Adult Kahani समलिंगी कहानियाँ
05-14-2019, 10:45 AM,
#81
RE: Adult Kahani समलिंगी कहानियाँ
मेरा दिल धड़कने लगा. वह मजाक नहीं कर रहा था. "तेरा बड़ा भाई है क्या? उसकी शादी नहीं हुई अब तक?" मैंने पूछा.
वह हंस कर बोला. "कहो तो मेरा भाई है, कहो तो मामा है और कहो तो मेरा डैडी है. और जिस चूत का मैंने जिक्र किया, वह पता है किसकी चूत है? मेरी मां की चूत!"
मैं चकरा गया. "ठीक से बता ना यार!" मैंने उससे आग्रह किया.
"चल पूरी कहानी बताता हूं. टाइम लगेगा, इसलिये चल, सोफे पर बैठते हैं आराम से." मुझे उठा कर वह वैसे ही सोफे पर ले गया और मुझे गोद में ले कर बैठ गया. मेरे चूतड़ों के बीच अब भी उसका लौड़ा गड़ा हुआ था. धीरे धीरे अपने लंड को मेरी गांड में मुठियाते हुए मुझे बार बार प्यार से चूमते हुए उसने अपनी कहानी बताई. मस्त परिवार प्यार की कहानी थी.
हेमन्त की मां माया की शादी बस नाम की हुई थी. उसका पति कभी साथ नहीं रहा. माया अक्सर मायके आ जाती जहां उसके पिता उसे चोदा करते थे. अपने बाबूजी से चुदा कर उसे महुत मजा आता था. जब वह सोलह साल की थी तभी अपने पिता से उसे बच्चा पैदा हुआ, रतन. एक अर्थ से रतन माया का बेटा था और दूसरे अर्थ से छोटा भाई. रतन के पैदा होने के बाद दस साल बाद ही उसके पिता की मौत हो गयी.


२०
बचपन से रतन बहुत मतवाला था. यार दोस्तों से गांड मरवाता और मारता था. उसकी यह आदत छुड़ाने को माया ने उसे खुद ही रिझाया और अपने साथ संभोग करना सिखा दिया. छोटी उम्र से ही रतन अपनी मां को चोदता था.
माया को बहुत सुख मिला पर रतन गे का गे ही रहा. दूसरी औरतों में उसकी रुचि बिलकुल नहीं थी. कमसिन उमर में के रतन से माया को गर्भ रह गया. हेमन्त पैदा हुआ. तब माया अट्ठाईस साल की थी. इस हिसाब से हेमन्त माया का बेटा भी था और भांजा और पोता भी. और रतन हेमन्त का पिता, मामा और भाई तीनों था.
हेमन्त भी पक्का चोदू निकला. छोटी उमर में ही रतन ने उसकी गांड मारना शुरू कर दी. रतन के महाकाय लंड से मरा कर हेमन्त की हालत खराब हो गयी. दो तीन दिन वह बिस्तर में रहा. माया पहले बहुत झल्लायी पर आखिर उसने अपना हठ छोड़ दिया क्योंकि हेमन्त को भी मजा आया था. वह समझ गयी कि उसके दोनों बेटे गे हैं. अपने खेल में उसने हेमन्त को भी शामिल कर लिया. वैसे वह बहुत खुश थी. दो दो जवान बेटे उसे चोदते और उसकी गांड मारते थे. और साथ में एक दूसरे से भी खूब संभोग करते थे.
अब हेमन्त बाईस साल का नौजवान था, रतन चौंतीस का हो गया था और माया पचास की. रतन ने शादी करने से साफ़ इन्कार कर दिया था. बोला था कि किसी औरत को चोदेगा और चूसेगा तो सिर्फ़ अम्मा को. बाकी मजे के लिये तो उसका छोटा भाई था ही. एकाध दो दोस्त भी उसने बना लिये थे.
माया बेचारी बहुत चाहती थी कि रतन शादी कर ले. एक दिन रतन मजाक में बोला था कि अगर कोई शी मेल या अर्ध नारी मिल जाये तो वह शादी कर लेगा. पर ऐसा नाजुक छोकरा मिलना चाहिये जिसका लंड मजबूत हो और मस्त चिकनी गांड और चूचियां भी हों, भले ही नकली चूचियां हों. वैसे असली हों तो और अच्छा है.
कहानी सुन कर मेरा ऐसा तन्ना गया था कि क्या कहूं. हेमन्त उसे मुठियाता हुआ बोला. "अब समझा मेरी गांड ढीली क्यों है? रतन ने मार मार कर ऐसी कर दी है. बहुत मजा आता है उससे मरवाने में. तू उसका लंड देखेगा तो घबरा जायेगा! मुझसे बहुत बड़ा है."
मैंने मचल कर उसकी गर्दन में बांहें डालीं और उसे चूमने लगा. वह भी अपना मुंह खोल कर मेरी जीभ चूसता हुआ नीचे से ही मेरी गांड मारने लगा. झड़ने के बाद उसने मेरा लंड चूस डाला. इतनी मीठी उत्तेजना मुझे हुई कि मैं
करीब करीब रो दिया.
घंटे भर हम चुप रहे. सोते समय उससे लिपट कर मैं शरमा कर बोला. "तू सच कह रहा था कि मैं तेरी भाभी बन जाऊ? पर फ़िर तू मुझे नहीं चोदेगा?"
वह मेरे बाल सहलाता हुआ बोला. "अरे मैंने अपनी मां को नहीं छोड़ा तो तुझे क्या छोडूंगा. समझ ले तीन तीन से तुझे चुदाना पड़ेगा. मैं, रतन और अम्मा. अम्मा है पचास साल की पर बड़ी छिनाल है. साली का मन ही नहीं भरता.
घर की बहू बन कर तुझे सबकी सेवा करनी होगी. पिटाई भी होगी तेरी अगर किसी की बात नहीं मानी."
मैं बोला. "यार मुझे बात जमती है पर डर भी लगता है. मेरी हालत कर दोगे तीनों मिल कर."
वह सीरियस होकर बोला. "हां, यह तो सच है. गांव में बहू की क्या हालत होती है यह तू जानता है. असल में अम्मा, मेरे और रतन के मन में बड़े बुरे विकृत खयाल आते हैं. रतन भी कह रहा था कि कोई छोकरा बहू बन के आये तो सब मुराद पूरी कर लें. अम्मा तो क्या क्या सोचती है, तू सुनेगा तो घबरा जायेगा. और एक बात है. हम जैसे रखें रहना पड़ेगा, जो कहें वह करना पड़ेगा. पक्के गांडू और चुदैल लड़के को बहुत मजा आयेगा हमारी बहू बनकर अपनी दुर्गति कराने में भी."
मेरा मन डांवाडोल हो रहा था. बहुत डर लग रहा था पर दो मस्त बड़े लंड वाले जवानों और एक अधेड़ चुदक्कड़ नारी से मिलने वाली तरह तरह के कामुक गंदे और विकृत सुखों की सिर्फ कल्पना से ही मैं विभोर हो रहा था.


रात भर हमने संभोग किया, इतने हम इन गंदी बातों से उतावले हो गये थे. सुबह देर से उठे. हेमन्त तैयार होकर कालेज को निकला. मैंने मना कर दिया. बोला आज मूड नहीं है. वह मुस्कराया और चला गया.
मैं झट से तैयार हो कर बाजार गया. अपनी छाती और कूल्हों का नाप मैंने ले लिया था. चौंतीस और छत्तीस. फ़ेमिना में ब्रा का नाप लेने का लेख आया था, वह मैंने पढ़ा था. बाजार से ३४ डी डी कप साइज़ की नाइलान की पैडेड ब्रा और ३६ साइज़ की पैंटी खरीदी. साड़ी पेटीकोट और ब्लाउज़ का कपड़ा लिया. एक दर्जी से दुगने पैसे देकर सामने ही ब्लाउज़ सिलवाया. झूट मूट कहा कि बहन के लिये चाहिये. फ़िर हाई हील की सैंडल ली. अंत में एक लंबे बालों का विग खरीदा.
वापस आया तो बुरी तरह लंड खड़ा था. किसी तरह मुठ्ठ मारने से खुद को रोका और सो गया. शाम को उठकर अपने सिंगार में जुट गया. नहा कर पहले पैंटी और ब्रा पहनीं. ब्रा के अंदर बहुत सारे रुमाल ढूंस लिये जिससे वह फूल जाये. फ़िर विग लगाया. आइने में देखा तो विश्वास ही नहीं हुआ. मैं बहुत ही सेक्सी बड़े स्तनों वाली अर्धनग्न कन्या जैसा लग रहा था. बस पैंटी में तंबू बनाता मेरा लंड यह बता रहा था कि मैं मर्द हूं. उसे पेट से सटाकर पेटीकोट पहना और नाड़ी से लंड पेट पर बांध लिया.
