मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - Printable Version

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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

मेरा लण्ड एक लयबद्ध तरीके से रंजू भाभी की मस्त चूत में अटखेलियां कर रहा था ....

मैं अपने हाथों से उनकी चूचियों को मसल रहा था ..कभी हलके से तो कभी पूरी कसकर ..

कभी कभी मैं उनके निप्पल भी अपनी अंगुली और अंगूठे की साहयता से मसल देता ...

रंजू भाभी लगातार सिसकारी निकल रही थीं ...

रंजू भाभी: अह्ह्ह्ह्हाआआआआ ओह ह्ह्ह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अह्ह्हाआआ 

मेरे होंठ सूखने लगे ...

मैं उनके लाल होंठो को चूसना चाह रहा था ..

बस यही मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी ...

मैं आगे बढ़कर उनके होंठो को अपने मुह में नहीं ले पा रहा था ...

शायद इसलिए क्युकि भाभी मुझसे उम्र में बड़ी थी ...

तभी भाभी आगे को बढ़कर अपना सर आगे कर ..मेरे को अपनी और झुकाती है ..

और मेरे होंठो को चूम लेती हैं ...

शायद इसीलिए सेक्स करने के बाद हम लोग इतना करीब आ जाते हैं ...

एक दूसरे की भावनाओं को कितना जल्दी समझ जाते हैं ...

मैं भाभी के होंटों को चूसने लगता हूँ ...

तभी भाभी कसकर मुझे पकड़ लेती है ...और मुझे अपने लण्ड पर गर्म गर्म अहसास होता है ..

रंजू भाभी ने अपना पानी छोड़ दिया था ...

रंजू भाभी: अह्ह्ह्ह्हाआआ अह्ह्ह्ह ह्ह्ह ओह नहीईइइइइइइइइइइइइइइइइइ अह्ह्ह्हह्ह 
अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआअ 

वो कसकर मुझे चिपकाये थीं .. मेरा लण्ड उनकी चूत में पूरी तरह कसा था ...

मैंने भी उनकी चूची को पाकर फिर से खड़ा हुआ और तेज तेज धक्के दिए ...

अब मेरा भी निकलने वाला था ...

मैंने अपना लण्ड बाहर निकालने के लिए पीछे हट ही रहा था कि...

रंजू भाभी: ओह नहीईईईईईई अंदर ही डाल दो ...
बहुत दिन से इसको पानी नहीं लगा है ..
जल्दी करो ओ ओ ओ आआअ ...

मैं: ओह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..अगर कुछ रुक गया तो ..क्या होगा ???????

रंजू भाभी: अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह कुछ नहीं होगा ...
मैं अब इस मजे को नहीं जाने दूंगी ...
अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् 

और मैंने उनको कसकर पकड़ लिया ...

मेरे लण्ड से पिचकारी निकलने लगी ..

जो एक के बाद एक उनके चूत में जा रही थीं ...

भाभी मस्ती से आँखें बंद किये मेरी हर पिचकारी का आनंद ले रही थी ...

रंजू भाभी: अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आज तूने अपनी भाभी को तृप्त कर दिया रोबिन ..
आज से ये अब तेरी है ..
तू इसका ध्यान रखना ...
नियम से इसमें पानी डालते रहना ...

मैं: हाँ हाँ भाभी अब तो मेरा लण्ड भी आपको नहीं छोड़ेगा ...कितनी प्यारी हो आप ..
और आपकी ये चूत .....
आई लव यू भाभी ...

रंजू भाभी: आई लव यू टू ...पुच पुच 

उन्होंने मेरे सब जगह चूम लिया ..

सच बहुत हॉट है रंजू भाभी ...

अब लण्ड से पानी निकलने के बाद मुझे जूली कि याद आई ...

भाभी नंगी अपने चूतड़ों की ओर से कपडा डाल अपनी चूत साफ़ कर रही थी ...

भाभी और क्या देखा था आपने ..
अंकल ने भी जूली को चोद दिया है ना ...
मुझे तो ऐसा ही लगता है ...

रंजू भाभी: अरे नहीं रे ...ऐसा तो मुझे नहीं लगता ...
पर हाँ दोनों एक दूसरे को नंगा देख चुके हैं ..
और चुम्मा चाटी भी होती रहती है ...

मैं: अरे आपने क्या देखा वो बताओ ना ..???

रंजू भाभी: अब तू फिर जाकर लड़ेगा ना जूली से ...

मैं: अरे अब मैं क्यों लड़ूंगा ... ???
मुझे तो इतनी प्यारी भाभी मिल गई ना अब चोदने के लिए ...

रंजू भाभी: ओ हाँ ..सुन मैंने २-३ बार उनको चूमते हुए देखा है ..

मैं: बस स्स्स्स्स्स्स्स्स वो तो मैंने कितनी बार देखा है ..वो तो जब भी आते हैं ..मेरे सामने ही जूली के गालो को चूमते हैं ..
ये तो अलग बात हुई ना ..

रंजू भाभी: अरे वैसे नहीं पागल ..
एक बार जब मैं गैलरी में थी तो तुम्हारे अंकल जूली के पास ही गए थे ...
मैंने वैसे ही किचिन में झांक लिया 
तो तुम्हारे अंकल जूली को चिपकाये उसके होंठो को चूस रहे थे ...

मैं: बस इतना ही ना ...

रंजू भाभी: और उनके हाथ जूली के नंगे चूतड़ों पर थे ..जिनको वो मसल रहे थे ...
तुमको तो पता ही है ..
कि वो कितनी छोटी गाउन पहनती है ...और कच्छी पहनती नहीं है ...
या हो सकता है कि इन्होने उतार दी हो ....

मैं: तो फिर तो आगे भी कुछ किया होगा उन्होंने ...

रंजू भाभी: मुझे भी यही लगा था ...पर फिर कुछ देर बाद ही ये वापस आ गए थे ...

मैं: और क्या क्या देखा आपने ????

रंजू भाभी: बस ऐसा ही कुछ और भी देखा था ... फिर बाद में बता दूंगी ...
उन्होंने अपनी पजामी सीधी कर पहनते हुए कहा ...

मुझे भी अब जूली को देखने कि इच्छा होने लगी थी ..

मैंने मोबाइल निकाल समय देखा ...

करीब आधा घंटा मुझे घर से निकले हो गया था ...

अनु भी वहां थी तो तिवारी अंकल जूली से ज्यादा मजा तो नहीं ले पाये होंगे ...

और मैंने तो यहाँ पूरा काम ही कर दिया था ...

पर कहीं ना कहीं दिल जूली के बारे में जानने को कर रहा था ...

तभी रंजू भाभी ने मेरे लण्ड को भी कपडे से साफ़ किया ..फिर उसको चूमकर मेरी पेंट में कर दिया ...

मैंने उनको चूमा और वहां से निकाल आया ...

मैंने अपने फ्लैट की ओर देखा ...

दरवाजा बंद था ....

मतलब अंकल अभी भी अंदर ही थे ...

मैं अभी प्लान कर ही रहा था ...

कि मुझे सीढ़ियों से अनु आती नजर आई ...

मैं चोंक गया ...अनु यहाँ है ..

तो क्या बंद फ्लैट के अंदर अंकल और जूली अकेले हैं ..

ओह क्या वो दोनों भी चुदाई कर रहे हैं ..???

अनु मुझे आश्चर्य से देख रही थी ...

मैंने उसको आँखों में देखते हुए ही पूछा ..

मैं: कहाँ गई थी तू .... ???

अनु: (जैसे उसने कुछ सुना ही नहीं ) अरे भैया आप यहाँ ..इस समय ...

मैं: मैंने तुझसे कुछ पूछा ...

अनु: अपने हाथ में सिगरेट कि डब्बी दिखाते हुए ..
अंकल ने मंगाई थी ...

मैं: क्या कर रहे हैं वो दोनों अंदर..........?????

अनु ने कंधे उचकाए ...

अनु: मुझे क्या पता ????

मैं: कितनी देर हो गई तुझे निकले हुए ...

अनु: अभी तो गई थी ...हाँ दुकान पर कुछ भीड़ थी ..

मुझे पता था कि बाहर कॉलोनी तक जाने इतनी सीढ़ियां ..इस सबमे करीब १५ मिनट तो लगते ही हैं ..

इसका मतलब पिछले १५-२० मिनट से दोनों अंदर हैं ..
और दरवाजा भी लॉक कर लिया ...

साला तिवारी मेरी बीवी से पूरा मजा ले रहा होगा ...

अब देखा कैसे जाये ...

तभी मुझे किचिन वाली खिड़की नजर आई ...

और मैं चुपचाप अनु को वहां ले गया ...

मेरी किस्मत कि खिड़की खुली थी ..

हाँ उसके दरवाजे भिड़ा कर बंद कर दिया था ...

मैंने हलकी से आहत लेते हुए दरवाजे को खोल दिया ...

किचिन में कोई नहीं था ...

मैंने उसके जंगले कि चिटकनी खोल उसको भी खोला ..

और देखा....
अब अंदर जाया जा सकता था ..

पर खिड़की काफी ऊँची थी ...
ऊपर चढ़ने के लिए कोई ऊँची कुर्सी या स्टूल चाहिए था ...

मैंने अनु कि और देखा ...
उसने अपना कल वाला फ्रॉक पहन लिया था ...

शायद बाहर आने के लिए ...
या अंकल के कारण....

मैंने मुह पर ऊँगली रख उसको चुप रहने के लिए इशारा किया ...

और उसको अंदर जाने के लिए बोला ...

वो एक दम तैयार हो गई ...

मैंने उसको उचकाया ...और जैसे ही उसके चूतड़ों पर हाथ लगाया ...

एक दम से ठंडा सा लगा ..

अनु ने अभी भी कच्छी नहीं पहनी थी ...

उसके चूतड़ नंगे थे .....

............................



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

मैंने अनु को गोद में उठाकर खिड़की पर टिकाया ..
और अपना हाथ सहारे के लिए ही उसके चूतड़ों पर रखा ...

