Kamukta Story बदला
08-16-2018, 01:48 PM,
#61
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"उउंम्म...औच...!",रजनी अपने घुटनो & हाथो पे बिस्तर पे झुकी थी & इंदर
पीछे से उसकी गंद मे अपना लंड घुसाए धक्के लगा रहा था.उसे इस साधारण
शक्ल-सूरत वाली लड़की को चोदने मे अब बोरियत होने लगी थी मगर वो उसे कोई
शक़ नही होने देना चाहता था,इसलिए आज अपनी बोरियत भगाने के लिए & रजनी को
ये जताने के लिए की वो उसके जिस्म का दीवाना है उसने उसकी गंद मारने का
इरादा किया था.

"ओह्ह..माआ...हाइईईई...क्यू मा..नि..मा..इने..तुम..हा..आआहह...तुम..हरी
बात...आअननह....आअनन्नह....!",इंदर उसकी गंद मारते हुए उसकी चूत मे तेज़ी
से 2 उंगलिया अंदर-बाहर कर रहा था.वो जानता था की रजनी जो भी कहे उसे
बहुत मज़ा आ रहा था.

"रजनी..जानेमन.."

"ह्म्म..",रजनी को सच मे बहुत मज़ा आ रहा था.शुरू मे तेज़ दर्द हुआ था
मगर अब तो वो हवा मे उड़ रही थी.

"तुम्हारे बॉस ने शिवा को अपने बंगल के अंदर क्यो कमरा दिया हुआ है जबकि
हम बाकी लोग तो बाहर रहते हैं?"

"शिवा..ऊव्वव...उनका बहुत भरोसेमंद आदमी थाआआअ..आहह....& बॉस को लगा..की
अगर वो अंदर र..हे तो..ऊहह....अगर कभी....कोई ख़तरे वाली
बात..हूऊ..तो..वो उन..के परी..वार की हिफ़ाज़त
करेगा..आहह..आआअनन्नह....!",रजनी झाड़ रही थी & इंदर भी उसकी गंद को अपने
पानी से भर रहा था.

रजनी के थकान से निढाल हो बिस्तर पे गिर पड़ी.इंदर उसके बगल मे लेट गया &
अपने बाए हाथ से पेट के बल लेटी हाँफती रजनी की पीठ सहलाने लगा.उसने बगल
मे पड़ी अपनी पॅंट से 1 सिगरेट का पॅकेट निकाला & 1 सिगरेट सुलगा ली.शराब
जैसा सुकून तो नही मिलता था उसे इस से मगर ये रजनी से उसकी बेचैनी
च्छुपाने मे कामयाब थी....इस शिवा को तो घर से निकालना पड़ेगा..मगर
कैसे..कैसे?

वो सिगरेट के कश खींच रहा था,"क्यू पीते हो ये गंदी चीज़?",रजनी सर घुमा
के उसे देख रही थी.उसने फर्श पे सिगरेट मसल के उसे बुझाया फिर रजनी को
सीधा किया,"ठीक है नही पीता गंदी चीज़.अब अच्छी चीज़ पीता हू.",उसने उसकी
बाई छाती को मुँह मे भर लिया तो रजनी के होंठो पे मुस्कान फैल गयी & 1
बार फिर वो मदहोश होने लगी.

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"ऊन्न्ह्ह...ऊओनह...और
ज़ोर्र्र्र...आअहह..से...आइय्यी..हाआनन्न..शिवा....जान...चोदो...चोदो...मुझे...आअहह...!",देविका
की टाँगे शिवा के कंधो पे थी & उसके हाथ शिवा की जाँघो पे.शिवा का तगड़ा
लंड उसकी चूत की गहराइयो मे अंदर-बाहर हो रहा था.देविका आज रात ये कौन सी
बार झाड़ रही थी उसे याद नही था.याद था तो बस ये की शिवा 1 बार उसकी चूत
मे & 1 बार मुँह मे झड़ने के बावजूद वैसे ही जोश से उसकी चुदाई करते हुए
तीसरी बार झड़ने वाला था.

"ऊन्ह...!",देविका बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगी तो शिवा ने उसकी
टाँगे अपने कंधे से उतारी और उसके उपर लेट गया.उसके बालो भरे सीने तले
देविका की चूचिया दबी तो उसे बहुत सुकून मिला.दोनो ने 1 दूसरे को बाहो मे
भर लिया & अपनी-2 कमर हिलाने लगे & बस कुच्छ ही पॅलो मे 1 बार फिर अपनी
मंज़िल पे पहुँच गये.

"उम्म..",देविका अपने प्रेमी को चूम रही थी.वो अभी भी उसकी चूत मे अपना
सिकुदा लंड धंसाए उसके उपर पड़ा था.उसने अपनी प्रेमिका के उपर से उतरना
चाहा था मगर देविका की गुज़ारिश थी की वो अभी थोड़ी देर और वैसे ही उसे
अपने तले दबाए रहे.

"देविका..",शिवा ने उसके गले पे चूमा.

"बोलो,शिवा.",डेविका उसके बालो से खेल रही थी.

"तुम्हे अब ये सारा कारोबार संभालना है & इसमे इंदर तुम्हारी मदद करेगा
लेकिन तुम उसपे आँख मूंद के भरोसा नही करना प्लीज़!"

"सॉफ-2 कहो शिवा."

"देखो,देविका मुझे सॉफ कुच्छ पता नही चल रहा मगर वो ठीक आदमी नही
है.देखो,वो बहुत अच्छा काम करेगा,तुम्हे शिकायत का कोई मौका नही देगा मगर
फिर भी तुम अपनी 1 नज़र उसपे बनाए रखना."

"ठीक है.",1 बार फिर देविका के लब शिवा के होंठ तलाशने लगे.

"नही..",शिवा ने होंठ खींच लिए,"..पहले वादा करो की तुम होशियार रहोगी."

"वादा..वादा..वादा..!",देविका ने उसका सर पकड़ के नीचे झुकाया,"खुश?"

"हां.",शिवा उसे चूमने के लिए नीचे झुका तो इस बार देविका ने रोक दिया,"क्या हुआ?"

"मैने किया अब तुम भी 1 वाद करो."

"क्या?बोलो."

"की आज के बाद तुम मुझे किसी भी रात अकेला नही छ्चोड़ोगे."

"नही छ्चोड़ूँगा मेरी जान.",वो देविका की गोरी गर्दन पे झुक के अपने
होंठो से शरारत से काटने लगा,उसका सोया लंड 1 बार फिर से सुगुबुगाने लगा
था & उसकी कमर भी हौले-2 हिलने लगी थी.देविका ने अपनी टाँगे उसकी कमर पे
लपेटी,"..ऊव्व..",शिवा की शरारातो ने गुदगुदी पैदा कर दी तो उसने भी अपने
हाथो से उसके बगल मे गुस्गुसा दिया.1 दूसरे की च्छेड़च्छाद से दोनो
प्रेमियो के दिल मे खुशी की लहर दौड़ गयी & कमरा दोनो की हँसी की शोर से
भर गया.

"..सारा कारोबार चलाने की ज़िम्मेदारी Mइसेज.देविका सहाय के उपर हो.इस
वसीयत के & सुरेन सहाय & वीरेन सहाय के बीच हुए क़ानूनी करार के मुताबिक
अब वो आधी जयदा की भी मालकिन हैं लेकिन चुकी वीरेन जी अभी ना तो बँटवारा
चाहते हैं ना ही कारोबार चलाना तो अभी सारी जयदाद की देख-रेख की
ज़िम्मेदारी भी देविका जी की ही है..",कामिनी सहाय परिवार के बंगल के हॉल
मे बैठी वीरेन,देविका & प्रसून की मौजूदगी मे वसीयत पढ़ रही थी.

"..वीरेन जी को हर महीने पहले की ही तरह वो रकम मिलती रहेगी जो उन्होने
अपने बड़े भाई सुरेन सहाय के साथ मिल के तय की है & जोकि दोनो भाइयो के
करार मे भी लिखी हुई है.जिस दिन भी वीरेन सहाय क़ानूनी तौर पे बँटवारे की
माँग करेंगे उस तारीख से लेके आनेवाले 6 महीनो के भीतर देविका जी को उनके
साथ मिलके बँटवारे की सारी करवाई पूरी करनी होगी.अब देविका जी को भी अपनी
वसीयत बनानी होगी ताकि उनकी मौत के बाद उनके बेटे प्रसून की देखभाल हो
सके & जयदाद के मामले सुलझ सकें."

"ये है वसीयत का सार जो मैने पढ़ा है.इन सारी बातो को डीटेल मे आगे लिखा
गया है.ये 3 कॉपीस हैं..",कामिनी ने 2 देविका को & 1 वीरेन को
थमायी,"..आप प्रसून की कॉपी भी अपने पास ही रखिए,देविका जी & आप दोनो यहा
दस्तख़त कर दीजिए की आपने वसीयत ले ली है & आप इसे मानते हैं."

दोनो के दस्तख़त लेने के बाद कामिनी ने अपना बॅग मुकुल को थमाया & वाहा
से जाने लगी.वीरेन & देविका उसे बाहर तक छ्चोड़ने आए & उसकी कार का
दरवाज़ा खोलते हुए वीरेन फुसफुसाया,"डार्लिंग!आज शाम घर आना.तुम्हे कुच्छ
दिखाना है."

"हूँ..",कामिनी हल्के से मुस्कुराइ & कार मे बैठ गयी.

"मैं भी चलता हू.बीच-2 मे आता रहूँगा.",देविका की ओर देखे बिना उसने उस
से ये बात कही,"बाइ!प्रसून.",उसने अपने भतीजे को देख के मुस्कुराते हुए
हाथ हिलाया & उसने भी वैसे ही हंसते हुए उसका जवाब दिया.

"तुमसे 1 बात कहनी थी.",देविका उसके कार के दरवाज़े के पास खड़ी थी.

"क्या?",वीरेन चाभी इग्निशन मे लगा रहा था.

"आज मैं प्रसून के लिए 1 लड़की देखने जा रही हू.शाम लाल जी के जान-पहचान
का कोई परिवार है पंचमहल मे."

"तुम उसकी शादी कराओगि ही?",वीरेन ने इस बार अपनी भाभी की नज़रो से नज़रे मिलाई.

"हां & उसका चाचा होने के नाते तुम्हारा ये जानना ज़रूरी है."

"हूँ..जो करना सोच-समझ के करना,प्रसून की मासूमियत का ख़याल रख के कोई
फ़ैसला लेना."

"तुम बेफ़िक्र रहो.आख़िर मैं उसकी मा हू.",वीरेन ने देविका को पल भर के
लिए बड़ी गहरी निगाहो से देखा & अपनी कार वाहा से निकाल दी.जब से देविका
बहू बन कर इस घर मे आई थी तब से लेके आजतक देवर-भाभी मे इतनी लंबी बातचीत
बस गिने-चुने मौको पे हुई थी.

1 गहरी सांस लेके देविका वापस बंगल मे चली गयी,"रजनी."

"येस,मॅ'म."

"देखो,मैं ज़रा काम से पंचमहल जा रही हू.पीछे अपने भाय्या का ख़याल
रखना.",उसने प्यार से अपने बेटे के बालो मे हाथ फेरा..इसका चाचा इसे
मासूम समझता है..आज उसे इस मासूम की थोड़ी मासूमियत भी दूर करनी थी बस
भगवान करे वो लड़की अच्छी हो!

"उम्म..मम्मी!मैं भी चलूँगा आपके साथ..",प्रसून मचल उठा.

"आज नही बेटा.बस आज का काम हो जाए फिर तुम भी चलना."

थोड़ी देर तक प्रसून ज़िद करता रहा & देविका उसे मनाती रही & जब वो मान
गया तो वो भी अपनी कार से ड्राइवर के साथ निकल गयी.

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"ये है संजय वेर्मा,मॅ'म.",शाम लाल जी देविका का परिचय लड़की के बड़े भाई
से करवा रहे थे.

"नमस्ते.",थोड़ी देर बाद बातचीत असल मुद्दे पे आ गयी.देविका को संजय 1
पड़ा-लिखा & बहुत शरीफ इंसान लगा.बाते भी वो काफ़ी नापी-तुली कर रहा था.

"..आपको तो अंकल ने सब बताया ही होगा.पिता जी की मौत के बाद से बस हम
दोनो भाई-बेहन ही हैं.पिताजी ने हम दोनो की पढ़ाई पे हुमेशा से ज़ोर दिया
था & उसी की बदौलत हम अपने पैरो पे खड़े हैं.हुमारे पास बेशुमार दौलत तो
नही पर उनके सिखाए हुए अच्छे विचार हैं.",शाम लाल जी ने पहले ही देविका
को इस परिवार के बारे मे सब कुच्छ बता दिया था & यहा तो देविका बस लड़की
से मिलने के मक़सद से आई थी.

