mastram kahani राधा का राज
04-07-2019, 12:31 PM,
#31
RE: mastram kahani राधा का राज
वो मेरी बगल मे गिर गया. रचना अभी भी टॉपलेस थी. वो उठ कर राज शर्मा के वीर्य टपकते लंड को पास से देखने लगी.राज शर्मा ने उसके सिर को अपने हाथों से थाम कर अपने लंड पर झुकाया. रचना ने झिझकते हुए उसके लंड के टॉप पर अपने होंठ च्छुआ कर एक किस किया.

"लो इसे मुँह मे लेकर प्यार करो." राज शर्मा ने कहा तो वो झिझकने लगी.

" इसमे झिझक कैसी? तुम्हारे साथ संभोग तो कर नही रहा है. तूने कल के लिए कहा तो राज शर्मा ने मान लिया अब उसके लंड को प्यार करने से भी क्यों झिझक रही है. वैसे तो राज शर्मा के लंड को याद कर करके झाड़ जाती है अब नखरे दिखा रही है." मैने उसके ज़ज्बात को चोट पहुँचाया तो उसने भी बिना किसी कशमकश के अपने होंठ खोल कर राज शर्मा के लंड को अंदर प्रवेश करने की जगह दे दी. राज शर्मा का लंड उसके मुँह मे घुस गया उसके बाल खुल कर चेहरे को चारों ओर से ढांप लिए थे. मैने उसके बालों को चेहरे पर से हटाया तो रचना का प्यारा सा चेहरा राज शर्मा के लंड को अपने होंठों के बीच से अंदर बाहर करता नज़र आया. रचना राज शर्मा के लंड को तेज़ी से अपने मुँह मे अंदर बाहर कर रही थी. राज शर्मा अपनी गर्देन को बिस्तर से उठा कर रचना की हरकतों को निहार रहा था. रचना के सिर को अपने दोनो हाथों से थम रखा था. रचना राज शर्मा के लंड के साथ मच मैंतुन करते हुए उसके बॉल्स को अपने हाथों से सहला रही थी. बीच बीच मे लंड को अपने मुँह से निकाल कर उसके बाल्स पर अपनी जीभ फिरा देती थी. एक दो बार तो उसके एक एक बॉल को अपने मुँह मे भर कर भी उसने चूसा. राज शर्मा का लंड इतने सबके बाद भी सोया कैसे रह सकता था. वो वापस अपने पूरे फॉर्म मे आ गया था. अब उसे दोबारा सुलाना मेरी ज़िम्मेदारी थी. लेकिन मैने अपनी तरफ से कोई उतावलापन नही दिखाया. मैं इस बार राज शर्मा के रस का स्वाद रचना को देना चाहती थी. रचना का भी शायद यही प्लान था. इसलिए जब राज शर्मा का लंड उत्तेजना मे फुंफ़कारने लगा, झटके देने लगा तो रचना ने अपनी गति बढ़ा दी. राज शर्मा भी उसके सिर को सख्ती से पकड़ कर अपने लंड को पूरा अंदर करने की नाकाम कोशिश करने लगा. रचना हाँफ रही थी. काफ़ी देर से उस लंड से जो मशक्कत करना पड़ रहा था. आख़िर राज शर्मा ने उसके सिर को अपने लंड पर सख्ती से दबा कर ढेर सारा वीर्य उसके मुँह मे उडेल दिया. रचना साँस लेने को च्चटपटा रही थी मगर राज शर्मा के आगे उसकी एक नही चल पा रही थी. राज शर्मा ने उसे तभी छोड़ा जब उसका लंड पूरा खाली होकर सिकुड़ने लगा था.

राज शर्मा ने उसे खींच कर अपने पसीने से भीगे बदन से लिपटा लिया. रचना भी किसी कमजोर लता की तरह उसके बदन से लिपट गयी और अपने कसे हुए स्तनो को राज शर्मा की चौड़ी छाती पर मसल्ने लगी. राज शर्मा के लंड को अपने हाथों से सहला रही थी. रचना राज शर्मा के सीने मे अपना चेहरा छिपा कर आँखें बंद करके पड़ी थी.

कुछ देर बाद रचना धीरे से उठी और दौड़ते हुए सीधे बाथरूम मे घुस गयी. काफ़ी देर तक अपने बदन की गर्मी को ठंडे पानी से ठंडा करने के बाद ही वो बाहर निकली.

