Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - Printable Version

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RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

आयशा आँटी की चुदाई

लेखक:- राजू राय

मेरा नाम राजू है। उस वक्त की बात है जब मैं उन्नीस वर्ष का था। दिखने में ठीक ठाक था। मेरी एक गर्ल फ्रेंड हुआ करती थी... उसका नाम सानिया था। वो बहुत खूबसूरत थी। जहाँ हमलोग रहते थे, वहाँ से सानिया का घर थोड़ी ही दूरी पर था। उसकी मम्मी को मैं आँटी कह कर बुलाता था। वास्तव में वो लोग कश्मिरी मुसलमान थे, और आप लोग तो जानते ही हैं कि कश्मिरी मुसलमान औरतें कितनी हॉट और सैक्सी लगती हैं। सानिया से ज्यादा अच्छी उसकी मम्मी लगती थी। उनका नाम आयशा था। आँटी की उम्र लगभग चालीस- बयालीस के आस पास थी। लेकिन देखने में बिल्कुल भी चालीस-बयालीस की नहीं लगती थीं। गोरी लंबी और बहुत खूबसूरत थी। वो अपने सैक्सी चाल-चलन और नाजायज़ संबंधों के लिए काफी मशहूर थीं। कईं लोगों के साथ उनके नाजायज़ संबंध थे, शायद इसलिए कि उनके शौहर काफी व्यस्त रहते थे और शायद आँटी की शारिरिक जरूरतें भी पूरी ना कर पाते होंगे।



जुलाई का महीना था और एक दिन मैंने और मेरे एक दोस्त ने ड्रिंक करने का प्रोग्राम दिन में ही बनाया। पहले हम लोगों ने ड्रिंक की और उसके बाद हमलोगों ने ब्लू फ़िल्म देखने का प्रोग्राम बनाया। थोड़ी देर बाद हम लोग ब्लू फ़िल्म देखने लगे और फ़िल्म देखने के बाद हम लोग बहुत उत्तेजित हो गये थे।



“यार! काश हमें भी कोई चूत मिल जाती चोदने के लिये!” मैंने आह भरते हुए कहा।



“तेरी तो गर्ल फ्रेंड है… सानिया… तू तो उसके साथ मज़े कर सकता है!” मेरे दोस्त ने कहा!



“कहाँ यार… कईं बार कोशिश कर चुका हूँ… लेकिन सानिया तो किसिंग और स्मूचिंग के आगे बढ़ने ही नहीं देती!” मैं बोला।



“लेकिन उसकी मम्मी तो एक नंबर की चालू छिनाल औरत है!” वो हंसते हुए बोला तो अचानक मेरे दिमाग में आया कि क्यों ना आयशा आँटी को ही पटाया जाय और उनके साथ चुदाई की जाये। दर‍असल आयशा आँटी मेरे साथ काफी फ्रेंडली थीं और मज़ाक वगैरह भी कर लेती थीं और उनकी रेप्यूटेशन भी खराब थी! इसलिये मुझे लगा कि शायद वो मान जायें और अगर नहीं भी मानी तो बात का बतंगड़ तो नहीं बनायेंगी। कहानी का शीर्षक 'आयेशा आँटी की चुदाई’ है!



मैंने वहीं से उन्हें फोन किया और कहा कि, “आँटी! मैं राजू बोल रहा हूँ और आप से कुछ बात करना चाहता हूँ!”



उन्होंने कहा, “बोलो?”



मैंने कहा, “आँटी ये बात फोन पर नहीं हो सकती... मैं आपके घर आ जाऊँ?”



आँटी ने कहा, “मैं तो अभी मर्किट में आयी हुई हूँ... तुम कहाँ हो इस वक्त?”



“मैं तो अपने दोस्त के घर पे हूँ... जो मार्केट के नज़दीक ही है और आपके रास्ते में ही है... अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो आप यहाँ मेरे दोस्त के घर पर आ जाइए!” मैंने कहा।



उन्होंने कहा, “कोई बात नहीं...अभी थोड़ी देर में आती हूँ।”



मैंने उन्हें पता बता दिया। उसके बाद हम लोग फिर से फ़िल्म देखने लग गये और घर का दरवाजा खुला छोड़ दिया। उस समय दरवाजे पर बेल बजी तो मेरा दोस्त दूसरे रूम में थोड़ी देर के लिए चला गया। मैंने कहा, “आँटी दरवाजा खुला है... आप अंदर आ जाइए।” वो अंदर आ गयी और अंदर मैं बैठा ब्लू फ़िल्म देख रहा था। आँटी फिरोज़ी रंग की सलवार कमीज और काले हाई हील के सैंडल में बहुत सैक्सी लग रही थीं। उन्होंने हल्का सा मेक-अप भी किया हुआ था। वो आते ही मुस्कुराते हुए बोलीं, “तो कॉलेज जाने की बजाय ये सब देख रहे हो…?”



“बस आँटी आज ऐसे ही मूड हो गया!" मैंने जवाब दिया।



“कोई बात नहीं... मैं समझती हूँ... तुम्हारी उम्र के लड़के तो ये सब करते ही हैं लेकिन अपनी आँटी के सामने कुछ तो लिहाज करो... अब बंद करो इसे...।” उन्होंने फिर मुस्कुराते हुए कहा मैंने सी.डी प्लेयर बंद कर दिया और वो मेरे पास आकर बैठ गयी और बोली, “क्या बात करनी है... बोलो।”



इतनी देर में मेरा दोस्त भी वहाँ आ गया। आयशा आँटी का अच्छा मूड देख कर मेरा हौंसला बढ़ा और मैंने हिम्मत करके बोल दिया, “आयशा आँटी आप बहुत खूबसूरत लगती हो और मैं आप के साथ चुदाई करना चाहता हूँ।”



मेरे बात सुनकर वो चौंक गयी और बोली, “तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या… मेरे लिए तू अभी बहुत छोटा है।” वास्तव में वो मेरे दोस्त के सामने कोई बात नहीं करना चहा रही थी।



जब उन्होंने कहा कि उनके लिये मैं बहुत छोटा हूँ तो ये सुनकर नशे की खुमारी में मैंने कहा, “आयशा आँटी! मैं तो आपके लिए शायद छोटा हूँ लेकिन मेरा लंड आपके लिये छोटा नहीं है।”



यह सुनकर वो गुस्से से बोली, “तूने मुझे समझ क्या रखा है… तुझसे हंस-बोल कर मज़ाक वगैरह कर लेती हूँ तो इसका मतलब तू… नशे में अभी तुझे होश नहीं है कि तू क्या कह रहा है…!” और आयशा आँटी वहाँ से चली गयी। मैंने रोकने की कोशिश भी नहीं की।



जब वो चली गयीं तो हम लोगों का मूड खराब हो गया और उसके बाद हमलोग फिर से ड्रिंक करने लगे। थोड़ी देर बाद मेरा दोस्त बाथरूम चला गया और उस समय आयशा आँटी ने मुझे फोन किया और कहा, “तू अभी कहाँ है... वहीं है क्या अभी भी? मुझे तुमसे कुछ बात करनी है... क्या तू अभी मेरे घर आ सकता है… लेकिन किसी को बता कर मत आना!”



मैंने कहा, “ठीक है मैं थोड़ी देर में आपके पास आता हूँ!”



थोड़ी देर बाद मेरा दोस्त भी बाथरूम से आ गया। हम लोगों का ड्रिंक भी खतम हो चुका था और उसको नशा भी चढ़ चुका था। तभी मैंने कहा कि “यार इसमें मज़ा नहीं आया... मैं अभी एक बोतल और लेकर आता हूँ”, तो उसने कहा, “नहीं यार! बहुत हो गयी है।”



लेकिन मुझे तो आयशा आँटी के घर जाना था, इसलिए मैंने उसके मना करने के बाद भी कहा, “नहीं यार मुझे मज़ा नहीं आया... मैं एक बोतल और लेने जा रहा हूँ!” और मैं वहाँ से चला गया और उसने घर का दरवाजा बंद कर लिया।



उस समय करीब तीन बज रहे थे। मैं आयशा आँटी के घर गया। वो घर पर अकेली थीं। उनकी बेटी (यानी मेरी गर्ल फ्रेंड) उस समय कॉलेज गयी थी और वो साढ़े चार बजे कॉलेज से आती थी। आयशा आँटी ने अभी भी वही कपड़े पहने हुए थे। मैंने उनसे पूछा, “घर में कोई है नहीं क्या?” तो वोह बोली, “नहीं इसलिए तो तुझे बुलाया है!”



ये सुनकर मैं थोड़ा हैरान हो गया। “वो आँटी सॉरी आपसे बदतमीज़ी करने के लिये… मैं पता नहीं… बस कैसे बहक गया था!” मैंने माफी माँगते हुए कहा।



तब उन्होंने कहा कि “कोई बात नहीं... मैं समझती हूँ... तेरी उम्र ही ऐसी है... अगर तू मुझे चोदना ही चाहता था तो ये बात तुझे अकेले में कहनी चाहिए थी... तूने तो अपने दोस्त के सामने ही कह दिया!” ये कहते हुए वोह मेरे गाल पर हाथ रख कर सहलाने लगी। मुझे बड़ा अजीब लग रहा था। मैं थोड़ा नशे में भी था, इसलिए कुछ अलग ही लग रहा था। उसके बाद उन्होंने कहा, “मैं तुझे अच्छी लगती हूँ क्या?”



मैंने कहा, “हाँ आँटी... आप बहुत खूबसूरत और सैक्सी हो।”



तब आयशा आँटी कहा, “लेकिन तू तो मेरे बेटी को पसंद करता है!” कहानी का शीर्षक 'आयेशा आँटी की चुदाई’ है!



मैंने कहा, “आँटी आपको कैसे पता?”



तब वो बोलीं, “बेटा मुझे सब कुछ पता है।” उसके बाद मुझसे पूछा कि “कोल्ड ड्रिंक पीयोगे?”



मैंने कहा, “हाँ! प्यास तो लग रही है!”



आयशा आँटी अंदर चली गयी और लगभग दस मिनट बाद बाहर आयी। मैं उनको देख कर हैरान रह गया। मेरा सारा नशा जैसे गायब हो गया हो। वो एक सफ़ेद रंग की पतली सी पारदर्शी ड्रेस पहने हुए थी और अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था, जिससे उनकी चूंची और चूत साफ़-साफ़ दिख रहे थे। साथ में ऊँची पेन्सिल हील के काले सैंडल पहने हुए उनका उनका हुस्न क्या कहूँ… बस पटाखा लग रही थी आयेशा आँटी। मैं उनको बहुत ध्यान से देखने लगा तो वो बोली, “क्या देख रहा है... कभी किसी को इस तरह देखा नहीं है क्या?”



मैंने कहा, “नहीं आयशा आँटी, आप बहुत अच्छी लग रही हो... दिल कर रहा है कि मैं आपको अपनी बाँहों में लेकर खूब चुदाई करूँ।”



तो उन्होंने कहा, “कर ना! किसने रोका है?”



मैंने कहा, “लेकिन आपने ही तो मना कर दिया था!”



वोह बोली कि “क्या तेरे दोस्त के सामने चुदवाती तुझसे!” और ये कहते हुए वो मेरे पास आ गयी और मेरे गले में अपनी बाँहें डाल दीं। मैं उनके चेहरे को हाथ में लेकर उनके होठों को किस करने लगा। पहले तो धीरे-धीरे किस कर रहा था, लेकिन जब मैंने देखा कि आयशा आँटी भी किस करने में मेरा साथ दे रही हैं तो मैं और जोर से उनके होठों पर किस करने लगा। उसके बाद उन्होंने कहा कि “अपना लंड तो दिखा... जरा मैं भी तो देखूँ कि मेरी बेटी की पसंद कैसी है!”



तब मैंने उनसे कहा कि मैंने सानिया के साथ आज तक कुछ नहीं किया तो वोह बोली कि “क्यों नहीं किया?” यह कहते हुए उन्होंने मेरे लंड को मेरी जीन्स से बाहर निकाल कर अपने हाथ में ले लिया और बोली, “हाय अल्लाह... ये तो हकीकत में काफी बड़ा है।”



फिर वो मेरे लंड को धीरे-धीरे अपने हाथों से सहलाने लगी। फिर मैं धीरे से अपना हाथ उनके बूब्स पर ले गया और उन्हें दबाने लगा तो वो बोली, “ज़रा जोर से दबाओ... मैंने तीन चार दिनों से चुदाई नहीं करवायी है।” मैं उनकी चूंची को जोर से दबाने लगा और वो “ऊँऊँहह ऊँऊँहहह” की आवाज़ निकालने लगी। ये देखकर मुझे अच्छा लग रहा था। फिर मैंने उनकी सफेद ड्रेस को उतार दिया। अब वो बिल्कुल नम्गी थीं और काले रंग के ऊँची पेंसिल हिळ वाले सैंडल में उनका गोरा बदन कयामत लग रहा था। मैं उनके बूब्स के निप्पल को अपने होठों के बीच में रख कर उन्हें चूसने लगा। वो “आआहह आआहहह” करने लगी। एक हाथ से मैं उनकी दूसरी चूंची को दबा रहा था और दूसरा हाथ उनकी जाँघों पर था और मैं उनकी जाँघों को सहला रहा था। उसके बाद उन्होंने मेरे कपड़े उतारना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर सहलने लगी। मेरा लंड एकदम टाईट हो चुका था। आँटी बोली कि “बहुत दिनों के बाद जवान लड़के का लंड नसीब हुआ है... आज चुदाई का मज़ा आयेगा!”



मैंने कहा, “हाँ आँटी, लेकिन आज तक मैंने कभी किसी के साथ चुदाई नहीं की है…!”



तो वो बोली, “तू चिंता मत कर... मैं सिखा दूँगी।”



मैंने कहा, “ठीक है!” और उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और अपने मुँह के अंदर बाहर करने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं आँटी के सिर को पकड़ कर अपने लंड पर जोर से दबाने लगा। ये देखकर आँटी बोली, “तू झूठ बोल बोल रहा है कि तूने किसी के साथ चुदाई नहीं की है।”



मैंने कहा, “नहीं आँटी! मैं सच कह रहा हूँ। ये सब तो मैंने ब्लू फ़िल्मों में देखा था।”



वोह बोली, “और क्या देखा था... बता…।”



मैंने कहा कि “मैं बताऊँगा नहीं... करके दिखाऊँगा।”



वो बोली, “ठीक है!” और वो और जोर से मेरे लंड को अंदर बाहर करने लगी। करीब दस मिनट तक वो लगातार मेरे लंड को अपने मुँह में लिये चूसती रही। चूँकि मेरा पहली बार था, इसलिए मैं उनके मुँह में ही हल्का हो गया। आँटी बोली, “कोई बात नहीं... पहली बार में ऐसा होता है”, और वोह अपनी जीभ से मेरे लंड को साफ़ चाटने लगी और मेरा लंड धीरे-धीरे फिर से खड़ा होने लगा। इस सब में समय का पता ही नहीं चला और देखते-देखते सानिया के आने का समय हो गया। लेकिन वो अभी तक आयी नहीं थी और हम दोनों अपने आप में मस्त थे। दुनिया की कोई चिंता नहीं थी।कहानी का शीर्षक 'आयेशा आँटी की चुदाई’ है!



आयशा आँटी ने अपनी वो पारदर्सी ड्रेस उतार कर फेंक दी और ऊँची हील वाले सैंडलों के अलावा बिल्कुल नंगी हो गयी। अब मैं आयशा आँटी की चूत को सहला रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूंची को दबा रहा था। उसके बाद आँटी ने कहा, “मेरी चूत को चूस” और मैं उनकी चूत को जोर-जोर से चूसने लगा। उनकी चूत गीली हो चुकी थी और उसमें से कुछ पानी जैसा निकल रहा था। मैं उसे चूसने लगा और वो जोर-जोर से “आआआआआहहहहह” कर रही थी और फिर बोली, “अब मुझे चोद... अब मुझसे नहीं रहा जा रहा है।” मैंने भी बिना समय बर्बाद किये अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक हल्का सा झटका दिया तो मेरा आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में बहुत आसानी से चला गया।



फिर मैंने एक जोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड उनकी चूत में घुस गया और वो हल्की आवाज़ में चिल्लाने लगी, “आआहह आआहहहह आआआआआ और कर.... बहुत मज़ा आ रहा है मेरे जानू... मुझे ऐसे ही चोदते रह.... ऊऊऊऊ ओहहहह आआआआहहहह।” मैं जोर-जोर से झटके लेने लगा और करीब सात मिनट तक मैं लगातार झटके लेता रहा। उसके बाद उन्होंने कहा कि, “अब मैं तेर ऊपर आती हूँ।” कहानी का शीर्षक 'अयेशा आँटी की चुदा‌ई’ है!



मैंने कहा “ठीक है”, और मैं लेट गया। वो मेरे ऊपर आ गयी और एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत से मिलाया और मेरे लंड पर अपनी चूत को दबाती चली गयी। मेरा पूरा लंड उनकी चूत में घुस चुका था। अब वो जोर-जोर सी झटके मारने लगी और मैं उनकी गाँड को पकड़ कर आगे पीछे कर रहा था। फिर मैंने अपना हाथ उनकी चूंची पर रखा और उसे दबाने लगा।



वो और जोर-जोर से आवाज़ निकालने लगी, “ऊँऊँऊँऊँहहहह आआआआआहहहह ओहहह आँआँआँ” और बोलने लगी, “आज बहुत दिनों बाद ऐसा कोरा जवान लंड मिला है!” हम लोग अपने आप में इस तरह खोये हुए थे कि कब सानिया आ गयी पता ही नहीं चला। जब सानिया आयी थी तो आयशा आँटी मेरे ऊपर थी और जोर-जोर से झटके मारते हुए कह रही थी कि. “आज बहुत मज़ा आ रहा है... तू रोज आकर मुझे चोदा कर!”



सानिया ये सब अपनी आँखों से देख रही थी और फिर सानिया चुपचाप अंदर चली गयी। अपने मम्मी को किसी गैर-मर्द से चुदते देखना सानिया के लिए कोई नयी बात नहीं थी क्योंकि आयशा आँटी तो हमेशा किसी नये लंड की तलाश में ही रहती थी। करीब पंद्रह मिनट के बाद आयशा आँटी मेरे ऊपर से हटी और बोली, “आज बहुत मज़ा आया!”



तब मैंने कहा, “आपको तो मज़ा आ गया लेकिन मेरा तो अभी बाकी है!” और ये कहते हुए मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। वो सिसकते हुए बोली, “बस कर... अब और नहीं... तुम जवान लड़कों को तो तसल्ली ही नहीं होती…!” तब मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और जोर से उनके होंठों को चूसने लगा। अब वो आवाज़ नहीं कर पा रही थी और मैं जोर-जोर से झटके लेने लगा। तभी मैंने देखा कि सानिया कमरे के दरवाजे के पीछे से सब कुछ देख रही है और अपने चूंची को अपने हाथों से दबा रहे है। ये देख कर मैं और जोश में आ गया और आयशा आँटी को जोर-जोर से चोदने लग।



करीब पंद्रह मिनट के बाद मैं भी हल्का हो गया और हल्का होकर आयशा आँटी की बगल में ही लेट गया। वो अपने लिपस्टिक वाले होठों से मेरे होठों को चूमते हुए बोली, “आज बहुत मज़ा आया... तेरा दिल जब भी चोदने को करे तो तू मेरे पास आ जाया कर!”



मैंने कहा, “ठीक है!” फिर मैंने आँटी से कहा कि “क्या लड़की को चोदने में और ज्यादा मज़ा आता है?” तो वो बोली कि “तू चिंता मत कर... तेरा इशारा मैं समझ रही हूँ... तू ईद की रात में करीब बारह बजे के आस पास घर आना। उस समय तेरे अंकल भी घर पर नहीं रहेंगे क्योंकि वो दस बजे की ट्रेन से कुछ दिनों के लिये टूर पे जा रहे हैं और मैं तुम और सानिया… तीनों एक साथ चुदाई करेंगे!”



ये सुनकर मैं चौंक गया और उनसे कहा कि “क्या आप को खराब नहीं लगेगा जब मैं आपके सामने ही सानिया को चोदूँगा?”



आयेशा आँटी बोली, “खराब क्यों लगेगा…? सैक्स के मामले में मैं बेहद ओपन हूँ... और आखिर मैं भी तो देखूँ कि मेरी बेती की चूत चोदने में तुझे ज्यादा मज़ा आता है या मेरी चूत चोदने में!”



तब मैंने कहा, “ठीक है आँटी... मैं बारह बजे आ जाऊँगा!”



ईद की रात को मैं जल्दी से बारह बजने का इंतज़ार करने लगा। मन में उत्तेजना थी कि आज सानिया को भी चोदूँगा। सानिया की चूत कैसी होगी, यही सोच कर उत्तेजित हो रहा था मैं। बड़ी मुश्किल से रात के बारह बजे। मैं किसी तरह से चुपचाप सानिया के घर गया। मैं घर के पीछे वाले दरवाज़े से गया था जिससे कोई देख ना सके। जब मैं घर में गया तो देखा कि ड्राइंग रूम में आयशा आँटी मैरून रंग का बहुत ही सैक्सी गाऊन और मैरून रंग के ही हाई पैंसिल हील के सैंडल पहन कर बैठी थी और एक हाथ में शराब का ग्लास पकड़े किसी से फोन पर बातें कर रहे थी। मुझे देख कर बोली, “आ गये तुम!”



मैंने कहा, “हाँ! बहुत मुश्किल से तो रात के १२ बजे हैं... मैं बहुत बेचैनी से रात के बारह बजने का इंतज़ार कर रहा था!”



मैंने पूछा, “आँटी! सानिया कहाँ है?”



आयशा आँटी बोली, “इतने बेचैन क्यों हो रहे हो, आज की रात तुम्हें जो कुछ भी करना है, सब कुछ कर लेना, आज सानिया को ऐसे चोदो कि उसे भी मज़ा आ जाये!”



मैंने कहा, “हाँ आँटी! आप ही का शागिर्द हूँ.. आज सानिया को मैं ऐसे ही चोदूँगा!”



उसके बाद आँटी बोली कि, “शराब तो तू पीता ही है... है ना?” और एक ग्लास में थोड़ी शराब निकाल कर मेरी तरफ़ बढ़ा दिया। मैं चुपचाप उसे पीने लगा। मैंने उनका ग्लास खाली देखा तो मैंने कहा, “आँटी आप भी पियो ना…” तो आयेशा आँटी बोली, “ठीक है एक पैग और पी लेती हूँ... वैसे मैं व्हिस्की के चार पैग तो पी चुकी हूँ और नशा भी हो रहा है… कहीं टुन्न होके लुढ़क ना जाऊँ!”



मैंने कहा, “कुछ नहीं होगा आँटी... वैसे भी शराब की पूरी बोतल से ज्यादा नशा तो आपके हुस्न में है...!”



“इसमें तो कोई शक नहीं... तो ले फिर हो जाये!” आयेशा आँटी अपना ग्लास भरके हंसते हुए बोली और हम दोनों चीयर्स करके पीने लगे।



तभी मैंने दरवाज़े के पास देखा कि सानिया वहाँ खड़ी है और मुझे बहुत ध्यान से देख रही है। मुझ पर शराब का हल्का सा नशा हो गया था। मैं वहाँ से उठा और सानिया के पास गया और उसे ईद की मुबारक बोल कर उसके होठों पर किस कर लिया। वोह कुछ नहीं बोली। मैंने कहा की, “कम से कम सानिया तुम मुझे ईद की बधाई ही दे दो जैसे मैंने तुम्हें दी है…!” वो शरमा गयी और वहाँ से जाने लगी। तभी आयशा आँटी ने उसे रोक और कहा, “सानिया बेटा! राजू को ईद मुबारक तो बोल दो, जैसे वो कह रहा है!”



तब सानिया ने कहा कि “मम्मी मुझे आपके सामने शरम आती है... मैं किस नहीं करूँगी!”



तो आयशा आँटी ने कहा, “बेटा मुझसे कैसी शरम? मैं तो तुम्हारी अम्मी हूँ और हम दोनों को सहेलियों की तरह रहना चाहिए… कभी मैंने तुमसे शरम की है क्या?” 



ये सुनकर सानिया थोड़ी सी मेरी तरफ़ बढ़ी और बोली, “यहाँ नहीं। अंदर के रूम में चलो!”



