Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
09-23-2018, 01:06 PM,
#1
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जगन शहर से आते वक़्त सदा की भांती देवकी के आम के बगीचे से होकर गुजरा. आज हरिया की झोंपड़ी बंद थी और वहाँ कोई नहीं था. हाँ देवकी का आम का बगीचा, यही नाम मश'हूर हो गया था. देवकी के बाप का यह बगीचा था पर जब देवकी का व्याह देव से हुआ तो उसके बाप ने यह बगीचा देवकी के नाम कर दिया और तब से यह नाम मश'हूर हो गया.

लोग कह'ते देवकी का बगीचा बड़ा प्यारा है बड़ा ही मस्त है. आम के सीज़न में लोग बातें करते देवकी के आम तो बड़े मीठे हैं, बड़े बड़े हैं, पूरे पक गये हैं. लेकिन ऐसी बातें लोग आपस में ही करते और एक दूसरे को देख हंसते. बातें बगीचे और आमों की होती, निशाना कहीं और होता.

जगन थोड़ा सुसताने के लिए झोंपड़ी के पास एक आम के पेड की छान्व में बने चबूतरे पर बैठ गया. वह देवकी के बारे में सोचने लगा:-

देवकी जब बीस साल की थी तब उसकी शादी देव से आज से 4 साल पहले हुई थी. शुरू शुरू मे उसकी सुहागन की जिंदगी और उसकी चूत की चुदाई ठीक ठाक चल रहा था. देव उसकी चूत को हर रोज सुबह और रात को खूब जम कर चोद्ता था और इस'से देवकी को चूत भी संतुष्ट थी. लेकिन कुच्छ सालों के बाद देव कमजोर पड़ने लगा और ठीक से देवकी की चूत को चोद नही पाता. घंटों उसका लंड चूसने पर खड़ा होता था और चूत में डाल'ने के कुच्छ समय बाद ही पानी छ्चोड़ देता था. इस'से देवकी की चूत भूखी रह जाती थी और हमेशा लंड की ठोकर मांगती थी. वो देव के सामने अपनी चूत मे उंगली डाल कर अपनी चूत को शांत करने का नाटक करती थी. देवकी अप'नी जवानी को ऐसे ही बर्बाद नही करना चाहती थी और वो अपनी चूत एक मोटा और लंबा लंड से चुदवाने के लिए तरसती थी.

कुच्छ दीनो तक तो देवकी चुप चाप थी पर उसकी चूत उसे शांत नही रहने देती और एक दिन वो हरिया से मिली. शुरू शुरू मे तो देवकी नही चाहती थी कि वो हरिया के सामने अपनी साड़ी उठाए और उस'से अपनी चूत चुड़वाए, लेकिन देवकी अब बिना चूत मे लंड लिए जी नही सकती थी और इस लिए देवकी हरिया से अपनी चूत चुदवाना शुरू कर दिया और ये बात देव से छुप रखी थी.

देवकी को हरिया से चुदवाना धीरे धीरे पसंद आने लगा और उसके मन मे इस'से कोई ग्लानी नही थी क्योंकि उसके मा और बाप यही करते थे. देवकी के मा बाप अपने एक छ्होटे भाई (बाप का भाई) के साथ रहते थे. अपनी छोटी उमर से ही देवकी और उसकी छ्होटी बहन जया यह जानती थी कि उनकी मा अपने देवर और अपने पति से अपनी चूत मरवाती है. दोनो बहने रोज दोपहर को जब उनके पिताजी खेत पर काम रहे होते, अपने चाचा को मा के बेडरूम मे जाते देखती थी. जब दोनो बहाने कुच्छ बड़ी हुई और समझदार हुई तो उन्होने दरवाजे की झीरी से अंदर झाँकने का सोच लिया. जब वो बहने अंदर झाँकी तो उनको पहली बार यह मालूम हुआ की अंदर क्या चल रहा है.

अंदर उनकी मा और चाचा दोनो नंगे थे और चाचा उनकी मा के उप्पेर उल्टे लेट कर अपना चूतर उपर नीचे कर रहे थे. बाद मे उनको मालूम परा कि वो जो कुच्छ भी देखी थी वो मा और चाचा की चुदाई थी. कभी वो देखती थी कि उनकी मा चाचा का लंड अपने मूह मे ले कर चूस रही है. एह देख कर उन बहनो को बहुत मज़ा आता था. कभी कभी वे देखती की चाचा उनकी मा की चूत को चोदने से पहले अपनी जीव से चट रहा है और अपने होठों मे भर कर चूस रहा है. रात को वो बहने अपनी मा की चूत की चुदाई अपने बाप के लंड से होते देखा करती थी. कभी कभी उनकी मा अपना पति से चुदवा ने के बाद अपनी चूत को धो कर उनके चाचा के कमरे मे चली जाया करती थी और फिर वो दोनो फिर से चुदाई करने लगते थे. चुदाई के बाद उनकी मा फिर से अपनी चूत धो कर उनके पिताजी के पास जा कर सो जाया करती थी.

उन बहनो को अपनी मा, पिताजी और चाचा की चुदाई देख देख कर काफ़ी कुच्छ जानकारी हो गयी थी और कुच्छ दीनो के बाद वो एक दूसरे से खेलने लगी थी. वो अप'ने कंबल के नीचे एक दोसरे की चूंची और चूत से खेला करती थी. वो एक दूसरे की चूत को चटा और चूसा भी करती थी और इस'से उनको बहुत मज़ा मिलता था. लेकिन एक दिन उनकी मा ने उनको ये सब करते देख लिया और उनको सेक्स के बारे मे सब कुच्छ समझा दिया.

उनकी मा ने बताया कि जब वो छ्होटी थी तो वो बहुत चुद्दकर थी. अपनी शादी के बाद से ही उनके ससुरजी बता दिए थे की उनका आदमी चुदाई मे कमजोर है और इसलिए वो अपने देवर से अपनी चूत चुदवा सकती है. इसमे कोई पाप नहीं है क्योंकी उनके पति का लंड कमजोर है और उनकी चूत की गर्मी को पूरी तरह से शांत नही कर सकता है.

"मुझे इस बात पर खुशी है कि तुम दोनो भी हमारे रास्ते पर चल रही हो.मुझको तुम्हारे लिए कोई अक्च्छा सा तगड़ा सा पति ढूँढना परेगा. लेकिन फिलहाल तुम दोनो को अपने आप को शांत करना परेगा. अब से मैं तुम दोनो को मेरी चूत की चुदाई देखने ले लिए अपना दरवाजा थोरा सा खुला रखूँगी. तुम दोनो खुल कर मेरी चूत की चुदाई देख सकती हो और हर काम ठीक से समझ सकती हो," उनकी मा उनसे बोली.

उस दिन के बाद से वो बहने बिना झिझक और डर के खुल्लम खुल्ला अपनी मा की चूत की चुदाई देखा करती थी. उनके मा और पिताजी अपने कमरे मे ऐसे एक दूसरे को चोद्ते थे जैसे कि वो चुदाई का नुमाइश लगा रखा है. अक्सर वो अपने कमरे की लाइट बिना बुझाए ही चुदाई करते थे. दोनो बहने अपनी मा और पिताजी की चुदाई देख देख कर एक दूसरे की चूत मे उंगली डाल कर एक दूसरे की चूत को उंगलेओं से चोदा करती थी और अपनी अपनी मस्ती झारा करती थी. उनके चाचा बहुत चुदक्कर थे और वो उनकी मा को कई तरह से, आगे से पिछे से, अपने गोद मे बैठा कर, लेट कर कुतिया बना कर चोद्ते थे और उनकी चुदाई काफ़ी लूंबे समय तक चलती थी.

