मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - Printable Version

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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 104





जूली की इतनी सेक्सी बातें सुनकर मेरे पर तो ज्यादा असर नहीं हुआ ....

पर शायद लगता है कि पिंकी कुछ ज्यादा ही उत्त्सुक दिख रही थी ....



अब मुझे सब कुछ सम्भालना था ...



उसको बड़े आराम से ही सब कुछ बताना था ....



उसकी आँखों में मेरे लिए इस समय केवल सीम्पेथी ही नजर आ रही थी ...



वो अभी केवल इतना ही समझ रही थी कि जिस पति को अपनी पत्नी की बेवफाई के बारे में पता चले तो उस पर क्या गुजरती है ....



अब मुझे उसकी वो सारी ग़लतफहमी दूर करनी थी ...और उसका दृष्टिकोण बदलना था ....



पिंकी : ओह सर ये आपकी वाईफ थी न .....मुझे यास्मीन ने बताया था ...उनका नाम जूली ही है ना ....



अब फिर से मेरा माथा ठनका ...

यास्मीन ने इसको क्या क्या बताया ..???



मैं : हाँ यार मेरी प्यारी बीवी ही है ....क्या बताया यास्मीन ने तुमको ...इसके बारे में ...



पिंकी : बस इतना ही कि उनका नाम जूली है ...और बहुत मोर्डर्न हैं ...



मैं : हाँ यार बहुत मॉडर्न है वो ..अब तो तुम समझ ही गई होगी ....



पिंकी : छिइइइइइइइइइइइ कितनी गन्दी हैं वो ...ये सब भी कोई करता है क्या ..????????



मैं : हा हा हा हा वाह यार तुम भी क्या बात करती हो ??? अरे इसमें क्या हुआ ??????



पिंकी : क्यों आपको बुरा यही लगा ....वो ये सब ....



मैं : कमाल करती हो ..... इसमें बुरा क्या लगेगा ...अरे यार उसका जीवन है ....और जो उसको अच्छा लगता है ..उसको करने का पूरा हक़ है ....



पिंकी : मगर ऐसे ..ये तो गलत है न ....उनको आप जैसा इतना अच्छा पति मिला है ...फिर तो कुछ और नहीं .........



मैं : अरे यार किस पिछड़ी दुनिया में जी रही हो ...आजकल सब कुछ चलता है ....

अभी कुछ देर पहले हमने जो कुछ किया ..क्या वो सही था ....

अरे हम दोनों को अच्छा लगा तो किया ना .......



..................



पिंकी : ह्म्म्म्म्म्म पर मुझे अगर आप जैसा पति मिलता तो फिर तो कभी कुछ और नहीं सोचती ....



मैं : क्यों अभी क्या खराब मिला है ....अरे यार ये पति सिर्फ १-२ साल तक ही अच्छे लगते हैं फिर सब कुछ पुराना जैसा हो जाता है ....



पिंकी : जी नहीं मेरे साथ ऐसा नहीं है ....वो तो ...



मेरे लिए सेक्स ही सब कुछ नहीं है ...मुझे तो बस दिल से प्यार करने वाला और मुझे समझने वाला ही अच्छा लगता है .....



मैं : अरे तो क्या इसीलिए तुम मेरे साथ वो सब ....



पिंकी : जी हाँ मुझे आप बहुत अच्छे लगे ...तभी तो मैंने जूली जी के बारे में वो सब कहा ,,,,



मैं : अरे मेरी जान ऐसा कुछ नहीं है ....वो बहुत अच्छी है ...मुझे बहुत प्यार करती है ....और मैं भी उसको बहुत प्यार करता हूँ ....



पिंकी : फिर ये सब ..क्या आपको बिलकुल भी बुरा नहीं लगा ....



मैं : बिलकुल नहीं ....मैं ये सब केवल थोड़ा सा शारीरिक सुकून ही मानता हूँ ....

क्या किसी के साथ थोड़ा बहुत मस्ती करने से इंसान का कुछ घिस जाता है ...नहीं ना ...तो फिर कयके हल्ला ....



पिंकी : हाँ मगर हमारा ये समाज ....इसी को सब कुछ समझता है ...



मैं : अरे छोड़ो यार ये सब फ़ालतू की बातें ....कुछ नहीं रखा इनमे .....

सच बताओ ....हमने जो अभी किया ....मुझे पता है वो तुम्हारी नजरों में गलत है ....पर सच बताना तुमको अच्छा लगा या नहीं ....



उसने बहुत ही शरमाते हुए हाँ में जवाब दिया ....



मैं : फिर सब बात बेकार हैं ... अगर किसी बात से हमको ख़ुशी मिलती है ...और कुछ नुक्सान नहीं होता ...तो वो बात गलत हो ही नहीं सकती ...

मुझे नहीं लगता कि किसी भी मर्द को अगर कोई लड़की सेक्स का ऑफर दे तो वो मना कर दे ...

वो एक बार भी तुम्हारी तरह नहीं सोचेगा ...

जब उसका कुछ नहीं घिसता तो फिर यार तुम लड़कियों को क्यों चिंता होती है ...



इस बात पर हम दोनो बहुत तेज हसने लगते हैं .....



पिंकी : आप सच बहुत मजेदार बात करते हो ...आप बहुत अच्छे हैं ...



मैं : अच्छा पिंकी सच बताओ .... क्या तुम्हारे हस्बैंड तुको परेसान करते हैं ...



पिंकी : ना ऐसी कोई बात नहीं ...पर वो अच्छे इंसान नहीं हैं ...



..................





फिर मुझे लिजी कि याद आ गई ....



मैंने उसको फोन मिलाया ....



कुछ ही देर में उसने कॉल रिसीव कर लिया ....



मैं : हाँ जी लिजी जी क्या हो रहा है ....आपके ये कपडे ...इनका क्या करना है ..???



लिजी : ओहो जीजू ...व्व्वो ववो ...अह्हा 



वहां से बड़ी ही खतरनाक आवाजें आ रही थी ....



मैं : अरे क्या हुआ ....लगता है बहुत जरुरी काम चल रहा है ...हा हा 

मैं जानबूझकर हंसा ....



लिजी : अह्हा हा हाँ जीजू ...वो कुछ खुदाई का काम चल रहा है ....ऐसा करो ...अभी तो मैं कपडे पहन ही नहीं सकती ...आप उनको अपने पास ही रखो ...फिर कभी ले लुंगी ...



ओह ये लिजी तो सैतान की नानी निकली ...उसको कोई शरम नहीं थी ....



वो बड़ी आसानी से सब बात बोल जाती है ....



मैं भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहता ..



मैं : ठीक है डिअर फिर तुम खुदाई करवाओ ...मैं बाद में चेक कर लूंगा कि सही से हुई है या नहीं ....



लिजी : और अगर नहीं हुई होगी तो क्या फिर आप भी सही से करोगे ....हा हा आःह्हाआआ 



मैं : वो तो देखने के बाद ही पता चलेगा ....ओके बाई..



और उसने भी फोन रख दिया ....



मैं काफी थक गया था ....इसलिए जल्दी से घर पहुंचा ...



वहां जूली और अनु किचन में काम करने में व्यस्त थे .... 



......................



अनु को देखकर मैं बहुत खुश हुआ ....



वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ....

उसने सफ़ेद लांचा और कुर्ती पहनी थी ...लांचा पर नीले रंग के चमकदार फूल थे ....



मुझे देखकर दोनों ही बहुत खुश हुए ....



जूली : अरे आ गए आप ...चलो अच्छा हुआ ...



जूली भी क़यामत लग रही थी ...उसने नै प्रिंटेड साडी पहनी हुई थी ....

मुझे नहीं पता की उसने खुद पहनी या अंकल ने हेल्प की ...

मगर साडी बहुत ही फैशनेबल स्टाइल में बंधी हुई थी ...

उसका ब्लाउज भी बहुत ही मॉडर्न था ...कुल मिलाकर जूली क़यामत लग रही थी ...,



मैं : हाँ यार आज बहुत थक गया हूँ ....क्या हुआ ...?? कहीं जा रही हो क्या .???



मैंने जानबूझकर थकान के लिए कहा ...कि वो कहीं जाने को ना कह दे ....



जूली : अरे नहीं बस वो मेहता जी कि बेटी कि शादी है ना तो उन्ही के यहाँ आज महिला संगीत है ...मैंने सोचा अनु को भी ले जाती हूँ ...



मैं : ठीक किया ....



जूली : पर अब आपका चाय नास्ता लगा दूँ क्या ????



मैं : नहीं यार अभी तो नहीं ....पहले तो में फ्रेश होऊंगा ...कोई नहीं ..तुम चली जाओ ...मैं खुद कर लूंगा ...



.जूली : अरे नहीं ...कोई बात नहीं कुछ देर बाद चली जाउंगी ...



तभी रंजू भाभी भी आवाज देने आ गई ....



मैं : अरे तुम लोग चले जाओ ना ....



अनु : दीदी आप चले जाओ ...मैं काम निबटाकर आ जाउंगी ....



मेरी आँखों में चमक आ गई ....फिर भी मैंने कहा ...



मैं : अरे नहीं अनु तू भी चली जा ...मैं मैनेज कर लूंगा ...



जूली : अरे नहीं ठीक ही तो कह रही है ...आप खुद कैसे करोगे ...कभी कुछ किया भी है ...

ये बाद में आ जाएगी ...

सुन अनु सही से सब कुछ करके आ जाना ...



मैं सोच रहा था ...कि क्या यार कितने प्यार से सब समझाकर जा रही है ....



और वो दोनों चले गए .....



अब मैं और अनु दोनों ही घर पर अकेले थे ...



मैंने मुस्कुराकर अनु की ओर देखा ....



वो भी मुस्कुरा रही थी ....


........




RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

जूली जाते हुए अनु को बहुत प्यार से समझा रही थी ..उसके चेहरे पर रहस्मई मुस्कान भी थी ....

वो अनु को बोल गई थी कि......
सुन अनु सही से सब कुछ करके आ जाना ...

मैं बस यही .सोच रहा था ...कि क्या यार कितने प्यार से सब समझाकर जा रही है ....

जब वो दोनों चले गए .....

तब मैं और अनु दोनों ही घर पर अकेले थे ...

मैंने मुस्कुराकर अनु की ओर देखा ....

वो भी मुस्कुरा रही थी ....

मैंने अनु से दरवाजा सही से बंद करने को कहा ...और फ्रेश होने के लिए बेडरूम में आ गया ....

अपनी आदत के अनुसार मैंने अपने सभी कपडे उतार दिए ...
सूज,कोट, पेंट, शर्ट, टाई आदि ...
मैं अपना अंडरवियर उतार रहा था ..तभी अनु ने कमरे में प्रवेश किया ....

अनु की छोटी सी बुर के बारे में सोचकर मेरा लण्ड पहले से ही जोश में आ गया था ...

वैसे भी आज पूरे दिन वेचारा खड़ा रहा था ...उसको डिश तो बहुत मिली थीं पर खा नहीं पाया था ....

मैंने सोच लिया था कि आज इस अनु को तस्सल्ली के साथ खूब चोदूंगा ...

मुझे अब जूली की भी कोई परवाह यही थी ...मुझे पता था कि उसको सब पता तो है ही ...
और वो खुद उसको मस्ती के लिए ही छोड़ कर गई है ...

मुझे नंगा देखकर अनु हसने लगी ...

अनु : हा हा....... ये क्या भैया ..... अंदर जाकर नहीं उतार सकते थे ...

मैंने अंडरवियर उतारकर एक ओर फेंका और अनु को अपनी बाँहों में कसकर जकड लिया ...

मैं : अच्छा इतना ज्यादा इतरा मत ...तू आज इतनी सुन्दर लग रही है ...कि ....अब तो बस चोदने का ही मन कर रहा है .....

अनु : हाय भैया ...कितना गंदा बोल रहे हैं आप ...

मैं : जब गन्दा कर सकते हैं ..तो बोल क्यों नहीं सकते ...


.............

अनु : आप और दीदी बिलकुल एक सा ही बोलते हो ..वो भी यही सब कहती है ....
आअह्ह्ह्हाआआआ धीरे से ना .....

मैंने उसकी छोटे अमरुद जैसी चूची को कस कर उमेठ दिया था ...

मैं : हाँ जब अंदर डालूँगा एब बोलेगी तेज और अभी धीरे बोल रही है ...हा हा 
मैंने उसकी दोनों चूची को एक साथ मसलते हुए ही कहा ...

अनु : ओह दर्द हो रहा है ना भैया ...

मैं : अरे चिंता मत कर मेरी जान ....तेरा सारा दर्द पी जाऊंगा ....

कुर्ती के ऊपर से साफ़ पता चल रहा था ..कि उसने नीचे कुछ नहीं पहना ....

लेकिन उसके चूची के निप्पल अभी इतने बड़े नहीं हुए थे कि कुर्ती के ऊपर से दिखते ...
थोड़े से उभार ही दिखाई देते थे ....

उसकी चूचियों को सहलाते हुए ही ....अनु कि कोमल सी गुलाबी बुर मेरे दिमाग में छा गई ....
बहुत प्यारी थी उसकी छोटी सी बुर ...जिसमे उसने अभी ऊँगली तक नहीं डाली थी ...

उस दिन मैं कितना खेला था इस बुर के साथ ...पर चोद नहीं पाया था ....
खूब चाटा था ....और मेरा लण्ड तो उसके अंदर तक झांक आया था ...
ये सोचकर ही लण्ड का बुरा हाल था ...और वो मस्ताने की तरह तनकर ...अनु के लांचे को खोदने में लगा था ...

वो तो निशाना सही नहीं था .,..वरना अब तक तो लांचे के साथ ही उसकी बुर में चला जाता ....

अनु की बुर थी ही ऐसी ....अभी तक तो सही से उस पर हल्का हल्का रोआँ भी सही से आना सुरु नहीं हुआ था ....

जूली के बाद मुझे अगर किसी की चूत पसंद आई थी तो वो अनु की ही थी ....
बिलकुल मख्खन की टिक्की की तरह ...

उसकी चूत की याद आते ही मैंने अनु को बिस्तर के किनारे पर ही पीछे को लिटा दिया ....

मैं सीयोर था कि अनु ने लांचे के अंदर कच्छी भी नहीं पहनी होगी ...
आखिर वो जूली से ही सब सीख रही है ...जब जूली नहीं पहनती तो इसने भी नहीं पहनी होगी ...

मैंने अनु के लांचे को उठाते हुए उसके कोमल पैरों को सहलाया और चूमा ...

अनु लरज रही थी ...बल खा रही थी ...कसमसा रही थी ....
उसको पूरा मजा आ रहा था .....

....................

लेकिन अनु बहुत बेसब्र थी ...इस उम्र में ऐसा होता भी है ....वो चाहती थी कि एक दम से ही उसकी चूत में लण्ड डाल दूँ .....
उसको धीरे धीरे वाला प्यार पसंद नहीं आ रहा था ....
ये उसकी बेसब्री ही थी ..जो मेरे द्वारा धीरे धीरे लांचा उठाने से बो तुरंत बोली ...

अनु : ओह भैया ....लांचा ख़राब हो जायेगा ...इसको उतार देती हूँ ...

मुझे हंसी आ गई ....

मैं : अरे होने दे ख़राब ...और आ जायेगा ...

अनु : अह्ह्हाआआआ पर ...दीदी ...को पता चल जायेगा ....

मैं : हा हा ....क्या पता चल जायेगा ....??

अनु : अह्ह्ह हाह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआ यही ना ओह भैया .....आप भी नाआआआ ...आह्ह्हा 

और मैंने उसके लांचे को पूरा उठाकर उसके पेट पर रख दिया ....

अनु कि चिकनी जांघो के अंदर वाले हिस्से को चूमते हुए ही मेरे होंठ सीधे उसकी बुर के ऊपर थे ....

