Porn Sex Kahani पापी परिवार
10-03-2018, 03:52 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
पापी परिवार--43

सेम पोज़िशन में कम्मो ने निकुंज के चेहरे को देखा ...वह अपलक उसकी ओर ही देख रहा था, पर एक दम शांत ...जैसे उसके पंख - पखेरू उड़ चुके हों, अपने आप कम्मो के होंठ हिलने लगे और उसकी जीब ने मुरझाए सुपाडे पर गोल - गोल घूमना शुरू कर दिया ...एक अजीब सी गंध उसने अपनी सांसो में फैलती महसूस की और इसके बाद उसके आँखें पनिया गयी ...एक हाथ से उसने लंड को अपनी मुट्ठी में जाकड़ लिया और फिर शुरू हुआ सिलसिला लंड चुसाई का.

निकुंज को होश में लाने के लिए उसने तीसरी बार उसके अंडकोष दबाए और इस बार भी लगभग चीखते हुए वह यथार्थ में लौट आया ...कितना आनंदतीरेक नज़ारा बन गया था ....... " घबरा मत !!! मैं सब सही कर दूँगी " .......फॉरन कम्मो ने लंड को अपने मूँह से बाहर निकाल कर उसे साहस दिया और उसकी आँखों में देखते हुए सुपाडे को जीभ से चाटने लगी

बेटे के लंड का गुलाबी अग्र भाग और उसकी मा की उतनी ही गुलाबी जीब, दोनो में एक द्वंद सा छिड़ गया ...कम्मो अपनी जीभ को नचाने में पारंगत होती जा रही थी और निकुंज यह नज़ारा बड़े गौर से देख रहा था ...आगे को झुकी होने से उसकी मोम के चूतड़ हवा में काफ़ी ऊँचे उठ चुके थे और सरक कर कुर्ता, कब उसकी कमर तक खिच आया उसे होश नही था.

लंड मुठियाने में भी कम्मो ने कोई कमी नही छोड़ी और एक बार फिर उसे अपने मूँह में ठूंस लिया ...धीरे - धीरे उसके होंठ अपने बेटे के लंड की कोमल त्वचा पर फिसलने लगे और वह लगभग आधा उसके मूँह में प्रवेश कर गया ...हलाकी अब भी लंड में बिल्कुल उबाल नही था पर कम्मो तीव्रता से उसे चूस्ति रही, शायद इस आशा में ..... " कभी तो उसकी मेहनत सफल होगी "

" मोम !!! हम कल डॉक्टर को दिखा लेंगे ..आआहह " ......बोलते ही निकुंज की आह से पूरा कमरा गूँज उठा, वजह अंजाने में उसकी मा के दांतो का लंड पर ज़ोर से गढ़ जाना था और इसके फॉरन बाद एक चमत्कार हो गया, कुछ लिसलिसा सा गाढ़ा पदार्थ सुपाडे के छेद से बाहर आते ही ...लंड फूलने लगा.

एक - दम से कम्मो को अपना सर ऊपर की तरफ उठाना पड़ा क्यों कि ढीलेपन से मुक्ति पा कर, लंड अब विकराल होने लगा था ...कम्मो ने निकुंज की आँखों में झाँका, जो बहने लगी थी और यह देख कर उसकी भी आँखें छलक उठी.

असली खुशी क्या होती है, अब कम्मो को समझ आ गयी और उसने रुंधने की परवाह ना करते हुए ...खड़े होते लंड के साथ भी अपने मूँह को अड्जस्ट करना शुरू कर दिया ........ " उमल्ल्लप्प्प्प्प !!! " ........सुपाडे से हल्का नीचे उतर कर वह उसके मूँह में फँसने लगा, लेकिन उसने हार नही मानी और सुड़कते हुए अपना सर ज़बरदस्ती और नीचे को ठेलने लगी ...जब आधा लंड उसके मूँह में समा गया वह रुक गयी और थोड़ी देर तक गहरी साँसे लेने लगी ...वह जानती थी इससे ज़्यादा लिंग वह अपने मूँह में नही ले सकती है, वरना उसका गला अवरुद्ध हो जाएगा और उसका दम भी घुट सकता है.

इसके बाद वह अपने बेटे की आँखों में देखते हुए लंड को अत्यधिक कठोरता से चूसने लगी ...बार - बार उसका हाथ अपनी योनि दिशा में जाता और उतनी ही तेज़ी से वापस भी लौट आता, वह चाह कर भी खुद की पीड़ा के साथ न्याय नही कर पा रही थी ...उसकी बंद होती कामोत्तेजित आँखें सन्तुस्तिपुर्वक उस आकड़े लंड को और ज़्यादा विकराल बना रही थी, लेकिन अबकी बार कम्मो को अपनी तत्परता और लंड चूसने की तेज़ी पर अचंभा होने लगा ....... " वह यह क्या कर रही है, अब तो लिंग में तनाव भी आ गया है ..फिर क्यों वह उसे चूसने में इतनी मगन है " .......सोचते ही उसने अपने होंठ खोल दिए और ठीक इसी वक़्त निकुंज के मूँह से कुछ शब्द फूट पड़े ....... " नही मोम !!! चूसो प्लीज़ " .......अत्यधिक आनंद की प्राप्ति ने उसके बेटे से अपने आप यह शब्द कहलवा दिए, जिसे सुनते ही कम्मो का चेहरा शरम से बेहद लाल हो गया और सकुचाते हुए वह वापस उसका लंड निगलने लगी ...लेकिन अब उसके अंदर उत्साह समा चुका था इसलिए वह निकुंज की बात टाल नही पाई थी.
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10-03-2018, 03:52 PM,
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बलपूर्वक चुसाई आरंभ करते हुए उसने बड़ी कोशिशो के बाद लंड को आधे से ज़्यादा अपने छोटे से मुख में प्रवेश करवा लिया और इसके साथ ही निकुंज की गान्ड हवा में ऊपर की तरफ धक्का लगाने लगी ...कम्मो ख़ासना चाहती थी लेकिन ऐसा संभव नही हो सका ....... " उंगग्घह !!! " ......घुटि - घुटि सी आवाज़े उसके भरराए गले से बाहर आने लगी और जल्द ही वे आवाज़ें थोड़ी ज़्यादा ऊँची हो कर कमरे में गूंजने लगी ...उत्तेज्ञापूर्वक वह अपना सर ऊपर - नीचे करती हुई बेटे के लंड को मूँह से चोदना चालू कर चुकी थी और उसकी उंगलियाँ लिंग की जड़ पर बेहद कठोरता से कस्ति चली गयी ...फिर वह प्रचंडता के साथ सुपाड़ा चूस्टे हुए लंड मुठियाने भी लगी.

आलू - भूखारे जैसे सुपाडे पर अपनी जीभ गोल - गोल घूमाते हुए, उसने उसे अपनी थूक से नहला दिया ..वह उसके नमकीन रस को चाटने लगी, जो उस विशाल लंड से टपकता जा

रहा था, जल्दी ही उसे उसकी मेहनत का फल मिलने लगा और निकुंज के मूँह से सीत्कार की ध्वनियाँ आनी प्रारंभ हो गयी.

जिसे सुन कर कम्मो के कानो में रस घुल गया, उसका चेहरा लाल हो उठा और वह जितनी कठोरता से उसके लंड को चूस सकती थी, चूसने लगी ...कामरस से भरे उस लंड के, उसके मूँह में होने के कारण कम्मो के गाल अति शीघ्रता से फूलते और सिकुड़ते जाते ...वह बेताबी थी, एक बहुत भारी फुहारे के फूटने के लिए ...यहीं उसके मन में एक नयी लालसा ने जनम लिया कि उसका बेटा उसे, उसका पूरा वीर्य निगलने

के लिए बाधित कर दे.

