College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
11-26-2017, 12:00 PM,
#41
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
राज का एक हाथ गौरी की जांघों पर था... उसने हाथ को बातों बातों में थोडा सा और उपर करके उसकी पनटी के उपर रख दिया.. वहाँ उसने गौरी को कसकर पकड़ा हुआ था..... अंजलि उसकी गर्दन को अपनी गोद में रखे उसके हाथों को पकड़े हुए थी...

मॅच देखने आई गौरी की हालत पतली हो गयी... पर उसको लग रहा था वो सुरक्षित हाथों में है... अपनी मम्मी और अपने सर के हाथों में... इसीलिए थोडा सा निसचिंत थी...

ये वही समय था जब दिव्या की रूम मेट सभी लड़कियों को जगा कर ले आई थी... दोनो कमरों में चल रहा वासना का नंगा नाच फ्री में दिखाने के लिए....

गौरी की हालत पतली होती जा रही थी.. मर्द के हाथ उसकी चूत के पास होने से वो लाख चाह कर भी अपने आपको बेचैन सा महसूस कर रही थी... उधर अंजलि उसके कपड़े उतारने पर आमादा थी.. राज चुपचाप उसकी छतियो का उतना बैठना देख रहा था.. जब सीधी उंगली से ही घी निकल रहा हो तो टेडी करके क्या फयडा... वो इंतज़ार कर रहा था की कब अंजलि उसको नंगा करे और कब वो उस्स बेमिसाल हुस्न की मल्लिका के दीदार कर सके... गौरी के लाख कोशिश करने पर भी जब अंजलि ने उसके हाथों को नही छोड़ा तो उसने अपना सिर अंजलि की गोद में घुसा दिया... अंजलि की रस से भारी पनटी की भीनी भीनी खुसबू उसका विरोध लगातार ढीला करती चली गयी... अंजलि ने पहले ही पेट तक आ चुकी उसकी नाइटी को उसकी ब्रा के उपर तक सरका दिया... वो मचलती रही... पर अब मचलना पहले जैसा नही था... शायद दिखावा ज़्यादा था... वो सेक्स के प्रति मानवीया कमज़ोरी से टूट-ती जा रही थी लगातार...

राज उसको अकल्पनीया यौवन को देखकर पत्थर सा हो गया... वो सोच रहा था, सुंदर तो उसकी बीवी भी बहुत है... पर क्या 18 साल और 22 साल में इतना फ़र्क़ आ जाता है.. या फिर पराया माल कुच्छ ज़्यादा ही अपना लगता है.... उसका हाथ उसकी जाँघ से उपर उठकर उसके पेट पर ब्रा से थोड़ा सा नीचे जाकर जम गया... क्या चीज़ है ययार!
अंजलि ने थोड़ी सी कोशिश और की और नाइटी उसके हसीन बदन से अलग होकर बेड के सिरहने पर जाकर टंग गयी...


गौरी का दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था की उसकी धक धक बिना स्टेतस्कोप के अंजलि और राज को सुनाई दे रही थी.. राज का दिल उसकी छातियो की ताल से ताल मिला कर धड़क रहा था.. अपनी कोहनी से अपनी आँखों को ढके गौरी ये सोच रही थी की जब उसको कुच्छ नही दिखता तो औरों को भी नही दिखता होगा... ठीक उस्स कबूतर की तरह जो बिल्ली को आया देख आँखें बंद करके गुटरगू करता रहता है.. उड़ने की बजाय... गौरी को नही पता था की राज की आँखें बिल्ली की तरह ही उसकी घात लगाए बैठी हैं... उसका शिकार करने के लिए... अंजलि के मॅन में भी उसको राज की जांघों पर सवार करने का कोई इरादा नही था... वो तो बस अपनी झिझक दूर करने के लिए ही उसको शरम से पानी पानी कर देना चाहती थी... जब अंजलि ने राज को उसकी पनटी और ब्रा पर नज़र घूमते देखा तो वो राज का आशहया समझ गयी.. उसने गौरी को छोड़ दिया," जा उठकर अपने कपड़े पहन ले... अब तो समझ आ गया होगा की कितनी शर्म आती है.. अगर तू सच में दिल से मुझे दीदी कहती है तो प्लीज़ यहाँ से चली जा...

गौरी को अपनी ग़लती का अहसास हो गया था पर उसको इश्स कदर गरम करके राज की बाहों से उठा देना उसको अजीब सा लगा.. पर अपने आपको उसने संभाला और अपनी नाइटी पहन ली. वह आकर अपनी दीदी मा से लिपट गयी," आइ लव यू मम्मी!"

पहली बार गौरी को अहसास हुआ की नारी चाहे सग़ी मा हो या सौतेली.. पर मा तो मा ही होती है ...

पहली बार उसने अंजलि को मा कहा.. दोनों की आँखें छलक आई......

उधर टफ ने तो जैसे अपनी जिंदगी के सारे सेक्स के अनुभवोव को एक साथ ही सरिता और प्यारी की चूत में डाल देना था.... उनकी चूत इतनी पास पास थी की एक चूत से दूसरी चूत में लंड के जाने का पता ही टफ को नाहो लगता था... पता लगता था तो सिर्फ़ सरिता और प्यारी की आवाज़ों से... जिसकी चूत से उसका लंड बाहर निकलता वो तड़प उठती और जिसकी चूत में वो जाता वो सिसक उठती.... कामना सेक्स के इश्स जादूगर को बिना हीले देख रही थी... बिना पालक झपकाए...

उधर राकेश भी जी भर कर 2-2 लड़कियों को मस्त बना रहा था... एक की चूत में लंड सररर सर्ररर जा रहा था और दूसरी की चूत में उंगली अपना काम कर रही थी... जब एक का काम हो गया तो उसने एक्सपाइर माल की तरह उसको एकतरफ ढाका दिया और दूसरी को जन्नत की सैर करने लगा... लगभग 15-20 मिनिट में ही उसने दोनो को निहाल कर दिया और खुद भी लंड चूत से बाहर निकल कर निढाल हो गया... तीनो हाल्फ रहे थे....

गौरी अपनी मम्मी की गोद से उठकर अलग हो गयी और उन्न दो जवान पांच्छियों को यौवन सुख के लिए अकेला छोड़ दिया... पर अस्ल मुसीबत तो बाहर गेट पर खड़ी थी... जैसे ही गौरी ने दरवाजा खोला... बाहर खड़ी सभी लड़कियाँ आपा धापी में भाग ली.... गौरी के होश उड़ गये... उसने झट से दरवाजा बंद कर दिया और हैरत
से राज और अंजलि की और देखने लगी... राज और अंजलि भी सारा माजरा समझ गये....

उधर टफ दोनों के अस्थि पंजर ढीले करके अपनी पॅंट पहन ही रहा था जब उसको अचानक कमरों के बहा शोर सुनाई दियाअ...

सब का नशा एक दम से काफूर हो गया...

कुच्छ देर बाद राज टफ के कमरे में आया...," उसने देखा एक और लड़की खड़ी है दीवार से लगकर ... वो रो रही थी... ," कामना, अपने रूम में जाओ!"
"मैं नही जवँगी सर! मैं कैसे जाऊं... सबने सब कुछ देख लिया होगा... वो उस्स वक़्त तक भी नंगी खड़ी थी... पर राज ने उसकी ओर ध्यान तक नही दिया...

"ठीक है.. तुम जल्दी से कपड़े पहनो और अंजलि मेडम के पास जाओ... हम सब ठीक कर देंगे... कुछ सोचते है.." दोनो लड़कियाँ और प्यारी दूसरे कमरे में चली गयी...
राज ने टफ से पूछा," क्या करें भाई... बॅंड बज गया"

टफ ने बेड के सिरहाने से अपना सिर लगाया और सिग्गेरेत्टे सुलगा ली...," मुझे सोचने दो!"

टफ और राज आपस में बात कर ही रहे थे की अंजलि और प्यारी भी उसी कमरे में आ गयी...," अब क्या होगा?" अंजलि के माथे पर चिंता की सिल्वट सॉफ दिखाई दे रही थी... प्यारी भी कम परेशन नही थी... उसकी 'इज़्ज़त' खराब होने का डर उसको भी सता रहा था....
टफ ने सिग्गेरेत्टे बुझाते हुए कहा... "मेरे पास एक आइडिया तो है... पर सफल होगा या नही; इसकी कोई गॅरेंटी नही है...."

"जल्दी बताओ ना!" अंजलि इश्स बात को दबाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी...
"देखो पसंद ना आए तो मत लेना... लेकिन में सीरीयस हूँ... मैने एक इंग्लीश मूवी में ऐसा देखा था..." टफ ने बताने से पहले उनको भरोसे में लेना चाहा...
" अब कुछ बको भी... या पहेलियाँ ही बुझते रहोगे..."राज अपना धैर्या खोता जा रहा था... उसको शिवानी से बहुत डर लगता था...

टफ ने अपना थर्ड क्लास आइडिया उगल दिया..," हम एक खेल खेलेंगे कल रात को जिसमें बारी बारी से सब लड़कियाँ अपने कपड़े उतारती जायेंगी.."
"बकवास करने की भी हद होती है यार! हूमें यहाँ अपने कपड़े बचाने की पड़ी है.. और तुम दूसरी लड़कियों के भी कपड़े उतरने की सोच रहे हो... कुच्छ तो सोचा होता..." राज उसकी बात सुनकर फफक पड़ा....
"पूरी बात सुनोगे या नही?" टफ ने ज़ोर से चिल्लाकर राज को चुप कर दिया...
अंजलि ने भी राज से सहमति जताई," ऐसा कभी हो ही नही सकता... वो गाँव की लड़कियाँ हैं... तुम्हारी ब्लू फिल्म की हेरोइन नही.."

"फिर तो एक ही तरीका है.. बचने का.." टफ अब भी शैतानी कर रहा था... उसका था भी क्या... गाँव में भी जाता तो जाता; ना भी जाता...

"अब क्या है!" सारे उसकी बात सुनकर पक रहे थे...

"स्यूयिसाइड!" उसने कहा और उठकर बाथरूम चला गया...

सभी के दिमाग़ काम करना बंद कर चुके थे... आख़िर उन्होने टफ की ही शरण ली... अंजलि ने प्यार से टफ को कहा," अच्छा तुम पूरा तरीका बताओ!"
"अरे बहुत सारे तरीके हैं... गोली खा लो, फाँसी पर...!"टफ को अंजलि ने बीच में ही रोक दिया.. उसने तकिया उठाकर प्यार से टफ के मुँह पर दे मारा...," वो बताओ; पहले वाला..." अंजलि को लगा, भागते चोर की लंगोटी पकड़ लेनी चाहिए!


"ध्यान से सुनो.. पूरा सुन-ने से पहले अगर कोई बीच में बोला तो में उठकर चला जवँगा.. आज ही ड्यूटी पर... अपना क्या है? एक तो साला तुम्हारे बारे में फोकट में दिमाग़ घिसाओ, उपर से तुम्हारे नखरे भी सुनो.... अगर मंजूर हो तो उन्न छिप्कलियो को भी बुला लो... प्लान को ठीक से समझ कर उसकी अड्वर्टाइज़्मेंट कर देंगी...
प्यारी झट से उठ कर दूसरे कमरे में डरी बैठी उन्न ," छिप्कलियो" को बुला लाई...

तीनों लड़कियों के आने के बाद टफ ने बोलना शुरू किया:

"देखो! हमारे पास इश्स रास्ते के अलावा दूसरा कोई रास्ता नही है की हम सभी लड़कियों को इश्स खेल में शामिल करें.. और जब हमाम में सभी नंगे हो जाएँगे तो फिर किसका डर रहेगा... इसके लिए इन्न लड़कियों का हमारा साथ देना ज़रूरी है... ये अब कमरों में जाकर
बेशर्मी से ये बताएँगी की उन्होने हमसे एक खेल सीखा है... बहुत ही मजेदार खेल... खेल
में धीरे धीरे करके अपने कपड़े उतारने पड़ते हैं.. और जो इश्स खेल में पीछे
रहेगी.. वो हारेगी.. और जिसके कपड़े सबसे पहले उतरेंगे वो इश्स खेल में विजेता होगी...

मुझे पता है उन्हे शुरू में बहुत झिझक होगी.. पर वो सब इनके बाकी लड़कियों को बताने के तरीके पर डिपेंड करता है... और सुबह अंजलि के भासन पर भी....
अंजलि को जब सुना की उसको भी लड़कियों को इश्स बारे में बोलना पड़ेगा तो वो एक दम से टफ को टोकने को हुई.. पर उसको टफ की बात याद आ गयी... बीच में ना बोलने वाली....

टफ का प्लान जारी था...

"सारी नही तो कुछ लड़कियाँ ज़रूर खेलने को तैयार हो जाएँगी... पर हुमको हर एक लड़की को नंगा करना है... इश्स खेल से हमें कम से कम ये तो पता लग ही जाएगा की कौन कौन लड़कियाँ नंगी नही हुई... बस! वही हमारे लिए ख़तरा बन सकती हैं... उनके बारे में बाद में सोचेंगे... हां जो कुच्छ अंजलि को सुबह लड़कियों को कहना है... उससे मुझे विस्वास है की जिन लड़कियों का बदन दिखाने लायक है... वो तो तकरीबन ही तैयार हो जाएँगी... अब तुम तीनो जाओ और खेल का प्रचार शुरू कर दो... उनको खुल कर ये बताना है की इश्स खेल में जो मज़ा है... वो आज तक तुम्हे नही आया... बाकी प्लान में आप को बता दूँगा...
"एक दो तो मेरे कहने से ही तैयार हो जाएगी.." सरिता ने टफ की और देखते हुए कहा..

"अरे हां! जिन लड़कियों के राज तुम तीनो जानती हो उनको तो पहले ही तैयार कर लो ताकि वो भी तुम्हारे साथ दूसरी लड़कियों को खेल के लिए तैयार कर लें.... तुम सबसे पहले उन्ही को मेरे पास लेकर आओ!" टफ ने लड़कियों को जाते हुए रोक कर कहा..

कुच्छ ही देर बाद काई और लड़कियाँ भी उनक 'गेम प्रमोटर ग्रूप' में शामिल हो गयी.... कविता, दिव्या, अदिति, मुस्कान, नेहा; इन्न सबको मिला कर अब कुल 10 लड़कियाँ कमरे में सिर झुकाए खड़ी थी... तीनो ने इन सबको प्यार से या फिर ब्लाकक्मैँलिंग की डर से तैयार कर लिया था गेम में शामिल होने के लिए... सभी कमरे में सिर झुकाए खड़ी थी...

टफ इतनी बड़ी संख्या में लड़कियों को देखकर खुश हो गया... "बस अब हमारा ग़मे सुपेरहित होकर रहेगा..." अब तो सिर्फ़ 34 ही बची हैं..."" तुम क्पडे उतारने के लिए तैयार हो या थोड़ी प्रॅक्टीस चाहिएगी... अभी..."
एक साथ काई लड़कियाँ बोल पड़ी," नही सर! हम तैयार हैं...."

"गुड! अब अंजलि मेडम तुम्हे कल सुबह खेल की आवस्यकता और उसके फ़ायदों के बारे में जानकारी देंगी... जाओ अब सभी अपने अपने रूम्स में इश्स खेल के बारे में बताना शुरू कर दो.. ऑल थे बेस्ट!"

लड़कियाँ चली गयी... जाते ही अंजलि टफ पर बरस पड़ी... "मैं कैसे सबको इश्स बारे में...!"
राज ने अंजलि को बीच में ही टोक दिया.. ," डोंट वरी! मैं बता दूँगा! मुझको ऐसी बातें बताने का बड़ा शौक है.. आगे वो माने या ना माने... वो उनकी मर्ज़ी... " राज अपनी लाइफ में पहली बार इतना सीरीयस हुआ था, लड़कियों की बात पर....


"क्या बोलना है... ये भी बता दो!" राज ने टफ से पूछा...
टफ ने उसको अपने प्लान का थीम बता दिया.. और बाकी खुद सोच लेने को कह दिया..

सब के चेहरे पर निसचिंत-ता सी झलकने लगी थी... कुछ कुछ... प्यारी और अंजलि उठ कर कमरे में चली गयी....
"क्या हो गया यार!" टूर का सारा मज़ा खराब हो गया....
" कुच्छ नही हुआ! सो जा... सुबह देखना कितना मज़ा आएगाअ" टफ ने राज को कहा और करवट बदल कर आँखें बंद कर ली.....