अर्र्र्र्र्र्र रे ये क्या .....???

मेरा अनुमान यहाँ बिलकुल गलत निकला ....

अनु ने को कच्छी पहनी थी ....
हलके आसमानी रंग की ,,, जिस पर पीले इस्माइली बने थे ....
एक इस्माइली ठीक उसके बुर के ऊपर था ....
जो बहुत सुन्दर लग रहा था ....

मैंने कच्छी के ऊपर से ही उसकी बुर को सहलाते हुए पूछा ....

मैं : अरे ये क्या ??????? तूने आज कच्छी पहनी है ...तेरी दीदी ने तो नहीं पहनाई होगी ....

वो लाल आँखे लिए मुझे मुस्कुराकर देख रही थी ...

अनु : हाँ ..दीदी तो मना कर रही थी ...पर मुझे शरम आ रही थी ...इसलिए पहन ली ...

मैं : और तेरी दीदी ने पहनी या वो ऐसे ही गई है ...

अनु : वो कहाँ पहनती हैं ...वो तो ऐसे ही गई हैं ...
मैंने तो उन अंकल की वजह से पहन ली ....मुझे उनसे शरम आ रही थी ...

...................मैं तुरंत समझ गया ....तिवारी अंकल ही होंगे ...इसका मतलब उन्होंने ही जूली को तैयार किया होगा ...

मैं : इसका मतलब तुम दोनों अंकल के सामने ऐसे ही घूम रहे थे ...

अनु ने कोई जवाब नहीं दिया ....

मैं : तो अंकल ने तुझे कच्छी में देख लिया ....

अनु : अरे उन्होंने तो मुझे पूरा भी देख लिया ...ये दीदी भी ना ....

मैं उसकी बात सुन रहा था पर 
फिलहाल तो मुझे अनु का रस पीना था ....मैंने उसकी कच्छी की इलास्टिक में ऊँगली फंसाई और उसको नीचे सरकाना शुरू कर दिया ...

अनु ने भी अपने गोल मटोल चूतड़ों को उठाकर ...आराम से कच्छी को निकालने में पूरा सहयोग किया ...

मैंने उसकी कच्छी को उसके पैरों से निकालकर बेड के नीचे डाल दिया ...

अब उसका बेशकीमती खजाना ठीक मेरे आँखों के सामने था ....

उसकी बुर अनु के रंग के मुकाबले काफी गोरी थी ...इस समय बुर काफी लाल हो रही थी ....

मैं : क्याआआ तुम दोनों अंकल के सामने ही तैयार हुई ....और तेरी ये बुर भी क्या अंकल ने लाल की ....

अनु : अरे भैया ...मैं तो नह रही थी ....दीदी ने ही अंकल को अंदर भेज दिया ....फिर उन्होंने ही बहुत तेज रगड़ा था ....

मैं : ओह ..तो ये बात है ....फिर अंकल ने जूली के साथ क्या किया ....और क्या तेरे साथ कुछ ऐसा वैसा भी ????

अनु : नहीईईईईईईई न मेरे साथ नहीं ...मुझे तो बस नहलाया ही था ....पर दीदी को उन्होंने बहुत देर तक परेसान किया ...

मैं : परेसान मतलब ....क्या कुछ जबरदस्ती ....???

अनु : नहीं ...वो सब कुछ ही ना ....

मैं एक दम से उठकर बैठ गया ....

अनु : क्या हुआ ....?????

मैं : तू मुझसे इतना आधा आधा क्यों बोलती है ....पहले सब बात खुलकर मुझे बता ...
नहीं तो मैं तेरे से बिलकुल नहीं बोलूंगा ....

अनु बहुत ज्यादा हॉर्नी हो गई थी ....वो मेरी हर बात मानने को तैयार थी ....

उसने कसकर मुझे अपने पर झुका लिया ...

मैं भी अब उसको छोड तो सकता ही नहीं था ....

..............................
मैंने उसकी नाजुक बुर को सहलाते हुए ही पूछा ..????

मैं : देख अनु मैं तेरे से बहुत प्यार करता हूँ ...चल बता ..क्या-क्या किया उन्होंने तेरी जूली दीदी के साथ ....

सब कुछ अच्छी तरह से खुलकर बता ...

अनु : अह्हा बाद में ....भैया ...पहले तो ...यहाँ बहुत खुजली हो रही है ...

अनु बिलकुल बच्चे जैसा ही व्यबहार कर रही थी ...

उसने बड़ी मासूमियत से अपनी बुर को खुजाया ...

मैं उसकी मासूमियत देख उसका कायल हो गया ...

और उसकी बुर को सहलाते हुए चूम लिया ...

फिर मैंने कुछ देर तक उसकी चूत को चाटा ...
मैं अच्छी तरह जानता था कि ..कैसे उससे सब कुछ उगलवाना है ...

मैंने उसके लांचे की कोई परवाह नहीं की ...
मैं अनु को लांचे से साथ ही चोदना चाहता था ...

मैंने अनु को सही से बिस्तर के किनारे पर सेट किया ...
और उसके दोनों पैर घुटने से मोड़कर उसके पेट से लगा दिए ...

जैसे एक फूल की सारी कलियें ..बाहर को खिलती हैं ..ऐसे ही उसकी बुर की पुत्ती बाहर को हो गई ...

अनु की चूत के अंदर का लाल हिस्सा भी चमकने लगा ...

अनु की चूत और गांड दोनों के सुरमई द्वार बिलकुल साफ़ साफ़ दिख रहे थे .,..

पर मैं तो इस समय केवल चूत के छेद को ही देख रहा था ...मेरा ध्यान बिलकुल गांड की ओर नहीं था ...
अभी तो अनु की चूत भी गांड से भी ज्यादा टाइट थी ...फिर गांड के बारे में कौन सोचता ....???

मैंने बेड के किनारे रखा क्रीम का ट्यूब उठाया ..और अनु के बुर पर रख दबा दिया ...
ढेर सारी क्रीम वहां इकठ्ठी हो गई ...

मैंने ऊँगली की सहायता से उसकी बुर के अंदर तक क्रीम भर दी ...
उसकी बुर बहुत चिकनी हो गई थी ...

मेरे से भी रुकना अब बहुत मुस्किल था ...

मैंने अपने लण्ड का सुपारा उसकी बुर के छेद पर रखा ...
और हल्का सा ही दबाब दिया ....

मुझसे कहीं ज्यादा जल्दी अनु को थी ...
उसने अपने चूतड़ ऊपर को उचकाए ....और मेरा मोटा सुपाड़ा उसकी मक्खन की टिकिया को चीरते हुए ...
भाआककक्क्क्क्क्क्क की आवाज के साथ अंदर घुस गया ...

अनु : अहाआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआ नहीईइइइइइइइइइ 

????????????????????????




RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 106


आज मैं बहुत ही खुश था ....मेरी अपनी ही बीवी की मदद से मुझे आज इस कुआँरी कली से खेलने का मौका मिल रहा था ....

अनु जैसी छोटी और बंद चूतों का मैं दीवाना था ....जिनकी चूत पर अभी बाल भी निकलना शुरू नहीं हुआ हो ....

ऐसी चूत के कच्चे रस का पानी मेरे लण्ड को और भी ज्यादा मोटा कर देता था ....

ये शौक मुझे बचपन से ही लग गया था ....जब अपने साथ खेलने वाली छोटी छोटी बच्चियों की फ़ुद्दी को मैं देखता और सहलाता था ...

कॉन्वेंट और कोएड में पढ़ने के कारण बहुत सारी लड़कियां मेरी दोस्त थी ...
और वो सभी ही अच्छे घरों से थीं ...खूब गोरी और चिकनी ...
वो सब भी इस सबका बहुत मजा लेती थी ...

अपने इसी गंदे शौक के कारण मेरी अपने ही घर में काफी बेजय्यति भी हुई थी ....
मुझसे छोटी ३ बहिने हैं मुझे उनकी फ़ुद्दी से भी खेलने का शौक हो गया ....
और मैंने एक एक कर तीनो को ही पटा लिया था ...फिर एक दिन डैडी ने हमको रंगे हाथों पकड़ लिया ...

हम चारों ही नंगे होकर खेल रहे थे ....
पर मैं सबसे बड़ा था ....और मेरे खड़े लण्ड के कारण पूरी सजा मुझे ही मिली...
और बाकी की पढ़ाई मुझे बाहर हॉस्टल में रहकर ही करनी पड़ी थी ....

फिलहाल मुझे अनु के साथ वही मजा आ रहा था ...

अनु की बुर ....उसकी टांगें उठने से पूरी खुलकर सामने आ गई थी ....

मुझे लग रहा था कि मुझे अपना लण्ड उसकी बुर में प्रवेश कराने के लिए बहुत ही मेहनत करनी होगी ...

क्युकि उसकी बुर की दोनों पुत्ति आपस में बुरी तरह से चिपकी थी ...
उसकी बुर का छेद ..जिसमें लण्ड को प्रवेश होना था ...लाल भभूका हो रहा था ....इसीलिए दिख भी रहा था ...वरना उसका पता भी नहीं चलता ....

पर आश्चर्य जनक रूप से मेरे लण्ड वहां रखते ही ..जैसे ही मैंने हल्का का दबाब डाला ...मेरे लण्ड का अगला भाग ...जिसे सुपाड़ा कहते हैं ....भाअक्क्क्क्क की आवाज के साथ अंदर घुस गया ....

अनु : अह्ह्ह्हाआआआआआआ

बस एक जोर से सिसकारी ही ली अनु ने ...उसको शायद कोई ज्यादा दर्द नहीं हुआ था ....

ये इसीलिए हुआ होगा कि ...या तो अनु बहुत ही ज्यादा गरम हो गई थी ...
या फिर उसकी बुर में बहुत चिकनाई थी ...
जो उसने इतना मोटा सुपाड़ा ...आसानी से ले लिया था ...

पर हाँ ..........

उसने अपने चूतड़ को पीछे करना चाह......पर मैं उसके छोटे मगर कोमल से दोनों चूतड़ों के गोलाई को कसकर पकडे रहा ...

मैंने उसको हिलने तक का भी मौका नहीं दिया ...

मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी बुर में फंस गया था ....

उसको तकलीफ तो हो रही थी ...मगर ज्यादा नहीं ...ये मुझे पता लग गया था ...
इससे पहले भी मैंने कुआंरी बुर में लण्ड को डाला था ...इसलिए मुझे पूरा अनुभव था ....

मैं कुछ देर तक ऐसे ही लण्ड को उसकी बुर में फंसाये रहा ...

मैंने देखा वो अब खुद ही अपने चूतड़ों को उठाकर .. लण्ड को अंदर करने की कोशिश कर रही है ...

उसकी इस प्यारी सी हरकत पर मेरा दिल खुश हो गया ...

मैंने उसके चूतड़ों को कसकर पकड़....अपनी कमर को एक धक्का दिया ....

अनु : आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआआआआ

इस बार जरा जोर से सिसकारी ....क्युकि धक्का थोड़ा जोर से लग गया था ....

मेरा आधे से ज्यादा लण्ड उसकी कोमल सी बुर को चीरता हुआ अंदर चला गया था ....

और कमाल तो तब हो गया ....जब मेरा पूरा लण्ड अनु की बुर में बिना किसी रुकाबट के चला गया ...

अगले २ ही प्रयास में मैंने अपना पूरा लण्ड उसकी बुर में डाल दिया ....

अनु ने कोई ज्यादा विरोध नहीं किया ...उसने बहुत प्यार से मेरा पूरा लण्ड ग्रहण कर लिया ....

मैंने बहुत ध्यान से उसकी बुर में फंसे हुए अपने लण्ड को देखा ....
लण्ड बुरी तरह से जकड़ा हुआ था ...
उसकी बुर लाल सुर्ख हो रही थी ....मगर खून नकलने का कोई निसान नहीं था ...

मतलब उसकी बुर की झिल्ली पहले से ही फटी हुई थी ...अब ये पता नहीं की खेलकूद में फटी थी या किसी दूसरे के लण्ड ने कमाल दिखाया था ....

.....................

मुझे थोड़ा सा अफ़सोस तो हुआ ...मगर फिर भी बुर बहुत टाइट थी ...मेरा लण्ड टस से मस नहीं हो रहा था ...
मैं उसी का मजा लेने लगा ....

मैंने धीरे धीरे .....लण्ड को बाहर निकाला और फिर से अंदर कर दिया ...

मैं बहुत जरा सा ही लण्ड बाहर निकाल रहा था ....

अधिक से अधिक १ या २ इंच ....बस इसी तरह उसको चोदने लगा ...

कुछ ही देर में लण्ड ने वहां जगह बना ली ...और मेरा लण्ड आराम से अंदर बाहर होने लगा ....

अब कमरे में फच फच आवाज भी आ रही थी ....

अनु की बुर ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था ....

लण्ड इतना... फंसा फंसा... अंदर ...आ ... और जा रहा था कि ..मुझे जन्नत का मजा आ रहा था ....

अब मैंने अपनी स्पीड बहुत धीमी कर दी ...

मैं उसको बहुत देर तक आराम से चोदना चाहता था ...

मैंने उसके लांचे को ठीक से ऊपर को किया ...और आराम से लण्ड पेलने लगा ...

अनु मजे से सिसकारी ले रही थी ...

मैं : अह्हा ...हाँ तो अब ...अनु सच बता .... क्या किया तिवारी अंकल ने तेरी दीदी के साथ ...

अनु ने मस्त आँखों से मेरी ओर देखा ...अब वो भी इस चुदाई की अभ्यस्त हो गई थी ....

उसने सिसकारते हुए ही जवाब दिया ...

अनु : अह्हा अह्ह्ह हाँ ....अंकल ने दीदी के साथ यही सब किया था ....तभी से मेरा दिल भी कर रहा था ...
अह्हा अह्ह्ह्ह्ह्हाआआआआ

मैं : क्या उन्होंने तेरे सामने ही जूली को चोदा ...

अब मैं उसको जल्द से जल्द पूरी तरह खोलना चाह रहा था .........
इसीलिए अभी शब्द खुलकर बोलने लगा ...

अनु ने मुस्कुराकर मुझे देखा ....

अनु : हाँ ..मैं उनके सामने तो नहीं पर यहीं किचन में तो थी ही ...
अह्ह्ह अह्ह्ह्ह्हाआआ
उनको पता तो था ही ....
अह्हा अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ....

...................


और वो सब कुछ दरवाजा खोलकर ही कर रहे थे ...

मैंने एक कसकर धक्का लगाया ....

आह्ह्ह्हाआआआआआआआ ...वो भी तेजी से सिसकारी ...

मैं : अरे क्या कर रहे थे ...देख अगर तुझे हमेशा मुझसे मजे लेने हैं और ...मेरा प्यार चाहिए तो तुझे सब कुछ खुलकर बताना होगा ....
देख मुझे जूली के कुछ भी करने पर कोई ऐतराज नहीं है ...
बस मैं जानना चाहता हूँ की वो सब कुछ कैसे करती है ...
और तू इतनी छोटी भी नहीं है जो सब कुछ ना समझती हो ...
इसलिए सब कुछ खुलकर बता ...

मैंने बदस्तूर अपने धक्के एक ही स्पीड में चालू रखे ...


अनु भी अब मजे लेती हुई बहुत ही मजेदार तरीके से बताने लगी ..

उसके मुहं से आहों के साथ जूली की चुदाई की कहानी सुनने में बहुत मजा आ रहा था ...

अनु : अह्हा वो क्या है भैया ....अंकल ने दीदी को कपडे पहनाने के लिए उनके सभी कपडे उतार दिए ...वैसे भी उन्होंने केवल एक नाईटी ही पहनी थी ...
वो अंकल के सामने ऐसे ही नंगी घूम रही थी ...अंकल उनको बार बार छू रहे थे ....