मैने उसे अपने साथ सोने के लिए मनाना चाहा मगर वो मेरी बात बिल्कुल भी नही मानी और अपने बेडरूम मे चली गयी. कुछ ही देर मे राज शर्मा भी खर्राटे लेने लगा. मैं दबे पाओ उठी और रचना के बेडरूम मे झाँक कर देखा. रचना बिल्कुल निवस्त्र लेटी हुई थी. उसका एक हाथ दोनो पैरों के जोड़ों के बीच रखा हुआ था और उसकी लंबी लंबी उंगलियाँ उसकी योनि के अंदर बाहर हो रही थी. वो अपने दोनो पैरों को एक दूसरे के साथ सख्ती से भींच रखी थी. और उन्हे एक दूसरे पर रगड़ रही थी. उसके मुँह से हल्की हल्की कराह की आवाज़ निकल रही थी. मैने उसको डिस्टर्ब करना उचित नही समझा और उसी तरह दबे पाओ वापस चली आए. आज की रात उसके फ़ैसले की रात थी. उसे नींद तो आनी ही नही थी. हो सकता है सारी रात सोचने मे निकल जाए. इसलिए मैं उसे किसी तरह की रुकावट नही देना चाहती थी.

अगली सुबह मैं उठी तो सामने रचना को खड़े हुए पाया. उसके हाथ मे चाइ की ट्रे थी.

"उठ गयी राधा?" उसने चहकते हुए पूछा. उसका चेहरा खुशी से दमक रहा था. उसने एक छोटी सी, जांघों के बीच तक लंबी नाइटी पहन रखी थी. नाइटी उसके कंधे से दो डोरियों पर लटकी हुई थी. उसके पहनावे को और उसके बातों की खनक से मैं समझ गयी कि उसने फ़ैसला कर लिया है और वो फ़ैसला मैं जैसा चाहती हूँ वैसा ही हुआ है.

"आ बैठ बिस्तर पर." मैने बिस्तर मे जगह बनाते हुए कहा. मैं उस वक़्त बिल्कुल नग्न थी. राज शर्मा भी नग्न एक ओर करवट लेकर लेटा हुया था.

" लगता है रात को बेचारा ठीक से सो नही पाया. तूने लगता है बिकुल ही निचोड़ लिया है इसे." रचना ने कहा.

" अरे ये तो पूरा सांड है सांड. घंटो धक्के मारता रहे फिर भी इसके लंड पर कोई असर नही पड़ता. तू झेलेगी तब पता चलेगा कि किस चीज़ से बना है ये पहाड़." मैने रचना की जांघों पर एक चिकोटी काटी.

" तू मुझे बहुत परेशान करती है. मेरी सबसे अच्छी सहेली मेरी सबसे बड़ी दुश्मन बन रही है." रचना ने मुझे गुदगुदी करते हुए कहा, "क्यों मेरे जज्बातों को हवा दे रही है. जब से पहली बार तेरे

राज शर्मा को देखा था तब से ही मन ही मन मैं इसे चाहती थी. लेकिन तूने हमारे बीच परे पर्दे को टुकड़े टुकड़े कर दिया. अगर मैं तेरे राज शर्मा को लेकर भाग गयी तो?"

" तो क्या तूने अपनी सहेली को इतने कमजोर दिल वाला समझा है क्या? मुझे मालूम है कि मैं तुम दोनो से जितना प्यार करती हूँ तुम दोनो मुझसे उससे भी कहीं ज़्यादा प्यार करते हो."

हम दोनो के दूसरे को गुद गुडी कर रहे थे, चिकोटी काट रहे थे. इस तरह छीना झपटी मे बहुत जल्दी ही रचना का भी हमारे जैसा ही हाल हो गया. उसकी नाइटी भी उसके बदन से मैने नोच कर अलग कर दी. हम तीनो उस कमरे मे बिल्कुल नग्न थे. राज शर्मा भी इस धीन्गा मुष्टि मे सोया नही रह सका और आँखें रगड़ता हुया उठा. सामने एक नही दो दो नग्न खूबस्सूरत महिलाओं को देख कर उसका लंड एकदम से हरकत करने लगा. हम दोनो नेउसे धक्का देकर बिस्तर पर वापस गिरा दिया और उसके ऊपर कूद कर उसके लंड को सहलाने मसल्ने लगे. राज शर्मा हमारी हरकतों का मज़ा लेने लगा. वो हम दोनो को अपनी बाहों मे भर कर चूमने लगा और हमारी कमर को अपने बाजूयों मे भर कर अपने सीने से जाकड़ लिया. उसके बाजुओं मे इतना दम था कि हम दोनो छ्छूटने के लिए च्चटपटाने लगे. रचना किसी तरह उसकी बाजुओं से फिसल गयी और उसे ठेंगा दिखाती हुई अपने कपड़े उठाकर कमरे से भाग गयी.

क्रमशः...........................
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04-07-2019, 12:31 PM,
#32
RE: mastram kahani राधा का राज
राधा का राज--10गतान्क से आगे....................
राज शर्मा का आज काम पर जाने का मन नही था आज रचना को सुबह से ही परेशान कर रहा था. रचना मेरी ओट लेकर उससे बच रही थी. हम दोनो ने उसे किसी तरह धकेलते हुए नर्सरी भेजा. रचना आज सुबह से बहुत प्यारी लग रही थी. दोपहर खाना खा कर हम दोनो ने रेस्ट किया. आज हम दोनो ने छुट्टी ले रखी थी. आज का ये स्पेशल दिन हम दोनो सहेलियाँ साथ एंजाय करना चाहते थे.

