rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
06-16-2017, 10:27 AM,
#1
rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
धोबन और उसका बेटा 

चेतावनी ...........दोस्तो ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है 
बात बहुत पुरानी है पर आज आप लोगो के साथ बाटने का मन किया
इसलिए बता रहा हू. हमारा परिवारिक काम धोबी (वाशमॅन) का था
हम लोग एक छ्होटे से गाओं में रहते थे और वाहा गाओं में धोबियों
का एक ही घर है इसीलिए हम लोग को ही गाओं के सारे कपड़े साफ
करने को मिलते थे. मेरे परिवार में मैं मेरी एक बहन और मा
पिताजी है. गाओं के महॉल में लरकियों की कम उमर में शादिया हो
जाती है इसीलिए जैसे ही मेरी बहन की उमर 16 साल की हुई उसकी
शादी कर दी गई और वो पारोष के गाओं में चली गई. पिछले एक
साल से घर में अब्ब में और मेरी मा और बापू के अलावा कोई नही
बचा था मेरी उमर इस समय 15 साल की हो गई थी और मेरा भी
सोलहवा साल चलने लगा था. गाओं के स्कूल में ही पढ़ाई लिखाई
चालू थी. हमारा एक छ्होटा सा खेत था जिस पर पिताजी काम करते
थे और मैं और मा ने कपड़े सॉफ करने का काम सम्भहाल रखा था.
कुल मिला कर हम बहुत सुखी सम्पन थे और किसी चीज़ की दिक्कत
नही थी. मेरे से पहले कपड़े साफ करने में मा का हाथ मेरी बहन
बेटाटी थी मगर अब मैं ये काम करता था. हम दोनो मा बेटे हर
वीक में दो बार नदी पर जाते थे और सफाई करते थे फिर घर
आकर उन कपड़ो की इस्त्री कर के उन्हे गाओं में वापस लौटा कर फिर
से पुराने गंदे कपड़े एकते कर लेते थे. हर बुधवार और शनिवार
को मैं सुबह 9 बजे के समय मैं और मा एक छ्होटे से गढ़े पर
पुराने कपड़े लाद कर नदी की ओर निकल परते. हम गाओं के पास बहने
वाली नदी में कपड़े ना धो कर गाओं से थोरा दूर जा कर सुनसान
जगह पर कपड़े धोते थे क्योंकि गाओं के पास वाली नदी पर साफ
पानी भी नही मिलता था और डिस्टर्बेन्स भी बहुत होता था.

अब मैं ज़रा अपनी मा के बारे में बता दू वो 34-35 साल के उमर की
एक बहुत सुंदर गोरी च्चीती औरत है. ज़यादा लंबी तो नही परन्तु
उसकी लंबाई 5 फुट 3 इंच की है और मेरी 5 फुट 7 इंच की है. मा
देखने मे बहुत सुंदर है. धोबियों में वैसे भी गोरा रंग और
सुंदर होना कोई नई बात नही है. मा के सुंदर होने के कारण गाओं
के लोगो की नज़र भी उसके उपर रहती होगी ऐसा मैं समझता हू. और
शायद इसी कारण से वो कपड़े धोने के लिए सुन-सन जगह पर जाना
ज़यादा पसंद करती थी. सबसे आकर्षक उसके मोटे मोटे चूतर और
नारियल के जैसी स्तन थे. जो की ऐसा लगते थे जैसे की ब्लाउस को
फार के निकल जाएँगे और भाले की तरह से नुकीले थे. उसके चूतर
भी कम सेक्सी नही थे और जब वो चलती थी तो ऐसे मतकते थे की
देखने वाले के उसके हिलते गांद को देख कर हिल जाते थे. पर उस
वक़्त मुझे इन बातो का कम ही ज्ञान था फिर भी तोरा बहुत तो गाओं
के लड़को की साथ रहने के कारण पता चल ही गया था. और जब भी
मैं और मा कपड़े धोने जाते तो मैं बरी खुशी के साथ कपड़े
धोने उसके साथ जाता था.
जब मा कपड़े को नदी के किनारे धोने के लिए बैठती थी तब वो
अपनी सारी और पेटिकोट को घुटनो तक उपर उठा लेती थी और फिर
पिच्चे एक पठार पर बैठ कर आराम से दोनो टाँगे फैला कर जैसा
की औरते पेशाब करने वक़्त करती है कपरो को सॉफ करती थी. मैं
भी अपनी लूँगी को जाँघ तक उठा कर कपड़े साफ करता रहता था. इस
स्थिति में मा की गोरी गोरी टाँगे मुझे देखने को मिल जाती थी और
उसकी सारी भी सिमट कर उसके ब्लाउस के बीच में आ जाती थी और
उसके मोटे मोटे चुचो के ब्लाउस के उपर से दर्शन होते रहते थे.
कई बार उसकी सारी जेंघो के उपर तक उठ जाती थी और ऐसे समय
में उसकी गोरी गोरी मोटी मोटी केले के ताने जैसे चिकनी जाँघो को
देख कर मेरा लंड खरा हो जाता था. मेरे मन में कई सवाल उठने
लगते फिर मैं अपना सिर झटक कर काम करने लगता था. मैं और मा
कपरो की सफाई के साथ-साथ तरह-तरह की गाओं घर की बाते भी
करते जाते कई बार हम उस सुन-सन जगह पर ऐसा कुच्छ दिख जाता
था जिसको देख के हम दोनो एक दूसरे से अपना मुँह च्छुपाने लगते थे.

