Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
01-12-2020, 12:06 PM,
#1
Thumbs Up  Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
एक और घरेलू चुदाई


दोस्तो आपके लिए एक और मस्त कहानी लेकर आया हूँ मुझे उम्मीद है ये कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी

रामगढ़, शहर से दूर प्रकृति की छाँव मे बसा एक छोटा सा पर बड़ा ही प्यारा सा गाँव था , आबादी कुछ ज़्यादा नही थी करीब 100 एक घर होंगे एक तरफ घना जंगल था और दूसरी तरफ एक नदी थी पहाड़ो के आँचल मे बसा ये गाँव ऐसा था कि जो एक बार यहाँ आ जाए तो यहा आकर ही रह जाए, इसी गाँव मे रहता था प्रेम, उसके घर मे कुल मिला कर तीन लोग थे.


उसकी माँ सुधा, बहन उषा और तीसरा वो खुद पिता जब वो छोटा ही था तभी चल बसे थे सुधा ने ही दोनो भाई-बहनो को पाल पोसकर बड़ा किया था करीब 20-25 एक्ड्ड ज़मीन थी तो उसमे होने वाली फसल से भरपूर आमदनी हो जाती थी कुल मिला कर गाँव मे काफ़ी सम्मानित सा परिवार था उनका बहुत ज़्यादा अमीर तो नही पर ग़रीब भी नही थे तो चलो करते है कहानी की शुरुआत



शाम का वक़्त था प्रेम अपने दोस्त सौरभ के साथ नदी किनारे बैठा मछली पकड़ रहा था की सौरभ बोला-अरे यार आज गाँव मे वीसीआर का प्रोग्राम है पूरी रात फिलम देखने को मिलेगी तू आ रहा है ना

प्रेम- अच्छा मुझे तो पता ही नही था , वैसे किसके घर वीसीआर लाया जा रहा है

सौरभ- अरे वो अपने गाँव का नही है ना कल्लू उसके यहाँ ही और तू आ जाना वरना मैं भी नही जाउन्गा

प्रेम- यार माँ से पूछना पड़ेगा अगर वो हाँ कह देंगी तो पक्का आउन्गा

फिर दोनो मछली पकड़ने के बाद अपने अपने घर चले गये दोनो के घर बिल्कुल पास ही थे, रात को करीब 8 बजे सौरभ प्रेम को बुलाने आया प्रेम की भी इच्छा थी जाने की तो सुधा ने उसे कहा कि जाओ पर जल्दी ही वापिस आ जाना पूरी रात ही फिलम मत देखना तो फिर वो दोनो वीसीआर देखने कल्लू के घर पहुच गये रात का करीब 1 बज गया था एक फिलम पूरी हो गयी थी दूसरी चल रही थी कि तभी बिजली चली गयी और थोड़ा इंतज़ार करने पर भी ना आई तो करीब करीब सभी लोग अपने अपने घर चले गये

बस दो-चार लोग ही बचे थे, प्रेम और सौरभ का घर थोड़ा दूर पड़ता था तो वो वही कल्लू की बैठक मे लेट गये ना जाने कब दोनो को नीद आई , पर जब प्रेम की नींद खुली तो उसकी आँखे जैसे फट ही गयी थी दरअसल कुछ सिसकारियो की आवाज़ से उसकी आँख खुल गयी थी लेटे लेती ही उसने आँखे खोल के देखा की सामने टीवी पर एक फिल्म चल रही है जिसमे एक आदमी और औरत पूरे नंगे थे और जिस्मो का खेल खेल रहे थे

प्रेम भी पूरा जवान था, और उसे भी इन सब बातों का पता था पर ये पहली बार था जब वो ऐसा कुछ अपनी आँखो से देख रहा था , इस से पहले तो उसने बस किस्से- कहानी ही सुने थे चुदाई के . उसका लंड पॅंट मे ही फूलने लगा साँसे भारी होने लगी थी, उसकी आँखे बरा बार टीवी की स्क्रीन पर ही गढ़ी थी अचानक ही उसका हाथ उसके लंड पर चला गया और वो उसे सहलाने लगा

टीवी पर चलती ब्लूफिल्म देख कर प्रेम को बहुत ही मज़ा आ रहा था करीब घंटे भर वो फिल्म चलती रही और प्रेम अपनी आँखो से उस नज़ारे का भरपूर अवलोकन करता रहा , बार बार उसे ख़याल आ रहा था कि काश उस आदमी की जगह वो उस लड़की को चोद रहा होता उसे लगा कि जैसे चूत मारने की उसकी इच्छा अचानक से बहुत ही ज़्यादा बढ़ गयी थी पर उसे ये भी पता था की चूत ऐसे नही मिला करती है

अगले दिन प्रेम सोया पड़ा था कि कमरे मे आवाज़ से उसकी आँख खुल गयी तो उसने देखा की उसकी बहन उषा झुक कर झाड़ू लगा रही है उसकी चुन्नी कुछ सरक सी गयी थी तो सूट मे से उसकी चूचियो की घाटी की लकीर प्रेम को दिखने लगी जबकि उषा बेतकलुफ्फि से झाड़ू लगाती रही प्रेम चाहकर भी अपनी नज़रे बहन के बोबो से हटा नही पाया तभी उषा दूसरी तरफ घूम गयी उसका सूट एक साइड से कुछ उपर को हो गया था

तो प्रेम को उसकी सलवार का पीछे का हिस्सा दिखने लगा क्या भारी भारी से चूतड़ थे उषा के , उषा उमर के 22वे बसंत मे चल रही थी 5 फुट के साँचे मे ढली गोरी सी एक भरे हुवे हुस्न की मालकिन थी उसके पतले होठ, लंबी गर्दन मोटी मोटी चूचिया किसी को भी अपना दीवाना एक पल मे ही बना सकती थी और ऐसा ही हाल उसके भाई का भी उस समय हो रहा था तभी उसकी नज़र प्रेम पर पड़ी तो वो चेहरे पर एक मुस्कान लाते हुवे बोली उठ गये भाई

प्रेम ने भी मुस्कुरा कर उसको जवाब दिया और सीधा खेत की तरफ चल पड़ा कुछ तो उसने रात को ब्लूफिल्म देखली थी और फिर सुबह सुबह ही अपनी बहन की चूचियो के दर्शन कर लिए थे , तो वैसे ही उसका हॉल बुरा था लंड रह रह कर पॅंट मे ऐंठन पैदा कर रहा था और फिर जब वो कुँए से बाल्टी भर रहा था तो उसने देखा कि पास के खेत मे एक बकरा एक बकरी पे चढ़ कर उसे चोद रहा था

दरअसल वो खेत सौरभ का था और वहाँ पर उसकी मम्मी विनीता भी थी जो कि करीब 35 साल की एक मस्त औरत थी गाँव मे कई लोग उसको चोदना चाहते थे वो बहुत ही सुंदर थी अंग-अंग जैसे किसी शिल्पकार ने मेहनत से तराशा हो उसका , उसे देख कर कोई कह ही नही सकता था कि वो दो बच्चों की मा होगी, इधर प्रेम का लंड बहुत गरम हो चुका था तो उसने उसे पॅंट से बाहर निकाल दिया

लंड हवा मे झूलने लगा प्रेम के दिमाग़ मे हवस का कीड़ा कुलबुलाने लगा था उसने अपने लंड को सहलाना शुरू कर दिया तो उसे मज़ा आने लगा उसका हाथ तेज़ी से लंड पर चलने लगा और उसकी आँखे मस्ती के मारे बंद हो गयी थी तभी उसकी आँखो के सामने उषा की तस्वीर आ गयी, तो लंड और भी कड़ा हो गया उसके मन मे विचार आया कि जैसे वो उषा को ही चोद रहा है अपनी सग़ी बहन की कल्पना करके वो मुट्ठी मार रहा था

इधर प्रेम कुँए पर खड़े खड़े ही मुट्ठी मार रहा था दूसरी तरफ बाल्टी लिए विनीता उसी ओर चले आ रही थी अपनी मस्ती मे मस्त विनीता जैसे ही उस ओर आई तो उसकी निग प्रेम पर पड़ी तो वो उसके उस विशालकाय लंड को देखते ही उसकी आँखे खुल गयी वो फॉरन ही दीवार की ओट मे हुई और चुपके चुपके प्रेम के लंड को निहारने लगी प्रेम उसकी मोजूदगी से बेख़बर अपना लंड हिलाने मे लगा हुवा था
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01-12-2020, 12:06 PM,
#2
RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
इधर प्रेम के लंड को देख कर विनीता बहुत ही हैरान थी उसे जैसे विश्वाश ही नही हो रहा था कि किसी का लंड इतना लंबा भी हो सकता है, तभी उसने गोर किया कि उसकी जाँघो के बीच कुछ गीला-गीला सा लग रहा है उसकी चूत उस लंड को देख कर गीली हो गयी थी ना जाने क्यो विनीता के होटो पर एक मुस्कान सी आ गयी और ठीक उसी पल प्रेम ने अपना पानी गिरा दिया 8-10 गढ़े सफेद रस की धार निकल कर धरती पर गिर पड़ी

आज से पहले इतना पानी कभी नही गिराया था प्रेम ने क्या ये उसकी उषा के प्रति बदली सोच के असर से था , प्रेम ने अपनी पॅंट की ज़िप बंद ही की थी कि तभी दीवार की साइड से विनीता निकल आई उसे देख कर प्रेम सकपका सा गया और थूक गटाकते हुए बोला चाची आप कब आई तो विनीता मन ही मन हँसते हुए बोली अरे बेटा बस आई ही हूँ विनीता कुँए से पानी भरने लगी और प्रेम वहाँ से भाग लिया


