Desi Kahani Jaal -जाल
12-19-2017, 10:41 PM,
#61
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--60

गतान्क से आगे......

“ये किसका घर है रंभा?”

“यहा के वाइड का.”

“यहा क्या मिला है तुम्हे?”

“ये.”,रंभा ने चौखट पे बैठे शख्स के चेहरे पे टॉर्च की रोशनी मारी.उस शख्स ने बहुत धीरे से हाथ उठाके रोशनी को रोका & फिर आँखे मीचे हाथ नीचे कर रोशनी मारने वाले को देखने लगा लेकिन वो कुच्छ बोला नही.देवेन आगे बढ़ा & उस शख्स के चेहरे को गौर से देखा & उसके मुँह से हैरत भरी चीख निकल गयी.

“हैं!ये तो..ये तो..विजयंत मेहरा है.!”

"ये मुझे नदी के किनारे पड़ा मिला था..",वाइड देवेन को विजयंत मेहरा के मिलने की कहानी सुना रहा था,"..यहा से बहुत आयेज.मैं उधर जड़ी-बूटियाँ चुनने जाता हू."

"आपने पोलीस को इत्तिला नही की?"

"की थी लेकिन यहा कोई पक्की चौकी नही है बस 1 हवलदार आता है हफ्ते मे 1 बार.उसने इसे देखा & बोला कि नदी मे गिर गया होगा.उसने कहा कि वो जाके थानेदार को बता देगा & फिर वोही ये पता करेगा कि इसके जैसे हुलिए वाले किसी आदमी के गुम होने की रपट लिखाई गयी है या नही."

"फिर?"

"फिर वो आअज तक यहा नही आया है."

"हूँ..वैसे इसे हुआ क्या है?..ये बोलता क्यू नही?"

"ये देखो..",वाइड काफ़ी उम्रदराज़ था & काफ़ी देर बैठने के बाद उठने मे उसे काफ़ी तकलीफ़ होती थी.वो धीरे से उठा & कमरे मे बैठे उन्हे देखते विजयंत की ओर गया.विजयंत सब सुन रहा था,उन्हे देख रहा था लेकिन उसकी आँखो मे कही भी वो भाव नही था जिसे देख ये लगे कि उसे उनकी बातें समझ आ रही थी या नही,"..इस जगह..",उसने उसके माथे पे बाई तरफ बॉल हटा के दिखाया,"..पे गहरी चोट लगी थी इसे.मैने खून रोक के टाँके लगाए.ये बोलता क्यू नही इसका कारण मुझे नही पता.पर इतना ज़रूर है कि इसके दिमाग़ पे ज़ोर की चोट लगी है & उसी वजह से या तो इसकी याददाश्त गयी है या फिर सोचने & बोलने की ताक़त.",वो वापस अपनी जगह पे बैठ गया.

"वैसे इसे बातें समझ मे तो आती है.इसे भूख लगती है,प्यास लगती है.कहो तो खड़ा हो जाएगा,बोलो तो बैठ जाएगा मगर खुद कुच्छ कहेगा नही ना ही इशारा करेगा."

"हूँ..हम इसे अपने साथ ले जाते हैं.वाहा शहर मे सरकारी लोगो के हवाले कर देंगे तो फिर ज़रा आपका हवलदार भी चौकस होगा.ढीला लगता है मुझे वो."

"बहुत अच्छे.ज़रा यहा की बिजली के बारे मे भी बात करना."

"ज़रूर.",दोनो विजयंत को वाहा से ले निकल आए.रंभा ने वाइड को कुच्छ पैसे दे दिए थे.उसे अजीब सी खुशी हो रही थी लेकिन उसकी निगाह गाड़ी चलाते देवेन पे भी थी जो बहुत संजीदा लग रहा था.अब देवी फार्म पे हुई किसी बात की वजह से या फिर विजयंत के मिलने की वजह से,ये उसकी समझ मे नही आ रहा था.देवेन उसे चाहने लगा था & वो ये भी जानता था कि रंभा के ताल्लुक़ात विजयंत के साथ भी हैं.उसने उसे सवेरे ही कहा था कि इस बात से उसे कोई ऐतराज़ नही कि वो उसके अलावा किसी & को भी चाहे लेकिन था तो वो 1 मर्द ही.

"क्या हुआ था वाहा?बताए क्यू नही?",रंभा ने अपना सर उसके कंधे पे रख दिया & उसकी बाई बाँह सहलाने लगा.

"बताता हू.",देवेन ने उसके सर को थपथपाया & कार चलते हुए उसे सारी बात बतानी शुरू की.

"गाड़ी रोकिए!",सारी बात सुनने के बाद वो बोली.

"क्या हुआ रंभा?"

"गाड़ी रोकिए!",वो रुवन्सि हो गयी थी.देवेन ने ब्रेक लगाया तो वो उसके गले लग गयी & रोने लगी.देवेन उसके जज़्बातो को समझ रहा था.1 कामीने के स्वार्थ ने तीन जिंदगियो को इतने दिनो तक खुशी से महरूम रखा था & उनमे से 1 तो अब इस दुनिया मे थी भी नही.

"इतना ख़तरा मोल लिया आपने..आप कितना चाहते थे मा को आज सही मयनो मे समझ आ रहा है मुझे..उसके धोखे की ग़लतफहमी से ही इतनी नफ़रत पैदा हुई थी आपके दिल में.",रंभा की रुलाई थम गयी थी & वो उसके गाल के निशान को सहला रही थी.

"हां,मगर आज सारी ग़लतफहमी दूर हो गयी बस 1 बात का गीला रह गया की सुमित्रा मेरी सच्चाई जाने बगैर चली गयी.",रंभा की रुलाई दोबारा छूट गयी.देर तक देवेन उसे बाहो मे भर समझाता रहा.उसने मूड के पिच्छली सीट पे बैठे विजयंत को देखा.उसने 1 बार आवाज़ होने पे आँखे खोली थी & फिर सो गया था.

"चलो,अब चुप हो जाओ.हमे यहा से जल्द से जल्द निकलना है.बालम सिंग ड्रग डीलर था & उसके मरने के बाद अब उसके लोग & पोलीस कुत्तो की तरह पूरे इलाक़े को सूंघ-2 के छनेन्गे.",उसने फिर कार स्टार्ट की तो सीधा क्लेवर्त जाके ही रोकी.रंभा होटेल वाय्लेट पहुँच समीर को विजयंत के मिलने के बारे मे बताना चाहती थी लेकिन देवेन ने उसे रोका.उसे कुच्छ खटक रहा था.

"रंभा,तुम मुझे ये बताओ कि समीर जब कंधार पे पोलीस को मिला था तो उसने क्या बताया था?",वो रात अभी भी उसके ज़हन मे ताज़ा थी बाद मे उसने & अख़बारो मे भी पढ़ा था & खबरों मे भी सुना था कि कैसे ब्रिज & सोनिया उस साज़िश मे शामिल थे & यही बात उसे खटक रही थी.रंभा ने उसे सारी बात बता दी.

"लेकिन आप ये क्यू पुच्छ रहे हैं?"

"अब मेरी समझ मे आया कि मुझे क्या खटक रहा था.",उसने खुशी से स्टियरिंग पे हाथ मारा,"..समीर झूठ क्यू बोल रहा है,रंभा?"

"क्या?समीर..झूठ..मेरी समझ मे नही आई आपकी बात.",रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी थी.

"उसने ये क्यू कहा कि झरने पे उसके हाथ पाँव बँधे होने के कारण वो अपने बाप की मदद नही कर सका जबकि हक़ीक़त ये थी कि उसके पाँव खुले थे."

"क्या?!"

"हां & उसे तो ये दिखना ही नही चाहिए था कि ब्रिज & सोनिया 1 साथ आए कि उसका बाप अकेला आया."

"क्यू?"

"क्यूकी उसकी आँखो पे पट्टी बँधी थी."

"क्या?!..",रंभा के चेहरे पे काई भाव आके चले गये..समीर झूठ बोल रहा था लेकिन क्यू?..विजयंत की मौत क्या 1 हादसा नही साज़िश थी?..समीर क्या नाराज़ था उसे रंभा से शादी करने पे ग्रूप से अलग करने से?..तो इसका मतलब था कि वो उस से बेइंतहा मोहब्बत करता था लेकिन उसके नमूने तो वो उस पार्टी मे देख ही चुकी थी जब वो कामया से प्यार के वादे कर रहा था..आख़िर सच क्या था?..समीर का मक़सद क्या था?

वो पलटी & पिच्छली सीट पे बेख़बर सोए विजयंत को देखा,"अब क्या करें?",उसने देवेन की ओर देखा.पहली बार उसे इस सारे मामले मे डर का एहसास हुआ था.

"पहले तो तुम समीर को इस बारे मे ज़रा भी भनक नही लगने दोगि..समीर क्या किसी को भी नही!ये राज़ सिर्फ़ मेरे तुम्हारे बीच रहेगा."

"ठीक है मगर इनका क्या करें?..इन्हे इलाज की ज़रूरत है वो भी बहुत उम्दा इलाज."

"हूँ..वो तो मैं करवा दूँगा."

"मगर कैसे?"

"वो मुझपे छ्चोड़ो."

"ओफ्फो..",तनाव की वजह से रंभा झल्ला गयी,"..मुझे भी तो बताइए कुच्छ..दिन मे भी मुझे अकेला भेज दिया & अब अभी भी नही बता रहे हैं!",खीजती रंभा देवेन को किसी बच्ची की तरह लगी..थी तो वो 1 बच्ची ही..वो तो हालात की दरकार थी की वो जल्दी बड़ी हो गयी.

"मैं इसका इलाज कारवंगा.इसे अपने साथ ले जाके..",उसने उसे अपनी ओर खींचा & उसके चेहरे को चूमने लगा.रंभा की खिज भी गायब होने लगी,"..गोआ मे."

"गोआ?"

"हां,गोआ."

देवेन विजयंत मेहरा को गोआ कैसे ले गया ये वही जानता था.कुच्छ रास्ता उसने ट्रेन से कुच्छ बस से & कुच्छ टॅक्सी से तय किया.किसी के माशूर इंडस्ट्रियलिस्ट विजयंत मेहरा को पहचान लेने का ख़तरा था & इसीलिए उसे इतनी सावधानी बरतनी पड़ी.रंभा ने विजयंत की बेतरटीबी से बढ़ी दाढ़ी & बालो को बस थोड़ा सा काटा-च्चंता & बालो की पोनीटेल बनाके उसे ढीली टी-शर्ट & जेनस पहना दी थी ताकि वो कोई हिपी जैसा लगे & वो खुद डेवाले वापस लौट गयी थी.

समीर उस वक़्त बॉमबे मे था & उसने उस बात का फयडा उठाके उसकी चीज़ो की तलाशी ली लेकिन उसे कुच्छ भी ऐसा नही मिला जोकि गुत्थी सुलझाने मे उसकी मदद करता & तब उसे अपनी सहेली सोनम की याद आई & उसने उसे मिलने के लिए 1 5-स्तर होटेल के कॉफी शॉप मे बुलाया.

"सोनम,आजकल ऑफीस मे सब कैसा चल रहा है?"

"ठीक-ठाक लेकिन तू क्यू पुच्छ रही है?"

"& आज से पहले कैसा चल रहा था?",रंभा ने उसके सवाल को नज़रअंदाज़ कर दिया.

"मैं तेरी बात समझ नही पा रही,रंभा.",सोनम के माथे पे बल पड़ गये.

"रंभा,जब समीर लापता हुआ था & दाद उसकी खोज मे गये थे तो सब ठीक चल रहा था यहा?",अब सोनम सोच मे पड़ गयी.उसका दिल धड़कने लगा कि वो उसे प्रणव के बारे मे बताए या नही.उसे ये भी डर था की कही रंभा को उसके ब्रिज से जुड़े होने की बात तो पता नही चल गयी.

"क्या हू सोनम?तू चुप क्यू है?",रंभा ने उसके हाथ के उपर अपना हाथ रखा तो सोनम ने नज़रे उपर की.रंभा की नज़रो मे उसे कोई शक़ नही दिख रहा था बल्कि चिंता दिख रही थी.

"रंभा..वो.."

"हां,बोल ना!"

"देख,मुझे ये बात शायद विजयंत सर को या तुम्हे या फिर समीर को बता देनी चाहिए थी पर मैं बहुत घबरा गयी थी."

"मगर क्यू,सोनम?",उस वक़्त सोनम ने फ़ैसला किया कि अब अपने दिल का बोझ हल्का करने के लिए अपनी सहेली को सब बता देना ही सही होगा.

"यहा नही.मेरे घर चल.",दोनो वाहा से निकले & उसके घर पहुँचे.

"अब तो बता."

"रंभा,मुझे नही पता कि तुम मेरे बारे मे क्या सोचोगी लेकिन आज मैं तुम्हे सब बता देना चाहती हू..",सोनम ने ब्रिज से मिलने से लेके प्रणव के शाह से कोई डील करने तक की सारी बातें बता दी.रंभा उसे खामोशी से देख रही थी..सोनम ब्रिज की जासूस थी..& उसे भनक भी नही लगी..उस से दोस्ती भी क्या इसीलिए गाँठि उसने?..",तू मुझे धोखेबाज़ समझ रही है ना?..लेकिन रंभा,मैने तेरी दोस्ती से कभी फयडा उठाने की कोशिश नही की.हां,शुरू मे मैने सोचा था कि समीर से तेरी नज़दीकी का फयडा उठाऊं & उस वक़्त तुझे खोदती भी रहती थी ताकि कुच्छ इन्फर्मेशन मेरे हाथ लगे लेकिन बाद मे मुझे खुद पे बड़ी शर्म आई..",सोनम की आँखे छलक आई थी..क्या ग़लती थी उसकी?..& उस से भी बड़ा सवाल क्या वो इस बात का फ़ैसला करने वाली कौन होती है?..वो भी तो उसी के जैसी थी..बस अपना फयडा देखने वाली.

वो अपनी सुबक्ती हुई सहेली के करीब गयी & उसकी पीठ पे हाथ रखा,"कुच्छ ग़लत नही किया तूने.तेरी जगह मैं भी होती तो शायद ऐसा ही करती.",सोनम के दिल का गुबार उसकी आँखो से अब फूट-2 के बहने लगा & वो रंभा के गले से लग गयी,"..बस हो गया,अब चुप हो जा..कहा ना तेरी कोई ग़लती नही..हम जैसी लड़कियो को ऐसे फ़ैसले तो लेने ही पड़ते है ना!बस चुप हो जा!",1 बच्चे की तरह उसने उसे समझाया.

सोनम को अब बहुत हल्का महसूस हो रहा था,"अब मेरी बात गौर से सुन,सोनम.डॅड की मौत की जो कहानी हमने सुनी है उसमे कुच्छ झूठ है."

"क्या?!मगर तुझे कैसे पता?"

"वो मैं तुझे बाद मे बताउन्गि क्यूकी अभी तक मुझे भी नही पता सही बात का.देख,उनकी मौत मे ब्रिज कोठारी का हाथ तो नही था."

"क्या?!"

"हां.",उसे देवेन ने बता दिया था कि सोनिया उस रात उसके ससुर के साथ होटेल से निकली थी & कंधार पहुँची थी ना कि अपने पति के साथ,"..& ये काम परिवार के ही किसी सदस्य का है."

"मतलब प्रणव?"

"तेरी बातो से मुझे उसपे भी शक़ होने लगा है."

"उसपे भी?"

"हां,पहले तो मुझे समीर पे शक़ था."

"वॉट?!"

"हां.अब हम दोनो को ये पता लगाना है कि आख़िर है कौन & उसे क्या फयडा हुआ डॅड की मौत से?"

"फयडा..हूँ..लेकिन समीर को क्या फयडा होगा..ग्रूप तो उसेही मिलना था अपने पिता के बाद."

"हां मगर मेरे लिए झगड़ा किया था उनसे उसने लेकिन..लेकिन फिर सब होने के बाद वो मुझसे ही बेरूख़् हो गया है."

"अच्छा?"

"हां,यार वो मेरे साथ सोता है,मेरे जिस्म को प्यार करता है लेकिन अब उसका प्यार मेरे दिल तक जैसे पहुँच ही नही पाता..मैं तो उसके साथ पहले जैसे ही बर्ताव करती हू मगर वो जैसे मुझे..मुझे.."

"भूल गया है?",सोनम ने सहेली की बात पूरी करनी चाही.

"नही.भूला नही जैसे अब मैं उसके लिए कोई मायने नही रखती."

"हूँ..तो तुझसे शादी भी कही उसकी किसी चाल का हिस्सा तो नही था?",रंभा ने चौंक के सहेली को देखा..इस तरह तो सोचा भी नही था उसने..मगर चल क्या हो सकती थी & क्यू?..फिर वही क्यू?..यानी मक़सद..समीर का मक़सद क्या था?..अगर शादी भी चाल थी तो उस चल का मक़सद था क्या?..रंभा का सर घूमने लगा था!

"तू थी तो है,रंभा?..ये ले पानी पी.",.सोनम ने उसे पनिका ग्लास थमाया & उसके साथ बैठ गयी.रंभा गतगत सारा पानी पी गयी.

"यार,हम कहा फँस गयी हैं!",उसने अपनी सहेली को देखा,"..बचपन से लेके जवानी ऐसे कमिनो मे गुज़ारे की दौलत & ऊँचा तबका हमारी ख्वाहिश ही नही जुनून भी हो गया लेकिन क्या ये सब उतनी ज़रूरी चीज़ें हैं जितना ये हमे लगती थी?",रंभा ने बहुत गहरी बात कह दी थी.सोनम ने आँखे झुका ली थी,"चल यार.अब ऐसे मुँह मत लटका.चल कही बाहर चल के बढ़िया खाना खाते हैं.इस मुसीबत से तो मैं निपट ही लूँगी.कोई मेरा इस्तेमाल करे & मैं उसे सबक ना सिखाऊँ,ऐसा तो होगा नही!",दोनो हंसते हुए उठे & बाहर जाने की तैय्यरी करने लगे.

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क्रमशः.......
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12-19-2017, 10:42 PM,
#62
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--61

गतान्क से आगे......

रंभा अपने बिस्तर पे लेटी थी,सोनम की बातें उसके ज़हन मे घूम रही थी..प्रणव की हरकतें उसे शक़ के दायरे मे खड़ा ही नही कर थी बल्कि चीख-2 के कह रही थी कि वही मुजरिम है मगर फिर समीर के बदले रवैयययए,उसके झूठे बयान का राज़ क्या था?..प्रणव की हर्कतो से & जिस तरह से उसने रंभा को अपनी बातो के जाल मे फँसाने की कोशिश की थी,उस से इतना तो समझ आ ही रहा था कि वो ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनना चाहता है.महादेव शाह को भी जिस तरह वो कंपनी मे पैसे लगाने के बहाने घुसना चाह रहा था,उस से भी यही लगता था कि शाह उसकी कठपुतली है & उसके ज़रिए वो बाद मे कंपनी का हॉस्टाइल टेकोवर करने की कोशिश कर सकता है.तभी रंभा को याद आया कि आज रात उसने उस से मिलने की बात कही थी.अब देखना था कि वो क्या कहता है & उस से गुत्थी सुलझाने मे कोई मदद मिलती है या नही.तभी उसका मोबाइल बजा.

"हेलो."

"कैसी हो?",लाइन पे देवेन था.रंभा के जिस्म मे उसकी आवाज़ सुनते ही खुशी की लहर दौड़ गयी.वो 1 सफेद कुरती & जीन्स पहन सोनम से मिलने गयी थी & जब लौटी थी तो जीन्स उतार केवल कुरती मे आराम करने लगी थी.

"ठीक नही हू."

"क्यू?क्या हुआ?",देवेन की आवाज़ मे चिंता सॉफ झलक रही थी.

"दूर जाके पुछ्ते हैं कि मैं ठीक हू की नही!",रंभा अपने आशिक़ से मचल गयी तो वो हंस दिया.

"ओह!अब क्या करू?..हालात ही कुच्छ ऐसे हैं.",उसकी आवाज़ रंभा के ज़हन मे उसकी तस्वीर को ताज़ा कर रही थी & उसके जिस्म को भी.रंभा ने अपनी भारी जाँघो को आपस मे रगड़ा & अपनी पॅंटी पे अपना बाया हाथ रख दिया.

"हां,वो तो है.पता है,मामला उतना सीधा नही लग रहा अब.शक़ के दायरे मे केवल समीर ही नही प्रणव भी है."

"क्या?!"

"जी..",रंभा उसे सब बताने लगी.प्रेमी की आवाज़ सुन के ही उसका हाथ पॅंटी मे घुस गया था..जब बातें इतनी संजीदा थी तब तो ये हाल था अगर बाते रोमानी होती तो क्या होता!

"रंभा,मुझे कुच्छ भी ठीक नही लग रहा.बहुत ख़तरा है इस सब मे.तुम छ्चोड़ो उस परिवार को.हम मेहरा के मिलने की बात बता देते हैं & तुम समीर को छ्चोड़ मेरे पास आ जाओ.उसके जितनी दौलत नही मेरे पास पर तुम्हे कोई तकलीफ़ ना होने देने का वादा करता हू मैं!"

"पागल मत बानिए!",रंभा जज़्बाती हो गयी मगर उसकी उंगली उसके दाने को सहलाने लगी थी,"..ऐसा कैसे सोचा आपने की दौलत की वजह से आपके साथ नही रहूंगी मैं?..& अब बताएँगे तो क्या जवाब होगा हमारे पास कि हम दोनो 1 साथ उस गाँव मे कर क्या रहे थे & सनार का वो मुखिया.पोलीस उस तक तो पहुँच ही जाएगी & जब वो ये बताएगा कि हम पति-पत्नी बनके वाहा रहे थे तो फिर क्या होगा?..नही.इस मामले की तह तक पहुँचने पे ही हमे चैन मिल सकता है..आहह..!"

"क्या हुआ?कराही तुम..",मगर देवेन तब तक उसकी बात समझ गया & उसका लंड भी पॅंट मे कुलनूलने लगा,"..खुद से खेल रही हो क्या?",सुने अपने लंड को सहलाया.

"हूँ..आप तो है नही यहा..ऊव्ववव..तो निगोडी उंगली से ही काम चलना पड़ रहा है..ऊहह..कब मिलेंगे हम?..कब दोबारा आपके जिस्म के नीचे पिसुन्गि मैं?..",रंभा अपनी बातो से आप ही मस्त हो रही थी,"..आपके सख़्त हाथ कब मेरी छातियो को मसलेंगे & आपके गर्म होंठ कब उन्हे चूसेंगे?..उफफफफफ्फ़..बोलिए ना!..कब मेरे लब आपके लबो से मिलेंगे & कब आपके मज़बूत जिस्म को मैं चूम पाऊँगी?....ओह..माआआआअ..!",दाने पे उंगली की रगड़ तेज़ हो गयी थी.

"मैं भी तो बेकरार हू..",गोआ की कॉटेज मे बैठे देवेन का लंड भी पॅंट की क़ैद से बाहर आ चुका था & उसकी भींची मुट्ठी मे कसा हिल रहा था,"..तुम्हारे कोमल,नशीले जिस्म के साथ के लिए.तुम मे समाके तुमसे मिलने के लिए.."

"..हाआंन्‍ननणणन्..अब इंतेज़ार नही होता..जल्दी आइए & अपनी इस दीवानी की चूत मे अपना लंड घुसैए..ओईईईईईई..!",जोश मे आहत हो रंभा ने खुद ही अपने दाने को मसल दिया था & दर्द & मस्ती मे चीख पड़ी थी.उसकी बेबाक बातो से देवेन ना केवल चौंका बल्कि जोश मे भी भर गया.उसका दिल चीख उठा रंभा के साथ के लिए & उसके हाथ के हिलने की रफ़्तार बहुत तेज़ हो गयी.

"उउम्म्म्ममममम..आप मेरे उपर हैं..हाआआन्न्‍णणन्..मेरे अंदर..ओईईईई..& ज़ोर से..हान्ंणणन्..ज़ोर से..धक्के लगा..इए...आहह..!",वो झाड़ गयी & उसी वक़्त देवेन के लंड से भी वीर्य की तेज़ धार निकली & सामने के फर्श पे गिर गयी.दोनो कान से फोन लगाए 1 दूसरे की तेज़ सांसो को सुन रहे थे & फोन को ही चूम के अपने-2 प्यार का इज़हार कर रहे थे.

"पागल कर दिया है आपने मुझे!",रंभा ने अपने मोबाइल को चूमा.

"तुमने क्या मुझे ठीक हाल मे छ्चोड़ा है!",दोनो हँसने लगे.देवेन को खुद पे भी हँसी आ रही थी..इस उम्र मे स्कूल के लड़के के सी हरकत!

"अच्छा,मरीज़ कैसा है अब?"

"वो..डॉक्टर को दिखा तो दिया है & वो टेस्ट पे टेस्ट कर रहा है मगर यार बड़ा अजीब सा लगता है उसके साथ रहने मे."

"क्यू?",रंभा ने पॅंटी से हाथ निकल लिया था & कुरती के उपर से अपनी चूचियो को दबा रही थी.

"तुम ही सोचो,1 आदमी जो सब देखता है मगर खुद कुच्छ बोलता नही.,बस 1 रोबोट की तरह तुम्हारी हर बता मान लेता है.जल्दी से यहा आओ ताकि कुच्छ पक्का सोचें इस बारे मे."

"हूँ,करती हू कोई जुगाड़.वैसे उस डॉक्टर का क्या कहना है?"

"3-4 दीनो मे टेस्ट्स की सारी रिपोर्ट्स आ जाएँगी तभी बोलेगा कुच्छ.अच्छा चलो,रखता हू..आ रहा है मरीज़ हाथ मे पानी का ग्लास लिए हुए.प्यास लगी होगी & बॉटल मे पानी होगा नही.ओके,बाइ."

"बाइ..आइ..आइ लव यू.",वो उस से चुड चुकी थी.अभी-2 उसके साथ फोन पे भी चुदाई की थी लेकिन ये 3 लफ्ज़ कहते हुए अभी भी उसे शर्म आ जाती थी.