राज की आँखों में नींद नही थी... यही हाल अंजलि का भी था... पर प्यारी को अपने यार पर पूरा भरोसा था.... वो जल्द ही खर्राटे लेने लगी...
तो भाई लोग कैसी लगी ये कहानी कैसी लगी बताना मत भूलना कहानी अभी बाकी है.आगे की कहानी आप गर्ल्स स्कूल--16 मैं पढ़ सकते है.
कहानी अगले पार्ट मैं तब तक के लिए विदा
लकिन दोस्तो कहानी पढ़ने के बाद एक कमेंट दे दिया करो मैं भी खुश हो जाउगा तो फिर देर मत कीजिए अपना कमेंट देने मैं
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11-26-2017, 12:00 PM,
#42
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
राज का एक हाथ गौरी की जांघों पर था... उसने हाथ को बातों बातों में थोडा सा और उपर करके उसकी पनटी के उपर रख दिया.. वहाँ उसने गौरी को कसकर पकड़ा हुआ था..... अंजलि उसकी गर्दन को अपनी गोद में रखे उसके हाथों को पकड़े हुए थी...

मॅच देखने आई गौरी की हालत पतली हो गयी... पर उसको लग रहा था वो सुरक्षित हाथों में है... अपनी मम्मी और अपने सर के हाथों में... इसीलिए थोडा सा निसचिंत थी...

ये वही समय था जब दिव्या की रूम मेट सभी लड़कियों को जगा कर ले आई थी... दोनो कमरों में चल रहा वासना का नंगा नाच फ्री में दिखाने के लिए....

गौरी की हालत पतली होती जा रही थी.. मर्द के हाथ उसकी चूत के पास होने से वो लाख चाह कर भी अपने आपको बेचैन सा महसूस कर रही थी... उधर अंजलि उसके कपड़े उतारने पर आमादा थी.. राज चुपचाप उसकी छतियो का उतना बैठना देख रहा था.. जब सीधी उंगली से ही घी निकल रहा हो तो टेडी करके क्या फयडा... वो इंतज़ार कर रहा था की कब अंजलि उसको नंगा करे और कब वो उस्स बेमिसाल हुस्न की मल्लिका के दीदार कर सके... गौरी के लाख कोशिश करने पर भी जब अंजलि ने उसके हाथों को नही छोड़ा तो उसने अपना सिर अंजलि की गोद में घुसा दिया... अंजलि की रस से भारी पनटी की भीनी भीनी खुसबू उसका विरोध लगातार ढीला करती चली गयी... अंजलि ने पहले ही पेट तक आ चुकी उसकी नाइटी को उसकी ब्रा के उपर तक सरका दिया... वो मचलती रही... पर अब मचलना पहले जैसा नही था... शायद दिखावा ज़्यादा था... वो सेक्स के प्रति मानवीया कमज़ोरी से टूट-ती जा रही थी लगातार...

राज उसको अकल्पनीया यौवन को देखकर पत्थर सा हो गया... वो सोच रहा था, सुंदर तो उसकी बीवी भी बहुत है... पर क्या 18 साल और 22 साल में इतना फ़र्क़ आ जाता है.. या फिर पराया माल कुच्छ ज़्यादा ही अपना लगता है.... उसका हाथ उसकी जाँघ से उपर उठकर उसके पेट पर ब्रा से थोड़ा सा नीचे जाकर जम गया... क्या चीज़ है ययार!
अंजलि ने थोड़ी सी कोशिश और की और नाइटी उसके हसीन बदन से अलग होकर बेड के सिरहने पर जाकर टंग गयी...


गौरी का दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था की उसकी धक धक बिना स्टेतस्कोप के अंजलि और राज को सुनाई दे रही थी.. राज का दिल उसकी छातियो की ताल से ताल मिला कर धड़क रहा था.. अपनी कोहनी से अपनी आँखों को ढके गौरी ये सोच रही थी की जब उसको कुच्छ नही दिखता तो औरों को भी नही दिखता होगा... ठीक उस्स कबूतर की तरह जो बिल्ली को आया देख आँखें बंद करके गुटरगू करता रहता है.. उड़ने की बजाय... गौरी को नही पता था की राज की आँखें बिल्ली की तरह ही उसकी घात लगाए बैठी हैं... उसका शिकार करने के लिए... अंजलि के मॅन में भी उसको राज की जांघों पर सवार करने का कोई इरादा नही था... वो तो बस अपनी झिझक दूर करने के लिए ही उसको शरम से पानी पानी कर देना चाहती थी... जब अंजलि ने राज को उसकी पनटी और ब्रा पर नज़र घूमते देखा तो वो राज का आशहया समझ गयी.. उसने गौरी को छोड़ दिया," जा उठकर अपने कपड़े पहन ले... अब तो समझ आ गया होगा की कितनी शर्म आती है.. अगर तू सच में दिल से मुझे दीदी कहती है तो प्लीज़ यहाँ से चली जा...

गौरी को अपनी ग़लती का अहसास हो गया था पर उसको इश्स कदर गरम करके राज की बाहों से उठा देना उसको अजीब सा लगा.. पर अपने आपको उसने संभाला और अपनी नाइटी पहन ली. वह आकर अपनी दीदी मा से लिपट गयी," आइ लव यू मम्मी!"

पहली बार गौरी को अहसास हुआ की नारी चाहे सग़ी मा हो या सौतेली.. पर मा तो मा ही होती है ...

पहली बार उसने अंजलि को मा कहा.. दोनों की आँखें छलक आई......

उधर टफ ने तो जैसे अपनी जिंदगी के सारे सेक्स के अनुभवोव को एक साथ ही सरिता और प्यारी की चूत में डाल देना था.... उनकी चूत इतनी पास पास थी की एक चूत से दूसरी चूत में लंड के जाने का पता ही टफ को नाहो लगता था... पता लगता था तो सिर्फ़ सरिता और प्यारी की आवाज़ों से... जिसकी चूत से उसका लंड बाहर निकलता वो तड़प उठती और जिसकी चूत में वो जाता वो सिसक उठती.... कामना सेक्स के इश्स जादूगर को बिना हीले देख रही थी... बिना पालक झपकाए...

उधर राकेश भी जी भर कर 2-2 लड़कियों को मस्त बना रहा था... एक की चूत में लंड सररर सर्ररर जा रहा था और दूसरी की चूत में उंगली अपना काम कर रही थी... जब एक का काम हो गया तो उसने एक्सपाइर माल की तरह उसको एकतरफ ढाका दिया और दूसरी को जन्नत की सैर करने लगा... लगभग 15-20 मिनिट में ही उसने दोनो को निहाल कर दिया और खुद भी लंड चूत से बाहर निकल कर निढाल हो गया... तीनो हाल्फ रहे थे....

गौरी अपनी मम्मी की गोद से उठकर अलग हो गयी और उन्न दो जवान पांच्छियों को यौवन सुख के लिए अकेला छोड़ दिया... पर अस्ल मुसीबत तो बाहर गेट पर खड़ी थी... जैसे ही गौरी ने दरवाजा खोला... बाहर खड़ी सभी लड़कियाँ आपा धापी में भाग ली.... गौरी के होश उड़ गये... उसने झट से दरवाजा बंद कर दिया और हैरत
से राज और अंजलि की और देखने लगी... राज और अंजलि भी सारा माजरा समझ गये....

उधर टफ दोनों के अस्थि पंजर ढीले करके अपनी पॅंट पहन ही रहा था जब उसको अचानक कमरों के बहा शोर सुनाई दियाअ...

सब का नशा एक दम से काफूर हो गया...

कुच्छ देर बाद राज टफ के कमरे में आया...," उसने देखा एक और लड़की खड़ी है दीवार से लगकर ... वो रो रही थी... ," कामना, अपने रूम में जाओ!"
"मैं नही जवँगी सर! मैं कैसे जाऊं... सबने सब कुछ देख लिया होगा... वो उस्स वक़्त तक भी नंगी खड़ी थी... पर राज ने उसकी ओर ध्यान तक नही दिया...

"ठीक है.. तुम जल्दी से कपड़े पहनो और अंजलि मेडम के पास जाओ... हम सब ठीक कर देंगे... कुछ सोचते है.." दोनो लड़कियाँ और प्यारी दूसरे कमरे में चली गयी...
राज ने टफ से पूछा," क्या करें भाई... बॅंड बज गया"

टफ ने बेड के सिरहाने से अपना सिर लगाया और सिग्गेरेत्टे सुलगा ली...," मुझे सोचने दो!"

टफ और राज आपस में बात कर ही रहे थे की अंजलि और प्यारी भी उसी कमरे में आ गयी...," अब क्या होगा?" अंजलि के माथे पर चिंता की सिल्वट सॉफ दिखाई दे रही थी... प्यारी भी कम परेशन नही थी... उसकी 'इज़्ज़त' खराब होने का डर उसको भी सता रहा था....
टफ ने सिग्गेरेत्टे बुझाते हुए कहा... "मेरे पास एक आइडिया तो है... पर सफल होगा या नही; इसकी कोई गॅरेंटी नही है...."

"जल्दी बताओ ना!" अंजलि इश्स बात को दबाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी...
"देखो पसंद ना आए तो मत लेना... लेकिन में सीरीयस हूँ... मैने एक इंग्लीश मूवी में ऐसा देखा था..." टफ ने बताने से पहले उनको भरोसे में लेना चाहा...
" अब कुछ बको भी... या पहेलियाँ ही बुझते रहोगे..."राज अपना धैर्या खोता जा रहा था... उसको शिवानी से बहुत डर लगता था...

टफ ने अपना थर्ड क्लास आइडिया उगल दिया..," हम एक खेल खेलेंगे कल रात को जिसमें बारी बारी से सब लड़कियाँ अपने कपड़े उतारती जायेंगी.."
"बकवास करने की भी हद होती है यार! हूमें यहाँ अपने कपड़े बचाने की पड़ी है.. और तुम दूसरी लड़कियों के भी कपड़े उतरने की सोच रहे हो... कुच्छ तो सोचा होता..." राज उसकी बात सुनकर फफक पड़ा....
"पूरी बात सुनोगे या नही?" टफ ने ज़ोर से चिल्लाकर राज को चुप कर दिया...
अंजलि ने भी राज से सहमति जताई," ऐसा कभी हो ही नही सकता... वो गाँव की लड़कियाँ हैं... तुम्हारी ब्लू फिल्म की हेरोइन नही.."

"फिर तो एक ही तरीका है.. बचने का.." टफ अब भी शैतानी कर रहा था... उसका था भी क्या... गाँव में भी जाता तो जाता; ना भी जाता...

"अब क्या है!" सारे उसकी बात सुनकर पक रहे थे...

"स्यूयिसाइड!" उसने कहा और उठकर बाथरूम चला गया...

सभी के दिमाग़ काम करना बंद कर चुके थे... आख़िर उन्होने टफ की ही शरण ली... अंजलि ने प्यार से टफ को कहा," अच्छा तुम पूरा तरीका बताओ!"
"अरे बहुत सारे तरीके हैं... गोली खा लो, फाँसी पर...!"टफ को अंजलि ने बीच में ही रोक दिया.. उसने तकिया उठाकर प्यार से टफ के मुँह पर दे मारा...," वो बताओ; पहले वाला..." अंजलि को लगा, भागते चोर की लंगोटी पकड़ लेनी चाहिए!


"ध्यान से सुनो.. पूरा सुन-ने से पहले अगर कोई बीच में बोला तो में उठकर चला जवँगा.. आज ही ड्यूटी पर... अपना क्या है? एक तो साला तुम्हारे बारे में फोकट में दिमाग़ घिसाओ, उपर से तुम्हारे नखरे भी सुनो.... अगर मंजूर हो तो उन्न छिप्कलियो को भी बुला लो... प्लान को ठीक से समझ कर उसकी अड्वर्टाइज़्मेंट कर देंगी...
प्यारी झट से उठ कर दूसरे कमरे में डरी बैठी उन्न ," छिप्कलियो" को बुला लाई...

तीनों लड़कियों के आने के बाद टफ ने बोलना शुरू किया:

"देखो! हमारे पास इश्स रास्ते के अलावा दूसरा कोई रास्ता नही है की हम सभी लड़कियों को इश्स खेल में शामिल करें.. और जब हमाम में सभी नंगे हो जाएँगे तो फिर किसका डर रहेगा... इसके लिए इन्न लड़कियों का हमारा साथ देना ज़रूरी है... ये अब कमरों में जाकर
बेशर्मी से ये बताएँगी की उन्होने हमसे एक खेल सीखा है... बहुत ही मजेदार खेल... खेल
में धीरे धीरे करके अपने कपड़े उतारने पड़ते हैं.. और जो इश्स खेल में पीछे
रहेगी.. वो हारेगी.. और जिसके कपड़े सबसे पहले उतरेंगे वो इश्स खेल में विजेता होगी...

मुझे पता है उन्हे शुरू में बहुत झिझक होगी.. पर वो सब इनके बाकी लड़कियों को बताने के तरीके पर डिपेंड करता है... और सुबह अंजलि के भासन पर भी....
अंजलि को जब सुना की उसको भी लड़कियों को इश्स बारे में बोलना पड़ेगा तो वो एक दम से टफ को टोकने को हुई.. पर उसको टफ की बात याद आ गयी... बीच में ना बोलने वाली....

टफ का प्लान जारी था...

"सारी नही तो कुछ लड़कियाँ ज़रूर खेलने को तैयार हो जाएँगी... पर हुमको हर एक लड़की को नंगा करना है... इश्स खेल से हमें कम से कम ये तो पता लग ही जाएगा की कौन कौन लड़कियाँ नंगी नही हुई... बस! वही हमारे लिए ख़तरा बन सकती हैं... उनके बारे में बाद में सोचेंगे... हां जो कुच्छ अंजलि को सुबह लड़कियों को कहना है... उससे मुझे विस्वास है की जिन लड़कियों का बदन दिखाने लायक है... वो तो तकरीबन ही तैयार हो जाएँगी... अब तुम तीनो जाओ और खेल का प्रचार शुरू कर दो... उनको खुल कर ये बताना है की इश्स खेल में जो मज़ा है... वो आज तक तुम्हे नही आया... बाकी प्लान में आप को बता दूँगा...
"एक दो तो मेरे कहने से ही तैयार हो जाएगी.." सरिता ने टफ की और देखते हुए कहा..

"अरे हां! जिन लड़कियों के राज तुम तीनो जानती हो उनको तो पहले ही तैयार कर लो ताकि वो भी तुम्हारे साथ दूसरी लड़कियों को खेल के लिए तैयार कर लें.... तुम सबसे पहले उन्ही को मेरे पास लेकर आओ!" टफ ने लड़कियों को जाते हुए रोक कर कहा..

कुच्छ ही देर बाद काई और लड़कियाँ भी उनक 'गेम प्रमोटर ग्रूप' में शामिल हो गयी.... कविता, दिव्या, अदिति, मुस्कान, नेहा; इन्न सबको मिला कर अब कुल 10 लड़कियाँ कमरे में सिर झुकाए खड़ी थी... तीनो ने इन सबको प्यार से या फिर ब्लाकक्मैँलिंग की डर से तैयार कर लिया था गेम में शामिल होने के लिए... सभी कमरे में सिर झुकाए खड़ी थी...

टफ इतनी बड़ी संख्या में लड़कियों को देखकर खुश हो गया... "बस अब हमारा ग़मे सुपेरहित होकर रहेगा..." अब तो सिर्फ़ 34 ही बची हैं..."" तुम क्पडे उतारने के लिए तैयार हो या थोड़ी प्रॅक्टीस चाहिएगी... अभी..."
एक साथ काई लड़कियाँ बोल पड़ी," नही सर! हम तैयार हैं...."

"गुड! अब अंजलि मेडम तुम्हे कल सुबह खेल की आवस्यकता और उसके फ़ायदों के बारे में जानकारी देंगी... जाओ अब सभी अपने अपने रूम्स में इश्स खेल के बारे में बताना शुरू कर दो.. ऑल थे बेस्ट!"

लड़कियाँ चली गयी... जाते ही अंजलि टफ पर बरस पड़ी... "मैं कैसे सबको इश्स बारे में...!"
राज ने अंजलि को बीच में ही टोक दिया.. ," डोंट वरी! मैं बता दूँगा! मुझको ऐसी बातें बताने का बड़ा शौक है.. आगे वो माने या ना माने... वो उनकी मर्ज़ी... " राज अपनी लाइफ में पहली बार इतना सीरीयस हुआ था, लड़कियों की बात पर....


"क्या बोलना है... ये भी बता दो!" राज ने टफ से पूछा...
टफ ने उसको अपने प्लान का थीम बता दिया.. और बाकी खुद सोच लेने को कह दिया..

सब के चेहरे पर निसचिंत-ता सी झलकने लगी थी... कुछ कुछ... प्यारी और अंजलि उठ कर कमरे में चली गयी....
"क्या हो गया यार!" टूर का सारा मज़ा खराब हो गया....
" कुच्छ नही हुआ! सो जा... सुबह देखना कितना मज़ा आएगाअ" टफ ने राज को कहा और करवट बदल कर आँखें बंद कर ली.....

