Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
05-16-2019, 11:58 AM,
#11
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
बुक मेरे हाथ मे आ गयी. नीचे उतरते वक़्त मेरा सरीर राजू के सरीर से चिपका हुआ था और रगड़ खा रहा था. फिर मेरे दोनो पैरो के बीच कुछ आ गया. शायद राजू की नुन्नि थी. राजू ने तुरंत नही छोड़ा मुझे. धीरे धीरे उतारा. उसकी नुन्नि मेरी चूत के एरिया को रगड़ती हुई निकल गयी. खैर किताब मिल गयी थी. मेने झुक कर पैंटी को उठाना चाहा तो राजू ने पैंटी ले ली और कहा जाने के समय पहन लेना, अभी पढ़ाई करो.

राजू ने टवल लपेट लिया और मेरे सामने बैठ गया. उसकी नुन्नि सॉफ दिख रही थी, मेने साइज का आइडिया लगाया और आज फिर स्केल पर चेक करने की सोची. थोड़ी देर बाद पढ़ाई ख़तम. मैं टीवी देखने लगी. राजू मेरे साथ पिक्चर देखने लगा. मैं पेट के बल लेट कर टीवी देख रही थी. अचानक राजू ने मेरी फ्रॉक मे हाथ डाला और मेरे बम्स सहलाने लगा. फिर हाथ से मुझे पीछे से उँचा किया और मेरी चूत तक सहलाने लगा.

मुझे अच्छा लग रहा था. मेने कुछ नही कहा और टीवी देखती रही. एक बार मेने ज़रा नज़र बचा के राजू को देखा. वो अपनी नुन्नि को हाथ मे पकड़े हुए था और उसको हिला रहा था. हिलने से उसकी नुन्नि के उपर की चॅम्डी पीछे चली जाती थी और उसमे से दिखता था एकदम चिकना गोरा पिंक कलर का नुन्नि के उपर का हिस्सा जो नॉर्मल मे नही दिखता था. बहुत अच्छा लग रहा था वो.

इसी तरह कुछ देर चलता रहा. फिर ट्यूशन टाइम ख़तम हो गया और मैं पैंटी पहन कर नीचे चली आई. आज बहुत अच्छा लगा था, नयी चीज़ देखने मिली थी. मुझे भी सहलाया था. नेक्स्ट और क्या होगा ये सोचते सोचते आँख लग गयी.

नेक्स्ट डे मेरा सिर भारी था, फिर भी ट्यूशन गयी. पढ़ने मे मन नही लग रहा था. राजू ने मुझे लेटने को कहा और आराम करने को कहा. मैं लेट गयी. आज मेने सलवार पहनी थी. राजू मेरा सिर दबाने लगा. बोला तुम जब भी यहाँ आओगी, फ्रॉक मे आना और आते ही अपनी पैंटी उतार देना. पर आज तो सलवार थी. राजू ने मेरी सलवार नीचे सरकाते हुए पूरी उतार दी और फिर पैंटी उतार दी.

मैं पीठ के बल लेटी हुई थी. पैंटी उतरते ही मैं पूरी नंगी हो गयी, मेरी चूत ओपन हो गयी. राजू उसको सहलाने लगा. बहुत अच्छा लग रहा था. फिर राजू ने मेरी फ्रॉक भी उतार दी. मैं पूरी नंगी हो गयी. राजू मेरी छाती पर हाथ फेरता रहा. बीच मे दबा भी देता था. फिर पेट सहलाता, फिर मेरी चूत. थोड़ी देर बाद उसने मेरे पैरो को मोड़ दिया. और फैला दिया. अब वो नीचे झुक कर मेरी चूत देखने लगा.

फिर वो मेरी चूत की तरफ लेट गया. अब मुझे लगा कि वो किस कर रहा है. मेने गर्दन उठा के देखा तो राजू के सिर के बाल दिखे. उसकी जीव मेरी चूत पर थी और वो उसको चाट रहा था. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. कुछ देर ये सब करता रहा . फिर वो बैठ गया. अपनी पॅंट उतारी. नीचे पैंटी नही थी इसलिए उसकी नुन्नि बाहर आ गयी. वो मेरे सिर के पास आया और कहा- सायरा, इसको देखो.

मेने देखा. क्या सुंदर नुन्नि थी. अब वो मेरे पास बैठ गया और मुझे नुन्नि पकड़ने को कहा. मेने झिझकते हुए नुन्नि पकड़ी. वो मेरे हाथ मे नही आई, काफ़ी मोटी लग रही थी. राजू ने मेरा हाथ पकड़ के आगे पीछे किया तो वो कल वाला हिस्सा दिखाई दिया. उसने हिलाते रहने को कहा. फिर मुझे उसकी नुन्नि को किस करने को कहा.

राजू- सायरा, नुन्नि को किस करो.

मैं- राजू भैया, शरम आ रही हे.

राजू- शरम क्यू, मेने भी किस किया ना तुम्हारी चूत को. अब तुम भी करो.

मेने हल्के से किस किया. राजू ने अपनी नुन्नि को पकड़ कर मेरे होंठो पर यहाँ से वहाँ फेरना शुरू किया और कहा.सायरा' अपना मूह खोलो

मेने मूह खोला तो राजू ने अपनी नुन्नि मेरे मूह मे डाल दी. पर वो काफ़ी बड़ी थी मेरे लिए. अब नौ साल की लड़की का मूह था ये. नुन्नि के उपर का हिस्सा मेरे मूह मे आ गया. उसने कहा - सियरा, इसको मूह मे घूमाओ, अपनी जीव से इसको चॅटो और चूसो मैं करने लगी, हम दोनो को मज़ा आ रहा था. मेरे मूह मे नुन्नि घुसाए राजू लेट गया. उसका मूह मेरी चूत की तरफ था.

मैं उसकी नुन्नि चूसने मे लगी थी और वो मेरी चूत मे उंगली डाल रहा था. काफ़ी देर तक ये सब चलता रहा. थोड़ी देर बाद राजू ने कहा-

सायरा, अब नुन्नि से एक जूस निकलेगा, सफेद, तुम उसको पी जाना, उसको पीने से दिमाग़ तेज होता हे और नंबर अच्छे आएँगे.

मेने सिर हिलाकर हां कहा. और जब उसका जूस निकला तो राजू ने मेरा मूह पकड़ लिया और सारा जूस मेरे मूह मे डाल दिया. मैं पी गयी सब. बहुत नया और अच्छा लगा. फिर तो ये रोज का काम हो गया. थोड़ी देर तक पढ़ाई करने के बाद रोज यही सब होता. एक नयी बात ये हुई कि अब राजू की फिंगर मेरी चूत मे पूरी जाने लगी. और मेरी चूत भी कुछ फूलने लगी. राजू मेरी चूत को खूब दबाता, उंगली करता और मैं उसका जूस पीती.

एक दिन राजू ने अपना जूस मुझे पिलाने के बाद अपनी नुन्नि फिर से मेरे मूह मे डाल दी, वो फिर से बड़ी हो गयी. फिर राजू ने उसपर आयिल लगाया. मेरी चूत मे उंगली डाल डाल के आयिल लगाया. फिर वो बैठ गया और मुझे उसकी नुन्नि पर बैठने बोला. जब मैं बैठने लगी तो उसने अपने लंड को मेरी चूत पर टीकाया और बैठने बोला. जैसे ही मैं बैठी, लगा कुछ घुस गया और दर्द भी हुआ. मैं उठ गयी.

फिर राजू ने मुझे अपनी गोदी मे लिया. मेरा मूह अपनी तरफ किया और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा, मेरी चूत पर सेट किया और बैठने को कहा. बैठते ही फिर वेसा हुआ, मैं उठने लगी तो उसने उठने नही दिया. कहा कुछ देर बैठी रहो, ठीक लगेगा. मैं बैठी रही. थोड़ी देर मे दर्द कम हो गया. अब मेने पीछे होकर झुक कर देखा राजू का लंड मेरी चूत मे घुसा हुआ था. राजू ने आयिल से भीगी हुई अपनी एक उंगली मेरी गंद मे घुसा रखी थी.

ये नया एक्सपीरियेन्स था. मुझे ठीक ही लग रहा था. थोड़ी देर मे लंड से जूस निकल गया. हम दोनो अलग हुए. टवल से खुद को पोछा.

मैं- राजू भैया, आज अच्छा लगा, नयी चीज़ हुई.

राजू- हां सायरा, धीरे धीरे सब सिखा दूँगा, पर स्टडी भी करती रहो. अगर नंबर ठीक न्ही आए तो तुम्हारी अम्मी ट्यूशन बंद करा देगी, फिर ये सब नही मिलेगा.

मैं- भैया, आपका लंड इतना बड़ा है या सबका ऐसा होता है?

राजू- सायरा, सबका बड़ा होता है, किसी का 5, किसी का 6, जैसे मेरा 8 इंच है.

मैं- तो क्या ये इतना ही जाता है चूत मे?

राजू- नही सायरा, ये पूरा लंड चला जाता है.

मैं- भैया, आपने मेरे पीछे भी उंगली घुसाई थी, क्यू?

राजू- ये लंड वहाँ भी जाता है. चूत मे, गंद मे, मूह मे, सब जगह.

मैं- मेरे मे कब जाएगा?

राजू- रोज उंगली से बड़ा करूँगा. जब छेद बड़ा हो जाएगा तब ये सब जगह आराम से जाएगा और तुझे मज़ा भी आएगा.

मैं- ओके भैया. कल मिलती हू, बाइ

अब ये रोज होने लगा. अब मेरी गंद मे राजू की 2 उंगली घुसने लगी और चूत मे लंड का टॉप. एक दिन राजू ने मुझे कहा कि आज वो मेरे गंद मे लंड डालेगा थोड़ा सा. मेने कहा ओके. राजू ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मेरे पीछे आया और मेरी गंद पर जीव फिराने लगा. मुझे अच्छा लग रहा था. फिर उसने वहाँ आयिल लगाया. मेरे पेट के नीचे तकिया रखा और मेरे उपर चढ़ गया. अपने लंड को गंद के छेद पर टीकाया और पुश किया. लंड का टॉप घुस गया और हल्का दर्द हुआ.

राजू उसी पोज़िशन मे रुक गया. जब दर्द कम हुआ तो उसने फिर पुश किया. शायद लंड और गया. दर्द हुआ. मेने कहा बस भैया, आज इतना ही करो. उसने वो पोज़िशन मे छोड़ के अपना जूस निकाला और भीतर डाल दिया. फिर लंड बाहर निकाल लिया.

मैं- भैया, आज लंड ज़्यादा घुसा ना?

राजू- हां, यहाँ तक गया, 1/4थ, मैं तुम्हारी गंद मे ट्राइ करूँगा अब. वहाँ जल्दी चला जाएगा. चूत मे थोड़ा टाइम लगेगा.

मैं जब खड़ी हुई तो चलने मे तकलीफ़ होने लगी. डर लगा अगर अम्मी ने रीज़न पूछा तो क्या कहूँगी.. राजू ने कहा कि कह देना पैर मे मोच आ गयी है. फिर क्या था, अब कोई डर नही. अब रोज चुदाई होने लगी.एक दिन तो ऐसा आया कि उसका लंड मेरी गंद मे पूरा घुस गया.

उस दिन, राजू ने कहा, दर्द हो तो चिल्लाना मत. राजू मेरे पीठ पर चढ़ा. लंड मेरी गंद पर टीकाया. मेरी बगल से हाथ डाल के मेरे कंधो को पकड़ लिया. लंड पुश किया तो आधा चला गया. उसने और घुसाना चाहा. पर दर्द से मैं आगे की तरफ होने लगी पर राजू ने मेरे कंधे पकड़े हुए थे सो आगे नही जा सकी.
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05-16-2019, 11:58 AM,
#12
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
मेरा मूह तकिये मे घुसा हुआ था. राजू ने फिर पुश किया. मुझे साफ लगा कि लंड मेरी गंद मे जा रहा है. पर मैं चिल्लाई न्ही. इसी तरह पुश करते करते 5 मिनिट बाद राजू रुक गया. मेने पूछा क्या हुआ तो उसने मेरा एक हाथ मेरी गंद पर रखवाया . मेने महसूस किया कि राजू का लंड न्ही मिल रहा है. उसके लंड की बाल तो टच हुई पर लंड न्ही मिला.

राजू ने कहा- सायरा,, आज तूने पूरा लंड ले लिया है. सारा तेरी गंद के भीतर है,

मैं- क्या? पूरा 8 इंच चला गया?

राजू- हां सायरा. इतने दिन की मेहनत आज सफल हुई. इसी तरह एक दिन चूत मे भी जाएगा.

मैं- ह्म्‍म्म भैया, अब क्या करना है.

राजू- तुझे कुछ नही करना, मुझे करना है.

कहकर राजू ने मेरी गंद मारनी शुरू की. उसके धक्को से मेरा पूरा सरीर हिल रहा था. 15/20 मिनिट बाद उसने जूस गंद मे निकाला और लंड बाहर खींच लिया. फिर मुझे किस किया और प्यार किया.15/20 दिन बाद तो अब बिना तकलीफ़ के मेरी गंद चुदने लगी, अब तो राजू बैठा रहता और मैं उसके लंड पर बैठ जाती और लंड भीतर चला जाता. खूब चुदाई होती. इस बीच मेरे एग्ज़ॅम हुए, अच्छे नंबर आए. अम्मी बहुत खुस हुई.

राजू को शुक्रिया कहा और मुझे और भी मन लगा कर ट्यूशन करने को कहा. एग्ज़ॅम के बाद छुट्टी हो गयी . विंटर सीज़न था. राजू ने पिक्निक का प्रोग्राम बनाया.अम्मी को बताया कि सब बच्चो को पिक्निक पर ले जाएगा वो. अम्मी राज़ी हो गयी. 40 किमी दूर झरना था, वहाँ जाना था सबको. हमारे यहा टोटल 5 बच्चे थे चाचा ताऊ मिला कर, राजू के पास इडिका कार थी. राजू ने मुझे फ्रॉक पहनने को कहा. फिर हम पिक्निक को निकल पड़े.

कार छ्होटी थी. हम 6 प्लस ड्राइवर. जगह कम लग रही थी. राजू ने मुझे अपनी गोदी मे आने को कहा जिससे सब आराम से बैठ गये.मैं राजू की गोदी मे थी. थोड़ी देर बाद राजू ने मेरी फ्रॉक मे हाथ घुसाया और पैंटी नीचे खिचने लगा. मेने थोड़ा सा उठकर ये होने दिया. राजू ने पॅंट की ज़िप खोल कर लंड बाहर कर लिया. ठंड थी, हम शॉल ओढ़ के बैठे थे. किसी को कुछ मालूम न्ही क्या हो रहा था मेरे साथ.

राजू की लंड को पकड़ा, एकदम टाइट. थोड़ा सा उठ कर अपनी गंद पर लगाया. धीरे धीरे लंड पूरा गंद मे चला गया.अब मैं राजू के सहारे पीठ लगा कर बैठ गयी. राजू मेरी छाती दबा रहा था अब मेरी छाती पर उभार आने लगा था, राजू वो ही दबा रहा था. अब सफ़र का आनंद आने लगा था. पूरे रास्ते इसी तरह बैठी रही. जब झरना आ गया तो मैं उठी. लंड भी खिचता हुआ बाहर निकल गया, राजू ने उसको ज़िप मे डाला और हम उतर गये.

झरने मे मेरे अलावा सब बच्चे किनारे पर नहाते रहे. मुझे राजू थोड़ा भीतर ले गया. मेने पैंटी तो पहनी न्ही थी. राजू ने भी टवल उतार के अपने गले मे डाल लिया. मेने पानी के भीतर राजू का लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी. वो टाइट हो गया. मेने लंड की तरफ पीठ कर दी. राजू ने मेरी कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी गंद मे घुसा दिया. पानी मे मेरी गंद मारी जा रही थी. किनारे पर मेरी छ्होटी बहन शबनम ने हमे पानी मे देखा.

शबनम- बाजी, वहाँ क्या कर रही हो?

मैं- स्विम्मिंग सीख रही हूँ. राजू भैया सिखा रहे हैं.

शबनम- मुझे भी सीखनी है स्विम्मिंग.

राजू- अभी सायरा को सीखा रहा हूँ. आधा सीखा है इसने.

मैं झूठे ही हाथ चलाने लगी. पीछे राजू दनादन पंपिंग कर रहा था. शबनम को यही लगा होगा कि राजू स्विम्मिंग सीखा रहा हे. अब राजू ने मुझे पानी मे सीधा लिटा दिया. मेरी कमर को पकड़ा. मेरे पैर अपने कंधे पर रखे और चोद्ने लगा. शबनम ने देखा.

शामनाम- बाजी, ये कैसी स्विम्मिंग है?

मैं- क्यू क्या हुआ.

शबनम- तुम सीधी लेटी हुई हो, तुम्हारे पैर भैया के कंधे पर हैं.

मैं- ये नयी स्टाइल की स्विम्मिंग है.

राजू- हां शबनम, ये स्टाइल मे बहुत मज़ा आता है.

शबनम- अच्छा बाजी.

आधे घंटे तक मेरी गंद मारने क बाद जूस निकल गया. हम दोनो अलग हुए, राजू ने टवल लपेट लिया. हम दोनो बाहर आ गये. शबनम ज़िद करने लगी कि उसको भी पानी के बीच जाना है एक बार. राजू उसको मजबूरी मे ले गया. वहाँ राजू ने शबनम को पानी पर उल्टा लेटा दिया और उसके पेट के नीचे हाथ रख कर उसको स्विम्मिंग सिखाने लगा. दूर से तो यही दिख रहा था. शबनम थोड़ी मोटी थी.

