College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
11-26-2017, 12:57 PM,
#31
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल--12


निशा ने अपनी मम्मी के जाते ही अपनी कमीज़ का एक और बटन खोल दिया और फिर से उसी सवाल पर आ गयी...," बताइए ना भैया! क्या गौरी मुझसे भी सुंदर है..."

संजय ने कोशिश की पर उसकी और मुँह ना घुमा पाया," निशा! तुम इश्स टॉपिक को बंद कर दो... और जाकर पढ़ लो!

" भैया! मैं अपनी किताबें यहीं ले आऊँ क्या? मैं यहीं पढ़ लूँगी..."
लाख चाह कर भी संजय उसको मना नही कर पाया," ठीक है... लेकिन पढ़ना है..."

निशा अपना बॅग उठा लाई और आते आते मम्मी को भी बता आई की मैं भैया के पास ही पढ़ूंगी... देर रात तक!
निशा संजय के बराबर में आकर बैठ गयी और अपनी किताब खोल ली. संजय के दिमाग़ में एक बार और अपनी छ्होटी बेहन की 'उन्न सुंदर और सुडौल चूचों को देखने का भूत सॉवॅर होता ही गया...

संजय ने अपनी नज़र को तिरच्छा करके निशा की और देखा पर शायद वो उम्मीद छ्चोड़ कर सच में ही पढ़ाई करने लगी थी.. अब वो अपनी मस्तियों को छल्कने की बजाय अपने कमीज़ से उनको ढकने हुए थी... पर कमीज़ के उपर से ही वो संजय की आँखों को अपने से हटने ही नही दे रही थी... आ! मैने पहले कभी इन्न पार ध्यान क्यूँ नही दिया. वो उस्स पल के लिए गौरी को भूल कर अपनी बेहन की मस्तियों का दीवाना हो गया... और उन्हे कमीज़ के उपर से ही बार बार घूरता रहा... कैसे इनको अपने हाथों में थाम कर सहलाऊ? पर वा तो इसका सगा भाई था... सीधा अटॅक कैसे करता...
ऐसा नही था की निशा को अपनी चूचियों पर चुभाती संजय की नज़रें महसूस ना हो रही हों... पर उसका हाल भी संजय जैसा ही था... सीधा अटॅक कैसे करती?

निशा को एक प्लान सूझा... वह उल्टी होकर लेट गयी, अपनी कोहानिया बेड पर टीका कर... इश्स पोज़िशन में उसकी चूचियाँ बाहर से इतनी ज़्यादा दिखाई दे रही थी थोडा सा नीचे झुक कर संजय उसके निप्पल्स के चारों और की लाली भी देख सकता था... संजय ने वैसा ही किया... उसने थोड़ा सा उपर होकर अपनी कोहनी बेड पर टीका दी और टेढ़ा होकर लेट सा गया. संजय की आँखें जैसे चमक गयी... उसको ना केवल चूचियों के अन्त्छोर पर दमकती हुई लाली परंतु उस्स लाली का कारण उनकी चूचियों के केन्द्रा में दो टॅना टन गुलाबी निप्पल भी सॉफ दिखाई दे रहे थे... संजय सब मरुअदाओ को ताक पर रखता चला गया," निशा! आज यहीं सोना है क्या?" उसकी आवाज़ में वासना का असर सॉफ सुनाई दे रहा था... वह जैसे वासना से भरे गहरे कुए से बोल रहा हो!
निशा उसकी चूचियों को देख पागल हो चुके संजय को देखकर मुस्कुराइ. उसका भाई अब ज़रूर उसके योवन की ताक़त को पहचान लेगा..," नही भैया! अपने कमरे में ही सो उगी. अभी चली जाऊं क्या? उसकी आवाज़ में व्यंग्य था... संजय की बेचैनी पर व्यंग्य...
संजय हकलाने लगा... उसको समझ में नही आ रहा था, उस्स को अपने पास से जाने से रोके कैसे," हाआँ.. म्म..मेरा मतलब है.. नही.. तुम यहीं पढ़ना चाहो तो पढ़ लो... और बल्कि यहीं पढ़ लो... अकेले मुझे भी नींद आ जाएगी... बेशक यहीं पर सो जाओ! ये बेड तो काफ़ी चौड़ा है... इश्स पर तो तीन भी सो सकते हैं... जब हम सोते थे तो इकट्ठे ही तो सोते थे.." निशा को अपने साथ ही सुलाने के लिए वो अपने इतिहास तक की दुहाई देने लगा..

निशा भी तो यही चाहती थी," ठीक है भैया!" और फिर से किताब का पन्ना पलट कर पढ़ने की आक्टिंग करने लगी......



संजय को अब भी चैन नही था... उसको ये जान-ना था की निशा ने 'ठीक है' यहाँ पढ़ने के लिए बोला है या यहाँ सोने के लिए! वो पक्का कर लेना चाहता था की उम्मीदें कहाँ तक लगाए..... देखने भर की या छूने तक की भी. उसने निशा से पूचछा," तुम्हारी चदडार निकल दूँ क्या ओढ़ने के लिए...." निशा ने जैसे ही उसकी आँखों में झाँका उसने अपनी बात घुमा दी,"........ अगर यहाँ सोना हो तो"

निशा के लिए भी यहाँ सोना आसान हो गया... नही तो वह भी यही सोच रही थी की यहाँ पढ़ते पढ़ते लटका लेकर सोने की आक्टिंग करनी पड़ेगी...," हां! भैया... निकाल दो.. मैं यहीं सो जाती हून... सोना ही तो है..."

दोनो की आँखों में चमक बराबर थी... दोनो की आँखों में रिस्ते की पवित्रता पर वासना हावी होती जा रही थी.... पर दोनो में से किसी में शुरुआत करने का दूं नही था.

सोच विचार कर निशा ने वहीं से बात शुरू कर दी.. जहाँ उसके भाई ने बंद करवा दी थी... संजय की आँखों को अपनी छतियो की और लपकती देखकर निशा को यकीन था की अब की बार वो इश्स बात को बंद नही करवाएगा," भैया! एक बात बता दो ना... प्लीज़... दोबारा नही पूछून्गि!"
संजय को भी पता था वो क्या पूछेगि. उसने अपनी किताब बंद कर दी और उसकी चूचियों में कुच्छ ढ़हूंढता हुआ सा बोला," बोल निशा! तुझे जो पूच्छना है पूच्छ ले... मैं बता दूँगा... जितनी चाहे बात पूच्छ. आख़िर तेरा भाई हूँ... मैं नही बतावँगा तो कौन बताएगे तुझे!"

निशा ऐसे ही लेटी रही.. अपनी चूचियों को लटकाए... लटकी हुई भी वो इतनी सख़्त हो चुकी थी की निप्पल मुँह उठाने लगे थे... बाहर निकालने के लिए," आपको कौन ज़्यादा सुंदर लगती है; मैं या गौरी!!!"
संजय ने उसकी गोल मटोल चूचियों में अपनी नज़रें गड़ाए हुए कहा," निशा! मैने तुम्हे कभी उस्स नज़र से देखा ही नही."
"किस नज़र से" निशा ने अंजान बनते हुए अपनी जवानियों को उसकी और जैसे उच्छल ही दिया... लेट लेते ही एक मादक अंगड़ाई...

संजय के मुँह में कुत्ते की तरह बार बार लार आ रही थी... भ्ूखे कुत्ते की तरह...," उस्स नज़र से; जिस नज़र से अपनी प्रेमिका और बीवी को देखते हैं..."
"अपने भाई के मुँह से प्रेमिका और पत्नी शब्दों को सुनकर वो ललचा सी गयी; एक बार उसकी प्रेमिका बन-ने के लिए... पर लाख चाहने पर भी वो अपनी इच्च्छा जाहिर ना कर पाई," पर क्या सुंदरता का पैमाना प्रेमिका और पत्नी के लिए ही होता है...?"

संजय मॅन ही मॅन सोच रहा था,' होता तो नही... सुंदरता तो हर रूप में हो सकती है..' पर वा तो उसको अपनी प्रेमिका ही बना लेना चाहता था... और उसके छलक्ते कुंवारे प्यालों को देखकर तो आज रात ही... वासना हावी होने पर कुच्छ भी सही या ग़लत नही होता... बस मज़ा देना और मज़ा लेना ही सही है... और उससे वंचित रखना ग़लत," जिस सुंदरता की तुम बात कर रही हो; वो तो आदमी प्रेमिका में ही देख सकता है... भला बेहन में मैं कैसे वो सुंदरता देख सकता हूँ."

निशा को पता था वो कब से उसकी वही 'सुंदरता' ही तो देख रहा है," तो क्या तुम एक पल के लिए मुझे प्रेमिका मान कर नही बता सकते की तुम्हारी ये प्रेमिका सुंदर है या वो?

"ठीक है तुम दरवाजा बंद कर दो! मैं कोशिश करूँगा देख कर बताने की" संजय को लगा अगर अब भी उसने कुच्छ नही किया तो मर्द होने पर ही धिक्कार है.. हवस पूरी तरह से उसके दिलोड़िमाग़ पर च्छाई हुई थी...

निशा की खुशी का ठिकाना ही ना रहा. उसने झट से दरवाजे की कुण्डी लगा दी.. और वापस बेड पर आकर सीधी बैठ गयी. अब उसको चूचियाँ दिखाने की ज़रूरत नही थी. उन्होने तो अपना जादू चला दिया था... उसके सगे भाई पर....

संजय कुच्छ देर तक यूँही कपड़ों के उपर से देखता रहा.... वो कहीं से भी उसको गौरी से कम नही लग रही थी... कम से कम उस्स पल के लिए," देखो निशा! मेरी किसी बात का बुरा मत मानना... मैं जो कुच्छ भी करूँगा या करने को कहूँगा; वो यही जानने के लिए करूँगा की तुम सुंदर हो या वो; गौरी.... और वो भी तुम्हारे कहने पर... ओ.के.?

निशा: हां!....ओ.के.
वह बेताबी से मरी जा रही थी की जाने क्या होगा आगे!
संजय: उस्स कोने में जाकर खड़ी हो जाओ! ये सुंदरता मापने का पहला चरण है... जैसा मैं कहूँ; करती जाना... अगर तुम्हे लगे की तुम नही कर पाओगी तो बता देना.... मैं बीच में ही छ्चोड़ दूँगा... पर मैं तुम्हे ये पूरा काम हो गया तो ही बातौँगा की सुंदर कौन है! ठीक है...

निशा को यकीन था की उसकी उम्मीद से भी ज़्यादा होने वाला है... वा शरमाती हुई सी जाकर कोने में खड़ी हो गयी.... आज रात हो सकने वाली सभी बातों को छ्चोड़ कर... उसके चेहरे पर अभी से हया की लाली दिखने लगी थी....

संजय ने निशा को अपने हाथ अपने सिर से उपर उठाने को कहा... निशा ने वही किया... पर जैसे जैसे उसके हाथ उपर उठते गये... उसकी गड्राई हुई चुचिया भी साथ साथ मुँह उठाती चली गयी... और नज़रें अपने भाई की और तनी हुई उसकी मस्तियों को देखकर उसी स्पीड से नीचे होती गयी... शरम से...

अपने से करीब 6 फीट की दूरी पर खड़ी अपनी बेहन की चूचियों को इश्स कदर तने हुए देखकर संजय की पॅंट में उभर आने लगा... निशा के उत्तेजित होते जाने की वजह से उसकी चूचियों के दाने रस से भरकर उसके कमीज़ से बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे.. संजय उनकी चौन्च को सॉफ सॉफ अपने दिल में चुभते हुए महसूस कर रहा था. वा सोच ही रहा था की अब क्या करूँ.. तभी निशा बोल पड़ी," भैया! हाथ दुखने लगे हैं... नीचे कर लूँ क्या.". वा नज़रें नही मिला रही थी...
संजय तो भूल ही गया था की उसकी बेहन को सुंदरता की पहली परीक्षा देते हुए 5 मिनिट से भी ज़्यादा हो गये हैं...," घूम जाओ.. और हाथ नीचे कर लो!"

निशा कहे अनुसार घूम गयी... अब नज़रें मिलने की संभावना ना होने की वजह से दोनों को ही आगे बढ़ते हुए शरम कम आ रही थी...

संजय ने उसके चूतदों को जी भर कर देखा... पर कमीज़ गांद तक होने की वजह से वो गांद की मस्त मोटाई का तो अंदाज़ा लगा पा रहा था. पर गांद की दोनो फांकों का आकर प्रकार जान- ने में उसको दिक्कत हो रही थी... पर वो अपना कमीज़ हटाने की कहते हुए हिचकिचा रहा था... काफ़ी देर सोचने के बाद उसने निशा से कहा,"निशा! अजीब लगे तो मत करना... अगर निकल सको तो अपना कमीज़ निकाल दो...!"
यह बात सुनते ही निशा के पैर काँपने लगे... उसने तो नीचे समीज़ तक नही पहना हुआ था," पर मई नीचे...." आगे वो कुच्छ ना बोली पर संजय समझ गया...," मैने पहले ही कह दिया था... मर्ज़ी हो तो करो वरना आ जाओ! पर में फिर बता नही पवँगा सच सच...."

निकलना कौन नही चाहता था... वो तो बस पहले ही सॉफ सॉफ बता रही थी की कमीज़ निकालने के बाद वो.... आ.... नंगी हो जाएगी... उऊपर से... अपने सगे भाई के सामने...

निशा के हाथो ने कमीज़ का निचला सिरा पकड़ा और उसके शरीर का रोम रोम नंगा करते चले गये... उपर से... उसके भाई....

संजय उसकी पतली कमर, उसकी कमर से नीचे के उठान और कमर का मछली जैसा आकर देखते ही पागला सा गया... आज तक उसने किसी लड़की को इश्स हद तक बेपर्दा नही देखा था... वा बेड पर बैठ गया... और पिछे से ही उसकी नंगी छतियो की कल्पना करने लगा...

निशा का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा तहा... वो सोच रही थी की सिर्फ़ सुंदरता देखने के लिए तो ये सब हो नही सकता... आख़िर संजय ने गौरी को कब ऐसे देखा था... पर उसको आम खाने से मतलब था... पेड़ गिन-ने से नही... और आम वो छक छक कर खा रही थी... तड़प तड़प कर.... जी भर कर... उसको पता नही था की इश्स सौंदर्या परीक्षा का अगला कदम कौनसा होगा... पर वो ए भली भती जान चुकी तही की फाइनल एग्ज़ॅम में वो आज चुद कर रहेगी........
और गजब हो गया... संजय ने उसको आँखें बंद करके घूम जाने को कहा.... आँखें तो वो वैसे भी नही खोल सकती थी.. नंगी अपने भाई से नज़रें मिलना बहुत दूर की बात थी... घहुमते हुए ही उसका सारा बदन वासना की ज्वाला में तप कर काँप रहा था... उसका सारा बदन जैसे एक सुडौल ढाँचे में ढाला हुया सा संजय की और घूम गया... उसका लंबा पतला और नाज़ुक पेट और उसके उपर तने खड़े दो संतरे के आकर की रसभरी चूचियाँ; सब कुच्छ जैसे ठोस हो गया हो... अब उसकी छतियो का रहा सहा लचीलापन भी जाता रहा... उस्क्कि चूचियों के चूचक भी अब तक बिल्कुल अकड़ गये थे... संजय ने इतना भव्या शरीर कभी ब्लू फिल्मों में भी नंगा नही देखा था... उसका हाथ अपने आप ही अपने तब तक तन चुके लंड को काबू में करने की चेस्टा करने लगा... पर अब लंड कहाँ शांत होने वाला था... वो भीतर से ही बार बार फुफ्कार कर अपनी नाराज़गी का इज़हार कर रहा था मानो कह रहा हो," अभी तक में बाहर क्यूँ हूँ; तेरी बेहन की चूत से...."
निशा के लिए हर पल मुश्किल हो रहा था... अब तक उसका शरीर मर्द के हाथों का स्पर्श माँगने लगा था... तड़प दोनो ही रहे थे... पर झिझक भी दूर होने का नाम नही ले रही थी... दोनो की... अगर वो भाई बेहन ना होते तो कब का एक दूसरे के अंदर होते.... पूरी तरह...

निशा से ना रहा गया," भैया! यहाँ तक में कैसी लग रही हूँ" मतलब सॉफ थी... परीक्षा तो वो पूरी ही देना चाहती थी... पर अब तक का हिसाब किताब पूच्छ रही थी...

संजय कुच्छ ना बोला... बोला ही नही गया... उसने कहना तो चाहा था," अब बस कंट्रोल नही होता... आ जा" पर वो कुच्छ ना बोला...

निशा ने लरजते हुए होंटो से अपनी सारी सकती समेत-ते हुए कह ही दिया...," भैया! सलवार उतार दूं क्या? गीली होने वाली है...."
'नेकी और पूच्छ पूच्छ' संजय को अगले 'बेयूटी टेस्ट' के लिए कहना ही नही पड़ा. और ना ही निशा ने अपने भैया से इजाज़त लेने की ज़रूरत समझी... उसने सलवार उतार दी... अपनी पनटी को साथ ही पकड़ कर... संजय तो बस अपनी बेहन के अंगों की सुंदरता देखकर हक्का बक्का रह गया... काश उसको पता होता... उसकी बेहन ऐसा माल है.. तो वा कभी उसको बेहन मानता ही नही... उसकी चूत टप्प टप्प कर चू रही थी... उसकी चूत का रस उसकी केले के तने जैसी चिकनी और मुलायम जांघों पर बह कर चमक रहा था... और महक भी रहा था... संजय से रहा ना गया," ये रस कैसा है? " उसने अपनी आँखे बंद किए आनद के मारे काँप रही अपनी प्यारी और सुंदर बेहन से पूचछा...
" ये इसस्में से निकल रहा है" निशा ने कोई इशारा ना किया... बस 'इसमें से' कह दिया...
"किस्में से?" संजय ने अंजान बन-ने की आक्टिंग करते हुए पूचछा.

निशा का एक हाथ अपनी छतियो से टकरा कर नीचे आया और उसकी चूत के दाने के उपर टिक गया," इसमें से!" उसकी छतिया लंबी लंबी साँसों की वजह से लगातार उपर नीचे हो रही थी..

संजय थोड़ा सा खुल कर बोला," नाम क्या है जान इसका?" उसकी बेहन उसकी जान बन गयी थी... उसकी प्रेमिका!

निशा शरम से दोहरी हो गयी... पर खुलना वो भी चाहती थी....,"... च..... चूऊ...?"

"पूरा नाम ले दो ना!... प्लीज़ जान... बस एक बार"

"...चूत!" और वो घूम गयी दीवार की तरफ... उसकी शरम ने भी हद कर दी थी.. कोई और होती तो इसके बाद कहने सुनने के लिए कुच्छ बचा ही ना था... बस करने के लिए बचा था... बहुत कुच्छ!"

संजय ने उसकी गांद को ध्यान से देखा... उसके दोनो चूतड़ उसकी चूचियों की भाँति सख़्त दिखाई दे रही थे...गांद के नीचे से उसकी उभर आई चूत की मोटाई झलक रही थी... और अब भी उसकी चूत टपक रही थी...

संजय उसके पिछे गया और उसके कान में बोला... जान तुमसे ज़्यादा सुंदर कोई हो ही नही सकता...
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11-26-2017, 12:58 PM,
#32
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निशा उसके भाई की परीक्षा में प्रथम आई थी. अब सहना उसके वश में नही था... आख़िर उसको भी तो फर्स्ट आने का इनाम मिलना चाहिए.. वो घूमी और अपने भाई... सॉरी..! प्रेमी बन चुके भाई से लिपट कर अपनी तड़प रही चूचियों को शांत करने के कोशिश की...! संजय को उसकी चूचियाँ पनी छति में चुभती हुई सी महसूस हो रही थी... वा वही बैठ गया और अपनी प्रेमिका बेहन की तरसती चूत पर अपने होन्ट टीका दिए....

"प्लीज़.. बेड पर ले चलो!" निशा ने अपनी सुंदरता का इनाम माँगा...

संजय ने उसको दुल्हन की भाँति उठा लिया... और ले जाकर बेड पर बिच्छा कर उसको इनाम देने की कोशिश करने लगा.... उसके मुँह में...

"उफफफफफ्फ़ ! सहन नही होता... जल्दी नीचे डाल दो!" निशा बौखलाई हुई अपनी चूत की फांकों के बीच उंगली घुसने की कोशिश कर रही थी..

संजय ने मौके की नज़ाकत को समझा... वा नीचे लेट गया और निशा को अपने उपर चढ़ा लिया... दोनो और पैर करके...

निशा को अब और कुच्छ बताने की ज़रूरत नही थी.. वो अपनी चूत को उसके लंड पर रखकर घिसने लगी... लगातार तेज़ी से... और संजय हार गया... संजय के लंड ने पिचकारी छ्चोड़ दी... उसकी चूत की गर्मी पाते ही... और लंड का अमूल्या रस उसकी चूत की फांकों में से बह निकला... संजय ने बुरी तरह से निशा को अपनी च्चती पर दबा लिया और आइ लव यू निशा कहने लगा.. बार बार... जितनी बार उसके लंड ने रस छ्चोड़ा... वा यही कहता गया... निशा तो तड़प कर रह गयी... वा लगातार उसके यार के लंड को अपनी चूत में देना चाहती पर लगातार छ्होटे हो रहे लंड ने साथ ना दिया... वा बदहवास सी होकर संजय की छति पर मुक्के मारने लगी... जैसे संजय ने उसको बहुत बड़ा धोखा दे दिया हो...

पर संजय को पता था उसको क्या करना है... उसने निशा को नी चे गिराया और अपना रसभरा लंड उसके मुँह में ठूस दिया... वासना से सनी निशा ने तुरंत उसको ' 'मुँह में ही सही' सोचकर निगल लिया... और उसके रस को सॉफ करने लगी.. जल्दी जल्दी...

लंड भी उतनी ही जल्दी अपना संपुराण आकर प्राप्त करने लगा... ज्यों ज्यों वा बढ़ा निशा का मुँह खुला गया और लंड उसके मुँह से निकलता गया... आख़िर में जब संजय के लंड का सिर्फ़ सूपड़ा उसके मुँह में रह गया तो निशा ने उसको मुँह से निकलते ही बड़ी बेशर्मी से संजय से कहा," म्‍म्मेरी चूत में डाल दे इसको... मैं मार जवँगी नही तो...

संजय ने देर नही लगाई.. वा निशा के नीचे आया और उसकी टांगे उठा कर उन्हे दूर दूर कर दिया... निशा की चूत गीली थी और जैसे ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी... संजय ने अपना लंड उसकी चूत के च्छेद पर रख दिया... निशा को पता था मुकाबला बराबर का नही है... उसने अपने आप ही अपना मुँह बंद कर लिया..

संजय ने दबाव बढ़ाना शुरू किया तो निशा की आँखें बाहर को आने लगी दर्द के मारे... पर उसने अपना मुँह दबाए रखा... और 'फ़च्च्छ' की आवाज़ के साथ लंड का सूपदे ने उसकी चूत को च्छेद दिया.. दर्द के मारे निशा बिलबिला उठी... वह अपनी गर्दन को 'मत करो के इशारे में इधर उधर पटकने लगी.... संजय ने कुच्छ देर उसको आराम देने के इरादे से अपने 'ड्रिलर' को वहीं रोक दिया... और उसकी छतियोन पर झुक कर उसके तने हुए दाने को होंटो के बीच दबा लिया... निशा क्या दर्द क्या शरम सब भूल गयी... उसका हाथ अपने मुँह से हटकर संजय के बालों में चला गया... अब संजय उसके होंटो को चूस रहा था... पहले से ही लाल होन्ट और रसीले होते गये... और उनकी जीभ एक दूसरे के मुँह में कबड्डी खेलने लगी... कामदेव और रति दोनो चरम पर थे... प्रेमिका ने अपने चूतदों को उठाकर लंड को पूरा खा सकने की समर्त्या का अहसास संजय को करा दिया... संजय उसके होंटो को अपने होंटो से दबाए ज़ोर लगाता चला गया... बाकी काम तो लंड को ही करना था... वह अपनी मंज़िल पर जाकर ही रुका...संजय ने लंड आधा बाहर खींचा और फिर से अंदर भेज दिया... अपनी प्रेमिका बेहन की चूत में... निशा सिसक सिसक कर अपनी पहली चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी.... एक बार झड़ने पर भी उसके आनंद में कोई कमी ना आई... हां मज़ा उल्टा दुगना हो गया... चिकनी होने पर लंड चूत में सत्तसट जा रहा था... नीचे से निशा धक्के लगाती रही और उपर से संजय... दौर जम गया और काफ़ी लंबा चलता रहा... दोनो धक्के लगाते लगाते एक दूसरे को चूम रहे थे; चाट रहे थे... और आइ लव यू बोल रहे थे... अचानक निशा ने एक 'अया' के साथ फिर से रस छ्चोड़ दिया... उसके रस की गर्मी से संजय को लगा अब वह भी ज़्यादा चल नही पाएगा.... संजय को चरम का अहसास होते ही अपना लंड एक दम से निकाल कर निशा के पतले कमर से चिपके पेट पर रख दिया... और निशा आँखें बंद किए हुए ही संजय के लंड से निकलने वाली बौच्चरों को गिन-ने लगी... आखरी बूँद टपकते ही संजय उसके ऊपर गिर पड़ा....