"मुझे भी अपने बेटे के लिए बस 1 अच्छी सी बीवी चाहिए,संजय जी.दौलत का
क्या है!..इंसान अगर मेहनती हो & ईमानदार भी तो दौलत तो उसके पास रहेगी
ही.आप बस मुझे 1 बार रोमा से मिलवा दीजिए."

"ज़रूर.",संजय उठके अपनी बेहन को बुलाने चला गया.

"शाम लाल जी ,मैं उस से अकेले मे बात करना चाहती हू."

"ठीक है,मॅ'म."

तभी अंदर के दरवाज़े का परदा हटा & हल्के नीले रंग की सारी पहने 1 सुंदर
लड़की कमरे मे आई.देविका को देख वो लड़की मुस्कुराइ & हाथ जोड़ के नमस्ते
किया.

"नमस्ते,आओ बैठो बेटा.",उसके बैठते ही शाम लाल जी बहाने से संजय को वाहा
से ले गये.देविका उस लड़की से उसकी पढ़ाई & नौकरी के बारे मे पुछ्ति
रही.लड़की का रंग बहुत गोरा तो नही था मगर वो साँवली भी नही थी.उसका
चेहरा बहुत ही दिलकश था & पहली नज़र मे जो भी देखता उसे वो निहायत शरीफ &
पढ़ने-लिखने वाली लड़की लगती.

"रोमा,तुमने शाम लाल जी से कहा की प्रसून जैसे इंसान की बीवी बनके तुम्हे
बहुत खुशी होगी..मैं जान सकती हू क्यू?मेरा बेटा मंदबुद्धि है,ये जानते
हुए भी तुम आख़िर इस शादी के लिए क्यू तैय्यार हो?"

"हां,मैने ऐसा ही कहा था..",रोमा मुस्कुराइ,"..& कल अंकल को मैने जान बुझ
के इस बात को नही समझाया.मैं सीधा आपको ये बताना चाहती थी.देखिए,सब लोग
बस प्रसून जी की कमी देखते हैं.क्या कभी किसी ने ये सोचा है की वो इंसान
जिसे वो मंदबुद्धि समझ रहे हैं उसका दिल कितना सॉफ है."

"ये तुम्हे कैसे पता?तुम तो उस से मिली भी नही कभी.",देविका के माथे पे
शिकन पड़ गयी थी.

"मिली तो नही मगर इतना पता है की वो 1 छ्होटे बच्चे जैसे हैं.ये बात तो
सभी को मालूम है,अब आप ही बताइए क्या 1 छ्होटा बच्चा हम सो कॉल्ड मेच्यूर
यानी समझदार लोगो जैसा दुनिया के दाँव-पेंच समझ सकता है.नही ना!..इसका
मतलब की उनका दिल भी निश्च्छाल है & ऐसे इंसान की बीवी बनना तो बड़ी
किस्मत की बात है."

"तुम्हे उसकी दौलत का 1 पैसा भी नही मिलेगा,रोमा तो क्या फिर भी तुम उस
से शादी करोगी?"

"जी हां.इतना कमाने की ताक़त है मुझमे की ज़रूरत पड़ने पे मैं अपना &
अपने पति का गुज़ारा आराम से चला लू."

"अच्छा,अगर मैं तुमसे शादी के पहले 1 प्री-नप्षियल अग्रीमेंट पे दस्तख़त
करने कहु जिसमे ये लिखा होगा की प्रसून की मौत होने पे तुम्हे बस 1 तय की
हुई रकम मिलेगी & बाकी की जयदाद ट्रस्ट को दान कर दी जाएगी तो?"

"तो क्या?..मैं दस्तख़त कर दूँगी लेकिन मैं ये शादी तभी करूँगी जब आपको
मुझपे & मेरी ईमानदारी पे पूरा यकीन हो.",रोमा को ये बात थोड़ी बुरी लगी
थी की कोई उसकी ईमानदारी पे शक़ कर रहा है.

"अच्छा रोमा,मैं भी 1 औरत हू & अच्छी तरह समझती हू की इस धन-दौलत के
अलावा भी हुमारी 1 ज़रूरत होती है.उसके बारे मे कुच्छ सोचा है तुमने?"

"क्या प्रसून जी मे कोई कमी है?"

"नही."

"फिर उस बारे मे आप फ़िक्र मत करिए.मैं अपने पति के साथ हर खुशी का एहसास
कर लूँगी.इतना भरोसा है मुझे अपनेआप पर.",रोमा ने सर झुका लिया था & उसके
गाल सुर्ख हो गये थे.आख़िर अपनी होने वाली सास से ये बात करना की उसका &
उसके पति का सेक्स का रिश्ता कैसा होगा कोई मौसम के बारे मे बात करने
जैसा तो नही था!

"उठ बेटा..",देविका ने उसके कंधे पकड़ के उसे खड़ा कर दिया,"..मुझे मेरी
बहू मिल गयी है.मेरे सवाल बुरे लगे होंगे ना तुझे?",उसने उसका चेहरा पकड़
के उसे प्यार से देखा,"..मगर मैं मजबूर हू रोमा,अपने बेटे के लिए ये सब
करना पड़ा मुझे.देखो,मैने तुम्हे आज से अपनी बहू मान लिया है & तुम्हे 1
बेटी की तरह रखूँगी.वो अग्रीमेंट पे तुम्हे दस्तख़त तो करने पड़ेंगे मगर
वो कुच्छ क़ानूनी कार्यवाईयो को पूरा करने की गरज से.ये मत समझना की मुझे
तुमपे भरोसा नही रहेगा.",उसने उसके भाई & शाम लाल जी को अंदर बुलाया &
अपने पर्स से निकाल उसने उसे पकड़ाए,"..ये लो."
Reply
08-16-2018, 01:49 PM,
#62
RE: Kamukta Story बदला
रोमा ने झुक के उसके पाँव च्छुए तो उसे उठा उसका माथा चूम वो वाहा से निकल गयी.

कार मे बैठ के देविका ने आगे के बारे मे सोचना शुरू किया.ऐसा नही था की
वो जज़्बाती हो गयी थी & उसने रोमा को बहू बनाने का फ़ैसला लिया था.लड़की
बहुत ही अच्छी थी & प्रसून के लिए बिल्कुल सही भी मगर वो ऐसे जज़्बाती
होकर दोनो भाई बहनो को ये महसूस कराना चाहती थी की वो उन दोनो से बहुत
प्रभावित है.अगर उनके दिल मे ज़रा भी खोट होता तो वो इस बात से बहुत खुश
होते की देविका उनके जाल मे फँस गयी & फिर जब शिवा उनके बारे मे पता
करेगा तो हो सकता है उनकी लापरवाही से उनका राज़ खुल जाए & अगर वो सचमुच
सच्चे & ईमानदार हैं तब तो कोई बात ही नही!दोनो सुरतो मे वोही फाय्दे मे
रहने वाली थ रहने वाली थी.वो मन ही मन मुस्कुराइ & सोचने लगी की आज रात उसे प्रसून से
कैसे बात करनी है.

"कैसी लगी?",वीरेन की आवाज़ सुन कामिनी ने सामने रखी पेंटिंग्स से नज़र
हटाई & अपने प्रेमी को देखा.सामने 3 पेंटिंग्स रखी थी,पहली मे वो
शरमाई-सकूचाई नयी दुल्हन के रूप मे थी,दूसरी मे जोश से पागल आधी नंगी
बिस्तर पे लेटी अपने प्रेमी के इंतेज़ार करती हुई मस्त लड़की के रूप मे &
तीसरी मे वो पूरी नंगी लेटी थी मगर बिस्तर पे नही बादलो मे & उसके चेहरे
पे सुकून था.

तीनो पेंटिंग्स लाजवाब थी & कामिनी को खुद को उनमे देख थोड़ा गुरूर भी हो
रहा था & उस से भी ज़्यादा खुशी की कोई है जो उसका इतना दीवाना है की
अपनी कला मे भी उसे बस वोही नज़र आती है.

वीरेन को अभी भी अपने सवाल के जवाब का इंतेज़ार था.कामिनी उसके करीब आई &
उसके कंधो पे अपने हाथ रख अपने होंठो को उसके होंठो से सटा उसे जवाब देने
लगी.दोनो 1 दूसरे को बाँहो मे भर अपने प्यार का इज़हार करने लगे.कामिनी
सीधा दफ़्तर से वाहा आई थी & इस वक़्त उसने 1 क्रीम कलर की भूरी धारियो
वाली आधे बाजुओ की शर्ट & बालू के रंग की काफ़ी कसी हुई पतलून पहन रखी
थी.

वीरेन के लब उसके शर्ट के गले से दिखती उसकी गर्दन पे घूमते हुए उसकी कसी
पॅंट मे से उभरती उसकी चौड़ी गंद को हौले-2 दबा रहे थे.कामिनी के हाथ भी
उसकी पीठ पे बेचैनी से मचल रहे थे & थोड़ी ही देर मे वो उसकी शर्ट को
उसकी पॅंट से बाहर खींच रहे थे.

कामिनी ने शर्ट को पॅंट से निकाल उसकी पीठ पे अपने हाथ फिराए तो वीरेन ने
उसकी कमर को पकड़ उसे घुमा दिया,अब कामिनी की पीठ वीरेन के सीने से लगी
थी & उसके हाथ अपने प्रेमी के गले मे थे.वीरेन उसकी शर्ट मे हाथ घुसा
उसकी कमर & पेट को सहलाते हुए उसके दाए गाल को चूम रहा था.अजीब सा नशा था
उसकी उंगलियो मे,कामिनी उन्हे अपने जिस्म पे महसूस करते ही मदहोश हो जाती
थी.अभी भी वो हवा मे उड़ रही थी.उसका दिल वीरेन की हर हरकत का भरपूर
लुत्फ़ उठा रहा था.उसकी चूत मे वही मीठी कसक उठनी शुरू हो गयी थी & दिल
मे,आज की रात के भी वीरेन के साथ बिताई बाकी रातो की तरह नशीली होने की
उम्मीद से बहुत ही उमंग भर गयी थी.

वीरेन के हाथ उसकी शर्ट के बटन खोल रहे थे & कामिनी के हाथ उसकी गर्दन से
नीचे आ पीछे जा वीरेन की पुष्ट जाँघो को सहला रहे थे.सभी बटन्स खोल वीरेन
ने अपने दाए हाथ की पहली उंगली को कामिनी के पेट पे दायरे की शक्ल मे
घुमाने लगा.उंगली का पोर बस कामिनी के चिकने,गोरे पेट को छुता हुआ घूम
रहा था.उसके होठ बड़ी नर्मी से उसके गाल & गले को चूम रहे थे & उसकी गर्म
साँसे कामिनी की स्किन को जला के उसके जिस्म को और मस्त कर रही थी.

वीरेन की उंगली का दायरा धीरे-2 छ्होटा हो रहा था & कामिनी की साँसे तेज़
हो रही थी.उसकी आँखे अधखुली थी & वो दाए तरफ गर्दन घुमा अपने प्रेमी के
होंठो को चूम रही थी.उसके हाथ वीरेन की कलाईयो को थामे थे मगर वो उसके
हाथो की हर्कतो को रोकने की ज़रा भी कोशिश नही कर रहे थे.अब वीरेन की
उंगली कामिनी की नाभि के ठीक बाहर घूम रहा था.

"आहह....!",कामिनी की बेचैनी आह की शक्ल मे उसकी ज़ुबान से बाहर आई &
जैसे ही वीरेन की उंगली उसकी नाभि की गहराई मे उतरी उसने अपनी गंद को
पीछे कर उसके तने हुए लंड को दबा अपनी बेडचनी जताई.वीरेन की उंगली उसकी
नाभि के अंदर की दीवारो पे घूम रही थी & कामिनी की चूत से पानी रिसने लगा
था.उसके चेहरे पे परेशानी के भाव से आ गये जैसे उसे बड़ी तकलीफ़ हो &
तकलीफ़ तो उसे हो रही थी-इंतेज़ार की तकलीफ़,अपने प्रेमी के लंड के
इंतेज़ार की तकलीफ़.उसका दिल कर रहा था की जल्द से जल्द वीरेन उसे अपने
मज़बूत जिस्म तले दबा उसके बदन की अगन को शांत कर दे.

वीरेन हमेशा की तरह ही उसे तड़पाने के मूड मे था.कामिनी की गहरी नाभि को
उसकी उंगली बस कुरेदे जा रही थी.कामिनी की बेताबी इतनी बढ़ी की उसने
वीरेन की कलाई पकड़ उसके हाथ को अपने पेट से अलग कर दिया.उसके ऐसा करते
ही वीरेन ने भी फ़ौरन उसके कंधो पे हाथ रख उसकी खुली कमीज़ को उसके जिस्म
से अलग कर दिया.कामिनी की सफेद ब्रा से ढँकी छातिया मस्ती मे उपर नीचे हो
रही थी.अपनी प्रेमिका की पतली कमर को बहो मे भर,उसकी नंगी पीठ को सहलाते
हुए वीरेन ने उसे खुद से चिपकाया & 1 बार फिर अपने होतो से उसके लरजते
होंठो को चूमने लगा.

