चूतो का समुंदर - Printable Version

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RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

वो तो पटाका थी यार...मैं सोचने लगा कि ये अकरम से कैसे पट गई साली...

जैसे ही मैने कार रोकी तो वो मेरे पास आ गई...

मैं- तुम रूही हो...??

रूही- हां...और तुम अंकित

मैं- ह्म्म..अंदर आ जाओ...

रूही को पिक करके हम अकरम के घर पहुच गये.....


वहाँ पर सब लोग रेडी थे बस अकरम के मोम-डॅड और उनके फरन्ड की फॅमिली नही दिख रही थी ..और अकरम की मौसी भी नही आई थी...

हॉल मे अकरम, ज़िया , जूही और गुल खड़े हुए थे...

हमे देखते ही सब आपस मे मिले...जूही भी पूनम को देख कर खुश हो गई...दोनो पुरानी फरन्ड जो थी...

फिर हम यू ही गप्पे करते रहे ....तभी ज़िया ने मुझे उपेर चलने को कहा...

मैं ज़िया के साथ उपर निकल गया...पर ये बात शायद जूही को अच्छी नही लगी और वो मुझे घूर के देखने लगी...वही गुल उस समय मुस्कुरा रही थी...

उपेर जाते ही ज़िया मुझे अपने रूम मे ले गई...

मैं- यहाँ किस लिए लाई हो...

ज़िया- तुम्हे कुछ दिखाना था...और पूछना भी था...

मैं- अच्छा...तो बताओ फिर...

ज़िया- ह्म्म..पहले ये बताओ कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है...

मैं ज़िया के मुँह से ऐसी बात सुनकर थोड़ा चौंका...पर मुझे पता था कि ये काफ़ी मॉर्डन है..इसलिए उनकी बात को नॉर्मल ही लिया...

ज़िया- बोलो ना...

मैं- ह्म्म..गर्लफ्रेंड तो नही है...

ज़िया- अच्छा...तब तो तुम परेसान रहते होगे...गर्मी बढ़ती है ना...हहहे ..

मैं- अरे यार...

ज़िया- बताओ..फरन्ड समझ कर बात करो...

मैं- ऐसा है तो सुनो...मैं गर्मी मिटाने के लिए गर्लफ्रेंड बनाता हूँ...फिर गर्लफ्रेंड अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते...

ज़िया- ओह हो...काफ़ी स्मार्ट हो...

मैं- आपसे ज़्यादा नही...

ज़िया- ह्म..तो एक काम करो इस टूर मे मेरे बाय्फ्रेंड बन जाओ..

मैं- ह्म..सोच लो...मैं गर्लफ्रेंड को बहुत परेसान करता हूँ ...

ज़िया- तभी तो गर्लफ्रेंड बनना है तुम्हारी...अब बोलो...

मैं- सच्ची..आप तो मुझसे भी आगे हो..

ज़िया- वो तो है...मैं लाइफ के मज़े लेने मे बिलिव करती हूँ...तो बोलो...बनॉगे मेरे बाय्फ्रेंड..??

मैं- आप जैसी लड़की को ना कौन कह सकता है...

ज़िया- ह्म्म तो मुझे आप मत बोलना...समझे ना...

मैं- अब तो तू बोलुगा...तू मेरी जो है..पूरे टूर मे तेरे पूरे मज़े लुगा...

ज़िया मेरे पास आई और मेरे होंठ पर हल्के से किस किया...

ज़िया- जो चाहे करना...पर ध्यान से...हम अकेले नही वहाँ...

मैं- ह्म्म..सही कहा...अब ये बताओ कि और क्या बताना है...

ज़िया- हाँ...ये देखो...इनमे से कौन सी ड्रेस पहनु...

मैं- ह्म..ये ...स्कर्ट वाली...मुझे मेरी गर्लफ्रेंड की गोरी जाघे देखने मिलेगी...हाहाहा...

ज़िया- ह्म्म..ठीक है..यहीं पहनती हूँ...


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

तभी गुल ने गेट पर नॉक किया...

गुल- आप दोनो जल्दी आइए सब आ चुके है...

ज़िया- ओके..तुम चलो..मैं चेंज करके आती हूँ...

फिर मैं गुल के साथ नीचे आ गया...वहाँ अकरम के मोम-डॅड और उनके फ्रेंड की फॅमिली आ चुकी थी...


मेरे आते ही अकरम के डॅड ने मुझे उनके फरन्ड की फॅमिली से मिलवाया ...

(अकरम की फॅमिली और उनके फरन्ड की फॅमिली का इंट्रो....आगे के कुछ दिन ..मुझे इनके साथ ही रहना है...)


अकरम की फॅमिली:
अकरम:- 
वसीम ख़ान:- अकरम के पापा
सबनम:- अकरम की माँ
ज़िया:- अकरम की बड़ी बहेन
जूही:- अकरम की छोटी बहेन
शादिया:- अकरम की मौसी

वसीम ख़ान के दोस्त की फॅमिली.....

सरद गुप्ता:- वसीम का फरन्ड
मोना गुप्ता:- सरद की बीवी
मोहिनी गुप्ता:- सरद की बेटी

इनके अलाव भी 3 माल और हमारे साथ जा रहे थे.....

पूनम दीदी-संजू की दीदी
गुल- अकरम की कज़िन
रूही- अकरम की गर्लफ्रेंड

फिर हम सब अकरम की मौसी का वेट करने लगे...तभी जूही ने मुझे साइड मे बुलाया...

मैं- हाँ जी..क्या बात है...

जूही- ये बताने की आज तो हीरो दिख रहे हो...

मैं- अच्छा...पर तुमसे कम..तुम तो क़हर ढा रही हो..

जूही- अच्छा ....तो बोला क्यो नही...मेरे बोलते ही तारीफ करने लगे...

मैं- ऐसा कुछ नही....बस टाइम ही नही मिला...

जूही- हाँ...टाइम कैसे मिलगा...दीदी के साथ तो निकल गये थे...

मुझे जूही की आँखो मे जलन दिख रही थी..बट मैने इग्नोर किया...

जूही- वैसे...क्यो गये थे दीदी के साथ...

मैं- वो..बस ऐसे ही...वो अपनी ड्रेस दिखा रही थी...

जूही(घूरते हुए )- सच मे...सिर्फ़ ड्रेस ही दिखाई या....

तभी अकरम की आवाज़ आई...

अकरम- ये लो...मौसी आ गई...

अकरम की मौसी के आने का सुनकर हम भी आगे बढ़े...

लेकिन अकरम की मौसी को देख कर मैं सुन्न पड़ गया...और मुझे देख कर अकरम की मौसी भी सन्न रह गई...और हम एक दूसरे को देखते हुए खड़े रहे.....

अकरम की मौसी को देख कर मेरा माइंड घूम गया पर दिल खुश हो गया....

ये तो वही थी ..जिनको मैने मसाज दिया था उस रात...और साथ मे जी भर कर चोदा भी था....

मैं और अकरम की मौसी थोड़ी देर तक एक-दूसरे को देखते रहे...तभी अकरम बोला...

अकरम- मौसी...ये मेरा फरन्ड है अंकित...और अंकित...ये है मेरी मौसी...शादिया....

मैं- हेलो मौसी जी...

शादिया- ह...हेलो बेटा...

फिर से एक बार सब बातों मे बिज़ी हो गये पर शादिया चोरी-चोरी मुझे देखती रही...

मैं जानता था कि उनके दिमाग़ मे मेरे लिए कई सवाल खड़े हो गये होगे...

जैसे कि..मैं पार्लर मे क्यों था...मैने मसाज क्यो की..एट्सेटरा..

मैने सोच लिया कि इस टूर पर इनसे बात करके सब समझा दूँगा...और इनके मज़े भी ले लूँगा....

फिर मैं शादिया के बारे मे सोच कर हमारे साथ जाने वाले माल को देखने लगा...

मेरे साथ टोटल 9 चूत वाली जा रही थी...उनमे से 2 शादी शुदा थी और बाकी 7 कुवारि...

शादिया की भी शादी नही हुई थी...पर मुझे पता था कि वो काफ़ी समय से चुदाई करवा रही है...

