Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - Printable Version

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Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

मुहं बोली बहन की चुदाई


हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम संजय है। में भोपाल का रहने वाला हूँ। मेरी हाईट 5.11 इंच उम्र 23 साल अच्छा खासा शरीर है। में दिल्ली में एक कमरा किराए पर लेकर रहता हूँ। दोस्तों यह कहानी आज से 3 साल पहले की है। जब में दिल्ली आया तब में एक ऑफिस में काम करता था। तभी मुझे कुछ काम के सिलसिले में अपने घर पर जाना पड़ा.. भोपाल जहाँ पर मेरे मम्मी, पापा रहते हैं।

दोस्तों जब में वहाँ से लौटने लगा तो तभी मेरे पड़ोस वाली आंटी आई और मुझसे कहने लगी कि बेटा मेरी लड़की भी दिल्ली में रहती है उसकी तबीयत बहुत खराब है प्लीज़ उसे यह कुछ पैसे दे देना और हो सके तो उसका कुछ दिन ख्याल रख लेना। तो मैंने कहा कि ठीक है और मुझसे जो बन सकेगा में कर दूँगा। फिर जब में दिल्ली आया.. तो मैंने रश्मि को फोन किया और कहा कि आंटी ने कुछ पैसे भिजवाए है तुम कहाँ पर रहती हो मुझे बताओ मुझे तुमसे मिलना है।

रश्मि : में कालकाजी रहती हूँ भैया।

में : ठीक है तुम ऐसा करो में तुमको कल 6 बजे मिलता हूँ शाम को ऑफीस के बाद।

रश्मि : ठीक है भैया जब आप यहाँ पर पहुंच जाओ तो मुझे फोन कर देना में आपको अच्छे से पता बता दूंगी।

में : ठीक है.. फिर दूसरे दिन शाम को जब में ऑफीस से फ्री हुआ तो में कालकाजी बस स्टॅंड के पास पहुंचा और मैंने रश्मि को फोन किया।

में : हैल्लो रश्मि.. में बस स्टॅंड पर खड़ा हूँ सफेद शर्ट और काले कलर की शाइनिंग पेंट में।

रश्मि : भैया आप वहीं पर रूको में अभी थोड़ी देर के बाद आती हूँ।

फिर मैंने देखा कि एक लड़की इधर उधर देखती हुई आ रही है और मैंने सोचा कि हो सकता है यही रश्मि हो। तो में बाईक से उतरा और उसके पास गया और उससे पूछा।

में : क्या तुम रश्मि हो ?

लड़की : नहीं मेरा नाम रश्मि नहीं है.. यह स्टाईल बहुत पुराना हो गया है लड़की को पटाने का।

तो मैंने उसे सॉरी बोला और पीछे मुड़कर आने लगा.. तभी उस लड़की ने कुछ फुस फुसाते हुए कहा।

लड़की : पता नहीं कहाँ कहाँ से आ जाते है?

फिर यह बात सुनकर मेरे बदन में आग लग गई।

में : हैल्लो मेडम.. में आपको पटाने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ। में तो किसी का इंतज़ार कर रहा हूँ और आप इधर उधर देखती हुई आ रही थी तो मैंने सोचा कि आप वही हो।

लड़की : वैसे भी तुम मुझे पटा भी नहीं सकते और तुम्हे पता नहीं में कौन हूँ?

में : होगी कोई बड़े बाप की बिगड़ी औलाद।

तभी मैंने देखा कि एक पुलिस वेन हमारे सामने आ कर रुकी और उसमें से 4-5 पुलिस वाले उतरे और उस लड़की के आगे पीछे खड़े हो गये।

लड़की : चाहू तो में एक मिनट में अभी तुम्हे अंदर करवा दूँ।

में : मैंने सोचा कि बेटा भलाई इसी में है कि बहन की लौड़ी को जाने दे और जो काम करने आया है वो जल्दी से करके लौट जा। तभी उस लड़की ने कहा।