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05-14-2019, 10:45 AM,
#82
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फ़िर मैंने साड़ी और ब्लाउज़ पहने. साड़ी दो तीन बार उतारना और पहनना पड़ी पर आखिर में जम गयी. अंत में सैंडल पहने और लिपस्टिक लगा ली. अब हेमन्त आने का इंतजार था.
बेल बजी और मैंने धड़कते दिल से दरवाजा खोला. हेमन्त चकरा गया कि कहीं गलत घर तो नहीं आ गया. "आप
कौन? अनिल कहां है?"
मैंने दरवाजा लगा लिया और उससे लिपट कर चूमते हुए बोला. "हाय सैंया, अपनी रानी को नहीं पहचाना?"
उसकी आंखों में वासना छनक आयी. "क्या दिखता है यार तू अनिल, सारी, मैं कहना चाहता था कि क्या दिखती है तू अनू रानी, एकदम ब्यूटी क्वीन. साला रतन, अब देखता हूँ कैसे शादी नहीं करता!" कहकर वह मुझे खींच कर पलंग पर ले गया और मुझे पटक कर मुझ पर चढ़ कर मुझे बेतहाशा चूमने लगा. जल्द ही उसका तन्नाया लंड मेरी
गांड में था.
दो घंटे बाद जब वह रुका तो लस्त हो गया था. दो बार उसने मेरी गांड मारी थी. मुझे पूरा नंगा नहीं किया था, ब्रा और पैंटी रहने दिये थे. मेरा अर्धनग्न रूप उसे बहुत उत्तेजित करता था. पैंटी में छेद करके उसीमेंसे उसने मेरी गांड मारी थी.
जब उसने मेरी गांड में से लंड निकाला तो मैं उसे मुंह में लेता हुआ बोला. "अपनी रानी की प्यास नहीं बुझायेंगे क्या स्वामी? मैंने कब से पानी नहीं पिया. आपका इंतजार करती रही." मैं जान बूझ कर घर की बहू जैसा बोल रहा था.
मेरा सिर पकड़कर पेट पर दबाते हुए वह मेरे मुंह में मूतने लगा. "पेट भर कर पी मेरी जान. मैं भी दिन भर नहीं मूता. सुबह जल्दी में तुझे पिलाना भूल ही गया."
मेरा लंड अब बुरी तरह से खड़ा था. हेमन्त ओंधा लेट गया और मैं उस पर चढ़कर उसकी गांड मारने लगा. आइने में यह दृश्य बड़ा ही कामुक दिख रहा था कि एक युवती एक जवान मर्द की गांड मार रही है.
हेमन्त भी उत्तेजित होकर बोला. "मां की याद दिला दी तूने. उसके पास भी दो तीन डिल्डो हैं. जब मूड में आती है। तो मेरी या रतन की गांड मार लेती है. आज तुझसे मरवा कर ऐसा लग रहा है जैसे उसीसे मरवा रहा हूं."
रात को दो बार और उसने मेरी मारी. इस बार मुंह में चप्पल ठूस कर मेरी गांड को उसने चोदा. मेरा लंड चूस कर
आखिर उसने मुझे झड़ाया और फ़िर प्यार से मेरा मूत पिया.


जब मैं अपनी ब्रा, पैंटी और विग उतारने लगा. हेमन्त मेरा हाथ"रहने दे यार, बहुत प्यारा लगता है. अब घर में ऐसा ही रहा कर. आदत डाल ले."
रात को हेमन्त ने मुझे कहा, "आ यार, देखेगा मेरी मां और रतन की तस्वीर?"
मैं उछल पड़ा. मैं हमेशा की तरह गांड में उसका लंड लेकर उसकी गोद में बैठा था. वह वैसे ही उठ कर मुझे बाहों में उठाकर अपनी सूटकेस के पास आया और एक लिफ़ाफ़ा निकालकर वापस सोफे पर आ गया. तब तक मैं पैर उठाकर उसकी गर्दन में बांहें डालकर लटका रहा. अब गांड में उसका लंड न हो तो मुझे अटपटा लगता था.
लिफ़ाफ़े से निकालकर उसने अपनी मां और रतन की फ़ोटो दिखायी. पहली फ़ोटो में तीनों पूरे कपड़ों में एक साथ खड़े थे. रतन हेमन्त जैसा ही दिखता था, जरा और लंबा और तगड़ा था. उनकी मां को देखकर तो मैं दीवाना हो गया. सांवले रंग की भरे हुए शरीर की उस नारी को देखकर ही मन में असीम कामना जागती थी. सादी सफ़ेद साड़ी और चोली में उसके भारी भरकम उरोज आंचल के नीचे से भी दिख रहे थे. बालों में कुछ सफ़ेद लटें भी थीं. आंखों में छिनालपन लिये वह बड़े शैतानी अंदाज से मुस्करा रही थी.
बस दो फ़ोटो और थीं. उनमें चेहरा नहीं था, पर साफ़ था कि किसकी हैं. एक में अम्मा का सिर्फ जांघों और गले के बीच का नग्न भाग था. ये बड़े बड़े नारियल जैसे लटके मम्मे और उनपर जामुन जैसे निपल. झांटें ऐसी घनी कि आधा पेट उनमें ढक गया था. दूसरे फ़ोटो में अम्मा की झांटों से भरी चूत में धंसा एक गोरा गोरा लंड था. सिर्फ जरा सा बाहर था इसलिये लंबाई तो नहीं दिख रही थी पर मोटाई देखकर मन सिहर उठता था. किसी बच्चे की कलाई जैसा मोटा डंडा था.
मेरे चेहरे पर के भाव देखकर वह हंसने लगा. "मजा आयेगा जब तेरी गांड में यह लंड उतरेगा, तेरा मुंह बांधना पड़ेगा नहीं तो ऐसा चीखेगा जैसे हलाल हो रहा हो. मुझे भी बहुत दुखा था. मैं तो तुझसे भी बहुत छोटा था जब रतन ने मेरे मारी थी. रात भर बेहोश रहा था मैं. बोल अब भी तैयार है रतन की बहू बनने को या डर गया?"
मैं डर तो गया था पर उसकी अम्मा के सेक्सी देसी रूप और रतन के लंड की कल्पना से लंड में ऐसी मीठी कसक हो रही थी कि मैं मचल उठा. "हेमन्त मेरे राजा, मैं मर भी जाऊं तो भी चलेगा! मुझे गांव ले चल और तुम तीनों का गुलाम बना ले."
दूसरे ही दिन हेमन्त ने मेरे तीन फ़ोटो खींचे. एक पूरे कपड़ों में लड़की के रूप में और एक सिर्फ़ ब्रा, पैंटी और विग में. पैंटी के ऊपर के भाग से मेरा लंड बाहर निकलकर दिख रहा था. तीसरे में मैं पूरा नग्न अपने स्वाभाविक लड़के के रूप में था. फ़ोटो के साथ एक चिट्ठी लिखकर उसने रतन को बताया कि उसके मन जैसी 'शी मेल' बहू मिल गयी है।
और उसे पसंद हो तो आगे जुगाड़ किया जाये.
उसके एक माह बाद की बात है. आज खास दिन था क्योंकि रतन की चिट्ठी आई थी कि उसे और मां, दोनों को लड़की पसंद है. शादी का इंतजाम करके हेमन्त जब बुलायेगा वे आ जायेंगे. हेमन्त ने तुरंत दो हफ़्ते के बाद उन्हें बुला भी लिया था. अब हेमन्त की सलाह के अनुसार मैं लड़की बनके रहने का अभ्यास कर रहा था.
मैं आइने के सामने नंगा खड़ा था. बस हाई हील की सैंडल और पैडेड ब्रा पहनी थी जिनके कंपों में मैंने अंदर दो रबर की आधी गेंदें भर ली थीं. हेमन्त मेरे पीछे खड़ा हो कर मेरी नकली चूचियां दबा रहा था और उनकी मालिश
कर रहा था. मेरे बाल अब तक कंधे के नीचे आ गये थे जिनमें मैं क्लिप लगा लेता था.
"चल आज घूमने चलते हैं. अब बाहर भी लड़की के रूप में घूमना तू शुरू कर दे. आदत डाल ले. वैसे गांव में तुझे बाहर निकलने का मौका नहीं आयेगा. पर यहां शहर में तो तू घूम सकती है अनू रानी." वह मुझे चूम कर बोला. अब वह मुझे अनू या अनुराधा कह कर बुलाता था.
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05-14-2019, 10:45 AM,
#83
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मेरा लंड तन कर खड़ा था. साफ़ चिकने पेट और गोटियों के कारण लंड बड़ा प्यारा लग रहा था. हेमन्त ने उसे सहलाया और बोला, "इसे अब बांध कर रखना पड़ेगा. और अब चलते समय जरा चूतड़ मटकाने की आदत डाल


मैंने कहा, "हेमन्त, मैं भूल जाती हूं कि मैं अब लड़की हूं. इसलिये चलते समय लड़के जैसे चलने लगती हूं."