इतने मालो को देख-देख कर मेरी भूख बढ़ने लगी थी...सब कमाल दिख रही थी...और उनकी बॉडी मुझे अपनी तरफ खीच रही थी...

जैसे कह रही हो कि आओ और मज़े मार लो....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

आइए आपको दिखाता हूँ कि वो किस तरह की लग रही थी...

1- सबनम (अकरम की मोम)

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2- शादिया (अकरम की मौसी)

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3- ज़िया (अकरम की बड़ी दीदी)


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4- जूही (अकरम की छोटी दीदी)

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5- गुल (अकरम की कज़िन)


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6- रूही (अकरम की गर्लफ्रेंड)



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7- मोना गुप्ता ( सरद की बीवी )

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8- मोहिनी गुप्ता (सरद की बेटी )

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9- पूनम दी ( संजू की दीदी )


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इन सब मालो को देख कर मेरा दिल और लंड दोनो खुश थे....अब बस इंतज़ार इस बात का था कि इनमे से कितनी मिल पाती है....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

मुझे मेरे सपनो की दुनिया से अकरम के डॅड की आवाज़ ने निकाला....

वसीम- चलो सब रेडी है ना...

अकरम- यस डॅड...ऑल सेट...

वसीम- ह्म..तो अपना सामान बाहर खड़ी बस मे रखवा दो...

वसीम के कहते ही सब खुस्फुसाने लगे...क्योकि अभी तक हम सब यही सोच रहे थे कि हम कार्स से जाने वाले है...

अकरम- बट डॅड..बस से क्यों...कार से चलते ना..

वसीम- देखो बेटा...बस मे सब साथ मे रहेगे...और फिर सफ़र लंबा भी तो है...

अकरम- लंबा...6-7 घंटे का तो है डॅड...

वसीम- अरे नही...हम दूसरी जगह जा रहे है...मेरे पुस्तैनि गाओं मे...और वो यहाँ से 19-20 घंटे का रास्ता है...

वसीम की बात सुन कर मुझे झटका लगा ..क्योकि अकरम ने मुझे पास वाले गाओं का बोला था...

मैं- क्या...इतनी दूर...पर अकरम तूने तो कहा था...कि...

अकरम(बीच मे )- सॉरी यार..मुझे भी कहाँ पता था...

वसीम- अरे बेटा...टेन्षन क्यो ले रहे हो...ये भी ज़्यादा दूर नही ...और ये गाओं तुम्हे पसंद भी आएगा...

ज़िया- हाँ यार...टेन्षन छोड़ो...और मज़े करने को तैयार हो जाओ...हहहे...

रिया का मतलब मेरे अलावा कोई नही समझा और मैने भी मुस्कुरा कर हाँ बोल दिया...मेरे हाँ बोलते ही संजू और पूनम ने भी हाँ कर दी....

फिर क्या था...सबने सामान रखवाया...और बस मे सवार होने लगे... 

हमारे साथ 1 ड्राइवर और एक नौकरानी भी जा रही थी...

हमे निकलते हुए दोपहर हो चुकी थी...और रास्ता 20 घंटे का था....तो ये तय हुआ कि रात मे कहीं स्टे करेंगे...जिससे सफ़र मे थकान कम होगी....

सब लोग बस मे चढ़ने लगे...तभी मैने अकरम और संजू को अपने पास बुलाया...

मैं- कमीनो...अपना सामान रख लिया कि नही...

अकरम- हाँ साले...सब सेट है...तू चल तो सही...

बस बहुत ही बड़ी थी...और जैसे ही मैं बस मे चढ़ा तो देखा कि ये एक लग्षुरी बस थी...

बस को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि जिसमे सफ़र आरामदायक हो और लोगो की प्राईवेसी भी बनी रहे...


बस मे छोटे-2 कॅबिन बनाए गये थे...हर कॅबिन मे 2 बड़ी शीट्स थी जो आमने-सामने बैठने के लिए...और उन्हे फोल्ड करने पर वो बेड का काम करती थी...

ऐसे ही बस मे 6 कॅबिन थे...3 -3 दोनो तरफ....और कॅबिन्स के उपेर भी सोने का इंतज़ाम था.( लाइक स्लिपर )

उसके अलावा ड्राइवर के साइड मे एक लोंग शीट थी...और कॅबिन्स के आगे दोनो तरफ 2-2 शीट थी...उसके बाद कॅबिन थे...

पूनम , जूही, मोहिनी और रूही एक तरफ की शीट्स पर बैठ गई...

दूसरी तरफ की शीट्स पर गुल ,शादिया, मोना और सबनम ने क़ब्ज़ा कर लिया....

अब बच गया मैं, और ज़िया , अकरम और संजू...और वो नौकरानी...

मैं कुछ सोचता उसके पहले ही ज़िया मुझे ले कर एक कॅबिन मे चली आई...और अकरम और संजू दूसरे कॅबिन मे पहुच गये...

मैं- ज़िया..यहाँ क्यो लाई...

ज़िया- अरे यार नये - नये बाय्फ्रेंड बने हो...थोड़ा अकेले मे टाइम स्पेंड तो कर लो....

मैं- ओके...बट अभी तो सफ़र शुरू हुआ है...आराम से करेंगे ना...

ज़िया- आगे का किसे पता...कौन किसे पकड़ ले..हाँ...

मैं - मतलब...

ज़िया- मुझे सब पता है...सबको घूर के देख रहे थे ना...सबको सेट करने का इरादा है क्या...

मैं सोचने लगा कि ज़िया तो बहुत ही ओपन है...खुद ही अपनी माँ-बेहन के बारे मे ऐसी बात कर रही है...तो मैं क्यो पीछे रहूं....


मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..अभी तो सिर्फ़ अपनी न्यू गर्लफ्रेंड के मज़े लेना है..बाकी को बाद मे देखेंगे...

फिर मैने ज़िया को किस करने के लिए उसे आगे खीचा कि तभी जूही की आवाज़ आई..

जूही- अरे अंकित...यहाँ आओ ना..कहाँ छिप कर बैठ गये...

ज़िया- उफ़फ्फ़ हो...ये जूही की बच्ची...चलो ..नही तो वो यही आ जायगी..

मैं- गुस्सा नही यार...बहुत टाइम है अभी...आओ चले...

फिर हम दोनो बाहर आ कर बैठ गये...

सब लोग 2 की शीट पर 3 को अड्जस्ट कर के बैठे थे...

मैं- हाँ तो...अब क्या करना है...

जूही- अंताक्षरी खेलते है...( इंडिया मे सफ़र के दौरान खेला जाने वाला फेमस गेम)

मैं- ओके...

फिर हम थोड़ी देर तक अंताक्षरी खेलते रहे...पर 1 घंटे मे ही सबको आलस आने लगा और सब धीरे-धीरे कॅबिन मे सोने जाने लगे....

शादिया, सबनम और मोना 1 कॅबिन मे...

जूही, पूनम, मोहिनी और रूही एक कॅबिन मे...

ज़िया , गुल और नौकरानी एक कॅबिन मे...और हम तीनो लड़के एक कॅबिन मे....

इस तरह हम सब तीन कॅबिन मे फिट हो गये....सरद और वसीम अभी भी ड्राइवर के साथ वाली शीट पर थे...रास्ता बताने के लिए...


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

कॅबिन मे आते ही संजू ने ड्रिंक निकाली...और हम ने 2-2 पेग लिए...फिर सब रेस्ट करने लगे...

थोड़ी देर बाद ज़िया ने मुझे बुलाया और अपने साथ पीछे वाले कॅबिन मे ले आई...

मुझे ड्रिंक का थोड़ा सुरूर चढ़ ही गया था...तो मैने खुद ज़िया को बाहों मे भर के किस करना शुरू कर दिया...ज़िया भी पूरी मस्ती मे मुझे किस कर रही थी...

फिर मैने ज़िया को अपनी गोद मे बैठाया और किस करते हुए उसके बूब्स से खेलने लगा...

फिर मैने अपने हाथ ज़िया की स्कर्ट मे डाला और जागे सहलाते हुए उसकी चूत तक पहुच गया...

