Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
07-12-2018, 12:33 PM,
#1
Thumbs Up  Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ-1

प्रस्तावनारात का समय, तेज घनघोर बारिश हो रही है। सुनसान जगह पर स्तिथ एक महलनुमा हवेली से एक के बाद एक गोली चलने की आवाज बिजली कड़कने के शोर में दब के रह गयी थी। उस हवेली के ड्राइंगरूम में पड़ी हुई रक्तरंजित लाश को घूरते हुए जड़वत खड़े हुए लोग। एक लम्बा और चौड़ा दबंग सा दिखने वाला व्यक्ति हाथ में गन थामे नीचे पड़ी हुई लाश को घृणा भरी नजरों से घूरता हुआ जिसे चार मुस्टंडे कस कर पकड़े हुए हैं। एक ओर पड़ी हुई घायल लड़की को अपनी बाँहों में थामे एक नवयुवक जिसकी सिसकियाँ की आवाज कमरे में गूँज रही है। उन्हीं दोनों को घेरे हुए एक छोटी बच्ची और एक नवयौवना गोदी मे बच्ची को लिए घायल लड़की को घूरती है…।

घायल लड़की अपनी उखड़ी हुई आवाज में बोलती है… मै तुम पर अपनी दीदी और उनकी बच्चियों की जिम्मेदारी डाल रही हूँ प्लीज उनका ख्याल रखना। युवक पास खड़ी हुई छोटी बच्ची के हाथ को थाम कर सिसकते हुए हामी भरता है।

तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे… मगर मै तुम्हें भूलने नहीं दूँगी क्योंकि मै वापिस आऊँगी… कहते हुए घायल पड़ी लड़की एक आखिरी हिचकी लेकर हमेशा के लिए शान्त हो जाती है।

नवयुवक उस लड़की से लिपट कर रोता है। पास खड़ी नवयुवती उसे सांत्वना देती हुई उसका ध्यान सामने पड़ी हुई दूसरी लाश की ओर खींचती है। नवयुवक की नजर पड़ते ही उसके मुख से चीख निकल जाती है… पिताजी…। उठ कर कहते हुए सामने पड़ी हुई लाश से लिपट कर बिलख-बिलख कर रोने लगता है। कुछ देर के बाद अपने आप को शान्त करते हुए कहता है… ठाकुर तूने अपनी झूठी शान के लिए मेरी पत्नी और मेरे पिता को मार दिया… मै कसम खाता हूँ कि तेरे जीतेजी मै तेरी हर एक बेटी को अपनी हमबिस्तर बनाऊँगा अब तू रोक सके तो रोक लेना… साले हवस के पुजारी… तूने मेरा घर बर्बाद कर दिया अब तू अपनी बर्बादी का मंजर देख…

नवयुवती गोदी मे बच्ची लिए उस दबंग से दिखने वाले व्यक्ति की ओर बढ़ती है और गुस्से में बिफरती हुई… पिताजी आज से मै और मेरी बच्चियाँ आप के लिए हमेशा के लिए मर गयी है… मै जा रही हूँ… कहते हुए नवयुवक का हाथ थाम कर चली जाती है।

मेरा नाम राजेश है, मेरी उम्र 38, अपना व्य्वासय है। मेरे परिवार और नजदीकी दोस्तों बहुत गिने चुने है। प्लीज एक बार सब से मिल लिजिए।

1) मुमताज- मेरी पत्नी- 35 वर्षीय, गुदाज-भरीपूरी देह, मोहिनी मूरत, भारी वक्ष और गोल नितंब, नयन नक्श एक दम तीखे

2) लीना- मेरी पुत्री- 16 वर्षीय, माँ की तरह तीखे नयन नक्श, मोहिनी मूरत, उभरता योवन, कोमल देह

3) टीना- मेरी पुत्री- 13 वर्षीय, चंचल, माँ का प्रंतिरुप

4) एलन: मेरा मित्र- 40 वर्षीय, साँवला रंग, कसरती जिस्म, लम्बा कद, मिलनसार, अच्छे खासे व्यक्तित्व का मालिक, फिटनेस सेन्टर का मालिक

5) डौली: एलन की पत्नी- 32 वर्षीय, छरहरा बदन, गुदाज, भारी वक्ष और नितंब एवं tतीखे नयन नक्श

7) स्वीटी: एलन और डौली की पुत्री- 14 वर्षीय, सुन्दर नयन नक्श, मोहिनी मूरत, चंचल, माँ का प्रंतिरुप

8) करीना: टीना की सहेली- 13 वर्षीय, तीखे नयन नक्श, गेहुआँ रंग, छरहरा बदन, गुदाज, भारी वक्ष और नितंब, चंचल

सीन-1

(शाम का समय: बीयर बार, राजेश अपने दोस्त एलन और उसकी पत्नी डौली के साथ गपश्प करता हुआ।)

राजेश: बहुत दिनों के बाद दिखे, क्या हाल है।

एलन: कुछ खास बात नहीं। कुछ घरेलू कार्य की वजह से निकलना नहीं हुआ।

राजेश: और डौली तुम कहाँ गायब हो गयी थी। अगर एलन नहीं है, तुम तो अपना समय हमारे साथ गुजार सकती हो? बहुत दिन हो गये तुम्हारे साथ रात बिताये हुए।

डौली: नहीं, एसी कोई बात नहीं। आपके दोस्त की मदद कर रही थी। एक साल से पीछे पड़े थे कि स्वीटी तेरह सावन पार कर गयी हे, अभी भी बच्ची बनी हुई है, कब बड़ी होगी?

राजेश: यार, तुम दोनों की मदद चाहिये। अगर कामयाब हो गया, तो जन्न्त, वरना निश्चित तलाक।

एलन: लगता हे कि अब गाड़ी लाईन पर आ गयी। लीना या टीना? आखिर दोनों अपनी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी है। यार तूने अपनी बच्चियो को प्यार के सुख से वन्चित रखा है। अगर किसी स्कूली भँवरे को उनकी मह्क लग गयी, तो बहुत पछ्ताएगा।

राजेश: तू सही कह रहा है। पर तू मुमु को जानता है, वह डौली की तरह खुले विचारों की नहीं है। सेक्स के मामले में बहुत दकियानूसी है।

(एलन दंपति एक दूसरे की तरफ मुस्कुरा कर देखते है)

राजेश: मुझे एक कातिल आइडिया आया है, जो तुम्हारी मदद के बिना पूरा नहीं हो सकता।

(तीनो नजदीक आकर खुसर-पुसर करते है। अचानक राजेश और डौली खिलखिला कर हँसते है और डौली एलन को चूम लेती है)

सीन-2

(राजेश के घर के ड्राइंगरूम का सीन)

(राजेश सोफे पर लेट कर टीवी देख रहा है, मुमु नजदीक बैठी हुई है। राजेश बार-2 अपना हाथ मुमु के सीने की तरफ बढ़ाता है पर मुमु उसके हाथ को झट्क देती है। टीना का आगमन।)

(अभी-2 टीना सो कर उठी है। छोटी सी महीन टी-शर्ट मे से छोटे-छोटे नांरगी जैसे पुष्ट सीने के उभार साफ दिखते हुए, और घुटने से भी एक फुट उपर मिनि सर्क्ट जो बामुश्किल जांघो को छुपाने की नाकाम कोशिश करती हुई। आकर राजेश के उपर गिर कर लिपट जाती है।)

टीना: मम्मी, मुझे दीदी की याद आ रही है।

(राजेश अपने हाथ प्यार से धीरे-धीरे टीना की पीठ पर फिराते हुए उसे अपनी ओर खीचता है। टीना की अर्धविकसित उरोज, राजेश की बालिष्ट छाती से जा टकराते है। राजेश का हाथ नीचे की ओर चला जाता है और टीना के नग्न जांघों पर आ टिकता है। मुमु इन सब से बेखबर, टीवी देखने मे मस्त।)

टीना: (थोड़ा कसमसाते हुए) मम्मी तुम सुन नहीं रहीं।

(राजेश थोड़ा मस्ती में टीना की नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए, नीचे से अपने खड़े होते लिंग का दबाव बढ़ाता है। कोई चीज अपनी जांघ के निचले हिस्से में गड़ती हुई मह्सूस करती हुए, टीना फिर से एक बार कसमसाती है।)

मुमु: एक महीने कि तो बात है। अपनी क्लास के साथ छुट्टियां मनाने कशमीर गयी है, कोई फोरन तो नहीं गयी है।

टीना: (थोड़ा कसमसाते हुए) पापा, मुझे छोड़ो।

राजेश: (अपने तन्नाए हुए लिंग का दबाव बढ़ाते हुए और नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए) न मेरा प्यारा बेटा, लीना जल्दी वपिस आएगी। तेरी मम्मी को तो टीवी देखने से फुरसत मिले तो वह तेरे बारे में सोचे कि तू अपनी छुट्टियाँ कैसे बिताए।

मुमु: तुम तो रहने दो। टीना ह्ट वहां से, अब तू छोटी बच्ची नहीं रही। कोई देखेगा तो क्या कहेगा।

टीना: (थोड़ा इठलाते हुए) क्यों पापा, क्या मैं बच्ची नहीं रही, अब मैं जवान हो गयी हुं ।

राजेश: (अपने लिंग को धीरे से घिसते और दबाव बढ़ाते हुए) न मेरा प्यारा बेटा, तू तो अभी मेरी छोटीसी गुड़िया है। तेरी मम्मी के दिमाग का तो भगवान ही मालिक है। (टीना के गाल को चूमते हुए) तुझे नहीं लगता, तेरी मम्मी अक्ल और शरीर से मोटी होती जा रही है?

मुमु: (आंख तरेरते हुए) तुम रहने दो। तुमको इतने दिनों से कह रहीं हुं कि मेरा वजन बढ़ता जा रहा है, कोई फिट्नेस सेन्टर के बारे मे पता लगाओ। पर तुम हो कि कुछ भी नहीं करते।

टीना: (अपने को राजेश की बाहो से छुड़ाते हुए) मम्मी, यह ठीक रहेगा। मैं और आप, दोनों एक ही फिट्नेस सेन्टर जौइन कर लेते है क्योंकि मुझे भी अपना फ़िगर और वजन ठीक रखना है। मेरी छुट्टियाँ भी अच्छी तरह से इस्तेमाल हो जाएगी।

राजेश: (टीना को अपनी ओर खींचते हुए) मैनें तुम्हारे बारे मैं एलन और डौली से बात की है, उनका कहना है कि पहले तुम एक बार उनके फिट्नेस सेन्टर पर आओ और देखो, फिर वह दोनों तुमसे बात करने घर पर आएगें।

मुमु: उनको तो रहने दो, मैनें उनके बारे मे बहुत सुन रखा है। दोनों बहुत लम्पट किस्म के है।

राजेश: (टीना की नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए, नीचे से अपने खड़े हुए लिंग को घिसते हुए) तुम पता नहीं घर मे बैठ कर कहाँ से उल्टी-सीधी बातें सुन लेती हो। उनका फिट्नेस सेन्टर शहर का सबसे बड़ा और एक्स्क्लुसिव सेन्टर है। हर कोई उसका मेम्बर नहीं बन सकता।

टीना: (फिर से एक बार कसमसाती है, हिलने से उसके अर्धविकसित उरोज राजेश की छाती पर घिसाव करते है जिस से उसकी छोटी-छोटी घुन्डियां खड़ी होने लगती है। लाल-लाल डोरे मासूम आँखों में तैरने लगते है। अजीब सी कश्मकश मासूम टीना को अपने शरीर में महसूस होने लगी थी। छातियों की घुन्डियों से करन्ट उत्पन्न हो कर पुरे शरीर में फैल रहा था और सीधे नीचे जाकर योनिद्वार पर दस्तक दे रहा था। उधर राजेश के हाथ और लिंग के जैसे अपने दिमाग थे, कि हाथ का निशाना टीना की नग्न जांघों पर था और खड़ा हुआ लिंग कपड़ों से ढंकी योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मार रहा था) (हल्की सी कपकंपायीं आवाज मे) मम्मी अ...हं..ह्ह.....लन अंकल का फिट्नेस सेन्टर बहुत मशहूर है। मेरी कुछ फ्रेंड्स के पेरन्ट्स मेम्बरशिप पाने के लिये बहुत दिनों से कोशिश कर रहे है पर उन्हें अभी तक नहीं मिला है .अंह..अंह..ह.ह..(अचानक बार-बार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकला, वह राजेश से कस के लिपट गयी)

मुमु: अरे इसे क्या हुआ?

राजेश: (अपने तन्नाए हुए लिंग को और भीषणता से घिसते हुए, टीना को अपनी बाँहों मे भींचते हुए) कुछ नहीं, बस जरा कस के पकड़ लिया तो बेचारी की साँस घुट कर रह गयी। तुम बताओ कि क्या सोचा? (इस बीच टीना ने जबरदस्ती अपने को राजेश की बाँहों से मुक्त किया और बाथरुम की ओर भाग गयी। आखिरी कश्मकश मे राजेश के लिंग ने भी उफनता हुआ लावा हल्का सा छ्लका दिया, इस से पहले मुमु देखे जल्दी से राजेश ने पाजामा ठीक-ठाक किया) .... अं.ह... मेरा ख्याल है कि एक बार तुम जा कर देख लो, अगर अच्छा लगे तो करना अन्यथा कुछ और सोचेंगे।

मुमु: लेकिन जो बाते मैनें सुनी है, मै टीना को उधर ले जाना ठीक नही समझती क्योंकि मैनें सुना है कि उधर बहुत अश्लील पहनावे मे जवान युवक-युवतियां योग एवं क्रीड़ा में मग्न होते है।

…(दरवाजे के पीछे से टीना ने सब सुन लिया और पैर पट्कती हुई आती है और मुमु से लड़ती है)

टीना: (रुआंसी हो कर) मम्मी तुम हमेशा ऐसे ही करती हो। तुम्हारी दकियानूसी बातें हमे अच्छी नहीं लगती। तुम लीना दीदी को भी टूर पर जाने से मना कर रही थी। अगर पापा जिद्द नहीं करते तो लीना दीदी भी आज शायद यहीं पर बैठ कर बोर हो रही होती।

राजेश: (जरा कठोरता से) टीना बेटा, तुम्हें अपनी मम्मी से ऐसे बात नहीं करनी चाहिये। वह हमेशा तुम्हारी भलाई की सोचती है। अगर वह सोचती है कि फिट्नेस सेन्टर में तुम्हारा जाना अच्छा नहीं है तो तुम्हें जिद्द नहीं करनी चाहिये। तुम्हें अपनी मम्मी से माफ़ी माँगनी चाहिये।

(राजेश को मुमु की तरफदारी करते हुए देख कर, टीना झेंप जाती है और रोते हुए अपने कमरे मे चली जाती है।)

राजेश: मुमु, टीना नाराज हो गयी। अब कई दिनों तक मुँह फुला के बैठी रहेगी। बेचारी की सारी छुट्टियाँ बरबाद हो जायेंगी।

मुमु: लेकिन उसकी हर जिद्द तो पूरी नहीं की जा सकती। और वैसे भी मैं उसके खुले विचारों से पहिले से ही काफी चिन्तित हूँ।

राजेश: तुम चिन्ता मत करो, मैं उसे मनाने की कोशिश करुँगा। पर तुम अब अपनी सेहत के बारे मे सोचो, एलन का फिटनेस प्रोग्राम बहुत लाभदायक है। मैंने कई लोगों से इसके बारे मे सुना है।

मुमु: तुम जा कर टीना को मनाओ, वर्ना आज वह पूरे दिन मातमी चेहरा बना कर बैठी रहेगी।

राजेश: हाँ, मैं उसके पास जाता हुं।

मुमु: मैं थोड़ी देर के लिये बेला के घर जा रही हुं, उसकी बेटी और दामाद आए हुए है। तुम दरवाजा बंद कर लो क्योंकि तुम उपर टीना के पास बैठने जा रहे हो। मैं आकर घंटी बजा दूँगी।

(मुमु घर से जाती है, राजेश दरवाजे को लाक करके टीना के पास जाता है।)

सीन-3 (टीना का बेडरूम)

(राजेश धीरे से टीना के दरवाजे पर दस्तक देता है।)

राजेश: बेटा टीना, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ ?

(कोई जवाब न पा कर, राजेश धीरे से दरवाजे को अन्दर की ओर ढ्केलता है और बेडरूम मे दाखिल हो जाता है। टीना उन्हीं वस्त्रों मे अपने बिस्तर पर ओंधे मुँह लेटी हुई सुबक रही है। मिनी-स्कर्ट कुछ उपर खिसक जाने से उसकी मासंल जांघे और आधे अधूरे गोल-गोल नितंब सर्वविदित होते हुए। पीठ पर से टी-शर्ट भी कुछ उपर खिसक गयी है।)

राजेश: बेटा, मुझसे बात भी नहीं करोगी? क्या बहुत नाराज़ हो?

(यह सब बोलते हुए, राजेश बेड के पास आ कर खड़ा हो जाता है। टीना हल्के से कुनमुनाती है पर कुछ नहीं बोलती है। राजेश धीरे से उसके साथ ही बेड पर लेट जाता है। और धीरे से उसे पलट कर सीधा कर देता है। रोता हुआ चेहरा लाल हो गया है, यह देख कर झट से टीना के गाल चूम लेता है और उसे अपनी ओर खींच लेता है।)

टीना: मैं आपसे नहीं बोल रहीं।

राजेश: क्यों नहीं बोल रहीं? बेटा, क्या मुझसे कोई गल्ती हो गयी? लड़ाई तुम माँ-बेटी करती हो और अपनी नाराजगी मुझ गरीब पर उतारती हो।

(यह सब बात करते हुए, राजेश जबरदस्ती टीना को अपने उपर घसीट लेता है। इस खीचाँतानी मे टीना का दायाँ ऊरोज उघड़ गया, गोरे स्तन पर एक गुलाबी घुंडी के दर्शन मात्र से राजेश के रोंगटे खड़े हो गये। अर्धविकसित बायाँ उरोज, राजेश की बालिष्ट छाती से दब गया। इन सब से अनिभिज्ञ, मासूम टीना मचलती हुई राजेश की गिरफ्त से निकलने की पुरजोर कोशिश करते हुए उसके और चिपक जाती है। राजेश का हाथ नीचे की ओर चला जाता है और टीना के नग्न नितंबों पर आकर ठहर जाता है। अब वही पहिले जैसी स्थिति मे दोनों आ जाते है। टीना को पकड़े हुए राजेश करवट बदलता है और उसे अपने नीचे दबा लेता है। अपने तन्नाए हुए लिंग का दबाव बढ़ाते हुए और टीना के गालों को लगातार चूमता हुआ गिड़गिड़ाता है।)

राजेश: न मेरा प्यारा बेटा, इतनी नाराज़गी अच्छी नहीं। (चूमते हुए........) क्या मैने तुम्हारी कोई इच्छा को आज तक मना किया है?

(सिल्क पाजामे मे से राजेश का तन्नाया हुआ लिंग टीना की जांघों के बीचोंबीच आ टिकता है। फिर से एक बार टीना कसमसाती है, हिलने से उसकी अर्धविकसित छोटी-छोटी घुन्डियां रगड़ खा कर खड़ी होने लगती है। राजेश अपनी बालिष्ट छाती से टीना के स्तनों को पीस देता है। टीना की मासूम आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। अजीब बैचैनी और कश्मकश में मासूम टीना अपनी आँखे मूंद लेती है। छातियों की घुन्डियों मे से करन्ट फिर से प्रावाहित होना शुरु कर देता है। नीचे लिंगदेव कठोरता धारण कर योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मारना शुरु कर देते है।

राजेश: क्या हुआ, टीना की मुआफी नहीं मिलेगी। मुझसे बात नहीं करोगी।

टीना: (नशीली आवाज में) आपने मम्मी की साइड क्यों ली? आप लीना दीदी को ज्यादा प्यार करते हो, मुझे नहीं। जाओ मैं आपसे बात नहीं करती।

(अब राजेश के हाथ भी हरकत मे आ गये और नीचे की ओर सरकते हुए टीना के नग्न नितम्बों पर जा कर ठहर गये। कुछ ढूँढते हुए और हल्के-2 हाथ से सहलाते हुए कुछ दबाते हुए इधर-उधर बेटोक विचरने लगे। अचानक, राजेश को विदित हुआ कि टीना नीचे से बिलकुल नग्न अवस्था में लेटी हुई है और उसके लिंग और योनिमुख के बीच मे बस एक रेशम की दीवार है। अपनी भुजाओं मे कस कर, राजेश धीरे से टीना का बायां पाँव उपर उठा कर अपने लिंग को ढकेलता है। एक हल्की सिसकारी के साथ टीना कस के राजेश को चिपट जाती है।)

राजेश: नहीं बेटा, घर मे मुझे सबसे ज्यादा प्रिय कोई है तो वह तुम और लीना हो और कोई नहीं। अगर मै उस समय तुम्हारा साथ देता तो तेरी मम्मी कभी भी फिट्नेस सेन्टर जाने के लिये सहमति नहीं देती। (बात करते हुए, राजेश अपने तन्नाए हुए लिंग को भीषणता से ठेलता है। जोर-जबरदस्ती के आलम मे रेशम से ढके लिंगदेव का अग्र भाग अछूती योनिमुख के कपाट थोड़ा सा खोलने मे सफल हो जाता है।)

टीना: पा .उई....प.आ... पा, मै भी अपने वजन को कम करना चाहती हूँ। मै भी मम्मी की तरह अपनी फिगर को मेन्टेन करना चाहती हूँ। आगे चलके मेरा भी मम्मी जैसा हाल न हो जाए इसलिए मै फिट्नेस सेन्टर जाना चाहती हूँ.उ.उ.उ...आह......

(राजेश बार-बार टीना के गालों को चूमता, नीचे से अपने लिंग को धीरे से ठेलता हुआ अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ता जा रहा है। बार-बार नितम्बों पर दबाव, लगातार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकलता है, टीना बदहवासी मे राजेश से कस कर लिपट जाती है। राजेश के लिंगदेव ने भी गुस्से से लावा उगलना शुरु कर दिया। राजेश ने वक्त़ की नजाकत को समझते हुए टीना को पुचकारना शुरु किया।)

राजेश: टीना ..टीना..क्या हुआ। (पिण्डलियों मे से हाथ निकाल कर, टीना को हिलाते हुए).. टीना..क्या हुआ।

टीना: (झेंप कर) कुछ.. नहीं।

राजेश: क्या हुआ बताओ। मुझे फिकर हो रही है। तुम बोल क्यों नहीं रहीं?

(सब तूफान शांत हो गया था। राजेश धीरे से टीना के उपर से सरक कर उसकी ओर मुख करके लेट जाता है। पाजामे के सामने का हिस्सा दोनों के प्रेमरस के मिश्रण की गाथा से सरोबर हो रहा था।)

राजेश: (टीना को अपनी छाती से लगाते और दिखाते हुए) अररे...यह क्या हुआ? क्या यहां पानी पड़ा था? सारा पाजामा गीला हो गया।

(उघड़ा हुआ अपना दायाँ ऊरोज को देख कर टीना जल्दी से टी-शर्ट नीचे खींचती है। अपनी झेंप मिटाने के लिये, झुकी हुई आँखें लिये राजेश के सीने से लग जाती है।)

टीना: (रुआँसी आवाज में) पापा, पता नहीं मुझे क्या हो गया है। जब भी आप मुझे प्यार से लिपटाते हो, मुझे न जाने क्या हो जाता है। मेरे पूरे शरीर में और पेट में अजीब सी हलचल मच जाती है और अचानक ऐसा लगता है कि मेरा पेशाब निकल जायगा। (और यह कर रोने लगती है)

राजेश: न बेटा, न रो। मेरा पजामा तेरे पेशाब से नहीं भीगा है। (टीना को पुचकारता हुआ) अब तू जवान हो गयी है। जब तुझे बहुत प्यार आता है तो तेरे शरीर में से एक तरह के टाक्सिन बनने लगते है और जब तू बहुत एक्साईटिड हो जाती है तो सारे टाक्सिन बाहर निकल जाते हैं।

(टीना ढ्बढबाई आँखों से चुपचाप राजेश के सीने से लग कर सारी बात सुनती है। राजेश भी आत्मग्लानि मे डुबा हुआ मासूम टीना को प्यार से समझाता है।)

राजेश: बेटा, जैसे तुम्हारी माहवारी होती है। वैसे ही तुम्हारे जवान होने पर यह टाक्सिन बनने और निकलना शुरु हो जाते है। यही हाल लड़कों के साथ भी होता है। मेरे को भी जब तुम पर बहुत प्यार आता है, मेरे शरीर से भी टाक्सिन निकल जाते है। खैर, तुम इसकी चिन्ता न करो। मुँह-हाथ धो कर फ्रेश हो जाओ। हम दोनों नीचे ड्राइंगरूम में बैठ कर फिट्नेस सेन्टर की पहेली सुलझाते है।

(राजेश उसके गाल थपथपाता है और टीना के कमरे से बाहिर निकल जाता है।)

क्रमशः
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07-12-2018, 12:34 PM,
#2
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--2

गतान्क से आगे..........

सीन-4 (ड्राइंगरूम का सीन)

(राजेश अपने कुर्ते-पाजामे में सोफ़े पर बैठ कर टीवी पर अंग्रेजी फिल्म देख रहा है। टीना का आगमन्। मलमल का कुरता, जींन्स, चेहरे पर मासूमियत और यौन संतुष्टि की पुर्ण रौनक)

राजेश: आओ, बेटा मेरे पास बैठ जाओ।

टीना: पापा, मुझे मम्मी के साथ एलन अंकल के फिट्नेस सेन्टर में एनरोल करा दिजिये। मेरी छुट्टियाँ भी अच्छी तरह से कट जाएँगीं।

राजेश: पर तुम्हारी मम्मी नहीं मानेंगी।

टीना: (ठुनकते हुए) यह भी कोई बात हुई। आप किसी भी तरह मम्मी को राजी कराईए।

राजेश: तुम जानती हो अपनी मम्मी को, वह नहीं मानेगी। (राजेश अपनी ओर टीना को खींचता है।)

टीना: (राजेश से सटती हुई उसके गाल को चूमती है) आप मुझे प्यार करते हो?

राजेश: (जवाब में राजेश भी उसके गाल को चूमता है) यह भी कोई पूछने की बात है। मैं तुमसे सब से ज्यादा प्यार करता हूँ।

राजेश: हाँ, एक काम कर सकता हूँ कि तुम एलन अंकल वाली एक्सरसाईज भी कर पाओ और मम्मी को भी पता न चले।

टीना: (खुशी से राजेश के उपर कूद पड़ती है) पापा, मेरे लिए प्लीज कुछ ऐसा कर दो।

(राजेश टीवी पर ध्यान लगाता है। सीन में आदमी एक नवयौवना को बाँहों में लेकर उसके होंठ चूमता है। लड़की भी उसके होंठ अपने होंठों में लेकर चूमती है।)

टीना: छिँ ... छिँ.. पापा, आप क्या गन्दी फिल्म देख रहे हो। मेरी मदद करो।

राजेश: क्यों बेटा, इस में क्या गन्दा है। वह अपने प्यार का इजहार कर रहें है। जब कोई किसी से प्यार करता है, वह ऐसे ही चूमते है।

टीना: क्या यह करना जरुरी है?

राजेश: हाँ, बिलकुल। ऐसा करने से वह अपने प्यार को प्रगाढ़ करते है और उसके परिणामस्वरूप उनके शरीरों से उतप्न्न टाक्सिन बाहिर निकाल फेकते है।

टीना: (मन्त्र्मुग्ध सी राजेश की बात सुनती है) आखिर यह टाक्सिन क्या होता है।

राजेश: टाक्सिन शरीर के अन्दर का जहरीला केमिकल है जिसकी वजह से चेहरे पर दाग, बालों का झड़ना, खाल में झुर्रियॉ, इत्यादि, हो जाती है। टाक्सिन का शरीर से निकालना बहुत ही आवयश्क है। वर्ना व्यक्ति जल्दी बूढ़ा होने लगता है।

टीना: पापा, क्या मेरे चेहरे पर भी दाग आजाएगें अगर मैनें टाक्सिन बाहिर नहीं निकाल फेके? राजेश: बिलकुल।

(टीना का चेहरा अपने हाथ में ले कर, राजेश धीरे से गालों को चूमता है)

राजेश: बताओ, तुम्हें कुछ मह्सूस हुआ?

टीना: नहीं, कुछ भी नहीं।

राजेश: इसका मतलब है कि ऐसे चूमने से तुम्हारे शरीर का जहर टाक्सिन नहीं बन पाया।

टीना: पर सब तो ऐसे ही करते है। क्या अभी आप ने मुझे ऐसे नहीं चूमा था?

राजेश: हाँ। तुम सही कह रही हो। पर मैं मुमु को तो तुम्हारी तरह नहीं चूमता हूँ। उसके तो होंठों को अपने होंठों मे ले कर चूमता हूँ।

टीना: पर मुझसे क्यों नहीं? या इस लिए कि मै आपकी बेटी हूँ और यह अच्छी बात नहीं।

राजेश: पहली बात, सिर्फ प्यार मे दो व्यक्ति ऐसा करते है। प्यार के बिना चूमने से टाक्सिन नहीं बनेंगें। दूसरी बात, जब तुम छोटी थी, मैं तुम्हें ऐसे ही चूमता था, पर जब से तुम बड़ी हुई मैं ऐसा करने से डरता था।

टीना: क्या आप मम्मी से डरते थे? या मुझसे?

राजेश: दोंनों से। यह पता नहीं ज्यादा डर किस से लगता है। (बड़े दुखी से चेहरे के साथ) पर मुझे लगता था कि अब तुम मुझे प्यार नहीं करती हो इस लिए मैं अपने प्यार का इजहार तम्हें नही कर पाता हूँ। और कहीं कर दिया तो तुम्हारी मम्मी को ऐसा न लगे कि मै तुम्हें उस से ज्यादा प्यार करता हूँ।

टीना: (खुशी में राजेश के गाल को जोरों से चूम लेती है) पापा मैं आपसे सब से ज्यादा प्यार करती हूँ। मम्मी और दीदी से भी ज्यादा। पर ऐसे चूमना गलत नहीं होगा।

राजेश: बताओ तुम मुझसे प्यार करती हो?

टीना: हाँ।

राजेश: (बड़े भोले अन्दाज में) और मै तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। जब हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है तो ऐसे चूमना गलत कैसे होगा?

टीना: (कुछ सोचती और सकुचाई हुई) ऐसा तो मैनें सोचा ही नहीं था। पर पापा मुझे तो ऐसे चूमना नहीं आता।

राजेश: बेटा, जब तुम्हें मैथ्स के सवाल नहीं आते, तो किसके पास सीखने जाती हो?