" आअहह मोम !!! मैं आ रहा हूँ, रुकना मत मोम ..मैं आ रहा हूँ " .......निकुंज उसके मूँह में धक्के लगाते हुए चीखा और साथ ही उसने अपने हाथो की मजबूत पकड़ मा के सर पर बना ली ...उससे सबर होता भी तो कैसे, कम्मो के नंगे चूतड़ो के दोनो पाट लकीर सहित उसे दिखाई पड़ रहे थे ...वह अत्यधिक बौखला गया था, जानते हुए भी कि वह पाप का भागीदार बन रहा है उसने अपने हाथ आगे बढ़ाते हुए मा के चुतडो के दोनो भाग अपने पंजो में कस लिए ....... " ह्म्‍म्म्ममम !!! " ......फॉरन कम्मो उच्छल पड़ी पर निकुंज उसकी पीठ पर अपना भार डाल चुका था और स्वतः ही उसका लंड ठोकर देते हुए मा के गले के अंतिम छोर को टच करने लगा.

कम्मो की साँसे रुकने लगी, मगर आख़िरकार उसकी इतनी जबरदस्त, कामुक लंड चुसाई की मेहनत का फल उसे मिला था ...

लंड के सूजे हुए सुपाडे से वीर्य की एक असीम बौछार फूटी, जो उस कामरस की प्यासी ...उस मा के गले की गहराई में थर्राहट से चोट कर कर गयी.

" उम्म्मल्ल्लप्प्प्प !!! " ........कम्मो के मूँह से गलल - गलल की आवाज़ आने लगी,

लंड उसके मूँह में रस उगले जा रहा था ...उसके गले में बेटे के गाढ़े वीर्य की तेज़ - तेज़ धाराएँ फूटने लगी, जो गले में नीचे की ओर बहने लगा था ...उत्तेजनावश

वह उस विशालकाए रस फेंक रहे लिंग से चिपक गयी, उसे अपने नवयुवक बेटे के वीर्य का स्वाद अत्यधिक स्वादिष्ट लगा था ...कामोत्तेजित मा पूरी बेशरमी से लंड को चूसने का, मुठियाने का और उसका रस पीने का ...तीनो काम एक साथ करने लगी, उसने अपने बच्चे के लंड को तब तक नही

छोड़ा जब तक वह उससे निकलने वाले नमकीन रस की आख़िरी बूँद तक ना पी गयी ...
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10-03-2018, 03:53 PM,
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तकरीबन आधे मिनिट बाद वीर्य का विस्फोट रुक गया और कम्मो को उसका पेट लंड रस से भरा हुआ महसूस जान पड़ा, जिसकी उसने मंन ही मंन में लालसा पाल रखी थी ...कुछ वक़्त बाद उसने अपना सर बेटे के लंड से ऊपर उठाया, स्तब्ध और अपर्चित उत्तेजना में वह अपनी

जीभ को होंठो के चारों ओर घुमा कर बाकी का वीर्य भी चाट गयी.

निकुंज की आँखें यह दृश्य बड़ी हैरत से देख रही थीं ...अब भी उसके लंड में हल्का सा उबाल बाकी था, कम्मो ने खुशी से झूमते हुए एक बार फिर से उसके गुलाबी सुपादे को अपने मूँह में डाल लिया और उस पर चिपकी सारी मलाई चूस्ति हुई अपने गले से नीचे उतारने लगी ...उसने जानबूचकर यह क्रिया अपने बेटे की आँखों में देखते हुए की, ताकि उसे समझा सके कि उसकी मा ने यह सब उस पर कोई एहसान के रूप में नही किया ...अपना चेहरा ऊपर उठाते वक़्त कम्मो ने एक आख़िरी बार अपनी जीभ को सुपाडे पर गोल - गोल घुमाया और फिर फाइनली सीधी हो कर बैठ गयी.

" अब कभी उदास मत होना ..अब तो तनवी की खेर नही " .......माहुल खुश नुमा बनाने के लिए कम्मो ने मज़ाक शुरू कर दिया, पर असल में तो उसका दिल अंदर से फूट - फूट कर रो रहा था ..उसे तोच रहा था उसकी बेशर्मी पर, निक्रिस्ट हरक़त पर.

इसके बाद कम्मो बाथ - रूम गयी ...हॅंगर पर तंगी साड़ी, ब्रा - पैंटी के साथ पहनी और बाहर निकल कर उसने निकुंज का माथा चूम कर उसे गुड नाइट बोला ...फिर सोने के लिए लेट गयी.

निकुंज भी ज़्यादा देर तक अपनी आँखों को गीला होने से नही रोक पाया ...उसकी सारी कामुत्तेज्ना ढल कर असहनीय पीड़ा में तब्दील हो गयी, उसने एक नज़र अपनी मा के चेहरे पर डाली और इसके बाद उसे खुद पता नही चला कब वह नींद के आगोश में जा पहुचा.

इन पुणे

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सुबह के 7 बजे कम्मो ने एक भारी भरकम अंगड़ाई लेते हुए अपनी आँखें खोल दी ...उसकी नींद खुलने की मुख्य वजह थी ...... " ज़ोर से लगती प्यास " ......कुछ देर आँखों को मलने के बाद उसने अपना हाथ अपने गले पर फेरा, उसे महसूस हुआ उसके गले के अंदर काफ़ी कॅफ जमा है ....एक ज़ोरदार खखार लेती हुई वह बेड पर बैठ गयी, बेहद सूखे अपने मूँह और उससे कहीं ज़्यादा सूखे होंठो पर खुद की जीभ का स्पर्श होते ही, उसके जहेन में काफ़ी सारे सवालो ने एक साथ हमला बोल दिया.

होंठो पर अपनी जिहवा फेरते वक़्त, जिहवा पर आती चिकनाई और उससे उठती अजीब सी गंध कम्मो को बीती रात का सारा स्मरण ...चुटकियों में करा गयी और उसने बगल में सोए अपने बेटे, अपने लाड़ले की तरफ अपना चेहरा मोड़ लिया.

कमरे में चारो तरफ उजाला ही उजाला फैला हुआ था, चेहरा घुमाते ही जो भयानक दृश्य उसकी आँखों ने देखा ...उसने उसकी रूह कंपा दी, हलाकी बीती रात में भी उसने वही नज़ारा देखा था ...पर उस वक़्त वह किसी मक़सद के हाथो मजबूर थी और अभी इस वक़्त उसकी सफलता का प्रमाण उसके सामने सर उठाए खड़ा था.

निकुंज अपनी रात वाली स्थिति में ही लेटा हुआ था, और सबसे बड़ी बात उसका लिंग पूर्न रूप से विकसित अवस्था में खड़ा था ...फॉरन कम्मो की निगाह उस पर गिध्ह की भाँति जम गयी और कुछ पल के लिए वह कलयुगी मा स्तब्ध होकर ...बड़ी बेशर्मी के साथ उसे देखने में खो कर रह गयी और जल्द ही उसने महसूस कर लिया ...कछि के अंदर उसकी योनि में कुलबुलाहट, ज़ोरो की सरसराहट आना शुरू हो गयी है.

" नही यह सरासर ग़लत है " ......वह अपना चेहरा घुमा कर बेड से नीचे उतरने को हुई और जैसे ही वह धरातल पर अपने पैर जमा पाती उसका मन बदल गया ...वह नीचे उतरने की बजाए बेटे की तरह घूम कर बैठ गयी और अनियंत्रित कामुकता, निराशा, गुस्से में वापस उसके विशाल लौडे को घूर्ने लगी.

