ब्रा वाली दुकान - Printable Version

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RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

आंटी थोड़ा शर्मिंदा होते हुए बोलीं, वह तो बस में झटके काफी लग रहे थे इसलिए।। । । । वरना मैं कभी किसी के साथ ऐसी हरकतें नहीं की। उनकी बात सुनकर मैंने मन ही मन में आंटी की शालीनता की दाद दी और फिर आंटी से पानी का आदि पूछा, लेकिन आंटी ने कहा नहीं पानी नहीं बस तुम मुझे अच्छे-अच्छे ब्रा दिखा दो। फिर आंटी ने बाहर देखा और बोलीं कब तक दुकान बंद रखे हो तुम? मैंने कहा आंटी आप बेफिक्र हो जाएं जब तक आप दुकान में हैं दुकान नहीं खुलेगी। वैसे 4 बजे तक खोलता हूँ फिर से तसल्ली से चेक करें। यह कह कर मैंने एक स्टेचू बताया जिस पर लाल रंग की पट्टी लगी हुई थी, मैंने कहा आंटी कोई ऐसी नाइटी आदि भी लेंगे आप या बस ब्रा ही लेने हैं। आंटी ने पहले नाइटी देखी और फिर मेरी सलवार को देखा जहां लंड सिर उठाए खड़ा था और बोलीं नहीं ऐसी नाइट तो नहीं लेकिन यह जो अरबी शैली की है यह मुझे पसंद आ रही है। मैंने कहा आंटी यह तो बहुत अच्छी है, मुनब्बर अंकल के होश उड़ जाएंगे। आंटी हंसी और कहा चल शैतान ... फिर बोलीं ले तो लूं, लेकिन मेरा शरीर थोड़ा वजनी है यह अच्छी नहीं लगेगी मेरे शरीर पर। मैंने कहा अरे आंटी ऐसे कैसे आपको आपके आकार के अनुसार दिखाऊंगा, अच्छी लगेगी आप पर। यह कह कर वापस काउन्टर पर आ गया, आंटी की नजरें तो मैंने देख ही ली थीं जो मेरे लंड को देख रही थीं जो सुबह से ही सलमा आंटी के इंतजार में खड़ा था, मगर आज मुझे लंड खड़ा होने से कोई हिचक नहीं थी क्योंकि मैं जानता था कि जो मज़ा सलमा आंटी ने बस में मेरे लंड से लिया था ( Heart )वह मज़ा वह कभी भूली नहीं होंगी और मौका मिलने पर फिर भी मज़ा ज़रूर लेंगी और आज भी उनकी प्यासी नज़रें मेरी सलवार मे मेरे लंड का उभार देख रही थीं। मुझे आंटी के आकार का तो पता ही था, मैंने 38 आकार के ब्रा निकाल कर आंटी के सामने रखे और आंटी को कहा पसंद कर लें इसमें से फिर आपको ट्राई भी करवाता हूँ। आंटी ने उनमें से एक ब्रा उठाया और बोलीं कहां है तुम्हारा ट्राई रूम ?? मैंने आंटी को कहा आंटी दुकान में आपके और मेरे अलावा कोई नहीं यहाँ तो ट्राई रूम में मुंह दूसरी तरफ करता हूँ ब्रा चेक कर लें। आंटी ने मेरी ओर देखा और बोलीं आप अधिक चालाक नहीं बन रहे ??? मैं जोर से हंसा और बोला बस आंटी आप हैं ही इतनी सुंदर आपके साथ चालाकियाँ करने का मन करता है। यह कह कर मैंने आंटी को ट्राई रूम दिखाया, आंटी ट्राई रूम मे गईं और मैंने काउन्टर में आकर ट्राई रूम का कैमरा ऑन कर लिया। जैसे ही कंप्यूटर स्क्रीन पर ट्राई रूम दृश्य आया ... मेरे होश उड़ गये



आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या अहसास था, आंटी का चेहरा छिपे हुए कैमरे से ही था और इस बात से बेखबर कि अंदर कैमरा लगा हुआ है आंटी ब्रा उतार कर नंगे मम्मे मे दूसरे ब्रा को पलट कर देख रही थीं। 40 साल की उम्र में भी आंटी के 38 साइज़ के मम्मे काफी तने हुए थे और उन पर बड़े बड़े निपल्स .... उफ़ एफ एफ एफ ...... मेरा हाथ सीधा अपने लंड पर चला गया था। फिर आंटी ने वह ब्रा पहना और सामने लगे शीशे में उसकी फिटिंग देखने लगीं। मैं यह सारा दृश्य देख रहा था। और मेरा लंड आंटी के तने हुए मम्मों को सलामी दे रहा था। मैंने नोट किया कि यह ब्रा थोड़ा लुढ़का हुआ लग रहा था इतने में आंटी की आवाज़ भी आ गई कि बेटा यह थोड़ा ढीला है। इससे थोड़ा छोटा आकार दिखा। मैं तुरंत ट्राई रूम के पास पहुंच गया और कहा आंटी यह बिल्कुल ठीक है आप के आकार के अनुसार है बस आप उसकी स्ट्रिप सेटिंग,कर लें तो फिट हो जाएगा आगे। आंटी ने कहा कि तुम पहले लाए थे वे ठीक थे, यह सही नहीं लग रहा मुझे। मैंने बाहर खड़े होकर ही कहा आंटी जो पहले लाया था वे लोकल थे उनमे ब्रा फिट करने की स्ट्रिप नहीं होती ये इपोर्टेड ब्रा है इसको अपने आप फिट कर सकते हैं। आंटी ने कहा मुझे तो पता नहीं लग रहा कैसे करना है।


मैंने आंटी को कहा तो दरवाजा खोलो में सेट कर देता हूँ। आंटी ने कहा रुको में उतारकर तुम्हें देती हूँ। मैंने कहा नहीं आंटी उतारकर नहीं, आप पहने रखें, मैं ऐसे ही फिट कर दूंगा। चिंता मत करो अंदर नहीं आता पर। यह सुनकर अंदर कुछ देर सन्नाटा रहा और फिर आंटी ने हल्का सा दरवाजा खोल दिया। दरवाजा इतना खुला था कि मैं में अंदर प्रवेश नहीं कर सकता था। मैंने आंटी को कहा आंटी थोड़ा तो खोलिए दरवाजा ताकि मैं फिटिंग तो कर सकूँ। अब आंटी ने मुंह दूसरी तरफ कर लिया और कमर मेरी ओर करके थोड़ा सा दरवाजा और खोला। आंटी की पूरी कमर मेरे सामने नंगी थी, कंधे से लेकर नीचे सलवार तक आंटी की गोरी गोरी कमर देखकर दिल किया कि अब अपनी जीब निकालकर उसकी कमर को चाटना शुरू कर दूं, लेकिन मैंने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और आंटी को कहा आंटी आगे ढीली है न? आंटी ने कहा हां। उनकी आवाज कांप रही थी। मैंने कहा आंटी अपना सीना मेरी ओर करो मैं देखूं तो सही कि कितना ढीला है। आंटी ने एक अनिच्छासे मुंह मेरी ओर किया तो मैंने बिना समय बर्बाद किए अपने दोनों हाथ उनके बड़े बड़े मम्मों पर रख दिए,( Heart ) मैं जानता था कि ऐसा मेरे लिए खतरनाक हो सकता है, लेकिन जो औरत खुद मेरा लंड पकड़ कर अपने चूतड़ों में फंसाकर अपनी चूत का पानी निकलवा ले भला उससे डरने की क्या जरूरत थी। मैंने जैसे ही आंटी के बूब्स पर हाथ रखा उनके मुंह से एक सिसकी निकली और उन्होंने मेरे हाथों पर हाथ रखकर उन्हें हटाना चाहा और बोली नहीं करो सलमान ऐसे। मैंने कहा आंटी मैं देख रहा हूँ कितना ढीला है। यह कह कर मैंने धीरे से आंटी के बूब्स को दबा दिया। वाह क्या मम्मे थे, दिल किया कि अब ब्रा उतारूँ और अपना लंड इन नरम नरम मम्मों में डाल चुदाई शुरू कर दूं। फिर मैंने आंटी को कहा आंटी अब अपना मुंह दूसरी तरफ कर लें। मैंने आंटी के बूब्स से हाथ हटा लिए थे, आंटी ने मुँह दूसरी ओर किया तो मैंने आंटी के ब्रा स्ट्रिप कंधों से थोड़ी टाइट कर दी जिससे ब्रा ने आंटी के बूब्स को आराम देना शुरू कर दिया। मैंने पीछे खड़े खड़े ही आंटी के पास होकर हाथ आगे किया और उनके मम्मे पकड़ कर धीरे से दबाए और कहा आंटी अब ठीक है फिटिंग ??? आंटी ने काँपती हुई आवाज कहा अब सही है।



इस दौरान मेरी सलवार मे मेरालंड जो सुबह से ही खड़ा था उसने आंटी की गाण्ड पर दस्तक देना शुरू कर दिया था। अब पता नहीं आंटी ने ब्रा फिटिंग के बारे में कहा था कि सही है या फिर अपनी गाण्ड पर मेरे लंड को महसूस करके कहा था कि यह ठीक है। मैं आंटी से पूछे बिना ही पीछे से उनके ब्रा हुक खोल कर ब्रा उतार दिया। और कहा आंटी आप यहीं रुकिये मैं और ब्रा लेकर आता हूँ। वह ब्रा मैंने अंदर ट्राई रूम में ही हुक पर लटका दिया और बाहर से एक और सेक्सी नेट वाला ब्रा उठा लाया। आंटी अपने बूब्स पर हाथ रखकर उन्हें छिपाने की कोशिश कर रही थीं मगर उनके बड़े बड़े मम्मे इस तरह छुपा पाना संभव नहीं था। मैंने आंटी के बूब्स पर ब्रा कपस रखे और खुद आंटी को ब्रा पहना कर उनकी हुक बंद किए और फिर से आंटी का चेहरा अपनी ओर किया और उनका सीना देखने लगा। ब्रा तो उनके सीने पर बहुत सुंदर लग रहा था और ऊपर से उनके बड़े बड़े मम्मों में गहरी लाइन जो क्लीवेज़ बना रही थी वो मेरे होश उड़ा रही थी। एक बार फिर से मैं आंटी के पीछे गया और उनके ब्रा स्ट्रिप को अकारण ही टाइट कर दिया हालांकि इस ब्रा की फिटिंग सही थी। ब्रा थोड़ा टाइट करके मैंने फिर अपने दोनों हाथ पीछे से ही उनके मम्मों पर रख दिए और इस दौरान अपने लंड का रुख आंटी की गाण्ड से कर लंड आंटी के चूतड़ों में डाल दिया जिससे आंटी की एक बार फिर सिसकी निकली।


मैंने आंटी की गाण्ड पर अपने लंड का दबाव बढ़ाया और आंटी के मम्मे दबाते हुए बोला आंटी यह ब्रा ठीक लग रहा है ??? आंटी ने सिसकते हुए कहा हां बेटा, मगर थोड़ा अधिक टाइट हो गया है। मैंने कहा कोई बात नहीं आंटी इस तरह आपके मम्मे ऊपर उठे रहेंगे और कमीज से आपके उठे हुए मम्मे नजर आएंगे तो मुनब्बर अंकल का तो तुरंत ही खड़ा हो जाएगा। मैंने जानबूझकर मम्मों शब्द का इस्तेमाल किया था आंटी के सामने ताकि जो थोड़ा बहुत नाटक वह कर रही थीं वह भी खत्म हो जाए। मेरी बात सुनकर आंटी बोलीं, वह तो ठीक है मगर तुम्हारे अंकल के पास इतना समय ही नहीं होता कि मुझे देखकर उनका खड़ा हो ... ..... यह सुनकर मुझे समझ लग गई थी कि उस दिन बस में आंटी को इतनी मस्ती क्यों चढ़ी थी, मुनब्बर अंकल आंटी की चुदाई पूरी तरह नहीं करते थे इसलिए आंटी ने उस दिन सार्वजनिक जगह पर मेरा लंड पकड़ कर अपने चूतड़ों में फंसा लिया था। आंटी की बात सुनकर मैंने कहा चलिए अंकल को छोड़ दो आपने पीछे लग रहा है, मेरा लंड आपके मम्मे देख कर खड़ा हो चुका है। आंटी ने हल्की सी आवाज़ से कहा, हां वह तो महसूस हो ही रहा है मुझे, तुम्हें शर्म नहीं अपनी आंटी को देख कर खड़ा कर लेते हो।