शाम को जब राज शर्मा के आने का समय नज़दीक आने लगा तो रचना का उतावलापन बढ़ने लगा था. आज ब्यूटी पार्लर से रचना तैयार होकर आई थी. पार्लर वाले ने उसे किसी परी की तरह सँवारने मे कोई कमी नही रखी थी. मैने भी उसे किसी दुल्हन की तरह सँवारा था. लाल भारी बनारसी सारी मे वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी. माथे पर सिंदूर, गले पर भारी मन्गल्सुत्र, ऐसा लग रहा था मानो आज रचना की पहली सुहागरात हो.

वो बन संवर कर राज शर्मा का इंतेजार करने लगी. ऐसा लग रहा था मानो आज ही उसकी शूहाग रात हो. वो नर्वस काफ़ी हो रही थी.

शाम सात बजे राज शर्मा घर आया. रचना को मैने अंदर रहने को कहा और मैं जाकर दरवाजा खोली. और अंदर आने दिया. राज शर्मा की आँखें इधर उधर घूम रही थी. वो रचना को ढूँढ रहा था. मैं मुस्कुरा दी.

" क्या हुआ किसे ढूँढ रहे हो?"

" नही वो मेरा मतलब है…तुम्हारी सहेली दिखाई नही दे रही है…." वो एक खिसियानी सी हँसी हंसता हुआ पूछा.

"किसे रचना को?" मैने उससे मज़ा लेते हुए पूछा.

" हां हाआँ कहाँ छिपि है वो?"

" अरे मैं तो तुम्हे बताना ही भूल गयी. दोपहर को अरुण आया था. उसे और बच्चे को हफ्ते भर के लिए अपने साथ ले गया." मैने अपने चेहरे पर बनावटी दुख लाते हुए कहा.

राज शर्मा बिना कुछ कहे सोफे पर बैठ गया. ऐसा लग रहा था मानो किसी बच्चे के सामने से उसका सबसे प्यारा खिलोना हटा लिया गया हो. उसका खिला हुआ चेहरा मुरझा सा गया. वो कुछ देर चुप रहा फिर पूछा, "क्या हुआ? ऐसे अचानक? वो कुछ नही बोली?"

" क्या कहती? अरुण उसका हज़्बेंड है उसका रचना पर पूरा हक़ है." कह कर मैं अपनी हँसी को दबाती हुई वहाँ से किचन मे चली गयी. किचन मे रचना सब सुन रही थी. मेरे आते ही मुझ से दबी आवाज़ मे बोली, " राधा मैं तुझे मार डालूंगी. क्यों तरसा रही है उसे इतना बेचारा दीवाना हो गया तो."

" तो क्या हम दो हैं ना उसे वापस रास्ते पर लाने के लिए. ले जा उसके लिए पानी ले जा. वैसे जैसे पहली रात को कोई दुल्हन ले जाती है." रचना का गाल शर्म से लाल हो गया.

वो एक ट्रे मे पानी लेकर ड्रोइन्ग रूम मे गयी. किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह पलकें झुका कर छोटे छोटे कदम भरती हुई राज शर्मा के पास पहुँची. उसे उस रूप मे आते देख राज शर्मा का मुँह खुला का खुला रह गया. उसकी पलकें भी झपकना भूल गयी. वो एक तक रचना को धीरे धीरे उसके करीब आता देखता रहा.

"कैसी लग रही है मेरी सहेली?" मैने राज शर्मा के बदन पर अपनी कोहनी से टोहका दिया.

वो किसी अनाड़ी प्रेमी की तरह कभी मुझे देखता कभी रचना को. रचना उसके करीब आकर सीधे बिना किसी हिचक के उसकी गोद मे बैठ गयी और पानी का ग्लास उठाकर राज शर्मा के होंठों से लगाया.

" कैसी लग रही हूँ मैं?" उसने राज शर्मा की आँखों मे अपनी आँखें डाल कर पूछा.

"बहुत खूबसूरत. मानो मेरी नयी दुल्हन आई हो." राज शर्मा ने अटकते हुए कहा. राज शर्मा ने उसके हाथों से ग्लास लेकर टेबल पर रख दिया और उसे खींच कर अपने सीने मे जाकड़ लिया. दोनो के होंठ आपस मे गूँथ गये. कभी ये उसको काटती तो कभी वो इसे काटता. दोनो के जीभ एक दूसरे के मुँह मे घुस कर मंथन कर रहे थे. काफ़ी देर तक एक दूसरे को चूमने चाटने के बाद भी जब दोनो अलग नही हुए तो मैने खांस कर उनको चौंकाया. दोनो झटके से अलग हो गये.

" अरे अब दोनो मे शर्म कैसी" मैं उनकी हालत पर हँसने लगी. रचना राज शर्मा के पास उससे सॅट कर बैठ गयी. हम हँसी मज़ाक करने लगे जिससे महॉल खुशनुमा हो गया.

