Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
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माँ को पाने की हसरत



दोस्तो जैसा कि कहानी के नाम से ही पता चलता है ये कहानी माँ बेटे पर आधारित होगी
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#2
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
एक लंबी सी अंगड़ाई लेते हुए अपने गर्दन को दाई और बाई ओर मोडते हुए मैं अपने बिस्तर से उठ खड़ा हुआ...सामने स्लाइडिंग डोर के खुले होने से सफेद पर्दे हवाओं से लगभग छत की दीवारो को छू रहे थे....बाहर घाना अंधेरा था यक़ीनन सुबह 4:30 में अंधेरा ही होता है...मैने एक बार अपनी बाई ओर नज़र फिराई...तो अहसास हुआ चादर ओढ़े अब भी आकांक्षा सो रही थी...

आकांक्षा का चेहरा उसकी बिखरी ज़ुल्फो से ढका सा हुआ था....मैने आगे बढ़के उसके बदन से सफेद चादर एक झटके में उठा ली...तो पाया अबतक उसने अपनी टाँगों के बीच सफेद रंग की पैंटी झिल्ली सी पहन ली थी जो कल रात मैने खींचके सोफे के पास उसकी चुदाई करने से पहले ही उतार दी थी

वो अब भी आँखे मुन्दे घारी नींद में सोई हुई थी उसके बदन पे एक भी कपड़ा नही था उसकी चुचियाँ उसके करवट एक ओर लेने से आपस में दबी हुई सी थी...उसके दोनो हाथ एकदुसरे के उपर थे..मैने दुबारा से मुस्कुराते हुए उसके बदन पे सफेद चादर ढक दी...उसे उठाना नही था मुझे....आख़िर उसने पूरी रात मुझे मज़ा जो दिया था...करीब 2 बजे ही उसे छोड़ा था...हालाँकि 3 बार चुदाई के बाद वो बुरी तरह थक चुकी थी पर उसने मुझे ना एक बार भी ना कहा...काफ़ी ओबीडियेंट लड़की थी बेचारी...मेरे इतने हार्डकोर (भीषण) चुदाई के बाद भी उसने आहह आह करके सिर्फ़ सिसकिया ही मुँह से निकाली..आख़िर करती भी क्या? मेरे भाई ने उसे धोका जो दे दिया था

जी हां मेरा कज़िन भाई आकाश जिसकी वो ना जाने कौन सी नंबर वाली गर्लफ्रेंड थी....उसकी तो आदत थी कपड़ों की तरह लड़कियो को बदलना...लेकिन इस बेवकूफ़ ने उससे बेपनाह प्यार कर लिया और फिर उसके हवस को धोखा जान पड़ते हुए खुदकुशी करने की कोशिश की थी पर मेरे लाख समझाने के बाद उसने ये कदम नही उठाया....लेकिन उसे प्यार से भरोसा हट गया वो उन लड़कियो में से बन गयी जो खुद मर्दो को इस्तेमाल करने की चीज़ समझने लगी उन लड़कियो की तरह जो एक बार कोठे पे आती तो है लेकिन उसके बाद उन्हें हर किसम की चुदाई की आदत सी हो जाती है शरमो हया के गहने तो बहुत पहले ही उतार दिए जाते है....और फिर उन्हें ना लाज ना शरम और ना डर रहता है ना उन्हें घिन आती है कि कितनो से मरवाई कितनो से चुदवायी और कितनो के चूसे....बस उनकी एक ही हसरत बन जाती है और वो है पैसा.....खैर आकांक्षा कोई कॉल गर्ल नही बनी थी या कोई रंडी नही थी भाई के धोका देने के बाद मेरे लाइफ में आई थी एक दोस्त की हैसियत से कुछ मुलाक़ातो के बाद मैने उसकी जवानी में आग लगा दी

और फिर उसने खुद ही अपने आपको मुझे सौंप दिया....लेकिन ऐसा लगा जैसे कुँवारापन मैने उसका छीना था...उसके दोनो छेदों मे सख्ती बरक़रार थी....क्यूंकी भाई की लुल्ली और मेरे लंड में कहीं ना कही फरक़ था...दाद दूँगा उसकी जो मेरे इतने मोटे लंबे लंड को लुल्ली समझके उससे चुदने को तय्यार हो गयी शायद हवस की ही वो आग थी...पर अब उसे देखके लग नहीं रहा था कि दूसरे दिन भी उसकी आँख खुलेगी....पर मुझे ज़रा सी परवाह ना थी....क्यूंकी मुहब्बत और रहम तो मेरे अंदर भी नही थी...बस मेरा तो उस पर दिल आ गया था...

मेरी ज़िंदगी भी अजीब सी है...माँ बाप से झगड़ा किया और दिल्ली जैसे बड़े शहर को छोड़ कर अपने होम टाउन आ गया....था ही कौन बस एक माँ बाप केर करने वाले ननिहाल में जिसमें से मेरी एक मौसी मेरे होम टाउन में रहती है बाकी ददिहाल वालो से कोई मतलब नही था..पर अगर भूले भटके भेंट हो जाए तो बस दो चार बातें और फिर अलविदा....वो भी मुझे याद नही करते पर माँ बाप तो करते है...पर उन्हें कैसे बताता? हसरत जिस चीज़ की है वो तो मुझे मेरे होमटाउन में ही मिल सकती है

जब तक अयाशी का कीड़ा बदन में रोम रोम में समाया हुआ है तबतक यहाँ से वापिस बड़े शहर जाना मुझे भाने नही वाला...वो लोग आजतक मेरी इस हसरत को जानते नही पर शायद जान भी ना पाए...अगर सब कुछ वोई मिल जाता तो यहाँ आने के की क्या नौबत ? पर यहाँ की दास्तान बचपन से जो माँ से सुनते आया हूँ इसलिए इस जगह से एक और प्यार सा हो गया है
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Yesterday, 12:52 PM,
#3
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
खुल्लम खुल्ला अयाशी यहाँ का जैसे एक रिवाज़ सा बन गया है....हालाँकि कौन किसके साथ क्या कर रहा है किसी को फरक़ नही हां पर माँ बहन तक तो ठीक अगर किसी की गर्लफ्रेंड बीवी फँसी हुई हो किसी और से अपने मर्द के होते हुए तो फरक़ पड़ ही जाता है..2 साल हुए आए हुए ना जाने कितनी सरकारी नौकरिया के इम्तिहान दिए पर हाथ कुछ ना लगा हालत के आगे पिता जी की थोड़ी सी मदद के साथ यहाँ डिसट्रिब्युटर की नौकरी पा चुका हूँ....हालाँकि पिता जी को भी ऐतराज़ था मेरे यहाँ रहने से..पर मेरी सामने उनकी एक ना चली...अब तो बस फोन पे हाल चाल ही की ही बातें होती है

खैर मैं तब्तलक अपने डमबेल और बारबेल सेट को निकालके लगभग 1 घंटा एक्सर्साइज़ करने लगा....हर एक मसल्स की एक्सर्साइज़ के बाद जैसे शरीर हार्ड सा हो गया...काफ़ी पसीना बहाने के बाद 2 बनाना लिए और मिक्सर में दूध डालके उसे अच्छे से ग्राइंड करके शेक बनाया....उसकी चुस्किया लेते हुए बिस्तर के पास ही सोफे पे ढेर हो गया...सूरज निकल चुका था...हापी छोड़ते हुए काफ़ी थका हुआ चेहरा लिए आकांक्षा उठी फिर उसने मुस्कुराया....

