछने पर मैंने कहा कि आप कल रात को एक ही राउंड किए थे तो मैंने दूसरा अभी कर लिया। अब उनको ये तो नहीं बोल सकती थी कि तुम्हारे पापा ने मेरी आग सुबह सुबह भड़का दी है। हा हा । 

राजीव उसको बाँहों में भरकर चूमा और बोला: शाबाश बेटी , बिलकुल मुझ पर जा रही हो। 

मालिनी अपने आप को छुड़ाते हुए बोली: पापा वो उठ गए हैं और कभी भी बाहर आ सकते हैं। 

राजीव ने उसको छोड़ दिया और हँसते हुए अपने कमरे में चला गया।

जब वो शिवा के जाने के बाद अपने कमरे में बैठा दुकान का हिसाब चेक कर रहा था। तभी सरला का फ़ोन आया: हेलो। 

राजीव: हेलो कैसी हो मेरी जान। 

सरला: बहुत बुरी हालत में हूँ । रात भर सो नहीं पाई हूँ। 

राजीव: लगता है श्याम रात भर चुदाई किया है , है ना? 

सरला: मज़ाक़ मत करिए श्याम के कारण नहीं, आपके कारण नींद उड़ी हुई है। 

राजीव: अरे तो मैं सपने में आकर चोद गया था क्या? 

सरला रुआंसी होकर : बस करिए ना मज़ाक़। आप बतायिए शादी का इरादा छोड़ दिया है ना? या अभी भी पागलपन सवार है आप पर। 

राजीव: अरे अभी पंडित का फ़ोन आया था कि लड़की वाले जल्दी मचा रहे हैं शादी की। उनको पैसे जो मिलने वाले हैं बहुत सारे। 

सरला: प्लीज़ ऐसा मत करिए । सबकी ज़िंदगी ख़राब हो जाएगी। 

राजीव : देखो सरला, अब सब तुम्हारे हाथ में है? अगर तुम चाहो तो सब कुछ ठीक हो सकता है। बस शिवा को पटा लो। 

सरला: आप समझते क्यों नहीं है वो मेरे बेटे जैसा है। अच्छा एक बात बताओ आप क्यों नहीं किसी लड़की को पैसा देकर शिवा को फाँस लो ना। मुझे क्यों इसमें घसीट रहे हो? 

राजीव: अरे जब वो किसी भी लड़की के साथ चुदाई करेगा तो मालिनी को वो भावना नहीं आएगी जो उसे तुम्हारे साथ देखकर आएगी। तुम भी शिवा की रिश्तेदार हो और अगर उससे चुदवाती हो तो वो भी अपने एक रिश्तेदार याने ससुर से चुदवाने में कोई संकोच नहीं करेगी। ठीक कहा ना? 

सरला: आप मेरे माध्यम से, ना सिर्फ़ मुझे अपने दामाद से ग़लत काम करने को कह रहे हैं ,बल्कि अपनी बहु से भी ग़लत काम करने जा रहे हैं। उफफफ मैं क्या करूँ? वो रोने लगी। 

राजीव: देखो सरला रोने से कोई हल नहीं निकलेगा। तुमको शिवा को अपने जाल में फँसाना ही होगा। वरना मेरा शादी का फ़ैसला नहीं बदलेगा। 

सरला ने रोते हुए फ़ोन काट दिया। 

राजीव अब सोचने लगा कि पता नहीं सरला मानेगी या नहीं? 

उसी दिन शाम को फिर से सरला का फ़ोन आया। वो बोली: मैंने बहुत सोचा है और मैं समझ गयीं हूँ कि मेरे पास सिवाय आपकी बात मानने के अलावा कोई और चारा नहीं है। 

राजीव ख़ुश होकर: वाह सरला वाह आज तुमने दिल ख़ुश कर दिया। बस अब लग जाओ काम में। शिवा को अपने क़ाबू में कर लो। 

सरला: पर मैं हूँ यहाँ और शिवा है वहाँ आपके शहर में। ये सब कैसे होगा? 

