Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
06-26-2017, 11:44 AM,
#1
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मेरा नाम बिंदु है और मेरी शादी आज से 3 साल पहले विमल से हुई थी. विमल मेरी मा की सहेली का बेटा है. वो एक बिज़्नेस कंपनी में जॉब करता है और अक्सर टूर पर रहता है. हमारी सेक्स लाइफ ठीक तक चल रही थी. शादी से पहले मैं बिल्कुल कुँवारी थी, यानी क़िस्सी मर्द

ने मुझे चोदा ना था. मेरा रंग गोरा है, कद 5 फीट 5 इंच और जिस्म भरा हुआ है. मेरी चुचि 36सी है और हिप्स 36 इंच और कमर 28 इंच है. शादी से पहले मेरी एक सहेली थी शशि जो कि मेरी सहेली भी थी और विमल की चचेरी बेहन भी थी.

शशि की शादी आज से दो साल पहले अविनाश से हुई थी. अविनाश भी टूरिंग जॉब पर था. शशि एक चालू लड़की थी जिसका कई लड़कों के साथ अफेर चल रहा था. उसका ससुराल देल्ही में था लेकिन अब उसके पति का ट्रान्स्फर हमारे शहर यानी गुड़गांवा में हो गया था. मुझे शशि का फोन आया,” साली बिंदु, मैं तेरे शहर आ रही हूँ. खूब मज़े करेंगे दोनो.

अगर विमल भैया से मन भर गया हो तो मेरे पास बहुत हत्ते कत्ते यार हैं जो मेरी तसल्ली खूब अच्छी तरह करवाते हैं. अगर विमल भैया के लंड से बोर हो गयी हो तो बता देना. मैं इस इतवार को पहुँच रही हूँ. मेरे अड्रेस लिख लो, वहीं मिलते है. और बता विमल भैया का 6 इंच का लंड अभी तक तुझे खुश रख रहा है या नहीं?” मैं शशि की बात सुन कर शरम से लाल हो रही थी और कहीं विमल ना सुन ले इस लिए बोली,” अच्छा यार मिलते हैं.

“किसका फोन था, बिंदु?” विमल ने पूच्छा.”मेरी सहेली और आपकी बेहन शशि का. अविनाश की ट्रान्स्फर भी गुड़गांवा में हो गयी है. जल्द ही वो यहाँ आ रहे हैं.” अचानक ही मेरी नज़र विमल की पॅंट के सामने वाले हिस्से पर गयी जहाँ मुझे नज़र आ रहा था कि उसका लंड खड़ा हो रहा था,” अच्छा, तब तो अच्छा है, तेरी सहेली आ जाएगी और तेरा मन भी बहाल जाएगा. शशि बहुत हँसमुख लड़की है.

अच्छी कंपनी मिल जाएगी हम लोगों को.” विमल सवभाविक ही बात कर रहा था लेकिन मुझे लगा कि वो शायद शशि के प्रति आकर्षित हो रहा है. मेरी आँखों के सामने शशि का मांसल जिस्म उभर आया. मेरी सहेली के नितंभ भरे थे जिनको अक्सर मैने अपने पति को निहारते हुए देखा था. आज कल मेरी और विमल की सेक्स लाइफ बोरियत भरी हो चुकी थी, लेकिन शशि के नाम पर मेरे थार्की पति का लंड तन गया था. खैर देखें गे क्या होता है.

मेरे घर में मेरी मा और छ्होटा भाई संजय हैं. संजय 20 साल का है और मा का नाम रजनी है जो कोई 46 साल की है. पिता जी का देहांत हो चुका है. शशि के घर में उसका भाई जिम्मी,

इतवार के दिन मैं और विमल शशि को मिलने गये. शशि ने बहुत टाइट जीन्स पहनी हुई थी जिस से उसके नितंभ बहुत उभरे हुए थे. ब्लू जीन्स के उप्पर उसने सफेद टी-शर्ट पहनी हुई थी जिस में उसके भारी वक्ष बाहर आने को तड़प रहे थे. उसके निपल कपड़े से बाहर निकलने को बेताब दिख रहे थे. “विमल भैया, कैसे हो, अपनी शशि की कभी याद नहीं आई, भैया? आप तो हम को भूल ही गये लगते हो.”कहते हुए शशि मेरे पति के गले लग गयी और विमल ने उसको आलिंगन में ले लिया. दोनो एस मिल रहे थे जैसे बिच्छड़े आशिक मिल रहे हों.

अविनाश ने इसका बिल्कुल बुरा नहीं माना और वो मेरी तरफ बढ़ा और मैं उसकी बाहों में समा गयी,” जीज़्जा जी, क्या हाल है? आप ने तो कभी फोन भी नहीं किया. क्या बात है शशि ने ऐसा क्या जादू कर दिया है जो हम याद ही ना रहे, जीज़्जा जी?” अविनाश ने मुझे आलिंगन में लेकर प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेरा,” क्या बताऊ, बिंदु काम में इतना व्यस्त हो गया था कि टाइम ही नहीं मिला. अब आराम से मिलेंगे. बस इस हफ्ते मुझे टूर पर जाना है, अगले वीक मैं फ्री हूँ.

विमल भैया आप फ्री होंगे अगले वीक? यार पार्टी करेंगे, इसी बहाने हमारी बीवियाँ खुश हो जाएँगी और हम भी दो दो पेग पी लेंगे” विमल हंस कर बोला,” ठीक है मैं भी इस हफ्ते टूर कर लेता हूँ और अगला हफ़्ता फ्री रख लेता हूँ.”

मैने देखा कि विमल का हाथ शशि की चुचि पर रेंग रहा था. उधर अविनाश ने भी मेरी चुचि को अंजाने में दबा दिया. मेरे जिस्म में एक करेंट सा लगा और मैं थर थारा गयी. थोड़ी देर में विमल और अवी पीने लग पड़े और हम दोनो सहेलिया गप्पें मारने लग पड़ी. “अब बता, मेरी बन्नो, कोई नया यार बनाया कि नहीं? और या फिर सिर्फ़ भैया से ही चुदवा रही है? भैया तो नये शिकार की तलाश में लग रहे है. बिंदु मेरी रानी, मर्द एक औरत से बँध कर नहीं रह सकता!!” मैं हंस कर बोली,” और तेरे जैसी चालू लड़की एक मर्द से खुश नहीं रह सकती!! अब यहाँ मेरे पति को पटाने आई है? साली. याद रखना विमल तेरा भाई भी है.

कहीं अपनी आदत से मजबूर हो कर मेरे पति को बेह्न्चोद ही ना बना देना, वेर्ना मैं भी तेरे पति को पटा लूँगी!!” शशि मेरे गले में बाहें डालती हुई बोली,” बिंदु, मेरी रानी, तेरा पति तो है ही बेह्न्चोद. ना जाने कब से बेहन बेहन बोल कर मेरे साथ तर्क करता रहा है. अभी भी भैया मेरी चुचि पर हाथ फेर रहे थे.

और फिर मर्द का कोई धरम नहीं होता. जहाँ औरत देखी, चोदने की प्लान बना लेते हैं ये लोग. अविनाश कौन सा कम है. अगर मौका मिले तो अभी तुझे चोद डाले. मर्द ज़ात तो होती ही है कुत्ता. और मैं हूँ सेक्स से भरी हुई कुतिया जिसकी तसल्ली एक लंड नहीं करवा सकता. मेरी जान तू बता कोई यार बनाया है कि नहीं?”

मैने बता दिया कि विमल के साथ सेक्स में अब वो मज़ा नहीं रहा, लेकिन मैने कोई यार नहीं बनाया, बनाती भी कैसे? “यार मैं तो चुदाई की भूखी हूँ और अगर तू भी सम्पुरन औरत है तो तेरा भी मन तरह तरह के लंड लेना चाहता होगा. हम ऐसा करेंगे कि तू अवी को पटा लेना और मैं विमल भैया को पटा लूँगी. एक एक बार चुदवा कर हम पर्मनेंट स्वापिंग करने का माहौल बना लेंगे. जब अवी तुझे और विमल मुझे चोदना चाहेगा तो हम दोनो ये काम खुलम खुल्ला करने की शरत रखेंगे. बस फिर तो सब हमाम में नंगे हो जाएँगे.

उसके बाद हमारी चाँदी होज़ायगी मेरी रानी. देल्ही में मेरे यार रघु, जगन, वीरू और शाहिद रहते है, सभी के साथ ऐश करवाउंगी तुझे. रघु और जगन का तो 10-10 इंच का लॉडा है, मेरी जान चुदाई क्या होती है तुझे पता चल जाएगा. तेरी चूत का भोसड़ा ना बन जाए तो कहना”

मैं तो शशि की बात सुन कर दंग ही रह गयी. मेरी चूत से भी पानी बहने लगा और मुझे अपनी चुचि पर अवी जीज़्जा के हाथ अब भी स्पर्श करते महसूस होने लगे.”शशि साली तू बहुत गंदी है, बिल्कुल रंडी, एक दम कुत्ति. तू पटा लेगी विमल को?” शशि तेश में आ कर बोली” साली, अगर शरत लगा लो तो 5 मिनिट में विमल को बेहन्चोद ना बना दिया तो मेरा नाम बदल देना. 5 मिनिट में वो मुझे चोदेगा भी और दीदी भी बोलेगा. तू घबरा मत बस अपने जीज़्जा को पटाने की सोच. खैर एक प्लान है मेरे पास. हम भी अंदर जा कर शराब पी लेती हैं और नशे का बहाना बना कर आज ही पति बदलने का काम कर लेती हैं” मैं कुच्छ समझ ना सकी तो बोली,”वो कैसे?” शशि बोली,”ये मुझ पर छ्चोड़ दे”
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हम दोनो जब अंदर गयी तो शशि शरारत से बोली,”अवी, यार हम को भी महफ़िल में शामिल नहीं करोगे? भैया क्या हम को शराब ऑफर नहीं करोगे?” शशि जान बुझ कर अपनी गांद मटकाती हुई विमल के सामने गयी और उसकी जांघों पर हाथ फिराती हुई बात करने लगी. मेरा पल्लू भी सरक गया और अवी मेरे नंगे उरोज़ एक भूखे जानवर की तरह देखने लगा.”मेरा भी मन कर रहा है कि मैं एक पेग पी ही लूँ. पीना कोई मर्दों का ही अधिकार नहीं है, क्यो जिज़्जु?” कहते हुए मैं आगे की तरफ और झुक गयी जिस से मेरी चुचि अवी के सामने पूरी नंगी हो गयी.

उधर विमल ने भी शशि को अपनी तरफ खींच लिया और शशि ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया.”मुझे कोई एतराज़ नहीं अगर तुम लोग पीना चाहते हो, क्यो अविनाश. हो जाए थोड़ी से मस्ती. लेकिन मेरी बहना, कहीं पी कर बहक मत जाना!!” शशि ने भी अपनी बाहें विमल के गले में डालते हुए कहा,”भैया अगर बहक भी गयी तो क्या होगा? यहाँ मैं आपकी बेहन हूँ और बिंदु लगती है अवी की साली! भाई बेहन में कोई भेद होता नहीं और साली तो होती ही आधी घरवाली!क्यो अवी?” वो बस हंस पड़ा और मेरे कंधों पर हाथ फेरने लगा. मेरा बदन अब सेक्स की आग से जलने लग पड़ा था.

