बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
07-01-2017, 11:27 AM,
#1
बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई-- 1

रवि की शादी हुए 2 साल हो चुके थे. रीमा नाम है उसकी बीबी का. रवि का गारमेंट बनाने की फॅक्टरी है. उसके कारखाने मे बनाए हुए लॅडीस नाइटी बहुत पॉपुलर है. काफ़ी सेक्सी नाइटी बनता है. कभी कभी अपनी फॅक्टरी की बनी हुई नाइटी को और कांट छ्चांट कर अपनी बीबी रीमा के लिए घर ले कर आ जाता था. रीमा के गौरे और सुंदर बदन पर यह नाइटी काफ़ी सेक्सी लगती थी. उसके बदन पर नाइटी से ज़्यादा उसका बदन झलकता था. रवि भी चाहता था की रीमा जब रात को रूम मे आए तो उसके मखमली बदन को देखनाए के लिए ज़्यादा तदफ़ना ना पड़े. उसकी गौरी चीटी चुचिया उसकी नाइटी से झलक पड़ती थी. उसे देखकर रवि का लंड हमेशा फड़फदता रहता था.

रीमा प्रेग्नेंट है और उसकी डेलिवरी का टाइम आ चुका था. रीमा ने अपने पिहर फोन करके अपनी चचेरी बहन रोमा को बुलवाया था. रोमा अपनी एक और बहन लीना के साथ अपने जीजी के घर पर आती है. लीना को पैंटिंग करना पसंद था. वो अपनी पैंटिंग की प्रदर्शिनी लगवाना चाहती थी इसीलिए रोमा के साथ चली आई. लीना एक कुशल डॅन्सर भी थी. कॉलेज के फंक्षन मे जब वो डॅन्स करती थी तो काई मनचलो की दिल की धड़कन बढ़ जया करती थी. रोमा जब पिच्छली बार एक साल पहले जब अपने जीजी के घर आई थी तब रीमा, रवि और रोमा काफ़ी हँसी मज़ाक कर के अपना टाइम पास कर लिया करते थे. रोमा अपने जीजू के काफ़ी करीब हो गयी थी. हालाँकि उनके सरिरिक संबंध नहीं बने थे लेकिन अपनी जीजी के सामने रवि से काफ़ी लिपट छिपात कर रहती थी. आलिंगन और चुंबन तक ही संबंध कायम हो पाए थे. और रीमा भी उसे बुरा नही मनती थी. कहती थी की जीजा और साली के बीच मे यह सब चलता है. रीमा, रोमा और लीना आपस मे चचेरी बहाने थी. उनकी उमरा मे ज़्यादा फराक नही था. तीनो काफ़ी गौरी और सेक्सी बदन की मलिक थी. तीनो

मे कौन ज़्यादा खूबसूरत है यह कहना काफ़ी मुश्किल था. जब शाम को रवि घर आया तो उसने बेडरूम से काफ़ी आवाज़े और हँसने की आवाज़े सुनाई दी. वो समझ गया की रोमा आ गयी है. उसका मून हिचकोले खाने लगा. क्यों नही आख़िर उसकी सबसे सेक्सी साली जोत ही. वो जैसे ही रूम मे घुसा तो देखता है की उसकी साली एक नही दो-दो सालिया रीमा के साथ बेड पर बैठ कर उसके द्वारा लाई गयी नाइटी को देख रही है. रवि सीधा रोमा के पीच्चे जाकर उसकी आँखों को अपने हाथों से बूँद कर अपने से चिपका लिया. रोमा कहने लगी, "आरे क्या जीजू, बड़ी देर करदी घर आने मे. हम लोग तो आज ही आने वेल थे फिर भी देर से आए हो." रवि ने पलट-ते हुए जबाब दिया, "सॉरी मी डार्लिंग. तोड़ा ऑफीस मे काम आगेया था इसलिए लाते हो गयी. चलो अब माफ़ कर दो." रोमा ने रवि के हाथों को अपने हाथों मे लेते हुए कहा, "चलो माफ़ किया. लेकिन आपको भी हमारी जीजी का ध्यान रखना चाहिए. इस हाल मे ज़्यादा अकेले नही छ्चोड़ना चाईए." तभी लीना बोल पड़ी, "हम भी है इस महफ़िल मे." रवि लीना की तरफ आँख मरते हुए बोला, "अब तुम्हारी जीजी को तो क्या, तुम दोनो को भी अकेले नही छ्चोड़ूँगा." फिर रवि लीना को तोड़ा खिसका कर वहीं बेड पर ही अपने लिए जगह बना कर बोला, "क्या बात है. नाइटी की प्रदर्शिनी लगा रखी है." रोमा ने एक नाइटी को उठाकर उसके बीच मे से झनखटे हुए बोली," नही जीजू. हम सब तो यह देख रहे थे की इन नाइटी को पहने के बाद बदन पर नाइटी दीखती है या हमारा बदन."लीना आँख मरते हुए बोली, "जीजू बड़ी सेक्सी नाइटी डिज़ाइन करते हो. पूरा बदन उघड़ कर रख देती है." रवि भी हाज़िर-जवाब था. तुरंत बोल पड़ा, "जाओ इने पहनकर आओ. हम भी देखें की हमारी नाइटी ज़्यादा सेक्सी है या तुम्हारा बदन." इसी तरह उनके बीच हँसी मज़ाक चल रहा था. तभी एक जोक्स के बीच रीमा को ज़्यादा ही हँसी च्छुत गयी. ज़्यादा हँसने से उसके दारद उठाने लगा. सो फॉरून रीमा को ले कर वो तीनो हॉस्पिटल रवाना हो

गये. और आधे घंटे के बाद नर्स ने एक लड़के के जानम लेने की बधाई उनको दी. रवि, रोमा और लीना तीनो ही लड़के के जानम पर काफ़ी खुस हुए. और एक दूसरे को बधाइयाँ दी. फिर डॉक्टर. की इज़ाज़त ले कर अंदर जा कर रीमा को भी बधाई दी. रात को रुकने के नाम पर पहले तो डॉक्टर. ने सॉफ माना कर दिया पर ज़्यादा ज़ोर देने पर डॉक्टर. ने कहा, "चलो आज रात तो एक जान रुक सकता है लेकिन कल किसी को रुकने की इज़ाज़त नही दूँगी. आख़िर हमारी नर्से है जच्चा और बच्चा की देखभाल के लिए." एक रात के लिए हन भरने पर रोमा ने वहीं रुकने का फ़ैसला लिया. रवि रोमा को वहीं रुकते देख तोड़ा मायूष हुवा क्योंकि वो आज रात रोमा के साथ सेलेब्रेट करने का प्लान बना रहा था. लेकिन कुछ ना कहकर लीना को लेकर वापस घर की चल पड़ा. घर के नीचे लीना को छ्चोड़ उस-से कहा की मई आधे घंटे मे आता हूँ. रवि आधे घंटे बाद एक विस्की की बॉटल और एक शमपने की बॉटल

ले कर घर पर आ गया. ड्यूप्लिकेट चाबी से दरवाज़ा खोल लीना को आवाज़ दी. लीना उस समय बाथरूम मे थी. बाथरूम से वापस जवाब दिया, "जीजू बातरूम मे नहा रही हून. पंधराह बीस मिनिट मे आती हून." रवि लीना को बाथरूम मे देख हॉल मे विस्की की बॉटल, आइस और ग्लास लेकर सोफा पर ही पसार गया. साथ ही VCड प्लेयर चालू कर एरॉटिक डॅन्स की एक Cड चालू कर दी. Cड मे इंग्लीश धुन के साथ काई लड़किया आधी से ज़्यादा नंगी हो कर नाच रही थी. रवि भी इंग्लीश धुन के साथ बैठा बैठा झूम रहा था. उसकी भूखी आँखे उन गौरी लड़कियों के बदन पर जमी हुई थी. उसका भूखा लंड भी उनको नंगा देख बैचेनी से अंदर ही अंदर मचल रहा था. भूखा तो होना ही था कारण की डॉक्टर. ने रीमा के साथ सोने से पिछले एक महीने से ना कर रखा था जो. जब तक लीना बाथरूम से आई तब तक रवि दो पेग चढ़ा चक्का था. उसके आँखों मे विस्की का शरूर चढ़ने लग गया था. लीना ने अपनी जीजी रीमा की एक नाइटी निकल कर पहन ली. जब काँच से अपने बदन को देखा तो कुच्छ झेंप सी गयी. बदन पर नाइटी तो थी फिर भी पूरा बदन सॉफ दिखाई दे रहा था. काँच मे अपने बदन को गौर से देखने लगी. अपने दोनो हाथों से अपने निपल्स को दबाने लगी. रूम मे बैठकर चारो जब हँसी मज़ाक कर रहे थे तभी से ही उसकी चूत

मे खलबली मची हुई थी. नों-वेग. जोक्स से पूरे बदन मे स्त्री और पुरुष के संबंध की विवेचना चल रही थी. साथ मे जीजू का बारबार उसके गालों पर चुंबन उसको वासना की आग मे जला रहा था. मान ही मन जीजू के टेस्ट के दाद देने लगी. फिर भी उसने उसके उपर एक झीना गाउन और पहन लिया. हॉल मे पहुँची तो उसकी आग और बढ़ गयी. टV मे मादक धुन के साथ नाच रही इंग्लीश मेमो को अपने बदन पर से बचे कुचे कपड़े उतार कर फेंकते हुए देख उसके दिल की धड़कन और बढ़ गयी. खुद एक अच्च्ची डॅन्सर तो वो थी ही. पीछे से आकर अपना चेहरा जीजू के गाल से चिपका कर बोली, "बोलो क्या बोल रहे थे." रवि ने कहा कुच्छ नही. आओ बैठो. लीना वहीं खड़ी खड़ी बोली, "अकले ही पियोगे या हमे भी कुच्छ चखने दोगे."

रवि ने अपनी ग्लास को लीना के चेहरे के नज़दीक ला कर उसके मदमटे होठों से लगा दिया. लीना एक साँस मे ग्लास मे जितना था (आधे पेग

से भी ज़्यादा) गतक लिया और लगी खांसने. अपना मुह्न बिगाड़ते हुए

बोली, "अफ, कैसी कड़वी है यह सराब." रवि हुँसने लगा. फिर लीना को अपने करीब खींच कर उसके होठों पर पड़ी सराब की कुच्छ बूँदो को छत लिया और बोला, "हमे तो कड़वी नही लगती. लगता है पहली बार टेस्ट कर रही हो."

लीना की उखड़ी साँस थोड़ी शांत हुई तब बोली, "हा, फल्ली बार पी रही हूँ. इससे पहले एक दो बार बियर ज़रूर पी है." फिर टV पर डॅन्स देखने लगी. रवि निब भी लीना को अपने पास सोफा पर बैठाकर एक-दो घूँट और पीला दिया. नशा जब हल्का हल्का चढ़ने लगा तो लीना बोली, "क्या ऐसा डॅन्स देख रहे हो. इससे अच्छा तो मे नाच सकती हून." रवि ने पहले सोचा की सायद नशा होने की वजह से वो बोल रही होगी. लेकिन दूसरी बार कहने पर उसने टV बूँद कर दिया और बोला, "तो दिखाओ मेरी जान. हम भी देखें तुम कितना अच्च्छा नाच सकती हो." चेल्लेंज मान कर लीना ने एक ऑडियो Cड लगा कर

नाचना चालू कर दिया. ऑडियो Cड रीमिक्स सॉंग्स कीट ही. और पहला गाना ही "काँटा लगा" था. लीना काँटा लगा की धुन पर नाचने लगी. इसी बीच जो झीना गाउन पहने हुए थी उसे निकाल कर रवि की और उछाल फेंका. रवि की साँसे ये सब देख कर भारी हो उठी. उसेके पूरे सरीर मे वासना की लहरे हिलोरे मार रही थी. लंड उत्तेजना से पागल हो रहा था. पूरे बदन मे लहू सन-सन-सन करके दौड़ रहा था. लीना का बदन कहीं से भी स्थिर नही था. उसका जलवा अपने पूरे उफान पर था. कभी नज़दीक आकर तो कभी डोर से ही रवि को अपने बदन की नुमाइश कर के उकसा रही थी. सराब और सबब अपने पूरी जवानी पर था. पूरा हॉल मे ज़ोर ज़ोर से उठ बैठ रही साँसे म्यूज़िक से ताल से ताल मिला रही थी. लीना हर ढूँ के साथ अपनी तालमेल बैठा कर रवि को बेकाबू करने मे लगी थी. रवि भी बेकाबू हो कर अपने सुख रहे होठों पर जीभ बार बार सहला रहा था. लीना की भारी भारी छातियाँ उच्छल उच्छल कर रवि को आमंत्रण दे रही थी की आओ मुझे दाभोच लो. उसकी मस्त जंघे हाथी की सूंड की तरह झूम रही थी. कभी फैला कर तो कभी सिकोड कर अपनी चूत को दिखा और छुपा रही थी. पीच्चे घूम कर अपने चूतड़ मटका मटका कर नाच कर रवि के लंड को पूरी तरह बेकाबू कर दिया. तभी रवि सोफे से उठकर लीना के पास जा ही रहा था की लीना ने उसको वापस धकेल कर सोफा पर वापस बैठा दिया और अपने चूतड़ को उसकी जाँघो पर रख कर उसके लंड को रगड़ने लगी. लंड इस रागड़ाई से एकदम बोखला गया. रवि के बदन का सारा लहू मानो इस वक़्त उसके लवदे मे समाया हुआ था. उसने अपने दोनो हाथों से लीना के कबूतरो को जाकड़ लिया. भारी भारी दोनो उरोज रवि के हाथों मे भी नही समा रहे थे. चिकनी निघट्य की वजह से दोनो कबूतर उसके हाथ से फिसल रहे थे. लीना के कबूतर शिकारी को इतना नज़दीक देख कर फड़फड़ने लगे. रवि ने पागल होते हुए उसकी नाइटी को उरजो के सामने से पकड़ कर फाड़ दिया और उसके बूब्स को अपने हाथो मे लेकर तोलने लगा. फिर उसके दोनो निपल्स को अंगुली के बीच मे लेकर ज़ोर

से मसल दिया. लीना के मुहन से सिसकारी निकल गयी. "उउईए माआ..... धीरे से." रवि ने आराम से उसकी चुचियो को सहलाने लगा. लीना अपने चूतड़ की

रागड़ाई चालू रखी थी. रवि के लंड को काफ़ी दीनो बाद चूत की महक मिल रही थी. फिर यह तो साली की चूत. नशा सराब के साथ सबब का डबल हो रहा था. उसके नशीले बदन को अपनी बाहों मे समेत कर इस रगड़ाई को रोक कर अपनी अनियंत्रित हो रही सांसो को समेटने मे लगा. लीना के शरीर को सामने कर उसके रसीले होठों को चूमने लगा. उसके होठों के रूस को पीकर वो और मतवाला हो गया. अपनी जीभ को लीना की जीभ से टकरा रहा था. दोनो की जीबे पेंच लड़ा रही थी और हाथ उसके दोनो कबूतरो को अपने मे समाते हुए धीरे धीरे मसल रहे थे. रवि होतो से अपने होतो को च्छुदा कर अपनी जीभ को लीना के उरजो की तरफ ले आया. "अफ क्या कयामत है," ऐसे कहते हुए अपनी जीभ से उसके गुलाबी चूचियो चाटने लगा. लीना के मूह से सिसकारी निकल रही थी. उसके दोनो उरोज भारी हो चुके थे. उसकी साँसे ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे होने लगी. "और ज़ोर ज़ोर से मेरी चुची को मसालो, बहुत मज़ा आ रहा है. तुम्हारे हाथ मे जादू है. इधर तुम मेरी चुची

को दबा रहे हो और उधर मेरी चूत पानी छोड़ रही है," लीना बेकाबू हो कर बड़बड़ाने लगी. दोनो निपल्स कड़क हो कर रवि के मूह मे जाने को उतावले थे. फिर बेकाबू हो कर चीख पड़ी, "सक इट. टके इट इन युवर मौत."

रवि निब ही अपने होठों को खोलकर उसके एक निपल को अपने बीच दबा लिया. "एस्स... एस्स... जीजू.... ऐसे ही चुसो....देखो मेरे निपल्स की खाज मिटा दो," लीना अपनी चाहत च्छूपा नही पाई. "ऊउउफ्फ्फ..ऽअ.. हह.. आआ.. हह प्लीज़ तोड़ा धीरे.... कतो ना..... उूउउइइ और ज़ोर से चूसो मेरे बूब्स को."
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07-01-2017, 11:28 AM,
#2
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
दोनो निपल्स को बरी बरी से अपने मूह मे लेकर चूसने के बाद रवि खड़ा होकर लीना को अपनी बाहों मे लेकर उसके पूरे बदन को जाकड़ लिया. ऐसा कस कर आलिंगन किया की लीना के मूह से चीख निकल पड़ी. `जब तुम्हारी चूंची इतनी खूबसूरत है तो छूट तो और भी खूबसूरत होगी," कहकर रवि उसके बदन पर लिपटी नाइटी के बाकी हिस्से को भी फाड़ने लगा. लेकिन लीना उसको रोकते हुए कहा, "उफ़फ्फ़... इतने बेकाबू क्यों हो रहे हो. पहले मुझे अपना झुनझुना तो दिखाओ. मुझे भी उससे खेलना है." रवि बेकाबू था लेकिन लीना वापस बोल पड़ी, "तुम अपना लंड मुझे दिखाओ मई तुम्हे अपनी चूत दिखा दूँगी." लीना ने अपने हाथ को बढ़कर रवि की पंत टटोलने मे लग गई. उसे अपना खिलोना चाहिए था. उसका खिलोना भूके शेर की तरह अपने

पिंजरे मे उच्छल कूद मचा रहा था. लीना का हाथ उस पिंजरे की तरफ बढ़ कर उसके पहले तले यानी पंत की चैन को खोल दिया. रवि ने उसके दोनो कबूतरो को सहलाते हुए अपनी पंत को नीचे की और खिसका दिया ताकि लंड को बाहर निकालने मे ज़्यादा परेशानी ना हो. फिर लीना घुटने के बुल बैठकर अंडरवेर की क़ैद मे बैठे उस भूके शेर की दहाड़ सुनने लग गई. उसका फूला हुआ लंड अंडरवेर मे मचल रहा था. लीना ने अपने हाथो से उसको पूछकर कर शांत करने की कोशिश की. जब लंड ज़्यादा ही मचलने लगा तो अपने होठों से रवि के लवदे को अंडरवेर के साथ ही दबा लिया. अब बरी थी रवि के सिसकरने की. एक महीने मे डॉक्तोर्र. के ना करने के कारण वो अपनी बीबी,

रीमा, को छोड़ नही पाया था लेकिन यादा-कड़ा रीमा अपने हाथ से रवि के लंड को मसल ज़रूर देती थी. लीना उसके लंड को अंडरवेर के उपर से चाटने लगी. लंड फूल कर एक दम भड़क उठा. तभी लीना ने झटके से अंडरवेर खींच कर नीचे खिसका दिया. रवि का लंड एक दूं टन कर लीना के मूह के सामने नाचने लगा. "अफ... क्या मोटा लंड है तुम्हारा जीजू," कह कर अपने हाथों मे समेत लिया लीना ने. लेकिन लंड पूरा का पूरा हाथों मे आया कहाँ था. मोटे के साथ साथ पूरा 9" का लूंबा लंड था रवि का. लंड का सुपरा भुक्कड़ की तरह लीना का चेहरा देख रहा था. लीना ने लंड को अपने हाथों मे लेकर उसकी चाँदी को उपर-नीचे करने लगी."सचमुच तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है," लीना के मूह से निकल पड़ा. रवि से अब रहा नही जा रहा था. लीना ने अपनी जीभ निकल कर लंड के सुपरे को धीरे-धीरे चाटने लगी. रवि का लंड उचक-उचक कर उच्छल रहा था. तोधी देर डाक लीना उसके सुपरे को ही छत रही थी. रवि और ज़्यादा बेकाबू होने लगा. उससे रहा नही जा रहा था. वो काँपते हुए स्वर मे

बोला, "आरीए, मेरी साअली, अब तो "टीज़िंग" बूँद करो. मेरे लंड को चूसो."

