Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
09-04-2017, 04:21 PM,
#41
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली चुपचाप वहीं खड़ी बस उसको देखती रही.. वो भिखारी शायद कई दिनों से नहाया नहीं था पानी के साथ उसके बदन से काली मिट्टी निकल रही थी।
वो साबुन को पूरे बदन पर अच्छे से मल रहा था.. जब उसने नीचे केहिस्से पर साबुन लगाया.. तो उसके हाथ लंड को साबुन लगा रहे थे और उसे बड़ा मज़ा आ रहा था।
बस लौड़े पर साबुन लगाते-लगाते उसने कई बार लौड़े को आगे-पीछे कर दिया..
जिससे उसकी उत्तेजना जाग गई..
लंड महाराज अंगड़ाई लेने लगे.. जैसे बरसों की नींद के बाद जागे हों और लंड अकड़ने लगा।
जब लंड महाराज अपने विकराल रूप में आ गए तो डॉली की आँखें फटने लगीं.. और उसका कलेजा मुँह को आ गया और आता भी क्यों नहीं.. भिखारी का लौड़ा था ही ऐसा…
दोस्तो, उसकी लंबाई कोई 9″ की होगी और मोटा इतना कि डॉली की कलाई के बराबर.. और उसका सुपारा एकदम गुलाबी किसी कश्मीरी सेब की तरह अलग ही चमक रहा था.. कड़कपन ऐसा.. कि उसके सामने लोहे की रॉड भी फेल लगे।
डॉली के होश उड़ गए।
वो नजारा देख कर उसका हाथ अपने आप चूत पर चला गया.. उसकी ज़ुबान लपलपाने लगी। डॉली मन ही मन सोचने लगी कि इतना बड़ा और मोटा लौड़ा अगर चूसने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए।
वो बस उसके ख्यालों में खो गई।
भिखारी 25 मिनट तक अच्छे से रगड़-रगड़ कर नहाया।
इस दौरान उसका लौड़ा किसी फौजी की तरह खड़ा रहा।
शायद उसे डॉली की चूत की खुश्बू आ गई थी.. या सामने खड़ी डॉली का यौवन दिख रहा था।
अरे नहीं.. नहीं.. आप गलत समझ रहे हैं.. भिखारी तो बेचारा अँधा ही है.. उसको कहाँ कुछ दिखेगा।
मैं तो उस लौड़े की बात बता रही हूँ.. वो थोड़ी अँधा है हा हा हा हा।
चलो बुरा मान गए आप.. मैं बीच में आ गई आप आगे मजा लीजिए।
भिखारी नहा कर एकदम ताजा दम हो गया.. उसके जिस्म में एक अलग ही चमक आ गई।
उसका रंग साफ था और लौड़ा भी किसी दूध की कुल्फी जैसा सफेद था।
भिखारी ने तौलिए से बदन साफ किया और उसे अपने जिस्म पर लपेट लिया।
भिखारी- बेटी कहाँ हो.. मैंने नहा लिया.. लाओ कपड़े दे दो…
उसकी आवाज़ सुनकर डॉली को होश आया.. उसने दरवाजे को धीरे से बन्द किया।
डॉली- हाँ यहीं हूँ.. आप तौलिया लपेट लो.. मैं दरवाजा खोल रही हूँ।
भिखारी- हाँ खोल दो.. मैंने लपेट रखा है।
डॉली ने आवाज़ के साथ दरवाजा खोला ताकि उसको शक ना हो।
डॉली- बाबा बाहर आ जाओ आपको दिखता तो है नहीं.. अन्दर पानी है.. कपड़े वहाँ पहनोगे तो गीले हो जाएँगे.. बाहर आराम से पहन लो.. मैं आपको कपड़े दे देती हूँ।
भिखारी थोड़ा शर्म महसूस कर रहा था.. मगर वो बाहर आ गया।
डॉली उसका हाथ पकड़ कर कमरे में ले आई और बिस्तर के पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर बैठने को कहा।
भिखारी- बेटी कपड़े दे दो ना..
डॉली- अरे बैठो तो.. एक मिनट में देती हूँ ना…
बेचारा मरता क्या ना करता बिस्तर पर बैठ गया।
डॉली अलमारी से हेयर आयल की बोतल ले आई और उसके एकदम करीब आकर खड़ी हो गई।
डॉली- अब इतने दिन से नहाए हो.. तो सर में थोड़ा सा तेल भी लगा देती हूँ ताकि बाल मुलायम हो जाएं।
भिखारी- अरे नहीं.. नहीं.. बेटी रहने दो.. मुझे बस कपड़े दे दो।
वो आगे कुछ बोलता डॉली ने तेल हाथ में ले कर उसके सर पर लगाने लगी।
डॉली- रहने क्यों दूँ.. अब लगाने दो.. चुप करके बैठो.. बस अभी हो जाएगा।
डॉली तेल लगाने के बहाने उसके एकदम करीब हो गई.. उसके मम्मे भिखारी के मुँह के एकदम पास थे।
डॉली के बदन की मादक करने वाली महक.. उसको आ रही थी।
अब था तो वो भी एक जवान ही ना.. अँधा था तो क्या हुआ.. मगर डॉली के इतना करीब आ जाने से उसकी सहनशक्ति जबाव दे गई और उसका लौड़ा अकड़ना शुरू हो गया।
डॉली ने एक-दो बार अपने मम्मों को उसके मुँह से स्पर्श भी कर दिया और अपने नाज़ुक हाथ सर से उसकी पीठ तक ले गई.. जिससे उसका लौड़ा फुंफकारने लगा.. तौलिया में तंबू बन गया।
भिखारी- ब्ब..बस अब रहने दो.. म..म..मुझे जाना है।
डॉली- अरे क्या हुआ बाबा.. अभी तो आपने खाना भी नहीं खाया.. अच्छा ये बताओ मैंने आपके लिए इतना किया आप मुझे क्या दोगे?
भिखारी- म..मैं क्या दे सकता हूँ बेटी मुझ भिखारी के पास है भी क्या देने को?
डॉली- बाबा आपके पास तो इतनी कीमती चीज़ है.. जो शायद ही किसी और के पास होगी।
इस बार डॉली का बोलने का अंदाज बड़ा ही सेक्सी था।
भिखारी- उह..सी.. क्या है मेरे पास?
डॉली ने लौड़े पर सिर्फ़ अपनी एक ऊँगली टिका कर आह.. भरते हुए कहा- ये है आपके पास.. इसके जैसा शायद किसी के पास नहीं होगा।
भिखारी एकदम घबरा गया और झटके से उठ गया।
इसी हड़बड़ाहट में तौलिया खुल कर उसके पैरों में गिर गया और फनफनाता हुआ उसका विशाल लौड़ा आज़ाद हो गया।
भिखारी- न..नहीं ब..ब..बेटी.. यह गलत है.. म..मुझे जाने दो।
डॉली- आप तो ऐसे घबरा रहे हो जैसे आप लड़की हो और मैं लड़का।
भिखारी- डरना पड़ता है बेटी.. तुम ठहरी पैसे वाली और मैं एक गरीब आदमी.. कोई आ गया तो तुमको कोई कुछ नहीं कहेगा.. मैं फालतू में मारा जाऊँगा।
डॉली ने लौड़े पर हाथ रख दिया और बड़े प्यार से सहलाती हुई बोली।
डॉली- बाबा कोई नहीं आएगा प्लीज़.. मना मत करो.. आपका लंड बहुत मस्त है.. थोड़ा प्यार कर लेने दो मुझे.. आप भी तो मर्द हो आपका मन नहीं करता क्या?
लौड़े पर डॉली के नर्म मुलायम हाथ लगते ही उसका तनाव और बढ़ गया और भिखारी भी अब लय में आ गया।
भिखारी- आहह.. करता है बेटी.. मगर मुझ अंधे को कहाँ ये नसीब होता है।
डॉली- उह.. इसका मतलब आपने कभी कुछ नहीं किया।
डॉली बातों के दौरान लौड़े को सहलाए जा रही थी और कभी-कभी दबा भी देती।
भिखारी- आहह.. ऐसी बात नहीं है.. पहले तो कभी-कभी मेरे पड़ोस की भाभी के मज़े ले लेता था.. आहह.. उफ.. अब जब से अँधा हुआ हूँ तब से बस लौड़ा प्यासा ही है।
अब भिखारी भी खुल गया था और लौड़े जैसे शब्द बिंदास बोल रहा था।
डॉली- उह.. इसका मतलब महीनों से प्यासे घूम रहे हो.. ओफ कितना मस्त लौड़ा है आपका.. मन करता है चूस कर मज़ा ले लूँ मगर आपके बाल बहुत ज़्यादा हैं।
भिखारी- बाल तो बड़े हो गए.. अब कैसे साफ करूँ इनको.. आहह.. चूस लो ना.. मेरा भी मन करता है कि कोई मेरे लौड़े को चूसे.. आहह.. वैसे तेरी उम्र क्या होगी?
डॉली- एक आइडिया है.. आओ बाथरूम में.. अभी दस मिनट में आपके बाल साफ कर दूँगी.. उसके बाद मज़ा करेंगे।
भिखारी भी इस बात के लिए फ़ौरन राज़ी हो गया और होता भी क्यों नहीं.. वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी.. ‘बिन माँगे मोती मिले.. माँगे मिले ना भीख..’
और यहाँ कुछ हाल ऐसा है ‘पेल दो लौड़ा फ्री की चूत में और सुनो ज़ोर की चीख…’
तो दोस्तो, बस डॉली उसे बाथरूम में ले गई और पहले तो कैंची से उस जंगल को काटा और उसके बाद हेयर रिमूवर से उसके बाल साफ किए..
साथ ही साथ अपनी चूत भी दोबारा क्लीन कर ली।
इन सब कामों में 15 मिनट लग गए।
हाँ.. इस दौरान उन दोनों में बातें हुईं जो कुछ खास नहीं थीं क्योंकि काम के वक्त बात ज़्यादा नहीं होती।
अब डॉली ने जब लौड़े पर पानी डाला तो एक अलग ही लंड उसके सामने था.. एकदम चिकना बम्बू जैसा उसकी जीभ लपलपा गई।
डॉली- वाउ.. अब लौड़ा क्या मस्त लग रहा है.. चलो अब बाहर चलो बिस्तर पर आराम से मज़ा करेंगे।
भिखारी- तुम्हारा नाम क्या है.. अब बेटी बोलने का मन नहीं कर रहा तुम्हें.. और तुमने बताया नहीं कि तुम कितने साल की हो।
डॉली- नाम का क्या अचार डालना है.. आप कुछ भी बोल दो मेरी उम्र भी नहीं बताऊँगी बस इतना जान लो.. बालिग हो गई हूँ अब चलो भी…
भिखारी- तुम बहुत होशियार हो मत बताओ कुछ भी.. मगर अपना यौवन तो छूने दो मुझे.. मेरे करीब आओ.. मेरा कब से तुम्हारे चूचे छूने का दिल कर रहा है।
डॉली उसके साथ ही तो थी और उसने सिर्फ़ नाईटी पहन रखी थी मगर भिखारी ने जानबूझ कर ये बात कही क्योंकि वो कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था।
डॉली- मैं कब से आपके पास ही तो हूँ.. अगर मन था तो मेरे मम्मों को पकड़ लेते.. रोका किसने था..
भिखारी- अब तो बिस्तर पर जाकर ही शुरूआत करूँगा.. चलो…
डॉली ने उसका हाथ पकड़ने की बजाए खड़ा लौड़ा पकड़ लिया और चलने लगी.. जैसे हम किसी बच्चे का हाथ पकड़ कर चलते हैं।
दोस्तों लौड़ा तो कब से खड़ा ही था क्योंकि झांटें डॉली ने साफ की और कब से लौड़े पर उसके नरम हाथ लग रहे थे.. वो तो लोहे जैसा सख़्त हो गया था।
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09-04-2017, 04:21 PM,
#42
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बिस्तर पर जाकर डॉली ने नाईटी निकाल दी और एकदम नंगी हो गई.. उसने भिखारी को अपने करीब बैठा लिया।
डॉली- लो बाबा अब जो छूना है छूलो.. मैं आपके पास बैठी हूँ और मुझे तो पहले आपके लौड़े का स्वाद चखना है।
भिखारी- मेरी जान अब तुम बाबा मत कहो.. कुछ और कहो और लौड़े को जितना चूसना है.. चूस लेना.. पर पहले तेरे चूचे तो दबा कर देखने दे।
ये बोलते-बोलते भिखारी ने डॉली के मम्मों को अपने हाथों में लेकर देखे.. बड़े ही कड़क और मस्त मम्मे थे।
भिखारी- वाह.. क्या मस्त अमरूद हैं तेरे.. आज तो मज़ा आ जाएगा तू तो कमसिन कली है.. मैंने ऐसा कौन सा पुन्य का काम किया था जो तेरी जैसी कमसिन चूत भीख में मिल गई.. वाह.. तेरे क्या मस्त चूचे हैं।
डॉली- आहह.. उई आराम से मेरे राजा.. आपका लौड़ा उई कब से खड़ा है.. लाओ मुझे चूसने दो.. आहह.. आप बाद में मेरे मज़े ले लेना आहह.. पहले लौड़ा चूसने दो ना.. मैं कब से तरस रही हूँ आहह..
डॉली नीचे बैठ गई और लौड़े का सुपारा चाटने लगी। वो इतना मोटा था कि उसने बड़ी मुश्किल से मुँह में ले पाया। अब वो आराम से लौड़ा चूसने लगी थी।
भिखारी- आहह.. चूस मेरी जान.. आह आज कई महीनों बाद मेरे लौड़े को सुकून मिलेगा.. आहह.. कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तेरे जैसी कमसिन कली के नाज़ुक होंठ मेरे लौड़े पे लगेंगे।
डॉली को कुछ होश नहीं था.. वो तो बस लौड़ा चूसे जा रही थी और भिखारी उसके सर पर हाथ घुमा रहा था। 
पाँच मिनट बाद डॉली की चूत भी वासना की आग में जलने लगी.. तब कहीं उसने लौड़ा मुँह से निकाला।
डॉली- ऐसा करो मैं उल्टी लेट जाती हूँ.. आप मेरी चूत चाटो बहुत जल रही है.. मैं आपका लौड़ा चूसती हूँ।

भिखारी- नहीं ये सब बाद में.. पहले तुम सीधी हो जाओ.. और अब मेरा कमाल देखो.. मैं कैसे तुम्हारे जिस्म को चूमता हूँ.. तुम मेरी चुसाई को जिंदगी भर नहीं भूल पाओगी.. चलो सीधी हो जाओ अभी तो तेरे मखमली होंठों को चूसना है.. उसके बाद धीरे-धीरे तेरी चूत तक आऊँगा.. देखना मेरा वादा है… चूत तक आते-आते अगर तू ठंडी ना हो गई ना.. तो जो तू कहे वो करूँगा..