रात का टाइम था विनीता अपने पति के साथ बिस्तर पर जिस्मो का खेल खेल रही थी उसकी मस्त आहों से कमरा गूँज रहा था और जैसे ही वो अपने सुख को पाई उसकी आँखे मस्ती से बंद हो गयी और उसके सामने प्रेम के लंड की तस्वीर आ गयी तो रस बहाती उसकी चूत से एक धार और बह निकली उसका पति भी अपना काम पूरा करके साइड मे लुढ़क गया था प्रेम के लंड को याद करके विनीता के चेहरे पर एक मंद मुस्कान आ गयी उसका हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया

वो लगातार प्रेम के बारे मे सोचे जा रही थी तो उसकी चूत फिरसे गीली होने लगी थी अनायास ही वो अपने ख़यालो मे गुम अपनी चूत के दाने से छेड़खानी करने लगी थी तो उसके जिस्म के तार फिर से उस मीठी सी धुन पर झन झनाने लगे थे उसने अपनी आँखे बंद कर ली और सोचने लगी कि कोई खुशनसीब ही होगी जो उस मस्त लंबे लंड से चुदेगि एक पल के लिए विनीता शरमा गयी

उसने अपने बदन पर एक चादर सी लपेटी और बाथरूम मे घुस गयी चूत से रिस्ता पानी उसकी टाँगो तक आ रहा था वो खुद भी जानती थी कि आज से पहले इतनी जल्दी वो कभी भी दुबारा उत्तेजित नही हुई थी विनीता के ख़यालो मे बार बार प्रेम का वो मूसल जैसा लंड ही आ रहा था बाथरूम मे जाकर उसने अपनी चादर को साइड मे रखा और अपनी टाँगो को चौड़ा करते हुए खड़ी हो गयी

अब वो अपनी बीच वाली उंगली चूत की लंबी सी दरार पर रगड़ने लगी उसकी चूचियो के निप्पल्स अब डेढ़ इंच तक बाहर को निकल आए थे विनीता थी भी तो बहुत ही खूबसूरत मादकता से भरा हुआ प्याला धीरे धीरे वो अपनी उंगलिया चूत पर रगड़ने लगी तो उसके जिस्म मे वासना की चिंगारी शोलो मे बदलने लगी उसकी टाँगे काँपने लगी थी उसके मोटेमोटे चूतड़ बुरी तरह से हिल रहे थे

उसके होटो से हल्की हल्की सिसकिया सी फूटने लगी थी, करीब 8-10 मिनिट तक वो चूत मे उंगली करती रही वो जैसे पागल ही होगयि थी उत्तेजना से और फिर आख़िर चूत से पानी की धार निकल पड़ी और उसी वक़्त विनीता के मूह से निकल आया :प्रेम, बेटे चोद दे अपनी चाची की मार ले मेरी निगोडी चूत को ओह हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई


विनीता आज बहुत ही बुरी तरह से झड़ी थी लगा जैसे उसकी टाँगो मे कोई जान ही ना बाकी रही हो कुछ देर बाद उसने अपने आप को संभाला शरीर को सॉफ किया और फिर आकर सो गयी, उधर, दूसरी तरफ प्रेम की आँखो मे भी नींद नही आ रही थी आज सुबह उसने अपनी दीदी उषा को सोच कर लंड हिलाया था तो उसे बहुत ही मज़ा आया था बिस्तर पर करवट बदलते हुए प्रेम सोच रहा था कि क्या उषा दीदी उस से चुदने को राज़ी हो जाएँगी

प्यास के मारे उसका गला सुख रहा था तो वो पानी पीने के लिए रसोई की तरफ जाने लगा तो उसने देखा की आँगन का बल्ब जल रहा है उसने सोचा कि घरवाले बंद करना भूल गये होंगे तो वो उसको बंद करने के लिए जैसे ही आगे को चलता है तभी उसे उषा दिखती है पेशाब करते हुए उसका मूह दूसरी साइड मे था, और लाइट मे उसकी गान्ड की बस एक झलक ही काफ़ी थी प्रेम के लंड को खड़ा करने को

उषा की चूत से गिरते पेशाब की सुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर उसरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर की आवाज़ से प्रेम रोमांचित होने लगा था , उषा के गोल गोल चूतड़ प्रेम की नसों मे गर्मी भर रहे थे उसका दिल किया कि अभी दीदी को पटक कर चोद देता हूँ पर किसी तरह अपनी भावनाओ को काबू कर लिया उसने , फिर उषा खड़ी हुई और अपनी सलवार बाँधने लगी तो वो उधर से खिसक लिया


अगली सुबह सुधा को पता चला कि प्रेम अभी तक सोया हुआ है तो वो उसको जगाने के लिए उसके कमरे मे गयी, गहरी नींद मे सोया प्रेम बड़ा ही मासूम लग रहा था पर सुधा उसको झींझोड़ कर जगाने लगी तो प्रेम की चादर हट गयी प्रेम रात को बस कच्चा-बनियान मे ही सोता था तो जैसे ही सुधा की निगाह उसके कच्चे पर पड़ी उसने देखा कि प्रेम का लंड पूरी तरह से तना हुआ था

और आधा लंड को कच्छे से बाहर उपर की ओर को निकला हुआ था सुधा ये देख कर सन्न रह गयी बिल्कुल विनीता की तरह उसकी तो सांस ही गले मे अटक सी गयी थी अफ कितना बड़ा लंड था जैसे की किसी घोड़े या गधे का लंड हो सुधा जैसे जम ही हो गयी थी पर तभी उसने देखा कि प्रेम जाग रहा है तो वो फॉरन ही दरवाजे की तरफ हो ली और वहाँ से आवाज़ दी कि बेटा जल्दी उठ जा आज कई काम करने है

प्रेम ने उठकर फटाफट अपने कपड़े पहने और हाथ मूह धोने के लिए बाथरूम की तरफ चल दिया ,जबकि रसोई मे आकर चाइ बनाते हुवे सुधा एक सोच मे डूबी थी वो सोच रही थी कि उसके पति का लंड तो करीब आधा ही था उसके बेटे के से और वो ही उसे बुरी तरह से निचोड़ दिया करता था तो प्रेम जब किसी को चोदेगा तो वो तो मर ही जाएगी फिर सुधा ने अपने सर को झटका और खुद से कहने लगी कि वो भी क्या सोचने लगी अपने बेटे के बारे मे

प्रेम के बाथरूम के दरवाजे मे कुण्डी नही थी कई बार खाती को बोला था कि लगा दे पर वो आता ही नही था और यही एक बात आज उसके जीवन मे एक तूफान लाने वाली थी प्रेम ने जैसे ही दरवाजे को धकेला तो वो अंदर की ओर हो गया और फिर जो नज़ारा उसने देखा , अंदर उषा थी बिल्कुल नंगी पूरे बदन जैसे किसी ने फ़ुर्सत मे तराश दिया हो उसका , अचानक से वो भी चोंक गयी और कुछ रिएक्ट ही नही कर पाई जब तक वो कुछ समझती प्रेम ने उसकी छोटी सी चूत के दर्शन कर लिए थे

बेहद तंग सी चूत बस एक लाइन भर की उषा का वो छिपा अनमोल खजाना उसने कभी सोचा भी नही था कि उसका सगा भाई ही यू उसको देखेगा फिर प्रेम को कुछ होश आया तो वो वहाँ से मूड़ लिया माफी माँगते हुए पर उसकी बहन का वो हुश्न पानी को बूँदो मे भीगा हुआ उसके लिए और मुश्किले खड़ी करने वाला था
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01-12-2020, 12:06 PM,
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RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
प्रेम वहाँ से सीधा अपने खेतो पर गया जो नज़ारा उसने देखा था वो उसके मन मे जैसे बस ही गया था अपनी बहन का मस्त भीगा बदन बार बार उसकी ख़यालो मे आ रहा था आख़िर उस से जब रहा नही किया तो वो अपने लंड को हिलाने ही जा रहा था कि तभी कुछ आवाज़ हुई और वो बाहर को आ गया उसने देखा कि विनीता उसकी तरफ ही चली आ रही है , तो उसने उसको नमस्ते किया इधर प्रेम को देख कर विनीता भी खुश हो गयी

विनीता ने तो ठान ही लिया था कि कैसे भी करके प्रेम के लंड को अपनी भोसड़ी मे लेकर ही रहेगी तो उसने उस पर डोरे डालने का सोचा और बोली प्रेम तू क्या कर रहा है तो प्रेम बोला चाची घास काटने आया हूँ काफ़ी बढ़ गयी है तो विनीता बोली- मैं भी घास काटने ही आई हूँ आजा साथ मे ही काट ते है जबकि विनीता उसको अपनी ओर रिझाना चाहती थी थोड़ी देर घास काटने के बाद

विनीता एक अंगड़ाई लेते हुए बोली –बेटे आजकल कमर मे कुछ ज़्यादा ही दर्द रहने लगा है जब विनीता अंगड़ाई ले रही थी तो उसकी मदमस्त चूचिया जैसे दो पल के लिए तन सी गयी थी तो प्रेम की निगाह भी पड़ गयी उन पर फिर विनीता ने उसे थोड़ा और दिखाने का सोचा और अपने पल्लू को सीने से हटा कर उस से अपने चेहरे को पोंछने का बहाना करने लगी

ब्लाउज से बाहर आने को बेताब उसकी चूचिया अब प्रेम की नज़रो के सामने थी और वो भी खुद को रोक ना पाया उनकी तरफ घूर्ने से विनीता की शातिर नज़रो ने भाँप लिया कि प्रेम भी उत्सुक है बस इसे लाइन पर लाना है जबकि वो ना समझी कि वो तो खुद चूत मारने को मारा जा रहा है विनीता फिर से घास काटने को बैठ गयी पर इस बार उसने अपने पल्लू से सीना को नही ढका बल्कि पल्लू को कमर पर लगा लिया

जब वो बैठ कर घास काट रही थी तो प्रेम की निगाहें बार बार उसके गोरे गोरे उभारों पर जा रही थी , तो उसका हाल बुरा होना शुरू हुआ उसका लंड पॅंट के अंदर ही अकड़ने लगा उसके लंड का उभार विनीता की नज़रो से ना छुपा रहा, घास की कटाइ के बाद वो वापिस हो रहे थे तो विनीता आगे को चल रही थी अपनी भारी गान्ड को कुछ ज़्यादा ही मटकाते हुए .