आयशा आँटी ने भी कहा, “ठीक है तुम लोग अंदर चले जाओ, मैं अभी थोड़ी देर में आती हूँ।”



उसके बाद सानिया मुझे अंदर के रूम में ले गयी। सानिया ने उस समय सिर्फ़ स्कर्ट और एक हल्के रंग की शर्ट पहन रखी थी। उसकी स्कर्ट उसके घुटनों तक ही थी जिससे उसकी गोरी-गोरी टाँगें दिख रही थी। आयेशा आँटी की तरह सानिया ने भी आज हाई हील के बेहद सैक्सी सैंडल पहन रखे थे। मैंने सानिया को पकड़ कर उसे अपनी बाँहों में ले लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसे किस करने लगा। मैं उसके होठों को चूसता रहा और वो भी मेरा साथ दे रही थी। वैसे हम पहले भी कईं दफा किस कर चुके थे। फिर मैं धीरे से अपने हाथ से उसकी शर्ट के बटन खोल कर उसकी एक चूंची अपने हाथ से दबाने लगा। जब मैं उसकी चूंची को दबा रहा था तो उसका चेहरा बहुत ही उत्तेजित लग रहा था। उसके बाद मैंने उसकी शर्ट खोल दी। अब उसकी दोनों चूचियाँ मेरे सामने थीं क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी। मैं देख कर हैरान रह गया कि सानिया की चूचियाँ कितनी अच्छी हैं। मैं यही सोचने लगा कि सानिया के कपड़ों के ऊफर से मैंने इन्हें मसला था लेकिन कभी नंगी नहीं देखी थीं।



उसके बाद मैंने सानिया को उसी तरह से बेड पेर लिटा दिया और मैं उसकी बगल में लेट कर उसकी एक चूंची को चूसने लगा और दूसरी चूंची को अपने एक हाथ से दबाने लग। वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगी थी। धीरे-धीरे मैंने उसकी स्कर्ट भी खोल दी। अब सानिया सिर्फ़ पैंटी और हाई हील सैंडलों में थी। मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लग। वो उत्तेजित होकर मुझसे लिपट गयी और मैं उसके होठों को जोर से चूसने लग गया, और फिर मैंने उसके पैंटी भी खोल दी। उसके चूत क्लीन शेव्ड थी। उसकी क्लीन शेव्ड चूत देखकर तो मेरा लंड रॉड के तरह टाईट हो गया। मैं उसकी चूत को धीरे-धीरे सहलाता रहा और फिर उसकी चूत पर अपना मुँह लगाकर उसकी चूत को चूसने लगा। कहानी का शीर्षक 'आयेशा आँटी की चुदाई’ है!



मैं उसकी चूत को चूसता जा रहा था और वो सिसक रही थी, “जोर से... आआआहहह आआहहह और जोर से चूसो मेरे राजू... और जोर से!” तभी मेरा ध्यान दरवाज़े के तरफ़ गया तो मैंने देखा कि वहाँ सिर्फ मैरून रंग के हाई-हील सैंडल पहने बिल्कुल नंगी, आयशा आँटी दरवाजे के सहारे खड़ी होकर सब कुछ देख रही है और अपने हाथों से अपनी चूत में अँगुली कर रही है। फिर वो नशे में लड़खड़ाती- सी बेड के पास आ गयी और गाँड पर हाथ फेरने लगी और मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।



सानिया उन्हें देख कर चौंक गयी और बोली, “मम्मी मुझे आपके समने शरम आ रही है... मैं आपके सामने कुछ नहीं करूँगी!” तब आयशा आँटी मेरे लंड पर से अपना हाथ हटाकर बोली, “तू मुझे अपनी अम्मी नहीं... अपनी सहेली समझ... मुझे भी तो तूने ऐं मर्तबा ये सब करते हुए देखा है...!” फिर आयेशा आँटी सानिया की तरफ़ चली गयी और उसके होठों को चूसने लगी। पहले तो सानिया कुछ नहीं बोली। फिर वो भी अपने मम्मी का साथ देने लगी। मैं सानिया की चूत को चूस रहा था। तभी सानिया ने मेरे चेहरे को अपनी चूत के पास जोर से सटा दिया और कहने लगी, “राजू आज पूरा चूस लो मेरी चूत को... पूरा निचोड़ लो…” और मैं उसकी चूत को चूसता रहा।



फिर आयशा आँटी ने कहा, “अब तू सानिया की चूत चोद!” कहानी का शीर्षक 'अयेशा आँटी की चुदा‌ई’ है!



मैंने अपना लंड अपने हाथ में लेकर सानिया की चूत के छेद पर जैसे ही रखा, सानिया डर गयी और कहने लगी “धीरे-धीरे करना... नहीं तो बहुत दर्द होगा!”



मैंने कहा, “ठीक है”, और मैंने धीरे से एक धक्का लगाया। मेरा आधा लंड सानिया की चूत में घुस चुका था और वो जोर से चिल्लायी, “ईईईईईईईईईईईई आआआआहहहह ऊऊऊऊऊऊऊहहहह... बस करो... अब नहीं आआआआआआआहहहहहह ओहह ओहहह मैं मर जाऊँगी... बस करो!”



तभी आयशा आँटी मेरे पास आयी और बोली, “अपना पूरा लंड सानिया की चूत में डाल दे... मैं देखना चाहती हूँ कि सानिया कि चूत में जब तेरा लंड जाता है तो उसे कैसा लगता है!”



मैंने तुरंत ही अपना पूरा लंड सानिया की चूत में डाल दिया और सानिया चिल्ला उठी “ऊँऊँऊँऊँम्म्म्म अल्लाहहऽऽऽ मैं मर गयी... बस छोड़ दो… अब नहीं!”



लेकिन तब तक तो मैं जोश में आ चुका था और मैं जोर-जोर से झटके मारने लगा। तब तक सानिया को भी अच्छा लगने लगा था। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी। जब मैं और सानिया चुदाई कर रहे थे तब आयशा आँटी भी मेरे पास आकर मेरे होठों को चूसने लगी और अपनी चूत को सानिया के तरफ़ कर दिया और सानिया से कहा, “सानिया! मेरी चूत को चूसो!”



सानिया उनकी चूत को चूसने लगी और तब तक सानिया छूट चुकी थी और हल्की पड़ गयी थी। इतने में मेरा वीर्य भी सानिया की चूत में छूत गया और मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। ये देख कर आयशा आँटी सानिया की चूत पे मुँह लगाकर अपनी बेटी की चूत को चूसने लगी और चूसते हुए बोली कि “सानिया तेरी चूत तो बेहद लज़ीज़ है, मैं तेरी चूत रोज़ चूसा करूँगी!”



"मम्मी आपकी चूत भी बेहद रसीली है... ऑय लव इट!" सानिया ने कहा। दोनों माँ-बेटी इस वक्त ६९ की पोज़िशन में एक दूसरे की चूत चाट रही थीं।



थोड़ी देर बाद सानिया बाथरूम में चली गयी। मैंने आँटी से कहा कि, “आँटी मैं तो सानिया की चूत में ही हल्का हो गया कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाये!”



आयेशा आँटी बोली, “तू फिक्र ना कर मुझे बहुत तजुर्बा है इस मामले में मैंने उस दिन से ही सानिया को बर्थ-कंट्रोल पिल्स देनी शुरू कर दी थी!” उसके बाद आयशा आँटी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर अपनी जीभ से चाटने लगी। जब वो मेरे लंड को चाट रही थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मेरा लंड फिर से उनके मुँह में सख्त हो गया। थोड़ी देर बाद मेरा वीर्य उनके मुँह में छूट गया और मैं हल्का पड़ गया। आयशा आँटी ने मेरे लंड को अपनी जीभ से ही साफ़ किया और कहा कि “आज सानिया को अपने सामने चुदते हुए देख कर अच्छा लग रहा था और खुशी इस बात की है कि तूने मेरी सानिया और मुझे दोनों को एक साथ चोदा!”



तब मैंने आयशा आँटी से कहा कि “अभी तो मैंने सिर्फ़ सानिया को चोदा है... अभी आपको कहाँ चोदा है?”



यह सुनकर आयशा आँटी बोली, “चोद ले आज जितना चोद स सकता है। आज की पूरी रात तेरी है... तुझे जैसे-जैसे चोदना है, वैसे चोद ले!” आयशा आँटी की आवाज़ नशे में थोड़ी सी बहक रही थी।



मैंने आयशा आँटी से कहा कि “मैंने सुना है कि गाँड मारने में बहुत मज़ा आता है... मैं आपकी गाँड मारना चाहता हूँ... आप मुझसे अपनी गाँड मरवाओगी?”



आयशा आँटी ने कहा कि “कुछ साल पहले दो अफ्रीकी लड़के हमारे पड़ोस में रहते थे जिनके साथ मैं ऐश करती थी। उन दोनों नीग्रो से पहली बार मैंने गाँड मरवायी थी और उन नामकुलों ने अपने हब्शी लौड़ों से इतनी बेरहमी से मेरी गाँड कि मैं बता नहीं सकती… तब से मैंने कभी अपनी गाँड नहीं मरवायी। लेकिन तुझे मैं मन नहीं कर सकती... इसलिए आज मैं तुझसे अपनी गाँड भी मरवा लूँगी!”



फिर वो वहाँ से उठकर हाई हील सैंडलों में खटखट करती हुई नशे में लड़खड़ाती हुई दूसरे कमरे में चली गयी, और जब वो लौट कर आयी तो उनके हाथ में एक क्रीम की ट्यूब थी। वो मेरी तरफ़ ट्यूब बढ़ाते हुए बोली कि “सूखी गाँड मरवाने में दर्द होता है... इसलिए ये के-वॉय जैली मेरी गाँड के छेद पर लगा देना और उसके बाद तू मेरी गाँड मारना!”



मैंने कहा, “ठीक है... लेकिन पहले मेरे लंड को एक बार आप चूस लो जिससे मेरा लंड और टाइट हो जाये।” कहानी का शीर्षक 'आयेशा आँटी की चुदाई’ है!



आयशा आँटी झुक कर अपने मुँह से मेरे लंड को चूसने लगी। वो बहुत अच्छी तरह से मेरे लंड को चूस रही थी। उनके होंठों और ज़ुबान में जादू था! एक मिनट में ही मेरा लंड पूरा टाइट होकर खड़ा हो गया। उसके बाद आयशा आँटी उल्टी होकर लेट गयी और अपने दोनों हाथों से अपनी गाँड के छेद को फ़ैलाने लगी। मैंने के-वॉय जैली निकाली और उनकी गाँड के छेद में भर दी। उसके बाद मैंने अपने लंड पर थोड़ा स थूक लगाया और गाँड के छेद पर अपना लंड रखकर हल्का सा धक्का दिया। मैंने जैसे ही धक्का दिया तो वो चिल्ला उठी, “नाआआआआईईईईईईईईईईई... बस कर... हाय अल्लाहहह…. बहुत दर्द हो रहा है।”



लेकिन तब मैं कहाँ रुकने वाला था, और मैंने एक धक्का और लगाया और मेरे लंड का तीन-चौथाई भाग उनकी गाँड के अंदर चला गया और वो जोर से चिलायी, “आआआआआहहहहह… मैं मर जाऊँगी।”



तभी मैंने पूरे जोर से झटका मारा और मेरा पूरा लंड उनकी गाँड में घुस गया। थोड़ी देर तक तो वो दर्द से चिल्लाती रही लेकिन बाद में कहने लगी, “बहुत अच्छा लग रहा है... मुझे नहीं पता था कि इसमें भी इतना मज़ा आता है... तो मैं तुझसे रोज़ अपनी गाँड मरवाऊँगी!”



तब तक सानिया भी बाथरूम से आ चुकी थी और वो ये सब देख रही थी कि मैं उसकी मम्मी की गाँड मार रहा हूँ। वो हमारे पास आ गयी। आयशा आँटी ने उसको अपने पास बुलाया और उसे अपने आगे लेटने के लिए बोली। सानिया लेट गयी और आयशा आँटी सानिया की चूत चाटने लगी। मैं उनकी गाँड मार रहा था और मेरा लंड तेजी से उनकी गाँड में अंदर-बाहर हो रहा था।कहानी का शीर्षक 'अयेशा आँटी की चुदा‌ई’ है!



सानिया की चूत चूसते-चूसते आयशा आँटी बीच में चिल्ला उठी, “ननाआआआआआहहहहह ऊईईईईईईईईईई धीरे कर... दर्द हो रहा है।”



लेकिन मैं तो अपने पूरे जोश में उनकी गाँड में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था। उसके बाद मैंने आयशा आँटी से कहा कि सानिया से कहो कि मेरे लंड को वो चूसे। ये सुनते ही सानिया वहाँ से उठकर मेरी तरफ़ आ गयी और मैंने अपना लंड आयशा आँटी की गाँड से निकाल लिया और मैं लेट गया।



सानिया मेरी बगल में आकर मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बोलने लगी, “इतना बड़ा लंड कैसे मेरी चूत में घुस गया?” और फिर वो मेरे लंड को चूसने लगी। पहले सानिया लंड को ठीक से नहीं चूस पा रही थी। तब आयशा आँटी ने कहा, “अरे ऐसे नहीं चूसते हैं... मैं तुझे बताती हूँ कि कैसे लंड चूसते हैं!” फिर वो सानिया को वहाँ से हटाकर खुद आकर मेरे लंड को चूसने लगी।



सानिया उन्हें बहुत ध्यान से देख रही थी। फिर वो मेरी बगल में आयी तो मैं उसके होठों को चूसने लगा और वो वहाँ से उठकर मेरे लंड के पास आयी और मेरे लंड को चूसने लगी। इस बार वो मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी। दस मिनट के बाद मैं सानिया के मुँह में ही झड़ गया। वो जल्दी से उठकर बाथरूम में गयी और अपना मुँह धोने लगी। तब आयशा आँटी ने अपनी जीभ से मेरे लंड को पूरा साफ़ किया और मैं हल्का होकर वहीं बेड पर लेटा रहा। उसके बाद सानिया भी मेरी एक तरफ़ आकर लेट गयी और दूसरी तरफ़ आयशा आँटी लेट गयी। आयशा आँटी कहने लगी कि ईद की ये मुबारक रात उन्हें हमेशा याद रहेगी। सानिया ये सुनकर हँसने लगी तो मैंने अपने एक हाथ से जोर से उसकी चूंची को दबा दिया और वो मुझसे लिपट गयी। मैंने रात में सानिया को तीन बार चोदा और सुबह होते ही पीछे के ही दरवाज़े से मैं अपने घर चला गया।



!!! समाप्त !!!


RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

राजस्थान की कमली


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हाए दोस्तो, मेरा नाम रवि है, जब जवान हुआ तो मेरा लण्ड कुलांचे भरने लगा था। पर बस यदि लण्ड ने ज्यादा जोश मारा तो मुठ मार लिया। कभी कभी तो मैं दो पलंगो के बीच में जगह करके उसमें लण्ड फ़ंसा कर चोदता था ... मजा तो खास नहीं आता था। पर हाँ ! एक दिन मेरा लण्ड छिल गया था ... मेरे लण्ड की त्वचा भी फ़ट गई थी और अब सुपाड़ा खुल कर पूरा इठला सकता था। रोज रोज तेल लगा कर मूठ मरने की वजह से मेरे लंड की लंबाई और चौड़ाई बहुत बड़ी हो गयी थी.. अब मेरा लंड नौ इंच का आरू चौड़ाई ३.६ इंच हो गयी है।

मैंने धीरे धीरे अपनी पढ़ाई भी पूरी कर ली। 23 वर्ष का हो गया पर मेरे लंड पर चूत का पानी नही बरसा था मेरा मन कुछ भी करने को तरसता रहता था, चाहे गाण्ड भी मार लूँ या मरा लूँ ... या कोई चूत ही मिल जाये।

मैंने एक कहावत सुनी थी कि हर रात के बाद सवेरा भी आता है ... पर रात इतनी लम्बी होगी इसका अनुमान नहीं था। कहते हैं ना धीरज का फ़ल मीठा होता है ... जी हां सच कह रहा हूँ ... रात के बाद सवेरा भी आता है और बहुत ही सुहाना सवेरा आता है ... फ़ल इतना मीठा होता है कि आप यकीन नहीं करेंगे।

मैं नया नया उदयपुर में पोस्टिंग पर आया था। मैं यहाँ ऑफ़िस के आस पास ही मकान ढूंढ रहा था। बहुत सी जगह पूछताछ की और 4-5 दिनो में मुझे मकान मिल गया। हुआ यूं कि मैं बाज़ार में किसी दुकान पर खड़ा था। तभी मेरी नजर एक महिला पर पड़ी जो कि अपने घूंघट में से मुझे ही देख रही थी। जैसे ही मेरी नजरें उससे मिली उसने हाथ से मुझे अपनी तरफ़ बुलाया। पहले तो मैं झिझका ... पर हिम्मत करके उसके पास गया।

"जी ... आपने मुझे बुलाया ... ?"

"हां ... आपणे मकान चाही जे ... ।"

"ज़ी हाँ ... कठे कोई मिलिओ आपणे"

"मारा ही मकाण खाली होयो है आज ... हुकुम (आप) पधारो तो बताई दूं"

"तो आप आगे चालो ... मूं अबार हाजिर हो जाऊ"

"हाते ही चालां ... तो देख लिओ ... "

"आपरी मरजी सा ... चालो "

मैंने अपनी मोटर साईकल पर उसे बैठाया और पास ही मुहल्ले में आ गये। मुझे तुरन्त याद आ गया ... यह एक बड़ी बिल्डिंग है ... उसमें कई कमरे हैं। पर वो किराये पर नहीं देते थे ... इनकी मेहरबानी मुझ पर कैसे हो गई। मैंने कमरा देखा, मैंने तुरन्त हां कह दी।

सामान के नाम पर मेरे पास बस एक बेडिंग था और एक बड़ा सूटकेस था। मैं तुरन्त अपनी मोटर साईकल पर गया और ऑफ़िस के रेस्ट हाऊस से अपना सामान लेकर आ गया। मैं जी भर कर नहाया। फ़्रेश होकर कमरे में आकर आराम करने लगा। इतने में एक पतली दुबली लड़की मुस्कराती हुई आई। जीन्स और टॉप पहने हुए थी। मैं इतनी सुन्दर लड़की को आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर देखने लगा, उठ कर बैठ गया।

"जी ... आप कौन हैं ... किससे मिलना है?"

वो मेरी बौखलाहट पर हंस पडी ... "हुकुम ... मैं कमली हूँ ... "

आवाज से मैंने पहचान लिया ... यह तो वही महिला थी। मैं भी हंस पड़ा।

"आप ... तो बिल्कुल अलग लग रही हैं ... कोई छोटी सी लड़की !"

"खावा रा टेम तो हो गयो ... रोटी बीजा लाऊं कई ... "(खाने का टाइम तो हो गया है, रोटी ले आउ क्या?)

मेरे मना करने पर भी वो मेरे लिये खाना ले आई। मेवाड़ी खाना था ... बहुत ही अच्छा लगा।

बातचीत में पता चला कि उसकी शादी हो चुकी है और उसका पति मुम्बई में अच्छा बिजनेस करता था। उसके सास और ससुर सरकारी नौकरी में थे।

"आपणे तो भाई साहब ! मेरे खाने की तारीफ़ ही नहीं की !"

"खाना बहुत अच्छा था ... और आप भी बहुत अच्छी हो ... !"

"वाह जी वाह ... यह क्या बात हुई ... खैर जी ... आप तो मने भा गये हो !" कह कर मेरे गाल पर उसने प्यार कर लिया।

मैं पहले तो सकपका गया। फिर मैंने भी कहा,"प्यार यूँ नहीं ... आपको मैं भी करूँ !"

उसने अपना गाल आगे कर दिया ... मैंने हल्के से गाल चूम लिया। जीवन में मेरा यह प्रथम स्त्री स्पर्श था। वो बरतन लेकर इठलाती हुई चली गई। मुझे समझ में नहीं आया कि यह क्या भाई बहन वाला प्यार था ... शायद ... !!!

शाम को फिर वो एक नई ड्रेस में आई ... घाघरा और चोली में ... वास्तव में कमली एक बहुत सुन्दर लड़की थी। चाय लेकर आई थी।

"भैया ... अब बोलो कशी लागू हूँ ...?" (अब बोलो कैसी लग रही हूँ?)

"परी ... जैसी लग रही हो ...!"

"तो मने चुम्मा दो ... !" वो पास आ गई ...

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसकी पतली कमर में हाथ डाल कर अपने से सटा लिया और गाल पर जोर से किस कर लिया। उधर मेरे लण्ड ने भी सलामी दे डाली ... वो खड़ा हो गया। उसने खुशबू लगा रखी थी। जोर से किस किया तो बोली,"भैया ... ठीक से करो ना ... !"

मैंने उसे अपने से और चिपका लिया और कहा,"ये लो ... !" उसके गाल धीरे से चूम लिये ... फिर धीरे से होंठ चूम लिये ... उसने आंखें बंद कर ली ... मेरा लण्ड खड़ा हो गया था और उसकी चूत पर ठोकर मारने लगा। शायद उसे अच्छा लग रहा था ... मैंने उसके होंठ को फिर से चूमा तो उसके होंठ खुलने लगे ... मेरे हाथ धीरे से उसके चूतड़ों पर आ गये ... हाय ... इतने नरम ... और लचीले ...

अचानक वो मुझसे अलग हो गई,"ये क्या करते हो भैया ... !"

"ओह ... माफ़ करना कमली ... पर आप भी तो ना ... " मैंने उसे ही इस हरकत के लिये जिम्मेदार ठहराया।

वो शरमा कर भाग गई।

क्या ... मेरी किस्मत में सवेरा आ गया था ... उसकी अदाओं से मैं घायल हो चुक था ... वो एक ही बार में मेरे दिल पर कई तीर चला चुकी थी। मेरा भारी लण्ड उसका आशिक हो गया।

उसके सास और ससुर आ चुके थे ... कमली रात का खाना बना रही थी। उसके सास ससुर मुझसे मिलने आये ... और खुश हो कर चले गये। रात को खाना खाने के बाद वो मेरे लिये खाना लेकर आई। अब उसका नया रूप था। छोटी सी स्कर्ट और रात में पहनने वाला टॉप ... । उसकी टांगें गोरी थी ... उसके तीखे नक्श नयन बड़े लुभावने लग रहे थे ... मुझे उसने खाना खिलाया ... फिर बोली,"भैया ... आप तो म्हारी खाने की तारीफ़ ही ना करो ...!! "

"अरे कमली किस किस की तारीफ़ करू ... थारा खाणा ... थारी खूबसूरती ... और काई काई रे ...! "

"हाय भैया ... मने एक बार और प्यार कर लो ... ! " उसकी तारीफ़ करते ही जैसे वो पिघल गई।

मैंने उसको फिर से अपनी बाहों में ले लिया ... मुझे यह समझ में आ गया था कि वो मेरे अंग-प्रत्यंग को छूना चाहती है ... ।

इस बार मैं एक कदम और आगे बढ़ गया और जैसे मेरी किस्मत का सवेरा हो गया। मैं उसके होंठ अपने होंठो में लकर पीने लगा। उसकी आंखों में गुलाबी डोरे खिंचने लगे। मेरा लण्ड कड़ा हो कर तन गया और उसकी चूत में गड़ने लगा। वो जैसे मेरी बाहों में झूम गई। मैंने हिम्मत करके उसकी छोटी छोटी चूंचियाँ सहला दी। वो शरमा उठी। पर जवाब गजब का था। उसके हाथ मेरे लण्ड की ओर बढ़ गये और लजाते हुए उसने मेरा लण्ड थाम लिया।

मेरा सारा जिस्म जैसे लहरा उठा। मैंने उसकी मस्तानी चूंचियाँ और दबा डाली और मसलने लगा।

"भैया ... मजा आवण लाग्यो है ... (मज़ा आ रहा है)! हाय !"

मैंने उसे चूतड़ों के सहारे उठा लिया ... फ़ूलो जैसी हल्की ... मैंने उसे जैसे ही बिस्तर पर लेटाया तो वो जैसे होश में आ गई।

"भैया ... यो कई (ये क्या )... आप तो म्हारे भैया हो ... !"

"सुनो ऐसे ही कहना ... वरना सबको शक हो जायेगा ...!! "

मैंने उसे फिर से दबोच लिया ... वो फिर कराह उठी ...

"म्हारी बात सुणो तो ... अभी नाही जी ... " फिर वो खड़ी हो गई ... मुझे उसने बडी नशीली निगाहों से देखा और मुँह छुपा कर भाग गई।

दो तीन दिन दिन तक वो मेरे पास नहीं आई। मुझे लगा कि सब गड़बड़ हो गया है। मुझे खाना खाना के लिये अपने वहीं बुला लेते थे। कमली निगाहें झुका कर खाना खा लेती थी।

मैं बहुत ही निराश हो गया।

एक दिन अपने कमरे में मैं नंगा हो कर अपने बिस्तर पर अपने लण्ड से खेल रहा था। अचानक से मेरा दरवाजा खुला और कमली धीरे धीरे मेरी ओर बढ़ी। मैं एकदम से विचलित हो उठा क्योंकि मैं नंगा था। मैंने जल्दी से पास पड़ी चादर को खींचा पर कमली ने उसे पकड़ कर नीचे फ़ेंक दिया। उसने अपना नाईट गाऊन आगे से खोल लिया और मेरे पास आकर बैठ गई।

" अब सहन को नी होवै ... !" और मेरे ऊपर झुक गई।

उसने मेरी छाती पर हाथ फ़ेरा और सामने से उसका नंगा बदन मेरे नंगे बदन से सट गया। उसका मुलायम शरीर मेरे अंगो में आग भर रहा था, लगा मेरे दिन अब फिर गये थे, मुझे इतनी जल्दी एक नाजुक सी, कोमल सी, प्यारी सी लड़की चोदने के लिये मिल रही थी। वो खुद ही इतनी आतुर हो चुकी थी कि अपनी सीमा लांघ कर मेरे द्वार पर खड़ी थी। उसने अपने शरीर का बोझ मेरे ऊपर डाल दिया और अपना गाऊन उतार दिया।

"कमली, तुम क्या सच में मेरे साथ ... ?"

उसने मेरे मुख पर हाथ रख दिया। तड़पती सी बोली,"भाईजी ... म्हारे तन में भी तो आग लागे ... मने भी तो लागे कि मने जी भर के कोई चोद डाले !"