उनकी मा अपने देवर से अपनी चूत चुद्वते वक़्त तरह तरह की आवाज़ निकालती थी और बहुत बर्बरती थे. उनकी मा की चूत मे जैसे ही उनके चाचा का लंड घुसता था तो उनकी मा अपने दोनो हाथ और पैरों से अपने देवर को बाँध कर अपनी चूतर उच्छाल उच्छाल कर चूत मे लंड पिलवाती थी, और उनका चाचा उनकी मा की चूंची को पकड़ चूस्ता और अपना चूतर उठा उठा कर अपनी भाभी की चूत मे लंड पेलता था. जब उनका चाचा झार कर अपने वीर्या से उनकी चूत को भर देता था तो उनकी मा भी झार कर शांत हो जाया करती थी. देवकी अपने मन ही मन मे एह जान चुकी थी कि एक औरत एक छोड कई आदमी के लंड से अपनी चूत चुदवा सकती है.
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09-23-2018, 01:06 PM,
#2
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
अचानक जगन की तंद्रा टूटी और उसकी आँखों के साम'ने पिच्छले कुच्छ महीनों के सीन एक चलचित्रा की तरह घूम'ने लगे........... आज से 6 महीने पह'ले की बात है जब जगन एक 24 साल का एक गठीले बदन का नौजवान जो बीए करके पिच्छ'ले साल ही शहर से गाओं में वापस आया है. गाओं में आते ही ग्राम पंचायत के ऑफीस में उस'की अच्छी नौकरी लग गयी. एक तो पढ़ा लिखा ऊपर से बात व्यवहार का मीठा, सो जल्द ही गाओं में रुत'बे का आद'मी बन गया. जगन की शादी अभी नही हुई थी और इसी लिए वो गाओं की औरत और लड़कियो को घूर घूर कर देखता था. गाओं के कुँवारी लरकियाँ भी जगन को छुप छुप कर देखती थी क्योंकि वो एक तो अभी कुँवारा था और दूसरी तरफ उसका गाओं मे काफ़ी रुतबा था.

जगन इस बात से वाकिफ़ था और बारे इतमीनान से अपने लिए सुन्दर लड़की की तलाश मे था. जगन को नौकरी से काफ़ी आमदनी हो जाती थी और इसलिए उसको पैसे की कोई कमी नही थी. एक दिन जगन को सहर से सरकारी काम ख़तम करके लौट रहा था. वो जब अपने गाओं मे बस से उतरा तो उस समय दुपहर के करीब 1.00 बजा था. ऊन्दिनो गर्मी बहुत पड़ रही थी और मे का महीना था. उस वक़्त कोई भी आदमी अपने घर के बाहर नही रुकता था. इसलिए उस दोपहर के समय सरक काफ़ी सुनसान था और जगन को कोई सवारी गाओं तक मिलने की आशा नही थी. जगन बहादुरी के साथ आप'ने गाओं, जो कि करीब दो काइलामीटर दूर था, पैदल ही चल पड़ा.

वो काफ़ी ज़ोर-ज़ोर से चल रहा था जिससे कि जल्दी से वो अपने घर को पहुँच जाए. जगन चलते चलते गाओं के किनारे तक पहुँच गया. गाओं के किनारे देवकी का आम का बगीचा था जिसके चारों और एक छोटी सी खाई थी. जगन सोचा कि अगर आम के बगीचा के अनदर से जाया जाए तो थोरी से दूरी कम होगी और धूप से भी बचा जा सकेगा. एह सोच कर जगन ने एक छलान्ग से खाई पार की और आम के बगीचे की एक पग डंडी पर चल पड़ा. वो अभी थोरी दूर ही चला होगा कि सामने बगीचा का रखवाला, हरिया, की झोंपरी तक पहुँच गया. उस'ने सोचा कि वो हरिया के घर थोरी देर आराम कर पानी और छछ पी कर अपने घर जाएगा. जगन सोचा रहा था कि वो पहले नहर मे नहाएगा और पानी पिएगा. जगन जैसे ही हरिया की झोपरी के पास पहुँचा तो उसे बर्तन गिरने की आवाज़ सुनने मे आई.

"अरे , साव'धानी बरत, मेरे बर्तनो को मत तोड़," हरिया की आवाज़ सुनाई दिया.

"मॅफ करना हरिया, बर्तन मेरे हाथ से फिसल गया," एक औरत की आवाज़ सुनाई दिया. एह तो बरी अजीब बात है, जगन. सोचा क्यूंकी हरिया की पत्नी का देहांत कई साल पहले हो चूक्का था. अब एह औरत कॉन हो सकती है? जगन सोचने लगा. जगन बहुत उत्सुक हो गया कि एह औरत हरिया के घर मे कौन आई है. वो धीरे धीरे दबे पावं हरिया के घर की तरफ चल परा. वो एक आम के छोटे से पेड़ के पिछे जा कर खरा हो गया और वहाँ से हरिया के घर मे झाँकने लगा. उसने देखा कि हरिया अपने घर मे एक चबूतरे मे बैठ कर अपने आप को पंखा हांक रहा है.

"ओह! कितनी गर्मी है" एह कहते हुए एक औरत अंदर से बाहर आई. जगन उसको देख कर चौंक उठा. वो जगन का खास दोस्त, देव की पत्नी थी और उसका नाम देवकी था. जगन उनके घर कई बार जा चुक्का था. देवकी एक बहुत ही सुंदर और एक सरीफ़ औरत है. देवकी इस समय सिर्फ़ एक सारी पहन रखी थी और उसके साथ ब्लाउस नही पहन रखी थी और अपनी छाती अपने पल्लू से दाख रखी थी. पल्लू के उप्पेर से देवकी की चूंची साफ साफ दिख रही थी, क्योंकी सारी बहुत ही महीन थी. देवकी हरिया के पास आकर बैठ गयी. देवकी चबूतरे के किनारे पर बैठी थी, उसकी एक टांग चबूतरे के नीचे लटक रही थी और एक टांग उसने अपने नीचे मोर रखी थी. इस तरफ बैठने से उसकी सारी काफ़ी उप्पेर उठ चुकी थी और उसकी एक चूतर साफ साफ दिख रही थी.
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09-23-2018, 01:06 PM,
#3
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
"मेरे गोदी मे लेट जाओ हरिया, मैं तुम्हे पंखा से हवा कर देती हूँ. कम से कम आम के पेर के नीचे थोरी बहुत ठंडा है" देवकी बोली.

"इस तरह की गर्मी कई साल के बाद परा है," हरिया कहा और देवकी की गोदी मे अपना सर रख कर लेट गया, जैसे ही देवकी पंखा झलने लगी तो हरिया उप्पेर की तरफ देखा तो देवकी की चूंची अपने चहेरे के उप्पेर पाया. हरिया अपने आप को रोक नही पाया और सारी के उप्पेर से ही वो देवकी की चूंची को धीरे धीरे दबाने लगा.

"देव बहुत किस्मत वाला है, उसे हर रोज इन सुंदर चूंची से खेलने के लिए मिलता है. देव इतनी सुंदर औरत को हर रात चोद्ता है," हरिया बोला रहा था और देवकी की चूंची को धीरे धीरे दबा रहा था.

"तुम अपने आप को और मुझको परेशान मत करो, तुम अच्छी तरफ से जानते हो कि मुझको कितनी देर तक उसका लंड चूस चूस कर खरा करना परता है. फिर उसके बाद वो दो चार धक्के मार कर झार जाता है. अगर वो मुझको अच्छी तरह से चोद पाता तो क्या मैं तुम्हारे पास कभी आती? खैर अब मुझको कोई परेशानी नही है और ना मुझको कोई शिकायत है." इतना कह कर देवकी झुक कर हरिया की धोती के उप्पेर से उसका आधा खरा लंड के उपर हाथसे मसलने लगा और दूसरी चूची को मुँह से चूसने लगा और बाँयी चूंची को मसल्ने लगा.