राज की आँखों में नींद नही थी... यही हाल अंजलि का भी था... पर प्यारी को अपने यार पर पूरा भरोसा था.... वो जल्द ही खर्राटे लेने लगी...
तो भाई लोग कैसी लगी ये कहानी कैसी लगी बताना मत भूलना कहानी अभी बाकी है.आगे की कहानी आप गर्ल्स स्कूल--16 मैं पढ़ सकते है.
कहानी अगले पार्ट मैं तब तक के लिए विदा
लकिन दोस्तो कहानी पढ़ने के बाद एक कमेंट दे दिया करो मैं भी खुश हो जाउगा तो फिर देर मत कीजिए अपना कमेंट देने मैं
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11-26-2017, 12:00 PM,
#43
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल--16

सुबह उठे तो सभी लड़कियों में एक अजीब तरह की खलबली मची हुई थी... सभी कानाफूसी में बात कर रही थी... खुल कर नही... लड़कियों ने उनको जिस गेम के बारे में रात को बताया था... हर तरफ उसी का चर्चा था.. एक लड़की कोमल ने अपनी सहेली नीरू को अलग ले जाकर पूछा... यार ये गेम का फंडा क्या है... तू खेलेगी...?
"पागल है क्या?" नीरू ने उसको झिड़कते हुए कहा..." तेरे में अकल है की नही... भला सबके सामने तू कपड़े निकल देगी अपने... मेरे ख्याल में तो वो हमारा ध्यान हटाना चाहते हैं... कल रात हमने जो कुछ भी देखा.. वो कोई खेल था... मुझे तो इतनी शर्म आ रही थी.. देखते हुए भी... कैसे बेशार्मों की तरह 'लोग लुगाई' (हज़्बेंड वाइफ) के जैसे नंगे पड़े हुए थे... ये भी कोई खेल है?
कोमल ने लंबी आ भरते हुए कहा," हां तू ठीक कह रही है... पर क्या तू किसी को गाँव में जाकर कुच्छ बताएगी... यहाँ के बारे में.."

वो बाथरूम में जा चुकी थी. नीरू अपनी सलवार खोल कर पेशाब करने को बैठ गयी... कोमल की नज़र उसकी गोरी जांघों पर पड़ी," तेरी ये कितनी सुंदर हैं..."
"चुप बेशर्म! उधर मुँह कर ले..."

वो दोनो 11थ की लड़कियाँ थी... दोनो सहेलियाँ थी पर कोमल का नज़रिया दूसरा था... वो गेम खेल लेना चाहती थी... पर नीरू के जवाब के बाद उसने अपनी छाती पर पत्थर रख लिया..

उधर सुबह उठते ही टफ ने लड़कियों को बताए जाने वाले खेल का खाका बना कर दे दिया... जिसको राज को अपने शब्दों में लड़कियों को बताना था...," यार ये सब कुछ कहने से लड़कियाँ मान तो जाएँगी ना!"

टफ ने उसके चेहरे के उड़े रंग को देखा और बोला," चल बाहर घुमा कर लता हूँ!"

वो दोनो सुबह सुबह ही होटेल से बाहर चले गये... टफ उसको वाइन शॉप पर ले गया...," टू सिगनेचर्स प्लीज़!"

टफ के हाथ में दारू की बोतल देखकर राज बोला," यार तू ऐसे मौके पर शराब पिएगा?"
टफ ने उसके कंधे पर हाथ रखा," मैं नही तू पिएगा..! चिंता मत कर.. इससे तेरा कॉन्फिडॅन्स बढ़ जाएगा और तू गेम के रूल सबको अच्छी तरह समझा पाएगा...! चल आ...

अपने रूम में बैठकर दोनों ने मिलकर 1 बोतल खींच ली... टफ अक्सर पीता था.. इसीलिए उस्स पर खास असर नही था.. पर बोतल में से क्वॉर्टर पीकर ही राज के रंग देखने लायक थे... तभी कमरे में अंजलि आई... ," य्ये... क्या कर रहे हो तुम...? प्लान का क्या हुआअ?"
राज ने डगमगाती आवाज़ से अंजलि को अपने पास बैठने को बोला... अंजलि कुर्सी को दूर खींच कर बैठ गयी...
" पिलान ये है.. प्लान तो बदल गया है जान... मैं... सोचता हू! ... की हम दोनो अभी यहाँ से... दूर भाग जाएँगे... मैं!.... तुमसे... शादी कर लूँगा... दुनिया... को बकने दो... प्रोमिस!"
इश्स गंभीर हालत में भी अंजलि राज की हालत देखकर ज़ोर से हंस पड़ी...," क्याअ.. .. क्या बक रहे हो?"

"प्रोमिसे जान! आइ लव यू..."
टफ ने अंजलि को वापस भेज दिया...," अबे तुझे ऐसा होने के लिए नही बोला था.." तेरी समझ में आ रही है ना बात!"

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"आ रही है... कमिशनर साहब!.. मैं तो ऐसे ... ही लाइन... मार कर... चेक कर रा था.. अभी ओ.के. है या नही... शादी! शिवानी.. मेरी गांद मार लेगी..!"

टफ को विस्वास हो गया ये अपने आपे में नही है... मामला बिगड़ सकता था.. उसने राज को नाश्ता करके सोने को कह दिया!

राज ने वैसा ही किया...

प्यारी ने 11 बजे लड़कियों को डाइनिंग हाल में आने का टाइम दे दिया.. सुबह के.. उसने बताया की आज कोई ट्रिप नही होगी... आज उनसे कुछ ज़रूरी बातें करनी है... ज़रूरी बात सब लड़कियों को पता थी...

करीब 10:45 पर ही डाइनिंग हाल में सभी लड़कियाँ आ चुकी थी.. सभी एक दूसरे से पीछे बैठने की जुगत में थी... ताकि छुप कर खेल देख सकें... कोई भी उनको खेल का आनंद उठाते ना देख सके... आलम ये था की करीब 100 सीटो में से आगे की आधी खाली थी... और सबसे आगे ये 'खेल' खेल चुकी लड़कियाँ ही बैठी थी... सिर्फ़ निशा को छोड़ कर... निशा को ज़बरदस्ती गौरी ने अपने साथ बिठा लिया... हालाँकि उसने ये खेल खेलने से सॉफ माना कर दिया था...

बीच की चार पंक्तियाँ बिल्कुल खाली थी...

नहा धोकर कुछ हद तक अपने नशे को कंट्रोल कर चुके राज ने दरवाजे से प्रवेश किया... टफ उसके पीछे था और प्यारी उसके पीछे... अंजलि ने आने से मना कर दिया... वो लड़कियों का सामना करने से घबरा रही थी... सभा में सन्नाटा छा गया... राज ने आकर अपनी 'मुख्या वक्ता' की कुर्सी संभाली... टफ उसके पीछे कुर्सी डाल कर बैठ गया... प्यारी दूसरी पंक्ति में जाकर कुर्सी पर बैठ गयी.....

टफ के कहने पर राज बोलने के लिए खड़ा हुआ... अजीब सा माहौल था... इतनी चुप्पी तो राज ने कभी क्लास में पढ़ते हुए भी नही देखी थी...

टफ को किसी भी लड़की के चेहरे से नही लग रहा था की वो खेलने को तैयार होगी... सभी अपना चेहरा छिपाने में लगी थी... कहीं सर उसको पहचान ना लें!

आख़िरकार राज ने बोलना शुरू किया....

"प्यारी सालियो.. अब ये मत पूछना मैं तुम्हे इतने प्यार से साली क्यों पुकार रहा हूँ.... मेरा तुम सब से बड़ा ही गहरा नाता है... तुम्हारी उन्नति के लिए मैं समाज से टक्कर लेने को तैयार हूँ... आख़िर हमारी सरकार पागल नही है जो 'तुम सबको' सेक्स एजुकेशन' देना चाहती है...
अरे मैं तो कहता हूँ

पारो और चंद्र मुखी का नूर आप पे बरसे, हर कोई आपके साथ सोने को तरसे,
आपके जीवन मे आए इतने लड़के,
की अप चड्डी पहेन ने को तरसे..

बिना 'सेक्स एजुकेशन' के तुम्हारा पढ़ना लिखना बेकार है... ऐसा सरकार मानती है... कभी कभी गलियों में से गुज़रते हुए कोई शरारती लड़का तुमको छेड़ देता होगा.. और तुम गुस्सा हो जाती होगी... या फिर घर वालों से उसकी शिकायत कर देती होगी... पर तुमने ध्यान दिया होगा... ना चाहने पर भी तुम नीचे से गीली हो जाती होगी.... ऐसा क्यूँ होता है?

तुमने देखा होता... बचपन में मम्मी पापा तुम्हे भरी दुपहरी में खेलने भेज देते होंगे.. या फिर 1 रुपय्या देकर पप्पू बानिए के पास भेज देते होंगे... और जब तुम कभी जल्दी वापस आ गयी होगी तो दरवाजा बंद मिला होगा... या कभी वो ग़लती से दरवाजा बंद करना भूल गये होंगे तो अचानक तुम्हारी मम्मी ने पापा को अपने उपर से फैंक कर कहा होगा," देखो मुनिया! बाहर मामा आया है.... वो क्या है?
तुम्हारे रात को सोने के बाद कभी कभी नींद खुल जाने पर मम्मी पापा को तुमने लड़ते देखा होगा. मम्मी कहती होगी," अब तुझमें वो बात नही रही!" और पापा गुस्से में पूरा ज़ोर लगाकर कहते होंगे," साली ! तुझे तो छोटे में बात नज़र आती है.." ऐसा क्यूँ होता है...
थोड़ा और बड़ा होने पर तुमने देखा होगा... तुम्हे काका की गोदी में बैठने में मज़ा आता है... तुम्हे साइकल की गद्दी पर बैठने में मज़ा आता है... तुम्हे पेशाब करते वक़्त नीचे देखने में मज़ा आता है... तुम्हे लड़कों से अपनी चोटी पकड़ कर अपनी और खेल खेल में ही खीँचवा लेने में मज़ा आता है... ऐसा क्यूँ है...?

तुमने देखा होगा.... और बड़ा होने पर जब तुम्हारी छातियाँ तुम्हारे कमीज़ में से उभरने लगी होंगी तो मम्मी ने कहा होगा," बेशर्म चुननी ले लिया कर... ... लड़कों को तुमने तुम्हारी छातियों में कुछ ढूंढते पाकर तुमको शर्म आई होगी... और हां! लूका छिपी खेलने के बहाने जब तुम जान बुझ कर ठिंकू की गोद में 'ग़लती से बैठ जाया करती होगी... और वो 'ठिंकू' फिर तुम्हे आसानी से उठने नही देता होगा... तुमने महसूस किया होगा.. हर लड़का तुम्हे ही क्यूँ इतने अंधेरे में ढूँढ लेता है.. और दूर से 'आइ स्पाइ' कहकर तुम्हे आउट करने की बजे तुमसे हाथ लगवाकर दोबारा बारी देने चला जाता होगा... ऐसा क्यूँ है?

थोडा और बड़ा होने पर अचानक एक दिन साइकल चलाते हुए तुम बिना चोट लगे ही नीचे से घायल हो गयी होगी... और मम्मी ने कारण बताने की बजाय एक कपड़ा वाहा थूस कर कह दिया होगा," अब तू बड़ी हो गयी है...!" पापा ने तुम्हे तुम्हारे साथ साथ ही आँख मिचौनी खेल खेल कर बड़े हुए ठिंकू से ज़्यादा बात ना करने को कहा होगा... ऐसा क्यूँ है.....?
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11-26-2017, 12:00 PM,
#44
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
टफ की आँखें लगातार राज को हैरत से देख रही थी... ये क्या बोलने लग गया... ! ऐसा तो उसने कुछ नही कहा था...उसने राज शर्मा का ऐसा रूप पहली बार देखा था
सारी लड़कियाँ इश्स तरह से राज को बोलते हुए ध्यान से सुन रही थी की जैसे ये कोई सेक्स क्लास नही बल्कि किसी साधु महात्मा का प्रवचन चल रहा है... और उनसे बड़ा भगत उस्स का कोई नही है...

शराब में टन साधु महात्मायानी अपने राज शर्मा का प्रवचन जारी था......

तुमने महसूस किया होगा... तुम्हारी उमर बढ़ने के साथ ही तुम्हारी छातियों में मिठास सी भरने लगी होगी! और ये मिठास तुम्हारी गली के भंवरों को तुम्हारे आते जाते, उठते बैठते, पानी लाते और गाँव के बाहर तालाब पर कपड़े ढोते अपनी और खींचती होगी... तुम्हे महसूस किया होगा... तुम्हे भी ये सब अच्छा लगने लगा होगा... कभी गाँव के लड़के ने तुम्हारे रास्ते में पर्ची फैंकी होगी... तुमने इधर उधर देखकर पर्चो उठाकर पढ़ा होगा... किसी को मत बताना... आइ लव यू... ! और जब तुम पढ़कर मटकती हुई आगे चली गयी होगी तो उसने सीटी बजकर तुम्हे थॅंक्स बोला होगा... फिर अगले दिन उसी जगह उसने पर्ची में समय और स्थान लिख दिया होगा... मिलने का... वो क्यूँ मिलना चाहता है... अलबत्ता तो बापू के डर से तुम गयी ही नही होगी... और चली गयी होगी तो तुम्हे पता लग चुका होगा... उसने क्यूँ बुलाया था...
जाने ऐसे कितने ही 'क्यूँ' हैं जो तुम्हे टेन्षन में डाले रखते हैं...जाने ऐसे कितने ही क्यूँ हैं जिनका जवाब तुम चाह कर भी नही ले पाती... बस घुट-ती रहती हो... मान ही मान में... पढ़ भी नही पति... और बच भी नही पति और.... पूच भी नही पाती....

सरकार को पता है.. तुम घर वालों से नही पूछ सकती.... सरकार को पता है... इन सबसे ग़ुजरकर देखे बिना तुम पढ़ भी नही पाती... सरकार को पता है.... ये एजुकेशन तुम्हारे लिए कितनी ज़रूरी है... सरकार को सब पता है.....

अब खुल कर बात बिना झिझक दूर किए नही हो सकती... और झिझक दूर करने के लिए ही सरकार ने तुम्हे यहाँ घूमने आने के लिए आधा खर्चा दिया है... और ये जिम्मा हमारा है की हम तुम्हारी झिझक तोड़ कर तुम्हे उन्न सब सवालों के खुल कर जवाब दें... सरकार ऐसा चाहती है... सरकार पागल नही है... सरकार बहुत समझदार है... तुमको सेक्स एजुकेशन देना चाहती है.....

सरकार बहुत अच्छी है....

सारा समा बँधा हुआ था... लड़कियों को ये अहसास होने लगा था की सरकार बहुत अच्छी .... उनके भले के लिए ही उनको यहाँ इतनी दूर भेजा है... सीखने के लिए... घरवालों से दूर... उनको लगने लगा था की 'जिस सेक्स एजुकेशन पर आजकल बवाल मचा हुआ है .. वो यही है जो रात को राज और टफ मॅडमो और उन लड़कियों को दे रहे थे... पर जैसे ही कपड़े निकालने वाले गेम का ध्यान उनको आता.. वो शर्मा कर सिमट जाती... ऐसा कैसे हो सकता है....?


राज का बोलना बिना रुके जारी था.......
चलो मैं तुम सबको एक चुटकुला सुनता हूँ


1--दो दोस्त कार से जा रहे थे.
अचानक कार के सामने एक बिल्ली आई.
कार चलाने वाले ने जम के गली दी........."तेरी मा की चूत"
दूसरा तुरंत बोला..."अरे चूत से याद आया भाभिजी कैसे हैं.?
अब ये बताओ गाली दी किसको ओर याद आई किसको



2-दो रंडी सहेली होती है।

एक बार छोटी रंडी के पास एक आदमी आता है और उसकी गांड मारता है।

खुब ज़ोर से याहन तक कि उसकी गांड फट जाती है।

छोटी रंडी : लाओ 5000 रुपये।

आदमी : तुमहारा रेट तो 2500 है।

छोटी रंडी : 2500 चुदवाने का और 2500 सिलवाने का।

रात को वो बडी रंडी को ये बात बताती है। मगर बडी रंडी की गांड पहले से फटी थीं। तो वो अपनी गांड मैं बम रख लेती है।


एक पठान उसकी गांड मारने आता है। गांड मारने के दोरान बम फट जाता है।

वो खुश होकर बोलती है : लाओ 5000 - 2500 गांड मारने के और 2500 सिलवाने के।


पठान उसकी शकल देखता है और कहता है : खोशि हम तुम को 10,000 देगी - पहले ये तो बताओ हमारा लौडा कहाँ गिया।

टफ ने राज को ट्रॅक से उतरते देख उसके पिच्छवाड़े पर लात मारी... लात खाते ही राज ट्रॅक पर वापस आ गया....
पर ये एजुकेशन लेना सब के बस की बात नही... जो पढ़ना चाहती हैं और आगे बढ़ाना चाहती हैं उनको हमारे साथ एक गेम खेलना होगा... सभी लड़कियाँ गेम में हिस्सा लेंगी... जैसा की हमारी स्काउट्स ने आपको बताया होगा, गेम में कपड़े उतारने पड़ेंगे... ज़रूरी नही है की गेम में हिस्सा लेने पर सबको ही कपड़े उतारने पड़ेंगे... जो ना चाहे.. वो आउट हो सकती है... और जो सीखना चाहे पूछना चाहे वो अपना एक वस्त्रा उतार कर अपनी झिझक दूर होने का सबूत दे सकती है... आगे तुम्हारी मर्ज़ी... पर सरकार का नारा है.... अगर एक भी लड़की छूट गयी; समझो छतरी टूट गयी!


