Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ
04-25-2019, 10:53 AM,
#21
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
चौधराइन 

भाग 19 - उस्ताद मदन


"नही, कपड़े खराब हो जायेंगे।
तभी उसके दिमाग में आया की क्यों ना पीछे से लण्ड डाला जाये, कपड़े भी खराब नही होंगे।

"मामी, पीछे से डालु,,,?,,,,,,कपड़े खराब नही होंगे,,,।"

मामीलण्ड पर से अपने हाथ को हटाते हुए बोली,
"नही, बहुत टाईम लग जायेगा,,,,,,,,,रात में पीछे से डालना"

मदन ने उर्मिला देवी के कन्धो को पकड़ कर उठाते हुए कहा,
"प्लीज मामी,,,,,,,,,,,,उठो ना, चलो उठो,,,,,,,,,,"

"अरे, नही रे बाबा,,,,,,,मुझे बाजार भी जाना है,,,,,,,,ऐसे ही देर हो गई है,,,,,,,,,"

"ज्यादा देर नही लगेगी, बस दो मिनट,,,,,,,"

"अरे नही रे, तू छोड़ न, ,,,,,,,,,"

" हाँ तुम्हारा काम तो वैसे भी हो गया न क्या मामी ??? मेरे बारे में भी तो सोचो, थोड़ा तो रहम करो,,,,,,,,,,,,हर समय क्यों तड़पाती…?"

"तु मानेगा नही,,,,,,,,"

"ना, बस दो मिनट दे दो,,,,,,,,,"

"ठीक है, दो मिनट में नही निकला तो खुद अपने हाथ से करना,,,,,,,,मैं नही रुकने वाली."
उर्मिला देवी उठ कर, डाइनिंग़ टेबल के सहारे अपने चूतड़ों को उभार कर घोड़ी बन गई। मदन पीछे आया, और जल्दी से उसने मामी की साड़ी को उठा कर कमर पर कर दिया। कच्छी तो पहले ही खुल चुकी थी। उर्मिला देवी की मख्खन मलाई से, चमचमाते गोरे गोरे बड़े बड़े चूतड़ मदन की आंखो के सामने आ गये। उसके होश फ़ाखता हो गये।

उर्मिला देवी अपने चूतड़ों को हिलाते हुए बोली,
"क्या कर रहा है ?, जल्दी कर देर हो रही है,,,,,,,,,।"

चूतड़ हिलाने पर थेरक उठे। एकदम गुदाज और माँसल चूतड़, और उनके बीच की खाई। मदन का लण्ड फुफकार उठा।
"मामी,,,,,,,आपने रात में अपना ये तो दिखाया ही नही,,,,,,,उफफ्, कितना सुंदर है मामी,,,,,,,,,!!!।"

"जो भी देखना है, रात में देखना पहली रात में क्या तुझे चूतड़ भी,,?,,,,,,,तुझे जो करना है, जल्दी कर,,,,,,,,,,,"

"ओह, शीईईईईई मामी, मैं हंमेशा सोचता था, आप का पिछ्वाड़ा कैसा होगा। जब आप चलती थी और आपके दोनो चूतड़ जब हिलते थे. तो दिल करता था की उनमे अपने मुंह को घुसा कर रगड़ दु,,,,,,उफफफ् !!!"

"ओह होओओओओओओओ,,,,,,,,जल्दी कर ना,,,,,,,,"
कह कर चूतड़ों को फिर से हिलाया।

"चूतड़ पर एक चुम्मा ले लुं,,,,,,,?"

"ओह हो, जो भी करना है, जल्दी कर. नही तो मैं जा रही हुं,,,,,"
मदन तेजी के साथ नीचे झुका, और पच पच करते हुए चूतड़ों को चुमने लगा। दोनो माँसल चूतड़ों को हाथों में दबोच मसलते हुए, चुमते हुए, चाटने लगा। उर्मिला देवी का बदन भी सिहर उठा। बिना कुछ बोले उन्होंने अपनी टांगे और फैला दी।

मदन ने दोनो चूतड़ों को फैला दिया, और दोनो गोरे गोरे चूतड़ों के नीचे चुद चुद के सावली होरही बित्ते भर की चूत देख बीच की खाई में जैसे ही मदन ने हल्के से अपनी जीभ चलायी। उर्मिला देवी के पैर कांप उठे। उसने कभी सोचा भी नही था, की उसका ये भांजा इतनी जल्दी तरक्की करेगा।

मदन ने देखा की चूतड़ों के बीच जीभ फिराने से चूत अपने आप हल्के हल्के फैल्ने और सिकुड़ने लगा है, और मामी के पैर हल्के-हल्के थर-थरा रहे थे।

"ओह मामी, आपकी चूत कितनी,,,???,,,,,,,,उफफफफ्फ्फ् कैसी खुशबु है ?,,,,


इस बार उसने जीभ को पूरी खाई में ऊपर से नीचे तक चलाया, उर्मिला देवी के पूरे बदन में सनसनी दौड़ गई। उसने कभी सपने में भी नही सोचा था, की घर में बैठे बीठाये उसकी चूत चाटने वाला मिल जायेगा। मारे उत्तेजना के उसके मुंह से आवाज नही निकल रही थी। गु गु की आवाज करते हुए, अपने एक हाथ को पीछे ले जा कर, अपने चूतड़ों को खींच कर फैलाया।

मदन समझ गया था की मामी को मजा आ रहा है, और अब समय की कोई चिन्ता नही है। उसने चूतड़ों के के ठीक पास में दोनो तरफ अपने दोनो अंगूठे लगाये, और दरार को चौड़ा कर जीभ नुकीली कर के पेल दी। चूत में जीभ चलाते हुए चूतड़ों पर हल्के हल्के दांत भी गड़ा देता था। चूत की गुदगुदी ने मामी को एकदम बेहाल कर दिया था। उनके मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी,
"ओह मदन, क्या कर रहा है, बेटा ??,,,,,,,उफफफ्फ्,,,,,,,,मुझे तो लगता था तुझे कुछ भी नही,,,,,,पगले, शशशशीईईईईईईईई उफफफफ चाआट्ट रहा हैएएएए,,,,,,मेरी तो समझ में नहीईई,,,,,,,,।"

समझ में तो मदन के भी कुछ नही आ रहा था मगर चूतड़ों पर मुँह मारते काटते हुए बोला,
" पच्च पच्च,,,,मामी शीईईईईई,,,,,,,मेरा दिल तो आपके हर अंग को चुमने और चाटने को करता है,,,,,,आप इतनी खूबसुरत हो,,,मुझे नही पता था चूतड़ों चाटी जाती है या नहीई,,,,,,हो सकता है नही चाटी जाती होगी मगर,,,,,,मैं नही रुक सकता,,,,,,,मैं तो इसको चुमुन्गा और चाट कर खा जाऊँगा, जैसे आपकी चूत,,,,।"

"शीईईई,,,,,,,एक दिन में ही तु कहाँ से कहाँ पहुंच गया ? माहिर हो गया ,,,,, उफफफ्फ् तुझे मेरे चूतड़ इतने पसंद हैं तो चाट,,,,,,चुम,,,,,,उफफफ शीईईईईई बेटा,,,,,,बात मत कर,,,,,मैं सब समझती हूँ,,, तू जो भी करना चाहता है करता रह।"
मदन समझ गया की रात वाली छिनाल मामी फिर से वापस आ गई है। वो एक पल को रुक गया अपनी जीभ को आराम देने के लिये, मगर उर्मिला देवी को देरी बरदाश्त नही हुई। पीछे पलट कर मदन के सिर को दबाती हुई बोली,
"उफफफ् रुक मत,,,,,,,,,जल्दी जल्दी चाट....."

मगर मदन भी उसको तड़पाना चाहता था। उर्मिला देवी पीछे घुमी और मदन को उसके टी-शर्ट के कोलर से पकड़ कर खिंचती हुई डाइनिंग़ टेबल पर पटक दिया। उसके नथुने फुल रहे थे, चेहरा लाल हो गया था। मदन को गरदन के पास से पकड़, उसके होठों को अपने होठों से सटा कर खूब जोर से चुम्मा लिया। इतनी जोर से जैसे उसके होठों को काट खाना चाहती हो, और फिर उसके गाल पर दांत गड़ा कर काट लिया। मदन ने भी मामी के गालो को अपने दांतो से काट लिया।

"उफफ्फ् कमीने, निशान पड़ जायेगा,,,,,,,,,रुकता क्यों है,?,,,,,,,जल्दी कर, नही तो बहुत गाली सुनेगा,,,,,,,,,,और रात के जैसा छोड़ दूँगी..."

मदन उठ कर बैठता हुआ बोला, "जितनी गालीयां देनी है, दे दो,,,,,"
और चूतड़ पर कस कर दांत गड़ा कर काट लिया। 

"उफफफ,,,,,,,हरामी, गाली सुन ने में मजा आता है, तुझेएए,,,,????"

मदन कुछ नही बोला, चूतड़ों की चुम्मीयां लेता रहा,

",,,,,,आह, पच पच।"

उर्मिला देवी समझ गई की, इस कम उमर में ही छोकरा रसिया बन गया है।
चूत के भगनशे को अपनी उँगली से रगड़ कर, दो उन्ग्लीयोन को कच से बुर में पेल दिया. बुर एकदम पसीज कर पानी छोड़ रही थी। चूत के पानी को उँगलीयों में ले कर, पीछे मुड कर मदन के मुंह के पास ले गई. जो कि चूतड़ चाटने में मशगुल था और अपनी चूतड़ों और उसके मुंह के बीच उँगली घुसा कर पानी को रगड़ दिया। कुछ पानी चूतड़ों पर लगा, कुछ मदन के मुंह पर।

"देख, कितना पानी छोड़ रही है चूत ?, अब जल्दी कर,,,,,,,,"

पानी छोड़ती चूत का इलाज मदन ने अपना मुंह चूत पर लगा कर किया। चूत में जीभ पेल कर चारो तरफ घुमाते हुए चाटने लगा।

"ये क्या कर रहा है, सुवर ??,,,,,,,,खाली चाटता ही रहेगा क्या,,,,,मादरचोद ?, उफफ् चाट, चूतड़ों, चूत सब चाट लेएएएए,,,,,,,,,,भोसड़ी के,,,,,,,लण्ड तो तेरा सुख गया है नाआअ,,,,!!!,,,,,,,हरामी…चूतड़ खा के पेट भर, और चूत का पानी पीईईईईई,,,,,,,,,ऐसे ही फिर से झड़ गई, तो हाथ में लण्ड ले के घुमनाआ,,,,,,"

मदन समझ गया कि मामी से नही रहा जा रहा था. जल्दी से उठ कर लण्ड को चूत के पनियाये छेद पर लगा, धचाक से घुसेड़ दिया। उर्मिला देवी का बेलेन्स बिगड़ गया, और टेबल पर ही गिर पड़ी. चिल्लाते हुए बोली,
"उफ़ बदमाश, बोल नही सकता था क्या ?,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,चूत,,,,,,,,आराम सेएएएएए......."
पर मदन ने सम्भलने का मौका नही दिया। धचा-धच लण्ड पेलता रहा। पानी से सरोबर चूत ने कोई रुकावट नही पैदा की। दोनो चूतड़ों के मोटे-मोटे माँस को पकड़े हुए, गपा-गप लण्ड डाल कर, उर्मिला देवी को अपने धक्को की रफतार से पूरा हिला दिया था, उसने। उर्मिला देवी मजे से सिसकारियाँ लेते हुएचू में चूतड़ों उचका-उचका कर लण्ड ले रही थी।

फच-फच की आवाज एक बार फिर गुन्ज उठी थी। जांघ से जांघ और चूतड़ टकराने से पटक-पटक की आवाज भी निकल रही। दोनो के पैर उत्तेजना के मारे कांप रहे थे।

"पेलता रह,,,,,,और जोर से माआआरर,,,,,,बेटा मार,,,,,फ़ाड़ दे चूत,,,,,,मामी को बहुत मजा दे रहा हैएएएएए,,,,,,,,। ओह चोद,,,,,,,,,देख रे मेरी ननद, तूने कैसा लाल पैदा किया है,,,,,,,,,तेरे भाई का काम कर रहा है,,,,,,,,ऐईईईई.......फाआआअड दियाआआआअ सल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लेएएए नेए,,,,,,,,,,"

"ओह मामी, आअज आपकी चूत,,,,सीईईईई,,,,,मन कर रहा, इसी में लण्ड डाले,,,,,ओह,,,,सीईईईई,,,,,,सीई बस ऐसे ही हंमेशा मेरा लण्ड लेती,,,,,,,,........"
"हाय चोद,,,,,बहुत मजा,,,,,,सीईईइ चूतड़ोंचाटु,,,,,तु ने तो मेरी जवानी पर जादु कर दिया,,,,,"

"हाय मामी, ऐसे ही चूतड़ों को हिला हिला-हिला हिला के लण्ड ले,,,,,सीईईइ, जादु तो तुमने किया हैईई,,,,,,,,,,अहसान किया है,,,,इतनी हसीन चूत, मेरे लण्ड के हवाले करके,,,,'पक पक',,,,,लो मामी,,,,,ऐसे ही चूतड़ों नचा-नचा के मेरा लण्ड अपनी चूत में दबोचो,,,,,,,,,,,सीईईई"

"जोर लगा के चोद ना भोसड़ी के,,,,,,,देख,,,,,,,,,,,,,देख तेरा लण्ड गया तेरी मामी की चूत में,,,,,,, डाल साले,,,,,,पेल साले,,,,,पेल अपनी, मुझे,,,,,,,चोद अपनी मामी की चूत,,,,,,रण्डी की औलाद,,,,,,साला,,,,,मामीचोद,,,,,,"

'''''फच,,,,,,फच,,,,,फच,,,,,''''''''

और, एक झटके के साथ उर्मिला देवी का बदन अकड़ गया.
"ओह,,, ओह,,,, सीईई,,,, गई, मैं गई,,,,"
करती हुई डाइनिंग़ टेबल पर सिर रख दिया। झड़ती हुई चूत ने जैसे ही मदन के लण्ड को दबोचा, उसके लण्ड ने भी पिचकारी छोड़ दी. 'फच फच' करता हुआ लण्ड का पानी चूत के पसीने से मिल गया। दोनो पसीने से तर-बतर हो चुके थे। मदन उर्मिला देवी की पीठ पर निढाल हो कर पड़ गया था। दोनो गहरी गहरी सांसे ले रहे थे।
जबरदस्त चुदाई के कारण दोनो के पैर कांप रहे थे। एक दूसरे का भार सम्भालने में असमर्थ। धीरे से मदन मामी की पीठ पर से उतर गया, और उर्मिला देवी ने अपनी साड़ी नीचे की और साड़ी के पल्लु से पसीना पोंछती हुई सीधी खड़ी हो गई।

वो अभी भी हांफ रही थी। मदन पास में पडे टोवेल से लण्ड पोंछ रहा था। मदन के गालो को चुटकी में भर मसलते हुए बोली,
"कमीने,,,,,,,अब तो पड़ गई तेरे लण्ड को ठंड,,,,,,पूरा टाईम खराब कर दिया, और कपड़े भी,,,,,"

"पर मामी, मजा भी तो आया,,,,,,,,सुबह-सुबह कभी मामा के साथ ऐसे मजा लिया है,,,,,,"

मामी को बाहों में भर लिपट ते हुए मदन बोला। उर्मिला देवी ने उसको परे धकेला,
"चल हट, ज्यादा लाड़ मत दिखा तेरे मामा अच्छे आदमी है। मैं पहले आराम करूँगी फिर बाजार जाऊँगी, और खबरदार, जो मेरे कमरे में आया तो, तुझे ट्युशन जाना होगा तो चले जाना "

"ओके मामी,,,,,पहले थोड़ा आराम करूँगा जरा."
बोलता हुआ मदन अपने कमरे में, और उर्मिला देवी बाथरुम में घुस गई। थोड़ी देर खट पट की आवाज आने के बाद फिर शान्ती छा गई।
मदन युं ही बेड पर पड़ा सोचता रहा की, सच में मामी कितनी मस्त औरत है, और कितनी मस्ती से मजा देती है। उनको जैसे सब कुछ पता है, की किस बात से मजा आयेगा और कैसे आयेगा ??। रात में कितना गन्दा बोल रही थी,,,,,,' मुंह में मुत दूँगी ',,,,,,ये सोच कर ही लण्ड खड़ा हो जाता है. मगर ऐसा कुछ नही हुआ. चुदवाने के बाद भी वो पेशाब करने कहाँ गई, हो सकता है बाद में गई हो मगर चुदवाते से समय ऐसे बोल रही थी जैसे,,,,,,,,शायद ये सब मेरे और अपने मजे को बढ़ाने के लिये किया होगा। सोचते सोचते थोड़ी देर में मदन को झपकी आ गई।

एक घंटे बाद जब उठा तो मामी जा चुकी थी वो भी तैयार हो कर ट्युशन पढ़ने चला गया। दिन इसी तरह गुजर गया। शाम में घर आने पर दोनों एक दूसरे को देख इतने खुश लग रहे थे जैसे कितने दिनो के बाद मिले हो, शायद दोनों शाम होने का इन्तजार सुबह से कर रहे थे । फिर तो जल्दी जल्दी खाना पीना निबटा, दोनों बेड्रूम मे जा घुसे और उस रात में दो बार ऐसी ही भयंकर चुदाई हुई की दोनो के सारे कस-बल ढीले पड़ गये। दोनो जब भी झड़ने को होते चुदाई बन्द कर देते। रुक जाते, और फिर दुबारा दुगने जोश से जुट जाते। मदन भी खुल गया। खूब गन्दी गन्दी बाते की। मामी को ' साली,,,,,,चुदक्कड़ मामी,,,,,,,,, ' कहता, और वो खूब खुश हो कर उसे ' हरामी चूतखोर ,,,, ,,,,,,' कहती।

उर्मिला देवी के शरीर का हर एक भाग थूक से भीग जाता, और चूतड़ों, चूचियों और जांघो पर तो मदन के दांत के निशान पड़ जाते। उसी तरह से मदन के गाल, पीठ और सीना उर्मिला देवी के दांतो और नाखुन के निशान बनते थे।
घर में तो कोई था नही. खुल्लम-खुल्ला जहां मरजी, वहीं चुदाई शुरु कर देते थे दोनो। मदन अपनी लुंगी हटा मामी को साड़ी पेटीकोट उठा गोद में लण्ड पर बैठा कर ब्लाउज में हाथ डाल चूचियाँ सहलाते हुए टी वी देखता था फ़िर चुदास बढ़ जाने पर वही सोफ़े पर चोद देता। किचन में उर्मिला देवी बिना सलवार के केवल लम्बी कमीज पहन कर खाना बनाती और मदन से कमीज उठा कर, दोनो जांघो के बीच बैठा कर चूत चटवाती। या मदन पीछे से चूतड़ों पर लण्ड रगड़ता या मामी चूत में केला डाल कर उसको धीरे धीरे करके खिलाती । अपनी बेटी की फ्रोक पहन कर, डाइनिंग़ टेबल के ऊपर एक पैर घुटनो के पास से मोड़ कर बैठ जाती और मदन को सामने बिठा कर अपनी नंगी चूत दिखाती और दोनो नाश्ता करते। चुदास लगने पर मदन मामी को वहीं पड़ी डाइनिंग टेबिल पर लिटा के खड़े खड़े चोद देता।
मामी मदन का लण्ड खड़ा कर, उस पर अपना दुपट्टा कस कर बांध देती थी। उसको लगता जैसे लण्ड फट जायेगा मगर चूतड़ों चटवाती रहती थी, और चोदने नही देती। दोनो जब चुदाई करते करते थक जाते तो एक ही बेड पर नंग-धडंग सो जाते।
शायद, चौथे दिन सुबह के समय मदन अभी उठा नही था। तभी उसे मामी की आवाज सुनाई दी,
" मदन……मदन बेटा,,,।"

मदन उठा देखा, तो आवाज बाथरुम से आ रही थी। बाथरुम का दरवाजा खुला था, अन्दर घुस गया। देखा मामी कमोड पर बैठी हुई थी। उस समय उर्मिला देवी ने मैक्सी जैसा गाउन डाल रखा था। मैक्सी को कमर से ऊपर उठा कर, कमोड पर बैठी हुई थी। सामने चूत की झांटे और जांघे दिख रही थी।

मदन मामी को ऐसे देख कर मुस्कुरा दिया, और हस्ते हुए बोला,

"क्या मामी, क्यों बुलाया,,,?"