उसका छोटा फ्रॉक हट गया था और मेरा हाथ उसके नंगे चूतड़ों पर था ..

एक बार फिर मेरे हाथों ने अनु के मांसल ..छोटे छोटे चूतड़ों का स्पर्श किया ..और रोमांच से भर गए ..

इससे पहले मेरे मन में उत्तेजना के साथ साथ शायद कुछ गुस्सा भी था ..

कि एक ६५ साल का बुढा... मेरी जवान सुन्दर बीवी ..जो लगभग नंगी थी ...
अंदर मेरे घर पर और शायद मेरे ही बैडरूम में ...मेरे बिस्तर पर ..
ना जाने क्या कर रहा होगा ??????

मगर अनु के नंगे चूतड़ों के स्पर्श ...
और जब वो खिड़की पर उकड़ू बैठी ..
तब उसके नंगे चूतड़ और उसकी प्यारी कोमल ..छोटी सी चूत देख ...
जिससे मैंने कल बहत मजे किये थे ....
और वो सब मेरी जान जूली के कारण ही हो सका था ..

मेरा सारा अंदर का मलवा गायब हो गया ..
और मैं अब केवल जूली के मजे के बारे में सोचने लगा ..

लेकिन मन उसको ये सब करते देखना चाहता था ..

कि मेरी जान जूली को पूरा मजा आ रहा है या नहीं ..
वो पूरी तरह आनंद ले रही है या नहीं ...

अनु के उकड़ू बैठने से उसके नंगे चूतड़ और खिली चूत ठीक मेरे चेहरे पर थे ...

उसकी फ्रॉक सिमटकर मेरे हाथो से दबी थी ...

मैंने अनु को दोनों हाथों से थाम रखा था ...

मेरी गर्म साँसे जब अनु को अपनी चूत पर महसूस हुई होंगी ...
तभी उसने अपनी आँखों में एक अलग ही तरह कि बैचेनी लिए मेरी ओर देखा ...

मैंने आँखों ही आँखों में उसको आई लव यू कहा ..
और अपने होंठ उसकी चूत पर रख एक गर्म चुम्मा लिया ...

अनु कि आँखे अपने आप बंद हो गई...

मगर मैंने खुद पर नियंत्रण रखा ...

मैंने उसको किचिन में उतरने और दरवाजा खोलने को बोला ...

वो जैसे सब समझ गई ...

वो जल्दी से नीचे उतर किचिन से होते हुए ...
ऐसे आगे बड़ी कि कोई उसे ना देखे ...
वो बहुत साबधानी और चारों ओर देखकर आगे बाद रही थी ...

फिर वो मुख्य द्वार की ओर बड़ी ..
मैं भी घूमकर आगे बढ़ गया ....

और अपने दरवाजे की तरफ आया ...

बहुत हलके से लॉक खुलने की आवाज आई ...

अनु काफी समय से हमारे घर आ रही है ...
इसलिए उसे ये सब करना आता था ...

उसने बाकई बहुत साबधानी से काम किया...

अंकल या जूली किसी को कोई भनक तक नहीं मिली ..

मैं चुपचाप अंदर आया ...

और उससे इशारे से पूछा ...
कहाँ हैं दोनों ????????

अनु ने बैडरूम की ओर इशारा किया ...

मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी ...

मैंने अनु को एक तरफ से देखने भेज ..पहले किचिन में जाकर सबसे पहले खिड़की का जंगला लॉक किया ..
कि जूली को बिलकुल शक ना हो ...

मैं जैसे ही मुड़ा ..मुझे किचिन में एक कोने में जूली कि नाइटी दिखी ..
जो उसने सुबह पहनी थी ..

मुझे अच्छी तरह याद है कि जूली केवल यही नाइटी पहने थी ...
और इसके अंदर कुछ नहीं ...

इसका मतलब अंकल ने जूली को यहीं नंगा कर दिया था ..

और अब बैडरूम में तो निश्चित चुदाई के लिए ही ले गए होगे ...

मैं केवल यही सोच रहा था कि आदमी कितना बदकार होता है ...
वहां रंजू भाभी सोचती है कि तिवारी अंकल कुछ कर ही नहीं सकते ..
क्युकि उनका अब खड़ा ही नहीं होता ..
और यहाँ दूसरी औरत को देख वो सब करने को तैयार हो जाते हैं ...
उनका मरा हुआ लण्ड भी ज़िंदा हो जाता है ...
वाह रे चुदाई कि माया ...

मैं जल्दी से किचिन से निकला और ...........

फिर अनु के पास जा खड़ा हो गया ...

बैडरूम का दरबाजा पूरा खुला ही था ..
बस उस पर परदा पड़ा था ...

बैडरूम का दरवाजा उन्होंने इसलिए बंद नहीं किया होगा ...
कि वो दोनों घर पर अकेले ही थे ...
और परदा तो उस पर हमेशा पड़ा ही रहता है ...

अनु परदे का एक सिरा हटाकर अंदर झांक रही थी ...

और अंदर का दृश्य देखते ही मेरा लण्ड तनतना गया ..
अंदर पूरी सफ़ेद रोशनी में जूली और अंकल पूरी तरह नंगे खड़े थे ...

मैंने दोनों कि बातें सुनने की कोशिश की ...

जूली: अंकल जल्दी करो ...कपडे पहनो ..अनु आती होगी ..

अंकल: अरे कुछ नहीं होगा ...तू मत डर ...
उसको भी देख लेने दे ... कितनी सेक्सी हो गई है ना ..

जूली: अरे वो तुम्हारी पोती के बराबर है ...उसपर तो गन्दी नजर मत डालो...

अंकल: अरे तो क्या हुआ ??? तू भी तो बेटी के बराबर है ...जब बेटी चोद सकते हैं ... तो उसको भी 
हे हे हे ...

सच अंकल बहुत बेशर्मों जैसे हंस रहे थे ..

तभी जूली थोड़ा पीछे को हटी ...

अंकल का लण्ड उसके हाथ में थे ....

माय गॉड ..ये तो बहुत बड़ा था ...

जूली उसको अपने हाथ से ऊपर से नीचे तक सहला रही थी ...

उसका हाथ बहुत तेज चल रहा था ...

और तभी अंकल ने जूली को नीचे की ओर धकेला ...

जूली ने तुरंत उनके लण्ड को जितना हो सकता था उतना ही अपने मुह में भर लिया ...

अंकल ने जूली के मुख को लण्ड से चोदते हुए ही अपनी आँखे बंद कर ली ...

मैंने देखा अंकल झड़ रहे हैं ...

और उनका सारा पानी जूली के मुह के अंदर जा रहा है ..

जूली ने मेरा भी कई बार चूसा है ...

मगर किसी और मर्द के साथ इस तरह सेक्सी पोजीशन में मैंने पहले बार देखा था ...

जूली ने उनका सारा पानी गटक लिया ...
और कुछ ही पलों में उनका लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया ...

मैं आश्चर्य चकित था की अंकल ने यहाँ केवल इतना ही किया ..

या पहले उन्होंने जूली को चोदा भी होगा ...

जूली जिस तरह नंगी उनसे मजे कर रही है ..

और करीब आधे घंटे से वो इनके साथ है ..

तो केवल हाथ से करने तो नहीं आये होंगे ...

मेरे दिमाग केवल यही सोच रहा था कि पिछले आधे घंटे उन्होंने क्या किया होगा ...



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

अपनी प्यारी जूली को मैं बहुत प्यार करता था ..

उसके बारे में ... उसकी मस्ती के के बारे में ...
बहुत कुछ जानता था मैं ...

पिछले दिनों में उसको अपने भाई विजय के साथ ...
फिर दुकानदार लड़के के साथ ...
जूली को कई सेक्सी हरकतें करते देख चुका था ..

मगर इस समय ये सबसे अलग था ...

अपने से लगभग तीन गुना बड़े ...एक बूढ़े आदमी के साथ ... जो जूली के पिताजी से भी उम्र में बड़े होंगे ..

और जूली उनके साथ कितने मजे कर रही थी..

जूली ने अंकल का लण्ड ..चाट चाट कर पूरा साफ़ कर दिया ....

अंकल ने जूली को ऊपर उठाया और उसके होंठो को चूमने लगे ...

जूली के मुह पर अंकल के वीर्य के निशान दिख रहे थे ...

दोनों बहुत ही हॉट किस कर रहे थे ...

अंकल.... जूली का लगभग पूरा मुह ही चाट रहे थे ...

फिर उन्होंने जूली को घुमाकर ..उसकी पीठ से चिपक गए ...

अब जूली का मुह हमारी ओर था ...

पूरी नंगी जूली की दोनों तनी हुई चूचियाँ और उनके गुलाबी निप्पल लगभग लाल शुर्ख हो गए थे ...

ऐसा लग रहा था जैसे बुरी तरह मसले जाने के कारण दोनों अपना लाल चेहरा लिए मेरे से खुद को बचाने को कह रहीं हों ...

तभी अंकल ने जूली के कानो के पिछले भाग को चूमते हुए ..अपने दोनों हथेलियों में फिर से उन मासूम चूचियों को भर लिया ...

वो दोनों को बड़ी बुरी तरह मसल रहे थे ...

उनका अभी भी आधा खड़ा लण्ड ..जूली के चूतड़ों में गड़ा हुआ था ...

मैं रंजू भाभी के शब्दों को याद कर रहा था ..
कि तिवारी अंकल का अब खड़ा ही नहीं होता ..
मगर यहाँ तो उल्टा था ...
पानी निकलने के बाद भी बैठने का नाम नहीं ले रहा था ...

तभी अंकल ने अपना हाथ जूली की जाँघों के बीच उसकी कोमल चूत पर ले गए ...

उनकी उँगलियाँ उसकी चूत पर पियानो की तरह चल रही थीं ..

जूली आँखे बंद किये सिस्कारिया ले रही थी ...

