College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
11-26-2017, 02:05 PM,
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल पार्ट --59



उधर राज जैसे ही कमरे से निकल कर बाहर आया, उसने प्रिया को अपने इंतजार में बाहर खड़ी पाया.. राज मंद मंद मुस्कुराते हुए सीधा उसके पास जा पहुँचा..

"हां.. प्रिया.. बोलो!"

"मैं.. नही.. मैने तो नही बुलाया.. किसने बोला?" प्रिया राज की शरारत भारी नज़र देख सकपका गयी...

"चलो.. रिया ने यूँ ही बोल दिया होगा.. कुच्छ देर तुम्हारे पास बैठ सकता हूँ क्या?" राज उसके दिल की हालत समझ रहा था...

प्रिया को समझ ही नही आया की क्या बोले," हां.. नही... मतलब.. वो.. मैं..!"

"थॅंक्स!" राज हंसा और कमरे के अंदर आ गया... इस तरह अकेलेपन में उसके साथ खुद को पाकर हड़बड़ाई हुई प्रिया बहुत प्यारी लग रही थी... और सबसे प्यारी लग रही थी उसकी आँखें.. जो उपर उठने का नाम ही नही ले रही थी...

"क्या बात है..? तुम नही आओगी क्या अंदर..? मैं क्या तुम्हे खा जाउन्गा.." राज अंदर जाते ही बिस्तेर पर पसर गया...

प्रिया सिर झुकाए हुए अंदर आ गयी.. धीरे धीरे चलते हुए उसका पूरा बदन लरज रहा था.. अंदर आकर प्रिया बेड के दूसरी तरफ जा कर खड़ी हो गयी.. हुल्के से नज़रें उठाकर उसने राज की तरफ देखा पर अपनी और ही देखता पाकर तुरंत गर्दन घुमा ली....

"बात क्या है प्रिया? मुझसे कोई नाराज़गी है क्या? अगर है तो बिना वजह पूच्छे ही मैं माफी माँग लेता हूँ.. पर तुम ऐसे गम्सम बिल्कुल अच्छि नही लगती.. तुम्हारी मुस्कान ही तो मेरी जान है.. एक बार हंस दो ना..." राज उठकर बैठ गया..

ये बात सुनकर प्रिया मुस्कुराए बिना ना रह सकी.. और अपनी प्रशंसा सुनकर अधरों पर आ गयी हँसी को च्छुपाने के लिए घूम कर उसने राज की तरफ पीठ कर ली...

राज तो कब से उसके बेपनाह हुश्न का दीवाना था.. और आज उसको लग रहा था कि बड़े दिनों से दिल में दबी हुई हसरतें आज पूरी हो सकती हैं... रात में हुई जिस बात को प्रिया आनंद का चरम मानकर अब तक उस खुमारी से नही निकल पाई थी.. राज ने उसको उनके संबंधों की प्रगाढ़ता की नीव मान रखा था.. उसको तो पता ही था.. मंज़िलें अभी और भी हैं...

राज उठा और दरवाजे को बंद करके चितखनी लगाने लगा.. प्रिया के रोम रोम में झुरजुरी सी उठ गयी," ययए.. ये क्या कर रहे हो...?"

"तुमसे कुच्छ खास बात कहनी है प्रिया!" राज मुस्कुराता हुआ उसकी और बढ़ा..

प्रिया के बदन में कल वाले कामुक आनंद की खुमारी अभी तक कायम थी.. अचानक उसका सारा बदन अंगड़ाई सी लेने लगा.. पर उसकी ज़ुबान कुच्छ और ही भाषा बोल रही थी..," नही प्ल्स.. दरवाजा खोल दो.. मेरे पास मत आओ प्ल्स.. मुझे.." कहते हुए पिछे हट'ते हट'ते प्रिया कमरे की दीवार से जा लगी..," नही प्ल्स... मान जाओ ना..!" उसके लब थिरकने लगे थे..

राज पर उसकी बातों का कोई असर नही हुआ.. वह धीरे धीरे मुस्कुराता हुआ जाकर उसके पास खड़ा हो गया.. करीब एक फुट की ही दूरी अब उन्न दोनो के दरमियाँ थी..," क्यूँ? आज किसका डर है? और देख लो.. आज भी तुमने ही बुलाया है.. फिर मेरा क्या कुसूर..?"

प्रिया ने राज को उसके और करीब आने से रोकने के लिए अपने हाथ उठाकर राज की छाती पर रख दिए.. अपने दायें हाथ के नीचे राज के दिल की धड़कनो को महसूस कर रही थी,"क्या करोगे?" प्रिया ने उसकी आँखों में आख़िर आँखें डाल ही ली..

"जो तुमने किया है?" राज अपने होंठो पर जीभ फेरता हुआ शरारत से मुस्कुराने लगा...

"क्या?" धीरे धीरे प्रिया की हिचक टूट रही थी.. और वो भी बात कहते हुए कभी कभी शर्मकार मुस्कुराने लगी...

"तुम्ही देख लो तुम क्या कर रही हो.. वही मुझे भी करना है!" राज ने अपनी छाती पर रखे उसके हाथों की और उंगली से इशारा करते हुए कहा...

प्रिया तुरंत समझ गयी.. अगले ही पल उसने वहाँ से हाथ हटाकर अपनी अनमोल कुँवारी छातियो को उनकी मदद से छुपा लिया.. राज मुस्कुराया तो प्रिया का दिल धौंकनी की तरह धड़कने लगा," नही.. मैं नही..." कहते हुए प्रिया घूमकर दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी हो गयी...

राज उसकी तरफ थोड़ा और बढ़ गया और आगे झुक कर उसके गालों के पास अपने होन्ट ले जाते हुए बोला," छ्छूने दो ना प्ल्स.. जाने कब से इनका प्यासा हूँ.. कितनी प्यारी हो तुम.. सिर्फ़ एक बार महसूस कर लेने दो.." राज ने प्रिया के कंधों पर अपने हाथ जमा दिए....

प्रिया की साँसें अचानक डाँवडोल होने लगी... राज की जांघों का अग्रभाग प्रिया के नितंबों से जा टकराया था.. इस अनोखे स्पर्श की मिठास के आगे उसको दुनिया की सारी खुशियाँ फीकी लगी.. पर शर्म की चादर उसके दिमाग़ पर से उतरने को तैयार ही नही थी..," आह.. राज.. प्ल्स.. मत करो ना ऐसे.."

"मैने अभी तक किया ही क्या है?" राज ने अंजान बन पूचछा.. उस कामुक मीठास में वैसा ही सुख राज को भी मिला था.. प्रिया के मादक और गदराए नितंबों की थिरकन अपनी जांघों पर महसूस करके.. बोलते हुए उसने हल्का सा दबाव और बढ़ा दिया...

प्रिया सिसक उठी.. राज को पीछे धकेलने के लिए जैसे ही वो अपने हाथों को नीचे लेकर आई.. राज ने भी तुरंत हाथ नीचे लाकर उसके कलाईयों को पकड़ लिया .. इस धक्का मुक्की में प्रिया झुक कर थोड़ी और पिछे सरक गयी और उसके मुँह से 'अयाया' निकल गयी.. उसने राज को अपने नितंबों से बिल्कुल चिपका हुआ महसूस किया...

मैं... मैं मार जाउन्गि राज... प्लीज़.. छ्चोड़ दो मुझे.." साँसें तेज हो जाने की वजह से प्रिया की ज़ुबान लड़खड़ाने लगी थी...

"सच में छ्चोड़ डून क्या?" कहते हुए राज ने उसके हाथों को उपर उठाकर उन्हे कंधों की सीध में दीवार पर चिपका लिया.. और उसके गर्दन पर प्यार से चुंबन अंकित कर दिया.. ये राज को भी अहसास था की प्रिया की ज़ुबान कुच्छ और ही कह रही है और दिल कुच्छ और ही...

"क्या... करोगे तुम?" प्रिया ने कामुकता भारी लंबी साँस लेते हुए कहा... अब तक वा भी अपना बदन ढीला छ्चोड़ चुकी थी और राज की साँसों समेत उसके हर अंग को अपने में उतरता हुआ महसूस कर रही थी...

"सब कुच्छ.. जो करते हैं.. प्यार में.." राज उसकी घूम चुकी गर्दन के कारण नज़दीक आ गये होंतों को अपने होंटो से छ्छूता हुआ सा बोला...

"सब कुच्छ क्या? क्या क्या करते हैं प्यार में?" प्रिया ने कहा और अचानक झटके से अपने हाथ छुड़ाकर घूमी और उसकी छाती से लिपट गयी.. बहुत सहन कर लिया था उसने.. अब बर्दास्त के बाहर की बात थी, सीने को सीने से दूर रख तड़पने देना..

राज ने प्रिया को अपनी बाहों में कसते हुए जाकड़ सा लिया.. और प्रिया अपना चेहरा अपने आप ही उसके सामने लाकर उसके होंटो को जी भर कर चूमने का निमंत्रण देने लगी...

