निर्मला दीदी का चुदक्कड़ भोसड़ा - Printable Version

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निर्मला दीदी का चुदक्कड़ भोसड़ा - desiaks - 04-16-2017

हैल्लो दोस्तों, आप सभी का कामुकता डॉट कॉम पर बहुत बहुत स्वागत है और में आज आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ और में आशा करता हूँ कि यह कहानी आप लोगों को जरुर पसंद आएगी, खैर में क्यों आप सभी को अब बोर कर रहा हूँ, चलिए आज में आप सभी को अपने जीवन में बीते कुछ हसीन पलों को एक धागे में पिरोकर बताता हूँ, जिसमें मैंने किसकी चुदाई के सपने देखे और मुझे किसकी चुदाई का मौका मिला और मैंने वो सब कुछ कैसे किया? वो में आप सभी को विस्तार से बताता हूँ।

दोस्तों यह घटना तब मेरे साथ घटित हुई जब में पढाई के लिये लखनऊ के एक छोटे से शहर में गया था। तब मैंने अपने रहने के लिए एक मकान को किराए पर ले लिया था और वो मेरा मकान मालिक छोटा सा अपना व्यपार किया करते थे, लेकिन बहुत समय तक वो काम करने के बाद भी उसकी ज़्यादा कमाई नहीं होने की वजह से वो हताश होने के बाद भी वो बहुत मेहनत किया करता था और कई कई बार तो वो दूसरे आसपास के शहर में जाकर भी वहां से माल लाना और ले जाना होता था, जिस कारण उनको चार पांच दिनों के लिए अपने घर से बाहर रहना होता था। दोस्तों मेरे मकान मालिक का थोड़ा छोटा सा परिवार था, जिसमें एक उनकी पत्नी जिसका नाम नेहा था और उन्हें में भाभी कहकर बुलाया करता था और वो एक ग्रहणी थी, जो ज़्यादा मॉडर्न तो नहीं थी, लेकिन वो अपने घर में ही रहना ज़्यादा पसंद करती थी और दोस्तों नेहा भाभी का फिगर दिखने में बहुत ही अच्छा आकर्षक लगता और जिसको देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि यह औरत इतने बड़े बच्चे की माँ है, उनकी उम्र करीब 38 साल की होगी, लेकिन वो अपने गदराए सेक्सी बदन की वजह से मुश्किल से 34-35 साल की लगती थी और उनका चेहरा बहुत मस्त, उनकी नाक, नयन भी बहुत ही सुंदर और दिखने में वो बड़ी ही आकर्षित लगती थी। उनकी एक बेटी थी, जिसकी उम्र करीब 20 साल की थी और में उससे निशा बहन कहकर बुलाता था और वो भी मुझे अक्षय भाई कहकर बुलाती थी। दोस्तों उन दोनों माँ बेटी का वो गोरा बदन बड़ा ही गठीला और सुंदर था, जिसको देखकर में हर कभी उनकी तरफ अपनी ललचाई हुई नजर से देखा करता था, वैसे में शुरू से ही थोड़ा अलग विचार का था।

फिर उस वजह से में कॉलेज से आने के बाद घर में ही रहना ज़्यादा पसंद करता था, मुझे बिना मतलब के इधर उधर घूमना फिरना बिल्कुल भी ठीक नहीं लगता था और इन कुछ दिनों बाद में भी उनके घर का एक बहुत अच्छा सदस्य बन गया था, जिसकी वजह से में उनके कोई भी छोटे बड़े घर के कामों में उनकी मदद कर दिया करता। दोस्तों नेहा भाभी को थोड़ा सा ब्लड प्रेशर की समस्या थी, जिस वजह से वो ज़्यादा भारी काम नहीं करती थी, नेहा भाभी अक्सर घर में मेक्सी या साड़ी ब्लाउज में ही रहती थी और वो हमेशा ज्यादातर गहरे गले वाला ब्लाउज ही पहनती थी, जिसमें से उनके मोटे मोटे बूब्स बाहर झलकते थे, जिनको देखकर तो कोई भी बूढा भी पागल हो जाने पर मजबूर हो जाता, निशा बहन भी हमेशा बहुत टाईट कपड़े ही पहनती थी और में भी कभी कभी उसकी टाईट टी-शर्ट में से उसके उभारों को ताकता रहता था। दोस्तों