टीना: आप के पास।

राजेश: तो फिर आज से हम ऐसे ही चूमेगें। इस से हमारे बीच प्यार भी बढ़ेगा और हमारे शरीर से टाक्सिन भी निकलवायेंगे। (थोड़ा रुक कर) पर तुम तो जानती हो की तुम्हारी मम्मी कितनी शक्की किस्म की औरत है। अगर उसके सामने हम ने ऐसा किया तो वह सोचेगी मै तुम्हें उस से ज्यादा प्यार करता हूँ।

टीना: हाँ, इस से तो वह अपना सारा गुस्सा हम पर निकालेगीं। पापा, क्यों न हम यह सब मम्मी के पीठ पीछे करें, तो उन्हें पता ही नहीं चलेगा।

राजेश: (अंधा क्या चाहे, दो आँखे) हाँ, यह ठीक रहेगा। अभी तुम्हारी मम्मी बेला आंटी के घर पर गयी हुई है, क्यों न हम ऐसे चूमने की कोशिश करके देखें। देखें कि क्या ऐसा करने से टाक्सिन बनते है कि नहीं।

टीना: (कुछ असमंजस में, कुछ शर्माती हुई और कुछ सकुचाई) हुं..हुं

राजेश: अगर तुम्हें कोई आपत्ति है तो नहीं करते है। बेटा, इससे मेरे प्यार में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

टीना: (कुछ शर्माती हुई) नहीं, ऐसी बात नहीं। पापा मुझे डर लग रहा है। चलिये आप मुझे सिखाना शुरु करिये।

(राजेश अपने सामने टीना को बैठाता है। टीन शर्म से अपनी आँखें मूंद लेती है। राजेश कुछ पल उसके चेहरे को निहारता है। तीखे नयन नक्श, मोहिनी मूरत, माँ का प्रंतिरुप, गुलाब सी पंखुड़ियों से होंठों को देख कर राजेश की दिल की धड़कने बड़ जाती हैं। वह धीरे से अपने होठों को टीना के होठों पर कुछ क्षणों के लिए रख कर हटा देता है।)

राजेश: बताओ टीना, कुछ हुआ क्या?

टीना: नहीं, कुछ भी नहीं।

राजेश: यह इस लिए कि मैनें सिर्फ अपने होंठों से तुम्हारे होंठों को स्पर्श किया था। इस क्रिया में प्यार नहीं था। तुमने अपने शरीर को अकड़ा लिया और होंठ भींच लिये थे। अपने शरीर को ढीला छोड़ दो और अपने होंठों को जरा सा खोलो।

टीना: (कुछ शर्माती हुई) ठीक है।

(एक बार फिर सकुचाती हुई टीना आँखें मूंद कर बैठ जाती है। राजेश एक बार फिर से टीना के कमसिन गुलाबी होंठों की ओर बढ़ता है। टीना की मासूम जवानी को सिर से पाँव तक आँखों से पीने की कोशिश करता है। कुछ क्षणों के लिये ठिठक कर रुक जाता है, पर फिर टीना की कमर को पकड़ कर अपनी ओर धीरे से खींचते हुए अपने शरीर से सटा लेता है।)

राजेश: (बहुत धीरे से अपने होठों को टीना के कान से छूते हुए) टीना अपने शरीर को ढीला छोड़ दो।

(राजेश की गर्म साँसों को कान पर मह्सूस होते ही टीना के शरीर में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। अपने हाथों में टीना का चेहरा ले कर, बड़े प्यार से अपने होंठ टीना के होठों पर रख देता है और धीरे से अपनी जुबान का अग्र भाग टीना के निचले होंठ पर फिराता है। इस नये एहसास से टीना के शरीर मे बिजली सी कौंध जाती है और उसके होंठ थोड़े से अपनेआप खुल जाते है। उसी क्षण राजेश के होंठ टीना के निचले होंठ को अपने कब्जे मे ले लेते है जैसे वह इसी ताक में बैठे थे। राजेश धीरे-धीरे निचले होंठ को चूसना शुरु कर देता है और बीच-बीच में अपनी जुबान टीना के उपरी होंठ पर फिराता है। टीना अपने आपे में नहीं रह पाती और अपने होठों को पूरा खोल देती है पर राजेश टीना से अलग हो जाता है। टीना आँखे मूंदें अपने झोंक में राजेश के होंठों को छूने के लिये आगे को झुकती है पर कुछ न पा कर आँखें खोलती है तो राजेश से आँख मिलते ही झेंप जाती है।)

राजेश: अब की बार कुछ हुआ क्या? मुझे तो 740 वोल्ट का करन्ट लगा। इसका तो यह मतलब है कि तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो।

टीना: (कुछ सकुचाई) हुं..हुं हाँ। पापा, मुझे पुरा विश्वास हो गया कि आप मुझ से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं।

राजेश: यह तुम्हें कैसे पता चला। क्या तुम्हें भी ऐसा लगा कि टाक्सिन बनने लगे?

टीना: (कुछ शर्माती हुई सिर हिला कर हामी भर देती है)

राजेश: पर बेटा, मुझे कुछ ज्यादा महसूस नहीं हुआ क्योंकि इस बार सब कुछ मैं ही कर रहा था। अगर तुम भी वही सब मेरे साथ करोगी तो मेरे अन्दर भी टाक्सिन बनने शुरु हो जाएँगे। क्या एक बार फिर से करें?

टीना: (एक बार फिर से शर्माती हुई सिर हिला कर हामी भर देती है)

राजेश: बेटा, एक या दो बार, या दस बार? प्लीज बताओ।

टीना: पा.. पा. (ठुनकते हुए) आप भी...न.. जाओ मै आप से नहीं बोलती।

राजेश: (मुस्कुराते हुए) मेरी गुड़िया फिर से नाराज हो गयी। पर बताओ तो सही क्योंकि मै जानना चाहता हूँ कि तुम्हें कैसा लगा। बताओ प्लीज्।

टीना: (शर्माते हुए) जितनी बार आप चाहें।

राजेश: मै तो बार-बार करना चाहता हूँ। तुम्हारे प्रति अपना प्यार बाँट्ने का सपना हमेशा देखता रहता हूँ।

टीना: (थोड़ा इठलाते हुए) आप ही बेकार बातों में समय बिता रहें है।

राजेश: सौरी। लेकिन अब की बार हम खड़े हो कर करते हैं। बैठ्ने से मिलन आधा-अधुरा रहता है और झुकने से पीठ में दर्द भी होता है।

(टीना सकुचाई सी राजेश से सट के खड़ी हो जाती है। दोनो अब आमने-सामने से चिपक कर खड़े हो जाते है। टीना की कमर को पकड़ कर राजेश धीरे से अपनी ओर खींचता है। राजेश की दिल की धड़कने बड़ जाती हैं क्योंकि अब टीना के स्तन राजेश के सीने में गड़ जाते है और नीचे से लिंगदेव मे भी हरकत आ जाती है। वह धीरे से अपने होठों को टीना के होठों के करीब ले जाता और कुछ क्षणों के लिए रख कर हटा देता है।)

राजेश: टीना अब की बार तुम करो।

(शर्माते हुई धीरे से टीना भी अपने होठों को राजेश के होठों के करीब ले जाती है और कुछ क्षणों के लिए रख कर हटा लेती है।)

राजेश: कुछ हुआ क्या? तुमको वही करना है जो मैनें पहले तुम्हारे होठों के साथ किया था। इसी तरह से हम दोनों के शरीरों मे टाक्सिन बनेगें।

(टीना को राजेश ने अपनी बालिष्ठ बाहों मे और कस कर जकड़ लेता है। टीना कसमसाती है, हिलने से उसकी अर्धविकसित छोटी-छोटी घुन्डियां रगड़ खा कर खड़ी होने लगती है। राजेश टीना के स्तनों को पीस देता है। टीना की मासूम आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। अजीब बैचैनी और कश्मकश में मासूम टीना अपने होठों के बीच राजेश के निचले होंठ को ले कर धीरे से चूसते हुए आँखे मूंद लेती है। स्तनों की घुन्डियों मे एक बार फिर से करन्ट प्रावाहित होना शुरु हो जाता है। नीचे पाजामे में राजेश का लिंग कठोरता धारण कर टीना के पेट पर बार-बार ठोकर मारना शुरु कर देता है। जैसे ही टीना अपनी जुबान का अग्र भाग राजेश के उपर के होठ पर फिराती है, कि दरवाजे की घंटी बज उठ्ती है। डर के मारे दोनों जल्दी से अलग हो जाते हैं।)

राजेश: शायद मुमु आ गयी, तुम अपने कमरे मे जाओ। मैं जाकर दरवाजा खोलता हूँ। याद रहे यह हमारा सीक्रेट है। अभी यह काम अधूरा रह गया, शाम को तुम्हारी मम्मी एलन अंकल के फिट्नेस सेन्टर जाएगीं। उसके जाने के बाद इस अध्याय को पूरा करेगें। कल मै एलन के पास जा कर तुम्हारी ट्रेनिंग का कोई रास्ता खोजता हूँ।

(टीना जल्दी से सीड़ीयाँ चड़ती अपने कमरे में चली जाती है। राजेश दरवाजा खोल देता है। मुमु का आगमन्।)

मुमु: तुम्हारी टीना से बात हुई क्या? क्या हाल है।

राजेश: हाँ, बात तो हो गयी। बहुत नाराज थी पर मैने उसे मना लिया है।

मुमु: मै जानती थी कि वह तुम्हारी बात नहीं टाल सकती। यह ठीक रहेगा कि सिर्फ पहले मै वहाँ का जायजा लूँ, अगर सब ठीक रहा तो बाद मे लीना और टीना को भी एनरोल करा देंगे।

राजेश: तुम भूल मत जाना कि आज शाम को 6 बजे तुम्हें एलन के फिट्नेस सेन्टर जाना है।

मुमु: हाँ, मुझे याद है।

(राजेश टीवी के सामने जा कर बैठ जाता है और मुमु रसोई मे चली जाती है।)

सीन-5

(शाम को फिट्नेस सेन्टर पर)

मुमु: डौली, एलन कहाँ है। आज मै उस से मिलने आयी और वह नदारद्।

डौली: नहीं यार, वह यहीं पर कुछ क्लाइन्टस के साथ बिजी है। अभी उनसे फारिग हो कर आता है।

(एलन का आगमन।)

एलन: हाय्। मुमु तुम्हारा वजन वाकई में बड़ गया है। राजेश बता रहा था कि तुम इसके बारे मे बहुत चिन्तित हो। तुम कुछ दिनों के लिये हमारे वजन घटाने वाला प्रोग्राम मे शामिल हो जाओ और फिर उसका असर देखलो।

मुमु: एलन तुम ठीक कह रहे हो। लेकिन मुझे शर्म आती है। मैने तुम्हारे फिटनेस केन्द्र के बारे में बहुत अश्लील बाते सुनी है।

एलन: सुनी सुनाई बातें पर विश्वास नहीं करना चाहिये। हां, यहाँ पर कुछ खास बातों का ख्याल रखना पड़ता है, जैसे वस्त्र, क्रीडा, आसन, ईमोशन, इत्यादि।

डौली: सारी बातें यहीं पर करोगे क्या? तुम एक बार मुमु को फिट्नेस सेन्टर का चक्कर लगवा दो, मुझे विश्वास है कि मुमु को पसन्द आएगा। मुमु जाकर देख लो, अगर पसन्द आये तो जौइन कर लेना।

मुमु: हाँ एलन, यह ठीक रहेगा। मेरे साथ कौन चलेगा, एलन या डौली?

डौली: (कुछ आँखों मे शैतानी भर कर) अगर तुम्हें औरतें आर्कषित करती हैं तो मै चलती हूँ। (आखँ मारते हुए) पर अगर जवाँ मर्दों का शौक रखती हो तो एलन के साथ जाओ।

मुमु: (शर्माते हुए और झेंपती हुई) डौली जब से तुम एलन के साथ इस काम को शुरु किया है, तुम ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी है।

एलन: नहीं तुम गलत समझ रही हो। ट्रेनिंग का पहला नियम है कि क्लाइन्ट अपने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ सुखदायी एवं आरामदायक अवस्था मे हमेशा रहे। यह तभी संभव होगा जब पार्टनर क्लाइन्ट के मन मुताबिक हो।

मुमु: ठीक है। डौली, तुम क्या सलाह देती हो।

डौली: मुमु, मै तुम्हें पिछ्ले 12 साल से जानती हूँ, मैं तो चाहूँगी कि तुम एलन के साथ जाओ। तुम्हें मैने कभी भी दूसरी औरत में रुचि लेते नहीं देखा है।

एलन: (डौली को आँख मारते हुए) मेरे साथ का घूमने का फायदा है कि तुम अकेली नहीं ए ..क लन के साथ घूमती हुई दिखोगी।

मुमु: (शर्म से लाल होते हुए) तुम भी न, ऐसा साथ कौन औरत नहीं चाहेगी।

(सब खिलखिला के हँस पड़ते है। एलन मुमु को ले कर फिटनेस केन्द्र का चक्कर लगाने चला जाता है।)

एलन: मुमु यहाँ पर क्लाइन्ट अपने ट्रेनिंग पार्टनर का चुनाव खुद करता है। मेरे पास तुम्हारे लिये एक सुझाव है कि कोई पार्टनर फिक्स मत करना। तुम रोज एक नये पार्टनर के साथ Tट्रेनिंग करना। ऐसा करने मे तुम्हे रोज एक नयी तकनीक सीखने को मिलेगी।

मुमु: मैं तो तुम्हें अपना पार्टनर बनाने की सोच रही थी।

एलन: मैं तो हमेशा तुम्हारे लिये हाजिर हूँ। पर अभी नहीं, तुम्हें अभी यहाँ की दुनिया देखनी है। यहाँ पहली ट्रेनिंग की झलक मिलेगी। तुम भी करना चाहोगी तो मै इन्तजाम कर दूगाँ।

(सामने एक ह्र्ष्ट-पुष्ट युवक बड़ी उत्तेजक आसन मे एक अधेड़ औरत के साथ आसन लगाए हुए है। वह औरत एक महीन से कपड़े की ब्रा और पैन्टी में नग्न युवक की बाँहों में पीठ के बल झूलती हुई अपना निचला अंग को युवक के लिंग से धीरे-धीरे रगड़ती हुई दिखाई देती है। युवक भी झुलाते हुए आगे-पीछे होने की क्रिया मे लीन है।)

मुमु: छिः, यह यँहा पर क्या कर रहे है।

एलन: क्या तुम इसको एक ईलाज की दृष्टि से नहीं देख सकती। दोनों ट्रेनिंग भी कर रहें है और पूरा मजा भी ले रहे है। मेरा मानना है कि सिर्फ ट्रेनिंग करना ही काफ़ी नहीं, शरीर के पूरे विकास के लिये व्यक्ति की सारी भावनाएँ की संतुष्टी बेहद जरुरी है।

मुमु: परन्तु गैर मर्द और औरत एक दूसरे के साथ, यह क्या अच्छी बात है।

एलन: मुमु, क्या ठीक है और क्या नहीं, मै नहीं जानता और जानना भी नहीं चाहता। अगर किसी कार्य से मुझे असीम सुख की अनुभूति होती है मैं उस कार्य को ठीक मानता हूँ।

एलन: सेक्स एक जरुरत है, जैसे खाना, पानी, इत्यादि। तुम्हे अपने आप पर बहुत विश्वास है न्। क्या तुम मेरे साथ एक प्रयोग में भाग लोगी? मेरे लिये आधा-घंटा ही काफी है तुम्हें अपनी बात समझाने के लिए। तुम सिर्फ अपनी आँखें कुछ देर के लिये मींच लो। मैं तुम्हारे बिना हाथ लगाये, तुम्हें मजबूर कर दूँगा कि तुम अपनी सारी लाज त्याग कर मेरे साथ कुछ भी करने तैयार हो जाओगी।

मुमु: अगर तुम नहीं कर सके तो?

एलन: मै तुम्हारी आजीवन फीस माफ कर दूँगा और कहीं तुम हार गयीं तो जैसा मै कहूँ वैसा तुम करोगी। मंजूर?

मुमु: ठीक है, मंजूर।

एलन: तुम उस के जैसे ट्रेंनिग वाले लिबास में आ जाओ। सामने चेंजिग रूम है।

मुमु: यह तो तुम ने नहीं कहा था। मैं सिर्फ ब्रा और पैन्टी में तुम्हारे सामने, कभी नहीं।

एलन: क्यों डरती हो कि अपना आपा खो दोगी?

मुमु: नहीं तो। पर

एलन: पर क्या? मैने कहा है कि मै तुम्हें छूऊँगा भी नहीं। तो फिर किस बात का डर है।

मुमु: ....पर...

एलन: पर क्या, फिर से? प्लीज मेरा कहा मान लो, इसको सिर्फ एक साईंस का प्रयोग की तरह लो, बस्।

मुमु: (कुछ सोचते हुए) यहाँ के बजाय किसी और जगह पर नहीं कर सकते यह प्रयोग?

एलन: ठीक है। तुम चेंज करो, फिर एक दूसरे कमरे में चलते है।

(मुमु चेंजिग रूम में चली जाती है। एलन मोबाइल फोन पर राजेश से बात करता है)

एलन: यार, मछ्ली जाल में फँस गयी है। बस कुछ देर की बात है।

राजेश: थैंक्स यार्। तेरी फीस कल मैं खुद देने आऊँगा। चल रख, क्योकि मै टीना को चूमना सीखा रहा हूँ।

एलन: बेस्ट आफ लक्। बाय।

क्रमशः
Reply
07-12-2018, 12:34 PM,
#3
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--3

गतान्क से आगे..........

(मुमु शर्माते हुए चेंजिग रूम से निकलती है। एलन का मुहँ खुला रह जाता है। उसकी धमनियों मे रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। और उसकी एक खास जगह पर तो ऐसा मानो की रक्त की बाढ़ आ गयी है। मोहिनी मूरत लिए मुमु धीरे-धीरे एलन की ओर बढ़ती है। भारी वक्ष जो आधे से भी ज्यादा ब्रा के बाहर झाँकते हुए और हर पग पर और भी ज्यादा बाहर निकलने की कोशिश करते है। पूरी गोलाई लिये नितंब हर पग पर दिलों मे भूचाल मचाने की क्षमता रखते हुए एक सगीत्मय लय मे हिलते हुए। तीखे नयन नक्श जो कि अजन्ता की मूर्ति को भी मात देदे। झीनी सी ब्रा में से बादामी रंग का दस रुप्ये के सिक्के का आकार और उस पर उठी हूई घुन्डीयाँ जैसे चूमने को आमंत्रित करती हों। नीचे की ओर एलन की नजर टाईट पैन्टी पर पड़ी तो मुमु की बालोंरहित कटिप्रदेश साफ विद्यमान होती हुई। सब कुछ मिला कर जैसे कोई स्वर्ग से अप्सरा आज एलन के पास कामसूत्र के राज खोलने आई हो।)

मुमु: तुम्हें क्या हुआ?

एलन: दिल पर बिजली गिर गयी। मुमु मै सोच रहा हूँ कि अपने शब्द वापिस ले लू। तुम्हारे हुस्न के ढ्के हुए जलवे देख कर मेरी जुबान में ताला लग गया है।

मुमु: (इठ्लाती हुई) अब इतनी भी ढ्की नहीं हूँ। ठीक है, मेरी फीस माफ करो, पाँच लाख रुपये कम नहीं होते।

एलन: इस बेमिसाल हुस्न के लिये कोई गधा ही कीमत लगाने की कोशिश करेगा। पर अभी तो प्रयोग बाकी है। चलो दूसरे रूम में चलते हैं।

(यह कह्ते हुए, एलन मुमु की कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींचता है।)

मुमु: तुम भूल रहे हो, तुम मुझे छूओगे नहीं।

(एलन खिलखिला कर हँस देता है।)

एलन: तुम्हें छू कर देख रहा था कि कोई सपना तो नही देख रहा हूँ। तुम्हें सामने खड़े देख कर मै अपने आपे मे नही रहा। अच्छा चलो, दूसरे रूम में चलते हैं।

(दोनों साथ-साथ चलते हुए एक कमरे में आ जाते है। छोटा सा कमरा, परन्तु बहुत सुन्दर सजावट, साईड में करीने से एक बेड लगा हुआ और एक्स्र्साईज करने के लिये काफी जगह।)

मुमु: क्या बात है, (मुस्कुराती हुई) यहाँ सब कुछ काम का इन्तजाम है। पर कुछ करने की सोचना भी नहीं।

एलन: जब से तुम्हारे हुस्न का दीदार हुआ है, तब से तुम्हारे साथ सिर्फ एक काम करने की सोच रहा हूँ, पर तुम हो कि वार्निग ही दिए जा रही हो या फिर मुझे छिपे शब्दों मे आमन्त्रित कर रही हो। (मुमु धीरे से सिर हिलाती है।) खैर जो भी हो, अपनी आँखे मीच लो, या तुम कहो तो मै तुम्हारी आँखो पर पट्टी बाँध देता हूँ।

मुमु: हाँ, पट्टी ठीक रहेगी।

(एलन एक काली पट्टी मुमु की आँखों पर बाँध देता है। उसका हाथ पकड़ कर कमरे के बीचोंबीच ले जा कर खड़ा कर देता है। एक बार फिर से झीनी सी ब्रा के बाहर झाँकते हुए उरोजों को और बादामी रंग की उठी हूई घुन्डीयों को भूखी निगाहों से घूरता है। कुछ पल हुस्न का जाम पीने के बाद, नीचे की ओर रुख करता है। मैचिंग गुलाबी रंग की टाईट जालीदार पैन्टी मै बालोंरहित कटिप्रदेश की तरफ ध्यान केन्द्रित करता है। कुछ न होता पाकर मुमु खड़े-खड़े कसमसाती है। अचानक एलन अपना मुख अधखुली और फूली हुई योनि के बहुत नजदीक लेजा कर धीरे से फूँक मारता है। इस अप्रत्याशित हमले से मुमु चिहुँक उठती है और उत्तेजना से काँप उठती है। अब एलन लगातार धीरे-धीरे गर्म साँस छोड़ना शुरु करता है। सबसे पहले बालोंरहित कटिप्रदेश पर ध्यान केन्द्रित करता है, जैसे कि हवा से बंद फूल को खोलने की कोशिश कर रहा हो। धीमी रफ्तार से नंगी जांघों के अन्दरुनी भाग पर अपनी गर्म शव्सों को लगातार छोड़ते हुए फिर से उपर बालोंरहित कटिप्रदेश की ओर बढ़ता है। अपनी योनि पर लगातार गर्म साँसों का आघात से मुमु थोड़ा विचलित होने लगती है। एक अजीब सी सनसनाहट सारे शरीर में फैलना शुरु हो जाती है, और अपने शरीर को बस में रखने के लिये पंजो को निरन्तर सिकोड़ने लगती है।)

एलन: तुम्हारी तिजोरी के कपाट बिलकुल सील बंद दिख रहे है, दो बच्चों के बाद तो तिजोरी की दरार बहुत गहरी हो जाती है। क्या बात है राजेश के हथियार ने तिजोरी खोलना बंद कर दिया है।

(ऐसी अश्लील बातें मुमु की परेशानी और बढ़ा रहीं है। बार-बार एलन की साँसों का आघात कभी ज़ाँघो के अन्द्रुनी हिस्सों पर और कभी जंघाओं के बीचोंबीच मुमु को विचलित किये जा रहीं हैं। बहुत दिनों से मुमु की दबी हुई भावनाओं में आज उफान आने लगा है। एलन बीच में सब कुछ छोड़ कर अब खड़ा हो गया। अबकी बार उसने मुमु के दाएँ कान के पीछे से अपना कार्य शुरु किया और धीरे-धीरे चेहरे के पास आ कर पंखुडी से होठों पर लगातार प्रहार करना आरंभ कर दिया। थोड़ा रुक कर, फिर गले से होता हुआ दो हसीन पहाड़ियॉ के बीचोंबीच बनी खाई पर आ कर रुक गया। अबकी बार एलन के निशाने पर झीनी गुलाबी ब्रा में उठी हूई घुन्डीयाँ थी और अपनी गर्म साँसें से उन पर आघात करना आरंभ कर दिया। इधर मुमु भी उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँचने को हो रही है, कभी गुदगुदी का एहसास, कभी शरीर मे सिहरन, कभी अनजानी राह की अनिश्चितता, और इन सब में धीमी आँच मे जलता हुआ तन। बार-बार मुमु के अर्धनग्न जिस्म् पर गर्म-गर्म साँसों का प्रहार एक तूफान आने का संकेत दे रहा है।)

मुमु: .उ.अ..आह.अ.उउआ.आह.ए...ल...लन..हा..लन..लन

एलन: चाहिए क्या…इस वक्त तुम्हारी…तिजोरी…को एक सख्त हथौड़े की जरुरत है। क्या चाहिए हथौड़ा?

(एलन एक बार फिर से नीचे बैठ कर कटिप्रदेश पर ध्यान केन्द्रित करता है।)

एलन: मुमु....क्या......कुछ हुआ....क्या? (खुशी से चिल्लाते हुए) तुम्हारी मचलती कली ने बाहर झाकँना शुरु कर दिया है। अर....रे.. उस पर तो ओस की बूदं भी आ गयी है। (मुमु कुछ कहती, इससे पहले एलन झट से अपनी जुबान से कली के ऊपर पड़ी बूंद को चाट जाता है।)

मुमु: अ..आह....लन....लन..लन। (एलन का सिर पकड़ कर जबरदस्ती योनिमुख पर रख देती है)

(एलन की जुबान हरकत में आ जाती है। अपनी दोनों उँगलियों से योनिमुख को खोलता है और उसमें से झाँकती कली पर टूट पड़ता है। बेहाल मुमु सिर्फ पागलों की तरह झूमती हुई अवाजे निकालती है। एक कँपकँपी के साथ ढेर हो कर बैठ जाती है। उत्तेजना से काँपते हुए एलन से लिपट जाती है।)

एलन: मुमु…मुमु… सिर्फ अभी बाईस मिनट हुए है। आठ मिनट और बचे हुए है। अगर तुम कहो तो अपने हथौड़े का प्रयोग करुँ…?

(धीरे से मुमु होश मे आती है और अपनी साँसों को काबू करती हुई एलन से अलग हो जाती है। चेहरे पर शर्म की लालिमा और झुकी आँखे लिये, मुमु आत्मग्लानि महसूस करती है और एलन से लिपट जाती है। एलन प्यार से मुमु की पीठ सहलाता हुआ उसके होंठों को अपने होंठों के कब्जे मे ले लेता है। अब मुमु ने भी अपने सारे हथियार डाल कर एलन का साथ देना आरंभ कर देती है। एलन किसी शातिर खिलाड़ी की तरह होठों को चूमते, चूसते और काट्ते हुए धीरे से मुमु को निवस्त्र कर बेड पर लिटा देता है। मुमु को वासना की आग मे तड़पती हुई छोड़ कर धीरे-धीरे अपने को निवस्त्र करता है।)

मुमु: आह.ए...ल...लन अब और न तड़पाओ, मेरे शरीर में आग लगी हुई है जल्दी से इसे बुझाओ।

एलन: अब जो मै कहूँगा, तुम वही करोगी तो मै तुम्हें जन्नत की सैर कराऊँगा वर्ना इतना ही काफी है। मै तुम्हें और गलत काम के लिए नहीं उकसाऊँगा।

मुमु: मै तुम्हारी बात समझ गयी…बस और न तड़पाओ। आगे से तुम जो भी कहोगे मै मानूँगी।

एलन: प्रामिस्।

मुमु: हाँ गोड प्रामिस्।

(एलन का इतना सुनना था कि वह मुमु पर टूट पड़ा। अपना ढाई इंची गौलाई और नौ इंची लम्बे फनफनाते हथियार को मुमु के योनिमुख पर लगा कर धीरे से अन्दर सरका दिया। एलन का एक हाथ गोरी पहाड़ियों को रोंदने में मस्त है, और उसका मुख पहाड़ियों की गुलाबी बुर्जीयों को लाल किये जा रहा है। नीचे अन्दर सरकता हुआ हथियार मुमु को मीठे दर्द का एहसास करा रहा है। एलन थोड़ा रुक कर अचानक एक जोर का धक्का मारता है और उसका हथियार लबालब पूरा अन्दर तक धँस जाता है।)

मुमु: (दर्द से बिलबिला कर)….उ.अ..आह.मर.र…गई… उई माँ…ए...ल...लन....लन..…(एलन जल्दी से अपने मुख से मुमु का मुख ढक कर उसकी चीख दबा देता है। मुमु कुछ क्षणों के लिए शिथिलता से एलन के नीचे दबी पड़ी रहती है।)

एलन: मुमु…क्या हुआ? बस अब कुछ नहीं बाहर है।

मुमु: तुम्हारे काले अजगर ने मुझे बीच में चीर दिया। अपनी जगह बनाने की जल्दी मे इसने मेरी जान ही निकाल दी।

एलन: अब कैसा लग रहा है। आगे का रास्ता अब सिर्फ प्यार और मजे का रह गया है।

(अब दोनों बेल की तरह एक दूसरे के साथ लिपटे पड़े हुए हैं। एलन अपने आप को थोड़ा सा पीछे खीच कर फिर से एक करारा धक्का देता है। मुमु के मुख से संतुष्टि से भरी सिसकारी निकल जाती है। एलन का एक हाथ एक बार फिर से गोरी पहाड़ियों के मर्दन में और उसका मुख गुलाबी बुर्जीयों को लाल करने में वयस्त हो जाते है। दूसरा हाथ धीरे से मुमु के नितंबों पर बेखट्क कुछ ढूंढने के लिए विचरने लगता है। इधर एलन बिना रुके अपने हथियार से शाट पर शाट लगाये जा रहा है और मुमु भी उचक-उचक कर हर शाट का जवाब शाट से दे रही है। मुमु की सिसकारीयाँ और एलन की गहरी साँसों ने कमरे का वातावरण बहुत उत्तेजक बना दिया है। इस आपाधापी मे एलन की उंगली मुमु के सूरजमुखी आकार के पिछ्ले छिद्र पर आ टिकती है। धीरे से एलन अपनी उँगली को मुमु के पिघलते लावे मे निहला कर छिद्र पर फिराता है। मुमु इन बातों से अनभिज्ञ, मिलन की चरम सीमा पर पहुँचने के लिए व्याकुल हो उठी तो एलन धीरे से अपनी उंगली को छिद्र पर रख कर दबाव बढ़ाता है। मुमु की बायीं बुर्जी को चूसता हुआ काट लेता है और पूरी ताकत से उँगली को सूरजमुखी आकार के छिद्र मे प्रविष्ट कर देता है। इस अप्रत्याशित तीन तरफे हमले से मुमु कि योनि झरझरा कर बरस पड़ती है और कुछ पलों की देर से एलन का हथियार भी अपने लावे को उगल कर मुमु की आग को शान्त कर देता है। दोनों एक दूसरे को बाहों मे कसे निढाल पड़ जाते है।)

एलन: (अपने को अलग करते हुए) मुमु क्या एक और पारी खेलनी है?

मुमु: एक ही पारी मे तुमने मेरी यह हालत कर दी कि अब उठने की भी हिम्मत नहीं है। क्या टाइम होगा। मुझे तो लगता है कि अब मै चल भी नहीं पाउंगी।

एलन: (हड़बड़ाहट में) अरे हमें गुथे हुए एक घंटा हो गया। डौली हमारा इन्तजार कर रही होगी। चलो चलते हैं।

मुमु: (एलन के लिंग को सहलाते हुए) डौली बहुत लकी है।

एलन: इसको मत छेड़ो, अगर उठ बैठा तो तुम आज कहीं जाने के लायक नहीं रहोगी।

(दोनों अपने कपड़े पहनते है और रिसेप्शन की ओर बढ़ते है जहाँ डौली किसी नवयुवक से हँसते हुए बात कर रही है।)

डौली: अरे मुमु तुम्हें क्या हुआ? तुम्हारे चेहरे पर यह लालिमा कैसी? तुम्हारा चेहरा दीप्तीमान हो गया है।

मुमु: (झेंपती हुई) तुम्हारे मियाँजी की करतूत है। मुझे ट्रेंनिग करवा रहे थे।

डौली: फिर क्या सोचा। तुम्हें अभी एनरोल करूँ या बाद में?