"तुम्हारे होन्ट भगवान का मुझे दिया गया सबसे अनमोल तोहफा हैं प्रिया.. मैं इन्हे देखते ही मचल जाता हूँ.. इनका सारा रस चूम लेने के लिए.."राज ने उसको भावुक सा कर दिया.. बिना कुच्छ बोले ही प्रिया ने अपनी आँखें बंद की और अपने रसीले गुलाबी अधरों को राज के होंटो पर टीका दिया.. राज ने भी अपनी आँखें बंद की और अपने होन्ट खोल कर मस्ती से उनका रास्पान करने लगा...

प्रिया की संतरी ठोस छातियो में घुटन सी होने लगी.. राज के सीने से चिपक कर दब गयी छातियो में अजीब सी कुलबुलाहट होने लगी थी.. प्रिया और राज एक दूसरे के होंतों को चूमने चूसने में लगे थे की अचानक राज ने अपनी जीभ निकल कर उसके होंटो में फँसा दी...

प्रिया को अचानक जाने क्या ख़याल आया की वो अपने होंटो को राज से मुक्त करके ज़ोर से हंस पड़ी...

राज भोंचक्का सा रह गया..," क्या हुआ? अच्च्छा.. जीभ नही डालूँगा.. होन्ट तो दे दो.."

"पर वजह कुच्छ और ही थी.. प्रिया तुरंत एक बार फिर उसके होंटो से लिपट गयी और इस बार उसने अपनी जीभ निकाल कर राज के मुँह में डाल दी.. दोनो पागल से हो चुके थे.. मानो चूमा चाति के इस खेल में एक दूसरे को हराकर ही दम लेंगे.. काफ़ी देर से वो वहीं खड़े थे.. राज ने उसको धीरे धीरे सरका कर बिस्तेर की तरफ ले जाना शुरू किया.. बिस्तेर के पास जाते ही प्रिया किसी हुल्‍के खिलौने की भाँति अपने आप ही बिस्तेर पर ढेर हो गयी.. और राज को प्यार से निहारने लगी...

"क्या हो गया था? तुम हँसी क्यूँ?" अगला कदम बढ़ाने से पहले राज अपनी उत्सुकता ख़तम कर लेना चाहता था..

"कुच्छ नही.." और प्रिया एक बार फिर हँसने लगी....

"ऐसे हँसोगी तो मैं तुम्हे छ्चोड़ूँगा नही.. देख लो.." राज ने बनावटी गुस्से से कहा और खुद भी हँसने लगा...

"मत छ्चोड़ो.. मैं कब कह रही हूँ.. छ्चोड़ने के लिए..!" प्रिया अब भी हंस रही थी..

राज ने उसकी बराबर में लेट कर फिर से चूमा चाती शुरू कर दी और उसके पेट पर जॅकेट के उपर से ही हाथ फिराने लगा..," इसको निकाल दो ना...?"

प्रिया तो जैसे उसके निमंत्रण का ही इंतजार कर रही थी... झट से उठी और जॅकेट उतार कर एक तरफ रख दी," बस.. खुश?" और बैठी रही...

"अच्च्छा.. यही बात है तो फिर ये टॉप भी निकाल दो ना.. अच्च्छा नही लग रहा.." राज शरारत से कहकर मुस्कुराया...

"मैं.. मैं तुम्हे छ्चोड़ूँगी नही.. टॉप निकाल दूं? अच्च्छा.. तुम तो पूरी बेशर्मी पर उतर आए.." कहते हुए प्रिया ने उस पर धावा बोल दिया.. उसके उपर जा गिरी और राज की गर्दन पर अपने दाँत चुभा दिए..

राज को हुए इस हल्के से दर्द में भी अजीब सा नशा था.. उसने अफ तक ना की और प्रिया को अपने उपर खींच लिया.. अब प्रिया की छातिया आधी राज के सीने में पायबस्त थी और आधी उसके चेहरे के बिल्कुल सामने..

पता नही जान बूझ कर या अंजाने में पर प्रिया ने अचानक ऐसी कामुक हरकत की की राज तड़प उठा.. प्रिया ने अपनी एक टाँग उठाकर राज की जांघों के उपर डाल दी.. और राज का पहले ही तननाया हुआ लिंग एक दम सिसक उठा.. प्रिया की जांघों के नीचे फुफ्कार उठा उसका लिंग प्रिया की कुँवारी चिड़िया की भनक अपने आसपास पाते ही दहाड़ उठा.. उसकी छट-पटाहट प्रिया को अपनी जांघों के बीच महसूस हुई तो उसने एकद्ूम अपनी टाँग वापस खेंच ली और फिर से हँसने लगी...

"तुम्हे आख़िर हो क्या गया है.. बार बार हंस क्यूँ रही हो..?" राज ने उसके होंटो से अलग होते हुए कहा...

इस बार प्रिया ने राज के सामने अपने हँसने का राज खोल ही दिया.. उसके उपर झुकते हुए वो अपने होंटो को राज के कान के पास ले गयी और बोली," तुम्हारा कुच्छ मुझे बार बार चुभ रहा है... और मुझे गुदगुदी सी हो जाती है.."

"मैं समझा नही..." राज सचमुच नही समझ पाया था...

"ये.." प्रिया ने तेज़ी से अपना हाथ नीचे ले जाकर राज के लिंग को च्छुआ और उतनी ही तेज़ी से उसको वापस खींच लाई...

राज प्रिया की बात सुनकर मस्ती से झूम उठा..," यही तो असली चीज़ है..." कहते हुए राज अपना हाथ प्रिया के सीने पर ले गया.. प्रिया को उनमें चीटियाँ सी रेंगती हुई महसूस हुई....

"हां.. हां.. मुझे सब पता है.. मुझे समझने की कोशिश मत करो..." प्रिया ने कहा और राज के होंटो को चूम लिया.. अब वह इंतजार कर रही थी की कब राज अपना हाथ उसकी जांघों के बीच लेजाकार उसको कल रात वाला मजेदार अहसास फिर से कराएगा....

"क्या पता है तुम्हे..?" राज मुस्कुराते हुए बोला...

"यही की इसी से बच्चे पैदा होते हैं.. शादी के बाद.." प्रिया ने भोलेपन से कहा...

"अच्च्छा.. और कैसे पैदा होते हैं भला..?" राज ने उसको छेड़ते हुए कहा..

"ज़्यादा बकवास मत करो.. मैं अब उठती हूँ.. कोई आ जाएगा..." प्रिया ने ऐसा जानबूझ कर कहा था.. क्यूंकी जांघों के बीच की बेचैनी उस'से सहन नही हो रही थी... वह चाह रही थी की अब जल्दी से जल्दी राज का हाथ वहाँ पहुँच जाए...

"अब तुम्हे उठने कौन देगा.." कहते हुए राज अपने दोनो हाथ नीचे ले जाकर उसकी जीन्स का हुक खोलने लगा.. प्रिया अब शुरू होने वाले खेल को जान कर एक दम बेदम सी गयी और राज के सीने पर सिर टीका अपने नितंबों को उपर उठा जीन खोलने में उसका सहयोग करने लगी..

हुक खोलते ही राज ने जीन की चैन भी नीचे सरका दी.. अब प्रिया राज को देखने की हिम्मत नही कर पा रही थी.. इसीलिए झुक कर उसकी गर्दन से लिपट गयी...

जैसे ही राज ने जीन को नीचे खींचा.. वह चिंहूक उठी..," ये.. ये क्यूँ निकाल रहे हो.. " गरम साँसें राज के कानो में छ्चोड़ती हुई वो धीरे से सिसकी..

राज ने उसकी बात पर कोई प्रतिक्रिया नही दी और अपने काम में लगा रहा.. कुच्छ ही देर बाद प्रिया की जीन राज के हाथों में थी...

जैसे ही राज बैठने की कोशिश करने लगा.. हड़बड़ाई हुई प्रिया ने उसको वहीं दबोचने की कोशिश की..," उठो मत प्ल्स.. मुझे शरम आ रही है!" प्रिया का गाल एकद्ूम लाल हो गये...

"आज मत रोको प्रिया.. आआज मत रोको.. मुझे मंन की कर लेने दो प्ल्स.." कहते ही राज ने पलटा खाया और अगले ही पल सिसकती हुई प्रिया उसके नीचे थी.. शरम के मारे अब प्रिया अपनी आँखें नही खोल पा रही थी.. पर मन उसका भी बहकने लगा था.. वो भी मचल उठी थी.. अपने आपको राज की बाहों में पूरी तरह सौंप देने के लिए... राज ने जैसे ही नीचे देखा, उसने अपनी जांघों को एक दूसरे के उपर चढ़ा कर चिपका लिया...

एक दम मुलायम गोरी जांघों पर नायाब खजाने को छिपाये प्रिया की गुलाबी पॅंटी गजब ढा रही थी... योनि उसकी जांघों के बीच दुबकी हुई थी.. पर टॉप के उपर खिसक जाने की वजह से नाभि से नीचे का मादक कटाव ही राज के होश उड़ाने के लिए काफ़ी था... नाभि के आसपास लहराता हुआ राज का हाथ प्रिया की अपेक्षा के विपरीत उपर की और बढ़ने लगा तो वह कसमसा उठी और सिसकियाँ लेते हुए राज का ध्यान वहीं खींचने के लिए अपनी जांघों को सीधा करके ढीला छ्चोड़ दिया...