मैं : और अंकल क्या पहने थे ...?? आह्ह्हा

अनु : अह्हा अह्हा उन्होंने केवल टॉवल ही बाँधा हुआ था ...क्युकि मुझे नहलाने के बाद उन्होंने कछ नहीं पहना था ...

मैं : मतलब तूने अंकल का लण्ड देख लिया था ...

अनु : अह्हा अह्ह्ह्हाआ हाँ वो तो बाथरूम में ही देख लिया था ....जब मुझे नहलाने के लिए उन्होंने अपना पायजामा खोल दिया था ...

मैं : तो उन्होंने तेरे साथ भी कुछ किया था ....

अनु : नहीं ..बस छुआ ही था ....

मैं : क्या तूने भी उनका लण्ड छुआ था ..???

अनु : अह्ह्हाआआ वैसे नहीं ....बस जब वो उसको मेरे से चिपकाते थे ...तभी उसको अपने से दूर करती थी ...

मैं : अच्छा छोड़ ये सब ..फिर बता क्या हुआ ...??

......................

अनु : अंकल दीदी को पकड़ बार बार अपना बम्बू उनके चूतड़ों में घुसा रहे थे ....
दीदी उनको मना तो कर रही थी ...मगर वो मान ही नहीं रहे थे ...
फिर दीदी ने मुझे किचन में काम करने भेज दिया ...
कुछ देर बाद जब मैं आई तो दीदी को यहाँ बेड के बराबर में खड़ा कर वो उनको चोद रहे थे ...

मैं : ओह तो तूने क्या देखा ..??? क्या उनका लण्ड जूली की चूत में था या वो पीछे से चूतड़ों में घुसाये हुए थे ...

अनु : अह्हा अह्ह्ह्हाआ मैंने पूरा देखा ...उनका बम्बू दीदी के आगे ही घुसा हुआ था ....
और दीदी पूरा मजा ले रही थी ...
अह्हा अह्ह्हाआआआ अहह अह्ह्हाआआआ
वो ये भी कह रही थी ...की जल्दी करो ..अंकल ये आते होंगे ....वो उनको बिलकुल मना नहीं कर रही थी ..
फिर उनका पानी भी निकला ..जैसे आपने उस रात मेरे ऊपर गिराया था ....
आह्ह अह्ह्हाआआआ अह्हा अह्हा

मैं : ओह्ह्ह तो तूने उनको डिस्चार्ज होते हुए भी देखा ...अह्हा मतलब वो तेरे से डर रहे थे ...इसीलिए तुझे वहां से हटाकर उन्होंने चुदाई की ....अह्हा

अनु : अरे नहीं भैया ...वो तो वैसे ही दीदी ने कहा होगा ...फिर दोनों नंगे ही किचन में पानी पीने आये ...
अंकल बार बार मेरे को भी छू रहे थे ...इसीलिए मैंने कच्छी पहन ली ....
अह्हा अहहः अह्हा

उसकी बातें सुनकर मुझे इतन मजा आया कि मैं तेजी से धक्के लगाने लगा ..
और कुह देर में ही मेरा निकलने वाला था ....

मैंने तेजी से लण्ड उसकी बुर से बाहर निकाल लिया ...

और उसके मुहं कि ओर ले गया ...

आश्चर्य जनक रूप से उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और मुठ मरने लगी ..जैसे ही उसमे से पानी निकला उसने अपना मुहं वहां रख दिया ...
उसने एक सेक्स की देवी जैसे ही मुझे मजा दिया ..
मेरे लण्ड को चाट चाट कर पूरा साफ कर दिया ...

मैं : अनु तूने पहले भी सेक्स किया है न ....

अनु : क्या भैया ????

मैं : हा हा ..अरे अब भैया तो मत बोल ना ....तूने मेरे साथ चुदाई कर ली ..फिर भी ....

अनु : तो क्या हुआ ....इससे क्या होता है ....

मैं : अच्छा ये बता पहले इसमें कोई ऐसे ही अपना लण्ड घुसाया है ...
मैंने उसकी बुर को कुरेदते हुए पूछा ...

अनु : हाँ मेरे पापा ही ...रोज रात को ...कुछ कुछ करते हैं ....

मुझे पहले से ही पता था ...साला बहुत ही हरामी था ..शराब पीकर जरूर इसको पेलता होगा ...मैं तो केवल छेड़खानी ही समझ रहा था ...मगर अब पता चला कि सुसरा सब कुछ ही करता है ....

मैं अभी अनु से उसके बारे में और कुछ भी पूछना चाह रहा था ...
कि तभी रंजू भाभी की कॉल आ गई ....

मैंने तुरंत रिसीव की ...क्युकि इस समय रंजू भाभी की हर कॉल बहुत मजेदार हो रही थी ...

पता नहीं इस समय वो मुझे क्या सुनाने वाली थी ...

?????????????????

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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 107

अनु ने एक सेक्स की देवी जैसे ही मुझे मजा दिया ..

मैं : अनु तूने पहले भी सेक्स किया है न ....

अनु : क्या भैया ????

मैं : हा हा ..अरे अब भैया तो मत बोल ना ....तूने मेरे साथ चुदाई कर ली ..फिर भी ....

अनु : तो क्या हुआ ....इससे क्या होता है ....

मैं : अच्छा ये बता पहले इसमें कोई ऐसे ही अपना लण्ड घुसाया है ...
मैंने उसकी बुर को कुरेदते हुए पूछा ...

अनु : हाँ मेरे पापा ही ...रोज रात को ...कुछ कुछ करते हैं ....

मुझे पहले से ही पता था ...साला बहुत ही हरामी था ..शराब पीकर जरूर इसको पेलता होगा ...मैं तो केवल छेड़खानी ही समझ रहा था ...मगर अब पता चला कि सुसरा सब कुछ ही करता है ....

मैं अभी अनु से उसके बारे में और कुछ भी पूछना चाह रहा था ...
कि तभी रंजू भाभी की कॉल आ गई ....

मैंने तुरंत रिसीव की ...क्युकि इस समय रंजू भाभी की हर कॉल बहुत मजेदार हो रही थी ...

पता नहीं इस समय वो मुझे क्या सुनाने वाली थी ...

अनु भी अपनी बुर को साफ़ कर मेरे पास ही आकर बैठ गई ....

मैं तो अभी नंगा ही बैठा था ....पर उसने अपनी बुर को लांचे से ढक लिया था ....

और मेरे मुरझाते हुए लण्ड को देख हंस रही थी ...

मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया ...क्युकि मुझे लग गया कि रंजू भाभी ने मुझसे बात करने को नहीं ...बल्कि वहां की मस्ती सुनाने को ही फ़ोन मिलाया था ...

ओह ये दोनों तो मेहता अंकल के साथ थी...

दरअसल मेहता अंकल की बेटी की शादी थी ...
मेहता अंकल की बीवी का देहांत हुए बहुत साल हो गए थे ...उनकी २ बेटी थी ...१ की शादी हो चुकी थी ..वो लंदन में रहती थी ...और दूसरी की शादी हो रही थी ...दोनों ही बहुत सेक्सी और खूबसूरत थी ...

जिसकी शादी हो रही है ...उसका नाम ऋतू है ....और बड़ी का नाम मुझे याद नहीं है ....क्युकि उससे कभी मुलाकात नहीं हुई ....

....................
मेहता अंकल दिखने में बहुत बूढ़े लगते हैं ...सर पर बहुत कम बाल ...जो पूरे पके हुए हैं ...यहाँ तक कि उनकी ऑय ब्रो तक सफ़ेद हो चुकी हैं ...

मैंने हमेशा उनको पूजा पाठ में ही लगे हुए देखा है ... 

मगर इस समय उनका ये रूप देख मैं भौचक्का रह गया ....
मुझे ये तो पता चल गया कि वो तीनो अपने ही घर के किसी अलग कमरे में अकेले हैं ...

मैं और अनु ध्यान से वहां की बातें सुनने लगे ....

मेहता अंकल : अरे क्यों ज़िद्द कर रही है तू जूली ..
मान जा ना ...तुम दोनों मिलकर इस स्वांग को बहुत अच्छा करोगी ....

जूली : अरे नहीं ना ...मैं तो बस डांस का ही सोच कर आई थी ...तो बस वाही करुँगी ...ये आप भाभी से करा लो ...

रंजू भाभी : नहीं भई ..मुझे तो इससे दूर ही रखो ...जब तक तू नहीं करेगी मैं भी नहीं करुँगी ...

जूली : ओह ...दूर हटो ना अंकल ...क्यों इतना चिपके जा रहे हो ....
बस्स्स्स्स्स्स्स्स नाआअ कितना चूमोगे ...अब थोड़ा दूर हटकर बैठो ...

ओह इसका मतलब अंकल जूली को चूमने में लगे थे ..

मेहता अंकल : देख बेटा मान जा ...ये हमारा रिवाज़ है ..इस कार्यक्रम में एक स्वांग जरूर होता है ...अब ऋतू की माँ तो है नहीं ...वरना कोई ना कोई वो तैयार कर लेती ...अब तो तुम ही मेरी सबसे ज्यादा अपनी हो ...ऋतू भी तुमको कितना मानती है ...अगर तुम लोगों ने नहीं किया तो सब रिस्तेदार मेरे को ही दोष देंगे ...मेरी बहुत बदनामी होगी ...

रंजू भाभी : हाँ जूली ये कह तो सही रहे हैं ...इस स्वांग के द्वारा ही लड़की को शादी का मतलब बताना होता है ...पुराना रिवाज़ है ...पर जरुरी होता है ...और बहुत मजा आता है ...

जूली : ठीक है ...पर मैं लड़का बनूँगी ....और आप लड़की ....

मेहता अंकल : अरे नहीं बेटी ...तू कहाँ इतनी दुबली पतली और ये कहाँ रंजू ...क्यों स्वांग की ऐसी कम तैसी करने में लगी हो ....मन जाओ ना और तुम कितनी खूबसूरत लगोगी ...

जूली : ओह पर अंकल मैंने कच्छी नहीं पहनी है ...और फिर आपका ये लहँगा...कितना झीना और छोटा है ...हल्का सा घूमने में ही ये तो पूरा उठ जाएगा ...मैं नहीं पहन पाऊँगी ये ...

मेहता अंकल : हा हा ..क्या ये जूली बोल रही है ...?? जिसको कपड़ों की कभी परवाह ही नहीं रही ...अरे भई ..सब लेडीज ही तो हैं यहाँ ...और देखना इसमें कितना मजा आएगा ...

..................

जूली : नहीं ..पहले किसी कच्छी का इंतजाम करो ...तभी पहनूंगी ...

मेहता अंकल : अरे बेटा ..अब मैं कहाँ से लाऊँ कच्छी ...ऋतू की तो सभी उसी के कमरे में होंगी ...और वो तेरे आएँगी भी नहीं ...ऐसा कर इस रंजू की पहन ले ...

जूली : हाँ भाभी ...लाओ आप अपनी कच्छी दो... मुझे उतारकर ...वही ट्राई करके देखती हूँ ...वैसी भी आप तो पेंट शर्ट ही पहनोगी ...

रंजू भाभी : अरे अगर मैंने पहनी होती तो कब का दे देती ....मैंने भी नहीं पहनी ....

मेहता अंकल : अरे यार अब ये सब छोड़ो ...चलो जल्दी से तैयार हो जाओ ...

जूली : ठीक है ..पर आप तो जाओ यहाँ से ....

मेहता अंकल : अब मेरे से ये सब क्या ....???..... ऐसा क्या है जो मैंने नहीं देखा ... यही तो मौका है जब मैं तुम्हारी ख़ूबसूरती को अच्छी तरह से देख सकता हूँ …….और उसकी जी भरकर तारीफ कर सकता हूँ .......

जूली : जी नहीं ....मुझे नहीं करवानी आपसे अपनी तारीफ .....मुझे अच्छी तरह पता है कि आप कैसे तारीफ करते हो ....
आप बहार जाओ हम दोनों तैयार होकर आते हैं ...

रंजू भाभी : वही मुझे तो आपके सामने तैयार होने में कोई ऐतराज नहीं है ....हा हा हा ....

मेहता अंकल : ये आज जूली को हो क्या गया है ...जब पहले मैं मना करता था ...तब तो सब कुछ दिखती रहती थी ...और आज ..देखो तो कैसे नखरे कर रही है ये ....

रंजू भाभी : उसको तो यही लगता है ना ...कि आपको दिखाने से भी क्या फायदा ...चुसे हुए गन्ने से भी कोई रस निकलता है क्या ...?????

मेहता अंकल : ऐसा मत कह तू रंजू ...तुझे पता नहीं ...मेरी बेटी लन्दन से ऐसी गोलियां लाई है जो मेरे को फिर से जवान कर रही हैं ....

रंजू भाभी : कैसा जवान अंकल ...क्या आपके मरियल पप्पू में भी जान आ रही है ... या ऐसे ही ...

मेहता अंकल : अरे नहीं कल पूरी रात पप्पू ने खूब कसरत की है ...तभी तो मैं तुम दोनों को इतना प्रेस कर रहा हूँ ...

रंजू भाभी : हैईईईन्न्न्न्न्न क्या कह रहे हो आप अंकल ...कैसी मेहनत ..क्या ऋतू की सुहागरात से पहले ही आपने ही तो नहीं उसके साथ सुहागरात मना ली .....

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मेहता अंकल : अरे नहीं बेटा ....अब उसके साथ तो नहीं ...पर रिया के साथ .....

मुझे याद आ गया ....रिया उनकी बड़ी बेटी का नाम है को लन्दन में रहती है ....और बहुत ही ज्यादा बोल्ड है ....

रंजू भाभी : अच्छा तो अपनी पुरानी कहानी फिर शुरू कर दी आपने ...

जूली : आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले अंकल ....पहले मुझे आप ऋतू के बारे में बता रहे थे ...और अब मालुम पड़ रहा है कि रिया भी ....
अपनी दोनों लड़कियों को ही आपने चखने के बाद ही विदा किया ....

अगर आपके दामाद को पता चल गया तो ....

मेहता अंकल : तो क्या ???? साले इतना पैसा ले रहे हैं ...तो क्या माल भी चोखा मिलेगा ....
और फिर मेरी बेटियां हैं ...मेरा ख्याल नहीं रखेंगी तो फिर किसका रखेंगी ...

जूली : फिर अब आप क्या करोगे ...अब तो रिया और ऋतू दोनों ही चली जाएँगी ...

मेहता अंकल : तो क्या हुआ ...?? तुम दोनों मेरी बेटी नहीं हो क्या ...
कभी जूली तो कभी रंजू .....और कभी तुम दोनों ही ..मेरे पास आते रहना ....

जूली : अच्छा जी ...हमको नहीं बनना ऐसी बेटी ....

उनकी बातें सुनकर मुझे लगने लगा कि जरूर वहां कुछ रोमांच वाला होगा ....
मेरा दिल उनको देखने का करने लगा ....

अनु मुझे बहुत गौर से देख रही थी ...

अनु : क्या हुआ भैया .???..क्या मैं दीदी को कच्छी देकर आ जाऊं ....???

मैं : तू तो पागल है ....तू अगर कच्छी लेकर भी गई ...तो क्या जूली पहनेगी ....अरे उसको तो ऐसे ही मजा आता है ...
चल हम लोग भी वहीँ चलते हैं ...
तू भी एन्जॉय कर लेना ....

अनु : तो क्या मैं भी नहीं पहनू ....

मैं : अरे तू क्या करेगी वहां ...तुझे कौन देख रहा है ...?? और तेरा तो लांचा भी पूरा ही है ...
चल ऐसे ही चल ...कहीं तेरी कच्छी देख ..जूली का मूड न बदल जाए ...