उसकी तड़प उसके हाव-भाव से आरम्भ से ही नजर आ रही थी, पर आज तो स्वयं नँगी हो कर मेरा जिस्म भोगना चाहती थी। हमारे तन आपस में रगड़ खाने लगे। मेरे लण्ड ने फ़ुफ़कार भरी और तन्ना कर खड़ा हो गया। वो अपनी चूत मेरे लण्ड पर रगड़ने लगी और जोर जोर सिसकारी भरने लगी।

उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने होंठ मेरे होंठो से मिला कर अधर-पान करने लगी। उसकी जीभ मेरे मुख के अन्दर जैसे कुछ ढूंढ रही थी। जाने कब मेरा लण्ड उसकी चूत के द्वार पर आ गया। उसकी कमर ने दबाव डाला और लण्ड का सुपाड़ा फ़च से चूत में समा गया। उसके मुख से एक सीत्कार निकाल गई।

"भाई जी ... दैया रे ... थारो लौडो तो भारी है रे (तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है)... !!" उसकी आह निकल गई।

अधरपान करते हुए मैंने अपनी कमर अब ऊपर की ओर दबाई और लण्ड को भीतर सरकाने लगा। सारा जिस्म वासना की मीठी मीठी आग में जलने लगा। कुछ ही धक्के देने के बाद वो मेरे लण्ड पर बैठ गई और उसने अपने हाथ से धीरे से लण्ड को बाहर निकाला और अपनी गाण्ड के छेद पर रख दिया और थोड़ा सा जोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा अन्दर घुस गया। उसने कोशिश करके मेरा लण्ड अन्दर पूरा घुसेड़ लिया। उसकी मीठी आहें मुझे मदहोश कर रही थी।

"आह ... यो जवानी री आग काई नजारे दिखावे ... मारी गाण्ड तक मस्ताने लागी है ... ।"

"कमली, थारी तो चूत भोसड़े से कम नहीं लागे रे ... इस छोटी सी उमर में थारी फ़ुद्दी तो खुली हुई है !"

"साला मरद तो एक इन्च से ज्यादा चूत में नाहीं डाले ... और मने तो प्यासी राखे ... !" उसकी वासना से भरी भाषा ज्यादा साफ़ नहीं थी।

"तो कमली चुद ले मन भर के आज ... मैं तो अठै ही हूँ अब तो ... " वो लगभग मेरे ऊपर उछलती सी और धक्के पर धक्के लगाती हुई हांफ़ने लगी थी। शरीर पसीने से भर गया था। मुझे भी लण्ड पर अब गाण्ड चुदाई से लगने लगी थी ... हालांकि मजा बहुत आ रहा था।

मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा और अपने से चिपका कर पल्टी मारी। लण्ड गाण्ड से निकल गया। अब मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया। उसने तुरन्त ही मेरा लण्ड पकड़ा और अपनी चूत में घुसेड़ लिया। हम दोनों ने एक दूसरे को कस कर दबा लिया और दोनों के मुख से खुशी की सिसकारियाँ निकलने लगी। उसकी दोनों टांगे ऊपर उठती गई और मेरी कमर से लिपट गई। मुझे लगा उसकी चूत और गाण्ड लण्ड खाने का अच्छा अनुभव रखती हैं। दोनों ही छेद खुले हुए थे और लण्ड दोनों ही छेद में सटासट चल रहा था। पर हां यह मेरा भी पहला अनुभव था।

अब मैंने धक्के देना चालू कर दिये थे। उसकी चूत काफ़ी पानी छोड़ रही थी, लण्ड चूत पर मारने से भच भच की आवाजें आने लगी थी। जवान चूत थी ... भरपूर पानी था उसकी चूत में ।

हम दोनों अब एक दूसरे को प्यार से निहारते हुए एक सी लय में चुदाई कर रहे थे। मेरा लंबा लंड चूत में पूरा अंदर तक आ जा रहा था, लण्ड और चूत एक साथ टकरा रहे थे। उसका कोमल अंग खिलता जा रहा था। चूत खुलती जा रही थी। उसकी आंखें बंद हो रही थी। अपने आप में वो आनन्द में तैर रही थी। सी सी करके अपने आनन्द का इजहार कर रही थी।

अचानक ही उसके मुख से खुशी की चीखें निकलने लगी,"चोद मारो भाई जी ... लौडा मारो ... बाई रे ... मने मारी नाको रे ... चोदो साऽऽऽऽऽ !"

मुझे पता चल गया कि कोमल अब पानी छोड़ने वाली है ... मैंने भी कस कर चोदा मारना आरम्भ कर दिया। मैं पसीने से भर गया था, पंखा भी असर नहीं कर रहा था।

अचानक कमली ने मुझे भींच लिया,"हाय रे ... भोसड़ा निकल गयो रे ... बाई जी ... मारी नाकियो रे ... आह्ह्ह् ... " उसकी चूत की लहर को मैं मह्सूस कर रहा था। वो झड़ रही थी। चूत में पानी भरा जा रहा था, वो और ढीली हो रही थी। मैं भी भरपूर कोशिश करके अपना विसर्जन रोक रहा था कि और ज्यादा मजा ले सकूँ पर रोकते रोकते भी लण्ड धराशाई हो गया और चूत से बाहर निकल कर पिचकारी छोड़ने लगा। इतना वीर्य मेरे लण्ड से निकलेगा मुझे तो आश्चर्य होने लगा ... बार बार लण्ड सलामी देकर वीर्य उछाल रहा था।

कमली मुझे प्यार से अपने ऊपर खींच कर मेरे बाल सहलाने लगी,"मेरे वीरां ... आपरा लौडा ही खूब ही चोखा है ... मारी तबियत हरी कर दी ... म्हारा दिल जीत लिया ... म्हारी चूत तो धान्या हो गयी सा !"

"थाने खुश राखूं ... मारा भाग है रे ... आप जद भी हुकुम करो बस इशारो दे दियो ... लौडा हाजिर है !"

