mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
03-21-2019, 11:55 AM,
#1
mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
इस फोरम के सभी भाइयो को मेरा नमस्कार मैं अभय आपके सामने मेरी सबसे प्रिय कहानी लेकर हाजिर हु जो आपको प्यार के समुन्दर में डुबो देगी......


यह कहानी मेरे दिल के बहुत करीब है इसके अपडेट थोड़ा स्लो मिलेंगे तो अगर आपको पसंद आये तो प्लीज आपने जबाब अवश्य बताये........

यह कहानी एक सच्ची प्रेम कहानी है । सभी मिलकर इसका लाभ उठाएं ।
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03-21-2019, 11:55 AM,
#2
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
खुशियां ही खुशियां एक खिला सा परिवार हमारा.....
दोस्त की तरह मेरे पिता और मेरी हिटलर माँ सासन पसंद,
माँ के बाद मेरी दूसरी माँ मेरी बहन ( सिमरन )ओर प्यारी सी छोटी बहन ( दिया ) जिसकी चुलबुली शरारतें यूँ तो बहुत परेशान करती है पर हल्की सी मुस्कान छोड़ जाती ।



और अंत मे मैं ( राहुल ) एक नादान अल्हड़ सा जिसकी दुनियां काफी सीमित,बाहरवी की इम्तिहान खत्म हुए अभी 10दिन ही हुए थे और में बिल्कुल अपने घर मे आसन जमाया, न कही आना न कही जाना।



जिंदिगी में कोई ऐसा नही जिसके लिए खुद को तैयार कर , आईना देख दिल को सुकून ओर न हि कोई दिलमें ख्याल।
कुछ दोस्त ने होते तो शायद मुझे इस दुनिया के बारे में पता चलता । मेरी ज़िंदगी एक परफेक्ट ट्रैक पर चल रही... जिसमे केवल मेरा परिवार और मेरे दोस्त।




छुट्टियों के दिन चल रहे थे और मैं आलसी रोज की तरह सो रहा था..... अचानक ही दी ने मुझे नीचे हॉल से आवज दी....

बेटू..बेटू... । घर पर मुझे सब प्यार से बेटू ही बुलाते है...


में...(ऊपर से ही चिल्लाते हुए) क्या है दी सोने दो न प्लीज

दीदी.... नीचे आ कुछ बात करनी है फिर चले जाना सोने... वैसे भी तू इतना सौएग तो तेरा पेट बाहर आ जायेगा...

में ... अभी आया ये दी भी न आज लगता है सोने भी नही देंगी...

गर्मियो के दिन था में केवल शार्ट में लेता हुआ था , इस तरह अचानक बुलाये जाने पर में उसी अवस्था मे चला गया ।

मैं... क्या है दी ऐसी भी क्या जरूरत आ गई ।

दीदी... पागल जा पहले फ्रेश होकर कपड़े पहन कर आ 

मैं... उफ्फ में ना जाऊंगा ओर मुझे जितने कपड़े पहने होने चाहिए में पहने हु ओर कोन सा यहाँ पार्टी चल रही है।

दीदी..... बड़ा ज़िद्दी है किरण अपनी दी कि तो कुछ सुनता है नही।

मैं... बन्द केओ दी ये इमोशनल अत्याचार, ओर तुम बताओ किरण की अपने घर मे ऐसे रहने में कोई परेशानी है।




किरण, दीदी की उन खास दोस्तो में से है जिनका आना जाना हमारे घर लगा रहता है इसीलिए मैं भी जनता था ।

किरण.... राहुल awesome look है बस थोड़ा पानी मार लो फेस पर , बाल सवार ओर बहार चला जा लड़कियों की लाइन लग जायेगी।

में इन सब मामलो में थोड़ा कच्चा था अभी अभी जवानी की दहलीज पर खड़ा हुआ 18साल का बच्चा... थोड़ा शर्मा गया ओर नीचे सिर करके ,... 'क्या किरण मुझे तो कोई देखती ही नही'

किरण... पागल तू बद्दू है , जब कोई देखे गी जो पसंद आएगी तो तू समझ जाएगा कि कोई तुझे देखती हैं कि नही। इतनी मस्त पर्सनालिटी है तेरी साढ़े छह फीट की हाइट।एक काम कर तू मेरे साथ मेरा बॉयफ्रैंड बन कर कभी डिस्को में चल कर ... तेरे जैसे क्यूट पर पर्सनालिटी वाला बॉयफ्रेंड देख कर न जाने कितनी लड़कियां आह भर मर जाए।

दी... चुप कर किरण बिगड़ मत मेरे भाई को , तुझे कुछ काम था या ऐसे ही टाइम पास करने आई है ।

किरण.. हाँ राहुल सुन में अगले महीने पुलिस अकादेमी में फिजिकल टेस्ट के लिए जा रही हूं लेकिन मुझे लांग जम्प ओर 800 मी रनिंग में थोड़ी दिक्कत आ रही है तो क्या तुम मुझे हेल्प करोगे ?

में...जी बिल्कुल कब से सुरु करना है।

किरण ... कल से ही करते है।

मैं... ठीक है कल सुबह 5 बजे मैदान में मिलना।

किरण ..ठीक है राहुल कल सुबह 5 बजे।




इसके बाद वो दोनों बात करते रहे मैं बहार घूमने चला गया ।अगली सुबह 4 बजे रोज की तरह उठ गया ओर में मेरे दोस्त ऋषभ, मेरा क्लास 1से अबतक का साथी दोनो यही रूटीन फॉलो करते थे ।

मैदान गया वहाँ मेरा दोस्त ऋषभ वही मौजूद था । हुम् दोनो ने रनिंग की और कुछ एक्सरसाइज करने लगे तबतक किरण भी वहाँ आ चुकी थी

दोनो ने गुड मॉर्निंग विश किया फिर मैं ऋषभ से विदा लेकर किरण को प्रैक्टिस करवाने लगा।

प्रैक्टिस खत्म करते करते 8 बज चुके थे तो मैं किरण से विदा लेलर घर जाने लगा कि किरण जिद्द करने पर उसके घर चाय नाश्ता करने और उसकी फैमिली से मिलने चला गया। जब मैं किरण के घर के गेट पर पहुंचा तभी दी का फ़ोन आया।





मैं ... हा दीदी।

सिमरन...हो गई प्रैक्टिस।

मैं.... जी दीदी।

सिमरन.... घर आजा देर क्यों कर रहा है।

फिर मैंने पूरी बात बता दी कि किरण के घर से नाश्ता करने के बाद ही आऊंगा। मैंने फ़ोन कट किया ही था और जैसे ही मुड़ा की मैं सन्न रहह गया।


सामने एक खूबसूरत लड़की कमसिन 5.6 की लंबी पर्सनालिटी, चेहरे में एक खिंचाव ,एक आकर्षण एक ललक मेरी नजर उस ओर से हट है नहीं रही थी। चेहरे का तेज ऐसा की मन मोह ले, चेहरे के ऊपर लटकते काले घुंगराले बाल, कान में बड़ी बड़ी बलिया। मैं ऐसा रूप - यौवन पहले कभी नही देखा था । मेरे लिए तो यह पल जैसे थम चुका था और मैं अपनी रूप की देवी को वैसे ही शांत खड़ा निहारता रहा । तभी मेरे कान मैं आवाज सुनाई दी ....