जूली: अह्ह्ह्हाआआआ आए अब छोड़ दीजिये ना 
अह्हाआआ आ बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स अब नहीईइइइइइइइइइइइइइइइइइ ओह 

अंकल: पुच पुच ...
बस उसको चूमे जा रहे थे ...
कानो से लेकर गर्दन तक ...

मैंने देखा अनु भी काफी गर्म हो गई है ...

वो अपने चूतड़ों को मेरे से घिस रही थी ...

मगर अभी इस सबका समय नहीं था ...

मैं इस सबमे भूल गया कि मैं और अनु चुपके से घर में घुसे हैं .
अगर जूली को ये पता लग गया तो उसको बहुत बुरा लगेगा ...

मैं अभी बाहर निकलने कि सोच ही रहा था कि 

तभी अंदर से आवाज आई ...

जूली: चलिए अंकल जी अब आप जल्दी से फ्रेश होकर कपडे पहन लो ...
मैं नहीं चाहती कि अनु या किसी को कुछ पता चले ..

और जूली तेजी से बाहर को आने लगी ...

मेरे पास इतना समय नहीं था कि मैं बाहर निकल सकूँ ..

मैंने अनु को पीछे खींचते हुए ..

मैं खुद अलमारी के साइड में हो गया ...

हाँ अनु वहीँ रह गई ...

जूली पूरी नंगी ही बाहर निकली ...

जूली: अर्र्र्र्रीईईईए 
उसके मुह से हलकी सी चीख निकली ...
फिर 

जूली: तू कब आई ...और दरवाजा .....

अनु मेरी समझ से भी जयदा समझदार निकली ..

अनु: दरवाजा तो खुला था भाभी ...
उसने अपने हाथ में पकड़ा सिगरेट का पैकेट उसको देते हुए कहा ...

जूली: (वहां पड़े एक कपडे से अपने शरीर को पोंछते हुए बोली) कितनी देर हो गई तुझे ...

अनु: बस अभी आई भाभी ...
आप नहा ली क्या ...???

जूली: बस नहाने ही जा रही थी ....
तू रुक ,....

और वो किचिन में चली गई ....

बस इतना ही समय काफी था मेरे लिए ...

मैं जल्दी से बाहर निकला और एक बार अंदर कमरे में देखा ...
वहां कोई नहीं था ...
अंकल शायद बाथरूम में थे ..
मैं जल्दी से मुख्य द्वार से बाहर आ गया ...

पीछे अनु ने दरवाजा बंद कर दिया ...

मैंने चैन की सांस ली ...

मैं एक बार फिर चुपके से किचिन की खिड़की से झाँका ..

जूली अपना गाउन सीधा कर पहन रही थी ....

उसके मस्त चूतड़ों को नजर भर देखकर ..मैं जल्दी जल्दी सीडियां उतरने लगा ....

कितना कुछ हो रहा था ...

हर पल कुछ नया ....

पता नहीं सही या गलत ... पर मजा बहुत आ रहा था ...

करीब १२ बजे जूली का फोन आया ...

वो स्कूल और शॉपिंग के लिए जा रही थी ...

मुझे अफ़सोस इस बात का था की मैंने आज उसके पर्स में रिकॉर्डर नहीं रखा था ...

पर अनु उसके साथ थी ...

अब ये मेरे ऊपर थे कि मैं अनु से सब कुछ उगलवा सकता था ....

पता नहीं आज क्या होने वाला था ..????????

............
........................



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

सब कुछ छोड़कर मैं ऑफिस पंहुचा ...

आज का दिन पता नहीं कैसा जाने वाला था ....

मेरा पूरा ध्यान जूली और अनु की ओर ही था ...

पता नहीं वो वहां क्या कर रहे होंगे ..???

पर ऑफिस पहुँचते ही दिल को सुकून मिल गया ...

मेरी सेक्रेटरी यासमीन जो ३ दिनों से नहीं आ रही थी ..आज मेरे कॅबिन में सेक्सी ड्रेस में बैठी मुस्कुरा रही थी ..

उसको देखते ही मेरा सारा ध्यान अब ऑफिस की ओर ही हो गया ...

हाँ जूली सही कहती थी ...

मेरे यासमीन के साथ बहुत गहरे ताल्लुकात थे ...

वो पिछले १ साल से मेरे साथ थी ..और मेरा पूरा ध्यान रखती थी ...

हम कई बार ऑफिस टूर पर बाहर भी जा चुके थे ...

और एक ही कमरे में एक साथ रुकते थे ...

यासमीन एक गरीब परिवार की बहुत सुन्दर लड़की थी ..

१९-२० साल की ...५ फुट ६ इंच लम्बी ... ३४ २५ ३४ की उसकी बहुत आकर्षित ..साँचे में ढला शरीर ..
किसी को भी उसकी ओर देखने पर मजबूर कर देता था ....

ऑफिस के काम के बारे में तो वो कुछ ज्यादा नहीं जानती थी ...

मगर मर्द को खुश रखने की सभी कला उसके अंदर थी ..

बहुत मॉडर्न और फैशन के कपडे पहनना और अपने बदन के कुछ हिस्सों को देखकर ..रिझाना उसको बहुत अच्छी तरह आता था ...

उसकी आवाज बहुत सेक्सी थी ... फोन पर बात करके ही वो काफी आर्डर बुक करवा देती थी ...

उसकी इसी अदा का मैं दीवाना था ... उसके नैननक्स काफी तीखे थे ...
और उसके लाल होठों के नीचे की ओर एक तिल उसको कुछ ज्यादा ही सेक्सी दिखाता था...

उसमे एक बहुत ख़ास बात थी ..कि सेक्स में किसी भी बात के लिए वो कभी मना नहीं करती थी ..

मैं जो चाहता था ..वो मेरी हर चाहत का पूरा ख्याल रखती थी ...

अपने ऑफिस में ही उसको मैं कई बार पूरा नंगा करके चोद चुका था...

उसको कभी ऐतराज नहीं होता था ...
मैं कहीं भी उसके साथ मस्ती करने के लिए उसके कपड़ों के अंदर हाथ डाल देता था ..
या उसके कपडे उतारता था तो वो तुरंत तैयार हो जाती थी ..

मेरे कॅबिन में बन साइड मिरर लगे हैं ...
जिनसे मैं स्टाफ पर नजर रखता था ...

वैसे तो उन पर परदे पड़े रहते हैं ...

पर यासमीन को चोदते समय मैं ये परदे हटा देता था ..

मुझे और यासमीन दोनों को ही ...सारे स्टाफ को काम करते हुए.. देखते हुए ..चुदाई करने में बहुत मजा आता था ...

कई बार तो कोई न कोई लड़की या लड़का ..हमारे सामने ही दूसरी तरफ से सीसे में देखते हुए ..खुद के कपडे सही करने लगता था...

हमको ऐसा लगता था कि वो हमको चुदाई करते हुए घूर रहा है ..

और चुदाई में ओर भी ज्यादा मजा आ जाता था ...हम दोनों ओर मजे लेकर चुदाई करने लगते थे ..

हाँ हम दोनों चुदाई के समय बातें करने की भी आदत थी .. 

यासमीन और मैं दोनों अपनी चुदाई की बातें एक दूसरे से खुलकर करते थे ..

इससे हमको बहुत उत्तेजना मिलती थी ...

यासमीन वैसे भी चुदाई की आदि थी ..क्युकि उसको बहुत काम आयु से ही चुदवाने की आदत लग गई थी ..

इसीलिए वो इतनी कम आयु में ही इतनी सेक्सी हो गई थी ...

आज यासमीन कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी ..

उसने काले रंग की स्किन टाइट लेग्गिंग और नारंगी कराई वाली टाइट कुर्ती पहनी थी ...

उसके गोरे रंग पर.. गहरे रंग के कपडे उसको बहुत सेक्सी दिखा रहे थे ...

कपडे इतने टाइट थे ..की उसका हर अंग ..अपना आकार बाहर को निकला दिखा रहा था ....

उसने सेक्सी मुस्कराहट के साथ मेरा साथ दिया ...

मैंने भी उसको मुस्कुराकर ही स्वागत किया ...

यासमीन: क्या हुआ जनाव .. आज इतनी देर से .. किसके साथ बिजी थे ...

उसकी बात सुनते ही मुझे रंजू भाभी याद आ गई ... 
जिसको अभी अभी चोदकर आ रहा था ..
और मेरा एक बहुत पुराना सपना साकार हुआ था ..

मैं: मेरी जान है कोई ..अब तू तो गायब ही हो गई थी ..क्या हुआ था ..

यासमीन: अरे आपको बताया तो था ... कोई आया था घर पर ..

मैं: अच्छा तो अपने किसी पुराने आशिक के साथ थी जनावेआली...

यासमीन: अरे नहीं ..कोई रिस्तेदार थे ... बस ओर कोई नहीं ...
पर आपको क्या हुआ आज ..
कुछ बदले से नजर आ रहे हो ...

उसका ऐसा सोचना सही भी था ...

आज सुबह की चुदाई और रात अनु के साथ की गई मस्ती के कारण खुद को कुछ थका सा महसूस कर रहा था ...

वरना पहले जब भी वो छुट्टी से आती थी ,,मैं तुरंत उसको नंगा करके चोदने लगता था ...

पर आज मैं अपने काम में लग गया था ...

इसीलिए वो मुझे आश्चर्य से देख रही थी ...

मैं: अरे नहीं जानेमन ..आज जरा कुछ थकान सी लग रही है ...

मैंने उसको पकड़ कर उसकी होंठो का एक चुम्मा लिया ..

अब वो भी मेरा साथ देने लगी ...

और उसने मुझे सही से बैठाकर मेरे सिर को अपने हाथो से दबाते हुए कहा ..

यासमीन: अहा मेरा जानू ..क्या हुआ ???
लाओ मैं अब पूरी सेवा करके आपको बिलकुल सही कर दूंगी ..

बस यही उसकी अदा मुझको भाती थी ..
वो हर समय बस मेरा ख्याल रखती थी ...