"इधर तो आ पास में,,,,,,,", उर्मिला देवी ने इशारे से बुलाया।

"क्या काम है ?,,,,,,,यहाँटट्टी करते हुए."

मदन कमोड के पास गया और फ्लश चला कर. झुक कर खड़ा हो गया। उसका लण्ड इतने में खड़ा हो चुका था।

उर्मिला देवी ने मुस्कुराते हुए. अपने निचले होठों को दांतो से दबाया और बोली.
"एक काम करेगा ?"

"हां बोलो, क्या करना है,,,?"

"जरा मेरी चूतड़ धो दे ना,,!!??,,,,,,"
कह कर उर्मिला देवी मुस्कुराने लगी। खुद उसका चेहरा लाल हो रहा था । मदन का लण्ड इतना सुनते ही लहरा गया। उसने तो सोचा भी नही था, की मामी ऐसा करने को बोल सकती है। कुछ पल तो युं ही खड़ा, फिर धीरे से हँसते हुए बोला,
"क्या मामी ?, कैसी बाते कर रही हो ?।

इस पर उर्मिला देवी तमक कर बोली, "तुझे कोई दिक्कत है, क्या,,,?"

"नही, पर आपके हाथ में कोई दिक्कत है, क्या,,,,,?"

"ना, मेरे हाथ को कुछ नही हुआ, बस अपने चूतड़ों को तुझसे धुलवाना चाहती,,,,,,,,?।"

मदन समझ गया की, 'मामी का ये नया नाटक है. सुबह सुबह चुदवाना चाहती होगी। यहीं बाथरुम में साली को पटक कर चोद दूँगा, सारा चूतड़ धुलवाना भुल जायेगी।' उर्मिला देवी अभी भी कमोड पर बैठी हुई थी। अपना हाथ टोईलेट पेपर की तरफ बढ़ाती हुई बोली,
"ठीक है, रहने दे,,,,,चूतड़ों को चाटेगा, मगर धोयेगा नही,,,,,,आना अब चूने भी तो,,,,,,,,,,"

"अरे मामी रुको…नारज क्यों होती हो,,,,,,,मैं सोच रहा था, सुबह सुबह,,,,,,,लाओ मैं धो देता हुं.?

और टोईलेट पेपर लेकर, नीचे झुक कर चूतड़ को अपने हाथों से पकड़ थोड़ा सा फैलाया. जब चूतड़ों का छेद ठीक से दिख गया, तो उसको पोंछ कर अच्छी तरह से साफ किया, फिर पानी लेकर चूतड़ों धोने लगा । मदन ने देखा कि मामी को इतना मजा आ रहा था की चूत के होंठ फरकने लगे थे।
चूतड़ों के सीकुडे हुए छेद को खूब मजे लेकर, बीच वाली अंगुली से चूत तक रगड़-रगड़ कर धोते हुए बोला,
"मामी, ऐसे चूतड़ धुलवा कर, लण्ड खड़ा करोगी तो,,,,,,,,??!!।

उर्मिला देवी कमोड पर से हँसते हुए, उठते हुए बोली,
"तो क्या,,?,,मजा नही आया,,,,,???"
बेसिन पर अपने हाथ धोता हुआ मदन बोला,
"वो तो ठीक है पर…दरअसल मुझे कुछ दिखा था जरा आप यहाँ खड़ी हो तो”

और मामी को कमर से पकड़ कर, मुंह की तरफ से दीवार से सटाकर बोला –
“जरा थोड़ा झुको मामी।”
मामी “क्या है रे” कहते हुए झुक गईं।
मदन एक झटके से उसकी मैक्सी ऊपर कर दी, अब उनके बड़े बड़े चूतड़ों के नीचे उनकी गीली बित्ते भर की चूत गीला भोसड़ा साफ़ दिख रहा था। बस फ़िर क्या था मदन ने अपनी शोर्टस् नीचे सरका, फनफनाता हुआ लण्ड निकाल कर उस गीले भोसड़े पर लगा जोर का धक्का मार बोला –“ मजा तो अब आयेगाआ,,,,,,!!!।"

उर्मिला देवी ' आ उईईइ क्या कर रहा है कंजरे,?,,,,छोड़...' बोलती रही, मगर मदन ने बेरहमी से तीन-चार धक्को में पूरा लण्ड पेल दिया और हाथ आगे ले जा कर चूचियाँ थाम निपल मसलते हुए, फ़टा फ़ट धक्के लगाना शुरु कर दिया। पूरा बाथरुम मस्ती भरी सिसकारीयों में डुब गया. दोनो थोड़ी देर में ही झड़ गये। जब चूत से लण्ड निकल गया, तो उर्मिला देवी ने पलट कर मदन को बाहों में भर लिया।
कुछ ही दिनो में मदन माहिर चोदु बन गया था। जब मामा और मोना घर आ गये, तो दोनो दिन में मौका खोज लेते जैसे कि लन्च टाइम में मदन कालेज से आ चोद के चला जाता और छुट्टी वाले दिन कार लेकर, शहर से थोड़ी दुरी पर बने फार्म हाउस पर काम करवाने के बहाने निकल जाते।

जब भी जाते मोना को भी बोलते चलो, मगर वो तो होमवर्क मे व्यस्त होती थी, मना कर देती। फिर दोनो फार्म हाउस में मस्ती करते।

क्रमश:…………………………
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04-25-2019, 10:54 AM,
#22
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
चौधराइन 
भाग 20 – नया चस्का 1


यहाँ तक की कहानी सुना के मदन बोला –“तो चौधराइन चाची ये थी, मेरी ट्रेनिंग़ की कहानी। मुझे मेरी मामी उस्ताद बनाया।”
इस गरम कहानी के बीच एक बार चौधराइन चाची चुदास से गरमा कर मदन से चुदवा के मस्त हो चुकीं थीं । पर कहानी खतम होते होते मदन पूरे मूड मे आ चुका था सो मदन ने अपनी एक टांग उठा, उनकी जांघो पर रखते हुए, उसके पैरो को अपने दोनो पैरों के बीच करते हुए, लण्ड को पेटिकोट के ऊपर से चूत पर सटाते हुए, उसके होठों से अपने होठों को सटा उसका मुंह बन्द कर दिया। रसीले होठों को अपने होठों के बीच दबोच, चूसते हुए अपनी जीभ को उसके मुंह में ठेल, उसके मुंह में चारो तरफ घुमाते हुए चुम्मा लेने लगा।

कुछ पल तो माया देवी के मुंह से ...उम्म...उम्म... करके गुंगियाने की आवाज आती रही, मगर फिर वो भी अपनी जीभ को ठेल-ठेल कर पूरा सहयोग करने लगी। दोनो आपस में लिपटे हुए, अपने पैरों से एक दूसरे को रगड़ते हुए, चुम्मा-चाटी कर रहे थे। मदन ने अपने हाथ कमर से हटा उसकी चूचियों पर रख दिया था, और ब्लाउज के ऊपर से उन्हे दबाने लगा। माया देवी ने जल्दी से अपने होठों को उसके चुम्बन से छुडाया. दोनो हांफ रहे थे, और दोनो का चेहरा लाल हो गया था। मदन के हाथों को अपनी चूचियों पर से हटाती हुई बोली,
“इस्स,हट,,,,,,,क्या करता है…?"

मदन ने माया देवी का हाथ को पकड़, अपनी लुंगी के भीतर डाल, अपना लण्ड उसके हाथ में पकड़ा दिया। माया देवी ने अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश की, मगर उसने जबरदस्ती उसकी मुट्ठी खोल, अपना गरम तपता हुआ खड़ा लण्ड उसके हाथ में पकड़ा दिया। लण्ड की गरमी पा कर उसका हाथ अपने आप लण्ड पर कसता चला गया।

“…। तेरा मन नही भरता क्या?”
लण्ड को पूरी ताकत से मरोड़ती, दांत पीसती बोली।

“हाय,,,,,,!!! …एक बार और करने दे…ना,,,,!!”,
कहते हुए, मदन ने उसके घुटनो तक सिमट आये पेटिकोट के भीतर झटके से हाथ डाल चूत दबोच ली। माया देवी ने चिहुंक कर लण्ड को छोड़, पेटिकोट के भीतर उसके हाथ से चूत छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली,
“इस्स्स्स,,,,,…क्या करता है,,,??…कहाँ हाथ घुसा रहा…???”

मदन जबरदस्ती उसकी जांघो के बीच हाथ से चूत को मसलता हुआ बोला,
“हाय,,,,,,,,एक बार और…देख ना कैसे खड़ा…??!!”
“उफफफ्,,,,,हाथ हटा,,,,,। बहुत बिगड़ गया है, तु…??”

मदन का हाथ गीला हो गया था चौधराइन की चूत पनिया गई थी। मदन बोला,
“हाय,,,,पनिया गई है,,,,तेरी चु…”

माया देवी उसकी कलाई पकड़, रोकने की कोशिश करती बोली,
“उफफ्,,,,,छोड़,,,,,ना,,,!,,,,क्या करता है,,,,?…वो पानी तो पहले का है…।"

एक हाथ से लुंगी को लण्ड पर से हटाता हुआ बोला,
“पहले का कहाँ से आयेगा ??…देख, इस पर लगा पानी तो कब का सुख गया…।"

नंगा, खड़ा लण्ड देखते ही चौधराइन, आंखे चुराती, कनखियों से देखती हुई बोली,
“तेरा लुंगी से पौंछ गया होगा,,,,,,मेरा अन्दर, कैसे सुखेगा…??”,
कहते हुए, मदन के हाथ को पेटिकोट के अन्दर से खींच दिया। पेटिकोट जांघो तक उठ चुका था। लण्ड को अपने हाथ से पकड़, दिखाता हुआ मदन बोला,
“…। एक बार और्…तेरी चु…”

“चुप,,,बेशरम,,,,बहुत देर हो चुकी है…”

“हाय चाची,,,,कहानी कहते कहते मन …बस एक बार और…”

“हर बार तू यही कहता है रात भर तु यही करता रहता था, क्या…???”

“…तीन…चार…बार तो करता ही था ......छोड़ो उसे …बस एक बार और…”,
कहते हुए, फिर से उसके पेटिकोट के भीतर हाथ घुसाने की कोशिश की।

“उफफ्,,,,सीईईईई…। कमीने छोड़…। घड़ी देख…। क्या टाईम हुआ…???”

मदन ने घड़ी देखी। सुबह के ४:३० बज रहे थे. मदन के किस्से में टाईम का पता ही नही चला था.