कुछ देर में उसके हाथ में मैने 500 के 4 नोट दिए....वो मुस्कुराइ किसी रंडी की तरह अपने पर्स में मेरे दिए हुए पैसे रखने लगी....हमने साथ में नाश्ता किया....और फिर उसके बाद वो घर से निकलने को हो गयी

आदम : घर में क्या बहाना मारोगी?

आकांक्षा : बोल दूँगी सहेली के यहाँ हूँ इट ईज़ नोट सो हार्ड तो मे माँ को समझा लूँगी और पापा की तो लाडली हूँ हाहाहा

आदम : ओके घर तक छोड़ दूं

आकांक्षा : नही पैदल ही चली जाउन्गी वैसे तुमने अंदर तो नही छोड़ा था ना पेशाब के वक़्त भी छेद खुला खुला सा लग रहा था

आदम : हाहाहा पहली बार मोटा लंड लिया है ना धीरे धीरे लोगि तो आदत पड़ जाएगी

आकांक्षा ने ऐसा इशारा किया आँखो से जैसे वो आखरी ही था

मैने पहलू बदला और उसके सवालात का जवाब दिया "नही डबल कॉंडम चढ़ाया था"

आकांक्षा : ओह तब तो ठीक है

आदम : बाइ

आकांक्षा : बाइ आदम (कहते हुए मेरे सामने ही वो घर से 10 कदम दूर ही चली थी कि उसने हाथ दिखा के एक थ्री वीलर को रोका और उस पर चढ़के चली गयी)

मैं वापिस घर में आके तय्यार होके सुबह 9 बजते बजते काम के लिए निकल पड़ा....अकेला रहने का यही फ़ायदा होता है ना किसी से मतलब रखो बस ज़िंदगी को ऐश से जियो पर अपने तो याद आते ही है....और माँ भला बेटे से जुदा तो रह नही सकती...माँ का फिर सुबह में कॉल आया कल रात को उठाया नही था...क्या कहता कि मैं आकांक्षा की चुदाई कर रहा था? माँ की रूखी सुखी बातों के बाद मैने फोन कट कर दिया....

एक बार माँ की तस्वीर को देखने लगा.....और फिर दिल मसोसते हुए उसे टेबल पे रख दिया काश माँ मेरी फीलिंग्स को समझ सकती कि उसके बेटे की क्या चाहत है? लेकिन ऐसी भी क्या चाहत जो परिवार से दूर रहके पूरी हो? पर नेकी और बदी में कभी कभी बदी की ही जीत होती है....
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Yesterday, 12:52 PM,
#4
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
अब तक मैने किसी भाभी या आंटी को चोदा नही था....लेकिन मुझे अपने उपर पूरा विश्वास था कि मैं उन्हें चोद सकता हूँ और ये कॉन्फिडेन्स दिलाने वाली एक मात्र थी चंपा...चंपा टाउन के बदनाम लालपाडा एरिया में रहती थी.....पेशे से बाई थी...कामवाली नही चुदाइ वाली बाई....उसे देखके मुझे बांग्ला हीरोइने की याद आ जाती थी साली पहनती ही कुछ ऐसे कपड़े थी....कपड़े बोलूं तो साड़ी जिससे उसकी नाभि दिखती थी.....साली के ब्लाउस का उपरी बटन हमेशा खुला रहता था शायद कस्टमर को रिझाने के लिए होता था उसके होंठो की वो लाल लिपस्टिक हद से ज़्यादा गोरी थी और उपर से कांख के बाल को वॅक्स करके एकदम चिकना रखती थी चूत के भी बाल ब्यूटी पार्लर में जाके वॅक्स करवाती थी उसने खुद ही बताया....गुलाबी दोनो छेद थे चुचियाँ भी दस मर्दो के दबाने से मोटी दशहरी आम जैसी हो गयी थी पर उससे मिलना भी जैसे संजोग था....पर बिना उसके पास जाए दिल मानता नही था....पर जब दिल एमोशनल होता था तो उसकी तरफ दिल जाने का इरादा नही करता था....एक तरह से तो मैं अपने माँ बाप को धोका देके रह रहा था....लेकिन अपनी इस ज़रूरत के चक्कर में मैं सबकुछ गवाने को जैसे तय्यार था

ये एक ऐसा नशा था जो मुझे हर पल वापिस उसी साँचें में ढाल रहा था...अभी माँ की तस्वीर की तरफ देखते हुए सोच ही रहा था कि...

इतने में पास रखा फोन बज उठा...

फोन रिसीवर कान में लगाते ही....आवाज़ पहचानने में देरी ना लगी

"हेलो"....आवाज़ सुनते के साथ मैने रिसीवर को दाए कान से हटाते हुए बाए कान में लगाया

आदम : हां बोलो चंपा

चंपा : हम क्या बोलेंगे? आपने तो आजकल आना ही छोड़ सा दिया है

आदम : हां वो दरअसल काम में फँसा हुआ था

चंपा : हां हां ये कम्बख़्त काम (अपनी ज़ुल्फो से खेलती होंठो को काटती हुई चंपा ने जवाब दिया)

आदम : ह्म दरअसल अभी मूड नही बन रहा था ना तो इसलिए मैं आ नही पा रहा था

चंपा : अर्रे सरकार मूड का क्या है? चंपा दो मिनट में नरम को गरम कर सकती है और गरम को नरम भी आप आके तो देखिए हुज़ूर

आदम : चंपा मैं टाइम निकालके आता हूँ ना

चंपा : क्यूँ आज क्यूँ नही सरकार? ओह हो कहीं कोई नयी घोड़ी मिल गयी क्या चरने को ?

आदम : चंपा देख तमीज़ से बात कर ऑफीस में हूँ किसी और ने रिसीवर उठा लिया तो मेरी ऐसी कम तैसी हो जाएगी बात को समझ यार

चंपा : क्या करें हुज़ूर? पहले तो अपने मर्ज़ी से आने लगते हो फिर खुजली लगा के उतर जाते हो हमे क्या ठंडी औरत समझ रखे हो का ?

आदम जानता था बातों से बात महेज़ बढ़ेगी....साली रंडी को एक से दो बार चोद क्या दिया? थोड़ा प्यार के दो मीठे बोल क्या बोल दिए महँगा सेंट वाला तोहफा क्या दे दिया? साली तो अब छाती पे चढ़ने लगी थी....चंपा जैसी लीचड़ से पीछा छुड़ाना थोड़ा मुस्किल था...आदम जानता था खुजली चूत के साथ साथ पैसो की है..और आदम हर राउंड के बाद बिना आना कानी किए पैसा दे देता था ग़लती उसकी भी थी जिसने कुछ ज़्यादा ही जोश में आके अपने पैसो की धौंस जमा दी थी चंपा की नज़रों में...
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Yesterday, 12:52 PM,
#5
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
आदम ने फोन कट कर दिया....मूड बहुत खराब हो गया था...लेकिन चंपा ने दुबारा फोन नही किया....आदम कुर्सी पे पसरते हुए माँ की तस्वीर की तरफ देख रहा था....काश माँ तुम समझ पाती? तो ना इतना दूर अकेले रहता और ना परिवार से जुदा हो पाता...पर सच मुहब्बत सिर्फ़ नसीब वालो को मिलती है बदनसीब वालो को नही जो आदम खुद को समझता था..

