Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
07-19-2018, 12:21 PM,
#1
Star  Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
चेतावनी ........... ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है 

जिस्म की प्यास 




दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हू दोस्तो जिस्म की प्यास एक ऐसी प्यास है जो बड़े बड़े खानदानो को तबाहओ बर्बाद कर देती है ये कहानी भी जिस्मो की प्यास पर आधारित है दोस्तो

ये कहानी एक साधारण भारतीय परिवार की है... दिल्ली शहर में बसा हुआ ये परिवार एक साथ बहुत खुश

रहता है मगर अलग अलग इनकी ज़िंदीगिया कुच्छ और ही है... और इनमे 5 लोग है..

सब से पहले

नारायण : उम्र: 50 साल.. रंग: सावला... दिखने में: लंबा, पतला और 6.5 इंच का लंड.. एक स्कूल अध्यापक

होने के कारण कयि लड़कियों से घिरा रहता था और उसकी वजह से उसकी काई इच्छाएँ थी जिनको वो . करने से डरता था.

शन्नो : उम्र 42 साल.. रंग: गोरा.. दिखने में: हट्टी कत्ति आंटी.. 38डी/30/38 साइज़ है और गाल पे एक तिल है..

एक ज़िम्मेदार पत्नी और मा मगर एक कमी है कि ये पैसो के बारे में कुच्छ ज़्यादा ही सोचती है..

डॉली : उम्र 23 साल.. रंग सावला.. दिखने में: 34बी/24/36 साइज़ खूबसूरत चेहरा और 5 7 इंच की हाइट..

सच्चे प्यार की तलाश में रहती है.. काफ़ी शरीफ और घरेलू लड़की है और अपने परिवार से बहुत प्यार करती है.

ललिता : उम्र 19 साल.. रंग गोरा.. दिखने में: 36सी/26/37 साइज़... छोटी उम्र मगर बाकी सब कुच्छ बड़ा..

अपनी बहन से बिल्कुल अलग.. प्यार से ज़्यादा इसको चुदाई में ज़्यादा दिलचस्पी है.... मगर अभी तक इसकी सील टूटी नहीं है...

चेतन :उम्र 18 साल.. रंग सावला.. दिखने में लंबा मोटा.. घर का सबसे छोटा और काफ़ी शरीफ लड़का..

आज तक उसने किसी लड़की को छुआ भी नहीं था छूना तो दूर की बात उसे बात भी करनी नहीं आती थी.. लेकिन उसका भी मन करता था कि उसकी कोई गर्ल फ्रेंड हो जो उसे बहुत ज़्यादा प्यार करें

ये कहानी नारायण के परिवार के बारे में हैं जो कि ईस्ट देल्ही में रहते हैं. नारायण 50 साल

का है और पेशे से स्कूल का टीचर है. उसकी बीवी शन्नो है जो कि घर की और पूरे परिवार की देखबाल

करती है. शन्नो के पिता ने उसकी 19 साल की उम्र में ही शादी करा दी थी. इतनी कम उम्र में शादी होने के बावजूद

अभी भी उनकी शादी शुदा ज़िंदगी अच्छी है. अपनी पहली बच्ची का नाम उन्होने डॉली रखा और कुच्छ साल बाद

उनको दो और बच्चे हुए जिनका नाम उन्होने ललिता और चेतन रखा. डॉली कॉलेज के आखरी साल में है....

ललिता डिस्टेन्स से अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही है मगर फिर भी उसको क्लासस के लिए हर दिन जाना पड़ता है

और चेतन फिलहाल स्कूल में पढ़ रहा है मगर ऐसा स्कूल जिसमे सिर्फ़ लड़के पढ़ते है...

रोज़ की तरह सुबह नारायण 6 बजे उठ कर दौड़ने चला गया. कुच्छ देर बाद शन्नो बिस्तर से सोके उठी और किचन

में जाके सुबह का नाश्ता बनाने लगी. जब तक नारायण दौड़ के आया शन्नो ने चेतन और ललिता दोनो को उठाया

और जल्दी से तैयार होके नाश्ता करने को कहा. चेतन हमेशा की तरह ललिता से लड़ झगड़ के बाथरूम में पहले

घुस गया. ललिता ज़ोर से दरवाज़े को पीटने लगी.... इन दोनो के बीच में कुत्ते बिल्ली जैसी लड़ाई होती रहती थी..

किसी ना किसी बात पर बहस होती रहती थी और कभी कबार हाथा पाई भी.... जैसे की सुबह कभी ललिता टाय्लेट

जल्दी चली जाती थी तो कभी चेतन और दोनो एक दूसरे को सताने के लिए बहुत समय लगाते थे... थोड़ी देर बाद

दोनो अच्छी तरह तैयार होके टाइम से खाना खाने के लिए आ गये. देखते ही देखते घर खाली हो गया.

नारायण ललिता को स्कूटर पे ले गया ताकि वो उसको क्लासस के लिए छोड़ दे और फिर स्कूल चले जाए और

चेतन अपने स्कूल चला गया बस से. ललिता को भी जल्दी जाना था क्यूंकी आज उसका एग्ज़ॅम था...

शन्नो को थोड़ी देर के लिए राहत मिली तो वो आराम करने चली गयी. जब उसकी आँख खुली तब 8:10 हो गये थे

वो जल्दी भागी डॉली के कमरे में उसको उठाने के लिए. जब तक वो पहुचि वहाँ डॉली पहले ही

तयार हो चुकी थी कॉलेज जाने के लिए. शन्नो उसके पास गयी और उसके माथे को हल्के से चूमा

और खाना खाने के लिए बोला. खाने के बाद डॉली भी अपना कॉलेज बॅग उठाके मेट्रो पकड़ने के लिए चली गयी.

शन्नो अकेले रूम में बैठ कर अपनी बेटी के बारे में सोचने लगी.. उसको डॉली पे बहुत नाज़ था और वो चाहती थी

की डॉली अपनी पढ़ाई पूरी करके अपनी ज़िंदगी जिए जो वो खुद नही कर पाई थी .

दूसरी ओर डॉली आनंद विहार स्टेशन पहुचि और जब तक वो प्लॅटफॉर्म पे पहुचि ट्रेन चली गयी थी.

अगली ट्रेन 4 मिनट में थी तो डॉली गर्ल्स कॉमपार्टमेंट की लाइन में जाके खड़ी हो गई.कुच्छ कदम दूर ही एक गार्ड

था जोकि लंबा चौड़ा था और डॉली को देखे जा रहा था. डॉली ने उसको नज़र अंदाज़ करने की कोशिश करी

मगर वो चलके उसके पास आने लगा. तभी मेट्रो आने की आवाज़ आई और डॉली झट से जाके उसमें बैठ गयी.

उस गार्ड ने तो उसको डरा ही दिया था मगर आज वो बहुत खुश थी क्यूंकी उसके बाय्फ्रेंड राज और उसके

रिलेशन्षिप को 6 महीने हो गये थे और वो सीधा उसके घर जाने का सोच रही थी इसीलिए तो उसने

अपनी फॅवुरेट ब्लू जीन्स और ब्लॅक टी-शर्ट ब्लॅक हाइ हील्स के साथ पहनी थी. वो ट्रेन में अपनी पहली मुलाकात

के बारे में सोचने लगी जब वो दोनो मेट्रो में ही मिले थे. डॉली अपनी सहेलिओ के साथ थी और

राज अपने दोस्तो के साथ. डॉली को पहली झलक में राज से प्यार हो गया था. फिर वो सोचने लगी

जब पहली बार राज के घर गयी थी और कैसे राज ने उसको अपनी बाँहो में लेके प्यार किया था.

उस दोपेहर का एक एक पल वो कभी नहीं भूल सकती जब वो दोनो पहली बारी हमबिस्तर हुए थे.

डॉली आज भी अपने आपको राज को सौपने जा रही थी और तभी उसने पर्पल ब्रा और पैंटी पहनी थी जोकि राज

का सबसे पसन्द का रंग है. डॉली लक्ष्मी नगर स्टेशन पे उतरी और राज के घर जाने लगी.

राज आकाश गंगा अपार्टमेंट्स में रहता था अपने मा बाप के साथ मगर उसके मा-बाप सुबह काम के लिए जाते थे

और शाम को ही लौटते थे... डॉली ने घर की बेल बजाई और कुच्छ सेकेंड्स इंतजार किया. थोड़ी देर फिर से बेल बजाई

तो दरवाज़ा खुला और राज के चेहरे का रंग ही उतर गया था डॉली को देख कर. डॉली ने राज को देख कर कहा

अर्रे दरवाज़ा तो खोलो. राज ने ना चाहते हुए भी दरवाज़ा खोला और डॉली घर के अंदर आके उसे लिपट गयी.

तभी रूम में से एक लड़की की आवाज़ आई "राज कौन आया है".. डॉली राज से दूर हो गयी और उसके बेडरूम में गयी.

बिस्तर पे रज़ाई ओढ़ के उसकी सबसे अच्छी सहेली नेहा लेटी हुई थी. नेहा डॉली को देख कर घबडा गई और कुच्छ बोल नही पाई.

डॉली की आँखों में आँसू आ गये और वो घर से बाहर चली गयी. डॉली अपने आपको रोक नहीं पाई

और सीडिओं पे बैठके रोने लगी. राज सीडिओं तक आया उसको चुप करने के लिए और गुस्से में आके

उसने राज को वहीं चाँटा लगा दिया और वहाँ से चली गयी...

पूरे रास्ते उसका ध्यान राज पे था जिसने उसको धोका दिया मगर उससे ज़्यादा उसे अपनी सहेली नेहा पे

गुस्सा आ रहा था.... वो नेहा को सब कुच्छ बताती थी और उसपे हद से ज़्यादा भरोसा करती मगर उसको

अंदाज़ा भी नहीं था कि वो कभी ऐसा कर सकती है... यही सोचते सोचते वो अंजाने में जाके

मेट्रो के नॉर्मल कॉमपार्टमेंट के अंदर चली गयी. इतना शोर सुनके उसका ध्यान भटका और देखा कि

पूरे कॉमपार्टमेंट में लड़के/आदमी थे. और उसके अगले कॉमपार्टमेंट में भी लड़के ही दिख रहे थे.

वो सोच में पड़ गयी कि अब लड़कियों के कॉमपार्टमेंट में जा भी नहीं सकती. डॉली पोल को पकड़के बीच में खड़ी हो गई.

उसने अपना ध्यान भटकाने के लिए इयरफोन्स लगाए और गाने सुनने लग गयी. अगले स्टेशन पे जब ट्रेन रुकी

तो और लोग उसमें चढ़ गये और डॉली सबके बीच पिस गयी. गाने सुनने के कारण डॉली के सिर में दर्द हो रहा था

तो उसने गाने सुनने बंद कर दिए मगर एअर फोन कान से नहीं निकाले. डॉली दोनो गेट के बीचे में

पोल पकड़के खड़ी हुई थी और पोले का सहारा लिए कयि लोग थे. डॉली को लगे जा रहा था कि ये लड़के/आदमी

ज़रूर मेरे हाथ को छुना चाहेंगे और इसी वजह से उसने पोल को सबसे उपर से पकड़ा.

इस ग़लती की वजह से अंजाने में डॉली की टी-शर्ट थोड़ी उपर हो गई और उसकी पतली कमर का नज़ारा दिखाने लगी.

सब लोगो की अंजाने में या जानके नज़र डॉली की कमर पे ही जा रही थी. अगला स्टेशन प्रीत विहार था

और स्टेशन पे जब गाड़ी रुकने वाली थी तभी लोग उतरने के लिए दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगे.

डॉली घबरा गयी और अपने आपको संभालने लगी. 2-3 लोगो से उसका बदन छुआ फिर उसको किसी का

हाथ गान्ड के उपर महसूस हुआ और दूसरे सेकेंड में ही उसकी नंगी कमर को सहलाता हुआ दूसरा हाथ.

डॉली ने जल्दी से अपना शर्ट नीचे करी और घबराके खड़ी हो गयी. उसने पूरी कोशिश करी कि उसकी

घबराहट किसी और को दिखे ना. प्रीत विहार पे जितने लोग उतरे तो उतने चढ़ भी गये. बस अब 2 स्टेशन बचे

थे आनंद विहार स्टेशन आने में और डॉली को उसका ही इंतजार था. धक्को के कारण डॉली दूसरे दरवाज़े

की तरफ हो गयी शीशे के बाहर देखने लगी.वो इतनी चिपकी हुई थी दरवाज़े से की मानो कभी कभी मेट्रो के

झटको के कारण उसके मम्मो और शीशे के बीच में चुंबन हो रहा हो. पर अचानक बड़ी तेज़ ब्रेक की

आवाज़ आई और झटके से मेट्रो रुक गयी. इसी मौके का फ़ायदा उठाके एक 15-16 साल के बच्चे ने डॉली की गान्ड को छुने का मज़ा उठाया. डॉली ने अपने आपको संभाला और तभी अनाउन्स्मेंट हुई

" ज़रूरी सूचना कुच्छ टेक्नीकी खराबी की वजह से मेट्रो का सफ़र रोका गया है. हमे खेद है

और जल्द ही इस समाधान को ठीक कर दिया जाएगा."

मेट्रो पूरी बंद हो चुकी थी हल्का सा अंधेरा भी च्छा गया था और एसी भी बंद हो गये थे.

डॉली ने अपनी आँखें बंद करके दुआ माँगी कि जल्दी सब ठीक हो जाए. गर्मी और दर्द के कारण डॉली ने

अपना कॉलेज बॅग अपने पैरो के पास रख दिया.

फिर से अनाउन्स्मेंट हुई कि "हम कुच्छ ही समय में सफ़र शुरू करदेंगे." डॉली को ये सुनके जान में

जान आई. डॉली का फोन वाइब्रट हुआ और उसने राज का नाम देख कर कट कर्दिआ. दो-तीन बारी कॉल आया और हर

बारी राज का कॉल कट कर दिया. मेट्रो भी चलने लगी और डॉली अब फिर आज सुबह के बारे में सोचने लगी.

जब ट्रेन आखरी स्टेशन पे पहुच गयी तब डॉली आराम से उतरी ताकि फिर धक्का मुक्की में ना फसना पड़े.

तक हारकर डॉली घर पहुचि और उसने बेल बजाई. थोड़ी देर बाद दरवाज़ा चेतन ने खोला.

"ओये तू इतनी जल्दी कैसे आ गया स्कूल से" डॉली ने चेतन से पूछा. चेतन ने कुच्छ नहीं कहा

और सीधा अपने कमरे में गया और दरवाज़ा बंद कर दिया. "अच्छी बात है आगयि तू डॉली" शन्नो गुस्से में बोली.

"क्या हुआ अम्मी" डॉली ने घबराके पूछा. "इस लड़के ने तो हमारा जीना हराम कर रखा है स्कूल

से लेटर आया है कि ये कितने दिनो से स्कूल नही जा रहा है. एक एग्ज़ॅम भी नही दिया इस नालयक ने. नज़ाने कहाँ किसके साथ रहता होगा."

ये बोलके शन्नो अपना सिर पकड़के सोफे पे बैठ गयी. डॉली ने अपनी अम्मी को तसल्ली दी और उसको कहा

की वो चेतन से बात करेगी... चेतन की सबसे चहेती बहन डॉली थी.. जितनी लड़ाई उसकी ललिता से थी उतना

ही प्यार उसका डॉली के साथ था... मगर डॉली के कई बारी दरवाज़े खटखटाने पर भी चेतन ने दरवाज़ा नही खोला.

डॉली आज वैसे ही काफ़ी झेल लिया था और अब वो परेशान होके अपने रूम में चली गयी सोने के लिए.

4 बजे तक घर पे सब शांत था फिर घर की बेल

बजी और शन्नो जल्दी से उठी दरवाज़ा खोलने के लिए.

नारायण और ललिता खड़े थे बाहर और नारायण कुच्छ

ज़्यादा ही गुस्से में था.

"कहा है साहब ज़ादे" नारायण ने चिल्लाके पूछा

शन्नो से. शन्नो ने कहा कि अपने रूम को बंद करके

बैठा हुआ है. नारायण ने भी चेतन को उसके हाल पे

छोड़ दिया और इंतजार किया उसके बाहर निकलने का.

शाम के 6 बज गये थे और डॉली और ललिता दोनो

बिस्तर पे सो रहे थे तभी चेतन ने अपने कमरे का

दरवाज़ा खोला और देखा के उसके अम्मी और पापा दोनो टीवी

देख रहे है. वो चुप चाप जाके सोफे पे बैठ गया.

कुच्छ देर बाद चेतन ने हिम्मत झुटाके पापा कहा और

नारायण ने टीवी बंद कर्दिआ.

