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RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

दामिनी ने सोचा था कि बच्चे की वजह से उसकी मोम संभाल जाएगी...पर दामिनी ग़लत थी...उसकी मोम ने सच जान कर अपने आप को मिटा दिया ....
फिर दामिनी ने मेरे दादाजी से कमल का हक़ माँगा...पर दादाजी माने ही नही कि कमल उनका बेटा है...और उन्होने दामिनी को जाने को कहा...और हाँ...उसकी सारी प्रॉपर्टी भी वापिस दे दी...
दामिनी भी मान गई...उसे सब वापिस मिल गया था...
पर कुछ दिन बाद ही दादाजी को एक आदमी खेत मे पड़ा मिला ..जो मर ही रहा था...किसी ने उसको चाकू से मारा था...
उस आदमी ने बताया कि कमल आज़ाद का बेटा नही...बल्कि उसका बेटा है...
वो आदमी था दामिनी का नौकर चंदू.....
अब चंदू कहाँ से आया...ये भी सुन लो...
जब गुड्डी की मौत हुई तो आज़ाद ने तुम्हारे घर आना बंद कर दिया...तुम्हारी मोम ने बहुत कोसिस की पर आज़ाद नही माने ...
पर तुम्हारी मोम को चुदाई की लत लग गई थी...और दामिनी को भी...
और इन दोनो ने अपने नौकर के रूप मे अपनी हवस मिटाने का रास्ता ढूँढ लिया...
पर तुम्हारी मोम आज़ाद से गुस्सा थी...और उन्होने एक ख़तरनाक प्लान बना लिया...जिससे आज़ाद को वापिस हासिल कर सके और साथ मे उसकी दौलत को भी...
तो फ़ैसला ये हुआ कि चंदू तुम्हारी माँ को प्रेगञेन्ट करेगा और उसका बाप आज़ाद को कहा जायगा ....
चंदू ने तो काम कर दिया...पर वो अंजान था तुम दोनो के मंसूबो से...उसे तो पता ही नही था कि ये उसका बेटा है....
फिर जब तुम्हारी मोम ख़त्म हो गई और दामिनी कमल के साथ अकेली थी...तब दामिनी ने नशे मे धुत चुदाई करते वक़्त चंदू को सच बोल दिया...
चंदू भी सबकी तरह आज़ाद को मानता था...उसलिए उसने आज़ाद को सच बताना ठीक समझा...
पर इस बात की दामिनी को भनक लग गई और उसने कुछ आदमियों को पैसे देकर चंदू को मारने भेज दिया...
आदमी चंदू को मार ही रहे थे कि आज़ाद वहाँ दिख गया...तो आदमी भाग निकले...
यहाँ चंदू ने मरते हुए आज़ाद को सच बताया..और वहाँ दामिनी के आदमियों ने दामिनी को बोल दिया कि शायद आज़ाद को सब सच पता चल चुका है...
आज़ाद गुस्से मे दामिनी की कोठी पहुचा...पर उसके पहले ही दामिनी कमल को ले कर निकल गई थी...
और वहाँ से भाग कर अपने पुस्तैनि गाओं आ गई...और कामिनी को भी बुला लिया...और शान के साथ रहने लगी...
आज़ाद ने भी दामिनी का पीछा नही किया...उन्होने सोचा कि चलो...जाने दो...बच्ची से क्या दुश्मनी...
पर दामिनी ने मन मे तय कर लिया की आज़ाद की फॅमिली को बर्बाद कर देगी...जैसे उसकी फैमिली बर्बाद हुई...और कमल के सहारे आज़ाद का सब कुछ हासिल कर लेगी...
कमल के सहारे इसलिए ..क्योकि दामिनी ने गाओं मे खबर फैलवा दी थी कि आज़ाद का एक बेटा कमला की कोख से पैदा हुआ है...इसलिए कमल का साथ ज़रूरी था...
तो ये थी पूरी कहानी....सच...सच...और पूरा सच....अब क्या बोलती हो दामिनी...
मेरी बात ख़त्म होते ही दामिनी और कमल एक -दूसरे को ऐसे देखने लगे जैसे दोनो को बिजली का झटका लगा हो...
पर कुछ ही पल मे दामिनी उसी तरह से तालियाँ बजाने लगी जैसे कुछ देर पहले मैने बजाई थी...
दामिनी- मान गये...इतनी सी उमर मे इतना दिमाग़...क्या सोच है....तुम्हे तो कहानीकार होना चाहिए...क्या कहानी बनाई ...अपने दादाजी को तो मासूम ही बना दिया...हा...
मैं(मुस्कुरा कर)- मुझे ऐसी ही उम्मीद थी तुमसे...पर अफ़सोस ...ये कहानी नही...सच्चाई है...कहानी तो तुमने सुनाई थी...
दामिनी- अच्छा....मेरा सच कहानी और तुम्हारी कहानी सच...वा बेटा...बड़े होशियार हो...
मैं- ह्म्म..कोई भी सच...सच तभी माना जाता है...जब कोई सबूत हो...तो बताओ...तुम्हारे पास क्या सबूत है...
मेरी बात सुन कर दामिनी की आँखो मे एक बार फिर से परेशानी के भाव आ गये...
दामिनी- सबूत...कैसा सबूत...ये कमल...ये है जीता जागता सबूत ...और मेरी गुड्डी की मौत..मेरे माँ-बाप की मौत...
मैं(बीच मे)- उन सब मौतो की ज़िम्मेदार तुम्हारी माँ और तुम हो...और हाँ...कमल...ये सच मे सबसे बड़ा सबूत है...पर ये सबूत तुम्हे ग़लत साबित करेगा....समझी...
दामिनी- मातब...तो तुम्हारे पास सबूत है...दिखाओ तो...या ये भी एक कहानी ही है...ह्म्म..
मैं- नही...बिना सबूत के मैं कुछ नही बोलता...अगर ऐसा नही होता तो तुम दोनो बहनो का मक़सद जानने के बाद मैं रुकता नही...कब का ठोक देता...पर मैं सबूत ढूँढ रहा था..जिससे मुझे सच्चाई पता चले....और आज भी मैं जो कुछ बोल रहा हूँ वो सच जानने के बाद ही बोला...सबूत के साथ...
दामिनी- बकवास बंद कर...
कमल- साले ..चुप रह वरना अभी ठोक दूँगा...


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

कमल ने फिर से मुझे गन दिखाते हुए धमकाया...


कामिनी(बीच मे)- चुप रहो..दीदी...मुझे बात करने दो...अंकित...क्या सबूत है तुम्हारे पास..जो तुम्हारी बात को सच साबित करे...

दामिनी- कम्मो ये बकवास...

कामिनी- मैने कहा ना ....चुप रहो....अंकित...तुम बोलो..क्या सबूत है...

दामिनी(मेरी तरफ बढ़ कर)- हाँ ..बोल तो..क्या सबूत है तेरे पास...हाँ..

मैं- एक नाम...नही..असल मे दो नाम...और उनमे से एक है बहादुर...क्यो याद आया....

दामिनी(सकपका कर)- मुझे....नही तो..मुझे कुछ नही पता...कौन है ये...

मैं- क्या तुम भी...इतने बार मेरे दादाजी के साथ चुदाई की और बहादुर को नही जानती....

कामिनी- कौन है ये बहादुर....

मैं- ये वो इंसान है जो दादाजी के साथ हमेशा रहता था....तब भी जब वो तुम्हारे घर रासलीला मनाने जाते थे....वो ड्राइवर कम बॉडी था दादाजी का....पूछो दामिनी से...ये जानती है उसे. ..और बहादुर भी इसे अच्छे से जानता है ...क्योकि ये सारी बातें उसने ही बताई है मुझे...

कामिनी- दीदी...क्या अंकित सही बोल रहा है...आप बहादुर को...

दामिनी(गुस्से मे)- हाँ...मैं जानती हूँ उसे...पर वो तो अपने मालिक के साइड ही बोलेगा ना...साला झूठ बोल रहा है...समझा.....

मैं- ओके..मान लिया बहादुर झूठा है...पर एक और नाम भी है मेरे पास...जिसे दम कर तुम्हारी फट जायगी...बताऊ...हाँ...

दामिनी- मेरी फट जायगी...अबे फटेगी तो तेरी...जब कमल तुझे मरेगा...1 गोली और सब ख़त्म...पर मैं सुनना ज़रूर चाहुगी...क्या है वो नाम...

मैं- छोटा सा नाम है...पर है असरदार....चंदू....हां...याद आया ना...

दामिनी- चंदू...वो नौकर...हाँ याद है...पर उसको क्यो याद कर रहा है...वो तो गया...


दामिनी मुस्कुराने लगी...और साथ मे कमाल भी...

मैं- ओह...वैसे कमाल...एक गुड न्यूज़ है तुम्हारे लिए...तुम्हारा असली बाप जिंदा है....

कमाल- क्या..

मैं- हाँ...चंदू जिंदा है...और वो ही मेरा आख़िरी सबूत है तुम दोनो को झुटलाने ले लिए...

दामिनी- पर चंदू तो...