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

मैंने कहा आंटी उस दिन बस में जब से आप ने अपने हाथ में पकड़ा है तब से मेरी और मेरे लंड की तो हालत बुरी है, कैसे न खड़ा हो तो आपको देखकर। इस बीच आंटी के चूतड़ों को पकड़ कर अपना लंड आगे कर चुका था, आंटी ने मेरी बात सुन कर कहा, तुम्हारा पहले से ही खड़ा था और बार बार मेरे पीछे स्पर्श हो रहा था इसीलिए तो पकड़ा था। मैंने कहा आंटी आपके नितंबों हैं ही इतने जबरदस्त कि हर आदमी का लंड आपको देख कर खड़ा हो जाए, यह कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से एक बार फिर आंटी के मम्मे पकड़ लिए और उन्हें जोर से दबा दिया और अपनी जीभ निकाल कर आंटी की कमर को चाटना शुरू कर दिया। मेरी इस हरकत से आंटी को मस्ती चढ़ गई थी, आंटी ने कहा अभी तो मेरी उम्र अधिक हो गई है तुम मुझे जवानी में देख लेते तो मेरे पतले शरीर पर मेरे ये बड़े मम्मे और बाहर निकले हुए चूतड़ देख कर तुम सलवार में ही झड जाते, अब तो मेरा बदन काफी मोटा हो गया है। 


मैंने कहा आंटी आपकी जवानी का तो पता नहीं, मगर आज भी आप किसी जवान हसीना से कम नहीं, आपके निकले हुए चूतड़ देख कर तो आपकी गाण्ड मारने का मन करता है और आपके 38 मम्मे देख कर मुंह में तो पानी आता ही है, लंड पर भी पानी की बूंदे आना शुरू हो जाती हैं। यह कह कर मैंने के आंटी ब्रा की हुक खोल दी और आंटी का ब्रा उतार दिया। ब्रा उतार कर मैंने पीछे खड़े खड़े ही आंटी के बूब्स को अपने हाथ में पकड़ लिया और उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा। जिससे आंटी की मस्ती में अधिक वृद्धि हो रही थी मैं आंटी की कमर चाटने के साथ साथ अपने लंड को धीरे धीरे आंटी के चूतड़ों में हल्के हल्के धक्के भी लगा रहा था और आंटी के बूब्स को भी हाथ में पकड़ कर दबा रहा था। ( )आंटी के मम्मे इतने बड़े थे कि मेरे हाथों में पूरे नहीं आ रहे थे। मगर एक बात थी कि आंटी के चूतड़ों में फंसा लंड और आंटी के नरम नरम मम्मे जो मज़ा दे रहे थे वह मजा तो मेरी पड़ोसी लड़की को चोदने मे भी नहीं आता था जिसकी उम्र अभी सिर्फ 20 या 21 साल थी और जवानी की आग उसकी चूत में लगी हुई थी। मगर उसको चोदने मे भी कभी ऐसा मज़ा नहीं आया था जो अभी कपड़े उतारे बिना ही आंटी से सेक्स करने मे आ रहा था। कुछ देर तक आंटी अपने चूतड़ों में लंड के मजे लेती रही, इस दौरान आंटी की सांसें अभी से बहाल हो चुकी थी और उन्हें जो पहले थोड़ी झिझक थी अब वह नहीं रही थी बल्कि वह अब रिलैक्स हो गईं थीं। फिर आंटी ने अपने मम्मों से मेरा हाथ हटाया और मेरी ओर मुड़ कर बोलीं उन्हें दबाते ही रहोगे या इनमे से दूध भी पीओगे ? 


मैंने कहा क्यों नहीं आंटी, मैं तो पता नहीं कब से आपके मम्मों से दूध पीने के लिए तरस रहा हूँ, यह कह कर मैं थोड़ा नीचे झुका और आंटी के बूब्स पर अपना मुँह रख कर उनके निपल्स को चूसने लगा। आंटी के बूब्स पर निपल्स जवान लड़कियों की तरह छोटे नहीं थे वे आकार में थोड़े बड़े थे, मगर उन्हें चूसने का मज़ा बहुत आ रहा था। जैसे ही मैंने आंटी के मम्मे चूसना शुरू किए आंटी ने मेरे लंड पर अपना हाथ रख लिया और बोलीं लगता है तेरी सलवार में यह हथियार खासा मजबूत और बड़ा है, एक बार चेक तो करने दे कि कैसा माल है तेरी सलवार में। मैं आंटी के बूब्स से मुंह हटाया और कहा आंटी आप पहले एक बार यह हथियार चेक करो फिर आपकी चूत और गांड दोनों ही इस हथियार की दीवानी हो जाएंगी और आप बार बार मेरे पास आकर चुदाई करवाया करोगी। यह कह कर मैंने फिर से अपना मुंह आंटी के बूब्स पर रख कर उनके निपल्स चूसना शुरू कर दिए और आंटी ने सलवार के ऊपर से ही मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसकी पैमाइश शुरू कर दी। मेरे लंड को अच्छी तरह टटोलने के बाद आंटी ने पूछा तेरा आकार तो किसी हटे कटे पुरुष के लंड के आकार जितना लगता है मगर तेरा रूप देखकर नहीं लगता कि तुम्हारे पास इतना बड़ा लोड़ा होगा। आंटी ने थोड़ी देर मेरे लंड को सलवार के ऊपर से ही मुठ मारी और फिर बोलीं, तेरे अंकलसे तो बड़ा ही लग रहा है यह क्या आकार है उसका ?? मैंने फिर आंटी के निपल्स छोड़े और आंटी को कहा केवल 8 इंच का है आंटी यह।

8 इंच सुनकर आंटी की आँखें खुली की खुली रह गईं और बोलीं बाप रे, तेरे अंकल का तो केवल 6 इंच का है, दिखा तो सही जरा वाकई 8 या ऐसे ही बकवास कर रहा है, यह कह कर आंटी ने खुद ही मेरी सलवार का नाड़ा खोला, सलवार एक झटके से नीचे उतर गई तो आंटी ने मेरी कमीज ऊपर उठा कर मेरे 8 इंच के लंड पर नज़र मारी। कुछ देर वह बिना आंखें झपकाए मेरे लंड को देखती रहीं, फिर उन्होंने मेरी ओर देखा और उसके बाद फिर से लंड को देखने लगीं। मैंने कहा क्यों आंटी कैसा लगा आपको मेरा लंड?

आंटी ने कहा बहुत ही मस्त है यह तो आज तक ऐसा लंड नहीं देखा मैंने, यहाँ तो तेरे अंकल के 6 इंच लंड है, वो भी काफी समय से नसीब नहीं हुआ, या फिर उनके छोटे भाई का 7 इंच का लंड है जो 3, 4 महीनों के बाद एक बार मिलता है। मैंने आश्चर्य से आंटी को देखा और आश्चर्य से पूछा आंटी क्या आप अपने देवर से भी चुदाई करवाती हैं ?? आंटी ने कहा हां तो और जब तेरे अंकल महीनों महीनों मेरी चूत को देखेंगे ही नहीं तो किसी ना किसी के लंड से तो मुझे अपनी प्यास बुझानी ही है न। मैंने कहा आंटी पहले बताती न तुम, मेरे होते हुए आपको इतना इंतजार करने की क्या जरूरत थी, बस अब आपका जब मन करे, तो यहाँ आकर मुझ से चुदाई करवा सकती हैं। इस लंड को अपना लंड ही समझें। आंटी ने कहा अब तेरे लंड की खैर नहीं, ऐसे सवारी करूंगी तेरे लंड पर कि तू जवान और गर्म चूतों को भूल जाएगा और अपनी आंटी की चूत का दीवाना हो जाएगा। 


यह कह कर आंटी नीचे बैठ गई और मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया। मैंने कहा आंटी यहाँ ठीक से मज़ा नही आ रहा है, बाहर चलते हैं। आंटी ने कहा पागल हो? लोग बाहर से अंदर देखेंगे, मैंने कहा आंटी बेफिक्र हो जाओ, अंदर से तो बाहर दिखाई देता है पर बाहर से अंदर दिखाई नहीं देगा। आंटी ने कहा सोच लो, अगर कहीं से भी अंदर नजर पड़ गई तो यहीं जूते पड़ जाने हैं तुम्हें भी और मुझे भी। मैंने कहा आंटी बेफिक्र हो जाओ कुछ नही होता, यह कह कर मैंने अपनी कमीज उतार दी और नंगा ही बाहर आने लगा। आंटी भी मेरी पीछे बाहर आ गई, बाहर आकर सोफे पर पैर फैलाकर बैठ गया, आंटी मेरे सामने जमीन पर बैठ गई और मेरा लंड पकड़ कर उस पर पहले अपने मुंह में थूक का गोला बनाकर उस पर फेंका और फिर दोनों हाथों से मेरा 8 इंची लंड पकड़ कर उसे अपने थूक से मालिश देने लगीं। थोड़ी देर तक आंटी अपने दोनों हाथों को घुमा घुमा कर मुझे मज़ा देती रही, आंटी का एक हाथ लंड की टोपी को पकड़ता और दूसरा हाथ नीचे होता,( ) और फिर अपने दोनों हाथों को ऐसे घुमाती जैसे कपड़े निचोड़ने के लिए हाथ घुमाया जाता है, और इसी तरह हाथ घुमा कर नीचे ले आतीं। आंटी यह काम बहुत कौशल से कर रही थीं। 

थोड़ी देर तक मेरे लंड की घुमा घुमा कर मुठ मारने के बाद आंटी डागी स्टाइल में मेरे सामने बैठ गईं, उन्होंने अपने दोनों हाथ जमीन पर रख लिए थे और घुटने भी जमीन पर लगे हुए थे और मेरा लंड अब आंटी के मुँह में था। आंटी को चुसाइ लगाने में भी खासी महारत हासिल थी। आंटी शरप शरप की आवाज के साथ मेरे लंड पर अपना मुँह ऊपर नीचे करके सेक्सी दुकान के वातावरण को और सेक्सी बना रही थीं। मैंने आंटी के बाल उनकी गर्दन पर इकट्ठे करके अपने हाथ में पकड़ लिए थे और मैं भी आंटी के बाल खींच खींच कर उन्हें चुसाइ लगाने पर उकसा रहा था जिससे आंटी की मस्ती में अधिक वृद्धि हो रही थी आंटी की गर्म गर्म सांसें, और थूक से भरा मुंह, मेरे लंड को बहुत मज़ा दे रहे थे। फिर आंटी ने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरे लंड की टोपी पर अपनी जीभ को गोल गोल घुमाने लगी। मेरी टोपी की बनावट भी बहुत अच्छी थी जिस पर आंटी अपनी जीब फेर फेर कर मुझे मज़ा दे रही थीं, 5 मिनट तक आंटी मेरे लंड की चुसाइ लगाती रहीं तब मैंने आंटी को कहा आंटी अब अपनी चूत भी दिखा दें मुझे तो मैं भी उसे थोड़ा प्यार कर सकूँ। आंटी ने कहा पहले मुझे इस जवान घोड़े को दिल खोलकर प्यार करने दे, तू ने सिर्फ़ मेरे लिए अपने बाल साफ किए हैं ना आज? मैंने कहा जी आंटी मुझे पूरा यकीन था कि आज मेरा इंतजार खत्म होगा और आपकी चिकनी चूत और टाइट गाण्ड में मेरा यह घोड़ा सरपट दौड़ कर जाएगा। आंटी ने फिर से लंड चूसा और बोलीं दुर्लभ का लंड तो हमेशा बालों से भरा रहता है उसको चूसने में बहुत मज़ा नहीं आता जितना मज़ा आज तेरा यह तगड़ा और सॉफ सुथरा घोड़ा दे रहा है। 

मैंने कहा आंटी आपका अपना ही लंड है जब आप आदेश करेंगी आप से चुसाइ लगवा लूँगा मगर इस समय मुझे आपकी चूत देखनी है। यह सुनकर आंटी ने मेरा लंड छोड़ा और मेरे सामने खड़ी हो गईं। मैं थोड़ा आगे बढ़ा और आंटी की सलवार एक ही झटके में उनके घुटनों तक उतार दी। मेरे चेहरे के बिलकुल सामने आंटी की चूत थी जो बिल्कुल साफ था, आंटी ने भी शायद यहाँ आने से पहले ही अपनी चूत की सफाई की थी, मैंने आंटी की तरफ देखा और फिर आंटी की चूत पर एक प्यार भरा चुंबन करके आंटी को कहा आंटी आप ने भी ख़ास मेरे लिए ही अपनी चूत की सफाई की है ना ?? आंटी ने कहा, हां, दुर्लभ और मुनब्बर ने तो कभी चूत देखी ही नहीं वह तो सीधा अपना लंड ही चूत में डालते हैं, लेकिन मुझे पता है आजकल के नौजवानों को चूत चाटने का बहुत शौक होता है इसलिए ख़ास तेरे लिये चूत को बालों से साफ करके आई हूँ। मैंने आंटी की तरफ देखा और कहा आंटी आपको कैसे पता कि युवाओं को चूत चाटना पसंद है ?? दुर्लभ अंकल के अलावा भी है कोई ??? आंटी खिसियानी होकर हँसी और बोलीं हां मोहल्ले का एक लड़का है, सप्ताह मे आकर मेरी चूत को प्यार करता है और गांड को चोदता है। मगर उसका लंड भी तेरे लंड जैसा नहीं। 6 इंच का ही है उसका लंड मगर चूत की प्यास बुझ जाती है उससे . 