कपड़े धोने के बाद हम वही पर नहाते थे और फिर साथ लाए हुआ
खाना खा नदी के किनारे सुखाए हुए कपड़े को इक्कथा कर के घर
वापस लौट जाते थे. मैं तो खैर लूँगी पहन कर नदी के अंदर
कमर तक पानी में नहाता था, मगर मा नदी के किनारे ही बैठ
कर नहाती थी. नहाने के लिए मा सबसे पहले अपनी सारी उतरती थी
फिर अपने पेटिकोट के नारे को खोल कर पेटिकोट उपर को सरका कर
अपने दाँत से पाकर लेती थी इस तरीके से उसकी पीठ तो दिखती थी
मगर आगे से ब्लाउस पूरा धक जाता था फिर वो पेटिकोट को दाँत से
पाकरे हुए ही अंदर हाथ डाल कर अपने ब्लाउस को खोल कर उतरती थी
और फिर पेटिकोट को छाति के उपर बाँध देती थी जिस से उसके
चुचे पूरी तरह से पेटिकोट से ढक जाते थे और कुच्छ भी
नज़र नही आता था और घुटनो तक पूरा बदन ढक जाता था. फिर वो
वही पर नदी के किनारे बैठ कर एक बारे से जाग से पानी भर भर
के पहले अपने पूरे बदन को रगर- रगर कर सॉफ करती थी और
साबुन लगाती थी फिर नदी में उतर कर नहाती थी. मा की देखा
देखी मैने भी पहले नदी के किनारे बैठ कर अपने बदन को साफ
करना सुरू कर दिया फिर मैं नदी में डुबकी लगा के नहाने लगा.
मैं जब साबुन लगाता तो मैं अपने हाथो को अपने लूँगी के घुसा के
पूरे लंड आंड गांद पर चारो तरफ घुमा घुमा के साबुन लगा के
सफाई करता था क्यों मैं भी मा की तरह बहुत सफाई पसंद था.
जब मैं ऐसा कर रहा होता तो मैने कई बार देखा की मा बरे गौर
से मुझे देखती रहती थी और अपने पैर की आरिया पठार पर धीरे
धीरे रगर के सॉफ करती होती. मैं सोचता था वो सयद इसलिए
देखती है की मैं ठीक से सफाई करता हू या नही इसलिए मैं भी
बारे आराम से खूब दिखा दिखा के साबुन लगता था की कही दाँत ना
सुनने को मिल जाए की ठीक से सॉफ सफाई का ध्यान नही रखता हू
मैं. मैं अपने लूँगी के भीतर पूरा हाथ डाल के अपने लौरे को
अcचे तरीके से साफ करता था इस काम में मैने नोटीस किया कई
बार मेरी लूँगी भी इधर उधर हो जाती थी जससे मा को मेरे लंड की
एक आध जहलक भी दिख जाती थी. जब पहली बार ऐसा हुआ तो मुझे
लगा की शायद मा डातेगी मगर ऐसा कुच्छ नही हुआ. तब निश्चिंत हो
गया और मज़े से अपना पूरा ढयन सॉफ सफाई पर लगाने लगा.
-
Reply
06-16-2017, 10:27 AM,
#2
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
मा की सुंदरता देख कर मेरा भी मन कई बार ललचा जाता था और
मैं भी चाहता था की मैं उसे साफाई करते हुए देखु पर वो ज़यादा
कुच्छ देखने नही देती थी और घुटनो तक की सफाई करती थी और फिर
बरी सावधानी से अपने हाथो को अपने पेटिकोट के अंदर ले जा कर
अपनी च्चती की सफाई करती जैसे ही मैं उसकी ओर देखता तो वो अपना
हाथ च्चती में से निकल कर अपने हाथो की सफाई में जुट जाती
थी. इसीलिए मैं कुछ नही देख पता था और चुकी वो घुटनो को
मोड़ के अपने छाति से सताए हुए होती थी इसीलये पेटिकोट के उपर
से छाति की झलक मिलनी चाहिए वो भी नही मिल पाती थी. इसी
तरह जब वो अपने पेटिकोट के अंदर हाथ घुसा कर अपने जेंघो
और उसके बीच की सफाई करती थी ये ध्यान रखती की मैं उसे देख
रहा हू या नही. जैसे ही मैं उसकी ओर घूमता वो झट से अपना हाथ
निकाल लेती थी और अपने बदन पर पानी डालने लगती थी. मैं मन
मसोस के रह जाता था. एक दिन सफाई करते करते मा का ध्यान शायद
मेरी तरफ से हट गया था और बरे आराम से अपने पेटिकोट को अपने
जेंघो तक उठा के सफाई कर रही थी. उसकी गोरी चिकनी जघो को
देख कर मेरा लंड खरा होने लगा और मैं जो की इस वक़्त अपनी
लूँगी को ढीला कर के अपने हाथो को लूँगी के अंदर डाल कर अपने
लंड की सफाई कर रहा था धीरे धीरे अपने लंड को मसल्ने लगा.
तभी अचानक मा की नज़र मेरे उपर गई और उसने अपना हाथ निकल
लिया और अपने बदन पर पानी डालती हुई बोली "क्या कर रहा है जल्दी
से नहा के काम ख़तम कर" मेरे तो होश ही उर गये और मैं जल्दी
से नदी में जाने के लिए उठ कर खरा हो गया, पर मुझे इस बात
का तो ध्यान ही नही रहा की मेरी लूँगी तो खुली हुई है और मेरी
लूँगी सरसारते हुए नीचे गिर गई. मेरा पूरा बदन नंगा हो गया और
मेरा 8.5 इंच का लंड जो की पूरी तरह से खरा था धूप की रोशनी
में नज़र आने लगा. मैने देखा की मा एक पल के लिए चकित हो
कर मेरे पूरे बदन और नंगे लंड की ओर देखती रह गई मैने जल्दी
से अपनी लूँगी उठाई और चुप चाप पानी में घुस गया. मुझे बरा
डर लग रहा था की अब क्या होगा अब तो पक्की डाँट परेगी और
मैने कनखियो से मा की ओर देखा तो पाया की
वो अपने सिर को नीचे किया हल्के हल्के मुस्कुरा रही है और अपने
पैरो पर अपने हाथ चला के सफाई कर रही है. मैं ने राहत की
सांश ली. और चुप चाप नहाने लगा. उस दिन हम जायदातर चुप चाप
ही रहे. घर वापस लौटते वक़्त भी मा ज़यादा नही बोली.

