Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
09-18-2017, 12:00 PM,
#1
Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
गाँव मे मस्ती

चेतावनी ........... ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है



दोस्तो आपके लिए एक ऑर मस्त कहानी हिन्दी फ़ॉन्ट मे पेश करने जा रहा हूँ 



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जब ये सब मादक घटनाये घटना शुरू हुई तब मैंने अभी अभी जवानी मे कदमा रखा था गाँव के बड़े पुश्तैनी मकान मे मैं कुछ ही दिन पहले माँ के साथ रहने आया था पाँच साल की उम्र से मैं शहर मे मामाजी के यहाँ रहता था और वहीं स्कूल मे पढता था तब गाँव मे सिर्फ़ प्राइमरी स्कूल था इसलिए माँ ने मुझे पढने शहर भेज दिया था अब गाँव मे हाई स्कूल खुल जाने से माँ ने मुझे यहीं बुलावा लिया था कि बारहवीं तक की पूरी पढ़ाई मैं यहीं कर सकूँ

घर मे माँ, मैं, हमारा जवान तेईस चौबीस साल का नौकर रघू और उसकी माँ मंजू रहते थे मंजू हमारे यहाँ घर मे नौकरानी थी चालीस के आसपास उमर होगी घर के पीछे खेत मे एक छोटा मकान रहने को माँ ने उन्हें दे दिया था जब मैं वापस आया तो माँ के साथ साथ मंजू और रघू को भी बहुत खुशी हुई मुझे याद है कि बचपन से मंजू और रघू मुझे बहुत प्यार करते थे मेरी सारी देख भाल बचपन मे रघू ही किया करता था

वापस आने के दो दिन मे ही मैं समझ गया था कि माँ रघू और मंजू को कितना मानती थी वे हमारे यहाँ बहुत सालों से थे, मेरे जन्म के भी बहुत पहले से, असल मे माँ उन्हें शादी के बाद मैके से ले आई थी अब मैंने महसूस किया कि माँ की उनसे घनिष्टता और बढ़ गयी थी वहाँ उनसे नौकर जैसा नहीं बल्कि घर जैसा बर्ताव करती थी रघू तो मांजी मांजी कहता हमेशा उसके आगे पीछे घूमता था

घर का सारा काम माँ ने मंजू के सुपुर्द कर रखा था कभी कभी मंजू माँ से ऐसे पेश आती थी जैसे मंजू नौकरानी नहीं, बल्कि माँ की सास हो कई बार वह माँ पर अधिकार जताते हुए उससे डाँट दपट भी करती थी पर माँ चुपचाप मुस्कराकर सब सहन कर लेती थी इसका कारण मुझे जल्दी ही पता चल गया
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09-18-2017, 12:00 PM,
#2
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
जब से मैं आया था तब से मंजू और रघू मेरी ओर ख़ास ध्यान देने लगे थे मंजू बार बार मुझे पकडकर सीने से लगा लेती और चूम लेती "मुन्ना, बड़ा प्यारा हो गया है तू, बड़ा होकर अब और खूबसूरत लगने लगा है बिलकुल छोकरियों जैसा सुंदर है, गोरा चिकना" 

माँ यह सुनकर अक्सर कहती "अरे अभी कच्ची उमर का बच्चा है, बड़ा कहाँ हुआ है" तो मंजू कहती "हमारे काम के लिए काफ़ी बड़ा है मालकिन" और आँखें नचाकर हँसने लगती माँ फिर उसे डाँट कर चुप कर देती मंजू की बातों मे छुपा अर्थ बाद मे मुझे समझ मे आया

रघू भी मेरी ओर देखता और अलग तरीके से हँसता कहता "मुन्ना, नहला दूँ? बचपन मे मैं ही नहलाता था तुझे"

मैं नाराज़ होकर उसे डाँट देता वैसे बात सही थी मुझे कुछ कुछ याद था कि बचपन मे रघू मुझे नंगा करके नहलाता मुझे तब वह कई बार चूम भी लेता था मेरे शिश्न और नितंबों को वह खूब साबुन लगाकर रगडता था और मुझे वह बड़ा अच्छा लगता था एक दो बार खेल खेल मे रघू मेरा शिश्न या नितंब भी चूम लेता और फिर कहता कि मैं माँ से ना कहूँ मुझे अटपटा लगता पर मज़ा भी आता वह मुझे इतना प्यार करता था इसलिए मैं चुप रहता

वैसे मंजू की यह बात सच थी कि अब मैं बड़ा हो गया था माँ को भले ना मालूम हो पर मंजू ने शायद मेरे तने शिश्न का उभार पैंट मे से देख लिया होगा इस कमसिन अम्र मे भी मेरा लंड खड़ा होने लगा था और पिछले ही साल से मेरा हस्तमैथुन भी शुरू हो गया था शहर मे मैं गंदी किताबें चोरी से पढता और उनमे की नंगी औरतों की तस्वीरें देखकर मुठ्ठ मारता बहुत मज़ा आता था औरतों के प्रति मेरी रूचि बहुत बढ़ गयी थी ख़ास कर बड़ी खाए पिए बदन की औरतें मुझे बहुत अच्छी लगती थीं
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09-18-2017, 12:00 PM,
#3
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
गाँव आने के बाद गंदी किताबें मिलना बंद हो गया था इसलिए अब मैं मन के लड्डू खाते हुए तरह तरह की औरतों के नंगे बदन की कल्पना करते हुए मुठ्ठ मारा करता था

