Sex Hindi Kahani बलात्कार
07-15-2017, 12:51 PM,
#1
Sex Hindi Kahani बलात्कार
बलात्कार 


कैसे दिन हफ्तों में और हफ्ते महीनो में बदल गये, मानो पता ही नहीं चला. अचानक ही एक दिन रूपाली को एहसास हुआ कि हवेली के चारों तरफ झाड़-घास-फूस बढ़ गये हैं. रूपाली को खुद पर गुस्सा आने लगा कि क्यूँ इतने वक़्त से उसने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया.

आँगन में आकर उसने चंदर को आवाज़ लगाई,”चंदर……ओ चंदर.” तभी उसने देखा वो पेड़ के नीचे बैठा है और पेड़ पे बैठे कबूतर को एकटक निहार रहा है. एकदम गुम सूम…….रूपाली को गुस्सा आ गया. वो पास गयी और चिल्लाते हुए चंदर से कहने लगी कि उसकी आँखें फुट गयी हैं क्या? उसे रोज़ सफाई करते रहना चाहिए ताकि हवेली सॉफ सुथरी बनी रहे. हाथ हिला हिला कर उसने चंदर को सफाई करने के लिए कहा.

चंदर ने एक नज़र उसकी तरफ देखा और रूपाली ने देखा चंदर की आँखों में रूपाली के लिए सिर्फ़ नफ़रत थी. वो अचानक उठा और तेज़ी से भौचक्की सी रूपाली के आगे से निकल गया और दूर कहीं गुम हो गया. रूपाली के होंठो तक चंदर के लिए एक भद्दी से गाली आई, पर वो मंन मार कर रह गयी.

रूपाली ने एक नज़र आसमान की ओर देखा….कोई शाम के 6 बज रहे थे. उसके दिमाग़ में ख़याल आया, क्यूँ ना वो खेतों की तरफ जाए और अगर वहाँ कोई मज़दूर दिख जायें तो उनके साथ अगले दिन के लिए हावीली की आस पास सफाई का काम तय कर ले. उसे ये विचार अच्छा लगा.

अंदर आई और उसने जल्दी जल्दी अपने लंबे, घने बालों को संवारा, बगल में खुशबूदार फ्रांसीसी खुश्बू लगाई जो उसको कभी ससुर शौर्या सिंग ने दी थी….हल्के गुलाबी रंग का ब्लाउस पहना और गुलाबी सी साड़ी भी. शीशे में देखा, बहुत अच्छी लग रही थी रूपाली. बाहर पसीना आने का ख़तरा था, इसलिए रूपाली ने अपने गालों, गर्देन और ब्लाउस के अंदर हल्का सा पॉंड्स पाउडर लगा लिया. रूपाली ने एक बार खुद को निहारा…..और किसी 17 साल की लड़की की तरह शर्मा के रह गयी……वाकई बहुत खूबसूरत लग रही थी वो.

हवेली से चलते चलते काफ़ी दूर आ गयी थी रूपाली. इक्का दुक्का गाओं के बूढ़े उसको हुक्का पीते हुए नज़र आए और जैसे ही उन्होने ठकुराइन को देखा, अचकचा कर, “प्रणाम ठकुराइन”, कह कर उसका अभिवादन किया. रूपाली को अच्छा लगा कि आज भी हवेली का इतना रुतबा है. उन बूढ़े लोगों से काम के लिए कहना बेकार था, इसलिए वो आगे निकलती चली गयी.

सूरज ढालने लगा था और उसकी लालिमा चारों ओर फेल रही थी. रूपाली का चेहरा भी तपिश के कारण चमचमा उठा था और हल्का पसीना माथे पे मोती की तरह चमक रहा था. रूपाली को लगा अब कोई नहीं मिलेगा और उसे वापस हवेली की ओर चलना चाहिए. मुड़ने की वाली थी की उसे लगा उसे कुछ आवाज़ें सुनाई दी हों.

आवाज़ खेतों की तरफ से आई थी. रूपाली के कदम उसी तरफ बढ़ गये. अचानक उसे किसी मर्द के हँसने की आवाज़ आई और फिर से कुछ अस्पष्ट आवाज़ें. खेत गन्ने के होने की वज़ह से बहुत घना था……अचानक रूपाली को लगा उसने चूड़ियों के टूटने की आवाज़ सुनी और फिर एक लड़की की चीख आई,”ना कर सत्तू चाचा, हाथ जोड़ू तेरे…..” और एक गुर्राहट भरी मर्दानी आवाज़,”चुप्प साली…”……..और तभी रूपाली के आगे सारा नज़ारा सॉफ था…

गाओं में जात-पात थी. ऊँची जात वाले ब्राह्मण और ठाकुर, गाओं की ऊपर ओर रहते थे, और सब डोम-चमार-कहार, नाई, गाओं की निचली ओर. सारा मामला निचली जात का था. 2 काले कलूटे, 40 साल से ऊपर के चमारों ने एक 20-22 साल की मांसल से लड़की के हाथ पकड़ रखे थे और एक 50 साल से ऊपर का कलूटा उसके पैरों को खोल कर, अपना काला लंड लड़की की बुर में घुसाने की कोशिश कर रहा था. एक और 45-50 साल का अधेड़, साँवले रंग का बुज़ुर्ग ये सब ऐसे देख रहा था मानो कोई किसी गाय को चारा चरता हुआ देख रहा हो.
“ना कर सत्तू चाचा, जान दे, मैं तेरी मौधी (बेटी) जैसी हूँ रे….”…….”चुप्प कमला साली……हमरी मौधी ऐसे गांद ना फिराती फिरे गाओं भर में….अब चोद्ने दे नाहीं तो चीर देई तोहरा के….”…ये कहते हुए उसने एक असफल कोशिश और की. मगर लड़की शरीर सेमजबूत थी और उसकी टांगे अलग होने का नाम नहीं ले रही थी. झल्लाहट में सत्तू ने एक झापड़ रसीद दिया. कमला ज़ोर से रोने लगी,”हाए दैयया रे…..कोई बचाआऊऊ……बचहाआआााऊऊ.” खेत गाओं से इतनी दूर थे कि किसी के आस पास होने का सवाल ही नहीं था. तीनो कलूटों ने उसका मुँह बंद करने तक की ज़हमत नहीं उठाई और हंसते रहे.
“क्या हो रहा है ये???.......बंद करो….सालो”, किसी बूखी शेरनी की तरह रूपाली गुर्राते हुए चीखी और एक पल के लिए मानो वक़्त थम गया था…….सब सुन्न रह गये थे. ना कमला चीखी, ना सत्तू कुछ बोला और चारों मर्द रूपाली को ऐसे देख रहे थे मानो पूछ रहे हों,”आप कौन हैं?” सांवला आदमी, जिसकी उमर 45-50 के बीच थी, धीरे से बोला,”सत्तू, कालू, मोतिया……ये हवेली की ठकुराइन हैं……परणाम ठकुराइन.”. तीनो कल्लुओं ने घबराहट में कमला को छ्चोड़ दिया जो अपने कपड़े झाड़ते हुए उठी और भाग के रूपाली के पीछे जा छुपि.

“तो यह सब हो रहा है हमारे गाओं में अब? हैं? कोई शरम लाज नहीं है आप लोगों को?”, किसी बिफरी हुई शेरनी की तरह रूपाली आग उगल रही थी. “कौन हे रे तू?” रूपाली ने कमला से पूछा तो पता चला वो झूरी मल्लाह की बेटी है और मोतिया उसे सस्ती साड़ी वाले से मिलवाने के बहाने फुसला के गाओं से कुछ दूर लाया था, जहाँ कालू और सत्तू ने उसको पकड़ लिया और तीनों उसको खेत की ओर ले आए थे. बेगानी शादी में अब्दुल्लाह दीवाना वाली हालत थी साँवले मुंगेरी की और वो ऐसे ही इन तीनो के साथ हो लिया था की कुछ देसी शराब पी लेगा और कुछ चने खा लेगा. चारों 2 बॉटल देसी शराब गटक चुके थे और उन्होने कमला को भी ज़बरदस्ती शराब पिलाने की कोशिश की थी, पर उसने सब शराब बाहर थूक दी थी. उन्होने शराब बर्बाद करने से अच्छा सोचा साली को बस कुछ देर पकड़ कर रखें और फिर नशे के सुरूर में चुदाई का प्रोग्राम चालू ही किया था की रूपाली ने आकर सब गुड-गोबर कर दिया.