वो मेरी कुर्सी के बराबर खड़ी हो ..मेरा सिर अपनी मुलायम चूचियों पर रख दबा रही थी ...

मैंने अपना हाथ उसकी कमर में डाल कर ..उसके गदराये चूतड़ों पर रखा ...
और उनको मसलने लगा ...

मुझे यासमीन के चूतड़ दबाने ओर मसलने में बहुत आनंद आता था ...

उसके चूतड़ थे भी पुरे गोल और मुलायम ..

मुझे अहसास हो गया कि उसने कच्छी नहीं पहनी है ..

वैसे साधारणतया वो हमेशा कच्छी पहनती थी ..

मैं: क्या बात जानेमन ??? आज अंदर खुला क्यों है ..??
किस ख़ुशी में अपनी मुन्नी को आज़ाद छोड़ रखा है ..

यासमीन: हा हा वेरी फनी...
आपको तो ओर भी मजा आ गया होगा ...

मैं: अरे वो तो है ... ऐसा लग रहा है जैसे नंगे ही चूतड़ पर हाथ रख रहा हूँ ...
आज तो रास्ते में लोगों को मजे आ गए होंगे ..

यासमीन: हाँ मैं तो रास्ते में सबसे दबबाती हुई आ रही हूँ ... आपने तो मुझे ना जाने क्या समझ रखा है .??

मैं: अरे नहीं जानेमन... मेरा वो मतलब नहीं था ..
अरे आते जाते जो सैतान दिमागी होते हैं ..उनकी बात कर रहा हूँ ...

यासमीन: मुझे तो सबसे ज्यादा सैतान आप ही लगते हो बस ...

मैं: हा हा हा ....

फिर भी हुआ क्या ये तो बता ...
अगर सभी कच्छी फट गई हैं.. तो चल बाजार अभी दिला देता हूँ ...

यासमीन: अरे नहीं यार ... वो कल ही मेंसिस बंद हुई थी ना ..तो कुछ रेसिस पड़ गए थे ...
इसीलिए नहीं पहनी ....

मैं: अरे कहाँ ??? दिखाओ ..

यासमीन: तो देख लो ना ..मैंने कभी मना किया ...
मेरी मुन्नी के आस पास ही ...
और काफी खुजली भी हो रही है ...

मैं: अच्छा तो वो खुजली सही करनी होगी .. हैं ना 

यासमीन: हाँ आप तो डॉक्टर हो ना ..सब कुछ सही कर दोगे...

मैंने उसको अपनी ओर किया ..

उसने आज्ञाकारी की तरह अपनी कुर्ती पेट तक ऊपर कर दी ...

और मैंने यासमीन की लेग्गिंग की इलास्टिक में अपनी उँगलियाँ डालकर उसको नीचे करने लगा ..

और ...??????

............



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

यासमीन का मस्ताना हुस्न नंगा होने को तैयार ..मेरे सामने खड़ा था ...

उसने अपनी कुर्ती पेट से ऊपर कर ली थी ...

उसकी पतली कमर और सुत्वाकार पेट ..बहुत धीरे धीरे मेरे सामने फूलता पिचकता ..
अपनी बैचेनी बता रहा था ...

उसकी नाभि पर एक चुम्मा लेते हुए मैंने हलकी सी गुदगुदी की ..

यासमीन: अह्ह्ह्हाआआ 

मैंने उसकी लेग्गिंग को उसके चूतड़ों से नीचे करते हुए ...आगे से जैसे ही नीचे कर उसकी जाँघों तक लेकर गया ...

यासमीन की चिकनी चूत अपने दोनों होंठो को कंपकंपाते हुए मेरे सामने आ गई ...

उसने अपनी चूत को बिलकुल चिकना किया हुआ था ..

इसका कारण ये थे कि मुझे इस जगह एक भी बाल पसंद नहीं था ...

तो यासमीन भी रेगुलर हेयर रिमूवर का उपयोग करती थी ...

मैंने कभी उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं देखा था ..

मैंने ध्यान से उसकी चूत को देखने लगा ..

यासमीन ने भी अपने चूतड़ों को आगे को कर अपनी चूत को उभार दिया ...

उसकी चूत पर हलके हलके निसान दिख रहे थे ...
जो खुजाने से सफ़ेद भी हो रहे थे ...

मैंने अपनी उँगलियों को उसकी चूत पर फेरते हुए ही कहा ..

मैं: क्या जानेमन ?? कुछ चिकना तो लगा लेती ..लगता है तुमने कुछ नहीं लगाया ..

यासमीन कि ऑंखें बंद होने लगी थी ..
वो मेरे स्पर्श का पूरा आनंद ले रही थी ...

यासमीन: ओह्ह्ह्ह हाँ सर ....
मैंने सुना है आदमी के थूक से अच्छा कुछ नहीं होता ..

तो ऐसी है मेरी यासमीन ...
वो मुझे अपनी चूत चाटने का साफ़ साफ़ इशारा कर रही थी ...

उसकी चूत देखकर मेरा भी दिल फिर से चुदाई का करने लगा था ...

मेरे लण्ड ने अंडरवियर के अंदर अपना सिर उठाना शुरू कर दिया था ...

मैंने नीचे झुककर उसकी चूत की स्मेल ली ..
एक अलग ही मीठी मीठी सी खुसबू वहां फैली हुई थी ..

मैंने अपनी जीभ निकाली और यासमीन की चूत को चारों ओर से चाटा ....

यासमीन: आआह्ह्ह्ह्ह्हाआआ ओह्ह्ह्ह्ह्ह 
इइइइइइइइइइइ 
खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाई 

उसके मुह से तेज सिस्कारियों की आवाज निकलने लगी ..

मैं अपनी पूरी कला का प्रदर्शन करते हुए ...
अपने दोनों हाथो से उसके चूतड़ को पकड़ अपनी ओर कर ...मस्त हो उसकी चूत का स्वाद ले रहा था ...

मेरी जीभ यासमीन की चूत के हर कोने को अपनी नोक से छेड रही थी ...

करीब १० मिनट में ही वो इतनी गरम हो गई कि ..
वो मेरी कुर्सी को पीछे को खिसका ..
एक ओर को आ जाती है ...

फिर अपने सैंडल एक तरफ को उतार वो अपनी लेग्गिंग पूरी तरह से निकाल मेरी मेज पर रख देती है ..

यासमीन जब लेग्गिंग को अपने पंजों से निकालने में पूरी झुकी थी ...
तब उसके चूतड़ मुझे इतने प्यारे लगते हैं कि मैं एक तेज चपत उसके चूतड़ पर लगा देता हूँ ...
उसके चूतड़ पर एक लाल निसान तुरंत पड़ जाता है ..
और वो मस्त हिलते हैं ..

यासमीन: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह 

वो बस अपनी कमर हिल हल्का सा दर्द का अहसास कराती है ...

मगर कुछ मना नहीं करती ...

मैं उस जगह को सहला उसके दर्द को कम करने लगता हूँ 

फिर यासमीन अपनी कुर्ती भी निकाल मेरी मेज पर रख पूरी नंगी हो जाती है ...

उसकी तनी हुई चूची और हलके भूरे निप्पल तेज तेज सांस के साथ मस्त तरीके से हिल रहे थे ...

मैंने दोनों चूची को प्यार से सहलाया ...

मैं: अहा अब सांस आई बिचारो को ...

यासमीन जोर से हंस देती है ...

यासमीन: ठीक है सांस लेने के लिए इनको खुला ही रहने देती हूँ ..फिर जो होगा आप देख लेना ...

मैं अपने होंठो से उसके निप्पल को पकड़ चूसने लगता हूँ ...

एक बार फिर वो सेक्सी सिसकारी निकालने लगती है ..

यासमीन: आःह्हाआआ बस अब छोड़ भी दो ना सर ..क्या आप भी ...कॉफ़ी के समय दूध पिने में लगे हो ...

उसको पता था कि मैं साधारणतया इस समय कॉफ़ी पीता था ....

मैं: ये तो तुम्हारी गलती है ना ... कॉफ़ी कि जगह मेरे सामने दूध क्यों रखा ....

यासमीन तुरंत सिडियस हो जाती है ...

वो मेज पर रखे इण्टरकॉम पर २ कॉफ़ी का आर्डर भी दे देती है ...

मैं: अच्छा अब क्या बाबुराम (जो हमारा चपरासी था) के सामने नंगी रहोगी ...

यासमीन: मेरे को कोई फरक नहीं पड़ता ...
आप सोचो क्या बोलोगे ....

मैं: हा हा हा ...अच्छा खिलाओगी क्या ..???
ये तो बताओ ...

वो नीचे को बैठ मेरी पेंट खोलते हुए ...

यासमीन: मेरे पास तो मजेदार स्नैक्स है ...अब अपनी बताओ क्या खाओगे ...???

वो अंडरवियर से मेरे आधे खड़े लण्ड को बाहर निकाल सहलाने लगती है ...

मैंने भी उससे मस्ती करने की सोची ....

मैंने पास की डोरी खीच सीसे के परदे को हटा दिया ..

अब बाहर मेरा १५ लोगो का पूरा स्टाफ दिख रहा था ..
जिसमे ११ आदमी और ४ लड़कियां थीं ..

मैं: तो बता कौन सा लू ...

यासमीन: मुस्कुराते हुए ..जो आपकी मर्जी हो ...
फिर थोड़ा सा चिढ़कर ...
जो अंदर है वो तो अब आपको दिख ही नहीं रहा होगा ..

यासमीन मेरे लण्ड को अपने मुह में लेकर चूसने लगती है ...

तभी बाहर नोक होती है 

ठक ठक ...

बाबुराम: कॉफ़ी साहब ...

.......



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

दिन के ११ बजे थे ..
मैं अपने ऑफिस में ..अपने केबिन में था ...
मेरा पूरा स्टाफ अपने काम में लगा था ...


केबिन के परदे हटे हुए थे... और सीसे से सारा स्टाफ दिख रहा था ...

और ऐसी स्थिति में भी.........