" आइ लव यू टू.",देवेन हंसा & फोन रख दिया.

रंभा के दरवाज़ा खोलते ही प्रणव ने उसके बंगल मे कदम रखा & हाथ पीछे ले जाके दरवाज़ा बंद किया & फिर उसे बाहो मे भर चूमने लगा,”इस तरह कहा चली गयी थी?”,उसने रंभा को बाहो मे भरे हुए दरवाज़े की बगल की दीवार से लगा दिया,”मेरा कुच्छ तो ख़याल किया होता!”,रंभा अभी भी बस कुरती & पॅंटी मे थी.देवेन के साथ हुई गुफ्तगू ने उसकी आग को बुरी तरह भड़का दिया था,अब वो तो यहा आ नही सकता था तो उसे प्रणव के ज़रिए ही उस आग को ठंडा करना था.प्रणव उसे दीवार से दबाते हुए अपना लंड उसकी चूत पे मसल रहा था & उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था.

“तुम ही ने तो कहा था कि ग्रूप जाय्न करू..उउम्म्म्मम..!”,प्रणव उसकी कमर को लपेटे उसकी गर्देन चूम रहा था.उसके लंड की रगड़ से मस्त हो रंभा ने अपनी बाई टांग उठा के प्रणव की दाई टांग के उपर रखते हुए उसके पिच्छले हिस्से पे उपर-नीचे चलाया.

“अच्छा किया,बहुत अच्छा किया.”,प्रणव ने उसकी बाई जाँघ को दाए हाथ मे थमते हुए उसे सहलाया.उसके होंठ रंभा के चेहरे & गर्दन को भिगोये जा रहे थे.उसका बाया हाथ रंभा की कुरती मे घुस उसकी पीठ पे घूम रहा था.रंभा भी उसे चूमते हुए उसके सीने पे अपने बेसब्र हाथ चला रही थी.उसने उसे धकेल उसके होंठो को खुद से लगा किया & उसकी टी-शर्ट निकाल दी.उसके बालो भरे सीने मे अपनी उंगलिया फिराते हुए उसने फिर से उसे आगोश मे कसा & उसे चूमने लगी.उसके दिल मे देवेन के जिस्म की याद गूँज रही थी & उस से ना मिल पाने की बेबसी उसके हाथो की हर्कतो से झलक रही थी.

“तुम्हे मुझसे क्या ज़रूरी बात करनी थी,प्रणव?..ऊहह..!”,प्रणव का दाया हाथ उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड मे से घुसता हुआ उसकी गंद की बाई फाँक को दबाने लगा था.रंभा ने मस्ती मे आह भरते हुए सर उपर करते हुए आँखे बंद कर ली थी.

“रंभा,कल को अगर तुम्हेकोम्पनी के शेर्स मिल जाएँ & ग्रूप के अहम फ़ैसले के लिए वोटिंग हो तो तुम किसकी तरफ रहोगी?”,प्रणव ने उसकी कुरती उपर कर निकाली & केवल ब्रा & पॅंटी मे खड़ी रंभा को अपनी गोद मे उठा लिया.रंभा ने अपनी दोनो बाहें उसकी गर्देन मे डाली & उसे चूमने लगी.वो उसे उसके बेडरूम मे ले जा रहा था.

“बड़ा बेतुका सवाल किया है तुमने..ऊव्ववव..!”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे गिराया.रंभा थोड़ा उचकी & बिस्तर के किनारे खड़े अपने आशिक़ की ट्रॅक पॅंट को नीचे किया & उसके खड़े लंड को थमते हुए उसकी झांतो को चूम लिया.

“इसमे बेतुका क्या है?..आहह..!”,रंभा की ज़ुबान उसके सूपदे को सहला रही थी.

“पहले तो मैं वोटिंग मेंबर हू नही,ना बनने की सूरत दिखती है तो फिर मैं किसके लिए वोट करूँगी इसका जवाब कैसे दू.”,उफफफफ्फ़..देवेन..ये दूरी क्यू है!..उसने प्रणव के लंड को मुँह मे भा ज़ोर से चूसा & उसकी गंद को बहुत ज़ोर से दबोचा.रंभा की आशिक़ी से झलकती बेचैनी से प्रणव को ये गुमान हुआ कि पिच्छले दिनो रंभा ने उसे बहुत मिस किया & इसीलिए अभी वो इतनी जोशमे है.उसके हाथ रंभा के बालो से नीचे गये & उसके ब्रा के हुक्स खोल दिया.

“फ़र्ज़ करने को कह रहा हू.”,उसकी मखमली पीठ पे उसने अपने हाथ चलाए.रंभा उसके लंड को हिलाते हुए चूसे जा रही थी.

“फिर भी जवाब देना मुश्किल है..आहह..!”,प्रणव ने उसके मुँह से लंड खींचा & उसे बिस्तर पे धकेल दिया & अपनी पॅंट उतार बिस्तर पे चढ़ गया.रंभा की आँखो मे अब बस वासना का नशा था.प्रणव ने उसकी दाई टांग को उठा लिया & आगे झुकते हुए उसकी दाई जाँघ के अन्द्रुनि हिस्से पे चूमने लगा,”..पता तो चले कि आख़िर वोटिंग हो किस मुद्दे पे रही है..आननह..!”,प्रणव के तपते होंठ उसकी पॅंटी की ओर बढ़ रहे थे जोकि उसकी चूत से रिस्ते रस से गीली हो गयी थी.

“मान लो वोटिंग इस बात के लिए हो रही हो की कंपनी मे किसी बाहर के शख्स को पैसे लगाने की इजाज़त दी जाए तो?”,..महादेव शाह..यही नाम बताया था सोनम ने उसे!..आख़िर प्रणव उसे क्यू कंपनी मे घुसना चाहता है?..उसे क्या फयडा होने वाला है इस से?..शाह पैसा लगाएगा तो फिर वो शेर्स भी लेगा & फिर मालिक तो वो हुआ?

“आन्न्‍ननणणनह..!”,रंभा का दिल देवेन के पास था,दिमाग़ प्रणव के मंसूबो को समझने मे उलझा था मगर जिस्म तो वही प्रणव की हर्कतो का लुत्फ़ उठा रहा था & जैसे ही प्रणव ने जोश मे भर उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत को चूमा वो झाड़ गयी.वो आँखे बंद किए खुमारी मे तेज़ साँसे ले रही थी & वो उसकी ब्रा & पॅंटी उसके जिस्म से जुदा कर रहा था,”..उउन्न्ञणन्..ओह..हान्ंनननणणन्..चूसो ना!”,प्रणव उसके उपर लेट गया था & उसकी छातियो को चूमने के बाद उसकी गर्देन को चूमने लगा था जब रंभा ने उसके बाल पकड़ उसके मुँह को वापस अपने सीने से लगा अपनी ख्वाहिश ज़ाहिर की,”1 बात पुच्छू?..ऊन्नह..!”,प्रणव उसके निपल्स को जीभ से छेड़ते हुए उसकी छातियो को मुँह मे भर रहा था.उसका बाया हाथ तो रंभा के सीने पे ही था मगर दाया उसकी बाई जाँघ को उठाते हुए सहला रहा था.रंभा भी अपने चूत के उपर दबे उसके लंड की गर्मी से बेचैन हो बहुत धीरे-2 अपनी कमर हिला रही थी.

“पुछो ना.”,प्राणवा ने दाया हाथ भी जाँघ से खींच रंभा के सीने से लगाया & उसके दोनो उभारो को दबाते हुए उन्हे चूमने लगा.रंभा ने अपने दोनो घुटने मोड़ अपनी टाँगे फैला अपनी मस्ती का एलान किया.

“कोई दूसरा पैसे लगाएगा तो तुम्हे क्या फयडा होगा?..आईिययययययययईईईई..!”,लंड चूत मे घुस गया था.रंभा ने जिस्म कमान की तरह मोडते हुए आँखे बंद कर ली थी.समीर से मैल्कना हक अगर छीना भी तो वो इन्वेस्टर मालिक बन जाएगा..तुम तो वही के वही रह जाओगे..आन्न्‍नणणनह..हां..पूरा घुसाओ ना..रुक क्यू गये हो?!”,लंड 2 तिहाई अंदर घुसा था जब रंभा ने ये फ़ैसला लिया कि प्रणव से सीधा सवाल कर उसे परखा जाए.उसके सवाल ने प्रणव को चौंका दिया था.

ये लड़की तो बहुत होशियार है!..वो लंड घुसते हुए रुक गया था & उसके मस्ती भरे चेहरे,जिसपे लंड घुसने से हुए हल्के दर्द की लकीरें भी खींची थी,को गौर से देखने लगा.रंभा के बेचैन हाथ उसकी पीठ पे घूमते हुए उस से जैसे चुदाई आगे बढ़ाने की इल्टीजा कर रहे थे & जब उसने उसकी नही सुनी तो हाथो ने उसकी गंद को पकड़ उनमे अपने नाख़ून धंसा दिए.

“आहह..!”,नखुनो की चुभन से आहत हुए प्रणव की कमर अपनेआप हिलने लगी & चुदाई शुरू हो गयी.रंभा के होंठो पे मुस्कान खेलने लगी,”,प्रणव उसके उपर अपना पूरा भार डालते हुए लेट के धक्के लगा रहा था.रंभा को फिर से देवेन की याद आ गयी & उसने उसके जिस्म को बाहो मे भर ज़ोर से दबाया.उसकी टाँगे प्रणव की कमर पे चढ़ गयी & वो नीचे से कमर हिलाने लगी.

“देखो रंभा,तुम इस खानदान की बहू हो & मैं दामाद लेकिन हैसियत हमारी नौकरो वाली है.शिप्रा के नाम शेर्स हैं & उसकी मा के भी जबकि दोनो को ये तक पता नही कि पूरे मुल्क मे कंपनी के कितने दफ़्तर हैं..”,रंभा ने उसके कंधो को थामते हुए ज़ोर से आह भरी & उसका चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसे बहुत तकलीफ़ हो रही हो.प्रणव की भी आह निकल गयी क्यूकी रंभा की चूत उसके लंड पे कस-फैल रही थी.उसने खुद पे काबू रखा & अपनी झड़ती महबूबा के बालो को चूमने लगा,”..मुल्क की छ्चोड़ो,दोनो से ये पुछो की डेवाले मे कितने दफ़्तर हैं हमारे तो जवाब नही दे पाएँगी लेकिन जब भी कभी वोटिंग की ज़रूरत पड़ेगी तो उन्हे बुलाया जाएगा..”

“..& हम जो इस ग्रूप की फ़िक्र करते हैं..इसके बारे मे जानते हैं,वो किनारे बैठे तमाशा देखेंगे..”,रंभा तेज़ सांसो & खुमारी के बीच भी उसकी बात को बड़े ध्यान से सुन रही थी.उसने उसके कंधे पकड़े & घूमाते हुए उसे नीचे किया & उसके उपर आ गयी.उसके सीने पे हाथ जमा उसके बालो को नोचती वो कमर हिलाने लगी तो प्रणव ने भी उसकी गंद की फांको को बेरहमी से मसला,”..इसीलिए मैं चाहता हू कि किसी बाहरी आदमी को लाऊँ.”

“ऊन्नह..”,रंभा ने उसके हाथ गंद से हटा के अपनी चूचियो से लगा दिए तो प्रणव ने उन्हे मसलना शुरू कर दिया,”..अभी भी मेरी बात का जवाब नही दिया तुमने, मगर फयडा क्या होगा इस से?..रहेंगे तो हम नौकर के नौकर ही!..आहह..!”,रंभा ने जानबूझ के ‘हम’ लफ्ज़ का इस्तेमाल किया था ताकि प्रणव को ये धोखा हो कि वो पूरी तरह से उसकी तरफ है.उसने उसकी चूचियो को पकड़े हुए ही नीचे खींचा & उसे अपने सीने से चिपकते हुए हाथो को उसकी कमर पे ला जाके उसे कसा & अपने घुटने मोड़ नीचे से ज़ोरदार धक्के लगाने लगा.

“मेरी जान,वो इन्वेस्टर पैसे लगाके ग्रूप के शेर्स लेगा मगर उन शेर्स का असली मालिक मैं रहूँगा & फिर तुम्हारे साथ मिलके मैं इस ग्रूप पे राज करूँगा..ओह..!”,उसके धक्को से आहत रंभा ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नही कर पाई थी & फिर से झाड़ गयी थी.वो सर उठाए आँखे बंद किए कराह रही थी & उसकी चूत की हरकत से काबू खो चुका प्रणव का जिस्म झटके खा रहा था & उसका गाढ़ा वीर्य उसकी चूत मे छूट रहा था.रंभा के काँपते लबो ने उस वक़्त देवेन के होंठो की लज़्ज़ात को याद किया & उसके जिश्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.

“वो इन्वेस्टर अपने पैसे लगाके तुम्हे मालिक क्यू बनाएगा?”,लंबी-2 साँसे लेती रंभा प्रणव के चेहरे को सहला रही थी.

“उस बेचारे को तो पता भी नही की मेरा असली मक़सद क्या है..”,प्रणव हंसा.अभी तक वो इस खेल मे अकेला था मगर अब वक़्त आ गया था 1 साथी चुनने का & रंभा से बेहतर साथी कोई हो नही सकता था.वो समझदार थी,होशियार थी & सबसे बड़ी बात,वो भी उसी की तरह सोचती थी,”..काम हो जाए उसके बाद उस इन्वेस्टर को मैं बड़ी सफाई से तस्वीर के बाहर कर दूँगा..”,प्रणव की उंगली रंभा के चेहरे पे घूम रही थी,..& फिर उस तस्वीर मे होंगे बस मैं & तुम!”,उसकी उंगली रंभा के गुलाबी लाबो पे आके रुक गयी थी.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़का..तो कही प्रणव ही तो नही विजयंत मेहरा के इस हाल का ज़िम्मेदार?..मगर फिर समीर ने झूठा बयान क्यू दिया था?..अभी तो यही उचित था कि वो प्रणव को इस धोखे मे रखे कि वो उसी के साथ है..अब उसे गोआ जाना ही पड़ेगा.विजयंत का ठीक होना अब बहुत ज़रूरी हो गया था.वही बता सकता था कि उस रात कंधार पे हुआ क्या था..,”क्या सोचने लगी?”,वो प्रणव के सवाल से ख़यालो से बाहर आई.

“यही की प्रणव जी,आप तो बड़े च्छूपे रुस्तम हैं!”,उसने अपने होंठो पे ठहरी उसकी उंगली को काटा.दोनो हँसने लगे & प्रणव उसे बाहो मे भर चूमने लगा.

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क्रमशः.......
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12-19-2017, 10:42 PM,
#63
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--62

गतान्क से आगे......

"ओह!समीर..आहह..ऐसे ही प्यार करते रहो..!",अपनी डाई बाँह समीर की गर्दन मे डाले कामया उसकी गोद मे बैठी थी.उसने 1 स्कर्ट & ब्लाउस पहना था & समीर उसकी गर्दन से लेके क्लीवेज तक अपने होंठ चला रहा था.उसका बाया हाथ कामया की कमर को थामे था & दया उसकी जाँघो के बीच घुसा वाहा की कोमलता परख रहा था.

"ऊहह..शरीर कहिनके..!",कामया ने मुस्कुराते हुए आशिक़ के गाल पे प्यार भरी चपत लगाई जोकि उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा उसकी चूत को सहला रहा था & उसके क्लीवेज को दांतो से हौले-2 काट रहा था,"..उउन्न्ञनह..हाआंन्‍ननणणन्..!",कामया के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.समीर की उंगली उसकी चूत की दीवारो को रगड़ने लगी थी.

समीर अपनी नाक उसके क्लीवेज मे घुसा के रगड़ते हुए उसके सीने को चूम रहा था.कामया का दिल भी अब उसके होंठो की गर्मी को सीने पे महसूस करने को मचल रहा था.उसने खुद ही अपने ब्लाउस के बटन्स खोल दिए & अपनी छातियो को ब्रा के कप्स से आज़ाद कर दिया.समीर ने अपने मुँह मे उसकी छातियो को बारी-2 से भरना शुरू कर दिया तो कामया सर पीछे झटकते हुए बहुत तेज़ आहें लेने लगी.

"आहह..अब रहा नही जाता,समीर..ओह..जल्दी से मुझे अपनी दुल्हन बनाओ..आन्न्‍नननणणनह..!",समीर की उंगली & ज़ुबान ने उसे उस कगार से नीचे धकेल दिया था जहा से गिरने मे जो मज़ा मिलता है वो & कभी महसूस नही होता,"..फिर हर रात,सारी-2 रात तुम्हारी बाहो मे ऐसे ही गुज़ारुँगी..1 पल को भी तुम्हे खुद से दूर नही जाने दूँगी..",समीर ने उसकी पॅंटी खींची तो कामया ने खुद ही स्कर्ट & पॅंटी को निकाला & उसकी पॅंट ढीली कर उसके जिस्म के दोनो तरफ टाँगे कर उसकी गोद मे बैठते हुए उसके लंड को अपनी गीली चूत मे ले लिया,"..ऊहह..!",लंड अंदर घुसा तो उसने सर को पीछे फेंका & समीर के सर को पकड़ उसे अपनी चूचियो मे दबाते हुए कमर हिलाने लगी.

"बस मानपुर वाला टेंडर खुले & हमे मिले.उसके बाद मैं रंभा को किनारे करूँगा & तुम बनोगी म्र्स.मेहरा.",समीर उसकी कमर को जकड़े उसकी चूचियो को चूस्ते हुए अपनी कमर हिला रहा था.

"मिस्टर.मेहरा,लॅमबर्ट बॅंक के मिस्टर.सूरी आज शाम 6 बजे आपसे मिल नही पाएँगे.",अचानक दरवाज़ा खुला & किसी की गुस्से से भरी आवाज़ आई.दोनो प्रेमी चौंके & कामया ने गर्दन घुमाई.जिस कुर्सी पे दोनो चुदाई कर रहे थे वो बिल्कुल दरवाज़े के सामने थी & समीर को उनकी मोहब्बत मे खलल डालने वाले को देखने के लिए गर्दन नही घुमानी पड़ी थी.

"रंभा..त-तुम..!",समीर खड़ा होने लगा & उसी वक़्त कामया भी उसकी गोद से उतरने लगी मगर वो लड़खड़ा गयी & फर्श पे गिर गयी.समीर जैसे ही खड़ा हुआ उसकी पॅंट सरर से नीचे सरक के उसकी आएडियो के गिर्द फँस गयी.रंभा को दोनो की हालत पे बहुत हँसी आ रही थी लेकिन उसने अपने दिल के भाव को चेहरे पे नही आने दिया.उसे अंदाज़ा तो था कि दोनो का रिश्ता चुदाई तक पहुँच गया होगा & शुरू मे इस ख़याल से उसे काफ़ी गुस्सा भी आया था मगर अब उसकी ज़िंदगी मे देवेन आ चुका था.अब उसे समीर की कोई ज़रूरत नही थी मगर फिर भी इन दोनो को सज़ा तो देनी ही थी.रंभा कुच्छ पल अंगारे बरसाती आँखो से दोनो को देखती रही-दोनो जल्दी-2 अपने-2 कपड़े पहन रहे थे,& फिर दरवाज़ा ज़ोर से बंद करते हुए वाहा से निकल गयी,"..रंभा..रंभा सुनो तो..!"

गलियारे से बाहर जाती रंभा को समीर के घबराए चेहरे को याद कर बहुत हँसी आ रही थी मगर उस से भी ज़्यादा हँसी उसे आई थी उसे देख के चौंक उठे समीर की गोद से फर्श पे दोनो टाँगे फैलाए गिरती कामया को देख के.

समीर ने रंभा से कहा था कि वो आज देर रात बॉमबे से लौटेगा.यही बात सोनम को भी पता थी मगर दोपहर 12 बजे 1 फोन आया जिसे सोनम ने रिसीव किया,"ट्रस्ट ग्रूप,समीर मेहरा'स ऑफीस.हाउ मे आइ हेल्प यू?"

"हेलो,मैं लॅमबर्ट बॅंक से राजिंदर सूरी बोल रहा हू.आज शाम 6 बजे मुझे मिस्टर.मेहरा से ग्रांड वाय्लेट मे मिलना था मगर कुच्छ ऐसी एमर्जेन्सी आ गयी है कि मैं आज उनसे मिल नही पाऊँगा.मैने उनका मोबाइल ट्राइ किया था मगर वो मिल नही रहा तो प्लीज़ उन्हे ये मेसेज दे दीजिएगा & ये भी कह दीजिएगा कि इस बात के लिए मैं माफी चाहता हू.ओके..थॅंक्स!"

"जी..लेकिन..वो..",तब तक सूरी ने फोन रख दिया था,"..तो आज रात को वापस आ रहे थे.",सोनम सोच मे पड़ गयी थी & उसने ये बात फ़ौरन अपनी सहेली को बता दी जिसने उसे ये बात समीर को बताने से मना किया.जिस वक़्त सोनम का फोन आया था उस वक़्त रंभा प्रणव के साथ 1 शॉपिंग माल के बाहर कार मे बैठी थी.उस माल मे विदेशी डिज़ाइनर्स के स्टोर्स थे & वाहा उसे आज उस शख्स से मिलना था जिसका उसने अभी तक बस नाम ही सुना था-महादेव शाह.

"क्या बात है?किसका फोन था?",उसे परेशान देख प्रणव ने पुछा.

"मेरी 1 सहेली थी.उस से भी मिलना है.वही सोच रही थी."

"अच्छा,थोड़ी देर के लिए उसे भूल जाओ & ध्यान से सुनो.शाह ने मुझे कहा था कि वो तुमसे ऐसे मिलना चाहता है कि लगे कि तुम दोनो कही टकरा गये फिर वो तुमसे मेल-जोल बढ़ाएगा & मेरी तारीफ करेगा मगर कुच्छ इस तरह की तुम्हे ये शक़ ना हो कि हम मिले हैं."

"अच्छा.यानी अभी तुम दोनो हो तो मिले हुए मगर दुनिया के लिए तुमने भी डॅड की तरह उसका ऑफर ठुकरा दिया है.अब वो मुझसे तुम्हारे बारे मे ऐसे बात करेगा कि मुझे लगे की तुम दोनो दोस्त तो बिल्कुल नही हो मगर वो फिर भी तुम्हारी काबिलियत का लोहा मानता है.है ना?"

"हां.वो यही सोचता रहेगा कि वो मेरे साथ मिलके तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है जबकि हाक़ेक़त ये होगी कि हम दोनो उस बुड्ढे का इस्तेमाल कर रहे होंगे.",प्रणव उसकी होशियारी पे फिर हैरान हो गया था & 1 पल को उसे ये लगा कि कही उसने इस लड़की को अपने साथ मिलाके कोई ग़लती तो नही की है?..कही ऐसा ना हो कि आगे जाके वो उसे ही कोई धोखा ना दे दे..नही..नही..ऐसा नही हो सकता..इसे भी सहारे की ज़रूरत है & जब समीर जाएगा तो मेरे सिवा और मिलेगा कौन इसे?..,"..चलो,जाओ माल मे & उस से मुलाकात कर लो."

"ओके,डार्लिंग."रंभा ने उसे चूमा & फिर कार से उतार के माल मे चली गयी.कुच्छ पलो बाद 1 मशहूर इटॅलियन डिज़ाइनर का डिज़ाइन किया 1 ईव्निंग गाउन वो देख रही थी & 1 असिस्टेंट उसे उस ड्रेस के बारे मे बता रही थी जब सफेद बालो वाला 1 बूढ़ा मगर चुस्त शख्स उसके सामने आ खड़ा हुआ.असिस्टेंट उसे देख बड़ी शालीनता से पीछे हट गयी.

"एक्सक्यूस मे,आप म्र्स.मेहरा है ना?..म्र्स.रंभा मेहरा?"

"जी."

"इस तरह से आपको परेशान करने के लिए माफी चाहता हू मगर आपको देखा तो आपसे मिलने से खुद को रोक नही पाया.",रंभा ने उसे निगाहो से तोला.बुद्धा देखने मे अच्छा था & क्रीम कलर की कमीज़,भूरी टाइ & काले सूट के साथ आँखो पे चढ़ा रिमलेस चश्मा उसकी शख्सियत को रोबदार बना रहे थे.उसे देखने से ऐसा लगता था जैसे कि वो किसी ऊँचे खानदान से ताल्लुक रखता है.

"हेलो.",रंभा ने हाथ आगे बढ़ाया.

"हाई,मुझे महादेव शाह कहते हैं.",उसने रंभा का हाथ थाम उसे बड़ी शालीनता से चूमा..बुड्ढ़ा लड़कियो को इंप्रेस करना भी जानता था,"..जब आपके पति लापता हुए थे तब मैने आपको खबरों मे देखा था & आपकी हिम्मत की दाद दिए बिना नही रहा था."

"थॅंक यू."

"आपके ससुर मिस्टर.मेहरा के लिए भी मेरे दिल मे बस इज़्ज़त & तारीफ ही थी.मैं उनके साथ काम भी करना चाहता था लेकिन उन्हे मंज़ूर नही था.",रंभा ने उसे सवालीयो निगाहो से देखा.

"मैं 1 इन्वेस्टर हू.कंपनीज़ मे पैसा लगाता हू & बदले मे उनके चंद शेर्स मुझे मिलते हैं & यही मेरी कमाई का ज़रिया है.ट्रस्ट मे भी इनवेस्ट करने की मेरी ख्वाहिश थी मगर मिस्टर.मेहरा नही माने."

"ओह.ये कारोबारी बातें तो मैं नही जानती.",रंभा इस वक़्त 1 अमीर खानदान की बहू थी जिसकी ज़िंदगी बस कपड़े,गहनो & पार्टीस के गिर्द ही घूमती थी.