पर राज शायद स्टेप बाइ स्टेप आगे बढ़ने के मूड में था.. उसको प्रिया की बैचानी का अहसास तक नही हुआ.. और टॉप और समीज़ के अंदर धीरे धीरे उपर आता हुआ हाथ उसकी मादक छातियो की जड़ में आकर ठहर गया..

आँखें बंद किए सिसक रही प्रिया के होंटो का चुंबन लेते हुए राज ने आग्रह किया," इसको भी निकालने दो प्ल्स...!"

प्रिया तो जैसे वहाँ थी ही नही.. आनंद के सातवे आसमान में झूल रही प्रिया तो जैसे मदहोशी में पागल सी हुई जा रही थी.. उसने राज की बात पर कोई प्रतिक्रिया नही दी.. हां अपनी कमर को थोड़ा सा उपर उठा कर राज को टॉप निकालने का इशारा ज़रूर कर दिया...

राज ने प्रिया को उपर से एक दम नंगी करने में कुच्छ पल ही लगाए.. और कपड़ों से छुट-कारा पाते ही एक लंबी सी साँस के साथ ही प्रिया के उरजों में कंपन का संचार हो गया.. गुलाबी रंग के उन्न गोलाइयों पर कसे हुए दाने अकड़ कर सीधे हो चुके थे.. राज ने ऐसे हसीन दृश्या की कल्पना तक नही की थी.. प्यार से एक उरोज को सहलाते हुए उसने अपनी तरफ वाले दाने को अपने दाँतों के बीच ले लिया.. इस हरकत पर प्रिया सिसक कर दोहरी सी हो गयी.. योवन फलों पर मानो बहार सी आ गयी.. प्रिया से रहा ना गया.. अपने हाथों से ही नीचे की खुजली मिटाने की फिराक़ में जैसे ही वो अपना हाथ नीचे ले जाने लगी.. राज ने उसको बीच में ही पकड़ कर अपना पहले ही बाहर निकल चुका हथ्यार उसके हाथों में पकड़ा दिया..

जाने क्यूँ प्रिया को इस बार ज़रा सी भी हँसी नही आई.. बड़ी ही सिद्दत और प्यार से अपने हाथों में समेटे हुए राज के लिंग को वो उपर से नीचे सहलाने लगी.. ये सब उसको इतना आनंदित कर रहा था कि पॅंटी के अंदर अब तक छिपि बैठी उसकी नाज़ुक सी योनि पानी पानी हो गयी.. पर बेचैनी इस'से कम नही हुई.. बुल्की और बढ़ गयी.. प्रिया के पूर्ण स्खलन को अभी भी राज की उंगलियों का इंतजार था.. जब उस'से नीचे की तड़प सहन नही हुई तो उसके मुँह से निकल ही गया..," राआज.. नईएचए..!"

राज इशारा समझ गया.. वह धीरे धीरे उसके बदन को चूमता हुआ नीचे की और जाने लगा तो प्रिया आनंद की प्रकस्था की कल्पना करके पागल सी हो गयी और तेज तेज सिसकियाँ लेने लगी...

राज नीचे जाकर उसकी मखमली मांसल जांघों को सहलाता हुआ गौर से हुषन के इस नायाब तोहफे को देखने लगा.. पॅंटी के अंदर ही हाथ डाल कर राज ने पहले उसके नितंबों की बढ़ चुकी गर्मी को महसूस किया.. और फिर पॅंटी के उपर से ही उसकी तितली के होंटो का अनुमान लगा वहाँ अपने होन्ट रख दिए.. प्रिया उच्छल पड़ी.. हाथों से कहीं ज़्यादा जादू होंटो में था.. गरम साँसे पॅंटी में से छन छन कर उसकी योनि की गर्माहट को और हवा दे रही थी... राज ने जैसे ही उसकी पॅंटी निकाल कर उसको पूरी तरह अनावर्त किया.. उसके साँसों में तेज़ी और सिसकियों में पागलपन सा छाने लगा.. प्यार और हवस के भंवर में बुरी तरह फँस चुकी प्रिया ने राज के होंटो के दोबारा उसकी योनि के करीब आते ही अपनी जांघों को पूरी तरह खोल दिया.. और गोरी चिकनी योनि की छ्होटी फांकों के बीच उसका गुलबीपन राज को मदहोशी से भर गया..

अब इंतजार किस बात का.. और कर भी कौन रहा था.. राज ने हल्क बालों वाली योनि पर अपनी जीभ घुमाई और पूरी तरह उसको अपने होंटो में क़ैद कर लिया.. प्रिया की सिसकियाँ पागलपन की हद को पार कर गयी.. उसको अहसास ही नही था कि वो ज़मीन पर है या आसमान में.. वो उच्छलती रही.. सिसकती रही और अपनी छातियो को अपने आप ही मसल्ति रही.. अचानक प्रिया को अपने बदन में कंपकपि सी महसूस हुई और उसकी योनि रस से सराबोर हो गयी.. राज कच्चा खिलाड़ी था.. इसीलिए तो अपना चेहरा हटा लिया.. वरना इतनी प्यारी महक वाले रस का कतरा भी कोई बिस्तेर पर नही गिरने देता...

अब बारी राज की थी इतनी मेहनत का प्रतिफल लेने की थी... आँखें बंद किए उस आनंद को अब तक भी अपने मॅन में ही समेटे रखने की कोशिश में प्रिया के चेहरे पर मंद मंद मुस्कान च्छाई हुई थी.. जैसे ही उसने अपनी टाँगों को हवा में उठता हुआ महसूस हुआ.. उसने झट से चौंक कर अपनी आँखें खोल दी," नही.. ये नही राज.. प्ल्स..!"

"ये क्यूँ नही कह देती कि ख़ुदकुशी कर लो.. अब अगर तुमने मुझे रोका तो वैसे भी मुझे मर ही जाना है.. राज ने कहा और लंबी लंबी साँसे सी लेता हुआ अपने औजार को प्रिया की कुँवारी योनि में डालने की तैयारी करने लगा..

प्रिया उसके बाद कुच्छ नही बोली पर उसको डर लग रहा था.. कयि तरह का.. और जैसे ही राज ने हल्का सा उसकी योनि में डाला.. उसका डर सच साबित हो गया..,"ऊहह.. मर गयी राज.. बहुत दर्द हो रहा है... फट जाएगी..."

"कुच्छ नही होगा प्रिया.. बस एक पल की बात और है.." राज ने कहते हुए उसकी बात को अनसुना सा कर दिया और फिर से अभियान में जुट गया..

राज जब भी ज़ोर लगाता.. प्रिया की चीख सी निकल जाती.. पर हर कोशिश में लिंग इंच आध इंच सरक ही जाता.. अंत में चैन की साँस लेते हुए राज प्रिया की और देख कर मुस्कुराया," हो गया...हे हे हे!" मानो उसने आवरेस्ट फ़तह करी हो अभी अभी...

प्रिया की आँखों में अब पीड़ा नही थी.. पर बेचैनी ज़रूर थी...," हो गया तो निकाल लो अब!.. मुझे मार कर ही हटोगे क्या..?"

"वो थोड़े ही हुआ है मेरी जान.. अंदर गया है अभी तो.. बस एक दो मिनिट में ही दर्द ख़तम हो जाएगा और बहुत मज़े आएँगे.. मेरा विस्वास करो.." कहते हुए राज ने योनि को देखते हुए धीरे धीरे लिंग बाहर निकलना शुरू किया.. लिंग के साथ ही योनि के पतले पतले होन्ट बाहर निकल आए.. राज का लिंग योनि में बुरी तरह फँसा हुआ था... जैसे योनि की दीवारें उसको हिलने ही नही देना चाहती हों... इस बार राज ने जैसे ही अपना लिंग वापस अंदर धकेला.. प्रिया चिंहूक उठी.. राज ने एकद्ूम से अंदर धकेल दिया था उसको..

"अया.. आराम से करो ना प्ल्स..." प्रिया ने सिसकते हुए कहा...

"मज़ा तो आने लगा है ना.." राज ने बाहर निकाल कर धीरे धीरे एक बार फिर अंदर करते हुए पूचछा...

प्रिया ने शर्मकार तकिया अपने चेहरे पर रख लिया और अपना जवाब अपनी टाँगों को राज की कमर पर लपेट कर दिया...

राज तो धन्य सा हो गया.. कुच्छ देर धीरे धीरे अंदर करते रहने के बाद जब प्रिया ने लिंग को अंदर लेते हुए अपने नितंबों को हल्का हल्का उपर उठना शुरू किया तो राज की खुशी का ठिकाना ना रहा..," तेज तेज कर लूँ क्या?"

"हूंम्म.. मुझसे मत पूच्छो.. जैसे मर्ज़ी कर लो.." तकिये के नीचे से आनंद से सराबोर आवाज़ आई...