उधर दिल्ली में आदम की माँ अंजुम अपनी सहेली हेमा के घर आई थी....उसने टाइट नीले रंग का सूट पहन रखा था ..थोड़ा ढका पोश पहनती थी इसलिए खुले गले वाली कमीज़ नही थी....थोड़ा इन्तिजार करने के बाद दरवाजा हेमा ने खोला वो जैसे हड़बड़ाई हुई सी थी....अंजुम को देखके उसने मुस्कुराया और उसका हाथ पकड़े अंदर ले आने लगी

अंजुम ने उसकी हालत का जायेज़ा ले लिया था...क्यूंकी ब्लाउस से उसके निपल सॉफ दिख रहे थे जल्दबाज़ी में 39 साइज़ की ब्रा भी पहनना भूल गयी थी...उसके पीछे का ब्लाउस का फीता लगभग खुला था..और आगे से उसकी दो तरबूज़ जैसे दूध ब्लाउस में जैसे दबे हुए से थे उसका क्लीवेज सॉफ दिख रहा था....अंजुम ने पीछे की ओर देखा तो टाय्लेट से आदमी बाहर आया...अंजुम को जानने में देरी ना लगी कि ये हेमा का बाय्फ्रेंड संजय था....जो कि उसके पति की गैर हाज़िरी में यहाँ आता था अपनी भूक मिटाने....हेमा अब भी हाँफ रही थी उसने अंजुम को बैठने को कहा....और उसी के सामने अपनी पेटिकोट का नाडा बाँधने लगी

संजय सकपकाया हुआ अंजुम को देखने लगा जो उसे घूर रही थी और शरम से आँखे इधर उधर करने लगी...."अर्रे अंजुम जी आप यहाँ पे अच्छा हेमा मैं चलता हूँ तुम लोग बात करो".......हेमा मुस्कुराइ संजय ने अंजुम के सामने ही हेमा के गर्दन से लेके उसके पीछे खुले गले तक अपना हाथ फिराया और बिना कुछ कहे पीछे से उसकी पेटिकोट में 2000 के दो नोट फँसा दिए...ये सारी हरकत अंजुम देख रही थी शरम से उसके गाल लाल थे पर चुप थी...संजय ने गंदी सी हसी हँसी...और अपने खुले बदन पे सफेद शर्ट डालता हुआ घर से निकल गया

हेमा : और बता ? कैसे आना हुआ? तू शाम को आती

अंजुम : अच्छा और रात को घर थकि हारी जाके खाना बनती..तेरी तरह आराम नही है मुझे

हेमा : मुझे किसका आराम? मेरी दोनो बेटियाँ आएँगी 8 बजे तक तब्तलक मैं चावल चढ़ा दूँगी सब्ज़िया काट दूँगी बाद में खाना वो बनाएँगी

अंजुम : तुझे पता भी है संजय के यूँ आने जाने से तेरी पोल क्सिी दिन तेरे दूसरे पति के आगे खुल सकती है ह्म सरदार जी नही है तभी गुलच्छर्रे उड़ा रही है कमीनी

हेमा : तो तुझे जलन क्यूँ होती है? क्या हम दोनो ने मिलके कयि आदमियो से चट्टिंग नही की और एक तो फोन पे तेरी आवाज़ का ही दीवाना हो गया था

अंजुम : वो बीता कल था तेरी मज़बूरी में मैने साथ दिया और तूने सबको मेरा ही नंबर दे दिया पता है बाद में चेंज करना पड़ा आदम के बाप को मालूम पड़ जाता

हेमा : अच्छा छोड़ जाने दे वो तो मज़बूरी थी भला जिसका पति अपनी पत्नी को दिन रात जलाता हो बातों से थप्पड़ और मारपीट से तो ऐसी औरत का क्या सुख बचता है? अगर सरदार आया ना होता ज़िंदगी में तो अब तक ग़रीबी की आह और विधवा होने के शाप ने मार ही डाला होता....वो तो चला गया दुनिया से मुझे ग़रीब बेसहारा छोड़कर लेकिन अच्छा ही हुआ उसके सितम से दूर तो हो गयी

अंजुम : पर ये जो तू कर रही है उसका क्या? पहले राकेश फिर भान और अब ये अर्रे कही बीमारी लग गयी ना तुझे? तेरे सरदार जी को मालूम पड़ा तो !

हेमा : छोड़ ना आजकल तो टाइम देता नही कहता है बिज़्नेस के सिलसिले में बिहार जाना पड़ जाता है अर्रे वो बिहार नही अपने इकलौते बंग्लो में किसी कुँवारी 25 साल की लौंडिया के साथ चुदाई करता है पैसे वाला जो है अय्याश इंसान बस मेरी मज़बूरी से उसकी आँख क्या भर गयी थी? कि मुझे बीवी का दर्ज़ा दे डाला

अंजुम मन ही मन बुदबुदाने लगी ह्म बीवी का दर्ज़ा या रखैल का....एरिया में तो वैसे ही हवा उड़ गयी की सरदार की रखैल है पहले कामवाली थी...जो घरो घर बर्तन मांजती थी आज 50 गज के दिए हुए आलीशान घर में रहती है....सरदार तो बेहया था...पहली बीवी जो सरदारनी थी जिसके साथ वो रहता था और दूसरी जिसे उसने काफ़ी दबाव और प्रेशर देने पे बीवी माना ज़रूर था पर उसकी अहमियत उसके दिए चार दीवारी घर में मोहताज उसकी टुकड़ो पे पलती एक रखैल सी थी..बेटियो का भी खर्चा वोई चलाता था...हालाँकि बेटियाँ अब जॉब करने लगी थी हेमा की

लेकिन हर कोई जो भी हेमा को जानता था उसके बारे में यही कहता था कि वो सरदार की रखैल है...सरदार से अफेर होने से पहले हेमा ने पैसो की मज़बूरी के लिए काफ़ी मर्दो से रिश्ता जोड़ा था....हालाँकि उसने अंजुम के किराए का मकान भी इस काम के लिए कितनी बार यूज़ भी किया....दोनो के जाने के बाद अंजुम को ही बाथरूम की सॉफ सफाई करनी पड़ती थी...पर हेमा उसके घर की कामवाली ही नही बल्कि उसकी एक अच्छी दोस्त भी बन गयी थी कभी भी कोई भी प्राब्लम होता तो हेमा बेझिझक उसकी हेल्प करती थी...पर पैसो की शौहरत पाते ही धीरे धीरे हेमा और उसकी दोस्ती फीकी पड़ने सी लगी थी...क्यूंकी अंजुम को उसकी पर्सनल लाइफ से कोई शिकायत नही थी पर वो अब दूरिया बनाना चाहती थी इस राज़ का भागीदार खुद आदम भी था जिसने हेमा और केयी अनगिनत मर्दो को उसके साथ बाथरूम में बंद होते देखा था...लेकिन माँ के डर से वो उस वक़्त वहाँ मज़ूद नही होता था बस छुप छुपके देखता था...और एक बार तो उसे बाथरूम में गाढ़ा पीला सा वीर्य भी दिखा था जिसे बाद में उसकी माँ ने ये कह कर उससे छुपाया कि शायद इजी का पाउच फर्श पे गिर गया होगा...पर बेटे की आँखो से कुछ ना छुपा और वो भी धीरे धीरे हेमा से क्लोज़ हो गया

आदम को कोई ऐतराज़ नही था कि उसकी माँ कैसी औरत के साथ उठती बैठती है या इधर उधर जाती है? उसे पूरा विश्वास था हेमा आंटी पे और अपनी माँ पे....कहीं ना कहीं ये सच भी था...