मैं(बीच मे)- वो मरने वाला ही था...पर मेरे दादाजी ने ठीक टाइम पर उसे हॉस्पिटल भेज दिया...तब से वो उन्ही के साथ है....उसने सब सच बोल दिया था..पर मेरे दादाजी ने तुम्हे बच्ची समझ कर छोड़ दिया...और ये बात तभी ख़त्म हो गई...

सुना कमाल ...तेरा बाप जिंदा है...

मेरी बात दम कर दामिनी की शीटी पिट्टी गुम हो गई...उसका झूठ सबके सामने आ ही गया था...अब दामिनी को डर इस बात का था कि कामिनी को सच पता चला तो अब वो क्या करेगी......

मैं- दामिनी जी...अब भी मुझे झूठा कहोगी या अपना झूठ कबूल करोगी...

बताओ अपनी बेहन को कि मैने जो कहा वही सच है...मेरा एक- एक लब्ज सच है...बोलो...

दामिनी- हाँ..हाँ...हाँ...सब सच है...मेरी माँ की ही ग़लती थी...पर मैं...मैं आज़ाद को नही छोड़ूँगी....साले ने इतना मज़ा लिया और अब...मैं उसे नही छोड़ूँगी...और उसकी सारी दौलत कमल के सहारे हासिल करूगि...

मैं- ह्म्म...तो अब ये भी बता दो..कि मैं और मेरे डॅड इस सब मे कैसे आए...तुम्हे तो सब वापिस मिल गया था ना...और मेरे डॅड तो कब का उनसे दूर आ गये थे...तो फिर क्यो...

दामिनी- क्योकि..हमारी सारी प्रॉपर्टी आकाश के नाम है...और उसे कुछ हुआ तो वो तेरी होगी...

मैं- ह्म्‍म्म..अब सच बोला ना...सुना कामिनी...ये है पूरा सच...और ये कैसे हुआ...ये भी बता दो...

कामिनी- हाँ दीदी...जब हमे सब वापिस मिल गया था तो फिर ये आकाश के नाम कैसे....

दामिनी- वो इसलिए कि जब आज़ाद को पता चला कि कमल के सहारे हम उसकी दौलत हथियाना चाहते है तो वो गुस्सा हो गया और प्रॉपर्टी के पेपर वापिस मागने लगा...पर मोम ने वापिस नही किए...आज़ाद ने भी फिर माँगना छोड़ दिया...

पर चंदू के मिलने के बाद जब मैं वहाँ से भागी तो आज़ाद को कोठी से सारे पेपर मिल गये..जो अब तक उसके ही नाम थे....

आज़ाद ने वो प्रॉपर्टी हम से छीनी तो नही पर हिफ़ाज़त के लिए सब अपने बेटे के नाम कर दी...ताकि अगर मैं कुछ कदम उठाऊ तो वो सब छीन ले...इसी वजह से मैं चुप थी और आकाश को मारने का सोचने लगी..क्योकि आज़ाद का तो पता भी नही ..बस आकाश था जो बीच मे था...और उसका बेटा...ये अंकित...

कामिनी- पर आकाश ने तो मेरी हेल्प भी करना चाही थी..उसने तो कुछ नही माँगा...

मैं- और हाँ..डॅड ने तो एक कंपनी के 30% शेयर भी कामिनी के नाम किए है...और वो सब जानते थे...पर कभी वापिस नही माँगा...

दामिनी- पर माँग लेता तो...और ये सिर्फ़ प्रॉपर्टी की बात नही थी...मेरी फॅमिली तबाह हुई थी आज़ाद की वजह से तो मैं भी उसकी फॅमिली को मिटाना चाहती थी...

मैं- पर इसमे ग़लती किसकी थी...तुम्हारे पिता की...माँ की या खुद तुम्हारी...

दामिनी- आज़ाद की ग़लती थी...

कामिनी- नही दीदी...इसमे आज़ाद की क्या ग़लती....जो कुछ हुआ उसमे ग़लती तो बस माँ की ही थी..और साथ मे आपकी भी...

दामिनी- ये तू कह रही है...तू दुश्मन का साथ दे रही है...अरे तू नही जानती कि ये किस कमीने का खून है...

कामिनी- जानती हूँ...पर जो भी हुआ...वो माँ और तुम्हारी वजह से ...हाँ दी...आज़ाद की कोई ग़लती न्ही...

मैं- हाँ..सही कह रही है कामिनी...और कमीनेपन की बात तुम मत करो दामिनी...तुमने तो कमीनेपन की हद पार कर दी है...

दामिनी- क्या मतलब तुम्हारा...

मैं- तुमने किसी को बताया कि तुम्हारा पति कहाँ है...

कामिनी- हाँ...जीजू तो दुबई मे है...है ना दी...

मैं- नही कामिनी...ये तो सबको बताया गया है ..असल मे दामिनी को ही सच पता है...तो दामिनी...बताओ..कहाँ है तुम्हारा पति...जिंदा है या...हां...बताओ....


दामिनी की हालत ऐसी हो गई कि काटो तो खून नही...उसे कुछ समझ नही आ रहा था...बस बुत बनी खड़ी थी...

कामिनी- बोलो दी...कहाँ है जीजू...

मैं- कामिनी...मैं बताता हूँ...तुम्हारे जीजू मर गये...और उनका कातिल हमारे बीच ही है....

दामिनी- त्त्त...तुम्हे...कैसे....

मैं- वो भी बताउन्गा...पहले ये तो बताओ अपनी बहेन को कि तुम्हारे पति कैसे मारे गये....

दामिनी मेरी बात सुन कर कुछ नही बोल पाई बस किसी पत्थर की तरह खड़ी रही...उसकी आँखो मे दर्द और डर के मिले -जुले भाव उमड़ आए थे....

कामिनी भी अब शॉक्ड थी...और ये जानने के लिए बेताब थी कि आख़िर दामिनी के पति को हुआ क्या....

मैं- तो तुम नही बोलॉगी दामिनी...ठीक है...मैं ही बताता हूँ...तो सुनो कामिनी...

ये तो तुम जानती ही हो कि तुम्हारी दीदी दामिनी सेक्स के मामले मे कितनी हद तक जा सकती है...

इसी का नतीजा ये हुआ कि दामिनी , कमल के साथ भी सेक्स के मज़े लेने लगी थी...और अब तक ले रही है...

पर एक दिन इनकी अयाशी इसके पति ने देख ली...उसे तो यकीन नही हुआ कि दामिनी किसी गैर मर्द के साथ ये सब कर सकती है...

पर बेचारा अपनी बदनामी के डर से चुप रहा ...यहाँ तक कि दामिनी को भनक भी नही लगने दी कि उसने कुछ देखा....

पर जब देखते-देखते उसका सब्र टूट गया तो वो दोनो के सामने आ गया और दोनो को धमकाने लगा...

और उसी दौरान उसकी मौत हो गई...क्योकि किसी ने गुस्से मे आ कर उसका सिर दीवाल से मार दिया था....

और फिर उसकी लाश को ये दोनो ही दूर दफ़ना आए थे....

कामिनी(रोते हुए)- क्या...जीजू के साथ ...पर ये सब किया किसने....

मैं- वो और कोई नही..बल्कि तुम्हारा ये भाई है...कमल...इसी ने मारा उनको...

कमल(गुस्से मे)- हाँ साले...मैने मारा...बड़ा मूह चला रहा था..कि सबको बोल देगा कि मैं नौकर की औलाद हूँ...चंदू की नही...

मैं- उसे कैसे पता...

कमल- उस दिन मैं और दामिनी यही बाते कर रहे थे जो उसने सुन ली...और साला चुदाई रोकने नही आया था...वो तो हमे दुनिया के सामने नंगा करने आया था...तो टपका डाला साले को ...और अब तू भी जायगा...और ये कामिनी भी..

कामिनी- क्या..तू मुझे मारेगा...अपनी बेहन को..

कमाल- चुप कर बेहन की बच्ची...काहे की बेहन...मैने तुझे अपनी रखेल माना है हमेशा...समझी...

दामिनी तो अपने पति की बात सुन कर धोके मे थी...और कमल की बातों पर ध्यान ना दे कर मुझसे बोली...

दामिनी(सुबक्ते हुए)- तुम्हे कैसे पता...बोलो अंकित...

मैं- मुझे सिर्फ़ ये पता था कि तुम्हारे पति को तुम्हारी असलियत पता चली थी...पर ये एक अंदाज़ा था कि वो मर चुका...बट अब सब सॉफ है...

दामिनी- तुम्हे कैसे पता...प्लीज़ बताओ.....

मैं- उनकी डाइयरी ...जो तुम्हारी बेटी को मिल गई थी...उसमे पढ़ा...

दामिनी(चोंक कर)- मेरी बेटी...

मैं- हाँ...उस पर नज़र थी मेरी...और अभी वो मेरी निगरानी मे ही है.....क्या करूँ तुम्हारे करमो की सज़ा मिल रही उसे...बस उसी के पास डाइयरी मिल गई...

दामिनी- पर मेरी बेटी क्यो...