उसकी चूत पैंटी मे कसी हुई थी...पर पानी छोड़ चुकी थी...

मैने एक उंगली पैंटी के साथ ही चूत मे दबा दी...

ज़िया- उउउंम्म...उउंम्म..

मैने धीरे-धीरे ज़िया की चूत सहलाना चालू किया और ज़िया तेज़ी से मेरे होंठो को चूसने लगी...

करीब 10-15 मिनिट की मस्ती के बाद मैं बोला...

मैं- आअहह...अब कॉंट्रोल नही होता...अंदर का खजाना दिखा दो जल्दी से...

ज़िया- स्शही...अभी नही...यहाँ कोई भी आ सकता है...ऐसे ही मज़े करो...थोड़ा अंधेरा हो जाए ...फिर करेंगे...

मैं- अरे कोई नही आएगा...और आ भी गया तो पता नही चलेगा....

ज़िया- मतलब...

मैं तुम खड़ी हो...मैं बताता हूँ...

ज़िया खड़ी हुई तो मैने उसके स्कर्ट मे हाथ डाल कर उसकी पैंटी खिसका दी...और पैरो से अलग कर ली...

ज़िया- पर इससे क्या होगा...तुम्हारे कपड़े भी तो है...

मैं- अरे मैने लोवर पहना है...ये तो तुरंत चढ़ा लुगा...

ज़िया- ह्म्म..स्मार्ट बॉय..हाँ..

मैं- अब जल्दी करो..आओ मेरी गोद मे...

ज़िया मेरी गोद मे स्कर्ट उठा कर बैठी ...अब आगे से सब ढका हुआ था और नीचे वो नंगी थी...

ज़िया- पर कोई आ गया तो...

मैं- ये कंबल कब काम आएगा...सर्दी का मौसम है ही...ओढ़ के बैठ जाओ...किसी को पता नही चलेगा कि कहाँ बैठी हो...

ज़िया- फिर भी यार...थोड़ा रुक जाओ...कोई आ गया और मुझे तुम्हारी गोद मे बैठा देखा तो शक हो जायगा....

मुझे भी ज़िया की बात सही लगी...और मैं भी यहाँ मज़ा करना चाहता था...फँसना नही....

इसलिए मैं मान गया और चुदाई का प्रोग्राम बाद के लिए छोड़ दिया...

मैने ज़िया को साइड मे बैठाया...अब वो खिड़की की तरफ थी ...

मैने उसके स्कर्ट मे हाथ डाला और उसकी चूत को सहलाना चालू रखा...

ज़िया भी मस्ती मे मेरा लंड कपड़े के उपर से सहलाने लगी....


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अकरम और संजू साथ बैठे हुए थे....संजू जाग चुका था और सिर्फ़ पूनम के बारे मे सोच रहा था....

उसके आने का मक़सद ही यही था कि वो पूनम के साथ ज़्यादा से ज़्यादा मज़े कर सके....

पर इस समय तो पूनम अपनी फरन्ड के साथ बिज़ी थी और संजू अकेलेपन से पागल हो रहा था....

अकरम भी सपनो मे रूही को देख रहा था...पर उसकी गर्लफ्रेंड भी अपने बाय्फ्रेंड की दीदी के साथ गप्पे मार रही थी....

सरद और वसीम अपनी बातों मे मस्त थे...सबनम और मोना आराम फर्मा रही थी....

लेकिन शादिया को चैन नही था...ना ही वो रेस्ट कर पा रही थी और ना ही किसी से बात करके अपना मूड ठीक कर पा रही थी....

शादिया के दिमाग़ मे सिर्फ़ मैं घूम रहा था....

शादिया को हैरानी भी थी और डर भी...

हैरानी इस बात की थी...कि एक पार्लर मे मसाज देने वाला अकरम का दोस्त निकला....

और जब उसे मेरे बारे मे पूरा सच पता चला तो उसकी हैरानी और बढ़ गई...कि आख़िर इतने पैसे वाला पार्लीर मे क्या कर रहा था....

दूसरी तरफ उसे डर भी बहुत लग रहा था...वो यही सोच कर डर रही थी की अगर मैने किसी को बता दिया कि पार्लर मे क्या हुआ था..तो उसका क्या होगा....

शादिया ने अपनी कस्मकस से बाहर निकल कर एक फैशला किया कि अब वो मुझसे बात कर के रहेगी...

और कोसिस करेगी कि ये बात यही ख़त्म हो जाए.....


----------------

यहाँ मैं और ज़िया मज़ा करते हुए ये भी ध्यान रखे थे कि कोई आए तो उसे कुछ पता ना चले....

लेकिन थोड़ी देर मे हमारी सेक्स की भूख सब कुछ भूल गई....

मैने ज़िया की चूत मे उंगली डाल दी और ज़िया ने बिना आगे की सोचे मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाना चालू कर दिया....

ज़िया काफ़ी देर से गरम थी और मेरे उंगली डालते ही वो मदमस्त हो गई....

ज़िया- आअहह..आहब...आअहह...ज़ोर से...उउउंम...माआअ...आअहह...

मैं भी उसके होंठो को चूस्ते हुए और बूब्स को एक हाथ से दबाते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूत को चोदे जा रहा था...

मैं- सस्स्ररुउउउप्प...उउंम...उउउंम...उउंम..आअहह...उउंम्म...उउंम...

ज़िया- ओह्ह्ह..ओह्ह...माऐन्न..आअहह....आऐईइ...आअहह...ऊहह..ऊहह...एस्स. एसस्स..आअहह...

एक लंबी सिसकारी के साथ ज़िया झड गई और फिर ज़ोरो से मेरा लंड हिलाने लगी...


ज़िया- आअहह....मज़ा आ गया....


मैं- अभी तो बस उंगली डाली...

ज़िया- ह्म्म्मब...ये डालोगे तो मेरी फट जायगी...(मेरे लंड को देख कर)

मैं- अरे तुम तो खेली-खाई लगती हो...पहले ही फटी होगी...

ज़िया- ह्म्म्म ..पर ये बड़ा है थोड़ा...

मैं- अच्छा...तो इसे शांत तो करो...

ज़िया- ह्म..करती हूँ...

ज़िया ने झुक कर मेरे लंड को किस किया...फिर अपनी जीभ को मेरे सुपाडे पर फिराने लगी....उसकी हरकते बता रही थी की वो खेली हुई लड़की है....
हमारी मस्ती अपनी अपनी जगह चल रही थी....चलो बाकी सबका हाल भी देख लेते है....

ज़िया मेरे सुपाडे को खाल से निकालती ..उस पर जीभ फिर खाल उपर करती और थूक देती....

ज़िया अपनी हरकते करके मुझे ज़्यादा गरम कर रही थी...


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

मेरा कॉंट्रोल ख़त्म हो रहा था...तो मैने ज़िया का सिर पकड़ कर अपने लंड पर दबा दिया...

मैं- आहह..तडपा मत ...जल्दी से चूस इसे...

ज़िया- ह्म...

और फिर ज़िया ने आधे लंड को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया....

मैं- आअहह...ज़ोर से ...ज़ोर से....आअहह..

ज़िया- सस्ररुउप्प्प...सस्स्ररुउउप्प...उउंम..उउंम..उउंम..उउंम..उउंम.

मैं ज़िया के सिर को सहलाते हुए अपना लंड चुस्वाए जा रहा था और ज़िया भी पूरी मस्ती मे लंड चूस रही थी....पर कोई था जो हमारी मस्ती देख कर गरम भी हो रहा था और शॉक्ड भी था...

मैं- हाँ...बस...हो ही गया...तेजज...एस...एस्स..येस्स...यहह...आअहह...हमम्म..
मैं ज़िया के मुँह मे झड गया और उनका सिर लंड पर दवाए रखा...ताकि वो लंड बाहर ना निकाल दे...

फिर ज़िया को मजबूरी मे पूरा लंड रस पीना पड़ा...और जब मैं झड चुका तो ज़िया खाँसती हुई उठ गई....

मैं- आअहह...मज़ा आ गया...