राजीव: अरे फ़ोन किस लिए बनाया गया है। उसी से शुरू करो। फिर आगे का रास्ता अपने आप खुलता जाएगा तुम्हारा शहर कौन सा बहुत दूर है सिर्फ़ २ घंटे का तो सफ़र है ।प्यार में लोग समुन्दर पार कर लेते हैं, तुमको और शिवा को तो बस दो घंटे का सफ़र तय करना है। 

सरला: ठीक है कोशिश करती हूँ। पर एक बार फिर से आपको बोलती हूँ कि ये सब बहुत ग़लत है। एक बात और सोच लीजिए। 

राजीव: सोच लिया है जान । बस अब काम में लग जाओ।

सरला अब सोच में पड़ गयी कि ये काम कैसे शुरू करे। उसने अपना फ़ोन चार्जिंग में लगाया और जब श्याम उसके पास किसी काम से आया तो वो बोली: कई दिन हो गए , मालिनी और शिवा से बात ही नहीं हुई। मेरा फ़ोन चार्जिंग में है आप लगाओ ना शिवा को । उसका हाल पूछते हैं।

श्याम फ़ोन लगाया और बोला: बेटा क्या हाल है? 

शिवा: ताऊ जी सब बढ़िया । आप लोग सब ठीक हैं ना?

श्याम: लो अपनी मम्मी से बात करो। 

सरला: हेलो बेटा कैसे हो? कई दिन से कोई ख़बर नहीं मिली। 

शिवा: मम्मी जी सब ठीक है। बस ऐसे ही दुकान में कुछ काम ज़्यादा था। आप तो कई दिनों से यहाँ आयीं ही नहीं? प्रोग्राम बनाइए ना। 

सरला: वाह बेटा, मैं तो कई बार आयी हूँ पर तुम लोग तो कभी प्रोग्राम ही नहीं बनाते। इस इतवार को क्या कर रहे हो? आओ ना आप सब । 

शिवा: जी मम्मी जी मैं मालिनी से बात करके प्रोग्राम बनाता हूँ। 
सरला: चलो फिर रखती हूँ। बाई। 

अब सरला मालिनी को फ़ोन की : कैसी है मेरी बेटी? 

मालिनी: ठीक हूँ आज अपनी बेटी की कैसे याद आइ मम्मी जी? 

सरला: बेटी हम सब तो तुमको बहुत याद करते हैं। अभी श्याम जी और मैंने दामाद से बात की और बोला है कि तुम सब इतवार को यहाँ आने का प्रोग्राम बनाओ। 

मालिनी: ओह ठीक है मम्मी जी बनाते हैं। फिर आपको बताएँगे। फिर कुछ देर इधर उधर की बातें की और फ़ोन रख दिया ।

खाना खाते हुए मालिनी राजीव से बोली: मम्मी का फ़ोन आया था । वो हम सबको इतवार को आने को बोल रही थी। 

राजीव: ओह तो जा रहे हो तुम लोग? 

मालिनी: आप नहीं जाएँगे? 

राजीव : अरे तुम लोग हो आओ। मैं चला गया तो श्याम के साथ मिलकर तुम्हारी माँ की चुदाई में लग जाऊँगा। तुम लोग उस बेचारी से मिल भी नहीं पाओगे। हा हा ।

मालिनी: छि आप तो बस हर समय चुदाई की ही बात करते रहते हैं। अच्छा आप मत जायिएगा। 

राजीव: अरे बेटी, ग़ुस्सा क्यों करती हो। मैं तो मज़ाक़ कर रहा था। वैसे भी इतवार को मेरे दोस्तों ने एक पार्टी रखी है। मैं वहाँ जाऊँगा। 

राजीव का बस चलता तो वो मालिनी को भी ना जाने देता ताकि सरला आपका काम आराम से कर ले पर वो शायद सम्भव नहीं था ।

उस दिन शिवा रात को मालिनी को बोला: मम्मी का फ़ोन आया था । इतवार को बुलाई हैं। चलें क्या? 

मालिनी: हाँ चलते हैं । बहुत दिन हो गए मैं भी वहाँ नहीं गयी हूँ। 
इस तरह इतवार को जाने का प्रोग्राम तय हुआ। अगले दिन शिवा ने सरला को फ़ोन किया: मम्मी जी हम परसों यानी इतवार को आ रहे हैं। 

सरला: बेटा ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है। आपके पापा भी आएँगे? 