मैं उसे देखने में इतना खो गया था कि पता नहीं कितनी बार आवाज दी हो , जब ध्यन टूटा तो पता चला किरण मुझे आवाज दे रही है मैं कुछ पल के लिए हड़बड़ाया फिर सम्भलते हुए...क्या है किरण
किरण.... हस्ते हुए क्या हुआ कहाँ खो गए थे।

मैं.... मुझे थोडी असहजता के साथ, कुछ नहीं किरण मैं घर की आउटलुक देख रहा था।

किरण ... हंसते हुए आउटलुक हो गया हो तो अन्दर चले।




मैं चल दिया किरण के साथ, किरण आगे चल रही थी मैं पीछे पीछे चल रहा था पर मेरा ध्यान तो उसी खूबसूरत पर अटक गया था। किरण के घर अन्दर आया तो पूरी फैमिली डिंनिंग टेबल पर जमा थी । एक -एक करके किरण ने मुझे सबसे मिलवाया।


वँहा सबसे नमस्कार और hii hello हो रहा था तभी वो लड़की जिसे देख कर मेरे दिल मे तार बज चुका था।हवाओ में अजीब सी धुन बजने लगी थी और आंखों में बस उसी की सूरत वो भी पहुंच चुकी थी , किरण ने मुझे इंट्रोड्यूस करवाया....

किरण इस से मिलो यह मेरी कजिन रूही है अभी 12थ मैं आ गई है ।



मैं..... हेलो रूही।
रूही...... गुस्से भारी नजरों से घूरते हुए "hii"





उसके बाद सब नास्ता करने लगे पर रह - रह कर बार - बार नजर उसपर ही जा रही थी। इस बात का एहसास उसे भी हो गया था इसलिए वो बहुत गुस्से में जल्दी से खा रही थी और इस मुख्य दर्शक थी किरण जो हम दोनों को देख कर मुस्कुराते हुए खा रही थी।


खैर नास्ता कर मैं बारे मयुष मन से वहाँ से जाने लगा दिल मे बस यही ख्याल लिए.... "आह काश कोई मुझे यहां रोक ले तो मैं सारा दिन यही रुक सकता हूँ " बस इसी ख्याल के साथ अपने आह भरे अरमानो के साथ वहाँ से निकलकर घर पहुंचा घर पहुंच कर मेरा सामना मेरी दी सिमरन से हुआ ।
सिमरन दी मुझे टोकते हुए व्यंग भरे सब्दो मैं.......

"हूँ तो आज कल आप लोगो के घर आउटलुक देखा करते हैं"
मैं दीदी के व्यंग भरे सब्दों को समझ गया और बिना कोई जबाब दिए अपने कमरे मे चला गया ।

अभी सुबह के 9:30 am ही बजे थे और मेरा एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था यह उम्र ही ऐसी होती है जब आपका दिल आपको नकारा बना देता है ।

यहाँ एक पल की मुलाकात के बाद मेरी बेचैनी की कोई सीमा ना थी कि कब उसके एक और झलक मिल जाये।

मैं इन्ही ख़यालों में खोया था तभी दरवाजे पर आहत हुई मुड़ कर देखा तो माँ थी।




माँ..... बेटू..... में ..... जी माँ ।

माँ...... कंहाँ खोया है बेटा।

मैं ....... कुछ नहीं माँ रिजल्ट के बारे मैं सोच रहा था ( झूठ )
माँ...... चल इतना सोचने की जरूरत नहीं है अच्छा ही होगा वैसे तू क्या कर रहा है ....

मैं ......कुछ नहीं माँ फ्री हुन।

माँ ..... मुझे और शिल्पा ( मेरी पड़ोसी माँ की दोस्त ) को मिस रॉय के यहां जाना है।

मैं ...कौन मिस रॉय मां।

माँ ....शिल्पा की फ्रेंड है मिस रॉय .... उसके घर किट्टी पार्टी है ।

वैसे तो मुझे किसी काम में मन नहीं लग रहा था सोचा माँ का ही काम कर दूं ओर मैंने उन्हें ड्राप करने के लिए ओके बोल दिया। मैं जल्दी से तैयार हो कर नीचे चला आया ।

नीचे मेरी लाडली दिया भी तैयार होकर बैठी थी । मैन उसे चिढ़ाने के लिए बोला..... " माँ यह किट्टी पार्टी तुम लेडीज के लिए है वँहा बच्ची का क्या काम "

दिया गुस्से में..... माँ इनसे कह दो अब मैं बच्ची नही और चुपचाप अपना काम करे।

उसकी बातें सुनकर उसे चिढ़ाने के इरादे से.... तू इतना बन सवर के किसकी शादी में जा रही हैं ।

दिया गुस्से से.... माँ देखो ना भैया को।

माँ .... क्यू तांग कर रहा है उसको ।

मैं .... मैं कहाँ तांग कर रहा हूँ मैं तो पूछ रहा हूं कहा जा रही हैं।

माँ .... मुझे छोड़ने के बाद तू इसको मार्केटिंग के लिए ले जाएगा ।

मैं...... नहीं ले जाऊंगा दीदी को बोलो वो चली जाए ।
दिया .... माँ अभी मुझे बताओ कि भैया चल रहे हो या मैं अकेले जाऊं ।

माँ ..... ले जा बेटू तेरी प्यारी बहन है , तेरा कितना ख्याल रखती हैं।

मैं ..... हा मैं जानता हूं लंच बॉक्स मैं खाने में केवल बॉक्स होता हैं लंच यह किचन में ही छोड़ देती हैं।

माँ ...... तू चुप कर और दिया से ..... ये तुझे ले जाएगा चिंता मत कर ।

इन्ही सब बातो के दौरान शिल्पा आंटी भी आ जाती हैं और हम कार मैं रॉय आंटी के घर जाने लगते हैं ।




लेकिन अब जैसे - जैसे शिल्पा ऑन्टी रास्ता बता रही थीं मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था क्योंकि ये पता और किरण के घर का रास्ता एक ही है ।


मैं मन ही मन भगवान से मांग रहा था," हे भगवान ये मिस रॉय वही रॉय फैमिली हो जिस से अभी मैं मिल काट कर आया हूँ " 

और लगता है भगवान ने मेरी सुन ली यह वही घर था जहां से कुछ घंटे पहले में जाना नहीं चाहता था और अब मैं वही खड़ा था। मैं कार से नीचे उतरा तो नीचे रेणुका आंटी ( किरण की माँ ) खड़ी थी मुझे देख तो आश्चर्य से..... "क्या हुआ राहुल कुछ भूल गए क्या " तबि उनकी नजर माँ और शिल्पा आंटी पर गई ।
माँ...... यह मेरा बेटा राहुल है मुझे छोड़ने आया है।

रेणुका आंटी .... देख शिल्पा हुम् एक दूसरे को जानते हैं और हमारे बच्चे एक दूसरे को जानते ह क्या इत्तेफाक है ।
फिर माँ मुझे घर जाने का बोल कर सबके साथ अन्दर चली गई ।

पर यह बईमान मन सोचा एक झलक रही कि देख लू फिर चला जाऊंगा । यही सोचते हुए अंदर जाने लगा कि मुझे गेट पर किरण नजर आई ।

किरण आश्चर्य से..... क्या हुआ राहुल कुछ काम था मुझसे
फिर मैंने सारी बात किरण को बता दी.... किरण..." चलो कोई बात नहीं चाय लोगे "

यू तो में कभी घर में चाय नहीं पीता पर रूही को देखने के चक्कर में मैंने हां कर दी और अंदर हाल में आकर बैठ गया ।
ऊपर सभी लेडीज की किट्टी पार्टी शुरू हो गई थी।

किरण किचन में जाकर चाय बना रही थी और मेरी बेचैन नजर रूही को ढूंढ रही थीं । शायद किरण ऊपर कुछ भूल आयी हो इसलिए भागते हुए ऊपर जाती है ।

अभी मैं कुछ सोच रहा था कि सामने से रूही चाय लेकर आती हुई दिखी । मैं आह भरते हुए सोचा.... काश आह!