रूपाली ने चिल्ला कर कहा,”चल कमला तू मेरे साथ…….और हरामजादो, कल गाओं की पंचायत लगेगी, उसमें दिखाना तुम अपने ये गंदे-काले चेहरे.” मुंगेरी,जो सिर्फ़ शराब के लालच में आया था, गिड़गिदा रहा था,”जाने दो ठकुराइन, ये बहक गये थे.”. बाकी तीनो नशे और शर्म की मिली जुली हालत में कभी आँखें झपका रहे थे, कभी खेत के ज़मीन की तरफ देख रहे थे. एक तेज़ हवा का झोंका आया और एक पल के लिए रूपाली की सारी का पल्लू सरक गया. ढलती शाम में तीनों कलूटों ने एक पल के लिए गुलाबी ब्लाउस में क्वेड दो उन्नत उरोज़ देखे और उनकी आँखें चौंधिया गयी.

सकपका कर रूपाली ने झट से आँचल ठीक किया और कदक्ते हुए बोली,”चल कमला.” मुड़कर चलने लगी, गाओं की ओर. चारों आदमी वहीं हक्के-बक्के से खड़े रह गये थे. 

300 मीटर चले होंगे रूपाली और कमला कि अब सन्न होने की बारी रूपाली की थी. शायद उन कलूटों ने छ्होटा रास्ता लिया था, या तेज़ तेज़ चलते हुए बराबर के रास्ते से आए थे. जो भी था, सच्चाई यह थी कि सत्तू, मोतिया, कालू और मुंगेरी भी, उन दोनो के सामने खड़े थे. “क्या है?” रूपाली चीखी. नीच जात के मोतिया ने एक थप्पड़ रूपाली के गाल पे रसीद दिया और बोला,”हरामजादि. हमको पंचायत के हवाले करेगी? कर साली. पर उनको पूरी बात बताना. कि कैसे हम ने तेरी चुदाई की रांड़.” एक पल के लिए रूपाली को अपने कानो पे विश्वास नहीं हुआ. ये नीच जात के लोग, जो ठाकुरों की छाया पे भी पैर रखने के कारण पिट जाया करते थे, उसकी इज़्ज़त लूटने की बात कर रहे थे…….ठाकुर साहब की बहू की इज़्ज़त.
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“खबरदार…”, रूपाली चिल्लाई…..मगर उसके इतना बोलते ही मोतिया ने उसे तड़ातड़ 4-5 थप्पड़ लगा दिए. पीड़ा और अपमान से रूपाली के आँसू छल-छला आए. “जाने दो…”, उसकी कराह निकली. कमला, जिसकी गदराई हुई जवानी को पाने के लिए कलूटों ने ये सब किया था बोली,”सत्तू चाचा, मोतिया भाय्या….ठकुराइन को जाने दो….आपको जो करना है, हमरे संग कर लेव भाय्या…” कालू और मोतिया वहशियो की तरह हँसने लगे. कालू ने कसकर कमला का हाथ पकड़ लिया और सत्तू और मोतिया ने रूपाली के दोनो हाथ पकड़े और वो वापस खेत के उसी हिस्से की ओर बढ़ने लगे, जहाँ उन्होने खेत के बीच कुछ जगह सॉफ की थी और कमला को चोद्ने की कोशिश ही कर रहे थे कि रूपाली आ पहुची थी……..
रूपाली और कमला की हालत ऐसी थी मानो बकरियों को कसाई घसीट रहे हों. बीच बीच में धमकाने के लिए मोतिया उसके हाथ को ज़ोर से मरोड़ देता था और हर बार उसके मुँह से आआआः, निकल जाती थी. मुंगेरी ने एक दो बार ज़रूर कहा,”अरे जानो दे रे ठकुराइन को….क्यूँ आफ़त मोले ले रहे हो….”, मगर शायद उसकी बातों की कोई अहमियत थी ही नहीं.

थोड़ी ही देर में वो सब वहीं पहुँच चुके थे जहाँ खेत के बीचों-बीच कुछ गन्ने उखाड़ कर कुच्छ सॉफ जगह बनाई गयी थी. खेत के गन्ने इतने ऊँचे थे कि अगर कोई भूले भटके आस पास आ भी जाए, उसे कुछ दिखाई देने का सवाल ही नहीं उठता था.


रूपाली और कमला को बीच में बैठा कर, उन्होने शराब की बोतलें खोल ली. सत्तू ने एक बड़ा सा घूँट लगाया और कड़वा सा मुँह बनाते हुए, बोतल रूपाली के होंठो पे लगाई और बोला,”ले, पी ले…” ये सब अचानक हुआ था, इसलिए कुछ ज़हर जैसे कड़वे घूँट रूपाली के अंदर चले ही गये. खाँसते हुए उसने थूकते हुए कहा,”देखो….कल हवेली आ जाना और हम तुम सबको 2000 रुपये देंगी. हम वादा करते हैं, बात यहीं ख़तम हो जाएगी, पंचायत नहीं होगी.”

मुंगेरी झट से बोला,”परेशान की कोई बात नहीं ठकुराइन,…….अरे सत्तू, जाने दो इन्हें.” सत्तू गुर्राया,”चुप साले. हीज़ड़ा की माफिक बात करे है हमेसा…..अब इस पार या उस पार………………….ठकुराइन, लाख टके की चूत के बदले दूई हज़ार रुपय्या? कच्ची हैं आप हिसाब की…..”


अब बहुत ही हल्की रोशनी बची थी सूरज की. रूपाली समझ चुकी थी अब कुछ नहीं हो सकता था. खुद को कोस रही थी कि क्यूँ घर से निकली. कमला, जो रूपाली के आने तक इतने हाथ पैर मार रही थी, भी अब ढीली पड़ चुकी थी. उसको लग रहा था अगर वो भाग भी जाए तो ये ग़लत होगा, क्योंकि ठकुराइन, जिन्होने अपनी ज़िंदगी उसकी खातिर दावं पे लगा दी थी, फिर भी लूट जाएँगी.


कालू और मोतिया नशे की हालत कें उन ख़ूँख़ार कुत्तों की तरह लग रहे थे जो किसी घायल चिड़िया को मारने से पहले उसको कुछ देर के लिए दाँत दिखाते हैं और गुर्राते हैं. कालू अपनी लूँगी हटा चुका था. रूपाली ने नफ़रत से उसकी तरफ देखा. नीच जात के कालू ने नारंगी रंग का कच्छा पहन रखा था.बैठी हुई रूपाली को उसने छ्होटी पकड़ कर उठाया, खुद बैठ गया और उसको अपनी नंगी, काली जाँघ पे बिठा लिया. रूपाली सन्न रह गयी.


सत्तू सामने की तरफ से आया और उसने कालू की पीठ को इस तरह से जाकड़ लिया कि रूपाली उन दोनो के बीच में भींच गयी. रूपाली के पीठ, कालू के बदबूदार सीने से चिपकी हुई थी और सट्टी ने अपने काले, भद्दे होंठ, उसके खूबसूरत, रसीले होंठो पर चिपका दिए. सस्ती शराब की बदबू और काले पसीनेदार बदनों से निकलती हुई सदान्ध ने रूपाली का माथा चकरा दिया था…..उसे लगा उसको उल्टी आ जाएगी. सत्तू रूपाली के होंठ चूस रहा था. कालू ने अपने हाथ सरकाए और रूपाली के मम्मे सहलाने लगा. रूपाली की पीठ से उसे पॉंड्स की भीनी भीनी महक आ रही थी और उसने ज़िंदगी में कभी भी इतनी खूबसूरत और खुशबूदार औरत का दीदार किया ही नहीं था. उसकी हालत उस पागल मक्खी जैसी थी जो जानती है कि शहद से चिपटने का अंज़ाम मौत है मगर फिर भी वो कुछ और नहीं सोच पाती.


कालू पागलों की तरह रूपाली के बॅबल ट्रक को भोंपु की तरह बजाने लगा और रूपाली की हर सिसकी, सत्तू के बदबूदार होंठों तक पहुँच कर रुक जाती थी. सत्तू ने रूपाली की खूबसूरत जीभ को अपने तंबाखू से सड़े हुए दाँतों के बीच पकड़ लिया और उसको चूसने लगा. इतना भरोसा था अब उन सबको कि आराम से फिर शारब पीने लगे और फिर से रूपाली को थोड़ी सी शराब पीला दी. सत्तू केबदबूदार चुंबन के बाद रूपाली का गला ऐसे सूख रहा था कि इस बार उसको ये कड़वी शराब भी इतनी बुरी नहीं लगी.


रूपाली की गोरी चूत और सुनेहरी गांद ने कभी किसी काले लंड को अपने पास तक नहीं फटकने दिया था. और आज ये बदबूदार, नीच जात के गंदे आदमी उसके साथ मनमानी कर रहे थे. मज़बूरी में रूपाली के आँसू छलक आए.
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#3
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“जाने दो हमें….हमें हवेली पहुँचना है….” रुंधी हुई आवाज़ में एक नाकाम कोशिश की उसने. मोतिया बोला,”हाँ हां, तेरे ख़सम, ससुर और देवर के भूत तेरा इंतेज़ार कर रहे हैं वहाँ ना? चुप कर रंडी.”