ज़िया- खो-खो...तुमने तो...खो...जान ले ली...

मैं- अभी कहाँ...जान तो तब जायगी जब ये गान्ड मेरे लंड का स्वाद चखेगी....

ज़िया कुछ बोल पाती उसके पहले ही बस की ब्रेक लगी...और हमने जल्दी से अपने आप को ठीक किया...

तभी मुझे लगा कि कोई ह्यूम देख कर निकल गया....पर बोला कुछ नही........

कौन हो सकता है ये....??????

ब्रेक लगते ही वसीम ने सबको आवाज़ दी...

वसीम- चलो सब...थोड़ा चाइ-नाश्ता कर लेते है...बैठे हुए बोर हो गये होगे....

वसीम की आवाज़ आते ही मैं जाने को खड़ा हुआ तो ज़िया ने अपनी पैंटी का पूछा...

मैने ज़िया को बिना पैंटी के रहने का बोला...और चलने को कहा...

ज़िया ने भी ज़्यादा नही सोचा...और मेरे साथ निकल आई...

हम ने और सब को भी उठाया और सब बाहर आ गये...

बाहर आ कर मैं सबको देख कर अब्ज़र्व करने लगा....कि शायद किसी का फेस देख कर ये पता चल जाए कि वो हमे देख रहा था....

पर इसका कोई फ़ायदा नही हुआ...सब अपने आप मे मस्त थे...

हम सब एक ढाबे पर रुके थे....पहले हम सब फ्रेश हुए और फिर टेबल पर बैठ गये...

मेरे साथ टेबल पर ज़िया, गुल, अकरम और मोहिनी बैठी थी...

ज़िया मेरे सामने ही बैठी थी...और वो भी बिना पैंटी पहने हुए....

चाइ पीते हुए मैं अकरम से बाते कर रहा था कि तभी एक पैर मेरे पैर पर दस्तक देने लगा....

मैं समझ गया कि ये ज़िया ही होगी...उसकी चूत मे कुछ ज़्यादा ही खुजली है....

मैं आराम से चाइ पिता रहा और वो पैर अपना काम करता रहा....

अब मुझे भी मस्ती चढ़ रही थी तो मैने भी अपने पैर को ले जाकर रिया की जाघो के बीच डाल दिया...

मैने पैर थोड़ा सा आगे बढ़ाया और मेरा अंगूठा ज़िया की चूत मे टच हो गया...

मेरी हरक़त से ज़िया का मुँह खुल गया...पर उसने अपने आपको संभाला और खुद आगे सरक आई...जिससे मेरा अगुठा आराम से उसकी चूत पर घूमने लगा...

मैं जिया के साथ मस्ती करते हुए अकरम से बात कर रहा था...और वो पैर अभी भी मेरे एक पैर को रगड़े जा रहा था.....

तभी मुझे ऐसा लगा कि शादिया बार-2 मुझे घूर रही है...इससे मुझे लगने लगा कि यही तो नही थी..जिसका अहसास मुझे बस मे हुआ था...

पर मे बेफ़िक्र था...अगर शादिया ने मुझे और ज़िया को देखा भी होगा तो मेरा घंटा नही उखाड़ सकती...

थोड़ी देर बाद हम फिर से बस मे आ गये और सफ़र शुरू हो गया...

अब वसीम ने अकरम और संजू को ड्राइवर के साथ बैठा दिया और खुद अपनी बीवियो के साथ कॅबिन मे चले गये...

शादिया ने ज़िया और गुल को अपने साथ बैठा लिया....जूही ने पूनम, और मोहनी को अपने साथ बुला लिया...

और मैं भी अकेला एक कॅबिन मे आ गया...और शीट्स को फोल्ड करके बेड बनाया और लेटने की सोचने लगा...

लेकिन तभी रूही भी पीछे से आ गई...

रूही , अकरम की गर्लफ्रेंड थी ..इसलिए मैने उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया था...

पर इस तरह अकेले मे साथ होने से मैं शॉक्ड हो गया...

रूही- क्या मैं...यहाँ...

मैं- हाँ..क्यो नही...आओ ना...

रूही- थॅंक्स...

और रूही मेरे सामने बैठ गई...

हम दोनो पैरो को सामने पसार कर टिके हुए बैठे थे...

रूही ने एक टाइट कॅप्री और स्लीबलेशस टॉप पहना हुआ था...उसका गला भी थोड़ा बड़ा था..जिससे उसके बूब्स के थोड़े दर्शन हो रहे थे....

रूही को देख कर मेरे फ़ीमाग़ मे उसके लिए भूख जागने लगी थी...पर उसे पटाना इतना ईज़ी भी नही था...आख़िर दोस्त की गर्लफ्रेंड थी...

रूही- वैसे आप कहाँ रहते है...

मैं- सबसे पहले तो मुझे आप मत बोलो...और हाँ मेरा घर ****** मे है...

रूही- ओके...तुम..ह्म..तो तुम अकरम को कब्से जानते हो...

मैं- बचपन से...हम साथ मे पढ़े है 1स्ट क्लास से...

रूही- ह्म..तो उसकी फॅमिली से भी अच्छे से जान-पहचान होगी...

मैं- ह्म..आक्च्युयली उसकी फॅमिली से कुछ दिन पहले ही मिला...पहले सिर्फ़ जानता था...पर हम बाहर ही मिलते थे तो...

रूही(बीच मे)- तब तो बहुत फास्ट हो...

मैं(चौंक कर)- एक्सक्यूस मी...क्या मतलब...??

रूही- मतलब...मतलब ये कि बहुत जल्दी ...बहुत आगे पहुच गये....

मैं- सॉरी...मैं अभी भी नही समझ...ज़रा खुल के बताओगी...

रूही- ह्म..लगता है सब खोल कर ही बताना होगा...

और रूही ने अपनी टांगे खोल दी...और एक पैर को उठाकर मेरे पैर पर चढ़ा दिया..

मैं- ये..ये..क्या...इसका क्या मतलब..हटो..


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

मैने जूही का पैर साइड मे कर दिया...जिससे जूही गुस्सा हो गई और अचानक मुस्कुराने लगी...

मैं- क्या हरक़त है ये...

रूही- अच्छा...मैं करूँ तो हरक़त और ज़िया करे तो...

ज़िया का नाम आते ही मेरी धड़कन बढ़ गई...मुझे यकीन हो गया कि इसने कुछ तो देखा है...


पर मुझे रूही का डर नही था...डर इस बात का था कि कही अकरम को भनक ही गई तो क्या सोचेगा वो....

मैं- क्या बकवास है...ज़िया के साथ क्या...???

रूही(आगे आकर धीरे से)- ज़िया अच्छा चूस्ति है ना....ह्म

अब तो मेरी सच मे चॉक ले गई...रूही ने सब देखा था...अब समझदारी यही होगी कि रूही को मनाया जाए कि चुप रहे....

तभी रूही उठ कर जाने लगी और धीरे से बोल कर गई...

रूही- मेरा ख्याल रखना...वरना...हहहे...तुम जानते ही हो ..कि लड़कियो के पेट मे राज़ हजम नही होते....

रूही मुझे प्यार से धमकी देकर निकल गई और मैं परेसान हो कर लेट गया...

लेकिन मुझे आराम से लेटना भी नसीब नही हुआ...मुझे लेट कर 20-25 मिनिट ही हुए थे कि ज़िया फिर से आ गई...

ज़िया(धीरे से)- क्या कर रहे हो...

मैं- तुम...क्या हुआ...

ज़िया- हाँ..और कौन हो गा...और क्या हुआ मतलब...मुझे आग लगा कर खुद आराम कर रहे हो...

मैं- अच्छा..मैने क्या किया....

ज़िया- ज़्यादा भोले मत बनो...चाइ पीते हुए मेरी चूत को रगड़-रगड़ कर प्यासा कर दिया और आ कर आराम करने लगे....

मैं- ओह्ह...तो अब क्या इरादा है...

और मैने ज़िया को खीच कर अपने उपेर डाल लिया...

ज़िया- अओुच्च..आराम से मेरी जान....बहुत नाज़ुक हूँ मैं...फूल की तरह..