मुझे भला इससे क्या लेना देना था कि आंटी किस किस से चुदवाती हैं, मैंने मन ही मन में अपनी चुदक्कड़ आंटी को दाद दी और अपनी जीभ निकाल कर उनकी चूत पर फेरने लगा। आंटी की नरम और मुलायम चूत पर अपनी जीभ फेरने के बाद मैंने अपनी ज़ुबान आंटी की चूत के लबों में प्रवेश करा दी जहां आंटी की चूत का गाढ़ा पानी लगा हुआ था। स्वाद तो इतना अच्छा नहीं था, थोड़ा कड़वा और कसैला स्वाद था आंटी की चूत का, परंतु उसकी गर्मी ने मुझे अपनी जीब हटाने नहीं दी और लगातार आंटी की चूत को चाटता रहा। आंटी की मस्ती बढ़ती जा रही थी और आंटी ने अब मुझे सिर से पकड़ रखा था और मुझे अपनी चूत की तरफ धकेल कर सिसकियाँ ले रही थीं। आह ह ह ह ... आह ह ह ह ... जोर से चूस बेटे मेरी चूत को अपनी आंटी की चूत को आह ह ह ह ह ..... जीब फेर अंदर जोर से ..... और जोर से .... आह ह ह ह ह ह ह एफ एफ एफ एफ .... आह ह ह ह ह, आह ह ह ह आह ह ह ह ... आंटी की सिसकियाँ तेज होती जा रही थीं और फिर अचानक आंटी ने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत के साथ लगा लिया और तभी आंटी के ज्वालामुखी ने लावा उगलना शुरू कर दिया। मैं समझ गया था कि आंटी छूटने वाली हैं लेकिन मैंने पहले ही अपना मुंह बंद कर लिया था क्योंकि आंटी की चूत का पानी पीने का मेरा कोई इरादा नहीं था। मगर आंटी के गरम पानी ने मेरा सारा चेहरा भिगो दिया था कि मैं ने आंटी की सलवार से ही साफ किया जो कि अभी तक उन्होंने पहन रखी थी।


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

चेहरा साफ करने के बाद मैं खड़ा हो गया और आंटी को कहा आंटी अब तैयार हो जाएं आपकी चूत आज पहली बार 8 इंच लंड लेने के लिए तैयार है। आंटी ने तुरंत ही अपनी सलवार उतार दी और कहा, बिल्कुल भी लिहाज नहीं करना मेरा, बस पहले धक्के से ही जानदार चुदाई शुरू कर दे कि तेरी आंटी तेरी दासी बन जाए। मैंने आंटी को काउन्टर की तरफ मुँह करने को कहा, आंटी ने अपना मुँह काउन्टर की ओर मुंह किया और काउन्टर पर अपनी कोहनी लगाकर थोड़ा झुक गई और अपने चूतड़ बाहर निकाल लिए। मैंने अपना 8 इंच का लंड अपने हाथ में पकड़ और टोपी आंटी की चूत पर सेट की और एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा 6 इंच लंड आंटी की चूत में उतर गया और महज 2 इंच ही बाहर रहा, मेरे धक्के के साथ ही आंटी ने एक चीख मारी, मगर चीख मारने के तुरंत बाद आंटी बोलीं, शाबाश बेटा, बहुत जान है तेरे लंड में चोद आज अपनी आंटी को जोर से। मैंने कहा आंटी अभी तो पूरा लंड अंदर नहीं गया, अगले धक्के में पूरा लंड जाएगा अंदर। आंटी बोलीं फिर इंतजार क्यों कर रहा है डाल दे न पूरा लंड अपनी आंटी की प्यासी चूत में। 


मैंने लंड बाहर निकाला महज टोपी ही चूत के अंदर रहने दी और आंटी को चूत टाइट करने को कहा। आंटी ने चूत को टाइट किया तो मैंने पूरे जोर के साथ आंटी की चूत में धक्का लगाया। आंटी की चूत की पकड़ में वह मजबूती नहीं थी जो मेरी पड़ोसन की चूत में थी, मगर फिर भी चूत टाइट करने का यह फायदा हुआ कि मेरा 8 इंच लंड आंटी की चूत को चीरता हुआ उनकी गहराई तक उतर गया और उसके बाद फिर से आंटी की चीख निकली। इस चीख में पहले की तुलना में दर्द थोड़ी अधिक थी। मगर मैंने बिना रुके फिर लंड वापस खींचा और अगला जानदार धक्का लगाया जिससे आंटी की फिर चीख निकले। फिर मैंने बिना रुके आंटी की चूत में अपना इंजन स्टार्ट करके लंड चौथे गियर में डाल दिया और धक्के पे धक्का लगाना शुरू कर दिया जिससे कुछ देर हल्की चीखें मारने के बाद अब आंटी की सिसकियों से मेरी दुकान गूंज रही थी। 

मेरे हर धक्के पर आंटी के मोटे चूतड़ मेरे शरीर से टकराते तो कमरे में धुप्प धुप्प की आवाज पैदा होती। धुप्प धुप्प की आवाज के साथ आंटी की चिकनी चूत में मेरा लंड पिचक पिचक की आवाजें भी उसके मुँह से निकलवा रहा था और इन दोनों आवाज के साथ आंटी आह ह ह ह, आह ह ह ह ह, आह ह ह ह आह, आह, आह आह, उफ़ एफ एफ एफ एफ एफ, उफ़ एफ एफ एफ एफ, आह ह ह ह, आह ह ह ह ह, आह ह ह ह ह की आवाजों ने माहौल को बहुत सेक्सी बना दिया था। 5 मिनट तक मैं आंटी को इसी तरह फुल स्पीड से चोदता रहा। फिर मैंने आंटी की चूत से लंड निकाल लिया और खुद सोफे पर बैठ गया। सोफे पर बैठ कर मैंने अपनी टाँगें थोड़ी सी फैला ली और आंटी को कहा कि मेरी गोद में बैठ जाएं। आंटी ने मेरी बात समझी और सोफे पर चढ़ कर मेरी गोद में बैठने लगीं तो मैंने कहा नहीं आंटी ऐसे नहीं, दूसरी ओर मुंह कर लें अपना और बस अपनी गाण्ड मेरी गोद में रख दें। आंटी मेरी फैली हुई टांगों के बीच आ गई और मेरी तरफ अपनी कमर करके अपनी गाण्ड मेरे लोड़े ऊपर रख दी। मैंने अपने लंड की टोपी को आंटी की चूत के निशाने पर रखा और उन्हें चूतड़ों से पकड़ कर एकदम नीचे गिरा दिया जिससे मेरा सारा लंड आंटी की चूत में उतर गया। फिर मैंने आंटी को उछलने को कहा तो आंटी ने अपने दोनों हाथ मेरे मज़बूत पैरों पर रख दिए और थोड़ा ऊपर होकर अपनी गाण्ड को हवा में उछालने लगी। आंटी की गति तो ज्यादा तेज नहीं थी, मगर मुझे इस तरह चोदने में बहुत मज़ा आता था कि जब औरत खुद मेरी गोद में बैठ कर अपनी चुदाई करवाए। 

आंटी शायद 2 मिनट ही इस तरह अपनी चुदाई करवा पाईं और फिर उनकी पैर थक गये तो वह मेरी गोद में बैठ गईं, मगर मेरे लंड ने उनको चैन से नहीं बैठने दिया, उन्होने खुद ही अपनी गाण्ड को गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया जिस मेरा लंड उनकी चूत में चक्र की तरह घूमने लगा। और उनकी चूत की हरसाईड पर रगड़ लगने से मेरी टोपी को भी मज़ा आने लगा। कुछ देर आंटी इसी तरह अपनी गाण्ड घुमा घुमा कर मेरे लंड के मजे लेते रहीं फिर मैंने आंटी को अपनी गाण्ड ऊपर उठाने को कहा तो आंटी ने फिर मेरे पैरों का सहारा लेकर अपनी गाण्ड ऊपर उठाई तो मैं नीचे से अपने चूतड़ हिलाने किया और आंटी की चूत में अपने लंड मशीन चला दी। इस तरह आंटी को चुदाई का अधिक मज़ा आ रहा था क्योंकि खड़ा होकर चुदाई के समय आंटी ने अपनी टाँगें खोल रखी थी, लेकिन अब मेरी गोद में बैठ कर आंटी पैर आपस में मिली हुई थी जिसकी वजह से उनकी चूत टाइट हो रही थी और टाइट चूत में जब 8 इंच का लोड़ा अपने धक्के लगाएगा तो मजे की तीव्रता से सिसकियाँ तो निकलेंगी ही यही हाल सलमा आंटी का हो रहा था। अब मेरे धक्कों की गति तूफानी हद तक तेज हो चुकी थी। और आंटी की चिकनी चूत टाइट होने के कारण मेरे लंड की रगड़ से आग का गोला बनी हुई थी। और अगले 2 मिनट से अधिक धक्कों के कारण आंटी की चूत ने आग पर पानी डालकर बुझाने की कोशिश की। आंटी की चूत ने गरम पानी से मेरे लंड को नहला दिया था। आंटी की चूत से पानी वर्षा मेरे काउन्टर तक गई और काउन्टर पर अपने प्यार की निशान छोड़ गया। 

अब मैंने आंटी को अपनी गोद से उठाया और उन्हें सोफे पर घोड़ी बनने को कहा। आंटी सोफे पर बैठ गई और अपने हाथों और घुटनों के सहारे सोफे पर घोड़ी बन गई और अपनी गाण्ड बाहर निकाल ली। मैंने आंटी के मोटे-मोटे चूतड़ों को हाथ से पकड़ कर उन पर 2,4 हाथ मारे जिनकी गूंज पूरी दुकान में सुनाई दी। फिर मैंने आंटी की गाण्ड में उंगली डाल कर उसके आकार का अनुमान लगाया आंटी की गाण्ड थी तो काफी टाइट मगर कुंवारी बिल्कुल नहीं था, उसमें जाने कितने पहले भी लंड जा चुके थे इसलिए मैंने अपने आपको उसको अधिक चिकना करने मे परेशान नहीं किया, बल्कि अपने लंड ऐसे ही आंटी की गाण्ड के छेद पर रख दिया, मुझे पता था कि लंड बहुत आसानी से अंदर चला जाएगा क्योंकि मेरे लंड पर आंटी की चूत से निकलने वाला पानी भी था जिसकी वजह से मेरा लंड बहुत चिकना हो रहा था, और हुआ भी यही, मेरे पहले ही धक्के से लंड की टोपी आंटी की गाण्ड में घुस गई थी , आंटी की एक हल्की सी चीख निकली मगर उन्होंने मुझे गाण्ड मारने से मना नहीं किया। फिर मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा आधा लंड आंटी की गांड में चला गया। इस पर भी आंटी की एक जोरदार आह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह ह निकली और उन्होंने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और बोलीं तेरा लोड़ा तो गाण्ड में लेकर ऐसे लग रहा है जैसे किसी घोड़े का लंड ले लिया हो मैंने गाण्ड में। मैंने आंटी को कहा, घोड़ी बनी हुई हो तो लंड भी तो घोड़े का ही मिलना चाहिए कि नहीं, यह कह कर मैंने एक और धक्का लगाया और मेरा पूरा लंड आंटी की गाण्ड में उतर गया। आंटी की गाण्ड काफी चिकनी थी, और उसमें लंड डाल कर आराम मिला था। गाण्ड की पकड़ लंड को दर्द पहुंचा रही थी। फिर मैंने धीरे धीरे गाण्ड में धक्के मारने शुरू किए। शुरू-शुरू में तो लंड फस फस कर गाण्ड में जाता रहा, लेकिन 2 मिनट बाद लंड बहुत तेज़ी के साथ आंटी की चिकनी और टाइट गाण्ड में जा रहा था, 

