mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
03-21-2019, 11:29 AM,
#51
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट 49
ये कहाँ फंसा दिया जान तुमने......
अब तो हड्डी गले में अटक गई है जिसे निकले बिना चैन नहीं मिलेगा, खैर अब इंतजार अब इंतजार-e- मोहब्बत का नहीं था अब तो मलाल प्यार का इजहार मै किस खूबसूरती से करता हूं उसका, पर यह फिलिंग कहां से लाऊं पर करना तो था ही इसीलिए मेरा पहला ट्राय….....
मैं अपने बाया पाँव से घुटने पर और दायाँ को जमीन पर टिका कर चेयर की तरह मोड़ मै परिधि के हाथ पकड़ कर.......
"आई लव यू जान क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो"
परिधि....यस ऑफ़ कोर्स जान मै तो ना जाने कब से तुम्हें चाहती हूँ।
ओय ओय,बईमान सड़क पर 100लड़कों ने बोला होगा ऐसा तूने सबका प्रपोज़ल एसेप्ट कर लिया क्या? सिम्मी ने परिधि को ऐसा बोल कर फिर मुझसे ...
" नहीं सर यह तो बहुत ओडेनरी है नहीं चलेगी"
मैं....... बड़े मायूस मनसे ठीक है दूसरा ट्राई करता हूं।
इधर परिधि मेरी हालत देख कर मन मन मुस्कुरा रही थी और शरारत भरी नजरों से देख रही थी मानो कर रही हो.... "बाबू कुछ और ट्राई करो इनका दिल इससे नहीं मानने वाला" मुझे ही सब कुछ समझ में नहीं आ रहा था किया किया जाए फिर अचानक से मुझे ख़याल आया और मैंने परिधि के दोनो है पकड़ कर बीच फ्लोर पर किया,2 कदम पीछे हटा शाहरुख सर के स्टाइल मे दोनों बाहे फैलाकर...
"दिल का क्या राज है जाने क्या कर गए
जैसे अंधेरों में तुम चांदनी भर गए
करके चांद तारों को मशहूर इतना क्यों
कमबख्त इनसे खूबसूरत है तो
"आई लव यू" तू रूह रूह येह"
परिधि ने गले लगाकर एक बार सिर्फ..."love u to Jaanu"
और उधर से अंजलि......ओओओओ ओओओओ ए परिधि की बच्ची तू तो पागल हो गई है क्या? ऐसा कोई हां बोलता है। अब तू तबतक नहीं बोलेगी जब तक हमारा इशारा ना हो। और आप मिस्टर राहुल जरा अदा से कहो ताकि हमें भी लगे यही है इजहारे- मोहब्बत।
अब क्या करूं जान कहां फंसा दिया तुमने मै एक बार अपनी जान की और देखा, इस बार अपने दोनों कान पकड़ते सॉरी का इशारा किया मैं उसके इस हरकत पर धीमे स्माइल देते हुऐ फिर से सोचने लगा और फिर मैंने परिधि के पास जाकर...
मैंने परिधि का एक हाथ पकड़ कर उसे चेयर से उठाया, धीरे से उसे बीच में लाया, अपने एक हाथ धीरे से उसके आंखों के पास से गुजारा, और परिधि ने अपने आप से बंद कर ली । मैं उसकी कान की बालियां से नीचे गर्दन पर प्यार से हाथ फिराया, इक आह के साथ परिधि ने थोड़ा गर्दन झुका लिया फिर मैंने अपना एक हाथ परिधि के कमर पे डाल कर उसे प्यार से अपनी ओर खिंचा उसने अपना पूरा भार मेरे कंधे पर छोड़कर अपने आपको बिल्कुल मुझे सौप दिया। मैं उसे अपने कंधो के दम पर थामे रहा और परिधि जमीन की ओर झुकी थी। मैं धीरे से अपने दूसरे हाथ से उससे लटो को उसके चेहरे से हटाया, परिधि के चेहरे को निहार उसी को दी सर ने उसे थामे रहा और अचानक ही मेरे होंठ परिधि के होटों की तरफ बढ़ाने लगें।
हम इतने पास आ चुके थे कि हमारी सांसें आपस में टकरा रही थी, परिधि को यह एहसास हुआ तो धीरे से उसने धीरे से आंखें खोली जैसे आगे बढ़ने की सहमति दे रही हो कि आगे बढ़ो।
हमारे होंठ एक दूसरे के इतने करीब हो चले थे, कि आपस में स्पर्श हो रहे थे। स्पर्श मात्र से ही मेरे अंदर एक भूचाल सा आ गया। मैं एकदम से परिधि के सांसों के साथ खोता ही जा रहा था इससे पहले की मै उस अप्सरस से आगे बढ़ पाटा की तभी तालियों की गड़गड़ाहट से हमारा ध्यान दूसरी तरफ खिंचा लिया।
तीनो नीलू ,सिम्मी और अंजलि ने हमें घेर रखा था,जब हमें होश आया तब मै और परिधि एक दम से झटके के साथ अलग हुए। परिधि शर्म से पानी पानी हो गई और मैं उन तीनों से नजरे नहीं मिला पाराहे थे।
नीलू.......साबश!! इसे कहते हैं असली प्रपोज़ दिल ख़ुश कर दिया आपने।
अंजलि ......अब तुझे i love You Jaan बोलना हैं तो जा कर बैठ गई टेबल पर ।
सिम्मी...." Sorry लव बर्ड"हमने इतने रोमांटिक सीन यही ख़त्म करवा दिया।तुम दोनों इतने पैसेंनेट दिख राहे थे की हमें लगा की अभी ही दोनों की सुहागरात ना हो जाए। Sorry फ्रेंड बाकी का आप कही प्राइवेट मे कंटिन्यू करना।
जहाँ एक ओर मै इन तीनों की बात पर थोड़ा सरमा रहा था और थोडा मुस्करा रहा था वहीपरिधि शर्म से पानी पानी हो गई थी।अब हम सब टेबल पर बैठ गये जहा अब नीलू ने परिधि को छेड़ना शुरू किया।
नीलू.....बता ना परिधि तुझे कैसा लगा राहुल का परफॉर्मेंस?
परिधि......तू चुप कर, जाओ मै नहीं बताती।
अब अंजलि मुझे छेड़ते हुए
अंजलि.....क्यों राहुल सर बिच मै कैसे छोड़ दिये।
मैं.....क्या अंजलि जी आप भी एक तो खुद ही कहती हैं प्रपोज़ करने और अभी ऐसा सवाल पूछ रही है, मैं तो एक्ट कर रहा था।
अंजलि ..... पर आपको देखकर तो ऐसा नहीं लगा।
मैं...... वो एक्टिंग ही क्या जो रियल ना लगे।
अंजलि...... तो फिर किस भी कर लेते जनाब रोका किसने था, एक्टिग में सही किस देखने को तो मिलती।
अब परिधि से नहीं रहा गया
परिधि .....प्लीज यार अब ऐसी बातें बंद करो शर्म आती है
अब सिम्मी बात पकड़ते हुऐ
" जानेमन तुझे कब से शर्म आने लगी तू तो बोलती थे कि मुझे किसी भी बात की परवाह नहींहोती तो आज कैसे आज तुझे शर्म आने लगी"
परिधि अब बोले तो क्या बोले मुझे इन तीनो की मुलाकात याद आ गई।की कैसे तीनो ने प्लान करके मेरी क्लास लेने आई थीं। जो सक्सेस नहीं हो पाई।पर आज इन तीनो ने हम दोनों को ही घेर रखा था।
खैर अब मैंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुये
"हम किसी और बारे मे बात कर सकते है क्या?या नहीं आप सबको यही कंटीन्यू करनी है तो आ जाइए और मुझे कुछ लीजिए"
मेरी बात सुनकर अंजलि......उफ़्फ़्फ़ लो अब जीजाजी भी नाराज हो रहे है क्यों परिधि दी
अब मैं क्या करूँ इन पर तो किसी भी बात का असर नहीं हो रहा,मैं अपनी ही उलझनो मे खोया था कि परिधि पुराने वाले अंदाज मे आते हुये
परिधि ....अब क्या महारानी हमारी पूरी रासलीला तुम्हे देखनी है या अब हम दोनों को अकेला छोड़ देगी।जैसी बता वैसी करुँगी अभी।
परिधि की बात सुन कर तीनो शांत हुये,फिर हम सब कुछ देर बाते करने के बाद तीनो चली गईं।अब उस कॉफी शॉप में बस मैं और मेरी परछाई परिधि थीं।
मैं........परी..... परी
परिधि.....हुन्नन्न!!
मैं...... आज तुम इतनी प्यारी क्यों लग रही हो?
परिधि......(इतराते हुये) हटो जब सामने होती हूँ तभी मुझसे प्यार जताते हो और जब दूर होती हूँ 
मैं..... जब दूर होती हु तो रुलाते हो यही कहना चाहती हो ना।
परिधि......नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं
मैं..... नहीं जान मैं समझता हु कल मैंने तुम्हे बहुत परेसान किया था। चाहता तो नहीं था पर परिस्थितिया कुछ ऐसी पैदा हो गई थी की......
परिधि......अभी चलो यहाँ से अब मुझे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा।
मैं....... ठीक है चलो
हम दोनो कार मे बैठे और निकल पड़े।
मैं...... परी !!कहाँ चलना हैं?
परिधि .....वही शॉपिंमाल और कहाँ
मैं......एक बात पुछना चाह रहा था खैर जाने दो चलो
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03-21-2019, 11:30 AM,
#52
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
मैं...... परी !!कहाँ चलना हैं?
परिधि .....वही शॉपिंमाल और कहाँ
मैं......एक बात पुछना चाह रहा था खैर जाने दो चलो
अपडेट 50
परिधि .....जान यूँ ना बात अधूरी छोड़ा करो,और किसी भी सवाल के लिए पूछने के लिए इजाजत लेने की क्या जरूरत हैं।अब ऐसा किया तो शोच लेना तुम मेरा रुद्र रूप देखोगें।
मैं......वाओ!! क्या तुम अभी मुझे अपना रुद्र रुप दिखा सकती हो।
एकदम से परिधि ने अपनी बालों को बिखरा ली,जीभ बहारऔर दोनों हाथों को बहार लाते हुये...(भरी आवाज मे) बता बता मुझे फिर कभी परी को परेसान करेगा? बताता क्यों नहीं।
इस तरह परी की हरकत देख कर मै हस पड़ा और मुझे हस्ता देख उसने अपने आप को ठीक किया और मेरे गाल पर एक किश करते हुये"love you Jaan" बस ऐसे ही हँसते रहा करो अच्छा लगता हैं।
परिधि की इस तरह अचानक किश करना,मैं तो बिलकुल ही फ्लैट हो गया।
"आज परी मैम लगता है मेरी जान ही निकाल देंगी,please एक बार और"