मैंने जल्दी से पेंट शर्ट ही डाली और अनु के साथ निकल गया ....
मैंने फोन ऑफ कर दिया ...

मेहता अंकल के फ्लैट पर काफी चहल पहल थी ...मैं अनु को वहीँ छोड़ ...जहाँ गाना बजाना चल रहा था ...
जूली की ड्रेस का बहाना कर अंदर की ओर चला गया ...

मुझे उनके फ्लैट का अच्छा आईडिया था ....मैं कई बार पहले भी आ चुका था ...

मुझे पूरा भरोसा था कि ये लोग मेहता अंकल के कमरे में ही होंगे ...

मैं वहां पहुंचा ...मगर कमरा तो अंदर से बंद था ...

...................


मैंने तुरंत भाभी को कॉल की ....

कुछ देर बाद भाभी ने कॉल रिसीव की ...

रंजू भाभी : क्या हुआ ..??

मैं : अरे दरवाजा तो खोलो ...मैं भी देखना चाहता हूँ ...

रंजू भाभी : कहाँ हो तुम ???

मैं : यहीं आपके कमरे बाहर ...

रंजू भाभी : ओह ...ऐसा करो ऋतू के कमरे से यहाँ बाथरूम में आ जाओ ...

मुझे याद आ गया ...
वहां दोनों कमरे का कॉमन बाथरूम था ....
और रंजू भाभी भी शायद वहीँ से बात कर रही थीं ...

मैं जल्दी से ऋतू के कमरे में गया ....
वो पूरा खाली था ...

और हो भी क्यों ना ...ऋतू भी तो बाहर कार्यक्रम में ही बैठी थी ...

मैं जल्दी से बाथरूम में प्रवेश कर गया ...

वाकई वहां रंजू भाभी थी ...

उन्होंने मुझे चुप रहने का इशारा किया ....

उनके बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट ही था ...

मैंने पेटीकोट के ऊपर से ही उनके मुलायम चूतड़ों को मसला ....

और बहुत हलके से पूछा ...

मैं : क्या हो रहा है यहाँ ...????

उन्होंने फुसफुसाते हुए ही जवाब दिया ...

रंजू भाभी : चुप करके केवल अपनी जोडू की चुदाई देख ....और वो बाथरूम से बाहर ...
फिर से मेहता अंकल के कमरे में चली गई ...

मैंने बाथरूम के दरवाजे को भिड़ा दिया ...

और इतना गैप कर लिया कि कमरे की हर वस्तु देख सकु ...

सामने ही उनका किंग साइज़ बेड पड़ा था ....

और वहां का दृश्य देखते ही मैं भौचक्का सा खड़ा रह गया ....

ये तो वही सब हो रहा था ...जिसे मैं कबसे देखना चाह रहा था ...

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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 108

मैं जल्दी से ऋतू के बाथरूम में प्रवेश कर गया ...

वाकई वहां रंजू भाभी थी ...

उन्होंने मुझे चुप रहने का इशारा किया ....

उनके बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट ही था ...

मैंने पेटीकोट के ऊपर से ही उनके मुलायम चूतड़ों को मसला ....

और बहुत हलके से पूछा ...

मैं : क्या हो रहा है यहाँ ...????

उन्होंने फुसफुसाते हुए ही जवाब दिया ...

रंजू भाभी : चुप करके केवल अपनी जोडू की चुदाई देख ....और वो बाथरूम से बाहर ...
फिर से मेहता अंकल के कमरे में चली गई ...

मैंने बाथरूम के दरवाजे को भिड़ा दिया ...

और इतना गैप कर लिया कि कमरे की हर वस्तु देख सकु ...

सामने ही उनका किंग साइज़ बेड पड़ा था ....

और वहां का दृश्य देखते ही मैं भौचक्का सा खड़ा रह गया ....

ये तो वही सब हो रहा था ...जिसे मैं कब से देखना चाह रहा था ...

मेहता अंकल काफी अमीर व्यक्ति थे ...उनके घर सभी ऐशो आराम की वस्तुएं थी ....

जिस बाथरूम मैं था वो भी बहुत बड़ा था ....बड़े बाथटब से लेकर चमकीली लाइट तक सभी कुछ था वहां ...

पर मैंने इस समय बाथरूम की सभी लाइट बंद कर दी थीं ...

उधर मेहता अंकल के कमरे की सभी लाइट ओन थीं ..वल्कि इस समय शादी का घर होने के कारण ..कमरा बहुत चमक रहा था ....

उनके कमरे में भी सभी आधुनिक वस्तुएं थीं ...एक नजर में ही कमरे को देखकर पता लग जाता था ..कि ये किसी रहीसजादे की ऐशगाह है ....

दीवारों पर महंगी वाल पेंटिंग्स .....किंग साइज़ ..राउंड ..मूविंग बेड .....बड़े बड़े मिरर ...और फैंसी लाइट ..सभी उस माहोल को सेक्सी बना रहे थे ...

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फिलहाल मेरा सपना पूरा होने जा रहा था ...

मैं जूली को एक दूसरे मर्द के साथ मस्ती करते हुए देख रहा था ...

भले ही वो एक बूढ़ा मर्द हो ..पर मैं जूली के सेक्स की पराकाष्टा देखना चाह रहा था .....

जो कुछ भी सामने हो रहा था ...उससे तो यही लगता था कि आज मुझे एक ...बहुत ही गरम चुदाई दिखने वाली थी ....

और शायद रंजू भाभी भी जानती थी ...वो मेहता अंकल से चुदवा भी चुकी होंगी ...तभी उन्होंने मुझसे ऐसा कहा भी है ....
कि चुपचाप अपनी जोडू कि चुदाई देख ...

मैंने बाथरूम की लाइट बंद करके ..दरवाजा बिलकुल ऐसे कर लिया था ..कि मैं तो सब कुछ देख सकता था ...पर कोई मुझे नहीं देख सकता था ...

पहला दृश्य ही मुझे बहुत गरम दिखा ....

जूली बेड के किनारे पैर लटका कर बैठी थी ....
उसके बदन पर भी रंजू भाभी जैसे ही केवल ब्लाउज और पेटीकोट ही था ....

इस दोनों की साडी शायद मेरे यहाँ आने के दौरान ही उतरी थी ...

जूली के ठीक सामने मेहता अंकल खड़े थे ...

ख़ास ये था कि उनके बदन पर केवल एक फुल आस्तीन का बनियान था ....

बाकी नीचे तो वो पूरे नंगे थे ...

मुझे साइड से वो दिख रहे थे .....

अपनी कमर पर दोनों हाथ रखे वो तनकर जूली के सामने खड़े थे ....

और जूली अपने हाथों में उनके लण्ड को पकडे थी ...

पता नहीं वो क्या उलट-पुलट कर देख रही थी ...

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मैंने जब ध्यान से देखा तो मेरी आँखें भी फटी की फटी रह गई ....
ये क्या है भई....

सांप जैसा उनका लण्ड देख मेरा भी बुरा हाल हो गया ...

कोई ११-१२ इंच से कम नहीं होगा ....बिलकुल काला …..और बहुत ही मोटा ...

जूली के दोनों हाथों में होने के वावजूद वो काफी बाहर को निकला हुआ नजर आ रहा था ....

कमरा काफी बड़ा होने के वावजूद मुझे उनकी हर बात साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी ...
मैं ध्यान से उनकी मस्ती भरी बातें सुनने लगा ...

जूली : वाओ अंकल आपका ये तो बहुत प्यारा है ...मैंने तो आज तक ऐसा हथियार नहीं देखा ...

अंकल का सीना गर्व से तना हुआ था ....

मेहता अंकल : तभी तो मैंने तुझसे कहा था ...मुझे अपने लण्ड पर बहुत गर्व है ...इसी की तो ऋतू और रिया भी दीवानी हैं ...

जूली चमकती हुई आँखों से उनके लण्ड को घूर रही थी ..और उसके हाथ अंकल के लण्ड को ऊपर से नीचे तक सहला रहे थे ...

मेहता अंकल : कब िाक सहलाती रहेगी ...अब जरा इसको अपने मुहं से पुचकार भी दे ...फिर देखना ये तेरी चूत की कैसी सेवा करता है ...
हरी कर देगा तेरी तबियत ... अंदर तक खुश कर सेगा तुझको ...

जूली : नहीं अंकल जी ...बस थैंक्यू आपका ...मेरी तबियत पहले से ही बहुत खुश है ...
बस इतना ही काफी है ...

जूली अभी भी खुलकर हाँ नहीं कह रही थी ...

परन्तु उसकी हरकतें और आँखे उसकी जुबान से बगावत कर रही थी ...

साफ़ पता चल रहा था कि वो सब कुछ चाहती है ...मगर कह नहीं पा रही थी ...

मेहता अंकल भी पूरे घाग ही थे ...वो शायद सब कुछ समझ रहे थे ....

मेहता अंकल : चल कोई बात नहीं ...

और उन्होंने अपनी कमर को आगे करते हुए जूली के चेहरे के पास कर दिया ...
उनका लण्ड जूली के गालों से छूने लगा ...

मैंने देखा रंजू भाभी एक ओर कुर्सी पर बैठकर ..मुझे और जूली को देखकर मजा ले रही थी ...
उनका बैठने का स्टाइल भी बहुत सेक्सी था ...
उन्होंने एक पैर कुर्सी के नीचे रखा था और दूसरा घुटने से मोड़कर ऊपर ...
उनका पेटीकोट बहुत ऊपर हो गया था ...
उनकी खुली हुई चूत साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी ...
जिसको वो अपने दायें हाथ कि उँगलियों से सहला रही थी ...

.................


फिलहाल तो मेरा ध्यान केवल जूली की ओर ही था ...

अंकल ने जूली को पकड़ते हुए कहा ...चल तू इससे खेलती रह ...मैं तुझको तैयार कर देता हूँ ...

और उन्होंने जूली के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए ...

जूली थोड़ा ना नुकुर तो कर रही थी ...मगर कुछ ही देर में अंकल ने उसकी ब्लाउज को निकाल दिया ...

जूली को उनका लण्ड इतना प्यारा लग रहा था ...कि वो उसको एक पल के लिए भी नहीं छोड़ रही थी ...

अंकल ने जूली को आगे को झुकाया ...मुझे ऐसा लगा जैसे जूली ने उनका लण्ड अपने मुहं में ले लिया हो ...

पर अंकल ने उसकी पीठ पर लगा ब्रा का हुक निकाला था ...

उन्होंने बहुत ही प्यार से सहलाते हुए उसकी ब्रा के कप को जूली के गोल और तने हुए बूब्स से हटाकर एक ओर डाल दिया ...

अब जूली केवल एक पेटीकोट में ही वहां बैठी थी ...
उसकी नंगी चूची किसी सफेद बॉल जैसी ..ऊपर को उठी हुई ..बहुत ही मस्त दिख रही थी ...

अंकल कि नजर उनसे हट ही नहीं रही थी ...जूली के निप्पल अभी भी गुलाबी रंगत लिए थे ...इस समय तने हुए निप्पल अपनी उत्तेजना के चरम की कहानी साफ़ साफ़ बयां कर रहे थे ...

अंकल ने एक हलका सा अपनी हथेली को उसके निप्पल से सहलाते हुए ...
जूली को पेट से पकड़ नीचे खड़ा किया ...

जूली : अह्ह्हाआआआ 

जूली हलके से सिसकारी ...
पर उसने कुछ नहीं कहा ....और वो अंकल के बराबर में बेड के नीचे खड़ी हो गई ...

अंकल ने उसको बिस्तर के ऊपर चढ़ा दिया ...और जूली बेड पर अधनंगी खड़ी किसी खजुराओ की मूरत जैसी दिख रही थी ...

अंकल ने जूली की कमर को सहलाते हुए ...बहुत ही सेक्सी तरीके से जूली के पेटीकोट के अंडर हाथ डाल उसके नाफ़े (नाड़े) को बहार निकाला ...
फिर धीमे से उसको खींच कर खोल दिया ...

............

केवल एक पल लगा ....और जूली का पेटीकोट उसका साथ छोड़ गया ...
पेटीकोट जूली के चूतड़ों से सरकता हुआ ...उसके पैरों में सिमट गया ...

एक सेक्सी मूरत जैसी जूली ...सम्पूर्ण नग्न बिस्तर पर खड़ी थी ...
उसको इस तरह सिमटता हुआ देख किसी का भी लण्ड पानी छोड़ दे ...

अंकल बिस्तर के नीचे खड़े हुए ...जूली की पतली कमर को थामे हुए थे ...
उनकी नजर ठीक जूली की सबसे सेक्सी और सुंदर भाग ...उसकी बेशकीमती चूत पर थी ...

अंकल अपने हाथो को सरकाते हुए जुली के साफ़ सफ्फाक ...उठे हुए मुलायम चूतड़ों तक ले गए ...और अब उनकी हथेली और उँगलियाँ .जूली के चूतड़ों पर किसी पियानो प्लेयर की तरह ही नाच रही थी ...

मेहता अंकल : अह्ह्ह सच जूली बेटा तेरी चूत तो बहुत ही प्यारी है ...ऐसी तो ऋतू और रिया की बचपन में भी नहीं थी ...
कितनी छोटी सी और कोमल लग रही है ...लगता ही नहीं कि इस पर कभी बाल आएं हों ...
मुझे इतना अनुभव है ...बिलकुल सच बोल रहा हूँ ...तेरी चूत को देखकर कोई ये नहीं कह सकता कि तेरी शादी को इतना समय हो गया ...और तू इतने मजे ले चुकी है ...
सच ये तो गॉड गिफ्ट है जो तुझे इतनी प्यारी चूत मिली है ...

जूली अपने दोनों हाथो से अपना चेहरा छुपाये बिस्तर पर खड़ी थी ...
उसको वैसे भी अपनी तारीफ सुनना बहुत ही पसंद था ..
अंकल कि बातें सुनकर जरूर वो बहुत ही खुश हो रही होगी ...
उसको अपनी चूत पर ही बहुत गर्व था ...उसको खुद पता था कि ये उसका बेशकीमती खजाना है ..
इसीलिए वो इसको दिखाने से जरा भी परहेज़ नहीं करती थी ...
और कच्छी तक नहीं पहनती थी ...

और अबकी बार तो उसने कमाल ही कर दिया ..

उसने अपनी हथेलियों के बीच से जरा सा अपना चेहरा निकालते हुए जवाब दिया ...

जूली : सच अंकल ...वैसे आपका हथियार भी कोई कम नहीं है ...सच मैंने आज तक ऐसा नहीं देखा ...

बस उसकी ये बात सुनते ही अंकल खुश हो गए ...

उन्होंने जूली के चूतड़ों से अपने सीधे हाथ को हटाकर आगे लाये और अपनी उँगलियों से उसकी चूत को सहलाते हुए ...अपना चेहरा जूली कि जांघो के बीच रखकर ..उसकी चूत का एक चुम्मा ले लिया ...

जूली : अह्ह्हाआआआआआआ प्लीज मत करो अंकल .....

मेहता अंकल : अरे बेटा ...जब तेरी चूत और मेरा लण्ड जब सबसे अच्छे हैं ..तो क्यों ना दोनों का मिलन करवा दो ...

जूली : नहीईइइइइइइइइइइ प्लीज ....

मेहता अंकल : ओह चलो चुदाई ना सही ....कम से कम दोनों का एक चुम्बन तो करवा ही दो ...

जूली : पर सब बाहर हमारा इन्तजार कर रहे होंगे ...
फिर कभी .....

मेहता अंकल : अरे सब नाच गाने में बिजी हैं ...२ मिनट ही तो लगेंगे ...
और अंकल ने जूली को मना ही लिया ...

जूली उनसे मना नहीं कर पा रही थी ...

उन्होंने जूली को बिस्तर पर लिटा दिया ...