मैं- ताकि तुम कुछ बुरा ना कर पाओ मेरा....समझी...दुश्मन की कमज़ोरी को हाथ मे रखना ही पड़ता है ना...ह्म्म्म...


दामिनी- नही...उसे कुछ मत करना..मैं ..मैं कुछ नही करूगी...

मैं- ह्म्म..तो फिर ये कमल....ये तो जैल जायगा...तेरे पति को इसी ने मारा ना..हाँ..और तुम गवाह हो...क्यो...

दामिनी कुछ बोलती उसके पहले कमल ने दामिनी को धक्का दे कर हमारे साइड कर दिया...जहा मैं और कामिनी थे...

अब एक साइड मैं फिर दामिनी और फिर कामिनी खड़ी थी और दूसरी तरफ हम पर गन ताने कमाल....

काजल हमारे पीछे बेड पर बेसूध पड़ी हुई थी....


दामिनी- कमल..ये क्या...क्या कर रहे हो...

कमाल- चुप...एक दम चुप...अब तुम तीनो मरोगे...तीनो...हाँ...

दामिनी- नही कमल..हम तुम्हारी बहने है...और अंकित...उसने क्या बिगाड़ा तुम्हारा....

कमल- चुप...सब चुप...मैने तुम्हे बेहन माना ही कब...मैं तो इसलिए साथ दे रहा था कि मुझे आज़ाद की प्रॉपर्टी मिल जाए...और फिर मैं तुम दोनो को छोड़ देता...पर अब..अब तो तुम दोनो पीछे हट रही हो..तो मेरे किस काम की...तो अब मरो....

मैं- एक मिनट...अभी भी सोच लो...इस सब से कोई फ़ायदा नही...

कामिनी- हाँ कमल...बुरे काम का नतीजा बुरा ही होता है...

कमल- तू तो चुप ही रह...सब तेरी और तेरी बेटी की वजह से हुआ है...सबसे पहले तू ही मर...ये ले...

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही...धाय-धाय की आवाज़ के साथ दो गोलिया चली....

दोनो गोलियाँ चली तो कामिनी पर था पर रुकी दामिनी के सीने मे जा कर...

हाँ..दामिनी ने कामिनी के सामने आ कर अपनी बेहन को बचा लिया था...

कामिनी- दीदी...न्न्ंहिईीई....


मैं(चिल्ला कर)- साले...ये क्या किया...

कमल- अब तू भी..

मैं(बीच मे)- अभी...

और तभी एक गोली चली ...और गोली की आवाज़ के साथ कमल नीचे गिर गया.....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

गोली कमल की हथेली पर लगी और कमल की गन हाथ से निकल कर नीचे जा गिरी..

यहाँ दामिनी नीचे गिरने लगी तो मैने उसे सहारा दिया...और वहाँ गेट से इंस्पेक्टर आलोक की एंट्री हुई...और उन्होने कमल को दबोच लिया...

मैं- दामिनी...आराम से....

कामिनी(रोते हुए)- दीदी...ये क्या....आपने मेरे लिए...दीदी....

दामिनी को मैने गोद मे लिटा लिया और कामिनी भी बैसाखी छोड़ कर नीचे आ गई और दामिनी का हाथ पकड़े रोने लगी...

कामिनी- दीदी..ये सब...नही दीदी...आपको कुछ नही होगा...

दामिनी- क..कम्मो...रो मत...आहह...मैने आज ...आहह..पहली बार...अच्छा...अच्छा काम किया...

कामिनी - नही दीदी...आप बहुत अच्छी है...

दामिनी- बुरे का नतीजा...आहह..बुरा ही होता है...अब मेरा...आहह...टाइम...

मैं- शांत रहो दामिनी...तुम्हे कुछ नही होगा...

आलोक- हाँ...आंब्युलेन्स आ रही है...कॉल कर दिया है..

दामिनी- अंकित...मेरी बेटी..आआहह...वो मासूम है...उसको कुछ....आहह..

मैं- नही...उसे कुछ नही होगा...मैं वादा करता हूँ...

दामिनी- त्थ्ह..थॅंक यू....

तभी आलोक भी हमारे पास आ गये और दामिनी की नब्ज़ देख कर मुझे देखा और...ना मे गर्दन हिला दी...

मैं- दामिनी...एक बात बताओगी..

दामिनी- क्क्क..कहो..

मैं- मैं ये जानता हूँ कि कामिनी तो तुम्हारे कहने पर काम कर रही थी..पर तुम उसे जानती होगी जो ये सब करवा रहा है..है ना...वो बॉस...तुम जानती हो ना उसे...

दामिनी- आ...हाँ..

मैं- तो बोलो...कौन है..कौन है वो कमीना...जिसकी वजह से ये नौवत आई...बोलो दामिनी बोलो...

दामिनी- वउूओ..वू..वो..

मैं- हाँ दामिनी बोलो...

दामिनक़- सस्स..सस्साआ...

मैं- सा ..सा क्या दामिनी...बोलो..

दामिनी- सस्स्स्स्साआस.........

और दामिनी हमेशा के लिए चुप हो गई....दामिनी के खामोश होते ही मैं उसे हिलाने लगा और कामिनी ज़ोर से रोने लगी...

मैं दामिनी को हिलाते हुए नाम पूछ रहा था...तभी इंस्पेक्टर आलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा.....

आलोक- नही अंकित...शी ईज़ नो मोर....

मेरा तो दिमाग़ हिल गया...क्या सोचा था और क्या हुआ...

मैने सोचा था कि आज दामिनी को डरा कर बॉस का नाम पता कर लुगा..पर इस कमल की वजह से...

मुझे कमल पर गुस्सा आ गया और मैने दामिनी को छोड़ा और कमल को लाते मारने लगा...

मैं- साले...तेरी वजह से मरी वो..मैं तुझे...ये ले साले...

इंस्पेक्टर आलोक ने मुझे आ कर रोक लिया......


मैं- इंस्पेक्टर , ले जाओ इसे..और साले को फाँसी पर लटका दो..

इंस्पेक्टर आलोक ने अपने सिपाहियो को इशारा किया और वो उसे ले कर निकल गये...

मैं भी कामिनी को संभालने लगा...और तभी सोनम भी आ गई...जिसे मैने छिप कर रहने को कहा था...

कुछ देर बाद आंब्युलेन्स आई और दामिनी को ले गई...

मैने सोनम के साथ कामिनी को भी घर पहुचा दिया...

जाने के पहले कामिनी ने काजल के बारे मे कहा तो मैने उसे बिश्वास दिलाया की काजल सही सलामत पहुच जायगी...अभी उसे नीद की गोलिया दी है तो सोने दो...

मैं उसे होश मे आते ही ले आउगा...और जब तक दामिनी का पोस्टमार्टम करके पोलीस बॉडी भी ले आयगी...

मैने उसे ये भी बता दिया कि दामिनी की बेटी भी जल्दी ही पहुच जायगी...

कामिनी , सोनम के साथ निकल गई और मैं काजल के बाजू मे बैठ गया...

तभी मेरे सामने एक नकाब पोस आया...

उसे देख कर मैने उसे थॅंक्स कहा और जाने का बोल दिया...वो निकल गया...

और फिर मैं आज हुई सारी घटना के बारे मे सोचने लगा...

मैं(मन मे)- आज फिर बॉस ना नाम नही जान पाया...सब बरवाद गया...

और जो मैं नही चाहता था वो हो गया..

दामिनी मर गई...अब उसकी बेटी को क्या सम्झाउन्गा....कैसे बताउन्गा की अब वो अनाथ हो गई..

और ये काजल...इसे तो पता भी नही कि इसके पास क्या-क्या हो गया...इसे भी तो समझाना पड़ेगा...

वेल...ये होश मे आ जाए फिर देखते है...

फिर मैने रजनी आंटी को कॉल करके उन्हे कामिनी के घर भेज दिया...साथ मे संजू को भी भेज दिया...दामिनी की अंतिम यात्रा की तैयारी करने...

मेरी दुश्मनी तो जब तक थी तब तक वो जिंदा थी..मरने के बाद कोई दुश्मन नही होता...

मैं वादा करता हूँ दामिनी...तुम्हारे किए पापो का असर तुम्हारी बेटी पर नही होने दूँगा...वादा...

अब मेरे मन मे एक ही सवाल था...कि जो हुआ वो सही हुआ या ग़लत.....??????????
मैं अपने ख़यालो मे खोया हुआ दामिनी के बारे मे सोच रहा था...

मुझे ऐसा लग रहा था कि दामिनी की मौत का ज़िम्मेदार मैं हूँ...क्योकि आज यहाँ सबको मैने ही आने पर मजबूर किया....

मैने जो सोचा था वो हो गया...मुझे और कामिनी को सारी सच्चाई पता चल गई...

पर इसकी कीमत दामिनी की मौत तो नही रखी थी मैने...

मैं तो सिर्फ़ उसको सही रास्ते पर लाना चाहता था...पर रास्ता दिखाते-दिखाते खाई मे ले गया...

नही...ये ठीक नही हुआ....दामिनी की मौत को उसकी बेटी कैसे झेल पायगी...क्या वो मुझे इस सब का कसूरवार समझेगी...शायद हाँ...