वैसे निशा हमेशा ही स्कर्ट और टी-शर्ट में ही घर में रहती थी और वो हमेशा बड़ी ही लापरवाही से उठती, बैठती थी, जिस वजह से वो भी मुझे अपनी चढती जवानी का प्रदर्शन हर कभी करवाती रहती थी, जिसको देखकर में मन ही मन बहुत खुश रहने लगा था और में हमेशा इस जुगाड़ में लगा रहता था कि कब मुझे कोई अच्छा मौका मिले और कब में इन दोनों को चोद दूँ और अपने लंड के मज़े इनकी चूत को भी चखाकर इनकी चूत के मज़े लूँ? में उस अच्छे मौके की तलाश में हमेशा लगा रहा और एक दिन उनके एक करीबी रिश्तेदार की शादी उसी शहर में थी और मेरा वो मकान मालिक उस दिन अपने काम की वजह से दूसरे शहर में गया हुआ था, इसलिए नेहा भाभी और निशा बहन के साथ में भी उनके कहने पर उस शादी में चला गया, क्योंकि उन दोनों को अकेले जाने और वहां से आने में थोड़ा सा डर था और उस शादी में नेहा भाभी की बड़ी ननद निर्मला जी भी आई हुई थी, जो कि दूसरे शहर में रहती थी और वो कभी कभी अपने भाई मतलब कि मेरे मकान मालिक से मिलने आ जाया करती थी, जिस वजह से हम दोनों अब तक एक दूसरे से थोड़ा थोड़ा सा अंजान ही थे, वैसे मैंने उसके बारे में बहुत कुछ सुन रखा था कि उसकी शादी से पहले और बाद में भी उसके हमारे पड़ोस के कई लड़को से शारीरिक संबंध बने रहे थे और वैसे वो भी दिखने में थी ही इतनी ज्यादा सेक्सी कि कोई भी उसको देखकर चोदने के लिए एकदम उतावला पागल हो जाता था, वैसे वो थी भी बहुत रंगीन मिज़ाज और खुले विचारों की औरत, लेकिन उसके साथ पहली बार यह काम करने के बाद मुझे पता चला कि वो तो बहुत बड़ी चुदक्कड़ किसी रंडी से कम नहीं थी, जिसको चुदाई का पूरा और बहुत अच्छा अनुभव था। वो शादी में अपने एक साल के लड़के को भी अपने साथ में लेकर आई हुई थी और वहाँ पर उस दिन बहुत गर्मी और भीड़ को देखकर उनका लड़का बार बार बहुत ज़ोर ज़ोर से रो रहा था, इसलिए नेहा भाभी ने मुझसे कहा कि अक्षय तुम जाकर निर्मला दीदी के बच्चे को संभाल लो, क्योंकि वो गर्मी की वजह से परेशान होकर बहुत रो रहा है और अगर वो फिर भी चुप नहीं हो तो तुम निर्मला को अपने साथ घर पर ले जाओ, हो सकता है कि वहाँ पर शायद मुन्ना चुप हो जाए। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर में उनके कहने पर निर्मला दीदी के करीब जाकर बैठ गया, वो बहुत ही बिंदास औरत थी और उनको किसी भी बात की ज़रा सी भी लाज संकोच कोई भी शरम नहीं थी और वो अब थोड़ा गरमी लगने की वजह से अपने पेटीकोट को अपने घुटने तक उँचा उठाकर पंखे के बिल्कुल सामने बैठी हुई थी और उस पंखे की वजह से उसकी साड़ी के साथ साथ उसका पेटिकोट भी हवा में इधर उधर हो रहा था, जिस वजह से मुझे उनकी पेंटी और साईड की झांटे दिखाई दे रही थी और वो मस्त मनमोहक नज़ारा देखकर तो मेरा लंड पेंट के अंदर ही ख़ुशी से झूमने नाचने लगा और में बहुत खुश था। दोस्तों मुन्ना अब भी लगातार रोए जा रहा था और फिर में कुछ देर बाद निर्मला दीदी को अपने साथ में लेकर घर आ गया और रास्ते में वो मुझसे बातें करते हुए कहती जा रही थी कि अक्षय तुम्हारे जीजाजी एक महीने के लिए अपनी कंपनी की तरफ से दिल्ली अपनी किसी ट्रेनिंग पर गये हुए है और यहाँ पर तो इतनी जबर्दस्त गरमी की वजह से मेरा सारा शरीर बहुत गरम हो उठा है और फिर वो मुझसे जल्दी से गाड़ी को चलाने