अब चौधराइन की चूत की बन आई दोपहर में बाप सदानन्द से और हर दूसरे तीसरे दिन किसी बहाने से रात में बगिया वाले मकान में सदानन्द के बेटे मदन से अपनी चूत जम के बजवाती। रोज रात को इसलिए नहीं कि कहीं किसी को शक न हो जाय सो जिस जिस दिन बगिया वाले मकान पे जाने का कोई बहाना न मिलता वो रात भर चुदास से छटपटाती रहती क्योंकि चुदवाने का चस्का जो पड़ गया था। अचानक उनके शैतानी दिमाग ने इसका भी तरीका निकाल लिया।
दरअसल चौधरी के मकान में आंगन पीछे की तरफ़ था उसके बाद दीवार थी, जिससे चौधरी साहब का दूसरा मकान जुड़ा था उस मकान में आधे में मवेशी घर था, जहाँ जानवरों के बँधे रहते थे, बाकि के आधे में चौधरी साहब की पँचायत का कमरा था जो पँचायतघर कहलाता था जिसमें जरूरत पड़ने पर शाम को चौधरी साहब पँचायत लगाते थे उस कमरे में दिन दोपहर में कोई भी नहीं रहता था। दिन दोपहर में अक्सर चौधराइन इस कमरे का इस्तेमाल नौकरों का हिसाब किताब करने के लिए करती थीं क्योंकि यहाँ एकान्त रहता था और वो सुकून से अपना हिसाब किताब बिना व्यवधान के कर सकती थी। कमरे में लोगों के बैठने के लिए दरी बिछी थी, एक चौकी थी और उस पर एक गद्दा व गाव तकिया लगे रहते थे, उसी पर बैठ चौधरी पँचायत और चौधराइन नौकरों का हिसाब करती थीं। इस मकान के बाद सड़क थी इसलिये नौकर चाकर बाहर ही बाहर आ जा सकते थे पर चौधरी और चौधराइन अपने मकान के अन्दर से भी आ जा सकते थे । चौधराइन को ये जगह जच गई और कोफ़्त हुआ कि अभी तक उन्हें ये जगह क्यों न सूझी । बस उन्होंने बेला के हाथ वहाँ की अतिरिक्त चाभी दे उससे कहा कि इसे मदन को दे देना और उसे रात बारह बजे के बाद पँचायत घर आने को बोलना । बेला को भी मदन से उस दिन चुदवाने के बाद से मौका नहीं लगा था क्योंकि इस माह कई त्योहार थे उनकी छुट्टियों के कारण उसका मर्द आजकल घर आया हुआ था, और पति को शक हो जाने के डर से बगिया वाले मकान पर जा नही पाई थी, उसे तो जाने का बस बहाना चाहिये था, सो वो खुशी खुशी जाने को राजी हो गयी।
मदन दोपहर में बगिया वाले मकान पर खाली बैठा मक्खियाँ मार रहा था क्योंकि जैसा कि मैने पहले बताया इस माह कई त्योहार थे सो उनकी छुट्टियों के कारण गाँव की सभी चुदक्कड़ औरतों के मर्द और भाई बन्द आये हुए थे। पिछले कई दिनों से उसे कोई चूत नहीं मिली थी । बेला को देख उसकी बाछें खिल गई।
मदन –“अरे आओ बेला चाची! बहुत दिनों पे दिखाई दीं लगता है इस भतीजे को भूल ही गईं क्या ।”
बेला –“ अरे नहीं बेटा! काम काज से छुट्टी ही नहीं मिलती, वो तो आज चौधराइन ने जरूरी बात बताने भेजा है इसलिए छुट्टी मिली।”
मदन –“भरी दुपहरी में आई हो अन्दर चलके पानी वानी पी लो बात कहीं भागी नहीं जा रही सुन लूंगा।” 
बेला समझ गई कि मदन आज बिना चोदे न जाने देगा, चाहती वो भी यही थी सो मन ही मन खुश होकर पर ऊपर से नखरा दिखा बोली –“ अच्छा बेटा! भगवान भला करे पर मैं हुँ जरा जल्दी में चौधराइन का बड़ा काम फ़ैला छोड़ के आई हूँ।”
ऐसे बोल अन्दर को चल दी जबकि वो चौधराइन को बोल के आई थी कि उसे कुछ दूसरे घरों का काम निबटाना है सो अब वो अगर आ सकी तो शाम को छ: सात बजे के करीब आयेगी। मदन उसके अपने भारी चूतड़ों और पपीते सी विशाल चूचियों को ललचाई आँखों से घूरते पीछे पीछे अन्दर आया और दरवाजा अन्दर से बन्द कर उसे पानी दिया और पूछा –“अब बताओ क्या कहलवाया है चाची ने ।”
मदन को अन्दर आ दरवाजा बन्द करते देख बेला अर्थ पूर्ण ढ़ंग से मुस्कुराई और बोली –“चौधराइन ने ये पँचायत घर की चाभी भिजवाई है और रात बारह बजे वहाँ आने को कहा है। अभी आराम कर रात में मजे करना ।
मदन ने चाभी ले ली और बेला को बिस्तर पर गिराते हुए बोला –“अरे मैं तो आराम ही कर रहा था तुम भी तो थोड़ा आराम कर लो चाची ।
बेला –“ अरे अरे क्या कर रहे हो बेटा अपनी ये ताकत रात के लिए बचा के रख। दरवाजा खोल दे और मुझे जाने दे।”
मदन –“ रात के लिए अभ्यास तो करा दो चाची ।
बेला –“अरे जाने दे बेटा तुझे किसी अभ्यास की जरूरत नहीं, मैं क्या जानती नहीं ।”
बेला के इस अरे अरे और बात चीत के बीच मदन ने फ़ुर्ती से उसकी नाभी के पास हाथ डाल उसकी धोती की प्लेटें(चुन्नटें) बाहर निकाल और पेटीकोट का नारा खींच धोती और पेटीकोट एक ही झटके में निकाल फ़ेंका और अगले ही क्षण बेला सिर्फ़ ब्लाउज में नंगधड़ग बिस्तर पर पड़ी थी। तभी मदन बड़े बड़े चूतड़ माँसल जाघें देख उसके ऊपर कूदा तो बेला हँसते हुए बोली –“आराम से मदन बेटा मैं क्या कहीं भागी जा रही हूँ।”
मदन (उसका ब्लाउज खोलते हुए) –“ अभी तो कह रही थीं कि चौधराइन चाची का बड़ा काम फ़ैला छोड़ के आई हो, अब कह रही हो क्या मैं कहीं भागी जा रही हूँ
बेला(मुस्कुराते हुए दोनो हाथ ऊपर कर ब्लाउज उतारने में मदद करते हुए) –“अरे वो तो मैं तुझे चिढ़ा रही थी मैं तो चौधराइन से बोल के आई हूँ कि कुछ दूसरे घरों का काम निबटाना है सो अब तो शाम को छ: सात बजे के करीब आऊँगी।
मदन(उसकी ब्रा उतारते हुए) –“फ़िर क्या मजे लो, पर ये क्या चाची तुम भतीजे चिढ़ा के तड़पाती हो ।
बेला(मुस्कुरा के) –“जब भतीजे से चुदवा ही लिया तो चिढ़ा के तड़पाने मे क्या है तड़पने मे जोश बढ़ता है।
ब्रा उतरते ही बेला की बड़ी बड़ी चूचियाँ फ़ड़फ़ड़ाई मदन ने जिन्हे मदन ने दोनों हाथों मे दबोच उनपर मुँह मारते हुए कहा –“तो चाची अब देखो मेरा जोश।”
मदन ने पिछले दो दिन बिना चूत के बिताये थे सो बेला चाची को खूब पटक पटक के चोदा । मारे मजे के बेला मालिन ने अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के किलकारियाँ भर भर के चुदवाया। शायद रात में मनपसन्द चौधराइन की चूत मिलने की सोच सोच कुछ ज्यादा ही जोश मे चोदा । उसके बाद भी मदन ने उसे जाने न दिया और उसकी सेर सेर भर की चूचियाँ थाम, उसकी मोटी मोटी जाँघों और बड़े बड़े चूतड़ों के बीच अपना लण्ड दबा के चिपक के शाम साढ़े चार बजे तक सोया। 
उस रात मदन पँचायतघर करीब पौने बारह बजे पहुँचा। दरवाजा खोल के अन्दर गया और गद्दा व गाव तकिया लगी चौकी पर बैठ गया । करीब बारह बजे चौधराइन घर के अन्दर से वहाँ आयीं और उसी चौकी पर बेखटके इत्मीमान से मदन से लिपट लिपट रात भर सोईं मतलब चुदवाती सोती जागती रहीं और सुबह होने से पहले बिना किसी को शक हुए अन्दर ही अन्दर अपने घर अपने कमरे में वापस चली गई। पँचायतघर का इन्तजाम देख उसने मन ही मन चौधराइन के दिमाग की दाद दी।
अब क्या था दोपहर को सदानन्द, रात में मदन, चौधराइन की चूत को पूरा आराम सुकून हो गया । 
अचानक एक दिन के 11 बजे चौधराइन ने मदन को बुला भेजा। मदन को ताज्जुब हुआ क्योंकि इस समय आमतौर पे उसके पिता पण्डित सदानन्द का बुलावा आता था। नौकरानियां घर के काम में व्यस्त थीं, कम उम्र के बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे और आंगन में कुछ नौकर सफाई कर रहे थे। पता चला कि चौधरी साहब खेत पर जा चुके हैं। मदन चौकी पर आराम से बैठ गया। तभी चौधराइन आई और मदन के बगल में बैठ गई।
माया देवी(चौधराइन) ने उसका हाथ पकड़ कर एक लड़के की तरफ इशारा करके पूछा,"वो कौन है मदन?"
वो लड़का आंखें नीची करके अनाज बोरे में डाल रहा था। उसने सिर्फ हाफ-पैंट पहन रखा था।
"हां, मैं जानता हूँ, वो गोपाल है, श्रीपाल का भाई !" मदन ने चौधराइन को जवाब दिया।
श्रीपाल मदन के घर का पुराना नौकर था और पिछले 8-9 सालों से काम कर रहा था। चौधराइन उसको जानती थी।
मदन ने पूछा,"क्यों, क्या काम है उस लड़के से?"
चौधराइन ने इधर उधर देखा और अपने कमरे में चली गई। एक दो मिनट के बाद उन्होंने मदन को इशारे से अन्दर बुलाया। वो अन्दर गया और मायादेवी ने झट से हाथ पकड़ कर कहा,"बेटा, मेरा एक काम कर दे... पर देख किसी को पता न चले।"
"बताइये चाची! कौन सा काम ?"
जवाब में उन्होंने जो कहा वो सुनकर मदन हक्का बक्का रह गया।
"बेटा, मुझे गोपाल से चुदवाना है...!"
मदन चौधराइन को देखता रह गया। उसने कितनी आसानी से बेटे के उम्र के लड़के से चुदवाने की बात कह दी.....
"क्या कह रही हो.....ऐसा कैसे हो सकता है...." मदनने कहा।
"मैं कुछ नहीं जानती, जब से तुझसे चुदवाया है मुझे छोटी उमर के लड़कों से चुदवाने का चस्का लग गया है, मैं सुबह से अपने को रोक रही थी, उसको देखते ही मेरी चूत गरम हो चुलबुलाने लगती है, मेरा मन करता है की नंगी होकर सबके सामने उसका लण्ड अपनी चूत के अन्दर ले लूँ !" चौधराइन ने मदन के सामने अपनी चूत को ऊपर से खुजाते हुए कहा,"कुछ भी करो, बेटा गोपाल का लण्ड मुझे अभी चूत के अन्दर चाहिए !"
चौधराइन की बातें सुनकर मदन का सर चकराने लगा था। मदनने कभी नहीं सोचा था कि चौधराइन, इतनी आसानी से दूसरे लड़कों के बारे में उससे बात करेगी। वो सोचने लगा कि गोपाल, अपने से 20-22 साल बड़ी, चौधराइन, उसकी ही उमर की लड़की की अम्मा को कैसे चोद पायेगा। मुझे लगा कि गोपाल का लण्ड अब तक चुदाई के लिये तैयार नहीं हुआ होगा।
"चौधराइन, वो गोपाल तो अभी बहुत छोटा है.. वो तुम्हें नहीं चोद पायेगा...." मदन ने चौधराइन की बड़े कटीले लंगड़ा आम के साइज की चूची पर हाथ फेरते हुए कहा,"चलिये आपका बहुत मन कर रहा है तो मैं इसी वख्त आपकी चोद देता हूँ..!"
मदन चूची मसल रहा था, चौधराइन ने उसका हाथ अलग नहीं किया। "बेटा, तू तो चोदता ही है फ़िर चोद लेना, लेकिन पहले गोपाल से मुझे चुदवा दे...अब देर मत कर ....बदले में तू जो बोलेगा वो सब करुंगी... तू किसी और लड़की या औरत को चोदना चाहता है तुझे आज से पूरी छूट है यहाँ तक कि अगर तू कहेगा तो मैं गाँव की चौधराइन हूँ, खुद उसका इंतज़ाम कर दूंगी, लेकिन तू अभी अपनी चौधराइन चाची को गोपाल से चुदवा दे.. मेरी चूत बुरी तरह गीली हो रही है।, तुझे बस उसे पँचायतघर में लेके आना है। बाकि मैं देख लूँगी। "
पँचायतघर का नाम सुन मदन का दिमाग सन्नाटे में आ गया । उसने मन ही मन चौधराइन के दिमाग की दाद दी । चौधराइन ने खुद से चुदाई की पेशकश की है तो कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा। मदन ने चौधराइन चाची को अपनी बांहों में लेकर उसके टमाटर जैसे गालों को चूमा और उनकी दोनों मस्त लंगड़ा आमों जैसी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से सहलाते हुए कहा," आप थोड़ा इन्तज़ार करें...मैं कुछ करता हूँ !" यह कहकर वो बाहर निकल कर आ गया।
उसने करीब पाँच दस मिनट इधर उधर घूमकर समय बिताया ताकि चौधराइन को लगे कि उसने उनके काम के लिए काफ़ी जोड़ तोड़ मेहनत की है फ़िर वो वापस आया। चौधराइन अपने कमरे में मिलीं मदन उनके बगल में बैठ गया और कहा कि वो दस मिनट के बाद पँचायतघर में पहुँचे ,वहाँ से उठ कर वो आंगन में ग़ोपाल के पास आया, उसने देखा चौधराइन भी पीछे बाहर आंगन में आ गई थीं। उसने गोपाल की पीठ थप-थपा कर साथ आने को कहा। वो बिना कुछ बोले साथ हो लिया। मदन ने कनखियों से देखा चौधराइन के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी।
गोपाल को लेकर पँचायतघर में आया और दरवाज़ा खुला रहने दिया। मदन आकर गद्दे पर लेट गया और गोपाल से कहा कि मेरे पैर दर्द कर रहे हैं, दबा दे.. यह कहते हुये उसने अपना पजामा बाहर निकाल दिया। नीचे उसने जांघिया पहना था। ग़ोपाल पांव दबाने लगा और मैं उससे उसके घर की बातें करने लगा।
वैसे तो गोपाल के घरवाले मदन के घर में सालों से काम करते हैं फिर भी वो कभी उसके घर नहीं गया था। गोपाल की दादी को भी उसने अपने घर में काम करते देखा था और अभी उसकी माँ और भैया काम करते हैं। गोपाल ने बताया कि उसकी एक बहन है और उसकी शादी की बात चल रही है। वो बोला कि उसकी भाभी बहुत अच्छी है और उसे बहुत प्यार करती है।
अचानक मदन ने उससे पूछा कि उसने अपने भाई को अपनी बीबी यानि के तेरी भाभी को चोदते देखा है कि नही। ग़ोपाल शरमा गया और जब मदनने दोबारा पूछा तो जैसा उसने सोचा था, उसने कहा कि हाँ उसने चोदते देखा है।
मदन ने फिर पूछा कि चोदने का मन करता है या नहीं?
तो उसने शरमाते हुये कहा कि जब वो कभी अपनी भाभी को अपने भैया से चुदवाते देखता है तो उसका भी मन चोदने को करता है। ग़ोपाल ने कहा कि रात में वो अपनी माँ के कमरे में सोता था । लेकिन पिछले एक साल से भैया भाभी की चुदाई देख कर उसका भी लण्ड टाईट हो जाता है। इसलिए वो अब अलग सोता है।
"फिर तुम अपनी भाभी को ही क्यों नहीं चोद देते..." मदन ने पूछा,
लेकिन गोपाल के जबाब देने के पहले चौधराइन मायादेवी कमरे में आ गई और उसने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया। ग़ोपाल उठकर जाने लगा तो मदन ने उसे रोक लिया। गोपाल ने एक बार चौधराइन के तरफ देखा और फिर पैर दबाने लगा।
"क्या हुआ चौधराइन चाची?"
"अरे बेटा, मेरे पैर भी बहुत दर्द कर रहे है, थोड़ा दबा दे !" मायादेवी बोलते बोलते मेरे बगल में लेट गई। मदन उठ कर बैठ गया और चौधराइन को बिछौने के बीचोंबीच लेटने को कहा।
मदन चौधराइन का एक पैर दबाने लगा ।
क्रमश:……………………………
Reply
04-25-2019, 10:54 AM,
#23
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
चौधराइन 
भाग 21 – नया चस्का 2


ग़ोपाल चुपचाप खड़ा था। उससे मदन ने दूसरा पैर दबाने के लिये कहा लेकिन वो खड़ा ही रहा।
"अरे ग़ोपाल, तुम खड़े हो क्यों, दूसरा पांव दबाते क्यों नहीं चलो दबाओ !" चौधराइन माया देवी ने जब अपनी सधी आवाज में आदेश दिया तो गोपाल दूसरे पांव को दबाने लगा। चौधराइन ने मदन को मुस्कुरा के आंख मारी।
" चौधराइन चाची, कहाँ कहाँ दर्द कर रहा है?"
"अरे पूछ मत बेटा, पावों में कमर के नीचे और छाती में दर्द है, खूब जोर से दबाओ।"
चौधराइन ने खुल कर जाँघों, चूतड़ों और बड़ी बड़ी चूचियाँ दबाने का निमंत्रण दे दिया था। मदन पाँव से लेकर कमर तक मसल मसल कर मजा ले रहा था जब कि गोपाल सिर्फ घुटनों तक ही दबा रहा था। मदन ने गोपाल का हाथ पकड़ा और चौधराइन की जांघों के ऊपर सहलाया और कहा कि तुम भी नीचे से ऊपर तक दबाओ। वो हिचका लेकिन मुझे देख देख कर वो भी मायादेवी की शानदार सुडोल गुदाज जांघों लम्बी लम्बी टांगों को नीचे से ऊपर तक मसलने लगा।
2-3 मिनट तक इस तरह से मजा लेने के बाद मदन ने कहा,"चाची साड़ी उतार दें...तो और आसानी होगी..."
"अच्छा, बेटा,..."
"गोपाल, साड़ी खोल दे।" चौधराइन का आदेश गूँजा।
उसने चौधराइन की ओर देखा लेकिन साड़ी खोलने के लिये हाथ आगे नहीं बढ़ाया।
"गोपाल, शरमाते क्यों हो, तुमने तो कई बार अपनी भाभी को नंगी चुदवाते देखा है...यहां तो सिर्फ साड़ी उतारनी है, चल खोल दे।" और चौधराइन ने का गोपाल का हाथ पकड़ कर साड़ी की गांठ पर रखा। उसने शरमाते हुये गांठ खोली और मदन ने साड़ी चौधराइन के बदन से अलग कर दी। काले रंग के ब्लाऊज़ और साया में गजब की माल लग रही थी।
गोपाल को अपनी तरफ़ देखते देख चौधराइन मुस्कुराई, “क्या देख रहा है गोपाल?
"मालकिन, आप बहुत सुन्दर हैं..." अचानक गोपाल ने कहा और प्यार से जांघों को सहलाया।
"तू भी बहुत प्यारा है.." माया ने जबाब दिया और हौले से साया को अपनी घुटनों से ऊपर खींच लिया।
चौधराइन के सुडौल पैर और पिंडली किसी भी मर्द को गर्म करने के लिये काफी थे। वो दोनों पैर दबा रहे थे लेकिन उनकी नजर चौधराइन की मस्त, बड़ी बड़ी मांसल चूचियों पर थी। लग रहा था जैसे कि चूचियां ब्लाऊज़ को फाड़ कर बाहर निकल जायेंगी।
मदन का मन कर रहा था कि फटाफट चौधराइन को नंगा कर चूत मे लण्ड पेल दे। लण्ड भी चोदने के लिये तैयार हो चुका था। और इस बार घुटनों के ऊपर हाथ बढा कर मदन ने हाथ साया के अन्दर घुसेड़ दिया और मखमली जांघों को सहलाते हुये चूत पर हाथ रखा।
फ़ूली हुई खूब बड़ी सी करीब बित्ते भर की मुलायम चिकनी चूत। अच्छा तो चौधराइन ने झाँटे साफ़ कर दीं थीं। मदन से रहा नहीं गया मसल दिया।
एक नहीं, दो नहीं, कई बार लेकिन चौधराइन ने एक बार भी मना नहीं किया।
मदन ने महसूस किया सहलाने से उत्तेजित हो उनकी पुत्तियाँ उभर आयीं और चूत पानी छोड़ने लगी
चौधराइन साया पहने थी और चूत दिखाई नहीं पड़ रही थी। साया ऊपर नाभी तक बंधा हुआ था। मदन उनकी चिकनी की हुई चूत को देखना चाहता था। एक दो बार चूत को फिर से मसला और हाथ बाहर निकाल लिया।
" चौधराइन चाची, साया बहुत कसा बंधा हुआ है, थोड़ा ढीला कर लो.. "
मदन ने देखा कि गोपाल अब आराम से मायादेवी की जांघों को सहला मसल रहा था। गोपाल से कहा कि वो साये का नाड़ा खोल दे। तीन चार बार बोलने के बाद भी उसने नाड़ा नहीं खोला तो मदन ने ही नाड़ा खींच दिया और साया ऊपर से ढीला हो गया।
मदन पांव दबाना छोड़कर चौधराइन की कमर के पास आकर बैठ गया और साये को नीचे की तरफ ठेला। पहले तो उसका चिकना पेट दिखाई दिया और फिर नाभि। मदन ने कुछ पल तो नाभि को सहलाया और साया को और नीचे की ओर ठेला।
अब उसकी कमर और चूत के ऊपर का फ़ूला हुआ भाग दिखाई पड़ने लगा। अगर एक इंच और नीचे करता तो चूत दिखने लगती।
"आह बेटा, छाती में बहुत दर्द है.." माया ने धीरे से कहा । साया को वैसा ही छोड़कर मदनने अपने दोनों हाथ चौधराइन के मस्त और गुदाज लंगड़ा आमों (चूचियों) पर रखे और दबाया। गोपाल के दोनों हाथ अब सिर्फ जांघो के ऊपरी हिस्से पर चल रहा था और वो आंखे फाड़ कर देख रहा था कि ये लड़का कैसे चौधराइन की चूचियां दबा रहा है।
" चौधराइन चाची, ब्लाउज खोल दो तो और आसानी होगी" मदन ने दबाते हुए कहा।
"तो खोल दे न " उसने जबाब दिया और मदन ने झटपट ब्लाउज के सारे बटन खोल डाले और ब्लाउज और ब्रा को चौधराइन की चूचियों से अलग कर दिया।
ब्रा हटते ही लेटी हुई चौधराइन के नुकीले मस्त और गुदाज लंगड़ा आम अपने भार से गोल हो, बड़े बड़े खरबूजों में बदल गये, देख कर मदन झनझना गया और जम कर उन्हें दबाने मसलने लगा और ग़ोपाल से कहा,
"कितनी ठोस है, लगता है जैसे गेंद में किसी ने कस कर हवा भर दी है।" फ़िर घुन्डी को मसल के बोला " क्यों गोपाल कैसा लग रहा है?" मदन जोर जोर से चूचियों को दबा रहा था।
अचानक मदन ने देखा कि गोपाल का एक हाथ चौधराइन की दोनों जांघों के बीच साया के ऊपर घूम रहा है। मदन ने एक हाथ से चूची दबाते हुए गोपाल का वो हाथ पकड़ा और उसे चौधराइन की नाभि के ऊपर रख कर दबाया।
"देख, चिकना है कि नहीं?" ये कह मदन उसके हाथ को दोनों जांघों के बीच चूत की तरफ धकेलने लगा। अचानक मदन चौधराइन के ऊपर झुका और घुन्डी को चूसने लगा।
तभी चौधराइन ने फुसफुसाकर मदन के कान में कहा, "बेटा, तू थोड़ी देर के लिये बाहर जा और देख कोई इधर ना आये.."
मदन ने निपल चूसते चूसते गोपाल के हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर साया के अन्दर ठेला और गोपाल का हाथ चौधराइन के चूत पर आ गया। उसने गोपाल के हाथ को दबाया और गोपाल चूत को मसलने लगा । कुछ देर तक दोनों ने एक साथ चूत को मसला और फिर मदन खड़ा हो गया। ग़ोपाल का हाथ अभी भी चौधराइन की चूत पर था लेकिन साया के नीचे चूत दिख नहीं रही थी।
मदन ने अपना पजामा पहना और गोपाल से कहा,"जब तक मैं वापस नहीं आता, तू इसी तरह मालकिन को दबाते रहना। दोनों चूचियों को भी खूब दबाना।"
मदन दरवाजा खोल कर बाहर आ गया और पल्ला खींच दिया। आस पास कोई भी नहीं था। वो इधर उधर देखने लगा और अन्दर का नजारा देखने की जगह ढूंढने लगा। जैसा हर घर में होता है, दरवाजे के बगल में एक खिड़की थी। उसके दोनों पल्ले बन्द थे। हलके से धक्का दिया और पल्ला खुल गया। बिस्तर साफ साफ दिख रहा था।
चौधराइन ने गोपाल से कुछ कहा तो वो शरमा कर गर्दन हिलाने लगा। मायादेवी ने फिर कुछ कहा और गोपाल सीधा बगल में खड़ा हो गया। माया ने उसके लण्ड पर पैंट के ऊपर से सहलाया और ग़ोपाल झुक कर साया के ऊपर से चूत को मसलने लगा। एक दो मिनट तक लण्ड के ऊपर हाथ फेरने के बाद माया ने पैंट के बटन खोल डाले और गोपाल का साढ़े सात इन्च लम्बा लण्ड फ़नफ़ना के बाहर आ गया। मदन ने सपने में भी नही सोचा था कि इस जरा से लड़के का लण्ड इतना बड़ा होगा । चौधराइन ने झट से उसका टनटनाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी।
चौधराइन को मालूम था कि मदन जरुर देख रहा होगा, सो उसने खिड़की के तरफ देखा। नजर मिलते ही वो मुस्कुरा दी और लण्ड को दोनों हाथों से हिलाने लगी। गोपाल का लण्ड देख कर वो खुश थी। उधर गोपाल ने भी चूत के ऊपर से साये को हटा दिया तो आज मदन ने भी पहली बार उनकी साफ़ चिकनी की हुई चूत देखी शायद आज ही झांटें साफ की होंगी। उनकी चूत करीब बित्ते भर की फ़ूली हुई मुलायम चुद चुद के हल्की साँवली पड़ गई उत्तेजना से बाहर उठी पुत्तियों वाला टाइट भोसड़ा लग रही थी । जिसे मदन की आंखों के सामने एक लड़का मसल रहा था।
मायादेवी ने कुछ कहा तो गोपाल ने साया बिलकुल बाहर निकाल दिया। अब वो पूरी नंगी थी। शानदार सुडोल संगमरमरी गुदाज और रेशमी चिकनी जांघों के बीच दूध सी सफ़ेद पावरोटी सा भोसड़ा अपने मोटे मोटे होठ खोले लण्ड का इन्तजार करता हुआ लग रहा था।
मायादेवी लण्ड की टोपी खोलने की कोशिश कर रही थी। उसने गोपाल से फिर कुछ पूछा और गोपाल ने ना में गर्दन हिलाई। शायद पूछा हो कि पहले किसी को चोदा है या नहीं। माया ने गोपाल को अपनी ओर खींचा और खूब जोर जोर से चूमने लगी और चूमते-चूमते उसे अपने ऊपर ले लिया।
अब मायादेवी की चूत नहीं दिख रही थी। उन्होंने अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और अपने हाथ से लण्ड के सुपाड़े को चूत के मुहाने पर रखा। माया देवी ने गोपाल से कुछ कहा और वो दोनों चूची पकड़ कर धीरे धीरे धक्का लगा कर चुदाई करने लगा।
गोपाल अपने से 20 साल बड़ी गांव की सबसे मस्त सुन्दर और इज्जतदार औरत की चुदाई कर रहा था। मदन अपने लण्ड की हालत को भूल गया और उन दोनों की चुदाई देखने लगा। गोपाल जोर जोर से धक्का मार रहा था और चौधराईन भी अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदाई का मजा ले रही थी। यूँ तो गोपाल के लिये चुदाई का पहला मौका था ।
मदन देखता रहा और गोपाल जम कर चौधराइन चाची को चोदता रहा और करीब 15 मिनट के बाद वो चौधराइन के गुदाज बदन पर ढीला हो गया। मदन 2-3 मिनट तक बाहर खड़ा रहा और फिर दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया। मुझे देखते ही गोपाल हड़बड़ा कर नीचे उतरा और अपने हाथ से लण्ड को ढक लिया। लेकिन मायादेवी ने उसका हाथ अलग किया और मदन के सामने ही गोपाल के लण्ड को सहलाने लगी।
चौधराइन बिल्कुल नंगी थी। उसने दोनों टांगों को फैला रख्खा था और मुझे अपनी चूत की खुली फांके साफ साफ दिखा रही थीं। मदन उनकी कमर के पास बैठ कर चूत को सहलाने के ख्याल से हाथ लगा। चूत गोपाल के रस से पूरी तरह से गीली हो गई थी।
चौधराइन का आदेश फ़िर गूँजा " गोपाल, इसे मेरे साये से साफ कर दे।"
गोपाल साया लेकर चूत के अन्दर बाहर साफ करने लगा।
गोपाल के लण्ड को सहलाते हुये मायादेवी बोली," गोपाल में बहुत दम है...मेरा सारा दर्द खत्म हो गया।" फिर उसने गोपाल से पूछा,"क्यों रे, तुझे कैसा लगा..?"
गोपाल “जी बहुत अच्छा मालकिन।
फ़िर उन्होंने गोपाल से कहा कि वो उसे बहुत पसन्द करती है और उसने चुदाई भी बहुत अच्छी की। पर उन्होंने गोपाल को धमकाया कि अगर वो किसी से भी इसके बारे में बात करेगा तो वो बड़े मालिक (बड़े चौधरी काका) से बोल गाँव से निकलवा देगी और अगर चुप रहेगा तो हमेशा गोपाल का लण्ड चूत में लेती रहेगी।
गोपाल ने कसम खाई कि वो किसी से कभी चौधराइन मालकिन के बारे में कुछ नहीं कहेगा। ग़ोपाल बहुत खुश हुआ जब चौधराइन ने उससे कहा कि वो जल्दी ही फिर उससे चुदवाने के लिए बुलवायेगी। मायादेवी ने उसे चूमा और कपड़े पहन कर बाहर जाने का आदेश दिया।
मदन ने गोपाल से कहा कि वो आंगन में जाकर अपना काम करे। गोपाल के जाते ही मदन ने दरवाजा अन्दर से बन्द किया और फटाफट नंगा हो गया। लण्ड चोदने के लिये बेकरार था ही। चौधराइन ने नजदीक बुलाया और लण्ड पकड़ कर आश्चर्य से देख सहलाते हुए नखरे से कहने लगी,
"हाय आज मुझे मत चोद क्यों कि अभी अभी मैने चुदवाया है और दोपहर में तेरे बाप से भी चुदवाना है। तू घर की जिस किसी भी लड़की को चोदना चाहे, मैं चुदवा दूंगी..।"
मदन ने कोई जवाब न दे उन्हें लिटा दिया और उनकी दोनों टाँगे अपने कन्धों पर रख लीं जिससे उनकी चूत ऊपर को उभर आयी और दोनों फांके खुलकर लण्ड को दावत सी देने लगीं। मदन ने अपने लण्ड का सुपाड़ा चौधराइन की चूत के मुहाने पर दोनों फांकों के बीच रखा और धक्का मारते हुए कहा –“मेरे बाप से चुदवाना है तो क्या आपकी चूत मेरा लण्ड अन्दर लेने से मना कर देगी।”
गीली चूत मे लण्ड का सुपाड़ा पक से अन्दर घुस गया
चौधराइन "आह्ह्ह्ह्ह..... शाबाश ।"
मदन फ़िर बोला, “देखा कैसे बिना आना कानी किये घुस गया न।”
"आअह्ह्ह्ह्ह्ह....मजा आआआअ ग...याआअ.."
मदन चौधराइन के खरबूजों को थाम कर चोदने लगा।
"चौधराइन, अगर मुझे मालूम होता कि आप इतनी चुदासी रहती हो तो मैं 4-5 साल पहले ही चोद डालता, " कहते हुये मदन ने हुमच कर धक्का मारा।
चौधराइन ने कमर उठा कर नीचे से धक्का मारा और गाल पकड़कर नोचते हुए बोली," "आह्ह्ह्ह्ह..... शाबाश बेटा, वो तो तुझसे चुदवाने के बाद मैने जाना कि लड़कों से चुदवाने का अलग मजा होता है ।
मदन ने धक्का मारते मारते चौधराइन को चूमते हुए बोला
"सच बोल, चौधराइन चाची गोपाल के साथ चुदाई में मजा आया क्या?" मदन का लौड़ा अब आराम से उनके भोसड़े में अन्दर-बाहर हो रहा था।
"सच बोलूं बेटा, पहले तो मैं भी घबरा रही थी कि मैं इत्ती सी उम्र के लड़के के सामने रन्डी जैसी नंगी हो गई हूँ लेकिन अगर वो नहीं चोद पाया तो !" चौधराइन ने गोपाल को याद कर चूतड़ उछाले और कहा," गोपाल ने खूब जम कर चोदा, लगा ही नहीं कि वो पहली बार चुदाई कर रहा है.. मैं मस्त हो गई और अब मैं उससे अक्सर चुदवाया करूँगी।"
"और मैं चौधराइन चाची?" मदनने उसके टमाटर से गालों को चूसते हुये पूछा।
"बेटा, तेरा लौड़ा तो मस्त है ही और तेरे में गोपाल से ज्यादा दम भी है....मजा आ रहा है...."
और उसके बाद दोनों जम कर चुदाई करते रहे और आखिर में मदन के लण्ड ने चौधराइन के चूत में पानी छोड़ दिया। दोनों हांफ रहे थे। कुछ देर के बाद जब ठण्डे हो गये तो मदन ने उनकी चूत की फ़ूली फ़ाँके हथेली में दबोच कर कहा–“आज पता चला चाची कि आप इस रजिस्टर के हिसाब किताब के लिये अक्सर यहाँ आती हैं।”
चौधराइन –“अरे नहीं बेटा अभी तक सिर्फ़ चार नाम ही तो चढ़े हैं एक तेरा बाप सदानन्द दूसरा चौधरी साहब मेरे पति, तीसरा तू औ आज ये चौथा गोपाल बस ।”
मदन–“वाह चाची! चार तो ऐसे कह रही हो जैसे बहुत कम हैं।
चौधराइन –“अरे बेटा क्या करूँ ये चूत साली ऐसा रजिस्टर है कि भरता ही नहीं ।”
मदन मुट्ठी में दबोची उनकी फ़ूली चूत की फ़ाँकों के बीच उँगली चुभोते हुए बोला, “कोई बात नहीं चाची अब मैं इस रजिस्टर की देखभाल किया करूंगा और कोई पन्ना खाली न जाने दूँगा।”
चौधराइन हँसकर घर चली गयीं।
क्रमश:……………………………
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04-25-2019, 10:54 AM,
#24
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
चौधराइन 
भाग 22 - समझौता चौधराइन का