तीन बोतल शराब गटक चुके थे वो चारों लोग. मुंगेरी को उन्होने पैसे दिए और जल्दी से 4 बोतल शराब, मुर्गी-रोटी ले आने को कहा और वो झट से गाओं की ओर चल दिया. शराब में मुंगेरी के प्राण बस्ते थे मानो. 

कालू ने हंसते हुए मोतिया से कहा,”मोतिया…..ज़रा ठकुराइन को तोहार लौदा की मार तो दिखाई देब भाई……”, और मोतिया ने पहले कमला की अंगिया-चोली हटा दी और फिर उसका लहंगा भी. हल्की रोशनी में कमला का सांवला, गदराया बदन मादार-जात नंगा था और वो सिसक रही थी. मज़बूत साँवले स्तन जिनपर काली सी गोल चूचियाँ थी…….सपाट, सांवला पेट (स्टमक), साँवली मांसल, भारी-भारी जांघें और डरी हुई, हिरनी जैसी आँखें. मोतिया को ऐसी मस्त जवानी की कोई कदर नही थी ही नहीं…….रोमॅंटिक तरीके से चूमने, चूसने की जगह, साला कमला की चूत में उंगली घुसेड कर सिर्फ़ ये कोशिश कर रहा था कि वो जल्दी से कुछ गीली हो जाए, ताकि हू अपना लॉडा उसके अंदर डाल के चोद दे बस…….


मोतिया ने कमला के होंठों को अपने होंठों के बीच में लिया, दोनो हाथों से उसकी जांघों को अलग किया और अपने एक हाथ में ढेर सारा थूक लेकर उसकी कोरी चूत और अपने काले मूसल लंड पे रगड़ने लगा. उसके बाद उसने अपना काला मोटा लॉडा कमला की चूत के मुँह पे रखा और धीरे से कुछ अंदर किया……कमला की फटी हुई आँखें और सिसकियाँ बता रही थी कितना दर्द हो रहा है उसको……….मोतिया ने कमला के बंद दरवाज़े पे दबाव बढ़ाया…..और अचानक,”ले मादरच्चोड़…….” कह कर कमला का बंद दरवाज़ा फाड़कर वो उसके अंदर घुस गया.

“उई मैययययययययययययययययाआआआआआआआआआअ रीईईईईई……………..मर गाइिईईईईईईई………आआआआआआआआआआआआआआन्न्‍नननननननननननननननगगगगगगघह,….
माआआआआ…………….मैयययययययययाआआआआआआआआआअ रीईईईईईई…………….” कमला का भयानक आरतनाद जारी था और मोतिया अब उसके आखरी परखच्चे ढीले करने में मशगूल था. ठप्प, ठप्प, ठप्प ठप्प……मोतिया की काली जांघें कमला की साँवली जांघों से टकरा रही थी………फुकच्छ-फुकच्छ. फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ….काला मोटा लॉडा, साँवली, सख़्त चूत के अंदर से संगीतमय आवाज़ें निकाल रहा था……..पहली बार मोतिया ने कमला के दाहिने मम्मे को चूसना शुरू किया और उसकी काली चूचियों को चूसने-काटने लगा. कमला की कोरी चूत से खून रिस रहा था पर मोतिया को कोई फ़िक्र नहीं थी. अब वो उसको अपने लंड की जड़ तक चोद रहा था और कभी कमला के मम्मे चूस्ता, कभी उसकी गर्देन और होंठ पे काट खाता.


कालू की नंगी जाँघ पे रूपाली बैठी थी और उसको सॉफ महसूस हो रहा था कालू का काला, अकड़ता हुआ लंड. कालू से रहा नहीं जा रहा था, उसने ब्लाउस के हुक खोले, ब्लाउस हटाया और ब्रा-ब्लाउस हटा के रूपाली के बंद कबूतरों को आज़ाद कर दिया. अब रूपाली ऊपर से नंगी थी. गोरी पीठ को चूम चूम के कालो दीवाना हुआ जा रहा था. सत्तू ने अपनी बोतल अलग रखी और रूपाली के मम्मे बारी बारी से चूसने लगा. नफ़रत और अपमान से रूपाली सिसक रही थी.

कालू ने रूपाली की गर्देन को चूमना चूसना शुरू कर दिया था और सत्तू के तंबाखू से सड़े हुए दाँत उसकी गुलाबी चूचियों को काट रहे थे. रूपाली ने आँखें बंद कर ली थी और अजीब से सिहरन महसूस कर रही थी. दोनो चमारों का गोरी ठकुराइन को आध-नंगा देख कर वैसे ही बुरा हाल था…
क्रमशः...........
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07-15-2017, 12:51 PM,
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RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
गतान्क से आगे..................
उधर मोतिया ने कमला की चूत के परखच्चे उड़ा दिए थे. खून और उसका रस, चूत से रिस रहे थे और धीरे धीरे उसके साँवले छूतदों के बीच छिपे काले से छेद पे मिल रहे थे. मोतिया ने अपनी जीभ उसके मुँह के अंदर घुसा रखी थी और लंड उसकी चूत को दना दान, गपा गॅप चोद रहा था……कमला को चुदाई का कोई अनुभव नहीं था….मगर फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ के आवाज़ों के बीच उसने अचानक महसूस किया उसका पेशाब निकलने वाला है…….मोतिया ने उसके बाए मम्मे को चूसना शुरू कर दिया मगर चुदाई जारी थी….. ठप-ठप-ठप-ठप-ठप…….फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ फुकच्छ-फुकच्छ……………..अचानक कमला के मुँह से निकला …आआआआआआआहह…..और उसे लगा उसने पेशाब कर दी है……मगर दरअसल वो छ्छूट चुकी थी…..ये, उस बेचारी का पहला सेक्स अनुभव था………मोतिया के धक्के वीभत्स हो चुके थे……..तेज़, तेज़, और तेज़….अचानक वो चिल्लाया,”अयाया रंडीईईईईईई………..”, और कमला ने महसूस किया मानो मोतिया का लॉडा उसके अंदर लगातार थूक रहा था……गरम-गरम-चिप चिपा वीर्य……मोतिया का वीर्य………..कमला के अंदर……..च्चटपटा कर कमला ने निकलने की कोशिश की, मगर उस हरांज़ाड़े को कोई परवाह नहीं थी. बेरहमी से उसने कमला के चूतड़ पकड़ कर अपनी ओर भींच लिए और हर बूँद उसके अंदर ही रहने दी. पूरी तरह से खल्लास होने के बावजूद, कमीना दस मिनिट तक कमला के पूरे नंगे बदन पे बेरहमी से चिपका रहा………………

सत्तू और कालू रूपाली की साड़ी और पेटिकोट हटा चुके थे. अब वो भी कमला की तरह मादार-जात नंगी थी. उसीकि साड़ी और पेटिकोट को नीचे बिछा कर दोनो ने उसको नीचे लिटा दिया था. सारी पे लेटने के बावजूद, रूपाली को अपनी पीठ पे खेतों के कंकर-पत्थर चुभते हुए महसूस हुए.

कालू ने उसकी गोरी जांघें देखी तो पागल हो उठा. उसने रूपाली के गोरे पैरो और जाँघो को चूमना-चूसना शुरू कर दिया. सत्तू रूपाली के गालों को हाथो से चिकोटी काट रहा था और कभी कभी उसके मम्मों को भोंपु की तरह बजा देता था. रूपाली की गोरी चूत पे, छ्होटी छ्होटी काली झांते थी और उनको देखते ही कालू का दिमाग़ खराब हो गया. उसने चूत का एक हिस्सा मुँह में दबाया और ऐसे चूसने लगा मानो किसी बच्चे के मुँह में रसीली टॉफी आ आई हो. फिर अपनी जीभ रूपाली की चूत में उसने पूरी घुसा दी और रूपाली की सिसकारियाँ निकलने लगी. उंगली पे थूक लगा के रूपाली की गांद के सुनहरे, भूरे छेद से खेल रहा था कालू और जीब पूरी तरह से गुलाबी चूत को चोद रही थी. रूपाली पूरी तरह गन-गॅना उठी.

रूपाली ने नज़र घुमा के देखा……कमला लेटी हुई थी और बेबसी की हालत में उसको देख रही थी…..उसके ठीक पीछे मोतिया लेटा हुआ था और बेशर्मी से मुस्कुराते हुए उसको एकटक देख रहा था……जैसे ही रूपाली की आँख उसकी आँख से मिली, वो बेशर्मी से मुस्कुराते हुए बोला,”क्यूँ ठकुराइन? पंचायत में बोलोगि कैसे कालू चूत चूस रहा आपकी? हाहहाहा.” रूपाली ने नफ़रत से दूसरी तरफ नज़रें घुमा ली. 