कामिनी के हाथ वीरेन के जिस्म को नंगा करने को बेचैन थे.चूमते हुए उसने
वीरेन की शर्ट को उसके कंधो से नीचे किया & उसकी पॅंट का बटन खोल उसमे
हाथ घुसा उसके लंड को ढूँदने लगी.वीरेन के हाथ भी उसके ब्रा के हुक को
खोल उसे उसके कंधो से नीचे सरका रहे थे.पॅंट ढीली होते ही वीरेन ने अपनी
टाँगे उठा उसे अपने जिस्म से अलग किया & कामिनी की कमर के दोनो तरफ बगल
मेअप्ने दोनो हाथो की पहली उंगली से उपर से लेके नीचे तक सहलाने लगा.कोई
और मर्द होता तो चूचिया नंगी होते ही उनपे टूट पड़ता मगर वीरेन पे तो
जैसे उन उभारो का कुच्छ असर ही नही था.

कामिनी अपने दाए हाथ से उसके लंड को हिलाते हुए बाए से उसकी गर्दन को
अपनी ओर खींच उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा दी.वीरेन का बालो भरा सीना उसकी
चूचियो से आ लगा मगर वीरेन ने अभी भी उन्हे नही थामा बल्कि अब उसका बाया
हाथ उसकी कमर को थामे था & दाए की पहली उंगली उसके पीठ के बीचो-बीच नीचे
कमर से उसकी गर्दन तक फिर रही थी.कामिनी की बेताबी अब बहुत ज़्यादा बढ़
गयी थी.

उसने वीरेन का लंड छ्चोड़ दोनो हाथो मे उसके हाथ पकड़ अपने जिस्म को उनमे
कसा & उसके गले मे अपनी बाहे डाल दी,"वीरेन,तुम बहुत तड़पाते हो.प्यार
करो ना मुझे!",वो पागलो की तरह उसे चूमने लगी तो वीरेन भी उसकी किस का
जवाब देने लगा & अपने हाथो मे उसकी गंद की भारी फांके दबाने लगा.उसके
होंठो को छ्चोड़ वो नीचे उसकी ठुड्डी को चूमते हुए उसकी गर्दन पे आ
गया.कामिनी का दिल उमंग से भर गया की अब उसके फूलो जैसे उभारो को वीरेन
अपने होंठो के रस से सींचेगा मगर वीरेन ने उसे फिर से तड़पाते हुए बिना
उसकी चूचियो को च्छुए अपने होंठो को उसके पेट पे रखा & फिर उसकी नाभि पे
आ गया.

कामिनी को लगा की अब वो रो पड़ेगी.वीरेन उसकी नाभि को चाट रहा था & उसके
पूरे जिस्म मे अब बस मस्ती भरा दर्द दौड़ रहा था.वीरेन उसकी गंद को अपने
हाथो तले मसलता हुआ पॅंट के उपर से ही उसकी चूत पे 1 के बाद 1 किस्सस
ठोंक रहा था, "आहान्न..आहँन्न....वीरे..न..उऊन्ह....",कामिनी रुआंसी हो
गयी थी & वीरेन समझ गया की अब और तड़पाना ठीक नही.उसने फटाफट उसकी पॅंट
उतारी.अब कामिनी के जिस्म पे बस उसकी चूत से चिपकी 1 पतली सी सफेद पॅंटी
थी.वीरेन ने उसे अपनी गोद मे उठाया & स्टूडियो से बाहर निकल अपने बेडरूम
मे चला गया.

अपने बड़े से बिस्तर पे अपनी प्रेमिका को लिटा वो उसकी मखमली जाँघो को
चूमने लगा.कामिनी बिस्तर पे मचल रही थी.वीरेन उसकी पॅंटी को निकाल उसकी
गीली चूत से टपकते रस को चाट रहा था.कामिनी ने हाथ नीचे ले जा अपने बाए
तरफ बैठे वीरेन के लंड को पकड़ा & घूम के अपना मुँह उसके तरफ लाने
लगी.वीरेन उसका इशारा समझ गया & फ़ौरन अपना लंड उसके मुँह मे दे लेट
गया.अब दोनो करवट से लेटे 1 दूसरे की गोद मे मुँह घुसाए थे.कामिनी अपनी
दाई करवट पे लेटी उसका लंड चूस रही थी & वीरेन अपनी दाई करवट पे लेटा
उसकी छूट.

काफ़ी देर बाद जब वीरेन ने उसके 2 बार झड़ने के बाद उसकी चूत छ्चोड़ उसे
सीधा लिटा के उसकी चूत मे अपना लंड घुसाया तब कामिनी को थोड़ा चैन
पड़ा.वीरेन ने चुदाई शुरू कर दी & बस कुच्छ ही पॅलो बाद उसके बदन से चिपक
कामिनी 1 बार फिर झाड़ गयी.वीरेन अभी भी धक्के लगाए जा रहा था.वो उसकी
चूचिया चूस रहा था & कामिनी उसके सर को चूम रही थी.कामिनी के चेहरे पे
बहुत ही संतोष का भाव था.वीरेन अपने हाथो पे थोड़ा उठ गया & उसके धक्को
की रफ़्तार और तेज़ हो गयी & उसके साथ ही कामिनी की आहे भी.

वीरेन का लंड उसकी चूत की दीवारो को बड़ी तेज़ी से रगड़ रहा था & अब उसके
उपर 1 बार फिर खुमारी छाने लगी.उसकी चूत मे बहुत ज़्यादा तनाव बन गया &
उस से परेशान हो कामिनी ने अपने नाख़ून वीरेन की गंद मे धंसा दिए.उसकी
चूत अपनी वही मस्तानी सिकुड़ने-फैलने की हरकते कर उसके लंड को पागल कर
रही थी.वीरेन के आंडो मे भी हल्का सा मीठा दर्द हो रहा था.दोनो प्रेमियो
के नाज़ुक अंगो मे उठ रही कसक अब अपने चरम पे पहुँच गयी थी.

दोनो को कुच्छ होश नही था सिवाय इसके की दोनो को अपनी-2 मंज़िल पानी
है.कामिनी के नाख़ून वीरेन की गंद मे कुच्छ और ज़्यादा धँस गये & वो अपनी
कमर बेचिनी से हिलाते हुए बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगी.उसकी चूत मे
बन रहा तनाव बेइंतहा मज़े की शक्ल इकतियार कर रहा था.उसके रोम-2 मे मानो
खुशी के फव्वारे फुट रहे थे.ठीक उसी वक़्त वीरेन के आंडो का दर्द भी
ख़त्म होने लगा & उसके लंड से गाढ़ा पानी छूट कामिनी की चूत मे भरने
लगा.दोनो ने अपनी-2 मंज़िल पा ली थी & अब उन्हे किसी बात की परवाह नही
थी.

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क्रमशः.............
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08-16-2018, 02:06 PM,
#63
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"तुम जाओ,रजनी.",देविका ने रजनी के हाथो से सवेरे धुले & इस्त्री किए
कपड़े लिए,"..आज मैं प्रसून का कपबोर्ड ठीक कर देती हू.",प्रसून वही बैठा
कोई बच्चो की किताब पढ़ रहा था.

"ओके,मॅ'म.",रजनी मुस्कुराते हुए वाहा से चली गयी.

"अरे ये क्या प्रसून?"

"क्या हुआ मम्मी?",प्रसून ने किताब से सर उठाया.

"तुमने कल 2 पाजामे पहने थे क्या?"

जवाब मे प्रसून मा से नज़रे चुराने लगा,"बोलो,बेटा."

"नही.."

"पर यहा तो तुम्हारे 2 पाजामे धुले हैं.",देविका ने प्रसून क चेहरा अपनी
ओर घुमाया,"बताओ ना बेटा."

प्रसून सर झुकाए बैठा रहा,"प्रसून,तुम्हे शर्म आ रही है क्या?",प्रसून ने
हाँ मे सर हिलाया.देविका को हँसी आ गयी मगर उसने उसे रोक लिया.

"बेटा,रात को पाजामा खराब हो गया था ना?"

राज़ खुलने से प्रसून और शर्मिंदा महसूस करने लगा & उसके चेहरे को देख के
ऐसा लगा की मानो अभी वो रो पड़ेगा,"घबराने की कोई बात नही बेटा.अब तुम
बड़े हो गये हो ना,इसलिए ऐसा हो रहा है."

प्रसून ने मा को सवालिया नज़रो से देखा,"हां बेटा.मेरी बात धान से
सुनो.बेटा,जब हम बड़े हो जाते हैं ना तो हमारे बदन मे बहुत से बदलाव आते
हैं.वही तुम्हारे मे भी आए हैं.ये सारे बदलाव लड़के को बाप & लड़की को मा
बनाने के लिए होते हैं."

"तो क्या अब मैं पापा बन गया हू?",प्रसून का मासूम सवाल सुन देविका इस
बार अपनी हँसी नही रोक पाई.

"नही बेटा.तेरी शादी कहा हुई है अभी!जब शादी होगी तब तू पापा & तेरी बीवी
मम्मी बनेंगे & यही मैं तुझे आज बताउन्गी की कैसे बनते हैं पापा &
मम्मी.",देविका अब संजीदा हो गई थी.

"प्रसून,तुम्हारा पाजामा खराब हुआ था तो जो चीज़ तुम्हारे वाहा से निकली
थी वो चिपचिपी सी थी ना?",प्रसून ने हाँ मे सर हिलाया.

"उसे पानी कहते हैं या फिर वीर्या.तुम्हारा वो जहा से तुम पेशाब करते हो
वो कभी-2 बहुत कड़ा हो जाता है ना?",देविका के गाल शर्म से लाल हो गये थे
मगर ये कम करना ज़रूरी था.प्रसून ने फिर से हाँ मे सर हिलाया.
"तो जब ये कड़ा हो जाता है तब इसे अपनी बीवी के पेशाब करने की जगह,जोकि 1
छेद जैसी होती है,उसमे घुसा के उस वीर्या को अंदर गिराते हैं.इसी से बीवी
के पेट मे बच्चा आ जाता है.",देविका ने जल्दी से बात कही.

"ये काम सिर्फ़ बीवी के साथ करते हैं,मम्मी?"

"हाँ,बेटा सिर्फ़ उसी के साथ.",देविका ने उसके गाल थपथपाए,"..ये काम
सिर्फ़ बीवी के साथ करते हैं & इसके बारे मे सभी बाते भी.कभी भी ये बातें
अपनी बीवी & मेरे सिवा और किसी से नही करना.ओके?"

"ओके,मम्मी."

"अब रात को पाजामा गंदा हो तो परेशान मत होना.ठीक है?"

"ठीक है,मम्मी.".प्रसून के चेहरे पे डर या शर्म का नामोनिशान नही था.

"चलो अब खाना खाने चलते हैं."

"चलिए,मम्मी."

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"उम्म्म....",कामिनी ने वीरेन का सर अपनी बाई चूची से उठाया.दोनो चादर
ओढ़े उसके बिस्तर पे लेटे थे & वीरेन उसके सीने पे झुका था,"..जब देखो
वही झुके रहते हो!",वीरेन हंसते हुए उसका चेहरा चूमने लगा.

"वीरेन.."

"ह्म्म..",वो उसके गले को चूम रहा था.

"तुम्हारे भाय्या का कारोबार तुम्हारी भाभी संभाल लेंगी?"

"हां.बहुत..",वीरेन ने चूमना छ्चोड़ दिया & जैसे कुच्छ सोचने
लगा,"..समझदार औरत है वो.",कुच्छ पॅलो बाद उसने जवाब दिया.

"वैसे एस्टेट को चलाने के लिए स्टाफ तो होगा ही?"

"हां,1 मॅनेजर होता है जोकि सभी चीज़ो पे & सारे वर्कर्स पे नज़र रखता है
फिर 1 सेक्यूरिटी मॅनेजर भी है जो एस्टेट की सेक्यूरिटी संभलता है."

"अच्छा."

"हाँ,वो शिवा नाम का आदमी था ना.."

"हाँ,वो लंबा सा."

"हाँ,वोही..",वीरेन लेट गया तो कामिनी उसके सीने पे ठुड्डी टीका वाहा के
बालो से खेलती उसकी बात सुनने लगी,"..वो है सेक्यूरिटी मॅनेजर.",वीरेन
उसके चेहरे को सहला रहा था,"..& वो इंदर है मॅनेजर जोकि कुच्छ ही दिन
पहले आया है."

"अच्छा.इस से पहले वो कहा था?"

"पता नही.ये डीटेल्स तो वही एस्टेट के लोग जानते होंगे.",कामिनी सोच मे
पड़ गयी.पहले उसने सोचा था की वीरेन को वो सुरेन सहाय की दवा वाली बात
बता दे मगर फिर उसने सोचा की पहले कुच्छ & पुख़्ता सबूत मिल जाए जिस से
किसी पे शक़ भी थोडा यकीन मे बदले,फिर बताएगी.