पता नहीं वो क्या करने वाले थे ...????
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मैं तो सांस रोके देख रहा था ....कि ना जाने कौन से पल .................
?????????????

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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 109


जूली भले ही कितना भी चुदवाने के लिए मना कर रही हो ......
परन्तु मेहता अंकल उसको पटाने ही हर संभव कोशिश कर रहे थे .........

अब देखना ये था कि मेहता अंकल अपनी कोशिश में सफल होते हैं या नहीं ......

मेहता अंकल : अरे बेटा ...जब तेरी चूत और मेरा लण्ड जब सबसे अच्छे हैं ..तो क्यों ना दोनों का मिलन करवा दो ...

जूली : नहीईइइइइइइइइइइ प्लीज ....

मेहता अंकल : ओह चलो चुदाई ना सही ....कम से कम दोनों का एक चुम्बन तो करवा ही दो ...

जूली : पर सब बाहर हमारा इन्तजार कर रहे होंगे ...
फिर कभी .....

मेहता अंकल : अरे सब नाच गाने में बिजी हैं ...२ मिनट ही तो लगेंगे ...
और अंकल ने जूली को मना ही लिया ...

जूली उनसे मना नहीं कर पा रही थी ...

उन्होंने जूली को बिस्तर पर लिटा दिया ...

पता नहीं वो क्या करने वाले थे ...????

मैं तो सांस रोके देख रहा था ....कि ना जाने कौन से पल .................

मेरा ध्यान कमरे में अब कहीं नहीं था ...
मैं ना तो रंजू भाभी को देख रहा था ...और ना अपने बारे में सोच रहा था कि कोई देख लेगा ...

बस दम साधे जूली को देख रहा था ...

वो पूरी नंगी थी...एक भी वस्त्र नहीं था उसके चमचमाते जिस्म पर ...
उस बड़े से बेड पर लेटी थी .....

उसके एक-एक अंग से मस्ताना सा रस टपक रहा था ...

मेरी ही हालत उसको देखकर खराब हो रही थी ...
फिर मेहता अंकल का तो कहना भी क्या ...वो वोराये सा उसको देख रहे थे ...

उन्होंने शायद वो सेक्सी गोली भी खा रखी थी ..जो उनके अनुसार उनकी अपनी ही बड़ी बेटी रिया ...लंदन से लाई थी ...

..............

ये अहसास उनके खड़े ...टन्टनाए मोटे लण्ड को देखकर हो रहा था ...

जूली ने तो क्या मैंने भी आज तक इतना मूसल सा लण्ड नहीं देखा था ...

बहुत ही जानदार हथियार था मेहता अंकल के पास ...जो उनकी जवानी में की हुई अय्याशी की पोल खोल रहा था ...

जिन्होंने अपनी दोनों मासूम बेटियों तक को नहीं छोड़ा ..वो अब ऐसी हालत में जूली को कहाँ छोड़ने वाले थे ...

जूली भी मस्ती भरी आँखों से हिलते हुए उनके लण्ड को देखे जा रही थी ...

अंकल भी बिस्तर पर ऊपर चढ़ने के बाद ..अपनी बनियान भी उतार फेंकते हैं ...
बहुत घने बाल थे उनके शरीर पर ...और सभी सफ़ेद थे ..

वो बहुत ही बूढे लग रहे थे ...मगर उनके लण्ड को देखते ही ....उनका शरीर झूठा सा प्रतीक होता था ...

वो घुटने के बल जूली के दोनों पाओं के बीच बैठ जाते हैं ..
और उसके दोनों पैरों को खोलकर ध्यान से चूत को देखते हैं ...फिर अपनी एक हथेली से उसकी चूत को पोंछते हैं ...
शायद उस पर जूली के कामरस लगा था ...

फिर अंकल एक दम से नीचे झुककर अपने होंठ जूली की चूत पर रख देते हैं ...

यही तो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी ...

अब जूली की हालत देखने लायक थी ..वो बुरी तरह मचल रही थी ...उसकी कमर चारों ओर घूम रही थी ..

मुझे ये तो पता था कि चूत को चुसवाते समय जूली बिलकुल पागल हो जाती है ...

मगर आज पहले बार ही मैं उसको लाइव देख रहा था ..
खुद चूसते समय तो मुझे उसको बैचेनी ज्यादा दिखाई नहीं देती थी ...
क्युकि उस समय तो मैं खुद भी पागल हो जाता था ...

इस समय जूली का हर एक कोण और उसकी हर हरकत पर मेरी नजर थी ...
बहुत ज्यादा आनंद आ रहा था उसको इस तरह देखने में ...

१० मिनट तक जूली की चूत और गांड को अच्छी तरह चाटने के बाद ...
अंकल ने जूली के चूतड़ों के नीचे हाथ लगाकर उसको अच्छी तरह से एडजस्ट किया ...

अब वो क्षण था ...जब मुझे कोई दूसरा लण्ड जूली की चूत में जाता हुआ देखने वाला था…..

....................

मैं बहुत गौर से केवल वहीँ पर नजरे गड़ाये था ...

मेहता अंकल ने बहुत ही अच्छे ढंग से जूली की चूत को सहलाया ...
फिर अपने लण्ड के टोपे को उसकी चूत के छेद पर सेट किया ...
और अपनी कमर को धक्का दिया ...

इस दौरान जूली ने एक बार भी उनका ...किसी भी बात का विरोध नहीं किया ...

मुझे ज्यादा ठीक से तो नहीं दिखा ....
पर उन दोनों के चेहरे जो कहानी बता रहे थे ...
उससे साफ़ जाहिर था ...
कि मेहता अंकल का लण्ड जूली कि कोमल चूत को भेद चुका था ...
अब कितना अंदर गया .... ये तो वही जाने 

मैं तो उनकी सिस्कारियां सुन रहा था ...

जूली : अह्ह्ह्हाआआआआआआआआआ बहुत बड़ा है ...धीरे से ....आःह्हाआआआ 

मेहता अंकल : आअह्हाआआआआ ...बहुत टाइट है तेरी फ़ुद्दी ...अह्ह्ह बस हो गया .....अह्हा अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह


उनके धक्को से ..या फिर हिलने से बेड ...धीरे धीरे घूम रहा था ...

और अब वो ठीक मेरे सामने रुका ...
दोनों मुझे साइड से चुदाई करते हुए बहुत साफ़ साफ़ दिखाई दिए ....

मेहता अंकल के छिड़ने का स्टाइल बहुत अलग था ...
उन्होंने जूली के निचले हिस्से को ....अपने दोनों हाथो में उठा रखा था ...
उनके दोनों हाथ जूली के चूतड़ और कमर पर थे ...

वो खुद अपने घुटनो पर खड़े थे ...

हाँ छोड़ वो बहुत ही धीमे धीमे रहे थे ...

अब मुझे उनका सांप जैसा लण्ड साफ़ साफ़ दिख रहा था ...

इतनी दूर से भी दिखाई दे रहा था ....जैसे कोई रोड जूली की चूत में जा रही हो ...

वो बहुत ही आराम से लगभग पूरा लण्ड ही बाहर निकाल लेते ...या फिर जरा सा ही अंदर रहने देते ...
फिर से पूरा अंदर का देते ...

जूली की कमर को देख मुझे पता चल गया कि उसको बहुत मजा आ रहा है ....
क्युकि उसकी कमर भी अंकल के धक्को के साथ ही हिल रही थी ...
वो इस चुदाई में पूरा साथ दे रही थी ....

जूली के दोनों हाथ अपनी तनी हुई चूचियों पर थे ..जिनको वो खुद ही मसल रही थी ...

सच कहूँ ..तो मैंने सेक्स तो बहुत किया है ...पर उस सबमें मैं हमेशा खुद ही हीरो रहता था ...
पर इस तरह लाइव ब्लूफिल्म ..वो भी अपनी बीवी की ...मैं पहले बार देख रहा था ...

जूली को पूरा नंगा होकर इस तरह ...मेहता अंकल के लण्ड से चुदवाते देख मेरी हालत ख़राब हो रही थी ...

मैंने अपना लण्ड ...पेंट से बाहर निकाल लिया था ...और अपने ही हाथों से सहला रहा था ....

..........................

अब मैंने रंजू भाभी को देखा ....लगता है वो भी पहली बार ही ऐसे लाइव शो देख रही थी ...
उनकी हालत भी पतली थी ...
अपनी शरम के कारण वो बिस्तर पर तो नहीं जा रही थी ...
लेकिन कुर्सी पर बैठे हुए ही ...उनका हाथ अपने पेटीकोट के अंदर था ...
साफ़ पता चल रहा था ...कि वो अपनी चूत के साथ खेल रही हैं ...

मैं अभी रंजू भाभी को ही बुलाकर ...उन्ही को चोदने का प्लान बना रहा था ... 

कि तभी मुझे अपनी ओर वाले कमरे में कुछ आहट सी हुई ...
ओह इस समय कौन आ गया ....
मैं अभी बाथरूम का दरवाजा बंद करने की सोच ही रहा था ...
कि वो तो एक दम से दरवाजे पर ही आ गया ...

मुझे कुछ नहीं सूझा ..
बाथरूम बहुत बड़ा था ....और मोटे मोटे परदे भी थे ...

मैं वहीँ पास के एक मोटे परदे की ओट में हो गया ...

तभी बाथरूम की लाइट ओन हुई ...
और एक बहुत ही सुन्दर लड़की मेरे सामने प्रकट हुई ...

क्या खूबसूरती थी उसकी ....बहुत लम्बी ....६ फुट से २-३ इंच ही कम होगी...
बहुत ही ज्यादा गोरी ...दूध से भी ज्यादा साफ़ रंग था उसका ....उस पर रंगत गुलाबी ...
आँखे तो ज्यादा खूबसूरत नहीं थी ... उनको काजल से बड़ा बनाया हुआ था ...
पर होंठ बहुत चौड़े, मोटे और लाल थे ...
कपडे भी बहुत सेक्सी पहने थे ...अमूमन महिला संगीत में लड़कियां लहंगा ..चोली जैसे वस्त्र ही पहनती हैं ..जो उसने भी पहना था ...
परन्तु उसकी हाइट ज्यादा होने के कारण वो इन वस्त्रो में बहुत ही सेक्सी लग रही थी ...

उसका लहंगा कमर से बहुत नीचे बंधा था ...जो उसकी पतली कमर की पूरी ख़ूबसूरती को दिखा रहा था ...
और चोली इतनी छोटी थी कि ...ऊपर से उसके भरी मम्मो कि पूरी गोलाई बाहर थी ...और चोली के निचले भाग से भी गोलाई का कुछ अंश बाहर था ...
चोली के कप उसकी चूची कि पूरी गोलाई को दिखा रहे थे ....

फिर चोली के नीचे से लहंगे तक का भाग नंगा था ...जो सफेद लाइट में चमक रहा था ...
एक तो गोरा रंग ..ऊपर से बहुत पतली कमर ...उस पर उसकी गहरी नाभि ..जिसपर उसने कोई चमकता हुआ नाग लगा रखा था ...
और फिर नाभि के नीचे का भी काफी हिस्सा नंगा ही था ...
उसने अपना लहंगा शायद अपनी चूत से २-३ इंच ही ऊपर बाँधा हुआ था ...

कुल मिलाकर सेक्स के रस से सरावोर थी वो हसीना ...

मेरे देखते ही देखते वो ठीक मेरे ही सामने आई ..
अरे वहां को कमोड था ....ओह ये तो मूतने के लिए आई है ...

........................

और बिना कुछ सोचे अपने लहंगे को कमर तक उठा लिया ..
अब उसकी दोनों लम्बी नंगी टाँगे मेरे सामने थी ...बिलकुल चिकनी और केले के तने जैसी ...
वो अपने लहंगे को बहुत ही संभालकर अपनी कमर के ऊपर को समेट रही थी ...
कि कहीं वो गन्दा ना हो जाए ....

पर उसकी इस हरकत से मुझे बहुत ही सेक्सी दृश्य के दर्शन हो गए थे ...

उसने लहंगा कमर से भी ऊपर उठ जाने से उसकी कमर में फंसी छोटी सी कच्छी बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ...

उसने एक हाथ से लहंगे को पकड़ ..दूसरे से अपनी कच्छी नीचे सरका दी ...
और जल्दी से कमोड पर बैठ गई ...

मुझे उसकी चिकनी चूत साफ नजर आ रही थी ...बिलकुल चिकनी ...और बाहर को निकले हुए होंठ ..
मैंने देखा चूत का दाना और उसके होंठ हलके से कांपे और उसमे से मूत निकलने लगा ...

एक हसीना मेरे सामने बैठी मूत रही थी ...और में उसको देख रहा था .....

बड़ा ही मनोहारी दृश्य था ....

तभी वहां जूली कि तेज आवाज आती है .......

जूली : अह्ह्ह्हाआआ अह्ह्ह्ह आःह्हाआआआआ आह्ह्हा तेज अंकल और तेज अह्हा अह्हा 

और ये आवाजें सुन वो चोंक जाती है ....

वो आश्चर्य के भाव लिए कमोड से उठती है ....
बहुत ही सेक्सी अंदाज़ से ...अपनी फैंसी कच्छी ...जो उसके खड़े होने से पंजो तक पहुँच जाती है ...
उसको अपने पाऊँ से बाहर कर देती है ....

इस दौरान भी वो लहंगे को वैसे ही अपने दोनों हाथों से अपनी कमर तक ऊँचा किये पकड़ी रहती है ... 

फिर वो उसी दरवाजे की ओर जाती है ....जहाँ से मैं अभी कुछ देर पहले जूली को चुदवाते हुए देख रहा था ...

मैंने पहली बार उसकी आवाज सुनी ....

...... : ओह गॉड ....ये क्या ...डैड तो जूली भाभी को चोद रहे हैं ...घर में इतने मेहमान हैं ...अगर किसी ने देख लिया तो ....ओह ....

मेरी समझ में एक दम से आ गया ...अरे ये तो रिया है ...मेहता अंकल की बड़ी बेटी ....
उफ्फ्फ मुझे तो पहले ही समझ जाना चाहिए था ...इसको देखकर ...आखिर लंदन से आई है ...तभी ऐसी है ...

उसने अपना लहंगा ..अभी तक नहीं छोड़ा था ...

और उसके झुके खड़े होने से ...मुझे वो दिख गया ...जिसे देखकर मेरे लण्ड ने बगावत कर दी ...

अब मैं भी नहीं रुक सकता था ....

और .....

????????????????????????

.........
……………………….


RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 110


अच्छी तरह से मूतने के बाद वो हसीना उठने ही वाली थी ...
कि उसको जूली और मेहता अंकल की चुदाई की सिस्कारियां और आवाजें सुनाई दे जाती हैं ...
वो संभालकर ही अपने लहंगे को पकड़े हुए कमोड से उठती है ...

उसको तो यही लग रहा था कि वो बाथरूम में अकेली ही है ...

अतः वो अपने लहंगे को नहीं छोड़ती ...उसको ऊपर ही पकडे रहती है ....
या फिर उसको इस बात का ख्याल ही नहीं रहता ..
क्युकि वहां चुदाई कि आवाजें ही ऐसी आ रही थी ..

उसकी जिज्ञासा ही थी जो उसको ऐसे ही रखे रहती है ....
और वो कमोड से उठकर आगे बढ़ने लगती है .....

इस दौरान भी वो लहंगे को वैसे ही अपने दोनों हाथों से अपनी कमर तक ऊँचा किये पकड़ी रहती है ... 
और अपनी कच्छी को भी पैरों से निकाल अलग कर देती है ....

फिर वो उसी दरवाजे की ओर जाती है ....जहाँ से मैं अभी कुछ देर पहले जूली को चुदवाते हुए देख रहा था ...

मैंने पहली बार उसकी आवाज सुनी ....