"मैं बताता हूँ एक उपाय. चल झुक कर खड़ी हो जा." कहकर वह एक ककड़ी ले आया. अपने मुंह में डाल कर अपने थूक से उसे गीला करके उसने ककड़ी मेरी गांड में घुसेड़ दी और उंगली से गहरी अंदर उतार दी. "अब चल कर देख" वह हंसकर बोला.
मैं जब चला तो ककड़ी गांड के अंदर होने से और हाई हील की सैंडल के कारण मेरे चूतड़ खुद ब खुद लहरा उठे. कमरे के दो चक्कर लगाकर जब मैं लौटा तो हेमन्त मुझसे चिपक गया. "क्या मस्त चलती है तू रंडी जैसी! बाहर न जाना होता तो अभी पटक कर तेरी मार लेता. अब कपड़े पहन और चल. वापस आकर तेरी चूचियों का भी टेस्ट लेना है कि इनमें कितना दूध आता है."
जब हम बाहर निकले तो मुझे बहुत अटपटा लग रहा था. डर लग रहा था कि कोई पहचान न ले कि मैं लड़का हूं. लंड को मैंने पेट पर सटाकर उसपर पैंटी पहन ली थी और फ़िर पेटीकोट का नाड़ा उसीपर कस कर बंध लिया था. इसलिये लंड तो छुप गया था पर फ़िर भी मैं घबरा रहा था. हेमन्त ने मेरी हौसला बंधाया. "बहुत खूबसूरत लग रही है तू अनू रानी."
दो घंटे बाद हम लौटे तो मैं हवा में चल रहा था. मेरे असली रूप को कोई नहीं पहचान पाया था. हेमन्त के एक दो मित्र भी नहीं जिनसे मैं मिल चुका था. और मैंने महसूस किया कि राह चलते नौजवान बड़ी कामुक नजरों से मेरी ओर देखते थे. मैं कुछ ज्यादा ही कमर लचका कर चल रहा था. लोग हेमन्त की ओर वे बड़ी ईष्र्या से देखते कि क्या मस्त छोकरी पटाई है उसने.
जब वापस आये तो हेमन्त का भी कस कर खड़ा हो गया था. घर में आते ही उसने मुझे पटक कर चूमाचाटी शुरू कर दी. वह मेरी गांड मारना चाहता था पर उसमें ककड़ी थी. निकालने तक उसे सब्र नहीं था. इसलिये उसने आखिर मेरे मुंह में अपना लौड़ा घुसेड़ कर चोद डाला.
मुझे अपना वीर्य और मूत पिला कर वह उठा तो मैं अपना गला सहलाते हुए उठ बैठा. इतनी जोर से उसने मेरा गला
चोदा था कि मुझसे बोला भी नहीं जा रहा था. ऊपर से खारे मूत से जलन भी हो रही थी.
उसकी वासना शांत होने पर प्यार से मुझे गाली देते हुए वह बोला, "आज रात भर तुझे चोदूंगा. साली रंडी छिनाल. क्या हालत कर दी है तेरे रूप ने! अब गांव में हम तीनों मिलकर तेरे रूप को कैसे भोगते हैं, तू ही देखना. ऐसे कुचल कुचल कर मसल मसल कर तुझे चोदेंगे कि तू बिना चुदने के और किसी लायक नहीं रह जायेगा साले मादरचोद. अब चुदाने चल" ।
मुझे पटककर उसने मेरे गुदा पर मुंह लगाया और चूस कर ककड़ी बाहर खींच ली. जैसे जैसे वह बाहर निकलती गयी, वह खाता गया. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था. ।
रात भर हमारी चुदाई चली. जब हम सोये तो लस्त हो गये थे. हेमन्त बहुत खुश था कि रतन की होने वाली बहू अब पूरी तरह तैयार थी. उसने चिट्ठी लिख कर अम्मा और रतन को तुरंत आने को कहा, "यहीं बुलवा लेते हैं उन दोनों को. यहां घर में कोर्ट के क्लर्क को बुलवाकर तेरी शादी करा देते हैं, फ़िर सब मिलकर गांव चलेंगे."
रतन और अम्मा आने तक हेमन्त ने मुझसे संभोग बंद कर दिया. बोला. "अब सुहागरात की तैयारी कर रानी. नयी दुल्हन की ठीक से खातिर करने को कुछ दिन सब का आराम करना जरूरी है. मैंने मां और रतन को भी लिख दिया है. वहां उनकी चुदाई भी बंद हो गयी होगी."
जिस दिन रतन और अम्मा आने वाले थे, मैं बहुत खुश था. शरमा रहा था और डर भी रहा था कि उन्हें मैं पसंद
आऊंगा या नहीं. शादी करके उसी दिन हम गांव को रवाना होने वाले थे.


२४
मैं खूब सजा धजा. मेरे रूप को देखकर हेमन्त बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू रख पाया, दो मिनिट तो उसकी गुलाबी आंखें देख कर मुझे लगा था कि कहीं वह वहीं पटक कर मेरी गांड न मारने लगे. पर किसी तरह उसने अपने
आप पर काबू किया. हां मेरे सामने बैठ कर झुक कर खूबसूरत सैंडलों में लिपटे मेरे पैर वह चूमने लगा. "रानी, आज तो तू एकदम जूही चावला जैसी लगती है, मां कसम अब तुझे न चोदूं तो मर जाऊंगा." उतने में बेल बजी तो किसी तरह अपने आप को सम्हालकर वह दरवाजा खोलने चला गया.
रतन और अम्मा आये तो मैं सहमा हुआ सोफे पर बैठा था. रतन को देखते ही मेरा दिल धड़कने लगा. आखिर मेरा होने वाला पति था. अच्छा तगड़ा ऊंचा पूरा जवान था. दिखने में बिलकुल हेमन्त जैसा था. उसके पैंट के सामने के फूले हिस्से को देखकर ही मैं समझ गया कि उसका लंड कैसा होगा. अम्मा सादी साड़ी पहने हुए थीं. फ़ोटो में तो उनकी मादकता का जरा भी अंदाज नहीं लगा था, उनका भरा पूरा शरीर, आंचल के नीचे से दिखती भारी भरकम छातियां और पहाड़ सी मोटी मतवाली गांड मुझे मन्त्रमुघ्न कर गयी.
मुझे देखकर उन दोनों की भी आंखें चमक उठीं. अम्मा मुझे बांहों में लेकर चूमते हुए बोलीं. "सच में परी जैसी बहू है, हेमन्त तूने जादू कर दिया. पर हमें झांसा तो नहीं दे रहा? मुझे तो यह सच मुच की लड़की लगती है."
जवाब में हेमन्त ने हंसकर उनका हाथ मेरे पेट पर रखकर साड़ी के नीचे से मेरे तन कर खड़े पेट से सटे लंड पर रखा तब उन्हें तसल्ली हुई. रतन ने भी टटोल कर देखा कि मैं सच में लड़का हूं तो उसकी आंखों में खुमारी भर आयी. वह शायद मुझे वहीं बांहों में भर लेता पर अम्मा ने उसे डांट दिया. बोलीं शादी के बाद गांव में ही वह मुझे भोग पायेगा, यहां नहीं.
कुछ देर में कोर्ट का क्लर्क आया. हेमन्त ने उसे काफ़ी पैसे दिये थे. बिना कुछ पूछे उसने हमारी शादी रचायी और हमारे दस्तखत लिये. मैंने अनुराधा के नाम पर साइन किया. फ़िर रतन ने मुझे मंगलसूत्र पहनाया और मैंने झुक कर सब के पैर छुए.
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05-14-2019, 10:45 AM,
#84
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हम बाहर खाना खाने गये. रतन तो मुझे ऐसे घूर रहा था कि कच्चा खा जयेगा.
घर आकर सबने सामन बांधना शुरू हुआ. हेमन्त के दो सूटकेस थे. अम्मा और रतन बस एक बैग लाये थे. मेरा कोई सामान नहीं था क्योंकि अब मेरे पुराने कपड़े मेरे किसी काम के नहीं थे.
गांव का सफ़र बारा घंटे का था. रास्ते भर मैं अजीब मदहोशी में रहा. अम्मा मुझे बार बार चूम लेतीं और जब मौका मिले, रतन मेरी नकली चूचियां मसल लेता. वह इतनी जोर से मसलता था कि मैं सोचने लगा कि अगर सच में मेरी
चूचियां होतीं तो मैं जरूर रो देता.
आखिर हम घर पहुंचे. शाम हो गयी थी. अम्मा बोलीं. "हेमन्त और रतन बेटे, अब तुम लोग सो लो. मैं तब तक बहू को सुहाग रात के लिये तैयार करती हूं।"
हेमन्त बोला. "मां, अनू का लंड चूस लेना. बीस घंटे से खड़ा है. एक बार झड़ना जरूरी है नहीं तो बीमार हो जायेगी बेचारी."