"क्यू पुच्छ रही हो?"


"बस ऐसे ही.इतनी बड़ी जयदाद कैसे संभलेगी ये ख़याल तो आता ही है ना."

"हां,वो तो है मगर भाभी सब संभाल लेगी.",वीरेन जैसे फिर कुच्छ सोचने लगा.

"कहा खो जाते हो?",कामिनी ने उसके निपल को नाख़ून से छ्चोड़ा.

"तुम्हारे यहा होते मैं कही और खो सकता हू!",उसने उसकी गंद पे चूटी काटी.

"ऊव्वव....!",जवाब मे शोखी से मुस्कुराती कामिनी ने उसके आंडो को पकड़ के
दबा दिया.1 बार फिर से दोनो का मस्ताना खेल शुरू हो गया.

"उन्न्ह...उन्न्ह.....",देविका अपने कमरे मे 1 सिंगल-सीटर सोफे पे पाई
उपर चढ़ाए बैठी थी,उसके जिस्म पे 1 धागा तक नही था & उसका दीवाना शिवा
ज़मीन प्यू अपने घुटनो पे बैठ उसकी चूत पे अपनी लपलपाति जीभ फिरा रहा था.

"आआननह...आनह....!",शिवा अपनी जीभ अब उसके दाने के बजाय उसकी चूत मे ऐसे
अंदर-बाहर कर रह हो मानो वो कोई लंड हो.देविका को बहुत मज़ा आ रह
था.मस्ती मे पागल हो उसने शिवा के बॉल पकड़ लिए & उन्हे खींचती हुई उसके
सर को अपनी चूत पे भींचते हुए कमर हिलाने लगी.

"शी..वाअ...ऊव्ववव...डार..लिंग...1 का..आम
है..तुमसे...आआअनन्नह..!",देविका उसके बाल खींचते हुए अपनी कमर हिलाते
हुए झाड़ रही थी.

"कैसा काम,मेरी जान.",शिवा ने अपनी प्रेमिका के झाड़ते ही सर उसकी चूत से
उठाया & घुटनो पे बैठे-2 ही अपना लंड सोफे पे बैठी देविका की चूत मे
घुसाने लगा.

"ऊव्वव...",देविका ने अपना सर सोफे के बॅक पे टीका के पीछे झुका लिया तो
शिवा ने लंड अंदर घुसते हुए मुँह मे उसकी दाई मोटी चूची को भर
लिया,"..मैं प्रसून की शादी करना चाहती हू."

"क्या?!!मगर वो..",देविका ने अपने हैरान प्रेमी के होंठो को अपने होंठो
से सील दिया.उसकी चूत मे उसका लंड बहुत गहरे तक उतरा था.उसने अपनी टाँगे
उसकी गंद पे कस उसे और अंदर किया & अपनी बाँहो मे उसका उपरी बदन भर उसे
खुद से चिपका लिया,"..तुम्हारी हैरानी बाद मे दूर करूँगी."

उसके होंठ छ्चोड़ उसने बेचैनी से कमर हिलाते हुए उसके सीने के बालो मे
उंगलिया फिराई,"..ये है उस लड़की की तस्वीर जिसे मैने प्रसून के लिए पसंद
किया है,इसका नाम है रोमा वेर्मा.प्नच्महाल मे रहती है अपने बड़े भाई
संजय वेर्मा के साथ."

"..ये हैं सारे डीटेल्स.",तस्वीर के साथ 1 काग़ज़ उसने शिवा को
दिखाया,"..शिवा मैं चाहती हू कि ज़रा तुम इस लड़की & इसके परिवार के बारे
मे सब पता कर दो ताकि ये पता चले की ये कैसे लोग हैं & ये लड़की मेरे
प्रसून के लिए सही है या नही."

"वो तो ठीक है मगर..",शिवा के माथे पे अभी भी शिकन पड़ी हुई थी.

"डार्लिंग,बस थोड़ी देर मे तुम्हे सारी बात बताउन्गि मगर पहले मुझे प्यार
तो करो.तुम्हारा लंड मेरे अंदर पड़ा मुझे पागल कर रहा है,जान!",अपनी
जान,अपनी प्रेमिका की बात भला शिवा कैसे टाल सकता था.उसने उसके होंठो को
अपने होंठो की गिरफ़्त मे लिया & उसकी छातिया मसल्ते हुए उसकी चुदाई करने
लगा.

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08-16-2018, 02:06 PM,
#64
RE: Kamukta Story बदला
"आउच..!",बिस्तर पे लेटे वीरेन का लंड अपनी चूत मे लिए उसके उपर बैठी
कामिनी ने उसे 1 प्यार भरी चपत लगाई,उसने उसके निपल को अपनी उंगलियो के
बीच थोड़ा ज़ोर से मसल दिया था,"शरीर कही के!".कामिनी कमर हिला-2 के
वीरेन के तगड़े लंड का लुत्फ़ उठाने लगी.वीरेन के हाथ उसकी मोटी चूचियो
को मसले जा रहे थे.

"ऊहह..वीरेन....ये मॅनेजर लोग तुम्हारी ..आअहह...".उसकी कमर को अपनी बाहो
मे कसते हुए उसने उसे खुद पे झुका लिया था & अब उसकी छातिया अपने प्रेमी
के सीने से पीस गयी थी,"..तुम्हारी एस्टेट मे ही रहता
हैं...ऊऊहह..!",वीरेन उसकी कमर को थामे नीचे से गंद उचका-2 के धक्के लगा
रहा था.

"हां,एस्टेट मनेजर के लिए तो कॉटेज है मगर उस शिवा को भाय्या ने बंगल के
अंदर ही 1 कमरा दिया था अपनी हिफ़ाज़त के लिए.",वो अपना सर उठाए उसके
निपल्स पे जीभ चला रहा था.

"क्यू?उन्हे किसी से ख़तरा है क्या..आआआआआअहह..!",वीरेन ने अपना दाए हाथ
की 1 उंगली उसके गंद के छेद मे घुसा दी थी जिसकी वजह से उसकी मस्ती और भी
बढ़ गयी थी & उसकी कमर हिलाने की रफ़्तार भी.

"अरे नही,बस ऐसे ही प्रिकॉशन लिया था उन्होने."

"अच्छा..आहह..!",तो ये शिवा घर के अंदर रहता था..कही उस नयी दवा की
डिबिया की गुत्थी उसी से तो नही सुलझेगी?..लेकिन उस नये मनेजर इंदर के
बारे मे भी पता करना पड़ेगा....बहुत ज़रूरी था की वो अपने दिल का शक़ दूर
करे.वो नही चाहती थी की अगर सुरेन सहाय किसी साज़िश के शिकार हुए थे तो
उनके परिवार पे कोई आँच आए ख़ासकर के उसके प्रेमी पे जिसका लंड अब उसके
अंदर बहुत खलबली मचा रहा था.

वीरेन की चुदाई की खुमारी अब पूरी तरह से कामिनी के उपर च्छा गयी थी.उसके
ज़हन से एस्टेट की सारी चिंता हवा हो गयी & बस 1 ही बात रह गयी की वो
वीरेन के साथ इन लम्हो का पूरा लुत्फ़ उठाए.उसने अपने होंठ अपने प्रेमी
के होंठो से मिलाए & उछाल-2 कर उसके हर धक्के का जवाब देने लगी.


क्रमशः..................
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08-16-2018, 02:06 PM,
#65
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे... शिवा अपनी जीप से पंचमहल से वापस एस्टेट लौट रहा
था,पिच्छले 4 दीनो मे उसने संजय & रोमा वेर्मा के बारे मे सब पता कर लिया
था।दोनो भाई बेहन कुच्छ दिन पहले ही फिर से पंचमहल आए थे.इस से पहले रोमा
अपनी पढ़ाई के चलते & संजय अपनी नौकरी के चलते दूसरे शहरो मे थे.शिवा ने
उन शहरो मे भी अपने कॉंटॅक्ट्स से पता करवाया था & हर जगह यही बात सामने
आई की दोनो निहायत शरीफ थे. शिवा को देविका का प्रसून की शादी करने का
फ़ैसला बिल्कुल भी ठीक नही लगा था.प्री-नप अग्रीमेंट & ट्रस्ट के बारे मे
जानने के बावजूद उसने देविका को अपने फ़ैसले को बदलने के लिए कहा था मगर
देविका 1 बार कुच्छ ठान लेती तो फिर उसे डिगना नामुमकिन ही था.वैसे भी
शिवा कभी भी देविका पे 1 पति जैसा हक़ नही जताता था & अपनी हद्द समझते
हुए ही उस से बात करता था.बस बिस्तर मे वो अपनी मनमानी करता था & वाहा
कोई हद्द भी नही होती थी.ऐसा इसलिए भी मुमकिन था की देविका को भी बिस्तर
मे उसकी हर हरकत बहुत अच्छी लगती थी. शिवा के ख़यालो का रुख़ अब इंदर को
ओर हुआ.सुरेन सहाय की मौत के बाद जब तक देविका ने ऑफीस मे दोबारा आना नही
शुरू किया तब तक इंदर ने ही सारा काम-काज संभाला था.शिवा ने उसे ज़रा भी
भनक नही लगने दी मगर वो हर वक़्त उसके उपर नज़र रखे हुए थे मगर इंदर पूरी
ईमानदारी & मुस्तैदी से अपना काम करता रहा. शिवा को क्या पता था की ये भी
इंदर की चाल का हिस्सा था.वो अपने काम से देविका को इतना खुश कर देना
चाहता था की वो उसपे आँख मूंद के भरोसा करने लगे & जब ऐसा हो तो वो अपनी
आगे की चाल चले.इस वक़्त अपने दफ़्तर मे बैठा इंदर यही सोच रहा था.सुरेन
सहाय नाम का काँटा तो उसने अपनी राह से निकाल फेंका था.अब बारी थी उसकी
खूबसूरत बीवी & उसके कॅम्ज़ेहन बेटे को. पिच्छली रात को उसके लंड की मार
से खुशी से तड़पति रजनी ने उसे बता दिया था की देविका ने बेटे के लिए 1
लड़की को पसंद कर लिया है.इंदर को अब इंतेज़ार था उस बेवकूफ़ लड़के की
शादी का.उस शादी के बाद ही वो देविका की ज़िंदगी मे खलबली मचा उसे इतना
परेशान कर देना चाहता था की उसे इंदर के अलावा & कोई सहारा नज़र ना
आए.वीरेन सहाय उसकी राह मे रोड़े अटका सकता था मगर कल फोन पे अपने साथी
से बात कर उसने उसे भी हटाने का उपाय सोच लिया था. बस अब जल्दी से सही
वक़्त आ जाए.उस से इंतेज़ार नही हो रहा था.उसके दिल की बेचैनी बढ़ गयी &
उसे शराब की तलब हुई मगर यहा दफ़्तर मे शराब ला वो अपने सारे किए कराए पे
पानी नही फेरना चाहता था.उसने जल्दी से जेब से सिगरेट निकाल के सुलगई &
2-3 लंबे-2 कश खींचे.उसे पूरा सुकून तो नही मिला मगर उसका दिल संभाल
ज़रूर गया.आँखे बंद कर वो अपनी कुर्सी पे सर पीछे कर बैठ गया.इस बेचैनी
को उसे काबू मे रखना था वरना वो कही उसके इन्तेक़म की आग सहाय परिवार के
बजाय उसे ही ना खाक कर दे. ------------------------------