मैं अपने कपड़े चेंज करने लगी और नाश्ता लगाने की तैयारी मे लग गयी. राजू ने एक हाथ शबनम की छाती पर और दूसरा उसकी चूत पर रख कर उसको पानी पर टीकाया हुआ था. एक बार शबनम का बॅलेन्स खराब हुआ, वो पानी मे डुबकी लगाने लगी, फिर राजू का सहारा पा कर ठीक हो गयी. पर उसके दोनो हाथ पानी मे थे. आधे घंटे बाद राजू और शबनम बाहर आ गये.

हमने नाश्ता किया. थोड़ा हसी मज़ाक किया. फिर वापस घर को चले. रास्ते मे राजू ने कहा- शबनम की चूत तेरे से ज़्यादा फूली हुई और मोटी है.. मेने पानी मे चेक किया. जब एक बार उसका बॅलेन्स बिगड़ा तो वो मेरे लंड को पकड़ का संभली थी. उसको मालूम न्ही हुआ कि उसने क्या पकड़ा है. वो काफ़ी देर तक उसको पकड़े रही. शायद उसको न्ही मालूम वो क्या पकड़ी थी.

मैं- भैया आज मज़ा बहुत आया, पानी मे काफ़ी अच्छे से गंद मारी आपने.

राजू- एक आध दिन मे मैं तुम्हारी चूत की चुदाई करूँगा.

मैं- क्या??? लंड चला जाएगा उसमे.?

राजू- ट्राइ करेंगे. देखना वहाँ ज़्यादा मज़ा आएगा.

मैं- ह्म्‍म्म, कब करेंगे?

राजू- आज तो शायद टाइम न्ही मिलेगा.. कल तैयार रहना.

मैं- ओके भैया.

नेक्स्ट डे राजू ने मुझे नंगा करके मेरी चूत की खूब मालिश की. खूब फिंगर की. आयिल लगाया. मुझे पीठ के बल लिटा दिया. कमर के नीचे तकिया लगाया. मेरी चूत उपर हो गयी. मेरे दोनो पैरो को फैला कर दूर किया जिससे मेरी चूत फेल गयी. अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा. कहा

राजू- सायरा चिल्लाना नही, दर्द हो तब भी, समझ ले ये तेरा एग्ज़ॅम है.

मैं- ओक भैया, पर कुछ होगा तो नही ?

राजू- नही, बस जैसा मैं कहता जाऊ वेसा करते रहना. देखना पूरा लंड जाएगा भीतर.

राजू मेरे उपर झुका, मेरे कंधे पकड़े और लंड को पुश किया, लंड भीतर घुसा. और पुश, और भीतर. और पुश, मुझे दर्द होने लगा पर मैं चिल्लाई नही. गर्दन उठा कर लंड को धीरे धीरे भीतर घुसते देखती रही. काफ़ी दर्द हुआ. एक वक़्त ऐसा आया कि पूरा 8 इंच लंड भीतर समा गया. अब राजू रुक गया. जब दर्द कम हुआ तो उसने चोद्ना शुरू किया.. थोड़ी

देर बाद रियल मे मज़ा आने लगा.अब तो मैं भी अपनी कमर नीचे से उठा उठा कर लंड भीतर लेने लगी. राजू मेरी कमर पकड़े हुए था और ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था. करीब 25 मिनिट की चुदाई के बाद राजू के लंड ने जूस छोड़ा. बहुत मज़ा आया.

तो दोस्तो ये थी मेरी पहली चुदाई. आशा करती हू कि आपको मेरी चुदाई पसंद आई होगी..
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05-16-2019, 11:58 AM,
#13
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
मेरी चूत की प्यास बुझाओ 

हल्लो दोस्तो कैसे है आप लोग बहुत सारे मैल मिले जिनमे मेरी कहानियों की
तारीफ थी मैं आप सबका खुल्ले दिल और खुल्ली चूत के साथ सुक्रिया अदा करती
हूँ आप सबको पता होना काहिए कि आज मैने अपनी चूत के बॉल सॉफ किए है और अब
फिर से मेरी चूत तनटना गयी है किसी कोरी कमसिन लड़की की तराह हां तो
दोस्तों अब मैं अपनी कहानी सुरू करती हूँ जिसमे एक बार फिर से अब्बू और
भाई ने मुझे चोदा उस दिन हुआ ये था कि मैं बहुत चुदासि थी और अम्मी नानी
के घर गयी हुई थी ये तो आप लोग जानते ही है कि मेरी फ्ली चुदाई भी अब्बू
ने ही की थी और फिर अम्मी ने भाई से भी चुदवाया था और अब.

वो लोग अक्सर मुझे चोदा करते थे मगर इधर बहुत दिन से अब्बू अम्मी की फैली
हुई चूत मे मस्त थे और भाई ने कोई 2सरी ग़/फ फसा ली थी और मुझपे ध्यान
देना छोड़ ही दिया था तब आख़िर अम्मी के बाहर जाते ही मैने सबसे पहले
अपनी झाँते बनाई और रात को अब्बू के रूम मे गयी अब्बू कोई मूवी देख रहे
थे और मुझे देख कर बोले बेटी क्या हुआ आज बहुत दिन बाद अब्बा की याद आई
तब मैने कहा आप तो अम्मी जान की चूत मे ही फसे रहते है अब आपको मेरा ज़रा
भी ख्याल नही आपने मुझे कितने दिनो से नही चोदा है तब अब्बू ने दुलार
जताते हुए कहा ऊऊओह मेरी प्यारी रानी बेटी आजा आज तुझे फिर से चोद्ता हूँ
और ये कह कर उन्होने डी.वी.डी चेंज कर दी अब उसमे एक बी/फ चलने लगी जिसमे
एक 14 साल की लड़की को 5 आदमी चोद रहे थे जिसे देख कर मेरी आँखें बाहर आ
गयी और मैने अब्बू से कहा अब्बा ये बच्ची इन 5चो को एक साथ झेल रही है और
उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकी एज भी अभी ज़्यादा नही 14...15 साल
की होगी तब अब्बू बोले मेरी बच्ची ये साले अंग्रेज लोग ऐसे ही होते है
साली इतनी सी है और तुम खुद ही देखो कैसे मज़े ले..लेकर 5.

5 लंडों का मज़ा एक साथ ले रही है जबकि इसमे एक इसका बाप और एक भाई के
अलावा 3बाहर वाले है अब ये सब देख कर भला मेरी चूत मे ख़ाज़ क्यूँ नही
उठती तब मैने अब्बू से कहा अब्बू मैं तो आप और भाई से ही चुदवा कर पनाह
माँग जाती हूँ तब अब्बू ने कहा जा बगल के रूम से आफ़ाक़ को बुला ला साला
लंड पकड़े सो रहा होगा तब मैं भाई के रूम की तरफ बड़ी और देखा तो सच मे
वो अपने लंड को हाथ मे लेकर सदका मार रहा था मैं जल्दी से बढ़ते हुए बोली
हाय भाय्या क्या ग़ज़ब कर रहे हो भला घर मे इतनी खूबसूरत बहन होते हुए
तुम्हे ये सब करना पड़े तो लानत है मेरी जवानी पे और मैने झट से उनका लंड
अपने कोमल हाथ मे ले लिया और बड़े प्यार से सहलाने लगी और जल्दी...जल्दी
हाथ आगे पीछे करने लगी और फिर झट से मूह मे लेकर चूसने लगी और तब भाई का
लंड पूरी औकात मे आ गया और वो मेरे बालों को पकड़ते हुए ज़ोर ज़ोर से
धक्का मारने लगे और फिर जल्दी ही उनका पानी मेरे मूह मे गिरा जिसे मैं
छपार, छपार करते हुए चाट गयी और भाई से बोली चलो अब्बू बुला रहे है आज
फिर से तुम 2नो मुझे चोद्कर मज़ा दो और भाई को नंगा ही उनका लंड पकड़ कर
अब्बू के रूम मे ले आई और भाई को देखते ही अब्बू बोले मैने कहा था साला
मूठ मार रहा होगा तब मैने कहा अब्बू आप बहुत तजुर्बेदार है सच मे भाई
सदका मार रहे थे और फिर मैने अब्बू का लंड अपने मूह मे ले लिया और भाई
पीछे से मेरी गांद पे अपना लंड रगड़ते हुए अंदर डालने की कोसिस करने लगे
तब मैने कहा अब्बू जी मैं भी बी/फ वाली लड़की की तरह 5 जन से एक साथ ही
चुदाना चाहती हूँ तब अब्बा ने कहा बेटी तू नही झेल पाएगी एक साथ 5.को

मगर मैं तो पूरी तरह से चुदासि हो ही चुकी थी मैने कहा कान खोल के सुन लो
आप 2नो मुझे 5जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है अगर कल आप लोग ने मुझे
5 जान से नही चुदवाया तो बहुत बुरा होगा तब अब्बू ने कहा अच्छा अच्छा
मेरी रानी बेटी मैं तो तेरे भले के लिए ही कह रहा था अगर तेरी चूत फट गयी
तो परेसानि तो हमी लोगों को होगी मगर जब तू नही मान रही तो मेरी बला से
अब चल आज तो हम दोनो से चुदवा ले और ये कह कर उन्होने फिर से अपना मूसद
जैसा लंड मेरे मूह मे जोरदार धक्के के साथ अंदर धकेल दिया और तभी भाई ने
पीछे से मेरी गांद फैलाकर इतनी ज़ोर से धक्का मारा की मुझे नानी याद आ
गयी उउउइई माआअ मर गयी आआहह भाई ज़रा धीरे से धक्का मारो तू तो नानी याद
दिला रहा है तब अब्बू ने कहा बेटी चाहे जिसका नाम ले पर नानी का नाम ना
ले तब मैने कहा क्यूँ तब अब्बू बोले तेरी नानी की चूत मैने मारी थी और कई
साल तक मैं उसकी चूत चोद्ता रहा था तब मेरे साथ साथ भाई का मूह भी खुला
रह गया तब भाई ने कहा अब्बू क्या आपने नानी को चोदा है तब अब्बू ने कहा
हां यार साली मेरी सास बहुत मस्तानी थी तुझे तो पता ही है कि तेरी अम्मी
की कम उमर मे शादी हुई थी जब मेरी शादी हुई थी मैं 19 साल का था और तेरी
अम्मी 16 साल की थी और मेरी सास सिर्फ़ 30 साल की थी मगर मेरे ससुर की
उमर करीब 40साल थी वो तुम्हारी नानी को खुस भी नही कर पाता था जाने भी दो
इन बातों को अभी तो फिलहाल चुदाई का मज़ा लो उसकी चुदाई के बारे मे फिर
कभी बताउन्गा और तब भाई पीछे से मेरी गांद मार रहे थे और अब्बू आगे मेरे
मूह मे अपने लंड को धक्के लगा रहे थे अब मुझे भी मस्ती आने लगी.

और मैं अपने मूह और गांद को आगे पीछे करते हुए धक्के लगाने लगी थी और तब
भाई झाड़ गये थे मगर अब्बू जी अभी भी नही झाडे थे और उन्होने मुझे बेड पे
खड़ा होने को कहा मैं खड़ी हो गयी और तब अब्बू ने मेरे दोनो पैर अपने
कंधे के दाए...बाए करे और मेरी चूत को मूह मे भर कर चूसने लगे मैं बुरी
तरह तप रही थी और अपने अब्बू का मूह ज़ोर... ज़ोर से अपनी चूत पे दबाने
लगी तब ही अब्बू खड़े होने की कोसिस करने लगे और मेरा बॅलेन्स बिगड़ने
लगा तब मैने घबरा कर कहा आआआअहह अब्बू क्या कर रहे है मैं गिर जाउन्गि
मगर अब्बू नही माने और वो मुझे अपने कंधे पे बैठा कर खड़े हो गये अब मैं
अपनी 2नो टांगे उनकी गर्दन मे कस कर लपेटे हुए थी और अपनी चूत को उनके
मूह से दबाते हुए उनके सिर को भी ज़ोर. ज़ोर से दबा रही थी और भाई आँख
फाडे हुए अब्बू के इस पोज़ को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमे भी बहुत
आ रहा था इस तरह से कोई पहली बार मेरी चूत चाट रहा था और थोड़ी देर बाद
ही मैं ऊऊओ ऊओह आआहह करते हुए झाड़ गयी और अब्बू का रस भी नीचे से
पिचकारी की तराह बह गया और तब अब्बू मुझे नीचे उतारते हुए बेड पर लिटा कर
तुरंत अपने झाडे हुए लंड को मेरे 2नो चूचियों के बीच मे रगड़ने लगे और
मैं उनके नोक की तराह लंड की टोपी को मूह मे लेने की कोसिस कर रही थी पर
अब्बू जल्दी, जल्दी आगे पीछे कर रहे थे तब मैने कहा अब्बू अपना लंड मेरे
मूह मे दीजिए आपका सारा माल बेकार ही जाया हो रहा है तब अब्बू ने अपने
लंड को 2नो चूची के बीच से मेरे मूह मे डाल दिया और मेरी चूची को दबाने
लगे और इस तराह से उनके लंड से थोड़ा सा रस.

और निकला जिसे मैं चाट गयी और फिर अब्बू ने अपना लंड मेरी गांद मे धासा
दिया और उस दिन अब्बू और भाई 2नो ने मेरी गांद ही मारी थी मेरी बुर के
साथ कोई हरकत नही की थी और फिर रात को दुबारा भी उन लोगों ने मेरी गांद
एक एक बार और मारी अब मेरी गांद परपारा रही थी और सुबह अब्बू ने कहा
क्यों रानी बेटी क्या ख्याल है क्या अब भी 5 जान से चुद्वाओगि तब मैने
गुस्से से कहा साला बेटीचोड़ भोसड़ी वाले कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना
है तब अब्बू मुस्कुरा कर बोले कोई बात नही आज की रात तैयार रहना आज 5
लोगों को लेकर आउन्गा और फिर मुझे अब्बू से नानी की चुदाई की बात भी
जाननी थी आज रात मुझे 5 जान से एक साथ चुदाई का मज़ा आने वाला है मगर
मुझे अफ़सोस है कि बहुत सारी लड़कियों को शायद आज भी कोई लंड नसीब नही
होगा और उन्हे मोमबत्ती से काम चलाना पड़ेगा क्यों कि हर लड़की मेरी तराह
बाप और भाई से नही चुदवा सकती.
समाप्त
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05-16-2019, 11:59 AM,
#14
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
रूपाली की टाइट चूत का बाजा बजाया

एक सच्ची घटना, मेरा नाम रूपाली है और मैं 19 साल की एक कमसिन, अन्छुइ
कली हू. मुझे सेक्स के बारे में सुनना और ब्लू फिल्म देखना अच्छा लगता
था. मैं अपनी सहेली के साथ कई बार ब्लू फिल्म देख चुकी थी और सेक्स की भी
इच्छा होती थी लेकिन अंदर से डर भी लगता था. मैं अभी अभी इंटर स्कूल में
अड्मिशन लिया था और रोजाना घर से लोकल बस पकड़ के स्कूल जाती थी. एक दिन
स्कूल जाने के
लिए भीड़ से भादी बस मे चाड गयी इतनी भीड़ थी कि पुछो मत, स्कूल घर से 15
किमी दूर में था और 1-1.5 घंटे लगते थे. बस एक स्टॉप पर रुकी तभी आवारा
किस्म के 4 लड़के बस में चढ़ गये, और सरकते सरकते मेरे पास आ गये और मुझे
तकरीबन घेर लिया उन चारो ने, दो आगे से दो पिछे से. यानी कि उनकी हर्कतो
को कोई देख ना सके. उस दिन मैं स्कर्ट और शर्ट पहनी हुई थी, मेरे शर्ट
में से मेरी गोल
गोल उभरी हुई चूंचिया बहुत मस्त दिख रही थी यहा तक कि लाल लाल घुंडी भी
सॉफ सॉफ दिखाई दे रही थी. उन चारो लड़को की नियत अच्छी नही लग रही थी,
ड्राइवर जब ब्रेक लगता तो कभी वो मेरी गंद पे हाथ लगाते तो कभी वो अपने
हाथ से मेरी चूंची दबा देते. मैं कसमसाती रही उन चारो के बीच लेकिन उनपेर
कोई असर नही हुआ और मुझ से बदतमीज़ी करते रहे. अब तो उनमे से एक ने मेरी
गांद में उंगली कर दी तभी दूसरे ने चूंची की घुंडी को मसल दिया ऐसा यह
लोग
करते ही रहे, मैं चाह कर भी कुछ नही कर सकी. आहिस्ता आहिस्ता मुझे भी
मज़ा आने लगा आब तो चारो मे बहुत हिम्मत आ गयी क्यूंकी मैं खामोश थी और
यह लोग लगातार मेरी जवानी से खेल रहे थे, अभी भी स्कूल आने में आधा घंटा
और था. मैं सोचने लगी आब इनका विरोध करना बेकार है इसमे बदनामी भी मेरी
ही है और मैं चुपचाप उनलोगो से मज़े लेने लगी.