आने के बाद माँ के प्रति मेरा आकर्षण बहुत बढ़ गया था सहसा मैंने महसूस किया था कि मेरी माँ एक बड़ी मतवाली नारी थी उसके इस रूप का मुझ पर जादू सा हो गया था शुरू मे एक दिन मुझे अपराधी जैसा लगा थी पर फिर लंड मे होती मीठी टीस ने मेरे मन के सारे बंधन तोड दिए थे

मेरी माँ दिखने मे साधारण सुंदर थी भले ही बहुत रूपवती ना हो पर बड़ी सेक्सी लगती थी बत्तीस साल की अम्र होने से उसमे एक पके फल सी मिठास आ गयी थी थोड़ा मोटा खाया पिया मांसल शरीर, गाँव के स्टाइल मे जल्दी जल्दी पहनी ढीली ढाली साड़ी चोली और चोली मे से दिखती सफेद ब्रा मे कसी मोटी मोटी चुचियाँ, इनसे वह बड़ी चुदैल सी लगती थी बिलकुल मेरी ख़ास किताबों मे दिखाई चुदैल रंडियों जैसी!

मैंने तो अब उसके नाम से मुठ्ठ मारना शुरू कर दिया था अक्सर धोने को डाली हुई उसकी ब्रा या पैंटी मैं चुपचाप कमरे मे ले आता और उसमे मुठ्ठ मारता उन कपड़ों मे से आती उसके शरीर की सुगंध मुझे मतवाला कर देती थी एक दो बार मैं पकड़े जाते हुए बचा माँ को अपनी पैंटी और ब्रा नहीं मिले तो वह मंजू को डाँटने लगी मंजू बोली कि माँ ने धोने डाली ही नहीं किसी तराहा से मैं दूसरे दिन उन्हें फिर धोने के कपड़ों मे छुपा आया मंजू को शायद पता चल गया था क्योंकि माँ की डाँट खाते हुए वह मेरी ओर देखकर मंद मंद हँस रही थी पर कुछ बोली नहीं मेरी जान मे जान आई!

मुझे ज़्यादा दिन प्यासा नहीं रहना पड़ा माँ वास्तव मे कितनी चुदैल और छिनाल थी और घर मे क्या क्या गुल खिलते थे, यह मुझे जल्द ही मालूम हो गया मैं एक दिन देर रात को अपने कमरे से पानी पीने को निकला उस दिन मुझे नींद नहीं आ रही थी माँ के कमरे से कराहने की आवाज़ें आ रही थीं मैं दरवाजे से सट कर खड़ा हो गया और कान लगाकर सुनने लगा सोचा माँ बीमार तो नहीं है!


"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हा, मर गयी रे, मंजू तू मुझे मार डालेगी आज उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईह्ह्ह्ह्ह मायाम " माँ की हल्की चीख सुनकर मुझे लगा कि ना जाने मंजू बाई माँ को क्या यातना दे रही है इसलिए मैं अंदर घुसने के लिए दरवाजा ख़टखटाने ही वाला था कि मंजू की आवाज़ आई "मालकिन, नखरे मत करो अभी तो सिर्फ़ उंगली ही डाली है आपकी चूत मे! रोज की तराहा जीभ डालूंगी तो क्या करोगी?"

"अरे पर आज कितना मीठा मसल रही है मेरे दाने को तू छिनाल जालिम, कहाँ से सीखा ऐसा दाना रगडना?" माँ कराहती हुई बोली

"रघू सीख कर आया है शहर से, शायद वह ब्लू फिल्म मे देख कर आया है कल रात को मुझे चोदने के पहले बहुत देर मेरा दाना मसलता रहा हरामी इतना झड़ाया मुझे कि मै लस्त हो गयी!" मंजू की आवाज़ आई
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09-18-2017, 12:01 PM,
#4
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
"तभी कल मुझे चोदने नहीं आया बदमाश, अपनी अम्मा को ही चोदता रहा तू तो दिन रात चुदाती है अपने बेटे से, तेरा मन नहीं भरता? रोज रात को पहले मेरे पास ले आया कर उसे तुझे मालूम है उसकी रात की ड्यूटी मेरे कमरे मे है तू भी रोज आ जाया कर, सब मिलकर चुदाई करेंगे हफ्ते मे एक बार चुद कर मेरा मन नहीं भरता मंजू बाई चल अब चूस मेरी बुर, ज़्यादा ना तडपा"

"मैं तो रोज आऊ बाई पर अब मुन्ना आ गया है ज़रा छुपा कर करना पड़ता है" मंजू बोली

"अरे वह बच्चा है, जल्दी सो जाता है अब चूस ले मेरी बुर को, मत तडपा मेरी रानी अपनी मालकिन को" माँ कराहते हुए बोली

सुनकर मैं बहुत गरम हो गया था दरवाजे से अंदर झाँकने की कोशिश की पर कोई छेद या दरार नहीं थी आख़िर अपने कमरे मे जाकर दो बार मुठ्ठ मारी तब शांति मिली मन ही मन मे कल्पना कर रहा था कि माँ और मंजू की रति कैसी दिखती होगी! एक दो बार मैंने लेस्बियन वाली कहानियाँ पढ़ी थीं पर चित्र नहीं देखे थे