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"ये लो बेटा..",देविका ने प्रसून को अंगूठी थमा रोमा को पहनाने का इशारा
किया.दोनो ने 1 दूसरे को अंगूठिया पहनाई,"..अब आज से तुम दोनो का रिश्ता
पक्का हुआ.",उसने अपने बेटे का हाथ उसकी होने वाली बीवी के हाथ मे
दिया.प्रसून बहुत शर्मा रहा था.संजय ने भी उसे कुच्छ पैसे पकड़ाए &
देविका के कहने पे प्रसून ने उसके पाँव छुए.शिवा के बताने के बाद उसने इस
काम मे देरी करना ज़रा भी ठीक नही समझा था & अगली सुबह ही यहा चली आई थी.
"संजय जी..",देविका अपनी होने वाली बहू के भाई से मुखातिब हुई,"..आपको तो
पता ही है की प्रसून के पिता की मौत हुए अभी ज़्यादा दिन नही हुए हैं.ऐसे
मे कोई बहुत बड़ा जश्न मनाना मुझे ठीक नही लगता.मैं चाहती हू की मेरे
वकील के बनाए अग्रीमेंट को पढ़के दस्तख़त करने के बाद दोनो की शादी कोर्ट
मे करा दी जाए.उसके बाद एस्टेट मे अपने कुच्छ बहुत करीबी रिश्तेदारो के
लिए हम दावत दे देंगे.आपका क्या कहना है?" "मुझे कोई ऐतराज़ नही है फिर
पिताजी का भी मानना था की दिखावे मे पैसे खर्च करने के बजाय अगर किसी
ज़रूरतमंद की मदद कर दी जाए तो वो बेहतर है." "ठीक है.मैं आज ही अपने
वकील से कोर्ट मे इस बात के लिए अर्ज़ी दल्वाति हू.आज से ठीक 1 महीने बाद
इनकी शादी हो जाएगी फिर आपके पिताजी की सोच की कद्र करते हुए हम 1
अनाथालय जाके इन दोनो के हाथो से वाहा के बच्चो को दान करवाएँगे & शाम को
हम दोनो अपने-2 करीबी रिश्तेदारो के लिए 1 छ्होटी सी दावत रख देंगे."
"ठीक है." "अच्छा,तो अब हम चलते हैं..",देविका उठ खड़ी हुई.उसने देखा की
प्रसून चोर निगाहो से अपनी मंगेतर को देख रहा था,"चलें,बेटा.",मा की
आवाज़ सुन वो हड़बड़ा के उठा & फिर दोनो वाहा से निकल गये.देविका ने कार
मे बैठे हुए अपने बेटे को देखा जोकि खिड़की से बाहर देख रहा था.उसने भाँप
लिया था की उसके बेटे को रोमा पसंद आ गयी थी.उसने कुच्छ दिन पहले प्रसून
के डॉक्टर से भी इस बारे मे बात की थी & उसने भी कहा था की अगर प्रसून
चाहे तो वो अपनी पत्नी को जिस्मानी तौर पे पूरी तरह से खुश रख सकता है &
इस से उसके उपर कोई असर भी नही पड़ेगा.देविका को ये भी लगा की अगर प्रसून
1 जवान मर्द वाली हरकत कर सकता है तो क्या वो 1 जवान मर्द जैसे सोच नही
सकता.क्या पता जो काम 1 मा का दुलार नही कर पाया वो बीवी की मोहब्बत कर
दे & उसका बेटा पूरा नही तो कुच्छ ठीक हो जाए! पति की मौत के बाद उसके
जीवन मे ये पहला खुशी का मौका था & वो उसे यादगार बनाना चाहती थी.वो शादी
के लिए की जाने वाली तैय्यारियो की प्लॅनिंग मे डूब गयी & प्रसून अपनी
मंगेतर के.उसे वो बहुत अच्छी लगी थी & उसे देखते ही उसका दिल किया था की
वो उसे चूम ले..वैसे नही जैसे वो मम्मी को या फिर रजनी दीदी को चूमता था
बल्कि दूसरी तरह से..पकड़ के उसके पूरे चेहरे पे..उसका कमज़ोर दिमाग़ समझ
नही पा रहा था की वो इस एहसास को क्या नाम दे. जब रोमा उसके सामने बैठी
थी तो सारी के बीच से उसे उसका चिकना पेट नज़र आया था & उसका दिल किया था
की उसे छु ले.इन ख़यालो से उसका लंड खड़ा हो गया था & पहली बार उसके
दिमाग़ मे ख्याल आया की अगर वो अपने इस खड़े हुए को रोमा के उस छेद मे
घुसाए तो मगर घुसाते कैसे हैं?..मम्मी से पुच्छू..नही!उसे शर्म आ
गयी..उसने सोचा की वो कोई और तरीके से ये पता लगाएगा.उसका दिमाग़ कमज़ोर
था मगर उसके दिल मे रोमा के रूप ने खलबली मचा दी थी जो वो अपने जिस्म मे
भी महसूस कर रहा था.उसने अपने लंड पे हाथ रख उसे दबा दिया & खिड़की से
बाहर आती-जाती गाडियो को देखने लगा.
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(¨`·.·´¨) Always
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08-16-2018, 02:07 PM,
#66
RE: Kamukta Story बदला
कामिनी ने देविका के कहने पे प्री-नप्षियल अग्रीमेंट तैय्यार कर लिया
था.इतने दिन वो और केसस मे उलझी रही & वीरेन से भी ज़्यादा नही मिल पाई
थी मगर जब भी मिली थी वीरेन ने उन पलो को यादगार बना दिया था.मसरूफ़ियत
की वजह से वो शिवा & इंदर के बारे मे ज़्यादा पता भी नही कर पाई
थी.देविका ने उसे प्रसून की शादी का न्योता भी दिया था & वीरेन ने उसे उस
मौके पे उसके साथ एस्टेट की कॉटेज मे 2 दिन गुज़ारने की गुज़ारिश की थी
जिसे उसने फ़ौरन मान लिया था.उसने तय कर लिया था की उस मौके पे वो उन
दोनो मर्दो के बारे मे भी पता करेगी & अगर उसे मुनासिब लगा तो देविका &
वीरेन को आगाह भी कर देगी. अब सभी को बस प्रसून की शादी का इंतेज़ार था
फ़र्क़ बस सब की नियत का था. "सर,हमारी कंपनी भी सारे प्रॉडक्ट्स आपको
मुहैय्या कराएगी मगर कम दामो पे.",शिवा के दफ़्तर मे 1 सेक्यूरिटी
प्रॉडक्ट्स कंपनी का सेल्स रेप बैठा था. "आपकी बात ठीक है मगर हमने पहले
ही दूसरी कंपनी को फाइनल कर लिया है." "सर,प्लीज़ 1 बार अपने फ़ैसले के
बारे मे फिर से सोच लीजिए..",वो सेल्स रेप बोलते हुए रुका फिर आस-पास
देखा,".हो सकता है,हमारे साथ-2 आपका भी फ़ायदा हो जाए.",शिवा उसकी बात का
मतलब समझ गया.वो उसे रिशवत देने की कोशिश कर रहा था. उसे गुस्सा तो बहुत
आया मगर वो ये समझता था की उस बेचारे ने भी ये बात मजबूरी मे ही कही
है.इनलोगो पे सेल बढ़ाने का इतना दबाव रहता था की ये भी हर हथकंडा अपनाने
को तैय्यार रहते थे. "आइ'एम सॉरी.",शिवा ने अपनी मेज़ पे रखी 1 फाइल खोल
ली,"..अब आप बुरा ना माने तो मैं कुच्छ काम निपटा लू." "नो-2 सर,बुरा
क्यू मानूँगा!पर आगे से प्लीज़ हमारा भी ख़याल रखिएगा." "जी.",शिवा फाइल
देखने लगा तो वो सेल्स रेप उसके कॅबिन से बाहर चला गया. वो सेल्स रेप
दफ़्तर से बाहर निकल ही रहा था की इंदर ने उसे आवाज़ दी,"हां,कहिए?",वो
सेल्स रेप उसके पास आया. "आप ज़रा मेरे साथ आइए.",& इंदर उसे अपने
क़ब्निन मे ले गया.
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सेल्स रेप के जाने के बाद शिवा आगे के बारे मे सोचने लगा,1 बार
सेक्यूरिटी सिस्टम के बारे मे आख़िरी फ़ैसला हो जाए तो वो सबसे पहले वो
पुरानी लकड़ी के बाद जो एस्टेट की सीमा पे लगी थी उसे हटवा के नयी जंग ना
लगने वाले लोहे की बाड़ लगवाएगा फिर हर बिज़्नेस के एरिया को अलग कर वाहा
वर्कर्स का बिओमेट्रिक डेटा लेके वो सिस्टम लगवाएगा.इसी दफ़्तर मे उसने 1
मॉडर्न कंट्रोल रूम बनवाने के बारे मे सोचा था. मगर ये सारे काम होने मे
अभी वक़्त था देविका आजकल बहुत मसरूफ़ थी बेटे की शादी की तय्यारियो
मे.उसके बाद ही वो इस बारे मे कोई फ़ैसला लेती & तब तक उसे बस इंतेज़ार
ही करना था.उसने वो फाइल किनारे की & दूसरी देखने लगा.
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क्रमशः......
Reply
08-16-2018, 02:07 PM,
#67
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...