मुमु: बिलकुल, अभी करो।

डौली: मै जानती थी, मैने सारा पेपर-वर्क करके रखा हुआ है, बस तुम यहाँ साइन कर दो। (आँख मारते हुए) जिस किसी के पीछे मै एलन को लगाती हूँ मजाल है कि वह न कर दे।

(मुमु भिन्न-भिन्न पेपरों पर साइन कर देती है और एलन और डौली के साथ बाहर आती है।)

डौली: मुमु, तुम ने तो अपना पार्टनर तो चुना नहीं।

मुमु: मै तो एलन के साथ ट्रेंनिग करने की सोच रही थी।

एलन: मुमु, मैनें तुम्हें बताया था कि तुम रोज एक नया पार्टनर चुनना, इस तरह तुम नये-नये तरीके सीख पाओगी। जब समय हो तो कभी-कभी तुम मेरे साथ भी ट्रेंनिग कर लेना।

डौली: हाँ, यह भी ठीक रहेगा। मैं भी इसी तरीके को प्रिफर करती हूँ।

एलन: डौली, तुम कल मुमु के घर चले जाना और ट्रेंनिग-कासट्यूम के नाप ले आना।

डौली: ठीक है। मुमु मै कल लंच टाइम में तुम्हारे घर नाप लेने आउँगी।

मुमु: ओके।

(मुमु अपनी कार में बैठ कर घर की ओर रवाना हो जाती है।)

डौली: तुमने तो कमाल कर दिया। एक घंटे में इस पंछी को शीशे मे उतार लिया।

एलन: दोस्ती में क्या-क्या करना पड़ता है।

डौली: रहने दो। बिकनी में देख कर तो तुम्हारे मुँह से लार टपक रही थी। वैसे शरीर से काफी अच्छी है। राजेश बहुत लकी है, जब घर में ऐसा खजाना छुपा हो तो बाहर की ओर रुख करना मुश्किल है।

एलन: आज अपने छोटे भाई से मिलवा दिया तो देखो कैसी चेहरे पर चमक आ गयी। पहिले तो मुमु मुझसे कटी-कटी रहती थी।

(दोनों खिलखिला कर हँस पड़ते है और आफिस में चले जाते है।)

सीन-6

(शाम का समय, राजेश का ड्राइंगरूम। अभी कुछ देर हुई है मुमु को फिटनेस सेन्टर गये हुए।)

राजेश: (टीना को आवाज लगाता है) टीना बेटे उठ जाओ। शाम हो गयी है… रात को फिर नींद नहीं आएगी।

(राजेश आवाज लगा कर सोफे पर लेट कर नावल पढ़ने लगता है। सुबह और दोपहर की धींगामस्ती से थक कर टीना अपने कमरे मे सो रही है। समय निकलता जा रहा है और राजेश बीच-बीच में घड़ी को देख कर झुँझलाता है। मुमु एक घंटे की कह कर गयी है, पर वह जानता है कि एलन और डौली इतनी जल्दी मुमु को नहीं छोड़ेगें। राजेश एक बार फिर से स्टेअरस के पास खड़े हो के आवाज लगाता है।)

राजेश: शाम हो गयी है, टीना बेटे उठ जाओ।

टीना: (उनीदीं आवाज में) मैं उठ गयी हूँ पापा। हाथ-मुहँ धो कर अभी थोड़ी देर मे नीचे आती हूँ।

राजेश: ठीक है। मै चाय बनाने जा रहा हूँ, जल्दी से नीचे आ जाओ। क्या तुम्हारे लिये कुछ खाने के लिये भी बना दूँ। दोपहर मे भी तुम ने कुछ नहीं खाया था।

(बोलते हुए राजेश रसोई की तरफ रुख करता है। मोबाइल फोन की घंटी बजती है। एलन का फोन है, राजेश बात करता है)

टीना: (नीचे आ कर, अलसायी सी आवाज मे) पापा, मै आपकी कोई मदद करूँ?

राजेश: न बेटा, चाय तो बन गयी है। मै अभी ले कर आता हूँ।

(टीना अपने पारदर्शी नाइट-गाउन मे धम से सोफ़े पर पसर जाती है। नादान टीना अपनी नग्नता से अनभिज्ञ आँखे मूंद कर लेटी हुई है। राजेश ट्रे मे चाय ले कर आता है कि उसकी नजर केले सी चिकनी व गोरी टांगे, मासंल जांघों तक की नग्नता, पर पड़ती है। सीने पर कसाव के कारण, सीने की गुलाबी गगनचुम्बिँया साफ विद्यमान हो रही है। ऐसा उत्तेजक द्र्श्य किसी को भी पागल करने की क्षमता रखता है।)

राजेश: (हिचकिचाते हुए) उठो बेटा, चाय पी लो।

(टीना अलसायी सी मुद्रा लिये उठ कर बैठ जाती है। राजेश उसके समीप बैठ जाता है। दोनों चुपचाप कुछ सोचते हुए धीरे-धीरे गर्म चाय की चुस्की लेते है। राजेश का दिमाग आगे की गुत्थी सुलझाने मे लगा हुआ है। टीना के होठों का जायका लेकर अन्दर का शैतान तो अब पुरा रास्ता तय करने का मन बना चुका है। और इधर टीना सुबह और दोपहर के घटनाक्रमों में उलझी हुई है। बार-बार उन घटनाओं की याद कर उसके शरीर के अंग-अंग में अजीब सा कसाव उत्पन्न हो जाता है।)

टीना: पापा…

राजेश: हूँ…

टीना: आपने एलन अंकल के यहाँ मेरी ट्रेंनिग के बारे में कुछ सोचा है?

राजेश: वही सोच रहा हूँ। अगर तुम वहाँ पर गयीं और तुम्हारी मम्मी को पता लग गया तो आफत आ जाएगी।

टीना: मै जानती हूँ। पर आप एलन अंकल से बात क्यों नहीं कर लेते?

राजेश: (टीना की जांघ पर थपथपता हुए) मैं उस से कल बात करुँगा। अभी तो तुम्हारी मम्मी वहाँ पर होंगी।

(फिर कुछ देर के लिये चुपचाप बैठ जाते है। राजेश का हाथ अभी भी टीना की नग्न जांघ पर रखा हुआ है। वह बड़ी सहजता से हल्के हाथ से जांघ को सहलाता है जैसे कि वह कुछ सोच रहा है और इधर टीना के शरीर में चीटीयाँ सी दौड़ने लगती है। सहलाने का दायरा बड़ाते हुए राजेश चुप्पी तोड़ता है।)

राजेश: बेटा, तुम कुछ सोच रही हो। क्या बात है?

टीना: (झेंपती हुई) नहीं पापा, (राजेश के उपर खिसकते हाथ को पकड़ते हुए) कोई खास बात नहीं। आपके छूने से मुझे कुछ हो जाता है।

राजेश: (धीरे से हाथ छुड़ाते हुए) क्या हो जाता है? तुम्हें अच्छा नहीं लगता है, क्या (थोड़ी सी चेहरे पर मायूसी लाते हुए)?

टीना: नहीं, ऐसी बात नहीं है। (भोलेपन से) मुझे लगता है कि मेरे शरीर मे आपके छूने से टाक्सिन बनने लगते है।

राजेश: यह तो अच्छा है। इसका मतलब है कि तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो। कोई जब किसी से बहुत प्यार करता है, तो उस व्यक्ति के छूने मात्र से शरीर में टाक्सिन बनने लगता है। ऐसा लगता है कि शरीर में चीटीयाँ सी दौड़ने लगी, आँखों में एक नशा सा छा गया, सारे बदन के अंगो में अजीब सा कसाव आ जाता है।

टीना: हाँ पापा ऐसा ही कुछ होता है। (खुशी में राजेश से लिपट जाती और उसके गाल चूम लेती है)।

राजेश: न ऐसे नहीं बेटा, मैने तुम्हें प्यार से चूमना दोपहर को बताया था। अब जब तुम्हारी मम्मी नहीं है, क्यों न तुम थोड़ा प्रेक्टिस कर लो। आखिर कल तुम्हारी शादी होगी, वहाँ पर कौन सिखाएगा।

टीना: अभी? (शर्माते हुए) ठीक है।

राजेश: बेटा अबकी बार हम बैठ कर किस करते है। तुम मेरी छोटी सी गुड़िया हो, गोदी में बैठ जाओ। हम एक दूसरे के नजदीक भी होंगें और थकान भी नहीं होगी।

(टीना उठ कर राजेश की गोदी में धम से बैठ जाती है। राजेश धीरे से टीना की कमर को पकड़ कर आमने-सामने पोजीशन मे अपने जांघों पर बिठाता है, टीना की चिकनी व गोरी टांगों को पकड़ कर अलग करते हुए अपने पाँवों के दोंनों ओर लटका देता है। पारदर्शी नाइट-गौन उपर खिसक कर मासंल जांघों तक नग्न कर देती हैं और सीने की गुलाबी गगनचुम्बिँया राजेश की आँखों के सामने विद्यमान हो उठीं हैं। अपनी नग्नता से अनभिज्ञ टीना ग़रदन झुकाये राजेश के पाजामे मे सिर उठाये लिंग को हैरत से देख रही है।)

राजेश: टीना (कमर से पकड़ कर खींचते हुए) नजदीक आओ।

(टीना सरक कर आगे हुई तो अपनी कोमल योनिमुख पर अनजानी कठोर चीज की ठोकर महसूस करती है। उसकी नारंगी जैसे सख्त उरोज राजेश की छाती से जा टकराते है।)

राजेश: (टीना को अपने बाहुपाश में भर कर) हाँ, अब ठीक है। टीना, तुम दुबारा से शुरु करो।

(टीना शर्माती हुई अपने होठों के बीच राजेश के निचले होंठ को ले कर धीरे से चूसते हुए आँखे मूंद लेती है। अपनी जुबान के अग्र भाग को राजेश के उपरी होंठ पर फिराती है। उत्तेजना में राजेश अपनी बालिष्ठ बाहों मे कसमसाती हुई टीना के उन्नत स्तनों को पीस देता है। नीचे पाजामे में से राजेश का लिंग कठोरता धारण कर बार-बार टीना की योनिमुख पर दस्तक देनी शुरु कर देता है।)

क्रमशः
Reply
07-12-2018, 12:34 PM,
#4
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--4

गतान्क से आगे..........

राजेश: टीना बेटे, क्या टाक्सिन बनने शुरु हुए…।

टीना: हुं…हूँ…हाँ पा…पा।

(अब टीना के होंठों को कब्जे मे ले कर, राजेश अपनी जुबान से कोमल पंखुडी से होठों की कोमलता का लुत्फ लेता है। धीरे से अपनी जुबान से टीना के मुख का जायज़ा लेता हुआ, टीना की कैंची सी चलने वाली जुबान के साथ लुकाछिपि खेलना शुरु कर देता है। टीना के लिये इस तरह की मौखिक-क्रीड़ा करने का पहला अवसर है। उत्तेजित टीना की आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। अजीब कश्मकश में मासूम टीना के स्तनों की घुन्डियों मे एक बार फिर से करन्ट प्रावाहित होना शुरु हो जाता है। नीचे लिंगदेव अपनी पूरी मस्ती में जांघिये से ढकी योनि पर रगड़ मारना शुरु कर देते हैं।)

टीना: .उ.अ.पा.आह….पा…अ.उउआ.आह.…पापा…

राजेश: (और थोड़ा सा जकड़ते हुए) टाक्सिन बन रहे है, है न्…

(एक बार फिर से चुम्बनों की बारिश, योनीमुख पर लगातार पड़ती ठोकर और बार-बार पिसते हुए स्तन, उत्तेजित टीना को बरसने के लिए मजबूर कर देते है। एक ही क्षण में टीना का बदन काँपते हुए झटके लेता है और फिर निढाल पड़ जाता है। उत्तेजना का मारा राजेश सब कुछ समझते हुए प्यार से लिपटी हुई टीना को धीरे से अलग करता है और गोदी मे उठा कर सोफे पर लिटा देता है।)

राजेश: टीना, तुम थोड़ा आराम कर लो। तुम्हारे शरीर में मेरे प्यार के कारण काफी टाक्सिन बन गये थे और अच्छा है कि बाहर निकल गये। मै तुम्हारे लिए गर्म दूध का गिलास ले कर आता हूँ। बहुत फायदा करेगा।

टीना: नहीं पापा। मुझे नहीं…(अचानक टीना की नजर पाजामे मे तन्नाये लिंगदेव पर पड़ती है और झेंप जाती है।)

राजेश: क्या हुआ? (जान कर भी अनजान बनते हुए)

टीनाआँखे झुकाए) कुछ नहीं। आप मुझसे बहुत प्यार करते है।

राजेश: क्यों पूछ रही हो?

टीना: नहीं, मै बता रहीं हूँ।

राजेश: थैंक्यू बेटा। तुम मेरी सबसे प्यारी बेटी हो।

टीना: मम्मी आने वाली होंगीं। (उठते हुए) मै अपने कमरे मे कपड़े बदलने जा रही हूँ।

राजेश: ठीक है। मैं मार्किट से सब्जी ले कर आता हूँ, तुम दरवाजा बन्द कर लो। अन्दर आने के लिये मेरे पास चाबी है।

(राजेश के जाने के बाद टीना दरवाजा बन्द कर के अपने कमरे मे जाती है। कमरा बन्द कर के गुनगुनाते हुए अपने कपड़े उतारती है। जमीन पर पड़ी अपनी पैन्टी को गीली देख कर उठाती है और छू कर देखती है कि पेशाब तो नहीं है। पर पैन्टी के उपर लगी तरलता में कुछ चिपचिपापन महसूस करती है। हैरानी में सूंघ कर देखती है और कुछ ज्ञात न होने पर धोने के लिये डाल देती है। शावर को चला कर नीचे खड़ी हो कर स्नान करती है। घंटी बजती है)

टीना: आ…ती हुँ।

(दरवाजा खुलने की आवाज आती है। फिर राजेश और मुमु की आवाजें सुनाई देती है।)

राजेश: आज बहुत थकी हुई लग रही हो?

मुमु: हाँ, एलन के साथ जरा सी ट्रेनिंग की थी। आदत नहीं है तो थकान हो गयी है।

राजेश: आज बाहर से खाना मँगवा लेते है। जल्दी सो जाना तो आराम आ जाएगा।

मुमु: हाँ, यही ठीक रहेगा।

राजेश: पसंद आया। क्या सोचा?

मुमु: बहुत अच्छा है। मैनें तो एनरोल करा लिया है। कल डौली कासट्यूम का नाप लेने आएगी।

राजेश: चलो अच्छा है। अगले हफ्ते से तुम्हारी ट्रेनिंग शुरु हो जाएगी।

मुमु: पर तुम्हें उस टाईम पर यहाँ टीना के पास होना पड़ेगा क्योंकि उसे घर पर अकेला नहीं छोड़ा जा सकता है।

राजेश: तुम उसकी चिन्ता छोड़ दो। हम बाप-बेटी यहाँ पर ऐश करेगें।

(दोनों अपने-अपने काम में लग जाते है।)

सीन-7

(दोपहर का समय, मुमु ड्राइंगरूम में बैठी हुई है। डौली के आने का इंतजार कर रही है। अभी कुछ देर हुई है खाना खा कर टीना अपने बेडरूम में सोने चली गयी है। घंटी बजती है, मुमु उठ कर दरवाजा खोलती है। डौली का आगमन्।)

डौली: हाय मुमु। आज बड़ी रौनक है चेहरे पर, क्या बात है?

मुमु: हैलो। सब तुम्हारे फिट्नेस केन्द्र की कृपा है। एक ही दिन मे शरीर में हल्कापन आ गया। आओ बैठो।

डौली: (सोफे पर बैठ कर) बहुत अच्छे। आज जरा जल्दी में हूँ फिर कभी आराम से बैठ कर गप्पें मारेंगे। लीना और टीना कहाँ है? काफी दिन हुए उन्हें देखे।

मुमु: तुम तो बिजनस-वुमन हो गयी हो इस लिए हमेशा जल्दी मे ही रहती हो। जरीन की किट्टी पार्टी में भी तुम आयीं और गयी जैसे ही थी। लीना अपने स्कूल के ट्रिप पर काश्मीर गई हुई है और टीना खाना खा कर सोने गई है।

डौली: मुमु सेन्टर पर कोई नहीं है। कुछ मेम्बर्स को ट्रेनिंग करते छोड़ कर आ रहीं हूँ और तुम ने तो देखा है की हमेशा कोई न कोई आता-जाता रहता है। चलो यार, बातें करते हुए तुम्हारा नाप भी ले लेते हैं।

मुमु: कहाँ पर चलें, यहीं पर या बेड-रूम में?

डौली: जहाँ पर तुम्हें ठीक लगे क्योंकि तुम्हें बिलकुल निर्वस्त्र होना पड़ेगा। बेडरूम ही ठीक रहेगा।

(मुमु और डौली मास्टर बेडरूम की ओर जातें है। बेडरूम की भव्यता को देखकर डौली के मुख से सीटी निकल जाती है। विशाल बेड, बारह इचं का डनलप का गद्दा, मुलायम फ़्लोर कार्पेट, आलीशान वार्डरोब, फुलसाईज मिरर की ड्रेसिंग टेबल, बेड के ठीक सामने की दीवार पर फुल वाल-मिरर और अत्यन्त माड्रन सुख सुविधा चीजों से सुसज्जित, बेडरूम न लग कर एक अरब के शैख का हरम लग रहा है।)

डौली: क्या… बात है, तुम और राजेश तो इस कमरे का उप्युक्त लाभ उठाते होंगें।

मुमु: राजेश को तुम अच्छी तरह जानती हो। कभी-कभी तो जैसे कमरे मे भूकंप आ जाता है। मेरी तो कुछ सुनते ही नहीं। रात-रात भर में पूरा शरीर तोड़-मरोड़ कर रख देते है।

डौली: यार तू तो बड़ी लकी है कि तेरा आदमी अभी भी तेरे उपर मुग्ध है। आजकल ऐसे मर्द कहाँ मिलते है, दो बच्चों के बाद तो जैसे सारी जवानी काफुर हो जाती है और बीवी तो बस घर की गाय बन कर रह जाती है।

मुमु: मैं तो रोकती रह जाती हूँ कि दो जवान बेटियाँ है कुछ तो शर्म करो, पर उन पर तो जैसे हमेशा कोई वासना का जुनून हावी रहता है।

डौली: तुम तो… खैर आज मै जल्दी मे हूँ। नाप लेने के लिये तुम्हें कपड़े उतारने पड़ेंगें।

(मुमु अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार कर एक तरफ रखती है। डौली ललचायी निगाहों से काली जालीदार ब्रा में से बाहर झाँकते गोरे पुष्ट उरोज, नितंबों की गोलाईयाँ और पैन्टी में बालोंरहित योनि को घूरती है।)

मुमु: अब नाप ले लो।

डौली: (मुमु की दायें वक्ष को अपने हाथ में ले कर ब्रा को खींचते हुए) इस को कौन उतारेगा? चलो मै तुम्हारी मदद कर देती हूँ।

(धीरे से डौली फ्रंट ओपेनिंग ब्रा का हुक खोल देती है। दोनों पुष्ट गोल वक्ष नग्न हो कर डौली के सामने उदित हो गये, मुहँ चिड़ाती बादामी रंग की उठी हूई घुन्डीयों चुमने और चूसने को आमन्त्रित करने लगीं। डौली पैन्टी के दोनों साइड के इलास्टिक मे अपनी उँगलियॉ फँसा कर नीचे की ओर खींचती है। पैन्टी जैसे किसी केले के छिलके की तरह नीचे उतरती जाती है। उत्तेजना में एसी कि ठंढक के बावजूद भी कुछ पसीने की बूँद डौली के माथे पर उभर आयीं।)

डौली: हाँ, अब ठीक है।

(अपने पर्स में से नापने की टेप निकाल कर सारे साईज लिख कर नोट करती है। कभी-कभी धीरे से मुमु के उरोजों को हाथ मे लेकर सहलाती है और कभी सिर उठाए बादामी बुर्जीयों को अपनी दो उंगलियों के बीच में ले कर तरेड़ती है। मुमु को भी अब इस नपाई करने के तरीके में मजा आने लगता है। डौली नीचे झुक कर पैरों की लंबाई और जाँघों की चौड़ाई नापती हुई अपनी उँगलियों को मुमु के योनिमुख पर फिराती है और चिपके हुए होठों को खोल कर गहरे बादामी रंग के बीज को घिसती है। एक सिसकारी भरती हुई मुमु पीछे की ओर हठ जाती है।)

मुमु: क्या कर रही हो……?

डौली: छुपे हुए खजाने को देख कर मै रोक नहीं पायी। अगर मेरे पास थोड़ा और समय होता तो तुम्हारा रेप आज निशचित था।

मुमु: (हसँती हुई) क्या आज तक किसी औरत ने किसी औरत का रेप किया है।

डौलीहसँती हुई) अभी तुम इस मामले में बहुत नादान हो। अब तो हफ्ते में तीन दिन मिला करेंगें, कभी किसी दिन औरत को ट्रेनिंग पार्टनर ले लेना। ऐसी हसीन चीज को शायद ही कोई बिना तृप्त किये छोड़ेगा।

मुमु: (मुस्कुरा कर) छोड़ो भी, नाप ले लिया?… एक बात बताओ कि नाप की ऐसी क्या जरूरत है, मैं अपने कपड़े पहन कर ट्रेनिंग नहीं कर सकती।

डौली: हाँ, नाप तो हो गया। ट्रेनिंग के लिये विशेष कपड़ों की जरूरत होती है। कुछ अंगों को कसाव (आँख मारते हुए) और कुछ अंगों को ढीलापन चाहिए, यह कोस्ट्यूम इन सबका ख्याल रखता है।

मुमु: यार, तुम्हें तो हर चीज में शैतानी ही सूझती है। यह कपड़े कब तक तैयार हो जाएँगें?

डौली: दो दिन में, पर तुम चाहो तो मेरे साथ कल से ट्रेनिंग कर सकती हो…(कुछ मुस्कुराते हुए) क्योंकि मैं बिना कपड़ों के एक्स्र्साईज करती हूँ।

मुमु: (अपने कपड़े पहनते हुए हँसती है) एलन की संगत में तुम बहुत बेशर्म हो गयी हो।

(दोनों बेडरूम से बाहर आ जाती है। उपर से टीना सीड़ीयों से नीचे उतरती हुई दिखती है।)

डौली: हैलो टीना। कैसी हो?

टीना: हाय आन्टी। फाईन, आप कब आई?

डौली: थोड़ी देर हो गयी, तुम्हारी मम्मी के कोस्ट्यूम के लिये नाप लेने आयी थी।

टीना: क्यों मम्मी आपको फिट्नेस सेन्टर की मेम्बरशिप मिल गयी? यह तो कमाल हो गया। आंटी मेरे को भी आपका सेन्टर जौइन करना है। स्वीटी कैसी है, वह भी तो वहाँ जाती होगी?

डौली: नहीं बेटा, स्वीटी तो अपने घर पर ही ट्रेनिंग करती है। मुमु, अपनी बेटी को बुरी नजर से बचाना, बहुत जल्दी जवान हो गयी है। अपने उठान पर है और सुन्दर भी होती जा रही है। राजेश से कहो की टीना के लिये टाईम निकालना शुरू कर दे नहीं तो इसका बचपना नहीं जाएगा।

मुमु: यही तो मै भी कहती हूँ पर वो है कि बिजनिस मे हरदम उलझे रहते हैं। लेकिन अबकी बार मैनें उनसे वादा लिया है कि जब मैं फिट्नेस सेन्टर जाऊँगी तो वह घर पर टीना का ख्याल रखेंगें।

डौली: अच्छा यार मै चलती हूँ, बहुत देर हो गयी है। परसों से ट्रेनिंग शुरू करना। फिट्नेस सेन्टर पर ऐसे ही आ जाना, अपना कोस्ट्यूम भी ट्राई कर लेना और एक्स्र्साईज भी शुरू कर देना।

मुमु: ठीक है, परसों से मेरी ट्रेनिंग शुरु। (दरवाजे पर आ कर) बाय-बाय्।

टीना: बाय आन्टी।

डौली: बाय-बाय्।

(माँ और बेटी एक दूसरे को देखती है और अपने-अपने काम मे लग जाती हैं। मुमु रसोई में चली जाती है और टीना टीवी देखने मे मग्न हो जाती है।)

सीन-8

(शाम का समय, राजेश और मुमु ड्राइंगरूम में बैठे हुए टीना के आने का इंतजार कर रहे हैं। टीना पड़ोस के शर्माजी की लड़की करीना के साथ खेलने गयी हुई है। घंटी बजती है, मुमु उठ कर दरवाजा खोलती है। करीना और टीना का आगमन्।)

करीना: हैलो आंटी, हैलो अंकल्।

मुमु और राजेश: (दोनों एक स्वर मे) हैलो बेटा।

राजेश: शर्माजी कैसे है।

करीना: ठीक हैं अंकल, पापा तो टूर पर बाहर गये हुए है। आंटी मुझे पता चला है कि आप परसों से फिट्नेस सेन्टर जाना शुरू कर रहीं है?

मुमु: हाँ बेटा, वजन बढ़ता जा रहा है। थोड़ी एक्स्र्साईज शुरू कर देनी चाहिए।

टीना: मै भी जौइन करना चाहती थी, पर मम्मी है कि मानती नही।

मुमु: (थोड़ी कड़ी आवाज में) अब इस टापिक पर ‘नो डिसकशन’। डौली ने भी तो स्वीटी के बारे मे बताया था।

करीना: (मुमु और टीना की तकरार सुन कर) आंटी मै टीना को छोड़ने आयी थी, अच्छा मै चलती हूँ।

टीना: मम्मी मैं गेट तक करीना को छोड़ कर आती हूँ।

राजेश: फिर बेटा तुम टीना को गेट पर छोड़ने आ जाना। रात भर यही कार्यक्रम चलता रहेगा। इस बार मै करीना को छोड़ कर आता हूँ जिस से इस बेचारी को दुबारा तकलीफ नहीं करनी पड़ेगी। (टीना मुँह बनाती है)

राजेश: मुमु तुम खाना लगाओ मै करीना को छोड़ कर आता हूँ।

(राजेश खड़ा हो कर करीना के साथ घर के बाहर जाता है। रास्ते में अपनी पैनी निगाहों से करीना को निहारता है। करीना भी टीना की हम-उम्र परन्तु कद-काठी से ज्यादा विकसित, गोल चेहरा, हल्का गेहुआँ रंग, तीखे नैन-नक्श, भारी सीना और नितंब, बेबाक और चंचल, हर तरह से एक आकर्षक व्यक्तित्व। ब्रा न होने के कारण, हर पग पर हिचकोले लेते हुए वक्ष और टाईट जींन्स में एक लय में हिलते हुए नितंब, राजेश के दिल पर बिजली गिरा रहे थे।)

राजेश: और बेटा छुट्टियओं मे क्या चल रहा है। सिर्फ खेल-कूद या थोड़ी पढ़ाई भी कर रही हो?

करीना: अंकल मैने साईँस की कोचिंग क्लास जौइन करी हुई है।

(बात करने में करीना का ध्यान बँटने से एक पाँव मे ठोकर लगी तो वह लड़खड़ाई, झट से राजेश ने संभालने के लिये अपना हाथ बढ़ा कर पकड़ने की कोशिश करी। लेकिन सब इतनी जल्दी हुआ कि राजेश का हाथ बाँह को पकड़ने के बजाय करीना की उन्नत छाती से जा टकराया। राजेश ने करीना को अपनी बाँहों मे जैसे-तैसे संभाला और बाँये वक्ष को जानबूझ कर अपनी हथेली मे लेकर सहलाने लगा जैसे कि दर्द कम करने की कोशिश कर रहा हो। नादान करीना शर्म के मारे दोहरी होती जा रही, पर राजेश टी-शर्ट में से झाँकती हुई बुर्जी को अपनी दो उंगलियों के बीच में ले कर बड़े प्यार से धीरे-धीरे खींचने का क्रम जारी रखे हुए था। इस नये एहसास ने करीना को अन्दर तक गुदगुदा दिया।)

करीना: (शर्माते हुए) अंकल अब ठीक है।

राजेश: (बाँये वक्ष को सहलाते हुए और खड़ी हुई बुर्जी पर चिकोटी भरते हुए) बेटा अगर खून जम गया तो कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

करीना: उई…ई, अब ठीक है अंकल (धीरे से अपने को छुड़ाते हुए)।

(राजेश ने पीछे से अपनी बाँहों का सहारा दे कर करीना को खड़ा किया और एक बार फिर से जानबूझ के दाँये और बाँये वक्ष को दोनों को अपने हाथों मे भर कर धीरे-धीरे दबाने का कार्यक्रम जारी रखा। अब तक राजेश का हथियार भी अपने पूरे जोश मे आ चुका था और पीछे से जींन्स में कसे नितंबों की खाई में जोर आजमाइश कर रहा था। दोनों के दिलों की धड़कन अनजाने भय से बढ़ी हुई थी पर दोनों ही उत्तेजित अवस्था मे अपनी-अपनी प्यास बुझाने मे व्याकुल थे। अंधेरी सुनसान पगडण्डी पर कमसिन करीना के शरीर मे हलचल मची हुई थी और राजेश पर तो जैसे नई कली को चखने का भूत सवार था। अचानक एक आहट सुन कर दोनों छिटक कर अलग हो गये।)

राजेश: (झेंपते हुए) तुम अब ठीक हो। अपने पाँव पर चल सकती हो।

करीना: (शर्म से अधमरी हुई जा रही) हुं…

राजेश: तो फिर चलो, देर हो रही है। घर पर इंतज़ार हो रहा होगा।

(इतना कह कर दोनों चुपचाप करीना के घर की ओर चल पड़ते है। राजेश करीना को दरवाजे पर छोड़ कर कुछ बोले बिना वापिस अपने घर की ओर चल देता है। घर पर मुमु और टीना डाईनिंग टेबल पर बैठ कर इंतजार कर रहे है।)

मुमु: इतनी देर कैसे लग गयी।

राजेश: करीना रास्ते में गिर पड़ी थी, थोड़ीसी चोट लगने के कारण देर हो गयी। घबराने की बात नहीं है, सब ठीक है। घर पर छोड़ कर आ रहा हूँ। भूख लग रही है चल कर खाना लगाओ।

(मुमु रसोई में चली जाती है।)

टीना: पापा क्या ज्यादा चोट लग गयी।

राजेश: नहीं बेटा, मैने वक्त रहते उसे संभाल लिया था।

टीना: (आशवस्त हो कर) आज डौली आंटी नाप लेने आयी थी। आपकी एलन अंकल से कोई बात हुई?