और फिर असली खेल शुरू हुआ.. राज ने उसकी टाँगों को मोदकर उसके नीचे अपनी हथेलिया बेड पर टीका ली और दनादन धक्के लगाने लगा... प्रिया और राज दोनो ही आपे में नही थे... या शायद धरती पर थे ही नही.. कामुक और युवा सिसकियों से पूरे कमरे में संगीतमय माहौल बन गया.. वासना रूपी संगीत के सातों सुर अपनी पूरी ले में थे.. दोनो ही अनाड़ी थे.. दोनो ही अंजान.. करीब पाँच मिनिट तक चला ये खेल अचानक बंद हो गया और चिंघाड़ता हुआ सा राज प्रिया के उपर गिर पड़ा... प्रिया को अपनी योनि में तेज़ी से कोई द्रव प्रविष्ट होता महसूस हुआ और इस गरमागरम रस के स्वागत में प्रिया ने भी अपने रस कपाट पूरी तरह खोल दिए.. दोनो के अंग एक दूसरे के प्रेम रस से नहा से उठे और बाग बाग हो गये... प्रिया ने राज की कमर में हाथ डाल उसको सख्ती से अपने से चीका लिया.. और पागलों की तरह उसके होंटो को चूमने लगी...

राज को रंग में वापस आते देर ना लगी.. अंदर पड़ा पड़ा उसका लिंग फिर से उभरने लगा और कुच्छ ही मिनिट में फिर से योनि में फँस कर खड़ा हो गया.. मान अभी तक दोनो में से किसी का नही भरा था.. इसीलिए फिर से दोनो इस खेल में मशगूल हो गये... इश्स बार दोनो ने ही करीब 15 मिनिट तक जी भर कर धक्के लगाए और वासना के सागर में तैरते हुए फिर से मंज़िल को पा लिया...

बड़ा ही मनोहारी द्रिश्य था.. शरीर छक चुके थे पर अभी भी एक दूसरे के प्यासे थे.. जाने कितनी ही देर वो एक दूसरे से चिपके रहते अगर उनका दरवाजा किसी ने ना खटखटाया होता...

दोनो की जान सी निकल गयी.. हड़बड़ाहट में प्रिया अपने कपड़े उठा बाथरूम की और भागी.. राज ने पॅंट पहन कर अपने आपको संभाला और हिच-किचाते हुए दरवाजा खोल दिया....

"क्या है.. कितनी बार आकर दरवाजा खटखटा चुकी हूँ.. सो गये थे क्या?" अंदर आते ही रिया ने सवाल किया...

"हां.. नही.. मतलब मैं सो गया था और प्रिया शायद नहा रही है.." राज ने एकद्ूम से कहा और तपाक से बाहर निकल गया... वह एक बार भी रिया से नज़रें चार नही कर पाया...

पागल को ये नही पता था की रिया खुद ही उस'से नज़रें चुरा रही है.. रिया ने भी उसकी और एक बार भी नही देखा था.. वो भी तो अभी अभी ही प्रेमरस में नहा कर आई थी..

राज रूम से बाहर निकल कर गया था की दरवाजे पर फिर से दस्तक हुई.. वापस मुड़ते हुए रिया ने दरवाजा खोल कर देखा.. बाहर वाणी खड़ी थी..," दीदी.. प्रिया दी कहाँ हैं?"

"वो बाथरूम में है.. तुम अकेली क्या कर रही थी रूम में.. हमारे पास आ जाती.." रिया ने औपचारिकता निभाई...

वाणी बेड पर जाकर बैठ गयी," आ तो रही थी दीदी.. पर वो.. राज को रूम में आता देख वापस चली गयी..."

वाणी के कहते कहते ही प्रिया भी कपड़े पहनकर बाहर आ गयी थी.. उसकी बात सुनकर दोनो सकपका गयी.. रिया ने बात संभालने की कोशिश करते हुए कहा," हां.. वो आया था.. कुच्छ काम से.. हमें उस'से कुच्छ ज़रूरी बातें करनी थी..."

"पर दीदी.. आप तो वीरू के पास थी ना.. अब तक..?" वाणी की इस बात से तो रिया के होश ही फाक़ता हो गये..

"क्या बोल रही है तू पागल? मैं तो यहीं थी... कोई सपना आया था क्या?" रिया को समझ नही आ रहा था की कमरों की अदला बदली के लिए कैसे सफाई दे..

"झूठ मत बोलो दीदी.. मुझे सब पता है.. मैं तब से अपने कमरे के दरवाजे पर ही तो खड़ी हूँ.." वाणी ने मुस्कुराते हुए कहा...

"प्ल्स वाणी.. किसी और को मत बोलना.. पता नही कैसी कैसी बातें शुरू हो जाएँगी हमारे बारे में.. तू समझ रही है ना.." रिया बचाव की मुद्रा में आ गयी..

इस'से पहले की वाणी कुच्छ बोलती.. प्रिया ने आकर उसके दोनो गाल प्यार से खींच लिए..," इस'से डरने की ज़रूरत नही है.. इसका भी एक राज मेरे पास है.. क्यूँ वाणी?"

वाणी उठकर प्रिया की तरफ लपकी और हल्की सी शरम चेहरे पर लिए रुनवासी सी होकर बोली..,"दिदीईइ.. प्ल्स!"

"अच्च्छा.. अपनी बारी आ गयी तो प्ल्स.. और हमको ऐसे बोल रही है जैसे तूने पता नही क्या देख लिया हो.. क्या कर रही थी रात को? ... बस में.." प्रिया ने बेड पर बैठकर उसके दोनो हाथ पकड़ते हुए अपने पास खड़ी कर लिया...

वाणी ने अपने हाथ च्छुड़ाए और शर्मकार बेड पर औंधी होकर लेट गयी," मुझे कुच्छ मत बोलो...!"

ये सब देख रिया की जान में जान आई.. बेड पर लेटी वाणी को ज़बरदस्ती सीधा करते हुए बोली," आ.. बोल ना.. बता ना क्या बात है? किसी से प्यार करती है क्या?"

वाणी कुच्छ नही बोली.. बस आँखें बंद करके मुस्कुराने लगी.. प्रिया ने उसका राज रिया के सामने खोल दिया..," हां.. वो एक लड़का नही है.. क्या नाम है उसका वाणी?.. हां.. मोनू.. उसके साथ है कुच्छ इसका लेफ्डा है..."

"मोनू नही दीदी.. मनु" वाणी ने आँखे बंद किए हुए ही कहा और फिर से उल्टी होकर चदडार में मुँह छिपा लिया...

"वो तो बहुत ही शरीफ लड़का लगता है.. स्मार्ट भी बहुत है.. इनकी जोड़ी कितनी अच्छि जमेगी... वो भी प्यार करता है क्या तुमसे?" रिया ने वाणी को कुरेदना शुरू किया...

वाणी गुस्सा हो गयी.. तपाक से उठ बैठी," कुच्छ नही करता वो.. उसके बस का कुच्छ है ही नही.. उसी की वजह से मैं आज घूमने भी नही गयी और तब से दरवाजे पर खड़ी रही.. एक बार भी कमरे से बाहर नही निकला... इस'से अच्च्छा तो बाहर घूम आती..."

वाणी के मासूम से चेहरे पर गुस्से की लाली देख दोनो मुस्कुरा उठी," तो तू चली जाती वाणी.. अगर दिल नही लग रहा था उसके बिना..."

वाणी के चेहरे से पल भर में ही गुस्से का स्थान हुल्की नाराज़गी और उत्सुकता ने ले लिया.. यही उसकी सबसे शानदार बात थी.. गुस्सा तो जैसे पल भर का ही मेहमान होता था.. और वो भी बनावटी," पर आना तो उसको ही चाहिए था ना दीदी.. आना चाहिए था ना.. मेरे पास.. अगर वो भी मुझसे प्यार करता है तो..?"

"हां.. आना चाहिए था.. उसकी ग़लती है.. पर क्या पता उसको पता ही ना हो की तू उसका इंतजार कर रही है.. तू जाकर उस'से लड़ाई तो कर सकती है ना.. तेरे पास नही आने के लिए..." प्रिया ने प्यार से उसका माथा चूम लिया.. सच में.. कितनी प्यारी थी वो...

"हूंम्म.. लड़ाई तो कर सकती हूँ.. अभी जाउ दीदी!" वाणी एक दम उठ खड़ी हुई...

दोनो ज़ोर ज़ोर से उसकी बात सुनकर हँसने लगी..," हाँ.. जा कर ले.. लड़ाई.. और 2-4 हमारी तरफ से भी सुना देना.. ठीक है ना.." प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा..

"ठीक है दीदी.. मैं अभी उसको सबक सीखा कर आती हूँ.." कहते हुए वाणी वहाँ से उड़ान छ्छू हो गयी....

"ये लड़की कितनी प्यारी है ना रिया.. एक दम बच्चों की तरह बात करती है.. पर है बहुत समझदार.. कभी इस'से सीरीयस होकर बात करके देखना..." प्रिया के होंटो पर अब भी वाणी की बात याद करके मुस्कान तेर रही थी...

"हूंम्म.. और सुंदर भी तो कितनी है.. मुझे तो एकद्ूम परी के जैसे लगती है ये.." रिया ने प्रिया की बात को सत्यापित करते हुए कहा....

वाणी ने जैसे ही मनु के कमरे के बाहर जाकर खटखटने के लिए हाथ लगाया, दरवाजा अपने आप ही खुल गया.. दरवाजे को थोड़ा और खोलकर उसने झाँका तो मनु को चैन से कंबल में लिपटे हुए सोते पाया... वाणी ये देख आपे में ना रही.. तुनक्ति हुई बिस्तेर के पास गयी और झटके के साथ कंबल खींच दिया.. मनु हड़बड़कर उठ बैठा," वाणी.. तुम?"