निशा ने उसके माथे को चूम लिया और उसकी आँखों में देखकर कहने लगी," मैं तुझे किसी के पास नही जाने दूँगी जान... तू सिर्फ़ मेरा है... मेरा यार... मेरा प्यार....

संजय गौर से दुनिया की सबसे सुंदर लगने वाली अपनी बेहन को देखने लगा.... पर अब उसको गौरी याद आ रही थी.............

उधर राज को मानो बिन माँगे ही मोती मिल गया... गौरी जैसी हॅसीन लड़की से इश्स तरह 'ब्लॅकमेल' कौन नही होना चाहेगा. वो खुद उसके और अंजलि के सामने बैठह्कर उन्न दोनो की लाईव सेक्स पर्फॉर्मेन्स देखना चाहती थी... राज को पूरा विस्वास था की इतनी सेक्सी लड़की उसके मोटे लंड को देखते ही अपने आप ही अपनी चूत को उसके आगे परोस देगी; भोगने के लिए...अंजलि तो इश्स बात को लेकर बहुत ही ज़्यादा विचलित थी... और राज भी उसके आगे मजबूरी होने का नाटक कर रहा था... पर अंदर ही अंदर वा इतना खुश था की वा रात होने का इंतज़ार ही नही कर पा रहा था... बार बार उत्तेजित होकर गौरी की और देखता और चुपके से अपने लंड को मसल देता... गौरी दोनो के चेहरों को देखकर मॅन ही मॅन बहुत खुश थी. वो नये नये तरीके जिनसे वो उन्न दोनो का भरपूर मज़ा ले सके; सोच रही थी...

2 घंटे का इंतज़ार गौरी और राज दोनों को ही बहुत लूंबा लग रहा था... उनको अहसास नही था की उनका ये इंतज़ार और लंबा होने जा रहा है...

दरवाजे पर बेल बाजी. गौरी ने दरवाजा खोला," पापा आप....!!!!!"

ओमप्रकाश अंदर घुसते हुए बोला," मेरे जल्दी आने से खुश नही हुई मेरी बेटी...! है ना!"
अंजलि को पहली बार उसको आए देख इतनी खुशी हुई," आ गये आप!" वो चहक्ती हुई सी बोली... लाईव गेम से जो बच गयी... कम से कम आज तो बच ही गयी थी.."
" अरे भाई क्या बात है...! कहीं खुशी कहीं गम" ओमपारकश ने राज से हाथ मिलते हुए कहा," और मास्टर जी, का हाल हैं..."

राज ने भी उखड़े मॅन से जवाब दिया," बस ठीक है श्रीमंन!"

ओमपारकश ने अपना बॅग बेड के साथ रखा और बेड पर पसर गया," लाओ भाई! कुच्छ चाय वाय नही पूछोगे क्या?" बड़ा थका हारा आया हूँ!" खा पीकर सो जाऊं!"

गौरी ने अंजलि के पास जाकर कान में कहा," दीदी! में आपको ऐसे नही बचने दूँगी... मेरी शर्त उधार रही" और राज की और देखकर मुश्कुरा दी......

राज अपने बिस्तेर पर पड़ा पड़ा सोच रहा था," अंजलि चुदाई करवाते हुए उसकी जगह शमशेर का नाम ले रही थी... तो क्या शमशेर ने....."

उसने अपना फ़ोन निकालकर शमशेर को डाइयल किया

शमशेर बाथरूम में था; फोन पर लड़की की मादक मधुर आवाज़ थी.

राज . जी नमस्कार दिशा भाभी जी

" दिशा भाभी जी नही, दिशा भाभी जी की बेहन बोल रही हूँ. कौन हैं आप?" वाणी समझदार होती जा रही थी...

"नमस्ते साली साहिबा! आप की आवाज़ बड़ी प्यारी है..."

वाणी: आपकी साली बोल रही हूँ... आप अपनी तारीफ तो सुनाइए..."

तभी दिशा ने फोन ले लिया," जी कौन?"
राज उसकी आवाज़ पर ही मोहित हो गया... पर वो शमशेर की बीवी होने का मतलब जानता था," मैं राज बोल रहा हूँ..."
दिशा शर्मा गयी... अगर वो शमशेर की पत्नी ना होती तो राज उसके सर होते," नमस्ते सर! ये वाणी थी... ये कुच्छ भी बोल देती है... वो नहा रहे हैं... निकलते ही बात करा दूँगी..."
राज: ठीक है
राज ने फोने रखते ही आह की... शमशेर कितना खुशकिस्मत है... तभी उसके फोन की घंटी बाज उठी... शमशेर का फोने था...," हां राज कैसे हो?"
राज: मैं तो जैसा हूँ ठीक हूँ, पर आपकी साली बहुत तीखी है भाई साहब!
शमशेर ने ज़ोर का ठहाका लगाया और पास ही खड़ी वाणी के सिर पर हाथ फेरने लगा...," कहो क्या हाल चाल हैं मेरी ससुराल के?
शमशेर ने दिशा की और आँख मारते हुए कहा... दिशा ने जैसे उसका मुँह नोच लिया प्यार से.... उसको पता था वो ससुराल का नही... ससुराल वालियों का हाल पूच्छ रहा है.... शमशेर ने उसको पकड़ कर अपनी बाजू के नीचे दबोच लिया... वाणी अपने जीजा की मस्ती देखकर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी....

राज: भाई! ससुराल में तो हर और हर्याली है... एक फसल को काट-ता हूँ तो नयी लहराने लगती है... वैसे 'पोध' भी तैयार हो रही है... तेरी ससुराल की तो बात ही कुच्छ और है...

शमशेर हँसने लगा... दिशा से उसको बहुत डर लगता था... वो उसको प्यार जो इतना करती थी..

राज: एक बात पूच्छू?
शमशेर टहलते हुए कमरे से बाहर निकल आया," बोल"
राज: ये प्रिन्सिपल के साथ तेरा कुच्छ सीन था क्या?
शमशेर: हां यार! वहीं से तो कहानी शुरू हुई थी... पर तुझे किसने बताया?
राज: अब मेरा सीन है उसके साथ.... नीचे लेते हुए तेरा नाम बड़बड़ा रही थी...
शमशेर को आसचर्या हुआ," यार! वो ऐसी तो नही थी.."
राज: वक़्त सब कुच्छ बदल देता है दोस्त... तेरे साथ होने के बाद... वो बूढ़ा उसको कहाँ खुश कर पाता... वैसे बड़ी मस्त चीज़ है साली...
शमशेर सीरीयस हो गया... अंजलि ने उसको शादी के लिए प्रपोज़ किया था... उसको अंजलि के बारे में ये सब सुन-ना अच्च्छा नही लगा...," चल छोड़... और सुना कुच्छ..."
राज: कब आ रहे हो?
शमशेर: दिशा वाणी के पेपर्स ख़तम होने के बाद! एक महीने के लिए आएँगे...
राज: पेपर्स में तो अभी महीना बाकी है...
शमशेर: हां, वो तो है...
राज चल ठीक है... हम तो स्कूल की कन्याओं के साथ निकल रहे हैं... मस्ती के टूर पर...
शमशेर: कब?
राज: कुच्छ कन्फर्म नही है अभी... चलना है क्या?
शमशेर: नही यार, अब मेरे वो दिन नही रहे! चल एंजाय कर... ओ.के.
राज: बाइ डियर...
राज के हाथों से आज एक हसीन मौका निकल गया.... गौरी आते आते उसके हाथों से फिसल गयी.... उसको गौरी का ध्यान आया... वो उठ कर दरवाजे के के होल में से झाँकने लगा........

राज को लगता था की गौरी से डाइरेक्ट ही डील कर ली जाए... पर उसने देखा... गौरी तो सो चुकी है... वा मान मसोस कर वापस अंदर आकर सो गया....

अगली सुबह; प्रेयर के बाद अंजलि ने टूर की अनौंसेमेंट कर दी. तौर 3 दिन का होगा मनाली में... टूर पर जाने की इच्छुक लड़की को अपना नाम राज सर के पास लिखवाना था... वही इश्स टूर का इंचारगे था... लड़कियाँ खुश हो गयी... पर मेडम्स में से किसी ने रूचि नही दिखाई.... दोपहर आधी छुट्टी के बाद राज के पास 44 नाम लिखे जा चुके थे... इतनी सारी लड़कियों को मॅनेज करना अकेले राज और अंजलि के लिए मुश्किल हो जाता.... अंजलि ने राज को ऑफीस में बुलाकर कहा," राज! टूर तो कॅन्सल करना पड़ेगा!
राज ने अचरज से सवाल किया... उसकी तो सारी उम्मीदें टूर पर ही टिकी थी...," क्यूँ मॅ'म?
"कोई मेडम चलने को तैयार नही... इतनी सारी लड़कियों को मैं कैसे संभालूंगी?"

राज ने शरारती अंदाज में कहा," अरे इससे दौगुनी लड़कियाँ भी होती तो मैं अकेला ही संभाल लेता... आप जानती नही हैं
मुझे..."

अंजलि उसकी बात को समझ कर मुस्कुरा पड़ी," वो बात नही है राज! पर लड़कियों की कुच्छ पर्सनल प्राब्लम भी होती हैं... और वो एक औरत ही मॅनेज कर सकती है...क्या शिवानी नही आ सकती?

राज अपना मज़ा किरकिरा नही करना चाहता" वो आ सकती तो भी मैं उसको ले जाना नही चाहूँगा!"

तभी टफ ने ऑफीस में एंट्री मारी... उसने आते ही मेडम को नमस्कार किया और राज के कंधे पर ज़ोर से घूसा मारा...," क्या प्लानिंग चल रही है भैईई?"

"आओ इनस्पेक्टर साहिब! मुझे पता चला की तुम काई बार गाँव आए हो... और चुपके चुपके वापस हो लिए... बिना मिले... ये भी कोई बात हुई!" राज ने उससे हाथ मिलाते हुए कहा..
टफ ने मजबूरी बयान कर दी," अरे यार ड्यूटी में इतना टाइम ही नही मिलता... और तुझसे मिलने आ जाता तो तू जल्दी तहोड़े ही भागने देता... अब जाकर एक हफ्ते की छुट्टिया मिली हैं." खैर और सूनाओ कैसे हो"

राज ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा," यार ये गाँव की मेडम भी ना... अभी हमारा टूर का प्रोग्राम बना था... कोई मेडम चलने को तैयार ही नही है... लड़कियों को 'संभालने' के लिए..." उसने संभालने पर कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर दिया...

"तुम्हारी ये प्राब्लम तो में सॉल्व कर सकता हूँ" टफ ने कहा.
राज की आँखें चमक गयी...," करो ना...."
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11-26-2017, 12:58 PM,
#33
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल--13


टफ ने रहस्यमयी अंदाज में कहा," भाई साहब! पोलीस वाले बिना लिए कभी किसी की प्राब्लम दूर नही करते... तू तो जानता है"
राज ने अंजलि के आगे ही ऐसी बात कही की अंजलि भी बग्लें झाँकने लगी," बोल किसकी लेनी है.."

टफ ने मुश्किल से अपनी हँसी रोकी," अगर मुझे भी साथ ले चलो तो मेडम का इंतज़ाम में कर सकता हूँ...."

राज ने अंजलि से इजाज़त लेने की ज़रूरत ही ना समझी, नेकी और पूच्छ पूच्छ... पर मेडम कहाँ से पैदा करोगे!"
"इसी गाँव से...प्यारी मेडम!" टफ के चेहरे पर मुस्कान तेर गयी...

प्यारी का नाम सुन-ते ही अंजलि को घिन सी हो गयी... सारा माहौल खर्राब कर देगी... पर वो राज के साथ इश्स हसीन सफ़र को गवाना नही चाहती थी.. टूर कॅन्सल हो सकता था... इसीलिए वा चुप रही.

राज: ये प्याई कौन है भाई
टफ: तू अभी तक प्यारी को नही जान-ता... इश्स गाँव में क्या झक मार रहा है?
अंजलि ने सुस्पेंस ख़तम किया," प्यारी पहले इसी स्कूल में मेडम थी... पर उसको तो स्कूल में जाना पड़ता है...
टफ: आप वो मुझ पर छ्चोड़ दीजिए... शमशेर सेट्टिंग करा देगा...

अंजलि: ओ.के. तो तुम बात कर लो... अगर वो चल पड़ें तो..
टफ: चल पड़े तो नही मेडम; चल पड़ी... उसने प्यारी को फोने लगाया," मेडम जी नमस्कार!"
प्यारी: रे नमस्कार छ्होरे! गाम में कद (कब) आवगा तू?

अंजलि के सामने टफ खुल कर बात नही कर पा रहा था... वो ऑफीस से बाहर निकल आया... राज भी उसके साथ ही आ गया," आंटी जी ! एक अच्च्छा मौका है... तुझे टूर पर घुमा कर लाउन्गा... देख लो!"

प्यारी: तू पागल है क्या? घर पर क्या कहूँगी... और फिर स्कूल भी...

टफ ने उसको बीच में ही टोक दिया," तू सुन लो ले पहले... गाँव के स्कूल से टूर जा रहा है... लड़कियों का... और तुम उसमें जा सकती हो! रही स्कूल की बात तो शमशेर अपने आप ही जुगाड़ करवा कर तुम्हे ऑन ड्यूटी करा देगा... अब बोलो!"

प्यारी: हाए! मज़ा आ जाएगा तेरे साथ... मैं आज ही अपनी चूत को शेव कर लूँगी... पर देख तू मुझे छ्चोड़ कर दूसरी लड़कियों पर ध्यान मत धर लेना... मैं तो जीते जी ही मार जवँगी... आइ लव यू!

टफ हँसने लगा," तो फिर तुम्हारा नाम फाइनल करवा दूं ना...

प्यारी: बिल्कुल करा दे; पर तेरे साथ वाली सीट रेजर्व करवा लियो!

टफ: तेरी सरिता को भी लेकर चल रही होगी साथ में...?

प्यारी: देख तू है ना... मैं कह देती हूँ... अपने सिवाय किसी की और झहहांकने भी नही दूँगी...

टफ: देखने में क्या हर्ज़ है आंटिजी.... अच्च्छा ओके! बाद में बात करते हैं बाइ!!!

और प्रोग्राम तय हो गया.... तौर में टफ और राज 2 मर्द तो थे ही... उसके अलावा जो बस बुक की गयी... उसका ड्राइवर और ड्राइवर का हेलपर भी रंगीन मिज़ाज के आदमी थे. 25 से 30 साल की उमर के दोनो ही हटते कत्ते और लंबे तगड़े शरीर के मालिक थे... राज ने जाने अंजाने अपनी चुदाई करवाने जा रही लड़कियों की लिस्ट पर गौर किया... सबसे पहले अंजलि और प्यारी मेडम का नाम था... लड़कियों में हमारी जान पहचान की सारी लड़कियाँ थी... गौरी, निशा, दिव्या, नेहा, कविता, सरिता और अभी तक भी अपनी चूत का रस शायद मर्द के हाथो ना निकलवा सकने वाली 38 और खूबसूरत बालायें थी.... उपर लिखे हुए नामों वाली लड़कियों का तो टूर पर जाने का एक ही मकसद था... जी भर कर अपनी चुदाई करवाना... बाकियों में से भी कुच्छ राज सर के साथ सेक्स का प्रॅक्टिकल करने को बेताब थी... हद तो तब हो गयी जब प्यारी अपने साथ... अपनी पता नही किस बाप की औलाद 'राकेश' को भी ले आई," ये भी साथ चल पड़ेगा... इसका खर्चा अलग लगा लेना...
किसी ने कुच्छ नही कहा..... और बस आ गयी...!

बस में दो दो सीटो की दो रोस थी. अंजलि अपने साथ राज को रिज़र्व रखना चाहती थी... पर प्यारी देवी ने उसको एक तरफ होने को कहा तो मजबूरन अंजलि को सीट प्यारी को देनी पड़ी. राज अभी बाहर ही खड़ा था. सरिता आकर अपनी मम्मी के पीछे वाली सीट पर बैठ गयी. टफ ने बस में चढ़ते ही प्यारी को देखा... उसके साथ तो बैठने का चान्स था ही नही... सो वो उसके पिछे वाली सीट पर सरिता के साथ जम गया.. अंजलि के साथ वाली सीट पर निशा और गौरी बैठे थे... राज आकर टफ के साथ वाली सीट पर गौरी के पिछे बैठ गया. नेहा की क्लास की ही एक लड़की मुस्कान राज के साथ वाली सीट पर जा बैठी... जबकि दिव्या और उसकी क्लास की लड़की भावना टफ और सरिता के पीछे वाली सीट पर जाकर बैठ गयी...नेहा राज और मुस्कान के पीछे एक और लड़की अदिति के साथ बैठ गयी. लगभग सभी लड़कियाँ बस में चढ़ चुकी थी... तभी राकेश बस में चढ़ा और गौरी को घूर्ने लगा.... वो उसके पास ही जमना चाहता था पर कोई चान्स ना देखकर उसके सामने आगे जाकर ड्राइवर के बरबेर वाली लुंबी सीट पर बैठ गया... कंडक्टर भी वहीं बैठा था... बस भर गयी... राज ने बस चलाने को कहा तो तभी कविता भागती हुई आई," रूको! रूको! मैं रह गयी... वो हमेशा ही लेट लतीफ थी.. बस में चढ़कर वो अंजलि से बोली..." मेडम मैं अकेली सबसे पीछे वाली सीट पर नही बैठूँगी... मुझे आगे ही जगह दिलवा दो ना कहीं!"

राकेश ने मौका ताड़ कर अंजलि मेडम को कहा," मेडम! यहाँ मेरे पास जगह है.. कहकर वो खिड़की वाली साइड में सरक गया...

अंजलि: देखो कविता! ऐसे तो अब किसी को उठाया नही जा सकता... या तो किसी से पूच्छ लो कोई पीछे अकेला जाकर बैठ सके... या फिर ये आगे वाली सीट ही खाली है बस... !

कविता भी चालू लड़की थी... कम से कम लड़के के साथ बैठने को तो मिलेगा... पर किस्मत ने उसको दो लड़कों के बीच में बिठा दिया... कंडक्टर और राकेश के बीच में... पर वा खुश थी.. एक से भले दो... कोई तो कुच्छ करेगा!

बस चल पड़ी. कोई भी अपनी सीट पाकर खुश नही था... टफ प्यारी के साथ बैठना चाहता था... अंजलि राज के साथ बैठना चाहती थी...राज गौरी के साथ बैठना चाहता था और गौरी अंजलि और राज के साथ... वो टूर पर ही लाईव मॅच देखने का प्लान बना रही थी... राकेश गौरी के साथ बैठना चाहता था... पर उसको भागते चोर की लंगोटी... कविता ही पकड़नी पड़ी... निशा सोच रही थी... काश उसका भाई संजय साथ होता... कुल मिलकर सबको अपने सपने टूट-ते दिखाई दे रहे थे.. टूर पर सुरूर पूरा करने के सपने... हां बाकी लड़कियाँ जो अभी फ्रेम में नही आई हैं.. वो भी सोच रही थी की कस्स राज के पास बैठने को मिल जाता....

ड्राइवर ने भी आँखों आँखों में कंडक्टर को इस्शरा किया," सारे मज़े तुझे नही लेने दूँगा लड़की के... आधे रास्ते तू बस चलना... और मैं वहाँ बैठूँगा... कविता के पास....

बस अपने गंतव्या के लिए रवाना हो चुकी थी... पर जैसे सबका चेहरा उतरा हुआ था... रास्ते भर मज़े लेते जाने का सपना जो टूट गया था... राकेश तो सामने से ही गौरी को ऐसे घूर रहा था जैसे उसको तो उसकी गोद में ही बैठना चाहिए था.. उसके लंड के उपर... निशा ने बार बार राकेश को गौरी की और देखता पाकर धीरे से गौरी के कान में कहा," यही है ना वो लड़का... जिसके बारे में तुम बता रही थी.... तेरे पीcछे पड़ा रहता है.."
गौरी ने भी उसी की टोने में उत्तर दिया," हां! पर मेरा अब इसमें कोई इंटेरेस्ट नही है... मैं तुम्हारे भाई से दोस्ती करने को तैयार हूँ!"
निशा ने मॅन ही मॅन सोचा...," उसका भाई अब उसका अपना हो चुका है... और वो अपने रहते उसको कहीं जाने नही देगी....

अचानक प्यारी देवी की ज़ोर से चीख निकली," ऊईीईई माआआं!" उसने झट से पलट कर पिछे देखा.... टफ ने उसके चूतदों पर ज़ोर से चुटकी काट ली थी... प्यारी ने समझते ही बात पलट दी...," लगता है बस में भी ख़टमल पैदा हो गये हैं.."

सरिता ने टफ को हाथ पीछे करते देख लिया था... पर उसको सिर्फ़ शक था... यकीन नही... बस कंडक्टर रह रह कर कविता की बगल में अपनी कोहनी घिसा देती.. पर जैसा कविता भी यही चाहती हो... उसने कंडक्टर को रोकने की कोशिश नही की...

गौरी को राकेश का एकटक उसकी और देखना सहन नही हो रहा था... उसने अपनी टांगे घुमा कर प्यारी मेडम की और कर ली और साथ ही उसका चेहरा घूम गया... इश्स स्थिति में उसकी जाँघ राज के घुटनो से टकरा रही थी... पर गौरी को इश्स बात से कोई दिक्कत नही थी...

नेहा ने उठ कर मुस्कान के कान के पास होन्ट ले जाकर फुसफुसा कर कहा," ंस्कान! सर के साथ प्रॅक्टिकल करने का मौका है... कर ले..!" मुस्कान ने उँची आवाज़ में ही कह दिया... " मेरी ऐसी किस्मत कहाँ है.. तू ही कर ले प्रॅक्टिकल"

राज सब समझ गया," उसने खुद ही तो ह्यूमन सेक्स ऑर्गन्स पढ़ते हुए लड़कियों को कहा था की जो प्रॅक्टिकल करना चाहती हो... कर सकती है... ज़रूर नेहा उसी प्रॅक्टिकल की बात कर रही होगी... मतलब मुस्कान प्रॅक्टिकल के लिए तैयार है..! उसने अपना हाथ धीरे से अपनी जाँघ से उठा कर उसकी जाँघ पर रख दिया...

कंडक्टर अपनी कोहनी को लगातार मोड्टा जा रहा था... अब उसकी कोहनी के दबाव से कविता की बाई चूची उपर उठी हुई थी... कविता ने शाल निकल कर औध ली ताकि अंदर की बात बाहर ना दिखाई दे सकें... वो इश्स टचिंग का पूरा मज़ा ले रही थी... उधर राकेश भी गौरी द्वारा रास्पोन्से ना दिए जाने से आहिस्ता आहिस्ता कविता की तरफ ही सरक रहा था.. अब दोनों की जांघें एक दूसरे की जांघों से चिपकी हुई थी....
टफ कहाँ मान-ने वाला था.... वो तो था ही ख़तरों का खिलाड़ी. उसका हाथ फिर से प्यारी की जांघों पर रंगे रहा था.. हौले हौले.... उसकी बराबर में बैठा राज मुश्किल से अपनी हँसी रोक पा रहा था; टफ को इतनी जल्दबाज़ी दिखाते देखकर... राज की नज़र सरिता पर गयी... वो रह रहकर टफ के हाथ को देख रही थी... पर उसको ये नही दिखाई दे पा रहा था की आख़िर आगे जाकर हाथ कर क्या रहा है... उसकी मम्मी तो नॉर्मल ही बैठी थी.. अगर टफ उसकी मम्मी के साथ कुच्छ हरकत कर रहा होता तो वो बोलती नही क्या...