मैं- ओह..तब तो इस फूल को मसल कर इसका रस पीना ही पड़ेगा...

( और मैने ज़िया का एक निप्पल मरोड़ दिया)

ज़िया- आअहह...तो मसल दो ना...मैं तो कब्से तैयार हूँ...

मैं- पर मैं फूल को नंगा करके ही मसलूंगा...

ज़िया- नंगा...यहाँ...कैसे...

मैं - अब डरना छोड़ो...एक तो अंधेरा उपेर से सर्दी...तो हम कंबल मे कैसे है ..किसी को क्या खाक पता चलेगा...ह्म...

और फिर से ज़िया का निप्पल मरोड़ दिया...

ज़िया- उूउउम्म्म्म...ठीक है...तो जल्दी करो ना....

मैं- ह्म..तो शुरू हो जाओ...

मेरे बोलते ही ज़िया ने कॅबिन का परदा ठीक से लगाया और मेरे दोनो पैरो के साइड घुटनो पर बैठ गई और एक झटके मे अपना टॉप निकाल दिया....

टॉप निकलते ही उसके बूब्स मेरे सामने आ गये...

मैं- दीदी...ब्रा कहाँ है...

ज़िया- वो...मैं जब फ्रेश होने गई थी तो निकाल ली थी....न्ड हे...डोंट कॉल मी दीदी...ट्रीट मी लाइक युवर फक्किंग बिच...

मैं- ओह...तो अब नंगी हो जा मेरी कुत्ति...

ज़िया(मुस्कुरा कर)- अब पूरे टूर मे मुझे अपनी कुतिया की तरह चोदना...

मैं- हाँ क्यो नही...चल...ये स्कर्ट भी निकाल दे....

ज़िया जल्दी से पीछे लेटी और अपनी स्कर्ट को निकालते हुए अपनी टांगे हवा मे कर दी....

बाकी का काम मैने कर दिया...उसकी स्कर्ट को टाँगो से निकाल दिया...

ज़िया ने फिर मेरे लोवर को खीच कर निकाल दिया और मेरे लंड पर अपनी बड़ी गान्ड रख कर बैठ गई...मैने भी अपनी टी-शर्ट निकाल दी और अब हम दोनो पूरे नंगे थे....


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

ज़िया मेरे लंड पर अपनी चूत घिसने लगी और मैने उसके बूब्स को मसलना चालू कर दिया...

मैं- तुम्हारे बूब्स तो बस चूसने को बने है...मस्त...

ज़िया- ओह्ह..तो चूस लो ना...

मैने ज़िया को अपने उपेर झुका लिया औट उसके बूब्स को बारी- बारी चूसने लगा...और ज़िया अपनी गान्ड मेरे लंड पर घुमाती रही...

मैं ज़िया के बूब्स को कभी चूस्ता और कभी काट रहा था..और ज़िया पूरी मस्ती मे सिसकते हुए मेरे लंड पर गान्ड घिस रही थी...

मैं- उउउंम्म....उउंम..आहह...उउउंम...उउउंम.....

ज़िया- ओह्ह...आहह..काटो...आअहह...मत....उउंम्म...

मैं- चुप साली...तू मेरी कुतिया है ना...उउउंम्म...उूउउंम्म...

ज़िया- आअहह ...पता है....उउउंम्म....आअहह...आअहह...

थोड़ी देर की मस्ती मे ज़िया की चूत पानी बहाने लगी और मेरा लंड उसकी चूत के पानी से गीला होकर तैयार होने लगा....

मैं- अब जल्दी से मेरा लंड तैयार कर...फिर अपनी कुतिया की फाडनी भी तो है..

ज़िया- हमम्म...हाँ मेरे राजा...अभी करती हूँ...आहह...

ज़िया जल्दी से साइड मे आई और झुक कर मेरे लंड को चूसने लगी...




ज़िया- सस्स्ररुउप्प्प्प...सस्स्ररुउउप्प्प्प...सस्रररुउपप...सस्ररुउप्प्प...सस्दतरतुउपप...उूउउम्म्म्ममममम...

मैं- क्या बात है ....आअहह....ऐसे ही...आहह. .

ज़िया- सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प...उउंम..उऊँ..उउंम..उउंम..उउंम..

मैं- यस...अंदर तक ले...आहह...ज़ोर से. .एस्स...एससस्स....

ज़िया पूरे लंड को गले तक भर कर चूस रही थी..और मैं मस्ती मे सिसक रहा था....


मैं- आहह...ज़ोर से...यीहह...ज़ोर से...ज़ोर से....आअहह...

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद मैने उठ कर ज़िया को लिटाया और दोनो पैर एक तरफ करके उसकी चूत मे लंड सेट कर दिया...

मैं- अब तेरी फाड़ता हूँ....चूत को बाद मे चखुगा...अभी लंड ले...

ज़िया- तो डाआलूऊऊ......आअहह...

ज़िया के बोलने के पहले आधा लंड उसकी चूत मे जा चुका था...

मैं- चुप कर साली...अभी तो और जाना है..

ज़िया- आहह..आराम से...ऊहह...

और मैने दूसरे धक्के मे पूरा लंड चूत मे उतार दिया...

ज़िया- आहज..थोड़ा...रूको...ओह्ह्ह...

मैं- नही...तुझे कुतिया बनने काशौक है ना...अब देख...

और मैने ज़िया का एक बूब्स पकड़ा और उसे दबाते हुए तेज़ी से चुदाई करने लगा....




ज़िया-उूुुउउइइ…म्म्म्मउमाआ…..फफफफफ़ाआद्दद्ड…द्ददडिईई…
.आहह…हमम्म्म…उूउउम्म्म्मम…म्म्म्मुमाआररर्र्ररर…द्द्ददडाालल्ल्ल्ल्ल्लाअ..आहह…हहुउऊम्म्म्ममम्म्म


मैं- अब बन मेरी कुतिया...ये ले साली...यह...ईएह...
यईहह

ज़िया- ऊहह...म्माआ...माअर गाइ...आआअहह...


मैं- अभी तो तेरी गान्ड मरेगी...तब चिल्लाना....ले साली...मेरी कुतिया....

थोड़ी देर के बाद ज़िया का दर्द सिसकियों मे बदल गया...अब लंड उसकी चूत मे सेट हो चुका था...और वो मज़े से सिसक रही थी...

ज़िया- आहह...ज़ोर से...आहह...ऊहह....फक...फक..फुक्कक..

मैं- यीहह...टेक इट...एस्स....यीहह...


ज़िया- आहह..फक...मी...हार्डर...एस्स..एस्स..एसस्स...ओह्ह्ह...

थोड़ी देर बाद ज़िया झड़ने लगी...

ज़िया- इहह...एस्स...कूँम्मिईननगग...आहह...आहह...फक..फक्ज्क..फुक्ककक...यईससस्स...आहह..आहह...

ज़िया झड़ने के बाद शांत हो गई और मैं उसे चोदता रहा....थोड़ी देर बाद मैने लंड बाहर निकाला तो ज़िया ने उठ कर लंड को चूस लिया...

ज़िया- आहह..टेस्टी ..हाअ...अब मेरी बारी..

और ज़िया ने मुझे लिटाया और लंड को चूत मे भरके उपेर बैठ गई..मैने ज़िया की गान्ड को सहलाना शुरू किया और रिया ने लंड पर उछलना शुरू कर दिया.....




ज़िया -आअहह…आहह...आहह…उउउफ़फ्फ़….हहाअ…..

मैं-यस बेबी…जंप….याआ..यस...

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…हाअ…आहह....

मैं-एस…जंप…ज़ोर से..कुतिया……तेज ..और तेजज....

ज़िया -हाअ..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..आहह…आऐईइसस्ससी..आहहह

मैं- हाँ..ऐसे ही….ज़ोर से…

मैने ज़िया के बूब्स को हाथो से पकड़ लिया ओर मसलते हुए उसको चोदने लगा…


ज़िया भी पूरी स्पीड से उछल रही थी, उसकी मस्त गान्ड मेरी जाघो पर पट-पट कर रही थी…ऑर ज़िया चुदाई का आनद ले रही थी….