दूसरे दिन से मैने देखा की मा मेरे साथ कुछ ज़यादा ही खुल कर
हँसी मज़ाक करती रहती थी और हमरे बीच डबल मीनिंग में भी
बाते होने लगी थी. पता नही मा को पता था या नही पर मुझे बरा
मज़ा आ रहा था. मैने जब भी किसी के घर से कापरे ले कर वापस
लौटता तो मा बोलती "क्यों राधिया के कापरे भी लाया है धोने के
लिए क्या". तो मैं बोलता, `हा', इसपर वो बोलती "ठीक है तू धोना
उसके कापरे बरा गंदा करती है. उसकी सलवार तो मुझसे धोइ नही
जाती". फिर पूछती थी "अंदर के कापरे भी धोने के लिए दिए है
क्या" अंदर के कपरो से उसका मतलब पनटी और ब्रा या फिर अंगिया से
होता था, मैं कहता नही तो इस पर हसने लगती और कहती "तू लरका
है ना शायद इसीलिए तुझे नही दिया होगा, देख अगली बार जब मैं
माँगने जाऊंगी तो ज़रूर देगी" फिर अगली बार जब वो कापरे लाने जाती तो
सच मुच में वो उसकी पनटी और अंगिया ले के आती थी और
बोलती "देख मैं ना कहती थी की वो तुझे नही देगी और मुझे दे
देगी, तू लरका है ना तेरे को देने में शरमाती होंगी, फिर तू तो अब
जवान भी हो गया है" मैं अंजान बना पुछ्ता क्या देने में
शरमाती है राधिया तो मुझे उसकी पनटी और ब्रा या अंगिया फैला कर
दिखती और मुस्कुराते हुए बोलती "ले खुद ही देख ले" इस पर मैं
शर्मा जाता और कनखियों से देख कर मुँह घुमा लेता तो वो
बोलती "अर्रे शरमाता क्यों है, ये भी तेरे को ही धोना परेगा" कह
के हसने लगती. हलकी आक्च्युयली ऐसा कुच्छ नही होता और जायदातर
मर्दो के कापरे मैं और औरतो के मा ही धोया करती थी क्योंकि उस
में ज़यादा मेहनत लगती थी, पर पता नही क्यों मा अब कुछ दीनो से
इस तरह की बातो में ज़यादा इंटेरेस्ट लेने लगी थी. मैं भी चुप
चाप उसकी बाते सुनता रहता और मज़े से जवाब देता रहता था.
जब हम नदी पर कापरे धोने जाते तब भी मैं देखता था की मा अब
पहले से थोरी ज़यादा खुले तौर पर पेश आती थी. पहले वो मेरी
तरफ पीठ करके अपने ब्लाउस को खोलती थी और पेटिकोट को अपनी
च्चती पर बाँधने के बाद ही मेरी तरफ घूमती थी, पर अब वो इस
पर ध्यान नही देती और मेरी तरफ घूम कर अपने ब्लाउस को खोलती
और मेरे ही सामने बैठ कर मेरे साथ ही नहाने लगती, जब की पहले
वो मेरे नहाने तक इंतेज़ार करती थी और जब मैं थोरा दूर जा के
बैठ जाता तब पूरा नहाती थी.
-
Reply
06-16-2017, 10:28 AM,
#3
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
मेरे नहाते वाक़ूत उसका मुझे घूर्ना
बदस्तूर जारी था और मेरे में भी हिम्मत आ गई थी और मैं भी
जब वो अपने च्चातियों की सफाई कर रही होती तो उसे घूर कर देखता
रहता. मा भी मज़े से अपने पेटिकोट को जेंघो तक उठा कर एक
पठार पर बैठ जाती और साबुन लगाती और ऐसे आक्टिंग करती जैसे
मुझे देख ही नही रही है. उसके दोनो घुटने मूरे हुए होते थे और
एक पैर थोरा पहले आगे पसारती और उस पर पूरा जाँघो तक साबुन
लगाती थी फिर पहले पैर को मोरे कर दूसरे पैर को फैला कर साबुन
लगाती. पूरा अंदर तक साबुन लगाने के लिए वो अपने घुटने मोरे
रखती और अपने बाए हाथ से अपने पेटिकोट को थोरा उठा के या अलग
कर के दाहिने हाथ को अंदर डाल के साबुन लगाती. मैं चुकी थोरी
दूर पर उसके बगल में बैठा होता इसीलिए मुझे पेटिकोट के
अनादर का नज़ारा तो नही मिलता था, जिसके कारण से मैं मन मसोस के
रह जाता था की काश मैं सामने होता, पर इतने में ही मुझे ग़ज़ब
का मज़ा आ जाता था. और उसकी नंगी चिकनी चिकनी जंघे उपर तक
दिख जाती थी. मा अपने हाथ से साबुन लगाने के बाद बरे मग को
उठा के उसका पानी सीधे अपने पेटिकोट के अंदर दल देती और दूसरे
हाथ से साथ ही साथ रगर्ति भी रहती थी. ये इतना जबरदस्त सीन
होता था की मेरा तो लंड खरा हो के फुफ्करने लगता और मैं वही
नहाते नाहटे अपने लंड को मसल्ने लगता. जब मेरे से बर्दस्त नही
होता तो मैं सिडा नदी में कमर तक पानी में उतर जाता और पानी
के अंदर हाथ से अपने लंड को पाकर कर खरा हो जाता और मा की
तरफ घूम जाता. जब वो मुझे पानी में इस तरह से उसकी तरफ घूम
कर नहाते देखती तो वो मुस्कुरा के मेरी तरफ देखती हुई बोलती "
ज़यादा दूर मत जाना किनारे पर ही नहा ले आगे पानी बहुत गहरा है",
मैं कुकछ नही बोलता और अपने हाथो से अपने लंड को मसालते हुए
नहाने की आक्टिंग करता रहता. इधर मा मेरी तरफ देखती हुई अपने
हाथो को उपर उठा उठा के अपने कांख की सफाई करती कभी अपने
हाथो को अपने पेटिकोट में घुसा के च्चती को साफ करती कभी
जेंघो के बीच हाथ घुसा के खूब तेरज़ी से हाथ चलने लगती, दूर
से कोई देखे तो ऐसा लगेगा के मूठ मार रही है और सयद मारती
भी होगी. कभी कभी वो भी खरे हो नदी में उतर जाती और ऐसे
में उसका पेटिकोट जो की उसके बदन चिपका हुआ होता था गीला होने
के कारण मेरी हालत और ज़यादा खराब कर देता था. पेटिकोट
छिपकने के कारण उसकी बरी बरी चुचिया नुमाया हो जाती थी. कापरे
के उपर से उसके बरे बरे मोटे मोटे निपल तक दिखने लगते थे.
पेटिकोट उसके चूटरो से चिपक कर उसके गंद के दरार में फसा
हुआ होता था और उसके बरे बरे चूतर साफ साफ दिखाई देते रहते
थे. वो भी कमर तक पानी में मेरे ठीक सामने आ के खरी हो के
डुबकी लगाने लगती और मुझे अपने चुचियों का नज़ारा करवाती जाती.
मैं तो वही नदी में ही लंड मसल के मूठ मार लेता था. हलकी
मूठ मारना मेरी आदत नही थी घर पर मैं ये काम कभी नही
करता था पर जब से मा के स्वाभाव में चेंज आया था नदी पर
मेरी हालत ऐसे हो जाती थी की मैं मज़बूर हो जाता था.

अब तो घर पर मैं जब भी इस्त्री करने बैठता तो मुझे बोलती
जाती "देख ध्यान से इस्त्री करियो पिच्छली बार शयामा बोल रही थी
की उसके ब्लाउस ठीक से इस्त्री नही थे" मैं भी बोल परता "ठीक है
कर दूँगा, इतना छ्होटा सा ब्लाउस तो पहनती है, ढंग से इस्त्री भी
नही हो पति, पता नही कैसे काम चलती है इतने छ्होटे से ब्लाउस
में" तो मा बोलती "अरे उसकी च्चाटिया ज़यादा बरी थोरे ही है जो वो
बरा ब्लाउस पहनेगी, हा उसकी सास के ब्लाउस बहुत बरे बरे है
बुधिया की च्चती पहर जैसी है" कह कर मा हासणे लगती. फिर मेरे
से बोलती"तू सबके ब्लाउस की लंबाई चौरई देखता रहता है क्या या
फिर इस्त्री करता है". मैं क्या बोलता चुप छाप सिर झुका कर इस्त्री
करते हुए धीरे से बोलता "अर्रे देखता कौन है, नज़र चली जाती
है, बस". इस्त्री करते करते मेरा पूरा बदन पसीने से नहा जाता
था. मैं केवल लूँगी पहने इस्त्री कर रहा होता था. मा मुझे
पसीने से नहाए हुए देख कर बोलती "छ्होर अब तू कुच्छ आराम कर ले
तब तक मैं इस्त्री करती हू," मा ये काम करने लगती. थोरी ही देर
में उसके माथे से भी पसीना चुने लगता और वो अपनी सारी खोल कर
एक ओर फेक देती और बोलती "बरी गर्मी है रे, पता नही तू कैसे कर
लेता है इतने कपरो की इस्त्री मेरे से तो ये गर्मी बर्दस्त नही होती"
इस पर मैं वही पास बैठा उसके नंगे पेट, गहरी नाभि और मोटे
चुचो को देखता हुआ बोलता,
-
Reply
06-16-2017, 10:28 AM,
#4
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
"ठंडा कर दू तुझे"

"कैसे करेगा ठंडा"

"डंडे वाले पंखे से मैं तुझे पंखा झल देता हू", फॅन चलाने
पर तो इस्त्री ही ठंडी पर जाएगी"

"रहने दे तेरे डंडे वाले पँखे से भी कुच्छ नही होने जाने का,
छ्होटा सा तो पंखा है तेरा"