शिवा: नहीं वो नहीं आ पाएँगे। 

सरला ने चैन की साँस ली और बोली: ठीक है बेटा क्या बनाऊँ तुम्हारे लिए स्पेशल? 

शिया : अरे मम्मी आपको जो पसंद हो बना लेना। वैसे आपको कौन सी सब्ज़ी पसंद है। 

सरला बेटा, मुझे तो कच्चे केले और बैगन पसंद हैं। कहो तो इनकी सब्ज़ी बना दूँ ? 
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06-10-2017, 09:17 AM,
#80
RE: बहू नगीना और ससुर कमीना
शिवा थोड़ा चौंका । उसे याद आया कि एक ब्लू फ़िल्म में भाभी बोलती है कि उसे बैगन और केला अच्छा लगता है और उसका देवर बोलता है कि उसको भी संतरें और फूली हुई कचौरी पसंद है उफफफ वो क्या क्या सोच गया। उसे अपने आप पर शर्म आयी। वो बोला: ठीक है मम्मी आप वही बना लो। 

सरला:अरे तुम भी बोलो ना तुमको क्या पसंद हैं? 

शिवा: जी मैं तो सब खा लेता हूँ। 

सरला:: अरे शिवा बेटा श्याम को तो आम और फूली हुई कचौरी पसंद है। तुमको भी पसंद है ना ? 

शिवा अब सन्न रह गया । हे भगवान ये क्या बोल रही है मम्मी? क्या वो उसे कुछ इशारा कर रही है या यह एक महज़ इत्तिफ़ाक़ है कि जो उसने ब्लू फ़िल्म में देखा था वही मम्मी भी बोल रही है। बस संतरे की जगह आम बोली है। 

शिवा: जी मम्मी मुझे भी पसंद है, पर आप तो सब्ज़ियों की बात करते करते फल और नाश्ते पर आ गयीं। 

सरला: बेटा, सिर्फ़ सब्ज़ी ही खाओगे और नाश्ता और फल नहीं खाओगे?

शिवा हँसकर: जी सब खाऊँगा । 

सरला: बेटा तुम्हारी दुकान में मेरी कुछ सहेलियाँ आना चाहती हैं , कपड़े ख़रीदने के लिए। वो पूछ रहीं थीं कि तुम क्या क्या रखते हो। मुझे जो याद था मैंने बता दिया। कल मेरी एक सहेली आएगी तो उसे बता देना कि क्या क्या रखते हो , ठीक है? 

शिवा: ठीक है मम्मी जी। 

सरला: चलो बाई। 

शिवा: बाई। 

शिवा फिर से सोचने लगा कि मम्मी ने बैगन केला आम और कचौरी की बात क्यों की? क्या वो उसे कुछ इशारा कर रही थी? छी ये क्या सोच रहा है वो? ऐसा भी हो सकता है कि ये एक संयोग ही हो। फिर वो सोचा कि क्या इतना बड़ा संयोग भी सम्भव है? पता नहीं क्या सच है क्या ग़लत? उसने अपना सिर झटका और अपने काम में लग गया। 

अगले दिन सरला का फ़ोन शिवा को ११ बजे के क़रीब आया। 

शिवा: नमस्ते मम्मी जी। 

सरला: नमस्ते बेटा। ये मेरी सहेली अंजु है वो तुमसे दुकान के कपड़े के बारे में पूछेगी और फिर वो सब आएँगी तुम्हारे यहाँ सामान ख़रीदने के लिए। 

शिवा: जी मम्मी जी बात करवाइए। 

अंजु: हेलो बेटा, मेरी बेटी की शादी है अगले महीने । मैं चाहती हूँ कि उसके लिए कपड़े आपकी दुकान से ही लूँ। आप डिस्काउंट दोगे ना? 

शिवा: हाँ हाँ क्यों नहीं देंगे। हमारे यहाँ सब तरह के कपड़े मिलते हैं। 

अंजु: ज़रा बताओ ना क्या क्या मिलता है? 