आख़िरकार वो दिन भी आ ही गया जब प्रसून & रोमा की शादी हो गयी.देविका आज
बहुत खुश थी.उसने जैसे सोचा था सब कुच्छ वैसे ही हुआ.वो अपने बंगल के
दरवाज़े पे खड़ी जो चंद मेहमान आए थे उन्हे विदा कर रही थी.वीरेन भी उसके
साथ खड़ा था.कामिनी पहले ही उसकी कॉटेज मे जा चुकी थी.सारे मेहमआनो के
जाने के बाद देविका बंगल के अंदर चली गयी & वीरेन अपनी कॉटेज. अपनी कॉटेज
मे दाखिल होते ही वीरेन ने देखा की कामिनी कॉटेज के बेडरूम की खिड़की के
पास खड़ी बाहर देख रही थी,"क्या देख रही हो?",वीरेन ने उसे पीछे से बाहो
मे भर लिया. "वो दूसरी कॉटेज किसकी है?",वीरेन की कॉटेज बंगल से थोड़ा हट
के कुच्छ पेड़ो के पीछे इस तरह से बनी थी कि उसकी 1 खिड़की से बुंगला तो
दूसरी से मॅनेजर की कॉटेज नज़र आती थी & अगर कॉटेज के दूसरे कमरे की
खिड़की से देखते तो सर्वेंट क्वॉर्टर्स नज़र आ जाते लेकन उसकी कॉटेज
सिर्फ़ बंगले से ही नज़र आती थी. "वो मॅनेजर की कॉटेज है.",वीरेन ने उसकी
गर्दन पे चूमा. "लेकिन वाहा इतना अंधेरा क्यू है?",कामिनी ने अपने हाथ
अपने पेट पे बँधे उसके हाथो पे रख दिए. "पता नही.",वीरेन बस उसकी खुश्बू
महसूस करता हुआ उसे चूमे जा रहा था. "मॅनेजर तो वही रहता है फिर कोई
रोशनी क्यू नही है?",कामिनी ने अपना सवाल दोहराया. "अकेला आदमी है.सो गया
होगा.",उसने कामिनी की सारी का पल्लू नीचे गिरा दिया,"..अब उस बेचारे की
कॉटेज मे ऐसा गुल कहा जो गुलज़ार हो.",उसकी बात पे कामिनी को हँसी आ गयी
तो वीरेन ने उसे बाहो मे भरा & अपने बिस्तर की ओर ले जाने लगा.
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रोमा & प्रसून अपने कमरे मे अकेले थे.ये पहली बार था जब प्रसून अपनी मा
के अलावा किसी और औरत के साथ अपने बेडरूम मे रात को सोने वाला था.उसे
काफ़ी शर्म आ रही थी,उसे कपड़े बदलने थे & उसे समझ नही आ रहा की इस लड़की
की मौजूदगी मे वो ऐसा कैसे करे. शर्म तो रोमा को भी आ रही थी मगर वो
जानती थी की इस रिश्ते मे अगर वो ये उम्मीद करे की प्रसून पहल करेगा तो
वो शायद ज़िंदगी भर उस से चुद नही पाएगी.आख़िर था तो वो 1 मर्द के जिस्म
मे बच्चा ही.यहा उसे ही अपनी शर्मोहाया छ्चोड़ अपने पति को भी बेशर्म
बनाना होगा. "सुनिए..",प्रसून उसकी आवाज़ सुन घुमा,"..कपड़े बदलने है ना
आपको?",प्रसून ने हा मे सर हिलाया. "तो बदलते क्यू नही?",वो उसके करीब आ
गयी.प्रसून के गाल जैसे शर्म से जल रहे थे,"..मुझसे कैसा शरमाना.मैं तो
आपकी बीवी हू ना.",वो उसके पास बिस्तर पे बैठ गयी,"..लाइए मैं मदद करती
हू.",उसने उसका कुर्ता पकड़ के उपर किया तो प्रसून पीछे हो गया,"..मैं
खुद कर लूँगा." उसने उसकी तरफ पीठ की & कुर्ता उतारने लगा.रोमा को उसके
बच्पने पे हँसी आ गयी मगर उसने ठान लिया था की अपने पति से वो आज रात
दोस्ती कर ही लेगी.वो भी अपनी सारी उतारने लगी.प्रसून पाजामा उतारने के
लिए बाथरूम जाने लगा तो रोमा ने उसे रोका,"सुनिए." "क्या है?" "ज़रा ये
हुक्स खोल दीजिए ना.मुझ से नही खुलते,",वो उसके सामने ब्लाउस & पेटिकोट
मे खड़ी हो गयी.प्रसून का शर्म के मारे बुरा हाल था.काँपते हाथो से उसने
उसके सीने के बड़े-2 उभारो को ढँके हुए ब्लाउस के हुक्स खोले & फिर वाहा
से जाने लगा,"रुकिये,पहले यहा बैठिए.",हाथ पकड़ रोमा ने उसे अपने साथ
बिस्तर पे बिठाया. "मुझसे शरमाते क्यू हैं.मैं तो आपसे दोस्ती करने आई
हू.",प्रसून ने उसकी तरफ देखा. "हां.",रोमा ने उसका हाथ थाम लिया,"मैं
आपकी दोस्त हू.आप मुझे बताइए की आपको क्या अच्छा लगता है हम वही करेंगे."
भोले प्रसून को उसकी बात बहुत अच्छी लगी,"मुझे पैंटिंग बहुत पसंद है."
"सच.",रोमा ने बहुत खुशी से कहा,"तो दिखाइए ना." "अभी लाता हू.",रोमा ने
अपना ब्लाउस निकाल दिया.अब वो लाल ब्रा मे & पेटिकोट मे बिस्तर पे बैठी
थी. प्रसून उसे अपनी ड्रॉयिंग्स दिखाने लगा.रोमा उस से सॅट के बैठी थी &
उसे थोड़ा अजीब सा अभी भी लग रहा.उसकी नज़र बार-2 रोमा के ब्रा पे जा रही
थी,उसके बदन से आती खुश्बू उसे बहुत अछी लग रही थी & उसने देखा की उसके
पाजामे मे उसका लंड खड़ा हो गया है.1 बार फिर उसे शर्म आने लगी & उसने
अपनी 1 स्केचबुक अपनी गोद मे रख ली. "वाउ!",प्रसून के बाए अरफ़ बैठी रोमा
ने अपना दाया हाथ उसकी नंगी पीठ पे रखा तो वो सिहर गया,"..आप कितनी अच्छी
ड्रॉयिंग करते हैं,प्रसून.मुझे भी सिखाएँगे.",वो 1 बच्चे की तरह मचली मगर
अपने पति के चेहरे की उड़ी रंगत देख उसके माथे पे भी शिकन पड़ गयी. "क्या
हुआ प्रसून?",उसने उसके चेहरे पे हाथ फेरा,".आपकी तबीयत तो ठीक है?",उसके
माथे पे उसने हाथ रख देखा की कही उसे बुखार तो नही. "मैं ठीक हू." "फिर
क्या हुआ?",रोमा ने अपने बाए हाथ से उसका चेहरा अपनी ओर
घुमाया,"बोलिए.अपनी फ्रेंड से नही कहेंगे.",प्रसून को सब कुच्छ बहुत अजीब
सा लग रहा था मगा रोमा की करीबी उसे बहुत भा रही थी.उसका बदन,उसकी खुश्बू
उसे समझ नही आ रहा था की आख़िर ये हो क्या रहा था.रोमा का दाया गाल उसके
करीब था & उसने उसपे हल्के से चूम लिया. रोमा अपने गाल पे हाथ रखथोडा
पीछे हुई & अपना सर झुका लिया तो प्रसून घबरा गया & बिस्तर से उतरने
लगा,"नही." "क्यू जाते हैं?",रोमा ने उसे रोका. "तुम गुस्सा नही हो?",1
बार फिर प्रसून 1 मासूम बच्चा बन गया था. "नही तो..",रोमा फिर से उसके
करीब आ गयी,"..मैं तो आपकी बीवी हू.आप तो मुझे कभी भी प्यार कर सकते
हैं." "कभी भी?" "हां.",रोमा ने उसके होंठो पे अपने गाल रख दिए तो प्रसून
ने फिर से उसे चूमा.जवाब मे रोमा ने भी उसके गाल को चूम लिया.ये मस्ताना
हरकत बच्चो का खेल बन गयी.प्रसून उसका गाल चूमता तो रोमा भी उसका 1 गाल
चूम लेती.वो उसकी नाक चूमता तो वो भी ऐसा ही करती.दोनो हंसते हुए ये खेल
खेल रहे थे.रोमा 1 जवान लड़की थी & प्रसून दिमाग़ से बच्चा था मगर जिस्म
से हटटा-कट्ता जवान मर्द था.उसकी करीबी से वो भी मदहोश हो रही थी & उसके
अरमान भी जाग उठे थे. इस बार उसने प्रसून के नंगे बालो भरे सीने पे
बीचोबीच चूम लिया.खेल मे मगन प्रसून ने भी आव देखा ना ताव & उसके ब्रा से
झाँकते उसके बड़े क्लीवेज पे चूम लिया मगर चूमते ही उसे ऐसा लगा मानो
उसने बहुत बड़ी ग़लती कर दी & वो झट से पीछे हो गया लेकिन रोमा ने ऐसे
जताया जैसे उसे कुछ लगा ही ना हो & उसने झुक के प्रसून के पेट पे चूम
लिया. अब प्रसून को भी लगा की उसकी नयी दोस्त उसके साथ खेल ही रही
है.उसने भी उसके पेट पे चूम लिया.रोमा का जिस्म अब पूरी तरह से गरम हो
चुका था.वो बिस्तर पे ही खड़ी हो गयी,"उम्म....चलिए पहले कपड़े बदल लेते
हैं फिर खेलेंगे.",उसने अपनी पेटिकोट की डोर खोल दी.अब वो लाल रंग की लेस
की ब्रा & पॅंटी मे थी,"आप भी बदलिए ना कपड़े." बहुत शरमाते हुए प्रसून
ने अपना पाजामा नीचे किया.रोमा ने अपने पति को केवल 1 काले अंडरवेर मे
देखा तो जैसे उसकी टाँगो ने उसका साथ छ्चोड़ दिया.उसका गला सुख गया &
उसने थूक गटका.उसने अपनी पीठ प्रसून की तरफ कर दी & अपने बाल अपने हाथो
मे पकड़ अपनी पीठ से हटाए,"ज़रा ये हुक खोल दीजिए." प्रसून ने उसकी बात
मानी & जैसे ही उसने ब्रा के हुक्स को खोला रोमा उसे अपने सीने से नीचे
गिराती हुई घूम कर उसके सामने आ गयी.रोमा की 34 साइज़ की बड़ी-2 चूचिया &
उनपे सजे हुए जोश से कड़े भूरे निपल्स अब प्रसून की आँखो के सामने
थे.उसने ज़िंदगी मे पहली बार 1 औरत की नंगी चूचिया देखी थी,"ऐसे क्या देख
रहे हैं?" प्रसून ने जैसे अपनी बीवी का सवाल सुना ही नही.उसे वो गेंद
जीसी चीज़े बड़ी अजीब सी लग रही थी,"क्या हुआ?पहले कभी नही देखी क्या
आपने ये?",रोमा ने अपनी मस्त चूचियो की ओर इशारा किया.प्रसून ने ना मे सर
हिलाया. "तो अब देख लीजिए.",रोमा ने उसका हाथ पकड़ के अपने सीने पे रख
दिया.उसे खुद पे भी हैरत हो रही थी की वो इतनी बेबाक कैसे हो गयी थी की
पहली रात को ही अपने पति से ऐसे खुल के पेश आ रही थी.माना की वो
मंदबुद्धि था फिर भी उसकी शर्मोहाया यू हवा हो जाएगी उसे उम्मीद भी नही
थी. "उम्म..",प्रसून ने उसकी चूची को हौले से दबाया तो उसकी टाँगो ने
उसका साथ छ्चोड़ दिया & वो बिस्तर पे गिर पड़ी. "क्या हुआ
रोमा?सॉरी...मैं अब ज़ोर से नही दबाउन्गा..!",घबराया प्रसून आँखे बंद किए
रोमा के उपर झुका हुआ था.रोमा के अपने इस बुद्धू पति पे बहुत प्यार आया &
उसने उसे अपने उपर खींचा & उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए.उसकी ज़ुबान
प्रसून के मुँह मे घुस उसकी जीभ से लड़ने लगी तो प्रसून घबरा गया & उसकी
बाँहो से निकलने की कोशिश करने लगा मगर रोमा अब पूरी तरह से बेकाबू हो
गयी थी.उसने उसे नही छ्चोड़ा. प्रसून अपनी बीवी के उपर पड़ा हुआ था &
उसका लंड उसकी चूत पे था.उसका दिमाग़ कमज़ोर था उसका जिस्म नही & चूत को
महसूस करते ही उसकी कमर अपने आप हिलने लगी & वो अपने अंडरवेर के अंदर से
& उसकी पॅंटी के उपर से ही धक्के लगाने लगा.रोमा की कमर भी हिल रही
थी.अचानक प्रसून को अपने अंदर बहुत ही मज़ा जैसा कुच्छ लगा & उसकी कमर और
ज़ोर से हिलने लगी & वो अपने उंड़रएवर मे ही झाड़ गया. रोमा ने भी ये
महसूस किया & उसे थोड़ी खिज महसूस हुई.प्रसून को अब बहुत ज़्यादा शरम आई
& वो जल्दी से रोमा के उपर से उतरा & बाथरूम मे भाग गया.
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Reply
08-16-2018, 02:07 PM,
#68
RE: Kamukta Story बदला
"ऊन्नह...ऊन्नह....!",कामिनी बिस्तर के हेडबोड को हाथो से पकड़े अपने
घुटनो पे बिस्तर पे थी & वीरेन उसकी अन्द्रुनि जाँघो को चूम रहा
था.पिच्छले 1 घंटे मे वो कोई 2 बार झाड़ चुकी थी मगर अभी तक उसकी चूत ने
उसके लंड से मुलाकात नही की थी. "आऐइययईईए....!",कामिनी ने हेडबोर्ड को
और ज़ोर से पकड़ लिया क्यूकी वीरेन की लपलपाति जीभ अब उसके दाने को चाट
रही थी & उसकी उंगली भी उसके चूत मे अंदर-बाहर हो रही थी.वो तीसरी बार
झड़ने के करीब पहुँच रही थी जब वीरेन ने अपनी ज़ुबान & उंगली को उसकी
चिकनी चूत से पीछे हटाया & अपना लंड उसमे दाखिल करा दिया. कमरे मे अंधेरा
था बस खिड़की से आती चाँदनी ही वाहा मौजूद थी & माहौल को और नशीला बना
रही थी.वीरेन उसकी चौड़ी गंद की फांको को फैलाते हुए अपने लंड को जड तक