गौरी को उल्तियाँ आ सकने का अहसास हुआ.. वो खुद खिड़की की और चली गयी और निशा को दूसरी तरफ भेज दिया... अब निशा की जाँघ राज के घुटनो के पास थी... वो तो चाहती भी यही थी...

मुस्कान को अपनी जाँघ पर रखे राज के हाथ की वजह से कुच्छ कुच्छ होने लगा था.. वो बार बार नेहा की और पीछे देखकर मुस्कुरा रही थी... पर राज को इससे कोई फराक नही पड़ा... निशा क जांघों का दबाव राज पर बढ़ता ही जा रहा था... और टफ के हाथ प्यारी की जांघों के बीचों बीच जाते जा रहे थे.... सारे- आम.

कविता ने अपनी चूची के उपर आ चुकी कोहनी को अपने हाथ से दबा लिया... अब कंडक्टर की कोहनी वहाँ पार्मेनेट सेट हो गयी... कंडक्टर को अहसास हो चुका था की ये लड़की कुच्छ नही बोलेगी...

बस भिवानी पहुच गयी... हँसी गेट के पास ड्राइवर ने बस रोकी और पेशाब करने के लिए उतर गया. अपनी बारी के अहसास से उसका लंड अकड़ता जा रहा था.. उसने देख लिया था कंडक्टर को मज़े लेते... करीब 7:30 बाज गये थे.. कुच्छ कुच्छ ठंड लगने लगी थी... सभी ने अपनी अपनी खिड़कियाँ बंद कर दी.. तीसरी सीट से पिच्चे की लड़कियाँ अपनी अपनी बातों में मस्त थी... उनके पास और टाइम पास करने को था ही क्या...?
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11-26-2017, 12:58 PM,
#34
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
अचानक पिच्चे से 2 सीट आगे एक लड़की ने अपने साथ वाली को इशारा किया," आ देख... वो सर के दोस्त का हाथ..! प्यारी मेडम के कमीज़ के अंदर... उसने उपर उठकर देखा तो पिछे की सभी लड़कियाँ उधर देखने लगी.. उनकी बात अचानक बंद हो गयी. निशा का ध्यान भी टफ के हाथ पर गया... वो प्यारी मेडम के कमीज़ के और शायद उसकी सलवार के भी अंदर जा चुका था... प्यारी आँखें बंद किए बैठी थी... मज़े ले रही थी... उसको अहसास नही था की आधी बस उसी की और देख रही है...

अब सरिता का भी ध्यान पीछे गया... उसने देखा सभी की नज़र उसकी मम्मी की टाँगों के पास है... कुच्छ ना कुच्छ गड़बड़ ज़रूर है, सरिता ने सोचा.... उसकी मम्मी पर भी उसको 'पूरा भरोसा' था. इसका मतलब सर का दोस्त चालू है... उसने भी झपकी आने की आक्टिंग करते हुए अपना सिर टफ के कंधे पर टीका दिया और अपना दायां हाथ अपनी चूचियों के उपर से ले जाते हुए टफ के कंधे पर रख दिया... टफ का ध्यान असलियत में तभी पहली बार सरिता पर गया," नींद आ रही है क्या?"
सरिता संभाल कर बैठ गयी. लेकिन टफ ने अपना हाथ प्यारी की सलवार में से निकाला और सरिता के सिर को पकड़ कर वापस अपने कंधे पर टीका लिया... अब उसको नया माल मिल गया था... प्यारी ने तिर्छि नज़र से पीछे देखा... टफ ने करारा जवाब दिया," ठंड हो गयी है... अब ख़टमल कहाँ होंगे!" बस चलती जा रही थी...
राज को निशा का उसके घुटनो से जाँघ घिसना जान बुझ कर किया हुआ काम लग रहा था... उसने निशा के चेहरे की ओए देखा... वा आँखें बंद किए हुए थी... राज का बाया हाथ मुस्कान की जांघों को सहला रहा था.. हौले हौले...

अंजलि प्यारी के साथ बैठकर बहुत विचलित हो गयी थी. वो किसी भी तरह से राज के पास जाना चाह रही थी... पर कोई चारा नही था... उसने अपनी आँखें बंद की और सोने की तैयारी करने लगी...

कविता के शाल ओढाते ही कंडक्टर और राकेश दोनो की हिम्मत बढ़ गयी थी... राकेश तो अपना हाथ कविता की चूत के उपर रगड़ रहा था... और कंडक्टर अपना बाया हाथ दायें हाथ के नीचे से निकाल कर कविता की बाई चूची को मसल रहा था.. उसके हाथ की हलचल शाल के उपर से ही सॉफ दिखाई दे रही थी... पर ड्राइवर और राकेश के अलावा किसी का ध्यान उधर नही था... कविता की आँखें दो अलग अलग लड़कों से जाम कर मज़े लूट रही थी... पर चुपके चुपके!

टफ ने सरिता का ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए कहा," क्या नाम है?"
सरिता ने धीरे से कान में कहा," धीरे बोलो! मम्मी सुन लेगी!"

टफ ने आसचर्या से कहा," तो तुम अंजलि की बेटी हो... गौरी!"
सरिता ने फिर से उससे रक़िएसट की," प्लीज़ धीरे बोलो! मैं सरिता हूँ; प्यारी की बेटी!"

"क्या?" टफ ने पहली बार उसके चेहरे पर गौर किया... ," अरे हां! तुम्हारी तो शकल भी मिलती है... फिर तो करम भी मिलते होंगे!" टफ ने अब की बार ढहीरे ही कहा!
कविता समझ तो गयी थी की ये आदमी कौँसे करमो की बात कर रहा है.. आख़िर उसकी मा को तो सारा गाँव जनता था.. पर उसने ना शामझ बनते हुए कहा," क्या मतलब?"
टफ ने उसकी छाती पर हाथ रखकर कहा... ," कुच्छ नही... तुम्हारी भी बड़ी तारीफ सुनी है.. शमशेर भाई से.... अब तो मज़ा आ जाएगा... कच्छ देर बाद सब समझ आ जाएगा...!

राज को मुस्कान से पॉज़िटिव रेस्पॉन्स मिल रहा था... वा राज के उसकी जाँघ पर फिसल रहे हाथ से लाल होती जा रही थी... राज ने उसको उलझे हुए शब्दों में इशारा किया," टूर पर पुर मज़े लेना साली साहिबा! ऐसे मौके बार बार नही आते... यहाँ से भी बगैर सीखे चली गयी तो मैं शमशेर को क्या मुँह दिखावँगा... ये तीन दिन तुम्हारी जिंदगी के सबसे हसीन दिन शाबिट हो सकते हैं... जी भर कर मज़े लो... और जी भर कर मज़े दो! समझी..."

बस में हल्के म्यूज़िक की वजह से धीरे बोली गयी बात तीसरे कान तक नही पहुँचती थी.......... बस जिंद शहर के पटियाला चौंक से गुज़री..............

मुस्कान को राज की हर बात समझ में आ रही थी... पर इश्स तरह इशारा करने से पहले उसकी हिम्मत नही हो रही थी.... उसने राज के अपनी गरम जांघों पर लगातार मस्ती कर रहे हाथ को अपने हाथ के नीचे दबा लिया... हूल्का सा... राज के लिए इतना सिग्नल बहुत था.. मुस्कान का...

सरिता तो अपनी मा से दो चार कदम आगे ही थी... टफ के अपनी चूची के उपर रखे हाथ को वहीं दबोच लिया और अपना दूसरा हाथ टफ की पॅंट में तैयार बैठहे उसके लंड पर फेरने लगी...

गौरी सो चुकी थी पर निशा की तो नींद उड़ी हुई थी... वो राज के साथ बैठना चाहती थी... वो पीच्चे घूमकर मुस्कान से बोली," मुस्कान! तू आगे आ जा ना; आगे थोड़ी सी ठंड लग रही है... तेरे पास तो कुम्बल भी है... मैं लाना भूल गयी."पर राज को भला मुस्कान उस्स पल कैसे छोड़ती... उसको तो ये तीन दिन अपनी जिंदगी के सबसे हॅसीन दिन बनाए थे... उसने कंबल ही निशा की और कर दिया," लो दीदी... कुम्बल ओढ़ लो!" अब निशा क्या कहती...?

उधर कविता के साथ तो बुरी बन रही थी... एक तो उसकी चूचियों से बिना बच्चे ही दूध निकालने की कोशिश कर रहा था; दूसरा उसकी सलवार के भी अंदर हाथ ले जाकर उसकी चूत का जूस निकालने पर आमादा था... कविता; उपर चूची नीचे
चूत... के साथ हो रही मस्तियों से मस्त हो चुकी थी... ड्राइवर का ध्यान लगातार उस्स पर जा रहा था... अपनी बारी की प्रतीक्षा में.... राकेश रह रह कर गौरी के चेहरे की और देख लेता... और उसका जोश दुगना हो जाता.....

लगभग सारी बस सो चुकी थी... या सोने का नाटक कर रही थी... जाग रहे थे तो सिर्फ़ ये बंदे; ड्राइवर, कंडक्टर, राकेश, कविया; टफ, प्यारी, सरिता; मुस्कान, राज, निशा और नेहा....... और शायद दिव्या भी... वो बार बार आँखें खोल कर बस में आगे चल रहा तमाशा देख रही थी... उसका हाथ अपनी नन्ही सी चूत पर रखा हुआ था........

बस कैथल पहुँच गयी थी.... बाइ पास जा रही थी.... अंबाला की और... करीब 10:15 का टाइम हो चुका था.

ठंड इतनी भी ज़्यादा नही हुई थी जैसा जागने वाले मुसाफिरों के कंबल खोल लेने से दिख रहा था... सबसे पहले टफ ने कंबल निकाला और अपने साथ ही सरिता को भी उसमें लपेट लिया... सरिता ने आगे पिच्छे देखा और टफ को इशारा किया...," ज़्यादा जल्दी है क्या?"
टफ ने अपनी पॅंट की जीप खोलकर अपना चूत का भूखा लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया," खुद ही चेक कर लो!"
सरिता ऐसे ही लंड की दीवानी थी; उसने अपनी मुट्ही में टफ का लंड पकड़ा और उसको ऊपर से नीचे तक माप कर देखा," ये तो मेरी पसलियां निकल देगा!" सरिता ने धीरे से टफ के कान में कहा."
सरिता ने अपने आप को सिर तक धक लिया था... उसके होन्ट टफ के कान के पास थे..
टफ ने देर नही की.. सरिता के घुटनो को मोड़ कर अगली सीट से लगवा दिया... और घुटनो को दूर दूर करके उसकी चूत का कमसिन दरवाजा खोल दिया... क्या हुआ खेली खाई थी तो?.... थी तो 17 की ही ना!... कमसिन तो कहना ही पड़ेगा!
टफ ने अपने बायें हाथ को सरिता की जाँघ के नीचे से निकाल कर सलवार के उपर से ही चूत की मालिश करने लगा....

लगभग यही काम राकेश अभी तक कविता की चूत के साथ कर रहा था... सरिता से सब सहन नही हो रहा था... वह उठी और बस के पीछे रखे अपने बॅग में से कंबल निकालने चली गयी... पिच्चे जाते ही कविता के मॅन में आइडिया आया... वा कंबल औध कर पिच्छली लुंबी सीट पर ही बैठ गयी... अकेली! उसके आगे वाली लड़कियाँ सो चुकी थी. वा राकेश के वहाँ आने का इंतज़ार करने लगी... उसको यकीन था... उसकी चूत की मोटी मोटी फांकों को मसल मसल कर फड़कट्ी हुई, लाल
करके शांत भी राकेश ही करेगा... कंडक्टर ने तो बस उसको सुलगया था... आग तो राकेश ने ही भड़काई थी.....
कंडक्टर और राकेश के हाथों से जैसे एकद्ूम किसी ने अमृत का प्याला छ्चीन लिया हो.. कविता के पीछे बैठने का मतलब वो यही समझे थे की वो तंग आकर गयी है... वो ये समझ ही नही पाए की वहाँ वो पूरा काम करवाने के चक्कर में गयी है...... बेचारे राकेश और कंडक्टर एक दूसरे को ही देख देख कर मुश्कूराते रहे....

टफ वाला आइडिया राज को बहुत पसंद आया... उसने अपना कंबल निकाला और उसको औध लिया... फिर उसने मुस्कान की और देखा... मुस्कान आँखों ही आँखों में उसको अपने कंबल में बुला लेने का आग्रह सा कर रही थी. राज ने धीरे से बोला," मुस्कान! कंबल में आना है क्या?
वो शर्मा गयी. उसने कंबल के नीचे से हाथ ले जाकर राज का हाथ पकड़ लिया. राज इशारा समझ गया. उसने कंबल उतार कर मुस्कान को दे दिया और बोला," इसको औध कर बस की दीवार से कमर लगा लो!"
मुस्कान उसकी बात का मतलब समझी नही पर उसने वैसा ही किया जैसा राजने उसको कहा था," सर! आप नही औधेंगे?"
राज ने कोई जवाब नही दिया.. उसने मुश्कान की और खिसक कर उसकी टाँगें उठाई और कंबल समेत अपनी जांघों के उपर से सीट के दूसरी तरफ रख दिया.. कंबल टाँगों पर होने की वजह से वो ढाकी हुई थी. अब राज की जांघें मुस्कान की चूत की गर्मी महसूस कर रही थी... उनके बीच में सिर्फ़ उनके कपड़ा थे... और कुच्छ नही... राज का हाथ अब मुस्कान की चूत को सहला रहा थे कपड़ों के उपर से ही..... अब से पहले मुस्कान के साथ ऐसा कभी नही हुया था... उसको इतने मज़े आ रहे थे की अपनी आँखों को खुला रख पाना और चेहरे से मस्ती को च्छुपाना... दोनो ही मुश्किल थे...

निशा की जांघें राज के घुटनों से दूर होते ही मचल उठी... उसने राज की और देखा... राज और मुस्कान एक दूसरे से चिपक कर बैठहे थे... निशा का ध्यान राज के पैरों की डाई तरफ मुस्कान के पंजों पर पड़ा..," ये बैठने का कौनसा तरीका है..." निशा समझ गयी... की दोनों के बीच ग़मे शुरू हो चुका है..... फिर उसकी नज़र नेहा पर पड़ी... वो मुश्कान के काँप रहे होंटो को देखकर मुश्कुरा रही थी... निशा और नेहा की नज़र मिली... वो दोनों अपनी सीट से उठी और इश्स सीक्रेट को शेर करने के लिए सबसे पिछे वाली सीट पर चली गयी.... कविता के पास....!

निशा ने जाते ही कविता पर जुमला फैंका," यहाँ क्यूँ आ गयी? आगे मज़ा नही आया क्या?.... राकेश के साथ....
कविता को पता नही था की राकेश से अपनी चूत मसळवते समय निशा उसको देख चुकी थी... वो हल्का सा हँसी और बोली... नही मुझे तो नही आया मज़ा... तुझे लेना हो तो जाकर ले ले!
नेहा का मज़ा लेने का पूरा मॅन था," निशा दीदी! मैं जाउ क्या आगे राकेश के पास.... वो कुच्छ करेगा क्या?
निशा ने नेहा पर कॉमेंट किया," रहने दे अभी तू बच्ची है..." फिर कविता को कहने लगी... आगे देख क्या तमाशा चल रहा है... मुस्कान और सुनील सर के बीच..."

कविता बोली," और वो सर का दोस्त भी कम नही है... थोड़ी देर पहले प्यारी मेडम पर लाइन मार रहा था... आशिक मिज़ाज लगता है.." उसने ये बात च्छूपा ली की वो तो उसकी चूत में से भी सीधी उंगली से गीयी निकल चुका है... और नेहा भी तो... शमशेर के साथ.... नेहा और कविता की नज़रें मिली... दोनो ही एक दूसरे के मॅन की बात समझ कर हँसने लगी....

निशा उनकी बात का मतलब ना समझ पाई," क्या बात है. तुम हंस क्यूँ रही हो?"

कविता ने रहस्यमयी अंदाज में कहा," कुच्छ नही... पर नेहा अब बच्ची नही है!"
नेहा ने कविता को घहूरा," दीदी! तुम मेरी बात बताॉगी, तो मैं आपकी भी बता दूँगी... देख लो!"
कविता उसकी बात सुनकर चुप हो गयी.. पर निशा के दिमाग़ में खुजली होने लगी.," आए मुझे भी बता दो ना प्लीज़... मैं किसी को नही बाताओंगी.... प्लीज़... बता दो ना..."

कविता और नेहा ने एक दूसरे की और देखा... वो निशा पर भरोसा कर सकती थी... पर निशा की किसी ऐसी बात का उनको पता नही था... कविता बोली... ठीक है.. बता देंगे... पर एक शर्त है..........

मुस्कान की हालत खराब हो गयी थी.. अपनी कुवारि और मर्द के अहसास से आज तक बेख़बर चूत रह रह कर आ भर रही थी.. जैसे जैसे राज अपने हाथ से उसकी हल्के बलों वाली चूत को प्यार से सहला रहा था, मुस्कान उस्स पर से अपना नियंत्रण खोती जा रही थी.. उसको लग रहा था जैसे उसकी चूत खुल सी गयी हो... चूत के अंदर से रह रह कर निकलने वेल रस की खुश्बू और उसकी सलवार के गीलेपान को सुनील भी महसूस कर रहा था... उसने मुस्कान की सलवार के नाडे पर हाथ डाला... मुस्कान अंजाने डर से सिहर गयी... उसने पिछे देखा... अदिति सो चुकी थी...
मुस्कान ने सर का हाथ पकड़ लिया," नही सर... प्लीज़... कोई देख लेगा... मैं मार जवँगी...
राज उसकी चूत को अपनी आँखों के सामने लेनी के लिए तड़प रहा था. छूने से ही राज को अहसास हो गया था की चूत अभी मार्केट में नही आई है... पर बस में तो उसका 'रिब्बन' काट ही नही सकता था... राज ने धीरे से मुस्कान को कहा," कुच्छ करूँगा नही... बस देखने दो... मुस्कान ने सामने टफ की और देखा....

टफ सरिता का मुँह अपनी जांघों पर झुका चुका था... कंबल के नीचे हो रही हलचल को देखकर भी मुस्कान ये समझ नही पा रही थी की टफ की गोद में हो रही ये हुलचल कैसी है... उसने राज को उधर देखने का इशारा किया... राज ने अपनी गर्दन टफ की और घुमाई तो टफ उसकी और देखकर मुस्कुराने लगा," भाई साहब! अपने अपने समान का ख्याल रखो... आ.. काट क्यूँ रही है?... मेरे माल पर नज़र मत गाड़ो... फिर मुस्कान का प्यारा चेहरा देखकर बोला....," ... या एक्सचेंज करने का इरादा है भाई...."

सरिता बड़ी मस्ती से टफ के लंड को अपने गले की गहराइयों से रु-बारू करा रही थी... अगर ये बस ना होती तो टफ कब का उसकी चूत का भी नाप ले चुका होता... सब कुच्छ खुले आम होते हुए भी... कुच्छ परदा तो ज़रूरी था ना... जैसे आज कल की लड़कियाँ अपनी चूचियों को ढकने के नाम पर एक पतला सा पारदर्शी कपड़ा उन्न पर रख लेती हैं... ऐरफ़ ये दिखाने को की उन्होने तो च्छूपा रखी हैं.. पर दर असल वो तो उनको और दिखता ही है...

सरिता ने लंड की बढ़ रही अकारण के साथ ही उसको गले के अंदर उपर नीचे करने में तेज़ी ला दी... रह रह कर वो टफ के लंड को हूल्का सा काट लेती.. जिससे टफ सिसक पड़ता... बस टफ तो यही सोच रहा था की एक बार ये बस मनाली पहुँच जाए... साली को बतावँगा.. प्यार में दर्द कहते किसको हैं... उसने सरिता की चूची को अपने हाथ में दबाया हुआ था... वो भी उसकी चूचियों को नानी याद करा रहा था... पर सरिता को तो प्यार में वाहसीपान जैसे बहुत पसंद था.. अचानक ही टफ ने सरिता का सिर ज़ोर से अपने लंड के उपर दबा लिया.. लंड से रस की जोरदार पिचकारी निकल कर गले से सीधे सरिता के पेट में पहुच गयी... ना तो सरिता को उसके र्स का स्वाद ही पता चला, और ना ही उसके अरमान शांत हुए... उसकी चूत अब दहक रही थी.. वो किसी भी तरीके से अब इश्स लंड को चूत में डलवाना चाहती थी... पर टफ तो उस्स पल के लिए तो शांत हो ही चुका था... अपना सारा पानी निकालने के बाद उसने सरिता को अपने मुँह से लंड निकालने दिया... पर सरिता ने मुँह बाहर निकलते ही अपने हाथ में पकड़ लिया और टफ को कहा," इसको अभी खड़ा करो और
मेरे अंदर डाल दो... नीचे!

बस ने अंबाला सिटी से जी.टी. रोड पर कर चंडीगढ़ हाइवे पर चलना शुरू किया... करीब 11:30 बजे...

अब सच में ही ठंड लगने लगी थी... सब के सब कंबलों में डुबक गये....

राज सिर्फ़ उसकी चूत को एक बार देखना भर चाहता था... उसके दोबारा कहने पर मुस्कान ने अपना नाडा खोल कर सलवार चूतदों से नीचे खिसका दी... साथ में अपनी पनटी भी... अब उसकी नगी चूत सुनील के हाथों में थी... राज ने मुस्कान की रस से सराबोर हो चुकी चूत को उपर से नीचे तक सहला कर देखा... एक दूं ताज़ा माल था... हल्के हल्क बॉल हाथ नीचे से उपर ले जाते हुए जैसे खुश होकर लहरा रहे थे... पहली बार इश्स तरह उस्स बंजर चूत पर रस की बरसात हुई थी.. वे चिकने होकर रेशम की तरह मालूम हो रहे थे...
राज से रहा ना गया.. उसने कंबल उपर से हटा दिया... क्या शानदार चूत थी... जैसी एक कुँवारी चूत होनी चाहिए... उससे भी बढ़कर... राज ने अपनी उंगली च्छेद पर रखी और अंदर घुसने की कोशिश की.. चिकनी होने पर भी अंदर उंगली जाते ही मुस्कान दर्द के मारे उच्छल पड़ी... और उच्छलने से उसके चूतड़ राज की जांघों पर टिक गये.. उसने नीचे उतरने की कोशिश की पर राज ने उसको वहीं पकड़ कर कंबल वापस चूत पर ढक दिया... टफ सरिता की चूत में उंगली करके उसके अहसान का बदला चुका रहा था... पर उसका धन राज की गोद में बैठी मुस्कान पर ही था... पर ये दोनो जोड़े निसचिंत थे... कम से कम एक दूसरे से...

राज थोड़ा सा और सीट की एक तरफ सरक गया... अब मुस्कान बिल्कुल उसकी जांघों के बीच में राज के लंड पर चूतड़ टिकाए बैठी थी... राज ने पूरी उंगली उसकी चूत में धीरे धीरे करके उतार दी थी... सीट की उचाई ज़्यादा होने की वजह से अब भी बिना कोशिश किए कोई किसी को आगे पीच्चे नही देख पा रहा था....

मुस्कान ने राज को कस कर पकड़ लिया.. उंगली घुसने से मुस्कान को इतना मज़ा आया की वो अपने आप ही धीरे धीरे आगे पीच्चे होकर उंगली को चूत के अंदर की दीवारों से घिसने लगी... वो ज़्यादा टाइम ना टिकी... मुस्कान का रस बाहर आने का अंदाज़ा लगाकर राज ने वापस उसको सीट पर बिठा दिया... मुस्कान ने राज की उंगली को ज़ोर से पकड़ा और अपनी चूत के अंधार ढ़हाकेल कर पकड़ लिया... और अकड़ कर अपनी टाँगे सीधी कर ली... सीट गीली हो गयी...... मुस्कान ने उचक कर नेहा को बताना चाहा की उसने प्रॅक्टिकल करके देख लिया... पर नेहा तो पीछे कविता और निशा के साथ बैठी थी......... मुस्कान राज से लिपट गयी...और सर को थॅंक्स बोला.. राज ने उसके होंटो को अपने होंटो में दबा लिया.... कंबल में धक कर.....