"हां मैं समझती हूं. उसके वीर्य पर मेरा भी तो पहला हक है सास के नाते, आ बेटी" कहकर अम्मा मुझे बाथरूम ले गयी. मैं लंगड़ाता उनके पीछे हो लिया. कमर अब भी दुख रही थी.
अम्मा मुझे बाथरूम ले गयीं. मुझे नंगा करके खुद भी अपने कपड़े निकालने लगीं. मैं जैसे जैसे उनके पके गदराये शरीर को देखता गया, मेरा पहले ही खड़ा लंड और खड़ा होता गया. एकदम चिकने संगमरमर जैसा उनका सांवला


२५
तराशा शरीर याने जैसे खजाना था. चूचियां ये बड़ी बड़ी तरबूजों सी थीं और गांड तो मानों पहाड़ की दो चट्टानों जैसी थी. झांटें ऐसी लंबी कि चाहो तो चोटी बांध लो. कमर पर मुलायम मांस का टायर लटक आया था. जांघे किसी पहलवान जैसी मोटी मोटी और मजबूत थीं.
उन्होंने मुझे नहलाया और खुद भी नहायीं. मेरा शरीर खूब दबा कर देखा. वे मेरे शरीर का ऐसे मुआयना कर रही थीं जैसे कसाई काटने के पहले बकरी की करता है.
"बहुत प्यारी है बहू. हमें बहुत सुख देगी. चल अब तेरा लंड चूस लें. और ज्यादा खड़ा रहा तो टूट कर गिर जायेगा बेचारा." कहकर उन्होंने मुझे दीवार से सटाकर खड़ा किया और मेरे सामने बैठ कर मेरा लंड एक मिनिट में चूस डाला. इतनी देर के बाद जो सुख मुझे मिला उससे मैं गश खाकर करीब करीब गिर पड़ा.
अम्मा ने मुझे छोड़ा नहीं बल्कि नीचे बैठ कर मेरा सिर अपनी जांघों के बीच खींचती हुई बोलीं. "अब जरा अपनी सास की बुर भी चख ले बहू. तेरा पति और देवर तो दीवाने हैं ही इसके, अब तू भी आदत डाल ले."
मैंने उस गीली तपती बुर में मुंह डाला तो खुशी से रोने को आ गया. क्या स्वाद था! इतना गाढ़ा शहद बह रहा था जैसे अंदर बोतल रखी हो. चूत भी ऐसी बड़ी कि मेरी ठुड्डी उसमें आराम से घुस रही थी. मैंने मन भर कर उस रस को पिया. अम्मा दो बार झड़ीं और मुझे शाबासी भी देती गईं. "अच्छा चूसती है बेटी, मैं और सिखा दूंगी कैसे अपनी सास की बुर रानी की पूजा की जाते है."
अब तक मेरा लंड फ़िर खड़ा होने लगा था. बहुत मीठी कसक हो रही थी. अम्मा ने फ़िर मुझे फ़र्ष पर लिटाया और मुझे मुंह खोलने को कहा. मेरे मुंह पर बैठ कर वे उसमें लोटा भर मूतीं और तभी उठीं जब मैं पूरा पी गया. मेरी भूख और प्यास पूरी मिट गयी थी. पेट गले तक भर गया था. मैं मानों जन्नत में था. लंड ऐसे खड़ा हो गया था जैसे बैठा ही न हो. उसे देख कर अम्मा ने मेरी बलायें लीं. "बहुत अच्छी बहू ढूंढी है हेमन्त ने. हमेशा मस्त रहती है! तुझे चोदने में मेरे बेटे को बहुत मजा आयेगा. चल अब तुझे सुहागरात के लिये तैयार करू."
बड़ा मन लगाकर उन्होंने मेरा सिंगार किया. ब्रा पहनाने के पहले मेरी छोटी गेंदें उन्होंने फ़ेक दीं और दो बड़ी बड़ी रबड़ की ठोस अर्ध गोलाकार गेंदें निकालीं. उन्हें मेरी छाती पर रख कर अम्मा ने एक रबड़ की काली ब्रा मुझे पहनाई. "खास तेरे लिये मंगवायी है. जरा बड़े और भरे हुए मम्मे हों तो दबाने में मजा आता है. और रबड़ की यह ब्रा लगती भी बड़ी प्यारी है, एकदम मुलायम है. देख इनमे तेरे मम्मे कसने के बाद कैसे ये दोनों झपटकर तेरी चूचियां मसलते हैं।"
वो ब्रा बिलकुल छोटी और तंग थी और मेरे बदन पर चढ़ाने के लिये उसे खूब तानना पड़ा. ब्रा ने मेरी चूचियां और छाती कसकर जकड़ लिये. मेरी छाती उन मम्मों से जकड़ने के बाद थोड़े दुख रही थी पर रबड़ के मुलायम स्पर्श से उसमें अजीब सी सुखद सनसनी हो रही थी. उसके बाद काले रबड़ की पैंटी पहनाकर मेरा खड़ा लंड उसमें दबा दिया गया. पैंटी पीछे से गुदा पर खुली थी.
अम्मा ने समझाया. "तू अधनंगी इतनी प्यारी लगती है कि तेरी गांड मारने के लिये यह पैंटी नहीं उतारना पड़े इसलिये ऐसी है. अब तेरे लंड का काम होगा तभी यह उतरेगी."
हेमन्त मुझसे चिपकना चाहता था पर अम्मा ने उसे डांट दिया. "चल दूर हो, तेरी भाभी है, आज पहले रतन चोदेगा मन भर कर, तू मेरे साथ आ जा दूसरे पलंग पर. मेरी गांड मारना और रतन के कर्तब देखना. फ़िर बहू पर करम करेंगे."
मुझे आज उन्होंने पूरा सजाया था. हाथों में चूड़ियां, कान में बुंदे, पांव में पायल और बनारसी साड़ी चोली पहनाई. मेरे बाल कंधे तक लंबे हो ही गये थे. उसमें मांजी ने फूल गुंध कर चोटी बांध दी.
"चलो अब खा लो कुछ. फ़िर बेडरूम में चलते हैं." अम्मा बोलीं. रतन और हेमन्त के साथ वे रसोई में आईं. मुझे परोसने को कहा गया.


"चल आज से ही काम पर लग जा. हमें परोस. खाना तो तू खा चुकी है. आगे रतन भी प्यार से खिलायेगा. कल से धीरे धीरे घर का काम भी सिखा दूंगी. घर का पूरा काम करना और हम सब की सेवा करना यही तेरा काम है अब." अम्मा ने कहा.
खाना खाते खाते सब मुझे नोंच रहे थे. जब भी मैं किसी को परोसने जाता, कोई मेरी चूची दबा देता या चूतड़ या जांघ पर चूंटी काट लेता. धीरे नहीं, जोर से कि मैं तिलमिला जाऊं. एक बार रोटी लाने में मुझे देर हुई तो रतन ने मजाक में जोर से मेरी चूची मसल दी और फ़िर नितंब पर जोर से चूंटी काटी. "जल्दी जानेमन, नखरा नहीं चलेगा." मैं कसमसा गया और रोने को आ गया.
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05-14-2019, 10:45 AM,
#85
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"रोती क्यों है बहू, तेरा पति है, तेरे जवान शरीर को मसलेगा ही. और पिटाई भी करेगा! हमारे यहां बहुओं की कस कर पिटाई होती है. इसलिये जो भी तुझसे कहा जाये, तुरंत किया कर. हम सब भी तेरे शरीर को मन चाहे वैसे भोगेंगे. हमारा हक है. और जब रतन का लौड़ा लेगी तो क्या करेगी? मर ही जायेगी! बड़ी नाजुक बहू है रे रतन." अम्मा बोलीं.
"ऐसी ही चाहिये थी अम्मा, सही है. जरा रोयेगी धोएगी तो चोदने में मजा आयेगा. मैं तो अम्मा रुला रुला कर चोदूंगा इसको!" रतन अपना लंड सहलाता हुआ बोला.
खाना खाने के बाद अम्मा बोलीं. "चलो अब देर न करो. बहू को उठा कर ले चलो. वो बेचारी कब से तड़प रही है। तुझसे चुदने को!"
मैं सिहर उठा. मेरी सुहागरात शुरू होने वाले थी!
रतन मुझे उठा कर चूमता हुआ पलंग पर ले गया. मां और हेमन्त भी पीछे थे. मुझे पलंग पर पटक कर रतन मुझपर चढ़ गया और जोर जोर से मुझे चूमने लगा. उसके हाथ मेरी चूचियां और नितंब दबा रहे थे. मुझे बहुत अच्छा लगा. आखिर वह मेरा पति था और अब मेरे शरीर को भोगने वाला था. आंखें बंद करके मैं उसकी वासना भरी हरकतों का आनंद लेने लगा.