हेमा : उफ्फ अब बता क्या बात है? तेरा बेटा कैसा है? (हेमा ने अपने चेहरे को तौलिए से पोंछते हुए कहा)

अंजुम : क्या बताऊ? कितने महीने हो गये उसे गये हुए? आजकल कॉल भी नही करता (अंजुम उदास अपना दुख बाँट रही थी हेमा सुनते हुए अपने ब्लाउस के बटन लगा रही थी)

हेमा : ह्म्म्मथ बात तो है तुझे भूल गया है हाहाहा बीयर पिएगी

अंजुम : तू क्या सीरीयस नही है? और मुझे पीने को कह रही है मैं नही पीती तू ही पी (गुस्से भरे स्वर में)

हेमा : अर्रे तू तो गुस्सा हो गयी? चिल यार हाहाहा उसके लिए दुखी ना हो साला ठर्की हो गया था इसलिए अपनी प्यास भुजाने गया इस बात पे तो तू मुझपे भी नाराज़ नही हो सकती

अंजुम ने सर झुका लिया....उसे सच में इस बात का अहसास था

अंजुम : फिर भी बेटा है ना वो मेरा वैसे मुझे उस जगह से कोई दिक्कत नही है पर मुझे डर है कि कहीं अकेले में वो लड़कियो को घर में लेके ना आ जाए वहाँ की लड़किया पैसा एन्ठेन्गी और बीमारी दे जाएँगी कहीं कोठे पे ना जाने लगे नशा ना करने लगे

हेमा : काहे को तू इतनी फिकर कर रही है हेमा...ज़िंदगी जीने दे उसे बड़ा हो गया है कब तक अपने पल्लू में बाँध के रखेगी...

अंजुम : फिर भी माँ हूँ ना पति से तो कुछ मिला नही बेटे से आस लगाई थी लेकिन अब वो आस भी चली गयी उसके जाने के बाद मैं उसे कितना मिस कर रही हूँ...हम मा बेटे से ज़्यादा दोस्त जैसे थे....कभी भी रात गये बाज़ार जाने तक नही देता था कहता था माँ अकेले क्यूँ जा रही हो? माँ फोन साथ लेके जाओ? माँ मैं चलूं क्या? पर मैं ही उसकी आदतो की वजह से उसे अकेला घर में छोड़ जाती थी....

हेमा : ह्म उस दिन रंगे हाथो जो उसकी असलियत पकड़ी गयी थी हाहाहा कैसे पाजामे में अपनी छोटी सी नुन्नि को छुपाए उपर आ रहा था....और तूने उसके उभार को नोटीस कर लिया और मैने झट से जब उसका पाजामे का एलास्टिक पकड़ा..तो पाजामे पे हाथ रखते ही हाथ पे गीला गीला वीर्य लग गया था उसका
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Yesterday, 12:52 PM,
#6
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
अंजुम : ह्म्म्मथ और मैने पाजामा खोल कर जब उसके लिंग को देखा उसने पूरा पाजामा गंदा कर दिया था और पूछने पे भोलेपन से कहने लगा मम्मी पता नही अपने आप हो जाता है

हेमा : हां वो भी क्या जाने? की वो किससे छुपा रहा है उस वक़्त तो नादान था बढ़ती उमर थी पर अब तो जवान हो गया है वो और ब्याह लायक भी

अंजुम : हेमा प्ल्ज़्ज़ शादी की बात मत कर.....कहीं ये कसर भी वो पूरी ना कर ले

हेमा : पर मेरा जहाँ तक दिल कहता है वो ऐसा कदम नही उठाएगा अभी नया नया जवानी का ज़ोर चढ़ा है जब ठंडा पड़ेगा तब अपने आप उसे उकताहट होने लगेगी

अंजुम : हां मैं भी यही उम्मीद करती हूँ उससे चाहे जैसा भी रहे ज़िद्दी रहे पर वो कभी ग़लत कदम नही उठाएगा

हेमा : ह्म मर्दो की पहचान है मुझे और उसे तो बचपन से देखते आई हूँ इन्ही हाथो से नहलाया है उसे लेकिन सच में अंजुम तेरे बेटे का लिंग काफ़ी मोटा है उस वक़्त वो वैसा था तो ना जाने अभी

अंजुम : छी फालतू की बातें मत सोचा कर हेमा तू भी ना

हेमा : अर्रे तू तो चिड गयी...वैसे तुझे पता है आज कल के लड़के लड़कियों से ज़्यादा औरतो में दिलचस्पी लेते है

अंजुम : क्या बक रही है? कुछ भी

हेमा : अर्रे हां सुन तो ले ये मेरी बेटी की सहेली का भाई है ना वो अपनी माँ की उमर की औरतो के साथ अफेर रखे हुए है

अंजुम : क्या? (अंजुम जानती थी उस लड़के को जो उसके बेटे से बड़ा था इसलिए उसका मुँह खुला का खुला रह गया)

हेमा : अर्रे हां आज कल के लड़को का इंटेरेस्ट चाची,भाभी ऐसी बड़ी उमर की महिलाओ में हो गया है

अंजुम : सच में दुनिया खराब हो चुकी है

हेमा : ह्म पर जहाँ तक मैं समझती हूँ माँ का हक़ बच्चो पे ज़्यादा होता है और ख़ासकर बेटों पे बेटियाँ तो कल को अपने घर चली जाती है पर पूरी ज़िंदगी तो माँ को अपने बेटे के संग बितानी पड़ती है और शादी ब्याह करके तो बीवी बेटों को तो अपनी मुट्ठी में कर लेती है....और कभी कभी वक़्त रहते घर से गान्ड पे लात मार के माओ को निकलवा भी देती है

अंजुम : हां ये बात तो है पर क्या कर सकते है?

हेमा : कर सकते है मेरे पास एक आइडिया है जिससे तेरा बेटा वापिस आ सकता है

अंजुम : क्या?

हेमा : देख बुरा मत मानना पर तूने जैसे कहा तेरा बेटा तेरे दुख सुख का साथी था और तुम दोनो के बीच कुछ छुपा नही तूने और उसने कभी एकदुसरे से शरम और लिहाज़ नही किया...माँ बेटे की हर ज़रूरत पूरी करती है उसे कंट्रोल माँ ही रख सकती है क्या तू उसकी हर ख्वाहिश पूरी नही कर सकती

अंजुम : तू कहना क्या चाह रही है? मेरी कुछ समझ नही आ रहा

हेमा : देख मैं कहना चाह रही हूँ कि जो उसकी अभी की ज़रूरत बनी है उसे पूरा करने की कोशिश तो कर सकती है उससे बात करके या उसे समझा भुजाके उसे आकर्षित करके हमबिस्तर तो हो सकती है

अंजुम : छी छी ये क्या वाहियात बात कह रही है तू? अर्रे बेटा है वो मेरा उसे नौ महीने कोख में रखा है मैने और मैं अपने ही बेटे के साथ ये गुनाहगारी है अगर वो मेरे बारे में ये सब सुनेगा तो क्या सोचेगा? और मैं अब तक उसके बाप से उसके पैदाइशी के बाद मिली नही हूँ और अब तो काफ़ी अरसा हो गया

हेमा : मासिक तो अब भी आते है ना तुझे

अंजुम : हां फिर भी नही हेमा मैं तो खुद ये काम नही कर पाउन्गी और तू मेरी दोस्ती का नाजायेज़ फायेदा ना उठा