मैं-यस …जंप….य्ाआ

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…आईसीए..आहह…..आहहह…अहहह..
यईएसस..ईसस्स..आहह

मैं- आहह…ज़ोर से…यस…

ज़िया- आहह आह…आहह

मैं-यस बेबी यस

ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एसस्सस्स…आअहह…

पूरे कॅबिन मे हमारी चुदाई की आवाज़े भर रही थी और हम बेफ़िक्र चुदाई के नशे मे डूबे हुए थे....


फफफफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईस...हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…
..आहह…आईइईसीए..हहीी..आहह…ज्जोर्र…सीए..यएएसस्सस्स…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह

ऐसी ही आवाज़ो के साथ ज़िया मेरे उपेर झुक गई और किस करने लगी...

ज़िया- उउंम..उउंम्म..आहह...थक गई...उउंम्म...

मैने तुरंत ज़िया को कुतिया बनाया और पीछे से लंड को चूत मे उतार दिया....एक बार फिर से ज़िया कराह उठी...

ज़िया- आाआईयईईईई......

मैं- अब बनी तू कुतिया...अब देख कैसे होती है कुतिया की चुदाई....

और मैने कमर पकड़ कर तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी.....




ज़िया- आहह….माँ…उूउउइइ…..आहह

मैं- अब तेरी फाड़ता हूँ मेरी कुतिया…

ज़िया-आअहह..फाड़ दो…आअहह…ज्ज़ोर..सी…माररू..

मैं -तो ये ले …फटी तेरी..यीहह





RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

मैने ज़िया की गान्ड को थपथपाते हुए फुल स्पीड मे चोदना शुरू किया ओर ज़िया ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी ऑर चुदाई का रंग चरम पर पहुच गये… 

ज़िया-आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्मा आ….उूउउफ़फ्फ़…म्म्माप….फ़फफादद्ड़..दद्दूव…आअहह...उूउउफ़फ्फ़..म्म्मा......आाऐययईई.....म्म्माहआ...आअहह

मैं- आहह..ईएहह….एस्स..एस्स….ये..ले…...

ज़िया- आअहह…आअहह…ऊररर…तीएजज,,,,आहह,,,,,,आअन्न्ंदडाा ….ताअक्कक….म्म्माहआ….उूउउफ़फ्फ़…माआ…म्माईिईन्न्न…..म्म्माअ…आआईइ……आअहह…ऊओह

मैं- साली.... ओर तेजज्ज़ डालु..

ज़िया-आअहह….दददााालल्ल्ल्ल्ल्ल…द्ददी…..आआअहह…फासस्थटत्त…आअहह
..यस…यस..एस…आअहह....तीएजज्ज़....ऊओरर..त्त्टीज्जज....आहह...उउफफफ्फ़...आआहह

मैं-यस बेबी..ये ले..…ये ले

मैने तेज़ी से ज़िया की चुदाई कर रहा था ऑर ज़िया की गान्ड पर मेरी जाघे इतनी तेज़ी से टकराने लगी कि उसकी गान्ड लाल पड़ने लगी …..15-20 मिनिट की चुदाई से ज़िया फिर से झड़ने लगी ओर उसकी सिसकारिया तेज होने लगी....

ज़िया-आअहह…आहह…हहा…ऐसे ही करो..आहह…..आहहह…अहहह..यईएसस..सहहाः…ज्जॉर्र्र..ससी..आहहह....फ़फफात्तत्त…..प्प्पाट्त्ट…आहः..उउंम…हहूऊ…
आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीएहहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..तीज़्ज़ज्ज…हहाअ…उउउफफफ्फ़...
.यसस्सस्स…आअहह…आअहह…ययईईसस्स….ऊऊहह…आअहह

मैं-यस बेबी यस

ज़िया- अहः..उउंम…हहूऊ…आअहह.ययईएसस…आऐईइईसीए हहीी…ययईसस…ज्जूओर्रर…ससीए…..एसस्सस्स…आअहह…फफफफफफुऊफ़ुऊूक्कककककक…म्माईिईन्न्न,….आआईयइयाय …आअहहहह…ऊओ…म्मा….ऊहह…ऊहह..ऊहह


ऐसे चिल्लाते हुए ज़िया झड़ने लगी ऑर उसका चूत रस मेरे लंड से होते हुए निकल कर फुकछ-फुकछ की आवाज़े करने लगा…

मैं भी झड़ने ही वाला था तो मैने कहा…

मैं- मैं भी आ रहा हूँ…यही डाल दूं......

ज़िया- डाल दो...आअहह...

मैं- तो लो...यीहह...यीहह......एस्स बेबी...उउंम...यईहह..

मैने ज़िया की चूत लंड रस से भर दी और फिर हम लेट कर गले लग गये और किस करने लगे...

थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हुए तो हम ने कंबल ओढ़ा और बाते करने लगे...



मैं- तुम इतनी वाइल्ड चुदाई पसंद करती हो....??

ज़िया- ह्म्म..इसमे मज़ा बढ़ जाता है...और तुमने तो बहुत मज़ा दिया...

मैं- ह्म..बट सॉरी...इतना दर्द दिया ...सॉरी दीदी...

ज़िया- ना...दीदी नही...कुतिया बोलो...हहहे...

मैं- हाहाहा...ओके..तो मेरी कुतिया...मज़ा आया ना...

ज़िया- ह्म..बहुत..अब थोड़ा रेस्ट कर लेते है...फिर रात मे जहा स्टे करेंगे..वहाँ देखेंगे...ओके...वैसे तुम्हे मज़ा आया ना...सच बोलो..

मैं- सच....बहुत मज़ा आया...

फिर हम कंबल के अंदर पूरे नंगे एक-दूसरे से चिपक कर लेट गये...

और बाहर हमारी चुदाई देख कर एक शक्स अपने आप से बोला...... "सच मे ..मज़ा तो मुझे भी बहुत आया...."
थोड़ी देर रेस्ट करते हुए..मैं हल्का सा नीद की आगोश मे चला गया....

थोड़ी देर बाद मुझे अकरम की आवाज़ आई...

अकरम- उठ अंकित....उठ भी जा साले.....

मैने आँख खोली तो अकरम मुझे हिला रहा था...और तभी मुझे अहसास हुआ कि बस रुकी हुई है....

मैं- उउउंम....क्या है बे...

अकरम- उठ साले....हम रात यही रुकेगे...आराम से सो लेना...अभी नीचे चल...

मैं- ह्म्म...चलता हूँ...

तभी मुझे याद आया कि मैं कंबल मे पूरा नंगा लेटा हूँ...थॅंक गॉड मैं कंबल से निकला नही....

मैं- तू चल ना...आता हूँ...

अकरम- ह्म्म..आजा जल्दी...

अकरम नीचे निकल गया और मैं रिलॅक्स हो गया ...नही तो अकरम को क्या समझाता कि मैं नंगा क्यो लेटा हूँ...

मैने जल्दी से अपने कपड़े पहने और फिर ज़िया के बारे मे सोचने लगा कि वो कब उठ गई और कपड़े पहन के निकल भी गई...

मुझे ज़िया पर गुस्सा आ रहा था...कम से कम जगा कर तो जा सकती थी...

मैं गुस्से मे नीचे उतरा तो पता चला कि हम एक गाओं मे किसी बड़ी हवेली के सामने खड़े थे...

सब लोग अभी भी बाहर खड़े हुए थे...फिर मैने ज़िया को देखा तो उसने मुझे देख कर स्माइल कर दी और उसकी स्माइल ने मेरा गुस्सा और बढ़ा दिया...

पर इस वक़्त उससे बात करना मुश्किल था....फिर मैने सोचा कि इसे तो बाद मे देखगे...पहले इस जगह का तो पता करूँ...

मैं- अकरम...हम कहाँ है अभी ...

वसीम(बीच मे)- बेटा ये हमारे दोस्त की हवेली है...वो इसी गाओं का है...

मैं- पर हम यहाँ क्यो रुके अंकल...आइ मीन किसी होटेल मे रुक सकते थे...