लड़कियाँ हैरान थी; उन्होने ये तो सुना था की "एक भी बच्चा छूट गया.. सुरक्षा चकरा टूट गया.." अमिताभ बच्चन के मुँह से, पोलीयो प्रचार की आड में... पर ये नारा तो उन्होने पहली बार सुना... अपने सर के मुँह से... कुच्छ लड़कियों ने सोचा...," सरकार का गुप्त अभियान होगा... मम्मी पापा से बचाकर लड़कियों को सिखाने का.... इसीलिए तो टी.वी. पर नही आता.....
राज ने गेम के रूल बताने शुरू किए...

"गेम रात को 10 बजे के बाद खेला जाएगा... सभी लड़कियों को यहीं आना है... डाइनिंग हाल में... उसके बाद लकी ड्रॉ से सभी लड़कियों के 4 ग्रूप बनाए जाएँगे... चारों ग्रूप अलग अलग बैठेंगे... हर ग्रूप में ग्यारह लड़कियाँ होंगी... एक बार एक ग्रूप हमारे पास आएगा... सभी ग्यारह लड़कियाँ अपना अपना सवाल लेकर आएँगी... ग्रूप में से जो लड़की ना आना चाहे वो अपने स्थान पर ही बैठी रहेगी... बाकी ग्रूप की लड़कियाँ अपना अपना सवाल एक पर्ची पर लिख कर लाएँगी... उन्न पर्चोयोँ में से मैं बिना देखे एक पर्ची उठवँगा... जिसकी पर्ची निकली... उसको छोड़ कर बाकी लड़कियों को अपना एक कपड़ा शरीर से उतारना होगा... और जिस लड़की की पर्ची निकलेगी, उसके सवाल का जवाब दिया जाएगा... जो लड़की ग्रूप में बाकी सभी लड़कियों के नंगी होने पर ज़रा सी भी ढाकी बची रहेगी... उसको इनाम दिया जाएगा... हर ग्रूप का इनाम अलग अलग होगा.... लास्ट की चार लड़कियों को उनकी मनपसंद ड्रेस खरीद कर दी जाएगी... तभी कोमल ने राज को टोक दिया," मगर सर... प्यारी मेडम ने तो कहा था.. जो सबसे पहले... मतलब.. वो हो जाएगी... उसको इनाम देंगे!"
"देखा! कितनी शरमाती हो.. ये 'वो' क्या होता है?" राज ने कोमल से पूछा... पर कोमल का चेहरा शर्म से लाल हो गया... पास बैठी नीरू ने उसका सूट पकड़ कर नीचे खींच लिया..

"ऐसा है साली साहिबाओ! पहले वही प्लान था... पर भाई... हाफ हार्टेड ने उसको सेन्सर कर दिया... इसीलिए... प्लान हमने चेंज कर दिया...

बाकी तुम्हारी मर्ज़ी... सब 10 बजे यहाँ आ जाना... अब जाकर सोचो... आगे बढ़ाना चाहती हो या... घुट घुट कर मरना...

कहकर राज डाइनिंग हाल से बाहर निकल गया.. जाते ही टफ ने राज की पीठ थपथपाई.. "आबे! तू तो पूरा गुरु घन्टाल निकला! ये प्लान तूने कब बनाया...

"पता नही! पर नशा उतरने पर मुझे समझा देना, की गेम कैसे खेलना है.. और उसके क्या क्या रूल हैं...

राज जाते ही गद्दे पर गिर पड़ा... टफ उसको अचरज से देख रहा था...!

लड़कियों का दिमाग़ चक्राया हुआ था... उन्हे दिल्चस्पि सेक्स एजुकेशन में नही थी... बड़ी लड़कियों में से तो काइयों को राज के हर 'क्यूँ' का जवाब 'प्रॅक्टिकली' पता था.... पर वो भी सेक्स एजुकेशन के इश्स गेम के बहाने अपनी 'मस्त हसरत' पूरी करें या नही... इश्स असमन्झस में थी... और छोटी अनचुई कलियाँ उनकी ही और देख रही थी... यहाँ अगर कोई उनको नंगे नाच से रोक सकता था तो सिर्फ़ समझदार लड़कियाँ.. जिन्होने दुनिया देख रखी थी.. और जो उन्न छोटियों को यादा कदा छोटी मोटी सेक्सी बात बता कर मस्ती से भर दिया करती थी... पर यहाँ तो वो ही खुद असमंजस में थी.. दूसरों को क्या समझायें... सभी एक दूसरी से उसकी राय पूच्छ रही थी.. पर जवाब कोई नही दे रहा था...
छोटी लड़कियों की लीडर दिव्या थी... वो उनको बुर्गला रही थी," मज़े बहुत आते हैं... मुझे पता है... मैने अपने मामा के स्कूल में ये गेम खेला था एक बार..!
" पर दिव्या! इन्होने घर बता दिया तो?"

"कोई नही बताएगी, जो नही खेलेगी, सर उसको फैल कर देंगे! और फिर सोच! इनाम में ड्रेस भी तो मिलेगी..."

"हूंम्म... मैं अदिति दी से पूछ आऊँ...."
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11-26-2017, 12:00 PM,
#45
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
अदिति तो राज के साथ दिव्या की पार्ट्नर रह चुकी थी... वो सीधी उसके कमरे में पहुँची.. वहाँ पर 7-8 लड़कियाँ बैठी थी... अदिति उनको कॉन्विएनसे करने की कोशिश कर रही थी... ," बाकी तुम्हारी मर्ज़ी! पर सर ने मुझे बताया था... जो भी गेम खेलेगी... उसको अलग से फाइनल में नंबर. दिए जाएँगे... " राज की सेक्सी स्काउट्स अपने आप ही अलग अलग तरह के प्लान बना बना कर बता रही थी...

नीरू वही बैठी थी," जा तू ले लेना अलग से नंबर... बड़ी आई सर की चमची... अरे हम क्या कोई बछियाँ हैं जो ऐसे झूठे लोलीपोप के लालच में आ जाएँगी.. "
पर सुरसुरी उसके बदन में भी होने लगी थी... पर गाँव में उसकी इमेज एक शरीफ लड़की की थी.. और वा उसको तोड़ना नही चाहती थी... पर उसके बोलने का लड़कियों पर असर हो रहा था...

जो खेलना चाहती थी... वो भी पीछे हट रही थी... नीरू की वजह से...
दिव्या ने अदिति को बाहर बुलाया... उसकी छोटी बहन स्वाती उसको एक तरफ ले जाकर बोली," "दीदी! क्या करना है..."
"चल तू अपने कमरे में... अपने आप पता चल जाएगा..." अदिति ने स्वाती के सिर पर हाथ फेरा....
" पर आप मम्मी को तो नही बताओगे ना?" स्वाती को बस इसी बात का डर था...

"मैने कहा ना तू जा... अगर बाकी खेलेंगे तो तू भी खेल लेना....

अदिति ने अपनी रिपोर्ट जाकर राज को दी," सर एक दो लड़कियाँ तैयार हो भी रही हैं तो उनको वो नीरू भड़का रही है....

राज ने नीरू को उसके पास भेजने को कहा.. उसस्पर से नशे का शुरूर अभी तक उतरा नही था...........

राज ने टफ को दूसरे कमरे में भेज दिया... कुछ देर बाद नीरू आई... ," यस सर!" वो नज़रें चुरा रही थी!"

काफ़ी देर बाद तक भी जब राज कुछ ना बोला तो उसने राज की तरफ देखा... वो उसकी चूचियों को घूर रहा था... नीरू ने तुरंत अपनी चुननी ठीक की....
राज ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा," मेरी तरफ देखो नीरू!"
बार बार कहने पर नीरू ने राज से नज़रें मिलाई..," तो तुम गेम में पार्टिसिपेट नही करना चाहती!"
"नही सर!" नीरू का जवाब सटीक था...!"
"क्यूँ?"
"सर! ये ग़लत चीज़ होती है...!" उसने काँपते अधरों से शर्मा कर जवाब दिया..
"अच्छा! तुम्हे किसने बताया?"
"मुझे पता है सर....!" सर के सामने उसके विरोध में वो बात नही थी जो वो लड़कियों के सामने कर रही थी...
"अच्छा! तुम्हे पता है... तो ये बताओ... अगर मैं अभी तुम्हे छू लूं तो तुहे कैसा लगेगा और क्यूँ लगेगा?"
नीरू की ज़ुबान अटक गयी...सर के छू लेने का मतलब वो समझ रही थी..," पता नही सर!" उसकी आवाज़ गले से बाहर मुश्किल से आ पाई...
"इधर आओ! मैं बताता हूँ..."
नीरू हिली तक नही.. बल्कि थोड़ा सा पीछे हट गयी... राज उसके पास चला गया... वो डर के मारे काँप रही थी... जैसे ही राज ने उसका हाथ पकड़ा... वो सिहर गयी...," नही सर!"
राज उसका हाथ छोड़ कर बेड पर चला गया," क्या अभी तक ऐसे तुम्हारा हाथ किसी ने नही पकड़ा है...?"
"पकड़ा है सर!"
"तो क्या तुम हमेशा ऐसे ही काँप जाती हो..!"
नीरू ने ना में गर्दन हिला दी!

"तो अभी ऐसा क्यूँ किया...?"
नीरू के पास कोई जवाब नही था....

"दट'स व्हाट वी आर ट्राइयिंग टू मेक यू लर्न, डर्टी बिच!" वॉट डू यू हेल थिंक ऑफ उर्सेलफ" राज नशे में था... वा कुछ भी बके जा रहा था... नीरू डर के मारे काँप रही थी...
"सॉरी सर!"
"वॉट सॉरी? आंड वॉट डू यू वॉंट टू बी... आर यू नोट ए गर्ल?"
"यस सर!" नीरू को लगा जैसे वो बहुत ही ग़लत कर रही थी लड़कियों को भड़का कर..," सर, मैं अब ऐसा नही करूँगी!"

राज रास्ते पर आया देख नरम पड़ गया," तो क्या तुम खेलोगी?"
उस्स वक़्त तो हां करने के सिवा कोई रास्ता ही नही था..," यस सर!"
"ठीक है, तो कपड़े उतारो!"
"सर क्या?"
"तो अब तुमको मेरी आवाज़ भी नही सुनाई दे रही.."
नीरू ने राज की आँखों में एक वाहसी पन सा देखा... उसने अपनी चुननी उतार दी!
"अपनी कमीज़ उतारो!"
नीरू अपनी कमीज़ उतारते हुए रो रही थी... उसके आँसू थमने का नाम नही ले रहे थे...
अब उपर उसकी ब्रा के सिवाय कुछ नही था... वो बुरो तरह अपना मुँह अपने हाथों से ढके रो रही थी...

राज फिर से उसके पास गया... वो पिछे हट-ती हुई एक कोने से जाकर चिपक गयी... ये उसकी हद थी... पीछे हट-ने की!
राज ने उसके हाथ हटाकर गालों पर हाथ रख दिया.. फिर उसके होंटो पर... उसके नरम पतले गुलाबी होन्ट भी आँसू में भीगे हुए थे... पर अब उसकी आँखें बंद होकर 'जो होना है; वो तो होगा ही' के अंदाज में निस्चल हो गयी... उसका सुबकना बंद हो गया...
जैसे ही राज का हाथ उसकी गर्दन से नीचे आया.. उसने राज का हाथ पकड़ लिया... पर हटाया नही...
राज ने अपना हाथ हटाने की कोशिश की पर नीरू ने हाथ कस कर पकड़ लिया... उसके भाव बदल चुके थे...
राज ने दोबारा कोशिश की तो नीरू ने हाथ.. और भी कसकर पकड़ लिया, और अपनी छाती की और खींचने लगी... ," सॉरी सर!"
"मेरा हाथ छोड़ो! राज ने गुस्सा दिखाते हुए कहा..."
नीरू ने हाथ छोड़ दिया और अपनी छतियो को हाथों से ढके, आँखें बंद किए... दीवार से सटी रही...
"मैं ये सिखाना चाहता था तुमको! अगर ग़लत होता है तो भगवान ने इसमें इतना मज़ा क्यूँ दिया है... इसीलिए हम इंडियन आज तक उभर नही पाए... चलो निकलों यहाँ से.... नीरू ने अपना कमीज़ पहना और बे-आबरू सी होकर निकल गयी..... कमरे से...
दोस्तो मैं तो कहता हूँ आदमी के देखने नज़रिए पर निर्भर करता है की क्या सही है क्या ग़लत है चलिए
इसी बात पर एक शेर अर्ज़ करता हूँ
अर्ज़ किया है ...

निगाहों से निगाहें मिला कर तो देखो ...

कभी किसी लड़की को पटा कर तो देखो ....

हसरतें दिल में दबाने से क्या होगा ....

अपने हाथों से "बॉल" दबा कर तो देखो ....

आसमान सिमट जाएगा तुम्हारे आगोश में....

लड़की की टाँगें फैला कर तो देखो ...

ये ना कर सके ...तो हारना नहीं ....

दो बूँदें ज़रूर गीरेंगी ....

अपने लॅंड को हिला कर तो देखो

तो भाई लोगो कहानी अभी बाकी है
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11-26-2017, 12:01 PM,
#46
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
शिव किसी ख़ूँख़ार भेड़िए की तरह मुस्कुरा रहा था... शिकार करना वो जनता था... शिकार उसके सामने था.... किचन में... उसने धीरे से ओम के कान में कहा," सिर्फ़ ट्राइ करते हैं... मान गयी तो ठीक है... वरना अपना क्या बिगड़ लेगी...."
"नशे में नही होता तो ओम कभी भी उसको इश्स बात की इजाज़त नही देता... पर जाने क्या बात होती है शराब में... आदमी 2 घंटे बाद क्या होगा, ये भी भूल जाता है..," तू मरवाएगा यार..! कहकर वो फिलम देखने लगा.. हीरो की बेहन ने कुए में कूद कर जान दे दी.....

शिव सोफे से उठकर किचन की और गया...और दरवाजे पर खड़ा हो गया... अपने साथ होने जा रही वारदात से अंजान शिवानी कुछ गुनगुनाती हुई सी रोटियाँ सके रही थी... पसीने के कारण उसकी नाइटी पूरी तरह भीग गयी थी... उसके चूतदों का गड्रयापन उसकी नाइटी के नीचे पहनी हुई उसकी पनटी के किनारों के अहसास के साथ सॉफ झलक रहा था... टी.वी. का वॉल्यूम उतना ही था... जितना शिवानी ने कर दिया था... फुल! शिव उस्स पर किसी बाज की तरह से झपटा... शिवानी कसमसा कर रह गयी... शिव का एक हाथ उसके मुँह पर था... और दूसरा उसके पेट पर... शिवानी के गले से आवाज़ निकालने ही ना पाई... शिव ने उसको उठाया और उसी के बेडरूम में ले गया... दरवाजे की कुण्डी लगाई... और शिवानी को बेड पर लेजाकार पटक दिया.....

उसकी हाव भाव देखकर शिवानी की ये कहने की भी हिम्मत नही हुई की आख़िर कर क्या रहा है... वा सब समझ गयी थी.. शिव नीचे खड़ा मुस्कुरा रहा था...

अचानक ही दरवाजे पर दस्तक हुई... शिवानी उठकर दरवाजे की और भागी... पर वहाँ तक पहुँच ना पाई... शिव के हाथों में जकड़ी ज़ोर से चिल्लाई," बचाअओ!"
पर बचाने वाला कोई ना था... हां शिव को समझने वाला तो था... ओम! पर वो भी एक बार दरवाजा थपथपा कर वापस चला गया... जब दरवाजा नही खुला..!
शिव शिवानी के उपर गिर पड़ा... उसको नोचने लगा... वो चिल्लती रही... शिव ने उसकी नाइटी गले से पकड़ी और खींच दी... नाइटी चीरती चली गयी... शिवानी की चूचियाँ अब नंगी थी.. उसने अपने आप को समेटने की कोशिश करी... शिव ने उसके दोनो हाथ पकड़े और पीछे करके एक हाथ से दबा लिए...