माना कि दामिनी ने कई ग़लतियाँ की...कई लोगो की जिंदगी खराब की...पर इस सब मे उसकी बेटियों की क्या ग़लती...

अगर उसकी बेटी को ये सब पता चला...और उसने मुझसे पूछा कि क्या उसकी माँ का मारना ही ज़रूरी था तो....

तो क्या बोलुगा उसे...नही...मैं तो उससे नज़रे भी नही मिला पाउन्गा....

मैं ऐसा इंसान नही हूँ जो किसी को मारने का सोचे...मैं तो सिर्फ़ अपनी फॅमिली को सुरक्षित रखना चाहता था....

दामिनी की मौत मेरा मक़सद नही थी...वो तो कमल ने....पर मैं उसे रोक भी सकता था....दामिनी को गोली लगने के पहले ही मैं कमल की गन को गिरा सकता था...

पर ना जाने मैं क्या सोच रहा था...मुझे उम्मीद नही थी कि कमल फाइयर कर देगा....

पर अब सोच के क्या फ़ायदा....मैं अयाश तो था ही...आज किसी की मौत की वजह भी बन गया....

मैं अपने ख़यालो से होश तब आया जब मेरा फ़ोन रिंग हुआ...

( कॉल पर )

आलोक- हेलो...अंकित...तुम जल्दी से हॉस्पिटल पहुचो...

मैं- क्यो...क्या हुआ ...

आलोक- पहले आओ तो..सब बताता हूँ ..

इससे पहले की मैं कुछ बोलता फ़ोन कट गया...

फ़ोन कट होते ही मैने टाइम देखा तो पता चला कि मैं लगभग 1 घंटे से अकेला बैठा सोच रहा था...

फिर मुझे आलोक की बात याद आई...जल्दी से हॉस्पिटल पहुचो...

पर मैं काजल को अकेले कैसे छोड़ सकता था...अब क्या करूँ...हाँ...

मैने जल्दी से सोनू को कॉल किया और उसे सब समझा कर हॉस्पिटल निकल गया...


यहाँ फार्महाउस पर सोनू ने जैसे-तैसे कर के काजल को होश मे लाया....

काजल(आँखे मलते हुए)- मैं..हूँ..सोनू...तुम...और मैं यहाँ ...कैसे ..कब...

सोनू- स्शहीए...रिलॅक्स...तुम बिल्कुल ठीक हो...और अभी हम घर जा रहे है....

काजल- पर सोनम...वो कहाँ है...

सोनू- वो तुम्हारे घर पर ही है..डोंट वरी...

काजल अब खड़ी हो गई थी और अपने कपड़े ठीक करने लगी....

काजल- पर मैं यहाँ आई कैसे..मैं तो सोनम के साथ थी...

सोनू- सब पता चल जायगा...पहले तुम फ्रेश हो जाओ ..और घर चलो...

फिर काजल फ्रेश हुई और सोनू के साथ घर निकल आई...


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

दूसरी तरफ मेरे आदमी ने भी अपने चम्चो को बोल कर दामिनी की बेटी को घर पहुचाने के लिए बोल दिया था...

थोड़ी देर बाद ही काजल , सोनू और दामिनी की बेटी..कामिनी के घर पहुच गये....

कामिनी के घर पर रजनी भी थी और उसके साथ रिचा और मनु भी आ गई थी...उन्हे रजनी ने बता दिया था...

कामिनी के घर के अंदर गम का महॉल था...सब लोग दामिनी की मौत से शॉक्ड मे थे...पर पूरी बात किसी को नही बताई गई थी...

सबसे यही बोला गया था कि दामिनी एक आक्सिडेंट का शिकार हो गई......


रिचा ने जब ये बात सुनी तो उसने सबसे नज़रें बचा कर बॉस को कॉल किया....

( कॉल पर )

बॉस- हाँ बोलो..क्या हुआ...

रिचा- बॉस...एक न्यूज़ है...बहुत खास...

बॉस- अच्छा...कैसी न्यूज़...अच्छी या बुरी..

रिचा- बुरी...

बॉस- तो जल्दी बोल ना रंडी...

रिचा(भड़क कर)- दामिनी मर गई...

बॉस(शॉक्ड)- कैसे....किसने मारा...

रिचा- किसी ने नही...अपने आप मर गई...

बॉस- अरे..साली ये तो बता कि क्या हुआ था...

रिचा- वो उसका आक्सिडेंट हो गया ..

बॉस- ओह्ह्ह..तो मिस्टर गई ना...अंतिम यात्रा निकली कि नही..

रिचा- अभी कहा...अभी तो वो हॉस्पिटल मे है...

बॉस- क्या...जिंदा है क्या....और हॉस्पिटल कौन ले गया....

रिचा- नही..पर ले गये पीएम करने शायद...और साथ मे कौन है...रूको बताती हूँ...

रिचा ने फ़ोन होल्ड पर रखा और सोनम से पूछ लिया...

सोनम ने भी रिचा को अंकित का नाम बता दिया..क्योकि वो तो रिचा के मंसूबो से अंजान थी..उसे अच्छा समझती थी...

रिचा- हाँ बॉस...वो अंकित है साथ मे...

बॉस- ओह नो..कही दामिनी जिंदा ना हो..और अंकित को कुछ बक दिया तो...नूओ..ये नही होना चाहिए...

रिचा- क्या..किससे बोल रहे हो...और दामिनी तो मर गई..क्या बोलेगी...

बॉस- अरे बेवकूफ़....कन्फर्म कर कि वो मर गई..नही तो मेरी लग जायगी...

रिचा- क्या मतलब...मान लो कि जिंदा भी हो तो क्या बिगाड़ लेगी...वो भी तो अंकित की दुश्मन ही है...

बॉस- पर अगर मरते वक़्त उसका ज़मीर जाग गया तो...कही मेरा नाम ले लिया तो...पता कर...

रिचा- आप फालतू मे डर रहे हो...

बॉस- चुप साली...दामिनी वो जानती है जो और कोई नही जानता...इसलिए उससे ज़्यादा ख़तरा है...पता कर कि वो मरी या नही...और मरी भी तो क्या कुछ बोली अंकित से या नही...

रिचा- हाँ..करती हूँ...मैं अभी पता लगाती हूँ...

बॉस- तू उस भडवे रफ़्तार को भेज वहाँ..अभी...और मुझे पूरी रिपोर्ट दे...समझी..

और कॉल कट हो गई...

कॉल कट होते ही रिचा ने रफ़्तार को कॉल किया...रफ़्तार ने 30-40 मिनट मे वहाँ पहुच जाने का बोला और कॉल कट हो गई..

फिर रिचा सोचने लगी कि दामिनी को ऐसा क्या खास पता है जिससे बॉस इतने घवराये है...खैर जो भी हो...दामिनी तो मर ही गई...बॉस फालतू मे डरे हुए है...रफ़्तार भी यही बतायगा...ह्म्म..

हॉस्पिटल मे.......


सोनू काजल का ख़याल रखने आ गया और मैं पहुचा हॉस्पिटल..

मैं- हाँ सर...क्या हुआ...

आलोक- वेल...मेरे पास 2 न्यूज़ है...1 बॅड न्यूज़ न्ड 1 गुड न्यूज़...

मैं- ह्म...

आलोक- ह्म्म क्या...पहले क्या सुनना चाहोगे...

मैं- आज मेरे साथ बॅड ही बाद हुआ है...तो मैं गुड न्यूज़ सुनना पसंद करूगा...

आलोक- तो गुड न्यूज़ ये है कि दामिनी मरी नही...जिंदा है...

मैं(चौंक कर)- क्या...कैसे...आइ मीन वो तो...उसकी नाड़ी तो...अरे आपने ही तो...

आलोक(बीच मे)- रिलॅक्स- रिलॅक्स...सब बता दूँगा...फिलहाल खबर ये है कि वो जिंदा है...और उसके जिस्म से गोली भी निकाल ली गई है....

मैं(हाथ जोड़ कर)- थॅंक गॉड....बच गई...अब उसकी मौत का कर्ज़ नही चढ़ेगा मुझ पर....

आलोक- पर एक बॅड न्यूज़ भी है...

मैं- बॅड न्यूज़...वो क्या है...

आलोक- उसे जानने को थोड़ा रुकना पड़ेगा...अभी क्लियर होना बाकी है...ओके..

मैं- ह्म..कब तक रुकना होगा...

आलोक- ह्म..दामिनी के होश मे आने तक...

मैं- ओके...पर वो बच तो गई है ना...
आलोक- हाँ...शी ईज़ सेफ नाउ...

मैं- तो मैं उसकी अंतिम यात्रा की बात को मना कर देता हूँ....

आलोक- हाँ..कर दो...उसकी अंतिम.यात्रा अभी नही होगी...

मैने तुरंत संजू को कॉल कर के सब समझा दिया....और बोल दिया कि सबको बता दे कि दामिनी जिंदा है...बट अभी किसी को हॉस्पिटल मत आने देना...जब तक होश ना आ जाए....