परिधि .....हटो तुम्हें तो बस चान्स चाहिए।तुम तो कोई भी मौका नहीं चूकते ,पहले बताव की क्या पूछ रहे थे?
मैं..... पहले चलो कहि जहां हम हो और वही फुरसत से बात करेंगे।
परिधि .....हटो जी !! बड़े आये अकेले मे चलने वाले,आज ज्यादा ही रोमांटिक लग रहे हो,इरादे तो नेक हैं ना?
"मुझे अच्छा नही लगा परिधि का यूँ बोलना मैं अपना मुँह बनाते हुये"
"गलती हो गई जो ऐसा बोला माफ़ करो और मॉल चलो"
परिधि.....क्या हुआ मेरा बच्चा नारज हैं।मैं तो मजाक कर रही थी plzz अब मूड ठीक करो अपना।
इतना बोल कर परिधि अपने दोनों बाहे मेरे गर्दन मै लपेटे और चेहरे को मेरे कंधे पर टिका कर बैठ गईं।
मैं.....मुझ पर से हटो परी मैं अभी ड्राइव कर रहा हूँ।
परिधि .....नही पहले मुझे एक किश चाहिए।
मैं...... तुम हटो या मैं कार से उत्तर जाऊ।
परिधि.....(थोड़े गुस्से मे)क्या मैं मज़ाक भी नही कर सकती। ठीक हैं जब मुझे तुम पर कोई हक़ ही नहीं हैं तो जो जी मे आये करो । तुम्हें क्या मैं जिऊ मरु
इतना बोल कर परी मुझसे अलग हो कर बैठ गईं, और कार मे बिलकुल शांति।मैं भी थोड़ा उखड़ा थ इसलिए परिधि को छोड़ दीया।कुछ ही छणो मे हम शोप्पिंगमाल के पास थे लेकिन हम दोनों ही शांत थे।
साथ-साथ चले माल के अंदर बिल्कुल ही शांति बनाये हुये मैं साइड से अपनी जान का एक झलक देखा बहुत ही प्यारी लग रही थी।इतना प्यारा रूप और ये शांति, मुझे अब परिधि का चुप रहना खटकने लगा। लेकिन फिर भी बनावटी गुस्से से ......
"कुछ बोलना हैं की हम कहाँ चल रहें हैं या यूँ ही आये हम यहाँ"
परिधि कुछ ना बोली केवल चुपचाप चलती रही, मुझे अब उसका चुप रहना बर्दास्त नहीं हो पा रहा था। इसलिए मै बिल्कुल उसके सामने आया और चिपक गया उससे।
मैं उसे अपनी बाहों मे भर लिया इस तरह अचानक मेरे गले लगने से वो चौक गईं।उसने पुरे माहोल का जायजा लिया और मुझे अपने से अलग करने की नाकामयाब कोसिस करती रही।
जब परिधि मुझे हटाने मे नाकाम हो गईं तो मेरे कान मे बोली.... "plzz जान छोड़ो क्या कर रहे हो पब्लिक प्लेस हैं सब देख रहे हैं"
मैं...... नहीं मुझे किसी कि परवाह नही यदि किसी को परेसानी है तो अपना मुँह फेर कर चला जाये और मज़ा आता हैं तो देखें।
परिधि .....क्यों सता रहे हो,मुझे बहुत शर्म आ रही हैं,"हटो ना जान plezz"
मैं..... नहीं पहले तुम हँसो फिर मैं हट जाता हूँ।
परिधि.....हँसते हुये, छोडो बाबा देखों मैं हँस रही हूँ।
मैं उससे अलग हुआ तो परिधि हँसते हुये .....
"बहुत बदमाश हो पहले जली-कटि सुना कर घाव देते हों फिर मरहम भी लगते हों"
मैं..... तुम इस क़दर बोली की मुझे बुरा लग गया,अब क्या मैं नाराज़ भी नही हो सकता।
परिधि......हाय मेरी जान सदके जावा इस नराजगी पर।
परिधि की ऐसी बातों पर मै हसने लगा और अब चले हम पेट पूजा करने उससे पहले मैंने अपना फोन ऑन किया और मैंने अलिशा को मैसेज कर दिया क़ि.....
"Every things is fine मैं शाम तक लौट रहा हूँ"
हम रेस्तरां पहुँचे खाने का ऑर्डर किया और एक कोने वाली सीट पर अपना आसन जमा लिया।
परिधि......अब बता दिजिये सरकार की क्या पूछनेवाले थे।
मैं...... नही,मुझे तुम्हारे साथ कोई भी बॉडीगार्ड नजर नही आ रहें वाही जानना था।
परिधि ......मुझे अब अपनी पर्सनल लाइफ भी जीनी थी इसलिये उनकी छुट्टी।
मैं.....और पुछ सकता हूँ की कैसी पर्सनल लाइफ।
परिधि .....उफ्फफ्फो,अब मै तुम्हारे साथ रहूँ और क्या क्या हुआ हमारे बीच उसे अपने घर वालों को डिटेल स्टोरी सुनने के लिए बॉडीगार्ड रखती अपने पास।
मैं...…लेकिन अंकल -ऑन्टी को सब पता चल गया तो?
परिधि .....उसकी चिंता मत करो आज ही बता दुँगी घर मे,अब इस पर कोई चर्चा नहीplezz चेंज टॉपिक।
मैं.....ok बाबा पर ये तो बताओ मेरे बारे मे जानने के बाद उनका रिएक्शन क्या रहेगा।
परिधि ....फ्यूचर का सोच कर तुम प्रेसेंट में क्यों परेसान हो रहे हो जो भी होगा डिटेल तुम्हें मिल जायेगी।
मैं...
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03-21-2019, 11:30 AM, (This post was last modified: 03-21-2019, 11:30 AM by sexstories.)
#53
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
उस समय मैंने तुम्हें पहले बार देखा था और ना जाने क्यों तुम मुझे बहुत प्यारे लगे फिर तुमसे मिली, बातें कि तुम्हारा हसना, रुठना, मनाना, दिल में सभी के लिए दया और जब तुम मुझे अपनी बाहों में लेते तो मैं खुद को बहुत महफूज़ समझती"