के लिए कहती रही, क्योंकि उसको ज़ोर का पेशाब लगा था, इसलिए में भी तेज़ी से गाड़ी चलाने लगा और हम कुछ देर बाद घर पहुंच गए। फिर घर पर आते ही निर्मला दीदी ने सबसे पहले तो पंखा चलाकर अपने बच्चे को बेड पर सुला दिया और फिर जब तक में ठंडा पानी लेकर आया, तब तक उसने अपनी साड़ी को खोलकर एक तरफ फेंक दिया था और अब वो जल्दी से बाथरूम में घुस गयी, शायद उसको ज्यादा ज़ोर से पेशाब लगा होगा, इसलिए वो यह भी भूल गई और वैसे उसने सोचा होगा कि में अब अपने घर में हूँ, इस वजह से वो खुले दरवाजे में ही बैठकर पेशाब करने लगी और वहां पर में खड़ा पीछे से चुपचाप उसके मोटे मोटे, गोरे कूल्हों के दर्शन करता रहा और जब वो मूत रही थी, तब तेज़ सिटी की आवाज़ के साथ उसकी मूत से धार बाहर निकल रही थी, वो आवाज़ इतनी तेज़ और ज़्यादा थी कि मानो वो पूरे एक सप्ताह भर का आज ही एक साथ मूत रही हो और जब निर्मला पेशाब करके उठी तो पीछे से मुझे उसकी बड़े आकार की चूत का नज़ारा भी दिखने को मिल गया, उूफ्फ़ क्या मस्त काली काली झांटो के बीच चूत की लाल लाल सुर्खिया और उसकी चूत की वो जामुनी कलर की फांके (चूत का मुहं या होंठ) नज़र आ रही थी। फिर वो अपनी पेंटी को अपने कूल्हों पर चढ़ाती हुई बाहर आई तो मुझे देखकर वो बड़ी बेशर्मी से बोली कि यदि में एक पल और रुक जाती तो मूत के मारे मेरी मूतने की नली ही फट जाती। अब उसके मुहं से यह शब्द सुनकर में एकदम चकित हो गया, लेकिन निर्मला दीदी मेरे चेहरे की तरफ देखकर अपनी चूत को अपने पेटिकोट के ऊपर से सहलाते हुए मेरी तरफ हंस रही थी और फिर वो मुझसे कहने लगी कि रात भर सफ़र की वजह से मुझे बिल्कुल भी नींद ही नहीं आई, चल में यहीं कमरे में पंखे के नीचे सो जाती हूँ और फिर वो ज़मीन पर केवल एक तकिया लेकर पसर गयी और वो मुझसे बातें करने लगी, लेकिन मेरा सारा ध्यान निर्मला के ब्लाउज पर ही था, जिसके ऊपर के दो बटन खुले हुए थे और उसके बूब्स से भरे हुए दोनों बूब्स उस ब्लाउज से बाहर निकलने के लिए बड़े ही बेताब लग रहे थे और उसकी भरी हुई निप्पल से दूध अपने आप बाहर आ रहा था, जिस वजह से उसकी ब्रा भी अब तक गीली हो चुकी थी, मुझे उसके बूब्स को घूरते हुए वो ताड़ गयी और वो अपने ब्लाउज में अपने एक हाथ को अंदर डालकर अपने दोनों दूध से भरे बूब्स को वो खुजाते हुए मुस्कुराते हुए कहने लगी कि मुझे दूध कुछ ज़्यादा आता है और मुन्ना इसको इतना पी नहीं पाता, इस वजह से मेरे बूब्स में से दूध हमेशा ऐसे ही बाहर बहता रहता है और मेरी छातियाँ दर्द करने लगती है, ऐसा कहते हुए उसने अपने बच्चे को अपने पास खींच लिया और मेरे सामने ही उसने अपने ब्लाउज को एक तरफ से उँचा उठाकर अपने दूध से भरे एक बूब्स को बच्चे के मुहं में दे दिया और उस समय पहली बार बिना कपड़ो के में उसके स्तनो का आकर देखकर बिल्कुल चकित रह गया और उस समय निर्मला दीदी उस पंखे के नीचे पसरी हुई थी और उस पंखे की तेज हवा की वजह से उसका पेटीकोट अब घुटनों के ऊपर तक चड़ा हुआ था और वो बार बार अपनी चूत को खुज़ाए जा रही थी। फिर कुछ देर बाद अपने बच्चे के मुहं में अपना दूसरा स्तन देते हुए वो अपनी चूत को खुजाती हुई बोली कि शायद रात भर बस में बैठे रहने की वजह से और इतनी गरमी होने की वजह से मुझे नीचे की तरफ भी आज बहुत खुजली होने लगी है, साली बड़ी मीठी मीठी खुजली आ रही है।