डॉली- अच्छा मेरे राजा.. ये बात है.. चूत को चाटे बिना मुझे ठंडी कर दोगे.. चलो आ जाओ मैं भी देखती हूँ.. आज मेरी कैसी चुसाई करते हो।
डॉली सीधी लेट गई और भिखारी उसपर चढ़ गया.. इस तरह चढ़ा कि लौड़ा डॉली की जाँघों में फँस गया और वो डॉली के होंठ चूसने लगा। उसके हाथ भी हरकत में थे.. कभी उसके कान के पीछे ऊँगली घुमाता तो कभी मम्मों के
बीच की घाटी में.. डॉली भी उसका साथ दे रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने होंठों को छोड़ दिया और डॉली की गर्दन चूसने लगा। डॉली तड़पने लगी थी उसकी चूत से लार टपकने लगी थी।
डॉली- आहह.. उई वाह.. मेरे राजा आहह.. क्या मस्त चूस रहे हो.. आह गर्दन से भी सेक्स पैदा होती है मुझे पता ही नहीं था.. आहह.. चूसो आहह..
भिखारी पक्का रण्डीबाज या चोदू था.. वो तो ऐसे चूस रहा था जैसे डॉली उसकी लुगाई हो… और सारी रात उसके पास रहेगी.. उसको किसी के आने का जरा भी डर नहीं था, इतने आराम से सब कर रहा था कि बस डॉली तो वासना की आग में जलने लगी।
उसको हर पल यही महसूस हो रहा था कि अब ये लौड़ा चूत में डाल दे.. अब डाल दे.. मगर वो कहाँ डालने वाला था.. वो तो अभी गर्दन से उसके रसीले चूचों तक आया था। 
जिनको वो एक-एक करके मुठ्ठी में लेकर दबा और चूस रहा था।
डॉली- आ आहह.. उह.. प्लीज़ आहह.. अब चूत चाटो ना.. आहह.. मज़ा आ रहा है.. उफ़फ्फ़ पूरे जिस्म में आग लग रही है.. उई क्या मस्त चूस रहे हो आहह..
भिखारी- जलने दो मेरी जान.. आहह.. जितना जल सकता है.. तेरा बदन जलने दे.. तेरी चूत को रस टपकाने दे.. पूरी गीली हो जाने दे.. तभी तेरी चूत मेरे लौड़े को अन्दर ले पाएगी.. नहीं तो मेरे हथियार का वार सहन नहीं कर पाएगी। 
डॉली- आहह.. उह.. मेरे राजा मैं कोई कुँवारी नहीं हूँ जो सह नहीं पाऊँगी.. आहह.. चूत में कई बार लौड़ा ले चुकी हूँ.. आहह.. अब सब वार सह लिए हैं.. आराम से करो ना.. आहह.. सह लूँगी.. एक बार लौड़ा डाल कर तो देखो.. मेरे राजा।
भिखारी- अभी बच्ची हो.. नहीं जानती कि क्या बोल रही हो.. ये लौड़ा कोई मामूली नहीं.. तुमने बच्चों के लंड लिए होंगे.. आज तेरा असली मर्द से पाला पड़ा है.. देखना अब तक के सारे लौड़े भूल जाओगी।
डॉली- आहह.. उफ देखती हूँ आहह.. वैसे आपका लौड़ा है बहुत बड़ा.. और मोटा भी आहह.. मगर कुछ भी हो.. पूरा ले लूँगी.. आहह.. अब डाल भी दो.. मत तड़पाओ।
भिखारी अपने काम में लगा हुआ था.. अब चूचों से नीचे.. वो पेट पर आ गया था और अपनी जीभ पूरे पेट पर घुमा रहा था।
डॉली बहुत ज़्यादा गर्म हो गई थी। वो भिखारी के बाल पकड़ कर खींचने लगी थी कि अब डाल दो मगर वो पक्का खिलाड़ी था.. सब सहता गया और पेट से उसकी जाँघों को चूसने लगा। डॉली को लगा.. अब चूत पर मुँह आएगा मगर वो जाँघों से नीचे चला गया और उसके पैर के अंगूठे को चूसने लगा। 
बस उसी पल डॉली की चूत का बाँध टूट गया और वो कमर को उठा-उठा कर झड़ने लगी।
बस भिखारी समझ गया कि उसका फव्वारा फूट गया है.. उसने फ़ौरन अपनी जीभ चूत पर लगा दी और रस को चाटने लगा।
डॉली- ससस्स आह ससस्स अब क्या फायदा.. आहह.. कब से बोल रही थी.. तब तो चूत को टच भी नहीं किया और अब चाट रहे हो.. जब मेरा पानी निकल गया आहह..
भिखारी- मैंने कहा था ना.. बिना चूत को छुए.. तुम्हें ठंडी कर दूँगा.. वो मैंने कर दिया.. अब दोबारा गर्म भी मैं ही करूँगा और मेरा लंड जो कब से तेरी चूत में जाने के लिए तड़फ रहा है.. उसको भी आराम दूँगा.. तू बस ऐसे ही पड़ी रह।
डॉली- नहीं.. मैं कब से तड़फ रही हूँ.. मेरे होंठों सूख गए.. लाओ लौड़ा मेरे मुँह में दो और तुम चूत चाटो।
भिखारी को समझ आ गया वो उल्टा हो गया.. यानी डॉली सीधी ही लेटी रही और उसने ऊपर आकर उसके मुँह में लौड़ा डाल दिया और खुद चूत चाटने लगा।
भिखारी कमर को हिला-हिला कर डॉली के मुँह में लौड़ा अन्दर बाहर कर रहा था.. साथ ही साथ उसकी चूत को चाट रहा था। अभी पाँच मिनट भी नहीं हुए होंगे.. डॉली फिर से उत्तेजित हो गई और लौड़े को मुँह से निकाल कर उसे चोदने को बोलने लगी।
दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि एक अँधा आदमी इतने आसन कैसे ले रहा है.. तो आपको बता दूँ कि चुदाई अक्सर रात के अंधेरे में होती है।
वो कहते हैं ना कि रात के अंधेरे में कहाँ मुँह काला करके आई है.. तो दोस्तों आँख वाले भी ये काम चुपके से अंधेरे में करते हैं.. इसमें आँख का कोई काम नहीं.. यहाँ तो जिस्म में आग और लौड़े में जान होनी चाहिए.. इशारे से सब काम हो जाता है और लौड़ा तो ऐसा होता है कि चूत के करीब भी हो ना.. तो अपने आप अन्दर जाने का रास्ता ढूँढ़ लेता है।
मेरी बात वो ही समझ सकता है जिसने ये अनुभव किया होगा। 
तो चलो अब आगे आनन्द लीजिए।
भिखारी समझ गया कि अब ज़्यादा देर करना ठीक नहीं.. कोई आ गया तो सारा खेल चौपट हो जाएगा। 
वो डॉली के पैरों के पास आ गया और उसके दोनों पैर कंधे पर डाल लिए.. लौड़ा अपने आप चूत के पास हो गया।
भिखारी- मेरी जान.. अब संभाल लेना.. मेरा हरफनमौला अब तेरी नन्ही सी चूत में जाने वाला है।
डॉली- आह डाल दो.. अब तो चूत का हाल से बेहाल हो गया है.. अब तो बिना लौड़े के इसको सुकून नहीं आएगा।
भिखारी ने अपना सुपारा चूत पर टिकाया.. ऊँगली से टटोल कर चूत की फाँक को थोड़ा खोला और धीरे से लौड़ा आगे सरका दिया।
डॉली- आहह.. आपका लौड़ा बहुत मोटा है.. उई टोपा घुसते ही चूत फ़ैल सी गई है.. उई आराम से डालना अन्दर.. आहह.. कहीं आपके बम्बू से मेरी चूत फट ना जाए..
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09-04-2017, 04:21 PM,
#43
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भिखारी- डर मत मेरी जान.. तेरी जैसी लड़की तो नसीब से चोदने को मिलती है.. तुझे तकलीफ़ दूँगा तो कामदेव नाराज़ नहीं हो जाएँगे मुझसे.. तू बस थोड़ा दर्द सहन कर ले.. मैं आराम से लौड़ा घुसा रहा हूँ।
भिखारी ने धीरे-धीरे लौड़े को आगे धकेलना शुरू कर दिया। 
वैसे तो डॉली ने चेतन का लंबा लौड़ा चूत में लिया हुआ था मगर ये लौड़ा कुछ ज़्यादा ही मोटा था.. तो उसकी चीख निकल गई.. मगर वो बस आनन्द के मारे आँखें मींचे पड़ी रही।
डॉली- आहह.. ससस्स उह.. डाल दो आहह.. आपके लौड़े में आहह.. इतनी गर्मी है उफ.. चूत की आग और भड़क गई.. आहह.. पूरा डाल दो.. एक ही साथ.. अब बर्दास्त नहीं होता।
भिखारी ने आधा लौड़ा घुसा दिया था.. डॉली की बात सुनकर उसने कमर को पीछे किया और तेज झटका मारा। 
‘फच्च’ की आवाज़ के साथ 9″ का लौड़ा चूत में समा गया।
डॉली- ईएयाया उऊ.. माँ मर गई रे.. आहह.. तुम आदमी हो या घोड़े.. आहह.. कितना बड़ा लौड़ा है.. लगता है तुमने चूत में गड्डा खोद दिया आहह.. कितना दर्द हो रहा है.. अऐईइ.. मगर ऐसा मोटा तगड़ा लौड़ा जब अन्दर गया.. तो मज़ा भी आ गया…
भिखारी- उफ़फ्फ़ जान तेरी चूत तो बहुत टाइट है.. लौड़ा अन्दर फँस सा गया है.. तू सच में बच्चों से ही चुदवाती होगी.. आहह.. अब ले संभाल मेरे वार अब बर्दाश्त नहीं होता.. कब से लौड़ा फुंफकार मार रहा है।
भिखारी ने अब झटके मारना शुरू कर दिए और ‘दे.. घपाघप’ लौड़ा पेलने लगा।
डॉली को दर्द तो हो रहा था मगर वो उसको ज़ोर-ज़ोर से चोदने को बोल कर उकसा रही थी।
उसकी आँखों में आँसू आ गए मगर वासना उन आँसुओं पर भारी थी। वो गाण्ड को उछाल-उछाल कर उसका साथ देने लगी।
भिखारी उसको चोदने के साथ-साथ उसके निप्पल भी चूस रहा था।
करीब 20 मिनट की चूत फाड़ चुदाई के बाद डॉली का बाँध टूट गया और वो झटके खाने लगी। उसकी चूत से रस निकलने लगा।
जिसका अहसास भिखारी ने लौड़े पर महसूस किया और झटके मारना बन्द कर दिए।
जब डॉली शान्त हुई तो वो दोबारा शुरू हो गया।
डॉली- आहह.. उई मेरी चूत दो बार ठंडी हो गई.. आहह.. मगर तुम्हारा लौड़ा झड़ने का नाम भी नहीं ले रहा.. जब से मैंने झांटें साफ कीं.. तब से अकड़ा हुआ है।
भिखारी- अभी कहाँ बेबी.. आह आह.. कई दिनों बाद चूत मिली है आज तो पूरा मज़ा लूँगा.. मेरा इतनी जल्दी नहीं झड़ता.. उस पड़ोसन भाभी को मैं चोदता था ना.. तो उसकी हालत खराब करके ही झड़ता था.. आहह.. उफ तेरी चूत बहुत टाइट है.. मज़ा आ रहा है उह उह।

डॉली- मेरी चूत में जलन होने लगी। दो मिनट का तो आराम दो आहह.. आई.. मैं मुँह से मज़ा दे देती हूँ आहह.. निकाल लो ना.. आहह.. आई.. एक बार…
भिखारी को उस पर रहम आ गया और एक झटके से लौड़ा चूत से बाहर खींच लिया। 
‘सर्ररर’ की आवाज़ के साथ लौड़ा बाहर आ गया.. जैसे किसी ने म्यान से तलवार निकाली हो।
डॉली बैठ गई और लौड़े को चूसने लगी.. उसको अब राहत मिली और लौड़ा अब भी लोहे की रॉड जैसा तना हुआ था.. जिसे उसको चूसने में अलग ही मज़ा आ रहा था।
पाँच मिनट तक वो लौड़ा चूसती रही.. अब उसकी चूत दोबारा चुदने के लायक हो गई.. उसमें पानी रिसने लगा..
भिखारी- मेरी जान.. अब बस भी कर.. चल अब घोड़ी बन जा.. मेरा लौड़ा अब किसी भी वक़्त लावा उगल सकता है।
डॉली घुटनों के बल बैठ गई और भिखारी ने लौड़ा चूत पर टिका दिया और वहाँ बस रगड़ने लगा.. उसने अन्दर नहीं डाला.. उसके हाथ डॉली की गाण्ड पर घूम रहे थे।
डॉली- ससस्स आ डालो ना.. क्या हुआ छेद नहीं मिल रहा क्या.. मैं मदद करूँ..
भिखारी- अरे नहीं मेरी जान.. छेद क्यों नहीं मिलेगा.. क्या कभी सुना है.. साँप को बिल कोई और बताता है.. वो खुद ब खुद ढूँढ लेता है.. मैं सोच रहा हूँ तेरी गाण्ड क्या ज़बरदस्त है.. एकदम मक्खन की तरह.. अबकी बार गाण्ड ही मारूँगा।
डॉली- वो सब बाद की बात है पहले चूत में लौड़ा घुसाओ.. अब जल्दी से अपना पानी निकालो.. मेरी माँ आने वाली है।
भिखारी ने इतना सुनते ही लौड़ा चूत में पेल दिया और ठोकने लगा।
उसने डॉली की कमर पकड़ ली और रफ़्तार से लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा।
डॉली- आआ आआ आईईइ आराम से.. आह क्या हो गया तुमको.. आह आहह.. मर गई रे.. हाय जान निकल गई आ उह..
अबकी बार भिखारी कुछ ज़्यादा ही रफ़्तार से चोद रहा था। वो पूरा लौड़ा बाहर निकालता और एक साथ अन्दर घुसा देता.. जिसके कारण डॉली को दर्द होता और चोट के साथ ही वो सिहर जाती।
दस मिनट तक वो बिना कुछ बोले बस चूत की चुदाई करता रहा।
अब डॉली को भी मज़ा आने लगा था वो गाण्ड को पीछे धकेलने लगी थी।
डॉली- आहह.. आह आईईइ फास्ट आहह.. उहह.. ज़ोर से आहह.. मेरा प्प..पानी आ..आने वाला है.. फास्ट।
भिखारी अपनी पूरी ताक़त से चोदने लगा, उसका लौड़ा भी फूलने लगा था, अब उसका किसी भी पल ज्वालामुखी फूटने वाला था। 
भिखारी- उह उह उह मेरा भी उहह आने वाला है.. आहह.. बाहर निकालूँ क्या आहह.. जल्दी बोलो।
डॉली- आई.. आई.. नहीं आहह.. आहह.. अन्दर ही आहह.. उह.. मैं गई आहह..