जिस से प्रेम का हाल बुरा हो रहा था उसने सोचा कि विनीता चाची भी मस्त औरत है और उनकी गान्ड तो किसी मोटे तरबूज जैसी है तभी अचानक से विनीता ज़मीन पर बैठ गयी और कराहने लगी तो प्रेम ने पूछा क्या हुवा चाची-

विनीता- चेहरे पर दर्द के भाव लाते हुए बेटा लगता है मोच सी आ गयी है ज़रा मदद कर मुझे खड़ा होने मे तो प्रेम ने उसको उठाया तो विनीता जान बुझ कर उसके सीने से लग गयी

और अपनी चूचियो से उसके सीने को दबा दिया प्रेम को बहुत ही अच्छा लगा पर फिर अगले ही पल वो उस से दूर हो गयी और अपना हाथ उसके कंधे पर रखते हुए बोली –बेटा बहुत दर्द हो रहा है , मुझसे तो चला ना जाएगा एक काम कर तू मुझे उठा ले और मेरे खेत तक छोड़ दे , तो प्रेम ने उसे अपनी गोदी मे उठा लिया और विनीता के खेत मे बने कमरे की तरफ चल दिया

वहाँ ले जाकर उसने उसको चारपाई पर लिटा दिया, और जाने लगा तो विनीता बोली- बेटा मुझे इस हालत मे छोड़ कर कहाँ जा रहा है ज़रा पैर को दबा दे थोड़ा आराम हो जाए तो मैं भी घर को पहुचु तो प्रेम भी खाट पर बैठ गया और उसकी टाँग को दबाने लगा विनीता ने साड़ी को थोड़ा सा उपर की ओर कर लिया ये प्रेम का पहला अवसर था जब वो यूँ किसी औरत को छू रहा था विनीता के बदन के स्पर्श से उसका बदन गरम होने लगा था

उसकी पिंडलियो को दबाते दबाते उसका हाथ अब घुटनो तक पहुच रहा था विनीता उसकी तारीफ करते हुवे बोली-बेटा तू तो बहुत ही अच्छी मालिश करता है बड़ा आराम मिला है एक काम कर थोड़ा सा दर्द मेरी कमर मे भी हो रहा है तो ज़रा उसे भी दबा दे और फिर वो घूम गयी अब उसकी पीठ उपर को हो गयी थी उसकी मोटी गान्ड प्रेम की आँखो के सामने थी प्रेम उसकी कमर को अपने हाथो से दबाने लगा तो विनीता ने एक आह सी भरी

इधर नीचे कच्छी के अंदर विनीता की चूत का बुरा हाल हुआ था उसकी कच्छी चूत के पानी से पूरी तरह भीग गयी थी उसकी टाँगे अब चिपचिप कर रही थी पर वो सीधे सीधे तो नही बोल सकती थी प्रेम को कि उसे चोद दे, पर अब उसके लिए भी मुश्किल हो राहा था तो उसने कहा बेटा ऐसे दर्द कम ना होगा तू मेरी कमर पर बैठ कर मालिश कर

इधर प्रेम भी थोड़ा सा मूड मे था तो वो फॉरन उसके उपर चढ़ गया उसके मोटे चुतड़ों पर अब प्रेम के लंड का अहसास विनीता को पागल करने लगा था मालिश तो बहाना था , जब की प्रेम का लंड भी विनीता की गान्ड मे घुसने को बेताब हो रहा था जब जब प्रेम आगे को झुकता उसके लंड की रगड़ से विनीता के चुतड़ों मे सुर सुराहट ही फैल जाती

करीब आधे घंटे तक वो दोनो ऐसे ही करते रहे और फिर विनीता ने कस कर अपनी आँखो को बंद कर लिया उसकी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया था,

दूसरी ओर उषा आज अपनी एक सहेली से मिलने आई थी जो कि शादी के बाद पहली बार मायके आई थी ये उसकी पक्की सहेली थी तो दोनो कई बाते शेयर करती थी जब उसकी सहेली ने अपनी सुहागरात का किस्सा उषा को बताया तो उषा भी गरम हो गयी कि कैसे उसके पति ने उसको मज़े दिए

उषा का दिल भी चुदाई के लिए मचलने लगा पर वो ऐसे तो नही चुद सकती थी किसी के साथ भी और उसकी सहेली ने जो बाते उसे उसे बताई थी कि चुदाई मे कितना मज़ा आता है तो उसकी चूत तो बहने से रुक ही नही रही थी और फिर उसे ख़याल आया कि सुबह जब उसके भाई ने उसे नंगा देखा तो उसका लंड भी तो तन गया था तो क्या प्रेम उसे चोद सकता है नही नही ये मैं क्या सोचने लगी वो मेरा भाई है उसके साथ मैं कैसे

पर उसने भी तो उसे नंगी देखा देखा था , और अगर वो अपनी चूत अपने भाई से चुदवा लेगी तो बदनामी भी ना होगी और मज़े का मज़ा भी मिलेगा पर सीधा कैसे कह दूं भाई चोद दे अपनी बहन को और उसकी खुजली को मिटा दे, आख़िर उषा ने सोचा कि वो पहले प्रेम को लाइन देगी अगर वो भी तैयार हुआ तो देखा जाएगा सब लोग अपना अपना जुगाड़ करने मे लगे थे

क्रमशः............................
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01-12-2020, 12:07 PM,
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RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
रात को उषा अपने बिस्तर पर करवटें बदल रही थी तकिये को कभी अपने सीने से लगाए कभी अपनी टाँगो के बीच दबाए उसकी सहेली ने जो चुदाई की बाते चटखारे लगा कर उसे बताई थी तो उसकी जाँघो के बीच जबरदस्त हलचल मची हुवी थी पहले भी वो कई बार अपनी चूत की आग को उंगली की सहायता से शांत कर चुकी थी पर अब उसे भी एक लंड की सख़्त ज़रूरत थी

अपने निचले होठ को दाँतों से काट ते हुए उषा अपनी उत्तेजना को दबाने का पूरा प्रयत्न कर रही थी, पर आज उसके जिस्म मे भड़कते शोले काबू मे जैसे आ ही नही रहे थे तो उसने अपने कमरे की खिड़की खोल दी और ठंडी हवा को महसूस करने लगी तभी उसकी नज़र बाहर नाली के पास गयी तो उसने देखा कि प्रेम पेशाब कर रहा था उषा ने उसके लंड को देखा तो उसकी आँखे उस पर जम गयी

सोए हुए भी वो बहुत बड़ा और मोटा लग रहा था उसकी चूत मे खुजली सी मच गयी थी उसका हाथ अपनी सलवार के अंदर पहुच गया और वो अपनी योनि को मसल्ने लगी प्रेम पेशाब करके वापिस घर मे आ गया था उषा ने निर्णय लिया अपने भाई को रिझाने का , उसे ऐसे ही मस्त लंड की बहुत आवश्यकता थी, उसने सर पर चुन्नी डाली और बाहर बैठक मे आ गयी उसकी माँ सो गयी थी पर प्रेम शायद कोई फिलम देख रहा था

वो भी जाकर उसके पास बैठ गयी और फिल्म देखने लगी पर उसके मन मे उधेड़बुन चल रही थी कि कैसे प्रेम को पटाए उषा उस से बिल्कुल सट कर बैठ गयी उसकी मांसल जाँघ प्रेम की टाँग से रगड़ खाने लगी थी तो दोनो के बदन मे करंट आहिस्ता आहिस्ता बढ़ने लगा दोनो की नज़रे टीवी स्क्रीन की ओर थी पर मन मे अपने अपने विचार थे उषा की जाँघ का स्पर्श प्रेम को उत्तेजित करने लगा था

और उसका लंड पॅंट मे फूलने लगा था , जिसे उषा ने भी नोटीस कर लिया था टीवी पर राजा हिन्दुस्तानी फिलम आ रही थी और जब वो पेड़ के नीचे किस्सिंग सीन आया तो उषा जैसे पिघल ही गयी उसने अपना हाथ प्रेम की जाँघ पर रख दिया और उसे सहलाने लगी प्रेम ने अपनी दीदी की आँखो मे देखा पर कुछ कहा नही थोड़ी सी हिम्मत करते हुवे उषा ने अपना हाथ आख़िर प्रेम मे उभरे हुवे लंड पर रख दिया

पर ऐसा शो किया कि जैसे बस हाथ टच हो गया था फिर उसने तुरंत ही अपना हाथ हटा लिया, जब कि दीदी के हाथ को लंड पर पाकर प्रेम को मज़ा ही आ गया उषा थोड़ा सा और प्रेम की तरफ सरक गयी, उसका दिल बार बार पुकार रहा था कि प्रेम चोद दे अपनी बहन को पीस डाल उसे अपनी बाहों में . पर ये रिश्ता ही कुछ ऐसा था कि इसमे आगे बढ़ने से शायद दोनो ही घबरा रहे थे