राजेश: (मुख पर उँगली रख कर चुप रहने का ईशारा करता हुआ) हाँ मेरी बात हुई थी। रात को तुम्हारी मम्मी के सोने से बाद मै तुम्हारे कमरे आ कर बताऊँगा।

मुमु: खाना मेज पर लग गया है। तुम दोनों आ जाओ।

(सब मिल कर खाना खाते है। सारा परिवार टीवी के प्रोग्राम बैठ कर देखते है।)

मुमु: बहुत रात हो गयी, मुझे नींद आ रही है, बेटा टीवी बन्द करो और सोने जाओ। मै तो सोने जा रही हूँ।

(राजेश टीवी बन्द कर के अपने बेडरूम की ओर बढ़ता हुआ टीना को आँखों से इशारा करता है। टीना झट से उठ कर अपने कमरे में चली जाती है। मुमु भी रसोई का काम समेट कर बेडरूम की ओर रुख करती है। राजेश सोने का नाट्क करता है। मुमु भी नजदीक लेट जाती है। एक बार राजेश को हिलाती है पर कुछ प्रतिक्रिया न देख कर करवट ले कर सो जाती है। थोड़ी देर के बाद, राजेश लुगीं पहने दबे पाँव टीना के कमरे की ओर रुख करता है। टीना इंतजार मे जाग रही है।)

राजेश: बेटा तुम अब तक जाग रही हो।

टीना: आपने ही तो कहा था कि ट्रेनिंग के बारे मे रात को मेरे रूम मे आ कर बताएँगे।

राजेश: (टीना के साथ लेटते हुए) हाँ, आज मै एलन से मिला था। (टीना के गले में हाथ डाल कर राजेश अपने कंधे का सिरहाना देते हुए टीना के बदन को अपने से सटाते हुए) एलन का कहना है कि फिट्नेस सेन्टर पर बच्चों को ट्रेनिंग करना मना है। (टीना ठुनकती है और राजेश उसके केश में प्यार से उंगलियों फिराता है) एलन बता रहा था कि स्वीटी को भी फिट्नेस सेन्टर मे ट्रेनिंग करना मना है।

(राजेश प्यार से पुचकारता है और अपने बाँह में टीना को और कस के जकड़ लेता है। दोनों एक दूसरे के बदन के कटावों को महसूस कर रहे है। राजेश अपनी हथेली को टीना के अर्धनग्न नितंबो फिराता है।)

राजेश: लेकिन कभी ऐसा हुआ है कि जो मेरा बेटा कहे और मै न करूँ। मैने इस मुश्किल का हल भी निकाल लिया है।

(इस खुशी में टीना अपने पारदर्शी हाफ़ नाईट-गाउन में बिना ब्रा और झीनी सी पैन्टी पहने राजेश से और चिपट जाती है। टीना का यौवन नीले रंग के नाईट लैम्प और उभर कर राजेश के दिल पर बिजली गिरा रहा है। टीना की गोल-गोल सख्त उरोज और उन पर सिर उठाती गुलाबी गगनचुम्बियाँ राजेश के शरीर को घायल किये जा रही है।)

टीना: पापा ज्यादा सस्पेंस मत बढ़ाओ।

राजेश: मैने सोचा है कि जब तुम्हारी मम्मी फिट्नेस सेन्टर चली जाए, तुम घर पर ही ट्रेनिंग कर लिया करो। मैने एलन को पैसे दे कर राजी कर लिया है कि वह अपनी कुछ एक्स्र्साईज मुझे समझा देगा, शाम को वो सारी एक्स्र्साईज मै तुम्हें बता दूँगा और तुम कर लिया करना। तुम्हारी मम्मी भी खुश और तुम भी खुश्।

(अब तक राजेश के हाथ अपना जादू दिखाने में मस्त है। हल्के हाथ से पैन्टी को नितंबो की दरार मे सरकाते हुए और नग्न हिस्सों को धीरे-धीरे सहलाते हुए, राजेश के होंठ कुछ पल के लिये टीना के होंठों को अपने कब्जे में ले लेते है।)

टीना: (कसमसाती हुई)…पापा, घर पर पार्टनर कहाँ से लाऊँगी।

(शाम को करीना के साथ हुआ हादसा और अब अधखिली कली के शरीर की चुभन और खुशबू, राजेश की मचलती हुई भावनाओं को और भी ज्यादा भड़का दिया, लुगीं मे छुपे राक्षस ने लहरा कर सिर उठा दिया।)

राजेश: बेटा अगर ठीक समझो तो मुझ बूढ़े को अपना पार्टनर बना लेना। ट्रेनिंग मे तुम्हारा साथ दे कर मै भी थोड़ा शरीर से फिट हो जाउँगा।

टीना: (जरा हिचकिचाते हुए) क्या मै किसी और को अपना पार्टनर नहीं बना सकती? आप के साथ ट्रेनिंग करने मे मुझे शर्म आती है।

राजेश: (मायुसी के अंदाज मे) हाँ भई, जवान लोगों को बूढ़े नहीं पसन्द आते। ठीक है तुम्हारा सोचना।

टीना: ऐसी बात नहीं है। आप तो बहुत हैडंसम हो लेकिन मुझे लगता नहीं कि हम दोनों ट्रेनिंग ठीक से कर पाएगें क्योंकि हम दोनों के लिए यह पहला अवसर है।

राजेश: कोई बात नहीं, मै एलन को जा कर बता दूँगा कि हम उसका कोर्स नहीं कर सकेगें। लेकिन दिये हुए पैसे वह वापिस नहीं करेगा। मुझे सीधे दो लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।

टीना: पापा मेरे लिए आपने इतना खरचा कर दिया। (अपने शरीर को राजेश के हाथों मे ढीला छोड़ देती है। हिलने से उसके अर्धविकसित उरोज राजेश की छाती पर घिसाव करते है जिस से उसकी छोटी-छोटी गुलाबी घुन्डियां सिर उठाने लगती है।)

क्रमशः
Reply
07-12-2018, 12:34 PM,
#5
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--5

गतान्क से आगे..........

राजेश: मेरी गुड़िया सी बेटी ने एक चीज चाही, क्या मै पैसों की ओर देखता। मै तो अपनी बेटी से बहुत प्यार करता हूँ। हाँ, मेरी बेटी तो मुझे अपने काबिल नहीं समझती यह अलग बात है।

टीना: (प्यार से राजेश के पेट पर अपनी एक टांग रख देती है) ऐसी बात नहीं है। पापा, हम दोनों एक दूसरे के पार्टनर बनेगें।

राजेश: नहीं बेटा, कोई जरुरी तो नहीं। (टीना को अपने उपर खींचकर लिटा लेता है। टीना के चेहरे को अपने हाथों मे ले कर) तुम अभी हामी भर रही हो, लेकिन ट्रेनिंग के बीचोंबीच छोड़ने पर मुझे काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। (लुगीं में राजेश का तन्नाया हुआ लिंग टीना की जांघों के बीचोंबीच आ टिकता है। टीना को फिर से एक बार किसी कठोर चीज का एहसास होता है। वह कसमसाती है और हिलने से उसकी अर्धविकसित छोटी-छोटी घुन्डियां रगड़ खा कर खड़ी हो जाती है।)

टीना: न……हीं पा…पा (उत्तेजना से काँपते हुए) मुझे आपके साथ ट्रेनिंग करनी है।

राजेश: (खुशी से टीना को अपनी बाँहों में भर कर अपनी बालिष्ट छाती से टीना के स्तनों को पीस देता है) ठीक है। कल मैं तुम्हारा नाप लेने डौली को भेज दूंगा जिससे तुम्हारा कोस्ट्यूम टाईम से तैयार हो जाए और हम एक्स्र्साईज भी शुरू कर दें। अच्छा इसी बात पर क्या मेरी बेटी मुझे प्यार से एक चुम्बन देगी?

टीना: हुँ… अब से जब भी आप चाहें, मुझे बता दें। (टीना झुक कर राजेश के होंठों पर अपने होठ रख कर चूमने और चूसने का दौर शुरु कर देती है। राजेश के दोनों हाथ टीना के नग्न नितंबों को गूँथना आरंभ कर देते है। टीना की आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। इसी कश्मकश में मासूम टीना अपनी आँखे मूंद लेती है। छातियों की गुलाबी घुन्डियों बार-बार रगड़ खाने से लाल हो जाती है। नीचे योनिद्वार में एक मीठी सी अकड़न होने लगती है और सारे शरीर में करन्ट प्रावाहित होना शुरु कर देता है। नीचे लिंगदेव टीना को अपनी पूरी कठोरता का एहसास कराते हुए योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मारना शुरु कर देते है।)

राजेश: बेटा मुझे लगता है तुम्हारे प्यार की वजह से मेरे शरीर मे टाक्सिन बनने शुरु हो गये है। क्या तुमको भी ऐसा ही मह्सूस हो रहा है?

टीना: (अपने जुबान राजेश के होठों पर फिराते हुए) हुँ…हुँ…

(टीना के होठों को चूसते हुए राजेश एक झटके से करवट लेता हुआ पोजीशन बदलता है और टीना को अपने नीचे दबा लेता है। हल्के-2 हाथ से नग्न नितंबो को सहलाते हुए, कुछ दबाते हुए और अपने हथियार को बेटोक योनिच्छेद पर घिसते हुए राजेश पूरी हरकत मे आ गया है। अपनी भुजाओं मे कस कर, राजेश धीरे से बेबस टीना का बायां पाँव उपर उठा कर अपने लिंग को ढकेलता है। एक हल्की सिसकारी के साथ टीना कस के राजेश को चिपट जाती है।)

टीना: पा .उई....प.आ...पा.…उ.उ.उ...आह.....

राजेश: बेटा…(बात करते हुए, राजेश अपने तन्नाए हुए लिंग को भीषणता से ठेलता है। राजेश बार-बार टीना के गालों को चूमता, नीचे से अपने लिंग को धीरे से ठेलता हुआ अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ता है। बार-बार नितम्बों पर दबाव, लगातार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकलता है, टीना बदहवासी मे राजेश से कस कर लिपट जाती है। राजेश के तन्नाये लिंगदेव भी गुस्से से लावा उगलना शुरु कर दिया।)…बेटा…मेरे शरीर में से सारा टाक्सिन बाहर निकल गया।

टीना: (उत्साहित स्वर में) पापा, मेरा भी निकल गया।

(कुछ देर दोनों एक दुसरे के साथ लिपटे हुए अपनी-अपनी साँसों को काबु में लाते है। राजेश एक बार फिर से टीना के होठों को चूमता है। धीरे से अपने को टीना से अलग करता है। टीना के गालों पर हाथ फेरता है।)

राजेश: अब से हम ट्रेनिंग पार्टनर हैं।

टीना: (शर्माते हुए) हाँ। परन्तु परसों से।

राजेश: बेटा, मै अब जाता हूँ, बहुत रात हो गयी है तुम अब सो जाओ।

(यह कहते हुए राजेश अपनी अस्त-व्यस्त लुंगी को सम्हालता हुआ कमरे से बाहर चला जाता है। परन्तु टीना की आँखो मे नींद कहाँ, वह तो बार-बार उस रहस्यमयी कठोर चीज के बारे सोच रही है। इसी उधेड़बुन में निढाल सी पड़ी हुई टीना को अपनी पैन्टी के अन्दर कुछ गीलेपन का एहसास होता है। लेटे-लेटे ही वह अपनी पैन्टी को उतारती है और गीली जगह को सूंघ कर और छू कर देखती है। एक बार फिर से वही चिपचिपेपन को महसूस करती है। टीना उठ कर अपने बाथरूम मे जाकर फुल साइज आइने के सामने खड़ी हो कर अपने निचले हिस्से पर नजर डालती है। दो संतरे की जुड़ी हुई फाँके समान सफाचट गोरी योनि, हल्के भूरे रोएँ और योनिमुख के पास काला तिल देख कर रोमांचित हो उठती है। दो फाँकों के जोड़ पर धीरे से उँगली फिराती हुई उन्हें खोलने का प्रयत्न करती है। कुछ सोच कर वापिस बेड पर आकर लेट जाती है और पिछ्ले दो दिनों के अनुभव के बारे मे सोचते हुए और अगले दिन ट्रेनिंग कोस्ट्यूम की आस में सो जाती है।)

सीन-9

(शाम का समय, मुमु और टीना ड्राइंगरूम में बैठीं हुई हैं। डौली के न आने की वजह से टीना का मूड खराब है। घंटी बजती है, मुमु उठ कर दरवाजा खोलती है। करीना का आगमन्।)

मुमु: करीना, पाँव कैसा है?

करीना: हाय आंटी, अब ठीक है। हाय टीना…

टीना: (बुझे मन से) हाय करीना।

करीना: क्या बात है, आज नहीं चहक रही है। क्या मूड खराब है?

(पोर्च में कार रुकने की आवाज आती है। मुमु दरवाजे की ओर बढ़ती है)

मुमु: टीना लगता है कि तेरे पापा आ गये।

टीना: मुझे क्या। मै उनसे नाराज हूँ। मै उनसे बात नहीं करुंगी। चल करीना मेरे कमरे मे चलते है। (यह कहते हुए खड़ी हो कर करीना का हाथ थाम कर अपने कमरे मे करीना को ले जाती है।)

(राजेश और डौली का आगमन)

मुमु: हाय डौली। यह डौली तुम्हें कहाँ मिल गयी।

डौली: क्या यार, मैनें राजेश को फोन किया था कि घर जाते हुए मुझे फिट्नेस सेन्टर से लेता हुआ जाए क्योंकि तुम्हारा एक ट्रेनिंग कोस्ट्यूम तैयार हो गया था तो मैनें सोचा कि ट्राई करवा लूँगी तो बाकी पीसिज के लिये अच्छा रहेगा। इसी लिए तुम्हारी सेवा मे हाजिर। चलो जल्दी से ट्राई कर लो क्योंकि मुझे अभी वापिस जाना है।

मुमु: तुम्हारी लाडली नाराज बैठी है। बहुत गुस्से मे है।

(कोस्ट्यूम ले कर बाथरूम की ओर जाती है)

राजेश: (आँख मारते हुए) डौली, प्लीज तुम टीना के पास जाओ और कुछ मेरी सिफारिश कर दो। वैसे ही माँ और बेटी ने मेरी हालत पतली कर रखी है।

(डौली उठ कर टीना के कमरे मे चली जाती है। कुछ देर के बाद मुमु अपने कोस्ट्यूम पहन कर आती है। राजेश के मुख से सीटी निकल जाती है। गुलाबी रंग की स्पैनडक्स की टाईट वेस्ट जो सिर्फ मुमु के भारी वक्षों को बामुश्किल ढक पा रहे थे, सिर्फ जांघों तक की काली स्किन टाईट स्पैनडक्स पैन्ट, जो नीचे के सभी कटावों पर चिपक जाने से, आगे-पीछे के खास कटाव और भी ज्यादा उभर कर साफ तौर पर झलक रहे थे।)

मुमु: डौली कहाँ है? क्या मैं यह पहन कर ट्रेनिंग करुँगी?

राजेश: क्यों इसमे क्या खराबी है, बहुत सैक्सी लग रही हो। मुझे तो डर है कि कोई तुम्हें भगा के न ले जाए। मैने डौली को टीना को मनाने उपर भेजा है।

(थोड़ी देर बाद डौली टीना और करीना को ले कर नीचे आ गयी। टीना खुश हो कर राजेश के गले से लग जाती है। करीना के उपर नजर पड़ते ही राजेश झेंप जाता है। इधर करीना भी राजेश से नजर चुराती है। मुमु को कोस्ट्यूम मे देख कर टीना और करीना एक साथ हँस पड़ती है। दोनों को हँसता देख कर मुमु भी शर्माती हुई डौली की ओर शिकायती नजरों से देखती है।)

डौली: ऐसे क्यों देख रही हो। तुम तो बहुत सुन्दर लग रही हो। क्यों लड़कियों क्या ख्याल है?

टीना: मम्मी तुम बहुत सैक्सी लग रही हो।

मुमु: तेरे पापा भी यही कह रहें है।

करीना: नहीं आंटी, सच में आप बहुत अच्छी लग रहीं है।

डौली: लाजवाब फिटिंग है। मै अब चलती हूँ, राजेश तुम मुझे अपनी कार से वापिस सेन्टर पर छोड़ दो।

राजेश: यार, इतनी जल्दी किस बात की कर रही हो। कुछ देर ठहरो, चाय और नाश्ता कर के चलते हैं।

डौली: नहीं, मुझे जल्दी है। आज एलन भी सेन्टर पर नही है। मुझे निकलना चाहिए।

राजेश: चलो, फिर तुम्हें छोड़ कर मै कपड़े बदलूँगा।

(राजेश और डौली घर के बाहर निकल जाते है। मुमु भी अपने कपड़े बदलने बाथरूम मे चली जाती है। दोनों सहेलियाँ खुसर-पुसर मे लग जाती है और चलते हुए टीना के कमरे की ओर बढ़ जाती है। एक घंटे के बाद, राजेश का आगमन। राजेश सीधा अपने बेडरूम मे कपड़े बदलने चला जाता है और मुमु रसोई मे चाय बनाने चली जाती है। राजेश बनियान और रेशमी लुंगी मे सोफे पर आ कर बैठ जाता है और धीरे से चाय की चुस्की लेता है। मुमु भी राजेश के नजदीक आ कर बैठ जाती है)

मुमु: सच कहना, क्या मै कोस्ट्यूम मे बहुत बुरी दिख रही थी?

राजेश: पागल हो तुम। सच, तुम तो कोस्ट्यूम मे बहुत खूबसूरत दिख रहीं थी। सच मानो तुम लीना की बड़ी बहन लग रही थी।

मुमु: चलो झूठे। लेकिन कल से तुम्हें घर जल्दी आना पड़ेगा क्योंकि ट्रेफिक का ख्याल रखते हुए मुझे पाँच बजे निकलना चाहिए।

राजेश: तुम आराम से जाओ। यहाँ की फिकर करनी छोड़ दो। मै कल से ठीक टाईम से आ जाउँगा।

(मुमु खाने की तैयारी करने रसोई में चली जाती है। अंधेरा गहराता हुआ, करीना और टीना बात करते हुए सीड़ीयों से नीचे उतर कर दरवाजे की ओर बड़ते है।)

राजेश: भई, रात में यह जोड़ी कहाँ चल दी?

टीना: पापा, मै करीना को घर छोड़ने जा रही हूँ।

राजेश: (मुस्कुराते हुए) क्या बात है करीना, न कोई हैलो-हाय, बस चुपचाप आयीं और चल दी।

करीना: (नजरें चुराती और झेंपती हुई) ऐसी कोई बात नहीं अंकल्। (दोनों की नजरें मिलती है, एक बार फिर से करीना नजरें नीचे कर लेती है।)

राजेश: तुम्हारे पापा टूर से वापिस आ गये?

करीना: (नीची नजरें किये) अभी नहीं। वह तो अगले हफ्ते वापिस आएगें।

टीना: क्या हम जाएं अब?

राजेश: क्यों तुम्हारी सहेली को मेरा बात करना अच्छा नहीं लगता? (यह सुन कर करीना शर्माती है) खाने का टाईम हो रहा है, आज करीना तुम हमारे साथ खाना खा कर जाना।

टीना: हाँ करीना। तू हमारे साथ खाना खा कर जाना। मै मम्मी से कह देती हूँ कि वह तेरी मम्मी को फोन पर बता दें।

करीना: नहीं, पापा भी नहीं है और घर पर सब इंतजार करेंगे। रात भी हो गयी है मैं चलती हूँ।

(फोन की घंटी बजती है। राजेश टीना की ओर इशारा करता है। टीना फोन पर बात करती है तो पता चलता है कि लीना का फोन है। दोनों बहनें लम्बी बातें शुरु कर देती है। करीना सकुचाई सी घर जाने के लिये दरवाजे पर निगाहें झुकाए खड़ी है।)

राजेश: मुमु लीना का फोन है। (मुमु भाग कर आती है और टीना के हाथ से फोन ले लेती है।)

टीना: मम्मी मुझे दीदी से जरूरी बात करनी है, फोन बन्द मत करना। (मुमु के साथ खड़ी हो जाती है। टीना की नजर करीना पर पड़ती है)

टीना: पापा प्लीज आप करीना को घर तक छोड़ दो क्योंकि मुझे दीदी से बात करनी है।

करीना: नहीं ठीक है। अभी इतनी रात नहीं हुई है। मै चली जाउँगी।

राजेश: क्यों भई, प्रामिस आज मै तुम्हें नहीं गिरने दूँगा। ठहरो, मै शर्ट पहन कर आता हूँ।

(इस से पहले करीना न नुकर करे, राजेश शर्ट पहनने अपने कमरे मे चला जाता है। करीना बेबसी की हालत में खुले दरवाजे के सामने खड़ी रह जाती है। कुछ पलों मे राजेश शर्ट के बटन लगाते हुए करीना की तरफ आता है। नजरें मिलते ही राजेश मुस्कुरा देता है। करीना एक बार फिर से झेंप जाती है।)

राजेश: आओ चले।

(करीना का हाथ थाम कर बाहर निकल आता है।)

सीन-10

(रात का समय, अंधेरा गहराता हुआ। सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही भी कम होती हुई। दूर-दूर बसे हुए घरों से आती हुई रोशनी भी बाहर का अंधियारा मिटाने मे नाकामयाब होती लग रही है। राजेश प्यार से करीना को निहारता है। चांदनी रात में फूल और पत्तियों के डिजाइन कि घुटने तक की फ्राक पहने करीना गजब की लग रही थी। राजेश सिर्फ शर्ट और लुगीं पहने करीना के उमड़ते हुए यौवन के हर कटाव को आँखों से पीने की कोशिश में लगा हुआ था। चलते हुए राजेश हल्के से करीना कि बाँह थाम लेता है।)

राजेश: क्या बात है करीना आज बहुत चुप हो। तुम ठीक तो हो?

करीना: अंकल ठीक हूँ। बस…ऐसे ही आप को लग रहा है।

राजेश: (पैंतरा बदलते हुए) तो तुम मुझे आज इतनी सुन्दर क्यों लग रही हो?

(राजेश उसका हाथ छोड़ कर अपना हाथ करीना के कंधे पर रख देता है और अपनी ओर खींच कर सटा लेता है।)

राजेश: करीना तुम्हारी फ्राक बहुत सुन्दर है। (अपना हाथ करीना के कंधे से सरकाता हुआ कमर तक ले जाता है जैसे कि कपड़े की सलवटें हटा रहा हो। करीना के सारे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। असमंजस में अलग होने की कोशिश करती है परन्तु राजेश कमर को कस कर थाम लेता है।)

करीना: अंकल कोई देख लेगा…

राजेश: क्या देख लेगा? यही कि मैं तुम्हें बड़े संभाल के ले जा रहा हूँ। यह सब छोड़ो, मुझे सच सच बताओ कि कल तुम्हें आराम से नींद आ गयी थी।

करीना: आप ऐसे क्यों पूछ रहे हो…

राजेश: रात भर मै नहीं सो सका, इसीलिए।

करीना: क्यों…

राजेश: मुझे डर था कि कहीं मेरे हाथ की चोट की वजह से तुम्हारे सीने में कैंसर न हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो मै जीते जी मर जाउँगा।

करीना: नहीं, मुझे कुछ नहीं हुआ।

राजेश: तुम्हें क्या पता इन सब चीजों का, तुम तो अभी बच्ची हो। हाँ, तुम अगर चाहो तो मेरी परेशानी दूर कर सकती हो।

करीना: कैसे…

राजेश: (बड़े भोलेपन से) एक बार मै देख लूँ कि सब ठीक है तो मुझे विश्वास हो जाएगा।

करीना: नहीं अंकल, किसी ने देख लिया तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। नहीं, बिलकुल नहीं।

राजेश: (अपना हाथ कमर से सरकाते हुए पीठ पर ला कर) पाँच कदम पर वही पगडंडी आ जाएगी, अगर तुम कहो तो दो मिनट के लिए नीचे उतर कर झुरमुटों के पीछे चल कर मुझे दिखा दो तो मेरी टेन्शन कम हो जाएगी। प्लीज करीना।

करीना: नहीं अंकल, किसी को पता चल गया तो आफत आ जाएगी।

राजेश: कौन बताएगा, तुम या मैं, हम दोनों तो बताने से रहे तो फिर कौन।

(करीना के घर की ओर जाने वाली पगडंडी पर पहुँच कर करीना की पीठ पर हल्का सा जोर लगाते हुए नीचे की ओर झुरमुटों के पीछे ले जाता है।)

राजेश: प्लीज करीना, मेरी चिन्ता को दूर करो। (बात करते हुए फ्राक के पीछे लगे हुए हुक धीरे से खोल देता है।)

करीना: (डरते-डरते) अंकल प्लीज जल्दी किजीए।

(राजेश पीछे से खुले हुए स्थान मे हाथ सरकाते हुए आगे बढ़ा कर ब्रा के उपर अपनी हथेली बायें उरोज पर टिका देता है। करीना चिहुँक उठती है। राजेश पीछे से आकर दायाँ उरोज भी अपनी हथेली मे ले लेता है। करीना के दिल की धड़कन बढ़ जाती है। ब्रा के उपर से ही राजेश सहलाने, दबाने और मसलने का कार्य आरंभ कर देता है। इधर उत्तेजना में करीना की साँसे तेज होने लगी और उधर राजेश का मतवाला हथियार पूरे जोश में आ कर नितंबो पर दबाव बढ़ाने लगा है। धीरे से राजेश एक हाथ से ब्रा का हुक खोल देता है। इससे पहले नादान करीना को इसका आभास हो, राजेश की हथेलियाँ करीना के नग्न, सुडौल और उन्नत उरोजों को अपने कब्जे मे ले लेती है। अब बिना रुके राजेश सहलाने और दबाने के कार्य में लीन हो गया है। कभी अपनी उँगली को सुप्तअवस्था मे पड़ी चोटियों पर फिराता और कभी बीच-बीच में खड़ी हुई घुन्डियों को दो उँगलियों मे फँसा कर तरेड़ता। लुंगी से ढके अपने तन्नाये हुए लिंग को नितंबो कि दरार मे फसाने की कोशिश करता हुआ राजेश करीना के कानों पर चुम्बनों की झड़ी लगा देता है।)

राजेश: करीना

करीना: हुं…

राजेश: मुझे आगे से देखना है क्योकि मुझे तुम्हारे सीने मे कोई सूजन तो नहीं महसूस हो रही है। (इससे पहले करीना कुछ बोले राजेश घुमा कर अपने सामने कर लेता है। शर्म और उत्तेजना से लाल हुई करीना अपनी नजरें झुका देती है। राजेश धीरे से उपर से खुली हुई फ्राक को नीचे सरका कर दोनों उन्नत पहाड़ियों को अनावरित कर देता है। कभी चोटियों पर उँगलियॉ फिराता और कभी दो उँगलियों मे घुन्डियों को फँसा कर खींचता, कभी पहाड़ियों को अपनी हथेलियों मे छुपा लेता और कभी उन्हें जोर से मसक देता। यह कार्यक्रम कुछ देर चलने के बाद, राजेश ने अपने दोनों हाथों मे करीना का चेहरा लेकर अपनी ओर किया। आँखे मुदें हुए करीना का चेहरा उत्तेजना से लाल और दोनों होंठ ह्ल्के से खुले हुए देख कर राजेश अपने आप को रोक नहीं सका और तड़ से उन थिरकते होठों को अपने होठों के कब्जे में ले लिया। नादान करीना ने भी एक अनजान सफर पर चलने के लिये अपने आप को राजेश की बाँहों मे ढीला छोड़ दिया। वासना की आग मे झुलसते दोनों धम्म से जमीन पर बैठ जाते जैसे की पैरों की जान ही निकल गयी हो।)

राजेश: करीना

करीना: हुं…

राजेश: (करीना को अपनी गोद में खींचते हुए) करीना कैसा लग रहा है… तुम्हारी सुन्दरता को देख कर (नीचे की ओर झुक कर बायें वक्ष पर चुम्बन जड़ देता है) मै अपने को काबू में नहीं रख सका (और फिर पूरा बाँया वक्ष अपने मुँह में समाने के लिये कोशिश करता हुआ, जुबान से फूले हुए निपल को छेड़ता है)।

करीना: .उई....अ.आ...क.…उ.उ.उ.ल..न्…हई…आह.....

(राजेश का एक हाथ दाएँ वक्ष के मर्दन में लग जाता है और दूसरा हाथ फ्राक के नीचे खिसक कर पैन्टी के उपर से ही योनिमुख को टटोलता है।)

करीना: (इस दो तरफा वार से छ्टपटती हुई) .उई....अ.आ...क.…उ.उ.उ.ल..न्…हई…क्या कर आह.हो....(करीना अपने दोनों हाथों से राजेश का हाथ पकड़ने की कोशिश करती है, पर राजेश की उँगलियों पैन्टी को एक तरफ सरका कर जुड़ी हुई संतरे की फाँकों को अलग करने मे जुट जाती है। राजेश की उंगली योनिच्छेद में जगह बनाती अकड़ी हुई घुन्डी पर जा टिकती है।)

करीना: .उई...माँ….अँ.क.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(अचानक कुछ आह्ट सुनाई देती है, दोनों चुपचाप पड़ जाते है। दो लोग आपस में बात करते हुए पगडंडी पर चले आ रहे है। राजेश करीना को चुप रहने का इशारा करता है, परन्तु अपनी उंगली से घुन्डी का घिसाव जारी रखता है। बेबस हुई करीना इस नये वार से हतप्रभ रह जाती है। राजेश अपने होठों से करीना के होंठों को सीलबन्द कर देता है, अपने एक हाथ से कभी चोटियों पर उँगलियॉ फिराता और कभी दो उँगलियों मे निपल को फँसा कर खींचता, कभी एक पहाड़ी को अपनी हथेली मे छुपा लेता और कभी दूसरी को जोर से मसक देता। ऐसे तीन तरफा वार को करीना बरदाश्त नहीं कर पायी और असीम आनंद की सिसकियाँ गले में घुट कर रह गयी और झटके लेते हुए ढेर होई। अब तक जाने वाले भी चले गये थे और पगडण्डी पर भी शान्ति छा गयी।)

राजेश: (करीना के निचले होंठ को चूसते और धीरे से काटते हुए) करीना…करीना…

करीना: (शर्म से अधमरी हुई जा रही) हुं…

राजेश: क्या हुआ…कैसा लग रहा है?

करीना: हुं…ठीक हूँ…

राजेश: बताओ तो, कैसा लगा… आज तुमने जवानी की देहलीज पर पहला कदम रख लिया है। कैसा लगा…

करीना: अंकल यह गलत है। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था।

राजेश: मै तुम्हारी सुन्दरता पर मर मिटा हूँ (इतना कह कर एक बार फिर से नीचे की ओर झुक कर बायें वक्ष पर चुम्बन जड़ देता है) तुम इतनी सुन्दर हो कि मै अपने को काबू में नहीं रख सका (और एक बार फिर से कभी जुबान से फूले हुए निपल को छेड़ता और कभी पूरी पहाड़ी को निगलने की कोशिश करता है)।

करीना: (राजेश को ढकेलती हुई) .उई....अ.आ...क.…उ.उ.उ.ल..न्…हई…आह.....