"बोलो मैं सुन रहा हूँ" नारायण ने अपनी भारी

आवाज़ में बोला. "मैं मानता हूँ कि मैने स्कूल बंक

किया मगर खुदा की कसम मैने कोई ग़लत काम

नहीं किया. मैं चंदर के घर पे रहता हर समय

आप चाहे तो पूच्छ सकते है". नारायण ने कहा "उसकी

कोई ज़रूरत नहीं है मैने चंदर से पहले ही बात करली

थी और मुझे तुमपे भरोसा है कि तुमने कुच्छ ग़लत

काम नहीं किया होगा. मैं तुम्हारे स्कूल गया था

और बहुत गुज़ारिश करने के बाद तुम्हारी प्रिनिसिपल

ने तुम्हे आखरी मौका दिया है. मगर मुझे ये

बताओ तुमने एग्ज़ॅम क्यूँ नहीं दिए और स्कूल क्यूँ

बंक करा??"

"पापा उस स्कूल में सब मेरा मज़ाक उड़ाते है

और मुझे हर वक़्त परेशान किया जाता है. मुझे

उस स्कूल में तरह तरह के नामो से पुकारा जाता है"

ये बोलके चेतन के आँखों में आँसू आ गये.

नारायण ने समझाया "बेटा इस दुनिया में

कयि बारी तुम्हारे पे मुसीबते आएँगी मगर तुम्हे

उनसे भागना नहीं चाहिए. मेरेलिए तुम फिर से

स्कूल जाके देखो. अब तुम्हे कोई परेशान नहीं

करेगा". केयी कोशिशो के बाद चेतन ने नारायण की

बात मानलि और जाके दोनो के गले लग गया.

रात तक माहौल काफ़ी सुधर गया था. सब अपने अपने

रूम में सोने के लिए चले गये थे. डॉली अपने बिस्तर

पे अकेले नेहा और राज के बारे में सोचने लगी.

उसे एक पल भी नहीं लगा था कि ये दोनो मिलके उसको इतना

बड़ा धोका देंगे. तभी उसका मोबाइल बजा और राज

का मैसेज आया प्लीज़ डॉली फोन उठा लो बहुत ज़रूरी बात

करनी है. डॉली ने काफ़ी देर सोचा और उसको रिप्लाइ करा

कि मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी और तुम्हारी

आवाज़ हरगिज़ नहीं सुननी. राज ने फिर

लिखा की अगर हमारा प्यार सच्चा है तो कल तुम

मुझे अपने कॉलेज के बाहर मिलोगि.... मैं इंतजार

करूँगा... डॉली ने राज के मैसेज का कोई रिप्लाइ नहीं करा.

रात के कुच्छ 12:30 बज रहे होंगे नारायण ने अपनी आँख

खोली और बिस्तर से उठा और अपने रूम के बाहर गया.

पूरे घर में शांति थी.. नारायण अपने कमरे

में आया और आहिस्ते से अपनी अलमारी खोलके ड्रॉयर

में सेकोन्डोम निकाला. शन्नो उसके सामने ही

सीधे पड़े हुए बिस्तर पे सोरहि थी सफेद-हरे

सलवार कुर्ते में. उसने एक पतली सी चादर ओढ़ रखी थी

अपने पेट तक. कसम से काफ़ी मस्त लग रही थी वो

और जब भी वो सासें लेती तो उसके स्तन उपर नीचे

होते रहते नारायण उसके पास जाके खड़ा हो गया

और उसको 5 सेकेंड्स देखकर ही उसका लंड जाग गया.

नारायण अपनी बेगम को चौकाना चाहता था इसीलिए उसने

उसको जगाया नहीं बल्कि धीरे से उसकी चादर

नीचे सरका दी. नारायण ने अपना उल्टा हाथ धीरे से

बढ़ाता और शन्नो के मम्मे पे रख दिया और उसको

उपर नीचे करने लगा. शन्नो के कुच्छ ना करने पर वो

फिर उन्हे दबाने लगा... फिर उसकी मोटी चुचियो को

महसूस करने लगा और वो सख़्त हो गयी... बड़ी कठोरता से

नारायण ने उसकी चुचि को नौचा जिससे शन्नो

बिस्तर पे पलट गयी.... अब शन्नो की मोटी गान्ड उसके

सामने आ गयी थी.. वो नीचे घुटनो के बल बैठा

और अपनी बेगम की गान्ड को महसूस करने लगा..

उसने कुर्ते को उपर करा और सलवार के उपर से उसकी मस्त

गान्ड को सहलाने लगा...

फिर नारायण ने अपनी उंगली शन्नो की गान्ड के बीचकी सड़क

पे चलाने लग गया... शन्नो नींद में ही परेशान होके

फिरसे पलटी...

अब वो नारायण की तरफ मूड गयी थी... नारायण खड़ा

हुआ तो उसका लंड जो कि उसके पाजामे में था, शन्नो

के मुँह की तरफ देख रहा था. नारायण ने पाजामे का

नाडा खोला और अपने लंड को कच्छे में

से बाहर निकाला.. उसका 6.5 इंच का मोटा लंड और बढ़

गया था. वो थोड़ा शन्नो के पास झुका और अपना

लंड शन्नो के गाल पे रखके सहलाने लगा. उसका लंड

शन्नो के गालो को चाट्ता चाट्ता उसके होंठो तक पहुच गया

"हाए जालिम क्या क्या कर रहे हो" शन्नो चौक के बोली.

नारायण ने शन्नो को कॉंडम दिखाया. शन्नो ने गुस्से

में बोला आप जानते है ना कि कभी भी बिना कॉंडम

के लंड नहीं चूस सकती फिर क्यूँ मेरे

मुँह के पास लाए."

नारायण ने कहा "ग़लती हो गई ना बेगम...

चलो ना अब और इंतजार ना कर्वाओ इतने दिन हो

गये है तुम्हे ढंग से देखा भी नहीं".

शन्नो परेशान होके बोली

" नारायण आज नहीं कर सकते मैं बहुत थकि हुई हूँ

पूरा घर सॉफ किया है मैने".

नारायण ने उखड़ के कहा " मैं तुमसे बात नहीं

करूँगा" शन्नो ने प्यार से बोला"ऐसे बच्चो की

तरह बात नहीं करते नारायण... "मैं आज सच्ची में

बहुत थकि हुई हूँ और समय भी बहुत हो गया है

कल उठना भी है सुबह मुझे."

क्रमशः………………..
Reply
07-19-2018, 12:22 PM,
#2
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
कामुक-कहानियाँ

जिस्म की प्यास--2

गतान्क से आगे……………………………………

नारायण ने अपनी अलमारी खोली और कॉंडम अंदर

फेक दिया और बिस्तर पे लेट गया. शन्नो बिस्तर से

उठी और कॉंडम वापस निकाला और बोली " देखो आज

संभोग तो नहीं कर सकते मगर मैं तुम्हारे

लंड को चूस सकती हूँ". नारायण ने भी सोचा जितना मिल

रहा है उसको तो लिया जाए और कहा "मगर एक

ही शर्त पे तुम्हे मेरा पानी मुँह में लेना होगा".

" नारायण तुम जानते हो ना मैं नहीं कर सकती ये सब"

शन्नो गुस्से में बोली. नारायण ने शन्नो के माथे को चूमा और कहा

कि "मैं ऐसी ही मज़ाक कर रहा था बेगम... मगर हाँ तुम्हारे

बड़े बड़े गोरे गोरे मम्मो पे तो डालूँगा ही"

शन्नो शर्माके बोली "जैसे आपकी मर्ज़ी"... ये बोलके

शन्नो ने नारायण के पाजामे का नाडा खोलके नीचे गिरा

दिया. उसने नारायण को बिस्तर पे बिठाया और मुस्कुराते

हुए उसका कच्छा उतार दिया.

नारायण का काला लंड जो कि सो चुका था उसको शन्नो ने

छुआ और फिर हाथ में लिया. 2-3बारी हिलाने के

बाद लंड थोड़ा बड़ा हो गया और शन्नो ने कॉंडम

पॅकेट मेंसे निकाला उसपे लगा दिया. शन्नो ने हल्के

से चूमा लंड को और आहिस्ते आहिस्ते अंदर लिया. नारायण ने

शन्नो के लंबे बालो को सहलाया और अपनी बेगम के

मज़े लेने लगा.शन्नो अब चूसने लगी थी लंड को

और लंड पूरी तरह बड़ा हो गया था. शन्नो का उल्टा

हाथ लंड को पकड़े हुआ था तो नारायण ने उसके सीधे

हाथ को अपने आंडो को सहलाने में लगा दिया.

नारायण ने शन्नो को बीच में रोका और झटके

से उसने वो कुर्ता उतार फेका जो उसकी बेगम के बड़े

मम्मो को छुपाए हुए था... शन्नो रात में ब्रा

नहीं पहनती थी तो उसके स्तन नारायण की आँखों

के सामने थे.. नारायण अब बिस्तर पे लेट गया था और

शन्नो बिस्तर पे बैठ कर अपने पति का लंड चूस

रही थी... लंड चूसने के साथ साथ उसके बड़े

मम्मे भी हिले जा रहे थे... नारायण ने अपने

हाथ से एक स्तन को दबाना शुरू करा और बीच बीच

में चुचियो को मसलना भी... शन्नो अब पूरे

नशे में लंड को अपने मुँह लिए जा रही थी और नारायण

पूरी तरह गरम हो चुका था कि उसके मुँह से

सिसकियाँ निकल रही थी.. शन्नो ने अपनी चूसने की

रफ़्तार तेज़ करदी. पूरी तेज़ी से शन्नो लंड को चूसने लगी

और नारायण ने

"हट जल्दी" कहा और कॉंडम को लंड से हटा दिया और

अपना वीर्य आधेसे ज़्यादा शन्नो के मुँह पे

जाने दिए.

शन्नो गुस्सा होके टाय्लेट में चली गयी. नारायण

मन ही मन मुस्कुराने लगा. फिर उठ कर कॉंडम

फेका और ज़मीन को सॉफ किया. जैसी ही शन्नो बाहर

निकली तो नारायण ने उसको कुर्ता पहनने को दिया और अपना लंड

सॉफ करने टाय्लेट चला गया. जब वो बाहर निकला तो पूरे

कमरे में अंधेरा था और उसे पता चल गया था

कि शन्नो बहुत गुस्से में है. वो भी फिर जाके बिस्तर

पे सो गया. सुबह पूरे घर में शांति छाई हुई थी. शन्नो नारायण की तरफ देख भी नहीं रही थी. नारायण ने उससे बात

करने की कोशिश करी मगर वो कल रात की वजह से अब भी नारायण से खफा थी. रोज़ की तरह ललिता क्लासस के

लिए और चेतन स्कूल जाने के लिए उठे और लड़ झगरकर नीचे आ गये. शन्नो ने सबको नाश्ता दिया और घर

से बाहर निकाल दिया.

इतने दिनो के बाद आज चेतन स्कूल गया और उसे बड़ा अजीब लग रहा था. सब उससे यही पूछ रहे थे कि वो

इतने दिन आया क्यूँ नहीं. उसने पीछा छुड़ाने के लिए झूठ मूठ कुच्छ बोल दिया...कुच्छ देर बाद सारे लड़के

शीला की जवानी गाने के बारे में बात करने लगे.., सब कटरीना कैफ़ के गोरे और कंचन जिस्म की तारीफ करने लगे...

उनमें से एक तो बोलने लगा कि सल्लू भाई की किस्मत है जो जब चाहे इसको चोद्ते होंगे और तभी दूसरा बोला

ये भी तो रोल के लिए कुतिया की तरह आती होगी उसके पास... चेतन को भी कटरीना पसंद थी मगर जिस तरह ये

लड़के उसके बारे में बात कर रहा थे वो सुनके उसे अच्छा नहीं लग रहा था....

चेतन लड़कियों के मामले में बहुत सीधा था. वो अपनी बहनो के अलावा किसी और लड़की से बात भी नहीं कर

पाता था. ऐसा नहीं था कि उसे ये नहीं पता था कि लंड का असली इस्तेमाल कहाँ करा जाता है या लड़की के जिस्म

में कितने छेद होते है.... उसने इधर उधर से थोडा बहुत सीख ही लिया था... मगर फिर भी इसको सारे स्कूल के

लड़के हिजड़ा बुलाते थे सिवाई इसके सबसे अच्च्चे मित्र चंदर के...

खैर किसी तरह चेतन का दिन बीत रहा था उधर दूसरी और नारायण स्कूल में परेशान हुए जा रहा था.

उसका दिमाग़ बस सेक्स के बारे में सोचे जा रहा था. वो जानता था कि घर जाके उसको आज कुच्छ नहीं

नसीब होगा और ये बात उसको और खाई जा रही थी. मगर वो याद कर रहा था कि शन्नो के चेहरे पे जब उसने

बो वीर्य छिड़का हाए कमाल का नज़ारा था..... फिर वो स्कूल की लड़कियों को स्कर्ट में देख कर और मचले जा रहा था.

स्कूल का आखरी आधा घंटा बचा था जो कि हमेशा फ्री पीरियड होता था. नारायण समय काटने के लिए

क्लास में बैठा कॉपिया चेक कर रहा था. पूरी क्लास में सिर्फ़ 3 लड़किया थी और एक लड़का... बाकी सब बच्चे स्कूल

में कहीं ना कहीं घूम रहे थे. ये जो 3 लड़किया थी इनका नाम रंजना, एकता और सिमरन था. सिमरन पूरे स्कूल

की टॉपर और देखने में बिल्कुल चुहिया जैसी पतली छोटी सी थी. इससे बिकुल अलग रंजना और एकता थी गोरी, गुबारे जैसीफूली हुई और अपनी छोटी 18 साल की उमर में बंब थी. उन दोनो लड़कियों के कयि किस्से सुन रखे थे नारायण ने...

उसका एक मित्र सलीम स्कूल में मथ्स का अध्यापक था... वो तो एकता के बारे में ये तक कहता था कि मार्क्स के

लिए पांडे जी (हिन्दी के टीचर) से चुदवा चुकी है.... नज़ाने इस बात में कितना सच था या नहीं मगर नारायण ने

खुद रंजना को उसके बॉय फ्रेंड के साथ हाथो में हाथ डाले गले मिलते हुए पकड़ा था...

खैर जो लड़का अकेला बैठा था उसका नाम आशीष था जिसको कोई भी पसंद नही करता था क्यूंकी वो हर समय

अकेला चुपचाप बैठा रहता था. अभी भी वो उल्टे हाथ की ओर बैठा हुआ था और ये तीन बिल्कुल सीधे हाथ की ओर.

नारायण की भी कुर्सी बीच में नहीं उल्टे हाथ पे थी ताकि वो पंखे की हवा का आनंद ले सके और साथ ही

साथ तीनो सुन्दरिओ को तिर्छि नज़रों से दर्शन कर सके. पूरी क्लास नारायण को सबसे कूल टीचर मानती थी

तभी तो एकता आराम से डेस्क पे बैठके अपनी सहेलिओ से बतिया रही थी. नारायण ने कॉपिओ को चेक करते हुए देखा कि आशीष एकता की बड़ी मोटी जाँघो को देख रहा है जोकि उसकी स्कर्ट में से हल्की हल्की नज़र आ रही थी. उसने गौर से देखा तो आशीष अपने लंड को भी सहला रहा था एकता को घूरते हुए.... इस द्रिश्य को देख कर नारायण का लंड भी जाग चुका था.

उसने अपने उल्टे हाथ से अपने लंड को ठीक किया. नारायण की नज़रे भी एकता की जाँघो पे पड़ रही थी साथ ही साथ

रंजना और सिमरन के हस्ते चेहरो पर भी. उसे लगा काश वो इन चेहरो पर भी अपना वीर्य छिड़क पाए...

फिर अचानक घंटी बज गयी और स्कूल की छुट्टी हो गयी. नारायण ने सब कुच्छ क्लास की अलमारी में फेंका और ताला

लगा के टाय्लेट चले गया. उसने अपने पैंट की ज़िप खोली और अपने लंड को कच्छा से निकाला और उसको सहलाने लग गया. वो बस ध्यान लगा रहा था एकता के जिस्म पे और अपने लंड को आगे पीछे हिला रहा था. पूरी तरह खो गया था

नारायण और अचानक से उसका वीर्य निकला और दूर जाके गिरा. नारायण का हाथ भी गंदा हो चुका था फिर भी उसको ऐसा लग रहा था कि वो पूरी तरह सॅटिस्फाइ हो गया है. वो टाय्लेट से निकला और क्लास से अपना बॅग लेके घर के लिए रवाना हो गया..

आज नारायण को ललिता को क्लासस से उठाने नहीं जाना था क्यूंकी आज क्लासस देर तक चलनी थी...

वो सीधा तेज़ी से घर क्यूंकी वहाँ से उसको शन्नो के साथ किसी के घर लंच के लिए जाना था...