फिर मैं इंस्पेक्टर आलोक के साथ वही बैठ कर दामिनी के होश मे आने का वेट करने लगा....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

तभी थोड़ी देर मे वहाँ रफ़्तार आ गया...

उस टाइम आलोक कहीं निकल गये थे..और रफ़्तार मुझे देखते ही बोला...

रफ़्तार- ओह..तो तू यहाँ भी...साला जहाँ भी गड़बड़ हो...तू वही मिलेगा...हाँ..

मैं(गुस्से से)- क्या मतलब...

रफ़्तार- मतलब छोड़..तू क्या कर रहा है यहाँ...और डॉक्टर कहाँ है...हे कोई है...

रफ़्तार की आवाज़ सुन कर एक नर्स आ गई...उससे रफ़्तार को पता चल गया कि दामिनी मरी नही...

रफ़्तार ने तुरंत ही एक कॉल कर के सब बता दिया...और वहाँ से ऑर्डर मिलते ही मुझसे बोला...

रफ़्तार- ओये..अब तू निकल यहाँ दे...आगे हम संभाल लेगे...

मैं- नही..मैं कही नही जाने वाला...समझे...

रफ़्तार- तू साले...ऐसे नही मानेगा..आज दिखा ही देता हूँ कि मैं क्या चीज़ हूँ...

और रफ़्तार ने आगे बढ़ कर मेरा कॉलर पकड़ा....

रफ़्तार- क्या बोला..नही जायगा...सुन साले...निकल जा यहाँ से...

मैं- मुझे दामिनी से बात करनी है...फिर जाउन्गा...

रफ़्तार- उससे बात करनी है..मैं कराता हूँ बात..ओये..ज़रा इस हीरो की चर्बी तो निकालो...

रफ़्तार ने अपने साथ आए सिपाहियो से बोला और मुझे उनके पास धकेल दिया....

रफ़्तार- आज ऐसी हालत होगी तेरी कि बात करना तो दूर...सुन भी ना पायगा...ले जाओ साले को...

सिपाहियो ने मुझे जकड़ा ही था कि आलोक की आवाज़ गूँजी...

आलोक- रुक जाओ...कोई इसे हाथ भी मत लगाना...और रफ़्तार...तू क्या कर रहा है यहाँ...

रफ़्तार- सर...आप ...मैं तो यहाँ...वो आक्सिडेंट हुआ तो...

आलोक- मैं सब जानता हूँ..इसलिए यहाँ हूँ...तुम अंकित को छोड़ो और दफ़ा हो यहाँ से...

सिपाहियों ने मुझे छोड़ दिया...और एक बार फिर रफ़्तार अपनी हार होने पर मुझे घूरते हुए निकल गया....

रफ़्तार के आने से ही मुझे समझ मे आ गया था कि दुश्मनो तक ये बात पहुच चुकी है ...और इसकी लिंक ज़रूर रिचा ही होगी...

मैं(मन मे)- अब तो दामिनी की जान का ख़तरा बढ़ गया है....अगर इनके बॉस तक बात पहुच गई तो वो दामिनी को चुप कराने की कोसिस ज़रूर करेगा...

तभी आलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा...

आलोक- अंकित...आओ बैठो....और दामिनी की फ़िक्र मत करो...

और हम फिर से इंतज़ार करने लगे....


यहाँ रफ़्तार ने बाहर जाते ही रिचा को सब बता दिया....

फिर रिचा ने अपने बॉस को पूरी बात बताई और उसका ऑर्डर सुन लिया...और रफ़्तार को कॉल किया...

रिचा- सुन...उड़ा दे उसे...किसी भी कीमत पर उसकी बात अंकित से ना हो पाए...

रफ़्तार- पर कैसे करूँ...वहाँ इंस्पेक्टर आलोक बैठा है...मैं कुछ नही कर सकता...

रिचा- मुझे कुछ नही सुनना...जैसे भी कर...पर दामिनी जिंदा बाहर नही आनी चाहिए...

रफ़्तार- ठीक है...पर पैसे ज़्यादा खर्च होंगे....

रिचा- सब मिल जायगे....तू काम कर बस...

रफ़्तार- ह्म्म..जो काम वर्दी नही कर सकती...वो गुन्डे कर सकते है...अब फ़ोन रखो...जल्दी ही गुड न्यूज़ दूगा....


यहाँ मैं और आलोक शाम तक बैठे रहे ...और शाम को दामिनी को होश आ गया...

दामिनी के होश मे आने की न्यूज़ मेरे लिए गुड न्यूज़ थी...

मैं भाग कर दामिनी के पास पहुँचा...

मैं- दामिनी..आप ठीक हो...थॅंक गॉड...मुसीबत टल गई....अब आपको कुछ नही होने दूँगा...डोंट वरी...

दामिनी बेड पर लेटी हुई मुझे आँखे फाड़ कर देख रही थी...

मैं- अरे...कुछ तो बोलो...ओह सॉरी..अभी वीक्नेस्स होगी ना..आप आराम करो...मैं यही हूँ...जब बोलने का मन हो तो बताना....

दामिनी फिर भी कुछ नही बोली बस मुझे एक टक देखती रही...

फिर मैने दामिनी का हाथ छोड़ा और वापिस जाने को मुड़ा ही था कि दामिनी ने मेरा हाथ जकड लिया...

मैं- दामिनी...क्या हुआ..कुछ कहना चाहती हो...

दामिनी- त्त्त...तुम...तूमम...

मैं- हाँ दामिनी...बोलो..क्या हुआ...बोलो...

दामिनी- कौन हो तुम...?????????????????

दामिनी की बात सुनकर मेरा सिर घूम गया...मेरी समझ मे ही नही आया कि ये क्या बोल रही है...और क्यो...

मैं- क्या कहा..दामिनी..मैं अंकित...अंकित मल्होत्रा...

दामिनी- कौन अंकित....मैं तुम्हे नही जानती...कौन हो तुम.....????

मैं(मन मे)- इसकी माँ की...क्या बक रही है ये....कही ये नाटक तो नही...

दामिनी- बोलो...कौन हो तुम...और मेरे पास कैसे आए...

मैं- दामिनी...मैं अंकित हूँ....याद करो....आकाश का बेटा...तुम जानती हो मुझे...फिर भी...

दामिनी(ज़ोर से)- बोला ना...मैं तुम्हे नही जानती...कौन हो तुम...और यहाँ...कोई है...कोई है...

दामिनी की आवाज़ इतनी तेज थी कि बाहर से डॉक्टर, नर्स और इंस्पेक्टर आलोक भाग कर अंदर आ गये...

डॉक्टर- क्या हुआ इन्हे...ये चिल्लाई क्यो...

मैं- डॉक्टर...ये मुझे..

दामिनी(बीच मे)- कौन है ये...और आप लोग कौन है...

डॉक्टर( सिर पर हाथ रख कर)- ओह नो...जो डर था...वो हो ही गया...

मैं- क्या...क्या मतलब...क्या हुआ इसे...

डॉक्टर- आप मेरे साथ आइए प्लीज़....नर्स...इनको (दामिनी) को सम्भालो....

फिर डॉक्टर मुझे और आलोक को एक साइड ले गया....

मैं- बताइए डॉक्टर...क्या हुआ है आख़िर....

डॉक्टर- असल मे इनकी मेमोरी लॉस्ट हो गई है...या ये कहूँ कि अभी इन्हे कुछ भी याद नही...

मैं(चोंक कर)- क्या...ये कैसे हो सकता है...इनके तो सिर पर भी चोट नही लगी...

मेरी बात सुन कर आलोक और डॉक्टर मुझे ऐसे देखने लगे जैसे मैं कोई अजूबा हूँ...

मैं- अरे...मैने फ़िल्मो मे देखा है ...तो बोल दिया...

डॉक्टर- ह्म्म..पर यहा कुछ अलग हुआ है...असल मे ये शॉक्ड की वजह से हुआ है...शायद...

आलोक- शायद का क्या मतलब आपका....

डॉक्टर- आक्च्युयली हमे लग रहा था कि कही इनकी माइंड की नस चोक ना हो जाए...क्योकि गोली दिल के करीब लगी थी...

आलोक- दिल का दिमाग़ से क्या कनेक्षन...???

डॉक्टर- है...आक्च्युयली दिल हमारे माइंड से जुड़ा हुआ है...और जब कभी दिल को शॉक लगता है तो दिमाग़ की नसो मे प्राब्लम हो जाती है...जिससे मेमोरी लॉस्ट भी हो सकती है...

मैं- तो आप कहना चाह रहे है कि ये ऐसे ही रहेगी...कुछ भी याद नही होगा इन्हे...

डॉक्टर- नही...हो सकता है कि जल्दी ठीक हो जाए...और हो सकता है कि टाइम लग जाए...

मैं- क्या ये भी हो सकता है कि कभी ठीक ना हो...

डॉक्टर- शायद..पर मैं ट्रीटमेंट जारी रखुगा...शायद जल्दी ठीक हो जाए...

मैं- तो क्या ये यही रहेगी जब तक...