मैं अपनी रिवॉल्विंग चेयर पर बैठा था ...
मेरा लण्ड मेरी पेंट से बाहर था ..
जिसे में पर्सनल सेक्रेटरी अपने पतले हाथो में लिए चूस रही थी ...

और वो इस समय पूरी नंगी थी ..उसके कपडे मेरी ऑफिस की मेज पर रखे थे ...

यहाँ तक तो सब ठीक था ...

क्युकि मेरे ऑफिस में कोई ऐसे नहीं आ सकता था ..
और ना ही किसी को कुछ दिखाई दे सकता था ..

परन्तु इस समय हमारे ऑफिस में काम करने वाला चपरासी बाबूलाल ...
जो ५२ साल का ठरकी बुड्ढा था ..
मेरे केबिन के दरवाजे के बाहर खड़ा था ..
और अनदर आने के लिए खटखटा रहा था ...

खट खट ...खट खट 

मैं: कमिंग ...और कुह हो भी नहीं सकता था ..

हाँ मैंने अपनी चेयर को खिसकाकर मेज के बिलकुल पास आ गया ..

जिससे यासमीन मेज के अंदर को हो गई ..

अब सामने वाले को कुछ नहीं दिख सकता था ..

तभी दरवाजा खुला ..
और बाबूलाल कॉफ़ी लेकर अंदर प्रवेश करता है ..

साधारण सी पेंट शर्ट पहने ...अधपके बाल और शेव बड़ी हुई ...
दिखने में बहुत साधारण ..
मगर हर समय उसका मुहं और आँखे चलती रहती थीं ..
अपने काम में माहिर था ...

बाबूलाल: साहब कॉफ़ी ..

मैंने वहीँ सामने रखी एक फाइल को देखने का बहाना किया ...

मैं: हाँ रख दो ...

और यासमीन को तो न जाने क्यों कोई शर्म ही नहीं थी ...
वो अभी भी मेरे लण्ड को पकडे चाटने और चूसने में लगी थी ...

उसको यह भी चिंता नहीं थी कि उसकी कोई हलकी सी आवाज भी अगर बाबूलाल ने सुन ली तो वो रोज उसे चिड़ाने लगेगा ..

और अगर बाबूलाल थोड़ा सा भी मेरे दाई ओर आया ..
जो अक्सर कुछ न कुछ करने वो आ ही जाता है ..
तो मेज के नीचे घुसी ..पूरी नंगी यासमीन उसको दिख जाएगी ...

मगर अभी तक ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी थी...

मैं अपने चेहरे पर कोई भी भाव नहीं आने दे रहा था ..
जबकि जिस तरह यासमीन मेरे लण्ड से खेल रही थी ..
ऐसे तो मेरा दिल जोर जोर से चीखने का कर रहा था ..

यासमीन मेरे लण्ड को ऊपर नीचे खिचती ..
उसके टॉप को लोलीपोप कि तरह चूसती ..
लण्ड को ऊपर उठाकर ..गोलियों को मुहू में ले लेती ..
पूरे लण्ड को चाटती..

उसकी आवाजें कमरे में सुनाई न दें ..
इसलिए मैंने लेपटोप पर एक कंपनी का वीडियो ओन कर दिया था ...

इसीलिए बाबूलाल को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था ..

वरना उस जैसा पारखी इंसान एक दम समझ जाता कि ये तो लण्ड चूसने के आवाजें हैं ...

बाबूलाल कॉफ़ी रखकर बोला ..

बाबूलाल: और कुछ साब...
वो पिंकी मेमसाब मिलने को बोल रही थी ..कह रही थी ..जो आपने काम दिया था उसमे कुछ पूछना है ..

पिंकी २६-२७ साल की एक शादीसुदा महिला थी ..
उसने खुद को बहुत मेन्टेन कर रखा था ..
३६ २८ २४ की कुछ सांवली ..मगर अच्छी सूरत वाली पिंकी कुल मिलाकर बहुत खूबसूरत दिखती थी ..
उसने अभी १ महीने पहले ही ज्वाइन किया था ...
इसलिए उसको यहाँ के बारे में ज्यादा नहीं पता था ..

मैं: बाबूलाल को जल्दी भेजने के चक्कर में बोल देता हं ..ठीक है भेज देना उसको ...

मगर बाबूलाल पूरा घाघ आदमी था ...

बाबूलाल: अरे यासमीन मेमसाब कहाँ हैं साब ...कॉफ़ी ठंडी हो जायेगी ...

ओ बाप रे ..

साले ने मेज पर रखे कपडे देख लिए थे ...

उसके होंठो पर एक कुटिल मुस्कान थी ...

मैं: (जरा आवाज में कठोरता लाते हुए) तुझे मतलब ..अपना काम कर ...
वो बाथरूम में है ...

बाबूलाल: व् व् व् वो साब यहाँ उनके कपडे ...

मैं: हाँ वो अपनी ड्रेस ही बदलने गई है ...और तू अपना काम से मतलब रखा कर ...समझा ...

मेरी हालत ख़राब थी ...
मैं इधर बाबूलाल को समझने में लगा था ...
और नीचे यासमीन हंस भी रही थी ..
और मेरे लण्ड को नोच या काट भी रही थी ..

मैं कुछ भी रियेक्ट नहीं कर पा रहा था ..

समझ नहीं आ रहा था कि कैसे खुद को रोकूँ ..

मगर थैंक्स गॉड ..
बाबूलाल बाहर चला गया ..

मुझे यासमीन पर इतना गुस्सा आ रहा था कि ..

मैंने तुरंत उसको मेज के नीचे से निकला और अपनी मेज पर लिटा दिया ...

उसकी दोनों टांगों को फैलाकर ..
सीधे उसकी पूरी चूत अपने मुहं में भर ली ...
और दांतों से काटने लगा ..

अब मचलने की बारी यासमीन की थी ..

बो बुरी तरह सिसकार रही थी ...
और अपनी कमर हिलाये जा रही थी ..

मैंने अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों में उसके चूतड़ों को पकड़ ..कस कस कर दबाने लगा ...

जरा सी देर में यासमीन की हालत बुरी हो गई ..

वो छोड़ने के लिए मिन्नतें करने लगी ...

यासमीन: नहीईइइइइइइइइइइइइइ छोड़ दीजिये ना ..आह्ह्ह्ह्ह्हाआआआ नहीईइइइइइइइइइइइइइइइइ आआआआआअ अब्बब्बब नहीईइइइइइइइइइइइइइइइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह 

मैंने उसको उसी अवस्था में रखा और अपनी पेंट खोल दी ..
मेरी पेंट नीचे मेरे जूतों पर जाकर ठहर गई ..

मैंने अंडरवियर भी नीचे घुटनो तक उतार अपने मस्ताने लण्ड को आज़ाद किया ...

और यासमीन की मेरे थूक से गीली चूत के छेद पर टिका एक ही बार में अनदर डाल देता हूँ ...

ठक की आवाज से लण्ड पूरा चूत की जड़ तक चला जाता है ..

पिछले २४ घंटे में ये चौथी चूत थी जिसमें मेरा लण्ड प्रवेश कर रहा था ....

मगर शायद आज किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी ..

अभी लण्ड ने जगह बनाई ही थी ..

की एक बार फिर 

ठक ठक ...ठक ठक ..

दरवाजे पर फिर नोक हुई ...

ओर इस बार कोई महीन आवाज थी ...

ओह पिंकी ...मर गए ....
मैं तो भूल ही गया था ....

अब क्या होगा ..?????????

.................



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

यासमीन को पहले भी ऑफिस में मैंने कई बार चोदा था ...

मगर हमेशा दोपहर के बाद या फिर शाम को ...

मैं हमेशा ये ध्यान रखता था कि अब कोई नहीं आने वाला है ...

और सभी कार्य निबटने के बाद ही उसको चोदता था ..

मगर आज तो सुबह आते ही ये कार्यक्रम सेट हो गया था ...

इसीलिए हद हो गई यार ...

पहले बाबूलाल ..यासमीन के कपडे देख गया ...
ना जाने क्या क्या सोच रहा होगा ...

और अब बिलकुल नई स्टाफ ..वो भी शादीसुदा ..
दरवाजे के बाहर खड़ी थी ..

यासमीन पूरी नंगी ..आओनी टाँगे फैलाये ..
मेरी मेज पर लेती थी ...

और मैं लगभग नंगा ..
पेंट और अंडरवियर दोनों मेरे जूतों पर पड़े रो रहे थे ..

मेरा लण्ड जड़ तक यासमीन की चूत में घुसा था ..

मैं उसकी चूचियों को मसलता हुआ उसकी चूत में धक्के लगा रहा था ...

और दरवाजे के बाहर खड़ी पिंकी की दरवाजे पर की जा रही खट खट ..
ऐसा लग रहा था जैसे चुदाई का बैकग्राउंड म्यूजिक चल रहा है ...

और मुझे अचानक होश आया ...

यासमीन पर जैसे कोई फरक नहीं पड़ा ..

वो मुझे अपनी लाल आँखों से देख रही थी ..

कि क्यों निकल लिया ...
फिर से पूरी ताकत से डाल दो ना ...

मैंने जल्दी से उसको उठाकर फिर से मेज के नीचे घुसा दिया ..

और इस बार उसके कपडे भी नीचे गिरा दिए..

मैं: कमिंग ....

और तुरंत दरवाजा खुला ..पिंकी का सुन्दर चेहरा नजर आया ..

उसने नीली पारदर्शी साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज पहना था ..

ब्लाउज से उसकी ब्रा भी नजर आ रही थी ...

एक टाइट साडी में उसके शरीर के अंग अच्छी तरह प्रदर्शित हो रहे थे ...

उसने मुझे मुस्कुराकर देखा ...

पिंकी: गुड मॉर्निंग सर ...

मैं: हाँ क्या हुआ ???
मैंने फिर से खुद को बिजी दिखाया ...

पिंकी: सर वो मोहनदास जी वाला काम हो गया है ..
आप एक बार देख लेते ..