आंटी के 38 आकार के मम्मे मेरे हर धक्के के साथ आगे पीछे हिलते थे। मुझे आंटी के हिलते हुए मम्मे बहुत सुंदर लग रहे थे, कुछ देर तो मैं थोड़ा साइड पर झुक कर धक्के भी लगाता रहा और आंटी के बूब्स को हिलाता हुआ देखता रहा, फिर थोड़ा आगे झुका और आंटी के बूब्स को अपने हाथों में पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया, जबकि गाण्ड में लंड भी पूरी गति से अपना काम कर रहा था। आंटी की सिसकियों से मेरी दुकान गूंज रही थी और वह मुझे अधिक गति से चोदने पर उकसा रही थीं। चोद अपनी चाची को, जोर से चोद। मारदे अपनी आंटी की गाण्ड आह ह ह ह ह, आह ह ह ह। । । आह ह ह ह ह ह ह ह चोद बेटा चोद ..... आह ह ह ह आह ह ह ह, आह ह ह ह .... आह ह ह ह शाबाश बेटा ऐसे ही चोदता रह अपनी आंटी को ..... आंटी की बातों से मेरे लंड की कठोरता और गति दोनों ही बढ़ते जा रहे थे। 5 मिनट तक गाण्ड मरवाने के बाद आंटी थक गई तो उन्होंने मुझे कहा कि अब लिटा कर गाण्ड मार लो मैं बहुत थक गई हूँ। मैंने आंटी की गाण्ड से लंड निकाला और उन्हें नीचे लिटा दिया जमीन पर ही . आंटी को जमीन पर लिटाने के बाद आंटी के ऊपर आया और उनकी दोनों टांगों को उठाकर पीछे की ओर यानी उनके सिर की ओर मोड़ दिया जिससे आंटी की गाण्ड मेरे लंड के निशाने पर आ गई, मैंने लंड टोपी को आंटी की गाण्ड पर सेट किया और फिर आंटी की गाण्ड में अपना लंड उतार कर चोदना शुरू कर दिया। 

जैसे जैसे मैं आंटी को चोदता जा रहा था वैसे-वैसे आंटी अपनी चूत पर हाथ फेर फेर कर उसे भी गर्म कर रही थीं। मैंने आंटी को अधिक 5 मिनट उसी स्थिति में चोदा और खूब दिल खोलकर उनकी गाण्ड मारी। मगर मेरी आदत थी कि पानी हमेशा या तो चूत में छोड़ता हूँ यह फिर मम्मों पर। इसलिए मैंने अपना लंड सलमा आंटी की चिकनी गाण्ड से बाहर निकाल लिया और बिना समय बर्बाद किए उनकी चिकनी और गीली चूत में लंड एक ही धक्के में डाल दिया। अब मैं खुद आंटी के ऊपर लेट गया और आंटी के मम्मे एक बार फिर मेरे मुँह में थे जिन्हें मैं चूसने के साथ साथ उनकी चूत भी पूरे जोर से चोद रहा था। 5 मिनट तक उनकी चूत में लंड से धक्के मारने के बाद आंटी की चूत ने फिर पानी छोड़ दिया और मेरा लंड उनकी चूत के पानी से गीला हो गया। मगर अब मुझे भी लग रहा था कि मैं अब छूटने वाला हूँ, मैं आंटी से पूछा आंटी आपकी चूत में वीर्य निकाल दूँ या फिर आपके मम्मों पर निकालूं ???


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

आंटी ने कहा मम्मों पर निकाल दे और मम्मों को चोद दे। मैंने अभी आंटी की चूत से अपना लंड निकाल लिया और उसको टों के पास जड़ पकड़ कर थोड़ी देर दबाए रखा, उसका फायदा यह होता है कि अगर वीर्य निकलती हो तो थोड़ी देर के लिए रुक जाती है। जब मुझे लगा कि अब वीर्य नहीं निकलेगी तो मैं ऐसे ही आंटी के सीने पर आकर बैठ गया और अपना लंड आंटी के 38 इंच के मम्मों के बीच रख दिया, आंटी ने अपने दोनों बूब्स को अपने हाथों से आपस में मिलाकर मेरे लंड के ऊपर मम्मों की मजबूत पकड़ बना ली तो मैंने आंटी के बूब्स में अपना लंड आगे पीछे करना शुरू कर दिया। आंटी की चूत का पानी मेरे लंड पर लगा हुआ था जिससे आंटी के मम्मे भी चिकने हो गए थे। आंटी के नरम नरम मम्मों को चोदने का भी अपना ही एक मजेदार अनुभव था। जब मैं पीछे की ओर अपनी गाण्ड लेकर जाता तो मेरा 8 इंच लंड आंटी के बूब्स में गायब हो जाता और जब मैं वापस आगे की ओर होता तो आंटी के बूब्स की क्लीवेज़ से मेरे की लंड टोपी बाहर निकलती जिसको आंटी बड़े शौक से देख रही थीं । 2 मिनट तक चाची के 38 इंच के मम्मे चोदता रहा तो मुझे लगा कि मेरा लंड अब अपने प्यार का रस निकालने वाला है, मैंने आंटी को इशारा किया तो आंटी ने कहा रुकना नहीं बस ऐसे ही मम्मों पर लंड के घस्से मारता रह ताकि तेरी वीर्य की धार मेरे मुंह तक आए, मैंने धक्के लगाना जारी यहाँ तक कि मेरे टट्टों से एक पतली सी धार निकल कर मेरे लंड से होते हुए मेरे लंडकी टोपी तक आ गई, और फिर एक दम से मेरे लंड ने वीर्य की एक गर्म धार निकाल दी। जब मेरे लंड की धार निकली तो मेरा लंड आंटी के बूब्स की क्लीवेज़ से बाहर निकला हुआ था जिसकी वजह से शुक्राणु की धार सीधी आंटी के खुले मुंह में गई और फिर एक के बाद दूसरी और फिर तीसरी धार निकली जिससे आंटी का मुंह भी भर गया इसके अलावा कुछ वीर्य आंटी के चेहरे और कुछ होठों पर और कुछ आँखों पर गिरा कुछ वीर्य आंटी के चेहरे से आगे जाकर मेरी दुकान के फर्श पर भी गिर गई। कुछ देर मेरे लंड मे झटके लगते रहे, जब सारा वीर्य निकल गया तो मैंने अपना लंड आंटी के बूब्स से साफ किया और आंटी के ऊपर से नीचे उतर आया। आंटी ने अपनी आंखों से और अपने सीने से वीर्य साफ किया और अपनी उंगलियां चाटने लग गईं। जो वीर्य आंटी के मुंह में थी आंटी उसको भी पी गईं, उसी तरह अपने गालों से भी आंटी ने वीर्य साफ करके अपनी जीभ से उंगली चाट ली। फिर आंटी ने मेरा लंड देखा जो वीर्य छोड़ने के बावजूद अब तक खड़ा था और उस पर आंटी की चूत का और मेरे लंड के पानी का मिश्रण मौजूद था। आंटी ने आगे बढ़ कर मेरे लंड हाथ में पकड़ा और उसे अपने मुंह में डाल कर एक बार फिर उसकी छूसा लगाना शुरू कर दी 

जब आंटी मेरे लंड की सारी वीर्य चूस चुकीं तो उन्होंने मुझसे सफाई वाला कपड़ा मांगा। मैंने अपने काउन्टर से एक कपड़ा निकाल कर आंटी को दिया तो उन्होंने पहले अपनी चूत को साफ किया और फिर काउन्टर और फर्श पर गिरे हुए चूत और लंड के पानी को साफ किया कि मैं नंगा ही सोफे पर बैठ गया। आंटी ने पानी का पूछा तो मैंने आंटी को बताया कि ट्राई रूम से थोड़ा आगे वॉश बेसिन लगा हुआ है। आंटी वॉश बेसिन पर जाकर अपना मुंह को अच्छी तरह साफ कर आईं और थोड़ी देर बाद ही आंटी अपने कपड़े पहन कर मेरे साथ बैठ चुकी थीं। मैंने आंटी की तरफ देखा और फिर उनके बूब्स को देखने लगा, 


आंटी ने भी मेरी ओर मुंह कर लिया और मेरे सोए हुए लंड पर हाथ फेर कर कहने लगीं लगता है अब तक तुम्हारा मन नहीं भरा मेरी चुदाई से। मैं हंसा और कहा आंटी भला वह आदमी ही क्या जिसका चुदाई से दिल भर जाए, लेकिन मैं जानता हूँ अब दूसरा राउंड लगाना संभव नहीं क्योंकि ब्रेक का समय समाप्त होने वाला है, और वैसे भी आप काफी थक गई होंगी। आंटी ने कहा हां आज तो तेरे धक्कों ने मेरा अंग अंग हिलाकर रख दिया है। फिर कभी दुबारा तेरे से चुदाई करवाने जरूर आउन्गी मैंने आंटी से पूछा आंटी गांड की चुदाई कैसे लगी आपको? आंटी ने नीचे झुककर मेरे मुरझाए हुए लंड पर एक पप्पी और बोलीं, तेरे लंड ने तो मजे करवा दिए आज। इतना ज़बरदस्त मज़ा तो असंभव ही था फिर पड़ोस वाला लड़का भी इतना नहीं चोदता। 10, 15 मिनट में ही इन दोनों लंड जवाब दे जाता है। मगर तू ने खूब जमकर चुदाई है अपनी आंटी की। चिंता न कर अब तेरे लंड को मैं अपनी गाण्ड और चूत में लेती रहूँगी। उसके बाद मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए आंटी को उनके आकार के अनुसार 2 ब्रा दे दिए और 4 बजने से कुछ देर पहले दरवाजे पर लगा साइन बोर्ड बदल दिया। मगर आंटी को अब बाहर निकलने से मना कर दिया ताकि देखने वालों को यह न लगे कि साइन बोर्ड परिवर्तित होते ही अंदर से महिला निकली है। कुछ देर बाद निकलेंगी तो लोगों को शक नहीं होगा

फिर कुछ देर के बाद आंटी मुझे फिर चुदाई करवाने का वादा करके चली गईं और सलमा आंटी की गाण्ड को याद करता रहा। 3 से 4 दिन अधिक बीत गए मगर सलमा आंटी का न तो फिर से फोन आया और नही सलमा आंटी खुद आईं, मैंने भी सलमा आंटी को तंग करना उचित नहीं समझा, जब उनकी चूत में खुजली होगी वो खुद ही मेरे से चुदाई करवाने आ जाएगी यही सोचकर मैंने सलमा आंटी का इंतजार करने की बजाय अपनी पड़ोसी को घर बुला कर उसकी खूब चुदाई कर डाली। जिस दिन अपनी पड़ोसी की चुदाई की इससे अगले दिन दुकान पर बैठा था कि नीलोफर और शाज़िया मेरी दुकान पर फिर से आईं। वही कॉलेज वर्दी और गले में कैथेटर दुपट्टा जिससे फिटिंग वाली कमीज से मम्मों का आकार बड़ा स्पष्ट नजर आता था। मगर आज इन दोनों के साथ राफिया नहीं थी जिसको देखने के लिए में खासा बेताब था। 


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

मैंने एक मुस्कान के साथ नीलोफर और शाज़िया हेल्लो किया। आज दोनों काफी खुश नजर आ रही थीं। मैंने दोनों से पानी पूछा लेकिन उन्होंने मना कर दिया और मुझसे कहा आज कोई नई और अच्छी ब्रा दिखाएं। मैंने उनसे पूछा, किस प्रकार का ब्रा चाहिए आपको? उन्होंने कहा बस कोई नया और जबरदस्त शैली का हो। में थोड़ा थोड़ा समझ गया था कि वह क्या कहना चाह रही है। मैंने पूछा आपका मतलब है कोई सेक्सी शैली में हो ??? इस पर शाज़िया थोड़ा हिचकी मगर नीलोफर ने मुस्कुराते हुए कहा, हां सेक्सी हो। मैंने नीलोफर ने मम्मों पर नजर डालते हुए कहा क्या आप शादीशुदा हैं ??? नीलोफर ने कहा नहीं, लेकिन तुम क्यों पूछ रहे हो ??? मैंने कहा कुछ नहीं, अक्सर शादीशुदा लड़कियाँ सेक्सी ब्रा की मांग करती हैं ताकि वह अपने पति को दिखा सकें इसलिए पूछ लिया, खैर मैं आपको दिखा देता हूँ। मेरी इस बात पर नीलोफर भी थोड़ी हड़बड़ा गई थी। जैसे मैंने उसकी चोरी पकड़ ली हो। 