वैसे जब आपने पढ़ा कि ललिता की क्लासस देर तक चलनी है तब आपके दिमाग़ में ज़रूर गंदे ख़यालात आए

होंगे मगर ऐसा नहीं था वो सिर्फ़ अपने दोस्तो के साथ मर्डर 2 पिक्चर देखने गयी थी... उसके दोस्तो में एक भी

लड़का नहीं था सारी लड़किया थी.... फिलहाल मूवी ख़तम होने में अभी भी घंटा पड़ा था...

बाकियों का तो पता नहीं मगर ललिता गरम हो चुकी इतने सारे सेक्स सीन्स के बाद... ललिता को एमरान हाशमी इतना

भी पसंद नहीं था मगर जिस तरह से वो जक्क़लीन को मज़े दे रहा था वो देख कर तो उसके होश ही उड़ गये थे...

उधर दूसरी ओर नारायण ने शन्नो को घर से उठा लिया था मगर वो अभी उससे बात नहीं कर रही थी...

चेतन घर पे अकेला था तो उसने खाना खाया और अपने कमरे में जाके लेट गया.... ये कमरा काफ़ी बड़ा था क्यूंकी

ये आधा ललिता का भी था... आप सोच रहे होंगे कि ललिता डॉली के साथ क्यूँ नहीं रहती वो इसलिए क्यूंकी पहले

ये कमरा डॉली और ललिता का ही था मगर डॉली को इधर काफ़ी डरावने सपने आया करते थे जिसकी वजह से ये चेतन

के छोटे से कमरे में चली गयी और चेतन इस कमरे में आ गया.. चेतन बिस्तर पे अकेला पड़ा याद कर रहा था

कि उसकी क्लास के लड़के ना जाने क्या क्या बक रहे थे कटरीना कैफ़ के बारे में.. वो एक एक बात याद करने लगा

और उसका लंड भी हिलने लगा... उसको अजीब लगा पहले मगर फिर उसने अपनी आँखें बंद करी और कटरीना कैफ़ के

बारे में सोचने लगा कि कैसे वो उस गाने में कह रही थी ज़रा ज़रा टच मी टच मी किस मी फील मी...

ये सोचके उसका लंड बड़ा होने लगा... उसका हाथ अपने आप ही अपने लंड की तरफ बढ़ा और उससे खेलने लगा...

उसने अपने लंड को शॉर्ट्स में से निकाला खुली हवा में मगर फिर अचानक उसका दिमाग़ में से कटरीना कैफ़ की छवि

मिट गयी और उसकी अपनी बहन डॉली की तस्वीर बन गयी... उसने उसे मिटाना चाहा मगर उसके ज़हेन में

डॉली नंगी खड़ी थी और बोल रही थी ज़रा ज़रा टच मी फील मी किस मी... चेतन ने घबरा के अपनी आँखें खोली और

टाय्लेट गया अपने हाथ धोने के लिए...

उसके टाय्लेट में पानी नहीं आ रहा था तो वो अपने पापा मम्मी के टाय्लेट में गया क्यूँ वोई सबसे पास था...

उसने डेटोल से अपने हाथ धो लिए.. नल बंद करके जब वो बाहर जाने के लिए मुड़ातो उसने सामने पड़ी हुई सफेद रंग

की वॉशिंग मशीन देखी जो ढंग से बंद नहीं थी... उसने उसका ढक्कन खोला तो उसमें सबसे उपर वोई

काली टी-शर्ट और जीन्स थी जो कल डॉली ने पहनी थी... चेतन ने उसपे ध्यान ना देते उसको नीचे दबाने की कोशिश करी

और तभी उसमें से ब्रा थोड़ी बाहर की तरफ आगयि.. वोई पर्पल ब्रा थी चेतन को समझ आ गया था कि ये

उसकी बहन की ही ब्रा है... उसने घबराते हुए मशीन में धकेला और उसका ढक्कन लगाके वहाँ से चला गया...

अब जैसे ही वो अपने रूम में जाने लगा तो घर की घंटी बजी... उसने अपने माथे का पसीना पौछा और दरवाज़ा

खोलते ही उसकी बहन डॉली खड़ी थी... डॉली उसको देख कर ही मुस्कुराइ और उसके गाल खीच दिए...

फिर वो अपने कमरे में चली गयी... चेतन को समझ नहीं आ रहा था कि ये सब हो क्या रहा है उसके साथ..

वो भी अपने कमरे में गया और आँखें बंद करके सो गया...

उधर ललिता मूवी देख कर बाहर निकली तो शाम और रात के बीच का माहौल हो रहा था यानी के हल्का अंधेरा

छा गया आसमान पे.... ललिता की एक दोस्त रिचा उसके घर के पास ही रहती थी तो दोनो ने सोचा कि एक ऑटो कर लेते है

जल्दी पहुच जाएँगे... ऑटो की तलाश में दोनो ने 10 मिनट गवाँ दिए मगर कोई नहीं रुका...

उधर शन्नो का कॉल आया ललिता के मोबाइल पे जिससे ललिता और भी ज़्यादा घबरा गयी... रिचा ने सुझाव दिया कि ऑटो छोड़तेहै रिक्शे में ही चलते है 10 के 20 मिनट लग जाएँगे मगर पहुच तो जाएँगे... उन दोनो ने तुरंत

एक रिक्शे वाला ढूँढा और उसमें बैठ गये..

रिक्शे वाला काफ़ी अच्छी रफ़्तार में चला रहा था और मज़े की बात ये थी कि उसकी रिक्शा के

पिछे धन्नो लिखा हुआ था... मगर साला जहाँ सड़क खराब थी वहाँ भी तेज़ी से चला रहा जिस वजह से रिचा और ललिता

की गान्ड सीट पे उपर नीचे होती रही... फिर कहीं रिक्शा रोक दिया उसने और उतर भागने लगा... इससे पहले दोनो पूछती

कि वो कहाँ जा रहा है वो झाड़ियों के पास जाके मूतने लगा... रिचा हसके बोली "तो इसलिए ये इतनी तेज़ चला रहा था"

दोनो लड़कियाँ ज़ोर से हस्ने लगी और उनकी हँसी उस रिक्शे वाले ने भी सुन ली... उसकी पिशाब की आवाज़ सॉफ कानो

तक पहुच रही थी दोनो लड़कियों के... रिचा से रुका नहीं गया और वो हल्के से हस्ने लग गयी....

फिर वो रिक्शा चलाने वापस आया.. उसने आराम से पहले रिचा को घर छोड़ा और फिर ललिता के घर जाके रुक गया...

उसने 30 रूपर माँगे जोकि एक दम सही भाव था... ललिता ने अपना पर्स खोला और उसके पर्स में 50 का नोट था..

उसने वो नोट उसको देदिया.. उस रिक्शे वाले ने अपनी जेंब में से पैसे की गद्दी निकाली और ललिता की उंगलिओ को छुके

20 का नोट थमा दिया... ललिता को याद आया कि साला वहाँ मूत रहा था और उन हाथो से मेरी उंगलिओ को भी च्छू लिया...

घर पहुच कर ही सबसे पहले उसने अपने हाथ धोए... उसको उम्मीद थी कि आज वो बहुत सुनेगी शन्नो से मगर किसीने

उसको कुच्छ नहीं बोला...

रात को खाना खाने के कुच्छ देर बाद डॉली अपने कमरे से निकली और गंदे बर्तन धोने किचन में गयी....

\ ड्रॉयिंग रूम में चेतन बैठा हुआ टीवी देख रहा था और जब उसे आवाज़ आई बर्तनो की तो उसने सोचा कि दीदी की

कुच्छ मदद कर्दु तो उसने टीवी बंद किया और एक सूखा कपड़ा लेके डॉली के साथ में खड़ा हो गया...

डॉली बर्तन धोके चेतन को दे रही थी और वो उन्हे अच्छी तरह पोछ के रख रहा था....

दोनो इधर उधर की बातें भी कर रहे थे.. डॉली को खुशी थी कि उसका भाई बाकी लड़को की तरह नहीं है

जो घर में सिर्फ़ अनाज खाते है और कुच्छ काम नहीं करते.. अचानक से नलके से पानी 2 सेकेंड के लिए

बंद हो गया और फिर पूरी तेज़ी से आया और उसकी वजह से पानी के छींटे डॉली के उपर आ गये...

उसके कपड़ो पे तो कोई फरक नहीं पड़ा मगर उसके चेहरे पे एक दो छींटे थे... डॉली ने चेतन को उन्हे हटाने

को कहा क्यूंकी वो अपने गंदे हाथो से खुद नहीं कर सकती थी... चेतन ने पहला छिन्टा तो हटा दिया

जोकि डॉली के माथे की तरफ था मगर दूसरे छींटे को हटाते हुए उसके चेहरे पे एक अजीब मुस्कान आ गयी

क्यूंकी जैसे उसने डॉली के कोमल गालो को छुआ छीटा हटाने के लिए उसका लंड भी कछे के अंदर हिल गया...

ना चाहते हुए भी उसकी नज़र डॉली के जिस्म की ओर बढ़ गयी क्यूंकी जिस तरह से वो बर्तन धो रही थी उसका

जिस्म हिले जा रहा था ख़ास तौर से उसके संतरे जैसे स्तन.... उन्हे देखते देखते चेतन के हाथ से वहीं

एक काँच की प्लेट ज़मीन पे गिरी और हर जगह शीशा फेल गया...

चेतन फिर नीचे बैठा शीशा उठाने के लिए तो डॉली बोली

"चेतन तुम मत करो शीशा चुभ जाएगा मैं कर्दुन्गि... तुम टीवी देखो"

चेतन ने डॉली की बात को नज़र अंदाज़ कर दिया और शीशा उठाने लगा...

शीशा उठाते उठाते उसकी नज़र अपनी बेहन की टाँगो पे गयी जिसपे एक भी बाल का नामो निशान नहीं था...

डॉली के बदन का नीचे का हिस्सा एक खाकी रंग की शॉर्ट्स से ढका हुआ था जोकि उसके घुटने तक थी...

चेतन शीशा उठाता हुआ डॉली की टाँग को देखता देखता उनके पास पहुचा तो उसकी उंगली पे बारीक शीशा चुभ गया...

"आउच" निकला चेतन के मुँह से और डॉली ने घबरा के पूछा "क्या हुआ??"

चेतन बोला "कुच्छ नहीं हल्का सा लग गया"

डॉली बोली "बस सुननी तो होती नहीं है तुमको... अंदर तो नहीं घुसा ना??"

चेतन बोला 'पता नही मुझे दीदी"

डॉली के बर्तन भी ख़तम हो गये थे तो उसने अपने हाथ को कपड़े से पौछा और

चेतन की उंगली में शीशा देखने लगी... डॉली ने उसकी उंगली अपने अंगूठे और एक उंगली से पकड़ी

और उसे घूरके देखने लग गयी... "अर्रे कुच्छ नहीं हुआ है बस वो हल्का सा लगा होगा"

ये कहके डॉली ने प्यार से चेतन की उंगली को चूमा और उसके बालो को हिलाते हुए अपने कमरे में चली गयी...

मगर चेतन वहीं खड़ा हुआ रह गया... ऐसा नहीं था कि उसकी दीदी ने कभी उसके गाल को या उंगली को नहीं चूमा था

मगर इस बारी उसको अंदर बड़ा अजीब लगने लगा... कुछ देर बाद वो भी अंदर चला गया सोने के लिए..

क्रमशः………………..
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07-19-2018, 12:23 PM,
#3
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--3

गतान्क से आगे……………………………………

देर रात को पूरे घर में सिर्फ़ ड्रॉयिंग रूम की तरफ एक बत्ती जल रही थी...

तीनो कमरो के दरवाज़े बंद हुए थे और कमरो में अंधेरा फेला हुआ था...

ललिता की आँखें बंद थी मगर वो अभी सोई नहीं थी... वो याद कर रही थी मर्डर 2 में जॅक्लिन और एमरान

के हॉट सीन्स को ख़ासतौर से जिस तरह वो एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे....

ललिता बड़े मज़े से अपने बदन के उपरी हिस्सो पे हाथ फेर रही थी (जोकि टॉप से ढका हुआ था)...

मगर वो अपने मम्मो को कभी कबार च्छू रही थी मगर जब भी वो उन्हे छूती उसके बदन में चिंगारी आ जाती....

उसे फिर याद आया कि वो रिक्शे वाला कैसे झाड़ियो के उधर पिशाब कर रहा था..

शायद वो जान बुझ कर गया ताकि दो जवान लड़किया उसको देख पाए... मगर जिस तरह रिचा उसे देख के हंस रही थी

वो ललिता नहीं भूल पा रही थी... जितनी शरम ललिता के चेहरे पे थी उस समय उतनी ही शरारती मुस्कान

रिचा के चेहरे पे थी.... फिर वो सोचने लगी कि ये आदमी भी कहीं पर भी शुरू हो जाते है...

और सबको मज़ा भी आता होगा खुली हवा में मूतने का और क्या पता इनको दिखाने में भी मज़ा आता हो...

तभी बिस्तर से चेतन उठा और ललिता एक दम से डर गयी... चेतन कमरे के बाहर गया तो ललिता के गंदे दिमाग़ में

आया कि ये भी शायद मूतने जा रहा होगा और ये सोचके वो हँसने लग गयी...

चेतन पहले तो टाय्लेट गया मूतने के लिए फिर उसने सोचा नींद तो आ नहीं रही है तो टीवी ही देख लू...

बिल्कुल धीमी आवाज़ पे उसने टीवी देखना शुरू करा...हमेशा की तरह टीवी पे कुच्छ ख़ास नहीं आ रहा था

तो वो गाने सुनने लग गया तो शीला की जवानी गाना आ रहा था... कटरीना कैफ़ को बिस्तर पर एक चादर लपेटे हुए

देख कर उसका दिमाग़ फिर से वहीं चलने लगा... ना चाहते हुए उसने चॅनेल बदल दिया

क्यूंकी वो ऐसा ख़याल नहीं लाना चाहता था.... फिर उसे बाल्कनी की तरफ से कुच्छ आवाज़ आई...

5 सेकेंड बाद फिर से आवाज़ आई तो वो डर गया... वो पहले पापा को उठाने गया मगर वहाँ पर बॅट पड़ा हुआ था

तो वो खुद ही बॅट उठाते हुए बाल्कनी की तरफ बड़ा... धीरे धीरे वो वहाँ पहुचा और उसने दरवाज़े को झट

से खोला तो वहाँ डॉली बैठी हुई थी... चेतन की जान में जान आई मगर उसके हाथ में बॅट देख कर डॉली डर गयी...

"क्या कर रहा है" डॉली ने घबरा के पूछा

चेतन बोला "अर्रे मुझे कुच्छ आवाज़ सी आई तो मैं डर गया मुझे लगा कोई चोर आया है

पागल... मुझे डरा दिया" डॉली हसके बोली

"आप यहाँ क्या कर रहे हो" चेतन ने पूछा

डॉली बोली "कुच्छ नहीं बस बैठी हूँ सितारों को देख रही हूँ"

चेतन भी डॉली की कुर्सी के सामने (थोड़ा सा साइड में) रेलिंग से टिक कर खड़ा हो गया...

डॉली के चेहरे पे चाँद की रोशनी इस तरह पड़ रही थी जैसे किसी खूबसूरत झील पे पड़ रही हो....

फिर डॉली ने पूछा 'क्यूँ कल स्कूल नहीं जाना है क्या?"

चेतन बोला "जाने का मन तो नहीं है मगर जाना पड़ेगा"

डॉली ने फिर पूछा "अच्छा बता तेरी गर्ल फ्रेंड बनी क्या अब तक"

ये सुनके चेतन हँसने लग गया और बोला "मैं आपके अलावा किसी और लड़की से बात भी नहीं करता"

'और ललिता से भी तो करता है" डॉली बोली

"ललिता से तो मैं सिर्फ़ लड़ता हूँ" ये सुनके डॉली हँसने लगी....

डॉली ने अपनी टाँगें रेलिंग पे रख दी ताकि उनको आराम मिल जाए मगर उस वजह से चेतन बौखला गया...

उसकी कोहनी से कुच्छ 5 इंच दूर उसकी दीदी की लंबी टाँगें थी और गौर की बात ये थी डॉली की शॉर्ट्स भी

जाँघो की तरफ से ढीली थी जिस कारण चेतन डॉली के नीचे हिस्से की जाँघ को भी देख सकता था....

चेतन अपनी आँखें फेरके डॉली से बात करने लगा...

डॉली बोली "खड़ा हुआ क्यूँ है बैठ जा यार..." तो चेतन ने ने एक कुर्सी ली अपनी दीदी की तरह रेलिंग पे

पाओ रख के बैठ गया... डॉली चेतन की तरफ पैर करते हुए बोली "देख मेरे पाओ कितने बड़े है तुझसे"

चेतन भी चौक गया ये देख के क्यूंकी डॉली के पाओ काफ़ी बड़े थे... मगर वो हिल गया जब डॉली ने अपना सीधा पाँव

उसके उल्टे पाँव से मिला दिया था दोनो का साइज़ नापने के लिए....

