non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्रेम कहानी )
12-27-2018, 01:38 AM,
#1
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अंजानी राहें ( एक गहरी प्रेम कहानी )

सपने जो देखे इन आँखों ने ख्वाहिश यही होती है कि उन सपनो को जिया जाय. चाहत की उड़ान हमेशा ही एक सुख्मयि अहसास होती है. वैसवी राजधानी एक्सप्रेस मे बैठ कर बस आने वाले दिनो के बारे मे सोच रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी.


बनारस की तंग गलियों से निकल कर वैसवी अपने सपने आँखों मे लिए फॅशन डिज़ाइनिंग करने देल्ही जा रही थी.


वैसवी जिन तंग गलियों से निकल कर आई थी वहाँ आज भी गाँव का ही महॉल था. गंगा घाट पर बसा वाराणसी का शहर यूँ तो भारत के फेमस सहरों मे से एक है लेकिन इसके इलाक़े अब भी गाँव जैसे ही है. 


मकान के उपर मकान मुश्किल से एक आदमी पास होने वाली वो तंग गलियाँ और ऐसी ही एक गली से निकल कर आई थी वैसवी. उसने जब नॅशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ फॅशन डिज़ाइनिंग कंप्लीट की तो घर मे ख़ुसीयों का महॉल छा गया.


मिड्ल क्लास से बिलॉंग करने वाली वैसवी एक बहुत ही तेज-तर्रार लड़की थी. खुद को काफ़ी मेनटेन किए हुए थी और अपनी गली के लड़कों के सपनो की रानी थी. लंबी हाइट, गोल चेहरा बदन भरे हुए और हर एक अंग तराशा देखने वाले हमेशा उसे देख बस आहह भरा करते थे.


वैसवी कभी भी अच्छी स्टूडेंट नही रही हमेशा आवरेज क्लास ही रही थी. स्कूलिंग पापा के इन्फ्लुयेन्स के कारण पास कर गयी और कॉलेज अपने इन्फ्लुयेन्स के कारण. 


हमेशा सपनो की दुनिया मे रहने वाली एक लड़की जिसके पास खुद का अपना बंग्लॉ हो, गाड़ी हो नौकर चाकर और शॉपिंग पर लुटाने के लिए लाखों रुपये.


हालाँकि परिवार काफ़ी ही इज़्ज़तदार और संस्कारी था पर वैसवी को ये चस्का कॉलेज मे आने के बाद अपनी दोस्त नीमा से लगा.


सहर के नामचिह्न रहीश आमोद पांडे की इकलौती लड़की जिसके पास लुटाने के लिए लाखों की दौलत थी और आगे पीछे करने वाले कई लोग. हाई-स्टॅंडर्ड लाइफ स्टाइल और कुछ भी करो कोई रोकने वाला नही. बात तब की है जब वैसवी अपने कॉलेज के फर्स्ट एअर मे थी. 


फर्स्ट एअर और कॉलेज का पहला दिन.......


"जल्दी कर माँ आज क्या पहले ही दिन लेट करवाएगी"

माँ.... रुक जा वैसवी पहला दिन है आरती लेती जा

वैसवी.... माँ तुम्हारी आरती के चक्कर मे मैं कहीं लेट ना हो जाउ.


माँ.... रुक जा पहला दिन है वैसे भी कुछ नही होना है. वहाँ जाकर वैसे भी क्लास ढूँढने और अपनी जगह पहुँचने मे तुझे टाइम लग जाएगा.


अब माँ को कौन बताए कि वैसवी कितनी उत्साहित थी अपने कॉलेज का पहला दिन देखने के लिए. पिताजी लेक्चरर थे इसलिए महारानी का अड्मिशन वाराणसी के टॉप कॉलेज मे हो गया. वरना तो इनका अड्मिशन किसी लोवर कॉलेज मे होता. 

ब्लू स्कर्ट घुटनो के नीचे तक एक टाइट शर्ट जिनमे इसके अंगो के उभार के शेप बिल्कुल समझ मे आते हुए और रेड वाइट शेड की एक टाइ पहने वैसवी गेट के पास खड़ी इंतज़ार कर रही थी.

माँ आरती की थाली जब लेकर अपनी बेटी के पास पहुँची और उसका पहनावा देखी तो अचंभित हो गयी .....

"करमजली ऐसे शर्ट पहन कर तू कॉलेज जाएगी. तुझ मे थोड़ी भी अकल है कि नही"

वैसवी अपनी माँ की बात को नज़रअंदाज करते हुए ..... "रहने वाली तो गाँव की ही हो ना तो तुम्हारी सोच वहीं की रहेगी" बस इतना बोल आरती की थाल पर हाथ घुमाई और घर से बाहर निकल गयी.

पीछे से माँ ने कितनी भी रोकने की कोसिस की पर उसके कानो मे जु तक नही रेंगी. घर से कुछ आगे जाते ही वैसवी एक गली के किनारे खड़ी होकर अपने स्कर्ट के दो फोल्ड उपर से मोड़ लेती है और शर्ट का एक पार्ट बाहर निकाल लेती है बिल्कुल किसी फिल्म के स्कूल गर्ल की तरह. 


दिखावे की अंधी दौड़ मे बहती वैसवी बिल्कुल अपने परिवार की बातें भूल चुकी थी. जो पहले घुटने से नीचे तक का पहनावा था वो अब जांघों तक चला आया. नुक्कड़ तक पहुँची तो उसी के मोहल्ले का लड़का जो हम उम्र था वो मिल गया.


आज उसके भी कॉलेज का पहला दिन था. वो अपने घर से गाड़ी निकाल ही रहा था कि वैसवी पर उसकी नज़र चली गयी. पहली झलक जब उसने देखा तो उसकी नज़र चेहरे तक पहुँच ही नही पाई. 


हालाँकि दोनो साथ मे ही क्लासमेट थे पर आज तो वैसवी जैसे बिजली गिरा रही थी ....


"कहाँ जा रही हो वैसवी" उस लड़के ने बाइक को स्टॅंड पर लगाते हुए पूछा


वैसवी.... तुम से मतलब राकेश मैं कहीं भी जाउ.


राकेश.... भड़कती क्यों है मैं तो वैसे ही पूछ रहा था.

वैसवी.... चल-चल ये तेरा वैसे ही पूछना ना किसी और को सुना ज़्यादा मेरे हमदर्द बन ने की कोसिस ना कर.


वैसवी की बातें सुन राकेश का मूह छोटा हो गया. उसने अपना ध्यान वैसवी पर से हटाते हुए अपने काम पर ध्यान दिया. नुक्कड़ पर खड़े वैसवी ऑटो का इंतज़ार कर रही थी वहीं राकेश अपनी माँ को बाहर से "कॉलेज जा रहा हूँ कहते हुए" बाइक स्टार्ट करने लगा.


वैसवी जो अबतक ऑटो का इंतज़ार कर रही थी कुछ सोचती हुई...


"सुन राकेश सॉरी यार मैं थोड़ा घर से चिढ़ कर निकली थी इसलिए तुझे सुबह सुबह सुना दी"


राकेश..... कोई बात नही वैसे भी तेरे साथ कई सालों से हूँ तुझे जानता हूँ मैं.


वैसवी.... राकेश देख ना ऑटो नही मिल रही और मैं कॉलेज के लिए लेट हो रही हूँ.

राकेश..... मैं भी कॉलेज के लिए ही निकल रहा हूँ आज पहला दिन है ना. कौन से कॉलेज मे ली है अड्मिशन.


वैसवी.... इंपीरीयल कॉलेज मे


राकेश..... हॅम ... थोड़ी परेशानी है वैसवी. मैं जगत कॉलेज मे हूँ और दोनो कॉलेज दो अलग अलग छोर पर है मैं लेट हो जाउन्गा.


वैसवी थोड़ी मायूस होती हुए..... देख ना थोड़ा ड्रॉप कर दे ना तू तो बाइक से जल्दी पहुँच जाएगा लेकिन मैं लेट हो जाउन्गी.


अब इतनी सुंदर लड़की ऐसे भोलेपन से आग्रह करे तो कौन है जो नही फिसले. राकेश ने भी
वैसवी की बात मानते हुए उसे ड्रॉप करने का फ़ैसला किया और दोनो चल दिए इंपीरीयल कॉलेज की ओर. तकरीबन 20मिनट मे दोनो कॉलेज के गेट पर थे. 


वैसवी.... राकेश ये कॉलेज तो ऐसी जगह है जहाँ ऑटो भी नही आ पाते. थॅंक्स राकेश.

राकेश.... कोई बात नही अब मैं चलता हूँ.

वैसवी....... रुक ना एक मिनट. यार इस ब्रांच रोड से मेन रोड तक पैदल चलते चलते तो मेरी जान ही निकल जाएगी. तू तो कॉलेज के बाद फ्री हो जाएगा ना. यार मुझे पिक-अप करने आ जाना ना.


राकेश.... यार एक तो तेरा कॉलेज बहुत दूर है और वहाँ से यहाँ आना .... चल ठीक है तू मेरी दोस्त है इसलिए तेरे लिए इतना तो कर ही सकता हूँ. पर मैं यहा कितने बजे आउन्गा.


वैसवी..... थॅंक यू सूऊ मच. तू अपना नंबर. दे दे मैं लास्ट पीरियड ख़तम होने से पहले तुझे फोन कर दूँगी तू आ जाना.


राकेश की तो जैसे लॉटरी ही लग गयी हो. और हो भी क्यों ना उसके पास इतनी हॉट & सेक्सी लड़की का नंबर. जो मिल रहा था. बारे ही उत्साह से उसने नंबर. एक्सचेंज किया और बाइ बोलकर अपने कॉलेज निकल गया.
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12-27-2018, 01:39 AM,
#2
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
कॉलेज के गेट से वैसवी ने एक नज़र कॉलेज को निहारी और अपने कदम बढ़ाते अंदर चल दी. कॉलेज काफ़ी बड़ा था उसे ऑफीस ढूँढने और टाइम टेबल पता करने मे आधा घंटा लग गया.


सारी इन्फर्मेशन लेने के बाद वैसवी चल दी फर्स्ट एअर की क्लास की ओर जहाँ पहले से उनके सीनियर्स रॅगिंग का लुफ्त उठा रहे थे. वैसवी जब कॅंपस के खुले इलाक़े मे आई और ऑफीस के विपरीत फर्स्ट एअर क्लास की ओर जाने लगी तो सारे लड़कों की धड़कने उनके सीने से छाती फाड़ कर बाहर आने को बेताब थी.


चलने का ढंग उच्छल उच्छल कर कुछ यूँ था कि लड़कों की चीरती नज़रें बस उसके गोरी जाँघो को देखने मे लगी थी. इधर लड़कों के दिल मे आग लगती वैसवी जैसे ही फर्स्ट एअर की बिल्डिंग मे दाखिल हुई उसके सीनियर्स ने उसका रास्ता रोक दिया

गोरा बदन और इतनी सेक्स अपेन्स को देख भला किसके दिल मे हलचल नही होती. रास्ता रोकने के लिए जब एक सीनियर ने एकदम से अपना हाथ आगे बढ़ाया तो वैसवी की छाती उसके हाथ से टकरा गयी.


इस सीन को देख सारे लड़के हूटिंग करने लगे और गंदे गंदे कॉमेंट पास करने लगे .....


"क्या रोहित आते ही सीधे आमों पर हाथ साफ"


"यार बता तो कैसे है फल कच्चा है या पक कर लटका हुआ है"


"साले अकेले अकेले मज़ा अब तू नही रगिन्ग ले सकता अब हम भी कुछ पूछ ले जानेमन से"


"रोहित छिछोर एग्ज़ॅक्ट साइज़ भी तूने अबतक पता कर ली होगी"


"अरे देख सुमित ये कुछ बोल क्यों नही रहा .. क्या अभी से सपनो मे खो गया"


एक के बाद एक कॉमेंट्स पास होते गये. उसका सीनियर रोहित अब भी अपना हाथ आगे किए उसका रास्ता रोके था. इतने सारे अश्लील कॉमेंट सुन ने के बाद वैसवी चिढ़ कर आग से लाल हो गयी थी.


रोहित अपनी जगह से खड़ा होते हुए....... "नाम क्या है तुम्हारा"


वैसवी..... मैं तुम्हे अपना नाम बताना ज़रूरी नही समझती. अब रास्ता छोड़ो मेरा नही तो प्रिन्सिपल से कंप्लेन कर दूँगी तुम्हारी.


रोहित ने उसकी कलाई पकड़ उसे मोडते हुए उसके हाथ को पीछे ले गया और जैसे ही उसने ऐसा किया .... वैसवी की टाइट कपड़े की बटन बिल्कुल खिंच सी रही थी और वो टूटने को बेकरार थी. सीने के उभार ऐसे सामने थे कि देखने वाले लड़के बिना आँखें बंद किए बस घूर रहे थे.


अपनी इस हालत पर बेबस वैसवी ने अपना नाम बता दिया. तभी पीछे से एक लड़का उसके बॅक पर एक हाथ धीरे से मारते हुए ..... साइज़ क्या है तेरा ...


वैसवी इस सवाल पर चिढ़ती हुई..... शट युवर माउत कुत्ते 


वही लड़का.... ओ' मेडम अँग्रेजन मैने कहा साइड कौन सी है .... मतलब किस साइड की रहने वाली हो .... वैसे तुम्हे क्या सुनाई दिया ज़रा वो तो बताओ.


और इतना बोल सभी हँसने लगे. तभी ग्राउंड मे धूल उड़ाती 5/6 गाड़ियाँ सीधी प्रिन्सिपल के चेंबर के पास रुकी ... एका एक सबका ध्यान उसी ओर गया कि आख़िर कॉलेज के अंदर इतनी सारी गाड़ियाँ लेकर किसने एंट्री मारी.


वैसवी के लिए ये एक सुकून के पल था. जब रोहित और उसके साथियों का ध्यान दूसरी ओर था तब वैसवी चुपके से वहाँ से निकल गयी और उन गाड़ी वालों को मन मे धन्यवाद करने लगी.


आज वैसवी को खुद मे ज़िल्लत महसूस हो रही थी. इंडियन फिज़कॉलजी भी बड़ी अजीब है. लड़कियाँ खुद को कितनी ही मॉडर्न और हॉट दिखाने की कोशिस क्यों ना करे पर घर का जैसे महॉल और संस्कार होता है लोगों के ऐक्शन के हिसाब से वैसा ही रिक्षन भी देती है. 


वहीं लड़कों मे ये धारणा आम होती है कि यदि कोई लड़की चंचल नेचर की है तो उसकी फ्रेंड्ली बातों को ग़लत समझते हुए वो ये सोचते है कि लड़की उसे लाइन दे रही है. और ड्रेस यदि छोटी पहनी हो तो उसे ईज़ी मान लेते है फिज़िकल रीलेशन के लिए.


अजीब ही भवर मे फँसे है हम लोग जहाँ कपड़े तो मॉडर्न हो गये पर सोच अभी उसी पॉइंट पर अटकी है. इस समय वैसवी भी कुछ ऐसी ही फील कर रही थी जब उसके अंगों को रगिन्ग के नाम छु लिया गया. उसके घर के संस्कार उसके अंदर ज़िल्लत पैदा कर रही थी और मन मे बदले की भावना जगा रही थी.


वहीं रोहित का ध्यान जब उन गाड़ियों से हटा तो वो भी वैसवी को ढूँढने लगा. खुद मे अफ़सोस करते कि इतनी हॉट लड़की थी थोड़ा और सिड्यूस करता तो आज कहानी अपनी भी सेट थी.


वैसवी अपनी क्लास मे बैठी अभी अपने साथ हुए टीज़िंग के बारे मे सोच रही थी कि बाहर कुछ लोगों के बीच गहमा गहमी की बातें उसके कानो मे सुनाई पड़ी.


वो जब गेट पर पहुँची तो देखी एक बिल्कुल अल्ट्रा मॉडर्न भेष मे लड़की खड़ी थी जो हंस रही थी. रोहित और उसके साथियों को 8/10 आदमी पकड़े हुए थे और 10/12 आदमी पीट रहे थे. मामला क्या हुआ उसे पता ना था पर जो हो रहा था उसे देख वैसवी के दिल को सुकून मिल रही थी. 


कुछ देर मे कॉलेज के और स्टूडेंट जमा हो गये. वाराणसी मे स्टूडेंट यूनियन भी काफ़ी माशूर है. जब उन के बॅच के लड़कों ने अपने साथियों को पिट ते देखा तो वो लोग भी उन लोगों को मारने लगे.


देखते ही देखते वो जगह किसी लड़ाई के मैदान जैसा बन गया. उस लड़की ने अपना फोन निकालते हुए किसी से बात करने लगी और इधर उन आदमियों की पिटाई स्टूडेंट्स के द्वारा हो रही थी.


कुछ ही देर मे पोलीस की वॅन घुसी कॅंपस मे और मार रहे लड़कों को पकड़ने लगी. देखते-देखते मामला काफ़ी आगे बढ़ गया क्योंकि स्टूडेंट्स ने पोलीस को भी घेर लिया बस एक माँग पर कि......... 


"बाहर वालों को लेकर जाए. बाहर के गुंडे कॉलेज मे आकर मार कर रहे थे. यदि स्टूडेंट को ले गये तो ये उन पोलीस वालों के लिए अच्छा नही होगा".


मामले की गहराई को देखते हुए प्रिन्सिपल सर ने दोनो पक्षों को समझाया. जहाँ स्टूडेंट खफा थे कि उनके साथी को मारा गया वहीं उन लोगों का कहना था कि उसने उनके मालिक की बेटी नीमा के साथ छेड़-चाड की और उसे ज़बरदस्ती हाथ लगाने की कोशिस की.