शाम को खाना खाने के बाद रचना ने अपने बच्चे को दूध पिला कर जल्दी सुला दिया.

"आज हम चारों एक ही कमरे मे सोएंगे. तेरे बच्चे का झूला जिसमे वो सोता है उसे हमारे कमरे मे लगा ले." मैने रचना को कहा. रचना ने वैसे ही किया. रचना जब बच्चे को झूले पर सुलाने के लिए कमरे मे गयी मैने राज शर्मा को कमरे मे धक्का दे दिया.

राज शर्मा सम्हलते हुए बेडरूम मे घुसा. बिस्तर के सिरहाने पर रचना बैठी अपने बच्चे को सुला रही थी. राज शर्मा आगे बढ़ कर उसके पास पहुँचा. रचना उसे अपनी ओर आते देख कर आँखें सख्ती से बंद कर ली. मानो उसे डर हो कि उसके साथ जो कुछ हो रहा हो वो एक सपना हो. उसका बदन भी राज शर्मा के निकटता के एहसास से अकड़ गया था. चुचियाँ कुछ बाहर की ओर निकल आई थी और निपल्स कड़े हो गये थे. राज शर्मा उसके पास जा कर उसे अपनी बाहों मे भर लिया. रचना राज शर्मा के बाहों का सहारा लेकर उठ खड़ी हुई और उसके बदन से लिपट गयी.

राज शर्मा उसके काँपते होंठ पर अपने होंठ रख दिए. शायद इसी पहल की प्रतीक्षा कर रही थी रचना. वो एकदम से राज शर्मा से लिपट गयी. मानो राज शर्मा के जिस्म मे अपना वजूद खो देना चाहती हो. मैं दरवाजे की आड़ से सब देख रही थी मगर उनके सामने आकर उनके आनंद मे बाधा नही बनना चाहती थी. मैं तो दोनो के पूरेगर्म हो जाने का इंतेज़ार कर रही थी. जिसके बाद तो उन्हे कुछ भी होश नही रहेगा कि कमरे मे कौन कौन है और किसके सामने वो संभोग कर रहा हैं. राज शर्मा ने धीरे से रचना के लरजते बदन को अपने से अलग किया और उसे कुछ पल अपने सामने खड़ी कर के निहारता रहा.

"मुझे भी अपने दिल मे अपने जीवन मे शामिल कर लो. मैं बरसों से तुम्हारी प्यासी हूँ आज मेरी प्यास बुझा दो." रचना ने रुकते रुकते कहा. राज शर्मा ने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसके सारी के आँचल को नीचे गिरा दिया. फिर सारी के प्लीट्स खोल कर उसे रचना के बदन से अलग कर के ज़मीन पर गिर जाने दिया. रचना अब पेटिकोट और ब्लाउस मे थी. राज शर्मा उसे बिस्तर के सिरहाने पर बिठा कर खुद बगल मे बैठ गया और रचना के चेहरे को अपने हाथों से थाम कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. रचना ने अपनी जीभ निकाल कर राज शर्मा के मुँह मे डाल दी जिसे राज शर्मा पूरे आवेग से चूस्ता रहा. कुछ देर बाद दोनो के होंठ अलग हुए.

"आज से मैं आपकी बिन ब्याही बीवी बन रही हूँ. आप तो मेरी कल्पना थे. जाने कितनी बार आपको सोच सोच कर मैं स्खलित हुई थी. मगर आज मेरी सहेली ने अपने दिल का टुकड़ा मुझे भी छूने दे दिया." रचना ने राज शर्मा के कपड़े अलग करते हुए कहा. कुछ ही देर मे राज शर्मा सिर्फ़ एक छोटी फ्रेंची मे बैठा हुआ था. रचना फिसल कर ज़मीन पर बैठ गयी. उसने राज शर्मा के पैरों के पंजो से चूमते हुए अपने होंठ उसके घने बालों भरे जांघों तक पहुँचाए. राज शर्मा का लंड फ्रेंची के अंदर से तना हुआ उभर रहा था. रचना किसी सेक्स की भूखी औरत की तरह अपने होंठ राज शर्मा की जांघों पर फिरा रही थी. फिर वो एक पल को रुकी और उपर राज शर्मा की आँखों मे झाँकते हुए अपना मुँह खोल कर उसके लंड को फ्रेंची के उपर से अपने दाँतों से पकड़ कर उस पर दो तीन बार अपनी जीभ फिराई.

राज शर्मा उसकी हरकतों से पूरे जोश मे आ गया. उसने रचना के बाल खोल कर उसके चेहरे पर बिखेर दिए. ऐसा लगा मानो चाँद को बादलों ने ढक लिया. रचना ने अपने हाथों से अपने बालों को चेहरे पर से हटा
दिया.