लेकिन लीना ने सुपरे को चाटना नही छ्चोड़ा. वो रवि को और भड़कना

चाहती थी. मर्द जब ज़्यादा भड़कता है तो औरत की चुदाई भी उतनी

ही ज़्यादा कर्ता है. लीना अपनी चूत की छुड़वा बहुत ज़ोर से करवाना चाहती थी. कारण यह था कॉलेज मे अपने बाय्फ्रेंड से उसकी सात- आठ बार जो चुदाई हुई थी वा जल्दी जल्दी हो गयी थी क्योंकि कोई आकर डिस्टर्ब ना कर दे या कोई आकर देख ना ले. एक बार उसकी फ्रेंड की चुदाई किसी ने देख ली थी तो उसको अपनी चूत कॉलेज के डूस-बारह स्टूडेंट के साथ एक साथ चुदवानि पड़ी थी. पर यहाँ तो रवि का लंड भड़कता ही जा रहा था. उसने लीना को

कहा, "साली मदरचोद, चूस मेरे लंड को. पूरा का पूरा खा जा मेरे

लंड को. साली यह लंड एक महीने से तरस रहा है और तुझे "टीज़िंग" की पड़ी है. अगर नही चूसाती तो मे तेरी चूत को ऐसा चोदुन्गा कितु भी जिंदंगी भर याद रखेगी." लीना का मकसद पूरा हो गया. वो रवि को ऐसे ही भड़कना चाहती थी. तभी रवि ने उसके बॉल पकड़ कर अपना पूरा नो इंची लंड उसके मूह मे गॅप से डाल दिया. "ले च्चिनाल चूस मेरे लंड को. बहुत ज़्यादा मटक रही तीन ना. अब चूस मेरे लंड को." रवि का लंड आठ इंच तक ही लीना के मूह मे घुस पाया. बाकी एक इंच बाहर ही रहा. उसके लंड का किनारा उसके मूह की आख़िरी दीवार को छ्छू गया था. लीना को साँस लेने मे तकलीफ़ होने लगी थी. उसने रवि के लंड को पूरा बाहर निकाल कर कहा, "जीजू, मार ही डालोगो क्या. तोड़ा सब्र करो. चूसाती हू तुम्हारे मूसल लंड को."

फिर लीना ने लंड को हाथ से पकड़ कर जो चूसैई की रवि तो पागल हो गया. उसे लगा अगर मेने अपने लंड को बाहर नही निकाला तो मेरी पिचकारी अभी छ्छूट जाएगी. उसने अपना लंड बाहर निकल कर लीना को खड़े कर अपनी बाहों मे उठा लिया और उसके होठों को चूमते हुए अपने बेडरूम की और चल पड़ा. बेडरूम मे बेड पर लीना को सुलते हुए उसकी नाइटी के बाकी कपड़ाए को फादते हुए उसकी जाँघो को चाटने लगा. लीना की गुदाज़ जंघे मखमल की तरह नरम और दूध जैसी गौरी थी. रवि उन जाँघो को चुसते हुए अपने हाथो को उसकी झांतो को सहलाने लगा. अफ क्या नरम नरम झांते थी. रवि तो झांतो मसालते हुए उसकी उठी हुई बर(चूत) को देख पागल हो गया. अपनी

उंगली को धुस से उसकी कोमल चूत मे धकेल दिया. लीना के मूह से निकल पड़ा, "उउईइ मा. धीरे से." रवि उसकी जाँघो को छ्चोड़ आस्की चूत की आस-पास अपनी जीभ से चाट रहा था और अपनी एक उंगली को उसकी चूत की उंगली-चुदाई कर रहा था. थोड़ी देर मे ही लीना बोल पड़ी, "है! क्यों टाइम बर्बाद कर रहे हो? मेरे चूत को उंगली नहीं चाहिए. अभी तुम इसको अपने जीभ से छोड़ो. बाद मे उसको अपना लंड खिलाना. वो तुम्हारे लंड खाने के लिए

तरस रही है." तभी रवि ने अपनी उंगली निकाल कर उसकी जगह अपनी जीभ को लगा दिया. उसके दाने को चूस कर अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई मे

उतार दिया. लीना मादक स्वर मे कहने लगी, ""है! काया चीज़ बनाई है भगवान ने, चूसो चूसो, और ज़ोर से चूसो मेरी चूत को. और अंदर तक अपनी जीभ घुसेदो. है! मेरी छूट के दाने को भी चातो. बहुत मज़ा आ रहा है." रवि ने उसकी चूत चूस चूस कर उसकी हालत खराब कर दी. लीना बैठ कर अपनी चूत को रवि के मूह पर धक्के लगाने लगी. साथ ही बाद-बड़ा रही थी, "एस डार्लिंग, चूसो मेरे राजा, चूत को को चूसो, अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक चूसो. एस बड़ा मज़ा आ रहा है जीजू. एस, एस, चूसाते जाओ. मेरे दाने को भी चूसो. आहह, एस, चूसो. लो मेरी छूट का पानी निकल रहा है. आहह, ऊहह, चूसो बहुत दीनो बाद मेरी चूत का पानी निकलेगा. चूवस्स्स्तीए रहो, एस, एस, एस, ओह, ओह, क्या जीभ से चोद रहे हो. लगता है यह जीभ नही, तुम्हारा लंड है. आआहह, और हूओसो,

ह, मेरा पााअनी निकल रहा है. ऑश एससस्स, मेरा पानी निकल आआआआआआ......" लेकिन रवि ने उसकी चूत को छ्चोड़ा नही. वो बहुत देर तक चूसाता रहा जब तक उसकी जीभ नही तक नही गयी. लीना की चूत की खाज और ज़्यादा बढ़ गयी. लेकिन अब वा अपनी चूत को चटवा कर नही बल्कि

असली खेल कर अपनी प्यास बुझवाना चाहती थी. उसने अपने हाथ बढ़ा कर रवि के लंड को अपने हाथ मे लेकर आयेज पिच्चे करने लगी. जब लंड एकदम मूसल हो गया तो अपनी चूत को उसके मूह से हाता कर उसके लंड पर बैठ गयी. रवि के लंड को और क्या चाहिए. उसका लंड तो चूत का प्यासा था. चूत को देख कर लंड अपनी जगह पर ही उच्छल- कूद मशीन लगा. रवि ने अपने हाथ बढ़ा कर अपने लंड के सुपरे को लीना की चूत के मूह पर रख दिया. लीना ने उपर से बैठे बैठे अपनी चूत को तोड़ा धक्का दिया तो रवि का लंड फुररररर करके उसकी चूत मे जा कर फँस गया. इसी के साथ लीना के मूह चीख निकल पड़ी. यह चीख दर्द भारी नही थी बुल्की आनंद से भारी थी.

लीना रवि के उपर बैठ कर अपनी चूत की खाज मिटाने लग गयी. अपनी चूत की जाकड़ मे लंड को ले कर उच्छल-कूद मचाने लगी. साथ ही उसके मूह से सिसकारियाँ निकल रही थी. रवि अपने हाथो से उसके मुम्मे पकड़ कर सहला रहा था. लीना उसकी च्चती पर हाथ रख कर अपनी चूत खुद ही चुड़वा रही थी. आनंद से मदहोश हो कर चुड़वा रही थी. स्पीड धीरे-धीरे बढ़ कर अपनी चरम सीमा पर चली गयी. फुल फास्ट स्पीड मे चुड़वाने से लीना की सिसकारी बड़बाधत मे बदलने लगी. "एस.. एस.. क्या मज़ा आ रहा है.. एस.. एस.. आज बहुत दीनो बाद चूत को मज़ा मिल रहा है.. श.. क्या जन्नत का मज़ा मिल रहा है.. उफ़फ्फ़.. जीजू तुम्हारा लंड एक दूं लोहे के जैसा सख़्त है... अफ... मेरी चूत... है... मैं .... आहह... मेरी चूत का पानी निकालने वेल हा... ऑश... क्या हो रहा है मुझे... है... मेरी चूत... उफफफ्फ़... मेरा पानी निकला... येस.ंएर पानी निकला... एस... उउई... एस... मेरा पानी निकल गया..." ऐसा कह कर लीना उसकी च्चती पर गिर कर लंबी-लंबी साँसे छ्चोड़ने लगी. चूत का पानी निकलते हुए वो अब हल्के हल्के धक्के मार कर एकदम से निढाल हो गयी. रवि ने अपनी बाहों मे भरकर उसके होठों को अपने होठों से जाकड़ लिया. थोड़ी दे बाद जब लीना की धड़कन एकदम नॉर्मल हुई तो अपने सरीर से उसे उतारकर अपने बाजू मे सुला लिया और उसके बूब्स को सहलाता हुआ एक मुममे को मूह मे दबा लिया. थोड़ी देर मे दोनो मुममे को चूस कर अपनी उंगली से उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा. उसकी चूत को सहला कर उसकी छूट की चुदाई की तय्यरी कर रहा था. उसका भूखा लंड अब उसे चोदने को एकदम तय्यार था. लीना के मूह से जब सिसकारी निकालने लगी तो उसे डॉग्गी स्टाइल मे लेता कर उसके चूतड़ो को अपने हाथ से सहलाने लगा. उसकी चूत दोनो चूतड़ो के बीच एकद्ूम से दबी हुई थी. अपने लंड को हाथ मे लेकर उसके चूतड़ो पर हल्के से सहला रहा था. लीना की चूत काफ़ी गरम हो चुकी थी. उससे अब सहा नही जा रहा था. वो बोल पड़ी, "है जीजू, क्यों तडफा रहे हो. लंड हुमारी चुदासी चूत को दिखा रहे हो और उसको चूत के अंदर नही पेल रहे हो. अब जल्दी से अपने मूसल जैसे लंड को चूत मे घुसाओ, प्ल्ज़्ज़.' तभी अपने लंड को उसकी चूत की खाई के सामने रखकर उसकी दरार मे टीका दिया और एक ज़ोर का धक्का मारा की लीना के मूह से आनंद-भारी चीख निकल पड़ी. "है.. दैया." लंड आधा एक ही धक्के मे छूट के अंदर घुस गया. दूसरे धक्के मे लंड पूरा का पूरा चूत के अंदर था. रवि ने धीरे-धीरे अपने धक्के लगाने चालू रखे. लंड छूटमे पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था. उसका लंड चूत की गर्मी पाकर और फूल गया. लीना भी धक्के का जवाब धक्के से दे रही थी. फिर अपने हाथ बढ़ा कर रवि ने लीना के मुममे को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया और धक्को की स्पीड बढ़ा दी. लंड चूत की जड़ तक जा रहा था. रवि का लंड छूट के धक्के से एकदम बेकाबू हो उठा. रवि के मूह से आवाज़े आनी शुरू हो गयी. "लो रानी... मेरे लंड के झटके... खाओ, खूब खाओ.. देखो तुम्हारी छूट की प्यास बाकी नही रहे.. लो यह लो.. " लीना की छूट धक्के पर धक्के खा कर अपना पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया. "एस.. मेरे जीजू... उउफ्फ.. मरो धक्के.. और मरो धक्के... मेरी छूट से फिर से पानी निकल रहा है. तुम्हारा सख़्त लंड ही मेरा पानी इतनी जल्दी-जल्दी निकल पाया." फिर भी रवि अपने धक्के मरने चालू रखा. वो भी अपना पानी निकलना चाहता था. लीना ने देखा की रवि इसी तरह छोड़ता रहा तो पानी उसकी छूट मे ही छ्चोड़ देगा तो अपनी चूत को एकद्ूम से हटा लिया. रवि चिहुनक पड़ा, "यह क्या रानी. मेरा पानी निकालने वाला था." "यही तो मैं नही चाहती की तुम मेरे अंदर झड़ो. मैं तुम्हारे वीर्या को अपने पूरे बदन पर झाड़वाना चाहती हून." "ऐसी बात है तो लो अपना मुहन खोलो और इसको चूसो. अब तोड़ा

इंतज़ार करना पड़ेगा मेरे झदाने का." लीना ने रवि के लंड को हाथ से पकड़ कर पहले अपने मुम्मो पर सहलाया फिर लेट कर उसके मूसल को अपने दोनो बूब्स के बीच दल कर रवि से बोली, "लो जीजू, अब मेरे टिट्स को चोदो. अपने लंड को मेरे बूब्स की खाई मे डाल कर यहाँ भी अपना झंडा गाड़ दो."

रवि अपने लंड को लीना के कबूतरो के बीच मे लाकर उसकी टिट- फक्किंग चालू कर दी. लेकिन जो टेंपो डॉग्गी-स्टाइल मे बना हुया था वो वापस नही बन रहा था. पानी निकलता नही देख उसने अपना ध्यान उसके कबूतरो पर टीका दिया. "मेरी प्यारी साली, अब इस टिट-फक्किंग के बाद तुम्हारी चूत की फिर एक

बार चुदाई करूँगा. तेरे कबूतरो का जवाब नहिन.....तेरे बूब कितने मलाई जिट्नी चिकान्य है....ऽउर तेरे गुलाबी निप्प्लेस...इनेह तो मैं खा जाऊँगा," कहता हुआ अपने लंड को मुम्मो से निकाल कर उसके उपर टूट पड़ा और उसकी चुचियों को मसल मसल कर दबोचने लगा. "प्लीज़ मेरी चुची को और ज़ोर से दब्ाओ, बहुत मज़ा आ रहा है. मुझे नशा सा हो रहा है. तुम मेरी चुची दबा रहे हो और मेरी चूत मे कुच्छ कुच्छ हो रहा है. है! तुम्हारा तो लंड भी अब वापस से कड़क हो गया है." लीना नीचे पड़ी पड़ी अपनी चुचियों की खाज मिटा रही थी. जीजू को पागल हटे देख उसकी छूट मे खाज शुरू हो गयी थी. अपनी छूट पर उसके लंड को रख कर अपने बदन को उसके बदन से जाकड़ लिया और कहने लगी, "मुझे छूट में अहुत..ऽआह....खुज्ली हो रही है..... अब अपना चाकू मेरी छूट पे छाला दो...... मितादो मेरी खुजली..... मिताआओ." लीना को भी तड़फते देख अपने लंड को उसकी छूट के उपर रख कर एक ज़ोर से धक्का दिया और बोला, "ही! मेरी रानी, ले! लीईए! और ले, जी भर कर खा अपनी चूत मे मेरे लंड के धक्के." फिर धक्के पर धक्के चालू हो गये. थोड़ी देर तक कमरे मैं केवल "अफ" "है" "श" की ही आवाज़े आ रही थी. तभी रवि और लीना दोनो एक साथ ही चीख पड़े. दोनो का ही पानी एक साथ च्छुटने लगा. दोनो निढाल हो कर पलंग पर लेते रहे और उसी हालत मे नींद आ गयी.
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07-01-2017, 11:28 AM,
#3
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई {पार्ट --2}