वो मुझे चाय देकर चली गयी और मेरी नजर उसके पीछे-पीछे गई । मैं गौर से उसी ओर देखता रहा बिना पलक झपकते हुए । और मैं लगातार उसी ओर देख रहा था कितनी देर तक पता नहीं ।


तभी मेरे फ़ोन की घंटी बजी और मेरा ध्यान भंग हुआ । मैं कॉल देख कर आस्चर्य में पड़ गया....

कहानी जारी रहेगी...........
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03-21-2019, 11:55 AM,
#3
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
. अपडेट -2 


मेरे मोबाइल पर कॉल आती है और मेरा ध्यान भंग होता है और कॉल देख कर मैं आश्चर्य में पड़ जाता हूँ ।


यह कॉल मेरी माँ का था मैं सोच में पढ़ जाता हूँ कि अभी तो इन्हें में किट्टी पार्टी में छोड़ कर आया हु इतनी जल्दी फोन कु कर रही है।


मैं कॉल उठा कर.... हेलो माँ।

माँ ... कहा है बेटू घर नहीं पहुंचा ।

मैं..... माँ अभी तो में नीचे ही बैठा हूँ निकला कहा घर के लिए 

माँ.... आश्चर्य से बेटा आधा घंटा हो गया अभी तक घर नहीं गया दिया इन्तेजार कर रही होगी ।

मैं.... ठीक है माँ अभी जाता हूं । ( उदास मन से )

माँ..... रुक ऊपर आ पहले फिर जाना ।


मै धीमे कदमो से ऊपर की ओर बढ़ते हुए माँ के पास पहुंचा ।
ऊपर जब पहुंचा तो रॉय आंटी ने मुझसे कहा..... "राहुल तुम्हारी माँ बता रही थीं कि तुम मार्केट जा रहे हो अपनी बहन के साथ तो रूही को भी साथ लेकर जाओ वहाँ रूही को भी अपने लिए कुछ खरीदना है"



इतना सुनने के बाद तो मेरे दिल में जैसे खुशी की लहर दौड़ गई और फिर मुझे एक फ़िल्म का डायलॉग याद आ गया ।
" जब आप किसी को सिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने में लग जाती हैं"


मैं यही सोच रहा था कि रॉय आंटी ने रूही को बुलाया और तैयार होकर मेरे साथ मार्किट जाने को कहा । पर रूही को देख कर ऐसा लग रहा था कि वो मेरे साथ नहीं जाना चाहती ।
रूही रॉय आंटी की बात को टालते हुए ..... " मासी मैं किरण के साथ शाम को मार्केट चली जाउंगी " .


रॉय आंटी ... अभी कुछ देर पहले तो किरण से लड़ रही थीकी तुझे अर्जेंट मार्केट जाना है , अब शाम को बोल रही हैं कु क्या हुआ बोल ।

रूही ने जब इतना सुना तो वो झेप गई और नजरें नीचे करके बोली.... मासी मुझे किरण के साथ जाना है में अकेले कंफ्यूज हो जाती हूँ क्या लू क्या नहीं ( झूठ )
रॉय आंटी रुक अभी.. किरण - किरण


किरण...हा माँ।


रॉय आंटी .... जा दोनो बहन तैयार हो जा राहुल अभी अपनी बहन के साथ मार्केट जा रहा है तुम दोनों भी चले जाओ ।
किरण हा माँ बोलकर रूही को भी साथ ले जाती हैं मन तो उसका बिल्कुल भी नहीं था लेकिन अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था ।


मैं मन ही मन मुस्कुराते हुए नीचे कार मैं आ गया । कुछ देर बाद दोनो बहने तैयार होकर नीचे आयी। उनके आते है मेरा ध्यान रूही की ओर जाता है और मैं अपने आप को उसे देखने से नहीं रोक पाता हूं देखना क्या में लगातार रूही को घूरे जा रहा था। 


इस समय वो सिम्पल ड्रेस में ऊपर से लेकर निचे घुटने तक फ्रॉक रेड कलर में अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं।
मैं लगातार उसे देखे जा रहा था कि तभी किरण ने मुझे टोकते हुए कहा..... फिर से आउटलुक देखने लगे क्या ।
मैं हड़बड़ाते हुए ...... कक क्या ...

किरण.... मैंने पूछा फिर से घर की आउटलुक देख रहे थे?
मैं झेंपते हुए बोला..... " नहीं मैं तो अपने12थ के रिजल्ट के बारे मे सोच रहा था ( झूठ )

किरण आगे मेरे साथ ड्राइविंग सीट पर और पीछे रुही बैठी थी।

किरण बैठते हुए मुझसे पूछा .... तुम तो डिस्ट्रिक्ट टॉपर थे ना 10थ में तो तुम्हें कब से रिजल्ट की चिंता होने लगी ।
मैं क्या बोलता फिर भी मैंने कहा .... एक मार्क्स से 1st से 2nd पर आ सकता हूँ।


और फिर हम इसी तरह की बात करते दिया को लेने के लिए पहुंच गए ।


जब मैं कार से उतरा तो पहली बार रूही ने मेरी तरफ नॉर्मल नजरों से देखा हो सकता है मेरी टॉपर की बात को जानकर ।
हुम् घर पहुंचे तो सिमरन दी हॉल में ही बैठी हुई थी। उन से दिया कि बारे में पूछा तो पता चला कि वो अपनी सहेली सोनल के घर गई हैं ।


प्लान कुछ ऐसा था कि मैं माँ को ड्राप कर घर से दिया को पिक करूँगा फिर सोनल के घर जाना था और वहां से मार्केट लेकिन मैं लेट हो गया तो दिया सोनल को पिक करने चली गई ।


सिमरन ने जब किरण को देखा तो उससे बाते करने लगी और आने के बारे मे पूछने लगी , वो दोनों बात कर रही थी तभी मेरे कानों में पहली बार रूही की आवाज सुनाई पड़ी ..... वाशरूम कहाँ है...


मैं अति प्रसन्न पहली बार रूही की आवाज सुनी बड़ी सुरीली , मनमोहक आवज थी । मैं उसे वाशरूम तक ले गया वहां से आने के बाद मैंने पूछा .... कुछ टी या कॉफी ।


मेरे इस तरह पूछने से पहली बार रूही ने स्माइल के साथ जवाब दिया.... जी नहीं ... 
फिर उसे देखने के बाद तो जैसे मेरा दिमाग ही काम ना करें फिर पूछा.... खाना लगाऊ क्या ? 