मामला रगिन्ग का आते ही प्रिन्सिपल बिल्कुल तैश मे आ गये और जितने लड़के जो इन्वॉल्व होते है रगिन्ग मैं सबको टू वीक का डेटॅन्षन देते है और एक वॉर्निंग इन फ्यूचर यदि कोई ऐसी हरकत की तो रेस्टिकेट कर दिए जाएँगे.


साथ -साथ नीमा को भी वॉर्निंग देते है कि कल से उनके ये गुंडे इस कॅंपस मे नही दिखने चाहिए यदि वो ऐसा नही कर सकती तो किसी दूसरे कॉलेज जा सकती है. यदि फिर भी नही मानी तो लास्ट्ली रेस्टिकेटेड.
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12-27-2018, 01:39 AM,
#3
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
आज पहला दिन ही ऐक्शन का सीन देख कर वैसवी खुश हो गयी. उसे विस्वास हो चला कि आने वाले दिन कॉलेज के काफ़ी रोमांचक होगे. पर उसके लिए और भी रोमांचक था उस लड़की नीमा का रूतवा.


उसने कपड़े ऐसे सेक्सी अंदाज मे पहने थे कि लोग मूड मूड कर देख रहे थे. हाइ हिल्स, शॉर्ट स्कर्ट और उपर वी शेप की टी-शर्ट जिसमे उसके क्लीवेज़ की स्टार्टिंग लाइन दिख रही थी और हाई-हिल्स पर उसके कमर मटका कर चलना. इतना काफ़ी था किसी के भी होश उड़ाने के लिए. 


नीमा जैसे ही क्लास के गेट पर पहुँची वैसवी उसका रास्ता रोकती हुई.....


"हाई आइ म वैसवी" ......

नीमा .... तो मैं क्या करूँ...


वैसवी..... आप समझी नही हम दोनो एक ही क्लास मे है. मैं भी हिस्टरी फर्स्ट एअर स्टूडेंट हूँ. इतना बोल वैसवी ने अपना हाथ उसके आगे बढ़ा दिया.

नीमा उस से हाथ मिलाती हुई....... आइ म नीमा डॉटर ऑफ आमोद पांडे. डू यू नो माइ डॅड ?

वैसवी.... अरे कैसी बातें कर रही है आप. आप के पापा को कौन नही जानता

नीमा..... लिसन मैं यहाँ कचरे मे नही पढ़ने आई पर पापा की ज़िद की वजह से मुझे वाराणसी मे रुकना पड़ा. अब हटो मेरे पास से मुझे यहाँ दोस्त बनाने मे कोई इंटरेस्ट नही.


नीमा बिना कोई उसे रेस्पॉंड दिए निकल गयी और जाकर एक चेयर पर बैठ गयी. वैसवी भी नीमा के पीछे वाली चेयर पर बैठ गयी और नीमा के मॉडर्न स्टाइल को जड्ज करने लगी. वैसवी को नीमा के बोल्ड करेक्टर ने काफ़ी इंप्रेस किया और वो अब किसी भी तरह से उसे दोस्ती करना चाहती थी और उसके जैसी बन ना चाहती थी.


फर्स्ट डे क्लास इंट्रो मे चला गया. फाइनल पीरियड से पहले वैसवी ने राकेश को कॉल कर दी राकेश का भी पीरियड उसी टाइम ख़तम होना था जिस टाइम वैसवी का. इसलिए राकेश ने उसे 15/20 मिनट इंतज़ार करने को बोला.


क्लास ओवर होने के बाद वैसवी गर्ल्स कॉमन रूम मे चली गयी और राकेश का इंतज़ार करने लगी. कुछ ही पल बीते होंगे कि नीमा भी कॉमन रूम मे पहुँची और वैसवी के पास जाते हुए...... "सुनो तुम इसी सहर की हो ना"


वैसवी....... हां इसी सहर की हूँ बचपन से. क्या आप यहाँ नही रहती.


नीमा.... नही स्टुपिड यदि मैं वाराणसी मे रहती तो क्या ऐसा पूछती. मैं यहाँ किसी को नही जानती. क्या तुम मेरे साथ मार्केट चलो गी. मुझे कुछ शॉपिंग करनी है.


वैसवी भी कुछ ऐसा ही चाहती थी इसलिए वो ख़ुसी-ख़ुसी राज़ी हो गयी चलने के लिए बिना इसका ख्याल किए कि उसने राकेश को पिक-अप करने यहाँ अपने कॉलेज बुलाया है.

वैसवी, नीमा के साथ मार्केट के लिए निकल गयी. कार की पिच्छली सीट पर बैठ कर वैसवी केवल कार और नीमा की ओर ही देखे जा रही थी. उन आँखों ने आज सपनो पिरोने शुरू कर दिए थे, जो रंग नीमा का था उसी रंग मे अब वैसवी भी रंगना चाहती थी. पर ये तो बस चाहत ही थी.


दोनो मार्केट पहुँचे समान लेने. एक-एक कर के नीमा ने अपनी लिस्ट बताई, और वैसवी उसी के अनुसार आगे प्लान करने लगी. अभी दोनो एक दुकान मे गयी ही थी, कि राकेश का फोन वैसवी के पास आया.... लेकिन वैसवी उसे इग्नोर करती हुई नीमा के साथ मार्केटिंग करने लगी.


केयी बार कॉल आए वैसवी के पास, लेकिन वैसवी ने लगातार उसे इग्नोर किया. शाम 5पीएम बजे तक पूरा मार्केटिंग करने के बाद नीमा वैसवी को उसके घर के नज़दीक ड्रॉप करती हुई, अपने घर चली गयी.


रात भर बस वैसवी को नीमा का स्टाइल और उसका रुतबा ही दिखता रहा, अगली सुबह फिर वैसवी उसी रंग मे निकली, बिल्कुल बोल्ड आंड ब्यूटिफुल.


राकेश के घर के पास से जब गुज़री तो राकेश जैसे उसी के आने का इंतज़ार कर रहा हो...


राकेश.... हद है यार, मुझे बुला कर फोन तक पिक नही किया.


यूँ तो राकेश कल की बातों से बहुत चिड़ा था, लेकिन वो वैसवी को नाराज़ नही करना चाहता था इसलिए अपनी चिढ़ को काबू मे रखते हुए बड़े ही शांत लहजे मे पुछ दिया.


वैसवी... मुझे कल काम था इसलिए अचानक निकलना पड़ा, और ये तुम बार बार फोन कर के परेशान क्यों कर रहे थे.


राकेश... वैसवी, मैं परेशान कर रहा था या तुम मुझे बुला कर खुद कहीं गायब हो गयी. एक बार इनफॉर्म भी नही कर सकी कि तुम कहीं जा रही हो. एक घंटे तक पागलों की तरह कॉलेज के गेट के बाहर खड़ा रहा, और लगातार फोन लगाता रहा.


वैसवी... अच्छा चल सॉरी, इतना गुस्सा क्यों होता है.


राकेश के जले दिल पर जैसे ये सॉरी किसी मलम की तरह काम कर गयी हो, उसका सारा गीला शिकवा पल मे दूर हो गया और वो वैसवी को कॉलेज तक छोड़ने की बात पुच्छने लगा. वैसवी को भी एक मुर्गा चाहिए था तो भला उसे क्यों इनकार हो.


दोनो साथ फिर से निकले कॉलेज, राकेश, वैसवी को ड्रॉप करता हुआ अपने कॉलेज वापस चला गया. वैसवी आज किसी तरह बचते बचाते क्लास पहुँची, हालाँकि सीनियर्स रगिन्ग गॅंग कहीं भी दिख नही रही थी पर वैसवी कोई रिस्क नही उठाना चाहती थी.


कुछ देर बाद नीमा भी क्लास मे पहुँची और आज वो सीधे वैसवी के पास आकर बैठ गयी. देखने वाला हर लड़का या लड़की ने जब नीमा के परिधान को देखा तो खुद को उससे घूर्ने से नही रोक पाए.


फैशन के नाम पर जो खुद को संवारा था नीमा ने वो काफ़ी वल्गर था, मात्र अंग प्रदर्शन था और कुछ नही. पूरे दिन क्लास मे वैसवी बस नीमा के फैशन को देख कर आकर्षित होती रही और मन ही मन अपना आदर्श मान चुकी नीमा को, अब वैसवी बी बिल्कुल उसी के रंग मे रंगना चाहती थी.


क्लास की दो सबसे हॉट गर्ल हमेशा एक साथ, देखने वाले लड़के दिल मे कयि तमन्ना लिए बस दोनो को देखते थे. दोनो लेकिन किसी भी कॉलेज के लड़को को घास तक नही डालती थी. कइयों ने कई बार कोशिस भी की दोनो मे से किसी से दोस्ती हो जाए, लेकिन दो से ये तीन नही हुए कभी.


दोनो लड़कियों की चर्चा पूरे कॉलेज मे थी. ऐसा नही था कि उस कॉलेज मे बोल्ड & ब्यूटिफुल लड़कियों की कमी थी. पर ये दोनो सबसे अलग इसलिए थे क्योंकि ये दोनो एक राज की तरह थी, किसी से कोई लेना देना नही, यही एक कारण था कि दोनो के बारे मे हर कोई जान ना चाहता था.


हर जगह दोनो अब साथ मे ही होती थी. वैसवी का नीमा की हर बात मे समर्थन करना उनके रिश्तों मे काफ़ी जुड़ाव लाया और कॉलेज के बाद भी दोनो हर जगह साथ ही दिखती थी.


इधर राकेश के लिए भी रोज जैसे वैसवी को कॉलेज छोड़ना रूटीन सा हो गया था. अंदर ही अंदर राकेश के भी कयि अरमान थे वैसवी को लेकर, पर शायद उसके हाव भाव को देख कर खुद के कदम पिछे कर लेता था.


कॉलेज के 6 महीने बीतने को हो चले थे, इस बीच वैसवी ने खुद मे काफ़ी बदलाव कर लिया था, लेकिन कहीं ना कहीं नीमा अब एक पीरियाडिक लाइफ से उब चुकी थी. हर दिन एक प्रिडिक्टबल जैसा रूटीन काम.... दोनो एक दिन मार्केट से कुछ शॉपिंग कर रही थी..


नीमा... वासू, यार उब गयी यहाँ से

वैसवी.... समझी नही मैं, तुम कहना क्या चाहती हो नीमा

नीमा..... वासू, तुझ मे तो अकल की ही कमी है, तू काहे समझने लगी. यार लाइफ बिल्कुल बोरिंग हो गयी है, सुबह से क्लास, फिर ईव्निंग मे घूमना तेरे साथ आंड दा ओवर.

वैसवी.... ह्म्म्मह, कह तो सही रही हो पर किया भी क्या जाए.

नीमा.... ओके कल रेडी रहना एक नये ट्विस्ट के लिए.

वैसवी.... लेकिन क्या वो तो बता दे, रात भर मुझे अब नींद नही आएगी.

नीमा.... सर्प्राइज़ डार्लिंग, थोड़ा तो इंतज़ार कर ले.


इतनी बात के बाद नीमा ने कुछ नही बताया, लाख पुच्छने पर भी वो बस कल का इंतज़ार करने के लिए बोलने लगी. नीमा के पास आने वाले कल के लिए कुछ नया सा प्लान था जो वैसवी को रोमांचित कर रहा था. घर पहुँचने के बाद भी वैसवी बस उसी के बारे मे सोचती रही .... और खुद से ही बातें करती हुई जागने लगी ...

"चल देखती हूँ कल कौन सा नया रंग तू मुझे दिखाती है ... रियली एग्ज़ाइटेड आंड वेटिंग"


अगली सुबह वैसवी काफ़ी उत्साह से उठी और, आज के आने वाले सर्प्राइज़ को सोचती वो तैयार होने चली गयी. तकरीबन तैयार हो ही गयी थी कि नीमा का कॉल आया...

नीमा.... कितनी देर से निकल रही है

वैसवी.... बस 10 मिनट मे

नीमा.... सुन बॅग मे अलग से कुछ पार्टी वेअर रख लेना

वैसवी.... और वो क्यों भला

नीमा.... उनह ! जितना बोली उतना कर

वैसवी.... पर तू करना क्या चाहती है

नीमा.... अभी 8.15एएम हुए हैं, मैं 8.30एएम पर तुझे वहीं से पिक करूँगी जहाँ छोड़ती हूँ. बी ऑन टाइम बेबी...

इतना बोल नीमा ने कॉल कट कर दी. कुछ देर नीमा की बातों पर वैसवी गौर की, उसे कुछ समझ मे नही आ रहा था कि नीमा करने क्या जा रही थी. अंदर से उसे अब थोड़ा डर भी लग रहा था, पर सारी सोच पर विराम लगाती वैसवी ने आख़िर वही किया जैसा नीमा ने उससे कहा.
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12-27-2018, 01:39 AM,
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RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
ठीक 8.30एएम बजे कार उसी जगह खड़ी थी जहाँ नीमा रोज वैसवी को ड्रॉप करती थी. बेचारा राकेश, आज उसके अरमानो पर पानी फिर गया. राकेश को मना कर वैसवी चल दी अपनी सहेली नीमा के साथ. कार मे बैठ'ते ही वैसवी....

"यार, हम कॉलेज ही जा रहे है ना"

नीमा.... हां बाबा अभी कॉलेज ही जाएँगे...

वैसवी... तो तूने एक अलग से ड्रेस रखने को क्यों बोली.

नीमा.... क्योंकि कॉलेज का फर्स्ट लेक्चर अटेंड केरने के बाद हम ऊडन च्छुउऊ...

वैसवी.... लेकिन जा कहाँ रहे हैं......

नीमा.... सब अभी ही पुच्छ ले बाद के लिए कुछ ना रख, कहा तो सर्प्राइज़ है. अब कोई सवाल नही मुँह बंद.

वैसवी भी मन मार कर उसके बाद कोई सवाल नही पुछि, पर कहीं ना कहीं एक अंजाना डर उसके मॅन मे भी था, कि ये हाई-सोसाइटी गर्ल कहीं उसे फँसा ना दे.

खैर दोनो कॉलेज पहुँचे और जैसा कि नीमा ने प्लान किया था, पहला लेक्चर अटेंड करने के बाद दोनो कॉलेज से निकल गयी. नीमा की कार सीधा जाकर होटेल रॉयल मे रुकी, जहाँ पहले से एक कमरा रिज़र्व था.

वैसवी जब उस होटेल को देखी तो देखती ही रह गयी, क्या आलीशान होटेल था बिल्कुल फिल्मों जैसा. उसकी टाइल्स फ्लोर, दीवारों की डेकोरेशन हर चीज़, उससे अपने आँखों पर विस्वास नही हो रहा था कि वो ऐसी जगह पर है.

कुछ देर मे दोनो होटेल के कमरे मे थे.....

वैसवी.... नीमा अब तो बता दे हम यहाँ होटेल मे क्यों आए हैं

नीमा... तेरा रेप देखने, अब तो तू गयी

वैसवी.... क्या ???? 

नीमा की इस बात पर वैसवी का जो रिक्षन था उसे देख कर नीमा बिल्कुल हँसने लगी ...

"पागल मज़ाक कर रही थी, तू तो आज सुबह से इतनी डरी है की लगता है सचमुच तेरे साथ कुछ होने वाला है"

वैसवी... हुहह ! पागल डरा ही दी सच मे. बड़ा ही अजीब सा लग रहा है मुझे

नीमा... डर मत वासू, तूने समझा क्या है मुझे. तू तो जान है मेरी .... वैसे एक बात बता ..

वैसवी... क्या ??

नीमा.... तू अब तक वर्जिन या ..... हुन्न......

वैसवी.... ढत्त ! तू भी ना आज लगता है पागल हो गयी है. ये क्या फालतू की बकवास कर रही है.

नीमा.... अच्छा ये फालतू की बकवास है. ठीक है एक बार कर ले फिर पुच्हूँगी, कि ये एक्सपीरियेन्स बकवास रहा या मज़ा आया..

वैसवी... किस से, मुझ से या उस लड़के से ...

दोनो हँसने लगी वैसवी की बात पर, फिर नीमा वैसवी को जल्दी से तैयार होने के लिए बोली, क्योंकि नीचे हॉल मे 11 बजे से दोनो को पार्टी अटेंड करने जाना था. वैसवी अपने साथ लाई जीन्स और टॉप लेकर चली गयी बाथरूम रेडी होने और नीमा वहीं बैठ कर टीवी देख रही थी..

कुछ देर बाद वैसवी बाहर आई, और उसे देख एक भद्दा सा एक्सप्रेशन देती हुई नीमा बोली...

"ये क्या पहन कर आ गयी, पार्टी मे जाना है भजन करने नही"

वैसवी... मुझे क्या पता था, मुझे जो सही लगा वो घर से ले कर आ गयी.

नीमा.... ईईए डफर, इसमे तो धकि पूती, कुछ पता ही नही चलता

वैसवी... तो क्या इन कपड़ो मे पार्टी मे नही जा सकती.....

नीमा.... वासू इन कपड़ों मे तुझे देखेगा कौन, थोड़ा स्टाइलिश बन, खुद को थोड़ा सेक्सी लुक दे, और ऐसा दिख कि देखने वाले तुझे बस घूरते ही रहे.

वैसवी... क्या नीमा, मुझे क्या पता पार्टियों मे कैसे कपड़े पहनते हैं, और तो और तू सेक्सी लुक की बात कर रही है..... यहाँ तो स्कर्ट दो इंच छोटे हो तो मोम के ताने सुनो, इसलिए रोज-रोज की चककलस से.... ज़य माता दी.