शर्त की बात सुनकर पहले तो निशा हिचकी पर फिर बोली ,"बोलो क्या शर्त है..?"

नेहा कविता के दिमाग़ को पढ़ नही पाई," नही दीदी... प्लीज़ मत बताओ; किसी को पता चल गया तो?

कविता ने उसकी बात पर ध्यान ना देते हुए कहा," निशा! अगर तुम कोई अपना राज बता दो तो हम भी तुम्हे एक ऐसी बात बता सकती हैं, जिसको सुनकर तुम उच्छल पड़ोगी... हम तुझे टूर पर मज़े दिलवा सकती हैं... "

निशा को अपने भाई के साथ 2 दिन पहले मनाई गयी सुहग्रात याद आ गयी.. पर इश्स बात को तो वा किसी के साथ भी शेर नही कर सकती थी...," मेरी कोई बात नही है... हन में दिव्या और सरिता की एक बात बता सकती हूँ...?"
कविता चौकी...," दिव्या की बात? वो तो छ्होटी सी तो है...!... और सरिता की बात कौन नही जानता...!"
निशा ने और भी मज़े लेते हुए कहा," देख लो! मेरे पास इतनी छ्होटी लड़की की बात है... और वो भी एक ऐसे आदमी के साथ जो तुम सोच भी नही सकती.... !"

ठीक है बताओ, पर इसके बाद हम एक आर काम करवाएँगे अपनी बात बताने से पहले..!"

अब निशा को उनकी सुन-ने से ज़्यादा अपनी बात बताने पर ध्यान था..," मैने स्कूल में शमशेर को सरिता और दिव्या के साथ करते देखा था..."

"क्य्ाआ?" दोनो के मुँह से एकसाथ निकला... शमशेर के साथ ही तो वो अपनी बात बताने की सोच रही थी...!
"दिव्या के साथ भी?" कविता ने पूचछा.

निशा ने सच ही बता दिया..," नही! पर वो भी नंगी खड़ी थी सर के साथ..."

अब कविता और नेहा के पास बताने को इससे ज़्यादा कुच्छ नही था की शमशेर ने ही एक दोस्त के साथ मिलकर उनको खूब चोदा था... और वो दोस्त इसी बस में जा रहा था... उनके साथ... और इसका मतलब टूर में मौज करने का हथियार उनके साथ ही जा रहा था...

"अब बताओ भी!" निशा ने कविता को टोका.

"हम तुम्हारी कोई बात जाने बिना तुम्हे नही बता सकते... अब जैसे तूने सरिता की बात बता दी ऐसे ही हमारी भी किसी को बता सकती हो... पर हम तुम्हे बता सकते हैं... अगर तुम एक काम कर सको तो!" कविता ने कहा..

"क्या काम!" निशा ने सोचते हुए पूचछा...

"अगर तुम अपनी सलवार और पनटी को निकाल कर अपनी ये हमको दिख सको तो....." कविता ने सौदा निशा के सामने रखा....

"तुम पागल हो क्या? ये कैसे हो सकता है... और तुम्हे देखकर मिलेगा क्या... ?"

"मैं सिर्फ़ ये देखूँगी की तुम अभी तक कुँवारी हो या नही..." कविता ने निशा से कहा..

"तुम्हे कैसे पता लगेगा" निशा अचरज से बोली...

"वो तुम मुझ पर छ्चोड़ दो.. और तुम्हे भी सीखा दूँगी कैसे देखते हैं... कुँवारापन...!" कविता बोली...
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Reply
11-26-2017, 12:58 PM,
#35
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
निशा को विस्वास नही हो रहा था की कोई चूत देखकर ये बता भी सकता है की चूत चुड चुकी है या नही....," ठीक है... मैं तैयार हूँ... पहले तुमको बात बतानी पड़ेगी..."

"ऐसा नही होगा; तुम बाद में मुकर सकती हो" नेहा ने अंदेशा प्रकट किया..

"ये तो मैं भी कह सकती हूँ की तुम भी बाद में मुकर सकती हो..." निशा ने जवाब दिया.

कविता बताने को राज़ी हो गयी," सुनो! वो शमशेर सर हैं ना... उन्होने हमको भी चोद दिया..."
"च्चीी ! कैसी भासा बोल रही हो...? और क्या सच में..? दोनो को?" निशा को अचरज हुआ की एक आदमी किस किस को चोदेगा..."

"नही... शमशेर ने सिर्फ़ नेहा को चोदा था... मेरे सामने ही..." कविता ने बताया..

"तुम वहाँ का कर रही थी..?" निशा को अब भी विस्वास नही हो रहा था...
"मुझे कोई और चोद रहा था"
"कौन?"
" ये जो सामने सरिता के साथ कुच्छ कुच्छ कर रहा है अभी... ये शमशेर सर का भी दोस्त है...

निशा की आँखें फटी रह गयी.. उसने कभी भी नही सोचा था की सेक्स का ये खेल ऐसे भी हो सकता है... 2 लड़के... 2 लड़की..," तुम्हे शर्म नही आई साथ साथ"

कविता ने सपस्ट किया," वो सूब तो यूँही हो गया था... हम कुछ कर ही नही सके... पर मैं चाहती हूँ की कम से कम एक बार और वैसे ही काई लड़कियाँ और काई लड़के होने चाहियें... टूर पर... सच में इतना मज़ा आता है..."

नेहा ने भी अपना सिर खुश होकर हिलाया..," अब आप दीदी की बात पूरी करो.. आपकी सलवार उतार कर दिकजाओ; आप कुँवारी हैं या नही...

बस ने पंचकुला से आगे पहाड़ी रास्तों पर बढ़ना शुरू किया था... ठंड बढ़ने लगी............ करीब 12:00 बाज गये थे... आधी रात के......

टफ अब सरिता की आग बुझाने की कोशिश कर रहा था... उसी तरीके से; जिस-से तहोड़ी देर पहले मुस्कान शांत हुई थी... उंगली से.. अब मुस्कान राज के लंड की गर्मी को अपनी जीभ से चट चट कर शांत कर रही थी... कंबल के अंदर...

निशा ने अपना वाडा निभाया... उसने झिझकते हुए अपन सलवार उतार दी... कविता उसकी पनटी को देखते ही बोली," कहाँ से ली.. बड़ी सुंदर है" ... वही लड़कियों वाली बात...

निशा को दर सता रहा था की कहीं कविता को सच में ही कुँवारी और चूड़ी हुई चूत में फ़र्क करना ना आता हो! अगर उसने उसकी चूत के चुड़े होने की बात कह दी तो वो किसका नाम लेगी...अपने सगे भाई का तो ले नही सकती...

कविता ने निशा की चूत पर से पनटी की दीवार को साइड में किया... निशा की चूत एक दूं उसके रंग की तरह से ही गोरी सी थी... कविता ने निशा के चेहरे की और देखा और उसकी चूत के च्छेद पर उंगली टीका दी... निशा एकद्ूम से उत्तेजित हो गयी... 2 दिन पहले उसके भाई का लंड वहीं रखा था.. उसकी चूत के मुँह पर... और उसकी चूत उसके भाई के लंड को ही निगल गयी थी... पूरा..!

कविता ने एकद्ूम से उंगली उसकी चूत में थॉंस दी... सर्ररर से उंगली पूरी अंदर चली गयी.....

बस का ड्राइवर बेकाबू हो रहा था... कितने सपने संजोए तहे उससने आधी दूर मज़े लेने के... कितनी मस्त मोटी मोटी चूचिया थी.. उस्स लड़की की... कंडक्टर सला अकेले ही मज़े ले गया... अब क्या करूँ... ये सोचते सोचते उसके मॅन में एक आइडिया आया...

उसने अचानक ही रेस ओर क्लच एक साथ दबा कर गाड़ी रोक दी... जो जाग रहे थे अचानक ही सब चौंके... जल्दबाज़ी में अपने आपको ठीक किया. टफ ने पूचछा..., "क्या हुआ भाई...?"

"शायद कलुतचप्लते उडद गयी साहब!" चढ़ाई को झेल नही पाई.. पुरानी हो चुकी तही....

टफ ने रहट की साँस ली, बाकियों ने भी.... अब अपना अपना काम करने... और करवाने के लिए सुबह का इंतज़ार नही करना पड़ेगा.. एक बार तो टफ के मॅन में आई की स्टार्ट करके देखे... पर उसको लगा जो हुआ तहीएक ही हुआ है...

राज और टफ ने बाहर निकल कर देखा... चारों और अंधेरा था... एक तरफ पहाड़ी थी तो दूसरी तरफ घाटी....," अब क्या करें?" राज ने टफ की राई लेनी चाही....

सबसे पहले तो एक एक बार चोदुन्गा दोनों मा बेटी को... उसके बेगैर तो मेरा दिमाग़ काम करेगा ही नही....

राज के पास तो तीन तीन विकल्प तहे; अंजलि, गौरी, और मुस्कान...

पर ऊए उसकी सोच वो... टूर की सब लड़कियाँ प्रॅक्टिकल करना चाहती थी.....

बस के रुकते ही धीरे धीरे करके सभी उठ गये. सभी ने इधर उधर देखा... अंजलि ने राज से मुखातिब होकर अपनी आँखें मलते हुए कहा," क्या हुआ?? बस क्यूँ रोक दी...?"

"बस खराब हो गयी है.. मेडम... अब ये सुबह ही चलेगी....! अभी तो मिस्त्री मिलेगा नही....." ड्राइवर ने आगे आ चुकी कविता को घूरते हुए कहा... तकरीबन सभी लड़कियाँ जो पहली बार मनाली के टूर पर आई थी... उदास हो गयी... वो जल्दी से जल्दी मनाली जाना चाहती थी... पर कूम से कूम एक लड़की ऐसी थी... जो इश्स मौके का फयडा उतहाना चाहती तही...'कविता!' उसने कातिल निगाहों से राकेश को देखा... पर राकेश का ध्यान अब निशा को कुच्छ कहकर खिलखिला रही गौरी पर था... राज और टफ आस पास का जयजा लेने नीचे उतरे... उनके साथ ही अंजलि और प्यारी मेडम भी उतर गयी... कविता ने राकेश को कोहनी मारी और नीचे उतार गयी... राकेश इशारा समझ गया... वो भी नीचे उतार गया... धीरे धीरे सभी लड़कियाँ और ड्राइवर कंडक्टर भी बस से उतार गये... और दूर तारों की तरह टिमटिमा रहे छोटी छोटी बस्तियों के बल्बस को देखने लगे... कहीं दूर गाँव में दीवाली सी दिख रही थी... जगह जगह टोलियों में लड़कियों समेत कंबल औधे सभी बाहर ही बैठह गये... अब ये तय हो गया था की बस सुबह ठीक होकर ही चलेगी.... गौरी बार बार राकेश की और देख रही थी... अब तक उसको दीवानो की तरह घूर रहे राकेश का ध्यान अब उस्स पर ना था... थोड़ी देर पहले तक राकेश को अपनी और देखते पाकर निशा के कान में उसको जाने क्या क्या कह कर हँसने वाली गौरी अब विचलित हो गयी... लड़कियों की यही तो आदत होती है.... जो उसको देखे वो लफंगा... और जो ना देखे वो मानो नही होता बंदा(मर्द).... अब गौरी लगातार उसकी और देख रही थी... पर राकेश का ध्यान तो कुच्छ लेने देने को तैयार बैठी कविता पर था... गौरी ने देखा; राकेश ने कविता को हाथ से कुच्छ इशारा किया और नीचे की और चल पड़ा... धीरे धीरे... सब से चूपते हुए... गौरी की नज़र कविता पर पड़ी... उसके मान में कुच्छ ना कुच्छ ज़रूर चल रहा था... अपनी टोली में बैठकर भी वा किसी की बातों पर ध्यान नही दे रही थी.... वा बार बार पिच्चे मुड़कर अंधेरे में गायब हो चुके राकेश को देखने की कोशिश कर रही तही..... आख़िरकार वो आराम से उठी और सहेलियों से बोली...," मैं तो बस में जा रही हूँ सोने..."
गौरी साथ ही उठ गयी," चलो मैं भी चलती हूँ!"

"तो तूही चली जा..." कविता गुस्से से बोली थी...

गौरी को विस्वास हो गया की ज़रूर कविता राकेश के पिछे जाएगी... ," अरे मैं तो मज़ाक कर रही थी..!"

कविता को अब उठते हुए शरम आ रही थी... पर चूत की ठनक ने उसको थोड़ी सी बेशर्मी दिखाने को वीवाज़ कर दिया... वो अंगड़ाई सी लेकर उठी और रोड के दूसरी तरफ... बस के दरवाजे की और चली गयी.... गौरी का ध्यान उसी पर था.... सड़क पर काफ़ी अंधेरा था... पर क्यूंकी गौरी ने बस के पीछे अपनी आँखें गाड़ा रखी थी... उसको कंबल औधे एक साया सड़क पर जाता दिखाई दिया.... गौरी को यकीन था वो कविता ही थी...

गौरी भी धीरे से उठी और वहाँ से सरक कर बस में जा चढ़ि.... कविता वहाँ नही थी..... उसको पूरा यकीन हो गया था की कविता और राकेश अब ज़रूर ग़मे खेलेंगे.... गौरी राज और अंजलि का लाइव मॅच तो देख ना सकी थी... पर लाइव मॅच देखने का चान्स उसका यही पूरा हो सकता था... उसने दोनो को रंगे हाथो पकड़ कर अपनी हसरत पूरी करने की योजना बनाई... और उधर ही चल दी.... जिधर उसको वो साया जाता दिखाई दिया था.....

उधर उनसे दूसरी दिशा में ड्राइवर थोड़ी ही दूरी पर कविता का मुँह बंद करके उसको घसीट-ता सा ले जा रहा था... वैसे तो कविता को उससे चुदाई करवाने में भी कोई समस्या नही तही.... पर एक तो अंजान जगह उस्स पर आदमी भी अंजान... वो डरी हुई थी....

जिधर गौरी साया देखकर गयी थी... उससे बिल्कुल दूसरी दिशा में काफ़ी दूर ले जाकर ड्राइवर ने उसके मुँह से हाथ हटा लिया... लेकिन वो उसको एक हाथ से मजबूती से पकड़े हुए था...

कविता कसमसाई...," छोड़ दो मुझे... यहाँ क्यूँ ले आए हो?" पर उसकी आवाज़ में विरोध उतना भी ना था जितना एक कुँवारी लड़की को अपने हो सकने वाले बलात्कार से पहले होता है...

ड्राइवर ने लगभग गिड़गिदा कर कहा," हा य! मेरी रानी! एक बार बस दबा कर देख लेने दो... मैं तुम्हे जाने दूँगा.."

"नही.. मुझे अभी छोड़ो...!" मुझे जाने दो"... ड्राइवर को गिड़गिदते देख कविता में थोड़ी सी हिम्मत आ गयी और नखरे दिखाने लगी... वैसे उसके लिए तो राकेश और ड्राइवर में कोई फ़र्क नही था... आख़िर लौदा तो दोनो के ही पास था.....

ड्राइवर को कविता की इजाज़त नही चाहिए थी... वो तो बस इतना चाहता था की पूरा काम वो आसानी से करवा ले... वरना बस में उसकी शराफ़त वो देख ही चुका था... कैसे दो दो के मज़े एक साथ ले रही थी...
"तेरी चूची कितनी मोटी मोटी हैं... गांद भी मस्त है... फिर चूत भी... कसम से तू मुझे एक बार हाथ लगा लेने दे... जैसे 'शिव' से डबवा रही थी.... हाए क्या चीज़ है तू! " ड्राइवर रह रह कर उसको यहक़्न वहाँ से दबा रहा था... उसका एक हाथ अपने लंड को थोड़ा इंतज़ार करने की तस्सली दे रहा था.... पर कविता थी की उसके नखरे बढ़ते ही जा रहे थे," मैं तुमको हाथ लगाने भी देती... पर तुम मुझे ऐसे क्यूँ... आ... उठा कर लाए... मैं कुच्छ नही करने दूँगी"

उसका वोरोध सरासर दिखावा था... ड्राइवर तो कर ही रहा था... सब कुच्छ... पर बाहर से... उसने कविता का एक चूतड़ अपने हाथ में पकड़ रखा तहा और चूतदों के बीच की खाई को उंगलियों से कुरेड रहा था.... मानो उसकी गांद को जगा रहा हो....," करने दे ना चोरी.. बड़ी मस्त है तू..."

"नही... मैं कुछ नही करने दूँगी" कविता ने गुस्सा दिखाते हुए कहा... जैसे ड्राइवर अभी तक उससे हाथ ही मिला रहा हो...

ड्राइवर उसको धीरे धीरे सरकता सरकाता सड़क के एक मोड़ पर नीचे की और जा रहे छ्होटे से रास्ते की और ले गया... शायद वो रास्ता नीचे गाँव में जाता था... मनाली के रोड से दूर.....

"देख तो ले एक बार! ड्राइवर ने पॅंट में से अपना लंबा, मोटा एर काला सा लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया... लंड बिल्कुल तैयार था... उसकी चूत की सुरंग को और खोल देने के लिए...

"नही, मुझे कुच्छ नही देखना! " कविता ने मुँह फेर लिया.. पर ऐसे शानदार लंड को अपने हाथ से अलग ना कर पाई... ऐसा लंड रोज़ रोज़ कहाँ मिलता है... पर उपर से वो यही दिखा रही थी की उसको कुच्छ भी नही करना है.... कुच्छ भी......

ड्राइवर के लंड को सहलाते सहलाते कविता इतनी गरम हो गयी थी की उसने अपने दूसरे हाथ को भी वहीं पहुँचा दिया... पर नखरे तो देखो लड़की के," तुम बहुत गंदे हो.... तुम्हे शरम नही आती क्या...?"

ड्राइवर बातों का खिलाड़ी नही था.... ना ही उससे कविता की बात का जवाब देने में इंटेरेस्ट था... वो तो बस एक ही रट लगाए हुए था... ," एक बार दे देगी तो तेरा क्या घिस जाएगा?"
कविता ने फिर वही राग अलापा," नही मुझे कुच्छ देना वेना नही है..." उसका ध्यान अब भी ड्राइवर के लंड की धिराक रही टोपी पर था....

ड्राइवर ने अपना हाथ सलवार के अंदर से पीछे उसकी गांद की दरारों में घुसा दिया तहा... वो एक हाथ से ही दोनो चूतदों को अलग अलग करने की कोशिश कर रहा था.. पर मोटी कसी हुई गांद फिर भी बार बार चिपकी जा रही थी... ड्राइवर क एक उंगली गांद के प्रवेश द्वार तक पहुँच ही गयी... उसने उंगली गांद के च्छेद में ही घुसा दी... कविता को रात के तारे दिखाई देने बंद हो गये तहे.... क्यूंकी उसकी आँखें मारे आनंद के बंद हो गयी थी... वो आगे होकर ड्राइवर की छति से चिपक गयी और उसके होंटो पर अपने नरम होंटो से चूमने लगी...

ड्राइवर तो सीधे ही सिक्सर लगाने वाला आदमी था... ये होन्ट वोंट उसकी समझ के बाहर थे... उसने झट से कविता का पहले ही उतारा कंबल ज़मीन पर बिच्छा दिया और उसको ज़बरदस्ती उसस्पर लिटने की कोशिश करने लगा...

"रुक जाओ ना! ईडियट... चूत मरने का मज़ा भी लेना नही आता...." कविता अब सीधे क्षकशकश मूड में आ गयी थी...

ड्राइवर उसकी बात सुनकर ठिठक कर खड़ा हो गया.. जैसे सच में ही वो नादान हो... जैसे कविता ही उसको ज़बरदस्ती वहाँ उठा लाई हो....
वो चुप चाप कविता की और देखने लगा; जैसे पूच्छ रहा हो... फिर कैसे मारनी है... चूत!

कविता ने ड्राइवर को सीधा खड़ा हो जाने को कहा.... वो बच्चे की तरह अपनी नूनी पकड़ कर खड़ा हो गया... कविता कंबल पर घुटनो के बाल बैठी और इसका सूपड़ा अपना पूरा मुँह खोल कर अंदर फिट कर लिया... ड्राइवर मारे आनद के मार गया... उसने तो आज तक अपनी बाहू की टाँग उतहकर ढ़हाक्के मार मार कर यूँही पागल किया था... हन अँग्रेज़ी फ़िल्मो में उसने देखा ज़रूर था ये सब... पर उनको तो वा कमेरे की सफाई मानता था... इतना आनंद तो उसको कभी चूत में भी नही आया... जो ये छ्होटी सी लड़की उसको दे रही थी.. वो तो उसका चेला बन गया.. अपने आप वो हिला भी नही... अब जो कर रही तही.. वो कविता ही कर रही थी...

कविता उसके गरम लंड के सुपादे पर अपनी जीभ घिमाने लगी... ड्राइवर मारे आनंद के उच्छल रहा था...."इसस्स्सस्स.... चूऊऊऊओस लीई! कसाआअँ से चहोरि.. तेरे जैसेईईइ लड़की... अया गुदगुदी हो रही है...

कविता ने अपने दोनो हाथों से ड्राइवर के चूतड़ पकड़ रखे थे और... लंड को पकड़ने की ज़रूरत ही नही ठीक... वो तो कविता के होंटो ने जाकड़ रखा तहा.. बुरी तरह...

कविता ने लंड को और ज़्यादा दबोचने की कोशिश करी... पर लंड का सूपड़ा इतना मोटा था की उसके गले से आगे ही ना बढ़ा... वो सूपदे को ही आगे पीच्चे होन्ट करके चोदने लगिइइई...... ऐसा करते हुए वो ड्राइवर के चेहरे के पल पल बदल रहे भाव देखकर और ज़्यादा उत्तेजित हो रही थी.......
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Reply
11-26-2017, 12:59 PM,
#36
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल--14

ड्राइवर को उस्स छ्छोकरी ने सूपड़ा चूस चूस कर इतना पागल कर दिया की वो आखरी दम पर भी अपना लंड बाहर निकलना भूल गया... 5 मिनिट के करीब ही वो थ्रा गया... उसके लंड का रस झटके मार मार कर छ्होरी के मुँह में ही निकल गया... आनंद के मारे उसने अपनी आइडियान उपर उठा ली... पर कविता उसके सूपदे से मुँह हटाने को तैयार ही ना थी.. वा साथ साथ उपर उठती चली गयी... और रस की एक एक बूँद को अपने मुँह में भर लिया... लंड अपने आप ही शर्मा कर बाहर निकल आया... ड्राइवर की हालत देखकर कविता अपनी जीभ से होंटो को चट-ती हुई मुस्कुरा रही थी..," बहुत गरम था... मज़ा आ गया!"
"मेरा सारा प्लान चौपट कर दिया छ्होरी... अपनी चूत को बचा लिया.. मेरे लंड से!" चल जल्दी चल.. बस के पास!" ड्राइवर अपनी चैन बंद करने लगा...
कविता तो पुर रंग में थी," ऐसे नही जाने दूँगी अब... मेरा रस कौन पिएगा!" कहती हुई कविता अपनी सलवार उतारने लगी... और फिर पनटी उतार कर अपनी कमसिन; पर खेली खाई चूत का दीदार ड्राइवर को कराया..

ड्राइवर उसकी 18 साल की चिकनी मोटी फांको वाली चूत को देखता ही रह गया... सच में उसने ऐसी चूत आज तक नही देखी थी... उसने तो आज तक या तो रंडियों की मारी थी या फिर अपनी काली भद्दी सी बहू की... बिना कुच्छ कहे ही वा कंबल पर बैठ गया और कविता की चूत पर हाथ फेरने लगा..," हाई.. कितनी गोरी चिटी है छ्होरी तेरी चूत...

कविता ने एक स्पेशलिस्ट की तरह अपने चूतड़ कंबल पर रखे और अपनी टाँगें फैला दी... ऐसा करते ही चूत की फांकों ने दूर होकर उसका सुर लाल रंग ड्राइवर को दिखाया... वा भौचक्का होकर उसको देखने लगा..