"बहू को नंगा करो रतन. बहुत लाड़ हो गया. अपना काम शुरू करो. और अपने अपने कपड़े भी उतारो" अम्माजी ने हुक्म दिया.
सब फ़टाफ़ट नंगे हो गये. हेमन्त को तो मैंने बहुत बार देखा था. अम्माजी का नग्न शरीर भी आज नहाते समय देख किया था. पर रतन को मैं पहली बार देख रहा था. उसके हट्टे कट्टे पहलवान जैसे शरीर को देखकर मैं वासना से सिहर उठा. क्या तराशा हुआ चिकना मांस पेशियों से भरा हुआ बदन था! चूतड़ बड़े बड़े और गठे हुए थे. मैं सोचने
लगा कि अपने पति की गांड मारने मिले तो मैं तो खुशी से पागल हो जाऊंगा.
पर रतन का लंड देखकर मैं घबरा गया. मन में कामना के साथ एक भयानक डर की भावना मन में भर गयी. रतन का लंड आदमी का नहीं, घोड़े का लंड लगता था एक फुट नहीं तो कम से कम दस ग्यारह इंच लंबा और ढाई-तीन इंच मोटा होगा!. सुपाड़ा तो पाव भर के आलू जैसा फूला हुआ था! और नसें ऐसी कि जैसे पहलवान के हाथ पर होती हैं। घबरा कर मैं थरथर कांपने लगा.
मेरी घबराहट देख कर सब हंसने लगे. हेमन्त तुरंत मेरी ओर बढ़ा. उसकी आंखों में भी मेरे प्रति प्यार और वासना उमड़ आयी थी. "अरे घबरा गयी अनू भाभी? मैंने पहले ही कहा था कि रतन का लंड झेलना आसान काम नहीं है.
आ तेरे कपड़े उतार दें! भैया, कहो तो मैं चोद लू भाभी को?"
"तू नहीं रे छोटे, तूने बहुत मजा ली है. अब रतन पहले इसे चोदेगा. फ़िर हम चखेंगे बहू का स्वाद. रतन बेटे, इसके


२७
सब कपड़े निकाल दे, सिर्फ ब्रा और पैंटी रहने दे. पैंटी में पीछे से छेद है, तू आराम से उसमें से इसे चोद सकेगा. देख अधनंगी बहू क्या जुल्म ढाती है." मांजी बोलीं.
रतन ने फ़टाफ़ट मेरी साड़ी और चोली उतार दी. काली रबड़ की ब्रा और पैंटी में सजा मेरा गोरा दुबला पतला शरीर देखकर सब "आः, उफ़, मार डाला" कहने लगे. रतन तो पागल सा हो गया. मुझे पटककर मेरे ऊपर चढ़ गया और
अपना लंड मेरे गुदा पर रख कर पेलने लगा.
अम्माजी हंसने लगी. "देखो कैसा उतावला हो गया है, अरे पहले जरा बहू के शरीर को मसलना कुचलना था. खैर, तेरी बेताबी मैं समझ सकती हूं. मार ले उसकी, अपनी आग शांत कर ले, फ़िर मिलकर आराम से खेलेंगे इस गुड़िया
रतन के पेलने के बावजूद उसका लंड मेरी गांड में नहीं घुस रहा था. उधर में दर्द से बिलबिलाता हुआ तड़प रहा था क्योंकि गांड में बहुत दर्द हो रहा था. हेमन्त बोला. "भैया, ये ऐसे नहीं जायेगा. महने भर से मैने भाभी को नहीं चोदा है. आराम से अब उसकी गांड फ़िर टाइट हो गयी है. मख्खन लगा लो नहीं तो अनू मर जायेगी."
वह जाकर मख्खन ले आया. अम्माजी ने मेरे गुदा में और हेमन्त ने अपने भाई के लंड में मख्खन लगाया. मख्खन लगाते हुए रतन के लंड को चूम कर हेमन्त बोला. "आज तो यह गजब ढा रहा है यार! सुहागरात न होती तो मैं कहता कि मेरी ही मार लो प्लीज़! ।
अव रतन ने बेरहमी से मेरी गांड में सुपाड़ा उतार दिया. पक्क की आवाज के साथ मेरा छल्ला चौड़ा हुआ और मुझे इतना दर्द हुआ कि मैं रो पड़ा और हाथ पैर फ़कते हुए चीखने लगा. "आखिर सील टूटी साली की, हेमन्त इधर आ
और हाथ पकड़ो हरामजादी के, बहुत छटपटा रही है" रतन मस्त होकर बोला.
अम्माजी ने मेरे पैर पकड़ लिये और हेमन्त ने हाथ. हेमन्त ने पूछा "मुंह बंद कर दें भाभी का?"
मांजी बोलीं. "अरे नही, चिल्लाने दे, मजा आयेगा. सुहागरात में बहू रोये तो मजा आता है. इससे पता चलता है कि असल में चुदी या नहीं? मैं इसकी दर्द भरी चीख सुनना चाहती हूं जब मेरे बेटे का लौड़ा इसकी गांड चौड़ी करेगा. वैसे फ़ाड़ तो नहीं देगा रे रतन बहू की गांड नहीं तो कल ही टांके लगवाने पड़ेंगे. आगे ढीली ढाली गांड मारने में
क्या मजा अयेगा?"
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05-14-2019, 10:45 AM,
#86
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"नहीं अम्मा, ऐसे थोड़े फ़टेगी! साली पूरी चुदक्कड़ है. देख अब इसकी कैसी दुर्गत करता हूँ!" कहकर रतन ने आगे लंड पेलना शुरू किया. मैं दर्द से चीखने लगा. आज सच में मेरी गांड ऐसे दुख रही थी जैसे कोई घूसा बना कर हाथ डाल रहा हो. अब मेरा लंड भी बैठ गया था. सारी मस्ती उतर गयी थी. आंखों से आंसू बह रहे थे. रतन ने
और जोर लगाकर जब तीन चार इंच लौड़ा और मेरी गांड में उतार दिया तो मैं बेहोश होने को आ गया.
"अरे अरे, बेहोश हो रही है बहू. फ़िर क्या मजा आयेगा इसके बेजान शरीर को चोदकर. रतन, उसकी चूची मसल, अभी जाग जायेगी." अम्मा की इस सलाह पर रतन ने मेरे गाल पकड़कर ऐसे कुचले कि दर्द से बिलबिलाकर मैं फ़िर होश में आ गया और हाथ पैर पटकने की कोशिश करने लगा.
"अब ठीक है, डाल दे पूरा लंड अंदर" अम्मा ने कहा. रतन ने मेरे चूतड़ पकड़े और घच्चसे पूरा एक फुट लौड़ा मेरे चूतड़ों के बीच गाड़ दिया.
में ऐसे चिल्लाया जैसे हलाल हो रहा होऊ! मेरे दर्द की परवाह न करके रतन मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी चूचियां हाथ में पकड़कर बोला. "अब हट जाओ अम्मा. हेमन्त तू अब जा और मां को चोद ले. मुझे अपनी पत्नी को चोदने दे ठीक से. अब देख मैं कैसे इसे रंडी की गांड का भुरता बनाता हूं." और मेरी रबड़ की ब्रा में कसी नकली चूचियां मसल मसल कर वह मेरी गांड मारने लगा.
अगले आधे घंटे मेरी जो हालत हुई, मैं कह नहीं सकता. मैं रोता बिलखता रहा और मेरा पति हांफ़ता हुआ ऐसे मेरी


२८
गांड मारता रहा जैसे पैसा वसूल करने किसी रंडी पर चढ़ा हो. मुझे ऐसा लग रहा था कि किसीने पूरा हाथ मेरे चूतड़ों के बीच गाड़ दिया हो और उसे अंदर बाहर कर रहा हो. आज मुझे पता चल गया था कि हलाल होते बकरे को कैसा दर्द होता होगा या फ़िर भयानक बलात्कार की शिकार कोई युवती क्या अनुभव करती होगी!
उधर हेमन्त अपनी मां पर चढ़ कर उसे चोद रहा था. अम्माजी भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपने छोटे बेटे से चुदवाती हुई बड़े बेटे को शाबासी दे रही थीं. "बस ऐसे ही बेटा, दिखा दे बहू को चुदाई क्या होती है! हेमन्त ने तो बड़े प्यार से मारी होगी इसकी गांड! अब जरा यह देखे कि असली गांड मराना किसे कहते हैं."
आखिर रतन एक हुंकार के साथ झड़ा और हांफ़ता हुआ मेरे ऊपर लेट कर आराम करने लगा. मां और हेमन्त मेरी यह निर्मम चुदाई देखकर पहले ही झड़ चुके थे. उनकी वासना शांत होने पर अब वे मुझसे थोड़ा नरमी का बर्ताव करने
लगे.