कमली खुशी से हंस पड़ी ... मुझे उसने चिपका कर बहुत चूमा चाटा।

मेरी किस्मत की धूप खिल चुकी थी ... मिली भी तो एक खूबसूरती की मिसाल मिली ... तराशी हुई,, तीखे नयन नक्श वाली ... सुन्दर सी ... पर हां पहले से ही चुदी-चुदाई थी वो ...

~~~ समाप्त ~~~

दोस्तो, कैसे लगी ये कहानी आपको ,

कहानी पड़ने के बाद अपना विचार ज़रुरू दीजिएगा ...


आपके जवाब के इंतेज़ार में ...


RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

रेनू की कमसिन चूत

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ये कहानी मेरी पड़ोसी रेनू के बारे में है, कैसे में रेनू की कमसिन चूत का उद्घाटन किया
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मेरे पड़ोस में रेनू रहती थी / वो 12 मैं पढ़ रही थी / उसकी उमर 18 साल थी, रेनू बहुत सेक्सी थी / उसके बूब्स मुझे बहुत अच्छे लगते थे / भरे भरे मुममे थे उसके, जब वो चलती थी तो उसके कमर की लचक के साथ साथ हिलते थे / वो एकदम हरी-भरी थी / मेरी उसके घरवालों के साथ और उसके साथ अच्छी अक्सर बातें होती रहती थी, क्योंकि उसकी और हमारी छत एक ही थी, बीच में सिर्फ़ 3’ की एक दीवार थी / वो पढ़ाई में कमजोर थी / उसके एग्जाम आने वाले थे, उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- रवि , रेनू के एग्जाम शुरू होने वाले हैं, वो पढ़ाई में कमजोर हैं, उसे थोड़ा समय निकाल कर पढ़ा दिया करो / मैंने हां कर दी /

मैं रोज रात को 9 बजे उसके घर उसे पढ़ाने जाता / मेरा कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, उसका भी एक कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, वो बन्द रहता था क्योंकि उसके मम्मी, पापा और उसका छोटा भाई जो 12 साल का था सब ग्राउंड फ़्लोर पर ही रहते थे / दो दिन के बाद मैंने उसकी मम्मी से कहा, “भाभी नीचे हम डिस्टर्ब होते हैं, क्या हम आपके ऊपर वाले कमरे में पढ़ाई कर सकते हैं?”

उन्होंने तुरन्त हां कर दी / मैं रोज़ रात को 9 बजे जाता और रात के 11-12 बजे तक वहाँ पर रुकता था / वो पढ़ाई में बहुत कमजोर थी / उसे अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, मैंने उसकी मम्मी से कहा तो उन्होने बोला कि अगर नहीं पढ़ती है तो पिटाई कर दिया करो, तो मैंने एक दिन उसे उसकी मम्मी के सामने ही हलका सा एक थप्पड़ मारा, उस दिन मैंने उसे पहली बार छुआ था, उसका गाल एकदम गरम था, थप्पड़ खा कर वो मुस्कराने लगी /

अगले दिन उसने जींस और शर्ट जिसके बटन सामने खुलते थे पहने हुए थी, मैं उसके सामने बैठा कर उसे मैथ्स समझा रहा था, उसके शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था, उसका ध्यान पढ़ाई में था और मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन के पीछे उसके बूब्स पर था, उसकी काली ब्रा और गोरे बूब्स मेरे सामने दिख रहे थे / अचानक उसका ध्यान अपने टूटे हुए बटन पर गया तो वो शरमाई और नीचे जा कर शर्ट बदल कर आई /

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने बोला- आप मुझे अच्छे से पढ़ा नहीं पा रहे थे /

अगले दिन उसने टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसके बूब्स का उभार गजब ढा रहा था / मेरा ध्यान वहीं पर था /

उसने पूछा, “ क्या हुआ रवि? तुम्हारा ध्यान कहाँ है?”

मैंने कहा, “मेरा ध्यान तुझमें है / ”

वो शरमाई और बोली- धत /

मेरी हिम्मत बढ़ गई / मैंने हलके से उसके गाल पर चपत लगाया और प्यार से मुस्कराया / जवाब में वो भी मुस्कराई /

मेरी हिम्मत और बढ़ी, मैंने उसके दोनो गालों को पकड़ कर उसके होठों को चूम लिया, उसने दूर हटाते हुए कहा- रवि. मम्मी आ जायेगी /

और हम वापस पढ़ाई में लग गये /

अगले दिन उसके मम्मी, पापा और उसका भाई किसी काम से बाहर गये थे, जाते समय उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- रवि , रेनू घर पर अकेली है, तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना / मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई /

रात को 9 बजे मैं उसके घर गया / वो ग्राउन्ड फ़्लोर पर थी / आज उसने सुन्दर सी काले रंग की नाइटी पहन रखी थी / हम दो घण्टे तक पढ़ते रहे / बाद में वो अपने कमरे में जाकर सो गई, मैं बाहर हाल में सो गया / अचानक वहाँ लाइट चली गई / वो कमरे से बाहर आई और मेरे पास हाल में बेड पर बैठ गई और हम बातें करने लगे /

उसने मुझसे कहा,“रवि , आइ लव यू / ”

मैंने कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों में ले लिया / वो चुप रही, उसने कुछ भी नहीं बोला / मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, वो हल्का सा विरोध करती रही, इतने में लाइट आ गई तो मैंने देख उसका चेहरा एकदम लाल हो रहा है और आँखे अपने आप बन्द हो रही हैं /

मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फिराया तो वो एक दम से मुझसे चिपक गई / मैं उसके रसीले होठों को चूमता रहा और हाथों से धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाता रहा, वो मदहोश हो गई /

मैं थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसकी नाइटी धीरे से उतार दी / अब वो मेरे सामने लेमन रंग की ब्रा और पैन्टी में थी, उसकी फ़िगर देख कर मैं अपने होश खो बैठा / मैंने उसके पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया / वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे कपड़े उतारने लगी / अब मैं भी सिर्फ़ अन्डरविअर में था / मैं उसे चूमता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ घुमाता रहा /

उसके स्तन क्या पत्थर की तरह कड़क थे / मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके से ब्रा उसके हाथ में आ गई और उसके बूब्स आज़ाद हो गये, इससे पहले भी मैंने 3-4 बार सेक्स किया था लेकिन उसका हुस्न देख कर मैं अपने होश खो गया और धीरे से मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी / बदले में उसने भी मेरी चड्डी उतार दी /

अब हम दोनों नंगे थे / हम दोनों एक दूसरे को चाटते रहे / मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर लगाया और उसको चूसने लगा उसने मेरे लण्ड को हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी / मेरा लण्ड लोहे की तरह एक दम कड़क हो गया / मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसके मुँह के पास किया तो वो उसे चूमने लगी / मैंने उसे मुँह में लेने को कहा तो वो उसे मुँह में लेकर चूसने लगी /

मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था, मैंने अपनी उँगली धीरे से उसकी चूत मे डाल दी / उसकी चूत गरम तवे की तरह तप रही थी / मेरी उँगलियां उसकी चूत की गरमी महसूस कर रही थी /

वो मेरे लण्ड को चूसती रही और मेरी उँगलियां उसकी चूत के साथ खेलती रही / अब वो चुदवाने के लिये एकदम तैयार थी / उसकी चूत मेरी उँगलियों की हरकत से पानी से भर गई और गीली हो गई / मैं अपना मुँह उसकी चूत पर ले गया और उसकी जाँघों और उसकी चूत को चूमने लगा / वो जोर जोर से पाँव हिलाने लगी / आअहह . रवि, मेरे राजा, मज़ा आ रहा है / मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी और उसके पानी को पीने लगा / वो एक दम मदहोश हो गई और मेरे लण्ड को दाँत चुभाते हुये और जोर से चूसने लगी /

थोड़ी देर में उसकी चूत ने और पानी छोड़ दिया / मैं उसे पीता रहा / कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका था और उसके मुँह में मेरे लण्ड ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो सीधे उसके गले मे गया / उसने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और एक भी बून्द बाहर नहीं गिरने दी, और मेरे लण्ड को चूसना जारी रखा / 3-4 मिनट में मेरा लण्ड वापस तन गया / उसकी हरकतों से मुझे लगने लगा कि वो चुदाई के लिये बहुत आतुर है /

मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और उसकी गाँड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत ऊपर आ गई / मैं अपने लण्ड को उसकी चूत पर फिराने लगा / उसकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी /

उसने कहा कि उसने कभी चुदवाया नहीं है / वो बोली, रवि इतना मोटा लंड मेरी चूत में कैसे जाएगा / मैंने कहा- थोड़ा सा दर्द होगा, लेकिन बाद मे मज़ा आयेगा /

मैंने अपने लण्ड और उसकी चूत पर क्रीम लगाई और अपना लण्ड धीरे से उसकी चूत में घुसाने लगा / उसकी चूत बहुत टाइट थी /

मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसके अन्दर जाते ही वो जोर से बोली,“ र वि , बहुत दर्द हो रहा है / ” मैं वहीं पर रूक गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा और उसके होठों को चूमने लगा / थोड़ी देर मे रेनू जोश में आ गई और अपने चूतड़ उठाने लगी / मैंने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया, मेरा लण्ड उसकी चूत में ३ इन्च घुस गया / वो जोर से चिल्लाने लगी और पसीने में नहा गई, मुझसे कहने लगी,“ र वि, प्लीज / बाहर निकालो / ”

मैंने उससे बोला- पहली बार में थोड़ा दर्द होता है / और उसे चूमने लगा /

कुछ देर बाद वो शान्त हो गई /

मैंने उससे बोला- अपना मुँह बन्द रखना, मेरी जान / मैं अभी अपना पूरा लण्ड तेरी चूत में डालूंगा /

उसने जोश मे आकर कहा- अगर मैं चीखूं भी तो भी तुम नहीं रुकना /

मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में 3-4 इन्च में अन्दर बाहर करने लगा / उसे भी मज़ा आने लगा और वो मुझसे ज्यादा चिपकने लगी / अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 8 इन्च का लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया / वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी / आअहह, रवि, मार गयी, लगता है मेरी चूत फट गयी है /

मैं वहीं पर रूक गया / उसकी चूत में से खून निकलने लगा था / वो जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चल गया है / रेनू, अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद मे जो मज़ा आयेगा वो पूरा दर्द भुला देगा /

मैंने उसके लाख कहने पर भी अपना लण्ड उसकी चूत से नहीं निकाला /

पाँच मिनट तक मैं सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फ़िराता रहा / धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसे जोश आने लगा / वो मुझसे चिपक गई और अपने चूतड़ उठाने लगी / उसकी चूत मेरे लण्ड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती / मैं इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया /

थोड़ी देर मैं उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाइ का मज़ा लेने लगी / 15 मिनट तक मैं उसे चोदता रहा / इतनी देर मे उसकी चूत गीली हो गई और उसका दर्द कम हो गया, और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी /

करीब 15 मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ /

मैंने उसे कस के पकड़ा, जिससे उसके मुंह से आवाज न निकले उसके होंठ अपने होठों में मजबूती से दबा लिये और सरपट घोड़ा दौड़ा दिया / मैं पूरे जोश में आ चुका था और मैं अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर एक धक्के से पूरा घुसा देता, पूरी फूर्ती से / मेरा लंड रेनू की चूत में धच-धच-धच अंदर बाहर हो रहा था /

अब वो बुरी तरह छूटने के लिये दम लगा रही थी और मैं उसे उतना ही मजबूती से पकड़ रहा था / झटके पर झटके / धक्के पर धक्के /

एक दो मिनट में उसकी चूत बुरी तरह से मेरे लण्ड को रोकने की कोशिश कर रही थी / और मुझे साफ़ पता चला जैसे कि उसकी चूत ने एक जोर से पिचकारी मेरे लण्ड पर छोड़ दी / अब मैंने रफ़्तार और धक्के की ताकत बढ़ा दी और बड़े दम लगाने पर मैं भी चरम आनन्द पर पहुँच गया / ऐसा लगा जैसे मेरे लण्ड से कोई टँकी खुल गई हो और मैंने बहुत सारा पानी उसकी चूत में भर दिया /

करीब 10 मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा / हम दोनों की सांस की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा था / उसके बाद हम दोनो उठे और बाथरूम में जाकर उसकी चूत और अपने लण्ड को धो कर साफ़ किया और वापस आकर बेड पर बैठ गये /

मेरा लण्ड इतनी देर में वापस तन कर खड़ा हो गया / उसे तना देखकर वो बोली- अब नहीं रवि , अभी दो घण्टे सो लेते हैं, उसके बाद करेंगे /

मैंने कहा- ठीक है /

हमने अपने कपड़े पहन लिये और सोने लगे / लेकिन आंखो में नींद कहाँ /

करीब एक घण्टे बाद मैंने उसके और अपने कपड़े फिर उतार दिये / उसने कहा कि प्यार से करना क्योंकि अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है / मैंने उसके बदन को दबाना शुरू कर दिया, बच्चों की तरह उसका दूध पीने लगा तो वह कसमसा उठी / और उसने भी मुझे चूमना शूरू कर दिया और खुद-ब-खुद 69 की पोजीशन में आ गये / वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत को / फिर मैं काम शास्त्र में बताये एक एक आसन से उसे चोदने लगा और एक ही रात में कली को खिला कर फ़ूल बना दिया था /

फिर तो हम दोनों को जब भी मौका मिलता वो मुझसे चुदवाती थी / करीब एक साल तक मैं उसे चोदता रहा, उसके बाद उसके पापा की बदली हो गई / उसके बाद से आज तक उससे मेरी मुलाकात नहीं हुई है / वो मेरे जीवन सबसे हसीन कली थी जिसे फूल बनाने का जिम्मा खुदा ने मुझे इनाम में दिया था / उस से मोबाइल पर बातचूट हो जाती है / वो आज भी मेरे लंबे तगड़े 8" लंड को याद कर के अपनी चूत में उंगली करके अपनी चूत की आग शांत करती है.. काश उसका साथ एक बार फिर से मिल जाए, बस इसी मौके की तलाश में हूँ /



RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

रवि, मेरा सौतेला बेटा

मेरा नाम जसमीत कौर है, मैं 37 साल की होशियारपुर पंजाब से हूँ। मेरे परिवार में चार सदस्य हैं, मेरे पति प्रताप 44 वर्ष के हैं, मेरी उनसे शादी जब हुई तब वे विधुर थे और इस तरह में उनकी दूसरी बीवी हूँ। पहली बीवी से उनके दो बच्चे हैं जो अब मेरी संतान कहलाये पर उनसे मेरा खून का कोई रिश्ता नहीं है।

मेरी बेटी पायल और मेरा बेटा रवि। मैं अपने बारे में आपको बताना चाहती हूँ।

मेरे पति बैंक में क्लर्क हैं, पायल बी.कॉम. प्रथम वर्ष में है और रवि 12वीं क्लास में साइन्स से पढ़ाई कर रहा है। हम सभी बहुत प्रसन्नता से रहते हैं और एक दूसरे का बहुत ख़याल रखते हैं।

मैं BA पास हूँ। हर माँ की तरह मैं भी चाहती हूँ कि मेरे बच्चे, चाहे वे मेरे पेट से नहीं जन्मे फ़िर भी, पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी पायें !

मुझे लगता है कि पायल को तो अच्छी नौकरी मिल जाएगी और वो अपने ससुराल चली जाएगी लेकिन मुझे रवि की चिंता होती है क्योंकि वो स्टडी में अपनी बहन की तरह ध्यान नहीं देता है, जबकि वो भी बहुत इंटेलिजेंट है, लेकिन कुछ समय से उसका स्टडी से बिल्कुल ध्यान हट गया है।

मुझे लगता है कि किशोर-वय में अक्सर ध्यान यहाँ-वहाँ चला जाता है, इसीलिए मैं उसे बहुत समझाती हूँ कि पढ़ाई पर ध्यान दो। वो पढ़ाई भी करता है और पास हो जाता है। लेकिन वो ज़्यादातर अपना समय अपने स्कूल के दोस्तों के साथ बिताता है और मुझे चिंता रहती है क्योंकि वो मुझसे हमेशा आगे की स्टडी के लिए बंगलौर जाने की बात अभी से करता है।

मैं परेशान हो जाती हूँ, और सोचती हूँ कि कैसे उसे अपने से दूर बंगलोर भेजूँ क्योंकि डर लगता है कि कहीं वो ग़लत रास्तों पर ना चल पड़े। मैं रवि से बहुत प्यार करती हूँ। एक दिन मैंने सोचा कि क्यूँ ना इस समस्या पर अपनी सहेलियों से इस बारे मैं बात करके उनसे कुछ सलाह लूँ। तो फिर मैंने अपनी सहेली को फोन लगाया और अपनी परेशानी बताई।

उसने कहा- इंटरनेट पर जाकर गूगल पर माँ-बेटे के सम्बन्ध को सर्च करने को कहा और बोली कि मुझे मेरे सारे सवालों का जवाब वहीं मिलेगा। शाम को मैंने ऐसा ही किया। खाना बनाने के बाद मैंने सर्च किया और मुझे मेरा जवाब मिल गया। फिर मैंने रवि को नोटिस करना चालू कर दिया और मैं उसकी सारी गतिविधियों पर नज़र रखने लगी और मैं देखने लगी कि रवि मेरे साथ कैसा व्यवहार करता है।

मैंने पाया कि उसका व्यवहार सामान्य नहीं है। मैंने उसके कमरे की तलाशी ली लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला। फिर मैंने उसका मोबाइल देखा तो मुझे उसमें भी कुछ नहीं मिला। फिर मैंने उसकी पेन ड्राइव अपने लॅपटॉप पर लगा कर देखी। उसकी पेन ड्राइव मैंने जब देखा तो जो मुझे लग रहा था वो मुझे मालूम हो गया। मैंने देखा कि उसकी पेन ड्राइव में नंगी लड़कियों के फोटो थे और मैं समझ गई कि अब रवि बड़ा हो गया है।

फिर मैंने वही किया जो मुझे करना चाहिए था। मैंने सोचा कि कहीं बाहर यह कोई गलती न कर दे, जिससे इसकी लाइफ खराब हो जाए तो क्यूँ ना मैं ही उसे इन सब बातों के बारे में बताऊँ।

मैंने उससे एक दोस्त की तरह उन सब बातों को बारे में डिसकस किया, लेकिन वो सुनने के लिए तैयार ही नहीं था। शायद वो मुझसे शरमा रहा था। और जब ही मैं इस तरह की बात समझाती, तो वो मुझे अनदेखा कर देता।

मैंने अपने पति से इस बारे में बात की तो वो बोले कि वो अपने आप समझ जाएगा। लेकिन मेरा मन तो यही सोच रहा था कि कहीं रवि से कोई गलती ना हो जाए या वो अपने स्कूल के दोस्तों की तरह ना हो जाए।

मैंने फ़ैसला किया कि मुझे ही कुछ करना पड़ेगा क्योंकि एक माँ ही अपने बेटे की अच्छी दोस्त होती है। मैंने सोचा कि क्यूँ ना रवि को थ्योरी की जगह प्रॅक्टिकल नॉलेज दी जाए और यही आख़िरी रास्ता है और मैं इसे गलत भी नहीं समझती हूँ।
और मैंने वही किया जो मुझे करना चाहिए था। अब मैं रवि को अपनी और आकर्षित करने का प्रयास करने लगी।
रवि बड़ा तो हो ही गया था तो मुझे ज़्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी।

मैं रवि को शुरू से ही नहलाती थी। अभी तक नहलाती हूँ, भले ही अब वो 18 साल का हो गया है, फिर भी मैं ही उसे नहलाती हूँ। आज से मेरा इरादा कुछ और होगा मैं हमेशा रवि को पहले नहलाती थी और फिर मैं नहाती थी। आज मैंने पहले नहाने का इरादा किया और मैं बाथरूम मैं नहाने चली गई और सोचा क्यूँ ना बेटे रवि को भी बुला लूँ। नहाने के लिए मैंने रवि को आवाज़ लगाई।

सर्दी के दिन थे, मैंने बोला- रवि, ज़रा गरम पानी दे देना ! रवि गरम पानी लेकर बाथरूम मैं आ गया उसने मुझे जैसे ही देखा वो देखता ही रह गया। उसने पहली बार मुझे इस नज़र से देखा था। वो मेरे मुममे देख रहा था, जो ब्लाउज में से थोड़े बाहर निकल रहे थे।

मैंने अपनी साड़ी उतार रखी थी और मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी।

मैंने रवि से कहा- तू भी नहा ले।

उसने कहा- नहीं, पहले आप नहा लो। मैं बाद में नहा लूँगा।

मैंने कहा- तुझे स्कूल के देर हो जायेगी। मुझे नहाने में टाइम लगेगा। आजा, पहले तुझे नहला देती हूँ।

वो मान गया। मैं जैसे ही गरम पानी मिलाने के लिए नीचे झुकी, तो मेरे मुममे ब्लाउज में से और ज़्यादा बाहर आ गये थे और रवि मेरे मुममे ही देखे जा रहा था।

उसकी नज़र हट ही नहीं रही थी और फिर मैं भी तो यही चाहती थी। फिर मैंने रवि को अपने कपड़े उतारने के लिए कहा, उसने कपड़े उतार लिए।

वो सिर्फ़ अंडरविअर पहने हुए था। मैंने उसके ऊपर पानी डाला और उसे नहलाने लगी। वो भी आज बड़े मज़े से नहा रहा था।

नहाते हुए पानी भी उछाल रहा था जिससे मैं, और मेरे कपड़े भी गीले हो गए। मैंने कले रंग का ब्लाउज पहना हुआ था और सफ़ेद ब्रा जो कि भीगे हुए ब्लाउज में से साफ़ दिख रही थी।

भीगे हुए ब्लाउज में से मेरे मुममे भी नज़र आ रहे थे। जिसे रवि नज़र चुरा कर देख रहा था।

रवि अब नहा चुका था। मैंने उसे स्कूल जाने के लिए जल्दी से तैयार होने के लिए कहा, और वो बाथरूम से जाने को हुआ।
तभी मैंने उसे रोक लिया और कहा- रवि ज़रा रुक जा मेरे पीठ घिस देना, बहुत मैल जम गया है।

वो रुक गया। वो अभी भी भीगा हुआ था और सर्दी से काँप रहा था। उसने तौलिया से अपना बदन पौंछ लिया और मेरे पीछे खड़ा हो गया। मैंने भी सोचा कि रवि को और सताया जाए।

मैंने नहाने के लिए अपने ऊपर पानी डाला और साबुन लगाने लगी। मैंने अपना ब्लाउज भी उतार लिया और अपनी ब्रा भी, और फिर मैंने रवि को पीठ पर साबुन लगाने के लिए कहा।

वो मेरी पीठ पर साबुन लगाने लगा। वो मेरे पीछे खड़ा था। इसीलिए वो मेरे मुममे नहीं देख पा रहा था।
तो वो बाथरूम में लगे दर्पण में से मेरे मुममे देख रहा था और अब उसकी लंड खड़ी हो गई। जो साबुन लगाते समय मैं कभी-कभी अपने पीछे महसूस कर रही थी।

रवि को भी शायद अब मज़ा आने लगा था क्योंकि साबुन लगाते समय वो मेरे मुममे को बगल से छूने की कोशिश कर रहा था, मैं भी कुछ नहीं बोल रही थी। मेरे मुममे काफ़ी बड़े हैं और ऊपर से मेरा बदन भी गोरा है। मुझे देख कर हर कोई आहें भरता है। मैंने भी उसका साथ दिया और मैंने महसूस किया कि मेरे कुछ ना कहने पर उसे और भी मज़ा आने लगा। उसने इस बार अपनी लंड मेरे पीछे से स्पर्श की और मुझे महसूस कराया।

मैंने कहा- क्या कर रहा है?

वो डर गया कि कहीं मम्मी मुझे डांटें ना।

लेकिन मैंने कहा- तेरा ध्यान किधर है? ठीक से साबुन क्यूँ नहीं लगाता?

वो बोला- हाँ, लगा तो रहा हूँ।

मैंने बोला- पीठ पर ही लगता रहेगा या थोड़ा छाती पर आगे भी लगाएगा !

उसने अपने हाथ आगे की तरफ बढ़ाये और अब वो मेरे वक्ष के उभारों पर साबुन लगाने लगा। तभी मुझे उसकी लंड पीछे से थोड़ी और महसूस हुई, लेकिन इस बार उसने अपनी लंड मेरे पीछे लगाए रखी।

और अब रवि ने साबुन लगाते हुए ही मेरे मुममे धीरे-धीरे दबाने लगा। जिससे मुझे भी अजीब सा नशा छाने लगा। मैं भी मज़ा ले रही और कुछ नहीं बोल रही थी क्योंकि मुझे ऐसा कभी भी महसूस नहीं हुआ था।

रवि के अंडरवियर पहने होने के कारण उसकी लंड ठीक से मुझे महसूस नहीं हो रही थी। तो रवि ने हिम्मत करके अपनी अंडरवियर में से लंड को बाहर निकाल कर मेरे पीछे की दरार में लगाया, जो मुझे काफ़ी हद तक महसूस हुआ।

रवि मेरे स्तनों पर साबुन लगाते हुए उनको मसलने लगा, लेकिन मैंने अभी भी कुछ नहीं कहा।
अब वो शायद बहुत उत्तेजित हो गया था लेकिन मैंने सोचा कि बस बहुत हुआ, रवि के लिए अभी के लिए इतना ही काफ़ी था।

मैंने उससे कहा- बस साबुन लग गया है।

तो वो बोला- मम्मी हाथ-पैरों पर भी साबुन लगा दूँ क्या?

“नहीं, मैं लगा लूँगी, मेरा हाथ पीठ पर नहीं जाता ना, इसलिए तुझे बुलाया था। बस अब मैं नहा लूंगी। तुम जाओ, तुम्हें स्कूल के लिए देर हो रही है।”