मेरे इतना बोलते ही वो हँसने लगी सच कहूं तो उसे हँसते हुए देख कर ऐसा लगा जैसे मुझ पर फूलों की बारिश हो रही हो, बैकग्राउंड में म्यूजिक बज रहा हो, सारा माहौल थम चुका हो बस रूही और में ही हलचल नजर आ रही थी । मैं चुपचाप खड़ा देख रहा था ।


रूही मेरी चुप्पी तोड़ते हुए बोली ..... ( चुटकी बजाते हुए ) हेलो कहाँ खो गए राहुल सर्

मैं .... कहीं नहीं बस तुम्हें हँसते हुए देख रहा था। 
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03-21-2019, 11:55 AM,
#4
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
. अपडेट -3

मैं ...... कहीं नहीं बस तुम्हें हँसते हुए देख रहा था।

रूही अपनी हंसी को रोकती हुए .... मै साफ - साफ बता दूं कि इस तरह किसी का घूरना मुझे अच्छा नहीं लगता ।

मैं ... सॉरी मुझे पता नहीं था।

रूही..... ओके लेकिन आगे से ध्यान रखना ।

मैं... वैसे रुही क्या में आपसे एक बात पूछ सकता हूँ ।

रूही अपने आप मे कुछ बड़बड़ाती हुई चिढ़ कर .... हा पूछो
मै .... किसी भी खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य को देखने में क्या बुराई है ।

रूही ....... नार्मल वे मे समझी नहीं।

मै .... सोचो बहुत खूबसूरत मनमोहक पंछियों का झुंड खुले आसमान में उड़ रहा है या किसी डाल पर बैठा उसकी शोभा बढ़ा रहा है आप क्या करोगी ?


रूही ...... उसे देखूंगी ...

मै ..... अच्छा और छूने या पकड़ने की कोशिश की तो 

रूही ..... डर कर उड़ जाएंगे ।

मैं ...... बस उसी तरह मैं तुम्हारे मनमोहक रूप को देखता हूँ तो क्या बुराई है बुरा तब है जब कुछ गलत करूँ मैं तो प्राकर्तिक सौंदर्य देख रहा हूँ

रूही को मेरा लॉजिक शायद समझ में आ जाता हैं वो इस टॉपिक को बदल देती हैं।

"तो राहुल अपने स्कूल का टॉपर बॉय आप तो काफी इंटेलिजेंट निकले "


मैं ...... नहीं बस थोड़ी मेहनत और टॉपिक रिलेटेड क्लीयरेंस होने से ऐसा हुआ है और कुछ नहीं ।


रूही ..... ओह' मतलब एक रूटीन को फॉलो करते हो आप ।
मै ... हा कह सकती हो वैसे आम तौर पर सब्जेक्ट रैंडम होता हैं लार सब्जेक्ट के अंदर की टॉपिक एक सेक्यूएन्से को फॉलो करना होता हैं।


रूही ..... हम्म तो इतने बडे टॉपर की कई फैन होंगी , वैसे कितनी गर्लफ्रैंड हैं तुम्हारी... ।


रूही के इस सवाल पर मैं थोड़ा शर्मा गया क्युकी किसी लड़की से यूँ कहि बाते नई सुनी थी यह मेरा पहला मौका था जब कोई मुझसे मेरी गर्लफ्रैंड होने के बारे मे पूछ रहा था।
वैसे तो रूही को देख ही मेरा दिल धड़क जाता था एक मन हुआ कि बोल दु " अबतक तो कोई गर्लफ्रैंड नहीं रुही जी लेकिन जब से आपको देखा है तो आपको गर्लफ्रैंड बनाने की ख्वाइश है "


पर क्या करूँ हिम्मत ही नहीं हुई , बड़ी विडंबना थी रूही लड़की होके मुझसे मेरी गर्लफ्रैंड के बारे में पूछ रही थी और में लड़का होकर भी कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
" हेलो .. आप ये बार - बार कहा गुम हो जाते हो, कंही गर्लफ्रैंड के पास तो खयालो में नहीं पहुंच गए "


मैं..... अरे नहीं रूही जी मैं तो बस यह सोच रहा था कि क्या जबाब दु क्योंकि गर्लफ्रैंड तो है नहीं हान यदि झूठ बोल दु तो कैसा रहेगा , क्योंकि आजकल किसी लड़के के पास गर्लफ्रैंड न हो या किसी लड़की के पास बॉयफ्रेंड ना हो तो उसे इन्फीरियर नजरों से देखा जाता हैं ......


रूही ...... हँसते हुए , अरे ऐसा नहीं है में तो यूँ ही पूछ रही थी 
केवल जानने के लिए की क्या टॉपर के पास गर्लफ्रैंड होती हैं या पूरा दिन पढ़ाई में डूबे रहते हैं।



मैं ..... देखा आप भी मज़ाक उड़ाने लगी , खैर कुछ - कुछ आप सही है पर मेरे पास पर्याप्त समय बचा है अपने दोस्तों और घर के लोगो के लिए पर अबतक कोई ख्याल नहीं आया कि कोई गर्लफ्रैंड हो घर दोस्त और अपना स्टडी रूम बस यही मेरी दुनिया है ।


" और तुम भी रूही शायद में कह ना सकू " 

कहानी जारी रहेगी .............
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03-21-2019, 11:56 AM,
#5
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट - 4



थोड़ा मुस्कुराते हुए.... हम्म्म्म मतलब राहुल सर अभी सिंगल है जिनका ध्यान अब तक गर्लफ्रैंड की ओर नहीं गया। गजब की बात है देखते है कबतक, खैर आज टॉपर के दर्शन हुए तो में भी देख लू इनके स्टडी रूम कैसे होते है और पढ़ने का तरीका .... आप अपना स्टडी रूम नहीं दिखाओगे ।



मैं... जी बिल्कुल क्यों नहीं मैंने रूही को अपना स्टडी रूम दिखाया जहाँ मैं और दिया साथ मे पढ़ते थे , उस रूम में मेरे कई स्पोर्ट्स और अकादमिक सर्टिफिकेट थे जिसे देख कर वो एक - एक करके बारे में पूछती रही और मैं बड़े प्रेम से सबके बारे में बताता गया ।



अभी चंद घंटों की ही मुलाकात हुई थी हमारी लेकिन मेरे दिल और दिमाग पर रूही छाई हुई थी, पहली बार मुझे अपनी हासिल उपलब्धि पर फक्र महसूस हो रहा था क्योंकि आज इनकी वजह से ही रूही मेरे साथ थी और मुझ से बाते कर रही थीं।



रूही बिल्कुल आस्चर्य भरे भाव से मेरे स्पोर्ट्स शेल्ड को उठाते हुए बोली....... " राहुल सर मुझे लगा कि आप नीचे केवल मुझे इम्प्रेस करने के लिए यह बोल रहे थे कि आप को स्टडी के अलावा भी पर्याप्त समय बच जाता हैं, पर आपके स्पोर्ट्स अचीवमेंट को देखते हुए एक ही बात जुबान पर आती है कि यु आर बोर्न ब्रिलियंट जिसे दिमाग विरासत में मिला है. मेरी सुभकामनाये आप के साथ है आप यू ही सफल हो अपने हर काम में "



मैं ..... थैंक यू सो मच रूही जी ।


हम यू ही बात कर रहे थे कि तभी सिमरन दी कि आवाज आई "चल बेटू क्या कर रहा है ऊपर " गुस्सा तो बहुत आया दी पर लेकिन "आया दी " बोल कर हम चल दिए ।


और फिर हम हाल की तरफ चल पड़े। हाल में सिमरन दी तैयार हो कर बैठी थी, दिया और सोनल भी आ चुकी थी ।

मैंने दी से पूछा...... आप भी चल रहे हो क्या?