अचानक रूपाली को गंदी सी बदबू आई. आँख खोली तो देखा ठीक नाक के नीचे एक बहुत ही बदबूदार लंड, उसके खूबसूरत मुँह में घुसने की कोशिश कर रहा है…….बिलबिलते हुए रूपाली बोली,”भगवान के लिए, ये मत करो सत्तू काका…..आप नीचे कर लो…..” सत्तू चिल्लाया,”मुँह खोल रंडी………”…..जल्दी ही पेशाब, पसीने से मिली जुली सदान्ध वाला काला लंड रूपाली के खूबसूरत गोरे मुँह में था…….उल्टी आने को हुई, मगर रूपाली के गले में घुट कर रह गयी…….बदबू से ध्यान हटाने की कोशिश करने के लिए रूपाली ने नीचे की सनसनाहट की ओर ध्यान केंद्रित किया……..

रूपाली को चूत की सनसनाहट अच्छी लग रही थी. कालू की जीभ मोटी थी और वो बड़े करीने से उसकी गुलाबी- गोरी चूत को चूस रहा था……जानवरों जैसी जीभ होने की वज़ह से उस जीभ की खुरदुराहट, जितनी बार रूपाली के दाने को छ्छू जाती, उसकी सिसकारी सी छ्छूट जाती. मुँह में बदबूदार, पसीने से चिपचिपा काला लंड था और उबकाई, नफ़रत और बेबसी के मारे रूपाली की खूबसूरत आँखों से आँसू छल्छला उठे.

आहत हिरनी की तरह, किसी तरह रूपाली ने नज़रें घुमाई तो देखा नंगी कमला उसकी ओर एकटक देख रही है. पूरी नंगी कमला की बगल में काला मोतिया नंगा लेटा हुआ था और भूखे भेड़िए की तरह रूपाली की चुदाई देख रहा था. शायद रूपाली की मज़बूरी उसके अंदर के शैतान को और जगा रही थी….इसलिए, वो रह रहकर, कमला की कसी हुई छतियो को बीच बीच में ज़ोरों से मसल देता था……हर बार उसकी कल्पना में रूपाली के गोरे स्तन आते थे जो दर-असल इस वक़्त, दो मज़बूर कबूतरों की तरह सत्तू के लटके हुए, काले टट्टों के नीचे तड़प रहे थे.

सत्तू अपना बदबूदार लंड रूपाली के मुँह में अंदर बाहर कर रहा था. चमार लॉडा आज़ादी से मनमानी कर रहा था और ठकुराइन का खानदानी मुँह, इस दबंग लंड की मनमानी सहने को मज़बूर था…..मुँह से भी गप्प-गप्प-गप्प-गप्प की आवाज़ें आ रही थी. रूपाली इस लंड से निकला कुछ भी गले के अंदर नहीं उतरने देना चाहती थी और इसलिए ढेरों थूक उगल रही थी. ढेर सारा थूक होने की वज़ह से सत्तू का बदबूदार लॉडा ऐसी चिकनाई महसूस कर रहा था जैसी उसने ना कभी अपनी पत्नी की चूत में महसूस की थी और ना कभी शहर की सस्ती रंडियों में. कभी कभी सत्तू अपने दोस्तों के साथ शहर की सस्ती रंडिया भी चोद लिया करता था, जैसा कि गाओं के लोग अक्सर करते हैं जब वो बड़े शहरों में अनाज बेचने या खाद-बीज खरीदने जाते हैं.

सत्तू वहशियों की तरह रूपाली का मुँह चोद रहा था. कालू ने रूपाली की जांघों के बीच में मुँह फँसा रखा था और चूत से रिस्ति हुई हर बूँद को ऐसे पी रहा था मानो देवता समुद्रा मंथन से निकले अमृत को पी गये थे. फ़र्क सिर्फ़ ये था, कि कालू कोई देवता नहीं, एक राक्षश था……और रूपाली की विडंबना यह थी कि इस दुष्ट राक्षश का गला काटने के लिए कोई देवता धरती पे नहीं आ रहा था.
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07-15-2017, 12:51 PM,
#5
RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
अचानक सत्तू ने थूक से अपने दोनो चूचक (निपल्स) खूब गीले किए और रूपाली के दोनो हाथ उठाकर,उसके अंगूठों और पहली उंगली के बीच अपने निपल पकड़ा दिए. मज़बूरी में रूपाली उसका बदबूदार, मोटा लंड चूस्ते चूस्ते उसके चूचको को धीरे धीरे मसल्ने लगी. सत्तू मानो स्वर्ग में था. अपने चूचकों से उसको सनसनाहट महसूस हो रही थी…..काला लंड मोटा होते होते, अपनी पराकाष्ठा पे था और रूपाली को गले के अंदर तक चोद रहा था…….कालू की खुरदरी जीभ रूपाली की चूत के अंदर साँप की तरह बिलबिला रही थे……अचानक रूपाली को नीचे एक तेज़ सनसनाहट महसूस हुई और उसने कई झटको में कालू की जीभ में ढेर सारा शहद छ्चोड़ दिया.

रूपाली छ्छूट चुकी थी. लेकिन सत्तू ने उसके बाल पकड़ रखे थे और उसके मुँह को झटके दे देके वो उसका मुँह लगातार चोद रहा था…..रूपाली की उंगलियाँ लगातार उसके चूचकों से खेलने को मज़बूर थी……..रूपाली ने उसके चूचकों को ज़रा ज़ोर से मसल क्या दिया, एक ज़ोरदार झटका ले के सत्तू ने बहुत ही मोटा, गाढ़ा और बहुत सारा सफेद वीर्य, रूपाली के ठाकुर गले में उतार दिया.

फूकक्च…….फूकक्चह…..फुक्ककचह……के आवाज़ और कमीने ने रूपाली का सिर इतनी ज़ोर से अपनी जांघों के बीच में भींच लिया की वो बेचारी साँस तक लेने को ऐसी मज़बूर हुई कि मुँह से साँस खींचनी पड़ी और चमार की एक एक बूँद रूपाली के शानदार ठाकुर गले से होती हुई पेट (स्टमक) के अंदर चली गयी.


पूरे 2 मिनिट ज़बरन उसे भींचे रखा सत्तू ने और जब रूपाली का सिर आज़ाद किया, तो वो ज़ोरो से खाँसने लगी. लंबे खुले बाल, गुलाबी रंग का मज़बूर, खूबसूरत चेहरा और आँखो से झार झार गिरते मोतियों जैसे आँसू………….कमीने सत्तू ने जैसे ही उसका चेहरा देखा, ज़ोरो से हँसने लगा और बोला,”पंचायत में ज़रूर बताई…..कि नास्पीटा सत्तू हमरे मुख में लवदा दिए रहा हमरे….हाहहहहहहहाहा.” कालू जो अब तक रूपाली की चूत चाट रहा था, धीरे से सरक के उठ बैठा और रूपाली का बायां मम्मा सहलाते हुए वो भी हँसने लगा!

यह सब देखते देखते मोतिया फिर से गरम हो चक्का था. वो लगातार साँवली कमला की कसी हुई चूत, जिसका किला वो थोड़ी ही देर पहले ध्वस्त कर चक्का था, सहला रहा था. कभी छूट में उंगली घुसा घुसा के मज़े लेता था और कभी उसकी चूत के दाने को मरोड़ने लगता. कमला कसमसाते हुए सिसकारियाँ ले रही थी. अचानक मोतिया एक झटके से उठा और कालू से बोला,”ठकुराइन की चूत काफ़ी चूस चुके तुम मादर्चोद….अभी तुम कमला रानी का मज़ा भी लई लो….मौकू ठकुराइन का जायजा लेन दो भाई.” कालू बड़े अनमने मंन से उठा. सच बात यह थी कि उसने सिर्फ़ एक बार एक सस्ती नेपाली रंडी को चोदा था जो गोरी थी. उस जैसे बदसूरत, कलूटे चमार को गोरी ठकुराइन के दर्शन मात्र दुर्लभ थे और यहाँ वो उनकी चूत 1 घंटे से चाट रहा था. राक्षश जैसा कालू मजबूरी में उठा, कमला की बगल में लेटा और उसकी छूट में बेरहमी से 1 उंगली पूरी घुसाते हुए उसके होंठो को ज़ोर से चूसने लगा.