उसी पल डॉली का बाँध टूट गया और उसकी चूत से पानी लौड़े पर स्पर्श हुआ.. उसके लगते ही लौड़ा भी फट गया और उससे बहुत तेज पिचकारी निकली.. जिसका फोर्स इतना तेज था कि डॉली की चूत से टकराते ही डॉली की सिसकी निकल गई.. जैसे किसी ने पानी के पाइप से तेज धार चूत में मार दी हो…
लौड़े से वैसी ही कई पिचकारी और निकलीं और डॉली की चूत माल से भर गई।
जब भिखारी ने लौड़ा बाहर निकाला ‘फक’ की आवाज़ से लौड़ा बाहर निकला.. उसके साथ दोनों का मिला-जुला वीर्य भी बाहर आने लगा।
अब दोनों ही थक चुके थे इस पलंग-तोड़.. चूत-फाड़ चुदाई से अब दोनों बिस्तर पर पड़े लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे।
काफ़ी देर तक दोनों वैसे ही पड़े रहे।
भिखारी- वाह जानेमन वाह.. आज तूने कमाल कर दिया.. कोई भीख में रोटी देता है कोई पैसे.. तो कोई कपड़े.. मगर तू सबसे बड़ी दानवीर है.. तूने मुझे भीख में अपनी चूत दे दी वाह.. मज़ा आ गया।
डॉली- ऐसा मत कहो मैंने तुम्हें कोई भीख नहीं दी.. मेरी अपनी चूत में आग लग रही थी। उसकी शांति के लिए मैंने तुम्हें इस्तेमाल किया और कसम से मज़ा आ गया। तुम्हारा लौड़ा बहुत तगड़ा है.. झड़ता ही नहीं कितना चोदा तुमने मुझे.. वाकयी बहुत पावर है आप में..
भिखारी- जान अब गाण्ड कब मरवाओगी? मेरा बड़ा मन हो रहा है.. तेरी मखमली गाण्ड मारने का।
डॉली- अभी नहीं.. मम्मी आ जाएगी’.. तुम बस इसी एरिया में घूमते रहना.. जब भी मौका मिलेगा मैं अन्दर बुला लूँगी और प्लीज़ किसी को बताना मत.. मेरी इज़्ज़त अब तुम्हारे हाथ में है।
भिखारी- अरे मुझे क्या पागल कुत्ते ने काटा है जो मैं किसी को बताऊँगा.. सोने जैसा पानी फेंकने वाली चूत को भला कोई क्यों काटेगा.. उसको तो बस चोदेगा हा हा हा तू फिकर मत कर अब मैं इसी एरिया में भीख माँगता रहूँगा.. जब मौका मिले.. तू बुला लेना तुझे मेरे खड़े लौड़े की कसम है।
डॉली- अच्छा बाबा ठीक है.. अब उठो जल्दी से कपड़े पहनो और निकलो.. माँ आ गईं.. तो सब चौपट हो जाएगा।
डॉली ने उसे पापा के पुराने कपड़े पहना दिए और कुछ खाना भी पैकेट में डाल कर दे दिए। वो खुश होकर वहाँ से चला गया तब कहीं डॉली की जान में जान आई और वो बाथरूम में घुस गई।
उसकी चूत में थोड़ा दर्द था तो वो गर्म पानी से नहाने लगी और चूत को सेंकने भी लगी।
उसने नहाने के बाद भिखारी के पुराने कपड़े फेंके अब उसको बड़ी ज़ोर की भूख लगी और लगनी ही थी.. उसने 9″ के मूसल से इतनी दमदार चुदाई जो करवाई थी।
बस फिर क्या था.. जम कर खाना खाया और अपने कमरे में जाकर सो गई। कब उसको नींद ने अपने आगोश में ले लिया पता भी नहीं चला। उसकी मम्मी आईं.. तब तक वो गहरी नींद में सो गई थी।
रात को कहीं कुछ खास नहीं हुआ तो चलो सीधे सुबह की बात बताती हूँ।
दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि ये कहानी कब से चल रही है मगर अब तक रविवार नहीं आया, अब विस्तार से सब लिखूँगी तो कहानी बड़ी हो ही जाती है.. 
खैर.. अगली सुबह का सूरज निकल आया.. आज रविवार आ गया.. अब आज क्या होता है आप खुद देख लो।
डॉली देर तक सोती रही क्योंकि आज स्कूल तो था नहीं और कल की चुदाई से उसका बदन दुख रहा था।
करीब 9 बजे उसकी मम्मी ने उसे बाहर से आवाज़ लगाई, ‘अब बहुत देर हो गई.. उठ जाओ पढ़ाई नहीं करनी क्या.?’
डॉली अंगड़ाई लेती हुई बोली। 
डॉली- कल शाम को तो इतनी जबरदस्त चुदाई की थी.. अब दोबारा आप चुदाई करने को कह रही हो।
सुशीला- अरे क्या बड़बड़ा रही है.. उठ कर बाहर आजा…
मम्मी की आवाज़ सुनकर डॉली को अहसास हुआ कि उसने ये क्या बोल दिया.. ये तो अच्छा हुआ मम्मी ने नहीं सुना वरना आज तो उसकी शामत आ जाती।
डॉली- हाँ मम्मी आ रही हूँ.. बस 2 मिनट रूको।
डॉली ने दिल पर हाथ रखा वो थोड़ा डर गई थी। उसके बाद वो फ्रेश होने चली गई।
दोस्तो, जब तक ये फ्रेश होती है.. चलो चेतन और ललिता के पास चलते हैं, देखते हैं वहाँ क्या खिकड़ी पक रही है।
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09-04-2017, 04:22 PM,
#44
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
ललिता- क्या बात है मेरे राजा आज तो नहाने में बड़ी देर लगा दी.. अन्दर ऐसा क्या कर रहे थे? कहीं डॉली के नाम की मुठ तो नहीं मार रहे थे ना हा हा हा हा हा…
चेतन- अरे मुठ मारें मेरे दुश्मन.. मैं तो आज उसकी चूत मारूँगा.. नहाने में समय इसलिए ज्यादा लग गया क्योंकि आज लौड़े की सफ़ाई कर रहा था.. यार आज रविवार है तो शाम तक तुम दोनों की चूत और गाण्ड को मज़े से चोदूँगा।
ललिता- ओये होये.. क्या बात है मेरे लिए तो नहीं किया था चिकना.. रात को ऐसे ही मेरी ठुकाई कर दी.. अब मेरा ख्याल तो आप दिल से निकाल ही दो.. रात को क्या कम चोदा है जो अब दोबारा मेरी हालत खराब करना चाहते हो।
चेतन- अरे जानेमन रात को तो मैंने गोली ले ली थी.. ताकि पूरी रात तुम्हें चोद कर खुश कर दूँ.. वैसे बुरा मत मानना मैंने इसलिए चोदा ताकि आज पूरा दिन बस डॉली के मज़े ले सकूँ।
ललिता- अच्छा जी मेरी बिल्ली मुझ ही से मियाऊँ.. कोई बात नहीं जाओ आपको पूरी आज़ादी है… जितना मर्ज़ी उसको चोद लेना मुझे मेरी एक सहेली के घर जाना है.. उसकी बड़े दिनों से याद आ रही है.. आज रविवार है तो आराम से पूरा दिन हम बात कर लेंगे। आप यहाँ मज़े करना। 
चेतन- अरे कौन सी सहेली? हमसे भी मिलवाओ कभी.. और सिर्फ बात ही करोगी या कुछ और करने का इरादा है?
ललिता- बस चेतन आप कुछ ज़्यादा ही फास्ट हो रहे हो.. मैंने डॉली को तुमसे चुदवा दिया.. इसका मतलब यह नहीं.. तुम अब किसी के बारे में भी कुछ भी बोल दोगे।
ललिता की आँखों में गुस्सा साफ नज़र आ रहा था।
चेतन- अरे सॉरी यार.. तुम तो बुरा मान गई.. मैंने बस ऐसे ही मजाक में कहा था।
ललिता- नहीं चेतन ऐसा मजाक दोबारा मत करना.. मैंने डॉली के लिए ये सोच कर ‘हाँ’ कही थी कि दोनों का भला हो जाएगा.. उसको ज्ञान मिल जाएगा और आपको कुँवारी चूत.. मगर इसके अलावा आप किसी के बारे में सोचना भी मत।
चेतन- ओके मेरी जान.. सॉरी.. अब मूड ठीक करो और नास्ता ले आओ बड़े जोरों की भूख लगी है।
दोस्तो, यहाँ तो कुछ खास नहीं हो रहा चलो प्रिया के पास चलते हैं।
कल शाम की चुदाई के बाद रात को रिंकू किसी बहाने से प्रिया के घर गया और उसे दवा और मलहम दे गया। 
उसकी चूत सूज गई थी आज सुबह वो भी देर से उठी थी। अभी नहा कर निकली ही थी कि उसके घर रिंकू आ गया। 
प्रिया- अरे रिंकू भाई आप.. आओ आओ बैठो…
तभी अन्दर से उसके पापा आ गए उन्होंने रिंकू का हाल पूछा वो शायद कहीं जाने के लिए जल्दी में थे तो प्रिया को बोल गए- भाई को चाय दो.. तुम्हारी माँ मंदिर गई हैं मुझे भी जरूरी काम से जाना है।
रिंकू ने भी उनको जाने को कहा और खुद सोफे पर बैठ गया।
प्रिया- हाँ भाई.. कहो क्या पीओगे चाय या कॉफी?
रिंकू- मन तो मेरा.. दूध पीने का कर रहा है।
प्रिया- अच्छा क्या बात है.. शराब से सीधे दूध पर आ गए.. अभी लाती हूँ..
रिंकू- अरे बहना जाती कहाँ है.. गाय या बकरी का नहीं.. तेरा दूध पीना है मुझे.. आजा अभी तो कोई नहीं है पिला दे अपना दूध..
प्रिया- धत.. आप बड़े बेशर्म हो.. कुछ भी बोल देते हो.. मेरे पास कहाँ दूध है.. अभी तो मैं खुद बच्ची हूँ.. जब बच्चे हो जाएँगे.. तब दूध आएगा।
रिंकू- अरे वाह.. क्या बात है बच्चे की बात कर रही हो.. क्या इरादा है तेरा?
प्रिया- मेरा इरादा तो कुछ नहीं है.. आप सुबह-सुबह कैसे आ गए?
रिंकू- मेरी जान आज रविवार है.. कल की चुदाई भूल गई क्या.. चल लगा फ़ोन डॉली को और वहीं बुला ले.. आज पूरा दिन तीनों वहाँ मज़े करेंगे।
प्रिया- पूरा दिन… मगर मैं मम्मी को क्या कहूँगी? 
रिंकू- अरे कह देना.. सहेली के घर इम्तिहान की तैयारी करने जा रही हो.. सिंपल यार…
प्रिया- आइडिया तो अच्छा है.. मगर आज मैं नहीं चुदवा पाऊँगी कल की चुदाई से मेरी चूत सूज गई है.. दर्द भी बहुत हो रहा है.. अगर आज दोबारा चुदवाया तो बीमार हो जाऊँगी इम्तिहान भी सर पर आ गए हैं।
रिंकू- अरे यार पहली बार दर्द होता है.. अब नहीं होगा और मज़ा ज़्यादा आएगा, तेरी गाण्ड भी तो अभी मारनी बाकी है।
प्रिया- ना बाबा ना.. गाण्ड तो इम्तिहान के बाद ही मरवाऊँगी.. कहीं सूज गई तो पेपर के लिए 3 घंटे बैठना पड़ता है.. मुश्किल हो जाएगी।
रिंकू- अच्छा मत चुदवाना.. मगर डॉली को तो बुला ले.. यार तू देख कर ही मज़ा ले लेना लौड़े से नहीं तो चूस कर ही तेरा पानी निकाल दूँगा.. प्लीज़ यार उसके लिए कब से तड़फ रहा हूँ.. तू अच्छी तरह जानती है ना..
प्रिया- आपकी बात सही है मगर शायद आप भूल गए डॉली ने कहा था.. उस घर का मलिक रात को आ जाएगा.. अब तक तो वो आ गया होगा।
रिंकू- नहीं ऐसा कुछ नहीं है.. वो घर बन्द पड़ा है उसकी चाभी किसी तरह डॉली के हाथ लग गई होगी। वहाँ कोई नहीं आने वाला उसने झूठ कहा था.. मुझे पता है। तू उसको फ़ोन तो कर..
प्रिया- अच्छा भाई करती हूँ.. आप बैठो तो सही।
प्रिया ने जब फ़ोन लगाया तो डॉली ने ही उठाया।
डॉली- हाँ.. बोल प्रिया कैसी है तू? कल तेरे को मज़ा आया कि नहीं?
प्रिया- अरे बहुत आया.. मिलकर बताऊँगी यार कल वाले घर में आ जा.. रिंकू भी यहीं है.. साथ में मज़ा करेंगे..
डॉली- अरे नहीं वहाँ आज नहीं जा सकते.. वो रात को आ गया.. यार ऐसा कर दोपहर को मैं तुझे फ़ोन करके कोई दूसरी जगह बताऊँगी.. जहाँ हम मज़े कर सकते हैं और अभी तो वैसे भी मुझे बहुत जरूरी काम है यार..दोपहर को फ्री होकर बात करती हूँ ओके बाय..
प्रिया कुछ और बोलती उसके पहले डॉली ने फ़ोन काट दिया।
रिंकू- क्या हुआ.. क्या बोली वो?