“भैया हम को भी दो ना. मैं ग्लास ले कर आई,” शशि किचन से ग्लास लेने चली गयी. जब वो चल रही थी तो विमल बिना किसी शरम के शशि के मादक कूल्हे निहार रहा था और ये अवी भी देख रहा था. “विमल यार तू तो बहुत बेशरम हो गया है, बेह्न्चोद अपनी बेहन की गांद घूर रहे हो? साले शशि मेरी पत्नी है!! बिंदु यहाँ है, उसको देख अच्छी तरह.” विमल भी हंस कर बोला, “अवी, मेरे यार यारों में तेरा क्या और मेरा क्या. जो मेरा है वो तेरा है और जो तेरा है वो मेरा है. अब तेरी पत्नी पर मेरा भी तो कुच्छ हक है कि नहीं? जब तू बिंदु को आलिंगन में ले रहा था तो मैने कुच्छ बोला? यारों में सब कुच्छ बाँट लिया जाता है अगर किसी को एतराज़ ना हो. चल एक और पेग बना. आज का दिन यादगार बना देते हैं”

तभी शशि आ गयी और उसने दो पेग बना लिए. मैं बहुत कम पीती हूँ और मुझे जल्दी ही नशा हो जाता है. शराब कड़वी थी तो मैने कहा,” शशि साथ में कुच्छ नमकीन नहीं है? ये बहुत कड़वी है” मैने घूँट भरते हुए कहा. शशि बोली,” चल हम किचन में जा कर एग्स फ्राइ कर लेती है, ये भी खा लेंगे. क्यो अवी एग्स खायोगे? ” अवी हंस कर बोला,”जाने मन आज तो तुम लोगों को खा जाने का मन कर रहा है. अगर खिलाना ही है तो अपने आम चुस्वा लो हम दोनो से, क्यो विमल? और आपको कुच्छ खाना है तो हमारे केले हाज़िर हैं!!!” मेरा तो शरम से बुरा हाल हो गया उसकी बेशरामी की बात सुन कर. “हां खा लेंगी आपके केले भी अवी. लेकिन अगर केले में दम ना हुआ तो?वैसे मैं और बिंदु भी बहुत भूखी हैं. हम केले के साथ आपके लुकात भी चूस लेंगी!!”

सभी हंस पड़े और मैं और शशि किचन में एग्स फ्राइ करने लगी. शशि ने मेरे ब्लाउस में हाथ डाल कर मेरी चुचि मसल डाली और बोली,”बिंदु, मेरी जान, क्यो ना आज ही पति बदल कर टेस्ट किया जाए. अवी और विमल अब नशे में हैं. हम को कुछ करने की ज़रूरत नहीं है. विमल भैया तो कब से मुझे सेक्सी नज़रों से घूर रहे हैं और अवी तो कल्पना में तेरे कपड़े उतार रहा है. क्यो ना देखा जाए कि विमल को मैं कैसी लगती हूँ और तुझे अवी का लंड कैसे लगता है. एक बार खुल गये तो हम लोग बिना किसी डर के फ्री सेक्स की दुनिया में परवेश कर सकते हैं. मेरी रानी आज कल ग्रूप सेक्स का बहुत फॅशन है. खूब मज़े करेंगे!! ओके?” मेरे अंदर तो एक आग भड़क उठी थी.

मुझे अवी एक कामुक मर्द नज़र आ रहा था और मेरी चूत ने पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया था. उतेज्ना में आ कर मैने शशि को आलिंगन में ले लिया और उसके होंठों को चूमने लगी. “साली तुमने मुझे आज बहुत गरम कर दिया है, और उप्पेर से शराब का नशा, आज जो होना है हो जाने दो!! मुझे अपने पति के साथ चुदाई कर लेने दे औ=र तू मेरे पति से चुदवा ले, सखी!!” कहते हुए मैने शशि की चुचि मसल डाली. मेरी साँस बहुत तेज़ी से चल रही थी. मेरा अपने आप पर काबू ना रहा.

“चल बिंदु, पहले हम कपड़े बदल लें. इस से काम आसान हो जाए गा.” शशि मुझे अपने रूम में ले गयी और उसने सारे कपड़े उतार कर एक खुला हुआ घुटनो तक पहुँचने वाला पाजामा और बिना बाज़ू की शर्ट पहन ली और मुझे भी ऐसी ही एक और ड्रेस दे दी. पाजामा और शर्ट के नी चे हम बिल्कुल नंगी थी. मैने देखा कि शशि ने भी मेरी तरह अपनी चूत ताज़ी शेव की हुई थी. जब मैने अपनी सारी और ब्लाउस उतारा तो वो मस्ती से भर गयी और मेरी चूत को मुथि में भर कर कस दिया,” आरीए मदर्चोद तू भी बहुत उतेज़ित हो गयी है मेरे पति को चोदने के विचार से.

अवी ठीक चोदेगा तुझे मेरी बन्नो!! साली तेरी चूत तो गॅगा जमुना बहा रही है!!मेरे लिए भी पति बदलने का पहला मौका है. अंदर जा कर देखते हैं इन कपड़ों में क्या बॉम्ब गिराती है तू मेरे पति देव पर?” शर्ट का गला इतना लो कट था कि कल्पना की कोई ज़रूरत ना बची थी. जब मैं अंदर जाने के लिए मूडी तो शशि ने मेरे नितंभ पर ज़ोर से चांटा मारा तो मेरी चीख निकल गयी,”ओह्ह्ह्ह शशि साली कुत्ति, मार किओं रही है साली?” शशि शरारत से मुस्कुराती हुई बोली,'क्यो की मेरे पति तेरी डबल रोटी जैसी गांद पर चाँते ज़रूर मारेंगे और शायद तेरे पिच्छवाड़े का भी महुरत कर दें. भारी गांद का बहुत रसिया है अवी!”

जब हम कमरे में गयी तो मर्दों की आँखें खुली की खुली रह गयी. विमल के मूह से निकल गया,”ओह्ह्ह भेन्चोद कितनी सेक्सी हैं ये दोनो औरतें!!!” अवी बस देखता ही रह गया. “यार गर्मी बहुत थी तो हम ने चेंज कर लिया. पसीने से भीग रही थी हम दोनो. तुम तो यहा एसी में बैठे हो हम औरतों को किचन में काम करना पड़ता है. मेरे तो बूब्स से पसीना नीचे तक जा रहा था. ओह्ह्ह्ह बिंदु यहाँ आराम है, बैठ जाओ और शराब के मज़े लो” तभी विमल के ताश उठा ली और बोला,'चलो कार्ड्स खेलते हैं. सभी का मनोरंजन हो जाएगा, किओं बिंदु खेलोगी?” मैं भी अब इस सेक्स की गेम में शामिल होने को तैयार थी. “विमल यार आज जो गेम भी खेलो गे मैं साथ हूँ. मुझे लगता है कि आज का दिन हम भुला नहीं पाएँगे. लेकिन गेम की शरत क्या होगी/ हारने वाला कितने पैसे देगा जीतने वाले को? भाई मेरे पास तो बस 500 रुपये हैं! मैने कहा तो अवी बोल उठा,” मेरी प्यारी साली साहिबा, अँग्रेज़ लोग एक गेम खेलते हैं, स्ट्रीप पोकर. वो ही किओं ना खेला जाए? जो हारता है, अपने जिस्म से एक कपड़ा उतारे गा. शशि को ये गेम पसंद है, किओं शशि?” शशि हंस पड़ी,' यार नंगी तो होना ही है, फिर ताश की गेम में किओं ना हो जाए?”

मुझे लगा कि अवी और विमल भी वो ही प्लान बना चुके थे जो मैं और शशि बना कर आए थे. हम चारों बैठ गये और विमल ने कार्ड्स बाँट दिए,” बिंदु, अभी से सोच लो, अगर हार गयी तो सभी के सामने कपड़े उतारने पड़ेंगे” मैं भी अब शराब के नशे में थी. “पति देव को अगर अपनी पत्नी को नंगा दिखाने में कोई शरम नहीं है तो पत्नी को क्या एतराज़ होगा, पति देव?” सभी हंस पड़े. पहली गेम विमल हारा. शशि ने आगे बढ़ कर कहा, विमल भैया की पॅंट्स उतारी जाएँ, ठीक है?” हम सभी ने मंज़ूरी दे दी और शशि ने विमल की पॅंट की बेल्ट खोली और नीचे सरका दी. मेरा पति अब कच्छा पहने हुए बैठा था. उसको कोई शरम नहीं थी किओं कि उसका लंड तना हुआ था. शशि ने विमल की जांग्घों पर हाथ फेरा तो अवी बोल उठा” शशि मेरी रानी, विमल का तो पहले ही खड़ा है, अगर तुमने हाथ फेरा तो कहीं छ्छूट ही ना जाए!!” सभी हंस पड़े.

क्रमशः................
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रंगीन आवारगी - 2

गतान्क से आगे...................

दूसरी गेम में हार हुई शशि की. अवी ने कहा,” विमल यार अब बारी तेरी है. ले लो बदला मेरी बीवी से. मेरी मानो तो इसका पाजामा उतार दो. कम से कम अपनी बेहन की चूत के दर्शन तो कर लो!!” विमल मुस्कुराते हुए उठा,” ठीक है यार अगर तू अपनी बीवी की चूत दिखवाना चाहता है तो देख ही लेते हैं. क्यो शशि, मेरी बहना, कहीं नीचे पॅंटी तो नहीं पहन रखी?” शशि भी बेशरामी से बोली,” भैया, अपनी बेहन की चूत देखने का शौक है तो पाजामा उतार कर ही देखनी होगी. मुझे भी लगता है कि तुम बहुत बरसों से मेरी चूत के दीदार करने के इच्छुक हो, किओं बिंदु से दिल नहीं भरा?”

विमल ने शशि को होंठों पर किस किया और फिर पाजामे का एलास्टिक खींच दिया. जब वो एलास्टिक नीचे सरका रहा था तो उसने जान बुझ कर उंगलियाँ उसकी फूली हुई चूत पर रगड़ डालीं. अवी मुस्कराते हुए बोला”विमल साले तू हरामी का हरामी रहा, साले शशि की चूत स्पर्श करने की इजाज़त तुझे किस ने दी? साले अपनी बेहन की चूत पर हाथ फेरते हुए कैसा लगा?” शशि बोली,” अवी, मैं अपनी चूत पर जिसका हाथ फिराना चाहती हूँ फिरा सकती हूँ, मेरे विमल भैया से शिकायत मत करना, जब तेरी बारी आएगी तो बिंदु पर हाथ सॉफ कर लेना!!”

तीसरी बाज़ी अवी हारा. विमल ने मुझे उसकी पॅंट उतारने को बोला. जब मैने उसकी पॅंट उत्तरी तो वो बोला,” शशि, तेरी सहेली के हाथ से नंगे होना मज़े की बात है,” तभी मेरे हाथ अवी के नंगे लंड से जा टकराए,”उइईए, ये क्या? आपने कच्छा नहीं पहना?” अवी हंस पड़ा,”किओं साली साहिबा, हमारा हथियार पसंद नहीं आया जो चीख मार दी आपने? आपकी सखी तो काफ़ी खुश है इसकी पर्फॉर्मेन्स से!!” उसका लंड किसी नाग देवता की तरह फूँकार रहा था. अवी ने जान बुझ कर पॅंट के नीचे कुच्छ नही पहना था. उसका लंड विमल के लंड से थोड़ा बड़ा था. अगली गेम फिर शशि हार गयी और बिना कुच्छ बोले विमल ने उसकी शर्ट उतार डाली.

शशि के मोटे मोटे मम्मे सब के सामने थे और मेरी सखी मादरजात नंगी हो गयी. विमल ने आगे झुक कर उसके निपल को चूम लिया. “बहनचोड़ विमल, ये फाउल है. मादराचोड़ तेरी बीवी एक भी गेम ना हारी और मेरी को तुम नंगा कर चुके हो और ये ही नहीं साले अपनी बेहन का दूध भी पी रहे हो!!!” विमल बोला” अवी यार हिम्मत है तो मेरी बीवी को हरा दो और कर दो नंगा, मुझे कोई एतराज़ नहीं. मेरिबिवी भी हम सभी के बराबर ही है”

अब की बारी मैं हारी तो सभी बहुत खुश हुए. “साली साहिबा अब आई हमारी बारी. मैं भी तेरी शर्ट उतार कर नंगा करता हूँ तुझे. देखूं तो सही की चुचि पत्नी की अधिक सेक्सी है या साली की?” अवी के हाथों ने पहले तो मेरी चुचि को अच्छी तरह टटोला. मेरी चुचि पत्थर की तरह कड़ी हो गयी. कसम से अवी का हाथ लगते ही मैं पागल हो गयी. मेरी शर्ट उतार कर जब उसने मेरी चुचि को किस किया तो मैं चुदासी हो गयी और चाहती थी कि आज मुझे अवी चोद डाले. मेरी चुचि गुलाबी हो गयी,”ऊऊओह, अवी मत करो, प्लेआस्ीईईई” अवी ने मुझे होंठों पर किस किया और बोला,”साली साहिबा, जब आपने हाथ लगा कर मेरे लंड को दीवाना बनाया था, भूल गई? अभी तो आपकी चूत को नंगा करना बाकी है”

फिर हारा अवी और विमल ने मुझे कहा, बिंदु, डार्लिंग, अब अपने जीजा को कर दो पूरा नंगा. उतार दो इसकी कमीज़ भी” मैने वैसे ही किया. अवी का सीना काले बालों से ढाका हुआ था और जब उसने मुझे अपने सीने से लगाया तो मेरी कड़क चुचि उसके स्पर्श से फटने को आ गयी. अवी ने एक हाथ मेरे पाजामे में डाल कर मेरी चूत को स्पर्श किया तो मेरी सिसकारी निकल गयी. मेरी चूत से पानी की धारा बह रही थी. “साली साहिबा, आपकी चूत तो पागल हुई जा रही है. किओं ना इसका इलाज मैं अपने लंड से कर दूं? विमल यार आज मेरी बात मान लो, प्लीज़. तुम शशि को चोदो और मुझे बिंदु को चोद लेने दो.