मैं: ठीक है तुम फाइल छोड़ दो ..मैं देख लूंगा ..
और तुम्हारा दिल लग रहा है ना ..
काम सही लग रहा है ...

पिंकी: हाँ सर ..यहाँ का माहोल बहुत अच्छा है ...
और सभी लोग भी बहुत मिलनसार हैं ...

मैं: ठीक है ...मन लगाकर काम करो ... जल्दी ही तुम्हारी तरक्की हो जाएगी ...

पिंकी: थैंक यू सर ..
क्या मैं आपका बाथरूम यूज़ कर सकती हूँ सर ...
बाहर का बहुत गन्दा हो रहा है ...

वैसे भी ज्यादातर लेडीज स्टाफ ये अंदर का ही बाथरूम यूज़ करती थीं तो उसमे कोई प्रॉब्लम नहीं थी ..

और मैं उसको मना भी कैसे कर सकता था ...

मैं: हाँ हाँ क्यों नहीं ...
जरा ध्यान से .. लॉक ख़राब है ..

पिंकी: हा हा ..मुझे पता है सर ..
पर अभी तो आप हैं ना किसी को अंदर नहीं आने देंगे ..

और वो बड़ी सेक्सी मुस्कान छोड़कर बाथरूम में चली गई ..

थैंक्स गॉड कि उसने एक बार भी पीछे घूमकर नहीं देखा ...

वरना बाथरूम मेरी कुर्सी के सीधी तरफ ... पीछे कि ओर था ...

उसको सब कुछ दिखाई दे सकता था ...

इतनी देर में चुदाई का मूड सब ख़त्म हो गया था ...

मैंने जल्दी से अपना अंडरवियर और पेंट सही करके पहन ली ...

और यासमीन को भी कपडे पहनने को बोला ...

क्युकि जब वो वापस आएगी तो पक्का उसको सब दिख जाने वाला था ....

यासमीन ने भी तुरंत अपनी कुर्ती पहनी और लेग्गिंग भी चढ़ा ली ...

तभी यासमीन को शरारत सूझी ..
मुझे आँख मारते हुए वो बाथरूम की ओर चली गई ..

मैं उत्सुकता से ऊसे देखने लगा पता नहीं अब क्या करने वाली थी ...

मगर उसकी हर शरारत से मुझे फ़ायदा ही पहुँचता था ..
इसीलिए मैं कभी कुछ नहीं कहता था ...

और उसने एक दम से बाथरूम का दरवाजा खोल दिया ..

ओह माय गॉड ...

क्या सीन था ..??????



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

केवल १ मिनट में ही यासमीन ने अपना सफ़ेद ..नंगा बदन अपने २ कपड़ों में ढक लिया था ....

मैंने भी अपने पप्पू मिया को अंदर कैद कर ..पेंट ठीक कर ली ...

मगर सैतान यासमीन को तो अपनी चुदाई बीच में रुकने का बदला लेना था ...

वो तुरंत बाथरूम की ओर गई ..

एक बार मुझे पलट कर देखा ...

मुस्कुराई ...

और एक झटके में दरवाजा खोल दिया ...

दरवाजा अंदर की ओर खुलता था ...

अंदर सफ़ेद लाइट झमाझम चमक रही थी ...

उसमे एक तरफ ही वेस्टर्न शीट लगी थी ...

मैं जहाँ खड़ा था ..वहां से वो जगह साफ़ दिख रही थी ..
कहते हैं ना कि कोई दिन आपके लिए बहुत भाग्यशाली होता है ..
तो आज ये भी देखना था ..

मैंने सबसे पहले शानदार पुरे नंगे चूतड़ देखे ...

क्या लुभावना दृश्य था ...????

मेरी आँखे तो पलक झपकना ही भूल गई ..

मैं एक टक उसको निहार रहा था ..

दरअसल पिंकी अभी अभी ही सु सु करके उठी होगी ..

उसने अपनी नीली साडी पूरी ऊपर कर अपने बाएं हाथ से पकड़ी थी ...

और उसकी कच्छी जो शायद गुलाबी ही थी ..
जो वहां से लग रहा था ...
उसने अपने घुटनो तक उतार रखा था ..

और वो हलकी सी झुकी हुई फ्लश कर रही थी ...

वो इतनी मगन थी कि उसको पता ही नहीं चला कि बाथरूम का दरवाजा खुल गया है ...

मेरी आँखों ने भरपूर उसके मतवाले चूतड़ों के दर्शन किये ...

अभी मैं कुछ सोच ही रहा था कि ...

यासमीन ने एक और हरकत कर दी ...

उसने ऐसे जाहिर किया जैसे उसको कुछ पता ही नहीं है ....

और तेज आवाज में बोली ...

यासमीन: अररररर ऐ एई तू यहाँ पिंकी .....

और स्वभाबिक पिंकी ने घूमकर उसको देखा ...
उसने वो कर दिया जिसकी उम्मीद न तो मुझे थी और ना शायद यासमीन को ही ...

पिंकी: हाय राम ...
और उसने अपनी साडी दोनों हाथो से पकड़ी ..
शरमाकर अपने चेहरे तक ले जाकर ढक ली ...

इस दृश्य की तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी ..

पिंकी के घूमने से उसकी गुलाबी कच्छी ढीली हो उसके घुटनो से सरक कर नीचे गिर गई थी ...

उसकी साडी और उसका पेटीकोट दोनों उसने खुद पूरा उठाकर अपने चेहरे तक ले गई थी ....

उसका कमर के नीचे का भाग पूरा नंगी अवस्था में ..बाथरूम की सफ़ेद चमकती लाइट से भी ज्यादा चमक रहा था ..

पतली कमर, पिचका हुआ पेट, लम्बी टाँगे, गोल सफ़ेद जांघे... 
और जांघो के बीच फूली हुई चूत का उभार खिला खिला साफ दिख रहा था ...

ये तो नहीं पता चला कि उस पर बाल थे या नहीं ..
और अगर थे तो कितने बड़े ..
वैसे जितनी साफ़ वो दिख रही थी .
उस हिसाब से तो चिकनी ही होगी ..
या होंगे तो थोड़े थोड़े ही होंगे ...

दिल चाह रहा था कि अंदर जाऊं और उसके इन प्यारे होंठो पर अपने होंठ रख दूँ ...

पिंकी की तो जैसे आवाज ही नहीं निकल रही थी ...

मगर यासमीन पूरे होश में थी ...

वो चाहती तो दरवाजा बंद कर देती और सब कुछ सही हो जाता ...

मगर वो तो किसी और ही मूड में थी ..

वो अंदर जा पिंकी के कंधे पर हाथ रख ..

यासमीन: अरे सॉरी यार मुझे नहीं पता था कि तू अंदर है ...
चल अब तेरा तो हो गया ना ...

पिंकी: तू बहुत गन्दी है रे .तू बाहर जा न ...

यासमीन: हा हा ... क्या बात करती हो दीदी ..??
आपका तो हो गया ना ...
अब आप बाहर जाओ न ..
मुझे भी तो करनी है ...

और अस्वभाबिक रूप से वो नीचे बैठ ..पिंकी कि कच्छी को पकड़ ऊपर करने लगती है ..

इतनी देर में मैंने भरपूर पिंकी कि चूत के दर्शन कर लिए थे ...

यासमीन: अब कपडे तो सही कर लो दीदी ..
कब अपनी मुनिया को हवा लगाओगी ..

अब जैसे पिंकी को होश आया ..
कि चेहरा छुपाने के लिए उसने क्या कर दिया था ..??

और यासमीन तो पिछले एक साल में मेरे साथ रहकर पूरी बेशरम हो ही गई थी ...

उसने कच्छी को पिंकी के चूतड़ों पर चढ़ाते हुए ..
अपने एक हाथ से पिंकी कि पिंक चूत को सहलाया .
और कच्छी के अंदर करते हुए ..

यासमीन: बहुत प्यारी है दीदी अपनी मुनिया ...
इसको धो तो लिया था ना ..

और पिंकी ने अब अपनी साडी छोड़कर उसको नीचे कर दिया ...
और यासमीन के धप लगते हुए ..

पिंकी: पूरी पागल ही है तू ...
चल हट...

अभी तक शायद उसको पता नहीं था ..
या वो मेरे बारे में बिलकुल भूल ही गई थी ..

कि मैं बाहर कमरे में से दोनों की हर हरकत को देख रहा हूँ ...

पिंकी बाहर आ दरवाजा अभी बंद ही कर रही थी ..

इतनी देर में यासमीन अपनी कुर्ती ऊपर उठा अपनी लेग्गिंग चूतड़ों से नीचे खिसका ..शीट पर बैठने की तैयारी कर रही थी ...

पिंकी: अरे दरवाजा तो बंद करने देती ...
तू सच पूरी पागल है ... हे हे ....

और जैसे ही पिंकी दरवाजा बंद कर घूमती है .
मुझे देख उसे सब कुछ का अहसास होता है ...

वो बुरी तरह शर्मा रही थी ...

पिंकी: अरे सर आपने यासमीन को रोका नहीं ...
वो अंदर .. मैं ....ये ...

मैं: अरे मैं काम में बिजी था ...और वो पता नहीं कैसे ..
मुझे पता ही नहीं चला ...

पिंकी: वो ..ओह ....मैं तो ...

मैं: अरे इतना घबरा क्यों रही हो ..???
शादी सुदा हो ..समझदार हो ...
हो जाता है ऐसा ...
कोई बड़ी बात नहीं है ..

पिंकी: वो सब अचानक ...मेरे को तो पता ही नहीं था ..
और आप भी ...

मैं: अरे यार कुछ नहीं हुआ ....
इतनी सुन्दर तो हो तुम ..
जरा सा देख लिया तो क्या हो गया ..??
वैसे एक बात बोलू ...

पिंकी ने अपनी नजर बिलकुल नीचे कर रखी थी ..
वो बहुत शर्मा रही थी ...

लेकिन इतना शुक्र था कि वो कमरे से बाहर नहीं गई थी ..