कहने को तो मदन जोश में कह गया पर चौधराइन के जाने के बाद उसके दिमाग ने सोचा कि ये मैंने चौधराइन से ये कैसा बेवकूफ़ी भरा वादा कर लिया इस तरह तो मैं दिनरात इनकी चूत ठन्डी करने में ही लगा रहूँगा और इस गाँव में भरी तरह तरह कि चूतों का स्वाद न ले पाऊँगा। पर जल्दी ही उसके शैतानी दिमाग को एक शान्दार आइडिया सूझ गया।
हुआ यों कि एक दिन एक नये नये जवान हुए चिकने लड़के चिन्टू को ले उसकी भरी पूरी गदराई जवान खूबसूरत माँ चम्पा मदन के पास आई।
चम्पा –“मदन बेटा, ये मेरा लड़का चिन्टू पढ़ता लिखता तो है नहीं दिनभर शैतानी करता रहता है। आप चौधराइन से कह के इसे किसी काम पे लगा दो तो धीरे धीरे कुछ सीख जायेगा और बड़ा होने तक अपनी रोजी रोटी तो कमा ही लेगा।”
मदन उन्हें ले के चौधराइन के पास गया और सारी बात बताई ।”
सारी बात सुन चौधराइन ने माँ बेटे को थोड़ी देर बाहर बैठ इन्तजार करने के लिए बोल मदन को सलाह करने के लिए अन्दर बुलाया।
चौधराइन –“लौंडा है तो मेरे रजिस्टर में दर्ज करने लायक
मदन –“और उसकी माँ मेरे खाते लायक।
चौधराइन –“क्या बकता है।”
मदन –“क्यों मेरा मन नही होता नये नये तजुर्बे करने का?
चौधराइन –“पर तूने तो मुझसे वादा किया था कि अब तू अपनी ताकझाँक बन्द कर देगा।“
मदन –“तब आपने रजिस्टर कहाँ खोला था?
चौधराइन –“पर जरा संभल के।
मदन –“ आप फ़िक्र न करो। तो आज से तय रहा जो लड़का आपका उसकी माँ बहन मेरी।”
चौधराइन –“ठीक है। बुलाओ।”
मदन ने माँ बेटे को अन्दर बुलाय।
चौधराइन –“ठीक है। शुरू में मैं इसे हल्का काम दूँगी ताकि इसे काम करने की आदत पड़े। इसे आज रात भेज देना पँचायतघर की रखवाली करने। इसे सिर्फ़ वहाँ सोना है। ”
दोनों खुशी खुशी चले गये । उस रात जब चौधराइन ने चिन्टू से अपनी चूत जम के बजवाई तो चौधराइन के करतब देख देख मदन भी बहुत उत्तेजित हो गया और उसने भी चौधराइन की चूत धुन डाली। चुदाई से निबट करीब रात के दो बजे जब मदन बगिया वाले मकान पर जा रहा था तो सोच रहा था कि चौधराइन ने तो हरी झन्डी दे दी पर चिन्टू की अम्मा चम्पा फ़ँसानी तो खुद मुझे ही पड़ेगी ।”
भगवान ने खुद ही इसका रास्ता दिखा दिया। हुआ यों कि तीसरे दिन करीब एक बजे दोपहर में चम्पा मदन के पास बगिया वाले मकान पर आई और
मदन –“ आओ चम्पा चाची। कहो कैसी हो?”
चम्पा –“मैं तो ठीक हूँ पर चिन्टू बड़ा थका थका रहता है । ऐसा क्या काम कराती है चौधराइन?” 
मदन –“कुछ नहीं बस पँचायत घर में सोता है।”
चम्पा(हँसकर) –“अरे सोने से कहीं कोई थकता है बेटा।”
मदन ने सोचा हँस रही है क्यों न इसका मन टटोलने के देखे सो बोला –“क्यों तुम रात में सोती हो तो नहीं थकती क्या या चन्दू(चम्पा का पति) चाचा नहीं थकते ।”
चम्पा उसका दोहरा मतलब समझ गयी, उसके मन में गुदगुदी सी हुई क्योंकि उसने भी गाँव में मदन के कारनामों की कहानियाँ सुनी थीं हँस के बोली –“अरे मेरी बात और है मैं तो तुम्हारे चन्दू चाचा के मारे……वो भी कभी जब वो मुझे……हटो। क्या फ़ालतू बात ले……।” यह बोलते बोलते चम्पा शर्मा के चुप हो गई। फ़िर संभल के आगे बोली –“ पर वो तो अकेला…।”
और वो फ़िर शर्मा गई।
मदन मजाक के ढ़ंग से –“कौन जाने शायद चौधराइन चाची साथ में……।”
चम्पा हँसते हुए –“ क्या मजाक करते हो बेटा कहाँ चौधराइन कहाँ जरा सा बच्चा।”
मदन मुस्कुराकर –“ जरा सा बच्चा क्यों। मेरी ही उमर का होगा और चौधराइन चाची तुम्हारी उमर की।”
चम्पा भी अब शर्म छोड़ पूरी तरह बहस के मूड में आ गयी थी मुस्कुरा के बोली –“हाँ माना तेरी ही उमर का है पर हम बुढ़ियों और तेरी उमर वाले का क्या तालमेल?
मदन आश्चर्य प्रकट करते हुए –“तुम्हें बुढ़िया बताने वाले को मैं अन्धा ही कहूँगा । मुझे तो ताज्जुब है कि तुम और चन्दू चाचा रोज क्यों नहीं थकते । चाचा शायद तुम्हें नाजुक समझ के………।”
चम्पा –“ चुप कर बेटा ये सब कोई रोज रोज थोड़े ही………।”
मदन –“ये तो अगर मैं चन्दू चाचा होता तो बताता।”
पता नही बात चीत की झोंक में या शायद जानबूझ के चम्पा कह गई –“अच्छा तो तू आज बता ही दे।”
बस मदन ने चम्पा चाची का गदराया बदन बाहों में भर लिया उसकी मजबूत बाहों के उमंग भरे कसाव में चम्पा को एक अनोखा अनुभव हुआ पर उसने छूटने की एक कमजोर सी कोशिश की –“छोड़ बेटा क्यों मजाक करता है।”
इसबार मदन ने गम्भीर आवाज और चमकती आँखों से चम्पा चाची की उत्तेजना के खुमार से भरती आँखों में झाँक के कहा –“ये मजाक नहीं है चाची यही तो मैं साबित करना चाहता हूँ।”
ऐसा बोलते हुए मदन चम्पा चाची को लिए लिए ही बिस्तर पर गिर पड़ा।
चम्पा उत्तेजना से काँपती आवाज में–“ अरे अरे कहीं कोई आ गया तो…………?
आगे का वाक्य चम्पा के मुँह में ही घुट गया क्यों कि मदन ने उसके होठों को अपने होठों मे दबा लिया नये जवान होते लड़के का जिस्म और की बाँहो का कसाव चम्पा को अपने चढ़ती जवानी की याद दिला रहा था वो अपना आपा खोती जा रही थी और मदन से लिपटती जा रही थी एक दूसरे के होठों को चूसते चूसते कब दोनों के जिस्म से कपड़े उतर गये पता ही नहीं चला । जब दोनों के होठ अलग हुए तो बुरी चम्पा ने हाँफ़ते हुए मदन से कहा –“क्या सचमुच मैं अभी भी तेरे जैसे जवान लड़के को लुभाने लायक हूँ।”
मदन चम्पा चाची के ऊपर से उठ के बैठ गया और एक भरपूर नजर बिस्तर पर नंगधड़ंग पड़ी चम्पा चाची पर डाली और बोला –“मैं झूठ नहीं बोलूँगा दरअसल मेरी उमर के लड़कों को नईजवान लड़कियों से औरतें ज्यादा पसन्द आती हैं और औरतों में आप बेजोड़ हैं।”
चम्पा चाची –“अगर तू सच कहता है तो ताज्जुब नहीं रोज रात में चौधराइन मेरे चिन्टू को चूस डालती हो।”
मदन –“अरे छोड़ो चाची दोनो साले मजा करते होंगे अभी थोड़ी देरे में तुमको मेरी बात का विश्वास हो जायेगा।” 
ये कह मदन ने अपने दोनों हाथों से उनकी केले के खम्बों जैसी जाँघें पकड़ के फ़ैलायी और अपने फ़ौलादी लण्ड का सुपाड़ा उनकी फ़ूली हुई चूत के रसीले मुहाने पर रखा । फ़िर अपने दोनों हाथों में उनकी बड़े बड़े खरबूजों जैसी चूचियाँ थाम के धक्का मारा। चम्पा के मुँह से निकला –“आआह्ह्ह!
सुपाड़ा अन्दर जा चुका था पर इसके बाद मक्कार मदन रुक गया और चम्पा चाची की बड़े बड़े खरबूजों जैसी चूचियाँ दबा दबाके निपल ऐसे चूसने लगा जैसे कोई आम चूस के खाता है। उसकी इस हरकत से उत्तेजित हो चम्पा ने अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के उसका पूरा लण्ड अपनी चूत में धाँस लिया और झुँझला के फ़ुसफ़ुसाई –“अगर तू ऐसे करता रहा तो मैं बिना चुदे बिना थके ही झड़ जाऊँगी। फ़िर तू साबित कैसे करेगा कि तू चम्पा चाची को थका सकता है।”
बस मदन इसी बेकरारी का तो इन्तजार कर रहा था उस भरी दोपहरी में बगिया के उस एकान्त मकान में मदन ने चम्पा चाची के जिस्म और दिमाग को अपनी जोशखरोश से भरी चुदाई से इतना मजा दिया कि वो अपने घर ऐसे थिरकते हुए लौट रही थीं जैसे कि वो एक बार फ़िर जवान हो गई हों। चम्पा चाची ने शाम को अपने पति (चन्दू) के आने पर उन्होंने बड़ी आवभगत की और रात में खुद पहल कर चन्दू चाचा को चुदाई के लिए उकसाया। दोपहर में जो कुछ मदन की चुदाई से सीखा था वो सब चन्दू चाचा के साथ फ़िर से दोहरा के आजमाया।