इतनी गरम चुदासी मैने आज तक नहीं देखी. अगर किसी को एतराज़ है तो अभी बोल दे” विमल और शशि ने हाँ बोल दी. वो हैरान हुए जब मैने कहा,”मुझे एतराज़ है, जीज़्जा जी! मुझे आज की पार्ट्नर्स बदलने की स्कीम पर एतराज़ है. अगर करना ही है तो फ़ैसला हो जाए कि ये अरेंज,मेंट हमेशा के लिए होगा. हम चारों आपस में किसी के साथ भी, जब चाहें जो करना हो कर सकते हैं. अगर मंज़ूर है तो बोलो. अवी ने मेरी चुचि को चूमते हुए कहा” साली साहिबा, आपने तो मेरे मन की बात कर डाली. लेकिन शायद विमल को रोज़ रोज़ अपनी बेहन चोदना पसंद ना आए” विमल ने शशि को अपनी गोदी में उठाते हुए कहा,” अगर तुम्हारा ये प्रोग्राम अच्छा है तो फिर इस मे कोई एतराज़ क्यो? चलो एक पेग और बनायो हमारे इस नये रिश्ते के लिए. आज पता चल जाएगा कि घर की चूत कितनी स्वाद होती है”

शशि उठी और पेग बना कर ले आई. अवी ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और शशि विमल की गोद में जा बैठी. विमल के सिवा हम सभी नंगे थे. अवी का लंड मेरी गांद में घुसने की कोशिश कर रहा था. जब मैने देखा तो विमल शशि की चूत को हाथों से रगड़ रहा था और जब उसके ग्लास से कुच्छ शराब शशि की चुचि पर गिरी तो विमल उसको चाटने लगा,” ऑश मेरे भाई…ये क्या कर रहे हो…मैं तो कब से जल रही हूँ…चूस लो मेरी चुचि…आआहह..चूसो भैया,,,है…मैं मर गयी…मेरी चूत एक शोला बनी हुई है…..बस करो भैया…अब नहीं रहा जाता….पेल डालो अपना पापी लंड अपनी बेहन की चूत में….मैं मारीईईईई…..उउउफफफफफफ्फ़..भैय्ा

आआआअ चोद डालो मुझे…ऊऊओ भेन्चोद्द्द्द्द्द”

अवी ने अब शराब अपने लंड के सूपदे पर गिरा डाली और मुझे चाटने को बोला. उसका सूपड़ा उठक बैठक कर रहा था और जब में उसको चाटने के लिए झुकी तो उसने लंड मेरी मुह्न में डाल दिया. मैने आँखें बंद कर के लंड चूसना शुरू कर दिया और उसके अंडकोष हाथों में ले कर मसल्ने लगी.

अवी मेरे मुख को किसी चूत की तरह चोदने लगा,”ओह भेन्चोद बिंदु….बिल्कुल रांड़ है तू….मेरी पत्नी जैसी रांड़ है तू जो अपने भाई से चुदवाने को तड़प रही है…आआअहह….रुक जाओ वरना मैं झाड़ जाउन्गा….तेरी मा की चूत साली बस कर!!!” मैं भी अवी को झड़ने नहीं देना चाहती थी. इस लिए रुक गयी. विमल हम को हमारे डबल बेड पर जा कर एक साथ चुदाई शुरू करनी चाहिए. वहाँ मैं तुझे अपनी बेहन को चोद्ते देखना चाहता हू, चाहे वो मेरी बीवी ही है!!”

विमल ने शशि का नंगा जिस्म बाहों में उठा लिया और उसको बेड पर ले गया. अवी ने मुझे उठा लिया और मैं और शशि साथ साथ नंगी बेड पर लेट गयी. दोनो मर्द लोगों के लंड रोड की तरह खड़े थे.” साली साहिबा मैं तुझे घोड़ी बना कर चोदना चाहता हूँ किओं कि आपकी गांद मुझे बहुत सेक्सी लगती है. मैं अपना लंड पीछे से आपकी चूत में जाता हुआ देखना चाहता हूँ” मैं अपने मर्द के हूकम की पालना करती हुई घोड़ी बन कर हाथों और घुटनो पर झुक गयी.

“हाँ मेरे हरामी पति देव मैं जानती थी तू यही करेगा!! अब मेरी सहेली की गांद भी चाट ले किओं के तुझे उसकी गांद में भी घुसना है थोड़ी देर बाद!!!” शशि बोली और फिर विमल की तरफ मूडी,' मुझे क्या हूकम है भैया? मुझे भी घोड़ी बनायोगे क्या? अगर घोड़ी बनायोगे तो भी ठीक है किओं कि कम से कम भेन्चोद बनते वक्त भेन की शकल नहीं देख पाओगे!!” शशि बोली.

विमल ने कहा, 'बहना, भेन्चोद रोज़ रोज़ तो बना नहीं जाता. कब से तमन्ना थी तुझे चोदने की. पहली बार तो देखना चाहता हूँ कि मेरी बहना भी चुदाई के लिए तैयार है अपने भैया से? मेरी लाडो बहना, मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे उप्पेर चढ़ कर मुझे भेन्चोद बनायो. मैं अपनी बेहन की चूत में अपना लंड जाता हुआ देखना चाहता हूँ. लेकिन पहले एक बार अपनी चूत मेरे मुख से लगा कर अपनी नमकीन चूत का स्वाद तो चखा दो मेरी बहना, अपनी चूत को मेरी ज़ुबान पर रख दो, प्लीज़” विमल लेट गया और शशि उसके उप्पेर चढ़ करपनी चूत चटवाने लगी.

अवी ने पीच्छे जा कर एक उंगली शशि की गांद में डाल दी और चोदने लगा उसको उंगली से.”अवी मदेर्चोद, हट जा…साले तुझे बिंदु जैसी हसीन औरत मिली है और तू हम भाई भेन को आराम से चुदाई नहीं करने दे रहे. लगता है किसी दिन भैया से तेरी गांद मर्वानी पड़ेगी मुझे” शशि की गांद तेज़ी से उप्पेर नीचे हो रही थी.

असल चुदाई की स्टेज सज चुकी थी. अवी मेरे पीच्छे झुका और अपनी ज़ुबान को मेरी गांद में घुसा कर चाटने लगा. मेरी गांद आज तक कुँवारी थी. एक नया आनंद मेरे बदन को आ रहा था. उधर शशि अब उठी और अपनी दोनो जांघों को फैला कर विमल के लंड पर सवार होने लगी. विमल ने अपने हाथ उसकी चुचि पर कस दिए और शशि ने उसका लंड हाथ में पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया और नीचे होने लगी.

अवी ने भी अब गांद चाटना बंद कर दिया और मेरे उप्पेर चढ़ गया. अवी का सूपड़ा किसी आग के शोले जैसा गरम था. उसने मेरे नितंभ को फैलाया और जांघों के बीच से लंड मेरी चूत मे पेल दिया.'आआआआ….भैय्ाआआअ….अंदर जा रहा है तेरा लंड…ऊऊओह बेह्न्चोद बन गये तुम विमल भैया..तेरी बेहन चुद रही है तुझ से आज….शाबाश मेरे भाई!!”

लगता था कि विमल का लंड शशि किचूत की जड़ तक समा गया था. अवी का सूपड़ा भी मेरे अंदर जा चुका था और मैं आनंद सागर में गोते लगा रही थी,” उर्र्ररज्ग्घह…….डाल दो जीजा…चोद लो अपनी साली को…..मदेर्चोद एक ही बार में घुसा दो जीजा…मत रोको…पेलो मुझे….उउउस्स्सिईईई …मर गाइ मेरी मा….आआआआ…पेलो जीज्ज़ज़ज्ज्जाआा!!” अवी ने अब एक ही झटके में पूरा लंड पेल दिया. उसका लंड मेरी चूत में बुरी तरह फिट हो गया और वो मुझे कुतिया की तरह चोदने लगा. मैं भी अपनी कमर उचका कर अपनी गांद उसके लंड पर मारने लगी.

कमरा फॅक फॅक की आवाज़ों से गूँज उठा. एक बेड पर हम चार लोग जन्नत की सैर कर रहे थे. विमल ने अपनी बेहन के कूल्हे जाकड़ लिए और नीचे से चोदने लगा. अवी भी अब एक कुत्ते की तरह हाँफ रहा था. 'अवी मदेर्चोद थक गये? देखो मेरा पति कैसे चोद रहा है तेरी पत्नी को? तुझ में दम नहीं है क्या? साले चोद अपनी साली साहिबा को ज़ोर से…ज़ोर से….अंदर तक पेल अपना लंड जीज़्ज़ाआाअ!!!”

अवी ने मेरे बाल पकड़ लिए और घोड़े की लगाम की तरह खींच कर मुझे चोदने लगा. अब उसका लंड मेरी कोख से टकराने लगा. बाज़ू में अपनी सहेली और अपने पति को देख कर मेरी उतेज्ना की कोई सीमा ना रही और मैं झरने लगी.'ओह्ह्ह ज़ोर से चोदो…मैं झदीए…अवी चोद मुझे…आआहह….मैं झार रही हूऊऊ.!!!” अवी ने भी धक्के तेज़ कर दिए.

मुझे लगा कि वो भी मंज़िल के नज़दीक है. अचानक लंड रस की गरम धारा मेरी चूत में गिरने लगी और मेरा चूत रस अवी जीज़्जा के लंड रस से मिल गया. उधर शशि ने एक चीख मारी और विमल पर ढेर हो गयी. चारों झाड़ चुके थे.

दोस्तो ये कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा
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06-26-2017, 11:44 AM,
#4
RE: Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
रंगीन आवारगी - 3

गतान्क से आगे...................

मैं और शशि अपने शाहर चल पड़ी. सफ़र के कारण हम ने स्कर्ट्स और टॉप्स पहन ली थी. अवी की चुदाई मुझे भूल नही रही थी. शशि बार बार अपने यारों के साथ मुझे चुदाई के मज़े लेने की बात कर रही थी और मैं उत्तेजित हो रही थी. इस बारी मेरे साथ ना जाने क्या होने जा रहा था.

हम ने घर पर फोन कर दिया था कि हम आ रहे हैं. संजय ने बताया कि वो दोपहर के बाद घर पहुचे गा क्यो कि उसका मॅच है. मैं और शशि 11 बजे घर पहुचे. पहले घर शशि का आता था इस लिए मैं वहीं थोड़ी देर के लिए रुक गयी. मोना कॉलेज जा रही थी और जिम्मी का कोई पता नही था. घर आते ही शशि बोली,"बोल बिंदु रानी आज शाम को दिखाए तुझे अपने शहर का जलवा. मेरे यारों की मंडाली तो वेट कर रही होगी चोदने के लिए मुझे. कहो तो तेरा भी टांका भिड़वा दूं? साली दो दो मर्दों से एक साथ चुदवाओ गी तो सब कुच्छ भूल जाओगी, मेरी बन्नो.