शिवा: आंटी, सब मिलता है जैसे साड़ी, सलवार मैक्सी वग़ैरह। 

अंजु: और स्कर्ट, नायटी और गाउन वग़ैरह ? देखो हम कुछ अपने लिए भी लेंगे ना? 

शिवा : हाँ जी वो भी। जींस भी। टॉप और टी शर्ट भी। 

अंजु: और वो वो अंडर्गार्मेंट्स? 

शिवा: जी हाँ बिलकुल। सब हैं हमारे यहाँ। 

अंजु: वो बेटा, कुछ ख़ास क़िस्म के भी होंगे ना? मेरा मतलब समझ रहे हो ना। 

शिवा: जी आंटी सब तरह की ब्रा और पैंटी मिल जाएँगी। आप शायद नॉटी तरह की ब्रा और पैंटी की बात कर रही हैं तो वो भी मिल जाएँगी। फ़्रिल या नेट वाली भी। वो हँसते हुए बोला।

अंजु: लिंगरी वगिरह? 

शिवा हँसकर: आंटी जी आप आइए तो सही एक से एक सेक्सी लिंगरी और नाइट गाउन मिलेंगे। और बढ़िया से बढ़िया सेक्सी ब्रा और पैंटी भी मिलेगी। सच कहता हूँ। 

रंजू: ठीक है बेटा, हम कल आएँगे। लो अपनी मम्मी से बात करो। 

सरला: ठीक है बेटा मेरी सहेलियाँ आएँगी तेरी दुकान में। उनको डिस्काउंट दे देना। 

शिवा: मम्मी आप भी आ जाओ ना इनके साथ। 

अंजु की आवाज़ आइ: हाँ चल ना यार । तू भी चल । 

सरला: ठीक है मैं भी आती हूँ इनके साथ। 

शिवा: बढ़िया मम्मी आप भी आ जाओ। फिर सरला ने अगले दिन आने का कहकर फ़ोन रख दिया। अब शिवा सोचने लगा कि कैसी सहेली है मम्मी की जो कैसे अजीब अजीब कपड़ों की बातें कर रही थीं। वो भी इस उम्र में। वो सोचने लगा कि क्या हो रहा है ये सब ? पहले बैगन केला और अब सेक्सी पैंटी ब्रा और लिंगरी। क्या सब ठीक है ना? 

उधर सरला और रंजू बातें कर रही थीं। 
रंजू बोली: मैं कल कार लाती हूँ फिर हम दोनों चलेंगे और देख लेंगे कि कैसा कलेक्शन है उसके पास। कुछ सामान अपने लिए ले लेंगे और बेटी को अगली बार लेज़ाकर और कपड़े ले आएँगे। और सहेलियाँ फिर किसी दिन आ जाएँगी।

सरला: हाँ घर की बात है। चलो कल १० बजे निकल जाएँगे। 

रात को शिवा मालिनी को बताया कि उसकी मम्मी और उसकी सहेली कल आएगी । मालिनी बोली: अच्छा मुझे तो मम्मी ने बताया नहीं।चलो ठीक है। हमारे घर भी आएँगी क्या? वो सोचने लगी कि यहाँ आएँगी तो पापा उनके पीछे पड़ें बिना रहेंगे नहीं। 

शिवा: अभी कुछ पक्का नहीं है। तुम दुकान आकर उनसे मिल लेना। 

मालिनी: हाँ ये ज़्यादा अच्छा रहेगा । वो सोची कि इस तरह वो पापा से दूर रहेंगी।

शिवा के जाने के बाद राजीव मालिनी के पास आया और बोला: बेटी, बाज़ार जा रहा हूँ, कुछ चाहिए क्या? 

मालिनी: नहीं पापा कुछ नहीं चाहिए। आप कब तक वापस आओगे? 