शिवानी चिल्ला रही थी... अपने पैर चला रही थी.. खुद को बचाने के लिए... शिव उठकर उसकी जांघों पर बैठ गया...
ठीक उसकी योनि पर... हाथ शिव के काबू में होने की वजह से शिवानी असहाय हो गयी... भला 22-23 साल की 35 साल के आगे क्या बस चलती..... उसने शिव की कलाई को ज़ोर से अपने दाँतों के बीच ले लिया.. और लगभग उसकी खाल को काटकर अलग ही कर दिया...
शिव के क्रोध का ठिकाना ना रहा... उसने झुक कर शिवानी के गाल को काट खाया... उसी जालिम तरीके से... शिवानी का दिल और दिमाग़ काँप उठे... इश्स दर्द को महसूस करके.. उसने अपने दाँत हटा लिए.... समर्पण कर दिया...

पर इश्स समर्पण से शिव संत्ुस्त नही था... उसने थोड़ा पीछे होकर शिवानी की जांघों के बीच हाथ दे दियाअ....
शिवानी ने एक आखरी कोशिश और की... अपनी अस्मत बचाने की... उसने ज़ोर लगाकर निसचिंत से हो चुके शिव को पिछे धक्का दे दिया... शिव बेड से पिछे जा गिरा...

शिवानी उठने को भागी... पर उठते हुए उसकी नाइटी में उसका घुटना आ फँसा और वो मुँह के बाल आ गिरी... चोट सीधी शिव द्वारा कटे गये उसके गाल पर लगी... शिवानी दर्द से तिलमिला उठी...
शिव को उठ ने में कम से कम 1 मिनिट लगा.. पर तब तक शिवानी ना उठ पाई...
अब शिव ख़ूँख़ार हो चुका था... उसने लगभग हार चुकी शिवानी को आधा बेड पर गिरा दिया... शिवानी के घुटने ज़मीन से लगे थे... उसके दोनो हाथ पीछे शिव के हाथों में थे.. पैरों को शिव ने अपने घुटने से दबा दिया... बेड के कोने पर शिवानी का वो भाग था जिसको शिव भोगना चाहता था....

शिव ने उसकी नाइटी उपर खींच दी... और पॅंटी नीचे...
शिवानी असहाय सी हीरो की बेहन की तरह सिसक रही थी... उसकी आँखों के आगे आँधेरा छाया हुया था....


शिवानी की योनि के कटाव को देखकर शिव एक हाथ से अपने को तैयार करने लगा...

और तैयार होते ही उसने अपनी हसरत पूरी कर दी... शिवानी मानसिक दर्द से तिलमिला उठी.... उसकी चीत्कार सुनकर ओम फिर दरवाजे पर आया," शिव भाई... ज़बरदस्ती नही... तुमने बोला था....
शिव को गुस्सा आ गया अपने कुत्सित आनंद में विघन पड़ते देखकर... और ये सब शिवानी की चीखों की वजह से हो रहा था....
शिव ने अपना मोटा हाथ शिवानी के मुँह पर रख दिया... शिवानी का सब कुछ घुट गया....
शिव धक्के लगाकर अपनी वासना की पूर्ति करने लगा... धीरे धीरे शिवानी का विरोध कम होता होता बिल्कुल ही बंद हो गया... अब वो चिल्ला नही रही थी...

शिव जब अपनी कुत्सित वासना शांत करके उठा... तो शिवानी ना उठी... वा नीचे गिर पड़ी... धदाम से...

शिव ने उसकी छाती पर हाथ रखा.. वो खामोश हो चुकी थी... शिव के हाथ के नीचे उसकी साँसों ने दम तोड़ दिया...

शिव अपना सिर खुजाता हुआ बाहर आया... उसकी समझ में नही आ रहा था की क्या करे... उसकी नज़र टी.वी. पर गयी... हीरो... उस्स सरदार को उसके कर्मों का फल दे रहा था...
शिव डर गया... उसने ओम को सब कुछ बताया... ओम के हाथ पैर फूल गये....

करीब 1 घंटे बाद उनकी कार गेट से निकली और गायब हो गयी.... शिवानी की लाश लिए.
ओर उधर
मनाली में करीब 8:00 बजे टफ ने नीचे जाकर मॅनेजर को 1000 रुपए का नोट दिया... और 8:30 बजे तक उपर खाना लगाने का आदेश दिया.... और उसके बाद किसी को भी उपर ना आने देने के लिए कहा.... मॅनेजर ने खुशी से नोट अपनी जबे में डाला और साहब को इनायत बखसने के लिए धन्यवाद दिया...उसको तो 10:00 बजे निकलना ही था... होटेल का हाउस फुल होने की वजह से कस्टमर की तो उम्मीद थी ही नही... उसने रूम सर्विस देने वेल अपने एक मात्रा वेटर को बुलाया और सब समझा दिया....
उसके बाद वा होटेल के किचेन में गया... खाना उसके कहते ही बन-ना शुरू हो गया था...
राज ने केमिस्ट की दुकान से लाई गयी कुछ नशे की दवाइयाँ उसको दे दी थी.... खाने में मिलाने के लिए... टफ ने वैसा ही किया... और 500 का नोट वेटर को दे दिया.... ," शाब! क्या मामला है... आज क्या कुछ बड़ा हाथ मारना है.."
राज ने उसके गाल पर एक ज़ोर का तमाचा दिया.... कुक सब समझ गया," सॉरी, शाब! मैं तो ऐशी पूछ रहा था...

उसके बाद टफ वापस आ गया... आज वह पहली बार किसी के कहे पर चल रहा था... पता नही राज का दिमाग़ अचानक कैसे चलने लगा था....

प्यारी ने नीरू को बुलाकर कहा... आज खाना जल्दी खाना है.... उसके बाद तैयार हो जाना... सेक्स गेम के लिए...!

जैसे जैसे सबने डिन्नर शुरू किया... नशे की गोलियाँ अपना रंग दिखाने लगी... लड़कियों को आज स्वाद कुछ अजीब लग रहा था... पर आज तो सभी कुछ अजीब सा हो रहा था... इसीलिए... गेम की चिंता में डूबी लड़कियाँ.. आपस में ख़ुसर फुसर करते करते खाती रही.....

खाने के करीब 15 मिनिट बाद उनके हाव भाव में परिवर्तन आना शुरू हो गया... उनकी एक दूसरी से बात करते हुए झिझक कम होती जा रही थी... कोमल ने नीरू से कहा," क्या तू सच में गेम में हिस्सा लेगी..."
नीरू हँसने लगी," जो वाआअदाअ कियाअ है वो निभाना पदेयययगाअ.. हमनेययय बुलायाअ तुमको आआना पड़ेगाअ...!" जब सबसे ज़्यादा अपनी इमेज का ख्याल रखने वाली समझदार नीरू का ये हाल था... तो दूसरों के तो कहने ही क्या थे... अब उनमें इश्स बात पर बहस होने लगी थी की आज के कॉंटेस्ट में प्राइज़ कौन जीत सकता है...!"
"एक दूसरी लड़की अनिता सबको अपना आइडिया बता रही थी," मैं तो चार चार सूट पहन कर जवँगी... फिर कोई मुझे कैसे नंगा करेगा...!" और लड़कियाँ हंस पड़ी... उन्न पर गोलियों का शुरूर छा गया था...! सब लड़कियाँ बारी बारी से बाथरूम में जाती और देख कर आती की वो नंगी होने पर भद्दी तो नही लगेंगी... हर तरफ हँसने गाने की आवाज़ें गूंजने लगी... शरम हया होटेल से कहीं दूर जा चुकी थी... सारा होटेल ही जैसे किसी बहुत ही शानदार फेस्ट की तैयारी कर रहा था...
करीब 9:30 बजे... टफ ने ड्राइवर और कंडक्टर को बुलाया..," हां साहब! बताइए... वो अभी तक इश्स बात से अंजान थे की वहाँ क्या कुछ होने वाला है...
"ये पाकड़ो अपना किराया... और यहाँ से फुट लो!" टफ ने अपनी रौबिली आवाज़ में कहा..
"क्यूँ जनाब! हमसे कोई ग़लती हो गयी क्या?" ड्राइवर ने पूछा...
" वो हम शायद कुछ दिन और रुकेंगे! तुम चले जाओ!"
"पर जनाब! हूमें कोई काम नही है... हम रुक जाएँगे..." हसीन परियों के बाजू वाले कमरों में कौन नही रहना चाहता... धंधा अपनी मा चुडवाए...
"तुमसे कह दिया ना... अभी चल दो.. सुबह तक पहुँच जाऊगे.. या दूसरे तरीके से समझना पड़ेगा!"
" ठीक है जनाब, हमें पूरा किराया मिल गया.. हमें और क्या चाहिए..." दोनो को पता चल चुका था की ये भिवानी मैं सब इनस्पेक्टर है... वो चुप चाप वहाँ से खिसक लिए...

करीब 9:45 पर प्यारी देवी ने सभी लड़कियों को उपर डाइनिंग हाल में बुलाया," सुनो लड़कियो! इश्स खेल का नियम है की कोई भी लड़की 4 से ज़्यादा कपड़े अपने सरीर पर नही डालेगी... सिर्फ़ तुम्हारी ब्रा, पनटी, कमीज़ और सलवार के अलावा कुछ नही होना चाहिए.... हां कम चाहे तो पहन सकती हो... याद रखना... जो ग्रूप में सबसे पहले अपने कपड़े उतार देगी.. वही विजेता होगी... अभी तुम जाओ और तैयार होकर जल्दी आ जाओ....

करीब 10:15 पर राज और टफ ने डाइनिंग हाल में प्रवेश किया... लगभग सभी लड़कियाँ अपनी सीटो पर कब्जा जमा चुकी थी.... सुबह तक जो लड़कियाँ... सबसे पीछे वाली से भी पीछे बैठने की जुगत में थी.. अब उनमें आगे बैठने की कसक थी...

कुछ ही देर बाद गौरी और अंजलि ने प्रवेश किया... गौरी लड़कियों में जाकर बैठ गयी.. अंजलि टफ की बराबर में जाकर बैठ गयी... उसने भी वही भोजन किया था जो लड़कियों ने किया था... गौरी लगातार टफ को घूरे जा रही थी... पता नही क्या ढूँढ रही थी...

राज रेफ़री था... आगे आया और बोला.. इन्न पर्चियों में सबके नाम लिखे हैं... अब कोई एक लड़की आए और इनको 11-11 में बाँट कर 4 ढेरी बना दे... उसके बाद हम खेल शुरू करेंगे...
लड़कियों के बीच से नीरू उठ कर आगाई... वो राज के पास जाकर ऐसे मुस्कुराइ जैसे उसको दिन वाली बात याद दिला रही हो... जब उसने राज का हाथ अपनी छातियों पर ही पकड़ लिया था...
नीरू ने बंद पर्चियों को अलग अलग करके 4 ग्रूप्स में बाँट दिया... राज ने एक ग्रूप की पर्चियाँ उठाई... सभी लड़कियाँ अपना अपना ग्रूप जान-ने को बेचैन थी... बिना बात ही... नंगा तो सभी को होना था...
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11-26-2017, 12:01 PM,
#47
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
सभी के ग्रूप घोसित कर दिए गये... निशा सरिता के ग्रूप में आई थी... गौरी.. और नीरू का दूसरा ग्रूप था... कोमल, अदिति, तीसरे ग्रूप में थी... स्वाती, और मुस्कान और नेहा का नंबर चौथे ग्रूप में पड़ा था... हर ग्रूप में 11 लड़कियाँ थी... हर लड़की का चेहरा लाल हो चुका था.. और तकरीबन सभी.. जीतना चाहती थी...

पहले ग्रूप को बुलाया गया... सभी 11 लड़कियाँ स्टेज पर पहुँच गयी... निशा ही कुछ हिचकिचा रही थी.. बाकी सब मस्त थी...

सबने अपने अपने क्वेस्चन लिखे थे... उनकी पर्चियों को मिला कर राज ने एक पर्ची को उठाया... सरिता का नाम आया..
प्यारी खुश हो गयी.. पर सरिता उदास थी... इश्स बार वो कपड़े नही उतार पाएगी...
राज बाकी लड़कियों की और मुड़ा और उनको अपना एक वस्त्रा उतारने को कहा... सबने अपनी सलवार उतार दी... सबसे कम नगी होने के लिए सलवार ही सबको ठीक लगी...

निशा की मांसल गोले जांघों पर सबकी नज़र पड़ी... टफ के साथ पीछे की और बैठे राकेश ने अपना लंड संभाल लिया... दूसरी लड़कियाँ भी घुटनो से कुछ उपर तक नंगी हो चुकी थी... नशे में भी सलवार उतारते ही उनकी जांघों के बीच सीटी बाज गयी... राज ने सब लड़कियों को उपर से नीचे तक देखा... लड़कियाँ अब भी कुछ शर्मा रही थी...
कुर्सियों पर अपने अपने ग्रूप में बैठी लड़कियाँ.. उनकी हालत देखकर सकपका गयी.. वो अपने आपको उनकी जगह देख कर....सोचने लगी.. मिस्रित सी भावना अब उनकी आँखो में थी.. शर्म की भी, बेशर्मी की भी....
राज ने सरिता से उसका सवाल पूचछा... सरिता ने बेहिचक कहा," सर, प्यार क्यूँ होता है?
राज ने सवाल लिख लिया...
लड़कियाँ जाकर वापस बैठ गयी...

2न्ड ग्रूप का नंबर आया..... गौरी और नीरू इश्स ग्रूप में एक दूसरे से मुकाबला कर रही थी...
पर्ची कीर्ति की निकली... वो बच गयी....
नीरू और गौरी ने एक दूसरी की और देखा... गौरी ने झुक कर अपनी लोवेड उतार दी.. वो सूट और लोवर में थी... उसके सलवार निकलते ही हर जगह सीटी बाज गयी... लड़कियों की और से... वो थी ही इतनी सुन्दर की लड़कियाँ भी उस्स पर जान छिडकती थी.......
नीरू ने अपने हाथ उपर उठाए और अपना कमीज़ निकल दिया... राज तो जैसे पीछे गिरते गिरते बचा... नीरू ने अपनी ब्रा नही पहनी हुई थी.......
राज ने मुश्किल से अपने को गिरने से बचाया........... उसने देखा... टफ अभी भी सो रहा है.... उसने टफ को उठाया... अभी भी वो शानदार सपने के जाल से निकला नही था...तो भाई लोग आप समझ गये होंगे ये सब एक सपना था जो राज देख रहा था
टफ ने उठकर टाइम देखा," सुबह के 10 बाज चुके थे...
राज ने उससे पूचछा," क्या बात है.. घर नही चलना क्या? हमें तो रात को ही निकलना था ना! राज ने ज़ोर की जमहाई लेते हुए कहा...
"कोई सपना देख है क्या भाई.. अभी 5-6 घंटे पहले तो पहुँचे हैं... तू वापसी की बात कर रहा है....


राज का ध्यान अपने कच्चे पर गया... वो पूरी तरह उसके रस से चिपका सा हुआ था... शायद रात को काई बार नाइटफॉल हो गया...

राज ने उठकर परदा हटाया... दूर चोटियों पर जमी बर्फ सूर्या की रोशनी से चमक रही थी... वो बाथरूम में घुसकर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा....

करीब 12 बजे तक सभी नहा धोकर तैयार हो चुके थे... बाहर मस्ती करके आने के लिए...

दिन भर सबने खूब मज़ा लिया... मनाली में घूमने का और मार्केट में खरीदारी करने का....

रात को टफ और अंजलि ने रूम चेंज कर लिया... जैसे राज के सपने में हुआ था... बस गौरी, सरिता और कामना गायब थी...

अगले दिन वो रोहतांग दर्रे पर घूम कर आए... सबने खूब मज़ा लिया... रास्ते भर तीनो माले मस्ती करते गये लड़कियों के साथ... अपने अपने तरीक़ो से....

रात को राकेश ने दिव्या से अपने कमरे में ले जाकर प्यार किया और टफ ने सरिता को बुलाकर उसकी मा के सामने ही चोदा... और मा को फिर सरिता के सामने...

अगले दिनभर जिसका जो दिल चाहा किया... घूमे फिरे थकान उतरी और शाम को घर वापसी की तैयारी की...

करीब 7:00 बजे वो घर के लिए निकल पड़े..... ये वही रात थी जिस दिन शिवानी के साथ वो हादसा हुआ....

पर राज इश्स बात से बेख़बर था...........निसचिंत......