उसकी चूत मे धँसाते हुए धक्के लगा रहा था.कामिनी का बुरा हाल था.लंड के
घुसते ही 3-4 धक्को मे ही वो झाड़ गयी थी मगर वीरेन की चुदाई मे उसे फिर
से तुरंत मस्त कर दिया था.चोद्ते हुए वीरेन झुका & अपने दाए हाथ से उसकी
चूचिया भींच के उन्हे मसलते हुए उसकी पीठ & गर्दन पे किस्सस की बौछार कर
दी. कामिनी अपने प्रेमी की मस्ताना हर्कतो से और मदहोश हो गयी & बेचैन हो
उसने अपना सर दाए तरफ घुमाया,वीरेन उसके बाए कंधे को चूमते हुए धक्के लगा
रहा था.सर घूमते ही कामिनी की नज़र कमरे की खिड़की पे पड़ी & उसके मुँह
से चीख निकलते-2 रह गयी.वाहा कोई आदमी खड़ा उनकी चुदाई देख रहा था जो
उसके सर घूमते ही वाहा से हट गया था. कामिनी को घबराहट हुई मगर उस वक़्त
उसका दिल उसके जिस्म का गुलाम था & उसका जिस्म वीरेन का लंड उसकी कोख पे
चोट कर उसके जिस्म मे मस्ती की लहरें दौड़ा रहा था.वीरेन ने अपना सर उसके
बाए कंधे से उठाया & उसके दाए तरफ घूमे हुए सर को अपने 1 हाथ से उपर कर
उसके लब से अपने लब लगा दिए.कामिनी भी उसकी किस मे सब भूल अपनी कमर
हिलाके चुदाई का मज़ा लेने लगी. "क्या कर रहे हैं,प्रसून?",बाथरूम मे
अपना अंडरवेर उतार के अपना लंड धोते प्रसून से रोमा ने पुचछा. "आप कितना
शरमाते हैं!",प्रसून उसे देख अपना लंड च्छुपाने लगा था,"ये देखिए मेरी भी
तो पॅंटी गीली हो गयी है.",रोमा ने इशारा किया तो प्रसून ने देखा की
सकमूच उसकी बीवी की पॅंटी के लेस पे भी 1 बड़ा सा धब्बा पड़ा हुआ था.वो
कुच्छ बोलता उस से पहले ही रोमा ने अपनी पॅंटी उतार दी & अपनी रस बहाती
चूत अपने पति के सामने कर दी. "ये देखिए..",प्रसून अपना नन्गपन भूल हैरत
मे रोमा की चूत देख रहा था.पहली बार उसने किसी जवान औरत को इस तरह नंगी
देखा था,"..चलिए उठिए.",उसने उसे हाथ पकड़ उठाया & फिर 1 तौलिया ले उसका
लंड पोंच्छ दिया.प्रसून ने दूर हटने की कोशिश की मगर रोमा ने उसकी 1 ना
सुनी. प्रसून तो झाड़ चुका था मगर रोमा की आग अभी भी वैसे ही भड़क रही
थी.प्रसून के लंड के एहसास ने उसे और पागल कर दिया था.सिकुड़ने के बावजूद
लंड कोई 4-5 इंच लंबा लग रहा था.उसके सख़्त होने पे उसकी लंबाई के बारे
मे सोच के रोमा की चूत फिर से गीली होने लगी. अपने पति का हाथ पकड़ वो
उसे वापस कमरे मे लाई & बिस्तर पे लिटा दिया,"आज से आपके सारे काम मैं
करूँगी.ठीक है.",वो भी उसके बगल मे लेट गयी,"..और आप भी 1 प्रॉमिस करिए."
"क्या?",प्रसून अपनी इस दोस्त की बातो से हैरान था. "कि आप मुझ से कभी भी
नही शरमाएँगे.ओके!" "ओके,प्रॉमिस." "थॅंक्स.",रोमा ने उसके गाल पे चूम
लिया & फिर उसे उसकी 1 स्केचबुक थमा दी,"चलिए अपनी और ड्रॉयिंग्स
दिखाइए." प्रसून उसे खुश होके ड्रॉयिंग्स दिखाने लगा & उनके बारे मे
बताने लगा. "आपके चाचा तो बहुत अच्छी ड्रॉयिंग करते हैं,प्रसून.आप उनसे
क्यू नही कहते की आपको सिखाएं." "हां,चाचा भी मुझे बेस्ट पेंटर कहते
हैं.पर मुझे तो सब आता है.मैं उनसे क्यू सीखू?",प्रसून के मासूम सवाल पे
रोमा को हँसी आ गयी.वो उसके बाई तरफ लेटी थी,उसने करवट बदली & प्रसून के
गाल पे प्यार से हाथ फेरा,"वो आपसे बड़े हैं ना & पता है उन्हे बहुत
प्राइज़स भी मिले हैं.वो आपको नये-2 रंगो के बारे मे भी बताएँगे & अलग-2
ड्रॉयिंग्स के बारे मे भी.",रोमा ने ये जानते ही की प्रसून ड्रॉयिंग करता
है,ये तय कर लिया था की वो अपने पति को अपने इस हुनर को और निखारने के
लिए ज़रूर प्रेरित करेगी. प्रसून ने जैसे उसकी बात नही सुनी थी & वो उसके
सीने को देखे जा रहा था,"क्या देख रहे हैं?" "तुम्हारे यहा पे बॉल क्यू
नही हैं?",उसने उसकी छातियो पे हाथ फेरा तो रोमा के बदन मे बिजली सी दौड़
गयी. "तो आपका सीना भी तो मेरे जैसा नही.",उसने उसके सीने के बालो मे हाथ
फिराया,"..जो आपके पास है वो मेरे पास नही & जो मेरे पास है वो आपके पास
नही.भगवान जी ने हमे जान के ऐसे बनाया है ताकि हम दोनो 1 दूसरे के पास से
वो ले लें जो हमारे पास नही है." उसने उसका हाथ पकड़ के अपनी चूत पे
लगाया"देखिए ये जगह भी आपके जैसी नही है ना." "हां.",प्रसून का लंड 1 बार
फिर खड़ा हो गया.रोमा की चूत पे हाथ फिराते हुए उसने अपनी 1 उंगली अंदर
डाल दी,"ऊव्व!" घबरा के प्रसून ने हाथ पीछे खींच लिया,"इतनी ज़ोर से नही
प्रसून आराम से कीजिए.",रोमा उठ के बैठ गयी तो प्रसून भी बैठ गया.दोनो
आमने-सामने बैठे थे,"..हां ऐसे ही धीरे से अंदर बाहर कीजिए.",उसने प्रसून
का हाथ पकड़ उसे उंगली से चूत मारना सिखाया.उसका दिल तो कर रहा था की
प्रसून के तने लंड को जो अब 9 इंच का हो गया था पकड़ के हिला दे मगर उसे
डर था की उसका अनारी पति कही फिर ना झाड़ जाए. "अब ऐसे इस्पे गोल-2..हां
बिल्कुल ऐसे..आअहह..",वो उसे अपने दाने को छेड़ना सीखा रही थी,"..रुक
क्यू गये?" "तुम्हे दर्द हो रहा है,तुम कराहती हो." "ओह्ह..मेरे
राजा!",उसने अपने भोले-भले पति के होंठ चूम लिए,"..जब मज़ा आता है तब भी
लड़किया कराहती हैं & आप घबराईए मत अगर मुझे तकलीफ़ होगी तो मैं आपको
बोलूँगी की रुक जाइए.ठीक है!",प्रसून ने बच्चो जैसे सिर हिलाया & उसकी
चूत मारने लगा.थोड़ी ही देर मे रोमा उसकी उंगलियो से परेशान हो अपनी कमर
हिलाके झड़ने लगी.उसने प्रसून की कलाइया कस के पकड़ के उन्हे रोक
दिया,उसे बहुत तकलीफ़ सी हो रही थी मगर साथ ही इतनी खुशी भी हो रही थी की
उसके आँसू निकल आए. "तुम रो रही हो,रोमा?",प्रसून उसे हैरत से देख रहा
था. "नही मेरी जान.",रोमा ने उसे खींच के अपने सीने से लगा लिया & उसके
सर को चूमने लगी.प्रसून का लंड उसके पेट मे चुभ रहा था.अब वक़्त आ गया था
की उसके अनारी पति को खिलाड़ी बनाया जाए. वो उसे लिए-दिए लेट गयी.बीवी के
उपर लेटते ही प्रसून की कमर फिर से खुद बा खुद हिलने लगी.अब उसे रोमा का
उसके मुँह मे अप्नी जीभ डालना भी बहुत अच्छा लग रहा था.रोमा ने उसे बोल
कर उसकी जीभ भी अपने मुँह मे घुस्वाई.प्रसून को इस खेल मे बहुत मज़ा आ
रहा था.उसके आंडो मे मीठा सा दर्द हो रहा था जिसका एहसास उसके लिए
बिल्कुल अनोखा था. "प्रसून,आप अपने घुटनो पे बैठ जाइए..",रोमा ने अपनी
टाँगे फैला प्रसून को उनके बीच लिया,"..हां..अब इसे यहा
घुसाइये..",प्रसून को मा की कही बात याद आ गयी & वो अपना लंड रोमा की चूत
मे धकेलने की कोशिश करने लगा. "ऊओवव्व..!रुकिये,प्रसून....ऐसे नही ..1
मिनिट..",उसने उसका लंड पकड़ा & अपनी चूत पे रखा,"..हां अब हल्के से
घुसाइए.",प्रसून ने उसकी बात मान हल्के से धक्का लगाया मगर नाकाम रहा.
"फिर से कोशिश कीजिए..",रोमा समझ गयी की उसकी कसी चूत की वजह से ये हो
रहा है,"..1 मिनिट रुकिये.",उसने दाए हाथ मे लंड को पकड़ा & बाए की 2
उंगलियो से अपनी चूत को फैलाया,"..अब घुसाइए." "आहह..!",इस बार लंड थोड़ा
अंदर घुसा & इसके बाद तो जैसे प्रसून को सब खुद समझ मे आ गया.उसने ऐसे
ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू किए की ना सिर्फ़ रोमा की चूत मे वो जड़ तक
समा गया बल्कि 4 धक्को मे ही रोमा दोबारा झाड़ गयी.उसे पता ही ना चला की
उसे बहुत दर्द हो रहा है क्यूकी उसके उपर तो खुमारी च्छाई हुई थी. प्रसून
1 बार झाड़ चुका था & अब उसे वक़्त लग रहा था मगर वो था तो अनारी ही.वो
बस उउन्ण उउन्ण करता पागलो की तरह धक्के लगाए जा रहा था,"प्रसून..",अपनी
बीवी की आवाज़ सुन अपने हाथो पे आँखे बंद किए,उठे प्रसून ने उसे देखा तो
रोमा ने उसे खींच के अपने उपर सुला लिया & उसके हाथो को अपनी चूचियो पे
लगा दिया,"..इन्हे दबाइए & इन्हे किस भी कीजिए." धक्के लगाता प्रसून अपनी
नयी-नवेली दुल्हन से इस खेल के नये-2 गुर सीखने लगा.
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क्रमशः.........
Reply
08-16-2018, 02:08 PM,
#69
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे... "वीरेन..",बिस्तर पे पेट के बल पड़ी कामिनी ने अपनी पीठ
पे पड़े अपने प्रेमी को पुकारा. "हूँ..",वीरेन कुच्छ ही देर पहले झाड़ा
था & उसके सिकुदे लंड से अभी भी थोड़ा पानी कामिनी की चूत मे रिस रहा था.
"मुझे लगा की उस खिड़की के बाहर कोई खड़ा था." "क्या?",वीरेन फ़ौरन उठा
अपना अंडरवेर पहनते हुए खिड़की के पास पहुँच उसे खोल बाहर देखा,"..यहा तो
कोई भी नही है.",वो वैसे ही कॉटेज के बाहर निकल गया.कामिनी ने भी अपने
बदन पे चादर डाली & उसके पीछे-2 अंदर के कमरे से बाहर के कमरे मे आई.तब
तक वीरेन वापस अंदर आके दरवाज़ा बंद कर रहा था. "मुझे तो कोई नज़र नही
आया.तुम्हे यकीन है की तुम्हे वेहम नही हुआ था?" "हां,वीरेन मुझे यकीन
है,वाहा कोई तो था." "जो भी था.वो अब चला गया.",उसने उसके कंधे पे हाथ
रखा & दोनो वापस बेडरूम मे आ गये & बिस्तर पे लेट गये. "कौन होगा वीरेन?"
"पता नही ऐसी बेहूदा हरकत कौन करेगा.हो सकता है कोई रात का चौकीदार हो
जिसने हमारी आवाज़े सुन ली हो & छुप के हमारी चुदाई देखने लगा हो.",वीरेन
ने 1 बार फिर उसे बाँहो मे भर लिया. "हूँ..",कामिनी ने पहले सोचा की उसे
दवा की डिबिया के बारे मे बताडे मगर फिर उसने सोचा की क्यू ना पहले थोड़ी
छनबीन करले & उसने वो बात अपने दिल मे ही रखी.जितनी देर वो सोच रही थी
उतनी देर मे वीरेन ने अपना अंडरवेर निकाल दिया था & 1 बार फिर उसके जिस्म
से खेलने लगा था.कामिनी ने भी उसके बदन पे अपनी बाहे लपेट दी & उसकी
हर्कतो का लुत्फ़ उठाने लगी. ------------------------------
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"आआआआहह...प्रसुउउन्न्न्न्न..!",रोमा झाड़ रही थी मगर प्रसून अभी भी उसके
उपर चढ़ा धक्के लगाए जा रहा था. "ऊहह..आअहह..!",प्रसून भी बहुत ज़ोर से
कराहा & रोमा ने उसका गर्म वीर्या अपनी चूत मे भरता मेशसूस किया.उसे बहुत
मज़ा आया था,उसने अपने पति को बाहो मे भर लिया & उसके सर को चूमने लगी.
प्रसून के लिए ये बिल्कुल अनोखा एहसास था.ऐसा मज़ा उसे कभी नही आया
था.उसे अपनी ये नयी दोस्त बहुत अच्छी लगी थी & उसने सोच लिया था की अब वो
रोज़ उसके साथ ये खेल खेलेगा.
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काफ़ी रात हो गयी थी.कामिनी ने सर घूमके पास मे सोए वीरेन को देखा & फिर
बिस्तर से उठ गयी.अपना सूटकेस खोल उसने अपना ट्रॅक्सयूट निकाल के फटफट
पहना & पैरो मे जूते डाले.वो जानती थी की वीरेन अब सीधा सुबह होने पे