वो मेरे से बात कर रही थी ...

पिंकी: क्या सर ?????

मैं: तुम अपने नाम से लेकर ..अंदर तक पिंक ही हो ..
मतलब गुलाबी ...

पिंकी: धत्त ..क्या कह रहे हो सर आप ???

मैं: सच यार मजा आ गया ...
कच्छी से लेकर अंदर तक सब गुलाबी था ...

पिंकी: आप भी ना सर ... अपने सब देख लिया ...

मैं: अरे यार इतना सुन्दर दृश्य कौन ..छोड़ता है ...
और बाकई बहुत प्यारी लग रही थी ...

पिंकी के चेहरे से लग रहा था कि उसको मेरी बात अच्छी लग रही है ..

पिंकी: ये यासमीन भी बहुत गन्दी है ..ये सब उसकी वजह से हुआ ...

मैं: हा हा ..मेरे लिए तो बहुत लकी रही यार ..
और तुमको उससे बदला लेना हो तो ले लो ..
जाओ दरवाजा खोल दो ... हा हा 

पिंकी: धत्त ..मैं ऐसी नहीं हूँ ...
आपका मन कर रहा हो तो ..आप खुद खोलकर देख लीजिये ...

मैं: अरे इतनी खूबसूरत देखने के बाद तो अब किसी और की देखने का दिल ही नहीं करेगा ...
सच बहुत सुन्दर है तुम्हारी ...

और अब पिंकी तुरंत केबिन से बाहर निकल गई ..

मगर हाँ केबिन का दरवाजा बंद करते हुए उसके चेहरे की मुस्कुराहट उसकी ख़ुशी को दर्शा रही थी ...

कुछ देर बाद यासमीन भी अपने काम में लग गई ..

अब ऑफिस का कुछ काम भी करना था ...

दोपहर को लंच करने के बाद मैंने ...
जूली को फोन लगाया ...
उधर से अनु की आवाज आई ..

अनु: कौन ..???

मैं: अरे अनु तू ..क्या हुआ ..?? जूली कहाँ है ...??

अनु: अरे भैया ..हम स्कूल में हैं ...भाभी की जॉब लग गई है ...
वो अंदर हैं ...

मैं: क्यों ?? तू बाहर क्यों है ????

अनु: अरे अंदर उनका इंटरव्यू चल रहा है ...
वो कुछ समझा रहे थे ... तभी ...

मैं : ओह ...मगर तू उसका ध्यान रख ...
देख वो क्या कर रही है .???

अनु: हाँ भइया ... पर क्यों ???

मैं: तुझसे जो कहा वो कर ना ...

अनु: पर वो अपने कोई पुराने दोस्त के साथ है ..
वो क्या नाम बोला था ???
हाँ याद आया ...
विकास ...
वो उनके कोई पुराने दोस्त हैं ...
वो ही हैं यहाँ बड़े वाले टीचर ..

मेरे दिमाग में एक झनका सा हुआ ...

अरे विकास वो तो कहीं वही तो नहीं ...

मुझे याद आया जूली ने एक दो बार बताया था ..
उसका फोन भी आया था शायद ...

विकास उसके स्कूल के समय से दोस्त था ...
पर हो सकता है कि कोई और हो ...

तभी अनु की आवाज आई ...

अनु: भैया ..ये तो ... अंदर ...

मैं: क्या अंदर ??? क्या हो रहा है ...

अनु: वव व्व्व्व्व्व्वो भाभी अंदर ... और व्व्व्वो ववकास 

?????????
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RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

ऑफिस में ही यासमीन और पिंकी से मस्ती करने के बाद मैं बहुत आराम से फोन पर बात कर रहा था ...

लण्ड को अपनी खुराक भरपूर मिल गई थी ...फिर भी दिल तो बाबरा होता है रे ....

जूली का फोन अनु के पास था ...

दोनों किसी स्कूल में थे ...
जहाँ जूली ने जॉब करने के लिए कहा था ....

अनु ने के ऐसी बात बताई कि मेरे कान खड़े हो गए ...
झूठ नहीं बोलूंगा ...
कान के साथ लण्ड भी खड़ा हो गया था ...

अनु: भैया ....भाभी अंदर कमरे में हैं ...
यहाँ उनका कोई दोस्त ही बड़ा सर है ...
वो क्या बताया था ...
हाँ विकास नाम है उनका .....

मैंने दिमाग पर ज़ोर डाला ...
उसने बताया था ...
कि कॉलेज में उसके विनोद और विकास बहुत अच्छे दोस्त थे ...
दोनों हमारी शादी में भी आये थे ...

मैंने अनु को कमरे में देखने को बोला ..

अनु: व् वव व् वव वो भाभी तो विकास सर के गोद में बैठी हैं.....

मैं सारा किस्सा एक डैम से समझ गया ...
दिल चाह रहा था कि भागकर वहां पहुँच जाऊं ...

मैंने अनु को निर्देश दिया ..

मैं: सुन अनु फोन ऐसे ही वहीँ खिड़की पर रख दे ..
स्पीकर उनकी तरफ रखना ...
और तू वहीँ खड़े होकर देखती रह ....

अनु ने तुरंत ही ये काम कर दिया ...

और मुझे आवाज आने लगी ....

विकास: सच जूली ..कसम से तुम तो बहुत सेक्सी हो गई हो ...
मुझे पहले पता होता तो चाहे कुछ हो जाता ..मैं तो तुमसे ही शादी करता ...

जूली: हाँ और जैसे मैं कर ही लेती ...
मैंने तो पहले ही सोच रखा था ...कि शादी माँ डैड कि मर्जी से ही करुँगी ...
और यकीन मानना मैं बहुत खुश हूँ ...

पुच्छ पुच च च च च च पुच 

जूली: ओह क्या करते हो विकास ...
अपना मुहु पीछे रखो ना ...
जब से आई हूँ चूमे ही जा रहे हो ..

विकास: अरे यार कंट्रोल ही नहीं हो रहा ...

जूली: हाँ वो तो मुझे नीचे पता चल रहा है ...
कितना चुभ रहा है ...

विकास: हा हा हा .... यार ये तुमको देखकर हमेशा ही खड़ा होकर सलाम करता था ...
मगर तुमने कभी इस बेचारे का ख्याल ही नहीं किया ..

जूली: अच्छा तो तुम्हारे दोस्त के साथ दगा करती ..

विकास: इसमें दगा कि क्या बात थी यार??
तुम तो हमेशा से खुले माइंड की रही हो ...
ऐसे तो अब भी तुम अपने पति से दगा कर रही हो ...

जूली: क्यों ऐसा क्या किया मैंने ...
ऐसी मस्ती तो तुम पहले भी किया करते थे ..
हे हे क्यों याद है बुद्धू या याद दिलाऊं ...

विकास: अरे उस मस्ती के बाद ही तो मैं पागल हो जाता था ...
फिर पता नहीं क्या क्या करता था ...
तुम तो हाथ लगाने ही नहीं देती थी ...
तुम्हारे लिए तो बस विनोद ही सब कुछ था ....

जूली: अरे नहीं यार ...
तुम ही कुछ डरपोंक किस्म के थे ...

विकास: अच्छा मैं डरपोंक था ...
वो तो विकास की समझ कुछ नहीं कहता था ...
वरना न जाने कबका ..
सब कुछ कर देता ...

जूली: अच्छा जी क्या कर देते ???
बोल तो पते नहीं ..
और करने की बात करते हो ...

विकास: बड़ी बेशरम हो गई है तू ...

जूली: मैं हो गई हूँ बेशरम...
ये तेरा हाथ कहाँ जा रहा है ...
चल हटा इसको ...

विकास: अरे यार बहुत दिनों से तेरी ये चीजें नहीं देखी ..
शादी के बाद तो कितना मस्ता गई है ..
जरा टटोलकर ही देखने दे ...

जूली: जी बिलकुल नहीं ...
ये सब अब उनकी अमानत है ...
तुमने गोद में बैठने को बोला ...
तो प्यार में मैं बैठ गई ...
बस इससे ज्यादा कुछ नहीं ...समझे बुद्धू ....
वरना मैं तुम्हारे यहाँ जॉब नहीं करुँगी ...

विकास: क्या यार ????
तुम भी न ...ऐसे ही हमेशा के एल पी डी कर देती हो ..

जूली: हा हा हा हा ...मुझे पता है तुम्हारे के एल पी डी का मतलब ...
और ज्यादा हिलाओ मत कहीं ये मेरी जींस में छेद ना कर दे ...

विकास: हा हा तो दे दो ना इस बेचारे का छेद इसको ..फिर अपने आप ढूंढ़ना बंद कर देगा ....

जूली: जी नहीं यहाँ नहीं है इसका छेद ...
इसको कहीं और घुसाओ ...

विकास: अरे यार कम से कम इसको छेद दिखा तो दो ...बेचारा कब से परेसान है ...

जूली: अच्छा जैसे पहले कभी देखा ही नहीं हो ...
अब तो रहने ही दो ...

विकास: अरे यार तब की बात अलग थी ...
तब तो मैं दोस्त का माल समझ कुछ ध्यान से नहीं देखता था ..

जूली: हाँ हाँ मुझे सब पता है ...
कितना घूरते थे ...
और मौका लगते ही छूटे और सहलाते थे ..
वो तो मैंने कभी विनोद से कुछ नहीं कहा ...
वरना तुम्हारी दोस्ती तो हो गई थी ...
हे हे 

विकास: अच्छा तो ये तुम्हारा अहसान था ....

जूली: और नहीं तो क्या ....

विकास: तो थोड़ा सा अहसान और नहीं कर सकती थीं ...
पता नहीं था क्या ..कि मैं कितना परेसान रहता था ...

जूली: वैसे सच बोलूं ...
तुमने कभी हिम्मत नहीं की ...
तुम्हारे पास तो कई बार मौके थे ...
और शायद मैं मना भी नहीं करती ....

विकास: अच्छा इसका मतलब ..मैं बेबकूफ था ...
ऐं ऐं ऐं ऐं ...