नीमा.... हहे, चल कोई बात नही, मैं जाती हूँ पहले अब मैं रेडी हो जाउ फिर चलते हैं मार्केट .... वैसवी के हॉट आंड सेक्सी लुक के लिए 

अब बारी थी नीमा के बाहर निकलने की, जब नीमा बाहर निकली तो वैसवी देखती ही रह गयी...

वैसवी... वूऊ ! ये क्या है नीमा, लॉल

नीमा... यही तो फॅशन है डार्लिंग

वैसवी... वॉववव ! कंप्लीट बार्बी लुक 

नीमा.... चल अब तेरा भी हुलिया ठीक कर दूं

वैसवी..... पर यार तू ये इस ड्रेस मे मार्केट ...

नीमा.... डफर... व्हाई शुड ओन्ली बाय्स हॅव फन

दोनो हँसती हुई निकली मार्केट. नीमा जिस मार्केट से निकली देखने वाले बस उसे ही घूरते रहे. आख़िर कार पहली बार वैसवी भी नीमा के रंग मे. बिल्कुल तंग कपड़े बदन से चिपके हुए, खुला सीना जिसमे क्लीवेज़ बिल्कुल दिखता हुआ. काले लिबास मे वैसवी का गोरा रंग किसी कहर से कम नही था.

वैसवी.... ये क्या पहना दिया है, इतनी टाइट ड्रेस लगता है चलते-चलते गिर जाउन्गी.

नीमा.... वासू, ज़्यादा चल मत नही तो तुझे देख पूरा वाराणसी गिर जाएगा.

वैसवी.... ऐसा क्या, तो चलें आज पूरा सिटी गिराने.

नीमा.... वो भी कर लेंगे चिंता क्यों करती है... करने पर आ जाएँ जानेमन तो पूरा इंडिया कदमों मे, बस खुद को पहचान. और फिलहाल चलें पार्टी मे चूँकि हम लेट हो चुके हैं.

जल्दी मे फिर दोनो निकली वहाँ से सारे लड़कों पर बिजलियाँ गिराती हुई. होटेल जब वापस पहुँची तो सीधा दोनो पार्टी हॉल मे गयी. लेकिन जब पार्टी हॉल का नज़ारा देखी तो वैसवी की आँखें फटी की फटी रह गयी और मुँह खुला .... "आख़िर ये है क्या"

वैसवी की आँखें खुली की खुली रह गयी जब उसने अंदर का महॉल देखा. म्यूज़िक बीट बज रहा था, 7,8 लड़कियाँ बिल्कुल अपने तंग कपड़ों मे पानी मे भीगी हुई, लड़कों के साथ डॅन्स कर रही थी. बिल्कुल उसके विस्वास से परे था कि लड़कों के साथ लाकियाँ भी सिगेरेट और शराब मे डूबी थी.

वैसवी.... नीमा ये क्या है, और कौन है ये सब

नीमा.... फिर डरने लगी पागल, ये सब मे दोस्त है. जस्ट चिल यार, आओ मज़े करते हैं.

वैसवी... पर.. वो .. मैं ... मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा. ये सब बहुत अजीब है.

नीमा.... चल तुम्हे अच्छा नही लगता, तो मैं भी नही जाती.

वैसवी.... ओफफफ्फ़ ओ ! अजीब ज़बरदस्ती है, मैं नही जाउन्गी तो तुम भी ना जाओगी, अब क्या जो-जो मैं करूँगी वही तू भी करेगी क्या. तू जा ना, बस मुझे जाने का मॅन नही.

नीमा..... अब तू नही जाएगी तो मैं भला जा कर क्या करूँगी. तू मेरे साथ आई है और मैं तुझे अकेला नही छोड़ सकती.

वैसवी.... फिर से वही बात, तू जा ना, मैं कमरे मे जाती हूँ वहीं बैठूँगी. तू जल्दी से निपटा ले इन सब को.

नीमा.... तुम्हे पता है वासू कि मेरी प्राब्लम क्या है ?

वैसवी.... क्या कोई प्राब्लम है तुम्हे ?

नीमा... ह्म्‍म्म्म ! ये जो देख रही है ना अंदर जितनी भी लड़कियाँ है या इनमे कुछ लड़के, सबको मैं जानती हूँ. अब तू सोच रही होगी कि ये कैसी बेतुकी बात है ... नीमा की पार्टी है तो मैं नही जाउन्गी तो कौन...

वैसवी ने सहमति से एक बार नीमा की ओर देखी.... नीमा एक बार फिर अपनी बात आगे बढ़ाती हुई....

"यू नो बिग्गेस्ट ट्रेड्जी ऑफ लाइफ, आप के पास सब कुछ हो फिर भी आप अकेला महसूस करते हो. कहने को तो सब मेरे दोस्त हैं, पर सब झूठे, मतलबी कहीं के ... आज पार्टी दी है तो सब दिख रहे हैं, वरना सब अपने मे मस्त है, पूरा दिन अपने बाय्फ्रेंड के साथ लगी रहेंगी, कॉल करने पर भी रेस्पॉंड नही करती."

"वहीं दूसरी ओर ये लड़के हैं, कुत्तों के पास पहले से गर्लफ्रेंड है फिर भी हर 10मिनट के चॅट के बाद प्रपोज कर देते हैं. आइ नीड आ फ्रेंड यार जो मेरे साथ रहे, जिसे मेरी बातों मे इंटरेस्ट हो, जो समझे सुने मुझे, ना कि इनकी तरह कि कुछ बोलूं तो सुन तो ले पर अंदर से एक ही एक्सप्रेशन दे... कितना पकाती है"

वैसवी.... ओह्ह्ह ! मुझे नही पता था कि तुम्हे भी कोई बात परेशान करती है, वैसे चेहरा क्यों उतार ली, मैं हूँ ना.

वैसवी की बात पर नीमा उसके गले लगती कहने लगी....

"तभी तो तेरे साथ पार्टी करने का मॅन हुआ डफर, नही तो इतने दिनो से कहाँ कोई ऐसी बात थी. और एक तू है कि नखरे कर रही है. रहने दे मुझे नही जाना पार्टी मे"

वैसवी..... अच्छा तो ऐसी बात है, चल फिर हम भी धमाल करते हैं पार्टी मे

नीमा.... ये हुई ना बात, एप्पप्प्प्प्प्प ! चल आज का ये दिन हमारी दोस्ती के नाम.

हँसती हुई दोनो अंदर आई, दोनो को अंदर आते देख जैसे ही ग्रूप की नज़र उन पर पड़ी, एक ज़ोर का हंगामा हुआ .... और तेज आवाज़ के साथ ... स्वागत..

"वूऊ, वूऊओ, टू ऑफ दा ब्यूटिफुल गर्ल ऑन वॉक, लेट'स वेलकम हर"

और इतना बोलने के बाद पानी का झोंका दोनो पर, दोनो को भींगा दिया गया, म्यूज़िक लगी आंड डॅन्स ऑन. वैसवी के लिए जैसे सब कुछ अजीब हो, बिल्कुल कल्पना से परे. आते ही लोगों का पागलों की तरह चिल्लाना, सब के सब भींगे हुए, अजीब था पर जो भी था उससे अब वैसवी भी एंजाय कर रही थी.

थोड़ी देर दोनो डॅन्स करती रही फिर नीमा ने वैसवी का हाथ पकड़ कर उससे साइड एक छोटे से काउंटर पर ले आई, कुछ सराब की बोत्तोल रखी थी उस काउंटर पर और टकीला शॉट से लेकर पटियाला शॉट तक के ग्लास.

नीमा.... बता टकीला शॉट लेगी या पटियाला

वैसवी.... पागल हो गयी है क्या, मैं नही पीती, घर पर जान गये तो मेरा खून कर देंगे घर वाले.

नीमा.... जस्ट फॉर एंजाय बेबी, एक दो पेग से कुछ नही होता, वैसे भी अभी थोड़े ना जाना है घर, अभी बहुत टाइम है.

वैसवी... मगर, वो मैने कभी इस चीज़ को हाथ नही लगाई, और मुझे अच्छा नही लग रहा, तुझे लेना है तो ले मैं नही इसे लेने वाली.

नीमा... देख ये अगर मगर बंद कर, तुझे मेरी कसम है, वैसे भी आज का दिन मेरे नाम है, तो जैसा कहती हूँ वैसा कर. कुछ नही होता रे.

वैसवी... तू खुद पागल है, और मुझे भी पागल कर देगी, तेरे कहने पर पार्टी मे आई ना, अब ये सब क्यों. मुझे बहुत अजीब लग रहा है प्लीज़ बात मान ले, ज़िद मत कर.

नीमा... ठीक है मैने तो कसम भी दी अपनी, अब भला मैं जिंदा रहूं या मर जाउ इस से तुझे क्या, तू कर तुझे जो करना है.

वैसवी... मुँह नही बना, हमेशा अपनी बात मनवा लेती है, बता क्या करना है...

नीमा.... ये हुई ना बात, चल तो शुभ आरंभ टकीला शॉट से करते हैं, एक बार मे पूरा पी जाना.

नीमा की बातों पर वैसवी सहमति देती हुई हां मे सर हिला दी. नीमा ने दो छोटे से प्याले मे वोड्का के दो टकीला शॉट डाले एक खुद उठा ली और दूसरा वैसवी की ओर बढ़ा दी.

वैसवी उसे अपने हाथों मे थाम कुछ सोचने लगी, नीमा ने वैसवी की ओर देखा और पीने का इशारा किया, थोड़ी हिचक के साथ आख़िर कार वैसवी ने एक बार मे उसे पी ही लिया. और चेहरे पेर बिट्टर एक्सप्रेशन लाती हुई... यक्कक, यक्कक करने लगी.
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12-27-2018, 01:39 AM,
#5
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
वैसवी को ऐसा करते देख नीमा हँसने लगी और उसने भी अपना पेग पीकर दोनो पहुँच गयी डॅन्स फ्लोर पर. वैसवी ने पहली बार पी थी, डॅन्स करते करते उसे नशे का सुरूर भी छाने लगा. एक बार फिर दोनो वाइन काउंटर पर थी. नीमा को इस बार मेहनत नही करनी पड़ी, बिना कहे वैसवी ने दो वोड्का शॉट लिए...

नीमा.... यार तू क्या यहाँ मेरे साथ डॅन्स करने आई है

वैसवी.... तो बता ना किसके साथ करूँ, वैसे मज़ा आ गया आज.

नीमा... तो चल मज़ा दुगना करते है, यहाँ कयि लड़के खाली हैं चल-चलकर उनपर बिजलियाँ गिराते है.

वैसवी... ऐसा क्या ... तो चल ना, रुक एक शॉट और लेते हैं फिर चलते हैं

नीमा.... बस कर मेरी माँ, तेरी पहली बार थी, इतना काफ़ी है..

वैसवी.... चुप कर, अभी कुच्छ नही, अभी एक और शॉट लेते हैं और फिर चलते हैं .. लेट'स पार्टी टुनाइट.

नीमा.... हहे, डफर अभी दिन है रात नही, चल ठीक है तेरे लिए कुछ भी..

दोनो बे एक और जाम पिया और चल दी पार्टी एंजाय करने. नीमा भी थोड़ी लरखड़ाई और वैसवी पूरी मदहोश पहुँची अपने लिए पार्टनर देखने, दोनो ने एक-एक लड़के को सेलेक्ट किया और डॅन्स करने लगी.

अभी तो जैसे पूरा महॉल ही नाच रहा हो. वैसवी क्या कर रही थी और क्यों उसे अब होश कहाँ था. इतना पी चुकी थी कि उसे यदि सहारा ना दिया जाए तो कब वो नाचते नाचते गिर जाए उसे भी नही पता.

और इस बात का पूरा मज़ा उस लड़के को मिल रहा था जो उसके साथ डॅन्स कर रहा था. वैसवी को बाहों मे भरे वो तो मज़े से थिरक रहा था डॅन्स फ्लोर पर. दोनो के बदन बिल्कुल चिपके थे, उस लड़के का हाथ किसी साँप की तरह वैसवी के बदन पर रेंग रहा था, नशे मे वैसवी को उसने कयि बार चूमा जिसका कोई विरोध तक नही किया वैसवी ने, उल्टा वो भी मज़े से चूम रही थी उसे.

पार्टी का महॉल, म्यूज़िक बीट, बदन भींगा, सराब का नशा उपर से अपने अन्छुये बदन पर लड़के का स्पर्श ... नीमा ने आज वैसवी को उस ही-सोसाइटी का रंग दिखाया जो कभी उसके कल्पना मे भी नही होता.

वैसवी अपने डॅन्सिंग पार्टनर के साथ आज तो खुल कर नाची, उसे ये होश तक नही था कि वो किसी अंजाने के साथ है और उसे जानती तक नही. अगले कुछ घंटे उसके साथ कैसा गुज़रे उसे पता ही नही चला. आँख खुली तो खुद को होटेल के कमरे मे पाई, और खुमार सी भरी आँखों को धीरे से खोलती हुई अपना सिर पकड़ कर बैठ गयी.


वैसवी अभी अचेत अवस्था मे थी, कुछ देर लगी उसे होश आने मे, और जब पूरी तरह जागी तो उसके होश ही उड़ गये .. बौखला कर वो चिल्लाने लगी.... 


"नींाआआआ .... नींाआआआआअ" ....


बाथरूम का दरवाजा खोलती हुई नीमा बाहर आई, वैसवी अपने उपर चादर लपेटे नीमा को घूर रही थी ....


"नीमा ये सब क्या है, तुम मुझे यहाँ ये सब करवाने लाई थी"


बड़े ही गुस्से मे वैसवी, नीमा को देखती हुई अपनी बात पुछि, और जब नीमा ने वैसवी का रिक्षन देखा तो खिल-खिलाकर हँसने लगी.. उसे हंसता देख वैसवी अंदर से चिढ़ गयी और गुस्से मे चिल्लाती हुई बरस पड़ी...

"कमीनी तू ऐसे क्यों हंस रही है, बता तुझे क्या मिला ये सब कर के"

नीमा.... चिल बेबी .....

इतना बोल कर वो फिर से हँसने लगी, उसकी हँसी बर्दास्त ही नही हो रही थी, नीमा को हंसते देख वैसवी गुर्राती हुई नज़रों से उसे देखने लगी मानो अभी खा जाए. अपने हँसी पर काबू पाती हुई नीमा, वैसवी से कहने लगी....


"जानेमन मैं तो ये सोच रही हूँ कि तुंझे क्या कहूँ, अभी कुछ घंटे पहले तूने पुछा था ना कि, "किसे मज़ा आएगा, मुझे या उस लड़के को" तो मैं तय नही कर पा रही कि किसे ज़्यादा मज़ा आया".


इतना बोल नीमा फिर से हँसने लगी, उसकी बात सुनकर वैसवी का भी गुस्सा थोड़ा शांत होता दिखा... वैसवी कुछ देर चुप बैठी फिर नीमा से सवाल करने लगी...


वैसवी.... नीमा, अभी तूने कहा जज नही कर पाई कि मज़ा किसको ज़्यादा आया, तो क्या तू भी यहाँ थी. सबकुछ होता देख रही थी ????


नीमा..... सॉरी वासू, थोड़ी सी बेशरम हो गयी, मैं खुद को रोक नही पाई देखने से, वैसे भी तुम दोनो आपस मे ऐसे लगे थे कि मैं तो होकर भी नही थी.


वैसवी.... तो क्या मैने अपनी मर्ज़ी से .....


नीमा.... मत पुछ जानेमन ... हाय्यी ! तू तो बिल्कुल मस्ती मे थी. यू आर रॉकिंग बेबी


वैसवी.... चुप कर, तू सब होता देख रही थी, कुछ कर नही सकती थी.


नीमा.... नाना, ऐसा पॉर्न मूवीस मे होता है, दो लड़की एक लड़का, या एक लड़की दो लड़का, रियल्टी मे मैं कैसे ये सब कर सकती थी.


वैसवी... पागल, डफर, तुझे तो हर बात पर मज़ाक ही सूझता है. इतनी बड़ी बात हो गयी, और मैं उसे जानती तक नही, ना कोई अता ना कोई पता... कोइन बॉक्स की तरह यूज़ कर के चला गया.


नीमा.... अच्छा है ना वासू, सेक्स एंजाय भी करी और कोई सेंटिमेंट्स नही. नही तो पहले तो ये लड़के हमारे पिछे घूमते हैं, इमोशनली ब्लॅकमेल करते हैं, और जब सेंटिमेंट्स जुड़ जाते है तो इनको हम याद केवल तभी आते हैं जब वो खाली रहते हैं, ओन्ली फॉर सेक्स, बाकी तो ऐसे इग्नोर करते हैं जैसे जानते तक नही. अच्छा हैं ना फालतू के सेंटिमेंट्स से बच गयी.


वैसवी..... ये कैईसीईइ बातें कर रही है नीमा. अभी ये सब नही सुन'ना मुझे, हुआ क्या था ये बता. मुझे समझ मे नही आ रहा कि मैं जिसे जानती तक नही उसके साथ....


नीमा.... ओह्ह्ह्ह हूऊ तो तुझे जान'ना है कि हुआ क्या था... तो सुन....