चाँदनी रात थी और शायद पूरण-मासी से 1 दिन पहले का चाँद था. रूपाली का गोरा नंगा बदन मानो दूध में नहाया हुआ दिख रहा था और मोतिया और सत्तू उसको ऐसे खरोन्चे मार रहे थे मानो शैतान चीतों के हाथ एक मज़बूर हिरनी लग गयी हो और वो मारने से पहले, उसको नोच-खसोट रहे हों.

मोतिया ने अपना मोटा लंड उसके होंठों के बीच में लगाया और मज़बूर, नाकाम कोशिश को अनदेखा करते हुए, रूपाली के सुंदर मुँह में अपना लंड घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा. सत्तू ने रूपाली का हाथ पकड़ा और उसमें अपना लॉडा थमा दिया. मज़बूरी में रूपाली सत्तू का बदबूदार लंड, जिसको वो कुछ ही देर पहले चूस चुकी थी, हिलाने सहलाने लगी. मोतिया ने घापघाप उसके मुँह को थोड़ी देर चोदा और रूपाली की आँखें फटने को आ रही थी. अचानक, मोतिया ने अपना लंड रूपाली के मुँह से खींच के निकाल लिया, तीर की तरह नीचे सरका और घकचह से अपना मोटा लंड रूपाली की चूत में घुसा दिया. “आआआआआअहह……..”, रूपाली की घुटि सी चीख निकली और मोतिया उसको जानवर की तरह चोद्ने लगा. चमार मोतिया चोद रहा था……शानदार ठकुराइन, मज़बूरी और लाचारी में चुद रही थी….और सत्तू चामर बेचारी से अपना बदबूदार लंड मसलवा रहा था, सहलवा रहा था…..

कालू इतना सब देख कर अपना आपा खो बैठा. उसने अपना मूसल जैसा लंड एक बार सहलाया , उसपर बहुत सारा थूक लगाया और कमला की कसी हुई, उभरी भूरे रंग की चूत में घुप्प्प्प्प्प्प्प्प्प, से घुसा दिया. कमला कुच्छ ही देर पहले मोतिया को अपनी जवानी का अनमोल मोती सौंप चुकी थी. पहली बार चुदी थी इसलिए अब इतना दर्द नहीं होना चाहिए था. मगर कालू का लंड मूसल था. जैसे किसी गधे का हो. “हाअए मोरी मैययययययययययययययाआआआआआआआअ, मरर गयी माआआआआआआआआआं……..ठकुराइन, हामका बचाई लेब….”……..उसकी कातर आवाज़ रात के सन्नाटे में भटक के रह गयी………..चाँदनी रात में उसने देखा बेचारी ठकुराइन खुद मोतिया से चुद रही थी. मोतिया चमार ने शायद कुछ गंदी पिक्चरे देखी थी……इसलिए वो सिर्फ़ गाओं जैसी चुदाई नहीं कर रहा था…..उसने रूपाली की गोरी टाँगें अपने कंधों में फँसा ली थी और इस कारण ऐसे चुदाई कर रहा था मानो कोई किसान किसी खेत में हल जोत रहा हो……..
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07-15-2017, 12:51 PM,
#6
RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
कालू ने बेरहमी से कमला के उभरे हुए, मोटे होंठ को चूसना शुरू किया और मूसल लंड से दनादन चुदाई जारी थी. कुछ देर पहले मोतिया ने उसकी चूत से खून निकाला था मगर शायद उसकी किस्मेत में चूत को और ज़्यादा, पूरी तरह से खुलवाना लिखा था…….खून फिर से रिसने लगा. कालू बेख़बर, चोदे जा रहा था…..फुकच्छ-फुकच्छ—फुकच्छ-फु
कच्छ, फुकच्छ-फुकच्छ—फुकच्छ-फुकच्छ, फुकच्छ-फुकच्छ—फुकच्छ-फुकच्छ.

“उूुुुउउन्न्ञननणणन्…आआअन्न्‍नणणन्—आआअन्न्‍णणन्…उूउउन्न्ञणणन्….”, कमला की रुलाई और फुकच्छ-फुकच्छ—फुकच्छ-फुकच्छ, फुकच्छ-फुकच्छ—फुकच्छ-फुकच्छ, फुकच्छ-फुकच्छ—फुकच्छ-फुकच्छ….कालू की चुदाई………20-25 मिनिट का कभी ना ख़तम होने वाला समय और फिर कालू ने अपना गाढ़ा, चिपचिपा वीर्य, कमला की पूरी तरह खुल चुकी, 20 साल की कुँवारी चूत के अंदर उगल दिया. ऐसा जानवर था कि कमला के निचले होंठ को बुरी तरह काट खाया उसने और पूरी तरह, अपने बदन का एक एक इंच कमला के कसे हुए बदन से चिपका के उसके ऊपर ऐसे लेट गया मानो दोनो का एक ही शरीर हो. मानो दोनो कभी अलग नहीं होंगे. कालू ने आँखें बंद कर ली और कल्पना में, कमला की जगह ठकुराइन रूपाली को बदल लिया. उत्तेजना के मारे कालू के शरीर में एक सिहरन दौड़ गयी और उसने ज़ोर से रूपाली (कमला), के चूतड़ पे एक च्युंती काटी और बाएँ गाल पे काट खाया……”हाआआआए’…कमला की सिसकारी निकली, पर कालू ने उसके होंठों पे अपने भद्दे, काले होंठ दबा दिए और उन्हें चूसने लगा.

मोतिया, जो पहले ही कमला के अंदर एक बार झाड़ चुक्का था, अब रूपाली को चोदे जा रहा था और झड़ने का नाम नहीं ले रहा था. पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ, पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ………की आवाज़ हज़ारों झींगुरों की आवाज़ के बीच आ रही थी और हालाँकि यह और कुछ नहीं, एक लड़की और एक युवती का बलात्कार था, फिर भी, चुदाई का संगीत मानो फ़िज़ाओं में च्छा चुका था.

अचानक झाड़ियों में खाद खाद खाद खाद के साथ किसी के आने की आवाज़ महसूस हुई…..और किसी अंजान शख़्श के आने के डर से मोतिया रूपाली के ऊपर एकदम सुन्न्ं लेट गया. कालू ने भी कमला का मुँह भींच दिया. लेकिन रूपाली ने मौके की नज़ाकत को समझते हुए गुहार लगाई,”भाय्या…इधर,……..हमें बचाओ….बचाओ…बचाओ……बचाओ हमें भाय्या..............बccछ्ह्ह्ह्हाआऊऊऊ…..”



…”चुप्प….चुप्प साली…..” मोतिया और सत्तू फुसफुसाए और उन्होने रूपाली का मुँह दबा दिया….अब सिर्फ़ “उग्गघह…गों-गों…उग्घह….”जैसी घुटि आवाज़ें आ रही थी.

धीरे धीरे कदमों की आवाज़ पास आती गयी और अचानक ‘वो’ सामने आ गया



वो 45-50 साल का मुंगेरी था……जिसे इन तीन छमारों ने गाओं भेजा था, रोटी, मुर्गी और शराब लाने. चाँदनी रात में मुंगेरी ने रूपाली का दूध जैसा नंगा बदन देखा……..कालू के काले चीकत-कीचड़ जैसे बदन से चिपका कमला का पूरा नंगा, कसा हुआ सांवला-सलोना बदन देखा और उसका मुँह खुला का खुला रह गया. उसको देख कर मोतिया, कालू और सत्तू हँसने लगे और सत्तू बोला,”हुट्त्त साला…..ये तुम हो चूतिया, हाहहहाहा.” रूपाली ने मुंगेरी की ओर एक नज़र देखा और उसके मुँह से बेबसी की एक लंबी, ठंडी अया निकल गयी. उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

पूरी शाम मुंगेरी तीन चमार दोस्तों को समझा रहा था की ठकुराइन से पंगा ना लो और जाने दो उनको. पर अब वो रूपाली के गोरे, सुंदर बदन को चाँदनी रात में यूँ निहार रहा था जैसे कोई गिद्ध, मरे हुए जानवर की लाश को निहारता है.उसके हाथ से खाने का थैला छ्छूट गया. बोतलें ज़मीन पर रख के, मुंगेरी अपने बायें हाथ से, धोती के ऊपर से ही, अपना लंड मसल्ने लगा.

मोतिया ने रूपाली की टाँगों को फिर दोनो कंधों पे रखा और पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ के संगीत मे आवाज़ एक बार फिर खेतों में गूंजने लगी. सत्तू सरक कर रूपाली के मुँह की तरफ गया, उसने रूपाली के लंबे बालों वाले सिर को अपने हाथों में लिया और एक बार फिर, अपना बदबूदार लंड उसके मुँह में घुसा के उसको चोद्ने लगा.