एक लंड चूसोगी तो दूसरा तेरे गालों पर सैर करेगा. एक यार तेरी चूत चाते गा और दूसरा तेरी गांद चुसेगा. अब यहाँ किसी का डर भी नही है. शाहिद का फार्महाउस है वहीं प्रोग्राम बना लेंगे, क्यो ठीक है ना?" शशि ने मुझे आलिंगन मे ले लिया था और साली मेरे साथ चिपक रही थी. मुझे याद आ रहा था कि उसके यार ग्रूप मे उसको चोदते हैं और उनके लंड बहुत बड़े हैं. मुझे उत्तेजना होने लगी और ऊपर से शशि के हाथ मेरे जिस्म पर रेंगने लगे. हम दोनो उस वक्त लंबी स्कर्ट्स और कॉटन की टॉप्स पहने हुई थी. शशि मुझ से लिपटती हुई सोफे पर ले गयी.

जैसे ही मैं सोफे पर बैठी तो शशि ने मेरी स्कर्ट्स को ऊपर उठा कर मेरी जाँघो पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. साली के हाथ मुझे करेंट मार रहे थे. उसके बड़े बड़े मम्मे मेरे मुख के सामने थे और उसकी मनमोहक सुगंध मेरे नाक मे घुस रही थी. मैने देखा कि शशि की आँखों मे वासना के लाल लाल डोरे तेर रहे थे. "शशि, साली बेह्न्चोद, अब मुझे तो छ्चोड़ दे. मैं कोई लड़का हूँ?

जब तेरे यार मिलेंगे तो चुदवा लेना अपनी चूत साली" लेकिन शशि पर तो और ही भूत सवार था. उसकी साँस मुश्किल से चल रही थी और उसका हाथ मेरी पॅंटी के अंदर घुस रहा था. मेरी उत्तेजना भी बढ़ रही थी. "क्या शशि साली एक लेज़्बीयन है?" ये सवाल मेरे दिमाग़ मे कौंधा. लेकिन वो लेज़्बीयन थी या नही, मेरी चूत भीग गयी थी अपनी सहेली के स्पर्श से."ओह बिंदु मेरी जान तू तो पहले ही प्यासी है, साली तेरी चूत तो पानी छ्चोड़ रही है. घर खाली है, बेह्न्चोद इसका फयडा उठाते हैं.

मुझे अपने जिस्म के हर उस हिस्से को चूम लेने दे जिस को मेरे विमल भैया ने चूमा है. ओह मदर्चोद तेरी चूत तो किसी आग की भट्टी की तरह तप रही है!!! मुझे अपने साथ मस्ती करने दे और खुद भी मेरे साथ मस्ती कर ले. वा क्या मस्त मम्मे हैं तेरे!! कैसे कड़े हो गये हैं शशि का हाथ लगते ही!!! जल्दी से अपने कपड़े उतार डाल रानी और ले ले मज़े ज़िंदगी के!!"

शशि ने अब तब मेरी पॅंटी एक तरफ खींच कर दो उंगलियाँ मेरी चूत मे घुसा डाली थी और मुझे हैरानी इस बात की थी कि मेरी चूत और माँग रही थी. मेरे हाथ अपने आप शशि की चुचि पर चले गये और मैं उसको दबाने लगी. इस बिगड़ी हुई औरत ने मुझे अपने वश मे कर लिया था. मेरी सहेली मुझे मंतर मुग्ध कर चुकी थी. उसकी हर बात मेरे अंदर की औरत का एक नया भाग नंगा कर रही थी, एक नयी उमंग जागृत कर रही थी. अब मैं इस चालू शशि के नग्न जिस्म से लिपट जाना चाहती थी, उसकी जिस्म के उभारों को स्पर्श करना चाहती थी और उसकी हर गहराई को चूम लेना चाहती थी.

मैं अपने आप अपने कपड़े उतारने लगी और उधर शशि भी नंगी होने लगी. जब मैने अपनी स्कर्ट उतार डाली और टॉप भी उत्तर फेंका तो मेरी पॅंटी का चूत के सामने वाला हिसा गीला हो चुका था. शशि का जिस्म भी गर्मी और उत्तेजना के कारण पसीने से भीग गया था."शशि, तू लेज़्बीयन हो क्या? ये कैसी आग लगा दी है तुमने मेरे अंदर की मैं तुझ से लिपटना चाहती हूँ, चूमना चाहती हू....ओह्ह्ह्ह भगवान मैं तुझे प्यार करना चाहती हूँ....ऐसी आग तो तेरे भैया ने भी नही लगाई थी जब उसके सामने नंगी हुई थी मैं...मैं तेरे अंदर समा जाना चाहती हूँ, तेरे हाथ, तेरी ज़ुबान अपने मचलते हुए जिस्म पर महसूस करना चाहती हूँ.....

हे शशि मुझे संभाल मैं बहक रही हूँ!!" कहते हुए मेरे होंठ उसके पसीने से भीगी गर्दन पर चले गये और मैं उसकी गर्दन को चूमने लगी, चाटने लगी. ऐसा प्यार का अनुभव मुझे ज़िंदगी मे पहली बार हो रहा था.

"उफफफफफफ्फ़....उई.....आअहह....

आाअगगगगगगग!!! हां मेरी बन्नो.....तू ठीक कह रही है....शशि एक चालू लड़की है....एक गश्ती है...लेकिन केवल मज़े लेने के लिए चालू बनी है शशि!!! मैं ज़िंदगी का हर मज़ा लेना चाहती हूँ...हर मज़ा लिया है मैने...जिस्म का हर मज़ा...बिंदु मेरी जान जो आनंद औरत दूसरी औरत को दे सकती है वो शायद एक मर्द भी नही दे सकता.....एक औरत की सेक्स की सुगंध दूसरी औरत ही सूंघ सकती है..आज हम एक हो जाएँ.....तुझ पर मेरा भी उतना ही अधिकार हो जितना विमल भैया का है...रानी अपना पति तो पहले ही सौंप चुकी हूँ तुझ को....बहुत सुंदर है तू मेरी रानी....ये तेरी चूत का रस तो चमक रहा है तेरी पॅंटी पर चाट लेना चाहती हूँ मे मेरी रानी! विमल भैया के साथ सुहागरात मनाई थी तुमने, मेरी रानी आज अपनी सहेली के साथ लेज़्बीयन दिन मना ले.....मेरी लेज़्बीयन प्रेमिका बन जाओ मेरी रानी!!!" शशि भी उत्तेजना की सीमा पर कर चुकी थी और मेरी पॅंटी को नीचे खींच रही थी. उसकी उंगलियाँ मे एक अजीब बेचैनी थी. उत्तेजना मे मैने भी उसकी गर्दन को काट खाया.
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06-26-2017, 11:45 AM,
#5
RE: Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
उसका नंगा जिस्म मुझे बहुत रोमांचित कर रहा था."उई साली....बहुत चुदासि हो रही है मेरी बन्नो....चूम साली काट मत...तू तो मेरी चूत के भूखे यारों से भी अधिक उतावली हो रही है...ऐसे कहीं मेरे निपल मत काट लेना वेर्ना साला अवी सोचेगा कि मैं बाहर से चुदवा रही हूँ" मैने अपने होंठ उसकी गर्दन से अलग किए और बेशर्मी से बोली,"अवी कौन सा ग़लत सोचेगा, मेरी शशि बाला? चुदवाति तो है ही अपने यारों से...लेकिन डर मत कह देना कि विमल भैया ने काट लिया था अपनी बहना रानी को!!" मैं हंस पड़ी. लेकिन मेरे हाथ अब शशि की ब्रा खोलने लगे. ब्रा के हुक खुलते ही दो कबूतर आज़ाद हो गये जो मेरे हाथों मे फिर से क़ैद हो गये.

अब मेरी ब्रा की बारी थी जिसको उतारने मे शशि ने देरी नही की. कमर से ऊपर पूरी तरह से नंगी हो कर हम दोनो सखियाँ एक कामुक कुम्बं मे क्वेड हो गयी. मेरे तपते होंठ शशि के भीगे होंठों को चूमने लगे. शशि की भीगी ज़ुबान मेरे मूह मे दाखिल होने लगी और मैने भी मुख खोल कर उसको अंदर आने दिया. हमारे थूक मिक्स हो रहे थे और हम एक दूसरे की जीभ चूस रहे थे. मेरे हाथ शशि के सिर को थामे हुए थे और उसके हाथ मेरे नितंभ सहला रहे थे. हमारा जिस्मानी स्पर्श मेरे अंदर एक आग भड़का रहा था और मेरी चूत मे एक शोला भड़का रहा था. है मेरे भगवान, ये क्या हो रहा है मुझे!!!!

हम किस करते हुए बेड की तरफ बढ़े. मेरे होंठों से हमारा मिक्स हुआ मुख रस टपक रहा था. शशि मेरे होंटो से सारा मुख रस चाट गयी और मुझे बेड पेर लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गयी. उसने पहले मेरी पनटी नीचे सर्काई और फिर अपनी उतार डाली. उसकी फूली हुई गुलाबी फांकों वाली चूत से रस की एक बूँद टपक कर बिस्तर की चादर पर गिर पड़ी जहाँ पर चादर गीली हो गयी. मैं उठ कर बैठ गयी और अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी. मेरी चूत मे एक भयानक जवालामुखी फॅट रहा था. शशि ने मुझे आलिंगन बाँधा क्या और हम दोनो उत्तेजित सखियाँ एक कामुक चुंबन मे क्वेड हो गयी.

फिर शशि ने अपनी जांघों को फैला कर मेरी कमर के इर्द गिर्द बाँध दिया और मेरे निपल चूसने लगी. मेरे निपल लंबे और कड़े हो गये थे जो की अब मेरी सखी के थूक से भीग चुके थे. मेरा अंग अंग वासना की आग मे दहक रहा था. वासना मे भरी हुई मैं, अपनी लेज़्बीयन सहेली से लिपटने लगी और उसको कंधों से, गर्दन से चूमने लगी. मेरी साँस ऐसे चल रही थी जैसे किसी कुतिया की चल रही हो जो चुदाई की आग मे जल रही हो. पसीने से भीगा हुआ बदन मुझे बहुत नमकीन लग रहा था और मैं पागलों की तरह शशि का अंग अंग चूम रही थी. जितना चूमती मुझे शशि का बदन उतना ही अधिक कामुक लगता.

मेरे जिस्म मे नयी उमंगें जाग रही थी, एक नयी वासना मुझे अपनी सहेली के जिस्म का एक एक अंग स्पर्श करने को और चूम लेने को उत्साहित कर रहा था.

"ऊऊऊऊ, शशि मदर्चोद चूस ले मेरी चुचि...तेरा पति भी चूस चुका है साला...अब तू भी चूस ले....तेरा भाई भी इसको चूस्ता है तू भी इसका रस पी ले!! आआहह.....मदर्चोद इस आग को शांत कर दो किसी तरह.....मुझे किसी घोड़े जैसे लंड से चुदवा कर ठंडी कर दे मेरी रानी.....मुझे अपने पति सी....भाई से....साली अपने बाप से चुदवा पर चुदवा दे, प्लेआस्ीईई!!!!! मेरे मूह से ना जाने क्या क्या निकला जा रहा था. मेरा जिस्म तृप्ति चाहता था. अब शशि ने मेरे निपल छ्चोड़ कर नीचे तक अपना मुख ले जाना शुरू कर दिया. उसके गीले होंठ मेरी नाभि पर किस करने लगे और फिर उसकी ज़ुबान मेरी नाभि की गहराई मे घुस गयी. मेरा चेहरा लाल हो उठा.

ऐसा अनुभव मुझे आज तक ना हुआ था. धीरे धीरे उसकी ज़ुबान मेरी चूत की तरफ बढ़ी और मैं अपने ऊपर पूरी तरह से कंट्रोल खो गयी."बिंदु मेरी रानी, जब एक औरत दूसरी औरत की चूत पर ज़ुबान फेरती है तो क्या होता देख ले. एक औरत की चूत की भाषा एक औरत ही समझती है. मर्द लोग औरत का ये भेद नही पा सकते, मेरी रानी, आज शशि तुझे एक नया अनुभव कराने जा रही है. आज तुझे मालूम होगा कि औरत की ताक़त क्या है!!"