तुम दोनो बिल्कुल नशे की हालत मे झूम रहे थे, डॅन्स फ्लोर पर तुम दोनो ने ऐसी आग लगाई कि हमने दो बार पानी भी चलवाया, पर इतनी गर्मी, उफफफ्फ़ ! मुझे तो लगा तुम दोनो कहीं वहीं ना शुरू हो जाओ .... हम सब वहाँ से तो हट गये फिर भी तुम दोनो नाचते रहे.


तू तो इतनी मदहोश थी कि तू ढंग से खड़ी भी नही हो पा रही थी, वो तो तुझे सीने से चिपकाए नाच रहा था. तेरे होंठों को चूम रहा था, चेहरे पर बाइट दे रहा था और तेरे पूरे बदन पर हाथ फेर रहा था.

वैसवी.... च्चीी .. वो अंजान लड़का इतना कुछ कर रहा था और तू बस देख रही थी.


नीमा.... मैं क्या, वहाँ पर सारे लोग देख रहे थे, एंजाय कर रहे थे और तुम दोनो को इनकोवरेज कर रहे थे तालियाँ बजा कर. 


वैसवी ने जब इतना सुना तो तकिया फेंक कर उसे मारने लगी. नीमा हँसती हुई हिली तक ना वहाँ से, और तकिये को वापस वैसवी की ओर फेंकती हुई....


"वासू, तूने आज ऐसा शो दिखाया है, कि आज तो तू खून भी कर दे तो वो भी माफ़, हॅट्स ऑफ वासू, अगली पार्टी का अरेंज्मेंट जल्दी ही करना होगा"


नीमा की बातों से वैसवी काफ़ी हद तक नॉर्मल हो गयी थी, यहाँ तक कि अब उसकी बातें सुन'ने मे उसे कोई हैरानी नही हो रही थी. खुद मे मान ली थी कि अब तो ग़लती हो गयी... इसलिए बात को बदलती हुई वैसवी, नीमा से कहने लगी....


"यार, कुछ भी सही नही हो रहा है, ये मेरा सिर क्यों फटा जा रहा है"


नीमा.... इसे हॅंगओवर कहते हैं, तुझे मना की थी इतना मत पी पर तुझे तो पता नही एक ही दिन मे सारा नशा करना था. झल्ली दो बार तो वहीं डॅन्स फ्लोर पर उल्टी कर चुकी है.


वैसवी.... यक्ककक ! मॅन भटक गया सुन के, मत बोल नही तो अभी मॅन इतना भारी है कि लगता है यही फिर ना उल्टी हो जाए, इसका कुछ इलाज़ भी है या मैं ऐसे ही पड़ी रहूंगी.


नीमा ने नींबू पानी ऑर्डर करी, थोड़ी देर मे नीबू पानी भी आ गया, गेट से नीमा नीबू पानी लेकर वैसवी को दे दी, वैसवी उसे पीने के बाद सीधे बाथरूम मे चली गयी, फ्रेश होकर घर से लाए कपड़े पहन कर वो वापस आई, आते ही घड़ी की ओर देखी और समय देख कर चिंता की लकीरें उसके माथे पर आ गयी ....


वैसवी... नीमा चल घर जल्दी, बहुत लेट हो गया देख 6:00 पीएम बज गये. और हां ये जो हुआ प्लीज़ वो बाहर मत आने देना.


नीमा.... कितना डरती है, यररर चिल कर. पहले तो ये सुन की किसी के बोलने से कुछ फ़र्क नही पड़ता. थे ब्लॉडी मॅन डोमिनटिंग सोसाइटी. लड़के प्री-मेयरिशियल सेक्स करते हैं और जब उनका नाम किसी लड़की के साथ जोड़ा जाता है... तो भी यही कहा जाएगा कि "लड़के तो छुट्टा सांड होते है, बच कर तो लड़कियों को चलना चाहिए". कंडीशन कैसी भी हो बदनाम हमे ही होना पड़ता है.


मार डालूंगी जो कभी इस बात को बदनामी से जोड़ा, जैसे उनकी सेक्स फॅंटेसी होती है वैसी हमारी. ईवन हम तो सेंटिमेंट्स भी अडीशनल देते हैं उनकी चिंता करना, ख्याल रखना, अगैरा वायग्रा....


बी र्सिलीयेंट, कोई कुछ भी कहे आक्सेप्ट नही करने का, बंद कमरे की बात कोई जानता भी है तो उसे जान'ना नही कहते.


वैसवी.... हमम्म ! ठीक है, पर घर का क्या करें.... अभी तो छोड़ दे मुझे घर तक, या तुझे काम हो तो बता दे, मैं ज़्यादा लेट हुई तो मम्मा मेरी जान खा जाएगी. फिर हर मिनट और सेकेंड का हिसाब दो...


नीमा... नही पुछेन्गि, क्योंकि जब तू ओवर ड्रिंक की, तभी फोन कर दी थी तुम्हारे घर, "क्लास के बाद तुम मेरे साथ मार्केट जा रही हो आने मे लेट हो जाएगी". अब तू बैठ आराम से बहुत वक़्त है अपने पास. थोड़ी नॉर्मल हो जा नही तो घर पर पकड़ी जाएगी.


वैसवी... ठीक है, पर फोन तो दे एक बार घर बात कर लूँ... 


वैसवी ने फिर अपने घर कॉल लगाई, मम्मा को, अब किए अपने सारे काम, यानी सारे झूठे काम के बारे मे बता कर फोन कट कर दी, आराम से बैठ'ती हुई बिस्तेर पर नीमा से एक बार फिर अपने साथ हुई हादसे पर चर्चा करने लगी....

वैसवी.... नीमा तूने ऐसी पार्टी मे मुझे क्यों बुलाया, पहले बता देती तो मैं नही आती.


नीमा..... मैं क्या बताती, मुझे क्या पता था कि तू ओवर ड्रंक होगी, और वैसे भी जितनी मस्ती तुम ने की, शायद ही कोई किया हो.


वैसवी.... अच्छा ! लेकिन मुझे कुछ याद क्यों नही, मुझे बस इतना ध्यान है आखरी का कि मैं पानी के फव्वारे मे भींग रही थी, बाकी कुछ याद भी नही. और मेरे साथ इतना बड़ा कांड हो गया, मैं क्या रिएक्ट करूँ कुछ साँझ मे नही आ रहा.


नीमा.... ह्म्‍म्म ! पहली बार पिया था ना, रोज पिएगी तो नही होगा ऐसा, तुझे सब याद रहेगा सोने तक का हर सीन. हा हा हा हा हा


वैसवी.... वेरी फन्नी ... अच्छा जोक था. मतलब तुम मुझे रोज पीने का सजेस्ट कर रही हो. और टल्ली होकर फिर से वही ..... यक्कक ! तू ना पागल हो गयी है.


नीमा.... अच्छा पागल मैं हो गयी हूँ, पागल तो तू हो गयी थी अब से कुछ देर पहले, और जानती है क्या सब की ......


वैसवी.... मुझे कुछ नही सुन'ना चुप कर तू अभी.


नीमा... सुन तो ले ....


नीमा इतना ही बोली कि वैसवी उसे मारने के लिए अपनी जगह से उठी, लेकिन नीमा ने उसका हाथ पकड़ लिया और आराम से बिस्तेर पर बैठने का इशारा की ...


नीमा.... अर्रे जाहिल शांत बैठ ना जो होना था हो गया क्यों अब भी उसी बात को सोच रही है ... वैसे ये बता तुम ने कभी कोई पॉर्न मूवी या अडल्ट स्टोरी पढ़ी है.


वैसवी... मैं ये गंदे काम नही करती.....


नीमा... ओह्ह्ह्ह ! बड़ी सरीफ़ बनती है, वैसे मैं ना कुछ बोलूँगी नही तो तुझे फिर पागलपन के दौड़े चढ़ेंगे....


इतना कह कर नीमा ने अपना छोटा सा मुँह बना लिया और वैसवी के पास चुप-चाप बैठ गयी....


वैसवी..... अब मुँह क्यों लटका लिया, आज सुबह से तू एमोशनल ड्रामा कर रही है, अच्छा चल बोल क्या बोल'ना चाह रही है.


नीमा.... ना ना रहने दे, नही तो कहीं फिर मुझे मारने दौड़ेगी....


वैसवी.... अब बोल भी दो, क्यों ड्रामा कर रही है...


नीमा.... जाने दे बहुत छेड़ दिया तुझे, सुन तेरे साथ कुछ भी नही हुआ, मैं बस कहानी कह रही थी और तेरा रियेक्शन देख रही थी.


वैसवी.... क्या, सच ! तूने तो फालतू मे मेरे होश उड़ा दिए, वैसे तूने बड़ा सीरीयस सा मज़ाक किया, तुझे पता नही मैं अंदर से कैसा फील कर रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे कोई पाप हो गया हो एक घुटन सी हो रही थी. सच कहूँ तो अंदर ही अंदर घुट रही थी.

लेकिन जब कुछ हुआ नही था फिर मेरी ये हालत, मैं बिना कपड़ों के बिस्तर मे कैसे ?


नीमा.... क्यों, तेरे साथ कुछ होना चाहिए जब भी तू बिना कपड़े की होगी. खैर, तू भींगी थी इसलिए मैने तेरे कपड़े उतार दिए.


वैसवी.... थॅंक्स गॉड, वैसे सॉरी यार मैने तुम्हे बहुत सुनाया.


नीमा.... चल चल फॉरमॅलिटी बंद कर. मैं रहूं और तेरी हालत का कोई नाजायज़ फ़ायदा उठा ले, जान ना निकाल लूँ. हां तू होश मे अपनी मर्ज़ी से मज़े करे फिर ऐतराज़ नही.
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12-27-2018, 01:40 AM,
#6
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
नीमा की बात सुनकर वैसवी उसके गले लग गयी. कुछ देर बाद वैसवी कुछ नॉर्मल हुई, वहाँ से दोनो मार्केट निकली, नीमा ने वैसवी को  का एक लिंक दिया और बोली वक़्त मिले तो इसे ज़रूर पढ़ना .


वहाँ से नीमा, वैसवी को ड्रॉप करती हुई अपने घर चली गयी. वैसवी जब अपने घर पहुँची तो इतनी थकि थी कि सीधी अपने बिस्तेर पर जाकर लेट गयी. हरदम जो घर को अपने सिर पर उठाए रहती थी वो आज शांत बिस्तेर मे जाकर सो गयी. वैसवी को ऐसा देख भला माँ को चिंता क्यों ना हो.


वैसवी की माँ उसके कमरे मे आकर वैसवी के सिर पर अपना हाथ रखा, थोड़ा सा प्यार से अपना हाथ फिराई, इतने मे वैसवी की नींद खुल गयी...


वैसवी.... माँ, क्या हुआ ?


माँ.... तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना वही देखने आई थी.


वैसवी.... कुछ नही हुआ माँ, आप बेकार मे चिंता कर रही हो. वो आज भागा-दौड़ी इतना हो गया कि थकि हुई सी महसूस कर रही हूँ.


माँ.... ठीक है खाना बन गया है खा ले फिर आराम करना. दो मिनट मे बाहर आ तबतक मैं खाना लगा देती हूँ.


वैसवी अपने कमरे से बाहर निकली, थोड़ा सा खाना खाने के बाद जाकर बिस्तर पर लेट गयी. ताकि इतनी थी कि नींद तुरंत आ गयी उसे. पार्टी के बाद सोई, जब से शाम को घर आई केवल खाना खाने के लिए जागी थी, और फिर खुम्भ्करन की नींद मे सो गयी. रात के 2 एएम बजे वैसवी की नींद खुल गयी, थोड़ा सा पानी पी और बैठ गयी बिस्तर पर.


इतना सोई थी अब आँखों मे नींद कहाँ, क्या करे, क्या करे, फिर उसे नीमा के दिए हुए लिंक राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम का ध्यान आया, हालाँकि कहानियों मे कभी कोई रूचि नही रही उसकी फिर भी करने को कुछ था नही इसलिए वैसवी ने अपने मोबाइल पर साइट खोल ली. 


पहले अएज् मे ही उसने कुछ ऐसा पढ़ा कि उसको आगे पढ़ने की इक्षा सी होने लगी. जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ी उसके पढ़ने की इक्षा भी बढ़ती रही, वो लगातार पढ़ती रही ना तो उसे समय का ध्यान रहा बस पढ़ती रही.


जब से पढ़ने बैठी थी आज खुद मे बड़ा ही बदलाव महसूस कर रही थी वैसवी. एक तो आज दिन की सारी बातें उसे पहले से ही काफ़ी उत्तेजित कर चुकी थी, वहाँ से जब लौटी और ये साइट पर शुरू की पढ़ना तो कहानी की लीड नायिका के साथ हुए रींडम और प्लान्ड घटनाए, वैसवी को नयी आग मे जला गयी.


ज्ञान तो उसे सेक्स के बारे मे पहले से था, पर उसे महसूस करने और उसका ख्याल दिमाग़ मे आना, वैसवी के बदन मे एक सिहरन पैदा कर रहा था. उसके हाथ अपने ही अंगों पर थे और मज़े से कहानी का लुफ्त उठा रही थी.

पढ़ते पढ़ते इतनी मगन थी कि कब सुबह हो गयी पता ही नही चला उसे, सुबह जब माँ ने कॉलेज जाने के लिए दरवाजा खट-खटाया तब जाकर उसका ध्यान टूटा. कहानी लंबी था आखरी चेपटर रह गया पढ़ना.


बेमॅन तैयार होकर निकली राकेश के साथ कॉलेज वैसवी. रास्ते भर उसे कहना का ही ख्याल आता रहा और खुद मे बड़ी ही अजीब महसूस कर रही थी. कुछ प्यारी सी गुदगुदी सी अंदर हो रही थी.

नीमा और वैसवी कॉलेज के गेट पर ही मिल गये, नीमा ने जब वैसवी को देखा और उसके चेहरे पर थोड़ा सा अनचाहे रियेक्शन तो वो समझ गयी कि वैसवी अभी क्या फील कर रही है. नीमा क्लास बॅंक करती वैसवी के साथ कॅंटीन आ गयी ...


नीमा.... वासू क्या हुआ तुझे


वैसवी.... नीमा तुम ने वो कहानी पढ़ी थी क्या.

नीमा.... नही, अभी नही पढ़ी. कैसी थीं राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर कहानियाँ , पूरा पढ़ ली.


वैसवी.... माइ गॉड, क्या था ये नीमा, एक लड़की किसी के साथ भी शुरू हो जाती है, क्या सच मे ऐसा होता है.


नीमा.... काल्पनिक कहानी है वासू ज़्यादा मत सोचा कर


दोनो आमने सामने बात कर रहे थे, वैसवी थोड़ी आगे हुई और धीरे से नीमा के कान के पास कहने लगी ...


"नीमा इसमे तो पूरा एक एक सीन लिखा था, मुझे तो कुछ कुछ होने लगा"


नीमा.... हहे, कंट्रोल कर बेबी नही तो तुझे बाय्फ्रेंड की ज़रूरत महसूस होने लगेगी.


नीमा की बात सुन कर थोड़ी देर शांत रही वैसवी फिर दोनो ने वहीं कॉफी पी और क्लास मे चली गयी.


वैसवी का दिमाग़ अब भी उसी कहानी की घटनाओ पर था, कि कैसे एक लड़की पोलीस मे जाने के बाद अपना काम निकलवाने के लिए गुणडो के साथ अपने संबंध बनाती है, अपना हर काम केवल अपने जिस्म का इस्तेमाल कर के वो पूरा कर लेती है... और सच तो ये था कि वैसवी को सब कुछ अपनी आँखों के सामने होता दिख रहा था और यही सोच सोच वो आज काफ़ी एग्ज़ाइटेड हो रही थी.


अंदर की जलन से वो चिढ़ गयी थी, बदन की गर्मी अब संभाले ना संभली, पर करे क्या आग भड़क चुकी थी पर बुझाने वाला कोई नही और ये सब उस लेखनी के कारण हुआ जो वो उस कहानी मे पढ़ी और शायद पहला अनुभव था इसलिए पता भी नही था कि क्या करे.


खैर धीरे धीरे सब नॉर्मल होता चला गया पर अब वैसवी के अंदर काफ़ी बदलाव दिख रहे थे. वैसवी अब नीमा की बातों मे मज़े लेना सीख गयी थी. नीमा ने उसे कुछ टिप्स भी दिए अकेले कैसे अपने एक्सॅयेटमेंट को कंट्रोल किया जाए.


वैसवी ने नीमा के साथ अपनी फॅंटेसी को जिया, आलीशान गाड़ियों मे घूमना, पार्टी करना और एंजाय करना, पर सबकी अपनी कुछ खास बातें और कुछ खामियाँ होती है. जहाँ नीमा का लड़कों से बात करने का एक रूड अंदाज था वहीं वैसवी हंस कर रेस्पॉंड करती थी. और दोनो मे कोमन ये था कि जो भी बोलना होता बिल्कुल फ्रॅंक्ली सामने से बोला करती थी.


कॉलेज के पहले साल मे वैसवी ने काफ़ी कुछ सीखा नीमा की संगत मे. लोगों को देखने और बात करने का जो नज़रिया जो वैसवी का था उसपर भी काफ़ी प्रभाव पड़ा और नीमा के साथ रहकर थोड़ा घमण्ड भी आ गया वैसवी मे.


लेकिन पहला साल बीत'ते-बीत'ते वैसवी और नीमा का साथ छूट गया. नीमा कभी भी वाराणसी मे नही रहना चाहती थी इसलिए पहले साल के रिज़ल्ट के बाद वो वाराणसी से निकल गयी. 