ड्राइवर ने तुरंत अपनी पॅंट उतार दी.. लंड का ओरिज्णल काम करने के लिए....
पर कविता पूरी तरह मस्त थी.. उसने ड्राइवर के चेहरे को पकड़ा और अपनी चूत के दाने से उसके होन्ट लगा कर मचल उठी," इसको मुँह मीं पकड़ कर चूसो!"

ड्राइवर ने जैसे उसकी अग्या का पालन किया.. उसने जीब निकल कर चूत की फांको में रस टपकाना शुरू कर दिया... कविता ने सिर ज़ोर से चूत पर दबा लिया और तेज तेज साँसे लेने लगी... ड्राइवर को ठंड में भी पसीने आने लगे...," अपना लौदा मेरी चूत पर रखो... अंदर मत करना" कविता ने आदेश दिया... और उसका गुलाम हो चुके ड्राइवर ने ऐसा ही किया... वो उसके उपर आ गया... और घुटनो और कोहानियों के बाल ज़मीन पर सेट हो गया.. लंड उसकी चूत के उपर झूल रहा था.. अभी वो पूरी तरह आकड़ा नही था...

कविता ने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर घिसने लगी... बाहर ही... दाने पर... वा सिसक रही थी.. बक रही थी.. और ड्राइवर का लौदा खड़ा होते होते उसकी चूत की फांको के बीच फँस गया.. अब वा ज़्यादा हिल नही रहा था... कविता के चूतड़ उपर उठते चले गये.. लंड अब कम हिल रहा था और कविता की चूत ही उपर नेचे होकर अपने आप से लौदे को गुइसा रही थी..

ड्राइवर अब फिर कगार पर आ गया था झड़ने के... उसने लौदा कविता के हाथ से छ्चीन लिया," अब की बार ऐसे नही... अब अंदर करने दो चूत के...
कविता भी अब मस्त हो चुकी थी... उसने अपनी टाँग हवा में उठा दी... और उनको पिछे ले गयी," लो फँसा दो जल्दी.." वा तड़प सी गयी थी.. लंड को उतारने को...

ड्राइवर ने कविता की टाँगों को पकड़ कर थोड़ा और पिछे किया... अपना लंड चूत के उपर रखा और उस्स पर बैठ गया... कविता की एकद्ूम साँस बंद हो गयी.. उसका गला सूख गया... आँखें बाहर आने को हुई... और वा मिमियने लगी.. ," बाहर निकाल जल्दी.. मार गयी.. माआअ.. " पर ड्राइवर ने अपने गुरु से बग़ावत कर दी... उसका मुँह दबोचा और उसके अंदर समाता चला गया... पूरा लंड चूत में उतार कर उसने कविता की चूत को देखा.. वा ऐसे ही खुल गयी थी जैसे उसकी बहू की चूत सुहग्रात वाले दिन खुल गयी थी... वा भी ऐसे ही चीखी थी.. और अगले दिन कभी ना आने की धमकी देकर गयी थी... पर चूत तो चूत होती है... उसके बाद जब उसकी बाहू वापस आई तो कभी जाने का नाम ही ना लिया...

ड्राइवर ने लंड पूरा चूत में फँसाए फँसाए ही कविता को बैठा लिया अपन जाँघो पर.. आर उसका कमीज़ उतार दिया... ब्रा से ढाकी उसकी चूचियाँ इतनी मस्त लग रही थी की ड्राइवर ने तुरंत उसकी ब्रा को उपर उठा कर उसकी चूचियों को ब्रा के नीचे से निकाल लिया और उनको चूसने लगा.. धीरे धीरे!
कविता की चूत ने जैसे तैसे ड्राइवर का लंड अपने अंदर रख लिया... ड्राइवर उसको अपनी जांघविं उपर नीचे करके हिला रहा था और थोड़ा थोड़ा लंड चूत के अंदर बाहर होने लगा....

धीरे धीरे मज़ा बढ़ने लगा... कविता ने उसके गले में बाहें डाली और पिछे लुढ़क गयी... लगभग पहले वाली पोज़िशन आ गयी... ड्राइवर अपने घुटनो पर बैठ गया और लंड को थोड़ा और ज़्यादा अंदर बाहर करने लगा.. अब कविता को भी जन्नत में होने का अहसास हो रहा था... उसको लगा दर्द में तो इश्स मज़े से भी ज़्यादा मज़ा आया था... सोचते सोचते ही उसकी चूत का ढेर सारा रस बाहर निकलने लगा.. झटके अब झटके नही लग रहे थे... लंड इतनी सफाई से अंदर बाहर हो रहा था की जैसे वो धक्के लगा ही ना रहा हो.. अचानक कविता का बचा खुचा रस भी बौच्हर की तरह से निकल कर लंड के साथ ही बाहर टपकने लगा... कविता को अब दर्द का अहसास होने लगा... अब इश्स दर्द में मज़ा नही था... पर ड्राइवर का काम अब बहुत देर तक चलना था.... कविता ने कहा "अब इसस्में नही... में उल्टी होती हूँ.. तुम पीछे कर लो"

ड्राइवर का तो मज़े से बुरा हाल हो गया... गांद में जाने का ऑफर मिलते ही लंड और शख्त हो गया... वहाँ और शख़्ती की ज़रूरत जो थी..
उसने झट अपना लंड बाहर निकाला और कविता को कुतिया बना दिया.. उसकी कमर को बीच से नीचे दबा कर जितना गांद को खोला जा सकता था.. खोला... लंड को गांद के च्छेद पर टीकाया और बोला.. "डाल दूं?"

"हां!" और हां कहते ही कविता ने अपने दातों को बुरी तरह भींच लिया... उसको पता था अब क्या होना है...

ड्राइवर के ज़ोर लगाते ही चिकना होने की वजह से वो फिसल कर चूत में ही घुस गया.. कविता चिल्ला उठी.. "यहाँ क्यूँ कर दिया कामीने...!"

ड्राइवर ने लंड निकल कर सॉरी बोला... उसने कविता की चूत से अपनी उंगली को घुसा कर रस लगाया और उंगल गांद में घुसा दी... इससे मोटे की तो वो आदि थी," इससे कुच्छ नही होगा... लंड घिसा अपना..."

"चिकनी तो कर लूँ छ्होरी.. तेरी गाड" उसने रस को अच्छि तरह से उसकी गांद में लगाया और फिर से अपना लौदा ट्राइ किया.. एक हाथ से पकड़ा और उस्स पर ज़ोर डाला.. सूपड़ा आधा अंदर गया.. और कविया दर्द और मज़े के मारे मार सी गयी," फँसा दे... फँसा दे... जल्दी फँसा दे... फटने दे चिंता मत कर...

ड्राइवर को भला क्या चिंता होनी थी.. उसने एक धक्का और ज़ोर से मारा और लंड का गोल घेरा उसकी गाड में फँस गया...
कविता की टाँगें जैसे बीच में से काट जायेंगी... पर उसमें गजब की हिम्मत थी... उसने अपने मुँह में कंबल त्हूस लिया... पर टांगे नही हिलने दी मैदान से...

कुच्छ देर बाद गांद ने भी हिम्मत हार कर खुद को खोल ही दिया लंड के लिए... अब लंड बाहर कम आता और हर बार अंदर ज़्यादा जाता... ऐसे ही इंच इंच सरकता सरकता लंड पूरा अंदर बाहर होने लगा.... कविता को ड्राइवर से ज़्यादा और ड्राइवर को कविता से ज़्यादा मज़े लेने की पड़ी थी.. दोनो आगे पीछे होते रहे.... ड्राइवर ने दोनो और से उसकी चूचियों को पकड़ रखा था और झटकों के साथ साथ उनको भी खींच रहा था.....

ऐसा चलता गया .... चलता गया... और फिर रुकने लगा.... ड्राइवर ने उसकी गांद को रस से भर दिया और तब तक धक्के लगाता रहा जब तक उसके लंड ने और धक्के लगाने से इनकार करके मूड कर अपने आपको गांद से बाहर ना कर लिया...

कविता ने तुरंत पलट कर उसके लंड को अपने होंटो से चुम्मि दे कर थॅंक्स बोला... इतने मज़े देने के लिए... पर लंड सो चुका था.....

बस के पास सभी अपनी अपनी बातों में लीन थे... सभी मनाली जाकर करने वाले मौज मस्ती की प्लॅनिंग कर रहे थे.... किसी को किसी की फिकर ना थी... जो जिसके पास बैठा था... उसके सिवा किसी का ख्याल ना था... जब ड्राइवर कविता का मुँह बंद करके उसको एक तरफ ले जा रहा था... लगभग उसी वक़्त... अकेले खड़े बातें कर रहे टफ और राज के पास मुस्कान आई....," सर! मुझे आपसे कुच्छ बात करनी है...!"
"बोलो!" राज ने घूमते हुए कहा.
मुस्कान टफ के सामने शर्मा रही थी... हालाँकि बस में उसने सरिता के साथ मस्ती करते टफ को देख लिया था.... और वो खुद भी जानती थी की राज की जांघों पर बैठ मज़े लेते टफ ने भी उसको देखा था... पर वो फिर भी शर्मा रही थी....," सर.... मुझे अकेले में बात करनी है.. आपसे!" वो नज़रें झुकायं बात कर रही थी... राज के हाथो मिली मस्ती की लाली अब भी उसके गालों पर कायम थी... का हुआ जो अंधेरे की वजह से किसी ने नही देखा... राज टफ को ' एक मिनिट कहकर उसी और चल पड़ा जिस तरफ कविया और ड्राइवर गये हुए थे...," मज़ा आया मुस्कान!"
मुस्कान कुच्छ ना बोली... बस नज़रें झुकाए साथ चलती रही... वो चाहती थी की सर खुद ही उसकी कसक जान लें... और उसको प्रॅक्टिकल पूरा करा दें... जिसको सर ने अधूरा छ्चोड़ कर उसकी हालत पतली कर दी थी...

थोड़ा आगे जाने पर सुनील ने उसके कंधे पर हाथ रख लिया और चलता रहा," बोलो ना! शर्मा क्यूँ रही हो?"

"कुच्छ नही सर....वो!" मुस्कान कुच्छ बोल नही पा रही थी... उन्होने ध्यान नही दिया... बस में उनके पिच्चे बैठही अदिति और दिव्या उनके पीछे पीछे जासूसों की तरह चल रही थी... उनको पता था.... ज़रूर यहाँ प्रॅक्टिकल पूरा हो सकता है.... क्या पता उनका भी एक एक पीरियड हो जाए...

राज ने उसके कंधे पर रखे हाथ से उसकी चूची को दबा दिया... ज़्यादा बड़ी नही थी... पर खड़ी खड़ी ज़रूर थी.... मुस्कान हल्की सी सिसकारी लेकर राज की छति से लिपट गयी..," सर कर दो!... प्लीज़... मैं मर जाउन्गि!" उसने अपने हाथ सुनील की पीठ पर चिपका लिए और अपनी छति राज की पसलियों में गाड़ दी.... राज को उसकी चूचियों की गर्मी का अहसास होते ही विस्वास हो गया... अब ये चुदे बिना नही मानेगी... मुझसे नही तो किसी और से..!

राज ने उसका चेहरा उपर उठाया और उसके सुलगते होंटो को थ्होडी शांतवना दी... अपने होंटो से...," आइ लव यू सर!" मुस्कान का हाल बहाल हो रहा था....

राज को लगा अभी वो ज़्यादा दूर नही आए हैं... वो रोड पर चलता गया... और उस्स रास्ते को पार कर गया.. जिस रास्ते पर उस्स समय ड्राइवर ने कविता की गांद में अपनी हथेली फँसा रखी थी....
अदिति और दिव्या भी उनके पीछे चलती गयी... उनको भी बड़ी लगान थी... प्रॅक्टिकल करने की.....
रोड पर चलते चलते राज को नीचे ढलान की और जाता एक सांकरा सा रास्ता दिखाई दिया... करीब 2 फीट चौड़ा... शायद किसी गाँव के लिए शॉर्टकट था. राज ने मुस्कान को अपनी छति से चिपकाया और नीचे उतरने लगा..

वो करीब 20 फीट ही गये होंगे की उन्हे एक चीख सुनाई दी.. दोनो चौंक कर पलते... अदिति के जूते मैं से एक काँटा उसके पैर में चुभ गया था... इसीलिए उसकी चीख निकल गयी... राज तेज़ी से चढ़ कर उसके पास गया," अदिति तुम? और ये दिव्या?"
अदिति और दिव्या का सिर शर्म से झुक गया... शर्मा तो राज भी गया था.. पर उसको पता था... ये तो होना ही था... अदिति बस में उनके पीच्चे ही बैठी थी...," जासूसी कर रही हो!?"

अदिति ने सिर झुकाए ही जवाब दिया," नही सर, हम तो सिर्फ़ देखने आए थे!"

राज थोड़ा संभाल कर बोला," देखने ही आए थे या कुच्छ करने भी?"

अदिति कुच्छ ना बोली... उसने राज की कलाई अपने कोमल हाथो में पकड़ ली... राज समझ गया... वो भी प्रॅक्टिकल करना चाहती थी," और ये छिप्कलि?" उसने दिव्या की और देखा... उसको क्या पता था ये छिप्कलि राकेश का साँप निगल चुकी है एक बार... अपनी चूत में!,"सर मुझे भी करना है... दिव्या की चूत बुरी तरह खुजा रही थी... उसको प्यार का खेल सीखा कर राकेश गौरी के पिछे पड़ गया... और वा इतने दिन से यूँही तड़प रही थी...
"ये कोई बच्चों का खेल नही है? जाओ! राज ने दिव्या को कहा... पर उसको डर भी था की अगर दिव्या को वापस भेज दिया तो ये राज उगल भी सकती है.... उसने दिव्या को मुँह लटका कर सुबक्ते देखा तो राज ने दोनो का हाथ पकड़ा और मुस्कान के पास ले आया....
मुस्कान अदिति से जलती थी... अदिति वही लड़की थी जिसको राज ने पहले ही दिन उठा कर पूचछा था," तुम्हे किससे प्यार है?" उसकी चूचियाँ क्लास में सबसे मस्त थी.. ज़्यादा बड़ी नही थी पर सीधी खड़ी थी... बिना ब्रा के... और उसकी प्यारी सी हँसी का राज दीवाना था... जब वा हँसती थी तो उसके गाल पर दाई और एक डिंपल बन जाता था...

मुस्कान ने मुँह बना कर कहा," मैं जाऊं सर!"
"नीचे चलो! आराम से... आज तुम सभी को एक नया प्रॅक्टिकल कराता हूँ.... ऐसा प्रॅक्टिकल तो आज तक खुद मैने भी नही किया है.....

कुच्छ और नीचे जाने पर रास्ते की सिद में ही राज को एक छ्होटी सी क्यारी दिखाई दी.. जिसको समतल करके शायद कुच्छ सब्जी वग़ैरह उगाने के लिए तैयार किया गया था... राज तीनों को वहीं ले गया... ठंड काफ़ी थी चारों को शर्दि लग रही थी...राज ने अपना कंबल उतारा और ज़मीन पर बिच्छा दिया...." सब अपने अपने कपड़े निकाल लो... और कंबल ओढ़ लोराज ने तीनो से कहा... मुस्कान को छ्चोड़ कर दिव्या और अदिति ने तुरंत ऐसा ही किया... मुस्कान नाराज़ हो गयी थी... उसको अपना हिस्सा बाटना पड़ रहा था... राज ने मुस्कान को अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा... गरम तो वा पहले ही थी... जब राज ने उन्न दोनो नंगी लड़कियों को छ्चोड़कर उसको बाहों में भरा तो उसकी नाराज़गी जाती रही... उसने कंबल उतार फैंका और राज से चिपक कर उसकी जाँघ से अपनी जांघों के बीच च्छूपी कोमल चूत को रगड़ने लगी... अब वा अपने से राज को दूर नही करना चाहती थी... वह अदिति को जलाने के लिए कुच्छ बढ़ चढ़ कर ही अपना प्यार लूटा रही थी राज पर... मुस्कान को देखकर उनकी भी हिम्मत बढ़ गयी... नंगी अदिति ने राज को पीछे से पकड़ लिया और अपनी छति उसकी पीठ से सेटाकर शर्ट के उपर से ही राज को दांतो से काटने लगी... मुस्कान ने अपना हाथ अदिति की चूची पर ले जाकर उसके दाने को जोए से दबा दिया... अदिति सिसक उठी...

दिव्या के लिए राज का कोई हिस्सा नही बचा था.. वा अदिति के पिछे आकर उसके चूतदों पर हाथ फिरने लगी... जब उसका हाथ अदिति की गांद की दरार में से होकर गुजरा तो वो उच्छल पड़ी... उसको यहाँ किसी ने पहली बार हाथ लगाया था... दिव्या तो खेल का पहला भाग खेल रही थी.. और पहले भाग में लड़की हो या लड़का... उसको कोई फ़र्क़ नही पड़ता था...
मुस्कान अलग होकर अपने कपड़े उतारने लगी... वो अदिति से पिछे नही रहना चाहती थी... अब कहीं भी शर्मीलेपान के लिए कोई जगह नही थी..

मुस्कान के अलग हट-ते ही अदिति घूम कर आगे आ गयी... राज उसकी सबसे प्यारी चूचियों से खेलने लगा... राज ने उसकी छतियोन के मोतियों को चूसना शुरू कर दिया... अदिति पागल हो उठी.. दिव्या अदिति के पीछे आ गयी और नीचे बैठकर उसकी टाँगों के बीच उसकी चूत से होन्ट सटा दिए...

अदिति आनंद से दोहरी होती जा रही थी... पल पल उसको जन्नत का अहसास करा रहा था... सबकुच्छ भूल कर वा बदहवासी में बोल रही थी., हाईए... मेरा सबकुच्छ चूस लिया.... अया... मेराअ... सभह... कूच निकााल लिया.... सिएर्र्ररर ज्जिि मार गििईई" दिव्या ने उसको मचलता देख दुगने जोश से उसकी फांको में अपनी जीभ से खेलना शुरू कर दिया....
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Reply
11-26-2017, 12:59 PM,
#37
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
मुस्कान भी तैयार होकर मैदान में आ गयी... उसने राज की पॅंट खोली और उसको खींच कर घुटनो से नीचे कर दिया ओर...वोराज की टाँगों के नीचे कंबल पर अपने चूतड़ टीका कर बैठ गयी और राज के अंडरवेर में अपना हाथ डालकर उसका लंड नीचे निकाल लिया... लंड उपर उठने की कोशिश कर रहा था... पर ज़ोर से पकड़े हुए मुस्कान ने थोड़ा ऊँचा उठकर उसको अपने होंटो में ले लिया...लंड उसको गले से नीचे उतारना नही आता था... वह सूपदे को ही मुश्किल से मुँह में भर लिया... और उसका दूध पीने लगी.... राज की हालत बुरी होती जा रही थी... इश्स तरह का उसका भी पहला अनुभव था... और अपने दोनो हाथों में लड्डू और लंड मुस्कान के मुँह में... राज को अपनी किस्मत पर यकीन नही हो रहा था... दिव्या ने अदिति की चूत को चूस्ते चूस्ते ही अपना पैर सीधा किया और मुस्कान की चूत से लगा दिया... मुस्कान ने झट उसका अंगूत्हा अपनी चूत में सेट कर लिया और उठक बैठक लगाने लगी... दिव्या साथ ही साथ राज की जांघों पर हाथ फेर रही थी.... राज अदिति की छतियो पर से हटा और मुस्कान को नीचे लिटा दिया... उसने मुस्कान की टाँगो को उपर उठा कर खोल दिया... मुस्कान तो इश्स एक्शन के लिए कब की तरस रही थी... उसने झट से अपनी चूत को अपने एक हाथ की उंगलियों से खोल कर दिखाया... मानो कह रही हो... देखिए सर... कितनी प्यारी है... सच में ही उसकी चूत की बनावट गजब की थी...

राज ने अपना पॅंट को उतार फैंका और अदिति को मुस्कान के सिर की तरफ आने को कहा... अदित और दिव्या दोनो उधर आ गयी... राज के कहने पर अदिति ने उसकी दोनो टांगे पकड़ ली और दिव्या ने उसका मुँह बंद कर लिया... अपने मुलायम हॉथो से....
"देखना एक बार दर्द होगा... फिर मज़ा ही मज़ा है.. कहते ही राज ने अपना लंड चूत की दीवारों से लगाया और ज़ोर लगा दिया.. मुस्कान ने मारे दर्द के दिव्या की हथेली को काट खाया.. दिव्या दर्द से कराह उठी. उसने तुरंत ही मुस्कान के मुँह से अपना हाथ हटा लिया.. और उसकी छतियो को मसलनने लगी... अदिति अब तक उंगली अपनी चूत में डाल चुकी थी....

बहुत अधिक दर्द होने पर भी मुस्कान ने अपने आपको काबू में रखा; ये सोचकर की कहीं राज उसको छ्चोड़ कर अदिति को ना पकड़ लें... दर्द शांत होने पर अदिति और दिव्या ने मुस्कान को छ्चोड़ दियाँ और एक दूसरी की चूत में उंगली डाल कर तेज़ी से चलाने लगी.... राज के लंड के लिए खुद को तैयार करने लगी...
मुस्कान से ज़्यादा देर नही हुआअ.. वो 3-4 मिनिट में ही ढेर हो गयी... और लंड को बाहर निकालने की ज़िद करने लगी...

राज ने लंड बाहर निकाल लिया और अदिति को कुतिया बना लिया... राज उसके उपर चढ़ बैठा...अदिति की चूत गीली होकर टपक रही थी....
राज ने अदिति की गांद को अपनी जांघों के बीच दबा लिया... उसका सिर कंबल पर झुका हुआ था... राज के कहने पर दिव्या उसके मुँह के दोनो और अपनी टांगे फैलाई और लेट कर अदिति का मुँह अपनी चूत पर रख दिया... अदिति उसकी चूत को चाटने लगी.... मुस्कान अदिति के नीचे. घुसकर उसकी चूचियों को अपने मुँह में दबा लिया... राज ने सब सेट करके दिव्या को उसका मुँह अपनी चूत पर दबाने को कहा...

"उम्म्म्मममममममम!" जैसे ही राज के लंड ने अदिति की चूत को चीर कर रास्ता बनाया.. उसने हिलने और चीखने की लाख कोशिश की पर ना वा हिल सकी और ना ही चीख सकी... लंड धीरे धीरे झटके लेता हुआ उसकी चूत में पायबस्त हो गया... अदिति मॅन ही मॅन पचछता रही थी.. पर अब पछ्ताये हॉत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत... उसकी चीखें दिव्या की चूत में ही गुम होती गयी... तब तक जब तक की उसको मज़ा नही आने लगा और वो अपनी गांद से पीच्चे ढ़हाक्के लगाने लगी.. राज के इस्शारे पर दिव्या ने अदिति का मुँह आज़ाद कर दिया... अब चीखों की जगह उसके मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थी.. मुस्कान से उसका मज़े लेना ना देखा गया.. वा बाहर निकली और बैठकर अपनी चूत में उंगली घुसाई.. गीली उंगली अदिति की कमर पर से लेजाकार उसकी गांद में घुसाने लगी... राज मुस्कान की कोशिश को समझ गया..

उसने अदिति को सीधा कर दिया.. मुस्कान की तरह ही उसकी टांगे उठाई और फिर से उसकी चूत में लंड से धक्के मारने लगा.. अब मुस्कान के लिए गांद में दर्द करना आसान था.. उसने अपनी उंगली नीचे से उसकी गांद में ठुस दी... पर इससने एक बार दर्द देकर अदिति के मज्र को और बढ़ा दिया... एक दो मिनिट के बाद ही वा भी चूत रस से नहा उठी.. राज को अभी दिव्या को भी निपटना था...