अपडेट 51
"मुझे तो ये कभी एहसास भी ना हुआ कि मैं तुम पर कब मर मिटी, तुमसे मिलने से पहले मैं केवल हंसती थी पर तुम्हारे लिए तो रोना भी उस हंसी से कहीं सुकून वाला है, ""आई लव यू जान लव यू"
मैं..... क्या तुम सूखा सूखा आई लव यू बोल रही हो, कुछ तो मीठा खिलाओ।
परिधि ......बस इतना ही रूको,वेटर को बुलाने के लिए मुड़ी।
मैं....... रुको पाग, मुझे दूसरी स्वीट्स चाहिए।
परिधि....... अब यह दूसरी कौन सी स्वीट्स हैं।
मैं........ वही जो कैफे में मिलते मिलते रह गई
परिधि...... जाओ तुम्हें तो बस।
मैं .......बस क्या जान।
परिधि........ बहुत शैतान हो हमेशा मुझे छेड़ते हुए रहते हो,अब चलो कुछ शॉपिंग करनी है।
मैं ......और शॉपिंग के बाद।
परिधि...... बाद की बाद में,अभी चलो तुम समझ नहीं सकते कि अभी मैं कितनी ओड फील कर रही हूं इस लहंगे में।
मैं....... तो तुम यह क्यों पहन कर चली आई?
परिधि....... इसलिए कि तुम्हारी पसंद का केवल यही थी।अब आज 10-12 कपड़े ले लो तो मैं कुछ दिनों के लिए फुर्सत हो जाऊ।
" दोनों चले शॉपिंग पर ऊपरवाला एक दिन का कारावास की सजा दे दे पर किसी लड़की के साथ शॉपिंग के लिए ना भेजें, मेरा तो भेजा फ्राई हो गया"।
"हमने तकरीबन 4:00 बजे तक शॉपिंग की परिधि में ना केवल अपने लिए पर मेरे लिए भी पता नहीं क्या-क्या लिया, मैंने बिल पे किया और पास ही में परिधि से आगे का प्लान पूछाने लगा पर इससे पहले परिधि को कुछ बोलता वहां फिर से अलार्म बजा"
मैं....... जान जब भी मैं यहां आता हूं यह अलार्म क्यों बजने लगता है?
परिधि.....(बहुत हड़बड़ी में) जान यहां से चलते हैं, मुझे कुछ काम याद आ गया।
मैं....... क्या हुआ ?सब ठीक तो है परी इतनी परेशान क्यों हो।
परिधि.....नहि जान मुझे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा अब मेरा दम घुट रहा हैं।
मैं..... ठीक हैं परी तुम चलो बस मैं अभी आया।
मैं चला उस आदमी कि ओर जो मेरी तरह कार जीता था, सोचा बधाई देता चलू।और उसके पास पहुँच कर......कांग्रेट्स ब्रो आपने तो कार जीता हैं आज।
आदमी......थैंक्स ब्रो पर प्राइज मे कार कब से देने लगे,यहाँ तो 10000 के अंदर अपनी मन पसन्द कोई भी सामान खरीद सकते हैं।
"फिर परिधि बोल पड़ी plzz चलो हो गया हो तो मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा,लेकिन मेरा दिमाग तो इस बात मे लग रहा था कि आखिर ये कार और 10000 का क्या चक्कर हैं।
मैं बोला....." परी तुम कार मे वेट करो मैं अभी आया"
परिधि......plzz चलो ना मुझे भी मीठा खाने का मन कर रहा हैं।
मैं...... क्या जान बस 2 मिनिट नहीं रुक सकती मेरे लिए plzz।
"अबतक वो मैनेजर भी आ गया और हुआ कार जितने के बाद का खुलासा की कैसे प्लान कर के उस नंबर तक पहुँचाया,और जहां 10000 विनिंग अमाउंट था कैसे उसे चौहान इंफ्लुएंस के कारण मुझे 1 कार प्राइज मे दे दी गईं।"
"मुझे बहुत चोट पहुँची,कितनी भी बड़ी बात हो सब चल सकती थी पर इस तरह अपने पैसे के इंफ्लुएंस से मुझे कार देना मुझे छोटा बना रहा था।मेरा आत्मा सम्मान चोटिल हुईं थीं।मेरे दिल मे अब विकार पैदा हो रहा था।"
परिधि मेरे कंधे पर हाथ रख कर...... चलो जान मै तुम्हें सब समझती हूँ।
मैने अपने कंधे से हाथ झटका, मोबाइल को वहीँ फेंक दिया और.....
"(गुस्से मे) तुमने आज मेरे आत्म सम्मान को ठेस पहुचाई हैं,plezz मुझे कुछ आर्गुमेंट नहीं चाहिए।बस वहाँ से इतना बोल कर चल दिया अपने घर को।पीछे से बहुत आवाजे आती रही,पर अब मेरे कान बंद हो चले थे परिधि के शब्द सुनने के लिए।"
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03-21-2019, 11:30 AM,
#54
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
बस इतना बोला और वापस चल दिया अपने घर को। पीछे से बहुत आवाजें आती रही पर मेरे कान अब बंद हो चला था परिधि के शब्द सुनने के लिये।
अपडेट 52
मुझे परिधि की हर शरारत, हर नादानी मंजूर थी पर मुझे कभी ये गवारा नहीं की यूँ झूठ बोलकर अपने पापा के पैसे से मुझे इस तरह से गिफ्ट देण। मुझे तो ऐसा लग रहा था की मुझे अब से पलने की जिम्मेदारी परिधि ने उठा ली है जो कंही न कंही मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा रही थी।

मैन बहुत गुस्से से दिल्ली तो चंडीगढ़ रवाना हुआ। परिधि की ऐसी हरकत से जंहा मैं स्तब्ध था वंही घर जब पहुंचा तो मेरे घर मैं किसी शादी सा माहौल था। लोग आ रहे थे और हमें बधाइयां दे कर जा रहे थे। पता चला की आज पुरे दिन लोगो का आना जाना लगा रहा हमरे घर पर। अब चूँकि इतनी बड़ी ख़ुशी थी तो घर पर मेहमान नवाजी में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे सब।

घर लौट कर पूरा समय लोगों को रिसीव करने, थैंक्स बोलने और फ्यूचर प्लान बताने मैं गुजर गया। रात को मुझे नींद कंहा आने वाली थी बस इसी ख्याल से मैंने नींद की टेबलेट ली और सो गया।

सुबह रूटीन के हिसाब से नींद खुली 4 a.m और पहुँच गया मैं ग्राउंड लेकिन मेरा मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। ग्राउंड पर मैं और ऋषभ मिले। ऋषभ ने मुझे बधाइयां दी फिर मैंने ऋषभ के रिजल्ट के बारे मैं पूछ, उसे भी अच्छे मार्क्स मिले थे और उसे उम्मीद थी की अपने स्कूल मैं अंडर १०कि पोजीशन में होगा।

हम चले अपने रूटीन एक्सरसाइज किया पर मन तो कंही और ही था । करीब ५।३० बजे तक हमारे पास रूही भी पहुँच गयी। उसने मुझे बधाई दी और ऋषभ से उसके भी रिजल्ट के बारे मैं पूछा। तभी बीच मैं मैं टोकते हुए।।।
"रूही मेरा ही दोस्त है"

रुही।।।।। हाँ तुम्हारा ही दोस्त है और मैं भी,पर दोस्तों पार्टी तो बनती है

ऋषभ।।।।।।। कब और कंहा चाहिए आप इन्फॉर्म कर देना मेरी तरफ से डन।

रुही।।।।।। मैं राहुल को बता दूँगी, ठीक बॉय

इतना बोलकर रूही चली गयी तभी ऋषभ ने कल के बारे में पूछ्ने लगा
में।।।।।। यार कल नीरज भैया के पास था दिल्ली शाम को लौटा हूँ।

ऋषभ।।।।।। भाई ठीक किया जो तू कल अड्डे पर नहीं था

में।।।।। क्यों क्या हुआ?