अगली सुबह सुधा किसी काम से पड़ोस मे गयी थी उषा कमरे मे पोछा लगा रही थी कि प्रेम उठ कर आ गया उसकी आँखे पूरी तरह से नही खुली थी नीचे फर्श गीला होने के कारण उसका पाँव फिसला और उसने गिरने से बचने के लिए उषा को थाम लिया पर उसके हाथ मे उसकी मस्त चूचिया आ गयी जो प्रेम के हाथों के दवाब से दब गयी तो उसके बदन मे एक आग सी लग गयी

वो भी अपने आप को संभाल ना पाई और प्रेम के साथ साथ ही गिर गयी, प्रेम उसके उपर लदा पड़ा था उसके बोझ से उषा दब रही थी पर उसे बहुत अच्छा लग रहा था प्रेम का लंड उसकी चूत के ठीक उपर दवाब डाल रहा था तो उषा पिघल गयी और उसने अपनी बाहें प्रेम की पीठ पर रख दी और अपने होठ प्रेम के होटो पर ये उसका खुला निमंत्रण था प्रेम को

उषा दीवानो की तरह अपने भाई के होटो को पिए जा रही थी उषा का ये पहला किस था करीब 5 मिनिट तक उनका चुंबन चलता रहा और फिर बाहर से किसी के आने की आवाज़ हुई तो वो दोनो झट से अलग हो गये पर इस घटना ने नीव रख दी थी एक नये रिश्ते की उषा भाग कर अपने कमरे मे चली गयी और प्रेम नहाने के लिए चला गया

इधर प्रेम सोच रहा था कि क्या दीदी भी उस से चुदवाना चाहती है , हाँ ऐसा ही है वरना वो उसे किस करके क्यो जता ती और दूसरी तरफ उषा सोच रही थी आज रात को माँ के सोने के बाद वो पक्का प्रेम से चुदवा के रहेगी, पर चाहने से क्या होता है जनाब, दोपहर को उसके मामा का फोन आया कि नानी की तबीयत कुछ खराब सी है तो सुधा उषा के साथ मामा के घर चली गयी उषा का मन नही था पर माँ को मना भी नही कर सकती थी

तो दोनो भाई बहन के अरमानो पर कुछ समय के लिए पानी सा फिर गया था रात के करीब दस बज रहे थे मोसम ने अचानक ही करवट ले ली थी, ठंडी हवाओं के साथ हल्की हल्की बारिश की फुहारे गिरने लगी थी विनीता ने सोचा था कि आज की रात दबा कर चूत मरवायेगी पर हाई रे उसकी किस्मत उसके पति को आज नाइट ड्यूटी पर जाना पड़ा तो उसकी झान्टे ही सुलग गयी सुबह प्रेम के साथ जो समय बिताया था तो वो वैसे ही पूरे दिन से चुदासी पड़ी थी

और आज ही उसके पति की नाइट ड्यूटी लगनी थी, मॅक्सी पहने वो अपने चॉबारे से उन बारिश की बूँदो को देख रही थी ऐसे रंगीन मोसम मे किसी का भी दिल सेक्स करने को मचलेगा ही और दूसरी ओर प्रेम भी अपने चॉबारे मे खड़ा बारिश को देख रहा था वो सोच रहा था कि आज अगर दीदी होती तो क्या पता उनको चोदने का मोका मिल ही जाता उषा का ख़याल आते ही उसका लंड तन गया
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01-12-2020, 12:07 PM,
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RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
उसने अपनी लूँगी को उतार दिया और अपने लंड को सहलाने लगा बारिश अब कुछ तेज सी हो गयी थी इधर विनीता ने देखा कि सौरभ के कुछ कपड़े जो सूखने के लिए डाले थे वो उतारना भूल गयी थी तो वो उन्हे उतारने के लिए गयी तो एक शर्ट प्रेम की छत पर गिर गयी वो दीवार से इस तरफ आई और शर्ट उठा रही थी कि तभी उसकी निगाह चॉबारे की तरफ पड़ी तो उसने देखा कि प्रेम मूठ मार रहा था उसका चमकता लंड देख कर विनीता अब काबू से बाहर हो गयी

हवस का जो तूफान उसके दिलो दिमाग़ मे छाया था विनीता ने कपड़ो को जल्दी से रखा और नीचे देखा तो सौरभ सो चुका था वो फिर उपर आई और दीवार कूद के प्रेम के चॉबारे की तरफ हो गयी इधर प्रेम अपनी आँखे बंद किए उषा के बारे मे सोचते हुए अपना लंड हिलाने मे मस्त था एक दम से विनीता को देख कर उसकी गान्ड फट गयी उसने अपने लंड को छुपाना चाहा पर ऐसा कर नही पाया उसकी बोलती बंद हो गयी कुछ समझ ना पाया वो चाची चाची करने लगा

तो विनीता आगे को बढ़ी और अपनी उंगली उसके होटो पर रखते हुए बोली, चुप रहो कुछ मत बोलो,और अंदर को आ गयी प्रेम कुछ पलों के लिए सकते मे आ गया था वो काँपती हुई आवाज़ मे बोला चाची माफ़ करदो ग़लती हो गयी आप किसी से ना कहना आपके पाँव पड़ता हूँ, तो विनीता उस से सट ते हुए बोली मैने कहा ना चुप होज़ा जवानी मे ये काम तो सब करते ही रहते है

विनीता उसके लंड को अपने हाथ मे पकड़ते हुए बोली- वैसे भी तू अब बच्चा नही रहा तू तो पूरा 12इंच का जवान हो गया है, और उसके लंड को कस कर मसल दिया प्रेम की आह निकल गयी वो बोला चाची ये आप क्या कर रही है तो विनीता बोली- क्या कर रही हूँ मैं जैसे कि तुझे कुछ पता ही नही है देख तेरी चाची का बदन कितना तप रहा है और प्रेम का हाथ अपने उभारों पर रख दिया

प्रेम भी समझ गया था कि आज उसे चूत मारने का सुख प्राप्त होने वाला है, विनीता उसके लंड को बड़े प्यार से सहलाते हुवे बोली बेटे जब से तेरे लंड को देखा है मेरी टाँगे गीली ही रहती है मेरी प्यास भड़क गयी है हर दम तेरा ही ख़याल मेरे उपर छाया रहता है आज इस निगोडे मोसम ने भी कहर ढाया हुआ है आज अपनी चाची को सुख दे दे बेटा और विनीता ये कह ने के साथ ही घुटनो के बल पर नीचे को बैठ गयी

उसने प्रेम के लंड की खाल को पीछे को सरकाया और उसके गुलाबी सुपाडे पर अपनी लंबी जीभ रख दी, किसी औरत की जीभ को अपने लंड पर पहली बार महसूस करके प्रेम का जिस्म मस्त हो गया मस्ती के मारे उसकी आँखे बंद हो गयी और गले से एक आह निकल गयी जिसे सुनकर विनीता की आँखे चमक गयी और वो मुस्कुरा पड़ी उसने अपना मूह खोला और लंड के सुपाडे को अंदर लेने लगी

विनीता ने अपना पूरा मूह खोल दिया था पर फिर भी उसे प्रेम के लंड को लेने मे मुश्किल हो रही थी वो उसे चूस्ते हुए बोली प्रेम तेरा लंड बहुत मस्त है एक हाथ से उसकी गोलियो को दबाते हुए वो उसका लंड चूस रही थी तो प्रेम जैसे सातवे आसमान पर पहुच गया था विनीता पूरी खिलाड़ी औरत थी उसे पता था कि प्रेम अभी कच्चा ही है तो बस उसे अपने साँचे मे ढालना था

धीरे-धीरे करके उसने काफ़ी लंड को अपने मूह मे ले लिया था उसके थूक से लंड गीला होकर मूह मे फिसल रहा था प्रेम को एक अलग ही प्रकार का मज़ा आ रहा था विनीता के होटो की गर्मी से वो जल्दी ही झड़ने के कगार पर पहुच गया और फिर उसने अचानक से उसके चेहरे को अपने लंड पर कस कर दबा दिया और उसके मूह मे ही झड़ने लगा गरमा गरम वीर्य विनीता के मूह मे गिरने लगा जिसे वो मीठे शहद की तरह पी गयी

झड़ने के बाद प्रेम का लंड सिकुड गया पर विनीता ने गौर किया कि अब भी उसका लंड उसके पति के तने हुए लंड से थोड़ा ही छोटा था, अब विनीता उटी और अपनी मॅक्सी को तुरंत ही उतार दिया नीली ब्रा-पैंटी मे उसके गोरे बदन को देख कर प्रेम की सांस ठहर सी गयी, आज से पहले उसने ऐसा नज़ारा कभी नही देखा था विनीता ने प्रेम को धक्का दिया तो वो बेड पर लेट गया और विनीता उसकी छाती पर सवार हो गयी