कह कर अपने हाथ उपर उठा कर माथे पर छलक आए पसीने को
पोछती तो मैं देखता की उसकी कांख पसीने से पूरी भीग गई है
और उसके गर्देन से बहता हुआ पसीना उसके ब्लाउस के अंदर उसके दोनो
चुचियों के बीच की घाटी मे जा कर उसके ब्लाउस को भेगा रहा
होता.,,,,,,,,,,, तो
घर के अंदर वैसे भी वो ब्रा तो कभी पहनती नही थी इस कारण से
उसके पतले ब्लाउस को पसीना पूरी तरह से भीगा देता था और, उसकी
चुचिया उसके ब्लाउस के उपर से नज़र आती थी. कई बार जब वो
हल्के रंगा का ब्लाउस पहनी होती तो उसके मोटे मोटे भूरे रंग के
निपल नज़र आने लगते. ये देख कर मेरा लंड खरा होने लगता था.
कभी कभी वो इस्त्री को एक तरफ रख के अपने पेटिकोट को उठा के
पसीना पोच्छने के लिए अपने सिर तक ले जाती और मैं ऐसे ही मौके
के इंतेज़ार में बैठा रहता था, क्योंकि इस वाक़ूत उसकी आँखे तो
पेटिकोट से ढक जाती थी पर पेटिकोट उपर उठने के कारण उसका
टाँगे पूरा जाग तक नंगी हो जाती थी और मैं बिना अपनी नज़रो को
चुराए उसके गोरी चिटी मखमली जाहनघो को तो जी भर के देखता
था. मा अपने चेहरे का पसीना अपनी आँखे बंद कर के पूरे आराम से
पोचहति थी और मुझे उसके मोटे कंडली के ख़भे जैसे जघो को पूरा
नज़ारा दिखती थी. गाओं में औरते साधारणतया पनटी ना पहनती
है और कई बार ऐसा हुआ की मुझे उसके झतो की हल्की सी झलक
देखने को मिल जाती. जब वो पसीना पोच्च के अपना पेटिकोट नीचे
करती तब तक मेरा काम हो चुका होता और मेरे से बर्दस्त करना
संभव नही हो पता मैं जल्दी से घर के पिच्छवारे की तरफ भाग
जाता अपने लंड के कारेपन को थोरा ठंडा करने के लिए. जब मेरा
लंड डाउन हो जाता तब मैं वापस आ जाता. मा पुचहति कहा गया था
तो मैं बोलता "थोरी ठंडी हवा खाने बरी गर्मी लग रही थी"

" ठीक किया बदन को हवा लगते रहने चाहिए, फिर तू तो अभी बरा
हो रहा है तुझे और ज़यादा गर्मी लगती होगी"

" हा तुझे भी तो गर्मी लग रही होगी मा जा तू भी बाहर घूम कर
आ जा थोरी गर्मी शांत हो जाएगी" और उसके हाथ से इस्त्री ले लेता.
पर वो बाहर नही जाती और वही पर एक तरफ मोढ़े ( वुडन प्लांक)
पर बैठ जाती अपने पैरो घुटने के पास से मोर कर और अपने
पेटिकोट को घुटनो तक उठा के बीच में समेत लेती. मा जब भी
इस तरीके से बैठती थी तो मेरा इस्त्री करना मुस्किल हो जाता था.
उसके इस तरह बैठने से उसकी घुटनो से उपर तक की जांगे और
दिखने लगती थी.

"अर्रे नही रे रहने दे मेरी तो आदत पर गई है गर्मी बर्दस्त करने
की"

"क्यों बर्दाश्त करती है गर्मी दिमाग़ पर चाड जाएगी जा बाहर घूम
के आ जा ठीक हो जाएगा"
-
Reply
06-16-2017, 10:28 AM,
#5
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
"जाने दे तू अपना काम कर ये गर्मी ऐसे नही शांत होने वाली, तेरा
बापू अगर समझदार होता तो गर्मी लगती ही नही, पर उसे क्या वो तो
कारही देसी पी के सोया परा होगा" शाम होने को आई मगर अभी तक
नही आया"

"आरे, तो इसमे बापू की क्या ग़लती है मौसम ही गर्मी का है गर्मी तो
लगेगी ही"

"अब मैं तुझे कैसे समझोउ की उसकी क्या ग़लती है, काश तू थोरा
समझदार होता" कह कर मा उठ कर खाना बनाना चल देती मैं भी
सोच में परा हुआ रह जाता की आख़िर मा चाहती क्या है.

रात में जब खाना खाने का टाइम आता तो मैं नहा धो कर किचन
में आ जाता, खाना खाने के लिए. मा भी वही बैठा के मुझे
गरम गरम रोटिया सेक देती जाती और हम खाते रहते. इस समय भी वो
पेटिकोट और ब्लाउस में ही होती थी क्यों की किचन में गर्मी
होती थी और उसने एक छ्होटा सा पल्लू अपने कंधो पर डाल रखा
होता. उसी से अपने माथे का पसीना पोचहति रहती और खाना खिलती
जाती थी मुझे. हम दोनो साथ में बाते भी कर रहे होते.
मैने मज़ाक करते हुए बोलता " सच में मा तुम तो गरम इस्त्री
(वुमन) हो". वो पहले तो कुच्छ साँझ नही पाती फिर जब उसकी समझ
में आता की मैं आइरन इस्त्री ना कह के उसे इस्त्री कह रहा हू तो वो
हसने लगती और कहती

"हा मैं गरम इस्त्री हू", और अपना चेहरा आगे करके बोलती "देख
कितना पसीना आ रहा है, मेरी गर्मी दूर कर दे"

" मैं तुझे एक बात बोलू तू गरम चीज़े मत खाया कर, ठंडी
चीज़ खाया कर"

"अक्चा, कौन से ठंडी चीज़ मैं ख़ौ की मेरी गर्मी दूर हो जाएगी"

"केले और बैगान की सब्जिया खाया कर"

इस पर मा का चेहरा लाल हो जाता था और वो सिर झुका लेती और
धीरे से बोलती " अर्रे केले और बैगान की सब्जी तो मुझे भी आक्ची
लगती है पर कोई लाने वाला भी तो हो, तेरा बापू तो ये सब्जिया लाने
से रहा, ना तो उसे केला पसंद है ना ही उसे बैगान"\

"तू फिकर मत कर मैं ला दूँगा तेरे लिए"

"ही, बरा अक्चा बेटा है, मा का कितना ध्यान रक्ता है"