चन्दू को बहुत मजा आया और बड़ा आश्चर्य हुआ। चुदाई के बाद उसने पूछा –“आज तू बड़ी खुश है चम्पा।” 
चम्पा चन्दू के बालों भरे चौड़े सीने पर हाथ फ़ेरते हुए –“ खुश क्या चिन्टू की चिन्ता दूर हुई वैद्यजी(सदानन्द) के लड़के ने चौधरी के यहाँ लगवा दिया।”
चन्दू –“कौन वो मदन?”
चम्पा बोली –“हाँ वही। मुझे तो बड़ा सीधा लगता है पर लोग तो पता नहीं क्या क्या कहते हैं।”
चन्दू –“हाँ ताज्जुब तो मुझे भी है मैं एक गरीब किसान हुँ पर हमेशा आते जाते अपनी तरफ़ से चाचा राम राम कहना कभी नहीं भूलता । मुझे लगता है चौधरी की बगिया में जो चोर नौकर थे वो ही बदनाम करते हैं क्यों कि सालों को मदन ने निकाल दिया।”
चम्पा मुस्कुराई और मन ही मन सोंचा अब तो और भी राम राम करेगा –“खैर हमें क्या अपना लड़का ठिहे से लग गया।”
चन्दू उसकी चूत पर हाथ फ़ेर कर –“ठीक बात क्यों न इसी खुशी में बार और हो जाये
चम्पा ने उसके लण्ड पर हाथ रखा –“हाय दैया! ये तो फ़िर खड़ा हो गया।”
चन्दू चम्पा के ऊपर आ के सुपाड़ा चूत पर लगाते हुए–“खुशी मना रहा है न।“
चम्पा की इतनी चुदाई शादी वाली रात भी नहीं हुई थी जितनी आज हुई।
अगले दिन खेत पर जाते समय चन्दू मदन से मिल उसका आभार प्रकट करते हुए गया। मदन ने चन्दू को इतना खुश कभी नहीं देखा था।
उसी दिन चम्पा चाची ने मदन को मिल रात के किस्से की जानकारी दी तो मदन की समझ मे सारा माजरा आया वो हँसते हुए बोला –“ वाह चाची भतीजे से सीख चाचा पे आजमाया और उन्हें खुश भी कर दिया। तुमने कमाल कर दिया।
चम्पा –“कमाल तो तूने कर दिया हमें खुश रहना सिखा दिया। सारे करतब तेरे ही तो सिखाये हुए हैं ।”
मदन –“मिलती रहा करो, चाची ऐसे ऐसे करतब बताऊँगा कि चाचा को आप जन्नत की हूर लगेंगी।”
चम्पा –“जुग जुग जियो बेटा। आज तो नही परसों दोपहर एक बजे आऊँगी।”
मदन –“ठीक है चाची।”
तो इस तरह शुरू हुई चौधराइन की चूत की चौधराहट। अब हाल ये है कि चौधराइन को कोई नया शिकार मिले, तो उसके घर की औरते माँ बहन जो भी मदन को पसन्द आ जाय, चौधराइन की तरफ़ से उन्हें चोदने की छूट है और दूसरी ओर अगर गाँव की कोई औरत मदन से फ़ँस जाती हैं तो उनके लड़कों के लण्ड से चौधराइन अपनी चूत सिकवाती हैं ।
 समाप्त
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04-25-2019, 10:54 AM,
#25
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
फ्रेंड्स अब ये सलीम जावेद मस्ताना की दूसरी कहानी आपके लिए 






अशोक की मुश्किल
भाग 1
बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा… 

अशोक लखनऊ के पास के गाँव का एक गठीले बदन वाला कड़ियल जवान है उसका कपड़ों का थोक का व्यापार लखनऊ कानपुर के आस पास के छोटे छोटे शहरों कस्बों और गाँवों के फुटकर व्यापारियों में फैला है जिसे वो लखनऊ में रहकर चलाता है। उसे अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहरों कस्बों और गाँवों में आना जाना पड़ता है. इसीलिए उसे अक्सर रात में भी यहाँ वहाँ रुकना पड़ता है। शादी से पहले अपनी जिस्मानी जरुरतों को पूरा करने के लिए वो यहाँ वहाँ बदमाश लडकियों, औरतों में मुंह मार लेता था, पर धीरे धीरे उसकी प्रचंड काम शक्ति(चोदने कि ताकत) और हथियार (लंड) के आकार की वजह से बड़ी से बड़ी चुदक्कड़ बदमाश लड़की या औरत यहाँ 
तक की रंडियां भी एक बार के बाद उसके पास आने से घबराने लगीं ।
दरअसल उसका लंड करीब नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा था और वो इतनी ज्यादा देर में झड़ता की जो एक बार चुदवा लेती थी वो दोबारा उसके पास भी नहीं फटकती थीं धीरे धीरे वो इतना बदनाम हो गया की जब वो रात में किसी शहर गांव में रुकता तो उसे यूँही (जांघों के बीच लंड दबा के) सोना पड़ता क्योंकि सब औरते उसके बारे में जान गयीं थीं.
पर इसी बीच बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा अशोक पास के एक कस्बे में व्यापार के सिलसिले में गया था वहां के फुटकर व्यापारियों से हिसाब किताब करते रात हो गयी तो उन लोगो ने पड़ोस की एक विधवा अधेड़ औरत चम्पा से गुजारिश करके उसके यहाँ अशोक के रुकने का इंतजाम कर दिया. ये विधवा किसी दूर के गाँव से, अपनी जवान खुबसूरत गदराई भतीजी महुआ जिसके माँ बाप कुछ धनदौलत छोड़ गए थे उसे बेचबांच के ये मकान लेकर रहने के लिए आई थी. अतः ये लोग अशोक की असलियत नहीं जानते थे अशोक को महुआ पसंद आ गई और उसने चम्पा से उसका हाथ मांग लिया और दोनों का विवाह हो गया।
सुहागरात को अशोक ने दुलहन का घूँघट उठाया महुआ की खूबसूरती देख उसके मुंह से निकला “सुभान अल्लाह ! मुझे क्या पता था की मेरी किस्मत इतनी अच्छी है।”
ऐसा कहते हुए अशोक ने अपने होंठ उसके मदभरे गुलाबी होठों पर रख दिये। महुआ को चूमते समय उसके बेल से स्तन अशोक के चौड़े सीने पर पूरी तरह दब गये थे वो उसके निप्पल अपने सीने पर महसूस कर रहा था ।
महुआ की फ़ूली बुर पर उसका लण्ड रगड़ खा कर साँप की तरह धीरे धीरे फ़ैल रहा था। महुआ की बुर गर्म हो भी उसे महसूस कर रही थी जिस्मों की गरमी में सारी शरम हया बह गई और अब महुआ और अशोक सिर्फ़ नर मादा बचे थे अशोक की पीठ पर महुआ की और महुआ की पीठ पर अशोक की उँगलियाँ धसती जा रही थी । दोनों ने एक दूसरे को इतनी जोर से भींचा कि अशोक के शर्ट के बटन और महुआ का ब्लाउज चरमरा के फ़टने लगे अपने जिस्मों की गर्मी से पगलाये दोनो ने एक दूसरे की शर्ट और ब्लाउज उतार फ़ेंकी । अब महुआ ब्रा और पेटीकोट में और अशोक अन्डरवियर मे था। महुआ ने अशोक के अन्डरवियर के साइड से उसका टन्नाया हलव्वी लण्ड बाहर निकाल लिया और सहलाने लगी। साँसों की तेज़ी से महुआ का सीना उठबैठ रहा था और उसके बेल से स्तन बड़ी मस्ती से ऊपर नीचे हो रहे थे। अशोक ने उन्हें दोनो हाँथों में दबोच कर, उन पर जोर से मुँह मारा । इससे उत्तेजित हो महुआ ने उसका टन्नाया हलव्वी लण्ड जोर से भीच दिया । तभी अशोक ने उसके पेटीकोट का नारा खीच दिया
महुआ की मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों भारी नितंबों से पेटीकोट नीचे सरक गया। अशोक पागलों की तरह उसके गदराये जिस्म मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों भारी नितंबों को दबोचने टटोलने लगा।
महुआ से अब रहा नहीं जा रहा था, सो उसने अशोक का टन्नाया हलव्वी लण्ड खीचकर अपनी बुर के मुहाने पर लगाया और तड़पते हुए बोली,
"आहहहहहह अशोक, प्लीज़ अब रहा नहीं जाता, प्लीज़ मुझे चोद डालो नहीं तो मैं अपने ही जिस्म की गर्मी में जल जाऊँगी, हाय राजा अब मत तड़पाओ।"
अब अशोक ने और रुकना मुनासिब नहीं समझा। महुआ की टाँगें फ़ैला और एक हाथ उसकी गुदाज चूतड़ों पे घुमाते हुए दूसरे से अपना खड़ा, कड़क, मोटा, गर्म लण्ड पकड़ कर महुआ की फ़ूली हुई पावरोटी सी बुर के मुहाने पर रगड़ते हुए बोला, "चल महुआ, अब होशियार हो जा ज़िंदगी में पहली बार अपनी बुर चुदवाने के लिये। अब तेरी बुर अपना दरवाजा खोल कर चूत बनने जा रही है ।"
महुआ ने सिसकारी ली और आँखें बंद कर लीं । महुआ को पता था कि पहली चुदाई में दर्द होगा, वो अब किसी भी दर्द के लिये तैयार थी । अपना सुपाड़ा ठीक से महुआ की बुर के मुँहाने पे रख कर अशोक ने ज़ोर से दबाया। बुर का मुँह ज़रा सा खुला और अशोक के लण्ड का सुपाड़ा आधा अंदर घुस गया।
महुआ दर्द से कराही,
"इस्स्स्स्स्स्स अशोक।"
वो महुआ की कमर पकड़ कर बोला,
"घबरा मत महुआ, शुरू में थोड़ा दर्द तो होगा फ़िर मजा आयेगा।"
महुआ की कमर कस कर पकड़ कर अशोक ने लण्ड अंदर धकेला पर बुर फ़ैलाकर लण्ड का सुपाड़ा बुर में आधा घुस कर अटक गया था। महुआ ने दर्द से अपने होंठ दाँतों के नीचे दबा लिये और अब ज़रा घबराहट से अशोक को देखने लगी। महुआ की बुर को अपने लण्ड का बर्दास्त करने देने के लिये अशोक कुछ वक्त वैसे ही रहा और महुआ का गदराया गोरा गुलाबी जिस्म सहलाते हुए उसके बेल से स्तन की घुन्डी चूसने लगा, जब अशोक को एहसास हुआ कि महुआ की साँसें सामन्य हो गयी हैं तो फिर अपनी कमर पीछे कर के, महुआ को कस कर पकड़ कर पूरे ज़ोर से उचक के धक्का दिया। इस हमले से अशोक के लण्ड का सुपाड़ा महुआ की कम्सिन, अनचुदी बुर की सील की धज्जियाँ उड़ाते हुए पूरा अन्दर हो गया । अशोक के इस हमले से दर्द के कारण महुआ, अशोक को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी और अपनी चूत से अशोक का लण्ड निकालने की नाकाम कोशिश करते हुए ज़ोर से चिल्ला उठी,
"आहहहहहहहह
मैं मर गयीईईईईईई, उ़़फ्फ़्फ़्फ़़ फ्फ़्फ़्फ़फ़्फ़ नहींईंईंईंईं, निकालो लण्ड मेरी बुर से अशोक, फ़ट जायेगी।"
ये देख कर अशोक ज़रा रुका और महुआ का एक निप्पल होठों मे दबाके चुभलाने लगा । अशोक के रुकने से महुआ की जान में जान आयी। उसे अपनी बुर से खून बहने का एहसास हो रहा था । अशोक महुआ के बेल से स्तन की घुन्डी चूस रहा था, उसका गदराया गोरा गुलाबी जिस्म सहला रहा था जब अशोक को एहसास हुआ कि महुआ की साँसें अब सामन्य हो गयी हैं और वो धीरे धीरे अपनी बुर को भी आगे पीछे करने लगी तो उसने हल्के से लण्ड का सुपाड़ा दो-तीन बार थोड़ा सा आगे पीछे किया। पहले तो महुआ के चेहरे पर हलके दर्द का भाव आया फ़िर वो मजे से 
"आहहहहह, ओहहहहह"
करने लगी । पर जब कुछ और धक्कों के बाद महुआ ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ अशोक की तरफ़ देखा, तो अशोक समझ गया कि महुआ की चूत का दर्द अब खतम हो गया है। अबकी बार अशोक ने लण्ड का आधा सुपाड़ा बाहर निकाला और फ़िर से धीरे से चूत में धक्का मारा। पर लण्ड का सुपाड़ा फ़िर से चूत में घुस कर अटक गया और महुआ ज़ोर से चिल्ला उठी,
"आहहहहहहहह
मैं मर गयीईईईईईई, उ़़फ्फ़्फ़्फ़़ फ्फ़्फ़्फ़फ़्फ़, बस अशोक अब और नहीं, फ़ट जायेगी।"
अनुभवी अशोक समझ गया कि ये इससे ज्यादा बर्दास्त नहीं कर पायेगी सो मन मार के सुपाड़े से ही चोदने लगा अशोक को इसमें ज्यादा मजा तो नहीं आया पर महुआ के गदराये गोरे गुलाबी जिस्म से खेल सहला और उसके बेल से स्तन की घुन्डी चूसते हुए काफ़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वो उसकी छोटी सी चूत में सुपाड़े से ही चोदकर लण्ड झड़ाने में कामयाब हो ही गया इस बीच उसकी हरकतों से महुआ जाने कितनी बार झड़ी और बुरी तरह थक गई। इसीलिए मजा आने के बावजूद महुआ ने अगले दिन चुदवाने से इन्कार कर दिया और फ़िर पहले दिन की थकान और घबराहट को सोच हर रोज ही चुदवाने में टाल मटोल करने लगी। घर में सुन्दर बीबी होते हुए बिना चोदे जीवन बिताना अशोक के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था अत: अशोक ने झूठ का सहारा लिया एक दिन उसने महुआ से कहा कि उसके पेट में दर्द है और वो डाक्टर के यहाँ जा रहा है वहाँ से लौट कर उसने महुआ को बताया कि डाक्टर ने दर्द की वजह चुदाई में कमी बताया है और कहा है कि ये दर्द चुदाई करने से ही जायेगा।
ये सुन कर महुआ चुदाने को तैयार हो गई पर उसने सुपाड़े से ज्यादा अपनी चूत में लेने से इन्कार कर दिया क्योंकि उसे सचमुच बहुत दर्द होता था। अशोक भी जो कुछ मिल रहा है उसी को अपना भाग्य समझ इस आधी अधूरी चुदाई पर ही सन्तोष कर जीवन बिताने लगा।
क्रमश:………………
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04-25-2019, 10:54 AM,
#26
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
अशोक की मुश्किल
भाग 2

चम्पा चाची का चूरन…

गतांक से आगे………………
इसी बीच अशोक व्यापार के सिलसिले में जिस कसबे में उसकी ससुराल थी, वहाँ गया। फुटकर व्यापारियों से हिसाब किताब करते रात हो गयी तो सास से मिलने रात ही में पहुंच पाया और रात में वापस आना ठीक न समझ ससुराल में ही रुक गया उसे देख उसकी विधवा सास चम्पा बहुत खुश हुई। महुआ की तरह वह भी उन्हें चाची ही कहता था।
चाची की उम्र यही कोई 40 या 42 साल के आस पास होगी। उनका रंग गोरा डील डौल थोड़ा भारी पर गठा कसा हुआ, वो तीस पैंतिस से ज्यादा की नहीं लगती थी
अशोक ने पाँव छुए तो वो झुककर उसे कन्धे पकड़ उठाने लगीं तो सीने से आंचल ढलक गया और चाची के हैवी लंगड़ा आमों जैसे स्तनों को देख अशोक सनसना गया।
चाची बोली- “अरे ठीक है ठीक है आओ आओ बेटा मैं रोटी बना रही थी इधर रसोईं मे ही आ जाओ जबतक तुम चाय पियो तबतक मैं रोटी निबटा लूँ।
अशोक ने महसूस किया कि चाची ने ब्रा नहीं पहनी है उसने सोचा शायद रसोई की गर्मी से बचने के लिए उन्होंने ऐसा किया हो।
चाची ने उसे चाय पकड़ाते हुए पूछा – “ महुआ कैसी है?”
बोला-“जी ठीक है।”
अशोक डाइनिंग टेबिल की कुर्सी खींच के उनके सामने ही बैठ गया। चाची रोटी बेलते हुए बातें भी करती जा रहीं थी। उनके लो कट ब्लाउज से फ़टे पड़ रहे उनके कटीले आम जैसे स्तन रोटी बेलते पर और भी छ्लके पड़ रहे थे। जिन्हें देख देख अशोक का दिमाग खराब हो रहा था। वो उनपर से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहा था। उसने सोचा ये कोई महुआ की माँ तो है नहीं चाची है मेरा इसका क्या रिश्ता?
अगर मैं इसे किसी तरह पटा के चोद लूँ तो क्या हर्ज है, कौन सा पहाड़ टूट जायेगा। उसने आगे सोचा आज तो महुआ भी साथ नही है मकान में सिर्फ़ हमीं दोनों हैं पता नहीं ऐसा मौका दोबारा कभी मिले भी या नहीं ये सोंच उसने चाची को आज ही पटा के चोदने का पक्का निश्चय कर लिया।
वो चाय पीते और उन कटीली मचलती चूचियों को घूरते हुए चाची को पटाने की तरकीब सोचने लगा।
तभी चाची बोली- क्या सोच रहे हो बेटा बाथरूम में पानी रखा है नहा धो के कुछ खा लो दिन भर काम करके थक गये होगे।”
अशोक(हड़बड़ा के) – “मैं भी नहाने के ही बारे में सोंच रहा था।”
ये कहकर वो जल्दी से उठा और के नहाने चला गया। नहाते नहाते उसने महुआ की चाची को पटा के चोदने की पूरी योजना बना ली थी।
नहा के अपने कसरती बदन पर सिर्फ़ लुन्गी बांध कर वो बाहर आया और जोर जोर से कराहने लगा।
कराहने की आवाज सुन चाची दौड़ती हुई आयीं पर अचानक अशोक के कसरती बदन को सिर्फ़ लुन्गी में देख के सिहर उठीं।
वो बोली- “क्या हुआ अशोक बेटा।”
अशोक(कराहते हुए)- “आह! पेट में बड़ा दर्द है चाची।”
चाची बोली- “तू चल के कमरे में लेट जा बेटा मेरे पास दवा है मैं देती हूँ अभी ठीक हो जायेगा।”
वो उसे सहारा दे के उसके कमरे की तरफ़ ले जाने लगी सहारा लेने के बहाने अशोक ने उन्हें अपने गठीले बदन से लिपटा लिया। अशोक के सुगठित शरीर की मांसपेशियाँ बाहों की मछलियाँ चाची के गुदाज जिस्म में भी उत्तेजना भरने लगी पति की मौत के बाद से वो किसी मर्द के इतने करीब कभी नहीं आई थीं ऊपर से अशोक का शरीर तो ऐसा था जैसे मर्द की कोई भी औरत कल्पना ही कर सकती है। बाथरूम से कमरे की तरफ़ जाते हुए उसने देखा कि उत्तेजना से चाची के निपल कठोर हो ब्लाउज में उभरने लगे हैं वो मन ही मन अपनी योजना को कामयाबी की तरफ़ बढ़ते देख बहुत खुश हुआ। जैसे ही वो चाची के कमरे के पास से निकले वो जान बूझ के हाय करके उसी कमरे में घुस उन्हीं के बिस्तर पर लेट गया जैसे कि अब उससे चला नहीं जायेगा।
चाची ने उसे अपना अचूक चूरन देते हुए कहा- “ये ले बेटा ये चूरन कैसा भी पेट दर्द हो ठीक कर देता है।” 
अशोक चूरन खाकर फ़िर लेट गया चाची बगल में बैठ उसका पेट सहलाने लगीं काफ़ी देर हो जाने के बाद भी अशोक कराहते हुए बोला-“हाय चाची मर गया हाय बहुत दर्द है ये दर्द जब उठता है कोई दवा कोई चूरन असर नहीं करता। इसका इलाज तो यहाँ हो ही नही सकता इसका इलाज तो महुआ ही कर सकती है।”
चाची ने अपने अचूक चूरन का असर न होते देख पूछा- “आखिर ऐसा क्या इलाज है जो महुआ ही कर सकती है।”
अशोक कराहते हुए बोला-“हाय चाची मैं बता नहीं सकता मुझे बताने लायक बात नहीं है। हाय मर गया, बड़ा दर्द है चाची।”
चाची ने फ़िर पूछा- “मुसीबत में शर्माना नहीं चाहिये यहां मेरे सिवा और तो कोई है नहीं बता आखिर ऐसा क्या इलाज है जो महुआ ही कर सकती है।”
अशोक कराहते हुए बोला-“ चाची आप नहीं मानती तो सुनिये ये सिर्फ़ औरत से शारीरिक सम्बन्ध बनाने से जाता है अब महुआ होती तो काम बन जाता। हाय बड़ा दर्द है मर गया।”
अशोक का पेट सहलाते हुए चाची ने उसके सुगठित शरीर की मांसपेशियों बाहों की मछलियों की तरफ़ देखा और उन्हें ख्याल आया इस एकान्त मकान में वो यदि इस जवान मर्द के साथ शारीरिक सुखभोग लें तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। ये सोच उनके अन्दर भी जवानी अंगड़ाइयाँ लेने लगी। वो अशोक को सान्त्वना देने के बहाने उसके और करीब आकर सहलाने गयीं यहाँ तक कि उनका शरीर अशोक के शरीर से छूने लगा वो बोलीं- “ये तो बड़ी मुसीबत है बेटा।”
चाची की आवाज थरथरा रही थी।
अशोक कराहते हुए बोला-“हाँ चाची डाक्टर ने कहा है कि इसका और कोई इलाज नहीं है।”
तभी अशोक के पेट पर सहलाता चाची का हाथ बेख्याली या जानबूझकर अशोक के लण्ड से टकराया सिहर कर चाची ने चौंककर उधर देखा, लुंगी में कुतुबमीनार की तरह खड़े उसके लण्ड के आकर का अनुमान लगा कर उसे ठीक से देखने की अपनी इच्छा को चाची के अन्दर की जवान और भूखी औरत दबा नहीं पायी और अशोक के पेट दर्द की बीमारी का नाजुक मामला उन्हें इसका माकूल मौका भी दे रहा था। सो चाची ने बीमारी के मोआयने के अन्दाज में लुन्गी हटाके उसका नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा लण्ड थाम लिया उसके आकार और मर्दानी कठोरता को महसूस कर चाची के अन्दर की जवान औरत की जवानी बुरी तरह से अंगड़ाइयाँ लेने लगी। अपनी उत्तेजना से काँपती आवाज में वे बोल उठी,-“अरे बेटा तेरा लण्ड तो खड़ा भी है क्या पेट दर्द की वजह से।”
अशोक(लण्ड अकड़ा के उभारते हुए)-“ –हाँ चाची हाय इसे छोड़ दें।”
चाची की आवाज उत्तेजना से काँपने के अलावा अब उनकी साँस भी तेज चलने लगी थी। वो अशोक के लण्ड को सहलाते हुए बोलीं- “अगर मैं हाथ से सहला के झाड़ दूँ तो क्या तेरा दर्द चला जायेगा।”
अशोक-“अरे ये ऐसी आसानी से झड़ने वाला नहीं है चाची।”
चाची ने सोचा एकान्त मकान, फ़िर ऐसी मर्दानी ताकत(आसानी से न झड़ने वाला), ऐसी सुगठित बाहों की मछलियाँ वाला गठीला मर्द, ऐसे मौके और मर्द की कल्पना तो हर औरत करती है। फ़िर उन्हें तो मुद्दतों से मर्द का साथ न मिला था, ऐसे मौके और मर्द को हाथ से निकल जाने देना तो बेवकूफ़ी होगी।
क्रमश:………………
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04-25-2019, 10:54 AM,
#27
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
अशोक की मुश्किल
भाग 3
चाची का फ़ैसला…



