Antarvasna kahani रिसेशन की मार
07-10-2018, 12:36 PM,
#1
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रिसेशन की मार




लेखक : दा_ग्रेट_वाररियर

मेरा नाम स्नेहा है. मैं गार्डेन सिटी बॅंगलुर की रहने वाली हू. अब इस वक़्त मेरी एज 28 यियर्ज़ की है और मैं एक शादी शुदा महिला हू. हमारी शादी को 4 साल बीत चुके है और मैं एक पक्की हाउसवाइफ हू. मेरे हज़्बेंड

( सतीश ) सतीश का अपना डिफरेंट टाइप्स ऑफ एलेक्ट्रिकल आक्सेसरीस का बिज़्नेस था. वो वाइर्स, होल्डर्स, प्लग्स, कनेक्टर्स और दूसरे आक्सेसरीस आइटी के कंपनीज़ और दूसरे प्राइवेट ऑफिसस मैं सप्लाइ करते थे. सतीश का काम ठीक ठाक चल रहा था. हमारी लाइफ सेट थी. हम एक मीडियम क्लास फॅमिली से बिलॉंग करते थे. सतीश के पास अपना खुद का एक घर भी था जिस्मै हम रहते थे. हमे किसी चीज़ की कोई कमी नही थी. ऊपेर वाले ने बोहोत ज़ियादा तो नही दिया था पर कम भी नही दिया था. हम बोहोत अछी तरह से रह रहे थे. मैं यह पास्ट टेन्स मैं इस लिए लिख रही हू के अब हमारा बिज़्नेस एक दम से ठप्प हो गया है रिसेशन की मार की वजह से बोहोत सारे आइटी कंपनीज़ का

दीवालिया निकल चुका था और प्राइवेट ऑफीस का भी कुछ ऐसा ही हाल था. सतीश का लॉस कुछ ज़ियादा ही हो गया था और वो अपने सप्लाइयर्स को भी पेमेंट करने के काबिल नही थे जिसकी वजह से सप्लाइयर्स ने माल सप्लाइ करना बंद कर दिया था. सतीश कर्ज़े मैं डूबते चले गये और बिज़्नेस ऑलमोस्ट बंद करना पड़ा और हमारी ज़िंदगी मैं जैसे बोहोत बड़ी कठिनाई आती चली गयी. हमारी परेशानी का दौर शुरू हो गया और सतीश बेचारे सारा दिन इधर उधर घूम घूम के अपने पेंडिंग इनवाइसस की अमाउंट्स को वसूल करने के लिए डिफरेंट ऑफिसस के चक्कर लगा चुके थे पर कही से कोई उम्मीद की किरण नज़र नही आ रही थी और कोई भी पेमेंट नही कर रहा था. रिसेशन की मार ऐसी पड़ी के हमारी ज़िंदगी मैं जैसे एक भूचाल आ गया और अब हमको खाने पीने की भी तकलीफ़ होने लगी. थोड़े ही दीनो मैं जो कुछ बचा कुचा था वो भी सब ख़तम हो गया और सतीश कर्ज़े मैं डूबने लगे और नौकरी की तलाश मैं इधर उधर भटकने लगे पर कही भी किसी किसम का भी जॉब नही मिला और इस बीच मैं ने सतीश से कहा के अगर वो कोई ख़याल ना करे तो मैं भी कही कोई जॉब कर लूँगी तो कुछ ना कुछ तो घर का खर्चा पानी चल ही जाएगा तो सतीश बड़ी मुश्किल से तय्यार हो गये और मैं अब पूरे इंडिया मैं अपने जॉब के अप्लिकेशन भेजने लगी. डेली मेरा काम यही था के पेपर्स मे आड़ देखती और अप्लाइ कर देती थी.

यह मेरी एक फॅंटेसी है और कुछ रियल इन्सिडेंट्स है जो मैं आप के साथ शेर कर रही हू. इस से पहले कि मैं अपनी फॅंटेसी स्टार्ट करू लेट मी डिस्क्राइब माइसेल्फ आंड इन शॉर्ट टू टेल यू सम्तिंग अबौट मी.

मेरा परिवार जिस्मै मेरे डॅड, मोम और मैं बॅस हम तीन ही लोग थे. मेरे डॅड एक सरकारी करमचारी थे. हमारा भी एक छोटा सा घर है लैकिन पिताजी को गवर्नमेंट क्वॉर्टर मिला हुआ था जिस्मै हम रहते थे. मैं अपनी खूबसूरती की तारीफ तो नही करना चाहती पर सच मे मैं एक बोहोत ही खूबसूरत लड़की हू यह मैं नही मेरे फ्रेंड्स कहते है. बॅंगलुर के फर्स्ट क्लास वेदर की वजह से मेरे चिक्स किसी कश्मीरी सेब की तरह गुलाबी हो गये थे, मेरा फेस राउंड और ब्राइट है. माइ स्माइल ईज़ माइ ट्रेषर और जब स्माइल देती तो गालो मैं छोटे छोटे डिंपल्स पड़ते है जो बोहोत अच्छे लगते हैं. मेरे बाल थोड़े से कर्ली है पर डार्क ब्लॅक और शाइनिंग वाले है. मेरी आँखें काली और बड़ी बड़ी चमकदार है फ्रेंड्स बोलते है कि आइ हॅव लाइव्ली एएस जैसे आँखें बोल रही हो और अगर कोई मुझ से बात करता है तो मेरी आँखो की गहराई मैं और मेरी मुस्कान मे डूब जाता है. मैं हेर आयिल तो यूज़ नही करती पर फिर भी लोग ऐसा फील करते है जैसे मैं हेर आयिल लगाए

हुए हू, ई मीन टू से कि मेरे बाल इतने शाइनिंग वाले है. मेरे दाँत मोटी जैसे सफेद और चमकदार है और जब मैं स्माइल देती हू तो ऑलमोस्ट हाफ मोती जैसे चमकते हुए दाँत दिखाई देते है. मैं उतनी मोटी तो नही पर दुबली पतली भी नही मीडियम बिल्ट है मेरी. आइ हॅड वेरी गुड हेल्थ. मेरा बदन भरा भरा है जो बोहोत ही सेक्सी लगता है. मेरे बूब्स का साइज़ 36” है, एक दम से कड़क और बोहोत ही पर्फेक्ट शेप मे है, गोल गोल है ऐसा लगता है जैसे कोकनट को हाफ कट कर के मेरे चेस्ट पे रख दिया हो जिन के ऊपेर लाइट चॉक्लेट कलर के निपल्स है जो मोस्ट्ली एरेक्ट ही रहते है और लाइट ब्राउन कलर के 1 इंच का आरियोला है और मेरे बूब्स बोहोत ही कड़क है एक दम से सख़्त पत्थर जैसे. यूँ तो मैं ब्रस्सिएर पेहेन्ति हू पर जब घर मे रहती हू तो मोस्ट्ली अवाय्ड करती हू और ऐसे टाइम पे मेरे निपल्स मेरे शर्ट के ऊपेर से सॉफ एरेक्ट और खड़े हुए दिखाई देते है और जब मैं चलती हू तो मेरे शर्ट के अंदर जब कपड़ा निपल्स से रगड़ता है तो मुझे बोहोत ही मज़ा आता है, ऐसा लगता है जैसे कोई धीरे धीरे मेरे निपल्स की मसाज कर रहा है. मेरे बूब्स और निपल बोहोत ही सेन्सिटिव है. थोडा सा भी टच मुझे मज़ा देता है और जैसे मेरे बदन मे एलेक्ट्रिसिटी दौड़ने लगती है. मैं अपनी चूत के बालो को हमेशा ट्रिम कर के शेप मैं रखती हू और फर्स्ट क्लास ट्रिम देती हू. मुझे अपनी ट्रिम किए हुए छोटे छोटे नरम और मुलायम झांतो वाली चूत बोहोत अछी लगती है और मैं उसपे बोहोत प्यार से हाथ फेरेती और ऐसे ट्रिम बालो पे मसाज करना मुझे बोहोत अछा लगता है और मेरा ख़याल है के हर लड़की को अपनी चूत प्यारी होती है और हर लड़की अपनी चूत पे प्यार से हाथ फेरती है जैसे मैं फेरती हू.

मैं कॉमर्स की ग्रॅजुयेट हू और जब मैं बी. कॉम के फर्स्ट एअर मे थी तब मैं ने फर्स्ट टाइम अपनी चूत का मसाज किया था.

मैं लाइट एक्सर्साइज़ भी करती थी जिस से मेरी बॉडी पर्फेक्ट शेप मे है. एक दिन मैं कॉलेज से वापस आई और बाथरूम मैं शवर लेने चली गई. मेरे बाथरूम मे एक लाइफ साइज़ का मिरर भी लगा हुआ है जिस्मै मैं अपने नंगे बदन को बोहोत देर तक देखती और अप्रीशियेट करती रहती थी, अपने बूब्स को भी लाइट मसाज करती थी. उस दिन शवर लेने के लिए जब अपने कपड़े उतारे तो मे एज यूषुयल अपने बूब्स का मसाज किया और फिर मिरर मे अपने नंगे बदन को देखते देखते पता नही कब और कैसे मेरा हाथ अपनी चूत पे चला गया और जैसे के मैं प्यार से अपनी चूत पे हाथ फेरती हू उसी तरह से चूत पे हाथ फेरने लगी तो उस दिन मुझे ऐसे प्लेषर का एहसास हुआ जो पहले कभी नही हुआ था और देखते ही देखते मेरी मिड्ल फिंगर चूत के दाने को रगड़ते रगड़ते चूत के अंदर चली गयी और मैं अज्ञाने मे अपनी चूत के अंदर अपनी उंगली डाल के चोदने लगी और तो मुझे ऐसा मज़ा आया जो

पहले कभी नही आया था, मेरा सारा बदन गरम हो गया, मेरी आँखे बंद हो गयी और साँसें तेज़ी से चलने लगी और 2 – 3 मिनिट के अंदर ही मेरा बदन सुन्न हो गया और जैसे मेरे दिमाग़ मैं आँधियाँ चलने लगी मेरा बदन काँपने लगा और फर्स्ट टाइम एवर इन माइ लाइफ मेरी चूत मे से जूस बह के चूत के बाहर निकलने लगा और मैं लाइफलेस हो के बाथरूम के फ्लोर पे बैठ गई और फिर फ्लोर पे ही लेट गयी और मुझे लगा के शाएद मैं 10 – 15 मिनिट के लिए सो गयी. जब मैं अपने सेन्सस मे वापस आई तो मुझे महसूस हुआ के मेरे बदन मे मीठा मीठा नशा सा फैला हुआ है और मुझे अपना बदन बोहोत ही हल्का हल्का महसूस होने लगा और मुझे लगा जैसे मैं हवाओ मे उड़ रही हू. मैं फ्लोर से उठ गई और शवर ले के बाहर आ गई. उस दिन के बाद से मेरा मूड एक दम से चेंज दिखाई देने लगा मुझे हर चीज़ अछी लगने लगी और मैं अक्सर अपने आप मे गाना गाने लगी और अकेले मे मुस्कुराने लगी और उसके बाद से मैं रात मे डेली सोने से पहले अपनी चूत को बोहोत प्यार से सहलाती हू और फिर अच्छी तरह से चूत के दाने को रगड़ के और चूत के अंदर उंगली डाल के मास्टरबेट कर के जूस निकाल देती हू और उसके बाद ही सोती हू जिस से मुझे बोहोत अछी मीठी और गहरी नींद आती है.

जब मैं बी.कॉम के 2न्ड एअर मई थी तब मेरी फ्रेंडशिप मेरे एक कॉलेज फेलो रवि से हो गई वोमेरे से एक साल सीनियर था उस से फ्रेंडशिप हो गई थी जो ऑलमोस्ट 1 साल तक मेरा बॉय फ्रेंड रहा. उसके साथ मैं थियेटर मे फिल्म देखने जाती थी, कभी हम पार्क मे घूमने भी चले जाते थे और कभी ईव्निंग मे रेस्टोरेंट मे भी जा के कॉफी वाघहैरा पीते थे. हम काफ़ी क्लोज़ हो गये थे. एक शाम कॉलेज के छोटे से पार्क के कॉर्नर मे उसने मुझे पहला टॅंक सकिंग पॅशनेट किस किया और साथ मे उसके हाथ मेरे बूब्स पर भी आ गये और वो मेरे बूब्स को स्क्वीज़ करने लगा. उसका हाथ मेरे बूब्स पे लगते ही मेरे बदन मे एलेक्ट्रिसिटी दौड़ने लगी और आइ ब्रोक दा किस क्यॉंके मुझे पता था कि मेरे बूब्स और निपल्स कितने सेन्सिटिव है और इफ़ आइ अलो हिम टू स्क्वीज़ मोर टू मेरी चूत से जूस वही निकल जाता. उसके बाद वी केम क्लोज़र टू ईच अदर और जब हम थियेटर मे होते तो वो अपने हाथ मेरे बदन पे इधर उधर घुमाता और लोगो की नज़र बचा के मेरे थाइस पे हाथ रख देता और थियेटर के अंधेरे मे मेरी चूत का भी मसाज करता जिसकी वजह से मोस्ट ऑफ दा टाइम्स मैं वही थियेटर के अंदर ही झाड़ जाती. और मेरा हाथ ले कर अपने लौदे पर रख देता. उसका आकड़े हुए लौदे को पकड़ते ही मेरी चूत गीली हो जाती. मैने हमेशा ही उसके लंड को पॅंट के ऊपेर से ही पकड़ा था कभी नेकेड लंड को नही पकड़ा जिसकी वजह से मुझे उसके लंड का साइज़ भी नही मालूम, बॅस इतना जानती थी के उसका लंड बोहोत ही कड़क हो जाता था जब मैं हाथ मे उसके लंड को पकड़ती तो. जब जब भीहमको मोका मिलता वी किस ईच अदर आंड हे स्क्वीज़ मी बूब्स आंड मसाज माइ पुसी ओवर माइ क्लोद्स.

रवि से मिलने के बाद से ही मेरे अंदर सेक्स की भावना बढ़ने लगी और मैं इंटरनेट पे लंड, चूत और चुदाई के फोटोस और वीडियो क्लिप्स देखने लगी और उसके बाद से मेरा मास्टरबेशन करना कुछ ज़ियादा ही हो गया पर मैं ने रवि को कभी चोदने नही दिया. एक अछी और रिप्यूटेड फॅमिली से होने की वजह से मे चाहती थी के मैं अपनी चूत की सील शादी के बाद अपने पति से ही तुडवाउन्गि और अपने पति को ही अपनी वर्जिनिटी प्रेज़ेंट करूगी. पर शादी के बाद ख़याल आया के मैं ने रवि को एक मौका दिया होता तो अछा होता काश के रवि भी मुझे चोद देता. एनिहाउ अब क्या हो सकता था जो होना था वो हो चुका था.

मेरी फॅंटेसी शादी के थोड़े ही दीनो मे शुरू होती है जिसे मैं ऊपेर लिख चुकी हू अब मैं यहा से अपनी फॅंटेसी स्टार्ट करती हू.

मेरी शादी सतीश के साथ पूरे रीति रिवाजो के साथ ठीक ठाक तरीके से हो गई थी और मैं उसके घर आ गई थी. सतीश के पेरेंट्स बॅंगलुर से तकरीबन 300 किमी दूर एक डिस्ट्रिक्ट मे रहते थे. सतीश अपने बिज़्नेस की वजह से बॅंगलुर शिफ्ट हो गये थे और एक छोटा सा घर भी खरीद लिया था तो उसी घर मे, मैं और सतीश अकेले ही रहते थे. पहले ही लिख चुकी हू के पहले पहले तो बिज़्नेस बोहोत अछा चलता रहा पर 2 या 3 सालो मैं ही रिसेशन की मार की वजह से सतीश का बिज़्नेस तकरीबन बंद हो गया था, हमारा गुज़र बसर, खाना पीना बहुत मुश्किल हो गया था, बड़े ही कठिन दिन चल रहे थे. सिन्स आइ वाज़ कॉमर्स ग्रॅजुयेट, तौग आइ नेवेर हॅड एनी प्रॅक्टिकल एक्सपीरियेन्स बट आइ नो दा नो हाउ आंड दा अंडरस्टॅंडिंग ऑफ अकाउंट्स आंड आइ वाज़ शुवर इफ़ आइ स्टार्ट डूयिंग आ जॉब इन अकाउंट्स ऑर सेक्रेटेरियल फील्ड, आइ कॅन पिक अप वेरी ईज़िली आंड कॅन बी कॉन्फिडेंट इन आ शॉर्ट टाइम. आइ हॅव सीन सो मेनी लेडी सेक्रेटरीस इन ऑफिसस वेनेवर आइ हॅड आ चान्स टू विज़िट एनी ऑफीस फॉर एनी वर्क आंड आइ थिंक दा वर्क ऑफ सेक्रेटरीस आर ऑल्सो ईज़ी आंड आइ वाज़ कॉन्फिडेंट दट आइ कॅन डू तट ऑल्सो आस अन आल्टर्नेटिव टू अकाउंट्स फील्ड. ऐसा सोचते हुए आइ स्टार्टेड अप्लाइयिंग फॉर ए जॉब ऑल ओवर इंडिया टेकिंग दा अड्रेसस ऑफ कंपनीज़ इन नीड ऑफ अकाउंटेंट्स ओर इन सिक्रेटेरियल फील्ड. जहा जॉब की अड्वर्टाइज़्मेंट देखी, अप्लाइ कर देती और बोहोत बेचैनी से डेली पोस्ट का वेट करती रहती पर हमेशा निराशा ही हाथ आती और पोस्ट मन बिना लेटर दिए चला जाता. अप्लाइ करने के टाइम पे ही अपना पोस्टल और ईमेल आइडी दोनो लिख देती थी. पोस्ट को तो चेक कर लेती थी पर एमाइल चेक करना मुश्किल हो गया था क्यॉंके धीरे धीरे फोन कट करवाना पड़ा फिर इंटरनेट और केबल कनेक्षन भी कट

करवाना पड़ा था इसी लिए अब मैं अपने एमाइल्स भी नही चेक कर सकती थी. घर के करीब ही एक इंटरनेट केफे था जिसे एक फिज़िकली चल्लनगेड आदमी चला ता था. हमारा पड़ोसी होने के नाते उसे हमारे बिज़्नेस के बारे मे भी पता था वो मुझे अपने केफे मे आ के फ्री मे ईमेल चेक करने की पर्मिशन दे देता था जहा जा कर मैण अपने ईमेल्स चेक कर लिया करती थी.

क्रमशः......................
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07-10-2018, 12:36 PM,
#2
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--2

गतान्क से आगे..........

अप्लाइ करते करते ऑलमोस्ट 3 मंथ हो गये थे पर कही से कोई ऐसा फ्रूटफुल रिप्लाइ ही नही आया था. थोड़े बोहोत जो रीप्लाइस आते थे वो यही आते थे की वी हॅव केप्ट युवर अप्लिकेशन इन और आक्टिव फाइल, एज सून एज वी हॅव सम वेकेन्सी वी विल कॉंटॅक्ट यू. कुछ लोग तो डाइरेक्ट लिख देते थे कि पोज़िशन ईज़ ऑलरेडी फिल्ड. कुछ लिखते थे कि वी हॅव प्रमोटेड ए गाइ फ्रॉम और ऑफीस टू फिल दट पोज़िशन. कुछ कंपनीज़’ वाले लिखते के उनको एक्सपीरियेन्स्ड लड़की चाहिए. मैं तो इतनी निराश हो गयी थी के रातो मे रोने लगती के शाएद मुझे जॉब नही मिलेगा और धीरे धीरे सतीश की हेल्थ भी खराब रहने लगी थी. हमारा टाइम ही खराब चल रहा था. सतीश इतने सेल्फ़ कॉन्षियस थे के अपने पिताजी से या मेरे पिताजी से कुछ मॉनिटरी हेल्प लेने के लिए तय्यार ही नही थे. उसका ख़याल था कि यह बुरा टाइम है जो जल्दी ही ख़तम हो जाएगा और फिर वोही पुराने फुल प्रॉफिटबल बिज़्नेस आ जाएगा. सो ही वाज़ रेज़िस्टिंग बट हिज़ हेल्थ ईज़ रूयिनिंग दे बाइ दे आंड आइ आम अनेबल टू फाइंड आ जॉब फॉर माइसेल्फ. हम दोनो रातो मे रिसेशन, बिज़्नेस लॉस और जॉब के बारे मे ही डिसकस किया करते थे. हमारी सेक्स लाइफ भी तकरीबन ख़तम ही हो चुकी थी. अब सतीश का लंड जैसे एक छोटा सा लटकता हुआ यूरिन पास करने का टूल बन गया था. उसके लंड को एरेक्ट हुए पता नही कितने वीक्स हो गये थे. शुरू शुरू मे तो मेरा बोहोत मूड होता था चुदवाने का और मैं सतीश के लंड से खेलती और अपने हाथमे ले कर दबाती और कभी मूह मे ले के चूस्ति लैकिन फिर भी उसका लंड एरेक्ट नही होता था और मैं अपनी चुदवाने की भावना को अपने दिल मैं ही दबा के सो जाती. अब धीरे धीरे मेरी चूत भी गीली होना बंद हो गयी थी. दिन और रात बस जॉब का ही ध्यान लगा रहता था इसीलिए सेक्स की भावना ऑलमोस्ट ख़तम ही हो गयी थी. मेरा दिल भी अब चुदाई से हट गया था और मैं जो अपनी चूत की ऐसी अच्छी देख भाल किया करती थी अब अपनी चूत के बालो को ट्रिम करना भी छोड़ दिया था.

दिन और रात ऐसे ही निराशा भरे गुज़रने लगे. एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रही थी तो मुझे वो गुड न्यू मिल गयी जिसका इंतेज़ार मैं ऑलमोस्ट 2 महीने से कर रही थी. मुझे इंटरव्यू कॉल आई थी आर.के. इंडस्ट्रीस, मुंबई से. आर.के. इंडस्ट्रीस को उनके मॅनेजिंग डाइरेक्टर ( एम डी ) के लिए एक पर्सनल सेक्रेटरी की ज़रूरत थी जो उनके छोटे मोटे पर्सनल अकाउंट्स भी देख सके. मेल देख कर मेरे दिल को जो खुशी मिली वो मैं बयान नही कर सकती.