जगन फटी फटी आँखो से देखने लगा कि देवकी की चूंची मीडियम साइज़ के पपीते के बराबर खरी खरी थी. हरिया अपने दोनो हाथों से देवकी की चूंची को संभाल नही पा रहा था. जगन जब जब देव के घर जाया करता था तब वो देवकी की चूंची को अपनी कन्खेओ से देखा करता था. लेकिन जगन को यह उम्मीद नही थी कि देवकी की चूंची इतनी बरी बरी और सुंदर होगी. देवकी अपने हाथों से हरिया की धोती उतार कर उसका लॉरा बाहर निकाल लिया. फिर उसको अपने होठों मे लेकर धीरे धीरे सहलाने लगी और फिर हरिया के उपर उल्टी लेट कर (69 पोज़िशन) हरिया का लॉरा अपने मूह मे ले लिया.

हरिया तब देवकी की सारी उसके चूतर तक उठा दिया और उसकी झांतों भरी चूत को पूरी तरह से नंगी कर दिया. देवकी की गोरी गोरी जंघे बहुत सुडोल और सुंदर थी और उसके चूतर भी गोल गोल थे. हरिया अब देवकी की चूत की फांको को अपने हाथों से फैला कर उसकी चूत को चाटने लगा. जगन जहाँ खरा था उसको सब कुच्छ साफ साफ दिख रहा था. उसका लंड अब खरा हो चुक्का था, उसने अपने पैंट की ज़िप खोल कर अपना 10" का तननाया हुआ लॉरा बाहर निकाल कर अपने हाथों से सहलाने लगा. जगन देखा कि देवकी की चूत पेर से झांतो का चादर हटाने से चूत के अंदर का लाल लाल हिस्सा साफ साफ दिख रहा था. हरिया अपना जीव निकाल कर के उसकी चूत पर फिराने लगा. देवकी अपनी चूत पर हरिया का जीव पड़ते ही धीमे धीमे आवाज़ निकालने लगी. देवकी अपनी चूत हरिया के मुँह पर रगर्ने लगी और वो हरिया का लॉरा इतने ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी कि जगन को बाहर से उसकी आवाज़ सुनाई देने लगी.

उन्होंने अपनी पोज़िशन बदल लिया और अब हरिया के उप्पेर देवकी पूरी मस्ती से बैठी थी और अपनी चूत हरिया से चुस्वा रही थी. इस समय देवकी की चूंची बहुत ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और उन चूंची को हरिया अपने दोनो हाथो से पकड़ कर मसल रहा था. इस समय देवकी अपने मूह से तरह तरह की आवाज़ निकल रही थी. जगन एह सब देख कर अपने हाथों से अपना लॉरा ज़ोर ज़ोर से मलने लगा. एका एक देवकी चबूतरे से नीचे उतरी. नीचे उतेर्ते ही उसकी सारी जो की अबतक ढीली पड़ चुकी थी देवकी के बदन से फिसल कर नीचे गिर पड़ी और वो पूरी तरह से नंगी हो गयी. जगन अब देवकी की गोल गोल चूतर साफ साफ देख रहा था और उनको पकर कर मसल्ने के लिए बेताब हो रहा था. अब देवकी चबूतरे को हाथों से पकर कर झुक कर खरी हो गयी और अपने पैर फैला दिया.

हरिया तब देवकी के पिछे जा कर अपना मूसल जैसा खरा लंड देवकी की चूत मे घुसेर दिया और ज़ोर ज़ोर से देवकी को पिछे से चोदने लगा. इस समय हरिया और देवकी दो नो ही गर्मी खा चुके थे और दोनो एक दूसरे को ज़ोर ज़ोर से चोद रहे थे. जगन भी एह सब देख कर ज़ोर ज़ोर अपने हाथों से मूठ मारने लगा. जल्दी ही उस का पानी निकल परा और उधर हरिया और देवकी दोनो एक दूसरे को ज़ोर ज़ोर से चोद रहे थे और बाड़ बड़ा रहे थे. जगन अब अपने छुप्ने की जगह से निकल कर चुप चाप दूसरे रास्ते से अपने घर की तरफ चल परा और उधर हरिया और देवकी दोनो झार चुके थे.

क्रमशः.....................
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09-23-2018, 01:06 PM,
#4
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
गतान्क से आगे............

उस दिन शाम को वह अपने दोस्त देव के घर गया और देव से गपशप करने लगा. उसने देवकी को अपने कन्खेओ से देखा और उसके दिमाग़ उस दिन दोपहर की घटना फिर से घूम गयी. उसे इस समय देवकी की भरा भरा बदन बहुत ही अच्छा लग रहा था और वो उस बदन को अपनी वासना भरी आँखो से नाप तोल रहा था. देवकी को इस सब बातों का एहसास नही था और वो भी जगन से पहले जैसी बातें कर रही थी. जबकि जगन को अपने आप को रोक पाना मुश्किल हो रहा था और वो एक बहाने के साथ देव के घर से उठ कर अपने घर की तरफ चल दिया. अपने घर आकर अकेले मे भी उसका दिमाग़ शांत नही हुआ. वो सोच रह था कि कैसे वो देवकी को अपने बाहों मे भर कर चोदेगा. उसके दिमाग़ मे अब एक ही बात घूम रहा था की कैसे वो देवकी को अपना बनाएगा, चाहे हमेशा के लिए या फिर चाहे एक बार के लिए.

उसको देवकी की चूत मे अपना लंड पेलने की क्वाहिश थी. वो अपने दोस्त की नकाबलियत जान चुक्का था और रात भर देवकी के बारे में सोचता रहा. इस समय जगन सिर्फ़ देवकी की चूत चाहता था. आख़िर कर वो तक कर चुप चाप सो गया और सुबह जब उसकी आँख खुली तब धूप आसमान पर चढ़ चुकी थी. वो अपने नित्य क्रिया पर जुट गया.

उस दिन रविबार था. जगन के दिमाग़ मे अब देवकी ही देवकी थी और वो सोच रहा था कि कैसे वो देवकी को अपने जाल मे फँसाएगा. जगन अपने सुबहा की सैर पर निकल परा. चलते चलते, अनद अंजाने मे देवकी की आम के बगीचा की तरफ निकल परा. वो देवकी के आम के बगीचा मे घुस कर हरिया के झोपरी की तरफ चल परा. जगन जब हरिया के झोपरी के पास पहुँचा तो उसको देवकी की आवाज़ सुनाई दिया. वह झट अपने आप को एक आम के पेड के पिछे छुपा लिया और छुप कर देखने लगा. उसने देखा कि हरिया अपने आप को एक तौलिया मे लप्पेट कर कुच्छ कपरे और साबुन लिए नहर की तरफ जा रहा है और देवकी उसके पिछे पिछे चल रही है. वो लोग जगन की आँखों के साम'ने निकल कर नहर की तरफ मूर गये, जगन भी अपने च्छूपने के जगह से निकल कर नहर के किनारे जा कर छुप गया और उनकी क्रिया कलाप देखने लगा.