दोनो का साथ इतना अनूठा था, कि जब नीमा जा रही थी तो दोनो के आँखों मे आँसू थे, एक अच्छे दोस्त अलग हो रहे थे पर आपस का प्यार सदा दिल मे रहा.


नीमा के जाने के बाद वैसवी बिल्कुल अकेली हो गयी, उसकी संगत ने थोड़ी सी मेचुरिटी तो दी पर उस भी ज़्यादा कुछ बुरी लत जैसे घूमना, पार्टी करना, महनगे महनगे चीज़ों का सौक जो कि एक मिड्ल क्लास फॅमिली के लिए पासिबल नही था.


वैसवी को अब जैसे आदत सी हो गयी थी इन सब चीज़ों की, और जब पैसे ना हो तो पूरा कहाँ से हो ये शौक. इधर राकेश की फीलिंग वैसवी के लिए दिन व दिन बढ़ती ही जा रही थी. वैसवी मे आए बदलाव और उसका हर बात पर एक फन्नी सा रिप्लाइ करना, कभी कभी इनडाइरेक्ट बोल्ड सा मज़ाक करना उसे अलग ही दिशा मे ले जा रहा था.


एक दिन जब वैसवी, राकेश के साथ कॉलेज जा रही थी, तब राकेश ने उसे मूवी चलने का ऑफर किया, वैसवी को भी क्लास से कोई ज़्यादा मतलब तो था नही लेकिन मूवी तो वो बिल्कुल नही जाना चाहती थी इसलिए उसने राकेश को मूवी का प्लान छोड़ कर कहीं घूमने चलने को कही.


राकेश की तो जैसे किस्मत खुल गयी हो, पूरा दिन राकेश उसे घुमाता रहा और अपने पॉकेट मनी के हिसाब से खर्च करता रहा. वैसवी को आज थोड़ा रिलीफ फील हो रहा था क्योंकि वो इन सब चीज़ों को मिस कर रही थी.


शाम को घर वापस लौट ते वक़्त राकेश ने अपने पैसे से उसे एक हॅंड बॅग गिफ्ट किया. गिफ्ट देख कर वैसवी काफ़ी खुश हुई और उसे लेती वो अपने घर चली गयी. आज दिन भर की घटनाओ ने राकेश को सोने नही दिया, वहीं वैसवी भी आज जाग रही थी क्योंकि उसके दिमाग़ ने कुछ अब्ज़र्व किया था और उस बात को लेकर उसकी जिंदगी बदलने वाली थी.

जब सपने और चाहत दिल मे आते हैं तब सही ग़लत की पहचान ख़तम सी हो जाती है. दिन की हुई अंजान सी एक घटना ने वैसवी की सोच को एक अलग ही रूप दिया और वो लगातार बस एक ही बात सोचती रही ..... "जब एक क्लर्क का लड़का मेरे पिछे 1000 खर्च कर सकता है तो करोरपतियों की कमी है क्या सहर मे"


वैसवी को अपने सपने पूरे करने का एक आसान और अच्छा तरीका मिला जो उसके लाइफ को उसके तरीके से जीने मे मदद करता. वैसवी ने एक बाय्फ्रेंड बनाने की सोच ली पर वो इस रास्ते पर जाने से पहले अपनी गुरु यानी नीमा से एक बार बात करना चाहती थी.


अगली सुबह जब आज कॉलेज के लिए निकली तो राकेश बिल्कुल सज धज के तैयार था, और ऐसा लग रहा था जैसे वैसवी का इंतज़ार काफ़ी समय से कर रहा हो....


राकेश .... हाई वैसवी, लुकिंग ब्यूटिफुल

वैसवी... थॅंक्स राकेश, वैसे कूल ड्यूड तो तुम दिख रहे हो बात क्या है कोई गर्लफ्रेंड मिल गयी क्या


राकेश खुद मे थोड़ी हिम्मत जुटा'ता हुआ बोला....


"गर्लफ्रेंड हां वो तो मिल ही गयी है"


वैसवी.... वॉवववववव ! कौन है मुझे भी तो बता


राकेश.... कौन क्या तुम ही तो हो


वैसवी.... अच्छा ऐसी बात, लड़का फ्लर्ट कर रहा है, पर मैं हाई-फ़ाई गर्ल हूँ, कहीं कोई और देख ले, मैं तेरे हाथ नही आने वाली.


राकेश.... मैं क्या इतना बुरा दिखता हूँ 


थोड़ी निराशा और थोड़ी मासूमियत से राकेश ने अपनी बात कही.


वैसवी ने जब राकेश को इतना सीरीयस इस मॅटर पर बात करते देखा तो वो भी थोड़ी सीरीयस होती बोली ...


"देख राकेश तुम यदि कुछ फीलिंग्स अपने अंदर रखते हो तो उसे वहीं रोक दो, क्योंकि तुम जैसा सोच रहे हो वैसा संभव नही, मेरा पहले से एक बाय्फ्रेंड है"
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12-27-2018, 01:40 AM,
#7
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
वैसवी आने वाली संभावना को सोचती हुई और अपने सपनो को साकार करने के लिए, जो लड़का उसे चाहिए था वो तो राकेश बिल्कुल नही था, इसलिए वो ये बाय्फ्रेंड वाला झूठ बोल गयी. राकेश का तो जैसे सपना ही टूट गया हो. मायूसी से उसने बिना कुछ बोले अपनी बाइक स्टार्ट किया और वैसवी को चलने के लिए बोला.


जैसे हम किसी के साथ रहते रहते उसकी आदत सी होने लगती है वैसा ही कुछ वैसवी के साथ था, आज रास्ते भर राकेश चुप था, वैसवी को अंदर से अजीब लग रहा था पर उसे खुद पता नही क्या हो रहा था.


खैर वैसवी कॉलेज पहुँची, आज थोड़ा गुम्सुम थी सुबह की बातों को लेकर, पर अपनी सारी चिन्ताओ पर विराम लगाती उसने नीमा को कॉल लगा दी....


नीमा..... ओह्ह्ह माइ गॉड ! वासू तुझे ही कॉल लगाने वाली थी, मिस यू डार्लिंग सो मच. कैसी है 


वैसवी.... कल रात से मैं भी तुम से बात करना चाहती थी, पर वक़्त ज़्यादा हो गया था इसलिए कॉल नही कर पाई.


नीमा..... पागल हो गयी है, तेरे लिए कौन सा टाइम, सोई भी रहूं तो जगा कर बात किया कर. छोड़ ये सब फॉर्मल बातें और सुना कॉलेज कैसा चल रहा है, कोई बाय्फ्रेंड बनाई या अकेली ही मज़े कर रही है.


वैसवी.... तुम भी ना नीमा क्या कॉलेज का नाम ले रही है, बापू मेरे प्रोफ़ेसर नही होते तो कॉलेज कभी नही आती, पर उनकी नज़र रहती है अटेंडेन्स पर उपर से तू भी चली गयी मुझे आधे रास्ते छोड़, बिल्कुल अच्छा नही लगता यहाँ. प्लीज़ लौट आ मन नही लगता तेरे बिना.


नीमा..... हहे, पागल इतना अटकेगी तो लाइफ कैसे जिएगी, एक काम कर थोड़ा घूम फिर, कुछ दोस्त बना, हो सके तो 4,5 लड़को को अपने पिछे घुमा खुद इतनी बिज़ी हो जाएगी कि फिर किसी की याद नही आएगी.


वैसवी.... ऐसा होता है क्या बता, तेरी याद तो दिल से आती है.


नीमा, वैसवी की बातों मे थोड़ी उलझन महसूस की, ऐसा लगा कोई बात है जो अब तक बता नही पाई .......


नीमा.... वासू कोई बात है क्या, ऐसा लगा जैसे कुछ कहना चाह रही है पर कह नही पा रही. क्या चल रहा है तेरे मन मे अब बताएगी ज़रा.


वैसवी, नीमा की बात सुन'ने के बाद थोड़ी देर गुम्सुम रही... इस बीच नीमा ने एक बार फिर दोहराई ... "बात क्या है" ... वैसवी, नीमा की बात का जबाव देती हुई....


"नीमा थोड़ी कन्फ्यूज़ हूँ, कल रात को मेरे मॅन मे ख़याल आया कि क्यों ना मेरा भी एक बाय्फ्रेंड हो, और इसी बारे मे मैं तुमसे बात करना चाहती थी, पर सुबह वो राकेश है ना......


नीमा.... हां, वो तेरे स्कूल से जो साथ पढ़ता है, अब बता ना क्या किया उसने, यदि कोई उल्टी सीधी हरकत किया है तो तू बता मैं उसका मर्डर करवा दूँगी.


वैसवी.... अर्रे गुस्सा क्यों होती है, अच्छा लड़का है यार. लेकिन आज जब सुबह आई तो थोड़ा हँसी मज़ाक चल रहा था गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड के टॉपिक पर. उसके हाव-भाव से लगा वो मेरे लिए फीलिंग रखता है, लेकिन मैने उसे साफ समझा दिया कि, यदि कोई उसकी फीलिंग है मेरे लिए तो दिल से निकाल दे. 


"बस इत्ति सी बात थी, लेकिन वो सीरीयस हो गया, ऐसा लगा जैसे उसने ये उम्मीद नही किया था. पूरे रास्ते चुप रहा, उसका चुप रहना मुझे अच्छा नही लगा"


नीमा.... हहहे, कहीं तू प्यार तो नही कर बैठी...


वैसवी.... नीमा तू भी ना, नही रे ऐसी कोई बात नही. मैं इसलिए परेशान हूँ कि मैने तो उसे क्लियर कर दिया कि हमारा रीलेशन संभव नही, बस इस बात को लेकर सीरीयस हो गया और हमारा इतना लंबा साथ रहा है तो उसका चुप रहना थोड़ा अखर गया. जबकि कल हम पूरे दिन साथ मे घूमे भी थे. 


नीमा.... डफर तू खुद कन्फ्यूज़ है और मुझे भी कर रही है. रात को तू सोची, कि तू एक बाय्फ्रेंड बनाना चाहती है, और सुबह जब तुमने राकेश को मना कर दी तो तुम्हे फील भी हो रहा है कि वो उदास क्यों है, तो जब तुम्हे बाय्फ्रेंड ही बनाना है और तुम्हे राकेश का चुप रहना फील भी हो रहा है, देन व्हाई नोट गिव हिम आ चान्स, और तू तो अच्छे से जानती भी है उसे.

वैसवी.... लेकिन यार मैने कभी उसके बारे मे नही सोचा, उस फट-फटिया छाप की मैं गर्लफ्रेंड बनू यक्ककक, कभी नही. मेरा तो बाय्फ्रेंड कोई राजकुमार टाइप होगा, हे ईज़ नोट इल्लिजिबल फॉर माइ बाय्फ्रेंड.


वैसवी की बातें सुन कर नीमा हँसने लगी, और हँसते हुए जबाव दी...


"ओह्ह्ह ! तो ऐसी बात है, तेरे बातों से तो साफ हो गया तुम्हे बाय्फ्रेंड नही टाइमपास चाहिए, और ये भी कि तुम्हे आदत सी हो गई है राकेश के साथ बात करने की. चल कोई बात नही घर मे भी जब लोग बात नही करते तो थोड़ा फील होता है, पर कुछ दिनो मे सब नॉर्मल हो जाता है. तू राकेश की चिंता छोड़ और अपने राजकुमार पर कॉन्सेंट्रेट कर"

अपनी छोटी सी उलझन बयान करने के बाद जो नीमा से जबाव मिला वो काफ़ी संतुष्टि जनक था. सच तो ये था कि वैसवी करना सब कुछ चाहती थी पर वो राकेश का साथ नही छोड़ना चाहती थी. 


घर, कॉलेज और उसकी राजशर्मास्टोरीसडॉटकॉम पर कहानियाँ पढ़ने की चाहत बस इतने मे ही दिन बीत'ता था वैसवी का. वैसवी अब पहले से ज़्यादा आरएसएस को एंजाय कर रही थी, एरॉटिक स्टोरीस उसे काफ़ी आकर्षित करने लगी थी, और वो लगातार अपनी चाहतों पर वर्काउट कर रही थी यानी कि एक समृद्ध बाय्फ्रेंड की, जो उसकी इक्षाये पूरी कर सके.


इधर राकेश ने अपना एक तरफ़ा प्यार अपने अंदर दफ़न कर लिया और उसे बस इस बात की खुशी थी, कि कुछ भी हो कम से कम वैसवी उसके साथ है, क्या पता आज ना कल उसे भी राकेश के प्यार का एहसास हो जाए.


जिंदगी कुछ दिन रूटीन मे बिताने के बाद आख़िर वैसवी की तलाश ख़तम हुई. सनडे के दिन अपने घर से बोर होकर जब वो मार्केट घूम रही थी, पैसे तो थे नही वैसवी के पास, फिर भी अपनी अधूरी चाह लिए एक शॉपिंग कॉंप्लेक्स मे कुछ मॉडर्न आउटफिट देख रही थी.


वैसवी बहुत देर तक शो केस मे रखे रेड ड्रेस को घूर रही थी, नीचे टॅग देखी, दम था ₹12000, बस उस टॅग को देखी और मायूस वापस मूड गयी, और शॉपिंग कॉंप्लेक्स घूमने लगी.


घूम तो वो शॉपिंग कॉंप्लेक्स फालतू मे ही रही थी, पर बार बार उसका ध्यान उसी ड्रेस पर आता और वो रह-रह कर उसे देखती हुई वहाँ से गुजरती. दो बार ऐसे ही घूमती रही, बाद मे वैसवी तीसरी बार उस ड्रेस को देखने आई तो वो ड्रेस शोकेस मे नही थी.


बड़ी ही मायूस कदमों से खुद को कोस्ती हुई कि "क्यों वो ऐसे घर मे पैदा हुई जो ये ड्रेस तक नही खरीद सकी" अपनी चेतनाओ मे आगे चल रही थी. वैसवी के कदम आगे बढ़ रहे थे पर ध्यान कहीं और था, और वो टकरा गयी....


"आप ठीक तो है ना" .... 6 फिट लंबा बिल्कुल मॉडेल की पर्सनलटी का एक लड़का अपना हाथ आगे बढ़ाता हुआ वैसवी से बोला.


पर वैसवी को तो ड्रेस बिक जाने का गुस्सा था इसलिए वैसवी झुंझला कर बरस पड़ी उस पर....


"देख कर नही चल सकते, जान बुझ कर लड़कियों को परेशान करने के लिए टकराते है, नालयक लड़के, भागो यहाँ से"


वैसवी की बात सुनकर वो लड़का मुस्कुराता हुआ जबाव दिया ....


"मेडम देख कर मुझे नही आप को चलना चाहिए, क्योंकि मैं तो अपनी जगह पर ही खड़ा था, आकर तो आप टकराई"

वैसवी.... बस तुम लड़कों को मौका मिलना चाहिए, मैं यदि नही देख पाई तो तुम्हारे पास तो आँखें थी तुम क्यों नही साइड हो गये.


यूपी के वाराणसी का इलाक़ा और इतनी बातें हो और भला भीड़ ना जुटे ऐसा हो सकता है क्या, वैसवी को यूँ तेज-तेज चिल्लाते सुन वहाँ लोग जुट गये, भीर लगने लगी, उस लड़के ने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए वहाँ से निकालने मे ही अपनी भलाई समझी.


इधर कुछ लोग वैसवी से पुछ्ने लगे... "क्या हुआ, क्या हुआ"


वैसवी ने सारा दोष उसी लड़के पर माढ़ते हुए अपने साथ छेड़खानी का आरोप मढ़ दी उसके मत्थे, पर जबतक भीड़ कोई ऐक्शन लेती वो लड़का वहाँ से ओझल हो चुका था. वैसवी भी झल्लाती उठी और वहाँ से बाहर निकली.


ऑटो लेकर वैसवी अपने घर की ओर रवाना हुई ही थी, कि कुछ देर आगे जाने के बाद ऑटो वाले ने ब्रेक लगा कर ऑटो रोक दी. अचानक ब्रेक लगने से वैसवी थोड़ी अनबॅलेन्स हुई, इधर ऑटो वाला गुस्से मे तमतमाया चिल्लाते निकला... "हमारी छोटी गाड़ी है तो क्या हमें सड़क पर चलने नही दोगे"


ऑटो वाले को चिल्लाते हुए और ऑटो से उतरते देख वैसवी भी ऑटो से उतरी. कुछ ही फ़ासले पर एक आलीशान कार रुकी थी, वैसवी तो बस उस कार को ही देख रही थी, पर कार से जब वही शॉपिंग माल वाला लड़का उतरते दिखा तो वैसवी को बड़ा आश्चर्य हुआ...


ऑटो वाला लगातार बोले जा रहा था पर वो लड़का बिल्कुल मुस्कुराता हुआ ऑटो वाले के पास से गुजर गया और वैसवी के पास आकर खड़ा हो गया. वैसवी उसे देख थोड़ा घबरा गयी और इसी घबराहट मे उसने अपने कदमों को धीमे से पिछे लेते हुई उस लड़के से बोलने लगी ..... "प्लीज़ मुझे क्यों परेशान कर रहे हैं, मेरा पिछा छोड़ दीजिए"


वैसवी जितनी धीरे से अपने कदमों को पिछे ले रही थी, उस से काई गुना ज़्यादा स्पीड मे वो लड़का उसके सामने से बढ़ रहा था, लगभग 10 इंच का फासला होगा वैसवी और उस लड़के मे, कि उस लड़के ने वैसवी का एक हाथ पकड़ लिया.