"आज मुझे सिर्फ़ प्यार करने दो. मुझे अपनी प्यास बुझा लेने दो. तुम्हारी मर्ज़ी कल पूरी कर लेना. आज मुझे मत रोकना." कहकर रचना ने धक्का दे कर राज शर्मा को बिस्तर पर गिरा दिया. राज शर्मा के पैर बिस्तर से नीचे झूल रहे थे बस कमर के उपर का भाग बिस्तर पर पसरा हुआ था. रचना उच्छल कर राज शर्मा के तने लंड पर बैठ गयी. और अपने दोनो पैर उसकी कमर के दोनो ओर रख कर अपनी पेटिकोट और पॅंटी से धकि योनि से राज शर्मा के लंड को छेड़ा. राज शर्मा ने उसके दोनो बूब्स सख्ती से ब्लाउस के उपर से पकड़ लिए और मसल्ने लगा. रचना ने एक झटके से उसके दोनो हाथ अपनी चुचियों पर से हटा कर अपने ब्लाउस के बटन्स खोल डाले. फिर उसने अपने हाथ पीछे ले जा कर अपने ब्रा का हुक खोल दिया फिर दोनो को एक साथ अपने बदन से उतार कर दूर फेंक दिया अब वो भी टॉपलेस हो चुकी थी. राज शर्मा ने वापस उसके बूब्स को अपनी मुट्ठी मे भरना चाहा मगर वापस उसने राज शर्मा के इरादों को नाकाम कर दिया.

"ठहरो इतने उतावले मत हो. तुम्हारी इच्च्छा अभी पूरी करती हूँ." कहकर रचना अपने तने हुए निपल को राज शर्मा के पूरे बदन पर फिराने लगी. राज शर्मा उन निपल्स को अपने मुँह मे लेने के लिए उतावला हुआ जा रहा था मगर रचना अपने अंगूरों को उसकी पकड़ से बचाती हुई पूरे बदन पर फिरा रही थी फिर रचना अपने होंठ राज शर्मा के सीने पर फ़िराने लगी.

"कैसे हैं मेरे ये?..." रचना ने अपने स्तनो की ओर ललचाई नज़रों से देखते हुए राज शर्मा से पूछा.

"एम्म…बहुत अच्छे बहुत सुंदर….मुझे तो तुम्हारे बच्चे से जलन होती है जब मैं उसे इन चुचियों पर अपना हक़ जमाते देखता हूँ."

"हहा…मेरे बच्चे से क्यों जल रहे हो. मुझसे रिक्वेस्ट क्यों नही करते इनका रस पीना हो तो. पियोगे?"

राज शर्मा ने सिर हिलाया और अपना चेहरा आगे बढ़ाया मगर रचना ने उसे अपने से दूर कर दिया.

"नही ऐसे नही मुझ से रिक्वेस्ट करो…"

"मुझे अपने स्तनॉ को चूसने दो" राज शर्मा ने कहा

"से प्लीज़.."

"प्लीज़….. प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज पीने दो ना क्यों परेशान कर रही हो."

रचना बिस्तर पर आल्ति-पालती मार कर बैठ गयी और राज शर्मा का सिर पकड़ कर अपनी गोद मे रख लिया. राज शर्मा को किसी दूध पीते बच्चे की तरह अपना स्तन पान कराने लगी.

"पता है राज शर्मा मेरा बच्चा जब एक स्तन से दूध पीता है तो दूसरे निपल से खेलता रहता है." राज शर्मा उसका इरादा समझ कर वैसा ही करने लगा. राज शर्मा एक स्तन को पूरा खाली करके दूसरे स्तन पर टूट पड़ा.

"बस…बस….कुछ मेरे बच्चे के लिए भी तो छोड़ो." रचना ने मुस्कुराते हुए कहा.

"कोई बात नही. तुम्हारा बच्चा बॉटल से दूध पी लेगा."

जब राज शर्मा का स्तनो को पीने का काम ख़त्म हुआ तो वो अपने होंठों को जीभ से चाटते हुए उठ कर बैठा. अब रचना की बारी थी. वो राज शर्मा पर सवार हो गयी. उसने राज शर्मा को वापस बिस्तर पर लेटने को मजबूर कर दिया. वो खुद राज शर्मा के नग्न बदन के उपर लेट गयी.

रचना अपनी जीभ निकाल कर राज शर्मा के छोटे छोटे निपल्स को सहलाने लगी. राज शर्मा उत्तेजना मे च्चटपटा रहा था. रचना राज शर्मा के पैरों पर सरक्ति हुई कुछ नीचे हुई. फिर अपनी जीभ राज शर्मा की नाभि से होते हुए उसके लंड की तरफ सरक गयी. राज शर्मा के पूरे बदन पर घने काले बाल हैं जिसकी वजह से वो बिना कपड़ों का और भी सेक्सी लगता है.