उसकी सुदार छातिया प्रेम के सीने मे धँसने को बेताब हो रही थी वो प्रेम के चेहरे पर झुकी और अपने गुलाबी होटो को प्रेम के होटो पर रख दिया और उसको किस करने लगी 440 वॉल्ट का करेंट प्रेम के तन बदन मे दौड़ गया वो भी विनीता का पूरा साथ देने लगा और विनीता की पीठ को सहलाने लगा और उसकी ब्रा की डोर को खोल दिया तो पीठ पूरी नंगी हो गयी करीब दस मिनिट तक किस चलने के बाद
अब प्रेम ने पलटी खाई और विनीता उसके नीचे आ गयी उसने ब्रा को साइड मे फेक दिया और उसकी 36 इंच की गदराई हुई गोल मटोल छातियो को देखन लगा तो उसका गला सूखने लगा उसने अपने काँपते हुए हाथो को चूचियो पर रखा और दबा दिया तो विनीता ने मस्ती से अपनी आँखे बंद कर ली अब प्रेम दोनो हाथो से उसके बोबो से खेलने लगा इधर उसका लंड फिर से तैयार हो गया था और विनीता की चूत वाले हिस्से पर दवाब डाल रहा था उसकी चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी
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01-12-2020, 12:07 PM,
#6
RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
प्रेम उस दिन ब्लूफिल्म देख कर समझ तो गया ही था कि चुदाई कैसे करते है उसने उस सीन को वास्तविकता मे करने का सोचा और फिर चाची की चूची पर अपने होठ लगा दिए गरम चूची पर होटो का कोमल स्पर्श पाकर विनीता मचलने लगी वो खुद प्रेम के मूह को अपने बोबो पर दबाने लगी, उत्तेजना की आग दोनो के जिस्मो को पिघला रही थी

विनीता की बेहद कसी हुई चूचियो की घुंदियो पर प्रेम की लिसलीसी जीभ कहर ढा रही थी वो इस कदर उत्तेजित हो चुकी थी कि उसका रोम रोम कांप रहा था बाहर से आती बरसात की हल्की बूँदो के साथ ठंडी हवा आग मे घी का काम कर रही थी खुद प्रेम का लंड भी दुबारा से खड़ा हो गया था और सुपाडे पर लगा प्री कम उसे चिकनाई प्रदान कर रहा था बस ज़रूरत थी तो सही मोके पर चोट करने की

विनीता प्रेम की बाहों मे बहुत ही अच्छा महसूस कर रही थी, उसने अपना हाथ नीचे को किया और प्रेम के लंड को पकड़ कर अपनी प्यासी चूत पर रगड़ने लगी उस रगड़ का असर यूँ हुआ कि दोनो बदन अब प्रेम क्रीड़ा हेतु आतुर हो चुके थे आख़िर विनीता ने कह ही दिया , प्रेम अब सहा नही जाता देर ना कर अपनी चाची को और ना तडपा अपनी टाँगे खोल दे

प्रेम ने अपने लंड को चूत के मुहाने पर सेट किया इधर विनीता ने अपने कुल्हो के नीचे एक तकिया लगा लिया अब जैसे ही प्रेम ने एक जोरदार झटका मारा तो उसका मोटा सुपाडा विनीता की चूत को जैसे चीरता हुआ अंदर को अटक गया विनीता के मूह से दर्द भरी चीख निकल गयी वैसे तो वो एक्सपीरियेन्स होल्डर थी और उसकी शादी को भी 17 साल हो गये थे पर फिर भी उसे लगा कि जैसे उसकी चूत फट सी गयी हो वो कुछ कह पाती............

उस से पहले ही प्रेम के अगले धक्के से उसका लगभग आधा लंड विनीता की चूत मे घुस चुका था विनीता को बहुत दर्द होने लगा था पर वो जानती थी कि दर्द के बाद ही असली मज़ा मिलता है तो वो बस उस दर्द को झेलने की कोशिश करने लगी दूसरी तरफ चूत मिलने की खुशी मे प्रेम बौरा गया और बिना विनीता की परवाह किए धक्के पे धक्के लगाते हुए आख़िर कार पूरे लंड को चूत मे डाल ही दिया

विनीता को ऐसा लगा कि जैसे उसकी बच्चेदानी से कुछ अड़ सा गया हो इतनी गहराई तक उसके पति का लंड तो कभी पहुचा ही नही था, तो उसके लिए भी ये एक बिल्कुल अलग सा ही अनुभव था उसकी आँखे बंद हो गयी और वो गहरी साँसे ले रही थी अब प्रेम उस पर पूरी तरह से छा चुका था प्रेम उस पर लेट गया और उसके गालो को चूमने लगा विनीता ने अपने हाथो से उसकी कमर को सहलाना शुरू कर दिया

कुछ देर तक वो दोनो ऐसे ही लेटे रहे फिर प्रेम ने अपने लंड को बाहर की ओर खीचा तो विनीता को ऐसा लगा कि जैसे कोई चाकू उसकी चूत को चीरे जा रहा हो और फिर पूरी ताक़त के साथ उसने दुबारा चूत मे लंड को घुसा दिया विनीता एक बार फिर से अपनी चीख को ना रोक सकी वो बोली- क्या कर रहे हो मेरी जान ही लोगे क्या थोड़ा आराम से करो पर प्रेम का ये पहली बार था तो आराम कैसे हो

कुछ देर तक प्रेम धीरे धीरे धक्के लगाता रहा , इधर विनीता की चूत भी प्रेम के लंड के हिसाब से अब सेट हो गयी थी और चूत के चिक्नेपन की वजह से घर्षण मे अब दोनो को मज़ा आने लगा था विनीता एक भूखी लोमड़ी बन चुकी थी, वो प्रेम की गर्दन पर अपने दाँतों से काटने लगी उसकी कसी हुई चूत प्रेम के लंड की नसों पर दवाब डालने लगी थी जहाँ कुछ देर पहले वो दर्द महसूस कर रही थी अब वो बस मज़े के सागर मे डूबी हुवी थी

प्रेम के भारी टटटे जब उसके चुतड़ों से टकराते तो विनीता को बड़ा ही मज़ा आ रहा था , उसने अपना मूह खोला और अपनी गुलाबी जीभ प्रेम के मूह मे सरका दी कमरे का आलम चुदाई की वजह से बहुत गरम हो चुका था , थप ठप की आवाज़ आ रही थी करीब 15-0 मिनिट की चुदाई के बाद विनीता झड़ने को आ गयी थी उसने कस कर प्रेम को अपनी बाहों मे भर लिया और झड़ने लगी उसकी चूत से आज से पहले इतना रस कभी नही निकला था

वो झड चुकी थी पर प्रेम अभी भी पूरी रफ़्तार से उसे चोदे जा रहा था , तो वो फिर से गरम हो ने लगी अब प्रेम ने उसे घोड़ी बना दिया और उसके मोटे मोटे चुतड़ों पर किस करने लगा उसकी गरम साँसे अपने चुतड़ों पर महसूस करके विनीता पागल होने लगी थी अब प्रेम ने उसकी चूत को थोड़ा सा उभारा और अपने लंड को चूत के छेद से लगा दिया
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01-12-2020, 12:07 PM,
#7
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विनीता ने एक झुझुरी ली और अगले ही पल से प्रेम का लंड फिर से उसकी चूत मे जाने लगा विनीता ने अपनी टाँगो को आपस मे चिपका लिया जिस से कि उसे और प्रेम दोनो को ही बड़ा मज़ा आ रहा था उसकी पतली कमर मे हाथ डाले प्रेम ताबड तोड़ चोदे जा रहा था उसको तभी विनीता बोली- मेरे बोबे दबा तो प्रेम उसकी चूचियो से खेलने लगा इस घनघोर चुदाई से विनीता का बदन लरज रहा था

उसे घोड़ी बने हुए भी काफ़ी देर हो गयी थी चूत से रिसता पानी उसकी जाँघो पर पहुच चुका था पर प्रेम उसी रफ़्तार से लगा हुआ था विनीता दूसरी बार झड़ने को आई थी तो वो आगे को हो गयी और सिसकारिया भरते हुए फिर से झड गयी दो मिनिट बीते होंगे कि तभी प्रेम ने उसकी कमर को कस कर थाम लिया और उसके लंड से गरम पानी की धार को विनीता अपनी चूत मे महसूस करने लगी थी

ना जाने कितनी पिचकारिया मारता रहा वो और फिर प्रेम उसे लिए लिए ही बिस्तर पर लुढ़क गया विनीता की आँखे मस्ती के मारे बंद हो गयी, जब उसे होश आया तो देखा कि प्रेम उसकी बगल मे सो रहा है उसका लंड सिकुड कर बाहर आ गया था विनता उठने लगी तो उसे अपनी टाँगो मे दर्द महसूस हुआ वो बोली कमिने ने पूरा दम ही निकाल दिया है उसने अपने कपड़े पहने और फिर अपने घर चली गयी

अगली सुबह प्रेम की आँख जब खुली तब बाहर दरवाजा किसी ने ज़ोर से पीटा, वो आँखो मलता हुआ खड़ा हुआ और अपने नंगे जिस्म को देख कर उसे रात को हुए उस हसीन वाकये की याद आ गयी, वो खुद-ब-खुद मुस्कुरा पड़ा उसे जैसे यकीन ही नही था कि विनीता चाची की ले ली थी उसने वो भी खुद चाची ने चुदवाया था उस से फटाफट उसने अपने कपड़े पहने और नीचे आ गया.