वैसवी की धरकने बढ़ गयी, और वो बस तेज साँसे लेती हुए अपनी जगह पर खड़ी रही. वो लड़का मुस्कुराता हुआ अपने दूसरे हाथ से एक गिफ्ट पॅक का छोटा सा बॉक्स निकाला, और वैसवी के हाथों मे थमा कर वो लड़का मुस्कुराता चला गया. 


वैसवी अब भी घबराई थी, सड़क पर वो भी खुले मे किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया, वैसवी का घबराना लाजमी था, वैसवी घबराई खड़ी रही इतने मे ऑटो वाला वैसवी को ऑटो मे बैठने को कहा.


वैसवी अपने मन के ख्यालों से जागती ऑटो मे बैठ गयी और ऑटो चल दिया वैसवी के घर की ओर. वैसवी के हाथो मे अब भी वो पॅकेट था, पर मन से घबराहट लिए ऑटो मे चुपचाप बैठी थी.

घर आ गया, ऑटो वाले को पैसे देकर वैसवी चली अपनी गली मे. वही रोज का नाटक लड़को के कॉमेंट आती जाती लड़कियों पर, और लड़कियाँ हमेशा दूर ही रही इन सड़क छाप मनचलों से, लेकिन वैसवी के साथ एक के बाद एक हुई घटनाओ ने चिढ़ा दिया था....


जैसे ही वो चौक से गुज़री एक लड़के ने कॉमेंट किया ... क्या पीस है यार, दिल करता है कच्चा चबा जाउ"


उस लड़के के कॉमेंट पर दूसरा लड़का अपनी टिप्पणी देते हुए.... यार कच्चा कैसे चबाएगा ये तो पूरी पकी हुई है.


वैसवी ने जब दोनो के कॉमेंट सुने तो गुस्से से पागल हो गयी, आओ देखी ना ताव और बड़ी तेज़ी से उनके पास गयी और एक थप्पड़ उस लड़के के गाल पर रसीद कर दी. कितना गुस्सा वैसवी को था उसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता था कि थप्पड़ पड़ते ही कई लोगों का ध्यान उसी ओर खिंच गया.


वैसवी ने उसे एक थप्पड़ मारने के बाद अपना सारा गुस्सा उसपर उतारती हुई.... कमीनो अगर आज के बाद कोई फालतू बकवास की इस चौराहे पर बैठ कर , तो चप्पल से मारूँगी, भाग यहाँ से हरामज़ादे.


वैसवी का गुस्सा देख वहाँ से सारे लड़के खिसक लिए, इधर वैसवी भी अपनी बात बोलने के बाद घर चली आई.... घर आते ही माँ ने उसके चेहरे की उड़ी रंगत देखी और समझ गयी, कि एक जवान लड़की का यूँ परेशान होकर घर आना किस ओर इशारा करता है. 


वैसवी की माँ ने उसे हाथ मुँह धो कर खाना खाने को कही, और अपने काम मे लग गयी. वैसवी जब खाना खा कर फ़ुर्सत हुई तो सीधी अपने कमरे मे घुस गयी और आज हुई घटनाओ पर सोचने लगी.
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12-27-2018, 01:40 AM,
#8
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
रूम मे गये तकरीबन एक घंटा हुआ होगा, वैसवी भी अब नॉर्मल हो चुकी थी, तभी दरवाजे से उसकी माँ अंदर आकर वैसवी के पास बैठ गयी, वैसवी के सिर पर हाथ फेरती हुई ...


"वासू किस बात को लेकर परेशान सी घर पहुँची मेरी बच्ची"


वैसवी.... कुछ नही माँ बस घूमते घूमते थोड़ा थक गयी थी.


माँ.... अच्छा ला तेरा पाँव दबा दूं


वैसवी.... माआआ, क्या कर रही हो छोड़ो


माँ.... देख बेटा मैं तेरी माँ हूँ, मुझ से नही बताएगी तो किसे बताएगी अपनी परेशानी.


वैसवी थोड़ी सी खुद मे खोती हुई बोल पड़ी.... माँ जब भी आती हूँ वो चौराहे पर कुछ लड़के हमेशा कॉमेंट करते हैं, मुझे अच्छा नही लगता.

माँ.... ओह्ह्ह्ह ! तो ये बात है, रुक कल ही उनकी खबर लेती हूँ, आने दे तेरे पापा को फिर वही इलाज़ करेंगे उन लड़को का.


वैसवी... जाने दो माँ, अब नही करेंगे. मैने भी आज उनको एक थप्पड मारा और वॉर्निंग दे दी "आईएंदा यदि ऐसी कोई हरकत की तो मुझ से बुरा कोई नही होगा"


माँ.... क्या !!!! नही वासू तुम्हे आवारा लड़कों के मुँह नही लगना चाहिए, उनका तो काम ही यही होता है दिन भर आते जाते लड़कियों पर कॉमेंट करना.. भगवान ना करे, पर यदि कहीं उसने कोई उल्टी सीधी हरकत कर दी तो हम कहीं मुँह दिखाने के काबिल नही रहेंगे.


वैसवी... माँ ये तुम मुझे हौसला दे रही हो या डरा रही हो. तुम ही बताओ आख़िर कब तक सहते रहे हम, आख़िर सुन'ने की भी कोई हद होती है.


माँ... बेटा कीचड़ मे पाँव डालॉगी तो कीचड़ मैला नही होगा, बल्कि तुम्हारे पाँव ही गंदे होंगे.


वैसवी... माँ आप ये देहाती वाली सोच बदलो, कोई कीचड़ और कोई मैला नही होता. आज छोड़ दिया तो कमिने कल से वही हरकत करेंगे.


माँ.... पागल हो गयी है तू, यदि तू अपनी सोच नही बदली तो आज से तेरा घर से निकलना बंद, तेरे पापा तुझे कॉलेज छोड़ आएँगे और फिर टाइम होने पर वापिस भी.


वैसवी बिल्कुल गुस्से से लाल होती हुई बोली .... माआअ ! करे कोई भरे कोई, इस से अच्छा होता मेरे पैदा होते ही मार ही देती, जिंदा क्यों रखा. ये नही करो, वहाँ मत जाओ, जैसे सारे नियम क़ानून हमारे लिए बने है, उन आवारा लड़को को तो कोई कुछ नही कहता.


माँ अपनी बेटी का गुस्सा देखते हुई उसे शांति से समझाने लगी.... देख वासू तू कितनो को मारती रहेगी, तुम्हे हर चौराहे पर ऐसे आवारा मिलेंगे. इस से अच्छा है कि या तो तू बाहर ही मत जा, या फिर उनकी बात को नज़र अंदाज़ करती हुई अपना काम कर. मैं ये नही कहती कि वो ग़लत नही पर हम कर भी क्या सकते हैं.


वैसवी.... हुहह ! हम कर भी क्या सकते हैं, अर्रे यही बोल बोल कर के तो घर की बिल्ली बना कर रख दी हो, खैर जाने दो मैं उनके लिए तुम से क्यों बहस कर रही हूँ, ठीक है सबको जैसे पहले इग्नोर कर रही थी वैसा ही करूँगी, अब तो हंस दो. 


वैसवी की बात सुनकर उसकी माँ को स्ंतुष्टि भी थी और खुशी भी की उसके कहने से उसकी बेटी ने बात मान ली, लेकिन अपनी माँ के जाते ही वैसवी मन ही मन हँसने लगी ..... "माँ तुम्हारी ख़ुसी के लिए वही बोली जो तुम सुन'ना चाहती थी पर करूँगी वही जो दिल करेगा, तुम्हे पता चलेगा तो ना कोई बात होगी"


रात बीतने के बाद जब भोर हुआ तो आज भी वैसवी का वही रुटीन इंतज़ार कर रहा था, भाग दौड़ के साथ तैयार होना और राकेश के साथ कॉलेज जाना. जल्दी जल्दी जब वैसवी भागम भाग मे थी तब उसकी नज़र उस गिफ्ट पॅकेट पर गयी, जो उस लड़के ने वैसवी को कल दिया था, पर वैसवी इतनी जल्दी मे थी कि वो उसे वहीं छोड़ कॉलेज के लिए घर से निकल गयी.


पर वैसवी को क्या पता था कि उसके साथ एक अजीब सी घटना आगे रास्ते मे इंतज़ार कर रही है, वैसवी जैसे ही उस चौराहे के पास पहुँची जहाँ उसने कल शाम उस लड़के को थप्पड़ मारी थी, उसकी आँखें बड़ी हो गयी और कुछ पल तक वो वैसी हो खड़ी रही.....

वैसवी की नज़र जब सामने गयी तो कल शाम वाला वही लड़का खड़ा था अपनी कार के साथ. जब उस लड़के ने वैसवी को यूँ मूर्ति की तरह खड़ा देखा तो खुद ही उसके पास चला गया... और "हाई" कह कर विश किया.


एक ही पल मे वैसवी को कल हुई घटनाए याद आ गयी, कि कैसे इस लड़के ने सड़क पर वैसवी को पकड़ा था. वैसवी थोड़ी घबरा गयी उस घटना को याद कर के, पर अपनी घबराहट को वो छिपाती हुई, बिना उसके "हाई" का कोई रिप्लाइ किए अपने रास्ते चलने लगी.

"अजी यूँ बेरूख़े होकर कब तक तड़पाईएगा"
"हुजूर अब तो जहाँ जाइएगा हमे पाईएगा"


"अर्रे सुनिए तो मिस, कम से कम अपना नाम ही बताते जाइए, जबतक आप से दोस्ती नही होती तबतक आप के नाम को ही जपा करेंगे, शायद तपस्या के बाद जैसे भगवान मिल जाते हैं, आप भी मिल जाएँ"


वैसवी अब बिना बोले नही रह पाई. वैसवी, जो बिना बोले आगे आगे चल रही थी, वो पिछे मूडी और उस लड़के के सामने खड़ी होकर, उस पर बरसना शुरू हो गयी....


"तुम खुद को समझते क्या हो, हयंन्न ! यदि तुम ने मेरा पिछा नही छोड़ा तो मैं पोलीस मे कंप्लेन कर दूँगी, और खुद को इतने बड़े तौप समझते हो तो कल माल मे रुके क्यों नही भाग क्यों गये"


एक सांस मे वैसवी ने अपनी पूरी बात उस लड़के के सामने रख दी. वो लड़का भी बस वैसवी की बातों को सुन रहा था और मुस्कुरा रहा था... उस लड़के का मुस्कुराना तो जैसे वैसवी के गुस्से को और हवा दे दी हो ... कुछ देर शांत रही और उसे मुस्कुराता देख .... "कुत्ता, कमीना, हरामज़ादा" कहती हुई फिर से अपने रास्ते चल दी.


लेकिन वाह रे भूत चाहत का जो पता लगाकर, सिर्फ़ एक शाम मे उसके घर की गली तक पहुँचा, वो ऐसे कैसे पीछा छोड़ देता, वो भी पिछे-पिछे बढ़ा, पर यहाँ तो एक अनार और दो बीमार थे.


उस लड़के के सामने से बिल्कुल राकेश आकर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर सामने से हाथ रखते हुए .... "ओईए ये क्या तुच्छ वाली हरकतें है, चुपचाप चले जाओ यहाँ से वरना यहाँ मजनुओ का हाल कुछ अच्छा नही होता"


वो लड़का.... कंधे से हाथ हटाओ, वो निकल जाएगी. तुम्हे जो भी हाल करना है वो बाद मे कर लेना मैं यहाँ आ जाउन्गा. पर प्लीज़ इस वक़्त रास्ता ना रोको.


अब भले वैसवी ने राकेश को रिजेक्ट कर दिया हो लेकिन राकेश की चाहत तो अब भी वैसवी ही थी, तो अब भला राकेश से कहाँ बर्दास्त हो इतनी बड़ी बात. राकेश ने उस लड़के की बात सुन कर उसका कॉलर पकड़ लिया और खींच कर एक घूँसा मारा.


घुसा सीधे नाक पर लगा और उस लड़के की नाक से खून निकलने लगा. खून देख कर ही वैसवी की हालत खराब हो गयी, उसका मन अजीब सा होने लगा. राकेश को कंधे से पकड़ कर साइड करती हुई, वैसवी ने तुरंत अपना रुमाल निकाला और दूर से ही उस लड़के की ओर बढ़ा दी.


वैसवी दूसरी ओर नज़रें घुमाए ही उस लड़के की तरफ रुमाल बढ़ाए हुए थी, और वो लड़का तो बस वैसवी को ही देख रहा था. कुछ समय तक जब उस लड़के ने रुमाल नही लिया तो वैसवी अपनी नज़रें उस लड़के की ओर करती हुई रुमाल थामने का इशारा की.


नज़रों से नज़रें मिलाए ही उस लड़के ने एक हाथ से रुमाल लेकर अपने नाक पर लगा लिया. उसके रुमाल लेते ही वैसवी, राकेश का हाथ थामी और कॉलेज चलने के लिए कहने लगी. राकेश भी एक बार उस लड़के को गुस्से मे घूरते हुए वैसवी के साथ निकल गया...


पर जैसे ही पिछे मुड़े दोनो की उस लड़के ने फिर से एक कॉमेंट कर दिया... "अर्रे सिनॉरीटा ये तो बताओ आज शाम को क्या वहीं मिलोगि जहाँ तुम टकराई थी"


राकेश मुड़ा ही था उसे मारने के लिए कि वैसवी ने उसका हाथ पकड़ लिया और चिढ़ती हुई कहने लगी ... "एनफ राकेश, अब प्लीज़ सड़क पर तमाशा मत करो"


वैसवी की बात सुनकर राकेश गुस्से का घूँट पी गया और बाइक स्टार्ट कर दोनो कॉलेज के लिए निकल गये.


राकेश .... वाशु ये क्या है, तुम बीच मे क्यों आई, और उस कमीने को रुमाल क्यों दी अपना.


वैसवी... चिल राकेश, हो तो गया नाक तो तोड़ दिया उसका, अब क्या जान ले लेगा.


राकेश... वासू, उसकी हिम्मत तो देख मेरे सामने तुम्हे छेड़ रहा था, जान से मार दूँगा उसे.


वैसवी... आह हाअ हा हा, ज़रा उसकी पर्सनालटी देखा भी है, लगता है कुछ ज़्यादा ही शांत बंदा है, नही तो तुझे धूल चटा देता. बात करता है जान से मार देगा. 


राकेश.... उड़ा ले मज़ाक मेरा तू, तू ये बता मेरी साइड है या उसके. मतलब वो मुझे मारेगा तो तुम्हे मज़ा आएगा.

वैसवी... जान से ना मार दूं उसको, जो मेरा सामने तुझे छु भी लिया तो. वैसे अच्छा किया तूने मेरे दिल को कुछ तसल्ली तो हुई.


इसी मुद्दे पर बात करते करते दोनो कॉलेज पहुँच गये. आज, वैसवी की बातों ने राकेश को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया कि आख़िर कहीं ना कहीं वैसवी की दिल मे भी कुछ है. राकेश ख़ुसी से उछल्ता हुआ अपने कॉलेज चला गया. आज तो जैसे राकेश के पाँव ज़मीन पर नही पड़ रहे थे.


शाम को वैसवी घर लौटी और रूटीन अनुसार अपना काम करके, सीधा अपने रूम मे अपने मोबाइल के साथ बिज़ी हो गयी. कहानी पढ़ते पढ़ते वैसवी का ध्यान अचानक ही उस पॅकेट पर गया जो उस लड़के ने वैसवी को दिया था.


ज़िग्यासा वश वैसवी उस पकेट को जल्दी से खोली. उपर का रॅपार हटाते ही अंदर एक डब्बा और डब्बे के उपर एक लेटर था. वैसवी ने लेटर को साइड टेबल पर रखा और अंदर का समान देखने के लिए वो डब्बा खोली.


Room me gaye takareeban ek ghanta hua hoga, Vaisvi bhi ab normal ho chuki thi, tabhi darwaje se uski maa andar aakar Vaisvi ke pass baith gayi, Vaisvi ke sir par hath ferti huyi ...
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12-27-2018, 01:40 AM,
#9
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
वैसवी की तो आँखें बड़ी हो गयी और दिल मे हज़ार तरंगे नाच गयी. डब्बे के अंदर वही ड्रेस थी जिसपर वैसवी का दिल आ गया था. ड्रेस निकाल कर सीने से लगाए वैसवी झूमती रही. कुछ देर खुशियाँ मनाने के बाद वैसवी का ध्यान उस चिट्ठि पर गया और उसे लेकर पढ़ने लगी.......

कुछ इस तरह से उन से मिली नज़र
कि दीवाने से हुए जा रहे हैं
नाम जिंदगी का होता है प्यार पता ना था
और आज उसी प्यार के हुए जा रहे हैं


नाचीज़ को वमिश कहते हैं, प्यार से लोग अनु पुकारते हैं, और गुस्से से जो आप पुकार लें सब कबूल है. माफ़ कीजिएगा बड़ी हिम्मत कर के तोहफा दिया है आप को, पता नही कैसा लगा हो, पर दिल मे कोई दूसरी भावना नही थी बस इतना था कि आप के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ जाए.


लोग मुझे बातूनी कहते हैं, इसलिए ज़्यादा नही लिखूंगा, यदि आप सच मे एक बार मुस्कुराइ हो तो, इसे पहन कर उसी जगह ज़रूर मिलिए जहाँ पर आप ने इस ड्रेस को देखा था. यदि ना पसंद आए तो भी आइए, इस तोहफे को मेरे मुँह पर मार कर चले जाइए, विस्वास मानिए उसके बाद ये बंदा आप को कभी परेशान नही करेगा.