गतांक से आगे…
सो चाची ने खुल के सामने आने का फ़ैसला कर लिया, जी कड़ा कर धड़कते दिल से बोल ही दिया- “बेटा फ़िर तो तेरी जान बचाने का एक ही तरीका है तू मेरे साथ कर ले।
अशोक-“अरे ये क्या कह रही हैं चाची ये कैसे हो सकता है। हाय मैं मरा! आप तो महुआ की चाची यानि कि मेरी सास हैं। ”
चाची अशोक के पथरीले मर्दाने सीने पर झुक अपने ब्लाउज में उभरते उत्तेजना से कठोर हो रहे निपल रगड़ लण्ड को सहलाते हुए बोलीं- ये सच है कि मैं महुआ की चाची हुँ इस नाते वो मेरी मुँहबोली बेटी हुई उसके एवज में मुँहबोली माँ का फ़र्ज मैं अदा कर चुकी उसकी शादी कर उसका घर बसा दिया उसी नाते मैं तेरी मुँहबोली सास हुँ अस्लियत में मेरा तेरा कोई रिश्ता नहीं। तू एक अन्जान मर्द और मैं एक अन्जान औरत।
अशोक(दर्द से छ्ट्पटाने के बहाने लण्ड अकड़ा के उभारते हुए)-“मगर चाची……!
चाची अपनी धोती खींच के खोलते हुए बोली- “क्या अगर मगर करता है वैसे भी आखिर तू मेरी महुआ बेटी का पति है तेरी सास होने के नाते तेरी जान तेरे शरीर की रक्षा भी तो मेरा फ़र्ज है।”
अशोक(उनके हाथ से झूठ्मूठ लण्ड छुटाने की कोशिश करते हुए)-“मगर चाची बड़ी शरम आ रही है। हाय ये दर्द……!!
चाची ने एक ही झटके में अपना चुट्पुटिया वाला ब्लाउज खोल अपने बड़े बड़े विशाल स्तन अशोक की आँखों के सामने फ़ड़फ़ड़ा के कहा-“ इधर देख बेटा क्या मेरा बदन इस लायक भी नही कि तेरे इस पेट दर्द की मुसीबत की दवा के काम आये।”
ये कह के चाची ने अपना पेटीकोट का नारा खींच दिया पेटीकोट चम्पा चाची के संगमरमरी गुदाज भारी चूतड़ों शानदार रेशमी जांघों से सरक कर उनके पैरों का पास जमीन पर गिर गया। चाची ने अशोक बगल में लेट अपना नंगा बदन के बदन से सटा दिया और अपनी एक जाँघ उसके ऊपर चढ़ा दी। अशोक उत्तेजाना से पागल हुआ जा रहा था।
उनके बड़े बड़े विशाल स्तनों के निपल अशोक के जिस्म में चुभे तो अशोक बोला
- “हाय चाची कहीं कोई आ न जाय, जान न जाय।” 
चाची –“ अरे यहाँ कौन आयेगा घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बन्द है फ़िर भी आवाज बाहर न जाये के ख्याल से मैं कमरे का दरवाजा भी बन्द कर लेती हुँ।”
ये कह वे जल्दी से उठ कमरे का दरवाजा बन्द करने जल्दी जल्दी जाने लगीं। उत्तेजना से उनका अंग अंग थिरक रहा था। वो आज का मौका किसी भी कीमत पर गवाना नही चाहती थी। अशोक दरवाजे की तरफ़ जाती चाची की गोरी गुदाज पीठ, हर कदम पर थिरकते उनके संगमरमरी गुदाज भारी चूतड़ शानदार रेशमी जांघें देख रहा था।
दरवाजा बन्द कर जब चाची घूंमी तो अशोक को अपना बदन घूरते देख मन ही मन मुस्कराईं और धीरे धीरे वापस आने लगीं। अशोक एक टक उस अधेड़ औरत के मदमाते जवान जिस्म को देख रहा था। धीरे धीरे वापस आती चाची की मोटी मोटी गोरी रेशमी जांघों के बीच उनकी पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत थी जो कभी जांघों के बीच विलीन हो जाती तो कभी सामने आ जाती। पास आकर चाची मुस्कुराती हुई उसके बिस्तर के दाहिनी तरफ़ इत्मिनान से खड़ी हो गईं क्योंकि अशोक को अपना बदन घूरते देख वो समझ गईं थी कि उसपर पर चाची के बदन का जादू चल चुका है। खड़े खड़े ही चाचीने उसकी लुंगी हटा कर उसका दस इन्ची लण्ड फ़िर से थाम लिया और हाथ फ़ेर के बोली –“ बेटा तेरा ये नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा हैवी लण्ड महुआ ले लेती है?” 
अशोक-“ नहीं चाची सिर्फ़ सुपाड़ा किसी तरह सुपाड़े से चोद के झाड़ लेता हूँ उससे कभी मेरी चुदाई की प्यास नहीं बुझी। वो क्या मुझे आज तक अपने जोड़ की औरत मिली ही नहीं डाक्टरों के अनुसार इसीलिए मुझे हमेशा पेट दर्द रहता है।”
अशोक का लण्ड सहलाती चाची के बड़े बड़े विशाल स्तन, उनके खड़े खड़े निपल, मोटी मोटी गोरी रेशमी जांघें, जांघों के बीच उनकी पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत ने अशोक की बर्दास्त खत्म कर दी थी। उसने अपना दाहिना हाथ उनकी कमर के पीछे से डालकर उन्हें अपने ऊपर गिरा लिया। उनके बड़े बड़े विशाल स्तनों के निपल अशोक की मर्दानी छाती में धँस गये।
अशोक ने महसूस किया कि चाची का बदन अभी तक जवान औरतों की तरह गठा हुआ है। वो उनके गुदाज कन्धे पर मुँह मारते हुए बोला-“मुझे आज पहली बार अपने पसन्द की औरत मिली है बदन तो आपका ऐसा है चम्पा चाची कि मैं खा जाऊँ मगर अब देखना है कि इस बदन की चूत मेरे लण्ड के जोड़ की है या नहीं।
चाची हँसते हुए बगल में लेट गई और उसका दस इन्ची हलव्वी लण्ड फ़िर से थाम लिया और हाथ फ़ेरते बोलीं-अशोक।
अशोक-“हाँ चाची ।
चाची “आ जा अब तेरे पेट का दर्द ठीक हो जायेगा क्योंकि ये चाची और उसकी चूत तेरे जोड़ की है।”
अशोक उठकर चाची की जाँघों के बीच बैठ गया और उनकी केले के तने जैसी सुडोल संगमरमरी रेशमी चिकनी और गुदाज मोटी मोटी रानों को सहलाते हुए बोला-“ आह चाची आप कितनी अच्छी हो । बोलते हुए उसका हाथ चूत पर जा पहुँचा। जैसे ही अशोक ने पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत सहलाई चाची ने सिसकारी ली
"स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह।”
चाची ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैलायी अब उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुंह खुला दिख रहा था अशोक ने अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुहाने पर टेक दिया। चाची ने सिसकारी ली – 
"स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह।”
अशोक चूत के मुंह की दोनों फूली फांको के ऊपर अपना फौलादी सुपाड़ा घिसने लगा
चाची की चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी। उत्तेजना में आपे से बाहर हो चाची ने जोर से सिसकारी ली और झुन्झुलाहट भरी आवाज में कहा – 
"स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह अब डाल न।”
ये कह चाची ने उसका लण्ड अपने हाथ से पकड़कर निशाना ठीक किया।
ये देख अशोक ने उन्हें और परेशान करना ठीक नही समझा उसने हाथ बढ़ाकर चाची की सेर सेर भर की चूचियाँ थाम लीं और उन्हें दबाते हुए लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला।
पक की आवाज के साथ सुपाड़ा चाची की चूत में घुस गया, पर चाची की चीख निकल गई “आ---आ---ईईईईईह”
क्योंकि चाची की चूत में मुद्दतों से कोई लण्ड नहीं गया था सो वो दर्द से चीख पड़ी थीं पर अशोक के लण्ड के सुपाड़े को बिलकुल कोरी बुर का मजा आ रहा था।
अशोक –“ हाय चाची आपकी चूत तो बहुत टाइट है एकदम कोरी बुर लग रही है।”
चाची(बेकरारी से) –“हाय अशोक बेटा तेरे लण्ड का सुपाड़ा मुझे भी सुहागरात का मजा दे रहा है राजा किस्मत से मुझे ऐसा मर्दाना लण्ड और तुझे अपनी पसन्द की चूत मिली है। मेरी भतीजी महुआ के साथ सुपाड़े से मनाई आधी अधूरी सुहागरात की भरपायी, चाची की चूत में पूरा लण्ड धाँस के आज तू अपने मन की सुहाग रात मना के पूरी कर ले। पर अब जल्दी करमेरी चूत में आग लगी है।”
अशोक -“पर आप पूरा सह लोगी चाची? आपकी चूत भी तो इतनी टाइट छोटी सी ही लगती है मैं आप को तकलीफ़ नहीं पहुँचाना चाहता। मुझे डर लगता है क्योंकि आज तक कोई औरत मेरा पूरा लण्ड सह नहीं पाई है।”
चाची – “अरे तू डर मत बेटा मेरी चूत छोटी होने की वजह से टाइट नहीं है बल्कि इसका टाइट होना एक राज की बात है वो मैं फ़िर बाद में बताऊँगी तू पहले पूरा लन्ड तो डाल मेरी इतने सालों की दबी चुदास भड़क के मेरी जान निकाले ले रही है।
अशोक ने थोड़ा सा लण्ड बाहर खीच के फ़िर धक्का मारा तो थोड़ा और लण्ड अन्दर गया चाची कराहीं–
“उम्महहहहहहहहहहह।”
पर अशोक ने उनके कहे के मुताबिक, परवाह न करते हुए चार धक्कों में पूरा लण्ड उनकी चूत में ठाँस दिया 
जैसे ही अशोक के हलव्वी लण्ड ने चाची की चूत की जड़ बच्चेदानी के मुँह पर ठोकर मारी, उनके मुँह से निकला- “ओहहहहहहहहहहह शाबाश बेटा।”
आज तक चाची ने जिस तरह के लण्ड की कल्पना अपनी चूत के लिए की थी अशोक के लण्ड को उससे भी बढ़ कए पाया उनके आनन्द का पारावार नहीं था। चाची ने अपनी टाँगे उठा के अशोक के कन्धों पर रख ली। अशोक ने उनकी जांघों के बीच बैठे बैठे ही चुदाई शुरू की। पॉव कन्धों पर रखे होने से लण्ड और भी अन्दर तक जाने लगा। उनके गोरे गुलाबी गद्देदार चूतड़ अशोक की जॉंघों से टकराकर उसे असीम आनन्द देने लगे। साथ ही उसको उनकी सगंमरमरी जॉंघों पिन्डलियों को सहलाने और उनपर मुँह मारने में भी सुविधा हो गई। उसके हाथ चाची की हलव्वी चूचियाँ थाम सहला रहे थे बीच बीच में वो झुककर उनके निपल जीभ से सहलाने और होठों में दबाके चूसने लगता।
धीरे धीरे चाची के बड़े बड़े स्तनों पर उसके हाथों और होठों की पकड़ मजबूत होती गई और कमरे में सिसकारियॉ गूँजने लगी। चाची टॉगें ऊपर उठाकर फैलाती गईं अशोक की रफ्तार बढ़ती गई और अब उसका लण्ड धॉस के पूरा अन्दर तक जा रहा था। अब दोनों घमासान चुदाई कर रहे थे। अब चाची अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के चुदवाते हुए सिसकारियॉं भरते हुए बड़बड़ा रही थीं- “शाबाश बेटा! मिटाले अपना पेट का दर्द और बुझा दे इस चुदासी चाची की उमर भर की चुदास, जीभर के चोद।
अशोक चाची के दबाने मसल़ने से लाल पड़ बडे़ बड़े स्तनों को दोनों हाथों में दबोचकर चूत में धक्का मारते हुए कह रहा था- “उम्म्हये चाची तुम कितनी अच्छी हो सबसे अच्छी हो, इस तरह पूरा लण्ड धँसवा धँसवा के आजतक किसी ने मुझसे नही चुदवाया इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। उम्म उम्म उम्म लो और लो चाची आह”
चाची (भारी चूतड़ उछाल उछाल के सिसकारियॉं भरते हुए)- “इस्स्स्साह बेटा! किसी लण्ड की कीमत उसके जोड़ की चूत ही जान सकती है उन सालियों को क्या पता तेरे लण्ड की कीमत, मेरी चूत तेरे लण्ड के जोड़ की है तेरा लंड तो लाखों मे एक है बेहिचक चोदे जा, फ़ाड़ दे अब जबतक तू यहाँ है रोज मेरी चूत फ़ाड़ मैं रोज तेरे लंड से अपनी चूत फ़ड़वाऊंगी ह्म्म उम्म्म्ह उम्म्म ह्म्म उम्म्म्ह उम्म्म!!!!!!! अब तू जब भी यहाँ आयेगा मेरी चूत को अपने लण्ड के लिए तैयार पायेगा।
अब दोनों दनादन बिना सोचे समझे पागलों की तरह धक्के लगा रहे थे दोनों को पहली बार अपने जोड़ के लन्ड और चूत जो मिले थे। आधे घण्टे कि धुँआधार चुदाई के बाद अचानक अशोक के मुँह से निकला - आह चाची लगता है मेरा होने वाला है। आआअह अआआह मुझसे रुका नहीं जायेगा।
चाची-“ उम्मईईईईईईईईईई मैं भी झड़नेवाली हूँ बेटा।”
आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई ह्म्म आ--ईईई आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई आ--ईईई,. " मैं तो गईई‍र्‍र्‍र्‍र्ईईई।
“आह चाची आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई आ--ईईई आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई आ—ईईई मेरा भी छुट गया आह।”
अशोक थक कर चाची के बदन पर बिछ सा गया। वो अपनी उखड़ी सॉसों को सम्हालने की कोशिश करते हुए उनका चिकना बदन सहलाने लगा।
चाची –“अब दर्द कैसा है बेटा।
अशोक उनके ऊपर से हट बगल में लेट बोला- अब आराम है चाची।
फ़िर मुस्कुरा के उनकी चूत पर हाथ फ़ेर के बोला-“आपकी इस दवा ने जैसे सारा दर्द निचोड़ लिया।”
क्रमश:………………
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04-25-2019, 10:55 AM,
#28
RE: Muslim Sex Stories सलीम जावेद की रंगीन दुन�...
अशोक की मुश्किल
भाग 4 
राज की बात…


गतांक से आगे…
चाची ने भी मुस्कुरा के उसकी तरफ़ करवट ली और अपनी गोरी मोटी मांसल चिकनी जाँघ उसके ऊपर चढ़ा लन्ड पे रगड़ते हुए बोलीं- “एक बात सच सच बताना बेटा मैं बुरा नहीं मानूँगी। देख मैं भी उम्र दराज औरत हूँ मैंने भी दुनियाँ देखी है ये बता कि सचमुच तेरे पेट में दर्द था या तू सिर्फ़ मुझे चोदने का बहाना खोज रहा था क्योंकि मैंने तेरी आँखों को चोरी चोरी मेरा बदन घूरते देखा है।”
अशोक ने फ़िर झूठ का सहारा लिया-“अब क्या बताऊँ चाची दोनों बातें सही हैं। दरअसल चुदाई की इच्छा होने पर मुझे पेट दर्द होता है। जब आपको रसोई में सिर्फ़ धोती ब्लाउज में देखा………………।”
“तो पेट दर्द शूरू होगया।” चाची ने मुस्कुरा के वाक्य पूरा किया।
अशोक ने झेंपते हुए कहा-
“अरे छोड़िये न चाची”
कहते हुए उनके बायें स्तन के निपल को उंगलियों के बीच गोलियाते मसलते हुए और दायें स्तन के निपल पर जीभ से गुदगुदा के स्तन का निपल अपने होठों मे दबा उनके विशाल सीने में अपना मुँह छिपा लिया और उनके मांसल गुदाज बदन से लिपट गया. 