राजीव : क्यों हमारे बिना दिल नहीं लगता क्या? वह उसको बाहों में लेकर उसको चूमते हुए बोला। 

मालिनी हँसकर: पापा इतने बड़े घर में आप भी ना हो तो मैं तो बिलकुल अकेली हो जाऊँगी। और मुझे अकेले में डर लगता है। बस यही बात है। 

राजीव उसकी साड़ी के पल्लू को गिराकर उसकी नंगी चूचियों को चूमकर बोला: उफफफ क्या माल हो तुम ! अब बाज़ार जाने का मूड नहीं हो रहा ।वह ब्लाउस के ऊपर से उसकी मस्त चूचियों को दबाया। फिर वह उसकी नंगी कमर को सहला कर मस्त हो गया। दिर उसके हाथ उसके पेट पर घूमने लगे और नाभि में ऊँगली डालने लगा। वह उसके चूतरों को दबाकर उसके बदन को अपने बदन से चिपका लिया। वह उसकी गरदन और नंगे कंधे को भी चूमा। मालिनी भी अब गरम हो गयी थी। उसका हाथ अब राजीव की छाती पर घूमने लगा। दूसरा हाथ वो नीचे लाकर उसकी लूँगी के अंदर डाल दी। अब उसके मूठ्ठी में उसके ससुर का लौड़ा आ गया। वह उसके लौड़े को मूठियाने लगी। राजीव भी मस्ती से भर गया और उसकी चूचि को ब्लाउस के ऊपर से सहलाने लगा। 

अचानक मालिनी नीचे ज़मीन में बैठी और उसकी लूँगी खींच कर उतार दी। अब उसके सामने ससुर का लौड़ा तना हुआ था। वो जीभ निकाली और उसके पूरे लौड़े और बॉल्ज़ को चाटी और फिर वो पूरे जोश से उसका लौड़ा चूसने लगी। राजीव भी अपनी कमर हिलाकर उसके मुँह को चोदने लगा। जल्द ही वह झड़ने लगा और मालिनी ने उसका पूरा वीर्य पी लिया। वह लस्त होकर सोफ़े पर बैठा और गहरी साँस लेते हुए बोला: बेटी अब तो तुम अपनी मम्मी से भी ज़्यादा बढ़िया चूसती हो उफफफफ क्या मज़ा देती हो। 

मालिनी मुस्कुराती हुई वाश बेसिन में जाकर क़ुल्ला करी और मुँह धो कर वापस आयी और सोफ़े पर बैठकर बोली: पापा आपने ही सिखाया है सब ।अब आप बाज़ार जाओ। और हाँ आज मम्मी अपनी सहेली के साथ शिवा की दुकान में आ रही हैं, कुछ कपड़े लेने है उनकी सहेली को। 

राजीव: ओह तो क्या यहाँ नहीं आएगी? 

मालिनी: पता नहीं पापा। अभी कुछ तय नहीं है। 

राजीव: अरे बेटी, मेरी प्यास तो बुझा दी और तुम्हारी प्यास का क्या? 

मालिनी: पापा मेरा पिरीयड चल रहा है। आज ही शुरू हुआ है। 

राजीव: ओह ठीक है बेटी, अब आराम करो। पिरीयड्ज़ में कोई तकलीफ़ तो नहीं होती ?

मालिनी: पापा मुझे दूसरे दिन ज़्यादा तकलीफ़ होती है 

राजीव: ठीक है बेटी, अभी आता हूँ वापस। वह उसे चूमकर बाहर चला गया। 

उधर रंजू अपनी कार लेकर सरला को उसके घर से लेकर चल पड़ी।
रंजू कार चला रही थी और सरला उसके साथ बैठी थी। रंजू क़रीब ४६/४७ साल की गोरी चिट्टि स्वस्थ बदन की मालकिन थी। वो अपने स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखती थी। रईस घर की महिला थी और उसकी लड़की की शादी तय हुई थी। 
रंजू: यार तेरे दामाद की दुकान पहुँचते हुए १२ बज जाएँगे। 

सरला: जितना तेज़ तुम चला रही हो मुझे लगता है कि उसके पहले ही पहुँच जाएँगे। 

रंजू: अच्छा तेरा दामाद दिखने में कैसा है? 