ऋषभ।।।।।। कुछ नहीं भाई वो तमन्ना वाले ने कुछ लोग भेजे थे हमें पिटवाने के लिये, यार उसका रेस्टोरेंट की बहुत बदनामी हुए न परसो उसी की खुन्नस निकलने।

में।।।।।। यार लगता है जयादा हो गया है चल आज चल कर कोम्प्रोमाईज़ कर लेते है नहीं तो फालतू के पचड़े मैं पड़ेंगे।

ऋषभ।।।।।। हाँ यार मैं भी यही सोच रहा था। ठीक है तो चलते है ४p.mके आस-पास

में।।।।। ओके बोल, और ऋषभ वंहा से चला गया। में वंही ग्राउंड में सीढ़ियों पर बैठ गया और कल के बारे में सोचने लाग। हाँ थोड़ा मायूस जरूर था पर दिल तो दिल है जुदाई का भी गम था, बहुत प्यार जो करता हूँ मैं अपनी परिधि से।

कुछ देर में यूँ ही चारो तरफ देखता रहा और सोचता रहा, की रूही मेरे बगल में आकर बैठी और मेरे कंधे पर हाँथ रखते हुए।।।

रुही।।।।।।।।। लगता है फिर आज तुम मेरे ख्यालों मैं खोए हो क्या?

न चाहते हुए भी मैं झूठी हँसी हँसते हुए

"अब तुमने तो मन कर दिया मेरा प्रपोएसल, पर तुम जैसी हसीना को कोई कैसे न अपना बनाना चाहि"

रुही।।।।। ओह हो! । हम तो यूँ ही मना करते है पर ये तो तुम्हारा काम है हमें न से हाँ मैं इक़रार करवाना।

में।।।।।। ओह अब बर्दास्त नहीं होगा मेरे अरमान मेरे काबू मैं नहीं है अब मैं फिर से 

रुही।।।।।।। रहने दे रहने दे नौटंकी सब चेहरे पर लिखा है, अब कितनी नौटंकी करेगा बात क्या है जो उदास हो।

में।।।।।। कुछ भी तो नहीं बस यूँ ही बीती बातों को याद कर रहा था।

रुही।।।।। बता न कौन है जिसके बारे मैं सोच रहा है।

में।।।।। तुम ही मेरी जानेमन जिसके ख्यालों में मैं डूबा था।

रुही।।।।।। चल चल हवा आने दे, तुम्हें मालूम है लड़कियों की क्या खास बात होती है उसे पता होता है की किसकी नजर कंहा (अपने क्लीवेज की तरफ इशारा करते हुए) और कैसी है। इसलिए झूट छोड और सच बतओ।

में।।।।।।। हाँ बात तो तुम्हारी सही है की मैं तुम्हारे बारे में नहीं सोच रहा था बस यूँ ही।।।।।।। अब चलो

रुही।।।।।। कहाँ

में।।।।।।। क्यों क्या हुआ विश्वास नहीं है क्य, चलो तो पह्ले

रुहि ने मुझे आश्चर्य से देखते हुए चल दी मेरे साथ्। हम दोनों ग्राउंड के बाहर आये और मैं अपनी बाइक लेकर उसके सामने खड़ी की। बाइक देख कर रूही।।।।।।

रुही।।।।। क्या बाइक से हम जाएंगे

में।।।।।। (चिढ़ते हुए) यार तुम्हें हो क्या गया है हर बात पर टोक रही हो।[url=/>
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03-21-2019, 11:31 AM,
#55
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
रुही।।।।। क्या बाइक से हम जाएंगे

में।।।।।। (चिढ़ते हुए) यार तुम्हें हो क्या गया है हर बात पर टोक रही हो।
अपडेट 53
रुही।।।।।। ठीक है ठीक है पर ब्रेक ठीक से लगाना मज़े मत लेने लगना।

में।।।।।।।। लो महारानी ये चाबी लो तुम ही चलाओ ब्रेक भी लगाना और मेरे मज़े लेना। 

रुही।।।।।।।। राहुल हुआ क्या है आज इतने भन्नाये क्यों हो बताओ तो हो सकता है मैं कुछ हल ढूंढ़ने मैं मदद करू।

में।।।।।।। सॉरी यार पता नहीं हो क्या गया है मैं इतना चिरचिरा क्यों हो गया हू, पर तुम चलो गी भि
रुही।।।।। चलो

फिर मैं रूही के साथ उसी के घर की तरफ चलने लगा

रुही।।।।।। क्या राहुल तुम तो घर की तरफ जा रहे हो।

में।।।।।। हाँ इतनी सुबह तुम्हें क्या लगा मैं किसी रेस्टूरेंट में ले कर जाऊंगा

रुही।।।।।।। बुद्धू, मैं अपनी स्कूटी पार्किंग में ही छोर आई हूँ अब तुम मुझे घर ड्राप कर डोज तो मैं स्कूटी कैसे लौंगइ। 

में।।।।।। ओह्ह्ह! ये आज कल क्या हो रहा है।

रुही।।।।।। चलो कोई बात नही, मुझे पहले चाय पिलाओ फिर चलते है वापस ग्राउंड।

फिर हम दोनों ने चाय पि और वापस ग्राउंड लौट। ग्राउंड पहुँच कर रुही।।।।

"देखो अगर तुम चाहो तो शेयर कर सकते हो की आखिर बात क्या है या फिर कम से कम कंसन्ट्रेट करो ताकि तुम्हारा मंन एब्सेंस न रहे"

मैन रूही की बात को टालते हुए।।।।
"रूही मुझे लगता है तुम सही कहती हो बात यूँ तो कुछ खास नहीं है पर मुझे लगता है की खुद पर कंट्रोल करना सीखना पडेगा। थैंक्स फॉर बेस्ट सजेशन"।

फिर रूही वंहा से अपने घर और मैं अपने। अबतक ९a.m हो चुके थे। वाकई दिल किसी काम मैं नहीं लग रहा था, घर पर इस समय कोई नहीं था मिनल स्कूल के लिए तैयार हो रही थी और अलीशा अबतक कॉलेज जा चुकी थी। मैं भी चला गया फ्रेश होणे।

मैन फ्रेश होकर अपने रूम में ही बैठा बस परिधि के बारे मैं सोच रहा था। दिल तो बहुत कर रहा था उस से बात करने का पर अन्तर आत्मा इस बात की गावहि नहीं दे रहा था।

इतने में मिनल मेरे पास आती दिखी और आते ही।।।।

"भाइया मैं देख रही हूँ जब से आप दिल्ली से आये हो बड़े खोए खोए रहते हो आखिर बात क्या है"।

में।।।।।। (झुंझलाते हुए) तू सुबह सुबह मेरा दिमाग क्यों खा रही है काम बता न।

मिनल।।।।।। क्या भैया मुझे अच्छा नहीं लगता आप ऐसे अकेले रहते हो ऊपर से कुछ बोलो तो डांट देते हो। मैं देख रही हूँ कुछ दिनों से आपका व्यवहार बहुत बदला बदला है। लगता है उम्र बढ़ते बढ़ते हमारे लिए आप का प्यार घाटता जा रहा है।

में।।।।। सॉरी छोटी मैं जरा आवेश मैं था प्लीज अब तू ये इमोशनल अत्याचार बंद कर।

मिनल।।।। ठीक है, प्रिंसिपल सर का फ़ोन आया था आपको स्कूल बुलाया है।

में।।।। क्यों बुलाया है मुझे?