रचना नीचे की तरफ सरक्ति हुई राज शर्मा के लंड तक पहुँची. राज शर्मा का लंड बुरी तरह से तना हुआ झटके खा रहा था. उसके लंड के टोपे के उपर से चमड़ी हट जाने के कारण उसके लंड का काला सा किसी बिल्लियर्ड्स की गेंद की तरह चमक रहा था. उसके टिप से प्रेकुं निकल कर पूरे टोपे पर सन गया था. रचना कुछ देर तक उसके लंड को अपने हाथों मे लेकर प्यार भारी निगाहों से निहारती रही और राज शर्मा रचना की अगली हरकत का इंतेज़ार कर रहा था. कुछ देर बाद रचना ने अपनी नज़रें उठाकर राज शर्मा को देखा और मुस्कुरा कर बोली.

"बहुत प्यारा है. लेकिन ख़तरनाक भी इसकी लंबाई देख कर डर लग रहा है." रचना ने अपनी उंगलिया राज शर्मा के लंड पर फिराई. उसके लंड के टोपे पर से अपनी उंगलियों मे राज शर्मा के प्रेकुं को समेट कर अपने मुँह मे भर लिया. "म्‍म्म्ममम……ताअस्तयईई है."

"इसे मुँह मे लो." राज शर्मा की आवाज़ उत्तेजना मे भारी हो गयी थी. उसने रचना के सिर को अपने हाथों से पकड़ कर अपने लंड पर झुकाया. रचना अपने सिर को झटक कर राज शर्मा के चंगुल से बचना चाहती थी मगर इस बार उसकी एक नही चली. राज शर्मा की ताक़त के आगे वो तो बिल्कुल निसाहाय थी. राज शर्मा ने उसके चेहरे को अपने लंड पर झुका दिया. रचना के सिर को इधर उधर हिलाने के कारण उसका चेहरा राज शर्मा के लंड से निकल रहे रस से सन गया था.

"नही राअज प्लीज़…..मुझे अपने हिसाब से प्यार करने दो" लकिन राज शर्मा उसको बिल्कुल भी ढील देने के मूड मे नही था. इतनी दूर से दोनो के बीच चल रहा घमासान देखने मे मुझे दिक्कत हो रही थी. इसलिए मैं कमरे मे घुस आई. दोनो को मेरे आने की खबर भी नही लगी.

ज़ोर आज़माइश के कारण रचना के बाल चारों ओर फैल कर उसके चेहरे को बार बार छिपा ले रहे थे. मैने उसके बालों को चेहरे से हटा कर एक गाँठ बाँध दी. किसी दूसरे हाथ का आभास पकड़ रचना ने नज़रें उठाई और मुझे देख कर मुस्कुरा दी. अब उसका विरोध भी ढीला पड़ चुका था. उसने आख़िर अपने हथियार डाल दिए और अपने मुँह को खोल कर राज शर्मा के टोपे को अपने मुँह मे ले लिया. उसने सिर उठा कर राज शर्मा की आँखों मे इस तरह झाँका मानो पूछ रही हो अब तो खुश.

रचना अब तेज़ी से उसके लंड को अपने मुँह मे लेने लगी. बीच बीच मे राज शर्मा उत्तेजना मे उसके सिर को अपने हाथों से थाम कर अपने लंड पर दबा देता. मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरे सामने कोई ब्लू फिल्म चल रही हो.

फिर रचना राज शर्मा के लंड को अपने मुँह से निकाल कर उसके नीचे नस्पाती की तरह लटकते दोनो गेंदों को अपनी जीभ से चाटने लगी. राज शर्मा की उत्तेजना अब काफ़ी बढ़ चुकी थी. अगर जल्दी ही कुछ ना किया जाता तो उसका फव्वारा चालू हो जाता. लेकिन रचना हालत को समझ गयी. वो राज शर्मा के वीर्य को वेस्ट करने के मूड मे नही थी. वो झटके से राज शर्मा के बंधन से अपने को छुड़ा कर उठी. और उसने राज शर्मा को करवट लेकर मुँह के बल सोने को मजबूर कर दिया. अब रचना अपने होंठ राज शर्मा की गर्देन से लेकर उसके नितंबों तक फिराने लगी. उसके होंठ धीरे धीरे राज शर्मा की पीठ को सहलाते हुए नीचे आने लगे. फिर उसके होंठ राज शर्मा के दोनो नितंबो पर फिरने लगे.
क्रमशः........................
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04-07-2019, 12:31 PM,
#33
RE: mastram kahani राधा का राज
राधा का राज--11 end
गतान्क से आगे....................
फिर उसने जो किया मैने भी आज तक कभी नही किया था. ना ही राज शर्मा को उसके इस हरकत की कोई आशा थी. उसने राज शर्मा के दोनो नितंब अपने हाथों से पकड़ लिए और फिर अपने होंठों को उसके नितंबों से उपर उठा कर अपनी जीभ निकाल ली. रचना ने अपने दोनो हाथों से राज शर्मा के दोनो नितंबों को अलग किया और वाउ….. वो अपनी जीभ राज शर्मा के गुदा द्वार पर फिराने लगी. राज शर्मा भी एक बार चिहुनक उठा. रचना अपनी जीभ दोनो टाँगों के जोड़ से लेकर जहाँ पर राज शर्मा के दोनो नितंब ख़तम होते हैं वहाँ तक फिरा रही थी.