चेतन ने बोला "आप तो चुड़ैल हो इतने बड़े पैर है आपके"

ये सुनके डॉली चेतन से मज़ाक में हाथ पाई करने लगी...

डॉली ने फिर चेतन को रोका पानी पीने के लिए... चेतन भी रुका और डॉली बॉटल से आ करके पानी पीने लगी...

चेतन ने मस्ती में मौके का फ़ायदा उठाके बॉटल के निचले हिस्से पे हाथ मारा और उस बॉटल का

आधा पानी डॉली के मम्मो पे गिर गया... डॉली की टी-शर्ट पूरी तरह गीली हो चुकी थी डॉली ने भी बॉटल का बाकी

पानी चेतन के उपर फेक दिया और दोनो एक दूसरे की हालत पे हँसने लगे...

डॉली बोली "अंदर चल नहीं पापा जाग जाएँगे और हमे बहुत मारेंगे.... डॉली चेतन के आगे आगे चल रही थी...

उसकी टी-शर्ट पूरी तरह उसकी पीठ का हिस्सा बिल्कुल सूखा हुआ था मगर जब वो उस ड्रॉयिंग रूम की लाइट की तरफ आके मूडी तो

उसके बदन से चिपकी हुई थी... और डॉली की चुचियो को देख कर जोकि ठंडे पानी से

इतनी सख़्त हो गई थी कि चेतन अनुमान लगा सकता था कि डॉली की चुचियाँ काफ़ी बड़ी है...

चेतन को इतना तो समझ में आ गया था कि उसकी दीदी ने अंदर कुच्छ नहीं पहेन रखा था...

फिर डॉली अपने कपड़े बदलने के लिए चली और चेतन भी उसे गडनाइट कहके अपने कमरे में चले गया...

इन हसीन पल को याद करते करते उसकी आँख लग गयी....

अगली सुबह सब लोग अपने अपने काम पे चले गये मगर डॉली नहीं गयी क्यूंकी आज कॉलेज का आखरी दिन

और इसके एग्ज़ॅम के लिए छुट्टिया थी... डॉली आराम से 10 बजे तक सोके उठी तो उसकी मम्मी उसके कमरे

में आई और बोली "बेटा तुम्हारी मासी और उनके बच्चे आ रहे है लंच के लिए तो जल्दी उठ जाओ और घर सॉफ

करने में मेरी मदद करो.. डॉली बिस्तर से उठी और घर सॉफ करने में शन्नो की मदद करने लगी...

घर को अच्छी तरह सॉफ करने के बाद डॉली नहाने चली गयी... उसे खुशी थी कि उसकी बुआ और

उसके दो कज़िन्स घर आ रहे थे... उनमें से छोटा "सोनू" से तो वो कुच्छ समय पहले भी मिली

मगर उसके बड़े भाई "मनोज' से वो काफ़ी समय से नहीं मिली थी... खैर वो नहा के आई और अपने कपड़े बदलने लगी....

उसने हरे रंग की कुरती जैसा टॉप पहना और उसके नीचे नीले रंग की जीन्स पहेन ली

उसके अंदर उसने सफेद रंग की ब्रा और पैंटी पहेन रखी थी...

अपने बालो को उसने रिब्बन में बाँध दिया और बैठके टीवी देखने लगी...

उसकी मम्मी खाना बनाते बनाते बोली " डॉली मासी और बच्चे आ रहे है तो कुच्छ खाने पीने के लिए तो ले आ"

एक लंबी साँस लेके डॉली ने टीवी बंद करा और पैसे लेके मार्केट चली गयी....

मार्केट ज़्यादा दूर नहीं थी तो उसने पैदल जाना ठीक समझा... गुप्ता स्टोर्स के अंदर गयी जहाँ से

उसका परिवार हमेशा समान लेता था... वो दुकानदार को समान बताने लगी

तभी पीछे से एक बंदा आकर डॉली की गान्ड पर अपना लंड छुआता हुआ चला गया...

डॉली ने गुस्से से उसकी तरफ देखा तो वो कोई गाओं वाला सा लग रहा था और

डॉली ने सोचा छोटे लोगो के मुँह नहीं लगना चाहिए... फिर उसने कोक चिप्स और बिस्किट्स खरीदे और घर के लिए

रवाना हो गयी....
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07-19-2018, 12:23 PM,
#4
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
अपने अपार्टमेंट पहुच कर डॉली सीडीयो के तरफ बड़ी तो उसकी गान्ड पे एक बॉल आके लगी....

वो पीछे मूडी तो तीन चार छोटे से लड़के हँसने लगे और फिर सॉरी बोलने लगे...

वो सब वहाँ क्रिकेट खेल रहे थे तो डॉली ने भी ग़लती समझ कर कुच्छ नहीं कहा और अपने घर चली गयी...

जब वो घर पहुचि तो दरवाज़ा उसके कज़िन मनोज ने दरवाज़ा खोला... मनोज पहले से काफ़ी ज़्यादा स्मार्ट हो गया था..

डॉली खुशी से उसे मिली और फिर अपनी मासी और अपनी सबसे छोटे प्यारे से भाई सोनू से मिली...

सोनू को देख कर ऐसा लग रहा था कि पूरे घर में रौनक च्छा गयी हो... उधर दूसरी ओर मनोज जोकि ललिता के

जितना ही था ज़्यादा बात नहीं कर रहा था... डॉली को लगा कि इतने समय के बाद वो उसे मिला है तभी शायद

थोड़ा खुलने में समय लगेगा... कुच्छ देर बाद मनोज बाहर बाल्कनी में गया फोन पे बात करते हुए

तो उसने लंबी साँस लेते हुए सोचा कि उसकी कज़िन तो बहुत ज़्यादा हसीन है... डॉली को पहली नज़र

में ही देख कर उसके मन में गंदे गंदे ख़याल आने लग गये...

फिर उसने बाल्कनी में नज़र घुमाई तो धुले हुए कपड़े सूखने के लिए टाँगे हुए थे...

फिर वो थोड़ी सीधी तरफ मुड़ा तो कूलर से छुपा हुआ एक कपड़े रखने का स्टॅंड था और उधर बहुत

सारे ब्रास और कच्चिया थी... मनोज अपनी किस्मत को सलाम करता हुआ वापिस बाल्कनी के दरवाज़े की तरफ

बढ़ा और बाहर से उसकी कुण्डी लगा दी.... फिर जल्दी से वापस कूलर के पीछे गया और बिना झिझक के उसने

एक सस्ती सी सफेद रंग की ब्रा उठाई..... उसको महसूस करने लगा मगर उसको पक्का यकीन था कि ये डॉली

की नहीं हो सकती क्यूंकी उसके लिए ये बड़ी थी... उसकी नज़र पर्पल रंग की ब्रा पे पड़ी जोकि महँगी लग रही थी

उसे उठाके उसने देखा कि ये डॉली की ही होगी... उसने अपनी जीन्स की ज़िप खोली और जल्दी से अपने लंड पे उसको रगड़ दिया..

फिर उसकी नज़र उसके जोड़ीदार पर्पल रंग की पैंटी पे पड़ी और वो उसे सूँगने लगा मगर उसमें से नींबू की बू

आ रही थी... उसको आवाज़ आई कि कोई दरवाज़ा खाट खता रहा है उसने जल्दी से कपड़े टाँगें और दरवाज़ा खोलने गया...

उसकी मम्मी खड़ी थी... उन्हो ने उसको अंदर आने के लिए कहा....

कुच्छ देर बाद पूरा घर भर गया था क्यूंकी चेतन, ललिता और नारायण भी आ गये थे और सबने मिलके खाना खाया..

मनोज चेतन की किस्मत से जल रहा था क्यूंकी साले के पास दो दो इतनी पटाखेदार बहन थी और

दोनो एक दूसरे से काफ़ी अलग थी जिसका और भी मज़ा था.... मनोज को समझ आ गया था कि

वो सस्ती सफेद वाली ब्रा ललिता की होगी क्यूंकी उसके मम्मे मोटे थे... और अब उसका ध्यान सिर्फ़ मूठ

मारने में लगा हुआ था.... उसका मन तो था कि कोई भी ब्रा/पैंटी को लेजा सके मगर उसमें काफ़ी ख़तरा था

तो वो टाय्लेट चला गया कि इन दोनो बहनो के बदन को याद करके ही खुश हो जाएगा...

टाय्लेट में जाकर ही उसने अपनी जीन्स का बटन खोला और उसको कछे के समेत उतार के टाँग दिया...

उसका लंड हल्का सा लगा हुआ था और वो उसको हिलाने लगा और फिर उसकी नज़र सामने सफेद रंग की

वॉशिंग मशीन पे पड़ी... मनोज को ऐसा लगा कि वो सातवे आसान पे पहुच गया...

उसने बड़ी साव धानी से मशीन का ढक्कन खोला और उसमें सिर्फ़ 2 जोड़ी ही कपड़े थे एक तो वो खाकी शॉर्ट्स और

एक वो टी-शर्ट जो कल डॉली ने पहेन रखी थे... जब उनको अलग किया तो मनोज की आँखें बड़ी हो गई क्यूंकी

उसके सामने एक गुलाबी रंग की पैंटी थी... उसने पैंटी को उठाके देखा तो उसपे लिट्ल मर्मेड बनी हुई थी और

उसके साइज़ से पता चल गया था कि ये डॉली की ही है.... अफ़सोस की बात ये थी उसका टॅग फटा हुआ था

मगर खुशी के ये बात थी कि वो कपड़े अभी ही मशीन में डाले थे...

मनोज ने सीधे हाथ से अपने लंड को थामा और उल्टे से डॉली की पैंटी को अपनी नाक की तरफ ले गया..

डॉली की चूत की सौंधी सौंधी खुश्बू आ रही थी उस पैंटी में.... मनोज ने अपनी आँखें बंद करली और

उसे सूंगता सूंगता अपनी मूठ मारने लगा... जब वो खुश्बू उसके नाक में फेल गयी तो उसने उसको अपने लंडपर लपेटा

और उसको हिलाने लग गया... डॉली के बदन को सोचते हुए उसका वीर्य बस निकलने ही वाला था...

उसने पैंटी को मशीन पे रखा और ठीक उसकी जगह अपना वीर्य छोड़ दिया जहाँ डॉली की चूत की महक सबसे ज़्यादा थी...

तकरीबन 5 सेकेंड मनोज वहीं खड़ा रहा उसके चेहरे पे खुशी थी जैसे उसने कोई मेडल जीत लिया हो...

फिर उसने उस पैंटी को उस शॉर्ट से मिला दिया ताकि वो वीर्य फेल जाए और किसिको पता ना चले... हाथ धोने के बाद वो वहाँ से निकल गया... फिर कल सुबह डॉली की आँख खुली और वो जल्दी जल्दी तैयार होकर कॉलेज के लिए निकली...

उसने नीले रंग का टॉप और हल्के नीले रंग की जीन्स पहेन रखी थी.... वो जब कॉलेज पहुचि तो वहाँ कोई भी नहीं था...

सारी क्लासस खाली थी... उसे समझ नहीं आ रहा था कि आज क्या है कोई भी कॉलेज में नहीं दिख रहा था...

फिर वो अपनी क्लास की तरफ बढ़ी तो देखा कि दरवाज़ा बंद पड़ा हुआ था.. कुच्छ और ना सूझने पर उसने दरवाजे से झाँक कर देखा कि टेबल पर कोई लेटी है... उसके आस पास करीबन 10 और लोग खड़े थे और उसने दरवाज़े पर ज़ोर से लात मारी और दरवाज़ा खुल गया... कमरे के अंदर जैसे ही उसने कदम बढ़ाया और

उल्टे हाथ पे देख कर ही वो चौक गयी... कमरे के बिल्कुल बीच में टीचर की बड़ी टेबल लगी हुई थी

और वहाँ नेहा नंगी वो सारे उसी के क्लास के लड़के थे और वो भी सारे नंगे खड़े हुए थे... 2-3 लड़के नेहा के मुँह के

पास खड़े थे अपना लंड पकड़े हुए 3 लड़के उसके संतरे जैसे मम्मो को चूस रहे थे कुच्छ उसकी

टाँगो की तरफ थे और एक लड़के ने उसकी टाँगें अपने कंधे पे टिका रखी थी और अपना लंड

नेहा की चूत में डाल रखा था... वो बंदा उसको घोड़े की तरह चोद रहा था और नेहा

चिल्ला भी नही पा रही थी क्यूंकी उसके मुँह में भी लंड था.... पूरे कमरे में एक अजीब सी बू आ रही थी....

डॉली बिना पालक झप काए वहीं पर खड़ी रह गयी उसको समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा था और वो क्या करें....

जब उसके मुँह से लोड्‍ा निकाला 3 सेकेंड के लिए तब वो चिल्लाने लग गयी "और ज़ोर से चोद मुझे और ज़ोर से"

फिर फिरसे उसका मुँह किसी और लंड ने भर दिया... डॉली से ये सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वहाँ से

जाने लगी तभी उसका जिस्म राज के बदन से टकराया और वो राज को देख कर घबरा गयी...

डॉली के कंधे से उसका पर्स गिरा जिससे काफ़ी आवाज़ आई और उन्न सारे लड़को का ध्यान डॉली के उपर गया...

कुच्छ उनमें से नेहा को छोड़के भागकर आए और उसको हवा में उठाकर पागलो की तरह शोर मचाकर

नेहा की साथ वाली टेबल पे रख दिया.... राज को देख कर डॉली ने उससे थप्पड़ मारने के लिए माफी माँगने लगी...

राज ने उसकी एक ना सुनी और उसके एक इशारे से उन लड़को ने डॉली के कपड़े फाड़ दिए...

डॉली सिर्फ़ अपनी सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में उसे टेबल पे थी उसने अपने हाथो से अपने मम्मो

और चूत को ढकने की कोशिश की मगर उन्न लड़को ने उसके हाथ और टाँगें फेला दिए...

राज ने बड़े आराम से डॉली की ब्रा को उतार फेका और उसकी पैंटी को भी उतारके अपने सिर पे टोपी की तरह पहेन लिया....

सारे लड़के उसपर कुत्ते की झपते... कोई उसके बदन को चूस रहा था तो कोई चाट रहा था और कोई काट रहा था..

दर्द के मारे डॉली चिल्लाने लगी तो राज ने उसके होंठो को अपने होंठो से मिला दिया और उसको ज़ोर से चुम्मा दे दिया....

फिर उन सब लड़को ने डॉली और नेहा को छोड़ दिया... 2 सेकेंड के लिए डॉली को राहत मिली मगर अचानक

से नेहा टेबल से उठी और उल्टी होके डॉली के उपर लेट गयी... अपनी छोटी सी ज़ुबान से नेहा डॉली की चूत को चाटने लगी...

डॉली उसको हटाने को कोशिश कर रही थी मगर वो नाकामयाब रही... नेहा की चूत भी डॉली के मुँह के पास थी

मगर उसने अपना मुँह बंद रखा था... राज ने डॉली के बाल तेज़ी से खीचे और दर्द के कारण उसका मुँह खुल गया

और नेहा ने अपनी चूत उसके मुँह में डाल दी.. नमकीन स्वाद डॉली के मुँह में भर गया था....

जब नेहा को फिर से लंड की प्यास लगी तो उसने डॉली को छोड़ दिया और बाकिओ से चुद्वाने लगी...

राज ने डॉली को टेबल से हटाया और खुद उसपे लेट गया... बाकी लड़को ने डॉली की गान्ड को राज के लंड पे रख दिया...

डॉली ने आज तक अपनी गान्ड नहीं मरवाई थी और राज का कब्से मन था डॉली की गान्ड मारने का...

राज ने डॉली की कमर को पकड़ा और उसको उपर नीचे करने लगा... बाकी लड़को से इंतजार नहीं हुआ तो बारी

बारी वो डॉली की टाइट चूत को चोद्ने लगे... डॉली दर्द के मारे चिल्ला रही थी तो नेहा जोकि उसके

साथ ही चुद रही थी उसने डॉली के होंठो को अपने होंठो से बंद दिया.. बारी बारी सबने डॉली और नेहा को चोदा और

अपना वीर्य उनके चेहरे पर डाल दिया...

डॉली चौक के उठी... क्या वो सपना देख रही थी?? ये सवाल उसके ज़हेन में आया...

उसने आस पास देखा तो कमरे में अंधेरा था... उसने पास ही पड़े अपने मोबाइल पे टाइम देखा तो सुबह के

4:30 बज रहे थे... जब डॉली ने अपनी टांगे हिलाई तो उसको उसकी अपनी गीली चूत महसूस हुई...

उसे अपने से घिन आने लगी कि ऐसे सपने से भी उसे मज़े आने लगा... क्या मैं इतनी गिरी हुई लड़की हूँ??