लड़की : तुम जैसे लड़को को में अच्छी तरह से जानती हूँ.. हरामी कहीं के।

तो मेरे तनबदन में फिर से आग लग गई।

में : बहन की लौड़ी तेरा बाप ऑफिसर होगा अपने एरिए में.. में भी मीडीया में हूँ और अगर में अपनी पर उतर आऊंगा तो अच्छा नहीं होगा.. चुप चाप चली जा अब यहाँ से।

पुलिस : साले हरामी।

में : ओए तेरे बाप की जागीर नहीं हूँ और ना मैंने कुछ ग़लत किया है ना तुम लोगो से डरता हूँ और मुझे अच्छी तरह पता है तुम लोगो का काम। अब चुपचाप चले जाओ नहीं तो। फिर उस में से एक समझदार पुलिस वाला था वो मेरे पास आया जो कि उम्र में 50 के करीब था और मुझसे बोला कि क्या हुआ बेटा?

में : अरे अंकल देखो.. में किसी का इंतज़ार कर रहा था और मुझे इन मेडम को देखकर लगा कि यह वही है.. तो मैंने इनसे पूछ लिया तो यह पता नहीं क्यों भड़क गई? कोई बात नहीं बेटा हो जाता है। अभी बिटिया नादान है तुम जाओ अपना काम करो। ठीक है अंकल.. वैसे आपका नाम क्या है? तो अंकल बोली कि नदीम। फिर मैंने कहा कि ठीक है अंकल बहुत बहुत धन्यवाद में चलता हूँ और आप जैसे ही समझदार पुलिस वालो के दम पर ही सब कुछ चल रहा है.. नहीं तो अभी का हाल तो आपसे छुपा नहीं है। तो वो बोले कि क्या करे बेटा? चलो कोई बात नहीं। तो मैंने कहा कि ठीक है.. बाय अंकल।

फिर में जैसे ही पीछे मुड़ा देखा कि एक लड़की मुझे देखकर मुस्कुरा रही है। गोरी चिट्टी, कद 5.6 इंच अच्छे फिगर। क्या आप संजय भैया हो? और तुम रश्मि? हाहहहाहा मुझे बहुत देर हो गई और मेरी वजह से यह सब।

में : अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं.. जब कुछ बुरा करोगे नहीं तो डरना किस बात का?

रश्मि : फिर भी पुलिस वालो को देखकर तो अच्छे अच्छो की हालत खराब हो जाती है।

में : लेकिन वो हैवान थोड़े ही ना होते है.. वो भी हमारी ही तरह एक इंसान होते है अब 5 उंगलियां बराबर तो नहीं.. उनमे कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी होते है ठीक कहा ना मैंने।

में : अच्छा चलो पहले यह बताओ कि तुम्हारा रूम कहाँ है?

रश्मि : यहीं पर पास में है।

में : तो फिर चलो।

रश्मि : हाँ क्यों नहीं.. चलिए ना।

जब में रश्मि के रूम पर गया तो देखा कि छोटे छोटे तीन बेडरूम थे किचन बाथरूम और एक हॉल

में : तुम्हारे साथ और कौन रहता है?

रश्मि : दो सहेलियां उनकी नाईट शिफ्ट होती है दोनों अपने अपने काम में व्यस्त रहती है।

में : अच्छा अच्छा और तुम?

रश्मि : में तो अभी एक कॉलेज से पढ़ाई कर रही हूँ और मेरा आखरी साल है।

में : ठीक है.. अच्छा यह लो पैसे और बताओ कि में तुम्हारी क्या सेवा कर सकता हूँ? आंटी ने तो हुक्म दिया है तुम्हारा ख्याल रखने का।

रश्मि : बस बस बहुत है।

में : चलो ठीक है तो अब में चलता हूँ ज़रूरत हो तो मेरे नंबर पर कॉल कर देना।

रश्मि : ठीक है भैया।

फिर में वहाँ से चला गया शनिवार और रविवार मेरे ऑफिस की छुट्टी होती है। तो शनिवार को में दिन भर घर पर बैठा बैठा बोर हो गया। तो मैंने सोचा कि चलो आज फिल्म देखने चलते है। मुझे तभी रश्मि का ख्याल आया और मैंने सोचा कि में उसको भी अपने साथ में ले लेता हूँ.. हो सकता है कि थोड़ा उसका भी मन बहल जाएगा।

में : हैल्लो रश्मि.. क्या तुम फिल्म देखने चलोगी?