दरअसल नीलोफर को सेक्सी ब्रा इसीलिए चाहिए था कि वह उसे अपने प्रेमी को दिखा सके और मैं ने पहली शादी का पूछकर और फिर पति को बनाने के लिए कह कर उसको यह एहसास दिला दिया था कि वह अपने प्रेमी को दिखाने के लिए सेक्सी ब्रा मांग रही है। खैर मैंने एक लाल रंग का ब्रा निकाला जिस पर सफेद रंग के सितारे लगे हुए थे। ये एक हाफ कप ब्रा था, अर्थात इससे मम्मों के ऊपर का हिस्सा स्पष्ट नजर आता था, यह ब्रा न केवल मम्मों को उठा कर रखता था बल्कि बूब्स को बहुत स्पष्ट कर देखने वाले को दिखाता था। ये ब्रा मम्मों पर केवल निपल तक ही आता था, निपल्स ऊपर का हिस्सा नंगा था। मैंने यह ब्रा दिखाते हुए नीलोफर को बताया कि यह आधे कप का ब्रा है जो आपके साथी निश्चित रूप से पसंद करेंगे और आपके सीने को भी एक्सपोज करेगा। मेरी बात सुनकर शाज़िया थोड़ा परेशान दिख रही थी मगर नीलोफर को जैसे कोई चिंता नही थी। नीलोफर ने ब्रा पलट कर देखा और बोली, इसके अलावा भी दिखाओ ना मैंने कहा मिस आपको ब्रा और पैन्टी सेट दिखा दूँ ?? नीलोफर ने कहा हां अगर अच्छा है तो दिखाओ। मैंने एक और ब्रा दिखाया। इस काले रंग वायर्ड ब्रा था, उसके दाहिने मम्मे के कप से स्ट्रिप कंधे के ऊपर से होकर बाईं हुक में लगती थी और बाएँ मम्मे के कप की स्ट्रिप कंधे से होकर दाँये हुक पर लगी थी। यानी कमर पर ब्रा स्ट्रिप से पार हो जाता था। इसके अलावा उसके साथ एक पैन्टी भी थी। यह रंग भी ब्लैक कलर की ही थी। पैंटी और ब्रा आपस में मिले हुए थे। दाएँ मम्मे के कप से एक स्ट्रिप पेट से होती हुई पैन्टी के बाईं ओर लगी हुक से मिलती थी और बाएँ मम्मे के कप से स्ट्रिप निकलकर पैंटी मे राइट साइड पर हुक से मिलती थी। 

एक क्रॉस कमर पर बनता था तो एक क्रॉस पेट पर बनता था। इसके अलावा इस ब्रा पैन्टी सेट के साथ एक ब्लैक कलर का वीर्य स्कर्ट भी था जो पैन्टी के ऊपर से पहनने के लिए था। यह पूरा सेट मैंने नीलोफर को दिखाया तो उसे बहुत पसंद आया। फिर मैंने इसी तरह एक और ब्रा और पैन्टी का सेट निकाल कर नीलोफर को दिखाया जो हल्के गुलाबी रंग का था, उस पर छोटे नगीने लगे हुए थे और ब्रा के दोनों कप्स पर गोल्डन कलर की छोटी चैन भी बनी हुई थी जो चादी की थी। और इस ब्रा के पीछे कमर पर कोई हुक मौजूद नहीं थी, बल्कि दोनों कपस के बीच में जहां दोनों मम्मों का मिलान होता है वहां पर एक क्लिप लगा हुआ था जिसको खोलकर ब्रा उतारा जाता था। इसके अलावा उसके साथ पैन्टी भी हल्के गुलाबी रंग की थी और यह थॉंग शैली पैन्टी थी। उसकी एक साइड जी स्ट्रिंग पैन्टी से ज़रा चौड़ी होती है मगर आम पैन्टी से ठीक होता है। और पैन्टी के फ्रंट पर ब्रा जैसे छोटे नगीने और चांदी की चेन लगी हुई थी। उसके साथ गुलाबी रंग की ही लीग स्टाकनग भी थीं जो मोजे की तरह पहनी जाती है लेकिन यह ठीक जालीदार कपड़े की होती है जो पैर से लेकर घुटनों तक आती है। फिर घुटनों से क्लिप लगे होते हैं जो स्टाकनग से लेकर पैन्टी तक स्ट्रिप के माध्यम आपस में मिले हैं। 

ये ब्रा दिखाते हुए मैंने नीलोफर को जोर देकर कहा कि नवविवाहित जोड़े अपने हनीमून के लिए इस तरह के ब्रा पैन्टी सेट पसंद करते हैं और यह उनके प्यार में बेहद अच्छा लगता है। इस ड्रेस को देखकर भी नीलोफर की आंखों में एक चमक आ गई थी। उसने शाज़िया को देखा और बोली कि बहुत सुंदर हैं यह तो और कहीं से भी मुझे ऐसी ब्रा नहीं मिलीं। फिर उसके अलावा मैंने नीलोफर को कुछ अधिक सेक्सी ब्रा और पैन्टी सेट दिखाए। सभी सेट सुंदर और सेक्सी थे जिन्हें देखकर नीलोफर और शाज़िया दोनों ही खुश हो रही थीं। फिर मुझे नीलोफर ने कहा कि वह ट्राई करना चाहती है, मगर उन्हें ट्राई करने मे में थोड़ी देर हो सकती है, क्योंकि उनकी सेटिंग थोड़ी मुश्किल होती है और सारे कपड़े उतारने पड़ते हैं उनके लिए। मैंने नीलोफर को कहा क्यों नहीं आप जरूर ट्राई करें। फिर मैंने शाज़िया से पूछा आपको भी इस तरह के ब्रा पैन्टी सेट चाहिए ??? इस पर शाज़िया ने कहा नहीं मुझे अभी नहीं चाहिए मगर कुछ दिन बाद लूँगी आप से। आप अधिक से अधिक अच्छी शैली में मंगवा कर रखें। मैंने कहा ठीक है, अभी और भी अच्छी शैली के पड़े हैं, उसके अलावा कल नया माल आना है यह इस तरह के और भी अच्छे-अच्छे और सेक्सी शैली के ब्रा होंगे जिन्हें जब आप पहन कर अपने प्रेमी के सामने जाएंगी तो वह पागल हो जाएगा। मेरी यह बात सुनकर नीलोफर हंसी और बोली, उसका प्रेमी तो उसे वैसे ही देख ले तब भी पागल हो जाता है। यह कह कर शाज़िया और नीलोफर दोनों ही जोर से हंसने लगीं तो नीलोफर ने कहा, भाई यह ट्राई करने जा रही हूँ थोड़ा समय लग जाएगा प्लीज़ टेन्षन मत लेना मैंने कहा ठीक है आप तसल्ली से ट्राई करें। 

नीलोफर और शाज़िया दोनों ही ट्राई रूम की तरफ चली गईं और अगले ग्राहकों का इंतजार करने लगा। नीलोफर और शाज़िया को ट्राई रूम में गए अब 2 से 3 मिनट ही हुए होंगे कि मेरे दिमाग की घंटी बजी। इस ब्रा पैन्टी की ट्राई मे तो लड़की को पूरा नंगा होना पड़ता है। अगर खाली ब्रा चेक करना हो तो केवल ऊपर से नंगा होना पड़ता है मगर ब्रा पैन्टी सेट ट्राई करने के लिए ऊपरी भाग के साथ निचले हिस्से को भी उजागर करना पड़ता है। और लड़कियां आमतौर तौर पर एक दूसरे के सामने अपने मम्मे तो दिखा देती हैं मगर अपनी चूत और गाण्ड नंगे नहीं करती। जबकि यहाँ शाज़िया और नीलोफर दोनों ही ट्राई रूम में मौजूद थीं। एक पल के हजारवें हिस्से में मेरे मन में कई विचार आए और चले गए मैंने अपने विचारों को गलत करने की कोशिश की मगर ऐसा न हो सका। अंत में मुझसे रहा नहीं गया और मैंने सोचा देखूँ तो सही कि अंदर दोनों क्या कर रही हैं ??? यह सोच कर मैंने अपने कंप्यूटर से ट्राई रूम का कैमरा ऑन किया और अपनी कंप्यूटर स्क्रीन ऑन कर ली। जैसे ही कैमरा चलाया अंदर का दृश्य देख मेरे 8 इंच के लंड ने अंगड़ाइयाँ लेना शुरू कर दीं अंदर नीलोफर काले रंग के ब्रा मे थी जो उसका अपना ही था जबकि शाज़िया बिल्कुल नंगी अपने 34 डी के मम्मे नंगे किए हुए थी और नीलोफर उसके बूब्स को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी जबकि शाज़िया सिसकियाँ ले रही थी और उसकी आँखें बंद हुए जा रही थीं। 


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

शाज़िया के छोटे हल्के ब्राउन रंग के निपल कड़े हो रहे थे उन पर नीलोफर अपनी ज़ुबान फेर फेर कर उसको और मजे दे रही थी। थोड़ी देर तक नीलोफर शाज़िया के बड़े मम्मों को प्यार करती रही फिर दोनों सीधी खड़ी हो गईं और शाज़िया ने नीलोफर का ब्रा भी उतार दिया। दोनों आपस में धीमी आवाज में बातें कर रही थीं जिसका मुझे कुछ पता नहीं लग रहा था क्योंकि अंदर कैमरा तो लगा था मगर माइक आदि नहीं था कि जिससे मुझे कुछ समझ आती कि दोनों क्या बात कर रही हैं। शाज़िया ने नीलोफर का काले रंग का ब्रा उतारा तो नीचे से 36 आकार के गोल और सुडौल गोरे चिट्टे मम्मे उछलकर निकले। नीलोफर के मम्मे एक जेली की तरह हिल रहे थे और उसके निप्पल भी शाज़िया की तरह छोटे ही थे और नपल्स के आसपास ब्राउन रंग का दायरा भी छोटा था। अब शाज़िया की बारी थी नीलोफर ने निपल्स को चाटने को कहा और शाज़िया भी नीलोफर की तरह बहुत प्यार और कौशल के साथ नीलोफर के मम्मों को चूस रही थी। शाज़िया थोड़ी सी झुकी हुई थी और एक मम्मा अपने मुँह में ले रखा था जबकि दूसरे मम्मे के नपल्स को शाज़िया अपने हाथों की उंगलियों से धीरे धीरे मसल रही थी जिससे नीलोफर की सिसकियाँ निकल रही थीं। कैमरे में उसके चेहरे के भाव से अनुमान लगा सकता था कि नीलोफर बहुत मुश्किल से अपनी सिसकियों को रोक रही थी उसे निश्चित रूप से इस बात का भी डर था कि कहीं उसकी सिसकियाँ निकल कर मेरे कानों तक न पहुंच जाए। 


कुछ देर नीलोफर के मम्मे चूसने के बाद अब दोनों सीधी खड़ी हो गईं थी और दोनों एक दूसरे के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों को चूस रही थीं। कभी नीलोफर शाज़िया के पतले-पतले सुंदर होठों को अपने होठों से और जीभ से चूसती तो कभी शाज़िया नीलोफर के थोड़ा मोटे एंजेलीना जोली जैसे होंठों को अपने मुँह में लेकर उनको चूसने लगी। फिर नीलोफर ने अपनी ज़ुबान निकाली और शाज़िया ने होठों पर अपनी जीभ का दबाव बढ़ाया तो शाज़िया ने अपना मुंह खोल दिया जिसके बाद नीलोफर ने अपनी ज़ुबान शाज़िया मुँह में प्रवेश करा दी और उसको गोल गोल घुमाने लगी। शाज़िया भी नीलोफर की ज़ुबान को अपनी जीभ से चूसने लगी थी। थोड़ी देर के बाद शाज़िया की ज़ुबान नीलोफर के मुंह में पहुंच चुकी थी। कुछ देर बाद मैंने देखा कि नीलोफर नीचे बैठ गई थी और उसने शाज़िया की सलवार उतार दी थी। शाज़िया ने पैन्टी नहीं पहनी थी, मुझे कैमरे में उसकी चूत तो नज़र नहीं आई क्योंकि कैमरे का एंगल ऐसा था कि शाज़िया जिस साइड पर खड़ी थी वहाँ से उसकी चूत कैमरे में नहीं आ सकती थी लेकिन उसकी गोरी गोरी टाँगें और पूरा शरीर कैमरे में नज़र आ रहा था, लेकिन कैमरा ऊपर होने के कारण उसकी चूत नज़र नहीं आ रही थी। नीलोफर ने शाज़िया की सलवार उतार ही अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी चूत पर रख दी थी और उसको चाटने लगी थी, शाज़िया ने अपना हाथ नीलोफर सिर पर रख लिया था और मुंह ऊपर की ओर करके आंखे बंद कर अपनी सिसकियाँ नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी। इधर मेरा हाथ अपनी सलवार के ऊपर से ही लंड को पकड़ कर उसकी मुठ मारने में व्यस्त था।