प्रिया- उसने कहा कि वहाँ वो आदमी रात को आ गया है दोपहर को किसी दूसरी जगह के बारे में बताएगी।
रिंकू- ऐसा कहा उसने और दूसरी जगह कहाँ से लाएगी प्रिया.. ये डॉली जितनी सीधी दिखती है.. उतनी है नहीं.. क्या पता किस-किस से चुदवाती फिरती है.. तभी तो दूसरी जगह की बात कर रही थी।
प्रिया- होगा जो भी.. अब दोपहर तक इन्तजार करो.. फिर उससे ही पूछ लेना।
रिंकू- तू पागल है क्या.. कल पहली बार चूत के दर्शन हुए और आज तू इन्तजार की बात कर रही है.. उसको गोली मार.. चल आजा तू ही मेरी प्यास बुझा दे.. लौड़े को देख.. चूत के लिए कैसे अकड़ा हुआ खड़ा है।
प्रिया- भाई आप पागल हो गए क्या? माँ किसी भी वक़्त आ सकती हैं।
रिंकू ने दरवाजा बन्द किया और अपना लौड़ा पैन्ट से बाहर निकल लिया.. जो वाकयी में फुंफकार रहा था।
प्रिया- ओह.. भाई आप क्या कर रहे हो.. इसे जल्दी से पैन्ट के अन्दर डालो.. कोई देख लेगा तो आफ़त आ जाएगी।
रिंकू- चुप करो.. इतना वक्त बातों में खराब कर रही है चूत नहीं तो मुँह से चूस कर ही मज़ा दे दे.. दरवाजा बन्द है आंटी आ भी गई तो जल्दी से अन्दर डाल लूँगा.. चल जल्दी आ…
प्रिया ने मौके की नज़ाकत को समझा और जल्दी से नीचे बैठ कर उसके लौड़ा को मुँह में भर लिया और चूसने लगी।
रिंकू- आह्ह.. मज़ा आ गया.. साली ओफ्फ क्या मस्त चूसती है तू.. पहले पता होता तो इतने साल तड़पना नहीं पड़ता.. चूस आह्ह.. मज़ा आ रहा है।
प्रिया लौड़े को होंठ से दबा कर चूस रही थी और पूरा जड़ तक अन्दर ले लेती.. फिर पूरा बाहर निकाल देती… बस इसी तरह वो चूसती रही। रिंकू को चूत चुदाई जैसा मज़ा आ रहा था। वो अब प्रिया के सर को पकड़ कर दे-दनादन उसके मुँह को चोदने लगा।
प्रिया का मुँह दुखने लगा था.. मगर रिंकू तो बस लौड़ा पेले जा रहा था।
प्रिया ने बड़ी मुश्किल से लौड़ा मुँह से निकाला और एक लंबी सांस ली।
रिंकू- अरे मज़ा आ रहा था निकाल क्यों दिया.. मेरा पानी निकलने ही वाला था.. ओफ्फ जल्दी से चूस ना…
प्रिया- हाँ चूसती हूँ.. जरा सांस तो लेने दो.. कब से चूस रही हूँ.. आपका लौड़ा पानी छोड़ता ही नहीं.. इसमें बहुत दम है।
रिंकू- अब बातें बन्द कर आह्ह.. चूस.. ओफ्फ मज़ा आ गया आह्ह.. ऐसे ही हाँ आह्ह.. ऐइ ज़ोर-ज़ोर से चूस आह्ह.. ओफ्फ सस्स हूओ उई..
रिंकू का लौड़ा फूलने लगा और उसी पल डॉली ने लौड़ा टोपी तक बाहर निकाल दिया यानि बस सुपारा अन्दर रखा.. उसमें से गर्म-गर्म लावा निकला, जिसे उसने अपनी जीभ पर लेकर पूरा बाहर निकाला फिर गटक गई।
रिंकू- वाह.. बहना तू बड़ी कमाल की रण्डी है.. क्या मज़ा दिया मुझे.. अब से रोज तेरे पास आऊँगा.. मौका मिला तो तेरी चुदाई करूँगा.. नहीं तो तेरा मुँह चोदूँगा.. बड़ा मस्त चूसती है तू तो।
प्रिया- भाई अब आप निकल लो.. माँ आती होगी.. आपको देखेगी तो 10 तरह के सवाल करेगी.. दोपहर तक डॉली कुछ ना कुछ जुगाड़ कर ही लेगी.. उसके बाद मैं आपको बता दूँगी.. आप बस घर पर ही रहना।
रिंकू- ठीक है मेरी जान.. अभी तो जा रहा हूँ मगर दोपहर तक कुछ ना हुआ ना.. तो देख लेना मुझे चूत चाहिए 
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09-04-2017, 04:22 PM,
#45
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
रिंकू वहाँ से निकल गया।
प्रिया सोच में पड़ गई कि डॉली इतनी जल्दी में क्यों थी.. कहीं चेतन सर के पास तो नहीं जा रही।
प्रिया ने दोबारा फ़ोन लगाया और इस बार भी डॉली ही थी।
डॉली- अरे क्या हुआ यार? मैंने कहा ना दोपहर को बताती हूँ।
प्रिया- ऐसी बात नहीं है.. आज रविवार है तू कहा बिज़ी है ये बता कहीं चुदवाने के लिए चेतन सर के पास तो नहीं जा रही ना?
डॉली- हाँ.. वहीं जा रही हूँ.. तुझे आना है क्या? वहाँ आजा तू भी चुद लेना मेरे साथ..
प्रिया- नहीं यार तू जा.. मैं उनके सामने नहीं जाना चाहती.. वक़्त आएगा तो उनके लौड़े को भी देख लूँगी.. अभी रिंकू ही बहुत है और प्लीज़ तुम भी उनको कुछ मत बताना।
डॉली- ठीक है नहीं बताऊँगी.. अच्छा सुन चाभी तेरे पास है ना.. 11 बजे के बाद तू उस घर में जा सकती है.. शाम को 5 बजे तक वहाँ कोई नहीं रहता.. चाहे तो रिंकू को वहाँ बुला ले.. और मज़ा कर.. मैं भी आ जाऊँगी।
प्रिया- यार आख़िर वहाँ रहता कौन है? ये तो बता मुझे..
डॉली- अरे एक बूढ़ा आदमी रहता है सुबह से शाम तक बाहर रहता है.. इसी लिए बोल रही हूँ उसके आने के पहले निकल जाना।
प्रिया- यार मगर वो है कौन? तेरे पास चाभी कहाँ से आई… ये तो बता?
डॉली- वक़्त आने पर सब बता दूँगी.. चल अब रख.. मुझे रेडी होना है यार..
डॉली ने फ़ोन रख दिया। 
अब वो कपड़े देखने लगी कि आज क्या पहने।
फ़ोन रखने के बाद प्रिया अपने कमरे में चली गई और अपने आप से बड़बड़ाने लगी।
प्रिया- ये डॉली भी ना.. कुछ भी नहीं बताती अपने बारे में.. अब चेतन सर के पास मज़े लेने जा रही है।
बड़बड़ाते हुए उसको कुछ आइडिया आता है और वो जल्दी से नीचे जाती है।
उसकी माँ भी मंदिर से आ गई थीं.. वो उनको बोलती है कि अपनी सहेली के पास जाकर अभी आती हूँ और घर से निकल जाती है।
उधर ललिता ने चेतन को नास्ता करवा दिया और खुद रेडी होकर घर से निकल गई।
डॉली ने आज काली जींस और लाल टी-शर्ट पहनी थी.. बड़ी मस्त लग रही थी। 
अपनी माँ को ‘इम्तिहान की तैयारी करने सहेली के पास जा रही हूँ’ बोलकर वो भी घर से निकल गई।
दोस्तो, आप ध्यान करना सब एक ही वक्त घर से निकल रही हैं। अब तीनों के बारे में एक साथ तो बता नहीं सकती इसलिए एक-एक करके बताती हूँ।
आज बड़ा ट्विस्ट है आप ध्यान दो बस।
डॉली चेतन के घर की ओर जा रही थी और एक मोड़ पर उसने ललिता को दूसरी तरफ जाते हुए देखा उसने आवाज़ भी दी.. मगर ललिता ने नहीं सुनी और रिक्शा रुका कर उसमें बैठ कर चली गई।
डॉली ने भी ना जाने क्या सोच कर दूसरा रिक्शा रुकवाया और ललिता के पीछे चल दी।
वो 15 मिनट तक वो ललिता का पीछा करती रही और अपने आप से बड़बड़ा रही थी कि दीदी कहाँ जा रही हैं.. आज तो रविवार है इनको पता है मैं आऊँगी.. उसके बाद भी जाने कहाँ जा रही हैं।
ललिता का रिक्शा एक घर के पास जाकर रुका तो डॉली ने भी रिक्शा रुकवा लिया।
जब ललिता अन्दर चली गई तो डॉली उस घर के पास जाकर खिड़की से अन्दर झाँकने लगी।
अन्दर एक औरत जो करीब 30 साल के लगभग होगी.. दिखने में भी ठीक-ठाक सी थी.. वो सोफे पर बैठी थी। 
ललिता बिल्कुल उसके पास बैठी बातें कर रही थी.. जो बाहर डॉली को साफ सुनाई दे रही थीं।
ललिता- यार मीना बड़े दिनों बाद मिलना हुआ कभी तू भी मेरे घर पर आ जाया कर। 
मीना- अरे नहीं रे.. वक्त कहाँ मिलता है आने का तुम तो जानती हो मेरा काम ही ऐसा है.. होटल में कहाँ वक्त मिलता है.. रविवार बस को छुट्टी मिलती है। वहाँ साले एक से बढ़कर एक हरामी देखने को मिलते हैं।
ललिता- हरामी कौन? मैं कुछ समझी नहीं यार?
मीना- अरे यार मैंने बताया तो था.. वहाँ ज़्यादातर टूरिस्ट आते हैं। अब जैसे कोई अंग्रेज आया तो उस साले को इंडियन गर्ल चाहिए बस हमारा मैनेजर भड़वा.. मंगवा देता है उस लड़की को सब समझा कर मुझे वहाँ कमरे तक ले जाना पड़ता है और उसके जाने का इंतजाम भी मुझे करना पड़ता है। साला कोई-कोई हरामी तो मुझे ही चोदने के चक्कर में रहता है। तू जानती है मुझे ये सब पसन्द नहीं है।
ललिता- अरे यार जानती हूँ.. तू अपने पति को छोड़कर अलग रहती है वो जानवरों की तरह तुझे चोदता था.. तब से चुदाई से तुझे नफ़रत हो गई है। यार वहाँ तुझे अच्छा नहीं लगता तो.. तू कोई दूसरी नौकरी कर ले ना…
मीना- अरे नहीं यार.. इतने बड़े होटल में स्टाफ की हैड हूँ.. पगार भी अच्छी है। ऐसी नौकरी दूसरी नहीं मिलेगी। 
ललिता- हाँ ये बात तो सही है.. अच्छा ये बता जैसा ट्रिपल एक्स फिल्मों में अंग्रेजों का लौड़ा कितना बड़ा दिखाते हैं.. क्या सच में ऐसा होता है.. तूने कभी देखा है वहाँ किसी का?
मीना- अरे मैं क्यों देखूँगी यार?
ललिता- ओह.. कभी तो मौका मिला होगा.. जैसे तू कमरे में लड़की लेने या वापस लाने गई हो.. नज़र पड़ जाती है यार.. बता ना…
मीना- हाँ कई बार ऐसा हुआ है.. बड़ा तो होता है ये बात मैंने गौर की है.. मगर अफ़्रीकन आदमी का सबसे बड़ा होता है.. अभी कल ही एक काला सांड आया है.. कुत्ता कहीं का…
ललिता- अरे कौन सांड.. क्या हुआ? बता ना यार?
मीना- कल एक अफ़्रीकन आया है.. शैतान जैसा लंबा-चौड़ा.. मैनेजर ने मुझे उससे पूछने भेजा था कि उसको कोई चाहिए क्या? 
तो हरामी ने मुझे ही पकड़ लिया और अपना शॉर्ट्स निकाल कर मुझे लौड़ा दिखा कर बोला कि हाय बेबी लुक माय कॉक यू वांट दिस बिग कॉक… मैं अपना हाथ छुड़ा कर वहाँ से भाग गई और मैनेजर से शिकायत की.. तब उन्होंने उसको समझाया कि ये खुद नहीं चुदेगी.. तुमको लड़की लाकर देगी.. तब हरामी बात को समझा।
ललिता- ओह.. रियली कितना बड़ा होगा उसका?
मीना- अब मैंने कौन सा नाप कर देखा है सोया हुआ भी कोई 7′ का होगा.. ना जाने खड़ा होकर कितना होता होगा?
ललिता- ओह्ह.. रियली यार एक बात तो है लौड़ा जितना बड़ा होता है ना.. उतना ही मज़ा देता है।
मीना- अरे तू भी.. क्या ये लौड़े की बात लेकर बैठ गई.. चल आजा रसोई में नाश्ता बनाते हुए बात करेंगे।
ललिता- अरे नहीं.. नाश्ते की क्या जरूरत है यार बात करते हैं ना…
मीना- अब कोई बहस नहीं.. चल आजा…
दोनों उठकर रसोई में चली जाती हैं।
डॉली भी अब सोचती है यहाँ खड़ी रहने से क्या फायदा।
वो भी रिक्शा पकड़ कर वापस चेतन के घर की ओर चल देती है।
दोस्तो.. आप सोच रहे होंगे.. मैं कहानी को लंबा खींचती जा रही हूँ, नए-नए किरदार सामने आ रहे हैं मगर आपका ऐसा सोचना गलत है..
ये सब कहानी का हिस्सा है जो धीरे-धीरे सामने आ रहा है.. इसका कहानी से गहरा सम्बन्ध है।
ये आपको बाद में पता चल जाएगा.. अभी प्रिया के पास चलते हैं।
प्रिया के मन में शरारत भरा आइडिया आया था कि सर के घर किसी सवाल पूछने के बहाने से जाए और डॉली का प्रोग्राम चौपट कर दे। बस वो चेतन के घर की ओर निकल पड़ी।
उसने हरे रंग का स्कर्ट और गुलाबी टॉप पहना हुआ था.. वो इस ड्रेस में बड़ी सेक्सी लग रही थी।
जब ललिता घर से निकली थी.. तब चेतन अलमारी के ऊपर से कोई सामान निकाल रहा था.. तभी उसकी आँख में कंकर चला गया और उसकी आँख में जलन होने लगी। उसने जल्दी से आई-ड्रॉप आँखों में डाला और बिस्तर पर लेट गया।
तभी प्रिया दरवाजे पर पहुँच गई और दरवाजा खटकाने लगी।
चेतन- दरवाजा खुला है आ जाओ अन्दर.. प्रिया चुपके से अन्दर आ गई। 
चेतन ने टी-शर्ट नहीं पहन रखी थी और नीचे भी बस बिना अंडरवियर के लोवर ही था।
चेतन- आ गई तुम.. आजा अब सवाल मत पूछना कि ऐसे क्यों पड़ा हूँ आँख में कचरा चला गया.. अभी ड्रॉप डाला है.. 5 मिनट रूको आ जाओ मेरे पास बैठ जाओ…
प्रिया कुछ नहीं बोली.. बस धीरे से बिस्तर पे चेतन के पास बैठ गई.. उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोले और डॉली कहाँ है.. वो सोच ही रही थी कि अचानक उसके बदन में 440 वोल्ट का झटका लगा।
चेतन लेटा हुआ था और वो उसके पास बैठी थी। अचानक चेतन ने प्रिया को अपने पास खींच लिया और उसका मुँह लौड़े पर टिका दिया।
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09-04-2017, 04:22 PM,
#46
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
चेतन- अरे चुपचाप क्यों बैठी है.. देख मैंने आज तेरे लिए लौड़ा कैसा चमकाया हुआ है.. चूसेगी नहीं आज।
प्रिया के तो होश उड़ गए वो तो डॉली का प्रोग्राम चौपट करने आई थी.. यहाँ तो मामला ही दूसरा हो गया।
वो कुछ बोलती इसके पहले चेतन ने एक और धमाका कर दिया.. उसने लोवर नीचे सरका दिया।
अब लौड़ा आधा खड़ा प्रिया के होंठों के एकदम करीब था।
चेतन- अरे जानेमन क्या बात है.. नाराज़ हो क्या.. ले अब चूस ले.. देख कैसा चिकना हो रहा है.. इसे तेरे लिए ही चमकाया है.. आज तेरी चूत और गाण्ड की खैर नहीं…
प्रिया अब बुरी तरह डर गई थी और अपने ही जाल में फँस भी गई थी, उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या ना करे।
चेतन ने उसके मम्मों को दबाने शुरू कर दिए और लौड़ा को उसके होंठों से स्पर्श कर दिया।
चेतन- अरे क्या हुआ.. कुछ तो बोल.. आज मौन व्रत रख कर आई है क्या.. और तेरे मम्मे इतने कड़क क्यों लग रहे हैं.. कुछ अलग ही लग रहे हैं.. आ ले अब तो लौड़ा होंठ के पास आ गया.. चूस ना यार…
चेतन के चूचे दबाने से अब प्रिया का मन मचल गया और उसने धीरे से लौड़े की टोपी मुँह में ले ली और चूसने लगी।
चेतन- आह्ह.. मज़ा आ गया.. अरे मुँह में पूरा ले ना आह्ह..