आप के जबाव का इंतज़ार रहेगा. प्लीज़ दोनो ही सुर्तों मे आइए ज़रूर और आने से पहले क्षकशकशकशकशकशकश991 पर कॉल ज़रूर कर दे.


इसी के साथ इज़ाज़त चाहूँगा,

अनु 


वैसवी खत को एक हाथ मे लिए चेयर पर बैठ गयी और अपने सिर को टिकाती हुई, बस अनु और उसके खत के बारे मे सोचने लगी.

कुछ देर सोचने के बाद वैसवी वो लाल ड्रेस पहन कर रेडी हुई और निकल गयी अनु से मिलने के लिए. ये पहला ऐसा मौका था जब वैसवी किसी लड़के से यूँ मिलने जा रही थी. खुद मे थोड़ी खिल-खिलाती वैसवी वो गिफ्टेड ड्रेस पहनी और चल दी अनु से मिलने.


वाकई काफ़ी खूबसूरत ड्रेस सेलेक्ट की थी, लाल रंग के कपड़ों मे वैसवी का गोरा रंग खिलकर बाहर आ रहा था, उसपर से हल्का हल्का मेक-अप ग़ज़ब ढा रहा था. वैसवी माँ को प्रॉजेक्ट-रिपोर्ट का बहाना करती निकली उसी जगह के लिए और निकलते ही फोन लगा दी अनु को...


अनु.... हेलो कौन,


वैसवी... मैं आ रही हूँ 10 मिनट मे आप के पते पर


इतना बोल वैसवी ने फोन कट कर दिया और निकल गयी शॉपिंग माल की तरफ. इधर अनु ने एक बार फोन को देखा, खुशी से झूम गया और जल्दी से वो भी तैयार हुआ वैसवी से मिलने के लिए. थोड़े ही देर मे अनु उसी दुकान के पास खड़ा था जहाँ वैसवी उस से टकराई थी.


वैसवी ने दूर से ही अनु को देख लिया और वो थोड़ी सी शरमाती अनु के पास पहुँची. 


वैसवी... हीईीई 


अनु........

खुदा कयामत बख़्शे आज इस धरा को
क्योंकि कयामत तो खुद सिरकत कर रही है


वैसवी.... आप क्या नॉर्मल बातें नही करते, जब देखो तब यूँ शायराना अंदाज़ 


अनु.... मोहतार्मा, क्या करूँ आप को देख जो दिल से आवाज़ आती है वो मैं बोल देता हूँ.


वैसवी..... (अभी तुम्हे मज़ा चखती हूँ).... ओये, मिस्टर. पहली बात तो ये कि मुझे आप की थर्ड क्लास शायरी मे कोई इंटरेस्ट नही और दूसरी बात ये कि मैं यहाँ ये कहने आई थी कि आइन्दा ऐसे गिफ्ट नही दिया कीजिए.


अनु..... (अच्छा ऐसा था तो ये ड्रेस क्यों पहन कर आई, जान बुझ कर नखरे, चल बेटा उठा ले मेडम के थोड़े नखरे वैसे भी सुंदर लड़कियों के नखरे तो झेलने ही पड़ते हैं) ...... सॉरी मिस, मुझे लगा आप को ये ड्रेस पसंद है इसलिए गिफ्ट कर दिया आइन्दा ध्यान रखूँगा और आप से पूछ कर गिफ्ट किया करूँगा.


वैसवी... ह्म्म्म ! साउंड बेटर


अनु.... सो, कॅन वी फ्रेंड्स नाउ 


वैसवी.... हँसती हुई.... ये फ्रेंडशिप क्या होती है, वो भी केवल दो मुलाकात मे


अनु.... दो मुलाक़ातें तो जीवन भर साथ रहने का डिसीजन कर देती हैं, ये तो फिर भी एक छोटा सा दोस्ती का प्रस्ताव है


वैसवी... हयंन्न ! दो मुलाकात से जीवन भर का साथ, ज़रा खुल कर समझाएँगे इस बात का मतलब


अनु... वो ऐसा है मेडम, कि दो अजनबी शादी के लिए एक बार मिलते हैं फॅमिली के साथ और दूसरी बार अकेले मिल कर हाँ ना का फ़ैसला कर देते हैं, तो हुआ ना दो मुलाकात मे जीवन भर का साथ का फ़ैसला.


वैसवी.... आप तो बातों के राजा लगते हैं, चलो मैं भी सोच रही हूँ कि एक बार दोस्ती कर के देख ही लूँ, कुछ नही तो कम से कम ऐसे गिफ्ट्स ही मिला करेंगे. अमीर दोस्त होने के अपने ही फ़ायदे होते हैं.


अनु.... हा हा हा, हां जी बिल्कुल, तो दोस्त क्या खाना पसंद करोगे आप.


वैसवी.... ना ना, आज की मुलाकात समाप्त हुई, आज के पहले दिन के लिए इतना ही काफ़ी है बाकी फिर कभी.


अनु... फिर कभी कब वासू


वैसवी... अब हम दोस्त हैं, तो वो फिर कभी जल्द ही आएगा


वैसवी ने अनु को अपनी बात बोल वहाँ से बड़ी अदा से निकल गयी, वैसवी को जाते देख अनु खुद मे खुश होते बस इतना ही बोल पाया ... वॉवववव ! लगता है अपनी भी गाड़ी पटरी पर है, जल्दी ही दोस्त से हम कुछ और भी होंगे.


इधर वैसवी जाते हुए बस इतना ही सोच रही थी, मैने थोड़े ना कुछ किया, जब बकरा हलाल होने खुद आ रहा है तो मुझे क्या पड़ी है होने दो हलाल साले को.


दोनो अपनी पहली छोटी सी मुलाकात को अपने हिसाब से भुनाने मे लगे हुए थे. वैसवी घर पहुँच कर बस अनु के पैसे और रुतबे के बारे मे ही सोचती रही, और रह रह कर खुद मे हँसती कि, कितने अरमान उसके अब अनु पूरा करेगा, लेकिन वो भूल रही थी कि हर चीज़ की एक कीमत चुकानी पड़ती है.


रात को खाने के बाद वैसवी अपना रूटीन अनुसार राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर कहानियाँ पढ़ रही थी और खुद मे ही काफ़ी उत्तेजित हुए पड़ी थी तभी उसके मोबाइल पर रिंग बजी...


वैसवी ने कॉल देखा तो अनु का था, उसने मोबाइल को तुरंत वाइब्रेशन मोड पर डाल दिया और फिर से कहानी पढ़ने लग गयी. तकरीबन 12/13 बार कॉल आए होंगे वैसवी के पास अनु के, पर उसने एक बार भी रेस्पॉंड नही किया.


सुबह अपने रूटीन के हिसाब से वो राकेश के साथ कॉलेज निकल गयी और कॉलेज पहुँच कर क्लास ना अटेंड कर के सीधा अनु को कॉल लगा दी...


अनु.... हेलो मेडम


वैसवी.... तुम पागल तो नही हो गये रात को कोई इतना कॉल करता है क्या, मम्मी पापा सब पास मे ही थे, वो तो शुक्र है फोन वाइब्रेशन मे था नही तो तुम्हारी वजह से डाँट पड़ने वाली थी.


अनु... आइ म रियली सॉरी, मुझे नही पता था कि तुम्हरे इतने फॅमिली रिस्ट्रिक्षन है, तुम्हे देख कर लगा नही.


वैसवी.... व्हाट डू यू मीन बाइ तुम्हे देख कर, तुम क्या विदेश से आए हो जो तुम्हे इंडियन फैमिली कल्चर पता नही. बाहर हम कैसे भी रहे घर मे लड़कों का आना तो दूर की बात फोन के नाम से ही क्लास लग जाती है.


अनु.... ओह्ह्ह ! आइ एम रियली वेरी सॉरी. मुझे बिल्कुल भी पता नही था, अब प्लीज़ गुस्सा ना करो, आइन्दा ऐसा नही होगा.


वैसवी.... हमम्म ! पहली बार था इसलिए जाने देती हूँ .... वैसे मरे क्यों जा रहे थे बात करने के लिए कल.


अनु.... कुछ नही बस बात करनी थी तुमसे, सोचा फ्री होगी तो बात कर लूँगा, पर यहाँ तो बात ही कुछ और हो गयी.


वैसवी.... ओह्ह्ह्ह तो अनु जी को बात करनी थी, वैसे क्या बात करनी थी ज़रा हम भी तो सुने


अनु.... हुन्न्ं ! बात तो है ढेर सारी करनी थी, पर दिमाग़ मे जो अभी एक ख्याल आ रहा है वो ये, कि क्या वासू मेडम अभी थोड़ा समय निकाल सकती हैं मेरे लिए ताकि आमने सामने बैठ कर बातें कर सके.


वैसवी.... अच्छा ! ख्याल तो नेक है पर यदि मैं ना मिलना चाहूं तो


अनु.... तो मैं बहुत ही तेज़ी से कार तुम्हारे कॉलेज के अंदर लाउन्गा और सीधा प्रिन्सिपल के रूम मे जाकर उसके अनाउन्स्मेंट वाले माइक से अनाउन्स कर दूँगा .... क्या वैसवी मेरे साथ घूमने चलोगि ?????


वैसवी.... हहे, रूको इतना करने की ज़रूरत नही है, मैं कॉलेज के गेट पर आ रही हूँ, 5 मिनट के अंदर यदि तुम पहुँच गये तो मैं चलूंगी नही तो भूल जाओ.


अनु... जैसी आप की मर्ज़ी, मुझे आप की हर शर्त मंजूर है.


फोन कटा और वैसवी मुस्कुराती हुई कॉलेज के गेट पर पहुँच गयी, पर मुस्कुराता चेहरा तब आश्चर्य मे बदल गया जब उसने अनु को पहले से कॉलेज के गेट पर देखा......

वैसवी आश्चर्य भरी निगाहों से उसे देखती हुई....... अनु यन्हि थे 


अनु....... हां, यन्हि से फोन किया. दिल कह रहा था कि मेरे पास ऐसी ही कोई शर्त रखी जाएगी, इसलिए संभावनाओ को सोचते और तुम्हे मिस ना करूँ, इसलिए पहले यहाँ आया फिर कॉल किया.


वैसवी..... अच्छा जी ऐसी बातें, फ्लर्ट कर रहे हो क्या ?


अनु ....... लो जी सच बात बोला तो वासू मॅम को फ्लर्टिंग लग रही है, क्या करूँ मैं, सच ही मेरे दोस्त कहते हैं.....


वैसवी.... क्या कहते हैं दोस्त, ज़रा मुझे भी बताना


अनु ... ... क्या करोगी जान कर, रहने दो चलो चलते हैं


वैसवी ...... नहीं पहले बताओ कि क्या कहते हैं तुम्हारे दोस्त


अनु..... अजीब ज़बरदस्ती है, सुनो मेरे दोस्त सच ही कहते हैं, लड़कियों को पेट भर झूठ बोलो वो खुश रहेंगी, और सच बोलोगे तो फन्सोगे.


वैसवी....... फालतू की बातें और फालतू के दोस्त है तुम्हारे , सब बदल डालो.


अनु... . वही तो कर रहा हूँ, एक नये दोस्त से नाता जोड़ रहा हूँ, इस दोस्त का साथ रहा तो सारे फालतू के दोस्तों को भूल जाउन्गा.


वैसवी ..... बातें और गोल गोल बातें, कोई मौका चूकते नही. चलें अब या यन्हि रुक कर बातें करने का इरादा है.


दोनो फिर वहाँ से घूमने निकले. वैसवी का जैसे हर सपना सच हो रहा हो. महज चन्द मुलाकात ही हुई थी पर अनु उसके ख्वाब की तरह आया था, जो उसके सपने पूरे कर रहा था.


दोनो की मुलाक़ातें बढ़ती जा रही थी और साथ ही साथ प्यार भरी बातें भी. वैसवी को जब भी मौका मिलता, फुर्र हो जाती अनु के साथ. शायड वैसवी को थोड़ी हिचक राकेश और अनु की पहली मुलाकात से थी, इसलिए आज तक उसने राकेश को पता नही चलने दिया अनु और अपने बारे मे.


वैसवी के लिए सपनो के दिन जीना फिर शुरू हो चुका था. मंहगी गाड़ी मे घूमना, औकात से बड़े गिफ्ट खरीदना, सब काम वैसवी के मॅन के मुताबिक हो रहा था.



आख़िर वो दिन भी आया जब अनु ने वैसवी को गर्लफ्रेंड के लिए प्रपोज कर दिया. रविवार का दिन था जब शाम को वैसवी घूमने के बहाने निकली. दोनो एक माल मे ही घूम रहे थे, घूमते घूमते दोनो बैठे थे एक बेंच पर, जहाँ कई वराइटी की चीज़ों को वैसवी ललचाई नज़रों से देख रही थी, तभी अनु बिल्कुल उसके सामने खड़े होते हुए अपनी जेब से एक छोटा सी रिंग निकाली और वैसवी का हाथ अपने हाथो मे थाम'ता हुआ उसे कहने लगा......


"वासू, अब मैं खुद को रोक नही पाउन्गा, सच तो ये है कि मैं तुम्हे पहली मुलाकात से चाहता हूँ, यदि तुम्हे भी मैं पसंद हूँ तो ये रिंग पहन कर रुकी रहना नही तो चुप-चाप चली जाना, क्योंकि मैं तुम्हे जाते नही देख सकता"


इतना बोल अनु पिछे मूड गया और इंतज़ार करने लगा वैसवी के जबाव का. आँखें मुन्दे बढ़ी धड़कनो के साथ, अभी 1 मिनट से भी कम समय हुआ होगा कि वैसवी की आवाज़ आई......


"वैसे ये रिंग तुमने किस उंगली की नाप से लिया था, ये फिट नही हो रही"


अनु.... अर्रे उसे दाएँ हाथ की छोटी उंगली के बगल वाली मे ट्राइ करो


फिर अनु को कुछ ध्यान आया और वो वापस मूड कर वैसवी के पास पहुँचा, कुछ क्षण दोनो की नज़रें मिली, वैसवी धीमे मुस्कुरा रही थी. अनु गले लगाते खुशी से "वूहू" करने लगा.


अनु गले लगे ही...... वाशु सीधे नही हाँ बोल सकती थी, इतना नाटक क्यों ?


वैसवी...... ईश्ह्ह ! मैं तो वही कह रही थी जैसा तुम ने कहा था, "यदि हाँ हो तो रिंग पहन लेना". अब वही तो पहन रही थी..


अनु, वैसवी की बात सुन मुस्कुराते हुए और टाइट्ली उसे गले लग गया. दोनो के अफीशियली इस इज़हार के बाद एक दूसरे से गले लगे रहे, फिर वैसवी इस मुलाकात को विराम देती अपने घर चली गयी. रात के करीब 11:30 पर अनु का कॉल वैसवी के पास आया.


वैसवी अपनी कहानी मे लगी थी, फिर उसने कुछ सोचते हुए फोन कट कर तुरंत मेसेज टाइप किया....


"प्लीज़ रात मे कॉल मत करो, कोई जाग गया तो मुझे लेने के देने पड़ जाएँगे. कल मिलती हूँ ना बाबा"


अनु का रिप्लाइड मेसेज ...... फ़ेसबुक पर ऑनलाइन हो क्या ?


वैसवी.... नही मुझे नही पता कैसे यूज़ करते हैं, और प्लीज़ अब डिस्ट्रब मत करो मेसेज कर के, नही तो सज़ा के तौर पर कल तुमसे नही मिलूंगी.


फिर कोई रिप्लाइड मेसेज नही आया. सुबह वासू रोज की तरह राकेश के साथ निकली कॉलेज और कॉलेज पहुँच कर अनु को कॉल करने लगी, पर अनु ने कॉल का कोई रेस्पॉंड नही किया. तीन बार और वासू ने कॉल किया पर अनु ने कोई रेस्पॉंड नही किया.


बेमॅन आज चली क्लास, 2 क्लास अटेंड करने के बाद अनु का कॉल आया पर इस बार वाशु ने कॉल अटेंड नही किया. अनु समझ गया कि मेडम का गुस्सा सातवे आसमान पर है , इसलिए चुप चाप गेट पर इंतज़ार करता रहा.


वाशु भी इस बात को जानती थी इसलिए वो भी जान कर अगले 1 घंटे तक गेट पर नही गयी, बहुत देर हुए जब ना तो वाशु आई और ना ही उसका फोन तो अनु ने फिर एक बार कॉल लगाया...


"आ रही हूँ" एक चिढ़ा सा जबाव देती वाशु ने कॉल कट कर गेट तक पहुँची. पहले से इंतज़ार कर रहे अनु ने वाशु को देखते ही अपने दोनो कान पकड़ लिए पर वाशु बिना कुछ बोले सीधी कार मे जाकर बैठ गयी. अनु ने भी कार स्टार्ट कर दिया और वाशु को मनाते हुए.. 


"बेबी आइ एम सॉरी ना, कुछ कर रहा था इसलिए मैं कॉल पिक नही कर सका, प्लीज़ अब गुस्सा तो ना करो"


वाशु.... दिस ईज़ रेडिक्युलस अनु, एक मेसेज भी तो कर सकते थे मुझे कोई बात नही करनी. हुहह !


अनु.... पर बेबी एक सर्प्राइज़ था, इसलिए मेसेज भी नही कर सकता था.