डॉक्टर- नही..नही...इन्हे आप कल तक ले जा सकते है...उसके बाद इनका ट्रीटमेंट घर पर ही चलेगा...


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

मैं- ओके...बट अभी क्या...

आलोक- अभी तुम इसके घरवालो को इनफॉर्म कर दो...मैं अभी जा रहा हूँ...बाद मे आउगा...

मैं- ओके...

फिर आलोक निकल गये और मैने भी कामिनी के घर कॉल कर के पूरी बात बता दी...


कुछ टाइम बाद कामिनी के घरवाले और बाकी पहचान वाले हॉस्पिटल आ पहुचे...और एक-एक कर के दामिनी से मिलने लगे...

मैं यही सोच रहा था कि हो ना दामिनी के जिंदा होने की खबर इनके बॉस को ज़रूरी आफॅक्ट करेगी..

और ये भी मुमकिन है कि वो दामिनी को मारने का सोचे....

इसके लिए मैने अपने आदमियों को लगाया हुआ था...हॉस्पिटल के आस-पास...

पर एक तरफ मुझे ये उम्मीद भी हो गई थी कि अब शायद हमला ना हो...क्योकि दामिनी की हालत की न्यूज़ बॉस को पक्का मिलेगी...

और दामिनी को कुछ याद नही तो फिर प्राब्लम क्या.....

यहाँ जैसे ही रिचा ने दामिनी का हाल जाना तो उसने चुपके से बॉस को खबर कर दी...और रफ़्तार को भी...जो हॉस्पिटल के पास किराय के गुन्डो के साथ तैनात था...

सब लोग दामिनी को देख कर परेशान थे कि अब क्या होगा...और मैं इसलिए परेशान था कि अब बॉस का नाम कैसे पता चलेगा....तभी मेरे आदमी का कॉल आ गया....

( कॉल पर )

मैं- हेलो...

स- इतना उदास होने की कोई ज़रूरत नही...

मैं- क्यो...उदास भी ना रहूं...

स- अरे यार...दामिनी नही तो क्या...अभी बहुत लोग है ...ये बॉस का नकाब तो निकल ही जायगा...

मैं- हाँ ..वो तो है...अभी साली रिचा तो है...शायद इससे कुछ पता चले...

स- ह्म्म्म..ये हुई ना बात...

मैं- और हन...मुझे नही लगता कि अब दामिनी की जान को ख़तरा होगा...

स- ह्म्म..यही मैं सोच रहा था...मैं आदमी वापिस बुला लेता हूँ...सिर्फ़ 2 रहेगे वही...जब तक दामिनी हॉस्पिटल मे होगी...

मैं- हाँ..और 2 बंदे उसके घर पहुचा दो....

स- ह्म्म...वैसे अब तुम फ्री हो...??

मैं- हाँ...क्यो कुछ खास बात..

स- भूल गये...तुमने किसी को टाइम दिया था...

मैं- टाइम...किसकी बात कर रहे हो...

स- सोनी....उसकी बीवी के बारे मे...

मैं- ओह हाँ...भूल ही गया था...बट आज मूड नही हो रहा...

स- पर मेरे हिसाब से तुम्हे जाना चाहिए....क्या है ना कि दवाब बना रहना चाहिए....

मैं- बात तो सही है ..पर मेरा मूड...ठीक है...जाउन्गा...

स- देखो...मूड नही तो कोई नही...कुछ करना मत..बस ज़रा सा प्रेशर देना...ज़रा बाते सुनना...और बाद मे आने का बोल देना...

मैं- ह्म्म्मम...तो 2 घंटे के बाद जाउन्गा...अभी मुझे रेस्ट करना है थोड़ा...

स- कोई नही..घर जाओ ..थोड़ा रेस्ट करो...फिर जाना...

मैं- ओके..तब तक आप यहा नज़र रखना...

स- ह्म्म..मैं देख लुगा...और तुम्हारे साथ बंदे पहुच जायगे...बाइ...

मैने कॉल कट की और संजू , सोनू को वहाँ का ख्याल रखने का बोल कर घर निकल आया....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

हम से दूर एक अंजान जगह.....

एक बड़ा सा घर...जिसके चारो तरफ गार्ड्स खड़े हुए थे....और सभी गन के साथ...

उस घर के अंदर डाइनिंग टेबल पर रेणु और एक साथ खाने का लुफ्त उठा रहे थे....

और साथ मे खड़ा था सब गार्ड्स का मुखिया....रघु...

रेणु- अच्छा पापा...ये बताइए कि अब तक थे कहाँ...

शक्श- बस बेटी....अपने आप को छिपा रहा था...और हालत भी सुधार रहा था...

रेणु- पर छिप क्यो रहे थे....मुझे पता होता कि आप कहाँ है तो मैं कब की आपके पास आ जाती....

शक्श- क्या करू बेटी...मजबूर था...आक्सिडेंट के बाद मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी...कुछ भी ठीक से याद नही था...बड़ी मुस्किल से कुछ-कुछ याद आया...यहाँ तक कि मैं तुझे भी भूल गया था...

रेणु- ओह...चलो आपको याद तो आ गया...वरना पता नही आपके ये आदमी मेरा क्या हाल करते....

शक्श- ह्म्म..पर ये तो बता कि तू यहाँ पहुचि कैसे और किसे ढूड़ रही थी...

रेणु- मैने बताया था ना...मैं सम्राट सिंग को ढूँढने आई थी...

शक्श- हाँ...बताया था...पर क्यो...

रेणु- क्योकि सम्राट सिंग वो इंसान है जिसने अंकित को मारने की कोसिस की...

शक्श- हाँ...वो आकाश का बेटा...

रेणु- हाँ...इसलिए मैं पता करने आई थी कि उसकी क्या दुश्मनी है...क्योकि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है...

शक्श- ह्म्म..पर ये सम्राट...शायद मैने नाम सुना है...

रेणु- सच...बताइए ..कौन है वो...शायद हमारे काम आ जाए...

शक्श- पता नही...याद करता ही तो सिर फटने लगता है...इस आक्सिडेंट ने मेरे दिमाग़ को...

रेणु(बीच मे)- बस...बस कीजिए...आप टेन्षन ना लो....हम दूध लेगे उसे...मैं न्ही चाहती की मेरे पापा को कोई प्राब्लम हो...

शक्श(मुस्कुरा कर)- इतनी फ़िक्र है मेरी...

रेणु- और नही तो क्या....मुझे तो उम्मीद ही नही थी कि कभी आपको देखुगी...पर अब मिले हो तो आपको लो प्राब्लम नही होने दुगी...

शक्श- ठीक है...पर ये तो बता कि तूने मुझे पहचाना कैसे...

रेणु- आपकी फोटो है मेरे पास...

शक्श- ओके...अब तू ये बता कि आज़ाद का कुछ पता है...

रेणु- नही...बस वही नही मिल रहा...पर हमारे लोग लगे हुए है ढूँढने के लिए...

शक्श- ह्म्म...मैं भी इसी कोसिस मे लगा हुआ हूँ...

रेणु उठ कर उस सक्श के पास गई और उसका हाथ पकड़ कर बोली..

रेणु- डोंट वरी पापा...अब देखना...आज़ाद और आकाश को हर एक ज़ख़्म का हिसाब देना होगा...

तभी रेणु का फ़ोन बजा और सामने वाली की बात सुन कर रेणु चौंक गई...

रेणु(फ़ोन पर)- मैं आती हूँ...

शक्श- क्या हुआ बेटी...

रेणु- मुझे जाना होगा पापा...अर्जेंट है...

शक्श- ह्म्म...पर अब कॉल करते रहना....

रेणु- ओके...अब मैं चलूं..

फिर वो सक्श उठा और रेणु को गले लगा कर बोला...

शक्श- बहुत जल्द हम साथ मे रहेगे बेटी...

रेणु- जी पापा...बस वो वक़्त जल्दी ही आने वाला है...अब मैं और नही रूकूगी...चाहे कोई भी बीच मे आए...सबको मिटा दूगी....और आप सम्राट को ढूँढना...हो सके तो...

शक्श- हाँ बेटी..मैं जल्दी से पता करता हूँ...

और फिर रेणु वहाँ से घर की तरफ निकल आई.....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

यहाँ अंकित के घर.....

मैं हॉस्पिटल से घर आया तो मेरे चेहरे पर थकान और परेसानि सॉफ-सॉफ दिख रही थी...जिसे पारूल ने देखते ही समझ लिया...

और मैं रूम मे पहुचा तो पीछे से ही पारूल आ गई...अपनी उंगलियों का जादू चलाने....

पारूल की तेल मालिश ने मेरे सिर को हल्का कर दिया और मैं सो गया...

फिर जागते ही रेडी हुआ और सोनी के घर निकल गया....

सोनी के घर पर मेरे बंदे पहले से ही तैनात थे....और मैं जा कर सीधा सोनी के सामने बैठ गया...स्मिता भी वही पास मे जी खड़ी थी ....

मैं- हाँ तो सोनी...क्या सोचा....???

सोनी- अंकित...वो...मुझे माफ़ कर दे प्लज़्ज़्ज़..