इस वक़्त उस मा को अपने बेटे का लिंग कल रात की अपेक्षा ज़्यादा फूला, विशालकाय और अकल्पनीय दिख रहा था ...कल जो सुपाड़ा मुरझाया सा, लिंग की खाल से बाहर शरम से झाक पा रहा था ...अभी गहरा लाल और किसी छोटे सेब बराबर काफ़ी मोटा नज़र आया.

कम्मो के दिल की धधकने यह सोच कर रुक गयी, कल उसके बेटे का मूसल उसके छोटे से मुख में समाया कैसे ...... " असंभव " .....यह शब्द मूँह से बाहर आते ही उसने सुपाडे के असल साइज़ को अपने जहेन में उतारा और बड़ी निकृष्ट'ता के साथ अपने मूँह को जितना खोल सकती थी ...खोल कर इमॅजिन करने लगी, लेकिन अपनी बात का सही अनुमान तो वह तब लगा पाती ...जब वह मोटा सुपाड़ा उसके मूँह के अंदर होता या उस बराबर कोई और वास्तु, जो कि इस वक़्त कमरे में मौजूद नही थी.

काम लुलोप वह मा खुल्लंखुल्ला अपने घुटनो पर आ गयी, यह जानते हुए कि उसका बेटा किसी भी पल नींद से बाहर आ जाएगा और वह ज़रूर पड़की जाएगी ...पकड़े जाने पर वह उसे क्या जवाब देगी, क्या ये कहेगी उसे खुद को सत्य साबित करना है ...इसलिए वह उसके पूर्ण विकसित लिंग को एक आख़िरी बार अपने मूँह में प्रवेश करवा कर देखना चाह रही थी.

कुछ ही पॅलो में उसने उस विशाल और तंन कर खड़े लंड को ठीक अपनी आँखों के सामने पाया, कम्मो ने जाना वह बहुत गहरी साँसे ले रही है और अपने दिल की तेज़ धड़कनो को अपनी छाति से कहीं ज़्यादा अपनी योनि पर महसूस कर रही है ...उसे लगा जैसे वा खुद के ऊपर बनाया सारा नियंत्रण खो बैठी हो और उसके लिए इस बात में अंतर करना नामुमकिन था ....कि वह क्या अनर्थ करने जा रही है, उसे विश्वास नही हो पा रहा था कि वा दोबारा से अपने बेटे के लिंग को अपनी मर्ज़ी से ...अपने मूँह में प्रवेश करवाने के लिए कितना विवश हो गयी है.

कम्मो ने अपनी उंगलियाँ उस फड़फदा रहे लौडे को पकड़ने के लिए, उसके इर्द - गिर्द लपेटनी चाही ...लेकिन वह इसमें नाकाम रही, वा जानती थी उसका बेटा लिंग पर ज़रा सा स्पर्श पाते ही ...उठ कर बैठ जाएगा, इसलिए फॉरन उसने लिंग को थामने का मन बदल दिया और कुछ पल एक - टक उस गहरे लाल रंगत लिए सुपाडे को बेहद करीब से देखती रही ...कैसे वह मुकुट, खिली रोशनी में बेहद चमकीला और सुंदर नज़र आ रहा था.

कम्मो ने अपनी नाक सुपाडे से सटा दी और उसमें से उठती मादक खुश्बू सूंघते ही उसका रोम - रोम पुलकित हो गया, वह उस अजीब सी सुगंध में खो सी गयी ...उसने स्पष्ट देखा सुपाडे पर दो छिद्र बने हुए हैं, एक जिससे बेटे का मूत्र बाहर आता होगा और दूसरे से उसका वीर्य ...जिससे कल रात उसने अपने पेट को भरता महसूस किया था, इसके बाद वह नीचे को उतरती हुई उस गोल घेरे पर पहुचि, जहाँ से उसके बेटे के मोटे सुपाडे के, लिंग की खाल से बाहर निकालने की शूरवात हुई थी ...कम्मो ने बड़े ध्यान से उस घेरे को देखा, उसने अनुमान लगाया जब कभी वह अपनी हाथ की उंगली में पहनी अंगूठी को उतारती है तब बिल्कुल ऐसा ही घेरा उसकी उंगली पर बन जाता है.
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10-03-2018, 03:53 PM,
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इसके बाद वह ओर नीचे झुकती गयी, शायद मन से भी और अपने तंन से भी ...बेटे के संपूर्ण लिंग की गोरी रंगत उसे बेहद पसंद आ रही थी और जब वह लिंग के नीचे लटके दोनो अंडकोषो पर पहुचि, उसका चेहरा मुस्कुराहट से भर गया ...... " कहाँ कल रात सिर्फ़ खाल ही खाल दिखाई दे रही थी और आज लिंग के समान ही फूले नज़र आ रहे हैं ...जैसे उनमें वीर्य ही वीर्य भर गया हो " ......फॉरन कम्मो ने अपनी सफलता पर गर्व महसूस किया और खुशी से झूमती हुई उसी रास्ते सुपाडे पर वापस लौट आई.

अब उसकी आँखों में एक इरादे की झलक तैरने लगी और खुद - ब - खुद उस चंचल और अनियंत्रित मा के होंठो ने आगे बढ़ते हुए सुपाडे का अग्र भाग चूम लिया ...इसके फॉरन बाद वह पीच्चे हटी और अपने बेटे के चेहरे को निहारा, जो बड़ी शांत और गहरी नींद में सो रहा था.

कम्मो की सारी खुशी का अंत पल भर में हो गया, जब उसे महसूस हुआ वह कितनी घ्रानित हरक़तें किए जा रही है ...बेटा तो नींद में है, अब ठीक भी हो चुका है ...फिर क्या ज़रूरत थी उसकी मा को दोबारा वही क्रिया दोहराने की, माना कल रात उस मा को मजबूरीवश अपने बेटे का सुषुप्त लिंग चूसना पड़ा था और पहली बार इस कला की शुरूवात भी उसने अपने बेटे के लिंग से ही की थी ...बाद में उस नौजवान के अंडकोषो से बाहर आया गाढ़ा स्वदिस्त वीर्य भी पिया था ...लेकिन अब क्यों वह मचल रही है, क्यों तड़प रही है ...क्या वह बुरी लालसा और पाप के माया जाल में फस चुकी है ...या फासना चाहती है.

" नही !!! मैं नीमा जैसी हिम्मत वाली नही और ना ही बन'ना चाहती हूँ ..बस इस अध्ध्याय का अंत मुझे यहीं कर देना चाहिए " .....यह प्रण करते हुए उसने बेटे का माथा चूमा और बेड से नीचे उतर कर बाथ - रूम की तरफ जाने लगी, लेकिन ज्यों - ज्यों उसके कदम आगे बढ़ते जाते ...उसका मन उतना ही दुखी होता जाता.

वह ज़्यादा आगे नही जा पाई और एक बार फिर से पलट कर उसने अपने बेटे का सोता चेहरा देखा, लेकिन जल्द ही उसकी नज़र वापस अपने लाड़ले के विकराल और मूसल लिंग पर टिक गयी ...उसकी साँसे भारी होने लगी, जाने क्यों उसे बेटे के लिंग से बिछड़ते हुए दुख हो रहा था ...वह जानती थी कुछ देर बाद निकुंज उठ कर कपड़े पहन लेगा और शायद यह आख़िरी बार है जो वह उस सुंदर, मनभावन बलिष्ठ वास्तु के दर्शन कर रही है.