"वाणी तुम?" वाणी ने मुँह बनाकर उसकी नकल की और गुस्से में भूंभूनती हुई बोली," किसी और का इंतजार कर रहे थे क्या?" मधुर आवाज़ में चीखती हुई भी वो उतनी ही मासूम लग रही थी जितनी वो रूठने पर लगती थी...

"नही.. वो.. मैं तो सो रहा था.. तुम कब आई.." मनु उठकर बाथरूम में मुँह धोने चला गया...

"मुझे और गुस्सा मत दिलवओ.. पहले बता रही हूँ.. पता है मैं 2 घंटे से अपने दरवाजे पर खड़ी हूँ.. इस इंतजार में की तुम बाहर निकलो और मैं तुम्हारी ये.. ये बदसूरत शकल देख सकूँ..." वाणी मनु के कंबल में अच्छि तरह लिपट कर आलथी पालती मार कर बैठ गयी....

मनु उसकी बात सुनकर मुस्कुराता हुआ बाहर आया," अच्च्छा.. मैं बदसूरत हूँ..?"

"जब तुम मुझे दिखाई ही नही दोगे तो मुझे क्या फरक पड़ता है.. चाहे बदसूरत हो या खूबसूरत..." मनु के बिस्तेर पर बैठते ही वाणी उस'से नाराज़ होकर मुँह फेर कर बैठ गयी.....

"वाणी... तुम जो ये बात बात पर नाराज़ हो जाती हो.. मुझे बिल्कुल अच्च्छा नही लगता.. प्ल्स.. मान जाओ.. इधर मुँह कर लो और मुस्कुरा दो.." मनु तकिये का सिरहाना लगाकर लेट गया...

आधी बात वाणी ने मान ली... वह तुरंत घूमकर उसकी और मुँह करके बैठ गयी.. आख़िर वह भी तो नही रह सकती थी ना.. उसका चेहरा देखे बगैर," क्यूँ मुस्कुरा दूं? तुम तो आराम से यहाँ सो गये.. और वहाँ खड़े खड़े मेरे पैर दुखने लगे..."

"अच्च्छा.. सॉरी.. पर तुम यहाँ भी तो आ सकती थी ना..."

"क्यूँ? तुम नही आ सकते तो मैं क्यूँ आऊँ..?" वाणी ने तपाक से कहा..

"अब भी तो आई हो ना.. बोलो!" मनु हँसने लगा...

"अब तो मैं.. वो.. अब तो मैं लड़ाई करने आई हूँ..." वाणी ने जवाब दिया...

"हा हा हा हा.. लड़ाई करने आई हो.. लो कर लो लड़ाई.. गुलाम हाज़िर है.." मनु उठकर बैठ गया...

"कर तो ली..." वाणी ने नाराज़ होते हुए कहा और अगले ही पल मनु को देख मुस्कुराने लगी...," इतनी ही करनी थी बस.."

मनु को उस पर इतना प्यार आ रहा था की जैसे उसको बाहों में उठाकर घूमता रहे.. चूमता रहे.. पर उसको मालूम था की होटेल में और भी बच्चे हैं.. इसीलिए संयम से काम ले रहा था.. इसीलिए वाणी के पास नही गया था," अच्च्छा.. चलो.. लड़ाई तो ख़तम हुई.. अब क्या इरादा है...?"

"मुझे प्यार करना है?" वाणी ने बिना अटके इस तरह कह दिया मानो यह कोई मामूली बात थी...

मनु सुनकर उच्छल पड़ा..," क्या? ... कैसा प्यार..?"

[color=#8000bf][size=large]"वही जो प्यार करने वाले अकेले में करते हैं.. च्छुपकर.." वाणी के चेहरे पर कतयि उत्तेजना के भाव नही थे.. पर फिर भी वह प्यार करना चाहती थी.. मनु के साथ.. ताकि हमेशा हमेशा के लिए दोनो पर एक दूसरे की मोहर लग जाए.. ताकि फिर से वाणी को त्याग ना करना पड़े... ताकि वो कह सके," मनु सिर्फ़ मेरा है.. और किसी का
-
Reply
11-26-2017, 02:06 PM,
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल पार्ट --60 end

गतांक से आगे ...................................

गर्ल्स स्कूल--61

वाणी ने पॅंटी निकाल कर फैंकते ही अपनी जांघों को कसकर भीच लिया.. उत्तेजना के मारे वह पहले ही अधमरी सी हो चुकी थी और गरम योनि पर ठंडक उल्टा असर कर रही थी. हल्क बालों से ढाकी योनि के पेडू और उसकी पतली सी झिर्री की थोड़ी सी झलक पाकर मनु पागल सा हो गया. अब वो कुच्छ पूच्छने या कहने की हालत में था ही नही.. झट से वाणी की जांघों में अपने हाथ फँसाए और बलपूर्वक उन्हे फैला दिया.. वाणी तड़प सी उठी..

जांघें फैलने की वजह से कयि बार पिघल कर चिकनी हो चुकी वाणी की योनि की फांकों के चौड़ी हो जाने की वजह से उसका अंदर का सुर्ख लाल और अत्यंत कोमल हिस्सा बेपर्दा हो गया.. और उसमें से रह रह कर प्रेमरस रिस रहा था.. मनु के लिए ये सब अकल्पनीया था.. अद्भुत!

मनु को देर करते देख वाणी च्चटपटाहट में सिसकियाँ लेते हुए अपने नितंबों को उच्छलने लगी.. अब मनु के लिए भी जल्द से जल्द मंज़िल पर पहुँचना सख़्त ज़रूरी था.. उसने झट से अपनी पॅंट निकाली और लोहे की सलाख जैसे हो चुके अपने लिंग को हाथ में पकड़ कर वाणी की जांघों के बीच बैठ गया. जांघों को उपर उठाया और झुक कर लिंग को योनि मुख पर रख दिया. वाणी को इस पहले मिलन की कितने ही दीनो से प्रतीक्षा थी.. गरम गरम सख़्त लिंग को सही निशाने पर जान उसने बिस्तेर की चादर को कसकर हाथों में पकड़ा और लोटने लगी.. जल बिन मच्चली की तरह..

मनु ने नज़रें उठाकर वाणी के चेहरे को देखा. उसने अपना जबड़ा कसकर भीच लिया था पर बेताबी उसकी पथरा चुकी नज़रों से सॉफ दिख रही थी.. मनु ने हल्का सा दबाव डाला और वाणी उच्छल पड़ी," आ!"

"दर्द हो रहा है ना!" मनु ने रुक कर प्यार से उसकी जांघों को सहलाते हुए पूचछा...

"सीसी.. कुच्छ नही.. तुम डाल दो.. जल्दी..!" होने वाली पीड़ा का अंदाज़ा लगाकर वाणी के चेहरे पर पहले ही शिकन उभर आई थी.. पर उसने निस्चय कर रखा था.. कि आज ही सब कुच्छ कर लेना है..

आदेश मिलते ही मनु का ध्यान नीचे आ गया.. लिंग वहाँ से हटाकर फांकों को जितना खोल सकता था खोल दिया और छेद के मुँह पर फिर से अपना लिंग रख दिया.. योनि की फांकों ने हल्का सा लिंग को अपने अंदर ले लिया.. मनु को वाणी को हो सकने वाली पीड़ा का अहसास था.. पर काम तो आज करना ही था.. अभी नही तो कभी नही के अंदाज में मनु ने वाणी की जांघों को कसकर पकड़ कर अपनी तरफ से प्रहार किया और किसी भी दर्द को सहने के लिए पूरी तरह तैयार वाणी की आँखों से आँसू उमड़ पड़े... पर उसने अफ तक नही की..

लिंग की टोपी योनि के अंदर फँसी खड़ी थी और फांकों ने लिंग को कसकर भींच रखा था... पर काम बन गया था...

"बहुत ज़्यादा दर्द हुआ ना..?" मनु ने बेचारगी से वाणी के चेहरे पर लुढ़क आए आँसुओं को देखते हुए पूचछा..

दर्द को सहन करते हुए वाणी ने मुश्किल से अपना मुँह खोला और खोलते ही उसकी टीस बाहर निकल आई," अया.. अया.. नही.. कुच्छ खास नही.. हो गया क्या?"

"नही.. अभी पूरा नही हुआ!" मनु ने योनि की फांकों को प्यार से सहलाते हुए उनको राहत सी देने की कोशिश की...

"क्या?" वाणी को लगा अभी तो बहुत झटके लगने बाकी हैं.. दर्द भरे..," अभी मत करना प्लीज़.. थोड़ा रुक जाओ..!"

"कहो तो निकाल लूँ? तुम तो रोने लगी हो.."

"नही.. अब मत निकलना.. कितनी मुश्किल से गया है.. अभी डाल दो बेशक.. पर निकलना नही जान..!" ना चाहते हुए भी वाणी के हर शब्द से उसको हो रही पीड़ा झलक रही थी...