हर एक के चेहरे पर तौर से कुछ ना कुछ मिलने की खुशी थी..........

बस में आते हुए राज का ध्यान बड़ी शालीनता के साथ बैठी हुई नीरू पर था... आज उसने उसके सपने में अपनी कमीज़ उतार दी थी और बिना शरमायें सबको अपनी उभरती जवानियों का दीदार करा दिया था...
राज का ध्यान बार बार उसकी तरफ जा रहा था... क्या ऐसा कभी असलियत में हो सकता है?....
नीरू अपनी सॉफ सुथरी इमेज के लिए पुर गाँव में प्रसिद्ध थी... कोई लड़का उसकी तिरछी नज़रों से भी कभी देखता नही पाया गया था... फिर उसकी मस्कराहट किसी पर मेहरबान हुई हो... ये तो कभी किसी ने उसके 16 पर के बाद देखा ही नही था.. दिशा की तरह... अपनी नाक पर मक्खी तक को ना बैठने देने वाली...
स्कूल की सभी लड़कियाँ उसको अपना निर्विवाद नेता मानती थी... जब भी कभी किसी बात पर दो राय हो जाती... नीरू से ही पूछा जाता...
नीरू थी भी इश्स सम्मान के लायक... एक ग़रीब घर में पैदा होने के बावजूद.. उसने अपन पहचान बनाई थी... अपनी समझदारी, बेबाकी और बेदाग चरित्रा से...
हालाँकि वा इतनी हॅस्ट पुस्त नही थी... पर उसकी इमेज उसको उससे कही ज़्यादा सुंदर लड़कियों से भी सेक्सी बनती थी... गरमा-गरम... पर फिर भी बिना पका हुआ... बिना 'फुक्कका' हुआ...
राज को अपनी और देखता पाकर नीरू उसकी सीट के पास गयी," सर! कुछ कह रहे थे क्या?"
राज हड़बड़ा गया, यह सिर्फ़ वही जानता था की उसके सपने में वो आई थी... बिना ढके... ," आअ..नही कुछ नही"
ऐसी लड़की से दर होना लाजमी था.. किसी की आज तक उसको प्रपोज़ करने की हिम्मत ना हुई थी..
नीरू वापस अपनी सीट पर कोमल के साथ बैठ गयी... सुबह के 3:00 बजे वो भिवानी जा पहुँचे...

उधर शिवानी की लाश को भिवानी हाँसी रोड पर लेकर चल रहे शिव और ओम का नशा काफूर हो चुका था... अब उनकी समझ नही आ रहा था की क्या करें..
ओम ने कार चला रहे शिव को देखकर कहा," यार तूने तो अपने साथ मुझे भी फंस्वा दिया... कम से कम ये जिंदा होती तो बलात्कार का ही इल्ज़ाम लगता, वो भी तुझपर... मर्डर में तो मैं भी साथ ही जवँगा!" यार तुझे जान लेने की क्या ज़रूरत थी...
"आबे! मैं कोई गधआ हूँ क्या.. जो जान बूझ कर जान लूँगा..! वो चिल्ला रही थी.. मैने उसका मुँह दबा लिया... नशे में ये होश ही नही रहा की उसकी साँस भी बंद हो सकती है..."
"तो फिर इसका करना क्या है अब?"
शिव चलता रहा...," इसको बहुत दूर जाकर फैंकना पड़ेगा.. ताकि कोई इसको आसानी से पहचान ना सके...!"
"मेरे पास एक आइडिया है... ये साँस बंद होने से मारी है... अगर हम इसको नदी में फैंक दे तो?"

शिव को आइडिया बेहद पसंद आया.. , उसने गाड़ी वापस घुमाई और करीब 5 किलो मीटर पीछे रह चुकी नहर की और चलने लगा....

नहर के पुल पर जाकर शिव ने गाड़ी पटरी पर दौड़ा दी... रात का समय था... बंदे की जात भी नज़र नही आ रही थी... थोड़ी दूर जाकर शिव ने गाड़ी नहर के साथ लगा दी...
"ओम! इसको पानी में फैंक दो...!"शिव ने ओम से कहा..
ओम पागल नही था..," बहुत अच्छे... करम करो तुम! भुगतें हम! ये काम में नही करूँगा... खुद उतरो.. और जो करना है करो..."
" तो तुम नीचे नही उतरोगे...! तुम भी बराबर के दोषी हो मत भूलो! मैं तुम्हारे ही पास था... तुमने ही मुझे शराब पिलाई.. और ना ही त्मने मुझे कुछ करने से रोका... और तो और तुमने ही इसके हाथ पैर पकड़े और इससे बलात्कार भी किया..!"
"क्या बक रहे हो?" ओम ने उसको हैरानी से देखा... ," ऐसा कब हुआ था..?"
"पर अगर कुछ गड़बड़ हुई तो पोलीस को मैं यही बतावँगा...!" शिव ने धूर्त-ता से कहा...
ओम मुनु बनाकर उतार गया... खिड़की खोलकर उसने शिवानी को बाहर की और खिछा..," वो आसचर्या और ख़ुसी से उछाल पड़ा..," ओह! तेरे की, ये तो जिंदा है...!"
"कयय्य्ाआआआअ?" शिव को भरोसा ना हुआ... वा तेज़ी से पिछे पलटा...," का बकवास कर रहे हो?...

"हां भाई... देख हाथ लगाकर देख..."
शिव ने उसका कलाई पकड़ी.. नब्ज़ चल रही थी... पर शिवानी में कोई गति ना थी... वा शायद बेहोशी या सदमें में थी...," अब क्या करें... मर गये!.. अब तो इसको मारना ही पड़ेगा..! चल इसको पानी में फैंक दे... अपने आप मर जाएगी!"
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11-26-2017, 12:01 PM,
#48
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
ओम की मुश्किल से जान में जान आई थी... एक वही तो गवाह थी.. जो उसको बचा सकती थी...," तू पागल है क्या... अपने बचने की टिकेट सिर्फ़ इसी के पास है... अगर मर गयी तो दोनो में से एक के फँसते ही दोनो फँसेंगे... मेरे पास एक आइडिया है...!"

"क्या?" शिव की समझ में कुछ नही आ रहा था.. उसको सच में ही आइडिया की ज़रूरत थी...
"इसको अपने फार्म हाउस पर क़ैद करके रखो....! अगर कुछ समस्या आई.. तो हम इसको जिंदा तो बरामद करा सकते हैं... अगर कोई समस्या ना आई तो तुम बेशक इसको मार देना....!" ओम ने उसको समझाया...
"कम से कम फाँसी से बचने के लिए शिव को ये उपाय पसंद आया... वे दोनो गाड़ी में बैठे और वापस हँसी की और चल दिए... वाया रोहतक.. बहड़ुरगर्ह... अपने फार्महाउस पर जाने के लिए...!

"यार! तू मुझे वापस छोड़ दे? घर जाकर मैं वहाँ की हालत ठीक कर दूँगा...!" ओम अपने आपको अब इश्स वारदात से दूर कर लेना चाहता था...

शिव ने कुछ देर सोचा... उसको लगा ये ठीक ही कह रहा है... अगर किसी पर शक होगा तो सबसे पहले ओम पर ही होगा... घर की ऐसी हालत देखकर!" और ओम फँसा तो समझो शिव तो फँस ही गया... उसने फिर से गाड़ी घुमा दी और तेज़ी से भिवानी की और चलने लगा...

करीब 1 बजे शिव ने ओम को गाँव के बाहर उतार दिया.. और वापस घूम गया... उसने शिवानी का हाथ पकड़ा.. उसने कोई हुलचल नही दिखाई दी... उसने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी...

ओम ने घर पहुँच कर सबसे पहले दारू की बोतल वाहा से हटाई.. फिर किचन को सॉफ किया ... गॅस अभी तक चालू थी... रोटी 'रख' बन चुकी थी..... गॅस बंद करके ओम पहले बेडरूम में गया.. और बिस्तेर की सीवतें ठीक की... एक जगह फर्श पर खून लगा हुआ था... ओम की समझ में नही आया की वो खून आख़िर है किसका.. पर उसने उसको भी सॉफ किया...
किचन की सफाई करने के बाद उसने हर जगह घूम कर देखा.... सब कुछ ठीक ठाक था... वा निसचिंत होकर बेड पर लेट गया... पर नींद उसकी आँखों में नही थी... वा यूँही करवट बदलता रहा...

.... बाथरूम में हॅंगर पर शिवानी का सूट टंगा हुआ था... राज का मनपसंद सूट... जो शिवानी अपने मयके जाते हुए पहन कर गयी थी... और वही पहन कर भी आई थी.. अपने राज के लिए!!

यहाँ ओम ग़लती कर गया....

करीब 3:30 पर बस स्कूल के पास आकर रुकी... सभी सो रहे थे...
ड्राइवर ने हॉर्न देकर सबको जगाया... नींद में आंगड़ाई लेते हुए सभी स्कूल की लड़कियाँ नीचे उतार कर अपने कपड़ों को ठीक करने लगी....
टफ, राज, अंजलि और प्यारी सबसे आख़िर में उतरे...
प्यारी ने टफ की और मुस्कुरकर देखा... उसको टूर पर ले जाने के लिए.. और टूर पर मज़ा देने के लिए..
टफ मुस्कुरा दिया," अच्छा आंटी जी, फिर कभी मिलते हैं...."
अंजलि ने टफ की बात सुनकर मुस्कुराते हुए राज से कहा," ये भी हमारे साथ ही चल रहे होंगे...
"नही नही.. मैं तो प्यारी आंटी के साथ ही जवँगा..." टफ ने हंसते हुए कहा और राज के साथ ही चलने लगा... गौरी ने निशा को भी अपने साथ ले लिया... सभी घर पहुँच गये...
अंजलि ने बेल बजाई... जागते हुए भी ओम ने थोड़ी देर से दरवाजा खोला.... ताकि उनको लगे की वो सो रहा था...

अंजलि ने अंदर आते ही टफ का इंट्रोडक्षन करवाया," ये हैं सब इनस्पेक्टर इन क्राइम ब्रांच, भिवानी! राज के...!"
सुनते ही ओम के माथे पर पसीना छलक आया... और दो बूंदे उसके लंड से भी चू पड़ी... पेशाब की... उसने अपना डर उससे नज़र हटा कर हटाया... वा कुछ ना बोला...
टफ की नज़र टेबल के पाए के साथ पड़े सिग्गेरेत्टे के टोटके पर पड़ी...," यार ये नेवी कट कौन पीता है... इसका तंबाकू तो बहुत तेज़ है!"
अंजलि ने जवाब दिया," यहाँ तो कोई सिग्गेरेत्टे पीता ही नही!" "या फिर छुप छुप के पीते हो!" अंजलि ने ओम की और मुखातिब होते हुए कहा....
"इश्स साले इनस्पेक्टर को भी अभी मरना था..!" ओम ने मॅन ही मान सोचा और कुछ बोला नही.. जाकर बिस्तेर पर ढेर हो गया...!"

उसका पसीना सूखने का नाम नही ले रहा था," पता नही क्या होगा!!!
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11-26-2017, 12:01 PM,
#49
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल--18

आधे बेड पर लेट राज को आज शिवानी कुछ ज़्यादा ही याद आ रही थी.... मनाली के सपने ने उसको बहुत ज़्यादा उत्तेजित कर दिया था. उसकी पतिवर्ता पत्नी अगर आज उसके पास होती तो वो उसको जी भर कर प्यार करता... उसने घड़ी में समय देखा.. लगभग 4:30 बाज चुके थे. उसने सुबह उठाते ही शिवानी को फोन करके उसी दिन बुलाने का निस्चय किया और उस्स तकिये को, जिसको अक्सर वो प्यार करते हुए शिवानी को नीचे से उपर उठाने के काम लाता था, अपनी छाती से लगाया और सो गया..

निशा गौरी को लेते लेते ध्यान से देख रही थी... गौरी किसी भी तरह से निशा से कम नही थी... उसका भाई गौरी से प्यार करता था और निशा अपने भाई को खोना नही चाहती थी... किसी भी कीमत पर... वह मन ही मन में भुन सी गयी... उसने उल्टी लेट कर सोई हुई गौरी के मस्त पुत्तों को देखा... यहाँ निशा गौरी से थोडा सा पिछड़ रही थी.. निशा ने अपनो जांघों को सहला कर देखा... 'क्या मेरा भाई मुझे छोड़ देगा?' उसने मन ही मन गौरी को संजय के दिल से निकालने का निस्चय किया और संजय को गौरी के दिल में ना बसने देने का...

अंजलि ने ओम की और देखा, वैसे तो वह सेक्स के प्रति इतना उत्सुक कभी नही रहता था... पर आज तो उसने उससे बात तक नही की... पहले के दीनो में ओम कम से कम उसकी छाती पर हाथ रखकर तो सोता था... पर आज तो उसने पीठ ही अंजलि की और कर रखी थी देखने के लिए.. अंजलि ने भी दूसरी और करवट बदल ली और सो गयी.......

शिव की गाड़ी करीब 6:30 बजे फार्म हाउस पहुँची... गेट्कीप ने दरवाजा खोला और शिव गाड़ी को सीधा ग़ैराज ले गया... वहाँ उसकी पालतू.. लड़कियाँ आधे अधूरे कपड़ों में लिपटी उसका इंतज़ार कर रही थी...
शिवानी होश में आ चुकी थी.. पर सदमें की वजह से कुछ बोल नही पा रही थी... बोलने का फ़ायदा ही क्या होता...
"इसको अंडरग्राउंड बेडरूम में ले आओ!" शिव ने कहा और आगे बढ़ गया.........
सुबह उठने से पहले अचानक राज ने पलटी मारी, पर जल्दी ही उसको ग़लती का अहसास हो गया... सुबह सुबह शिवानी से पहले उठकर नींद में ही पलटी मार कर शिवानी के उपर चढ़ जाना, और उसको तब तक तंग करना जब तक की वह जाग कर, उसके गले में बाहें डाल कर उसके 'आइ लव यू' ना बोल दे... उसके बाद शिवानी पलट कर उसके उपर आ जाती और उठ जाती... फ्रेश होकर वा राज को उठा देती और चाय बनाने चली जाती... ये उनकी दिनचर्या का एक ज़रूरी हिस्सा बन चुकी थी...
पर आज पलटी मारते ही जब एक मर्दाना शरीर से टकराया तो उसको याद आया की शिवानी
तो आई ही नही है... वा बाथरूम में घुस गया...



फ्रेश होने के बाद वा किचन में जाने के लिए जैसे ही लिविंग रूम में आया उसकी नज़र नींद में अपनी अपनी मस्तियों का दीदार करा रही गौरी और निशा पर पड़ी.. दोनो का सिर राज की तरफ था... गौरी उल्टी लेती पड़ी थी. उसके हरमन प्यारे जबरदस्त कसाव लिए हुए नितंब अपनी गोलाई और उनके बीच की गहराई का सबूत उसके लोवर के अंदर से ही दे रहे थे...
दोनो निसचिंत हुई सोई पड़ी थी... निशा गौरी की अपेक्षा सीधी लेती हुई थी.. उसके चौड़े गोले गले वाले कमीज़ में ब्रा के अंदर से टपक रहा उसकी चूचियो का सौंदर्या राज को कुछ शरारत करने के लिए उकसाने लगा...
निशा दीवार वाली साइड में थी, जबकि गौरी बेड के दूसरे किनारे पर थी.. राज उसके चूतदों के पास गया और हौले से उनपर हाथ रख दिया... कोई हुलचल नही हुई.. उसके चूतड़ उसकी छातियों की वजह से उपर उठी उसकी कमर से भी ऊँचे थे... राज को उन्हे छूने से ऐसा अहसास हुआ मानो किसी ठोस फुटबॉल के उपर रेशम का लबादा लपेटा गया हो..
राज ने अपने हाथों का दबाव हूल्का सा बढ़ा दिया.. गौरी एक दम से उचक कर बैठ गयी... अपनी आँखें मलते हुए बोली," उन्न्न... क्या है सर?... अभी तो आए हैं...!
"चाय बना दोगि मेरे लिए!" राज ने बड़ी प्यारी आवाज़ में कहा..
"गौरी ने नींद में होने की वजह से थोड़ा सा मुँह बनाया और उठकर किचन में घुस गयी... राज हंसकर सोफे पर बैठ गया...
तभी उनकी आवाज़ सुनकर अंजलि बाहर निकल आई... राज को देखकर मुश्कुरई और पूचछा.. इतनी जल्दी कैसे उठ गये...?
"मैं तो रोज ही जल्दी उठता हूँ मेडम, आप सुनाइए!" राज ने सोफे पर बैठ चुकी अंजलि का हाथ दबाते हुए पूछा...
"अरे मैं अभी कहाँ उठाने वाली थी... वो तो उन्होने उठा दिया... उनको जल्दी जाना था सो 6:00 बजे ही उठा दिया....."
राज ने उसकी और आँख मारते हुए कहा," मिस्टर. ओमपारकश जी गये क्या. ?"
"हां! कह रहे थे कुछ ज़रूरी काम है...2-3 दिन लग जाएँगे आने में" वह खुस लग रही थी......
राज ने सोचा.. चलो एक आध दिन और ऐश कर लेते हैं... पीछे का मज़ा ले लेते हैं... बेगम को बाद में ही बुलाएँगे... और उसकी सुबह उठकर शिवानी को फोन करने की योजना बदल गयी......
फार्म हाउस पर करीब 23 और 26 साल की छरहरे बदन वाली 2 लड़कियों या यूँ कहें 2 औरतों ने शिवानी को गाड़ी से उतारा और उसको दोनो तरफ से पकड़ कर ले जाने लगी... लुंबी बेहोशी और सदमें से गरस्त शिवानी में विरोध करने की हिम्मत ना के बराबर ही बची थी.. वा उनके साथ साथ लगभग सरक्ति हुई सी चल पड़ी... उसकी आँखों में रात को उसके साथ हुए हादसे का भय सॉफ झलक रहा था...
दोनों लड़कियाँ उसको 3 कमरों और एक लुंबी गॅलरी से गुजर कर नीचे सीढ़ियाँ उतरते हुए एक आलीशान बेडरूम में ले गयी...
वहाँ पहले से ही शिव खड़ा था और बेडरूम के बीचों बीच एक गोलाकार बेड पर एक करीब 19 साल की लड़की बिना कपड़ों के अपने उपर एक पतली सी चादर डाले लेती थी... शिव के इशारा करते ही वो बिस्तेर से उठी और चादर से अपने आपको ढकने का दिखावा करती हुई दूसरे दरवाजे से बाहर निकल गयी...