वह अधर में लटक गयी, चाहती थी अभी दौड़ कर जाए और बेटे के लिंग को फॉरन अपने मूँह में भर ले ...उसे चूसे, चाटे और घंटो उसके गाढ़े वीर्य से अपना गला तर करती रहे, पर यह अब संभव नही ...सहेली नीमा की तरह उसे भी अपने बेटे के लिंग से बेहद प्यार हो चुका था, परंतु इस पर भी उसकी मनोदशा ...इतनी नही बदली थी की अपने सगे बेटे के साथ संसर्ग स्थापित कर ले, बस उसे अपने बेटे और खुद के बीच की मर्यादित दीवार से दो - चार ईंटे निकालनी अच्छी लग रही थी.

वह चाहती थी उसका बेटा उससे थोड़ा खुल जाए ...उसे अच्छा ख़ासा वक़्त दे, हसी - मज़ाक करे ...घुमाने ले जाया करे, अपने प्राइवेट - से - प्राइवेट सीक्रेट्स उससे शेर किया करे ...उसका क्लोज़ फ्रेंड बने, जिससे वह भी अपने सुख - दुख बेटे से साथ बाँट सके ...यक़ीनन कपड़ो के बंधन से वह तो आज़ाद नही हो सकती पर बेटा ज़रूर अपनी लाज - शरम छोड़ दे, कुछ रोमांच उनके दरमियाँ हो ...जिसमे बेटा बार - बार उसे कयि अजीबो - ग़रीब कामो को करने के लिए बाधित किया करे ...कितना रस घुल गया था उसके कानो में जब निकुंज ने उससे कहा था .......मोम !!! चूस्ति रहो ..रुकना मत " ......सोचते ही कम्मो के गाल फिर से लाल हो उठे ...वह बुरी तरह से निकुंज की तरफ आकर्षित हो चुकी थी या शायद अपने पति के हाथो हुए हमेशा से तिरस्कार का भान तक अपने मश्तिश्क से मिटा देना चाहती थी ...उसका बीता पूरा जीवन सिर्फ़ कुढते हुए ज़ाया हुआ था और अब वह अपने बेटे के साथ इस नये खुशनुमा जीवन का प्रारंभ करना चाहती थी.

" हां !!! मैं बस यही चाहती हूँ !!! " ........उसके बोल फूटे और वह तेज़ कदमो से वापस बेटे के नज़दीक पहुच गयी और बिना किसी संकोच के फॉरन उसके कठोर लिंग को चूसने लगी, उसे ज़रा भी लज्जा नही आई ...जैसे ही उसके होंठो ने अपना कमाल दिखाया निकुंज नींद में कसमसा गया लेकिन कम्मो पीछे नही हटी और बड़ी परचंडता के साथ लंड मुठियाने भी लगी ...वह प्यासी थी, शायद इसी वजह से उसकी नींद भी खुली थी और अब वह चाहती थी ...पूरी तरह से उसका गला तर हो जाए.

कुछ ही पल बीत पाए होंगे ...कम्मो का मोबाइल बजने लगा और इसकी परवाह किया बगैर वह अपने काम को द्रुत गति से पूरा करने में जुटी रही, हलाकी निकुंज अब भी नींद में था और यक़ीनन उसे महसूस भी हो रहा था कि उसके लिंग पर किसी के गीले होंठ तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे हैं ...परंतु इसे सपना समझ कर वह तड़प्ता ही रहा ...उसकी आँखों ने खुलने की कोई कोशिश नही की.

फोन लगातार बजता रहा और कम्मो को इस बात पर गुस्सा भी आ रहा था ...वह फॉरन झल्ला गयी और ना चाहते हुए भी उसने लिंग को अपने मूँह से बाहर निकाल दिया ...... " कोई बात नही बेटा तो मेरा अपना है ..कहाँ जाएगा " ......एक स्लट स्माइल के साथ उसने सुपाडे पर मौजूद अपना थूक बड़ी कठोरता से अंदर सुड़का ...जैसे इसी वक़्त वह सुपाडे को रस सहित अपने गले के नीचे तोड़ कर ले जाएगी और उसकी इस हरकत पर निकुंज के हाथ भी स्वतः ही अपनी मा के सर पर पहुच गये.

" फिकर मत कर ..अभी आती हूँ " .....कम्मो मुस्कुरकर बोली ...जैसे उसका बेटा हक़ीक़त में उसकी बात सुन रहा हो और सुपाडे को मूँह से बाहर करती हुई वह अपने मोबाइल की वर्तमान स्थिति खोजने लगी.

सेल उस वक़्त टीवी पर रखा हुआ था और कम्मो को बड़ी ज़ोर की पेशाब भी लग रही थी ...वह तेज़ी से अपने मोबाइल पर झपटी और बिना नंबर देखे, बाथ - रूम की तरफ जाने के लिए दौड़ लगा दी ...उसे तो जल्दी थी वापस अपने बेटे को दुलार करने की.

हलाकी बाथ - रूम में वेस्टर्न पॉट था पर कम्मो से उठता प्रेशर सहेन नही हो पाया और ठीक उसी वक़्त कॉल भी डिसकनेक्ट हो गया ...उसने तेज़ी से अपनी साड़ी कमर तक उठाई और जब तक पैंटी उतार पाती वह बह गयी, शायद यह प्रेशर पेशाब का नही सेडक्षन था ......" ह्म्‍म्म्म !!! " एक झटके से कम्मो को रिलॅक्स मिल गया ...लेकिन वह झटका भी किसी करेंट से कम नही था, गरम - गरम पेशाब की धार ज़मीन पर बहती उसके नंगे तलवो को टच करने लगी ...उसे लगा जैसे अत्यधिक गरम पानी से उसके तलवे झुलस रहे हों, पूरे दो मिनिट तक वह इस क्रिया में लगी रही और इसके पश्चात जब उसे चैन मिला ...पैंटी सरकाकर उसने उसे वहीं फ्लोर पर फेंक दिया, अपनी हालत में कुछ सुधार किए और खुशी - खुशी बाथ - रूम से बाहर निकल आई.

बाहर निकल कर कमरे में प्रवेश करते ही उसकी नज़र निकुंज पर पड़ी ...वह नींद से जाग कर बेड पर टेक लगाए बैठा हुआ था और उसे उठता देख ...कम्मो का चेहरा और ज़्यादा मुस्कुराहट से भर गया लेकिन जल्द ही उसकी मुस्कुराहट गेहन उदासी में तब्दील हो गयी, उसका बेटा अब नग्न नही ...बल्कि उसने अपना अंडवर और शॉर्ट्स पहेन लिया था.
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10-03-2018, 03:53 PM,
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अपनी मा को कमरे में आता जान कर भी निकुंज ने उसकी तरफ निगाह नही डाली ...बस अपना चेहरा झुकाए ग्लानिस्वरूप वह चुप - चाप बेड से नीचे उतरता हुआ बथ - रूम की तरफ बढ़ने लगा, एक पल ऐसा आया जब दोनो एक दूसरे को क्रॉस कर रहे थे ...लेकिन ना तो निकुंज कुछ बोल पाया और ना ही कम्मो की कोई हिम्मत हो सकी.

" धम्म्म्म !!! " ......एक ज़ोरदार आवाज़ कम्मो के कानो से टकराई, जो यक़ीनन निकुंज के गुस्से का प्रमाण थी ...बाथ - रूम का गेट उसने इतनी ज़ोर से बंद किया था, एक तरह से कम्मो घबरा कर वहीं जम कर रह गयी ...जहाँ तक उसके बोझिल कदम पहुच पाए थे.