सुबह लीना ने उठकर रवि को उठाया. रात की मस्ती झड़ी नही थी. एक बार फिर दोनो आपस मे लग कर चुदाई शुरू कर दी. रवि लीना को नीचे ले कर कस कस कर उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया. सिसकारीओं से कमरे का वातावरण काफ़ी मदहोश हो गया. लीना नीचे से हर धक्के का जवाब अपनी सिसकारी से दे रही थी. "सचमुच तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है. उस लड़की को बहुत मज़ा आएगा जो तुमसे चुड़वाएगी," लीना रवि से चुदवाती हुई बोली. रवि कस-कस कर धक्के मारते हुए बोला, "हां जाने-बहार, तुम्हारी चूत भी एकदम लाज़वाब है. लगता है इसे चोदता ही जाऊं." नीचे से लीना सिसकारी मारते हुए बोली, "ओह्ह! मेरे राजा और पेलो और पेलो अपनी रानी की चूत मे अपना मोटा लंड. आ! मेरी चूत तुम्हारा लंड खा कर निहाल हो रही है. हाया! लंबे और मोटे लंड की चुदाई ही कुछ और ही होती है. बस मज़ा आ गया. हाँ हाँ, तुम ऐसे ही अपनी कमर उच्छाल उच्छाल कर मेरी चूत मे अपने लंड से धक्का मारते रहो. मेरी चूत को भी बहुत दीनो से शौक था तगड़ा और लंबा लंड खाने का. उसको और ज़ोर ज़ोर से खिलाओ अपना लंबा-तगड़ा लंड." लेकिन जल्दी ही ख़तम हो गयी उनकी चुदाई. दोनो का पानी आधे मिनिट के फराक पर निकल गया. लीना ऐसी चुदाई पा कर मस्त हो गयी. रात की चुदाई से ज़्यादा कड़क चुदाई उसे अभी वाली लगी. हॉस्पिटल जाकर रीमा को देखने और रोमा को फ्री करने के कारण रवि को बिस्तर पर से जल्दी उतना पड़ा. बाथरूम मे जाने के बाद पता चला की बाथटब का शावर और नाल दोनो खराब हो गये है. पानी नही आ रहा था. तो रवि यह कहकर निकल गया की मैं प्लमबर को भेज रहा हून. अगर जल्दी आ गया तो ठीक है नही तो रोमा को बता देना की प्लमबर से नाल ठीक करवाना है. रवि ने हॉस्पिटल जाकर रोमा को फ्री किया और बोला की घर पहुँचकर लीना को जल्दी भेज देना ताकिवो खुद ऑफीस जा सके. रोमा घर पहुँची तो लीना बाथरूम से निकल कर अपने कपद बदल रही थी. बाथरूम मे स्टोरेज किए हुए पानी से उसने अपना काम चला लिया था. लीना के चेहरे पर छायी हुई खुशी को देखकर रोमासमझ गयी की रात भर क्या क्या हुआ होगा. फिर भी अंजान बनते हुएउसने लीना को छेदते हुए पूचछा, "है मेरी जान, बड़ी खुश दिखरही हो. रात भर सोई नही थी क्या? लगता है जीजू ने बहुत परेशान किया है." "नही तो. ऐसी तो कोई बात नही है." "अच्छा हमसे ही नाटक." "जब कुच्छ हुआ ही नही तो क्या नाटक करूँ." फिर धीरे धीरे सारी बात रात की उगल दी लीना ने. रोमा और लीना रात की बात करते करते दोनो ही उत्तेजित हो गये. आपस मे अंजाने ही एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे. दोनो की चूते अंदर की गर्मी से पिघलाने लगी. तभी टेलिफोन की घंटी बाजी. लीना ने फोन उठाया. "मैं रवि बोल रहा हून." "बोलो जीजू, मैं लीना बोल रही हून.""देखो प्लमबर को बोल दिया है. थोड़ी देर मैं आ जाएगा. लेकिन तुम जल्दी आ जाओ. मुझे कुच्छ मेडिसिन्स लाना है फिर मैं ऑफीस निकल जाऊँगा." लीना जल्दी ही हॉस्पिटल के लिए निकल गयी साथ मे कह कर गयी की बाथरूम का नाल खराब है, प्लमबर आएगा. रोमा मान मसोस कर रह गयी. रात मे भी मौका नही मिला और अब सुबह थोड़ी बहुत गर्मी शांत होती वा भी नही हुई. आख़िर चूत तड़फती ही रह गयी. वो उसे शांत करने के लिए जीजी की एक नाइटी पहन कर बातरूम मे चली गयी. उससे बदन तो धक गया लेकिन गला काफ़ी खुला हुआ था और नीचे से भी घुटने के उपर तक ही थी. नाइटी को उतार कर जैसे हीनाल खोला तो ध्यान आया की वो तो खराब है. उसी हालत मे बैठी बैठी अपनी चूत को हाथ से सहलाने लगी. चूत को सहलाते-सहलाते उसे ध्यान ही नही पड़ा की डोर बेल कितनी देर से बाज रही है. फटा- फॅट नाइटी पहन कर बाहर निकली और गाते खोल दिया. सामने खड़ा था प्लमबर. एक मजबूत किस्म का इंसान. रंग सांवला लेकिन कद कती कसरती. वो भी अपने सामने खड़ी रोमा को देखता रह गया. अफ क्या नशीला बदन है. एक मिनी नाइटी पहने हुए तो कयामत ढा रही थी. छातियां नाइटी मे समा नही रही थी. आधे मुम्मे बाहर छलक रहे थे. गहरी साँस लेते हुए बोला, "रवि साहेब ने बुलाया है. क्या कोई नाल खराब है." "हन.. हन. बाथरूम का शावर और नाल दोनो खराब है. पानी नही आ रहा है." सुरेश, यही नाम था प्लमबर का, सीधे बाथरूम मे चला गया. बाथटब का शवर और नाल चालू कर के देखा लेकिन पानी नही आ रहा था. तो उसने शोवेर को निकाल दिया और फिर बाथरूम के अंदर बनी हुई टंकी जो सीलिंग से लगी हुई थी से नाल को चेक करने लगा. "लगता है की टंकी से पानी नही आ रहा है. उपर चेक करनापड़ेगा. कोई तबले है क्या?" रोमा ने एक मिड्ल साइज़ की तबले ला कर दी. वो उस पर चढ़ कर टंकी चेक करने लगा और बोला, "पानी तो पूरा भरा पड़ा है. पीपे और फिटिंग चेक करना पड़ेगा." यह कह कर अपनी पॅंट और शर्ट निकालने लगा. एक बनियान और स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम जैसा अंडरवेर पहने हुया तबले पर चढ़ गया. रोमा उसके गतीले बदन को देखी तो देखते ही रह गयी. मज़दूर आदमी का जिस्म था. एक दूं कड़क. उपर से पीपे को खोलते हुआ बोला "मेमसाहेब, आप ज़रा बाथटब के पास रहना. जब पानी आए तो शावर को पीपे के उपर पकड़ कर रखना." बाथरूम मे जगह कम थी. तबले ने जगह घेर कर रखी थी. रोमा बाथटब मे जाकर खड़ी हो गयी. जब पानी आने लगा तो वो शोवेर को पीपे के उपर लगाने लगी लेकिन बाथटब मे खड़ी होने की वजह से रोमा पूरी तरह से भीग गयी. उसका बदन नाइटी से झलकने लगा. उसके कबूतर नाइटी से आधे तो पहले ही दिख रहे थे अब बाकी आधेनाइटी के पारदर्शी (ट्रॅन्स्परेंट) हो जाने की वजह से दीखने लगे. उसके डार्क निपल एक दूं से तन कर आमंत्रण दे रहे थे. जाँघों से नाइटी चिपक गयी थी. उसके उभरे हुए नितंब आकर्षित कर रहे थे. सुरेश ने जब नज़र नीचे कर यह नज़ारा देखा तो उसका लंड दान-दान करता हुआ खड़ा हो गया. उसका लंड एक गोरी और मस्त लौंडिया को देख कर फड़फड़ाने लगा. वो पीपे वापस फिटिंग करते हुए कभी पीपे को देख रहा था तो कभी रोमा की उफनती हुई जवानी को देख रहा था. तभी उसके हाथ से रेंच-पाना (आन इन्स्ट्रुमेंट तो टाइट पीपे) नीचे बाथटब मे गिर गया और उसके हाथ से पीपे भी छूट गया. पानी उपर पीपे से नीचे गिरने लगा. खुद भी पूरी तरह से भीग गया. उसके बदन के कपड़े भी भीग गये. कॉस्ट्यूम जैसे अंडरवेर से लंड का साइज़ सॉफ दिख रहा था. उपर से ही कहा, "मेमसाहेब, ज़रा वारेणच-पाना देना प्ल्ज़्ज़." रोमा ने रेणच-पाना उठाया तो शवर अपनी जगह से खिसक गया. जिसकी वजह से पानी फिर गिरने लगा. एक हाथ से शवर को पकड़े हुए दूसरे हाथ से उस रेणच-पाना को देने लगी. लेकिन पानी गिरते रहने की वजह उसका ध्यान शवर की तरफ ही था. दूसरा हाथ रेणच-पानासुरेश को देने के लिए आयेज बढ़ाया हुआ था. उपर सुरेश भी पीपे से पानी गिरते रहने की वजह से पीपे की और ही देख रहा था. उसने उपर ही मूह किए हुए वापस कहा, "मेमसाहेब, प्ल्ज़्ज़. वा रेणच-पाना देना." रोमा भी शवर की और देखते देखते बोली, "दिया तो है. लेलो." तभी दोनो की नज़र आपस मे टकराई तो देखा की रेणच-पाना रोमा ने अंजान-वश सुरेश के मोटे फूले हुए लंड मे फँसा दिया था. सुरेश यह देखकर मुश्कराया और रोमा ने अपनी नज़र नीचे झुका ली. सुरेश रेणच-पाना अपने लंड पर से निकाल कर पीपे को फिटिंग करने लग गया. रोमा ने नज़र उठा कर देखा की है रब्बा कितना मजबूत लंड है. एक मूसल की तरह खड़ा था. उसकी साइज़ 10" इंच से कम नही होगी और मोटा भी पूरा था. उसकी छूट तो कल रात से ही उसके काबू मे नही थी. अब तो उसकी हालत एकद्ूम से बेकाबू हो गयी. पूरे बदन मे खून सई-सई कर के बहने लगा. चूत का पानी रोके से नही रुक रहा था.बार-बार नज़र सुरेश के लवदे पर जाकर अटक रही थी. "उफ़फ्फ़," ऐसी सिसकारी निकल पड़ी. "काश ऐसे लंड से मेरी चुदाई हो जाती तो मैं निहाल हो जाऊं."उधर सुरेश का मान भी कुच्छ ऐसा ही सोच रहा था. "काश मेमसाहिबकी गौरी चूत चोदने को मिल जाए तो .. " तभी पीपे को आधा फिट किया तो शवर का पानी आना बंद हो गया. सो उसने रोमा से कहा, "मेमसाहिब, आप ज़रा यहाँ तबले पर खड़ी हो जाए तो मैं शवर को भी वापस चेक कर लू."रोमा तो लंड और चुदाई की सोच मे खोई हुई तबले पर खड़ी हो गयी. उसे होश ही नही था की उसकी भीगी हुई नाइटी से उसका पूरा जिस्म झाँक रहा है. बदन की कोई भी चीज़ छुपि हुई नही थी. उसकी मखमली झाँटे केवल उसकी चूत को हल्का सा उपर से केवल च्छुपाए हुई थी. जब उसने अपना हाथ बढ़ा कर पीपे को पकड़ा तो उसकी नाइटी भी उपर हो गयी. चूत जो तोड़ा बहुत झांतों से च्छूपी हुई थी वा भी बेपर्दा हो गयी. वासना की आग मे जलते हुए बदन की गर्मी पूरे बाथरूम मे तूफान ला दिया. सुरेश ने नीचे से यह नज़ारा देखा तो सुलग उठा. उसके सामने रोमा का नशीला बदन ही नाच रहा था. सुडोल बदन की मल्लिका, गड्राया हुआ सनडर बदन, गोल-गोल गाल, होंठ एसे की जेसे शहद से भारी दो पंखुड़ीयान, बॉल लूंबे-लंबे नितंब को छूते हुए, गर्दन सुराही की तरह, उरोज मुम...ंउम्मे भरे-भरे, दो कलश, गोल-गोल उभरे हुए सख़्त-सख़्त कसे हुए हापूस-आम. मलाई जैसा बदन, गुलाबी होत चूसने के लिया तैयार और न्योता देते हुए. चुची उठी हुई मस्त मस्त नाइटी से बाहर आने के लिए बेकरार. देखते ही लगता था हाथ बढ़ा कर दबा दो. कब इसे चोद पाऊँगा, कब इसकी चूत कोचूसूंगा, कब इसकी चुचियों को कस कर दब्ाओंगा, कब इसके होठों को चूस चूस कर मज़ा लूँगा, कब इसकी चूत मे मेरा लंड घुसेगा, और कब इसे कस कस कर दबोच पाऊँगा. आह हा, क्या माममे हैं - एकद्ूम ताने हुए मानो की कह रहे हों - आओ मुझे पकड़ लो, मुझे दब्ाओ, मुझे चूसो. होठों पर एक मुस्कुराहट सी खेल रहती है. गीला गीला गुलाबी जिस्म बुला रहे है की आओआ ना, मुझे चूसो ना. यह सोचते सोचते उससे रहा नही गया. उसने शवर को छ्चोड़ बाथटब से बाहर आ कर अपने होतो से उसकी चूत के होतो के साथ संगम कर लिया. "उफ़फ्फ़.. कितनी गरम है." रोमा चुदाई के सपने मे खोई हुई थी की उसे लगा की यह चूत मे अचानक वोल्टेज कैसे बढ़ गया. नीचे देखा तो सुरेश अपने होठों से उसकी चूत चूज़ रहा है. वो मान कड़ा कर बोली, "यह क्या कर रहे हो." सुरेश ने कुच्छ भी ना बोलते हुए उसकी चूत और उसके दाने को चूसना चालू रखा. रोमा विरोध करती रही लेकिन धीरे-धीरे उसका विरोध सिसकारीओं मे बदल गया. अब यह छूसा उसे शकून दे रही थी. शकून के साथ-साथ जिस्म मे एक आग भी भर रही थी.चूत पर से मुहन ना हटते हुए सुरेश ने रोमा को तबले से उतारकर बाथटब पर बैठा दिया. बाथटब पर बैठी हुई वा अपने हाथ से सुरेश का बॉल पकड़ कर उसे और ज़ोर से चूसने के लिए प्रेरित कर रही थी. उसकी सिसकारियाँ बड़ाती ही जेया रही थी. तभी उसके मुहन से निकलना शुरू हो गया, "एस.. एस.. ज़ोर से चूसो मेरी चूत को.. अफ .. जीभ पूरी अंदर डाल दो. एस... मेरी चूत की गर्मी पूरी तरह से शांत कर दो. चूसाते रहो.. आअहह.. मुझसे अब रहा नही जेया रहा है... अफ.. क्या ... एस... जीभ से ऐसे ही चोदो.. चूवसो..." सुरेश अपनी जीभ की स्पीड उसकी चूत मे बढ़ा दी.
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07-01-2017, 11:28 AM,
#4
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
जब जीभ थोड़ी तक जाती तो अपने नाक से उसके दाने को सहलाने लगता. रोमा कीसिसकारियाँ चालू थी, "चाट मेरी चूत, छूतिए! खा जा मेरी रसभरी चूत को!" थोड़ी देर बाद सुरेश ने अपना अगला कदम बढ़ते हुए उसे बाथटब मे लिटा दिया और खुद उसकी बर्दास्त से बाहर होते हुए अपने लंड को रोमा के मुहन के सामने लहरा दिया. बाकी का काम रोमा ने खुद अपने हाथ ले लिया. सुरेश का 10" का पीपे उसके हाथो मे तड़प रहा था. हाथो से आयेज पिकचे करते हुए उसके लंड के सुपारे को जीभ से चाटने लगी. सुरेश का पूरा शरीर कांप उठा. गरम जीभ का स्पर्श पाते ही बदन का लहू `वन-वे' हो गया लॉड की तरफ. रोमा अपनी जीभ से उस मोटे लूंबे लॉड की लंबाई नाप रही थी. जीभ से उसके अंगूर को च्छेद रही थी. अब सुरेश से रहा नही जराहा था. वो एकदम काँपति हुई आवाज़ मे बोला, ""वाउ, मज़ा आ रहा है. छातो मेरे लंड को.. किसीने ऐसे चटा नही मेरे लंड को पहले. मेरे लंड को जन्नत मिल गयी, आज. ले चूस मेरे लंड को. मेरे लंड को पूरा मूह मे ले करचूसो." रोमा ने अपने होतो का एक गोल सर्कल बनाया और उसके लंड के केवलसुपरे को ही अंदर लिया. पूरा लंड लेना उसके बस की बात नही थी. वा रुक रुक कर तोड़ा तोड़ा लंड को मुहन मे ले रही थी. सुरेश एक दूं से बेसबरा हो रहा था. वा एक झटके से लंड को पूरा मुहन मे डालने के लिए एक धक्का मार दिया. रोमा ने तड़फते हुए लंड मुहन से निकाल दिया और खाँसते हुए बोली, "जालिम, पहले अपने लंड को तो देख. साला पूरा गढ़े जैसा है. पूरा मेरे मुहन मे कैसे जाएगा. तोड़ा रहम कर." सुरेश बोला, "अच्च्छा मेमसाहिब, अब धक्का नही दूँगा. मैं तोढ़ा ज़्यादा ही जोश मे आ गया था. लेकिन अब इसे चूसो. तड़फाव मत मुझे." रोमा उसके लंड को छत रही थी उपर से फव्वारे से पानी गिर रहा था. सुरेश को जन्नत का मज़ा मिल रहा था. तभी सुरेश को महसूस हुवा की अगर लंड को रोमा के मुहन से नही निकाला तो फव्वारे की तरह उसका लंड भी पानी फेंकने लगेगा. उसने रोमा को बाथटब मे लेटाकार उस पर छा गया और उसके मम्मे अपने हाथों से पकड़ एक को मुहन मे लेकर आम की तरह चूसने लगा. रोमा के मुहन से सिसकारी निकल गयी. सुरेश बगैर दंटो से नुकसान पहुँचाए उसके एक-एक करके दोनो उरजो को बरी-बरी से मुहन मे लेकर चूस रहा था. साथ मे बोलता भी जा रहाथा, "मेमसाहेब, तुम्हारे स्तन्नो का जवाब नहिन.....तुम्हरे बूब्स कितनेमलाई जिट्नी चिकान्य है....ऽउर तुम्हारे गुलाबी निपल्स... उफ्फ....इनेह तो मैं खा जाऊँगा." रोमा सिसकारी लेते हुए बोली, ""ही! और ज़ोर से मेरी चुची मसालो, इनको खूब दब्ाओ, दबा दबके इनका सारा रूस पी जाऊ. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. मेरे पूरे बदन मे नशा च्छा रहा है. ही मुझको इतनामज़ा कभी नही मिला. और दब्ाओ मेरी चुची को." सुरेश उसके मम्मे चुसते हुए अपने एक हाथ को उसके मुममे से सरकते हुए उसकी छूट के उपर हाथ से मालिश करने लगा. रोमा का जोश दुगुना हो गया. उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी. जिनको सुनकर सुरेश का भी जोश बढ़ गया. उसका मुहन और दोनो हाथ की स्पीड डबल हो गयी. अपनी जीभ से उसकी कड़क हुई निपल्स को चूसने के साथ उसकी छूट और झांतों पर अपनी रग़ाद बढ़ा डी. आआह्ह्ह्ह......प्लेअसे आहिस्ता करो. रागडो मेरी चूत को.. आराम से करो.. मज़ा आ रहा है तुम ने क्या कर दिया है.. आज ऐसा पहली बार फील कर रही हून औरबहुत अछा लग रहा है.. हन ऐसे.. आराम से.. मगर रुकना मत.. करते रहो.. ऑश." लोहे को गरम होते देख सुरेश ने अब अपना हात्ोड़ा मारना ही अच्च्छा समझा. उसने रोमा को दीवाल के सहारे खड़ा कर उसके पीच्चे से अपने दोनो हाथो से उसके चूतड़ को सहलाना शुरू कर दिया. अफ... क्या गुदाज़किस्म के उसके चुतताड थे. ढूढ़ मे सिंदूरी कलर डाले हुए रंग के चूतड़. वो अपनी किस्मत पर यकीन ही नही कर पा रहा था. वाकई मेऐसी चूत और चूतड़ किस्मत वाले को ही मिलते है. उसने अपनी जीभ निकल कर उसके चूतड़ को चाटना चालू कर दिया. रोमा के मादक बदन मे एक सिहरन दौड़ गयी. उसका बदन का एक-एक रोया शिहर उठा. पूरे बदन मे बिजली कड़क रही थी. चूतड़ को छत-ते छत-ते अपनी जीभ को उसकी पीछे से उभर कर बाहर आई हुई चूत पर लगा दिया. जीभ चूत पर लगते ही रोमा के मुहन से "ओफ्फ्फ...ओफ्फ्फ" की आवाज़ आनी शुरू हो गयी. अपनी जीभ को सुरेश ने धीरे धीरे आयेज बढ़ते हुए चूत की चुदाई अपनी जीभ से चालू कर डी. चोदना-चाटना, चोदना-चाटना, चोदना-चाटना यही कर रहा था अपनी जीभ से उसकी चूत को. "ऊवू माआ.. ओह आहाा.. यह क्या कर रहे हो, बहुत मज़ा आ रहा है और छातो, चूस डालो... पानी निकल दो इसका.... बहुत प्यासी है मेरी चूत," रोमा की लहराती हुई आवाज़ बाथरूम मे गूँज रही थी. मेरी प्यास बुझा दो, मुझे ठंडा करदो.. मेरा जिस्म बहुत जल रहा है.. कुच्छ कुच्छ हो रहा है मान मे, प्ल्ज़्ज़ मेरी आग बुझा दो मेरी.. प्ल्ज़्ज़." सुरेश ने उसकी रसीली चूत की छूसा कर उसे वैसे ही खड़ा रहने दिया और अपने सख़्त लंड को उसके चूतड़ पर दबाना शुरू कर दिया. लंड को एकदम नज़दीक देख उसकी चूत का पानी बहना चालू हो गया. चूत एकदम से जुवैसी हो गयी. अपने हाथ को पीछे ले कर सुरेश को अपने बदन से चिपका लिया. उसकी चूत की भूख अब बढ़ती ही जेया रही थी. अब उससे सहन नही हो पा रहा था. वो भड़क कर बोली, "उफ़फ्फ़... देख क्या रहे हो... चालू करो.... लगाओ अपने लंड कोनिशाने पर और मरो धक्का." सुरेश ने अपने लंड को उसकी चूत के निशाने पर ला तोड़ा सा धक्का दिया. आधा सुपरा लंड का चूत मे जेया कर फँस गया. दूसरा धक्का मारा तो उसके लंड का पूरा सुपरा उसकी चूत मे जेया कर धँस गया. तीसरा धक्का मारा तो आधा लंड उसकी गुफा मे गायब हो गया. साथ ही रोमा की आनंद भारी चीख भी निकल गयी. "है.... क्या लंड हैतुम्हारा.... एक दूं से तगड़ा.... अफ ..... वाकई मे ही... जैसे कोई गरम गरम हात्ोड़ा जाकर मेरी चूत मे फँस गया हो." अब सुरेश ने अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए. खड़े होने की वजह से पूरा लंड तो अंदर नही जा रहा था लेकिन जितना भी जा रहा था वा रोमा की चूत मे खलबली ज़रूर मचा रहा था. थोड़ी देर इस तरह डक्के मरने के बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और रोमा को बाथरूम के फर्श पर लेता कर अपने लंड को उसके मुहन मे डाल दिया. रोमा ने गॅप से उसको मुहन मे ले लिया. थोड़ी देर चूसने के बाद बाहर निकाल उसके लंड को हाथ से पकड़ सुरेश को कहा, "प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत मैं डाल दो. मुझे और मत तड़पाव ज़ालिम. मुझे चोदो, मैं तुम्हारे लंड की दीवानी बन गयी हून. अपने लंड से मेरी चूत की प्यास भुझाओ." सुरेश ने उसकी जाँघो को चौड़ा कर अपने लंड को उसकी चूत पर टीका दिया. फिर कस कर एक धक्का मारा. लंड उसकी रस से भारी हुई उसकी चूत की अंदर वाली दीवार से सीधा जा टकराया. रोमा तो एक बार पूरी तरह कांप गयी. लंड को बाहर निकाल वापस धक्का मारा तो उसकीसिसकारी निकलनी चालू हो गयी. "अफ... आह..." सुरेश अपनी फुल स्पीड से उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था. रोमा बड़बड़ा रही थी, "ऑश... क्या चोद रहे हो तुम.... वाकई मे मेरी चूत धान्या हो रही है... तुम्हारी चुदाई से.... उफ़फ्फ़.... मेरी चूत को आज चोद-चोद कर खूब रगड़ाई करो.... ह.... चोदो.... चोदो.... और चोदो.... चोदते ही जाओ." "हन रानी.... खूब छोड़ूँगा तुझे आज...तुम्हरि जी भर की कसर निकालूँगा आज मे....लो संभलो मेरे लंड को.....उफ्फ्फ....तुम्हरि चूत..... क्या नाज़ुक है....तुम्हरे संतरों का भी जवाब नहि....उफ्फ क्या चुचिया है तुम्हरि...ऽअज तुझे ऐसा चोदुन्गा मैं की जिंदगी भर याद रखोगी." धक्कों की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी. दोनो मदहोश हुए चुदाई मे लगे हुए थे. घचा-घच....फच-फॅक. दोनो आँखो से एक-दूसरे को देखते हुए एक दूसरे मे ज़्यादा से ज़्यादा सामने की कोशिश मे लगे हुए थे. लंड अंदर जाता फिर बाहर आकर दुगने जोश से वापस अंदर चला जाता. चूत उसका तोड़ा उपर उठके स्वागत करती फिर गुप से उसको अपने अंदर समा लेती. रोमा की चीखें बढ़ती गयी, "राजा चोदो मुझे. और तेज.. और ज़ोर्से... चोदो. उउफ़फ्फ़, ऑश, आहह, उउई मया, मार गयी मैं आज. फार दो मेरी चूत को.... और ज़ोर से चोदो मुझे..ऽप्ने लंड से फाड़ दो मेरी चूत को... मुजको अपना बनलो.... चोदो मुझको... ज़ोर से छोड़ो... प्लेअसे.....इस्को अंदर तक चोदते रहो....ऊईए...उफ्फ... कितना मोटा लंड है, ऐसा लगता है की गधे का लंड हो...ंउझे ऐसा लगा रहा है की मैं पहली बार चूदि हुन....तुम बहुत मज़े का चोद्ते हो." सुरेश अपने लंड को तोड़ा निकाल उसकी जाँघो को और फैला कर उसकी चूत की चुदाई चालू कर डी. अंदर तक जेया रहे लंड से अब उसकी चूत पिघलने को त्यार हो गयी. रोमा ने अपनी टॅंगो से उसकी टॅंगो को एकद्ूम से जाकड़ लिया और बड़बड़ाई, एस्स... मेरे राजा... चोदो मुझे....उफ्फ्फ...ऽउर...ऽउर....ऽह्ह्ह...ंएर पानि...्ऐईइ..ंएर पानी निकालने वाला है....रज.... चोद...ंएर पानी निक्ल....्आन...ंइक्ल....्आन....ंइकल गया." सुरेश के साथ एक-दूं से छिपात कर अपनी चूत के पानी से उसके लंड को सींच ही रही थी की लंड ने भी अपना फव्वारा छ्चोड़ दिया. चूत और लंड का मिलन अपने चरम पर पाहूंछ गया. दोनो एक दूसरे की बाहों मे खोते हुए निढाल हो कर फर्श पर ही लेट गये. थोड़ी देरबाद सुरेश उठा और अपनी नज़रे रोमा की आँखों मे गाड़ते हुए बोला, "मेमसाहिब ये चुदाई मुझे जिंदगी भर याद रहेगी." रोमा ने भी कहा,"और नही चोदोगे मुझे." "नही मेमसाहिब, अब दूकान पर जाना होगा. नही तो सेठ को बोलना भारी पड़ेगा मुझे." इच्च्छा नही होते हुए भी सुरेश को विदा करने रोमा उठ खड़ी हुई. सुरेश खड़ा होकर अपने कपड़े पहने और रोमा को चूमता हुवा बाथरूम से बाहर निकल गया. मैं-डोर पर फिर बगैर कपड़ों मे खड़ी रोमा को अपनी बाहों मे समेत-ते हुए उसके होठों को चूमा, चुचियो को सहलाया, चूत को मसला. रोमा भी उसकी बाहों से अपने एक हाथ को फ्री कर पंत के उपर से ही उसके लंड को मसालने लगी. लंड झत्ट से खड़ा हो गया. खड़े हुए लंड ने रोमा के हाथों मे फुर्ती ला दी. और ज़ोर से मसालने लगी और बोली, "देखो इसे. इसको अभी नही जाना है." फिर नीचे बैठ कर उसके लंड को पंत की चैन खोल कर बाहर निकाल ली और चूसने लग गयी. लंड मुहन मे जाते ही उच्छल कूद मचाने लगा. अपनी पंत को नीचे खिसका कर रोमा को घोड़ी बना कर अपना लंड उसकी नाज़ुक चूत मे पेल दिया. रोमा की जान मे जान आई. उसकी चूत लंड खाने को ही उतावली थी और उसे लंड मिल गया. "ही, मेरे चोदु राजा, मे कब से अपनी चूत मे तुम्हारे लंड के धक्के खाने के लिए तड़प रही हूँ, और तुम दुकान का बहाना बना रहेथे. अगर एक बार ही हमे चुदाना होता तो मे क्यों तेरे घोड़े के लंड जैसे लंड से अपनी चूत फड़वति. अब ज़ोर ज़ोर से चोद मुझे." सुरेश ने अपने लंड से उसकी चूत की कस कस कर चुदाई चालू रखी. थोड़ी देर मे ही रोमा का पानी निकलना चालू हो गया. लेकिन सुरेश का लंड नही झाड़ा. तो रोमा ने उसके लंड को चूत से निकाल कर अपने मुहन मे ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी छूसा के बाद जब सुरेश बड़बड़ाने लगा, "आहह... चूसो मेरे लंड को.... आहह... और ज़ोर से ... अफ ... मेरे लंड का पानी निकालने वाला है.... चूसो... चूवसूओ....." तभी रोमा ने उसके लंड को मुहन से बाहर निकाल अपने हाथ से उसके लंड को पेलने लग गयी. सुरेश ने गहरी साँस लेते हुए अपना पानीरोमा के चेहरे और मुममे पर डालना शुरू कर दिया. जब पानी पूरी तरह से झाड़ गया तो एक दूसरे को चूमते हुए एक-दो मिनिट तक दोनो आपस मे लिपटे हुए खड़े रहे. फिर सुरेश कपड़े पहन कर चला गया. रोमा अब बहुत खुश थी. उसकी चूत की फिसर्ट क्लास चुदाई हुई थी. कपड़े पहन रूम मे सोने चली गयी. आँख खूली तो शाम हो चुकी थी. थोड़ी देर बाद घंटी बाजी. गाते खोला तो सामने लीना खड़ी थी. "आज हॉस्पिटल मे डॉक्टर ने किसिके भी रुकने से माना कर दिया है," लीना ने घुसते हुए कहा. "क्यों. जीजू भी नही जाएँगे वहाँ." "नही. जीजू वहाँ जाकर थोड़े लाते आएँगे. लेकिन तुम्हारे चेहरे पर सुस्ती क्यो च्छाई हुई है," लीना ने पूचछा. "नही ऐसी कोई बात नही है. ज़रा नींद लग गैट ही. अभी अभी उठी हून," रोमा ने जवाब दिया. फिर दोनो एक साथ नास्टा कर क ईक ही बेड पर लेट गये. बातों बातों मे ही रोमा ने सुबह वाला किस्सा प्लमबर का सुना दिया. लीना एक अर्थ- पूर्णा मुस्कराहट से रोमा को देखने लगी.
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07-01-2017, 11:28 AM,
#5
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई {पार्ट --3}