देवकी नहर पर आ कर हरिया से उसके कपरे लेके घुटने तक पानी मे अपनी सारी को उठा कर घुस गयी और हरिया के कपरे नहर के पानी मे धोने लगी. देवकी इस समय घुटने तक पानी मे थी और उसने अपनी सारी को काफ़ी उप्पेर उठा रखी थी और इस समय उसकी गोरी गोरी जाँघ काफ़ी उपेर तक दिख रहा था. हरिया नहर किनारे एक पथर पर बैठा देवकी को देख रहा था और उसका तौलिया उसके गुप्तँग के पास उठ कर एक तंबू की तरफ तना हुआ था. कपड़े धोने के बाद देवकीने हरिया को आवाज़ दी,

"हरिया इन्हा आओ, मैं तुम्हारे पीठ पर साबुन लगा देती हूँ." हरिया अपने तौलिया को तंबू बनाए नहर के पानी की तरफ चल परा. देवकी तौलिया के तंबू को देख कर उस पर हाथ लगाया और हरिया के तौलिया को खींच कर निकाल दिया. अब हरिया बिल्कुल नंगा खरा था और उसका खरा हुआ लंड देवकी के तरफ था. उस'ने बरे प्यार से हरिया का खरा हुआ लंड अपने हाथों मे लेकर सहलाया.

फिर देवकी हरिया को धीरे से पानी मे दखेल दिया. पानी मे दखेल ने से हरिया तीन- चार डुबकी लगा कर फिर से पत्थर पर जा कर खरा हो गया. देवकी उसके पिछे पिछे जा कर हरिया के पास खरी हो गयी. हरिया पत्तर पर नंगा ही बैठ गया. देवकी हरिया के सिर और पीठ पर साबुन लगा कर रगर्ने लगी. हरिया अब खरा हो गया. देवकी तब हरिया की छाती और पेट पर साबुन रगर्ने लगी. वो हरिया के पैरों के पास रुक गयी. हरिया का खरा लंड देवकी के लिए बहुत लुववाना था. लेकिन इस समय देवकी कुच्छ करने की मूड मे नही थी, क्योंकि, थोरी देर पहले ही हरिया अप'नी झोम्पडी में उसकी चूत मे अपना लंड पेल कर देवकी को रगर कर चोद चुक्का था.

"क्या तुम्हारा हथियार कभी सुस्त नही परता?" देवकी मुस्कुरा कर हरिया से पूछी.

"कैसे सुस्त रहा सकता है जब तुम पास मे हो?" हरिया जवाब दिया.

"तुम्हे इसकी मदद करनी चाहिए" हरिया कहा. तब देवकी बोली,

"ज़रूर, मैं भी आप'ने आप को रोक नही पा रही हूँ?" इसके बाद देवकी हरिया का खरा लंड को झुक कर अपने मुँह मे भर लिया और उसको चूसने लगी. थोरी देर के बाद देवकी हरिया का चूतर को पकर कर अपना मुँह उठा उठा कर उस लंड को बरे चाब से ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. हरिया अपनी कमर आगे की तरफ झुका कर के अपनी आँख बंद करके बरे आराम से अपना तननाया हुआ लंड देवकी की मुँह के अंदर पेलने लगा. जगन अपनी फटी फटी आँखों से एह सब कुच्छ देख रहा था. देवकी ज़ोर ज़ोर से हरिया का चूस रही थी और थोरी देर के बाद हरिया अपना पानी देवकी की मुँह पेर छ्होर दिया. देवकी हरिया का पानी बरे इतमीनान के साथ पी गयी और उसका लंड धीरे धीरे अपनी जीव से चाट कर साफ कर दिया. फिर देवकी नहर मे गयी और नहर के पानी से अपना मुह्न धो लिया.
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09-23-2018, 01:06 PM,
#5
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
हरिया और देवकी फिर नहा लिए और नहाने के बाद देवकी हरिया से बोली कि मुझे अब घर जाना है. घर पर बहुत से काम बाकी है. एह सुन कर जगन अपने जगह से निकल कर फिर से आम के बगीचे में चला गया. वो देवकी का इन्तिजार करने लगा. उसको देवकी से बात करनी थी, क्योंकी एह देवकी से बात करने का सही समय था. थोरी देर के बाद देवकी उसी रास्ते से धीरे धीरे चल कर आई. जगन तब आम के पेड़ के पिछे से निकल कर देवकी के सामने आकर खरा हो गया.

"जगन भाई शहाब, आप एन्हा क्या कर रहे है?" देवकी रुक कर पूछी. देवकी को डर था की कहीं जगन सब कुच्छ देख तो नही लिया. वह बोला,

"मैं तो हरिया के पास जा रहा था लेकिन मैं तुम को उसके साथ देखा. तुम उसके साथ काफ़ी बिज़ी थी और इसीलिए मैने तुम दोनो को परेशान नही किया."

"अपने सब कुच्छ देखा?" देवकी जगन से पूछी और उसकी चहेरा शरम से लाल हो गया. देवकी अपना सिर झुका लिया. जगन तब देवकी से बोला,

"तुम्हे मालूम है अगर मैं सब कुच्छ देव से बोल दूं तो तुम्हारा क्या हाल होगा?"

"भाई शहाब, प्लीज़ मेरे पति को कुच्छ मत कहिए, मैं अब फिर से एह सब काम नही करूँगी" देवकी बोली.

"प्लीज़ किसी से भी कुच्छ मत कहिए मैं आप को जो भी चीज़ माँगेंगे दूँगी" देवकी जगन के साम'ने गिरगिरने लगी.

"तुम मुझे क्या दे सकती हो?" जगन मौका देख कर देवकी से पूछा.

"कुच्छ भी, आप जो भी मगेंगे मैं देने के लिए तैइय्यार हूँ," देवकी बिना कुच्छ सोचे समझे जगन से बोली.

"ठीक है, तुम मेरे साथ आओ. मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है! मैं तुमको हरिया के साथ कल दोपहर और आज सुबहा देख कर बुरी तरह से परेशान हो गया हूँ. मैं इस समय तुमको जम कर चोदना चाहता हूँ," जगन देवकी से बोला.

"एह कैसे हो सकता है, मैं तो तुम्हारे अच्छे दोस्त की बीवी हूँ" देवकी ने विरोध किया.

"तुम मेरे लिया एक भाई समान हो, तुम मेरे साथ एह सब गंदे काम कैसे कर सकते हो" देवकी जगन से बोली.

"तुम अपने वादे के खिलाफ नही जा सकती हो, अगर तुम मेरे साथ नही चलती तो मैं एह सब बात देव को बता दूँगा" जगन देवकी को एह कह कर धमकाया. देवकी चुप चाप जगन की बात सुनती रही और फिर एक ठंडी सांस लेकर बोली,

"ठीक है, जैसा तुम कहोगे मैं वैसा ही करूँगी," वो जानती थी कि जगन के साथ चुदाई की बात देव को नही मालूम चलेगा, लेकिन अगर उसको हरिया के साथ रोज रोज की चुदाई की बात मालूम चल गयी तो वो उसकी खाल उधेर देगा.

"ठीक है, लेकिन बस सिर्फ़ आज जो करना है कर लो," देवकी जगन से बोली. जगन एह सुन कर मुस्कुरा दिया और देवकी को लेकर एक सुन सान जगह पर ले गया. यह जगह आम की बगीचे से दूर था और रास्ते से भी बहुत दूर, इन्हा पर किसी को भी आने की गुंजाइश नही थी. जगन सुन सान जगह पर पहुँच कर अपनी पॅंट उतार कर ज़मीन पर बिच्छा दिया. उसका लंड इस समय अंडरवेर के अंदर धीरे धीरे खरा हो रहा था. उसने देवकी से कोई बात ना करते हुए उसको अपनी बाहों मे भर लिया और देवकी को चूमने लगा.