"बहू, ठीक से चुदी या नहीं तू या कोई तमन्ना बाकी है?" मांजी ने पूछा. मुझे रोते देखकर तरस खाकर बोलीं. "बहुत अच्छा चोदा तूने रतन पर अब इसे जरा पानी पिला दे. प्यास लगी होगी. और हेमन्त जरा अपनी भाभी के लंड पर ध्यान दे, देख कैसा मुरझा गया है. जरा मजा दिला उसे. तब तक मैं रतन को शहद चखाती हूं. रतन मजा आया बेटे?"
"मस्त मुलायम गांड है अम्मा अनू की. हेमन्त तू सही बीवी लाया है चुन कर मेरे लिये. अब देखना कैसे इस कली को मसल मसल कर इसका भोग लगाता हूं. इसकी मलाई चखने का मन हो रहा है अब" रतन मेरे गुदा में से लौड़ा खींचते हुए बोला.
अम्माजी ने रतन का मुंह अपनी चूत में डाल लिया और उसे अपने बुर के पानी और हेमन्त के वीर्य का मिला जुला अमृत पिलाने लगीं. मैं अब सोच रहा था कि काश मैं उसकी जगह होता. रतन का लंड निकल जाने के कारण अब मेरी गांड में होती भयानक यातना कम हो गयी थी फ़िर भी गांड ठन ठन दुख रही थी.
हेमन्त ने पहले रतन का लंड चूस कर साफ़ किया. फ़िर वह मेरे गुदा पर मुंह लगाकर अंदर का माल चूसने लगा. मुंह उठाकर बोला. "वाह, भाभी की मुलायम गांड में से भैया का वीर्य चखने का मजा ही कुछ और है अम्मा" वह साथ में मेरे लंड को सहला रहा था. उसे मालूम था कि मुझे क्या अच्छा लगता है और उसके अनुभवी हाथों ने जल्द ही मेरा लंड खड़ा कर दिया. लंड खड़ा होने के बाद गांड का दर्द मुझे अब इतना जान लेवा नहीं लग रहा था.
रतन आखिर अपनी मां की चूत पूरी चाट कर उठा और मेरा सिर अपनी गोद में लेकर लेट गया. मेरे मुंह में अपना लंड डालते हुए बोला. "अनू रानी, चल अब अपने पति का शरबत पी ले." फ़िर वह मेरे सिर को अपने पेट पर भींच कर मेरे मुंह में मूतने लगा.
उसने दस मिनिट मुझे अपना मूत पिलाया. लगता है घंटों वह मूता नहीं था. मैंने आंखें बंद करके चुपचाप अपने स्वामी का मूत पिया. वह खारा गरमागरम मूत मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे चेहरे परके भाव देखकर रतन और मांजी बहुत खुश हुए. "सच बड़ी अच्छी ट्रेनिंग दी है हेमन्त ने अपनी भाभी को कैसे पी रही है जैसे भगवान का प्रसाद हो!" मांजी बोलीं.
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05-14-2019, 10:45 AM,
#87
RE: Adult Kahani समलिंगी कहानियाँ
रतन का मूत पीने के बाद हेमन्त और मांजी ने भी अपना अपना मूत मुझे पिलाया. हेमन्त ने तो वैसे ही लौड़ा मुंह में देकर पिलाया पर मांजी ने खड़े होकर मुझे अपनी टांगों के बीच बिठाकर मेरे मुंह में मूता जैसे कोई देवी सामने बैठे भक्त पर अहसान कर रही हो. पहले चेतावनी भी दी. "बहू, अगर जरा भी नीचे गिराया तो आज तेरी टांगें तोड़ दूंगीं. अपनी सासूमां का यह बेशकीमती उपहार मन लगा कर पी." मैं जब बिना छलकाये सारा पी गया तो वे बहुत खुश
मेरा पेट अब लबालब भरा था और मुझे डकार आ रही थी. तीनों मिलकर यह सोचने लगे कि अब मेरे साथ क्या किया जाये?


"भैया, तुमने इसका एक छेद तो चोद डाला, अब दूसरा चोदो. मुंह चोद डालो, मस्त पूरा घुसेड़ कर पेट तक उतार दो. बहुत अच्छी चुदती है यह लौंडी मुंह में, अभी ठीक से सीखी नहीं है इसलिये गोंगियाती है, बहुत मजा आता है. तब तक मैं अपनी भाभी की गांड मार लेता हूं. आखिर इसकी सुहाग रात है, गांड खूब चुदनी चाहिये नहीं तो सोचेगी कि कैसे लोग हैं, बहुओं को ठीक से चोदना भी नहीं जानते. और अनू अम्मा की गांड मार ले तब तक!
आखिर बहू से गांड मराने में जो मजा है, वह मां भी चख ले जरा." हेमन्त ने सुझाव दिया.
रतन को बात जच गयी. उसने अपनी मां को बिस्तर पर लेटने को कहा. अम्माजी अपनी पहाड़ सी गांड ऊपर करके लेट गयीं. मुझे उनपर चढ़ा दिया गया और मेरा लंड उनकी गांड में घुसेड़ दिया गया. काफ़ी फुकला गांड थी मेरी सासूमां की, आखिर दो दो बेटों के मतवाले लंडों से सालों चुदी थीं. पर उस मुलायम छेद का मजा ऐसा था कि मैं तुरंत अपनी सास की गांड मारने लगा. हेमन्त मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी गांड मारने लगा. उसके प्यारे जाने पहचाने लंड के अपने गुदा में होते स्पर्श से मुझे बहुत अच्छा लगा.
रतन मेरे सामने बैठ गया और अपना झड़ा लंड मेरे मुंह में डालकर मेरा सिर अपने पेट पर दनाकर हमारे सामने बैठ । गया. "चलो शुरू हो जाओ अब"
अगले आधे घंटे यह सामूहिक चुदाई चलती रही. मैं मांजी के मम्मे दबाता हुआ उनकी गांड मार रहा था और हेमन्त मेरी. धीरे धीरे रतन का लंड खड़ा हुआ और मेरे गले में समाने लगा.
जल्द ही मैं दम घुटने से छटपटा रहा था. मेरे पति का एक फुटीया लंड मेरे सीने तक उतर गया था. अब मैं हाथ पैर मारकर छूटने की कोशिश कर रहा था. मेरा गला दुख रहा था और सांस रुक गयी थी. पर वे तीनों मां बेटे मुझसे चिपटे रहे और मुझे भोगते रहे.
आखिर मेरे झड़ने के बाद वे रुके. हेमन्त और रतन ने अपने अपने तन्नाये लंड मेरी गांड और मुंह से निकाले और बारी बारी से अपनी मां की गांड में से मेरा वीर्य चूसा. मैं हांफ़ता हुआ अधमरा सांस लेने की कोशिश करता हुआ लस्त पड़ा रहा. मांजी उलाहना देते हुए बोलीं. "तुम लोग झड़े नहीं बहू के शरीर में?"
"अब तो मौका आया है दुल्हन की असली चुदाई का अम्मा! अब हम लगातार इसकी गांड मारेंगे. एक मिनिट को भी इसकी गांड में लंड चलना बंद नहीं होना चाहिये. आखिर हमारे खानदान की इज्जत का सवाल है. सुहागरात में बहुएं बिना रुके रात भर चुदना चाहिये ऐसी प्रथा है हमारे यहां अम्मा." हेमन्त अपनी मां की चूचियां दबाता हुआ बोला.
"कितनी फ़िकर है मेरे जवान बेटों को अपनी बहू के सुख की!" अम्मा भाव विभोर होकर बोलीं. "बहू तू अब बाथरूम हो आ. फ्रेश हो ले, फ़िर तुझे तेरे मस्त चोदा जायेगा, तू बड़ी बेताब है उसके लिये मुझे मालूम है."
मैं किसी तरह बाथरूम गया. अंग अंग दुख रहा था. आंखों में आंसू आ गये थे. अब तक मेरी मस्ती हवा हो गयी थी. मन में रुलाई छूट रही थी कि कहां फंस गया. पर अब मैं कहां जाता.
पंद्रह मिनिट बाद भी मैं जब नहीं निकला तो रतन बुलाने आया. मैंने दरवाजा खोला तो पहले उसने मुझे एक करारा तमाचा मारा. मैं रोने लगा. वह बोला. "अनू रानी, मुझे लगा था कि तू फ़टाफ़ट खुशी खुशी आयेगी पर तू तो रो रही है! यह नहीं चलेगा. तू गुलाम है हमारी, जैसा कहते हैं वैसा करना नहीं तो तेरी ऐसी हालत करेंगे कि तुझसे सहन नहीं होगी."
मुझे पकड़कर वह बिस्तर पर लाया.