"& मैं आपसे कोई शिकवा भी नही कर रहा!",वो हंसा तो रंभा भी थोड़ा शरमाते हुए हंस दी..अगर उस बुड्ढे को लड़कियो से चिकनी-चुपड़ी बातें करना आता था तो वो भी मर्दों को अपनी उंगलियो पे नचाने मे माहिर थी!

"आपके पति से मिलने की ख़ुशनसीबी तो अभी तक हासिल नही हुई है मुझे मगर मिस्टर.प्रणव से मैं काई मर्तबा मिला हू.उन्होने भी मेरी पेशकश ठुकरा ही दी थी लेकिन वो आदमी बहुत काबिल हैं.जब तक वो ग्रूप मे हैं,आपकी कंपनी महफूज़ है."

"जी.वो बहुत भले इंसान है & हमसब उन्हे बहुत पसंद करते हैं.कारोबार मे आप हमारे साथ नही जुड़ पाए पर ज़ाति तौर पे तो जुड़ सकते हैं..",ये बात रंभा नेकुच्छ इस तरह से कही कि शाह को लगा कि कही वो उस से दोहरे मतलब वाली बात तो नही कर रही लेकिन रंभा के मासूमियत से मुस्कुराते चेहरे को देख उसे अपनी सोच ग़लत लगी मगर वो सोच मे तो पड़ ही गया था.यही तो रंभा चाहती थी & जान बुझ के उसने वो बात कही थी,"..कभी आइए हमारे घर.आप आदमी दिलचस्प मालूम होते हैं.",शाह फिर से उसकी बात मे मतलब ढूँढने लगा मगर 1 बार फिर रंभा के मासूम चेहरे ने उसे उलझा दिया.

"ज़रूर आऊंगा लेकिन उसके पहले आपको कभी हमारी मेहमाननवाज़ी कबूलनी पड़ेगी."

"ज़रूर.ऐसा करना तो मेरे लिए बड़ी खुशी की बात होगी."

"मेरा यकी कीजिए रंभा जी,आपसे ज़्यादा खुशी मुझे होगी.अच्छा,अब बहुत वक़्त लिया आपका.अब & परेशान नही करूँगा.",वो 1 किनारे हो गया तो रंभा ने अपना हाथ फिर से आगे बढ़ाया.

"नाइस मीटिंग यू,मिस्टर.शाह."

"सेम हियर.",शाह ने उसके हाथ को दोबारा चूमा & फिर स्टोर से बाहर चला गया.

रंभा कोई 15 मिनिट बाद कुच्छ समान खरीद माल से निकली & प्रणव को फोन किया,"मिल लिया उस से.सब ठीक रहा."

"वेरी गुड,डार्लिंग.",रंभा का अगला पड़ाव था ट्रस्ट फिल्म्स का ऑफीस.वो फिल्म जिसके बारे मे रंभा ने गौर किया था कि अगर उसमे 1 साइड हेरोयिन का रोल थोड़ा बढ़ा दिया जाए तो वो और निखर जाएगी,उसकी शूटिंग 70% हो गयी थी & उसी फुटेज को आज डाइरेक्टर,एडिटर,कॅमरमन,राइटर & बाकी लोग देखने वाले थे.फिल्म का हीरो अभी शहर से बाहर था & कामया विदेश से अभी लौटी नही थी.

सोनम के फोन से रंभा का माथा ठनका था & उसने ये फ़ैसला किया कि पहले तो ये पता करेगी कि कामया शहर मे है या नही.अगर वो शहर मे होती तो बहुत मुमकिन था कि उस से मिलने के लिए समीर ने झूठ बोला हो.रंभा कार चलाते हुए सोच रही थी कि कौन हो सकता है जो उसे कामया के शहर मे होने की सही खबर दे सकता था.उसने 1-2 फोन घुमाए तो पता चला कि कामया के शहर मे 4 मकान हैं.वो जिस मकान मे रहती है उसमे उसकी मा भी साथ ही रहती है.2 उसने किराए पे दे रखे हैं.अब बचा 1 & 1 फिल्मी रिपोर्टर से उसे पता चला कि यही वो कबीर के साथ रंगरलियाँ मनाती है.

रंभा ने फिल्म कंपनी के 1 कर्मचारी को कामया से कोई कॉस्ट्यूम्स की फिटिंग सेशन्स का अपायंटमेंट फिक्स करने के बहाने उसी फ्लॅट पे भेजा.लेकिन काम वैसे तो कामया के सेक्रेटरी का था मगर उस से कहने से ये पता नही चलता कि कामया शहर मे थी या नही.लड़का तेज़-तर्रार था & 1 घंटे मे ही इस खबर के साथ वापस लौटा की कामया फ्लॅट पे तो नही थी मगर शहर मे थी.वो सवेरे ही लौटी थी & सीधा अपने फ्लॅट पे गयी थी लेकिन उस लड़के के वाहा पहुचने से 30 मिनिट पहले ही वो वाहा से अकेली कही चली गयी थी.

रंभा अब समझ गयी थी कि कामया कहा मिलेगी.वो प्रीव्यू थियेटर पहुँची & बाकी लोगो के साथ फिल्म के रशस देखने लगी,"अब मुझे फिल्म मेकिंग की बारीकियो के बारे मे तो पता नही..",सारी फुटेज देखने के बाद वो डाइरेक्टर से मुखातिब हुई,"..मगर जो देखा वो कमाल का था!"

"थॅंक यू,मा'म.",डाइरेक्टर तारीफ सुन खुश हो गया था.प्रोड्यूसर्स अमूमन ऐसा कम ही करते थे.

"वैसे 1 बात कहने की हिमाकत करू?"

"अरे!कैसी बात कर रही हैं,मॅ'म!आप प्रोड्यूसर हैं.आप हुक कीजिए."

"जी नही..",.रंभा हँसी,"..हुक्म नही करूँगी वो आपका काम है.1 बात पुच्छनी थी मुझे."

"हां-2."

"वो जो साइड हेरोयिन है उसका किरदार बड़ा पवरफुल है.मान लीजिए उसे थोड़ा बढ़ाते हैं तो फिल्म और अच्छी नही हो जाएगी?",डाइरेक्टर उसके सवाल पे कुच्छ बोला नही & साथ बैठे राइटर को देखा & फिर एडिटर & कॅमरमन को.

"देखिए,मॅ'म.असल कहानी वैसी ही है जैसी आप कह रही हैं लेकिन कामया फिर फिल्म मे काम नही करती & उसे खोने का रिस्क हम ले नही सकते थे."

"ओके.तो उस लड़की के बस 3-4 सीन्स बढ़ाते हैं.कहानी तो तब भी मज़बूत हो जाएगी.कामया का रोल काटने की भी ज़रूरत नही है."

"तो फिर फिल्म की लंबाई बढ़ जाएगी,मॅ'म."

"कोई बात नही.अभी फिल्म 130 मिनिट की है.हमारे एडिटर साहब अगर उसे किसी तरह बस 140 मिनिट या उस से कम की कर दें तो ज़्यादा फ़र्क नही पड़ेगा.",डाइरेक्टर ने एडिटर को देखा तो उसने हां मे सर हिलाया.

"पर मॅ'म 1 दूसरी उलझन खड़ी हो जाएगी फिर."

"वो क्या?"

"कामया को शायद ये पसन्द ना आए कि उसके स्टारिंग रोल वाली फिल्म मे सपोर्टिंग आक्ट्रेस का भी दमदार रोल है."

"डाइरेक्टर साहब..",रंभा हँसी,"..कामया भूल गयी होगी कि उसकी शुरुआत भी इसी तरह हुई होगी छ्होटे-मोटे रोल्स से मगर आप तो नही भूले होंगे.सबसे अहम चीज़ है फिल्म,ना कामया ना वो सपोर्टिंग हेरोयिन.लोग अपने पैसे खर्च कर फिल्म केवल कामया को देखने के लिए नही जाते,वो जाते हैं 1 अच्छी फिल्म देखने अब चाहे वो कामया के फॅन्स हो चाहे ना हों.अगर केवल किसी सितारे की वजह से ही फिल्म देखी जाती तो बच्चन साहब की कोई फिल्म तो कभी पिटी ही नही होती क्यूकी उनसे ज़्यादा फॅन्स तो शायद ही किसी सितारे के होंगे!"

"ओके.मॅ'म.",उसकी आख़िरी बात पे सभी हंस पड़े थे,"..जैसा आप कहें."

"ओके,डाइरेक्टर साहब.कामया को मैं संभाल लूँगी.आप उसकी फ़िक्र मत कीजिएगा.",इसके बाद रंभा सीधा वाहा पहुँची थी जहा कि उसे पता था कि कामया & समीर उसे ज़रूर मिलेंगे-कामया के दफ़्तर.कामया शहर मे थी नही तो दफ़्तर बंद होगा & वाहा कोई स्टाफ भी नही आएगा.अब ऐसी जगह से बेहतर जगह कौन होगी छुप के मिलने के लिए.2 घंटे बाद रंभा की सोच बिल्कुल सही साबित हुई थी.

वो कामया के दफ़्तर से निकली & अपनी कार मे बैठ अपने बंगल की ओर चल दी.पिच्छले 3 दिनो से वो इस बात को लेके परेशान थी कि देवेन से मिलने & विजयंत मेहरा की हालत के बारे मे जानने के लिए गोआ जाए तो क्या बहाना बना के जाए.आज उसके पति ने खुद ही उसे बहाना पेश कर दिया था..थॅंक यू,समीर!..वो हँसी & कार की रफ़्तार बढ़ा दी.

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क्रमशः.......
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12-19-2017, 10:42 PM,
#64
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--63

गतान्क से आगे......

“रंभा..प्लीज़..समझने की कोशिश करो..वो बहुत परेशान थी & हम दोनो जज़्बातों मे बह गये थे..ग़लती हो गयी मुझसे..आइ’म सॉरी!”,रंभा अपनी अलमारी से कपड़े निकाल के सूटकेस मे भर रही थी.

“समीर,मैने अपनी आँखो से देखा है सब.प्लीज़,इस तरह से झूठ बोल के खुद को खुद की ही नज़रो मे मत गिराव.”,रंभा ने सूटकेस बंद किया.

“ऐसे इस वक़्त कहा जाओगी तुम?..अभी गुस्से मे हो..मैं समझ सकता हू तुम्हारा गुस्सा,रंभा..”,समीर उसके सामने उसके कंधो पे हाथ रख के खड़ा हो गया था,”..मगर बातों से सब हल हो सकता है ना?”

“हां,मैं गुस्से मे हू & बातो से सब हल भी हो सकता है मगर अभी मैं कोई भी बात करने की हालत मे नही हू.”,उसने सूटकेस बेड से उतार के फर्श पे रखा & अपना हॅंडबॅग कंधे पे टांग 1 दूसरा बॅग सूटकेस के उपर रखा,”..इसीलिए मैं जा रही हू,समीर.तुम्हारे साथ इस घर मे..इस कमरे मे 1 पल भी और गुज़ारा तो मैं पागल हो जाऊंगी.”,उसने उसके हाथ अपने कंधो से हटाए & सूटकेस के पुल्लिंग हॅंडल को बाहर निकल उसे पहियो के सहारे खींचा,”..मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना..”,वो कमरे के दरवाज़े पे पहुँच के रुकी & मूडी,”..घबराओ मत मैं कुच्छ दिनो मे लौट आऊँगी.तुम्हारा ये राज़ राज़ ही रहेगा & जब तक तुम मानपुर का टेंडर जीत के उसपे काम नही शुरू कर देते,तब तक मैं म्र्स.समीर मेहरा ही रहूंगी.पर प्लीज़,समीर आज से तुम्हारे & मेरे रास्ते अलग हैं इसीलिए मेरी ज़िंदगी मे दखल देने की कोशिश मत करना.”,वो कमरे से बाहर निकल गयी.उसका दिल खुशी से झूम रहा था.इतनी जल्दी उसे फिर से देवेन के पास जाने का मौका मिलेगा ये उसने सपने मे भी नही सोचा था & अब समीर की बेवकूफी ने खुद ही उसकी आगे की मुश्किल भी आसान कर दी थी.अब तलाक़ तो होना ही था & वो भी उसकी शर्तो पर.

“हाई!प्रणव..”,एरपोर्ट पहुँच उसने गोआ की अगली फ्लाइट का टिकेट लिया,”..मैं कुच्छ दिनो के लिए बाहर जा रही हू.”

“क्या?क्यू..& कहा,रंभा?!”

“वो सब मैं बता नही सकती.बस इतना समझो की जाना पड़ रहा है.”

“कोई मुश्किल है रंभा?”

“नही.मैं तुम्हे फोन करती रहूंगी & जब भी तुम्हे अपने काम मे मेरी ज़रूरत पड़ेगी,मैं आ जाऊंगी.ओके,बाइ!”,प्रणव अपने मोबाइल को थामे बैठा सोच रहा था कि अचानक आख़िर ऐसा हुआ क्या?अगला फोन रंभा ने सोनम को किया.उसने उसे ना तो पहले देवेन & विजयंत मेहरा के बारे मे बताया था ना अब बताया.बस इतना कहा क़ि समीर की बेवफ़ाई से दुखी हो वो जा रही है.उसने उस से भी फोन करते रहने की बात कही.

डबोलिं एरपोर्ट पे शाम 8 बजे उतार वो टॅक्सी से सीधा हॉलिडे इन्न गोआ गयी & 2 लोगो के लिए 1 कमरा बुक किया & फिर देवेन को फोन किया.देवेन ने उस से कहा कि वो 1 घंटे मे उसके पास पहुँच रहा था.वो 1 घंटा रंभा ने होटेल के कमरे मे चहलकदमी करते काटा.अब उस से 1 पल भी इंतेज़ार नही हो रहा था.अपने महबूब के शहर पहुँच गयी थी वो & अब बस उसकी बाहो मे समा जाना चाहती थी वो.रंभा ने हल्के नीले रंग की कसी जीन्स & काले रंग की गोल गले की कसी टी-शर्ट पहनी थी.इस लिबास मे उसके जिस्म के कटाव पूरी तरह से उभर रहे थे.उपर से महबूब से जल्द ही मिलने की उमंग का खुशनुमा रंग उसके चेहरे पे झलक रहा था & उसका हुस्न & भी दिलकश लग रहा था.

दरवाज़े की घंटी बजी तो वो भागती हुई गयी & दरवाज़ा खोला.सामने देवेन खड़ा था.उसकी आँखो मे हैरत थी & खुशी भी & दिलरुबा की चाहत भी.दोनो 1 पल 1 दूसरे को देखते रहे फिर देवेन आगे बढ़ा & कमरे मे दाखिल हुआ.उसने दरवाज़े के अंदर के नॉब से लटका ‘डू नोट डिस्टर्ब’ का कार्ड निकाला & बाहर के नॉब पे लटका दिया.इस सबके दौरान दोनो प्रेमियो की आँखे आपस मे उलझी रही-ना देवेन ने पालक झपकाई ना ही रंभा ने.रंभा का दिल अब बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था & उसकी कसी टी-शर्ट मे क़ैद उसके उभर उपर-नीचे हो उसके आशिक़ को उसका हाल बयान कर रहे थे.देवेन ने बिना घूमे हाथ पीछे ले जाके दरवाज़ा बंद किया & उसके बाद जैसे कमरे मे तूफान आ गया.

रंभा भागती हुई आगे बढ़ी & उस से लिपट गयी.देवेन ने भी उसे बाहों मे भर लिया & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे,पागलो की तरह,दीवानो की तरह.कहने मुश्किल था कि किसकी ज़ुबान किसके मुँह मे थी & कौन किसके चेहरे पे अपने बेसबरे लब फिरा रहा था.रंभा देवेन के गले मे बाहें डाले उसके बॉल खिचती उसे चूम रही थी & वो उसकी कमर को बहुत ज़ोर से जकड़े हुए उसकी ज़ुबान का लुत्फ़ उठा रहा था.देवेन ने उसे कमर से उठाया & कमरे मे रखे 1 शेल्फ पे बिठा दिया.खुद को संभालती कनपटी रंभा ने हाथ शेल्फ पे रखे & उसपे रखा गुल्दान उसके हाथो से टकरा के नीचे गिर गया.उस शेल्फ पे फोन & और भी कुच्छ सजावटी समान रखे थे.देवेन ने उन सारे सामानो को अपने हाथो से धकेल के नीचे गिराया & अपनी महबूबा की खुली टाँगो के बीच खड़ा हो उसकी चूत पे लंड दबाते हुए उसे चूमने लगा.रंभा के हाथ देवेन की पीठ पे घूम रहे थे.

देवेन उसकी ज़ुबान चूस्ते हुए उसकी बाई छाती को शर्ट के उपर से ही दबा रहा था & वो अब ज़ोर-2 से आहें भर रही थी.रंभा ने उसके कोट को उसके कंधो से नीचे सरकया & उसकी कमीज़ के उपर से ही उसके चौड़े सीने & कंधो पे हाथ फिराया.देवेन ने उसकी टी-शर्ट उपर की & उसके ब्रा को उपर कर झुक के उसकी नुमाया छातियो को चूसने लगा.

“आन्न्न्नह..देवेन..!”,रंभा की आँखे बिल्कुल फैल गयी थी & वो सर उपर किए अपने प्रेमी के बालो को खींचती झटके खा रही थी.देवेन उसकी छातियो को जैसे मुँह मे पूरा भर के चूसना चाहता था.उन भारी-भरकम मगर पुष्ट गोलैईयों को वो अपने मुँह मे बार-2 भरने की कोशिश करते हुए चूस रहा था.नीचे रंभा की चूत पे उसका सख़्त लंड वैसे ही लगातार रगड़ खा रहा था.शाम से ही रंभा उस से मिलने की हसरत की उमंग से भरी थी & अब उसके मिल जाने पे उसके जिस्म की नज़दीकी & उसकी दीवानगी भरी हर्कतो ने उसके सब्र का बाँध तोड़ दिया था & वो झाड़ रही थी.

देवेन ने उसकी टी-शर्ट को सर के उपर से खींच के निकाला तो उसकी चूचियो ने छल्छलाते हुए ब्रा की क़ैद से छूटने की ख्वाहिश जताई.अपनी दिलरुबा के मस्ताने उभारो की इल्टीजा ना मानने की हिमाकत भला देवेन कैसे कर सकता था.उसने उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को कंधो के उपर से पकड़ा & इतनी ज़ोर से खींचा की उसके हुक्स अलग हो गये & खुली ब्रा उसके हाथो मे आ गयी.उसने ब्रा को उच्छाल दिया & झुक के रंभा की दिलकश चूचियो से अपने प्यासे होंठ सटा दिए.वो उन्हे ऐसे चूस रहा था मानो उनसे दूध निकाल के अपनी प्यास बुझाना चाहता हो.रंभा के हुस्न को देख मर्द अपना आपा खो देते थे लेकिन फिर भी ये शिद्दत,ये दीवानापन उसने कभी किसी & के प्यार करने मे नही महसूस किया था.खुद देवेन भी हराड मे उस रात ऐसा दीवाना कहा था.

रंभा का भी हाल देवेन से अलग थोड़े ही था.वो भी बावली हो गयी थी.उसने महबूब के बाल पकड़ उसके सर को अपने सीने से अलग किया & उपर कर 1 लंबी किस दी.उसके हाथ देवेन की शर्ट को उसकी पॅंट से बाहर खींच रहे थे.अब उसे भी सब्र नही था & उसने उसकी कमीज़ को पकड़ के इस तरह खींचा की सारे बटन टूट गये.खुली कमीज़ को उसने देवेन के कंधो से उतार फेंका & आगे झुक उसके सीने के बालो मे मुँह घुसा के रगड़ने लगी.उसके गले से अजीब सी आवाज़ें निकाल रही थी जो उसके मस्ती मे सब भूल जाने का सबूत थी.उसने देवेन के निपल्स को चूसा & फिर काट लिया.देवेन ने सर उपर किया & कराहा मगर रंभा के सर को सीने से अलग करने के बजाय उसे और सटा दिया.रंभा के हाथ उसके बदन के बगल मे घूमते हुए उसके कंधो & मज़बूत बाजुओ पे फिर रहे थे.रंभा गर्देन झुका के उसके सीने से चूमते हुए उसके पेट पे जहा तक जा सकती थी,जाके चूम रही थी.वो & झुकने मे असमर्थ थी & उसके होंठ देवेन के लंड तक नही पहुँच रहे थे तो उसने अपने हाथो मे ही उसके लंड & अंदो को दबोच लिया & ज़ोर-2 से दबाने लगी.

“ओह..रंभा..!”,देवेन मस्ती मे आहत हो गया & उसके बाल पकड़ के उपर खींचा & 1 बार फिर उसके गुलाबी लबो को अपने लबो की क़ैद मे ले लिया.वो रंभा की कमर के गुदाज़ हिस्से को दबाते हुए चूम रहा था & वो उसके लंड को.देवेन के हाथ दिलरुबा की रेशमी पीठ पे सरक रहे थे.हाथ उसकी कमर से उपर गर्दन तक गये & फिर वापस लौटे & इस बार & नीचे गये & उसकी गंद से सॅट गये.रंभा चिहुनकि & उसने देवेन की पॅंट खोल अपना हाथ अंदर डाल दिया.देवेन फिर से कराहा & रंभा शेल्फ से उतर गयी & देवेन की कमर पकड़ उसे शेल्फ की बगल की दीवार से लगा दिया.

उसने देवेन की पॅंट को फ़ौरन नीचे किया & उसके अंडरवेर को भी.सामने प्रेकुं से भीगा उसका 9.5 इंच लंबा लंड अपने पूरे शबाब मे उसकी निगाहो के सामने था.रंभा अपने पंजो पे बैठ गयी & देवेन की गंद के बगल मे हाथ लगते हुए उसे आगे खींचा & खुद आगे झुकाते हुए उसके लंड के सूपदे को मुँह मे भर लिया.देवेन ने दीवार पे हाथ लगाए & सर उठाके आह भरी.रंभा उसकी झांतो मे नाक घुसा के वही हरकत दोहराई जो कुच्छ देर पहले उसने उसके सीने पे की थी.उसने देवेन के लंड को उठा उसके पेट से सटा दिया & अपनी जीभ को लंड की जड़ से लेके उसके सूपदे की नोक तक चलाया.देवेन का जिस्म सिहर उठा.रंभा की जीभ सूपदे से वापस जड़ तक आई & उसके भी नीचे देवेन के आंडो के बीच पहुँच के रुकी.उसने अपनी नाक लंड की जड़ मे घुसा के दबाते हुए उसके आंडो को मुँह मे भर के चूसना शुरू कर दिया.देवेन उसके बालो को पकड़ सर को अपनी गोद मे दबा रहा था.रंभा ने आंडो को मुँह से निकाला & लंड को मुँह मे भर लिया.अंगूठे & पहली उंगली का दायरा बना लंड को उसमे फँसा उसे हिलाते हुए उसने उसे चूसना शुरू कर दिया.देवेन अब कमर हिलाते हुए उसके मुँह को चोद रहा था.रंभा उसके अंग को मुँह मे भरे बस उस से खेलती चली जा रही थी.देवेन को लगा कि अगर वो इसी तरह जुटी रही तो वो फ़ौरन झाड़ जाएगा.उसने झुक के रंभा के कंधे पकड़ उसे उपर उठाया & उसे बाहो मे भर चूमते हुए उसकी कमर को जाकड़ हवा मे उठा लिया & शेल्फ के दूसरी तरफ रखी राइटिंग टेबल पे बिठा दिया.

उसने रंभा को धकेलते हुए टेबल पे लिटाया मगर उसपे रखे राइटिंग पेपर्स,पेन स्टॅंड,टेबल लॅंप वग़ैरह आड़े आ रहे थे.देवेन ने दोनो हाथो से सारे समान को धकेला तो रंभा ने भी लेटते हुए अपने हाथ फैला दिए.ज़ोर की आवाज़ के साथ लॅंप फर्श पे गिर के चूर-2 हो गया.बाकी चीज़ें भी नीचे गिर के च्चितरा गयी मगर दोनो को इन बातों से कोई मतलब नही था.रंभा को टेबल पे लिटा के उसकी गर्देन चूमते हुए वो उसकी चूचियो पे आया & उनके निपल्स को दांतो से पकड़ के खींचा.

“आईईयईईए..!”,रंभा मस्ती भरे दर्द से कराही.देवेन अब उसके पेट को चूमते हुए,उसकी नाभि को चूस्ते हुए नीचे आया & उसकी जीन्स के बटन को खोला & ज़िप खींची.देवेन ने जीन्स को नीचे खींचा तो रंभा ने भी गंद उपर उठा दी.अगले ही पल जीन्स & उसकी काली पॅंटी कमरे के फर्श पे बिखरे बाकी समान का हिस्सा थे.देवेन उसकी बाई टांग को उठा के चूम रहा था & रंभा अपने दाए पैर को उसके सीने पे चला रही थी.

“ओह..!”,देवेन कराहा.रंभा ने दाए पाँव के अंगूठे & उंगली के बीच उसके बाए निपल को फँसा खीच दिया था.देवेन ने उसकी दाई टांग को पकड़ बाए कंधे पे रखा & चूमते हुए बल्कि यू कहा जाए कि चूस्ते हुए उसकी जाँघ की तरफ बढ़ने लगा.

“आननह..उउम्म्म्ममममम..हान्ंननणणन्..ऊहह..!”,रंभा मस्ती मे चीख रही थी.देवेन उसकी मोटी जाँघो को होटो से काट रहा था & चूस रहा था.जब वो होठ हटता तो वाहा पे 1 निशान दिखने लगता.कुच्छ ही देर मे रंभा की दोनो अन्द्रुनि जंघे आशिक़ के होटो के दस्तख़त से भर गयी थी,”..उउन्न्ञनननणणनह..!”,रंभा अपनी कमर उचकाते हुए अपनी चूचिया अपने ही हाथो से दबा रही थी.रंभा ने अपने दोनो पाँव अब घुटने मोड़ टेबल पे जमा दिए थे & देवेन की ज़ुबान उसकी चूत तक पहुँच गयी थी & उस से बह रहे रस को लपलपाते हुए चाट रही थी.देवेन उसकी चूत मे जीभ घुसाते हुए उसके दाने को दाए हाथ की उंगली से रगडे जा रहा था.अगले ही पल रंभा कमर उचकती हुई झाड़ गयी.देवेन ने उसकी टाँगे फैलाई & अपने कंधो पे चढ़ा ली & 1 ज़ोर दार धक्के मे ही अपने लंड को जड तक उसकी चूत मे घुसा दिया.