दीदी ने हाँ में जवाब दिया , फिर हम सब निकल पड़े शॉपिंग करने के लिए।



कार में पीछे सिमरन,सोनल,किरण और रूही बैठे हुए थे और मेरे पास आगे दिया बैठ गई, हम दोनो भाई बहन मैं और दिया आपस में बहुत खिंचाई किया करते थे पर थे एक ही यूनिट , मतलब हम लड़ते हैं उससे कहीं ज्यादा एक दूसरे को प्यार करते हैं।


मैं आगे बैठा था पर मेरा मन तो पीछे की सीट पर था, मैंने चुपके से मिरर रूही पर एडजस्ट किया और छुप छुप के उसे देख रहा था।


इसी बीच दिया ने चॉकलेट निकली एक बाईट खुद ली और मेरी तरफ बढ़ा दी । दिया का मुझे इस तरह चॉकलेट देना वो भी रूही के सामने मुझे थोड़ा असहज लगा ।


मैंने उसका हाथ झटकते हुए कहा.... क्या कर रही हैं शांति से रह ना ।



मैं थोड़ा जोर से बोल दिया वो भी इतने लोगों के बीच दिया को बहुत बुरा लगा होगा जो कि मुझे भी महसूस हो रहा था । मैं दिया को नाराज नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने थोड़े धीमे स्वर में बोला ...... छोटी - छोटी ( दिया का निक नेम )



दिया अपने गुस्से से भरे रिएक्शन देते हुए ..... क्या है।


मै अब समझ गया था कि ये सफर बहुत बुरा कटने वाला है , क्योंकि अब वो पूरे हफ्ते का जो भी मैंने उसके साथ गलत किया हो सबका बदला लेगी ।


मैं ..... छोटी खिला न चॉकलेट भूक लगी हैं ।

दिया रूवासी आवज में ...... मुझे कोई बात नहीं करनी तुमसे भैया ।

दिया का रिएक्शन देख अब क्यों मुझे रूही का ख्याल आये अब तो बस दिमाग में एक ही बात थी कि जल्द से जल्द छोटी को मना लो नही तो यह हंगामा खड़ा कर देगी ।


अबतक हम शॉपिंग मॉल पहुंच चुके थे मैं कार से उतर कर सिमरन दी के पास गया और रेकुएस्ट कि दिया को मना लो ।
सिमरन दी ने साफ सब्दों में कहा ..... "क्या में पागल नजर आती हु की तुम दोनों के बीच पडू अपनी बात खुद ही संभाल में कोई हेल्प नहीं करने वाली "



मैंने कहा .... दीदी प्लीज , लेकिन दीदी मेरी बात को सुरु से खारिज करते हुए चल दी शॉपिंग करने ।


फिर हम मॉल के अंदर आये सबको अलग-अलग खरीदारी करनी थी इसलिए सब अपने ग्रुप में अलग हो गए ।

ग्रुप कुछ ऐसा था कि सोनल और दिया एक साथ में मैंने दिया से कहा मैं भी तेरे साथ चलता हूं पर उसने साफ मना कर दिया फिर में चुप हो गया ।


रूही , दी और किरण एक साथ शॉपिंग करने चली गई । मैं उदास मन से खुद में अपने आप से ..... " चल बेटा जल्दी से मना छोटी को नहीं तो आज तेरा काम लग जायेगा वैसे भी तू सुबह लेट हो गया उसे ले जाने में फिर उसे चिढ़ाया भी था अब चल जल्दी "


सिमरन ने शायद किरण से बोला कि चल तुझे डेली शो दिखती हु उन तीनों की नजर मुझ पर ही थी ।


मैं दिया कि पीछे ..... छोटी - छोटी सुन तो छोटी , वो बिना किसी जवाब के एक शॉप के अन्दर गई मैं भी साथ - साथ अन्दर गया और पीछे तीनो हँसने लगी क्योंकि यह लेडीज अंडरगारमेंट्स की शॉप थी । मैं घुसते ही देख और चुप चाप बहार खड़ा हो गया ।


दिया जानती थी कि मैं बाहर खड़ा हूँ तो वो जान भुझ कर ज्यादा समय लगाया और करीब 45मि के बाद बाहर आई ।
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03-21-2019, 11:56 AM,
#6
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट - 5
मैं पीछे - पीछे .... छोटी सुन तो ले , मेरी बात भी ना सुनेगी ।
तभी सोनल पीछे मेरे पास आई और बोली..... " भैया रेस्टोरेंट में जाओ हम सब वही मिलेंगे आपको " 


मैं रेस्टोरेंट में इंतजार करता रहा और करीब एक घंटे बाद सब वहाँ पहुंची । मैं चिंता में बाकी चार हँसते हुए और दिया मुँह फुलाये ।


सभी ने खाने का ऑर्डर दिया हमलोग राउंड टेबल पर बैठे थे , मैं मेरे लेफ्ट में सिमरन उसके लेफ्ट में किरण फिर रूही फिर दिया और फिर सोनल बैठे हुए थे ।


मैंने चुपके से सोनल को वहाँ से उठने का इशारा किया वो उठी तो मैं दिया के बाजू में बैठ गया, मुझे अपने बाजू में देख कर दिया सोनल पर जोर से बोली ...... " तुझे मैंने यहाँ बैठने को बोला तू वहाँ क्या कर रही हैं "



सोनल को थोड़ा बुरा लगा तो मैंने इशारे से सॉरी कहा और बैठने को कहा , सोनल यू तो दिया कि बेस्ट फ्रेंड थी पर थी हमारी प्यारी गुड़िया । सोनल का इस संसार में उसकी माँ के अलावा बस हमारा परिवार ही उसकी दुनिया थी ।


मैंने छोटी - छोटी बोल कर उसके कंधे पर हाँथ रखा तो उसने मेरा हाथ झटक दिया और अचानक से रोने लगी , सब ये देख कर चोंक गये तो सिमरान दी ने सबको चुप रहने का इशारा किया ।


मैं बड़े ही प्रेम से उसके सर को अपने सीने से लगाते हुए , प्यार से पुचकारते हुए उसके आंसू पोंछे । वो अब भी रो रही थी मैंने गले लगा कर दिया को चुप करवाया ।


जब भी गुस्सा होती तो जबतक उसे प्यार से ना मनाओ नहीं मानती थी । मुझ से प्यार भी बहुत करती थीं इसलिए किसी की बात बुरी लगे की ना लगे लेकिन मैं अगर जोर से बोल दूँ तो बर्दास्त नहीं कर पाती थी । अब तक हमारा खाना भी आ चुका था सब खाने लगे केवल दिया को छोड़ कर ।


मैंने पूछा ....... छोटी ये क्या है , दिया कुछ ना बोली मैं समझ गया ।

मैंने कहा इधर आ और में खिलाने लगा अपने हाथ से और वो भी खाने लगी ।

आह दिल को सुकून मिला ।


की चलो मामला अब यही सुलझ गया कि तभी सोनल भी अपना रोया सा बनावटी मुह लेकर मुझे देखने लगी ।