ऐसे तो लीना की पिच्छली रात अपने जीजू के साथ और आज सुबह ही रोमा की प्लमबर के साथ चुदाई हो चुकी थी लेकिन चूत का मज़ा देखो अभी बात करते-करते दोनो की चूत मे फिर से खाज शुरू हो चुकी थी. रोमा ने सुरेश प्लमबर के लवदे का पूरा फिगर अपनी बातों से रोमा को बताया. सुनते ही लीना के मुहन से सिसकारियाँ निकलनी चालू हो गयी. अपने हाथ से वो रोमा के बूब्स को हल्के हल्के सहला रही थी. रोमा के दिल और दीमग पर सुरेश द्वारा की गयी चुदाई छायि हुई थी. उसे अपने बूब्स पर लीना का हाथ फेरना अच्च्छा लग रहा था. लेते लेते रोमा ने अपनी आँखों को बूँद कर लिया और इस आनंद का खूब मज़ा ले रही थी. लीना की चेस्टाय बढ़ने लगी. उसने रोमा की अस्त- व्यस्त हुई नाइटी को निकाल फेंका. अपनी जीभ को उसके मुम्मो के पासलेजा कर उसे चाटने लगी. उसकी जीभ नीचे से उपर उसके संगमरमरी कबूतरो को हल्के हल्के चाट रही थी. भारी बूब्स को चाटने मे लीना को भी खूब मज़ा आ रहा था. "उफ़फ्फ़, छत ... रग़ाद रग़ाद कर छत," ऐसा कह कर रोमा ने अपने हाथ बढ़कर उसकी जाँघो पर फेरना चालू कर दिया. जाँघो पर हाथ फेरते ही लीना को गुदगुदी का एहसाश हुया. उसके बदन मे करंट दौड़ने लगा. अपनी दोनो जाँघो को उसने फेला दिया. जगह मिलते ही रोमा के हाथ लीना की जाँघो के और अंदर घुसने लगे. उसके हाथ किसी खास जगह को तलाश रहे दा. तोड़ा गीलापन उसके हाथ को महसूष हुया. उसे अपनी मंज़िल मिल गयी. अपनी अंगूलियों से लीना की चूत को सहलाने लगी. चूत पर अंगूलियों के च्छुटे ही लीना की जीभ की स्पीड रोमा के बूब्स को चाटने के लिए और बढ़ गयी. लीना के दंटो की हल्की-हल्की चुभन भी रोमा को महसूष हो रही थी. लेकिन यह चुभन पीड़ा देने की बजे ज़्यादा आनंद दे रही थी. रोमा ने अपनी एक अंगूली लीना की रूस से भीगी हुई चूत के अंदर पेल दी. अपनी अंगूली को वो लंड की जगह उपयोग मे ला रही थी. दोनो के मुहन से सिसकारियेयन निकल रही थी. अब दोनो एक दूसरे को अपनी बाहों मे लेकर अपने गरम जिस्म को आपस मे रगड़ना शुरू कर दिया. दोनो के बदन की रगड़ान से पुर कमरे का माहौल नशीला हो गया. दोनो को अब एक-एक लंड की ज़रूरत महसूष हो रही थी लेकिन मजबूरी मे दोनो और क्या कर सकती थी. दोनो एक दूसरे से छिपात कर एक दूसरे के मुममे को, चूत को सहला रही थी. फिर थोड़ी ही देर मे दोनो हाँफने लगी और निढाल हो कर बिस्तर पर लेट गयी.लेकिन ऐसे पड़े पड़े दोनो ही अपनी चूत की आग को और भड़कट्ी हुई देख सिसकारियाँ ले ले कर अपनी ही अंगूलिओं से चूत को छोड़ना चालू कर दिया. फिर आपस मे ही घूम कर एक दूसरे की चूत को चूसने लगी. जीभ लगते ही दोनो की सिसकारियाँ और बढ़ गयी. जहाँ रोमा सिसकारी मरते हुए सीख रही थी, "आह्ह...उफ्फ....देख कैसी चूत...ंए आग लगि..्ऐ....तु मेरी चूत को....उफ्फ्फ..ऽउर चत....येस्स...हत-ती जेया." वही लीना सिसकारी मरते हुए मादक आवाज़ मे चीख रही थी, "है! काया चीज़ बनाई है भगवान ने, चूसो चूसो, और ज़ोर से चूसो मेरी चूत को. और अंदर तक अपनी जीभ घुसेदो. है! मेरी चूत के दाने को भी चतो. बहुत मज़ा आ रहा है." दोनो मदहोश हो कर एक दूसरे की प्यास मिटाने मे लगी हुई थी. लेकिन प्यास जो थी वा बुझाने की जगह और बढ़ गयी. इसी समय रवि, उनका जीजू, घर मे हॉस्पिटल से आया और घर मे किसी को ना पाकर चौंक गया. तभी एक बेडरूम से सिसकारीओं की आवाज़े सुनाई दी. अंदर गया तो रूम का सीन देख कर उसकी आँखों मे चमक आ गयी. दोनो सालिया अपनी चूत की खाज मिटाने के लिए एक दूसरे के साथ गुटम-गूत हो कर अपनी-अपनी चूत चटवा रही थी. यह देख कर उसका लंड एक दूं से खड़ा हो गया. दोनो, रोमा और लीना बेख़बर हो कर एक दूसरे की चूत चाटने मे लगी हुई थी. रवि ने अपने कपड़े उतार कर अपने लंड को टोला. मानो लंड को समझा रहा था की आज रात को एक नही बुल्की दो- दो छूटो को पानी पिलाना है. आयेज बढ़कर उसने अपने लंड को लीना की चूत के पास लेजा कर खड़ा हो गया. रोमा तोड़ा चोणकी. मून ही मून सोचा की यह लंड कहाँ से आ गया. चेहरा उपर उठाया तो अपने जीजू को खड़े पाया. उसकी तो मून की मुराद पूरी हो गयी. उसने लपक कर लंड को अपने हाथो मे समेत लिया.मानो कोई दूसरा आ कर नही ले जाए या कोई दूसरा कब्जा नही कर ले. लंड को हाथो से सहलाती हुई अपनी जीभ लीना की चूत से हटा कर अब लंड को चाटने लगी. "क्या हुअ..हतो ना मेरी चूत को." कोई जवाब ना पाकर लीना ने अपनाचेहरा उपर उठा कर देखा की रोमा तो जीजू के लंड को छत रही है. नाराज़ होने की जगह उसके अंदर भी अब चूत की खाज मिटने का औजार मिलने की खुशी ही महसूष हो रही थी. लीना के चेहरा को देख रवि ने अपनी आँख मार कर उसके चूतड़ पर अपना हाथ रख दिया और लगा सहलाने. रोमा ने रवि के लंड को पूरा मुहन मे लेकर चूस चूस कर बहाल कर दिया. रवि अपने लंड को आयेज-पेच्चे कर चुस्वा रहा था मानो की यह रोमा का मुहन नही बुल्की उसकी चूत है. रवि के आनंद की कोई सीमा नही रही. अपने हाथो से लीना का चूतड़ कूस कर पकड़ वो मारे बेकाबू हो कर बड़बड़ा रहा था, ""वाउ, मज़ा आ रहा है. लेती है तुऽइस की मज़ा आ रहा है.. किसीने ऐसे चूसा नही मेरे लंड को पहले. मेरे लंड को जन्नत मिल गयी, आज...ले...उफ्फ..हूस मेरा लंड और चूस और ले ले...ंएरे लंड को पूरा मूह मे ले कर चूस."लेकिन जवाब दिया लीना ने दूसरे छ्होर से. वा रवि के लंड की चूसैई बड़े गौर से देख रही थी. उसने कहा, "मैने भी पहले ऐसा बेकाबू लंड नही देखा. पहली बार ऐसी चूसैई देख रही हून पर मज़ा आ रहा है इस बड़े लंड को चूस्टे देखकर मुझे. कितना मोटा और बड़ा है,.मेरे तो मूह मे पानी आ गया.." तभी रवि ने अपना लंड रोमा के मुहन से निकल कर लीना के मुहन मे पेल दिया और कहा, "ले मेरी लीना रानी, तू क्यों बाकी रहती है.चूस के मुझे पागल कर दे. है, वा जिब से कर, मूह मे ले और अंदर ले. पूरा खा इस बड़े लंड को." लीना को अब लंड चूसने मे बड़ा मज़ा आ रहा था. अपने हाथ से लंड को हीला-हीला कर चूस रही थी. कभी अपनी जीभ बहार निकल कर लंड के सुपरे और लंड की बॉल्स को छत रही थी तो कभी लंड को मुहन मे लेकर गपा-गॅप चूस रही थी. रोमा रवि के सामने आकर खड़ीहो गयी. रवि ने उसके कबूतरो को दबोच लिया. अपने हाथो से उन दोनो फड़फदते कबूतरो को मसालने लगा. मसालने के साथ ही रोमा के मुहन से सिसकारी निकल गयी. रवि ने अपना मुहन बढ़कर उसके मुम्मो को जीभ से चाटने लगा. वासना की आग मे जलते हुए उसके मुममे भारी हो चुके दा. उसके निपल्स कड़क होकर एकद्ूम से तन गये दा. निपल्स पर रवि जब अपना दाँत गादता तो रोमा की सिसकारी और बढ़ जाती. अब लीना ने लंड को मुहन से निकाल कर बेड पर चिट हो कर लेट गयी और रवि के लंड को अपनी चूत पर रगड़ने लगी. "जीजू, आओ. घुसाओ अपने लंड को. बड़ी बैचानी हो रही है मेरी चूत मे." "ले मेरी रानी. संभाल अपनी चूत को." इतना बोलकर अपने लंड का एकधक्का रवि ने दिया तो लंड सुर्र्रर से लीना की चूत मे घुस गया. लीना ख़ुसी से पागल हो गयी. रवि ने लगातार अपने धक्के देने चालू रखे. चूत भी धक्के खाकर लगातार पानी छ्चोड़ रही थी. तभी रोमा उठाकर लीना के मुहन पर बैठ गयी. पोज़िशन यह थी की लीना का मुहन रोमा की चूत पर और रोमा के मुममे रवि के मुहन मे और रवि का लंड लीना की चूत मे. बड़ा ही कामुक सीन था यह. तीनो बड़े मज़े से चूसैई और चुदाई मे लगे हुए दा. तभी रोमा ने अपने हाथ बढ़कर रवि का लंड अपने हाथ मे जाकड़ लिया. रवि जब भी धक्का मार रहा था तो लीना की चूत का दाना भी रोमा के हाथ से रग़ाद का रहा था. इसके कारण लीना का चुदाई का मज़ा डबल हो गया.लीना रवि को उसका रही थी, "छोड़ो मेरे राजा, खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाओ. मेरी चूत की खाज मितओ...उफ्फ्फ...ंएरे चोदु रज....होदो मुझे....जोर से चोदो....तुम्हरे लंड से मुझे रात भर चोदो....ऽअह्ह्ह....खूब चुदाई करो मेरि.....ओह्ह्ह्ह...ंएरे लुन्द...ंएरि चूत के दीवने....ंएरे रूस को पीने वले....ंएरे जिजु....होदो मुझे.....धक्के..... अह्ह्ह्ह...उछल-उच्छल कर...ंअरो धक्के मुझे...होदो....खज मिटाओ मेरी चूत की... मरो धक्के मरो..."रवि भी उसी हिसाब से जवाब दे रहा था, "ले मेरी रनि....ख मेरे....लुन्द को...ले..ऽउर ले... मेरे...लुन्द्द्द को....तुम्हरि चूत आज कितनी ज़्यादा जुवैसी हो गयी है....ले मेरी... चुड़दकड़ सालि....ले और ले....ख मेरे लंड के धक्के...्आऐ...हुद अपनी चूत को... ले खा... और खा... मेरे लंड के धक्के." रोमा उस चुदाई को बड़ी बेसब्री से देख रही थी. उसकी चूत बुरी तरह से पानी छ्चोड़ रही थी. वो भी लीना से चुस्वते चुस्वते बोलने लगी, "चूस मेरी चूत को....सालि.. छुड़वा छुड़वा कर अपनी चूत कि...खज तो मितलि....लेकिन मेरी... चूत...को चूसेगी कौन..हूस मेरी चूत को... लो जीजू... साली का और ज़ोर से धक्के मरो...फाद दो इसकी चूत....को...पेलो.. पेलो..ऽउर ज़ोर से पेलो.ऽप्ने लंड को....उफ्फ्फ्फ..ंएरे बूब्स... देखो.... दाँत ना गदओ....प्लीzzz... हन ऐसे...जीभ से चतो मेरे बूब्स को.... मेरे ... निपल्स को...हतो..." तभी लीना की सिसकारी बहुत ज़्यादा बढ़ गयी, "उफ़फ्फ़.... हाई हाई.... छोड़ो मुझे... उफ़फ्फ़... मेरी चूत... आह... मेरा पानी.... ओह दैया.... निकला मेरा पानी... मार धक्के मेरे राजा... और ज़ोर से.... आअहह... निकला मेरा पानी... हन... हन... निकला मेरा पनि..होद सेयेल ... चोद सेयेल.... चोद मुझे.... चोदते जाओ... चोदो... चोदो मुझे... यह लो मैं झाड़ गयी.... एस.... एस... झाड़ गयी मे.." रवि ने आकहरी धक्का लगाया और अपने मूसल लंड को लीना की चूत से निकाल कर रोमा को घोड़ी बनाकर उस पर सॉवॅर हो गया. एक झटके मे ही उसकी चूत मे अपना लंड पेल दिया. लीना को छोतदे चोद्ते उसका लंड तका नही था बुल्की उसकी चोदने की भूख बढ़ गयी थी. लीना साइड मे लेट कर अपनी उखड़ती सांसो को बराबर करने मे और रोमा और रवि की चुदाई देखने मे लग गयी. "अया ...हान्ं ...और ज़ोर्से चोदो.... इसी तरह से ...छोड़ते ... रहो ... हाइईइ दैयया ....... बहुत ग़ज़ब के छोड़ते हो ...जीजू .... चोदो और ज़ोर्से .... हाई रे दैया!" रोमा के मुहन से सिसकारी निकालने के साथ बेडरूम मे केवल चुदाई चुदाई हो रही थी. रवि भी अपने लंड से रोमा की चूत की चुदाई फुल स्पीड से चालू रखी. रोमा का मज़ा बढ़ता ही जेया रहा था, "इसको देखो ... कितना ज़ालिम लौदाहै तुम्हारा जीजू! हाइईइ ... कैसा अकड़ कर खड़ा है.... बड़ा मज़ा आ रहा है मुझे तुमसे छुड़वाने में डियर... ....ऊओह डियर तुम बहुत अच्च्छा चोद्ते हो....ऽआह्ह.....उउउह्ह..... ऊफ़फ्फ़.... डियर यूँही... हन डियर यूँही चोदो मुझे...बुस चोद्ते जाओ मुझे..ऽअब कुच्छ और नहीं चाहिए मुझे...ऽअज जी भर के चोदो मुझे...देअर ...हन डियर जूम कर छोडई करो मेरि...तुम बहुत अच्च्चे हो...बस यूँही छोडई करो मेरी... ऊऊहह ..... खूब चोदो मुझे..." रवि भी उसका जवाब देते हुए बोला, "ले साली, खा मेरे लंड को... देख कैसे साली... छुड़वा रही है... ले संभाल अपनी चूत को... उफ़फ्फ़..संभाल... कितनी नरम और कोमल है तुम दोनो की चूतेन...सल्लि..हुद...और..हुद..ऽइस लंड और चूत का संगम तुझे और कहीं नही मिलेगा... ले चुद्व...सालि...तुम दोनो को आज रात भर चोदुन्ग...ले खा मेरे लंड को....खूब चुद्वओ....उफ्फ्फ" "छोड़ डालो मुझे! मेरे लुन्द...ंउझे लूट लो.....ये बदन तुम्हारा है. आ! चढ़ जाओ मुझ पर मेरे जिस्म के मलिक, मेरी चूत च्चिन्न भिन्न कर दो. मेरी चूत चिर डालो. मेरे चूत के शारटज़... अपने मूसल,मोटे, लंबे और.... घधे जैसे लंड से! मेरी चूत.... के अंदर तकपेलो!.... मई और मेरी चूत केवल और केवल तुम्हारी है. आओ, मेरे राजा..... प्लीज़ मेरी चूत को ज़ोर ज़ोर से.... रग़ाद रगदकर.... पूरी तरह से पेलो अपने लंड से!" साथ ही उसका भी पानी निकलना शुरू हो गया. लेकिन रवि का लंड अभी भी झाड़ा नही था. रात भर दोनो को थोड़ी थोड़ी देर से छोड़ता रहा. जब भी उसका लंड झड़ने के करीब होता तो चुदाई रोक देता. उसे आज रात भर दोनो को छोड़ना जोत हा. सुबह जैसे ही हुई रवि ने दोनो सालियो को पलंग केनीचे बैठकर अपने लंड को हाथ से उनके उपर आयेज पीच्चे करने लगा."ऑश.... उउउहह.... अब मेरा लंड झदेगा.... लो संभलो मेरी धार को... मेरा अमृत निकल रहा है," कहता हुआ अपने लंड को दोनो के मुहन पर बारी बारी से ले गया और अपनी वीर्या की धार छ्चोड़ दी. रात भर का रुका हुवा माल ज़ोर की पिचकारी बन कर च्छुटा. दोनो सालिया हैरानी के साथ इतना ज़्यादा मखहान एक साथ निकलते हुए देख रही थी. रवि ने झड़ने के बाद अपना लंड बारी-बारी से दोनो मुहन मे तेल दिया. उसको पिचकारी मरने के बाद इस छूसा मे बड़ा ही मज़ा आया. थोड़ी देर बिस्तर पर लेटने के बाद दोनो सालिया लीना और रोमा एक पार्टी की फरमाइश कर बैठी. शाम की पार्टी फिक्स हुई. जगह के बारे मे बोला की मेरे दोस्त भी उस पार्टी मे आएँगे तो जगह दोपहर मे फाइनल करके बता दूँगा. फिर नहा कर ऑफीस मे निकल गया. लीना और रोमा रात भर की चुदाई के बाद तक चुकी थी. दोनो बिस्तर परएक दूसरे के गले लिपट कर सो गयी.
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07-01-2017, 11:28 AM,
#6
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई {पार्ट-- 4}