अब मैं इस ताक मे था कि रात को कौन माँ के कमरे मे आता है यह देखूं रघू कभी ना कभी आएगा और माँ को चोदेगा इस बात से मैं ऐसा गरमाया कि समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करूँ माँ के साथ साथ अब मंजू बाई के नंगे बदन की कल्पना भी करने लगा चालीस साल उमर होने के बावजूद मंजू बाई का शरीर काफ़ी छरहरा और तंदुरुस्त था साँवली ज़रूर थी पर दिखने मे काफ़ी ठीक लगती थी दोपहर को उसके नाम की मैंने दो तीन मुठ्ठ मार लीं

दूसरे दिन भी रात मे मंजू माँ के कमरे मे आई पर अकेले उस रात मैं चुपचाप माँ के कमरे तक गया और कान लगाकर अंदर की बातें सुनने लगा 


"कल ले आऊन्गि रघू को अपने साथ बहूरानी वह ज़रा काम मे था खेतों को भी तो देखना पड़ता है! अब चुपचाप मेरी बुर चूसो खुद तो चुसवा लेती हो, मैं क्या मुठ्ठ मारूं? कल रघू ने भी नहीं चोदा" मंजू बोली 

कुछ देर की खामोशी के बाद मंजू बोली "हाँ, ऐसे चूसो मालकिन, अब आया मज़ा ज़रा जीभ अंदर तो डालो, देखो आपकी नौकरानी की चूत मे क्या माल है तुम्हारे लिए और तुम्हें पसंद है ये मुझे मालूम है! कई बार तो चखा चुकी हो!" 

मैं समझ गया रघू के लंड का लालच दे कर आज मंजू माँ से खूब चूत चुसवा रही थी कुछ ही देर मे मंजू के कराहने की आवाज़ आने लगी और फिर वह चुप हो गयी साली झड गयी थी शायद

"अच्छा लगा मेरी बुर का पानी मालकिन? मैं तो पहले ही कहती थी कि रोज चखा करो अब रोज चुसवाऊँगी आप से" बोलकर मंजू फिर सिसकारियाँ भरने लगी

कुछ देर बाद मंजू बोली "बहू रानी, अब मुन्ना भी आ गया है उससे भी चुदा कर देखो, घर का लडका है, कब काम आएगा? अब मैं या रघू किसी दिन ना हों आपकी सेवा के लिए फिर भी प्यासा रहने की ज़रूरत नहीं है तुम्हें!" मेरे कान खड़े हो गये मेरी बातें हो रही थीं लंड भी उछलने लगा
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09-18-2017, 12:01 PM,
#5
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
माँ कुछ देर चुप रही फिर थोड़ी शरमा कर बोली "अरे अभी छोटा है अनिल बच्चा है और फिर मेरे बेटे से ही मैं कैसे चुदाऊ?"

"वाह मालकिन, मेरे बेटे से चुदाती हो, मेरे और मेरे बेटे की चुदाई मे बड़ा रस लेती हो और खुद के बेटे की बात आई तो शरमाती हो मुझे देखो, अपने बेटे से चुदा कर क्या सुख पाती हम! वैसे बड़ा प्यारा छोकरा है अपना मुन्ना और छोटा वोटा कुछ नहीं है रोज सडका लगाता है बदमाश मुझे पता है, मैं कपड़े धोती हँ उसके और तुम्हारे भी तुम्हारी ब्रा कई बार कड़ी रहती है, उसमे दाग भी रहते हैं कौन मुठ्ठ मारता है उसमे? रघू तो नहीं मारता यह मैं जानती हूँ और उस दिन तुम मुझ पर झल्ला रही थीं तुम्हारी ब्रा और पैंटी नहीं मिले इसलिए! कौन बदमाश उन्हें ले गया था, बताओ तो?" मंजू हँसते हुए बोली

कुछ देर कमरे से सिर्फ़ चूसने और चूमा चाटी की आवाज़ें आईं फिर माँ की वासना भरी आवाज़ आई "बदमाश है बड़ा, अपनी माँ की ब्रा मे मुठ्ठ मारता है अब तो उससे चुदा ही लूँ मंजू! अभी लंड छोटा होगा मेरे बेटे का पर होगा बड़ा रसीला री मेरा तो मन हो रहा है चूसने का"

"और उससे बुर चुसवाने का मन नहीं होता मालकिन? एक माँ के लिए इससे मस्त बात क्या हो सकती है कि वह अपने बेटे को अपनी उसी चूत का रस पिलाए जिसमे से वह बाहर आया है! ये बेटे बड़े बदमाश होते हैं बहू रानी अपनी अम्मा पर मरते हैं इनसे तो कुछ भी करा लो अम्मा के गुलाम होते हैं ये बच्चे" मंजू हँस कर बोली

कुछ देर बाद मंजू बोली "तुम्हें शर्म आती है तो मुन्ना को मेरे हवाले कर दो मैं और रघू मिलकर उसे सब सिखा देंगे फिर जब सधा चोदू बन जाए तुम्हारा बेटा तो तुम उसे अपनी सेवा मे रख लेना"

माँ बोली "तेरी बात तो समझ मे आती है पर इसमे रघू क्या करेगा?"