" थोड़ी देर पहले तक तो सब ठीक था, उसने अपने हाथो से मेरा सर भी नीचे दबाया था ...लेकिन अब क्यों गुस्सा हो गया ? " .......कम्मो ने सोफे पर बैठते हुए सोचा, इस वक़्त वह प्यासी भी थी और उदासी भी ...स्वतः ही उसकी आँखों में नमी आने लगी ...... " कहीं मैने कोई जल्दबाज़ी तो नही कर दी " ......अपनी वर्तमान दशा उसे उस पल का एहसास करा गयी, जब वह अपनी मर्ज़ी व पूरी तत्परता से ...लिंग चूसने में जुटी हुई थी ......" क्या जो मैं चाहती हूँ, निकुंज नही चाहता " ......ऐसे काई सवाल उसके मश्तिश्क में भ्रमण करने लगे ...जिमने से एक का भी हल उसके पास मौजूद नही था.

वहीं बाथ - रूम के अंदर जाते ही निकुंज ने पेशाब करनी शुरू कर दी ...वह रात भर से तड़प रहा था, चाहत तो उसकी कयि बार हुई थी की थोड़ी सी हिम्मत कर के बाथ - रूम तक चला जाए ...परंतु उसके ढीले बदन ने रात भर उसने उठने क्या ...हिलने तक नही दिया था.

कम्मो का बाथ - रूम जाना हुआ और ठीक उसी वक़्त निकुंज की नींद भी खुल गयी थी ...या शायद उसे थोड़ी देर और वही सपना देखना था, जो कम्मो उसे, उसका लिंग चूस कर दिखा रही थी ...यदि वह फोन उठाने की गर्ज से अपनी ज़ोरदार चुसाई ना रोकती ...निकुंज कतयि नींद से बाहर ना आ पाता, उसे तो बस इतना भान हो रहा था ...जैसे कोई शॅक्स उसे, उसके लंड में उठते तनाव से मुक्ति दिलाने में ...उसकी मदद कर रहा हो.

जब वह नींद से बाहर आया उसे अपनी नग्नता पर अचंभा हुआ और उससे ज़्यादा हैरत तब हुई ...जब उसने अपने लंड पर गीलापन महसूस किया, उसने फॉरन होश में आते हुए अपनी नज़र पूरे कमरे में दौड़ाई और फिर तेज़ी से फ्लोर पर पड़ी अपनी अंडरवेर - शॉर्ट्स पहेन कर वापस बेड पर बैठ गया ....... " अच्छा हुआ मोम अभी कमरे में नही हैं, वरना उन्हे दुख होता कि मैं नींद में भी मूठ मारे जा रहा हूँ " ......उसका सर तो रात में ही झुक गया था ...जो सुबह भी नही उठ पाया.


(¨`·.·´¨) Always
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10-03-2018, 03:53 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
इसी बीच कम्मो बाथ - रूम से बाहर निकली और फिर वही हुआ जो आप पढ़ चुके हैं.

पेशाब से मुक्ति पा कर निकुंज ने अपने दैनिक कार्य आरंभ कर दिए ...उसके लंड में तनाव आ गया, मूत भी निकला था ...लेकिन उसे इस बात से कोई खुशी नही महसूस हो पा रही थी, बार - बार उसका ध्यान बस इस बात पर चला जाता ....... " मैं कितना पापी बेटा हूँ !!! अपनी प्यारी और भोली मा को कितना विवश कर दिया था मैने, वह कितना प्रेम करती है मुझसे और मैं उससे अपना ....छीईईइ !!! " .......निकुंज पॉट पर बैठा बस खुद को कोसने में मगन हो गया ...... " ऐसी मा किसी की नही होगी, जो अपने बेटे के लिए इस हद्द तक टूट जाए ..कहाँ मैने मोम को हमेशा व्यवस्थित कपड़ो में देखा था, लेकिन मेरी चोट के चलते मेरे लंड को खड़ा करने के लिए ..वह कयि बार नग्न हुई, आख़िर कार जब सफलता नही मिली ..मोम को विवश हो कर मेरा लंड चूसना ही पड़ा और उस पर भी मैने उन्हे दो बार अपनी तरफ से टोका ..छीईइ !!! लानत है मुझ पर " ......यह सोचते वक़्त निकुंज को रोना आ गया लेकिन उसने अपने आँसू नही बहने दिए ..... " सिर्फ़ मेरे रोने से कुछ नही होगा ..मुझे प्राशयाचित करना पड़ेगा और इसका एक ही उपाए है, मैं मोम से दूरी बना लूँगा ..उसने बातें कम करूँगा और जितना हो सकेगा उनकी नज़रो के सामने अपना पापी चेहरा नही आने दूँगा " ......इतना प्रण कर वह बाथ - रूम से बाहर निकल आया.

" आप नहा लीजिए ..हमे आधे घंटे से हॉस्पिटल पहुचना है और हम आज ही रघु को लेकर मुंबई वापस निकल जाएँगे " .....निकुंज ने भर्राई गले से कहा और खुद के कपड़े ले कर बाथ - रूम में वापस चला गया ...अगले 5 मिंट से ज़्यादा का वक़्त नही लिया उसने और वहीं से तैयार हो कर उतनी ही तेज़ी से ...कमरे से बाहर भी निकल गया.

कम्मो भी सोफे से उठ कर हौले - हौले कदमो से बाथ - रूम पहुचि और जल्द ही दोबारा उसी लिबास को धारण कर कमरे से बाहर निकल गयी.

होटेल के नीचे निकुंज सफ़ारी में बैठा उसकी मा के आने का इंतज़ार कर रहा था और कम्मो के आते ही वे दोनो हॉस्पिटल जाने के लिए आगे बढ़ गये.

चलती कार में निकुंज ने एक - बार भी अपनी मा की तरफ निगाह नही डाली, बस अपना सारा ध्यान रोड पर केंद्रित किए ड्राइव करता रहा ...जब कम्मो उसके इस रूखे बर्ताव से अत्यधिक तंग गयी ..तब उसके मश्तिश्क में फिर से द्वन्द शुरू हो गया.