मुंगेरी पे मानो कोई जादू हो गया हो. वो कभी अपने चमार दोस्तों के साथ रंडियाँ तक चोद्ने नहीं जाता था. सिर्फ़ शराब और कबाब की यारी थी उसकी. पर रूपाली की गोरी टाँगें काले मोतिया के कंधों पे और रूपाली की गोरी चूत में धंसा हुआ मोतिया का काला लंड, उसके दिमाग़ पे छ्छा चुके थे. मानो किसी ने सम्मोहन सा कर दिया तहा उसपे. फटी हुई आँखो से रूपाली के सुंदर चुतड़ों को उछलता हुआ देख रहा था मुंगेरी. जाने कब उसकी धोती हट गयी और धारी वाले कच्छा का भी नाडा खोल के वो पूरा नंगा हो चुका था. कालू, जो कमला के साथ ये सब देख रहा था, ज़ोर से हंसा,”आए मादर्चोद मुंगेरी. इत्ता बड़ा लवदा रे……??? इस्तेमाल काहे नहीं करत है रे कभी कभी…हाहहाहा?”……..
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07-15-2017, 12:52 PM,
#7
RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
मुंगेरी उसकी हँसी को अनसुना करता हुआ चुद्ति हुई रूपाली के चुतड़ों के पास गया और अपनी नाक उसके गोरे, खूबसूरत चुतड़ों के जितना पास ले जा सकता था, ले गया. मुंगेरी के नथुनो में रूपाली की गांद से आने वाली मदमस्त खुश्बू समा गयी. उसे मोतिया के लंड की बदबू भी आई और उसका दिल किया मोतिया को धक्का दे दे……मगर सामाजिक तक़ाज़ा था…..अपना ध्यान मोतिया के लंड से हटा कर, रूपाली के सुनहरे, भूरे छेद पे केंद्रित किया और अपनी जीभ उसपे लगाने की कोशिश करने लगा.

इस कोशिश में कभी उसकी नाक और माता मोतिया के टटटे छ्छू जाते तो कभी जीभ रूपाली की गांद चाटने लगती. मोतिया और रूपाली हर बार एक सिहरन महसूस कर रहे थे और मोतिया ढका धक रूपाली की गोरी चूत चोद रहा था, जांघों को नाख़ून से नोच रहा था और बीच बीच में उसकी मस्त चूचियाँ चूसने लगता.

सत्तू लॉडा चुसवाने में मस्त था और रूपाली का मुँह चोदे जा रहा था.

मुंगेरी ने बहुत सारा थूक रूपाली की गांद के छेद पे लगाया और धीरे धीरे पहले एक उंगली और फिर दो उंगलियाँ उसकी गांद के अंदर करने लगा. मोतिया ने सॉफ महसूस किया कि रूपाली की चूत की दीवारों से मुंगेरी की उंगलियाँ उसका लंड दबा रही हैं और उसका चुदाई का उत्साह दुगुना हो गया…….रूपाली को बहुत तकलीफ़ हो रही थी मगर उसकी ठाकुर गांद की अकड़, चमार मुंगेरी की उंगलियों के आगे दम तोड़ रही थी. धीरे धीरे गांद ढीली होती चली गयी.

मुंगेरी ने मोतिया से रुकने को कहा. “का है???...”, मोतिया गुर्राया. “रुक ना, बहुत मज़ा आबे करी…” मुंगेरी बोला और उसने मोतिया को पीठ के बल लेटने को कहा. बेमंन से मोतिया नीचे लेटा, तो मुंगेरी ने बॉल पकड़ कर रूपाली को उठाया और मोतिया के ऊपर बैठा दिया. मोतिया के खड़े लंड ने आसानी से अपना रास्ता ढूँढ लिया और वो रूपाली की रसीली चूत में घपप से घुस गया. मोतिया ने रूपाली की कमर पे दोनो हाथ रखे और कमर को अपने मज़बूत हाथों से ऊपर नीचे करने लगा. दूध सी गोरी रूपाली, रसीले होंठ, आँख में आँसू और उसके कमर तक लंबे लहराते बाल………मानो कोई खूबसूरत अप्सरा इन खेतों में आ गयी थी….इन कमीने चमारों से अपनी ऐसी-तैसी कराने..

मोतिया ने पहले कभी इस मुद्रा में चुदाई नहीं की थी. उसे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था. रूपाली की मस्त चूचियाँ उसकी आँखों की आगे हर झटके के साथ उछल रही थी, उसके काले हाथ रूपाली के मस्त चुतड़ों पे थप्पड़ लगा रहे थे और लंड मस्ती से गॅप-गप्प-गप्प-गप्प-गप्प-गप्प चुदाई कर रहा था. मोतिया ने महसूस किया अचानक चुदाई रुक गयी है क्यूंकी वो रूपाली को कमर से ऊपर नीचे नहीं कर पा रहा है……..जल्दी ही उसे कारण समझ आ गया……उसने देखा, रूपाली को कमर से मुंगेरी ने पकड़ रखा है और वो चुतड़ों को थोड़ा उठा के, रूपाली की गंद में अपना मोटा लॉडा घुसाने की कोशिश कर रहा है. अपने आप ही, मोतिया ने अपने धक्के बिल्कुल बंद कर दिए और मुंगेरी के लंड की सफलता का इंतेज़ार करने लगा.
मुंगेरी ने ढेर सारा थूक रूपाली की गांद के छेद पे मला, अपने लंड पे मसला और एक बार फिर कोशिश की. घुपप्प….धीरे से लंड ने गुदा द्वार में प्रवेश किया और रूपाली की चीख निकली….”आआअहह.” सत्तू अब तक बगल में बैठा शराब पी रहा था आउज़ उसने रूपाली के गालों पे चिकोटी काटी,”मालकिन, पंचायत को बहुत मज़ा आबे करी, जब आप ई चुदाई का बारे मा बताबे करी….आआहहहाहा.”

धीरे, धीरे, धीरे, धीरे, मुंगेरी का मज़बूत लंड रूपाली की गांद में पूरा घुस गया और 30-40 सेकेंड तक मोतिया, रूपाली और मुंगेरी…तीनो की मानो साँसें रुक गयी. फिर धीरे से मुंगेरी ने 5-7 मिलीमेटेर बाहर को खींचा और लंड फिर अंदर घुसा दिया. फिर उसने ये लगातार करना शुरू कर दिया.
क्रमशः...........
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07-15-2017, 12:52 PM,
#8
RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
गतान्क से आगे..................
रूपाली को लग रहा था मानो नर्म मक्खन के बीच गर्म गर्म चाकू अंदर बाहर हो रहा हो………नीचे लेटे मोतिया को जन्नत का सुकून मिल रहा था. वो रूपाली की फेली हुई, कसी चूत का कड़ा दबाव महसूस कर रहा था…….और फिर, चमत्कार हो गया. एक साथ मोतिया ऊपर की ओर धक्का लगाता……मुंगेरी नीचे की ओर और दोनो के धक्कों का समय बिल्कुल एक साथ होने की वज़ह से, हर धक्के पे रूपाली दोनो के बीच भींच जाती और उसकी घुटि हुई आवाज़ आती,”हुन्न्ञनह………………….हुन्न्ञणनह……………हुनह”. मोतिया नीचे से खुशी से झूमते हुए चीखा,”मज़ाआआआअ…..आाआईयईई….गावा
ााआआआ रीईईईईई….ले….ले….ले, ले और ले….”

मुंगेरी कस कस के रूपाली की सुंदर गान्ड मार रहा था और इन दोनो काले चामारों के बीच रूपाली का गोरा, दूधिया बदन पिसता हुआ देख के कालू और सत्तू अपने लंड रगड़ रहे थे.

रोने धोने से कोई फ़ायडा नहीं था…..इसलिए रूपाली कोशिश करके बदन में पैदा होती हुई सनसनाहट का आनंद लेने लगी. उसे इस तरह कभी किसी ने नहीं चोदा था और मुंगेरी का लंड वाकई उसकी गान्ड में बहुत ही सख्ती से अंदर बाहर हो रहा था…….मुंगेरी के लंड की वज़ह से उसकी चूत पूरी तरह मोतिया के लंड को जाकड़ चुकी थी और ले-बद्धह तरीके से चुदाई-थुकायी जारी थी……

मोतिया का लंड कम आसानी से ऊपर नीचे हो रहा था मगर मुंगेरी के लंड ने गान्ड के अंदर आग सुलगा रखी थी…….. पुकछ-पुच्छ-पुकछ-पुकछ…….फुकच्छ…फुकच्छ…फुच…फुकच के बीच रूपाली की…….”हुन्न्ञणनह……..हाअएं…….हुन्न्ञनह….हुन्न्ह…..” दोनो चमारों के लंड में आग लगा रही थी……….12-15 मिनिट की ये चुदाई रूपाली को 12-15 युग समान लगी…..अचानक, मुंगेरी चीखा…..”आआआआआआाअगघह………हुमको…..माआआफ…..करो………ठकुर्ााआआईन्न्नननननननननननननणणन्…..आाागघ….आागघह……आअघह”….और उसने अपना सालों का जमा वीर्य रूपाली की गान्ड के अंदर छोड़ दिया……….”हाअए….हाअए……….मर गया रे रंडीईईईईईईईईईईईईईई”, बोलके मोतिया ने भी रूपाली की चूत के अंदर वीर्य-पात कर दिया.