मेरी आँखो मैं एक नयी चमक आ गयी, दिल इतनी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा जैसे अभी उछल कर सीने से बाहर आ जाएगा, बदन मे खुशी से पसीना आ गया पर फॉरन ही एक दम से पता नही क्यों दिल बैठ गया के इंटरव्यू तो मुंबई मे है और पोस्ट भी वही के लिए है. मैं सतीश को छोड़ के कैसे जासकती हू और यह कोई ज़रूरी भी नही है के मैं बॅंगलुर से मुंबई जाउ और यह जॉब मुझे ही मिले पर दिल कह रहा था के थेअर ईज़ नो हार्म इन ट्राइयिंग स्नेहा चली जा ट्राइ तो कर ले भगवान की कृपा रही तो यह जॉब तुझे ही मिलेगी फिर दूसरी तरफ दिल कहता के स्नेहा सिक्रेटेरियल जॉब तो किसी लड़की को ही मिलेगी ना और तू तो एक शादी शुदा है फिर दिल कहता के यार चली तो जा एक ट्राइ करने मे किया प्राब्लम है तू भी कुछ कम ब्यूटिफुल और सेक्सी नही है बॅस थोड़ा अपने आप को मॉडर्न बना ले और ट्राइ मार ले. यह सोचते सोचते मैं घर आ गई और सतीश को इंटरव्यू का प्रिंट आउट दिखा दिया तो वो भी खुश हो गया और बोला के चली जाओ और ट्राइ कर्लो देखो क्या होता है. हम दोनो ने मिल कर डीटेल मे डिसकस किया. पहले प्रोग्राम बना के दोनो जाएगे फिर सोचा के अब इतना लंबा एक्सपेन्स करके मुंबई जाए वाहा का होटेल, बोरडिंग, लॉड्जिंग और ट्रॅन्स्पोर्टेशन का खर्चा बोहोत हो जाएगा. सतीश ने पूछा के क्या तुम अकेली जा सकती हो तो मैने बोला के मैं कभी बॅंगलुर से बाहर ही नही गई मुझे तो पता भी नही के मुंबई क्या है, कहा है, कैसी है वाहा क्या होगा एट्सेटरा एट्सेटरा. सतीश एक दो टाइम अपने बिज़्नेस के सिलसिले मे मुंबई जा चुके थे तो उनको मुंबई का एक वेग टाइप का आइडिया था लैकिन वाहा वो किसी को जानते नही थे और यह इंटरव्यू की प्लेस भी नही जानते थे कि कहा है और मुझे कुछ ख़ास गाइड भी नही कर सके बस मुंबई के लाइफ स्टाइल के बारे मे थोड़ा बोहोत जो जानते थे बता दिया. इंटरव्यू 3 दिन बाद होना था और मुझे कल ही मुंबई के लिए निकल जाना था नही तो मैं टाइम पे नही पहुँच सकती थी. बहुत आर्ग्युमेंट्स और डिस्कशन्स के बाद अल्टिमेट्ली यही डिसाइड हुआ के मुझे अकेले ही जाना पड़ेगा और मेरे पास बिल्कुल भी टाइम नही है. रात हो गई है और कल लंच टाइम तक मुझे चले जाना है. यह डिसाइड किया के प्राइवेट बस से जाना होगा क्यॉंके सब से पहले तो ट्रेन का टिकेट कॉस्ट्ली पड़ता था और बिना रिज़र्वेशन मुंबई तक का ट्रॅवेल ऑलमोस्ट इंपॉसिबल था इसी लिए बस का डिसाइड कर लिया गया.

सतीश ने मुझे समझाया के कैसे जाना है और क्या करना है और कैसे वापस आना है उसके बाद सतीश तो मेडिसिन ले के सो गये पर मुझे तो तय्यारी करनी थी इसी लिए मैं वॉशिंग मशीन मे अपने कपड़े डाल के वॉशिंग मे लग गई और शादी मे आया हुआ एक मीडियम साइज़ का सूटकेस निकाल के उसको साफ किया और कपड़े धोने के बाद आइर्निंग करने बैठ गई. अपना मेक अप बॉक्स भी रेडी कर लिया. मेरे पास कॉलेज के ज़माने का एक क्रीम बॅकग्राउंड पे पिंक फ्लवर वाला

मिद्डी टाइप का सिल्की स्कर्ट था और लाइट क्रीम कलर पे पोल्का डॉट वाली एक चोली जिसमे नीचे से नाट भी डाली जा सकती थी, यह ड्रेस मुझे बोहोत ही पसंद था तो मैं ने इंटरव्यू के लिए इस ड्रेस को ही चूज किया जिसे सतीश ने भी अप्रूव किया था और यह ड्रेस सतीश को भी बोहोत ही पसंद था. यह ड्रेस को आइरन किया और सूट केस रेडी कर लिया. जब यह सब काम कंप्लीट हो गया तो मुझे ख्याल आया के मुझे अपने आप को भी तो ठीक ठाक करना है नही तो इंटरव्यू के टाइम पे ऐसा लगेगा जैसे मैं किचन से उठ कर आ रही हू, यह ख़याल आते ही मेरे चेहरे पे एक मुस्कान आ गयी और मैं बाथरूम मे शवर लेने चली गई.

मैं अपनी झांतो भरी चूत को शेव करने लगी.

बाथरूम मे आने के बाद जब अपने कपड़े उतारे और नंगी हो गई और सामने वॉल पे लगे लाइफ साइज़ मिरर मे मुझे अपनी चूत के आगे ऐसा जंगल दिखाई दिया जिसे देख कर मैं डर गई के यह मेरी चूत की क्या हालत हो गई है और फिर मैं ने कपबोर्ड से हेर रिमूविंग क्रीम निकाल के अपनी चूत के बालो पे स्प्रेड किया और वेट करने लगी. थोड़ी देर के बाद प्लॅटिक के पीस से जब चूत के झांतो पे शेव जैसे ही किया तो चूत पे धक्की हुई झांट आसानी से निकलने लगे और जंगल जैसे बालो भरी चूत की जगह एक चमकदार, चिकनी सिल्की सॉफ्ट चूत दिखाई देने लगी जिस पर मैं प्यार से हाथ फेरने लगी और देखते ही देखते मैं सब कुछ भूल गयी मुझे इस वक़्त अपनी प्यारी चूत से ज़ियादा कुछ अछा नही लग रहा था और मैं अपनी प्यारी चिकनी चूत का बड़े प्यार से मसाज करने लगी. अपनी चूत पे हाथ फिराना मुझे बोहोत ही अछा लग रहा था, मेरे बदन मैं एक सनसनी सी फैलने लगी थी. मेरी फ्रेशली शेवन सॉफ्ट चूत को इस टाइम एक मोटे से मूसल लंड की ज़रूरत महसूस होने लगी जो मेरी गरम चिकनी चूत को चोद चोद के उसका भोसड़ा बना दे. आज कल सतीश का लंड तो एरेक्ट नही हो रहा था इसी लिए मुझे इमीडीयेट्ली अपने

कॉलेज फ्रेंड रवि का मोटा लंड याद आगेया और अब मेरी चूत की पोज़िशन ऐसी थी कि उसको एक मस्त मोटे लंड से चूत के फटने तक चुदाई चाहिए थी. मैं एक लंड के लिए बे चैन हो गई और अपनी उंगली को चूत के अंदर डाल के चोद्ते हुए मैं अपनी चूत के अंदर रवि के लंड को अपने ख़यालो मे ही अपनी चूत के अंदर महसूस करने लगी अपनी समंदर जैसी गीली चूत को अपनी उंगली से पागलो की तरह से चोदने लगी, मेरी उंगली चूत के अंदर तूफ़ानी रफ़्तार से अंदर बाहर हो रही थी और पता ही नही चला कब मेरी आँखें बंद हो गयी थी और सारे बदन मे एक नशा सा च्छा गया था, आँखें बंद हो गई, मस्ती से मेरा बदन किसी सूखे पत्ते की तरह से काँपने लगा और मैं झड़ती ही चली गई झड़ती ही चली गई पता नही कितनी देर तक झड़ती रही क्यॉंके मेरी चूत को चुदे हुए बोहोत दिन हो गये थे, मे बाथरूम के फ्लोर पे लेट गई और फिर और मेरा सारा बदन ऐसे सुन्न हो गया था जैसे किसी ने बदन मे ऐसी सन सनाहट होने लगी जैसे अनेस्तीसिया दे दिया हो और चूत के मसाज के बाद आज इतना ज़ियादा जूस निकला था कि क्या बताउ, चूत से जूस बह के जाँघो से होता हुआ नीचे फ्लोर पे भी गिर गया ऐसा लगता था जैसे मेरी चूत से मस्ती का जूस नही कोई समंदर निकला हो. मेरी चूत के अंदर इतने दिनो से सोई हुई चुदाई की वासना जागने लगी और मैं एक दम से चुदासी हो गई और मेरी चूत एक मोटे लंड से चुदने को बेचैन होने लगी और सोचने लगी के काश आज की रात सतीश का लंड उठ जाए और मुझे चोद चोद कर मेरी चूत का भोसड़ा बना दे. पर क्या करू मुझे पता था के अब इस टाइम पे उसका लंड नही एरेक्ट होगा इसी लिए अपने दिल पे पत्थर रख के बिना चुदवाये ही शवर लिया और टवल लपेट के शवर से बाहर आ गई.

अपनी झांतो भरी चूत को साफ कर के और फ्रेशली शेवन चूत का मस्त मसाज करने तक मुझे पता ही नही चला के मेरे शवर लेने मे तकरीबन एक घंटा लग गया है. मेरे शवर ले के बाथरूम से बाहर आने तक सतीश सो गये थे. मुझे उसे देख के उसपे दया आ गई और सोचने लगी के काश मुझे यह जॉब मिल जाए तो एक बार फिर से हमारे दिन पलट सकते है. सतीश का बिज़्नेस फिर से ठीक हो सकता है. एट्सेटरा एट्सेटरा, यही सोचते सोचते मैं अपने कपड़े और दूसरा समान पॅक करने लगी. एक एक चीज़ को अच्छी तरह से डबल चेक किया और सूटकेस को पॅक किया और सोने के लिए अपने बेड पे चली गई. टाइम देखा तो रात के 4 बज रहे थे.

मुझे अकेले ट्रॅवेल करने के डर से और फर्स्ट टाइम मुंबई देखने के एग्ज़ाइट्मेंट मे नींद ही नही आ रही थी. मैं बेड पे लेटी करवटें बदल बदल के सोने की कोशिश करने लगी पर कुछ नही हुआ. आख़िर सारी रात जाग जाग कर ही गुज़री बॅस अपनी आँखें बंद कर के लेटी रही. दिमागी टेन्षन की वजह से

बोहोत दीनो से रातो मे नींद नही आ रही थी कभी किसी दिन 3 घंटे कभी 4 घंटे ऐसे ही नींद होती रही थी. और आज तो रात भर नींद नही आई थी. बेड पे लेटने के बाद सारा टाइम करवटें बदलने मे गुज़र गया और बिना सोए ही सुबह उठ के शवर लिया तो थोडा फ्रेश महसूस करने लगी.

आज मुझे किसी प्राइवेट बस से मुंबई जाना था. सुबह मेरे शवर लेने तक सतीश ब्रेकफास्ट बना चुके थे. हम दोनो ने ब्रेकफास्ट लिया और सतीश बस के रिज़र्वेशन के लिए चले गये. बॅंगलुर से मुंबई जाने के लिए बोहोत प्राइवेट कंपनीज़ के बस चलते थे. हमारे घर के करीब ही एक प्राइवेट कंपनी भी थी जहा सतीश एंक्वाइरी के लिए चले गये और थोड़ी ही देर मे रिज़र्वेशन ले के वापस आ गये. बस दोपेहेर के 2 बजे बॅंगलुर से निकलती थी. लेट रिज़र्वेशन करवाने की वजह से मुझे सब से लास्ट वाली सीट मिली थी. मैं शवर ले के तय्यार हो गई. बॅंगलुर से मुंबई का जर्नी कुछ ज़ियादा ही लंबा था फिर सोचा के रास्ते मे मौसम कैसा होगा पता नही हो सकता है के ठंडी हो इसी लिए मैं ने डिसाइड किया और अपना एक डार्क ब्लू बॅकग्राउंड पे लाइट क्रीम कलर के छोटे छोटे फ्लवर और डीप नेक का शर्ट जिस्मै से मेरा दूध जैसा क्लीवेज भी नज़र आ रहा था और डार्क ब्लू कलर की मॅचिंग वाला सलवार सूट पहेन लिया. इस डार्क कलर की सलवार मे मेरा गोरा रंग बोहोत अछा लग रह था. मुझे घर मे ब्रस्सिएर और पॅंटी पहेन्ने की आदत तो थी नही और फिर मैं ने सोचा के इतना लंबा सफ़र है शाएद पॅंटी और ब्रस्सिएर मेरे बदन पे अगर टाइट हो गये तो उनको दूसरे पॅसेंजर के सामने अड्जस्ट करना भी मुश्किल हो जाएगा और फिर बस मे कौन मुझे देखने जा रहा है के मैं ने ब्रस्सिएर और पॅंटी पहनी है के नही बॅस यह सोच के मैं थोड़ा सा मुस्कुरा दी और बिना ब्रस्सिएर और बिना पॅंटी के ही सलवार सूट पहेन लिया. सलवार सूट बोहोत लाइट मेटीरियल का बना हुआ था जिसका मेरे बदन पे एहसास ही नही हो रहा था मुझे यह ड्रेस भी बोहोत ही पसंद था तो मैं ने यह पहेन लिया. सलवार पेहेन्ते पेहेन्ते देखा तो मुझे याद आया के इस सलवार सूट मे तो मेरे टेलर ने सलवार मे नाडा नही एक मोटी सी और अछी क्वालिटी का एलास्टिक लगाया हुआ था जिसके पहेन्ने से मैं बोहोत ही कंफर्टबल महसूस करती थी और अगर नाडा होता तो उसको बाँधने मे कभी टाइट हो जाता कभी ढीला तो वो एक अलग मुश्किल थी इसी लिए मैं हमेशा ही एलास्टिक हाई प्रिफर करती थी और मैं ने अपने टेलर से बोल दिया था के नेक्स्ट टाइम से मेरी सारी सलवार मे एलास्टिक ही लगाना. एक अंदर की बात बताउ, सलवार मे एलास्टिक होने की वजह से कभी भी बैठे बैठे या खड़े खड़े ऊपेर से अपना हाथ अपनी चूत मे डाला जा सकता था चाहे वो खुजाने के लिए हो या

चूत का मसाज करने के लिए. मैं यह सलवार सूट मे बोहोत ही कंफर्टबल और लाइट महसूस कर रही थी.

क्रमशः......................
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07-10-2018, 12:36 PM,
#3
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--3

गतान्क से आगे..........

मैं और सतीश टाइम पर ट्रॅवेल ऑफीस पोहोच गये. सतीश को वेदर देख के याद आया और वो करीब की दुकान से एक वॅसलिंग मिक्स कोल्ड क्रीम का डिब्बा ले के आया, यहा कोई सूपरमार्केट तो था नही जो अपनी चाय्स से पर्चेस किया जा सके, इसी लिए चौड़े मूह वाला बड़े ढक्कन का मीडियम साइज़ का डिब्बा मिला जिसे सतीश ने खरीद लिया और मुझे बोला के यह रखलो रास्ते मैड हूप लगेगी या बाहर की हवा से स्किन खराब हो जायगी तो यह तुम अपने फेस पे और हाथो पे लगा लेना तो मैं ने वो कोल्ड क्रीम की बॉटल को अपने पर्स मे ही रख लिया. इतनी देर मैं वाहा ऑलमोस्ट सब ही लोग आ चुके थे और बस के अंदर बैठने लगे थे. मेरा सूटकेस भी बस के नीचे बने लॉकर मे रख दिया और मैं सिर्फ़ अपना पर्स ले के अपनी सीट पे आ गई. देखा तो मेरी सीट पे मैं अकेली ही थी और कोई नही आया तो मैं खुश हो गई के चलो सफ़र आराम से गुज़रेगा 2 सीट पे आराम से बैठुगी. मे बोहोत ही डर रही थी और बस के चलने तक सतीश मेरे साथ ही रहे और मेरी हिम्मत बढ़ा रहे थे और मुझे बिना घबराए और बिना डरे कॉन्फिडेन्स के साथ सफ़र करने को बोल रहे थे. आज मैं फर्स्ट टाइम सतीश से और बॅंगलुर से दूर जा रही थी मेरा दिल बड़ी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था जैसे अभी बहेर निकल जाएगा, मेरे बदन से पसीने छ्छूट रहे थे फिर भी मैं हिम्मत दिखा रही थी और यह सोच कर के जब मुझे जाना ही है तो क्यों ना मैं कॉन्फिडेन्स के साथ जाउ और अगर मुझे बॅंगलुर से बाहर ही रह कर जॉब करनी है तो मेरे अंदर कॉन्फिडेन्स तो होना ही चाहिए बॅस यह सोच कर मेरे अंदर हिम्मत बढ़ने लगी और मेरा दिमाग़ से डर निकल गया और मेरे चेहरे पे कुछ इतमीनान आ गया. बस अपने टाइम पे स्टार्ट हो गयी और चल पड़ी. मैं ने बुझे दिल से और अपनी आँसू भरी आँखो से सतीश को बाइ बोला और खिड़की से हाथ निकाल के उसको उस वक़्त तक विश करती रही तब तक वो दिखाई देता रहा. जब वो नज़रो से ओझल हो गया तो मुझे रोना आ गया और मेरे आँसू निकल पड़े. कुछ देर तक रोती रही फिर अपने आप को संभाल लिया. लास्ट सीट पे बैठने की वजह से किसी को पता भी नही चला के मैं रो रही थी.

अब मैं अपने आप को बस के अंदर सेट करने लगी और जो शॉल लपेटी थी उसको फोल्ड कर के ऊपेर बने हुए ओवरहेड पोर्षन मे रख दिया. मे के महीना था और दोपेहेर 2 बजे की गर्मी थी बदन पसीने से भरा हुआ था. जैसे ही बस चलने लगी थोड़ी हवा आई तो बदन का पसीना सूखा पर बाहर अभी हवा गरम ही चल रही थी. शुरू शुरू मे तो बस के अंदर के लोग एक दूसरे से ज़ोर ज़ोर से बातें कर रहे थे पर थोड़ी ही देर के बाद ऑलमोस्ट सब ही लोग चुप हो गये थे और बस मे जैसे एक सुकून आ गया था. मैं अब सोचने लगी के मुंबई मे क्या होगा, कहा होटेल मिलेगा, आर के इंडस्ट्रीस का ऑफीस पता नही कितनी दूर होगा, जॉब मिलेगी भी या नही एट्सेटरा एट्सेटरा. अभी मे यह सब सोचने मे ही बिज़ी थी के बस एक स्टॉप पे रुकी, खिड़की से बाहर झाँक के देखा तो किसी बोर्ड पे पीनिया लिखा देखा तो मैं समझ गई के बस बॅंगलुर के आउट्स्कियर्ट मे पोहोच गई है पर यह नही मालूम हुआ के बस क्यों रुकी है.

5 मिनिट के अंदर ही बस के अंदर एक जवान और बड़ा हॅंडसम सा यंग आदमी एक छोटा सा एर बॅग लटकाए, ट्रॅक सूट पहने अंदर आया. मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा क्यॉंके वो आदमी सीधा मेरी तरफ आ रहा था और वो सच मे मेरे पास आ के रुक गया और अपना एर बॅग सीट के नीचे रख के मेरे साइड वाली सीट पे बैठ गया तो मैं समझ गई के उसने रिज़र्वेशन तो शाएद बॅंगलुर से ही करवा लिया था पर शाएद उसको यही से बोर्ड करना था. उसने बैठने से पहले हेलो मिस बोला और धीरे से मुस्कुरा दिया. ऊफ्फ क्या बताउ कितनी किल्लर स्माइल थी उसकी. देखने से लगता था के प्लस और माइनस शाएद मेरी ही एज ग्रूप का होगा पर बोहोत ही हॅंडसम था, हाइट होगी कोई 5’ 9/10” के करीब, मेरे से अछा ख़ासा लंबा था, बोहोत ही गोरा रंग, ट्रॅक सूट के हाफ स्लीव्स टी शर्ट के अंदर से उसके लंबे भरे भरे गोरे गोरे हाथ जिनपे आछे ख़ासे बाल भी थे और उसकी रिस्ट पे एक बड़ी सी ब्लॅक स्ट्रॅप वाली स्पोर्ट्स . बहुत ही मस्त लग रही थी. अथलेटिक टाइप की मस्क्युलर बॉडी थी. बड़ी बड़ी ब्राउन एएस और लाइट ब्राउन बॉल जो बोहोत ही अछी तरह से सेट किए हुए थे, ब्रॉड शोल्डर्स और स्पोर्ट्स शूस मे वो एक स्पोर्टस्मन ही लग रहा था. उसके पास से पर्फ्यूम की बोहोत ही बढ़िया स्मेल आ रही थी लगता था के कोई हाइ क्वालिटी का पर्फ्यूम यूज़ करता है. उसने एक दम से मुझे बोहोत अछी तरह से विश किया और बोला हेलो मिस विच सीट वुड यू लाइक टू सीट, विंडो ओर आसले. मुझे उस टाइम तक आसले सीट क्या होती है पता नही था बॅस विंडो सीट से समझ आ गया के आसले सीट मीन्स नेक्स्ट टू विंडो यानी पॅसेज वाली सीट तो मैं ने बोला के आइ होप यू वोंट माइंड इफ़ आइ यूज़ विंडो सीट, तो उसने एक बोहोत ही दिलकश मुस्कुराहट के साथ बोला ओह मिस प्लीज़ डॉन’ट वरी, आप जहा कंफर्टबल फील करती है बैठिए. इतना बोल के मैं विंडो सीट की ओर हट गई और वो मेरे लेफ्ट साइड मे बैठ गया और मुस्कुराते

हुए बोला के हेलो मिस, आइ आम राज और अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया तो मैं भी उसकी मुस्कान मे इतनी डूब चुकी थी के मैं ने भी अपना हाथ उसके हाथ मे दे दिया और बोली के आइ आम स्नेहा तो उसने बोला के स्नेहा ईज़ आ नाइस नेम, वेरी ग्लॅड टू नो यू मिस तो मैं ने भी बोला के सेम हियर. उसने बोला के मैं मुंबई जा रहा हू तो मे ने भी बोला के मे भी मुंबई ही जा रही हू तो उसने बोला के विश यू ए प्लेज़ेंट जर्नी तो मे ने भी मुस्कुरा के बोला के सेम टू यू. इतनी बात करने से मेरा दिल कुछ हल्का होने लगा और मैं सोचने लगी के इतना हॅंडसम आदमी साथ मे हो तो शाएद सच मे मेरा जर्नी अछा ही होगा और यह सोच के मैं थोड़ा सा मुस्कुरा दी और खामोश हो गई और खिड़की के बाहर देखने लगी. यह हमारा छोटा सा इंट्रोडक्षन था.

उसके बैठने के थोड़ी देर के बाद ड्राइवर कॉफी पी के वापस आया और बस फिर से स्टार्ट हो गई. बस के सीट्स बोहोत ज़ियादा कंफर्टबल और बोहोत ज़ियादा बड़े भी नही थे इसी वजह से जब वो बैठा तो उसका शोल्डर और हाथ मेरे हाथ से लगने लगा और बस के मूव्मेंट्स के साथ उसका हाथ भी ऊपेर नीचे होने लगा. उसका बदन बोहोत ही गरम था जिसकी गर्मी मैं अपने बदन मे महसूस कर रही थी. मुझे भी कुछ अछा लगने लगा था इसी लिए मैं ऐसे ही बैठी रही. थोड़ी देर के बाद उसने अपना बॅग नीचे सीट से बाहर निकाला और बॅग मे से 2 कोक के ठंडे कॅन्स निकाले और एक मेरी तरफ बढ़ा दिया और बोला के प्लीज़ टेक इट मिस स्नेहा तो पहले तो मैं ने नो थॅंक्स बोला पर उसने बोला के गर्मी बोहोत है ठंडा ठंडा कोक पी लीजिए गर्मी जाती रहेगी वो बड़ी अची हिन्दी भी बोल रहा था लगता था के अछा ख़ासा पढ़ा लिखा होगा और उसके कपड़ो से, उसकी रिस्ट . से और उसके मेह्न्गे पर्फ्यूम उसे करने से लगता था के वो किसी अमीर घराने का होगा. उसके इन्सिस्ट करने पर मैं ने हाथ बढ़ा के थॅंक्स बोला और उसके हाथ से कोक ले लिया. कोक लाने के टाइम पे मेरा हाथ उसके हाथ से टच कर गया, मुझे उसका हाथ बोहोत ही गरम महसूस हुआ और मेरे बदन मे एक करेंट सा दौड़ गया. मैं कोक का कॅन खोल के पीने लगी. कोक बोहोत ही ठंडा था ऐसा लगता था के उसने कोक को फ्रीज़ किया हुआ था इसी लिए इतना ठंडा था और सच मे ऐसी गर्मी मई ठंडे कोक के पीना का मज़ा कुछ और ही था. जब ठंडा कोक थ्रोट के अंदर से पेट मे जा रहा था तो ऐसा लग रहा था जैसे एक ठंडी लकीर थ्रोट से पेट मे जा रही है और यह फीलिंग बोहोत अछी लग रही थी. उसने पूछा के कोक कैसा लगा मिस तो मैं ने बोला के डॉन’ट कॉल मी मिस जस्ट कॉल मी स्नेहा प्लीज़ तो वो हंस दिया और बोला के हा तो स्नेहाज़ी आपको ऐसी गर्मी मे ठंडा ठंडा कोक कैसा लगा तो मैं ने भी मुस्कुरा के बोला के नही स्नेहा जी नही सिर्फ़ स्नेहा बोलिए प्लीज़ और फिर जवाब दिया हा बोहोत अछा लगा तो उसने कहा के कॉल मी राज तो मैं ने कहा थॅंक्स राज जी तो उसने भी कहा के नही राज जी नही सिर्फ़ राज बोलिए प्लीज़ और हम दोनो मुस्कुरा दिए.