दोस्तों में यह सभी बातें सुनते हुए मेरी नज़र बार बार उसकी छाती पर जा रही थी और उसकी छाती के निप्पल दूध पिलाने से बड़े लंबे हो गए थे, जिन्हें वो अब अंदर भी नहीं कर रही थी और अब वो बच्चा बड़े ज़ोर ज़ोर से दूध को चूसते हुए आवाज़ कर रहा था। तभी वो मेरी तरफ देखकर आँख मारते हुए मुझसे बोली कि यह साला भी अपने बाप पर गया या तो मेरा पूरा रस निचोड़ लेगा या फिर मुझे रस से भरी ही छोड़ देगा, दोनों तरफ से मुझे बड़ी मुश्किल होती है और वो ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी।

फिर हम लोग इधर उधर की बातें करते रहे, लेकिन उसका अब भी बार बार अपनी को चूत खुजलाना बंद नहीं हुआ और अब में तुरंत समझ गया कि आज वो मेरे लंड का पानी लेकर अपनी चूत की गरमी को ठंडा करना चाहती है, लेकिन वो जानबूझ कर मेरे सामने सीधा बन रही थी और फिर उनसे कुछ देर बाद अपने बच्चे से दूरी बनाकर एक तकिया लेकर वो कोने में पसर गई। फिर हम इधर उधर की बातें करते हुए हम कब सो गये और हमें पता ही नहीं चला। फिर करीब रात को दो बजे जब मेरी नींद पेशाब करने के लिए खुली तो में निर्मला के दोनों स्तनो को देखता ही रह गया, क्योंकि वो दोनों बूब्स पूरी तरह से वापस दूध से भर गये थे और उसके निप्पल से दूध की कुछ बूंदे टपक भी रही थी और ज्यादा तनाव की वजह से उनमें लाल खून की नसे भी अब दिखाई देने लगी थी और दूसरी तरफ निर्मला का पेटीकोट भी उसकी गोरी मोटी जांघो तक ऊपर चड़ गया था, जिसमें से मुझे उसकी चूत की फांके साफ साफ नजर आ रही थी और मुझे पता ही नहीं चला कि कब उसने अपनी पेंटी को निकालकर अपने तकिए के पास में रख दिया था और यह सब देखकर मेरा लंड तो फूंकार मारने लगा, लेकिन पेशाब की वजह से मुझसे रहा नहीं गया और में बिना देर किए बाथरूम में घुस गया और जब में पेशाब करके वापस आया, तब तक शायद मेरी आहट से निर्मला दीदी जाग गयी थी और वो झुककर अपने बेग से कुछ ढूंढ रही थी और तब उसके लटकते हुए बड़े बड़े बूब्स बड़े ही मस्त आकर्षक सेक्सी लग रहे थे। उसी समय मैंने अपने लंड को सहलाते हुए उससे पूछा निर्मला दीदी क्या बात है, क्या आपको कोई परेशानी है? तो वो बोली कि मेरी छातियाँ अब बहुत दुख रही है, क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा दूध भर गया है और मुन्ना भी मेरा दूध नहीं पी रहा है, इसलिए मुझे मेरी निप्पल से इस दूध को बाहर निकालना पड़ेगा, इसकी वजह से मेरे दोनों बूब्स बहुत दुख रहे है और मैंने अगर इनका दूध नहीं निकाला तो इनमें से खून आने लगेगा।

अब में उनके मुहं से यह बात सुनकर बड़ा घबरा सा गया। तब मैंने उनसे पूछा कि अब क्या होगा आप कैसे इस काम को करोगी? फिर वो बोली कि अब एक ही तरीका है मुझे अपने हाथों से निप्पल को दबा दबाकर इनका दूध बाहर निकालना पड़ेगा और वो इतना कहकर अपने हाथों से निप्पल को दबाते हुए उनका दूध बाहर निकालने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसकी वजह से दूध थोड़ा थोड़ा ज़मीन पर भी गिरने लगा, तो वो पास में पड़े एक गिलास को उठाकर अपने एक बूब्स पर गिलास को सटाकर अपने दूसरे हाथ से उस बूब्स को दबा दबाकर निचोड़ निचोड़कर उससे अपने दूध को बाहर निकालने लगी, तब उसकी निप्पल से थोड़ी सी दूध की फुहार