मम्जू बोली "बहू रानी, रघू महा हरामी है, शायद उसे मुन्ना अच्छा लगता है बचपन मे वही तो संभालता था मुन्ना को, नहलाता भी था तुम खुद रघू से क्यों नहीं बात कर लेती? कल तो आएगा ही वह तुम्हें चोदने, तब पूछ लेना वैसे बड़ा रसिक है मेरा लाल खट्टा मीठा दोनों खाना चाहता है और मुन्ना से ज़्यादा मस्त मीठा स्वाद उसे कहाँ मिलेगा? अब यह बताओ बहू रानी कि मेरी बुर का पानी पसंद आया कि नहीं वैसे पानी नहीं शहद है तुझे पक्का माल चखाने के चक्कर मे आज मैंने रघू से चुदाया भी नहीं और मुठ्ठ भी नहीं मारी सीधा आपके मुँहा मे झड रही हूँ कल रात के बाद"
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09-18-2017, 12:01 PM,
#6
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
अम्मा मंजू की बुर चूसती हुई बोली "अरी यह भी कोई पूछने की बात है? तेरी चूत का माल है या खोवा? गाढा गाढा सफेद सफेद, मलाई दार कितना चिपचिपा है देख! तार तार छूट रहे हैं! रघू बड़ा नसीब वाला है, बचपन से चखता आया है यह मावा अब मेरे लिए भी रखा कर और अनिल बेटे को भी चखा देना कभी"

मैं वहाँ से खिसक लिया माँ को चोदने की बात सोच कर ही मैं पागल सा हुआ जा रहा था उपर से मंजू बाई और रघू की बात सोच कर मुझे कुछ डर सा भी लग रहा था कहीं अम्मा मान गयी और मुझे उन चुदैल माँ बेटे के हवाले कर दिया तो मेरा क्या हाल होगा? वैसे मन ही मन फूल कर कुप्पा भी हो रहा था मंजू बाई के छरहरे दुबले पतले कसे शरीर को याद करके उसीके नाम से मैंने उस रात हस्तमैथुन कर डाला 

अब रघू के बारे मे भी मैं सोच रहा था वह बड़े गठीले बदन का हेंड्सॅम जवान था मंजू काली थी पर रघू एकदम गेहुएँ रंग का था मॉडल बनने लायक था सोते समय मंजू की इसी बात को मैं सोच रहा था कि रघू मेरा स्वाद लेगा या क्या करेगा?

दूसरे दिन सुबह से मैं इस चक्कर मे था कि किसी तरह माँ के कमरे मे देखने को मिले जब माँ बाहर गयी थी और मैं अकेला था तब मैंने हाथ से घुमाने वाली ड्रिल से दरवाजे मे एक छेद कर दिया उसके उपर उसी रंग का एक लकड़ी का टुकडा फंसा दिया आज रघू आने वाला था कुछ भी हो जाए, मैं अपनी माँ को उस सजीले नौजवान से चुदते देखना चाहता था
रात को मैं जल्दी अपने कमरे मे चला गया अंदर से सुनता रहा रघू और मंजू बाई आने का पता मुझे चल गया जब अम्मा ने अपने कमरे का दरवाजा खोला कुछ देर रुकने के बाद मैं चुपचाप बाहर निकाला और माँ के कमरे के दरवाजे के पास आया अंदर से सिसकने और हँसने की आवाज़ें आ रही थीं

"चोद डाल मुझे रघू बेटे, और ज़ोर से चोद अपनी मालकिन की चूत, 
मंजू अपने बेटे को कह की मुझा पर दया ना करे, हचक हचक कर मुझे चोद डाले हफ़्ता होने को आया यह बदमाश गायब था, मैं तो तरस कर रह गयी इसके लंड को" अम्मा सिसकते हुए कह रही थी 

फिर मंजू की आवाज़ आई "बेटा, देखता क्या है, लगा ज़ोर का धक्का, चोद डाल साली को, देख कैसे रीरिया रही है? कमर तोड दे इस हरामन की, पर झडाना नहीं जब तक मैं ना कहूँ मन भर कर चुदने दे, कबकी प्यासी है तेरी मालकिन तेरे लौडे के लिए!" अम्मा और रघू को और उत्तेजित करने को मंजू गंदे गंदे शब्दों और गालियों का प्रयोग जान बुझ कर रही थी शायद!

मैंने दरवाजे के छेद से अंदर देखा उपर की बत्ती जल रही थी इसलिए सब साफ दिख रहा था माँ मादरजात नंगी बिस्तर पर लेटी थी और रघू उसपर चढा हुआ उसे घचाघाच चोद रहा था मैं बाजू से देख रहा था इसलिए अम्मा की बुर तो मुझे नहीं दिखी पर रघूका मोटा लंबा लंड सपासाप माँ की गोरी गोरी जांघों के अंदर बाहर होता हुआ मुझे दिख रहा था

मंजू भी पूरी नंगी होकर माँ के सिरहाने बैठ कर उसके स्तन दबा रही थी क्या मोटी चुचियां थीं माँ की और ये बड़े काले निपल! बीच बीच मे झुक कर मंजुबाई अम्मा के होंठ चूम लेती थी रघू ऐसा कस कर मेरी माँ को चोद रहा था कि जैसे खाट तोड देगा खाट भी चर्ऱ मर्ऱ चर्ऱ मर्ऱ चरमरा रही थी 