देवकी भी मन मार कर अपनी मुँह जगन के लिए खोल दिया जिस'से की जगन अपनी जीव उसकी मुह्न के अंदर डाल सके. जैसे जगन, देवकी को चूमने और चाटने लगा, देवकी भी धीरे धीरे गरमा कर जगन को चूमने लगी. देवकी को अपनी जाँघो के उप्पेर जगन का खरा लंड महसूस होने लगा. जगन तब देवकी की सारी खोल दिया और अब देवकी अपने ब्लाउस और पेटिकोट मे थी. जगन तब अपना मुँह देवकी की चूंची के उपेर रख कर उसकी चूंची को ब्लाउस के उप्पेर से ही चूमने और चाटने लगा. देवकी को तब जगन नीचे अपनी पॅंट पर बैठा दिया और खुद भी उसके पास बैठ गया. अब तक जगन का लंड काफ़ी तन चुक्का था और वो उसके अंडरवेर को तंबू बना चुक्का था. एह देख कर देवकी की आँखें चमक उठी. उसने अंडरवेर के उप्पेर से ही जगन का लंड पकड़ लिया और अपने हाथों मे लेकर उसकी लूम्बई और मोटाई नापने लगी.
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09-23-2018, 01:07 PM,
#6
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
"अरे वा, तुम्हारा लंड बहुत तगरा है, है ना?" देवकी खुशी से बोल परी और जगन का लंड धीरे धीरे अंडरवेर से निकालने लगी. देवकी जब जगन का 10" लंबा लंड देखी तो उसकी आँखे फटी की फटी रहा गयी. जगन तब धीरे धीरे अपना अंडरवेर और शर्ट उतार कर देवकी के सामने पूरी तरह से नंगा हो गया. देवकी तब जगन का लंड को अपने हाथों मे लेकर खिलोने की तरह खेलने लगी. देवकी अपना चहेरा जगन के लंड के पास लाकर उस लंड को घूर घूर कर देखने लगी और उसपर हाथ फेरने लगी. देवकी को जगन के लंड का लाल लाल और फूला हुआ सुपरा निकाल कर देखी और बहुत अस्चर्य से बोली,

"मैं अब तक इतना लंबा लंड और इतना बरा सुपरा नही देखी हूँ." देवकी तब उस सुपरे को धीरे से अपने मुँह मे ले कर चूमने और चूसने लगी. फिर वो उसको अपने मुँह से निकाल देखने लगी और अपनी जीव से उसके छेद तो चाटने लगी. जगन को अपने लंड पर देवकी का जीव की बहुत सुखद अनुभूति हो रही थी. अब जगन उठ कर बैठ गया और देवकी की ब्लाउस और पेटिकोट खोलने लगा. इस समय जगन देवकी को नगी देखना चाहता था और उसके चूंची से खेलना चाहता था. धीरे धीरे देवकी की ब्लाउस खुलते ही उसकी बरी बरी चूंची बाहर आ गयी और उनको देखते ही जगन उन पर टूट परा. जगन को देवकी की चूंची बहुत सुन्दर दिख रही थी.

"तुम्हे एह पसंद है? एह अक्च्चे है ना? पास आओ और इनको पकरो, शरमाओ मत." देवकी अपने चूंची को एक हाथ से पकर कर जगन को भेंट करते हुए दूसरे हाथ से उसका लंड मुठियाने लगी. जगन पहले तो थोरा हिचकिचाया और फिर हिम्मत करके उन नंगी चूंचियो पर अपना हाथ रखा. उसे उनको छुने के बाद बहुत गरम और नरम लगा. जगन फिर उन चूंचियो को दोनो हाथों से पकर कर मसल्ने लगा, जैसे की कोई आटा गुन्ध्ता है. वो जितना उनको मसलता था देवकी उतनी ही उत्तेजित हो रही थी. देवकी की निपल उत्तेजना से खरी हो गयी और करीब एक इंच के बराबर तन कर खरी हो गयी. जगन अपने आप को रोक नही पाया. वो उन निपल को अपने होठों के बीच ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगा. देवकी अब धीरे धीरे ज़मीन पर लेट गयी और जगन को अपने हाथों मे बाँध कर के अपने उपेर खींच लिया.

जगन तब देवकी की पेटिकोट कमर तक उठा दिया और उसकी झटों भरी चूत पर अपना हाथ फेरने लगा. उसने पाया की देवकी की चूत बहुत गीली हो गयी है और उसमे से काम रस चू चू कर बाहर निकल रहा है. उसने तब पहले अपना एक उंगली और फिर दो उंगली देवकी की गरम चूत के अंदर डाल दिया. जगन तब अपने अंगूठे से देवकी की चूत की घुंडी को सहलाने लगा. देवकी बहुत गरमा गयी थी. देवकी अपनी दोनो पैर चिपका लिए और अपनी सुडोल और चिकने जाँघो के बीच जगन का हाथ दबा लिया. देवकी फिर अपनी दूसरी चूंची को पकर कर जगन से उसको चूसने के लिए कहा और जगन देवकी की बात मानते हुए उसकी दूसरी चूंची को अपने हाथों मे लेकर चूसने लगा. हालंकी वे पेड़ के साए के नीचे थे फिर भी उन लोगों को जवानी की गर्मी से पसीना निकल रहा था.

जगन तब धीरे से देवकी की पेटिकोट का नारा खींच कर खोल दिया और उसको शरीर से निकाल दिया. उसे देवकी का नगा जिस्म बहुत पसंद आया और वो उस नंगी जिस्म को घूर घूर कर देखता रहा. देवकी की नगी जिस्म देख कर जगन को लगा कि उसकी बदन भरा भरा है लेकिन उसके बदन बहुत सुडोल और गता हुआ है. जगन देवकी की जाँघो को खोल कर घुटने मोर दिया और वो खुद उनके बीच आ गया. देवकी अपनी जाँघो को पूरा का पूरा फैला दिया जिससे की जगन उनके बीच बैठ सके. देवकी फिर जगन का खरा हुआ लंड को अपने हाथों मे पकर कर अपनी चूत के मुहाने पर लगा दिया.

"जगन भाई शहाब, ज़रा धीरे धीरे करना, मुझे आपका गधे जैसा लंड से डर लग रहा है. मैने आज तक इतना बरा लंड अपनी चूत के अंदर नही लिया है." फिर देवकी अपनी चूतर उच्छाल कर जगन का लंड अपने चूत में लेने की कोशिश करने लगी. थोरी देर के बाद देवकी को अपनी चूत के दरवाजे पर जगन का सुपरा का स्पर्श महसूस हुआ. देवकी ने तब अपने आप को ज़मीन पर बिच्छा दिया और जगन का मोटा ताज़ा लंड अपने चूत मे घुसने का इन्तिजार करने लगी. जगन तब अपने चूतर उठा कर एक्ज़ोर दार झटका मारा और उसका आधा लंड देवकी की चूत मे समा गया. जगन तब दो मिनिट रुक कर एक और झटका मारा और उसका पूरा पूरा 10" लूंबा लंड देवकी की चूत की गहराई मे घुस गया.
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09-23-2018, 01:07 PM,
#7
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
देवकी अपनी चूत मे जगन का लंड की लंबाई और मोटाई महसूस कर रही थी और हरिया और देव के छ्होटे लंड से फ़र्क का अंदाज़ा लगा रही थी. देवकी को लग रही थी की उसकी चूत जगन के लंड घुसने से दो फांको मे फॅट रही है. उसको जगन का लंड अपने बcचेदनि मे घुसने का अहसास हो रही थी और जगन का हर धक्का उसकी शरीर को मदहोश कर रहा था. उसे अबतक अपनी चूत की चुदाई में इतना मज़ा कभी नही मिला था. वो जगन का हर धक्के के जवाब अपनी चूतर उच्छाल कर दे रही थी.