ये सवाल डॉली ने अपने आप से पूछा.... वो उठकर टाय्लेट गयी अपनी चूत को टिश्यू पेपर से सॉफ किया और कुच्छ देर बाद फिर से सो गयी....

क्रमशः……………………….
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07-19-2018, 12:23 PM,
#5
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--4

गतान्क से आगे……………………………………

सुबह जब उसकी आँख तो 11 बज रहे थे... इतने सालो के बाद डॉली इतनी देर तक सोई होगी...

डॉली के ज़हेन मे फिर से वो सपना आया और वो घबरा गयी क्यूंकी उसको लगता था कि हर सपने का कोई ना कोई मतलब होता है मगर इसका क्या मतलब हो सकता है... यह सोच कर वो अपने कमरे के बाहर गयी तो घर पूरा शांत था और शन्नो का कोई अता पता नहीं था... डॉली वापस अपने कमरे में गयी और उसने अपनी मम्मी

को फोन लगाके पूछा तो शन्नो ने बताया कि वो बुआ के घर गयी है और दोपेहर तक आ जाएगी....

डॉली फिर टाय्लेट चली गयी और अपने ट्राउज़र और पैंटी को उतार कर पिशाब करने लग गयी

सिर्र सिर्र करके के आवाज़ फैल गयी पूरे टाय्लेट में डॉली ने अपनी नज़र अपनी पैंटी पे डाली जिसपे अभी भी उस सपने

की वजह से धब्बा पड़ा हुआ था... उसने अपना हाथ अपने टॉप के उपर ही फेरा तो उसे अपने सख़्त चुचियाँ महसूस हुई...

उसने फिर अपना हाथ धीरे से अपने टॉप के अंदर डाला और अपने स्तनो तक ले गयी..

उसके चुचियाँ वाकई में काफ़ी सख़्त थी उस समय.. उसका एक नाख़ून उनपे पड़ा तो डॉली को करेंट लग गया....

उसने अपना उल्टा हाथ अभी भी टॉप से निकाला नहीं था और वो ऐसी ही अपने टाय्लेट के बाहर निकली...

फिर वो अपने बिस्तर पे बैठी तो उसने शीशे मे देखा कि उसकी चुचियाँ कैसे उसके टॉप से भी नज़र आ रही थी..

अपने टॉप के उपर से वो अपनी उंगलिया उनपे चलाने लग गयी... वो बहुत गरम हो गयी थी और उसने अपना टॉप उतार

के रख दिया और अपने आपको शीशे में निहारने लग गयी... अपने पेट से ले जाकर अपना हाथ अपना मम्मो पे रख दिया..

फिर उन्हे ढक दिया और गोल गोल घुमाने लग गयी... डॉली के चेहरे से ही पता चल रहा था कि वो कितनी खुश थी...

काई महीने पहले राज से वो चुदि थी और उसके बाद वो चाहती अपनी चूत चुद्वाना मगर उस दिन

वो चाहत पूरी नहीं हो पाई... आज वो घर पर अकेली थी तो उसने सोचा कि वो अपनी चूत की

चाहत पूरी करने की कोशिश करेगी... डॉली बिस्तर से उठी और अपने ट्राउज़र को अपनी सफेद पैंटी समैत उतार दिया...

उसका जिस्म किसी भी आदमी को उसका दीवाना बना सकता था... उसने अपनी कबॉर्ड में से एक तेल का डिब्बा निकाला और

थोड़ा सा अपने हाथ पे डालकर अपने मम्मो पे मल दिया... और फिर थोड़ा सा अपनी चूत पर...

शीशे के सामने खड़ी वो अपने जिस्म से खेलने लगी... अपनी आँखें खुली रख कर वो देखने लगी कि कहाँ कहाँ

उसके हाथ उसके जिस्म से खेल रहे है... फिर वो बिस्तर पे लेट गयी और उसका याद आया कि वो सपने में भी

ऐसे ही टेबल पे लेटी पड़ी थी जब उसके बदन को सब नौच रहे थे... उसने धीरे से अपने सीधे हाथ की एक उंगली

अपनी चूत में डाली.. एक हल्की आह निकली उसके मुँह से... उस एक उंगली से वो अपने चूत को चोद ने लग गयी...

देखते ही देखते उसने अपनी दूसरी उंगली भी चूत में डाल दी... उसका उल्टा हाथ भी स्तनो से खेल रहा था...

उसका बदन अपन पसीने और तेल में लत्पथ पढ़ा था... उसने साइड टेबल पर रेनोल्ड्स

का 5 रुपये का पेन पड़ा देखा तो उसको ही उठा लिया और अपनी चूत के अंदर बाहर करने लग गयी....

अंदर बाहर करते करते वो पेन पूरा अंदर ही जाने वाला था ... मगर वो पतला सा पेन कुच्छ कमाल नहीं कर रहा था...

हवस में डूबी हुई वो अपने बिस्तर से उठी और कुच्छ ढूँडने लगी जिससे वो अपनी चूत चोद सके...

उसकी नज़र वहाँ पड़े हुए काले हेर ड्राइयर पे पढ़ी... उसने कुच्छ नहीं सोचा और उसको उठाते हुए बिस्तर

पे बैठ गयी अपनी टाँगें चौड़ी करते हुए... हेर ड्राइयर के पकड़ने वाला पार्ट काफ़ी बड़ा था ये सोचके डॉली ने

उसको अपनी चूत में डालना ठीक समझा... आहिस्ते आहिस्ते वो अपनी चूत में ड्राइयर को डालने लगी...

थोड़ी अंदर जैसे ही गया तो ग़लती से ड्राइयर ऑन हो गया और उसकी (वाइब्रट)हिलने लगा...

डॉली ने डर के मारे उसे निकाल दिया मगर हिलाने के बाद उसे एहसास हुआ कि उसकी चूत को कितना मज़ा आया उसे...

घबराई हुई मगर हवस में डूबी हुई डॉली ने फिर ड्राइयर को अंदर डाला और इस बार जानके उसको ऑन कर दिया...

ड्राइयर हिलने लग और डॉली ना चाहते हुए भी आवाज़ें निकालने लग गयी.... उसको ऐसा लगने लगा कि वो

10 लड़के और ख़ासतौर से राज उसकी चूत को चोद रहा है... उस दर्द में जो खुशी उसको जिस्म को मिल रही थी वो अनमोल थी...

थोड़ी और अंदर डालकर वो पूरी तरह मज़े में डूब गयी थी... वो अपने उंगलिओ से चुचियो को नौचने लगी...

तभी उसका मोबाइल बजने लगा... डॉली ने उसपे ध्यान नही दिया.. मगर फिर 2 मिनट बाद वो फिर से बजने लगा...

उसने नाम पढ़ा तो मम्मी लिखा हुआ था...

ना चाहते हुए उसने फोन उठाया तो शन्नो ने पूछा "ये इतना शोर क्यूँ मच रहा है??"

डॉली बिल्कुल भी बात करने के मूड में नही उसने बोला "वो बाल सूखा रही थी ड्राइयर से"

शन्नो बोली "अच्च्छा सुन चेतन ने गॅस बुक करवा दिया कि नहीं??"

डॉली चिढ़ के बोली "अर्रे मुझे क्या पता... "

शन्नो बोली "अर्रे ऐसी आवाज़ में क्यूँ बोल रही है.. पूछ लो उससे अभी और गॅस बुक करो अगर नहीं करा हो..

और मुझे थोड़ी देर हो जाएगी तो खाना खा लेना दोनो"

डॉली ने जल्दी से ड्राइयर अपनी चूत से निकाला और वो बुर्री तरह घबरा गयी थी.. कहीं उसका भाई घर पर तो नहीं है ना??

उसके कमरे का दरवाज़ा भी बंद हुआ था सुबह तो क्या पता वो हो"
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07-19-2018, 12:24 PM,
#6
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
डॉली जल्दी से टाय्लेट गयी अपनी चूत को पौछा और अपने कपड़े पहेन लिए....

कमरे को ठीक करने के बाद वो बाहर निकली और अपने भाई के कमरे के पास गयी तो अभी दरवाज़ा बंद था...

घबराकर उसने दरवाज़ा खोला तो चेतन बिस्तर पे सोया पड़ा था.. डॉली को कुच्छ राहत मिली...

आज वो पक्का मर जाती अगर उसके भाई ने उसको देख लिया होता... उसने अपने आपको दो-तीन गलिया दी ऐसी हरकते करने के लिए....

जब दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई तो चेतन ने धीरे धीरे अपने चेहरे से चद्दर हटाई और

दरवाज़े की ओर देखा... उसकी बहन चली गयी थी ये देख कर उसके दिल जोकि पिच्छले 45 मिनट से पागलो की तरह

धड़क रहा था थोड़ा शांत होने लगा था... मगर चेतन का लंड अभी भी सख़्त हुआ पड़ा था और

इतना सख़्त वो पहली बार ही हुआ था... उसकी शॉर्ट्स को टेंट बनाके तनतनाया हुआ था उसका लंड...

वो कुच्छ भी करके मूठ मारना चाहता था... वो आराम से बिस्तर से उठा और दबे पाओ टाय्लेट में चले गया..

उसने झट से अपने कपड़े उतारे और टाय्लेट की सीट पे बैठ गया... अपने लंड पे हाथ रखा और आँखें बंद

करके उन 30 मिनट के बारे में सोचने लग गया जो कि उसने अपनी आखों से देखे थे... अपनी बहन को वो

आधे घंटे जो शायद कोई भाई ही देख पाता हो और वो आधे घंटा जिसको शायद ही कोई भाई भुला सकता हो...

उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी प्यारी बड़ी बहन ऐसी हरकते कर सकती है.. जिस तरह डॉली के चेहरे पे

दर्द/खुशी बदन में मदहोशी छाई हुई थी वो याद करके चेतन अपने लंड को हिलाने लगा...

डॉली की चूत जोकि गीली हुई थी उस काले ड्राइयर की वजह से उसको वो चाटना चाहता था... वो चुचियाँ जोकि

बड़ी और सख़्त हुई थी उसको वो ऑरेंज बार की तरह चूसना चाहता था...

"क्या दीदी पहले भी लड़को से चुद्वा चुकी है" ये सवाल चेतन के दिमाग़ में चल रहा था...

वो अपनी दीदी के नंगे बदन को पूरा याद करता और फिर उसके बदन मे टाँगों के बीच अजीब सा दर्द जागा जोकि उपर

उठा और उसके लंड में से सफेद रंग वीर्य निकलने लगा... इससे पहले कभी भी चेतन के वीर्य नहीं निकला था

और उसको लगता था कि सिर्फ़ चुदाई के बाद ही ऐसा हो सकता है मगर उसके दीदी के नंगे बदन को देखते ही उसकी ऐसी हालत हो गयी थी...

फिर उसने बड़ी सावधानी से उसे सॉफ किया और जाके अपने बिस्तर पे लेट गया....

उधर दूसरी ओर स्कूल ख़तम हो चुका था.... नारायण को देखकर एक टीचर ने उसे कहा कि आपको

प्रिनिसिपल साब ने बुलाया है जल्दी जाइए. प्रिन्सिपल ने नारायण को देख कर उसको अंदर बुला लिया.

नारायण ने मुस्कुराते हुआ पूछा क्या हुआ "सर अचानक बुला लिया".

प्रिन्सिपल ने कहा " नारायण मैं तुम्हे जो भी बोलूँगा उसे ध्यान से सुनना और सोच समझ के मुझे बताना".

नारायण थोड़ा घबरा गया मगर उसने मुस्कुराते हुए कहा "जी ज़रूर सर... आप बोलिए.."

प्रिनिसिपल ने कहा "तुम जानते हो हमारा स्कूल सबसे पहले भोपाल में खुला था और फिर आगे जाके दिल्ली में भी खुला.

कुच्छ दिन पहले भोपाल में जो स्कूल के प्रिन्सिपल थे उनकी डेत हो गयी थी तो स्कूल

को चलाने के लिए वाइस प्रिनिसिपल को प्रिनिसिपल बना दिया था. ( नारायण चुपचाप पूरी बात सुन रहा था).

अब ऐसा हुआ है कि जो अब प्रिन्सिपल बना है वो भी वो पोस्ट संभाल नही पा रहा है और वो रिज़ाइन करना चाहता है.

अब स्कूल के पास कोई और ऑप्षन नहीं बचा है उस स्कूल को चलाने के लिए और वो हम से मदद माँग रहे है.

तो नारायण मैं चाहता हूँ कि तुम वहाँ के प्रिन्सिपल बन जाओ क्यूंकी तुममे वो सारी क्वालिटीस है

जो अच्छे प्रिन्सिपल की होती है.

" नारायण ने बोला "सर धन्येवाद आपने मुझे इस काबिल समझा मगर मैं..

प्रिन्सिपल ने टोकते हुए कहा देखो नारायण मना मत करना..

तुम्हारा हमारे स्कूल पे बहुत बड़ा एहसान रहेगा.

नारायण ने कहा "लेकिन सर मेरे बीवी बच्चे है उनका भी स्कूल कॉलेज है यहाँ उनका क्या होगा."

प्रिन्सिपल साहब बोले "देखो नारायण तुम्हारा बेटा भोपाल वाले स्कूल में ही पढ़ लेगा और रही बात

तुम्हारी बेटिओ की तो वो अपना कॉलेज यहाँ ख़तम करके तुम्हारे पास आ सकती है. देखो तुम्हारी सॅलरी

बहुत बढ़ जाएगी प्लस रुतबा रहने के लिए घर मिलेगा गाड़ी ड्राइवर और भी इन्सेंटीव्स."

नारायण कुच्छ देर के शांत होके बोला "सर मैं सुबह बताउन्गा मुझे अपने बीवी बच्चो की भी राई लेनी पड़ेगी."

उधर घर में अभी भी चेतन और डॉली की हिम्मत नहीं हो रही थी एक दूसरे को देखने की...

डॉली को यकीन था कि उसके छोटे भाई ने उसको नंगा अपनी चूत से खेलते हुए नहीं देखा था तब भी

उसे एक अजीब सी बेचैनी हो रही है... खैर चेतन हिम्मत करते हुए अपने कमरे से बाहर निकला और

सीधा अपनी बहन डॉली के कमरे में गया... दरवाज़ा खुला हुआ था दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा

फिर चेतन बोला "दीदी खाना खाएँ??"

डॉली ने भी उसके प्रश्न का जवाब सिर्फ़ हां में दिया और किचन में खाना गरम करने चली गयी...

मगर फिर दोनो साथ में टीवी देखने लगे और सब पहले जैसा ही होने लगा...

नारायण ललिता और डॉली को लेके घर आ गया और सबको बिठा के वो सारी बात बताने लग गया

जो प्रिन्सिपल सर ने उसे कही थी... शन्नो सुनके बोली "अगर तुम्हे इतनी सारी चीज़े मिल रही है तो तुम्हे

मेरे ससुराल जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी (एंपी में शन्नो का परिवार था).

चेतन ने बोला "पापा मुझे भी दिल्ली में नहीं रहना, मैं वहाँ पढ़ लूँगा."

डॉली ने कहा "मेरा भी मन ऊब गया है यहाँ से...... मेरा कॉलेज ख़तम ही होने वाला है अगले

हफ्ते उसके बाद एग्ज़ॅम्स होंगे तो मैं एग्ज़ॅम्स देने यहा आ जाउन्गि." ललिता भी चाहती थी जहाँ

उसके मम्मी पापा को अच्छा लगेगा वहाँ वो रह लेगी. शन्नो ने कहा देखो एक काम करते है हम

"तुम 10 दिन का टाइम माँगो

और उसके बाद तुम और डॉली वहाँ चले जाओ. तुम अपना काम करना और डॉली वहाँ एग्ज़ॅम की तैयारी

शांति से करलेगी. यहाँ मैं और बच्चे रहते है 3 महीनो में ललिता की क्लासस और चेतन का स्कूल ख़तम

हो जाएगा उसके बाद हम भी वहाँ आजाएँगे सब कुच्छ बेचके. चेतन वहीं पढ़ लेगा और ललिता भी वहीं से कहीं

अपनी पढ़ाई आगे कर लेगी" सब लोगो ने इस प्लान को ठीक समझा.

पूरी शाम इन्ही बातो में निकल गयी. रात को नारायण ने शन्नो के करीब आने की कोशिश मगर शन्नो ने

सॉफ इनकार कर दिया. उधर चेतन की हालत फिर से खराब हो रही थी... उसके दिमाग़ में से डॉली की

नंगी तस्वीर हटने का नाम ही नहीं ले रही थी... वो भी डॉली के बारे में सोचता तो उसका लंड खड़ा होजाता...

उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस बीमारी का इलाज वो कैसे करें क्यूंकी वो अपनी बहन के साथ कुच्छ करने

के बारे में सोच भी नहीं सकता था और उसको बैचेनी इस बात की भी हो रही थी कि डॉली कुच्छ ही दिनो में

उससे दूर हो जाएगी और फिर उसकी ज़िंदगी कैसे कटेगी??