मैं ..... हाँ पता है चल अपना मुंह खोल , फिर उसको भी मैंने अपने हाथों से खिलाया ।



खाने के बाद हम सब आपस मे बातें कर रहे थे कि तभी दिया ने वो बोला जो मैं कभी सोच भी नहीं सकता था । दिया तो दिया है रूठी रहे तो भी मेरा सत्यानास खुश रहे तो भी ।
"दिया कि बाते सुन्न कर मैं तो बिल्कुल शॉक्ड हो गया " 




कहानी जारी रहेगी .........
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03-21-2019, 11:56 AM,
#7
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट - 5

दिया ने वो बोला जो मैं कभी सोच भी नहीं सकता था और मैं बिल्कुल स्तब्ध रह गया।



दिया यू ही बातों - बातों में....... " भैया जब में चॉकलेट दे रही थी तो तुमनें क्या सोच कर नहीं लिया "


मैंने कहा .... ऐसी कोई बात नहीं है मैं कुछ सोच रहा था और तूने अचानक से दे दी तो गलती से रिएक्शन हो गया।


दिया.... झूठ मत बोलो आप पीछे देख रहे थे ( रूही की ओर इशारा करते हुए ) उस लड़की को और जब मैंने चॉकलेट दी तो एटीट्यूड दिखा रहे थे।

उसने जो भी समझ कर बोला सच्चाई तो यही थी , इतना सुनते ही मुझ पर जैसे बॉम्ब गिर गया हो मैं तो जम ही गया ।

मेरी परेशानी को शायद सिमरन समझ गई इसीलिए दिया को डाँटते हुए कहा .... "तुझे समझ नहीं आता कब क्या बोलना चाहिए " और खरी खोटी सुनाई ।


दिया .... हाँ डाँट लो छोटी हु न सच बात को ऐसे ही दवा दोगे।

सिमरन ..... दिया गलत बात , तुम्हें थोड़ा सोच कर बोलनी चाहिए बात , चलो रूही से सॉरी बोलो और राहुल से भी ।

यू तो उसका मन नहीं था क्योंकि वो अपनी बात पर भरोसा था फिर भी...... सॉरी भैया मजाक से कह दिया , सॉरी आपको भी रूही जी अगर आपको मेरी बात का बुरा लगा हो तो ।


रूही .... अरे नहीं दिया कोई बात नहीं थोड़ा बहुत मजाक तो माहौल को हल्का करता है, मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगा।


हम करीब 3 बजे तक वही बैठे रहे बाते करते हुए आपस में कि तभी माँ का फ़ोन आया । वो हम सब के बारे में जानकारी लेकर वहां से लौटने का निर्देश देती हैं शायद उनकी किट्टी पार्टी भी समाप्त हो गई थी । माँ की बात मानते हुए हम सब वापस लौट आए।


सबसे पहले रूही और किरण को छोड़ कर वहाँ से माँ को अपने साथ लिया फिर रास्ते में सोनल को छोड़ते हुए हम अपने घर वापस आ गए।


घर वापस होने के बाद कुछ खास नहीं होता हाँ पर आज जिस लड़की ( रूही ) से मिला वो बहुत ही खास थी और मैं उसीके ख्यालों में खोया हुआ था।

दिन अब यूँ है बीत रहे थे चूंकि में किरण को ट्रेनिंग देता था इसीलिए अक्सर उसके घर जाया करता था, जहाँ मेरी मुलाकात रूही से हो जाया करती थीं।



अब मैं और रूही एक दूसरे से नॉर्मलली मिलते थे अबतक मेरी हिम्मत नहीं हुई थी यह पूछने के लिए कि क्या हम फ्रेंड्स है। बस मन ही मन उसे चाहता रहता था। मैं दिल ही दिल प्यार के बारे में सिमरन, दिया , सोनल और किरण को हल्की भनक थी। दिन यूँ ही बीत रहे थे और रूही के प्रति मेरा आकर्षक दिन ब दिन बढ़ता जा रहा था । हमारी जब कभी मुलाकात होती तो वो मुझसे बाते करती और मैं उसका प्यारा चेहरा बड़े गौर से देखा करता ।



यूँ तो दिल के अरमान किसी सागर से कम नहीं थे पर मैं उसके एक झलक का प्यासा था । मैं शुरू से ही बहुत ज्यादा बातें नहीं कर पाता था किसी बाहरी लड़की से इसलिए मेरी बहुत ज्यादा रूही से ज्यादा बात नहीं हुई थी , क्योंकि वो बहुत बात करती थी ।


धीरे धीरे मेरा एक तरफा प्यार परवान चढ़ने लगा था और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह था कि में बाहरी दुनिया से कुछ दिनों से कट चुका था ।

सुबह रूटीन वेक अप फिर ग्राउंड , ग्राउंड से किरण का घर , और फिर वहाँ से अपने घर ।

अपने घर में भी सीधा अपने कमरे में दिन भर ना किसी से बात करना ना घर में सबके साथ बैठना बस अपनी ही दुनिया में खोए रहना ।


एक दिन की बात है मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था यही कोई 3 pm हो रहे थे कि सामने से सोनल और दिया मेरे रूम में आती हुई नजर आई ।

मैं .... क्या बात है देवियों आज भाई की कैसे याद आई ।

दिया ..... तुम तो रहने ही दो भैया तुम्हे किसी से क्या मतलब ।
अबतक दोनो मेरे पास आकर बैठ चुकी थी।

मैं ..... क्या हुआ सोनल दिया आज इतने गुस्से में क्यों है।
सोनल ने कोई जवाब नहीं दिया बस मेरी तरफ देखी और रोने लगी।

हमारी गुड़िया अचानक रोने लगी और बात क्या थी अबतक उसका कोई ज्ञान नहीं था और मैं चिंतित हो गया।
मैं ..... क्या बात है बता मुझे ऐसे क्या बात हो गई कि हमारी गुड़िया रोने लगी।

दिया .... भैया वो सोनल वो ...

मैं .... यह वो यह वो क्या है यह सब सीधे सीधे बोल क्या हुआ है ।

दिया ..... भैया सोनल को एक लड़का परेशान कर रहा है ।

मैं कुछ सोच कर सोनल की तरफ देखते हुए..... अरे लड़के तो ऐसे ही कमेंट पास करते रहते है इग्नोर करो इनको,तुम दोनों हो ही इतनी खूबसूरत इसलिए तो पीछे पड़े हैं ऐसे कमेन्ट को कॉम्प्लिमेंट समझो ।

दिया ..... ( चिढ़ते हुए ) वो कमेंट्स नहीं बहुत गंदे कमेंट्स करते हैं जो आज तक हमने नहीं बताई पर आज तो हद ही हो गई।मुझे अब बहुत चिंता हो उठी मेरी गुड़िया रोते हुए और ऊपर से पहले से कुछ लड़के उन्हें परेशान कर रहे थे।


मैं .....क्या हुआ ।

दिया और सोनल एक दूसरे को देख रहे थे फिर सोनल ने धीमे से रोती हुई ...... भैया उसने मुझे यहाँ पकड़ा ( अपने सीने की तरफ इशारा करते हुए ) ।

" आह ।।। कौन है कहाँ मिलेगा वो जल्दी बताओ "
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03-21-2019, 11:56 AM,
#8
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट - 7
दिया ....... वर्मा सर के कोचिंग के निचे पान की दुकान पर4,5 लड़के हमेसा रहते है जो हमे तंग करते है ।

अब मैंने फोन निकाला और नंबर मिलाया अपने बचपन से साथ रहे सबसे करीबी दोस्त ऋषभ को ।

ऋषभ ... बोल राहुल ।

मैं .... कहाँ है तू ? 