यह हमारी स्टार्टिंग के बात चीत थी उसके बाद राज ने अपने बॅग से कुछ मॅगज़ीन निकाले और एक मेरी तरफ बढ़ा दिया और एक वो खुद पढ़ने लगा. यह एक फिल्मी मॅगज़ीन था जिसे मैं देखने लगी. लास्ट नाइट बिल्कुल भी नींद नही हुई थी, शाम के ऑलमोस्ट 4 बज रहे थे और अभी भी बाहर से गरम हवा लग रही थी इसी लिए मुझे नींद आने लगी तो मुझे वॅसलीन मिक्स कोल्ड क्रीम की बॉटल याद आई तो मैं ने पर्स से निकाल के अपने चेहरे पे और हाथो पे क्रीम लगाई और क्रीम को पर्स मे वापस रख कर वैसे ही बैठे बैठे बोहोत देर तक तो राज के बारे मे सोचती रही के वाह क्या शानदार मर्द है कितना हंडसॅम है, लड़कियाँ तो इस पर मरती होंगी पता नही कितनी लड़कियाँ इस हॅंडसम से चुदवा चुकी होंगी पता नही कितनी गर्ल फ्रेंड्स होगे इसके पता नही शादी शुदा है या अभी ऐसे ही ज़िंदगी के मज़े ले रहा है एट्सेटरा एट्सेटरा ऐसे ही मेरे दिमाग़ मे सावालात गूंजते रहे फिर मैं कुछ देर तक मॅगज़ीन के पिक्चर्स देखती रही और ऐसे ही देखते देखते सो गयी. आँख खुली तो शाम के ऑलमोस्ट 6 या 6:30 बजे का टाइम था. मुझे लगा जैसे मुझे एक घंटे की नींद लगी थी इसी लिए मैं तोड़ा फ्रेश फील कर रही थी. बस चित्रदुरगा टाउन मे पोहोच रही थी. मेरी आँख खुली तो देखा के राज भी सो चुका था और जैसे ही बस चित्रदुरगा के आउट्स्कियर्ट के टी स्टॉल पे एक हल्के से झटके से रुकी तू राज की आँख भी खुल गई और हम दोनो एक दूसरे को देख के विदाउट एनी रीज़न मुस्कुरा दिए उसने सजेस्ट काइया के नीचे उतरते है और चाइ कॉफी पीते है तो मैं भी एक ही पोज़िशन मे इतनी देर से बैठे बैठे थक चुकी थी इसी लिए मैं भी नीचे उतर के थोड़ी वॉकिंग करके अपने मसल्स को रिलॅक्स करना चाहती थी इसलि लिए मैं भी नीचे उतर गई. राज ने मुझ से पूछा के क्या लेगी आप चाय या कॉफी तो मैं ने बोला के कॉफी ही ठीक रहेगी तो उसने 2 नेस्केफे का ऑर्डर दिया. कॉफी बोहोत अछी और बोहोत ही टेस्टी थी. शाम के टाइम मे गरमा गरम कॉफी बोहोत अछी लग रही थी मैं अपना पर्स खोल के कॉफी का पेमेंट करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला के नही पेमेंट तो मैं करूगा, प्लीज़ बे मी गेस्ट फिर भी मैं ने इन्सिस्ट किया तो उसने मुझे रोक दिया और खुद ही पेमेंट किया तो मैं ने उसको थॅंक्स बोला तो उसने बोला के नो फॉरमॅलिटीस प्लीज़. उसने जब मेरे हाथो को अपने गरम हाथो से पकड़ा तो मेरे अंदर एक करेंट सा दौड़ गया और मेरे माथे पे थोड़ा सा पसीना भी आगेया.

थोड़ी देर के अंदर वाहा पे सब पॅसेंजर्स यरिनल्स को जा के वॉशरूम से फ्रेश हो गये और कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स ले के वापस बस मे आ गये थे. मैं भी वॉशरूम को जा के आ गई थी तो यूरिनरी ब्लॅडर जो यूरिन से फुल हो गया था अब रिलॅक्स हो गया था और मैं भी ईज़ी फील कर रही थी. तकरीबन आधे

घंटे के बाद बस फिर से चलने लगी. इतनी देर से बहेर की गरम हवा लगने से मेरे गोरे गोरे चीक्स लाल हो गये थे तो राज ने बोला के स्नेहा आपके चेहरे पे धूप ने अपना कमाल दिखा दिया और आपके गालो को कश्मीरी सेब का कलर दे दिया तो मैं ऐसे फर्स्ट क्लास कॉमेंट्स के लिए मुस्कुरा दी. मुझे उसका यह ब्यूटी का आडमाइर करने का स्टाइल बोहोत अछा लगा. मैं ने बोला के नही ऐसी कोई बात नही मैं आक्च्युयली रात मे सोई नही थी इसी लिए मुझे नींद आ गई और मुझे पता भी नही था के मैं सन के डाइरेक्षन मे बैठी हू और बोला के राज आप इधर विंडो सीट पर आ जाइए मैं उधर आ जाती हू और मैं अपनी सीट से उठने लगी तो वो भी अपनी सीट से उठ गया और हम ने सीट्स का एक्सचेंज कर लिया अब मैं उसके लेफ्ट साइड मे बैठी थी. यह आसले वाली सीट मुझे विंडो सीट से ज़ियादा ठीक लगी के मैं अपने लेग्स को थोड़ा स्ट्रेच कर सकती थी. राज ने मुझ से पूछा के आप कहा रहती हो मुंबई मे तो मैने बोला के ओह नही मैं मुंबई मे रहती नही आक्च्युयली मे मुंबई को बिल्कुल फर्स्ट टाइम जा रही हू तो उसका मूह हैरत से खुल गया और बोला के आप अकेली जा रही हो मुंबई और वो भी फर्स्ट टाइम तो मैं ने बोला के हा एक कंपनी मे मेरा इंटरव्यू है तो उसने पूछा के कैसा इंटरव्यू तो मैने बोला के मैं ने सिक्रेटेरियल पोस्ट के लिए अप्लाइ किया था और मुझे कॉल आई है इंटरव्यू के लिए तो उसने पूछा के कोन्सि कंपनी का है तो मैं ने बोला के है कोई आर के इंडस्ट्रीस जिस्मै एमडी को प्राइवेट सेक्रेटरी कम अकाउंट्स वाली असिस्टेंट चाहिए तो उसने बोला के आपको पता है किसी एमडी की प्राइवेट सेक्रेटरी होने का मतलब क्या होता है तो मैं ने पूछा के नही, क्यों, क्या होता है उसका मतलब, तो उसने बोला के मुंबई या और दूसरे बिग सिटीस मैं जो भी किसी भी कंपनी के एमडी या एग्ज़िक्युटिव्स होते है वो बड़े ही हरामी होते है, अपनी सेक्रेटरीस को अपने साथ टूर पे भी आउट ऑफ सिटी ले जाते है जहा कभी कभी तो दोनो को एक ही रूम शरीर करने पड़ता है, और ऑफीस मे उनके साथ लेट बैठना भी पड़ता है कभी कभी तो उनके रूम मे घंटो तक भी बैठना पड़ता है और ऑलमोस्ट ऑल प्राइवेट सेक्रेटरीस के उनके बॉसस के साथ इल्लीगल रिलेशन्स होते है तो मेरा मूह हैरत से खुला का खुला रह गया और मैं ने पूछा आप सच बोल रहे हो तो उसने कहा के हाँ एक दम से सच.

क्रमशः......................

Recession Ki Maar part--3
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07-10-2018, 12:36 PM,
#4
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--4

गतान्क से आगे..........

आक्च्युयली बात यह भी तो है ना के आजकल की भाग दौड़ की ज़िंदगी मे और पैसे की ज़रूरत मे कोन्से हज़्बेंड को या किसके पेरेंट्स को पता चलता है या उनको इतनी फ़ुर्सत है के उसकी बीवी या बेटी बाहर क्या कर रही है और आजकल मेल्स भी नों वर्जिन गर्ल्स से शादी करने मे कोई प्राब्लम भी नही फील कर रहे है इसी लिए लड़कियाँ प्राइवेट सेक्रेटरीस वाले जॉब को इस लिए भी प्रिफर करती है के उनको डिफरेंट सिटीस के साइट सीयिंग के साथ ही पैसे भी मिलते रहते है, डिफरेंट बड़े बड़े होटेल्स मे ठहरने का, स्पेशल मील्स खाने का मोका मिलता है तो अब आप सोच लो के अगर आपको जॉब मिलती है तो क्या आप यह सब कर सकती हो. मैं ने पूछा के और अगर वो लड़किया प्रेग्नेंट हो जाती है तो क्या होता है तो उसने बोला के मार्केट मे ई-पिल्स मिलते है एक टॅबलेट लो और यू आर

सेफ कोई प्रेग्नेन्सी का चक्कर नही, चाहे जितनी टाइम सेक्स करना हो कर्लो कोई प्राब्लम नही होती. इतना सुनते ही मेरे पसीने छ्छूटने लगे मैं ने एक बार फिर से उस से पूछा आप सच बोल रहे हो क्या, प्राइवेट सेक्रेटरीस को यह सब करना पड़ता है क्या तो उसने बोला के किसी भी बड़े सिटी के लड़कियो के लिए यह जॉब किसी अड्वेंचर से कम नही है और आजकल की लड़कियाँ तो ऐसे जॉब के लिए कुछ भी करने को तय्यार रहती है. यह सुन के मेरा दिमाग़ और बदन एक दम से सुन्न हो गया और मैं सोचने लगी के अगर यह सब सच है तो मैं यह जॉब कैसे कर सकती हू, नही नही मैं यह सब नही करूगी, मैं सतीश के साथ बेवफ़ाई नही कर सकती मैं उस से बोहोत प्यार करती हू फिर ख़याल आया के अगर मुझे यह जॉब मिलती है और मैं आक्सेप्ट नही करती हू तो मुंबई आने जाने का खर्चा बेकार जाएगा और फिर से वोही परेशानी का दौर शुरू हो जाएग फिर पता नही क्या होगा. फिर मैं ने सोचा के चलो देखते है क्या होता है हो सकता है के एम.डी. कोई शरीफ आदमी हो या कोई ओल्ड मॅन हो जो ऐसा कुछ नही कर सकता यह सोच के मैं अपने दिल और दिमाग़ को तसल्ली देने लगी. मुझे ऐसे ख़यालो मे डूबे देख के उसने पूछा के अछा कब है इंटरव्यू तो मैं ने बोला के परसो है और मैं इसी लिए एक दिन पहले जा रही हू के उस ऑफीस के करीब ही कोई सस्ता सा अकॉमडेशन देख लू और उस ऑफीस का अड्रेस जान सकु. उसने पूछा के आपको पता भी है के फिर मैं ने उसको पूछा के आप मुंबई मे ही रहते हो या बॅंगलुर मे तो उसने बोला के आक्च्युयली मैं रहना और काम मुंबई मे करता हू पर हमारे ऑफीस की एक ब्रच बॅंगलुर मे है यहा मैं कुछ अफीशियल काम से आया था और अब वापस जा रहा हू. फिर उसने पूछा के आप अकेली क्यों जा रही हो तो मैं ने बोला के आक्च्युयली मेरे हज़्बेंड बीमार है तो उसने सर्प्राइज़ से पूछा के आप शादी शुदा हो तो मैं ने कहा के हा तो उसने बोला के अरे बट यू डॉन’ट लुक लाइक यू आर मॅरीड, यू लुक सो यंग तो मैं अपनी तारीफ सुन के मेरा चेहरा शरम से लाल हो गया. मैं ने उसको बताया के कैसे रिसेशन की मार की वजह से सतीश का बिज़्नेस बंद हो गया और कैसे मार्केट से उसको अपनी पेमेंट वापस नही मिली और कैसे हालात खराब होने लगे और कैसे उसको जॉब करने के लिए मजबूर होना पड़ा. अपने बारे मे सब कुछ बता दिया और बता ते बता ते मैं इतनी एमोशनल हो गई के मुझे पता ही नही चला के कब मेरी आँखो से आँसू निकलने लगे और कब मैं रोने लगी और मुझे पता भी नही चला के कब राज ने अपने हाथ मेरे शोल्डर पे रख दिए और कब मुझे अपनी बाँहो मे भर लिया और मेरे शोल्डर्स को थपक थपक के मुझे तसल्ली देने लगे के सब ठीक हो जाएगा डॉन’ट वरी ऊपेर वाले पे भरोसा रखो स्नेहा प्लीज़ रोना नही. मेरा सर राज के कंधे पे था और मेरे आँसू से उसका ट्रॅक सूट का शर्ट भीग चुका था. मैं बोहोत देर तक रोती रही और राज मुझे तसल्ली देते रहे. इतने दीनो से रुके हुए आँसू मेरी आँख से बह कर निकले और जब मैं जी भर के

रो चुकी तो मेरे दिल को इतमीनान आ गया और मुझे सुकून महसूस होने लगा के चलो किसी ना किसी के साथ अपने गम को शेर तो किया और मेरा दिमाग़ हल्का महसूस होने लगा तो मैं ने बोला के सॉरी राज आपको मैं ने तकलीफ़ दी तो उसने बोला के अरे नही स्नेहा आप ने अछा ही किया जो मुझे सब बता दिया यू कॅन ट्रीट मी एज युवर फ्रेंड और मैं आपकी पूरी मदद करूगा और मैं अपने पूरे सोर्सस यूज़ करूगा और कोशिश करूगा के आपको आर.के इंडस्ट्रीस मे नही तो कही ना कही जॉब मिल जाए और कभी भी आपकी आँखो मे आँसू नही आए तो मैं मुस्कुरा दी और थॅंक्स बोला तो उसने बोला के एक बात और स्नेहा तो मैं ने पूछा क्या, तो उसने बोला के मुझे आप आप कह कर ना पुकारो मुझे तुम बोलना अछा लगता है तो मैं ने बोला के ठीक है तुम भी मुझे तुम बोलना और फिर हम दोनो एक साथ हंस दिए.

ऐसे ही बाते करते करते हमारी बस थोड़ी देर के लिए दवंगेरे पे रुकी और फिर थोड़ी देर हरिहर पर रुकी और फिर रात के ऑलमोस्ट 9 या 9:30 बजे हवेरी पोहोच चुकी थी. यह मील्स स्टेशन था यहा बस के ड्राइवर ने कहा के यह मील्स स्टेशन है यहा बस आधा घंटा रुकेगी आप लोग डिन्नर कर के आ जाए तो हम दोनो भी बस से नीचे उतर गये और सामने के होटेल मे चले गये. यहा छोटे छोटे फॅमिली कॅबिन्स भी बने हुए थे. एक कॅबिन मे हम दोनो आ गये. मैं वॉशरूम को जा के एक बार फिर से फ्रेश हो के आ गई थी और राज भी फ्रेश हो के आ गया था. आते आते राज ने डिन्नर का ऑर्डर कर दिया था. वेटर 2 स्पेशल थाली ले के आया और हम दोनो खाने लगे. खाना बोहोत ही मज़ेदार था मुझे भूक भी खूब लगी हुई थी इसी लिए मैं ने पेट भर के खाना खाया. डिन्नर के बाद एक एक कप कॉफी का भी पी लिया. अब मैं बोहोत ही फ्रेश महसूस कर रही थी. बॅंगलुर मे घर से निकलते हुए खाना खाया भी नही जा रहा था एक तो अकेले मुंबई जाने का डर और दूसरा मुंबई को देखने का और फर्स्ट टाइम इन लाइफ इंटरव्यू फेस करने का एग्ज़ाइट्मेंट और सतीश को छोड़ने का गम इसी लिए मुझे अछी तरह से खाना नही खाया गया था और अब जो इतना मज़ेदार खाना मिला तो पेट भर के खाना खाया और फिर कॉफी पीने के बाद तो तबीयत एक दम से फ्रेश हो गई. रात के इस समय यहा थोड़ी थोड़ी ठंडी हवा चलने लगी थी और मौसम एक दम से अछा हो गया था.

हम वापस बस का अंदर आ गये फिर सब लोगो के आने के बाद बस स्टार्ट हो गई और चल पड़ी. मैं अब विंडो वाली सीट पे बैठी थी और राज पॅसेज की सीट पे. बाहर से आती हुई ठंडी हवा का झोंके मुझे बोहोत आछे लग रहे थे और मेरे बदन मैं थिन मेटीरियल के कपड़े पहने होने की वजह से कुछ ठंडी जैसी लग रही थी और हवा से मेरी शर्ट मेरे निपल्स से जिस तरीके से

टच कर रही थी जिस से मेरे नेकेड निपल्स खड़े हो गये थे मुझे बोहोत अछा लग रहा था, वैसे भी मैं बता चुकी हू के मेरे निपल्स बोहोत ही सेन्सिटिव है हल्का सा टच भी मुझे मज़ा देता है.

ड्राइवर ने बताया के कुछ पॅसेंजर्स हुबली मैं उतरने वाले थे और हुबली का सफ़र हवेरी से ऑलमोस्ट डेढ़ घंटे का था. रात हो चुकी थी पर आकाश मे चंदमा नही था तो मुझे याद आया के परसो ही तो अमावस की रात थी इसी लिए आज की रात अछी ख़ासी अंधेरी थी. कभी कभी कोई छोटा मोटा गाओ आजाता तो थोड़ी देर के लिए रोशनी दिखाई देती उसके बाद फिर से काली अंधेरी रात. मैं विंडो वाली सीट पे बैठी थी और बाहर की हवा की वजह से मेर बाल हवा से उड़ के राज के मूह से लग रहे थे तो मैं ने अपने बालो को गोल मोड़ लिया और एक राउंड सा जुड़ा बना के बालो को लपेट लिया तो राज ने हंस के बोला के अरे रहने देती आपके बालो से भीनी भीनी खुश्बू बोहोत अछी लग रही है तो मैं शर्मा गई. हम फिर इधर उधर की बातें करने लगे. मैं ने पूछा के आपकी शादी हो गई है तो उसने बोला के हा अभी 6 महीने पहले ही शादी हुई है पर उसकी वाइफ किसी कंपनी मे एग्ज़िक्युटिव है तो वो भी मोस्ट्ली टूर पे ही रहती है. कभी अचानक उसका टूर निकल आता है और कभी अचानक वो वापस आ जाती है उसका कोई टाइम सेट नही है. फिर हम अपने स्कूल्स की और कॉलेजस की बातें करने लगे, फ्रेंड्स की बातें करने लगे, कभी जोक्स भी सुनाने लगे और हम एक दूसरे से घुल मिल गये और हमे ऐसा लगने लगा जैसे हम जनम जनम के के साथी हो. ओफ़कौर्स हम बातें आहिस्ता ही कर रहे थे ता कि दूसरे पॅसेंजर्स को डिस्टर्ब ना हो.

तकरीबन सभी पॅसेंजर्स ने पेट भर के खाना खाया था इसी लिए अब ऑलमोस्ट सभी पॅसेंजर्स सो गये थे जिनके खर्रातो की आवाज़ें आने लगी थी. ठंडी हवा चेहरे पे लगने से मुझे भी नींद के झोंके आने लगे थे और मैं अपने सर को सीट के हेड रेस्ट पे लगा के सो गयी. कभी कभी मेरा सर स्लिप हो के राज के शोल्डर पे आ जाता तो मैं फिर से ठीक कर लेती. एक दो टाइम ठीक किया तो राज ने बोला के रहने दो ना तुम सो जाओ ऐसे ही और मैं उसके कंधे पे अपना सर रख के गहरी नींद सो गयी. बाहर का वेदर बोहोत ही प्लेज़ेंट था और मेरी नींद गहरी हो गई. जैसे ही मेरी नींद गहरी हुई मुझे लगने लगा के मैं कॉलेज मे हू और हमारे लास्ट के 3 पीरियड्स फ्री हो गये है तो मैं ने रवि को फोन किया वो भी अपनी क्लास ख़तम कर के बाहर आ गया और फिर हमने प्लान बनाया के कॉलेज से फिल्म देखने चलते हैं और हम एक इंग्लीश फिल्म देखने चले गये. फिल्म ला नाम का तो पता नही पर एक दम से मस्त और सेक्सी फिल्म थी. शाम का मॅटिने शो था इसी लिए थियेटर इतना ज़ियादा फुल नही था, बस हमारे जैसे कुछ स्टूडेंट्स जो कॉलेज को बंक करके आए थे बॅस उतने ही लोग थे. और वैसे भी आजकल लोग घरो मे ही सीडी लगा के पिक्चर्स

देखने के आदि हो गये है इसी लिए थियेटर्स मे भीड़ भाड़ नही होती और ऑलमोस्ट खाली ही होते है. हम सब से पीछे वाली सीट पे बैठ गये. हमारे अंदर आने तक फिल्म के स्टार्ट होने से पहले के आने वाली फ़िल्मो के कुछ ट्रैलोर्स चल रहे थे, आक्चुयल फिल्म अभी चालू नही हुई थी. हम अंदर आने से पहले कुछ पॉपकोर्न्स भी ले के आए थे के टाइम पास होगा. एक मैं ने अपनी गोदी मे रखा और दूसरा रवि की गोदी मे और दोनो ने डिसाइड किया के रवि मेरे पॅकेट मे से खाएगा और मैं रवि के पॅकेट से और हम एज पर डिसिशन एक दूसरे के पॅकेट्स से पॉपकॉर्न खाने लगे. पॅकेट्स उतने बड़े भी नही थे और सेक्सी रोमॅंटिक इंग्लीश फिल्म के चलते पॉपकॉर्न जल्दी ही ख़तम हो रहे थे. मैं ने रवि के पॅकेट मे हाथ डाला तो वाहा पॅकेट तो नही था पर उसका खड़ा लंड मुझे महसूस हुआ तो मैं ने इधर उधर टटोला तो पता चला के वो तो ख़तम हो गया है और जब मेरा हाथ उसके लंड से लग ही गया था तो उसने मेरे हाथ पे अपना हाथ रख दिया और अपने लौदे को मेरे हाथो से दबा दिया. मैं इस से पहले भी बोहोत बार उसके लौदे को पॅंट के ऊपेर से ही पकड़ चुकी थी इसी लिए मैं ने माइंड नही किया और अपना हाथ वही रखा और फिल्म देखने मे बिज़ी हो गई. थोड़ी ही देर मे रवि का हाथ भी मेरी झंगो पे आ गया, मेरा पॅकेट भी खाली हो चुका था जिसको मैं नीचे गिरा चुकी थी तो मेरी झांग भी फ्री थी. रवि मेरे थाइस को सहलाने लगा तो मेरे पैर ऑटोमॅटिकली खुल गये और रवि ने इशारा समझ लिया और मेरी चूत को रगड़ने लगा. जैसे जैसे फिल्म मे सेक्सी सीन्स आने लगे हम दोनो गरम होने लगे और रवि का हाथ लगने से तो मेरी चूत मे आग ही लग रही थी और फुल गीली हो चुकी थी. मुझे पता ही नही चला के कब रवि ने अपने पॅंट की ज़िप को खोल दिया था और मैं उसके नेकेड लंड को पकड़ के दबा रही थी और बिना सोचे ही उसके लंड का मूठ जैसे मार रही थी. मैं तो फुल जोश मे आ गई थी. रवि ने भी अपना हाथ ऊपेर कर के मेरी एलास्टिक वाली सलवार से अपना हाथ अंदर डाल दिया था और मेरी नंगी गरम चूत को मसाज कर रहा था. रवि की फिंगर मेरी क्लाइटॉरिस का मसाज कर रही थी और कभी मेरी चूत के सुराख मैं भी चली जाती तो मैं बेचैन हो जाती थी. मैं तो इतनी मस्त हो गई थी के मेरी आँखें बंद हो गई थी और मैं रवि के फिंगर फक्किंग के मज़े ले रही थी और अपनी सीट पे कुछ सामने की ओर मूव हो गई और अपनी टाँगो को फैला लिया था और रवि को अपनी चूत का फुल आक्सेस दे दिया था और फिर मेरे बदन मे सनसनाहट शुरू हो गई और मेरी चूत से जूस निकलता ही चला गया और मैं इतनी मदहोश हो गई थी के मस्ती मे रवि के लंड को इतनी ज़ोर ज़ोर से मास्टरबेट कर रही थी के रवि के लंड से कब मलाई की पिचकारी निकली मुझे पता ही नही चला. उसके लंड से मलाई निकलने के बाद भी मैं कितनी ही देर तक तो उसके लंड को मास्टरबेट करती ही रही मेरा हाथ उसकी क्रीम से लत पथ हो गया था और फिर जब मेरी चूत से जूस निकलना बंद हो गया और मैं कंप्लीट झाड़ चुकी

तो उसके लंड से अपना हाथ हटाया और हम दोनो एक दूसरे को झुक के किस करने लगे और रवि ने मेरे कान मे बोला के आज तो मस्त मज़ा आगेया मेरी जान तो मैं ने कहा के मुझे भी बोहोत ही मज़ा दिया आज तुमने रवि मुझे भी बोहोत ही मज़ा आया थॅंक. रवि की क्रीम से निकली क्रीम से अपने सने हुए हाथ को मैं ने अपने सलवार के अंदर वाले पोर्षन जो चूत के पास होता है उस पोर्षन से उसकी क्रीम को पोंछ लिया क्यॉंके उसके पॅंट पे लगा होता तो सब को दिखाई देता और मेरी सलवार के ऊपेर तो शर्ट आ जाती थी तो किसी को दिखाई नही देता था इसी लिए मैं ने अपनी चूत के साथ वाले पोर्षन पे अपनी सलवार से उसकी क्रीम को पोंछ लिया. अब हमारा मन फिल्म मे नही लग रहा था. मेरी चूत मैं अभी भी आग लगी हुई थी मे चाह रही थी के आज रवि के लंड को अपनी चूत के अंदर ले लू और उस से चुदवा लू पर फिर अपने संस्कार और मर्यादा याद आई तो खामोश हो गई और अपनी चूत को तसल्ली देने लगी. फिल्म का इंटर्वल हुआ पर हम बाहर नही गये वही अपनी चेर्स पे बैठे रहे. हम दोनो के चेहरे जोश मे लाल हो गये थे. रवि ने पूछा के कॉफी लाउ क्या तो मैं ने उसका हाथ पकड़ के बोला के नही रवि कही ना जाओ प्लीज़ यही बैठे रहो मेरे पास और फिर हम एक दूसरे का हाथ पकड़ के बैठे रहे. थोड़ी ही देर मे थियेटर मे फिर से अंधेरा छा गया और फिल्म स्टार्ट हो गई.