अदिति को छ्चोड़ करराज ने दिव्या को अपने नीचे दबा लिया... उसने बाकी दोनो को उठाकर दिव्या को भी पकड़ने को कहा... पर दोनों निढाल हो चुकी थी... नीचे लेटी हुई दिव्या की कमर के नीचे से हाथ निकल कर राज ने खुद ही उसको काबू में कर लिया... दूसरे हाथ से राज ने लंड को चूत के च्छेद पर सेट करके उस्स हाथ से दिव्या का मुँह दबा लिया... " बुसस्स एक बार..." अपनी बात को अधूरा ही छ्चोड़ते हुए राज ने जैसे ही अपने लंड का दबाव दिव्या की चूत पर बढ़ाया.. वह उन्न दोनो से ज़्यादा आसानी के साथ सर्र्ररर से चूत में उतरता चला गया... सिर्फ़ एक बार दिव्या की आँखें पथराई.. और वो नीचे से अपने चूतड़ उचकाने के लिए... राज समझ गया.. इसका मुँह बंद करना तो बेवकूफी है... उसने मुँह से हाथ हटाकर दिव्या की चूचियों पर रख दियाअ... और उन्हे मसल्ने लगा... दिव्या तो उन्न दोनो से भी ज़्यादा मज़े दे रही थी... हालाँकि वो अभी भी कुच्छ कुच्छ शर्मा रही थी पर उसके चूतदों की धर्कन राज के लंड के आगे पीछे होने की स्पीड से बिल्कुल मॅच कर रही थी... करीब 30 मिनिट से लगातार अलग अलग चूतो पर सवार सुनील का लंड बौखला गया था... ऐसा मज़ा तो उसको कभी मिला ही नही... आख़िरकार वा दिव्या की चूत से हार गया... और बाहर निकल कर दिव्या के पेट को अपने रस से मालामाल कर दियाअ... राज ने दिव्या के होन्ट मुँह में लेकर जैसे ही उसको ज़ोर से पकड़ा... वा भी आँखें बंद करते हुए राज से नाज़ुक बेल की भाँति लिपट गयी... आख़िरकार उसकी चूत ने भी कंबल पर अपने निशान छ्चोड़ दिए... राज का काम ख़तम होते देख वो दोनो भी उससे लिपट गयी....

कुच्छ देर ऐसे ही लेटी रहने के बाद उनको ठंड फिर से लगने लगी.. चारों ने अपने कपड़े पहने... कपड़े पहनते हुए.. तीनो राज को अपनी मादक नज़रों से धन्यवाद बोल रही थी... राज उनको अपने से चिपका कर बस की तरफ चल दियाअ... तीनो लड़कियाँ अलग अलग बस के पास गयी... राज बस से पहले ही कहीं बैठ गया.. कुच्छ देर बाद जाने के लिए... अब मुस्कान को अदिति से कोई जलन नही थी... वो हँसती हुई बस में चढ़ि तो कविता बड़े इतमीनान से पिच्छली सीट पर अपनी टाँगें फैलाए सो रही थी.....
उधर राज के जाने के बाद टफ की नज़रें सरिता को ढ़हूंढ रही थी...... करीब राज के जाने के 10 मिनिट बाद...
राज के जाने के बाद टफ प्यारी और सरिता में से किसी एक की ताक में बैठा था. पर प्यारी तो अंजलि के पास थी... मजबूरी मैं....! टफ अगर टीचर होता तो किसी भी लड़की के हाथों सरिता को बुला लेता... अचानक ही उसको एक आइडिया आया... वा अंजलि और प्यारी मेडम के पास ही जाकर खड़ा हो गया...
अंजलि ने उसको देखकर पूछा," राज जी कहाँ गये?" वा भी प्यारी को छ्चोड़ कर कब की 2 पल राज की बाहों में जाना चाहती थी....

"यहीं होंगे! शायद बस के दूसरी तरफ बैठहे हो" टफ को पता था राज किसी कबुतरि के साथ गया है... पर उसने जान बूझ कर झूठ बोला," वो भी आपको ही ढ़हूंढ रहे थे!"
टफ के मुँह से ये सुनकर अंजलि खुश हो गयी," हां मुझे भी उनसे बात करनी थी... मैं अभी आती हूँ..." कहकर वो चली गयी.


अंजलि के जाते ही टफ ने प्यारी के चूतदों पर चुटकी काट ली..," अपने ख़टमल के दुनक को भी नही पहचानती...."
प्यारी भी शाम से ही अपनी गांद की खुजली मिटाने की जुगत में थी...," ये साली प्रिन्सिपल मेरा पीचछा ही नही छ्चोड़ रही... कब का पानी टपक रहा है अंदर से, पता है तेरे को... कुच्छ हो नही सकता क्या?"
टफ ने नपे तुले शब्दों में कहा," अगर चुदवानी है तो उस्स तरफ अंधेरे में चली जाओ... मैं यहाँ सब सेट करके आता हूँ......
प्यारी देवी मुस्कुराइ और जाकर अंधेरे में खड़ी हो गयी.... जिस तरफ गौरी गयी थी...
उसके जाते ही टफ ने सरिता को ढ़हूंढा... और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया... सरिता उसको अकेला देखते ही बस में जा चढ़ि... मरवाने के लिए...

टफ ने भी दायें बायें देखा और उसके पीच्चे बस में जा चढ़ा...," अरे बुलबुल! कहाँ उडद गयी थी... उसने जाते ही सरिता की दोनो चूचियों को पकड़ा और उनको मसालने लगा... सरिता ने दर्द के मारे अपनी एडियीया उठा ली....," क्या कर रहा है... जल्दी पीछे आअज़ा.. कर दे...
"टफ ने रहस्यमयी ंस्कान उसकी तरफ फैंकी," ऐसे नही करूँगा मेरी रानी... आज तेरे को बहुत बड़ा सर्प्राइज़ दूँगा.."
"क्या?" सरिता उत्सुक हो गयी..
टफ ने सिर खुजाते हुए कहा," तेरी मम्मी को चोदुन्गा पहले!"
"क्या?... " सरिता ने हैरानी से कहा," हाँ .. मुझे पता है वो ऐसी हैं.. पर किसी अंजान के साथ....!" नही ये नही हो सकता!"
टफ ने सरिता की जांघों में हाथ डालते हुए कहा," मैं उसकी गांद भी मार चुका हूँ... समझी... बोल तमाशा देखना है?
सरिता ने अविस्वास के साथ अपने मुँह पर हाथ रख लिया... पर तमाशा तो उसको देखना ही था... अपनी माँ को चुद्ते हुए देखने का तमाशा," हां! दिखाओ.. कहाँ है मम्मी?" सरिता ने उसके चूत को मसल रहे हाथ को हटाते हुए कहा...
"मैने उसको आगे भेज दिया है.. वो कुछ दूर जाकर खड़ी होगी.. मैं भी जा रहा हूँ.. मैं उसको पीछे नही देखने दूँगा... तुम बगैर आवाज़ किए पीछे पीछे आ जाना...."
कहकर बस से उतार कर उसी और चल दिया, जिस और उसने प्यारी को भेजा था... सरिता बस के दूसरी और से घूमकर आई और उससे दूरी बना कर चलने लगी.. अपनी मम्मी को चोद्ते हुए टफ को देखने की इच्च्छा बलवती होती गयी.....

टफ जल्द ही प्यारी के पास पहुँच गया.. उसने जाते ही प्यारी के कंधे पर अपनी बाह रख दी.. ताकि वो पीछे देखने ना पाए... ," बहुत देर लगा दी! कहाँ रह गया था?" प्यारी रोमांच से भारी हुई थी... ठंडी वादियों में चुड़ाने के रोमांच से...
टफ ने कोई जवाब नही दिया और उसको ऐसे ही दबाए आगे चलने लगा...
सरिता ने भी पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया... चुपके चुपके...!

गौरी च्छुपति च्छूपति उस्स साए के पीछे जाती रही... साया कुच्छ दूर जाने के बाद ठिठका... उसको अहसास हुआ की उसके पीछे कोई है... जाने क्या सोचकर वो साया चलता रहा... गौरी उसके पीछे पीछे थी... वो काफ़ी दूर निकल आए.. रास्ते में राकेश ने एक की बजे दो को आते देखा... वो एक चट्टान की आड़ में खड़ा था ताकि कविता आए तो उसको धीरे से पुकार सके... पर जब उसने देखा की 2 आ रहे हैं तो उत्सुकतावास वो वहीं छिप गया और उनको अपनी बराबर से निकलते देख लिया... आअगे वाले को वो पहचान नही पाया पर पिछे वाली को देखते ही पहचान गया... उससने कंबल नही ओढ़ा हुआ था... राकेश गौरी को देखकर हैरान हो
गया. 


जब वो बस से करीब आधा काइलामीटर नीचे की और आ गये तो अचानक वो साया पिछे भागा और उसने गौरी को दबोच लिया... गौरी कसमसाई... अचानक हुए इश्स हमले में वो हड़बड़ा कर कुच्छ कर नही पाई.. उसने कंबल ओढ़े उस्स शक्श की आँखों में झॅंका...
गौरी उस्स कंडक्टर के शिकंजे में अपने आपको पाकर बहुत डर गयी.. कंडक्टर भी उसको देखकर हैरान था... उसने राकेश को कविता की और इशारा करके जाते देखा था और वो इसीलिए राकेश के पीछे गया था की अगर वो दोनो कुच्छ करेंगे तो थोड़ा प्रसाद उसको भी ज़रूर मिलेगा.. रंगे हाहहों पकड़ लेने पर... पर उसको राकेश कहीं दिखाई ही नही दिया इतनी दूर आने पर.. तो वो गौरी को कविता समझ बैठा... सोच सोच कर ही उसके लंड की अकड़न बढ़ती जा रही थी... वो तय कर चुका था की पीछे आने वाली 'कविता' को वो चोद कर रहेगा... उसको विस्वास था की कविता जैसी मस्त लड़की जिसने बस में ही इतने मज़े दे दिए; वो मना क्या करेगी..
यही सोच सोच कर उसका शरीर वासना की आग में जल रहा था...

पर जब उसने कविता की जगह गौरी को देखा तो एक बार वो ठिठक गया... गौरी उसकी बाहों की क़ैद से निकलने के लिए छॅट्पाटा रही थी... कंडक्टर ने उसके चेहरे से हाथ हटा लिया...
गौरी को थोड़ी सी राहत मिली," तुम??? छ्चोड़ो मुझे..." वो डरी हुई थी... उसको अपनी जांघों पर कंडक्टर का लंड चुभता हुआ सा महसूस हो रहा थी....
उसको डर से काँपते देख कंडक्टर का हॉंसला बढ़ गया... उसने सोच लिया था... चाहे यहाँ से ही वापस भागना पड़े... इश्स हूर को चोदे बिना नही रहूँगा...," ज़्यादा चीक चीक करी तो जान से मार कर पहाड़ी से फाँक दूँगा साली... यहाँ क्या अपनी मा चुडाने आई थी मेरे पीछे... अपनी ही चूत तो मरवाने आई होगी..."
गौरी उस्स पल को कोस रही थी जब उसके दिमाग़ में राकेश और कविता का लाइव मॅच देखने की खुरापात उभरी... वो डर से काँप रही थी.. वो कंडक्टर से याचना करने लगी.. मरी सी आवाज़ में," प्लीज़ भैया मुझे छ्चोड़ दो... मैं तो कविता समझ कर आपके पीछे आई थी... मैं ऐसी लड़की नही हूँ... मुझे जाने दो प्लीज़.. मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूँ...
"तू अपनी बकवास अपने पास ही रख... कविता को देखने आई थी... साली.. बहनचोड़.. मैं 6 फुट का तुझे कविता दिखता हूँ! अभी दिखाता हूँ तुझे अपना कविता" कंडक्टर ने अपना ताना हुआ लंड उसकी जांघों पर और ज़्यादा चुबा दिया... गौरी को वो लंड किसी पिस्टल से कम नही लग रहा था... जितना डर गन का गर्दन पर रखे जाने से लगता है... लगभग यही हाल उसकी चूत के पास जाँघ पर गाड़े हुए लंड को महसूस करके गौरी का हो रहा था...," नही! मैं मर जाउन्गि भैया! प्लीज़ मुझ पर रहम करो..."
कंडक्टर ने दूसरे रास्ते से उसको लाइन पर लाने की सोची," एक शर्त पर तुझे कुँवारी छ्चोड़ सकता हूँ.."
गौरी उसकी हर शर्त से माना करके उसके मुँह पर थूकना चाहती थी.. पर उसके पास और कोई चारा ही ना था...," क.. कैसी .. शर्त?"
गौरी उसकी बाहों में ही कसमसा रही थी.. उसकी चूचियाँ कंडक्टर की छति से लगी हुई थी.... राकेश चुपचाप खड़ा होकर आन वक़्त पर एंट्री मारने की सोच रहा था... वो यही चाहता था की किसी तरह कंडक्टर उसके कपड़े निकलवा दे एक बार... फिर वो खुद ही सब संभाल लेगा...

तुमको एक बार अपने सारे कपड़े निकालने होंगे...

कंडक्टर की शर्त सुनते ही गौरी सिहर गयी... उसके सामने कपड़े निकलना तो अपनी इज़्ज़त लुटाने जैसा ही था... माना वो थोड़ी सी ठारकि और सेक्सी टाइप की थी पर आज तक कभी उसने सोचा तक ना था की कोई यूँ उसके कपड़े निकालने को कह देगा.. वो तो हमेशा ही एक राजकुमारी की तरह सोचा करती थी... की कोई राजकुमार आएगा और उसको लेकर जाएगा... ये शर्त वो अपनी मर्ज़ी से कभी भी नही मान सकती थी," नही! मैं ऐसा नही कर सकती!" कंडक्टर के नरम पड़ जाने पर उसके जवाब में भी थोड़ी सी हिम्मत आ गयी थी..
"तो क्या कर सकती हो..? कपड़े सारे नही निकल सकती तो कम से कम कमीज़ ही निकल दो..." कंडक्टर गौरी का गड्राया जवान जिस्म देखकर पिघलता जा रहा था...
" नही प्लीज़.. मुझे जाने दो... अभी नही.. मनाली जाने के बाद.. पक्का!"
कंडक्टर को भी लग्रहा था की वो कुच्छ कर नही पाएगा... एक तो डर था... दूसरे रोड पर और तीसरा... गौरी के जिस्म की गर्मी से उसका रस निकलने के लिए तड़प रहा था...," ठीक है.. बस एक काम कर दो..."
"क्या?"
"तुम नीचे बैठ जाओ!" कंडक्टर ने अपना लंड सहलाते हुए कहा...
"क्यूँ?" गौरी ने इंग्लीश फिल्मों में गर्ल्स को लंड चूस्ते देखा था... उसका भी बहुत मॅन था ऐसा करने का.. पर अपने राजकुमार के साथ... और कंडक्टर में से तो उसको वैसे भी बदबू आ रही थी...
"अब मैने तुमको ना चोदने की बात मान ली है तो ये मत सोचो की मैं शरीफ हूँ... याद रखना अगर एक बार भी अब मैने तुम्हारे मुँह से और 'ना' या 'क्यूँ' सुना तो नीचे फैंक दूँगा साली को..." कंडक्टर फिर उफान गया...
गौरी सहम गयी... वो तो भूल ही गयी थी की वो एक गहरी खाई के पास बैठी है.. और ये कंडक्टर कुच्छ भी कर सकता है... वो कंडक्टर के चेहरे की और देखती हुई सी नीचे बैठ गयी.... कंडक्टर की पॅंट का उभार उसकी आँखों के सामने था...
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11-26-2017, 12:59 PM,
#38
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
कंडक्टर ने झट से अपनी पंत की ज़िप खोल दी... कच्च्चे में से साँप की तरह फुफ्कर्ता हुआ कला लंड गौरी की आँखों के सामने झहहूल गया.. गौरी दरकार पिच्चे गिर गयी..," बैठो!" कंडक्टर ने आदेश सा दिया...
गौरी मारती क्या ना करती वो फिर से बैठ गयी, पर उसने मुँह दूसरी और घुमा लिया...

यहाँ तक का सीन देखने के बाद अब राकेश को और देर करना ठीक नही लगा... वो गौरी की सील तोड़ना चाहता था... वा एक दम से झाड़ी के पीछे से निकल कर गुर्राया," क्या कर रहे हो?"


आवाज़ सुनते ही दोनो सुन्न रह गये... कंडक्टर का लंड एकद्ूम छ्होटा होकर एपने आप ही अपनी मांद में घुस गया.. उसने झट से अपनी ज़िप बंद करी..
गौरी को तो जैसे साप सूंघ गया.. उसकी गर्दन नीचे झुक गयी. उसने देखने तक की हिम्मत नही की आख़िर है कौन. उसने बैठहे बैठे ही अपनी नज़रें ज़मीन में गाड़ ली..

राकेश ने आते ही एक झापड़ कंडक्टर के मुँह पर दिया.. साले, बेहन चोद.. मैं सिखाता हूँ तुझे.. उसने पास पड़े लट्ठ को उठाया ही था की कंडक्टर भाग खड़ा हुआअ मैदान छ्चोड़ कर...

कुच्छ दूर जाकर वा रुक गया और आराम से चलने लगा.. उसको मालूम था की अब वो लड़का उसको चोदेगा.. इसीलिए डरने वाली कोई बात नही थी.. अचानक उसको सड़क से कुच्छ ही दूरी पर एक आदमी और एक औरत की हँसने की आवाज़ सुनी... उत्सुकतावास वा पगडंडी से दिखाई दे रहे रास्ते पर उतार गया.. कुच्छ नीचे उतरने पर आवाज़ें सपस्ट होने लगी..." साली उस्स दिन तेरी गांद का जो हाल किया था उसको भूल गयी... आज तेरी मा दादी बेटी सब एक साथ कर दूँगा... " टफ प्यारी देवी से कह रहा था.. "
"कर्दे ना मेरे राजा.. सारी रात निकल गयी.. उस्स बहनचोड़ अंजलि की गांद ना आती तो साथ में.. मैं तेरी गोद में ही बैठकर आती.." कहकर प्यारी ने टफ का लंड मुँह में ले लिया.....
कंडक्टर की तो जैसे उस्स दिन लॉटरी लगनी ही थी.... उसने देखा.. एक औरत उनको च्छुपकर देख रही है.. सब करते हुए... दबे पाँव उसने जाकर देखा.. ये तो कोई लड़की है..
कंडक्टर ने उस्स लड़की को ही अपना शिकार बनाने की सोची.. धीरे से पीछे जाकर उसने लड़की के मुँह को दबा लिया..पर उसका हाथ उसके मुँह की बजे उसके नाक के उपर रखा गया...," ऊईीईई माआ!" सरिता की अचानक की गयी इश्स हारकर से चीख निकल गयी.....
टफ और प्यारी दोनो चौंक पड़े... प्यारी ने अपनी बेटी की आवाज़ पहचान ली... टफ ये सोच रहा था की आख़िर सरिता ने चीख क्यूँ मारी.. सब समझाया तो था की कब आना है... कंडक्टर बेचारा यहाँ से भी भाग गया...

"आ जाओ सरिता!" टफ ने सरिता को पास बुला लिया... सरिता को जैसे पता नही क्या मिल गया हो.. ," मम्मी आप !"

प्यारी को कुच्छ कहते नही बन पा रहा था..," बेटी वो ये सला मुझे ज़बरदस्ती घसीट लाया..!"
"हां वो तो मुझे दिख ही रहा है...मम्मी!"
"देख सरिता! मैने तेरी इतनी बातें च्छुपाई हैं.... अब अगर तू...!"
"मैं कुच्छ नही बतावंगगी मम्मी.. बस मैं तो... "
"आजा तू भी आजा! जब आ गयी है तो...
"चलो अब कुच्छ नही होगा.. वो सला कौन था पता नही.. हूमें जल्दी से बस के पास चलना चाहिए! क्या पता किसको ले आए." टफ ने अपनी पॅंट उपर की और प्यारी को भी उठा दिया.. दोनो बुत बनी उसके पीछे चली गयी........

गौरी और राकेश अकेले रह गये. गौरी शर्मिंदा थी... वो कुच्छ बोल नही पा रही थी... जैसे ही राकेश ने उसका हाथ पकड़ा; गौरी सपास्टीकरण देते हुए बोली," वो ज़बरदस्ती कर रहा था...!"
राकेश उसको लपेटने की कोशिश कर रहा था," तुम यहाँ आई ही क्यूँ? अकेली!"
गौरी के पास कोई जवाब नही था... कैसे उसको ये बताती की वो तो कविता और उसको रंगे हतह पकड़ने आई थी... और पकड़ी गयी खुद वो.... वो चुप चाप खड़ी थी...
"आइ लव यू गौरी!" जैसे राकेश के पास कुच्छ भी कहने का पर्मिट था..," मैं तुमसे फ्रेंडशिप करना चाहता हूँ....
गौरी ने अपना हाथ उसकी और बढ़ा दिया," ओ.के. वी आर फ्रेंड्स"

गाँव के लड़के; लड़की से दोस्ती को उसकी गांद मारने का लाइसेन्स समझ लेते हैं... जैसे ही गौरी ने फ्रेंडशिप करने को 'हां' कहा... राकेश ने अपने होंट उसकी और बढ़ा दिए... गौरी अपना हाथ बीच में ले आई...," ये क्या है"
"अभी तो तुमने कहा था की हम दोस्त बन गये...." राकेश को बहुत जल्दी थी... उसने फिर से कोशिश की...
"तो?" गौरी ने पीछे हट-ते हुए कहा... "हाँ हम दोस्त बन गये पर...." गौरी के सुर्ख लाल होन्ट दूसरे होंटो के मिलने से आने वाली बाहर से अंजान थे....
राकेश ने बुरा मुँह बनाते हुए कहा," ये क्या दोस्ती हुई...."
गौरी को लगा इश्स तरह शायद ये ज़बरदस्ती पर भी आ सकता है," ठीक है, मनाली जाने के बाद देखते हैं... यहाँ सब ठीक नही लगेगा"
राकेश शांत हो गया," .... पर एक पप्पी तो लेने दो.."
"गालों की...ठीक है!" गौरी की मजबूरी थी..
"ठीक है!" राकेश गालों की पप्पी से ही सन्तुस्त होने को तैयार हो गया...

राकेश के होंट गौरी के ज्यों ज्यों पास आते गये... गौरी के बदन की महक से वा पागल सा होने लगा... ऐसी खुश्बू तो उसने आज तक भी कभी नही सूँघी.. गौरी की छतिया होने वाली बात के बारे में सोचने से उपर नीचे होने लगी.... उसकी मदभरी चूचियाँ तो दूर से ही किसी को पागल कर सकती थी.. फिर राकेश तो उसके पास खड़ा था.. इतनी पास की अगर एक फूल भी दोनों की छतियो के बीच रख दे तो नीचे ना गिरे...
तभी राकेश को लगा की गालों की पप्पी में क्या रखा है.. अगर इसका विस्वास जीत लिया तो कल परसों में सारी ही आ गिरेगी बाहों में.. उसने उसकी गालों के करीब आ चुके अपने होंट वापस खींच लिए," मैं तो मज़ाक कर रहा तहा.." चलो चलते हैं..."
गौरी ने इश्स तरह का व्यवहार करने पर उसको अचरज से देखा... निशा ने तो उसको उस्स लड़के के बारे में कुछ और ही बताया था... राकेश के पिछे चल रही गौरी ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया... राकेश एक दम से घूम गया... उसको लगा की अभी वो उसको कह देगी... की मेरे साथ कुच्छ भी कर लो.. पर उसकी सोच ग़लत थी. गौरी ने प्यार से देखते हुए राकेश को कहा," राकेश! किसी को कुच्छ मत बताना प्लीज़..
"नही बतावँगा.. तुम्हे मेरा नाम कैसे मालूम है?"
"बस ऐसे ही... वो अलग अलग हो गये और पहले गौरी फिर राकेश बस तक पहुँच गये... किसी बंदे/बंदी ने उन्न दोनो को ही आते देख लिया... वो सोच रहा था... ये दोनो अभी तक किधर थे.. 


बस के पास ही आग जली हुई थी और सब ठंड में उसके चारों और बैठह कर किसी तरह रात काट रहे थे....

तभी गाड़ी स्टार्ट होने की आवाज़ हुई... ड्राइवर ने नीचे आकर कहा," गाड़ी ठीक हो गयी है... जल्दी बैठो!" उसका लंड तो ठंडा हो ही चुका था... अब ठंड में रहने का क्या फायडा....!

सभी खुस होकर बस में बैठ गये... पर अब की बार कुच्छ सीटो की अदलाबदली हो गयी थी.......