रवि ऑफीस पहुँच कर अपने दोस्तों को फोन करने लग गया. अतुल,सुरेश और बंशी उसके खास दोस्त थे. सबने उसे लड़के के जन्म होने कीबधाई दी. वैसे इन्न चारो मे खुला ख़ाता था. कई बार ग्रूप सेक्स कामज़ा ले चुके थे. रवि ने शाम की पार्टी के बारे मे बताया. तीनो नेही पार्टी की हां कर दी. जगह के लिए सुरेश पर छ्चोड़ दिया. सुरेशका इवेंट मॅनेज्मेंट का दानधा था. जिसकी वजह से उसे मालूम था कीकौनसी जगह अच्च्ची रहेगी. थोड़ी देर बाद सुरेश ने वापस फोनकिया और शाम की पार्टी के लिए बताया की क्लॅसिक क्लब ही अच्च्छारहेगा. अभी इन्न दीनो वहाँ पर एक इंग्लीश मेम आई हुई है औरअच्च्छा डॅन्स भी करती है. साथ ही एक स्पेशल शो भी होता है.

शाम को रवि क्लॅसिक क्लब के लिए रवाना हुवा और साथ मे थी दोनोसालियन लीना और रोमा. थोड़ी ही देर मे तीनो क्लब के गाते परपहुँच गये. 2-4 मिनिट के बाद अतुल और उसकी बीबी देवी भी पहुँचगये. सुरेश और बंशी की बिबीयन मैके गयी हुई थी. वो लोग अकेलेही आए. सब इकठ्ठा हो कर क्लब के अंदर चले गये.

क्लब बहुत ही ख़ास था. आम लोग उसमे नही जेया सकते दा. सुरेश काइवेंट मॅनेज्मेंट का बिज़्नेस होने के कारण उन्न लोगों को एंट्री मिलगयी. क्लब की ख़ास बात यह थी की इसमे हर तरह के क़ानूनी औरगैर-क़ानूनी धंधे चलते दा. पोलिटिकल और टीन नुंबरी लोग अपनीशाम और रात शराब, कबाब और शबाब के लिए यहाँ गुज़ारते थे.क्लब मे दो हॉल और आठ-डूस कमरे बने हुए दा. एक हॉल मे कब्रातेडॅन्स चलता था और दूसरे हॉल मे डॅन्स के साथ स्पेशल शो भीहोता था. हर हॉल मे सात-आठ टेबल्स का घेरा गोल मंच के टीनतरफ बना हुया था. एक हॉल मे 25-30 लोगों के बैठने की जगह थी.बीच के गोल स्टेज पर प्रोग्राम चलते थे और हॉल की लाइट केवलस्टेज पर ही गिरती थी. वेट्रेस सर्विस थी.

यह लोग 7 पर्सन्स होने के कारण 2 टेबल्स को जॉइंट कर दिया. इनकेबैठते ही 2 लेडी वेटर मेनू लेकर उनके पास पहुँची. दोनो कीड्रेससें ऐसी की उनको देख कर किसी भी मर्द की जवानी मे उबालआजाए. काफ़ी टाइट शॉर्ट ब्लाउस और शॉर्ट स्कर्ट. झुके तो सामने वालेको उसके कबूतर आधे से ज़्यादा दीखे और पिच्छेवाले को ट्रॅन्स्परेंटपनटी से उसकी चूत की झलक दीख जाए. चूतड़ तो झुकने के बादपीछे वाले को पूरा का पूरा ही दीखे. लेकिन अफ़सोस कोई हाथ नहीलगा सकता था उन्न वेट्रेस को. अगर किसीने ने गर्ल वेटर को छ्छूभी दिया तो वहाँ पर पाले हुए मुस्टंड बहार फेंकने मे कोई देरनही लगते थे. सिर्फ़ मन मसोस कर उनकी छलक्ति जवानी को देखोऔर अपने लंड को सहलाओ. वैसे किसी को अपने लंड की प्यास बुझानी होतो लड़कियाँ भी अवेलबल थी और रूम भी.

उन लोगो ने एक-एक पेग का ऑर्डर दिया और कुच्छ स्टारटर माँगाया. शोचालू होने मे अभी 5-7 मिनिट की देरी थी. रवि ने दोनो सालियों कापरिचय अपने दोस्तों से कराया. साथ ही अपने दोस्तों का परिचय अपनीसल्लियों को दिया.

सी शेप मे लगी टेबल मे रवि के बाद देवी. देवी के बाद बंशी.बंशी के बाद लीना. लीना के बाद अतुल. अतुल के बाद रोमा. रोमा केबाद सुरेश बैठा था. आपस मे हँसी मज़ाक चालू हो गये. सब एक सेएक सेक्सी और क्षकशकश जोक्स का मज़ा लेने लगे. बंशी ने इसकी शुरुआत की.उसने जाम की चुस्की लेते हुए कहा की एक बार लेफ्ट मुममे ने रिघ्तमुममे से कहा, 'यार, बड़ी मुसीबत है!' तो रिघ्त मुममे नेपूचछा, 'क्या हुआ?' लेफ्ट मुममे ने जवाब दिया, 'लाफद सला नीचे गलीमें होता है... पकड़े जाते हैं हम लोग!'

इतना सुन कर सब खिलखिलाकर हँसने लगे. तभी रवि ने अपना जोक्ससुनाया. एक रांड़ ने एक आदमी को कहा: 'दो सौ रुपी लूँगी, हिल हिलके दूँगी!'आदमी ने मोल भाव करते हुए कहा: 'सौ रुपी दूँगा मैं खुद ही हिललूँगा!'रांड़ ने तड़क कर जवाब दिया: 'साले गान्डू, सौ रुपी भी बचा लेऔर अपने हाथ से ही हिला ले!'

इतना सुन कर सब और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे. अब बारी थी सुरेश की.सुरेश ने भी रांड़ के उपर ही जोक्स सुनाया की एक बार एक साधु बाबाको बहुत तारक चढ़ती है. चले जाते हैं रेड लाइट एरिया मे.वहाँ की सबसे खूबसूरत रंडी को पकड़ के उसका काम लगा देते हैं.काम लगाने के बाद कपड़े पहन कर निकालने लगते हैं तो रंडी सेरहा नही जाता है. बोलती है, "बाबा पैसे?" साधु बाबा तुरंत कहतेहैं, "बेटी, तुमने मेरी इतनी सेवा की है अब तुमसे पैसे थोड़े हीलूँगा.