मनु को वाणी पर बहुत प्यार आ रहा था.. उसके समर्पण पर.. वह इसी हालत में वाणी पर झुक गया और उसके चेहरे को बेतसा चूमने लगा.. पागलों की तरह. शुरुआत में पीड़ा के कारण अपने आपको उसका साथ देने में असहज महसूस कर रही वाणी भी जल्द ही सब कुच्छ भुला उसके होंटो से चिपक गयी.. उपर चल रही प्यार मोहब्बत की चूमा चाती से वाणी को नीचे बड़ी राहत सी मिली और वह धीरे धीरे अपने नितंबों को उचकाने लगी....

वाणी के चेहरे पर चुंबनो की बेपनाह बरसात करते हुए मनु को अचानक कुच्छ अजीब सा महसूस हुआ... उसने उपर उठकर नीचे देखा और देखते ही उसकी आँखों में सफलता की चमक उभर आई," वाणी.. देखो गया.. आधा अंदर जा चुका है अपने आप..!" वह झुका और वाणी की चूचियो को चूसने लगा..

"क्या? दिखाना!" वाणी भी अचरज से भर उठी.. और अपने हाथों का दबाव मनु की छाती पर डाल उसको उपर होने का इशारा किया.. मनु उठकर बैठ सा गया..

योनि के बीचों बीच लठ की तरह फँसे खड़े आधे लिंग को देख वाणी पानी पानी हो गयी.. लज्जा के मारे वह तुरंत सीधी लेट गयी और अपनी आँखें बंद करके मुस्कुराने लगी.. उसकी हसरत जो पूरी हो गयी थी..

"क्या हुआ? हंस क्यूँ रही हो?" मनु वापस वाणी के उपर लेट कर उसके होंटो का चुंबन लेता हुआ बोला..

"कुच्छ नही.. डाल दो पूरा जल्दी..!"वाणी ने मनु को अपनी छाती से चिपका कर ज़ोर से भीच लिया और उसकी कमर को सहलाने लगी.. आख़िरकार 'वो' भी पूरी हो ही गयी..

--------------------------------------

प्यार करने के बाद भी वो दोनो काफ़ी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे.. पर अब वाणी की चीकपिक बंद हो गयी थी.. चुपचाप उसने उठकर कपड़े पहने और नज़रें झुकाए हुए बोली," मैं जाउ अब?"

"अब तुम्हे कौन जाने देगा वाणी.. अब तो तुम मेरी हो गयी हो!" मनु ने वाणी को बाहों में उठाया और वापस बिस्तेर पर लाकर पटक दिया.. वाणी खिलखिलाकर हंस पड़ी.. पर वो हँसी 'अपनी' वाणी की नही बुल्की मनु की हो चुकी एक नारी की थी..

सारा दिन रोहित जल्द से जल्द रात होने का इंतजार करता रहा.. और रात होते ही उसकी बेताबी भड़क उठी थी..पर जाने क्यूँ, सोने के लिए शालिनी के रूम की और जाते हुए रोहित के मन में हल्की सी हिचकिचाहट थी... उसने जैसे ही दरवाजा खटखटाया, शालिनी ने झट से खोल दिया और एक तरफ हट कर नज़रें झुका कर खड़ी हो गयी.. रोहित ने उसके चेहरे की और देखा.. लज्जा में डूबी हुई सी शालिनी नज़ाकत का प्रयय लग रही थी..

"मुझे यहीं सोना पड़ेगा! कोई दिक्कत तो नही है ना!" रोहित ने अचकचते हुए उसके पास ही खड़ा होकर पूचछा...

शालिनी ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया.. दरवाजा बंद किया और बाथरूम में चली गयी...

ऐसा तो पहले कभी हुआ ही नही था.. शालिनी ने अपने पूरे बदन में अजीब सी ऐठन महसूस की.. हरे चिटकेदार कमीज़ के नीचे सफेद ब्रा में उसको अपनी चूचियो के उभारों का दम सा घुट'ता महसूस हुआ.. वो 'वहाँ' से आज कुच्छ और भारी हो गयी थी..साँसे तेज हो जाने के कारण उसकी चूचिया तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी... साँसों पर काबू पाने में असमर्थ रहने पर शालिनी ने अपना कमीज़ निकाल कर ब्रा का हुक खोल दिया... गोरी चित्ति चूचियाँ ब्रा से आज़ाद होते ही मचल उठी.. उनपर जड़े गुलाबी दाने तंन कर लंबे और पैने हो गये थे.. उनको छ्छूने भर से ही कामुक आनंद की सिसकी शालिनी की मुँह से आह के रूप में निकल गयी...

एक साथ रात बिताते हुए रोहित को मर्यादा में रखने के लिए शालिनी को कुच्छ खास करने की ज़रूरत नही थी.. पर प्राब्लम ये थी की खुद उसका बदन ही आज बेकाबू सा हो गया था.. वो खुद रोहित की बाहों में समा कर आज अपना 'सब कुच्छ' उसके हवाले कर देना चाहती थी.. उसने अपने तरंगित उभारों को अपने हाथों में समेट कर देखा.. वो फदक से रहे थे.. अंजाने स्पर्श की चाहत में..

आख़िरकार शालिनी ने ब्रा को हॅंगर पर टाँग दिया और केवल कमीज़ पहन कर अपने उभारों को चुन्नी में छुपाति हुई बाहर निकल आई..

"ययए क्या कर रहे हो?" शालिनी ने रोहित को अपना बिस्तेर नीचे लगाते हुए देखा तो वह कसमसा कर रह गयी...

"कुच्छ.. नही.. सोने की तैयारी कर रहा हूँ.. और क्या?" रोहित ने नज़रें चुराते हुए कहा...

"ये क्या बात हुई..? ठीक है.. तुम उपर सो जाना... मैं सो जाउन्गि यहाँ..." शालिनी ने कहा और नीचे बिस्तेर पर बैठ गयी...

"नही शालु.. मैं यहाँ ठीक हूँ.. तुम.. उपर चली जाओ!" रोहित और शालिनी एक दूसरे के सामने बैठे थे...

"क्यूँ? तुम यहाँ ठीक हो तो मैं भी ठीक हूँ.. मैं भी अपना बिस्तेर नीचे लगा लेती हूँ.." शालिनी ने प्यासी आँखों से रोहित के चेहरे की और निहारा...

"क्यूँ परेशान हो रही हो? उपर जाकर आराम से सो जाओ ना...!" रोहित ने हल्का सा प्रतिरोध किया...

"तुम्हे मैं अच्छि नही लगती क्या?" शालिनी ने तड़प कर कह ही दिया...

"ये भी कोई बात हुई.. तुम अच्छि नही लगोगी तो कौन लगेगा.. सब जानते हुए भी तुम...." रोहित ने बात अधूरी छ्चोड़ दी...

"नही.. मैं कुच्छ नही जानती.. जहाँ तुम सोवोगे.. वहीं मैं... बस!" शालिनी ने आदेश देने के लहजे में कहा और बैठे हुए रोहित की बराबर में सीधी लेट कर आँखें बंद कर ली... चुन्नी सरक कर उसके बदन से उतर गयी थी.. शायद शालिनी ने ध्यान नही दिया.. या फिर शायद उसने जानबूझ कर ही लेट'ते हुई चुननी को अपने हाथ के नीचे दबा लिया था...

रोहित शालिनी के हुश्न की बेपनाह दौलत को यूँ बिखरा देख पागल सा हो उठा.. उसकी बंद आँखों पर एक पल को ठहर कर उसकी नज़रें नीचे फिसलती चली गयी.. और ठहरी वहाँ, जहाँ शालिनी की गोल मटोल तनी हुई चूचियो पर उभर कर खड़े हो चुके दाने उसकी हालत बयान कर रहे थे," देख लो! बाद में मुझे कुच्छ मत कहना!" रोहित अपने होंटो पर खुद को जीभ फेरने से ना रोक सका...

"देख लिया! मुझे यहीं सोना है..." आँखें बंद किए हुए ही शालिनी ने मचल कर कहा...

"तो मैं उपर चला जाउ?" रोहित ना चाहते हुए भी पूच्छ बैठा...

"कह दिया ना! जहाँ तुम सोवोगे, वहीं मैं...." शालिनी ने कहा और हल्का सा मुस्कुराते हुए करवट लेकर अपना सिर आलथी पालती मारे रोहित के घुटने पर रख लिया...

"सोच लो.. गड़बड़ हो जाएगी.. मैं खुद को रोक नही पाउन्गा शालु.. बहुत तडपा हूँ तुम्हारे लिए...!" रोहित ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा.. उसकी साँसे उखाड़ने सी लगी थी.. शालिनी के यौवन को अपने पहलू में समेट'ने की चाहत लिए हुए...

"ऐसे कैसे गड़बड़ हो जाएगी.. मेरी एक बेहन का भाई इनस्पेक्टर है.. अंदर करवा दूँगी!" और शालिनी खिलखिला कर हंस पड़ी..

"अच्च्छा! तो ये बात है.. इसीलिए इतना अकड़ रही हो.. देखता हूँ कैसे अंदर करवाती हो.." और बरसों से शालिनी के लिए तड़प रहा रोहित झुका और शालिनी के चेहरे को चूम लिया.. चुंबन हालाँकि गालों पर था, पर भावनैयें इतनी कमसिन और कामुक हो चुकी थी कि शालिनी सिहर उठी.. अपने आप ही उसके हाथ रोहित के चेहरे पर चले गये और अपना चेहरा उसके सामने करके शालिनी आँखें बंद करके उसको नीचे खींचने लगी....