“ऊउउईईईईईई माआआआआअ..!”,रंभा चीखी & दोनो हाथ सर के पीछे ले जाके टेबल को पकड़ लिया.देवेन उसकी जाँघो को सहलाता,उसकी टाँगो को चूमता उसे चोद रहा था.रंभा टेबल को पकड़े अपनी कमर उचका रही थी.बस 3 दिनो की जुदाई का ये असर था!

देवेन का लंड रंभा की कोख पे लगातार चोट कर रहा था & जब भी वो उसके नरित्व के सबसे अहम हिस्से से टकराता तो 1 अनोखे,मस्ताने दर्द से वो तड़प उठती जिसमे बेइंतहा मज़ा भी च्छूपा होता.दोनो की नासो मे मानो लहू की जगह बेसब्री बह रही थी जोकि जिस्मो के मिलने के बावजूद ख़त्म होने का नाम ही नही ले रही थी.देवेन के चेहरे पे भी अचानक दर्द के भाव आ गये.रंभा की चूत ने सिकुड़ने-फैलने की हरकत शुरू कर दी थी & उसका लंड अब उसकी कसी चूत के & कसने की वजह से जैसे चूत की फांको मे पीस रहा था मगर कितना मज़ा था..कितनी खुशी..उसका दिल किया की अभी इसी पल झाड़ जाए मगर नही.अभी उसे अपनी जान से प्यारी महबूबा के साथ जन्नत की & सैर करनी थी.रंभा टेबल को थामे कमर उचकाती अपने सीने को उपर उठती & सर को पीछे फेंकती चीखती झाड़ रही थी मगर देवेन अपने उपर काबू रखे वैसे ही धक्के लगा रहा था.

रंभा ने हाथ सर के पीछे टेबल से हटाए & आगे लाके अपने दिलबर के सीने & पेट के बालो मे हसरत से फिराए तो उसने भी उसकी टाँगो को कंधो से उतार दिया & उसकी मरमरी बाहें थाम उसे उपर खींचा.रंभा उठाते हुए उसके आगोश मे आ गयी & अपनी बाहें उसके कंधे पे रखते हुए उसकी गर्देन मे डाल दी & उसकी गर्देन चूमने लगी.देवेन भी धक्के लगाता हुआ उसके डाए कान मे जीभ फिरने लगा.रंभा के होंठ उसके कंधो पे पहुँचे & वो उनपे हौले-2 काटने लगी.देवेन उसकी हरकत से & जोश मे आ गया & उसने कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए.जिस्म मे उठे दर्द & मज़े के मिलेजुले मस्ताने एहसास से आहत हो रंभा ने उसके दाए कंधे के उपर थोडा ज़ोर से दाँत गढ़ा दिए.

“ओह..!”,देवेन कराहा & रंभा की पुष्ट जाँघो के नीचे बाहें घुसके उसकी गंद की फांको को अपने हाथो मे थमते हुए उसने उसे मेज़ से उठाया & घुमा के कमरे की दूसरी तरफ की दीवार से लगा दिया & ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.रंभा आहें भरती हुई उसके कंधो के उपर से बाहें ले जाते हुए उसकी पीठ को नोच रही थी.देवेन का लंड सीधा उसकी कोख पे क़ातिल चोटें कर रहा था & बस चंद लम्हो मे ही वो उसके लंड से दोबारा झाड़ गयी & अपने हाथ पीछे अपने सर के उपर ले जाते हुए अपने नाख़ून दीवार पे ज़ोर से रगड़ उसपे अपनी बेचैनी के निशान छ्चोड़ दिए.

देवेन उसे उठाए हुए घुमा & बिस्तर पे लिटा दिया & धक्के लगाने लगा.धक्के लगाते हुए वो बिस्तर पे घुटने जमाके उपर चढ़ने लगा तो रंभा भी अपने हाथ बिस्तर पे रख उसके सहारे उपर होने लगी.देवेन उसके उपर लेटा उसके चेहरे,उसकी गर्देन को चूमते हुए उसे चोद रहा था.रंभा बेचैनी से बिस्तर पे अपने हाथ फिरा रही थी & चादर को खींच रही थी.उसका बाया हाथ तकिये से टकराया तो उसने उसे उठाके फर्श पे फेंक दिया.देवेन के धक्के अब बहुत तेज़ हो गये थे & उसका लंड अब चूत की दीवारो को बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.रंभा कनपटी आवाज़ मे चीख रही थी.उसकी टाँगे देवेन की कमर से लेके उसके घुटनो के पिच्छले हिस्सो तक घूम रही थी & वो उन्ही के सहारे कमर उचका भी रही थी.देवेन के हर धक्के पे उसका जिस्म सिहर उठता.वो बहुत तेज़ी से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रही थी.

देवेन का लंड भी उसकी चूत की कसावट से अब बहाल हो गया था.उसके आंडो मे मीठा दर्द होने लगा था & उनमे उबल रहा उसका लावा अब फूटने को बिल्कुल तैय्यर था.रंभा उसकी पीठ से लेके उसकी गंद तक अपने हाथ चलाते हुए उसे नोच रही थी.2 जिस्म अब 1 दूसरे के सहारे अपनी-2 मंज़िल के बिल्कुल करीब पहुँच चुके थे.देवेन ने अपनी बाई बाँह रंभा की गर्देन के नीचे & दाई उसकी कमर के नीचे सरका उसे अपने आगोश मे क़ैद कर खुद से बिल्कुल चिप्टा लिया था.रंभा भी उसे अपनी बाहो & टाँगो मे बाँध चुकी थी.

“देवेन्न्ननननननननणणन्.......रंभा....................!”,तभी जैसे ज़ोर का धमाका हुआ जिसमे कोई आवाज़ नही थी बस बहुत तेज़,चमकीली रोशनी थी जो केवल दोनो प्रेमियो को ही दिखी.रंभा के थरथरते होंठो से सिसकियाँ निकल रही थी ,उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे.उसका जिस्म दिलबर की बाहो मे मस्ती की इंतेहा से कांप रहा था.उसकी चूत मे मज़े की नदी सारे बंधन तोड़ सैलाब की शक्ल इकतियार कर चुकी थी.वो झाड़ रही थी,ऐसे जैसे पहले कभी नही झड़ी थी.देवेन के आंडो का मीठा दर्द अपने चरम पे पहुँचा & उसी वक़्त उसके लंड मे भी ज्वालामुखी फूटा & उसका गर्म लावा उसकी महबूबा की चूत मे भरने लगा.रंभा की चूत तो अपनी मस्तानी हरकत किए चली जा रही थी & देवेन के लंड को निचोड़ रही थी.देवेन उसे बाहों मे भरे,सर उपर उठाए आहें भरता चला जा रहा था.जिस्म मे ऐसा मज़ा उसने भी अपनी ज़िंदगी मे पहले कभी महसूस नही किया था.उसने सर नीचे किया तो रंभा की आँखो से मोती छलक्ते नज़र आए.वो झुका & उन मोतियो को चखने लगा.इश्क़ के शिद्दत भरे इज़हार के अंजाम पे पहुँचने का एलान करती उन बूँदो को अपनी ज़ुबान पे महसूस करते ही देवेन को & उसकी ज़ुबान का उसके गालो से उन बूँदो को उठाना महसूस करते ही रंभा को उस सुकून से भी बड़ा सुकून मिला जो उन्हे अभी-2 चुदाई ख़त्म होने पे मिला था.रंभा के काँपते होठ मुस्कुराने लगे तो उन्हे देख देवेन के लब भी हंस दिए.दिल मे खुशी की लहर उठी तो दोनो सुकून & चैन से भरे जिस्म 1 दूसरे को आगोश मे भर चूमने लगे.

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क्रमशः.......
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Reply
12-19-2017, 10:42 PM,
#65
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--64

गतान्क से आगे......

"इस तरह अचानक कैसे आ गयी तुम?",जो बात उसे आते ही पुच्छनी चाहिए थी,वो देवेन अब पुच्छ रहा था.इसमे उसकी भी ग़लती नही थी.दिले मे उठते तूफान को शांत करते वक़्त & किसी बात का होश कहा था उसे & रंभा को.वो उसके उपर अभी भी सवार था & लंड सिकुड़ने के बावजूद चूत के अंदर ही था.

"आपकी याद ने इतना तडपया कि मुझसे रहा नही गया.",रंभा उसके गाल के निशान को सहला रही थी.

"अच्छा?",देवेन को जैसे यकीन नही हुआ.वो मुस्कुराते हुए उसकी ठुड्डी के नीचे के हिस्से पे अपने दाए हाथ का पिच्छला हिस्सा फेर रहा था.

"तो क्या झूठ बोल रही हू मैं?",रंभा ने प्यार भरी नाराज़गी से पुछा तो देवेन हंस दिया.

"नही,झूठ नही बोल रही मगर कुच्छ छुपा भी रही हो.क्या बोलके आई हो वाहा?"

"कुच्छ बोल के नही आई.सब छ्चोड़ आई हूँ.",रंभा ने नज़रे झुका ली थी.उसकी आवाज़ की संजीदगी से देवेन के माथे पे शिकन पड़ गयी.उसने लंड बाहर खींचा & तकिये के सहारे लेटते हुए अपनी महबूबा को अपने आगोश मे खींच दोनो के जिस्मो के उपर चादर डाल ली.

"चलो,अब पूरी बात बताओ.",देवेन के सीने पे सर रखे उसके बालो मे उंगलिया फिराती रंभा ने उसे सारी बात बता दी.

"& तुम उसे छ्चोड़ आई?"

"हां तो क्या करती?",रंभा बाई कोहनी को बिस्तर पे जमा बाए हाथ पे सर को उसी हाथ पे टिकाते हुए देवेन को देखने लगी.उसका दाया हाथ अभी भी देवेन के सीने पे घूम रहा था.

"बुरा मत मानना मगर बेवफ़ाई तो तुम भी उस से करती आ रही थी.",देवेन उसके बालो को संवार रहा था.

"हां,मगर हालात क्या थे मेरे आपको पता है?..",रंभा की आवाज़ मे गुस्सा था,"..जब वो लापता था तब मैं उसके बाप के साथ सो रही थी क्यूकी उसके बाप ने शर्त रखी थी मेरे सामने की अगर मैं उसके साथ हुम्बिस्तर हुई तभी वो मुझे मेहरा खानदान का हिस्सा बना रहने देगा वरना बाहर कर देगा!"

"..मेरी कमज़ोरी थी कि मैने उसे ना नही किया.कुच्छ दौलत का लालच..कुच्छ..",रंभा की नज़रे झुक गयी,"..कुच्छ जिस्म की माँग & मैने उसकी बात मान ली.फिर डॅड अपनी ज़बान के पक्के थे.मेरे साथ पहली बार सोने के बाद ही उन्होने मुझसे कह दिया था कि आऐइन्दा वो मेरी मर्ज़ी के बिना मुझे नही चोदेन्गे.उसके बाद की सारी चुदाई मे मैं उनके साथ मर्ज़ी से शरीक थी.",रंभा चाह के भी देवेन से निगाहें नही मिला पा रही थी.

"पर समीर..वो तो जैसे मेरा इस्तेमाल कर रहा था.चाहे कुच्छ भी हो,मैं डॅड के साथ उसे ढूँढने तो निकली थी & वो..उसे तो मेरी परवाह ही नही..जब आपके साथ ये रिश्ता शुरू हुआ तो मैं उसकी बेवफ़ाई के बारे मे जानती थी & फिर..",रंभा खामोश हो गयी.

"& फिर क्या?",देवेन ने दाई करवट पे होते हुए उसे फिर से आगोश मे भर लिया & उसके दूसरी तरफ घूमे चेहरे को अपनी नाक से धकेल अपने चेहरे के सामने किया.

"मुझे चुदाई बहुत पसंद है..इसके बिना जी नही सकती मैं मगर इसका मतलब ये नही है की मैं कोई बाज़ारु औरत..कोई वेश्या हू!"

"रंभा!",देवेन को उसकी बात बहुत बुरी लगी थी.

"शादी से पहले भी मेरे मर्दो के साथ संबंध थे.शादी के बाद पति के अलावा मैने अपना जिस्म डॅड & प्रणव को भी सौंपा मगर आपसे मिलने के बाद मैने जाना कि मेरे किसी भी मर्द के साथ सोने की असल वजह मेरा चुदाई का शौक या मेरी मतलबपरस्ती नही थी..",रंभा की आँखो मे पानी आ गया था/

"..मुझे तलाश थी किसी की जोकि उस गाँव मे उस रात यहा आके..",उसने देवेन के सीने पे अपना हाथ रख वाहा इशारा किया,"..पूरी हो गयी.आपकी बाहो मे आने के बाद अब किसी & की चाहत नही रह गयी है मुझे.ये सच है कि मैने वापस जाने के बाद प्रणव के साथ चुदाई की है मगर मैं उसे अपने जाल मे उलझाए रखना चाहती हू ताकि जान सकु की डॅड की हालत के पीछे उसका हाथ है या नही.आप..-",देवेन ने बाया हाथ उसकी कमर से हटा उसके होंठो पे रख दिया.

"चुप!बिल्कुल चुप!..सफाई देके मुझे शर्मिंदा कर रही हो?..तुमसे प्यार करने का मतलब ये थोड़े ही है कि मैं तुम्हारी ज़िंदगी का मालिक बन गया..नही!तुम 1 समझदार,काबिल लड़की हो जो अपने फ़ैसले खुद लेने का माद्दा रखती है.हां,मुझे रश्क होता है तुम्हारी ज़िंदगी के बाकी मर्दो से लेकिन उसका मतलब ये नही कि मैं तुम्हे सबसे रिश्ता तोड़ने को कहु.मेरी मोहब्बत की बुनियाद इतनी कमज़ोर नही है."

"ओह!देवेन..",रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया.उसकी आँखो का पानी उसके गालो को भिगोने लगा था.देवेन उसके दाए कंधे के उपर सर रखे उसके गले से लगा उसकी पीठ थपथपा रहा था,"..बस..1 बार मेहरा खानदान की गुत्थी सुलझ जाए,उसके बाद मैं सब छ्चोड़ बस आपकी बाहो मे यू ही सारी ज़िंदगी पड़ी रहूंगी.",उसकी बात सुन देवेन की पकड़ और कस गयी & उस्ने दाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे सरकाते हुए उसे फिर से पीठ पे लिटा दिया & उसके माथे को चूमने लगा.

"फ़िक्र मत करो.बहुत जल्द ये सारी उलझने ख़त्म हो जाएँगी.मुझे तफ़सील से सारी बात बताओ कि आख़िर वो प्रणव क्या हरकतें कर रहा है?",रंभा ने देवेन को सब कुच्छ बताया.उसने महादेव शाह के बारे मे भी बताया.

"हूँ..",देवेन का लंड रंभा के जिस्म की च्छुअन से फिर से खड़ा हो रहा था & उसके साथ-2 रंभा ने भी इस बात को महसूस किया,"..तुम्हे शाह से मिलके क्या लगा?..वो किस तरह का आदमी है?..क्या उसे वैसे बेवकूफ़ बनाया जा सकता है जैसे प्रणव सोच रहा है?",देवेन अब दाई करवट पे था & रंभा अपनी बाई करवट पे.वो बाए हाथ से उसके लंड को दबा रही थी & दाए को उसके जिस्म पे फिराते हुए उसके सीने के बालो मे मुँह घुमा रही थी.

"उउंम..नही मुझे तो वो बुड्ढ़ा बड़ा चालाक लगा..आहह..!",देवेन ने उसके सर को अपने सीने से उठाया & उसके बाल पकड़ पीछे कर उसकी गर्दन अपने सामने की ओर चूमने लगा.

"1 तरकीब सूझी है!",अचानक देवेन ने उसके होंठो से लब अलग किए & उसके चेहरे को देखा.रंभा को उसकी ये हरकत बिल्कुल भी अच्छी नही लगी & उसने उसके सर को पकड़ वापस अपनी गर्दन पे दबाया,"..क्यू ना हम दोनो के साथ ये खेल खेलें & कंपनी की मालकिन तुम बन जाओ."

"क्या?!",इस बार रंभा ने खुद देवेन के बाल पकड़ उसके सर को उपर कर दिया.

"हां,हम ये पता करते हैं कि विजयंत मेहरा के इस हाल का ज़िम्मेदार कौन है मगर साथ-2 शाह & प्रणव के साथ ये खेल भी खेलते रहते हैं.जैसे ही मामला सुलझेगा तो अगर प्रणव मुजरिम होगा तो वो सलाखो के पीछे होगा & अगर नही तो भी हम उसे & शाह को किनारे कर देंगे,फिर तुम कंपनी की मालकिन बनी रहोगी.",रंभा उसके चेहरे को गौर से देखते हुए उसे समझने की कोशिश कर रही थी.

"मगर 1 बात और है."

"क्या?"

"प्रणव का सारा प्लान इस बात पे टिका है कि समीर के शेर्स तुम्हे मिलें."

"हां."

"अब अगर तुम समीर को तलाक़ देती हो तो उसकी सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी."

"हां."

इसका मतलब तुम्हे अभी समीर की पत्नी बनाकर रहना होगा हां एक बात और भी है."

"वो क्या?"

"समीर के शेर्स तुम्हारे पास तो केवल 1 ही सूरत मे आ सकते हैं..",रंभा जानती थी वो सूरत क्या थी,"..जब उसकी मौत हो जाए.तो कभी ना कभी शाह या प्रणव तुम्हे टटोलेंगे कि तुम इस बात के लिए तैय्यार हो या नही और तुम्हे उन्हे यकीन दिलाना है कि तुम्हे समीर की मौत से कोई परेशानी नही बल्कि तुम खुद समीर को रास्ते से हटाओगि उनके लिए.",रंभा कुछ पल देवेन को देखती रही.उसे उसकी बात समझ आ गयी थी & उसके होंठो पे मुस्कान खेलने लगी.उसे मुस्कुराता देख देवेन भी मुस्कुराने लगा & अगले ही पल दोनो हंसते हुए 1 दूसरे को बाँहो मे बाहर बिस्तर पे लोटने लगे.रंभा जानती थी कि देवेन का प्लान कमाल का था & आगे की उनकी सारी ज़िंदगी बड़े सुकून से कटने वाली थी.

बिस्तर पे यू लोटने से उनके जिस्मो पे पड़ी चादर उनके गिर्द लिपट गयी थी मगर उन्हे किसी बात का होश नही था.1 बार फिर रंभा नीचे थी & देवेन उसके उपर.वो उसकी छातिया चूस्ते हुए लंड को चूत पे दबा रहा था.रंभा तो बस अपने बेचैन हाथो से उसके पूरे जिस्म को च्छू रही थी,"..उउम्म्म्म..भूख लग रही है मुझे..शाम से कुच्छ नही खाया है."

"अच्छा..",देवेन उस से अलग होने लगा.

"उउन्ण..जा कहा रहे हैं!"

"अरे!तो फोन तक कैसे जाऊं?",देवेन उसके बच्पने पे मुस्कुरा दिया.

"मुझे नही पता पर मुझसे अलग होना मना है!",देवेन को उसकी बात पे हँसी आ गयी.

"अच्छा बाबा!जैसा तुम कहो.",उसने रंभा को चादर समेत बाहो मे भरा & लिए दिए बिस्तर से उतर गया & चलते हुए शेल्फ के पास पहुँचा जिसके नीचे फोने & मेनू कार्ड गिरा था.उसने दोनो चीज़ें उठा के उपर रखी & फिर रूम सर्विस को ऑर्डर किया.वो रंभा को वैसे ही बाहो मे भरे हुए चूमते हुए दरवाज़े तक गया & उसे खोला & फिर उसे गोद मे उठा लिया & बिस्तर पे आ गया.दोनो हंसते हुए फिर से प्यार करने लगे.

चादर के नीचे देवेन रंभा के उपर चढ़ा उसे चूम रहा था & उसकी चूचिया दबा रहा था.रंभा भी उचक के बीच-2 मे उसके सीने को चूम रही थी & उसके निपल्स को अपनी उंगलियो से नोच रही थी की दरवाज़े की घंटी बजी.देवेन उसके उपर से उतर बिस्तर पे लेट गया & रंभा उसकी दाई बाँह के घेरे मे आ गयी & चादर को अपने गले तक खींच लिया.

"कम इन.",देवेन के कहने पे वेटर दरवाज़ा खोल 1 ट्रॉली धकेल्ता अंदर आया & कमरे की हालत & बिस्तर पे दोनो को देख चौंक गया मगर वो 1 नामी होटेल का वेटर था & उसने फ़ौरन खुद को संभाला.

"गुड ईव्निंग,मॅ'म!..गुड ईव्निंग,सर!",वो बिस्तर के दूसरी तरफ रखी 2 कुर्सियो & मेज़ की तरफ फर्श पे गिरे समान से बचाते हुए ट्रॉली को ले जा रहा था.

"अरे भाई!इस ट्रॉली को यही इधर लगा दो.",देवेन ने अपने दाई तरफ बिस्तर के किनारे इशारा किया.रंभा का दाया हाथ चादर के नीचे से सरक के देवेन के लंड पे आ गया था & वो उस से खेलने लगी थी.वेटर से चादर के नीचे होती हुलचूल छुपि तो नही ना ही च्छूपा था चादर के नीचे रंभा के नंगी होने का एहसास.

रंभा 1 बेबाक लड़की थी मगर इस हद्द तक जाने की उसने भी कभी नही सोची थी लेकिन आज जैसे सारी हदें टूट गयी थी.वेटर की मौजूदगी से उसे थोड़ी शर्म तो आई थी मगर जब उसने देखा कि वो उसे सीधा देखने से बच रहा है तो उसे हँसी आने लगी थी.देवेन की बाहो मे खुद को बहुत महफूज़ महसूस कर रही थी वो.

वेटर ट्रॉली लगाके जाने लगा तो रंभा ने देवेन को उसे टिप देने को कहा.देवेन ने वेटर को बुलाया तो वो उसके करीब आया & टिप लेते हुए उसकी नज़र नीचे हुई & चादर मे बना तंबू और उसमे होती हुलचूल उसे और करीब से दिखी.वेटर को पसीना आ गया.ऐसा नही था कि उसने कभी जोड़ो को इस तरह से 1 दूसरे से प्यार करते नही देखा था.विदेशी जोड़े अक्सर 1 दूसरे को चूमते लिपटाते रहते थे मगर ये पहला मौका था जब उसने किसी जोड़े को इस तरह बिस्तर मे देखा था.वो टिप लेके दरवाज़े की ओर गया & वाहा पहुचते ही आदत के मुताबिक घुमके 'हॅव ए नाइस स्टे!' बोलने ही वाला था कि सामने का नज़र देख उसका हलक सुख गया.

रंभा उसके घूमते ही देवेन के उपर आ गयी थी और उसे चूम रही थी.चादर उसकी कमर तक सरक गयी थी & उसकी गोरी पीठ कमरे की रोशनी मे चमक रही थी.उसकी दाई छाती का थोड़ा सा हिस्सा उसकी बगल से दिख रहा था.देवेन के हाथ उसकी कमर के मांसल हिस्से को दबा रहे थे.वेटर की आवाज़ उसके हलक मे ही अटक गयी थी.उसने दरवाज़ा बंद किया & माथे का पसीना पोन्छ्ता वाहा से चला गया.

"पहले खाना तो खा लो.",देवेन ने चादर के नीचे हाथ सरका के उसकी गंद को दबाया & फिर कमर पकड़ उसे अपने उपर से हटाया,"..फिर तुम्हे बताना है कि मुझे क्या नया पता चला है दयाल के बारे मे."

"दयाल के बारे मे?",रंभा ट्रॉली से प्लेट उठाके उसमे खाना परोसने लगी.

"ह्म..अब दयाल के बारे मे तो नही मगर समझो कि 1 नया सुराग मिला है.",देवेन ने रंभा को अपनी ओर खींचा.वो पलंग के हेडबोर्ड से टिक के बैठ गया था & उसने अपनी दाई बाँह रंभा के दाए कंधे के गिर्द डाल दी.रंभा उसे चम्चे से खाना खिलाने लगी & खुद भी खाने लगी,"..रंभा गोआ का 1 चेहरा जो तुम जानती हो या जिसके बारे मे तुमने सुना होगा,वो है इसके खूबसूरत,चमकीली रेत वाले बीचस,समंदर का नीला पानी..",उसने महबोबा के हाथ से 1 नीवाला लिया,"..यहा के लोगो की धीमी चाल से चलती आरामदेह ज़िंदगी,फेणी & यहा का म्यूज़िक."

"..मगर इस जगह का 1 दूसरा चेहरा भी है जो की इसके पहले चेहरे से बिल्कुल उलट है..",रंभा गौर से उसे सुन रही थी.देवेन के सीने के दाए हिस्से पे उसका बाया निपल चुभ रहा था & देवेन को मस्त कर रहा था.उसने अपना बाया हाथ अपनी महबूबा के सीने के दिलकश उभारो से लगा दिया,"..वो चेहरा है जुर्म का,ड्रग्स का,जिस्म्फरोशी का,करप्षन का.",वो रंभा की छातियो को हौले-2 दबा रहा था.रंभा को बहुत भला लग रह था उसके हाथो का दबाव मगर फिर भी उसे छेड़ने की गरज से वो चिहुनकि & बुरा सा मुँह बनाया तो देवेन ने उसके बाए गाल को चूम लिया & मुँह खोल अगले नीवाले को मुँह मे डालने की ख्वाहिश ज़ाहिर की.