जो हालत चेतन की थी वोही हालत ललिता की भी थी.. उसकी सारी सहेलिया किसी ना किसी से चुद चुकी थी और

यह बातें वो हर रोज़ सुनती थी... वो अपनी सहेलिओ में से सबसे ज़्यादा हसीन थी और उसके पीछे भी लड़के

थे मगर वो चाहती कोई बंदा उसका फ़ायदा ना उठाए....

अगली सुबह नारायण ने प्रिन्सिपल को सारी बात बता दी और उन्होने खुशी खुशी रज़ामंदी देदि.

नारायण को खुशी थी कि उसके परिवार ने इस ऑफर को इनकार नहीं किया क्यूंकी इसमें बहुत बड़ी पोज़िशन और पैसा था....

मगर उसे एक बात का गम था कि वो अब दिल्ली की लड़कियों को से दूर हो जाएगा....

उसको दिल्ली की लड़किया बेहद पसंद थी क्यूंकी जितनी भी बनने की कोशिश करती थी कि वो बहादुर है अपना ख़याल

वो खुद रख सकती है उतनी ही नादान हरकते कर बैठती थी..... उसे भोपाल गये काफ़ी समय हो गया था

मगर उसे यकीन था कि भोपाल की लड़किया पहले जैसी निहायती शरीफ होंगी जोकि 24 घंटे कपड़ो में धकि रहती होंगी...

उसे घबराहट तो इस बात की भी थी कि कहीं उसके स्कूल में लड़कियों को स्कर्ट की जगह सलवार कुर्ता ना पहनाया जाता हो...

उधर घर में सब कुच्छ आराम से बीत रहा था... डॉली तो उस बात को भूल भी गयी थी कि ऐसा कुच्छ उसने किया था....

आज वो खुश थी क्यूंकी उसकी सहेली प्रिया का जनमदिन था और उसको उसकी पार्टी में जाना था...

प्रिया ने राज को पार्टी में नहीं बुलाया था ये जानके डॉली को अच्छा लगा....पूरे दिन भर वो सब कुच्छ प्लान

करती रही और सोचती रही कि वो क्या पहनेगी... जहाँ प्रिया उस बात को भूल गयी थी उधर चेतन के

दिमाग़ में यही घूम रहा था... आज उसने एक ऐसी ग़लती कर दी थी जिसको करके वो खुश नहीं था...

उसने स्कूल के टाय्लेट में जाके लिख दिया कि "कल मैने अपनी बहन को अपनी चूत से खेलते हुए देख मूठ मारा"

ये लिखने के बाद डॉली को सोचके उसने कुच्छ 7-8 मिनट के लिए मूठ मारा.....

वो चाहता था कि एक बारी फिरसे वो डॉली को नंगा देख सके...

आज फिर से नारायण ललिता को लिए बगैर घर आ गया और आज सच्ची में ललिता की एक्सट्रा क्लासस थी...

क्लासस ख़तम करने के बाद उसकी सहेली रिचा को अपने मा-बाप के साथ मॉल जाना था तो ललिता को आज

अपने आप ही घर पहुचना था... उसने ऑटो में जाना ठीक समझा मगर हमेशा की तरह उसे ऑटो खाली नहीं मिला...

अंधेरा फिर से छाने लगा था आसमान पर और वो फिर रिक्शा वालो से पुच्छने लगी...

एक दो के मना करने के बाद उसे वोई रिक्शा वाला मिला और उसने तुर्रंत ही ललिता को पहचान लिया था

मगर उसने ये ज़ाहिर नहीं होने दिया... ललिता के बड़े मोटे मम्मो को 2 सेकेंड के घूर्ने के बाद उसने पुछा "कहाँ जाना है"

ललिता ने बोला "आप पिच्छली बार लेके गये थे ना आनंद विहार की तरह तो वहीं जाना है"

रिक्शा वाला अंजान बनके बोला "आनंद विहार में कहाँ"

ललिता को लगा शायद इसको याद नहीं होगा बस उसको पूरा याद था कि इसने पिच्छली बारी भी उसने यहीं गंदे कपड़े पहेन रखे थे...

ललिता बोली "आनंद विहार के आगे में आपको रास्ता बता दूँगी"

ललिता ने रिक्शा का हॅंडल पकड़ा और अपनी एक टाँग रिक्शा पे रखके थोड़ा अंदर घुसी तो उसकी सफेद कॅप्री

थोड़ी नीचे हो गयी और पर्पल टॅंक टॉप उपर उठ गया... ललिता की पीठ के दर्शन को देख कर उस रिक्शा वाले

की आँखें बड़ी हो गयी.... वो अपने लंड को छूता हुआ रिक्शा पे बैठ गया... उस रिक्शा वाले ने एक गंदी

सी हल्के नीले रंग की लूँगी पहेन रखी थी जोकि उसके घुटने तक थी और उपर एक हरी बनियान...

क्रमशः……………………….
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07-19-2018, 12:24 PM,
#7
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--5

गतान्क से आगे……………………………………

ललिता को उस रिक्शा वाले के बदन से ही बू आ रही थी.... पिच्छली बार की तरह वो फिर से काफ़ी तेज़ चला रहा था

रिक्शा मगर साथ ही साथ उसकी नज़रे सानिया के मम्मो पर भी थी जोकि हर हल्के से झटके से उपर नीचे

हुए जा रहे थे... ललिता की ब्रा का पतला सा गुलाबी स्ट्रॅप भी उसपे कंधे पे नज़र आ रहा था उस रिक्शा वाले को...

2-3 बारी उसको अपने लंड को ठीक करना पड़ा क्यूंकी वो उसके कच्छे के साथ कुश्ती में लगा हुआ था...

फिर वहीं थोड़े सुनसान सड़क पे जाके उसने रिक्शा रोक दिया और 2 मिनट का वक़्त माँग कर उन्ही झाड़ियों की तरफ बढ़ा...

वो सड़क पिच्छली बार से ज़्यादा सुनसान लग रही थी ललिता को शायद उसकी सहेली रिचा के ना होने की वजह से ऐसा था...

ललिता की नज़रे उस रिक्शा वाले की ओर ही भटक रही थी... पिच्छली बार की तरह आज उसने पॅंट नहीं पहनी थी...

ललिता को समझ नहीं आ रहा था कि उस लूँगी में वो कैसे पिशाब करेगा....

ललिता चौक गयी देख कर जब उस रिक्शा वाले ने अपनी लूँगी उतार के अपने कंधे पे रख दी और एक गंदा

सा काले रंग के कच्छे को हल्का से नीचे करके मूतने लगा... सानिया ने बचपन में अपने भाई/पापा को

ऐसा देखा होगा मगर इस जवानी में वो पहली बारी किसी मर्द को ऐसे देख रही थी...

इस बारी झाड़ियो पे पिशाब की आवाज़ ज़्यादा तेज़ थी... उस रिक्शा वाले ने मौका नहीं छोड़ा और हल्का सा टेडा

हो गया ताकि रिक्शा में बैठी हुई लड़की उसे देख पाए और वैसा ही हुआ... रिक्शा वाला ने अपनी मुन्डि नही उठाई

मगर ललिता ने उसकी पिशाब की लंबी धार को देख लिया.. नज़ाने क्यूँ उसकी आँखें उस धार को नीचे से उपर

देखती हुई उसकी लंड की तरफ बढ़ी मगर ज़्यादा अंधेरा होने के कारण वो उसे ढंग से देख नहीं पाई... जैसे ही

रिक्शा वाले ने अपने लंड को कच्छा में डाला ललिता ने अपनी नज़रे उल्टी तरफ करदी...

रिक्शा वाले को पता था कि ललिता की नज़रे पहले कहाँ थी और वो लूँगी पहेन कर वापिस रिक्शा में बैठ गया...

वो काफ़ी धीरे धीरे रिक्शा चलाने लगा जैसे वो उस सुनसान सड़क पे ही रहना चाहता हो...

परेशान होके ललिता ने उसे बोला " भैया पॅड्ल पे पाँव मारो और ज़रा जल्दी चलाओ"

ये सुनके रिक्शा वाले ने अपनी भारी आवाज़ में कहा " पॅड्ल की जगह कुच्छ और मारने का मन कर रहा है"

ललिता एक दम चुप हो गयी थी... वो वैसे बहुत ज़्यादा बनती थी अपने परिवार और दोस्तो के सामने मगर उसने इधर

चुप रहना ही ठीक समझा....

जैसे तैसे ललिता घर पहुचि और इस बार ललिता ने उसको पूरे पैसे दिए मगर उस शातिर रिक्शा वाले ने ललिता की

उंगलिओ को छुते हुए पैसे रख लिए...

ललिता का दिमाग़ उस रिक्शा वाले पर ही था और जब वो घर पहुचि तो शन्नो ने उसको अच्छी ख़ासी डाँट लगा दी इतनी लेट घर आने के लिए... दोनो के बीच में काफ़ी बहस हो गई जिसको डॉली और चेतन को सुल झाना पड़ा...

ललिता को चिढ़ इस बात की थी जब डॉली अपने दोस्त के घर पार्टी में जा सकती है तो वो अपनी क्लसेस सेथोड़ी देर से

क्या आ गई तो कौनसा तूफान मच गया....

खैर माहौल फिर से ठीक हो गया और कुच्छ देर डॉली नहा के तैयार होने लग गयी....

उसने एक गहरे हरे रंग की सारी निकाली जिसपे काले रंग की एमब्रोयिडारी थी.. उसके साथ काला ब्लाउस और काला पेटिकोट पहेन लिया....

आँखो पे काजल लगाके और हल्की लाल लिपस्टिक लगा के वो प्रिया की पार्टी के लिए निकल गयी...

उसको घर से पिक कर लिया उसकी बाकी सहेलिया आ रही थी गाड़ी में... वो प्रिया के घर पहुचि तो वहाँ काफ़ी रौनक थी..

अच्छा म्यूज़िक चल रहा था, शोर शराबा लज़ीज़दार खाना और पीने के लिए कोक से लेके बियर तक थी और काफ़ी

अच्छे लोग थे जिनसे डॉली अब कुच्छ ज़ादा दूर चली जाएगी.... उसके पापा-मम्मी आज घर पर नहीं थे तभी

ये सब कुच्छ मुमकिन हो रहा था... काफ़ी लड़कियों और एक-दो लड़को ने डॉली की सारी की तारीफ करी मगर कुच्छ देर के बाद उधर नेहा आई उसने एक पर्पल रंग का नूडल स्ट्रॅप ड्रेस पहेन रखा था जिसकी लंबाई घुटनो के उपर तक थी...

उसने स्ट्रेप्लेस्स ब्रा पहेन रखी थी जिससे कुच्छ लड़को उमीद थी कि शायद इसने अंदर कुच्छ पहना भी ना हो....

ऐसी उमीद इसलिए थी क्यूंकी बड़ी आसानी से राज ने इसको पटा लिया था और उन दोनो के अश्लीलता के काफ़ी चर्चे भी

चल रहे थे कॉलेज में.... उसको देखकर सारे लड़के मानो उसके दीवाने हो गये हो... सब एक दूसरे के कान मे नेहा की

तारीफ करने लगे कुच्छ लड़के अपनी आँखो से उसके कपड़े उतारने लगे... डॉली ने नेहा से दूरी ही रखनी अच्छी समझी....

फिर जब भी दोनो की नज़रे टकराती तो नेहा की नज़रो में एक गुरूर झलक रहा था जैसे कि उसने डॉली को हरा दिया हो

जैसे कि वो डॉली काफ़ी ज़्यादा बढ़िया दिखती है..... सब कुच्छ अच्छा ही जा रहा था फिर डॉली के सेल पे कॉल आया उसकी मम्मी का तो वो बाल्कनी में जाके वो उनसे बात करने लगी... बात करते करते उसने देखा कि उसके पीछे नेहा खड़ी है... डॉली ने फोन काटा तो नेहा ने उसे नीचे गिराते हुए कहा "क्या हुआ डॉली यहाँ आके अकेले रो रही है क्या??

कि नेहा ने मेरे बॉय फ्रेंड को छीन लिया.. उसने मुझे धोका दिया..." डॉली को उसके मुँह से बियर की स्मेल आ रही थी और उसने कुच्छ जवाब ना देना बेहतर समझा और वहाँ से जाने लगी

नेहा फिर से बोली " ऐसी सब कुच्छ तू पूरी दुनिया को सुना रही है ना कि मैं कितनी बड़ी कमिनि हूँ जो बहला फुसला के

राज को तुझसे दूर कर दिया और उसके घर में उससे चुद्वाने चली गयी"

डॉली वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए बोली "देख मुझे तुझसे इस बारे में कुच्छ बात नहीं करनी है" ये कहते हुए

वो बाल्कनी का दरवाज़ा खोलते हुए घर के अंदर बढ़ी तो

नेहा ने ज़ोर से डॉली की कलाई पकड़ी और चिल्ला के बोली "साली खुद तो अपने बॉय फ्रेंड को खुश नहीं कर पाई और फिर बच्ची की तरह रोती रहती है... अगर ज़रा सा भी औरत होती ना राज तुझे छोड़ता ही नहीं"

ये सुनके घर में सारे लोग दन्ग रह गये थे... सबको पता था इन दोनो लड़कियों की किस बात पे बहस हो रही थी....

जब डॉली ने देखा कि सब उसे और नेहा को ही देख रहे है तो उसने अपनी कलाई छुड़ाई नेहा के हाथो से और गुस्से में

बोली "मुझे कुच्छ नहीं लेना देना तुझसे या फिर राज से... भाड़ में जाओ तुम दोनो"

माहौल इतना गरम हो गया था कि नेहा ने डॉली के कंधो पे इतनी ज़ोर से धक्का दिया कि वो अपनी गान्ड पे जाके ज़मीन पे गिरी...

ज़मीन कार्पेट से धकि हुई थी जिस वजह से उसको चोट नहीं आई.... मगर उसकी जूती की हील टूट गयी और उसका पैर भी मूड गया...

डॉली ने नेहा की टाँग को जकड़ा और उसको अपनी तरफ ज़ोर से खीचा जिस वजह से नेहा भी वही पे गिर गयी...

दोनो लड़किया एक दूसरे के हाथा पाई करने लगी... किसी को कुच्छ समझ नहीं आ रहा था कि कौन किसको रोके....

हाथ पाई में डॉली की पिन खुल गयी और उसकी सारी का पल्लू उसके कंधे से लहराता हुआ ज़मीन पे गिरा...

डॉली ने नेहा के हाथ पकड़े और ताक़त लगाते हुए उसको ज़मीन पे रोके रखा... नेहा ज़मीन पे आधी लेटी हुई थी...

वो गुस्से में अपनी टाँगें उठाने लगी ताकि डॉली को मार सके वो तो हो नहीं पाया मगर उसकी ड्रेस

नीचे से काफ़ी उपर हो गयी.... उसकी गुलाबी रंग की चड्डी सबकी नज़र में आ गयी....

सारे लड़के आँखें फाड़ फाड़ के नेहा की चिकनी जाँघ को घूर्ने लगे... कईयो की हँसने की आवाज़ भी आ रही थी...

प्रिया ने डॉली को समझाने की कोशिश करी मगर वो अभी काफ़ी गुस्से में थी और उसकी एक नहीं सुन रही थी....

नेहा ने किसी तरह अपना हाथ छुड़वाया और डॉली के काले ब्लाउस को जकड़ते हुए खीच दिया...

आगे से डॉली का ब्लाउस फॅट गया उसकी काली ब्रा दिखने लगी सबको... उसके कोमल मम्मो की सड़क का भी नज़ारा दिखने लगा...

डॉली शर्मिंदा होकर वहाँ से उठी और अपनी सारी का पल्लू ठीक कर दिया ताकि कोई उसके संतरो को देख ना पाए...

प्रिया डॉली को लेके कमरे में चली गयी और उसको एक टी-शर्ट पहनने के लिए देदि... नेहा भी गुस्से में उस घर

से चली गयी थी और सब शांत हो गया था.... प्रिया को पार्टी बीच में हो रोकनी पड़ी और वो खुद जाके डॉली को

उसके घर छोड़ कर आई....

रात के कुच्छ 12 बज रहे थे और डॉली पापा मम्मी को जगाना नहीं चाहती थी इसलिए उसने चेतन के मोबाइल पे कॉल

किया ताकि वो दरवाज़ा पहले से खोलके रखे.... घर पहूचकर ही वो सीधा अपने कमरे में पहुचि और रोने लगी...

घर में सिर्फ़ चेतन जगा हुआ था उसे समझ नहीं आया कि दीदी बिना मिले सीधा अपने रूम में क्यूँ गयी है....