वसीम- बेटा...होटल मे रूम्स मिलने मे प्राब्लम होती और फिर होटेल के लिए आगे सहर जाना पड़ता जो काफ़ी दूर है...रात हो रही थी तो यही रुक गये...

सरद- डोंट वरी बेटा..ये हवेली होटेल से कम नही...तुम्हे कोई प्राब्लम नही होगी..

मैं- अरे..ऐसा कोई मतलब नही था मेरा...मैं तो बस पूछ रहा था ..

वसीम- ओके...अब सब अंदर चलो...नोकर हमारा सामान ले आएँगे....

फिर हम सब हवेली मे चले गये...अंदर आते ही मैने देखा कि ये हवेली वाकई लाजवाब है...

सुख-सूबिधा के सारे सामान मौजूद थे....रात बिताने के लिए होटेल से अच्छी ही थी...

हम सब हॉल मे जमा हो गये...तभी मेरे आदमी का कॉल आ गया....मैं उठ कर थोड़ा दूर आया और कॉल पिक की...

( कॉल पर )

मैं- हाँ..क्या हुआ...??

स- अभी कहाँ हो तुम...??

मैं- मैं तो एक गाओं मे हूँ...असल मे हम अकरम की फॅमिली के साथ **** गाओं जा रहे है...क्यो क्या हुआ...

स- ह्म्म...तो कौन - कौन है तुम्हारे साथ...???

मैं- मेरे साथ...(मैने सबके बारे मे बता दिया)

स- ह्म्म...तो थोड़ा साबधान रहना...

मैं(चौंक कर)- साबधान...किससे...

स- अरे अपने दुश्मनो से और किससे...

मैं- पर यहाँ कौन है मेरा दुश्मन....और जो मेरे दुश्मन है...उन्हे क्या पता कि मैं कहाँ हूँ...

स- तुम भी ना....जब संजू और पूनम तुम्हारे साथ है तो फिर...

मैं(बीच मे)- ह्म्म...पता था मुझे...वही से कुछ बात लीक हुई होगी...बट डोंट वरी...हम उस जगह नही जा रहे जिस जगह डिसाइड हुआ था...

स- मतलब...

मैं- सुनो(और मैने प्लान चेंज का पूरा मामला बता दिया)

स- ह्म्म...इसमे तुम्हे कुछ अजीब नही लगा...

मैं- हाँ..लगा था...अब मेरी बात ध्यान से सुनो...$$$$$%$%%%$$$

स- ह्म्म्न..थोड़ा टाइम दो...सब पता करता हूँ....

मैं- ओके..और हाँ..वो दोनो कैसे है...

स- मस्त है यार....

मैं- ओके..और बहादुर ने कुछ बोला...

स- नही..वो सिर्फ़ तुम्हारे डॅड से ही बात करेगा...

मैं- ओके..नज़र रखना...और हाँ कामिनी के उपेर भी...

स- उसकी टेन्षन मत लो...वो खुद मुझे सब बतायेगी....डोंट वरी...

मैं- गुड..चलो..बाइ...पहुच के बात करूगा...

स- ओके..बाइ...

फिर मैं फ़ोन कट कर के सबके साथ बैठ गया...तभी चाइ आ गई और चाइ पी कर वसीम ने सबको उनके रूम्स बता दिए...

नीचे 4 रूम थे...1 मे वसीम और उसकी बीवी...2 मे सरद और उसकी बीवी...3 मे मोहिनी , पूनम और जूही...4 मे शादिया अकेली .... 

बाकी उपेर के 4 रूम्स मे से 1 मे अकरम, मैं और संजू चले गये...2 मे ज़िया, रूही और गुल...और 3 मे नौकरानी जो हमारे साथ आई थी...

ड्राइवर बस मे ही सोने वाला था....

हम अपने रूम मे आए और फ्रेश होकर डिन्नर करने गये और फिर अपने-2 रूम मे सोने आ गये...

अपने रूम मे आते ही हम तीनो फरन्डस ने दो-दो पेग लगाए और रेस्ट करने लगे...

थोड़ी देर बाद अकरम और संजू सोने लगे...क्योकि वो दोनो पूरे सफ़र मे जागते ही रहे थे...

तभी मुझे अपने आदमी की बात याद आई....कि अपने दुश्मनो से साबधान रहना...


RE: चूतो का समुंदर - sexstories - 06-07-2017

मैं(मन मे)- मेरे यहाँ आने की बात सिर्फ़ रजनी आंटी और विनोद को पता है...और किसी को नही...अगर इन दोनो मे से किसी ने मुँह खोला तो...समझा ही देता हूँ...

फिर मैं रूम से बाहर आया और विनोद को कॉल किया.....


( कॉल पर )

विनोद- हेल्लूऊ...कौन है...

मैं- सो रहे थे क्या...??

विनोद- ये सोने का ही टाइम है...तुम कौन...??

मैं- साले...मैं तेरा बाप बोल रहा हूँ...अब उठ..

विनोद(सकपका कर)- त्त..तुम...इतनी रात मे...क्या हुआ...??

मैं- हुआ तो कुछ नही...और होना भी नही चाहिए...

विनोद- क्या मतलब...??

मैं- मतलब ये कि मैं कहाँ गया हूँ ये सिर्फ़ तू और तेरी रांड़ ही जानती है...और मैं चाहता हूँ कि ये बात तुम दोनो के अलावा किसी को पता ना चले..समझा..

विनोद- हाँ..मैं चुप रहुगा...पर भाभी को कैसे...

मैं- ये तेरा काम है...अगर ऐसा नही हुआ तो तुम जानते हो ना...कि मैं क्या करूगा..

विनोद- न्ही-न्ही...मैं उसे चुप रखुगा..तुम कुछ मत करना..

मैं- गुड बॉय...अब सो जा...और हाँ...अपनी बीवी को हाथ भी मत लगाना...

विनोद- ह्म..नही लगाउन्गा...

मैं- सो जा फिर...बाइ

और मैने कॉल कट कर दी...अब मैं निश्चिंत हो गया कि मेरे यहा होने का पता मेरे दुश्मनो को नही चलेगा...

पर अभी मुझे नीद नही आ रही थी..मैं तो बस मे ज़िया की चुदाई करके सो चुका था.....

इसलिए मैं रूम के बाहर ही घूमने लगा और देखने लगा कि कहीं कोई जाग रहा हो तो थोड़ा टाइम-पास कर लूँ...

तभी मुझे नीचे एक साया नज़र आया...जो एक साइड के रूम से निकल कर आया था और दूसरे साइड के रूम की तरफ चला गया...

नीचे के रूम सीडीयो की वजह से दिख नही रहे थे...मैं जब तक नीचे आया...वहाँ कोई नही था और रूम बंद थे...


दोनो साइड ही 2-2 रूम्स थे तो अंदाज़ा लगाना मुस्किल था की किस रूम से कौन आया...

पहले मुझे ख्याल आया कि कहीं अकरम की मोम तो नही सरद के रूम मे थी...पर फिर सोचा कि उसके रूम तो एक साइड ही है...और फिर दोनो अपने पार्ट्नर के साथ है...

मैं रूम की तरफ देख ही रहा था कि तभी पीछे से गाते खुलने की आवाज़ आई...और सरद बोला...

सरद- अरे अंकित...यहाँ...क्या हुआ ..

मैं- ओह्ह..अंकल...कुछ नही...मैं बस...वो नीद नही आ रही थी...

सरद- ह्म्म..नई जगह है ना...मुझे भी नीद नही आ रही...आओ बैठते है...

हम दोनो सोफे पर बैठ गये और तभी सरद ने विस्की की बॉटल उठाई जो कि डिन्निंग टेबल पर रखी थी....

सरद- आओ..एक -एक पेग ले लेते है...

मैं- अरे नही अंकल...थॅंक्स...

सरद- अरे बेटा..शरमाओ मत...अब तुम बड़े हो गये हो..कम ऑन..एक पेग..

मैं कुछ कहता उसके पहले ही सरद ने पेग बना दिए...और मैं भी शरम छोड़ कर पेग पीने लगा...