शशि के होंठ मेरी चूत पर हरकत कर रहे थे और मेरी चूत पर चींटियाँ रेगञे लगी थी. कुच्छ देर बाद शशि ने मुझे साइड पर लिटाया जिस से उसका सिर मेरी जांघों के बीच आ गया और उसके पैर मेरे सिर की तरफ आ गये. उसकी मांसल जंघें मेरे मूह के आमने खुली हुई थी. शशि के मन क्या चल रहा था, मुझे पता था. कोई शब्द, कोई भाषा की ज़रूरत ना थी. शशि की चूत मुझे कह रही थी"बिंदु मदर्चोद मुझे चाट, जैसे तेरी सहेली तेरी चूत चाट रही है....जो शशि कर रही उसी की माँग तुझ से कर रही है. लेज़्बीयन कोई अपनी मा के पेट से नही बन कर पैदा होती...ये तो एक प्यार है....एक हवस है जो एक औरत को सम्पुरन औरत बनती है, मेरी जान!!"

मैने अपनी जंघें शशि के चेहरे पर कस डाली और खुद अपनी जीभ उसकी मस्त चूत पर फेरने लगी. शशि की चूत का नमकीन अमृत मुझे बहुत मज़ेदार लग रहा था. मेरी ज़ुबान अपनी चूत पर महसूस कर के वो साली अपनी चूत मेरे मूह पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. मेरे हाथ उसके नितंभों पर कस गये और मैं हाथों से उसकी गांद दबाने लगी. शशि अपनी कमर उचका कर मेरी ज़ुबान पर ऐसे धक्के मारने लगी जैसे कोई मर्द किसी रांड़ को चोदते वक्त करता है. शशि ने फिर मेरे क्लिट को होंठों मे दबा लिया और मेरी गांद मे उंगली डाल दी.

"ओह.....आआआररर्र्रररगगगगघह......हाआऐययईईईईई.....उउर्र्ररज्ग्घह!!!"मेरे मुख से चीख निकली और मेरा जिस्म ऐंठ गया.

ऐसा आनंद मुझे आज तक नही मिला था. मेरी गांद उन्चुदी थी इस लिए शशि की उंगली को भीतर जाना मुश्किल हो रहा था. उस मदर्चोद ने अचानक अपनी चार उंगलियाँ मेरी चूत मे घुसेड दी और छोड़ ने लगी मुझे और दूसरे हाथ की उंगलिओन को अपने मुख रस से चिकना कर के मेरी गांद मे घुसेड डाली. उत्तेजना मैं आ कर मैने उसकी चूत की फाँक को काट खाया और जब वो मेरे होंठों पर मचलने लगी तो मेरी ज़ुबान फिसल कर उसकी गांद पर चली गयी.

क्रमशः.....................
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06-26-2017, 11:45 AM,
#6
RE: Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
इसकी गांद का छेद बिल्कुल रेशम जैसा मुलायम था, अजीब टेस्ट था उसका लेकिन मैं तो उस वक्त वासना मे अंधी हो चुकी थी, अब मैने भी शशि की तरह ही उसकी चूत मे पूरा हाथ धकेल दिया और उसकी चूत मे फीस्टिंग करने लगी. मुझे हैरानी हुई जब मेरा हाथ कलाई तक उस चालू गश्ती की चूत मे समा गया. चूत बहुत गरम थी अंदर से और रस की धारा मेरे हाथ पर गिर रही थी. हम दोनो हवस की आग मे जलती हुई एक दूसरी की दोहरी चुदाई करने लगी, यानी चूत और गांद दोनो की!!

शशि ने अपनी गांद को ढीला छोड़ दिया. शायद ये मेरे लिए एक हिंट था क्यो कि उस के बाद मेरी उंगलियाँ उसकी गांद मे आसानी से जाने लगी थी. मैने भी अपनी गांद के मसल्स को ढीला छ्चोड़ दिया. अब मेरी गांद आसानी से शशि की उंगली अपने अंदर लेने लगी और मुझे एक नया मज़ा आने लगा. अब मालूम हो रहा था कि गांद मरवाने का शौक क्यो होता है लड़कों और लड़कियो को. वासना की चर्म सीमा आ चुकी थी. चूत और गांद की चुसाई और चुदाई ज़ोरों पर थी. कमरा "फूच, फूच और पच, पच"की आवाज़ों असे गूँज रहा था. मेरा पूरा हाथ शशि की चूत खा गयी थी. मेरी कलाई ही उसकी छूट के बाहर थी. शशि ने भी अब मेरी गांद की चुदाई और तेज़ कर दी और मैं किसी कुतिया की तरह हाँफ रही थी जिस की चूत मे किसी तगड़े कुत्ते का लंड घुस चुका हो. चूत और गांद को दोहरी चुदाई का क्या मज़ा होता है मुझे पता चल चुका था और मैं अपने चूतर ज़ोर से हिला हिला कर मज़े ले रही थी.

मेरी चूत का उबलता हुआ लावा ऊपर चढ़ने लगा. शशि का भी यही हाल था. उसकी गरम साँस मेरी चूत से टकरा रही थी. उसने अचानक मेरी चूत से उंगलियाँ निकाल ली और चूत चाटने लगी और अपने फ्री हाथ से मेरे चूतर पर थप्पड़ मारने लगी. मेरी हरामी सहेली की चपत भी मुझे आनंदित कर रही थी. जितनी ज़ोर से वो थप्पड़ मारती उतना ही दर्द होता और उतना ही मेरा मन करता की वो और ज़ोर से मारे मेरी गांद पर अपना हाथ. मुझे ये भी पता चला कि चुदाई मे पीड़ा भी आनंदित होती है.

चूत की गहराई से चूत का लावा ज़ोर से उच्छल पड़ा और मैं पागलों की तरह चुदने लगी. मेरी स्पीड से शशि की भी मंज़िल आ गयी और वो भी चुदाई की चर्म सीमा को छ्छूने लगी और उसकी चूत का इयास एक फॉवरे की शकल मे मेरे मुख पर गिरने लगा, चुदाई अब पागलपन की हद तक पहुँच चुकी थी. हमारे नंगे जिस्म ऐंठ रहे थे, अकड़ रहे थे और हमारी चूत से रस की गंगा जमना बह रही थी."ऊऊऊऊ.....आआआआहह.......उूु

ऊउगगगगगघह!!!!!" आवाज़ें हमारे हलक से निकल रही थी लेकिन ये पता नही चल रहा था कि कौन सी आवाज़ किस की है. एक के बाद एक रस की धारा हमारी चूत से बाहर निकली और हम तक कर एक दूसरी के बाहों मे लेट गयी.

10 मिनिट तक कोई नही हिला. जब मैने चेहरा ऊपर उठाया तो देखा कि बिस्तर की चादर पर चूत रस का तालाब लगा हुआ था. इतने बड़े पैमाने पर मेरी चूत आज तक ना छूटी थी. शशि आँखें बंद कर के पड़ी रही और मैं उठी और कपड़े पहनने लगी. वो बिस्तर से ही बोली,"क्यो रानी देखा लेज़्बीयन सेक्स का मज़ा क्या होता है. कल का प्रोग्राम बना कर रात को तुझे फोन करूँगी कि कितने लंड तुझे चोदेन्गे."

शशि के घर से मैं जब निकली तो मेरे कदम कमज़ोर हो गये थे. उसके साथ जो विस्फोटक लेज़्बीयन अनुभव हुआ उसने मुझे थका दिया लेकिन मेरा शरीर एक फूल की तरह खिल गया था.

मेरी अपने शाहर मे वापिसी इतनी मनोरंजक हुई थी कि अब ये सोचना पड़ रहा था कि यहाँ मेरी किस्मत मे और क्या कुच्छ होने वाला है. शशि जितनी बेशरम थी उतनी ही सेक्सी और प्यारी भी थी. सब से बड़ी बात ये थी की वो मुझे ज़िंदगी का हर आनंद दिलाना चाहती थी. शायद अब मेरी ज़िंदगी से सेक्स की बोरियत का आंड होने जा रहा था. अपनी सहेली की चुचि की चूमना और उसको अपनी ज़ुबान से आनंदित करने की याद से मेरी चूत फिर उत्तेजित होने लगी थी. घर के गेट पर पहुँची तो मेरा भाई संजय बाहर आ रहा था," बिंदु दीदी, इतनी देर कहाँ लगा दी?

मैं कब से क्रिकेट खेलने जाना चाहता था और घर खुला भी नही छ्चोड़ सकता था. मम्मी अपनी सहेलिओं की पार्टी पर गयी हुई हैं, चाबी लो और मुझे जाने दो. शाम को 6 बजे लौटूँगा,"

संजय मेरे गले लग कर जाने लगा. मेरा भाई अब पूरा मर्द दिख रहा था. उसका कद कोई 5 फीट 11 इंच था एर बदन कसरती. जब उसने मुझे गले से लगाया तो मुझे अपने सीने से भींच लिया और मैं उसकी ग्रिफ्त मे एकदम खिलौना सी लग रही थी. उसके मूह से सिगरेट की महक आई. मैं उसको पुच्छने ही वाली थी कि क्या तुम सिग्रेट पीते हो लेकिन वो भाग खड़ा हुआ.

घर मे परवेश करते ही मुझे नहाने का मन हुआ. गेट बंद कर के मैने अपने कपड़े उतार दिए और नंगी हो गयी. मुझे अपने मायके घर मे पूरण नग्न हो कर घूमना बहुत पसंद था. घूमती हुई मैं संजय के रूम मे चली गयी. टेबल पर सिग्रेट का पॅक पड़ा हुआ था. मैने शीशे के सामने नंगी खड़ी हो कर सिगेरेट जलाया और कश लगाने लगी. वैसे मे सिगरेट नही पीती लेकिन आज मेरा मन वो सब कम करने को चाह रहा था जो मैने नही क्या था, मिरर के सामने मैं मदरजात नंगी खड़ी थी और अपने को खुद भी सेक्सी लग रही थी. मैं टेबल के सामने एक चेर पर बैठ गयी और कश लगाती रही. सिगरेट से मेरी चूत गीली होने लगी. शायद इसमे भी कोई नशा होता है. मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पर चला गया और उसको मसल्ने लगा," साली बिंदु, यहाँ खाली घर मे भी लंड के सपने देख रही है, तू कुतिया? अब तो तुझे हर वक्त लंड ही नज़र आता है!!!" मेरे मन ने मुझे झिड़का.

तभी मेरी नज़र कंप्यूटर स्क्रीन पर पड़ी. संजय किसी से चॅट करता हुआ बीच मे ही चला गया और कंप्यूटर बंद करना ही भूल गया था. जब मैं ध्यान से देखा तो वो किसी गर्ल फ्रेंड से चॅट कर रह लगता था. मैने टाइम पास करने के लिए चॅट हिस्टरी शुरू से पढ़नी शुरू कर दी.

संजय "कैसी हो मोना डार्लिंग?

मोना "तेरे लंड को याद कर रही हूँ मेरे राजा"

संजय "साली बेह्न्चोद मेरा लंड ही याद कर रही है या मुझे भी?"

मोना "बहनचोड़ तो तू है साले जो मेरे साथ किसी और लड़की को एक साथ चोदना चाहते हो."

संजय "तो ठीक है, तेरी शशि दीदी आ रही है उसको शामिल कर लो अपने बेड मे और हमारी त्रिकोनी श्रंखला भी हो जाएगी"

मोना " साले अगर मेरी दीदी आ रही है तो क्या हुआ. तेरी भी बिंदु दीदी आ रही है. उसको भी तो अपने भाई का लंड अच्छा ही लगे गा और जो हर वक्त बेह्न्चोद, बेह्न्चोद बोलता रहता है तेरी वो इच्छा भी पूरी हो जाएगी. मैं खुद अपने हाथों से तेरा 8 इंच का लॉडा डालूंगी अपनी प्यारी ननद की विवाहित चूत मे. क्यो संजू, साले तेरी बेहन क्या चूत शेव कर के रखती है या झांतों वाली बुर है उसकी. चुचि तो मेरी ननद की भी मेरी सासू मा जैसी मोटी और कड़क है!!!"

संजय"अच्छा बस कर अब, छ्चोड़ मेरी दीदी को अब. आज रात आ रही है ना पढ़ाई के बहाने? सारी रात चोदुन्गा तुझे, मेरी रानी!"