चेतन का लौड़ा झटके से एकदम अपने असली रूप में आ गया था।
प्रिया ने डरते-डरते पूरा लौड़ा मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।

चेतन- आह मेरी जान ओफ्फ मज़ा आ गया आह्ह.. आज तो तू कुछ अलग ही अंदाज में चूस रही है आह्ह.. उफ़फ्फ़…
प्रिया अब वासना की आग में जलने लगी थी उसकी चूत रिसने लगी थी। वो और जोश में लौड़ा चूसने लगी।
चेतन की आँख अब ठीक थी.. उसने आँखें खोल ली थीं और प्रिया को डॉली समझ कर उसकी गाण्ड दबा रहा था।
दरअसल प्रिया की पीठ उसकी तरफ थी और वो लौड़ा चूस रही थी। उसका जिस्म भी डॉली जैसा ही था.. बस चमड़ी की रंगत का फ़र्क था.. जिसके कारण चेतन को अब तक कुछ पता नहीं लगा।
वो बस लौड़े की चुसाई का आनन्द ले रहा था और प्रिया भी मज़े ले रही थी।
चेतन- ओफ्फ आह्ह.. चूस.. मेरी जान आह्ह.. आज तेरी चूत और गाण्ड का भुर्ता बना दूँगा आह्ह.. अब बस भी कर.. लौड़ा को चूस कर ही ठंडा करेगी क्या आह्ह..? चल अब चूत का मज़ा लेने दे आजा मेरी जान…
चेतन ने प्रिया के सर को पकड़ कर लौड़े से हटाया और उसके चेहरे पर नज़र पड़ते ही उसके होश उड़ गए।
प्रिया भी एकदम से घबरा गई.. जैसे लंबी बेहोशी के बाद होश में आई हो।
अब चेतन से नज़रें मिला पाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था, उसने नजरें झुका लीं।
ओह.. सॉरी मित्रों.. आपको थोड़ा रुकना होगा कुछ जरूरी बात बतानी है.. आपको बता दूँ.. डॉली जब ललिता के पीछे गई थी।
तभी प्रिया यहाँ आई थी।
सारी घटनाएं एक साथ हो रही हैं तो आपको बता दूँ कि डॉली वहाँ बिज़ी थी।
प्रिया यहाँ अब अपनी हीरोइन कहाँ तक पहुँची देख आते हैं, कहीं ऐसा ना हो वो आ जाए और दोनों को इस हाल में देख ले।
डॉली वापस रिक्शा में आ रही थी तभी रास्ते में मैडी और खेमराज बाइक पर जा रहे थे.. दोनों ने उसे देख लिया डॉली की भी नज़र उन पर पड़ गई।
डॉली- अरे ये कहाँ से आ गए.. अब सर के घर जाना ठीक नहीं.. क्या पता ये पीछे आ जाएं।
डॉली ने रिक्शा अपने घर की ओर ले लिया और घर के पहले मोड़ पर उतर गई।
मैडी भी उसका पीछा करता हुआ आ गया।
डॉली ने उनको नज़रअंदाज किया और घर की तरफ चल दी।
मैडी- डॉली एक मिनट रूको तो प्लीज़…
डॉली- अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो.. बोलो क्या बात है?
मैडी- डॉली कहाँ जाकर आई हो तुम?
डॉली- एक्सक्यूज मी.. तुम होते कौन हो मुझसे सवाल पूछने वाले?
मैडी- सॉरी यार.. तुम तो बुरा मान गईं.. मेरा वो मतलब नहीं था.. कल आ रही हो ना?
डॉली- हाँ यार पक्का आऊँगी.. बोला ना अब जाओ. मुझे ऐसे रास्ते में खड़ा होना पसन्द नहीं है।
मैडी- ओके थैंक्स.. बाय.. चल बे क्या खड़ा है चल…
दोनों वहाँ से जाने लगे.. डॉली वहीं खड़ी उनको जाते हुए देख रही थी.. वो बात करते हुए जा रहे थे।
खेमराज- यार साली, दिन पे दिन क़यामत होती जा रही है.. कल का क्या सोचा है.. अब तो बता दे.. कहीं ऐसा ना हो.. कल ये आए भी और हम कुछ भी ना कर सकें।
मैडी- अबे चूतिया साला.. जब भी बोलेगा उल्टी बात ही बोलेगा… इसके लिए मैंने इतना खर्चा किया.. ऐसे थोड़े ही साली को जाने दूँगा.. चल रिंकू के पास चलते हैं, तीनों मिलकर बात करेंगे.. उसके सामने ही कल का प्लान बताऊँगा.. तब तुझे समझ आएगा।
खेमराज- अरे अभी नहीं.. बाद में जाएँगे पहले एक जरूरी कम निपटा आते हैं.. उसके बाद पूरा दिन में फ्री हूँ यार…
मैडी- कौन सा जरूरी काम बे?
खेमराज- यार पापा के दोस्त के घर ये पेपर देने हैं बस उसके बाद फ्री ही फ्री.. चल अभी तो बाइक भी है.. बाद में आते हैं ना रिंकू के पास…
मैडी ने ना-नुकुर की और फिर मान गया दोनों वहाँ से चले गए।
डॉली- चले गए हरामी.. अब जाती हूँ मेरे राजा जी के पास बेचारे राह देख रहे होंगे दीदी भी नहीं हैं घर पर.. वो तो वहाँ अपनी सहेली के साथ बिज़ी हैं।
डॉली चेतन के घर की तरफ बढ़ने लगती है।
अरे दोस्तो, अब क्या होगा प्रिया भी वहीं है.. चलो आपको वापस वहाँ ले चलती हूँ.. मज़ा आएगा।
चेतन- प्प..प्प..प्रिया तुम.. यहाँ क्या कर रही हो?
प्रिया- व..व..वो सर मैं स..सवाल पूछने आई थी.. मगर आपने..
चेतन- ओह्ह.. मैंने समझा डॉली आई.. न..न..नहीं मेरी बीवी आई है.. ऐसा समझा सॉरी.. ग़लती से डॉली मुँह से निकल गया।
चेतन ने तब तक लोवर ऊपर कर लिया था उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था।
प्रिया- आप मुझे डॉली ही समझ रहे थे.. मैं सब जानती हूँ।
चेतन- क..क्या तुमको कैसे पता?
प्रिया- वो सब बाद में बताऊँगी.. डॉली कहाँ है.. मैं उसके लिए ही आई थी।
चेतन- अभी तक तो नहीं आई.. आने ही वाली होगी.. तुम जल्दी से निकलो.. अगर वो आ गई तो गड़बड़ हो जाएगी.. तुमको फिर कभी मज़ा दूँगा।
प्रिया- सॉरी आप गलत समझ रहे हो.. डॉली ने कई बार मुझसे आपके बारे में कहा.. मैंने हमेशा मना ही किया और आज भी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। बस सब इत्तफ़ाक़ से हो गया.. ओके मैं जाती हूँ प्लीज़ आप भी उसको कुछ मत बताना।
चेतन- अच्छा इत्तफ़ाक़ से हो गया.. लौड़ा तो बड़े मज़े से चूस रही थी.. अब जाने दो तुम्हारी मर्ज़ी.. अच्छा अब जाओ.. मैं क्यों उसको बताऊँगा?
प्रिया जब दरवाजे के पास गई.. बस खोलने ही वाली थी कि चेतन भाग कर उसके पास आ गया।
चेतन- रूको पहले मुझे देखने दो बाहर कोई है तो नहीं ना?
प्रिया साइड में हो गई.. चेतन ने थोड़ा सा दरवाजा खोला ही था कि सामने से डॉली आती हुई नज़र आई चेतन ने जल्दी से दरवाजा बन्द कर लिया।
चेतन- लो आ गई डॉली.. अब तुमको यहाँ देखेगी तो हम दोनों से ना जाने कितने सवाल पूछेगी.. तुम ऐसा करो वो सामने वाले कमरे में छुप जाओ जब मैं उसको लेकर इस कमरे में चला जाऊँ.. तब तुम निकल जाना।
प्रिया- मगर सर… छुपने की क्या जरूरत है..??
वो आगे कुछ बोलती चेतन उसका हाथ पकड़ कर दूसरे कमरे में ले गया और दरवाजा बन्द कर दिया।
तभी डॉली ने घन्टी बजा दी।
प्रिया- मेरी पूरी बात भी नहीं सुनी.. डॉली को बोल देती सवाल पूछने आई थी.. सर भी ना पागल है.. वैसे लौड़ा बड़ा मस्त है उनका.. तभी डॉली उनके प्यार में पागल हो गई है।
चेतन- आ रहा हूँ रूको…
चेतन ने दरवाजा खोला और डॉली को देख कर उसको मुस्कान दी।
चेतन- अब आ रही हो.. तुम्हारा कब से इन्तजार कर रहा हूँ।
डॉली- हाँ जानती हूँ.. अकेले बोर हो रहे होगे.. अब अन्दर भी चलो.. क्या सारी बात यही करोगे?
चेतन पीछे हट गया.. डॉली अन्दर आ गई।
चेतन- तुमको कैसे पता मैं अकेला हूँ?
डॉली- व्व..वो बस ऐसे ही अंदाज से बोल दिया मैंने.. तो क्या सच में दीदी घर पर नहीं है?
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09-04-2017, 04:23 PM,
#47
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
चेतन- हाँ अपनी सहेली से मिलने गई हैं.. तुम इतनी देरी से क्यों आई हो?
डॉली- वो घर पर थोड़ा काम था मुझे.. अब क्या सवाल करने लगे आप.. चलो थोड़ी मस्ती करते हैं।
चेतन- आ जा मेरी जान कमरे में.. आज तो पूरा दिन तेरी चूत और गाण्ड बजा कर मज़ा लूँगा..
डॉली- वहाँ नहीं आज इस कमरे में चुदवाऊँगी.. हमेशा एक ही कमरे में मज़ा नहीं आता.. आज दूसरे कमरे में चलो..
जिस कमरे में प्रिया थी.. डॉली उसी तरफ बढ़ने लगी।
चेतन- रूको डॉली आज तुम्हें क्या हो गया है.. उस कमरे में क्या खास है? चूत में लौड़ा डालना है.. चाहे इस कमरे में डालो या उसमें क्या फ़र्क पड़ जाएगा?
डॉली- मुझे तो कुछ नहीं हुआ मगर आपको शायद कुछ हो गया इतने घबरा क्यों रहे हो कोई और लड़की है.. क्या इस कमरे में हा हा हा…
चेतन- त..तू भी पागल है.. और कौन आएगी.. यहाँ चल उसमें ही चल आज तुझे वहीं चोदता हूँ।
डॉली- ये हुई ना बात.. चलो इस कमरे में जाने का कारण है कि मैं घर के हर एक कोने में आपसे चुदना चाहती हूँ ताकि घर का कोना-कोना हमारे मिलन को याद रखे.. अब आ जाओ।
प्रिया अन्दर से दोनों की बात सुन रही थी उसको बड़ा मज़ा आ रहा था।
उनकी बातों को सुनकर वो पर्दे के पीछे छुप गई। डॉली ने दरवाजा खोला तो चेतन की सांस कुछ देर के लिए थम गई।
वो जल्दी से अन्दर आया और चारों तरफ़ निगाह घुमाई।
डॉली- आ जाओ मेरे राजा जी, ये पलंग भी अच्छा है.. आज यही मज़ा लेंगे।
जब प्रिया कमरे में नहीं दिखी तो रिंकू की जान में जान आई.. मगर उसकी निगाहें अब भी उसे ढूँढ रही थीं.. उसको तो पता था कि वो यहीं कहीं छुपी हुई है।
डॉली- राजा जी कपड़े मैं निकालूँ.. या आप निकालोगे?
चेतन- अरे मेरी जान मैं ही निकालूँगा.. आजा मेरी रानी आज तो बड़ी जबरदस्त चुदाई करूँगा तेरी..
डॉली के सामने खड़ा होकर चेतन उसके कपड़े निकालने लगा। तभी पर्दे के पीछे से प्रिया ने झाँक कर अपनी मौजूदगी उसे बता दी कि मैं यहाँ हूँ।
चेतन ने इशारे से उसे वहीं रहने को कहा और डॉली को नंगा करने में लग गया।
चेतन- जान मैंने कहा था ना.. ब्रा का साइज़ अब बड़ा ले आओ.. देखो कैसे तूने इसमें ज़बरदस्ती चूचों को जकड़ा हुआ है..
डॉली- मेरे राजा आप शायद भूल गए ब्रा आपको ही लाकर देनी है.. मुझे भी अब महसूस हो रहा है.. आज बड़ी मुश्किल से ब्रा पहनी मैंने देखो.. पहले इस पहले हुक में बन्द करती थी.. अब तो आखिरी वाले में भी बड़ी मुश्किल से आई है।
चेतन अब थोड़ा खुल कर बात कर रहा था शायद वो प्रिया को रिझाने के लिए ये सब बोल रहा था।
चेतन- मेरी जान आज तेरी चुदाई के बाद साथ में जाएँगे.. तुझे ब्रा के साथ नई पैन्टी भी दिला दूँगा.. तेरी गाण्ड भी अब बड़ी होने लगी है।
डॉली- हाँ.. राजा उफ्फ क्या कर रहे हो मेरे चूचे इतनी ज़ोर से दबा दिए.. अब देखो आज आपके लौड़े को खा जाऊँगी।
चेतन ने लोवर निकाल दिया.. डॉली के कपड़े निकालते हुए उसका लौड़ा तन गया था।
चेतन- लो जानेमन लौड़ा हाजिर है.. खा जाओ इसको।
डॉली घुटनों के बल बैठ गई और लौड़े को मुँह में लेकर बड़े मज़े से चूसने लगी।
चेतन- आह.. चूस जान आह्ह.. एक बात कहूँ रात को सपने में एक परी आई थी… वो लौड़ा को बड़े अलग तरीके से चूस रही थी.. बड़ा मज़ा आया मुझे वैसे चूसो ना…
चेतन ने प्रिया को सुनाने के लिए ये बात कही ताकि उसको अच्छा लगे.. दरअसल चेतन की नियत प्रिया पर बिगड़ गई थी। अब वो किसी भी तरह उसको चोदना चाहता था।
डॉली- आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. आज तो आपका लौड़ा बहुत कड़क हो रहा है.. आह्ह.. कोई परी मुझसे अच्छा कोई नहीं चूस सकती.. मैं हूँ लौड़े की सबसे बड़ी दीवानी आह्ह..