दरवाजे पर सौरभ था, खोलते ही वो उस पर पिल पड़ा और बोला क्या यार कब्से किवाड़ पीट रहा हू मैं और तुम हो कि जवाब ही नही दे रहे थे, प्रेम बोला यार सोया पड़ा था, अब वो सौरभ को क्या बता ता कि कल रात वो नींद भर के क्यो नही सोया था पर जल्दी ही उसे ग्लानि सी हुई कि उसने अपने सबसे अच्छे दोस्त की माँ को जो चोद दिया था उसकी नज़रे जैसे झुकती सी चली गयी थी सौरभ के सामने

सौरभ ने कहा कि, यार तुझे माँ ने खाने के लिए बुलाया है, मैं सहर जा रहा हू मछली बेचने को तो दोपहर बाद ही आ पाउन्गा फिर मिलते है देर हो रही है और वो अपने रास्ते हो लिया , इधर प्रेम ने नाहया-धोया और फिर सौरभ के घर पहुच गया घर मे बस विनीता ही अकेली थी, रात को तो जवानी का जोश था पर अब प्रेम विनीता से नज़र चुरा रहा था विनीता भी इस बात को समझ रही थी और उसका भी हाल कुछ ऐसा ही था

प्रेम चुप चाप जाकर बैठा था विनीता ने उसके लिए नाश्ता लगाया और फिर खुद भी उसके पास ही बैठ गयी, प्रेम चुप चाप नाश्ता करने लगा और विनीता उसकी ओर देखने लगी हालत कुछ ऐसी थी कि दोनो पास होकर भी अंजाने बने हुए थे तभी विनीता प्रेम को और सब्ज़ी परोसने लगी तो उसकी चुनरिया थोड़ा सा सरक गयी और उसके पुष्ट उभारों की झलक प्रेम को दिख गयी

ये वो ही रसदार चूचिया थी जिन्हे कल रात को खूब कस कस कर प्रेम ने भीचा था उसे अपने बोबो को निहारते हुवे देख विनीता बोली ऐसे क्या देख रहे हो, कल तो लट्तू हो रहे थे इनपर ये सुनते ही प्रेम के गले मे रोटी का नीवाला अटक गया और उसे ख़ासी हो गयी विनीता ने उसे पानी का गिलास दिया और हँसते हुए बोली आराम से खाओ थके हुए लग रहे हो , क्यो ना लगोगे कल मेहनत भी तो खूब की थी तुमने और अपनी तिरछी निगाहों से प्रेम को देखने लगी

खाना खाते हुए प्रेम सोचने लगा कि जब चाची खुद ही उसे अपनी मस्त जवानी का जाम पिलाने को आतुर है तो उसे क्यो शर्मिंदगी हो रही है उसके लिए तो अच्छा ही है जो उसे बैठे-बिठाए गरमा गरम चूत मिल रही है तो उसने भी खुलते हुए कहा चाची कल मज़ा आया आपको, विनीता को अंदाज़ा नही था कि प्रेम सीधे सीधे ही उस से ऐसे पूछ लेगा तो मुस्कुराते हुवे बोली मेरी छोड़ो तुम अपनी बताओ

तो प्रेम ने अब खाना छोड़ा और विनीता को अपनी बाहों मे ले लिया और उसके सुर्ख लिपीसटिक्क लगे होटो को चूमने लगा और हाथों से उसकी गान्ड को दबाने लगा तो विनीता भी उसका साथ देने लगी प्रेम के लंड की नसें फिर से भड़कने लगी थी विनीता और प्रेम करीब दस मिनिट तक एक दूसरे को चूमते रहे आग भड़क उठी थी विनीता अपनी आँखे प्रेम की आँखो मे डालते हुए बोली बेटे मैं पिसना चाहती हू तेरे नीचे मेरे इस जोबन का असली हक़दार तो तू ही है कर ले अपनी मनमानी रगड़ डाल मुझे

और उसने प्रेम के पाजामे को नीचे करते हुए उसके लंड को बाहर निकाल लिया प्रेम उसके हाथों का स्पर्श पाते ही तड़प उठा , विनीता लंड को मुट्ठी मे भर कर भीच ने लगी थी इधर प्रेम उसका ब्लाउज खोल चुका था दोनो अब इस खेल को खेलने को पूरी तरह से तैयार थे पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, तभी बाहर से विनीता को किसी ने आवाज़ लगाई तो वो दोनो हड़बड़ाते हुए एक दूजे से अलग हो गये और फटाफट अपने कपड़ो को ठीक करने लगे
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01-12-2020, 12:07 PM,
#8
RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
प्रेम के लिए एक नया रास्ता खुल गया था इधर विनीता भी मन ही मन बहुत खुश थी कि वो प्रेम से संबंध बना के अपने जिस्म की हसरतों को पूरा कर पाएगी , इधर सौरभ जब सहर से मछली बेच कर वापिस आ रहा था तो उसे याद आया कि कुछ समान खरीदना है तो वो बाजार मे गया तो फूटपाथ पर कुछ पत्रिकाए बिक रही थी उसे फिल्मी हीरो-हेरोयिन्स की फोटो देखने का बहुत ही शौक था तो वो भी कुछ पत्रिकाओं को देखने लगा

तभी उसके हाथ कुछ ऐसी किताबें लगी जो किसी के भी होश उड़ा सकती थी, जी हां, ये वही सेक्स कहानियो वाली किताबें थी, सौरभ ने भी ऐसे ही दो किताबें खरीद ली और शाम होते होते घर आ गया ,मोसम आज भी बड़ा गुलजार था आज बारिश तो नही हुई थी पर थोड़ी ठंडक सी थी, प्रेम जब रात का खाना खाने सौरभ के घर गया तो विनीता की तीखी नज़रें बार बार उस से ही लड़ रही थी, जब किसी बहाने से विनीता उसे अपनी भारी भरकम चूचियो का नज़ारा दिखाती तो प्रेम के गले से रोटी का टुकड़ा निगलना मुश्किल हो जाता था


सौरभ का पिता अपनी ड्यूटी पर जा चुका था, विनीता जल्दी जल्दी रसोई का बचा हुआ काम समेट रही थी घाघरे के अंदर उसकी गुलाबी चूत इतनी बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी कि उसकी जांघे तक गीली हो गयी थी, प्रेम अपने चौबारे मे लेटा हुआ अपने लंड को सहलाते हुए विनीता के बारे मे ही सोच रहा था जबकि सौरभ अपने कमरे मे आकर पढ़ाई कर रहा था, करीब घंटे भर बाद विनीता ने जब अच्छी तरह से चेक कर लिया कि सौरभ सो चुका है

तो वो दीवार कूद कर प्रेम के चॉबारे मे पहुच गयी, दरवाजा खुला पड़ा था,और सामने चारपाई पर प्रेम नंगा पड़ा हुआ था विनीता ने एक कातिल अदा के साथ उसकी तरफ देखा और बोली बड़े बेशरम हो गये हो कम से कम दरवाजा तो बंद कर लेते तो प्रेम बोला- चाची मुझे पता था आप आने वाली हो इसीलिए खुला रखा था, विनीता प्रेम के पास बैठते हुए बोली अब तुम मुझे चाची ना कहा करो मैं तो तन मन से अब तुम्हारी लुगाई बन चुकी हूँ

प्रेम – उसकी पीठ को सहलाते हुवे बोला तो आप ही बता दो अब मैं क्या कहूँ आपको

विनीता अपने बोबो को उसके सीने से टच करते हुए बोली मैं तो तेरी रांड़ बन गयी हूँ जो चाहे बुला ले और प्रेम के होंठो को चूम ने लगी अगले कुछ मिनिट तक बस वो दोनो एक दूसरे के होंठो से ही खेलते रहे विनीता पूरी तरह से प्रेम के उपर आ गयी थी प्रेम उसके मस्ताने कुल्हो को अपने हाथों से दबा रहा था

उसने धीरे से घाघरे को उपर किया तो पता चला कि विनीता ने कच्छि तो डाली ही नही है प्रेम उसके नरम नरम कुल्हो को भीचने लगा तो विनीता उसके स्पर्श से जैसे पिघलने लगी थी,विनीता ने फटाफट अपने ब्लाउज के बटन खोले और अपने बोबे को प्रेम के मुँह मे दे दिया और गरम गरम आहे भरने लगी नीचे की तरफ उसने प्रेम के लोड्‍े को अपनी रस से भरी कटोरी पर रगड़ना शुरू कर दिया तो चूत की गर्मी से लंड का सुपाडा और भी फूलने लगा

कुछ देर तक उसको गरम करने के बाद विनीता प्रेम के लंड पर बैठ ती चली गयी और उसको अपनी मस्ती मे समा लिया अब वो पूरी तरह प्रेम पर छा गयी थी उसने धीरे धीरे अपनी गान्ड हिलानी शुरू की जबकि प्रेम उसकी जीभ को अपने मुँह मे लेकर चूस रहा था, विनीता अपने कुल्हो को इतना उपर कर लेती कि बस सुपाडा ही चूत मे फसा रहता और फिर जब वो झटके से वापिस नीचे आती तो दोनो को बहुत मज़ा आता था करीब दस बारह मिनिट तक विनीता ऐसी ही कूदती रही

अब प्रेम ने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी ठुकाई करने लगा विनीता के चूचे बुरी तरह से हिल रहे थे प्रेम मस्ती के स्वर मे बोला चाची आप बहुत ही गरम हो आप की चूत बहुत ही गरम और टाइट है अपनी तारीफ सुनकर विनीता और भी खुश हो गयी और आहे भरते हुए बोली बेटा तेरे चाचा भी मस्त चोदते है पर जो मज़ा तू दे रहा है वैसा मज़ा उन्होने कभी नही दिया शाबाश मेरे शेर लगा रह ऐसे ही अपनी चाची को सुख देता रह वाह मेरे शेर हिला डाल अपनी इस रंडी की चूत को फाड़ डाल

चाची की गरमा गरम बातें सुनकर प्रेम की नसों मे बहता खून और भी उबाल मारने लगा और वो ताबड तोड़ विनीता की चुदाई करने लगा विनीता के लिए तो ये पल जैसे ठहर ही गये थे अब अगर यमराज भी आकर उस से कहते तो वो यूँ ही कहती कि चुदते चुदते ही मेरे प्राण निकल जाए, उसकी टाइट चूत को जब प्रेम का लंड अपनी गोलाई की अनुपात मे फैलाता तो जो दर्द भरा मज़ा उसे मिलता था उसके आगे वो बड़ा से बड़ा सुख भी त्याग सकती थी