"क्यों जगन क्या तुम्हारा लंड पूरा का पूरा मेरी चूत मे समा गया?" देवकी अपनी चुत्तऱ चलाते हुए बोली. जगन तब देवकी की चूत मे अपन लंड पेलता हुआ बोला,

"हाँ, तुम्हारी चूत मे लंड पेलने का मज़ा ही कुच्छ और है. मुँझे तुम्हारी चूत चोदने मे बहुत मज़ा आ रहा है." जगन तब अपना लंड देवकी की चूत मे जर तक घुसेर कर देवकी को धीरे धीरे चोदने लगा. जगन को देवकी की चूत की गर्मी और रसिल्ला अनदाज बहुत अक्च्छा लग रहा था. जगन तब देवकी की चूतर के दोनो तरफ अपने हाथ रख कर उसकी चूत मे अपना लंड को घुसते और निकलते देख रहा था और वो मारे उत्तेजना से देवकी की दोनो चूंची को पकर मसल्ने लगा. दोनो चुदाई मे मासगुल थे. इस समय दोनो एक दूसरे को कमर चला चला कर धक्का मार रहे थे और जगन का लंड देवकी की चूत को बुरी तारह चोद रहा था. दोनो इस समय पसीने से नहा चुके थे पर फिर भी किसी को होश नही था. देवकी तब अपनी चूतर उछालते हुए जगन को अपने बाहों मे बाँध लिया और बोलने लगी

"जगन और ज़ोर से चोदो, आज फार दो मेरी चूत अपने मोटे लंड के धक्के से, बहुत मज़ा आ रहा है, और चोदो, रुकना मत बस चोद्ते रहो, बस ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत मे अपना लंड डालते रहो." जगन चोदने का रफ़्तार बढ़ा दिया. वो भी इस समय झदाने के कगार पर था. जगन एह सोच कर कि वो देवकी की गुलाबी रसिल्ले चूत मे अपना लंड पेल रहा है बहुत उत्तेजित हो गया. जगन मारे गर्मी के देवकी की चूत मे अपना लंड ज़ोर ज़ोर से पेल रहा था और बर्बरा था,

"हाई, देवकी तेरी चूत तो मक्खन के समान चिकना है, तेरी चूत को चोद कर मेरा लंड धन्य हो गया है, अब मैं रोज तेरी चूत मारूँगा, लगता है तुझको भी मेरा लंड पसंद आया है, क्या तू मुझसे रोज अपनी छूट चुद्वगी?" देवकी भी अपनी कमर चलते हुए जगन को चूम कर बोली,

"हाई मेरे राजा, तुम्हारा लंड तो लाखों मे एक है, तुम्हारा लंड खा कर मेरी चूत का भाग्य खुल गया है, अब मैं रोज तुमसे अपनी चूत मे तूहरी प्यारी प्यारी लंड पीलवौनगी." थोरी देर इस तरह चुदाई करते हुए जगन अपना वीर्या उसकी चूत मे छ्होर दिया और हफने लगा.

"जगन भाई शहाब आप वाकई बहुत अक्च्छा चोद्ते हैं. मुझको अगर एह बात पहले ही मालूम चलता कि आप को मेरे लिए प्यार है तो मैं हरिया के पास जा कर उस'से कभी अपनी चूत ना चुड़वती. मुझको अगर पहले से पता चलता कि आपका लंड इतना बरा और मज़बूत है तो बहुत पहले ही आपको अपने बाहों मे बाँध लेती," देवकी धीरे धीरे जगन से बोली.

"अब मेरी चूत तुम्हारे लंड को चख चुकी है, पता नही अब उसको और कोई लंड पसंद आएगा कि नही. अब शायद मेरी चूत को हरिया का लंड भी पसंद ना आए" देवकी जगन को चूमते हुए बोली. जगन तब देवकी को अपने हाथों मे बाँध कर अपने बगल मे बैठा दिया और उससे बोला,

"देवकी आज से एह लंड तुम्हारी चूत का गुलाम हो गया है, तुम्हे जब इसकी ज़रूरत हो तुम मुझे बुला लेना मैं और मेरा लंड हमेशा तुम्हारी सेवा के लिए तैइय्यार रहेंगे."

क्रमशः.....................
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09-23-2018, 01:07 PM,
#8
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
गतान्क से आगे............

उस दिन शाम को जगन अपने दोस्त देव के घर गया और दोनो नीम के पेऱ नीचे बैठ कर मिल कर इधर उधर की बातें करने लगे. देवकी अपने घर के काम काज मे ब्यस्त थी और चोरी चोरी जगन को देख रही थी. जैसे शाम होने लगी जगन देव से बोला कि मैं चलता हूँ और अपने घर की तरफ चल परा. देवकी अपने घर की गेट के पास जगन के लिए इंतेजर कर रही थी. जैसे जगन पास आया देवकी धीरे से बोली,

"जगन आज रत को 10.00 बजे मेरे घर पर आना, पिछला दरवाजा खुला रहेगा और मैं तुम्हारी इन्तिजार करूँगी" और देवकी अपने घर चली गयी. जगन को देवकी की बहादुरी पर ताज्जुब हुआ. उसको इसमे ख़तरा लगने लगा, लेकिन उसको एह सोच करके कि आज रात वो फिर देवकी को चोद पाएगा वो बहुत खुश हुआ और रात को देवकी के पास जाने का निस्चाया कर लिया. वो अपने घर गया और नहा धो कर एक साफ सुथरा धोती और कमीज़ पहन कर करीब 10.00 बजे रात को देवकी के घर के पिछवारे पहुँच गया. जगन वहाँ इंटिजार करने लगा. उसको वहाँ कोई नही दिखा. अंदर एक माटी के तेल का दिया जल रहा था और पिछवारे का दरवाजा आधा खुला था लेकिन अंदर से कोई आवाज़ नही सुनाई पर रहा था.

"जगन भाई शहाब अंदर आ जाइए," जगन को देवकी की दबी जवान सुनाई दिया. देवकी अनदर से निकल कर आई और जगन को अपने साथ अंदर एक दूसरे कमरे में ले गयी. दूसरे कमरे मे ज़मीन पर बहुत साफ सुथरा बिस्तर लगा हुआ था और उसपर दो तकिया भी लगा हुआ था. जगन अपने दोस्त देव के बारे मे पूछा.

"वो जल्दी सो जाता है और वो जब सोता है तो भूकंप भी उसको जगा नही पाता, मगर फिर भी हम लोगों को चुप चाप रहना चाहिए," देवकी धीरे से जगन से बोली. फिर देवकी माटी के तेल वाली दिया कमरे में ले आई और धीरे से दरवाजा बंद कर दिया. देवकी तब जगन के पास आई और उसको अपने बाहों मे बाँधते हुए बोली,

"आज सुबह हम लोग जो कुच्छ भी किया जल्दी मे किया, फिर्भी मुझे बहुत मज़ा आया. अब हम चाहते हैं कि हम तुमसे फिर से वही मज़ा लूटे और तुम मुझे रात भर धीरे धीरे चोदो, क्यों चोदोगे ना?" जगन अपना सर हिला कर हामी भरी और बोला,

"मैं भी तुमको पूरा पूरा चखना चाहता हूँ, सुबह जो भी हुआ वो बहुत जल्दी जल्दी हुआ". जगन ने देवकी को अपने पास खींच लिया और उसके पीठ पर हाथ फेरने लगा. उसने देवकी की होटो पर चुम्मा दिया और उसकी ब्लाउस के बटन खोलने लगा. जगन देवकी की ब्लाउस और ब्रा उतार कर उसकी सारी उतारना शुरू कर दिया. देवकी चुप चाप खरी हो कर अपना सारी उतरवाने लगी. जगन फिर धीरे से देवकी की पेटिकोट का नारा भी खोल दिया और देवकी की पेटिकोट उतार कर उसकी पैरों का पास गिर गया. अब देवकी पूरी तरह से जगन के सामने नंगी खरी थी. जगन तब एक कदम पिछे हाथ कर देवकी का नग्न रूप देखने लगा. हालंकी देवकी का बदन भरा पूरा था, लेकिन उसकी शरीर बहुत ही ठोस थी. देवकी की चूंची बरी बरी थी लेकिन लटकी नही थी.