इंटेरनवाल के बाद से तो यह फिल्म कुछ ज़ियादा ही सेक्सी हो गई थी. आक्च्युयली सीन तो हिडन ही थे पर कभी कभी पॅशनेट किस्सिंग के और चुदाई के ऐसे भी सीन्स थे जिस्मै लड़के का लंड लड़की की चिकनी चूत मे अंदर जाता और बाहर आता दिखाई दे रही थी रियल चुदाई दिखाई दे रही थी. हम दोनो एक बार फिर से गरम हो गये थे. रवि कंटिन्यू मेरी चूत का मसाज कर रहा था मेरी चूत से जूस तो कंटिन्यू निकल रहा था और अब इस टाइम मैं ने खुद ही रवि के पॅंट की ज़िप को खोला और उसके लौदे को जो लोहे जैसा सख़्त हो चुका था बाहर निकाल लिया और उसको बड़े प्यार से दबाने लगी. हम दोनो आज अपनी सारी पुरानी लिमिट्स क्रॉस कर चुके थे. एक ऐसे ही चुदाई के मस्त सीन को देख के अचानक रवि अपनी सीट से उठा और मेरी टाँगो के बीच मे बैठ गया और अपने हाथो से मेरी सलवार को नीचे खेच लिया. सलवार मे तो एलास्टिक था और मैं ने भी अपनी गंद को थोड़ा उठा लिया और मेरी सलवार स्लिप हो गई और मेरी टाँगो के बीच आ गई. मेरी नंगी गंद सीट पे थी और रवि मेरी टाँगो के बीच बैठ गया. किसी को भी अब रवि दिखाई नही दे सकता था. उसने मेरी थाइस पे किस किया तो मैं पागल हो गई और उसके सर को पकड़ के अपनी गंद को सीट पे आगे मूव कर दिया और उसके सर को पकड़ के अपनी चूत मे घुसा लिया. मैं अपनी सीट पे ऑलमोस्ट लेटी हुई थी और रवि मेरी चूत को चाट रहा था. मैं अपनी गंद उठा के अपनी चूत को उसके मूह से दीवानो की तरह ज़ोर ज़ोर से

रगड़ रही थी. रवि के दाँत भी मेरी क्लाइटॉरिस से लग रहे थे और इन्नर चूत से भी और फिर मैं अपने आप को ज़ियादा देर तक रोक नही पाई और रवि के सर को अपनी चूत मे दबा के पकड़ लिया और मैं उसके मूह मे झड़ती ही चली गई मेरे मूह से हमम्म्ममममममम आआआअहह ऊऊऊफफफफफफफफफ्फ़ जैसी आवाज़ें निकल रही थी और मैं झाड़ रही थी, मेरी साँसें बड़ी तेज़ी से चल रही मेरी गंद अभी भी अपनी सीट से ऊपेर उठी हुई थी. मेरा ऑर्गॅज़म बड़ा ज़बरदस्त था और जैसे ही ऑर्गॅज़म ख़तम हुआ और मेरी चूत से जूस निकलना बंद हुआ मैं किसी बेजान डॉल की तरह से अपनी सीट पे गिर गयी और मेरे हाथ पैर ढीले हो गये.

क्रमशः......................
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07-10-2018, 12:36 PM,
#5
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--5

गतान्क से आगे..........

रवि अपने मूह से लगे मेरी चूत के जूस को मेरी सलवार से पोछता हुआ मेरी टाँगो के बीच से उठा और अपनी सीट पे बैठ गया. उसके लंड का भी बोहोत बुरा हाल था वो लोहे जैसा सख़्त हो गया था और किसी एलेक्ट्रिक पोल की तरह से खड़ा था. यह पहला मौका था के मैने रवि के नंगे लंड को अपने हाथ मे पकड़ा, उसका मास्टरबेट किया और इतने करीब से देखा. मैने अपनी सलवार को ऊपेर पुल किया तो महसूस हुआ के मेरी सलवार इतनी गीली हो गई थी के लगता था कि सलवार के अंदर मेरा पिसाब निकल गया हो. थोड़ी देर मे ही मैं अपने सेन्सस मे वापस आ गयी और अब मैं ने सोचा के रवि ने जब मुझे ऐसा मज़ा दिया है जो मुझे आज तक नही मिला तो मेरा भी तो कुछ कर्तव्य है के मैं भी उसको रेसिप्रकेट करू. यह ख़याल आते ही मैं भी अपनी सीट से उठी और ठीक उसी तरह से रवि के पैरो के बीच बैठ गई जैसे वो बैठा था और फिर एग्ज़ॅक्ट्ली वैसे ही उसका पॅंट भी नीचे खेच लिया जैसे उसने मेरी सलवार को नीचे खेचा था. और वो भी ऑटोमॅटिकली वैसे ही अपनी सीट पे आगे को मूव कर गया था जैसे मैं हुई थी और उसकी गंद चेर के कॉर्नर पे थी और उसका लंड मेरे मूह के सामने था जिसे पहले तो मैं ने अपने हाथ मे लिया और उसका मसाज किया और प्यार से उसके लंड के डंडे को किस किया और फिर जीभ नीचे से ऊपेर तक ले गयी और लंड के सूपदे को किस किया. रवि इतना गरम हो चुका था के और बर्दाश्त नही कर सका और मेरा सर पकड़ के अपने लंड को मेरे मूह मे घुसा दिया. उसके मोटे लंड से मेरा मूह भर गया. मैं सीट के बीच मे अपने घुटने मोड़ के बैठी थी इसी लिए मुझे उसका लंड चूसने मैं थोड़ी दिक्कत हो रही थी तो मैं ने पोज़िशन चेंज किया और घुटनो के बल बैठ गई. यह पोज़िशन ठीक थी और मैं उसका मोटा लंड चूस रही थी और वो अपनी गंद उठा उठा के मेरे मूह को चोद रहा था. कभी कभी तो जोश मई इतनी ज़ोर से अंदर घुसेड़ता के उसका लंड मेरे हलाक मई घुस रहा था. मई किसी आइस क्रीम की तरहसे उसका लंड चूस रही थी और हाथ से उसके लंड का मूठ भी मार रही थी. रवि भी इतना गरम हो गया था के अपने आप को रोक रही पाया और उसका लंड मेरे मूह मेी फूलने लगा और उसने अपने लंड को

मेरे मूह के पूरा अंदर तक घुसा दिया जिस से उसका लंड मेरे हलक मे घुस गया और उसने मेरे सर को दबा के पकड़ लिया और उसकी गंद भी सीट से उठ गई थी और फिर उसके लंड से गरम गरम मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी. मैं ने अपना सर उठा के उसके लंड को बाहर निकालने की कोशिश की तो उसने मेरे सर को अपने लंड मे दबा के रखा और मेरे हलक मे उसकी मलाई के फव्वारे उड़ने लगे और डाइरेक्ट मेरे पेट मे चले गये और मेरे पेट को भरने लगी.

उसका लंड मेरे हलक मे घुसा था तो मुझे थोड़ी सी कॉफिंग सेन्सेशन जैसा महसूस हुआ तो मेरी आँख खुल गई और मैं सोचने लगी के मैं कहा हू फिर जैसे ही मैं अपने सेन्सस मैं वापस आने लगी मुझे याद आने लगा के मे किसी थियेटर मे नही मैं तो बस मे हू और मुंबई जा रही हू और मेरे साथ रवि नही राज है और मैं तो राज के शोल्दर पे सर रख के सोई थी फिर देखा तो पता चला के मैं तो उसके शहोल्डर से लुढ़क कर उसकी गोदी मे लेटी हू और ऐसी पोज़िशन मे हू के मेरा लेफ्ट हॅंड सीधा है और मेरे सर के नीचे पिल्लो जैसी पोज़िशन मे है, राज अपनी जगह से थोड़ा और आगे की तरफ को हट गया है और वो पॅसेज मे रखे किसी सूटकेस पे बैठा है और मैं अपनी सीट पे आधे से ज़ियादा लेटी हुई हू और राज बोहोत ज़ियादा साइड पे हटा हुआ है और मेरा सर राज के झंगो पर है, और राज के दोनो हाथ मेरे ऊपेर ऐसे है जैसे के मुझे नीचे गिरने से बचाने को पकड़ रखा है या कोई मा अपने बच्चे को अपने लॅप पे सुलाती है, उसका ट्रॅक पॅंट उसकी गंद से नीचे तक बाहर निकला हुआ है और मेरे मूह के सामने उसका इतना बड़ा और मोटा नंगा लंड जो के फुल्ली एरेक्ट है और अकड़ के मेरे गालो ( चीक्स ) से लग रहा है और मैं उसके लंड को ऐसे अपने हाथो मे ली हुई हू जैसे कोई मा अपने बच्चे को अपने से लिपटा के सोता है और उसका लंड एक दम से लोहे जैसा कड़क किसी मूसल की तरह लग रहा था. उसका लंड किसी तरह से भी 10 इंच से कम का नही लग रहा था और उसका हेड किसी हेल्मेट जैसा था. ठंडी हवा के चलते राज ने ऊपेर से मेरी शॉल निकाल ली थी और मेरे ऊपेर ऐसे डाल दी थी के किसी को पता ना चले के अंदर क्या हो रहा है और जिस से मैं ठंड से भी बची रहू. मुझे अंधेरा अन्देर जैसा लग रहा था मेरी समझ मे इमीडीयेट्ली नही आया के मैं क्या करू. पहले तो सोचने लगी के शाएद मैं ने रवि का नही राज का लंड चूसा हो या उसका मास्टरबेट किया हो, मैं तो फुल नींद मे थी मुझे कुछ मालूम ही नही के क्या हुआ है और यह के अगर मैं ने सच मे राज का लंड चूसा है या मास्टरबेट किया है तो राज मेरे बारे मे क्या सोचेगा के मैं कैसी औरत हू. यह सब सोचते सोचते मैं ने महसूस किया के मेरे गालो पे कुछ चिकना चिकना लगा हुआ है पर मेरे अंदर इतनी हिम्मत नही थी के चेक करू के क्या है. राज के लंड को देख के मुझे डर लगने लगा जो किसी बड़े और मोटे नाग की तरह से फुपकार रहा था और मेरी आँखो के सामने क़ुतुब मीनार की तरह शान से खड़ा हुआ था. उसका तकरीबन 10 इंच लंबा और

तकरीबन 4 इंच मोटा लंड देख के मेरी तो जान ही निकल गयी सोचा के क्या यह किसी आदमी का ही लंड है या किसी घोड़े (हॉर्स) का लंड है. अब मेरी आँखें पूरी तरह से खुल चुकी थी और मैं अछी तरह से जाग भी गई थी और अंधेरे मे मेरी आँखें देखने के काबिल भी हो गई थी. मुझे उसके लंड से मस्की स्मेल भी आ रही थी जो सतीश के लंड के स्मेल से डिफरेंट थी.

मैं नींद से जाग तो गयी थी पर अभी समझ मे नही आ रहा था के कैसे रिक्ट करू के राज को शक भी ना हो के मैं जाग गई हू. थोड़ी देर सोचने के बाद यही डिसाइड किया के मैं ऐसे ही पोज़ करती रहूगी जैसे के मैं गहरी नींद मे हू और फिर जैसे ही बस किसी खड्डे से थोड़ी उछली तो मैं अपनी जगह से उठ गई और वापस सीधे बैठ गई और अपनी आँखें मसल्ति हुई ऐसे इधर उधर देखने लगी जैसे मैं अभी अभी नींद से जागी हू. देखा तो बाहर अंधेरा था और बस के सभी पॅसेंजर्स सो रहे थे और राज की आँखें भी बंद थी पता नही वो सो रहा था या सोने की आक्टिंग कर रहा था. मैं ने ऐसे सलवार ठीक करने के बहाने अंजाने मे अपनी सलवार के ऊपेर से ही अपनी चूत पे हाथ लगाया तो देखा के सलवार तो बोहोत ही गीली हो चुकी थी लगता था के मुझे सच मे ऑर्गॅज़म आया है और मैं झाड़ चुकी हू. यह ख़याल आते ही मेरे चेहरे पे एक मुस्कान आ गयी के शाएद राज ने मेरी चूत का मसाज किया जो मैं ने अपने ख्वाब मे देखा और अपने गाल पे हाथ लगाया जहा चिकना लग रहा था तो मुझे कोई एग्ज़ॅक्ट पता तो नही चला के वो राज के लंड की क्रीम थी या उसके लंड से निकला प्री कम. मुझे अब नींद नही आ रही थी. बाहर से बड़ी अछी हवा आ रही थी तो मैं ऐसे ही आँखें बंद कर के जागती रही और अपने हालात पे और इंटरव्यू के बारे मे सोचने लगी फिर मुझे याद आया के राज ने बोला था के किसी एम.डी, की प्राइवेट सेक्रेटरी को वो सब कुछ करना पड़ता है जिसके बारे मे मैं ने सोचा भी नही था फिर मेरा दिमाग़ घूमता हुआ रवि के पास चला गया और रवि का ख़याल आते ही मुझे अपना ड्रीम याद आ गया के कैसे रवि ने मेरी चूत को चाट था और कैसे मैं ने रवि के लंड को चूसा था और उसके लंड से निकली क्रीम खाई थी और बस यह सोचते ही मेरी चूत एक बार फिर से गीली होनी शुरू हो गयी और मेरा हाथ ऑटोमॅटिकली अपनी चूत पे आ गया और मैं अपनी चूत का मसाज करने लगी. शॉल के अंदर हाथ होने से और अंधेरी रात होने से राज को भी पता नही चल पाया के अपनी गोदी मैं रखी शॉल के अंदर से अपनी चूत का मसाज कर रही हू. सलवार का कपड़ा बोहोत ही पतला था तो मुझे लग रहा था जैसे मेरी उंगली चूत के अंदर तक घुस रही है और ऐसे कपड़ा लगने से क्लाइटॉरिस बोहोत ज़ियादा ही सेन्सिटिव हो गई थी और देखते ही देखते मैं झड़ने लगी और एक बार फिर से गहरी गहरी साँसें लेने लगी. ऐसा मसाज करने से मेरा सारा बदन एक दम से गरम हो चुका था और बाहर की ठंडी हवा मुझे बोहोत अछी लग रही थी.

तकरीबन 11:30 बजे हम हुबली के बस स्टॅंड पे पहुच गये. बस रुकी और काफ़ी सारे पॅसेंजर उतर गये. बस ऑलमोस्ट हाफ ही रह गयी. एक या दो आदमी ही हुबली से बस मे चढ़े होंगे और वो लोग सामने वाली सीट पे ही बैठ गये. अब हमारे सामने की बोहोत सारी सीट्स खाली हो चुकी थी. सामने वालो को पता भी नही चल सकता था के एक कपल पीछे भी बैठा है. सब यही समझ रहे थे के हम हज़्बेंड वाइफ है और जब मुझे यह ख़याल आया तो मैं एक दम से मुस्कुरा दी. इतने मैं राज ने बोला के कॉफी पिओगी तो मैं ने बोला चलो थोड़ी थोड़ी पी लेते है और साथ मे वॉश रूम भी जा के आते है और फिर हम ने थोड़ी थोड़ी कॉफी पी और वॉशरूम जा के वापस आ गये और बस मैं बैठ गये. थोड़ी ही देर मे बस वाहा से स्टार्ट हो गयी. थोड़े पॅसेंजर्स तो इतनी गहरी नींद सो रहे थे के उनको पता भी नही चला के बस रुकी और फिर से चल पड़ी है. राज ने पूछा नींद लगी तुमको, तो मैं ने बोला के हा मुझे बोहोत ही गहरी नींद लगी बस अभी अभी उठी हू तो फिर मैं ने पूछा के तुमको नींद लगी तो उसने बोला के लगी पर ऐसे गहरी नही जैसे तुमको लगी. फिर हम इधर उधर की बातें करने लगे. मैं ने फिर से बोला के मुझे तो बोहोत ही डर लग रहा है और जब से तुमने बताया के प्राइवेट सेक्रेटरीस को ऐसे ऐसे काम करने पड़ते है तो मेरा तो दिमाग़ ही चकरा रहा है के क्या होगा, कैसे होगा, मैं इंटरव्यू कैसे फेस करूगी और क्या यह सब बातें अंडरस्टुड होती है या इंटरव्यू मे पूछी जाती है एट्सेटरा एट्सेटरा और फिर जब राज ने बोला के कोई पता नही तुम्हारा होने वाला एम.डी कैसा आदमी हो तुम देखो के तुम क्या कर सकती हो या क्या नही कर सकती हो यह सब तुम पर ही निर्भर करता है पर इतना ज़रूर बता दू के मुंबई की लड़किया तो यह सब खुशी खुशी कर लेती है उनको कोई फरक नही पड़ता तो मैं ने बोला के मेरी तो कुछ समझ मे नही आ रहा के क्या करू क्या ना करू क्यॉंके यह ऐसा टाइम है ही के हमै पैसी की सख़्त ज़रूरत है मुझे यह जॉब मिल जाए तो बोहोत अछा होगा पर अभी तक समझ नही पा रही हू के क्या करू क्या ना करू तो उसने मेरा हाथ हाथ अपने हाथो मे ले लिया और बोला के स्नेहा तुम फिकर ना करो मैं पूरी कोशिश करूँगा के तुमको यह जॉब मिल जाए और यह नही तो मैं कही ना कही तुम्हारे लिए जॉब का बंदोबस्त कर दुगा तो मेरी आँखो से आँसू निकल गया और मैने उसके हाथ को दबा के थॅंक्स बोला और उसके हाथ से अपने हाथ को अलग नही किया हम ऐसे ही हाथ मे हाथ डाले बैठे बाते करते रहे. बाहर से हवा के झोके आ रहे थे और राज को नींद आ गयी और तो थोड़ी ही देर मे एक दम से गहरी नींद सो गया और डीप ब्रीदिंग करने लगा तो मुझे पता चला के वो सच मे गहरी नींद सो गया है पर मैं इतनी देर सो के उठ चुकी थी इसी लिए मुझे नींद नही आ रही थी.

हुबली से बस के निकलते निकलते रात के 12 बज चुके थे. बेल्गौम भी हुबली से ऑलमोस्ट डेढ़ – दो घंटे का रास्ता था. राज सो चुका था और उसका सर मेरे शोल्डर पे आ गया था. मुझे उसका सर अपने शोल्डर पे बोहोत अछा लग रहा था. मैं भी अपने पैर थोड़े लंबे कर के अपनी सीट पे तोड़ आगे को मूव हो गई थी और मेरी गंद सीट के एड्ज पे थी, मैं भी अपनी सीट पर ऑलमोस्ट स्लॅनटिंग पोज़िशन मे बैठी थी और मेरे ऐसे मूव्मेंट से राज का सर मेरे शोल्डर से थोड़ा नीचे आ गया था और सोते सोते ही राज अपनी सीट पे थोड़ा और लेफ्ट मे हट गया था और अब उसका सर ऑलमोस्ट मेरे चेस्ट पे था. मैं पहले ही डीप नेक का शर्ट पहने हुए थी तो उसका फोर्हेड और थोड़ा सा गाल का पोर्षन मेरे नंगे सीने से टच कर रहा था. मुझे उसकी गरम गरम साँसें मेरे क्लीवेज मे महसूस हो रही थी जिस से मेरे अंदर भी सेक्स की गर्मी बढ़ने लगी थी और मेरा मंन कर रहा था के किसी तरह से मुझे मौका मिले तो मैं अपने शर्ट के एक दो बटन को खोल दू और राज के मूह मे अपनी बूब्स दे दू चूसने के लिए. बाइ दा वे मेरे शर्ट मे प्रेस बटन लगे हुए थे जिसे मैं बड़ी आसानी से खोल सकती थी और थोड़ी ही देर मे जब राज की नींद और गहरी हो गई और जब बस को एक छोटा सा झटका लगा तो राज का सर एक मिनिट के लिए मेरे सीने से हटा और मैं ने फॉरन मोके का फ़ायदा उठाया और एक ही सेकेंड के अंदर अंपनी उंगली शर्ट के नेक वाले पोर्षन मे डाल के ऊपेर के प्रेस बटन को खेच के खोल दिया लैकिन मेरी उंगली कुछ ज़ियादा ही ज़ोर से लगी मालूम होता है क्यॉंके मेरे शर्ट के चारो प्रेस बटन्स एक ही झटके मे खुल गये. अगर अब राज का सर पहले वाली पोज़िशन मे फिर से वापस आ जाता तो मुझे यकीन था के उसका मूह मेरे बूब्स से टच करने लगता और अब मेरे पास इतना टाइम भी नही था के मैं एक या दो बटन्स को वापस प्रेस करके बंद कर सकु खैर अब क्या कर सकती थी जो होना था हो चुका था और अब मैं वेट कर रही थी के राज का सर कब मेरे सीने से लगता है. और फिर थोड़ी ही देर मैं राज का सर मेरे शोल्डर पे आ गया और फिर वैसे ही नीचे को सरक गया तो मैं ने अपना हाथ राज के झुके हुए शोल्दर पे रख लिया और किसी बच्चे की तरह से उसको अपने सीने से लगा लिया.