(एक बार फिर से राजेश का हाथ फ्राक के नीचे खिसक कर योनिमुख को टटोलते हुए पैन्टी के गीलेपन को महसूस करता है।)

करीना:.उई....अ.आ...क.…उ.उ.उ.ल..न्…हई…क्या कर आह.हो....(करीना अपने दोनों हाथों से राजेश का हाथ पकड़ने की कोशिश करती है, पर राजेश अपनी उँगलियों दोनों ओर से पैन्टी की इलास्टिक मे फसाँ कर नीचे की ओर घुटनों तक सरका देता है। हल्की रोशनी में राजेश के सामने सफाचट और फूले हुए पाव की भाँति जुड़ी हुई संतरे की फाँकें विद्दमान होती है। इस नजारे को देख कर राजेश की उत्तेजना चरम-सीमा पर पहुँच जाती है।)

राजेश: करीना…जरा उठो, जमीन पर बैठने से फ्राक गन्दी हो जाएगी। ठहरो मै अपनी लुगीं बिछा देता हूँ।

करीना: अंकल्…न (राजेश हाथ पकड़ कर करीना को उठा देता है।)

राजेश: (लुगीं उतारते हुए) करीना अपनी आँखे बन्द कर लो, क्योंकि आज मै तुम्हें जवानी के दूसरे कदम का भी आभास करा देता हूँ। (लुगीं को उतार कर जमीन पर बिछा देता है और करीना की तरफ बड़ता है।)

(करीना चुपचाप कनखियों से राजेश की ओर देखती है तो उसकी निगाहें लिंगदेव पर पड़ती है। गोरे रंग का सर उठाए लम्बा, परन्तु बहुत मोटा, हर चाल पर पेट से टकरा कर सलामी देता हुआ। कौतुहलवश चुपचाप जड़वत खड़ी रह जाती है। राजेश उसे गोदी मे भरकर जमीन पर लिटा देता है। बदहवासी में करीना खुद को अलग करने मे जुट जाती है। राजेश (69) पोजीशन मे आ कर अपने शरीर से करीना का बदन ढक देता है। बड़े प्यार से जुड़ी हुई संतरे की फाँकों को खोल कर अकड़ी हुई घुन्डी पर अपनी जुबान टिका देता है।)

करीना: .उई...माँ….अँ.क.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश अपनी जुबान से घुन्डी के उपर घिसाव आरंभ करता है। बेबस हुई करीना इस नये वार से हतप्रभ रह जाती है। राजेश अपने होठों से करीना की योनि को अपने कब्जे में ले कर बार-बार अपनी जुबान को योनिच्छेद के अन्दर डालने का प्रयास करता है। उधर उत्तेजना में तड़पती करीना के चेहरे और होंठों पर तन्नाये हुए लिंगदेव भँवरें की भाँति बार-बार चोट मार रहा है। बेचारी करीना अपना चेहरा बचाने की कोशिश में राजेश के लिंग को अपने हाथ में ले लेती है। नरम हाथ का स्पर्श पा कर लिंगदेव एक जिवित गर्म लोहे की सलाख में तब्दील हो जाते है।)

करीना: उ.उई...अँ.उ…उक.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश की जुबान योनि की गहराई और लम्बाई नापने की कोशिश मे वार पर वार कर रही थी और करीना के हाथ में कैद लिंगदेव ने भी अपने फूले हुए सिर को पूरी तरह उघाड़ दिया है। क्षण भर रुक कर, राजेश करीना के दोनों हाथों को पकड़ कर फिर से अपने कार्य में लग गया है। अब की बार दो तरफा वार शुरु करता है। एक तरफ जुबान का वार योनिच्छेद पर, दूसरी ओर लिंगदेव का फूला हुआ नंगा सिर करीना के होंठों को खोलने पर आमादा हो रहा है। ऐसे दो तरफा वार को करीना बरदाश्त नहीं कर पायी और असीम आनंद में झटके खाते हुए अपने होंठ खोल दिये। राजेश तो बस इसी क्षण की आस में बैठा था, जैसे ही होंठों के बीच थोड़ी सी जगह बनी हल्का सा जोर लगाते हुए लिंगदेव के सिर से करीना के मुख को सीलबन्द कर दिया।)

करीना: .गग…गगगू...म…गूग.गअँ.न्ई…आह.....

(साँस घुटती हुई लगी तो करीना को मुख पूरा खोलना पड़ गया, राजेश ने वक्त की नजाकत को समझते हुए थोड़ा और अन्दर सरका दिया। बेबस करीना पुरी ताकत से राजेश को उपर से हटाने की कोशिश करती, राजेश थोड़ा उपर खिसकता पर लिंग पर दबाव बढ़ा कर उसे और अन्दर खिसका देता। कुछ मिनट यह मुख के अन्दर-बाहर का दौर चलता रहा और लगातार लिंग के नंगे सिर पर करीना के होंठों के घर्षण से झट्के के साथ उबलता हुआ लावा करीना के मुख मे बेरोकटोक बहने लगा। बेचारी करीना छटपटाती रह गयी पर निर्दयी राजेश ने अपने लिंगदेव को उसके मुँख से बाहर नहीं निकलने दिया जब तक कि वह सारा लावा गटक नही गयी। तूफान आ कर थम गया। दोनों अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसो को काबू करने मे लगे थे। राजेश ने आगे बढ़ कर करीना को अपने आगोश में ले कर जमीन पर लेट गया। अंधेरा और गहराता हुआ।)

क्रमशः
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07-12-2018, 12:35 PM,
#6
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--6

गतान्क से आगे..........

राजेश: (धीरे से कन्धा हिलाते हुए) करीना…करीना…

करीना: (शर्माती हुई) हुं…

राजेश: अच्छा लग रहा है?

करीना: हुं…अब चलें, काफी देर हो गयी है।

राजेश: अभी चलते है, हाँ एक घंटे से ज्यादा हो गया। करीना, तुमने आज अपनी जवानी के दो मौसम देख लिये। दोनों मे से कौन सा मौसम तुम्हें ज्यादा पसन्द आया।

करीना: हुं…अंकल (झिझकते हुए) दोनों (शर्माती हुई राजेश की छाती मे मुँह छिपा लेती है।)

राजेश: अच्छा जी…हुं…पहले तो न नुकुर्… गलत काम्…वगैराह

करीना: अंक्……ल, मुझे चिड़ाओ मत्। मुझे आज सही मायने में अपनी जवानी का एहसास हुआ है।

राजेश: कोई बात नहीं, अभी भी तुम्हें बहुत कुछ सीखना और समझना है। मुझे तुम से प्यार हो गया है। (नग्न वक्षों को सहलाते हुए)

करीना: छि…आपको कोई प्यार-व्यार नहीं है।

राजेश: जब तुम पहली बार हमारे घर आयीं थी उस दिन से मैं तुम पर मर मिटा था। तुम आठ साल की थी।

करीना: अंकल देर हो रही है। घर चलें? (उठते हुए)

राजेश: एक शर्त पर, जब भी मैं बुलाऊँगा तो तुम आओगी। अगर वादा करो, तो अपने कपड़े ठीक कर लो।

करीना: वादा (शान्त हुए लिंगदेव को सहलाती हुई करीना खड़ी हो जाती है।)

राजेश: यह तुम्हारी याद में रात भर तड़पेगा, इस को मुँह में ले कर एक बार चूम लो।

करीना: अभी नहीं, कल इस को बहुत प्यार करूगीं।

(राजेश अपनी लुगीं को बाँध कर करीना की कमर में हाथ डाल कर उसके घर की ओर चल देता है। करीना के घर से कुछ दूरी पर बाँहों मे भर कर उसके होंठों को चूमता है। दरवाजे पर छोड़ कर अपने घर की ओर रुख कर लेता है।)

(राजेश खुशी-खुशी घर लौटता है। टीना दरवाजा खोलती है।)

टीना: पापा, इतनी देर कैसे लग गयी।

राजेश: (अन्दर आते हुए) लौटते हुए रास्ते में सलीम साहिब अपनी तीसरी बेगम के साथ मिल गये थे। रात को टहलने निकले हुए थे तो पकड़ लिया। (मुँह फुला के बैठी हुई मुमु की ओर देखते हुए) मुमु तुम्हारे बारे में रेहाना पूछ रही थी।

मुमु: (तुनक कर) मुझे सलीम साहिब से सख्त एलर्जी है। दो साल मे दो शादी, और तीसरी बीवी रेहाना अपनी लीना की उम्र की है। क्या कह रहे थे।

राजेश: कुछ खास नहीं, रेहाना को दिखा कर मुझे इस्लाम धर्म के फायदे बता रहे थे। जल्दी से खाना लगाओ, बहुत भूख लगी है।

(मुमु और टीना खाना लगाने रसोई में चली जातीं हैं। सब एक साथ खाना खाते है। थोड़ी देर टीवी देखने के बाद, मुमु और राजेश बेडरूम में चले जाते है।)

राजेश: कल से तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू हो रही है। सब तैयारियाँ हो गयीं।

मुमु: हूँ… क्या तैयारियाँ करनी थी, कुछ भी तो नहीं। बस तुम टाइम से कल घर आ जाना।

राजेश: तुम फिक्र मत करो, मै कल टाइम से आ जाउँगा।

(दोनों अपनी-अपनी नींद की दुनिया मे खो जाते है।)

(शाम होने जा रही है। राजेश की कार आ कर रुकती है। मुमु हाथ मे एक बैग लिये बाहर खड़ी हुई है। जल्दी से कार मे बैठती है।)

मुमु: तुम ने आज देर कर दी। मै आज पहले दिन ही लेट हो जाउँगी।

राजेश: अभी साढ़े-चार बजे है। तुम टाइम से पहले पहुँच जाओगी। देखो सँभल कर जाना।

(मुमु अनसुना किए कार ले कर चली जाती है। राजेश अपने घर के दरवाजे की ओर बढ़ता है। टीना दरवाजे पर खड़ी इंतजार कर रही है।)

टीना: पापा, आपने देर कर दी।

राजेश: क्या बात है, घर की सारी महिलाएँ एक स्वर में बोलती है।

टीना: मेरा कास्ट्यूम डौली आंटी के पास से ले कर आयें कि नहीं।

राजेश: इसका जवाब तब तक नहीं मिलेगा जब तक मुझे एक चुम्बन नहीं मिलेगा।

(टीना इठलाती हुई राजेश की ओर बढ़ती है और तपाक से उसके होंठों पर अपने होंठों की मोहर लगा देती है।)

टीना: अब तो बता दिजिए।

राजेश: (अपनी जुबान होंठों पर फेरता हुआ) इस तरह से काम नहीं चलेगा, खैर मुझे देर इसीलिए हुई कि मै डौली के पास हम दोनों का कास्ट्यूम लेने गया था।

टीना: (खुशी मे उछ्ल कर राजेश से लिपट जाती है) थैंक यू पापा।

राजेश: तुम जल्दी से चेंज कर लो, मै भी चेंज कर लेता हूँ।

(दोनों अपने-अपने कमरे मे जातें है। थोड़ी देर बाद टीना कास्ट्यूम पहने नीचे उतर के आती है और राजेश को न पा कर आवाज लगाती है और राजेश के बेडरूम की ओर बढ़ती है।)

टीना: पापा…पापा… (धीरे से दरवाजे को ढकेलती है। सामने राजेश उपर से नग्न और सफेद रंग की स्पान्डेक्स शार्टस पहने खड़ा हुआ था। बहुत टाइट होने की वजह से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे कपड़ा निचले शरीर से चिपक गया है। उसकी टांगों के जोड़ों पर बड़ा सा थैलीनुमा उभार सारी अन्दर की कहानी बयान कर कर रहा है। टीना भी अपने स्पान्डेक्स के कास्ट्यूम में ऐसा ही कुछ द्र्श्य राजेश को भी दिख रहा है। तंग लो-कट सफ़ेद चोली बामुश्किल स्तनों को ढक पाती हुई, कमर से कुल्हों तक नग्न और फिर निचले अंगों से चिपटा हुआ सफ़ेद हाफ-शार्ट, जो कि शरीर के कटावों को छुपाता कम और उभारता ज्यादा प्रतीत हो रहा है।)

राजेश: आओ बेटा, यह अब तुम्हें सोचना है कि ट्रेनिंग यहाँ करनी है या तुम्हारे कमरे में।

टीना: आप बताइए। जहाँ भी आप को ठीक लगे…। पापा लगता है कि कास्ट्यूम एक साइज़ छोटा है। सारा शरीर जकड़ा हुआ लग रहा है।

राजेश: क्या तुमने कुछ और भी अन्दर पहना हुआ है? इस कास्ट्यूम के नीचे कोई भी और वस्त्र नहीं पहनना चाहिए, जैसे ब्रा या पैन्टी।

टीना: हाँ, मुझ से यह गल्ती हो गयी है, मै चेंज कर के आती हूँ। ऐसा करते है कि आज हम ट्रेनिंग मेरे कमरे मे कर लेते है।

राजेश: हाँ, यह ठीक है।

(दोनों कमरे से निकल कर, उपर की ओर टीना के कमरे की ओर बढ़ते है। चेंज करने के लिए टीना अपने बाथरूम मे चली जाती है। राजेश बेड के पास पड़े स्टूल पर बैठ जाता है। थोड़ी देर में टीना चेंज कर के बाथरूम के बाहर निकलती है। आज से पहले टीना ने अपने पिता को अधनंगी हालत में नहीं देखा था, बेचारी अपने-आप को राजेश की चौड़ी कसरती छाती को निहारने से रोक नहीं पायी। शर्माते हुए नजर झुकीं तो आँखों के सामने टाइट शार्टस में से कुछ जरूरत से ज्यादा फुला हुआ उभार देखने को मिला।)

टीना: (झेंप मिटाते हुए) पापा, क्या हम ऐसे ही…(एक बार फिर अपनी नजरें और ज्यादा फूलते हुए हिस्से पर टिकाते हुए)…ट्रेनिंग करेंगें?

राजेश: आओ बेटा मेरे पास बैठो।

टीना: (शर्माते हुए सामने पड़े हुए स्टूल की ओर इशारा करते हुए) पापा, यह स्टूल बहुत नजदीक है, बैठ्ने मे कठिनाई होगी।

राजेश: न बेटा, हमें एक दूसरे से सट कर बैठना है…तुम ऐसा करो कि मेरे दोनों पाँवों के बीच मे अपने पाँव रख लो…(ऐसा कहते हुए अपने दोनों पाँवो को खोल देता है, उभरा हुआ हिस्सा थोड़ा ज्यादा फूल कर मोटा हो जाता है)

(टीना सकुचाती हुई पास पड़े स्टूल बैठ जाती है। उसके घुटने अब उभरे हुए हिस्से से छू जाते हैं।)

राजेश: बेटा अब हम अपनी ट्रेनिंग शुरु कर सकते हैं। (इतना कहते हुए अपने हाथ टीना के पाँवो के उपर रख देता है) लेकिन एलन ने कुछ हिदायतें दी है (धीरे से अपने हाथों को घुटनों से सरकाते हुए जांघों तक सहलाता हुआ) पहली कि शरीर को जितना ज्यादा खुला रख सको उतना बेहतर है क्योंकि स्किन का आक्सीकरण अत्यन्त ही आवयश्क है, उसकी लालिमा, लचक और चमक को बरकरार करने के लिये शरीर को कम से कम कपड़ो से ढकना चाहिए। इस लिए ट्रेनिंग के दौरान तुम्हारे कपड़े कुछ और भी ज्यादा सारगर्भित हो जाएँगे। बेटा, मुझे उम्मीद है कि तुम्हें इसमें कोई आपत्ति तो नहीं?

टीना: (सहलाते हुए राजेश के हाथों के उपर अपने हाथ को रख कर) अगर ऐसा करने से मेरी स्किन को फायदा होता है, तो इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

राजेश: (टीना के चेहरे को अपने हाथों मे ले कर) तुम बहुत सुन्दर हो (धीरे से अपना हाथ सरकाते हुए, होंठों पर उँगली फिरा कर, हाथों को गरदन से कंधे तक खिसकाते हुए, दोनों ओर से सीने के साइड से स्लाइड करते हुए कमर पर रोकते हुए) खासतौर से साँचे मे ढला हुआ तुम्हारा शरीर। इस को मैन्टेन करने के लिए तुम्हारे को काफी मेहनत करनी पड़ेगी।

टीना: (अपने घुटनों को पीछे करती हुई) पापा, दूसरी हिदायत क्या है?

राजेश: (कमर पकड़ कर आगे की ओर खींचता है। एक बार फिर दोनों घुटने राजेश के उभरे हुए हिस्से के साथ जा टिकते है) बेटा, दूसरी हिदायत एक्सरसाइज के बारे में है। (अपने हाथों को टीना की दोनों जांघों पर रखते हुए) तुम्हारे को (सीने के उभारों की तरफ इशारा करके) इन को पुष्ट और बड़ा करना होगा। (टीना को खड़ा होने का इशारा करता है। टीना खड़ी हो जाती है, राजेश उसकी कमर पर हाथ रख कर उसे घुमा देता है।) तुम्हें कमर की एक्सरसाइज करनी है। (राजेश अपने हाथ गोल पुष्ट नितंबों पर फेरते हुए और धीरे से अपनी उंगलियों दरार में फिराते हुए) पर सबसे जरूरी एक्सरसाइज तुम्हारे नितंबों की है कि वह ज्यादा भारी न हो पायें। (फिर नीचे झुक कर जांघों के अन्दरूनी हिस्सों को प्यार से सहलाते हुए) जांघ और पिंडुली के अलावा (धीरे से अपनी उँगलियों को उपर खिसकाते हुए स्पान्डेक्स से ढकी कटिप्रदेश पर फिराते हुए) इसकी भी एक्सरसाइज जरूरी है।

टीना: (इस आकस्मिक हरकत से अचकचा कर दूर होती हुई) पापा…आप बड़े शैतान हो (और झेंप जाती है।)

राजेश: (खड़े हो कर पीठ किये टीना की कमर को पकड़ अपनी ओर खींचते हुए) पर सबसे जरूरी बात तो रह गयी है। (अपने नितंबो के बीच की दरार पर एक कठोर चीज का आभास होते ही टीना सिहर उठती है। लेकिन राजेश बेरोकटोक टीना को सटा कर अपने तन्नाये हुए हथियार को दरार पर रगड़ते हुए) एक्सरसाइज करने से पहले एक व्यक्ति को एक्सरसाइज के प्रयोजन से भलि-भांति परिचित होना चाहिए। (बात करते हुए राजेश बार-बार दरार पर उत्तेजना से फूले हुए लिंग को रगड़ते हुए) भारी वजन उठा कर तुम्हें कोई बाडी-बिल्डर तो नहीं बनना है। तुम्हें तो अपनी बाडी को और भी निखारना है और उसे मेन्टेन करना है। (राजेश अपनी हथेली को टीना के नग्न दुधिया पेट पर फेरता और कभी-कभी अपनी उँगली को नाभि पर फिराते हुए) अगर एक्सरसाइज का यह प्रयोजन है तो सारा ध्यान तुम्हें अपने शरीर में टाक्सिन को बनाने और उसे बाहर निकालने में लगाना पड़ेगा।

टीना: (लगातार आगे और पीछे से होते वार से अचम्भित) पापा…क्या यह तीसरी हिदायत बहुत जरूरी है?

राजेश: हाँ बेटा, एलन अंकल की स्पेशल एक्सरसाइज सिर्फ इसी प्रयोजन के लिए बनाई गयी है। तुम्हारी उम्र के लड़कों और लड़कियों के लिये यह बहुत जरूरी है। इस की विशेषता है कि इस एक्सरसाइज से व्यक्ति बाहुबली नहीं दिखता परन्तु बहुत फिट और आकर्षक हो जाता है। (टीना से अलग हो कर राजेश थोड़ा सा दूर खड़ा हो जाता है)

टीना: (घूम कर राजेश की ओर देखते हुए) हाँ डौली आंटी भी नाप लेते हुए कुछ ऐसा ही बता रहीं थी…तो एक्सरसाइज शुरु करें। (टीना की नजर फूले हुए और गुस्से में भन्नायें महीन स्पान्डेक्स में लिपटे हुए लिंगदेव पर जा टिकती है)

राजेश: ठीक है, पर एक वादा करना होगा कि जब तक कोर्स पूरा नहीं होता बीच में कोई न- नुकर नहीं करोगी।

टीना: (दोनों की आँखे मिलती है, टीना नजर चुराती है) वादा…।

राजेश: इसी बात पर मुझे एक चुम्बन दो ताकि हमारी डील पर मोहर लग जाये।

(टीना शर्माते हुए राजेश के होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लेती है। इधर राजेश की जुबान टीना के कमसिन होंठों को नापने में लग जाती है। राजेश अपनी बाहों में लिये टीना के होंठों को संतरे की फाँकों की तरह चूस कर गुलाबी से लाल कर देता है।)

राजेश: (अपनी उत्तेजना को काबू मे करते हुए) टीना अब हम शीशे के सामने खड़े हो कर पहली एक्सरसाइज करेंगें।

(राजेश और टीना फुल-साइज मिरर के सामने जा कर खड़े हो जाते है।)

(टीना का बेडरूम। राजेश और टीना फुल-साइज मिरर के सामने खड़े हुए हैं। टीना को अपने आगे खड़ा करके, राजेश पीछे से टीना की कमर में हाथ डाल कर खड़ा है। काम-उत्तेजना मे उसके लिंग का सिर फूल कर कुकुरमुत्ते की शेप बना कर शार्ट्स की इलास्टिक के बाहर निकलने को प्रयत्नशील हो रहा है।)

राजेश: पहली एक्सरसाइज शरीर को ढीला करने की है। अपने पंजों पर कूदना शुरु करो।

(टीना पंजो के बल कूदना शुरु कर देती है। आइने में देख रहे राजेश कि नजर टीना के सीने पर पड़ती है। बिना ब्रा के सहारे के, नारंगी-रूपी उन्न्त वक्ष हर जम्प पर सीने पर भूकंप लाते दिख रहे है। बार-बार उपर-नीचे होने से दुधिया गोलाईयों का निचला हिस्सा चोली के बाहर निकल आया है।)

राजेश: अब रुको। (टीना की तेज चलती हुई साँसों की वजह से सीने का उतार-चढाव और बाहर झांकती हुई गोलाइयाँ बड़ा उत्तेजक द्र्श्य प्रदर्शित कर रहे है।) थक गयीं क्या?

टीना: नहीं तो (आइने में बाहर झाँकती हुई गोलाइयाँ देख कर, शर्माते हुए जल्दी से चोली नीचे की ओर खींच कर ढक लेती है।)

राजेश: तो एक बार फिर से करो।

(एक बार फिर से वही द्र्श्य दोहराया जाता है। लेकिन इस बार टीना सँभल कर कुदती है। जब भी उछ्लने से चोली का निचला हिस्सा उपर खिसकने को होता, तुरन्त ही कूदना रोक कर टीना चोली को पकड़ कर ठीक कर लेती। राजेश सब कुछ जानते हुए भी चुप है।)

राजेश: टीना…तुम ध्यान नहीं दे रही हो। बार-बार क्यों रुक रही हो…(बड़ी भोली अदा से) अच्छा तुम्हारा सीना परेशान कर रहा है। तुम उसकी ओर ध्यान मत दो बस जल्दी से अपना रुटीन पूरा करो। हमें और भी एक्सरसाइज करनी है।

(टीना अब अपना सारा ध्यान जम्प्स पर केन्द्रित करती है। लगातार कूदने से आधी गोलाइयाँ बाहर आ जाती है। टीना के उभारों के सुडौलपन को राजेश अपनी आँखों से तौलता है। अचानक बायें उरोज का गुलाबी निप्पल कुछ क्षणों के लिए उदित होता है फिर छुप जाता है।)

राजेश: (कमर पर से हाथ हटा कर) बस अब कुछ देर आराम करो।

(टीना अपनी अस्त-वयस्त चोली को एक बार फिर से ठीक करती है।)

राजेश: बहुत अच्छे से कर रही हो बेटा। अब अपने पंजों पर स्थिर हो कर अपने शरीर को घुमाओ।

(टीना आदेशानुसार करती है। राजेश उसकी बाँहे पकड़ कर एक्सरसाइज करने मे मदद करता है। आमने-सामने होने की वजह से जब भी टीना एक ओर घूमती, महीन स्पान्डेक्स में उन्न्त गोलाईयाँ और उन पहाड़ियों की चोटियों पर इरेक्ट गुलाबी निप्पलों का आकार राजेश के दिल पर बिजली गिरा देता। राजेश ने कुछ देर टीना को यही एक्सरसाइज करने को कहा)

राजेश: बेटा अब आराम कर लो। अभी तक हमने शरीर के उपर के भाग की एक्सरसाइज की है, अब हम नीचे के भाग की एक्सरसाइज करेंगे।

टीना: ठीक है पापा, कैसे और किस तरह, आप एक बार दिखाओ।

राजेश: लेकिन इस से पहले एक चुम्मा तो बनता है, क्योंकि तुम ने अपना एक रुटीन पूरा कर लिया है।

(अब की बार पहल राजेश करता है। टीना को अपनी बाहों में लिये राजेश जुबान से कमसिन होंठों को नापने में लग जाता है और लगातार होंठों को संतरे की फाँकों की तरह चूस कर गुलाबी से लाल कर देता है। इधर टीना भी राजेश का भरपूर साथ देते हुए उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले कर कभी चूमती और कभी चूस लेती है। इधर राजेश भी पुरे जोश मे अपनी जुबान से टीना के गले की गहराई नापने मे लगा हुए है। दोनों उत्तेजना मे हाँफते हुए एक दूसरे से अलग होते है।)

राजेश: टीना तुम आईने की ओर रुख करो मै पीछे खड़े हो कर तुम्हारा साथ दूँगा। यहाँ पर पार्टनर को ज्यादा काम करना पड़ता है और इस एक्सरसाइज में पार्ट्नर की आवश्यकता होती है।

(टीना आईने की ओर मुख कर के खड़ी हो जाती है। राजेश पीछे से आ कर टीना की कमर पकड़ कर सट के खड़ा हो जाता है। दोनों की आँखे चार होती है, दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है।)

राजेश: (पीछे से नाभि पर हथेली रख कर टीना को आगे झुकने का संकेत करता है) टीना अब तुम अपना वजन मेरे हाथ पर डालो और आगे की ओर झुक जाओ।

(टीना नीचे की ओर झुकती है और राजेश पीछे से पीठ पर दबाव डालता है। झुकने से टीना का पीछे का हिस्सा थोड़ा सा बाहर की ओर निकल कर राजेश के उभरे हुए हिस्से पर जा टिकता है। इधर राजेश अपने उत्तेजना से फुफकारते हुए लिंग को धीरे से एड्जस्ट करके गोल और सुडौल नितंबो के बीचोंबीच दरार मे अटका देता है। उधर टीना को भी राजेश की दो टागों के बीच में उस रहस्यमयी कठोर चीज का अब तक पूरा अन्दाजा हो चुका था। कड़कड़ाते लिंग का एहसास होते ही टीना की कमसिन जवानी धीमी आँच में सुलगने लगी थी।)

राजेश: बेटा अब मै पीछे से धीरे से धक्का दुँगा और तुम उतनी ताकत से मुझे वापिस धकेलना। इस एक्सरसाइज से तुम्हारी जाँघे और पिंडुलियाँ मजबूत बनेंगी।

टीना: (गर्म राड की लंबाई और कठोरता को महसूस करती हुई) हुं …

(राजेश धीरे से आगे की ओर धक्का देता है, टीना भी अपने पैरों पर जोर दे कर पीछे की ओर धक्का देती है। महीन कपड़े मे लिपटे हुए लिंगदेव दोनों नितंबों के बीच में घर्षण से उत्तेजना में फुफकारते हुए फूल के कुप्पा हो गये। सात-आठ धक्कों के बाद, अचानक राजेश टीना को छोड़ने का नाटक करता है। टीना अपना सन्तुलन रखने के लिए लड़खड़ाती है, लेकिन समय रहते राजेश सँभाल लेता है। लेकिन इस हड़बड़ाहट में राजेश की हथेली नाभि से सरक कर गुप्तअंग पर आकर ठहर जाती है।)

टीना: (उत्तेजना मे फूली हुई साँस लेते हुए) गन्दे पापा… जाइए मै नहीं करती। अगर मै गिर जाती तो…

राजेश: बेटा क्या कभी ऐसा हो सकता है। तुम्हें अपने पार्टनर पर पूरा विश्वास होना चाहिए की जब तुम अपना वजन उस पर डालों तो वह तुम्हें कभी भी गिरने नहीं देगा… क्या कुछ देर रेस्ट करना है?

टीना: (एक नये तरह के एहसास में डूबी हुई आवाज में)…अभी नहीं…

राजेश: मैं भी रेस्ट अभी नहीं चाहता…चलो फिर से करते हैं।

(एक बार फिर से राजेश धीरे से आगे की ओर धक्का देता है, टीना भी अपने पैरों पर जोर दे कर पीछे की ओर धक्का देती है। लिंगदेव तो नितंबों के बीच में घर्षण से फूल कर पहले से ही कुप्पा है और अब नये जोश से घिसने में लग गये। अबकी बार राजेश ने सीधे अपनी हथेली टीना के गुप्तअंग पर रख दी और धीरे से अपनी उँगलियों से योनिमुख को छेड़ने लगा। सारा वजन राजेश के हाथ पर डाल कर टीना भी वासना की आग में जलने लगी। सात-आठ धक्कों के बाद, अचानक राजेश टीना को एक बार फिर से छोड़ने का नाटक करता है। एक बार फिर टीना अपना सन्तुलन रखने के लिए लड़खड़ाती है, लेकिन समय रहते राजेश फिर से सँभाल लेता है।)

टीना: (फूली हुई साँसों से) आप गन्दे हो पापा… जाइए मै नहीं करती…बता कर छोड़ा करिए ताकि मै अपने आप को सँभाल लूँ…

राजेश: ठीक है…अबकी बार पहले बता दूँगा। थोड़ी देर आराम कर लेते है।

(दोनों अलग हो जाते हैं। राजेश वापिस स्टूल पर बैठ जाता है और टीना अपने बेड पर जाकर लेट जाती है। दोनों के मन में एक ही चाह है कि उफनते हुए जजबातों को शानदार निकासी मिल जाए। टीना का मासूम शरीर उत्तेजना से भभक रहा है, अजीब नशा उसकी आँखों में लाल-लाल डोरों के रूप में उतर आया है। राजेश सब कुछ जान कर भी अनजान बना है।)

क्रमशः
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07-12-2018, 12:35 PM,
#7
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--7

गतान्क से आगे..........