एक ने मेरे कान में बोला क्या नाम है तुम्हारा, मैं बोली रूपाली, फिर
उसने कहा मैं समीर तुम्हे मज़ा आ रहा है. मैं कुछ नही बोली चुपचाप अपने
चूतर को समीर के लंड से सटा कर खड़ी रही और वो मज़ा लेता रहा. मैं मदहोश
हो चुकी थी आब मन कर रहा था कोई मेरी चूत की जमकर चुदाई कर दे. तभी स्कूल
आ गया, मुझे स्टॉप पे उतरते देखकर वो चारो भी उसी स्टॉप पर उत्तर गये और
मेरे पिछे चलने लगे.अचानक से समीर की आवाज़ मेरे कान में आई रूपाली मैं
पीछे मूडी चारो मुझे घूर रहे थे और मेरे नज़दीक आ गये और मेरा हाथ पकड़
कर साइड में ले गये. उनमे से एक ने बोला कहाँ जा रही है हम लोगो को
प्यासा छोड़ के, आज तुम्हे हम लोगो के साथ चलना पड़ेगा और हम लोगो की
प्यास भुजानी पड़ेगी. मैं घबराई और बोली आज नही फिर कभी, तभी समीर बोला
आज क्यू नही रूपाली रानी आज तो हम सभी तैयार है और ऐसा मौका रोज रोज नही
आता. राजेश का घर यही पर है
और खाली भी उसके घर में कोई भी नही है चलो आज राजेश के घर में मज़ा
लेंगे, क्यू राजेश. राजेश ने तपाक से बोला हां मैं तैयार हूँ. फिर क्या
था
अब आगे की स्टोरी समीर के ज़ुबानी
मैने और राजेश ने रूपाली का हाथ पकड़ा और घर की तरफ चल पड़े. रास्ते में
रूपाली बोली 3 बजे मुझे इसी स्टॉप पर छोड़ देना, हम सभी ने रजा मंदी
दिखाई और रूपाली हम लोगो के साथ चल पड़ी. 5 मिनमें ही हम सभी राजेश के घर
में थे, हम सभी बहुत खुश थे कि आज रूपाली का गॅंग रेप करेंगे कितना मज़ा
आयगा
साली एकदम कुँवारी माल है, मैं तो गांद और बुर दोनो की चुदाई करूँगा जम
कर. हम सभी सोफा पर बैठ गये और अपने आप को इंट्रोड्यूस किया. मैं समीर-20
यर्स, यह राजेश-18 यर्स, आफताब-22 यर्स और प्रकाश-20 यर्स, हम चारो बहुत
ही गहरे दोस्त है. आब तुम अपने बारे में बताओ रूपाली. मैं एक बिंगाली
फॅमिली से बिलॉंग करती हूँ, अभी 19 साल की हूँ, मेरे घर में मेरी एक बड़ी
बेहन ,मा और पिताजी है. हूँ तो 19 साल की पर दिखती हूँ 18-20 की यह साब
ख़ान पान की बजह से है. वैसे भी बिंगाली लौंडिया बहुत सेक्सी और मस्त
होती है, आफताब बोल पड़ा.
अब आगे की कहानी मेरी ज़ुबानी
मैं शरमाई सी इधर उधर देखती रही, अब सभी ने अपने अपने लंड को रगरना सुरू
किया और चारो मिल कर मुझे छेड़ने लगे. समीर बोला, है क्या माल है साली की
आज जम कर चुदाई करेंगे, राजेश और प्रकाश ने अपने लंड को मसल्ते हुए मेरी
गांद पे हाथ लगाया और कहा कि हाई क्या बेंगाली लौंडिया है मा कसम आज तो
बेंगाली गांद और बेंगाली चूत की घमासान चुदाई करूँगा. मैं सोचने लगी कि
रूपाली डार्लिंग आज तो तेरी चूत और गांद की खैर नही, पता नही कौन कौन सी
स्टाइल में चोदेन्गे यह लोग और इन लोगो के लंड का साइज़ भी पता नही आब जो
भी चुदवाना तो पड़ेगा ही.
फिर राजेश ने फ़्रीज़ से शराब की बोतल निकाली और चारो ने 2-2 पेग पिया एक
पेग मुझे भी पिलाई. आब मुझे हल्का सा नशा आने लगा और मुझे चारो दोस्त
छेड़ने लगे, समीर ने मुझे खींच कर बेड पर लेटा दिया, मेरे एक साइड राजेश,
दूसरी तरफ आफताब, पैर की तरफ समीर और प्रकाश. ऐसा लग रहा था कि मेरा
बलात्कार होने वाला है. सभी ने मेरी गदराई और सेक्सी जिस्म को चूमने
चाटने लगे, राजेश ने मेरे शर्ट के बटन को खोल दिया और मेरी कसी कुई चूंची
को हाथो से मसलना सुरू किया इधर आफताब ने मेरी दूसरी चूंची को अपने मुँह
में ले कर चूसना सुरू किया. मेरे पैर के पास समीर और प्रकाश बैठे थे
उन्दोनो ने मेरी स्कर्ट को पैर से खींच कर उतार दिया और मेरी जाँघो को
सहलाना सुरू किया. मेरी चिकनी जाँघो को देख कर दोनो ही पागल हो गये तभी
समीर ने झटके से मेरी पॅंटी को पैरो से खींच कर अलग कर दिया, आब मैं
बिल्कुल ही नंगी उनलोगो के बीच में तड़प रही थी और अपने आप को छुड़ाने का
असफल प्रयास करने लगी. तभी समीर गुस्से से बोला साली चुप चाप पड़ी रह नही
तो तेरी कमसिन चूत का बॅंड बजा दूँगा बगैर तेल के लॉडा घुसेड दूँगा इतना
कहते ही मेरी चूत में अपना एक मोटी सी उंगली घुसेड दी मैं चीख पड़ी. तभी
आफताब और राजेश बोल पड़े साली आज तुझे कुतिया बना के अपने गधे जैसी लंड
से चोदुन्गा. मैं समझ गयी की आब तो मैं फँस चुकी हूँ चाहे जैसे भी हो
चुदवाना तो पड़ेगा वो भी इनलोगो के मुताबिक. आब समीर ने मेरी चूत में
अपनी जीव्ह घुसेड दिया और चाटने लगा मैं तो जन्नत में सैर करने लगी.
राजेश और आफताब मेरी चूंचियो को चूस रहे थे समीर मेरी चूत को और प्रकाश
मेरी चूतरो को सहला रहा था. चूमते चाटते सभी मेरी मदमस्त जवानी की तारीफ
कर
रहे थे, क्या बेंगाली माल है साली की गांद कितनी मस्त है चूत का तो जबाब
ही नही चूंची तो बिल्कुल रसगुल्ले जैसी है कितना मज़ा आयगा जब हम सब लोग
इसकी चुदाई करेंगे. करीब आधे घंटे बाद साभी मुझ से अलग हो गये और चारो ने
अपने कपड़े खोल दिए आब बेड पर हम सभी मदरजात बिल्कुल नंगे थे. बाप रे बाप
क्या लंड है इनलोगो के सबके कम से कम 7-8 इंच लंबे और 2-3 इंच मोटे होगे.
मैं घबरा गई
और बेबस होकर उनलोगो की तरफ देखने लगी, तभी समीर ने बोला रूपाली डार्लिंग
घबराओ मत हम लोग कई लौंदियो को साथ साथ चोद चुके है तुम्हे हम लोग बहुत
प्यार से चोदेन्गे लेकिन हम लोगो की बात नही सुनी तो तेरा बलात्कार
करेंगे और बहुत बुरे तरीके से चोदेन्गे,क्यू दोस्तो सभी ने हां में हां
मिलाई लेकिन चुदाई के पहले तुम्हारे इस मक्खन जैसे बदन , बिना बालो वाली
कली जैसी चूत, मटके समान फूली हुई मदमस्त गांद और कसे हुए लाल लाल
चूंचियो का भरपूर मज़ा लेंगे फिर बारी बारी से तुम्हारी गांद और चूत की
चुदाई करूँगा उसके बाद तुम्हारा गॅंग रेप करूँगा. गॅंग रेप समझती हो
रूपाली डार्लिंग इसका मतलब होता है एक साथ गांद और चूत के छेद में चुदाई
अदल बदल कर यानी कि हर बार एक अलग लॉड से एक साथ चुदाई कसम से बेंगाली
चूत और मतवाली गांद को चोदने में बहुत मज़ा आयगा, तुम्हे भी मज़ा आयगा.

और इस तरह पहले मुझे बेड पर घुटनो के बल खड़ा किया अबताफ़ ने मेरी चूत
में समीर गांद में, राजेश और प्रकाश चूंची और मुँह में लग गये. समीर ने
मेरी बेदाग सी गोल और फूली हुई गांद पेर जीब फिराना सुरू किया और आहिस्ता
आहिस्ता गांद के दोनो भागो को चीर कर गुलाबी छेद में अपना जीभ घुसेड दिया
और कहा रूपाली डार्लिंग बड़ी खूबसूरत गांद है तुम्हारी बिल्कुल डबल रोटी
की तरह एक दम सॉफ्ट है कितना मज़ा आ रहा है गांद चाटने में, मुझे नही पता
था कि बेंगाली गांद इतनी मतवाली होती है आब तो जब भी मौका मिलेगा हम लोग
तुम्हारी चुदाई करेंगे. मैं बेचारी रूपाली चुप चाप आफताब और समीर के जीभ
से अपनी चूत और गांद को चुदवाती रही. आब तक दोनो ही छेद थूक से गीले और
चिकने हो चुके थे और उन चारो के लंड मूसल की तरह कड़क हो गये, तभी राजेश
ने चार टॅबलेट लेकर आया और सभी ने 1-1 गोली खा ली. मैं पूछी कौन सी गोली
थी तो राजेश ने कहा जानेमन सेक्सपवर की गोली थी इसको खाने से लंड 40-45
मिनट तक ऐसे ही तनटना रहेगा ताकि हम लोग तुम्हारी इस मतवाली गांद और
रसीली चूत की चुदाई जबरदस्त तरीके से जाम के कर सके. सभी ने अपने अपने
मूसल जैसे लंड को तेल में चुपोर कर मेरी गदराई सी जवानी को ललचाई नॅज़ारो
से देखने लगे और मुझ से पूछा किसका लंड कौन से छेद में लेगी, तुझे
तुम्हारे मनपसंद लंड से चोदुन्गा. जल्दी बता चूत में किसका लेगी और गांद
में किसका लंड घुस्वाएगी, मैं चारो का लंड हाथ में लेकर देखने लगी और
बोली चूत में आफताब का गांद में समीर का और मुँह में राजेश और प्रकाश का
बारी बारी से. उन चारो ने कहा लेकिन उसके पहले हम सभी लोगो का लंड चूसना
होगा और मैं बारी बारी से
उन चारो का लंड मुँह में लेकर चूसना सुरू किया क्या लंड है एकदम मूसल की
तरह कारक और गधे जैसे तकरीबन 20 मिनट की चुसाइ के बाद सभी लोग काफ़ी खुश
थे मेरे इस जबाब से और तैयारी सुरू हो गयी मेरी चुदाई की. सभी ने अपना
अपना पोज़िशन ले लिया, आफताब ने अपने पॉकेट से एक गेल निकाला और अपने लंड
और रूपाली की छूट में अच्छी तरह से लगाया फिर छूट के छेड़ पेर अपने सुपरे
को घिस्सना सुरू किया और एक
ज़ोर का धक्का मारा लंड फ़चक से अंदर घुस्स गया जेल की वजह से ना तो
ज़्यादा दर्द हुआ ना ही लॉड को घुसने में तकलीफ़ आब ढकधक लंड अंदर बाहर
करने लगा. आब बारी थी समीर की उसने भी ठीक वैसा ही किया जेल को अच्छी तरह
गांद के छेद पर लगाया और अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर गांद के छेद
पे लगा दिया. फिर अपने लॉड के सुपरे को छेद पेर भिड़ा कर एक ही धक्के में
सारा लंड गांद में घुस्सा दिया और इस तरह समीर और आफताब ने गांद और चूत
की चुदाई सुरू के साथ ही साथ मैं लगातार राजेश और प्रकाश का लंड भी चूस
रही थी. फिर चारो ने बारी बारी से मेरी की रसीली चूत और मतवाली गांद को
अदल बदल कर खूब बेरहमी से चोदा मतलब चार बार चार लंड से गांद की चुदाई
फिर चार लंड से चूत की चुदाई साथ ही साथ चार अलग अलग लंड की चुस्साई,
तकरीबन 40 मिनट की चुदाई के
बाद सभी ने मेरी गांद और चूत को पिचकारी की तरह बिर्य से भर दिया. सभी
सांत हो चुके थे मुझे को इस गॅंग चुदाई में खूब मज़ा आया और अब घर जाने
को तैयार थी.
समाप्त
Reply
05-16-2019, 11:59 AM,
#15
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
ओये बाप रे बाप क्या चुदाई करता है


मैं ऋतु, 32 वर्षीया शादीशुदा औरत हूँ, और घर में मेरी एक 8 साल की बेटी
रूबी, 55 साल के ससुर रामनारायण, मीना मेरी 50 साल की सास, 28 साल की
तलाक़शुदा ननद, राधिका है. मेरा पति दुबई में काम करता है और तीन साल के
बाद छुट्टी पर आता है वो भी एक महीने की. मेरे पति का नाम रघु है.. मेरा
फिगर बहुत ही सेक्सी है, मेरे बूब्स 36 इंच, हिप्स 36 इंच और कमर 30 इंच
हैं, रंग गोरा. मेरे चूतर बड़े ही मस्त हैं और मेरे अंदर सेक्स की भूख
ज़यादा ही है. लोग कहते हैं कि मैं अपनी मा की तरह चुड़क्कड़ हूँ. मेरी
मा उमा देवी आज भी अपनी चूत में लंड लेने से नहीं हिचकिचाती जबकि उस की
उमर 52 साल की हो चुकी है.

जैसा के आप जानते ही हैं, पति दुबई में होने के कारण मुझे तस्सलिबक्श
चुदाई नसीब नहीं हो पाती. मैं लंड को तरसती रहती हूँ, मेरी ननद राधिका का
तलाक़ हो गया किओं कि उसका पति साला नमार्द था. भोसड़ी का मेरी राधिका को
दोष देता रहता था कि वो बांझ है जब कि वो राधिका को अच्छी तरह से चोद
नहीं सकता था. खैर हम दोनो भाबी ननद लंड की कमी के कारण एक दूसरे के साथ
लेज़्बीयन संबंध बना चुकी थी. राधिका को मेरी चूत का नशा सा था.. वो जब
भी मौका मिलता, मेरे कमरे में आ कर मेरी चुचि चूसने लगती, कभी चूत में
उंगली करती और कभी अपनी मादक चूत को मेरे हवाले कर देती. राधिका का खिला
हुआ यौवन, बड़ी बड़ी 38 इंच की चुचि, गांद भी कम से कम 38 की ही होगी.
उसके चुत्तेर खूब मस्त थे. मैं अपने हाथ उसके चूतरो से दूर नहीं रख पाती.
लेज़्बीयन संबंध तक तो ठीक है लेकिन जब मेरी ननद जोश में आ जाती तो उसकी
कामवासना पर काबू पाना मुश्किल हो जाता और राधिका किसी भी कीमत पर लंड
पाने के लिए बेताब हो जाती.

एक दिन उसने मुझे पुछा कि मेरा पति (यानी कि उसका भाई) कैसी चुदाई करता
है और उसका लंड कितना बड़ा है. मैने उससे बताया के उसके भैया आका लंड 9
इंच का है और ग़ज़ब का कड़क है. जब वो चोद्ता है तो चूत को तारे नज़र आने
लगते हैं. "साला ऐसे पेलता है के चूत की भोसड़ी बना देगा, ऐसे चूत चूस्ता
है के सारा पानी निकाल देता है, वो कहता है के अगर उससे कामवासना का
बुखार चढ़ा हो तो अपनी मा या बेहन को भी चोद डाले, लेकिन मेरी बन्नो मेरी
किस्मत ही ऐसी है के वो तीन साल में एक महीने के लिए ही मुझे चोद सकता है
और मेरी चुदसी चूत को लंड रोज़ चाहिए, राधिका, साली तू ही कोई प्लान बना
ता की हम दोनो ही रोज़ लंड के मज़े ले सकें," मैं बोली. राधिका ने कहा'
भाबी, तुझे तो तीन साल में एक महीने तो लंड मिल जाता है, मुझे तो अभी तक
चुदाई का असली मज़ा नहीं आया, मेरे उस नमार्द पति का तो खड़ा ही नहीं
हुआ, बेह्न्चोद चूत पर रगड़ता था और झाड़ जाता था और मेरी चूत तड़प तड़प
कर आग में जलती रहती, भाबी मैं क्या प्लान करूँ, यह तो तुम्हें ही कोई
प्रबंध करना पड़ेगा, मेरी चूत को भी शांत करवा दो, अगर तेरा कोई यार है
या कोई कज़िन है तो उस से ही चुदवा दो मुझे, देखो भाबी मेरी चूत कैसे
दाहाकति है लंड के बिना,' मैने कहा चलो देखते हैं की क्या हो सकता है.

अगले दिन मैं बाज़ार जा रही थी तो मैने अपने ससुर से पुछा" बाबू जी आपको
क्या मंगवाना है बाज़ार से? जो चाहिए, मैं ला दूँगी, ' मेरे ससुर ने मुझे
ध्यान से देखा और कहा " बहू तुम शिलाजीत ले आना और साथ में छुआरे भी लेते
आना," मैने पुछा" ठीक है लेकिन आपको क्या करनी है यह चीज़ें बाबू जी,'
बाबू जी बोले," बेटी तेरा पति तो दुबई में बैठा है, लेकिन मुझे तो पति का
काम करना पड़ता है ना, तेरी सासू को खुश करने के लिए यह चीज़ें चाहिए, इन
से मर्दानगी बढ़ती है, ताक़त आती है बेटी,' कहते हुए बाबूजी ने मुझे अजीब
नज़रों से देखा, और मुझे लगा के वो मेरी चूचियो को घूर रहे हैं. जब मैं
बाज़ार जा रही थी तो मुझे बाबूजी की नज़रें मेरे चूतरो का पीछा करती हुई
महसूस हुई. मेरे शरीर में एक सिरहन सी दौर गयी और मेरी चूत में पानी भर
गया.