यह जोक सुन कर सबके पेट मे हंसते हंसते बाल पद गये. तभी डॅन्सशुरू हो गया. एक गोरी चित्ति इंग्लीश लड़की पुर कपड़ो के साथअकेली ही नाचने लगी. सभी का ध्यान उसकी तरफ गया. लड़की काबदन पूरा गड्राया हुवा और काफ़ी लचक डार्ट हा. अपने डॅन्स से सबकोमोहित कर रही थी. डॅन्स के बीच ही चारो मर्दो ने अपने लिए रिपीटशराब लाने का ऑर्डर दिया. वेट्रेस ऑर्डर लेते हुए झुकी और ऑर्डरनोट करने लगी. उसके बूब्स की गर्मी सभी ने महसूस की. उसके मीडियमसाइज़ के बूब्स को देख कर चारो के मुहन मे पानी आ रहा था. ऑर्डरलेने के बाद जब पलटी तो जान-बूझकर ऑर्डर बुक्स को नीचे गिरादिया. फिर घूम कर मुस्कराती हुई बोली "ऑश... सॉरी." वापस घूमकर नीचे झुक कर ऑर्डर बुक को उथली. उसका तो उठना था लेकिन इसउठाने के बीच अपने पीच्चे कयामत ढा चुकी थी. उसके जाते हीदेवी बोली," देखा! ग्राहक कैसे पटए जाते हैं." सब के सब हंसपड़े.

तीनो जवानिया धीरे धीरे पी रही थी. थोड़ी देर बाद सुरेश देवीसे कहता है, "भाभी आप भी कोई जोक्स सूनाओ.'

देवी भी स्टार्ट हो जाती है. उसने सुनना चालू किया की दो गर्ल्स नंगीहोकर जिम के स्टीम-रूम मे बैठी हुई थी. पहली लड़की दूसरी कीसाफा छत चूत को देखकर पूचछती है, 'तुम्हारे झाँटे क्यो नहीहै?" दूसरी जवाब देती है, "क्या तुमने किसी बिज़ी सड़क पर कभीघास उगते हुए देखा है?"

सॉफ-सॉफ चूत लंड का नाम ले कर जब जोक्स शुरू हो गये तो आपसमे उन्न सब की रही सही झिझक भी ख़तम हो गयी. आपस मे अब एक सेएक जोक्स शुना रहे दा. इधर नशा सब मे बढ़ रहा था और उधरडॅन्सर के कपड़े कूम होते जेया रहे दा. उसके भारी-भारी कबूतर हॉलमे बैठे सभी के होश उड़ा रहे दा. उच्छलते हुए बूब्स कयामत ढारहे दा. उसके बदन पर केवल झीनीसी नाइटी और पनटी थी. सबइंतज़ार कर रहे दा कब वो अपने बाकी के कपड़े उतार अपने जिस्म कीझलक दीखए. तभी देवी ने सुरेश को पूच्छ लिया, "वा क्याटकटकी लगा के देख रहे हो. अभी तो बहुत नाटक करेगी."

जवाब बंशी ने दिया, "आरे भाभी, जब बीबी मैके गयी हो तो सामनेजो भी मिले उसे गवाना नही चाईए."

रवि ने अपनी बाहों से देवी को अपनी और खिसखते हुए बोला, "मैके हीनही बल्कि नौवे महीने मे भी हो तभी भी."

लीना बोली, "भले ही वो अकेले हॉस्पिटल मे लेयिटी हो तब भी."

तभी डॅन्सर ने अपनी पनटी को नीचे खिसका दिया. हालाँकि उसकी चूतनाइटी होने की वजह से सॉफ नही दिख रही थी. लेकिन नाचने केकारण उसकी झलक ज़रूर दिखाई पद जाती थी. एक-दो स्टेप्स के बादअपनी पनटी को अपने पैरो से हवा मे उच्छल दिया. चारो की साँसे उपरनीचे हो रही थी. फिर उल्टी तरफ मुहन करके डॅन्सर ने अपनी नाइटीउपर उठाकर अपने बदन से निकाल दी. सब के सामने उसके चिकने-चिकनेगोरे-गोरे चूतड़ उच्छल-कूद कर रहे दा. उसके भारी चूतड़ सबकेमुहन मे लार पैदा कर रही थी. बंशी के मुहन से "उूउउफफफफफफ्फ़"निकल गयी.

रोमा ने आँख मरते हुए पूचछा, "बड़ी आग लग रही है क्या?"

बंशी,"आग कहाँ? यहाँ तो ज्वालामुखी उबाल रहा है."

देविन ए मुस्करा कर कहा, "चिंता मत करो. अब यह लावा भी आज रातको निकल देंगे."

तभी डॅन्सर ने अपना चेहरा घूमया और अपने बूब्स और चूत कीझलक दिखती हुई मंच से अंदर चली गयी. सभी उसे तरसतीनज़रों से जाते हुए देख रहे दा. अतुल तो अभी भी उसके सपने मेखोया हुया था. लीना बोल पड़ी, "बीबी अगर मैके नही भी गयी हो तोभी क्या? माल दिखना माँगता है."

अतुल गहरी स्वास छ्चोड़ते हुए बोला,"अफ क्या जवानी थी." फिर उनमेवापस हँसी मज़ाक का दौर चालू हो गया. सभी मर्द लोग 4-4 पेग पीचुके दा जबकि तीनो लेडी 2-2 पेग पी चुकी थी. नशा सबके दीमगपर काफ़ी चढ़ चुका था.
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07-01-2017, 11:28 AM,
#7
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
अतुल ने इस बार एक जोक सुनाया, एक राइस औरत एक होटेल मे काफ़ी दारूचढ़ा लेती है. उसे होश ही नही रहता. सुबह जब उसे होश आता हैतो बिस्तर पर वो अपने आप को नंगी लेती हुई पति है. तभी होटेलका मॅनेजर उसके रूम मे आता है.वो औरत मॅनेजर से पूचछती है, "मैं इस रूम मे कैसे?"मॅनेजर जवाब देता है, "रात को आपको होश नही रहा तो आपको मे खुदइस रूम मे ले आया."औरत पूचछती है, "और मेरे कपड़े?"मॅनेजर वापस जवाब देता है, "आपको लाते लाते आपके कपड़े पूरे फॅटगये तो मैने उनको निकाल फेंका."औरत पूचछती है, "ठीक है. लेकिन मेरा अंडरवेर?"मॅनेजर भोलेपन से जवाब देता है, "वो क्या है की मैने सोचा आपकेउंदरवाएर का एलास्टिक आपका खून का सर्क्युलेशन रोक देगा, तो मैने उसेनिकाल दिया."वो राइस औरत भी उसके भोलेपन को देखकर पूचछा," वा क्या रातथी! ज़रूर मैं टाइट हो गयी हूँगी."मॅनेजर ने उसी भोलेपन से जवाब दिया, "जी नही, सिर्फ़ पहली बार हीटाइट थी."

मतलब समझते ही सबकी हँसी छ्छूट गयी. लीना ने कहा, "सालामॅनेजर, रात भर लगा रहा होगा."

तभी स्टेज पर वही गोरी हसीना वापस आई. अबकी बार ड्रेस चेंजकिए हुई थी. एस बार की ड्रेस ज़्यादा कयामत ढा रही थी. झीनीशॉर्ट ड्रेस जिसके सामने से च्चती के नीचे तक बटन खुले हुएजिससे उसकी दोनो गोरी-गोरी गोलाइयाँ बीच से एकद्ूम सॉफ दिख रही थी.ड्रेस घुटनो से काफ़ी उपर थी. उसकी झंघे सॉफ सॉफ दीखाई पदरही थी. स्टेज पर आकर वो नाचने लगी. बाल खाती कमर, नीचेझुकने का अंदाज़ और लटके-झटके ने हॉल मे बैठे सभी मर्दो कोझुलसा दिया. 2-4 मिनिट के बाद स्टेज पर एक कला हबसी और एक गोरापहलवान आकर उस गोरी हसीना के साथ नाचने लगे. दोनो के बदनपर केवल हाफ चड्डी ही थी.

रोमा के मुहन से दोनो को देखकर "आअहह" निकल गयी. उसकी नज़रेंहबसी और पहलवान के चमकीली हाफ चड्डी पर टिकी हुई थी. यहीहाल देवी और लीना का भी था. चड्डी आयेज से तोधी उभरी हुई थी,जिसके अंदर मोटा मोटा सा कुच्छ लग रहा था. रवि, सुरेश, अतुल औरबंशी की नज़रें गोरी हसीना के कपड़े को चीरती हुई उसकी गोरी गोरीजालिम जवानी को भेद रही थी.

हबसी और गोरा पहलवान उस गोरी हसीना को अपने बीच ले कर अपनेबदन से उसके बदन को रग़ाद रहे दा. हबसी आयेज से लगा हुवा थाऔर गोरा पहलवान पीछे से लगा हुवा था. तीनो के जिस्म आपस मेटकरा रहे दा. तभी गोरी हसीना ने नीचे लेट कर अपनी दोनो टाँगेफैला दी. नीचे कोई पनटी नही थी. उसकी चूत हॉल मे मौजूद हरआदमी को दीखाई दे दी. काईओं के मुहन से "उउउफफफ्फ़" निकल गयी. कलाहबसी उसके सर की तरफ झुक कर उसके दोनो मुममे के उपर, जो अभी तकझीनी ड्रेस से ढके हुए दा, अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया. गोरापहलवान खड़ा खड़ा देख रहा था. हबसी का हाथ धीरे-धीरेनीचे से उपर उसके मुममे को सहलाता हुआ उसके गाल को च्छुकर हवा मेचला जाता. हसीना मस्त हो लेती हुई अपने दोनो पैरो को आपस मेमिलती और फैला देती. इसतरह चूत खुलती और बूँद हो जाती. उनकोदेख रहे सभी के लंड उत्तेजित हो कर अंदर ही अंदर उबाल खा रहेदा. साथ ही वहाँ बैठी तीनो जवनीओन की छूटेन भी गीली हो चुकीथी.

तभी गोरा पहलवान अपना हाथ बढ़कर गोरी हसीना के दोनो पैरो कोपकड़कर अपने नज़दीक खींच लिया. हसीना के पैर गोरे पहलवान केकमर के इर्द-गिर्द लिपट गये. अब उसकी चूत उसके अंडरवेर के सामनेवाले हिस्से से जाकर चिपक गयी. गोरा पहलवान उसको अपने पास औरकींच कर उसकी चूत को अपने अंडरवेर के साथ और ज़्यादा छिपतालिया. काले हबसी ने उसके दोनो हाथ को पकड़ कर अपनी कमर के इर्द-गिर्द लप्पेट लिया. अपने एक हाथ से उसके कमर के नीचे सहारा देदिया. दोनो तरफ खंबा बन कर खड़े हो गये और बीच मे जालिमहसीना झूला झूल रही थी. कला हबसी उसकी कमर मे हाथ डालकरउसको हल्का हल्का उपर नीचे झूला रहा था जिससे हसीना की चूतगोरे पहलवान के अंडरवेर से रग़ाद खा रही थी. गोरे पहलवान कालंड अंडरवेर के अंदर पूरा खड़ा हो चुका था. उसके लंड के साइज़की झलक साइड से सबको महसूष हो रही थी.

फिर गोरी हसीना ने अपना सर, जो की काले हबसी की कमर से चिपकाहुआ था, तोड़ा नीचे कर उसके लंड को अंडरवेर के उपर से चाटनेलगी. अपनी जीभ बहार निकल कर उसके लंड को छत रही थी. हॉल मेयह सीन देख कर एक-दो सीटियाँ बाज गयी. काले हबसी का लंड उसकीचटाई से अंडरवेर के अंदर उठ खड़ा हुया. उसके लंड का सुपरा उसकेअंडरवेर से बहार आने को उतावला था. बार-बार अंदर पड़ा हुयाउसका लंड झटका दे रहा था. यह चटाई और रगदाई इतनी जबरदस्तथी की तबले पर बैठे लोगों की हालत खराब होने लगी. सबके मुहनसे सिसकारियाँ निकल रही थी.

चटाई और रगदाई को देख कर तीनो हसीना का भी जी मचलनेलगा. नाश एके साथ वासना का उफान भी चढ़ने लगा. देवी ने अपनीदोनो टाँगे दोनो तरफ बढ़ा दी. एक तंग रवि की तंग से टकरा रहीथी और दूसरी तंग बंशी की तंग से पेच लड़ा रही थी. लीना कीझंघो पर अतुल का हाथ लहरा रहा था. वहीं रोमा की गर्दन मे हाथडाल कर सुरेश अपनी अंगूलियों से उसके गाल को सहलाने लगा. सभीआँखो से उस चटाई का मज़ा ले रहे दा और हाथो और टॅंगो से अपनीअपनी रागड़ाई का मज़ा ले रहे दा.

तभी गरम साँसे लेती हुई देवी ने कहा, "यह दोनो को एक साथ लेसकेगी."

जवाब उसके हज़्बेंड अतुल ने दिया, "काफ़ी खैइली खाई लगती है. इन दोको तो आराम से संभाल लेगी."

रवि अपनी तंग से देवी की तंग को सहलाता हुआ बोला,"तो भी दोनो कालंड छ्होटा-मोटा नही है."

बंशी लीना की जाँघो से खेलता रवि के समर्थन मे बोला, "अरे,इनके लंड को खाने के लिए कलेजा भी चाहिए."

लीना बोली, "चलो बताओ, इकनके लंड की क्या साइज़ होगी?"

रोमा बोली, "मेरे अंदाज से गोरे वाले की 10" से कम नही और काले वालेकी 12" से कम नही."

देवी बोली, "साइज़ जो भी हो, गोरे वाले का लंड ज़्यादा तगड़ा होगा."

रवि बोला, "अभी मालूम चल जाएगा की किसका कितना है."

अतुल बोला, "लेकिन कुच्छ भी हो. यह चुदाई देखने लायक होगी. वैसेदेवी तुम इतने बड़े और मोटे दोनो लंड को एक साथ खा सकती हो?"

देवी बोली, "अर्रे, पागल हुए हो क्या? ऐसे दोनो एक साथ खा कर मुझेतो हॉस्पिटल मे रह कर अपनी चूत की सिलाई करवानी पड़ेगी."

अतुल बोला, "लेकिन लास्ट टाइम जब हम सब फ्रेंड्स के साथ मे थी औरमैं और बंशी तेरे साथ लगे हुए दा तब तो तुम कह रही थी मुझेऔर लंड चाहिए."

देवी बोली, "तब की बात कुच्छ और थी."

बंशी बोला, "अर्रे भाई, जब तक दूर है तब तक नही. जब पास मे होया अंदर हो तो कूम ही लगता है."

तभी गोरी हसीना ने अपनी टाँगे गोरे पहलवान से च्छुदा कर औरपलट कर काले हबसी का अंडरवेर नीचे निकल दिया. हबसी काकरीबन 11" लूंबा और 4" मोटा लंड तन-ताना-तन कर उसके मुहन केसामने आगेया. उसका लंड काफ़ी मजबूत और मूसल था. तीनो छूटों केमुहन से सिसकारी निकल गयी.

लीना उसके लंड को देखकर बोली, "हाअए... कितना मुस्टंडा लंड है.अगर कोई कुवारि इससे छुड़वा ले तो मार ही जाएगी."

गोरी हसीना ने वक्त जया ना करते हुए अपनी जीभ निकल कर कालेहुबसी के लंड के सुपरे को चाटने लगी. गोरा पहलवान अपने हाथबढ़कर हसीना की ड्रेस को फाड़ कर अलग फेंक दिया और आयेजबढ़कर उसकी चूत को चाटने लगा. कला हबसी घुटने के बाल बैठाअपना लंड चटवा रहा था और गोरी हसीना स्टेज पर टाँगे फैला करलेती-लेती काले मुस्टंड लंड को चाट रही थी. साथ ही गोरा पहलवानज़मीन पर लेता लेता गोरी हसीना की चूत को छत रहा था.

अतुल यह देखते हुए लीना की जाँघो पर अपनी हथेली की रगदाई औरतेज कर दी. लीना के मुहन से सिसकारी निकालने लगी. यहॉ हाल बाकीदोनो का भी था.

गोरी हसीना ने अपनी जीभ से उसके लंड को छत-छत कर एकद्ूम सेफुल्ला दिया. फिर गुप-से लंड को मुहन मे डाल लिया. अपने मुहन को हिला-हिला कर उसके लंड को चूस रही थी. हबसी ने अपने हाथ बढ़करउसके डोलाते हुए मस्त मुममे को जाकड़ लिया. अपनी हथेली से उसको हॉर्नके जैसे दबाने लगा. उसके गोरे-गोरे मुममे दबाने से धीरे-धीरेगुलाबी रंगत लेने लगे. हसीना उसके लंड को मुहन मे कभी पूराडालती तो कभी आधा डालती. उसका थूक लंड के सुपरे से सरकता हुवाउसके अंगूरो पर आरहा था.

देवी यह देखकर बोली, "देखो कैसे गॅप-गॅप करती चूस रही है.लंड कितना भी मोटा और तगड़ा हो, मुहन से चूसैई बड़े आराम से होजाती है."

रवि देवी की टॅंगो मे अपनी टॅंगो को उलझाते हुए बोला, "मुहन औरचूत कैसे भी लंड फिट ही बैठते है."

गोरा पहलवान उसकी जुवैसी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. अपनीजीभ के नुकीले हिस्से से उसकी चूत के दाने को च्छेद रहा था. चूतका रस बराबर निकल रहा था. अपनी जीभ को दाने पर रगड़ने केसाथ उसके अंदर भी गश्ड रहा था. फिर गोरा पहलवान उठा औरअपने अंडरवेर को निकाल फेंका. उसका लंड लॅप-लापता हुआ बहारउच्छल कर निकला. लंड था बड़ा ही तगड़ा. काले हबसी से लूंबा ज़्यादाऔर तोड़ा सा ही छोरा कम था. लेकिन अच्च्ची अच्च्ची चूत का कूस-बालनिकल दे ऐसा लंड था उसका.