शिव के कहने पर उन्न लड़कियों ने शिवानी को बेड पर बिठा दिया. शिव ने लड़कियों की तरफ घूमते हुए कहा," अनार का जूस!
और लड़कियाँ अदब से" यस सर!" कहकर वापस चली गयी...


शिवानी उस्स राक्षस की और फटी आँखों से देख रही थी.. जिस ख़ूँख़ार जानवर ने उसके ही घर में उसकी इज़्ज़त को तार तार कर दिया, उससे कुछ कहने या पूछने की हिम्मत शिवानी की ना हुई... शिव उसके सामने दीवार के साथ डाले सोफे पर बैठ गया. और उसको घूर्ने लगा...
तभी लड़कियाँ एक शीशे का जग और 2 ग्लास ले आई... शिव का इशारा पाकर उन्होने जग और ग्लास टेबल पर रखे और वापस चली गयी...
शिव ने एक ग्लास में जूस डाला और खड़ा होकर शिवानी के पास गया," लो!"
उसके हावभाव आवभगत करने वाले नही बल्कि आदेशात्मक थे.. शिवानी का हाथ उठ ही ना पाया...
"एक बात ध्यान से सुन लो! मुझे कुछ भी दोबारा कहने की आदत नही है... यहाँ मेरा हूकम चला है, सिर्फ़ मेरा!.. मैं 5 मिनिट में आ रहा हूँ... अगर ये ग्लास खाली नही मिला तो नंगा करके अपने आदमियों को सॉन्प दूँगा... फिर मुझे मत कहना... उसने ग्लास वापस टेबल पर रखा और बाहर निकल गया...
शिवानी उसकी बात सुनकर काँप उठी... रात का हादसा और यहाँ का माहौल देखकर शिवानी को उसकी एक एक बात पर यकीन हो गया.. वह तुरंत उठी और एक ही साँस में सारा जूस पी गयी...
शिवानी ने अपने चारों और नज़र घुमा कर कमरे का जयजा लिया.. करीब 18'-24' का वो आलीशान बेडरूम शिव के अइयाश चरित्रा का जीता जागता सबूत था.. चारों और की दीवारें अश्लील चित्रों से सजी हुई थी... सामने दीवार पर प्लास्मा टी.वी. टंगा हुआ था.. कमरे के चारों कोनो में कैमरे लगे हुए थे जिनका फोकस बेड पर ही था...

उसका ध्यान अपनी अस्त व्यस्त नाइटी पर गया. ब्रा के हुक पीछे से खुले हुए थे.. और बस जैसे तैसे अटकी हुई थी... उसने नाइटी में हाथ डालकर अपनी पनटी को दुरुस्त किया. ब्रा के हुक बँधकर वा धम्म से बेड पर गिर पड़ी... उसकी आँखों से आँसू बहने लगे........

करीब 6-7 मिनिट के बाद शिव उसी लड़की के साथ बेडरूम में दाखिल हुआ.. जो शिवानी को बेडरूम में आते ही बेड पर लेटी मिली थी.. वा अभी भी उस्स पतली सी चादर में थी. उसका यौवन छलक छलक कर बाहर से ही दिखाई दे रहा था. शिवानी को वो गौरी की उमर की लगी. पर जैसे ही उस्स लड़की ने शिवानी की तरफ देखा. शिवानी ने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया..शिव ने आते ही खाली हो चुके गिलास को देखा," वेरी गुड! लगता है तुम्हारी समझ में आ गया है.. प्राची!... इसका खास
ध्यान रखना.. जब भी तुम्हे लगे की इसको किसी चीज़ की ज़रूरत है इसको दे देना... अगर मना करे तो मुझे फोन कर देना; समझी! प्राची शिवानी को देख कर मुस्कुराइ...," ओक सर! मैं इसका ख़ास ध्यान रखूँगी...!" उसकी मुस्कान में एक अलग ही तरह की धमकी थी.....!
शिव ने उसके शरीर से लिपटी वो चादर खींच ली, प्राची के चेहरे पर शिकन तक ना पड़ी... वो घूम गयी और चादर को अपने शरीर से अलग होने दिया... बिल्कुल नंगी प्राची के चूतड़ अब शिव की आँखों के सामने थे.. शिवानी ने ग्लानि से अपनी आँखें बंद कर ली... सोफे पर ही प्राची को झुका कर शिव उस्स पर सवार हो गया... पागल कुत्ते की तरह... दोनो की वासना से भारी आवाज़ें शिवानी के कानो में शीशे की तरह उतरने लगी.......

गौरी चाय बनाकर ले आई... अंजलि और राज चाय पीने लगे... गौरी ने निशा को उठा दिया और बाथरूम में चली गयी...



निशा इश्स हालत में खुद को सर के सामने देखकर झेंप गयी... वह उठी और अंजलि के बेडरूम में भाग गयी... अंजलि ने राज से पूचछा," कब आ रही हैं आपकी श्रीमती जी?"
"क्यूँ? मेरी आज़ादी देखकर जलन हो रही है क्या?" राज ने ठहाका लगाया...
"जैसे तुम्हे बाँध कर रखती है... बड़े आए आज़ादी के दीवाने...!"
तभी टफ की अंदर से आवाज़ आई," अरे भाई ये मेरे सिर के नीचे फोन क्यूँ रख दिया... कब से घरर घाररर कर रहा है...?"
"आबे तेरा ही होगा!... मेरा फोने तो दो दिन से ऑफ है....!" राज ने टफ की बात पर ज़्यादा ध्यान नही दिया... और फिर से अंजलि से बात करने लगा...

टफ उठ कर बाहर आया," ऐसे सस्ते फोन मास्टर ही रख सकते हैं.." उसने फोने टेबल पर पटक दिया...
फोने देखते ही राज की आँखें मारे अचरज के फट गयी... ," अरे! शिवानी अपना फोन यहीं भूल गयी...!" तभी मोबाइल पर फिर से घंटी बज गयी... राज ने फोने उठाया.. डिसप्ले पर 'मम्मी जी कॉलिंग' आ रहा
था... राज ने फोने उठा लिया..," हेलो!"
उधर से किसी की आवाज़ ना आई...
"हेलो..... शिवानी! .... हेलो!"
फोने कट गया!" ये शिवानी भी ना...
उसने देखा फोने पर करीब 45 मिस कॉल थी... सारी 'मम्मी जी' के फोने से...
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Reply
11-26-2017, 12:01 PM,
#50
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
कॉल का टाइम देखने के लिए जैसे ही उसने ऑप्षन का बटन दबाया... उसकी हैरत और बढ़ गयी..," मेरी सासू मा के पास तो टाटा
का फोने है... ये एरटेल का नंबर. कब लिया... शिवानी ने तो फ्री बात करने के लिए टाटा का फोने ही ले रखा था... फिर एरटेल का नंबर.
वह उठकर गया और अपना फोने चार्जिंग पर लगा कर ऑन किया... उसमें से अपनी सासू मा का नंबर. निकाला... उसके पास तो टाटा का ही नंबर. सेव्ड था... उसने नंबर. डाइयल कर दिया...
उधर से आवाज़ आई," हेलो!"
"हां जी कौन?" राज अपनी सास से ज़्यादा बात नही करता था.. इसीलिए दोनो
एक दूसरे की आवाज़ नही पहचानते थे... उसकी सास के पास राज का नंबर.
भी नही था..
"अरे बेटा! आपने फोने किया है... बताइए तो सही कौन बोल रहा है..."
"जी मैं राज बोल रहा हूँ!"
"ओहो! सॉरी बेटा! शिवानी कैसी है..."
राज को जैसे लकवा मार गया हो.." ज्ज्ज... जी वो तो आपके पास ही तो है...!"
"क्या? कब आई.. मैं तो कल यहाँ जिंद आ गयी थी बेटा!"
"कमाल कर रही हैं मम्मी आप भी! तीन दिन पहले आप ही ने तो बुलाया था...! वो तो उसी दिन आपके पास चली गयी थी..."
उधर से भी घबराई हुई सी आवाज़ आई," क्या कह रहा है बेटा... मैने तो कोई फोन नही किया.....!"
राज के सामने धरती घूमने लगी.... पता नही एक ही पल में उसके दिमाग़ में क्या क्या आने लगा. उसको याद आया जाते हुए शिवानी कह रही थी... तुम घर पर फोने मत करना... मैं ही करती रहूंगी...."
राज अपना सिर पकड़ कर सोफे पर बैठ गया... उसकी हालत देखकर.. सभी उसके चारों और जमा हो गये.. टफ ने उसके कंधे पर हाथ रखा," क्या हुआ दोस्त!"

राज ने कोई जवाब दिए बिना शिवानी के फोने से मम्मी जी का नंबर. निकाला.. 98963133**. वा अंजलि को लेकर बेडरूम में चला गया...!
वह अंजलि को कुछ बताने लगा ही था की टफ अंदर आ गया," मुझे क्या चूतिया समझ रखा है... क्या मुझे नही बताएगा... क्या हुआ?
राज उसको बाहर छोड़ कर आने पर शर्मिंदा हो गया," सॉरी यार! आ बैठ!"
"आबे बिठाना छोड़! तू बता तो सही... हुआ क्या है ऐसा, जो तेरे फूल से चेहरे पर मक्खियाँ सी उड़ाने लगी... " अपनी बेकद्री देख टफ को गुस्सा आया हुआ था... तभी निशा ने कहा," मैं जाती हूँ मेडम!" और वो चली गयी...
गौरी बाथरूम में से सब सुन रही थी...
"यार! वो शिवानी; झूठ बोल कर गयी है.... ये नही पता कहाँ... पर जहाँ भी गयी है.. इश्स नंबर. के मालिक को सब पता है... उसने एरटेल का नंबर. टफ को दिखाया..
अब टफ भी उसकी चिंता का कारण समझ गया... ," सॉरी यार! मुझे ऐसे ही गुस्सा आ गया..."
तभी राज के फोने पर शिवानी की मम्मी की कॉल आ गयी... राज ने फोने उठाया..
उसकी सास की आवाज़ आई," बेटा! मुझे चिंता हो रही है.... बता तो सही क्या बात है...!"
"आपकी बेटी मुझसे आपके पास जाने की कहकर कहीं और चली गयी है.. तीन दिन से... आप समझ ही रही होंगी इसका मतलब! और तो और उसने किसी से झूठा फोने भी कराया था... आपके नाम से....!" राज ने गुस्से में कहा और फोने काट दिया...

अंदर गौरी को उनकी बातें सुनकर जाती हुई शिवानी का चेहरा याद आया... हॅंगर पर टाँगे हुए कपड़े देख कर वो चौंक उठी," यही तो कपड़े पहन कर गयी थी... शिवानी दीदी!"
वह कपड़े उठाए बाहर आ गयी और उन्हे राज के सामने वो कपड़े दिखा कर कहा," सर ये कपड़े....!"
और कुछ कहने की ज़रूरत गौरी को पड़ी ही नही... राज उन्हे देखते ही पहचान गया... इश्स ड्रेस में शिवानी बहुत हसीन लगती थी... जाते हुए उसने यही तो पहने थे... तो क्या शिवानी वापस आई थी...

ये सब सुनकर सबका दिमाग़ चकरा गया... टफ ने सिग्गेरेत्टे सुलगा ली... गोल्ड फ्लॅक बड़ी!!!
किसी की समझ में कुछ नही आया... टफ ने अपने ऑफीस फोने किया," हां! धरमबीर! मैं अजीत बोल रहा हूं... एस पी साहब को कहकर एक नंबर. सुर्विल्लंसे पर लगवा दो... और पता करो किधर का है..."" ओ.के. सर!" उधर से आवाज़ आई... टफ ने नंबर नोट करवाया और फोने काट दिया...
घर में जैसे मातम छा गया... किसी की समझ में कुछ नही आ रहा था... अगर शिवानी वापस आई थी तो गयी कहाँ.... और झूठह बोल कर गयी थी तो कहाँ और क्यूँ गयी थी...
"तुम उसके सारे कपड़े पहचान सकते हो!" टफ ने सिग्गेरेत्टे बुझते हुए राज से पूछा....
"क्यूँ?" राज ने उल्टा सवाल किया...
"तू बात की बेहन को मत चोद! जो पूछ रहा हूँ बता..." टफ भी अत्यंत विचलित था... वो पॉलिसिया रोल में आ गया था... गाली बकते हुए उसने ये भी ध्यान नही दिया की अंजलि और गौरी भी वहीं खड़ी हैं...
"नही! सारे तो नही... पर एक आध जो मुझे अच्छे लगते हैं... वो पहचान सकता हूँ...
"टफ ने गौरी को निर्देश दिया " उसके जीतने भी कपड़े घर में हैं... सब उठा ला!" गौरी चली गयी...
सारे कपड़े देखने के बाद राज बोला," जो मैं पहचानता हूँ वो तो सब यही हैं... !"
"बॅग लेकर गयी होगी"
"हां! पर बॅग तो नही है...."
बॅग अभी तक गाड़ी में ही रखा हुआ था जो रात को शिव ने लाश समझकर शिवानी को पार्सल करते जाते समय साथ ही रख लिया था...

"तुम्हे क्या लगता है?" टफ ने करवाई शुरू कर दी थी... वो हर आंगल से सोच रहा था....
"अब मुझे क्या लगेगा यार..."
"अंजलि जी! आपके पति कहाँ हैं?"
"वो तो सुबह जल्दी निकल गये थे.... देल्ही के लिए.. दो तीन दिन में आएँगे..." सहमी हुई अंजलि ने जवाब दिया...
राज को अंजलि से सवाल करना अच्छा नही लगा " यार तू बात को कहाँ से कहाँ लेकर जा रहा है..."
"राज साहब! इन्वेस्टिगेशन का उसूल होता है... तहकीकात खुद पर शक करके चलने से शुरू होती है... अगर ज़रूरत पड़ी तो मैं आपसे भी पूछूँगा... क्या वजह थी की आपने पूरे रास्ते फोन बंद रखा!"

अभी मैं जा रहा हूँ... पहले साले उस्स नंबर. की मा चोदता हूँ... गौरी टफ को कड़वी निगाहों से देख रही थी.......
फार्महाउस पर बेडरूम के दरवाजे पर एक नयी हूर प्रकट हुई.. शिव ने प्राची से अपनी भूख मिटाने के बाद वहीं बेडरूम में ही बैठा था... शिवानी ने काई बार उससे पूछने की कोशिश की यहाँ लाने के कारण के बारे में पर शिव ने उसकी किसी बात का उत्तर देना ज़रूरी नही समझा... जब बैठा नही रहा गया तो वो मुँह फेर कर लेट गयी...
शिव बाहर चला गया और प्राची को उसके पास भेज दिया," ध्यान रहे! उसको किसी भी तरह से हमारी जगह के बारे में कोई आइडिया ना होने पाए.."
"लेकिन सर! उसका करना क्या है..?" प्राची ने शिव से सवाल किया.
"अभी तो मुझे भी नही पता क्या करना पड़ेगा.. बेवजह की टेन्षन मोल ले ली.. शराब के नशे में... खैर तुम अभी उसके पास जाओ.. और उसको हर बात से ये ही शो होना चाहिए की मैं कोई बहुत बड़ा गुंडा हूँ.."
प्राची मुश्कुराइ.. उसकी पॅंट के उपर से उसके लंड को दबाया और बोली," सर गुंडे तो आप हैं ही...!" शिव ने उसके गाल पर काट लिया.