मैं(ज़ोर से)- बस...मैने कहा था ना कि अब कुछ नही...सिर्फ़ तेरा फ़ैसला...कौन सा ऑप्षन चुना तूने....

सोनी- अंकित...मेरी बात...

मैं(बीच मे)- नही...बस ये बता कि क्या सोचा...जैल या घर...???

सोनी की आँखे फिर से झुक गई और शायद आँसू भी आ गये थे...पर मैं रहम के मूड मे बिल्कुल नही था ...

तभी मेरे फ़ोन पर मेसेज आया...जिसे पढ़ कर मैं खुश हो गया...और स्मिता को देख कर स्माइल दे दी...बदले मे उसने भी स्माइल पास कर दी...

ये सब सोनी ने नही देखा था...वो तो सिर झुकाए बैठा हुआ था....

मैं(ज़ोर से)- जल्दी बोल सोनी...मेरे पास टाइम नही है...बोल...

सोनी- अंकित...मुझे थोड़ा...

मैं(बीच मे)- ओके...कल इसी टाइम तक आउन्गा....ये फाइनल टाइम है...या तो कल पोलीस तुझे ले जायगी...या तेरी बीवी मेरे पास आयगी....सोच ले...

और मैं गुस्से मे उठ कर निकल आया...

फिर मैने एक बार हॉस्पिटल जा कर वहाँ का जायज़ा लिया और दामिनी की सुरक्षा देखी और घर आ गया...

घर आ कर मैने ड्रिंक की और आज हुए पूरे घटनाक्रम को वापिस से सोचने लगा...

हर एक बात जो दामिनी ने कही...मैं सब बातों को बार-बार याद करता रहा...

तभी एक जगह आ कर मेरा माथा ठनका...

दामिनी ने बताया था कि वो तीन बहने थी...दामिनी, कामिनी और गुड्डी...और एक भाई...जो चंदू की औलाद है...कमाल...

पर मेरा माइंड इसलिए घूमा कि अगर दामिनी ने सही बोला तो सोनू और सोनम का बाप कौन है......??????????

और इसे कामिनी ने अपना भाई क्यो बना रखा है....???????

इस बात ने मुझे थोड़ी देर के लिए कुछ ज़्यादा ही परेसान कर दिया कि सोनू के डॅड , कामिनी के भाई कैसे हुए....पर फिर अपने आप को समझा कर मैं नीद मे चला गया....

आकृति के घर...आज सुबह.....

सुबह-सुबह गेट पर नॉक होते ही आकृति ने गेट खोला तो सामने रेणु खड़ी थी....

जिसे देख कर आकृति बेहद खुश हो गई...और उसने ये भी गौर किया की रेणु भी बहुत खुश नज़र आ रही है...

आकृति- अरे बेटी...तुम आ गई...

रेणु(अंदर आते हुए)- हाँ मोम....जल्दी आना पड़ा....

आकृति(गेट लगा कर)- मतलब तेरा काम हो गया...हाँ...

रेणु- ह्म्म्मए...कुछ ऐसा ही समझो...

आकृति- तो क्या कहा सम्राट ने....वो है कौन..और अंकित से क्या दुश्मनी है उसकी...???

रेणु- मोम..मोम...एक साथ इतने सवाल....आराम से...

आकृति- ह्म्म..तो बता...क्या बोला सम्राट...

रेणु- असल मे सम्राट मिला ही नही...

आकृति- तो तू आ कैसे गई..मतलब...काम नही हुआ और तू आ गई...वो भी इतनी खुश...क्यो...??

रेणु- फिर से सवाल...ओके..मैं सब बताउन्गी...सम्राट की बात और अपनी खुशी का राज भी...पर पहले नाश्ता करते है...फिर...

आकृति- ह्म्म..तू फ्रेश हो जा...मैं नाश्ता बनाती हूँ...

थोड़ी देर बाद नाश्ते की टेबल पर...रेणु ने अपने पिता के मिलने की बात आकृति को बता दी...

आकृति(शॉक्ड)- ये...ये क्या कह रही है...ये हो ही नही सकता बेटा...

रेणु- क्या मतलब...?

आकृति- बेटा...मैं ये बोल रही हूँ कि तेरे पिता जिंदा नही हो सकते....

रेणु- अरे...मैने खुद उन्हे देखा है...और आप...

आकृति- पर बेटा..मैने भी खुद ही उनकी लाश देखी थी...तो ये कैसे मुमकिन है...

रेणु- ओह...तो सुनो...जो लाश आपने देखी थी...वो उनकी नही थी...किसी और की थी...वो बच गये थे...

आकृति- अच्छा...तो फिर सामने क्यो नही आए...क्यो छिपे है सबसे...

रेणु(मन मे)- ताकि आज़ाद को दूध कर मार सके...पर मैं आपको आज़ाद की बात नही बोल सकती...

आकृति(रेणु को हिला कर)- बोल ना...क्यो नही आते सामने...क्यो छिपे है...

रेणु- क्योकि ...क्योकि वो चाहते है कि आकाश ख़त्म होने तक ये ना जान पाए कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन ज़िंदा है....

आकृति- और सम्राट...उसका क्या...

रेणु- वो मिल जायगा...डॅड ने कहा कि वो उसे देख लेगे...अभी मुझे उससे भी ज़्यादा ज़रूरी काम है...

आकृति- और वो क्या है...

रेणु- दामिनी से मिलना और रिचा.....ओके...अब मुझे खाने दो ...फिर मुझे जाना भी है...

और फिर रेणु , आकृति के साथ नाश्ता करते हुए आगे की सोचने लगी.........


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

अंकित के घर...........

सुबह जब मैं जगा तो पता चला कि 9 बज गये है....

पर मेघा तो सुबह 6 बजे आ जाती थी...आज वो आई नही...या आ कर चली गई....????

पर मेरे बिना वो जिम करेगी...नही-नही...शायद आई नही होगी....कही ऐसा तो नही की कल की हरक़त के लिए शर्मिंदा हो...शायद मूड बदल गया हो....चलो पूछ लेगे....

और मैं अपने आप से बात करते हुए बाथरूम चला गया....

जब फ्रेश हो कर नीचे आया तो देखा कि डॅड कुछ पेपर्स देख रहे थे...

मैं- मॉर्निंग डॅड....ये क्या ..सुबह-2 काम...

आकाश- नही..वो तो बस ऐसे ही...मॉर्निंग बेटा...

मैं- ओह...वैसे डॅड..इन्षुरेन्स वालो ने क्या बोला...

आकाश- कुछ खास नही...बोला कि इन्वेस्टिगेशन ख़त्म होते ही मनी ट्रान्स्फर हो जायगी...ओके...चल मैं आता हूँ...एक पार्टी से मिलना है...

फिर आकाश ने जल्दी से पेपर्स समेटे और बाहर निकल गया...आकाश की हड़बड़ाहट को वहाँ खड़ी सविता ने देख लिया था..जो कॉफी ले कर आई थी...

सविता- बेटा..ये सर को क्या हुआ...इतने हडबडाया क्यो है...

मैं- ओह...वो...आक्च्युयली वो लेट हो गये...कोई अर्जेंट काम था...आप कॉफी दो...

सविता कॉफी दे कर निकल गई...

मैं(मन मे)- एक बार ये पैसे आ जाए और शेर होल्डर्स को मिल जाय...फिर रफ़्तार की वॉट लगाउन्गा...


तभी मेरा फ़ोन बज उठा...और स्क्रीन देख कर ही मैं खुश हो गया...ये जूही का कॉल था....मैने कॉफी ली और घूमते हुए बाते करने लगा.....

( कॉल पर )

मैं- हाँ साहिबा...क्या हाल ...??

जूही- साहिबा...ये क्या है...

मैं- अरे ...साहब की साहिबा ही होती है....मैं साहिब तो तुम साहिबा....

जूही- हहहे ...अच्छा..वैसे मैं गुस्सा थी ...

मैं- हम से....??

जूही- हाँ...बहुत गुस्सा....

मैं- ह्म ....पर क्यो...

जूही- आप मुझसे मिलने जो नही आए...

मैं- ओह...सॉरी...मैं बिज़ी था...यू नो..मेरे डॅड का ओफ्फिस...

जूही(बीच मे)- हाँ..पता है...तभी तो कॉल किया ...वरना कॉल भी नही करती...

मैं- ओह ..थॅंक्स यार...मैं जल्दी मिलुगा...बस थोड़ा काम निपटा लूँ...

जूही- कल शाम को...और मुझे कोई बात नही सुननी...बाइ...

और जूही ने ऐसे फ़ोन कट कर दी , जैसे कर्ज़ा चुकाने की मोहलत दी और बात ख़त्म....

मैं जूही की बात पर मुस्कुराते हुए रूम मे ही जा रहा था कि एक बार फिर से फ़ोन बज उठा ...और एक बार फिर से मैं कॉलर का नाम देख कर खुश हो गया......ये अनु का कॉल था....

( कॉल पर )

मैं- हाई जान...

अनु- ह्म्म...जान बोलते हो और याद भी नही करते...

मैं- यार...तुम लोगो को यही शिकायत क्यो रहती है....