मेरी माँ को चोदते चोदते रघू बोला "मांजी, कभी गान्ड भी मरवाइए बहुत मज़ा आएगा"
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09-18-2017, 12:01 PM,
#7
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
माँ सिसकती हुई बोली "हाँ रे चोदू, तुझे तो मज़ा आएगा पर मेरी फट जाएगी आज तक नहीं मरवाई मैंने अब तुझसे मराउ? मैं नहीं मरवाती गान्ड इतने मोटे लंड से"

मंजू बोली "नहीं फटेगी मालकिन घर का मख्खन लगा कर प्यार से मारेगा मेरा बेटा आसानी से फिसलेगा मेरी भी गान्ड मारता है यह हरामी, बहुत मज़ा आता है अब मेरी गान्ड चुद चुद कर फुकला हो गयी है, मेरे बेटे को भी किसी नयी तंग गान्ड का मज़ा लेने दो"

अम्मा अब हाथ पैर फेंक रही थी "चोद रघू, चोद डाल मुझे राजा, मंजू बाई, मेरी चूची दबा और ज़ोर से मुझे चुम्मा दे दे मेरी जान!"

"बहुत चिचिया रही है यह रंडी इसका मुँह बंद करना पड़ेगा" कहकर मंजू माँ के मुँह पर चढ कर बैठ गयी अपनी चूत माँ के मुँह पर रख कर उसने अम्मा की बोलती बंद कर दी और फिर जांघें आपस मे कस कर माँ का सिर अपनी जांघों मे दबा लिया फिर उचक उचक कर माँ की मुँह चोदने लगी
यहा नज़ारा देख कर मुझसे नहीं रहा गया मुँह से आवाज़ ना निकले ऐसी कोशिश करता हुआ अपने लंड को मैं रगड रगड कर अंदर चल रही धुआँधार चुदाई देखने लगा मंजू माँ का सिर कस कर अपनी बुर पर दबा कर उपर नीचे उछल रही थी दोनों माँ बेटे मिलकर बहुत देर अम्मा को गूंधते रहे जब माँ झडने को आ जाती तब मम्जू बाई रघू को इशारा कर देती "रुक बेटे, लंड पेलना बंद कर, नहीं तो झड जाएगी ये साली चुदैल औरत बहुत दिन से मुझे कह रही थी कि रघू नहीं आया चोदने, तो आज ऐसा चोद कि दो दिन उठ ना सके"

दस मिनिट मे माँ की हालत बुरी हो गयी वह रो पडी मंजू की चूत मे दबे उसके मुँह से हल्की दबी चीखें निकल रही थीं उसे यह चुदासी सहन नहीं हो रही थी बिना झडे उस मीठी सूली पर लटके लटके वह अब बुरी तरह तडप रही थी मंजू खुद शायद एक दो बार अम्मा के मुँह मे झड चुकी थी 

माँ के सिर पर से उतर कर वह लेट गयी और अम्मा के चुंबन लेने लगी "पसंद आया अपनी नौकरानी की बुर का रस मालकिन? रघू से चुदते चुदते तो यह और मसालेदार लगा होगा आपको" 

माँ कुछ कहने की स्थिति मे नहीं थी बस सिसकती जा रही थी माँ की चरम सुख की इस स्थिति मे मौका देखकर मंजुने मेरी बात आगे छेडी "मालकिन, मैं कह रही थी की कल से रघू मुन्ना को स्कूल छोड़ आया करेगा और ले भी आएगा आते आते मेरे पास छोड़ दिया करेगा"

माँ सिर इधर उधर फेकते हुए हाथ पैर पटकते हुए बोली "तुम दोनों क्या करोगे मेरे बच्चे के साथ मुझे मालूम है, हाय मैं मरी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, रघू दया कर, चोद डाल रे बेटे, मत तडपा अब"हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

रघू माँ की चूत मे लंड पेलता हुआ बोला "बहुत प्यार करेंगे मुन्ना को मांजी, उसे भी सब काम क्रीडा सिखा कर आपके कदमों मे ला कर पटक देंगे फिर आप दिन भर उस बच्चे के साथ मस्ती करना"

माँ को बात शायद जच रही थी क्योंकि उसने कुछ नहीं कहा मंजू ने माँ के निपल मसलते हुए कहा "अरे अभी से उसे चुदाई के खेल मे लगा दिया तो दो साल मे लंड भी बड़ा हो जाएगा उसका रघू को देखो, जब से लंड खड़ा होने लगा, तब से चोद रहा है मुझे बदमाश अब देखो कैसा घोड़े जैसा लौडा हो गया है उसका"

माँ आख़िर तैयार हो गयी "ठीक है रघू, कल से तेरे और मंजू के सुपुर्द किया मैंने मुन्ने को, हाइईईईईईईईईईईई य्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, मैं मरती क्यों नहीं? चोद चोद कर मार डाल मुझे मेरे राजा" मस्ती मे पागल होकर अम्मा बोली

मंजू खुश हो गयी रघू को बोली "रघू बेटे, कल से ही शुरू हो जा मैं कहती थी ना कि मालकिन मान जाएँगी! आख़िर अपने बेटे को भी तो पक्का चोदू बनाना है इन्हें तू अब चोद डाल बेटे ऐसे चोद अपनी मालकिन को कि वह सीधे इंद्रलोक पहुँच जाए"
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09-18-2017, 12:01 PM,
#8
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
माँ के होंठों पर अपना मुँह जमाकर मंजू अम्मा का मुँह चूसने लगी और रघू अब अम्मा को ऐसी बेरहमी से चोदने लगा जैसे घोडा घोडी को चोदता है मुझसे अब ना रहा गया मैं वहाँ से भागा और कमरे मे आकर सटासट मुठ्ठ मारी झडा तो इतनी ज़ोर से कि वीर्य सीधा छह फुट दूर सामने की दीवार पर लगा आज का वह कामुक नज़ारा मेरे लिए स्वर्ग का नज़ारा था