"मैं यहा से पहले तमिल नाडु मे था & मैने हर तरह के काम किए वाहा-क़ानूनी भी & गैर क़ानूनी भी.",इस बार रंभा ने सच मे बुरा मुँह बनाया,"..रंभा,जैल से निकले शख्स को सभी ग़लत ही समझते हैं.तुम्हे पता नही कितनी मुश्किल होती है सज़ायाफ़्ता इंसान को वापस 1 आम ज़िंदगी जीने मे.तुम्हे इतना यकीन दिलाता हू कि अब मैं कोई ग़लत काम नही करता.",रंभा को उसकी आँखो मे ईमानदारी की झलक दिखी & उसने अगला नीवाला उसके मुँह मे डाला & उसके दाए गाल को चूम लिया.

"..तो मेन समाज मे उस लकीर के,जो अच्छे & बुरे को अलग करती है,दोनो तरफ के लोगो को अच्छे से जानता हू,समझता हू.यहा गोआ मे जुर्म का जो संसार है उसमे हुमारे मुल्क के लोग तो हैं ही मगर साथ-2 रशियन & इज़्रेली भी हैं.ये लोग यहा के ड्रग्स & जिस्म्फरोशी के धंधे को कंट्रोल करते हैं.मैं इन दोनो मुल्को के लोगो को जानता हू..",खाना ख़त्म हो चुका था.दोनो ने पानी पिया & देवेन ने अपनी महबूबा को बैठे हुए ही अपनी गोद मे खींचा & उसकी छातियो को चूसने लगा.उसके लंड पे बैठी उसके सर को प्यार से अपनी हाथो मे पकड़ चूमते हुए रंभा आँहे भरने लगी.

"..बालम सिंग अपने फार्म पे चरस उगाता था & उसी का धंधा करता था.उसके मरने पे ड्रग्स की गंदी दुनिया मे उथल-पुथल मच गयी & ये खबर यहा गोआ भी पहुँची..",देवेन की ज़ुबान रंभा को मस्त किए जा रही थी.वो अपने जिस्म का बाया हिस्सा उसके सीने से सटा अपनी दोनो टाँगे उसके जिस्म के बाई तरफ फैलाए उसकी गोद मे छॅट्पाटा रही थी.देवेन का लंड उसकी मुलायम गंद के दबाव से फ़ौरन खड़ा हो गया था.

"..तब मुझे पता चला कि बलम सिंग अपने जैल मे काम करने के दिनो से ही ड्रग्स के धंधे से जुड़ा था.पहले तो वो बस दयाल जैसे लोगो से लेके क़ैदियो को ड्रग्स सप्लाइ करता था मगर बाद मे वो उन लोगो के साथ मिलके इस धंधे मे पूरा उतर गया..",रंभा मस्त हो अपनी बाई बाँह देवेन के दाए कंधे पे टिकाते हुए उसकी गर्दन को जकड़ते हुए उसके दाए कान मे अपनी जीभ फिरा रही थी.

"आईिययययई..!",उसके चेहरे पे शिकन पड़ गयी & साथ ही 1 मस्त मुस्कान भी खेलने लगी.देवेन ने उसकी मोटी जाँघो के नीचे बाई बाँह लगाते हुए उन्हे उठाया था & जब नीचे किया तो उसकी चूत मे देवेन का लंबा,मोटा लंड घुस चुका था.उसने उसके सीने से सर उठाया तो रंभा ने अपना सर झुका उसके होंठ चूम लिए.दोनो की आँखो मे वासना के लाल डोरे तेर रहे थे.देवेन उसकी जाँघो को थाम के उपर-नीचे करते हुए उसकी चुदाई कर रहा था.रंभा की दोनो जंघे सटी होने की वजह से उसकी कसी चूत और कस गयी थी & उसकी दीवारो पे देवेन का लंड बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.

"..मगर बालम कोई बहुत बड़ी मछली नही था.उसका असली बॉस यहा से दूर मारिटियस मे बैठा है.अब मज़े की बात सुनो.बलम के बॉस से हमे कोई मतलब नही है.हमे मतलब है उस बॉस के धंधे के तरीके से.वो आदमी भी ड्रग्स & जवाहरतो का ग़ैरक़ानूनी धंधा 1 साथ करता है & सभी मुल्को की पोलीस से लेके इंटररपोल उसके दोनो धंधो मे उलझी रहती है मगर कोई 1 भी उसे रंगे हाथ नही पकड़ पाती..",रंभा लंड की ज़ोरदार रगड़ से बहुत मस्त हो गयी थी & उसने अपने दिलबर की गर्दन को जकड़ते हुए उसके सर को अपने सीने से चिपका लिया & कमर हिलाती च्चटपटाने लगी.उसने देवेन के बाल पकड़ पीछे खींचे & अपने लरजते लब उसके लबो से चिपका दिए & उसके लंड पे अपनी चूत की गिरफ़्त को & कस दिया.वो झाड़ रही थी & देवेन उसे वैसे ही गोद मे उच्छलते हुए चोद रहा था.

रंभा ने सिसकते हुए उसके हाथ को पानी जाँघो के नीचे से हटाया & दोनो टाँगे उसकी टाँगो के उपर करते हुए उसके सीने से टेक लगाके बैठ गयी & फिर कमर उच्छालने लगी.देवेन ने भी उसकी कमर थाम ली & उसकी पीठ & कंधे चूमने लगा.

"..जिस वक़्त दयाल मुझे फँसा के यहा से भागा उसके कुच्छ अरसे बाद ही बालम के बॉस ने जवाहरतो का भी धंधा शुरू किया था.खेल बहुत सीधा है.जैसे मुझे फँसाया गया था उसी तरह किसी मासूम शख्स से जवाहरतो की स्मुगलिंग कराई जाती.पोलीस का ध्यान उसपे रहता & इस बीच ड्रग्स किसी दूसरे रास्ते स्मगल हो जाते.ये तरीका सीधा दयाल की ओर इशारा करता है..",रंभा ज़ोर-2 से उछल रही थी & बीच-2 मे गर्दन घूमके अपने प्रेमी को चूम भी रही थी.

"..लेकिन इंटररपोल की रिपोर्ट के मुताबिक वो शख्स मारिटियस का ही कोई बंदा था-रोशन पेरषद.पर मेरा दिल कहता है कि वो दयाल ही था & आदत से मजबूर नाम बदल के काम कर रह था.खैर,वो रोशन पेरषद काफ़ी दिनो तक इस धंधे से जुड़े रहने के बाद अचानक 1 दिन गायब हो गया..",रंभा ने अपने होंठ भींच लिए थे.उसके दिल मे मस्ती का 1 गुबार उठ रहा था,प्री जिस्म मे दौड़ती मस्ती बस 1 धमाके के साथ फूटने ही वाली थी.

"..कुछ दिनो बाद इसी तरीके से युरोप मे ड्रग्स स्मुग़ले किए गये & वाहा जो नाम सामने आया वो था दानिश सुलेमान.मेरे हिसाब से ये भी दयाल ही था.इंटररपोल वाले भी समझ गये थे कि हो ना हो ये सब 1 ही इंसान हैं जो नाम बदल के उन्हे हर बार गुमराह कर रहा है मगर 1 रोज़ आम्सटरडॅम के बदनाम डे वॉलेन इलाक़े मे सुलेमान की लाश मिली & उस तरीके से स्मुगलिंग भी बंद हो गयी.कुच्छ दिनो बाद इंटररपोल ने भी फाइल बंद कर दी."

"आहह..!",1 लंबी आह के साथ रांभ अपनी कमर बेचिनी से हिलाती & जिस्म को कमान की तरह मोदती झाड़ गयी & निढाल हो लंबी-2 साँसे भरती देवेन के सीने पे गिर गयी.देवेन ने दाई बाँह उसके पेट पे कसी & बाई उसकी चूचियो के नीचे & नीचे से ज़ोर-2 से कमर उचक के धक्के लगाने लगा.रंभा आहें भरती उसके सर को थामे उसके बाए गाल को चूमती उसका भरपूर साथ दे रही थी & चंद पॅलो बाद दोनो प्रेमियो ने 1 साथ आह भरी & रंभा के चेहरे पे मस्ती भरी मुस्कान खेलने लगी-वो अपनी चूत मे अपने प्रेमी के वीर्य को भरता सॉफ महसूस कर रही थी.

"..मगर मुझे अंदर की बात पता है कि सुलेमान ने अपनी जगह किसी & शख्स की लाश फिंकवा दी थी & अपने मरने की अफवाह उड़वा दी थी.किसी भी एजेन्सी के पास दयाल/पेरषद/सुलेमान का कोई डीयेने या बाइयोलॉजिकल रेकॉर्ड था नही & जब स्मगलिंग का वो तरीका बंद हो गया तो उन्होने भी उसकी मौत को सही मान लिया.."

"..जहा सारी एजेन्सीस धोखा खा गयी वाहा आपको कैसे पता ये सब,जानेमन?",रंभा अभी भी वैसे ही देवेन के बाए कंधे पे सर रखे उसके दाए गाल को सहलाती बाए को चूम रही थी.

"क्यूकी जिस शख्स ने पेरषद & सुलेमान के नामो के झूठे पासपोर्ट्स बनाए थे उसे मैं जानता हू

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क्रमशः.......
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Reply
12-19-2017, 10:47 PM,
#66
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--65

गतान्क से आगे......

"क्या?!..कैसे?!",रंभा चौंकी.देवेन ने उसकी चूत से लंड निकालते हुए उसे बिस्तर पे लिटाया तो वो बाई करवट पे लेट गयी.देवेन उसके पीछे उसी की तरह लेटा और दाई बाँह मे उसके जिस्म को घेर लिया.

"क्या और कैसे क़ी तो 1 अलग ही दास्तान है.तुम बस इतना जानो कि उस जालसाज़ ने मुझे ये बताया की उसने मारिटियस मे 1 हमारे मुल्क के शख्स को वो 3 नक़ली पासपोर्ट्स बना के दिए थे जिनमे से पहला पेरषद के नाम का मारिटियस का था.दूसरा सुलेमान के नाम का बांग्लादेश का & तीसरा था बीसेसर गोबिंद के नाम का जोकि फिर से मारिटियस का ही था..",रंभा उनिंदी हो रही थी मगर देवेन की बातें उसे बड़ी दिलचस्प भी लग रही थी.

"..इस तीसरे पासपोर्ट के नाम वाला शख्स अभी तक दुनिया के किसी भी पोलीस एजेन्सी की नज़र मे नही आया है.इसका 1 ही मतलब है कि दयाल अब ड्रग्स का धंधा नही कर रहा.आम्सटरडॅम मे अपनी मौत की अफवाह उड़वा के वो किसी दूसरी पहचान को अपना के किसी & ग़लत काम मे जुट गया है."

"मगर इतनी बड़ी दुनिया के किस कोने मे वो है ये हमे कैसे पता चलेगा?",रंभा ने उबासी ली.

"मुझे पता चल गया है."

"क्या?!",रंभा 1 बार फिर चौंकी & गर्दन पीछे घुमाई.देवेन मुस्कुरा रहा था.

"मैने अपनी ज़िंदगी मे काई अच्छे-बुरे लोगो की मदद की है,रंभा & अब उस सब को भूना रहा हू.मुझे पक्का पता है कि 1 लंबे समय का वीसा ले बीसेसर गोबिंद मुल्क मे दाखिल हो चुका है.अब वो कहा है,क्या कर रहा है ये पता लगाने के लिए मुझे उसे या तो ललचाना है या फिर डराना है."

"मगर कैसे करेंगे ये?",रंभा ने करवट ली & अपनी चूचियाँ अपने प्रेमी के सीने मे दबाती हुई उस से बिल्कुल सॅट गयी & चादर को दोनो के जिमो पे डाल लिया.देवेन ने उसका माथा चूमा & उसकी कमर के गुदाज़ हिस्से को सहलाने लगा.

"उसे डराउँगा कि मुझे पता चल गया है कि गोबिंद & दयाल 1 ही शख्स के 2 नाम हैं & चारा डालूँगा जिसे खाने के चक्कर मे वो अपने बिल से बाहर आए & फिर मैं उसे वो सज़ा दू जिसे देने के बाद ही मुझे चैन & मेरी सुमित्रा की रूह को सुकून मिलेगा.",उसकी मा के लिए देवेन के प्यार भरे जज़्बे को देख वो भी जज़्बाती हो गयी.उसका दिल भर आया & उसने अपना चेहरा देवेन के सीने मे च्छूपा लिया & उसके जिस्म के गिर्द अपनी बाहें & कस दी.

"मगर वो चारा होगा क्या?",वो वैसे ही मुँह च्छुपाए उस से चिपकी थी.

"क्या नही कौन.वो चारा होगा खुद मैं.",रंभा ने फ़ौरन मुँह उपर किया.उसका दिल ज़ोरो से धड़क उठा था.वो इस शख्स को खोना नही चाहती थी..उसे खोने का मतलब था फिर से वही तलाश..1 बिस्तर से दूसरे बिस्तर तक का अंतहीन लगने वाला सफ़र..क्या ज़रूरत थी इंटेक़ाम लेने की?..सब भूल के इस खूबसूरत जगह दोनो 1 दूसरे मे समाए क्या पूरी उम्र नही बिता सकते?

"मैं तुम्हे अकेला नही छ्चोड़ूँगा..",देवेन ने जैसे उसके दिल मे घूमाड़ते सवालो को सुन लिया था,"..इतने दिनो बाद मेरी ज़िंदगी मे तुम्हारी शक्ल मे खुशी आई है.मगर सुमित्रा की तकलीफो का खामियाज़ा तो उस कामीने को चुकाना ही पड़ेगा ना!..1 भरपूर ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताने का वादा करता हू मैं तुमसे & फ़िक्र मत करो ये वादा तोड़ूँगा नही.",रंभा ने उसे बहुत कस के जाकड़ लिया & उसके सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.देवेन ने हाथ पीछे ले जा कमरे की बत्ती बुझाई & अपनी महबूबा को आगोश मे भर उसके साथ ख्वाबो की दुनिया की सारी करने लगा.

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"मोम..",प्रणव रीता के कमरे मे खड़ा उसके गाउन मे नीचे से दाया हाथ घुसा रहा था & बाए हाथ से उसकी कमर को जकड़े उसकी गर्दन चूम रहा था.रीता दामाद की हर्कतो से खुशी मे मुस्कुरा रही थी.विजयंत के जाने के बाद उसे बड़ा हल्का लगने लगा था.दामाद के साथ यू छुप-2 के इश्क़ लड़ाना उसे बहुत मज़ेदार लगने लगा था & अब तो उसे इसका नशा हो गया था.हर रात बिस्तर मे वो खुद से खेलती उसका इंतेज़ार करती.जिस रात वो नही आता,वो रात तो मायूसी मे बीतती मगर इस से अगली मुलाकात मे उसका जोश दुगुना हो जाता था & फिर चुदाई मे वो मज़ा आता था कि पुछो मत!

"हूँ..",रीता ने उसक्के बालो को बाए हाथ मे पकड़ उसके सर को नीचे अपने सीने की ओर धकेला & दाए हाथ से उसकी ट्रॅक पॅंट के उपर से उसकी पुष्ट गंद दबाई.प्रणव ने जैसे उसे फिर से जवान कर दिया था.उसका हाथ अगले ही पल उसकी पॅंट मे घुसा & प्रणव की नंगी गंद को हसरत से खरोंछने लगा.

"समीर & रंभा के बीच कुच्छ अनबन हुई है क्या?",प्रणव का हाथ सास की पॅंटी मे घुस गया था & अब वो भी वही कर रहा था जो रीता उसकी गंद के साथ कर रही थी.

"उउम्म्म्म..मुझे क्या पता!..इस वक़्त उस मनहूस लड़की का नाम लेके मेरा मूड मत खराब करो.",रीता ने उसकी गंद पे चिकोटी काटी & फिर पॅंट को नीचे सरका दिया.प्रणव ने फ़ौरन टाँगे बारी-2 से उपर कर पॅंट को अपने जिस्म से अलग किया & बाए हाथ को उपर कर उसके गाउन के स्ट्रॅप को उसके दाए कंधे से नीचे सरका के उसकी दाई छाती को नुमाया किया & फिर उसे चूस्ते हुए उसकी गंद की दरार मे से उंगली सरकाते हुए पीछे से ही उसकी चूत कुरेदने लगा,"..आहह..ओह..प्रणव....!"

"फिर भी मोम समीर की तो फ़िक्र है आपको.उस से पुछिये..हो सकता है बेचारा परेशान हो मगर अपनी परेशानी आपसे या किसी & से भी कहते हिचकिचा रहा हो.",प्रणव ने गाउन के दूसरे स्ट्रॅप को भी नीचे सरका दिया था & अब बाई चूची भी उसकी ज़ुबान से गीली हो रही थी.रीता ने मस्ती मे उसकी टी-शर्ट मे हाथ घुसा के अपने नाख़ून उसकी पीठ पे चलाए & फिर उसे भी निकाल अपने दामाद को नंगा कर दिया.

"ओह..& चूसो..हाआंन्‍णणन्..उसे भी तो मेरी खबर लेने आना चाहिए,प्रणव..ऊव्ववव..शरीर कहिनके..काटते क्यू हो?..मगर देखा तुमने उसे आजकल..बस ऐसे मिलके चला जाता है मानो कोई काम पूरा कर रहा हो..हाईईईईईईईई..आराम से घुसाओ ना..ओईईईईईईई..दर्द होता है..आन्न्‍नननणणनह..!",रीता ने दामाद के मोटे लंड को जाकड़ के उसके मुँह को अपने सीने पे ज़ोर से दबाया तो उसने भी उसके बाए निपल पे हल्के से काट लिया & फिर उसकी पॅंटी नीचे कर दी & उसकी चूत मे ज़ोर-2 से उंगली करने लगा.

"वाउ!",दरवाज़ा खुला & 1 लड़की की आवाज़ से दोनो चौंक के अलग हो गये,"..क्या नज़ारा है!..दामाद & सास नंगे 1 दूसरे की बाहो मे..वाह!",कमरे की दहलीज़ पे उस से बाया हाथ लगाए & दाया अपनी कमर पे रखे शिप्रा खड़ी थी,"..तो माइ डार्लिंग हज़्बेंड..",वो आगे आई.उसके होंठो पे 1 मुस्कान थी जिसे दोनो समझने की कोशिश कर रहे थे,"..तो ये है तुम्हारा ज़रूरी काम.सास की सेवा!",उसने व्यंग्य से कहा.रीता शर्म से पानी-2 हो गयी थी & सर झुका लिया था.उसकी पॅंटी उसके घुटनो पे फँसी हुई थी.उसने हाथ नीचे घुसा उसे उपर करना चाहा तो शिप्रा ने तेज़ी से आगे बढ़ उसका हाथ पकड़ लिया.रीता चौंक के बेटी को देखने लगी.

शिप्रा ने मुस्कुराते हुए पॅंटी को घुटने से भी नीचे सरकया & फिर सीधी खड़ी हो दाई टांग उठाके पॅंटी को पूरा नीचे कर दिया.रीता का शर्म & हैरत से बुरा हाल था.प्रणव भी अपनी बीवी को समझाने की कोशिश कर रहा था,"प्लीज़ मोम,अपनी खूबसूरती देखने तो दो मुझे.",शिप्रा उसके सामने खड़ी उसे सर से पाँव तक निहार रही थी,"..हूँ..मैं समझ सकती हू कि प्रणव क्यू दीवाना है तुम्हारा,मोम.तुम अपनी असल उम्र से कितनी छ्होटी लगती हो & तुम्हारा जिस्म अभी भी कितना कसा हुआ है!",उसकी बातो मे सच्ची तारीफ थी.

"पर प्रणव..",उसकी आँखे च्चालच्छला आई थी,"..तुम्हे मेरा ज़रा भी ख़याल नही है ना!..मैं वाहा अकेली पड़ी रहती थी & तुम यहा..",वो सिसकी तो प्रणव ने उसे बाहो मे भर लिया.

"आइ'म सॉरी,बेबी!",वो उसकी पीठ सहला रहा था,"..सब कब,कैसे अचानक हुआ कुच्छ पता ही नही चला &..-",शिप्रा ने फ़ौरन सर उपर उठाया.

"-..पर अब तो सबको सब पता चल गया ना!",शिप्रा मुस्कुरा रही थी.प्रणव ने उसे देखा & दोनो हँसने लगे.प्रणव ने उसे बाहो मे भरा & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.प्रणव ने जल्दी से बीवी के गाउन की बेल्ट खोल उसे उसके कंधो से सरकाया & फिर उसकी नेग्लिजी को उपर करने लगा.रीता दोनो को हैरत से देख रही थी.शिप्रा ने किस तोड़ी & खुद बाहे उपर कर अपनी नेग्लिजी निकल अपनी मा के सामने खड़ी हो गयी.

"मोम,इतनी अकेली थी आप!",उसने उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया,"..& आपने मुझे क्यू नही बताया आप दोनो के बारे मे..हूँ?",रीता हैरत से उसे देख रही थी,"..वो तो आज मैने सोने का बहाना किया & फिर इस बदमाश के पीछे-2 आई देखने की आख़िर ये रात को करता क्या है!",उसने घूम के पति को देखा,"..पर आपसे नाराज़ हू.मुझे बताना तो चाहिए था या फिर सारा मज़ा अकेले-2 ही लूटना चाहती थी..हूँ?!",उसने शरारत से पुछा.अब रीता को एहसास हुआ कि उसकी बेटी उस से नाराज़ नही थी.

"सॉरी बेटा!",वो बस इतना कह पाई.बेटी के सामने यू नंगी रहने मे उसे अभी भी शर्म आ रही थी.प्रणव आगे बढ़ा & बाया हाथ शिप्रा की पीठ & दया रीता की पीठ पे रखा.

"इस सब का ज़िम्मेदार मैं हू.",उसने कहा & दोनो की पीठ सहलाई.

"तो अब इसकी सज़ा भी मिलेगी तुम्हे.अब दोनो को खुश करो 1 साथ.",शिप्रा ने अपना बाया हाथ आगे कर उसका लंड पकड़ के दबाया & दाए हाथ को मा के बाए कंधे पे रखा.रीता उसकी बात सुन हैरान हो गयी लेकिन उसका दिल भी ज़ोरो से धड़क उठा.प्रणव बीवी की बात सुन मुस्कुराने लगा & उसकी तरफ झुक उसके होंठ चूमे & फिर दूसरी तरफ गर्दन घुमा सास को चूमा जोकि अभी भी थोड़ी झिझकति दिख रही थी.

प्रणव ने रीता को अपनी तरफ खींच अपने सीने से चिपका लिया.रीता ने थोड़ा शरमाते हुए बेटी को देखा मगर वो तो बिंदास मुस्कुरा रही थी.प्रणव ने अपनी दोनो बाहे सास की कमर मे डाल उसे अपने से बिल्कुल चिपका लिया & उसके गुलाबी होंठो के पार अपनी ज़ुबान घुसा दी.रीता शुरू मे तो थोड़ा झिझक रही थी,बेटी की मौजूदगी उसे अभी भी सहज नही होने दे रही थी मगर प्रणव की आतुर ज़ुबान ने उसे जल्दी ही मस्त कर दिया & उसने भी अपनी बाहे उसके बदन पे लपेट दी & उसकी पीठ & कंधो पे हाथ फिराते हुए उसकी किस का जवाब देने लगी.शिप्रा मुस्कुराते हुए प्रणव के पीछे आई & उसके मज़बूत बाजुओ पे अपने हसरत भरे हाथ फिराते हुए उसके दोनो कंधो को चूमने लगी.

उसके हाथ पति के जिस्म पे फिसलते हुए उसके बगल से नीचे आ आगे गये & उसके लंड & आंडो को पकड़ लिया & उनसे खेलने लगी.प्रणव के हाथ भी नीचे आके सास की चौड़ी गंद से चिपक गये थे.रीता अब मस्त हो गयी थी & बेटी की मौजूदगी अब उसे असहज नही कर रही थी बल्कि अब उसे इस खेल मे मज़ा आ रहा था.उसने भी अपने हाथ नीचे किए & अपने दामाद की पुष्ट गंद को दबाने लगी.उसके होंठ प्रणव के होंठो को छ्चोड़ नीचे आ रहे थे & उसके सीने पे घूम रहे थे.उसके बालो को जीभ से अलग करती वो उसके निपल्स को छेड़ रही थी.

"ओह्ह..प्रणव..आइ लव यू,डार्लिंग!",शिप्रा ने हाथ पति के नाज़ुक अंगो से उपर खींच उसके सीने पे लगाए तो उसकी मा के होंठ और नीचे चले गये & दामाद की नाभि तक पहुँच गये.शिप्रा प्रणव की पीठ मे अपनी छातिया धँसती उसके कंधे को चूमते हुए अपने प्यार का इज़हार कर रही थी.उसने भी सर बाए कंधे के उपर से पीछे घुमाया & अपनी बीवी के गुलाबी होंठ चूम लिए.

"आहह..!",उसने शिप्रा के होंठ छ्चोड़ नीचे देखा.फर्श पे बैठी रीता उसके लंड को चूसने मे जुट गयी थी.शिप्रा उसके बाए कंधे से होंठ नीचे ले जाते हुए उसके बाए,उपरी बाज़ू को काट रही थी.प्रणव ने अपने हाथ नीचे किए और दाया सास के सर पे रख उसे अपने लंड पे दबाया & बाए को पीछे ले गया तो शिप्रा थोड़ा बाई तरफ हुई & उसने उसकी चूत मे उंगली घुसा दी.रीता ने लंड चूस्ते हुए बेटी की छ्होटी सी कसी चूत को देखा & दिल ही दिल मे उसकी खूबसूरती की तारीफ किए बिना नही रह सकी.शिप्रा ने पति के हाथ के अपने नाज़ुक अंग को सहलाते ही दोबारा उसके होंठो से अपने होठ सटा दिए.