क्रमशः......................
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07-10-2018, 12:37 PM,
#6
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--6

गतान्क से आगे..........

राज का मूह मेरे सीने मे था और उसकी नाक से निकलती गरम साँस जो मेरे बूब्स पे लग रही थी तो मैं भी गरम होने लगी और मेरा दूसरा हाथ मेरी जाँघो मे आ गया और मैने अपनी चूत का एक बार फिर से मसाज शुरू कर दिया था. मुझे खुद नही मालूम के मैं इतनी चुदासी क्यों हो रही थी पर सच तो यही है के मैं कुछ ज़ियादा ही चुदासी हो गई थी. राज के मूह को अपने बूब्स पे महसूस कर के मैं चूत का मसाज करने लगी और थोड़ी ही देर मे मेरा हाथ बोहोत ज़ोर ज़ोर से चलने लगा और मेरा ऑर्गॅज़म आना शुरू हो गया और

मैं झाड़ गयी. मेरी चूत से जूस तो निकल गया पर अभी मेरी चुदाई की भूक नही मिटी थी मुझे अपनी चूत के अंदर किसी लंबे मोटे लंड की ज़रूरत महसूस होने लगी थी. मैं चाहती थी के आज राज मुझे इतनी ज़ोर ज़ोर से अपने लंबे मोटे क़ुतुब मीनार जैसे लंड से ऐसा चोदे के मेरी चूत फॅट जाए. यह सोचते सोचते मेरा जोश और बढ़ने लगा पर मैं राज से चोदने को कैसे कह सकती थी बॅस ऐसे ही अपनी चूत की प्यास अपनी उंगली से मिटा ने के बाद कुछ इतमीनान हुआ.

इतनी देर मे राज का मूह मेरे निपल्स से टकराने लगा. मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो रहा था और मेरी चूत एक दम से चुदासी हो गयी थी. एक तो पहले ही मैं बोहोत दीनो से चुदी नही थी और दूसरे मैं राज का खड़ा लंबा मोटा तगड़ा लंड इतनी करीब से देख चुकी थी और फिर अब उसका मूह मेरे बूब्स पे लगा हुआ था. मेरी चूत तो समंदर जैसी गीली हो रही थी और मैं चाह रही थी के बॅस अब राज मुझे चोद ही डाले मुझे मेरे दिमाग़ मे बॅस राज का खड़ा लंड और अपनी गीली चूत ही दिखाई दे रही थी. एक दो बार मुझे ऐसा भी महसूस हुआ के राज ने मेरे निपल्स को मूह मे ले लिया हो पर शाएद नही लिया था क्यॉंके वो या तो सच मे गहरी नींद सो चुका था या बड़ा अछा आक्टर था जो ऐसे सोने का नाटक कर रहा था. बस को कभी कभी हल्का सा धक्का लगता तो उसके दाँत मेरे निपल्स से लगने लगते तो मेरे बदन मे एलेक्ट्रिसिटी दौड़ जाती. मेरे निपल्स तो पहले से बोहोत ही सेन्सिटिव है और इस वक़्त निपल्स पूरी तरह से एरेक्ट हो चुके थे और मैने राज को अपने सीने से चिपका लिया था और शाएद ऐसे ही मुझे नींद भी आ गई. अभी हमको हुबली सिटी से बाहर निकल के शाएद आधा या पौना घंटा ही हुआ था के बस किसी बोहोत

ही छोटी सी जगह पे एक झटका खा के रुक गई. पहले तो किसी की समझ मे नही आया के बस क्यों रुकी है थोड़ी देर तक तो लोग ऐसे ही सोए रहे फिर जब ड्राइवर की और क्लीनर की आवाज़ें आने लगी तो तकरीबन सभी उठ गये. आँखें मलते हुए बाहर देखा तो यह किसी ऐसी गाओ का आखरी भाग लग रहा था. दूर से आती रोशनी बता रही थी के यह जो भी गाओ है वो शाएद 1 या 2 किलोमेटेर दूर है. ड्राइवर से पूछा तो उसने बोला के बस का फॅन बेल्ट टूट गया है और इसको ठीक करने मे थोड़ा टाइम लगेगा.

तकरीबन सभी लोग बस से नीचे उतर के आ गये. यहा एक पत्थर का बना हुआ ऊँचा सा स्क्वेर प्लॅटफॉर्म जैसा बना हुआ था जिसके बीचो बीच एक होटेल था. और होटेल के बाहर इतनी बड़ी जगह थी जहा पे चेर्स पड़ी हुई थी, इतनी जगह पे अछी ख़ासी लाइट की रोशनी हो रही थी. लगता था के एक गाओ से बाहर कोई ढाबा टाइप की कोई चीज़ है जहा लोग आउटिंग के लिए आया करते है. ढाबे के आस पास कुछ नही था. बस को वो ढाबे के साइड मे रोक दिया गया था. टाइम देखा तो पता चला के रात के ऑलमोस्ट 1 बजा है. हर तरफ एक अजीब सा सन्नाटा था इधर उधर से कभी कोई फ्रॉग की या इन्सेक्ट्स की त्तररर त्त्तररर और ककककककरररर्र्र्र्र्र्र्र्ररर की आवाज़े आने लगी जैसे जंगल मे आती है या किसी कुत्ते की भोंकने आवाज़ आती है. दूर दूर तक कोई घर नही था. रोड के साइड मे नीम के और पीपल के बड़े बड़े झाड़ थे और कुछ ऐसे इनकंप्लीट स्ट्रक्चर थे जैसे पता चलता था के यहा भी कोई ढाबा या कोई झोपड़ी ( हूट ) टाइप का कुछ कन्स्ट्रक्षन चल रहा है. यहा पर ब्रिक्स, रेती और लकड़ी के टूटे फूटे टेबल्स जैसे कुछ चीज़े पड़ी थी जो के लेबवर्ज़ के खड़े होने या काम करने के लिए काम आती है. कुछ टूटे हुए झाड़ भी पड़े थे जिनको शाएद पर्पस्ली काटा गया था या तेज़ हवा के चलते गिरे होंगे पता नही. अछा ख़ासा अंधेरा था. जैसे ही बस रुकी और लोग ऊपेर आए वो ढाबे वाला उठ गया. बस को देख के खुश हो गया के चलो अछा बिज़्नेस हो जाएगा. ड्राइवर ने बोला के वो हुबली वापस जा रहा है और वाहा से फन बेल्ट ले के आएगा और इस मे शाएद 1 या डेढ़ घंटा लग जाए तब तक आपलोग चाइ पिओ और बस मे जा के रेस्ट लेलो. ड्राइवर हुबली जाने वाले रास्ते मे खड़ा हो गया और एक लॉरी वाले ने उसको बिठा लिया और वो चला गया.

यहा का मौसम बोहोत अछा था. हल्की सी ठंडी हवा थी पॅसेंजर्स चाइ पीना चाह रहे थे इसी लिए ढाबे वाले ने पॅसेंजर्स के लिए चाइ बनाना शुरू किया. मैं और राज भी नीचे उतर गये. उतरने से पहले ही मैं अपने प्रेस बटन्स को वापस लगा चुकी थी और अब ऐसे पोज़ कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नही लैकिन अंदर से चूत मे आग लगी हुई और इस टाइम पे मुझे यह चाय वाए कुछ नही मुझे बस राज का मस्त लंड चाहिए था. राज ने मेरे से

पूछा के चाइ पीओगी तो मैं अपने ख़यालो से वापस आ गयी और अपने आप को संभाल के और सिचुयेशन को समझते हुए बोली के चलो एक कप चाय पी लेते है और हम भी वाहा सब से अलग थलग बैठ के चाइ पीने लगे. चाय पीने के बाद कुछ पॅसेंजर्स तो बस के अंदर जा के सो गये और इक्का दुक्का पॅसेंजर्स ही वाहा पर बैठ के बातें करने लगे.

मुझे यरिनल्स को जाना था और यहा ढाबे मे कोई यरिनल्स तो था नही लोग ऐसे ही सड़क के किनारे या सड़क से कुछ दूर जा के ही पिशाब करते थे पर सड़क के थोड़ी दूर तक तो ढाबे की रोशनी जा रही थी लैकिन वाहा जहा ठीक नही था क्यॉंके लोग देख सकते थे तो मैं ने राज से बोला के मुझे उरिनल्स को जाना है तो उसने बोला के हा मुझे भी जाना है चलो वाहा चलते है उसने एक तरफ इशारा कर के बताया जहा कुछ बड़े झाड़ थे और जहा कन्स्ट्रक्षन जैसा कुछ चल रहा था तो मैं ने बोला के चलो और हम दोनो रोड क्रॉस कर के दूसरी तरह कुछ दूर ही चले गये यहा झाड़ो का आसरा था और कच्चे दुकान जैसे कन्स्ट्रक्षन की वजह से हमै अब कोई नही देख सकता था लैकिन यहा अंधेरा था तो मैं डर रही थी तो राज ने बोला के डरो नही मैं यही करीब खड़ा हू इतने मे शाएद कोई लॉरी जो इस रोड से पास होने वाली थी उसकी थोड़ी सी रोशनी पड़ी तो थोड़ी देर के लिए यहा का पोर्षन चार पाँच सेकेंड्स के लिए रोशन हुआ फिर वैसे ही अंधेरा. मैं ने राज से बोला के प्लीज़ दूर नही जाना तो वो बोला के तुम फिकर ना करो स्नेहा मैं यही हू और वो मेरे कुछ और करीब आ गया और मैं अपनी सलवार को घुटनो से नीचे कर के ज़मीन पे बैठ गई और पिशाब करने लगी. मेरी चूत से गरम गरम पिशब की मोटी धार निकल ने लगी. पिशाब करते टाइम मेरी चूत से जो सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईईई जैसी सीटी की आवाज़ आ रही थी तो राज भी शरारत से मेरी चूत की सीटी के सुर मे अपना मूह गोल कर के खुद भी सुर से सुर मिलाने लगा तो मुझे हँसी आ गई पर कुछ बोली नही. आक्च्युयली मुझे पिशाब करने के बाद अपनी चूत को पानी से धोने की आदत थी, मेरी कॉलेज की एक मुस्लिम फ्रेंड ने बताया था के चूत को पानी से धोने से चूत की खराब स्मेल नही आती इसी लिए मैं हमेशा ही अपनी चूत को पानी से धोती थी और सच मे ही मेरी चूत से कभी भी बाद स्मेल नही आती थी लैकिन अब इस टाइम पे यहा पानी तो था नही इसी लिए मैं ने अपना पर्स खोल के उस्मै से फेशियल टिश्यू निकाला और अपनी चूत से पिशाब के ड्रॉप्स को अछी तरह से पोंछ लिया और मैं उठ के खड़ी हो गई अपनी शलवार के एलास्टिक को ऊवपेर खेच लिया और ऑटोमॅटिकली मेरा हाथ मेरी चूत पे आ गया और शलवार के कपड़े को चूत से बाहर निकाल के अड्जस्ट किया जो शलवार ऊपेर खेचने की वजह से चूत के अंदर चला गया था.

वाहा पे लेबवर्ज़ ने एइटों ( ब्रिक्स ) का एक छोटा सा ज़मीन से ऑलमोस्ट 2 या 3 फुट ऊँचा प्लॅटफॉर्म बनाया हुआ था या शाएद ब्रिक्स को ऐसी पोज़िशन मे

जमा के रखा था और उसके ऊपेर एक लकड़ी का तख्ता ( वुडन प्लांक या वुडन बोर्ड ) डाल रखे था जहा शाएद वो बैठ कर खाना खाते थे या अपने रेस्ट टाइम पे कुछ देर के लिए लेट के रेस्ट लिया करते थे.

यह जगह ऐसी थी जहा से हम अपनी बस को आसानी से देख सकते थे क्यॉंके वाहा पर होटेल की रोशनी थी और होटेल का थोड़ा सा ही पोर्षन दिखाई दे रहा था पर हमै कोई भी नही देख सकता था क्यॉंके हम सड़क से कुछ दूर अंधेरे मे थे. एक तो कन्स्ट्रक्षन साइट थी जहा ऑलमोस्ट अंधेरा ही था और फिर वाहा पे कुछ पेड़ भी ऐसे थे जिस्मै हम प्राइवसी से बैठे हुए थे इसी लिए हमै कोई भी नही देख सकता था. पिशाब करने के बाद मे उस प्लॅटफॉर्म पे अपने पैर ज़मीन पे रख के बैठ गई और अपनी कमर को सीधा करने के लिए अपने पैर को ज़मीन पे आधा स्लॅनटिंग पोज़िशन मे कर के लटका के लेट गई. यह प्लॅटफॉर्म बोहोत ऊँचा नही था इसी लिए मेरे पैर ज़मीन से टच कर रहे थे. राज मेरे करीब ही बैठ गया तो मैं ने बोला के तुम भी लेट जाओ थोड़ी देर के लिए तो उसको भी यही ठीक लगा और वो भी अपनी कमर सीधी करने के लिए मेरे करीब ही लेट गया और रिलॅक्स होने के लिए अपने बदन को स्ट्रेच किया और हम बातें करने लगे. राज को अपने इतने करीब लेटा देख के एक बार फिर से मेरी चूत मे चीटियाँ रेंगने लगी और चूत गीली होना शुरू हो गई और एक बार फिर से मुझे अपनी चूत को एक मोटे लंड से चुदवाने की खावहिश बढ़ने लगे और चूत मे जैसे आग लगने लगी. बॅस इतनी सोचते ही मैं ने अपना हाथ ऑटोमॅटिकली अपनी चूत पे रख लिया. पता नही राज ने मेरा हाथ देखा या नही पर मैं मस्ती मे धीरे धीरे अपनी चूत को सहलाने लगी. थोड़ी ही देर मे राज खड़ा हो गया तो मैं भी ऑटोमॅटिकली अपनी जगह से उठ के बैठ गई और पूछा के क्या हुआ तो उसने बोले के मुझे भी पिशाब करना है तो मैं ने बोला के राज प्लीज़ दूर नही जाना, अंधेरे मे मुझे डर लगता है तो उसने बोला के तुम बोलो तो यही करलू तुम्हारे सामने ही तो मैं ने भी हस्ते हुए कहा के हा कर्लो वैसे भी यहा अंधेरा ही तो है. राज बस एक या दो स्टेप्स साइड मे हो के खड़ा हो गया और अपनी ट्रॅक पॅंट को थोड़ा नीचे खिसका दिया और अपनी शर्ट को अपने दोनो हाथो से पकड़ के थोड़ा ऊपेर उठा दिया के कही पिशाब से खराब ना हो जाए. राज का लंड एक दम से तना हुआ था फुल्ली एरेक्ट पोज़िशन मे था. राज ने बिना लंड को हाथ लगाए ही पिशाब की एक लंबी मोटी धार मारनी शुरू करदी जो ऊपेर को उठी और सेमी सर्कल पोज़िशन मे वापस दूर गिरने लगी. उसका लंबा मोटा लंड और उसके लंड से निकलती मोटी पिशाब की धार देख के मुझे लगा के यह कोई आग बुझाने वाला होज़ पाइप है और जैसे किसी बिल्डिंग मे लगी आग बुझाने के लिए पाइप से मोटी धार मार रहा हैं. इतने मे ही शाएद कोई लॉरी रोड से गुज़र रही थी तो उसकी रोशनी मे मुझे उसका घोड़े जैसा इतना बड़ा मोटा मूसल लंड दिखाई दिया तो

मैं पागल हो गई मेरा मंन करने लगा के अभी उठ के उसके लंड को पकड़ के चूसना शुरू कर्दु इतना प्यारा लंड था उसका. राज के लंड मे इतना पवरफुल एरेक्षन था के वो उसके नवल से लगा हुआ था और पिशाब उसके मूह के सामने से उड़ के नीचे गिर रहा था. उसके पिशाब ख़तम करने तक शाएद 3 लॉरीस सड़क से गुज़री और तीनो लॉरीस की रोशनी मे मुझे राज का लंड बोहोत अछी तरह से दिखाई दिया. राज के लंड से मेरी नज़र एक सेकेंड के लिए भी नही हट रही थी, ऐसा लगता था के उसका लंड कोई लंड नही मॅगनेट हो जहा मेरी नज़र एक दम से अटक गई हो और मैं कंटिन्यू उसके लंड को ही देख रही थी. राज के पिशाब की धार कुछ स्लो हुई तो मैं समझ गई के अब उसका पिशब ख़तम होने वाला है और देखते ही देखते राज ने अपने लंड को अपने हाथ मे पकड़ लिया और कुछ झटके मार के पिशाब की बूँदो को अपने लंड से निकाल ने लगा और अगर ऐसा नही करता तो शाएद पिशाब की बूँदें उसके लंड के सुराख से निकल के लंड के डंडे से होती हुई उसके ट्रॅक पॅंट से लग जाती थी इसी लिए उसने लास्ट मे अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ के झटके मारते हुए बूँदें निकाल दी. मेरा दिमाग़ तो एक डांसे खराब हो ही चुका था. चूत एक दम से गीली हो चुकी थी और चूत के अंदर जैसे खुजली बढ़ती ही जा रही थी. इस से पहले के राज अपने लंड को वापस अपने ट्रॅक पॅंटमे रख लेता मैं तेज़ी से अपनी जगह उठी और उसके सामने खड़ी हो गई और राज के बदन से लिपट गयी और अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ के दबा दिया. मैं ने राज को किस करने की कोशिश की तो वो खुद ही झुक गया और मेरे बदन को अपने बदन से लिपटा लिया और किस करने लगा. मेरी चूत को तो बॅस यह लंबा मोटा लंड चाहिए था. मैं उसके लंड को पकड़ के आगे पीछे करने लगी. राज ने अपने हाथ मेरी चूतदो पे रख लए और अपने लंड की ओर मुझे खेच लिया तो मैं अपनी चूत को उसके लंड से रगड़ने लगी. हम कोई बात नही कर रहे थे ऐसा लगता था जैसे यह हमारे बीच मे कोई साइलेंट अग्रीमेंट है. वो मेरे चूतदो को मसल रहा था. मेरी सलवार के थिन मेटीरियल की वजह से मुझे उसके नंगे लंड की गर्मी और ताक़त अपनी चूत मे महसूस होने लगी.

राज ने अपने हाथ मेरी शलवार के एलास्टिक मे से अंदर से डाल के मेरे चूतड़ मसल्ते मसल्ते मेरी शलवार के एलास्टिक को नीचे खेच दिया तो मैं ने भी उसके ट्रॅक पॅंट को पीछे से नीचे खींच के उतार दिया. अब हम दोनो नीचे से ऑलमोस्ट नंगे ही थे मेरी सलवार तो मेरे पैरो मे गिर पड़ी थी पर उसका ट्रॅक पॅंट उसके घुटनो तक ही उतरा था तो मैं ने उसके पॅंट मे अपना पैर डाल के उसको नीचे दबा दिया जिस से उसका पॅंट भी निकल चुका था. मैं ने उसके घोड़े जैसे लंड को अपने हाथो मे पकड़ लिया और अपनी चूत की पंखुड़ियो के बीच मे ऊपेर नीचे कर के रगड़ने लगी और मेरी आँखें वासना की भूक और मस्ती मई बंद हो गई थी और मेरी चूत बे इंतेहा गीली हो चुकी थी. उसका लंड कुछ इतना मोटा और बड़ा था के मेरी मुट्ठी मे भी नही आ रहा था. एक सेकेंड के लिए मेरे तो होश ही उड़ गये के इतना मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत मे घुसेगा तो मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ा देगा और चूत फॅट जाएगी मैं तो मर ही जाउन्गी पर इस टाइम मेरे डर पे ऐसे मस्त लंड से चुदवाने की वासना भारी पड़ने लगी और अब मुझे दुनिया मे कुछ दिखाई नही दे रहा था, मुझे तो बॅस यह लंड अपनी चूत के अंदर चाहिए था और मैं इस लंड से चुदवाने के लिए कुछ भी कर सकती थी. उसके लंड का हेड भी बोहोत ही मोटा हेल्मेट जैसा था जिसमे से अब प्री कम निकलना शुरू हो चुका था जिस से मेरी चूत बोहोत ही स्लिपरी हो गई थी और मेरी चूत के अंदर घिसने की वजह से मेरी चूत मे से जूस कंटिन्यू बहने लगा और मे गीली होती चली गयी और थोड़ी ही देर मे मैं राज से लिपट गयी और उसके लंड को अपनी चूत मे रगड़ते ही रगड़ते बिना चुदवाये ही झाड़ भी गई.

क्रमशः......................
Reply
07-10-2018, 12:37 PM,
#7
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--7

गतान्क से आगे..........

जैसे ही मेरा ऑर्गॅज़म ख़तम हुआ तो मैं घुटनो के बल नीचे बैठ गई और राज के मूसल को अपने दोनो हाथो से पकड़ लिया और उसके हेल्मेट हेड को किस किया. मेरी निगाह उसके लंड से हट ही नही रही थी मैं कंटिन्यू उसके लंड को मस्ती भरी नज़रो से देखे जा रही थी. लंड के हॅड को अपने मूह मे ले के चूसने लगी. उसके लंड का हेड भी इतना मोटा था के मेरे मूह मे मुश्किल से ही आ रहा था. राज ने मेरे सर को पकड़ लिया और अपनी गंद आगे पीछे कर के मेरे मूह को चोदने लगा. उसका लंड का हेड और थोड़ा सा डंडा ही मेरे मूह मे आ सका था और मेरा मूह पूरे का पूरा खुल चुका था उसने थोडा और ज़ोर लगाया तो मेरा मूह कुछ ज़ियादा ही खुल गया और मुझे साँस लेने मे भी दिक्कत होने लगी. उसके लंड का सूपड़ा मेरे हलक से लग चुका था. मेरे मूह मे उसका लंड कुछ इतना भरा हुआ था के मुझे चूसना मुश्किल हो रहा था फिर भी मैं ट्राइ करती रही और थोड़ी ही देर मे अपने मूह को अड्जस्ट कर ही लिया और चूसने लगी. इतने मे ही एक लॉरी और सड़क से गयी तो उसकी रोशनी मे मुझे एक मिनिट के लिए उसका लंड मुझे इतनी करीब से दिखाई दिया जो बोहोत ही मस्त था तो मुझे उसके लंड पे बोहोत प्यार आ गया और मैं कुछ और जोश मे उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. राज का लंड को चूस्ते हुए मुझे तकरीबन 10 मिनिट हो चुके थे और अब मेरा मूह दरद करने लगा था. राज मेरे सर को अपने हाथो से पकड़ के मेरे मूह को पूरे जोश से चोद रहा था और मुझे महसूस हुआ के उसका लंड मेरे मूह के अंदर कुछ ज़ियादा ही फूलने लगा है और फिर देखते ही देखते उसके लंड से गरम गरम मलाई निकल के डाइरेक्ट मेरे हलक मे गिरने लगी. उसका लंड मेरे मूह मे कुछ ऐसा फँसा हुआ था के मैं उसको बाहर निकाल भी नही सकती थी और उसके लंड से मलाई निकलती ही रही शाएद 8 या 10 मोटी मोटी धारिया निकली और मुझे लगा जैसे मेरा पेट उसकी मलाई से भर गया हो. मेरे मूह से उसकी मलाई की एक

बूँद भी बाहर नही निकलने पाई, मैं उसकी सारी मलाई बड़े मज़े से खा चुकी थी.