उसे डर लगा कि कहीं दीदी को पता तो नहीं चला कि उसने उनकी आज की उतरी पैंटी को चुपके से वॉशिंग मशीन से

निकाला था और फिर उसके सूंग कर मूठ मारा था... उसके दिमाग़ में ख़याल आया मगर फिर उसको एहसास हुआ दीदी तो

घर पर ही नहीं थी शाम से तो उनको कैसे पता चला होगा... डॉली के कमरे के पास खड़ा होकर एक गहरी

साँस ली उसने और फिर धीरे से उसका दरवाज़ा खोला... कमरे में अंधेरा था और डॉली बिस्तर पे लेटी हुई थी...

चेतन को डॉली के रोने की आवाज़ आने लगी तो उसने घबराकर पूछा "क्यूँ हुआ दीदी"

डॉली ने उसको कुच्छ जवाब नहीं दिया...

चेतन ने दरवाज़े को आराम से भेड दिया ताकि किसिको दीदी के रोने की आवाज़ ना आए... वो डॉली के बिस्तर के पास गया

और घुटनो के बल जाके बैठ गया... "डॉली दीदी क्या हुआ आपको... आप रो क्यूँ रही हो" ये कहने के बाद ही चेतन हिल

गया क्यूंकी डॉली ने उसको कस के गले लगा लिया और रोने लगी.... चेतन को समझ नहीं आ रहा था कि वो डॉली के आँसू

पौछे या फिर उसके स्तनो का मज़ा ले जोकि उसकी छाति से चिपके हुए थे...
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07-19-2018, 12:24 PM,
#8
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
एक और बारी चेतन के पुच्छने के बाद डॉली बोली "मैं तुझे नहीं बता सकती बस मुझे रोने दे...

चेतन की टी-शर्ट डॉली के आँसुओ से भीग चुकी थी.... चेतन भी आपने हाथ डॉली की उपरी पीठ पे फेरने लगा था...

डॉली की नंगी पीठ बहुत ही ज़ादा कोमल थी एक दम माखन की तरह... डॉली के आँसू जब ख़तम हो गये तो उसने

अपने भाई के कंधे से अपने सिर हटाया और चेतन ने अपने हाथो से डॉली के गालो से आँसू पौछे...

उसके अंदर एक अजीब से जज़्बा आया और उसने डॉली के होंठो को चूम लिया और फिर 1 सेकेंड में अपने होंठ दूर कर लिया...

डॉली को समझ नहीं आया कि ये हुआ क्या... वो खुले मुँह चेतन को देखने लगी तो चेतन ने डॉली की गर्दन पे हाथ

रखते हुए एक और बारी उसको चूम लिया और इस बार चूमता ही रहा... डॉली ने उसको दूर करने की कोशिश करी मगर

फिर वो मदहोश हो गई और चेतन को चूमने लगी.... डॉली को चूमता चूमता वो बिस्तर पर चढ़ गया और

डॉली बिस्तर पे लेट गयी.... डॉली के हाथ चेतन की गर्दन पे थे और दोनो एक दूसरे को अभी तक चूम रहे थे...

चेतन ने चुंबन तोड़ा और अपने होंठो को डॉली की गर्दन पे ले गया.... साथ ही साथ उसने अपना हाथ डॉली की टी-शर्ट

में घुसाया डॉली के गरम पेट को महसूस करने लग गया... डॉली की नाभि पे अपनी उंगली घुमाने लगा...

डॉली ने अपनी आँखें बंद करली थी और अपने भाई को उसने पूरी रज़ामंदी दे दी थी...

चेतन ने अपने दोनो हाथो से डॉली की टी-शर्ट को उतार दिया...... उसने 2 सेकेंड डॉली के पतले पेट को देखा और फिर

उसके स्तनो की तरफ नज़र डाली जोकि काली ब्रा में बंद थे... वो ब्रा को उपर करने लग गया मगर ब्रा काफ़ी टाइट थी जिस वजह से उसे दिक्कत हो रही थी.... डॉली ने अपना हाथ अपनी पीठ की तरफ बढ़ाया और अपने भाई के लिए अपनी ब्रा के हुक को खोल दिया.....

चेतन ने अपने हाथ डॉली के मम्मो की तरफ बढ़ाए और उसकी ब्रा उठाते हुए उनको प्यार से दबाने लग गया....

डॉली बिस्तर पे मचले जा रही थी... और फिर जब चेतन ने उसकी चुचियाँ को दबाया तो उसके मुँह से आह

निकल गयी.... चेतन फिर अपनी बहन के मम्मो को चूसने लग गया.... ना चाहते हुए भी डॉली की सिसकिया रुकने का

नाम ही नहीं ले रही थी.... डॉली ने हल्के से कहा "कोई आ जाएगा" डॉली फिर बिस्तर से उठी और दरवाज़ा लॉक कर्दिआ

और अपने टाय्लेट के अंदर चली गयी.... चेतन को अपनी बहन का इशारा समझ में आया और वो टाय्लेट के अंदर गया....

डॉली ने टाय्लेट की लाइट ऑन नहीं करी थी क्यूंकी वो अपने भाई का चेहरा देख नहीं पाती और चेतन ने भी लाइट ऑफ

रहने मे अपनी भलाई समझी.... डॉली ने चेतन की सीधे हाथ की उंगली को पकड़ा और अपनी चूत की तरफ ले गयी...

जैसी डॉली के नंगे बदन से चेतन की उंगली छुइ उसे एक ज़ोर का झटका लग गया....

"इतनी जल्दी डॉली दीदी ने अपनी सारी और पेटिकोट उतार भी दिया" ये सवाल चेतन के दिमाग़ में आया...

मगर फिर डॉली की चूत को महसूस किया जोकि थोड़ी सी गीली थी... चेतन ने अपनी डॉली की चूत में अंदर बाहर करनी शुरू की...

डॉली की चूत पे हल्के हल्के बाल थे जैसे कि चेतन के लंड के उधर भी थे....जब भी वो डॉली की चूत के अंदर

अपनी उंगली घुसाता डॉली अपने पंजो पे खड़ी हो जाती और चेतन के कंधे पे अपना माथा रख लेती....

फिर चेतन अपनी उंगली बाहर करता तो डॉली का दिमाग़ फिर से उंगली अंदर जाने का इंतजार करता...

डॉली ने चेतन की टी-शर्ट को उतार दिया और उसकी छाति को चूमने लगी... उसकी छाति को चूमते चूमते वो नीचे

बैठी और चेतन के पाजामे के साथ उसके कच्छा को भी नीचे कर दिया... चेतन का जवान लॉडा कूदता हुआ बाहर निकाला....

डॉली ने अपना नाख़ून अपने भाई के लंड पे उपर नीचे किया... चेतन को हल्का सा दर्द हुआ मगर मज़ा भी बहुत आया...

डॉली फिर उसके लंड को चूमने लग गयी और फिर आहिस्ते आहिस्ते चूसने लग गयी.... चेतन ने अपने पाजामे और कछे को

उतारके फेका और दीवार के सहारे खड़ा हो गया.... चेतन ने अपना हाथ डॉली के सिर पे रख दिया और

उसपे फेरने लग गया जैसे किसी कुतिया के अच्छे काम करने पे सबाशी दे रहा हो... डॉली ने सीधे हाथ से लंड को

पकड़ा हुआ था और अपने उल्टे हाथ से वो चेतन के आंडो से खेलने लगी.... चेतन के जिस्म में एक मीठा दर्द जगा और अचानकसे उसका वीर्य डॉली के मुँह के अंदर ही चला गया..... चेतन को अपने पे इतना गुस्सा आया क्यूंकी अब उसका लंड छोटा होना लगा...

डॉली ने चेतन के पानी को तो निगल लिया मगर उसके लंड को छोड़ा नहीं...

अभी भी वो उसको हिलाती रही देखते ही देखते चेतन का लंड फिर से जागने लगा...

चेतन को इसमे काफ़ी अचंभा लगा मगर अब उसे पता था उसे क्या करना है...

उसने अपनी बहन की जाकड़ में से अपना लंड अलग किया और टाय्लेट के फर्श पे लेट गया...

फर्श हल्का सा गीला था शवर के पानी के वजह से मगर चेतन को उस बात से कुच्छ फरक नहीं पड़ा....

डॉली ने अपनी टाँगें चौड़ी करी और चेतन के लंड पे जाके बैठ गयी... चेतन को पहले बहुत दर्द हुआ मगर

जब डॉली की चूत थोड़ा खुल गयी तब उसके लंड को राहत मिली... डॉली ने चेतन के पेट पर हाथ रखा हुआ था

और उसके सहारे उपर नीच हो रही थी वो... चेतन पहले की तरह कोई गड़बड़ नहीं करना चाहता था इसलिए वो अपनी

बहन को सारा काम करने दे रहा था... कुच्छ देर बाद डॉली थक गयी तो वो चेतन के लंड से उठी और चेतन को भी

इशारा करके उठा दिया... दोनो नलो को पकड़ कर वो अपनी चूत हवा में करके चेतन के लंड के सामने खड़ी हो गई...

चेतन ने आहिस्ते से अपना लंड डॉली की गीली चूत में डाला और उसकी कमर को जाकड़ चोद्ने लगा...

चेतन अपनी रफ़्तार तेज़ करने लगा था... और डॉली को इसमे बहुत मज़ा आ रहा था... बीच बीच में

उसका भाई उसके मम्मो को भी मसल्ने लगता जिससे डॉली और पागल हुई जा रही थी...

दोनो हल्की हल्की आवाज़ें निकाल रहे थे मगर वो बाहर वालो को सुनाई नहीं दे सकती थी...

डॉली अब और इंतजार नहीं कर सकती थी और उसका सारा पानी उसकी चूत से निकलने लगा... कयि बूंदे चेतन के लंड पर भी आई...

चेतन ने देखा कि कैसे डॉली दीदी अपनी चूत को रगडे जा रही थी और उसको देखादेखी चेतन भी वोही करने लगा...

जब पानी ख़तम हो गया तो चेतन ने अपना लंड वापस चूत में डाला.... इस बारी चेतन को पता चल गया था कि कब

वो झड़ने वाला है और तभी उसने अपनी दीदी की चूत में से लंड निकाला और उनकी कमर पे वीर्य डाल दिया....

कुच्छ सेकेंड बाद डॉली खड़ी हुई और चेतन के गाल को हल्का सा चूम के थंक्स बोली और वहाँ से चली गई...

चेतन भी फिर कमरे से चला गया और डॉली ने वापस दरवाज़ा बंद कर दिया और बिस्तर पे जाके नंगी

डॉली इतनी थक गयी थी कि उसको अपने जिस्म को ढकने की भी ताक़त नहीं थी दरवाज़ा पे कुण्डी लगा दी और

चदडार ओढ़ के सो गई मगर चेतन को आज नींद कहाँ आने वाली थी... उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि

ये सब इतनी जल्दी हो गया... पहली लड़की जिसको उसने नंगा देखा और अपनी ज़िंदगी में पहली बार चोदा

वो कोई और नहीं उसकी बड़ी बहन है.... उसको एक अजीब सी खुशी मिल रही थी ये सोचके कि बहुत कम ही

खुश नसीब भाई होते होंगे ऐसे.... मगर एक बात तो थी वो डॉली को बहुत पसंद करता था अब वो पसंद एक साधारण

भाई-बहन के रिश्ते वाली थी या फिर किसी और तरीके के रिश्ते की ये समझना उसके बस की बात नहीं थी.....

खैर कुच्छ देर बाद उसकी आँख लग गयी मगर उसको शन्नो ने सुबह स्कूल जाने के लिए उठा दिया और ना

चाहते हुए भी उसको स्कूल जाना पढ़ा... उसकी क्लास के लड़के हमेशा की तरह लड़कियों/हेरोइनो के बारे में

बात कर रहे थे.. वो मन ही मन मुस्कुराने लगा कि ये छिछोर तो बात ही करते रहेंगे और मैने

तो कल अपनी बहन को चोद भी दिया.... उसका पढ़ाई मे तो वैसे ही मन नहीं लगता था मगर आज तो उसका दिमाग़ बस कल रात के उपर ही लगा था.... रिसेस के वक़्त वो सीधा टाय्लेट गया और दरवाज़ा बंद करके उसने देखा कि उसने जो

लिखा हुआ था "कि कल मैने अभी बहन को नंगा अपनी चूत से खेलते हुए देख के मूठ मारा"

उसके आस पास भी कुच्छ चीज़े लिखी हुई थी... पर एक जगह लिखा हुआ था "कितने की मिलेगी तेरी बहन" ये पढ़के चेतन को गुस्सा आ गया...

किसी लड़के ने उसकी बहन को धंधा करने वाली बना दिया ये सोचके उसे अपनी इस हरकत पे भी गुस्सा आया...

खैर जब वो घर पहुचा तो डॉली को वहाँ ना पाके मायूस हुआ... वो किसी भी हालत में डॉली को देखना

चाहता था उससे कल रात के बारे में बात करना चाहता था... पूरा दिन फीका सा बीत गया...

क्रमशः……………………….
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07-19-2018, 12:24 PM,
#9
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--6

गतान्क से आगे……………………………………

शाम को जब डॉली घर पर आई तो वो मुस्कुरा कर चेतन से मिली... डॉली ने एक टाइट सी काली जीन्स पहेन रखी थी

जिसमे उसकी गान्ड काफ़ी बड़ी लग रही थी... इसी गान्ड पे कल उसका हाथ था ये सोचके चेतन मचल उठा....

चेतन को राहत भी थी कि उसकी बहन को कल की रात से कोई फरक नहीं पड़ा अब ऐसी रातें और होंगी ऐसा ख़याल

दिल में रखके वो खुश हो गया.... रात को सबने खाना खा लिया और सब अपने अपने कमरे में चले गये थे...

डॉली चेतन और ललिता के कमरे में गयी और चेतन को कुच्छ काम के लिए बाहर बुला लिया....

चेतन बड़ा खुश होके बाहर गया तो डॉली उसको अपने कमरे में ले गयी और उसको अच्छे से भेड़ दिया...

चेतन डॉली के सामने खड़ा हुआ था उसके चेहरे पे बहुत बड़ी मुस्कान छाइ हुई थी...

कुच्छ देर चुप रहने के बाद डॉली बोली " चेतन कल जो भी हुआ वो नहीं होना चाहिए था...

कल मैं जब घर आई थी तो मैं काफ़ी टूट गयी थी... मैं बस रोए जा रही थी मगर जब तुम आए

कमरे में और तुमने मेरे आँसू पौछे फिर नज़ाने क्यूँ तुमने मुझे किस किया और मैने भी तुम्हे रोका नहीं...

फिर जो भी हुआ मैं उसके लिए शर्मिंदा हूँ..."

चेतन चुप चाप खड़ा ये सब सुनता रहा उसकी मुस्कान अब ख़तम हो गयी थी.. वो अपनी बहन के प्रस्तावे को सुनने जा रहा था...

डॉली फिर बोली "देख ये बात हम दोनो के बीच में ही रहेगी तो सबके लिए अच्छा रहेगा और तू इसको भुला दो और मैं भी इसे भूलने की कोशिश करूँगी"

ये सुनने के बाद चेतन डॉली से कुच्छ कह नहीं पाया सिर्फ़ अपनी गरदन हिलाते हुए वहाँ से चला गया....

भोपाल जाने के दिन पास आते गये.... डॉली चाहती तो थी कि वो ये दिन अपने परिवार के साथ बिताए मगर उसकी

हिम्मत नहीं थी चेतन के साथ वक़्त गुज़ारने की... वो कोशिश कर रही थी कि जितना हो सके वो घर के बाहर रहे....

चेतन का मन भी इन जिस्मी बातों पे नहीं लग रहा था.... वो भी कोशिश कर रहा था कि अपने दोस्तो के साथ

वक़्त गुज़ारे ताकि उसका दिमाग़ डॉली दीदी के बारे में ना सोचे.... उधर नारायण किसी भी हालत में शन्नो को चोद्ना

चाहता था मगर शन्नो ने अब तक नारायण को हरी झंडी नहीं दिखाई थी. उसका लंड हर दूसरे मौके पे खड़ा हो

जाता और चूत की तलाश में रहता मगर उसके पास कोई चारा नहीं ती..... नारायण अपने आप को काबू नही कर पा रहा

था और कयि बारी स्कूल के टाय्लेट में जाके मूठ मारने लगता.

फिर नारायण का आखरी दिन था स्कूल में. हमेशा की तरह स्कूल बोरियत में निकल गया.

आख़िरी पीरियड जोकि फ्री होता था उसमें फिर से वोही दृश्य देखने को मिला... एकता रंजना और सिमरन साथ में

बैठी थी और आशीष अकेला दूसरी ओर. गर्मी के कारण एकता की सफेद शर्ट उसकी पीठ से चिपकी हुई थी और उसकी

ब्रा का सॉफ दृश्य दे रही थी.... आशीष की नज़र एकता की पीठ पर ही थी मगर नारायण का सिर इन तीनो लड़कियों के शोर से फटा जा रहा था. पूरे 15 मिनट से ये तीनो चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी....