उसका बाया हाथ पति के जिस्म पे फिरता नीचे आया तो उसे रीता ने थाम अपनी ओर खींचा.शिप्रा ने चौंक के मा को देखा जो लंड चुस्ती उसे अपनी ओर बुला रही थी.शिप्रा प्रणव के सामने गयी तो रीता ने उसे भी अपने साथ बिठा लिया & दामाद का लंड अपने मुँह से निकाल बेटी के मुँह मे दे दिया.शिप्रा ने मुस्कुराते हुए मा को देखा & लंड चूसने लगी.रीता दामाद के आंडो को अपने हाथो से दबा रही थी.

रीता की निगाह शिप्रा की गोल छातियों पे पड़ी तो वो उन्हे छुने से खुद को रोक नही पाई.शिप्रा मा के हाथो की च्छुअन से सिहर उठी & लंड चूस्ते हुए मा को देखा.रीता ने झिझक भरी मुस्कान के साथ हाथ पीछे खिचना चाहा तो शिप्रा ने हाथ वापस अपनी छातियो पे दबा दिया.अब रीता बाए हाथ से प्रणव के अंडे & दाए से शिप्रा की छातिया दबाने लगी.प्रणव तो इस वक़्त खुशी से पागल हुआ जा रहा था.2-2 खूबसूरत औरतें उसके कदमो मे बैठी उसकी मर्दानगी की इबादत कर रही थी.1 मर्द के लिए इस से मस्तानी बात क्या हो सकती थी!

शिप्रा की छातियो मे दर्द हो रहा था & उसका दिल कर रहा था की कोई उन्हे मसले & जम के चूसे.प्रणव तो खड़ा था तो उसने मा की गर्दन पकड़ उसके मुँह को ही अपनी चूचियो पे दबा दिया.रीता चौंकी तो ज़रूर मगर बेटी की हसरत पूरी करते हुए उसने उसकी चूचियो को मुँह मे भर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया.दोनो औरतो के लिए ये पहला मौका था जब वो किसी दूसरी औरत के जिस्म से यू खेल रही थी & दोनो को एहसास हुआ की दोनो को इसमे काफ़ी मज़ा आ रहा था.

कुच्छ देर बाद शिप्रा ने मा के सर को अपने सीने से उठाया & उसके होटो पे हल्के से चूमा & फिर उसके मुँह मे अपने पति का लंड दिया & फिर अपना मुँह मा की भारी-भरकम & थोड़ी सी लटकी मगर दिलकश छातियो से लगा

दिया.रीता के जिस्म मे तो जैसे बिजली की लहर दौड़ गयी & उसके होंठ प्रणव के लंड पे & कस गये.प्रणव ने आह भरी & रीता ने भी.बेटी के चूचिया चूसने से ही वो झाड़ गयी थी.

उसने लंड मुँह से निकाला & उसे शिप्रा की तरफ मोदते हुए प्रणव के आंडो को मुँह मे भर लिया & उन्हे चूसने लगी.शिप्रा ने भी मा की छातियो छ्चोड़ अपना मुँह प्रणव के लंड से लगा दिया.प्रणव ने कैसे खुद को झड़ने से रोका था ये वोही जानता था.उसने अपना ध्यान इन दो मस्तानी हुसनपरियो से थोड़ा भटकने के लिए फिर से समीर & रंभा की बात छेड़ दी,"..मगर मोम आपको समीर से पुच्छना चाहिए कि उसकी शादीशुदा ज़िंदगी मे कुच्छ गड़बड़ तो नही."

"रीता ने फिर बुरा सा मुँह बनाया & उसके आंडो के उपर की त्वचा को आगे के दन्तो मे पकड़ के हल्के से खींचा तो प्रणव की आह निकल गयी,"..फिर वही बात.मैने कहा ना समीर आजकल मेरी परवाह नही करता.",मा & बेटी प्रणव की अन्द्रुनि टाँगो & जाँघो पे हाथ फिराते हुए उसकी गंद को भी मसल रही थी.

"वैसे मोम,आजकल समीर प्रणव की भी इज़्ज़त नही करता.",शिप्रा ने शिकायत की.

"क्या?!"

"छ्चोड़ो शिप्रा.",प्रणव ने बीवी के मुँह से लंड निकाला & दोनो औरतो को खड़ा कर अपने आगोश मे भर लिया & बारी-2 से चूमने लगा.उसके दाया हाथ रीता को थामे था & बाया शिप्रा को.रीता का बाया प्रणव की कमर मे था और दाया शिप्रा की और शिप्रा दाए हाथ से पति के बदन को पकड़े थी & बाए मे मा की पीठ.दोनो के होटो का रस पीने के बाद प्रणव ने दोनो को बिस्तर पे जाने का इशारा किया.दोनो औरतें बिस्तर पे चढ़ि.दोनो ही 1 दूसरे के जिस्मो को निहार रही थी.

"नही प्रणव.समीर का रवैयय्या कुच्छ ठीक नही आजकल.ये क्या कि बस कंपनी की परवाह है उसे हम सब की नही!",रीता ने बेटी को बाहो मे भर लिया तो उसने मा की चूचियो मे अपना चेहरा दफ़्न कर दिया,"..आहह..तू तो बड़ी शरारती है!",रीता ने अपने निपल को दन्तो से काटती शिप्रा के बाए गाल पे प्यार भरी चपत लगाई & अपना हाथ उसकी चूत पे रख दिया तो शिप्रा ने शरारत से हंसते हुए मा का हाथ हटाया & उसे पलंग पे चित लिटा दिया & बिजली की तेज़ी से नीचे हो उसकी टाँगो को फैला उसकी चूत से ज़ुबान लगा दी.

"आहह..!",रीता करही & अपनी कोहनियो पे उचकति हुई टाँगे और फैला दी.शिप्रा की लपलपाति जीभ उसकी चूत से बहते रस को चाते जा रही थी.प्रणव ने दाई बाँह सास की गर्दन के नीचे लगाते हुए उसकी छातियों को दोनो हाथो से दबवाते हुए उन्हे चूसना शुरू कर दिया.

"मगर रंभा का उसकी बीवी बने रहना बहुत ज़रूरी है.",उसने सास की चूचियो को अपने होंठो के निशानो से ढँकने के बाद अपने जिस्म को अपने घुटनो पे किया & रीता के मुँह मे अपना लंड दे दिया जिसे वो बड़ी खुशी से चूसने लगी.उसकी आँखो मे दामाद की बात सुन सवालिया भाव उभर आए थे,"..वो इसीलिए की मुझे लगता है कि रंभा को कंपनी की मालकिन बनाना हम सब के फ़ायदे मे होगा.",प्रणव ने बहुत सोच समझ के आज सास को अपनी तरफ पूरी तरह से करने का फ़ैसला कर लिया था.

"ऊहह..!",रीता उसके लंड को छ्चोड़ बिस्तर पे गिर गयी & च्चटपटाने लगी.शिप्रा की जीभ ने उसकी चूत मे उधम मचाके उसे झड़ने पे मजबूर कर दिया था.कुच्छ देर बाद वो संभली तो वो उठी & शिप्रा अपने घुटनो पे खड़ी हो गयी & मा-बेटी 1 दूसरे को शिद्दत से चूमने लगी.प्रणव बिजली की तेज़ी से बीवी के पीछे आया और उसकी नुमाया चूत से मुँह लगा दिया.

"ओवववव..प्रणव..क्या करते हो!..& उस लड़की को हमारे सर पे बिठाने की क्या बकवास कर रहे थे..ऊहह..मोम....आप भी..!",शिप्रा प्रणव की ज़ुबान के चूत मे घुसते ही घुटनो पे खड़ी हो गयी थी & उसी वक़्त रीता ने उसे बाहो मे भर उसकी चूचियो से मुँह लगा दिया था और बहुत ज़ोर-2 से चूसने लगी थी.

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क्रमशः.......
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Reply
12-19-2017, 10:47 PM,
#67
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--66

गतान्क से आगे......

"क्यूकी वो हमारे काबू मे रहेगी.जिस रास्ते समीर चल रहा है,उसपे आगे जाके वो रंभा को किनारे कर किसी & लड़की से शादी करेगा.",रीता ने बेटी की चूचियाँ छ्चोड़ी & उसकी कमर थाम उसे आगे झुका उसके हाथो पे किया & उसकी गंद को सहलाने लगी.

"तुमने कभी मेरी बेटी की गंद मारी है,प्रणव?",उसने बेटी की गंद के छेद को चूमा.

"नही,मोम.",वो सास के बेबाक सवाल से चौंक गया था.

"बहुत ग़लत बात है.मेरी बच्ची की इस खुशी से महरूम रखा है तुमने.",वो अपनी 1 उंगली शिप्रा की गंद मे घुसा तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगी.

"ओईईईईईई..मोम..नहियीईई..बहुत..दा..र्द..होगा.....हाईईईईईईईईईईईईईईईई..!",वो सर उपर झटकती च्चटपटाने लगी.प्रणव जल्दी-2 उसकी चूत चाट रहा था.शिप्रा झाड़ रही थी.रीता ने दामाद को मुस्कुरा के आँखो से इशारा किया & वो फ़ौरन घुटनो पे हो अपना लंड शिप्रा की गीली चूत मे घुसाने लगा.

"उउन्न्ह..हाईईईईईईई..!..तो क्या हुआ?..उस मनहूस की जगह कोई दूसरी ढंग की लड़की आए तो अच्छा ही होगा..आईियययययईए..नाहहिईीईईईईई..प्रनाववववववववव..!",प्रणव ने लंड को कुच्छ धक्को मे चूत के रस से गीला कर शिप्रा की गंद मे डाल दिया था & वो दर्द से कराह उठी थी.रीता ने बेटी के होंठ अपने होंठो मे कस लिए & उसकी चूचिया दबा उसे समझाने लगी.

"बस बेटा..हो गया..शुरू मे दर्द होता है फिर बहुत मज़ा आता है..!"

"तो आप लीजिए ना अपनी गंद मे इसे..हाईईईईईईईईईई..मर गयी मैं तो!..प्रणव तुम्हे देख लूँगी मैं!..ओवववव..",प्रणव ने बीवी की चूत के दाने को हाथ नीचे ले जाके रगड़ना शुरू कर दिया था,"..प्रणव..तुम्हे मोम की गंद भी मारनी होगी..आननह..!",मस्ती मे भीगी आवाज़ मे उसने पति से फरमाइश की.

"हां,मेरी जान ज़रूर."

"चुप बदतमीज़ो.शर्म नही आती मोम के बारे मे ऐसी बातें करते हुए..चलो बताओ कि समीर की दूसरी शादी से क्या नुकसान है हमे?",प्रणव के लंड & उंगली के कमाल से शिप्रा मस्ती मे पागल हो गयी थी & अपनी मस्तानी,आहो भरी आवाज़ मे अपने जिस्म के खुशी मे डूबे होने की बात कर रही थी.

"थॅंक्स मोम,आपकी वजह..से....आननह..आज मुझे..उफफफफफफ्फ़....ये खुशी मिली..आन्न्न्नह..!",वो सर उपर उठाते हुए झाड़ गयी तो प्रणव ने लंड गंद से निकाला & उसकी चूत मे डाल दिया.शिप्रा घुटनो पे खड़ी हो गयी & अपनी बाँह पीछे ले जा पति को थाम लिया.प्रणव ने उसके जिस्म को अपनी बाँहो मे कस लिया & उसकी चूचियाँ दबाते उसके चेहरे & गर्दन को चूमते उसे चोदने लगा.रीता सामने से दोनो के जिस्मो को बाहो मे भर घुटनो पे खड़ी हो गयी & शिप्रा & प्रणव-दोनो के होंठो का बारी-2 से लुत्फ़ उठाने लगी.उसके हाथ दामाद की गंद से लेके बेटी की चूचियो तक घूम रहे थे.

"जहा तक मैं जानता हू..",प्रणव ने रीता को चूमा जोकि शिप्रा की चूत को बाए हाथ से रगड़ते हुए दाए से उसकी चूचियाँ दबा रही थी,"..समीर रंभा को छ्चोड़ कामया से शादी करेगा."

"उउन्न्ह..तो इसमे बुराई क्या है कामया उस लड़की से कही ज़्यादा अच्छी है..ऊव्वववव..!",प्रणव के धक्को ने शिप्रा को मस्ती की कगार से नीचे धकेल दिया था & वो निढाल हो आगे गिरी तो रीता भी लड़खड़ा गयी & बिस्तर पे गिर गयी.प्रणव के लिए भी अब खुद को रोकना मुश्किल था & उसने बहुत ज़ोर से आह भरी & बीवी की कसी गंद की फांको को हाथो मे भींचते हुए अपना गर्म वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया.शिप्रा मा के उपर गिरी थी & रीता ने भी उसे बाहो मे भर लिया था.दोनो की चूचियाँ दोनो के जिस्मो के बीच आपस मे पिस गयी थी & दोनो 1 दूसरे को बड़ी शिद्दत से चूम रही थी.प्रणव घुटनो पे खड़ा उन्हे देख रहा था.

शिप्रा ने चूमते हुए करवट ली & अपनी मा को अपने उपर ले लिया.रीता का जोश से बुरा हाल था & वो अब बेटी के उपर सवार उसकी छातियों को अपनी चूचियो से पीसती उसकी चूत पे अपनी चूत दबाते हुए उसकी ज़ुबान चूस रही थी.शिप्रा ने आँखो से पति को मा की गंद की तरफ इशारा किया & उसका इशारा समझते हुए प्रणव धीरे से रीता के पीछे आ गया.

"कामया अगर इस घर मे आ गयी तो फिर हम सबका पत्ता तो कटा ही समझिए.",प्रणव ने सिकुदे लंड को थोड़ा हिलाया & फिर आगे झुक सास की गंद मे डाल दिया.

"आईईयइईईई..प्रणव....हाईईईईईईईईईईईईईई..!",लंड गंद के सुराख मे घुसते ही सख़्त होने लगा था & उसकी मोटाई ने रीता की गंद को फैला दिया था.वो दर्द से चीख उठी थी.इस से पहले विजयंत मेहरा ने काई बार उसकी गंद मारी थी मगर प्रणव ने अचानक उसकी नाज़ुक गंद पे हमला कर उसे चौंका दिया था.

"और समीर से तो किसी सहारे की उम्मीद बाकी रही नही है.आप और शिप्रा बस नाम के शेर्होल्डर्स रहेंगे & मैं तो हू ही नौकर ही.",प्रणव ने कमर पकड़ रीता को उपर कर लिया था & वो अब अपने घुटनो & हाथो पे झुकी दामाद से गंद मरवा रही थी.शिप्रा उठ के घुटनो पे खड़ी हो गयी थी & रीता उसकी चूत को जीभ से छेड़ रही थी. प्रणव आगे झुका & अपनी बीवी के होंठ चूमने लगा,"..इसीलिए कह रहा हू कि अगर समीर & रंभा की शादी बरकरार रहे तो हमारे लिए अच्छा है & उस से भी अच्छा होगा अगर रंभा हमारा मोहरा बन कंपनी की मालकिन बन जाए."

"उउम्म्म्मम...हुउन्न्ञणणन्..!",बेटी की चूत मे मुँह घुसाए गंद मरवाती रीता झाड़ रही थी मगर दामाद की बात से उसके कान खड़े हो गये थे.

"उउन्न्ह..मोम..!",उसने झाड़ते हुए मस्ती मे शिप्रा के दाने को हल्के से काट लिया था & वो चिहुनक उठी थी & उस से दूर च्चितक गयी थी.प्रणव ने सास की गंद से लंड निकाला & उसे सीधा किया & उसकी चूत मे लंड घुसा दिया.अब वो घुटनो पे खड़ा सास की टाँगे थामे उसे चोद रहा था.शिप्रा मा के सर के पीछे आई & अपनी चूत उसके मुँह पे लगा आगे झुकी & उसकी चूत के दाने को चाटने लगी.चूत पे दोहरी मार से रीता मस्ती मे पागल हो गयी & शिप्रा की गंद को भींचते,आहे भरते हुए उसकी चूत चाट कमर हिलाने लगी.

"तुम..आहह..क्या कहना चाह रहे हो..प्रा..नाव...खुल के कहो..नाआआआआअ....!..समीर मालिक है कंपनी का..ऊहह..वो कैसे हटेगा?..उउन्न्ह..!",प्रणव ने बीवी को उसकी मा के उपर से उठाया & सास के उपर लेट के उसे चूमते हुए उसकी चूचिया दबाते हुए उसे चोदने लगा.

"कुच्छ सोचना पड़ेगा कोई ऐसा उपाय की समीर को कोई तकलीफ़ भी ना पहुचे & रंभा कंपनी की मालकिन बन जाए.",शिप्रा को दोनो को इस तरह लिपटे देख कुच्छ जलन सी महसूस हुई & उसने प्रणव को मा के उपर से उठा दिया & फिर से मा के मुँह पे अपनी चूत रख के बैठ गयी & अपने पति के उपरी बाज़ू पकड़ उसे आगे खींचा & चूमने लगी.रीता बेटी की हरकत पे मुस्कुराते हुए उसकी चूत चाटने लगी.

"मगर हम ही क्यू नही बन जाते मालिक?..उउफफफफफफफ्फ़..!",शिप्रा मस्ती मे कमर उचकाते हुए पति के सीने पे हसरत भरे हाथ फिराने लगी.उसकी मस्ती अब बहुत बढ़ गयी थी.

"क्यूकी समीर की मौत या उसके कंपनी चलाने के नकबिल होने की सूरत मे सारे शेर्स रंभा के नाम हो जाएँगे इसीलिए वो मामूली सी लड़की हमारे लिए बहुत खास हो गयी है.",प्रणव खुशी मे पागल बीवी की चूचियाँ मसलता सास की चूत मे ज़ोरदार धक्के लगाए जा रहा था.रीता भी उसके धक्को के जवाब मे कमर उचकाती नीचे से बेटी की गुलाबी चूत चाट रही थी & शिप्रा मा की ज़ुबान का लुत्फ़ उठाते हुए पति के हाथो से अपनी चूचिया मसळवती,उसे चूम रही थी.

कमरे मे 3 मस्तानी आहें 1 साथ गूँजी & तीनो वासना मे डूबे जिस्म खेल के अंजाम तक 1 साथ पहुँचे.शिप्रा मा की ज़ुबान से झाड़ आगे अपने पति की बाहो मे झूल रही थी जोकि सास की चूत मे वीर्य की बौच्चरें छ्चोड़े जा रहा था & उस वीर्य और उसे चोदने वाले लंड की रगड़ से बहाल हो रीता दोनो के नीचे झाडे जा रही थी.कुच्छ पॅलो बाद प्रणव बिस्तर के बीच लेटा था & उसकी दाई बाँह मे रीता & बाई मे शिप्रा उस से चिपकी लेटी थी.रीता की दाई & शिप्रा की बाई टांग उसके जिस्म के उपर थी & दोनो उसे चूमे जा रही थी,"तुम्हे जो भी करना है करो,प्रणव..",रीता ने दामाद के होंठो को चूमा,"..अब हम तीनो 1 साथ हैं.",उसने बेटी की ओर देखा तो उसने मा के दाए हाथ को मुस्कुराते हुए थामा & पति को चूम लिया.तीनो वसाना के मस्ताने खेल मे 1 बार फिर डूब गये.

रंभा कार से उतरी & सामने के घर को देखने लगी.देवेन कार पार्क कर रहा था.दोनो अभी-2 सवेरे का नाश्ता कर होटेल छ्चोड़ के निकले थे.1 रात के किराए के साथ-2 देवेन ने अपनी दीवानगी भरी चुदाई के दौरान कमरे की हालत बिगाड़ने का मुआवज़ा भी भरा.सामने का घर ना बहुत बड़ा था ना ही बहुत छ्होटा.लकड़ी के छ्होटे से गेट को खोल देवेन & वो घर के अहाते मे दाखिल हुए.सामने 1 सिल्वर कलर की मारुति ज़ेन खड़ी & उसके दोनो तरफ फूलो की क्यारिया थी.देवेन आगे बढ़ा & घर के बरामदे के दरवाज़े के बाहर लगी घंटी का स्विच दबाया.

"हेलो,देवेन.",घर का दरवाज़ा 1 मोटे,बूढ़े करीबन 60-65 बरस के विदेशी ने खोला.दोनो मर्दो ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया.

"हेलो,डॉक्टर.",देवेन ने रंभा की ओर इशारा किया,"..ये रंभा है,डॉक्टर."

"हेलो,रंभा.",डॉक्टर ने अपना हाथ रंभा की ओर बढ़ाया & उसे तारीफ भरी निगाहो से देखा.रंभा ने फूलों के प्रिंट वाली पीली सारी & स्लीव्ले ब्लाउस पहना था.सारी के झीने कपड़े से उसका गोल पेट & ब्लाउस के गले मे से झँकता क्लेवेज़ तो नुमाया हो ही रहे थे साथ ही उसकी नर्म,गुदाज़ बाहे भी सभी के देखने के लिए खुली थी,"..कैसी हैं आप?"

"हाई..ठीक हू.",उसकी बिल्कुल सॉफ लहजे मे बोली हिन्दुस्तानी सुन रंभा चौंक उठी.उस विदेशी के गोरे चेहरे पे गर्मी की वजह से गुलाबी चकत्ते पड़े हुए थे.लगता था जैसे उसे यहा की गर्मी की आदत नही थी.शक्ल से ही वो बहुत खुशमिजाज़ इंसान लग रहा था,"..आप कैसे हैं?"

"बहुत अच्छा.",उसने रंभा से हाथ मिलाया,"..मेरा नाम यूरी पोपव है.आप मुझे यूरी कह सकती हैं."

"यही हमारे मरीज़ के डॉक्टर हैं,रंभा.",देवेन & डॉक्टर उसके हैरत भर्रे चेहरे को देख हंस रहे थे,"..तुम इनकी हिन्दुस्तानी सुन चौंक गयी हो ना!लो डॉक्टर,1 & देसी तुम्हे देख चौंक गया!",दोनो ने फिर ठहाका लगाया,"..रंभा,ड्र.पोपव रशिया से हैं & हमारे मुल्क मे पिच्छले 20 सालो से रह रहे हैं.इनके घर & इस क्लिनिक..",दोनो घर के ड्रॉयिंग रूम से होते हुए 1 गलियारे से हो घर के पिच्छले हिस्से मे आ गये थे जहा यूरी का क्लिनिक था.दरअसल ये घर का पिच्छला हिस्सा नही सामने का हिस्सा था,"..को देख ये मत सोचना कि ये कोई मामूली डॉक्टर हैं.यूरी इंसान के जिस्म की कोई भी बीमारी ठीक कर सकता है."

"ना!",यूरी ने दोनो को बैठने का इशारा किया & खुद अपनी कुर्सी पे बैठ गया,"..ठीक करना केवल ऑल्माइटी के हाथ मे है.मैं बस बीमारी समझ के ट्राइ कर सकता हू."

"ओके,भाई.चलो अब हमारे मरीज़ के बारे मे बताओ."

"उस से पहले ज़रा मैं मोहतार्मा की थोड़ी खातिर तो कर लू!",यूरी उठा & कमरे से बाहर गया जब वापस आया तो उसके हाथो मे 3 ग्लास & 1 जग था.उसने तीनो के लिए नींबू-पानी धारे & दोनो को 1-1 ग्लास दिया & खुद भी 1 ग्लास ले लिया,"..मैने विजयंत के काफ़ी टेस्ट्स किए.इनके जिस्म मे इनका दिल,हाज़मे के अंग,किड्नी,लिवर वग़ैरह सब बिल्कुल ठीक काम कर रहे हैं.इनका जो भी आक्सिडेंट हुआ उसमे इन अंगो को ना ही कोई नुकसान पहुँचा & ना ही जिस्म की कोई भी हड्डी टूटी..",उसने अपना कंप्यूटर ओन कर स्क्रीन रंभा की ओर किया.

"..पर इनको सर पे चोट लगी है जोकि उस वाइड ने अपनी जड़ी बूटियो से ठीक करने की कोशिश की.उसकी दवा से उपर चमड़ी का घाव तो भर गया लेकिन अन्द्रुनि चोट पे कोई असरा नही हुआ.मैने उसके दिमाग़ के हर तरह के स्कॅन्स किए हैं.अब चोट इतनी भी गहरी नही लगती उन रिपोर्ट्स के मुताबिक की उसे कोई बहुत नुकसान पहुचे मगर इंसानी जिस्म के बारे मे आप कुच्छ कह नही सकते..",वो अपना शरबत पीना तो भूल ही गया था & बस विजयंत के केस के बारे मे बोले जा रहा था.

"..वो बोल सकता है,अपने सारे काम कर सकता है मगर जैसे इस कंप्यूटर की हार्ड डिस्क्स कोई डेलीट कर दे,उसी तरह वो भी सब भूल गया है.सब कुच्छ!"

"तो कोई तरीका नही डॉक्टर,जिस से याददाश्त वापस आए?"

"कंप्यूटर मे डाटा तो रिट्रीव हो सकता है मगर मेडिकल साइन्स ने कोई ऐसी दवा तो ईजाद की नही है लेकिन हा हम कोशिश कर सकते हैं."

"कैसी कोशिश?"

"उस से बातें कीजिए.उसे उसकी पिच्छली ज़िंदगी के बारे मे बताइए.फोटोस दिखाइए,उन जगहो पे ले जाइए जहा वो गया था या जिनसे कुच्छ ज़रूरी यादें जुड़ी हैं."

"ऐसे लोग जिनसे उसकी ज़िंदगी की ज़रूरी यादें जुड़ी हो,उनसे भी तो मिलवा सकते हैं?"

"हां ज़रूर.बस इतना ध्यान रहे की इसके दिमाग़ पे बहुत ज़्यादा ज़ोर ना पड़े वरना हो सकता है की उसके दिमाग़ को झटका लगे & उसे डॅमेज हो जाए."

"हूँ."

"विजयंत!",डॉक्टर ने आवाज़ दी तो अंदर के 1 कमरे से विजयंत बाहर आया.रंभा ने उसे देखा.सलीके से रहने की वजह से अब वो अच्छा लग रहा था मगर उसकी आँखे अभी भी वैसे ही बेनूर थी.