राज ने मुझे मेरे बगल से पकड़ के ऊपेर उठाया एक ज़ोर का किस किया तो मैं उसके बदन से लिपट गयी और अपनी जीभ उसके मूह मे डाल के पॅशनेट किस करने लगी और फिर मैं ने राज के कान के लटकते हुए पोर्षन को अपने दांतो से पकड़ लिया और उसके कान मे आहिस्ता से बोली “ फक मी राज, फक मी, फुक्ककक मे प्लीआसससी राज्ज्ज”. आइ वॉंट यू टू फुक्कककककक म्‍म्मीईई चोद्द डालो राज प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज” मुझे सतीश की याद एक ही सेकेंड के लिए आई पर मैं अब अपनी सारी मान मर्यादा को भूल चुकी थी और मुझे चुदाने के लिए लंड चाहिए था बॅस और अब मैं किसी रंडी की तरह से राज से चोदने की भीक माँग रही थी. मैं तो जैसे चुदवाने को पागल हो गई थी.

उसने मेरी अंडर आर्म्स से पकड़ के मुझे उठाया और वोही लकड़ी के तख्ते पे हाफ लिटा दिया. उसका लंड थोडा भी नरम नही हुआ था और वैसे का वैसा ही फुल्ली एरेक्ट किसी मिज़ाइल की तरह से खड़ा था. मेरी गंद लकड़ी के प्लॅटफॉर्म के एड्ज पे थी. राज नीचे घुटनो के बल बैठ गया और उसने मेरी गरम गीली चूत का एक मस्त चुंबन लिया तो फॉरन ही मैं ने अपने दोनो हाथो से उसके सर को पकड़ लिया और ज़ोर से अपनी चूत पर दबा के पकड़ लिया. मेरे पैर उसके शोल्डर पे लपेटे हुए थे मैं अपनी गंद उठा उठा के उसके मूह मे अपनी चूत को रगड़ रही थी. वो चूत को चाटने मे पर्फेक्ट लग रहा था क्यॉंके सतीश ने मेरी चूत को बोहोत टाइम चॅटा था पर कभी ऐसे नही चॅटा था जैसे राज चाट रहा था. राज ने अपनी ज़ुबान को नीचे से ऊपेर तक ऐसे चॅटा जैसे आइस क्रीम के कोन से आइस क्रीम को चाट रहा हो. मेरी आँखें बंद हो गई थी और गंद तो बॅस हवा मे ही हिल थी. मेरी पूरी चूत को उसने अपने मूह मे ले के दांतो से काटा तो मेरी चूत इतना मज़ा बर्दाश्त नही कर सकी और मेरा बदन काँपने लगा और मैं उसके सर को अपने हाथो से अपनी चूत मे घुसेड के उसके मूह मे ही झाड़ गयी. एक मिनिट तक चूत से जूस निकलता ही रहा जिसे राज बड़े मज़े से चाट रहा था और फिर अपनी ज़ुबान को गोल कर के मेरी चूत के सुराख मे उसको घुसेड के अंदर बाहर कर के चोदने लगा और फिर मेरी क्लाइटॉरिस को दांतो से काट डाला तो मैं एक बार फिर से झाड़ गई. मेरी चूत की तो बुरी हालत हो रही थी एक दम से गीली गीली और भट्टी जैसी गरम हो गई थी. मेरे हाथ उसके सर पे थे और मैं अपनी चूत को उसके मूह से कंटिन्यू रगड़ रही थी. सतीश ने भी मेरी चूत को चॅटा था पर मुझे इतना मज़ा कभी नही आया था जितना आज राज के चाटने से आ रहा था और चूत से कंटिन्यू जूस की झड़ी लगी हुई थी.

मैं ने अपने हाथ से उसके सर को 2 – 3 बार धीरे से ठप थपाया तो वो समझ गया के अब मुझे चुदवाना है तो वो अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और अपने पैर ज़मीन से टीका के मेरे ऊपेर झुक गया और मेरे बूब्स को दबाने लगा और मुझे टंग सकिंग किस करने लगा. उसका लंड मेरी चूत के ऊपेर किसी गरम लोहे के रोड की तरह रखा हुआ महसूस हो रहा था. मैं ने अपने दोनो हाथो को हमारे बदन के बीच मे किया और उसके लंड को दोनो हाथो से पकड़ के अपनी चूत मे रगड़ना शुरू किया. उसके लंड का हेल्मेट मेरी चूत के सुराख मे अटक रहा था तो मुझे बोहोत अछा लग रहा था. उसके लंड से बोहोत ज़ियादा प्रेकुं निकल रहा था. राज ने थोडा प्रेशर दिया तो उसके लंड के सूपदे का थोड़ा सा पोर्षन मेरी चूत के सुराख मे घुसा तो मेरा बदन एक दम से अकड़ गया और मुझे दरद होने लगा पर आज मुझे यह दरद भी बोहोत ही अछा लग रहा था. मैं ने उसके लंड को अपनी चूत के सुरख मे अटका दिया और उसके दोनो चूतदो को पकड़ के मसल्ने लगी और अपनी ओर खेचने लगी और साथ ही अपनी गंद को भी उठा के उसके लंड को चूत मे लेने की कोशिश करने लगी. उसने थोड़ा और प्रेशर दिया तो लंड का सूपड़ा चूत के सुराख मे घुस गया तो मुझे लगा जैसे मेरी चूत फॅट रही है और मुझे चूत के अंदर जलन महसूस होने लगी पर मुझे ऐसे जलन से भी मज़ा आ रहा था.

राज एक हाथ से मेरे एक बूब को मसल रहा था और दूसरे बूब को मूह मे ले के चूस रहा था और निपल्स को काट भी रहा था तो मेरा मज़ा डबल हो रहा था. मैं उसके चूतदो को मसल रही थी और अपनी गंद ऊपेर उठा रही थी. उसने थोड़ा और प्रेशर दिया तो उसका लंड थोड़ा और अंदर मेरी चूत के सुराख मे घुस के अटक गया मेरे मूह से हल्की सी चीख निकल गयी सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआईईईईईईईई म्‍म्म्ममाआआआआ तो वो रुक गया पर मैं ने उसके चूतदो को ठप थपा के कंटिन्यू करने का का इशारा दिया तो उसने लंड को बहेर निकाल लिया लैकिन चूत उसके लंड पे कुछ इतनी टाइट थी के लंड बाहर भी नही निकल रहा था. लंड को बिना बाहर निकाले ही वो हिलने लगा. जैसे जैसे वो प्रेशर दे रहा था मेरी आँखें अपने सॉकेट से बाहर निकल रही थी और मेरा मूह खुलता जा रहा था और आँखो मे आँसू भी आ रहे थे पर यह आँसू पॅशन और मस्ती के थे. ऐसे आँसू औरतो को बोहोत पसंद होते है क्यॉंके यह बड़ी ही मस्ती के होते है और इतने मस्त लंड से मस्ती मे चुदाई के सपनो को पूरा होने के होते है. उसका अभी आधा लंड भी मेरी चूत के अंदर नही गया था और मेरा ऑर्गॅज़म स्टार्ट हो गया और मैं राज से बोहोत ज़ोर से चिपेट गयी मेरा बदन अकड़ गया और झड़ने लगी. मेरी चूत से फ्रेश जूस निकलने की वजह से चूत और गीली हो गई थी और उसके लंड का उतना ही भाग जितना चूत के अंदर था अंदर बाहर होने लगा. अब मेरी चूत थोड़ी और स्लिपरी हो गई थी. मेरे पैर उसकी कमर से लिपटे हुए

थे और मैं उसके चूतदो को मसल रही थी और वो मेरे बूब्स को चूस रहा था और मसल रहा था और मैं मस्ती मे चूर थी.

जैसे जैसे मेरी चूत पे उसके लंड का प्रेशर बढ़ रहा था मेरी साँसे गहरी हो रही थी और आँखे बाहर को निकल रही थी और मूह खुल रहा था ऐसा लग रहा था जैसे मेरी आँखो मे और मूह मे उसके लंड के प्रेशर का डाइरेक्ट कनेक्षन है जो नीचे से दबाने से ऊपेर से खुल रहा था. राज ने पूछा अगर तुम्है दरद हो रहा हो तो तुम्हारे पर्स मे जो क्रीम है वो निकाल लो और चूत मे लगा लो तो मैं ने बोला के नही इस टाइम मुझे रफ चुदाई चाहिए मेरी चूत बोहोत ही चुदासी हो रही है आइ वॉंट टू फील दा पेन ऑफ फक्किंग बाइ युवर लव्ली मिज़ाइल लंड राज. मैं किसी चुदासी रंडी की तरह से बोल रही थी तो वो मुस्कुरा दिया और बोला के ठीक है तुम ऐसे ही रफ चुदाई चाहती हो तो रेडी हो जाओ. अभी उसका लंड मेरी चूत मे आधा भी अंदर नही गया था और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था के मेरी चूत फॅट जाएगी इतनी खुल गई थी मेरी चूत और उसके मोटे लंड से चूत का सुराख चौड़ा हो गया था. उसने बोला के अब गेट रेडी स्नेहा डार्लिंग टू गेट दा फक ऑफ युवर लाइफ तो मैं ने भी बोला के फक मी राज फक मी डॉन’ट स्टॉप टियर माइ चूत फाड़ डालो मेरी चूत को यह साली मुझे बोहोत तंग करती है फाड़ डालो यह रंडी चूत को इसका भोसड़ा बना डालो आज मदेर्चोद चूत का, जोश मे मैं अपने होश खो चुकी थी और पता नही मैं क्या क्या बोल रही थी बिल्कुल किसी बाज़ारु रंडी की तरह से गलियाँ बोले जा रही थी.

मेरे मूह से यह सब सुन के राज भी फुल मस्ती मे आ गया था और अब उसने मुझे शोल्डर्स से बोहोत टाइट पकड़ लिया था. उसके पैर नीचे ज़मीन पर थे और वो मेरे ऊपेर झुका हुआ था और बूब्स को चूस रहा था और लंड को मेरी चूत मे आगे पीछे कर रहा था. मैं तो बिना पूरी तरह से चुदवाये हुए ऑलमोस्ट 4 टाइम ऐसे ही झाड़ चुकी थी चूत बोहोत ही गीली हो चुकी थी और मेरी चूत के जूस से उसका लंड भीग चुका था और अब आधा लंड चूत के अंदर बाहर हो रहा था. मेरी चूत फुल्ली स्ट्रेच हो चुकी थी मुझे लग रहा था के अब अगर उसका लंड थोड़ा भी अंदर गया तो शाएद चूत फॅट जाए और उसकी धज्जियाँ उड़ जाए. मैं बर्दाश्त करती रही और एक सेकेंड के लिए राज ने अपना लंड चूत से पूरा बाहर निकाल लिया तो उतनी ही देर के लिए मुझे अपनी चूत एक दम से खाली खाली महसूस हुई और इस से पहले के मैं कुछ और सोचती राज ने अपना लंड पूरा हेड तक बाहर खींच के एक बोहोत ही ज़बरदस्त पवरफुल झटका मारा के मैं राज से बोहोत ज़ोर से लिपट गयी और उसके बदन को बोहोत टाइट पकड़ लिया और मेरी आँखों मे अंधेरा छा गया और सर मे जैसे लाखो पटाखे फूटने लगे मेरे मूह से एक बोहोत खोफ़नाक

चीख निकल गयी आआआआआआआआईईईईईईईईई म्‍म्म्मममममाआआआ म्‍म्म्ममममाआआआआआऐययईईईईईईईईईई म्‍म्म्ममाआआअरर्र्र्ररर गगगगगगगगगगगाआआआययययययययययईईईई र्र्र्र्र्र्र्रररीईईईईईई हीईईईईईईईईईईईईईईई निकाआाालल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूओ प्प्प्प्प्प्प्प्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लीीईआआसस्स्स्स्स्सीईई और एक मिनिट के लिए ब्लॅकाउट. रोड से गुज़रती लॉरी के हॉर्न मे मेरी चीख दब के रह गई. राज का लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ बच्चे दानी से जा टकराया था और बच्चे दानी ऐसे मार से हिल गयी थी. मुझे लग रहा था जैसे किसी ने तलवार से मेरी चूत एक दो टुकड़े कर दिए हो. चूत मे अंदर बे इंतेहा जलन होने लगी और मुझे लगा के जैसे मेरी चूत मे से किसी कुँवारी लड़की की चूत फटने से जैसे खून निकलता है वैसे ही मेरी चूत से भी निकल रहा है. मैं उसके बदन के नीचे छट पटाने लगी पर उसके मज़बूत ग्रिप से बाहर नही निकल सकी.

राज एक मिनिट के लिए मेरे ऊपेर ऐसे ही पड़ा रहा और मेरे बूब्स को चूस्ता रहा. मैं अपने सेन्सस मे वापस आई तो मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत के अंदर कोई मोटा लोहे जैसा सख़्त मूसल घुसा हुआ हो. राज ने मेरी आँखो मे झाँक के देखा तो मेरी आँखो मे तकलीफ़ दिखाई दे रही थी पर जैसे ही मुझे अपने चुदासी होने का ख़याल आया तो मैं मुस्कुरा दी बॅस फिर क्या था राज ने मुझे चोदना शुरू कर दिया. उसके पवरफुल धक्को से मेरी चीखे निकल रही थी आआआईईईई म्‍म्म्माआआअ उउउफफफफफ्फ़ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स द्द्धहीएररररीए हहाआआऐईईईईईई र्र्र्र्ररराआआअजजजज्ज्ज्ज आाआआईयईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्सीईई ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हीईईई फफफफफफफफफफफफफ्फ़ आआईईईस्स्स्सीईए ह्हियैआइयैयीयीयियी कककचहूऊद्ददडूऊऊ र्र्र्ररराआआआआआजजजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज म्‍म्म्ममममाआआज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ाआआआ हहाआआआईईईईई आआआआआ र्र्र्र्राआह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआअ हहाआआआऐययईईईईई उसका मूसल लंड मेरी चूत को फाड़ ही चुका था और अब बोहोत बुरी तरह से चोद रहा था. उसका लंड इतना मोटा था के मेरी चूत के पंखाड़ियाँ भी उसके लंड के साथ अंदर जा रही थी और उसके लंड के साथ ही वापस आ रही थी. वो बोहोट पवरफुल धक्के मार रहा था. मेरी आँखो से कंटिन्यू पेन और प्लेषर के मिक्स आँसू निकल रहे थे. मुझे अब मज़ा आने लगा था और अब मैं भी अपनी गंद उठा उठा के ऐसे मस्त मोटे और लोहे जैसे सख़्त लंड से चुदाई के पूरे मज़े ले रही थी.

राज 3 – 4 धक्के लगा के एक धक्का बोहोत ही ज़ोर से मारता और लंड को 15 – 20 सेकेंड्स के लिए चूत के अंदर ही रहने देता और ऐसा धक्के से उसका लंड डाइरेक्ट मेरी बच्चे दानी से लगता और मैं झाड़ जाती. मैं तो राज से लिपटी हुई

चुदवा रही थी और हर थोड़ी देर मे झाड़ रही थी मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत आज झाड़ झाड़ के खाली हो जाएगी. राज चोदता रहा ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को मेरी चूत के अंदर घुसता रहा. थोड़ी ही देर मे मेरी चूत उसके इतने लंबे और मोटे लंड से अड्जस्ट हो चुकी थी. अब मैं भी अपनी गंद उठा उठा के रफ चुदाई के मज़े ले रही थी और राज को झुका के उसके साथ टंग सकिंग किस कर रही थी. राज मुझे बड़ी मस्ती मे चोद रहा था उसकी स्पीड कभी एक दम से तेज़ हो जाती कभी धीमी गति से चोद्ता. राज की मलाई एक टाइम निकल चुकी थी इसी लिए वो जल्दी नही झाड़ रहा था और पूरी रफ़्तार से चोद रहा था. उसके इतने मस्त मोटे लोहे जैसे लंड से चुदवाते टाइम मुझे अपने नीचे लकड़ी के तख्ते की सख्ती और रफनेस बिल्कुल भी महसूस नही हो रही थी और वो मुझे किसी फोम के गद्दे की तरह कंफर्टबल लग रहा था.

क्रमशः......................
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07-10-2018, 12:37 PM,
#8
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--8

गतान्क से आगे..........

अब राज ने अपने दोनो हाथो से मेरे दोनो पैरो को पकड़ के चीर दिया और खड़े खड़े चोदने लगा आआआआअहह क्या बताउ कितना मज़ा आ रहा था मुझे तो बॅस जन्नत का ही मज़ा आ रहा था और मेरा मंन कर रहा था के हमारी बस आज की सारी रात यही रुकी रहे और राज मुझे सारी रात ऐसे ही चोद्ता रहे और चोद चोद के मेरी चूत का कचूमर निकाल दे. ऐसी पोज़िशन मे उसका लंड मेरी चूत के पूरा अंदर तक तो घुस रहा था पर पता नही क्या हुआ उसको उसने मुझे पलटा दिया और मुझे डॉगी स्टाइल मे कर दिया. मेरे पैर अब ज़मीन पर थे और मैं ब्रिक और वुडन प्लॅटफॉर्म पे झुकी हुई थी. राज मेरे पीछे से अपने लंड को चूत के सुराख से अड्जस्ट किया और अपने गीले लंड को मेरी गीली चूत के अंदर एक ही धक्के मे पूरा जड़ तक घुसेड दिया तो मेरी एक बार फिर से चीख निकल गई आआआअहह र्र्ररराआआआजजजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज सस्स्स्स्स्स्स्सल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूऊऊऊऊऊओववववववववव. उसका मोटा गरम लंड मेरी सेन्सिटिव क्लाइटॉरिस से रगड़ खा रहा था तो मुझे बोहोत ही मज़ा आने लगा.. उसका लंड जैसे ही मेरी चूत के अंदर तक घुस गया, मैं एक बार फिर से झड़ने लगी. मेरी चूत आज जितने टाइम झड़ी थी शाएद पूरे मंथ मे नही झड़ी होगी. मेरे बूब्स अभी भी बहुत ही टाइट थे. मेरे सीने पे आगे पीछे हो रहे थे पर लटक नही रहे थे. राज ने मेरे बूब्स को पकड़ के दबाना शुरू किया और चोदने लगा. वो मेरे से अछा ख़ासा लंबा था इसी लिए ऐसे पोज़िशन मे बड़ी अछी तरह से चोद रहा था. अब राज के धक्के तेज़्ज़ होने लगे थे और उसने मेरे बूब्स को छ्चोड़ के मेरे शोल्डर्स को टाइट पकड़ लिया. उसकी ग्रिप ऐसी थी के मैं एक इंच भी आगे नही हिल सकती थी और मुझे लग रहा था के उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरे मूह से बाहर निकल आएगा. उसके एक एक धक्के से मेरे मूह से हप्प्प्प हमम्म जैसी आवाज़े निकल रही थी और मेरा मूह खुल रहा था. मेरी चूत और पेट उसके लंबे मोटे लंड से फुल हो गये थे. वो बोहोत पवरफुल चुदाई

कर रहा था और अब चुदाई की मस्त म्यूज़िकल थापा ठप पच पच की आवाज़ें आने लगी थी जिस से हम दोनो का जोश कुछ और बढ़ गया कभी कभी रोड से इक्का दुक्का लॉरीस गुज़रती तो थोड़ी सी रोशनी हो जाती फिर वोही अंधेरा.

अब राज ने एक बोहोत ही ज़ोर का धक्का मारा और लंड को चूत की गहराइयों तक ले गया और रुक गया जिस से मेरा सारा बदन हिल गया और मेरे मूह से ऊवुयियैआइयैआइयीयीयियी म्‍म्म्माआआआ निकला और फिर राज ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया तो एक बार फिर से मेरी चूत खाली हो गयी और खुल बंद होने लगी और फिर देखते ही देखते राज ने मुझे पलटाया और हम एक दूसरे के आमने सामने था. राज ने थोडा सा झुक के दोनो हाथ मेरी गंद पर लगाए और मुझे ऊपेर खेच लिया तो मेरी टाँगें ऑटोमॅटिकली ही उसके बॅक से लिपट गयी. राज का लंड ऐसे फॅन फ़ना रहा था जैसे कोई बड़ा नाग साँप अपना फन्न निकाले अपनी बिल की तलाश मे इधर उधर देख रहा हो. राज का लंड उसके नवल से लगा हुआ और पेट के करीब ही था और ऑलमोस्ट 45 डिग्री के आंगल से खड़ा था. राज ने मुझे गंद मे हाथ दे के थोड़ा और ऊपेर उठाया तो मेरी गीली चूत के सुराख मे उसका लंड ऑटोमॅटिकली अटक गया और उसने मेरी गंद से थोड़ी ग्रिप लूज की तो जैसे ही मैं अपने पूरे वेट से थोडा नीचे को फिसल गई तो उसका लंड मेरी गीली फैली हुई चूत मे फ़चाक की आवाज़ से चूत के अंदर किसी मिज़ाइल की तरह से धँस गया. मेरा बदन एक दम से अकड़ गया और मैं उसके नेक मे अपने बाहें डाल के उस से लिपट गयी. अब राज मुझे खड़े ही खड़े चोदने लगा और मुझे ऐसे ही अपने लंड की सवारी करते कराते 2 स्टेप्स आगे बढ़ा और मुझे नीम के झाड़ के ट्रंक से टीका दिया और फिर मेरी चुदाई करना शुरू कर दिया. उसका लंड किसी जॅक हॅमर की तरह से मेरी चुदाई कर रहा था और मुझे लग रहा था के उसका लंड मेरी गंद को फाड़ता हुआ नीम के पेड़ मे घुस जाएगा. उसका लंड किसी हथौड़े की तरह से मेरी बच्चे दानी को मार रहा था. ऐसी चुदाई मे मुझे एक मिनिट भी नही लगा और मैं झड़ने लगी. मेरी चूत से कंटिन्यू जूस

निकलने की वजह से चूत समंदर बन चुकी थी और अब वो मुझे दीवानो और पागलो की तरह से चोद रहा था और मैं हैरान थी के राज मुझे आधे घंटे से ज़ियादा देर से चोद रहा था पर उसका लंड झड़ने का नाम ही नही ले रहा था. मुझे सतीश याद आया जो लंड को चूत मे डालने के बाद झड़ने के लिए 2 मिनिट से ज़ियादा नही लगता था पर राज का लौदा तो रुकने का नाम ही नही ले रहा था मैं ने सोचा के उसकी वाइफ क्या लकी होगी जो ऐसा शानदार लौदा और ऐसा मस्त चुदाई करने वाला हज़्बेंड मिला है. राज के धक्के अब अपनी फुल स्पीड पे पहुँच चुके थे और फिर उसने अपने लंड को पूरा हेड तक बाहर खेच लिया और उसी रफ़्तार से चूत के अंदर ठोंक दिया तो मैं उसके बदन से ज़ोर से लिपट गयी और चिल्ला पड़ी सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआहह म्‍म्म्मममममाआआ और बॅस राज के मिज़ाइल से मलाई की मोटे मोटे गरम गरम धारियाँ निकलने लगी और पहले ही धार के साथ मेरा बदन एक बार फिर से काँपने लगा और मैं फिर से झड़ने लगी. हम दोनो के बदन पसीने से भर चुके थे. राज अब पवरफुल और छोटे छोटे धक्के मार रहा था और एक दो सेकेंड के लिए लंड को चूत के अंदर ही रहने दे रहा था यह मुझे बोहोत ही अछा लग रहा था और हर धक्के के साथ ही उसकी मलाई की धार निकल रही थी और फिर 8 – 10 मोटी मोटी गरम गरम धारियों के बाद उसका झड़ना ख़तम हुआ. मेरा बदन ढीला पड़ चुका था और मैं अब उसके बदन से झूल रही थी. मैं फॉरन ही कंपेर करने लगी के सतीश की चुदाई और राज की चुदाई मे और दोनो के लंड से मलाई के निकलने का स्टाइल तो मुझे सतीश का स्टाइल एक दम से फैल लगा पर क्या कर सकती थी वो मेरा पति ही तो था और आख़िर मैं राज से कब तक चुदवा सकती थी क्यॉंके जैसे ही मुंबई पहुँच जाएगे पता नही फिर उस से मुलाकात होगी या नही. यह सब सोच रही थी पर उसके लंड के ऊपेर ही बैठी हुई थी. उसके लंड मे थोड़ी भी नर्मी नही आई थी और वो वैसे का वैसा ही आकड़ा हुआ मेरी चूत के अंदर फूल रहा था मैं सोचने लगी के यह राज का लंड नॅचुरल है या कोई गरम लोहे का डिल्डो है जो इतनी देर की चुदाई के बाद थोडा सा भी नरम नही हुआ. और हम दोनो पसीने से भर गये थे और गहरी गहरी साँसें ले रहे थे.