वो जाने लगा। मैंने देखा कि रवि की लंड काफ़ी बड़ी दिख रही थी जो अभी तक खड़ी हुई थी। मैंने सोचा कि क्यूँ ना अभी ही सारी प्रॅक्टिकल नॉलेज दे दूँ !

फिर मुझे याद आया कि उसे स्कूल भी तो जाना है, बाकी ज्ञान शाम को सोते समय दे दूँगी। और वैसे भी सब्र का फल मीठा होता है।

मैंने नहाने के बाद नाश्ता बनाया, रवि ने नाश्ता किया और उसके लिए मैंने लंच बॉक्स उसके बैग में रख दिया।
रवि स्कूल चला गया और फिर मैं घर के सारे काम करने में व्यस्त हो गई और पता भी नहीं चला कि कब दोपहर के दो बज गये। फिर मैंने थोड़ा आराम किया।

नींद खुली तो शाम के चार बज चुके थे, रवि भी घर आ चुका था, मैंने उसके लिए चाय बनाई और वो थोड़ी देर बाद कोचिंग के लिए निकल गया। तभी पायल क्लास से आ गई, मैंने उसको भी चाय दी।

वो अपने कमरे मैं चली गई। अब शाम के सात बज चुके थे। मेरे पति भी आ चुके थे। मैंने फिर चाय बनाई और अपने पति को दी। वे चाय पीने के बाद अपने कमरे में चले गये। थोड़ी देर आराम करने के बाद मेरे पति और मेरी बेटी दोनों ही साथ मैं गार्डन में घूमने चले गये।

मैं डिनर तैयार करने लगी और डिनर तैयार करते हुए मुझे पता ही नहीं चला कि कब 8:30 बज गये। पायल और मेरे पति दोनों गार्डन से घूम कर आ चुके थे।

पायल ने कहा- मम्मी खाना लगा दो।

मैंने अपने पति से पूछा- आपके लिए भी खाना लगा दूँ क्या?

उन्होंने कहा- हाँ, लगा दो।

मैंने दोनों के लिए खाना लगाया तो मेरे पति ने कहा- तुम भी खाना खा लो।

मैंने कहा- नहीं आप दोनों खा लो, मुझे अभी भूख नहीं है।

पायल ख़ाना खाने के बाद अपने कमरे में चली गई और मेरे पति भी अपने कमरे में चले गए, टीवी देखने लगे।
अब रात के 9:20 बज चुके थे और मैं भी कमरे मैं जाकर उनके साथ टीवी देखने लगी, 10 मिनट बाद ही रवि आ गया। मैंने गेट खोला और पूछा- इतनी देर क्यूँ लगा दी?

तो बोला- मम्मी साइकल पंचर हो गई थी इसलिए देर हो गई।

“ठीक है, खाना लगा देती हूँ, हाथ मुँह धो लो।”

मैंने टेबल पर खाना लगाया रवि खाना खाने लगा। लेकिन और दिन की तरह आज उसका चेहरा चमक रहा था। वो बहुत खुश लग रहा था।

खाने खाते हुए मुझसे बोला- मम्मी आज मेरे टैस्ट में 10 में से 10 नंबर आए हैं।

मैं भी खुश हो गई। तभी रवि ने थोड़ी सब्जी माँगी और मैं सब्जी परोसने के लिए जैसे ही झुकी तो मेरे मुममे भी ब्लाउज में से थोड़े बाहर आ गये।
तभी रवि की नजर मेरे उरोजों पर पड़ी। वो उन्हें देख रहा था और मुझे पता भी नहीं था कि रवि मेरे मुममे देख रहा है।
मैंने जैसे ही रवि की तरफ देखा, तो मुझे पता चला कि रवि का ध्यान खाने पर नहीं बल्कि मेरे उभारों पर था। उसकी नज़रें छुप-छुप कर मेरे चूचों को निहार रही थीं। मैं भी उसे अपने स्तन दिखाने के लिए थोड़ी झुक कर खड़ी हो गई, दोनों हाथ मेज पर रख दिए, जिससे मेरे पपीते अब और भी अच्छे तरह से दिख रहे थे।

रवि खाना खाते-खाते उन्हें देख रहा था और मैं अपनी नज़र इधर-उधर कर रही थी, जिससे कि रवि को पता ना चले की मैं उसे देख रही हूँ।

रवि खाना खा लिया था, फिर भी वो वहीं बैठा हुआ था और खाना खाने का बहाना कर रहा था, मुझसे बातें भी कर रहा था, क्योंकि वो मेरे बूब्स को ज़ी भर कर देखना चाहता था।

लेकिन थोड़ी देर रवि बोला- मम्मी क्या आपने खाना खाया?

मैंने कहा- नहीं मैं खा लूँगी, तुम खाओ अभी।

रवि ने कहा- माँ आप भी जल्दी खाना खा लिया करो, कितना काम करती हो आप। चलो आप मेरे साथ ही खाना खा लो।
मैंने भी उसकी बात नहीं टाली और उसके बगल में जाकर बैठ गई और हम एक ही थाली में खाना खाने लगे। लेकिन अभी भी रवि की नज़र मेरी छाती पर ही थी।

मैंने भी जल्दी से खाना खाया और कहा- मैंने खाना खा लिया है, तुम्हें और खाना है?

वो बोला- नहीं।

मैंने वहाँ से सारे बर्तन उठाए और रवि अपने रूम में चला गया।

मैंने सारे बर्तन धोकर, दूध गर्म किया और पायल को दिया और फिर मैं रवि के कमरे में दूध देने गई और रवि को दूध दिया। वो अभी पढ़ाई कर रहा था, मैंने उसे कहा- दूध ध्यान से पी लेना।

तभी रवि ने कहा- दूध दो तो, मैं पी ही लूँगा।

उसने यह बात इस तरह से की, जो वो परोक्ष मुझसे जो कहना चाहता था, वो उसने कह दिया।

और मैं भी उसकी बात का मतलब समझ गई।

“ठीक है, लेकिन ध्यान से पी लेना, भूलना नहीं !" और फिर मैं वहाँ से आ गई।

मेरे पति रूम में अभी तक टीवी देख रहे थे और साथ में ड्रिंक भी ले रहे थे।

तभी मैंने उनसे कहा- मैं ड्रिंक बना दूँ?

तो उन्होंने कहा- क्या बात है, आज बड़ी खुश लग रही हो?

मैंने कहा- बस यूँ ही, और मैं ड्रिंक बना कर उन्हें देती जा रही थी, जिससे उन्हें काफ़ी नशा हो जाए और वो जल्दी से सो जाएं, और सुबह भी देर से उठें। वैसे भी कल तो सन्डे है।

उनको काफ़ी नशा हो चुका था और वो सो गए।

मैंने टीवी ऑफ किया। कमरे की लाइट भी ऑफ की, और फिर मैं पायल के कमरे में गई और देखा कि पायल सो चुकी है या नहीं। फिर मैंने रवि के रूम में जाकर देखा कि वो क्या कर रहा है? वो अभी तक जाग रहा था और बेड पर लेटा हुआ था।

मैंने बोला- सो जाओ रात हो चुकी है।

तो वो बोला- मम्मी नींद नहीं आ रही है।

मैंने कहा- आ जाएगी, सो जाओ।

मैं फिर अपने कमरे मैं आ गई और सोने लगी लेकिन मुझे भी नींद नहीं आ रही थी।

तभी रवि मेरे कमरे में आया और बोला- मम्मी सो गईं क्या?

मैं बोली- नहीं, क्यूँ क्या बात है? क्या चाहिए?

रवि बोला- मम्मी मुझे डर लग रहा है।

मैंने कहा- इतना बड़ा हो कर डरता है, चल मैं आती हूँ।

वो अपने रूम में चला गया। मुझे पता था कि डर तो सिर्फ़ एक बहाना था, क्योंकि वो मेरे साथ सोना चाहता था।
फिर मैं भी तो यही चाहती थी। मैंने झट से कपड़े चेंज किए, एक ऐसी नाईटी पहन ली, जिसका कपड़ा पतला था और फिर मैं रवि के रूम में गई।

रवि मुझे देख कर खुश हो गया। उसके कमरे की लाइट जल रही थी, जिससे मेरी नाईटी के अन्दर से मेरी ब्रा और पैन्टी नज़र आ रही थी।

उसने बड़े गौर से मुझे देखा। उसकी नज़र ऊपर से लेकर नीचे तक गई। फिर मैं उसके बेड पर बैठ गई। तभी मैंने देखा कि उसने अभी तक अपना दूध का गिलास खाली नहीं किया है।

मैंने उसे पूछा- अभी तक दूध क्यूँ नहीं पिया?

तो वो बोला- मैं भूल गया था अभी पीता हूँ। और फिर उसने गिलास का सारा दूध पी लिया।

वो बिस्तर में लेट गया, और मैं भी बिस्तर लेट गई। लेकिन दोनों में से किसी को नींद नहीं आ रही थी। रात के 12:00 बज चुके थे। मैंने सोचा कि काफ़ी समय हो गया है और शायद रवि सो गया होगा।

मैंने धीरे से आवाज़ दी, “रवि !”

वो बोला- हाँ मम्मी।

मतलब वो अभी तक जाग रहा था।

मैंने उसे पूछा- सोया नहीं, अभी तक?

तो बोला- नींद नहीं आ रही है।

और उसने मुझसे पूछा- आपको नींद क्यूँ नहीं आ रही है।

मैं समझ गई कि रवि क्या चाहता है। और अभी तक क्यूँ जाग रहा है।

मैंने उसे कहा- मुझे थोड़ी सर्दी लग रही है और आज काम भी कुछ थोड़ा ज़्यादा था ! ‘ओह !’ पूरा बदन दुख रहा है।

तभी रवि एकदम से बोला- मम्मी, मैं आपके हाथ-पैर दबा देता हूँ।

मैंने कहा- नहीं, क्यूँ परेशान होता है, तू सो जा।

तो बोला- इसमें परेशान होने की क्या बात है, लाओ मैं दबा देता हूँ।

मैं जानती थी कि वो मेरे बदन को महसूस करना चाहता है।

मैं उसे मना भी कैसे करती भला, क्योंकि जैसा मैंने सोचा था, ठीक वैसा ही हो रहा था।

जैसे ही उसने कहा- मम्मी मैं आपके पहले पैर दबा देता हूँ, मैंने कहा- ठीक है।

और वो मेरे पैर दबाने लगा।

मेरी नाईटी सिर्फ़ घुटनों तक ही लंबी थी और वो भी थोड़ी ऊपर तक खिसक गई थी। पहले कुछ मिनट रवि ने पैर ठीक से दबाए, लेकिन कुछ देर बाद उसके हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगे।

मैंने रवि से कहा- ठीक से दबाओ पैर !

वो बोला- हाँ दबाता हूँ।

मैंने सोचा- क्यूँ ना रवि को और मज़ा दिया जाए।

तो मैं थोड़ा खाँसने लगी और तभी रवि ने पूछा- सर्दी हो गई है क्या?

मैंने कहा- हाँ सुबह से ही खाँसी हो रही है, रवि पैर बाद में दबा देना पहले एक काम कर दे। पापा के रूम में जो ड्रिंक्स की बॉटल रखी रहती है, उसमें से एक रम की बॉटल ले आ, जिससे ये खाँसी बंद हो जाएगी।

यह सुनते ही रवि जल्दी से गया और एक रम की बॉटल और गिलास भी ले आया।

उसने आधा गिलास रम का मुझे दे दिया और आधा गिलास रम वो खुद पी गया।

मैंने उससे पूछा- तुम क्यूँ पी रहे हो?

तो वो बोला- मुझे भी सर्दी लग रही है, इसलिए।

मैंने कुछ नहीं कहा और फिर मैं लेट गई और वो मेरे पैर दबाने लगा।

पैर दबाते-दबाते उसके हाथ मेरी जाँघों तक आ गये। वो अपने हाथ ऊपर बढ़ाते ही जा रहा था। और मुझे भी एक अज़ीब सा नशा आने लगा था। मैंने सोचा क्यूँ ना आज रवि को खुल कर मज़ा दिया जाए।

मैं रवि से बोली- रवि मुझे गर्मी लग रही है, तू रुक जा अभी।

मैं उठी और अपनी नाइटी भी उतार दी, अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में रवि के शामने थी।

उसने मुझे इतना घूर कर देखा, जैसे उसने कभी शायद ऐसा नहीं देखा होगा।

मेरी उमर भले ही 37 की है लेकिन मैंने अपने आप को बहुत मेंटेन करके रखा था।

मेरा फिगर साइज़ 38DD-28-36 था, जिसे देख कर रवि के होश उड़ गये। उसके बाद मैं बेड पर लेट गई, रवि से बोली- अगर मुझे नींद आ जाए तो तुम भी सो जाना, पैर दबाते मत रहना क्योंकि मुझे तो जोरों से नींद आ रही है। ठीक है? और हाँ, कमरे की लाइट बंद कर दो।

वो बोला- हाँ, आप सो जाओ, मैं बाद में सो जाऊँगा।

उसने कमरे की लाइट भी बंद कर ली और अपना मोबाइल भी ले लिया ताकि वो मोबाइल की लाइट से थोड़ा उजाला कर सके। वो भी बेड पर आ गया और पैर दबाने लगा। मैं नाटक करने लगी जिससे कि बात आगे बढ़े। मैं खर्राटे भरने लगी, जिससे रवि को लगे कि मैं अब सो गई हूँ।

फिर रवि उठा और उसने अपने कपड़े भी उतार दिए अब वो सिर्फ़ अंडरविअर में था और उसने अपने मोबाइल की लाइट ज़ला कर दूर रख दिया, जिससे रूम में थोड़ा उजाला होने लगा।
अब रवि की हिम्मत बढ़ गई क्योंकि वो सोच रहा था कि मैं सो चुकी हूँ, और मैं नशे मैं भी हूँ। वो कुछ भी करेगा तो मुझे पता नहीं चलेगा। लेकिन मुझे एक पैग ड्रिंक से क्या होने वाला था। अब रवि मेरी जाँघों को दबा नहीं रहा था, बल्कि वो अब मेरी जाँघों को सहला रहा था। जिससे मुझे भी मज़ा आने लगा।

उसकी हिम्मत अब बढ़ती जा रही थी। उसने अब मेरी जाँघों पर से हाथ फेरते हुए मेरी पैन्टी के ऊपर ले आया और हाथ फेरने लगा। दूसरा हाथ उसने और ऊपर बढ़ाते हुए मेरे वक्ष पर रख दिया और थोड़ी देर के लिए रुक गया और देखा कि मैं कुछ नहीं बोल रही हूँ। तो उसने मेरे स्तन दबाना चालू कर दिया।

थोड़ी देर बाद उसने मेरे उरोजों को और ज़ोर से दबाना चालू कर दिया। तभी मैं एकदम से उठी तो रवि घबरा गया उसका चेहरा देखने लायक था। वो बहुत डर गया था और मैंने नाटक किया कि जैसे मैं नींद में हूँ।

मैंने उससे बोला- रवि, देख ज़रा पानी है क्या? मुझे प्यास लगी है।

और वो बोला- हाँ पानी है।

लेकिन उसने सोचा कि मैं नींद में हूँ, उसने मुझे पानी की जगह आधा गिलास रम दे दी।

मैंने उससे नींद में बुदबुदाते हुए कहा- पानी का टेस्ट कैसा है?

तो वो बोला- आपने रम पी रखी है, इसलिए आपको ऐसा लग रहा है।

मैं भी झट से रम पी गई और फिर सोने का नाटक करने लगी, खर्राटे भरने लगी।

लेकिन रवि ने 10 मिनट बाद मुझे छुआ और मैं अभी भी जाग रही थी। उसने इस बार सीधा एक हाथ मेरे चूचे पर रखा और दूसरा मेरी पैन्टी पर और दबाने लगा। और इस बार हिम्मत करके उसने अपना हाथ पैन्टी के अन्दर धीरे से खिसकाया। मेरे पूरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई। मैंने भी उसको साथ दिया और अपने पैर थोड़े फैला लिए जिससे कि उसका हाथ ठीक से मेरी चूत पर जा सके।

जैसे ही मैंने अपने पैर फैलाए, रवि ने अपना पूरा हाथ मेरी चूत पर रख दिया। अब उसने अपनी उंगलियाँ मेरी चूत में अन्दर कर दीं। वो अपनी उंगलियों को मेरी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। फिर अचानक से उसने अपनी उंगली मेरी चूत में से बाहर निकाल ली। अब उसने अपनी अंडरवियर में से अपना लंड भी बाहर निकाल लिया।

मैंने अपनी थोड़ी से आँख खोल कर ये सब देख रही थी, उसका लौड़ा काफ़ी बड़ा लग रहा था। अब वो पूरा नंगा मेरे सामने था। उसे पता था कि मैंने ज़्यादा पी रखी है और मुझे कुछ पता नहीं चलेगा। उसने धीरे-धीरे मेरी पैन्टी उतार दी और मेरी ब्रा भी उसने उतार दी। अब वो एकदम निडर होकर अपने लंड को मेरी चूत में पेलने की कोशिश कर रहा था, तभी उसका लंड मेरी चूत में चला गया।

मेरे मुँह से ‘आह’ निकल गई लेकिन रवि इस बार नहीं रुका और उसने धीरे-धीरे झटके देना चालू कर दिया और मेरे चूचों को वो अपने हाथों से मसलने लगा। उसने अपने होंठ मेरे होंठ से मिला कर मुझे चूमने लगा। हम दोनों का बदन भी काफ़ी गर्म हो चुका था। जब मुझे लगा कि वो झड़ने वाला है तो मैंने धीरे से करवट ले ली, जिससे उसका लण्ड मेरी चूत में से बाहर आ गया।

वो झड़ भी नहीं पाया क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि वो इतनी जल्दी से झड़ जाए। लेकिन उसने मुझे किस करना नहीं छोड़ा और फिर से मेरी चूत में अपना लंड डालने लगा। इस बार मैंने भी उसका साथ दिया और अपने दोनों हाथों से उसे अपनी ओर इस तरह खींचा कि जैसे मैं अभी भी नींद में हूँ।

उसने फिर से अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। वो मेरे उभारों के निप्पलों को वो अपनी जीभ से सहला रहा था।
उसके धक्के लगतार मुझे गर्म कर रहे थे। कुछ देर बाद मैं झड़ गई और थोड़ी ही देर बाद रवि भी झड़ गया।

उसने मुझे बेड पर बैठाया लेकिन मैं अभी भी सोने का नाटक कर रही थी। उसने चादर से मेरी चूत और अपने लंड को साफ़ किया। फिर मुझे ब्रा पहनाई और लिटा दिया, फिर मुझे पैन्टी पहना दी। उसने मेरे होंठों पर एक चुम्बन भी किया और वो मुझे गले लगाया और वो सो गया। फिर मुझे भी नींद आ गई।

सुबह मैं जब उठी तो घड़ी में 7:30 का टाइम हो रहा था। मैं उठी और अपनी नाईटी पहनी और खिड़की का खोली जिससे बाहर से सूरज का उजाला आ रहा था। तभी रवि भी जाग गया। मैंने उससे उठने को कहा और वो बेड पर बैठ गया। उसे यह ध्यान नहीं था कि उसने अंडरवियर नहीं पहना है। तभी उसकी नज़र नीचे पड़ी और देखा कि उसने अंडरविअर नहीं पहना है तो उसने झट से चादर को लपेट लिया।

तभी मैं मन ही मन सोचने लगी कि जब रात में मुझे चोदते समय इसे शर्म नहीं आई जो अब यह शरमा रहा है। फिर मैंने उससे कहा- मुझसे शरमाता है? अरे पागल मैंने तो तुझे बचपन से ही ऐसा देखा है। उसे रात की सारी बात याद आ गई, उसने सोचा कि पता नहीं कि मम्मी को पता तो नहीं चल गया तो उसने मुझसे पूछा- मम्मी, आपको नींद कैसी आई?



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मैने पहली बार मोटा लंड लिया


मेरा नाम कमला है। अभी मेरी उम्र 26 साल की है। अभी तक कुवारीं हूँ। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की मेरी चूत भी कुवारी हैं। ये तभी चुद गयी थी जब मेरी उम्र ** साल भी नहीं हुई थी।


तब मै आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। उस दिन घर में मेरी मम्मी भी नहीं थी। मै और मेरा भाई जो कि मुझसे 5 साल छोटा था घर पर अकेले थे। उस दिन स्कूल की छुट्टी थी। इसलिए मै घर के काम कर रही थी। मेरा छोटा भाई पड़ोस में खेलने चला गया था। मै बाथरूम में नहाने चली गयी। अपने सारे कपडे मैंने हॉल में ही छोड़ दिए और नंगी ही बाथरूम में चली गयी। क्यों कि घर में तो कोई था नहीं इसलिए किसी के देखने का कोई भय भी नहीं था।

बाथरूम में आराम से मै अपने चूत को सहलाने । सहलाते सहलाते अपने चूत में ऊँगली डाल ली। पूरी ऊँगली अन्दर चली गयी। बड़ा ही मज़ा आया। अन्दर चूत में ऊँगली का स्पर्श साफ़ महसूस हो रहा था। मै अपने ऊँगली को चूत में घुमाने लगी। मुझे लगा कि शायद चूत में अभी भी बहूत जगह इसमें खाली है। मैंने बाथरूम में रखा हुआ पुराना टूथब्रुश लिया और उलटे सिरे से पकड़ कर अपने बुर में डाल लिया।

मै नीचे जमीन पर बैठ गयी और अपनी दोनों टांगो को पूरी तरह फैला दिया। इस से मुझे अपने बुर में ब्रश डालने में काफी आसानी हुई। अब मुझे बहूत ही मज़ा आने लगा। इतना मज़ा आ रहा था कि पेशाब निकलने लगा। करीब आधे घंटे तक मैंने अपने चूत में कभी शेम्पू तो कभी नारियल तेल डाल डाल के मज़ा लेती रही। और ब्रश से चूत की सफाई भी करती रही। थोड़े देर के बाद मै नहा कर वापस अपने कमरे में आ गयी। थोड़ी देर के बाद मेरा छोटा भाई भी बाहर से आ गया।


उसी शाम में मेरी मम्मी के दूर के रिश्ते में भाई लगने वाले एक रिश्तेदार मेरे यहाँ आ धमका । उसकी उम्र रही होगी कोई 28-29 साल की। उनको मेरी मम्मी से कुछ काम था। लेकिन मम्मी तो कल शाम में आने वाली थी। मैंने मम्मी को फोन कर के उसके बारे में बताया तो मम्मी बोली आज रात को उसे अपने घर में ही रुकने के लिए बाहरी कमरा दे देना।


रात को खाना पीना खा कर सभी चुपचाप सो गए। रात 11 बजे मुझे पिशाब लग गया। मै बाथरूम गयी तो मुझे फिर से वही सुबह में चूत में ब्रश डालने वाली घटना याद आ गयी। मुझे फिर से अपने बुर में ब्रश डालने का मन करने लगा। मैंने अपने सारे कपडे खोल कर अपने बुर में ब्रश डाल कर मज़े लेने लगी। मुझे अपने बाथरूम का दरवाजा बंद करने का भी याद नहीं रहा। मै दीवार की तरफ मुह कर के अपने चूत में ब्रुश डाल कर मज़े ले रही थी। मेरे मूह से मस्ती भारी अवाइज़ें निकल रही थी।

तभी पीछे से आवाज आई- ये क्या कर रही हो कमला ?


ये सुन कर मै चौंक गयी। मैंने पलट कर देखा तो मेरा कज़िन रवि ठीक मेरे पीछे खडा था। वो सिर्फ एक तौलिया पहने हुए था.


मैंने कहा - आप यहाँ क्या कर रहे हैं ?


वो बोला- मुझे पिशाब लगा था इसलिए मै यहाँ आया था तो देखा कि तुम कुछ कर रही हो।


मै अब क्या कहूं क्या नहीं? हड़बड़ी में मैंने कह दिया - देखते नहीं ये साफ़ कर रही हूँ। इसकी सफाई भी तो जरूरी है न? वैसे तुम यहाँ पिशाब करने आये हो ना तो करो और जाओ।


उसने कहा - मै तो यहाँ पिशाब करने आया था ।

मैंने कहा - ठीक है तुम तब तक पिशाब करो मै अपना काम कर रही हूँ।

दरअसल मै उसकी लंड देखना चाहती थी। सोच रही थी कि जब इसने मेरा चूत देख लिया है तो मै भी इसके लंड को देख कर हिसाब बराबर कर लूं।


रवि - तुम यहीं रहोगी?

मैंने कहा- हाँ। तुम्हे इस से क्या? ये मेरा घर है । मै कहीं भी रहूँ।


उसने कहा- ठीक है।

और रवि ने अपना तौलिया खोल दिया । और पूरी तरह से नंगा हो गया। मुझे सिर्फ उसकी लंड देखना था। रवि का लंड मेरे अनुमान से कहीं बड़ा और मोटा था। रवि का लंड किसी मोटे सांप की तरह झूल रहा था। वो मेरे सामने ही कमोड पर बैठ गया। उस ने अपने लंड को पकड़ा और उस से पेशाब करने लगा। यह देख मै बहूत आश्चर्यचकित थी कि इतने मोटे लंड से कितना पिशाब निकलता है? पिशाब करने के बाद उसने अपने लंड को झाड़ा और सहलाने लगा।


रवि ने कहा - तुम अपने चूत की सफाई ब्रश से करती हो?

मैंने कहा - हाँ.

रवि - क्या तुम अपने चूत के बाल भी साफ़ करती हो?

मैंने कहा - चूत के बाल? मेरे चूत में बाल तो नहीं हैं.

रवि - चूत के अन्दर नहीं चूत के ऊपर बाल होते हैं .जैसे मेरे लंड के ऊपर बाल है ना उसी तरह.

कह कर रवि अपने लंड के बाल को खींचने लगा.

मैंने पूछा - तुम्हारे लंड पर ये बाल कैसे हो गए हैं?


रवि बोला - जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम्हारे चूत पर भी बाल हो जायेंगे।


मैंने कहा – रवि, तुम्हारा लंड तो इतना बड़ा है कि लटक रहा है। क्या मेरा बुर भी बड़ा होने पर इतना ही बड़ा और लटकने लगेगा?

वो हंस के बोला- अरे नहीं पगली, भला बुर भी कहीं लटकता है? हाँ वो कुछ बड़ा हो जायेगा। फिर बोला- तुम एक जादू देखोगी? अगर तुम मेरे इस लंड को छुओगी तो ये कैसे और भी बड़ा और खड़ा हो जाएगा।


मुझे बहूत ही आश्चर्य हुआ ।


मैंने कहा - ठीक है। दिखाओ जादू .


रवि कमोड पर से उठ गया। और मेरे पास आ गया। रवि ने अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर कहा - अब इसको छुओ।

मैंने उसके लंड को पकड़ लिया। ऐसा लग रहा था कि कोई गरम सांप पकड़ लिया हो। रवि ने मेरे हाथ को अपने हाथ से दबाया और अपने लंड को घसवाने लगा। थोड़ी ही देर में मैंने देखा कि रवि की लंड सांप से किसी लकड़ी के टुकड़े जैसा बड़ा हो गया, एकदम कड़ा और बड़ा। उसे बड़ा ही आनंद आ रहा था। रवि ने अचानक मेरा हाथ छोड़ दिया। लेकिन मै रवि के लंड को घसती ही रही। थोड़ी देर में देखा रवि के लंड से चिपचिपा सा पानी निकल रहा था जो शेम्पू की तरह था। वो कराहने लगा.


मैंने कहा - रवि ये क्या है?

रवि बोला - हाय कमला, ये लंड का पानी है। बड़ा ही मज़ा आता है। तू भी अपने चूत से ऐसा ही पानी निकालेगी तो तुझे भी बड़ा मज़ा आयेगा.


मैंने कहा - लेकिन कैसे?


रवि बोला - आ इधर मै तुझे बता देता हूँ.


मैंने कहा - ठीक है , बता दो।


रवि ने मुझे कमोड पर बैठा दिया और मेरी दोनों टांगों को फैला दिया। रवि मेरे बुर को अपने मुह से चूसने लगा। मुझे बहूत ही अच्छा लग रहा था। रवि ने मेरी बुर में अपनी जीभ डाल दी। मेरे से रहा नहीं गया और मेरे बुर से पिशाब निकलने लगा। लेकिन वो हटा नहीं और पेशाब पीने लगा। मै तो एक दम पागल सी हो गयी। उस समय तो मेरी चूची भी नहीं निकली थी। लेकिन रवि मेरी निपल को ऐसे मसल रहा था लगा मानो वो मेरी चूची मसल रहा है। पेशाब हो जाने के बाद भी रवि मेरे बुर को चूसता रहा।


फिर अचानक रवि बोला - आ नीचे लेट जा ।


मैंने कहा - क्यों?


रवि बोला - अरे आ ना. तुझे और मस्ती करना बताता हूँ.


मै चुपचाप बाथरूम के फर्श पर लेट गयी। फर्श पर मेरे ही पिशाब पड़े हुए थे। रवि ने मेरे दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रख दिया और मेरे बुर में ऊँगली डाल कर ऊँगली को बुर में घुमाने लगा। मुझे मज़ा आ रहा था।

रवि बोला - अरे तेरा बुर तो बहूत बड़ा है। ये ब्रश से थोड़े ही साफ़ किया जाता है? आ इसकी मै सफाई अपने लंड से कर देता हूँ।

मैंने कहा - अच्छा रवि, लेकिन ठीक से करना।


रवि ने कहा - हाँ कमला , देखना कैसी सफाई करता हूँ.

उसने बगल से नारियल तेल लिया और मेरे चूत के अन्दर उड़ेल कर उंगली डाल कर मेरी चूत का मुठ मारने लगा.

मस्ती के मारे मेरी तो आँखे बंद थी. रवि ने पहले एक उंगली डाली. फिर दो और फिर तीन उंगली डाल कर मेरे चूत को चौड़ा कर दिया. थोड़ी ही देर में रवि ने मेरे चूत के छेद पर अपना लंड रखा। और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा। मुझे हल्का सा दर्द हुआ तो मै कराह उठी।


रवि रुक गया और बोला क्या हुआ कमला ?


मैंने कहा - रवि तेरा लंड बहूत बड़ा है। ये मेरी बुर में नहीं घुसेगा।


रवि बोला - रुक जा कमला . तू घबरा मत. बस मेरे लंड को देखती रह.