रोमा को उसके लंड को देखकर मज़ा आगेया. उसे कल वाले प्लमबर कालंड याद आगेया. उसके मुहन से निकल पड़ा, "ऐसे लंड से इस चुदाई कोदेखने का मज़ा बहुत आएगा."
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07-01-2017, 11:29 AM,
#8
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
सुरेश उसके गालों से खेलते हुए बोला, "ऐसी चुदाई और ऐसे पास-पास बैठने का मज़ा कुच्छ और ही है."

रवि बनावटी गुस्से के साथ बोला, "मेरी साली से दूर रहो."

सुरेश ने पलट कर कहा, "तुम्हारी साली है तो अब यह हमारी भीसाली भी हो गयी."

सब एक साथ हंस कर वापस शो को देखने लगे.

अपने लंड को हाथ मे लेकर गोरा पहलवान अपनी चाँदी को तोड़ा आगेपिच्चे कर अपने लंड को हिलाया फिर गोरी हसीना के पेट पर हाथरखकर उसे डॉग्गी स्टाइल मे कर दिया. अब हसीना की चूत उसके लंड केएकद्ूम सामने थी. उसने अपने लंड को उसकी चूत से जा सताया और चूतके जूस से अपने लंड को तोड़ा चिकना किया. फिर गुपप्प से अपने लंडके सुपरे को उसकी चूत मे तेल दिया. लंड का घुसना था और गोरी केमुहन से हबसी का लंड निकल गया. खाली मुहन से एक बड़ी सिसकारीनिकली. "एस्स.... "

फिर गोरे पहलवान ने अपने लंड को पूरा का पूरा गोरी हसीना कीरसीली चूत मे पेल दिया. अपने धक्को की स्पीड उसने स्लो रखी. गोरीहसीना अपने मुहन मे हबसी के लंड को बड़े मादक ढंग से चूस रहीथी. कभी अपने दंटो के बीच ले कर, कभी जीभ पूरी बहार निकलकर लंड को छत-छत कर हॉल मे बैठे दर्शको को दीखा रही थी.

थोड़ी देर बाद गोरा पहलवान ज़मीन पर चिट लेट गया. गोरी हसीनाने अपने मुहन से उसके लंड को चूसा और फिर उसके लंड को अपनी चूतमे डाल कर उसपर सॉवॅर हो गयी. कला हबसी अपने लंड को हाथ मेलेकर खड़ा हो गया और दर्शको के सामने अपने हाथ से हिला रहा था.हसीना उच्छल-उच्छल कर अपनी चूत को छुड़वा रही थी. उसकी चूतका दाना उसकी लंड की जड़ से रग़ाद खा रहा था. इसके कारण गोरीहसीना बहुत ही ज़्यादा मस्त हो गयी. उसके मुहन से सिसकारी निकालनेलगी, ""गोद, ई आम रियली हॉट. युवर कॉक इस सो हार्ड. युवर बॉल्स अरे सोटाइट. योउ'वे मेड मी पुसी सो, सो वेट!"

गोरा पहलवान बड़े आराम से चिट लेता हुवा हसीना को चुड़वते हुएदेख रहा था. अपने हाथ से उसके मुममे को सहलाता हुवा उसके निपल कोखींच रहा था. अपनी हथेली से उसके बूब्स को दबाता और छ्चोड़देता. उच्छलते हुए उसके बूब्स कयामत ढा रहे दा. गोरी हसीनाचुदाई मे मस्त हो कर ज़ोर ज़ोर से उच्छल उच्छल कर छुड़वा रही थी.साथ ही उसकी सिसकारियाँ भी बढ़ती जा रही थी, ""ऑश, तट फील्स सोगुड! ऑश एस! फक -- उन्ह -- फक मे! ऑश गोद एस! फक मेहार्ड, बेबी! एस! दो इट! ओह एस! एस! ऑश गोद एस! ओह, ई थिंकयोउ हॅव दा बिग्गेस्ट, स्वीटेस्ट कॉक इन दा होल वर्ल्ड!"

तभी कला हबसी अपना हाथ उसके उच्छल रहे चूतड़ पर फेरना लगा.अपने हाथ से उसके गोल गोल नितंब पर थपथपा रहा था. फिर अपनी एकअंगूली उसके गांद के च्छेद के पास लेजा कर उसे कुरेदने लगा. गांदपर अंगूली के आते ही गोरी हसीना ज़ोर से सिसकारी लेते हुएबोली, "ओह फक, तट फील्स सो गुड! युवर फिंगर इन मी आस फील्स सोफक्किंग फॅंटॅस्टिक! फक मे इन मी आस. ई वॉंट युवर कॉक उप मी आस!गिव इट तो मे नाउ! एस, एस, ई वॉंट तट बिग फक्किंग कॉक; फक मीआस होल वित युवर बिग कॉक!"

कला हबसी पास पड़े चड्डी की जेब मे से एक क्रीम निकल कर अपने लंडपर लगा लिया. स्टेज पर उसका लंड चमक उठा. फिर अपने लंड केसुपरे को उसकी गांद के च्छेद पर टीका दिया. "टके इट बेबी," कहतेहुए अपने लंड को गांद मे दिया. गोरी हसीना "उूुउउइइ" कहते हुएउसके लंड का गांद मे स्वागत करने लगी. लंड तोड़ा ही अंदर गयाथा. उसे पूरा बहार नही निकलते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा. लंडआधा उसकी गांद मे चला गया.

"फक मे... स्क्रू मे... रिप मे! गॉड्डॅम योउ मोतेरफुक्क्िंग बॅस्टर्ड्स...बुल मे! राम मे! टियर... म्य..ऽस्स... अपार्ट!" यह कहकर गोरी हसीनाकाले हबसी को अपनी गांद ज़ोर-ज़ोर से मरने के लिए कहने लगी. कलाहबसी अपने चूतड़ उठा-उठा कर अपना लंड उसकी गांद मे पेल रहा था.गोरा पहलवान अपना लंड उसकी चूत मे होल-होल अंदर बहार करतेहुए नीचे चिट लेता हुवा था. उसके बदन पर 2-2 जिस्म का बोझ थालेकिन परवाह किसे थी.

काले हबसी ने गोरी हसीना की गांद की अच्च्ची धुनाई करने के बादअपने लंड को बहार निकल लिया. वा ज़ोर ज़ोर से हंप रहा था. ऐसा लगरहा था की अगर वा थोड़ी देर और अपने लंड को उसकी गांद मे रखतातो लंड का पानी निकल जाता.

गोरी हसीना को कोई परवाह नही थी. गोरे पहलवान ने पोज़िशनबदलते हुए अब गोरी हसीना को चिट लेता दिया और अपने लंड कोसुर्र्रर-से उसकी चूत मे पेल दिया. फिर चालू हुई तूफान मैल कीस्पीड. अपने चूतड़ को ज़ोर से उठता और उसी स्पीड मे वापस नीचे लेआता. उसका लंड दान-दान करता बहार आता और दान-दान करता अंदरउसकी चूत मे चला जाता. उसकी जोरदार चुदाई ने गोरी हसीना कीभूख को और बढ़ा दिया. ज़ोर ज़ोर से सिसकारी लेते हुए उसने पुरहॉल को गूंजा दिया, ""ऊवू, इट'स सूऊ गुड! ओह! फक! ओह! फक!डॉन'त स्टॉप! डॉन'त स्टॉप! ओह एस, फक मे, फक मे! ई लोवे युवर जाइयंटकॉक इनसाइड मे. ओह! गोद! इट फील्स सो गुड! राम इट इंटो मी कंटहार्डर! ओह फक मे, फिल मे! ओह गोद! युवर थिक कॉक फील्स सो बिग!ओह! मी गोद! ई कॅन फील युवर कोकख़हेाद रब्बिंग ओं दा वॉल्स ऑफ मी कंट!ई लोवे युवर कॉक. प्लीज़ फक मे मोरे."

फिर गोरे पहलवान की कमर को जाकड़ लिया. खुद गोरे पहलवान केधक्के का जवाब अपने धक्के से देने लगी. उसका पानी निकल रहाथा. "ई'एम्म्म कुमिंगगगगगग... " यह कहकर अपनी अनंखे बंद बंद करकेअपनी टाँगे उसकी कमर पर लप्पेट ली और उसकी कमर के साथ झूलनेलगी.

थोड़ी देर बाद गोरी हसीना ने एक-एक करके गोरे पहलवान और कालेहबसी के लंड को मुहन से चूसने लगी. एक को चूसाती तथा दूसरेके लंड को हाथ से हिलती जाती. गोरे पहलवान के लंड का पानी पहलेआया. "एसस्स... तट'स रिघ्त, बेबी... एआट मी कॉक!" कहकर अपना लंडहसीना के मुहन से बहार निकाला और अपना पानी उसके बूब्स पर छ्चोड़दिया. उसका फव्वारा ज़ोर से निकला और उसके दोनो बूब्स को अपने गरम-गरम वीर्या से गीला कर दिया.

गोरी हसीना ने अपने मुहन मे गोरे पहलवान के लंड को लेकर उसकीआख़िरी बूँद को चूस लिया. फिर काले हबसी के लंड को अपने मुहन मेले लिया. मुहन मे लेने की देर ही थी. कला हबसी "यॅ, टके इट ऑल,"कहकर अपनी गरमा-गरम पिचकारी उसके मुहन, गॉल, और उसके बॉल परछ्चोड़ दी. पिचकारी इतनी लंबी थी की उसकी धार 5-6 फीट दूर स्टेजपर जा कर गिरी. पूरा रूस निकालने के बाद काले मोटे लंड को मुहन मेलेकर हबसी को और मज़ा दे दिया. काले हबसी ने उसको गौड़ मे उठालिया. गोरी हसीना उसकी गर्दन मे हाथ डाल कर झूल ली. फिर तीनोहॉल मे बैठे दर्शको को फ्लाइयिंग किस देते हुए अंदर चले गये.

पूरा शो जब ख़तम हुवा तो सबकी हालत खराब हो चुकी थी. सबकोवासना की आग जला रही थी. अगर हॉल नही होता तो अभी तक सब जानएक दूसरे के साथ लग जाते. बाहर आकर सभी खड़े हो गये. सुरेशबोला, "अब क्या प्रोग्राम?"

रवि ने कहा, "चलो मेरे घर चलो. वहीं आराम से मस्ती करेंगे."

सुरेश ने कहा, "नही यार मैं नही आ सकूँगा. कल मुझे एकपैंटिंग की प्रदर्शिनी करवानी है."

लीना, जो इसी काम से अपने जीजा के घर आई थी, ने पूचछा, "कैसीप्रदर्शिनी?"

सुरेश ने बताया, "नये टॅलेंटेड कलाकारो की है."

रवि बोला, "आरे यार, लीना भी बहुत अच्च्ची पेंटर है. तुम तोड़ाउसे गाइड कर दो."सुरेश बोला, "ठीक है. सुबह सात बजे मेरे घर पर लेकर आजना.फिर लीना को लेकर मैं इसे वहाँ ले कर चला जाऊँगा."

रवि ने कहा, "हमारे साथ रहेगी तो कल शाम को सात बजे हीआएगी. ऐसा का राइज़ अभी साथ ले जा."

सुरेश कहा, "कोई बात नही. चलो मेरी मल्लिका, लीना डार्लिंग."

बंशी ने कहा, "हॉल मे बैठा था तब तक रोमा अब लीना."

सुरेश ने हंसते हुए कहा, "भाई हमे भी रात गुजारनी है."

अतुल बोला, "ज़्यादा पैंटिंग नही करना रात भर. रात भर कहीं अपनीपिछपरी से रंग भरते रहे तो सुबह हो गया काम."

ऐसा कहके सब हंसते हुए बीड़ा हुए. रवि, रोमा, देवी, अतुल औरबंशी एक साथ चल पड़े और लीना सुरेश के साथ निकल गयी.

एंड ऑफ दा पार्ट --4
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07-01-2017, 11:29 AM,
#9
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई {पार्ट --5 फाइनल}

रवि, रोमा, देवी, अतुल और बंशी क्लब से सीधे रवि के घर परपहुँच गये. सभी नशे मे झूम रहे थे. घर पर पहुँचते हीरवि, अतुल और बंशी सोफे पर बैठ गये. म्यूज़िक चालू कर दिया.

रोमा बोली, "मैं और देवी कपड़े चेंज करके आते हैं. तुम लोगचेंज नही करोगे."

रवि ने जवाब दिया, "हमे तो रात मे कपड़े उतारने की आदत है कपड़ेपहनने की नही."

देवी ने जवाब दिया, "हां तुम लोगो को उतारने की है लेकिन हमेउतरवाने की. इसीलिए हम लोग चेंज करके आते हैं.

बंशी ने रिक्वेस्ट की, "भाभी वापस आते समय ग्लास और पानी लेकरआना. रवि विस्की की बॉटल किधर है? निकाल उसको."

देवी और रोमा बेडरूम मे कपड़े चेंज करने चली गयी और रवि नेविस्की की बॉटल अंदर कुपकोआर्ड से निकल ली. तीनो म्यूज़िक सुनते हुएदोनो का इंतज़ार करने लगे. रोमा ने अपनी जीजी रीमा की अलमारी खोलकर 7-8 नाइटी बहार निकाल देवी की और उकचल कर कहा, "लो पसंदकर लो कोई एक."

देवी ने एक नाइटी निकल ली और दोनो कपड़े चेंज करने लगी. नाइटीरवि की अपनी फॅक्टरी से लाई हुई एक से एक सेक्सी थी. जिस्म धकता कूमदिखता ज़्यादा था. देखने वाले मर्द की साँस उपर की उपर और नीचेकी नीचे रह जाए ऐसी निघतियाँ थी वो. जब दोनो नाइटी पहनकरग्लास और पानी साथ मे लेकर हॉल मे पहुँची तो बंशी ने सिटीबजकर उनका स्वागत किया. देवी काले रंग की टू-पीस नाइटी पहनेहुए थी. उसके कबूतर नाइटी मे फँसे हुए फड़फदा रहे थे. उसकीझंघे मलाई क्रीम की तरह चमक रही थी. रोमा ने स्कर्ट-नुमानाइटी पहना और उसका बॅक पूरा का पूरा खुला था. फीचे से उसकेकेवल चूतड़ का आधा हिस्सा ही नाइटी से दाखे हुवा था.

रोमा ने 5 ग्लास मे विस्की और पानी डाल कर सर्व करना चालू किया.पहले देवी, रवि और बंशी जो एक साथ बैठे हुए थे उनको दिया.रवि और बंशी सोफे पर जबकि देवी उनके पास सोफे के नीचे बैठीहुई थी. देवी का पति अतुल अलग सोफे पर अकेला बैठा हुया था.तीनो को सर्व करने के बाद रोमा अतुल को एक ग्लास सर्व की और लास्टग्लास अपने हाथ मे ले ली.

"क्या सर्व कर रही हो? अर्रे ले लेंगे हम लोग. आओ तुम यहाँ बैठो,"कहकर अतुल ने रोमा को झटके से अपनी गौड़ मे खींच लिया. रोमाझटके की वजह से सीधे उसकी झंघो के उपर जाकर बैठ गयी. दोनोएक दूसरे की आँखो मे देखते रहे और ग्लास की विस्की को पूरा गतकलिया. एक दोनो को मुश्कराहट के साथ देखते हुए धीरे धीरे दोनोके होत आपस मे चिपक गये. लगे दोनो चुंबन का आनंद उठाने. उनकाचुंबन काफ़ी लंबा था. दोनो एक दूसरे के होत चूस्ते चूस्ते अपनीजीबो का पेच लड़ने लगे.

इधर तीनो ने भी शराब पूरी की पूरी गतक ली. देवी नीचे बैठेबैठे अपने हाथ बढ़कर रवि और बंशी के लंड को पैंट के उपर सेही सहलाने लगी.

चुंबन लेते लेते अतुल ने रोमा की नाइटी निकाल फेंकी. उसके गोरे-गोरे उन्नत मुममे खुली हवा मे साँस लेने लगे. अतुल एक हाथ से रोमाकी गर्दन संभाले हुए उसके नाज़ुक और गुलाबी होतो का रूस पी रहाथा साथ ही अपने दूसरे हाथ से उसके कड़क हो रहे निपल को सहलानेलगा. रोमा के पुर बदन मे करेंट दौड़ रहा था. सराब का नशातो चढ़ा हुवा था ही अब वासना का रंग भी पुर बदन मे चढ़नेलगा.

देवी उनके लंड को पॅंट की चैन को खोलकर बहार निकल लिया. दोनोलंड को हाथ मे लेकर सहला रही थी. 2-2 लंड को एक साथ देखकरउसकी चूत की ज्वाला और बढ़ गयी. कभी एक हाथ से एक लंड को हिलतीकभी दूसरे हाथ से दूसरे लंड को हिलती. रवि और बंशी दोनो कोही ऐसे मज़ा आरहा था. बंशी ने अपना हाथ नीचे कर उसके एकमचलते हुए मुममे को पकड़ लिया. यह देखकर रवि निब ही अपना हाथबढ़कर अपने हिस एके मुममे को पकड़ लिया. दोनो अपने हाथ से उसकेमुममे को मसल रहे थे. कभी धीरे तो कभी ज़ोर्से. कभी पुरमुममे तो कभी केवल चुचि.

उधर, अतुल ने अपने होतो को उसके होतो से फ्री करके उसके गाल औरगर्दन पर चुंबनो की बोच्चार करते हुए उसके मुम्मो को अपने होतो कीगिरफ़्त मे ले लिया. मुम्मो पर उसके गरम होतो की च्चप पड़ते हीरोमा "एसस्सस्स" कहकर सिसकारी भर्ली. अपने होतो को दबाकर वा इसकाआनंद उठा रही थी. अतुल ने अपने होतो के साथ-साथ अपनी जीभ सेउसके भरे मुम्मो को चाटना शुरू कर दिया. नीचे से उपर चाटने सेरोमा की सिसकारियाँ ज़ोर पकड़ने लगी. "ऑश.. चतो... मेरे बूब्स को....आहह... बड़ा मज़ा आ रहा है... एस्स... एस्स... इनको ज़ोर ज़ोर से अपनी जीभसे रागडो.... मेरे जिस्म मे .... उफ़फ्फ़ .... क्या हो रहा है.... एस्स चतोइन्हे."