" ये ऐसे रिक्ट क्यों कर रहा है जैसे हमारे बीच कोई बहुत बड़ा पाप हो गया हो ..अरे !!! मा हू इसकी ..लंड चूस भी लिया तो क्या ग़लत किया, नीमा तो रोज़ाना चूस्ति है और तो और वह चुदवाने भी लगी है अपने बेटे से ..मैने तो फिर भी इसके इलाज के रूप में ऐसा किया था " ......कम्मो ने क्रोध में बढ़ते हुए सोचा ...... " और मैं अकेली ऐसी मा नही जिसने यह किया होगा, फिर क्यों ये मूँह फुलाए बैठा है ..बस मेरी ग़लती इतनी रही कि मैने बहुत ज़्यादा प्यार कर लिया इससे, अरे !!! मैं भी तो औरत हूँ ..मेरी भी कयि लालसाएँ हैं, सबसे बड़ी बात ..लाख मनाने के बावजूद भी जो सुख मैने कभी अपने पति को नही दिया, वह मैने इसे दिया ..मैं तो वापस भी लौट रही थी, पर इसने खुद नही लौटने दिया ..अब जब मुझे इससे अत्यधिक प्रेम हो गया है, तब क्यों ये ऐसी बातें सोच रहा है " ......कम्मो ने एक नज़र निकुंज पर डाली लेकिन हालात पहले जैसे रहे ....... " देखो !!! जान कर भी अंजान बना बैठा है ..मैं ग़लत नही, ग़लत ये खुद है ..पहले मुझसे ग़लती करवाई, मुझे नग्न होने पर मजबूर किया और जब मैने अपनी ग़लती को सुधारा तो अब इसके भाव बढ़ रहे हैं ..इतना सब होने के पश्चात यदि मेरी कुछ नयी इक्छाये पैदा हो गयी हैं, तो क्या ग़लत है ..मैं कोई चुदाई थोड़ी करवाना चाहती हू इससे, मैं तो चाहती हूँ अब यह मेरा बेटा नही दोस्त बने ..मैं जो भी कहु मेरी सुने, मुझे छेड़े ..परेशान करे, मुझे बेहद प्यार करे, अपना वक़्त दे ..हां !!! मानती हूँ, रोमांच के वशीभूत बहेक कर मैने दोबारा अपनी मर्ज़ी से इसका लंड चूसा ..तो इसमें इसका क्या बिगाड़ दिया, मैं उसे काट कर तो अपने पास रखने नही वाली ..भले शादी के बाद इसके लंड के ऊपर तनवी का हक़ होगा, पर मैं बहकी क्यों ..अरे !!! इतना झुकाने के बाद तो मेरी बात समझनी चाहिए थी ....मैने कभी कोई शिक़ायत नही की ऊपर वाले से, हर दुख और ज़ुल्म से कर भी कभी उदास नही हुई और अब जब मेरी उदासी छ'टनी चाहिए ..तब यह मेरे साथ ऐसा कर रहा है " ......सोचते - सोचते कम्मो की आँखों की किनोरे गीली होने लगी ...... " मुझे सब ने धोखा दिया, एक आस थी कि मेरा बेटा मेरे साथ है, लेकिन अब मैं कहाँ जाउ ..पिछे हट कर भी क्या फ़ायदा, मैने तुझसे बहुत सी आशायें लगा रखी थी निकुंज ..पर तूने मेरे पूरे विश्वास की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी, तू क्या सोचता है तेरी मा बाज़ारू है ..जो यूज़ किया और छोड़ दिया, अरे !!! मुझ जैसी मा तुझे 7 जन्मो में नही मिलेगी लेकिन मैं तो ऊपर वाले से हमेशा यही प्रार्थना करूँगी, जब भी मेरी कोख भरे ..उसमें से तू ही बाहर निकले " ......कम्मो का सिसकना शुरू हुआ और उनकी कार हॉस्पिटल की पार्किंग में जा कर खड़ी हो गयी.

बेहद टूट जाने पर कम्मो को रघु से मिलने की भी कोई खुशी नही रही ...वे दोनो जल्द ही उसके कमरे में पहुच गये, वह चेर पर बैठा था ...जैसा की निर्देश मिला था, उसकी दाढ़ी काफ़ी बढ़ी हुई थी ...स्टाफ को सॉफ कहा गया था, उसे शेव्ड रहना कतयि पसंद नही ...बदन पर हॉस्पिटल के कपड़े और उसका सर चेर स्टॅंड के साथ बाँधा गया था.

" जी आप बिल्कुल ले जा सकते हैं इसे ...मैं कुछ ज़रूरी बातें बता दूँगा, बस उनका ख़याल रखें ...बाकी सच कहूँ तो मैं भी यही चाहता था, इसे फेमिलियर एन्वाइरन्मेंट की सख़्त ज़रूरत है ..अगर फ्यूचर में कभी सही होगा, तो उसमें आप सब का योगदान प्रमुख रहेगा " .....ड्र. शर्मा इतना कह कर वॉर्ड से बाहर जाने लगे और अपने साथ उन्होने कम्मो को भी आने को कहा.

" मिसेज़. चावला !!! चूँकि आप घर की बड़ी हैं, कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान आप ही रख सकती हैं ..इसी लिए मैने निकुंज को यहाँ नही बुलाया " ......ड्र. शर्मा ने अपनी चेर पर बैठते हुए कहा.

" जी कहिए " ......कम्मो ने जवाब दिया पर उसकी आवाज़ में उतना दम नही था.

" जी थॅंक्स !!! मैं डाइरेक्ट मुद्दे पर आता हूँ ...रघु की बॉडी का कोई भी पार्ट वर्क नही करता, यह आप जानती हैं ..तो आप को या परिवार के अन्य सदस्यो को दिन - रात इसका ध्यान रखने की ज़रूरत है, वह पूरी तरह से आप सब के ऊपर आश्रित रहेगा ..गर्मियाँ ज़ोरो पर हैं, दिन में दोनो टाइम आप इसे ज़रूर नहलवाएँ ..साथ ही बड़ी बारीकी से इसके प्राइवेट पार्ट्स, जहाँ अक्सर गंदगी ज़्यादा रहती है ..हमेशा सॉफ और सूखे रखें ताकि कोई इन्फेक्षन उन्हे ना घेरे, इसके कपड़े नियमित बदलें ..बाकी मेडिकल संबंधी जितनी भी दिक्कतें हैं, मुंबई में भी हल हो जाएँगी ..आप के घर पर साप्ताह में दो बार वहाँ की ब्रांच से नर्स आ जाया करेगी ..मैं समझता हूँ आप को बड़े सैयम से काम लेना पड़ेगा, वादा तो नही करता पर मेरा अनुभव कहता है, वह ज़रूर ठीक होगा ..बेस्ट ऑफ लक मिसेज़. चावला, आप के बेटे को अब उसके परिवार का प्यार ही दोबारा से जीवित कर सकता है " .......इतनी समझाइश देने के बाद ड्र. शर्मा चुप हो गये और रघु के हॉस्पिटल छोड़ने के मैन दस्तावेज़ो पर दस्तख़त करने लगे.

" हम इसे कब तक ले जा सकते हैं ? " ......कम्मो ने पूछा साथ ही वह अपने मन में कुछ प्रण भी करने लगी ..... " निकुंज से नाराज़ हूँ तो क्या हुआ, मैं रघु को कोई कष्ट नही होने दूँगी ..हर हाल में उसका ख़याल रखूँगी, अगर मा अपने बच्चों का ध्यान नही रख पाई ..तो उसके मा होने पर लानत है " ......वह फिर से जीवित हो उठी, रघु भी उसे कम प्रिय नही था ...लेकिन वह चाह कर भी कभी उसके लिए कुछ कर नही पाई थी ....... " अब करूँगी ..मेरा बेटा ज़रूर ठीक होगा "

" चाहें तो 2 घंटे बाद ले जा सकते हैं ..बस एक लास्ट आंड; फाइनल चेक - अप करना चाहता हूँ, उसके बाद मैं निकुंज को कॉल कर दूँगा " ......इतना बोलने और सुनने के बाद दोनो चेंबर से बाहर आए ...ड्र. शर्मा ने निकुंज को भी कुछ हिदायतें दी और फिर दोनो मा बेटे सामान पॅक करने की गरज से वापस होटेल पहुच गये ..
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10-03-2018, 03:53 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
पापी परिवार--44

निकुंज जब तक कमरे के अंदर फैला सामान पॅक करने लगा ...कम्मो बाथ - रूम के अंदर चली गयी, उसके पास तो सिवाए छोटे से हॅंड बॅग के कुछ और नही था ...बाथ - रूम के अंदर जाने के बाद उसने हॅंगर पर टँगे सारे कपड़ो को समेट लिया, जिनमें उसकी पुरानी साड़ी, मॅचिंग के अन्य कपड़े और ख़ास बेटे का वा कुर्ता था ...जो उसके भारी - भरकम सुडोल बदन पर बीती रात शुशोभित हुआ था, इसके बाद वह पलट कर बाहर आने लगी तभी उसकी नज़र फ्लोर पर पड़ी अपनी गीली और पेशाब से तर पैंटी पर गयी ...उसने कोई देरी नही की और बिना किसी घिंन के, दोबारा से उसी गंदी पैंटी को अपनी कमर पर चढ़ा लिया.