राजेश: बेटा अब दुबारा से शुरु करते है। लेकिन अबकी बार टाक्सिन भी बनाने होंगे।

टीना: (ठुनकते हुए) पापा, मेरे शरीर मे तो टाक्सिन बन रहे थे परन्तु आपने बीच में रोक दिया था।

राजेश: सारी बेटा…तुम मुझे बता देती तो मै थोड़ी देर के बाद रेस्ट के लिए कहता। (कुटिल मुस्कुराहट) कम से कम बना हुआ सारा टाक्सिन बाहर निकल जाता तो अच्छा रहता।

टीना: पापा, अबकी बार…

राजेश: पूरा रास्ता तय करके ही थमेंगें… चलो चले

(राजेश के खड़े होने से उसका शिश्न ने अपने कुकुरमुत्ते नुमा सिर को शार्ट्स की इलास्टिक में से बाहर निकल दिया। मासूम टीना की नजर उस पर नजर पड़ी तो हतप्रभ खड़ी देखती रह गयी। जानते हुए भी राजेश ने टीना की बाँह थामी ओर आईने की ओर बढ़ते हुए कमर में हाथ डाल अपने से सटा लिया। टीना शर्माती हुई नीचे नजरें किये आईने की ओर बढ़ गयी।)

राजेश: बेटा, अबकी बार तुम्हें समझाने की जरूरत तो नहीं है। हमें वही करना है जो कि हमने पहले किया है। अबकी बार तुम जितना झुक सको, खुद झुको।

टीना: (नजरें चुरा कर एक बार फिर से कुकुरमुत्ते की आकार को निहारते हुए) ठीक है… (इतना कह कर टीना खुद ही झुक गयी)…

(अब की बार राजेश अपने आगे खड़ी टीना की कमर मे एक हाथ डालते हुए सीधे योनिमुख पर अपनी हथेली जमा देता है। दूसरे हाथ से अपनी शार्टस को नीचे कर के जकड़े हुए लिंग को आजाद कर देता है। बहुत देर से बंधे हुए लिंगदेव टीना के गोल और सुडौल नितंबों को देख कर फनफना के अजगर कि तरह लहरा कर झटके खाते हुए अपनी फिर से कठोरता धारण कर लेते हैं। राजेश अपने तन्नाते हुए लिंग को मुठ्ठी मे ले कर दोनों नितंबों के बीचोंबीच बनी दरार में अटका कर धीरे से आगे की ओर धक्का देता है, टीना भी अपने पैरों पर जोर दे कर पीछे की ओर धक्का देती है। इस नग्न घर्षण से राजेश का शिश्न-कलश फूल कर और भी कुप्पा हो गया है। महीन और चिकनी स्पान्डेक्स पर रगड़ खाते हुए लिंगदेव दोनों पाटों के बीच जगह बनाते हुए नीचे सरक कर अपनी पूरी लंबाई के साथ अटक जाते है।)

टीना: (इस अप्रत्याशित वार से अचकचा कर) पापा… यह क्या हुआ।

राजेश: बेटा कुछ नहीं हुआ। बस मैने तुम्हें ठीक से पकड़ने के लिये जगह बनाई है…

(इतना कह कर राजेश अब नये जोश से आगे-पीछे हो कर लिंग को नितंबो के बीच फँसा कर घिसने में लग गया। आगे से राजेश की उंगलियों ने अपना काम आरंभ कर दिया और योनिमुख को छेड़ने में लग गयी। सारा वजन राजेश के हाथ पर डाल कर टीना भी वासना की आग में जलने लगी और हर झटके का जवाब अपने झटके से देने लगी। एक ओर अनछुए कमसिन नितंबों के घर्षण का एहसास और दूसरी ओर बार-बार नई-नवेली सीलबन्द योनिद्वार के साथ की गयी छेड़खानी, राजेश के इतनी देर से उफनते हुए लावा को बाहर निकलने के लिये मजबूर कर दिया, और झटके लेते हुए सारा लावा बाहर उगल दिया। ऐसा ही कुछ हाल टीना का भी हुआ। एक तरफ भीषण कठोरता धारण किये कुकुरमुत्ता सा सिर पीछे से योनिद्वार पर अपनी पूरी लंबाई का एहसास कराता हुआ टकराता और दूसरी ओर से उँगलियों की बार-बार छेड़खानी ने टीना के अन्दर भी हलचल मचा दी। अपने जनानंग मे उठता हुआ तूफान टीना को चरम सीमा के पार ले गया और झटके के साथ सारा उफनता हुआ लावा उबल कर बाहर बहने लगा। दोनों अपना सन्तुलन न रख पाते हुए कारपेट पर गिर पड़ते हैं। राजेश ने अपने नीचे टीना को दबा कर अपनी साँसों को सन्तुलित करने में लग गया। उफ़नती हुई भावनाओं के शान्त होते ही टीना ने महसूस किया की नितंबों के बीच फँसी चीज पिचकारी के समान धीरे-धीरे झटके लेते हुए कुछ तरल पदार्थ निकाल रही है और उसकी कठोरता भी कम होती हुई लगने लगी।)

टीना: (कुनमुनाते हुए) पापा… पापा…

राजेश: (झपट कर अपने लिंग को शार्टस के अन्दर डाल कर) हाँ…बोलो…

टीना: पापा, आप बहुत भारी हो, मुझसे साँस नहीं ली जा रही। आप हटो…

राजेश: (अपने आप को पेट के बल लेटी टीना पर से हटा) क्यों भई… (टीना के कान को चूमते हुए) इतनी देर से जब तुम्हारा वजन मै उठा रहा था तो कुछ नहीं, पर तुम जरा सी देर भी मेरा वजन नहीं उठा सकीं। कैसी पार्टनर हो तुम?

टीना: (धक्का दे कर उठने की कोशिश करते हुए) पापा…(कुछ न सूझा तो)…आप बड़े भी तो हो…पापा मेरा सारा टाक्सिन बाहर निकल गया…हटो न…

राजेश: (अपना हाथ नीचे फिराते हुए) हाँ, बेटा तुम ठीक कह रही हो। (राजेश पेट के बल लेटी टीना को उलट कर सीधा कर देता है) ऐसा लगता है कि किसी ने नल खोल दिया है। (सफ़ेद महीन स्पान्डेक्स गीला होने के कारण पारदर्शी हो गया था, जिसमें दो जुड़े हुए होंठ के बीचोंबीच पतली सी दरार साफ विदित हो रही है। राजेश अपनी उंगली दरार के उपर फिराता है।) पूरा गीला पड़ा हुआ है।

टीना: (चिहुँक कर) पापा… क्या कर रहे हो…(एक बार फिर उठने की कोशिश करती है, फिर से राजेश उसे उठने नहीं देता)…पापा

राजेश: (वैसी ही आवाज में) टीना…(गीली उँगली को अपने होंठों पर फिराता हुआ और टीना को दिखाते हुए जुबान के अग्र भाग से चाटता हुआ)…वाह क्या जायका है तुम्हारे टाक्सिन का…

टीना: (सब कुछ भूल कर अचरज भरी निगाहों से देखती हुई) यय्…क्स्… यह क्या किया आपने…बहुत गन्दे हो आप्…

राजेश: (मुस्कुराते हुए) न बेटा…ऐसा नहीं बोलते। यह तो हमारे-तुम्हारे प्यार की देन है। एलन अंकल ने मुझे इसके बारे मे बताया था। (एक बार फिर से उंगली को प्यार की झील में डुबो कर निकालता है और अपने मुख में रख कर चूसता है)…इसके बारे मैं पूरी जानकारी ले कर अगली एक्सरसाइज के टाइम पर बताऊँगा।

टीना: यय्…क्स्… बहुत गन्दे हो आप्…

राजेश: (टीना को सहारा दे कर उठाते हुए) बेटा तुम कपड़े बदल कर तैयार हो जाओ। तुम्हारी मम्मी के लौटने का समय हो गया है। इन कपड़ों को छुपा कर मुझे दे देना, इनहें मै बाहर धुलवा दूँगा। कल का तुम्हारा कास्ट्यूम अलग होगा, मै लौटते हुए लेता आउँगा।

(टीना खड़ी हो कर नीचे नजर डालती है। अपनी शार्टस की पारदर्शिता और अन्दर से झांकती हुई योनि को देख कर शर्मा जाती है। सफेदी लिए पानी सा द्र्व्य धीरे-धीरे शार्टस से रिसते हुए जाँघो के अन्दरूनी हिस्से पर से फिसलता हुआ नीचे की बढ़ता हुआ देख कर झट से अपने हाथ से पौंछती हुई बाथरूम की ओर भागती है।)

राजेश: टीना मै नीचे जा रहा हूँ। तुम जल्दी से आ जाओ।

(आज की कामयाबी पर राजेश मुस्कुराता हुआ टीना के कमरे बाहर निकल जाता है।)

टीना: (बाथरूम से चीखते हुए) अच्छा पापा।

(टीना अपनी चोली और शार्टस उतार कर आईने की ओर रुख करती है। सामने से अपने नग्न जिस्म को निहारती है। सीने की सुडौल गोलाईयाँ सारे गुरुत्वाकर्षण के नियमों को फेल करते हुए सिर उठाए उपर की दिशा में ताक रहें हैं और उनकी चोटी पर बैठे गुलाबी निप्पल तो फूल के खड़े हो गये है। गोरी कमर पर दो जगह टाइट कास्ट्यूम की लाल लकीरें बनी हुई है। टीना उन हिस्सों को रगड़ कर खून का बहाव ठीक करती है। गीले हुए योनिमुख पर उँगलियों को फेरती है और गीली उंगली को सूँघ कर और फिर चाट कर देखती है। कुछ न पता चलने से उत्सुकतावश एक बार फिर से अपनी दो उंगलियों में बचा-कुचा सफेद सा पनीला द्र्व्य इकट्ठा कर के उठा कर चाटती है। कुछ पता न चलने पर शावर के नीचे खड़े हो कर अपने अंग-अंग को धोती है, अपनी योनि के होंठों को हटा कर मुँह उठाती हुई कली को घिसती है और हैन्ड-शावर की धार से साफ करती है। सिर उठाते निप्पलों को रगड़-रगड़ कर बिठाने की नाकामयाब कोशिश करती है। थोड़ी देर पानी के सुख ले कर गाउन पहन कर बाथरूम से बाहर निकल आती है। सामने राजेश को बेड पर लेटा देख कर ठिठक जाती है।)

टीना: पापा आप्…गये नहीं…?

राजेश: बेटा एक जरूरी चीज रह गयी थी।

टीना: (थोड़ा चौंकते हुए)…क्या…

राजेश: मेरा चुम्मा, तुमने अपना दूसरा रुटीन पूरा कर लिया था।

टीना: (खिलखिलाती हुई) पापा…आप भी न्…वह तो मै बाद मे भी दे सकती थी।

राजेश: न बेटा, कल करे सो आज कर्…।

(टीना धम्म से बेड पर राजेश से लिपट कर उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लेती है। राजेश भी टीना को अपने आगोश में भर कर कोमल पंखुड़ियों से होंठों का लुत्फ लेता है। थोड़ी देर चूमने और चूसने का दौर चलता है।)

राजेश: तुम्हारी मम्मी आने वाली होंगी। मेरी बेटी मुझसे बहुत प्यार करती है। बेटा अब मै नीचे जाता हूँ।

(दोनों बिस्तर से उठते है। राजेश बाहर निकल जाता है। टीना कपड़े पहनने में लग जाती है। दरवाजे की घंटी बजती है। राजेश जाकर दरवाजा खोलता है। सामने मुमु और करीना खड़ी हुई है।)

(दरवाजे पर मुमु और करीना खड़ी हुई है। रात के आठ बज रहे है।)

राजेश: अ…रर…रे। मुमु, इतनी देर कैसे लग गयी। बहुत थकी हुई लग रही हो क्या बात है।

मुमु: (अन्दर आते हुए) भई ट्रेनिंग कर के आ रही हूँ, थकान तो होगी ही। (अपने बेडरूम की ओर रुख करती है।)

राजेश: और तुम करीना तुम, बहुत देर से आयी हो।

करीनाशर्माते हुए) अंकल, कोचिंग क्लास गयी थी। (हल्की सी नजर उठा कर) जरा टीना से जरूरी काम था। क्या टीना घर पर है?

राजेश: (मुस्कुराते हुए) हाँ, तुम तो टीना से मिलने ही आओगी…हम तो तुम्हारे दुश्मन जो हैं।

करीना: नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं। (नजरें झुकाए, पैरों से कारपेट को कुरेदते हुए) मै तो… आ…प से भी मिलने आई हूँ।

राजेश: (ठोड़ी को उठाते हुए) मै तो यहाँ हूँ। तुम नीचे देख कर किससे बात कर रही हो? (तपाक से करीना के होंठों पर अपने होंठों की मौहर लगा कर अलग खड़ा हो गया। करीना इस हरकत से डर के मारे सिहर उठी और जड़वत सी खड़ी रह गयी।) तुम्हें अपना कल किया वादा याद है न?

करीना: (झेंपती हुई) कौन सा?

राजेश: अच्छा जी, एक दिन मे यह हाल है तो जाने आगे क्या होगा। (दिखावटी गुस्से से) कोई बात नहीं, जब किया हुआ वादा याद आ जाए तो मुझसे बात करना। टीना उपर है…

(सामने से आती हुई मुमु को देख कर, करीना बिना कुछ बोलें तेजी से आगे बढ़ गयी और सीड़ीयों से टीना के कमरे की ओर रुख कर लिया)

मुमु: क्या आपके पास नींद की गोली है? थक गयी हूँ, सोना चाहती हूँ …

राजेश: अरे खाना तो खा लो, तुम एक्सरसाइज कर रही हो या डाईटिंग?

मुमु: एक्सरसाइज करने के बाद, मुझे इतनी तेज भूख लग रही थी कि मुझसे रुका नहीं गया। रास्ते में डोमिनोंस पड़ा, गाड़ी रोक कर तीन पिज्जा पैक करा लिये थे।

राजेश: क्यों भई, तुम एक्सरसाइज करो और फिर फास्ट फूड खाओ और खिलाओ।

मुमु: प्लीज, मै बहुत थक गयी हूँ और मुझे पता है कि आज मुझसे खाना नहीं बनेगा। मैनें तो कार ड्राईव करते अपने हिस्से का पिज्जा तो खा लिया। आप लोग आज पिज्जा से काम चला लो, कल तक मै कोई इस का हल निकाल लूँगी।

राजेश: नहीं तुम खाने की चिन्ता मत करो, नींद की गोली मेरे ब्रीफ़केस में से निकाल लो। मै और टीना आज पिज्जा से काम चला लेंगे।

मुमु: आप जा कर कार में से पिज्जा निकाल लाओ और ओवन मै रख दो ताकि गर्म रहे।

(इतना कह कर मुमु बेडरूम में चली गयी। राजेश कार की चाबी लेकर पिज्जा निकाल ने चला गया। पिज्जा ले कर लौटा तो देखा कि दोनों सहेलियाँ, टीना और करीना, बातें करती नीचे उतर कर बाहर जाने के लिये आ गयी है।)

राजेश: टीना… कहाँ चल दी तुम्हारी सवारी?

टीना: (पिज्जा के पैकिट देख कर खुशी से उछलते हुए) ग्रेट्…आज किस खुशी मे पिज्जा पार्टी दी जा रही है?

राजेश: तुम्हारी कामयाबी पर। करीना, आज तुम भी हमारी पिज्जा पार्टी को जौइन करो।

करीना: (हिचकिचाते हुए) नहीं अंकल, बहुत देर हो जाएगी। घर पर मम्मी फिकर करेंगी।

टीना: नहीं यार, मैं आंटी को फोन कर देती हूँ। तू हमारे साथ पार्टी एन्जोय कर।

(टीना फोन उठा कर करीना की मम्मी से बात करती है)

टीना: आंटी ने हाँ कर दी है। अब और तेरी न नुकर नहीं चलेगी। खाने के बाद हम तुझे घर छोड़ देंगे।

करीना: (राजेश की ओर देखते हुए) अंकल आप को नाहक ही परेशानी होगी।

राजेश: (मुँह बनाते हुए) अगर मुझे परेशानी होगी तो तुम्हें टीना घर छोड़ देगी। क्यों टीना?

टीना: हाँ, मै छोड़ दूँगीं। चलो अब झटपट पिज्जा गर्म करने के लिए रख देते है, बहुत भूख लग रही है।

(टीना की बेसब्री को देख कर सब खिलखिला के हँस पड़ते है। राजेश पिज्जा ओवन मे रखने चला जाता है। जब तक पिज्जा गर्म होता है, राजेश फोन पर कहीं बात करता है। टीना और करीना डाईनिंग टेबल पर सामान सजाती है। कुछ देर के बाद राजेश गर्म-गर्म पिज्जा टेबल पर लगा देता है। टीना बिना रुके करीना से बातें करती जाती है और राजेश चुपचाप पिज्जा खाता है। करीना भी बीच-बीच में जवाब देती है। पिज्जा खाने के बाद, टीना और करीना ड्राइंगरूम में आ कर सोफे पर जम जाती है। राजेश भी टेबल साफ कर के दूसरे सोफे पर आ कर बैठ जाता है।)

राजेश: टीना, पेट भरा कि नहीं। तुम्हारे लिए कुछ और बना दूँ।

टीना: मेरा तो पेट फट जाएगा। करीना ने तो सिर्फ दो स्लाइस ही लिये। बाकी सारा तो मैनें खाया है। शायद यह भूकी रह गयी।

राजेश: क्यों करीना क्या अच्छा नहीं लगा। घर जा कर मम्मी से खाना माँगा तो हमारी बड़ी बदनामी होगी कि हमने उनकी बिटिया को भर-पेट खाना नहीं खिलाया।

करीना: नहीं अंकल, ऐसी बात नहीं है। टीना झूठ बोल रही है मैनें तो बहुत खा लिया है अब हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही।

टीना: चल झूठी…

राजेश: बहुत रात हो गयी है। चलो तुम्हें घर छोड़ देता हूँ।

करीना: आप नाहक ही परेशान होगें, मै टीना के साथ चली जाउँगी।

राजेश: टीना, बेचारी करीना मेरे बारे मे कितना सोचती है। जाओ तुम इसको घर छोड़ आओ।

टीना: पापा, प्लीज आप छोड़ आइये। मैनें बहुत खा लिया है, जरा भी चलने की हिम्मत नहीं है।

राजेश: पर तुम्हारी सहेली तो मेरी परेशानी कि वजह से मेरे साथ जाने से मना कर रही है। मै कैसे छोड़ दूँ।

करीना: (झिझकते हुए) मैं अपने आप चली जाउँगी।

राजेश: (गुस्से से) ठीक है, तुम अकेली चली जाओ। (इतना कह कर दरवाजे की ओर बढ़ जाता है। टीना और करीना भौंचक्की सी देखती रह जाती है)

करीना: (डरते हुए) न्…न्हीं अंकल। मेरा यह मतलब नहीं था… प्लीज सौरी अंकल।

राजेश: (हँसता हुआ दरवाजा खोलता है) क्या तुम्हें लगता है कि मै तुम्हें इस रात में अकेले जाने दूँगा।

टीना: पापा, आप भी न्…हमें डरा दिया…

राजेश: जिनसे प्यार करते हो, क्या उस पर कोई गुस्सा कर सकता है। मै तो मजाक कर रहा था। बार-बार करीना कह रही थी कि वह चली जाएगी तो मैने सोचा कि इसे एक सबक दे दूँ। बस इस लिए…

टीना: मेरे अच्छे पापा…

राजेश: टीना, तुम सोने जाओ। मै करीना को घर छोड़ कर आता हूँ। आओ चले करीना…

(इतना कह कर राजेश दरवाजे के बाहर जाता है। टीना अपने कमरे की ओर रुख करती है। सिर झुकाए करीना बाहर आकर दरवाजे को बन्द कर के राजेश से कुछ दूरी बना कर पीछे-पीछे चल देती है। काफी रात हो गयी है, घुप अंधेरा है, कुछ दूरी पर बने हुए घरों की रौशनी छ्न कर बाहर थोड़ा सा उजाला कर रही है। दोनों आगे-पीछे चुपचाप बढ़ते चले जाते है। दोनों विचारमग्न है कि कौन चुप्पी तोड़ता है।)

राजेश: करीना…तुम मेरे साथ नहीं चलना चाहती तो मेरे आगे-आगे चलो…(रुक जाता है)

करीना: आप ही नाराज हो कर आगे-आगे चल रहे है। (दोनों अब साथ-साथ चलने लगते है)

राजेश: (करीना की कमर में हाथ डाल कर नजदीक खींचते हुए) तुम ही आज दूर भाग रही हो।

करीना: (सट के चलती हुई) नहीं तो…

राजेश: छोड़ो सारे गिला-शिकवे (कमर पर से हाथ सरका कर सीने की ओर बड़ाते हुए) अपना कल का वादा याद आया कि नहीं? (बायें स्तन को अपनी हथेली से ढकते हुए)…क्या ब्रा नहीं पहनी आज्…

करीना: (शर्म से दोहरी होते हुए दूर हटने का प्रयास करती है पर राजेश उठे हुए निप्पल को अपनी दो उँगलियॉ के बीच मे लेकर मसल देता है) उई…ई…ई म्…माँ

राजेश: (फिर प्यार से निप्पल को पकड़ कर धीरे-धीरे सहलाता फिर तरेड़ता, और कभी हथेली मे पुरा स्तन को ले कर दबा देता) क्या हुआ…तुम्हें अच्छा नही लगा क्या?…कुछ याद आया?

करीना: (शर्माते हुए) हूँ…

राजेश: तो क्या विचार, सामने वही पगडंडी आ रही है।

करीना: (चुपचाप चलती हुई) हूँ…

(पगडंडी के आते ही राजेश आस-पास देख कर करीना का हाथ पकड़ कर नीचे की ओर उतर जाता है। दोनों के दिल जोरों से धड़क रहे हैं। करीना कल रात की घटना को सोचकर रोमांचित हो रही है और साथ ही डर भी रही है। इधर राजेश झुरमुटों के पीछे पहुँच कर अपनी लुगीं को खोल कर जमीन पर बिछा कर उस पर लेट जाता है और अपने उपर करीना को खींच लेता है। अनायस आँखें मिलते ही, करीना झेंप कर नजरें झुका देती है।)

क्रमशः
Reply
07-12-2018, 12:35 PM,
#8
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--8

गतान्क से आगे..........

राजेश: (दोनों हाथों मे करीना का चेहरा ले कर) शर्माओं नहीं। आज मेरी बहुत सालों की तमन्ना पूरी होने जा रही है। कई बार जब तुम हमारे घर आती थीं तो मैं छिप कर तुम्हारी सुन्दरता को निहारता था। बेध्यानी में तुम्हारे अंग-अंग से इश्क करने लगा हूँ (कहते हुए होंठों पर उंगली फिराता है) तुम्हारे कोमल पंखुड़ियों से होंठों की गुलाबीपन को अपने होंठों से सोख लूँगा, (पल्कोँ को चूमते हुए) हिरनी सी चंचल आँखों से आँख मिलाता हूँ तो झील की गहराई में डूब जाता हूँ…

करीना: (हिचकिचाते हुए) अंकल, जो भी कल हुआ और आज हो रहा है, यह ठीक नहीं हो रहा है…

राजेश: क्यों…(करीना की पीठ पर प्यार से हाथ फिराते हुए) सच बताओ, आज सारे दिन में कल रात के हमारे एकाकार के बारे कुछ भी नहीं सोचा? मुझसे झूठ मत बोलना…आज इसीलिए तुम ने नीचे कुछ नहीं पहना। है न?

करीना: (राजेश के सीने पर सिर रख कर) हूँ…(सिर हिला कर हामी भरी)… अंकल, आज सारा दिन कल रात की बात को सोचते हुए निकला है। मुझे बहुत डर लग रहा है कि किसी को पता चल गया तो क्या होगा।

राजेश: अरे पगली, मेरी नन्हीं गुड़िया। मैं आज पुरे दिन तुम्हारे अंग-अंग के बारे मे सोच-सोच कर रोमांचित होता रहा (कुर्ते के उपर से ही एक स्तन को मुहँ मे भर कर और फूले हुए निप्पल को होंठों मे लेकर कुछ देर चूस कर)… तुम आज नाहक ही परेशान हुई। (राजेश हाथ फिराते हुए पीठ पर कुर्ते के हुकों को एक-एक कर के खोलते हुए)…तुम्हें पता है कि मै तुम्हें टीना जितना ही प्यार करता हूँ।

करीना: (सिसकारी भर कर) अंकल नहीं करो न्…

राजेश: (गिड़गिड़ाते हुए) मान जाओ न्…क्या कल तुम्हें कोई परेशानी हुई थी। आज मेरे प्यार करने से तुम्हे असीम सुख मिलेगा और हमारा प्यार और भी प्रगाड़ हो जाएगा।

करीना: अंकल, मैं आपसे सब से ज्यादा प्यार करती हूँ। पर डर लगता है कि …

राजेश: आज तुम्हारे जीवन की वह रात है कि इन पलों को तुम सारे जीवन अपने दिल में सँजोए रखोगी… मेरी बात मान जाओ (करीना को अपने आगोश में लेकर कभी कान पर चूमता, तो कभी होंठ पर, कभी निशाने पर स्तन होते और कभी खड़े हुए दो निप्पल्स होते)…

करीना: अं…कल न…हीं करो… न्… (बार-बार के राजेश के वारों से करीना के जिस्म के भीतर हलचल बढ़ा दी थी)

(दोनों जिस्म कामोत्तेजना के ज्वर से जल रहे है।)

राजेश: तुम्हें इस एक आँख वाले अजगर (मुठ्ठी में लिए तन्नाये हुए लिंगदेव को दिखाते हुए) का स्वाद लेना है और फिर तुम्हारे इस (योनिच्छेद को उंगलियों छेड़ते हुए) मुख को इस को पूरा निगलना है।

करीना: (अपने हाथ मे लिंगदेव को पकड़ कर बड़े अचरज से) अंकल यह तो बहुत बड़ा और मोटा है, यह कैसे मै निगल पाउँगी?

राजेश: बेटा, तुम अपने इस मुख की प्रतिभा से अनजान हो। यही क्यों, बल्कि तुम्हारे पास दो और मुख है जो इस को निगलने में पूरी तरह सक्षम हैं। (धीरे से कुकुरमुत्ते सा सिर उघाड़ते हुए लिंग की इशारा करते हुए) खैर अब इसको निगलने के लिए तैयार हो जाओ?

करीना: क्या यह ऐसे ही रहेगा… (अपनी मुठ्ठी में लेकर जैसे दिखाया था वैसे फ़ोरस्किन को उतारते हुए) अरे यह खाल तो अपने आप नीचे सरक जाती है…

राजेश: बेटा यह ऐसे ही सिर उठाये खड़ा रहेगा जब तक कि इसके अन्दर का लावा उफ़न के बाहर नहीं आ जाता। आज मुझे तुम्हारें (एक बार फिर योनिच्छेद को उंगलियों छेड़ते हुए) इस मुख का इस्तेमाल करना है। तो आओ, आज इस सुहानी रात में तुम्हारी निखरते हुए यौवन के मुख पर अपनी मौहर लगा दूँ।

(करीना को नीचे लिटा कर बालोंरहित कटिप्रदेश और योनिमुख को अपनी उंगलियों से टटोलने में लग जाता है। राजेश की उँगलियों सरका कर जुड़ी हुई संतरे की फाँकों को अलग करती है। राजेश की उंगली योनिच्छेद में जगह बनाती अकड़ी हुई घुन्डी पर जा टिकती है। करीना की योनि तो आग से पिघल कर बह रही है।)

करीना: .उई...माँ….अँ.क.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश अपनी उंगली से घुन्डी का घिसाव जारी रखता है। अपने होठों की गिरफ्त में करीना के होंठों को ले लेता है। एक हाथ से कभी उन्नत उरोजों पर उँगलियॉ फिराता और कभी दो उँगलियों मे निपल को फँसा कर तरेड़ता, कभी एक कलश को अपनी हथेली मे छुपा लेता और कभी दूसरी को जोर से मसक देता। करीना भी असीम आनंद में लिप्त होती जा रही हैं।)

राजेश: (करीना के निचले होंठ को चूसते और धीरे से काटते हुए) करीना…करीना…

(राजेश करीने के नग्न जिस्म को अपने शरीर से ढक देता है। राजेश अपने तन्नायें हुए लिंग मुठ्ठी में लेकर योनिमुख पर टिका देता है। जलती हुई सलाख एहसास होते ही करीना के मुख से एक सिसकारी निकल जाती है। राजेश प्यार से संतरे की फाँकों को खोल कर घुन्डी को दबाते हुए सरकते हुए योनिच्छेद के मुख पर लगा कर ठेलता है। संकरी और गीली जगह होने की वजह से फुला हुआ कुकुरमुत्तेनुमा सिर फिसल कर जगह बनाते हुए अन्दर घुस जाता है।)

करीना: …उ.उई.माँ..अँ.उ… उक.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश अपनी जुबान से करीना के होंठों को खोल कर उसके गले की गहराई नापने लगता है। लिंगदेव अपना सिर अटकाए शान्ति से इन्तजार करते है कि योनिच्छेद इस नये प्राणी की आदि हो जाए। धीरे-धीरे आगे पीछे होते हुए सिर का घिसाव अन्दर तक करीना को विचलित कर देता है। बेबस करीना इस नये वार से हतप्रभ है। इधर योनिच्छेद मे फँसे हुए लिंगदेव अपने सिर की जगह बन जाने के बाद और अन्दर जाने मे प्रयासरत हो जाते है। उधर उत्तेजना और मीठे से दर्द में तड़पती करीना के होंठों को राजेश अपने होंठों से सीलबंद कर देता है। बार-बार हल्की चोट मारते हुए राजेश जगह बनाते हुए एक भरपूर धक्का लगाता है। आग में तपता हुआ लिंग प्रेम रस से सरोबर हो कर सारे संकरेपन को खोलता हुआ और करीना के कौमर्य को भंग करता हुआ जड़ तक जा कर फँस जाता है। करीना की आँखें खुली की खुली रह गयी और मुख से दबी हुई चीख निकल गयी।)

करीना: उ.उई.माँ..अँ.उफ…मररउक.…गय…यईई…उफ..नई…आह..ह..ह.

राजेश: (पुरी तरह अपने लिंग को जड़ तक बिठा कर) शश…शशश्…करीना…करी…ना

करीना: अंक…ल निका…उ.उई.माँ..अँ.उफ…मररगय…यईई…निक्…उफ..लि…ए…आह..ह..ह.

राजेश: शश…श…बस अब सारा कष्ट खत्म, बस आगे आनंद ही आनंद…।

(करीना की योनि ने भी राजेश के लिंग को अपने शिकंजे मे बुरी तरह जकड़ रखा है। योनि की गहराई नापने की कोशिश मे करीना की योनि में कैद लिंगदेव भी अपने फूले हुए सिर को पूरी तरह निचुड़ा हुआ पा रहे है। क्षण भर रुक कर, राजेश ने करीना के नितंबो को दोनों हाथों को पकड़ कर एक लय के साथ आगे-पीछे हो कर वार शुरु करता है। एक तरफ लिंगदेव का फूला हुआ नंगा सिर करीना की सुरंग को खोल हुआ आगे बड़ता है और फिर वापिस आते हुआ कुकुरमुत्ते समान सिर छिली हुई जगह पर रगड़ मारते हुए बाहर की ओर आता। लिंगदेव गरदन तक बाहर आते ही एक बार फिर से अन्दर का रास्ता तय करने लग जाते है। करीना की योनि भी अब इस प्रकार के दखल की धीरे-धीरे आदि हो गयी थी।)

राजेश: (गति कम करते हुए) करीना अब दर्द तो नहीं हो रहा है…

करीना: हाँ …बहुत दर्द हो रहा है…

राजेश: (रोक कर)… ठीक है मै फिर निकाल देता हूँ… (और अपने को पीछे खींचता है)

करीना: (अपनी टाँगे राजेश की कमर के इर्द-गिर्द कस कर लपेटते हुए) …न…हीं, अभी नही…

राजेश: अगर मजा आ रहा है तो …

करीना: अंकल प्लीज्…

(राजेश भी एक शातिर खिलाड़ी है। उसे यकीन है कि एक बार तेरह वर्षीय करीना को कामसुख से परिचय हो गया तो वह हमेशा के लिए उसकी बन कर रहेगी। थोड़ी देर की रेलमपेल के बाद राजेश के जिस्म मे लावा खौलना आरंभ हो गया और धीरे-धीरे वह अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। ज्वालामुखी फटने से पहले एक जबरदस्त आखिरी वार ने उसके लिंग को कमसिन योनि की गहराईयों मे उतर कर गरदन तक जा कर अन्दर धँस गया। इस वार को करीना बरदाश्त नहीं कर पायी और मीठी सी पीड़ा और रगड़ की जलन आग मे घी का काम करते हुए धनुषाकार बनाती हुई झरझरा कर बहने लगी। उसकी आँखों के सामने तारे नाँचने लगे और एकाएक राजेश के लिंग को गरदन से जकड़ कर योनिच्छेद ने झट्के लेते हुए दुहना शुरु कर दिया। इसका एहसास होते ही सारे बाँध तोड़ते हुए लिंगदेव ने भी बिना रुके लावा उगलना शुरु कर दिया। करीना की योनि को प्रेमरस लबालब भरने के बाद भी राजेश अपने लिंग को फँसाये रखा और नई-नवेली संकरी योनि का लुत्फ लेता रहा। खुले आसमान के नीचे झुरमुटों के बीचोंबीच एक तेरह वर्षीय हसीना के साथ कामक्रीड़ा का एहसास एक स्वपनिल परिकल्पना मात्र लग रहा था।

राजेश: करीना, हमें घर से निकले हुए तीन घंटे हो गये है। रात का एक बज गया है। जल्दी से कपड़े पहन लेते है और फिर सोचते है कि अब क्या करना चाहिये?