अंजुम काफ़ी गुस्सा हो गयी उसे बुरा लगा था और अज़ीब सा भी...काफ़ी ना नुकुर के बाद हेमा ने उसका गुस्सा ठंडा कर दिया...कुछ दैर तक दोनो सहेलिया बातें करने लगी...फिर हेमा ने जानभुज्के उसके व्यवाहिक जीवन के बारे में सवाल किये वो जानती थी अंजुम को अपने पति में रत्तीभार का इंटेरेस्ट नही था और उसके साथ शादी महेज़ समझौता थी जो बार बार लड़ाई झगड़े के वक़्त आदम के पिता से मिलती धमकी होती...अब नही तो तब जैसे ये रिश्ता टूट ही जाता...लेकिन बेटे के अलग होने से पिता को मौका मिल सा गया था....हालाँकि आदम ये बात जानता था पर वो कर भी क्या सकता था?
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Yesterday, 12:53 PM,
#7
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
हेमा ने अंजुम को समझाया और उससे सवाल किया कि क्या वो दोस्ती करना चाहेगी? पर अंजुम ने सॉफ इनकार कर दिया क्यूंकी कुछ सालो पहले जो मज़बूरी की आड़ में हेमा ने उससे मदद ली थी उस बीच अंजुम की ज़िंदगी में एक मर्द आया था...लेकिन हेमा की चुदाई के बावजूद उसे अंजुम में इंटेरेस्ट हो गया था उनकी पहली मुलाक़ात में....हालाँकि अंजुम उस मर्द के करीब भी आ गयी काफ़ी....हल्की चुम्मा चाटी और एकदुसरे से मुहब्बत तक हो गयी थी पर अपने बेटे आदम के चलते और उस मर्द के इंटेन्षन को भाँपते ही अंजुम ने दूरिया बना ली थी....क्यूंकी वो आदम के साथ साथ अंजुम को भगा ले जाना चाह रहा था...जिसके लिए अंजुम बिल्कुल भी तय्यार नही थी उसे ये गवारा ना था....जैसा भी हो उसके पति और बेटे के साथ वो सुकून महसूस करती थी....खैर वो तो कहानी तो पुरानी थी

पर अंजुम ने हेमा के ज़ोर देने पे भी इनकार कर दिया....अंजुम वहाँ से निकल गयी....पूरे रास्ते उसके ज़हन में अज़ीब से आदम को लेके ख़यालात आ रहे थे और हेमा की ख्वाहिश पूरी करने वाली बात....अगर हेमा की बात मानके वो अपने बेटे की शहवत (सेक्स) पूरी कर दे तो बेटा उससे...."छी छी".....अंजुम ने बड़बड़ाया ये वो क्या सोच रही थी? ऐसा कभी हो सकता है? दूसरो की माँ बहन के साथ तो रिश्ता लड़के बना ही लेते है पर अपनी सग़ी माँ के साथ नही...अंजुम को ये बात गवारा ना हुई और वो घर पहुचि...आज भी आदम के पिता से उसकी काफ़ी झडप हो गयी थी....

उधर शाम 7 बजते बजते आदम चंपा के घर पे दस्तक देता है छोटी सी गली थी जहाँ आस पास के बिल्डिंग के पाइप से पानी चुह रहा था वो शहर की सबसे बदनाम गली लालपाड़ा में खड़ा था....इतने में अंदर से आवाज़ आई अंदर आ जाओ

अंदर चहेल पहेल थी बिस्तर पे दो औरतें एकदुसरे से बात कर रही थी अधेड़ उमर की औरतें थी जिनके पहनावे और बातों के लहज़े से ही उनकी रंडीपना की झलक सी महसूस हो रही थी....उन्होने तिरछी निगाहो से आदम की ओर देखा "की रे? तोर नोतू माल एशेगेचे (क्या रे तेरा नया माल आ गया?).....औरतो की बात सुन आदम शरमा सा गया

"अर्रे आओ आओ उधर क्यूँ खड़े हो?"....एक औरत ने कहा

आदम थोड़ा अंदर आया....तब तक चंपा बाहर आई उफ्फ कहेर ढा रही थी लाल पाड़ा वाली साड़ी में....और उपर से भर माँग सिंदूर जो उसका शौक था....होंठ सुर्ख लाल गोल गहरी नाभि दिख रही थी...खुले गले का ब्लाउस जिसके बीच के कटाव सॉफ झलक रहे थे...अंदर ब्रा पहनी हुई थी वरना आम तौर पे आदम को उसके निपल्स दिख ही जाते है.....उसने आदम को देखके आँख मारी

चंपा : अर्रे आओ ना शरमा क्यूँ रहे हो?

आदम : नही नही लगता है अभी तुम बिज़ी हो?

चंपा : अर्रे ना ना काकी आप लोग जाइए कल मिलते है

"अच्छा चंपा भालो ताकीश (अच्छे से रहना)"...दोनो उठते हुए लगभग आदम के बगल से गुज़रती हुई उसे तिरछी निगाहो से देखके मुस्कुराए बाहर चली गयी

"दरवाजा ठीक से बंद कर लेना...वरना कोई और आ जाएगा डिस्टर्ब करने हाहाहा".....बोलते हुए वो लोग वहाँ से निकल गयी

आदम : ये लोग कौन है?

चंपा : मानती है मुझे बहुत पास में रहती है

आदम : धंधा करती है

चंपा : लालपाडा में कौन सी औरत धंधा नही करती अच्छा वो सब छोड़ो बाबू ये बताओ इतने दिनो से आए क्यूँ नही? (चंपा ने दरवाजे की कुण्डी लगा दी)

आदम : बस ऐसे ही मन नही था आने को

चंपा : हमसे मन भर गया इतनी जल्दी

आदम : अर्रे नही नही ऐसा कुछ नही है तू तो मेरी अच्छी दोस्त है

चंपा : एक आप ही तो हो जो हमसे इस लहज़े में बात करता है वरना और तो बस साहेबज़ादे पैसे देते है और बेज़्ज़त करते है

आदम : ह्म (आदम ने कुछ बोला नही और बोलता भी क्या?)

आदम ने चंपा को किचन में जाने से रोका "सुन चाइ मत बना ये ले"....आदम ने पहले ही पैसे पकड़ा दिए....चंपा मुस्कुराइ....उसने आदम के चेहरे पे हल्की सी चपत लगाई....

आदम : सॉफ तो कर रखी है ना खुद को

चंपा : दिन में दो बार नहाती हूँ मैं आपने क्या सोचा कि मैं वो रेग्युलर कस्टमर को देने वालीयो में से हूँ

आदम : फिर भी गंदा नही रखने का

चंपा : पर्मनेंट कस्टमर हो तुम तुम्हारे लिए तो हमेशा सॉफ रखती हूँ पर वहाँ के बाल नही काटे ब्यूटी पार्लर वाली गाओं गयी हुई है ना तो (चंपा ने आगे बढ़ कर आदम के बालो से लेके चेहरे पर अपनी उंगली फिराई आदम ने झट से उसकी उंगली पकड़ ली)

चंपा से भीनी भीनी रजनीगंधा की खुसबु आ रही थी....आदम ने उसे झट से अपने करीब खेंचा वो आदम की दाई जाँघ पे बैठ गयी...आदम उसे कमर से पकड़ा हुआ बीच बीच में उसके पेट को सहला रहा था....आदम ने उसके पल्लू को हटाया तो चंपा ने अपना पल्लू अपनी साड़ी से अलग करते हुए बैठे बैठे ही आदम की गोद में उतार लिया..और उसे बिस्तर पे फ़ैक् दिया...."क्या रे ये काला धागा?".....कहते हुए आदम ने उस काले धागे पे लगी ताबीज़ पे हाथ फिराया जो उसके कमर से लेके पेट पे बँधी थी उसने कस कर नाभि को पिंच किया...तो चंपा सिसक उठी और उसने आदम के सर को अपने ब्लाउस पहने छातियो से रगड़ दिया...