चूत तो ठीक थी मगर गान्ड में रूपाली को लग रहा था मुंगेरी ने आधा लीटर वीर्य छोड़ा था. इस बेबसी की हालत में भी उसके दिल ने कहा,”हे भगवान, ये चमार चूत के अंदर झाड़ा होता तो आज तो मैं मा बन ही गयी थी……..”, ना चाहते हुए भी अपने ख़याल पे मुस्कुरा उठी. हालाँकि वो सिर्फ़ एक पल के लिए मुस्कुराइ थी मगर, मोतिया ने देख लिया और हंसते हुए बोला,”आए हाए रानी….अब तो बहुत खुस हो……पंचायत नहीं जाओगी सायद..हाहहाहा.”

रूपाली ने उठना चाहा मगर मोतिया और मुंगेरी, दोनो ने उसको जाकड़ लिया और बहुत ज़ोर से दोनो के बीच में दबा लिया. कोई 10-15 मिनिट वो ऐसे ही पड़े रहे!

कोई 15 मिनिट बाद, मुंगेरी ने अपना लंड रूपाली की सुंदर गान्ड से और मोतिया ने उसकी खूबसूरत चूत से, बाहर खींचा और रूपाली लड़खड़ाती हुई उठी. सत्तू ने पानी की बोतल उसकी ओर बढ़ाई और ना चाहते हुए भी रूपाली ने पानी पिया. गाओं में ये सोचना भी पाप था कि कोई चमार किसी ठकुराइन को पानी के लिए पूछ भी सकता है. मगर यहाँ वो बस एक मज़बूर औरत थी.

धीरे से रूपाली उठी और घने गन्नो की तरफ बढ़ी. वो सब जानते थे वो भागने की हालत में नहीं है, इसलिए सिर्फ़ उस तरफ ध्यान से देखते रहे. रूपाली लंबे गन्नो की आड़ में बैठ गयी और पेशाब करने लगी. हिस्स्स्स्सस्स……..की आवाज़ आते ही मानो कालू को करेंट लग गया. झटके से उठा और दौड़ के रूपाली की ओर दौड़ा. झट से उसने अपना दायां हाथ बैठी हुई रूपाली की गान्ड के नीचे घुसाया और रूपाली के पेशाब की गरम गरम धार अपने हाथों पे महसूस करने लगा.

हिस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…………………….हिस्स्स्स्स्सस्स……हिस्स्सस्स……….हिस्स्स….” की आवाज़ के साथ पेशाब का गिरना बंद हुआ और रूपाली की चूत के होंठों को दबा दबा के कालू ने आखरी बूँद तक निचोड़ के चूत को पूरा सूखा दिया. उसके बाद कालू ने मज़बूत हाथों से रूपाली को किसी बच्चे की तरह गोद में उठा लिया और वापस, सबके बीच में ले आया.

चाँदनी रात में सब नंगे बैठे थे, और हल्की ठंडक हवा में होने के बावजूद, सबको हल्का पसीना आ रहा था. इतनी मेहनत जो की थी सबने. रूपाली ने अपनी सारी को अपने कंधों पे इस कदर रख लिया कि उसका नन्गपन कुछ छुप जाए. उसकी देखा-देखी साँवली-सलोनी कमला ने भी अपना घाघरा कंधो पे रख लिया अपनी छाती को ढकने के लिए. चाँदनी रात में कमला का नंगा बदन, पैरों में सिर्फ़ दो चाँदी की पाजेबें और सांवला सलोना रंग बहुत आकर्षक लग रहा था. रूपाली, का ननगपन, उसकी गुलाबी सारी से छन के बाहर निकल रहा था और उसके गोरे चेहरे पे फैला हल्का काजल, उसके खूबसूरत घने काले बाल, गोरा रंग और खूबसूरत चेहरा उसे किसी अप्सरा से कम नहीं लगने दे रहे थे.
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07-15-2017, 12:52 PM,
#9
RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
कालू, मोतिया, सत्तू और मुंगेरी ने प्लास्टिक के गिलास निकाले और उनमें देसी शराब भर दी. फिर मुर्गी के माँस वाली बड़ी थैली को उन्होने बीच में खोल लिया और रोटी के बड़े बड़े टुकड़े तोड़कर, उसमें मुर्गी-तरी लपेटकर खाने-पीने लगे. मोतिया ने एक बड़ा रोटी का टुकड़ा तोड़ा, उसमें मुर्गी का एक छ्होटा टुकड़ा लपेटा, तरी में थोड़ा डुबोया और कमला के मुँह में ठूंस दिया. बेचारी को शायद बहुत भूक लग आई थी और वो खाने लगी. मोतिया ने कमला से पूछा,”सराब पिएगी मौधी?” कमला ने ना में सिर हिलाया और पानी की बोतल की तरफ इशारा किया. मोतिया ने उसे पानी दे दिया.


कालू ने एक रोटी में थोड़ा मुर्गी का माँस रखा और एक पानी का गिलास भरकर, रूपाली के आगे रखता हुआ बोला,”लो ठकुराइन, खाना खाई लीजो.” इतनी इज़्ज़त से उसने ये बोला था कि एक पल को तो रूपाली को लगा मानो अब तक जो कुछ हुआ था वो सिर्फ़ एक भयानक सपना था. बचपन से रूढ़िवादी, कट्टर संस्कारों में पाली बढ़ी थी रूपाली और उसके लिए नीच जाती के लोगों के हाथ से कुछ भी खाना धर्म भ्रष्ट करने वाली बात थी. उसने मुँह फेर लिया. फिर अचानक वो कालू से बोली,”देखो, अब हम तुम्हारे हाथ जोड़ती हैं, बहुत हो गया. अब हमें हवेली पहुँचवा दो.”

शायद मोतिया या सत्तू तो मान भी जाते, मगर, कालू जिसने सिर्फ़ रूपाली की चूत का रस-पान किया था, इतनी आसानी से इस ख़ज़ाने को छोड़ने को तैय्यार नहीं था. बड़े अदब से बोला,”मालकिन, बस एक बार हमका भी आपकी चूत का स्वरग माफिक आनंद दाई दव…..फिर हम आपको इज़्ज़त से हवेली पहुँचाई देब.” बेयबसी में रूपाली मन मसोस कर रह गयी.

कमला सरक कर रूपाली के पास आ गयी थी. उसने रूपाली का हाथ थम लिया और आँसू बरसाते हुए बोली,”मालकिन…हमका माफ़ कर दव….हमरी खातिर….”. रूपाली ने एक पल के लिए उसको सूनी सूनी आँखों से देखा…..और सीने से लगा लिया. शराब पीते पीते मुंगेरी ने जैसे ही यह नज़ारा देखा, कमज़ोर दिल का होने की वज़ह से वो डर गया और धीरे से सत्तू से बोला,”सत्तू, चल अब बहुत हुआ. रोटी खा के, ठकुराइन और ई मौधी का घर पहुँचाई देत हैं…”. सत्तू ने मोतिया को देखा और उसने कंधे उचका के मानो कहा, जैसा तुम लोग ठीक समझो. पर कालू गुस्से से मुंगेरी से बोला,”वाह रे मुंगेरी. खुद साला ठकुराइन की गान्ड मार लिए हो, और हमका सिरफ़ कमला मौधी की चूत बजाई के सन्तोस कर लैब? आराम से बैठो अभी…….”

जान छ्छूटने की जो एक हल्की सी उम्मीद की किरण बची थी, वो भी ख़त्म हो गयी और रूपाली की आँखों से आँसू बह निकले.

कमला ने रूपाली को कहा,”दीदी, कुछ खाई लो..” मगर गम्सम बैठी रूपाली ने मानो कुछ सुना ही नहीं. कमला ने थोड़ा रोटी-मुर्गी उसके मुँह के पास किया तो रूपाली को चमारों के ढाबे के खाने में वोई दुर्गंध आती महसूस हुई जो उसने सत्तू के बदबूदार लंड से आती हुई महसूस की थी. नफ़रत से उसने नज़रें फेर ली.