जूली: हा हा हा हा हा हा ओह रहने दो न ..
बहुत गुदगुदी हो रही है ...

अहा ये क्या कर रहे हो ...????
अरे छोड़ो न इन्हे ...

विकास: यार सच बहुत जानदार हो गए हैं तुम्हारे बूब ..कितना मजा आ रहा है इनको पकड़ने में ...

जूली: देखो मैं अब जा रही हूँ ओके ..
तुम बहुत परेसान कर रहे हो ...

विकास: अरे यार तुमने ही तो कहा था ...
अब कोशिश कर रहा हूँ तो मना कर रही हो ...

जूली: ये सब उस समय के लिए बोला था ...
अब मैं किसी और की अमानत हूँ ...

विकास: अरे यार मैं कौन का अमानत में ख़यानत कर रहा हूँ ..
जैसी है वैसी ही पैक करके पहुंचा दूंगा ...

जूली: हाँ मुझे पता है ..कैसे पैक करोगे ...
मेरे मियां को की दाग पसंद नहीं है समझे बुद्धू ...

विकास: कह तो ऐसे रही हो जैसे अब तक बिलकुल साफ़ और चिकनी हो ...
न जाने कितने दाग लग गए होंगे ...

जूली: जी नहीं ...मेरी उस पर एक भी दाग नहीं है ..
जैसे तुमने पहले देखी थी ..
अब तो उससे भी ज्यादा अच्छी हो गई है ...

ओह माय गॉड 
इसका मतलब विनोद तो उसका बॉय फ्रेंड था ही ..
फिर ये विकास भी क्या उसको नंगा देख चुका है ...

मैं और भी ध्यान से उनकी बातें सुनने लगा ...

..............



RE: मेरी बेकरार वीवी और मैं वेचारा पति - desiaks - 08-01-2016

मैं एक लाइव ऑडियो सुनते हुए अपनी ही सेक्सी बीवी के रोमांस को इमेजिन कर रहा था ..

कि कैसे मेरी प्यारी जूली अपने पुराने दोस्त कि गोदी में बैठी होगी ...

उसने क्या-क्या पहना होगा ...
वैसे उनकी बातों से लग रहा था ..
कि उसने जीन्स और टॉप या शर्ट पहनी होगी ...

विकास ना जाने कहाँ कहाँ और किन किन अंगों को छू रहा होगा और मसल रहा होगा ...

विकास का लण्ड ना जाने कितना बड़ा होगा और जूली के मखमल जैसे चूतड़ों में कहाँ रगड़ रहा होगा या हो सकता है कि गड़ा होगा ....

ये विचार आते ही मेरा कई बार का झड़ा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा ...

मैं अपने हाथों से अपने लण्ड को मसलते हुए उनकी बातें सुनते हुए मस्त होने लगा ...

मुझे अनु से जलन सी होने लगी कि वो तो लाइव मजे ले रही होगी ..
और मैं यहाँ केवल सुन पा रहा हूँ ...

तभी उनकी आवाजें आने लगती हैं ...

जूली: ओह विकास ...तुम क्या कर रहे हो ???
समझा लो अब अपने इस पप्पू को ...
ठीक से बैठने भी नहीं दे रहा ...

विकास: कहाँ यार ..कितना तो शांत है ...
वरना इतने पास घर का द्वार देख ..
अब तक तो दरवाजा तोड़कर अंदर घुस जाता ..

जूली: हाँ हाँ रहने दो ..
ये दरवाजा इसके लिए नहीं खुलेगा ...
और खिला क्या रहे हो आजकल इसको ..
जो इतना मोटा होता जा रहा है ...
पहले तो काफी कमजोर था ना ...
हा हा हा 

विकास: हाँ हाँ उड़ा लो मजाक ..
तुमको तो उस समय केवल विनोद का ही पसंद आता था ...
मेरा कभी तुमने ध्यान दिया ...
हाथ तक तो नहीं लगाती थी ..
हर समय विनोद का ही पकडे रहती थीं ...
पता है उस समय मेरे इस पर क्या गुजरती थी ...??

जूली: अच्छा तुम ही हर समय वहीँ घुसे रहते थे ..
तुमको तो देखने में ना जाने क्या मजा आता था ??
छुप-छुप कर हमको ही देखते रहते थे ...
और झूट मत बोलो ..
मुझे याद है अच्छी तरह से ....
२-३ बार मैंने तुम्हारे लल्लू को पकड़ा तो था ...
तभी तो उसकी सेहत के बारे में याद है ...

विकास: हाँ सब पता है ...
मुझे देखने को भी मना करते थे ...
हर समय कहीं ना कहीं भेजने का सोचते रहते थे ...
और उसको पकड़ना कहते हैं क्या ??
कभी मेरे इस बेचारे को पकड़कर किस किया ...प्यार से चूमा क्या तुमने ...
बस पकड़कर पीछे को धकेल दिया ...
तुमको पता है कितना गुस्सा आता था मुझे ...

जूली: हाँ उस समय तुमको बचा लेती थी बच्चू ..
अगर विनोद को मालूम हो जाता कि तुम भी अपना लिए फिर रहे हो न तो सोचो वो क्या कर देता ...
उसको तुमसे बहुत प्यार था ...
इसलिए देखने या छूने में कुछ नहीं कहता था ...
मगर इसका मतलब ये थोड़ी था कि सब कुछ कर लेते ..

विकास: अरे यार मुझे पता होता कि तुम किसी और से शादी करने वाली हो ..
तो कसम से मैं नहीं छोड़ता ...
वो तो विनोद कि वजह से मैं शांत रहता था ..

जूली: अच्छा जी ..तो क्या करते ???

विकास: अच्छा तो बताऊ....
ये देख ....
जैसे पूरी नंगी लेटी रहती थी ..ना 
और मेरे पूरे घर में घूमती रहती थी ...
ना जाने कितनी बार ....

जूली: अह्ह्हाआ ओह धीरे से ...
क्या कितनी बार ..???
हे हे 

विकास: अरे यार तुम्हारे इस प्यारे से छेद को अपने पप्पू से पूरा भर देता ...

जूली: ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ वहां से अपना हाथ हटाओ ...
ऊपर रखने दिया बस उतना ही बहुत है ...

विकास: अरे यार ऊपर से ही रख रहा हूँ ...
कौन सा चेन खोलकर अंदर डाल दिया ...

जूली: सोचना भी मत ...

विकास: अरे इतना नखरा क्यों कर रही हो ...??
दिखा दो ना एक बार...
देखू तो सही पहले में और अब में कितना अंतर आ गया ..

जूली: नहीं जी ..कोई अंतर नहीं आया ...
अभी भी पहले जैसी ही है ...
और अब ये किसी की अमानत है समझे ...
जब मौका था तब तो तुमने चखा नहीं ...
तो अब तो तुमको देखने को भी नहीं मिलेगी ...

विकास: और अगर जब विनोद आएगा तो उसको भी मना करोगी ....

जूली: और नहीं तो क्या ...??
वही उसकी भी शादी हो गई ..मेरी भी ...
अब उसको क्या मतलब ..??
वो तो तुमने अभी तक शादी नहीं की ..
इसलिए तुमको थोड़े मजे करा दिए ...
पर इससे ज्यादा कुछ नहीं ..समझे बुद्दू ..

विकास: वाह ये तो वही बात हुई ना ...
की भूखे के आगे खाना तो रखा ..पर खिलाया नहीं ..

जूली: हाँ तुम जैसे भूखे ही होगे ना ...
ना जाने कहाँ कहाँ ..क्या क्या कहते रहते होगे ...

विकास: अरे चलो ठीक है ...
पर थोड़ा सा दूध तो पिला दो यार ..
कितने प्यारे हो गए हैं तुम्हारे ये मम्मे ...

जूली: अच्छा बस अब छोड़ भी दो ना ...
पूरा टॉप खराब कर दोगे तुम ...
मुझे अभी घर भी वापस जाना है ...

विकास: अरे यार पिला दो ना ...
क्यों इतना नखरे कर रही हो ...
पहले भी तो पीता था ...इसपर तो तुमको ऐतराज नहीं होता था ...

चलो उत्तर दो अब टॉप ..
वरना फाड़ दूंगा हाँ ...

जूली: ओह रुको ना यार ..
एक मिनट ...
अह्हाआआआआआ 
नहीईइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ यार 
बस ऊपर कर लेती हूँ ...
इतना ही ...
अर्र्र्र्र्र्र रे कोई आ जाएगा बाबा ....
बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स अब नहीईईईईईईईईई 

विकास: वाओ यार क्या मस्त गोले हैं ...
तुम क़यामत हो यार .,,,

पुचह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पुच पुच चचच 
मु ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पुच पुच 

जूली: ओह धीरे यार ...अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्अह 
दांत नहीईइइइइइइइइइइइइइइइ 
लाल कर दिया ....
तुझे सब्र नहीं है ...........
कबाड़ा निकालेगा क्या .???????

विकास: मजा आ गया ...
क्या टेस्ट है यार ....
ऐसा लग रहा है ....जैसे हर सिप के साथ ...
मुहू मीठे दूध से भर जा रहा हो ...
बिलकुल मख्हन जैसे हैं तेरे मम्मे ...

जूली: ओह अब ये क्या कर रहे हो ...???

विकास: एक मिनट यार ...
सच तू तो बिलकुल मॉडल लगती है यार ...
पूरे गोल और तने हुए मम्मे ..
कितनी पतली कमर ..
और बिलकुल चिकना पेट ...
और मन मोहने वाली नाभि ..वाओ यार ...

और तेरी ये लो वेस्ट जीन्स ...
कितनी नीची है यार ...
गजब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब यार 

तूने को कच्छी भी नहीं पहनी ...
क्या बात है यार ????
सच में सेक्स की देवी लग रही है ....

जूली: ओह क्या कर रहे हो ...
नहीं ना बटन मत खोलो ओह ....
अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाआआआआ 

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