मैं फिर जाकर आगे की चुदाई देखना चाहता था पर इतने मीठे स्खलन के बाद कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही नहीं चला

दूसरे दिन माँ बहुत तृप्त दिख रही थी चलते चलते थोड़े पैर अलग फैला कर चल रही थी मैं स्कूल के लिए तैयार हुआ और जाने लगा तो माँ ने मुझे बुलाया "अनिल बेटे, आज से रघू तुझे साइकिल पर पहुँचा दिया करेगा"

मैं थोड़ा डरा हुआ था काफ़ी सोचने के बाद मुझे कुछ अंदाज़ा होने चला था कि रघू की मुझ मे इतनी दिलचस्पी क्यों थी और उन माँ बेटे ने मिल कर क्यों माँ से अपनी बात कल रात मनवा ली थी रघू की कल की बातें याद करके मैं आनाकानी करने लगा मन ही मन लग रहा था कि रघू ना जाने मेरे साथ क्या क्या करे वैसे माँ को चोदता हुआ उसका लंड मुझे बड़ा प्यारा लगा था एक बार ऐसा भी लगा था कि उसे चूम लूँ

माँ ने मेरी एक ना सुनी वह कामसुख मे पागल थी और मंजू को वचन दे चुकी थी नाराज़ हो कर उसने सीधे मुझे एक तमाचा लगा दिया और डाँट कर बोली "अब मार खाएगा बुरी तरह! चुपचाप रघू के साथ जा और वह जो कहे वैसा कर"

मैं रुआंसा रघू के साथ हो लिया रघू मेरे गाल सहला कर प्यार से बोला "माँ के तमाचे का बुरा नहीं मानते मुन्ना, तू घबराता क्यों है? मैं दुश्मन थोड़े ही हूँ तुम्हारा! बहुत प्यार से स्कूल ले जाऊन्गा अम्मा जानती हैं कि मैं तुझ से कितना प्यार करता हूँ मेरी अम्मा भी बहुत चाहती है तुझे"

मैं कहने वाला था कि मालूम है कैसे तुम दोनों मुझे चाहते हो पर चुप रहा डर के साथ मैं उत्सुक भी था कि अब क्या होगा! आख़िर मैं अपनी रंडी माँ का बेटा जो था उसी का कामुक स्वाभाव मुझे विरासत मे मिला था

मैंने कहा "रघू दादा, अभी तो एक घंटा है स्कूल शुरू होने मे! इतनी जल्दी जा कर मैं क्या करूँगा?" 

वह हँस दिया "चलो तो मुन्ना, मज़ा करेंगे, थोड़ी जंगल की सैर कराते हैं तुझे"

रघू ने मेरा बस्ता कैरियर पर लगाया और मुझे साइकिल पर आगे डन्डे पर बिठाकर चल दिया आज वह बहुत मूड मे था और गुनगुना रहा था बार बार झुककर मेरे बालों को चूम लेता था स्कूल जाते समय एक घना जंगल पड़ता था वहाँ वह एक सुनसान जगह पर रुक गया और साइकिल से उतरकर धकेलता हुआ जंगल के अंदर घनी झाड़ी के पीछे ले गया साइकिल खडी करके उसने मुझे उतरने को कहा फिर उसने चादर बिछाई और मुझे उसपर बिठाकर खुद मेरे पास बैठ गया "आओ मुन्ना थोड़े यहाँ छाँव मे बैठकर गपशप करते हैं 
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09-18-2017, 12:02 PM,
#9
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
मैंने देखा कि उसकी धोती मे एक बड़ा तम्बू बन गया था रघू का लंड कस कर खड़ा था रघू मेरी ओर बड़े प्यार से देख रहा था मुझे देखते हुए उसने अपना हाथ धोती के उपर से ही अपने लौडे पर रखा और उसे सहलाने लगा

मैं अब घबरा गया था था पर एक अजीब अनकही चाहत से मेरा मन भर गया था मैंने पूछा "हम यहाँ क्यों रुके हैं रघू? और तुम ये क्या कर रहे हो?" उसने कोई जवाब नहीं दिया और अचानक मुझे अपनी गोद मे खींचकर मेरे गाल चूमने लगा

"यह क्या कर रहे हो रघू दादा? छोडो ना" मैं घबरा कर चिल्लाया पर उसने मेरे मुँह को अपने मुँह से बंद कर दिया और हाफपैंट के उपर से ही मेरे शिश्न पर हाथ फेरने लगा मुझे अजीब सा लग रहा था और मैं कल की देखी और सुनी बातों को याद करके घबरा भी रहा था उसके चंगुल से छूटने को मैं हाथ पैर फटकारने लगा रघू के सशक्त बाहुपाश के आगे मेरी क्या चलने वाली थी? मेरे होंठों को अपने होंठों मे दबा कर चूसते हुए मुझे बाँहों मे भींचकर वह मेरे लंड को सहलाता रहा उसके हाथ ने ऐसा जादू किया कि मेरा लंड कुछ ही देर मे तन कर खड़ा हो गया