उठेगा & उठते ही 1 बार फिर उसके नशीले जिस्म के साथ खेलने मे जुट जाएगा.
जूते के फीते बाँध वो कॉटेज से निकली & आसपास का जायज़ा लेने लगी.खिड़की
के नीचे की फूलो की क्यारी किसी जूते के तले मसली हुई थी यानी की उसे कोई
वेहम नही हुआ था.उसने उस जगह के आस-पास देखा,जब दावत हो रही थी उस वक़्त
थोड़ी बारिश हुई थी & उसकी वजह से मिट्टी गीली थी & उसपे किसी के जुतो के
निशान थे. वीरेन तो नंगे पाँव बाहर गया था तो ये निशान आख़िर थे
किसके?कामिनी उन निशानो के पीछे जाने लगी तो वो कॉटेज से कुच्छ दूरी पे
बनी झाड़ियो के पास जाके ख़त्म हो गये.कामिनी उन झाड़ियो के पार हो गयी &
देखा की निशान फिर शुरू हो गये हैं. उनके पीछे चलते हुए वो मॅनेजर'स
कॉटेज तक पहुँच गयी..जो भी था वो यही से आया था.उसे डर तो बहुत लग रहा था
मगर ये पता करना ज़रूरी था की कौन जासूसी कर रहा है.कॉटेज के पास पहुँच
कामिनी हैरत मे पड़ गयी. कॉटेज के दरवाज़े पे 1 ताला लगा था.आस-पास काफ़ी
धूल थी जोकि बारिश की वजह से थोडा जम गयी थी मगर उसपे वो जूतो के निशान
नही थे.कामिनी ने तले को जाँचा.ताला मज़बूत था & लगता था की काफ़ी दीनो
से लगा हुआ है.उसने कॉटेज की खिड़कियो से अंदर झाँका मगर अंदर की हालत
देख कर लगा नही की वाहा हाल मे कोई आया था. कामिनी ने कॉटेज की अच्छे
तरीके से छन्बिन करने के बाद वाहा से वापस वीरेन की कॉटेज की तरफ आते हुए
सर घुमा के देखा तो उसे बुंगला & सर्वेंट क्वॉर्टर्स नज़र आए.उसने
क्वॉर्टर्स को चेक करने का फ़ैसला किया.क्वॉर्टर्स 4 2 मंज़िला इमाराते
थी.पहली 3 के बाहर खड़ी हो कामिनी ने अंदर की आवाज़ो पे कान लगाया.हर
क्वॉर्टर से पंखे के चलने की आवाज़ आ रही थी.तीनो इमारतो की पहली मंज़िलो
को भी सर उठा के देखने पे उसे ऐसा ही लगा की अंदर मौजूद लोग सो रहे हैं.
कामिनी अब चौथी इमारत के पास थी.उसने निचली मंज़िल के क्वॉर्टर की खिड़की
पे कान लगाया तो उसे हल्की चीख सुनाई दी जोकि शायद पीछे की ओर से आई
थी.वो भाग के क्वॉर्टर के पीछे पहुँची मगर पिच्छला दरवाज़ा बंद था.पीछे
के कमरे की खिड़की थोडा ऊँची थी.कामिनी ने पास पड़ी कुच्छ ईंटो को खिड़की
के नीचे लगाया & उनपर खड़े हो अंदर झाँका. अंदर रजनी उसी पोज़िशन मे थी
जिसमे थोड़ी देर पहले वो थी जब उसने उस आदमी को खिड़की पे देखा था-यानी
की हाथो & घुटनो पे.उसे देखते ही कामिनी को चीख का कारण समझ आ गया.इंदर
रजनी क पीछे घुटनो पे खड़ा उसकी गंद मे अपना लंड घुसा रहा था. कामिनी
नीचे उतरी & उन ईंटो को वापस उनकी जगह पे रखा.वो इंदर को तो पहचान गयी थी
मगर वो लड़की कौन थी?उसे इतना तो समझ आ गया था की उसकी खिड़की के बाहर
खड़ा इंसान इंदर नही था.तो फिर था कौन? सवाल का जवाब ढूंडती कामिनी वापस
वीरेन की कॉटेज मे आ गयी थी.उसने अपने कपड़े & जूते उतारे.वीरेन अभी भी
बेख़बर सो रहा था.नंगी हो वो जैसे ही बिस्तर पे लेटी की उसके दिमाग़ मे 1
ख़याल कौंधा.कही शिवा तो नही था वो झाँकने वाला शख्स?..वो बंगल के अंदर
से आया होगा & फिर देख के चला गया होगफा?मगर वो क्या देखने आया था?..कही
उसी ने तो सुरेन जी की दवा के साथ छेड़ खानी तो नही की थी? कामिनी ने
करवट बदली..हां..वही था..& आज रात भी वो ज़रूर वीरेन को नुकसान पहुचने की
गरज से यहा आया होगा लेकिन जब उसने देख की वो अकेला नही है तो वाहा से
चला गया होगा..मगर वो क्यू उसे नुकसान पहुचाना चाहता था?....आख़िर वीरेन
को नुकसान पहुँचा के क्या मिलता उसे? उसने फिर करवट बदली..या फिर ऐसा तो
नही की वो किसी के कहने पे ऐसा कर रहा हो?..मगर किसके कहने
पे?...देविका!..तो क्या देविका ने ही अपने पति की दवा के साथ कुच्छ छेड़
खानी कर उसे मारा था & अब देवर को भी मारना चाहती थी?..लेकिन वो ऐसा क्यू
करेगी?वीरेन को कोई दिलचस्पी नही थी पैसो मे & सुरेन जी के बाद सब कुच्छ
तो वैसे भी उसी का होता..तो फिर क्या वजह हो सकती थी?..या कही ऐसा तो नही
की शिवा ही सब कुच्छ हड़पने के चक्कर मे हो मगर दोनो भाइयो की मौत से उसे
क्या हासिल होगा?..उनके बाद तो सब देविका के पास होगा. और तब कामिनी को
जैसे सब समझ मे आ गया.सुरेन जी ने जो सारी वसीयते लिखी थी उन तीनो सुरतो
मे ये नही लिखा था की उन दोनो भाइयो की मौत के बाद जब देविका हर चीज़ की
अकेली मालकिन होगी,उस वक़्त अगर वो दूसरी शादी कर ले तो क्या होगा?
Reply
08-16-2018, 02:08 PM,
#70
RE: Kamukta Story बदला
कामिनी
को शिवा की चाल समझ आ रही थी,वीरेन की मौत के बाद वो देविका से शादी करता
& फिर प्रसून & देविका को भी अपने रास्ते से हटा देता.उसके बाद हर चीज़
उसकी थी. कामिनी को पसीने छूट गये.क्या शिवा इतना ख़तरनाक आदमी
था?..लेकिन अगर उसने अभी कुच्छ कहा तो हो सकता है वो संभाल जाए & उसे
झूठा भी साबित कर दे उसके पास सबूत जो नही था कोई.उसे बहुत संभाल के कदम
उठाने थे.सबसे पहले तो उसे वीरेन को आगाह करना था & फिर ये पक्का करना था
की देविका शिवा के साथ मिली हुई थी या फिर शिवा उसे धोखे मे रख उसका
इस्तेमाल कर रहा था. उसने जमहाई ली,उसे नींद आ रही थी.उसने आँखे बंद कर
ली & इन सारे ख़यालो को दिमाग़ से निकाल सोने की कोशिश करने लगी.सुबह
होने मे कुच्छ घंटे ही थे & उसे पता था की सूरज की पहली किरण के साथ ही
वीरेन 1 बार फिर उसके जिस्म के साथ खेलने मे जुट जाएगा.वो उस से पहले
अपनी नींद पूरी कर लेना चाहती थी.उसने करवट ली & बेख़बर सो रहे वीरेन के
सीने से सर लगा के सोने लगी. "देविका जी,..",कामिनी सहाय परिवार के बंगल
के ड्रॉयिंग रूम मे वीरेन & देविका के साथ बैठी चाइ पी रही थी,"..प्रसून
की शादी हो गयी है,अब मुझे लगता है की आपको अपनी वसीयत तैय्यार कर लेनी
चाहिए." "जी.",देविका अपने कप से चाइ पीती रही.थोड़ी देर की खामोशी के
बाद उसने प्याली मेज़ पे रखी,"..कामिनी जी,क्या मैं कुच्छ दिन रुक के ये
वसीयत कर सकती हू?" "ये तो आपकी मर्ज़ी है.",कामिनी के दिमाग़ मे पिच्छले
रात के ख़याल घूमने लगे & वो देविका की बातो से ये भाँपने की कोशिश करने
लगी की वो & शिवा मिले हुए थे या फिर देविका का इस्तेमाल हो रहा
था,"..लेकिन मेरी राई तो यही होगी की जितना जल्दी करें उतना अच्छा होगा."
"ठीक है.मैं कुच्छ दीनो मे आपके पास आती हू." "बहुत अच्छे.",रजनी चाइ के
झूठे प्याले & बाकी खाने का समान वाहा से हटा रही थी.
-------------------------------------------------------------------------------
"ये देखो,कामिनी.",वीरेन कामिनी का हाथ पकड़े उसे पेड़ो के झुर्मुट से
निकल 1 खुली सी जगह मे ले आया था.आज सवेरे के नाश्ते के बाद से ही वो उसे
एस्टेट की 1 जीप मे वाहा की सैर करा रहा था. "वाउ!",कामिनी की नज़रो के
सामने 1 पानी की छ्होटी सी झील थी. "सुंदर है ना?",वीरेन उसके पास आ अपनी
बाँह उसकी कमर मे डाल उसके साथ कुद्रत के उस हसीन नज़ारे को उसके साथ
निहारने लगा. "बहुत." "पता है मैने क्या सोचा है की अगली बार जब हम यहा
आएँ तो मैं तुम्हारी पैंटिंग बनाउन्गा." "अच्छा!",कामिनी घूम के उसके
सामने उस से सॅट के खड़ी हो गयी,"..कैसी पैंटिंग बनाएँगे जनाब?जैसी आजकल
आप अपने स्टूडियो मे बनाते हैं?",बड़ी शोखी के साथ उसके सीने पे उसने
अपने हाथ रख दिए & उसके शर्ट के बटन्स से खेलने लगी. "आपने बिल्कुल ठीक
समझा,मोहतार्मा!",वीरेन ने भी उसे उसी अंदाज़ मे जवाब दिया.दोनो अपनी ही
बातों पे आप ही हंस पड़े & 1 दूसरे की बाहो मे समाते हुए चूमने लगे.दोनो
प्रेमी 1 दूसरे मे खोए हुए थे & दोनो मे से किसी का ध्यान पेड़ो के पीछे
छुपे उनकी हर्कतो पे नज़र रखे हुए इंदर पे गया ही नही.
-------------------------------------------------------------------------------
प्रसून 1 ही रात मे रोमा का दीवाना हो गया था.जिस बात के बारे मे उसे
उसकी मा ने बताया था,उसकी बीवी ने उसे उस खेल की हक़ीक़त से वाकिफ़ कराया
था & उसे वो हक़ीक़त बड़ी ही पूर्कशिष & नशीली लगी थी.रोमा अभी-2 नहा के
निकली थी & उसके बदन पे बस 1 तौलिया बँधा था.उस तौलिए के उपर से प्रसून
को,उसका हल्का सा क्लीवेज & मस्त,मांसल जंघे,बड़ी ललचाती हुई सी लग रही
थी. वो आगे बढ़ा & अपनी बीवी को बाहो मे भर लिया & चूमने लगा,"अरे!अरे!
क्या करते हैं?..औउ...अभी नही..प्लीज़ प्रसून...ऊव्व...!",रोमा ने हंसते
हुए उसे परे धकेला. "उम्म..क्यू नही?",प्रसून ने उसे फिर से बाहो मे भरना
चाहा.प्रसून के हाव-भाव & सोच तो 1 बच्चे जैसी थी मगर हरकते वो बडो वाली
करना चाह रहा था.रोमा को इस बात से बड़ी हँसी आ रही थी.टवल उतार कर उसने
बिस्तर पे रखे ब्रा को अपने कंधो पे चढ़ाया. "हर चीज़ का 1 वक़्त होता
है..",उसने अपनी पीठ प्रसून के आगे की,"..अब बिना शरारत किए मेरे हुक्स
लगाइए.",प्रसून ने हुक्स लगाने के बजाय पीछे से उसे बाहो मे भर उसकी
चूचिया मसल दी & उसे चूमने लगा.अपनी गंद मे चुभता पति का तगड़ा लंड तो
रोमा को भी मदहोश कर रहा था मगर अभी अगर वो प्रसून के साथ चुदाई मे लग
जाती तो उसे देर हो जाती & उसे ये बिल्कुल अच्छा नही लगता की शादी के बाद
पहली ही सुबह वो देर से अपने कमरे से बाहर आए. "ओई मा..!",वो उसकी
गिरफ़्त से किसी तरह निकली & जल्दी से खुद ही हुक्स लगा लिए,"..मैने कहा
ना प्रसून की हर चीज़ का 1 वक़्त होता है.ये सब हम रात को करेंगे.",उसने
जल्दी से अपनी पॅंटी चढ़ाई.प्रसून के चेहरे पे उदासी & गुस्सा दोनो आ गये
थे & वो बच्चो की तरह रूठ कर बिस्तर के कोने पे बैठ गया. रोमा ने फटफट
अपनी सारी पहनी & अपने रूठे हुए पति के आपस आ बैठी,"नाराज़ क्यू होते
हैं?",उसने उसका चेहरा अपनी तरफ किया,"..देखिए अभी मम्मी नीचे हमारा
नाश्ते पे इंतेज़ार कर रही होंगी ना!हूँ?" प्रसून ने हा मे सर हिलाया.
"तो उन्हे इंतेज़ार कराना बुरी बात होगी ना?" उसने फिर से हां मे सर
हिलाया. "इसलिए तो मना कर रही थी.हम रात को ये सब करेंगे.",उसने उसे खड़ा
किया,"..ठीक है ना.अब तो नाराज़ मत रहिए.",उसने उसके गाल पे चूमा,"..चलिए
नीचे मम्मी के पास चलें." "चलो.",प्रसून अपनी बीवी का हाथ थाम कमरे से
निकल गया. -------------------------------------------------------------------------------
क्रमशः...........
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