मैं बड़ी एकाग्रता के साथ शाज़िया और नीलोफर का सेक्स देख रहा था कि अचानक मुझे एक झटका लगा जब मुझे राफिया की आवाज़ सुनाई दी, न जाने वो कब अंदर आई और अंदर आकर मेरे सामने खड़ी हो गई, उसने मुझे सलाम किया था। उसकी आवाज सुनते ही मुझे एक झटका लगा। मैंने ऊपर मुंह करके देखा तो वह मुझे काफी परेशान नजर आ रही थी। शायद उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं इस समय अपने लंड के साथ खेलने में व्यस्त था। राफिया को देखकर जो मुझे झटका लगा था इस पर मैने कुछ सेकंड में ही काबू पा लिया था और अपना हाथ लंड से हटाकर कंप्यूटर स्क्रीन भी बंद कर दी थी। चूँकि कंप्यूटर स्क्रीन काउन्टर के अंदर नीचे इस तरह पड़ी थी कि सामने खड़े व्यक्ति की उस पर नजर नहीं पड़ सकती थी कि मैं क्या देख रहा हूँ, लेकिन फिर भी दिल में चोर था इसलिए मैंने स्क्रीन बंद कर दिया और मुस्कुराते हुए राफिया की ओर देखा। मैंने पूछा जी राफिया जी क्या हाल हैं आपके। उसने कहा मुझे वास्तव में वह चाहिए था। मैंने कहा वह क्या ?? राफिया की कपकपाती आवाज आई वह ...... वह वास्तव में मुझे ..... वह ...... ब्रा चाहिए था। अंतिम शब्द उसने काफी जल्दी में चुकाए जैसे उसको कठिनाई हो रही हो ब्रा शब्द बोलते हुए। इससे मुझे पता चल गया था कि राफिया एक शरीफ और सुलझी हुई लड़की है और वह नीलोफर और शाज़िया की तरह बोल्ड नहीं है। 

मैंने कहा जी राफिया जी में आपको ब्रा दिखा देता हूँ, आपका आकार क्या है ??? मेरी इस बात पर राफिया चुप खड़ी रही .... मैंने एक बार फिर से बोला कि राफिया आपका आकार क्या है ??? इस पर राफिया की घुटी-घुटी आवाज़ आई और वह बोली मुझे नहीं पता। मैं उसकी इस बात पर हैरान हुआ और कहा क्या मतलब ??? आपको अपने ब्रा के आकार नहीं पता ?? इस पर राफिया ने फिर से घटी हुई आवाज में कहा, पहले अम्मी ला देती थी मुझे, मैंने कभी नहीं लिया न मुझे आकार पता है अपना। फिर मैंने राफिया को रिलैक्स करने के लिए कहा चलिए कोई समस्या नहीं मगर ये बताएँ आज आप अकेले आईं हैं नीलोफर और शाज़िया के साथ क्यों नहीं आईं ??? तो राफिया कहा बस ऐसे ही अगर मैं उनके साथ आती तो वह मुझे चिड़ाती, और वैसे भी वे महंगे महंगे ब्रा लेती हैं मेरे पास इतने पैसे नहीं कि महंगा ब्रा ले सकूँ, मुझे बस एक साधारण सा दे दीजिए उनके साथ मैंने कभी खरीदारी नहीं की। राफिया की इस बात से मुझे पता चल गया था कि उसका संबंध मेरी तरह ग़रीब परिवार से है और वह एक अभिमानी लड़की है, जबकि नीलोफर और शाज़िया उसकी गरीबी का मजाक उड़ाती होंगी जिसकी वजह से राफिया ने उनके सामने ब्रा नहीं खरीदा। यह सोच कर मैंने ठान लिया था कि राफिया को शाज़िया और नीलोफर से भी अच्छा और महंगा अच्छी गुणवत्ता का ब्रा दूंगा मगर इससे कीमत आम ब्रा वाली ही लूँगा। 

फिर मैंने कहा कोई बात नहीं राफिया जी, इंसान अपने चरित्र और सीरत से बड़ा बनता है, पैसे से नहीं। अगर आपके पास ज्यादा पैसे नहीं तो आपको इन दोनों से दबने या उनसे प्रभावित होने की जरूरत नहीं है। मैं आपको अच्छे वाले ब्रा ही दिखाऊंगा, और पैसे की आप चिंता न करें, मैंने उन पर सेल लगानी है अगले सप्ताह से, तो आपके लिए यह कर सकता हूं कि अगले सप्ताह के बजाय आज ही आपको इस सेल वाली कीमत पर ब्रा दे दूंगा। इस पर राफिया को थोड़ी खुशी हुई मगर फिर अपनी खुशी छिपाते हुए बोली कि मगर सेल अगले सप्ताह लगनी है तो मुझ से आज क्यों सेल वाली कीमत लेंगे आप ??? मैंने कहा कुछ नहीं बस वैसे ही। तुम और मैं ग़रीब परिवार से हैं, और अभिमानी भी हैं, तो यह तो नहीं कर सकता कि यही ब्रा जो पूरी कीमत पर बेच रहा हूँ वह आपको आधी कीमत पर दूँ क्योंकि मुझे पता है आपको यह अच्छा नहीं लगेगा। अलबत्ता जिन ब्रा पर मैंने सेल लगानी है उसमें से ही मैं आपको आज दे देता हूँ, वैसे भी एक सप्ताह तक वह बंद पड़े रहेंगे सेल तो करनी नहीं अभी तो उम्मीद है आपको इस बात पर आपत्ति नहीं होगी। इस पर राफिया कहा ठीक है मगर शाज़िया और नीलोफर को न पता लगे कि मैंने सेल वाले माल में से ब्रा खरीदा था वरना वह मेरा मजाक उड़ाएँगी 


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

मुझे यह बात सुनकर राफिया की मासूमियत पर बहुत प्यार आया और शाज़िया और नीलोफर पर गुस्सा भी आया। मगर मैंने राफिया पर प्रकट नहीं होने दिया कि वे दोनों इस समय अंदर ट्राई रूम में हैं और क्या हरकतें कर रही हैं। मैंने फिर राफिया पूछा कि अब आपका आकार क्या है? अगर आपके पास कोई पुराना ब्रा पड़ा है तो मुझे दिखा दें में उससे अनुमान लगा लूँगा आपका आकार। राफिया ने कहा मेरे पास 2 ही ब्रा है, एक घर पड़ा है और एक मैंने पहन रखा है। फिर मैंने राफिया के सीने पर एक सरसरी सी नजर डाली, लेकिन उसके बूब्स का अनुमान लगाना मुश्किल था क्योंकि उसने ऊपर एक चादर ली हुई थी। फिर मैंने राफिया के शरीर पर एक नज़र डाली, मेरे अनुसार उसकी कमर 27 या 28 की थी, वो बहुत दुबली सुंदर लड़की थी, लेकिन उसके सीने पर नजर डालने से लगता नहीं था कि उसका ब्रा आकार भी छोटा होगा, फिर भी एक 32 नंबर वाला ब्रा निकाला और राफिया को दिखाकर कहा यह देखना क्या यह ब्रा आपके आकार के अनुरूप होगा? राफिया ने ब्रा पर एक नज़र डाली और बोली सेल में केवल ऐसे ही ब्रा है? कोई अच्छे वाले नहीं? मैंने कहा अरे राफिया जी आपको अच्छे वाले ब्रा ही दिखाऊंगा यह तो आपको इसीलिए दिखा रहा हूँ ताकि आप अपने आकार के बारे में बता सकें। मेरी बात सुनकर राफिया ने ब्रा को ध्यानपूर्वक देखा, इस दौरान मैंने नोट किया कि वह ब्रा पर नज़र डालते हुए भी शर्मा रही थी। फिर उसने कहा कि नहीं यह छोटा होगा मुझे। मैंने मन ही मन सोचा वाह जी वाह, इस दुबली पतली लड़की के भी मम्मे तो बड़े होंगे। 

फिर मैंने एक 36 नंबर का ब्रा उठाया और वह दिखाया, उसको देखकर राफिया ने कहा नहीं यह बड़ा होगा मेरे। मैंने अनुमान लगा लिया था कि उसका आकार 34 होगा, लेकिन मैंने जानबूझ कर 36 नंबर दिखाया था। फिर मैंने राफिया को कहा, अगर आप बुरा न मानें तो एक बार अपनी चादर थोड़ी सी हटा लें सामने से, मुझे देख कर अनुमान हो जाएगा आपके आकार का फिर मैं आपको ऐसे जबरदस्त ब्रा दिखाऊंगा जो नीलोफर और शाज़िया के पास भी नहीं होंगे ... मेरी बात सुनकर राफिया ने बुरा सा मुँह बनाया, लेकिन शुक्र है मुझे कुछ कहा नहीं उसने और फिर बोली नहीं आप इससे छोटा दिखा दें जो आप ने अभी दिखाया है। और जो पहले दिखाया था उससे थोड़ा बड़ा हो। मैं समझ गया कि राफिया के मम्मों पर नज़र डालना अब मेरी किस्मत में नहीं। कोई और लड़की होती तो मैं उसे मना कर देता उसको मगर न जाने क्यों राफिया की मासूमियत मुझे अच्छी लगी थी और मैंने उसे तंग करना उचित नहीं समझा। मैंने अपने पास पड़ा सबसे अच्छी गुणवत्ता का ब्रा राफिया को दिखाया जो 2000 रुपये में सेल करता था। 34 आकार का यह ब्रा नीले रंग का था, वायर्ड कपड़ा था मगर कप के अंदर फोम मौजूद था, और कप के तले में एक छोटी सी तार भी लगी हुई थी जिसे रंग बोलते हैं। इस रंग की वजह से ब्रा बूब्स को बहुत अच्छा कंफर्ट देता है और उन्हें ऊपर उठाकर गोल शेप भी देता है और फोम के कारण मम्मे भी बड़े लगते हैं। मैं ने यह ब्रा राफिया दिखाया और कहा देखो, कितना प्यारा ब्रा है, बहुत अच्छा लगेगा आप पर। इस ब्रा पर छोटे चौटे गोल्डन स्टार भी लगे हुए थे जो बहुत सुंदर लग रहे थे। राफिया ने ब्रा देखा तो उसकी आंखों में एक चमक सी आ गई। उसने कहा लेकिन यह तो बहुत महंगा होगा। मैंने पूछा तुम तो ये बताओ यह आकार सही रहेगा आपके लिए ??? इस पर राफिया ने कहा जी यह सही है। मैंने कहा बस फिर तुम ले लो, महंगे की चिंता न करें, यह सेल में अगले सप्ताह लगाने हैं। 

राफिया ने कहा मगर इतना अच्छा और महंगा ब्रा आप सेल में क्यों लगाएंगे ??? मैं एक पल के लिए सोच में पड़ गया कि उसे क्या जवाब दूँ, वास्तव में कोई भी दुकानदार अच्छी चीज़ सेल में नहीं लगाता बल्कि हल्की गुणवत्ता की चीज सेल में लगाई जाती है, लेकिन मेरे मन ने मेरा साथ दिया और मैंने तुरंत ही उसको कहा वास्तव में यहाँ इतना महंगा ब्रा खरीदता कोई नहीं, अधिक से अधिक 1000 से 1500 तक के खरीदते हैं यह मैंने विशेष अपनी पसंद के अनुसार मंगवाए थे मगर किसी लड़की ने नहीं खरीदा यह केवल 2, 3 लड़कियों ने खरीदे हैं जिनकी शादी होने वाली थी उन्हो ने अपनी हनीमून के लिए खरीदा है, उसके अलावा यह खाली पड़े हैं। इसलिए उन्हें सेल में लगाना है। मेरी बात सुनकर राफिया संतुष्ट हो गई और बोली कितने पैसे दूं उसके? मैंने कहा बस 500 दे। इस पर राफिया बहुत खुश हुई और उसने अपने पर्स से 500 रुपये निकालकर मुझे पकड़ाए, और मैंने ब्रा एक शापर में डाल राफिया को पकड़ा दिया, राफिया ने वह शापर अपने कॉलेज बैग में डाला और बिना कुछ कहे सुने तुरंत दुकान से निकल गई। 