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05-14-2019, 10:46 AM,
#88
RE: Adult Kahani समलिंगी कहानियाँ
मेरी ब्रा रहने दी गयी पर पैंटी अब निकाल दी गयी. हेमन्त और रतन मेरी नकली चूचियों पर टूट पड़े और अम्माजी मेरा लंड चूसने लगीं. उधर अम्मा मेरे लंड को चबा चबाकर चूस रही थीं जैसे गंडेरी खा रही हों. मैं तड़प कर झड़ गया. अम्माने पूरा वीर्य पी कर ही मुझे छोड़ा.


फ़िर वे आपस में चिपट कर संभोग करने लगे. मुझे मेरी हालत पर छोड़ दिया गया. दोनों भाई अपनी मां को आगे पीछे से चोदने लगे. "खूब चोदो मेरे लाड़लो पर झड़ना नहीं." अम्मा उचक उचक कर हेमन्त से गांड मरवाते हुए बोलीं. रतन आगे से उन्हें चोद रहा था. "झड़ना बहू की गांड में उसकी गांड आज इतनी मारी जानी चाहिये कि कभी यह न कह सके कि सुहाग रात में उसके साथ इन्साफ़ नहीं हुआ"
अब दोनों अलट पलट कर मेरी गांड मारने लगे. एक मिनिट को मुझे नहीं छोड़ा गया. एक का लंड मेरे मुंह में होता
और दूसरे का गांड में, मुंह में वे झड़ते नहीं थे. एक मेरी गांड में झड़ता तो दूसरा तुरंत मुझ पर चढ़ जाता.
वे दो तीन घंटे मेरे ऐसे गये जैसे मैं स्वर्ग नरक के अजीब से मिले जुले माहौल में होऊ.
आखिर रात को तीन बजे मेरी चुदाई समाप्त हुई. आखरी बार रतन ने मेरी गांड मेरी और फ़िर लस्त पड़ा आराम करने लगा. हेमन्त और अम्मा पहले ही सो गये थे. मेरी भी आंखें लग गयीं.
सुबह मुझे झिंझोड़ कर जगाया गया. अंग अंग दुख रहा था जैसे किसी ने रात भर तोड़ा मरोड़ा हो. गांड में अजब टीस थीं, जोर का दर्द था और कुछ मस्ती भी थी. नींद खुलते खुलते मुझे उठाकर रतन बाथरूम ले गया. हेमन्त और
अम्माजी भी साथ में थे.
आराम करने से मेरा लंड फ़िर खड़ा हो गया था. पिछली रात की मेरे दुर्गति याद करके मुझे बड़ी मादक सनसनी हो रही थी. अब मैं अपने आप को कोस रहा था कि क्यों मैं रोया और चिल्लाया! यह तो मेरा भाग्य था कि इतनी तीव्र गंदी और विकृत कामवासना से भरी जिंदगी मुझे मिली थी. अब मुझे यह लग रहा था कि फ़िर से तीनों मेरे ऊपर कब चलेंगे!
अपने मसले दुखते बदन में होती पीड़ा को अनदेखा करके मैंने प्यार से रतन के गले में बांहें डाल दीं और उसे चूम लिया. उसकी आंखों में देखते हुए शरमा कर मैंने कहा, "स्वामी, आपने, देवरजी और मांजीने मुझे जो सुख दिया है, मैं कभी नहीं भूलूंगी. आप तीनों मुझे खूब भोगिये, अपनी सारी हवस निकाल लीजिये, मुझे चोद चोद कर मार डालिये प्लीज़, मुझसे यह चुदासी सहन नहीं होती अब. और मेरी एक और प्रार्थना है स्वामी!"
रतन चूम कर मुझे बोला "बोल रानी, क्या चाहती है? क्या मुराद रह गयी तेरी सुहागरात में?"
"देवरजी की गांड तो मैंने बहुत मारी है, अम्माजी की भी मार ली, अब आप भी मरा लें मेरे स्वामी, आप जो कहेंगे मैं करूंगी."
रतन ने मुझे चूमते हुए कहा. तो यह चाहती है तू, चल अभी मार लेना. पहले अपनी गांड खाली कर लें, फ़िर उसमें अपना यह हसीन लंड डाल देना. और तू फ़िकर मत कर रानी, तुझे तो हम ऐसे ऐसे चोदेंगे और ऐसे ऐसे कुकर्म तेरे साथ करेंगे, तूने सोचे भी नहीं होंगे. हर तरह की नाजायज, गंदी, हरामीपन की क्रियाएं तेरे साथ हम करने वाले हैं. साल भर में तुझे पिलपिला न कर दिया तो कहना. अब चल, तैयार हो जा." वह जल्दी से संडास हो आया. तब तक अम्माजी ने और हेमन्त ने मिलकर मेरी मालिश की और मेरे दुखते शरीर पर क्रीम लगायी.
दस मिनिट बाद जब रतन वापस आया तो उसका भी लंड तन कर खड़ा हो गया था. अम्मा भी मुट्ठ मार रही थीं. "बहू एकदम रति देवी की मूरत है रतन. अब तुम लोगों से मूतना तो होगा नहीं अपने खड़े लंडों से, मैं ही इसकी प्यास बुझा देती हूं." कहकर वे मेरे मुंह में मूतने लगीं.
मेरा पेट लबालब भर गया था और वासना से मेरा सिर सनसना रहा था. मेरी हालत देख कर अब दोनों भाई मेरे ऊपर फ़िर चढ़ना चाहते थे, मैं भी यही चाहता था. पर अम्मा ने मना कर दिया. "बहू को क्या वादा किया था रतन? चलो गांड मराओ उससे."
रतन जमीन पर ओंधा लेट गया और मैं उसपर झुक कर उसके चूतड़ चूमने लगा. क्या चूतड़ थे एकदम गठीले, कड़े
और मांस पेशियों से भरे. मैंने उसके गुदा में नाक डाली और सूंघने लगा. फ़िर जीभ डालकर चाटने लगा.
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05-14-2019, 10:46 AM,
#89
RE: Adult Kahani समलिंगी कहानियाँ
"जल्दी कर रानी" रतन बोला. उसे मेरी जीभ का स्पर्श मतवाला कर रहा था.
"बहू को मजा करने दे मन भर कर. तू कर बहू क्या करना है।
मैंने मन भर कर अपने पति की गांड चुसी और अखिर जब मस्ती से पागल सा हो गया तब उसपर चढ़कर उसकी गांड में अपना लंड डाल दिया. तन कर खड़ा होने के बावजूद लंड आराम से गया. आखिर वह अपने छोटे भाई हेमन्त से मरवाता था, गांड ढीली होनी ही थी.
मैं उससे चिपटकर अपने पति के गांड मारने लगा. मेरी चूचियां उसकी पीठ पर दब रही थीं. उससे रतन को भी मजा आ रहा था. रतन भी मुझे हिम्मत दे रहा था. "मार रानी, मार मेरी गांड . अम्मा ! मैं पहला पति होऊंगा जिसने सचमुच के लंड से अपने पत्नी से गांड मरवायी है।"
तीव्र सुख के साथ मैं अचानक झड़ गया और रोने लगा. रुलाई खुशी की भी थी और इस अफ़सोस से भी थी कि
और देर मैं यह सुख नहीं ले पाया.
अम्मा ने मुझे दिलासा दिया. "बहू अब तो रोज मार सकती है तू. दिल छोटा न कर, तेरा ही आदमी है. ऐसा किया कर कि रोज सुबह इसकी गांड मारा कर. बहुत मजा आएगा. और हेमन्त तू आज बच गया. चल कल मरा लेना."
फ़िर वे अपने दोनों मस्ताये बेटों से बोलीं. "अब बहू को स्नान करने दो, साफ़ होने दो. बाद में इसे इस घर के तौर तरीके सिखा देंगे. एक टाइम टेबल भी बनाना है. चन्दा आती होगी. उसे कहूंगी बहू को नहला दे."
किसीने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया. मांजी बोली. "लो चन्दा आ गयी. आ जा चन्दा, तेरी ही रह देख रहे थे."
दरवाजा खुला और पैंतीस की उम्र की एक सांवली भरे पूरे बदन की औरत अंदर आयी. एकदम सेक्सी और देसी माल था. बड़ा सिंदूर, आधी खुली चोली जिसमें से बड़े बड़े मम्मे दिख रहे थे, और गांव की स्टाइल में बांधी साड़ी जिसमें से उसकी मोटी चिकनी टांगें दिख रही थीं. होंठ पान से लाल थे.
मुझे घूरते हुए वह बोली. "तो ले आये बहू को? मैं तो मरी जा रही थी देखने को पर आप ने कहा कि सुहागरात के बाद ही आना इसलिये कल रात ऐसे ही सड़का लगाकर सब्र कर लिया. बड़ी सुंदर है बहू, कितनी चिकनी है, कोई कह नहीं सकता कि लड़का थी, बस इस लंड से पता चलता है. लंड तो बहुत प्यारा है दीदी. और मम्मे? मैं तो वारी जाऊं, क्या चूचियां हैं? पर बड़ी मसली कुचली और थकी लग रही है बहू रानी. लगता है खूब मस्त सुहागरात हुई है दीदी." और हंसने लगी.