सरला: अच्छा है सुंदर तगड़ा। मालिनी को बहुत ख़ुश रखता है। पर उसका बाप थोड़ा ठरकी है। 

रंजू: सच, मुझे मिलवा ना उससे । मुझे ठरकी मर्द बहुत पसंद है। 

सरला: अच्छा इधर उधर मुँह मारती है क्या? 

रंजू अपनी सलवार के ऊपर से बुर खुजाकर बोली: अरे सती सावित्री तो हूँ नहीं। जब ये खुजाती है तो इलाज तो ढूँढना पड़ता है ना। अरे मेरे पति महोदय तो ज़्यादा टूर पर ही रहते हैं। और टूर में वो क्या क्या मज़े करते हैं इसका भी मुझे अंदाज़ा है। तो मैं यहाँ क्यों मन मार कर बैठी रहूँ। 

सरला: ओह ये बात है। चलो आज तो हम दुकान जाएँगे। मैं कोशिश करूँगी कि मालिनी भी वहीं आ जाए। वरना जब उसके घर जाएँगे तो उसके ठरकी ससुर को मिल लेना। देखते हैं क्या प्रोग्राम बनता है। 

रंजू: चलो ठीक है। अच्छा ये बता कि श्याम जी तेरा ख़याल रखते हैं ना? कितनी बार चुदाई हो जाती है हफ़्ते में? 

सरला ने कभी भावना में भरककर रंजू को बता रखा था की वो श्याम से फँसी हुई है। वो बोली: हफ़्ते में २/३ बार ही हो पाती है। 

रंजू: बस २/३ बार हफ़्ते में। मुझे तो एक बार रोज़ ही चुदाई चाहिए। इससे कम में मेरा गुज़ारा नहीं होता। 

सरला: ओह बड़ी चुदासि औरत है तू? कौन चोदता है तेरे को रोज़ ? 

रंजू: अरे मैंने घर के पीछे एक छोटा सा मकान है वहाँ मैंने एक कॉलेज का लौंडा रखा है २० साल का साँड़ है। जब मर्ज़ी होती है उसे बुला लेती हूँ और वो ३ घंटे में पूरा निचोड़ देता है मुझे निम्बू की तरह। सच बहुत मस्ती से चोदता है। और एक बात है कि वो मुझे चोदते समय मम्मी मम्मी बोलता है। और मुझे भी बेटा बोलने को कहता है। 

सरला: ओह इसका मतलब है कि वो शायद अपनी मम्मी को बुरी नज़र से देखता है। तभी तो तुमको मम्मी कहकर चोदता है। 

रंजू: हाँ यही बात है। उसने मुझे बताया भी है कि वो अपनी मम्मी को चोदना चाहता है पर हिम्मत नहीं कर पता। इसीलिए मुझमें अपनी मम्मी खोजता है। 

सरला: रिश्तों में सेक्स पर तेरा क्या विचार है? 

रंजू: मैं तो इसे बुरा नहीं मानती। 

सरला: कल को तेरा दामाद तुझे चोदना चाहेगा तो मान जाएगी? 

रंजू: सच बताऊँ? वो मुझे बहुत हॉट लगता है। अगर वो मुझसे फ़्लर्ट करेगा तो मैं तो ख़ुश होकर उसकी बाहों में चली जाऊँगी।पर पहल मैं नहीं करूँगी। यह कहते हुए वो अपनी बुर खुजा दी। 

सरला को अपनी बात का जवाब मिल गया। वो सोची कि मैं तो शिवा को शायद दबाव में आकर फँसाने जा रही हूँ पर ये तो मज़े के लिए अपने दामाद से मज़े के लिए तय्यार है। उसे याद आया था कि क़रीब पाँच साल पहले उसकी घर की एक विधवा नौकरानी रोते हुए आयी थी और बोली थी कि उसके दामाद ने रात को ज़बरदस्ती उसके साथ मुँह काला किया था। सरला ने उसे पुलिस के पास जाने को बोला था। पर वो नहीं गयी। एक महीने के बाद वो काफ़ी ख़ुश दिखने लगी थी।नए नए कपड़े और गहने भी पहनने लगी थी। सरला जब कई बार पूछी तो वो बताई कि अब उसके दामाद के साथ उसका समझौता हो गया है। वह दोपहर को रोज़ आकर उसको एक दो बार चोद जाता है। रात को वो उसकी बेटी की सेवा करता है। वो उसकी चुदाई से बहुत ख़ुश थी।उसने सरला से उसके बड़े और मोटे लौडे का भी ज़िक्र किया था। वो उसे नए कपड़े और ज़ेवर भी देता था। अब सरला उस औरत को याद की और अपनी बुर भी खुजा उठी। ये सब सोचकर वह गरम होने लगी थी। इधर रंजू की बातें भी उसे गरम कर गयी थी। 