मुझे मज़ा आने लगा और मैंने छूटने की कोशिश करना बंद कर दिया रघूका चूमना भी मुझे अच्छा लगा रहा था उसके कुछ खुरदरे होंठ मुझे बहुत उत्तेजित कर रहे थे मैंने अचानक पूरा समर्पण कर दिया और आँखें बंद करके उसके प्यार का मज़ा लेने लगा मेरे ढीले पड़े बदन को और जोरों से बाँहों मे भींच कर वह अब मेरे होंठों को ज़ोर से चूसने लगा साथ ही उसने मेरी हाफपैंट की ज़िप खोलकर उसमे से मेरा लंड निकाल लिया और उसे कस कर पकड़ लिया 

कुछ देर बाद मुझे चूमना बंद करके रघू बोला "मज़ा आ रहा है मुन्ना?" मैंने मूंडी हिलाई तो खुश होकर बोला "मैं कह रहा था मुन्ना घबरा मत अपने राजा मुन्ना को मैं बहुत प्यार करूँगा, खूब सुख दूँगा अब देख और मज़ा आएगा, बस चुपचाप बैठे रहो" 

मुझे नीचे चादर पर लिटा कर वह मेरे लंड को हाथ मे लेकर मुठियाने लगा उसकी आँखें ऐसी उसपर लगी थीं कि जैसे लंड नहीं, कोई मिठाई हो अचानक वह झुका और उंगली से मेरे सुपाडे पर की चमडी नीचे कर दी "हाय मुन्ना, सुपाडा है या रेशमी अंगूर का दाना है रे? क्या चीज़ है मेरे मालिक!" कहकर वह उसे चाटने लगा
मुझे बड़ा अच्छा लगा पर उसकी खुरदरी जीभ का स्पर्श मुझे अपने नंगे सुपाडे पर सहना नहीं हो रहा था "रघू छोड़, कैसा तो भी लगता है" उसके सिर के बाल पकडकर हटाने की कोशिश करता हुआ मैं बोला 

रघू ने सिर उठाया और हँस कर बोला "अब तो तेरा लंड चूसकर ही उठुंगा मैं मुन्ना राजा ऐसी चीज़ कोई छोडता है? मलाई है मलाई" फिर अपना मुँह खोल कर उसने मेरा पूरा लंड निगल लिया और चूसने लगा मैं सिहर उठा इतना सुख मुझे कभी नहीं मिला था, माँ की ब्रेसियार मे मुठ्ठ मारते हुए भी नहीं

एक दो बार रघू के बाल पकडकर मैंने उसका सिर हटाने की कोशिश की और फिर आख़िर अपने चूतड उछाल कर उसका मुँह चोदने की कोशिश करने लगा मेरी जांघों को सहलाते हुए रघू ने चूसना मेरा लंड जारी रखा अपनी जीभ से वह इतने प्यार से मेरा शिश्न रगड रहा था कि मैं कसमसा कर झड गया 
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09-18-2017, 12:02 PM,
#10
RE: Village Sex Kahani गाँव मे मस्ती
रघू ने मेरा लंड ऐसे चूसा जैसे कुलफी चूस रहा हो आँखें बंद करके उसने चटखारे ले लेकर मेरा वीर्य निगला जब आखरी बूँद मेरे लंड से निचुड गयी तो वह उठ बैठा मैं लस्त हो गया था बहुत मज़ा आया था 

"मेरा लौडा देखेगा राजा" रघू ने बड़े लाड से पूछा मैं शरमा गया पर मूंडी हिलाकर हाँ कर दी रघू ने अपनी धोती एक तरफ से उठाई और अपना लौडा बाहर निकाल कर हाथ मे ले लिया "मुन्ना, मस्त मलाई थी तेरी अब रोज खिलाएगा ना? ले, मैं भी अब तुझे गाढी रबडी खिलाता हुँ, ऐसा स्वाद तुझे कभी नहीं मिला होगा तेरी अम्मा तो दीवानी है इसकी"

मैं उस हलब्बी लंड को देखकर काँप उठा मन मे भय और कामना की एक मिली जुली टीस उठने लगी कल माँ की चूत मे रघू का लंड अंदर बाहर होता मैंने देखा था पर आज पास से उसकी साइज़ देखी तो मानों लकवा मार गया बहुत अच्छा भी लगा गोरा गोरा लंड एकदमा मांसल और कड़ा था बड़ी बड़ी नसें उभरी हुई थीं सुपाडा नंगा था और उसकी गुलाबी चमडी तन कर रेशम की तरह पतली और चिकनी लग रही थी मुझे लगा था कि लंड की जड मे घनी काली झान्टे होंगीं पर उसका पेट एकदमा चिकना और सपाट था गोटियाँ भी चिकनी थीं

"अरे काटेगा नहीं, हाथ मे तो ले! ज़रा खेल उससे खुद के लौडे से खेलता है कि नहीं मुठ्ठ मारने के पहले?" रघू ने मुझे पुचकार कर कहा अब तक मैं अपना डर भूल कर तैश मे आ गया था मैंने धीरे से उस थिरकते लंड को हथेली मे पकड़ा और हिलाया फिर दूसरे हाथ की हथेली भी उसके डंडे के इर्द गिर्द जकड ली दोनों हाथों की मुठ्ठियो से भी वह आधा भी नहीं ढका था