"मैने कल रात तुम्हारा फोन आने पे इसे यूरी के पास छ्चोड़ दिया था.",देवेन उठ खड़ा हुआ था,"ओके,यूरी चलते हैं.थॅंक्स फॉर एवेरतिंग.अरे हां..1 मिनिट.",देवेन बाहर गया & कुच्छ देर बाद वापस आया तो उसके हाथ मे 1 पॅकेट था,"..कार मे छूट गया था.ये लो.अभी-2 मँगवाया है खास तुम्हारे लिए.",यूरी ने पॅकेट खोला & अंदर से निकली असली रशियन वोड्का देख उसकी आँखे चमक उठी.

"बैठी,दोस्त.इसे ख़त्म कर के जाना."

"नही यूरी..",देवेन हंसा,"..आज तो तुम इसे अकेले ही ख़त्म करो या फिर वेरा को बुला लो.",उसने शरारत से कहा तो दोनो दोस्त फिर हंस पड़े.कुच्छ देर बाद देवेन,रंभा & विजयंत देवेन की कार मे बैठे उसके घर जा रहे थे

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क्रमशः.......
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12-19-2017, 10:47 PM,
#68
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--67

गतान्क से आगे......

"ये ड्र.यूरी गोआ मे कब से हैं?",रंभा कार की खिड़की से बाहर के नज़ारे को देख रही थी.कार गोआ के भीड़-भाड़ वाले इलाक़े से बाहर निकल आई थी.

"उस इंसान के बारे मे तुम्हारे दिल मे सवाल पे सवाल मचल रहे हैं.है ना?",देवेन हंसा,"..रंभा,यूरी 1 नुरोसर्जन है.रशिया मे वो क्या करता था मुझे ठीक से नही पता,बस लोगो से कभी-कभार ये सुना है की वो शायद पुराने सोवियट संघ यानी यूयेसेसार की जासूसी एजेन्सी केजीबी मे काम करता था.अब वाहा क्या हुआ कि उसे अपना मुल्क छ्चोड़ यहा आना पड़ा ये मुझे नही पता.बस इतना जानता हू कि,वो 1 कमाल का डॉक्टर है & मैने उसे आज तक किसी के मर्ज़ को नही पकड़ते नही देखा है."

"हूँ.",रंभा ने सर घुमा के विजयंत मेहरा को देखा.वो बस खिड़की से बाहर देखे जा रहा था.उसने रंभा को देखा तो रंभा मुस्कुरा दी मगर उसके चेहरे पे कोई भाव नही आए.रंभा ने सर आगे किया & सामने के रास्ते को देखने लगी.कुच्छ ही देर मे कार देवेन के घर के अहाते मे खड़ी थी.

देवेन का घर कोई बुंगला तो नही था मगर था काफ़ी बड़ा.देवेन ने कार अहाते मे लगा के गेट बंद किया & डिकी से रंभा का समान निकाल घर के अंदर चला गया.उसके पीछे-2 रंभा भी आगे बढ़ी.

आगे बढ़ती रंभा अचानक रुक गयी & पीछे घूम के देखा.विजयंत मेहरा उसका आँचल पकड़े खड़ा था.रंभा घूमी तो आँचल उसके सीने से पूरा हट गया & उसका स्लीव्ले ब्लाउस मे ढँका सीना & गोरा पेट दिखने लगे.रंभा विजयंत के चेहरे को गौर से देख रही थी,उसकी आँखे अब बेजान नही बल्कि उलझन से भरी दिख रही थी.रंभा ने गर्देन घुमाई & देवेन को देखा.उसका समान कमरे मे रख के वापस लौटने के बाद वो भी विजयंत की हरकत देख चौंक गया था.उसने भी रंभा को देखा & हल्के से सर हिलाया जैसे ये कह रहा हो कि उसे भी कुच्छ समझ नही आ रहा था.रंभा ने वापस चेहरा विजयंत की ओर किया & उसकी आँखो मे आँखे डाल दी.उसे ज़रूर कुच्छ याद आया था & तभी उसने उसका आँचल पकड़ा था..शायद रंभा & उसकी पहली रात याद आई थी उसे.ये ख़याल आते ही रंभा के दिमाग़ मे बिजली कौंधी..ड्र.पोपव ने कहा था कि उन्हे विजयंत को बीती बाते याद दिलाने के लिए उसे उन बातो के बारे मे बताना चाहिए..& अगर बताने के बजाय जताया जाए तो!

रंभा ने 1 क़ातिल मुस्कान अपने ससुर की ओर फेंकी & घूमते हुए कमरे मे आगे देवेन की ओर बढ़ने लगी,इस तरह की उसकी सारी खुलती जा रही थी.देवेन अब उसे भी हैरत से देख रहा था कि तभी उसके दिमाग़ मे बिजली कौंधी & उसे अपनी प्रेमिका की हरकत की वजह समझ आ गयी & वो भी मुस्कुराने लगा.रंभा अब अपने दोनो प्रेमियो के बिल्कुल बीच मे खड़ी थी.विजयंत उसे कुच्छ पल देखता रहा & फिर उसके करीब आने लगा.रंभा के करीब पहुँच उसने उसका आँचल छ्चोड़ दिया.वो अपनी बहू के बिल्कुल करीब खड़ा उसकी आँखो मे देख रहा था.अपने चेहरे पे उसकी गर्म साँसे महसूस करते ही रंभा को भी उसके साथ बिताए पॅलो की याद आ गयी & उसका दिल धड़क उठा.अब उसका दिल देवेन का था मगर विजयंत के साथ भी उसने केयी खुशनुमा पल बिताए थे.

विजयंत की आँखे अभी भी उलझन भरी जैसे कुच्छ समझने की कोशिश करती दिख रही थी.वो बहुत धीरे-2 आगे झुक रहा था.रंभा के होंठ खुद बा खुद खुल गये थे.वो समझ गये थे कि विजयंत के लब उनसे मिलने ही वाले थे & अगले ही पल वही हुआ.विजयंत उसके होंठ चूम रहा था & वो उसका पूरा साथ दे रही थी.उसकी आँखे बंद हो गयी & वो बस अपने होंठो पे विजयंत के होंठो की लज़्ज़त महसूस किए जा रही थी.काई पॅलो बाद जब किस तोड़ी & उसने आँखे खोली तो विजयंत को वैसे ही कुच्छ समझने की कोशिश करते उसे देखता पाया.वो कुच्छ करती उस से पहले ही 1 जोड़ी हाथो ने उसकी उपरी बाहे थाम उसे थोड़ा पीच्चे किया & फिर उसके दाए कंधे के उपर से 1 सर आगे झुका & देवेन के होंठ उसके होंठो के रस को पीने लगे.रंभा की आँखे फिर मूंद गयी.घर की दहलीज़ पे कदम रखते हुए उसने सोचा भी नही था कि यहा माहौल ऐसा नशीला हो जाएगा.

“हुन्न्ञन्..!”,उसने देवेन के होंठ छ्चोड़े तो विजयंत ने फिर उसके होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे ले लिया था.इधर विजयंत उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था & उधर देवेन उसके बालो को उठा उसकी गर्देन के पिच्छले हिस्से को चूम रहा था.रंभा इतनी सी देर मे ही पूरी तरह से मस्त हो गयी थी विजयंत की जीभ को पूरे जोश से चूस रही थी.देवेन उसकी गर्देन को चूमते हुए नीचे जा रहा था.उसके तपते होंठ रंभा की रीढ़ पे चलते हुए नीचे जा रहे थे.रंभा का जिस्म सिहर रहा था.देवेन उसकी पीठ के बीचोबीच चूमता उसकी कमर तक पहुँच गया था & दोनो तरफ के मांसल हिस्सो को दबाते हुए चूमे जा रहा था.

विजयंत अपने चेहरे को घूमाते हुए उसकी ज़ुबान से खेल रहा था की रंभा ने महसूस किया की देवेन के हाथ उसकी कमर की बगलो से आगे आए & उसके पेट को सहलाते हुए उसकी कमर मे अटकी सारी को खींच दिया.उसी वक़्त विजयंत उसके होंठो को छ्चोड़ उसके गालो & ठुड्डी को चूमने लगा.देवेन उसकी सारी को उसके जिस्म से अलग कर चुक्का था & उसके होंठ अब रंभा की पीठ पे उपर बढ़ने लगे थे.विजयंत उसकी गर्देन चूमता हुआ नीचे आया & ब्लाउस के गले मे से झँकते उसके क्लीवेज को चूमा.रंभा की धड़कने अब बहुत तेज़ हो गयी थी.देवेन उसके ब्लाउस की बॅक से दिखती उसकी पीठ चूम रहा था & विजयंत उसकी चूचियाँ.देवेन थोड़ा & उपर बढ़ा & विजयंत नीचे.थोड़ी ही देर बाद रंभा पीछे हुई & देवेन के चौड़े सीने के सहारे खड़ी हो गयी.देवेन उसकी गुदाज़ बाहो को दबाता हुआ उसके होंठ चूम रहा था & विजयंत उसकी कमर को थामे उसके पेट पे अपनी ज़ुबान फिरा रहा था.

“उउम्म्म्ममम..आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..!”,रंभा का जिस्म कांप रहा था & उसने देवेन के होंठो से अपने होठ खींच लिए.विजयंत उसकी नाभि की गहराई मे अपनी जीभ उतारे बैठा था & देवेन उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमे जा रहा था.रंभा की शक्ल देख ऐसा लग रहा था कि वो बहुत तकलीफ़ मे है जबकि हक़ीक़त ये थी कि इस वक़्त तो वो खुशियो के आसमान मे उड़ रही थी.वो दोनो प्रेमियो की हर्कतो से पहली बार झाड़ गयी थी.देवेन ने पाने हाथ आगे किए & उसकी कसी छातियो की गोलाईयो पे अपने दोनो हाथो की 1-1 उंगली को चलाने लगा.विजयंत भी उसके पेटिकोट के उपर से उसकी गंद की फांको पे अपनी हथेलिया फिरा रहा था.रंभा ने खुद को दोनो मर्दो को बिल्कुल सौंप दिया था.वो कुच्छ भी नही कर रही थी बस उनकी हर्कतो का लुत्फ़ उठा रही थी.

देवेन के हाथ उसकी चूचियो पे घूमने के बाद उनके बीच आए & उसके ब्लाउस के हुक्स खोल दिए.विजयंत भी उसकी कमर की दाई तरफ लगे पेटिकोट के हुक्स को खोल रहा था.जब देवेन ने उसकी बाहे पीछे करते हुए उसके ब्लाउस को निकाला,तब विजयंत ने भी उसके आख़िरी हुक को खोल उसके पेटिकोट को उसकी कमर से नीचे सरका दिया.अब रंभा पीले लेस की ब्रा & पॅंटी मे थी.विजयंत लेस के झीने कपड़े मे से झँकति अपनी बहू की चूत को देख रहा था & देवेन अपनी महबूबा के कड़े निपल्स को ब्रा मे नुकीले उभार बनाते हुए.रंभा अपने ससुर की गर्म साँसे पॅंटी के जालीदार लेस से होती हुई सीधी अपनी गीली चूत पे महसूस कर रही थी.देवेन उसकी चूचियो के नीचे अपनी हथेलिया जमा उसकी गर्दन & कंधो को चूम रहा था & विजयंत उसकी गंद को दबाते हुए उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड & नाभि के बीच के पेट के हिस्से को.रंभा अब ज़ोर-2 से आहे ले रही थी.

वो बेचैन हो घूमी & अपने पंजो पे थोड़ा उचक के अपने महबूब के होंठो को बड़ी शिद्दत से चूमा.नीचे बैठा विजयंत उसकी इस हरकत पे चौंका मगर अगले ही पल उसके होठ रंभा की चिकनी कमर & पीठ को चखने मे लग गये.रंभा ने अपने बेसब्र हाथो से अपने आशिक़ की कमीज़ के बटन्स खोल उसे उसके जिस्म से जुदा किया & उसके बालो भरे सीने को चूमने लगी.उसके हाथ देवेन की पीठ को उपर से नीचे तक खरोंच रहे थे.देवेन के सीने को जी भर के चूमने के बाद वो फिर घूमी & विजयंत को उपर उठाया & उसकी टी-शर्ट निकाल उसके साथ भी वैसा ही बर्ताव किया.जब वो विजयंत के सीने को चूम रही थी देवेन उसकी पीठ से लेके गंद तक अपने हाथ चला रहा था.

रंभा विजयंत के सीने को चूमते हुए नीचे उसके पेट तक पहुँच गयी थी & उसकी नाभि मे जीभ घुसा उसे मस्त करते हुए उसने उसकी जीन्स उतार दी & फिर उसके अंडरवेर के उपर से ही उसके लंड को चूम लिया.देवेन के दिल मे जलन की लहर दौड़ गयी.उसका दिल किया कि इसी वक़्त रंभा को खींच विजयंत से अलग करे & अपने कमरे मे ले जाए.उसने अपना सर झटका..वो जो भी कर रही थी उस शख्स की याददाश्त लौटाने की गरज से कर रही थी..आख़िर वो उसकी बहू के अलावा उसकी प्रेमिका भी रही थी..& अगर वो उस इरादे से नही बल्कि अपनी वासना के चलते भी ऐसा कर रही थी तो भी उसके दिल मे इस जलन के पैदा होने का कोई मतलब नही था..जब रंभा की मर्ज़ी ही यही थी तो वो क्या कर सकता था!..,”..आहह..!”,अपने लंड पे 1 गीला & गर्म एहसास होते ही वो चौंक उठा & अपने ख़यालो से बाहर आ नीचे देखा.

जब तक वो सोच मे डूबा था तब तक रंभा ने विजयंत के अंडरवेर को उतार उसे पूरा नंगा कर दिया था & उसके लंड & आंडो को जम के चूसा था.मगर इस सब के दौरान वो देवेन को भूली नही थी & पंजो पे बैठे हुए ही उसने घूम के उसकी पतलून की ज़िप नीचे कर उसके अंडरवेर मे सेउसके खड़े लंड को निकाल अपने मुँह मे भर लिया था.उसके दाए हाथ मे विजयंत का लंड था जिसे वो हिला रही थी & बाए मे देवेन के अंडे.देवेन ने उसके सर को पकड़ उसकी निगाहो से निगाहें मिलाई & रंभा उसके दिल का हाल समझ गयी.उसने लंड को हलक तक उतार लिया & देवेन को मस्ती मे पागल कर दिया.देवेन अपने उपर काबू खोने ही वाला था कि किसी तरह उसने लंड को बाहर खींचा & फ़ौरन उसे उपर उठाया.

“अच्छा नही लगा..-“,उसने देवेन को बाहो मे भर अपनी चूचियो को उसके सीने से दबाते हुए आगे बढ़ने की इजाज़त माँगनी ही चाही थी कि देवेन ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर उसे सवाल करने से रोक दिया.

“माफ़ करना,जान..”,उसने उसकी ब्रा के हुक्स खोले तो रंभा ने अपनी बाहे उसके जिस्म से अलग कर ब्रा को उतार दिया,”..पर क्या करू?..मर्द हू ना..अपनी महबूबा को दूसरे के साथ देख के जलन तो होगी ही.पर मेरी छ्चोड़ो & वोही करो जो तुम्हारा दिल कहता है.”,रंभा आगे बढ़ी & उसे बाहो मे कस लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगी..बस जल्द से जल्द ये उलझने सुलझे & फिर वो इस शख्स के साथ सारी ज़िंदगी यू ही उसकी बाहो मे बिताएगी!

“उउन्न्ह..ऊव्वववववव..!”,देवेन आगे झुक उसकी चूचिया चूस रहा था & अपने हाथो से उन मस्त उभारो को दबा रहा था.रंभा मस्ती मे आहे भर रही थी की उसे अपनी गंद पे कुच्छ महसूस हुआ.उसने गर्देन पीछे घुमाई तो देखा कि विजयंत उसकी पॅंटी उतार उसकी गंद चूम रहा था..इसे कुच्छ याद आ रहा था या बस इसके अंदर का मर्द जगा था?..मगर उसने उसका आँचल पकड़ के रोका था..यानी की उसे उनकी पहली रात की कुच्छ तो याद आई थी..अब देखना था कि इस खेल का उसपे क्या असर होता था.

विजयंत उसकी कमर को जकड़े उसकी मोटी गंद को चूमे जा रहा था.उसकी ज़ुबान रंभा के गंद के छेद से लेके गीली चूत तक घूम रही थी.रंभा ने आहे भरते हुए अपना सर पीछे कर लिया & देवेन के सर को जाकड़ अपने सीने पे और दबा दिया.देवेन उसकी चूचियो को मुँह मे भरे जा रहा था.रंभा का जिस्म दोनो मर्दो की हर्कतो से जोश मे पागल हो गया था.उसने अपने जिस्म को दोनो की बाहो मे बिल्कुल ढीला छ्चोड़ दिया था.देवेन की ज़ुबान उसके निपल्स को छेड़ रही थी & विजयंत की ज़ुबान उसके दाने को.रंभा की चूत मे फिर वही तनाव पैदा हो गया था जिसके चरम पे पहुचने के बाद वोही अनोखी खुशी मिलती थी.उसने बाए हाथ से देवेन के बालो को नोचते हुए उसके सर को अपनी चूचियो पे दबाते हुए चूमा & दाए को नीचे ले जाके पीछे की ओर किया & विजयंत के सर को अपनी गंद पे ऐसे दबाया की उसकी ज़ुबान चूत मे और अंदर घुसा गयी.

"आननह..!",उसने सर झटका & ज़ोर से करही.वो दोबारे झाड़ रही थी.कुच्छ पल वो वैसे ही अपने जिस्म को अपने दोनो प्रेमियो की बाहो के सहारे छ्चोड़ खड़ी रही.उसके बाद जब समभली तो उसने विजयंत के बाल पकड़ उसे उठाया & उसे सामने ला देवेन के बाई तरफ खड़ा किया & दोनो को धकेलने लगी.दोनो पीछे हुए तो उसने दोनो को हॉल मे रखे बड़े सोफे पे बिठा दिया.बाया हाथ देवेन के सीने & दाया विजयंत के सीने पे दबाते हुए वो आगे झुकी & पहले देवेन & फिर विजयंत के होंठो को चूमा.दोनो ने उसे पकड़ के सोफे पे अपने बीच गिराने की कोशिश की मगर उसने उनकी कोशिश नाकाम कर दी & सोफे के पीछे चली गयी.

रंभा ने अपना दाया हाथ देवेन के सीने पे रखा & बाया विजयंत मेहरा के सीने पे & उनके सीने के बालो से खेलते हुए सोफे की बॅक के उपर से इस तरह से झुकी उसकी छातियो दोनो मर्दो के बीच लटक गयी.दोनो ने फ़ौरन अपने-2 मुँह उसकी छातियो से लगा दिए.देवेन उसकी दाई चूची चूस रहा था & विजयंत बाई.रंभा ने अपने ससुर को देखा,उसकी हरकतें तो पूरी जोश से भरी हुई थी मगर अभी भी उसके चेहरे पे पुराने भाव नही आए थे.उसके हाथ दोनो मर्दो के सीनो से होते हुए नीचे गये & उनके लंड से खेलने लगे.

दोनो मर्दो ने भी अपना 1-1 हाथ पीछे ले जाके उसकी गंद की 1-1 फाँक को दबोच लिए & मुँह से उसकी चूचियो को & हाथो से गंद को मसलने लगे.रंभा मुस्कुराती हुई आहे बढ़ने लगी.इस मस्ताने खेल मे अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था.तभी विजयंत ने उसे चौंका दिया.उसने उसकी चूची से मुँह हटाते हुए उसके जिस्म को पकड़ उसे सोफे की बॅक के उपर से आगे खींचा.रंभा अचानक की गयी इस हरकत से समभाल नही पाई & आगे गिर गयी.उसका मुँह सीधा विजयंत की गोद मे उसके लंड से जा टकराया.विजयंत ने उसकी कमर को पकड़ा & उसकी गंद की दरार मे जीभ फिराते हुए उसकी गंद की छेद मे उंगली अंदर-बाहर करने लगा.देवेन उसे गौर से देख रहा था.शुरू मे उसे लगा था कि विजयंत को सब याद है & वो बस भूलने का नाटक कर रहा है मगर अभी की थोड़ी जुंगलिपने वाली हरकत ने उसकी सोच को ग़लत साबित कर दिया था.रंभा भी हैरत से बाहर आ गयी थी & विजयंत के लंड को चूसने लगी थी.विजयंत ने उसकी कमर को अपनी तरफ किया & उसकी दोनो टाँगो के बीच मुँह घुसा उसकी चूत चाटते हुए उसकी गंद मे उंगली करता रहा.देवेन से यू अलग-थलग रहना बर्दाश्त नही हुआ & फिर वो उसकी महबूबा थी,विजयंत की नही!

उसने फ़ौरन रंभा की बाहे पकड़ उसे खींचा तो उसके मुँह से विजयंत का लंड निकल गया.रंभा मुस्कुराइ & जैसे ही देवेन ने उसके सर को अपनी ओर किया उसने सर झुका के उसके लंड को मुँह मे भर लिया/देवेन आहे भरता उसकी मखमली पीठ और कमर पे अपने बेसब्र हाथ चलाने लगा.अब उस से बर्दाश्त नही हो रहा था.उसे अब रंभा के जिस्म से मिलना ही था.उसने उसके सर को अपनी गोद से उठाया & उसके कंधे पकड़ के खींचा तो विजयंत के मुँह से रंभा की चूत अलग हो गयी.

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क्रमशः.......
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12-19-2017, 10:47 PM,
#69
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--68

गतान्क से आगे......

देवेन ने उसकी कमर थाम उसे अपनी गोद मे अपने लंड पे बिठाया तो रंभा ने भी दाया हाथ पीछे ले जा उसके लंड को थाम उसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया.रंभा उसके कंधो पे कोहनिया टीका उसे चूमते हुए उसके लंड पे कूदने लगी.देवेन भी उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाते हुए,उसकी पीठ को जकड़ते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.उसने रंभा की गर्दन को जम के चूम & फिर अपने होंठ उसकी चूचियो से लगा दिए.

"एयेयीयैआइयीईयेयीईयी..!",रंभा चीखी तो देवेन ने भी चौंक के उसके सीने से सर उठाया.कब विजयंत सोफे से उठ रंभा के पीछे आ गया था & उसकी गंद मे अपना लंड घुसा दिया था उसे पता ही नही चला था.देवेन की आँखो मे गुस्सा उतर आया & वो विजयंत को परे धकेलने ही वाला था कि रंभा ने आँखो से इशारा कर उसे रोका & उसे चूमा.विजयंत आधा लंड अंदर घुसा बहुत धीरे-2 उसकी गंद मार रहा था.रंभा ने अपने दाए कंधे के उपर से गर्दन घुमाई तो वो आगे झुका & उसके होंठ चूमने लगा.

"उउंम..मैं कौन हू,डॅड..आपको याद है?",रंभा ने दाई बाँह उसकी गर्दन मे डाल दी.वो मस्ती मे पागल हो गयी थी.विजयंत ने उसके होंठो को छ्चोड़ा & उसे देखने लगा जैसे याद करने की कोशिश कर रहा हो कि वो कौन है.उसके माथे पे शिकन पड़ती जा रही थी & रंभा को लगा कि कही वो दिमाग़ पे ज़्यादा ज़ोर ना डाल ले & उसने दोबारा उसके सर को नीचे झुका उसके होंठो को चूम लिया.विजयंत & देवेन दोनो ही उसकी चूचियाँ मसल रहे थे & जब 1 उसके होंठ छ्चोड़ता तो दूसरा चूमने लगता.

"आननह..!",रंभा फिर चीखी.विजयंत ने लंड & अंदर धकेल दिया था.इतनी अंदर तक उसकी गंद मे कुच्छ भी नही घुसा था & उसे दर्द हो रहा था.उसकी कमर थामे विजयंत हल्के-2 उसकी गंद मार रहा था & वो चूत मे घुसे देवेन के लंड पे उच्छल रही थी.उसकी आँखे बंद हो गयी थी & जिस्म मे जैसे जान ही नही थी बस मस्ती ही मस्ती थी.वो झाडे जा रही थी मगर दोनो मर्द रुकने का नाम ही नही ले रहे थे.देवेन ने उसके सीने के उभारो को छूने के बाद सर उठाया तो महबूबा की हालत समझ गया.

"विजयंत,रूको.",उसने बड़ी सायंत मगर हुक्म देती आवाज़ मे विजयंत से कहा.विजयंत रुक गया,"..लंड बाहर खिँचो.",उसने वैसा ही किया.रंभा आश्चर्य से देख रही थी.दुनिया भर को हुक्म देने वाला विजयंत देवेन के हुक्म कैसे मान रहा था!देवेन ने रंभा की कमर को बाहो मे जकड़ा & उसे थाम के खड़ा हुआ & फिर सोफे पे लिटा के उसके उपर आ उसे चूमते हुए चोदने लगा.विजयंत दोनो को खड़ा देख रहा था.

"उउंम..ऊव्ववव..",देवेन का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो मस्ती मे उसकी पीठ नोच रही थी,"..सुनिए..बुरा मत मानिए प्लीज़..पर इन्हे आने दीजिए ना!..मुझे लगता है इन्हे इस से...आहह..कुच्छ याद आ जाए..उउन्न्ह..!",विजयंत के लंड ने उसे कगार के उपर से धकेल दिया था & वो फिर मस्ती की खुमारी मे खो गयी थी.

देवेन का दिल तो नही कर रहा था मगर रंभा की बात सही थी लेकिन उसने सोच लिया था कि इस बार वो उसे उसके जिस्म के साथ जुंगली पने से नही खेलने देगा.उसने रंभा को दाई करवट पे घुमाया & उसके पीछे आया & बाई बाँह उसकी कमर पे डाल उसके पेट को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमने लगा.वो भी बाया हाथ पीछे ले जा मुस्कुराते हुए उसके बालो से खेलने लगी.देवेन उसकी गर्दन चूमते हुए उसकी पीठ पे आया & उसे पेट के बल लिटा उसकी चिकनी पीठ को अपने होंठो से तपाने लगा.रंभा सोफे मे मुँह च्चिपाए चिहुनक रही थी.देवेन उसकी पीठ चूमते हुए नीचे उसकी गंद तक आया & उसकी फांको को फैला उसकी गंद के छेद को चूमने लगा.रंभा उसका इरादा भाँप गयी,"..उउन्न्ह..नही..वाहा बहुत दर्द होता है..ऊहह..!",देवेन अपनी उंगली से उसकी गंद मारने लगा था.रंभा आहे भरती अपनी कमर उचका रही थी.