मिनल।।।।। मुझे क्या पता, तुम्हारा नम्बर नहीं लग रहा था तो मुझे फ़ोन किये थे।

में।।।।। ठीक है तू चल मैं आता हूं।

मिनल।।।।।। भैया एक बात पूछ सकती हूँ

में।।।।।। पूछ न तू कब से इतनी फॉर्मल हो गयी

मिनल।।।। भैया आप ये उदास रहते हो मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता। मेरा मन रोंने को करता है। आप plzz ऐसे मत रहा करो। कई दिन हो गए आप तो अब बैठ कर बात भी नहीं करते। ऐसे मत रहो भैया अच्छा नहीं लगता है।

मुझे बहुत अफ़सोस हुआ मिनल की इन बातों का और साथ में बुरा भी लग रहा था। मैंने अपनी गुड़िया के सर पर प्यार से हाँथ फेरते हुए।।।।

"तु तो बहुत सायानी हो गयी है चल चल कर नास्ता करते है"

फिर मैं और मिनल नास्ता करने बैठ जाते है। मिनल को मैं अपने हांथों से खिला रहा था की उसके आँखों में आंसू छलक आते है।

में।।।। अब तुझे क्या हुआ रो क्यों रही है।

मिनल।।।।।। बस आप इतने प्यार से खिला रहे है की दिल भर गया। आज आप पूरा दिन मेरे साथ ही रहेंगे मैं कुछ नहीं सुन ने वली।

में।।।।। ठीक है, अब ये तू रोने बंद कर और चुपचाप नास्ता कर।
Reply
03-21-2019, 11:31 AM,
#56
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
मिनल।।।।।। बस आप इतने प्यार से खिला रहे है की दिल भर गया। आज आप पूरा दिन मेरे साथ ही रहेंगे मैं कुछ नहीं सुन ने वली।

में।।।।। ठीक है, अब ये तू रोने बंद कर और चुपचाप नास्ता कर।
अपडेट 54
नास्ते के बद मैं घर वाली कार लेकर सोनल के घर पहुंच। सोनल के घर पर उसकी माँ मिली वो मुझे बधाइयां देने लगी। सोनल को उसके घर से लेकर हम स्कूल पहुंचे।

स्कूल पहुँच कर मैंने प्रिंसिपल सर से आशीर्वाद लिया और as it is, सारा स्कूल मुझ से मिलने और बधाइयां देने पहुँच गया। मिनल को ड्राप कर मैं पहले ऋषभ के घर पहुंच, बेल बजायी गेट आंटी ने खोळ।

कउनती।।।।।। अरे बेटा तुम इस समय आओ आओ अंदर आओ

मैन हॉल में आकर बैठ गया। हॉल मैं सैनी और उसकी कुछ फ्रेंड्स भी बैठी थी जिसे मैं नहीं जनता था। सैनी ने मुझे एक बार देखा और इग्नोर कर के बातें करती रही अपने दोस्तों के साथ्।

मैन कुछ देर इंतज़ार करने के बद।।।।। "ऑन्टी कब तक आएगा ऋषभ"

ऑन्टी।।।।।। बेटा फ़ोन कर ले न अभी ही निकला है पता नहीं कब तक आएग।

में।।।।।। आंटी कॉल करो न मेरे पास मोबाइल नहीं है।

ऑन्टी।।।।। सैनी बेटा ऋषभ को फ़ोन लगा कर राहुल की बात करवा दे।

सैनी ने अपने माँ को ok बोला और मेरे तरफ देखते हुए।।।। कॉल लगा दिया है बात कर लो।

मैने ऋषभ से बात की पूछ्ने पर पता चला की कंही बाहर है अभी १०मिन मैं आ जाएगा। कॉल कट कर के मैंने फ़ोन सैनी को वापस किया।

सैनी मेरा हाँथ पाकड कर एक साइड मैं ले जाते हुए..... क्या हुआ राहुल तुम्हें कंहा खोए हो

सैनी का ये पूछना मुझे बहुत अजीब लगा। मैं......"मुझे छोड तुझे क्या हुआ है जो आज ये तेरा बदला बदला रूप देखने मिल रहा है"।

सैनी।।।।। नहीं यार जब तू अच्छे मुड़ मैं होता है तो तुझे छेड़ने मैं मज़ा आता है पर ये आज हुआ क्या है इतना मुर्झाया क्यों है।

में।।।।। क्या तू भी फालतू की बकवास लेकर बैठ गयी ठीक ही तो हूँ में। क्या हुआ है मुझे

सैनी।।।।। जो भी बोल पर तुझे किसी बात का गम तो खाये जा रहा है।

यार ये हो क्या रहा है सुबह से ३ लोग टोक चुके है क्या सही में मेरा चेहरा आज बयां कर रहा है की मैं उदास हूँ। हाँ बात तो सही है पर उदास तो पहले भी था पर आज तक तो किसी ने नहीं टोंका। परिधि क्यों किया तुम ने ऐसा मैं बस तुम्हें पाकर ही पूरा जंहा पा लेता फिर ये क्यों किया?

मैन सोच ही रहा था की सैनी ने एक बार और मेरा हाँथ पकड़ा और अपनी फ्रेंड्स के बीच मैं बिठा दिया और सबको इंडीकेट करते हुए।।।।

"इनसे मिलो ये है चंडीगढ़ की जान। राहुल सिन्हा जिन्होंने बैक टू बैक १०th और १२th मैं टॉप रैंकिंग हासिल की है"

सभी लड़कियों ने एक एक करके बधाई दी तबतक ऋषभ भी आ गया। मैं फिर सब से पीछे छुरा कर पहुंचा ऋषभ के पास

ऋषभ।।।।। क्या हुआ भाई तू इतनी समय क्या बात है।

में।।।।।।।। कुछ नहीं यार, बस चल थोड़ा मैं अपना सिम निकलवा लू फिर एक मोबाइल लेकर चलेंगे अपना मैटर शार्ट आउट करने।

दोनो दोस्त फिर निकले वंहा से, पहले अपना सिम निकलवाया फिर जब हैंडसेट लेने गया तो रुक गया। ख्याल आया की यदि मोबाइल मेरे पास हुआ तो हो सकता है की दिल के हांथों मजबूर होकर परिधि को फ़ोन न कर दूँ बस ये सोचते हुए मैंने हैंडसेट नहीं लिया। जबकि बार बार ऋषभ मुझे फोर्स करता रहा फ़ोन लेने के लिये।

खैर मुझे अब तमन्ना का मैटर शार्ट आउट करके मिनल को लेने उसके स्कूल भी जाना था इसलिए ऋषभ को बोलकर कुनल और असीस को भी वंही बुला लिया। अब हम सब एक बार फिर इकठ्ठा हुए तमन्ना में। ओनर सामने ही था।

में।।।।। अंकल आप बाहर आएंगे आप से कुछ बात करनी हैं

ओनर।।।।।। चलो मेरे केबिन में।

हम सब फिर चले ओनर के पीछे उसके साथ केबिन में।

ओनर।।।।।। हाँ तो बताओ क्या बात है।

में।।।।।।। देखिये अंकल बात आगे बढ़ने से अब कोई फायदा नहीं है। इसलिए पुरानी बातों को भूलते हुए एक दूसरे को भूल जाते है।

ओनर।।।।।। क्या भूल जाने के लिए कह रहे हो मीडिया के सामने जो मेरे रस्टूरेंट की रेपो ख़राब हुए है उसे भूल जाने को बोल रहे हो। तुम सोच भी नहीं सकते की मैं क्या हाल करने वाला हूँ तुम लोगों का।

में।।।।।।।। देखिये अंकल जंहा तक कुछ बिगार्ने की बात है तो आप कुछ न हमारा उखाड़ पाएँगे। अबतक तो हमने बहुत प्यार से बदला लिया है यदि अपनी पर उत्तर आये तो भगवान मालिक है आपका।
वइसे अगर देखा जाय तो काम बड़ी गलती नहीं थी आपकी। जिस तरह से आपने इन्हे चड्डी में कर दिया उसके मुकाबले तो कुछ भी नहीन । वैसे भी हम सब स्टूडेंट है। फिर भी आपको यदि लगता है की हमने गलती की है तो हमें मांफ कीजिये और मैटर क्लोज कीजिये।
ओनर।।।।। सायद तुम ठीक कहते हो मुझे भी अब इस बात को भूल जाना चहिये। ओके बच्चों अच्छा लगा मिलकर। आते रहना अच्छा लगेगा।

चारो निकले वंहा से फिर अपने अपने रास्ते। मैं मिनल को लेने उसके स्कूल पहुंच। आज पूरा दिन मैं मिनल और सोनल के साथ रह। थोड़ा अच्छा मेहसूस करता था मैं जब भी मिनल के पास होता।

परिधि के बिना अब दिन कैसे बीत रहे थे मेरा दिल ही जनता है पर एक बात तो ये अच्छी हुए की मैं धीरे धीरे अपनी उदासी छिपाने और झूठी हँसी हॅसने मैं भी माहिर होता चला जा रहा था।