अब उसका लण्ड कभी चाची की मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों कभी भारी नितंबों तो कभी उनकी चूत से रगड़ खा रहा था।
अशोक झेंपते हुए मुस्कुरा के बात बदलने की कोशिश की-“अच्छा ये बताइये आप कह रहीं थी कि चूत टाइट होना राज की बात है। कैसा राज?”
चाची –“ अरे हाँ बेटा ये तो बड़े काम की बात याद दिलाई। तू कह रहा था कि महुआ तेरे लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा किसी तरह ले पाती है क्योंकि उसकी चूत बहुत छोटी है पहले मेरी भी बल्कि उससे भी छोटी ही थी मेरे मायके के पड़ोस मे एक वैद्यजी रहते हैं उनका एक लड़का चन्दू था जब मैं 15 साल की थी तो वो चन्दूजी 16 या 17 के होंगे। हमारा एक दूसरे के घर आना जाना भी था। अब ठीक से याद नहीं पर धीरे धीरे जाने कैसे चन्दूजी ने मुझे पटा लिया और एक दिन जब हम दोनों के घरों में कोई नहीं था वो मुझे अपने कमरे में ले गये और चोदने की कोशिश करने लगे पर एक तो 15 साल की उम्र, ऊपर से जैसा मैंने बताया मेरी कुंवारी बुर मेरी अन्य सहेलियों के मुकाबले छोटी थी सो लण्ड नहीं घुसा, तभी चन्दू उठा और अपने पिताजी के दवाखाने से एक अजीब मलहम जैसा ले आया, उसे मेरी बुर और अपने लण्ड पर लगाया उसे लगाते ही बुर मे चुदास कि गर्मी और खुजली बढ़ने लगी तभी वो अपना लण्ड मेरी बुर पे रगड़ने लगे थोड़ी ही देर में मैं खुद ही अपनी बुर में उनका लण्ड लेने की कोशिश करने लगी थोड़ी ही देर में आश्चर्यजनक रूप से मैंने उनका पूरा सुपाड़ा अपनी बुर मे ले लिया पर उस दिन उससे ज्यादा नही ले पाई चन्दू ने भी सुपाड़े से ही चोद के संतोष कर लिया।
पर अब तो मुझे भी चस्का लग गया था, अगले दिन फ़िर मैं मौका देख कर उनके के पास पहुंची वो बहुत खुश हुए और हम दोनों चुदाई करने की कोशिश करने लगे। पर मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब आज आधे सुपाड़े के बाद लण्ड ने घुसने से इन्कार कर दिया पूछने पर वो मुस्कुराये और उन्होंने बताया कि उनके वैद्य पिता एक अनोखा मलहम(जो कि उन्होंने कल लगाया था) बनाते हैं। अगर कम उम्र की लड़कियाँ उसे अपनी बुर पे लगा के चुदवाने की कोशिश करें तो धीरे धीरे कुछ ही समय में बुर में रबड़ जैसा लचीलापन आ जाता है पर बुर ढ़ीली नहीं होती यहाँ तक कि भयंकर चुदक्कड़ बन जाने पर भी चूतें कुंवारी बुर की सी टाइट रहती हैं पर साथ ही अपने लचीलेपन के कारण बड़े से बड़ा लण्ड लेने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। मैं बहुत खुश हुई।
इस बीच चाचा मलहम ले आये मेरी चूत पर लगाने लगे, मैं तो चुदासी थी ही सो उनसे उस मलहम का इस्तेमाल कर चुदवाने को तैयार हो गई। कुछ ही दिनों में देखते ही देखते मैं आसानी से उनके पूरे लण्ड से चुदवाने लगी। मेरी बुर चुद के बुर से चूत बन गई, पर देखने और इस्तेमाल मे पन्द्रह सोलह साल की बुर ही लगती रही, आज भी लगती है तूने भी देखा और महसूस किया है।चन्दू चाचा से गाँव की शायद ही कोई लड़की बची हो? धीरे धीरे वो बदमाश लड़कियों मे पहले चन्दू चाचा फ़िर चोदू चाचा के नाम से मशहूर हो गये और अभी भी हैं। वो अभी भी अपने हुनर का उस्ताद है और अभी भी नाम कमा रहे है।”
इतना बताते बताते चाची मारे उत्तेजना के हाँफ़ने लगीं क्योंकि एक तो उनकी ये गरमागरम कहानी ऊपर से उनके जिस्म पर अशोक की हरकतें, इन दोनों बातों ने उन्हें बहुत गरम कर दिया था। इस समय वो चाची की मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच अपना फ़ौलादी लण्ड दबाकर, बारी बारी से उनके निपल चूसते हुए, अपने हाथों से उनके बड़े बड़े भारी नितंबों को दबोच टटोल रहा था।
अशोक ने पूछा –“उम्म क्या आप उनसे महुआ की चूत ठीक करवा सकती हैं।”
अशोक की हरकतों के कारण सिस्कारियाँ भरते हुए-“इस्स्स्स आ~ह उइइईई अम्म्म्म आआह हाँ पर उसके लिए तो महुआ को चन्दू चाचा से चुदवाना पड़ेगा।”
अशोक बायें हाथ से चाची की पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ फ़ैला, दायें हाथ से चूत के मुहाने पर अपने लण्ड का सुपाड़ा धीरे धीरे घिसते हुए बोला- “अरे तो कौन सी उसकी चूत घिस जायेगी उल्टे आपकी तरह हमेशा के लिए जवान बनी रहेगी साथ ही हमेशा के लिए सारी परेशानी दूर हो जायेगी सो अलग।”
चूत पे लण्ड घिसने से चाची की सिसकारियाँ और साँसे और भी तेज होने लगी –“ इस्स्स्स आ~ह उइइईई अम्म्म्म आआ~~ शैतान ! पर तुझे महुआ को फ़ुसलाकर चाचा से चुदवाने के लिए तैयार करना पड़ेगा।”
अशोक- “मेरे ख्याल से चुदाई करते हुए सोचें तो इसका कोई न कोई तरीका सूझ जायेगा।”
अचानक चाची ने एक झटके से उसे पलट दिया और बोली- “अच्छा ख्याल है तू आराम से लेटे लेटे चाची से चुदवाते हुए सोच और चाची का कमाल देख इसबार मैं चोदूंगी, तुझे ज्यादा मजा आयेगा जिससे सोचने में आसानी होगी और तेरा बचखुचा दर्द भी चला जायेगा।”
वो अशोक के ऊपर चढ़ गयी और बायें हाथ की दो उँगलियों से अपनी पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ फ़ैलाये और दायें हाथ से उसके लण्ड को थाम, उसका सुपाड़ा अपनी, चुदास से बुरी तरह पनिया रही अपनी चूत के मुहाने से सटाया और दो ही धक्कों में पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया और सिसकारियॉं भरते हुए अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी चूतड़ उछाल उछालकर धक्के पे धक्का लगाने लगी ।
अशोक के लिए ये बिलकुल नया तजुर्बा था उसने तो अब तक औरतों को अपने फ़ौलादी लण्ड से केवल डरते,बचते, चूत सिकोड़ते ही देखा था शेरनी की तरह झपटकर लण्ड को निगल जाने वाली चाची पहली औरत थीं सो अशोक को बड़ा मजा आ रहा था। उनके बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ अशोक के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे। वो दोनों हाथों से उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलने जिस्म को, गुदाज चूतड़ों को दबोचने लगा। उनके उछलते कूदते तरबूज जैसे स्तन देख अशोक उनपर मुँह मारने लगा । कभी निपल्स होठों मे पकड़ चूसने लगता, पर अशोक का पूरा लण्ड अपनी चूत मे जड़ तक ठोकने के जुनून में चाची उसके लण्ड पे इतनी जोर जोर से उछल रहीं थी कि निपल्स बार बार होठों से छूट जा रहे थे। वो बार बार झपट कर उनकी उछलती बड़ी बड़ी चूचियाँ पकड़ निपल्स होठों में चूसने के लिए दबाता पर चाची की धुआँदार चुदाई की उछल कूद में वे बार बार होठों से छूट जा रहे थे करीब आधे घण्टे की धुआँदार चुदाई के बाद इन दोनों खाये खेले चुदक्क्ड़ उस्तादों ने एक दूसरे को सिगनल दिया कि अब मंजिल करीब है सो अशोक ने दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी मसलने से लाल पड़ गई चूचियाँ पकड़कर एक साथ मुंह में दबा ली इस बार और उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉसकर झड़ने लगा तभी चाची अपनी चूँचियाँ अशोक के मुँह में दे उसके ऊपर लगभग लेट सी गईं और उनके मुँह से जोर से निकला-
“उहहहहहहहहहहह ”
वो जोर से उछलकर अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक अशोक का भयंकर फ़ौलादी लण्ड धॉंसकर और उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए झड़ने लगी ।
दोनो झड़के पूरी तरह से निचुड़ गये थे। चाची बुरी तरह पस्त हो अशोक के ऊपर पड़ी थीं तभी अशोक ने पलट के चाची को नीचे कर दिया। अब अशोक उनके ऊपर आ गया था उसने चाची के बायें स्तन पर हाथ फ़ेरते हुए और दायें स्तन के निपल पर जीभ से गुदगुदाते हुए कहा-“मैंने महुआ को राजी करने का तरीका सोच लिया है बस आप चन्दू चाचा को उनकी दवा के साथ बुलवा लीजिये। सुबह महुआ को फ़ोन करेंगे मैं जैसा बताऊँ आप उससे वैसा कहियेगा समझ लीजिये काम हो गया।”
चाची-“ठीक है सबेरे ही फ़ोन करके मैं चन्दू चाचा को भी बुलवा लेती हूँ।”
फ़िर अशोक ने उन्हें समझाना शुरू किया कि उन्हें सुबह महुआ से फ़ोन पर कैसे और क्या बात करनी है। ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे लिपटे सबेरे की योजना पे बात करते हुए कब उन्हें नींद आ गई पता ही नही चला।
क्रमश:……………
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04-25-2019, 10:55 AM,
#29
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अशोक की मुश्किल
भाग 5
अशोक का प्लान…


गतांक से आगे…

दूसरे दिन सबेरे ही सबेरे चाची ने फ़ोन करके चन्दू चाचा को बुलवा भेजा। फ़िर रोजमर्रा के कामों से निबट कर दोनों ने नाश्ता किया और चाची के कमरे में पलंग पर बैठ इतमिनान से एक बार फ़िर इस बात पर गौर किया कि महुआ से फ़ोन पर कैसे और क्या बात करनी है। पूरी तरह से तैयारी कर लेने के बाद अशोक की योजना अनुसार स्पीकर आनकर महुआ को फ़ोन मिलाया।
महुआ –“हलो!”
चाची-“महुआ बेटी मैं चाची बोल रही हुँ कैसी हो बेटी।
महुआ-“अच्छी हूँ चाची! आप कैसी हैं? रात अशोक वापस नहीं आए लगता है आपके पास रुक गये।
चाची-“ मैं ठीक हुँ बेटी! दामाद जी के साथ तू भी क्यूँ नहीं चली आई चाची से मिलने, महुआ।
महुआ-“मैंने सोंचा ये अपने काम से जा रहे हैं। कहाँ मुझे साथ साथ लिए फ़िरेगें, अकेले रहेंगे, तो काम जल्दी निबटा कर शाम तक वापस आ जायेंगे।
चाची(तेज आवाज में)-“पर क्या तुझे अशोक के अचानक उठने वाले पेट दर्द का ख्याल नहीं आया क्या इस बात का ख्याल रखना तेरी जिम्मेदारी में नहीं आता? मुझे तो इस बात का पता ही नहीं………
महुआ( घबरा के बीच में बात काटते हुए)-“हाय, तो क्या दर्द उठा था?”
चाची-“वरना मुझे कैसे पता चलता? मुझे कोई सपना तो आया नहीं।
महुआ( घबराहट से)- “अशोक ठीक तो है? क्योंकि उसमें तो कोई दवा………
चाची-“……असर नही करती। घबरा मत, अशोक अब ठीक है। वो यही मेरे पास है स्पीकर आन है ले बात कर, बोलो अशोक बेटा। ”
अशोक-“हलो महुआ! घबरा मत मैं ठीक हूँ।“
चाची ने आगे अपनी बात पूरी की-“हाँ तो मैं बता रही थी कि रात का समय, ये एक छोटा सा गाँव, न कोई डाक्टर, ना वैद्य। उसपे तुर्रा ये मैं अकेली बूड्ढी औरत।”
बुड्ढी शब्द सुनते ही अशोक ने आँख मार के उनकी कमर में हाथ डाल के अपने से सटा लिया।
महुआ(फ़िक्र से)- “ये तो मैंने सोंचा ही नही था। अशोक को तो बड़ी तकलीफ़ हुई होगी। फ़िर क्या तरकीब की चाची? 
चाची-“ऐसी हालत में बिना डाक्टर, वैद्य के कोई कर भी क्या सकता है जब चूरन मालिश किसी भी चीज का असर नहीं हुआ तो मुझसे लड़के का तड़पना देखा नही गया। एक तरफ़ मेरी अपनी मान मर्यादा थी दूसरी तरफ़ मेरी बेटी के सुहाग की जान पे बनी हुई थी मैने सोंचा मेरी मान मर्यादा का अब क्या है मेरी तो कट गई, पर बेटी तेरे और अशोक के आगे तो सारी जिन्दगी पड़ी है । आखीर में जीत तेरी हुई और मुझे वो करना पड़ा किया जो ऐसे मौके पे तू करती है।”
महुआ- “हे भगवान! ये आपने कैसे…चाची… ये समाज……।
अशोक की पहले से सिखाई पढ़ाई तैयार चाची बात काटकर बोली –“मैंने जो किया मजबूरी में किया, आज हम दोनों चाची और भतीजी के पास अशोक के अलावा और कौन सहारा है, भगवान न करे अगर अशोक को कुछ हो जाता तो क्या ये समाज हमें सम्हालता। फ़िर रोने और इस समाज के हाथों का खिलौना बन जाने के अलावा क्या कोई चारा था, सो समाज का नाम तो तू न ही ले तभी अच्छा। तू अपनी बता तेरे लिए अशोक की जान या समाज में से क्या जरूरी था।
महुआ जिन्दगी की इस सच्चाई को समझ भावुक हो उठी- “नहीं नहीं मेरे लिए तो अशोक की जिन्दगी ही कीमती है आपने बिलकुल ठीक किया मेरे ऊपर आपका ये एक और अहसान चढ़ गया।”
चाची की आवाज भी भावुक हो उठी- “अपने बच्चों के लिए कुछ करने में अहसान कैसा पगली।”
महुआ को दूसरी तरफ़ फ़ोन पे ऐसा लगा कि चाची बस रोने ही वाली हैं सो माहौल को ह्ल्का करने की कोशिश में हँस के बोली-“अरे छोड़ो ये सब बातें चाची ये बताओ मजा आया कि नहीं आया तो होगा। सच सच बोलना।”
महुआ की हँसी सुन अशोक और चाची दोनों की जान में जान आई अशोक तो चाची से लिपट गया।
चाची झेंपी हुई आवाज में - “चल हट शैतान! तुझे मजाक सूझ रहा है यहाँ इस बुढ़ापे में जान पे बन आई। कितना तो बड़ा है लड़के का!
कहते हुए चाची ने लुंगी मे हाथ डाल अशोक का हलव्वी लण्ड थाम लिया।
महुआ(हँसते हुए)-“क्या चाची?”
-“चुप कर नट्खट! शुरू में तो मेरी आँखे ही उलटने लगी थीं, लगा कि कही मैं ही ना टें बोल जाऊँ। 
चाची ने लण्ड सहलाते हुए साफ़ झूठ बोल दिया। इस बीच अशोक उनका ब्लाउज खोल के गोलाइयाँ सहलाने लगा था।”
महुआ-“अरे छोड़ो चाची! अब तो हम दोनों एक ही केला खा के सहेलियाँ बन गये हैं
मुझसे क्या शर्माना!”
अब चाची को भी जोश आ गया उन्होंने नहले पर दहला मारा- “ठीक है सहेली जी जब मिलोगी तो विस्तार से बता दूँगी पर फ़ोन पर तो बक्श दो। हाँ खूब याद दिलाया इस हादसे के बाद अशोक ने बताया कि तू अभी तक उसका आधा भी…… ।”
महुआ-“मैं क्या करूँ चाची आपने मुझे बचपन से देखा है जानती ही हैं, कहाँ मैं नन्हीं सी जान और कहाँ अशोक। अभी आपने भी मानाकि वो बहुत……।”
चाची-“इसका इलाज हो सकता है बेटी। मेरे गांव के एक चाचा वैद्य हैं। चन्दू चाचा, वो इसका इलाज करते हैं, दरअसल मेरा हाल भी तेरे जैसा ही था मैंने भी उन्हीं से इलाज कराया, ये उनके इलाज का ही प्रताप है कि मैं कल का हादसा निबटा पाई।”
ये कहते हुए चाची ने शैतानी से मुस्कुरा कर अशोक की ओर देखते हुए उसका लण्ड मरोड़ दिया।
फ़िर आगे कहा –“मैंने अशोक से भी बात कर ली है, वो तैयार है। ले तू खुद ही बात कर ले।”
अशोक-“ महुआ! मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ पर रात में इसके अलावा और कोई चारा नजर नही आया।”
महुआ–“छोड़ यार! वैसे अब तबियत कैसी है। चाची ने मुझे वख्त की नजाकत बतायी थी मैं समझती हूँ और हाँ! ये बताओ ये इलाज का क्या किस्सा है? ”
–“ये इलाज भी लगभग उतना ही असामाजिक और शर्मिन्दगी भरा है जितना कि कल का हादसा। पर मेरे तेरे और चाची के बीच शर्माने को अब कुछ बचा तो है नहीं।”
अशोक ने चाची की चूचियों पर अपना सीना रगड़ते हुए जवाब दिया।
महुआ–“अगर तुम्हें मंजूर है तो मुझे कोई एतराज नहीं। वैसे भी ठीक होना तो मैं भी चाहती हूँ शर्मा के पूरी जिन्दगी तकलीफ़ झेलने से तो अच्छा है कि एक बार शर्मिन्दगी उठा के बाकी की जिन्दगी आराम से बितायें।”
अशोक –“तब तो मेरे ख्याल से इससे पहले कि कोई और हादसा हो हमें ये इलाज करा लेना चाहिये। अगर तुम्हें एतराज ना हो तो मेरी तरफ़ से पूरी छूट है। चाची तुम्हें ठीक से समझा देंगी ।”
कहकर अशोक ने चाची के पेटीकोट को पकड़ कर नीचे खींच दिया। अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थीं।
चाची ने अशोक की लुंगी खीच के उसे भी अपने स्तर का कर लिया और नंगधड़ंग उससे लिपटते हुए बोलीं –“मैं चन्दू चाचा को भेज रही हूँ विश्वास रख सब ठीक हो जायेगा, बस तू दिल लगा के मेहनत से उनसे इलाज करवाना। करीब हफ़्ते भर का इलाज चलेगा। अशोक के सामने तुझे झिझक आयेगी और वैसे भी जितने दिन तेरा इलाज चलेगा उतने दिन तुझे अशोक से दूर रहना होगा तो तू उसका ख्याल न रख पायेगी सो उसे मैं तबतक यहीं रोक लेती हूँ।” 
महुआ ने फ़िर छेड़ा –“ओह तो जितने दिन मेरा इलाज यहाँ चलेगा उतने दिन अशोक का वहाँ चलेगा। वाह चाची! तुम्हारे तो मजे हो गये, मस्ती करो।”
चाची के भारी चूतड़ों को हाथों से दबोचते हुए, जवाब अशोक ने दिया –“ तुझे ज्यादा ही मस्ती सवार हो रही है ठहर जा, चन्दू चाचा से कह देते हैं वो इलाज के दौरान तेरी मस्ती झाड़ देंगें।”
चाची ने अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा अपनी गुलाबी चूत पर रगड़ते हुए कहा-“बिलकुल ठीक कहा बेटा! यहाँ तो जान पे बनी है इसे मस्ती की सूझ रही है।
महुआ-“हाय! तो क्या इलाज में वो सब भी होता……
अशोक (चाची की चूत पे अपने लण्ड का सुपाड़ा हथौड़े की तरह ठोकते हुए)-“और नहीं तो क्या बिना चाकू लगाये आपरेशन हो जायेगा। पर चन्दू चाचा की गारन्टी है और चाची ने तो आजमाया भी है कि उनके मलहम में वो जादु है कि तुझे तकलीफ़ बिलकुल न होगी।”
महुआ –“हे भगवान! ठीक से सोच लिया है अशोक। तुम्हें बाद में बुरा तो नहीं लगेगा।
अशोक(चाची की हलव्वी चूचियों पे गाल रगड़ते हुए) –“तू जानती है कि मैं कोई दकियानूसी टाइप का आदमी तो हूँ नहीं । फ़िर जो कुछ मैंने किया उसके लिए तूने खुले दिल से मुझे उसके लिए माफ़ कर दिया। तो मेरा भी फ़र्ज बनता है कि मैं खुले दिल और दिमाग के साथ तेरा इलाज कराऊँ ताकि तू मेरे साथ जीवन का सुख भोग सके। सो दिमाग पे जोर डालना छोड़ के जीवन का आनन्द लो इलाज के दौरान जैसे जैसे चन्दू चाचा बतायें वैसे वैसे करना।”
चाची –“ठीक है महुआ बेटी चन्दू चाचा, कल शाम तक पहुंच जायेंगे। अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ। ऊपरवाला चाहेगा तो सब ठीक हो जायेगा। खुश रहो।”
महुआ –“ठीक है चाची प्रणाम।
सुनकर चाची ने फ़ोन काट दिया और अशोक के ऊपर यह कहते हुए झपटीं –
“इस लड़के को एक मिनट भी चैन नहीं है अरे अपने पास पूरा हफ़्ता है एक मिनट शान्ती से फ़ोन तो कर लेने देता। अभी मजा चखाती हूँ।”
कहते हुए चाची ने अपनी लण्ड से रगड़ते रगड़ते लाल हो गई पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ बायें हाथ की उँगलियों से फ़ैलाये और दूसरे हाथ से अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा चूत के होठों के बीच फ़ँसा लिया।और इतनी जोर का जोर का धक्का मारा कि अशोक की चीख निकल गई।
चाची बोलीं –“ चीखने से काम नहीं चलेगा अब तो पूरे एक हफ़्ते चाची तेरे पेट दर्द का इलाज करेगी।”
अशोक मक्कारी से मुस्कुराते हुए बोला–“ पर चाची अभी नहाना भी तो है।”
चाची(दोनों के नंगे बदन की तरफ़ इशारा करते हुए) बोलीं –“फ़िर ये सब किसलिए किया, ये आग किसलिए लगा रहा था।”
अशोक –“खुद और आपको नहलाने, और नहाते हुए इस आग को बुझाने के लिए।”
चाची समझ गई कि लड़का उनके भीगते बदन का आनन्द लेते हुए चोदना चाहता है ये सोच उनके भी बदन में अशोक के मर्दाने भीगते शरीर की अपने बदन से लिपटे होने की कल्पना कर सन्सनाहट हुई। अगले ही पल चाची ने अपनी चूत उसके लण्ड से पक से बाहर खींच ली।
चाची कुछ सोच के बोलीं –“ठीक है तो चल नहाने।”
और नंगधड़ंग चाची उसका लण्ड पकड़ के कुत्ते के गले के पट्टे की तरह खींचते हुए बाथरूम की तरफ़ चल दीं।
क्रमश:……………………
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04-25-2019, 10:55 AM,
#30
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अशोक की मुश्किल
भाग 6
चन्दू वैद्य का इलाज…