रश्मि : कौन सी?

में : अरे एक हॉलीवुड फिल्म लगी है? एक्शन थ्रिलर है बोलो चलना है? में बोर हो रहा था तो सोचा कि फिल्म देखने चलता हूँ तभी तुम्हारा ख्याल आ गया तो मैंने तुमसे पूछ लिया।

रश्मि : हाँ तो इसमे इतनी सफाई देने वाली कौन सी बात है? ठीक है.. चलो चलते हैं।

में : तो ठीक है.. तुम एक काम करो तुम जल्दी से तैयार हो जाओ में अभी कुछ देर में आता हूँ और अगर ट्रैफिक ज्यादा नहीं हुआ तो में तुम्हारे घर पर 15 मिनट में पहुंच जाऊंगा।

रश्मि : ठीक है तो भैया अब जल्दी से आ जाओ।

फिर में 20 मिनट बाद उसके घर पर बाईक से पहुंच गया और मैंने दरवाजा नॉक किया तो रश्मि ने दरवाजा खोला। फिर मैंने जब उसे देखा तो देखता ही रह गया.. इस पर वो थोड़ा शरमा गई और बोली

रश्मि : ऐसे क्या देख रहे हो?

में : कुछ नहीं तुम तो आज कमाल की सुंदर लग रही हो।

रश्मि : बहुत बहुत धन्यवाद।

में : अच्छा अब चलो वरना हम लेट हो जाएगें।

फिर हम दोनों हॉल पहुंचे और टिकिट लिया कुछ पॉप कॉर्न लिए और फिर अंदर गये। तो वहाँ पर पहले से ही लाईट बुझ चुकी थी। हॉल पूरा भरा हुआ था और हमे सबसे लास्ट में कॉर्नर के पास वाली सीट मिली थी। फिर फिल्म शुरू हुई तो पहले ही उसमे एक हॉट सीन था। तो रश्मि ने शरम से अपना सर नीचे कर लिया। तो मैंने कहा कि इतना क्यों शरमा रही हो। जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं है। फिर तुम देखो फिल्म आराम से और मुझे अपना एक अच्छा दोस्त समझो.. इस पर वो हंस दी।

रश्मि : भैया आप भी ना कमाल करते हो.. कुछ भी बोल देते हो।

में : अच्छा मेरी माँ मुझसे ग़लती हो गई.. अब तुम फिल्म देखो।

फिर वो सीन 2 मिनट के बाद ख़त्म हुआ और इतने में कॉर्नर पर जो दो जोड़े बैठे थे वो एक दूसरे को किस करने लगे। तो मैंने साईड से देखा कि वो लड़का उस लड़की के कंधे के ऊपर से उसकी शमीज़ में हाथ डालकर उसके बूब्स दबा रहा था। रश्मि भी यह सब साईड से देख रही थी। फिर धीरे धीरे उस लड़के ने उस लड़की की सलवार में हाथ डाल दिया और उसकी चूत में उंगली डालकर हिला रहा था। लड़की के मुहं से धीरे धीरे आहह की आवाज़ आ रही थी और इधर उनकी हरकते देखकर में भी गरम हो गया था और मेरा लंड फूलकर फटने ही वाला था। तभी अचानक से मैंने देखा कि रश्मि मेरे ऊपर नीचे हिलाते हुए लंड को बड़े ध्यान से देख रही थी। तो जैसे ही मैंने उसकी चोरी पकड़ ली.. तभी उसने मुझे देखा हम दोनों की आँखे टकराई और हम धीरे से हंस दिए।

में : मुझे माफ़ करना यार.. मैंने नहीं सोचा था कि यहाँ पर कुछ ऐसा भी होगा।

रश्मि : कोई बात नहीं में समझ गई.. लेकिन यहाँ पर सब कुछ होता है।

खैर फिल्म ख़त्म हुई रात के 11:30 बज चुके थे और वो ठंड का समय था। फिर मैंने बाईक निकाली और रश्मि बैठ गई। मैंने अपना जॅकेट नहीं पहना था और जब हम बाईक से जाने लगे तो हमे ठंड लगने लगी।

रश्मि : ठंड लग रही है क्या भैया?