...... : ओह गॉड ....ये क्या ...डैड तो जूली भाभी को चोद रहे हैं ...घर में इतने मेहमान हैं ...अगर किसी ने देख लिया तो ....ओह ....

मेरी समझ में एक दम से आ गया ...अरे ये तो रिया है ...मेहता अंकल की बड़ी बेटी ....
उफ्फ्फ मुझे तो पहले ही समझ जाना चाहिए था ...इसको देखकर ...आखिर लंदन से आई है ...तभी ऐसी है ...

उसने अपना लहंगा ..अभी तक नहीं छोड़ा था ...

और उसके झुके खड़े होने से ...मुझे वो दिख गया ...जिसे देखकर मेरे लण्ड ने बगावत कर दी ...

अब मैं भी नहीं रुक सकता था ....

रिया के झुकने से उसके मस्त नंगे चूतड़ ....
कुछ ज्यादा ही उठे हुए थे रिया के चूतड़ ....क्या मस्त गद्देदार चूतड़ थे ....पूरे गोल ...और आपस में सटे हुए ...इतने खूबसूरत लग रहे थे ....
कि मैं सब कुछ भूल गया ....

मैंने अपना लण्ड तो पहले ही बाहर निकाला हुआ था ...
लण्ड उस दृश्य को देख और भी ज्यादा तन चूका था ...मैंने पेंट का बटन भी ढीला कर दिया ...
और रिया के ठीक पीछे पहुँच गया ...

...................

मैंने चुपके से ही उसके चूतड़ों से अपना लण्ड चिपका दिया ...

रिया ने एक दम से पीछे मुड़कर देखा ....
और मुझे देखते ही उसका चेहरा भक्क हो गया ...

रिया : अरे भैया आप ....

ओह ......मैं भले ही उसको ना जानता हूँ ...पर वो मुझे अच्छी तरह से जानती है ....
तभी तो उसने जूली को भी पहचान लिया ....

रिया ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे में ले जाने लगी ...

वो यही चाहती थी कि मैं जूली वाले कमरे में देखूं ...
उसको शायद डर था कि वहां जूली को ..मेहता अंकल के साथ देख मैं हल्ला न कर दूँ ...

इसीलिए वो मुझे वहां से हटाना चाहती थी ...

मैंने भी इस स्थिति का फ़ायदा उठाने की सोची ...

मैं : क्या हुआ ???? ये क्या हो रहा है ....

मैंने उसके नंगे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए पूछा ...

उसने मेरा हाथ झटका ...

रिया : उफ्फ्फ्फ्फ़ ये क्या कर रहे हो भैया ...
मैं तो बस टॉयलेट करने आई थी ...और आप यहाँ क्या कर रहे हो ...???

मैं : मैं भी तो बस जूली को ढूंढ रहा था ....फिर मुझे भी प्रेशर लगा ...और यहाँ आ गया ...

रिया : वो तो ठीक है ...फिर ये सब क्या कर रहे थे ...

वो लगातार मेरे लण्ड को ई देख रही थी ....

मैं : अरे मेरी हसीना ...जब सामने इतना सेक्सी चूतड़ दिखा ...तो मैंने तो खुद को संभाल लिया ...मगर ये नहीं माना ....हा हा हा 

मैंने अपने लण्ड को हिलाते हुए कहा ....
रुको मैं भी फ्रेश हो लेता हूँ ...

अब वो डर गई ....रिया नहीं चाहती थी कि मैं फिर से बाथरूम में जाऊं ...
उसको डर था कि मैं जूली को देख लूंगा ...

....................

बस यही बात मेरे लिए फायदे का सौदा साबित हुई ...

रिया : ओह तो इसको क्या ऐसे ही लेकर जाओगे ..
ऐसे तो कमोड की वजाए छत पर जायेगी ...

उसने मेरे छत की ओर तने हुए लण्ड को देखकर कहा ..
मैं भी उसकी बात से मासूम बन गया ...

मैं : हाँ यार रिया ...बात तो तेरी सही है ...वैसे ये खड़ा भी तूने किया है ...तो इसको बैठा भी तू ही ....

रिया : हा ह अ हा ...कैसे बैठते हैं आपके ये जनाव...

मैं : यार शादी शुदा हो ..अब ये भी क्या मैं बताऊंगा ...
तुम्हारे पास तो कई जगह हैं ..जहाँ ये आराम से बैठ सकता है ....

रिया : जी नहीं ...वो सभी जगह बुक हैं ....वहां इसको कहीं जगह नहीं मिलेगी ....

मैं : ओह ...क्या यार ??? चलो छोड़ो ....कम से कम वो जगह दिखा तो सकती हो ...
ये जनाव तो देखकर ही काम चला लेंगे ....

रिया : अरे नहीं बाबा ...अभी आपने देखा तो था ...सीधे कब्ज़ा करने ही आ गया था ...
मैं ये रिस्क नहीं ले सकती ..

मैंने फिर से अपना वही हथियार अपनाया ...

मैं : ठीक है ..फिर हम छत पर ही मूत कर आ जाते हैं ..
और मैं फिर से बाथरूम की ओर बड़ा ...

मेरा आईडिया काम कर गया ...

रिया : अर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रर्र्र्रीऐ नहीईईईईईईई वहां नहीं ....उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आप भी नहीं मानोगे ना ...
चलिए ठीक है ....पर सिर्फ देखना ....ओके ...और इसको दूर ही रखना ...

मैंने एक ठंडी सांस ली ...

मैं : हाँ हाँ ...अब जल्दी करो ...

वो लहंगा फिर से ऊपर करने लगी ....

......................

मैं : ओह ऐसे नहीं ...इसको उतार कर ..सही से ...
हमारे साहबजादे को कोई रूकावट पसंद नहीं ...

और मैंने खुद ही उसके लहंगे के हुक को निकाल दिया ..
रिया ने धीरे से अपना लहंगा नीचे को उतार दिया ...

उसने कोई विरोध नहीं किया ...
अब रिया केवल एक छोटी सी चोली पहने मेरे सामने खड़ी थी ....

मैंने चोली के ऊपर से ही उसने मस्त मम्मो को दबाया ...
रिया ने तुरंत मेरे हाथ को झटक दिया ....
वो वहां रखी एक आराम कुर्सी पर बैठते हुए बोली ...

रिया : इस सबका समय नहीं है ...जल्दी से देखो ....मुझे और भी बहुत से काम हैं .....

उसकी इस जल्दवाजी पर मुझे मजा आ गया ....

रिया ने आराम कुर्सी पर पीछे को लेटते हुए अपने दोनों पैरों को फैलाकर ..दोनों हथ्थो पर रख लिया ...
क्या पोज़ बनाया था उसने ....
लगता है ये कुर्सी चुदाई के लिए ही बनी है ....
और दोनों बहने यही अपने पिता से चुदवाती होंगी ...

मैं रिया के पास गया और अपना मुहं ठीक उसकी चूत से ऊपर ले गया ...
मैं उसके इतना पास था कि मेरी साँसे रिया की चूत के ऊपर जा रही थी ...

मैंने फिर से उसके चूत के बाहर निकले हुए होंठो को कांपते हुए महसूस किया ....

रिया : बस देख ली ना .....जल्दी करो ...घर में बहुत मेहमान हैं ....कोई भी इधर आ सकता है ... 

मुझे भी इसी बात का अंदेशा था ..पर मैं अब उसको छोड़ना नहीं चाहता था ...

मेरा लण्ड तो पहले से ही तैयार था ... जूली की चुदाई देखने के बाद तो वो बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था ...

मैंने रिया के दोनों पैरों को वहीँ हथ्थे पर ही अपने दोनी हाथो से जाम कर दिया ....

...................
 

अपनी कमर को हल्का सा नीचे किया ....
और मेरा लण्ड अपने निशाने पर पहुँच गया ...

रिया की चूत अभी बिलकुल सूखी थी ...पर फिर भी मुझे पता था कि वो आसानी से मेरे लण्ड को ले लेगी ...

आखिर वो लंदन से आई थी ...और मेहता अंकल जैसे बड़े लण्ड लेने की आदि थी ...

मैंने लण्ड को रिया की चूत के मुख पर रखा ...
और मेरा सोचना सही साबित हुआ ...जब एक ही धक्के में मेरा लण्ड रिया की चूत में समा गया ...

मेरा लण्ड पूरा का पूरा रिया की चूत के अंदर था ...

रिया का मुहं खुला का खुला रह गया ...

रिया : अह्ह्हाआआआ ये क्या कर रहे हो भैया ???

वो जोर लगाकर निकलने ही वाली थी ...
की मैंने वहां एक और धमाका कर दिया ....

मैं : वही जो वहां तेरा बाप मेरी जूली के साथ कर रहा है ....
बदलाआआआआआआआआ 

रिया : ओह अह्ह्हाआआ अह्हा इसका मतलब अपने देख लिया था ....अह्हा अह्हा अह्हा अह्हा 
अर्रे रुको तो ...आप कर लेना ...पर पहले कंडोम तो लगा लो ...
मेरी बात सुनते ही वो शांत हो गई

मैं : अब इस समय कंडोम कहाँ से लाऊँ ...

रिया : अरे यहीं रखा है ...वो उस ड्रायर में ...

मुझे उसकी बार पर विश्वास करना पड़ा ...और मेरे लिए भी सही था ...आखिर वो विदेश में भी चुदवाती होगी ...

मैंने वहां से कंडोम निकाला ...
रिया ने एक और अच्छा काम किया ...उसने खुद मेरे हाथ से पैकेट लिया ...और खोलकर बड़े ही प्यार से मेरे लण्ड पर चढ़ा दिया ...

मैंने इस बार और भी अच्छे ढंग से खड़े होकर ...लण्ड को फिर से उसकी चूत में सरका दिया ...
और अपना काम शुरू कर दिया ...

मैं लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था ...

...और अब वो आराम से चुदवाने लगी ...

अह्ह्ह आह्ह और मेरी मेहनत सफल हुई ...
अचानक धक्को से फच फच की आवाजें आने लगी ..

रिया की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था ...

मुझे जोश आ गया ...और मैं अब और भी तेजी से धक्के लगाने लगा ...

५ मिनट तक वहां बहुत अच्छा शमा बन गया था ...
मुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा था ...

और फिर ....

???????????????????

...............
.................................


RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 111


रिया के कहने पर ही मुझे अपनी सुरक्षा का ध्यान आया ...
मैंने उसके बताने पर एक विदेशी कंडोम का उपयोग किया ....
उसको पहनने पर भी उसके होने या ना होने का अहसास नहीं हो रहा था ....
और बहुत ही अच्छी खुसबू भी आ रही थी उससे ...

रिया ने खुद ही अपने हाथों से उसको मेरे लण्ड पर चढ़ाया ...
और उसको ३-४ बार चूसकर लण्ड को फिर से टाइट किया ...

मैंने इस बार और भी अच्छे ढंग से खड़े होकर ...लण्ड को फिर से उसकी चूत में सरका दिया ...
और अपना काम शुरू कर दिया ...

मैं लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था ...

...और अब वो आराम से चुदवाने लगी ...

नई बात ये थी कि वो मेरे द्वारा ब्लू फिल्मों में देखि गई विदेशी लड़कियों की तरह ही मस्ता रही थी ... 
और बिलकुल ऐसा व्यवहार कर रही थी ....जैसे पहली बार चुदवा रही हो ...

जबकि उसकी चूत में मेरा लण्ड बहुत ही आराम से आ जा रहा था ...

स्की सिस्कारियों में दर्द के साथ साथ ...चुदवाने की तीर्व इच्छा भी थी ....

रिया : आह्ह अह्हा अहा अह्ह्ह फ़क मी हार्ड .....(तेजी से चोदो मुझे) ........अह्ह्ह नहीईईईई ईई ओह अह्हा अह्हा फ़क मी हार्ड .....(तेजी से चोदो मुझे) ...ओह्ह अह्हा आह्ह और कस के ... अह्हा अह्हा अह्हा अह्हाआआआ अह्हा अह्ह्ह ....उफ्फ्फ आह्ह ...

इस तरह उसको चोदने में बहुत ही मजा आ रहा था ...

अह्ह्ह आह्ह और मेरी मेहनत सफल हुई ...
अचानक धक्को से फच-फच की आवाजें आने लगी ..

रिया की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था ...

मुझे जोश आ गया ...और मैं अब और भी तेजी से धक्के लगाने लगा ...

५ मिनट तक वहां बहुत अच्छा शमा बन गया था ...
मुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा था ...

..................

और फिर मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया ....
आखिर बहुत समय से बेचारा रोके पड़ा था ...

उधर रिया ने भी अपनी कमर उचकाई ...
और बहुत तेज सिस्कारियां लेने लगी ...

रिया : अह्ह्हाआआआआ अह्ह्हाआआ अह्ह्ह ओह हो गया ....बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स 

थैंक्स गॉड वो भी झड़ गई थी ....
उसके झड़ने से मुझे बहुत सुकून मिला ...वरना मुझे बहुत ग्लानि होती ...

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया ..
फिर कंडोम निकालकर वहीँ डाला ...और वहीँ रखी एक टॉवल से लण्ड को पोंछ लिया ...

रिया कुछ देर वैसे ही लेटी हुई मेरे लण्ड को देख रही थी ...

रिया : वैसे भैया ...आप चोदते तो अच्छा हो ...पर आपके हथियार को देखते हुए लगता है ...कि जूली भाभी को भी थोड़ा बहुत मजा….. तगड़े हथियार से लेने का पूरा हक़ है ...
आपका हथियार तो नार्मल ही है ...

मैं : हाँ जानेमन तेरी चूत देखकर तो मुझे भी ऐसा ही लगता है ...लगता है तूने तो खूब तगड़े तगड़े डलवाये हैं इसमें ....

रिया : इसकी छोड़ो ..इसने तो पूरी दुनिआ देखी है ...

मैं : तेरा पति कुछ नहीं कहता ...

रिया : वो क्या कहेंगे ...?? उनको तो ग्रुप सेक्स का चस्का है ....
वो तो खुद अपने ही हाथों से अपने दोस्तों का लण्ड पकड़कर मेरी चूत में डालते हैं ....
वो तो बहुत एडवांस और मॉडर्न हैं ...

मैं : अच्छा जी ...फिर तो ठीक है ...और अगर मुझे ऐतराज होता तो मैं तभी हल्ला कर देता जब जूली को तुम्हारे पापा से चुदवाते हुए देखा ...

रिया अब उठकर बैठ गई थी ...उसने भी उसी टॉवल से अपनी चूत और आस पास का हिस्सा साफ़ किया ...
और लहंगा पहनने लगी ...

रिया : ओह ...अच्छा ....तो वैसे ही डरा रहे थे ....
मतलब फ्री में मुझे चोद दिया ...हा हा हा ...

...................


मैं : अरे अगर मुझे पता होता कि तू भी नाटक कर रही है ...तो मैं ऐसा क्यों करता ...??
आराम से वहीँ चोद देता ....जूली को देखते हुए ...
हा हा हा ....

रिया ने भी हंसी में मेरा साथ दिया ...

उसने ड्रेसिंग टेबल के सामने खुद को व्यवस्थित किया ...
और मुझसे बोली ...

रिया : चलो भैया ....बाहर कार्यक्रम में ...आपको मजेदार डांस दिखवाते हैं ...

मुझे तो वैसे भी देखना था ...कि जूली और रंजू भाभी कैसा प्रोग्राम करती हैं ...

मैं तुरंत तैयार हो गया ...मैंने ध्यान दिया कि रिया ने अपनी कच्छी नहीं पहनी ...

मैं : रिया तुम्हारी कच्छी वही बातरूम में रह गई ...पहनोगी नहीं ...