मैं सारी चीज़ें लेकर आई और बाबूजी की चीज़ें उनको देने गयी. जब बाबू जी
ने चीज़ें पकड़ी तो मेरे हाथों से उनका हाथ अचानक ही छ्छू गया, मेरा पैर
फिसल गया और मेरे ससुर ने मुझे अपनी मज़बूत बाहों में लेकर संभाल लिया.
में उनकी चौड़ी छाती के साथ सॅट गयी. मेरी चुचि उनकी छाती में धस गयी और
मेरे जिस्म में आग दहकने लगी. उनका हाथ बरबस ही मेरे कुल्हों पर रेंग गया
और मैं शर्मा गयी. ' माफ़ करना बाबूजी मेरा पैर फिसल गया था, आप मुझे ना
थाम लेते तो मैं तो गिर ही जाती.' मैने कहा. वो बोले,' बेटी मैं किस लिए
हूँ, अगर क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना, मैं अपने
परिवार के लिए सब कुच्छ करने को तय्यार हूँ, मुझ से कभी भी शरमाना नहीं,
मेरी बेटी,' मैने गौर से देखा के उनके पाजामे में उनका लंड सलामी दे रहा
था, मैं मुस्कुराइ और अपने आप से बोली, साली, तू बाहर क्या ढूड़ रही है,
महा लंड तो घर में ही विराजमान हैं, यह साला ससुर मेरे उप्पेर ही नज़रें
लगा कर बैठा है, और मुझे भी तो लंड चाहिए, लेकिन अब साला बूढ़ा नहीं
जानता कि मैं उस के साथ चुदाई तो करूँ गी पर इसकी बेटी को भी इसके लंड से
चुदवाउंगी.

मैं सारी रात अपनी और राधिका की चुदाई का प्लान बनाती रही. जब मैं सारा
काम ख़त्म कर के अपने कमरे में राधिका के पास जा रही थी तो बाबूजी के
कमरे से आवाज़ आ रही थी,' अह्ह्ह्ह मार डाला मेरे रजाअ, आज क्या खा कर आए
हो, मेरी चूत की धज़ियाँ ही उड़ा डालीं, आज तेरा लंड कुच्छ ज़यादा ही
ज़ोर मार रहा है, ऐसा लगता है जैसे किसी जवान औरत की कल्पना करके मुझे
चोद रहे हो, मेरे स्वामी मैं आपके हल्लाबी लंड के सामने नहीं टिक सकती,
ये मैं नहीं झेल सकती, जब कल मैं अपने मायके चली जाउन्गी तो शूकर हो गा
कम से कम दो महीने तो आराम से काट लूँगी, और तुम मूठ मार मार के करना
गुज़ारा, ओह्ह्ह्ह मैं झड़ी मेरी चूत का रस निकल गया, निकाल लो अपना लॉडा
मेरी बुर में से मैं तो थक गयी,' बाबूजी बोले" साली मेरा तो झाड़ दे, चूस
के, मूठ मार के या फिर अपनी गांद मे डाल के, मैं इस खंबे जैसे लंड को ले
कर कहा जाऊ, बेह्न्चोद मेरा तो पानी निकाल दो" सासू मा बोली" अपना पानी
आप ही निकाल लो मैं तो सोने लगी हूँ.' मेरा दिल किया के मैं दौड़ के
बाबूजी का लंड अपनी चूत में लेकर मस्त हो जायूं पर एस्सा कर ना सकी.
लेकिन एस्सा कुच्छ ना कर सकी और अपने कमरे जाकर सारी रात बाबूजी के लंड
के सपने देखते हुए जाग कर निकाल दी

सुबह जब मैं उठी तो राधिका मेरे साथ लिपटी हुई थी, उसके हाथ मेरे मम्मों
पर थे जिन्हे वो दबा रही थी. मैं उठ कर बाथरूम होकर आई तो मेरी ननद अपनी
चूत खुज़ला कर बोली,"भाबी अगर तुमने किसी लंड का इंतज़ाम नहीं किया तो
मैं मर जायूंगी, मुझे बचा लो मेरी प्यारी भाबी," मैने मुस्कुरा कर पुछा,
किस का लंड चाहिए. उसने जवाब दिया लंड किसी का भी हो, चलेगा, अब तो चूत
इतनी बेसबरी हो चुकी है की अगर मेरे बाप का भी मिल जाए तो इसकी आग ठंडी
करने के लिए ले लूँगी" मैने कहा" ठीक है अब मुकर मत जाना किओं कि तुझे आज
बाबूजी का लंड ही मिलने वाला है, तू बस ऐसे ही करना जैसे मैं कहती हूँ,"
वो मान गयी. जब वो तय्यार होने चली गयी तो मैं बाबूजी की चाइ लेकर उनके
रूम में चली गयी. मैने जानबूझ कर सारी का पल्लू नीचे गिरा रखा था, जिस
कारण मेरे वक्ष आधे से अधिक नंगे हो रहे थे. सासू मा अपने मायके जाने के
लिए तय्यार हो रही थी.

मैने आगे झुक कर चाइ बाबूजी को दी और अपने कूल्हे इनके हाथ से रगड़ दिए.
मैने देखा कि उनका लंड उठक बैठक करने लगा है. मैने जान बुझ कर उनसे कहा"
बाबूजी, देखो मेरा हाथ दुख रहा है, क्या ये सूज गया है, देखो तो सही,"
इतना कह कर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया, उन्हों ने मेरा हाथ पकड़ लिया
और मलने लगे, मैं उनसे सॅट कर बैठ गयी. मैने नोट किया की बाबूजी मेरा हाथ
सहलाने लगे और उनका लंड पाजामे के अंदर सर उठाने लगा. मैने उनको पूरी तरह
उतेज़ित कर डाला. जब वो मेरे कंधे पर हाथ रखने लगे तो मैं जान बुझ कर
बोली, " अब मैं चलती हूँ माजी का नाश्ता बनाना है,' मैने हाथ छुड़ाया और
चली गयी लेकिन बाबूजी का बुरा हाल था, वो अपने लंड को मसल रहे थे.

मैने राधिका को कहा,' तुम माजी के जाने के बाद, कमर मैं दर्द का नाटक
करना, और बाबूजी को कमर पर इयोडीक्स लगाने के लिए कहना, और धीरे धीरे
नीचे तक उनका हाथ ले जाना, लेकिन ये सब उस वक्त करना जब मैं माजी को बस
स्टॅंड पर छोड़ने जाऊ और घर मैं कोई ना हो. देखना वो तेरे को चोदने को
तय्यार हो जाएँगे, मैने उनकी चाइ में शिलाजीत मिला दी थी, आज तेरी चुदाई
पक्की हो जाएगी मेरी बन्नो, तुम यह निकर और टी शर्ट पहन लो और ब्रा और
पॅंटी मत पहनना, तेरा बाप आज किसी को भी चोदने को तैयार हो जाए गा, तुम
उस पर अपनी जवानी का जादू चला दो मेरी रानी उसके बाद हम दोनो उसके लंड के
मज़े लेंगे, वो भी चूत का भूखा है मेरी जान' वो हैरान हो कर मेरी तरफ
देखने लगी. मैं फिर बाबू जी के कमरे में गयी और उनकी जांघों पर हाथ रख कर
बातें करने लगी, और उनके लंड को भी च्छू लिया. वो बेचैन होने लगे और मैं
मुस्कुरा कर बाहर आ गयी.

मैं थोड़ी देर में वापिस आगाई और राधिका के कमरे में झाँकने लगी. राधिका
ने आवाज़ लगाई" पप्पा ज़रा मेरी कमर पर बल्म लगा देना, मुझे बहुत दर्द हो
रहा है,' उसने ये कहते हुए अपनी टी शर्ट उप्पेर उठा डाली और उस का गोरा
पेट नंगा हो गया, और जब उसने अपनी कनीकेर्स को नीचे कर दिया तो उसकी जाँघ
नज़र आने लगी. मेरी आँख ने देखा कि बाबूजी की नज़र में वासना की चमक उभर
आई. उनकी आँखों में एक लाली नज़र आने लगी. वो अपनी बेटी के नज़दीक आ गये
और वासनात्मक नज़रों से देखते हुए बोले" बेटी क्या हुया, दर्द कहाँ हो
रहा है, और उनका हाथ अपनी बेटी की कमर पर चला गया और उसकी कमर को सहलाने
लगा.

मैने देखा कि अब बाबू जी नहीं बल्कि उनका लंड बोल रहा था. उनकी आवाज़ से
सॉफ ज़ाहिर था के काम वासना में वो बाप बेटी के रिश्ते की पवित्रता को
भूल गये थे. अब कमरे में सिर्फ़ चूत और लंड के मिलन का सीन बना हुआ था.
बाबूजी के हाथ काँप रहे थे जब वो अपनी बेटी की कमर को सहला रहे थे.
राधिका ने अपना सिर बाबूजी की छाती पर टीका दिया. राधिका की साँसें तेज़
हो चुकी थी.

बाबू जी ने इयोडीक्स की शीशी उठाई और कमर पर लगाना शुरू कर दिया. राधिका
की चुचि अब उनके शरीर से सॅट गयी थी और बाबूजी और भी उतेज़ित हाने लगे.
बाबूजी ने अपना एक हाथ उसकी चुचि पर रख दिया और धीरे से दबा दिया." ऑश
पापा धीरे से, मुझे बहुत घबराहट हो रही है, हाए मुझे दर्द हो रहा है,
बल्म मलीए ना, पापा," राधिका बोली और अपने बाप के शरीर से चिपक गयी.
बाबूजी का लंड अब बेकाबू हो चुका था. राधिका ने अपनी निकर्स को और नीचे
कर दिया जिस के साथ ही उसकी जांगेः पूरी तरह नंगी हो गयी. अब उसके कूल्हे
बस उसकी टी शर्ट से ही ढके हुए थे. बाबूजी ने काँपते हाथों से राधिका की
कमर और जांघों पर बॉम लगाना शुरू कर दिया और राधिका और ज़ोर से अपने बाप
के शरीर से चिपकती चली गयी. मैं मतर्मुग्ध हो कर कमरे के अंदर का सीन देख
रही थी और मेरे जिस्म में भी कामग्नी जल रही थी. ' पापा मेरे कूल्हे भी
दर्द कर रहे हैं, प्लीज़ वहाँ भी बॉम लगा दो,' बाबूजी ने बॉम लगाना शुरू
कर दिया और उसकी टी शर्ट को उप्पेर उठा दिया. वो अपनी बेटी के चूतरो पर
बॉम लगाने लगे. राधिका ने अपना हाथ अपने पापा की छाती पर रख दिया और अपने
होठ उनके होंठों पर रख दिए, उसकी साँसें पापा की साँसों से टकरा रहीं थी.
बाबूजी ने बेटी को बाहों मैं भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगे..
राधिका ने नाटक करते हुए अपने आप को छुड़ाने की झूठी सी कोशिश की लेकिन
बाबूजी ने उसे और भी कस कर जाकड़ लिया और अपनी बटी को बेतहाशा चूमने लगे,
उनका लंड राधिका के पेट को टच कर रहा था, बाबूजी ने उसकी चुचि कस कर
दबानी शुरू कर दी और राधिका ने ड्रामा किया" पापा, यह क्या कर रहे हो,
मैं आपकी बेटी हूँ, क्या यह पाप नहीं है, आप मुझे छ्चोड़ दो, हम यह सब
नहीं कर सकते, पापा, मुझे छ्चोड़ दो, प्लीज़," वो भी जानती थी कि अब पापा
वापिस आने के काबिल नही रहे किओं की उनका लंड अब फटने के करीब ही था.
पापा ने अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर रख कर कहा" मेरी बेटी लंड और चूत
का एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का रिश्ता, मेरी प्यारी बेटी,
तुम भी लंड के बिना तड़प रही हो मुझे पता है और साथ ही तेरी भाबी भी
चुदसी है क्योंकि के उसका पति भी उसे चोद नहीं सकता, आ जाओ मैं तेरी चूत
को चोद कर मस्त कर दूँगा, बेटी मेरा लंड कैसे दाहक रहा है, तुम इसको हाथ
में लेकर सहलाओ ज़रा, देखो तुम्हारी चुचि कितनी कड़ी हो गयी है, जल्दी से
अपनी टी शर्ट भी उतार दो मेरा लंड तुझे चोदने को तड़प रहा है," राधिका भी
मस्ती में भर उठी और अपनी टी शर्ट उतार कर पूरी तरह नंगी हो गयी और पापा
के लंड को हाथ में भर के मुठियाने लगी. लंड की आँख से प्री-कम की दो
बूँदें टपक पड़ी और बाबूजी चुदाई की मस्ती में आ गये और ज़ोर ज़ोर से
अपनी बेटी की चुचि को मुह्न मे लेकर चूसने लगे, " बेटी तू कितनी सेक्सी
हो गयी है, मेरा लंड तेरी चूत का प्यासा है, अब मुझे अपनी चूत का स्वाद
दिखाओ, मेरी प्यारी बेटी और मेरे लंड को चूस कर इसका स्वाद देखो, जल्दी
से मैं आज सवेरे से ही चोदने के लिए तड़प रहा हूँ, लाओ अपनी टाँगें खोल
कर अपनी चूत का दीदार तो कर्वाओ," राधिका ने अपनी जांघे खोल दी और उसकी
चूत मुस्कुरा उठी किॉकी वो आज पहली बार किसी असली लंड से चुदाई करने वाली
थी. पापा ने अपना मुह्न उसकी चिकनी चूत में घुस्सा दिया और अपनी जीभ चूत
की फांकों के अंदर डाल दी. " अहह पापा, यह क्या कर दिया मेरी चूत को, यह
तो पानी छ्चोड़ने लगी है, चूस लो मेरी बुर को पापा, यह आज चुदाई के लिए
तड़पति है, लायो मैं आपके लंड को चूस लेती हूँ, मुझे चोद डालो आज, चोद दो
अपनी बेटी को, मेरे पापा,' इसके साथ ही राधिका ने पापा का लंड अपने मुह्न
में ले लिया और लगी चूसने उनके लंड को. लंड आग की तरह दहकने लगा. बाबूजी
अपने चूतर आगे पिछे करने लगे, राधिका बाबूजी के लंड को गले के भीतर तक ले
गयी और करहाने लगी, उधर बाबूजी की जीभ राधिका की चूत में पूरी तरह समा
चुकी थी और उसकी चूत का रस, बाबूजी के मुह्न से बहने लगा, जैसे की उनके
मुह्न से लार टपक रही हो, राधिका की चूत झाड़ रही थी.
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05-16-2019, 11:59 AM,
#16
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
तभी मैने कमरे मैं एंट्री कर दी और बोली," साले बाबूजी, इतने कामीने
निकले के अपनी ही बेटी को चोदने के लिए तैयार हो गये, बेटीचोड़ साले मैं
क्या मर गयी थी, मुझे कौन चोदे गा बेहन्चोद, तेरा बेटा तो बेहन्चोद मुझे
छ्चोड़ कर चला गया और तू भी साले अपनी बेटी को ही चोद रहा है, मेरा क्या
हो गा, " बाबूजी मुझे देख कर घबरा गये और फिर संभाल कर बोले," बेटी तू भी
आ जा मेरी बेटी, मेरा लंड मेरी बहू और बेटी के लिए काफ़ी है, मैं तुम
दोनो को चोद कर शांत कर दूँगा, आजा मेरी रानी बहू, अगर बेटा चला गया है
तो क्या हुया, बाप तो ज़िंदा है, मेरे पास आ मैं तेरी चुचि को भी चूस्ता
हूँ, आ मेरी बेटी तू भी कोई कम सेक्सी नहीं हो, तेरा जिस्म भी चुदाई की
आग में जल रहा होगा, ला मेरे पास आ मैं तुझे भी तृप्त कर्दून्गा," मैने
फटाफट अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और बिस्तर पर आके बाबूजी के जिस्म
को चाटने लगी और राधिका की चुचि दबाने लगी. बाबूजी ने अपना हाथ मेरी गांद
पर फिराना शुरू कर दिया. मैने बाबूजी का लंड हाथ में ले लिए और उससे
सहलाना शुरू कर दिया. उनका लंड पूरी तरह कड़ा हो चुका था. मैने उसे चाटना
शुरू कर दिया, मेरी चूत भी पनिया गयी थी. मैने कहा " आप पहले राधिका को
चोद कर शांत कर दो, इसकी चूत अभी कुँवारी है, लेकिन ज़रा, प्यार से चोदना
अपनी बिटिया को," ये कहते हुए मैने राधिका की टांगे चौरी कर दी और उसकी
चूत पर बाबूजी का लंड टीका दिया, उनके टट्तों पर हाथ फिराया जिस कारण
बाबूजी के मुह्न से आह निकल गयी, मैने उनका लंड राधिका की चूत पर रगड़ा
जिस में से पहले ही पानी निकल रहा था. उसकी खुजली इतनी बढ़ गयी के वो
अपने आप पर काबू ना रख सकी" पापा अब और मत तद्पाओ, मेरी चूत में आग लगी
हुई है, आप का लंड रगड़ना मुझे पागल बना रहा है, पापा मेरी चूत के अंदर
पेल दो अपना लोड्‍ा, पापा मेरे साथ सुहागरात माना लो, मुझे मम्मी की तरह
चोद डालो मेरे प्यारे पापा, मुझे पेल दो पापा, प्लीएज, भाबी मेरी चूत में
पापा का लंड पेल दो, मेरी प्यारी भाबी, उसके बाद तुम मज़े ले लेना पापा
के लंड के साथ, मैं तेरी विनती करती हूँ, मेरी आग बुझा दो, प्लेआस्ीईए."