डॉली जीभ से चेतन के लौड़े और गोटियों को चूस और चाट रही थी।
डॉली की पीठ प्रिया की तरफ थी।
प्रिया थोड़ी सी पर्दे के बाहर निकल कर सब देख रही थी। उसकी चूत भी पानी-पानी हो गई थी और ना चाहते हुए भी उसका हाथ चूत पर चला गया.. जिसे चेतन ने देख लिया।
चेतन- आह्ह.. चूस जान.. तेरी चूत की खुजली ऐसे नहीं जाएगी आह्ह.. इसे मेरा लौड़ा ही मिटा सकता है.. आह्ह.. तू एक बार मेरा लौड़ा आह्ह.. लेकर तो देख आह्ह.. बड़ा मज़ा आएगा आह्ह..
डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. ज़रूर लूँगी एक बार क्या.. बार-बार लूँगी आह्ह.. अब मेरी चूत चाट कर बस घुसा दो लौड़ा.. आह्ह.. जल्दी से घुसा दो चूत जलने लगी है।
चेतन ने डॉली को बिस्तर पर ऐसे सुलाया कि उसका सर प्रिया की तरफ़ हो वो कुछ देख ना पाए और उसकी टाँगों को पूरा मोड़ कर उसकी चूत पे निगाह मारी।
चेतन- अरे दीपा रानी आज ये चूत ऐसे खुली हुई कैसे लग रही है.. क्या रात को कोई मोटा डंडा घुसाया है तूने इसमें?
डॉली सकपका गई.. भिखारी ने चूत को खोल दिया था और चेतन ने देख भी लिया।
डॉली- आह्ह.. आपके डंडे के सिवा और डंडा कहा से लाऊँगी आह्ह.. रात को बहुत मन था तो ऊँगली से मज़ा ले रही थी.. आह्ह.. अब आप मत तड़पाओ चाटो ना आह्ह.. मेरी चूत को…
चेतन ने अपनी जीभ चूत में घुसा दी और बस चाटने लगा।
डॉली- आ सर उह मज़ा आ गया आह्ह.. सच्ची आपके चाटने का तरीका बहुत मस्त है आह्ह.. चाटो मेरी चूत आ चाटो मेरे राजा।
प्रिया की अब हिम्मत बढ़ने लगी थी.. वो थोड़ी और बाहर निकल कर उनकी चुसाई-लीला देख रही थी और अपनी चूत मसल रही थी।
चेतन ने जब चूत से मुँह ऊपर उठाया प्रिया आँखें बन्द करके चूत रगड़ रही थी.. जिसे देख के चेतन के लौड़े में ज़्यादा तनाव आ गया और आना ही था.. डॉली को वो कई बार चोद चुका था.. प्रिया नई थी और किसी नई चूत के लिए लंड की लालसा.. आप जानते ही हो.. वो और ज़्यादा अकड़ गया।
चेतन- बस जानेमन.. अब तेरी चूत में लौड़ा डाल कर आज इसका भुर्ता बना दूँगा.. देख आज लौड़ा तुझे देख कर कैसे फुंफकार मार रहा है।
प्रिया ने आँखें खोल कर लौड़े पर नज़र डाली.. वो सब समझ रही थी कि चेतन जो कुछ भी बोल रहा है.. उसे देख कर ही बोल रहा है।
डॉली- आह्ह.. घुसा दो राजा.. अब बर्दास्त नहीं होता कर दो चूत को ठंडा.. आह्ह.. आज तो ये निगोड़ी चूत बहुत जल रही है।
चेतन ने एक ही झटके से पूरा लौड़ा चूत में पेल दिया।
डॉली- आईईइ मज़ा आ गया आह्ह.. सर आपकी ये फोर्स एंट्री बहुत मज़ा देती है.. आह्ह.. अब शुरू हो जाओ आह्ह.. रगड़ो आह्ह.. चोदो मेरे राजा.. मेरी चूत आह्ह.. आपकी ही है.. आह्ह.. चोदो।
चेतन घपाघप लौड़ा पेलने लगा। ये सब देख कर प्रिया की हालत खराब होने लगी थी.. मगर वो ना जाने क्यों छुपी हुई थी.. अब उसने स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल लिया था और चूत को मसल रही थी।
चेतन ने इशारे से उसे स्कर्ट निकालने को कहा तो वो मुस्कुरा दी।
डॉली- आह्ह.. चोदो फास्ट.. आह्ह.. राजा मज़ा आ रहा है आह उईईइ…
चेतन- ले मेरी जान तेरे लिए तो जान हाजिर है.. आह्ह.. ऐसे मज़ा नहीं आएगा खुल कर मज़ा लो.. शर्म को उतार कर फेंक दो.. चूत आज़ाद ही अच्छी लगती है.. उसे ऐसे जकड़ कर मत रखो.. बस चुदवाती रहो आह्ह.. ले जान उहह उहह पूरा ले आह्ह.. ले..
चेतन की बातें डॉली समझ नहीं पा रही थी.. मगर प्रिया अच्छी तरह सब समझ रही थी.. उस पर वासना हावी हो गई थी और चेतन की बातें उस पर असर करने लगीं।
उसने स्कर्ट और पैन्टी नीचे कर दी।
अब उसकी फूली हुई चूत चेतन को दिखने लगी। वो और जोश में डॉली को चोदने लगा।
डॉली- आह’ उह.. मर गई.. उई आह मेरा पानी आह निकलने उई वाला है ओफ्फ.. मैं गई आआह्ह..
डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया मगर चेतन कहाँ झड़ने वाला था.. वो तो दे-दनादान चुदाई कर रहा था।
इधर प्रिया भी चूत में ऊँगली कर रही थी।
डॉली- आ आह्ह.. मेरे राजा आह्ह.. मेरी चूत ठंडी हो गई आह्ह.. अब गाण्ड मार लो आह्ह.. चूत से आह्ह.. निकाल लो।
चेतन ने लौड़ा निकाला और झट से डॉली को उठा कर दूसरी तरफ़ झुका दिया यानि घोड़ी बना दिया और लौड़ा गाण्ड में पेल दिया।
डॉली- आह इतने भी क्या बेसब्र हो रहे हो अई कमर में झटका लग गया आह्ह.. छोड़ो अब आह्ह.. मेरी गाण्ड का मज़ा लो मेरे राजा आह्ह..
अब चेतन की पीठ प्रिया की तरफ़ थी.. वो लगातार डॉली की गाण्ड में शॉट लगाते जा रहा था।
कोई दस मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई के बाद चेतन के लौड़े से लावा फूट गया और लौड़ा जड़ तक गाण्ड में घुसा कर वो झड़ने लगा।
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09-04-2017, 04:23 PM,
#48
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
चेतन- आह मज़ा आ गया साली.. तेरी गाण्ड आज भी टाइट की टाइट है। चूत तो थोड़ी ढीली हो गई आह्ह…
प्रिया तेज़ी से ऊँगली कर रही थी मगर ऐसे खड़े हुए उसे ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा था।
वो थोड़ी देर और करती तो शायद झड़ जाती मगर तब तक चेतन ने लौड़ा गाण्ड से बाहर निकाल लिया और पीछे हाथ करके प्रिया को छुपने का इशारा कर दिया।
डॉली- आह्ह.. मेरे राजा आज तो पहली बार में ही अपने चूत और गाण्ड दोनों का मज़ा ले लिया। मुझे भी बड़ा मज़ा आया ओफ्फ क्या
मस्त चुदाई की आपने…
थोड़ी देर दोनों बात करते रहे.. प्रिया वहीं छुपी रही.. उसने स्कर्ट अब पहन लिया था।
डॉली- मेरे राजा आज तो आपका लौड़ा बड़ा तना हुआ था.. मेरी गाण्ड की हालत खराब कर दी.. मैं बाथरूम जाकर आती हूँ।
डॉली के बाथरूम में जाते ही चेतन झट से खड़ा हुआ प्रिया भी पर्दे के पीछे से बाहर आ गई।
प्रिया ने धीरे से कहा- अब मैं निकल जाती हूँ।
चेतन- क्यों मज़ा आया ना.. कभी तुमको भी लेना हो तो बता देना।
प्रिया ने मुस्कुरा कर नजरें नीची कर लीं.. चेतन अब भी नंगा था उसका लौड़ा सोकर लटक गया था।
प्रिया- सोचूँगी इसके बारे में….
प्रिया ने लौड़ा की तरफ इशारा करके ये बात कही.. चेतन ने झट से उसे गले लगा लिया और उसके होंठ चूसने लगा।

प्रिया ने भी साथ दिया मगर ये चुम्बन ज़्यादा नहीं चला.. डॉली कभी भी आ सकती थी।
चेतन- अब तुम जाओ.. डॉली आती होगी आज पूरा दिन उसकी चुदाई करूँगा.. कभी मन हो तो आ जाना.. अब जाओ जल्दी से…
प्रिया जल्दी से बाहर निकल गई.. वासना की आग में जलती हुई वो अपने घर की तरफ जा रही थी। उसकी चूत में आग लगी हुई थी
अधूरी जो रह गई थी वो….
प्रिया- उफ़फ्फ़ आज मन नहीं था मगर सर ने चूत में आग लगा दी.. अब तो रिंकू को बुलाना ही होगा।
प्रिया बड़बड़ाती हुई जा रही थी तभी सामने से रिंकू आता दिखाई दिया.. उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।
प्रिया- ओह्ह.. भाई अच्छा हुआ आप यहाँ मिल गए.. चलो आपकी मुराद पूरी कर दूँ।
रिंकू- तू कहाँ जाकर आई है.. और कहाँ चलें?
प्रिया- वो सब बातें बाद में.. चलो ये देखो चाभी मेरे पास ही है वो घर खाली है.. वो आदमी वहाँ शाम को आएगा।
रिंकू- मुझे पता ही था वहाँ कोई नहीं होगा.. वो साली सुबह झूठ बोली।
प्रिया- अरे नहीं भाई वो सच बोल रही थी। वो आदमी घर से अभी निकला है.. वो अकेला रहता है.. शाम तक आएगा.. अब चलो।
रिंकू- अच्छा चल.. वो नहीं आई.. क्या उस साली के चक्कर में तो मैं बहनचोद बना हूँ।
प्रिया- वो आ जाएगी.. पहले हम तो पहुँचे वहाँ…
रिंकू ने इधर-उधर देखा और दोनों सुधीर के घर की ओर चल पड़े। 
वो दोनों सुधीर के घर में दाखिल होने ही वाले थे कि मैडी और खेमराज बाइक पर वहाँ से गुजर रहे थे..
खेमराज की नज़र दोनों पर पड़ गई।
खेमराज- अरे रुक… रुक..
मैडी ने ज़ोर से ब्रेक लगाया..
मैडी- क्या हुआ बे साले गाण्ड में साँप घुस गया क्या.. जो इतनी ज़ोर से उछला तू..?
खेमराज- अबे साले.. मैंने जो देखा.. तू भी देख लेता ना.. तो ऐसे ही उछलता…
मैडी- अब क्या देख लिया तूने.. साले वैसे भी आजकल तू कुछ ज़्यादा ही देखने लगा है।
खेमराज- यार अभी-अभी उस घर में रिंकू और प्रिया गए हैं।
मैडी- साले ऐसा क्या खास देख लिया तूने उसमें जो तुझे हर जगह प्रिया नज़र आ रही है।
खेमराज- नहीं यार सच.. अन्दर वो दोनों ही गए हैं।
मैडी- अबे गए होंगे.. तो इसमें चौंकने वाली क्या बात है? किसी से मिलने गए होंगे.. कोई काम होगा उनको.. वो भाई-बहन हैं डॉली
और रिंकू होते तो शायद मुझे अजीब लगता.. अब चलूँ या तू यहीं रुक कर उनका इन्तजार करेगा..?
खेमराज- कहाँ जा रहा है.. रिंकू से मिलकर कल के बारे में बात करनी है ना.. भूल गया क्या? वो बाहर आएगा तब यहीं से उसको साथ ले लेंगे.. इसी बहाने प्रिया को भी देख लेना।
मैडी- अभी वो गए हैं क्या पता कितनी देर में आयें.. हम शाम को बात कर लेंगे। अभी मुझे घर जाना है.. तू रुक.. तू ही देख तेरी काली प्रिया को.. मैं चला….
खेमराज को थोड़ा गुस्सा आया.. मगर वो कुछ ना बोला और वहीं रुक गया। मैडी अपने घर की ओर चल दिया।
खेमराज वहीं खड़ा कुछ सोच रहा था।
खेमराज- साला ये घर किसका है.. यहाँ से कभी किसी को आते-जाते नहीं देखा.. मेरे हिसाब से यहाँ कोई नहीं रहता है.. वो दोनों किसके पास गए होंगे?
थोड़ी देर बाद उसके दिमाग़ में झटका सा लगा और अपने आप से ही उसने बात की।
खेमराज- अरे बेटा खेमराज बन्द घर में दोनों एक साथ गए है दाल में जरूर कुछ काला है.. अब तो ताक-झाँक करनी ही पड़ेगी…
खेमराज घर के पास जाकर अन्दर झाँकने की कोशिश करने लगा.. पीछे की तरफ एक खिड़की उसे खुली हुई दिखी.. बस वो अन्दर घुस गया।
उधर डॉली बाथरूम से बाहर आ गई और चेतन को देख कर मुस्कुराने लगी।
चेतन- क्या हुआ मेरी जान.. मुस्कुरा क्यों रही हो?
डॉली- कुछ नहीं.. ऐसे ही.. बस आप ऐसे दरवाजे पर क्यों खड़े हो.. क्या इरादा है?
चेतन- अरे नहीं.. मुझे लगा बाहर कोई है तो बस देखने चला आया।
डॉली- अच्छा ये बात है.. आप आज कुछ बदले-बदले लग रहे हो सर….
चेतन- क्या बोल रही हो.. मैं तो वैसा ही हूँ जैसा रोज रहता हूँ।
डॉली- अच्छा वैसे ही हो.. तो आप नंगे ही दरवाजे पर देखने गए थे कि कौन है बाहर.. वाह वेरी गुड….