करीब आधे घंटे की जोरदार चुदाई के बाद अब दोनो ही झड़ने को आ गये थे और कुछ और तेज तेज धक्को के बाद विनीता ने अपनी चूत को भीच लिया और उधर प्रेम ने अभी अपना लावा उसकी चूत मे छोड़ दिया दोनो हान्फते हुए बिस्तर पर गिर गये कुछ देर तक विनीता उसके सीने से ही लगी रही फिर उसने अपने कपड़ो को सही किया और प्रेम को एक जोरदार चुंबन देकर अपने कमरे मे जाकर सो गयी
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01-12-2020, 12:07 PM,
#9
RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
दूसरी तरफ अपने खड़े लंड को हाथ मे लिए सौरभ वो सेक्सी कहानियो वाली किताब को पढ़ रहा था, आधी से ज़्यादा वो पढ़ चुका था कि तभी एक ऐसी कहानी आई जो आने वाले वक़्त मे उसके जीवन मे एक अलग ही परिवर्तन लाने वाली थी…

जैसे जैसे सौरभ उस कहानी को पढ़ता जा रहा था उसका गला सूखता जा रहा था उसकी आँखो मे सुरखी बढ़ती जा रही थी उसके लंड की नसें और भी ज़्यादा फूलने लगी थी दरअसल वो जो कहानी पढ़ रहा था वो इस बारे मे थी कि कैसे एक माँ अपनी प्यास अपने बेटे से चुदकर बुझवाती है, सौरभ को वो कहानी पढ़ कर बहुत मज़ा आया अब उसके लिए अपने आप पर काबू करना बड़ा ही मुश्किल था हो अपने लंड को जोरो से हिलाने लगा

और जब उसका पानी गिरने को हुआ तो उसने अपनी आँखे बंद कर ली और तभी उसकी आँखो के सामने उसकी मम्मी विनीता का चेहरा आ गया और लंड से वीर्य की धार बह चली आज से पहले उसका कभी इतना पानी नही गिरा था जब वो शांत हुआ तो वो सोचने लगा कि मम्मी भी तो बहुत सुंदर है बिल्कुल किसी परी की तरह लगती है और उनके चूतड़ भी कितने मस्त है काश उस कहानी की तरह मैं भी कभी मम्मी को चोद पाता तो मज़ा ही आ जाता

ऐसे ही सोचते सोचते उसने एक बार और अपना लंड हिलाया और फिर सो गया.अगले दिन जब वो जगा तो उसने देखा कि विनीता बाहर आँगन मे बैठ कर बर्तन धो रही है और उसकी पीठ सौरभ की तरफ थी तो उसके कुल्हो का कटाव देख कर सौरभ के होश फाकता हो गये थे उसने पहले कभी भी अपनी मम्मी को उस नज़र से नही देखा था तो ये जानते हुए भी कि ये ग़लत है सौरभ रोमांचित सा होने लगा

अब उसके दिमाग़ मे बस एक ही बात थी कि क्या वो अपनी मम्मी को पटा कर चोद सकता है या नही तो उसने चान्स लेने की सोची पर कैसे ये उसे मालूम नही था दूसरी तरफ उषा सुधा के साथ मामा के घर आ तो गयी थी पर उसकी चूत की बढ़ती प्यास ने उसका जीना हराम कर रखा था वो हर हाल मे अपने भाई के लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती थी पर वो इधर फँसी पड़ी थी तो बस चूत को उंगली का ही सहारा था वो जल्दी से जल्दी गाँव जाने को उतावली पड़ी थी

इधर प्रेम के मुँह जो खून लग गया था वो तो बस विनीता को चोदने के मोके की तलाश मे ही रहता था और कुछ ऐसा ही हाल विनीता का भी था पर दिन मे मोका लगने का कोई चान्स था ही नही तो बस रात का ही सहारा था , पर वो इस बात से अंजान थी कि अब उसके मादक जिस्म का रस्पान करने के लिए उसका अपना बेटा भी तैयार हो चुका है और मोके की तलाश मे है पर गरम चूत कहाँ किसी लाज शरम की बात करती है

इधर रात को सुधा सोने की कोशिश कर रही थी पर ना जाने क्यो उसको नींद नही आ रही थी उसका ध्यान अपने बेटे के बड़े तने हुवे लंड पर बार बार जा रहा था दरअसल उसे सपना आया था कि वो अपने बेटे के लंड पर कूद रही है सपना तो टूट गया था पर उसकी आँखो मे वो सीन जैसे जम गया था तो उसे अपनी सोच पर हैरानी हो रही थी कि कैसे वो अपने बेटे के बारे मे ऐसा सोच सकती है अंजाने मे उसने अपनी चूत पर हाथ लगाया तो देखा कि वो बुरी तरह से टपकी पड़ी थी

सुधा को खुद पर शरम सी आई पर उसने फिर सोचा कि वो भी तो एक औरत थी उसकी भी कुछ जिस्मानी इच्छाये थी जो पति के मरने के बाद उसने जैसे तैसे करके दबा ली थी पर अब चिंगारी फिर से भड़क ने लगी थी और फिर सुधा भी टंच माल थी गाँव के कई आदमी उसकी पीछे लट्टू थे बस उसके एक इशारे भर की देर थी पर सुधा ने किसी को घास नही डाली थी तो दोस्तो हर कोई अपनी अपनी उलझनों मे उलझा पड़ा था पर सबकी मंज़िल एक ही थी जिस्मो की प्यास को बुझाना


तो उस रात को भी प्रेम और विनीता ने जम कर अपने जिस्मो की आग को बुझाया पूरी रात विनीता प्रेम के लंड के झूले पर झूलती रही प्रेम ने रगड़ रगड़ कर उसकी मुनिया को कूटा था, पर यहाँ पर एक दिक्कत हो गयी थी जब सुबह अंधेरे विनीता वापिस अपनी दीवार को कूद रही थी तो उसका बॅलेन्स बिगड़ गया और वो गिर गयी उसके घुटने पर चोट लग गयी जैसे तैसे करके वो अपने कमरे मे पहुचि दर्द के आलम मे पता नही कब उसकी आँख लग गयी

सूरज चढ़ चुका था सौरभ भी उठ गया उसने मम्मी को आवाज़ लगाई पर कोई जवाब नही आया तो वो उपर चला गया तो देखा की विनीता अभी भी सोई पड़ी थी कुछ तो रात को चुदाई की थकान थी और कुछ चोट का असर सांस लेने के कारण उसका सीना उपर नीचे हो रहा था तो सौरभ उस नज़ारे को देख ने लगा उसका लंड हरकत मे आने लगा कुछ देर तक नज़रें को देखने के बाद उसने हिला कर विनीता को जगाया तो वो हड़बड़ाते हुवे उठी पर अगले ही पल उसके जिस्म मे दर्द की लहर दौड़ ती चली गयी

सौरभ ने पूछा तो उसने झूठ बोलते हुए कहा कि बेटा रात को बाथरूम जाते टाइम फिसल गयी जिस से घुटने मे चोट लग गयी तो दर्द हो रहा है वो बिस्तर से उठना चाहती थी पर उठ ना पा रही थी तो सौरभ ने उसको सहारा देकर उठाया इसी बीच सौरभ का हाथ उसकी माँ की कमर को टच कर गया तो उसके जिस्म के तार झन झना गये चूँकि पैर मे बहुत दर्द था तो डॉक्टर को बुलाया गया उसने चेक करके बतया कि शूकर है घुटना टूटा नही पर करीब 10-15 दिन तक देखभाल करनी होगी और उसने घुटने पर एक बॅंड बाँध दिया और कुछ दवाइयाँ देकर चला गया

चोट के कारण प्रेम और विनीता दोनो के लिए ही मुश्किल खड़ी हो गयी थी दोनो के बदन मे जलती हुई चुदाई की आग उन्हे बड़ा ही परेशान कर रही थी पर दोनो मजबूर थे जबकि मम्मी की चोट सौरभ के लिए किसी वरदान से कम नही थी उसके बापू की तरक्की कर दी गयी थी तो वो अब कई कई दिन मे घर आने लगा था जबकि विनीता के कई काम सौरभ को ही करने पड़ते थे जैसे कि जब वो कहीं जाती तो सौरभ उसको सहारा देता जब वो मूतने जाती तो सौरभ बाथरूम के दरवाजे पर ही खड़ा रहता

अंदर से आती मूत की सुर्र्र्र्र्र्र्ररर सुर्र्र्र्र्र्र्ररर की आवाज़ उसे बड़ा ही रोमांचित करती थी पर वो चाह कर भी आगे नही बढ़ पा रहा था था पर किस्मत ने उस पर भी मेहरबानी करनी ही थी, उस दिन विनीता बाथरूम मे नहा रही थी और सौरभ बाहर खड़ा था विनीता घुटने मे बॅंड बँधा होने के कारण दीवार का सहारा लेकर खड़ी खड़ी ही नहा रही थी कि तभी उसके हाथ से साबुन फिसल कर नीचे फर्श पर गिर गया अब चूँकि वो नंगी नहा रही थी तो सौरभ को भी नही बोल सकती थी तो उसने खुद ही सोचा कि जैसे तैसे करके साबुन उठा ती हूँ पर इसी चक्कर मे उसका पैर साबुन पर टिक गया और वो फिसल गयी और सामने रखी बाल्टी से टकरा गयी एक तो पहले से ही घुटने मे चोट लगी पड़ी थी दूसरी ओर अब उसका कुल्हा बाल्टी से टकरा गया तो उसके गले से तेज चीख निकल गयी और वो तो रोने ही लगी उसको बहुत तेज दर्द हो रहा था उसकी चीख सुनकर बाहर से सौरभ ने तुरंत ही दरवाजे को हड़काया और जो अंदर का नज़ारा उसने देखा तो उसके होश फाकता हो गये