गतांक से आगे…
उधर अगले दिन शाम को चन्दू चाचा अशोक के घर पहुँचे, महुआ ने चन्दू चाचा की तरफ़ देखा चन्दू मजबूत कद काठी का इस उमर में भी तगड़ा मर्द लगता था। इलाज के तरीके की जानकारी होने के कारण उनका मर्दाना जिस्म देख महुआ को झुरझुरी के साथ गुदगुदी सी हुई। महुआ ने उनका स्वागत किया।
महुआ –“आइये चाचाजी, चम्पा चाची ने फ़ोन करके बताया था कि आप आने वाले हैं।”
चन्दू चाचा ने महुआ को ध्यान से देखा। महुआ थोड़ी ठिगनी भरे बदन की गोरी चिट्टी कुछ कुछ गोलमटोल सी लड़की जैसी लगती थी। उसके चूतड़ काफ़ी बड़े बड़े और भारी थिरकते हुए से थे और उसका एक एक स्तन एक एक खरबूजे के बराबर लग रहा था। चन्दू चाचा महुआ को देख ठगे से रह गये। उन्हें ऐसे घूरते देख महुआ शरमा के बोली- बैठिये चाचा मैं चाय लाती हूँ।”
चन्दू चाचा –“नहीं नहीं चाय वाय रहने दे बेटा, हम पहले नहायेंगे फ़िर सीधे रात्रि का भोजन करेंगे क्योंकि शाम ढ़लते ही भोजन करने की हमारी आदत है। और हाँ, वैसे तो चम्पा ने बताया ही होगा कि हम वैद्य हैं और उसने मुझे तुम्हारे इलाज के लिए भेजा है सो समय बर्बाद न करते हुए, तेरा इलाज भी हम आज ही शुरू कर देंगे क्योंकि इस इलाज में हफ़्ते से दो हफ़्ते के बीच का समय लगता है।”
चन्दू चाचा नहा धो के आये और महुआ के साथ रात का खाना खाकर वहीं किचन के बाहर बरामदे मे टहलते हुए अनुभवी चन्दू ने महुआ से उसकी जिस्मानी समस्या के बारे में विस्तार से बात चीत की जिससे महुआ की झिझक कम हो गई और वो चन्दू चाचा से अपनेपन के साथ सहज हो बातचीत करने लगी। ये देख चन्दू चाचा ने अपना कहा- “महुआ बेटी एक लोटे मे गुनगुना पानी ले खाने की मेज के पास चल, इतनी देर में अपना दवाओं वाला बैग लेकर तेरा चेकअप करने वहीं आता हूँ।”
जब गुनगुना पानी ले महुआ खाने की मेज के पास पहुंची तो चाचा वहाँ अपने दवाओं वाले बैग के साथ पहले से ही मौजूद थे। वो अपने साथ महुआ के कमरे से एक तकिया भी उठा लाये थे।
चन्दू चाचा टेबिल के एकतरफ़ तकिया लगाते हुए बोले –“ये पानी तू वो पास वाली छोटी मेज पे रख दे और साड़ी उतार के तू इस मेज पर पेट के बल लेट जा, तो मैं तेरा चेकअप कर लूँ।”
महुआ साड़ी उतारने में झिझकी तो चाचा बोले –“बेटी डाक्टर वैद्य के आगे झिझकने से क्या फ़ायदा।”
महुआ शर्माते झिझकते साड़ी उतार मेज पर पेट के बल(पट होकर) लेट गई।
चन्दू चाचा ने पहले उसके कमर कूल्हों के आस पास दबाया टटोला पूछा कि दर्द तो नहीं होता। महुआ ने इन्कार में सिर हिलाया तो चन्दू चाचा ने उसका पेटीकोट ऊपर की तरफ़ उलट दिया और उसके शानदार गोरे सुडोल संगमरमरी गुदाज भारी भारी चूतड़ों पर दबाया, टटोला और वही सवाल किया कि दर्द तो नहीं होता। महुआ ने फ़िर इन्कार में सिर हिलाया तो उसे पलट जाने को बोला अब महुआ के निचले धड़ की खूबसूरती उनके सामने थी। संगमरमरी गुदाज गोरी मांसल सुडौल पिन्डलियाँ, शानदार सुडोल संगमरमरी गुदाज भारी भारी चूतड़ों और केले के तने जैसी रेश्मी चिकनी मोटी मोटी जांघों के बीच दूध सी सफ़ेद पावरोटी सी फ़ूली हुई चूत, जिसपे थोड़ी सी रेश्मी काली झाँटें। चन्दू चाचा ने पहले उसके पेट कमर नाभी के आसपास दबाया टटोला फ़िर उसकी नाभी में उंगली डाल के घुमाया तो महुआ की सिसकी निकल गई। इस छुआ छेड़ी से वैसे भी उसका जिस्म कुछ कुछ उत्तेजित हो रहा था। सिसकी सुन चन्दू चाचा ने ऐसे सिर हिलाया जैसे समस्या उनकी समझ में आ रही है। वो तेजी से उसके पैरों की तरफ़ आये और बोले –“ अब समझा, महुआ बेटी! जरा पैरों को मोड़ नीचे की तरफ़ इतना खिसक आ कि तेरा धड़ तो मेज पे रहे पर पैर मेज पर सिर्फ़ टिके हों और जरूरत पड़ने पर उन्हें नीचे लटका के जमीन पर टेक सके।
महुआ ने वैसा ही किया चन्दू चाचा ने दोनों हाथों की उंगलियों से पहले उसकी रेश्मी झांटे हटाईं और फ़िर चूत की फ़ाँके खोल उसमें उंगली डाल कर बोले जब दर्द हो बताना, जैसे ही महुआ ने सिसकी ली चाचा ने अपनी उंगली बाहर खींच ली और बोले –“चिन्ता की कोई बात नहीं तू बिलकुल ठीक हो जायेगी, पर पूरा एक हफ़्ता लगेगा इसलिए इलाज अभी तुरन्त शुरू करना ठीक होगा।” इतनी देर तक एकान्त मकान में चंदू चाचा के मर्दाने हाथों की छुआ छेड़ से उत्तेजित महुआ सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी, वैसे भी पति की रजामन्दी के बाद सोचने समझने को बचा ही क्या था सो महुआ बोली –“ठीक है चाचा।”
चन्दू चाचा ने एक तौलिया महुआ के चूतड़ों के नीचे लगा कर गुनगुने पानी से उसकी रेशमी झाँटें गीली की फ़िर अपने बैग से दाढ़ी बनाने की क्रीम निकाल उनपर लगाई और उस्तरा निकाल फ़टाफ़ट झाँटें साफ़कर दीं। महुआ के पूछने पर उन्होंने बताया कि झाँटें न होने पर मलहम जल्दी और ज्यादा असर करता है। अब चन्दू चाचा ने चूतड़ों के नीचे से तौलिया बाहर निकाला फ़िर उसी से चूत और उसके आसपास का गीला इलाका पोंछपाछ के सुखा दिया। अब महुआ की बिना झाँटों की चूत सच में दूध सी सफ़ेद और पावरोटी की तरह फ़ूली हुई लग रही थी।
चाचा ने अपना मलहम निकाला और महुआ की चूत की फ़ाँके अपने बायें हाथ के अंगूठे और पहली उंगली से खोल अपने दूसरे हाथ की उंगली अंगूठे से उसमें धीरे धीरे मलहम लगाने लगे।
पहले से ही उत्तेजित महुआ को अपनी चूत में कुछ गरम गरम सा लगा फ़िर धीरे धीरे गर्मी के साथ कुछ गुदगुदाहट भरी खुजली बढ़ने लगी जोकि चुदास में बदल गई। जैसे जैसे चन्दू चाचा चूत में मलहम रगड़ रहे थे वैसे वैसे चूत की गर्मी और चुदास बढ़ती जा रही थी। महुआ के मुँह से सिस्कियाँ फ़ूट रही थी और उसकी दोनों टांगे हवा में उठ फ़ैलती जा रही थी। चाचा के मलहम उंगलियो के कमाल से थोड़ी ही देर में महुआ ने अपनी टांगे हवा मे फैला दी और सिस्कारी ले के तड़पते हुए चिल्लाई-
" इस्स्स्स्स्स्स आहहहहहह चाचा, ये मुझे क्या हो रहा है लग रहा है कि मैं अपने ही जिस्म की गर्मी में जल जाऊँगी, प्लीज़ कुछ कीजिये अब बर्दास्त नही हो रहा।”
चन्दू चाचा –“ अभी इन्तजाम करता हूँ बेटा।”
ये कहते हुए चन्दू चाचा अपनी धोती हटा के अपना फ़ौलादी लण्ड निकाला और उसके सुपाड़े पर अपना ढेर सा जादुई मलहम थोप के चूत के मुहाने पर रखा। फ़िर सुपाड़ा लगाये लगाये ही आगे झुक महुआ का ब्लाउज खोला और दोनो हाथों से दोनो बड़े बड़े बेलों को ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए बारी बारी से निपल चूसने लगे। चुदासी चूत की पुत्तियाँ मुँह खोल के लण्ड निगलने लगीं और लण्ड का सुपाड़ा अपने आप चूत में घुसने लगा। मारे मजे के महुआ की आँखें बन्द थी और दोनों टांगे हवा में फ़ैली हुई थीं । जब लण्ड घुसना रुक गया और चाचा ने लण्ड आगे पीछे कर के चुदाई शुरू नहीं की और चूचियाँ दबाते हुए ज़ोर ज़ोर से निपल चूसना जारी रखा तो महुआ ने आँखें खोली हाथ से अपनी चूत मे टटोला और महसूस किया कि सुपाड़े के अलावा करीब आधा इन्च लण्ड और चूत में घुस गया था जब्कि पहले उसकी चूत में अशोक के लण्ड का सुपाड़ा घुसने के बाद आगे बढ़ता ही नहीं था। उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। तभी शायद चाचा को भी महसूस हो गया कि लण्ड चूत में आगे जाना रुक गया सो उन्होंने चूचियों से मुँह उठाया और कहा –“अब आगे का इलाज इस मेज पर नहीं हो सकता सो तू मेरी कमर पर पैर लपेट ले और अपनी बाहें मेरे गले मे डाल ले ताकि मैं तुझे उठा के बिस्तर पर ले चलूँ, आगे की कार्यवाही वहीं होगी।”
महुआने वैसा ही किया सोने के कमरे की तरफ़ जाते हुए लगने वाले हिचकोलों से लण्ड चूत में अन्दर को ठोकर मारता था,उन धक्कों की मार से महुआ के मुँह से तरह तरह की आवाजें आ रहीं थी-
"उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ओउुुुुुुुुुउउ ऊऊऊऊओह इस्स्सआःाहहहहहहहहह ऊहोहोूहोो अहहहहह उूुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इस्स्सआःाहहहहहहहहह"
सोने के कमरे में पहुँच चाचा महुआ को लिये लिए ही बिस्तर पर इस प्रकार आहिस्ते से गिरे कि लण्ड बाहर न निकल जाये। चाचा ने महसूस किया कि सुपाड़े के अलावा करीब एक इंच महुआ की चूत के अन्दर चला गया है, पहले दिन को देखते हुए ये बहुत बड़ी कामयाबी है, ये सोच, महुआ के गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म के ऊपर झुककर उसकी बड़ी बड़ी चूचियों दबोच उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख चूसते हुए उतने ही लण्ड से चोदने लगे। उन्के मुँह से आवाजें आ रही थीं –
“उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह”
उधर महुआ भी चुदाते हुए तरह तरह की आवाजें कर रहीं थी –
"उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ओउुुुुुुुुुउउ ऊऊऊऊओह इस्स्सआःाहहहहहहहहह ऊहोहोूहोो अहहहहह उूुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इस्स्सआःाहहहहहहहहह"
एक जमाने से अशोक के हलव्वी लण्ड से होने वाले दर्द के डर से महुआ टालमटोल कर करके, चुदने से बचती चली आई थी सो जब आज इतने अरसे से उसकी बिन चुदी चूत चन्दू चाचा के कमाल से चुदासी हो इस तरह चुदने पर ज्यादा देर ठहर नहीं पाई और जल्दी ही झड़ने के करीब पहुँच गई और उसके मुँह से निकला – 
"अहह चाचा लगता है मेरी झड़ जायेगी यहह आज तक इतनी गीली कभी नही हुई चाचा उफफफफफफफइस्स्सआःाहहहउम्म्महह"
ये देख अनुभवी चोदू चन्दू चाचा अपनी स्पीड बढ़ा के बोला-
“शाबाश बेटी झड़ खूब जम के झड़ मैं भी अब अपना झाड़ता हुँ ले शाबाश ले अंदरअहहहहहहहहहहहहहहहहाहोह "
और दोनों झड़ गये । महुआ की चूत में उसे ऐसा लगा जैसे काफ़ी वक्त के प्यासे को पानी मिल गया और माल चूत के अंदर जाते ही उसके मुँह से निकला-
"उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ओउुुुुुुुुुउउ ऊऊऊऊओह"
और इस तरह चन्दू चाचा ने पहले राउण्ड का इलाज खत्म किया। वो महुआ के ऊपर से उतर कर बगल में लेट गये और बोले –“तूने बहुत अच्छी तरह से हर काम मेरे कहे मुताबिक किया। अगर तू ऐसे ही मेरे कहे मुताबिक चलती रही तो मेरे मलहम के कमाल से तू बहुत जल्द अशोक के लायक तैयार हो जायेगी। मेरे मलहम का एक कमाल ये भी है और तेरी चूत कभी ढीली या बुड्ढी नही होगी। तेरी चाची की चूत अभी तक एकदम टाइट और जवान है।”
महुआ ये सोच के मन ही मन मुस्कुराई कि तब तो अशोक को बहुत मजा आ रहा होगा। बिचारे ने जमाने से कोई चूत जम के नही चोदी थी।
ऐसे ही बातें करते दोनों को नींद आ गई।
क्रमश:…………………
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