हालांकि मेरी हिम्मत नहीं थी कि इतने मोटे लंड को अपनी बुर में घुसवा लूं लेकिन मै भी मज़े लेना चाहती थी। इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा। अब रवि ने मेरे बुर के छेद पर अपना लंड रखा और धीरे धीर रुक रुक कर अपने लंड को मेरे बुर में घुसाने लगा। मुझे थोडा दर्द तो हो रहा था लेकिन तेल कि वजह से ज्यादा दर्द नहीं हुआ। रवि ने पूरा लंड मेरे बुर में डाल दिया। मुझे बहूत आश्चर्य हो रहा था कि इतना मोटा और बड़ा लंड मेरे छोटे से बुर में कैसे चला गया। रवि मेरी बुर में अपना लंड डाल कर थोड़ी देर रुका रहा।


फिर रवि बोला- दर्द तो नहीं कर रहा ना?


मैंने कहा- थोडा थोडा ।


फिर रवि ने थोडा सा लंड को बाहर निकाला और फिर धीरे से अन्दर कर दिया। मुझे मज़ा आने लगा। रवि धीरे धीरे यही प्रक्रिया कई बार करता रहा। अब मुझे दर्द नहीं कर रहा था। थोड़ी देर के बाद रवि ने अचानक मेरे बुर को जोर जोर से धक्के मरने लगा।

मैंने पूछा – रवि, ये क्या कर रहे हो?

रवि बोले- तेरे बुर की सफाई कर रहा हूँ।

मुझे आश्चर्य हुआ- अच्छा ! तो इस को सफाई कहते है?

रवि बोला - हाँ मेरी जान. ये चूत की सफाई भी है और चुदाई भी.

मैंने कहा – रवि, तो क्या तुम मुझे चोद रहे हो?

रवि बोला - हाँ. कैसा लग रहा है कमली?


मैंने कहा - रवि अच्छा लग रहा है.


रवि बोला - पहले किसी को चुदवाते हुए देखा है?


मैंने कहा - देखा तो नहीं है रवि, लेकिन अपने स्कूल में सीनियर सेक्शन की लड़कियों के बारे में सूना है कि वो अपने दोस्तों से चुदवाती हैं. तभी से मेरा मन भी कर रहा था कि मै भी चुदवा लूं. लेकिन मुझे पता ही नही था कि कैसे चुदवाऊं?


रवि बोला - अब पता चल गया ना?


मैंने कहा - हाँ रवि.


थोड़ी देर में रवि ने मुझे कस के अपनी बाहों में पकड़ लिया और अपनी आँखे बंद कर के कराहने लगा। मुझे अपने चूत में गरम गरम सा कुछ महसूस हो रहा था।

मैंने पूछा - क्या हुआ रवि? मेरे चूत में गरम सा क्या निकाला आपने?


रवि बोला - कुछ नहीं मेरी जान कमली . वो मेरे लंड से माल निकल गया है।


थोड़ी देर में रवि ने मेरे चूत से से अपना लंड निकाला और खड़ा हो गया। मैंने अपने चूत की तरफ देखा कि इस से खून निकल रहा था. मै काफी डर गयी और रवि को बोली - रवि, ये खून जैसा क्या निकल गया मेरे चूत से?

हालांकि रवि जानता था कि मेरी चूत की झिल्ली फट गयी है. लेकिन उसने झूठ का कहा - अरे कुछ नहीं. ये तो मेरा माल है. जब पहली बार कोई लड़की चुदवाती है तो उसके चूत में माल जा कर लाल हो जाता है. आ इसे साफ़ कर देता हूँ।

मै थोड़ा निश्चिंत हो गयी.

फिर हम दोनों ने एक साथ स्नान किया. उस ने मुझे अच्छी तरह से पूरा नहला - धुला कर सब साफ़ कर दिया. और फिर हम दोनों अपने अपने कपडे पहन कर अपने अपने कमरे में चले गए।


सुबह जब मेरा छोटा भाई स्कूल चला गया तो मै उसे चाय देने गयी.

रवि ने मुझसे कहा - कैसी हो कमला कमली ?


मैंने कहा - ठीक ही हूँ.


रवि ने कहा - तेरी चूत में दर्द तो नही है ना?


मैंने कहा - दर्द तो है लेकिन हल्का हल्का. कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना रवि?


रवि ने कहा - अरे नहीं कमली. पहली बार तुने अपने चूत में लंड लिया था न इसलिए ऐसा लग रहा है. और देख.. किसी को कल रात के बारे में मत बताना। नहीं तो तुझे सब गन्दी लड़की कहेंगे।


मैंने कहा - ठीक है, लेकिन एक शर्त है.

रवि बोला- क्या?


मैंने कहा - एक बार फिर से मेरी बुर की सफाई करो लेकिन इस बार बाथरूम में नहीं बल्कि इसी कमरे में।

रवि बोला - ठीक है आ जा।


और मैंने उसके कमरे का दरवाजा लगा कर फिर से अपनी चूत चुदवाई। वो भी 2 बार । वो भी बिलकूल फ्री में।

दोपहर में मम्मी आ गयी. मम्मी के आने के बाद भी वो मेरे यहाँ अगले पांच दिन जमा रहा. इस पांच दिन में मैंने आठ बार अपनी चूत उस से साफ़ करवाई। रवि "लॅंडधारी" का लंड सच में बेहद लाजवाब था .... इतने मोटे लंड का मज़ा ही कुछ और होता है।

दोस्तो, कैसे लगी ये कहानी आपको ,

कहानी पड़ने के बाद अपना विचार ज़रुरू दीजिएगा ...



RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

मैं और मेरी कामुक मम्मी (भाग-1)




मेरा नाम रवि है और मैं आप लोगों को अपनी सच्ची कहानी बता रही हूँ जो की कुछ साल पहले मेरे साथ हुई.

मैं अपनी माँ के साथ एक गाओं मे रहता हूँ. मैने शहर के एक स्कूल से 12 पास की और गाओं मे आ गया अपनी माँ के साथ रहने और खेती बरी संभालने. मेरी माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं पर मेरे पापा ने ज़ोर देकर कहा की अब मुझे ही खेती बरी संभालने हैं सो मैं गाओं मे आ गया. मेरे पापा शहर मे रहते हैं और महीने मे एकबार ही घर पर आते हैं. हमारे घर पर दो कमरे थे,


एक मेरा और दूसरा मेरी माँ का.मेरी आगे 19 है और माँ की 40 है. मेरी माँ एक बहुत ही कामुक औरत है. माँ वैसे तो घर मे सारी, ब्लाउस और लहंगा पहनती है पर रात को सोते समय अपना लहंगा खोल कर सिर्फ़ ब्लाउस और सारी पहन लेती है. मेरी माँ के माममे 38D साइज़ के हैं और उसकी गाँड बहुत टाइट दिखती है. रात को सोते समय अक्सर मैं उनके मम्मो को देख सकता हूँ उनके ब्लाउस से झँकते हुए जब वो सो रही होती है तब. एक दिन मैने उनके जाँघ देख लिए. वो सो रही थी और उनकी सारी जाँघ पर आ गयी थी तो मैने उसके सफेद सफेद जाँघ देख लिए. मेरा लंड एकद्म खड़ा हो गया और मैं जल्दी से बातरूम मे जाकर मूठ मारकर आ गया. मैने सोचा पता नहीं माँ नंगी कैसे दिखती होगी. मेरे जाने के कुछ दीनो बाद से ही मैने देखा की माँ थोड़ी बेचैन है. मैने पूछा तो माँ बोली की कोई परेशानी नहीं है.

कुछ दीनो के बाद मेरे चाचा आए. उनकी उमर 60 थी. मैने देखा की माँ बहुत खुश लग रही है. चाचा को रात को रहना था हमारे घर पर और अगले दिन सुबह को अपने गाओं लौटना था. चाचा को दूसरा कमरा देकर माँ बोली की मैं रात को उनके साथ ही बिस्तर पर सो जाओं. रात को मैं और माँ बिस्तर पर सो गये.

अचानक कुछ आवाज़ से मेरी नींद टूटी तो देखा की माँ कमरे का दरवाज़ा बंद करके कहीं जा रही है. मैने सोचा रात को माँ कहाँ जा रही होगी. मैं उठा और दूसरे दरवाज़े से बाहर आकर देखा की माँ चाचा के कमरे मे जा रही है. मैं जल्दी से खिड़की के पास गया और उसमे से चुपके चुपके देखने लगा.

माँ के घुसते ही साथ चाचा बोले, ‘कितनी देर लगा दी तुमने शीला, कब्से मेरा लंड फंफंना रहा है. माँ बोली, “ रवि के सोने का इंतेज़ार कर रही थी मैं तो. चूत तो मेरी भी कब से पानी छोड़ रही है आप के घोड़े जैसा लंड के बारे मैं सोच के, मैं भी बहुत बेचैन हूँ आपके मोटे डंडे को सहलाने के लिए. देखिए ना मेरी चूत कैसे तड़प रही है आपके लंड को पाने के लिए.”

यह बोलकर माँ ने जल्दी से अपनी साडी कमर तक उठाई और चाचा को अपनी चूत दिखाने लगी. मैने भी माँ की चूत को देखा, चूत पर बाल का तो कोई निशान भी नही था, चाचा ने झट से अपनी हथेली उसकी चूत पे रख दी और उसे घिसने लगे. माँ अपने हाथ को चाचा के लूँगी के पास ले गये और उसे खोल दिया. जैसे हे माँ ने चाचा का लंड देखा "है हाए दायया ! 4 साल पहले भी तो आप से ही चुदवाती थी पर उस वक़्त तो इतना बड़ा नही था "

चाचा बोले सर्जरी करवाइ है मेरी कुट्टिया, चल अपने कपड़े उतार और जल्दी नंगी हो जा. 4 साल हो गये तुझे चोदे हुए.”अब मैं समझा क्यूँ माँ चाहती थी की मैं शहर मे ही रहूं.

जिससे की वो चाचा से चुदवाती रहे. अब जल्दी से अपने कपड़े उतरने लगी और अपनी चोली और सारी को उतार फेंका. तब तक चाचा भी नंगे हो गये. अब मैने माँ को पूरी तरह नंगा देखा. उसके मुममे बहुत बड़े बड़े थे और उसके निपल तो एकदम खड़े थे. चाचा का लंड करीब 9+ होगा अब चाचा लेट गये और माँ झट से चाचा के उप्पर 69 के पोज़िशन मे हो गये.

चाचा ने माँ की चूत को चाटना चालू किया और माँ ने चाचा के लंड को चूसने लगी. माँ अपने मूह मे चाचा के लंड को ले लिया और उसको पूरी तरह से अपने मूह मे घुसने लगी. उधर चाचा माँ की चूत को चाटने के साथ साथ उसकी चूत अंदर अपनी दो उंगली डाल दी और आगे पीछे करने लगे.

माँ धीरे धीरे ऊउउइईई माआअ ….. आआहह……. ऊऊओह…. करते हुए सिसकियाँ लेने लगी.

माँ …"आप की उंगली भी किसी लंड जैसे है भैया,

चाचा....” उंगली लेते वक़्त भैया ना कहा कर रानी.

माँ अब चाचा के लंड को बहुत ज़ोर ज़ोर से चूस रहे थी और उनके अंदो (बॉल्स) को दबाने लगी. चाचा बोले,” आबे साली मेरा माल मूह मे ही ले लेगी तो तेरे चूत मे लंड कौन लेगा. चल सीधी होकर मेरे लंड पर बैठ जा और सवारी शुरू कर दे.”

माँ कुछ देर तक वैसे ही चाचा के लंड को चूस्टी रहे फिर उठकर सीधी हो गयी और चाचा के पैरो के बीच बैठ कर उसके लंड को हाथ से मसालने लगी.

फिर माँ झुकी और चाचा के लंड को चाटने लगी और फिर पूरा लंड मूह मे घुसा लिया. ऐसा करते समय माँ की गाँड उप्पर हो गयी और मुझे उसकी गाँड और चूत दोनो की एक साथ दर्शन हो गयी.

तब मैने देखा की माँ जैसे जैसे चाचा का लंड और थैला चूस्टी चाचा भी अपने पैर के अंगूठे से माँ की चूत पर घिसते जाते. अचानक मैने देखा की चाचा का अंगूठा पूरा माँ की चूत मे चला गया है और माँ अचानक ही एक ज़ोर की सिसकी लेकर चाचा के उप्पर लेट गयी. मैं समझ गया की माँ ने अपना पानी छोड़ दिया चाचा पर.

चाचा ने अब माँ की चुचि से खेलना शुरू किया और उसे मूह मे ले लिए. दूसरे चुचि को वो हाथ से दबाने लगे और उसकी घुंडी को मसालने लगे. माँ एकद्म से फिर गरम हो गयी और चाचा के लंड से खेलना शुरू कर दिया. अब माँ चाचा के लंड को हाथ से पकड़ कर अपने चूत को पास लाई और धीरे से उस पेर बैठ गयी और उनके लंड को अपने चूत मे दल लिया.

मैं तो काफ़ी पहल ही गरम हो गया था और अपने लंड को हाथ से घिस रहा था. जैसे ही माँ के चूत मे चाचा का लंड पूरी तरह गया मैने अपना माल छोड़ दिया ककच्चे के अंदर ही. अब माँ बड़े ही मज़े से चाचा के लंड की सवारी कर रही थी और चाचा भी मज़े से माँ के मम्मो से खेल रहे थे. इसी बीच माँ ऊउउइईई … माआ……. अहह…….. ऊऊउउइईई……. करते हुए एक और बार पानी छोड़ दिया. चाचा ने तब उसे अपने लंड से उतरा और बिस्तर पर उसे लिटा कर उसे चूत मे अपनी लंड दल दी और धक्के मरने शुरू किए. उनका पूरा लंड माँ की चूत मे घुस गया था और उसका थैला माँ की चूत के नीचे जाकर धक्के मार रहा था. माँ के मूह से …. उउक्क …. उऊउक्कककक …. उउउम्म्म्मम … ऊओउउइईई ….. ऊओफफफफ्फ़….. की आवाज़े निकल रही थी और उसने अपनी आखें बंद कर ली थी. अचानक चाचा बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने लगे और थोड़ी देर मे उसने अपना पूरा गरम माल माँ के चूत मे छोड़ दिया. मुझसे सहा नही गया और मैने एकबार फिर अपने ककच्चे मे अपना माल छोड़ दिया.

इसके बाद मैं जा कर सो गया. शायद माँ और चाचा ने एक और राउंड चुदाई की और फिर सो गये. सुबहह को चाचा अपने गाओं चले गये. उसके बाद एक दिन रात को माँ मुझसे बोली,” रवि, आज तू मेरे साथ ही सो जाना”. मैं बहुत खुश हुआ की शायद आज मुझे माँ को नंगा देखने मिलेगा. मैं रात को माँ के बिस्तर पर लेट गया.

थोड़ी देर मे माँ आई और मेरी तरफ अपनी पीठ करके अपनी चोली उतार दी.उस ने सोचा शायद मैं सो गया.अब तक माँ के एक चुचि पर से सारी हाथ गये थी और मेरे आँखों के सामने उसकी एक चुचि थी. यह देख मेरा लंड टाइट हो गया. मैं माँ की तरफ मूह कर क सो गया वो करवट बदलती- बदलती मेरा लंड को टच हो गया /

लगता है की माँ गरमा गयी थी, रंडी साली. फिर एक नाख़ून से मेरे लंड की टोपी को धीरे धीरे से गिसने लगी . मैं भी आगे-पीछे होने लगा. मेरा टाइट लंड अब उनके सामने था. माँ बोली,” उई माँ ! यह क्या है तेरे जाँघो के बीच मे इतना बड़ा सा. बेटा तेरा लंड तो बिल्कुल टाइट है. और तेरी झाण्टे भी बहुत घनी है. तेरा लंड तो बहुत बड़ा है रवि. यह कैसे हो गया?’

मैं बोला, ”मैं भी जवान हो गया हूँ. पर यह अभी पूरा बड़ा कहाँ हुआ है, अभी तो तोड़ा बाकी है. हाथ से सहलाने से पूरा बड़ा हो जाएगा.” माँ बोली, “अर्रे बेटा मुझे मालूम ना था की तू इतना बड़ा हथियार घर मैं हे ले क घूम रहा है, नही तो दिन मैं 4-4 बार चोदवाती तुझसे. पर तेरा ये लंड तो सचमुच ही बहुत बड़ा है. क्या मैं इसे थोडा सहलाके देखूं और कितना बड़ा हो सकता है?”

यह बोल कर माँ ने झट से मेरा लंड अपने हाथ मे ले लिए ओर उसे घिसने लगी जिससे की मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया. अब माँ बोली, “र वि, क्या तेरा लंड क्या हमेशा इतना बड़ा रहता है?”

मैं बोला, “ नही माँ तेरी गाँड देख कर ऐसा हो गया है.”

माँ, “अर्रे शैतान तेरा लंड अपनी माँ के गाँड देख कर बड़े हो गयी है. मैं तुझे मज़ा चखाती हूँ.” यह बोल माँ ने मेरा लंड अपने मूह के पास ले गयी और लंड के टोपी को चूसने लगी. मैं तड़प उठा. माँ हंसकर बोली, “तुझे आज मैं पूरा मज़ा चखाती हूँ.”

फिर माँ ने मेरे सूपाडे को अपने मूह मे ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी साथ ही मेरे अंदो (बॉल्स) को हाथों से मसालने लगी. अब माँ ने मेरा पूरा लंड अपने मूह मे ले लिया और ज़ोर ज़ोर से अपना मूह अप्पर नीचे करने लगे. मैं अपना लंड माँ के मूह से बाहर आते और अंदर जाते हुए देखने लगा.

फिर माँ ने मेरे लंड को निकल कर मेरे अंदो से खेलने लगी और उन्हे चाटने लगी फिर अचानक से पुर थैले को मूह मे लेकर चूसने लगी. मैं सुख से कराह उठा. थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा और फिर माँ मेरे पास लेट गयी और मैने उसके वक्षो को मूह मे लेकर चूसना शुरू कर दिया. साथ ही मैने अपना दूसरा हाथ माँ के साड़ी के अंडर डाल दिया और उसके चूत को सहलाने लगा. माँ के चूत से पानी निकल रहा था.

माँ बोली, “अरे रावी बेटे मेरे लाल ज़रा मेरे नीचे वाले होंठ को चूस कर मुझे मज़ा दे मेरी जवानी का. चल अपनी माँ की साड़ी उतार कर नंगा कर दे. »

मुझसे रहा नही गया और मैने झट से उसकी साड़ी उतार दी एर उसे नंगा कर दिया. माँ ने अपने पैर फैला दिए थे और मेरा सिर उसके चूत की तरफ खिचने लगी. मैं जल्दी से उसके चूत को चाटने लगा. उसकी चूत बहुत फूली हुई थी और उसके चूत के होंठ एकदम खुले हुए थे

एग्ज़ाइट्मेंट मे. उसमे से उसका रस भी चूत रहा था. मैने अपने मूह उसके चूत पर लगा दिया और उसके होतों को फैला कर उसके चूत के अंडर भी अपनी जीभ घुसा दी और उसे अपनी जीभ से चोदने लगा. माँ को बहुत मज़ा आ रहा था.

उस पर बॉल नही थे मैने पूछा मा"तुम्हरे बॉल क्यो नही है बेटा, तुम्हारी माँ की ये सड़क भी तो चलती रहती है. थोड़ी देर बाद माँ बोली, “अब तू लेट जा और मैं तेरी सवारी करती हूँ.”

मैं जल्दी से लेट गया और माँ मेरे दोनो तरफ अपने पैर फैला कर मेरे लंड के अप्पर धीरे धीरे बैठने लगी. जल्दी ही मेरा ताना हुआ लंबा लंड माँ के चूत मे था. उसके गरम चूत मुझे बहुत गर्म कर चुकी थी. इसके बाद माँ धीरे धीरे मेरी सवारी करने लगी और आगे पीछे होने लगी.

10 मिनिट तक माँ मुझे चोदती रही और फिर झड़ गयी. अब मैने माँ को लिटाया और जल्दी से उसके चूत मे अपना लंड डाल दिया और उसे घपा घाप घपा घाप चोदने लगा. माँ अपनी गाँड उछाल उछाल के मेरा साथ देने लगी. माँ ने अपने पैर पूरे फैल्ला दिए जिससे की मैं पूरी तरह उसके चूत मे लंड पेल सकूँ.

मेरा आँड का थैला उसकी चूत से टकराने लगा और माँ मज़े से चोदवाती रही. करीब बीस मिनिट टुक लंड पेलने के बाद मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ और माँ भी समझ गयी तो उसने मुझे अपने अंदर ही झड़ने के लिए बोल दिया और मैं वैसे लंड पेलते हुए उसके अंडर झाड़ गया.

फिर मैं माँ से पूछने लगा की इस किस से चूत ढीली करवाई है तो माँ बोली"1 तो तेरे नाना जब मैं 14 की थी वो ढ़ाचा दच्चा चोद्ते था.मेरे चारो बाई.और जो मैं मार्केट जाती तो 1 या 2 से ढिल्ले करवा आती वो मुज़े याद नही,पर बेटा आज तक 1 भी दिन नही गया जब मेरी चूत मैं कुछ ना गया हो..लंड नही तो मुल्ली,

फिर मैने माँ से पूछा काबी गांद मरवी है ,

मा" नही वो मर्वानी भी नाही.
मैने कहा मैं मारना चाहता हो,
वो बोली मुज़े मेरे पिया की कसम कभी नही करना वैसे मैने,
मैं बोला. मैं तो बस ऐसे हे पूच रहा था मा.

2 दिन बाद मैं ओर माँ सेक्सी मोविए धेक रहे थे उस मैं लड़का लड़की को उल्टिकार उस के हाट बेड की 1 साइड बाँध दियाया फिर उस की चुदाई की तभी मेरे दिमाग़ मैं आइडिया आया माँ की गंद की धगिया उड़ा डुगा.

मैने माँ को वैसे हे सेक्स करने को कहा वो तो तैय्यर बैठे थी, मैने माँ क हाथ बेड क आगे ओर पैर पीछे बंद कर यूयेसे फ्लाइयिंग सूपरमन की पोज़िशन मैं किया ता क गाँड मार साकु, मैं माँ की चूत मैं उंगली डाली गील्ली थी मैं वाहा से ही चूत का पानी उस की गंद मैं लगाने लगा ओर मिद्देल फिंगर 'घुप'से दल दे.

माँ को चल समाज आ गई बोली ,कुत्ते ज्ञड़ का ख़याल डेमाग से निकल दे,मैने लंड पर टेल की मालिश करने लगा माँ की आइज़ मैं डर के आँसू आ गये 8 इंच का लंड गाँड
की मोरी सदा के लिए खोल देगा, मैने कहा लंड क लिया रेडी हो जा

माँ,नही बेटा ऐसा ना करते , मैं लंड को छेड़ पर रख कर 1 तूफ़ानी जटका मारा ओर बाल्स तक मेरा लंड माँ की गाँड मे धँस दिया , माँ चिड़िया की तरह छटपटा उठी उसक मूह से खुल के एक चीख निकल गयी 'आआआ एयाया आऐययई ईईईईईई ईईईईई ईईईईईई ईईईईईई ईईईई,, मैं सारा लंड माँ की गाँड मे डालकर 16 मिंट तक वैसे ही लेता रहा ओर माँ क चुप होने का इंतज़ार करता रहा,15 मिंट बाद वो सिर्फ़ पायट मैं हे रो रही थी फिर मैने धीरे- धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा,वो फिर रोने लगी मैने 1 घंटे तक माँ की गाँड मरि अब मैं थोड़ी देर रुक जाता ओर अपनी उंगली काट लेता जब मैने गाँड से लंड बाहर निकाला मुज़े माँ पर तरस आ गया माँ की गाँड का छेद दो रुपये सिक्के जितना बड़ा हो गया था,, ओर बेड पर भी खून गिर रहा था, उस रात माँ की 6 बार गाँड मारी,3 दिन तक माँ को चलने में प्रेशानि होती रही 2 दिन तक च्छेद पर उंगली रकति ओर कहती हराम के देख कितनी खोल के रख दी. मैने कहा सॉरी मां,फिर धीरे 2 माँ गान्डू भी बन गई,



RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

मैं और मेरी कामुक मम्मी (भाग-2)


दोस्तो मेरा नाम रवि है, मेरे घर में हम तीन लोग हैं, मैं, मेरी माँ और मेरे पिताजी ! पिताजी ज्यादातर ऑफिस के काम से बाहर ही रहते हैं तो घर पर रह गए मैं और मेरी माँ ! मैं अभी 19 साल का हूँ और मेरी माँ की उम्र होगी 37 साल, मेरी माँ बला की खूबबसूरत है। उनकी खूबसूरती तो ऐसी है कि अगर आज भी वो घर से बाहर निकलती है तो चलने वाले सभी आदमियों की और लड़कों की लुल्ली पैंट में ही खड़ी हो जाती है। क्योंकि उनका फिगर है ही इतना लाजवाब 36-27-36 ।


मैं अभी कालेज में ही हूँ और अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ। इस रविवार को मैं घर पर ही था छुट्टी होने की वजह से तो जब मैं सोकर उठा तो मेरी माँ घर की साफ सफाई कर रही थी।

माशा अल्लाह !

क्या लग रही थी वो !

सिल्की गुलाबी रंग के गाउन में उनके स्तन तो गाउन से बाहर निकलने को ही हो रहे थे। अगर ब्रा ना होती तो माँ के स्तन बाहर निकल चुके होते। और उनकी गांड तो मानो ऐसे मुझे उकसा रही थी कि आ बैल- मेरी मार। मैंने अपनी माँ को पहले कभी ऐसी नजर से नहीं देखा था पर मैं करता भी क्या ! मैं अभी उनके नितम्बों को देख कर सोच ही रहा था कि इतने में उन्होंने कहा- रवि, रवि , आज पूरे दिन पड़ा ही रहेगा या उठेगा भी ! बिस्तर से खड़ा हो ! मुझे यहाँ सफाई करनी है, कितना गन्दा कर रखा है तूने अपना कमरा !


मैं बोला- होता हूँ खड़ा !


और मैं खड़ा हो गया पर यह भूल गया कि मेरा लंड भी जोश में आकर खड़ा हो गया था, वो तो बस घुस जाना चाहता था माँ की गांड में !


मैंने उसे ठीक किया और बाहर आ गया।


बाहर पिताजी अखबार पढ़ रहे थे। इतने में मेरे दोस्त मुझे बुलाने के लिए आ गए क्रिकेट मैच के लिए।


मैं भी फिर जल्दी से नहा धोकर अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया पर पूरे दिन में अपनी माँ के सेक्सी ख्यालों में खोया रहा और उस दिन ढंग से खेल भी नहीं पाया।


शाम को 6 बजे जब मैं घर पर आया तो घर बिलकुल सुनसान सा पड़ा था, लग रहा था कि कोई नहीं है। पर जब मैं अन्दर घुसा तो मैं तो हैरान ही रह गया।

पापा मम्मी को चोद रहे थे। वो अब मेकअप करके किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। मैं यह सब बाहर दरवाजे के बगल में खड़ा होकर देख रहा था। क्या लग रही थी वो ! पापा मम्मी के बोबों को ऐसे दबा रहे थे कि आज ही सारा दूध निकाल लेना चाहते हो !


वो कह रहे थे- कमली , आजा मेरी जान ! अब तो महीने भर बाद ही मौका मिलेगा तुझे चोदने का !


शायद वो ऑफिस के काम से बाहर जा रहे थे।


माँ ने कहा- तो जा क्यों रहे हो ? इस जान को छोड़कर मत जाओ न ! मेरा दिल नहीं लगेगा, इतने दिन में मैं तो पागल ही हो जाऊँगी तुम्हारे बिना !


अरे, कमली क्यों चिंता करती हो? एक महीने बाद आ तो रहा हूँ मैं ! फिर से चोदूँगा तुझे मेरी जान ! पर काम तो काम है न ! वो तो करना ही पड़ेगा।


माँ बोली- हम्म ! वो तो है मेरे राजा !


पापा ने कहा- कमली ,चल अब घोड़ी बन जा ! काफी देर हो गई चूत मारते हुए !


तो माँ बोली- तुम मर्द लोगो को गाण्ड में ऐसा क्या मजा आता है?


और पापा ने मम्मी को घोड़ी बनाया और चोदने लगे।


क्या आवाजें निकाल रही थी माँ चुदते हुए ! मेरा लंड तो फनफनाने लगा था उनकी अवस्था देख कर !


मैं मन ही मन सोच रहा था कि काश मैं अपनी माँ को चोद पाता ! क्या माल है वो ! आधे घंटे भर तक वो चुदाई-कार्यक्रम चला होगा और फिर पापा रात को ही मुंबई के लिए चले गए और माँ से कह गए कि मेरा ख्याल रखे।


मैंने उस शाम का दृश्य देख कर कसम खाई कि एक बार तो माँ को जरुर चोदूँगा।


दिन ऐसे ही निकलने लगे और माँ भी थोड़ा उदास सी रहने लगी। क्या करे, उन्हें लंड ही नहीं मिला था इतने दिनों से !


मुझसे माँ की यह बेचैनी देखी नहीं जा रही थी पर मैं उनसे कह भी तो नहीं सकता था।


मैंने उनसे पूछा- माँ, इतनी उदास क्यों रहती हो तुम आजकल?


तो वो बोली- कुछ नहीं रवि, तेरे पापा की बहुत याद आ रही है, इतनी दिन हो गए न !


तो मैंने कहा- माँ मैं हूँ न पापा की जगह ! बोलो क्या हुआ ?


तो वो बोली- र वि तू क्या जाने एक औरत की मज़बूरी ! तू तो अभी बच्चा है।


तो मैंने कहा- हाँ माँ ! मैं समझ सकता हूँ कि आप पर क्या बीत रही है ! पर मैं एक बात बता दूँ कि मैं बच्चा नहीं रहा अब ! पूरे 19 साल का हो गया हूँ ! और मेरा पप्पू भी।


वो बोली- क्या कहा तूने र वि?