चूंची की निपल करीब 1" लूंबी थी और काली थे. देवकी की निपल इस समय खरी खरी थी. जगन तब धीरे धीरे चल कर देवकी के पीछे गया और देवकी की गोल गोल शानदार भारी भारी चूतर और शानदार जांघों को देखने लगा.

"तुम बहुत ही सुंदर हो," जगन धीरे से बोला. जगन फिर से उसे पास खींच लिया और उसको अपने बाहों मे भर कर चूमने लगा. अब तक जगन का लंड खरा हो चुक्का था और अपने लिए देवकी की चूत को चाह रहा था. देवकी भी जगन के बाहों मे खरी खरी अपनी चूत उसके लंड पर रगड़ने लगी.

"अब मेरी बारी है," देवकी बोली और जगन का शर्ट उतारने लगी. देवकी जगन के छाती पर अपना मूह मलते हुए धोती को खींच कर निकाल दिये और अब जगन भी देवकी के जैसा नंगा हो गया. जैसे ही देवकी जगन को अपने बाहों मे लिया उसको जगन का खरा हुआ लंड अपनी पेरू पर चुभने लगा. देवकी अपनी शरीर को जगन के नंगे शरीर से रगर्ने लगी. फिर देवकी झुक कर जगन के सामने अपने घुटनो पर बैठ गयी. अब जगन का खरा हुआ लंड देवकी के चहेरे से कुच्छ ही दूर था. देवकी लंड अपने दोनो हाथों से पकर लिया और उसका लाल लाल बरा सा सुपरा को खोल दिया. उस पर चुम्मा देते हुए बोली,

"कितना अक्च्छा है तुम्हारा यह सुपरा. कितना लंबा और मोटा और कितना करा. देखो देखो एह कैसे उछाल रहा है. मैं ऐसे ही एक लंड के लिए अब तक परेशान थी. ज़रूर भगवान ने इसे मेरे लिए बनाया है. क्या मस्त चीज़ है. इसको खा कर मेरी चूत पूरी तरह से मस्ती से भर उठेगी" वो बोलने लगी. देवकी तब लंड अपने दानो हाथों मे रख कर धीरे धीरे दबाने लगी और मसल मसल कर उसकी ताक़त और गर्मी का अंदाज़ा लगाने लगी. देवकी तब लंड अपने चहेरे और गालों पर रगर्ने लगी और फिर धीरे से उसको चूम लिया. देवकी नीचे झुक कर लंड उठा कर उसके अंडों को देखने लगी और उनको अपने हाथों मे ले कर ततौलने लगी.

"वाह कितना सुन्दर तुम्हारी एह सुपरियाँ है! एह बरे बरे है और भरे भरे है. मैं इनको जल्दी ही खाली कर दूँगी," देवकी मुस्कुरा कर बोली. वो पहले तो उनको छाती फिर एक को अप'ने मूह मे भर कर एक के बाद दूसरे को चूसने लगी. देवकी की चुसाइ इतनी धीमी थी कि जगन को पूरे शरीर मे झुरजूरी फैलने लगी. अंदो के बाद देवकी उसके लंड पर अपना मूह फेरने लगी और धीरे धीरे से सुपरे को अपने मूह मे ले लिया.

देवकी जगन के लंड को अपने हाथों मे पकर कर पूरे लंड पर अपनी जीव फिराने लगी. फिर देवकी खरी हो गयी. जगन देवकी के चूंची को च्छुआ, उसको इस समय सुबहा जैसी जल्दी नही थी इसलिए वो देवकी की चूंची धीरे धीरे छ्छू कर उसकी चूंची के सुंदरता को उसके ठोस पन को परखने लगा. उसने उन चूंची को अपने दोनो हाथों मे लेकर उनको तौलने लगा. देवकी को चुदाई की मस्ती काफ़ी चढ़ चुकी थी और इसलिए उसके चूंची तन कर खरी हो गयी थी. उसके चूंची के निपल भी तन कर खरी हो गयी थी.

जगन झुक कर देवकी की निपल को मूह मे ले कर चूसने लगा, लेकिन देवकी जगन को रोक दिया. फिर देवकी ज़मीन पर बिछे बिस्तेर पे लेट गयी और फिर जगन से अपने चूंची को पीने के लिए बोली. वो अपने दोनो हाथों से अपनी चूंची को साइड पकर कर उठा कर जगन को चूसने के लिए भेंट किया. जगन उन चुचियो को अपने दोनो हाथों से पकर कर दबाने लगा और फिर मसल्ने लगा. देवकी की चूंचिया जगन के हाथों से मसल्ने पर और बरी और करी हो गयी. जगन तब उन चूंचियो को बारी बारी से अपने मूह मे ले कर चाटने और चूसने लगा और देवकी मस्ती से अपने दोनो हाथों से अपनी चूंची उठा कर जगन से चुसवाने लगी. देवकी को मस्ती चढ़ चुकी थी और वो अप'नी दोनो जांघों को आपस मे रगड़ने लगी.
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09-23-2018, 01:07 PM,
#9
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
एह देख कर जगन अपना हाथ देवकी की चूत पर ले गया और उस चूत पर जमे काले काले रेशमी झांतों से खेलने लगा. उसने धीरे से देवकी की चूत के अंदर एक उंगली डाल दी. उसने फिर चूत के फाकॉ पर अपनी उंगली फेरने लगा. देवकी की चूत अब मदनरस छोड रही थी और इसलिए इस समय उसकी चूत बहुत गीली थी. जगन फिर देवकी की चूत की घुंडी को देख कर उसको अपने उँगलेओं से पकर लिया और उसको अपने उंगलीओ से मसल्ने लगा.

देवकी इस'से बहुत उत्तेजीत हो गयी और जगन का चेहरा अपने हाथों से पकर कर उसके होठों को चूमने लगी और अपनी जीव जगन के मूह मे डाल दिया. जगन देवकी के होठ और फिर उसकी जीव को चूसने लगा. जगन फिर से अपनी उंगली उस की चूत मे पेल दिया और उसके चूत मे अपनी उंगली घुमाने लगा. देवकी मारे गर्मी के जगन का हाथ अपनी जांघों में भींच लिया और अपनी चूतर उछालने लगी और बोलने लगी,

"हाई, ऐसा मत कर, मैं मर जाउन्गी, मेरी चूत मे आग लगी है, जल्दी से अपना लंड उसमे डालो और मुझे रगर कर चोदो. क्यों मुझे सता रहे हो, तुम्हारा लंड तो खरा है क्यों उसको मेरी चूत मे पेलते नहीं, मेरी चूत तुम्हारा लंड खाने की लिए देखो कितना लार बहा रही है, जल्दी करो और मुझे रात भर चोदो. मैं बहुत चुदासी हूँ, मेरी चूत की आग बुझाओ. जल्दी से अपना लंड मेरी चूत मे डाल इस चूत को चोदो और फाडो."

जगन घूम कर देवकी की जांघों को फैला दिया और उसकी चूत को अपने हाथों से खोल कर चूत के अंदर गौर से देखने लगा. जगन तब अपना नाक देवकी की चूत के पास ले जा कर उसकी सोंधी सोंधी खुसबु को सूंघने लगा. वो फिर झुक कर देवकी की चूत की घुंडी अपने जीव से छुआ और फिर उसको चटा और अपने होठों मे भर कर चूसने लगा. देवकी अपनी जाघो को और फैला दिया जिससे की जगन को अपने काम मे कोई बाधा ना हो. जगन अब देवकी के उप्पेर उल्टा लेट गया और देवकी की चूत को बरे चाब से चाटने और चूसने लगा. उसने देवकी की चूत को अपने हाथों से खोल कर उसमे अपना जीव घुसेर दिया और अंदर से उस चूत के रस को अपने जीव से चॅट चॅट कर पीने लगा. देवकी तब अपने चेहरे के सामने लटक रहा जगन का मोटा और 10: लूंबा लंड अपने मूह मे भर कर चूसने लगी.