डॉली की बात से चेतन थोड़ा भ्रमित हो गया और झुंझला गया।
चेतन- तुम तो किसी शक्की बीवी की तरह बात कर रही हो.. इतना तो मुझे कभी ललिता ने भी नहीं कहा।
डॉली- इसमें शक की तो कोई बात ही नहीं.. मैं तो बस ये कह रही हूँ.. आपको कोई टेन्शन है क्या..? आज बदले से लग रहे हो…
चेतन ने बात को संभालते हुए कहा- जान सॉरी बस थोड़ा गुस्सा आ गया.. यहाँ आओ मेरी रानी…
डॉली भाग कर चेतन के सीने से लिपट गई।
डॉली- सर आई लव यू.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मुझसे कभी गुस्सा मत करना.. मैं आपकी छोटी वाइफ हूँ ना…
चेतन- हाँ मेरी जान.. तू तो मेरी छोटी परी है.. चुदने वाली परी.. तूने तो मुझे अपनी चूत और गाण्ड दी है.. वो भी एकदम सील पैक.. तुझे कभी गुस्सा नहीं करूँगा.. चल आजा बिस्तर पर आ जा.. देख तेरे चिपकने से लौड़ा खड़ा हो रहा है।
डॉली ने हल्के से लौड़े पर एक चपत मारी।
डॉली- बड़ा बदतमीज़ है.. जब देखो खड़ा हो जाता है.. चल आजा तुझे प्यार से सुलाती हूँ चूस-चूस कर आज तेरा सारा पानी निकाल दूँगी.. फिर होना कड़क…
चेतन- हा हा हा चल आजा मेरी जान.. निकाल दे इसका पानी.. तेरे चूचे मुझे बुला रहे हैं पहले इनका रस पी लूँ.. उसके बाद लौड़े के साथ जो करना है.. तू कर लेना।
चेतन चूचों से ऐसे चिपक गया.. जैसे बहुत भूखा हो और चूचों से दूध आ रहा हो.. डॉली सीधी लेट गई और चेतन उसके मम्मों को चूसता रहा।
डॉली- आहह.. अई.. सर आप बहुत बदमाश हो.. अई उफ़ आराम से चूसो ना.. आहह.. मुझे गर्म कर दोगे फिर क्या.. आहह.. खाक मैं लौड़े को चूस कर पानी निकालूंगी आहह.. फिर तो चूत में ही लेना पड़ेगा मुझे आहह…
चेतन- हाँ मेरी दीपा रानी यही तो मज़ा है… कमसिन कली के साथ चुदाई करने का.. थोड़ा सा उसको चूसो.. बस गर्म हो जाती है और चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है.. तू कौन सी पक्की रंडी है.. जो कितना भी में चूसूँ तू बर्दास्त कर जाएगी.. वाह क्या चूचे है तेरे…
डॉली- आहह.. राजा जी.. आहह.. आप बार-बार रंडी की बात आहह.. बीच में ले आते हो.. कभी ठीक से आहह.. समझाया नहीं.. किसी रंडी के बारे में आहह…
चेतन- मेरी जान.. जो तरह-तरह के लौड़े ले चुकी हो और थोड़ी बहुत चुसाई से उसे कुछ फ़र्क ना पड़े.. बल्कि सामने वाले का लौड़ा बिना चूत में लिए पानी निकाल दे.. उसे कहते है रंडी.. आहह.. मज़ा आ रहा है…
डॉली- आहह.. राजा उई.. चूत में गुदगुदी हो रही है.. आहह.. प्लीज़ थोड़ी देर चूत चाटो ना.. आहह.. पक्की रंडी को जाने दो.. अपनी इस कच्ची रंडी को थोड़ा मज़ा दो हा हा हा…
चेतन भी उसके साथ हँसने लगा।
चेतन अब उसकी चूत चाटने लगा डॉली ने कहा- अब 69 के पोज़ में आ जाओ.. मुझे भी लौड़ा चूसना है। 
मगर चेतन ना माना और बस उसकी चूत चाटता रहा।
डॉली- आहह.. सर आहह.. मज़ा आ रहा है.. उफ़फ्फ़ अब पेल दो लौड़ा आहह.. मेरी चूत में.. आहह.. अब बर्दास्त नहीं होता.. आहह.. ससस्स ईयी उफफफ्फ़…
चेतन ने डॉली की टाँगें पकड़ कर उसे घुमा दिया यानि बिस्तर के बाहर उसका आधा बदन निकाल दिया और खुद बिस्तर के नीचे खड़ा हो गया।
डॉली- आहह.. राजा.. ये कौन सा तरीका है.. उफ़ आहह…
चेतन- यह नया तरीका है जान.. मैं खड़ा-खड़ा आज तेरी चूत का बैंड बजाऊँगा.. तू बस देखती जा…
चेतन ने डॉली के पैरों को मोड़ दिया और लौड़ा चूत में घुसा दिया।
डॉली- आहह.. मज़ा आ गया.. लौड़ा चूत में जाते ही बड़ा आराम मिलता है.. आहह.. अब चोदो राजा.. अपनी छोटी रानी को.. मज़ा ले लो मेरी चूत का.. आज आहह…
चेतन ‘दनादन.. दे-दनादन’ लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा.. बस एक ही रफ़्तार से वो चूत को चोदे जा रहा था और बड़बड़ा रहा था।
चेतन- आ आहह.. उहह ले.. मेरी जान.. आहह.. तूने मेरे लौड़े को कच्ची चूत का आदी बना दिया है आहह.. ले ओह ओह.. अब तेरी चूत आह उह आहह.. को चोद-चोद कर इसका भोसड़ा बना दूँगा.. आ आहह.. दोबारा कच्ची चूत कहाँ से मिलेगी मुझे.. आहह.. तू कोई रास्ता बता आहह…
डॉली- आहह.. अई छोड़ो मेरे राजा.. आहह.. अब मेरी चूत का तो आपने भोसड़ा बना ही दिया दोबारा अई ऐइ कच्ची कैसे करूँ इसे आहह…
चेतन- ओह.. तू चाहे तो आहह.. किसी दूसरी कच्ची चूत को आहह.. मेरे लौड़े के लिए ला सकती है आहह…
डॉली- आहह.. रफ़्तार से चोदो.. आहह.. मैं कहाँ से लाऊँ.. आहह.. मज़ा आ रहा है राजा और फास्ट आहह.. आहह…
चेतन ने ज़्यादा खुल कर कहना ठीक नहीं समझा और बात को घुमा कर बोल दिया।
चेतन- उहह उहह आहह.. तेरी चूत फट गई.. आहह.. है.. आह ओह इसे आ किसी दर्जी के पास सिलवा ले.. आहह.. आ हा हा हा।
डॉली- हा हा हा अई.. अच्छा अईउफ़ मजाक करते हो आप आहह.. चोदो आहह.. मेरी चूत में .. आहह.. पानी आहह.. अई आने वाला है आईईइ मैं गईइइ आहह.. फास्ट फक मी.. आह फास्ट आह आईईईई…
चेतन ने चोदने की रफ़्तार और तेज कर दी थी.. वो भी थक गया था और उसकी उत्तेजना भी चरम सीमा पर थी.. बस लौड़े की ठाप से चूत को पीट रहा था.. जैसे ही डॉली की चूत का पानी निकल कर लौड़े से स्पर्श हुआ..
चेतन ने लौड़े को जड़ तक घुसा कर एक लंबी सांस ली और उसका बाँध भी टूट गया.. दो नदियों का संगम हो गया.. काफ़ी देर तक दोनों उसी हालत में पड़े रहे।
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09-04-2017, 04:23 PM,
#49
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
इनका तो हो गया.. अब आप सोच रहे होंगे रिंकू और प्रिया अन्दर गए थे.. पीछे से खेमराज भी गया था.. वहाँ क्या हंगामा हुआ.. तो चलो हम वहीं जाकर देखते हैं।
सुधीर के घर में जाते ही प्रिया ने मुख्य दरवाजा बन्द कर दिया और रिंकू से चिपक गई।
उसने अपने होंठ उसके होंठों पर टिका दिए।
रिंकू भी उसका साथ देने लगा और उसकी गाण्ड को दबाते हुए उसे चुम्बन करने लगा।
थोड़ी देर बाद दोनों अलग हुए।
रिंकू- मेरी प्यारी बहना.. यहाँ नहीं.. कमरे में चल.. वहाँ आज तेरी गाण्ड मारूँगा…
प्रिया- नहीं भाई.. पहले तो मेरी चूत को शान्त करो.. लौड़े के लिए ये बड़ी तड़प रही है.. उसके बाद आप गाण्ड मार लेना…
दोनों कमरे में चले जाते हैं और वहाँ जाते ही प्रिया नीचे बैठ कर रिंकू की ज़िप खोल कर लौड़ा बाहर निकाल लेती है और मज़े से चूसने लगती है।
रिंकू- आहह.. अरे बहना.. आहह.. कपड़े तो निकालने देती.. उफ़ ऐसे ही शुरू हो गई तू आहह…
दोस्तो, इसी पल खेमराज खिड़की से अन्दर आया था और आपको बता दूँ वो रसोई की खिड़की थी.. यह उसके पास के कमरे में थी.. खेमराज जब खिड़की से अन्दर कूदा दूसरे कमरे में.. इन दोनों को आवाज़ सुनाई दी।
रिंकू ने जल्दी से प्रिया के मुँह से लौड़ा निकाला और पैन्ट के अन्दर करके ज़िप बन्द कर ली।
प्रिया- भाई बाहर कोई आया है.. आवाज़ आई ना अभी?
रिंकू- चुप चुप.. आराम से.. उस कुर्सी पर बैठ जा.. शायद डॉली आ गई होगी…
प्रिया- नहीं भाई.. चाभी मेरे पास है.. दरवाजा बन्द है.. वो कैसे अन्दर आ सकती है.. शायद घर वाला आ गया है.. उसके पास तो दूसरी चाभी होगी ना…
रिंकू- तू यहीं बैठ.. मैं बाहर जाकर देखता हूँ.. वो हुआ तो कह देंगे डॉली ने यहाँ मिलने के लिए बुलाया था.. ओके.. मैं अभी आता हूँ।
रिंकू कमरे से बाहर निकला.. उधर खेमराज भी दबे पांव रसोई से बाहर आ रहा था। दोनों आमने-सामने हो गए नजरें मिलीं और…
रिंकू- अरे साले.. मादरचोद.. डरा दिया.. तू यहाँ क्या कर रहा है?
खेमराज- तुझे देख कर ही यहाँ आया हूँ.. तू बता प्रिया के साथ यहाँ क्या कर रहा है?
अब रिंकू की हवा निकल गई.. वो हकलाने लगा- श..श..सी.. क्या बोल रहा है प्प..प्रिया को तूने क..कब देखा?
खेमराज- जब तुम दोनों मुख्य दरवाजे से अन्दर घुसे.. तब देखा और पीछे की खिड़की से यहाँ आया हूँ.. अब सच-सच बता.. तुम दोनों इस खाली घर में क्या करने आए हो..? दूसरा तो कोई दिखाई ही नहीं दे रहा यहाँ।
रिंकू कुछ बोलता.. उसके पहले प्रिया कमरे से बाहर आ गई और बोल पड़ी।
प्रिया- खेमराज.. मैं बताती हूँ.. हम यहाँ क्यों आए हैं।
रिंकू हक्का-बक्का सा बस प्रिया को देखने लगा।
खेमराज- हाँ.. बताओ.. बताओ.. मैं भी सुनना चाहूँगा।
प्रिया- तो सुनो तुमने और मैडी ने भाई को पागल कर दिया है.. बिगाड़ कर रख दिया है.. उस उस डॉली के चक्कर में भाई दिन-रात उसी के बारे में सोचते रहते हैं.. मुझसे ये देखा नहीं गया.. तब मैंने भाई से कहा कि मैं डॉली को उनसे मिलवा देती हूँ.. बस आज यहाँ इसी लिए आए हैं डॉली भी आने वाली है.. समझे…
प्रिया ने इतनी सफ़ाई से झूठ बोला कि रिंकू तो बस उसको देखता रह गया और खेमराज का भी मुँह खुला का खुला रह गया।
खेमराज- क्या डॉली यहाँ आ आने वाली है.. व्व..वो मानी कैसे? और द..रिंकू तुमने हमें बताया क्यों नहीं.. कि प्रिया हमारा साथ दे रही है?
अब तो रिंकू में जान आ गई थी.. खेमराज प्रिया के झूठ के जाल में फँस गया था।
रिंकू- बहन के लौड़े.. तुझे बड़ी जल्दी है हर काम की.. वो साला मैडी प्लान बना रहा है मगर कुछ बता नहीं रहा.. तो मैंने सोचा क्यों ना प्रिया के जरिए डॉली तक पहुँच जाऊँ मगर तू यहाँ अपनी माँ चुदवाने आ गया.. अगर वो आ गई और तुझे यहाँ देख लिया तो हाथ से गई समझ.. उसके बाद तो मैं तुझे देख लूँगा।
खेमराज- अरे यार मुझे क्या पता.. मैं तो समझा तुम दोनों यहाँ…
रिंकू- क्या सोचा बे.. मादरचोद.. बोल साले तेरी ज़ुबान काट के हाथ में दे दूँगा.. अगर कुछ भी उल्टा-सीधा बोला तो.. बता अब…
खेमराज बेचारा क्या बोलता.. उसकी तो जान आफ़त में आ गई थी और रिंकू तो बस पूछो मत उल्टा चोर कोतवाल को डांटने पर तुल गया था।
खेमराज- अरे कुछ नहीं सोचा मेरे बाप.. अब मैं जाता हूँ मगर जाने के पहले बस एक बार डॉली को देख लूँ.. मेरे मन को तसल्ली मिल जाएगी।
प्रिया- हाँ देख लेना.. वो आती ही होगी.. जाओ छुप जाओ और सुनो उसके सामने मत आ जाना.. भाई भी यहाँ छुपने ही मेरे साथ आए थे.. बस वो मुझसे मिलने आ रही है।
रिंकू ने कुछ और बोलना ठीक ना समझा और खेमराज के साथ रसोई में छुप गया।
उन दोनों के जाने के बाद प्रिया बड़बड़ाने लगी।
प्रिया- ओह.. गॉड.. बाल-बाल बची.. डॉली अब आ भी जाओ.. एक तो सर ने मेरी चूत को पानी-पानी कर दिया.. अब ये बीच में खेमराज आ गया.. सर जल्दी से डॉली को चोद कर भेज दो.. नहीं तो खेमराज को समझाना मुश्किल हो जाएगा।
रिंकू- साले तुझे ऐसे खिड़की से किसी के घर में घुसते हुए ज़रा भी डर नहीं लगा…
खेमराज- कैसा डर.. तुम दोनों को जाते देख लिया तो बस मन नहीं माना और यहाँ देखने आ गया।
रिंकू- मैं जानता हूँ साले.. तू एक नम्बर का हरामी है.. जरूर कुछ गलत सोच कर देखने आया होगा।
खेमराज- ऐसी बात नहीं है यार.. अच्छा ये सब जाने दे.. पहले ये बता डॉली यहाँ आ रही है.. ये सब जुगाड़ कैसे किया.. प्रिया को सब बातों का पता है क्या?