ऋषभ .... नूतन अपार्टमेंट में क्या हुआ ।

मैं .... कुछ नहीं जल्दी स्व सबको बोल वर्मा सर् की कोचिंग के बाहर मिलने को ।

ऋषभ .... क्या हुआ बात क्या हो गई ? 

मैं .... बात बाद में अभी लात का समय है तू सबको लेकर पहुंच मैं निकल रहा हु घर से ।

फिर मैंने दोनो को कार में बैठाया और चल दिए उस जगह पर वहाँ पहुंच कर मैंने कार थोड़ी दूर रोकी और दोनों से पूछा .... कोई है क्या अभी यहाँ ।


दोनो चुप थी क्योंकि जानती थी मैं क्या करने वाला हु । पर डर यह न था कि झगड़ा होने वाला है डर यह था कि अभी बता दिया तो में अकेला जाऊंगा सबको पीटने ।

उन्हें इस तरह चुप देख कर मुझे गुस्सा आया और मैं गुस्से से मेरी दोनो आंखें लाल हो गई जो दोनो को दिखाई दी तभी दिया ने उनमे से एक कि ओर इशारा किया।

मैंने गाढ़ी लॉक की और दोनों को शांत बैठने को कहा और अपना फोन दे दिया उन्हें रखने के लिए । गाढ़ी की डिक्की से मैंने होंकी स्टिक निकली और चला उनकी ओर ।

धीमे कदमो से उनके पास पहुंचा, उस लड़के को देख फिर हो गया शुरू । इससे पहले उन्हें कुछ समझ आता मेरी हॉकी स्टिक पड़नी शुरू हो गई।


मेरा मुकाबला करना उन 3 साथियों के अन्दर तो नहीं था क्योंकि अभी कुछ ही पलों में उनकी हालत खराब हो गई थी। उन्हें पिटता देख उनके कुछ और साथी भी आ गए अब वो करीब दस थे और मैं अकेला ।


अब मैं कोई हीरो तो था नहीं कि सब पर भारी पडू इसीलिए मार खाने की बारी अब मेरी थी मुझे भी मार लग रही थी और मैं भी मारे जा रहा था । कि अब मेरे मित्रो की एंट्री हुई घन - घन करते हुए 20-30 बाइक रुकी सब उतरे और बिना किसी सवाल किए उन्हें रुई की तरह धोने लगे ।


इतने लोगों को देख कर सब भाग गए पर मुख्य लड़का जो इन सब का कारण था उसे पकड़े रखा और दिया और सोनल को बुलाया फिर चेतावनी दी ..... " भविष्य में तुम या तुम्हारा कोई दोस्त इन लोगों को परेशान किया तो मैं तुमको दुनिया से ग़ायब कर दूंगा " 


और फिर सब अपने अपने रास्ते चले गए ।


जब मैं कार में बैठा तो दिया मुझसे लिपट कर रोने लगी ।
मैं ... क्या हुआ पगली ।

कुछ ना बोली बस रोये जा रही थी तभी सोनल ने मुझे देखा और मुझसे लिपट कर रोने लगी । अब मेरे समझ से परे था कि दोनों क्यों रो रही हैं । मैं दोनो को चुप करवाया माथे पर किस किया और पूछा क्या हुआ क्यों रोये जा रहे हो तुम दोनों ।


दिया सिसकिया लेते हुए .... आपके सर से खून निकल रहा है।
अब मामला समझ में आया कि यह लोग ब्लड देख कर घबरा गई हैं ।

मैंने हँसते हुए कहा ... पागल मर्द को दर्द नहीं होता ।



अब चुप हो जा चल डॉक्टर के पास नहीं तो खून सब बह जयेगा और में इस लोक से उस लोक का निवासी हो जाऊंगा ।
वहाँ से हम तीनों हॉस्पिटल पहुंचे मेरे सर में 5 टांके आये , डॉक्टर ने नार्मल सारे काम करने को कहा भाग दौड़ वाले काम छोड़ कर क्योंकि ऐसा करने से ब्लड तेजी से circulate होगा और bleeding के चांसेस रहेंगे ।


हॉस्पिटल के बाद सोनल को छोड़ते हुए हम घर पहुंचे । एक - एक करके सबको मेरे सर के चोट के बारे में पता चलता रहा और दिया सबको कारण बताती रही ।


अगले दिन जब मैं मैदान नहीं पहुंचा तो किरण का फोन सिमरन के पास आया जिस से उसे भी सब पता चल गया । अब करीब 10बजे होंगे कि किरण और रूही मुझसे मिलने आ पहुंची ।


आह ।। रूही को देखते ही सारे गम दूर हो गए ऐसा अहसास जिसे ना तो दिखाया जा सकता ना ही बयान किया जा सकता था ।


कुछ देर किरण मेरे पास बैठी रही फिर चली गई दी के पास अपनी चित -चैट के लिए और अब मैं और मेरी जान रूही वहाँ अकेले थे ।


मैं ..... रूही शुक्रिया ।

रूही ..... किसलिए शुक्रिया ।

मैं ..... मुझसे मिलने आई ना इसीलिए ।

रूही मेरी बातों पर चुटकी लेते हुए .... मिलने तो आपसे किरण भी आई है पर उसे तो आपने थैंक्स नहीं बोला ।

अब मैं क्या कहूँ ..... वो वो अब हम फ़्रेंड है ना ।

आह। चलो मैंने उसे फाइनली फ्रेंड बोल ही दिया ।

रूही हंसती हुई .....मैंने कब की फ़्रेंडशिप ? 


अब मैं क्या कहूँ ये लगता है मुझसे दोस्ती नहीं करना चाहती । मैं कुछ बोल ना पाया उसकी इस बात पर तबतक उसने फिर पूछ लिया ..... बताओ कब हुए हम फ्रेंड्स । 


मैं कहूँ तो क्या कहूं अपनी ही चिंताओं में घिरा था कि तभी ...... एक बार फिर दिया कमरे मे आते हुए नया रंग बिखेर दिया ।

कहानी जारी रहेगी ...... 
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03-21-2019, 11:56 AM,
#9
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट -8


मैं कहूं तो क्या कहूं अपनी ही चिंताओं में घिरा हुआ था कि..... एक बार फिर दिया कमरे में आती हुए नया रंग बिखेर देती हैं । दिया जो अब तक गेट पर खड़े होकर हमारी बाते सुन रही थीं अंदर आते हुए ।



दिया .... वो ऐसा ह रूही जी के दोस्ती करने के लिए पूछना नहीं पड़ता ।


रूही .... हम्म्म्म ।

दिया ...... वैसे भी " A friend in need in a friend in deed " 

रूही ..... ओके accepted दिया पर यह राहुल भी तो बोल सकता था , मैं क्या खा जाउंगी वो अगर ये बोल देता तो ।



दिया तिरछी नजरो से देखती हुई धीरे से मुझे बोलती है .... तुम्हे देख तो खाना भूल जाता हैं ये बात बोलना तो दूर की बात है ।

रूही .... समझी नहीं क्या कह रहे हो ।


दिया ...... मैंने कहा भैया को बाते बनाना नहीं आती ।


रूही ... ओ ' ऐसा क्या ? पर में एक आध बार example सुनी हु राहुल सर् से , example तो बिल्कुल ऐसा देते है कि सामने वाला चाह कर भी कोई जवाब ना दे सके ।