मैं राज के गले मे झूल रही थी, मेरी टाँगें अभी भी राज के बॅक पे लपेटी हुई थी और राज मुझे अपने लंड पे बिठाए हुए राज थोड़ा पीछे हट गया और उसी वुडन प्लॅटफॉर्म पे लेट गया. अब पोज़िशन ऐसी थी के राज नीचे लेटा हुआ था और उसका क़ुतुब मीनार जैसा लंड मेरी चूत के अंदर आकड़ा हुआ खड़ा था और मुझे अपने पेट मे महसूस हो रहा था. मैं ने राज से बोला के राज क्या मस्त लंड है तुम्हारा आधे घंटे से ज़ियादा देर से तुम मुझे चोद रहे हो और यह अभी तक ऐसे खड़ा है जैसे अभी तक किसी चूत को चोदा ही ना हो तो वो मुस्कुरा दिया और बोला के बस यह तुम्हारा ही है अब, मैं तो तुम्हारी मस्त टाइट चूत का दीवाना हो गया हू तुम पहली औरत हो जिसने मेरे लंड को पूरा अपनी चूत के अंदर लिया है. मेरी चूत से इतना जूस निकलने की वजह से मैं तो एक दम से मस्त हो गयी थी और थक चुकी थी इसी लिए मैं उसके लंड पे जॉकी की तरह से घुटने मोड़ के बैठ गयी और फिर उसके सीने पे सर रख दिया और उसके कान मैं धीरे से बोली के राज मुझे आज से पहले सेक्स का इतना मज़ा ज़िंदगी मे कभी नही मिला था जितना आज तुम ने दिया और अभी भी देखो तुम्हारा मूसल मेरी चूत मे कैसे घुसा हुआ है लगता है अभी और चोदना चाहता है तो वो मुस्कुरा दिया और बोला थे थॅंक्स स्नेहा फॉर ऑल थे प्लेषर यू गेव मी. मैं ने बोला के उसमे थॅंक्स की क्या बात है, थॅंक्स तो मुझे बोलना चाहिए के तुम ने मुझे वो मज़ा दिया जिसे मैं ज़िंदगी भर ना भूल पाउन्गि तो उसने कहा के पता है मैं कभी भी अपने लंड को अपनी वाइफ की चूत मे कंप्लीट नही डाल पाया तो मैने हैरत से पूछा वो क्यों ? तो उसने बोला के वो डालने ही नही देती इसी लिए मेरी सेक्स की भूक कभी ख़तम ही नही होती. वो तो बस खुद ही मेरे ऊपेर चढ़ के बैठ जाती है और बॅस लंड का सूपड़ा ही अंदर ले पाती है, खुद तो लंड का सूपड़ा अंदर लेते ही झाड़ जाती है और फिर चूस चूस के मेरी मलाई खा जाती है आज मैं ने फर्स्ट टाइम तुम्हारी इतनी मस्त चूत के अंदर तक अपना लंड डाल के तुम्हारी चूत का मज़ा लिया है तो मैं मुस्कुरा के बोली के युवर वाइफ डॅज़ंट’ नो व्हाट शी ईज़ मिस्सिंग इन हर लाइफ और फिर हम दोनो मुस्कुरा दिए.

मैं राज के ऊपेर लेटी हुई थी उसका लंड मुझे अपनी चूत मे बोहोत ही अछा लग रहा था. अभी तक हमारी मिक्स मलाई बाहर नही निकल पे थी क्यॉंके राज का लंड मेरी चूत पे किसी बॉटल के ढक्कन की तरह से टाइट बैठा हुआ था. राज ने आधा घंटे तक मुझे जाम के चोदा था इसी लिए मेरे बदन का एक एक जोड़ मस्ती मे थका हुआ था. राज ने मेरे बूब्स को एक बार फिर से चूसना शुरू कर दिया. मेरे बूब्स तो ऑलरेडी बोहोत ही सेन्सिटिव है इसी लिए मैं फिर से मूड मे आना शुरू हो गयी. मेरी चूत हम दोनो की मिक्स मलाई से भरी हुई थी और राज का लंड भीग रहा था इसी लिए स्लिपरी भी हो गया था. पहले मैं मूड मे आई और मैं उसके लंड पे आगे पीछे स्लिप हो के मज़े लेने लगी और फिर राज ने भी अपनी गंद उठा उठा के मुझे चोदना शुरू कर दिया.

ऐसी पोज़िशन मे राज का लंड मेरी चूत के बोहोट ही अंदर तक घुसा हुआ था और मुझे लग रहा था के मेरी बच्चे दानी के सुराख मे उसके लंड का सूपड़ा घुसा हुआ है जिस से मेरा मज़ा डबल हो गया था. थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद राज ने पोज़िशन चेंज कर ली और मुझे नीचे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपेर सवार हो गया और धना धन चोदने लगा. जूस से भरी चूत बोहोत

स्लिपरी हो गयी थी. अब उसका लंड ईज़िली चूत के अंदर बाहर हो रहा था. इतने मोटे और लंबे लंड से चुदवाते हुए मेरी चूत फुल्ली स्ट्रेच हो के पूरी तरह से खुल चुकी थी और मेरी नाज़ुक चूत का सच मे भोसड़ा बन चुका था. दर्द तो अपनी जगह पे था पर मुझे गर्व भी महसूस हो रहा था के पता नही वो कोन्सि लकी लॅडीस होती है जिनको इतने शानदार लंड से ऐसी शानदार चुदाई का आनंद मिलता होगा आंड आइ फेल्ट आइ आम वन ऑफ दा लकीयेस्ट लॅडीस हू फाउंड सच आ वंडरफुल लंड इन माइ लाइफ, आंड विथ दिस थॉट आइ फेल्ट प्राउड ऑफ माइसेल्फ.

अब राज मुझे घचा घच चोद रहा था जिस से मेरा सारा बदन हिल रहा था और हम दोनो के बदन भी पसीने से भीग चुके थे. इतने मे ही होटेल की तरफ से कुछ आवाज़ें आने लगी तो हम दोनो ने एक साथ मूह घुमा कर देखा तो अंदाज़ा लगाया के हमारी बस का ड्राइवर वापस आ चुका है और अब फन बेल्ट को ठीक कर रहा है. अब हमारे पास इस जगह पर चुदाई का टाइम कम हो गया था इसी लिए अब राज मुझे बोहोत ही तूफ़ानी रफ़्तार से चोदने लगा पर उसके लंड से मलाई थी के निकलने का नाम ही नही ले रही थी. मेरी चूत का तो बुरा हाल हो गया था और वो सूज के डबल रोटी की तरह हो गयी थी. मैं तो पता नही कितने टाइम झाड़ चुकी थी ऐसा लगता था के मेरे जूस का स्टॉक आज ख़तम हो जाएगे. राज के धक्के बोहोत पवरफुल हो गये थे और दीवानो की तरह से चोद रहा था पूरा लंड सूपदे तक बाहर निकाल निकाल के मार रहा था और फिर फाइनली उसने एक बोहोत ही पवरफुल धक्का मारा तो मेरे मूह से फिर से चीख निकल गयी आआआआआईयईईईईईईईईईईईईईई र्र्र्र्र्र्ररराज्ज्जज फफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ और बॅस उसका लंड मेरी चूत के आखरी लिमिट्स तक घुस्स चुका था और उस्मै से गरम गरम मलाई की धारियाँ निकल्ने लगी और मेरी चूत को भरने लगी और मैं एक टाइम फिर से झाड़ गयी. मैं ने राज को बोहोत ज़ोर से पकड़ा हुआ था और उसको बे तहाशा किस कर रही थी और बोल रही थी के राज तुम सच मे मर्द हो. मुझे तो ऐसी चुदाई कभी भी नसीब नही हुई थी. अपनी चूत के मसल्स से उसके मोटे लंड को स्क्वीज़ करते हुए बोली के यह मुझे देदो राज हमेशा के लिए तो वो झुक के मुझे चूमने लगा और बोला के अरे मेरी जान आज से यह सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा ही है. मैं अब इस टाइम पे अपने प्यारे पति सतीश को बिल्कुल ही भूल चुकी थी और राज से किसी रंडी की तरह से बोल रही थी के राज प्लीज़ मुझे कभी नही छोड़ना, आइ ऑल्वेज़ वांटेड टू बी विथ यू ऱाज प्लीज़ और मुझे हमेशा ही ऐसे मस्त लंड से चोदना प्लीज़ राज तो उसने मुझे चूमते हुए कहा के स्नेहा मेरी जान आज इतने सालो बाद तो मुझे कोई ऐसी मस्त लड़की मिली है जिसने मेरे लंड को पूरा अपनी चूत के अंदर ले के चुदवाया है मैं तुम्है कैसे भूल सकता हू या कैसे तुम्हे छोड़ के जा सकता हू. आइ नीड यू ऑल्वेज़ स्नेहा डार्लिंग तो मैं फिर से उसे चूमने लगी और बोली के यू आर माइ वंडरफुल लवर राज आंड आइ रियली लव यू फ्रॉम दा बॉटम ऑफ माइ हार्ट आंड सौल.

राज अभी भी मेरे बदन पे लेटा हुआ था और उसका मिज़ाइल मेरी चूत के अंदर ही फँसा हुआ था. उसने अपनी गंद ऊपेर कर के अपना मूसल बाहर खीचा तो मुझे लगा जैसे मेरी चूत उसके लंड के डंडे के साथ ही बाहर आ रही है और फिर मेरी चूत मे से इतनी देर से इकट्ठा हुआ जूस बह के बाहर निकलने लगा और मेरी गंद की क्रॅक से होता हुआ नीचे वुडन प्लांक पे गिरने लगा. मैं ने हाथ बढ़ा के अपनी शलवार को उठाया और उसकी चूत के ट्राइंगल वाले कपड़े से पहले तो राज के लंड को सॉफ किया फिर अपनी चूत से बहते जूस को उसी जगह से सॉफ किया तो अब मेरी शलवार पे भी मेरा और राज का जूस साथ ही रहा. और जब मैं अपनी शलवार पहनी तो चूत पे गीलापन मुझे बोहोत अछा लग रहा था और मैं सोचने लगी के क्यों ना मैं यह शलवार को हमेशा के लिए अपने पास बिना वॉशिंग के रख लू. उस टाइम अंधेरे मे तो मुझे कुछ नज़र नही आया था पर बाद मे देखा तो मेरी चूत से बोहोत सारा खून भी निकल चुका था ऐसा लग रहा था जैसे मेरी शादी शुदा कुँवारी चूत की सील एक बार फिर से टूटी हो.

हम दोनो वापस होटेल की तरफ आ गये और किसी ने भी नोटीस नही लिया के हम कहा गये थे और क्या कर के वापस आ रहे है. अब मैं राज से इतनी फ्री हो चुकी थी के उसके हाथो मे हाथ डाले उसकी वाइफ की तरह चल रही थी. जितनी देर मे फन बेल्ट ठीक होता हम ने एक एक कप गरमा गरम चाय का पिया और बॅस थोड़ी ही देर मे बस रेडी हो गयी और सारे पॅसेंजर्स अंदर बैठ गये और बस चलने लगी.

क्रमशः......................
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07-10-2018, 12:37 PM,
#9
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--9

गतान्क से आगे..........

यहा से 1 घंटे के अंदर ही हमारी बस बेल्गौम पोहोच गयी और यहा पे भी बोहोत से पॅसेंजर्स उतर गये लैकिन यहा से कोई भी नया पॅसेंजर नही चढ़ा. बस मैं अब बोहोत ही कम लोग रह गये थे. मॅग्ज़िमम होंगे शाएद कोई 10 – 12 पॅसेंजर्स जो सामने वाली सीट्स पे बैठे थे और हम सब से पीछे से पहली वाली सीट पे बैठे थे. सब से लास्ट वाली सीट एक सिंगल लंबी सीट थी जहा पे लेटा भी जा सकता था पर इस टाइम तक तो हम वाहा नही लेटे थे. बेल्गौम मे बस ज़ियादा देर नही रुकी क्यॉंके ऑलरेडी बोहोत देर तक रुक चुकी थी और अगर ज़ियादा देर करते तो मुंबई पहुँचने मे और देरी हो जाती. आजकल इतने बोहोत सारे बस सर्विस निकले थे इसी लिए पॅसेंजर्स डिवाइड हो गये थे इसी लिए हमारी बस मे भी बॅस थोड़े से ही पॅसेंजर्स थे.

तकरीबन 3 बजे के करीब बस बेल्गौम से निकली और अब ड्राइवर भी बस को तेज़ी से चला रहा था. बस के सब ही पॅसेंजर्स सो चुके थे. बस मे एक दम से खामोशी छाई हुई थी. मैं और राज ही बॅस जाग रहे थे. किस्सिंग और स्क्वीज़िंग मे बिज़ी थे. राज ने अपना ट्रॅक पॅंट निकाल दिया था और मैने भी अपनी शलवार को निकाल दिया था. सामने समान रखने की जगह से शॉल को लटका दिया फिर ख़याल आया के सब पॅसेंजर्स सो रहे है तो फिर शॉल को अपने साइड मे रख लिया के कभी भी ऐसा टाइम आए तो शॉल को पैरो पे डाला जा सके. राज का लंड एक बार फिर से तंन के लोहे के खंबे की तरह से खड़ा हो गया था जिसे मैं अपनी मुट्ठी मे पकड़ के मूठ मार रही थी और राज मेरी चूत को मसाज कर रहा था. मेरी चूत तो बे इंतेहा गीली हो चुकी थी और राज के लंड के सुराख मे से भी प्री कम के मोटे मोटे ड्रॉप्स निकल रहे थे. मैं झुक के उसके लंड को अपने मूह मे ले के चूसने लगी. उसके प्री कम का टेस्ट भी बड़ा मस्त था. मैं ज़ुबान से उसके लंड के सूपद को चाट रही थी और कभी पूरा मूह के अंदर ले के चूस भी रही थी. अब मेरे से और बर्दाश्त नही हो रहा था मुझे एक बार फिर से यह लंड अपनी चूत के अंदर चाहिए था इसी लिए मैं अपनी जगह से उठ गयी और राज के लंड पे बैठने की कोशिश करने लगी. राज भी अपनी सीट से थोड़ा सा आगे को आ गया था तो मैं ने अपने पैर उसकी बॅक पे रख लिए और उसके लंड पे धीरे धीरे बैठने लगी. मेरी चूत फुल्ली स्ट्रेच हो रही थी और बड़ी मुश्किल से मैं उसके लंड पे बैठ ही गयी. मुझे उसका लंड अपने पेट मे महसूस होने लगा. मैं राज को किस करने लगे. हमारी आँखो मे नींद बिल्कुल भी नही थी और ऐसे चुदाई के अड्वेंचर बार बार भी नही आते इसी लिए हम ऐसे मोके का भरपूर फ़ायदा उठना चाह रहे थे. मेरे शर्ट के अंदर हाथ डाल के राज मेरे बूब्स को मसल रहा था. और फिर उसने शर्ट को भी उतार दिया तो मैं ने भी उसके टी-शर्ट को ऊपेर खेच के निकाल दिया. ऐसे पब्लिक मैं नंगे होने का भी एक अनोखा अनुभव था. हम दोनो ऐसी बस मे जहा और लोग भी थे नंगे हो के एक दूसरे को नंगे देख के मुस्कुरा दिए. राज अब मेरे बूब्स को चूसने लगा और निपल्स को भी काटने लगा. ऐसी चुदाई का मज़ा आ रहा था. बस कभी कभी उछल पड़ती तो उसके लंड से चूत बाहर निकल जाता और फिर एक ठप्प की आवाज़ के साथ फिर से लंड पे गिर जाती तो मेरी मूह से हल्की सी मस्ती भरी चीख निकल जाती. राज के लंड के चूत मे घुसते ही मैं झड़ने लगी. मैं बस उसके लंड पे ऐसे ही बैठी रही. चुदाई नही हो रही थी बॅस कभी जब बस किसी गड्ढे मे से उछलती तो लंड अंदर बाहर हो जाता अदरवाइज़ मैं लंड की सवारी कर रही थी मुझे अपनी चूत मे इतना मोटा मूसल मज़ा दे रहा था. मेरी चूत तो हर थोड़ी देर मे अपना जूस छोड़ देती तो लंड मेरे जूस से गीला हो जाता.

ऐसे ही छोटे छोटे रोड साइड विलेजस गुज़र रहे थे थोड़ी देर के लिए बाहर से रोशनी आ जाती पर बस तेज़ी से चल रही थी तो किसी को भी बाहर से अंदर का कुछ भी दिखाई नही दे सकता था और इतनी रात मे कोई जाग भी नही रहा था बस हर तरफ सन्नाटा था. राज मेरे बूब्स चूस रहा था मैं उसके लंड को अपने चूत के अंदर डाले बैठी थी उसके गले मे बाहें डाले हुए थे. एक दम से बस बोहोत ज़ोर से उछली तो उसका लंड मेरी चूत से पूरा बाहर निकल गया और फिर मैं अपनी पूरे वेट के साथ उसके लंड पे जैसे गिर गयी तो लंड बोहोत ज़ोर से मेरी चूत मे घुस गया और मेरी चीख निकल गयी ऊऊऊऊओिईईईईईईईईईईईईईईईई सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स फफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ और झटका इतना ज़बरदस्त था के मेरी चूत से जूस निकल गया और मुझे लगा जैसे उसका लंड मेरे मूह तक आ गया हो.

अभी मैं अपने आपको उसके लंड पे अड्जस्ट नही कर पाई थी के एक और झटका लगा और फिर से लंड आधे से ज़ियादा बाहर निकल गया और मैं फिर से उसके लंड पे पूरी ताक़त से गिरी तो मेरी बच्चे दानी हिल गयी. थोड़ी ही देर मे बस मेन रोड से नीचे उतर गयी और एक डाइवर्षन ले लिया यहा कुछ रोड का काम चल रहा था शाएद. बस कच्चे रास्ते से गुज़र रही थी और मैं उसके हर एक झटके के साथ ही लंड पे उछल रही थी. उसका लंड मेरी चूत के जूस से बोहोत ही गीला हो चुका था. ऐसे झटको से मेरी टाँगो मे दरद हो रहा था तो मैं पोज़िशन चेंज कर के उसकी गोदी मे बैठ गयी. अब मेरी पीठ उसके मूह के सामने थी और. राज के थाइस पे बैठी थी उसका लंड मेरी चूत मे घुसा हुआ था. मेरा दोनो पैर उसके थाइस के दोनो तरफ थे ऐसी पोज़िशन मे मेरी चूत भी खुली हुई थी. अब जो बस के झटके लग रहे थे बड़ा मज़ा दे रहे थे. लंड बार बार अंदर बाहर हो रहा था और मैं भी अपने पैर बस के फ्लोर पे रख के खुद भी कभी कभी उछल रही थी तो चुदाई के मज़ा बोहोत आ रहा था. राज मेरे बूब्स को दबा रहा था और मैं उसके लंड पे उछाल रही थी कुछ तो बस के झटको की वजह से कुछ खुद ही उछल के चुदवा रही थी. राज ने अपने लंड के बेस मे पकड़ा हुआ था. कच्ची रोड के एक रफ से गड्ढे से बस जो उछली तो उसका पूरा लंड एक बार फिर से मेरी चूत से बाहर निकल गया और जैसे ही मैं वापस उसके लंड पे बैठने लगी उसका गीला लंड चूत के सुराख का रास्ता भूल के गंद मे एक ही झटके मे पूरा जड़ तक घुस्स चुका था मैं चीखी ऊऊऊओिईईईईईईईईईईईईई सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स म्‍म्म्ममममममममाआआआआआआआअ हहाआआआआआईईईईईई गंद के मसल्स रिलॅक्स थे और मैं इतनी ज़ोर से लंड पे बैठी थे के एक ही झटके मे पूरे का पूरा मूसल लंड गंद को फड़ता हुआ अंदर घुस चुका था. इस से पहले के मैं उसके लंड से उठ जाती, राज ने अपनी टाँगें मेरी टाँगो के ऊपेर रख के दबा लिया और अपने हाथ से मेरे शोल्डर को पकड़ लिया और ज़ोर

से अपनी ओर दबा लिया ता के मैं उठ नही पाऊ. उसका लंड मेरी गंद को फाड़ चुका था और मुझे बोहोत ही दरद हो रहा था, मैं छटपटा रही थी पर उसकी पवरफुल ग्रिप से निकलना इतना आसान भी नही थी. ऐसे मे बस फिर से उछलने लगी थी तो उसका लंड भी मेरी फटी गंद के अंदर बाहर हो रहा था और फिर थोड़ी ही देर मइए उसका लंड मुझे अछा लगने लगा और मैं उस से मज़े से गंद मरवाने लगी. अब मैं उसकी ग्रिप से निकलने की कोशिश भी नही कर रही थी. राज का एक हाथ मेरी चूत की मसाज कर रहा था और दूसरा हाथ मेरे बूब्स को मसल रहा था और वो खुद मेरी बॅक पे किस कर रहा था. उसके मोटे लोहे जैसे सख़्त लंड पे मेरी गंद बोहोत ही टाइट लग रही थी. राज का लंड ऐसी मीठी मीठी ग्रिप को सिहार नही सका और मेरी गंद के अंदर ही अपने गरम गरम मलाई की पिचकारिया मारने लगा. उसकी मलाई गंद मे फील करते ही मैं भी झड़ने लगी. आज एक ही रात मे राज ने मेरी चूत और गंद दोनो ही मार मार के फाड़ डाली थी. राज बोहोत ही खुश था के उसका पूरे का पूरा लंड मैं अपनी चूत मे भी ले चुकी थी और अपनी गंद मे भी. मुझे भी खुशी इस बात की थी के जो खुशी राज की वाइफ ने उसको नही दी वो मैं ने दी है.