बिना किसी कांटेक्ट के ५ दिन बीत चुके थे और समय के साथ परिधि के प्रति मेरा प्यार और भी गहरा होता जा रहा था मैं कैसे उसके बिना जी रहा था मेरा दिल ही जानता है और परिधि की हालत की तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था। मुझे कभी कभी ऐसा लगता की परिधि अभी मेरे पास आएगी और मेरे गले लग कर चूमने लगेगी।

बस कुछ यदि था मेरे और परिधि के बीच मैं तो वो बस मेरा ईगो था मुझे मेरी जान से मिलने से रोक रहा था। मैं अब रोज रात को नींद की टेबलेट लेने लगा था क्योंकि दिन तो किसी तरह गुजर ही जाती थी पर रात नहीं कटती। 

तबलेट का असर कुछ ऐसा था की आज कल कोई रूटीन फॉलो नहीं कर पा रहा था। ८a.m नींद ही खुलतीं थी। 

६ दिन जुदाई के काटने के बाद ऐसी ही एक सुबह जब मैं देर तक सोया रहा यही कोई ९ बजे तक्।।।।।।।।।।।।
Reply
03-21-2019, 11:31 AM,
#57
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
६ दिन जुदाई के काटने के बाद ऐसी ही एक सुबह जब मैं देर तक सोया रहा यही कोई ९ बजे तक्।।।।।।।।।।।।
मेरे सर पर किसी ने बड़े प्यार से हाँथ फेरा मैंने धीरे से आँख खोला ऐसा लगा परिधि सर के पास बैठी थी।
"जान तुमने ऐसा क्यों किया कितना तड़प रहा हूँ में, मैं अंदर ही अंदर मर रहा हूँ प्लीज मैं नाराज हूँ तो
क्या हुआ, तुम तो बात कर सकती थी ना"। 
"भइयां, भैया आँखें खोलो" दरवाजे से मिनल आवाजें लगा रही थी। मैंने जैसे ही अपनी आँखें खोली मैं झटके से
बिस्तर से नीचे खड़ा हो गया",
मिनल।।।।।।। क्या भैया ऐसे चोंक क्यों रहे हो।
मैं।।।।। परिधि यंहा क्या कर रही है और कब आयी?
मिनल।।।। फ्रेश हो कर हॉल मैं आओ सब पता चल जाएगा
इतना बोलकर मिनल और परिधि मुस्कुराते हुए निकल गयी मेरे कमरे से और मैं चला फ्रेश होने के लिये।
आज मेरे दिल खुश हो गया। बिरह की तपती आग के बाद आज जैसे सावन की बरसात का आनंद मिला हो। जैसे तपती रेत में कई दिन चलने के बाद झरने का आनंद मिला हो। मैं खुश तो बहुत था अपनी जान को देखने के बाद पर नराजगी भी कम न थी।
परिधि की हरकत मुझे उसके प्रति मेरा प्यार जताने से रोक रही थी। मैं तैयार होकर हॉल मैं आया वंहा पर सब बैठे थे। मैं बिलकुल नार्मल होकर।।।।।
में।।।। परिधि कब आयी?
पापा।।।।।। ये आज सुबह ही पहुंची है मोहित जी के साथ और अगले ३ साल यंही रहने वाली है पता नहीं अब ये क्या नाटक है और ये लड़की अब कौन सा नया गुल खिलने वाली है।
मैं।।। पापा मोहित अंकल कंहा है और ये तीन साल मैं कुछ समझा नहीं
पापा।।।।। मोहित जी तो वापस लौट गए और रही बात परिधि बेटी की तो तुझे पता चल जायेगी तब तक सस्पेंस मैं तू रह।
मैं।।।।। कोई बात नहीं यदि न बताना हो तो मैं पूछ्ने वाला भी नहीं और हाँ बड़ा शुभ कदम होता है परिधि का
देखिये गा कंही कोई आलीशान बंगला न प्राइज में आपको मिल जाय।
एक वयंग जो मैंने परिधि के लिए कहा जिसे उसे ये अह्सास हो की भूला नहीं मैं कुछ भी वो तो घर के लोग है इसलिए
मै नोर्मल्ली बातें कर रहा हूं।
मिनल।।।।।। भैया आज कंही घुमने चलो न देखो परिधि भी आई है 
मैं।।।।। नहीं छोटी मुझे आज जरा काम है मैं नहीं जा सकता
अलिसा।।।।। चल बेटू कितना भाव खाता है मैं सोच रही थी की मैं भी तुम लोगो के साथ चल दू। आज मेरा भी मूढ़ हो रहा है कंही घुमने क
मैं।।।। कभी और चलो न दीदी आज मन नहीं है कंही जाने का
अलिसा।।।।।।।। ठीक है बेटू मत ले जा वैसे भी तुम्हें हम लोगों से क्या मतलब।
मैं।।।।।। ये ठीक नहीं है दी, तुमहारा ये इमोशनली ब्लैकमैल, अच्छा ठीक है बता देना कब चलना है
फिर हम सब नास्ता करने लगे पर रह रह कर मेरे ध्यान परिधि पर ही जा रही थी। बता नहीं सकता कितना सुकून मिला मैं आज। मैं खाते हुए चुपके से परिधि को ही देख रहा था और जब हमारी नजरें मिलती तो मैं ऐसा रियेक्ट करता मानो मेरी चोरी पकड़ी गयी हो और परिधि एक हलकी सी स्माइल देती।
मै जल्दी से नास्ता कर के अपने कमरे में चला गया। पता नहीं कुछ देर और होता तो क्या हो जाता। मन में ग़ुस्सा और दिल में बेसुमार प्यार अजिब कस्मकस में फंसा था। एक तरफ दिल मैं इस बात की ख़ुशी थी की वो मेरे प्यार की वजह से मेरे घर तक आई तो दूसरी तरफ मन ये कह रहा था की नहीं बहुत गलत किया परिधि ने। मै परिधि को तो सजा दे ही रहा था पर साथ साथ खुद को भी उसी आग से जला रहा था। मैं बस विडंबनाओ के बीच कबसे बिस्तार पर लेटा था की परिधि मेरे रूम मैं आई हुई जान प्ल्ज़ अब मांफ कर दो मुझे।
पल्ज़ प्ल्ज़ प्लज़।।।
क्या बताऊँ बहुत प्यारी लग रही थी। उसका वो मासूम चेहरा और यूँ मासुमियत के साथ बोलना उफ्फ्फफ्फ्फ़! मेरे तो कलेजे पर जैसे चाकू चल रहे हो परिधि के उन अल्फाजों का और मैं कट ते हुए चला जा रहा हूं। मैं थोड़ा खुद को नोर्मल करते हुए और बेरुख़ी के साथ
मैं।।।।।। सुनो मैं तुम से मांफी माँगता हूँ प्ल्ज़ यंहा से जाओ मैं तुमसे अभी कोई बात।।।।।।।।।। इतना ही बोल पाया था की परिधि मेरे बिस्तर पर मेरे ऊपर गिर जाती है और मेरे चेहरे को अपने हांथो मैं लेकर बेहतास
चूमने लगती है। उसका मेरे प्रति यूँ प्यार जताना साफ कर रहा था की वो भी मेरे बिना कितना तड़पी है पिछले कुछ दिनो
मैं। फिर भी मैं अपनी भावनाओ को काबू मैं करते हुए परिधि से २ बार बोला "हट जाओ हट जाओ"।
लेकिन जैसे परिधि को मेरी कोई भी बात सुनाइ न दे रही हो वो लगातार मेरे चेहरे को चूमे जा रही थी। जब मेरी बातो
का उसपर कोई असर न हुआ तो मैंने उसे झटक दिया औऱ।।।।।।।।
"अब और तुम्हारी नाटक बिलकुल भी नहीं चहिये। अरे तुम क्या किसी से प्यार करोगी जब की तुम्हें ये भी पता नहीं की प्यार का बदले प्यार देते है भिख नहीं"।
इतना बोल मैं निकल गया घर से। पीछे परिधि का क्या रिएक्शन था वो भी न देख। मैं चाह कर भी नहीं भुला पा
रहा था की कैसे मुझे परिधि ने कार दिया। घर से तो निकल आया पर १० बजे सुबह कंहा जाऊं। घूमते घूमते मैं
किरन के घर पहुँच गया।
किरन।।।।।।आओ राहुल अच्छा हुआ मिल गै। मैं तो खुद तुम्हें की दिनों से ट्राई कर रही थी फ़ोन करने का पता नहीं 
तुम्हारा फ़ोन हमेसा ऑफ ही आ रहा था।
मैं।।।।।। तो सिलेक्शन हो गया मैडम का अब तो आप इंस्पेक्टर किरन हो गयी यही ना।
किरन।।।।। इकजीतली, और इसका श्रेय तुम्हें भी जाता है। तुम न होते तो सायद मैं फिजिकल टेस्ट मैं फ़ैल हो जाती।
मैं।।।।।। मैडम जी खाली थैंक्स से काम नहीं चलने वाला है आप को तो इनाम देनि होगी।
किरन।।।।। जो तुम चाहो
मैं।।।। ठीक है जब आप ट्रेनिंग से लौट कर ज्वाइन कर लेंगी और सैलरी पाने लगेंगी तब मैं मांग लूंगा तबतक उधर रह।
किरन।।।।। ठीक है पर यूँ ही बाहर खड़े रहोगे या अंदर भी आओगे।