माहौल गरम होने लगा था और बिस्तर भी...
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#8
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
चंपा : अब का करे? हमको ना बड़े जल्दी ही नज़र लग जाती है....इसलिए हमारी एक काकी ने हमको ये पहना दिया (चंपा ने अपने ताबीज़ पे उंगली रखते हुए कहा)

आदम : ह्म अब इतनी हसीन खूबसूरत हो तो नज़र तो लगनी ही है

चंपा : हम तो सबको हसीन खूबसूरत ही लगते है

आदम ने चंपा के नाभि को फिर पिंच किया जिससे चंपा के स्वर में आहह फुट पड़ी और उसने अपने निचले होंठ को कस के दाँतों से भींच लिया..."इस्शह".....चंपा ने सिसकते हुए कहा...आदम ने चेहरे को नीचे ले जाते हुए आख़िर पेट पे अपने चुंबन की मोहर मार दी....चंपा का पेट काँप रहा था....आदम ने मुस्कुराते हुए नाभि में जीब डाल दी और कुरेदने लगा....चंपा के हाथ आदम की पीठ पे अपने नाख़ून गढ़ा रहे थे.....

आदम का लंड पॅंट और चड्डी में कसा फहुंकार मार रहा था....जैसे आज़ाद होना चाहा रहा है....लंड का सिग्नल दिमाग़ को मिला...और आदम को महसूस होते ही उसने अपनी बाहों में चंपा को नीचे से उठा लिया.....आदम खड़ा था और अब उसकी गोद में चंपा का पूरा बदन था..

उसने हल्के से चंपा को लिटाया और उसके ब्लाउस उतार फैका....फिर उसकी सफेद ब्रा भी...चंपा ने हल्के से अपने बाल को झटकते हुए उसे खोल दिया...चंपा लेटे लेटे आदम को अपनी शर्ट और बनियान उतारते देख रही थी....जीन्स की ज़िप पे हाथ पहुचते ही चंपा ने अपने होंठो पे ज़ुबान फैरनी शुरू कर दी...जैसे लंड को देखने के लिए कितनी उत्साहित हो...

आदम ने अपनी जीन्स और कछि को भी एक झटके में टाँगों से अलग कर दिया....और जब चंपा के चेहरे के करीब आया...तो चंपा को सॉफ दिखा उसका झूलता सांवला लंड एकदम कड़क और गरम होके खड़ा हुआ था....चंपा ने उसे हाथो में लेके मसलना शुरू कर दिया...मुत्ठियाते हुए वो आदम की आँखो में झाँकने लगी

आदम ने तब तक चंपा के पेटिकोट को नाडा खोल दिया और उसे एक हाथ से ही उतारने का प्रयास किया...पर चंपा ने बाए हाथ में ही लिंग को मुठियाते हुए उठकर अपनी पेटिकोट और पैंटी को एक झटके में अपनी टाँगों तक सरका दिया....बाकी का काम आदम ने खुद कर दिया....अब बिस्तर के नीचे चंपा के सारे कपड़े पड़े हुए थे और बिस्तर के उपर चंपा मदरजात नंगी आदम से चिपकी लेटी हुई थी

अब आदम ने चिकनी जांघों उपर हाथ फेरते हुए टाँगों के बीच हाथ लाया तो उसे आधी उंगली बराबर चंपा की झान्टे दिखी...उसके रोयेदार झान्टो पे हाथ फेरते हुए उसने चूत को खोजा और फिर दोनो हाथो से चूत को फैलाया छेद के चारो तरफ का गुलाबी माँस दिखने लगा था

चूत पूरी गुलाबी गीली और हल्के हल्के उगती झान्टो से धकि हुई थी.....आदम कभी भी चूत पे मुँह नही लगाता था खासकरके चंपा की...क्यूंकी चंपा कयिओ से चुदवाति होगी..तो इस वजह से आदम को बीमारी का डर लगता था...आदम ने वैसे ही चूत की मुंहाने में हाथ फेरते हुए उंगली करनी शुरू कर दी....चंपा टाँगों को इधर उधर पटाकने लगी उसकी दोनो पाओ में बँधी पायल पैर पटाकने से छान्न छान्न की मधुर आवाज़ निकाल रही थी

आदम उंगली करता रहा और अपना लंड लगभग चंपा के मुँह के करीब रखा हुआ था...जिसे चंपा मुत्ठियाते हुए इस बार मुँह में लेके चूसने लगी...उसे तो कोई झिझक नही थी....चुदाई के दौरान वो एकदम खुल जाती थी...हालाँकि इस बार भी उसे लगा कि शायद आदम उसके वहाँ मुँह दे...पर आदम ने वैसा नही किया....आदम बस उंगली करता रहा....चंपा के पाँव काँपने लगे और आदम ने उंगली तेज़ कर दी

चंपा : ओह आहह आहह हो स्स्स्सिईईईईईईई आहह (चंपा के ज़्यादा हिलने से आदम उंगली भीतर तक घुसाने पे मज़बूर हो जाता क्यूंकी बार बार उंगली चूत से बाहर निकल जाती)

अंगूठा चूत में प्रवेश करते ही उंगली के साथ...चंपा का बदन शिथिल पड़ गया और एक ज़ोर की कपकपाहट के साथ चंपा चीख उठी उसकी चूत से रस बहने लगा था...आदम ने चेहरा थोड़ा चूत के करीब लाया और उसे सूँघा चूत से अज़ीब सी महेक आ रही थी....इससे उसका लंड और भी कड़क हो गया...और चंपा के गरम मुँह मे अपना प्री कम छोड़ने लगा..

चंपा उसे चट कर गयी और उसने लंड को मुँह से बाहर खींचा....."आओ राजा अब कराती हूँ जन्नत की सैर तुम्हें".....चंपा एकदम से उठ बैठी और तब तक आदम को धकेलते हुए उसने उसे लेटा दिया....अब आदम लेट चुका था....चंपा ने लिंग को तभी मुत्ठियाते हुए अपनी दोनो चुचियो पे सुपाडे को रगड़ने लगी....आदम मोन करने लगा....

आँखे मुन्दे ही रहा फिर चंपा ने चुदाई की शुरुआत की....और और उसने अपनी दोनो टाँगें आदम की कमर के दोनो तरफ इर्द गिर्द फैला लिए...फिर टट्टी करने की मुद्रा में वो लंड को पकड़के उसे अपनी चूत पे टीकाने लगी....धीरे धीरे लिंग किसी जलती भट्टी में घुसने लगा और चंपा ने पूरा लंड अपने अंदर समा लिया.....छेद थोड़ा कसा हुया था शायद गान्ड को टाइट कर रखा था चंपा ने...