शिव फार्म हाउस के बाहर रोड पर बने अपने ऑफीस में बैठा था.. जब ओम की कार सामने आकर रुकी.
अंदर आते ही ओम ने उसको घूरा.. "यार तेरी ये आइयशियों ने मरवा दिया... अब कुछ सोचा है क्या करना है.."
"अभी तक तो कुछ भी समझ में नही आ रहा भाई... वैसे में उसके दिमाग़ में डर बैठाने की कोशिश कर रहा हूँ.. ताकि उसको अगर जिंदा छोड़ना पड़े तो वो मुँह खोलती हुई घबराए... " शिव ने टेबल पर आयेज झुकते हुए कहा...
"वो कैसे? उसके साथ और कुछ मत करना भाई..." ओम ने उसको समझने की कोशिश की..
"अरे नही... कहते हैं की मार से मार का डर ज़्यादा होता है... मैने रास्ते में आते हुए ही प्लांनिंग कर ली थी.. और फोने पर इशारों में ही मेरी सेक्रियेट्री को सब समझा दिया था.. यहाँ पर आने पर शिवानी को हर चीज़ से ऐसा ही लगा होगा की हमारा कोई बहुत ही ख़तरनाक गॅंग है... सब नौकरानियाँ और सीक्रेटरी अंदर उसके सामने नंगी ही घूम रही हैं... और तो और मैने सीक्रेटरी को उसके सामने ही चोद दिया.... वो डरी हुई है.. बस उसके डर को इतना बढ़ा देना है की वापस घर जाने पर वा कुछ बताने से पहले 100 बार सोचे..."

"हां ये बात तो काम आ सकती है.. उसका इलाज करवाया क्या?" ओम ने पूछा.
"अरे इलाज क्या करवाना है.. चूत में लंड ही दिया था... कोई चाकू नही घोंपा.. यार इसकी गांद और मारने का दिल कर रहा है... क्या मस्त माल है.."
"इतनी बार समझाया है इन्न कामो से दूर रहकर अपना धंधा संभाल ले... और तेरी भाभी के काई फोने आ चुके हैं... मैने उठाया नही..."
"यार तू पागल है क्या? बेवजह शक करवाएगा... चल फोन मिला और बात कर.." शिव ने नेवी कट को मुँह में लगाते हुए कहा.....
अंजलि ने वाइब्रट कर रहा अपना फोने उठाया... ओम का फोने था
अंजलि: हेलो!
ओम: हां अंजलि. क्या कह रही थी..
अंजलि उठ कर दूसरे कमरे में चली गयी," कहाँ है आप?"
"क्या मतलब है... बताया तो था किसी काम से देल्ही जा रहा हूँ..." ओम को अंजलि की आवाज़ से लग रहा था की कुछ तो ज़रूर हो गया है..

"वो... क्या शिवानी आपके आगे यहाँ आई थी"
ओम ने अपने माथे पर झलक आया पसीना पूछा,"... नही तो .. वो कहाँ है.. ठीक तो होगी.." अगर टफ ने ये बात सुनी होती तो तुरंत उसकी गर्दन पकड़ लेता...
अंजलि ने चिंतित स्वर में जवाब दिया," हमारी तो कुच्छ समझ में नही आ रहा.. शिवानी घर जाने को बोल कर गयी थी... कल यहाँ उसका मोबाइल और वो सूट मिला है जिसको वो पहन कर गयी थी....!"
"ओह माइ गॉड!" ओमपारकश अंदर तक सिहर गया.. शिव उसके चेहरे के बदलते रंग को देख कर विचलित हो गया...
"क्या हुआ? कुछ पता है क्या?" अंजलि ने उसको असचर्या व्यक्त करते देख सवाल किया. ...
"तुम पागल हो गयी हो क्या... मुझे क्या पता" झूठ बोलते हुए अचानक ही ओम की आवाज़ तेज़ हो गयी...
"फिर आपने ओह माइ गॉड क्यूँ बोला?" अनजली ने सवाल किया..
"ज़्यादा जासूसा मत बनो... अब मुझे क्या चिंता नही होगी. कोई हादसा ना हो गया हो!"
अंजलि ने राज की बात खोल दी," अब पता नही हादसा हुआ है या नही... पर एक बात और सामने आई है..."
ओम का गला बैठ गया," क्या?"
राज ने शिवानी के घर फोने किया था... वो घर पर तो गयी ही नही... ना ही उसको किसी ने बुलाया था... अब हमारी समझ में ये नही आ रहा वो झूठ बोल कर क्यूँ गयी.. और अगर गयी भी तो कहाँ गयी थी... और फिर अचानक घर आई और फिर गायब हो गयी..."
ओम का चहा खिल गया... उसके भाव बदलने के साथ ही अब तक साँस रोके सुन रहा शिव भी कुर्सी से कमर टीका कर पीछे हो गया..

"अच्छा वो ऐसी तो नही दिखती थी... और मैं तो रात 12 बजे घर पहुँचा था.." कह कर उसने फोने काट दिया और ख़ुसी से उछालने लगा...
"अरे भाई... मुझे भी तो बताओ.. आख़िर हुआ क्या है..." शिव कोई खुशख़बरी सुन-ने के लिए बेचैन हो रहा था...
"चॉड साली को... मारले उसकी गेंड... साली रंडी है... झूठ बोल कर कहीं गयी होगी अपने यार से मिलने... अब वो कभी हम पर शक नही कर सकते... फँसेगा तो वो फँसेगा जिससे चुड कर वो आई थी.... चोद भाई .. जी भर कर चोद...! मैं भी घर वापस जा रहा हूँ... तुझे खबर देता रहूँगा..." ओम को लगा अब कुछ नही हो सकता...

वा बाहर निकला और अपनी गाड़ी स्टार्ट करके वापस चल दिया...

ये बात सुन कर शिव की खुशी का ठिकाना ना रहा.. उसने तुरंत ऑफीस को लॉक किया और अंदर पहुँच गया... प्राची बाहर ही मिल गयी... क्या हुआ सर? मैं तो अभी बाहर ही आ रही थी... आज तो आपने दिन भर हमको नंगा रखा... क्या वजह थी सर..?"
शिव ने उसकी बात पर ध्यान नही दिया," वो क्या कर रही है?"
"अभी मैने आपके कहे अनुसार उसको नींद का इंजेक्षन दे दिया था... सो रही है..."
प्राची की बात सुनकर शिव उपर ही लिविंग रूम मैं बैठ गया...," चलो! अभी सोने दो.. रात को मिलता हून... खा पीकर...!"
उधर टफ भिवानी जा चुका था... गौरी स्कूल में जा चुकी थी... अंजलि और राज घर पर अकेले थे....
राज अपने माथे पर हाथ रखे सोफे पर पड़ा था.. आज वो और अंजलि स्कूल नही गये थे और इश्स अजीब पहेली की गूतियाँ सुलझाने की सोच रहे थे...
अंजलि ने पास बैठकर राज के कंधे पर हाथ रखा," सब ठीक हो जाएगा राज! यूँ दुखी होने से क्या क्या फायडा... आ जाएगी"
राज गुस्से से भभक पड़ा," आ जाएगी की तो बाद की बात है... आख़िर वो गयी कहाँ थी झूठ बोल कर!" राज भी वही सोच रहा था जो बाकी सब के मॅन में था... अजीब समाज है... आदमी लाख जगह मुँह मार ले, वो कभी भी नही सोचता की आख़िर औरत भी उस्स पर अपना.. सिर्फ़ अपना अधिकार चाहती है... और औरत का उसकी चारदीवारी के बाहर बेपर्दा तक होना उसको सहन नही होता..
अंजलि राज की स्थिति को समझ रही थी.. उसने प्यार से उसके गले में बाहें डाल कर उसको अपनी और खींचने की कोशिश करी... पर राज को आज कुछ भी अच्छा नही लग रहा था... उसने अपने को छुड़ाया और दूसरे कमरे में चला गया... राज को अब शिवानी की चिंता नही थी... उसको उसके किसी यार की बाहों में होने की जलन थी...
टफ भिवानी जाते ही सीधा एस.पी. ऑफीस में गया... शमशेर भी पता लगते ही वहीं आ चुका था.. " नमस्ते भाई साहब!"
शमशेर ने उससे हाथ मिलाया...," कुछ पता लगा.."
"अभी देखते हैं... वा ऑफीस में बनी कंप्यूटर लब में गया...," हन.. नंबर. का कुच्छ पता चला!"
"सिर! वो नंबर. किसी सीमा नाम की औरत का था... उसका कहना है की वो एस.टी.डी. चलाती है.. और अपने मोबाइल से फोने करवा देती है काई बार जब लॅंड लाइन की लाइन खराब होती है.. "
टफ ने गुस्से से कहा," उठा के ना लयाए साली ने! (उठा कर नही लाए साली को)"
कंप्यूटर पेर बैठे पॉलिसीए ने कहा," थाना सदर पोलीस में बिठा रखा है साहब!"
टफ और शमशेर पोलीस ज़ीप में बैठे और सदर में पहुँच गये. सीमा करीब 23-24 साल की लड़की थी... उसकी मा उसके साथ आई हुई थी और बाहर बैठी थी. जाते ही टफ ने एक जोरदार तमाचा सीमा के गाल पर रसीद कर
दिया... उसके बॉल बिखर गये.. अपने चेहरे पर हाथ रख कर दीवार के साथ चिपक गयी," मेरा कुसूर क्या है सिर? क्या सिर्फ़ यही की मैं अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए एस.टी.डी. चलाती हून!"
टफ ने गुस्से से उसकी और देखा और गुर्रा कर बोला," ज़्याड्डा सुधी बनान की ज़रूरत ना से.. बना दूँगा मदर इंडिया!" ( ज़्यादा शरीफ बन-ने का नाटक करने की ज़रूरत नही है... एमोशनल होना सीखा दूँगा!)

शमशेर एंक्वाइरी पूरी करके उसको बताने की बात कह कर चला गया... टफ को पता था इसके साथ ज़रूर कोई आया होगा..," तेरे साथ कौन है?"
"मेरी मा है.. सर!" सीमा ने सहमी हुई आवाज़ में ही जवाब दिया..
टफ थाने के एस.एच.ओ. के पास गया और उसके द्वारा की गयी एंक्वाइरी के बारे में पूछा..!"
"ऐसा है भाई साहब! हुमने आस पड़ोस में छान बिन की थी... वो तो सब मा बेटी को शरीफ ही बता रहे हैं.. रही उस्स फोने की बात.. तो लड़की कह रही है.. पक्का तो नही याद, पर उस्स दिन शायद एक युवक और एक औरत उसकी एस.टी.डी. में आए थे.. उसके फोने की लाइन खराब थी तो उसने अपना मोबाइल दे दिया था... लड़का उस्स औरत को आंटी कह रहा था... उससे पहले उसने कभी उस्स लड़के को वहाँ नही देखा था..
"एस.टी.डी. कहाँ है?"
"रोहतक!"
"कहाँ पर?"
"ये तो मैने नही पूछा?"
टफ वापस मुड़ते हुए बोला," घंटा एंक्वाइरी करते हो यार... मैं इन्न मा बेटी को लेकर जा रहा हून..."
टफ ने उन्न दोनो को अपनी ज़ीप में बिठाया और थाने से निकल गया........

टफ दोनो को शमशेर के घर ले गया... दिशा और वाणी अभी स्कूल से नही आई थी... उसने दरवाजे के साथ बनी स्लॅब के उपर रखी ईंट के नीचे से चाबी निकली और दरवाजा खोल कर उनको अंदर ले गया... दोनो बुरी तरह डारी हुई थी.. टफ ने उनको सोफे पर बैठने का इशारा किया.. दोनो एक दूसरी से चिपक कर बैठ गयी... सीमा की टांगे काँप रही थी...
टफ ने लड़की को उठने को कहा और बेडरूम में चला गया.. सीमा पीछे पीछे चली आई... उसकी मा रह रह कर सोफे से उठकर उनको देखने की कोशिश कर रही थी... टफ ने लड़की को उपर से नीचे तक देखा... पढ़ी लिखी और सभ्या सी मालूम होती थी.. उसके हर अंग में कसाव बता रहा था की उसने अभी प्यार करना सीखा नही है.. बहुत ही सुंदर लड़कियों में उसको गिना जा सकता था... दोनो अभी तक खड़े ही थे...
"हां! शुरू हो जाओ!" टफ ने उसकी कामपति हुई टाँगों पर डंडा रखते हुए कहा...
"सीमा का गला सूख रहा था और होतो की लाली उडद सी गयी थी... उसने वो सब कुछ दोहरा दिया जो टफ को पहले कंप्यूटर ऑपरेटर ने और बाद में एस.एच.ओ. ने बताया था...
"कभी डलवाया है?"
"क्या सिर?" वो समझ ना पाई...
"अगर मैं डाल दूँगा तो कोई साइज़ फिट नही आएगा.. समझी..!"
अब भी सीमा की समझ में कुछ ना आया... पर बाहर बैठी उसकी मा सब समझ रही थी... उसको पोलीस वालों की तमीज़ का पता था...

"एस.टी.डी. कहाँ है?"
"सर रोहतक में ही!" सीमा को ये बात तो समझ में आ गयी थी...
"तेरी मा की... बंदूक!... अरे मैं पूछ रहा हूँ रोहतक में कहाँ पर है..." टफ उसको डरा कर तोड़ देना चाहता था... ताकि अगर उसके अंदर कुछ हो तो बाहर निकल आए...
"सर.. वो तिलक नगर में.. देल्ही रोड पर ही हमारा घर है... उस्स में ही आगे दुकान निकाल रखी है... वही है!"
टफ ने उसकी जाँघ पर डंडा रख दिया.. वो घबरा कर थोड़ा सा साइड में होने लगी.. तो टफ ने उसकी जीन्स के उपर से ठीक उसके पॉइंट का आइडिया लगा कर वहाँ पर डंडे की नौक टीका दी... सीमा ने नेजरें नीची कर ली... असहाय सी होकर उसका हाथ डंडे की नौक के पास चला गया ताकि अगर वो दबाव डाले तो अपनी चिड़िया को बचा सके...
"क्या करती हो?"
"ज़्ज्जीइ .. पढ़ती हूँ!"
"कहाँ?"
"यूनिवर्सिटी में!"
"क्या?"
"जी एकनॉमिक्स से एम.ए. कर रही हूँ.." उसकी बेचैनी सवालों से नही बुल्कि उस्स डंडे से बढ़ रही थी..."
"उनको पहले कभी देखा है!"
"ज्ज्जीइ... किनको?"
"अपनी मा के यार को... ज़्यादा स्मार्ट ना बने! (ज़्यादा स्मार्ट मत बन)"
सीमा समझ गयी...," ज्जीइ... कभी भी नही!"
"घर में कौन कौन है?"
"जी... बस में और मेरी मा!"
"क्यूँ पापा फौज में हैं क्या?"
सीमा की आँखों से आँसू टपक पड़े......
टफ को अपनी ग़लती का अहसास हुआ.... उस्स को डरा कर उगलवाने की कोशिश में शायद वा इंसानियत ही भूल गया...था!
"सॉरी... शायद..."
"कोई बात नही सर... हम मा- बेटी सीख चुके हैं.. पड़ोसियों का झगड़ना... लड़कों की फब्तियाँ... कभी कबार बिना खाए सोना... और पापा का फोटो पर तंगी माला देखकर रोना.... हम सीख चुके हैं सर... कोई बात नही.." टफ की सहानुभूति मिलते ही उसकी आँखों से अवीराल अश्रु धारा बह निकली.. डंडा पीछे हो गया...
"चलो बाहर आ जाओ!"
सीमा ने अपने आँसू पोंछे और बाहर आकर अपनी मा की गोद में सिर रखकर
फिर से रोने लगी... ज़ोर ज़ोर से...
"देखिए.. माता जी! हम पोलीस वाले अपनी भासा को लेकर बदनाम हैं... पर हमें ये सब करना पड़ता है... सामने वाले से कुछ उगलवाने के लिए... अगर वा कुछ छिपा रहा है तो... पर मैं आपसे दिल से माफी माँगता हूँ... आइ आम रियली वेरी वेरी सॉरी!"
मा ने सिर्फ़ इतना ही कहा " तो हम जाए साहब!"
तभी दरवाजे पर वाणी प्रकट हुई... अपनी वाणी!
-
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