बस में कुच्छ ज़्यादा ही बदलाव नज़र आ रहा था... राज अंजलि की नाराज़गी देखकर अंजलि के पास जाकर पसर गया... प्यारी को तो जैसे इश्स बात का इंतजार था... प्यारी टफ की सीट की और बढ़ी... पर सरिता ने ऑब्जेक्षन किया," ये मेरी सीट है मम्मी" मम्मी ने उसको घहूर कर देखा पर सरिता मान'ने को तैयार ही नही थी... दोनो के झगड़े का फायडा निशा ने उठा लिया... क्यों झगड़ा कर रहे हो आपस में, वो कहते हुए टफ के पास जा बैठी... इश्स पर दोनो मा बेटी जैसे निशा को खाने को दौड़ी... अंत में फ़ैसला ये हुआ की सरिता अपनी मम्मी की गोद में बैठेगी... सब उनकी हालत पर हंस रहे थे पर दोनो अधूरी ही आ गयी थी, इसीलिए किसी ने भी परवाह नही की...
इसी बीच निशा जब टफ के पास जा रही थी तो राकेश गौरी की बराबर में बैठ गया... गौरी कुच्छ ना बोल सकी...

कविता थॅकी हारी और मज़े लेने के मूड में नही थी. वो जाकर मुस्कान के पास बैठ गयी... निशा को मजबूरन कंडक्टर के पास बैठना पड़ा... गाड़ी फिर से टेढ़े मेधे रास्तों पर चलने लगी.....

टफ को भी प्यासा ही वापस आना पड़ा था... उसने सरिता के चूतदों के नीचे हाथ दे दिया... प्यारी की गोद में होने की वजह से सरिता की गांद को कपड़े के उपर से कुरेदते हुए बार बार प्यारी की चूत को हिला रहा था... दोनो मस्त थी...

अंजलि ने राज के पास बैठते ही अपना गुस्सा दिखना शुरू कर दिया.. वो राज से हटकर, खिड़की से सटकार बैठ गयी... राज ने अपना बयाँ हाथ अपनी दाईं बाजू के नीचे से निकाला और उसके पेट पर गुदगुदी करने लगा.. थोड़ी देर तक तो वो हाथ हटाने की कोशिश करती रही फिर हंसकर राज के साथ चिपक कर बैठ गयी.. सारा गुस्सा भूल कर...

कंडक्टर नये पटाखे को देखते ही मचल उठा... वो निशा को कविता समझ बैठहा और अपने हाथ से उसकी छति भींच दी.. निशा उठी और एक ज़ोर का तमाचा कंडक्टर को रशीद कर दिया... सबका ध्यान एकद्ूम से आगे की और गया," क्या हुआ निशा?" राज और अंजलि ने एक साथ पूचछा...
"कुच्छ नही सर!" बेचारी क्या बताती... उठकर आई और गुस्से से राकेश को कहा," मेरी सीट से उठ जाओ"
राकेश मौके की नज़ाकत समझ कर चुप चाप उठा और आगे चला गया....

चलते चलते करीब सुबह के 4:30 बजे गाड़ी होटेल के सामने रुकी.....

सभी नींद में डूबे हुए थे.... राज ने 13 कमरों की पेमेंट करी सभी को उनके कमरे दिखा दिए... एक कमरे में 4 लड़कियाँ थी... अंजलि और प्यारी का रूम अलग था... राज और टफ और राकेश का अलग..... राज ने जानबूझ कर राकेश को आळग कमरा दिलवा दिया... ड्राइवर और कंडक्टर के रूम की बराबर में... इश्स तरह कुल 15 कमरे बुक हो गये 3 दिन के लिए... सभी अपने अपने कमरों में जाकर सो गये!

सुबह उठ कर सब नाश्ते के बाद मनाली घूमने चले गये... पहले शाम तक मार्केट में घूमें और हिडिंबा का मंदिर देखा... करीब 4 बजे वो होटेल में लौटे और खाया पिया... सभी लड़किया जो पहली बार बाहर घूमने निकली थी... बड़ी ही खुस थी... एक बात की चर्चा हर जगह थी... राज और मुस्कान में कुच्छ हुआ है.. और टफ और सरिता में भी कुच्छ है... असली चक्राउः जो रचा जा रहा था उसका किसी को अहसास नही था...

टफ ने मौका देखकर राज से पूचछा," यार! तुझे मज़ा आ रहा है...!"
राज ने सामानया बन'ने की आक्टिंग करते हुए कहा," हां! आ रहा है! क्यूँ?

"क्यूँ झहूठह बोल रहा है यार!" मुझे सब पता है.. तेरा अंजलि मेडम के साथ कुच्छ सीन है..."
राज ने लुंबी साँस लेते हुए कहा," नही यार.. ... मतलब हां है... पर क्या हो सकता है.."
टफ ने लगभग उच्छलते हुए कहा," हो सकता है मेरे यार. तू आज रात अंजलि को अपने पास बुला ले!"
राज ने गौर से टफ को देखा," और प्यारी मेडम का क्या करेंगे!"
"अरे में प्यारी के लिए ही तो यहाँ आया हूँ... सोच ले मेरा भी काम हो जाएगा तेरा भी..."
राज बहुत खुश हुआ...," तूने तो कमाल कर दिया यार... अब आएगा टूर का मज़ा!"

कुच्छ देर बाद राज ने मौका देखकर गौरी को रोका," गौरी; लाइव मॅच देखना है क्या?"

गौरी लाइव मॅच देखने के लालच का नेतीजा रात को भुगत चुकी थी," कैसे?"
"तू चिंता ना कर! रात को मेरे कमरे में आ जाना 10 बजे के बाद..."
गौरी ने उत्सुकता से पूचछा," किसके साथ?"
"वही... तेरी मम्मी के साथ!" राज मुस्कुराया...
गौरी इतनी खुश हुई की वो उच्छल पड़ी.. ओक सर....मैं 10 बजे के बाद आ जाउन्गि...

उधर टफ ने भी सरिता को सब कुच्छ समझा दिया...

सरिता अपनी बात एक बहुत ही खास सहेली को बता दी... कामना... वो उसके साथ ही पढ़ती थी और बहुत ही गरम आइटम थी....

तो भाई लोगो इस पार्ट का भी यही एंड करना पड़ेगा क्योकि कहानी अभी बहुत बाकी है बाकी कहानी अगले पार्ट मैं तब तक के लिए विदा
लकिन दोस्तो कहानी पढ़ने के बाद एक कमेंट दे दिया करो मैं भी खुश हो जाउगा तो फिर देर मत कीजिए अपना कमेंट देने मैं
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11-26-2017, 12:59 PM,
#39
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
गर्ल्स स्कूल--15

करीब 9:30 बजे थे, टफ प्यारी मेडम के कमरे में गया," अंजलि जी, आपको राज भाई बुला रहे हैं..."
अंजलि को पता था.. राज क्यों बुला रहा है... वा शरमाती हुई सी उठी," वा नही आ सकते थे.. " कहकर कमरे से बाहर निकल गयी...
अंजलि के बाहर जाते ही टफ ने दरवाजा बंद कर दिया... प्यारी यह देखकर घबरा सी गयी," ये क्या कर रहे हो? वो अभी आ जाएगी..."
टफ ने प्यारी की बाँह पकड़ कर अपनी और खींच लिया," आंटी जी! कोई नही आएगा अब! समझो मैने रूम शिफ्ट कर लिया है... अब तीनो दिन ऐश होगी!"
"क्या सच में! वो राज के पास रहेगी?"
टफ ने प्यारी को पलट कर उसकी गांद पर अपने दाँत गाड़ा दिए...," और क्या तुम ही मज़े ले सकती हो...! अंजलि की चूत में खुजली नही हो सकती"
प्यारी अपनी गांद पर भरे गये टफ के जोरदार 'बुड़के' से तिलमिला सी गयी..," आाआईयईई अपनी मा की..... तुझे दर्द देने में मज़ा आता है क्या... ... मैं तो अंजलि से यूँही डरती थी... अगर मुझे पता होता की वो भी... तो मैं बस में ही ना खा लेती तेरा......"
टफ उसको गरम करने मैं लग गया... वो सरिता का वेट कर रहा था...

उधर जैसे ही अंजलि राज के कमरे में गयी.. वो दरवाजा बंद करना ही भूल गयी... कब से अपने नये यार से मज़े लेने को उसका बदन तैयार हो चुका था... वा भागती हुई सी बेड पर लेटी राज के उपर गिर पड़ी...," कितना तदपि हूँ में तुम्हारे लिए.... उसने राज के होंटो को अपनी जीभ से तर कर दिया और फिर उनको चूसने लगी... राज ने अपने हाथ उसकी गांद के मस्त उभारों पर चलाने शुरू कर दिए... अंजलि ने उपर चढ़े चढ़े ही अपनी टांगे मोड़ कर अपनी गांद को उभर लिया... ताकि राज और अंदर तक उसको छू सके.....

टफ के दरवाजे पर दस्तक हुई... प्यारी चौंक कर अपने आपको समेटने लगी... वो अपना कमीज़ और ब्रा निकल चुकी थी... उसकी मोटी मोटी कसी हुई चूचियाँ टफ के थूक से गीली हो रखी थी...," कौन है.. जल्दी हटो! मैं बाथरूम नें जाती हूँ!"


टफ ने खींच कर उसको बेड पर ही गिरा दिया.. यहीं लेटी रहो मेरी जान... तेरी ही औलाद है.. मैने बुलाया था.."
प्यारी शर्म से लाल हो गयी," तो क्या तू मुझे मेरी बेटी के सामने ही चोदेगा?" वो बेड पर ही बेशर्म होकर पड़ी रही..."

टफ दरवाजे की चितकनी खोलते ही प्यारी की और घूम गया," अरे नही.. तू तो आधी बात कह रही है... तेरी बेटी को भी चोदुन्गा तेरे सामने!" उसने प्यारी के चेहरे की और देखा... उसकी आँखें जाम गयी थी दरवाजे पर... टफ अचानक पिछे घूमा... दरवाजे पर कामना खड़ी थी... बला की सेक्सी लड़की...," सॉरी मेडम, मैं तो ये कहने आयो थी की सरिता दिखाई नही दे रही... कहीं आपके साथ तो नही!"

टफ एक बार तो हिचका, फिर उसको अंदर खींच कर दरवाजा बंद कर लिया...," हां! सभी आइटम यहीं पर मिलते हैं... कुछ चाहिए क्या?"
प्यारी देवी की हलाक में साँस अटक गयी... अब तो बात गाँव में फैल जाएगी," बेटी इधर आ किसी से कुछ कहना नही.. तू चाहे तो तू भी.... बहुत मज़े आते हैं... इश्स छ्होरे के साथ... "
कामना कुछ ना बोली, पर उसके गालों की लाली इश्स बात का सबूत थी की वो क्या चाहती है.. वो टफ के छ्चोड़ने पर भी वहीं खड़ी रही, नज़रें झुकाए!

उधर गौरी अपने कमरे से छुप कर बाहर निकली ही थी की जाने कब से उसकी ताक में बैठे राकेश ने उसका हाथ पकड़ लिया...," गौरी.. तुमने कहा था की मनाली जाने के बाद.. मेरा कमरा खाली है..." गौरी ने अपना हाथ झटका और तुनक्ते हुए जवाब दिया," तुमने क्या मुझे ," फॉर सेल' समझ रखा है... वो रंग बदल गयी....

राकेश पछता रहा था.. इससे अच्छा तो वो रात को ही उसको.... उसने तो ये सोचा था की उसको छ्चोड़ कर वो उसकी नज़र में हीरो बन जाएगा... पर.. वो उसको जाते देखता रहा... उसने देखा.. ये तो राज और टफ के कमरे में गयी है.... "वा वा... अब मैं बनावँगा इसको 'आइटम फॉर सेल..! बेहन की लौदी.." राकेश उसके अंदर घुसते ही कमरे की और गया.... लगभग बाकी सभी सो चुके थे... होटेल में सारे कमरे वो बुक कर चुके थे... चोवकिदार नीचे लेटा हुआ था... "नो रूम्स अवेलबल" का बोर्ड होटेल के बाहर लटक रहा था...

सरिता ने कामना को बता तो दिया था पर वा नही चाहती थी की उसकी मा और उसके मज़े में कोई बाधा पहुचाए.. कामना बात का पता चलते ही उससे चिपकी सी रहने लगी.. किसी भी तरह से वो उसका पीछा छ्चोड़ने का नाम नही ले रही थी... किसी तरह वो उससे बचकर राकेश के कमरे में भाग गयी थी और अब जाकर वहाँ से निकली थी... उसने देखा राकेश टफ के कमरे के आसपास मॅड्रा रहा है," भैया तुम्हे कोई बुला रहा है, तुम्हारे कमरे मैं...!"
"कौन!"
"जाकर खुद ही देख लो" सरिता ने शैतानी के साथ मुस्किरते हुए कहा.
राकेश को लगा ज़रूर कोई लड़की होगी.वा जल्दी से अपने कमरे की और गया.. उम्मीदें बांधें...

उसके जाते ही सरिता ने दरवाजा खटखटाया... कामना ने दरवाजा खोला.. उसको देखते ही सरिता भौचक्की रह गयी,... तत्तूमम्म?"
कामना कुच्छ ना बोली.. सरिता अंदर घुस कर बोली," ये क्या है?"
"चिंता मत करो प्रिय! सबको सबका हिस्सा मिलेगा... कूल डाउन बेबी!" टफ ने प्यारी को अपनी गोद में बिठा रखा था... प्यारी भी अब खुल कर हंस रही थी.. शरम को खूँटि पर टाँग कर..!
दरवाजा बंद हो गया..


जब गौरी कमरे में अचानक घुसी तो राज और अंजलि एक दूसरे को चूम रहे थे बुरी तरह... अंजलि एक दम चौंकी.. पर राज ने उसको अपने उपर से उठने ना दिया..," ये अंदर कैसे आई?"
"तुमने ही दरवाजा खुला छ्चोड़ दिया" राज उसके शरमाये हुऊए चेहरे को अपने हाथो में पकड़े बोला... गौरी दरवाजा बंद कर चुकी थी... अपनी जिंदगी का पहला लाइव मॅच देखने के लिए... शायद खेलने के लिए नही...

राकेश अपने कमरे की और गया.. पर कोई दिखाई ना दिया... कौन हो सकता है.. शायद दिव्या ना हो..!" वा एक एक कमरे को खुलवा कर दिव्या को ढ़हूँढने लगा... एक कमरे में उसको दिव्या मिल गयी... ," तुम्हे अंजलि मेडम बुला रही हैं.. दिव्या... !"
दिव्या उठकर उसके साथ बाहर निकल गयी.. एक कोने में जाते ही राकेश ने उसको पकड़ लिया," मैं ही बुला रहा था दिव्या! चल ना खेल खेलते हैं... मेरे कमरे में.."
"पर मेरे कमरे वाली मुझे ढोँढते हुए आ गयी तो... मैं अपनी एक और सहेली को बुला लूँ!" फिर कोई नही आएगा.. बाकी तो सो चुकी हैं.."

"वो तैयार हो जाएगी..?" राकेश खुस हो गया.. एक से भली दो!"
"हां! मैने उसको बताया था.. वो कह रही थी.. कास मैं भी खेल पाती..."

"ठीक है तुम उसको मेरे कमरे में ले आओ... जल्दी..." कहकर राकेश अपने कमरे मैं चला गया....!

सरिता के अंदर आने के बाद कामना ने दरवाजा बंद कर दिया था... चारों में वही ऐसी थी... जो शर्मा रही थी.. कामना तिरछि निगाहों से ही टफ और प्यारी का हरकतें देख रही थी.. अभी तक टफ ने अपना कुछ नही निकाला था. वो सरिता के आने की ही वेट कर रहा था... सरिता के आने के बाद वो प्यारी से अलग हो गया.. प्यारी दोनो हाथों से अपनी चूचियाँ ढकने की कोशिश कर रही थी.. पर इतनी बड़ी चूचियाँ दयाएं बायें से निकल कर उसके प्रयासों का मज़ाक बना रही थी...
सरिता ने कामना को देखा," तुझे भी फंस्वाना है क्या..? देख ले बहुत दर्द होगा!" उसने कामना को डराने की कोशिश की..

पर कामना दर्द पहले ही झेल चुकी थी अपने ता उ के लड़के से... अब तो बस मज़ा ही मज़ा लेती थी वो.. उसने टफ के 'लोवर' की और दखा... वहाँ 90* का एंगल बना हुआ था.. ," हां! तुम करोगी, तो मैं भी करूँगी..." उसने कहा और शर्मा गयी... टफ ने उसके मस्त शरीर को देखा... ऐसे उँचे नीचे रास्ते देखकर वो भगवान को धन्नयवाद देने लगा... ," हे भगवान! मेरे किए गये पापों की ऐसी मस्त सज़ा! हेल टू यू, डियर गॉड!" वा उठा और कामना को अपनी बाहों में उठा लिया... उसका एक हाथ कामना की जांघों के नीचे और दूसरा उसकी कमर के नीचे से उसकी छतियो को छू रहा था... कामना ने अपनी आँखें मूंद ली... टफ ने उसको और उपर उठाया और उसके होंठो पर 'थॅंक्स' रसीद कर दिया... अपने होंटो से... कामना ने सिसक कर टफ को मजबूती से पकड़ लिया...

सरिता को अपने हिस्से का प्यार कामना पर लूट-ते देख सहन नही हुआ.. वा टफ के सामने आई और उसको घहूरने लगी," अच्च्छा! अब ऐसे बदल जाओगे... रात को तो मेरी चूत फाड़ने का वादा कर रहे थे" उसको अपनी नंगी मम्मी से शरमाने की कोई वजह दिखाई नही दी...

टफ ने कामना को आराम से बेड के नरम गद्दे पर डाल दिया... उसकी आँखें अभी भी बंद थी..
सरिता उच्छल कर टफ की गोद में जा चढ़ि.. उसकी बाहें टफ के गले में थी और उसकी टांगे टफ के दोनों और से उसके पिच्छवाड़े पर कैंची मारे लिपटी हुई थी.. सरिता को अपनी गांद के बीचों बीच टफ के लंड की सपोर्ट मिल रही तही.. सरिता ने वासना के आवाग में टफ के दाँतों पर काट लिया.. टफ चिल्ला पड़ा," रुक तो जा.. शांति कर ले.. अभी पता चल जाएगा.. दर्द कहते किसको हैं....

प्यारी को लगा जैसे 2 हसीनाओं के बीच उसका बुढ़ापा टफ को लुभा नही पा रहा.. उसने कंप्टिशन में रहने के लिए अपनी सलवार और पनटी भी उतार फैंकी...," इधर तो नज़र डाल ले मेरे राजा...," मैं भी बूढ़ी नही हुई" वो अपनी चूत को फैला कर टफ को उसकी चूत की लाली दिखा रही थी...

टफ की समझ में ही नही आ रहा था.. की शुरू कहाँ से करूँ...," अरे एक ही तो लंड है. किस किस की चूत में डालूं एक साथ... थोड़ा वेट नही होता क्या. ?"
कामना की चूत मे टफ के मुँह से लंड और चूत सुनकर गुदगुदी सी होने लगी... चीटियाँ सी चलने लगी.. उसका हाथ अपने आप ही उन्न चीटियों को मसालने लगा... सलवार के उपर से ही...
"ठीक है बड़ी से शुरू करता हूँ...तुम दोनो अभी वेट करो... इसकी आग बूझकर ही तुम्हारा हाल पूछुन्गा........

टफ बेड पर जाकर प्यारी देवी की जांघों के बीच बैठ गया वैसे तो उस्स-से कभी कंट्रोल होता ही नही था... पर उन्न दोनो लड़कियों को जी भर कर गरम करने के इरादे से उसने सबर करने की सोच ली... वो लड़किया तो पहले ही जल बिन मछ्ली की भाँति तड़प रही थी...
कामना टफ और प्यारी के बीच में कूदना चाहती थी पर हिम्मत उसका साथ नही दे रही थी.. वो अनानद के अतिरके में सरिता से लिपट गयी ताकि उसकी तड़प रही चूचियों को कुछ देर के लिए शांत किया जा सके... दोनों की छातियाँ एक दूसरी से चिपकी हुई थी, सरिता ने अपना हाथ कामना की सलवार में डाल दिया, ताकि वो भी बदले में उसकी चूत को छू कर थोड़ी राहत पहुँचा सके!
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Reply
11-26-2017, 12:59 PM,
#40
RE: College Sex Stories गर्ल्स स्कूल
सरिता की नज़र टफ पर गयी.. वो उसकी मा की चूत को जीभ से सॉफ कर रहा था... सरिता को वो जीभ अपनी चूत पर ही चलती महसूस हुई... उसने झट से अपनी सलवार और पनटी उतार दी और बेड के कोने पर सीधी होकर पसार गयी," कामना! ऐसे ही करो ना..." अपनी चूत पर उंगली लगाकर उसने टफ की और इशारा करके कहा... कामना थोड़ी सी झिझकी पर सरिता ने उसको अपनी चूत पर झुका दिया...
कामना उसकी चूत की खुली फांको को देखकर अपनी चूत के बारे में सोचने लगी... इसकी तो कितनी खुली हुई है... मेरे अंदर तो जब संदीप ने किया था... इसकी तो जान ही निकल गयी थी... कामना ने सरिता को थोड़ा और उपर सरकया और तरारे में अपनी सलवार भी उतार दी... और अपना पिच्छवाड़ा सरिता के मुँह पर रख कर अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा दी...," आआआआः! आरााम से काआमुऊउन्ाअ!" सरिता के मुँह से अजीब सी सिसकियाँ निकल रही थी... इनको एक ही तरीके से रोका जा सकता था... अपने होंटो को बंद करने के लिए... कामना की गोरी चित्ति, मक्खन जैसी चूत को अपने मुँह पर खींच लिया... जीभ चूत से टच होते ही कामना उच्छल पड़ी... बड़ा ही उत्तेजक सीन था... अब टफ अपना पिच्छवाड़ा उपर उठाए झुक कर प्यारी की चूत को अपनी जीभ से काफ़ी अंदर तक चोद रहा था... प्यारी हाथ नी चे किए अपनी बेटी के बॉल नोच रही थी... सरिता को अपने से थोड़ी ही दूर टफ का लंड पॅंट में झूलता दिखाई दिया... बाहर से ही उसकी मोटाई और लंबाई का अंदाज़ा लग रहा था.. सरिता ने अपना हाथ बढ़ा कर लंड को अपने काबू में कर लिया.. उसने लंड को गोलों से भी उपर से पकड़ रखा था और उसको बुरी तरह अपनी और खींच रही थी... टफ ने उसके दिल की बात सुन ली... उसने उठकर अपनी पॅंट निकली और सरिता के मुँह के पास लंड लटकाकर प्यारी को अपनी और खींच लिया... टफ के चूतड़ अब इश्स पोज़िशन में कामना की गांद से टकरा रहे थे.. सरिता ने अपने सिर के नीचे तकिया लगाकर लंड को अपने होंटो के कब्ज़े में लेने में देर नही की... कामना उसकी चूत पर टूट पड़ी थी... अपनी गांद को बार बार वा पीछे करके टफ की गांद से टकरा रही थी... टफ तो जैसे सब कुछ भूल गया.. उसने अपनी जीभ बाहर निकली और पीछे गर्दन करके चल रहे काम युद्ध को देखने लगा... कामना की चूत गीली हो गयी थी.. सरिता के होंटो के इंतज़ार में... सरिता को जाने क्या सूझी... लंड को मुँह से निकाला और पिछे मोड़ कर कामना की चूत से घिसा दिया.. कामना चीख पड़ी आनंद में," ....ओहजहह मुंम्म्ममममी... मॅर गिइइ रीए!


प्यारी इस बीच आधार में ही लटक गयी... उसने टफ की उंगली अपनी गांद में घुसा ली और अपनी गांद उच्छलने लगी... बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम!
अचानक जब टफ से सहन करना बर्दास्त के बाहर हो गया तो उससने अपना लंड सरिता के हाथो से छीना और और अपने सामने पड़ी चूत में सर्ररर से घुसा दिया..