मैं।।।।।।। नहीं मैं अब चलता हू। बस आप के ही बारे में जान ने आया था वो तो हो गया।
इतने में रूही।।।।। अरे ऐसे कैसे हो गया साब इस तरह गेट पर खड़े होकर बातें की और चले गए ऐसा थोड़े ही ना होता है।
मैं।।।।। जाने दो काम है कुछ, वो तो इस तरफ से गुजर रहा था तो सोचा की किरन से मिलता चलूं।
रुही।।।। अरे वाह! ऐसे कैसे केवल किरन से मिलकर चले गए पहले तो यंहा से जाना नहीं चाहते थे और आज गेट से ही चले ।
मैं।।।।।। तुम भी न कहाँ की बात कहाँ ले आती हो सच में काम है मैं बाद मैं आता हूँ न।
रुही।।।।।। ठीक है पर मिलना जरूर
मै ठीक है बोलकर निकला वंहा से। मुझे भी पता नही, मैं क्यों गया किरन के घर खैर किसी तरह निकल तो आया।
जब प्यार आपका आपके आस-पास हो तो फिर कहाँ आप को कहीं और दिल लग सकता है। और वही हो रहा था मेरे साथ में था
तो घर के बाहर पर दिल घर में ही छोड आया था।
किरन के घर से निकल तो आया पर अब भी मैं अपने अहंकार मैं घर वापस नहीं जाना चाह रहा था। बस इसी ख्याल से पहूंचा अब मैं ऋषभ के घर। बेल्ल बजायी दरवाजा खुल।।
सैनी।।।।।। तुम, चले जाओ इस समय घर पर कोई नहीं है। ऋषभ और माँ दोनों मार्किट गए है।
मैन ठीक है बोलकर जाने लगा
सैनी।।।।।। हँसते हुए आ जाओ आ जाओ मैं मज़ाक़ कर रही थी।
मैं।।।।।। कोई बात नहीं मैं बाद मैं मिल लुँगा ऋषभ से
सैनी।।।।।। आ जाइये सर मैं भी अकेली बोर हो रही हूँ थोड़े गप्पे लड़ाते है।
मैं।।।।।। रहने दे सैनी वैसे भी मुझ से जयादा बातें बनती नहीं।
सैनी।।।।। यार कैसे लड़के हो एक अकेली लड़की घर मैं तुम्हें बुला रही है और तुम हो की जा रहे जो।
मैं।।।।। तू ऐसी छिछोरी बातें कहाँ से सिख गयी है तुझे शर्म नहीं आती मुझ से ऐसी बातें करते।
सैनी।।।।।।। हयययय! शर्म तो आती है पर क्या करू तुझे देख कर चली जाती है। अब अंदर आओ गे की मैं पकड़ कर ले अऊ पागल लड़की, पता नहीं इसके दिमाग मैं क्या चलते रहता है। यही सोचते मैं चला अंदर। अन्दर हॉल मैं हम दोनो बैठे।
सैनी।।।।। चाय लोगे या कोफ्फी
मैं।।।।।कॉफ़ी ले आओ
कुछ देर बाद सैनी दोनों के लिए कॉफ़ी लायी और साथ में बैठ कर कॉफ़ी पिने लगा।
सैनी।।।।।। राहुल यार तू मुझे अपनी गर्लफ्रैंड बना ले बहुत हैंडसमे है यार तु।
मैं।।।।। तू ऐसी पागल वाली बातें करेगी तो मैं जा रहा हूँ।
सैनी।।।।। इसमें पागल वाली कौन सी बात है तू मुझे अच्छा लगता है इसमें बुराई क्या है। तू भी सिंगल है और मैं भी सिंगल। वैसे भी यदि अफेयर भी होता तो भी तेरे हाँ पर मैं अभी ब्रेकअप कर देती।
मैं।।।।। ये तुझे हुआ क्या है। ऐसी बहकी बहकी बातें क्यों कर रही है।
सैनी।।।।।। लो दिल की बात बतायी तो बेहकी बेहकी बातें हो गायी।
मैं।।।।। मेरी माँ मुझे बक्श दे मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं इस रिलेशन में। और तू मेरे दोस्त की सिस्टर है मैं तो सपने में न सोचूँ इस तरह की वाहयात बातें। सैनी खड़ी होकर अपने कमर को थोड़ा रोल करते हुए।।।।। देखो क्या मैं सुन्दर नही
मैं।।।।। तू बहुत सूंदर है पर बात समझ तू जो सोच रही है वो पॉसिबल ही नहीं है। 
सैनी।।।।।। क्या कमी है मुझमे बता न, या तू उन सब की तरह है जो गर्लफ्रैंड बनाते है केवल अपने फिजिकल रिलेशन के लिए और कयोंकी मैं तुम्हारे दोस्त की बहन हो इसलिए गड़बड़ के आसार देख तुम ये एक्सेप्ट नहीं कर रह।
मैं।।।।। तू क्या आज भांग वांग तो नहीं खायी है। क्या तुमने कभी देखा है मुझे किसी के साथ मैं तो ५ साल से तेरे ही साथ पढ़ रहा हूँ। प्लीज अब इस बारे में सोचना बंद करो।
सैनी।।।।।।। हयययय! यही तो तेरी कातिलाना अदाएँ है पता नहीं स्कूल में कितनी तुझ पे मरती है पर तू तो किसी को घास भी नहीं डालता।
मैं।।।।।।। देख सैन्य ये तुझे आज हुआ क्या है तुझे शायद मालूम नहीं लेकिन मुझे ऐसी बातें पसंद नहीं।
सैनी।।।।।।। मैं वो सब नहीं जानती मैंने अपने दिल की बात बता दी है फैसला तुम्हें करना है। इस से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा जवाब क्या है मैं बस तुम्हें चाहती थी और चाहती रहुंगी।
मैं।।।।।। देख सैनी तू केवल मेरे दोस्त की बहन है बे। तुम से इतनी बात भी होती है तो वो भी केवल ऋषभ को लेकर नही तो मैं किसी से बात करने मैं भी इंटरेस्ट नहीं रखता। वैसे १ बात मैं क्लियर कर दूँ की मैं सिंगल नही
" i have a girlfriend"।
सैनी।।।। तो छछूंदर तुझे क्या लगा की मैं तेरे साथ कोई अफेयर चाहती हू। वो तो तू उस दिन इतना उदास था और तू अपनी बात टाल गया इसलिए इतना ड्रामा करना पङ गया।
मैं।।।।।।। अब तो तू जान गयी न अब हट मुझे जाने दे।
सैनी।।।।।। चल बे ऐसे कैसे जाने दुं। मुझे तेरे और काजल के बारे में पता है डिस्को की घटना बस उसी दिन से
जीज्ञासा है तेरे अफेयर के बारे में जानने की। रूही ही है न वो। बता न बता न।।।।।
मैं।।।।। नहीं मेरी Gf रूही नहीं है कोई और है।
सैनी।।।।।। चल झूट। उस दिन भी तू काजल को रूही से ही मिलवाने रेस्टूरेंट में लाया था और तेरी पूरी टोली मौजूद थी।वहां सब तुम दोनों की अफेयर की ही पार्टी चल रही थी न। सिर्फ मुझे नहीं मालूम था बांकी सबको मालूम थी।ये सब टीवी सीरियल का असर है कंहा कंहा से जोड़ कर कंही तैयार कर देती है ये लड़कियां।
मैं।।।।। हा हा ह, पागल तुझे कुछ नहीं पता है
"क्य नहीं पता है" ऋषभ ने पीछे से बोला
मैं।।।।।। उस दिन रेस्टूरेंट वाली घटना यार 
मै तो बिना सोचे बोल दिया पर ऋषभ के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगी।
ऋषभ।।।।। तो तू उसे क्या बताने वाला था
मैं।।।।। कुछ नहीं यार बस यही की उस दिन की पार्टी रेण्डम प्लान थी जंहा एक के बाद एक लोग जुडते चले गए।
हम दोनों दोस्त कुछ समय वंही बिताये अभी ११ाम रहे द। घर के बाहर तो एक पल भी मन नहीं लग रहा था पर
टाईम पास करने के ईरादे से अब मैं पहुँचा सोनल के पास।
ऑन्टी अपना टीवी सीरियल एन्जॉय कर रही थी मैं बैठा आंटी के पास 
ऑन्टी।।।।। जा सोनल के पास मैं अभी सीरियल देख रही हूँ डिसट्रब मत कर। वैसे भी बहुत नाराज है तुझसे।
मैं।।।।। क्या हुआ आंटी बात क्या है।
ऑन्टी।।।।। अभी कल रात को ही रो रही थी बोल रही थी देखो न राहुल भैया को मैं इतनी परेसान हूँ और उनका मोबाइल भी नही लग रहा और घर पर भी नहीं मिलते।
मैं।।।।।। थोड़ी चिंता में क्या हुआ औंटी।
ऑन्टी।।।।। मुझे क्या पता बेटा तू खुद ही पूछ ले
क्या हुआ सोनल को कंही फिर किसी ने छेड-खानी तो नहीं कि। रो रही तू क्यों?
मै अपनी चिन्ताओ में कदम सोनल के रूम की ओर बढ़ने लगा।।।।।।।।
Reply
03-21-2019, 11:31 AM,
#58
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
अपडेट...