काफी देर तक राफिया के बारे में सोचता रहा कि कितनी सीधी साधी और अच्छी लड़की है, फिर अचानक मुझे अपने ट्राई रूम की याद आ गई जहां नीलोफर और शाज़िया एक दूसरे के प्यार में व्यस्त थीं। मैंने फिर से कंप्यूटर स्क्रीन पर उनकी ओर का कैमरा आन किया तो अब नीलोफर की सलवार उतरी हुई थी और उसके 34 आकार के चूतड़ों को कैमरा बड़े सुंदर एंगल से दिखा रहा था। जबकि उसके सामने शाज़िया अपनी जीभ से नीलोफर की चूत चाट रही थी और नीलोफर नीचे मुंह करके शाज़िया को तेज तेज चाटने के लिए उसका सिर पकड़ कर अपनी चूत से दबा रही थी। दोनों को अंदर गए करीब 15 से 20 मिनट हो चुके थे। कुछ देर शाज़िया नीलोफर की चूत को अपनी जीभ से चाट्ती रहा फिर अचानक नीलोफर के शरीर को झटके लगने शुरू हुए और उसकी चूत का पानी निकलने लगा। चूत का पानी निकालने से पहले नीलोफर ने शाज़िया को साइड में कर दिया था जिसकी वजह से उसका चेहरा बच गया और नीलोफर की चूत का सारा पानी ट्राई रूम की लकड़ी की दीवारों पर जाकर गिरा। जब सारा पानी निकल गया तो नीलोफर ने अपना ब्रा उठाया और अपनी चूत का पानी साफ किया और ट्राई रूम में जहां जहां उसे पानी की बूंदें दिखाई दी वह उसने मेरी ब्रा से साफ कर दिए, उसके बाद वही ब्रा उसने पहन लिया और दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल आईं।

जब वह ट्राई रूम से निकल कर बाहर मेरे सामने आईं तब तक मैं कैमरा और कंप्यूटर स्क्रीन बंद कर चुका था। उनको देखकर मैंने मुस्करा कर पूछा कैसा लगा तो मज़ा आया आपको? मजे की बात सुनकर नीलोफर और शाज़िया दोनों ने एकदूसरे को देखा और परेशानी के आसार उनके चेहरे पर दिखने लगे। मैंने द्वइर्थी बात की थी और मेरा निशाना ठीक निशाने पर लगा था, लेकिन मैंने उन्हें अधिक परेशानी से बचाने के लिए तुरंत कहा, यह जो आपको ब्रा पैन्टी सेट दिखाए थे यह ब्रा सेट ही ऐसी है। मुझे तो देख कर ही बहुत पसंद आया था और मुझे विश्वास है कि जो भी लड़की इसे पहनेगी उसे मजा आएगा और मुझे थॅंक्स कहेगी वह। यह सुनकर नीलोफर हल्का सा मुस्कुराई और बोली वाकई चीज़ तो अच्छी है। मैंने कहा आकार आदि तो ठीक था न दोनों का ???



नीलोफर ने कहा हां बिल्कुल फिट था। मैंने फिर पूछा सेटिंग में कोई मुश्किल तो पेश नहीं आई, नीलोफर ने कहा नहीं, बस थोड़ा सा प्रॉब्लम था वह शाज़िया से सही करवा लिया मैंने। मैंने कहा हां यह पहनने के लिए कुछ जानकारी होनी चाहिए। अब शुरुआत में आपको परेशानी होगी मगर आप यहाँ आती जाती रहीं तो आपको शाज़िया की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। और चीज़ का मज़ा भी आएगा। मेरी इस बात पर भी नीलोफर थोड़ी सी परेशान हुई वह शायद समझ नहीं पाई थी कि मैंने क्या कहा है। 





फिर नीलोफर ने मुझसे पैन्टी और ब्रा सेट की कीमत पूछी तो मैंने राफिया को दिए गए ब्रा की कीमत का भी कुछ हिस्सा उनके ब्रा पैन्टी सेट में जमा करके उनको बता दिया और वह बिना कुछ कहे पैसे देकर चली गईं और मैं अब नीलोफर और शाज़िया की चुदाई की परियोजना बनाने लगा। इतना तो कन्फर्म हो गया था कि दोनों सेक्स की प्यासी हैं। बस अभी तक यह समझ नहीं आई थी कि क्या दोनों के प्रेमी उनको चोदते भी हैं या बस चुंबन और डेटिंग तक ही बात है अब। यह जानना इतना आसान काम नहीं था लेकिन अगर हिम्मत से काम लिया जाता तो ऐसा भी मुश्किल नहीं था। खैर काफी दिन हो गए थे और शाज़िया और नीलोफर दुकान पर नहीं आई, न ही राफिया फिर एक दिन लैला मेडम दुकान पर आई और उन्होंने अपने लिए ब्रा दिखाने को कहा। मुझे उनका ब्रा आकार पता था जोकि 36 था। और उनकी गाण्ड भी अब मुझे उनके साथ रह रहकर अनुमान हो गया था, 32 गाण्ड और 30 कमर। मेडम की आयु अब 32 के लगभग थी और इस उम्र में भी वह किसी जवान औरत की तरह ही सुंदर और स्मार्ट थीं।




लैला मेडम को कुछ उनकी पसंद के ब्रा दिखाने के बाद मैंने उनसे पूछा मैम, मैं आपको कुछ अपनी पसंद के ब्रा दिखाऊ ??? आपको पसंद आएंगे। मैम ने कहा ऐसी क्या बात है उनमें ??? मैंने कहा बस आप देखो, मुझे यकीन है आपको बहुत पसंद आएंगे और आप सुंदर भी लगेंगी उनमें। मेरी बात सुनकर मैम बोलीं तुम्हारा मतलब है ऐसे सुंदर नहीं लगती ... ??? में खिसियानी हंसी हंसा और बोला नहीं मेरा वह मतलब नहीं था, आप बहुत सुंदर हैं, लेकिन दूसरे सौंदर्य की बात कर रहा हूँ। मैम ने कहा दूसरी सौंदर्य कौन? मैंने कहा मतलब जब आप पहन कर अपने पति के सामने जाएंगी तो वह बहुत खुश होंगे और दीवाने हो जाएंगे आपके। मेरी बात सुनकर लैला मेडम के चेहरे पर कुछ परेशानी और निराशा के भाव आ गए और मैं महसूस किया कि उनकी आँखों में हल्की सी नमी भी थी। 


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

मैंने पूछा क्या हुआ मेडम मेरी बात बुरी लगी क्या आपको ??? इस पर लैला मैम ने कहा नहीं, कुछ नहीं, तुम दिखाओ जो दिखाना चाह रहे थे। मैंने इसी तरह के खराब पैन्टी सेट निकाले जो नीलोफर को निकाले थे। ब्रा पैन्टी के इस सेट लैला मैम शरीर के हिसाब से बिल्कुल फिट थे और उनका सेक्सी शरीर इसमें और भी अधिक सेक्सी लगता। मैं ने 2, 3 डिजाइन दिखाए तो उनमें से एक लीला मैम को पसंद आया, मैंने पूछा कि यह आपके पति को भी बहुत अच्छा लगेगा। इस पर वह एकदम से फिर चुप हो गईं और बोलीं वह तो अपनी जगह से हिल भी नहीं सकते। मैं तो बस आम पहनने के लिए लेती हूँ। तुम जो दिखा रहे हो यह तो पति के साथ रात को पहनने के लिए हैं। जबकि मेरे पति जब से विकलांग हुए हैं तब से ............ यह कह कर लैला मैम चुप हो गईं।


उनकी आँखों में छुपा दर्द स्पष्ट हो गया था और उनकी आंखें काफी भीग गईं थीं। इस पर मुझे बहुत अफसोस हुआ, वास्तव में इस घटना में लैला मैम के पति की रीढ़ की हड्डी को काफी नुकसान पहुंचा था यही कारण था कि वे अब अपनी जगह से हिल भी नहीं सकते थे और सही तरह सेक्स करने में सक्षम भी नहीं रहे थे। 

यह सोच कर ब्रा पैन्टी का वह सेट उठाकर वापस रखने लगा मगर लैला मेडम ने मुझे वह रखने से मना कर दिया और बोलीं यह बताओ तुम्हें उनमें से कौन सा पसंद है, मैंने उन्हे अपनी पसंद का ब्रा पैन्टी सेट बता दिया। लैला मेडम ने कहा ठीक है यह भी शापर में डाल दो। मैंने कहा लेकिन मैम जब आपको जरूरत ही नहीं तो क्यों ले रही हैं? लैला मैम ने कहा बस ऐसे ही, आप की तरफ से हैं इसलिए। बस तुम रखो। एक पल के लिए मेरे मन में आया कि शायद लैला मैम ने किसी और पुरुष के साथ चक्कर चला रखा है, मगर फिर अपने इस विचार को मन से झटक कर मैंने उनका ब्रा पैन्टी सेट शापर में डाला और उसके साथ दूसरा ब्रा भी रख दिया जो उन्होंने पसंद किया था। मेरे हाथ से शापर पकड़कर लैला मैम ने पैसे चुकाए और चली गईं। 

अब लैला मैम को गए हुए 5 मिनट भी नहीं हुए थे कि शाज़िया ने दुकान में प्रवेश किया। करीब 2 बजे का ही समय था जब मैं दुकान का दरवाजा बंद कर देता था, और उस समय दुकान पर कोई ग्राहक भी मौजूद नहीं था। आज शाज़िया अकेली थी और उसके साथ कोई और मौजूद नहीं था। मैंने शाज़िया का मुस्कुरा कर स्वागत किया और उसका हालचाल पूछा। उसने भी बड़ी खुशी खुशी जवाब दिए और उत्तर में मेरा भी हाल चाल पूछा। मैंने कहा बस जब से आपने ब्रा पैन्टी का सेट लिया है बुरा हाल है ... मेरी बात सुनकर शाज़िया ठिठक गई और बोली- क्या मतलब? मैंने स्पॉट चेहरा बनाकर कहा कुछ नहीं बस उस दिन से बुखार हो गया था, और कुछ कब्ज की शिकायत थी, अब काफी बेहतर है, लेकिन अभी तक पूरी तरह ठीक नही हुई। मेरे जवाब से शाज़िया रिलैक्स हो गई। उसके मन में यही बात आई थी कि मैंने इन दोनों को सेक्स शो देख लिया होगा, लेकिन मैंने अगला बहाना इतने कौशल किया कि उसे किसी प्रकार का भी शक नहीं हुआ। फिर उसने मुझसे पूछा कि मुझे कुछ इसी प्रकार के ब्रा पैन्टी सेट चाहिए वह बहुत सुंदर हैं। मैंने कहा पहले ये बताएँ कि नीलोफर जी ने लिए थे वे कैसे लगे ??? शाज़िया कहा वे अच्छे लगे हैं, इसीलिए तो मैं लेने आई हूं ..

मैंने कहा नहीं आपको तो अच्छे ही लगे थे नीलोफर जी के प्रेमी का पूछ रहा हूँ उन्हें कैसे लगे? वह तो देखकर पागल हो गए होंगे ??? मेरी बात पर शाज़िया थोड़ी हिचकी और फिर बोली, हां उसे भी पसंद आया है। मैंने फिर पूछा करते क्या हैं भाई साहब ??? इस पर शाज़िया ने कहा पता नहीं मैंने कभी नीलोफर से पूछा नहीं। फिर मैंने शाज़िया से पूछा कि आपके प्रेमी क्या ??? तो शाज़िया ने कहा वह लाहौर रहता है और वह भी स्टूडेंट है। मैंने कहा लगता है वह जल्द आने वाले हैं मुल्तान जो आप ब्रा और पैन्टी लेने आई हैं .. इस पर शाज़िया ने मेरी तरफ आश्चर्य से देखा और पूछा मेरे ब्रा और पैन्टी लेने का उसके यहां आने से क्या संबंध ?? 