मैं खाना ख़तम करते हुए बोलता, "चल अब खाना तो हो गया ख़तम,
तू भी जा के नहा ले और खाना खा ले", "अर्रे नही अभी तो तेरा बापू
देसी चढ़ा के आता होगा, उसको खिला दूँगी तब खूँगी, तब तक नहा
लेती हू" तू जेया और जा के सो जा, कल नदी पर भी जाना है". मुझे
भी ध्यान आ गया की हा कल तो नदी पर भी जाना है मैं छत पर
चला गया. गर्मियों में हम तीनो लोग छत पर ही सोया करते थे.
ठंडी ठंडी हवा बह रही थी, मैं बिस्तरे पर लेट गया और अपने
हाथो से लंड मसालते हुए मा के खूबसूरत बदन के ख्यालो में
खोया हुआ सपने देखने लगा और कल कैसे उसको बदन को ज़यादा से
ज़यादा निहारँगा ये सोचता हुआ कब सो गया मुझे पता ही नही लगा
-
Reply
06-16-2017, 10:28 AM,
#6
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
सुबह सूरज की पहली किरण के साथ जब मेरी नींद खुली तो देखा एक
तरफ बापू अभी भी लुढ़का हुआ है और मा शायद पहले ही उठ कर जा
चुकी थी मैं भी जल्दी से नीचे पहुचा तो देखा की मा बाथरूम
से आ के हॅंडपंप पर अपने हाथ पैर धो रही थी. मुझे देखते ही
बोली "चल जल्दी से तैयार हो जा मैं खाना बना लेती हू फिर जल्दी से
नदी पर निकाल जाएँगे, तेरे बापू को भी आज शहर जाना है बीज
लाने, मैं उसको भी उठा देती हू". थोरी देर में जब मैं वापस
आया तो देखा की बापू भी उठ चुक्का था और वो बाथरूम जाने की
तैइय्यारी में था. मैं भी अपने काम में लग गया और सारे कपरो
के गत्थर बना के तैइय्यार कर दिया. थोरी देर में हम सब लोग
तैइय्यार हो गये. घर को ताला लगाने के बाद बापू बस पकरने के
लिए चल दिया और हम दोनो नदी की ओर. मैने मा से पुचछा की बापू
कब तक आएँगे तो वो बोली "क्या पता कब आएगा मुझे तो बोला है
की कल आ जौंगा पर कोई भरोसा है तेरे बापू का, चार दिन भी
लगा देगा, ". हम लोग नदी पर पहुच गये और फिर अपने काम में
लग गये, कपरो की सफाई के बाद मैने उन्ह एक तरफ सूखने के लिए
डाल दिया और फिर हम दोनो ने नहाने की तैइय्यारी सुरू कर दी. मा ने
भी अपनी सारी उतार के पहले उसको साफ किया फिर हर बार की तरह
अपने पेटिकोट को उपर चढ़ा के अपनी ब्लाउस निकली फिर उसको साफ
किया और फिर अपने बदन को रगर रगर के नहाने लगी. मैं भी
बगल में बैठा उसको निहारते हुए नहाता रहा बेकयाली में एक दो
बार तो मेरी लूँगी भी मेरे बदन पर से हट गई थी पर अब तो ये
बहुत बार हो चक्का था इसलिए मैने इस पर कोई ध्यान नही दिया,
हर बार की तरह मा ने भी अपने हाथो को पेटिकोट के अंदर डाल
के खूब रगर रगर के नहाना चालू रखा. थोरी देर बाद मैं नदी
में उतर गया मा ने भी नदी में उतर के एक दो डुबकिया लगाई और
फिर हम दोनो बाहर आ गये. मैने अपने कापरे चेंज कर लिए और
पाजामा और कुर्ता पहन लिया. मा ने भी पहले अपने बदन को टॉवेल से
सूखाया फिर अपने पेटिकोट के इज़रबंद को जिसको की वो छाती पर
बाँध के रखती थी पर से खोल लिया और अपने दंटो से पेटिकोट को
पाकर लिया, ये उसका हमेशा का काम था, मैं उसको पठार पर बैठ
के एक तक देखे जा रहा था. इस प्रकार उसके दोनो हाथ फ्री हो गये
थे अब उसने ब्लाउस को पहन ने के लिए पहले उसने अपना बाया हाथ उसमे
घुसाया फिर जैसे ही वो अपना दाहिना हाथ ब्लाउस में घुसने जा
रही थी की पता नही क्या हुआ उसके दंटो से उसकी पेटिकोट च्छुत गई
और सीधे सरसरते हुए नीचे गिर गई. और उसका पूरा का पूरा नंगा
बदन एक पल के लिए मेरी आँखो के सामने दिखने लगा. उसके बरी बरी
चुचिया जिन्हे मैने अब तक कपरो के उपर से ही देखा था और उसके
भारी बाहरी चूतर और उसकी मोटी मोटी जांघे और झाट के बॉल सब एक
पल के लिए मेरी आँखो के सामने नंगे हो गये.
-
Reply
06-16-2017, 10:28 AM,
#7
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
पेटिकोट के नीचे
गिरते ही उसके साथ ही मा भी है करते हुए तेज़ी के साथ नीचे
बैठ गई. मैं आँखे फर फर के देखते हुए गंज की तरह वही पर
खरा रह गया. मा नीचे बैठ कर अपने पेटिकोट को फिर से समेत्टी
हुई बोली " ध्यान ही नही रहा मैं तुझे कुच्छ बोलना चाहती थी और
ये पेटिकोट दंटो से च्छुत गया" मैं कुच्छ नही बोला. मा फिर से
खरी हो गई और अपने ब्लाउस को पहनने लगी. फिर उसने अपने
पेटिकोट को नीचे किया और बाँध लिया. फिर सारी पहन कर वो वही
बैठ के अपने भीगे पेटिकोट को साफ कर के तरय्यर हो गई. फिर हम
दोनो खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद हम वही पेर की च्चव
में बैठ कर आराम करने लगे. जगह सुन सन थी ठंडी हवा बह
रही थी. मैं पेर के नीचे लेते हुए मा की तरफ घुमा तो वो भी
मेरी तरफ घूमी. इस वाक़ूत उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुरहत
पसरी हुई थी. मैने पुचछा "मा क्यों हास रही हो", तो वो बोली "मैं
"झूट मत बोलो तुम मुस्कुरा रही हो"

"क्या करू, अब हसने पर भी कोई रोक है क्या"

"नही मैं तो ऐसे ही पुच्छ रहा था, नही बताना है तो मत बताओ"

"अर्रे इतनी आक्ची ठंडी हवा बह रही है चेहरे पर तो मुस्कान
आएगी ही"

"हा आज गरम इस्त्री (वुमन) की सारी गर्मी जो निकाल जाएगी,"

"क्या मतलब इसरट्री (आइरन) की गर्मी कैसे निकाल जाएगी यहा पर यहा
तो कही इस्त्री नही है"

"अर्रे मा तुम भी तो इस्त्री (वुमन) हो, मेरा मतलब इस्त्री माने औरत
से था"

"चल हट बदमाश, बरा शैतान हो गया है मुझे क्या पता था की तू
इस्त्री माने औरत की बात कर रहा है"

"चलो अब पता चल गया ना"

"हा, चल गया, पर सच में यहा पेर की छाव में कितना अच्छा
लग रहा है, ठंडी ठंडी हवा चल रही है, और आज तो मैने
पूरा हवा खाया है" मा बोली

"पूरा हवा खाया है, वो कैसे"

"मैं पूरी नंगी जो हो गई थी, फिर बोली ही, तुझे मुझे ऐसे नही
देखना चाहिए था,

"क्यों नही देखना चाहिए था"

"अर्रे बेवकूफ़, इतना भी नही समझता एक मा को उसके बेटे के सामने
नंगा नही होना चाहिए था"

"कहा नंगी हुई थी तुम बस एक सेकेंड के लिए तो तुम्हारा पेटिकोट
नीचे गिर गया था" (हालाँकि वही एक सेकेंड मुझे एक घंटे के
बराबर लग रहा था).

"हा फिर भी मुझे नंगा नही होना चाहिए था, कोई जानेगा तो क्या
कहेगा की मैं अपने बेटे के सामने नंगी हो गैट ही"

"कौन जानेगा, यहा पर तो कोई था भी नही तू बेकार में क्यों
परेशन हो रही है"
-
Reply
06-16-2017, 10:28 AM,
#8
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
"अर्रे नही फिर भी कोई जान गया तो", फिर कुच्छ सोचती हुई बोली,
अगर कोई नही जानेगा तो क्या तू मुझे नंगा देखेगा क्या", मैं और
मा दोनो एक दूसरे के आमने सामने एक सूखे चादर पर सुन-सान जगह
पर पेर के नीचे एक दूसरे की ओर मुँह कर के लेते हुए थे और मा की
सारी उसके छाति पर से ढालाक गई थी. मा के मुँह से ये बात सुन
के मैं खामोश रह गया और मेरी साँसे तेज चलने लगी. मा ने मेरी
ओर देखते हुए पुकचा "क्या हुआ, " मैने कोई जवाब नही दिया और
हल्के से मुस्कुराते हुए उसकी छातियो की तरफ देखने लगा जो उसकी
तेज चलती सांसो के साथ उपर नीचे हो रहे थे. वो मेरी तरफ
देखते हुए बोली "क्या हुआ मेरी बात का जवाब दे ना, अगर कोई जानेगा
नही तो क्या तू मुझे नंगा देख लेगा" इस पर मेरे मुँह से कुच्छ नही
निकला और मैने अपना सिर नीचे कर लिया, मा ने मेरी तोड़ी पकर के
उपर उठाते हुए मेरे आँखो में झाँकते हुए पुकचा, "क्या हुआ रे,
बोल ना क्या तू मुझे नंगा देख, लेगा जैसे तूने आज देखा है,"
मैने कहा "है, मा, मैं क्या बोलू" मेरा तो गॅला सुख रहा था, मा
ने मेरे हाथ को अपने हाथो में ले लिया और कहा "इसका मतलब तू
मुझे नंगा नही देख सकता, है ना" मेरे मुँह से निकाल गया