बाबू जी का लंड पकड़ कर मैने राधिका की चूत के मुख पर टीकाया और कहा"
बाबूजी पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की बर में, देखो कैसे तड़प रही है
साली, कैसे दाहक रही है इसकी चूत, अब तो इसकी आग आपका लंड ही शत कर सकता
है, उड़ा दो इसकी चूत की धज़ियाँ, पेल दो अपनी बेटी को, डाल दो अपना लंड
रस इस की प्यासी चूत में, " बाबूजी ने देर करना मुनासिब नहीं समझा और
धक्का मार के लंड पेल दिया, और उनका आधा लंड पहले धक्के में चूत में समा
गया. राधिका चिल्लाई" पापा बहुत दर्द हो रहा है, लगता है मेरी सील टूट
गयी है, बाहर निकाल लो अपना लंड, दर्द बर्दाशत नहीं हो रहा पापा,
प्लीज़." लेकिन बाबूजी ने धक्के मारना जारी रखा. उनका लंड अपनी बेटी की
चूत के अंदर बाहर हो रहा था. राधिका की चूत से लहू बहने लगा. बाबूजी भी
पुराने खिलाड़ी थे, " बेटी दर्द थोड़ी देर में ख़त्म हो जाएगा, ऋतु, तू
राधिका की चुचि चूसना शुरू कर दो और इस की चूत को भी सहलाओ, साली बहुत
टाइट है इसकी चूत, लेकिन मैं आज इसे चोद कर ठंडी कर दूँगा, ले बेटी ले लो
अपना पापा का लंड अपनी प्यासी बुर में और मिटा दो इसकी प्यास.'

मैने अपनी जीभ से राधिका की चुचि चाटना शुरू कर दिया और अपनी उंगलिओ से
उसकी चूत के आसपास का इलाक़ा उतेज़ित करना शुरू कर दिया. उसका दर्द कम हो
गया और उसे मज़ा आने लगा, और वो चूतर उच्छाल कर बाबूजी के धक्कों का
ज्वाब देने लगी," पापा मेरा दर्द ख़त्म हो गया है, आपके लंड से मुझे
जन्नत का मज़ा आ रहा है, आपका लंड मेरी चूत को स्वर्ग दिखा रहा है, पेलो
अपना लंड मेरी चूत के अंदर, चोद दो अपनी बेटी को, ले लो मेरी कुंवाई चूत
के मज़े, ज़ोर से चोदो मुझे," मैने बाबूजी के लंड पर उंगलियाँ फेरी और
उनके चूतर पर थपकी दी और कहा" बाबूजी, चोदो अपनी हरामी बेटी को साले,
ज़ोर से लगा धक्के बेहन्चोद, देखता क्या है साले तुझे आज अपनी जवान और
कुँवारी बेटी की चूत का मज़ा मिल रहा है, साले बन गया है तू बेटीचोड़ और
थोड़ी देर में बहुचोद भी बन जाएगा, साले चोद डाल इसको, चोद डालो अपनी
बेटी को, वो कब से प्यासी है लंड की, मिटा तो इसकी प्यास, छोड़ दो अपना
पानी इसकी चूत मैं.' बाबूजी भी पागलों की तरह धक्के मारने लगे. कमरे में
घचा घच की आवाज़ें आने लगी, राधिका के मुह्न से अहह, ओह की आवाज़ आ रही
थी.

बाबूजी ने अपनी बेटी के चूतरो को कस के पकड़ रखा था और उसे पेल रहे थे,"
अहह, बेटी मेरा भी टाइम नज़दीक आ रहा है, मैं भी झड़ने वाला हूँ, हां मैं
सच में बेटीचोड़ बन गया हूँ, और मुझे ख़ुसी है के तुमने अपनी कुँवारी चूत
,मेरे लिए संभाल के रखी हुई थी, हाँ बेटी चुदवा ले मुझ से मेरी प्यारी
बेटी, कसम तेरी जवानी की आज तक इतना मज़ा नहीं आया, क्या चूत है तेरी, ले
लो मेरा पानी तेरी चूत में जा रहा है, मेरा पानी तेरी कोख में गिर रहा
है, तेरा बाप झाड़ रहा है, मैं गय्ाआआआ," यह कहते हुए बाबूजी ने पिचकारी
राधिका की चूत में छ्चोड़ दी और उनका लंड छपक की आवाज़ से चूत से बाहर
निकल आया. मैने पहले उनका लंड चूस कर सॉफ किया और फिर अपनी ननद की चूत को
चटा और हम दोनो ही बाबूजी की बगल में लेट गयी. थोड़ी देर बाद बाबूजी ने
मेरी भी चुदाई की और ऐसी चुदाई की की मैं आज भी अपने आपको जन्नत मे महसूस
करती हू
समाप्त.....
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05-16-2019, 11:59 AM,
#17
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
चुदाई के दिन चुदाई की रातें -1 



मेरा नाम सुधा है और मैं बीए मे पढ़ती हूँ. दिखने में सुंदर हूँ लेकिन नेचर शर्मीली है. मेरा फिगर 36-26-36 है और रंग गोरा है. पिच्छले हफ्ते तक मैं कुँवारी थी. मैने राज शर्मा की सेक्सी स्टोरीस पढ़ी थी और ब्लू फिल्म्स भी देखी थी जिस कारण मुझे सेक्स कि समझ तो थी लेकिन किसी ने मुझे कभी चोदा नहीं था. मैं चुदाई की इच्छा के कारण हमेशा अपनी चूत को शेव कर के रखती थी कि ना जाने कब कोई चुदाई करने वाला मिल जाए. लेकिन जैसे कि मैने कहा, मैं डरती थी और किसी को चुदाई के लिए न्योता देने की हिम्मत नहीं पड़ती थी. घर में मेरे सिवा पापा और एक छोटी बेहन नामिता थी. पापा श्री हंस राज एक दुकान मालिक थे और छ्होटी बेहन 12 क्लास में पढ़ती थी. नामिता भी दिखने में बहुत सेक्सी थी. वो अक्सर स्कर्ट्स और टीशर्ट पहनती थी. उसस्की स्कर्ट्स बहुत छ्होटी होती और उसस्के उरोज़ उसस्की टी-शर्ट से बाहर निकलने को तैयार रहते. 

एक दिन नामिता की नज़र मेरी पॉर्न बुक्स पर पड़ी और वो बोली,” दीदी, ये क्या बच्चो वाली किताबें पढ़ती हो, मैं तुझे ब्लू फिल्म दिखाती हूँ जिस में हबशी लड़के एक गोरी औरत को आगे पीच्छे से चोद्ते हैं. दीदी आज कल कहानी तो बच्चे पढ़ते हैं. एक बात बतायो, तेरा कोई बाय्फ्रेंड है या नहीं, कभी क़िस्सी ने तेरी चूत का उद्घाटन किया है या नहीं?” मैं अपनी छ्होटी बेहन की बात सुन कर दंग रह गयी. “नामिता क्या बकती हो? तुम अभी बच्ची हो. तुझे अपना मन पढ़ाई में लगाना चाहिए. अगर पापा को तेरी ऐसी बातों का पता चल गया तो मार पड़ेगी. फिर मुझे मत कहना” नामिता हंस पड़ी,”दीदी, जब चूत में जलन होती है तो लंड ही बुझाता है वो आग. तुझे अगर मज़े लेने हैं तो बता देना. मैं स्कीम बना लूँगी. अपने यार से तेरी भी चूत ठंडी करवा दूँगी. और रही पापा की बात, तुम फिकर मत करो. हमारे पापा भी ऐश करते हैं. तू नहीं जानती कि पापा के संबंध उषा मौसी के साथ हैं. पापा मौसी के साथ जो कुच्छ करते हैं, शायद हमारी मा के साथ भी ना किया हो उन्हों ने. दीदी ये दुनिया इतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है” 

मेरी मा की मौत के बाद उषा मौसी हमारा ख्याल रखती थी और हमारी गली में ही रहती थी. उषा मौसी के साथ पापा का चक्कर? सोचते ही मेरी चूत गीली हो गयी. मेरी मा की मौत आज से 3 साल पहले हुई थी. नामिता मेरे पास आई और मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे गालों पर हाथ फेर कर बोली,” दीदी, ज़िंदगी मज़े लेने के लिए है. जब पापा मौसी के साथ चुदाई करते हैं तो हम को किस बात की रोक है. हम तो अभी जवान हैं. इस चूत में जो आग लगती है उसस्के लिए भगवान ने लंड नाम की मज़ेदार चीज़ बनाई है. और रही पापा की बात आज रात को तुझे पापा की और मौसी की चुदाई दिखा दूँगी और तू कहे तो कल अपने यार से तुझे भी जवानी के मज़े दिलवा दूँगी. वैसे भी साला तुझे भूखी नज़रों से देखता है वो.” मेरे मन ज़लज़ला उठा खड़ा हुआ और मेरी चूत से पानी आने लगा. 

रात को उषा मौसी आई और खाना बनाने लगी. मौसा जी नाइट शिफ्ट में काम करते थे और मौसी हमारे घर ही सो जाती थी. मैने नामिता की बात सुन कर उषा मौसी को गौर से देखा. मौसी की उमर कोई 32 साल की होगी और वो भरे जिस्म की मालिका थी. चूतड़ काफ़ी भारी और चुचि भी बड़ी थी. मौसी ने ग्रीन रंग की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी लेकिन उसस्की चुचि जिस तरह उठक बैठक कर रही थी लगता था उससने ब्रा नहीं पहनी थी. पापा रसोई में चले गये और मैने देखा की पापा का हाथ मौसी के चूतड़ को टटोल रहा था और मौसी शर्मा कर नीचे की तरफ देख रही थी. मैं और नामिता डाइनिंग रूम से ये नज़ारा देख रहे थे. नामिता ने धीरे से कहा,”देखो दीदी, पापा कैसे हाथ फेर रहे हैं मौसी की गांद पर. आज ज़रूर चोदेन्गे मौसी को.” इसके साथ ही नामिता ने मेरे चूतड़ को ज़ोर से मसल दिया,” नामिता, ये क्या करती हो, कितना दर्द होता है मुझे” नामिता मुस्कुरा पड़ी,”दीदी, ये दर्द नहीं है, यही तो मज़ा है. आज दिखाती हूँ तुझे लंड और चूत का मधुर मिलन.” 

टेबल पर पापा अपने सामने शराब का ग्लास रखे हुए थे और चुस्की ले रहे थे. आज वो पानी जैसी दिखने वाली शराब पी रहे थे. फिर अचानक पापा ने ग्लास मौसी की तरफ बढ़ा दिया और मौसी ने चुप चाप पी लिया. मैने देखा के पापा ने टेबल के नीचे से अपना हाथ मौसी की जाँघ पर फेरना शुरू कर दिया. पापा और मौसी की आँखों में लाल रंग के डोरे तैरने लगे थे. उनकी साँसों में तेज़ी बता रही थी की दोनो चुदाई करने के लिए बेताब हैं. नामिता और मैने खाना जल्दी से ख़तम किया और अपने अपने कमरे में चली गयी. नामिता ने मुझे आँख मारी और कहा,” दीदी आज तुम मेरे साथ ही सो जाओ, मुझे तुमसे कोई बात करनी है.” मैं उसस्के पीछे चल पड़ी. नामिता के कमरे की दीवार में एक बड़ा सा छेद था जिस में से हम दोनो पापा की चुदाई का खेल देखने वाले थे. नामिता और मैं दोनो ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिस्तर पर चली गयी. 

नामिता का जिस्म भी बहुत सेक्सी था. उसस्के चुचक काफ़ी बड़े थे और उससने अपनी चूत को अच्छी तरह से शेव कर रखा था. मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरी बेहन ने मेरी चुचि को मसल डाला और मेरे होंठों पर किस करने लगी, मेरे चूतड़ को सहलाने लगी, मेरी चूत पर हाथ फेरने लगी,” ओह नामिता….ये क्या कर रही हो….मुझे कुच्छ होता है….मेरे बदन में झूर झूरी सी हो रही है…नामिता…..मेरी चूत में खुजली हो रही है…तुम मुझे किस कैसे कर रही हो….हाई मेरी बेहन मुझे क्या हो रहा है..तेरा आलिंगन मुझे उतेज़ित कर रहा है….तेरे बदन का सपर्श मुझे जला रहा है….मुझे छ्चोड़ दो प्लीज़” मेरे मूह से निकला तो नामिता शरारती तरीके से मुस्कुरा पड़ी और फिर से मेरी गर्दन और कंधों को किस करती रही. नामिता की जीभ से मेरी गर्दन और कंधे गीले हो गये लेकिन मुझे बहुत कामुक आनंद आ रहा था. नामिता का हाथ मेरी चूत को रगड़ने लगा तो चूत रस से उसस्की उंगलियाँ भीग गयी,” सुधा, साली देख तेरी चूत का रस कैसे बह रहा है. तेरी चूत अब चुदाई के लिए तड़प रही है. आज की रात तो मैं तुझे लेज़्बीयन प्यार से खुश करूँगी लेकिन कल तेरी चुदाई का वो बंदोबस्त करूँगी की याद रखोगी सारी उमर भर. नामिता ने अगर आज भी तेरी चूत का पानी ना निकाला तो मेरा नाम बदल देना.” 

दूसरे कमरे में भी हुलचूल शुरू हो चुकी थी. नामिता मुझे छेद के पास ले गयी और हम दोनो पापा के कमरे में झाँकने लगे. पापा और मौसी दोनो शराब पी रहे थे और पापा ने मौसी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए. मौसी चिहुक कर बोली,” जिज़्जु, अपने पाजामे को भी तो उतारो, अपनी साली को भी तो अपने लोड्‍े के दर्शन करवायो. मेरी बेहन को चोद कर तो दो लड़कियाँ पैदा कर ली हैं तुमने, अब मुझे भी तो एक बच्चे की मा बना दो मेरे जिज़्जु राजा,” मौसी बिस्तर पर टाँगें फैला कर बोल रही थी. मौसी की चूत पर काले काले बाल थे. तभी पापा ने अपना पाजामा खोल दिया और अपना काला लंड मौसी के मूह पर रख दिया और खुद मौसी की चुचि को सहलाने लगे,” उषा, मेरी रानी तेरा पति तुझे बच्चा नहीं देता क्या? अगर तू चाहे तो मैं तुझे मा बना सकता हूँ. मैने तुझे कभी ममता(हमारी मा) से कभी अलग नहीं समझा,” मौसी गुस्से में बोली,” जीजू मेरा पति कुच्छ नहीं कर पाता. साला चूत पर लंड रखते ही झाड़ जाता है और मैं तरसती रह जाती हूँ. इसी लिए तो अपने जिज़्जु के सामने टाँगें खोल देती हूँ, जिज़्जु राजा. लेकिन हर रोज़ चोरी से चुदवाते हुए डर लगता है, कहीं सुधा और नामिता को शक हो गया तो क्या होगा?” 

पापा ने अपना लंड अब मौसी के मूह में धकेलते हुए कहा” मेरी दोनो बेटियाँ भी जवान हो चुकी हैं. उनको भी लंड की तलाश होगी. वो अपने पापा की स्थिति को समझ लेंगी. वो समझ लेंगी कि अगर उनका पापा उनकी मौसी को चोद लेता है तो कोई बुरा नहीं करता. ये तो डिमॅंड और सप्लाइ का सिधान्त है. अगर मेरी साली को उसका पति नहीं चोदेगा तो क्या मैं भी छ्चोड़ दूँगा उसको पड़ोसी के लिए? शाबाश मेरी रानी चूस मेरा लंड, चाट ले मेरे अंडकोष. आज की रात मैं तुझे अपने बच्चे की मा बना कर यादगार बना देना चाहता हूँ, ज़ोर से चूस लंड को रानी, काट खायो मेरे लंड को उषा रानी.” 