रिया : मुस्कुराते हुए ...वाह जी ..बहुत ध्यान रखते हो ..छोड़ो उसको ...आज ऐसे ही आपको अपना डांस दिखाते हैं ....
और वो तेजी से घूमी ...
उसका लहंगा कमर तक उठ गया ...ऐसा तो मैंने महंगे होटल में बार गर्ल को भी नहीं देखा था ...
मजा आ गया ....अब तो और भी मजा आने वाला था ...

लहंगा बहुत ही महंगा और एयर घूम वाला था ...जरा सा घूमने से ही पूरा उठ जा रहा था ...
मुझे उसकी गोल गांड पूरी नजर आ गई थी ....

अब ये देखना था कि केवल इन कुछ पर ही मस्ती चढ़ी थी ....
या कुछ और भी कलियाँ थी वहां जो इसका मजा ले रही थी ....

मैंने एक बार और रिया को अपने सीने से लगाया ...उसके कसे हुए मम्मो का अहसास होते ही ...दिल में उनको देखने कि इच्छा हुई ....

मैंने रिया के सीधे मम्मे को अपनी हथेली में भर लिया ...

मैं : अरे जानेमन ..एक बार इसको तो दिखा दो ....वरना सपने में आते रहेंगे ...

रिया : ओह ....तभी क्यों नहीं कहा ...?? अब देर हो जाएगी ...फिर देख लेना .....

मैं : फिर कब ...पता नहीं मौका मिले या नहीं ....

रिया : क्यों अब नहीं आओगे ....अरे ७ दिन बाद शादी है ....और कई फंक्शन यहाँ भी हैं ....आपको सभी में आना है ...ओके ....
और हाँ शादी में जरूर साथ चलना ....वहां बहुत मजा आएगा ...

मैं : क्यों ..???? कहाँ जाना है ...?? क्या बरात यहाँ नहीं आएगी ...

रिया : नहीं ..??? हमको वहीँ जाना है ....होटल में सब अरेंजमेंट है ....जूली भाभी ने पहले ही बता दिया था ....तो आपको तो आना ही होगा ...

मैं अब इस मस्ती के बाद मना तो कर ही नहीं सकता था ...

बात करते हुए ही हम दोनों हॉल में आ गए ....
बहुत भीड़ थी वहां ...हर उम्र का माल था ...एक से एक चमकीले कपड़ों में ....

मैंने देखा सभी लेडीज ही थी ....मुझे कुछ अजीव सा लगा ....

.....................

तभी रिया मुझे हाल के सामने एक कमरे में ले गई ...
वहां मेहता अंकल अपने ४ दोस्तों के साथ बैठे थे ...तिवारी अंकल भी थे ....
ओह इसका मतलब तिवारी अंकल यहाँ थे ...और रंजू भाभी अंदर चुदाई करवा रही थी ...
मैं भी एक कुर्सी पर बैठ गया ...जहाँ से पूरा हल नजर आ रहा था ....

वो सब भी ऐसे ही बैठे थे ....कुर्सी सभी ऐसे ही पड़ी थी ...कि सब सामने कार्यक्रम का मजा ले सकें ...

सामने एक मेज पर खाने पीने का सामान और कुछ ड्रिंक भी रखी थी ...

खास बात यह थी कि केवल मैं ही यंग था ....बाकी सभी बुड्ढे ही थे ....
लगभग मेहता अंकल की उम्र के ही ...

मेहता अंकल : और बेटा कैसा चल रहा है तुम्हारा काम ...

मैं : बहुत अच्छा अंकल ....बधाई हो आपको ...अब आप भी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गए ...

बस ऐसे ही कुछ फॉर्मल बातें हो रही थी ...

तभी बाहर एक लड़की डांस के लिए खड़ी हुई ...

१७-१८ साल की ..गोरी थी पर थोड़ी पतली थी ...उसने पिंक फ्रॉक जैसी कुछ फैंसी ड्रेस पहन रखी थी ...फ्रॉक का घेरा...... किसी गुड़िया की तरह ....कई फरों वाला था ...और उसके घुटनो से थोड़ा ऊपर तक ही था ...

जिसमें से उसको गोरी गोरी टाँगे जांघो तक ही नुमाया हो रही थी ....

वो अपना गाना सेट करा रही थी ....

तभी मुझे पता चला ...कि ओह ये तो साले सभी बुढहे बहत ही कमीने हैं ...

उनमें से एक बोला ...रुको यार देखो अब ध्यान से देखना ....उसने काली ..नेट वाली ,,,कच्छी ही पहनी है ...

दूसरा : हाँ हाँ हम भी यही देख रहे हैं ...और ना हुई तो ५००० तैयार रख ....

ओह साला ...
ये तो शर्त लगाकर मस्ती कर रहे हैं .... उनको मेरे से भी कोई फर्क नहीं पड़ा ....शायद मुझे ज्यादा नहीं जानते थे ....

क्या हो गया है इन बुड्ढों को ...कमीने ...अपनी पोती कि उम्र की लड़की की कच्छी पर शर्त लगा रहे थे ...

...................

और तभी मैंने सोचा ...
मैं भी क्या सोचने लगा ....ये तो साले कमीने होंगे ही ...आखिर तिवारी और मेहता अंकल जैसों के दोस्त हैं ...जिन्होंने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा....

तभी उस लड़की ने डांस शुरू कर दिया ....
रॉक इन रोल बेबी रॉक इन रोल ...
गाना भी ऐसा था ....और उस पर घूमती हुई वो बिलकुल बेबी डॉल जैसी ही लग रही थी ....

और ये क्या ...??? वो सामने वाला बुड्ढा बिलकुल सही था ....लड़की ने काली नेट वाली कच्छी ही पहनी हुई थी ...
कच्छी भी इतनी उसके चूतड़ों से चिपकी हुई थी ...कि उसके चूतड़ और चूत के सभी उभार साफ़ पता चल रहे थे ...

वैसे तो वहां कोई मर्द नहीं था ...और हम लोग उसको नहीं दिख रहे होंगे ....
पर फिर भी कुछ वेटर तो थे ही ...वो सब वेल ड्रेस में सर्विस दे रहे थे ....

मगर उनको किसी की चिंता नहीं थी ...

तभी दूसरे ने ५००० का चेक उसको तुरंत ही दे दिया ...

.....: ले यार तू जेट गया ..पर ये बता तूने कब देख ली इसकी कच्छी ....क्युकि कलर तक तो सही था ...पर नेट भी पता होना संदेह में डालता है ....

वो जोर से हंसा .... बोला हाँ अभी जब आया था ..तभी देख लिया था ....ये वहां कोने में उखरू बैठी कुछ कर रही थी ....तभी साफ़ साफ़ दिख गई थी ...

दूसरा : ओह तभी साले इतना उछल रहा था ...चिड़िया के दर्शन पहले ही कर लिए ...

डबल फ़ायदा .....फ़ुद्दी भी देख ली और पैसे भी ...सही है ..कोई बात नहीं ....

मैं उनकी बातें सुनकर सोच रहा था ....की यार यहाँ तो कमाई भी हो सकती है ...
बस तिवारी और मेहता अंकल चुप रहें ...

मैं यहाँ बहुत ही मस्ती और फिर कुछ शर्त लगाने का भी प्लान कर रहा था ....

देखता हूँ कितनी सफलता मिलती है ....
फिलहाल बहुत ही मजा आने वाला था ....

.........
……………………….


RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 112



मैं सभी इन बूढो के बारे में सोचने लगा ....ये तो साले कमीने होंगे ही ...आखिर तिवारी और मेहता अंकल जैसों के दोस्त हैं ...जिन्होंने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा....

लेकिन सभी बहुत अमीर और डीसेंट भी थे ....
शर्त हारते ही दूसरे ने ५००० का चेक उसको तुरंत ही दे दिया ...

और उनकी बातें कितनी सेक्सी थी ....
.....: ले यार तू जीत गया ..पर ये बता तूने कब देख ली इसकी कच्छी ....क्युकि कलर तक तो सही था ...पर नेट भी पता होना संदेह में डालता है ....

वो जोर से हंसा .... बोला हाँ अभी जब आया था ..तभी देख लिया था ....ये वहां कोने में उखरू बैठी कुछ कर रही थी ....तभी साफ़ साफ़ दिख गई थी ...

दूसरा : ओह तभी साले इतना उछल रहा था ...चिड़िया के दर्शन पहले ही कर लिए ...
डबल फ़ायदा .....फ़ुद्दी भी देख ली और पैसे भी ...सही है ..कोई बात नहीं ....

मैं उनकी बातें सुनकर सोच रहा था ....की यार यहाँ तो कमाई भी हो सकती है ...
बस तिवारी और मेहता अंकल चुप रहें ...

मैं यहाँ बहुत ही मस्ती और फिर कुछ शर्त लगाने का भी प्लान कर रहा था ....

देखता हूँ कितनी सफलता मिलती है ....
फिलहाल बहुत ही मजा आने वाला था ....

मैंने वहां चारों ओर देखा बहुत ही हाई पार्टी थी ...क्युकि मेहता अंकल भी शहर के जाने माने अमीर व्यक्तियों में आते थे ....

तो वहां सभी अमीर घरों की तितलियाँ बहुत ही सेक्सी अंदाज में मंडरा रही थी ....

तभी उन बुड्ढों में से एक बोला यार वो देखो उधर ....
वो गुलाबी घाघरे में ....ये तो जान है यार मेहता ....क्या मस्त चूतड़ हैं इसके यार ....मेरा तो बिना गोली खाए ही तन जाता है .....

मेहता अंकल : रुक यार मैं अभी आया ....

और वो उठकर चले गए ....
तिवारी अंकल भी कुछ देर पहले चले गए थे .....

अब वहां वो तीनो बूढे और मैं ही था ....

और जैसे ही मैंने उनकी बताई हुई जगह देखा ...
तो एक दम से समझ गया कि मेहता अंकल क्यों उठकर गए ...

ये तो मेरी जूली को देख रहे थे ...

..................

और हो भी क्यों नहीं .....

जूली इतनी सारी लेडीज़ में भी अलग ही नजर आ रही थी ....
उसने गुलाबी लहंगा और चोली पहनी थी ...हालाँकि उसने चुनरी बाँध रही थी ...पर उसकी एक चूची ....नंगा पेट उसके नवल तक और एक कन्धा पूरा नंगा ही दिख रहा था ...
चोली भी काफी कसी हुई और छोटी थी ....जो केवल डोरी से ही उसके कंधो और शायद बैक से बंधी थी ...
उसके गोरे सुडोल कंधे और बाहें सब नंगे नजर आ रहे थे ..
उसका लहंगा भी टुंडी से काफी नीचे बंधा था ....और उसके घुटनो से जरा सा ही नीचे होगा ....
कुल मिलाकर उसका सुन्दर बदन ढका बहुत ही कम था और दिख ज्यादा रहा था ...

मुझे खुद पर गर्व महसूस हुआ ...
कि मुझे इतनी सुन्दर बीवी मिली है ....जो यहाँ सबसे ज्यादा सेक्सी लग रही है ....

वो एक कुर्सी पर बैठी थी ...एक पैर दूसरे के ऊपर रखा था ...जिससे उसकी एक जांघ भी थोड़ी से दिख रही थी .....

तभी जूली ने अपने पैरों को बदला ....और अपना लहंगा दोनों हाथो से आगे से उठाकर ठीक किया ....

जिअसे साधारणतया लडकिया करती है ....हम कुछ दूर थे तो साफ साफ़ तो कुछ नहीं दिखा ...अगर पास होते तो दावे के साथ कह सकता हूँ ...की उसकी चूत तक साफ़ साफ दिख जाती ...

मगर सोचकर ही उन बुढ़हों को मजा आ गया था ...वो बहुत ही गन्दी बातें करने लगे थे ...जो शायद वो हमेशा आपस में करते ही होंगे ...

जो शर्त में हारा था ...उसने तेज आह भरी ...

१ बूढ़ा : आःह्हाआआ हाय यार ...काश में वहां होता ...क्या चिकनी जांघे हैं ....

जूली बराबर में बैठी रंजू भाभी से झुककर कुछ बात कर रही थी ...तो उसके चूतड़ एक ओर से बाहर को निकले हुए थे ...

२ बूढ़ा : अरे यार ...इस जैसी मलाई कोफ्ता को तो तीनो छेदों में एक साथ लण्ड डालकर चोदना चाहिए ..तभी इसको मजा आएगा ...

तीसरा जीभ निकाले बस घूरे जा रहा था ....
यार ये कब नाचेगी ...

.....................

१ बूढ़ा : तू चाहे कही भी डालना ...पर मैं तो इसके मोटे मोटे चूतड़ के बीच ही डालूँगा .... जब से देखें हैं साले मस्त मस्त ....तभी से सपने में आते हैं ....

२-३ बुढ़हों ने एक साथ ही पूछा ....: क्या कह रहा है वे ...तूने कब देखे ...

१ बूढ़ा : अरे बताया नहीं था उस दिन ....वो यही थी ..यहीं पर ही तो देखे थे ..यार क्या मस्त लग रही थी उस दिन ...
मैंने तो तभी सोच लिया था ..कि इसकी तो जरूर मारूंगा ...यार ...

३ बूढ़ा : अरे मुझे नहीं पता यार बता न ...कैसे देखे थे ..

१ बूढ़ा : हाय ..क्या याद दिला रहा है तू यार ....अरे ये सामने से कुछ उठा रही थी ...या पता नहीं क्या कर रही थी ...मैं इसके पीछे ही था ...इसने छोटी वाली मिनी स्कर्ट पहन रखी थी ...तभी पूरे गोल गोल चूतड़ नजर आ गए थे ....

३ बूढ़ा : अरे को कच्छी में ही देखे होंगे ना ...मैं समझा कि नंगे देख लिए ...

१ बूढ़ा : अरे नहीं यार ....मुझे तो पूरे नंगे से ही दिखे ...अगर कच्छी होगी भी तो वो पतली वाली होगी ...जिसकी डोरी चूतड़ों की दरार में घुस जाती है ...और इसके तो इतने गद्देदार हैं कि डोरी भी नहीं दिखी ...
सच बहुत मजा आया था उस दिन ...

उनकी बातें दुंकर मुझे ना जाने क्यों बहुत मजा आ रहा था ...मेरे ही सामने वो जूली ..जो मेरी प्यारी सेक्सी बीवी है ...ऐसी गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे ...

उसकी बातें सुनकर मुझे साफ़ लग गया ...कि इसने जूली ने नंगे चूतड़ ही देखे होंगे ...और जूली जानबूझकर ही इसके सामने झुकी होगी ....ऐसा तो वो ना जाने कितनी बार कर चुकी होगी ...उसको तो अपना जिस्म दिखने में बहुत मजा आता है ...

इस साले को पता चलेगा तो साला अपना सर पीट लेगा ....कि अगर जरा सा झुककर देखता तो जूली की छोटी सी प्यारी सी चूत भी देख लेता ...जो मैंने कई बार ऐसे ही मौकों पर देखी है ...

पीछे से दोनों चूतड़ों के गैप से उसकी गोरी चिकनी ...हल्का हल्का सा झांकती हुई चूत बहुत हिपयरी लगती है ....

२ बूढ़ा : अरे सालों तुम तो ऐसे बात कर रहे हो जैसे इसकी मिल ही जाएगी ...

अब तीनो मेरे सामने इतना खुलकर बात कर रहे थे ..जैसे उनको कोई चिंता ही नहीं हो ...

क्युकि नशा उन पर पूरी तरह सवार हो चुका था ...

१ बूढ़ा : अरे यार ..मेहता ने कहा है ....बहुत चालू है ...और शादी में साथ ही चलेगी ...वहां तो बहुत समय होगा ...वहीँ पटाकर चोद देंगे यार ...

मैंने सोचा कि ..इन सबका परिचय तो ले ही लिया जाए यार ...कि साले हैं कौन ..जो इतना खुलकर जूली के बारे में बात कर रहे हैं ....