सरला पूछ बैठी: उस छोकरे का हथियार कैसा है?

रंजू शरारत से उसकी जाँघ में चुटकी काटी और बोली: क्या हुआ चाहिए क्या? आजा मेरे घर। मस्त लम्बा और मोटा है। सात इंच से तो बड़ा ही होगा। बहुत मज़ा देता है। 

सरला: आह सच? नहीं यार मैं इतनी ख़ुश क़िस्मत कहाँ हूँ। मैं नहीं आ सकती । 

इसी तरह की बातें करते हुए दोनों शिवा की दुकान पहुँच ही गयी। दोनों रास्ते भर मज़े की बातें कर रहीं थीं, इसलिए वो दोनों काफ़ी गरम थीं। 

शिवा ने अपने काउंटर से देखा कि दो मस्त औरतें सलवार कुर्ते में अंदर दुकान में आ रही हैं। वो उनको देखता ही रह गया । क्या मस्त फ़िगर है दोनों के। तभी वो जब पास आयीं तो वो सरला को पहचाना और हड़बड़ा कर उठा और उनको मिलने के लिए पास आया और आकर सरला के पैर छूआ । सरला ने उसे आशीर्वाद दिया। फिर रंजू से परिचय कराया। वह उसके पैर छूने को झुका पर रंजू ने उसे बीच से ही उठा लिया और बोली: अरे बेटा पैर मत छुओ। गले लगो। ये कहकर उसने शिवा को गले लगा लिया। इसकी बड़ी बड़ी छातियाँ शिवा की मस्क्युलर सीने से चिपक गयी। शिवा के लौडे में हरकत होने लगी। रंजू उससे चिपके हुए सरला को आँख मारी। फिर वो अलग हुई और शिवा ने चैन की साँस ली क्योंकि उसका लौड़ा खड़े होने लगा था। 

अब वह उन दोनों को अपने कैबिन में लेकर गया। वहाँ वो सब बैठे और रंजू ने अपनी चुन्नी ठीक करने के बहाने अपनी एक चुचि खुली कर दी। सरला सब देख रही थी। वो सोचने लगी कि देखती हूँ कि शिवा कितना शरीफ़ है? 
उसने देखा कि शिवा की आँखें बार बार रंजू की चुचि पर जा रहा था। उसे राजीव की वो बात याद आइ कि उस दिन पार्टी में शिवा सरला की चूचियों को घूर रहा था। 

शिवा ने उनके लिए जूस मँगाया। सब पीने लगे। 

रंजू: बेटा हम आज काफ़ी तंग करेंगे तुझे ? वैसे दुकान अच्छी है। मैंने काफ़ी कुछ ख़रीदना है आज ,और मैं काफ़ी देर लगाती हूँ फ़ाइनल करने में। 

शिवा: कोई बात नहीं आंटी जी, आप अपना टाइम लीजिए। 

सरला: अरे चल ना कपड़े देखते हैं। फिर वह उठकर बाहर आयी, रंजू भी उसके पीछे पीछे आयी। शिवा उनके पीछे आया और उसकी निगाहें दोनों की हिलती हुई मस्त गोल गोल मटकती हुई गाँड़ पर थीं। शिवा अपने लौंडे को पैंट में ऐडजस्ट किया। वह सोचा कि मैं आज इतना उत्तेजित क्यों हो रहा हूँ? वो सोचने लगा कि एक के बाद एक ऐसे बातें हो रही हैं जो उसे अजीब लग रही है और उसे उत्तेजित भी कर रही हैं। पता नहीं क्या होने वाला है।
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