देवकी अपने हाथों से जगन का चूतर पकर कर उसके लंड पर अपना मूह उप्पेर नीचे करने लगी और इस'से जगन का लंड देवकी के मूह के अंदर बाहर होने लगा. वो जगन का पूरा का पूरा लंड अपने मुँह मे लेने की कोशिश करने लगी लेकिन उतना लंबा और मोटा उसके मुँह मे नही जा पा रहा था. फिर देवकी जगन के लंड को अपने हाथों से पकर कर ज़ोर ज़ोर से अपने जीव से चाटने और चूसने लगी. उसकी चुसाइ मे इतना ज़ोर था कि उसकी मुँह से स्लपर स्लपर की आवाज़ निकल रही थी. फिर देवकी जगन को खींच कर अपने नीचे कर लिया और खुद जगन के उप्पेर लेट गयी. उप्पेर लेट'ते ही देवकी अपनी चूत उसके मुँह पर ज़ोर से दबा दिया और बोली,

"हाई मेरे राजा, और ज़ोर से मेरी चूत को चॅटो मैं मरी जा रही हूँ, मेरी चूत चॅट कर और चूस कर इसका सारा का सारा पानी पी जाओ." जगन भी अपना पूरा का पूरा जीव देवकी की चूत के अंदर डाल कर उसकी चूत को चाटने लगा. थोरी देर के बाद जगन देवकी की चूत से अपना मुँह उठा कर बोला,

"हाई मेरी देवकी रानी, क्या मज़ा आ रहा है तुम्हारी चूत चूस कर.सच मे तुम्हारी चूत से निकलता रस बहूत ही मीठा है. मैं तो तुम्हारी चूत चूस कर धान्या हो गया. तुम अब मुझको रोज कम से कम एक बार अपनी चूत चूसने ज़रूर देना." जगन मज़े ले ले कर देवकी की चूत तो चूस्ता रहा. उसने अपने उंगलीओ से इसकी चूत को पूरी तरह से खोल कर उसके रस को जी भर कर पीता रहा. फिट थोरी देर के बाद जगन देवकी की चूत को अपने दोनो होठों मे दबा कर चूसने लगा
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09-23-2018, 01:07 PM,
#10
RE: Antarvasna kahani गाओं की मस्ती
जगन को लगा कि देवकी अब झरने वाली है. थोरी देर और चुसाइ के बाद देवकी एकाएक अपनी चूतर उप्पेर उठा दिया. जगन समझ गया कि देवकी झार गयी. जगन के मुँह मे देवकी की चूत से ढेर सारा मीठा मीठा गरम रस निकल कर भर गया और जगन बारे उत्सुकुटा से सारा का सारा रस पी गया. एक भूके कुत्ते की तरह जगन अपनी जीव से देवकी की चूत को चट चट कर सारा रस पी कर साफ कर दिया. देवकी तब जगन के उप्पेर से हट कर ज़मीन पर जगन के बगल मे लेट गयी.

"एह मेरे लिए सब से अक्च्ची चूत की चुसाइ थी" देवकी जगन की तरफ मूर कर मुस्कुरा बोली.

"और तुम्हारी चूत का रस बहूत मीठा था और मैं पहली बार इतना मीठा रस पीया" जगन बोला. हालंकी जगन अभी तक झारा नही था, लेकिन थोरी देर सुसताने से उसका थोरा मुरझा गया. देवकी अब उसका लंड अपने हाथों मे ले कर मसल मसल कर फिर से उसे खरा कर दिया. तब देवकी उस खरे लंड को अपने हाथों से पकर जगन के उप्पेर चढ़ गयी और अपने हाथों से उसको अपने चूत के दरवाजे से लगा दिया और धीरे धीरे उस को अपने चूत को खिलाते हुए उस पर बैठ गयी. देवकी झुक कर जगन के लंड को अपने चूत के अंदर जाते हुए देखती रही. देवकी को जगन के लंड को अपने बcचेदनी को छुते महसूस किया. फिर देवकी अपने दोनो हाथों को जगन के शरीर के दोनो तरफ रख कर अपनी चूतर को उठाया और धीरे धीरे नीचे लाई और इस'से उसकी चूत लंड को धीरे धीरे खाने लगी.

जगन अपना हाथ बढ़ा कर देवकी की दोनो चूंची को पकर लिया और उनको धीरे धीरे मसल्ने लगा. देवकी अब अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दिया. वो मोटा और लंबा लंड देवकी की चूत मे पूरी तरह से फिट बैठ गया था और इससे देवकी को बहुत मज़ा आ रहा था. थोरी देर के देवकी जगन के लंड पर उछलते उछलते थक गयी और जगन के उप्पेर लेट कर हफने लगी. जगन तब देवकी को अपने से नीचे उतार कर देवकी को घोरी की तरफ चारों हाथ पैर पर रुकने को कहा और खुद देवकी के पिछे जाकर अपना तानया हुआ लंड देवकी की चूत मे घुसेर दिया. जगन अब देवकी को पिछे से कुत्ते को तरह चोद रहा था. जगन के हर धक्के के साथ देवकी की मूह से आह! ओह! की! आवाज़ निकल रही थी.

जगन अब अपना चोदने की स्पीड बढ़ा दिया और ज़ोर ज़ोर से अपना लंड को चूत मे डालने और निकालने लगा. अब जगन झरने वाला था. जगन अब अपना वीर्य से देवकी की चूत को भरने वाला था. देवकी इस समय चूतर आगे पिछे कर रही थी, जगन को लगा कि देवकी भी झरने वाली है. जगन अब और ज़ोर ज़ोर से देवकी को चोदने लगा और तब तक चोद्ता रहा जब तक उसका पानी निकल कर देवकी की चूत को भर ना दिया. देवकी झरते ही ज़मीन पर उल्टे लेट गयी और जगन उसके उप्पेर निढाल हो कर परा रहा.

देवकी और जगन बहुत खुस थे. वो दोनो हर रात को एक दूसरे की लंड और चूत चट'ते थे चूस्ते थे और दोनो एक दूसरे को चोद्ते थे. जगन जब भी अपने दोस्त देव से मिलता था तो अपने को दोषी महसूस करता. लेकिन वो जब सोचता था कि वो उसकी बीवी को उसके पिछे रोज रात चोद्ता है तो उसको काफ़ी मज़ा मिलता था. एक रात जगन देवकी को चोद कर अपने लंड को सहला रहा था और देवकी बाथरूम मे अपनी ऊट और जगहें धोने को गयी थी. जब देवकी बाथरूम से वापस आई तो देव उसके पिछे पिछे कमरे मे आया और नंग धारंग हो कर अपना तना हुआ लॉरा घुसा दिया.

देवकी अपनी चूत की चुदाई मे इतनी मशगूल थी कि उसको एह भी पता नही था की उसकी चूत मे जगन या देव का लंड घुसा हुआ है. उसको एह भी पता नही था कि उसका पति उसकी चूत जगन के सामने ही चोद रहा है. जगन को कुच्छ समझ मे नही आया और वो चुप चाप अपने लंड को थामे देव और देवकी की चुदाई देखता रहा. देव इस समय देवकी को बुरी तरह से चोद रहा था और हाँफ रहा था और थोरी ही देर मे उसका लंड पानी छोड दिया और उस पानी से देवकी की चूत एक बार फिर से भर गयी. देव झरने के बाद देवकी के बगल मे लेट हफने लगा.
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