"हाए रे चंपा सस्स निकल जाएगा अब तो बस अब शुरू कर"........आदम ने लेटे लेटे ही जवाब दिया

"अभी कहाँ सरकार अभी तो राउंड शुरू हुआ है...जन्नत में प्रवेश हुआ है कम से कम हमे तो सुख लेने दीजिए चूत में लिंग घुसाके उसी पल पानी छोड़ देना चुदाई नही असंतुष्टि कहलाती है".......आदम उसकी बातों से और भी ज़्यादा तराकी हो रहा था

चंपा अब धीरे धीरे लिंग को अंदर बाहर ले रही थी...अब धीरे धीरे उसकी गति बढ़ने लगी और वो लगभग आदम की जांघों के उपर जैसे कूद रही थी...लिंग सतसट अंदर बाहर हो रहा था...चूत बुरी तरीके से गीली हो चुकी थी आदम को चंपा की चूत का गरम रस छूटता महसूस हो रहा था...पर चंपा रुक नही रही थी उसकी आँखे एकदम लाल थी....और वो अपने लाल लाल होंठो को काट रही थी
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#9
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
"आअहह चंपाआ और ज़ोरर से आहह और ज़ोरर्र से ससस्स"......."जी सरकार बस लेने तो दीजिए मज़ा आहह"...अबकी बार चंपा लिंग को चूत में दबाते हुए अंडकोषो पे अपनी गान्ड बैठी बैठी ही रगड़ने लगी इस मुद्रा को अगर आप लोग देख लेते तो कसम से पानी छोड़ देते....

आदम अपने मन में बुदबुदा रहा था "कंट्रोल कंट्रोल बेटा कॉंटरोल्ल सस्स".........आदम को सिसकता मज़े लेता आँखे मूंदता देखके चंपा फिरसे लंड पे कूदने लगी....

"आहह हाहह आहह आअहह".......चंपा ज़ोर ज़ोर से चीख रही थी....आदम ने क़ास्सके उसके मुँह पे हाथ रख दिया...बेज़्ज़ती सा महसूस ना हो इसलिए

चंपा हँसने लगी और वो आदम के गले लग गयी...उसके बाल आदम के चेहरे पे थे जिन्हें समेटते हुए आदम ने उसके कान और गाल को चूमा..चंपा फिर चूत में लिंग लिए आदम के उपर लेटे लेटे दुबारा उसके अंडकोषो पे अपनी गान्ड घिसने लगी...आदम ने कस कर उसकी पीठ को थाम लिया और नाख़ून गढ़ाने लगा...अब चंपा भी आदम की गर्दन और चेहरे पे चुम्मा करने लगी..

"आअहह ओह्ह्ह्ह मयी बाबयययी ससस्स एम्म्म"........आदम के चेहरे को पकड़के उसने उसके होंठो को मुँह में ले लिया....चंपा ज़ोर ज़ोर से आदम को किस करने लगी...दोनो होंठो को चूस्ते हुए अपनी जीब वो आदम के मुँह में दे रही थी..

बिस्तर पुराना था इसलिए दोनो के ज़्यादा हिलने से आवाज़ कर रहा था....चंपा ने देखा कि आदम बड़बड़ा रहा है....चंपा ने हालात को देखते हुए लंड को खींचते हुए उसे बाहर निकाल लिया और आदम के उपर से उठ बैठी...फिर उसने लंड को ज़ोर ज़ोर से मुठियाना शुरू कर दिया......"आहह हाहह आहह आहह आहह"......."हां बाबू हान्न्न आहह हां बाबू"......लंड को ज़ोर से मसल्ते हुए चंपा आदम को उत्साहित कर रही थी जो लेटे लेटे सिसकिया भर रहा था

आदम : आहह हो माआ आहह (चंपा को कुछ अज़ीब लगा माँ नाम सुनके उसे लगा शायद आदम के लिंग में ज़ोरो से दर्द हो रहा होगा...पर आनंद के इस चरम अहसास पे माँ माँ बार बार कहना जैसे चंपा की हथेली मे नही बल्कि माँ के हाथ में वो मुठिया रहा हो....जिस औरत ने मज़ा मिलता है उसी का नाम ज़ुबान पे आता है जिस औरत को याद करते हुए मर्द झड़ता है...ज़बान पे बस उसी का नाम आता है)

चंपा ने फिर तीव्र गति से आदम को और उत्साहित किया....पर आदम ने उसका हाथ पकड़ लिया...चंपा समझ ना पाई...."रोक क्यूँ दिया बाबू तुम्हारा निकल जाता"........आदम ने मुट्ठी में लिंग को अपने कस के थामा और चंपा के हाथ को हटा दिया...कुछ देर में उसने अपने उपर नियनतरण पा लिया था

आदम : तेरी गान्ड भी मारूँगा

चंपा : सस्सह ओह्ह्ह हो तभी चूत मारके चंपा का दिल नही भरता वैसे आप भी हमारे बाकी चाहनेवालो की तरह शौकीन हो गये है

आदम : मज़े दे तो पूरा दे और मैं तो तेरा दोस्त हूँ सो प्ल्ज़्ज़

चंपा : गर्लफ्रेंड नही हूँ जो रिक्वेस्ट कर रहे हो रंडी हूँ और आज की शाम तुम्हारी रंडी जैसे बोलॉगे वैसे चुदवाउन्गि किस पोस्चर में चोदोगे घोड़ी बनके या कुतिया

आदम : जैसा तू बन

चंपा : ह्म घोड़ी बनू चाहे कुतिया चोदोगे तो गान्ड ही ना....तो ठीक है हमारी बात मानना चाहते हो तो कुतिया ही की मुद्रा में हमे चोदो वो क्या है ना? घोड़ी या गाय बनने में खड़ा होके झुकना पड़ता है और टाँगें दुख जाती है मोड़ने से दर्द हो गया है..

आदम : तो ठीक है चल कुतिया बन

चंपा ने थूक अपने हाथ में लिया और उसे अपनी गान्ड में मलने लगी....आदम ने चंपा के कुतिया बनते ही उसकी दोनो टाँग सही से मोडी और उसकी हथेलियो को भी सही से सीधा कर दिया....अब चंपा कुतिया बन चुकी थी

चंपा की गोरी गोरी नितंबो पे थप्पड़ मारते हुए उसकी गोल गान्ड को कस कस्के दबोचने लगा मैं...फिर उसकेर गान्ड की फांकों में छेद पे अंगुल करना शुरू किया छेद सिकुड़के बंद कर लेती तो कभी खोल लेती...पास में नारियल तेल पड़ा था उसकी कुछ बूँदें आदम ने छेद के मुंहाने पे डाल दिया और छेद को और गान्ड को चिकना कर दिया...चंपा का छेद कुलबुलाने लगा

आदम जैसे चंपा के उपर खड़ा था फिर उसने धीरे धीरे लंड को पकड़े ही छेद में रगड़ना शुरू कर दिया...घपप से लंड छेद के भीतर डालने की नाकाम कोशिश करने लगा...."ससस्स आहह आहह दर्द हो रहा है ओह्ह्ह्ह".........एक बार चंपा चीखी पर उसने दर्द बर्दाश्त कर लिया

चंपा : बाप रे बहुत मोटा है आपका दर्द हो रहा है

आदम : मतलब इतने दिनो से सिर्फ़ मेरा ही लंड गान्ड में लेती रही तू

चंपा : औरो को घिन आती है तो कोई कर नही पाता और आपका तो हद से ज़्यादा बड़ा है अच्छा है कि पहले से अंगुली और लंड लिए ना दोनो छेदो में वरना आप तो डाल डालके मुरब्बा बना देते