अब राज शर्मा से रहा नही गया और उसने रचना को उठा कर बिस्तर पर पटक दिया. रचना उसे एक बार मना की मगर वो सुना नही. तो उसने भी राज शर्मा की उत्तेजना का आनंद लेने का मन बना लिया. राज शर्मा के सामने वो लेट कर अपनी दोनो टाँगें हवा मे फैला कर छत की ओर उठा दी. और राज शर्मा के बालों को पकड़ कर उसके सिर को अपनी दोनो जांघों के बीच दबा दिया. राज शर्मा अपनी उंगलियों से रचना की योनि की फांकों को अलग करके उसके अंदर अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा. रचना उसके सिर को सख्ती से अपनी दोनो जांघों के बीच दबा कर अपनी कमर को उपर की ओर उचका रही थी. राज शर्मा उसकी योनि का रस चाट चाट कर सॉफ कर रहा था. तभी रचना अपने सिर को ज़ोर ज़ोर से तकिये पर पटाकने लगी,

"आआआअहह… ..ऊऊऊओह…सुउुुुुुउरााआआ आज……..म्‍म्म्मममम… ..राआआआईईएल्ल्ला आ………..बाचााआअ… .मुझीईए….आआआहह ह………..माणिईीई… ..गगैइिईईईईईईईई……" रचना की चीखों से पूरा कमरा गूँज गया. रचना के रस का बहाव ख़त्म होने के बाद वो धम से बिस्तर पर इस तरह गिरी मानो किसी ने किस गुब्बारे से हवा निकाल दी हो. अब वो बिस्तर पर निस्चल पड़ी ज़ोर ज़ोर से हाँफ रही थी. उसका पूरा बदन हर साँस के साथ उपर नीचे हो रहा था.

राज शर्मा ने रचना का पूरा वीर्य अपनी जीभ से सॉफ कर दिया. उसके दोनो हाथ रचना के स्तनो को मसल रहे थे और जीभ योनि के अंदर फिर रही थी. उसकी हरकतों से रचना वापस गर्म होने लगी. उनकी हरकतों से मेरी योनि भी गीली हो गयी. मैने अपने कपड़े भी उतार दिए और अपनी उंगलियों से अपनी योनि को सहलाने लगी.

कुछ देर बाद राज शर्मा ने रचना की टाँगों को छत की ओर उठा दिया. मैने आगे बढ़ कर रचना की दोनो टाँगें अपने हाथों से थाम ली. राज ने उसकी दोनो टाँगों के बीच बैठ कर रचना की योनि को अपनी उंगलियों से फैलाया और उसके योनि के द्वार पर अपने लंड को सटा कर एक ज़ोर के धक्के के साथ अपने लंड को पूरा अंदर कर दिया. और वो रचना के स्तनो को चूमते हुए उसके उपर लेट गया.

मैने एक ज़ोर की साँस ली. मेरी कोशिश आख़िर कामयाब हो चुकी थी. मैने रचना को अपने हज़्बेंड से चुदवा कर अपने साथ अरुण द्वारा किए गये सामूहिक बलात्कार का बदला ले लिया.

राज शर्मा ज़ोर ज़ोर से रचना के साथ संभोग करने लगा. रचना भी पूरी उत्तेजना मे अपनी दोनो टाँगों को मेरी पकड़ से छुड़ा कर राज शर्मा की कमर को आलिंगन मे जाकड़ लिया. रचना किसी बेल की तरह राज शर्मा के बदन से लिपटी हुई थी और उसके कमर की हरकत के साथ रचना का भी बदन बिस्तर से उपर नीचे हो रहा था. रचना ने आगे बढ़ कर मेरी टाँगों के जोड़ पर अपना चेहरा रख कर मेरी योनि को अपनी उंगलियों से सहलाने लगी थी.

"थॅंक उूउउ राआाआल…..तूने मेरी बरसो की चाहत को पूरा कर दिया. आआआहह….. मैं कब से इस दिन का सपना देख रही थी…" रचना अपने हाथों से मेरे चेहरे को पकड़ कर अपने होंठों पर झुकाया और मेरे होंठों को चूमने लगी.

"तो फिर इतने दिन नखरें क्यों करती रही?" मैने पूछा.

"कैसे मैं हा हा अपने दिल की बात बिनाअ किसीइ संकोच के अपनीी जुबाअं पर लाती. आख़िर हम हम हम हूँ हूँ तो एक औरत ही नाअ…..वो भी शाआदी शुदाा….एम्म्म" वो राज शर्मा की दोनो सख़्त चुचियों पर अपने हाथ फिराने लगी.