मैं सकपका गया और कहा- सॉरी माँ, गलती से मुँह से निकल गया।



और वो मेरे लंड को देखने लगी। मैं उस समय माँ से सॉरी बोलकर कॉलेज़ चला गया और काफी सोचता रहा कि यह मैंने क्या कह दिया ! माँ क्या सोचेगी मेरे बारे में..... की रवि कैसी बात बोल कर गया है ?


पर माँ ने तो शाम के लिए कुछ और ही योजना बना रखी थी।


कॉलेज़ खत्म करके जैसे ही मैंने घर के अन्दर कदम रखा, वैसे ही बारिश चालू हो गई। माँ ने मुझे देख कर कहा- आ गया मेरा राजा बेटा !


और यह कह कर वो छत पर कपड़े उठाने चली गई। उन्होंने उस समय वही गुलाबी सिल्की गाउन पहन रखा था। मैं भी उनके पीछे पीछे ऊपर चला गया तो वो मुझे देख कर बोली- तू ऊपर क्यों आ गया? भीग जायेगा ! चल नीचे जा !


मैं बोला- अरे माँ, मैं तो आपकी मदद करने के लिए ऊपर आया हूँ !


और आधे कपड़े उन्होंने उठाये, आधे मैंने, और नीचे आ गए।


सीढ़ी उतरते वक़्त माँ मेरे आगे चल रही थी, मैं उनके पीछे !


उनके भीगे हुए मादक चूतड़ क्या लग रहे थे ! भीगने की वजह से उनका गाउन बिल्कुल उनके शरीर से चिपक गया था। मन तो कर रहा थ कि उनको गोदी में उठा कर उनकी इतनी गांड मारूँ कि सारा वीर्य ही निकाल दूँ !


नीचे आकर माँ कहने लगी- इस बारिश को भी आज ही आना था ! एक तो यह ठण्ड, ऊपर से बारिश ! चल कपड़े बदल ले, नहीं तो ठण्ड लग जाएगी।


उस समय मैं माँ के दोनों स्तन देख रहा था जो गाउन में से झांक रहे थे। क्या संतरे थे- मानो कि अभी दबाओ तो कई ग्लास भर कर जूस निकलेगा उसमें से !उन्होंने मुझे देख कर कहा- क्या देख रहा है तू इधर मेरे उभारों को घूर कर ?


मैं डर गया और कहा- कुछ भी तो नहीं !


तो वो बोली- मैं सब समझती हूँ बेटा ! माँ हूँ तेरी !


और यह कह कर वो बाथरूम की तरफ जाने लगी और कहने लगी- तू भी अपने कपड़े बदल ले, मैं भी अब नहा लेती हूँ !


क्या गाण्ड लग रही थी चलते हुए उनकी ! मैं मन ही मन तो उन्हें चोद ही चुका था और आज अच्छा मौका था उन्हें सचमुच में चोदने का !


मैं उनसे जाकर पीछे से लिपट गया। माँ एकदम से घबरा गई। मैंने कहा- माँ सॉरी ! मैं ऐसा कुछ नहीं देख रहा था जो आप सोच रही हो !


माँ से चिपकते ही मेरा लंड फुन्कारे मारने लगा था और इसका एहसास मेरी माँ को भी हो गया था क्योंकि उस समय मेरा लंड उनकी दरार में रगड़ मारने लगा था। शायद माँ समझ गई थी कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ।


उन्होंने कहा- चल छोड़ मुझको ! मैं तो बस मजाक कर रही थी !


शायद वो भी काफी दिनों से चुदासी थी इसलिए चुदवाना भी चाहती थी और उन्होंने मुझे पीछे से हटाकर अपनी छाती में समा लिया। मैं तो उनके वक्ष में खो ही गया था।


क्या स्तन थे उनके ! मन तो कर रहा था कि दबा कर सारा दूध निकल लूँ !


फिर वो बोली- चल, अब जा ! कपड़े बदल ले ! मैं भी नहा लूँ !


तब वो बाथरूम में चली गई।


मैं कहाँ मानने वाला था, उनके बाथरूम में जाने के बाद मैं उन्हें बाथरूम में देखने लगा दरवाज़े के छेद मैं से !


उन्होंने अपने धीरे-धीरे कपड़े उतारे। शायद उन्हें पता लग गया था कि मैं उन्हें छेद में से देख रहा हूँ और वो धीरे धीरे अपनी चूचियाँ दबाने लगी और सिसकारी भरने लगी- उह्ह्ह ह्म्म्मम्म ओह माय गोशह्ह्ह्ह आह्ह्ह अहा ओह्ह्ह और अपनी चूत में भी ऊँगली डालने लगी। वो यह सब कुछ मुझे दिखा रही थी जानबूझ कर !


और मैं भी बाहर खड़ा होकर अपना लंड दबा रहा था।


क्या आवाजें थी- हम्म ओह्ह्ह होऊस्स्स ओह माय गुड फक मी ....


मैं बाहर सब सुन रहा था पर कुछ नहीं बोला ! मन तो कर रहा था कि दरवाज़ा खोल कर अन्दर घुस जाऊँ !


पर मुझे लगा कि यह मेरा भ्रम भी तो होसकता है, शायद उन्होंने मुझे न देखा हो !


इतने में उन्होंने मुझे आवाज़ लगाई- अरे मेरे कपड़े तो बाहर ही रह गए ! जरा देना बेटा !


मैं घबरा गया और वहाँ से बाहर के कमरे में आ गया और डरते हुए पूछा- कहाँ हैं कपड़े?


वो बोली- वहीं पर मेज पर रखे हैं !


मैं बोला- ठीक है। लाता हूँ !


वहाँ पर उनकी लाल रंग की ब्रा और चड्डी के साथ लाल रंग का गाउन रखा हुआ था। मैंने उन्हें उठाया और उनकी ब्रा और चड्डी को सूंघने लगा। क्या खुशबू थी उनमें ! भीनी-भीनी सी चूत की ! मानो जन्नत !


और फिर माँ को देने के लिए बाथरूम की ओर जाने लगा कि तभी माँ जोर से चिल्लाई- क्या कर रहा है ? इतनी देर हो गई तुझे? कहाँ मर गया?


मैं बोला- ला तो रहा हूँ !


मैं जब बाथरूम के पास पहुँचा तो दरवाज़ा खुला हुआ था। मैं उन्हें कपड़े देने लगा, उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और कपड़े ले लिए।


मेरा मन किया कि मैं भी घुस जाऊँ ! क्या पता बात बन ही जाये !


और दरवाजा खुला होने के कारण मैं भी बाथरूम में घुस गया। माँ को पता नहीं लगा क्योंकि उनका मुँह पीछे की तरफ था, वो ब्रा पहन रही थी। मैंने उन्हें पीछे से जाकर पकड़ लिए और उनके मम्मे दबाने लगा।


वो एकदम से घबरा गई और बोली- कौन है?


उन्होंने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो मुझे देख कर सबसे पहले उन्होने मुझे कस कर चांटा जड़ दिया और कहने लगी- क्या कर रहा था यह? तुझसे शर्म नहीं आती अपनी माँ के साथ ऐसा करते हुए? पर मैं तो मानो सब कुछ भूल ही गया था उस समय। मैं उनके उरोजों से चिपट गया और उन्हें चूसने लगा।
दरवाजा खुला होने के कारण मैं भी बाथरूम में घुस गया। माँ को पता नहीं लगा क्योंकि उनका मुँह पीछे की तरफ था, वो ब्रा पहन रही थी। मैंने उन्हें पीछे से जाकर पकड़ लिए और उनके मम्मे दबाने लगा।


वो एकदम से घबरा गई और बोली- कौन है?


उन्होंने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो मुझे देख कर सबसे पहले उन्होने मुझे कस कर चांटा जड़ दिया और कहने लगी- क्या कर रहा था यह? तुझसे शर्म नहीं आती अपनी माँ के साथ ऐसा करते हुए? पर मैं तो मानो सब कुछ भूल ही गया था उस समय। मैं उनके उरोजों से चिपट गया और उन्हें चूसने लगा।


इससे पहले कि वो मुझे कुछ कहती, मैंने उनकी चूत में ऊँगली डाल दी और घुमा दी।


और इसके बाद तो शायद माँ को भी लगा कि अब इसने इतना कुछ कर लिया है तो अब क्या रोकूँ इसे, क्योंकि वो भी तो सेक्स करने के लिए तड़प रही थी इतने दिनों से !


और माँ सिसकारी भरने लगी- उह्ह्ह ह़ा हाह आःह्ह्ह जालिम शर्म कर ! मैं तेरी माँ हूँ ! कम से कम मुझे तो बख्श दे ! शर्म कर थोड़ी !


तो मैंने कहा- माँ, आप बहुत सेक्सी हो ! मैं तो आपको कब से चोदने की फ़िराक में था ! आज मौका मिला है तो कैसे हाथ से जाने दूँ? आज मत रोको ! समा जाने दो मुझको तुम्हारे अन्दर ! नहीं तो मैं मर जाऊंगा माँ !


तो वो बोली- अच्छा ठीक है कम्बखत मारे ! अब तुझे क्या कहूँ? कुछ कहने लायक नहीं छोड़ा तूने तो ! जो करना है कर लेना ! पर अभी बाहर जा ! मैं कपड़े पहन कर बाहर आती हूँ ! कम से कम चैन से कपड़े तो पहन लेने दे। बाहर आने के बाद जो करना है, कर लेना।


मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कहा- नहीं पहले तो मैं आपको खूब चोदूंगा अभी !


और इतनी देर में मैंने अपना लौड़ा निकाल कर उनकी चूत पर लगा दिया।


वो एकदम से चिल्ला पड़ी- ऊई माऽऽऽ आऽऽ आ मार डाला जालिम !


जैसे ही मैंने उनकी चूत मैं लोडा डाला- उईऽऽ मांऽऽ मार डाला तूने तो ! अहह हूह्ह म्मम्म म्मम्म हह्म्म्म उह्ह्ह !


और मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स था तो मैं जल्दी झड़ने वाला था, मैंने माँ से कहा- माँ, मैं झड़ने वाला हूँ ! क्या करूँ?


वो बोली- निकाल दे अपना वीर्य मेरी चूत में ! बना दे मुझे अपने बच्चे की माँ !


और मैंने सारा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया। अब मैं बिल्कुल शांत हो चुका था पर माँ के अन्दर चुदाई करने की तमन्ना जाग गई थी। माँ मुझे देख रही थी और कहने लगी- पड़ गई तुझे शांति? चोद लिया तूने साले अपनी माँ को ? चोदते समय शर्म नहीं आई? तूने तो अपनी आग तो बुझा ली अब मैं क्या करूँ साले? चल अब बाहर जा ! मुझे दोबारा नहाना पड़ेगा। सारा गन्दा कर दिया मुझे। अब क्या मुँह दिखाऊँगी मैं तेरे पापा को !


और मैं बाहर आ गया। कुछ देर बाद वो भी बाथरूम से बाहर आ गई और अपने कमरे में चली गई। तब तक मैं भी अपने कमरे में जा चुका था। करीब आधा घंटा हो चुका था इस बात को।


मैं भी काफी शर्म महसूस कर रहा था, तो मैंने सोचा कि क्यों न माँ को जाकर सॉरी कह दूँ !


मैं उनसे माफ़ी मांगने उनके कमरे की तरफ जाने लगा, पर जैसे ही मैं उनके कमरे में पहुँचा तो वो तो सज-धज कर खड़ी हुई थी बिल्कुल 18 साल की लड़की की तरह लग रहा थी। उनके बड़े बड़े स्तन मानो कह रहे थे- आओ और हमें खा जाओ !


उनका यह रूप देख कर लग रहा था जैसे कि आज मानो उनकी सुहागरात हो !


मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। शायद माँ को चुदवाने की हुड़क चढ़ चुकी थी, वो कहने लगी- इधर आ ! मुझे तुझसे कुछ बात करनी है !


मैंने कहा- माँ सॉरी ! प्लीज पापा से मत कहना !


और मैं उनकी छाती से चिपट कर रोने का नाटक करने लगा। क्या खुशबू आ रही थी उनके वक्ष से !


तो उन्होंने मुझसे पूछा- बेटा जो हुआ उसे भूल जा ! और एक बात बता कि क्या मैं तुझे इतनी जवान लगती हूँ कि तुझे इतनी भी शर्म नहीं आई और तूने ऐसा कर दिया?


मैंने कहा- गलती हो गई माँ .....


वो बोली- चल ठीक है, कोई बात नहीं ! अच्छा एक बात बता, तू क्या फिर से मुझे चोदेगा?


मैंने कहा- नहीं !


तो वो बोली- चल पगले ! इतनी मेहनत से तैयार हुई हूँ मैं चुदने के लिए और तू मना कर रहा है ? तेरे लंड ने तो मेरी चूत में आग लगा दी है, अब इस आग को तो तू ही बुझाएगा मेरे राजा ! चोद डाल मुझे । फाड़ दे मेरी चूत ! निकाल दे आज सारी जलन मेरी चूत की !


और उन्होंने मुझे अपने वक्ष में दबा लिया और कहने लगी- पी ले सारा दूध इनका ! कुछ मत छोड़ इनमें ! समा जा मेरे अन्दर !


मैं भी मन ही मन खुश हो गया और कहने लगा- मेरा तो जैकपॉट लग गया है आज !


मेरी मुराद पूरी हो रही थी एक ही दिन में दो बार !


मैंने कहा- ठीक है माँ ! आप इतना कहती हैं तो !


मैं उनकी चूचियाँ दबाने और चूसने लगा ब्लाऊज़ के ऊपर से ही।


मैंने कहा- माँ, मैंने कभी सुहागरात नहीं मनाई ! मैं आपके साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ ।


तो वो बोली- अब तो मैं पूरी तेरी हूँ, जो करना है वो कर ना।


मैंने कहा- ऐसे नहीं ! जैसे टीवी पर, फिल्मो में दिखाते हैं, धीरे-धीरे !


तो वो बोली- अच्छा तो तू ये सब चीजें भी देखता है?


मैंने कहा- और नहीं तो क्या ? माँ, अब मैं बड़ा हो गया हूँ न इसलिए !


वो बोली- ठीक है, मैं तो पहले से तैयार हूँ, तू भी तैयार हो जा ! फिर हम दोनों माँ-बेटे पति-पत्नी बन कर सुहागरात मनाएंगे।


बाहर आकर नहाने के लिए बाथरूम में गया और सेंट लगाकर, अपनी शेरवानी पहन कर मैं तैयार हो गया और माँ के कमरे में आ गया।
वो तो तैयार बैठी थी, टीवी पर ब्लू फिल्म देख रही थी।


मैंने कहा- माँ, यह क्या है?


वो बोली- अब क्या करूँ? तेरे पापा तो काम से ज्यादातर बाहर ही रहते हैं, तो मुझे भी तो अपनी प्यास बुझानी होती है न।


तो मैं बोला- अब आगे से जब भी पापा बाहर जाएंगे तो मैं आपको चोदूँगा ! मैं आपका छोटा पति !


वो बोली- अरे हाँ हाँ ! मेरे स्वामी अब तो आप भी मेरे दूसरे स्वामी हो।



और मैंने उनको उठाया और उनसे इस तरह चिपक गया जैसे दो जान एक शरीर ! बिल्कुल जैसे सांप सेक्स करते हैं। मैंने उनको ऊपर से नीचे तक इतना चूसा कि वो कहने लगी- अब डाल दे लौड़ा मेरी चूत में जालिम। अब छोड़ मेरे चूचे ! डाल दे अब मेरी चूत में ! फाड़ दे मेरी चूत ! अब नहीं रुका जाता।


मैंने कहा- अरे इतनी जल्दी क्या है माँ ! थोड़ा रुक ! तुमसे ज्यादा तो मैं प्यासा हूँ। आज तो मैं तुम्हें इतना चोदूंगा कि तुम आगे से कभी भी पापा के साथ सेक्स करना पसंद नहीं करोगी।


वो बोली- हम्म ! तू तो बड़ा ज़ालिम है बेटा ! इस चूत पर हक तो तेरे पापा का ही है। इस मकान में तो तू केवल किरायेदार है बेटा !


मैंने बोला- हम्म वो तो है .....


और मैंने उनको अपनी बांहों में लेकर बिस्तर पर लेटा दिया और अपने सारे कपड़े उतार दिए और सबसे पहले उनके होंटों को कम से कम दस मिनट तक चूसता रहा और बीच बीच में उनकी चूत भी साड़ी के ऊपर से सहला रहा था और वो सिसकारियाँ भर रही थी।


मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतारे और लगभग पूरा नंगा कर दिया, केवल ब्रा और पैंटी रह गई थी वो भी लाल रंग की।


मैंने कहा- तुम तो इतनी खूबसूरत हो कि मैं तुमसे शादी कर लूँ और तुम्हें रोजाना इतना चोदूँ, इतना चोदूँ कि अब क्या बोलूँ कि कितना चोदूँ।


तो वो बोली- तो चोद ना साले ! मैं तो मरी जा रही हूँ कबसे ! अब तो मैं पूरी तेरी ही हूँ ! जब चाहे तब चोद मैंने कब मना किया है


मैं उनकी ब्रा उतारने लगा और इतने में उन्होंने मेरा लौड़ा अपने हाथ में ले लिया, उसके साथ खेलने लगी, कहने लगी- बाथरूम में तो इसकी लम्बाई ढंग से नहीं नाप पाई, पर यहाँ पर तो इसको पूरा खा जाऊंगी !


दस मिनट तक उन्होंने मेरे लौड़े को चूसा होगा।


मेरा लंड भी अब पूरे उफान पर था और फाड़ देना चाहता था माँ की चूत को।


जिस बात का मुझे इतनी दिनों से इंतज़ार था वो सपना पूरा होने वाला था।


माँ के दोनों संतरे मानो ऐसे लग रहे थे जैसे तो बड़े-बड़े खरबूजे ! मैंने कहा- माँ, इनको तो मैं खा जाऊंगा।


माँ तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थी।


और मैंने अपना लंड माँ की चूत में बाड़ दिया और फिर चालू हुआ माँ-बेटे की चुदाई का कार्यक्रम ! वो बीच बीच में इतनी तेज चिल्ला रही थी, कह रही थी- बेटा चोद दे आज अपनी माँ को ! घुस जा पूरा इसके अन्दर ! फाड़ डाल इसको। ह्म्मम्म हाआअहाह उह्ह्हह ह्म्म्म मैं तो मर जाउंगी ....उह ह्म्मम्म उह्ह्ह


और मैंने तेज-तेज झटके लगाने चालू कर दिए। कम से कम आधे घंटे चूत मारने के बाद मैंने कहा- माँ, अब घोड़ी बन जाओ, मैं तुम्हारी गांड मारूँगा।


तो माँ ने घोड़ी बन कर अपनी सुडौल गाण्ड पीछे की ओर उभार दी और कहा- तुम मर्द लोगों को गांड में ऐसा क्या मजा आता है?


मैंने कहा- माँ गांड और चूचियाँ ही तो तुम्हारी जान है ! और तुम कह रही हो कि क्या मजा आता है? इनको देख कर तो मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है और इन्हीं चीजों को लेकर तुम औरतें इतना इतराती हो।


उन्होंने एक सेक्सी सी मुस्कुराहट दी और गांड को सेक्सी तरीके से हिलाने लगी। मैंने धीरे-धीरे से लण्ड गाण्ड में डाल दिया और मां मस्त हो गई।


बहुत आनन्द आ रहा था मुझे गांड मारने में। मम्मी की गाण्ड को मैंने बहुत देर तक बजाया। मम्मी भी, जब तक मैं नहीं झड़ गया, तब तक चुदती रही और मेरा पूरा साथ दिया.....


मैं झड़ चुका था और माँ भी....


तो माँ ने कहा- रुको, अब थोड़ा आराम कर लो बेटा !


मैंने कहा- हाँ माँ ! मैं भी बहुत थक गया हूँ....


तो वो बोली- चल तू यहीं रुक ! मैं तेरे लिए दूध लाती हूँ .....


माँ जैसे ही उठी दूध लाने के लिये, मैंने फिर से गोदी में खींच लिया और उनकी चूचियों को अपने मुख से दबा लिया और चूसने लगा और कहा- मेरा पैष्टिक दूध तो यह रहा माँ ! तुम तो मुझे बचपन में यही दूध पिलाती थी ना !


तो वो बोली- अरे ! तू नहीं सुधरेगा ! थोड़ी देर भी नहीं इंतज़ार कर सकता ?


मैंने कहा- माँ, ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा? आज के बाद पता नहीं कब मौका मिलेगा !


और मैंने दूध मुंह में भर लिए और मां गुदगुदी के मारे सिसकारियाँ भरने लगी।


मेरा लण्ड फिर से फ़ुफ़कारने लगा था तो मैंने कहा- माँ यह तो फिर से खड़ा हो गया !


तो वो बोली- तो देर किस बात की? आ जा एक बार फिर !


मां ने अपनी दोनों खूबसूरत सी टांगें उठा ली। मां अपनी टांगें ऊपर उठा कर उछल-उछल कर चुदवा रही थी और मैं भी उन्हें काफी उछल-उछल कर चोद रहा था। मां को इस रूप में मैंने पहली बार देखा था, वो काम की देवी लग रही थी।माँ ने कहा- लगता है जिन्दगी भर की चुदाई आज ही कर डालोगे !


मैंने कहा- और नहीं तो क्या !


और मैंने तेज-तेज झटके मारने चालू कर दिए और सारा कमरा फिर से आवाजों से गूंजने लगा।उस रात मैंने उनको दो बार और चोदा।


अगली सुबह मेरी आँख दोपहर को तीन बजे खुली। मैं उठा और अपने कमरे में जाने लगा पर जैसे ही मैं बाहर आया, माँ झाड़ू लगा रही थी। उन्होंने गुलाबी सिल्की गाउन पहन रखा था वो उस समय झुकी हुई थी। मम्मी की गांड पीछे की तरफ़ उभरी हुए थी मैं पीछे से चुपचाप गया और उनकी गांड के छेद पर अपना लंड लगा दिया।


वो बोली- अरे रवि, जग गया मेरे राजा ! चल अब नहा धो ले ! फिर खाना खा ले !


मैंने कहा- ठीक है मम्मी, पर एक ट्रिप लेने के बाद !


मैंने उनको एक बार फिर से चोदा। अब जब तक पापा नहीं आ जाते, मैं उन्हें रोजाना चोदने वाला था। फिर से पूरा घर सेक्सी आवाजों से गूंज गया और फिर से एक बार हम दोनों माँ-बेटे पति-पत्नी बन गए।


काफ़ी देर की चुदाई के बाद मैं झड़ गया और माँ भी ....तो माँ ने कहा- पड़ गई तुझे शांति ! जा अब तो नहा ले !


मैंने कहा- ठीक है।


और रात भी मैंने मा को 7 बार फिर से चोदा....

दोस्तो, कैसे लगी ये कहानी आपको ,

कहानी पड़ने के बाद अपना विचार ज़रुरू दीजिएगा ...



RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

मैं और मेरी कामुक मम्मी (भाग-3)


मेरा नाम रवि है और मेरी उम्र 22 साल की है। मई मुंबई में रहता हूँ .मेरे फ्लैट में मै एवं मेरे मम्मी बाप के अलावा कोई नही रहता। एक साल पहले बाइक चलाते वक्त मै गिर गया और मेरे दोनों हथेली में काफ़ी जख्म हो गए। डॉ० ने मेरे दोनों हथेलियों में एक महीने के लिए बेंडेज कर दिया। अब मै अपना कोई काम ख़ुद से नही कर सकता था। सब से अधिक दिक्कत मुझे बाथरूम जाने में हुई। क्यों की मेरी पांचो उँगलियाँ पट्टी से बंधी थी. पहले दिन तो मेरे पापा ने मुझे बाथरूम कराया एवं सफाई भी की। लेकिन अगले ही दिन उन्हें जरूरी काम से जयपुर जाना पड़ गया। अब फ्लैट में मेरी मम्मी और मै ही बच गए। मेरे पापा तो नही जाना चाहते थे लेकिन जब मम्मी ने कहा की वो संभाल लेगी तो वो चले गए। अगले दिन जब मझे बाथरूम जाना था तो समझ में नही आ रहा था की कैसे जाऊं। मैंने कुछ नही कहा।

लगभग दस बजे मेरी मम्मी ने कहा – रवि, तुम बाथरूम नही गए?

मैंने कहा – धोऊंगा कैसे?

मम्मी ने कहा – जब तुम बच्चे थे तो कौन धोता था? आज भी मै धो दूंगी।

पहले तो मै नही माना ।

मम्मी ने गुस्से में आ कर कहा – मुझसे शरमाते हो?

वो अचानक खड़ी हुई और अपना गाउन उतार दी। अन्दर उसने पेंटी और ब्रा पहन रखी थी। झटके में अपना ब्रा उतार दी और बोली – यही वो मुममे है जिस से तुने ढाई साल तक दूध पिया है। तू कहाँ से आया वो देखना चाहता है? कहते हुए मम्मी ने अपनी पेंटी भी उतार दी और अपने चूत की तरफ़ इशारा करते हुए बोली- इसी से तू निकला है। देख, मुझे शर्म नही आती और तुझे कैसी शर्म? जब मै तुम्हारे सामने नंगी हो सकती हूँ तो तुम्हे क्यों आती है?

मै हक्का बक्का हो कर मम्मी को देख रहा था। वो पूरी तरह से नंगी मेरे सामने खड़ी थी। बड़े बड़े मुममे और बड़ा सा चूत काले काले घने बालों से ढके हुए मेरे सामने थे। थोड़ी देर मै शांत रहा एवं नजरें झुका कर बोला- आई ऍम सोरी मम्मी। अब मै आपसे नही शर्माऊंगा आप प्लीज़ कपड़े पहन लें।

मम्मी ने अपने सारे कपड़े पहन लिए और मुझे बाथरूम ले कर गई। वहां मम्मी ने मेरे सारे कपड़े उतरे और मुझे नंगा कर दिया और टोइलेट सीट पर बैठ जाने को कहा और बोली- जब हो जाएगा तो मुझे बोलना। अब मुझे मम्मी के सामने नंगा होने में कोई शर्म नही आ रही थी। थोड़ी देर में जब मैंने पैखाना कर लिया तो मैंने मम्मी को आवाज़ लगाई। वो बाथरूम में आई और मुझे नल के पास ला कर अपने हाथो से मेरे गांड की सफाई उसी तरह की जिस तरह मेरे बचपन में वो मेरी गांड धोती थी।

मेरी सफाई करने के बाद मेरे सारे कपड़े पहना कर मुझे बाहर भेज दिया और ख़ुद बाथरूम में स्नान करने लगी। मै बाहर आ कर काफ़ी हल्का महसूस कर रहा था। अब मै खुश था। अगले दिन जब मै बाथरूम गया और पैखाना करने के बाद मम्मी को आवाज़ लगाई तो मम्मी अन्दर आ कर अपना गाउन उतार दी।

बोली – रवि, तेरे धोने के कारण पानी पड़ने से गन्दा हो जाता है। वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में रहते हुए मेरी गांड की सफाई की। अब यह क्रम रोज़ का हो गया। 3-4 दिनों के बाद पापा का फ़ोन आया कि उन्हें यहाँ 22-25 दिन और लग सकता है। 5 दिन के बाद मै सो कर उठा तो देखा की रात में सोने में ही नाईट फाल हो गया (मेरे लंड से माल निकल गया ) था। मै बहूत असहज महसूस कर रहा था। क्यों कि आजकल मेरे सारे कपड़े मेरी मम्मी ही साफ़ करती थी। फ़िर सोचा, मम्मी पूछेगी तो बता दूँगा। जब बाथरूम में मम्मी मेरे कपड़े उतार रही थी तो मेरे अंडरवियर में मेरा वीर्य देखा । बोली- ये क्या है?

मैंने नजरे झुका के कह दिया- वो, रात को कुछ हो गया होगा।

मम्मी समझ गई और थोड़ा मुस्कुरा के बोली- अरे रवि, अब तू जवान हो रहा है। चल कोई बात नही मै साफ़ कर दूँगी।

कह के वो बाहर चली गई। जब मै पैखाना कर रहा था तो मेरी मुठ मारने की काफ़ी इच्छा होने लगी। क्यों कि पिछले कई दिन से मैंने मुठ नही मारी थी। लेकिन मन मसोस के रह गया। क्योँ की मेरे हाथ पट्टियों से बंधे थे। लेकिन मेरे लंड में कडापन आ गया जो ख़तम ही नही हो रहा था। किसी तरह से वो थोड़ा मुरझाया तो मैंने मम्मी को आवाज़ दी। मम्मी जब मेरी गांड की सफाई करने लगी तो मेरा लंड खड़ा हो गया।

मम्मी ने मुझे अंडरवियर पहनाते हुए मेरे लंड को देखा। लेकिन कुछ बोली नही। मै किसी तरह से बाहर चला आया। अगले दिन मेरे लंड की हालत एक दम ख़राब हो गई थी। यह बिना मुठ मारे शांत ही नही हो रहा था। मन कर रहा था की किस तरह से मुठ मारूं। जब मेरे कपड़े मम्मी ने उतारे तो ये तन के खड़ा हो गया। मै झट से दूसरी और घूम गया ताकि मम्मी मेरे खड़े लंड को ना देख पाये। लेकिन मम्मी ने देख लिया था।

वो बोली – आज तुम पैखाना करने के बाद नहा कर ही बाहर जाना. हड़बड़ी में मै तुझे ठीक से नहला भी नही पाती हूँ।

जब मैंने मम्मी को आवाज़ लगाई तो वो आई और नल पे मेरा गांड साफ़ करने के बाद

बोली- रवि, नहा भी लो ना।

मम्मी सिर्फ़ पेंटी और ब्रा पहन रखी थी। ब्रा में मम्मी के मुममे उभरे हुए और बहुत ही आकर्षक लग रहे थे । मेरा लंड एकदम टाईट हुआ जा रहा था। मम्मी ने मेरे शरीर पर पानी डाल कर मेरे बदन को रगड़ना शुरू किया तो मेरे लंड को छू कर कहा इतना टाईट क्यों कर रखा है इसे?