नारायण के मना करने के बाद भी ये फिर से शुरू हो जाती...वो अपने मन में ही तीनो को कयि गालिया दे चुका था.

उसने कोशिश करी कि वो अपनी आँखें बंद करके बैठने की मगर फिर भी वो अपने कानो को बंद नहीं कर पा रहा था...

नारायण ने अपनी आँखें ज़ोर से बंद करली और पाँच बारी पूरे आक्रोश से 'स्टॉप' बोला.

स्टॉप

स्टॉप

स्टॉप

स्टॉप

स्टॉप

अचानक से शांति हो गई कमरे में. क्लास के बाहर भी कोई शोर नहीं. पूरे स्कूल में शांति च्छा गयी थी...

नारायण ने अपनी उल्टी आँख खोली और देखा कि आशीष एक ही जगह रुका हुआ है ना उसके हाथ चल रहे थे और ना ही उसकीपलके झपक रही थी.... फिर नारायण ने आहिस्ते से अपनी दूसरी आँख भी खोली और देखा कि ये तीनो लड़किया भी एक हीजगह रुकी हुई थी... कोई ज़रा सा भी हिल नहीं रहा.... एकता टेबल पे बैठी हुई थी और बाकी दोनो लड़कियों के चेहरे उसकी तरफ थे....

नारायण ने अपनी मुन्डी उपर करी तो दीवार पे पंखा चल रहा था और खिड़कियो के बाहर से तेज़

हवा की अभी आवाज़ आ रही थी... वो घबराकर कुर्सी से उठा और क्लास के बाहर देखा तो मिस. किरण

(35 साल की हिन्दी टीचर... सब उसको काली बिल्ली बुलाते थे) बाहर ही खड़ी हुई थी एक पीली सारी में मगर वो भी एक

ही जगह खड़ी हुई थी... फिर नारायण क्लास के अंदर भागा और आशीष को हिलाने लग गया.

नारायण आशीष का हाथ हिला पा रहा था मगर आशीष उसको कोई रेस्पॉन्स नहीं दे रहा था. नारायण ने आशीष की

मुन्डी भी उपर नीचे करी मगर फिर भी वो कुच्छ नहीं बोल रहा था.... नारायण काफ़ी डरा हुआ था...

वो दबे पाओ उन तीनो लड़कियों के पास गया और कुच्छ सेकेंड के लिए उनको देखने लग गया क़ि शायद इनमे से कोई

कुच्छ बोलेगा मगर ऐसा नहीं हुआ... नारायण ने अपने माथे का पसीना पौछा और फिर एकता के कंधे को हल्के से छुआ.

एकता ने कुच्छ नहीं बोला. उसने एकता के दोनो कंधो को पकड़ा और ज़ोर से एकता को हिला दिया मगर

फिर भी कोई जवाब नहीं आया.... नारायण ने फिर रंजना और सिमरन को भी हिलाया मगर उन्होने ने भी कुच्छ नहीं बोला.

ऐसा लग रहा था कि किसी के भी जिस्म में जान है मगर हिलने की ताक़त नहीं है. तेज़ हवा झोका खिड़की में से

आया और एकता के बालो को हिला दिया... एकता की सफेद शर्ट उसकी छाती से सिमट गयी और नारायण आँखें उसके गोल गोल मम्मो पर पढ़ी और नारायण की घबराहट अचानक एक शैतानी हँसी बन गयी. नारायण ने एकता को देखा जोकि टेबल पे बैठी हुई थी. वो थोड़ा सा झुका और एकता की स्कर्ट को हल्के से पकड़ा और थोड़ा सा उपर किया. उसको कुच्छ ढंग से नज़र नहीं आया. उसने अब बिना परवाह किए एकता की स्कर्ट को और ऊचा कर दिया. एकता की कोमल मलाई जैसी जांघें दिखाई दे रही थी. नारायण उसकी जाँघो को देखे ही जा रहा था. घबराते हुए उसने अपना हाथ बढ़ाया औरएकता के घुटनो पे रख दिया... धीरे धीरे उसमें हिम्मत आई और अपना हाथ अब वो एकता की जाँघो पे फेरने लग गया....

उसने फिर पूरी स्कर्ट को उपर कर दिया और उसकी नज़र एकता की सफेद चड्डी पे पड़ी. नारायण ने अपना चश्मा उतार के ज़मीन पे फेक दिया और अपनी नज़र एकता की सफेद पैंटी पे गढ़ा दी. फिर उसने हल्के से अपने कापते हुए हाथ

को एकता के सीधा घुटने पे रख दिया. धीरे धीरे अब वो अपने हाथ को एकता की जाँघ पे फेरने लग गया और उपर ले

जाने लगा. नारायण ने हाथ आगे बढ़ाया और एकता की पैंटी को छुआ. वो एकता की चूत को महसूस कर पा रहा था.

उसने अब नज़र एकता की पैंटी से हटा कर उसके उपरी बदन पे ले गया. नारायण ने आराम से एकता की गर्दन

पे बँधी हुई टाइ को निकाला. एकता के 36 सी इंच के मम्मो को उसने हल्के से दबाया. कमीज़ के उपर ही उसको पता

चल रहा था कि ये कितने मुलायम होंगे. वो अब बिना परवाह किए उन्हे दबाने लगा. जल्दी से नारायण ने एकता की कमीज़ के बटन को खोला और उसको उतार दिया. एकता के बड़े बड़े स्तन बस उसकी सफेद ब्रा को फाड़के

बाहर आने को बेताब हो रहे थे. बिना रुके उसने ब्रा का हुक खोलके उसको फेक दिया.
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07-19-2018, 12:25 PM,
#10
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
नारायण अपने सिर को एकता के

स्तनो पे ले गया और अपने दांतो से उसकी कोमल त्वचा को काटने लग गया. एकता के भूरी चुचियाँ को चूसे जा रहा

बड़ा मज़े लेके. अचानक वो रुक गया और उसने रंजना और सिमरन को देखा जोकि बेंच पे बैठी हुई एकता के सामने.

उसने दोनो के गाल पर एक एक तमाचा मारा और ज़ोर से चिल्लाया "सालियो तुम्हे क्या हाथ जोड़के बोलना पड़ेगा??

चलो जल्दी से अपने इस स्कूल के कपड़ो को उतारो और नंगी हो जाओ आज तुम्हे चोद्ने का दिन आ गया है".

ये बोलके वो हँसने लगा और रंजना को गोद में उठाके दूसरी तरफ की टेबल पे रख दिया.

नारायण ने उसकी स्कर्ट उपर करदी और रंजना की गुलाबी पैंटी को देख वो काफ़ी उत्साहित हो गया.

उसने स्कर्ट के अंदर हाथ डाला और गुलाबी पैंटी को उतार के उसकी महक सूंघने लग गया. नारायण ने पैंटी

आशीष के पास फेक दी और अपना ध्यान अब रंजना के 36 इंच मम्मो पे लगा दिया. उसने सारे बटन्स खोले

रंजना की शर्ट के और ब्रा समैत उसको फेक दिया. रंजना के टिट्स का रंग भी हल्का गुलाबी था. नारायण उनको

बड़ी कठोरता से मसल्ने लग गया और फिर अपने दांतो से काटने लग गया. अभी नारायण ने किसी भी लड़की को नीचे

से पूरा नंगा नहीं किया था और उसने सोचा चलो सिमरन को उपर से नंगा कर दिया जाए. उसने सिमरन के पतले बदन की तरफ हाथ बढ़ाया और उसकी कमीज़ के बटन तोड़ दिए. सिमरन की सफेद ब्रा को उसने फाढ़ के एकता के मुँह में दे दिया.

नारायण को सिमरन के स्तन कुच्छ ख़ास पसंद नही आए क्यूंकी वो सिर्फ़ 32इंच के थे मगर उसकी चुचियाँ काफ़ी बड़ी थी.

अब नारायण ने अपने कपड़े उतारे और अपने 6.50 इंच के काले लंड को मसल्ने लग गया. वो सिमरन के हाथ को

लेके अपने काले लंड को मसल्ने लग गया. उसकी छोटी छोटी उंगलिओ का मज़ा नारायण जी भर के ले रहा था. नारायण

ने उसको भी उठाके टेबल पे रख दिया. नारायण अब तीनो के हाथ को अपने लंड को मसलवाने लग गया एक के बाद.

उसकी सिसकिया बहुत दूर तक सुनाई दे सकती थी. नारायण कुच्छ पल के लिए रुका और उसने फिर झट से रंजना की कमर से बेल्ट निकाला और उसकी स्कर्ट को नीचे कर दिया. दूसरे ही पल में उसने सिमरन की स्कर्ट को भी नीचे कर दिया.

अब बारी उसकी सबसे मनपसंद लड़की एकता की थी जैसी ही उसने अपना हाथ बढ़ाया उसे सुनाई दिया

"सर... नारायण सर" और सोचने लगा ये साली बोलने कैसे लग गई??

उसको अब कई लड़कियों की आवाज़ भी सुनाई दी और नारायण की

नींद टूट गयी. उसने एकता को सामने खड़े देख मन ही मन अपने आपको दो गालिया सुनाई.

उसकी नज़ारे झट से एकता की स्कर्ट पे गयी जोकि अभी भी उसने पहेन रखी थी.

"सर स्कूल की छुट्टी हो गयी है.. हम जायें" एकता ने प्यार से नारायण से पूछा.

उसने हां में अपना सिर हिलाया और दुखी होके उठ स्कूल से चला गया.

दिन निकल गया और रात आ गयी.... आज की रात आखरी रात थी डॉली और नारायण की उनके घर पर...

कल रात की ट्रेन से भोपाल जा रहे थे और इस बात का सबको दुख था...

मगर सब से ज़ादा दुख चेतन को था क्यूंकी वो डॉली दीदी से दूर नहीं रहना चाहता था...

डॉली के कहने पर उसने वो रात को भूलने की बहुत कोशिश करी और कुच्छ हद्द तक वो सफल भी रहा मगर

उनके अब कल जाने से उसको रोना आ रहा था... वो किसी भी तरह इस रात को ख़तम नहीं होने देना चाहता था.....

निज़ामुद्दीन स्टेशन पे पहुचने के बाद नारायण और डॉली आसानी से अपनी ट्रेन में बैठ गये....

उनको उपरी और नीचे की साइड बर्थ मिली थी. डॉली ने कहा कि पापा आप उपर सोजाए क्यूंकी उसे ट्रेन में

नींद नही आती है और वो बाहर देख कर वक़्त काट लेगी. वक़्त अपने आप बीतता गया और ट्रेन में एक के

बाद एक लाइट्स बंद होती गयी और अंधेरा छाता गया... रात के कुच्छ 12;30 बाज गये थे और तब जाके ट्रेन

ग्वेलियार पहुचि थी. पूरे डिब्बे में शांति थी जोकि डॉली को कांट रही थी... डॉली कल रात के बारे

में सोचने लग गयी जिस तरह उसके भाई ने उसको कल चोदा था उसमें एक अजब ही मज़ा था...

उसे लग रहा था कि उसने अपने भाई में से एक प्यासा शेर जगा दिया था.... डॉली ने अपने मम्मो को छुआ और

उसके चुचि सख़्त हो गई थी.... शायद ठंड के मारे ये हुआ हो क्यूंकी उसने एक पतली सी चादर ओढ़ रखी थी और

या फिर अपने भाई के साथ गुजारी रात की सोचकर ही उसकी ये हालत हो गयी ... फिर वो अपने मोबाइल पे कुच्छ करने लगी.

उसने यूँही मज़े में ब्लूटूथ डिवाइसस को सर्च किया अपने सेल पे.उसमे 3-4 लोगो के नाम आए और उनमें

से एक का नाम लुवाशिक़ था. उसने ऐसी ही इससे कनेक्षन करने की कोशिश करी और कोड0000 डाल दिया.....

डॉली ने कुच्छ सेकेंड अपने मोबाइल को देख कर और एक मिनट में ही कनेक्षन एस्टॅब्लिश्ड लिखा आ गया.

डॉली हैरान हो गई कि ऐसा कैसा हो सकता है. डॉली का ब्लूटूथ नाम "क्यूट गर्ल" ही था जिससे

लुवाशिक़ को पता ही चल गया था कि ये कोई लड़की ही है.... उसको एक म्‍मस मिला जिसपे आशिक़ ने अपने नंबर देके उसपे

मैसेज करने को कहा. ट्रेन भी अब चलने लगी थी. डॉली ने कफि देर सोचा और बाहर देखने लगी मगर

बोरियत के कारण उसका मन ऊब गया था.... उसको लगा चलो किसी से बात ही हो जाएगी और उसने उस नंबर. पे मैसेज दे दिया

"हाई कौन है आप??" कुच्छ ही सेकेंड में मैसेज आया "मेरा नाम रमेश है 22 साल का हूँ और भोपाल का रहने वाला हूँ आप?? (असली में रमेश नाम का कोई था ही नहीं... मैसेज देने वाले का नाम बंटी था और वो 50 साल का था)

डॉली ने भी अपना नाम नेहा बताया और उमर 22 साल. कुच्छ 3-4 मैसेजस के बाद रमेश ने डॉली से पूछा

"एक बात बोलू बुरा तो नहीं मानेगी आप... आपका फिगर क्या है??

डॉली ने साची साची लिख दिया 34 24 34. बंटी ये पढ़के काफ़ी मचल चुका था. उसको लगा कि लड़की ने इतना बता दिया

है तो आगे भी बहुत कुच्छ बता देगी. बंटी ने लिखा "आप तो एक दम कंचा लगती होंगी... अब तो आपको देखने का

मन कर रहा है"....

डॉली ने इस मैसेज का का कुच्छ जवाब नही दिया और रमेश डर गया था. उसने फिर थोड़ी देर दोस्तो और फ़िल्मो के बारे

में बात की और जब उसे लगा कि लड़की अब लाइन पे आ रही है तब उसने पुछा अभी ब्रा पहनी है?? कौन्से रंग की??

डॉली ये पढ़के शरम के मारे लाल हो गयी..

बिना सोचे समझे उसने लिख दिया "काली ब्रा पहनी हुई है.." रमेश ने लिखा काला तो मेरा पसंदीदा रंग है.

फिर उसने पूछा " नेट वाली है या फिर साधारण वाली" डॉली ने जवाब में "नॉर्मल वाली" लिख दिया

रमेश का अगला सवाल था "तुम क्या रोज़ रात को ब्रा पहने के सो जाती हो?? तकलीफ़ नही होती??? डॉली ने लिखा कि "मुझे ब्रा के साथ कभी नींद ही नही आती."

तो रमेश ने जल्दी से लिखा तो आज कैसे सोओगी?? डॉली फिर से शर्मा गयी.. उसको लग रहा था कि उसका जिस्म इन बातो पे मचलने लगा है. डॉली ने मस्ती में लिखा " वो तुम सोचते रहो कि आज मैं कैसे सोने वाली हूँ."

रमेश ये पढ़के और गरम हो चुका था. उसका सीधा हाथ मैसेज लिखे जा रहा था तो उल्टा हाथ लंड को सहला रहा था...

उसना लिखा कि "तेरा कोई बॉय फ्रेंड है या बना है?" डॉली ने झूट लिख दिया कि नहीं है और अभी तक नहीं बना..

वैसे क्यूँ पुच्छ रहे हो?

रमेश ने बोला "नहीं ऐसी ही पूछा... अगर साची बताया तो तुम बुरा मान जाओगी"डॉली ने लिखा " मैं कभी बुरा नही

मानती और वैसे जब इतनी बात करली तो अब किस बात पे बुरा मानूँगी"

रमेश कुच्छ देर रुका और मैसेज सेंड किया "तो इसका मतलब अभी तक कोई तुम्हे बिस्तर पे लेके नहीं गया?"अब ये पढ़के

डॉली को हल्का सा गीलापन महसूस हुआ उसे कल रात की फिर से याद आगयि.... मगर सच बात तो ये ही थी कि उसके

बिस्तर पर सिर्फ़ उसके पिच्छले बॉय फ्रेंड राज ने ही चोदा था... उसने अपनी जीन्स का बटन खोला और उसके अंदर

हाथ डालके अपने पैंटी को महसूस किया.

डॉली ने लिखा " नहीं. अभी तक ऐसा मौका नहीं आया..तुम्हारी ज़िंदगी में ऐसा मौका आया है क्या?"

रमेश काफ़ी देर सोचके लिखा " मैं सच कहता हूँ मैने अब तक कई लड़कियों और औरतो को चोदा है.और कुच्छ को

कयि बारी उनमें से एक मेरी मामी भी है" ( बंटी पूरा झूठ बोल रहा था)....

उसने फिर लिखा "तुमने अपनी मामी को कैसे पटा लिया"

क्रमशः……………………….
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