मोना,' साले चोद नही चोद अपनी बिंदु दीदी को!! याद है तुमने ही कहा था कि तेरी बिंदु दीदी, बिल्कुल बिंदु फिल्म आक्ट्रेस जैसी दिखती है. मुझे तो फिल्म आक्ट्रेस भी तेरी बेहन जैसी चुड़क्कड़ ही लगती है और बहनचोड़ मैं तो खुद तुझे अपनी बिंदु को चोदने को निमंत्रित कर रही हूँ. मैं खुद एक भाई को अपनी बेहन की चूत मे लंड डालते हुए देखना चाहती हूँ. अगर बिंदु दीदी को पटा लो तो मैं तो हाज़िर हूँ तेरे लिए मेरे राजा"

संजय 'अच्छा अब बंद कर अपनी बकवास. मैं नहा कर ग्राउंड मे जाने लगा हूँ, रात को होगा अपना मिलन मेरी रानी"

मोना" मिलन तो होगा लेकिन दो का नही तीन का, बाइ"

मुझे एहसास हुआ कि मेरे हाथ की उंगलियाँ मेरी चूत मे समा चुकी थी और मैं अपनी चूत मे अठन्नी तलाश कर रही थी जो मुझे मिल नही रही थी. तो मेरा संजा भैया मेरी सहेली शशि की बेहन मोना से इश्क लड़ा रहा था? और साले दोनो आशिक मुझे अपने बिस्तर मे 3सम की प्लान बना रहे थे!!! खास तौर पर मोना. जैसे मैने अपना पति शशि के साथ शेर किया था, अब मोना अपने होने वाले पति यानी मेरे भाई को मेरे साथ शेर करना चाहती थी. मेरी चूत वासना की आग मे तपने लगी ये सब सोच कर. मैं उठी और किचन से कोक की एक बॉटल ले आई और बैठ कर पीने लगी.

तभी मेरी नज़र टेबल पर पड़ी एक बुक पर पड़ी. वो एक डायरी थी और वो भी संजय की. उसके पेजस पर कई जगह लाल निशान लगे हुए थे.

पहला लाल निशान "जून 11, 2005. आज पहली बार मम्मी को नहाते हुए नंगा देखा. ओह्ह्ह्ह मम्मी की बुर...और उस पर काले काले बाल!!! मेरा लंड बेकाबू हो गया...मम्मी को चोदना चाहता हूँ तभी से...काश मम्मी मेरी हो जाती!!)

दूसरा लाल निशान (ऑगस्ट 12, 2006 बिंदु दीदी को कपड़े चेंज करते देखा...दीदी की शेव्ड चूत और उभरे नितंभ मुझे पागल बना रहे हैं. दीदी की गांद मे लंड डाल सकता काश मैं....शायद भेन्चोद की यही भावना है)

तीसरा लाल निशान (अक्टोबर 10, 2006. दीदी और विमल जीज़्जा जी की चुदाई देखी खिड़की से...बहुत ईर्षा हुई जीज़्जा जी से...उनकी जगह लेना चाहता हूँ मैं. दीदी की खुली जांघों के बीच फूली हुई चूत ना भूल पाउन्गा कभी और सारी उमर तड़प्ता रहूँगा कि बिंदु को ना चोद पाउन्गा क्यो कि वो मेरी बेहन है माशूक या पत्नी नही.)

अगला लाल निशान,(मार्च 12, 2008 मोना को पटा कर चोदा. बहुत ना नुकर करती थी लेकिन मैने जबरदस्तो चोद डाला. अगर बिंदु दीदी को पत्नी ना बना सका तो मोना से शादी करूँगा) अगला लाल निशान जून 15, 2009. मोना को शक हो गया कि मैं अपनी बेहन को चोदने की नियत रखता हूँ और उसने मुझे बहुत परेशान किया)

क्रमशः.....................
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06-26-2017, 11:45 AM,
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RE: Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
रंगीन आवारगी - 5

गतान्क से आगे...................

मेरा सारा बदन पसीना पसीना हो रहा था. मेरा सगा भाई मुझे चोदने की सोच रहा था और मुझे पता भी नही था. काम वासना मेरे दिलो दिमाग़ पर हावी होने लगी. चूत की आग भड़क उठी और मेरा मन कोई ठीक ढंग से सोचने के काबिल ना रहा. मैं बाथरूम मे गयी और नहाने लगी. मन उल्टे पुल्टे विचारों से भरा पड़ा था. बाहर आ कर मैं एक छ्होटी सी निक्केर और छोटी से टी शर्ट पहन कर लेट गयी. जब आँख खुली तो 6 बज रहे थे. जब मैने देखा तो संजय मुझे घूर रहा था. मुझे एहसास हुआ कि वो मुझे इस अर्ध नग्न अवस्था मे काफ़ी देर से देख रहा था. मैने भी अब आगे झुक कर अपने भाई को अपनी चुचि के भरपूर दर्शन करवा दिए और मन मे कहा," संजू मेरे भाई, अगर तू मुझे इतना चाहता है कि मुझे पत्नी बनाना चाहता है तो देख ले अपनी बेहन की चुचि. मेरा पति अगर बेहन्चोद बन गया है तो क्या फरक पड़ता है कि भाई भी बन जाए!!

'मम्मी कब तक आएँगी?' मैने पुछा. "दीदी मम्मी तो अपनी पार्टी से रात के दो दो बजे तक आती हैं. क्यो क्या बात है?" संजू ने पुछा."कुच्छ नही, मैं तो सोच रही थी कि अगर मम्मी लेट आएँगी तो क्यो ना आज कुच्छ जशन हो जाए? पीते हो क्या? कोई बियर या वोडका ले आयो, मज़े करेंगे!!" संजू एक दम खुश हो गया लेकिन बोला" दीदी आज तो मोना भी यहाँ आने वाली है पढ़ाई करने." मैं सब प्लान कर चुकी थी कि आज मुझे क्या करना है.

"मोना कौन? ओह शशि की बेहन? संजू उसके साथ क्या चक्कर चल रहा है तेरा, मेरे भाई?

तेरी गर्लफ्रेंड है क्या? सच बोल, तेरी शादी करवा सकती हूँ मैं. कैसी दिखती है वो? शशि से सुंदर है या नही? अच्छा भाई बुला लो उसको. मैंभी तो देखूं मेरे भाई की पसंद. तीनो पार्टी करते हैं यार!!" संजू पहले झिजका लेकिन फिर मान गया और शराब लेने चला गया.

उसके जाते ही मैने मोना को फोन लगाया."हेलो" मोना की आवाज़ सुनाई पड़ी,'हेलो मोना भाबी!!' मैने कहा.'हू ईज़ दिस!!!!" वो गुस्सा लगती थी."मोना यार मैं बिंदु, तेरी ननद, यही रिश्ता बनता है ना हमारा? जल्दी से आ जाओ हमारे पास और देखते हैं कि संजू भैया की पसंद कैसी है. अभी तक तो जो दिखाया है तुमने सिर्फ़ संजू को ही दिखाया है" मोना घबराहट मे बोली,'बिंदु दीदी? नमस्ते! मैं आ रही हूँ मैं और संजू आज पढ़ाई करने वाले है"

मैं भी किसी से कम नही थी,"मोना यार ये पढ़ाई के दिन हैं क्या? जवानी के दिन पढ़ाई के नही चुदाई के दिन होते हैं!! यार जल्दी आ जाओ, संजू पार्टी का समान लेने गया है. तुम किताब वग़ैरा मत ले आना मुझे दिखाने के लिए. मैं खुले विचारों वाली बेहन हूँ. मेरी तरफ से तुम लोगों को पूरी आज़ादी है. ऐश करो!!!"

"अच्छा दीदी, मैं आती हूँ" मैने उसको रोका," ठहरो, मोना. तुमने अपनी वो...सॉफ की हुई है...मेरा मतलब चूत? और सुनो तुम पॅंटी और ब्रा मत पहन कर आना. संजू को सर्प्राइज़ देना है तुमको, और कोई सेक्सी ड्रेस पहन कर आना मेरी भाबी जान!! शशि है क्या घर पर?" मोना कुच्छ सोचने लगी फिर बोली,"नही, दीदी, शशि दीदी तो पापा के पास गयी है. आती ही होगी"

मैं अब संजू का इंतज़ार करने लगी. संजू एक बॉटल वोड्का की और ऑरेंज जूस ले आया और साथ मे तन्दूरि मुर्गा और फ्राइड फिश भी. हम दोनो भाई बेहन ने सारा समान टेबल पर सजाया और मोना की वेट करने लगे. तभी मैं बोली,'संजू, मुझे मोना की लेटेस्ट फोटो तो दिखायो. देखूं तो सही अब वो कैसी दिखती है? कितनी सेक्सी है जो उसने मेरे प्यारे भाई को लूट लिया है" संजू एक दम शर्मा गया लेकिन फिर बोला, "अभी दिखाता हूँ, दीदी. मेरे कंप्यूटर मे है उसकी फोटो" मैने अपने भाई के चूतर पर चपत लगाई और बोली," हां भाई तेरे कंप्यूटर मे तो बहुत कुच्छ होगा, तेरी गर्लफ्रेंड का"

जब संजू ने मोना की फोटो दिखाई तो वो मुझे बहुत सुंदर लगी. जिस्म भरा हुआ लेकिन बहुत सेक्सी दिख रही थी. एक फोटो मे उसका साइड पोज़ था तो मैने देख कर कहा"यार संजू, तेरी मोना के नितंभ तो बहुत भारी हैं. इसी लिए तो नही हुआ इसका आशिक़ तू? तुझे भारी चूतर पसंद हैं ना? मुझे पता है जब तू मुझे और मम्मी के पिच्छवाड़े को चोरी चोरी निहारते थे. और मोना का सीना भी काफ़ी भरा हुआ है. वाह भाई तू तो लकी है!! मोना की शकल वैसे शशि से काफ़ी मिलती है, सच भाई"

तभी बेल बजी. मोना ही थी. मैने डोर खोला और वहाँ मोना एक ब्लॅक स्कर्ट और रेड टॉप पहने खड़ी थी. उसकी स्कर्ट घुटनो तक थी और उसकी गोरी टाँगें काफ़ी लंबी थी. मुझे अपनी चूत मे पानी आता हुआ महसूस हुआ जब मैने सोचा कि मोना स्कर्ट के नीचे नंगी थी अगर उसने मेरा कहा माना है तो. "मोना, कितनी सुंदर हो तुम. संजू बहुत लकी है और मैं भी. तेरे जैसी भाबी मिल गयी मुझे.

अब मैं शशि को भी कह सकती हूँ कि मैं उसकी भाबी हूँ और उसकी बेहन मेरी भाबी है. आओ अंदर भाबी. संजू तेरा इंतज़ार कर रहा है." मोना शरमाती हुई ड्रॉयिंग रूम मे चली गयी और मैं किचन से आइस, ग्लासस प्लेट्स लेने चली गयी.

जब मैं ड्रॉइग्रूम के दरवाज़े पर पहुँची तो संजू मोना को किस कर रहा था.

दोनो एक दूसरे से लिपटे हुए थे और संजू ने अपनी माशूक को गांद से पकड़ कर ऊपर उठाया हुआ था और मोना मेरे भाई के लंड को मसल रही थी,"ओह मोना, भेन्चोद साली, तुमने पॅंटी नही पहनी क्या? तेरे चूतर बिल्कुल नंगे महसूस हो रहे हैं!! तुझे पता है ना कि तेरे चूतर पर हाथ लगाते ही मेरे लंड का क्या हाल हो जाता है.

देख इसका हाल क्या बना दिया है तुमने" मोना नकली गुस्सा दिखाती हुई बोली,"संजू, अपनी बेहन से बोलना था कि वो मुझे ऐसा ना करने को कहती. साले भेन्चोद मैं नही तू है. तेरी प्यारी बिंदु दीदी ने ही मुझे कहा था कि भैया को सर्प्राइज़ देना है, पॅंटी और ब्रा मत पहनना. साले तुम भाई बेहन क्या क्या बातें करते हो मेरे बारे मे. और तेरी बिंदु दीदी तो बहुत चालू लगती है. लगता है मेरे साथ वो भी चुदने वाली है आज!!"