मैं : वाह अंकल ...आप सच कह रहे हो ...वैसे मैं रोबिन ....और .....इस कंपनी में काम करता हूँ ...

अब उन्होंने मेरी ओर कुछ ध्यान से देखा ...और सभी ने अपना परिचय दिया ...

.................


शर्त हारने वाला रिटायर्ड बैंक मेनेजर था ...नाम अनवर ...ओह वो मुस्लिम था ...तभी जूली की गांड मारने की बात कर रहा थे ....

दूसरा वाला जोजफ ..वो ईसाई थे ...वो रिटायर्ड जज थे 

और तीसरा वो कुछ ज्यादा ही बूढ़ा देख रहा था ...गोल मटोल सा ...पेट बाहर निकला हुआ ...उसका नाम राम कपूर था ....वो कोई बड़े बिज़नेसमैन थे ... 

उन तीनो से जरा सी देर में ही मेरी दोस्ती हो गई ...

मेहता अंकल और तिवारी अंकल अभी तक नहीं आये थे ...वो शायद ड़र गए थे ...
या फिर हो सकता है कि साले किसी के साथ मस्ती कर रहे हों ...

पर मुझे चिंता नहीं थी ...
जूली, रंजू भाभी और अनु तीनो ही मेरे सामने हाल में ही थी ...

अब अगर किसी और की बजा रहे हो तो मुझे उससे क्या ....

राम अंकल काफी बूढ़े लग रहे थे .... उन्होंने मेरे से कहा ...

राम अंकल : देख बेटा बुरा मत मानना ...बस ऐसे ही थोड़ी बहुत मस्ती कर लेते हैं .....
और फिर थोड़ा नशा भी हो गया है ....

मैं : अरे क्या बात कर रहे हो आप अंकल ....ये सब तो चलता है ... और जीवन में सेक्स ना हो तो जीने का फ़ायदा ही क्या ...??

राम अंकल : बिलकुल ठीक कहा बेटा ....ये सब हमारे लिए किसी दवाई से काम नहीं ....देखो हम सब ही ..अभी तक फिट हैं ....अगर ये सब नहीं होता तो कहीं अस्पताल में या बिस्तर पर पड़े होते ..या मर खप गए होते ....

जोजफ अंकल : और नहीं तो क्या ....इन हसीनाओ के मस्ताने अंग देख कर सेक्सी बात करने के लिए तो हम इतनी सुबह टहलने के लिए उठ भी जाते हैं ....और कितना चल भी लेते हैं ....वरना कौन साल उठता ...हा हा हा ....

और तीनो जोर जोर से हसने लगे .....

अभी बाहर हॉल में कुछ साधारण महिलाएं ही नृत्य कर रही थी ...

पर वो उन पर भी सेक्सी कमेंट्स मार रहे थे ...

कि देख यार क्या मोटे चूतड़ है ....कैसे हिला रही है ..
और जब किसी का पल्लू नीचे गिर जाता ..तब तो उनके मजे आ जाते ...और उनकी गहरी चूचियों की घाटी देख आहें भरने लगते ....

और जूली को भी देखे जा रहे थे और कमेंट्स भी कर रहे थे ....

....................


जोजफ अंकल : यार अनवर इस पीस से मिलवा तो दे यार ...जरा पास से भी देख लेंगे ....देख कितनी छोटी चोली पहन रखी है ...वो भी बिना किसी बंधन के ...छू नहीं सकते तो जरा इन कबूतरों को देख ही लें ....नाच भी तो नहीं रही ...वरना चुनरी हटाकर नाचती तो मजा आ जाता ... इसका तो चोली का गला भी इतना बड़ा है ..कि जरा सा भी झुकेगी तो पूरे नंगे ही दिखेंगे ..

राम अंकल : अरे वो तू सही कह रहा है जोजफ ...मैं तो इसकी टाँगे देख रहा हूँ ...और लहंगा भी ऐसा है कि जरा भी घूमेगी तो पूरा उठेगा ....हाय पता नहीं अंदर कितना लम्बा नेकर या फिर पजामी होगी ...

अनवर अंकल : हाय यार क्या बात कही ..?? ये भी तो हो सकता है कि केवल कच्छी ही पहनी हो ...और भी छोटी वाली ..उस दिन कि तरह ....

और मैं मन ही मन हंस रहा था कि अगर इनको पता चल गया ..कि जूली ने लहंगे के अंदर कुछ यही पहना तो इनकी क्या हालत होगी ...

तभी वो लोग जूली पर भी शर्त लगाने लगे ...
चल हो जाए ५००० की .... इसने कितनी लम्बी नेकर पहनी होगी ...

राम अंकल : मेरे अनुसार तो एक छोटी पजामी होगी ...जो एक --सवा फिट की जो आती है ...

जोजफ अंकल : हम्म्म्म शायद नेकर ही होगा ...जो लड़कियों के छोटे-छोटे.. स्किन टाइट, रंग बिरंगे जो आते हैं ....

अनवर अंकल : यार मुझे तो लगता है इसने एक छोटी सी कच्छी ही पहनी होगी ...हा हा ...

मैंने तुरंत सोचा कि मैं भी इनसे फ़ायदा उठा ही लेता हूँ ..

मैं : क्यों अंकल क्या मैं इस शर्त में भाग नहीं ले सकता ...

राम अंकल : अरे क्यों नहीं बेटा ...हम भी तो देखे तुम्हारा अनुमान ....बताओ तुमने क्या सोचा ..

मैं : हा हा अब सब कुछ तो अपने बता ही दिया ...चलिए अगर इसने कुछ नहीं पहना होगा ..तो मैं जीत गया ...

सभी जोर से हसने लगते हैं ...

अनवर अंकल : अरे यार अगर कुछ नहीं पहना होगा ..तो वैसे ही पैसे वसूल हो जायेंगे ...
हा हा

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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपडेट 113


तभी वो लोग जूली पर भी शर्त लगाने लगे ...
चल हो जाए ५००० की .... इसने कितनी लम्बी नेकर पहनी होगी ...

राम अंकल : मेरे अनुसार तो एक छोटी पजामी होगी ...जो एक --सवा फिट की जो आती है ...

जोजफ अंकल : हम्म्म्म शायद नेकर ही होगा ...जो लड़कियों के छोटे-छोटे.. स्किन टाइट, रंग बिरंगे जो आते हैं ....

अनवर अंकल : यार मुझे तो लगता है इसने एक छोटी सी कच्छी ही पहनी होगी ...हा हा ...

मैंने तुरंत सोचा कि मैं भी इनसे फ़ायदा उठा ही लेता हूँ ..

मैं : क्यों अंकल क्या मैं इस शर्त में भाग नहीं ले सकता ...

राम अंकल : अरे क्यों नहीं बेटा ...हम भी तो देखे तुम्हारा अनुमान ....बताओ तुमने क्या सोचा ..

मैं : हा हा अब सब कुछ तो अपने बता ही दिया ...चलिए अगर इसने कुछ नहीं पहना होगा ..तो मैं जीत गया ...

सभी जोर से हसने लगते हैं ...

अनवर अंकल : अरे यार अगर कुछ नहीं पहना होगा ..तो वैसे ही पैसे वसूल हो जायेंगे ...
हा हा

वो सभी जूली के बारे में सोचकर ..पागलों की तरह ही हंस रहे थे ......

मैंने सोचा कि यार कुछ देर उठकर जाता हूँ ..तभी मेहता अंकल भी आएंगे ...और हो सकता है ये जूली से कुछ मजा करें ...

और मैं उनसे एक्सक्यूज़ करके बाहर आ गया ...

और मेरा सोचा बिलकुल सही था ...

बाहर एक तरफ मेहता अंकल खड़े हुए सिगरेट पी रहे थे ....

मुझे देखते ही वो कुछ सकपका से गए ...

मैं : अंकल आपके दोस्त ..आपको याद कर रहे हैं ...मैं जरा कुछ काम निबटाकर आता हूँ ...

मेहता अंकल : ओह अरे ..बैठो ना बेटा ....वो सॉरी ...ये सारे मेरे दोस्त ऐसे ही हैं ...
पता नहीं वो क्यों झेंप सा रहे थे ...शायद अंदर हुई बात के कारण....

.....................


मैंने उनका डर दूर करने के लिए ही बोला ...

मैं : अरे क्या अंकल आप भी ...ये सब तो चलता ही है ....और मुझे बहुत मजा आया ...यकीन मानिए ..हम लोग तो इससे भी ज्यादा मजाक करते हैं ...
बस प्लीज अपने दोस्तों को ये मत बताना कि मैं जूली का हस्बैंड हूँ ....बाकि सब मजाक तो चलता है ..हा हा 

मैंने माहौल को बहुत ही हल्का कर दिया ...

अंकल का चेहरा एक दम से चमक गया ...
वो बहुत ही खुश हो गए ...

और मैं उनको दिखाने के लिए बाहर को चला गया ..

अंकल भी तुरंत सिगरेट फेंककर ...अंदर चले गए ...

मैंने बस १ मिनट ही इंतजार किया ...और फिर से अंदर आ गया ...

दरवाजा उनकी बैक साइड था...उनको पता ही नहीं चला ...

मैं चुपचाप अंदर जाकर ...एक परदे के पीछे छिप गया ..

मैंने पहले ही यहाँ छुपने का सोच लिया था ....

अब वो लोग आपस में बात कर रहे थे ....

अनवर अंकल : अरे यार कहाँ चला गया था तू ....सब के सेक्सी डांस मिस कर दिए तूने .....

मेहता अंकल : अरे तुम सब पागल हो क्या ..?? अरे वो रोबिन बैठा था ...उसके सामने ही शुरू हो गए ...वो यहीं रहता है यार ..और क्या सोचेगा मेरे बारे में ....और यहाँ सभी को जानता है वो ...अगर उसको बुरा लग जाता तो ....

राम अंकल : ओह ...अरे सॉरी यार ..हमने तो सोचा वो भी तेरे साथ ही होगा ...तभी तूने उसको यहाँ बैठाया है ...

जोजफ अंकल : पर यार वो तो खुद मजे ले रहा था ...उसको खुद इस सबमे मजा आ रहा था सच ...

अनवर अंकल : और तो और ....वो तो शर्त तक लगाकर गया है ....

मेहता अंकल : क्या शर्त ??? कैसी शर्त .......

........................


अनवर अंकल : अरे वो जो सामने बैठी है ना ....उस पर ....और पानी वही ..पुरानी शर्त ...की इसने लहंगे में क्या पहना है ...???

मेहता अंकल : ओह ..क्या कह रहे हो तुम ...?? क्या इसी पर पक्का ....अरे ये तो उसकी रिस्तेदार है ...

थैंक्स गॉड कि अंकल ने सच नहीं बताया ...

राम अंकल : अरे तू क्यों परेसान हो रहा है ....हमको तो ऐसा कुछ नहीं लगा ......
और वो खुद ही मजे ले रहा था ... 
अच्छा अब तुम लोग छोड़ो इन बातों को ...सुन यार मेहता ...जरा इस पटाका से मिलवा तो दे यार ...

मेहता अंकल : अरे तो इसमें क्या है ..?? अभी मिलवा देते हैं ...

और उन्होंने एक वेटर को बुलाकर कुछ कहा ...
फिर वो चला गया ....

मैं साँस रोके ये सब देख रहा था ...

और कुछ देर बाद ही जूली वहां आ जाती है ...वो सभी को हाथ मिलाकर हैल्लो बोलती है ...

मेहता अंकल तीनो से ही उसको मिलवाते हैं ...

जूली उनकी बगल में ही खड़ी थी ..
मैंने देखा वो अपना हाथ उसकी कमर पर रख देते हैं ..जो फिसल कर उसके चूतड़ों तक पहुँच जाता है ...

मैं उनके ठीक पीछे परदे की ओट में खड़ा था .....
मुझे उन सभी की हर हरकत बहुत ही अच्छी तरह से दिखाई दे रही थी ...

जूली को सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि मैं यहाँ भी हो सकता हूँ .....
वो बहुत ही खुलकर उनसे मिल रही थी ....

मेहता अंकल : बेटा ये सभी मेरे बहुत ही गहरे मित्र हैं .....तुम्हारी बहुत ही तारीफ कर रहे थे ....और मिलना चाह रहे थे ....तुम इनको बहुत ही अच्छी लगी ...

मेहता अंकल उससे बात करने के साथ साथ अपना हाथ जूली के चूतड़ पर ही रखे हुए थे ...जो वहां गोल मटोल ..चारों ओर घूम रहा था ....

मैंने देखा कि ....राम अंकल थोड़ा पीछे को बैठे हुए थे ....और उनकी नजर मेहता अंकल के हाथ पर ही थी ...जिसको देखकर वो मुस्कराते हुए मजा ले रहे थे ...

जूली ने एक बार भी उनके हाथ कोई विरोध नहीं किया ..

अब मैंने देखा कि मेहता अंकल का हाथ कुछ ज्यादा ही गुस्ताखी करने लगा है ..
वो सहलाने के साथ साथ जूली के लहंगे को समेटते भी जा रहे थे ....
जिससे जूली की चिकनी जांघे पीछे से नंगी होती जा रही थी ....

राम अंकल की नजर बदस्तूर वहीँ थी ...और तभी वो जूली के सामने ही बोल पड़े ...

राम अंकल : ओह यार ....मैं तो शर्त हार गया ...

...........................


मुझे याद आ गया ..कि उन्होंने कुछ पजामी टाइप ..पहने होने को कहा था ...जो उनको नहीं दिखाई दी ...तभी शायद वो मायूस हो गए थे ....
पर नंगी और चिकनी जांघे देख ..उनका चेहरा चमक रहा था ...

तभी अनवर अंकल ने जूली को कुछ ऑफर किया ...उन्होंने वहां रखी एक प्लेट उठाई और ...

अनवर अंकल : लो बेटा ...ये लो ....और कब है तुम्हारा डांस ....

वो सबसे कोने में बैठे थे ....

जूली जैसे ही प्लेट में लेने के लिए झुकी ...
तो कई बात एक साथ हो गई ...
चोली में से जूली के मम्मे देखने के लिए उन्होंने प्लेट को एक दम से नीचे मेज पर रख दिया ...

जूली अपने ही गति में आगे को मेज पर गिर सी जाती है ....
मेहता अंकल का हाथ जो काफी ऊपर तक उसके लहंगे को उठा चुका था ..और उस समय भी उसके चूतड़ पर ही था ...
सीधे ही जूली के नंगे चूतड़ पर पहुंच जाता है ...
और मेज से भी उसका बैलेंस गड़बड़ा जाता है ...
जिससे जूली उन पैरों के पास गिर जाती है ....

मुझे जूली का केवल कुछ ही भाग दिख रहा था ...वो उनके आगे गिरी थी ...
मगर चारों ने उसको अच्छी तरह देख लिया होगा ...

पता नहीं उसका कौन-कौन सा अंग उधर गया होगा ...

चारों जल्दी से उठकर उसको पकड़ कर उठाते हैं ...

जूली अपने लहंगे को सही कर रही थी ...

चारो एक साथ : ओह बेटा कहीं लगी तो नहीं ....

जूली : नहीं अंकल ..ओह सॉरी ...मेरा बैलेंस बिगड़ गया था ....बस बस मैं ठीक हूँ ....

चारों ही उसको देखने के बहाने ...जगह जगह से छूने
की कोशिश कर रहे थे ...

मैं सही से देख भी नहीं पा रहा था ....कि वो उसको कहाँ-कहाँ छू रहे हैं .....

ओह ये साले तो इतना गर्म हो रहे हैं ....कि अभी यहीं जूली का रेप ही ना कर दें ...

पता नहीं कैसे बचेगी अब जूली ..........

??????????????? 

.....................


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