इधर, देवी ने रवि के मुस्टंडे लंड को अपने मुहन मे लेकर चूसनेलगी. रवि का लंड मस्त हो कर उसके मुहन मे भंगरा करने लगा. अपनीजीभ और होतो से उसको चूसने लगी. रवि के पुर बदन मे एकसिहरन दौड़ रही थी. वो चाह रहा था की देवी इसे चूस्टी रहे,चूस्टी रहे, चूस्टी रहे. उसके मुहन से सिसकारी निकली, "ऑश बेबी,चूसो.. मेरे लंड को चूसो ... ज़ोर से ... हां .. हां ... स्पीड से ....चूसो .... चूसो मेरे लवदे को .... बड़ा मज़ा आरहा है ... जैसेतुम्हारे होत नही बल्कि नरम-नरम चूत मे मेरा लंड घुसा हुवाहै... चूस ... मेरे लंड को मेरी रानी."

उधर, अतुल चाटने के साथ साथ उसके बड़े बड़े संतरों को अपने मुहनमे भरकर उनको चूस्टा जाराहा था. इस बूब्स छूसा से रोमा इतनीउत्तेजित हो गयी की अपने हाथ बढ़कर उसने अतुल की शर्ट खोलनीचाही लेकिन नही खुलने पर उसने उसको फाड़ दी. अपने हाथ बढ़ा करउसकी पॅंट के हुक्स और चैन को खोल दिया. फिर खुद खड़ी हो गयी.अतुल भी उसके साथ ही खड़ा हो गया. रोमा ने उसकी पॅंट और अंडरवेरको झटके से नीचे खींच लिया. और सामने आगे अतुल का लंड. हल्काकला लेकिन डुमदार. अपने हाथ को बढ़कर उसको लपक लिया और लगीउसको पूछकरने. अपने हाथ से उसको घूमती और ट्विस्ट करती हुई उसकेचिकू और केले को लगी सहलाने.

इधर, बंशी सोफे पर से उठ कर अपने पुर कपड़े निकल दिए औरनीचे लेट कर अपने मुहन को देवी के चूतड़ से लगा दिया. बंशी केहोत के टच होते ही देवी के पुर बदन मे गुदगुदी होने लगी. उसनेरवि का लंड अपने मुहन से बहार निकल कर बंशी को कहा, "उफफफ्फ़ ...क्या कर रहे हो .... मुझे गुदगुदी हो रही है ... छ्चोड़ा ना ... प्लीज़ीए ...छ्चोड़ो ... गुदगुदी हो रही है ना .... प्लीज़े .... "

बंशी ने अपनी होतो को आयेज बढ़ते हुए उसकी चूत का नीचे वालाहिस्सा चूम लिया और आयेज बढ़ते हुए उसकी चूत को चाटने लगा.चूत को चाटते ही देवी की चूत उतावली होकर जूस से भर गयी.उसकी चूत बंशी की जीभ की चूसा मे पागल हो गयी. उसने अपनावजन बंशी के मुहन पर बढ़ा दिया. पोस्टीओं यह थी की रवि सोफे परबैठा अपना लंड देवी से चूस्वा रहा था जबकि देवी बंशी से अपनीचूत चुस्वती हुई रवि के लंड को चूस रही थी.

उधर, रोमा ने लंड को सहलाने के बाद अपनी जीभ बहार निकल करअतुल के अंगूरो को अपने मुहन मे भर लिया. अंगूरो को मुहन मे भरकरउसके सुपरे को हाथ से रगड़ने लगी. उसके इस आक्षन से अतुल के मुहनसे सिसकारी निकली, "एस्स.... रोमा... लो और चतो मेरे अंगूरो को... लेकिनसाथ मे मेरे केले को भी चूसो.... इसे और मत तड़पाव.... चूसो मेरीरानी... मेरे लंड को भी चूसो." यह कहकर उसके रोमा के सिर को बॉलसहित पकड़ लिया. अतुल की तड़फ़ड़ाहट देखकर रोमा ने अपना मुहन खोलाऔर गॅप-से उसके लंड को अंदर भर लिया.

इधर, बंशी देवी की चूत को छत और चूस कर उसको फुल उत्तेजितकर दिया. उसकी चटाई से पागल होकर रवि के लंड को मुहन से बहारनिकाल देवी बंशी से मिन्नटे करने लगी, "उफ़फ्फ़ .. बंशी ... प्लीज़े..अब मेरी चूत को चोदो ना .... प्लीज़े मुझे चोदो ... मुझे तुम्हारा लंडमेरी चूत मे चाहिए ... प्लीज़ी ... अब चोदो मुझे .... चोदो ... कस कसकर मुझे चोदो ..."

बंशी घुटने के बाल बैठकर देवी के चूतड़ को उपर उठाया और अपनेलंड के सुपरे को उसकी चूत के मुहन के निसाने पर रख दिया. लंडका सुपरा उसकी चूत के मुहन पर जाकर फिट हो गया. फिर धीरे-धीरे धक्के मरते हुए अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत मे पेलदिया. लंड के अंदर जाते ही देवी की चूत मे बवाल मच गया. उसकीचूत हिल-हिल कर छुड़वाने लगी. "एस्स ... मेरी चूत को चोदो ... एस ...लंड को पूरा अंदर डालडो मेरी चूत मे," बड़बड़ाती हुई, बंशी सेचुड़वति हुई, रवि के लंड को भी चूस रही थी.
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07-01-2017, 11:29 AM,
#10
RE: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई
उधर, लंड के मुहन मे जाते ही रोमा धड़ा-धड़ चूसने लगी. इसछूसा से अतुल का लंड एक दूं से बेकूबू हो गया. उसने रोमा केबालों को ज़ोर से पकड़ लिया और बड़बड़ाने लगा, "एस्स... मेरी रानी... अबजाकर मेरी मन की मुराद पूरी हुई है.... चूसो ... इसे ... ज़ोर से ... हां... ज़ोर से .... क्लब से ही तड़फ़ रहा था लंड मेरा... अभी इसे तुम्हारेहोतो और जीभ की ज़रूरत है.... इसे चूसो ... रग़ाद रग़ाद कर चूसोमेरे लंड को."

इधर, देवी ने अब पोज़िशन बदलते हुए बंशी को फर्श पर लेता दियाऔर उपर सवार हो गयी. बंशी के लंड पर अपनी चूत को रख कर एकबड़ा धक्का मार दिया. लंड मसके के माफिक उसकी चूत मे पूरा कापूरा घुस गया. अब देवी उसपर उच्छल उच्छल कर अपनी चूत को छुड़वारही थी. रवि सोफे से खड़े होकर देवी के होठों को अपने होतो कीगिरफ़्त मे लेलिया और अपनी जीभ उसके मुहन मे डालकर उसके मुहन मे गोल-गोल घूमने लगा.

लंड चूसैई से अतुल एक दूं गरम हो चुका था. उसने रोमा को सोफे परउल्टा लेटाकार उसके चूतड़ को अपने हाथ मे थामकर अपना लंड उसकीरसीली चूत मे पेल दिया. बाहर निकल कर वापस एक करारा झटकादिया जिससे लंड उसकी चूत के एक दूं अंदर तक जाकर समा गया. इसझटके से रोमा की चूत अंदर तक हिल गयी और वो आनंद से चीखपड़ी, "एस्स... उफ़फ्फ़ .... आह ... क्या डाला है लंड तूमे.... उफफफफफ्फ़... बड़ा हीमजेदार धक्का लगा है मेरी प्यासी चूत को .... ऐसे ही धक्के मरोमुझे.... हिलाडो मेरी चूत को आज .... मरो ज़ोर ज़ोर के धक्के ... वाकई मेऐसी ही चुदाई होनी चाहिए.... छोड़ो मुझे ... चोदो .... ज़ोर सेछोड़ूऊव "

दूसरी और चुड़ते चुड़ते देवी की मस्ती और बढ़ गयी. रवि भीउसके गोल-गोल चूतड़ पर हाथ फेर रहा था. चूतड़ पर हाथ फेरतेहुए अपनी एक अंगूली उसकी गांद पर फेरने लगा. गांद पर अंगूली केपहुँचते ही देवी ने कहा, "रवि, अंगूली नही. तुम्हारा लंड रखोवहाँ. मेरे गांद मरो. अपने मुस्टंडे लंड को गांद मे डालो दो."

रवि ने देर ना करते हुए खूब सारा थूक अपने लंड पर लगाया औरउसकी गांद के च्छेद पर रख दिया. अपने लंड को देवी की गांद केच्छेद मे फँसा दिया. हल्का दर्द हुवा देवी को. लेकिन चूत उसकी बंशीके लंड पर उकचल कूद कर रही थी इसीलिए लंड बहार निकल गया.तब रवि ने तोड़ा थूक अपने लंड पर और लगाया और देवी की गर्दनपकड़कर उसको झुकते हुए अपने लंड को उसकी गांद मे तेल दिया.

गांद मे लंड के जाते ही देवी चिल्लई, "अरे मदारचोड़ ... फाड़ दिया ....मेरी गांद को ... तेल भी नही लगाया .... और मेरी गांद मे अपने मूसललंड को पेल दिया .... आबे सेयेल .... मार गयी मैं ... कभी गांद मारीनही क्या? सासले .. मदारचोड़ ... चिकना तो करना था अपने लंड को ....सेयेल आइसे ही पेल दिया, भेंचोड़."

लेकिन रवि ने कुच्छ भी नही सुनते हुए अपने लंड को उसकी गांद मेपेलना जारी रखा. थोड़ी ही देर मे देवी को मज़ा आने लगा. अब नीचेसे बंशी का लंड उसकी चूत मे आग लगा था वहीं उपर से रवि कालंड उसकी गांद मे तूफान पैदा कर रहा था.

उधर, करार झाटके ने रोमा की तबीयत खुस कर दी. उसने धक्को केसाथ सिसकारियाँ बढ़नी शुरू हो गयी. पुर हॉल मे सभी चोद्तेलंड और चुड़वति चूत की सिसकारियाँ गूँज रही थी. धक्के परधक्का, झटके पर झटका. लंड अंदर तक पेल रहा था अतुल. रोमा कीचूत ऐसी चुदाई से बड़े मज़े ले रहीथी. "आह" "उूउउफफफफफ्फ़" "ओओह्ह्ह्ह्ह" की आवाज़ से दोनो एक दूसरे को जोशदिला रहे थे.

चूत और गांद मरवाते हुए देवी के कस-बाल ढीले होते दिखाई पड़नेलगे. उसकी चूत अब पानी छ्चोड़ने की त्यारी करने लगी. देवीबड़बड़ाने लगी, "हां ... मरो मेरी गांद और चूत ... साले लगा धक्केमेरी चूत मे ... टू भी ... साले मदारचोड़ ... बगैर तेल लगाए मेरीगांद मार रहा है .... मार अब धक्के मेरी गांद मे ... मरो ... चोदोमुझे ... मेरी चूत का रूस पीला दो अपने लंड को ... चोदो ... और ज़ोर से ...आह ... मेरा ... पानी ... आह ... उफ़फ्फ़ .... निकालने ... वाला है. . निकलगया .... निकल गया.."

तभी प्यासी चूत की प्यास एक बार मिटाने लगी. एक करार झटके केसाथ ही रोमा भी चीखने लगी, "एस .... अतुल.... एस्स... मैं झाड़ रहीहून.... मेरी चूत पानी छ्चोड़ रही है.... मरो एक दो बड़े ज़ोर ज़ोर केझटके .... हाआंन्न... ऐसे ही झटके .... आह ... मेरा पानी निकला... निकला..... निकलाआाआ" इतना कहकर रोमा सोफे पर ढीली हो कर लेट गयी.अतुल का लंड अभी तक अपना माल छ्चोड़ा नही था. वो वैसे ही टंकारखड़ा चूत को सलामी दे रा था.

देवी और रोमा छुड़वा कर मस्त हो कर फर्श पर लेट गयी. क्लब सेचुदाई को देखकर उनकी चूत गरम होना शुरू हुई अब जाकर झड़ी.दोनो बड़ी शांति महसूष कर रही थी. देवी की चूत और गांद दोनोमारे जाने के कारण कुच्छ ज़्यादा ही शॅंटी महसूष कर रही थी. रोमाकी चूत अभी भी खलबली मचा रही थी. उसे अभी एक चुदाई का दौरऔर चाहिए था. देवी ने कहा, "ना बाबा... अभी नही ... अभी रुक जाअ... "

लेकिन तीनो के लंड का पानी नही निकला था. तीनो हालाँकि रुकने कोत्यार थे लेकिन तभी रोमा ने सबको éलाँ कर जोश दिला दिया. रोमा नेएलान किया, "अब मैं तीनो लंड को एक साथ खाऊंगी. मेरे तीनोहोल्स को अपने लंड से भर दो."

यह सुनकर देवी ने कहा, "चलो, मैं भी देखती हून. कितनी देरटिकेगी यह. चलो तीनो, आज इसकी चूत, गांद और मुहन को मार-मारकर अपने रूस से भर दो. फिर जल्दी से इसकी हिम्मत नही हो ऐसा मरोइसकी गांद और चूत को." इतना कहकर देवी सोफे पर पालती मार करबैठ गयी.

बंशी उठकर बाथरूम मे गया और एक तेल की शीशी उठाकर लाया.हाथ से तेल को अपने लंड पर लगा कर कहा, "मैं इसकी गांदमारूँगा."

अतुल बोला, "मेने अभी इसकी चूत की धज्जियाँ उड़ाई है. रवि अबतुम्हारी बारी है इसको छोड़ने की. मेरे लंड को चूसेगी अब यह."

तीनो खड़े हो कर रोमा के मुहन, चूत और गांद से युध करने कोत्यार हो गये. अपने अपने हथियार को हाथ मे लेकर हिलने लगे मानोमोर्चे पे सिपाही अपनी बंदूक की नाल सॉफ कर रहे हो. तभी देवी नेकहा, "तुम लोग मोर्चा लो मैं कॉमेंटरी करूँगी. इसका "लिवटेलएकास्ट" मैं करूँगी."

रोमा की गांद को बंशी नीचे लेट कर अपने उपर रख लिया. पूरा तेलचूपदा होने से उसके लंड को गांद के होल मे फँसने मे देर नहीलगी. रोमा ने कमर उचका कर और तोड़ा उपर हो कर उसके लंड को अपनीगांद की गिरफ़्त मे ले लिया. गांद मे लंड के घुसते ही देवी कीकॉमेंटरी भी चालू हो गयी.

देवी ने कॉमेंटरी चालू की, "अब बंशी का लंड रोमा की गांद मे घुसचुका है. रवि तुम अब अपने लंड को हिलना बंद करो. अपने लंड कोइसकी चूत के दाने पर रागडो. हां ऐसे ही रागडो. इस तरह रगड़ने सेऔरत को बहुत ज़्यादा मज़ा आता है. अब इसकी चूत का रूस अपनी अंगूलीमे लो और इसको अपने लंड पर लगाओ. अब अपनी गांद उचककर अपने लंडको रोमा की चूत मे पेल दो."

देवी बड़े मज़े से रोमा की गांद और चूत की रागड़ाई और चुदाई देखरही थी. अपने मुममे पर वो हाथ से हिला रही थी. साथ ही उसकीकॉमेंटरी चालू थी, "एस.. बंशी तुम नीचे से अपने लवदे को उसकीगांद मे हिलाते रहो. तुम रवि, इसकी चूत मे ज़ोर ज़ोर से अपना लंडपेलो. अतुल, मेरे सरटाज़, अब अपना लंड इसके मुहन मे ठूँश दो. मैंभी देखती हून आज रोमा की चुदाई. अतुल, पीछे से आओ और अपने लंडको इसके मुहन मे डालो और इसके मुममे को मसलना शुरू कर दो."

देवी ऐसी चुदाई की कॉमेंटरी करते करते खुद भी अब भूखी होरही थी. वो सोफे पर से उठकर रोमा के पास आकर बैठ गयी. रविका लंड रोमा की चूत मे अंदर बहार स्पीड से आ-जा रहा था. अपनेबदन को रवि के पीछे से सताते हुए देवी रोमा की चूत के दाने कोसहलाने लगी. साथ ही कॉमेंटरी करती जेया रही थी. "हां अब ज़ोर ज़ोरसे पेलो लंड तुम सब इसमे. इसकी गांद को ज़ोर से मरो बंशी तुम."

थोड़ी देर मे तीनो लंड एक दूं बेकाबू हो गये. एक रोमा की हिम्मतदेखकर टीन लंड खाने की, दूसरा शाम से ही चुदाई क्लब मे देखतेहुए और तीसरा देवी की कॉमेंटरी.

अतुल और रवि ने अपना लंड झटके से बहार निकल लिया. मुहन खालीहोने से रोमा को बोलने का अब जाकर मोका मिला. उसने कहा, "अर्रे मेरेचूत चार बार पानी छ्चोड़ चुकी है इतनी देर मे. बड़ा ही मज़ा आया.और देवी, तुम्हे तो धन्यवाद. तुम्हारी वजह से ही मुझे इतना आनंदमिला."

बंशी ने भी अपना लंड रोमा की गांद से बहार निकल लिया. अब तीनोने रोमा और देवी को नीचे फर्श पर लेता कर उनके उपर अपने लंड कोहिलने लगे. अपने अपने लंड की चाँदी हिलाकर दोनो के पुर बदन परअब उन्हे अपने पीपे से बरसात करनी थी. तभी बंशी का पानी जोरदारझटके से निकला. उसके लंड का पानी रोमा के मुममे को भिगाता हुवादेवी के मुहन पर जाकर गिर रहा था. उसका आधा ही पानी निकला कीअतुल ने सामने से बारिश करते हुए दोनो की चूत को अपने वीर्या सेभिगाना चालू कर दिया. बंशी और अतुल ने अपने लंड को झाड़ कर दोनोके मुहन से अपने लंड को रगड़ने लगे. जितना माल भी अंदर था वोबूँद-बूँद कर बहार आ गया.

तभी रवि ने दोनो को हटते हुए अपना मखखां दोनो के बूब्स परछ्चोड़ना शुरू किया. उसने आधा ही मखखां बहार निकाला और बारीबाअरी से रोमा और देवी के गालो के नज़दीक आकर अपनी बाकी मलाई झाड़दी. पाँचो के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे. और वही लेट कर सोगये.

सुबह गाओं से फोन आया जिसकी वजह से रोमा और लीना को वापस जानापड़ा. लेकिन यह दिन दोनो को जिंदगी भर याद रहने वाले थे.

एंड ऑफ दा पार्ट --5
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