मैं दोनो को आलिंगन मे देख कर मुस्कुराती हुई कमरे मे गयी और मज़ाक से बोली,"संजू, बहुत बेसबरे हो तुम. अभी तो बेचारी आई है, ज़रा आराम तो करने दे इसको. आते ही दबोच लिया है इसको. और हां मोना तेरी ननद बहुत चालू है, लेकिन तेरी शशि दीदी से कम चालू है. मैं तुम दोनो को मौका दे रही हूँ ऐश करने का और तुम सालो मेरी बुराई कर रहे हो. अगर मेरे भाई ने तुझे प्यार क्या है तो उसका हर हक बनता है तुझ पर मोना रानी. खैर छ्चोड़ो पहले पेग बना लें फिर देखेंगे कि क्या प्रोग्राम बनता है. संजू ने पेग बनाए और हम तीनो सोफे पर बैठ गये और चुस्की लेने लगे.

मैं देख रही थी कि मोना कसमसा रही थी और कभी मेरी तरफ और कभी संजू की तरफ देख रही थी. दो पेग पीने के बाद हम सभी रिलॅक्स हो गये और मोना पेग ले कर संजू के पास गयी तो मेरे भाई ने उसको गोद मे खींच लिया. मैने देखा की फॅन की हवा ने मोना की स्कर्ट ऊपर उठा दी तो उसकी जंघें और शेव की हुई चूत भी साफ झलक दिखाने लगी. मोना ने अपनी बाहें अब संजू के गले मे डाल दी.

"संजू तुम सिगरेट भी पीते हो क्या" मैने पूछ लिया. मेरे भाई पहले सकपकाया लेकिन फिर बोला,"हाँ दीदी कभी कभी. लेकिन आपके सामने नही पीऊँगा. मुझे शरम आती है. अच्छा दीदी मैं सिगरेट पी कर आता हूँ तुम दोनो बातें करो ज़रा" संजू वहाँ से निकल पड़ा तो रह गयी मोना और मैं अकेली. मोना कुच्छ नशे मे थी और या फिर आक्टिंग कर रही थी. वो उठ कर मेरे पास आई और मुझ से लिपट गयी."दीदी, आपके कहने पर मैने वो सब किया जो आपने कहा था. अब आपकी बारी है मेरी बात मान लेने की. चलो अपने रूम मे. मैं बताती हूँ कि आपको क्या पहनना है. मंज़ूर?"

मैं भी नाटक करती हुई बोली,"मंज़ूर!!" मैं जान लेना चाहती थी कि मोना का क्या प्लान है. मेरे रूम मे आ कर उसने मेरा सूटकेस खोला और उस मे सफेद सिल्क की लेस वाली पॅंटी और ब्रा निकाली और बोली,"दीदी, ये है आज की रात के लिए आपकी ड्रेस. इस मे आप बहुत सेक्सी लगें गी, सच! इसमे आपकी चूत साफ नज़र आएगी और आपकी गांद आधी से अधिक नंगी रहे गी.

संजू बड़ी चुचि और बड़ी गांद का दीवाना है. देखते है कि अपनी बेहन के जिस्म को देख कर उसके लंड खड़ा होता है या नही. मेरा यकीन है कि शराब पी कर आदमी काफ़ी हद तक माशूक और बेहन मे फरक कम ही करता है खास तौर पर संजू जैसा मर्द. खैर आप ये पहन तो लो, प्लीज़!!"

मैं भी मोना का शुरू किया हुआ खेल खेलना चाहती थी. इस लिए अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गयी. मोना ने जब मुझे नग्न रूप मे देखा तो उसने ज़ोर से विज़ल बजाई और मुस्कुरा कर बोली,"वाउ दीदी!!!! आप तो बहुत मस्त हो. आप जैसा जिस्म देख कर संजू तो क्या भगवान भी ईमान छ्चोड़ दे आपको चोदने के लिए. वाह दीदी, मुझे इस माखन जैसे जिस्म को स्पर्श तो करने दो!!! इस सीने के उठान को देखने दो!! इस गोरे पहाड़ पर काली चुचि को मसल देने दो. वाह दीदी क्या नितंभ हैं आपके, बिल्कुल मखमली पर्वत और आपकी नाभि से जाती हुई ये नदी जो इस मस्त त्रिकोने मे मिल जाती है. दीदी, सच कहती हूँ कि अगर आपके भैया से इश्क ना करती होती तो आप की हो के रह जाती. सच दीदी, इस सोने मे तराशे हुए जिस्म को चूम लेती और चूमती रह जाती सारी ज़िंदगी!!!!!!"
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06-26-2017, 11:45 AM,
#8
RE: Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
मोना सच मे मेरी तरफ बढ़ी और मुझे आलिंगन मे ले कर चूमने लगी, मेरा जिस्म सहलाने लगी, मेरे चूतर मसल्ने लगी, मेरी चूत पर हाथ फेरने लगी. आज सुबह ही तो मैं शशि के साथ जीवन का पहला लेज़्बीयन अनुभव कर के आई थी जिसका नशा भी मेरे बदन पर था और यहा उसकी छ्होटी बेहन मुझे लेज़्बीयन लवर बनाने की बात कर रही थी. मैं भी जोश मे आ गयी और मोना के लिप्स किस करने लगी. लड़की वाकई ही बहुत गरम थी. मेरा भाई वाकई ही लकी था!!

मोना ने जब उंगली मेरी चूत पर फेरी तो उस पर मेरा रस लगा हुआ था," दीदी, आप ये पॅंटी और ब्रा पहन लो वेर्ना संजू के आने से पहले ही मैं उसकी बेहन की मखमली चूत खा रही हूँगी. सच दीदी, मुझे तो आप संजू से अधिक सेक्सी लग रही हैं. मुझे संजू के लंड से आपका नंगा जिस्म सेक्सी लग रहा है. ऐसे तो मुझे आज तक किसी औरत ने उत्तेजित नही क्या है.दीदी, मेरी इच्छा है की आज रात हम तीन, आप, मैं और आपका भाई हुम्बिस्तर हों.

आप अपने भाई को मेरे अंदर लंड पेलता हुआ देखें और मैं चाहती हूँ के संजू का लंड पकड़ कर आपको चुदवा डालूं उस से. दीदी आप भी चुदासि हो रही है ना? संजू आता ही होगा, प्लीज़ जल्दी से ये ब्रा और पॅंटी पहन लो" मैने भी मोना के प्लान को अपनाते हुए सफेद पॅंटी और ब्रा पहन ली. असल मे वो पॅंटी और ब्रा मुझे छ्होटी थी और उसके अंदर मेरे चूतर और मम्मे काफ़ी बाहर रह जाते थे और मुझे अपने आपको नंगा महसूस होता था. लेकिन नशे मे होने से मैं बेख़बर थी. मोना ने मुझे सोफे पर लेट जाने को कहा और खुद मेरे सामने चेर रख कर बैठ गयी. उसने मेरे चेहरे को हाथों मे लिया और एक फ्रेंच किस करने लगी.

उसका एक हाथ मेरे मम्मे पर था और दूसरे से वो मेरी जंघें सहला रही थी. तभी संजू कमरे मे आया औट ठिठक गया. मोना ने मेरे होंठों से अपने होंठ अलग करते हुए कहा," संजू.एर यार तुमने ये नही बताया कि तेरी बेहन कितनी नमकीन है!!! बिंदु दीदी तो बहुत मस्त है. अगर सच पूच्छो तो मुझे तुम दोनो बहुत पसंद हो. तेरा लंड मस्ती भरा है तो बिंदु दीदी का पूरा बदन मस्त है. काश मैं तुम दोनो को प्यार कर सकती!!"

संजू का मूह खुला का खुला रह गया जब उसने अपनी बड़ी बेहन को टाइट पॅंटी और ब्रा मे देखा."दीदी, आपने ये क्या पहना है? मेरा मतलब......आप तो नंगी हैं....." उसकी ज़ुबान लड़खड़ा रही थी. "संजू, एक तो अपनी माशूक से कह दे कि मुझे ऐसे कपड़े पेननाने को मत कहे. मोना ने कहा और मैने मान लिया. और वैसे भी गर्मी बहुत है, अगर तुम कहते हो तो उतार देती हूँ!!" मैने उठने की कोशिश की तो मोना ने मुझे फिर नीचे धकेल दिया," दीदी. जब आपने मुझे बिना पॅंटी और ब्रा के आने को कहा था मैने आपका कहना माना था ना? अब मेरा कहना आप माने. संजू इस पॅंटी मे बिंदु दीदी तुझे सेक्सी नही लगती क्या? गोरे मांसल बदन पर सफेद रेशम वा कितना सेक्सी लगता है. संजू तुम नया पेग बनाओ तब तक मैं दीदी के साथ एंजाय करती हूँ.

संजू तेरी दीदी मुझे बहुत गरमा चुकी है. क्यो ना हम तीनो एक हो जाएँ. दीदी भी आज सेक्स की आग मे जल रही है, संजू! ज़रा देख अपनी बेहन की चूत का उभार, कैसे जल रहा है!!!" संजू अब मुझे बिना किसी शरम के घूर्ने लगा और नया पेग पी कर बोला, दीदी, क्या तुम भी उत्तेजित हो चुकी हो? नशे मे मुझे तो तुम दोनो ही बहुत सेक्सी लग रही हो. अगर एतराज़ ना हो तो हम तीनो हुम्बिस्तर हो जाएँ? मोना मेरे लंड का क्या हाल हो रहा है ज़रा देखतो सही"

संजू की हालत देख कर मैने उसके लंड को पॅंट के ऊपर से स्पर्श क्या तो मुझे लगा किसी लोहे की रोड पर हाथ रख दिया हो. उसका लंड इतना मोटा और गरम था कि मेरे होश उड़ गये. संजू भी मेरे बालों मे हाथ फेरने लगा अजब की मोना मेरे निपल्स मसल रही थी. मेरी चूत ने पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया. मैने अब मोना की शर्ट नीचे सरकानी शुरू कर डाली.

जब उसकी स्कर्ट नीचे गयी तो उसके गोरे चूतड़ चमक उठे. सच कहूँ मोना के नितंभ बहुत सेक्सी थे, बिल्कुल भरे हुए और मुलायम!! मैने एक हाथ उसकी चूत पर फेरा तो देखा कि उसने अपनी चूत ताज़ी शेव की हुई थी और उस मे से रस टपक रहा था. मैने फिर संजू की पॅंट की ज़िप खोल दी और उसका ख़तरनाक दिखने वाला लंड बाहर निकल आया. उसका गुलाबी सूपड़ा बहुत मज़ेदार लग रहा था.

क्रमशः.....................
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06-26-2017, 11:45 AM,
#9
RE: Sex Hindi Kahani रंगीन आवारगी
मेरा दिल उसके सूपाडे को चूम लेने को करने लगा. "मोना, तू बहुत किस्मत वाली है. मेरे भाई का लंड तेरी किस्मत मे है, कितना मस्त है ये लंड. तुझे जन्नत दिखा देगा ये!!" मोना भी मस्ती मे आ चुकी थी और मेरी ब्रा खोलने लगी थी. मेरी चुचि नंगी हो कर मेरे भाई के सामने आ गयी और उसका मूह खुला का खुला रह गया. मोना ने झुक कर मेरे निपल्स चाटने शुरू कर दिए. संजू भी अपने कंट्रोल को खो चुका था और उसने मेरी पॅंटी को नीचे सरकाना शुरू कर दिया. मेरी पॅंटी का सामने वाला भाग मेरे चूत रस से भीगा हुआ था. मैं अब अपने सगे भाई के सामने नंगी थी और उसके लंड से खेल रही थी.

मोना उठी और अपनी टॉप को उतारते हुए बोली,"संजू, मेरे यार, आज मज़े लेने का दिन है. चलो तेरे बेड पर चलते हैं. आज तुम मुझे और बिंदु दीदी के साथ मज़े लूट लो. इसके बाद हम तीनो का ये रिश्ता हमारा एक सीक्रेट ही रहेगा. लेकिन मेरी शर्त है. बिंदु दीदी मेरी भी पार्ट्नर होंगी. मुझे ऐसा जिस्म चूमने को कहाँ मिलेगा और तुझे ऐसी औरत चोदने को कहाँ मिलेगी? और तुझे मुझ जैसी खुले मन की बीवी कहाँ मिलेगी? आओ मेरे यार मुझे अपनी बेहन के साथ साथ चोदो आज की रात. चलो इस रात को यादगार बना दें!!"