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

मैंने शाज़िया को कहा कि यह ब्रा पैन्टी सामान्य परिस्थितियों में कपड़ों के नीचे पहनने के लिए तो नहीं, यू ही अपने साथी को ही पहनाए जाते हैं। वे आ रहे होंगे तभी तो आज आई आप यह खरीदने . इस पर शाज़िया ने कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने हैरान होकर कहा यह आप किसके लिए ले रही हैं ??? शाज़िया कहा अपने लिए ही लेने हैं। मैंने फिर पूछा नहीं लेने तो अपने लिए हैं, लेकिन यह किसी के लिए ही पहनेंगी न आप। अकेली पहनकर तो कमरे में नहीं बैठेगी ना। मेरी बात पर शाज़िया कुछ देर चुप रही, फिर बोली आपको इससे मतलब? आप बस वो दिखाओ जो मांग रही हूँ। मैंने इससे ज्यादा कुरेदना उचित नहीं समझा इसलिए शाज़िया को और भी सेक्सी ब्रा पैन्टी सेट दिखाने लगा .. ये चीजें देखते हुए फिर शाज़िया खुद ही बोली, इससे पहले कि मेरे बारे में तुम कोई गलत राय कायम करो मैं तुम्हें बता ही देती हूँ कि नीलोफर और मैं यह क्यों खरीद रही हैं। वास्तव में आजकल के लड़कों की भी अलग फरमाईशें होती हैं, उल्टी-सीधी फिल्में देखते हैं, पत्रिका देखते हैं, तो फोन पर अपनी प्रेमिका से फरमाइशें करते हैं कि हमें ऐसी रात में, ऐसे ब्रा में अपनी छवि बनाकर वाट्सअप करो। तो बस हम यह पहन कर अपने अपने प्रेमी को तस्वीरें भेज देती हैं। इससे आगे और कुछ नहीं है ... मैंने एक हल्का सा ठहाका लगाया और कहा बात तो आपकी ठीक ही है, यह अमीर लोगों के ही चौंचले हैं, हम तो सीधा सीधा प्रेमिका को घर बुलाते हैं या खुद उसके घर पहुँच जाते हैं, और काम हो जाता है .... । 

शाज़िया ने चौंक कर मेरी तरफ देखा और बोली क्या मतलब ??? मैंने हँसते हुए कहा शाज़िया जी मेरे कहने का मतलब है कि अपडेट मारते हैं सीधे सीधे, इस तरह मोबाइल में तस्वीरें देखकर खुश होना और अजीब हरकतें करना फिर गर्म होकर, उसका भला क्या फायदा। आप हजार ऐसी तस्वीरें देख लो मगर जो आराम प्रेमिका के कंधे पर सिर रखने से मिलता है वह ऐसी तस्वीरों में कहाँ ?? शाज़िया ने कहा हां बात तो ठीक है तुम्हारी। आप कितना पढ़े हो ??? 


मैंने कहा बस जी मैट्रिक पास हैं। शाज़िया कहा मैट्रिक पास करके भी तुम्हें इतनी बुद्धि है मगर वह इंजीनियर बन रहा है और उसे इतनी बुद्धि नहीं। फिर मैंने शाज़िया से कहा शाज़िया जी ये इतने पैसे आप केवल फोटो बनाने के लिए बर्बाद कर रही हैं ??? इस पर शाज़िया ने कहा मजबूरी है, वरना नवाब साहब नाराज होने और बात ना करने की धमकी देते हैं। मैंने कहा तो उसका समाधान है ना मेरे पास ... आप बजाय 3, 4 हजार रुपये बर्बाद कर के प्रेमी को खुश करने के लिए, आप बस मुझे 500 रुपये दो, और यहाँ मौजूद जो नाइटी आपको पसंद आए वह पहन कर आप अपनी तस्वीर बनाएँ और इसे भेज दें। आपके पैसे भी बच जाएंगे और प्रेमी की ठरकी भी पूरी हो जाएगी। 

मेरी बात सुनकर शाज़िया थोड़ा मुस्कुराई, शायद वह ठरकी शब्द सुनकर मुस्कुराई थी। मगर फिर शाज़िया बोली नहीं आज नीलोफर भी नहीं है जो यहाँ मेरी फोटो बना सके, और मुझे आज ज़रूर अपनी फोटो भेजनी है वरना श्री साहब का 4 दिन मोबाइल बंद रहेगा। मैंने कहा तो इसमें कौन बड़ी बात है बनाता हूँ न आपकी तस्वीरें। और फोटो भी ऐसे ऐसे एंगल से बनाउन्गा कि आपके नवाब साहब छवि देखकर ही खत्म हो जाएंगे। मेरी इस बात पर शाज़िया ने मुश्किल से अपनी हंसी को नियंत्रित किया और बोली नहीं धन्यवाद आपका बहुत बहुत मैं 4 हजार खर्च कर लूँगी। मैंने धीमी सी आवाज़ में कहा शाज़िया जी क्या यार, किसी गरीब का लाभ भी होने दें। मगर शाज़िया ने मेरी बात सुन ली और बोली क्या मतलब? किसका फायदा ??? मैं अपनी चोरी पकड़े जाने पर पहले तो सटपटा गया लेकिन फिर हिम्मत करके बोला लाभ क्या होना बस हम भी आंखें सेक लेंगे अपनी थोड़ी। इस पर शाज़िया के चेहरे पर थोड़े गुस्से के आसार आए और वह बोली मुझे पहले से ही पता था कि तुम्हारी बुरी नजर मुझ पर। बस आप इन चीजों के पैसे बताओ, तस्वीर में खुद बना लूँगी आप अधिक ध्यान मत दो मुझ पर मैंने मन में सोचा कि बस कर सलमान अब, यह लड़की काबू आने वाली नहीं, ग्राहक खराब न कर। यह सोच कर मैं उसका ब्रा पैन्टी सेट का बिल बनाने लगा, मगर फिर याद आया कि शाज़िया ने उन्हे पहन कर चेक तो किया ही नहीं .... यहाँ मेरे मन में फिर एक अंतिम ट्राई मारने का प्लान आया तो मैंने शाज़िया से कहा शाज़िया जी बिल तो मैं बनाता हूँ, लेकिन आप पहले ट्राई तो कर लें ... शाज़िया ने कहा नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं, बस मुझे पता है कि यह मुझे ठीक आते हैं। मैंने कहा शाज़िया जी अगर सही न हुए और छोटे बड़े रह गए तो उनकी वापसी नहीं होगी। 


RE: ब्रा वाली दुकान - sexstories - 06-09-2017

इस पर शाज़िया ने कुछ देर सोचा और फिर बोली नहीं बस ठीक है, ट्राई करने के लिए कोई जरूरत नही है। मुझे फिर दाल गलती नजर नहीं आई तो मैंने फिर से शाज़िया पूछा शाज़िया जी आपने भी कभी अपने प्रेमी से फोटो मांगी है इस तरह की बातों पर। इस पर शाज़िया हंसी और बोली लड़कों की इस तरह की बातें कहां होती हैं ??? उनका तो बस अंडर और ही होता है। मैंने कहा अगर आपको चाहिए तो लड़कों की भी ऐसी चीजें मिल जाती हैं। इस पर शाज़िया मुस्कुराई और बोली पड़ी हैं आपके पास ??? मैंने कहा हां दिखाऊ क्या ??? शाज़िया ने कहा हां दिखाओ 


मैं एक जेंट्स अंडर वेयर निकाल कर दिखाया जो कराची से बहुत कम मात्रा में लाया था कि अगर कोई मेल ग्राहक मांग ले तो उसके लिए भी हो। यह था तो अंडर वेअर ही, लेकिन इसमें अगले हिस्से पर एक जेब या पर्स के लिए वह बनी हुई थी। जो लंबी सी थी। शाज़िया ने देखा और उसे पकड़ कर हंसती हुई बोली अरे यह किस लिए बनी हुई है ??? मैंने कहा शाज़िया जी आप खुद समझदार हैं कि यह किस लिए बनी हुई है, फिर शाज़िया को खुद ही अंदाजा हो गया और उसे अपनी गलती का भी एहसास हुआ, वह लज्जित सी होकर चुप हो गई मगर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान अब भी थी। यह वास्तव में जंगली प्रकार के सेक्स जोड़े के लिए थी, अंडर वेअर के सामने बनी इस थैली में लड़के का लंड आता है, और जब लंड खड़ा हो तो अंडरवेअर का भाग भी ऊपर खड़ा हो जाता है। जल्दी में शाज़िया ने पूछ तो लिया, लेकिन उसे देर से एहसास हुआ कि वास्तव में लड़के का लंड इस स्थान पर आता है। 

फिर मैंने शाज़िया से कहा, शाज़िया जी एक और चीज़ भी है, शायद वह आपको पसंद न आए, लेकिन आप कहती हैं तो दिखा देता हूँ आपको। शाज़िया बोली क्या चीज़ है। मैंने कहा सेक्स ट्वाय के रूप में उपयोग किया जाता है, और लड़कियों आपस में जो शरारतें करती हैं, तो उनके उपयोग के लिए भी अच्छी चीज़ है। शाज़िया के माथे पर बल आए और कहने लगी ऐसी कौन सी चीज़ है ???


इस बार उसकी आवाज में थोड़ी कपकपाहट थी। शायद उसे पता चल गया था कि उसे क्या चीज़ दिखाने वाला हूँ। मैं जानता तो था ही कि शाज़िया ने कैसे नीलोफर के साथ ट्राई रूम में लेसबो सेक्स किया था तो मेरे मन में आया कि शायद इसे एक डिल्डो की जरूरत हो जिससे यह अपनी प्यास बुझा सके। यही सोच कर मैंने शाज़िया को एक पैन्टी दिखाई जिसके साथ एक अदद लंड फिक्स होता है। राजशर्मास्टॉरीज के सदस्यों ने ऐसी पैन्टी कई अश्लील फिल्में देख रखी होगी जिसमें दो लड़कियां जब आपस में सेक्स करती हैं तो उनमें से एक लड़की लंड लगी हुई पैन्टी पहन लेती है और फिर नकली लंड यानी डिल्डो से दूसरी लड़की को चोदते है। मैंने यह जब शाज़िया को दिखाई तो कुछ मिनट के लिए तो वह बिल्कुल चुप खड़ी रही, बस चुपचाप कभी पैन्टी में लगे लंड देखती और कभी नजरें झुकाकर मरादाना अंडर वेअर देखने लगती। उसकी चुप्पी से मैं समझ गया कि वह लेना चाह रही है मगर संकोच कर रही है। अब मैंने फिर से शाज़िया को फँसाने का सोचा और शाज़िया से कहा, यह आपको बहुत पसंद आएगी, आपके कॉलेज से और लड़कियां भी मुझ से यह लेकर गई हैं, कुछ लड़कियाँ शरारत के रूप में आपस में ही सेक्स करती हैं, ऐसी लड़कियाँ जब एक दूसरे के शरीर को प्यार करती हैं तो स्वाभाविक रूप से उन्हें अपनी प्यास भी बुझाने की आवश्यकता होती है, और एक लड़की दूसरी लड़की की प्यास इस तरह नहीं बुझा सकती जिस तरह एक लड़का बुझा सकता है ..... आप समझ रहीं हैं न मेरी बात ???
इस पर भी शाज़िया ने कोई जवाब नहीं दिया। फिर मैं अपनी बात को जारी रखा, लड़की दूसरी लड़की की प्यास बुझा भी कैसे सकती है, असली बात तो लड़के के पास होती है जिससे लड़की की प्यास बुझे। । । लेकिन पैन्टी में वह चीज मौजूद है। अगर नीलोफर और आप चाहें, तो इसे पहन कर आपस में एकदोसरे खेल सकते हैं और अपने प्रेमी की दूरी से जो प्यास बढ़ जाती है, वह इस रंग की मदद से बुझाई जा सकती है। 



अब की बार शाज़िया की कपकपाती आवाज निकली ... म ..... मज ......... मजझे ै ...... यह न ....... न ..... ही चा ..... हुये ..... शाज़िया के हाथ काँप रहे थे और उसकी सांसें भारी हो रही थीं। मुझे लगने लगा कि अब लोहा गरम है, अब काम बन सकता है। मैंने कहा शाज़िया जी एक बार देखें तो सही, उम्मीद है आप उस पर लगी चीज का आकार भी पसंद करेंगी .



शाज़िया फिर अपने कांपते होंठों से बोली, पुल ...... प्लीज़ इसे वा ........ वापस ..... रखें ...... ज ..... ज ..... कोई आज ....... आ जाएगा .....


मुझे दरवाजे का विचार आया वो तो बंद ही है और बाहर से अंदर देखने पर नज़र नहीं आता मगर शाज़िया की बात सही थी किसी भी समय कोई आ सकता था। समय तो वैसे ही ब्रेक का हो चुका था, मैं काउन्टर से बाहर निकला और दरवाज़ा बंद करके दरावज़े पर दुकान बंद है का साइन बोर्ड लगा दिया। वापस आकर मैंने कहा लें शाज़िया जी, दुकान बंद हो गई और बाहर साइन बोर्ड भी लग गया कि दुकान बंद है। अब कोई अंदर नहीं देखेगा आप बेफिक्र होकर यह डिल्डो वाली पैन्टी की जाँच करें।


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