चारों चमारों ने तसल्ली से दारू ख़तम की, ठंडी पड़ चुकी रोटी-मुर्गी को पूरा सॉफ कर गये और उसके बाद, मुश्क़ुयल से 3-4 कदम दूर, बारी बारी पेशाब करने लगे. झींगुरों की आवाज़ें, चाँदनी रात और एक के बाद एक चार काले, गंदे, भद्दे इंसानो के मूतने की आवाज़ें…….बदबू के मारे रूपाली को उबकाई आने लगी.

रात के कोई 9-10 बज चुके थे…..आसमान में कुछ काले बादल उमड़ आए थे और बीच बीच में हल्की बूँदा बाँदी भी हो रही थी. खेत की मिट्टी से सोंधी सोंधी सुगंध आने लगी और रूपाली को कुछ राहत महसूस हुई. कालू ने उसे कंधो से पकड़ा और बड़ी इज़्ज़त से बोला,”लेट जाओ मालकिन.” रूपाली का दिल किया दुष्ट कलूटे की आँखें नोच ले मगर, चुपचाप लेट गयी. उसकी पीठ और जाँघो पे खेत का कीचड़ लिपट गया. कालू ने उसकी जांघों को अलग किया और अपना काला चेहरा, उसकी गोरी जांघों के बीच धँसा दिया.

जैसे ही कालू की खुरदूरी जीभ ने रूपाली की चूत को च्छुआ, उसके बदन में एक झुरजुरी दौड़ गयी. कालू को रूपाली की चूत से रूपाली की खुश्बू, उसके पेशाब की मेगक और मोतिया के वीर्य की बदबू का मिला जुला एहसास हुआ. कुल मिला कर उसपे तुरंत असर हुआ और उसका मूसल लंड, एकदम तन्ना के तय्यार हो गया और रूपाली के सौन्दर्य को सलामी देने लगा.

कालू का लंड बहुत ही बड़ा था और ये रूपाली को तब एहसास हुआ जब उसने इस मूसल को अपनी चूत में घुसता हुआ महसूस किया.

“नाआअ……उम्म्म्ममम….आआाअघह….म्‍म्म्मममममम”. रूपाली को लगा कालू का मूसल उसकी नाभि तक घुसा हुआ है……रूपाली दहशत के मारे सिहर उठी जब उसने कालू को बड़ी इज़्ज़त से कहते हुए सुना,”बस बस ठकुराइन, थोड़ा सा और है बस…” रूपाली ने खुद को बिल्कुल ढीला छोड़ दिया और ना चाहते हुए भी, उसकी टांगे बरबस अपने आप उठ गयी और दर्द ना हो, इसलिए उसने कालू की कमर को टाँगों के बीच जाकड़ लिया. अब कालू पूरा अंदर था और हौले हौले अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा रहा था. सत्तू और मुंगेरी एकदम पास आकर, रूपाली के गोरे गोरे चुतड़ों को कालू के काले चूतड़ के नीचे पिसता हुआ देख रहे थे और उनकी आँखें ऐसे फैली हुई थी मानो उत्साहित बच्चे किसी जादूगर का खेल देख रहे हों.
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07-15-2017, 12:52 PM,
#10
RE: Sex Hindi Kahani बलात्कार
मुंगेरी से रहा नहीं गया और उसने रूपाली के गोरे चूतड़ पे अपना एक हाथ रख दिया. फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ-….,”आआआआआ…..म्‍म्म्मममममम…….मेरी माआआआअ…..म्‍म्म्मममम…आआआआअ.” फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ- फुच्च—फुकछ—फुकछ-…..मज़बूरी की हालत में भी रूपाली को आनंद आने लगा था…..और कालू, जो साथ साथ उसकी बाईं चूची को चूस रहा था, मानो स्वर्ग में था. उसके बदसूरत चेहरे पे गाज़ाब का उल्लास था.

बूँदा-बाँदी की रिमझिम थम चुकी थी. कालू ने एक पल के लिए अपना लंड बाहर निकाला, और रूपाली की कमर को पकड़ कर उसने घुमा दिया. जल्दी ही रूपाली घोड़ी बन चुकी थी और कालू का गधे सरीखा लंड पीछे से उसकी चूत में प्रवेश कर चुका था. चाँदनी रात में गोरी पीठ और गोरे चूतड़, जिनपे गीला गीला कीचड़ लगा हुआ था. उफफफ्फ़…..कालू मानो खुशी से पागल हो उठा. उसने रूपाली के लंबे बालों को अपने दोनो हाथों में पकड़ा और बदसूरत गधा खूबसूरत घोड़ी को मस्ती से चोद्ने लगा.

मुंगेरी सरक कर रूपाली के नीचे आया और बारी बारी से उसके दोनो मम्मे और होंठों को चूसने लगा.

सत्तू का तो मानो शौक ही अपना बदबूदार, चिपचिपा लंड चुसवाना था. उसने साँवली, कसी हुई कमला को कीचड़ में लिटाया और लंड मुँह में घुसा कर अंदर बाहर करने लगा. नफ़रत के मारे कमला के दिल से सत्तू काका के लिए बाद-दुआएँ निकल रही थी पर बदबबॉदार लंड चूसने को मज़बूर थी बेचारी.

मोतिया, दो बार चुदाई के कारण, शराब के नशे की खुमारी में कीचड़ पे लेट गया और आँखें बंद करके कमला के कसे हुए चूतदों पे हाथ फिराने लगा.

कालू रूपाली को घोड़ी बनाकर चोदे जा रहा था और रूपाली की चमकती हुई, गोरी पीठ, उसके लंड को बहुत मोटा कर चुकी थी. क्यूंकी मुंगेरी ने कुछ देर पहले रूपाली की गान्ड मारी थी, उसका सुनेहरा, भूरा छेद भी चूत पे पड़ते हर धक्के पे मुँह खोल देता था. कालू की नज़र छेद पे पड़ी और उसने थूक लगा अंगूठा, गान्ड के अंदर घुसा दिया. “हााए..माआअ….” रूपाली ने कहा और नीचे से मुंगेरी ने फ़ौरन उसके रसीले होंठों को अपने होंठो के बीच फँसा लिया और ऐसे चूसने लगा मानो रसीले दाशहरी आम की फाँक किसी ग़रीब के हाथ लग गयी हो.

कालू चोद रहा था और पीछे से चोद्ने की वज़ह से आवाज़ कुछ अलग तरह की आ रही थी….पक-पक-पक-पक…फुच्च-फुकछ…पक-पक.. पक-पक-पक-पक…फुच्च-फुकछ…पक-पक.. पक-पक-पक-पक…फुच्च-फुकछ…पक-पक…..और साथ साथ अंगूठे से गान्ड के सुनहरे छेद को खोलता जा रहा था

फिर कमीने ने अपने मूसल-चंद लंड को बाहर निकाला और धीरे धीरे रूपाली की गान्ड में घुसाने लगा. “उययययीीईई..माआअँ….म्‍म्म्ममम……आआआआआहह”, रूपाली का आरतनाद ऐसा था मानो कोई जानवर भयंकर पीड़ा में कराह रहा हो……….कालू लंड घुसाता चला गया और पूरा अंदर आकर, कुछ पल के लिए थम गया. नीचे मुंगेरी सरक कर रूपाली की चूत चूसने लगा था. कुछ राहत मिली ही थी कि कालू ने लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. दर्द के मारे अचानक ही रूपाली का पेशाब निकल गया और मुंगेरी के चेहरे पर गर्म गर्म बरसात हो गयी. बौखला कर मुंगेरी बाहर निकल आया और मुँह पोछने लगा.

मुंगेरी की शाक़ल देख कर कालू हंस पड़ा और हंसते हंसते उसने गान्ड मारने की रफ़्तार तेज़ कर दी. कोई 15-20 मिनिट रूपाली की गान्ड का फालूदा बनता रहा और हाथ बढ़कर कालू उसकी चूत से खेलता रहा और अचानक,”आआआआहह…ऊहह……मालकिन……मैं आय्ाआआअ……आआआहह…………..आआअहह…..आआहह…”….कालू ने अपना सफेद, गाढ़ा वीर्य रूपाली की गान्ड के अंदर छोड़ दिया. 8-10 भयानक झटके लेकर कालू ने धीरे से अपना मूसल लंड बाहर निकाला और उसका वीर्य, रूपाली की गान्ड से चाशनी की तरह निकला और उसकी छ्होटे छ्होटे, काले झांतों वाली चूत पे फैलने लगा.

सत्तू वो पहला चमार था जिसने कमला को चोद्ने की नाकाम कोशिश की थी, जब अचानक ही रूपाली ने पहुँच कर उसके रंग में भंग डाल दिया था. पर अब उसका रास्ता सॉफ था. मोतिया कमला की चूत के दरवाज़े खोल चुका था और कालू उसके रहे सहे पेंच भी ढीले कर चुका था.
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