रिंकू- अरे नहीं साले.. उसको थोड़ी ये बोल सकता हूँ कि डॉली को चोदना चाहता हूँ.. मैंने प्रिया को झूट-मूट प्यार का नाम ले दिया इसी लिए उसने डॉली को यहाँ बुलाया है।
खेमराज- ओह.. ये बात है.. प्यार के चक्कर में फँसा कर चोदेगा.. चल अच्छा है.. कैसे भी आए.. चूत मिलनी चाहिए बस….
रिंकू कुछ बोलना चाह रहा था.. तभी दरवाजे की घन्टी बजने लगी शायद डॉली आ गई थी।
दोस्तो, दूसरी बार चुदने के बाद डॉली ने चेतन से कहा- उसको अब जाना होगा.. जरूरी काम है। 
चेतन ने बहुत रोकना चाहा मगर वो वहाँ से बहाना बना कर निकल गई और अब दरवाजे के बाहर खड़ी है। 
प्रिया झट से गई.. दरवाजा खोला और धीरे से कहा।
प्रिया- सस्स.. कुछ मत कहना.. खेमराज यहीं है ऐसी कोई बात करना उसको कुछ पता नहीं है।
डॉली- अरे शिट.. उसको यहाँ क्यों बुलाया?
प्रिया- चुप रह ना.. सब बता दूँगी अन्दर तो आ.. किसी ने नहीं बुलाया.. खुद आ गया.. अब आ जा…
खेमराज रसोई की खिड़की से डॉली को आता देख रहा था, तभी रिंकू ने उसको वहाँ से हटा दिया।
रिंकू- साले हट.. वो देख लेगी तो बना-बनाया काम बिगड़ जाएगा।
प्रिया और डॉली उस कमरे में चली गईं वहाँ जाकर प्रिया ने सारी बात डॉली को समझा दी।
खेमराज- अरे यार तू सच में खिलाड़ी है.. डॉली आ गई.. काश अभी प्रिया यहाँ ना होती तो साली को अभी चोद देते…
रिंकू- अबे चुप बहन के लौड़े.. अब चल निकल जा यहाँ से और सुन बाहर इंतजार कर.. मैं बस 5 मिनट में आता हूँ.. वहीं रहना।
खेमराज की उसी खिड़की से बाहर निकल गया रिंकू ने खिड़की बन्द कर दी और कमरे में चला गया।
प्रिया- गया क्या वो? आज तो बाल-बाल बचे.. वैसे क्या बोला अपने उसे?
रिंकू- कुछ नहीं.. यही कि तुम डॉली को मेरे प्यार के बारे में बता कर यहाँ बुलाकर लाने वाली हो.. अब मैं जाता हूँ.. साला वो बाहर ही खड़ा है.. कहीं उसको शक हो गया तो गड़बड़ हो जाएगी।
प्रिया- ठीक है आप जाओ।
डॉली- अरे मेरे आशिक.. तेरी किस्मत में आज भी मेरी चूत नहीं लिखी.. जा मैडी से मिल.. उसका कल का प्लान पता कर.. नया बदलाव में फ़ोन पे बता दूँगी तुम्हें ओके….
रिंकू- मेरी जान अब कोई टेन्शन नहीं है.. जब चाहूँ तुझे चोद लूँगा.. फिलहाल तो मैं जाता हूँ.. उस हरामी खेमराज के रहते मैं कोई ख़तरा मोल नहीं ले सकता.. तुम दोनों यहीं रहो.. मैं जाता हूँ.. जल्दी आने की कोशिश करूँगा।
रिंकू के जाने के बाद डॉली आराम से बिस्तर पर लेट गई।
डॉली- आह.. बड़ा सुकून मिल रहा है आज तो कमर दुखने लगी।
प्रिया- तू तो सर के लौड़े से चुद कर आई है मेरी चूत की हालत खराब है.. ये खेमराज कुत्ता भी ऐन मौके पर आ गया.. नहीं तो रिंकू के लौड़े से अब तक मेरी चूत ठंडी भी हो जाती।
डॉली- शुक्र कर.. कुछ शुरू होने के पहले वो आ गया.. नहीं तो तुम दोनों को भारी पड़ जाता और रिंकू के साथ वो भी अभी तेरी चूत के मज़े ले रहा होता।
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Reply
09-04-2017, 04:23 PM,
#50
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
प्रिया- लेता तो ले लेता.. मगर मेरी चूत की आग तो शान्त हो जाती.. अब पता नहीं रिंकू वापस आएगा भी या नहीं…
डॉली- मैंने तो तुझे कहा था सर के लौड़े से चुद ले.. मगर तू नहीं मानी.. क्या मज़ा आया आज.. बेचारे मुझे रोक रहे थे.. मैं ही ज़बरदस्ती आई हूँ.. सोचा था कि आज रिंकू के लौड़े से भी चुद कर देख लूँ.. उसमें कैसा मज़ा आता है.. मगर यहाँ तो तू ही सूखी बैठी है.. चल निकाल कपड़े.. मैं ही तेरी चूत चाट कर तुझे मज़ा देती हूँ.. क्या याद करेगी कि किस से पाला पड़ा है।
प्रिया- अरे चाट ले मेरी जान.. तू चाट कर बड़ा मज़ा देती है.. तूने तो आज बड़े पोज़ बदल-बदल कर चुदाई करवाई सर से.. अब मेरी चूत भी चाट कर मज़ा दे मुझे।
डॉली- हाय.. तुझे कैसे पता.. मैं सर से कैसे चुदी..?
प्रिया- अंदाज लगाया यार.. अब सर तेरी जैसी कली को चोदेंगे तो पोज़ बदल बदल कर ही चोदेंगे ना…
डॉली- ओह.. अच्छा चल हो ज़ा नंगी.. अभी तुझे आराम देती हूँ…
प्रिया ने जल्दी से कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर चित्त लेट गई।
प्रिया- अरे तू भी निकाल ना अपने कपड़े…
डॉली- नहीं.. मैं नहीं निकालूंगी.. तुझे मजा देती हूँ.. मेरा अभी मन नहीं है।
प्रिया- ओके ओके.. चल आ जा यार.. चूत में बड़ी खुजली हो रही है…
डॉली अपने काम में लग गई.. प्रिया आहें भरने लगी और चूत चटाई का मज़ा लेने लगी।
दोस्तो, रिंकू जब बाहर गया.. तो क्या हुआ चलो देखते हैं।
खेमराज घर के बाहर ही खड़ा था.. जब रिंकू आया.. उसके चेहरे पर सवाल आ गया कि रिंकू मेन गेट से बाहर आया है यानि वो डॉली से मिलकर आ रहा है।
रिंकू- अबे साले.. ऐसे क्या घूर कर देख रहा है.. चल अब..
खेमराज- अरे कुछ नहीं सोचा मेरे बाप.. अब मैं जाता हूँ.. मगर जाने के पहले बस एक बार डॉली को देख लूँ.. मेरे मन को तसल्ली मिल जाएगी।
खेमराज- वो दोनों तो अन्दर हैं क्या बात हुई डॉली से मिले क्या तुम…?
रिंकू- अबे साले सारे सवाल यहीं पूछ लेगा क्या.. प्रिया उसको समझा रही है.. काम बन जाएगा.. चल चाय पीकर आते हैं.. वो साले मैडी को भी बुला लेंगे मिलकर बात करेंगे।
दोनों वहाँ से चल पड़ते हैं.. अभी थोड़ी दूर ही गए होंगे कि खेमराज के पापा रास्ते में मिल गए और कुछ जरूरी काम है बोलकर खेमराज को अपने साथ ले गए।
रिंकू ने कहा- शाम को मिलते हैं।
उनके जाने के बाद रिंकू ने अपने आप से बात की।
रिंकू- चल बेटा रिंकू.. साला कबाब में हड्डी चला गया.. अब तो डॉली भी आ गई है आज साली की चूत का मज़ा ले ही लूँ।
रिंकू जाने लगा तो प्रिया के पापा यानि रिंकू के चाचा उसे दिखाई दे गए और वो वहीं रुक गया।
रिंकू- अरे अंकल आप कहाँ से आ रहे हो?
अंकल- तेरा कोई पता ठिकाना भी है क्या.. बेटा कितने समय से तेरे पापा के पास बैठ कर आया हूँ.. वो दरअसल मैं और तेरी चाची प्रिया की नानी से मिलने जा रहे हैं.. उनकी तबीयत खराब है.. शाम को जाएँगे.. प्रिया के
इम्तिहान हैं तो उसको नहीं ले जा रहे हैं.. तेरे पापा को बोलने गया था उसे अपने पास रख ले।
रिंकू- ओह.. आप बेफिकर होकर जाओ हम है ना.. प्रिया को संभाल लेंगे…
चाचा- हाँ बेटा सही है.. अच्छा चलता हूँ.. शाम को मिलेंगे अभी थोड़ा काम है…
रिंकू की ख़ुशी दुगनी हो गई.. प्रिया भी रात को उसके घर रहेगी.. वो तेज रफ़्तार से सुधीर के घर की ओर जाने लगा।
आपको याद नहीं तो मैं याद दिला दूँ.. रिंकू के जाने के बाद वो दोनों बिना मुख्य दरवाजे को लॉक किए ही मस्ती में लग गई थीं।
रिंकू जब आया दरवाजे की घन्टी बजाने के पहले उसने दरवाजे को हाथ लगाया तो वो खुल गया।
उसे दोनों पर बड़ा गुस्सा आया.. वो अन्दर आया.. दरवाजा लॉक किया और कमरे की तरफ़ बढ़ गया।
प्रिया- आ आहह.. ज़ोर से चाटो.. उई मेरा पानी निकलने वाला है अई अई..
डॉली भी रफ़्तार से चूत को चाटने लगी और साथ-साथ ऊँगली से चूत के ऊपर रगड़ने लगी।
प्रिया का बाँध टूट गया और वो झड़ गई।
डॉली ने सारा रस चाट कर चूत को साफ कर दिया।
ये नजारा देख कर रिंकू के लौड़े में तनाव आ गया और उसने पैन्ट निकाल दी।
प्रिया- अरे भाई.. आप कब आए पता भी नहीं चला।
रिंकू- तुम दोनों ने दरवाजा बन्द क्यों नहीं किया.. कोई और आ जाता तो.. और तुमको ऐसी हालत में देख लेता तो?
डॉली- दूसरा यहाँ कौन आएगा और आ भी जाता तो उसको भी चूत का स्वाद मिल जाता.. यार तेरा तो क्या मस्त लौड़ा खड़ा है। डॉली उठकर रिंकू के पास आ गई और लौड़े को हाथ में ले लिया।
रिंकू- साली.. मैं समझता था अपने भाई के बारे में सोचने वाली मेरी बहन ही रंडी है.. मगर तू उससे बड़ी रंडी निकली.. कोई आ जाता तो उसको भी स्वाद मिल जाता.. ऐसा बोलकर तूने साबित कर दिया.. कि तू भी रंडी है।
डॉली- हा हा हा रंडी.. और तू क्या है.. तुझे पता है? कल तक मुझे चोदना चाहता था.. कुत्ते की तरह मेरे आगे-पीछे घूमता था और अब तक तुझे मेरी चूत नहीं मिली.. तूने शुरूआत भी की तो अपनी बहन के साथ छी: छी:.. तू तो कितना बड़ा बहनचोद है।
प्रिया- डॉली बस भी करो.. बार-बार ये बात भाई को बोलकर गुस्सा मत दिलाओ.. नहीं तो आज तुम्हारी चूत की खैर नहीं.. गुस्से में ये बड़े ख़तरनाक तरीके से चोदते हैं।
डॉली- अच्छा.. ये बात है.. चल आज देख ही लेती हूँ.. तेरे भाई का जोश…
इतना बोलकर डॉली उसका लौड़ा चूसने लगी अपने होंठों को भींच कर सर को हिलाने लगी रिंकू की तो बोलती बन्द हो गई.. बस मज़े में आँखें बन्द किए खड़ा लौड़ा चुसवाता रहा।
डॉली को देख कर प्रिया में भी जोश आ गया और वो भी उसके पास आकर रिंकू की गोटियां चाटने लगी।
दो कमसिन कलियां अपना जादू चला रही थीं और रिंकू आनन्द की अलग ही दुनिया में चला गया था।
रिंकू- आहह.. उफ़फ्फ़ साली आहह.. सच में तुम दोनों ही ज़बरदस्त चुदक्कड़ हो आहह.. चूसो उफ़ मज़ा आ गया आहह…
प्रिया ने डॉली के मुँह से लौड़ा निकाल कर अपने मुँह में डाल लिया। डॉली ने उसकी गोटियाँ पूरी मुँह में ले लीं और ज़बरदस्त चुसाई शुरू कर दी।

रिंकू- आहह.. अइ बस भी करो आहह.. पानी निकालने का इरादा है क्या आहह.. साली अभी मुझे तेरी चूत का स्वाद भी चखना है।
डॉली- अच्छा तो रोका किसने है.. चख लेना पहले तेरे लौड़े का रस तो पिला दे.. उसके बाद जो चाहे कर लेना…
रिंकू- आहह.. ठीक है जान.. आहह.. ले चूस आहह.. प्रिया इसे चूसने दे आहह.. तूने तो एक बार मेरा रस पिया है ना.. आज इसे पीने दे आहह.. चूसो…
प्रिया ने लौड़ा मुँह से छोड़ दिया.. डॉली झट से लौड़े पे टूट पड़ी.. प्रिया भी उसके पास ही बैठी रही।
रिंकू ने डॉली के सर को पकड़ लिया और उसके मुँह में दनादन लौड़ा पेलने लगा।
रिंकू- आ आहह.. मज़ा आ रहा है आहह.. साली तेरा मुँह भी किसी चूत से कम नहीं आहह.. उफ़ चूस आहह.. साली रंडी.. आहह.. तू क्या देख रही है मेरे टट्टे चूस.. आहह.. पानी तो इनमें ही तो भरा हुआ है आहह.. चाट…
प्रिया भी उसकी टाँगों के बीच घुस कर गोटियाँ चाटने लगी।
वो रफ़्तार से डॉली के मुँह को चोद रहा था और प्रिया की जीभ उसकी गोटियों को चाट रही थी..
कब तक वो इन दो कमसिन कलियों के आगे टिका रहता.. उसका लौड़ा फूलने लगा और उसने पूरा लौड़ा डॉली के मुँह में घुसा कर झड़ना शुरू कर दिया।
रिंकू- आह उफ़फ्फ़ कितना हसीन पल है ये उफ़ आहह.. मज़ा आ गया…
रिंकू के लौड़े ने डॉली के गले तक पानी की पिचकारी मारी और वो सारा वीर्य गटक गई।
अब उसने लौड़ा मुँह से निकल जाने दिया.. उसके मुँह में अभी भी थोड़ा वीर्य था जो उसने अपनी जीभ की नोक पर रख लिया प्रिया ने झट से उसकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसा और बाकी वीर्य वो पी गई।
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