पापा अपनी गांद आगे पीच्छे कर रहे थे और मौसी मज़े से लंड को चूस रही थी. देखते ही देखते पापा भी पलंग पर लेट गये और उन्हों ने अपना मूह मौसी की जांघों के बीच डाल कर मौसी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. तभी नामिता ने मेरे निपल को किस कर के चूसना शुरू कर दिया और बोली,” सुधा, पापा की पोज़िशन को 69 कहते है. बहुत मज़ेदार पोज़िशन होती है जब मर्द औरत की चूत चाटता है और औरत मर्द का लंड चुस्ती है तो उस्स्को 69 कहते हैं. मैं आज तेरी चूत को चाट कर खलास कर दूँगी तो देखना कितना मज़ा आए गा, दीदी. पापा और मौसी तो अपनी मस्ती में खो चुके हैं. तुम मुझे अपने जिस्म के साथ खेलने दो. मुझे तेरी चूत का पानी निकालना है किओं की कल तो तेरी ज़िंदगी का हसीन दिन होगा,” 

मैं मंतर मुग्ध हो कर पापा और मौसी का खेल देख रही थी. मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरी चूत के होंठ उतेज्ना से फूल गये हों. मेरा पूरा बदन गान गॅना चुका था. मेरी बेहन के हाथ जब मेरे जिस्म पर चलते तो मैं झुन झुना जाती. मुझे भी इच्छा होती कि मौसी की तरह मुझे भी लंड मिलता जिस्सको मैं चुस्ती और अपनी चूत को चुस्वाति. मौसी के मुख रस से पापा का लंड भीग कर चमक रहा था और दोनो की भारी साँसें चलने की आवाज़ सुन रही थी. उधर नामिता ने मेरे निपल्स को चूसना जारी रखा हुआ था और वो मेरी चूत को सहलाए जा रही थी.” ओह्ह्ह्ह नामिता…मुझ से नहीं रहा जा रहा…मुझे भी पापा जैसा लंड ला दो कहीं से…अपनी बेहन की चूत को मस्त लंड से भर दो…मेरी चूत में आग लगी हुई है मेरी बेहन…मेरी आग बुझा दो नामिता” 

दूसरे कमरे में पापा ने मौसी को घोड़ी बना दिया. मौसी अपने घुटने और हाथों के बल झुक चुकी थी और पापा उसस्के चूतड़ को थाम कर अपना लंड उसस्की चूत पर पीच्छे से धकेलने लगे.” रानी, मुझे घोड़ी बना कर चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है. तुझे कैसा लगता है उषा मेरी रानी. तेरे चूतड़ बहुत सेक्सी लगते हैं मुझे. एक दिन तेरी गांद ज़रूर चोदुन्गा. वह कितनी सेक्सी हो तुम मेरी साली.” उषा मौसी नी चे से बोल रही थी,” जिज़्जु तुम चोदना शुरू करो. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मुझे मेरे जिज़्जु चोद्ते हैं. तुम मुझे घोड़ी बनाओ या कुतिया, मुझे बस अपने जिज़्जु का लंड अपनी चूत में चाहिए….चोदो मुझे जिज़्जु राजा….थोक्दो अपना लोड्‍ा मेरी चूत में….चोद लेना मेरी गांद भी जिज़्जु….पेल मुझे” 

मेरे बिस्तर पर नामिता ने अब मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल दिया. मेरी बेहन मेरे उप्पेर चढ़ि हुई थी. उसस्की चुचि मेरे वक्ष स्थल पर रगड़ रही थी. मुझे किस करते हुए उसस्के होंठ मेरे निपल्स से होते हुए पेट पर और आख़िर मेरी चूत की त्रिकोण की तरफ बढ़ने लगे. उसस्के होंठ आख़िर मेरी चूत की फांकों को खोलते हुए अपने निशाने पर जा पहुँचे. उसस्की जीभ मेरे क्लाइटॉरिस को चाटने लगी और फिर उससने मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घुसा दी. मुझे उसस्की ज़ुबान क़िस्सी लंड जैसी लग रही थी. नामिता नेमेरी जांघों को कस कर पकड़ रखा था. उसस्की ज़ुबान मेरी चूत को चोद रही थी. पापा के कमरे में अब मैं देख नहीं सकती थी लेकिन उनकी आवाज़ें सुनाई पड़ रही थी. मुझे नहीं मालूम था की औरत भी दूसरी औरत की जब चूत चाटती है तो इतना मज़ा आता होगा. “हे भगवान, मुझे अपनी बेहन के चूमने चाटने से इतना मज़ा मिल रहा था तो असली लंड से मेरी हालत क्या होगी? 

मेरी चूत से लगातार रस टपक रहा था और मेरी बेहन मज़े से उस्स्को चाट रही थी. मुझे लगा कि मेरी चूत झड़ने लगी है. मैने अपने चूतड़ उप्पेर उठाने शुरू कर दिए ता कि मैं नामिता की पूरी ज़ुबान को अपनी चूत में घुस्सा कर और मज़ा ले सकूँ,’ आआआअ……ऊऊऊऊ…..आअगग्घह ……हाईईईई….उससिईईईई,,,नामिताआअ….चूस मेरी चूत….मैं गइई,….मेरी चूत से पानी जा रहा है….या मुझे क्या हो गया मेरी बहना…डाल दे अपनी जीभ मेरी फुदी में मैं झदीए” 

मैं ना जाने कितनी देर तक बिस्तर पर शरीर एन्थ कर तड़पती रही, मेरी चूत रो रो कर रस छ्चोड़ती रही और मेरी बेहन मेरी चूत का रस चाटती रही. जब नामिता ने चेहरा उठाया तो उसस्के होंठों से चूतरस टपक रहा था. नामिता मेरी बेहन बहुत खूबसूरत लग रही थी. जब उससने मुझे होंठों पर किस किया तो उसस्के मूह से मुझे अपनी चूत के रस का स्वाद मिला. नामिता की आँखें लाल हो चुकी थी और फिर उससने मेरे कानो को चूमा. मैने भी अपनी बेहन को मज़ा देने की सोच ली. मैने भी उस्स्को वैसे ही किस करना शुरू कर दिया जैसे उससने मुझे किया था.. मुझे हैरानी थी कि जो मैं कर रही थी वो लेज़्बीयन सेक्स था लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. नामिता का जिस्म बहुत नमकीन लग रहा था मुझे. मैने उसस्की मस्त चुचि को जब अपने मूह में लिया तो मुझे जन्नत मिल रही थी. नामिता के चुचक बहुत कड़े हो चुके थे. मैने नामिता को पेट के बल उल्टा दिया और फिर उस्स्को गर्दन से चूमना शुरू कर दिया. मेरी बेहन की गांद का उभार बहुत कामुक लग रहा था. 

मैने धीरे से नामिता की पीठ को किस करना शुरू कर दिया और उसस्के चूतड़ को सहलाया. मेरी बेहन के चूतड़ की दरार मुझे बहुत सेक्सी लग रही थी. अपना हाथ नीचे ले जा कर मेने उसस्की चूत को सहलाया और पीठ को चूमते हुए अपने होंठ मैने उसस्की गांद की घाटी तक पहुँचा दिए. नामिता अपनी चूत मेरे हाथ पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी और उस पर धक्के मार रही थी. आख़िर मैने अपनी ज़ुबान को नामिता के चूतड़ की दरार में डाल कर चाटना शुरू कर दिया. मुझ पर चुदाई का एक नशा च्छा रहा था. नामिता के चूतड़ का बहुत मज़ेदार स्वाद था और मैने अपनी ज़ुबान उसस्की गांद के छेद में घुसा दी,” ऊऊऊऊ…..आआआअ……दीदी…..चॅटो…बहुत मज़ा आ रहा है…..शाबाश दीदी चाटती जाओ….हाईईईईईई” 
नामिता की गांद से नमकीन स्वाद मुझे बहुत सेक्सी लगा और मैने उसस्की गांद को चटाना जारी रखा और उंगली से उसस्की चूत को चोदना जारी रखा. पहले मेरी एक उंगली उसस्की चूत में थी फिर मैने उसकी चूत दो और फिर तीन उंगली डाल कर चुदाई शुरू कर दी. मेरी ज़ुबान उसस्की गांद चोद रही थी और उंगलियाँ उसस्की चूत को चुदाई सुख दे रही थी. मेरा हाथ उसस्की चूत के रस से भीग गया था और वो मेरे हाथ पर अपनी चूत ऐसे चोद रही थी जैसे की क़िस्सी लंड पर पेल रही हो. उससने थोड़ी देर में पानी छ्चोड़ दिया. जब वो झाड़ गयी तो मैने उसस्की चूत को खूब चूसा और चूत का रास्पान कर लिया.” सुधा तू तो बहुत मस्त चुस्ती है. मैं तो तुझे अनारी ही समझ रही थी, तू तो साली मस्त लेज़्बीयन निकली” मैने उसस्के चूतड़ पर काट खाया और बोली,” नामिता जैसी जिसकी बेहन हो वो अनारी कैसे हो सकती है. अब कल की चुदाई को मत भूल जाना” 

क्रमशः............... 
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05-16-2019, 11:59 AM,
#18
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
चुदाई के दिन चदाई की रातें 2 


गतान्क से आगे...................... 

मैं सुधा, एक बार फिर से अपनी चुदाई की कहानी जारी रखती हूँ. मेरा रात को पापा के साथ मौसी की चुदाई देख कर उतेज्ना से बुरा हाल हो गया था और फिर मेरी बेहन नामिता ने मुझे जो मज़ा दिया, मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था. मेरी बेहन बेशक मुझ से छ्होटी है, पर चुदाई में मेरी गुरु है. उसस्के भीगे हुए चुंबन ऐसे थे कि मेरी चूत से रस की नदिया बहने लगी थी और जो मज़ा मुझे अपनी बेहन के मुख से और हाथों से मिला, कभी नहीं महसूस हुआ था. उसस्के बाद मैने अपनी बेहन को भी प्यार किया जो एक यादगार लम्हा बन गया मेरी ज़िंदगी का. जब सुबह मेरी आँख खुली तो मेरा जिस्म एक दम हल्का महसूस हो रहा था. नामिता के होंठों के स्पर्श की भावना मुझे आनंदित कर रही थी.

मैं नामिता से लिपट कर नंगी ही लेटी हुई थी. जब मेरी आँख खुली तो नामिता को अपनी बाहों में पाया. हम दोनो बहने एक दूसरे से लिपटी हुई थी. तभी मौसी चाइ ले कर आई.” क्या बात है बेटी, आज उठना नहीं है क्या? अर्रे तुम ने तो कपड़े भी नहीं पहने आज! क्या बात है? बच्चो अब तुम जवान हो चुकी हो, कपड़े पहन कर रखा करो. वाह सुधा, तेरा जिस्म तो भर चुका है. मैं बात करती हूँ जिज़्जु से की तेरी शादी करवा दें जल्दी से. सुधा, ये जवानी चली गयी तो ज़िंदगी में कुच्छ नहीं रहे गा. मज़े ले लो जवानी के जवानी में.” मैं अब मुस्कुरा पड़ी,” मौसी, हम लोगों को भी सीखा देना कि कैसे मज़ा लिया जाता है जवानी का. लगता है तुम को काफ़ी तज़ुर्बा है मज़े लेने का. कहीं तू भी तो हमारे घर में मज़ा लेने ही तो नहीं आती? पापा का ख्याल रखना ज़रा, मम्मी के बाद अकेले हो गये हैं कुच्छ. और वैसे भी जीजा साली का रिश्ता तो होता ही प्यार वाला. है” 

मौसी मुस्कुरा पड़ी,” तेरे पापा तो मेरे प्यारे जिज़्जु हैं, मैं उनका ख्याल नहीं रखूँगी तो कौन रखे गा? मैं तो ऐसे ही कह रही थी कि अगर क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो पुच्छ लेना, मेरी बच्चियो. अब मैं निकलती हूँ, तेरे मौसा जी भी लौट आए होंगे. शाम को मिलेंगे” पापा भी तैयार हो कर चले गये. नामिता ने फोन घुमाया और अपने दोस्तों से बातें करने लगी. मैं नहाने चली गयी और जब लौटी तो मेरी बेहन बोली,” सुधा, पहले दौर में मैं तुझे अपने यार करण से चुदवाती हूँ. मैने उसको कहा है कि मैं घर में अकेली हूँ, और वो जल्दी से आ कर मुझे चोद डाले. जब मैं उसके साथ हूँगी तो तुम हम को रंगे हाथ पकड़ लेना और हम को ब्लॅकमेल करके उस से चुदवा लेना, मैं भला ना किओं कहूँगी. एक बार कारण से चुदाई करवा लेना फिर दोपहर को मेरे यारों की मंडली आ जाए गी जो हम दोनो को लंड से हर तरफ से चोद चोद कर कुतिया बना देंगे,” 

मैं आने वाले वक्त के बारे सोच कर मुस्कुराने लगी. मेरी चूत चुदाई सुहाने ख्वाब देख कर पानी छ्चोड़ने लगी. नामिता ने एक पाजामा पहन लिया जिसके नीचे उसने कोई पॅंटी नहीं पहनी थी और उप्पेर एक पारदर्शी कुर्ता पहन लिया. मैं एक सेक्सी मागज़िने ले कर अपने कमरे में चली गयी. मैने एक नाइटी पहन रखी थी और कुच्छ भी नहीं. थोड़ी देर में बेल बजी और नामिता डोर खोलने गयी. कुच्छ देर में वो अपने दोस्त कारण को ले कर ड्रॉयिंग रूम में गयी. वो बोल रही थी” करण यार, अब देर मत करो, मैं तेरे लंड को भूखी हूँ, तुम मेरी चूत को ठंडा कर दो इस से पहले कि कोई कबाब में हड्डी आ जाए. ज़रा मेरी चूत पर हाथ रख कर देखो, कैसे जल रही है चुदाई की आग में,” कहते ही नामिता ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. करण ने भी अपनी पॅंट उतारनी शुरू कर दी,” नामिता, साली तेरी चूत है ही इतनी गरम की लंड बिना तो रह नहीं सकती. पहले मैं तेरी चूत को चाट कर ठंडा करूँगा और फिर लोड्‍े से चोद कर, ” 

नामिता नंगी हो कर सोफे पर लेट गयी और करण उसस्की जांघों को खोल कर अपना मूह उसस्की चूत पर झुका कर चूमने चाटने लगा. करण काफ़ी बलिश्त जिस्म का मालिक था. उसका लंड कम से कम 7 इंच का होगा और बहुत मोटा भी था,” करण साले मेरी चूत को चॅटो, कब से तरस रही हूँ इस्सको चटवाने के लिए. जल्दी से घुसा दो अपनी ज़ुबान को इससके अंदर, नामिता टाँगें खोले पड़ी है तेरे सामने.” करण बिन बोले चूत में जीभ घुसा कर चाटने लगा,” अहह……आअरररगगगगग…..हह…..म्‍म्म्मममम” नामिता के होंठों से सिसकारियाँ निकलने लगी. मैने भी नाइटी के उप्पेर से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया, मुझे उतेज्ना हो रही थी. मेरी चूत को आज तक किस मर्द ने टच भी नहीं किया था, चूमना तो दूर की बात थी. मेरी नाइटी का वो हिस्सा जो मेरी चूत के सामने था, मेरी चूत के रस से भीग गया था. प्लान के मुताबिक, मुझे नामिता और करण को चुदाई के खेल में रंगे हाथों पकड़ कर ब्लॅकमेल करना था. 

नामिता की जंघें अब करण की गर्दन के इर्द गिर्द कसी हुई थी. करण के चुटटर दरवाज़े की तरफ थे और उसस्के चुटटर उप्पेर नीचे हो रहे थे जब वो मेरी बेहन की चूत चाट रहा था. मैने कुच्छ इंतज़ार किया और फिर अपनी आवाज़ में में गुस्सा लाती हुई कमरे में दाखिल हुई,” नामिता की बच्ची, ये सब क्या हो रहा है, कुछ शरम नाम की चीज़ तेरे पास है या नहीं? ये लड़का कौन है? मैं पापा को बताती हूँ कि तुम कौन से गुल खिला रही हो” नामिता ने घबराने का नाटक किया और बोली,” दीदी आप यहाँ? आप तो बाहर गयी हुई थी…दीदी मुझे माफ़ कर देना…करण को तो आप जानती हैं…मेरा दोस्त है….मुझ से बहुत प्यार करता है…दीदी प्लीज़ पापा को मत कहना..हम तेरी हर बात मानेगे..प्लीएज” करण बहुत घबरा गया और हड़बड़ा कर नामिता की चूत से अपना मूह अलग करते हुए बोला,”दीदी, हम से ग़लती हो गयी…माफ़ कर दो ना….हम आपकी हर बात मानेगे….ऐसी ग़लती अब फिर नहीं होगी…” मैने देखा कि करणअब डर गया है और नामिता दूसरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी. करण मेरे पैरों पर गिर पड़ा और गिड़गिदने लगा. 

“ठीक है…मैं तुमको माफ़ कर सकती हूँ….करण तुम इस्सको ग़लती कहते हो, लेकिन तेरा लंड तो इस्सको ग़लती नहीं मान रहा…देखो कैसे खड़ा है अभी, जैसे कि अभी चुदाई कर देता मेरी बेहन की अगर मैं 5 मिनिट लेट हो जाती…नामिता, सच बतायो कितनी बार चोद चुका है करण तुझे? मुझ से झूठ मत बोलना” नामिता भी घबराहट की आक्टिंग करती हुई बोली,” दीदी ये मुझे कई बार चोद चुका है और बहुत मज़ा देता है मेरी चूत को इसका लंड. करण मेरा पहला यार है जिससने मेरी सील तोड़ी थी” मैने मुस्कुराते हुए करण के लंड पर हाथ फेरते हुए कहा”तो फिर माफी तभी मिल सकती है अगर करण मुझे भी चोद कर वोही मज़ा दे जो इससने तुझे दिया था, बोलो मंज़ूर है?” नामिता और करण एक दूसरे को देखने लगे और फिर कमरे की दूसरी तरफ जा कर बातें करने लगे. जब वो वापिस आए तो करण मेरे पास आ कर बोला,” दीदी हम को मंज़ूर है. मैं आपको चोद लेता हूँ पर आप क़िस्सी को मत बताना हमारी चुदाई की बात.” 