रोहित भी तैयार ही था... खुद को ढीला छ्चोड़ वह थोड़ा और नीचे हो गया और बदहवास सा शालिनी के नरम होंटो को चूमने लगा...

"आआआआहह!" काफ़ी देर बाद जब रोहित ने उसको छ्चोड़ा तो शालिनी की भावनायें भड़क चुकी थी... कामुक सिसकी लेते हुए उसने प्रार्थना सी की... ,"रुक क्यूँ गये रोहित!"

रोहित कहाँ रुकने वाला था अब... वह भी पसर कर शालिनी के साथ लेट गया और अपनी जाँघ शालिनी की जांघों पर रख कर उसको अपने सीने से कसकर सटा लिया और पागलों की तरह उसके चेहरे को चूमने लगा... शालिनी सिमट कर उसके और करीब आ गयी और अपनी गरम साँसों से रोहित की साँसों को महकाने लगी....

शालिनी के उत्तेजित हो जाने की वजह से उसकी चूचियो के दाने रस से भरकर उसके कमीज़ से बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे.. रोहित उनकी चौंछ को सॉफ सॉफ अपने दिल में चुभते हुए महसूस कर रहा था. वह सोच ही रहा था कि अब क्या करूँ.. तभी शालिनी बोल पड़ी," तुम्हे मैं अब भी उतनी ही अच्च्ची लगती हूँ ना.."

"मैने तुम्हे कभी देखा ही नही है.. जब देखूँगा तो बताउन्गा..!" रोहित ने शरारती लहजे में कहा....

"और कब देखोगे? तुम्हारे सामने ही तो हूँ.. देख लो ना, जी भर कर..." शालिनी ने अपनी बाहें उठाकर अंगड़ाई लेते हुए कहा...

अब रोहित खुद को रोक नही पाया.. उसने एक हाथ शालिनी के उभार पर रखा और उसको समेट'ने की कोशिश करते हुए कसकर दबा दिया.. शालिनी सिसक उठी और अपना हाथ रोहित के हाथ के उपर ले गयी...

"कितनी प्यारी हो तुम? मैने तो कभी सपने में भी नही सोचा था कि इनको छूने में इतना मज़ा आता होगा...!" रोहित पागलों की तरह उसकी चूचियाँ दबा रहा था...

"आइ लव यू रो... आआहह" साँसें उखड़ जाने के कारण शालिनी की बात अधूरी ही रह गयी....

"इसको निकाल दूं क्या?" रोहित ने शालिनी का कमीज़ उठा कर उसकी नाभि को चूमते हुए पूचछा....

निकालना कौन नही चाहता था.. शालिनी की मौन सिसकी ने उसको इजाज़त दे दी और रोहित के हॉथो ने कमीज़ का निचला सिरा पकड़ा और उसके बदन का रोम रोम नंगा करते चले गये... उपर से...

रोहित उसकी पतली कमर, पेट का कमसिन नाभि क्षेत्रा और कमर का मछ्लि जैसा आकर देखते ही पागला सा गया... उसका लंबा पतला और नाज़ुक पेट और उसके उपर तने खड़ी दो संतरे के आकर की रसभरी चूचियाँ; सब कुच्छ जैसे ठोस हो गया हो... अब उसकी चूचियो का रहा सहा लचीलापन भी जाता रहा... उस्क्कि चूचियो के चूचक भी अब तक बिल्कुल अकड़ गये थे... आज तक उसने किसी लड़की को इस हद तक बेपर्दा नही देखा था... वह बैठ गया... और बेतहाशा उसके बदन पर चुंबनों की बौच्हर सी शुरू कर दी...

उसका हाथ अपने आप ही अपने तब तक तन चुके लंड को काबू में करने की चेस्टा करने लगा... पर अब लंड कहाँ शांत होने वाला था... वो भीतर से ही बार बार फुफ्कार कर अपनी नाराज़गी का इज़हार कर रहा था मानो कह रहा हो," अभी तक में पॅंट के अंदर क्यूँ हूँ; शालिनी के अंदर क्यूँ नही?

शालिनी के लिए हर पल मुश्किल हो रहा था... तड़प दोनो ही रहे थे... पर झिझक भी दूर होने का नाम नही ले रही थी... दोनो की... पूरी तरह... !

आख़िरकार शालिनी ने लरजते हुए होंटो से अपनी सारी सक्ति समेट-ते हुए कह ही दिया...," ! सलवार भी उतार दूं क्या? गीली होने वाली है...."

'नेकी और पूच्छ पूच्छ' रोहित को अगले काम के लिए कहना ही नही पड़ा. और ना ही शालिनी ने उसके जवाब का इंतजार करने की ज़रूरत समझी... उसने सलवार उतार दी... अपनी पॅंटी को साथ ही पकड़ कर... रोहित शालिनी के अंगों की सुंदरता देखकर हक्का बक्का रह गया... उसकी योनि टप्प टप्प कर चू रही थी... उसका रस उसकी केले के तने जैसी चिकनी और मुलायम जांघों पर बह कर चमक रहा था... और महक भी रहा था...

रोहित को अपनी जांघों के बीच इस तरह घूरते पाकर शालिनी शर्मा गयी और दूसरी तरफ पलट गयी.. पर पिछे का नज़ारा उस'से भी कहीं ज़्यादा हसीन था....

रोहित ने उसके नितंबों को ध्यान से देखा... उसकी दोनो फाँकें उसकी चूचियो की भाँति ही सख़्त दिखाई दे रही थी...जांघों के बीच से उसकी उभर आई योनि की दोनो परतें दिखाई दे रही थी....

रोहित उसस्पर झुका और उसके कान में बोला... "जान तुमसे ज़्यादा सुंदर कोई हो ही नही सकता..."

अब और सहना शालिनी वश में नही था... वो घूम कर बैठ गयी और अपने रोहित से लिपट कर अपनी तड़प रही चूचियों को शांत करने के कोशिश करने लगी...! कुच्छ ही देर में रोहित नीचे आ गया और शालिनी की बरस कर भी तरस रही योनि की प्यास बुझाने के लिए अपने होन्ट 'वहाँ' टीका दिए....

"प्लीज़.. बेड पर ले चलो!" शालिनी पागल सी हो चुकी थी...

रोहित ने उसको किसी दुल्हन की भाँति बाहों में उठा लिया और बेड पर ले जाकर लिटा दिया... मारे आवेश के शालिनी ने अपनी जांघों को एक दूसरी पर चढ़ा कर कसकर भींच लिया...

"उफफफफफ्फ़ ! सहन नही होता... जल्दी कुच्छ करो!"

रोहित ने मौके की नज़ाकत को समझा... अपनी पंत निकल कर वा नीचे लाते गया और शालिनी को अपने उपर चढ़ा लिया... दोनो और पैर करके... रोहित के लिंग का उभर शालिनी की जांघों में चुभ रहा था....

शालिनी को अब और कुच्छ बताने की ज़रूरत नही थी.. रोहित का तना हुआ लिंग अपने हाथ में पकड़ा और तेज़ी से अपनी योनि से सटकर बाहर ही घिसने लगी...

और रोहित हार गया... शालिनी की मदमस्त योनि की गर्मी का अहसास होते ही उसके लिंग ने पिचकारी छ्चोड़ दी... ... और रोहित का अमूल्या रस उसकी योनि की फांकों में से बह निकला... रोहित ने बुरी तरह से शालिनी को अपनी छाती पर दबा लिया और बुरी तरह हाँफने लगा... शालिनी लगातार उसके यार के लिंग को अपनी योनि पर रगड़ती रही पर लगातार छ्होटे हो रहे लिंग ने साथ ना दिया... वह बदहवास सी होकर रोहित की छाती पर मुक्के मारने लगी... जैसे रोहित ने उसको बहुत बड़ा धोखा दे दिया गो...

रोहित को पता था कि उसको क्या करना है... उसने शालिनी को नीचे लिटाया और अपना रसभरा लिंग उसके मुँह में ठूस दिया... वासना के मारे पागल हो चुकी शालिनी ने तुरंत उसको ' 'मुँह में ही सही' सोचकर निगल लिया... और उसके रस को सॉफ करने लगी.. जल्दी जल्दी...

लिंग भी उतनी ही जल्दी अपना सम्पुरन आकर प्राप्त करने लगा... ज्यों ज्यों वह बढ़ा शालिनी का मुँह खुलता गया और लिंग उसके मुँह से निकलता गया... आख़िर में जब लिंग का सिर्फ़ सूपड़ा उसके मुँह में रह गया तो शालिनी उसको मुँह से निकालती हुई बिलबिला उठी," कुच्छ करो अब... मैं मर जवँगी नही तो..."

रोहित ने देर नही लगाई.. वह शालिनी के नीचे आया और उसकी टांगे उठा कर उन्हे दूर दूर कर दिया... योनि गीली थी और ज़ोर ज़ोर से फुदाक भी रही थी.... रोहित ने जैसे ही अपना लिंग उसकी योनि की फांकों के बीच छेद पर रखा, शालिनी समझ गयी कि मुकाबला बराबर का नही है... उसने अपने आप ही अपना जबड़ा कस कर भीच लिया..