मैं... थोड़ी चिंता मैं क्या हुआ आंटी...

आंटी... मुझे क्या पता बता तू खुद ही पूछ ले ..


क्या हुआ सोनल को कही फिर किसी ने छेड़-खानी तो नहीं की। रो रही थी क्यों?


मै अपनी चिंताओं मैं कदम सोनल के रूम की ओर बढ़ने लगे... मैं रूम के अंदर पहुंचा तो सोनल पीथ गेट की ओर किये चेयर पर बैठ कर कुछ पढ़ रही थी।


मैन दवे पौन सोनल के पीछे पहुंचा और कान में जोर से...


वुऊऊ.... सोनल....आआआआआ! हूँ हूँ हूँ हूँ हूँ तेज तेज साँसे सोनल की।


सोनल.... जाओ भैया हार्ट फ़ैल हो जाता मेरा तो?


मैं.... पागल तुझे देखने के बाद 2 ,4 के हार्ट फ़ैल हो जाते होंगे तुझे कैसे हार्ट फ़ैल हो सकता है।


सोनल... जाओ मैं नहीं बात करती आप से । एक तो मैं इतनी परेशान हूँ ऊपर से आप मुझे छेड़ते रहते हो। कितने दिन हो गए आप तो ठीक से बात भी नहीं करते । क्या केवल 1 लड़की की प्यार की वजह से आप हम सब को यूँ भूल जाएंगे।


मैं... बदमास अब कौन किसे छेड़ रहा है। तुम सब तो जान हो मेरी इसके बीच में लड़की कंहा से आई... 


सोनल... रहने दो भैया ज्यादा खुद से पूछो की कब तुमने मुझसे बात की। (थोड़ी सी नम आँखों से) केवल हाँ सोनल बहुत दिन हो गए मिले चल सब को रेस्टूरेंट ले चलता हो, मूवी ले चलता हूँ कभी बैठ के 2 लाइन बातें की। कैसी हूँ मैं , अच्छा कर रही हूँ कुछ या कुछ गलत। न तो कोई दांत और न ही कोई प्यार जैसे सड़क के लोग हो गए अब हम की देखा आँखें मोदी और चले गए...


मै उसे अपने गले से लगाते हुए उसके आंसू पोंछ...


मैं... मांफ कर दे मेरी गुड़िया पर तू रोना बंद कर। देख मैं अपने कान पकड़ रहा हूं।


सोनल...( मेरे हाँथ कान पर से हटाते हुए ) एक शर्त पर माफ करूँगी... 


मैं... क्या?


सोनल... पहले आप मुझे पूरी बात बता दोगे और मुझे उस से मिलना भी है।


मैं... पक्का तू इसके बिना नहीं मान ने वली...


सोनल... नहीं बिलकुल नहीं यदि झूठ बोला और मुझे पता चला तो मैं ये मान लूँगी की आप को कोई मतलब नहीं मुझसे।


मैं... ठीक है बताता हूँ । फिर मैंने अपनी और परिधि की पूरी कहानी बताई अन्त तक...


सोनल... क्या भैया पहले दिन ही पर्पस किया और उसी दिन आप नाराज भी हो गए...


मैं... नहीं रे पागल ऐसी कोई बात नहीं पर जंहा एथिक्स की बात आती है वंहा मैं कभी कोम्प्रोमाईज़ नहीं करता...


सोनल... पर भैया उसे अपनी सफाई में तो आपने खुछ कहने ही नहीं दिया।


मैं... तेरे कहने क्या मतलब है...


सोनल.... वही जो आप का एथिक्स है.


मैं.... क्या?


सोनल... वही की जबतक हम किसी बात के नतीजे पर न पहुंचे अपनी राय कायम नहीं करनी चहिये। और आप ने तो बिना दूसरे पक्ष सुने अपनी राय ठोप दी , ये तो गलत है।


मैने सोनल के गाल अपने हाँथ से खिंचते हुए.... वहहह! क्या बात कही है थैंक्स अब मैं पहले बात करूंगा... 



सोनल... ओह! क्या कर रहे हो भैया छोरो भैया मैं परिधि नहीं सोनल हू । आप तो बात करने के ही ख्याल उछल रहे है।



मैं... तू नहीं जानती क्या-क्या बीती है हम दोनों पर पिछले 1 हफ्ते मैं खैर ये सब छोड़ अब तो जो होगा वो तो होगा ही तू पहले ये बता कल रो क्यों रही थी।



सोनल... वो तो भैया कल मुझे अपने मार्क्स देख के रोना आ गया, और हो सकता है की दिया का भी यही हाल हो। 

कल हमारा केमिस्ट्री की यूनिट टेस्ट था और कोचिंग चेंज के चक्कर में 2,3 टॉपिक हमारे मिस हो गए जिस से उस चैप्टर और उस से रिलेटेड जितने भी चैप्टर है कांसेप्ट ही नहीं क्लियर हो रहा है। इसी वजह से मुझे रोना आ गया की आज कल आप हमारी कोई भी खबर रखते।



मैं.... अब जो हो गया उसे जाने दे मांफ कर दे अपने भैया को लेकिन मैं अब तुम दोनों से नाराज होने वाला हूँ?

सोनल... क्यों भैया?


मैं... मतलब तुम दोनों ने ऐसा क्या सोचा जो मेरे पास नहीं आयी कुछ भी बताने...


सोनल... रहने दो भैया आप को तो याद भी नहीं होगा की पिछले कुछ दिनों से आप के पास कोई भी नहीं आया मालूम है क्यों क्योंकि आप खुद को जो देवदास बनाते हुए थे । सब के सब नाराज है आप की इस बात से... 

दिया ने तो उस दिन भी आप को कहा था पर अगले दिन से वही हाल रहा आपका। मालूम है सिमरन दी तो एक दिन बहुत रोई आप को ऐसा देख कर। 


मैं... यार अब बस करो मैं खुद मैं ही घुट ता जा रहा हूँ तू चल अब... 


कहानी जारी रहेगी....
Reply
04-12-2019, 10:24 PM,
#59
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
कहानी में पाठक को बांध के रखने की क्षमता नही दिखी....
Reply
04-20-2019, 07:43 PM,
#60
RE: mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी )
very nice story
Reply


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