"बाप रे रघू दादा, कितना मोटा और लंबा है? अम्मा और मंजू बाई कैसे लेती हैं इसे अपनी चूत मे? और झान्टे भी नहीं हैं" मेरे मुँह से निकल गया

"तूने देखा है क्या अपनी अम्मा को मुझसे चुदते?" रघू बोला मेरे चेहरे पर उमड आए शरम के भाव देखकर मेरे गाल दबाता हुआ बोला "अच्छा हुआ जो देख लिया मज़ा आया? मेरी अम्मा और तुम्हारी माँ, दोनों महा चुदैल रंडिया हैं मुन्ना अरे ऐसे लंड लेती हैं अपने भोसडो मे कि जैसे साली जनम जनम की प्यासी हों मैं तो घंटों चोदता हूँ दोनों छिनालों को साली मेरा ही क्या, घोड़े का भी लंड ले लें, इतनी गहरी चूत है उनकी"

मैं अब मस्ती मे रघू का लंड दबा और हिला रहा था "कितना प्यारा और चिकना लगता है तेरा लंड एकदमा सॉफ भी है! कितना लंबा है बता ना?" कहते हुए ना रहकर मैंने उसे चूम लिया फिर शरमा गया 

रघू खुश हो गया "ये बात हुई मुन्ना, अरे तेरे लिए ये लंड कब से खड़ा है दस इंच का है पूरा नाप ले तेरी स्केल से" उसके कहने पर मैंने बस्ते से स्केल निकाली और नापा सच मे दस इंच लंबा और अढाई इंच मोटा था सुपाडा तो तीन इंच मोटा था! 

रघू आगे बोला "मैं रोज शेव करता हूँ अम्मा को ऐसा चिकना बिना बाल का लंड बहुत अच्छा लगता है पर उसकी खुद की ये लंबी झान्टे हैं साली बदमाश है कहती है कि चूत चूसते समय झांटें मुँह मे जाएँ तो ज़्यादा मज़ा आता है पर मेरा लौडा चूसते हुए एक भी बाल मुँह मे जाए, उसे अच्छा नहीं लगता चल, तू अब नखरा ना कर तुझे मेरा लौडा पसंद आया ये मुझे मालूम है अब चूस डाल" कहते हुए उसने मुझे अपने पास खींचा और मेरा सिर अपनी गोद मे दबा दिया लंड मे से सौंधी सौंधी मद जैसी खुशबू आ रही थी
"मुँह खोल और ले सुपाडा मुँह मे लड्डू जैसे" उसके कहने पर मैंने उसका सुपाडा मुँह मे ले लिया और चूसने लगा मुझे पूरा मुँह खोलना पड़ा तब जाकर वह सुपाडा मुँह मे आया मुँह ऐसा भर गया था जैसे बड़ा मगज़ का लड्डू एक साथ मुँह मे भर लिया हो मेरा सारा डर गायब हो गया था बहुत मज़ा आ रहा था मैं उस नरम चमडी पर जीभ फेरते हुए मज़ा ले लेकर रघू का लौडा चूसने लगा

रघू मेरे बालों मे उंगलियाँ चलाते हुए बोला "हाय मुन्ना, मस्त चूसता है रे तू राजा बाद मे तुझे पूरा लौडा जड तक निगलाना सीखा दूँगा बहुत मज़ा आएगा तू मेरा लौडा लेना भी सीख लेना बहुत प्यार से दूँगा तुझे लौडा देने और लेने मे मुझे मज़ा आता है मेरी माँ तो रोज मेरा लेती है, आगे से भी और पीछे से भी मालकिन ने पिछले दरवाजे से नहीं लिया अब तक डरती है शायद तू ले ले एक बार तो मैं कहूँगा कि लो, आपके कमसिन छोकरे ने भी मेरा ले लिया, अब क्यों डरती हैं? या पहले वी तेरा छोटा लौडा ले लें, फिर मैं उन्हें प्यार से बड़ा दे दूँगा पिछवाड़े से"

मुझे लौडा देने की बात से मैं थोड़ा घबराया उसका इशारा मेरी गान्ड मे लंड देने का था यह मैं समझ गया पर लंड चूसने मे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं चुपचाप चूसता रहा

आधे घंटे हमने खूब मज़ा किया बीच मे रघू ने मेरे मुँह से लंड निकाल लिया और मुझे गोद मे लेकर खूब चूमा मेरी जीभ चुसी और अपनी चुसवाई मेरा लंड भी फिर खड़ा हो गया था और रघू उसे प्यार से सहला सहला कर मस्त कर रहा था
"अपनी चिकनी गान्ड तो दिखा मुन्ना" कहकर रघू ने एकाएक मेरी पैंट उतार दी मैं घबरा गया मुझे लगा रहा था कि शायद वह वहीं मेरी गान्ड मारेगा मेरी कातर आँखों मे उतर आए डर को देखकर उसने मुझे समझाया "डर मत राजा ऐसे थोड़े मारूँगा तेरी जल्दी मे मज़े ले लेकर मारूँगा मख्खन भी लगाना पड़ेगा जिससे सट से घुस जाए तेरे चूतडो के बीच मेरी माँ के सामने मारूँगा वह रहेगी तो तुझे संभाल लेगी उसे बड़ी आस है अपनी मालकिन के छोरे की गान्ड अपने बेटे से चुदते देखने की अभी बस मुझे तेरी गान्ड देखनी है रे राजा"
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