(राजेश अपना कुर्ता और लुगीं पहनता है। करीना अपना कुर्ता तो पहन लेती है परन्तु सलवार पहनने में तकलीफ़ होती है। राजेश उसकी परेशानी को समझते हुए, सलवार पहनने में मदद करता है। करीना एक कदम बढ़ाती है तो उसके मुख से एक सिसकारी निकल जाती है।)

राजेश: करीना…क्या चलने में तकलीफ हो रही है?

करीना: (रुआँसी आवाज में) अंकल, हर कदम पर एक टीस उठती है…मुझसे चला नहीं जाएगा।

राजेश: मेरी प्यारी गुड़िया को मैं गोद मे लेकर छोड़ कर आऊँगा। पर अगर किसी ने देख लिया तो क्या कहूँगा… ऐसा करते है कि वापिस मेरे घर पर चलते है। सब सो रहें होगें, तुम्हारे लिए मै गेस्ट रूम खोल दूँगा तुम वहाँ सो जाना। कल सुबह तक तुम्हें आराम हो जाएगा फिर दफ्तर जाते हुए मै तुम्हें कार से घर छोड़ दूँगा।

करीना: (हिचकिचाते हुए) पर घर पर मम्मी से क्या कहूँगी…टीना से क्या कहूँगी?

राजेश: (मुस्कुराते हुए) तुम उसकी चिन्ता छोड़ दो। खाना खाने के बाद जब मै रसोई में सामान समेटने गया था तो मैनें तुम्हारी मम्मी से फोन पर कह दिया था कि देर होने पर रात को करीना हमारे घर पर रुक जाएगी और सुबह घर छोड़ देंगे…इसलिए आज रात को तुम्हारा कोई घर पर इन्तजार नहीं करेगा।

करीना: (गुस्से से राजेश के सीने पर मुक्के मारते हुए) अंकल्…आप बड़े वो हो…इसका मतलब है कि आप पहले से जानते थे कि…(शर्माती हुई)…जाईए मै आपसे कुट्टी…

राजेश: (हँसते हुए) मेरी गुड़िया…नाराज हो गयी…(इतना कह कर करीना को अपने सीने से लगा लिया और होंठ चूम लिये)… तुम कभी मेरे से नाराज न होना नहीं तो मै मर जाउँगा…

करीना: (झट से राजेश के होंठों पर उँगली रखती है)…अंकल कभी भी ऐसी बात मत कहना। मै आपसे अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हूँ।

(राजेश इस अदा से भावुक हो कर करीना को गोदी में उठा कर अपने घर का रुख करता है। दोनों नये युगल जोड़े की तरह फुसफुसाते हुए राजेश के घर पर पहुँचते है। दरवाजे को बिना आहट के खोल कर घर में प्रवेश करते है। राजेश एक बार फिर से गोदी में उठाए करीना को गेस्ट रूम के बेड पर ला कर बिठा देता है।)

राजेश: बेटा, तुम आराम करो मै तुम्हारे लिये हल्दी वाला दूध गर्म करके ले आता हूँ।

करीना: नहीं अंकल रहने दिजीये, आप नाहक ही परेशान हो रहे है…

(राजेश अनसुना कर के रसोई में जा कर दूध को गर्म करता है और उसमे हल्दी मिला कर करीना के पास वापिस आ जाता है। करीना बिना कुछ बोले दुध पी लेती है और बड़ी प्यार भरी नजरों से राजेश को निहारती है।)

राजेश: (करीना के निकट आ कर प्यार से सिर पर हाथ फिराते हुए) करीना तुम अगर कुर्ता और सलवार उतार कर टीना का नाइट गाउन पहन लो तो आराम से सो सकोगी। मै अभी ले कर आता हूँ…(कह कर जाता है और उलटे पाँव प्रेस किया गाउन लेकर आता है)

राजेश: जो प्यार और मोहब्बत मुझे तुमसे मिला है उसके बदले मे जो भी मै कर रहा हूँ वह कुछ भी नहीं है…चलो कपड़े उतार कर गाउन पहन लो।

राजेश: मुझ से कैसी शर्म, मैनें तो तुम्हारा अंग-अंग देख रखा है। ऐसी कौन सी तुम्हारी चीज है जिसको मैनें देखा और छुआ नहीं है…

करीना: वह सब आपने तारों की छाँव में देखा था, यहाँ पर लाइट में मुझे शर्म आती है… कमरे का दरवाजा भी खुला है…

(जल्दी से जा कर दरवाजे की चिटखनी लगाता है और वापिस आकर करीना को अपनी बाँहों मे लेकर खड़ा करता है। फिर धीरे से उसका कुर्ता उतारता है। पुष्ट उरोजों को हाथ में लेकर सहलाता है, और खड़े हुए निप्पल को अपनी उंगलियों में फँसा कर तरेड़ता है। फिर कुछ सोच कर करीना को गाउन पहना देता है। इस बीच करीना अपनी सलवार को उतार देती है और बेड की ओर जाती है। राजेश की निगाह करीना के चेहरे पर पीड़ा की लकीरों पर पड़ती है। देख कर राजेश भावुक हो उठता है। एक बार फिर से गोदी में उठा कर बेड पर लिटा देता है। बालरहित कटिप्रदेश पर नजर पड़ते ही राजेश हतप्रभ रह जाता है। करीना का योनिमुख डबलरोटी की तरह सूज कर फूल गयी है। दोनों का मिक्ष्रित प्रेमरस योनिच्छेद पर सूख कर जम चुका है और थोड़ा जो बाहर रिस कर आया, वह दोनों जांघों पर धारी बनाता हुआ सूख चुका है। राजेश बाथरूम से गुनगुने पानी का एक मग ले कर आता है और साफ रुमाल को भिगो कर हल्के हाथ से योनिच्छेद और उसके आसपास की सिकाई करता है। थोड़ी देर सिकाई करने के बाद जांघों तक पौंछ कर साफ करता है। पूरे समय करीना सिर्फ टुकुर-टुकुर सारे कार्यकलाप को ताकती है पर कुछ नही बोलती।)

राजेश: अब तुम सो जाओ… (और बाहर जाने लगता है)

करीना: (राजेश का हाथ थाम कर)…अंकल थैकस…क्या थोड़ी देर मेरे पास लेट जाँएंगे तो मुझे जल्दी नींद आ जाएगी…

राजेश: क्यों नहीं… (कह कर करीना के पास लेट जाता है। करीना भी राजेश के सीने में मुँह से छिपा कर लिपट जाती है। राजेश धीरे से करीना के बालों में उँगलियों को फिराता है और प्यार पीठ को सहलाता है। करीना को बाँहो मे लिए, थकान से चूर राजेश की भी आँख लग जाती है…)

(सुबह छ: बजे राजेश कि घड़ी का अलार्म बजता है, राजेश गेस्ट रुम से बाहर आ कर सोफे पर सो जाता है। कुछ देर के बाद राजेश ड्राइंगरूम में दफ्तर जाने के लिए तैयार हो कर गेस्ट रूम की ओर रुख करता है। बेड पर अर्धनग्न हालत मे करीना गहरी नींद में सो रही है। करवटें बदलने से नाईट गाउन सिमट कर पेट पर इकठ्ठा हो गया है। उपर का हुक खुलने से एक स्तन बाहर झांक रहा है और करीना का जननांग लाली लिए रात की कहानी बयान कर रहा है। राजेश कुछ देर करीना की कमसिन जवानी को निहारता है फिर झुक कर तपाक से एक बोसा योनि पर जड़ देता है। करीना कसमसाती हुई नींद में करवट बदल कर सीधी लेट जाती है।)

राजेश: करीना…करीना…उठो दस बज गये हैं…

करीना: (आँखे झपकाती हुई बैठते हुए)…हुँ…अंकल्…

राजेश: बेटा मुझे दफ़्तर जाना है। अगर अभी और सोना चाहती हो तो सो जाओ बाद में तैयार हो कर अपने घर चले जाना…

करीना: (बाँहे बढ़ा कर राजेश के गले में डालते हुए)…आई लव यू…

राजेश: (करीना के होंठों पर अपने होंठों की मौहर लगा कर)… बेटा…आई लव यू टू… अब कैसा हाल है…

करीना: अंकल सारा बदन टूट रहा है…एक बार मुझे कस कर रात की तरह बाहों में लेकर भींच दें तो शायद मेरी पीड़ा कम हो जाएगी…

राजेश: (झुक कर करीना को उठाता है और अपने आगोश में लेकर कस कर जकड़ लेता कि हड्डियों के चटकने की आवाज सुनाई देती है) अब बताओ नीचे का क्या हाल है…

करीना: (शर्मा कर आँखे झुका लेती है)…ठीक है…

राजेश: एक बार चल कर देख लो…

(करीना बेड से उतर कर बाथरूम में जाती है और कुछ देर बाद मुँह-हाथ धो कर अपने सलवार कुर्ते मे बाहर आती है। राजेश उसके चेहरे पर एक नई नवेली दुलहन की सुहाग रात के बाद की आभा देख कर खुशी से फूला नहीं समाता है।)

करीना: अंकल…क्या देख रहे हैं।

राजेश: काश्…मुझे तुम… कुछ नहीं। चलें…

करीना: हाँ चलिए… (कह कर बाहर की ओर दोनों रुख करते हैं।

(राजेश और करीना कार में बैठ कर सड़क पर आ जाते है और करीना के घर की ओर मुड़ जाते है।)

करीना: अंकल क्या अभी तक आंटी या टीना में से कोई भी नहीं जागा, कोई दिखाई नहीं दिया…

राजेश: हाँ, अभी तक सब सो रहे है…करीना एक बात कहूँ तो मानोगी…

करीना: हाँ, क्यों नहीं मानूँगी…कल के बाद मैं आपकी हर बात मानूँगी कह कर तो देखिये।

राजेश: मै चाहता हूँ कि जब हम अकेले हों तो तुम मुझे अंकल न कह कर प्रिय या डार्लिंग कहा करो।

करीना: अच्छा प्रिय…लेकिन फिर आप भी मुझे प्रियतमा या डार्लिंग कहेंगें (दोनों खिलखिला कर हँस पड़ते है)…प्रामिस

राजेश: गाड प्रामिस्…अच्छा अब कब मिलोगी? मेरे ख्याल से तुम्हें दो दिन का आराम कर लेना चाहिए क्योंकि डार्लिंग तुम्हारे को सामने पा कर मै अपने आप को रोक नहीं सकूँगा…

करीना: डार्लिंग (गालों पर चुम्मा जड़ते हुए) आपको मेरा कितना ख्याल है। मुझे आपकी याद आयेगी तो इन दो दिन हम फोन पर तो बात कर सकते है न्…

(बातें करते हुए राजेश ने करीना के घर के सामने कार रोक कर और करीना को उतार कर अपने दफ़्तर की ओर बढ़ गया। कल की हसीन रात की कल्पना करते हुए और कमसिन करीना के बारे मे सोच-सोच कर मुस्कुराते हुए राजेश ने अपना रास्ता तय किया। द्फ़्तर पहुँच कर अपने काम मे लग गया।)

सीन-16

(शाम हो रही है। राजेश की कार आ कर रुकती है। मुमु हाथ मे एक बैग लिये बाहर खड़ी हुई है।)

राजेश: बाहर कैसे खड़ी हो, कहीं बाहर जा रही हो?

मुमु: तुम ने आज देर कर दी। मै आज लेट हो जाउँगी।

राजेश: क्यों…

मुमु: मेरी आज डौली से फोन पर बात हुई थी और उसने बताया कि एलन ने मेरा ट्रेनिंग का प्रोग्राम इस तरह बनाया है कि पहले हफ्ते रोज, दूसरे हफ़्ते चार बार, और तीसरे हफ्ते से तीन बार। चौथे हफ्ते रिव्यु करने के बाद बताएगा कि फिर रेग्यूलर कितने दिन मुझे जाना होगा।

राजेश: तो तुम ने फोन कर दिया होता तो मै जल्दी आ जाता…

मुमु: किया था पर तुम मीटिंग मे थे तो मैने द्रिष्टि को बता दिया था कि मीटिंग के बाद मुझसे तुम बात कर कर लेना, उसने बताया नहीं क्या…

राजेश: हाँ कुछ कहा तो था पर उसकी बात मेरे दिमाग से उतर गयी…अब क्या करोगी…

मुमु: मैं जा रही हूँ…

राजेश: अभी साढ़े-पाँच बजे है। देखो सँभल कर जाना।

(मुमु अनसुना किए कार ले कर चली जाती है। राजेश दरवाजे पर खड़ी टीना की ओर बढ़ता है………।)

टीना: पापा, क्या आज की कास्ट्यूम ले कर आयें?

राजेश: (अपनी जुबान होंठों पर फेरता हुआ) इस तरह से काम नहीं चलेगा, मुझे मेरा टैक्स चाहिए। पर कोई बात नहीं मै एक साथ ले लूँगा। मै दोनों का कास्ट्यूम ले कर आया हूँ।

टीना: (खुशी मे उछ्ल कर राजेश से लिपट जाती है) थैंक यू पापा।

राजेश: तुम जल्दी से चेंज कर लो, मै भी चेंज कर लेता हूँ।

(दोनों अपने-अपने कमरे मे जातें है। थोड़ी देर बाद टीना कास्ट्यूम पहन कर नीचे उतर के आती है और राजेश के बेडरूम की ओर बढ़ती है।)

टीना: पापा…पापा… (धीरे से दरवाजे को ढकेल कर अन्दर आते हुए)…मेरे ख्याल से यह कैसा कास्ट्युम है…

(सामने राजेश उपर से नग्न और सफेद रंग की बड़ी महीन स्पान्डेक्स की वी-शेप का स्पेशल टाइप का कच्छा पहने हुए जिसमे से उसका लिंग सिर उठा कर एक पाइप कि भाँति बाहर की ओर निकला हुआ है। आठ इंच लम्बे और तीन इंच मोटे पाइप पर बड़ी महीन स्पान्डेक्स कि परत जो कि एक कान्ड्म पहने लिंग के भाँति दिख रहा है। यह सब देख कर टीना असमंजस में एक चादर ओढ़े अवाक् खड़ी रह जाती है। लेकिन राजेश को दिखाने के लिए गुस्से से अपनी ओढ़ी हुई चादर को हटा देती है। तंग लो-कट सफ़ेद ब्रा जो बामुश्किल स्तनों को ढक पाती हुई, कमर से कुल्हों तक नग्न और फिर निचले अंग से चिपटा हुआ सफ़ेद वी-शेप की पैन्टी, बहुत महीन सफ़ेद रंग की नाईलोन की बिकिनी पहने खड़ी देख कर राजेश का मुख खुला ही रह जाता है।)

राजेश: (बात को संभालते हुए) क्या खराबी है इस कास्ट्यूम मे…

टीना: पापा…पापा…क्या यह मै पहन कर आपके साथ एक्सरसाइज करूगीं…?

राजेश: क्यों नहीं कर सकती…मै भी तो इतने अजीब से कास्ट्यूम में तुम्हारे साथ एक्सरसाइज करूँगा…

टीना: (झेंपती हुई) आप भी न्…

राजेश: (बात बदलते हुए) बेटा…मेरे पास आओ और मेरा टैक्स दे दो…फिर हम आगे की बात करेंगे।

(टीना शर्माते हुए राजेश के नजदीक आती है। राजेश प्यार से टीना को अपनी ओर खींच कर आगोश में ले लेता है। बेचारी टीना हवा में झूल जाती है। टीना के काँपते हुए अधरों को अपने होंठों की गिरफ्त में लेकर अपना टैक्स वसूलता है। कभी कोमल होठों को चूमता है और कभी उनकी लाली को सोखने की कोशिश करता है। कभी अपनी छाती को टीना की छातीयों पर रगड़ता है और कभी अपने उठे हुए हथियार को टीना की झूलती हुई टांगों के बीच मे फँसा कर आगे पीछे होता है। बार बार अर्धनग्न सुडौल स्तनों पर रगड़न और नीचे महीन पर्दे से ढकी अनछुई योनि पर कठोर हथियार का घिसाव माहौल को उत्तेजक बना देता है। राजेश की गहरी साँसे और टीना की सिसकारियाँ वातारण को और भी कामुक बना देती है। अपने आप को संभालते हुए राजेश धीरे से टीना को अपने से अलग करता है और जमीन पर खड़ा कर देता है।)

क्रमशः
Reply
07-12-2018, 12:36 PM,
#9
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--9

गतान्क से आगे..........

राजेश: टीना…कल हमने तुम्हारे हाथों (सहला कर दिखाते हुए) पिंडुली की (सहला कर दिखाते हुए) कमर की (सहला कर दिखाते हुए) और जांघों की (थोड़ी ज्यादा देर तक सहला कर दिखाते हुए) एक्सरसाईज की थी। आज तुम्हारे इन सारे अंगो को रेस्ट देना होगा इसलिए आज का सारा रूटीन सिर्फ टाक्सिन बनाने और निकालने के लिए है। इसी वजह से आज का कास्ट्यूम स्पेशल है।

टीना: (थोड़ा हिचकिचाते हुए) पापा…क्या हम कल वाला रूटीन दुबारा नहीं कर सकते…

राजेश: नहीं बेटा, ऐसा करने से तुम्हारे शरीर की माँस-पेशियाँ किसी एथलीट की तरह बन जाएगी। सारे शरीर का कोमलपन खत्म हो जाएगा और उसमें कड़कपन आ जाएगा। तुम्हें याद होगा कि कल मैनें तुम्हारे द्वारा निकाला हुआ टाक्सिन को पीने की कोशिश की थी। याद है न्…

टीना: हाँ, पर आपने ऐसा क्यों किया, आपने ही तो कहा था कि यह शरीर के अन्दर का जहर है…

राजेश: हाँ, शरीर का जहर उत्तेजना से उतपन्न केमिकल के साथ रिएक्ट हो कर टाक्सिन बनता है। यही टाक्सिन नर और मादा का स्वरूप में एक दूसरे के पूरक बनते हैं। जो तुम टाक्सिन बना सकती हो वह मै नहीं बना सकता। इसी तरह मेरे द्वारा बनाया केमिकल तुम्हारे लिये अम्रित का काम करता है क्योंकि वह तुम्हारा शरीर कभी भी नहीं बना सकता।

टीना: (हैरानी से) तो अगर मै आपका वाला केमिकल नहीं लेती तो इससे मुझे क्या नुकसान होगा…

राजेश: …इस को न लेने से तुम्हारे शरीर के अन्दर बहुत सारे विटामिन और मिनरल की कमी रह जाएगी। इसकी कमी से जल्दी बाल सफेद हो जाँएंगे, चेहरे पर झुर्रियॉ आ जाँएंगी…

टीना: मैं नहीं कर सकूँगी पापा…मुझे बहुत गन्दा लगता है, छि:…

राजेश: बेटा, पहली बार सब को ऐसा ही लगता है…तुम्हारी मम्मी को भी लगा था…परन्तु बाद मे सबको आदत पड़ जाती है…एलन की एक्सरसाईज की विशेषता है कि एक्सरसाईज के दौरान इस के सेवन की आदत पड़ जाए… क्या ख्याल है… एक्सरसाईज शुरु की जाए…

टीना: (हिचकते हुए) मेरे को यह सब ठीक नहीं लग रहा… (झिझकते हुए) मै आपकी बेटी हूँ और …(पिछले दो-तीन दिनों के घटनाक्रम ने टीना के दिमाग में हलचल मचा दी है। जब भी राजेश के उभरे हुए अंग पर नजर पड़ती तो उसके शरीर में अजीब सी सिहरन दौड़ जाती और कटिप्रदेश में मीठी सी तड़प महसूस करने लगी थी। छूने मात्र की कल्पना से कई बार योनि में से कुछ पिघल कर निकल पड़ता और अगर किसी कारणवश नहीं निकलता तो सारे जिस्म में बैचेनी बड़ जाती…ऐसी पेशोपश में नादान टीना कुछ समझ नही पा रही है पर दिल को यह सब करना अच्छा लग रहा है परन्तु दिमाग इन सब को गलत मानता है।) … पापा, ऐसा करना अनुचित है

राजेश: बेटा…हम एक्सरसाईज कर रहे है…तुम्हारे दिमाग में ऐसी-कैसी उचित और अनुचित बातें आती है…इन सब रूटीन को अपनी एक्सरसाईज का हिस्सा मान कर करो…आओ चलें…क्योंकि अगर हम ने कल का रूटीन करना है तो आज का पार्ट पूरा करना पड़ेगा…(इतना कह कर राजेश टीना को पकड़ कर बेड की ओर ले कर जाता है)… बेटा, तुम मेरे किंग साइज बेड पर सीधी लेट जाओ…

टीना: (असमंजस में चलती हुई) पापा…हम एक्सरसाईज कर रहें है, न्…(और जा कर लेट जाती है)

(राजेश के लिंगदेव का तो अपना दिमाग काम कर कर रहा है। छोटी सी बिकनी में अर्धनग्न टीना सामने बेड पर छत पर लगे हुए फुल साइज मिरर में देख कर शर्माती है और पलक बन्द कर के निश्च्ल पड़ जाती है। इधर राजेश बेड पर टीना के दोनों पाँवों को अलग कर बीच में घुटनों के बल आ कर बैठ जाता है।)

राजेश: टीना…टीना…अपनी आँखें खोलो और उपर आईने में देखो…याद रखना जो भी मैं करता हूँ.…वह सब तुम्हें मेरे साथ करना पड़ेगा…(टीना आँखे खोल कर देखती है…)

राजेश सब से पहले टीना के पाँव पर ध्यान केन्द्रित करता है। केले के समान चिकनी टाँगे अपने हाथ से पकड़ कर उठाता है और बायें पाँव की पिंडुली को चूमता है और धीरे से अपने होंठ खोल कर चूसना और चूमना आरंभ करता है। थोड़ी देर बाद यही क्रिया दायें पाँव के साथ दोहराता है।)

टीना:…पापा…मुझे गुदगुदी होती है…

राजेश: बेटा, इस के करने से तुम्हारे शरीर के इस भाग के अन्दर जमा हुए टाक्सिन उपर की ओर उठेंगें…

(फिर योजनाबद्ध तरीके से टीना के नितंबों को अपने हाथों मे लेकर उसकी जांघों पर निशाना साधता है। अपनी जुबान से जांघों के अन्दरूनी हिस्सों पर अपने होंठों की मौहर लगाता है। अब तक टीना के कमसिन शरीर में एक जानी पहचानी उथल-पुथल आरंभ हो चुकी है। धीमी आग में सारा शरीर तपने लगता है और अनजानी बढ़ती हुई तड़प से टीना बिस्तर पर करवटें लेने में लग जाती है।)

टीना: उ.उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

राजेश: (रुक कर) बेटा…अब मैं उपर से नीचे की आउँगा…(कह कर टीना को अपने शरीर से ढक देता है)

(राजेश अपने को एड्जस्ट करता हुआ टीना के उपर लेट जाता है। टीना के माथे को चूमता हुआ पलकों से होता हुआ होठों पर आ कर रुकता है। टीना के होंठों को अपने होंठों मे ले कर चूमने और चूसने का सिलसिला जारी रखता है। टीना भी अब पूरी निपुणता से राजेश का साथ देती है। टीना की जुबान अपने होठों मे दबा कर चूसता है और कभी अपनी जुबान टीना के होंठों के हवाले कर देता है। काफी देर टीना के गुलाबी होंठों को लाल करने के बाद, राजेश का ध्यान गरदन और कन्धों पर केन्द्रित हो जाता है। अब लगातार टार्गेट बदलने से राजेश के सीने ने टीना के उन्नत स्तनों को बड़ी बेरहमी से पीसना आरंभ दिया है। सब उचित-अनुचित भूल कर, टीना के अन्दर की धीमी जलती हुई आग अब भड़कने लगी है।)

टीना: प्पा.उई...पअआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…आह..ह..ह.

राजेश: बेटा…टाक्सिन बनने लगा है क्या…?

टीना: आह..ह..ह.हाँ…पा…पप्पा…

(नीचे की ओर खिसकता हुआ राजेश का ध्यान अब पूरी तरह अब टीना की अर्धनग्न उन्नत और सुडौल स्तनों पर आ टिकता है। तेज चलती हुई साँसें फूले हुए स्तनों में अजीब सी कँपन ला रहे है। क्षण भर रुक कर, एक बाज की तरह ब्रा समेत बायें स्तन को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लेता है और सोखना शुरु कर देता है। मुख से निकलती हुई लार महीन नाईलोन की ब्रा को पारदर्शी बना देती है। कभी नग्न हिस्से को निशाना बनाता है और कभी ढके हुए हिस्से को पूरा निगलने की कोशिश करता है। पारदर्शी ब्रा में से झाँकते हुए फुले हुए बायें ऊर्ध्व निप्पल को पहले अपनी जुबान के अग्र भाग से कुछ देर तक छेड़ता है और फिर धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है।)

टीना: प्पा.उई...पअआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…आह..ह..ह. (होश मे आते हुए) पा…उई…पा, यह हम एक्सरसाईज कर रहें है क्या…।

राजेश: (भावविभोर हो कर)…हूँ…हाँ, बेटा… टाक्सिन बनने लगा है क्या?

(बायाँ स्तन छोड़ कर अपना ध्यान दायें स्तन पर केन्द्रित करता है। फिर वही चूमने और चूसने के कार्यक्रम को दायें स्तन के साथ दोहराता है। टीना हर्षोन्मत्त हो कर सिर पटकती है। राजेश का मुख सुडौल स्तनों को पूरी तरह से अपने कब्जे मे ले कर सोखने में लग जाता है। कभी-कभी अपनी जुबान से फुले हुए ऊर्ध्व निप्पलों से छेड़खानी करता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है। टीना का शरीर अब उसके काबू मे न रह कर किसी गहरे उन्माद में तड़पता है। इसी उन्माद में टीना को एहसास होता है कि उसका योनिमुख अपने आप खुल-बन्द होने लगी है और उस मे से कुछ पिघलता हुआ लगातार बाहर की ओर बहने लगा है। राजेश का भी हाल टीना से भिन्न नहीं है। उसके लिंगदेव ने भी टीना की कमसिन जवानी की सुगन्ध लेकर लगातार अपने मुख से लार टपकाना आरंभ कर दिया है।)

टीन: उ.उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

राजेश: आह..ह..ह.हाँ

(अपने उन्माद को काबू में कर के राजेश एक बार फिर नीचे की ओर बढ़ता है। पेट और कमर को लाल करके पैन्टी पर आकर रुकता है। अपने दोनों हाथों से टीना के नितंबों को थाम कर उपर की ओर उठाता है और अपने होंठों को नाईलोन की महीन पैन्टी से ढकी योनिमुख के होंठों पर लगा देता है। इस अप्रत्याशित वार से टीना कसमसा कर खड़े होने की कोशिश करती है परन्तु हिलने की वजह से थोड़ा सा योनिमुख खुल जाता है और तपाक से राजेश की जुबान अपना रास्ता ढूँढते हुए सीधा वार एंठीं हुई घुन्डी पर कर देती है। इस वार से तिलमिला कर टीना की योनि झरझरा कर बहने लगती है। राजेश की जुबान भी चटखारे ले कर महीन नाईलोन से छ्नते हुए अम्रित को पीने में लग जाती है। टीना के योनिच्छेद पर मुख लगा कर राजेश सारा अम्रित सोखने मे लग जाता है। कुछ क्षणों में एक बार फिर से लगातार झटके ले कर टीना की योनि में सैलाब आ जाता है जिसको राजेश फिर से चटखारे ले कर पी जाता है। इस बार टीना बिना कुछ बोले निढाल सी पड़ जाती है। उसकी आँखों के सामने तारे नाँचने लगते है और फिर अंधेरा छा जाता है। राजेश भी थकान से निढाल हो कर टीना की योनि पर मुख रख कर पसर जाता है। दोनों अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसों को काबू में लाने की कोशिश करते है। थोड़े समय के बाद राजेश उठ बैठता है।)

राजेश: टीना…बेटा…टीना…

टीना: (अपनी साँसों को काबू मे लाती हुई) …हूँ …हाँ

राजेश: हमारा आधा रूटीन पूरा हो गया…आज तुमने बहुत सारा टाक्सिन निकाला है…देखो (पारदर्शी गीली पैन्टी के बीचोंबीच झाकँती हुई दरार पर उंगलियों को फिराता है। निढाल पड़ी टीना बिना हिले-डुले अबकी बार इस हरकत पर चिह्नकती नहीं बल्कि आँखें चार होते मुस्कुरा भर देती है।)

राजेश: कैसा लग रहा है…।

टीना: बहुत हल्का महसूस कर रहीं हूँ…पापा मेरे सारे कपड़े आपने गीले कर दिये…

राजेश: सारी बेटा, तुम इतनी सुन्दर हो की मेरे मुँह से लार निकलना बन्द ही नहीं हो रही थी…जैसे ही मैं (टीना के स्तन पर हाथ फिराते हुए और उँगलियों मे निप्पल को पकड़ कर तरेड़ते हुए) इन के पास पहुँचा तो मेरा बाँध टूट गया और मेरे मुख में सैलाब उमड़ पड़ा।

टीना: क्या अब मुझे भी यही सब करना है…

राजेश: हाँ, अगर तुम नहीं चाहती तो मत करो…लेकिन मैने तो तुम्हारे द्वारा बनाए सारे विटामिन सोख लिए परन्तु तुमको इस एक्सरसाईज से फायदा लेना है…तुम इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाओगी…

टीना: पापा…मुझे अजीब सा लग रहा है… मैं कपड़े बदल कर आती हूँ…तब मै आपका वाला रूटीन करने की कोशिश करूँगी…

राजेश: बेटा, आज के रूटीन का तो सिर्फ एक ही सेट है फिर बदल कर कौन से कपड़े पहनोगी? इन्हें पहने रहो…अभी कुछ देर मे अपने-आप सूख जाएँगे…वरना तुम अपनी कोई पुरानी काटन की ब्रा और पैन्टी पहन लो क्योकिं तुम्हारा कास्ट्यूम छोटा और टाईट है…

टीना: मुझे गीलापन सता रहा है…मै अपने पुराने कपड़ों में से काटन की ब्रा और पैन्टी निकाल कर ले आती हूँ…

(इतना कह कर उठ कर अपने कमरे की ओर जाती है…)

(टीना अपने पुराने कपड़ों को खंगाल कर पुरानी काटन की ब्रा और पैन्टी निकालती है…बाथरूम में जाकर बदलती है। बहुत तंग होने के कारण ब्रा के हुक दोनों स्तनों को कस कर भींचने के बाद भी नहीं लग पाते। जैसे-तैसे बेचारी साँस रोक कर बड़ी मुश्किल से हुक को लगा कर पैन्टी पहनने की कोशिश करने के लिए झुकती है तो ब्रा का एक हुक खिंच कर टूट जाता है और पैन्टी को उपर खींचती है तो साइड की सिलाई उधड़ जाती है। नीचे से राजेश की आवाज सुनाई देती है)

टीना: पापा, अभी आई… (इतना कह कर नीचे की ओर भागती है)

राजेश: बेटा जल्दी से आओ क्योंकि थोड़ी देर में मम्मी के आने का टाइम हो जाएगा…हमें यह रूटीन आज ही पूरा करना है…क्योकिं कल फिर मसल की एक्सरसाइज करनी होगी…।

(राजेश पूरी तरह नग्न सिर्फ एक वी-शेप ब्रीफ में बेड पर सीधा लेटा हुआ है। उसका जननांग महीन से नाईलान के कपड़े को कान्डम की तरह ओड़ कर किसी अजगर की भाँति हवा में लहराते हुए झटके खा रहा है। टीना झिझकती हुई बेड के पास आती है।)

राजेश: बेटा, इस रूटीन में सिर्फ तुम्हे अपने मुख का इस्तेमाल करना है। तुम्हें याद है न कि मैने शुरु कहाँ से किया था…

टीना: (मुस्कुरा कर) हूँ…पापा आपके पाँव पर तो बाल हैं…सब मुँह मे आएँगे…

राजेश: (हँस कर) ठीक है…तो वहीं से शुरु करो जहाँ पर तुम्हें बाल नहीं दिख रहे…मेरे होंठों पर तो बाल नहीं है…वहीं से शुरु करो…

टीना: हाँ (मन ही मन सोचती है कि इसी बहाने उस फनफनाते हुए अजगर से तो दूर होगी)… यही ठीक जगह है

(टीना साईड से राजेश के मुख की ओर बढ़ती है। झुक कर राजेश के होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त मे ले लेती है। टीना अपनी जुबान से राजेश के होंठों को नापने में लग जाती है और उधर राजेश भी उसके होंठों को चूस कर गुलाबी से लाल कर देता है। दोनों कि जुबान भी द्वंद्वयुद्ध में लग जाती है। कभी टीना राजेश के गले की गहराई नापती है और कभी राजेश टीना के गले की गहराई नापता है। दोनों उत्तेजना मे हाँफते हुए एक दूसरे से अलग होते है।)

राजेश: बेटा, यहाँ पर बड़ी देर से काम कर रही हो… अब आगे…

टीना: पापा, बाकी सब जगह तो आपके बाल आड़े आ रहे है…

राजेश: न बेटा, तुम भूल रही हो…मेरा एक अंग तुम्हें बुला रहा है…(आँखों से अपने हथियार की ओर इशारा कर के बताते हुए) …

टीना: नौटी पापा…मैं नहीं कर पाउंगी…बहुत बड़ा और मोटा है…।

राजेश: बेटा प्लीज्…ऐसा न कहो…आज सुबह से मै इसी……मेरा यह मतलब है कि मै सुबह से आज के रूटीन के बारे मे सोच रहा था कि तुम्हारे सारे टाक्सिन को मै कैसे पी पाउंगा पर तुम्हारी आँखों में मेरे लिए असीम प्यार को देख कर मै अपने आप को चाह कर भी रोक नहीं सका।

टीना: (इतना सुन कर) ठीक है पापा…आप बताते जाइए…मैं वैसा ही करती जाऊँगी।

राजेश: सबसे पहले तो मेरी दोनों टांगों के बीच में घुटनों के बल बैठ जाओ। फिर अपने होंठ खोल कर आईसक्रीम की तरह जुबान से इसके सिर को चाटो और मुँह को खोल कर सोखना शुरु कर दो…

(टीना शर्माते हुए दोनों पाँवों के बीच में जाकर बैठ जाती है। जैसे झुक कर लिंगदेव के नजदीक पहुँचती है, लिंगदेव एक झटका ले कर टीना के होंठों पर वार कर देते हैं। बेचारी नादान टीना इस अप्रत्याशित वार से डर कर पीछे होती है तो उसकी पैन्टी की सिलाई और उधड़ जाती है।)

राजेश: क्या हुआ…

टीना: यह मारता है…

राजेश: कौन मारता है…

टीना: (शर्माते हुए इशारा करते हुए) यह्…

राजेश: यह कौन?