"है मा, छ्होरो ना," मैं हकलाते हुए बोला "नही मा ऐसा नही
है"

"तो फिर क्या है, तू अपनी मा को नंगा देख लेगा क्या"

मैं क्या कर सकता था, वो तो तुम्हारा पेटिकोट नीचे गिर गया
तभी मुझे नंगा दिख गया नही तो मैं कैसे देख पाता,"

"वो तो मैं समझ गई, पर उस वाक़ूत तुझे देख के मुझे ऐसा लगा
जैसे की तू मुझे घूर रहा है.................इसिलिये पुचछा"

"है, मा ऐसा नही है, मैने तुम्हे बताया ना, तुम्हे बस ऐसा लगा
होगा, "

"इसका मतलब तुझे अक्चा नही लगा था ना"

"है, मा छ्होरो", मैं हाथ च्छूराते हुए अपने चेहरे को च्छूपाते
हुए बोला"

मा ने मेरा हाथ नही छ्होरा और बोली "सच सच बोल शरमाता क्यों
है"

मेरे मुँह से निकाल गया "हा अक्चा लगा था", इस पर मा ने मेरे हाथ
को पाकर के सीधे अपनी छाति पर रख दिया, और बोली "फिर से
देखेगा मा को नंगा, बोल देखेगा,"

मेरी मुँह से आवाज़ नही निकाल पा रहा था मैने बरी मुस्किल से अपने
अपने हाथो को उसके नुकीले गुदज छातियों पर स्थिर रख पा रहा
था. ऐसे में मैं भला क्या जवाब देता,
मेरे मुँह से एक क्रहने की सी आवाज़ निकली. मा ने मेरी थोड़ी पकर कर
फिर से मेरे मुँह को उपर उठाया और बोली "क्या हुआ बोल ना शरमाता
क्यों है, जो बोलना है बोल" . मैं कुच्छ ना बोला थोरी देर तक उसके
च्हूचियों पर ब्लाउस के उपार से ही हल्का सा मैने हाथ फेरा. फिर
मैने हाथ खीच लिया. मा कुच्छ नही बोली गौर से मुझे देखती
रही फिर पता ना क्या सोच कर वो बोली "ठीक मैं सोती हू यही पर
बरी आक्ची हवा चल रही है, तू कपरो को देखते रहना और जो सुख
जाए उन्हे उठा लेना, ठीक है" और फिर मुँह घुमा कर एक तरफ सो
गई. मैं भी चुप चाप वही आँख खोले लेता रहा, मा की
चुचियाँ धीरे धीरे उपर नीचे हो रही थी. उसने अपना एक हाथ
मोर कर अपने आँखो पर रखा हुआ था और दूसरा हाथ अपने बगल में
रख कर सो रही थी. मैं चुप चाप उसे सोता हुआ देखता रहा, थोरी
देर में उसकी उठती गिरती चुचियों का जादू मेरे उपर चल गया और
मेरा लंड खरा होने लगा. मेरा दिल कर रहा था की काश मैं फिर
से उन चुचियों को एक बार च्छू लू. मैने अपने आप को गालिया भी
निकाली, क्या उल्लू का पता हू मैं भी जो चीज़ आराम से च्छुने को
मिल रही थी तो उसे च्छुने की बजाए मैं हाथ हटा लिया. पर अब
क्या हो सकता था. मैं चुप चाप वैसे ही बैठा रहा.
-
Reply
06-16-2017, 10:30 AM,
#9
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
कुच्छ सोच
भी नही पा रहा था. फिर मैने सोचा की जब उस वाक़ूत मा ने खुद
मेरा हाथ अपनी चुचियों पर रखा दिया था तो फिर अगर मैं खुद
अपने मन से रखू तो शायद दाँटेगी नही, और फिर अगर दाँटेगी तो बोल
दूँगा तुम्ही ने तो मेरा हाथ उस व्क़ुत पाकर कर रखा था, तो अब मैं
अपने आप से रख दिया. सोचा शायद तुम बुरा नही मनोगी. यही सब
सोच कर मैने अपने हाथो को धीरे से उसकी चुचियों पर ले जा के
रख दिया, और हल्के हल्के सहलाने लगा. मुझे ग़ज़ब का मज़ा आ रहा
था मैने हल्के से उसकी सारी को पूरी तरह से उसके ब्लाउस पर से
हटा दिया और फिर उसकी चुचियों को दबाया. ऊवू इतना ग़ज़ब का मज़ा
आया की बता नही सकता, एकद्ूम गुदाज़ और सख़्त चुचियाँ थी मा की
इस उमर में भी मेरा तो लंड खरा हो गया, और मैने अपने एक हाथ
को चुचियों पर रखे हुए दूसरे हाथ से अपने लंड को मसल्ने लगा.
जैसे जैसे मेरी बेताबी बढ़ रही थी वैसे वैसी मेरे हाथ दोनो
जगहो पर तेज़ी के साथ चल रहे थे. मुझे लगता है की मैने मा
की चुचियों को कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर से दबा दिया था, शायद इसीलिए
मा की आँख खुल गई. और वो एकदम से हर्बराते उठ गई और अपने
अचल को संभालते हुए अपनी चुचियों को ढक लिया और फिर, मेरी
तरफ देखती हुई बोली, "हाय, क्या कर रहा था तू, हाय मेरी तो आँख लग
गई थी" मेरा एक हाथ अभी भी मेरे लंड पर था, और मेरे चेहरे
का रंग उर गया था. मा ने मुझे गौर से एक पल के लिए देखा और
सारा माजरा समझ गई और फिर अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुरहत
बिखेरते हुए बोली "हाय, देखो तो सही क्या सही काम कर रहा था ये
लरका, मेरा भी मसल रहा था और उधर अपना भी मसल रहा था".

फिर मा उठ कर सीधा खरी हो गई और बोली "अभी आती हू" कह कर
मुस्कुराते हुए झारियों की तरफ बढ़ गई. झारियों के पिच्चे जा के
फिर अपने चूटरो को ज़मीन परा सताए हुए ही थोरा आगे सरकते हुए
मेरे पास आई, उसके सरक कर आगे आने से उसके सारी थोई सी उपर हो
गई और उसका आँचल उसकी गोद में गिर गया. पर उसको इसकी फिकर नही
थी. वो अब एक दम से मेरे नज़दीक आ गई थी और उसकी गरम साँसे
मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी. वो एक पल के लिए ऐसे ही मुझे
देखती रही फिर मेरे थोड़ी पाकर कर मुझे उपर उठाते हुए हल्के से
मुस्कुराते हुए धीरे से बोली "क्यों रे बदमाश क्या कर रहा था, बोल
ना क्या बदमसी कर रहा था अपनी मा के साथ" फिर मेरे फूले फूले
गाल पाकर कर हल्के से मसल दिया. मेरे मुँह से तो आवाज़ नही निकाल
रही थी, फिर उसने हल्के से अपना एक हाथ मेरे जाँघो पर रखा और
सहलाते हुए बोली "है, कैसे खरा कर रखा है मुए ने" फिर सीधा
पाजामा के उपर से मेरे खरे लंड जो की मा के जागने से थोरा ढीला
हो गया था पर अब उसके हाथो स्पर्श पा के फिर से खरा होने लगा
था पर उसने अपने हाथ रख दिया, "उई मा, कैसे खरा कर रखा
है, क्या कर रहा था रे, हाथ से मसल रहा था क्या, है, बेटा और
मेरी इसको भी मसल रहा था, तू तो अब लगता है जवान हो गया है,
तभी मैं काहु की जैसे ही मेरा पेटिकोट नीचे गिरा ये लरका मुझे
घूर घूर के क्यों देख रहा था, ही, इस लरके की तो अपनी मा के उपर
ही बुरी नज़र है"