हम उठ कर संजू के रूम मे चले गये और मैं और मोना दोनो संजू को नंगा करने मे व्यस्त हो गयी. जब मेरा भाई नंगा हुआ तो मैं उसके लंड का तनाव देख कर दंग रह गयी. संजू का लंड कम से कम 8 इंच का था और बहुत मोटा था. मोना ने संजू को पलंग पर गिराया और उसके सूपदे को चूमने लगी.

मैं भी वासना मे अंधी हो चुकी थी. मैने अपने होंठ अपने भाई के अंडकोष से सटा दिए और उसके अंडकोष चूसने लगी. मेरा भाई आँखें बंद कर के लेटा हुआ था और उसकी साँस ऐसे चल रही थी जैसे कोई जानवर थका हुआ हो. तभी संजू बोला," तुम दोनो बला की सेक्सी लडकयाँ हो!! आज पहली बार दो औरतों की एक साथ चुदाई करूँगा मैं!! मोना पहले मैं तुझे चोदुन्गा क्योकि तुझे मैं चोद चुका हूँ. दीदी के सामने मुझे कुच्छ झीजक हो रही है. इस लिए दीदी को बाद मे चोदुन्गा. वैसे भी मोना की इच्छा थी कि वो मेरा लंड अपने हाथों से दीदी की चूत मे डालेगी. दीदी तुझे कोई एतराज़ तो नही?"

मैने मस्ती मे सिर हिला दिया. फिर मैने मोना की जांघों को खोलते हुए उसकी चूत को किस करना शुरू कर दिया. मोना की चूत गरम थी और रस टपका रही थी. उसकी चूत का नमकीन स्वाद मुझे बहुत अच्छा लगा. संजू ने अपने लंड को हाथ मे ले कर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.. वो कामुकता से हम दोनो को निहार रहा था. मोना की चूत अपने रस और मेरे मुख रस से भीग चुकी थी. वो मेरे भाई से चुदने को तैयार थी.

संजू तुम पहले इसको चोद लो!! इस कुत्ति की चूत बहुत जल रही है और तेरा प्यारा लंड भी अब इंतज़ार नही कर सकता. मोना तुम ज़रा घोड़ी बन जाओ मेरे भाई के सामने और मैं डालती हूँ तेरी चूत मे संजू का लंड अपने हाथों से. तेरी चूत भी चुदासि हो चुकी है. अब शुरू करते हैं चुदाई का असली खेल" कहते हुए मैने संजू को गले लगा लिया और अपनी चुचियाँ उसकी छाती पर रगड़ कर उसको किस करने लगी. मेरे भाई का लंड मेरे पेट मे चुभ रहा था और उस मे से रस टपक रहा था.

उस वक्त मेरा दिल कर रहा था कि संजू मुझे पटक पटक कर चोद डाले. मैने अपने हाथों से संजू के अंडकोष सहलाए और तब तक मोना वहाँ पर घुटनो और हाथों के बल घोड़ी बन गयी. "भैया देखो घोड़ी कैसे तुझ से चुदवाने तो तैयार है. किसी दिन इसकी गांद भी चोदना मेरे भाई. बड़ी प्यारी है इसकी गांद !!!!!" संजू मोना की तरफ बढ़ा और जब झुका तो मैने उसके लंड को मोना की जांघों के बीच से चूत पर टीका दिया. संजू ने अपनी कमर आगे धकेल दी और उसका लंड आसानी से अंदर चला गया"आआआआहह.....ऊऊओरर्ररगज्गघह.

...एयाया

संजूऊुुुुउउ....दिदीईईई...मार गयी...उमेररी माआअ!!!" मोना की सिसकी निकली.

मैं अब मोना के सामने आ गयी और नीचे लेट कर उसकी झूलती हुई चुचिओ को चूमने लगी. मेरा एक हाथ मोना की चूत पर रेंग रहा था जहाँ मुझे संजू का लंड महसूस हो रहा था. मोना की चुचि चूसने से उसकी उत्तेजना और बढ़ गयी और वो अपने चूतर पीच्छे धकेलने लगी. संजू के लंड की आवाज़ें उँची सुनाई दे रही थी. मोना के निपल बहुत कड़े हो चुके थे और मैं मस्ती मे उसकी चुचि चूसने लगी. संजू ने मोना की चोटी पकड़ ली और उसको ऐसे खींचने लगा जैसे कोई घोड़ी पर सवार घोड़ी की लगाम खींच रहा होता है. मोना हाँफ रही थी. फिर मैने अपने आपको उस से अलग किया और खुद अपनी जाँघो को फैला कर अपनी चूत उसके मूह के सामने कर दी और बिना बोले मोना ने मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी. मोना का मुख अब मेरी चूत मे घुसा हुआ था और वो मेरी चूत चाट रही थी.

"आह......ओह्ह्ह्ह....आआआ......आराररर्र्ररर...संजू...बस.....रुक जाओ......चुद गयी मैं....झार गयी....ओह.....मेरी माआ झार गयी, निकला लो बस संजू....!!!!" लेकिन संजू के धक्के चलते रहे. फुचा फूच की आवाज़ें गूँज रही थी. मोना झार रही थी. उसके जिस्म की स्पीड बता रही थी कि उसकी चूत पानी छ्चोड़ रही थी. जब मैने हाथ लगा कर देखा तो उसकी चूत का रस टपक टपक कर उसकी जांघों से नीचे जा रहा था. लेकिन संजू अभी झाड़ा नही था. उसका आधा काम अभी बाकी था. माशूक चुद चुकी थी, बेहन अभी बाकी थी. जब उसने लंड बाहर निकला तो वो चूत रस से भीग कर चमक उठा था

मैं उठी और अपने भाई के लंड को पकड़ कर चूसने लगी. मेरे भाई का गुलाबी सूपड़ा बहुत टेस्टी था और उस पर मोना के चूत रस का स्वाद मुझे पागल बना रहा था...मानो मैं भाई के लंड पर भाबी की चूत का स्वाद चख रही हूँ. मोना लड़खड़ाती हुई खड़ी हुई और बोली,' दीदी, आप बिस्तर पर पलंग के कॉर्नर पर अपने चूतर ले जाएँ और अपनी टाँगें ऊपर उठा लें. फिर आपकी चूत चुदाई के लिए बहुत आसानी से खुल जाएगी अपने भाई के लंड के सामने और आपका राजा भाई आपको मज़े से चोद लेगा. संजू, अगर तुम चाहो तो दीदी की चूत को चूम सकते हो!!! उसके बाद तो भेन्चोद बन जाओगे तुम!!!" संजू की आँखे वासना से लाल हो रही थी.

जब मैने मोना के कहने के मुताबिक अपनी टाँगें फैलाई तो संजू की ज़ुबान ने मेरी चूत पर वार कर दिया और मेरी चूत चूसने लगा,"ऊऊऊऊऊऊ.....आआआअहह......आआआररररगज्गघह...ऊवू भाई....आआआः संजू...मेरे भाई...ऊवू मदर्चोद...ये क्या कर रहे हो!!!! चूस लो अपनी दीदी की चूत...आआहह....मेरे भेन्चोद भाई चोद भी ले...मुझे और मत जला....मैं जल रही हूँ...मेरी प्यास बुझाओ भाई....मेरी चूत तप रही है...इसकी आग बुझा दे भाई....अपना लंड पेल दो मेरी चूत मे संजू....हाई मैं मरी....मेरी माआआआआ!!!!!!!!!!!!!!!!" मैं ना जाने क्या बक रही थी क्यो के मुझे अपने आप पर कोई कंट्रोल नही था.

संजू ने मेरी चूत की फनकों को काट लिया और मैं चीख पड़ी,"उई.....भेन्चोद मर गइईई...संजू भेन्चोद अपनी बहन की चूत काट रहे हो मदर्चोद......साले मेरी फुददी ही खायोगे या चोदोगे भी? अपनी बहना को चोदो यार क्यो तडपा रहे हो!!!!" संजू उठा और मेरी जांघों को फैला कर अपने कंधे पर टिका कर मेरी आँखों मे देखने लगा," मोना, मेरा लंड पकड़ कर रख दो अपनी ननद की चूत पर....मोना मेरा सूपड़ा टीका दो मेरी बेहन की जलती हुई चूत पर!!!

आज एक भाई को बन जाने दो भेन्चोद....बिंदु दीदी को बना डालो हमारी पर्मनेंट पार्ट्नर, चोदने के लिए चुदवाने के लिए.....अपनी सग़ी बेहन की चूत मे लंड पेलने के लिए मर रहा हूँ मैं.....मोना मैं दीदी को चोदुन्गा तो तुम दीदी के मुख पर अपनी चूत रख देना....दीदी भाई के लंड का स्वाद अपनी चूत से चखेगी और अपनी होने वाली भाबी की चूत का स्वाद अपने मुख से!!!!" मोना ने संजू के हूकम की पालना करते हुए पहले उसका लोड्‍ा पकड़ कर मेरी चूत पर टीकाया और फिर मेरे मुख पर अपनी चूत रख दी.

संजू का भयंकर् लंड मेरी चूत मे घुसा तो मैं तड़प पड़ी. जब मैं मचलने लगी तो मेरे भाई ने मेरे नितंभ जाकड़ लिए और अपना लंड आगे बढ़ाने लगा. कसम से भाई का लंड बहुत बड़ा था और बेशक मैं बहुत बार चुद चुकी थी, संजू का लंड तो मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था. मैं मस्ती मे भर गयी और मोना अपनी चूत मेरे होंठों पर रगड़ने लगी. मेरी आहें निकल रही थी और संजू का लंड मुझे दिन मे तारे दिखा रहा था.

बिस्तर पर तीन नंगे जिस्म हवस की आग मे जल रहे थे. कामुकता का नंगा नाच हो रहा था. किसी को अगले पल की परवाह नही थी. उस एक पल मे हम तीनो ज़िंदगी का पर आनंद उठा रहे थे. हम भगवान के इतने पास थे कि कह नही सकती. मेरी जीभ मोना के रस से भरी हुई थी. तभी मुझे संजू की उंगली मेरी गांद मे घुसती हुई महसूस हुई,"नूऊऊऊऊऊऊओ....नाआआआआआआआआ सन्जुउउउउउउउउ....नही!!!! यहाँ नही!!!!! ऊऊऊहह मेरे भाई गाआआंद नही....दर्द होता है...ऊऊओफफफफ्फ़ तेरी मा की चूत ....नाआआआ!!" मेरे मूह से निकला.

संजू ने झट से उंगली निकाली और मेरी चूत के रस से गीला कर के फिर से घुसा डाली मेरी गाअंड मे. उंगली चिकनी होने से घुस गयी और दर्द भी कम हुआ. अब मैं चूत और गांद दोनो मे चुद चुद कर मोना की चूत चाट रही थी. ऐसा अनुभव मुझे आज तक ना हुआ था. मेरा शरीर ऐंठ रहा था. चूत चाहती थी कि लंड का आखरी इंच भी उसके अंदर घुस जाए...काश मेरी गांद मे भी उंगली की जगह लंड हो होता.....मैं हवस की आग मे मर रही थी.

तभी मेरे भाई ने धक्के तेज़ कर दिए. उसकी रफ़्तार से लग रहा था कि वो झार रहा है. मेरी चूत की गहराई से एक रस की धारा उभरने लगी थी. हम तीनो तूफ़ानी गति से चुदाई मे लगे हुए थे. इधर मेरी चूत का बाँध टूटा और उधर संजू का फॉवरा छ्छूट पड़ा और उधर मोना की चूत से एक और रस की गंगा बहने लगी. संजू ने मेरी गांद मे एक और उंगली डाली और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा मुझे. मेरे भाई का गरम लावा मेरी चूत मे गिरने लगा. तूफान की शक्ति धीमी होने लगी और हम तीनो एक ढेर मे बिस्तर पर गिर पड़े
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