टीना: (ठुनकते हुए) पापा…आप बहुत नौटी हो…

राजेश: बेटा, यह तुम्हें बहुत प्यार करता है, यह अपना प्यार दिखा रहा था।

टीना: अच्छा जी…(प्यार से हिलते हुए लिंगदेव को हल्की सी चपत लगाती है)…पापा यह बहुत हिल रहा है…

राजेश: ठीक है, बेटा इसकी गरदन से पकड़ कर इसके सिर को अपने मुख में लेकर आइसक्रीम की तरह सोखना शुरु करो…।

(टीना तन्नायें हुए लिंगदेव को अपने हाथों मे थाम कर पुचकारती है और फिर अपने होंठों को थोड़ा सा खोल कर सिर को मुख में ले कर चूसने का प्रयत्न करती है। नरम हाथ का स्पर्श पा कर लिंगदेव एक बार अपनी सारी उर्जा टीना के हाथों पर तब्दील कर देते है। टीना झीने से कपडे में से भी गर्मी महसूस करती है)

करीना: पापा…यह तो बहुत तप रहा है…आह.....

राजेश: वेरी गुड…बेटा अपना मुँह खोलो इसके सिर को पूरा मुख में भर कर सोखो…जिससे यह ठंडा हो जाए…

(टीना अपना पूरा मुख खोल कर लहराते हुए अजगर का सिर को अन्दर लेकर चूसना आरंभ करती है। राजेश भी नीचे से अपने नितंबों को उठा कर लिंगदेव को अन्दर ढकेलने की कोशिश करता हुआ टीना के मुख को सीलबन्द कर दिया।)

टीना: .गग…गगगू...म…गूग.गअँ.…आह....(मुख से लिंगदेव को बाहर निकालने की कोशिश करती है)….

(साँस घुटती हुई लगी तो टीना को साँस लेने के लिए मुख पूरा खोलना पड़ गया, राजेश ने वक्त की नजाकत को समझते हुए थोड़ा और अन्दर सरका दिया। राजेश थोड़ा अपने को उपर खिसका कर लिंग का दबाव बढ़ा कर और अन्दर खिसका देता है। कुछ मिनट यह मुख के अन्दर-बाहर का दौर चलता रहा और लगातार लिंग के सिर पर टीना के होंठों के घर्षण से झट्के के साथ उबलता हुआ लावा टीना के मुख मे महीन कपड़े से छ्न कर बेरोकटोक बहने लगा। इस अचानक सैलाब से घबरा कर बेचारी टीना ने अपने आप को पीछे किया तो दूसरा और आखिरी हुक ने भी जवाब दे दिया। ब्रा के नीचे गिरने से उन्नत स्तन अवतरित हो गये। राजेश ने उठ कर टीना के सिर पर दबाव दे कर लिंगदेव को उसके मुँख से बाहर नहीं निकलने दिया जब तक कि वह सारा लावा गटक नही गयी। तूफान आ कर थम गया। दोनों अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसो को काबू करने मे लगे थे। राजेश ने आगे बढ़ कर टीना को अपने आगोश में ले कर बेड पर लेट गया और नग्न स्तनों के साथ खेलने लगा)

राजेश: टीना…टीना…

टीना: (रुआँसी आवाज में) पापा…मेरा दम ही निकल गया। मुझसे साँस लेने में तकलीफ हो रही थी कि आपने इसे मेरे मुँह में पूरा धँसा दिया…मेरी तो जान ही निकल गयी…

राजेश: (धीरे से एक स्तन को दबाते हुए) टीना…यह पहली बार बहुत जरूरी होता है। मुझे एलन अंकल ने कहा था कि एक बार इसका टेस्ट कराना जरूरी होता है… इसी लिए मुझे ऐसा करना पड़ा… कैसा लगा?

करीना: (शर्माती हुई) हुं…ठीक है

राजेश: अच्छा अब पूरा रूटीन हो गया है (अचानक टीना को एहसास होता है कि उसका सीना नग्न है और राजेश की हथेली ने एक स्तन को ढक रखा है और उसकी उंगलियों के बीच में गुलाबी निप्पल मुँह उठाए खड़ा हुआ है)

टीना:…पापा…यह क्या…(झेंप कर अपने हाथों से ढकने की कोशिश करते हुए)…

राजेश: कुछ नहीं बेटा…इनकी मालिश कर रहा हूँ जिससे यह हमेशा सुडौल और उन्नत रहे…क्या तुम्हारा रूटीन एक बार फिर कर लें…अभी तो बहुत टाइम है…

क्रमशः
Reply
07-12-2018, 12:36 PM,
#10
RE: Jawan Ladki Chudai कमसिन कलियाँ
कमसिन कलियाँ--10

गतान्क से आगे..........

(टीना तो पहले से ही आग में जल रही थी। जब से उसने गर्म राड थामी थी, उसके उदर मे हलचल मची हुई थी और नीचे धीमी सी आग जल उठी थी। नग्न स्तनों के मर्दन की वजह से पूरे शरीर में अनजानी सी अकड़न होने लगी थी। राजेश की बात सुन कर सारे शरीर में एक बिजली सी कौंध जाती है। परन्तु…)

टीना: पर पापा…मेरा कास्ट्यूम्…

राजेश: मुख में कपड़े के रोएं जुबान से चिपक जाते है… आज मेरे लिए…उसको रहने दो…

टीना: पर हमारा रूटीन्…एक्सरसाईज में तो ऐसा नहीं है…

राजेश: क्या मेरा बेटा मेरे लिए एक बार बिना एक्ससाइज के अलावा भी मेरे कहने से कुछ और कर सकता है…

टीना: पापा…(राजेश की याचक नजरें देख कर)…चलिए ठीक है…

राजेश: थैंक यू…मुझे पता था कि मेरी बेटी मुझसे बहुत प्यार करती है और वह मेरा दिल रखने के लिए कभी भी मना नहीं करेगी।

(एक बार फिर टीना सीधी हो कर बेड पर लेट जाती है। नग्न पुष्ट सीना और उन पर फुले हुए ऊर्ध्व गुलाबी निप्पल और नीचे एक छोटी सी काटन पैन्टी जो कि एक साईड से पूरी तरह उधड़ गयी है। कमसिन यौवन को अपने बेड पर हिलोरें मारते द्र्श्य को देख राजेश का मन एक बार फिर से मचल उठा।)

राजेश: बेटा उपर लगे आईने में जरा अपने को देखो और खुद की सुन्दरता पर गर्व करो कि तुम्हारा गोरा बदन कैसे साँचे में ढला हुआ है। जो इसको देखे मर मिटे…

(एक बार फिर से राजेश अपने जिस्म से टीना को ढक देता है। इस बार वह जल्दी में है और सीधा टीना के होठों को अपने होंठों मे ले कर चूमने और चूसने लगता है। टीना भी अब पूरी निपुण हो कर राजेश का साथ देती है। टीना की जुबान अपने होठों मे दबा कर चूसता है और कभी अपनी जुबान टीना के होंठों के हवाले कर देता है। काफी देर टीना के गुलाबी होंठों को लाल करने के बाद, राजेश का ध्यान सीधा नग्न सीने पर केन्द्रित हो जाता है। टीना के उन्नत स्तनों को अपने हाथों में भरकर बड़े प्यार से दबाने का क्रम शुरु करता है। टीना के अन्दर की धीमी सुलगती हुई वासना की आग अब भड़कने लगी है।)

टीना: प्पा.उई...पअआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…आह..ह..ह.

(तेज चलती हुई साँसें फूले हुए स्तनों में अजीब सी कँपन ला रहे है और लगातार मर्दन से लाल हो गये है। क्षण भर रुक कर, एक बाज की दायें स्तन को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लेता है और सोखना शुरु कर देता है। मुख से निकलती हुई लार पुरे पुष्ट स्तन को नहला देती है। कभी नग्न निप्पल को निशाना बनाता है और कभी पूरे स्तन को निगलने की कोशिश करता है। कभी लम्बवत्त निप्पल को अपनी जुबान के अग्र भाग से छेड़ता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है।)

टीना: (भावविभोर हो कर) प्पा.उई...प लीज…काटिएआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…दर्द्…हो…ओ…ता है…

राजेश: …हूँ…हाँ, बेटा…टाक्सिन बनने लगा है क्या?

(दायाँ स्तन छोड़ कर अपना ध्यान बायें स्तन पर केन्द्रित करता है। फिर वही चूमने और चूसने के कार्यक्रम को बायें स्तन के साथ दोहराता है। टीना हर्षोन्मत्त हो कर सिर पटकती है। अबकी बार नग्न होने के कारण टीना के सीने का पोर-पोर अतिसंवेदनशील हो गया है। राजेश का मुख सुडौल स्तनों को पूरी तरह से अपने कब्जे मे ले कर सोखने में लग जाता है। कभी-कभी अपनी जुबान से फुले हुए निप्पलों से छेड़खानी करता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है। टीना का शरीर अब उसके काबू मे न रह कर किसी गहरे उन्माद में तड़पता है और उसका योनिमुख भी फिर से एक बार हरकत मे आ कर अपने आप खुल-बन्द होने लगा है। पिघलता हुआ लावा बाहर की ओर बह कर काटन पैन्टी को गीला कर रहा है। राजेश के तनतनाते हुए हथियार ने भी अपने मुख से लार टपकाना आरंभ कर दिया है।)

टीन: उ.उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

राजेश: आह..ह..ह.हाँ

(अपने उन्माद को काबू में कर के राजेश एक बार फिर नीचे की ओर बढ़ कर गीले पैन्टी के हिस्से को मुख मे थाम कर सोखना आरंभ करता है। अपने एक हाथ से टीना की उधड़ी हुई पैन्टी के हिस्से में फँसाता है और उपर की ओर उठाता है जिस की वजह से सारी सिलाई खुदब्खुद खुलती चली जाती है। अति उल्लासित अवस्था में टीना को इसका पता ही नहीं चल पाता है वह सिर्फ बेड पर तड़पती हुई सिर पटक रही है। राजेश धीरे से पैन्टी के उपर वाले सिरे को एक तरफ उठा कर अपने होंठ नग्न योनिमुख के होंठों पर लगा देता है। अपनी उंगलियों से थोड़ा सा योनिमुख को खोलता है और अपनी जुबान से एंठीं हुई घुन्डी को सहलाता है। इस अप्रत्याशित वार से तिलमिला कर एंठीं हुई घुन्डी रक्तिम लालिमा लिए सिर उठा कर खड़ी हो जाती है। कभी अपनी उंगलियों से योनिच्छेद को छेड़ता और कभी जुबान के अग्र भाग से एंठीं हुई घुन्डी को सहला कर ठोकर मारता है। इस दो तरफा वार को ज्यादा टीना बर्दाश्त नहीं कर पायी और उसकी आँखों के सामने तारे नाँचने लगते है। एक झटका ले कर उसकी योनि झरझरा कर बहने लगी। राजेश की जुबान भी चटखारे ले कर अम्रित को पीने में लग जाती है।)

टीना: (जैसे नशे में हो).उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

(टीना के योनिच्छेद पर मुख लगा कर राजेश सारा अम्रित सोखने मे लग जाता है। अपनी जुबान के अग्र भाग को कड़ा कर के अन्दर डालने की कोशिश करता है। कुछ क्षणों में एक बार फिर से लगातार झटके ले कर टीना की योनि में सैलाब आ जाता है जिसको राजेश फिर से चटखारे ले कर पी जाता है। दोनों थकान से निढाल हो कर बेड पर पड़ जाते हैं और अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसों को काबू में लाने की कोशिश करते है। थोड़े समय के बाद राजेश उठ बैठता है।)

राजेश: (टीना के साथ सट कर लेटते हुए) टीना…बेटा…टीना…

टीना: (अपनी साँसों को काबू मे लाती हुई)…हूँ …हाँ

राजेश: आज की एक्सरसाइज कैसी रही…

टीना: (थकी हुई आवाज में) …हाँ…पापा मुझे लग रहा है कि मैं उड़ रही हूँ… (अपने हाथ को नीचे ले जाती है फिर रोंएँदार कटिप्रदेश की नग्नअवस्था का एहसास होता है)…पापा…(चीखते हुए उठ बैठती है और ढकने का प्रयत्न करती है)

राजेश: (भोली सूरत बना कर)…क्या हुआ…अच्छा यह्…देखते ही मै समझ गया था कि मेरी बेटी ने मेरा मन पढ़ लिया था और अपनी पैन्टी को साइड से उधेड़ लिया था जिससे मुझे कोई तकलीफ न हो। बेटा थैंक्स्…।

टीना: (झिझक कर)…नहीं मैनें ऐसा…

राजेश: (नग्न योनिमुख की दरार में से झाँकती हुई रक्तिम घुन्डी को अपनी उँगलियों से सहलाते हुए) अच्छा कुछ न कहो…आज मेरी बेटी ने मेरी बात रख कर दिखा दिया कि वह मुझसे कितना प्यार करती है…

टीना: (एक सिसकारी ले कर)…पापा आप तो बड़े वो हो…

राजेश: (रक्तिम घुन्डी को उंगलियों से छेड़ते हुए) मुझे सच बताना तुम्हें पहला दौर अच्छा लगा या दूसरा दौर्…।

टीना: (हल्की सी दबी आवाज में) दूसरा दौर्…

राजेश: मै जानता हूँ…(इतना कह कर टीना को अपने आगोश में भर लेता है)…कपड़ों के बिना एक्सरसाइज करने से ज्यादा टाक्सिन बनता है, आज यह बात भी भलि-भाँति हम दोनों ने सीख ली…है न्…

टीना: (झिझकते हुए) हाँ पापा…

राजेश: (बहुत दुखी मन से)…पर बेटा तुम्हारा तो रूटीन हो गया परन्तु मै तो ऐसे ही रह गया…अब तो नहीं कर सकते हैं क्योंकि तुम्हारी मम्मी के आने का समय हो गया है।

टीना: हाँ पापा…(चिड़ाते हुए)…पर क्या हुआ…आज जहाँ पर छोड़ा है कल वहीं से शुरु करेंगे…मै जाऊँ…

राजेश: हाँ बेटा…परन्तु जाने से पहले मुझे तुम्हें जी भर कर देखने दो…

(टीना बेड पर खड़ी होती है। राजेश एक बार प्यार भरी नजरों से टीना के नग्न जिस्म के एक-एक अंग को निहारता है। फिर फटी हुई पैन्टी को नीचे खींच कर अलग कर लेता है। धीरे से टीना की योनि को चूमता है और दरार पर अपनी जुबान फेरता है। टीना को अपनी गोद मे खींचकर उसके होंठों को चूमता है और फिर नग्न स्तनों को अपने मुख मे ले कर सोखता है।)

टीना: (चंचलता से) क्या बात है पापा…मन नहीं भरा…मम्मी आने वाली है…(तभी दरवाजे की घंटी बजती है। दोनों सहम कर इधर-उधर देखते है। राजेश जल्दी से अपना कास्ट्यूम उतारने की कोशिश करता है लेकिन अकड़े हुए लिंगदेव उसकी कोशिश को नाकाम कर देते है। घबराहट में बिना सोचे समझे अपना हाथ अन्दर डाल कर गुस्से से फनफनाते हुए लिंगदेव को बाहर निकालता है। उपर की खाल पीछे खिंचने से फूला हुआ लाल रंग का कुकुरमुत्ते नुमा सिर आसमान की ओर निशाना लगाता हुआ सामने आ जाता है। राजेश बेध्यानी में उसे गरदन से मुठ्ठी में पकड़ कर एक दो करारे झटके देता हुआ अपनी लुगीं को ढूँढता है। अचानक राजेश की नजर जड़वत खड़ी टीना पर पड़ती है जो भौचक्की सी लाल टोपी वाले को घूर रही है।)

राजेश: (अपनी मुठ्ठी में लिंगदेव को पकड़े हुए) टीना…टीना…बेटा जल्दी से अपने कमरे मे जा कर कपड़े पहन लो…मै दरवाजा खोलता हूँ…कहाँ खो गयी हो…बेटा यह (अपने लिंग को हिलाते हुए) तुम्हारा खिलौना है बाद में देख लेना…अभी जाओ…

(एक बार फिर से घंटी बजती है। टीना जैसे नींद से जागती है और तुरन्त अपने कमरे की ओर भागती है। राजेश को सामने मेज पर तह की हुई लुंगी दिखती है जिसे जल्दी से लपेट कर बाहर दरवाजे की ओर भागता है। और दरवाजा खोलता है……)

सीन-18

(राजेश दरवाजा खोलता है तो सामने थकी हुई मुमु को खड़ी पाता है। मुमु के हालत देख कर राजेश उसे अन्दर आने के लिए जगह देता है। मुमु सीधे जा कर धम्म से सोफे पर जा कर पसर जाती है।)

राजेश: बहुत थकी हुई लग रही हो?

मुमु: हाँ, लेकिन बहुत मजा आ रहा है…तुम लोग क्या कर रहे थे…बहुत देर लगा दी दरवाजा खोलने में…

राजेश: टीना कुछ देर पहले उपर अपने कमरे में फ्रेश होने चली गयी थी और मै नहाने के लिये बाथरूम में जा रहा था तभी तुम्हारी घंटी बजी। बस कपड़े रख कर आ रहा था कि तुमने दूसरी बार घंटी बजा दी…

मुमु: मै बहुत थक गयी हूँ…खाने का क्या करें…आज बाहर से मंगा लेते है।

राजेश: भई, ऐसा कब तक चलेगा…

मुमु: प्लीज्…कुछ दिन बरदाश्त कर लो…

राजेश: ठीक है…मैं पंचगुनी रेस्टोरेन्ट को फोन पर आर्डर दे देता हूँ, पन्द्र्ह मिनट में डिलीवरी की गारंटी है। तुम हाथ मुँह धो कर रेडी हो जाओ…

(इतना कह कर फोन करने अपने कमरे में चला जाता है। मुमु सोफे पर सिर टिका कर आँखे मुंदे पड़ी रहती है। थोड़ी देर बाद दरवाजे की घंटी बजती है तब मुमु की नींद टूटती है। मुमु जा कर दरवाजे को खोल कर पैक्ड खाने की डिलीवरी लेती है। डाईनिंग टेबल पर खाना सजाती है।)

मुमु: टीना…टीना…खाना लग गया है। (कह कर बाथरूम की ओर रुख करती है)

(थोड़ी देर के बाद, सब डाइनिंग टेबल पर इकट्ठे हो कर खाना खाते हैं। खाना खाने के बाद टीना अपने कमरे में चली जाती है और राजेश और मुमु अपने कमरे में सोने चले जाते है।)

मुमु: मुझे आज नींद की गोली दे दो क्योंकि मै बहुत थक गयी हूँ…

राजेश: मुमु, तुम अब बहुत ज्यादा इन गोलियों पर डिपेन्ड करने लगी हो…यह अच्छी बात नहीं है।

मुमु: डौली बता रही थी कि कुछ दिनों में मुझे इस वर्कआउट की आदत हो जाएगी तब मुझे इन गोलियों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

राजेश: ठीक है…दराज में से ले लो…मैं टीना के पास जाता हूँ। आज डाइनिंग टेबल पर बहुत चुप थी, तुमने भी तो उससे कोई बात नहीं की…लगता है वह नाराज है।

मुमु: प्लीज्…तुम उसको कुछ दिन सँभाल लो…अरररे…मैं तो बिलकुल भूल गयी…आज उसके स्कूल से फोन आया था कि कल सुबह उसको स्कूल जाना है क्योंकि कल बोर्ड की परीक्षा के फार्म भरे जाएँगे।

राजेश: तुम अब बता रही हो…

मुमु: आज कल हम मिल कहाँ रहे है…प्लीज क्या तुम कल उसको सुबह स्कूल छोड़ दोगे क्योंकि स्कूल बस नहीं चलेगी।

राजेश: ठीक है, तुम थक गयी हो सो जाओ…मै टीना के पास जा रहा हूँ। देखूँ कि कहीं सो तो नहीं गयी। (कह कर कमरे से बाहर आ जाता है और किसी से फोन पर बात करने के लिए नम्बर मिलाता है।)

राजेश: हैलो…हाँ डार्लिंग मैं बोल रहा हूँ…कैसी हो…कुछ दर्द कम हुआ…(उधर से करीना की आवाज आती है)

करीना: अंकल्…सौरी…मेरे प्रीतम…अब ठीक है…दर्द तो नहीं है…

राजेश: तो फिर कुछ देर के लिए चाँदनी रात में मुहब्बत का इजहार करने के लिए आ जाओ…

करीना: नहीं, अभी तो सब जाग रहें है…और मुझको कल स्कूल जाना है फार्म भरने के लिए…क्या टीना को नहीं बताया…उसको भी तो जाना है…

राजेश: हाँ उसको भी जाना है…पर तुम्हें मेरी याद नहीं आ रही है। मै ही पागल हूँ जो तुम्हारी याद में तड़प रहा हूँ…

करीना: नहीं…यह बात नहीं है, आप नहीं जानते कि जब से आँख खुली है तब से सिर्फ कल रात की बात सोच-सोच कर पागल हुई जा रही हूँ…मगर्…क्या करूँ…

राजेश: तुम फिकर न करो…तुम जल्दी से ठीक हो जाओ फिर तो तुम्हें मै रात भर सोने नहीं दूँगा…एक किस तो फोन पर दे दो फिर मै आराम से सो जाउँगा…

करीना: प्रिय्…मम्मी बुला रहीं है (किस की आवाज आती है और फोन कट जाता है)

(राजेश मुस्कुराते हुए सीड़ीयाँ चड़ता हुआ टीना के कमरे के पास पहुँच कर रुक जाता है। धीरे से दरवाजा खोलता है तो बेड खाली पड़ा है। इधर-उधर देखता है तो उसे टीना कहीं नहीं दिखाई देती है। बाथरूम के दरवाजे से कान लगा कर सुनता है तो टीना के नहाने की आवाज आ रही है। आश्वस्त हो कर राजेश बेड पर लेट जाता है और टीना का इन्तजार करता है। नहाती हुई टीना के जिस्म के बारे मे सोच कर उसका लिंग एक बार फिर से सिर उठाने लगता है। थोड़ी देर के बाद सिर्फ टावल लपेटे टीना बाहर आती है। सामने आँखे मूंदे राजेश को बेड पर लेटे देख कर चौंक जाती है।)

टीना: पापा…आप यहाँ…(शरारती स्वर में)…क्या नींद नहीं आ रही…

राजेश: (आँखें मलता हुआ)…हाँ नींद में तुम्हारे ही सपने देख रहा था…बेटा…कल तुम्हें स्कूल जाना पड़ेगा…अभी तुम्हारी मम्मी ने बताया कि तुम्हारे स्कूल से फोन आया था…

टीना: (बेड के नजदीक आ कर गुस्से में) क्यों अभी तो हमारी छुट्टियाँ चल रही हैं, यह स्कूल वाले पागल हो गये है…

(राजेश प्यार से टीना को अपनी ओर खींचता है और पास में बिठाता है। टीना की नग्न पीठ पर पानी की बूँदें धीरे से रिस रही है। राजेश प्यार से पीठ पर हाथ से बूँदें हटाता हुआ…)

राजेश: बेटा ऐसे नहीं बोलते…कल तुम्हारी बोर्ड की परीक्षा का फार्म भरा जाएगा…इस लिए तुम्हें स्कूल बुलाया है (कहते हुए कमर में हाथ डाल कर अपने उपर खींच लेता है। टीना अपने को छुड़ाने का प्रयास करती है लेकिन राजेश उसे अपने आगोश में भर कर अपने साथ लिटा लेता है। टीना के शरीर से उठती हुई भीनी-भीनी साबुन की सुगन्ध बेडरूम का समा और भी मादक बना देती है।)

टीना: पापा…छोड़िए न्… (अपने को छुड़ाने का प्रयास करती हुई)…मुझे चेंज करना है…

(राजेश टीना को पकड़ कर करवट लेता है और टीना को अपने नीचे ले आता है। इसी खींचतान में टीना का टावल खुल जाता है। टीना को छोड़ कर राजेश उसके नग्न जिस्म को एक बार फिर से निगाहों से पीने की कोशिश करता है।)

टीना:…उफ…पापा आपने मुझे एक बार फिर से…(कहते हुए झेंप गयी और अपने हाथों से नीचे की ओर कर के ढकने का प्रयत्न किया)

राजेश: ऐसी तो कोई नयी चीज नहीं है जो मैनें नहीं देखी है। बचपन में तुम्हें बहुत नहलाया है। अभी कुछ देर पहले ही मैने तुम्हें इसी अवस्था मे देखा है…फिर क्यों छुपाने की कोशिश कर रही हो…

टीना: अब मैं बड़ी हो गयी हूँ…

राजेश: हाँ यह तो सही बात है…बचपन में तुम्हारा सीना सपाट था पर आज यह (एक स्तन को सहलाते हुए और फिर उसके गुलाबी निप्पल को तरेड़ते हुए) सुडौल और उन्नत हो कर मुझे चिड़ा रहे है। यह कमर (हाथ फिराते हुए नितंबों तक ले जाते हुए) पहले सीधी थी पर अब कितना सुन्दर कुल्हे पर कटाव बन रहा है।

टीना: पापा…

राजेश: क्यों क्या हुआ…चेहरा तो वही है पर पंखुड़ियों से गुलाबी होंठ (झुक कर टीना के होंठों पर अपने होंठों की मौहर लगाता है) की लालिमा और भी निखर गयी है। और (पेट से योनि तक अपनी उंगली से रेखांकित करते हुए) सबसे ज्यादा बदलाव इधर हुआ है।

टीना: (शर्माते हुए पाँव सिकोड़ती हुई) पापा…क्या बदलाव आया है…

राजेश: (टीना के पाँव खोलते हुए और योनिमुख पर उँगलियॉ फिराते हुए) पहले यह ज्वालामुखी सुप्त अवस्था में था पर अब लावा उगलने की क्षमता रखता है…

टीना: न न…करिए…(एक बार फिर से पाँव सिकोड़ती है और फिर से राजेश अपने पाँव से टीना के पाँव खोलता है)…पापा…मुझे चुभ रहा है…

राजेश: क्या चुभ रहा है…

टीना: (ठुनकती हुई) आप भी न…इसे पीछे करिए…

राजेश: बेटा, प्लीज इसको तुम अपने हाथों से पीछे कर दो…(राजेश का एक हाथ उन्नत उभारों के मर्दन में लगा हुआ था और दूसरा हाथ योनि में छुपे सीप के मोती को छेड़ने मे लीन है)… तुम्हें तो पता है कि मेरे दोनों हाथ काम पर लगे हुए है।

(गुस्से से भन्नायें लिंगदेव बार-बार नग्न योनिच्छेद पर ठोकर मार रहे है। टीना कसमसाती हुई अपना सीधा हाथ दोनों शरीरों के बीच में डालती हुई लिंगदेव को अपनी उँगलियों में थामने की कोशिश करती है। इस बीच टीना के तपते होंठों को अपनें होंठों की गिरफ्त में लेकर राजेश उनका सारा रस सोखने में लग जाता है। झटके खाते हुए लिंगदेव की गरदन जैसे ही टीना की उँगलियों में आती है लिंगदेव और भी तन्ना कर रौद्र रूप धारण कर लेते है। टीना को लगता है कि उसने एक जिवित परन्तु तपती हुई लोहे की सलाख अपने हाथ में पकड़ ली है। उधर राजेश कभी पंखुड़ियों से होंठों को चूमता है कभी टीना के कान के नीचे गरदन पर अपने होंठों से वार करता है। टीना भी एक नये उन्माद में बहकती जा रही है। एक तरफ तो राजेश की लगातार उसके अंगों के साथ छेड़खानी और दूसरी ओर उसके हाथ में बैचेन जिवित तपती हुई सलाख।)

क्रमशः
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