आदम : तब तो तेरी फटी चूत और गान्ड कोई नही पेलता

चंपा : अब बातें बंद और डालो
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#10
RE: Maa Sex Kahani माँ को पाने की हसरत
आदम रुका पड़ा था फिर उसने झट से लंड को छेद के अंदर तक एक साँस में पूरी ताक़त के साथ घुसा दिया....चंपा का पूरा बदन काँप गया....उसने दर्द पी लिया ना जाने कितनी बार बिस्तर पे उसे पटक पटक के रफ चुदाई की थी मर्दो ने इसलिए उसे नये दर्द के अहसास को भी सहने का दम था

आदम धीरे धीरे लिंग अंदर बाहर करने लगा....पर छेद इतना सिकुडा हुआ था कि बार बार चंपा को गान्ड ढीली छोड़ने को कहनी पड़ी थी....फिर आदम ने धक्के तेज़ किए और अब आदम ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा पिछले माह जब वो यहाँ आया था तो उसने चंपा की गान्ड आधी ही मारी थी क्यूंकी चंपा का कोई जानने वाला क्लाइंट आ गया था जिसे चंपा ना ना कर सकी और बीच में ही आदम को उसकी चुदाई रोकनी पड़ी थी

आज आदम ने वो सारी कसर आज निकाल दी और चंपा की गान्ड को चोदने लगा..फ़च फ़च्छ करते हुए गान्ड में लंड फिसलने से आवाज़ें निकल रही थी....बीच बीच में आदम गान्ड से लंड बाहर खींच लेता और छेद को सिकुडत खुलता देख फिर लंड घप्प से अंदर घुसा देता...चंपा हर रगड़ से मस्तिया रही थी....कुछ ही पल में उसे महसूस हुआ कि आदम रुक नही रहा....उसे पेशाब भी उस वक़्त लगने लगी पर उसने आदम को उसकी चुदाई करने दी

आदम ने काफ़ी देर चुदाई के बाद लिंग बाहर खींचा और चंपा को सीधा किया लंड को टीसू पेपर से सॉफ किया और चंपा के मुँह में डाल दिया...."चुउस्स्स चंपा और प्यार से अहांन".....चंपा बड़ी बड़ी निगाहो से आदम को देखते हुए लंड को हलक तक लिए चूस रही थी....कुछ ही देर में आदम ने मुठियाते हुए चंपा का मुँह खुला रखा और अपना गरम गाढ़ा सफेद वीर्य उसके चेहरे और मुँह में छोड़ने लगा....चंपा ने ने आखरी बूँद को भी लंड से चाट के सॉफ कर लिया...और अपने होंठो को हाथो से पोछती हुई आदम की तरफ देखने लगी

दोनो हान्फ्ते हुए बिस्तर पे ढेर हो गये...."उफ़फ्फ़ बड़ी गर्मी है यार".....आदम आँखे मुन्दे अपना पसीना पोंछते हुए चंपा को देख रहा था जिसका पूरा चेहरा लाल था...वो नाक सिकुड़ते हुए बाथरूम में चली गयी....एक कमरा था इसलिए बाथरूम अटॅच था....अंदर चंपा मूत रही थी जिसकी आवाज़ आदम के कानो तक आ रही थी...आदम अपने लिंग को टिश्यू पेपर से सॉफ करने लगा...

अब उसके दिलो दिमाग़ से थरक उठ चुका था..."ह्म देखा बाबू ये होता है मज़ा".....चंपा आदम के बगल में आके लेट गयी और अपने और आदम के उपर चादर ढक दिया....

."ह्म सो तो है"......आदम ने चंपा की चुचियो को हाथो में लेके मसल दिया....

चंपा : लगता है कुछ करना भूल गये?

आदम : चुचियाँ चुस्स नही पाया हाहहा

चंपा : तो लो अभी लो ये किस मर्ज़ की दवा है

चंपा ने आगे बढ़के अपने दोनो स्तन आदम के चेहरे पे लगभग दबा दिए....आदम दोनो चुचियो को बारी बारी से चूसने लगा एक का निपल चुस्के फिर दूसरे का निपल मुँह में भर लेता....दोनो चुचियो को हाथो से मसल्ते हुए चूसने के बाद आदम ने चंपा को अपने अलग कर दिया

चंपा : आजकल देख रही हूँ थरक की आग बहुत जल्दी लगती है और बुझती है आज मुठियाते वक़्त आपने अपनी माँ का नाम लिया?

आदम : उहह हान्ं वो ग़लती से

चंपा : जिसके साथ बिस्तर गरम करने में मज़ा आए उसका नाम तो ज़ुबान पे आ ही जाता है चाहे वो बहन हो या माँ

आदम ने कस्स्के चंपा का गला दबोच लिया "साली दोस्ती का फ़ायदा उठाती है क्या बक रही है तू"....आदम का स्वर बदला वो बुरी तरह शर्मिंदा हो गया था

चंपा : अर्रे आप तो नाराज़ हो गये ? (चंपा ने आदम के सख़्त हाथो को नर्मी से छुड़ाते हुए खींचा)

आदम ने गला छोड़ा.."आइ आम सॉरी पर ऐसी बात क्यूँ करती है?"........आदम ने झिझकते हुए कहा

चंपा : हो सकता है मेरी सुनने की भूल पर मैं जानती हूँ आप कही ना कही अपनी माँ से बहुत प्यार करते है

आदम : ये तो है पर इससे इन सब का क्या ताल्लुक ?

चंपा : नाम तो मेरा भी ले सकते थे क्यूंकी सबसे ज़्यादा मज़ा मैं ही आपको देती हूँ और यक़ीनन शायद मैं इकलौती औरत हूँ जो आपकी ज़िंदगी में है जिससे सहवात पूरी करने आप यहाँ आते हो क्यूंकी ना आपको मुझे पटाना पड़ता है ना शादी ब्याह का वादा करना जो और लड़कियो के लिए लड़के करके उनकी तब लेते है कोई शादी से पहले तो कोई शादी के बाद

आदम : तू सच कह रही है ना जाने क्यूँ? पर ये ग़लत है यार वो माँ है छी ये सब

चंपा : हम समझते है पर ये जिन्सी आदतें थोड़ी एक बार ज़ुबान पे जिसकी लज़्ज़त लग जाए तो बस उसी के नाम की मुठियाते है ज़रूरी नही की लोग हीरोइनो की नाम की या किसी जानने वाली की जो उन्हें अज़ीज़ लगे मूठ मारे....नाम और रिश्ता कोई सा भी हो सकता है

आदम : लेकिन चंपा देख मैं अपनी माँ को ऐसी नज़रों से नही देखता और उनको अगर मालूम पड़ा कि मैं यहाँ आता हूँ तो हमारा माँ बेटे का रिश्ता भी ना बचेगा

चंपा : ह्म (सिगरेट जलके चंपा ने दो कश लिए और एक कश आदम को लगाने दिया)

आदम : स्मोकिंग किल्स

चंपा : शाना साला (आदम हँसने लगा चंपा की बात को सुन चंपा उसके साथ नंगी चादर उसके और अपनी छातियो तक रखके सिगरेट का कश लेते हुए धुआ छोड़ रही थी)

अचानक आदम को खाँसी उठ गयी चंपा को लगा शायद धुआ बर्दाश्त नही हुआ होगा पर अचानक आदम कलेजा पकड़ के बैठ गया वो ज़ोरो की आहह भरने लगा
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