इतना बोल कर अनु ने एक प्यारा सा छोटा सा गिफ्ट पॅक निकाला कर वाशु की जांघों पर रख दिया. कुछ देर पहले जो गुस्से मे थी वाशु , वो गिफ्ट पॅक खोलने के बाद चलती कार मे ही वाशु, अनु के गले लग गयी और उसके गालों को चूम ली.
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12-27-2018, 01:41 AM,
#10
RE: non veg story अंजानी राहें ( एक गहरी प्र�...
आज गिफ्ट मे वाशु को लेट्स्ट मोबाइल मिला था. अनु, वाशु से पूछता हुआ......


"कैसा लगा सर्प्राइज़"


वाशु... वॉवव ! इट्स अवेसम 


अनु. ... वाशु ये गूगल नेक्सस है लेट्स्ट अनरॉइड, काफ़ी फीचर्स है इस फोन के और ईज़ी आक्सेस भी है.


वाशु..... क्या फ़ायदा, मुझे तो यूज़ करना भी नही आता.


अनु..... अर्रे मैं हूँ ना, कल रात तुम कह रही थी ना फ़ेसबुक अकाउन्त नही है, अब बिना आवाज़ के, और बिना कोई परेशानी के रात मे हम बात कर सकेंगे.


दोनो वहाँ से पहले बटॉनिकल गार्डेन गये वहाँ तकरीबन 2 घंटे तक अनु ने फोन यूज़ करना और अकाउंट बनाना सिखाया.


गार्डन से निकलने के बाद वाशु घर चली गयी. आज काफ़ी खुश थी वाशु. पूरी रात फोन मे लगी रही, सीखती समझती और एक्सपॅरिमेंट करती रही.

अनु से मिलते और सोशियल अप पर समय गुज़ारते वैसवी का दिन कैसे गुजर जाता पता ही नही चलता.


वैसवी अब पहले से ज़्यादा व्यस्त थी. कई फेक प्रोफाइल, अनु के साथ घूमना, राजशर्मास्टॉरीज पर कहानियाँ पढ़ना, अब वक़्त ही कहाँ था वासू के पास.


सॅटर्डे ईव्निंग जब वैसवी अपने सोशियल अप पर लगी थी .... तभी फ़ेसबुक मॅसेंजर किसी जीत सिंग की ..


जीत... हेलो ब्यूटिफुल 


रश्मि प्रधान (वासू की फेक प्रोफाइल) ... हू ईज़ दिस


जीत.... जस्ट आ फ्रेंड 


रश्मि.... लड़की की आइ'डी के 100 फ्रेंड्स ऐसे ही गिफ्ट मे मिलते हैं. कोई और देखो आंड गो टू हेल 


जीत.... ओह ! गॉड, मिस मुझे इतनी जल्दी क्यों हेल भेज रही हैं, वैसे करम कभी बुरे नही रहे !! हां आप को मेसेज करना इतना बुरा होगा पता नही था.


वासू ने कोई जबाव नही दिया और प्रोफाइल लोग आउट कर के निकल गयी और कहानी पढ़ने लगी.
तभी अनु का एक मेसेज आया वासू के मोबाइल पर....


"कल हम पिक्निक पर जाएँगे, सुबह 10 बजे से शाम के 6 बजे तक मॅनेज कर लेना घर पर"


वासू.....

"पागल हो क्या, सनडे 2घंटे ही बड़ी मुश्किल से मिलती है, पूरा दिन बाद प्लान"


अनु......

"जानू सब प्लान हो गया है, प्लीज़ मॅनेज कर लो. प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़ प्ल्ज़"


वासू.....

"हद है ये पागलों की तरह ये ज़िद, इंतज़ार करो देखती हूँ आइडिया लगा कर"


अनु..... वेटिंग जानू, प्लीज़ हाँ ही कहना.


वाशु का दिल घूमने के नाम पर डोल गया, सोचना शुरू की, क्या करे, क्या करे, फाइनली दिमाग़ मे घंटी बजी और वाशु ने कॉल नीमा को लगा दी.....


नीमा..... कैसी है मेरी जान आज कैसे कैसे याद कर ली.


वासू... तेरी याद आई और कॉल लगा दिया. तू सुना कैसी है.


नीमा.... मैं तो अच्छी ही हूँ, पर तू झूठी बताएगी कॉल कैसे लगाई, और तेरे बाय्फ्रेंड के साथ कैसी चल रहा है.


वासू.... हहे, काफ़ी आगे पिछे करता है अनु मेरा. लव्ली बाय्फ्रेंड, अच्छा सुन ना आक्च्युयली मुझे ना अनु के साथ पिक्निक पर जाना है, और सुबह 10 से शाम 6 का प्लान है, घर से कैसे निकलूं.


नुहिता.... वॉवववव ! इत्ति देर क्या कुछ नॉटी इरादे हैं क्या, पूरा खा तो नही जाएगी उसे, देख निचोड़ मत लेना पहली बार मे ही.


वासू... हट पागल, कुछ भी कहती है, मेरा ऐसा कोई इरादा नही बस घूमना है. तू ना अपने दिमाग़ को ठिकाने रख हर समय एक ही बात करती है.


नीमा.... ओये, बोल तो ऐसे रही है जैसे इतनी देर साथ रहेगी तो भजन करेगी, सच बता मन तो तेरा भी कर रहा ही होगा, बिल्कुल नेक इरादे के साथ समय बिताने का.


वासू.... चुप कर नही तो खून कर दूँगी, मुझे तंग ना कर प्लीज़, आइडिया दे घर से निकलने का. और वैसे भी हम शायद ग्रूप मे होंगे.


नीमा..... वूऊ ! तो क्या ग्रूप मे एंजाय करेगी, अच्छा है बेबी पहले बार मे ही रॉकिंग.


वासू.... तुझ से ना बात ही करना बेकार है, अब कोई आइडिया देगी या फालतू की बकवास करेगी.


नीमा.... चिलाती क्यों है, एक काम कर तू जाने की तैयारी कर मैं सुबह फोन करूँगी और तेरे घर पर और बोल दूँगी आज तू पूरे दिन मेरे साथ रहेगी.


वासू.... ओ' नीमा, तूने तो मुश्किल आसान कर दी.


नीमा.... अच्छा सुन, एक चादर और एक एक्सट्रा पहन'ने के कपड़े रख लेना.


वासू.... पर ये सब क्यों, मैं समझी नही


नीमा..... वो तेरी सेफ्टी के लिए, कहीं रास्ते मे कुछ हुआ तो चादर पर आराम से मज़े करना और ड्रेस पर सिलवटें आ जाएँगी इसलिए दूसरे कपड़े, समझी.


वासू..... पागल कहीं की, रखती हूँ फोन चल बयी.


नीमा..... हां अब क्यों रुकेगी, तू प्लान कर अपने मज़े करने का, मैं भी चली घूमने.


कॉल कट हुआ फिर वासू ने मेसेज किया अनु को "ऑल डन, कल चलेंगे पिक्निक पर"


अनु रिप्लाइड.... वॉवववववव ! थॅंक यू, थॅंक यू, थॅंक यू, आइ आम सूओ हॅपी बेबी.


वासू.... अच्छा कितना हॅपी, ओये मिस्टर. इरादे तो नेक है ना


अनु, अंजान बनते हुए मेसेज रिप्लाइ किया ..... कैसे इरादे वासू


वासू.... अच्छा जी, तो आप को पता नही कैसे इरादे, ठीक है वो तो कल बताउन्गी यदि कोई गड़बड़ हुई तो.


अनु... जान ले लेना मिस, मैं भी आप का और ये जान भी, ग़लती की सज़ा सूली पर ही टाँग देना.


वासू.... कोई शक़ है क्या, सूली पर पक्का टाँग ही दूँगी. ओके बाइ कल मिलती हूँ कल. त्क


अनु.... ओके बाइ. लव यू 


कई तरह के सपने सज़ा वासू अपनी कहानी एंजाय करती सो गयी, इधर खुशी के मारे पता नही अनु कब तक जाग गया, और कब उसे नींद आई पता ही नही चला. सुबह सब प्लान के मुताबिक चलता रहा, वासू ने नीमा को कॉल लगा कर घर से निकलने को बोली, और नीमा ने भी वासू की मोम से बात कर के उसे घर से निकलने का पार्मिशन ले ली.


वासू पिंक जीन्स और ब्लॅक टी-शर्ट मे बिल्कुल हॉट बनकर अपने घर से निकली, गेट से बाहर निकलते ही अनु को कॉल लगा कर मीटिंग पॉइंट पहुँचने बोली, पर वासू को रिप्लाइ मिला अनु का, वो पहले से ही मीटिंग पॉइंट पर इंतज़ार कर रहा है. 


थोड़े ही समय मे दोनो साथ मे थे, वासू, अनु के साथ कार मे बैठी और चल दी अपने एक अंजाने सफ़र पर.

अनु, वासू की ओर चॉकलेट बढ़ाते हुए...... कुछ मीठा हो जाए बेबी


वासू... ओह्ह्ह ! नेकी और पुछ पुछ, वैसे किस खुशी मे मुँह मीठा कराया जा रहा है.


अनु..... खुशी, अर्रे मेरे पास पूरा खुशी का पिटारा है और तुम पुछ रही हो कि कौन सी खुशी.


वासू बड़ी अदा से अपने चेहरे पर एक हल्की मुस्कान लाती हुई .... अच्छा जी, पर गर्लफ्रेंड को चॉकलेट से मुँह मीठा करवा रहे हो, बड़ा ही ऑड है.


वासू की बात सुन कर अनु की आँखें बड़ी हो गयी, कार को तुरंत सड़क की साइड मे किया, और वासू की ओर लेफ्ट घूमते हुए ...


"वासू ये क्या था, तुम कहीं जान निकालने तो नही आई हो"


वासू.... आई हूँ तो, क्या कर लोगे, तुम भी मेरे और ये जान भी मिस्टर, और आज पूरे दिन तुम मेरी कस्टडी मे हो


अनु अपने खिले चेहरे के साथ अपनी बाहें वासू के गले मे डाल देता है, नाक से नाक को एक प्यारी सी छुअन देते हुए, "हम तो क़ैद होने ही आए हैं". इतना कह कर अपने होंठ वासू के होंठ से एक छोटी सी, प्यारी सी किस किया और सीधा हो कर गाड़ी की स्टेरिंग संभाल लिया.


वासू भी अनु मे खोती अपनी आँखें मूंद ली और और खुद को अनु से चिपक'कर उसके कंधे पर सिर रख खो सी गयी.


गाड़ी वाराणसी से मिर्जापुर की ओर हाइवे नंबर 57 पर दौड़ने लगी, और आधे घंटे बाद एक सब वे होती हुई एक छोटे से कस्बे मे रुकी.


गाड़ी के रुकते ही वासू अपनी खोई हुई मनोदासा से बाहर निकली और सामने देख कर पुच्छने लगी .... "अनु ये हम कहाँ आ गये"


अनु.... चलो साथ मे कुछ दिखाता हूँ.


अनु के साथ वासू उसके पिछे चली गयी, एक बड़े से मकान का गेट खोल कर अनु जैसे ही अंदर पहुँचा बहुत से बच्चों ने घेर लिया और जो जिस हाइट का था उस हाइट से लिपट गया, कोई अनु के पाँव से लिपटा था, तो कोई कमर से.


एक प्यारी सी बच्ची अपनी आवाज़ मे .... भैया, भैया आप इस बार लेट क्यों आए, यहाँ ना, यहाँ ना, हम सब ना बोर हो गये आप के बिना.


वासू बस आस पास क्या हो रहा है समझने की कोशिस मे जुटी थी, और सारे बच्चे अपनी अपनी कहे जा रहे थे, उनमे से एक ने पुच्छ दिया... भैया आप के साथ ये मेडम कौन आई हैं.


अनु मुस्कुराता हुआ वासू की ओर देखने लगा और उस बच्चे की बातों का जबाव देने को कहा...


अनु नीचे बैठी घुटनो के बल, उस बच्चे के सिर पर हाथ फेरा और कहने लगी ... भैया हैं तो भाभी भी होगी. तो मैं आप सब की होने वहली भाभी.


उस बच्चे ने दोनो बाहें फैलाई और गले लग गया, वाशु के गाल को चूमा और भागता हुआ धिंडोरा पीट'ते हुए, अंदर तक चिल्लाता गया .... अनु भैया भाभी के साथ आए हैं, अनु भैया भाभी के साथ आए हैं.


वासू ऐसा रियेक्शन देख कर हँसने लगी और अनु से सवाल करने लगी "ये सब क्या है, और ये बच्चे"


अनु.... ये अनाथालय है, मैं इनसे मिलने हर रविवार आता हूँ, मुझ से काफ़ी प्यार करते हैं और काफ़ी घुले मिले हैं. सोचा तुम्हे भी मिला दूं.


वासू ने अनु के गाल पर प्यार से एक किस की और गले लग गयी. वहाँ खड़े बच्चों मे एक बच्चे ने अपनी आँखें बड़ी करी, और वो भी भागता अंदर गया स्लोगन पढ़ते ..... "भाभी ने भैया के गाल पर पप्पी ले ली, भाभी ने भैया के गाल पर पप्पी ले ली"


इस बात को सुनते ही दोनो खिल-खिलाकर हँसने लगे. वहाँ से सारे बच्चों के साथ दोनो अंदर गये, अनु वहाँ के इंचार्ज से मिला और उसे 40000 रुपयेका एक चेक़ पकड़ा कर बातें करने लगा.


दोपहर तक अनु और वासू ने बच्चों के साथ समय बिताया, फिर दोनो वहाँ से निकले अपने सफ़र के दूसरे पड़ाव की ओर.


फिर से कंधा टिका कर वासू बैठ गयी अनु के साथ और यहाँ लाने के लिए धन्यवाद कहने लगी. अनु भी एक प्यारी सी स्माइल के साथ उसके बातों का स्वागत किया और सिर पर हाथ फिराता गाड़ी चलाने लगा.


कुछ दूर आगे चलने के बाद एक जंगल आया, खिली धूप थी पर जंगल के अंदर बिल्कुल शाम जैसा महॉल था. वासू, अनु का हाथ पकड़े जंगल की ओर बढ़ रही थी और थोड़ी डरी भी थी.


अनु... क्या हुआ बेबी तुम कुछ अनकंफर्टबल दिख रही हो


वासू.... अनु, हम जंगल मे क्यों आए हैं, बताओ ना


अनु.... कहावत नही सुनी हो, "जंगल मे मंगल" बस वही करने आया हूँ.


वासू गुस्से मे आँखें दिखाती अनु से कहने लगी ..... तुम्हारा मंगल कहीं शनी मे ना बदल जाए, या फिर बदल गया होता यदि बच्चों से ना मिलवाए होते. अभी मैं खुश हूँ इसलिए तुम्हारी इस गुस्ताख़ी को नज़र अंदाज करती हूँ, वर्नाआआ


अनु,ने वासू की बाहें थाम उसे रोक दिया, खुद एक कदम आगे होकर उसके ठीक सामने हुआ और खुदको घुटने के बल बिठा कर सिर नीचे करते हुए..... बंदा आप का गुलाम है, आप की जो मर्ज़ी आए कीजिए, हम उफ्फ तक नही करेंगे.


मुस्कान छा गयी वासू के चेहरे पर, दोनो हाथों को उसके गालों को थाम उपर उठाई, नज़रों को अनु की नज़रों से टकरा जाने दिया, और फिर प्यार के एक मधुर एहसास मे अनु के होंठों को चूम ली.


वासू... तो गुलाम जी, चलिए कहाँ ले जाना चाह रहे थे.


मुस्कुराता अनु भी आगे बढ़ा वासू को साथ लिए, तकरीबन आधा किमी आगे चलने के बाद, जंगलों के बीच तकरीबन एक किमी का हरी घास का मैदान था और जहाँ अभी वासू खड़ी थी उसके कुछ दूरी पर एक झील था.


नेचर का ऐसा दृश्य मन मोह लिया वासू का. उँचे पहाड़ से गिरता साफ पानी झर्र झर्र कर के, एक मधुर संगीत निकाल रहा था और पांच्छियों की चह-चाहट कानो मे मिशरी घोल रही थी.


वासू.... वॉववव !!!! अनु इट'स अमेज़िंग


अनु.... वासू, मैं तो पानी मे डुबकी लगाने जा रहा हूँ, चलो तुम भी साथ.


वासू थोड़ी मायूस होती .... मन तो मेरा भी यही है पर कपड़ों का क्या, भींग जाएँगे... और अपनी आवाज़ को थोड़ा सख़्त करते... कोई कहीं नही जाएगा, हम झील किनारे बैठ कर यहाँ का आनंद उठाएँगे


अनु.... ठीक है वासू तुम झील किनारे बैठ कर यहाँ का और मेरे पानी मे डुबकी लगाने का दोनो का आनंद उठाओ, मैं चला


इतना बोल कर अनु तेज़ी से अपना टी-शर्ट और बनियान एक साथ निकाला और वासू कुछ कहने या रिक्ट करे उस से पहले झील मे छलान्ग लगा दिया.


वासू ये देख कर थोड़ी गुस्सा हो गयी, और वासू का चेहरा देख कर अनु हँसने लगा. पर ये हँसी अनु की ज़्यादा देर कायम ना रह पाई.


तैरता झील के बीच मे पहुँचा था, कि तभी अनु की आँखें खुली की खुली रह गयी, और वहाँ कुछ ऐसा हुआ जो अनु की कल्पना मे नही था.......

वासू को अनु का जाना गुस्सा दिला रहा था, थोड़ी देर उसे देखी फिर दिमाग़ मे एक शरारती ख़याल लाती, वासू ने पहले चारो तरफ का मुयाएना किया, फिर ज़ोर से चिल्ला कर अनु का ध्यान अपनी ओर खींची.
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