फर्श पर विनीता नंगी पड़ी थी साबुन कहीं लगा था कही नही लगा था उसकी टाँगे खुली हुई थी जिस से सौरभ की नज़रे सीधी उसकी रेशमी झान्टो से भरी चूत पर ठहर गयी उस गुलाबी रंग की पंखुड़ियो से सजी काले रंग की चूत के छेद को देख कर सौरभ का काबू खुद से खोने लगा उसकी सुध्बुध खोने लगी थी जबकि विनीता सौरभ के इस तरह से बाथरूम मे आ जाने से शरम से गढ़ गयी थी उसने अपने हाथो से अपने बोबो को ढकते हुए और जैस तैसे करके चूत को टाँगो मे छुपाने की असफल कोशिश करते हुए दर्द भरी आवाज़ मे कहा देख क्या रहा है उठा मुझे तो सौरभ का ध्यान टूटा उसने सूखे गले से कहा हम उठा ता हूँ और फिर उसने आगे बढ़ कर विनीता को उठाया तो उसने उसकी गान्ड को भीच दिया तो विनीता चिहुन्क गयी उसके अपने बेटे ने उसकी गान्ड को दबाया था नही नही उसने सोचा ग़लती से उसका हाथ लग गया होगा हाँ ऐसा ही हुआ होगा सौरभ ने उसके शरीर पर पास रखी साड़ी लपेटी और उसको कमरे मे ले आया
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01-12-2020, 12:07 PM,
#10
RE: Indian Porn Kahani एक और घरेलू चुदाई
अब ये हालत कुछ ऐसे ही थे कि जहाँ सौरभ को अपनी मम्मी के जिस्म को देख कर आँखे सेकने का मोका मिल गया था दूसरी ओर विनीता शरम से अपनी नज़रे नही उठा पर रही थी उसको बहुत ही लज़्ज़ा आ रही थी कि उसके बेटे ने उसे नंगी अवस्था मे देख लिया था और वो गान्ड को दबाने वाली बात अभी भी उसके जहाँ से हटी नही थी सौरभ ने सोच लिया था कि मम्मी के बदन को देखने का यही बेस्ट मोका है तो उसने आगे बढ़ते हुए कहा

मम्मी आपको ध्यान से नहाना चाहिए था ना , देखो अभी कितनी चोट लग गयी है ये तो शूकर है मैं घर पर था पापा भी नही है अगर घर पर कोई नही आता तो कैसे संभालती आप, विनीता चुप ही रही,सौरभ ने तौलिया लिया और कहा लाओ मैं आपके गीले बालो को पोंछ देता हूँ तो विनीता बोली नही मैं बाद में कर लूँगी पर सौरभ को तो अपने प्लान को अंजाम देना था और ये उसकी पहली सीढ़ी थी तो उसने कहा क्या कर लोगि आप मैं कर देता हूँ

इधर विनीता के गोरे गाल शरम से लाल हो गये थे बेशक उसके बदन पर साड़ी थी पर वो पूरी तरह से पहनी हुई नही थी वो बस ऐसे ही थी कि उसके चुतड़ों वाले हिस्से और बोबो को ढक ले बस सौरभ मम्मी को चिकनी चुपड़ी बातों की चाशनी मे घोलता हुआ बोला मम्मी मैं जानता हूँ आप क्या सोच रही है पर सिचुयेशन ही कुछ ऐसी थी तो मुझे बाथरूम मे आना पड़ा पर मैं क्या करता मजबूरी है वरना …….. ये कह कर उसने बात को अधूरा छोड़ दिया और विनीता को उठा कर जैसे ही बाल सुखाने के लिए बेड के सिरहाने की ओर बिठाया तो कूल्हे पर बाल्टी से लगी चोट के कारण विनीता दर्द से कराह उठी तो सौरभ ने कहा बस बाल पोंछने के बाद दवाई लगा दूँगा और उसके बालो को पोंछने लगा जबकि विनीता ये सोचकर परेशान हो ने लगी कि अब फिर से सौरभ उसके चूतड़ को दवाई लगाएगा तो देखे गा

वो नही चाहती थी कि उसका बेटा उसके शरीर को देखे पर वो हालत के आगे मजबूर थी सौरभ ही कुछ दिनो के लिए उसका सहारा था उसका आँचल थोड़ा सा सरक गया था तो गोरी चूचियो के गुलाबी निप्पल्स देख कर सौरभ का ध्यान भटकने लगा पॅंट मे लोड्‍े ने तो पहले से ही टॅंट बनाया हुआ था वो अलग उसने मन ही मन भगवान को धन्यवाद दिया और अपना काम करता रहा बालों को सुखाने के बाद उसने मम्मी को लिटाया और फिर मालिश वाला तेल लेकर बेड पर आ गया और कहा मम्मी पहले मैं घुटने की मालिश कर दूं

उसने पैर को अपनी गोद मे रखा क्योंकि वो जानता था कि अंदर से मम्मी पूरी तरह से नंगी है , और उस तरह से पैर रखने पर वो बिना किसी परेशानी के विनीता की चूत के नज़ारे को देख सकता था तो वो ये अनमोल मोका अपने हाथ से क्यों जाने देता जबकि विनीता भी जानती थी पर वो चुप ही रही बस अपनी आँखो को बंद कर लिया तो अब सौरभ ने घुटने की मालिश शुरू की

तेल से चेकने हाथ विनीता के घुटनो पर फिर रहे थे जो कभी कभी उसकी मांसल जाँघ को भी टच कर रहे थे उपर से विनीता तो एक चुदासी औरत थी जो पिछले कुछ दिनो मे गपगाप लंड ले रही थी और उपर से ये जिस्म कहाँ किसी रिश्ते नाते को समझता है तो विनीता बस अपनी आँखे बंद किए सौरभ के हाथो को अपने जिस्म पर महसूस कर रही थी इधर सौरभ का दिल कर रहा था कि सबकुछ छोड़ कर अभी मम्मी की टाँगो को खोलू और अपना लंड अंदर घुसा दूं

उस वक़्त उस कमरे के माहौल मे इतनी गर्मी भर गयी थी कि बस पूछो ही मत,विनीता अपनी भावनाओ पर पूरा काबू रखना चाह रही थी पर उसका शरीर उसका साथ नही दे रहा था उधर घुटना तो कब का नीचे रह गया था सौरभ के हाथ उसकी नंगी जाँघो पर चल रहे थे विनीता की चूत से रस बहने लगा पर वो बस आँखे बंद करके पड़ी हुई थी पर जल्दी ही सौरभ ने अपने हाथ उसकी जांघों से हटा लिए और कहा कि मम्मी अब मैं आपको पलट देता हूँ और पीछे दवाई लगा देता हूँ

ये सुनकर विनीता असहज होने लगी पर कोई और चारा भी तो नही था उसका चोट वाला कुल्हा दुख रहा था तो उसने हार कर हाँ कह दी सौरभ को तो जैसे मन माँगी मुराद मिल गयी थी बड़े ही प्यार से उसने विनीता को पलटा और फिर धीरे से साड़ी को उपर उठाया तो अपनी मम्मी के गोरे गोरे चूतड़ देख कर सौरभ के लंड से पानी की कुछ बूँद गिर ही गयी उसे यकीन नही हो रहा था कि वो अपनी मम्मी की गान्ड को निहार रहा था उधर विनीता बस इतना ही बोली कि बेटा जल्दी से दवाई लगा दो

आख़िर वो भी अब अपने बेटे के सामने इस सिचुयेशन को और नही झेल सकती थी काँपते हाथो से सौरभ ने मम्मी की गान्ड को टच किया तो ऐसा अहसास हुआ रूई से भी मुलायम चुतड़ों पर अंजाने मे ही हाथ फेर दिया उसने अब विनीता समझ गयी थी कि सौरभ उसके जिस्म के मादक नज़ारे को देख कर उत्तेजित हो रहा है जो कि बिल्कुल ठीक नही था तो वो थोड़े से कड़क स्वर मे बोली कितनी देर लगा रहा है जल्दी से दवा लगा

तो सौरभ फिर बिना कोई शरारत किए दवाई लगाने लगा दवाई से विनता को बहुत आराम मिला फिर सौरभ ने कहा की मम्मी आप दूसरे कपड़े पहन लो और अलमारी से एक घाघरा चोली उसको दे दी और वही बैठ गया तो विनीता बोली क्या अब जा भी तो वो बोला जी मैं सोच रहा था कि मदद करू कपड़े पहन ने मे तो विनीता ने कहा नही मैं पहन लूँगी तू जा तो सौरभ उठ कर चल पड़ा पर उसके पयज़ामे के अंदर छुपे लंड के तनाव को विनीता ने देख लिया था

क्या उसका बेटा उसको देख कर उत्तेजित हो गया था , कैसे कर सकता है वो ऐसा फिर उसे खुद परही शरम आई कि ऐसे हालत मे तो किसी का भी लंड तनेगा ही पर हालत ही ऐसे थे उसने अपनी चूत को दबाया और फिर थोड़ी मेहनत करके कपड़े पहने और सो गयी जबकि अपने कमरे मे आते ही सौरभ ने सबसे पहले दो बार मम्मी को सोच कर मूठ मारी तब जाके उसको कुछ चैन मिला
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