मेरी बात बन चुकी थी. मैने हंस कर कहा” करण साले एक तरफ मुझे “दीदी” बोल रहा है और दूसरी तरफ चोदने की बात करता है, क्या बात है राजा?” करण मेरी नाइटी को सिर के उप्पेर उठता हुआ बोला”बहुत लड़कियो को चोदा है, लेकिन क़िस्सी को बेहन बना कर नहीं चोदा है. सोचता हूं के अब अपनी दीदी को भी चोद कर मज़ा ले लूँ. वाह सुधा दीदी, आपकी फिगर तो कमाल की है और आपकी चुचि का तो जवाब ही नहीं है. नामिता, तुमने मुझे बताया ही नहीं कि तेरी बेहन इतनी सेक्सी माल है और वो भी चुदाई की प्यासी है. सुधा दीदी अब तुम घूम जयो और मुझे अपनी गांद के दर्शन करवा दो. मैं गांद का दीवाना हूँ. मुझे बहुत देर इच्छा है की क़िस्सी मस्त गांद को चोदु और आपकी गांद के तो क्या कहने?” उससने मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे चूतड़ पर कस के हाथ फेरना शुरू कर दिया. मेरा रोम रोम रोमांचित हो उठा जब करण के लंड का मोटा सूपड़ा मेरी चूत पर रगड़ने लगा. मैने प्यार से अपने होंठ करण की होंठों पर रख दिए. तभी नामिता बोली,” अच्छा भाई, अब मेरा यहाँ क्या काम? तुम दोनो भाई बेहन मज़े लो मैं चलती हूँ.” मैने कहा,”तुम भी यहीं रूको, तुम कहाँ चली?” नामिता ने कहा” दीदी जिस तरह आपने हम दोनो पर छापा मार दिया था, वैसे कोई आप पर छापा ना मार दे, इस लिए छ्होटी बेहन रखवाली के लिए बाहर बैठ जाए गी” 

नामिता के जाते ही करण मुझ पर टूट पड़ा और मुझे बे’तहाशा चूमने चाटने लगा. नंगी तो उसने मुझे कर ही दिया था, अब मेरी चुचि को चाटने लगा, पेट को किस करने लगा, अपने हाथों से मेरे चुटटर मसल्ने लगा.” एम्म्म…..हूंम्म्मम…अहह……

उफफफफफफफ्फ़….आआआ……ओफफफफ्फ़ करण ये क्या कर रहे हो भाई…मेरी चूत जल रही है….मैं मर रही हूँ” करण ने मेरा हाथ अपने तपते हुए लंड पर रखते हुए कहा”दीदी, इस्सको पकडो…इससके साथ खेलो….ये करण भाई का लंड आपको चोदने वाला है..मुझे बहुत उतेज्ना हो रही है जब में आपको दीदी कहता हूँ और आप मुझे भाई कहती हैं…इस पवित्र रिश्ते में चुदाई की मनाही होती है….लेकिन मना होने वाले काम में बहुत मज़ा आता है….आअज मैं अपनी दीदी को चोदने वाला हूँ…..सुधा दीदी, तुम मेरा लंड अपनी चूत पर रगाडो फिर देखना कितना मज़ा आता है…आअज मेरे लंड और आपकी चूत का मिलन होने वाला है” 

मुझ पर जैसे कोई नशा चढ़ गया हो. मुझे सब कुच्छ दुन्ध्ला दिखाई दे रहा था. मैने करण के मस्त लंड को हाथों में थाम कर आगे पीच्छे करना शुरू कर दिया. उसस्का लंड और भी मोटा हो गया. उसस्के लंड से एक बूँद रस की टॅपॅक पड़ी. अब मेरे मन में एक नयी बात आई और मैने झुक कर अपना मूह करण के लंड पर रख दिया,” अर्रे सुधा, तू तो अपनी बेहन की तरह रंडी निकली….सच दीदी, नामिता भी लंड चूसने की शौकीन है, तू भी मेरे लंड को मज़े से चूसो, दीदी. मैं भी तेरी चूत को चूसने वाला हूँ….किओं ना हम 69 पोज़िशन पर चले जाएँ मेरी बहना, मैं तेरी चूत चाटूँगा और तुम मेरा केला खा लेना. चलो बिस्तर पर चलते है. वहीं मज़े से चोदुन्गा तुझे मेरी प्यारी दीदी. ” उसने मुझे सिरहाने पर सिर टीका कर लिटा दिया और उल्टा हो कर मेरे मूह में अपना लंड डाल दिया और खुद झुक कर मेरी चूत को चाटने लगा. अब में समझ गयी की 69 पोज़िशन क्या होती है. 

मैं मज़े से करण के लंड को चूसने लगी, उसस्के अंडकोष से खेलने लगी. कभी कभी मैं उसस्की गांद को छेड़ देती, उंगली उसस्की गांद में धकेल देती तो वो बेकाबू हो जाता. करण भी पूरा हरामी था. वो मेरे क्लाइटॉरिस को चूस लेता, मेरे चुटटर पर थपकी मारता और यहाँ तक के मेरी गांद के छेद को भी चाट लेता. मेरी चूत लगातार पानी छ्चोड़ रही थी. तभी करण ने मेरी चूत को छ्चोड़ दिया और मुझे बोला,” रानी, फ्रिड्ज में वोड्का की बॉटल पड़ी है, एक एक ग्लास भर लो, मैं भी पीता हूँ तुम भी पी लो. इस से लंड जल्दी नहीं छ्छूतता और मज़े का दौर लंबा हो जाता है और शरम भी ख़तम हो जाती है” मैने बात मान ली और नंगी ही बॉटल उठा लाई. वोड्का पीते ही मेरे बदन में ऐसी आग लगी कि मैं अपने आप करण के लंड को चूमने लगी और करण मेरा जोश देख कर मुस्कुरा उठा. 

” सुधा, इस्सको पी कर तो तू बिल्कुल रंडी बन गयी हो और मुझे रंडी औरत बहुत पसंद है.तुझे पता है कि मैं रंडी के साथ कैसा सलूक करता हूँ? मैं उस्स्को बेरेहमी से चोद्ता हून.” उसने मेरे बाल खींचते हुए कहा. मुझे भी लगा कि शराब पी कर मुझे एक नया रोल अदा करना है. मैने उसके अंडकोष कस के पकड़ लिए और उनको खींच लिया,” हां बेह्न्चोद, तेरी दीदी एक रंडी ही तो है जो तुझसे से चुदवा रही है….चोद मुझे हरामज़ादे करण…अपनी बेहन को नंगा तो कर चुके अब चोद भी लो, देख क्या रहे हो…..छ्होटी बेहन को चोद चुके हो अब बड़ी को भी भोग लो साले बेह्न्चोद” मुझे ना जाने क्या हुआ कि मैं इस तरह गालियाँ बकने लगी. करण पर भी नशा चढ़ चुका था. उससने मेरे गालों पर एक थप्पड़ मारा और बोला,” साली चोदुन्गा तुझे भी तेरी बेहन की तरह ही. तुम अब झुक जा और मेरे सामने घोड़ी बन जा. चोदते वक्त मैं तेरी गांद देखना चाहता हूँ. देखना कैसे मेरा लंड तेरी चूत को भोसड़ा बनाता है. दीदी, तुमको पीछे से चुदवाना अच्छा लगता है?” 

“बहनचोद, साले तेरी बेहन पहली बार चुदवा रही है और वो भी तुझ से. मुझे अच्छा ही लगे गा चाहे आगे से पेल या पीच्छे से. अपनी बेहन को चाहे घोड़ी बना या कुत्ति, मेरे भाई, पर जल्दी से चोद डाल. मिटा डाल अपनी बेहन की चूत की आग” मैं बोल उठी और करण ने जान लिया के मैं अब लंड की भूखी हूँ. मुझे घोड़ी बना कर वो मेरे पीच्छे चला गया और मेरी गांद को चाटने लगा,” भाई, अब ये क्या करने लगे हो? बहनचोद मेरी चूत में लंड पेल ये कुत्ते की तरह मेरी गांद बाद में चाट लेना. इस लंड को पेलो मेरे भाई अपनी बेहन की चूत में…प्लीज़” करण उठा और अपने लंड के सूपदे को मेरे चूतड़ की दरार से होते हुए मेरी चूत के मुहाने पर टीका दिया. उस बेह्न्चोद का लंड आग के शोले की तरह जल रहा था. फिर उसने कस कर मेरी कमर को जकड़ा और अपना लंड थेल दिया मेरी बुर के अंदर.” उईईईईए….मेरी माआआअ……आआआअ…आगगज्गग” मैं दर्द से बिलख उठी. मुझे क्या पता था कि लंड के घुसने से इतना दर्द होगा. खैर शराब के नशे के कारण पीड़ा जल्द ही ख़तम हो गयी और उतेज्ना की वजह से मुझे मज़ा आने लगा. 

करण एक चुड़क्कड़ खिलाड़ी था. उससने धीरे धीरे चुदाई की शुरुआत की, लेकिन जल्द ही स्पीड पकड़ ली. मेरी चोटी को उसने एस्से पकड़ रखा था जैसे क़िस्सी घोड़ी की लगाम हो और और मुझे तेज़ी से हांकने लगा.” वाह मेरी घोड़ी, बहुत मस्त चूत है तेरी, चुदवा मज़े से मेरी बहना. तेरे भाई का लंड आज तेरे पेट के अंदर की तलाशी ले रहा है. कैसे महसूस हो रहा है मेरी रंडी बहन को चुदवाते हुए, सुधा? मैने ही तेरी बेहन नामिता की सील भी तोड़ी थी और आज तेरी भी तोड़ रहा हूँ रानी,” उतेना के कारण मुझे दर्द तो कम हो रहा था लेकिन मेरी जांघों से कुच्छ गीला सा बह रहा था जो कि मुझे बाद में पता चला कि मेरी सील टूटने पर मेरा खून बह निकला था. करण का लंड जैसे कि मेरी चूत में जा कर फैल गया हो किओं की अब वो मेरी चूत को पूरी तरह से भर रहा था. उसके हाथ मेरे चूतड़ पर ज़ोर ज़ोर से चपत मारने लगे और मैं उतेज्ना से पागल हो रही थी. 

“चोद मुझे मेरे भाई, ज़ोर ज़ोर से चोद अपनी रंडी को….तेरा लंड मेरी बच्चेदानी को टक्कर मार रहा है….करण चोद मुझे मदेर्चोद…..यू मुझे अपनी बेहन बोल या रखैल पर अपना लंड पेलते रहो मेरी चूत में……मेरी चूत आज तृप्त हो रही है….कितने बरसों से प्यासी है लंड की…..शाबाश मेरे भाई….चोद अपनी बेहन को…..मैं अब झड़ने को हूँ…करण तेज़ी से चोद मुझे मेरी चूत का पानी निकल रहा है….और तेज़…..और तेज़…चोदो भाई…मैं झडियी…चोदो भाई….मैं……”मेरी चूत से रस बहता रहा और करण अपने लंड से मेरी चूत पर प्रहार करता रहा. फ़चा फ़च चुदाई की आवाज़ आ रही थी और अचानक ही करण का जिस्म भी अकड़ गया.उसस्की साँस तेज़ हो गयी और उसस्के लंड ने गरम रस मेरी चूत में छ्चोड़ दिया. उसस्का लंड रस मेरी चूत से बाहर गिरने लगा और मेरी जांघों से हो कर बिस्तर पर ढेर लग गया. चुदाई से थक कर मैं 2 घंटे सोती रही, नंगी ही अपने करण की बाहों में. तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी बता ना मत भूलना आपका दोस्त राज शर्मा 

समाप्त 
Reply
05-16-2019, 11:59 AM,
#19
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
शिकस्त--01





दोस्तों, राज शर्मा एक बार फिर हाज़िर है अपनी नई कहानी ले के. थोड़ी लंबी हो गयी है, पर इतमीनान से पूरी पढ़े. तब ही उसका सही स्वाद मिलेगा.

अनुपमा मेरे साथ पढ़ती थी. वो तब बहोट ही खूबसूरत हुआ करती थी. उसने कभी हिस्सा नही लिया, नही तो ब्यूटी क्वीन हो सकती थी. लेकिन उसकी पढ़ाई पूरी नही हो पाई थी. इस के लिए उसका साथ छूट गया था. कई साल बाद मुझे वो रास्ते मे मिल गई. पहले जैसा नूवर नही था. उसकी तबीयत ठीक नही लग रही थी. मैं उसे घर ले गया. वहाँ उसने मुझे जो कहानी बताई उसे मैं अनु की ज़ुबानी पेश कर रहा हू
मैं अनुपमा हू. अभी अभी 24 साल की हुई हू. दस साल पहले मेरी मया का देहांत हो गया. उसके डेढ़ साल बाद पिताजी ने दूसरी शादी कर ली. नई मया ने कुच्छ ही समय मे अपना रंग दिखाया और ढाई साल मे तो मुझे घर छ्चोड़'ने पर मजबूर कर दिया. उस वक्त मैं करीब 18 साल की थी. मुझे पढ़ाई भी छ्चोड़नी पड़ी. मैने वो शहर ही छ्चोड़ दिया.

मैं मुंबई आ गयी. नौकरी की तलाश शुरू की. जहाँ भी गयी, मुझे नौकरी तो टुरट ही ऑफर होती थी, लेकिन वो मेरी खूबसूरती का जादू था. कोई कोई तो पहले ही बेझिझक हो कर प्रपोज़ल रखता था, तो कोई इशारों मे समझाने की कोशिश करता था. लेकिन मतलब एक ही था, मुझे जॉब दे कर वो मेरे रूप को भोगना चाहते थे. ऐसी करीब बीस ऑफर मिले. मैने वो सारी ऑफर ठुकरा दी.

एक जगह जहाँ ऐसी बात नही हुई, तो मैने वो जॉब टुरट ले ली. लेकिन एक ही वीक मे वोही अनुभव हुआ. मैने वो भी छ्चोड़ दिया. एक और मिली तो वहाँ भी बीस दिन ठीक जाने के बाद वही बात हुई. मैने वो भी छ्चोड़ दिया, लेकिन अब मैं दर गयी थी. जान चुकी थी की मेरा ही रूप मेरा बैरी बन चुका है. लोगो पर से और ईश्वर पर से विश्वास उठता जेया रहा था. मान ही मान सोच'ने लगी की शायद यही इस दुनिया का दस्तूर हो. इसे स्वीकार कर'ने के ख़याल भी मान में आने लगे.

लेकिन तब मेरी किस्मत बदलने वाली थी. इत्तेफ़ाक़ से मैं एक ऑफीस मे जेया पहुँची. बड़ी साफ सुथरी ऑफीस थी. मेरा इंटरव्यू खुद बड़े सेठ ने लिया. राजन नाम था उनका. एकदम साफ इंटरव्यू रहा. मेरे रूप की और तो जैसे नज़र ही नही थी. मैं पास हो गयी और मुझे वो जॉब मिल गयी. सॅलरी भी मेरी ख्वाहिश से दुगनी थी. यहाँ कोई आल्टू फालतू बात नही होती थी. बस काम से काम रहता था. मैं राजन सिर की प.आ. थी.

वो करीब 45 की उमरा के थे. उनके तीन बेटे थे, मझला मेरी उमरा का था. सभी भाइयों मे 2 साल का अंतर था. वी पढ़ते थे लेकिन कभी कभी ऑफीस आ जया करते थे किसी काम से. मैं उन सब से परिचित हो गयी थी. राजन सिर की पत्नी पिच्छाले एक साल से बीमार रहा करती थी. उसे ले कर राजन सिर चिंतित भी रहते थे. कभी कभी मेरे पास भी वी अपनी चिंता व्यक्त करते थे. उनकी पत्नी के बच'ने के चान्स कम थे. मुझे राजन सिर से हमदर्दी होने लगी थी और शायद....... प्यार भी. कच्ची उमरा का पक्का प्यार....... आख़िर जीवन मे पहली बार कोई ऐसा आदमी मिला था जो संपूर्णा था, श्रीमंत था, स्वरूपवान था, शिक्षित था, अच्च्चे शरीर सौस्ठव का और बहुत ही अच्च्चे व्यव'हार वाला था. यूँ कह सकती हूँ, चुंबकिया व्यक्तित्वा था उनका. वक्त गुजरता जेया रहा था. यूँ ही चार महीने बीत गये. एक रोज़ शनिवार के दिन दोपहर को वो बोले,

"अनु चलो" ( अब वो मेरा पूरा नाम अनुपमा नही कहते थे, अनु से बुलाते थे). मैने पुचछा,

"कहाँ ?" वो कड़क टोने मे बोल उठे,

"चलो भी" और खुद चल दिए. मैं भी साथ हो गयी. नीचे आ कर वो अपनी नई होंडा क्र्व मे बैठे. मेरे लिए बाजुवाला दरवाज़ा खोल दिया. मैं भी बाजू मे बैठ गयी. पुचचाने की हिम्मत ही नही हुई कहाँ जेया रहे है. कार चल पड़ी और थोड़ी देर मे हम शहर से बाहर आ गये. वो गुमसूँ थे. मैं भी कुच्छ बोली नही. गाड़ी पहाड़ो मे होती हुई खंडाला जेया पहुँची और 'डूक्स' रिट्रीट मे एंट्री ली. बड़ी शानदार जगह थी. उन्हों ने एक सूट ऑफीस से फोन कर के बुक किया हुआ था. यहाँ उन्हे सब जानते थे. काउंटर पर रिसेप्षनिस्ट ने मुस्कराते हुए कहा,

"युवर सूट इस चिल्ड, सिर, आंड मिनी फ्रीज़ इस फुल वित स्टॉक". उसने रूम की की दे दी, राजन सिर ने कार की की वहाँ दे दी और हम अंदर चले गये. सूट आलीशान था और एकदम ठंडा भी. एर-कंडीशनर पहले से ही ओं था. रूम बॉय आ कर कार मे से राजन सिर की छ्होटी सी बाग ला कर रख गया और कार की चाबी छ्चोड़ गया. अंदर पहुँच के उन्होने कोट उतार फैंका और नेक्टिये ढीली करते हुए सोफे मे जेया गिरे, जुटे उतरे और पावं लंबा कर के सेंटर टिपोय पर रखते हुए बोले

" अनु, तुम सोच रही होगी , ये सब मैं क्या कर रहा हूँ, है ना ?" मैने मंडी हिलाई. उन्हों ने पास बैठने का इशारा किया. मैं बाजू मे जेया कर बैठी. उन्हों ने मुझे नज़दीक खींचते हुए कहा (मैं उनके इतने पास कभी नही बैठी थी पहले)

" अनु, आज डॉक्टर ने जवाब दे दिया. संगीता (उनकी पत्नी) अब 20-25 दिन की मेहमान है." गिड़गिड़ती आवाज़ मे आयेज कहा,

"हमारा 23 साल का साथ च्छुत जाएगा, मैं अकेला हो जौंगा". मैने सांत्वना दी,

" ये सब तो उपरवाले के हाथ मे है. लेकिन आप खुद को अकेला ना सम'झे. मैं जो साथ हूँ." वो आयेज झुके और मेरी आँखों मे झाँकते हुए कहा,

"सच ? क्या तुम वाकई मेरे साथ हो ?" मेरी आँखों मे झाँकति हुई उनकी आँखों मे कुच्छ अजीब से भाव मैने महसूस किए पर मैं समझ नही पाई और बोली,

"हन, सिर" उनका दूसरा प्रश्ना पिच्चे ही आया,

"संगीता की तरह ?" मैं चौंकी, पर बोल उठी,

"हन, सिर". वापस सोफे की बॅक का सहारा लेते हुए बोले,

"चलो अच्च्छा है..... ज़रा फ्रीज़ से विस्की और सोडा ला. और तुम भी सफ़र से ताकि होगी. जेया, नहा के फ्रेश हो जेया." मैने उनका पेग भरते हुए कहा,

"मैं तो कपड़ा भी नही लाई. नहा के क्या पहनूँगी ? मुझे नही नहाना." मुस्कराते हुए उन्हों ने अपनी बाग से कुर्ता और लूँगी निकल के फैंकते हुए कहा,

" ले, ये तुझ पर बहोट जाचेगा." मैं ने उसे उठाया और शरमाते हुए बोली,

"लेकिन आप की बाग मे ब्रा और पनटी थोड़ी होगी ?" विस्की की सीप लेते हुए वो बोल उठे,

" अब जेया भी, एक दिन ब्रा-पनटी नही पहनेगी तो नंगी नही दिखेगी" खिल खिल हंसते मैं कपड़े उठा के अंदर चली गयी. बातरूम बड़ा लग्षूरीयस था. पूरे कद का मिरर लगा हुआ था. मैने अपने कपड़े उतरे और अपने ही फिगर को आडमाइर करते हुए देख'टी रही. सोचा, वे सब लोग जो मुझे जॉब देते समय मेरे रूप के पागल होते थे....... आख़िर ग़लत तो नही थे !! मैं हूँ ही ऐसी.