"अया राआआजज आआहह आौर्र्रररज़ोर सीई और ज़ोर सीई…….हां हां ऐसे…ऑफ ओफफफफ्फ़…" रचना कुछ देर मे स्खलित हो गयी. मगर उसका मन अभी तक नही भरा था और वो वापस उसी आवेग से फिर राज शर्मा
के धक्कों का जवाब देने लगी. पूरा बिस्तर दोनो के धक्कों से चरमरा रहा था. दोनो पसीने पसीने हुए एक दूसरे को हराने के प्रयास मे लगे हुए थे.

रचना मुझे प्यार किए जा रही थी और मैं खुशी से उसके चेहरे को उसके बालों को सहला रही थी. कोई पंद्रह मिनट तक लगातार इसी तरह संभोग करने के बाद राज शर्मा ने उसे किसी गुड़िया की तरह उठाया और बिस्तर पर हाथ और पैरों के बल उल्टा करके झुका दिया. अब वो रचना को पीछे की तरफ से ठोकने लगा. उसके हर धक्के के साथ रचना के दोनो बड़े बड़े स्तन उच्छल रहे थे. रचना का मुँह खुला हुआ था आँखें मानो पथरा गयी थी. वो एक टक बस मुझे देख रही थी उसके मुँह से किस तरह की कोई आवाज़ नही आ रही थी सिर्फ़. मैने आगे बढ़ कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके मुँह मे अपनी जीभ फिराने लगी. तब मानो उसे होश आया और वो "आअहह हाइईईई…..ऊऊऊंम्म म्माआ" करने लगी.

राज शर्मा का स्टॅम्न्ना वैसे भी बहुत ज़्यादा था और उसके बाद एक नयी योनि ठोकने को मिली थी इसलिए उसकी उत्तेजना ख़त्म होने का नाम ही नही ले रही थी. रचना ज़्यादा देर अपने शरीर के बोझ को अपने हाथों के सहारे उठा कर नही रख पाई. उसकी कोहनियों ने जवाब दे दिया और उसका चेहरा धप्प से तकिये पर गिरा. उसका चेहरा तकिये मे धंसा हुआ था और सिर्फ़ कमर राज शर्मा की ओर उठी हुई थी जिस पर राज शर्मा वार पे वार किए जर आहा था. कोई आधे घंटे तक बिना रुके रचना को चोदने के बाद राज शर्मा नेढेर सारा वीर्य रचना की योनि मे भर दिया. जब तक आख़िरी क़तरा रचना की योनि मे नही चला गया तब तक रचना की योनि मे अपना वीर्य किसी पिस्टन की तरह अपने लंड से पंप करता रहा. दोनो वही हानफते हुए लुढ़क गये. रचना का तो इसी दौरान तीन बार स्खलन हो चुका था.

कुछ देर राज शर्मा के सुस्ता लेने के बाद मैने उसके लंड को अपनी जीभ से वापस उत्तेजित किया और उसके लंड पर चढ़ाई कर मैने अपनी गर्म हो चुकी योनि की प्यास बुझाई. हमने सारी रात जाग कर बिताई. हम दोनो ने मिल कर राज शर्मा को खूब निचोड़ा. राज शर्मा जब दूसरे राज शर्मा के उदय होने का समय आया तो थकान से नींद की आगोश मे चला गया. हम दोनो भी उसके नग्न बदन से लिपट कर सो गये.

इसके बाद तो बस सिलसिला चल निकला. मैने रचना को विस्वास दिला दिया था कि हम तीनो के बीच के संबंधों के बारे मे हम हमेशा गुप्त रखेंगे. चाहे वो अरुण ही क्यों ना हो. अब हम एक ही कमरे मे एक ही बिस्तर पर सोते थे. जब अरुण आता तो रचना अपने मकान मे चली जाती वरना वो सारा दिन हमारे साथ ही रहती. राज शर्मा दो दो बीवियाँ पकड़ फूला नही समाता था. अरुण जब भी आता मुझे ज़रूर सबकी नज़र बचा कर एक दो बार अपने लंड से ठोक ही देता था. लेकिन अब मैं उतना बुरा नही मानती थी क्योंकि मैने उससे बदला ले लिया था. उसकी बीवी को मेरा पति अपनी दूसरी बीवी बना कर उसके साथ जब मर्ज़ी जितना मर्ज़ी सेक्स करता था. लेकिन राज शर्मा और मेरे प्यार मे किसी तरह का कोई बासी पन नही आया था. बालिक राज शर्मा दो दो बीवियाँ पकड़ और ज़्यादा कामुक हो गया था.

साल भर इस तरह मेहनत करने के बाद हम दोनो को एक साथ मेहनत का फल मिला. ऑलमोस्ट साथ साथ ही हम प्रेगञेन्ट हो गये. दोनो के पेट मे राज शर्मा का ही अंश था. लेकिन अरुण खुशी से फूला नही समा रहा था
दोस्तो ये कहानी यही ख़तम होती है फिर मिलेंगे किसी नई कहानी के साथ तब तक के लिए अलविदा दोस्तो आपको ये कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा
दा एंड
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10-30-2019, 06:10 PM,
#34
RE: mastram kahani राधा का राज
२ND part is sexilent। Nice work।
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