फिर बातें करते हुए हम 3-3 पेग गटक गये और फिर सरद गुड नाइट बोल कर रूम मे निकल गया....

मैं(मन मे)- कौन होगा वो...इस तरफ तो सिर्फ़ शादिया, मोहिनी, जूही और पूनम ही है...

इनमे से कौन हो सकता है...अगर शादिया होती तो वो अपने रूम मे ही किसी को बुला लेती...अकेली जो है...फिर कौन हो सकता है...


मैं अपनी सोच मे खोया था कि तभी मेरे गले मे किसी ने बाहें डाल दी...

मैने पलट के देखा तो वो रूही थी...मैं उसे यहाँ देख कर चौंक गया...

मैं- त्त..तुम..यहाँ...और ये क्या हरक़त है...

रूही- क्यो...तुम्हे पसंद नही आया क्या...

मैं- देखो रूही...तुम...जाओ यहाँ से...

रूही- मैं जाने के लिए नही आई...

मैं- तो किस लिए आई हो...

रूही- तुम जानते हो...

मैं- क्या मतलब..??

रूही मेरे बाजू मे आ कर बैठ गई और मेरी जाघ सहलाने लगी...

मैं(रूही का हाथ हटाकर)- दूर हटो...ये हरक़ते बंद करो...

रूही- क्यो...मुझ मे क्या कमी है...

मैं- देखो रूही...बकवास बंद करो और जाओ यहाँ से...

रूही- नही...जब तक तुम मुझे हाँ नही कहोगे तब तक नही जाने वाली...

मैं- क्या हाँ...किस बात की हाँ...

रूही- तुम्हे पता है कि मुझे क्या चाहिए...

मैं- सॉफ..सॉफ बोलो...क्या कहना चाहती हो...

रूही- सॉफ..सॉफ...ये चाहिए( जूही ने मेरे लंड पर हाथ रख दिया)

मैं(हाथ हटाकर)- बस...बहुत हुआ...तुम पागल हो गई हो...जाओ यहाँ से...

रूही- हाँ...पागल हो गई हूँ...मेरे बदन मे आग लगी है...वो भी तुम्हारी वजह से....

मैं- तो जाओ अकरम के पास और बुझा लो आग....और हाँ... मैने क्या किया...

रूही(मुस्कुरा कर)- क्या बुझा लूँ...तुम्हारा फरन्ड तो किस करके छोड़ देता है ...बहुत सरीफ़ बनता है...और ये सब तब हुआ जब तुमने अपना वो दिखा दिया....

मैं- कब दिखाया...

रूही- ज़िया के साथ.....

मैं(बीच मे)- बस...एक शब्द नही...जाओ...ये नही हो सकता...

रूही- क्यो नही...ये तो बताओ मुझे...क्या कमी है मुझ मे...

मैं- कोई कमी नही...पर भूलो मत तुम मेरे फरन्ड की गर्लफ्रेंड हो...और मैं उसे धोखा नही दे सकता....जाओ अब...

रूही(खड़ी हो कर)- ह्म्म..जाती हूँ..पर फिर आउगि ..और हाँ ...क्या कह रहे थे धोके के बारे मे....ज़िया के साथ वो सब कर के धोखा ही दे रहे हो...समझे...

रूही चली गई और मेरे दिमाग़ मे आग लगा गई...उसकी बात भी सच थी...

मैं उसकी दीदी को चोद कर उसे धोखा तो दे ही चुका था...फिर रूही को क्यो नही चोद सकता....धोखा तो दे ही रहा हूँ......


फिर मैने अपने आप से कहा कि ये छोड़ो और सोने चलो...माइंड को शांति मिलेगी...

मैं उपर पहुच गया...पर इससे पहले कि रूम मे एंटर होता मुझे सिसकारियों की आवाज़ आने लगी....

मैं(मन मे)- ये तो चुदाई के टाइम की सिसकी है...पर यहाँ कौन है...??

मैं आवाज़ के पीछे गया और उपेर के लास्ट रूम मे पहुच गया....जिसमे नोकरानि रुकी हुई थी...

मैने गेट को खोलने की कोसिस की बट खुला नही...फिर मुझे याद आया कि सारे गेट मे सेम की लगती है ...तो मैं अपने रूम से की लाया और गेट को आराम से ओपन कर के अंदर देखा...

अंदर का नज़ारा देख कर ही मेरा लंड अकड़ने लगा....

मैं(मन मे)- ह्म्म...लगे रहो....रूम किसी और का और मज़े किसी और के...चलो एंजोई करो...मैं चला सोने....

और मैने गेट लगाया और रूम मे जाने लगा तभी पीछे से मुझे किसी ने पकड़ लिया...और मैं शॉक्ड रह गया.....
मैने अपने आप को छुड़ा कर पलट के देखा तो रूही खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी...

मैं(गुस्से मे)- पागल हो गई क्या...ये क्या हरक़त है...

रूही- क्यो..डर गये क्या...??

मैं- बात डरने की नही...तुम क्यो आई...

रूही- तुम जानते हो...

मैं(झल्ला कर)- चाहती क्या है तू...

रूही- ये भी तुम्हे पता है...

मैं- देखो रूही...ये ग़लत है....

रूही- कुछ ग़लत नही...जिस्म की भूख मिटाना सही होता है...

मैं- हाँ...पर हर किसी के साथ नही...तुम अकरम को बोलो ना...

रूही- वो नही मानेगा....तुम ही मान जाओ...

मैं- नही...मैं अपने दोस्त को धोखा नही दूँगा...

रूही- वो तो तुम दे ही रहे हो...उसकी दीदी को चोद कर...

मैं- रूही...बस करो...भूल जाओ सब...

रूही- नही...ना मैं भूलूंगी और ना तुम्हे भूलने दुगी...

मैं- समझती क्यो नही...ज़िया खुद मेरे पास आई थी...इट वाज़ आन आक्सिडेंट...

रूही- तो मैं भी तो अपने आप आई...एक आक्सिडेंट और सही...

मैं- बस...बहुत हुआ..जाओ और सो जाओ...

रूही- अभी जाती हूँ...तुम रात को सोच लेना...या तो मेरा साथ दो या फिर तैयार हो जाना..अपने दोस्त के सामने शर्मिंदा होने...मैं सबको बता दुगी...

मैं- ऐसा कुछ मत करना...उसकी फॅमिली को पता चला तो वो बिखर जायगे...बहुत सरीफ़ है वो लोग...

रूही- अच्छा...उनकी सराफ़त तो पास वाले रूम मे देख ली मैने...क्या सराफ़त है ...

मैं(चौंक कर)- व्हाट...तुमने...कब...??

रूही- ये छोड़ो...तुम मेरे बारे मे सोचो...एक रात है तुम्हारे पास...गुड नाइट...

रूही मुझे टेन्षन देकर निकल गई और मैं भी रूम मे आ गया....

रूम मे आते ही मैं सोफे पर लेट गया और एक बार फिर मेरे दिल और दिमाग़ मे जंग छिड़ गई.....

एक तरफ दिल कह रहा था कि रूही ग़लत है...उसकी माँग भी ग़लत है...मुझे उससे दूर रहना चाहिए...

पर दिमाग़ कह रहा था कि इसमे हर्ज ही क्या है..गरम माल खुद चल कर मेरे पास आ रहा है तो ना क्यो बोलू....

फिर दिल ने कहा कि रूही के साथ दूसरा रिस्ता बनाना अपने दोस्त को धोखा देना होगा...नही-नही उसके साथ कुछ नही...

पर दिमाग़ ने फिर टोका और कहा कि ...बात धोखे की है तो वो तो मैं दे ही चुका...उसकी दीदी को चोद कर....तो अब गर्लफ्रेंड को चोदने से क्या फ़र्क पड़ेगा...

फिर दिल ने कहा कि नही...ज़िया की बात अलग है...वो खुद चूत खोल कर आई थी...

तो दिमाग़ बोला ...तो क्या...रूही भी खुद आ रही है...

काफ़ी देर की कस्मकस के बाद मैने 2 पेग और लगाए और दिल और दिमाग़ ..दोनो को शांत किया और फिर नीद की आगोश मे चला गया.....


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