बाहर निकल कर उसने देखा निकुंज लगभग सारा सामान पॅक कर चुका था ...कम्मो ने उसका कुर्ता देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया और बिना कोई भाव दिए, कुर्ता पकड़ा कर अपनी साड़ी की तय बनाने लगी ...अब वे दोनो फ्री थे हॉस्पिटल वापस जाने के लिए, पर उन्हें इंतज़ार था ड्र. शर्मा के कॉल का ...जो निकुंज के पास अब तक नही आया था.

वक़्त बिताने के लिए कम्मो थोड़ी देर बेड पर लेट गयी और निकुंज सोफे पर बैठ गया ...दोनो चुप थे, लेकिन उनके मन अशांत थे ...वे चाहते थे कुछ बात तो उनके दरमियाँ हो, लेकिन क्या ...बस यही ग्यात नही हो पा रहा था.

कमर पर लिपटी गीली कछि पहेन'ने के बाद से ही कम्मो बड़ा अनकंफर्टबल महसूस कर रही थी, रह - रह कर उसकी योनि और उसके आस पास के एरिया में खुजली का अनुभव हो रहा था ...लेकिन वह खुजली भी उसे बहुत सुकून पहुचा रही थी, एक तो कछि का गीलापन और साथ ही उसका, कम्मो की गरम वा धधकति योनि पर बुरी तरह से चिपक जाना ...उसे आनंद से भरने लगा था, उसे सॉफ महसूस हो रहा था उसकी योनि में बेहद सूजन आ गयी है ...योनि के होंठ और भज्नासे में भी काफ़ी दर्द उठ रहा है, वजह सॉफ थी ...ना तो वह इन दो दिनो में एक बार भी खुल कर झड़ी थी और ना ही उसने अपनी खराब हालत पर इतना गौर कर पाया था ...वह अपने बेटे को कतयि अपनी कामुकता का भान नही कराना चाहती थी और शायद इसीलिए अब तक उसके मन में बेटे के साथ संसर्ग स्थापित करने की लालसा का जनम नही हो पाया था.

" जब मैने कोई ग़लती की ही नही, तो स्वीकारू क्यों ..जो कुछ हुआ उसमें मेरी निकुंज की भलाई शामिल थी, लेकिन बदले में मैने क्या पाया ..तिरस्कार, उसका रूठना ..उसकी नाराज़गी " ......बेड पर लेटे - लेटे वा अपनी चोर नज़रो से बेटे की तरफ देखने लगी थी, जो अपनी आँखें बंद किए बैठा हुआ था ...... " बात तो तब होती जब निकुंज मुझे समझता, क्या एक मा कभी अपने बेटे की तरफ आकर्षित नही हो सकती ..ज़रूर हो सकती है, आख़िर उसका बेटा होने से पहले वह एक मर्द है और उसकी मा होने से पहले वह स्त्री एक औरत ..अब जो कुछ अंजाने में हो गया, क्या उसे इतनी जल्दी अपने दिमाग़ से बाहर किया जा सकता है ..कुछ कम भी तो नही हुआ, जो मैने कभी सपने में भी नही सोचा था ..उसे करने पर विवश हुई, हां !!! माना मैं अभी भी उस हादसे को नही भुला पाई हूँ ..अपना मन नही बदल पा रही, मैं चाह रही हूँ, वह हादसा दोबारा हो और मुझे फिर से विवश होना पड़ जाए ..आख़िर इसमें ग़लत क्या है, ऊपर वाले ने उत्तेजना चीज़ ही ऐसी बनाई है ..जो हर मर्यादा, हर पवित्र रिश्ते की सीमा को लाँघने तैयार रहती है ..खेर जब तक मैं विवश नही हुई थी तब तक क्या मेरा मन इसी व्याकुलता से भरा रहता था ..नही !!! मैने एक पल को भी अपने बेटे के बारे में ग़लत सोच नही रखी, पर अब हालात बदल चुके हैं ..मैं वह कर चुकी हूँ जिसकी छाप सदैव मेरे मश्तिश्क में छायि रहेगी ..मैं चाह कर भी उसके प्यारे व नवजवान सुंदर लिंग को भुला नही पा रही हूँ और मन कर रहा है ..अभी सारा सच निकुंज पर बयान कर दूं " ......कम्मो पागल होने लगी, जाने क्या - क्या सोचने में व्यस्त हो गयी थी .......
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10-03-2018, 03:53 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
" अब दूसरा पहलू :- अभी मेरी योनि में दर्द है, सूजन है ..मैं चाहती हूँ मुझे इस असहनीय पीड़ा से फॉरन मुक्ति मिल जाए और यदि मैं इसके लिए अपने बेटे का सहारा लूँ ..क्यों नही ले सकती, आख़िर मैने भी तो उसके दर्द का निवारण किया था ..मैं यह कतयि नही चाहती वह अपना लिंग इसमें प्रवेश करवा कर अपनी मा की पीड़ा का अंत करे ..कम - से - कम जो क्रिया मैने उसके लिंग के साथ की थी, वह तो करवा ही सकती हूँ ..फिर देखूँगी !!! एक बेटे के लिंग में तनाव आता है या नही ..मा की योनि क्या दूसरी योनियों से भिन्न है, नही है !!! जिस तरह इस वक़्त मैं आकर्षित हूँ ..वह भी खुद पर काबू नही रख पाएगा और क्या पता ज़बरदस्ती अपनी मा को चोद भी डाले ..कहने का तात्पर्य केवल इतना ही है, मैं ग़लत नही हूँ " .....कहाँ कुछ दिन पहले तक कम्मो को एहसास ही नही था कि वह एक औरत है ...शायद इसीलिए उसका पति भी उससे दूरी बनाए रखता था, लेकिन आज जैसे उसका मन रोमांच से भरता जा रहा था ...कितना नीचे गिर चुकी थी वह, उसकी मनोदशा बिल्कुल नीमा जैसे हो गयी थी ...जिसने उसके अंदर भी काफ़ी सैलाब उमड़ा दिए थे, वह सही या ग़लत में अंतर नही कर पा रही थी ...उसे तो बस अथाह प्रेम करना था, वापस पाना था, फिर चाहे इसके लिए वह रंडी ..घोर पापिन तक बन'ने तैयार थी.

" निकुंज !!! " ......बेड पर बैठते हुए उसने अपने बेटे को आवाज़ दी, उसके भारी गले से निकली ध्वनि में एक तरह के अपवाद शामिल था.

" जी " ......कुछ पल बाद निकुंज ने अपनी आँखें खोली और जवाब दिया, लेकिन उसकी आँखों की पुतलियों की थिरकन ...एक बार भी अपनी मा के चेहरे पर नही टिक पाई.

" जो कुछ हुआ !!! उस बात का जिकर घर पर किसी से मत करना " .....कम्मो ने अपने मन की पीड़ा को दर्शाते हुए कहा.

" जी " ......एक बार फिर निकुंज के मूँह से वही शब्द दोबारा निकला ...शायद इसके अलावा वह ओर कहता भी क्या.