"ओहो अब बोल रहा है ग़लती हो गई, पर अगर मैं नही जागती तो, तू

तो अपना पानी निकाल के ही मानता ना, मेरे छातियों को दबा दबा के,
उम्म्म... बोल, निकालता की ऩही पानी"

"है, मा ग़लती हो गई,

"वाह रे तेरी ग़लती, कमाल की ग़लती है, किसी का मसल दो दबा दो फिर
बोलो की ग़लती हो गई, अपना मज़ा कर लो दूसरे चाहे कैसे भी रहे",
कह कर मा ने मेरे लंड को कस के दबाया, उसके कोमल हाथो का स्पार्स
पा के मेरा लंड तो लोहा हो गया था, और गरम भी काफ़ी हो गया था.

"हाई मा, छ्होरो, क्या कर रही हो"

मा उसी तरह से मुस्कुराती हुई बोली "क्यों प्यारे तूने मेरा दबाया तब
तो मैने नही बोला की छ्होरो, अब क्यों बोल रहा है तू," मैने
कहा "ही, मा तू दबाएगी तो सच में मेरा पानी निकाल जाएगा, ही
छ्होरो ना मा,".

"क्यों पानी निकालने के लिए ही तो तू दबा रहा था ना मेरी छातिया,
मैं अपने हाथ से निकाल देती हू, तेरे गन्ने से तेरा रूस, चल, ज़रा
अपना गन्ना तो दिखा,"

"है मा छ्होरो, मुझे शरम आती है"

"अक्चा, अभी तो बरा शरम आ रही है, और हर रोज जो लूँगी और
पाजामा हटा हटा के, सफाई जब करता है तब, तब क्या मुझे दिखाई
नही देता क्या, अभी बरी आक्टिंग कर रहा है,"

"है नही मा, तब की बात तो और है, फिर मुझे थोरे ही पाता होता
था की तुम देख रही हो",

"ओह ओह मेरे भोले राजा, बरा भोला बन रहा, चल दिखा ना, देखु
कितना बरा और मोटा है तेरा गन्ना"

मैं कुच्छ बोल नही पा रहा था, मेरे मुँह से साबद नही निकाल पा
रहे थे, और लग रहा था जैसे, मेरा पानी अब निकला की तब निकला.
इस बीच मा ने मेरे पाजामे का नारा खोल दिया और अंदर हाथ डाल के
मेरे लंड को सीधा पकर लिए, मेरा लंड जो की केवल उसके च्छुने के
कारण से फुफ्करने लगा था अब उसके पकरने पर अपनी पूरी औकात पर
आ गया और किसी मोटे लोहे के रोड की तरह एक दम टन कर उपर की
तरफ मुँह उठाए खरा था. मा ने मेरे लंड को अपने हाथो में
पकरने पूर कोशिश कर रही थी पर, मेरे लंड की मोटाई के कारण से
वो उसे अपने मुट्ठी में अच्छी तरह से क़ैद नही कर पा रही थी.
उसने मेरे पाजामे को वही खुले में पेर के नीचे मेरे लंड पर से
हटा दिया,

"ही मा, छ्होरो, कोई देख लेगा, ऐसे कपरा मत हटाओ" मगर मा
शायद पूरे जोश में आ चुकी थी,

"चल कोई नही देखता, फिर सामने बैठी हू, किसी को नज़र नही
आएगा, देखु तो सही मेरे बेटे का गन्ना आख़िर है कितना बरा"

और मेरा लंड देखता ही, असचर्या से उसका मुँह खुला का खुला रह
गया, एक डम से चौक्ति हुई बोली, "है दैयया ये क्या इतना मोटा, और
इतना लूंबा, ये कैसे हो गया रे, तेरे बाप का तो बीतते भर का भी
नही है, और यहा तू बेलन के जैसा ले के घूम रहा"

"ओह, मा, मेरी इसमे क्या ग़लती है, ये तो सुरू में पहले छ्होटा सा
था पर अब अचानक इतना बरा हो गया है तो मैं क्या करू"

"ग़लती तो तेरी ही है जो तूने , इतना बरा जुगार होते हुए भी अभी
तक मुझे पाता नही चलने दिया, वैसे जब मैने देखा था नहाते
वाक़ूत तब तो इतना बरा नही दिख रहा था रे"
-
Reply
06-16-2017, 10:30 AM,
#10
RE: rajsharmastories धोबन और उसका बेटा
"ही मा, वो वो " मैं हकलाते हुए बोला "वो इसलिए कोयोंकि उस समय
ये उतना खरा नही रहा होगा, अभी ये पूरा खरा हो गया है"

"ओह ओह तो अभी क्यों खरा कर लिया इतना बरा, कैसे खरा हो गया
अभी तेरा"

अब मैं क्या बोलता की कैसे खरा हो गया. ये तो बोल नही सकता था
की मा तेरे कारण खरा हो गया है मेरा. मैने सकपकते हुए
कहा "अर्रे वो ऐसे ही खरा हो गया है तुम छ्होरो अभी ठीक हो
जाएगा"

"ऐसे कैसे खरा हो जाता है तेरा" मा ने पुचछा और मेरी आँखो
में देख कर अपने रसीले होंठो का एक कोना दबा के मुस्कने लगी .

"आरे तुमने पकर रखा है ना इसलिए खरा हो गया है मेरा क्या
करू मैं, ही छ्होर दो नो" मैने किसी भी तरह से मा का हाथ अपने
लंड पर से हटा देना चाहता था. मुझे ऐसा लग रहा था की मा के
कोमल हाथो का स्पर्श पा के कही मेरा पानी निकाल ना जाए. फिर मा
ने केवल पाकारा तो हुआ नही था. वो धीरे धीरे मेरे लंड को सहला
भी और बार बार अपने अंगूठे से मेरे चिकने सुपरे के च्छू भी
रही थी.
" अच्छा अब सारा दोष मेरा हो गया, और खुद जो इतनी देर से मेरी
छातिया पकर के मसल रहा था और दबा रहा था उसका कुच्छ नही"

"ही, ग़लती हो गई"
चल मान लिया ग़लती हो गई, पर सज़ा तो इसकी तुझे देनी परेगी,
मेरा तूने मसला है, मैं भी तेरा मसल देती हू," कह कर मा अपने
हाथो को थोरा तेज चलाने लगी और मेरे लंड का मूठ मरते हुए मेरे
लंड के मंडी को अंगूठे से थोरी तेज़ी के साथ घिसने लगी. मेरी
हालत एकद्ूम खराब हो रही थी. गुदगुदाहट और सनसनी के मारे मेरे
मुँह से कोई आवाज़ नही निकाल पा रहा था ऐसा लग रहा था जैसे की
की मेरा पानी अब निकला की तब निकला. पर मा को मैं रोक भी नही पा
रहा था. मैने सीस्यते हुए कहा "ओह मा, ही निकाल जाएगा, मेरा
निकाल जाएगा" इस पर मा ने और ज़ोर से हाथ चलते हुए अपनी नज़र
उपर करके मेरी तरफ देखते हुए बोली "क्या निकाल जाएगा".