सी निकली, लेकिन जब भी उसको ठीक तरह से आराम नहीं मिला तो वो उदास होकर मुझसे कहने लगी कि काश अभी यहाँ पर तेरे जीजाजी होते तो मुझे इतना परेशानी ही नहीं होती। फिर मैंने निर्मला दीदी से कहा कि यदि में आपकी कुछ भी मदद कर सकता हूँ तो आप मुझे ज़रूर बताना, जिससे कि तुम्हारा यह दर्द कुछ कम हो जाए? तो वो बोली कि अक्षय तुम चाहे तो मुझे अभी इस दर्द से आराम दिलवा सकते हो, क्या तुम थोड़ा मेरे करीब आओगे और अपने मुहं को मेरी छाती से लगाकर मेरा थोड़ा सा दूध पी लोगे? तब में मन ही मन बहुत खुश होकर उनके करीब सरकते हुए शरमाकर उनसे बोला कि निर्मला दीदी मुझे ऐसा करने में बड़ी शरम आती है।

दोस्तों मेरे मन में यह काम करने की बहुत इच्छा थी और में भी यही सब करना चाहता था, उसके लिए सही मौका देख रहा था, लेकिन में थोड़ा सा डरता भी था और उसी के साथ में वो सबसे अच्छा मौका अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता था, में बस उनको दिखाने ले लिए थोड़ा सा नाटक कर रहा था। तभी वो मुझसे कहने लगी कि इसके अलावा हमारे पास कोई रास्ता भी नहीं है, अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो रात भर में दर्द की वजह से बड़ी परेशान रहूंगी और में इस दर्द की वजह से ठीक तरह से रात भर सो भी नहीं सकूँगी और यह बात कहकर उसने मुझे ज़बरदस्ती अपनी तरफ खींच लिया और उसने अपने एक बूब्स को हाथों से पकड़कर मेरे मुहं में जबरदस्ती दे दिया और में तो पहले से ही बस इस मौके की तलाश में था और में उसके एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा। फिर दूसरे बूब्स को अपने हाथ से दबा रहा था और यह हरकत करीब मैंने दस मिनट तक की और मेरी इस हरकत से इधर निर्मला दीदी के मुहं से उउफ्फ आईईईईईईई की आवाज़े निकलने लगी, उधर मेरा लंड तनकर लूंगी से बाहर आने के लिए उछल कूद मचाने लगा और में बारी बारी से दोनों बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूस रहा था। अब निर्मला दीदी बड़ी सफाई से मेरे कड़क हो चुके लंड को टटोलते हुए अपने हाथों में लेकर धीरे धीरे सहलाते हुए वो मेरे लंड के टोपे की ऊपर की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी और में भी तव में आकर उसके पेटीकोट में अपने हाथ को डालकर उसके कूल्हों को सहलाने लगा और तब निर्मला दीदी ने आँखें बंद कर ली और वो गहरी गहरी साँसे लेने लगी, धीरे धीरे मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चूत को टटोलते हुए में उसकी चूत को सहलाने लगा और उसकी चूत को छूकर मुझे बड़ा मज़ा और बहुत जोश आ गया था। फिर मैंने देखा कि चुदाई की वो आग हम दोनों में बराबर लगी हुई है, क्योंकि निर्मला दीदी ने अपने होंठो को अपने दांतों से भींचते हुए वो मुझसे बोली कि अब तू ज्यादा देर मत कर और डाल दे अपने इस लंड को मेरी इस चूत में और इसको आज तू जमकर चोद और इसका भोसड़ा बना दे। यह बात कहते हुए वो अपने पेटीकोट को ऊँचा करके अपने दोनों पैरों को उठाकर अपनी चूत को पूरी तरह से फैलाकर मुझसे मेरे लंड को अंदर डालने के लिए कहने लगी। अब यह सब देखकर मैंने भी जोश में आकर तुरंत अपना मोटा और लंबा लंड निर्मला दीदी की चूत में एक ही जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर डाल दिया और मेरा लंड उसकी खुली