फिर पानी भरे टब मे लेती और आज के बारे मे सोचने लगी. टुरट ख़याल आया, राजन सिर आज कुच्छ बदले बदले लग रहे है. वैसे भी औरत किसी भी मर्द की नियत को जल्दी ही समझ लेती है. मुझे भी वो पल याद आया, जब उन्हों ने मेरी आँखों मे अपनी आँखो से झाँकते हुए कहा था ;

"सच ? क्या तुम वाकई मेरे साथ हो ?" और दूसरा प्रश्ना था,

"संगीता की तरह ?" मुझे बात समझ मे आने लगी. भले ही इतने समय राजन सिर ने नेक व्यवहार किया हो, आज की बात कुच्छ और है. आज वो भी उसी लाइन पर है और मुझे भोगना चाहते है. लेकिन आश्चर्या !!!! पहले जहाँ मैं ऐसे हर मौके पर जॉब ठुकरा के भागी थी, इस बार मान मे कोई विरोध उठना तो दूर रहा, एक मीठी गुदगुदी सी हो रही थी. मैने टब मे अपने ही स्तन को सहलाते हुए अपने मान को टटोला. नतीजा सामने था. इन चार महीनो मे मैं मान ही मान उन्हे पसंद करने लगी थी. और संगीता की जान लेवा बीमारी की बात ने तो ये आशा भी जगाई थी की उसकी मृत्यु के बाद मैं म्र्स. राजन भी बन सकती हू.

ये ख़याल आते ही मान पुलकित हो उठा. फ्रेश हो के बाहर आई तो वो दूसरी ही अनु थी. मैं बाहर आई तो देखा की राजन सिर सोफे से बेड पर आ गये थे, कपड़े बदल के अब सिर्फ़ शॉर्ट्स मे थे. उपर का बदन खुला था, मैं उनके कसे हुए सिने को लोलूपता से देख रही थी. वो दो पेग पी चुके थे. उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो आँखे फाड़ कर देखते ही रह गये. कुर्ता लूँगी मे, बिना ब्रा-पनटी के, मैं बहोट ही सेक्सी लग रही थी. बालों से पानी तपाक रहा था, और मेरे स्तनों के उपर गिर के कुर्ते के उस भाग को गीला कर रहा था.

गीला कुर्ता मेरे स्तनों से चिपक कर , मुझे और सेक्सी लुक दे रहा था. मैं बेड पर उनके बाजू मे बाईं और जेया के लेती और एक गहरी साँस ले के मेरे स्तनों को उभरा. कुर्ते का उपरी बटन भी खुला छ्चोड़ रखा था मैने. मेरी आधी क्लीवेज सॉफ नज़र आ रही थी. उनके दिल मे हल्का सा तूफान तो उठा ही हुआ था. अब मेरी हरकत से उनके दिल मे खलभाली मची. उन्हों ने पेग साइड टेबल पर छ्चोड़ दिया और मेरी और मुड़े.

एक ही झट'के मे उनका डायन पैर मेरी दोनो जाँघो पर आ गया, उनका डायन हाथ मेरे बाएँ मुममे पर आ गया, और उनके होत मेरे दाएँ कान के पास आ गये. वी बिना कुच्छ कहे, जैसे अपना अधिकार समझ कर, शुरू हो गये. मेरे कान की बूट्ती (र्लोबस) को अपने मूह मे ले कर छुआस'ने लगे, साथ ही जो हाथ मेरे मुममे पर था उस से उसे सहलाने लगे और जो पावं मेरी जाँघो पर आ चक्का था उसे उपर नीचे करने लगे.

उनके लिए यह सब नया नही था, सिर्फ़ पात्रा बदल गया था. पर मैं तो जीवन मे पहली बार किसी मर्द का अनुभव कर रही थी. बदन पर एक साथ तीन तीन जगह स्पर्श हो रहा था. कान, मुममे और जाँघ पर. मुममे और जाँघ पर तो कपड़े के उपर से हो रहा था, लेकिन कन-बूट्ती पर तो सीधा ही हो रहा था. एक झंझनाहट सी महसूस हो रही थी. यह कहानी आप याहू ग्रूप्स; देशिरोमंसे में पढ रहें हैं. मैं आँखे मूंद कर पड़ी रही. कान तो एकदम गरम हो रहा था. उतने मे उन्हों ने एक हल्की सी बीते ले ली, रलोब पर. मेरे मुँह से सिसकारी निकल गयी. दर्द हो रहा था... पर अच्च्छा भी लग रहा था.

जाँघो पर उनके वज़नदार पावं उपर नीचे हो रहे थे. उस वजन के नीचे सिल्की लूँगी का मुलायम स्पर्श मेरी लचीली जांघों को उत्तेजित कर रहा था. और साथ ही मेरा मुम्मा पहली बार किसी मर्द के हाथों दबाया जेया रहा था. (वैसे ये अनुभव पूरी तरह से नया नही था. हर लड़की यौवन प्रवेश पर अपने ही हाथों अपने स्तनों को दबा के ये अनुभव ले लेती है. मैने भी लिया था. पर मान'ना पड़ेगा... मर्द के हाथों स्तन दबाने पर जो अनुभव होता है, वो अपने हाथों चाहे कितना ही दबा लो, उस से अलग ही होता है). अब उनका मुँह मेरे कान छ्चोड़ कर गालों पर आ गया. उनकी साँसे मेरे गाल पर टकरा रही थी और उनके होत जो अब गीले हो चुके थे गाल पर किस कर रहे थे.

पूर गाल को चूमते हुए, वो थोड़े उपर उठे और मेरे रसीले होठों पर अपने गरम गीले होत रख दिए. वो पूरी तरह उपर नही उठे थे. सिर्फ़ सीना और मुँह उपर उठाया था. उपर उठ के आने की वजह से अब उनका खुल्ला सीना मेरे दाएँ मुममे को दबा रहा था. स्तनों पर मर्द का वजन कैसा रंगीन लगता है, ये तो लड़कियाँ ही जानती है. साथ ही बायन मुममे जो अब तक सहलाया जेया रहा था, अब मसाला जेया रहा था. जांघों पर पावं की मूव्मेंट भी थोड़ी तेज हो गयी. लूँगी सिल्की थी. इतनी लंबी और अब तो तेज मूव्मेंट से खुल गयी और नीचे की और उतार गयी. मैने आप'नी और से सह'योग देते हुए, अपने पावं चौड़े किए. अब पावं की मूव्मेंट के साथ उनका खुल्ला घुटना मेरी खुली छूट को टच करने लगा. उपर से नीचे तक सब जगह मज़ा आ रहा था....
मेरे कान छ्चोड़ कर गालों पर आ गया. उनकी साँसे मेरे गाल पर टकरा रही थी और उनके होठ जो अब गीले हो चुके थे गाल पर किस कर रहे थे.

पूर गाल को चूमते हुए, वो थोड़े उपर उठे और मेरे रसीले होठों पर अपने गरम गीले होत रख दिए. वो पूरी तरह उपर नही उठे थे. सिर्फ़ सीना और मुँह उपर उठाया था. उपर उठ के आने की वजह से अब उनका खुल्ला सीना मेरे दाएँ मुममे को दबा रहा था. स्तनों पर मर्द का वजन कैसा रंगीन लगता है, ये तो लड़कियाँ ही जानती है. साथ ही बायां मुममे जो अब तक सहलाया जा रहा था, अब मसाला जा रहा था. जांघों पर पावं की मूव्मेंट भी थोड़ी तेज हो गयी. लूँगी सिल्की थी. इतनी लंबी और अब तो तेज मूव्मेंट से खुल गयी और नीचे की और उतार गयी. मैने आप'नी और से सह'योग देते हुए, अपने पावं चौड़े किए. अब पावं की मूव्मेंट के साथ उनका खुल्ला घुटना मेरी खुली चूत को टच करने लगा. उपर से नीचे तक सब जगह मज़ा आ रहा था....

अचानक एक ख़याल मान मे उठा, `ये मैं क्या करने जा रही हू ? क्यों उन्हे रोकती नही हू? ऐसे तो मेरा यौवन भ्रष्टा हो जाएगा.' पर मन की कौन सुनता था ! अब तो दिल ही हावी था !! कहयाल जैसा उठा वैसा ही दफ़न हो गया. मैं वापस मज़ा लेने मे मगन हो गयी... अब उन्हों ने पूरा बदन उठाया और मेरे उपर आ गये. उनका पूरा बदन मेरे बदन पर ही था. मैं उनके भारी वजन के नीचे दबति जा रही थी. क्रश हो रही थी. और क्या मज़ा आ रहा था !! मैने अपने हाथ उनकी खुली पीठ पर फैलाए और पसारने लगी. कभी कभी नीचे शॉर्ट्स के उपर से हिप्स पर भी फिरा लेती थी. वो अब तेझी से मेरे पुर चह'रे पर किस किए जा रहे थे. मैं भी अब उन्हे किस मे साथ दिए जा रही थी. मैने उनके होठों पर मेरे होठ रख दिए और एक लंबी किस शुरू की. दोनो ने होठ थोड़े खोले और मैने अपनी जीभ उनके मुँह के अंदर डाल दी. अंदर चारो और फिरते हुए उनकी जीभ से जीभ टकराई. होठ से होठ तो मिल ही रहे थे.
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05-16-2019, 12:00 PM,
#20
RE: Real Chudai Kahani रंगीन रातों की कहानियाँ
उनका दायां हाथ जो अब तक मेरे बाएँ मुममे को मसले जा रहा था, तेज़ी से नीचे खिसका और कुर्ते के अंत तक पहुँच कर उस के नीचे घुसा और वापस उपर आ गया. आप को ये पढ़ने मे जितना वक्त लगा , उस से भी कम समय मे एक ही आक्षन मे ये सारा मूव्मेंट हो गया. अब उनका दायां हाथ कुर्ते के अंदर मेरे बाएँ स्तन पर सीधा स्पर्श कर रहा था. पहली बार मेरे मुममे को किसी मर्द ने च्छुआ था. वो तेज़ी से मसालने लगे उसे. अच्च्छा तो लग रहा था, पर कब से ये बायां मुममे ही मसला जा रहा था.... तो मेरे दाएँ मुममे मे भी एक कसक उठी, वो भी दबावाने के लिए बेताब हो उठा.

मैने शर्म छ्चोड़ कर उनका बायां हाथ थमा और उसे मेरे दाए मुममे पर ले गयी. वो समझे, और मुस्कराते हुए दोनो हाथ नीचे ले गये, और कुर्ता उपर की और उठाया. मैं भी सिर के बाल हल्की सी उपर हुई और उन्हों ने कुर्ता मेरे गले तक खिसका लिया. मैने बदन नीचा किया और मंडी उपर उठाई, उन्होने कुर्ता पूरा बाहर निकल दिया और फैंक दिया एक कोने मे. लूँगी तो पहले ही खुल के घुटनो तक उतार चुकी थी. उन्हों ने पावं उपर ले के उस मे उसे फसा के पावं जो नीचे किया तो वो भी मेरे सहयोग के साथ बाहर हो गयी.

अब मैं पूरी नंगी थी और उनके नीचे दबी हुई थी. वापस फेस पर किस करते हुए अब वो दोनो हाथो से मेरे दोनो स्तनों को मसल रहे थे. ऐसा लग रहा था, जीवन भर कोई ऐसे ही मसला करे इन्हे. ! लेकिन थोड़ी ही देर मे मैं बेचैन हो उठी.....!!!

पहले स्तनों को सहलाए जाने का मज़ा लिया, लेकिन फिर दबावाने की इच्च्छा हो रही थी, दबाए गये तो मसले जाने की कसक उठी, अब मसले गये तो चूसाए जाने की चाह उठी. और उसी चाह ने मुझे बेचैन कर दिया था... मैने उनका मुँह - जो मेरे फेस पर किस करने मे लगा हुआ था - पिच्चे से बालों से पकड़ के हल्के से नीचे मेरे स्तनों की और खींचा.

वो तो अनुभवी थे, इशारा समझे और नीचे उतार बाएँ मुममे की और लपके. पर मेरा तो डायन मुम्मा कब से भूखा था. मैने फिर बालों से मुँह को दाएँ मुममे की और खींचा. वो उसको चारो साइड से चूमने लगे. इस खेल के मंजे हुए खिलाड़ी जो थे ! निपल को केन्द्रा बना कर पुर मुममे पर निपल से डोर सर्क्युलर मोशन मे चूम रहे थे. धीरे धीरे सर्कल छ्होटा करते जा रहे थे. मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. निपल मर्द के मुँह मे जाने के लिए उतावला हो रहा था. एक दो बार तो मैने उनका फेस निपल की और घसीटना चाहा. पर वो तो अपनी स्टाइल से ही चूमते रहे. मुझे टीज़ जो कर रहे थे. निपल मोटा और कड़क होता जा रहा था. सर्कल एकदम छ्होटा हो गया तब तो निपल से उनकी गर्म साँसे टकराने लगी, लेकिन उसे तो उनके मुँह का इंतेजार था. जब एकदम छ्होटा हो गया तो उन्हों ने जीभ निकली और अब तक कड़क हो चुके निपल पर टकराई. मेरे मुँह से आ निकल गई.

शरारती नज़र से मेरी और देखते हुए उन्हों ने जीभ झड़प से निपल की चारो और फिरा दी... और फिर लपक के निपल मुँह मे ले ली. मेरी धड़कन तेझ हो गई. जिस के लिए काब्से निपल बेताब हुए जा रहा था, वो अनुभव होना शुरू हो गया. वो मस्ती से उसे चूस रहे थे. आहा ! क्या फीलिंग थी !! निपल से जैसे करेंट बह रहा था और पुर बदन मे फैल रहा था......एक नशा सा च्छा रहा था ! कितना आनंदप्रद अनुभव होता है ये !!

यही सब दूसरे मुममे के साथ भी किया गया. बड़े आराम से वो लगे रहे, दोनो स्तनों पर. एक चूसाते थे तो डुअसरे को मसलते थे. मैं नारी तो जन्मा से थी लेकिन नारितवा आज महसूस कर रही थी. एक अरसे के बाद नशा तोड़ा कम हुआ तो मैने उनकी खुली पीठ पर रखे अपने दोनो हाथ से उन्हे अपनी और दबाते हुए एक आलिंगन दिया. उन्होने भी अपने हाथ मेरे स्तनों से हटा के साइड से होते हुए, मुझे हल्का सा उठाते हुए, मेरे बदन के नीचे पहुँचा दिए.. और आलिंगन दिया. मुझे साथ ले कर रोल ओवर हो के मेरी साइड मे आ गये और आलिंगन पर बड़ा ज़ोर दिया. आहहाअ....... मैं उनकी बाहों मे क्रश हो गयी...... बड़ा सुकून मिल रहा था......... लगता था वक़्त ठहर जाए तो कितना अच्च्छा होता.

उन्हों ने पकड़ ढीली कर के एक हाथ नीचे अपनी एलास्टिक शॉर्ट्स मे सरकया, और उसे नीचे खींचा. मैने देखा तो मैने भी शॉर्ट्स मे पावं फसा के उसे नीचे उतार दिया. पता नही मैने ये क्यों किया. उनका लंड बाहर निकल आया. फिर मुझे आलिंगन मे क्रश कर के वो रोल ओवर होते हुए वो मुझ पर आ गये. लेकिन अब दोनो बिल्कुल नंगे थे. वो पूरी तरह तैयार हो चुके थे. उन्हों ने अपने हिप्स उठाए और लंड को मेरी चूत के मूह पर ले आए. तब मुझे ख़याल आया , क्या होने जा रहा है. एक पल के लिए मैं सहमी और उनको कहा,
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