"ओह ओह, छ्होरो ना तुम जानती हो क्या निकाल जाएगा क्यों परेशान कर
रही हो"

"मैं कहा परेशान कर रही हू, तू खुद परेशान हो रहा है"

"क्यों, मैं क्यों भला खुद को परेशान करूँगा, तुम तो खुद ही
ज़बरदस्ती, पाता नही क्यों मेरा मसले जा रही हो"

"अच्छा, ज़रा ये तो बता शुरुआत किसने की थी मसल्ने की" कह कर मा
मुस्कुराने लगी.

मुझे तो जैसे साँप सूंघ गया था मैं भला क्या जवाब देता कुच्छ
समझ में ही नही आ रहा था की क्या करू क्या ना करू, उपर से
मज़ा इतना आ रहा था की जान निकली जा रही थी. तभी मा ने
अचानक मेरा लंड छ्होर दिया और बोली "अभी आती हू" और एक कातिल
मुस्कुराहट छ्होर्ते हुए उठ कर खरी हो गई और झारिॉयन की तरफ
चल दी. मैं उसकी झारियों की ओर जाते हुए देखता हुआ वही पेर के
नीचे बैठा रहा. झारिया जहा हम बैठे हुए थे वाहा से बस डूस
कदम की दूरी पर थी. दो टीन कदम चलने के बाद मा पिच्चे की
ओर मूरी और बोली "बरी ज़ोर से पेशाब आ रही थी, तुझे आ रही हो
तो तू भी चल, तेरा औज़ार भी थोरा ढीला हो जाएगा, ऐसे बेशार्मो
की तरह से खरा किए हुए है" और फिर अपने निचले होंठो को हल्के
से काटते हुए आगे चल दी. मेरी कुच्छ समझ में ही नही आ रहा
था की मैं क्या करू. मैं कुच्छ देर तक वैसे ही मॅ बैठा रहा,
-
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू sexstories 155 8,135 Yesterday, 02:01 PM
Last Post: sexstories
Star Parivaar Mai Chudai घर के रसीले आम मेरे नाम sexstories 46 40,949 08-16-2019, 11:19 AM
Last Post: sexstories
Star Hindi Porn Story जुली को मिल गई मूली sexstories 139 24,604 08-14-2019, 03:03 PM
Last Post: sexstories
Star Maa Bete ki Vasna मेरा बेटा मेरा यार sexstories 45 51,305 08-13-2019, 11:36 AM
Last Post: sexstories
Thumbs Up Incest Kahani माँ बेटी की मज़बूरी sexstories 15 18,403 08-13-2019, 11:23 AM
Last Post: sexstories
  Indian Porn Kahani वक्त ने बदले रिश्ते sexstories 225 81,747 08-12-2019, 01:27 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna तूने मेरे जाना,कभी नही जाना sexstories 30 42,669 08-08-2019, 03:51 PM
Last Post: Maazahmad54
Star Muslim Sex Stories खाला के संग चुदाई sexstories 44 38,161 08-08-2019, 02:05 PM
Last Post: sexstories
Lightbulb Rishton Mai Chudai गन्ने की मिठास sexstories 100 78,645 08-07-2019, 12:45 PM
Last Post: sexstories
  Kamvasna कलियुग की सीता sexstories 20 17,664 08-07-2019, 11:50 AM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


sil tutti khoon "niklti" hui xxx vedioअमन विला सेक्सी हवेली सेक्सी हिंदी स्टोरीTamil sadee balj saxDeepika nude sexbaba page 29Aakarshit pron in star video xxxlund chusa baji and aapa neBistar me soi aurat mms opan sexभोशडी की फोटो दिखाएJan bhcanni wala ki atrvasnaMai Mare Famili Aur Mera Gaon part 2buddhadesi.xxxsonarika bhadoriy ki chot chodae ki photoThongi baba sex rep videoadimanaw se ragar k chuwayaओयल डालके चुदाईXXNXX COM. इडियन लड़की के चूत के बाल बोहुत हेbhabi ke chutame land ghusake devarane chudai ki our gand mariIndian nude sex storyxnxxxxmaa bati ki gand chudai kahani sexybaba .netHotfakz actress bengialWww.exculve hot girl bebsex.com.hd मेरी चुत झडो विडीयोchhinar bibi ke garam chut ko musal laode se chudai kahaniमम्मी की प्यास कोठे पर बुझाये सेक्स स्टोरीBou ko chodagharmaXxx bed par sokar pichese hd Bahu ke gudaj kaankhचडि खोले कनि4 sahl ki Daughterssex video choot ctaayi apni maa ne bete se raat koBou ko chodagharmaXXXCOKAJALDelhi ki ladki ki chut chodigali sa xxxSardyon me ki bhen ki chudai storymanjari fadnis hd sexbaba nude मराठिसकसbollywood actress sexbaba stories site:mupsaharovo.rumoti wali big boobs wali aunti ka sara xxx video dikhaiy hd mesubscribe and get velamma free 18 xxxxx radxxxcom 63333xxx.sari.wali.petikot.upar.tang.ke.pisap.karti.video.w...जवाजवि पुद म बोडा sasur kamina bahu nagina sex storyमाझे वय असेल १५-१६ चे. ंआझे नाव वश्या (प्रेमाने मल सर्व मला वश्या म्हणतात नावात काय आहेBahu nagina sasur kamena ahhhhpooja gandhisexbabadasi pakde mamms vedeo xxxजोरात मारा xxxoviya potogabhin pornstars jhadate huye hdMastram anterwasna tange wale ka . . .गांड मरवाति गोरि लडकियाXxx xvedio anti telgu panti me dard ho raha hi nikalo Maa bete ki buri tarah chudai in razaiChoti si Jan chuto ka tufhan sex kahaniyabahen ki saheli ko choda rone lagi kahani sexbabaBollywood all actress naked gifs image sounds nithya menen naghi sexy hd pohtssexbaba south act chut photosix khaniyawww.comथूक लगा के गुंड में लैंड डालनाकाजल अग्रवाल हिन्दी हिरोइन चोदा चोदि सेकसी विडियोPorn sex sarmo hayaporn xxxxzorXxnx Ek Baap Ne choti bachi ko Mulakatpallavi sarada nude thered imagebaapu bs karo na dard hota hai haweli chudaiనానా అమ్మలా సెక్స్Www.boliwood jya parda ki khubsurat sexi chudai xxx photo image wow kitni achi cikni kitne ache bobs xxx vediojuhi chawla ki chut chudai photo sex babawww.sardarni ki gand chat pe mari.comxnxxxbedroom decorJibh chusake chudai ki kahaniCollege me paas hone ke liye xxx video banwayi hindi adeoParineeti chopra nude fucked hard sex baba videosबहिणीच्या पुच्चीची मसाजkamutasistersex babanet hawele me chudae samaroh sex kahanegupt antavana ke sex story nokar na chupchap dkhi didi ka sath chori karne aaya chod ke Chala gaya xxxful hdwww.भाई ने बहन से बोला एक बार चुदवालो विडीयों रियल मे. comगन्दी गली तत्ति मूति अंतर्वासना माँ हिंदी स्टोरीsexbaba story andekhe jivn k rangDesi sexjibh mms.comwww sexbaba net Thread tamanna nude south indian actress assxxx sexy videoaurt sari pahan kar aati hai sexy video hdTirigi xxxvedioxnxxTV_MA moveskapade fadker kiya sex jabrdastiBahan ki gand me lund tikaya achanak se sex story