हुई चूत में फिसलता हुआ सीधा उसकी बच्चेदानी से जा लगा और फिर में लगातार उसकी चूत में अपने लंड को डालकर अंदर बाहर कर रहा था, जिसकी वजह से मुझे बड़ा ही मस्त मज़ा आ रहा था और वो मुझसे कहने लगी ऊफफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया मेरे राजा, लगाओ और ज़ोर से धक्के आह्ह्ह्हह्ह वाह तुम बहुत मस्त मज़े देते हो, स्स्स्सीईईईइ तुमने तो मुझे आज मेरी उम्मीद से भी ज्यादा जोश में धक्के दिए, वाह बहुत बढ़िया हाँ बस ऐसे ही लगे रहो और में कुछ देर तक उसके ऊपर आकर उसको पूरे जोश से धक्के देकर चोदता रहा, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अब मेरे ऊपर आकर अपनी चूत में मेरा लंड डालकर उछल कूद मचाकर मुझसे अपनी चुदाई करवा रही थी, जिसकी वजह से बहुत ज़ोर ज़ोर से हांफ रही थी और वो पसीने से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और जब वो कुछ देर बाद नीचे ऊपर होने की वजह से थक गई तो मैंने उसको अब अपने सामने घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत नीचे उतरकर मेरे सामने घोड़ी बन गई। फिर मैंने बिना देर किए पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। दोस्तों में सच कहता हूँ कि वो बहुत बड़ी छिनाल चुदक्कड़ औरत थी। मैंने उसको जैसा भी कहा उसने ठीक वैसा ही किया और हर बार उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और मैंने उसको बहुत जमकर चोदा और इस तरह से हम दोनों ने एक लंबी अवधि तक उसको बहुत जमकर चोदा और उसकी चुदाई के मज़े लिए। वो मेरी चुदाई से बहुत खुश संतुष्ट थी, लेकिन इतने में ही नेहा भाभी और निशा बहन ने आकर दरवाजे पर दस्तक देकर आवाज़ लगाई। फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किए और उसके बाद मैंने कमरे से बाहर जाकर नेहा और निशा के लिए दरवाजा खोल दिया, में उनके इस तरह अचानक से बीच में आ जाने की वजह से बहुत उदास सा हो गया था, क्योंकि मुझे उसके साथ अभी और भी बहुत मज़े लेने थे और मैंने अंदर आकर देखा कि उसका चेहरा भी थोड़ा सा मुरझाया हुआ था। तभी नेहा ने अपनी ननद से पूछा क्यों क्या हुआ दीदी आप ऐसी उदास जैसी क्यों नजर आ रही हो? तो वो कहने लगी कि कुछ नहीं तुमने बीच में आकर मेरा सारा मज़ा खराब कर दिया, में तुम्हारे जीजाजी के साथ कितने मस्त मज़े मस्तियाँ कर रही थी, में उनके साथ कितनी खुश थी और तुम्हारे आ जाने से वो चले गए और में अपनी नींद से उठ गई। फिर उसकी बातें सुनकर हम सभी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे, मुझे और निर्मला को छोड़कर वहां पर कुछ देर पहले क्या चल रहा था और निर्मला कौन से किसके साथ मज़े मस्ती की बातें कर रही थी? यह बातें कोई भी ठीक तरह से नहीं समझ सका। दोस्तों निर्मला अपने भाई के घर पर दो दिन तक रही, लेकिन हम दोनों को दोबारा से चुदाई का ऐसा कोई भी अच्छा मौका हाथ नहीं लगा, जिसका फायदा उठाकर में उसकी चुदाई के मज़े दोबारा से ले सकूं, लेकिन में हर कभी समयानुसार उसके बूब्स या कूल्हों पर अपने हाथ तो फेर ही लेता था और अब वो वापस चली गई। दोस्तों यह थी मेरी वो चुदाई उस कमसिन सेक्सी चुदक्कड़ के साथ जिसके मैंने कुछ घंटो में ही बहुत मज़े लिए ।।

धन्यवाद .


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