अनु- तुम लोगो को...और कौन आ गई...ह्म..

मैं(मन मे)- ये क्या बोल गया....फस गये...

अनु- बोलो..कितनी जान बना रखी है...

मैं- अर्रे...तुम भी ना...कोई नही है...मेरे लिए एक तुम ही हो...मेरी जान...

अनु- अच्छा...तो साबित करो...

मैं- क्या...मतलब...कैसे...

अनु- ठीक 20 मिनट मे मेरे रूम मे ...मेरे सामने मुझे जान बोलो...तब मानु....

मैं- अच्छा...तो अब मुझे अपनी जान को यकीन दिलाना होगा कि वो मेरी जान है...सो सॅड...

अनु- आप ना...अपनी ड्रामेबाजी बंद करो...अगर आप सच मे मुझे जान मानते हो तो 20 मिनट मे आप मेरे सामने होगे....आइ एम वेटिंग...

और अनु ने भी अपनी बात बोलकर , बिना मेरी बात सुने कॉल कट कर दी...

मैं- अजीब है ये लड़कियाँ भी...हर बात मे बस बात मनवाना है...हर बात साबित करो...उफ़फ्फ़..अब जाना ही होगा...वैसे भी मेघा का भी पता करना है...क्या हुआ उसको...

और मैने फ़ोन रखा और रेडी होने लगा....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

रेडी हुआ ही था और फिर से फ़ोन बजना सुरू....और इस बार स्क्रीन पर रक्षा का नाम था....

मैं- आज साला गर्ल फ्रेंड डे है क्या....???

और मैने कॉल पिक की....

( कॉल पर )

मैं- हाँ जी...अब आपको क्या परेसानि है....

रक्षा- क्या...क्या कहा आपने...

मैं- वो..कुछ नही...बोल ना...कैसे याद किया...

रक्षा- बस यू ही...अभी नहा कर आई थी...


मैं- तो..क्या मैं तावीार करने आउ...

रक्षा- इउम्म्म...काश आ जाते..तो तावीार कौन होता फिर...

मैं- तो फिर क्या करती...

रक्षा- अगर आ जाते तो अपनी प्यास बुझा लेती...

मैं- तू तो बस...कितनी प्यासी है ...

रक्षा- बहुत...देखो मेरी चूत आपके नाम से ही फडक उठी...

मैं- अच्छा...चल बस भी कर....मैं आ गया ना तो खुद ही भाग जायगी...

रक्षा- भाग जाउन्गी...कभी नही...अरे आप आ कर तो देखिए...आपको अपने आप मे समा लूगी...

मैं- अच्छा...तो रुक..मैं आता हूँ...

और इस बार मैने बिना कुछ सुने फ़ोन रखा और संजू के घर निकल गया.....


जब मैं संजू के घर पहुचा तो पता चला कि संजू के पापा और पूनम , संजू की मौसी के घर गये है ..किसी फंक्षन मे...

और रजनी आंटी कामिनी के घर निकल गई...संजू के साथ...

तो मैं मेघा के रूम मे चला गया...वहाँ पता चला कि आज उन्हे फीवर आ गया....जिस वजह से वो आज नही आ पाई...

मैने उन्हे रेस्ट करते छोड़ा और अनु के रूम मे चला गया....मुझे लगा था कि रक्षा भी साथ होगी..बट वहाँ अनु अकेली मिली.....

मुझे सामने देख कर अनु की मारे खुशी की आँखे फटी रह गई...

उसे यकीन ही नही हो रहा था कि मैं सिर्फ़ 15 मिनट मे उसके सामने आ गया...

अनु को ऐसा खड़ा देख कर ..मैने गेट को अंदर से लॉक किया और उसके पास पहुच गया...

मेरे पास आते ही अनु की साँसे तेज हो गई...उसकी बॉडी मे कंपन सी होने लगी थी...

मैं- क्या हुआ जान...शॉक्ड...हां..

अनु- मैं..वो..आप...यहाँ...

मैने अनु के मुलायम गालों को अपने हाथो मे भरा ही था कि उसकी सिसकी निकल गई....

अनु की बॉडी की थरथराहट को मैं अपने हाथो से महसूस कर रहा था....

मैं- अनु...तुम ठीक हो..

अनु- उउंम..हाँ..पर आप..इतनी जल्दी...

मैं- अरे...मेरी जान ने आवाज़ दी और हम आ गये...

अनु- पर मैने तो बस...

मैं(बीच मे)-सस्शहीए...ये होंठ बहुत काँप रहे है...इन्हे ठीक कर दूं...

और मैने अनु के थरथराते होंठो पर अपने होंठ रख दिए...और होंठो का रस चूसने लगा...

फिर हम दोनो ही एक दूसरे के होंठो का रास्पान करते रहे...जब तक अनु का फ़ोन नही बजा...

फ़ोन की आवाज़ ने हमे वापिस होश मे लाया...

वो फ़ोन मेघा का था..जिसने अनु को नीचे बुला लिया....

अनु- वो..मोम की तवियत...आप..

मैं- ओके..ओके...रक्षा कहाँ है...??

अनु- वो पूनम दी के रूम मे होगी...मैं मोम के पास...

मैं(बीच मे)- जानता हूँ...तुम जाओ...और उनका ख्याल रखो...मैं रक्षा से मिल कर आता हूँ...फिर कॉफी साथ मे पिएगे...वैसे भी जिस काम से आया था..वो तो हो गया....

अनु कुछ नही बोली बस मेरी बात सुन कर शरमा गई और नीचे चली गई...और मैं पहुचा रक्षा से मिलने पूनम के रूम मे ....

मैं(नॉक कर के)- हेलो...

रक्षा- कौन...??

मैं- कौन की बच्ची....खोल ना....

रक्षा की तरफ से कोई आवाज़ नही आई...फिर थोड़ी देर मे मैने आवाज़ देनी चाही ..कि गेट खुल गया...और मेरे शब्द मेरे मूह मे रह गये....

मैं- रक़सस्शह.....वाउ...

रक्षा- कम तो मे माइ लव....

मैं तो रक्षा को देख कर ही शॉक्ड था ...उपेर से आज उसकी हॉट अदा...और भी क़हर ढा रही थी...

रक्षा मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा-पैंटी मे खड़ी हुई थी...उपेर से उसकी इतराती हुई आँखे...खुले बाल...वाउ...सो हॉट...

उसका अंग-अंग मादकता से भरा हुआ लग रहा घ...चिकना बदन....गुलाबी जॉंठ....कसे हुए बूब्स...और पैंटी मे क़ैद खजाना....

साला..ना चाहते हुए भी मूड बन जाए....

रक्षा- कम ऑन डार्लिंग...कम टू मी...

और रक्षा ने मेरा हाथ पकड़ के मुझे अंदर खीच लिया....और गेट लॉक....

मैं- रक्षा...तुम..तुम तो आज...

रक्ष मेरे करीब आई और मेरे गले मे बाहें डाल कर बोली...

रक्षा- सब कुछ आपके लिए...

और रक्षा ने पंजो के बल उपेर उठ कर अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठो से चिपका दिए....

मैं तो उसे देखते ही गरम हो रहा था ...और आप उसके होंठो की गर्मी ने मेरी भूख को जगा दिया...

मैने रक्षा को अपनी बाहो मे कसा और उपेर उठा कर उसके होंठ चूसने लगा...

रक्षा भी कम नही थी...वो भी उतनी ही मस्ती से मेरे होंठो पर क़ब्ज़ा जमाए हुए थी...

मैं- आओउउंम...सस्स्रररुउउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प...उउउम्म्म्म....

रक्षा- उउंम्म....उूउउंम्म...उउउंम...
आज हम दोनो ही काफ़ी जोश मे किस कर रहे थे...और बहुत देर तक किस्सिंग करते रहे......

किस करते हुए मेरे हाथ रक्षा की बड़ी हो रही गान्ड पर चले गये...जो पहले से ज़्यादा भारी लग रही थी...

मैं पूरी स्पीड से रक्षा की गान्ड दबाते हुए किस करने लगा...आज रक्षा की हॉटनेस्स पहले से ज़्यादा ही लग रही थी...लग रहा था कि आज जूरदार चुदाई होने वाली है....

आख़िरकार हमारा किस ख़त्म हुआ और हम दोनो ही जोरो से साँसे लेने लगे....

मैं- आअहह...आज तो तू ज़्यादा ही हॉट है...

रक्षा- हाँ भैया...आज बहुत मन हो रहा है...

मैं- ह्म्म..अब तो मेरा भी मूड हो गया....दिखा तो सही..मेरे खजाने का क्या हाल है...

और मैने रक्षा की गान्ड पर चपत मार दी...

रक्षा ने कुछ नही बोला...बस बेड पर जा कर कुतिया बन गई...और अपनी गान्ड को मेरे सामने कर के अपनी पैंटी की पट्टी साइड कर दी....

अब मेरे सामने रक्षा के दोनो छेद उजागर थे...और इन्हे देखने के बाद तो मेरा रहा-सहा मूड भी चुदाई के लिए रेडी हो गया..... 


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