कुछ देर दोनो बात करती रही फिर दिया बाहर सोनल से बात करने चली गई । इधर में और रूही बात करने लगे मैं लगातार उसकी बात में खोता चला गया बस इस एहसास के साथ ही रूही ऐसे ही मुझसे बात करती रहे ।



मैं इन्ही ख़यालों मैं खोया था कि मुझे रूही मेरी ओर अपना हाथ बढ़ते हुए .... " please shake hands for new friendship " 



आह। क्या मधुर एहसास था रूही से हाथ मिलाने का मैंने पहली बार रूही को टच किया था , उसके हाथ इतने सॉफ्ट थे कि मै एकदम से गुम हो गया । किसी फिल्मी सीन की तरह मैंने उसका हाथ पकड़े ही रह गया कि तभी अचानक दिया अंदर पहुंची .... भैया भैया कहाँ गुम हो ।



मैं अपने ही ख्यालों में गुम था और दिया और रूही दोनो मंद मंद मुस्कुरा रही थी और उन्हें देख कर में शर्मा गया।
अभी मेरा सम्भालना भी नहीं हुआ था कि दिया ने फिर से बोम्ब फोड़ दिया...




" क्या आप भी पहली बार कोई दोस्त घर आई हैं और आप लड़कियों की तरह शर्मा रहे हो Be A Man और कहीं खाने पर ले जाओ "



ओह दिया क्या बोल रही है कई दिनों बाद तो दोस्त कह के पुकारा अब क्या चाहती है कि आज ही ब्रेकअप हो जाए मैं मन में ऐसे विचार सोचते हुए कहा.... सॉरी रूही वो दिया ने बिना सोचे हुए कहा आई एम extremely sorry ।



पर पता नहीं आज तो मेरे ऊपर बोम्ब ही बोम्ब गिर रहे थे।
रुही... बिना सोचे ना तो दिया ने बोला ना तुम ने ।


मैं .... समझा नहीं ।


रूही .... दिया तो बस खाने पर ले जाने के लिए बोल रही थी और तुम तो बहुत बड़े कंजूस निकले जो पहले ही मना कर रहे हो ।


मुझे समझ नहीं आया रूही की बात पर क्या रिएक्शन दु , मेरा मुह खुला रह गया और मेरी प्रतिक्रिया देख कर दिया और रूही खिल खिलाकर हँस रही थी । दोनो को हँसते हुए देख में तो पानी पानी हो गया ।


इतना होने के बाद अब मेरी बारी थी । मैंने उन्हें 2 मि रुकने को बोल कर फ़टाफ़ट बाथरूम चला गया और तैयार हो कर आ गया ।


जब मैं बाहर आया तो दोनों मुझे आचार्य से देख रही थीं । मैंने उनसे पूछा ... क्या हुआ ? 

दिया .... भैया क्या हुआ कही जा रहे हो क्या ? 

मैं ... मैं नाम हम जा रहे हैं वो भी अभी रेस्टॉरेंट खाने के के लिए ।


मेरी बात सुन कर रूही थोड़ा असहज हुई .... आप तो सीरियस हो गए मैं तो मजाक कर रही थी ।


मैं.... पर मैं तो सीरियस हु मैं मजाक नहीं करता चाहे तो किसी से भी पूछ लो ।

फिर क्या था ... हाँ ना हाँ ना करते हुए तय हुआ कि हम जा रहे है रेस्टोरेंट ।



हम तीनों फिर निकले रेस्टोरेंट के लिए , बात करते करते हम रेस्टोरेंट पहुंच गए । आज मुझे पहली बार ऐसा फील हो रहा था कि जैसे मैं आज किसी खास काम से निकला हु । रेस्टोरेंट में खाने का आर्डर देकर हम आपस मे बात करने लगे ।
पर आज तो दिया पूरी शरारत के मूड में थी ।



खाते हुए दिया एक बार फिर रूही को छेड़ते हुए .... " आपको मालूम है रूही जी भैया की अबतक 3 गर्लफ्रैंड है " 


रूही आश्चर्य से ..... सच में तब तो राहुल ने मुझसे झूठ कहा कि उसकी कोई गर्लफ्रैंड नहीं है ।


दिया .... ना ना 3 गर्लफ्रैंड है , मैं सबको जानती हूँ ।


इधर मैं मन मे सोचा पागल यहां एक का पता नहीं यह 3 बता रही हैं , मैंने गुस्से भारी नजरो से एक बार दिया को देखा ।


दिया .... भैया यह लुक देना बंद करो और खाने पर ध्यान दो ।
मैं अब बेचारा चुप चाप खाने लगा ।


रूही .... दिया तुम गर्लफ्रैंड के बारे में कुछ बता रही थीं ।


दिया मजे लेते हुए .... आपको बहुत इंटरेस्ट आ रहा है भैया की गर्लफ्रैंड में खैर भैया की पहली गर्लफ्रैंड में दूसरी सोनल और तीसरी आप है ।


रूही .... मैं कैसे हो गई राहुल की गर्लफ्रैंड ।



दिया .... जैसे हम दोनों है मैं और सोनल वैसे ही आप है । बस आप जो वो वाला सोच रही हैं वो लवर्स वाली तो उसका कॉन्फॉर्मेशन तो आप दोनों को ही देनी होगी ।
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03-21-2019, 11:57 AM,
#10
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट -9 
लगता हैं आज दिया रूही को अपनी बातों में फंसा के ही रहेगी । क्या बात है । 


रूही ....हम्म्म्म। 

दिया ... वैसे ये इनके इलावा किसी से बात तक नहीं कर पाता ।
रूही ... क्यों ? 


दिया .... भैया से ही पूछ लीजिये अपने स्कूल का टॉपर है फिर भी शर्माते है बात करने में लड़कियों से । लड़की क्या ये तो लड़को से भी मिलने में शर्माते है ।


अब मुझसे रहा नहीं गया मैंने दिया को टॉपिक बदलने को बोला , फिर हम तीनो बाते करते रहे । कुछ देर बाद हम लौटे और रूही को उसके घर छोड़ा फिर हम अपने घर आ गए।


घर पहुंचते ही मैं आराम करने चला गया , अपने कमरे में और उस दिन की सारी घटनाओ को याद करके मन्द मन्द मुस्कुराते हुए सो गया।


शाम को 6 बजे के आस पास नींद खुली । नींद खुली तो देखा सोनल मेरे पास बैठी थी । मैंने सोनल से पूछा तू कब आयी ।


सोनल ... जी भैया अभी आई ।


मैं .... जगाया क्यों नहीं ।


सोनल ... बस आपको देख रही थीं आप सोते हुए देख कर सुकून मिलता है ।


मैं .... सुन तुम दोनों वर्मा सर् के यहाँ केमिस्ट्री के लिए जाती थी ना ? 


सोनल .... हाँ तो क्या हुआ ।

मैं ... कल से मत जाना ।

सोनल .... क्यों ? 

मैं ,....कल से अमित इंस्टीट्यूट में चले जाना मेरी बात हो गई हैं ।

सोनल ....( आश्चर्य से ) क्यों भैया ।

मैं ...क्योंकि मैं नहीं चाहता ।

सोनल ( उदास मन से ) ठीक है भैया ।


सोनल की उदासी में समझ सकता था .........


कहानी जारी रहेगी ....
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