रोहित ने दबाव बढ़ाना शुरू किया तो शालिनी की आँखें दर्द के मारे बाहर को आने लगी ... पर उसने अपना मुँह दबाए रखा... और 'फ़च्च्छ' की आवाज़ के साथ लिंग का सूपदे ने उसकी योनि को छेद दिया.. दर्द के मारे शालिनी बिलबिला उठी... वह अपनी गर्दन को 'मत करो' के इशारे में इधर उधर पटकने लगी....

रोहित ने कुच्छ देर उसको आराम देने के इरादे से अपने 'ड्रिलर' को वहीं रोक दिया... और पलट कर उपर आते हुए उसकी चूचियो पर झुक कर उसके तने हुए दाने को होंटो के बीच दबा लिया... शालिनी क्या दर्द क्या शरम सब भूल गयी... उसका हाथ अपने चेहरे से हटकर रोहित के बालों में चला गया... अब रोहित उसके होंटो को चूस रहा था... पहले से ही लाल होन्ट और रसीले होते गये... और उनकी जीभ एक दूसरे के मुँह में कबड्डी खेलने लगी... कामदेव और रति दोनो चरम पर थे...

कुच्छ ही देर बाद शालिनी ने अपने नितंबों को उठाकर पटक'ते हुए अपनी लालसा का इज़हार रोहित को कर दिया... रोहित उसके होंटो को अपने होंटो में दबाए ज़ोर लगाता चला गया... बाकी काम तो लिंग को ही करना तहा... वह अपनी मंज़िल पर जाकर ही रुका...

रोहित ने लंड आधा बाहर खींचा और फिर से अंदर भेज दिया... शालिनी सिसक सिसक कर अपने रोहन के साथ पहले मिलन का भरपूर आनंद ले रही थी.... एक बार झड़ने पर भी उसके आनंद में कोई कमी ना आई... हां मज़ा उल्टा दुगना हो गया... चिकनी होने पर लंड चूत में सटा सॅट जा रहा था... नीचे से सिसकती हुई शालिनी धक्के लगाती रही और उपर से हांफता हुआ रोहित... दौर जम गया और काफ़ी लंबा चलता रहा... दोनो धक्के लगाते लगाते एक दूसरे को चूम रहे थे; चाट रहे थे... और बार बार 'आइ लव यू' बोल रहे थे...

अचानक शालिनी ने नितंबों को थिरकते हुए फिर से रस छ्चोड़ दिया... उसके रस की गर्मी से रोहित को लगा अब वह भी ज़्यादा चल नही पाएगा.... रोहित को चरम का अहसास होते ही अपना लंड एक दम से निकल कर शालिनी के कमर से चिपके हुए पतले पेट पर रख दिया... और शालिनी आँखें बंद किए हुए ही रोहित के लंड से निकलने वाली बौच्चरों को गिन-ने लगी... आखरी बूँद टपकते ही रोहित उसके ऊपर गिर पड़ा....," आइ लव यू जान!"

"आइ लव यू टू!" शालिनी ने कसकर रोहित को अपनी छाती से चिपका लिया....

दोस्तों इस तरह गर्ल्स स्कूल की कहानी का एंड हुआ अब आप लोग बताये ये कहानी आपको कैसी लगी

आपका दोस्त

राज शर्मा

समाप्त

दाएंड
-
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर sexstories 47 4,675 4 hours ago
Last Post: sexstories
Star Desi Sex Story रिश्तो पर कालिख sexstories 142 100,880 10-12-2019, 01:13 PM
Last Post: sexstories
  Kamvasna दोहरी ज़िंदगी sexstories 28 20,550 10-11-2019, 01:18 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna kahani नजर का खोट sexstories 120 320,774 10-10-2019, 10:27 PM
Last Post: lovelylover
  Sex Hindi Kahani बलात्कार sexstories 16 176,658 10-09-2019, 11:01 AM
Last Post: Sulekha
Thumbs Up Desi Porn Kahani ज़िंदगी भी अजीब होती है sexstories 437 172,315 10-07-2019, 01:28 PM
Last Post: sexstories
  XXX Kahani एक भाई ऐसा भी sexstories 64 412,495 10-06-2019, 05:11 PM
Last Post: Yogeshsisfucker
Exclamation Randi ki Kahani एक वेश्या की कहानी sexstories 35 29,615 10-04-2019, 01:01 PM
Last Post: sexstories
Star Incest Kahani परिवार(दि फैमिली) sexstories 658 673,118 09-26-2019, 01:25 PM
Last Post: sexstories
Exclamation Incest Sex Kahani सौतेला बाप sexstories 72 157,330 09-26-2019, 03:43 AM
Last Post: me2work4u

Forum Jump:


Users browsing this thread: 4 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


Baba Net sex photos varshni kanada heroin nuda sexbaba imagesThief chori karne aata he pel ke Chala jata he xxx online and rape jabrdasti videoJabrdasti bra penty utar ke nga krke bde boobs dbay aur sex kiya hindi storyAditi Govitrikar xossip nudechut khani babaGaand me danda dalkar ghumayanude tv actress debina bonnerjee fucking pice.inrassi se band ker dasi pornma ki chutame land ghusake betene usaki gand mari sexअसल चाळे मामी चुतMaa ki bacchdani sd ja takrayasexbaba.com/maa betamaa बेटी कि चुत मरवाति दोनो साथ stroyimgfy.net bollywood actress fucked gifPati ne dusre land ke liye uksaya kahani xxxबरा कचछा हिनदिsax bfkajal agarwal incest fakesbaraland sexxsexxxxvillage husband "wibi" sex image.comSAREE ME BHABI NE BOOB DEKHAI VIDEOxxx mote gral fhotumeenakshi sheshadri sex sex fak babasexpehli baar mukh maithun kaise karvayenbacchu bhaiya bhabhi x** videomypamm.ru maa betabphdvideoxxxl2019शिल्पा शिंदे एकटर नगी फोटोबहन की फुली गुदाज बूर का बीजrani ko chodkar mutpine ki kahaniacoters aliyabhatt xxx videoNude Diwya datta sex baba picsAnushka shetty aur ramya krishna ki nangi photos ek saathpesab thuk pine ki gandgi bhre sex ki kahaniya sexbaba. comHd sex jabardasti Hindi bolna chaeye fadu 2019कैटरीना कैफ कि चुदते हुये फोटोyoni se variya bhar aata hai sex k badEklota pariwar sex stories pregnant kahanichut kissing acchi video hots saxy 20mintesexstoriyes.netकाली।का।भोशडीमोटी गाड़ मोटी चूत व पुचीkhofnak zaberdasti chudai kahanixnxummmmmm commery bhans peramka sex kahaniमैरी आममी की मोटी गांड राजसरमाbanaja tomari heiron xxxhot walpaper xxx full movie mom ki chut Ma passab kiya Katerina Kapoor Ka boorchoda chodi waianadan bahan ki god me baithakar chudai ki kahaniyaaKriti or Uski Bahan ki chut me mal girayaAmmo xxxviedoराज शर्मा सेक्स स्टोरी कमसिन कालियाUrvashi nude cartoon sexbabaLund chusake चाची को चोदaBotal se chudwati hui indian ladaki xxx.net Maa uncle k lund ko pyar karपिरति चटा कि नगी फोटोxnxummmmmm comDus re aatmi se chup ke se B F Xxnx seksi VidieoBebe.keadla.bdle.indan.xxxsurilie gautam ki bilkul ngi foto sax baba ' komWWW.Velamma Hindi Comics All Episode ImgFY.Netxxxbp pelke Jo Teen Char log ko nikalte Hainlaxmi rai ka xxx jpg nudebo nahakar aai thi pornWife Ko chudaane ke liye sex in India mobile phone number bata do pls Sara,ali,khan,nude,sexbabaindian girls fuck by hish indianboy friendssloop Aadmi Aur Bhains ka sexy video dikhaoमहाराजा की रानी सैक्सीलङकी योनि में भी newsexstory com telugu sex stories E0 B0 AE E0 B0 BE E0 B0 82 E0 B0 A4 E0 B1 8D E0 B0 B0 E0 B0 BF E0Sardyon me ki bhen ki chudai storyBaba ke Ashram Ne Bahu ko chudwaya haiभाजे ने मामी को पिछे से ठोक दिया मामि का बुर भाजे का लँडBhaiyun ne mil k chhoti ko baja dala sex kahaniभईया ने की धुँआधार चुदाई हौट चुदाई कहानीचीकनीचूतwww.xxx.petaje.dotr.bate.SAMPDA VAZE IN FUCKEDMari barbadi family sexaunty ke pair davakar gaand marisexbaba.com Daily updetmai mera gaon miri faimle part 8 by aviGand ghodi chudai siski latiChoti chut bada lig xxx porn viedo girl pik chumathe khu देसी राज सेक्सी चुड़ै मोटा भोसडा क्सक्सक्सक्सक्सक्सwidhwa didi maa na pariwar ma bata ko rakhail banaya hot stories sex baba .com