प्यारी की ख़ुसी का कोई अंदाज़ा नही था... वो सिसक रही थी और अपनी चूचियों को खुद ही मसल मसल कर उपर उठा रही थी ताकि टफ उन्न पर भी ध्यान दे... टफ प्यारी को चोद्ते हुए एक दूसरे की चूतो से खेलती हुई सरिता और कामना को देख रहा था... कामना की नज़रें अभी भी उसके लंड को नापने में लगी थी.. जैसे ही टफ लंड बाहर निकल कर अंदर धकेलटा... कामना.. अपनी चूत को सरिता के मुँह पर झुका देती... और फिर वापस उठा लेती.. ये समझने के लिए की जैसे वही चुद रही हो... सरिता का हाथ फ्री था.. उसको अपनी मा की गांद मुँह खोले दिखाई दी... सरिता ने मौके का फ़ायदा उठाया और धीरे से अपनी उंगली आते जाते लंड के नीचे अपनी मा की गांद में घुसा दी... लूंबे नाख़ून होने की वजह से उसकी गांद में नाख़ून चुभ गया और प्यारी उछाल पड़ी...," ये क्या कर रहा है... गांद काट दी साले....... मार गयी मैं... और उसकी चूत लापर लापर बरस पड़ी.... ," बुसस्स रहने दे... मार दियाअ...! हाए.. मुझे छ्चोड़, छ्होरियों को चोद.... मुझमें क्या रखा है...

टफ उसके उपर से हटा और छ्होरियों को देखने लगा... अब किसकी मारू?

उसका लन्ड़ फ्री होते ही सरिता ने कामना को उछाल कर बेड पर पटक दिया.. और कल की प्यासी सरिता.. उसके लंड पर टूट पड़ी... मा की चूत के रस में भीगक़े हुआ लंड चखने में सरिता को और भी मीठा लगा.........

टफ ने कामना की और देखा... सरिता तो तब तक अपना कमीज़ और ब्रा भी उतार चुकी थी... उसकी जांघें उसकी चूत के रस और कामना के थूक से सनी पड़ी थी.. सरिता की आँखों में वासना का तूफान तेर रहा था पर कामना मे टफ को अपनी और गौर से देखते पाया तो वा थोड़ी सी शर्मा गयी.. और अपने कमीज़ को जांघों तक खींच कर किसी तरह अपनी चूत को छिपा लिया... टफ ने कामना को खींच कर अपनी गोद में समेट लिया... उसका शरीर ताप रहा था... उसने टफ की छाती में अपने आपको छुपाने की कोशिश की..

टफ ने उसकी जांघों को प्यार से सहलाया.. जैसे बलि से पहले बकरे की आवभगत की जाती है... ठीक ऐसे ही!
सरिता टफ को भूखी नज़रों से देख रही थी.. जैसे कह रही हो.. उसका नम्बर. पहले क्यूँ नही... वा टफ के पास आई और उसके गालों को जीभ से चाटने लगी... टफ ने अपना हाथ कामना की जांघों से होते हुए उसकी चूत तक पहुँचा दिया.. कामना ने टफ को इश्स तरह पकड़ लिया जैसे वा आसमान में उसके साथ लटक रही हो और छोड़ते ही नीचे गिर जाएगी... अब टफ ही उसको इसके वासना के हवाई जहाज़ से उतार सकता था..
टफ ने उंगलियों से उसकी चूत से खेलना शुरू किया.. उसके होन्ट हालाँकि सरिता को चख रहे थे... सरिता ने अपनी एक चूची को उसके मुँह में भर दिया.. जैसे ही टफ ने उसके निप्पल के दाने को चूसना शुरू किया.. वा मिमियने लगी.. उसने टफ के दूसरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत में उंगली घुसा ली... मर्द का हाथ तो आख़िर मर्द का ही होता है... दोनो बुरी तरह से काँप रही थी.. चूत में उंगली जाने पर सरिता तो अपनी चूचियाँ उसके मुँह से निकल कर उछाल सी रही थी... और कुच्छ का कुच्छ बक रही थी.. ," मेरी.. अया... मा चोद्द्द दी... साले... मुझी कब..." प्यारी अपनी बेटी का ये रूप देखकर हैरान थी... उसको ये तो पता था की ये करवाती है.. पर ये नही पता था की बिल्कुल उसी पर गयी है... उसका दिल किया की एक बार अपनी बेटी के साथ लेस्बियान गेम खेल ले...
उसने सरिता को पकड़ कर खींच लिया....

टफ अब फ्री होकर कामना की कामना शांत करने लग गया.....

प्यारी ने जैसे ही सरिता को अपनी तरफ खींचा वा निढाल होकर उसके उपर आ गिरी... वैसे तो मा बेटी का इश्स तरह प्यार से एक दूसरी से चिपकना आम बात होती है.. पर यहाँ बात खास थी.. प्यारी ने पहली बार अपनी जाई बेटी को जवान होने के बाद पहली बार सिर से चोटी तक और चूत से गांद तक नंगी देखा था.. सरिता तो वासना की आग में इश्स कदर जल रही थी की उसने अच्छा बुरा सोचे बिना अपनी मा का हाथ पकड़ा और अपनी जाँघो के बीच दे दिया.. प्यारी अपने ही खून को इश्स तरह गरम देखकर फूली नही समा रही थी.. वही चूचियाँ, वही मोटी गांद; वही गड्राया हुआ जिस्म और वही जाँघ! सरिता बिल्कुल उसी पर गयी थी.. प्यारी ने उसकी चूत में उंगली डाल कर उसका तापमान चेक किया.. वा भट्टी की तरह ताप रही थी.. रात से ही टफ इसके कॉयलों को हवा जो दे रहा था.. अंगुली अंदर जाते ही सरिता ने कसमसा कर अपने निप्पल्स को उमेटा और प्यारी की चूचियों से अपना मुँह लगा दिया.. प्यारी ने अपनी टांगे चौड़ी करके सरिता को भी वैसा ही करने का इशारा किया.. सरिता ने तुरंत अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत में घुसा दी... वो एक दूसरे में इतनी खो गयी की उन्हे ध्यान ही नही रहा की कब टफ कामना को उठाकर बाथरूम में ले गया...

बाथरूम में टफ बार बार कामना को अपने से अलग करता और बार बार कामना उससे चिपक जाती.. या तो उसको टफ के अपनी और देखने से शरम आ रही थी या फिर वो उससे दूर ही नही होना चाह रही थी.. टफ ने उसको उठा कर वॉश बेसिन की साइड में स्लॅब पर बिठा दिया और उसके हाथ उपर करके उसका सब कुच्छ निकाल दिया.. कामना ने आँखें बंद कर रखी थी.. उसका चेहरा अजीब तरह से चमक रहा था.. टफ ने उसकी छातियों पर हाथ फेरा और अपना मुँह उनसे लगा दिया.. हल्के लाल रंग के निप्पल्स तने हुए थे.. टफ ने जब उनको चूसना शुरू किया तो कामना का खुद पर काबू पाना मुश्किल हो गया.. उसने हाथ झुका कर टफ के लंड को छूना चाहा पर वो उसकी पहुँच से बाहर था.. टफ ने एक टाँग उठा कर स्लॅब पर रख ली.. और कामना के हाथ में अपना हथियार पकड़ा दिया... करीब 8" लंड को पाकर कामना को लग रहा था की आज तो उसकी जान ही निकलेगी... संदीप तो उस्स वक़्त 15 साल का ही था जब उसने अपने 'घेर' में कामना को घेर कर उसको प्यार करवाना सिखाया था.. कामना अचरज से लगातार और उफनते जा रहे लंड को देखती रही... जी भर कर चूसने के बाद टफ ने उसको नीचे उतारा और खुद स्लॅब पर जाकर बैठ गया....

उधर प्यारी ने सरिता को उल्टा कर के चूत को अपनी जीभ का स्वाद देना शुरू कर दिया... मा बेटी का ये खेल देखने लायक था.. और बाहर जमा हो चुकी लड़कियाँ दरवाजे के कीहोल से देख भी रही थी... काफ़ी देर तक दिव्या को वापस ना आया देख उसकी रूम मेट उसको देखने वहाँ तक आ पहुँची और उसके दरवाजा खटखटाने पर भी जब प्यार में रात कमरों से कोई आवाज़ नही आई तो उसने के होल से ये नज़ारा देखा और जाकर सबबको चुप चाप आने को कहकर सभी को बिना टिकेट की फिल्म बारी बारी से दिखा रही थी...

प्यारी पूरी मस्ती से अपनी चूत में से निकली चूत को खाने में लगी थी.. वो सरिता के मस्त मोटे चूतदों को जैसे फाड़ कर एक दूसरे से अलग कर देना चाहती थी... दोनो मा बेटी एक दूसरी को गंदी से गंदी गालियाँ देकर अपने मॅन को शांत कर रही थी... पर सरिता को जैसे इससे संतोष नही हो रहा था... वा बार बार अपने चूतदों को पीछे ढका कर अपनी मा के चेहरे पर मार रही थी... लंड की प्यास भला जीभ से कैसे बुझती.. पर प्यारी अपनी तरफ से उसको चोदने में कोई कसर नही छ्चोड़ रही थी... उसने अपनी उंगली अपनी चूत के रस से भारी और सरिता की गांद में घुसा दी.. पर इससे तो सरिता भड़कनी ही थी.. उसने अपने चूतड़ और उठा दिए.. मा कुछ करो कुछ मोटा दे दो माआअ . बाहर की सब लड़कियाँ एक एक करके मा बेटी के संभोग को देख देख कर अपने दांतो तले उंगलिइयँ दबा रही थी... कुछ की उंगलिइयँ हालाँकि उनकी जांघों तले भी थी... उनकी चूत में.........

टफ ने अपना लंड कामना के हाथ में पकड़ा दिया," इसको चख कर देखो मेरी कामना!"
कामना ने अपना मुँह खोल कर टफ के सूपदे पर रखा... उसके मुँह की औकात दमदार लौदे से कम ही थी.. सो ले नही पाई..! टफ सूपदे को उसके होंठो से ही रगड़ने लगा.. इतने प्यारे होंतों की चुअन से ही उसको वो मज़ा मिल रहा था जो किसी बूड्दी चूत में घुसाने में उसको आता.. कामना की शर्म धीरे धीरे खुल रही थी और उसका मुँह भी... उसने जैसे तैसे करके सूपदे को मुँह में भर लिया... लेकिन वो वहाँ पर हिलने की हालत में नही था...

कुच्छ देर बाद टफ ने उसको भी उपर चढ़ा लिया.. उपर आते ही कामना को शीशे में अपनी चूचियों का तनाव दिखाई दिया... सच में इतनी सुंदर तो वा कभी नही लगी.... जितनी आज नंगी एक जवान मर्द के साथ आईने में खुद को देख कर उसमें आए इतने निखार को देखकर वा माह सूस कर रही थी...
टफ उसके जिस्म के हर हिस्से को चूम लेना चाहता था..उसके होंटो और गालों से शुरू होकर वो उसकी गोरी मस्त चूचियों को चाट-ता हुआ सा उसकी नाभि तक आ चुका था... कामना को होश ही नही था.. वो तो और उपर उठती जा रही थी ताकि जल्दी से उसके इश्स मर्द आशिक को उसकी मंज़िल तक पहुँचा सके!

ज्यों ही टफ के होन्ट उसके हल्क सुनहरे बालों तक पहुँचे, कामना की आँखे बंद हो चुकी थी और आने वेल आनंद को सोच कर पागल हुई जा रही थी... उसका हाथ टफ के सिर को नीचे दबा रहा था... जैसे ही टफ के होन्ट उसकी अधखुली चूत की पंखुड़ियों तक पहुँचे.. उसकी चूत बरस पड़ी यौवन रस के साथ.... टफ इश्स रस का इस्तेमाल अपने खास मकसद के लिए करना चाहता था...


टफ ने कामना के घुटने मोड और उसको अपने लंड की और झुकने लगा... कामना से कामिनी बन चुकी उसकी चूत भी जैसे अपने अंदर उस्स खास हथियार की भूख महसूस कर रही थी... वो नीचे होती गयी और उस्स के सूपदे पर जाकर टिक गयी...
टफ को आइडिया था की वो अंदर लेते हुए नखरे ज़रूर करेगी.. इसीलिए दबाव डालने से पहले ही उसने कामना को पीछे चूतदों से कस कर पकड़ लिया.
जैसे ही टफ ने उसको नीचे की तरफ खींचने शुरू किया तो कामना की चूत की हां दिमाग़ से निकल रही ना ना में बदल गयी... दर्द के कारण... इश्स असमंजस को दूर टफ ने अपने हाथो से दबाव डाल कर दूर कर दिया... उसकी चूत जैसे चिर सी गयी जब सूपदे ने अंदर जाकर साँस ली... टफ उसको बुरी तरह से चूमता हुआ तसल्ली देने की कोशिश कर रहा था.. पर कामना को उसकी हरकत चूत में छुरी, मुँह में प्यार लग रही थी... धीरे धीरे जैसे जैसे उसका दर्द कूम होता गया.. वो अपने आप ही उस्स पर बैठती चली गयी... चिकनी हों की वजह से एक बार खुलने के बाद उसको ज़्यादा समय नही लगा अपने चूतदों को हिला हिला कर अपनी चूत की दीवारों को लंड से सहलाने में...
टफ को जब तसल्ली हो गयी की मामला अब फिट है तो वो अपने हाथ उसकी गांद पर से हटाकर उसकी जाँघो के नीचे ले आया और पिछे सीशे से अपनी कमर सटा कर कामना को धीरे धीरे उपर नीचे करने लगा.. लंड इतनी संकरी चूत में आने जाने से टफ को इतना मज़ा आ रहा था.. जो आज तक नही आया.. वा तो हवश में दर्द देना ही सीखा था आज तक.. पर आज पहली बार प्यार देकर आर प्यार लेकर उसका तन और मन बाग बाग हो उठे थे...
अब कामना भी कामवेश में अपने चूतड़ उठा उठा कर लंड पर मार रही थी.. शीशे में खुद का चेहरा देखते देखते वो और ज़्यादा उत्तेजित होती जा रही थी... वो धक्के जब तक जारी रहे जब तक टफ का रस उसकी चूत में ना बहने लगा... इसके साथ ही चूत में टफ का रस जाते ही वो भी तीसरी बार अपनी योनि का बाँध तुद्वा बैठी और टफ से चिपक गयी..
इतना मज़ा आज तक टफ को नही आया था..
टफ उसको उठाकर बाहर लेकर गया तो वहाँ का नज़ारा देख कर सुन्न रह गया... सरिता और प्यारी दोनो एक दूसरे के उपर नीचे 69 की पोज़िशन में पड़ी चूतो को ज़ोर ज़ोर से अपने हाथों से चोद रही थी... प्यारी हाँफते हुए कह रही हही," पूरा हाः दे दे कामिनी..." दोनों इन ठंड में भी पसीने से नहाई हुई थी...
टफ का लंड यह सीन देखकर फिर से अंगड़ाइयाँ लेने लगा.... वा बेड पर जा चढ़ा और उनको सीधा लिटा दिया.. सरता को उसने प्यारी के उपर सीधा करके इश्स तरह लिटाया की सरिता की गांद की गोलाइया प्यारी की चूत के उपर उससे चिपकी हुई थी... टफ अपने असली रूप में आ गया... दोनो मा बेटी अचरज से टफ को देख रही थी.. की क्या होने वाला है......

जिस वक़्त सरिता ने टफ वाले कमरे में प्रवेश किया था.. लगभग उससे थोड़ी देर पहले ही अंजलि गौरी को अपने कमरे में देख कर चौंक थी... पर राज ने उसको अपने उपर से उठाने नही दिया था... अंजलि को खुद पर ही अफ़सोस था... उसने ही तो दरवाजा खुला छोड़ दिया था, राज की बाहों में आने की जल्दी में... किसी तरह से मचल कर उसने आपने आपको राज की बाहों से आज़ाद कराया और अपना सिर नीचा करके बैठ गयी...
गौरी उसके पास आई और बोली," कोई बात नही दीदी! मुझे बुरा नही लगता.. बुल्की अच्च्छा लगता है... आप ऐसे क्यूँ मुँह लटकयं बैठी
हैं.."
"नही कुच्छ नही!" अंजलि के पास इससे ज़्यादा बोलने को कुछ था ही नही...
राज गौरी के उभारों को गौर से देख रहा था.. आज ही नयी खरीदी घुटनो से भी उपर तक की नाइटी में वो गजब ढा रही थी... राज जल्दी से उसको खेल दिखा कर गरम करना चाहता था... ताकि वो भी खेल में शामिल हो सके," अंजलि! सब तुम्हारी ग़लती है..., अब हमें
गौरी के आगे ही..."
"नही प्लीज़.. गौरी!" अंजलि ने गौरी की और याचना की ड्रस्टी से देखा... जैसे वो बड़ी नही बुल्की गौरी से भी छोटी हो..
गौरी तो मॅन बनाकर आई थी...," ये ग़लत है दीदी! आपने प्रोमिसे किया था... और आज तो मैं आपको रंगे हाथो पकड़ चुकी हूँ... आपका और राज सर का मॅच तो मैं देखकर ही
रहूंगी....
"क्यूँ ज़िद कर रही हो... देखने दो ना... और फिर ये तो लड़की ही तो है... जब मुझे शरम नही
आती तो तुम्हे क्यूँ आ रही है...?"
अंजलि सिर झुकाए बैठी रही... उसको अब लग रहा
था ... अपनी बेटी के आगे नंगा होना पड़ेगा....

गौरी बेड के साथ रखी एक कुर्सी को खींच कर बेड के सामने ले आई और उस्स पर बैठ गयी... बैठने की वजह से उसकी पतले कपड़े की नाइटी उपर सरक आई. राज की नज़र उसकी चिकनी शायद वॅक्स की हुई दमकती जांघों पर पड़ी.. इतनी सुंदर मखमली जांघे राज ने कभी देखी नही थी.. बैठने की वजह से उसके पुथे कातिल तरीके से बाहर की और उभर आए.. गौरी ने जब राज को इतने बुरे तरीके से उसके नीचे की और झाँक रहे राज को देखा तो वा सकपका गया और अपनी टाँगों को सीधा करके बेड के नीचे सरका दिया और अपनी नाइटी ठीक करी," चलो अब शुरू हो जाओ! बड़ा मज़ा आएगा!" राज ने अंजलि को अपने पास खींच लिया और उसकी
नाइटी उतरने लगा.. पर अंजलि ने अपनी नाइटी को नीचे से कसकर पकड़ लिया...," पहले तुम उतारो!"
राज ने झट से अपनी शर्ट उतार कर बेड पर फाँक दी... उसको क्या अपने घुंघरू टूटने का डर था... वा अंजलि की और बढ़ा तो उसने फिर उस्स्को बीच में ही टोक दिया," नीचे से भी...!"
"चलो ठीक है.. ये भी सही...!" राज ने अपनी पंत भी उतार दी... अब वा सिर्फ़ अंडरवेर में था जिसमें से उसके तने हुए लंड के सॉफ महसूस होने ने गौरी को भी शरमाने पर मजबूर कर दिया... उसकी धड़कने तेज़ हो गयी. राज ने गौरी की और देखा तो वो दायें बायें नज़रे चुराने लगी... राज ने अंजलि को कहा," अब तो ठीक है..."
"नही; ये भी उतारो!" अंजलि राज को ऐसे गौरी के सामने देखकर अपनी हँसी पर मुस्किल से काबू पा रही तही... वो जैसे तैसे टाइम ही गुजर रही थी ताकि गौरी खुद शर्मा कर भाग जाए.. उसका सोचना सही था पर राज ने इसका मौका ही नही दिया.. ," अब ये ग़लत बात है... खुद पुर कपड़े पहन रखे हैं.. मुझे नंगा ही कर रही हो...,क्यूँ गौरी! सही कह रहा हूँ ना"
गौरी शर्मा गयी.. नज़रें नीची करके अपना सिर हिला दिया...," लाइव मॅच देखना कोई "पाँचवी पास से तेज" वाला गेम नही था... इसमें तो बड़ी बड़ी बेशर्म और बेबाक लड़कियाँ भी मेदान छ्चोड़ कर भाग जाती हैं.. या फिर मॅच में शामिल हो जाती हैं... अब गौरी को महसूस हो रहा था की ये शर्त खुद उसके लिए कितनी मुश्किल थी... पर हिम्मत करके बिना देखे उसने राज की बात का जवाब ज़रूर दिया था... हां में!

राज गौरी पर झपट गया और उसके विरोध के बावजूद उसकी नाइटी खींच कर निकल दी... वा सिर्फ़ ब्रा और एक सफेद पनटी में ही रह गयी थी... गौरी ने देखा; पनटी नीचे से गीली थी... तभी उसको लगा उसकी चूत भी चूने लगी है; धीरे धीरे....
अंजलि सिमट कर बेड के सिरहाने जा लगी.. जितना अधिक हो सकता था उसने अपने आपको छुपाने की कोशिश करी.. अपने पैर मोड़ लिए और आगे झुक गयी... उसको राज से नही बल्कि गौरी के आगे राज से शरम आ रही थी... गौरी नही होती तो वो कब का ग़मे पूरा भी कर चुके होते...

राज ने अंजलि को अपनी और खींच लिया और कमर के उस्स पार हाथ फँसा कर ब्रा का हुक खोल दिया.. ब्रा खुलते ही अंजलि बेड पर पॅट के बल गिर पड़ी और अपनी चूचियों को चादर में छुपा लिया...

गौरी जैसी कयामत की चीज़ भी अंजलि की मस्त चूतदों की गोलाइयाँ देख कर आ किए बिना ना रह सकी.. उसकी गांद मस्त सॉलिड थी और गांद से नीचे उसकी जाँघो के बीच चिपकी हुई उसकी पनटी में से उसकी फांकों की मोटाई झलक रही थी..
गौरी ने अपने आपको संभाला और गीली होने की वजह से चिपक चुकी उसकी पनटी को अपनी गांद पर से हटा, अपना हाथ नीचे ले जाकर.. अब राज का ध्यान भी गौरी से हटकर अंजलि की जांघों पर ही अटका हुआ था... थोड़ी सावली पर जिकनी मस्त जांघे उसके सौंदर्या का बखान कर रही थी.......

अंजलि का ध्यान अपने पिच्छवाड़े पर नज़रें गड़ाए हुई गौरी पर पड़ी.. उसका अचानक ही अपने चूतदों का ख़याल आया और वा एक दम से उठकर गौरी से जा चिपकी," खेल देखना है तो तुझे भी मेरी तरह होना पड़ेगा.. गौरी हड़बड़ा कर कुर्सी से पीछे गिर पड़ी.. पीछे होने की वजह से राज को उसकी मांसल जांघों की जड़ में छुपी बैठी उसकी पनटी और चूत के उभर के दर्शन हो गये... राज धान्या हो गया... गौरी को भोगने की उसकी इच्छा और बलवती हो गयी...
गौरी ने उठने की कोशिश की पर अंजलि ने उसको वही दबोच लिया और उसकी नाइटी नीचे सरका कर उसको पेट तक ला दिया... दोनो हंस भी रही थी और शर्मा भी रही थी... गौरी की गोरी और सॉफ गांद देखकर राज अपने लंड को पकड़ कर बैठ गया... गौरी की नाभि और उसका कमसिन पतला पेट गजब ढा रहा था... सच ही उसका नाम गौरी था... गोरी!
तभी अंजलि उसको पकड़े पकड़े ही राज को कहने लगी," इधर आओ ना, मेरी मदद करो इसके भी कपड़े उतरने चाहिए ना... फ्री में ही मज़े ले रही है..."
"नही सर.. प्लीज़.. मैं मर जवँगी... " गौरी अपने हाथ से पकड़ कर उसकी नाइटी को और उपर उठने से रोक रही थी... उसकी हँसी कम होती जा रही थी और उसके चेहरे पर शर्म की चादर चेहरे पर पैर पसारती जा रही थी...

राज ने झुक कर गौरी को अपनी बाहों में उठा लिया.. गौरी ने कुर्सी को पकड़ कर अपने आपको उसको बाहों में जाने से रोकने की कोशिश की पर कुर्सी भी साथ ही उठती चली गयी...
राज ने अंजलि से पूचछा," क्या करना है अब इसका?"
अंजलि मुस्कुराइ और गौरी के चेहरे पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली," नंगा!" अब वा अपने नंगेपन को भूल कर गौरी की इज़्ज़त उतरवाने पर उतारू हो गयी....
शर्म से पानी पानी हो चुकी गौरी ने अंजलि को अपनी बाहों का घेरा डाल कर पकड़ लिया," दीदी... प्लीज़..!" छ्चोड़ दो ना!" उसने गौरी को कसकर पकड़ लिया... राज ने तो गौरी को पकड़ा ही हुआ था... दोनो बेड पर जाकर बैठ गये.. गौरी उन्न दोनो के बीच झूलती हुई बेड पर जा टिकी....
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