"आननह..!",देवेन ने उसकी कमर थाम उसकी गंद को हवा मे उठाया & अगले ही पल उसका आधा लंड उसकी महबूबा की गंद मे था.इस बार वो उसके इस नाज़ुक अंग के साथ विजयंत को कोई बेरेहमी करने का मौका नही देना चाहता था.लंड गंद मे धंसाए बिना हिलाए वो उसके उपर लेट गया & उसकी गर्दन & बाल चूमने लगा.जब रंभा थोड़ा संभली तो उसके सीने के नीचे हाथ घुसा उसकी चूचियो को बहुत हल्के-2 दबा के उसने उसकी गंद मारना शुरू किया.रंभा अब आहे भर रही थी & उसके हाथ उसकी बेचैनी की कहानी कहते सोफे के गद्दे मे धँस रहे थे.देवेन ने रंभा के जिस्म को अपनी बाहो मे कसा & करवट ली & अगले पल वो उसके उपर लेटी थी & वो उसके नीचे.

"आओ,विजयंत.",अपने दिल पे पत्थर रख देवेन ने विजयंत को अपनी प्रेमिका की चूत चोदने का न्योता दिया.विजयंत आगे बढ़ा & सोफे पे दोनो के पैरो के पास घुटनो पे बैठ गया.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.विजयंत ने उसकी चूत मे उंगली घसाई तो वो चिहुनक उठी & उसके बदन मे सिहरन दौड़ गयी.उसकी चूत बहुत गीली थी.विजयंत ने उसकी टाँगे फैलाई & आगे झुक के लंड को उसकी चूत मे घुसाया & उसके उपर झुकने लगा.थोड़ी देर बाद लंड जड तक चूत मे था & वो उसके उपर झुका उसकी आँखो मे देख रहा था.रंभा ने अपने हाथ उसके मज़बूत उपरी बाजुओ पे लगाए & उचक के उसके होंठ चूमे तो विजयंत ने कमर हिला उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा उसके होंठ छ्चोड़ नीचे हुई & आँखे बंद कर देवेन के सीने पे लेटी दोनो लंड का मज़ा लेने लगी.

विजयंत की आँखे अभी भी उसे जैसे पहचानने की कोशिश कर रही थी.उसका दिल,उसका दिमाग़ शायद उसे नही पहचानते थे मगर उसके जिस्म को तो रंभा के जिस्म से मिलते ही मानो सब याद आ गया था.उसका लंड उसकी चूत की दीवारो को रगड़ते हुए उसकी कोख पे चोट कर रहा था.रंभा ने अपना सर देवेन के दाए कंधे पे रख दिया था & वो कभी उसे चूमती तो कभी उपर झुके विजयंत को.अब तीनो के जिस्म मस्ती के आसमान मे बहुत ऊँचे उड़ रहे थे.दोनो मर्दो ने भी बहुत देर से अपने उपर काबू रखा हुआ था & अब बात उनके बस के भी बाहर थी.वो भी अब बस जल्द से जल्द अपनी मंज़िल पे पहुचना चाहते थे.देवेन उसकी कमर थामे नीचे से अपनी कमर उचका के आधे लंड से उसकी गंद मार रहा था & उसके उपर झुका मस्ती की शिद्दत से दाँत पिसता विजयंत उसकी चूत मे बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था.रंभा को अब कुच्छ होश नही था.पिच्छले कुच्छ पलो मे वो कितनी बार झड़ी थी उसे कुच्छ होश ही नही था बल्कि उसे तो ये लग रहा था कि वो1 लंबी झदान है जो ख़त्म ही नही हो रही है.

"याआह्ह्ह्ह्ह..!",देवेन करहा & रंभा ने गंद मे उसके गर्म वीर्य की बौच्चरें महसूस की & उसकी चूत ने भी जवाब दे दिया.

"आननह..!",उसने आह भरी & उसका जिस्म अकड़ सा गया & वो जिस्म को कमान की तरह मोदते झड़ने लगी.उसकी चूत विजयंत के लंड पे सिकुड़ने-फैलने लगी & उस वक़्त विजयंत के दिमाग़ मे जैसे 1 धमाका सा हुआ.उसके ज़हन मे काई तस्वीरे 1 साथ कौंध गयी.हर तस्वीर मे वो लड़की जिसकी चूत मे वो लंड धंसाए था उस से चिपकी मदहोश हो रही थी & वो उसके साथ अपने जोश को शांत कर रहा था.

"रंभा..!",वो चीखा & उसने रंभा की चूत मे अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया.रंभा हैरान होके उसे देखने लगी & देवेन भी..क्या उसकी याददाश्त वापस आ गयी थी?विजयंत उसके उपर झुका हुआ हाँफ रहा था,"..तुम रंभा हो.",उसे अभी भी भरोसा नही था.

"हां,मैं रंभा हू.",रंभा खुश हो गयी & उसका चेहरा थामा,"..क्या लगती हू मैं आपकी बताइए?",विजयंत सोचने लगा.उसके माथे पे पहले हल्की शिकन पड़ी मगर धीरे-2 वो गहरी होने लगी.उसके चेहरे पे दर्द के भाव आने लगे,"बस..नही याद आता तो छ्चोड़ दीजिए.",रंभा ने उसे खींच अपने सीने पे उसका सर रख लिया & सहलाने लगी.

कुच्छ पॅलो बाद उसने उसके सर को उठाया & अपने उपर से उठने का इशारा किया तो विजयंत ने उसकी चूत से लंड बाहर खींचा & खड़ा हो गया.रंभा ने अपनी गंद से देवेन का सिकुदा लंड बाहर निकाला & सोफे से नीचे उतरी.देवेन भी उसके पीछे-2 उठा & रंभा को गोद मे उठा लिया & अपने कमरे की ओर बढ़ गया.उनके पीछे-2 विजयंत भी आगे बढ़ा.

"बस,अब ये आराम करेगी,विजयंत.ठीक है?",कमरे की दहलीज़ पे वो रुका & विजयंत से मुखातिब हुआ.विजयंत ने हां मे सर हिलाया,"..& इस कमरे मे तुम इसे नही चोदोगे.ओके?..यहा के अलावा कही भी..पर इस कमरे मे नही..हूँ..अब जाओ..कपड़े पहन अपने कमरे मे आराम करो.मैं कुच्छ देर बाद हम खाना खाएँगे.",विजयंत ने समझने का इशारा करते हुए सर हिलाया & अपने कमरे मे चला गया.

"थोड़ी देर मेरे पास रहिए.",देवेन रंभा को बिस्तर पे लिटा के वाहा से जा रहा था कि उसने उसे रोक लिया.वो उसके बगल मे लेट गया तो रंभा उसके पहलू मे आ गयी,"..इस कमरे मे उन्हे क्यू नही आने दिया?",उसकी आँखो मे शरारत थी,चुदाई के दौरान भी देवेन की उलझन उस से छिपि नही थी & उसे इस वक़्त बहुत प्यार आ रहा था अपने प्रेमी पे.

"तुम्हे नही पता क्या?..कोई और हालात होते तो..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ दी.

"तो?",रंभा ने उसके निपल को खरोंचा.

"तो मैं यहा से बाहर चला जाता.तुमपे अपना ज़ोर चलाने की हिमाकत तो कभी नही करूँगा मगर इस तरह गैर की बाहो मे देखना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता है."

"ओह!देवेन..",रंभा ने उसे पीठ के बल लिटाया,"..आइ'म सॉरी!..मेरा यकीन मानिए..बस 1 बार ये उलझने ख़त्म हो जाएँ..फिर इस दिल,इस बदन को आपके सिवा किसी & को सौंपने के बजाय मर जाना पसंद करूँगी.",

"चुप!",देवेन ने उसके होंठो पे अपना हाथ रखा,"..ऐसी मनहूस बात आगे मत करना.मुझे पूरा भरोसा है तुमपे,रंभा.मैं तो बस अपने दिल का हाल कह रहा था.",उसने उसे अपने आगोश मे भर लिया,"..चलो अब सो जाओ.बहुत थकाया है तुम्हे हमने.",वो प्यार से उसे थपकीया देते हुए सुलाने लगा.

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क्रमशः.......
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Reply
12-19-2017, 10:47 PM,
#70
RE: Desi Kahani Jaal -जाल
जाल पार्ट--69

गतान्क से आगे......

प्रणव की समझ मे नही आ रहा था कि रंभा आख़िर अचानक इस तरह कहा चली गयी थी.रीता ने भी सवेरे नाश्ते के दौरान उसकी & शिप्रा की मौजूदगी मे समीर से जानने की कोशिश की थी मगर उसने टाल दिया था.1 बात और उसे परेशान कर रही थी.उसकी सास ने उस से अपने बेटे की शिकायत की थी कि आजकल वो उसपे भी ध्यान नही देता मगर नाश्ते की मेज़ पे तो समीर का रवैयय्या ऐसा बिल्कुल भी नही था.....तो क्या रीता ने झूठ बोला था मगर उसे झूठ बोलने की क्या ज़रूरत थी?

अब उसे जल्द से जल्द समीर को रास्ते से हटाना था & रंभा को मोहरा बना ट्रस्ट ग्रूप को अपने शिकंजे मे जकड़ना था.शाह के साथ मिलके उसने तय कर लिया था कि समीर को मारना ही होगा पर अब ये सोचना था कि वो उसे कैसे मारे कि समीर की मा & बेहन को ज़रा भी शक़ ना हो & वो वैसे ही उसपे भरोसा करती रहें & सबसे ज़रूरी बात कि समीर की मौत ऐसी हो की क़ानून को उसकी साज़िशो की भनक भी ना लगे.

इधर अपने कॅबिन मे बैठा प्रणव अपने ख़तरनाक मंसूबो के बारे मे सोच रहा था उधर सोनम अपनी सहेली से फोन पे बात कर रही थी,"तेरे मना करने के बावजूद समीर तुझे ढूंड रहा है.कल शाम अपने ऑफीस के फोन से उसने किसी मोहन को फोन किया था.."

"बलबीर मोहन.जानती हू उस आदमी को.उसने क्या बोला?"

"उसने समीर को अपने दफ़्तर या यहा हमारे दफ़्तर मिलने को कहा.वो फोन पे इस बारे मे ज़्यादा बात करना नही चाहता था."

"हूँ.फिर कहा मिल रहे हैं दोनो?"

"अभी वो मोहन हमारे दफ़्तर पहुचा है & समीर ने उसे सीधा अपने कॅबिन मे बुलाया है."

"अच्छा.सुन,तू ज़्यादा ख़तरा मत मोल लेना.उनकी बाते सुनने की भी ज़रूरत नही.ठीक है?"

"अच्छा."

"& सोनम,अगर ज़्यादा परेशानी महसूस हो तो इस नौकरी को लात मारने मे हिचकना नही.मैं हू ना!तुझे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगी."

"तू भी ना यार.दोस्ती मे तकलीफ़ कैसी!",दोनो सहेलियो ने कुच्छ और बाते की & फिर फोन काट दिया.

"क्या हुआ?..किस सोच मे डूबी हो?",रंभा ने अभी-2 दोनो मर्दो के साथ नाश्ता ख़त्म किया था & रसोई मे ही खड़ी हो सोनम से फोन पे बाते कर रही थी.देवेन ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया था & उसके बॉल चूम रहा था.रंभा ने उसे सोनम से हुई बात के बारे मे बताया,"..अच्छा,बलबीर मोहन के गोआ पहुँचते ही मैं उस से मुलाकात करता हू."

"नही.उसकी नौबत ही नही आएगी.",रंभा घूमी & देवेन को बाहो मे भर उसके सीने पे सर रख दिया.

"अच्छा.क्या करोगी?",देवेन उसके बालो मे उंगलिया फिरा रहा था.

"जब कर लूँगी तो बता दूँगी..ये क्या?",उसने उसके कपड़ो पे नज़र डाली,"..कहा की तय्यारि है?..& मुझे साथ नही ले जा रहे?"

"नही.मैं बीसेसर गोबिंद नाम की मच्चली को जाल मे फँसाने के लिए चारा डालने जा रहा हू."

-------------------------------------------------------------------------------

दोपहर 2 बजे देवेन पॅनजिम मे गोआ के फॉरिनर्स रेजिस्ट्रेशन ऑफीस के बाहर अपनी कार लगा रहा था.इमारत के बाहर केयी विदेशी घूम रहे थे & उनका काम करने का भरोसा दिलाते कुच्छ सच्चे,कुच्छ झूठे दलाल भी.देवेन इमारत के बाहर खड़ा उसके मेन गेट को देख रहा था.वक़्त हो गया था.उसे जिस से मिलना था वो बस अंदर से निकलने ही वाला था,या यू कहा जाए की उसकी कार अंदर से निकलने ही वाली थी.कोई 5 मिनिट बाद 1 सफेद मारुति आल्टो अंदर से निकली & देवेन ने अपनी कार उसके पीछे लगा दी.वो आल्टो पॅनजिम की सड़को पे भागी जा रही थी.देवेन समझ गया था कि वो डोना पॉला की ओर जा रहा था.

कुच्छ देर बाद देवेन डोना पॉला के 1 बीच शॅक के बाहर अपनी कार मे बैठा अपनी दूसरी सिगरेट ख़त्म कर रहा था.सिगरेट ख़त्म होते ही वो कार से उतरा & शॅक के दरवाज़े को खटखटाने लगा.2-3 मिनिट बाद 1 गोरी विदेशी लड़की ने दरवाज़ा तोड़ा सा खोला,"यस?..वॉट डू यू वॉंट?",देवेन ने देखा कि लड़की बाए हाथ से दरवाज़े को पकड़े थी & दाए से सीने पे कोई कपड़ा दबाए थी.उसे समझते देर नही लगी कि लड़की नंगी थी & उस कपड़े से अपने सीने को ढाकी थी.

"आइ वॉंट टू मीट दा गाइ यू'रे फक्किंग,सिनॉरीटा!",देवेन ने दरवाज़े को ज़ोर से धकेला & अंदर घुसा गया.वो लड़की चीखती उसपे झपटी मगर उसने उसका हाथ पकड़ उसे घुमाया & उसकी दाई बाँह को उसके जिस्म के पीछे जाकड़ लिया & अपनी बाई बाँह से उसकी गर्दन दबोच ली,"आइ'म नोट हियर तो हर्ट यू,ओके?",लड़की के सीने पे दबा कपड़ा गिर गया था & अब वो पूरी नंगी थी,"..मुझे आपसे काम है बपत साहब.सामने के बिस्तर पे लेटा 1 करीब 36-37 बरस का आदमी अपने नागेपन को च्छूपाते हुए हड़बड़ा के उठ बैठा था.देवेन ने लड़की को उस आदमी पे धकेला & जैसे ही दोनो 1 साथ बिस्तर पे गिरे देवेन ने अपने मोबाइल से दोनो की खटखट 3-4 तस्वीरें खींच ली.

"साले,कुतरेया[email protected]#$%^&*..तू कौन है बे?..अभी तुझे मज़ा चखाता हू!",गलिया बकता वो बौखलाया सा चादर से अपनी कमर को ढँकता देवेन की ओर झपटा.देवेन ने अपने कोट से च्छूपी पॅंट की कमर मे अटकी पिस्टल निकाल के सामने तान दी.बपत जहा का ताहा रुक गया.

उसने 1 कुर्सी खींची & बैठ गया.पास ही 1 आइसबॉक्स मे बियर के कॅन्स पड़े थे.उसने 1 कॅन खोला & पीने लगा,"मिस्टर.अमोल बपत,मुझे आपकी ज़ाति ज़िंदगी से कोई लेना-देना नही है,ना ही मुझे इस बात से कोई मतलब है कि आप कितने करप्ट हैं.आराम से बैठिए.यू टू,सिनॉरीटा.",उसने बंदूक से दोनो को इशारा किया.

"आइ'म नोट हियर टू हर्ट यू,लेडी.प्लीज़ रिलॅक्स.आइ'म हियर टू मीट दिस गाइ & 1 हॅव ए बिज़्नेस प्रपोज़िशन फॉर हिम."

"क्या कारोबार करना चाहता है तू मेरे साथ?..साले है कौन तू?!",बपत चीखा.

"बपत साहब,आप गोआ आने से पहले मुंबई के फ्ररो मे काम करते थे.है ना?"

"हां."

"तो मुझे आपके ज़रिए 1 शख्स के बारे मे पता करवाना है कि वो हमारे मुल्क मे कब घुसा & कहा से आया.जो तस्वीरें इस मोबाइल मे हैं,मैं उनके ज़रिए आपको बलcक्मैल नही करना चाहता.आप मेरा काम कर दीजिए मैं ये मोबाइल ही आपको दे दूँगा फिर उस से आप चाहें अपनी और इसकी..",उसने बियर का कॅन खाली कर उस लड़की की ओर इशारा किया,"..फोटो खीचें या म्‍मस बनाए!",वो हंसा & दूसरा कॅन खोला.

"साले,तू जानता नही मैं कौन हू और तेरा..-"

"बपत साहब,इस तरह से आपसे मिलने का मुझे कोई शौक़ नही था मगर जो बात आपसे करनी है वो ना आपके दफ़्तर मे हो सकती थी ना घर पे & फिर ये बताइए कि मैं आपके पास आके आपको अपना ऑफर देता तो क्या आप मान लेते?..नही ना.अब ध्यान से सुनिए मेरी बात..ये लीजिए..",उसने बियर के 2 कॅन्स खोल बपत और उस लड़की की ओर उच्छाले,"..पीजिए.इट विल कूल युवर माइंड.",वो लड़की की ओर देख के मुस्कुराया.लड़की बिल्कुल नंगी बैठी थी & उसे इस बात की परवाह भी नही थी कि देवेन उसका ननगपन देख सकता है.देवेन उस जैसी ना जाने कितनी लकड़ियो को इस खूबसूरत जगह मे देख चुका था.सब अपने मुल्क को छ्चोड़ घूमते-घामते यहा पहुँचती थी & फिर कभी ड्रग्स या कभी यहा की खूबसूरती & आसान ज़िंदगी से प्रभावित हो या फिर किसी & चक्कर मे फँस बस यही रह जाना चाहती थी.बपत से भी वो अपने वीसा को बढ़वाने के चक्कर मे मिल रही होगी.अजीब जगह थी ये गोआ!

"मैं जिस शख्स को ढूंड रहा हू वो 1 पेशेवर मुजरिम है.उसकी पूरी कहानी आपको सुनाउन्गा तो आप हैरत से पागल हो जाएँगे.उसने हमारी पोलीस को ही नही बल्कि दूसरे मुल्को को & यहा तक की इंटररपोल को भी चकमा दिया है.अब ज़रा सोचिए की अगर उस इंसान को आप पकड़वा दें तो आपकी साख कितनी बढ़ जाएगी!",देवेन ने बाज़ी का सबसे मज़बूत पत्ता फेंका था.उसे पता था कि बपत 1 भ्रष्ट अफ़सर है & इधर उसकी हर्कतो की खबर थोड़ा उपर र्पहुचि है & बहुत मुमकिन था की उसके खिलाफ कोई करवाई भी हो.बपत को भी इस बात की भनक थी.उसकी जागह कोई और होता तो अपने सारे उल्टे-सीधे काम रोक देता,कम से कम तब तक जब तक मामला ठंडा नही पड़ जाता,मगर देवेन जानता था बपत जैसे लोगो के खून मे ही करप्षन होता है & वो उसके बिना जी नही सकते & इसीलिए आज वो उसके सामने इस शॅक मे इस तरह बैठा था.

"साले मुझे कितना बड़ा चूतिया समझता है तू?!",बपत बियर पीते हुए हंसा,"..दा बस्टर्ड थिंक्स आइ'म अन अशोल!",वो लड़की को देख हंसा & फिर उसकी छाती दबाई.लड़की भी हंस दी & 1 झूठ-मूठ की आह भरते हुए बियर पीने लगी.देवेन ने उसकी आँखो मे 1 पल को आया नफ़रत का भाव देख लिया था & लड़की ने जब उस से नज़रे मिलाई तो उसे भी समझ आ गया कि देवेन ने उसके असली भाव समझ लिए हैं.लड़की ने नज़रे झुका ली.देवेन हंसा & बियर का घूँट भरा.

"बपत साहब,आपको सारी कहानी सुनाउन्गा तब आपको यकीन होगा.ये कहानी उस वक़्त शुरू होती है जब मैं जवान था..",देवेन ने दयाल की कहानी सुनना शुरू किया.इस कहानी मे उसने सुमित्रा का बस उतना ज़िक्र किया जितना की ज़रूरी था & रंभा का तो नाम तक नही लिया.

"हूँ.पर यार 1 बात बता मैं पता भी कर लू कि ये बीसेसर गोबिंद या दयाल जो भी नाम है इसका ये यहा आ भी गया है तो भी उसे ढूंदेंगे कैसे?पोलीस को बताए तो वो साला तो फ़ौरन चौकन्ना हो जाएगा!"

"इसका मतलब है कि आप मेरी बात मान गये हैं?"

"केवल ये कि मैं तुझे गोबिंद के मुल्क मे घुसने की डीटेल्स दूँगा."

"ओके.उसके बाद का काम मैं खुद कर लूँगा & दयाल को आपके हवाले कर दूँगा फिर आप वाहवाही लुटीएगा."

"हूँ..पर यार और क्या फ़ायदा है इसमे?"

"बपत साहब,कभी तो पैसो के अलावा कोई & फयडा भी सोचा करो!"

"सोचता हू ना!",बपत के होंठो पे छिछोरि मुस्कान फैल गयी & उसने साथ बैठी लड़की को अपने पास खींच 1 बार फिर उसकी छाती को मसला.

"क्या साहब आप भी!",देवेन ने हवा मे दोनो हाथ उठाए,"..& वो जो डिपार्टमेंट आपकी हर्कतो के बारे मे सोच रहा है वो?..अरे साहब,1 बार ये आदमी पकड़ा गया फिर कौन अमोल बपत के खिलाफ आंटी-करप्षन के केस चलाने की सोचेगा!",बपत उस गहरी निगाहो से देख रहा था.देवेन समझ गया था कि बपत समझ चुका है कि वो देवेन को कमज़ोर समझने की ग़लती नही कर सकता.

"हूँ.ठीक है.मैं पता करता हू पर तुझे कैसे बताउन्गा?अपना नंबर दे."

"नंबर क्या साहब आप फोन ले लेना.",देवेन ने हंसते हुए अपना मोबाइल उसे दिखाया & उठ खड़ा हुआ,"..1 हफ्ते बाद आपसे मिलूँगा."

"पर कहा?"

"आप उसकी फ़िक्र मत करो साहब.आप बस मेरा काम करो & फिर उसका फ़ायदा उठाओ.",देवेन दरवाज़े तक पहुँच गया था.

"& ये मोबाइल की फोटो?"

"वादे का पक्का हू,बपत साहब.आप बस अपना काम करो.उसके बाद फोन आपका & इस बीच इन तस्वीरो के बारे मे किसी को कुच्छ पता नही चलेगा.",देवेन दरवाज़ा खोल के घुमा,"..लेकिन अगर आपने कुच्छ ग़लत किया तो सारी तस्वीरें गोआ के हर अख़बार & हर न्यूज़ चॅनेल की शोभा बढ़ाती दिखेंगी.अच्छा,खुदा हाफ़िज़!",वो बाहर निकल गया.

"हुंग!",बपत ने मायूसी मे सर हिलाया,"क्लोज़ दा डोर बेबी.लेट'स फिनिश वॉट वी हॅड स्टार्टेड.",उसने फिर से उस गोरी को देखते हुए छिछोरि मुस्कान फेंकी & बिस्तर पे लेट गया.

"मिस्टर.मोहन?"

"जी बोल रहा हू.कहिए."

"मैं रंभा बोल रही हू."

"ओह..हेलो,म्र्स.मेहरा.कैसी हैं आप?"

"मैं अच्छी हू & आप शायद मेरी तलश मे निकलने वाले हैं.",बलबीर चौंक गया..आख़िर इसे पता कैसे चला?..किसने बताया होगा इसे?

"आप सोच रहे होंगे कि मुझे पता कैसे चला..है ना?",रंभा घर के पिच्छले हिस्से मे खड़ी थी.यहा केयी गम्लो मे फूल-पौधे लगे थे & छ्होटा सा लॉन था.देवेन का घर कुच्छ ऊँचाई पे बना था & रंभा सामने समंदर के चमकते नीले पानी को देख रही थी,"..मुझे ये तो पता ही था कि डॅड की तरह समीर भी ऐसे काम के लिए आप ही को याद करेगा.सवाल ये था कि कब करेगा तो उसका जवाब मैने ढूंड ही लिया."

"तो आप कहा हैं मुझे ये भी बता दीजिए,म्र्स.मेहरा ताकि मेरा काम भी आसान हो जाए."

"आप तो मेरी इस कॉल को ट्रेस कर के भी ये काम कर सकते हैं,मिस्टर.मोहन."

"जी हां,सो तो है."

"मिस्टर.मोहन,आप मेरे पति से कह दीजिए की मैं गोआ मे हू & चंद दिनो मे डेवाले वापस आ जाऊंगी लेकिन इस दौरान वो मुझे कॉंटॅक्ट करने की कोई कोशिश ना करें ना ही यहा आके मुझे परेशान करें वरना जो तलाक़ उनकी सुविधा के समय पे होगा,उसकी अर्ज़ी अभी कोर्ट मे दाखिल कर मैं उन्हे परेशान कर दूँगी."

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क्रमशः.......
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