अम्माजी मुझे बोली. "बहू, यह है चन्दा. हमारी नौकरानी है पर घर की है. इससे कोई बात छिपी नहीं है. मेरी खास सहेली है. हम दोनों ने बहुत मजा की है, अब तेरे साथ और करेंगे. आज से यही तेरा खयाल रखेगी. तुझे हमारे भोग के लिये तैयार किया करेगी. इसका भी तुझ पर इतना ही हक है जितना हमारा. इसका कहा मानना. चन्दा तू बहू को नहला दे और तैयार कर. फ़िर बहू को सब समझाना है"
मुझे चंदा के सुपुर्द करके वे तीनों चले गये. जाते जाते रतन उसकी चूची दबा कर बोला. "अब चढ़ मत जाना बहू पर चन्दा बाई, हमने काफ़ी ठुकाई की है।"
"अरे तू जा ना! मैं देख लूंगी बहू के साथ क्या करना है" उलहना देकर उसने सब को बाहर निकाला और दरवाजा लगा लिया. फ़िर कपड़े उतारते हुए बोली. "आओ बहू रानी तुम्हें नहला दें. पेट तो भर गया ना? कब से तैयारी हो रही थी तुम्हें खिलाने पिलाने की." कहकर वह एक कुटिल हंसी हंसी और मेरा निपल जोर से मसल दिया. मैं कराह उठा. लगता है वह भी अपनी मालकिन और उसके बेटों जैसी दुष्ट थी. पर थी बड़ी सेक्सी.
उसके मोटे मम्मे, घनी झांटें और तगड़ी जांघे देखकर मेरा लंड उछलने लगा. "ओहो, तो मैं पसंद आयी बहू रानी को! मुझे भी तू बहुत पसंद है बहू, बस अपने आप को मेरे हवाले कर से, देख मैं तुझे कहां से कहां ले जाती हूं.


चल अब नहा ले"
चंदा ने मुझे खूब नहलाया. मेरे बदन की मालिश की, मेरे बाल धोये और अंत में मेरा लंड चूस डाला. दो मिनिट में मुझे झड़ाकर मेरा वीर्य पीकर वह उठ खड़ी हुई. मैं ना ना करते रह गया क्योंकि मुझे डर था कि उन लोगों को पता चल गया कि मैं झड़ गया हूं तो न जाने क्या करें.
चन्दा ने मुझे दिलासा दिया. "बहुत स्वाद है तुझमें बहू. तू मत डर, किसी को पता नहीं चलेगा, अभी तुझे फ़िर मस्त कर देती हूं, और पता चल भी जाये तो क्या, मेरा भी हक है तेरे बदन पर, अब चल, मेरी बुर चूस, तेरी सास तो दीवानी है इसकी, तू भी चख ले. फ़िर दूध पिलाती हूं तुझे" ।
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05-14-2019, 10:46 AM,
#90
RE: Adult Kahani समलिंगी कहानियाँ
मेरे चेहरे पर के भाव देखकर वह हंसने लगी. "अरे तेरे पति को, तेरे देवर को मैंने ही तो पिलाया है. अब भी पीते हैं। बदमाश, जो बचता है उनकी मां पी लेती है. अब बैठ नीचे." मुझे नीचे बिठाकर वह मेरे मुंह में अपनी चूत देकर खड़ी हो गयी और मुझे चूसने को कहा. एकदम देसी माल था उसका, चिपचिपा और तीव्र गंध वाला. उसकी बात सच थी. उसकी चूत चूस कर मेरा फ़िर ऐसा खड़ा हुआ जैसे बैठा ही न हो.
फ़िर उसने प्यार से वहीं बाथरूम के फ़र्श पर बैठकर मुझे गोद में लिया और अपना दूध पिलाया. एकदम मीठा और गरम दूध था. मैं तो निहाल हो गया. उसकी मोटी चूची पकड़कर बच्चे जैसा उसका स्तनपान करने लगा. दोनों स्तन आधे आधे पिला कर चन्दा ने मेरा बदन पोंछ कर जल्दी जल्दी साड़ी और चोली पहनायी. मेरे होंठों पर लिपस्टिक लगायी और मांग में सिंदूर भरा "ब्रा पहन और चल जल्दी बाहर, सब इंतजार कर रहे होंगे."
बाहर सब नहा धोकर मेरी राह देख रहे थे. "आओ बहू, बहुत सुंदर लग रही हो. चन्दा जरा नजर उतार देना मेरी बहू
की. बहू अब तुझे समझाती हूं कि तेरा दिन भर का क्या टाइम टेबल है. तुम लोग भी सुनो."
अम्माजी फ़िर मुझे गोद में बिठाकर चूमते हुए बोली. "बहू, तेरा काम है सिर्फ संभोग, दिन रात हमसे चुदवाना और गांड मरवाना और जैसा हम कहते हैं वैसा करना. जब कोई चाहेगा, तुझे जैसे मन आये भोग लेगा. और हमारे लिये
अपना मुंह हमेशा तैयार रखना. हम उसमें जो दें, वह प्यार से प्रसाद समझ कर निग
"मैं दिन भर घर में रहती हूं इसलिये मेरी सेवा तो तू हमेशा करेगी. रतन सुबह काम पर जाता है और दोपहर में आता है. सुबह वह तुझे अपना मूत पिला जायेगा. जाने से पहले जैसे चाहे तुझे चोद लेगा. उसके बाद तेरा नहाना धोना होगा. चन्दा तुझे नहलायेगी और तैयार करेगी. इसके बाद हेमन्त तुझे दोपहर तक चोदेगा. मैं तो रहूंगी ही. दोपहर को हेमन्त तेरी प्यास बुझायेगा और फ़िर काम पर जायेगा."
"रतन आकर सो जायेगा कि रात को तुझे ठीक से चोद सके. दोपहर को तू मेरी सेवा करेगी. चन्दा भी अपनी सेवा तुझसे करायेगी. हेमन्त भी आकर आराम कर लिया करेगा. फ़िर हर रात तेरी ठुकाई होगी जैसे कल सुहागरात में हुई थी. हम तीनों मिलकर तुझे चोदा करेंगे. आज से चन्दा भी अब साथ रहा करेगी. जब भी किसी भी कारण से तू खाली रहे, वह तुझे चोद लिया करेगी."
फ़िर वे आगे बोलीं. "और एक बात सुन. मैंने चन्दा का जिक्र नहीं किया, पर वो मेरी प्यारी नौकरानी है, जब तेरे साथ अकेले में हो तो तेरे साथ कुछ भी कर सकती है, तुझे प्यार से कुछ भी खिला पिला सकती है, क्यों री चन्दा? आज कुछ दिया बहू को?"
चन्दा हंसते हुए बोली "आज दूध पिला दिया मालकिन. बाद में और कुछ भी पिला देंगी. वैसे बुर का शरबत मेरा मस्त होता है, मेरा बेटा कहता है, रोज पीता है ना! बहू रानी को भी पिला दिया करूंगी"
सहसा अम्मा गंभीर हो कर मांजी वे बोलीं "बहू, तेरी बहुत दुर्गत भी करेंगे हम. असल में कब से हमारे मन में है, बहू आये तो उसे खूब पीटें, उसे तरह तरह की यातनायें दें और मजा लें. हमने बहुत सी चीजें लाकर रखी हैं. रबड़ के कोड़े, बांध कर लटकाने के लिये रबड़ की रस्सियां, बड़े बड़े डिल्डौ, वैसे पिटाई तेरी रबड़ की चप्पलों से ही होगी, तुझे अच्छी लगती हैं ना?"


मैं डर और वासना से बेहोश होने को था. रुलाई भी छूट रही थी और लंड तन कर उछल भी रहा था.
अम्मा बोलीं. "बहू को बात पसंद आ गयी. चल बहुत हो गया. चन्दा जा, उसे तैयार कर, हेमन्त और रतन के लंड अब फ़ट जायेंगे बहू को नहीं चोदा तो. देखा बहू तू कितने प्यारे परिवार में आ गयी है! और सुन, आज चोदने के पहले सब मिलकर जरा चप्पलों से उसकी पिटाई करो. कल पिटाई नहीं हुई थी उसकी, बुरा मान जायेगी. आज सटासट चप्पलें लगा लगा कर उसे कुचल डालो, फ़िर चढ़ जाना!"
चन्दा मुझे पकड़कर ले गयी और मैं अपनी अगली जिंदगी के बारे में सोचता खिंचाखिंचा उसके पीछे चल दिया.
--- समाप्त ---
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