" तनवी से भी नही !!! " .....कम्मो ने ठीक उसी लहजे में कहा, लेकिन अपनी बहू ...बेटे की होने वाली धरम - पत्नी का नाम ज़ुबान पर आते ही उसके दिल में सैकड़ो सूइयां चुभने लगी ...उसे अपना दिल जलता हुआ सा प्रतीत हुआ, लगा जैसे वह अपनी किसी ख़ास दुश्मन का नाम ले रही है और जो प्यार उसे अपनी होने वाली बहू से अब तक था ...एक पल में छ्ट कर क्रोध में भर उठा.
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10-03-2018, 03:53 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
जब निकुंज ने कोई जवाब नही दिया तब कम्मो फिर से बोली ...... " पत्नी मिल जाने के बाद बेटा अपनी मा तक को भूल जाता है, कहीं ऐसा ना हो ..प्रेमवश तू उसे अपनी मा की करतूत बता दे " ......कम्मो की इस बात का सीधा असर निकुंज के टूटे दिल पर हुआ, लगा जैसे कोई खंजर बेरहमी से उसके सीने में धस्ता जा रहा हो और वह उसे रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित होने लगा हो ...फॉरन उसके दिल में आया, अभी अपनी मा के पवित्र चर्नो में गिर जाए ...अपने किए की माफी माँगे, गिड़गिडाए ...पर ऐसा कुछ करने की हिम्मत उसके अंदर नही आ सकी और वह मन मसोस कर रह गया.

" बोल ना बेटा !!! नही बताएगा ना ? " ......यहाँ कम्मो उसके मार्मिक दिल के तार छेड़ती रही और निकुंज छिड़वाता रहा, आख़िरकार जब उससे सहन नही हो पाया तब इस बार भी वा अपने जवाब में ...... " जी " ..... कहते हुए सोफे से उठ खड़ा हुआ.

" हमे निकलना चाहिए ..आप कार तक पहुचो, मैं रिसेप्षन पर पेमेंट कर के आता हूँ " ......फॉरन वह अपना बॅग लेकर कमरे से बाहर निकल गया, वह जानता था कुछ पल बाद वह ज़रूर रोने लगता ...या अपनी मा से लिपट जाता, उससे अपने गुनाह की माफी माँगता, लेकिन वह नही चाहता था कि उसकी मा का दिल ओर दुखे ...उसे बीता हुआ घ्रानित पल वापस याद आए, शरम का अनुभव हो ...... " यादें भुलाने में वक़्त तो लगता है, सब ठीक हो जाएगा " ......यही सोचता हुआ वह रिसेप्षन तक पहुच गया और फाइनल पेमेंट करने के बाद दोनो हॉस्पिटल के लिए निकल पड़े.

हॉस्पिटल पहुचने के बाद उन्हें रघु एक - दम तैयार मिला ...सारे स्टाफ ने उसे गम - गीन विदाई दी, ड्र. शर्मा उनकी कार तक चले आए थे ...उन्होने बड़ी हौसला - अफज़ाइ की और इसके बाद कम्मो सेंटर की सीट पर बैठ गयी, रघु का सर उसकी गोद में था ...आख़िरी शुक्रिया अदा कर निकुंज ने सफ़ारी में गियर डाला और वे तीनो अपने घर जाने के लिए निकल पड़े.
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10-03-2018, 03:54 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
निकुंज काफ़ी ध्यानपूर्वक ड्राइव कर रहा था, अब उसकी मा के अलावा उसका भाई भी उनके साथ था ...सड़क के गड्ढो को देखने में वह पूरी तरह से अपना मन केंद्रित कर चुका था.

वहीं कम्मो की मुश्क़िलें लगातार उसे परेशान पर परेशान किए जा रही थी और अब उसे अफ़सोस हो रहा था ...क्यों उसने गंदी पैंटी को अपनी कमर पर चढ़ाया, उसकी स्पंदानशील, रिस्ति योनि सूज कर कचोरी से भी बड़ा आकार ले चुकी थी और रघु का सर उसकी गोद में होने से वह, अपने हाथो का ज़रा भी प्रयोग नही कर सकती थी.

अत्यधिक उठती खुजली ने उसे बार - बार अपनी गान्ड हिलाने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन इससे भी वह कोई राहत ना पा सकी, तक - हार कर उसने अपनी आँखें मूंद ली ताकि अपनी योनि में उठती सरसराहट, तीव्र पीड़ा को भुला सके.

समय तेज़ी से बीत'ता गया और कम्मो सपनो की दुनिया में भ्रमण करने लगी, लेकिन अपने सपनो में काफ़ी हद तक उसने वह देखा ...जो यथार्थ में नही देख पाई थी, या देखने की कल्पना की थी.

.

उसने देखा :-

.

निकुंज के वीर्य से अपना गला तर करने के बाद भी जब वह पूरी लगान से उसकी आँखों में झाँकते हुए, कठोरता के साथ उसका विशाल लॉडा चूस्ति जा रही थी ...उस वक़्त उसके बेटे के सख़्त हाथो का स्पर्श ठीक अपनी मा के मांसल, गद्देदार चूतड़ो पर दबाव दे रहा था ...वह मस्ताते हुए उन्हें अपने पंजो में ज़ोरो से भीचता और फिर अपनी मा की आँखों में देख कर मुस्कुराने लगता, इस तरह अपने चूतड़ मसले जाने का आनंद कम्मो को सीधा अपनी फड़फड़ाती योनि पर महसूस हुआ और अत्यधिक कामोत्तजना में भर कर उसकी आँखें बंद होने लगी, लेकिन निकुंज ने उसे वापस अपनी आँखें खोलने को कहा ..... " मोम !!! प्लीज़ अपनी आँखें खोलो " .....विवशता में भी कम्मो को बहुत मज़ा आ रहा था, उसने अपनी आँखें खोल कर देखा तो उसके बेटे ने उसके मुलायम, दूधिया गालो पर अपने हाथ फेरने शुरू कर दिए ...फॉरन कम्मो के होंठ खुल गये और बेटे का ढीला लिंग पल भर में उसके मूँह से सरक कर बाहर निकल आया ...लेकिन इसके बाद जो हरक़त निकुंज ने की, एहसास मात्र से ही कम्मो की योनि बहने को तैयार हो गयी.

उसके बेटे ने एक हाथ से अपने लिंग को पकड़ कर दोबारा उसे अपनी मा के मूँह में प्रवेश करवाना चाहा ..... " मूँह खोलो मोम !!! बस चूस्ति रहो और कभी ना रुकना " ......सुनकर कम्मो स्तब्ध रह गयी उसे समझ नही आया, निर्लज्जता से अपना मूँह खोले या मना कर दे.

" आप ने मेरी खुशी के लिए क्या कुछ नही किया !!! इसलिए आज से मेरे लंड पर सिर्फ़ आप का हक़ है ..तनवी का नही, आप वाकाई बहुत अच्छा लंड चूस्ति हो " .....बेटे के मूँह से यह शर्मनाक, घ्रानित टिप्पणी सुनकर कम्मो लज्जा से भर उठी, उसका रोम - रोम सिहर उठा, उसकी योनि लावा उगलने को तैयार बैठी थी .....इंतज़ार था तो मात्र एक हल्की सी छेड़ - छाड़ का.

" पहले ..पहले !!! मुझे बाथ - रूम जाना है निकुंज " .......कम्मो ने ऊपर उठते हुए फुफूसाया और बेड से नीचे उतर कर, चलने लगी ...... " चली जाना मोम !!! पर उससे पहले मैं आप की गोद में अपना सर रख कर लेटना चाहता हूँ " .......निकुंज ने उसका हाथ मजबूती से थामते हुए उसे रोक कर कहा, नीचे खड़ी उसकी मा के मंत्रमुग्ध कर देने वाले बेहद गोल - मटोल, भारी - भरकम चूतड़, पूरी तरह से नग्न दिखाई दे रहे थे ...टाइट कुर्ता अब तक उसकी कमर पर लिपटा हुआ था और प्रत्यक्ष रूप से यह नज़ारा देखते हुए निकुंज ने अपने दूसरे हाथ का अंगूठा, मा के चूतड़ो की दरार के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया.
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