मैंने कहा- तुम नही समझोगी।

मम्मी को तुरंत गुस्सा आया गया और बोली- अभी भी मुझसे शर्माता है। कह कर अपने ब्रा और पेंटी को खोल दिया॥ अब हम दोनों बिलकूल नंगे बाथरूम में खड़े थे।

मम्मी ने मेरे लंड को पकड़ के कहा – बता क्या बात है?

अब इस स्थिति में कुछ भी छुपाने लायक नही था।

मैंने कहा कि पिछले कई दिनों से मुठ नही मारा है इसलिए ये टाईट हो गया है।

मम्मी बोली- पहले बोलना चाहिए था ना? ला मै मार देती हूँ ।

मैंने कहा- तुम , लेकिन …… ???।

मम्मी ने मेरी बात बीच में ही काटते हुए कहा – जब तेरी गांड धो सकती हूँ तो तेरी मुठ क्यों नही मार सकती।

मैंने कहा – ठीक है।

मम्मी ने मेरे लंड पर नारियल तेल लगाया और इसे सहलाने लगी। मेरा लंड और भी लंबा और मोटा हो गया। मेरा लंड टाइट होते के बात नौ इंच का हो जाता है । मम्मी के मुममे और चूत को सामने देख मुझे काफ़ी गर्मी चढ़ गई। मम्मी ने मेरे लंड को अपने दोनों हाथों में भर कर मुठ मारना शुरू कर दिया। पहली बार कोई अन्य मेरे लंड का इस तरह से मुठ मार रहा था। 20-25 बार ही मम्मी ने मेरे लंड को आगे- पीछे किया होगा की मेरे लंड ने माल की पिचकारी छोड़ दी जो सीधे मम्मी के पेट पर जा कर गिरी। मै सिसकारी मारने लगा। अब जा कर मेरा लंड शांत हुआ। मम्मी ने अच्छी तरह नहलाया और बाथरूम के बाहर भेज दिया। अब मै काफ़ी शांत था। सारा दिन सामान्य स्थिति में गुजर गया।

इतना होने के बावजूद मेरे लिए मम्मी के लिए कोई ग़लत भावना नही आई थी। अगले दिन सुबह मम्मी ने मुझे पैखाना के बाद फिर से नहलाने लगी। मम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार रखे थे। लेकिन मेरे लंड में उनके मुममे और चूत को देख कर कोई तनाव नही था। साबुन लगाने के क्रम में मम्मी मेरे लंड पर विशेष रूप से सहलाने लगी। जिससे मेरे लंड में हल्का तनाव आ गया और मेरा लंड खड़ा होने लगा था ।

मम्मी बोली- आज मुठ नही मारना है?

मै बोला- वैसे तो जरूरत नही है लेकिन अगर तुम्हे दिक्कत नही हो तो मार दो।

मम्मी ने कहा – आज तेरी मुठ मै दूसरे तरीके से मारूंगी।

मै बोला – ठीक है। मम्मी नीचे बैठ गई और मेरे लंड को अपने मुह में भर लिए और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी।

मैंने कहा- मम्मी ये क्या कर रही हो?

मम्मी बोली- देख तो सही।

मम्मी ने मेरे लंड को इस तरह से चूसना चालू किया मानो वो वो कोई लोलीपोप हो। मुझे अत्यधिक आनंद आ रहा था। मेरे लंड पूरे आकार में खड़ा था। मम्मी ने मेरे लंड को चूसना जारी रखा। 2-3 मिनट के बाद मेरे लंड से माल निकलने लगा। मेरा पूरा लंड लोहे की तरह से सख़्त हो चुका था ।

मैंने कहा- मम्मी अब मेरे माल निकलने वाला है। छोड़ दो इसे।

लेकिन वो मेरे लंड को और कस के पकड़ ली और अपने मुह में अन्दर तक ठूस ली। मेरे लंड से माल निकलने लगा और मम्मी सारे माल को पीती रही। कुछ माल मम्मी के मुह से बाहर भी आ रहा था। मै मस्त हो रहा था। जब कुछ शांत हुआ तो मम्मी ने मेरी लंड को अपने मुह के कैद से आज़ादी दी ।

वो खड़ी हो गई और बोली- कैसा लगा रवि बेटा?

मैंने कहा- बहुत अच्छा लगा।

मम्मी ने कहा- रवि, आज मेरी भी इच्छा पूरी कर दे। जिस जगह से तेरा पूरा शरीर निकला है आज तुझे अपने शरीर का एक भाग फिर से डालना है।

मै समझ गया की मम्मी क्या चाहतो है। मम्मी मेरा मोटा और लंबा तगड़ा लंड देख कर मस्त हो चुकी थी, शायद मम्मी की छूट में खुजली शुरू हो चुकी थी।

मै बोला – ठीक है।

मम्मी बाथरूम के ज़मीन पर लेट गई और मुझे अपने बदन पर लेट जाने को कहा। मै उनके शरीर पर लेट गया। मम्मी की जिन मुममे को मैंने 16-17 साल पहले चूस चूस कर छोड़ दिया था आज फिर से उन स्तनों को अपने मुह में लिया। और उन्हें चूसने लगा। काफ़ी देर तक चूसने के बाद मैंने उनके बदन को चूमना आरम्भ किया। चुमते चुमते उनके चूत को भी अपने मुह से चुसना शुरू कर दिया। मम्मी की मुह से हलकी हलकी सिसकारी निकल रही थी।

बोली – बेटा, अब ना तरसाओ, और फिर से उसी चूत में अपना लंड डाल के अपने ऊपर का क़र्ज़ मिटाओ जिस चूत से तू आज से 19 साल पहले निकला था।

मेरा लंड अब पूरी तरह टाईट था।

मैंने कहा -किधर और कैसे डालना है मुझे पता नही है।

मम्मी ने अपनी दोनों पैरो को खोल दिया। एवं अपने उँगलियों को अपनी चूत में घुसाया और

बोली- देख, इसी में डालना है।

मैं मम्मी की चूत को गौर से देखा। मम्मी की चूत घने बालों से ढकी थी। अन्दर एक छेद दिख रहा था। मुझे यकीन नही हो रहा था की इसी छेद से मै बाहर आया था।

मम्मी बोली- क्या सोचने लगा।

मैंने कहा- इतने से छेद में मेरा इतना मोटा और लंबा लंड जाएगा?

मम्मी बोली- अरे इस छेद से तो तू निकला है तेरे लंड की क्या बिसात। चल डाल।

मैंने मम्मी की जाँघों को थोड़ा और चौड़ा किया। लेकिन मेरा लंड मेरे काबू के बाहर हो रहा था। वो लहराते हुए बांस की तरह इधर उधर बाग़ रहा था। किसी तरह मम्मी के योनी पर मैंने अपना लंड रखा। जब उसे अन्दर डालने की कोसिस की तो लंड से निकला चिकने की वजह से वो आगे फिसल गया। मम्मी ने मेरे लंड को अपने हाथो से पकड़ा और अपनी चूत की द्वार पर रख दिया बोली- अब डाल।

मैंने सावधानीपूर्वक अपने लंड को मम्मी की चूत में प्रवेश करा दिया। सचमुच मम्मी की चूत बहूत ही गहरी और मुलायम थी। तभी तो मेरे सारे लंड को अन्दर लेने के बाद भी वो आनंदित हो रही थी। मैंने अपना पूरा लंड मम्मी की चूत में डाल दिया। अब मेरी मम्मी के चूत के बाल और मेरे लंड के बाल आपस में उलझ गए थे। मैंने थोड़ी सी अपनी लंड को बहार निकाला और फिर अन्दर धकेला। लेकिन मम्मी में चेहरे पर दर्द का भाव नही आया। मुझे अब कोई फिक्र नही थी। मैंने अब अपनी स्पीड बढा दी । अब मै मम्मी के चूत में जोर लगा लगा के कस के लंड के धक्के मरने लगा। मेरे धक्के से मम्मी को थोड़ी तकलीफ होने लगी।

बोली- बेटा धीरे धीरे डाल ना।

लेकिन अब मुझे इस बात का गर्व हो गया था की मै भी आपको ऐसे चोद सकता हूँ की आपको दर्द होने लगे।

मम्मी ने जब देखा की मै नही मान रहा हूँ तो वो मुस्कुरा कर अपने दोनों पैरों को और भी ज्यादा खोल दिया। शायद इस से उनका दर्द कुछ कम हो गया। मै मम्मी के चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के पे धक्के मार रहा था और वो हर धक्के पर हाए… …… हाए… …… .कर रही थी। मैंने अपने बांह से अपनी मम्मी को लपेट लिया था जिस से मम्मी के मुममे मेरे सीने से चिपके हुए थे। चूँकि थोड़ी ही देर पहले मम्मी ने मेरे लंड को चूस कर मेरा माल बाहर निकाला था इसलिए इस बार मेरा लंड जल्दीबाजी में माल निकालने को तैयार नही था। अचानक मेरे लंड को अहसास हुआ की की मम्मी झड़ गयी थी, मम्मी के चूत में गरम गरम पानी निकल रहा है।

मैंने मम्मी को देखा वो आँखे बंद कर ना जाने किस आनंदलोक में उड़ रही थी। काफ़ी देर मम्मी को चोदने के बाद भी मेरे लंड से माल नही निकलने लगा तो मम्मी ने कहा ला मै तेरा माल निकलवा देती हूँ. मैंने लंड को बाहर कर लिया और मम्मी ने उसे अपने मुह में ले कर फिर से चूसने लगी। थोड़ी ही देर में मुझे लगा की अब शायद माल फिर जमा हो गया है।

मैंने मम्मी को कहा -ला रवि, अब हो जाएगा।

मैंने फिर से अपने लंड को मम्मी के चूत के पास ले गया। मम्मी का चूत का मुह अभी भी फैला हुआ ही था। इसलिए मुझे अपना लंड उसमे डालने में कोई परेशानी नही हुई। अब मै अधिक तेजी से मम्मी के चूत को चोदना शुरू किया। 10 मिनट के बाद ही मेरे लंड से माल की धारा फूटने वाली थी।

मैंने मम्मी को कहा- अब निकलने वाला है। कहाँ निकालूँ?

मम्मी बोली- चूत में ही माल गिरा दे।

मम्मी के कहते कहते मेरे लंड से माल का फव्वारा निकल के मम्मी के चूत में समाने लगा। पता नही कितना गहरी थी मम्मी की चूत। सारा का सारा माल चूत के अन्दर में कहाँ चला गया पता भी नही चला। एक बूंद भी बाहर नही आई। मै निढाल हो कर मम्मी के मुममे पर अपना मुह रख के लेट गया।

थोड़ी देर के बाद मम्मी ने ही मुझे सहायता दे कर उठाया। वो समझती थी की 22 साल के लड़के से दो बार माल तुरंत तुरंत निकलवाया जाए तो क्या हाल होगा बेचारे का। वो भी पहला अनुभव में। उस दिन के बाद से मम्मी और मेरे बीच जो शारीरिक रिश्ता बना है वो आज भी मेरे पिता की नजरों से छिप के बदस्तूर जारी है।

हर 1-2 दिन के बाद मम्मी मेरे कमरे में आकर मेरे साथ सेक्स करती है। या तो जब मेरा मन होता है तो मम्मी को उनके बेडरूम में जा कर चोद आता हूँ। कई बार तो मम्मी मेरे पिता से सेक्स करने के बाद बिना अपने चूत से पापा का माल साफ़ किए नंगे बदन ही मेरे रूम में आ जाती है । और उसी में मुझे चोदने को कहती है।

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समाप्त

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RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां भी……




हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम सिमरन है। यह मेरे जीवन की वास्तविक कहानी है।

प्यार से मुझे सिम्मू कहते हैं। मेरी उम्र सिर्फ़ 20 साल है लेकिन मेरे गदराये हुए जिस्म कि वजह से मैं भरपूर जवान लगती हूँ। मेरा कद 5 फ़ीट 8 इन्च है। आप मेरी खूबसूरती का अन्दाजा इसी बात से लगा सकते है कि अभी-अभी मैंने मिस कॉलेज का खिताब जीता है।


मेरे पापा का पब्लिकेशन का काम है, उनका ऑफ़िस घर के नीचे ही है। मम्मी हाउस वाइफ़ है। मेरे परिवार में मेरे दो छोटे भाई हैं निक्कू और सन्जू। इनके अलावा हमारे साथ और कोई नहीं रहता है। पापा के ऑफ़िस मे ज्यादा स्टाफ़ नहीं है। एक लड़का आता है जो की निहायत ही सीधा-सादा है और दूसरे मेरे दूर के रिश्ते के अन्कल आते हैं, वो मुझसे बड़े हैं और शादीशुदा हैं लेकिन मुझे उनकी नियत मेरे लिये सही नहीं लगती है। उनकी नजर हमेशा मेरे वक्ष पर ही टिकी रहती थी। वो हमेशा मुझसे अकेले में बात करने की कोशिश करते हैं और कभी कभी मुझे छूने की भी कोशिश करते हैं। मैं रिश्तेदारी का ख्याल करके उनसे कुछ भी नहीं कह पाती हूँ। मगर मुझे उनकी यह हरकत जरा भी अच्छी नहीं लगती है। जब पापा ऑफ़िस मे नहीं होते हैं तो वो इन्टरनेट पर गन्दी गन्दी साइटें देखते रहते हैं। इस बात का पता मुझे तब चला जब एक दिन मैं उन्हें चाय देने अचानक ऑफ़िस चली गई। वहाँ वो नन्गी फ़िल्मों की साइट देख रहे थे। मुझे देखते ही उन्होंने फ़ौरन उसे बन्द कर दिया। हालांकि मैंने सब कुछ देख लिया था लेकिन मैं जानबूझ कर अनजान बन गई और उनसे इधर इधर की बातें करके वापस ऊपर आ गई।


लेकिन मेरे अन्दर अभी भी उथल-पुथल चल रही थी। उस फ़िल्म की सिर्फ़ एक झलक ने मेरे मन में तूफ़ान खड़ा कर दिया था। मेरा मन बार बार उस फ़िल्म को देखने के लिये मचल रहा था, लेकिन उस दिन मुझे इसका मौका नहीं मिल पाया। अब मैं मौके का इंतजार करने लगी। आखिर एक दिन वो मौका आ ही गया।


उस दिन मैं अपने कॉलेज के कुछ नोट्स तैयार करने के लिये पापा के ऑफ़िस में गई। काफ़ी रात हो चुकी थी, पापा मम्मी अपने कमरे में सोने के लिये जा चुके थे और मेरे दोनों भाई भी अपने कमरे में सोने जा चुके थे। मैंने उसी कम्प्यूटर को चालू किया जिस पर अंकल काम करते थे। नोट्स तैयार करने के बाद मैंने इंटरनेट चालू करके मेरे अन्कल की देखी हुई साइट्स को क्लिक करना शुरु किया। वहाँ पर एक से बढ़कर एक चुदाई की फ़िल्में देखकर मैं गर्म हो गई। इसी दौरान मैंने इंटरनेट पर मैने ढेर सारी भाई-बहन और चाचा-भतीजी की चुदाई की कहानियाँ पढ़ी। तब ही मैंने सोचा कि अन्कल आखिर मुझे इतना घूरकर क्यों देखते हैं।


खैर चुदाई की कहानियाँ पढ़कर और चुदाई के दृश्य देखकर मेरी चूत में भी पानी आना चालू हो गया। उस दिन तो मैंने जैसे-तैसे अपने को शान्त कर लिया। लेकिन अब मैं भी अन्कल की तरफ़ खिंचती चली जा रही थी। मैं भी इसी मौके में रहती थी कि कब अन्कल मुझे छूएँ। लेकिन हमेशा घर में कोई ना कोई रहता है, इसलिए मेरी और अन्कल की इच्छा पूरी नहीं हो पा रही थी। इधर मैं रोजाना सबके सोने के बाद चुपचाप अपने कमरे से निकल कर चुदाई की फ़िल्मे देखती रहती और अपनी चूत पर हाथ फ़िरा फ़िरा कर और अपने चूचों को अपने ही हाथों से दबा दबा कर मजा लेती रही।


लेकिन जो मजा लड़कों से चुदाई में आता है, उससे मैं अभी अन्जान ही थी। मगर आखिरकार भगवान ने मेरी सुन ही ली।


वैसे तो हम सभी घर वाले अलग अलग कमरों में सोते हैं, पापा-मम्मी सबसे ऊपर वाले कमरे में, मेरे भाई निक्कू और सन्जू घर की दूसरी मन्जिल के आगे की तरफ़ वाले कमरे में सोते थे और मैं सबसे पीछे वाले कमरे में सोती थी। लेकिन अभी सर्दी ज्यादा पड़ रही है तो निक्कू और सन्जू मेरे कमरे में ही सोते हैं। मैं दोनों के बीच में सोती हूँ।


एक दिन मैं जब चुदाई की फ़िल्म देखकर अपने कमरे में आई तो देखा कि सन्जू जाग रहा है।

मुझे देखते ही उसने कहा,"दीदी, मुझे सू-सू करना है, अकेले जाने में डर लग रहा है, प्लीज आप मेरे साथ चलो ना !"


मैं बाथरूम तक उसके साथ चली गई। वहाँ जैसे ही उसने अपनी पैन्ट की जिप खोली, मेरी नजर उसके लण्ड पर पड़ गई। उस समय उसका लण्ड तना हुआ था। सन्जू का साढ़े चार इन्च लम्बा और दो इन्च मोटा लण्ड देखकर मैं दंग रह गई। मैंने आज पहली बार किसी लड़के का लण्ड इतने पास से देखा था।


मैंने मन में सोचा,"वाह ! इतनी सी उम्र में इतना मोटा लण्ड ! मेरे लिए तो इतना काफ़ी है।"


मुझे लगा कि अब मेरा मसला हल हो गया। मेरा मन तो हुआ कि अभी जाकर उसका लण्ड अपने कब्जे में कर लूँ, लेकिन डर भी लगा कि वो मेरा छोटा भाई है, अगर पापा मम्मी को पता चल गया तो?


खैर, उस वक्त तो मैने उसे कुछ नहीं कहा। लेकिन मुनासिब मौके का इन्तजार करने लगी।


एक दिन मैं कॉलेज से आई तो मम्मी पापा और सन्जू घर पर नहीं थे, निक्कू अकेला ही था। वो कमरे में पलंग पर कम्बल ओढ़कर टीवी देख रहा था। मैं भी अपने कपड़े बदल कर पलंग पर बैठ कर टीवी देखने लगी। हम दोनों ने अपने पाँव पर कम्बल डाल रखा था और पास-पास बैठ कर ही फ़िल्म देखने लगे। हालाँकि इस वक्त मुझे सन्जू की बहुत याद आ रही थी, काश ! निक्कू की जगह सन्जू घर पर होता और निक्कू पापा के साथ चला जाता, घर पर मैं और सन्जू होते ! आहहहहहहह ! मैं आज तो अपनी प्यास बुझा ही लेती। कितना मजा आता ! लेकिन मुझे क्या पता कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है?


टीवी पर राजा हिन्दुस्तानी फ़िल्म आ रही थी, मेरा और निक्कू का पूरा ध्यान फ़िल्म देखने में था, इतने में टीवी पर आमिर खान और करिश्मा कपूर का "चुम्बन-दृश्य" आ गया। मुझे थोड़ी शर्म आ गई, आखिर वो मेरे बराबरी का भाई था, मैंने हड़बडी में रिमोट ढूढ़ने लिए इधर-उधर हाथ मारा, तो मेरा हाथ सीधे निक्कू की पैन्ट पर लग गया। वहाँ हाथ लगते ही हम दोनों हड़बड़ा गए, उसका लण्ड खड़ा था और गलती से मेरा हाथ उस पर पड़ गया।


उसने कहा," दीदी क्या कर रही हो?!!"


मैंने कहा,"कितना गन्दा सीन आ रहा है, चैनेल बदलने के लिए रिमोट ढूँढ रही हूँ!!!"


इसी बीच वो दृश्य खत्म हो गया और हम फ़िर से पास पास बैठकर फ़िल्म देखने लगे, लेकिन मेरा ध्यान तो फ़िल्म में बिल्कुल ही नहीं लग रहा था और बार बार निक्कू के लण्ड की तरफ़ जा रहा था। मगर मैने पहल करना ठीक नहीं समझा। इसी दौरान टीवी पर फ़िर से एक सेक्सी विज्ञापन आया। लेकिन रिमोट नहीं होने से इस बार हमने चैनेल नहीं बदला। हम दोनों ध्यान से उस विज्ञापन को देखने लगे। मैं तो पहले से ही गर्म हो चुकी थी, मेरा मन तो बहुत हुआ कि निक्कू का लण्ड पकड़ लूँ, लेकिन आज भी मैंने डर के मारे अपने आप पर काबू रखा। उस विज्ञापन को देख कर शायद निक्कू भी गर्म हो गया।


थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि निक्कू का हाथ मेरी जांघों पर है और वो धीरे धीरे मेरी जांघों को सहला रहा है। उसके इस स्पर्श से मेरा रोम-रोम खड़ा हो गया। धीरे-धीरे वह अपना हाथ मेरी चूत की तरफ़ ले जाने लगा। मैं अपना सपना सच होते देख उसकी इस हरकत को जानबूझ कर नजर-अन्दाज करके टीवी देखने का नाटक करती रही। निक्कू का हाथ मेरी चूत तक पहुँचने वाला ही था कि अचानक दरवाजे की घण्टी बज उठी। मैंने जाकर देखा तो मम्मी-पापा आ गये।



RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 08-20-2017

बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां भी……




रात का खाना हम सबने साथ ही खाया, इस दौरान मेरी नजर जब निक्कू से मिलती तो वो हल्के से मुस्कुरा देता, मैं समझ गई कि आज मेरा काम बन गया।



रात को सर्दी की वजह से हम जल्दी सोने चले गये। सन्जू तो जाते ही सो गया और थोड़ी देर बाद मुझे नीन्द भी आने लगी, रात को जब मेरी नींद खुली तो मुझे महसूस हुआ कि मेरे चूतड़ों पर कुछ कड़क चीज चुभ रही है, मैंने धीरे से हाथ लगा कर देखा तो निक्कू का लण्ड था, मुझे उसके लण्ड का स्पर्श बहुत ही अच्छा लगा, मैंने भी अपनी गाण्ड को उसके लण्ड से सटा दिया। फ़िर मुझे लगा कि निक्कू अपना हाथ मेरे पेट पर फ़िरा रहा है, मैं अभी भी अपनी पीठ दूसरी तरफ़ करके सोने का नाटक कर रही थी, धीरे धीरे निक्कू का हाथ मेरे चूचियों की तरफ़ बढ़ने लगा। मेरी धड़कन तेज होती जा रही थी, अब उसका हाथ मेरी चूची पर था, जैसे ही उसने मेरी चूची दबाई, मेरे मुँह से एक मादक सिसकी निकल गई।



उसने हल्के हाथों से मेरी चूचियों की मालिश करनी शुरु कर दी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। अब धीरे धीरे उसका हाथ नीचे सरकने लगा, मै भी अब झिझक छोडकर निक्कू का सहयोग करने लगी और सीधी लेट गई और अपने एक हाथ से उसके लण्ड को पैन्ट के ऊपर से ही दबाना शुरु किया। उसने अपने एक हाथ से मेरे नाइट-सूट का नाडा खोल दिया। मैंने भी उसके लण्ड को पैन्ट से आजाद कर दिया और उसका 6 इन्च लम्बा और 3 इन्च चौडा लण्ड हाथ में लेकर हिलाने लगी और मन ही मन सोचने लगी कि कहाँ तो मैं साढ़े चार इन्च लम्बा लण्ड लेने की सोच रही थी और कहाँ ये तगड़ा तना हुआ 6 इन्च लम्बा और 3 इन्च चौडा लण्ड मिल गया !


लेकिन कमरे में अन्धेरा था इसलिए देख नहीं पाई।


अब निक्कू मेरी पेन्टी के अन्दर हाथ डालकर मेरी चूत को सहलाने लगा। मेरे मुँह से आहहहह ! आहहहह ! स स सी सी !! आऊऊऊ !! की आवाजें आनी शुरु हो गई। मैंने करवट बदलकर निक्कू के होंठों पर चूमना चालू कर दिया, उसने मुझे नीचे गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गया और जमकर मेरे होंठों को चूसा।


अब वो धीरे-धीरे नीचे की तरफ़ बढ़ने लगा और मेरी चूचियों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। मेरे से अब अपने पर काबू नहीं हो रहा था और मैं आहहह ! आहहाह्ह्ह्ह ! करने लगी। अब निक्कू ने मेरा पजामा उतारा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चूमने लगा। उसने एक झटके से मेरी पैंटी उतार दी और मेरी चूत का दाना अपने मुँह में लेकर चूसने लगा, मेरे मुँह से आआ आआअहहहहह ऊ ऊऊ उहह्ह्ह्हह्ह की आवाज निकलने लगी, जो पूरे कमरे में फ़ैलने लगी।


अचानक, कमरे की बत्ती जली, रोशनी होते ही हम दोनों हड़बड़ा गए, देखा तो सामने सन्जू खड़ा है और हमें आँखें फ़ाड फ़ाड कर देख रहा है,"अरे बाप रे! तुम दोनों नन्गे होकर क्या कर रहे हो? ठहरो! मैं अभी जाकर पापा को कहता हूँ।"


हम दोनों घबरा गए, मै झट से कपड़े ठीक करके उसकी तरफ़ लपकी और उससे विनती करने लगी,"सन्जू रुक ! हम तो ऐसे ही खेल रहे थे, प्लीज, पापा से कुछ मत कहना, तू जो कहेगा, जो माँगेगा वो तुझे दूँगी, प्लीज रुक जा।"

निक्कू भी उससे विनती करने लगा।


सन्जू,"एक शर्त पर मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा।"


हम दोनों एक साथ बोले,"हमें तेरी हर शर्त मन्जूर है।"


सन्जू-"तुम दोनों मेरा हर काम करोगे और जो खेल तुम अभी खेल रहे थे, मुझे भी खेलाओगे, मन्जूर है?"


"थैंक्यू ! सन्जू !" मैंने खुशी के मारे उसे गले लगा लिया और उसके गालों को चूम लिया। मुझे मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि आज एक के बजाय दो-दो लण्ड मिलने वाले हैं।


मैंने सन्जू के होंठों को चूमना शुरु किया और निक्कू मेरे पीछे से मेरी गाण्ड को सहलाने लगा। अब मैं सन्जू के कपड़े उतारने लगी और उसकी पैन्ट उतार कर उसका प्यारा सा लण्ड अपने मुँह में ले लिया।


इधर पीछे से निक्कू मेरी गाण्ड पर अपनी जुबान फ़ेरने लगा।


आहहहहाह!


अब सन्जू ने मेरे चूचे दबाने शुरु कर दिए।


मैंने सन्जू से कहा,"क्या ऊपर से ही मजा लेगा, चल अपनी बहन को नन्गी कर दे !"


सन्जू ने मेरा टॉप उतार दिया और मेरे स्तनों को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा।


वाह !! सन्जू !! आहहहाहह ! और जोर से चूस !!! मेरे मुँह से मादक सिसकारियाँ निकलने लगी।


निक्कू ने अपने कपड़े खुद ही उतार दिए और मेरी रसीली चूत चाटने लगा।


आहहहहाह ! आहहहह ! स स सी सी !! आऊऊऊ !! निक्कू की गरम जबान मेरी चूत में जाते ही मैं तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गई। उसके मुँह से निकलने वाली गर्म-गर्म सांसों से मेरे चूत में जैसे आग लग गई। आज मुझे लगा कि मेरे घर में ही चुदाई स्पेशलिस्ट मौजूद है और मैं कहाँ इधर-उधर ताक रही थी। कभी सन्जू तो कभी निक्कू बारी बारी से मेरी चूत और गाण्ड चाटते, तो मैं कभी सन्जू का तो कभी निक्कू का लण्ड चूसती।


करीब एक घन्टे तक मस्ती करने के बाद मैं एकदम गर्म हो चुकी थी, मेरे मुँह से सित्कार की आवाजें आ रही थी- आहहहहाह ! निक्कू !! सन्जू !! अब मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है, प्लीज!! मेरी चूत चोदो ! आहहहहाहहहह !


निक्कू ने मुझे नीचे लिटाया और मेरी टांगों को फ़ैलाकर मेरी चूत में अपनी अँगुली डाल दी। मेरे मुँह से फ़िर से मादक सित्कार निकल उठी- आआअहहहहाह !! स स्सी!!!!!!!!आऊ!!!!! निक्कू प्लीज, मेरी चूत चोदो!!!! आआ आआअहहहहह ऊ ऊऊ उहह्हह्ह !


अब निक्कू अपने लण्ड का सुपारा मेरी चूत पर रखकर रगड़ने लगा, मेरी चूत से गर्म तरल बाहर आने लगा, निक्कू ने जैसे ही अपना लंड मेरी चूत में डालने की कोशिश की मेरे मुँह से दर्द के मारे चीख निकल गई- उई मम्मी !!! मर गई !!! निक्कू मत करो !! मेरी चूत फ़ट जाएगी !!


सन्जू ने मुझे प्यार से पुचकारते हुए कहा,"दीदी! थोड़ी सी देर दर्द होगा, फ़िर मजा आयेगा।"


इतने में निक्कू ने एक झटका और दिया।


"उई मम्मी !!!!! मर गई !!!!! मेरे मुँह से फ़िर से चीख निकल पडी,"निक्कू !! तेरा लण्ड बहुत बडा है, ये मेरी चूत में शायद नहीं जाएगा!"


निक्कू ने सन्जू से कहा,"सन्जू ! पहले तू दीदी को चोद ले, तेरा लण्ड छोटा है, इससे दीदी को दर्द कम होगा।"



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