थोड़ी देर के बाद हम ऐसे ही नंगे लास्ट वाली सीट पे चले गये और राज सीट पे लेट गया और मैं उसके ऊपेर 69 की पोज़िशन मे लेट गई और उसका मूसल लंड चूसने लगी जहा पे मुझे हम दोनो की मिक्स मलाई का टेस्ट आने लगा जो बोहोत ही स्वादिष्ट था. वो मेरी चूत के अंदर अपनी जीभ डाल के चाटने लगा. जब कभी बस थोड़ा भी उछाल भरती तो मेरा बदन भी थोड़ा सा ऊपेर उठ जाता और वापस जब गिरता तो राज के दाँत मेरी चूत के अंदर लगते तो मुझे बोहोत ही मज़ा आता. वो बड़े मस्त स्टाइल मे मेरी चूत को चूस रहा था जिकी वजह से मैं फॉरन ही झाड़ गयी पर राज के लंड से मलाई निकलने का नाम ही नही ले रही थी. वो ऑलरेडी 2 टाइम झाड़ चुका था और अपने लंड पे मेरे मूह का आनंद महसूस कर रहा था कभी कभी अपनी गंद उठा के मेरे मूह मे अपना पूरा लंड घुसेड़ने की कोशिश करता पर मैं उसके लंड को पूरा नही ले पा रही थी. थोड़ी ही देर के बाद हमने पोज़िशन चेंज कर दी और अब मैं नीचे लेटी थी और राज मेरे ऊपेर आ गया था और मेरे मूह को अपने लंड से चोद रहा था. मेरा मूह उसके मोटे लंड से भर गया था. अब पोज़िशन चेंज हो चुकी थी और जब बस रोड पे थोड़ा भी उछाल भरती तो उसका लंड मेरे मूह के अंदर तक घुस जाता जिसे मैं फॉरन ही बाहर निकाल देती. राज के लंड के डंडे पे मेरे दाँत लग रहे थे जिस से उसको बोहोत ही मज़ा आ रहा था. एक दो टाइम तो बस के उछलने से उसके लंड का सूपड़ा मेरे हलक तक चला गया था और मेरे मूह से उउउउउउउउउउउग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जैसी आवाज़ निकल गयी. राज का लंड अब फुल मस्ती मे आ गया था और राज एक

दम से पलट गया और एक ही झटके मे उसने मेरी गीली चूत मे अपना गीला लंड घुसेड डाला तो मुझे महसूस हुआ जैसे कोई मिज़ाइल मेरी चूत मे घुस्स गया हो और मेरे मूह से फफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ की आवाज़ निकल गयी और उसका मूसल जैसा मोटा और लोहे जैसा सख़्त लंड मेरी चूत के गहराइयों मे घुस्स गया और वो मुझे धना धन चोदने लगा. सीट पे उतनी कंफर्टबल तो नही थी पर क्या करू उसका लंड मेरी चूत मे बोहोत ही मज़ा दे रहा था और मैं मस्ती मे चुदवा रही थी इस टाइम पे मुझे यह भी याद नही रहा था के मैं मुंबई क्यों जा रही हू और यह के मैं एक शादी शुदा महिला हू. मुझे तो बॅस चुदना था और मैं ज़िंदगी मे कभी इतनी चुदासी नही हुई जितनी आज हो रही थी. बस की उछाल के साथ उसका लंड मेरी बचे दानी को ज़ोर से मारता तो मेरा जूस निकल जाता. वो अब मुझे पागलो की तरह से चोद रहा था और मैं मस्ती मे चुदवा रही थी. तकरीबन आधे घंटे की चुदाई के दोरान मे ऑलमोस्ट 10 – 15 टाइम झाड़ चुकी थी तब कही जा के राज ने एक ज़बरदस्त शॉट मारा तो मेरा पूरा बदन हिल गया और उसका लंड मेरी बचे दानी के सुराख मे घुस्स गया और उसके लंड से गाढ़ी गाढ़ी गरम गरम मलाई की धार निकल ने लगी. 8 – 10 धारियाँ निकलने के बाद उसका लंड शांत हुआ पर ढीला नही हुआ. मुझे असचर्या हो रहा था के राज का लंड आख़िर कोन्से मेटीरियल का बना हुआ है जो नरम होने का नाम ही नही ले रहा है और इतनी देर से चुदाई करने के बावजूद अभी तक नरम नही हुआ. मुझे लगा के शाएद ऐसे लंड की कल्पना हर लड़की करती होगी आंड आइ वाज़ नो डिफरेंट दट अदर गर्ल्स. मैं भी चाह रही थी के यह लंड मुझे कंटिन्यू मिलता रहे

हम कुछ देर वैसे ही लेटे रहे. राज का लंड मेरी चूत के अंदर ही फूल पिचाक रहा था. थोड़ी ही देर मैं बस की स्पीड कुछ कम होने लगी तो ख़याल आया के शाएद बस रुकने वाली होगी इसी लिए हम अपनी सीट पे वापस आ गये और अपने कपड़े पहेन लिए. सच मे बस 5 मिनिट के अंदर ही किसी रोड साइड ढाबे पे रुक गयी और ड्राइवर पिशाब करने के लिए नीचे उतर गया. सब ही पॅसेंजर बोहोत गहरी नींद सो रहे थे शाएद किसी को पता भी नही चला था के बस रुकी है. टाइम देखा तो सुबह के ऑलमोस्ट 5 बज रहे थे और बाहर अब थोड़ा थोड़ा उजाला लगने लगा था. बस वाहा से 5 मिनिट के अंदर ही वापस निकल गयी.

मेरी आँख खुली तो तकरीबन सुबह के 8 बज रहे थे और बस खानदला घाट से गुज़र रही थी. रास्ता किसी साँप की तरह से बल खा रहा था, दोनो रोड के दोनो तरफ झाड़िया और दूर दूर तक ग्रीनरी फैली हुई थी बाहर का सीन बोहोत ही खूबसोरात लग रहा था. घाट पे चढ़ते हुए बस काफ़ी स्लो चल रही थी. पहले तो मई इतने फर्स्ट क्लास सीन मई खोई रही फिर मुझे

अचानक ख़याल आया के बस अब मुंबई के करीब आ गयी है और फिर याद आ गया के मैं अकेले मुंबई को क्यों जा रही हू और बॅस यह सोचते ही मेरे बदन से पसीने छ्छूटने लगे दिल बड़ी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. देखा तो राज भी अब जागने लगा था. राज को देख के मेरे मंन को थोड़ी शांति मिली के चलो राज तो है वो कुछ ना कुछ मेरा साथ तो दे ही देगा यह सोच के थोड़ा इत्मेनान आ गया. बस खंडाला घाट से ऊपेर चढ़ने के बाद फिर से स्पीड से चलने लगी और फिर वाहा किसी जगह रुक गयी तो ड्राइवर ने बोला के आप लोग यहा ब्रेकफास्ट ले लो. बस के सारे ही पॅसेंजर्स जाग चुके थे और सब ही नीचे उतर गये. बोहतो थोड़े से ही तो पॅसेंजर थे ऐसा लगता थे के बस ऑलमोस्ट खाली ही जा रही है क्यॉंके आजकल कॉंपिटेशन बढ़ गया था और बोहोत सारी बस सर्वीसज़ स्टार्ट हो चुकी थी.

क्रमशः......................
Reply
07-10-2018, 12:37 PM,
#10
RE: Antarvasna kahani रिसेशन की मार
रिसेशन की मार पार्ट--10

गतान्क से आगे..........

मैं और राज भी नीचे उतर गये और वाहा के वॉशरूम मे जा के हाथ मूह धोया और ब्रश किया फिर ब्रेकफास्ट कर के गरमा गरम कॉफी पी के ठंडी हवा का मज़ा लेने लगे. अभी मॉर्निंग टाइम था इसी लिए मौसम बोहोत ही अच्छा लग रहा था, फ्रेश एर से तबीयत फ्रेश होगयी. तकरीबन आधे घंटे के बाद यहा से बस फिर स्टार्ट हो गयी और लुनावाला की ओर बढ़ने लगी. मुझे फिर से डर लगने लगा था और मुझे सडन्ली सतीश की याद आ गयी. मैं ने राज का हाथ अपने हाथ मे ले लिया और उसके हाथ को अपने हाथो से दबा के बोला के आइ आम सो सॉरी राज पता नही मुझे क्या हो गया था पर बिलीव मी आइ आम नोट दट टाइप ऑफ वुमन. मैं ने कभी भी सतीश के सिवा किसी और मर्द के बारे मे सोचा भी नही और ना ही किसी गैर मर्द ने मुझे टच किया है तुम पहले मर्द हो जिस के साथ मैं ने यह सब किया आंड आइ आम फीलिंग गिल्टी राज प्लीज़ मुझे माफ़ करदो और फिर सतीश की याद के साथ ही मेरी आँखो से आँसू निकलने लगे और मैं राज के गले मे बाँहे डाल के रोने लगी और बार बार उसको सॉरी बोल रही थी. राज ने मुझे अपनी बाँहो मे ले लिया और मेरे फेस को चूमते हुए बोला के कोई बात नही स्नेहा प्लीज़ डॉन’ट क्राइ मेरी जान. आइ कॅन अंडरस्टॅंड हनी. मुझे पता है के तुम ऐसी औरत नही हो लैकिन तुम भी क्या कर सकती थी तुम एमोशन मे और अंजाने मे यह सब कर बैठी आंड टू बी फ्रॅंक आइ आम ऑल्सो फीलिंग गिल्टी के मैं ने तुम्हारे साथ यह सब किया. और सच पूछो तो स्नेहा, एवेरी पर्सन हॅज़ हिज़ ओर हर ओन प्राइवेट आंड सीक्रेट लाइफ, एवेरिबडी हॅज़ राइट टू हॅव हिज़ ओर हर ओन प्राइवेट सीक्रेट लाइफ व्हेर नोबडी हॅज़ टू इंटर्फियर इन एनी मॅनर आंड दट सीक्रेट्स आर नोट टू बी शेर्ड विथ एनी नोट ईवन टू युवर हज़्बेंड ऑल्सो, सो यू ऑल्सो हॅव दा राइट टू हॅव युवर ओन प्राइवेट आंड सीक्रेट लाइफ तो तुम इसको अपनी प्राइवेट और सीक्रेट लाइफ का एक हिस्सा समझ लो और जो किया वो तुम्हारा प्राइवेट मामला था जिस से तुम्हारे हज़्बेंड का कोई तालुक नही होना चाहिए. युवर प्राइवेट लाइफ ईज़ युवर प्राइवेट लाइफ

आंड एवेरिबडी इस फ्री टू कीप हिज़ प्राइवेट लाइफ सीक्रेट ईवन फ्रॉम हर हज़्बेंड आंड यू कॅन डू दट कीप युवर सीक्रेट टू युवरसेल्फ. इतना सुन के मुझे थोड़ा इतमीनान हुआ के हा बात तो सही है के आइ शुड हॅव माइ प्राइवेट आंड सीक्रेट लाइफ आंड नोबडी शुड इंटर्फियर इन माइ प्राइवेट लाइफ. भगवान जाने हो सकता है के सतीश की भी कोई प्राइवेट और सीक्रेट लाइफ होगी जिस को वो नही जानती, हो सकता है के सतीश की ज़िंदगी मे भी कोई औरत या लड़की होगी जिसे वो चोद्ता होगा क्या पता. आंड आइ वॉंट टू कीप दिस आज़ माइ मोस्ट इंटिमेट आंड प्राइवेट सीक्रेट आंड सतीश कन्नोट बी आ पार्ट ऑफ दिस सीक्रेट आंड ही हॅज़ नो प्लेस इन माइ प्राइवेट आंड सीक्रेट लाइफ आस आइ हॅव नो प्लेस इन हिज़ प्राइवेट सीक्रेट लाइफ. फिर मैं ने इतमीनान का साँस लिया और राज को बोला के हा राज यू आर राइट. दिस ईज़ आ पार्ट ऑफ माइ सीक्रेट लाइफ आंड नोबडी हॅज़ एनी राइट टू इंटर्फियर इन माइ सीक्रेट लाइफ, नोट ईवन माइ हज़्बेंड. राज भी वोही बात बोला के हो सकता है के सतीश की भी उसकी कोई सीक्रेट लाइफ होगी जहा वो भी किसी ना किसी के साथ संबंध होंगे, हो सकता है के उसका अफेर भी किसी औरत के साथ चल रहा होगा तुम्है क्या पता तो मैं मुस्कुरा के बोली के हा यू आर आब्सोल्यूट्ली राइट राज आइ नेव्य नो हिज़ सीक्रेट लाइफ आंड आस आइ हॅव माइ राइट टू हॅव माइ सीक्रेट लाइफ, ही ऑल्सो हॅज़ दा राइट टू हॅव हिज़ सीक्रेट लाइफ और हम दोनो ही मुस्कुरा दिए तो मैं ने राज से पूछा के डू यू ऑल्सो हॅव आ सीक्रेट लाइफ ? तो उसने मुस्कुरा के बोला के, यू थिंक वॉट हॅपंड लास्ट नाइट बिट्वीन यू आंड मी ईज़ नोट माइ सीक्रेट लाइफ, डू यू थिंक आइ विल टेल ऑल दिस टू माइ वाइफ ? हा यह मेरी सीक्रेट लाइफ है और इसे मेरे सिवा कोई नही जान सकता और ना ही मैं किसी सेबताउन्गा और मुस्कुराते हुए उसने मुझे एक ज़ोरदार किस दिया.

अब हम दोनो भी एक दूसरे से शर्मा रहे थे और चुदाई का नाम नही ले रहे था पता नही शाएद दिन का टाइम था इसी लिए क्यॉंके हम रात के अंधेरे मे जो बिंदास बोल देते है या कर लेते है वो दिन के उजाले मे नही कर पाते इसी लिए आटीस्ट मुझे तो लंड, चूत और चुदाई जैसे शब्द बोलने मे शरम आ रही थी. राज ने मुझे अपनी बाँहो मे पकड़ लिया और बोला के स्नेहा मेरी जान प्लीज़ डॉन’ट क्राइ मैं हू ना तुम्हाई कोई भी प्राब्लम हो तो मुझे बता देना आइ आम ऑल्वेज़ विथ यू. मैं तुम्हारे लिए जो कर सकता हू ज़रूर करूँगा. उसने मुझे अपना मोबाइल नंबर देते हुए बोला के एनी टाइम यू नीड मी आइ आम जस्ट आ कॉल अवे, कॉल मी आंड आइ विल मीट यू. तुम बोहोत ही अछी लेडी हो मैं तुमसे प्यार भी तो करने लगा हू पर क्या करू तुम और मैं दोनो ही मॅरीड है इसी लिए हम को थोड़ा केर्फुल रहना पड़ेगा. आइ आम ऑल युवर्ज़ शेना मेरी जान तो मैं राज से और ज़ियादा ज़ोर से लिपट गयी और उसके लिप्स को चूमते हुए बोली थॅंक यू राज फॉर एवेरितिंग यू गेव मी, यू टुक मी टू दा हाइट्स आइ नेव्य न्यू एग्ज़िस्ट्स इन रोमॅन्स. यू गेव मी दा प्लेषर आइ वाज़ नोट अवेर ऑफ बोला तो उसने एक बार

फिर से मुझे चूम लिया और बोला के प्लेषर ईज़ माइन मेरी जानू यू आर दा बेस्ट लेडी आइ एवर मेट, यू आर वेरी स्वीट आंड सोबर तुम बोहोत ही प्यारी और लव्ली हो, तो मेरी आँखो मे चमक आ गयी और मैं ने थॅंक्स बोला.

राज ने मुझे यकीन दिलाया के वो कही ना कही मेरे लिए जॉब का बंदोबस्त कर देगा तो मेरे दिल को कुछ इतमीनान आया.

दोपहर मे तकरीबन 12 बजे के करीब बस मुंबई पोहोच चुकी थी मेरे दिल की धड़कन बढ़ती ही जा रही थी और मेरे अंदर फिर से एक डर का एहसास होने लगा था के पता नही क्या होगा, लोग्डिंग कैसी मिलेगी, सिंगल रूम के कितने पैसे होगे एट्सेटरा एट्सेटरा.

बस सिटी के अंदर चल रही थी. मुंबई की ऊँची ऊँची बिल्डिंग्स दिखाई दे रही थी. बाहर रोड्स पे लोग बोहोत ही तेज़ी से चल रहे थे ऐसा लगता था जैसे कोई बोहोत ही इंपॉर्टेंट काम के लिए जा रहे हो और किसी को किसी की तरफ देखने की भी फ़ुर्सत नही थी सब अपने अपने काम मे बिज़ी लगते थे और जैसे एक दम से मेकॅनिकल लाइफ. लोग मशीन्स की तरह से वर्क कर रहे थे. उनको देख के मुझे डर लगने लगा कई अगर मुझे जॉब मिल गयी तो मुझे भी शाएद ऐसे ही भाग दौड़ करना पड़े. रोड्स पे बोहोत ही भीड़ थी और बस अब बोहोत स्लो स्पीड से चल रही थी जहा किस पॅसेंजर को उतरना होता तो वो ड्राइवर को बोल देता और ड्राइवर वही बस रोक लेता और पॅसेंजर नीचे उतर जाता. इसी तरह पता नही कोन्सि जगह थी जहा राज ने ड्राइवर से रुकने को बोला और मुझे अपने साथ आने का इशारा किया और उसने खुद ही मेरा सूटकेस भी उठा लिया और हम दोनो बस से नीचे उतर गये. बाहर उतर ते ही मुझे गर्मी का एहसास हुआ, गर्मी तो बॅंगलुर मे भी होती थी पर ऐसी नही, यहा तो थोड़ी ही देर मे बदन पसीने से भर गया. राज ने एक टॅक्सी को इशारा किया और टॅक्सी हमारे करीब आ के रुक गयी. राज ने ने टॅक्सी को किसी रोड का बोला और हम दोनो बैठ गये. थोड़ी देर मे ही राज ने टॅक्सी को रुकने का बोला और मेरा सूटकेस ले के नीचे उतर गया और टेक्सीवाले को वेट करने का बोल के मेरे साथ एक लॉड्जिंग मे आ गया और वाहा लॉड्जिंग के मॅनेजर को बोला के मुन्ना भाई, यह मेडम मेरी गेस्ट है इनको कोई तकलीफ़ नही होने देना और इनको सेपरेट सिंगल रूम दे दो, इनका ब्रेकफास्ट, लंच और डिन्नर भी इनके टाइम पे दे देना तो मुन्ना भाई ने बोला के सर आप बिल्कुल भी फिकर ना करे, आपकी गेस्ट हमारी गेस्ट है सर, आपकी गेस्ट को कोई तकलीफ़ नही होगी और कोई शिकायत का मोका नही मिलेगा और उसने एक काम करने वाले लड़के से बोला के मेम सब का समान उठाओ और उनको 14 नंबर के रूम मे ले जाओ. जब वो लड़का समान ले के चला गया तो राज ने मुझे बोला के इधर आओ मैं तुमको बता देता हू के तुम्है कहा जाना है तो मैं राज के साथ बाहर आ गयी. राज ने एक तरफ इशारा कर के बोला

के यह जो तुमको इतना बड़ा नोकिया – कनेक्टिंग पीपल का बोर्ड दिख रहा है, बॅस वोही बिल्डिंग है उस्मै कंपनीज़ के नेम प्लेट्स लिखे हुए है. अभी तो तुम थोड़ा रेस्ट ले लो और समय हो तो बाहर निकल के तुम चेक कर लेना के कोन्से फ्लोर पे है आज तो सनडे है शाएद ऑफीस बंद होगा पर तुम बिल्डिंग मे जा के फ्लोर का नंबर चेक कर सकती हो और ऑल दा बेस्ट गुड लक टू यू स्नेहा मे यू गेट दिस जॉब बोला तो मेरी आँखो मे आँसू आ गये के अब मैं फिर से अकेली हो गई हू. मेरा जी कर रहा था के राज का दामन पकड़ के उस से मेरे साथ रहने की भीक माँगूँ, पर मैं यह कर नही सकी और उसको आँसू भरी आँखो से देखती रही. राज ने मेरी आँखो मे आँसू देखे तो बोला के ओह स्नेहा मेरी जान रोती क्यों हो तुमको तो हिम्मत से काम लेना है तुम्है जॉब भी तो करना है और तुम जिस जॉब के लिए ट्राइ कर रही हो उसके लिए तो बोहोत ही बोल्ड होना पड़ता है और अगर तुम अभी से हिम्मत हार गयी तो इंटरव्यू कैसे फेस कर पओगि, सो प्लीज़ मेरी जान रोना नही और मेरा घर भी बॅस यहा से हार्ड्ली 20 – 25 मिनिट्स की वॉकिंग डिस्टेन्स पे है पर मैं तुम्है इस लिए नही ले जा सकता के पता नही मेरी वाइफ आ गई के नही. फिर कभी तुम्है ले जाउन्गा और मुझे आज शाम मे एक मीटिंग भी है जिसकी प्रेपरेशन करना है तो मैं ने फॉरन बोला के मुझे साथ लेलो मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी प्रेपरेशन मे तो उसने बोला के नही मेरी जान तुम आराम कर्लो तुमको कल इंटरव्यू फेस करना है. मेरी आँखो मे एक बार फिर से आँसू आ गये तो राज ने बोला के यू डॉन’ट वरी डार्लिंग आइ आम ऑल्वेज़ विथ यू. कुछ भी हो मुझे कॉल कर लेना तो मैं ने दिल पे पत्थर रख के उसको बाइ बोल तो दिया पर मेरा मंन कर रहा था के राज मेरे साथ ही रहे. यह दिल भी बड़ा पागल है राज मेरे साथ कैसे रह सकता है, आख़िर मैं कोन हू उसके लिए, उसकी भी तो एक फॅमिली है, उसके भी तो कुछ काम है और यह हर्डल मुझे अकेले ही पार करना है और मैं गीली आँखो से होटेल मे आ गई और लिफ्ट से 1स्ट्रीट फ्लोर पे चली गयी जहा रूम नो. 14 था.

रूम के अंदर आई तो देखा के यह एक अछा नीट आंड क्लीन सॉफ सुथरा कमरा था जिस्मै एक बेड पड़ा हुआ था जो सिंगल से थोडा बड़ा और डबल से थोड़ा कम था. वाइट चदडार बिछी हुई थी. एक ड्रेसिंग टेबल जिसपे बड़ा सा लाइफ साइज़ मिरर रखा हुआ था और उसके करीब ही एक साइड टेबल जैसी टेबल पे एक टेलिफोन, वॉटर का जग और एक ग्लास रखा हुआ था. रूम मे एक छोटा सा फ्रिड्ज भी था जहा मिनरल वॉटर के कुछ प्लास्टिक बॉटल्स रखे हुए थे. बेड पे एक नीट आंड क्लीन ब्लंकेट और एक शॉल रखी थी के जैसा मौसम हो यूज़ कर्लो. एक छोटा सा टेबल और चेर भी था जहा बैठे के कुछ पढ़ा या लिखा जा सकता था और वही टेबल के ऊपेर ही दीवार मे एक लॅंप भी था के रात मे बल्ब जला के यूज़ कर सकते थे. रूम मे एक मीडियम साइज़ का अटॅच

बाथरूम भी था जहा वॉशबेसिन और शवर ट्रे लगी हुई थी और साथ मे वॉश बेसिन के ऊपेर बड़ा सा मिरर लगा हुआ था और मिरर के नीचे के छोटा प्लॅटफॉर्म जैसा था जहा सोप केस के अंदर एक छोटा सोप था. वाहा पे टूथ पेस्ट और टूथ ब्रश होल्डर भी था. इन शॉर्ट यह एक बोहोत ही कंफर्टबल रूम था. मेरा दिल धड़कने लगा के पता नही इसका रेंट क्या होगा, मेरे पास इतने पैसे होंगे भी नही के मैं रूम का रेंट दे सकु. मैने रूम को अछी तरह से देखा और बिस्तर पे ढेर हो गई. मेरी आँखो से एक बार फिर से आँसू निकल ने लगे. अकेलेपन का एहसास. इस टाइम पे मुझे सतीश की बोहोत याद आ रही थी और सोच रही थी के अगर मुझे यह जॉब नही मिली तो क्या होगा, इतने पैसे जो ट्रॅवेलिंग पे लगे है वेस्ट हो जाएगे. मैं इतने लंबे सफ़र के बाद थक चुकी थी और नींद भी नही हुई थी, मैं बेड के किनारे पे खड़ी हो गयी और ऐसे ही उल्टा बेड पे ऑलमोस्ट गिर सी गयी, पिल्लो को थोड़ा अपनी ओर खेचा, दोनो हाथो को फोल्ड करके अपने नीचे पिल्लो रख लिया उस पे सर रख के लेट गयी और आने वाले समय और इंटरव्यू के बारे मे सोचने लगी और फिर पता ही नही चला के कब मेरी आँख लग गयी और मैं गहरी नींद सो गयी.

क्रमशः......................
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