में : हाँ यार स्वेटर घर पर ही भूल गया।

तो रश्मि मुझसे और चिपक कर बैठ गई और अपनी शॉल मेरे हाथ के नीचे से निकाल कर मुझे ओढ़ा दिया। उसका एक हाथ मेरे पेट से सीने और दोनों साईड की शॉल पकड़े हुए था और दूसरा हाथ मेरे लंड के सामने सीट पर था। खैर जब बाईक हिचकोले खा रही थी तब उसकी चूचियाँ मेरी पीठ से रगड़ खा रही थी और इसलिए मेरा लंड खड़ा हो गया। तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और इसलिए में बार बार ब्रेक लगा लगाकर बाईक चला रहा था। शायद रश्मि को यह बात पता चल गई और इसलिए वो थोड़ा पीछे हटकर बैठ गई.. लेकिन जैसे ही वो पीछे हटी अचानक से एक गड्डा आ गया और हम दोनों उछल पड़े। फिर अंजाने में रश्मि ने मुझसे चिपककर अपना बैलेन्स बनाया और एक हाथ से मेरी छाती पकड़ी और दूसरा हाथ उसका मेरे लंड को पकड़े हुए था। जब हम संभाले तो तब भी मेरा लंड उसके हाथ में था और वो ऊपर नीचे उछल रहा था। तभी उसने झट से मेरे लंड को छोड़ दिया। खैर जैसे तैसे हम घर पहुंचे।

रश्मि : भैया चलो आप थोड़ी देर बैठो में आपके लिए चाय बना देती हूँ.. आपको घर पर जाते समय ठंड नहीं लगेगी।

में : अरे नहीं ठीक है.. तुम बिना वजह परेशान मत हो।

रश्मि : अरे चलो ना परेशानी किस बात की।

फिर मैंने सोचा कि ठीक है यार चल कितना टाईम लगेगा और फिर मुझे ठंड भी तो लग रही थी और जैसे ही हम रूम में घुसे लाईट चली गई। रश्मि मोमबत्ती ढूँढने चली गई और में अंधेरे में सोफे की तरफ बढ़ गया। तभी अचानक रश्मि जोर से चिल्लाई और में देखने भागा क्या हुआ? और मैंने पूछा क्या हुआ?

रश्मि : मेरे पैर पर कुछ चलकर गया।

में : अरे तुम लड़कियाँ भी ना चूहे और कॉकरोच से डर जाती हो।

फिर में दीवार को टटोलते हुए आगे बढ़ा.. कुछ दिख तो रहा नहीं था.. कि अचानक ग़लती से अँधेरे में मैंने दीवार की जगह रश्मि की चूची हाथ में पकड़ ली। दोस्तो क्या मुलायम थी.. एकदम रुई की तरह और मन तो किया कि रगड़ दूं उउउफफफ्फ़.. लेकिन मैंने हाथ नहीं उठाया। जाने ऐसी कौन सी शक्ति थी जो मुझे उस लम्हे के लिए बाँध गई। इधर मैंने गौर किया कि रश्मि भी कुछ नहीं बोल रही थी बस उसकी बॉडी की कंपन मुझे महसूस हुई। पता नहीं मुझे उस वक़्त क्या हो गया? और मैंने उसकी चूचियाँ पकड़ कर ज़ोर से मसल दी और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए। फिर मैंने महसूस किया कि वो अब भी कांप रही थी.. लेकिन वो मूर्ति की तरह खड़ी थी। तो मैंने उसको अपने बदन से सटाया और उसके होंठ को चूसने लगा उूउउफ़फ्फ़ क्या मज़ा आ रहा था? फिर मैंने धीरे से उसकी जिन्स में अपना एक हाथ डाल दिया और झट से उसकी चूत पर हाथ घुमाने लगा.. लेकिन अफ़सोस मेरा हाथ सिर्फ़ जींस के अंदर गया पेंटी के नहीं और तभी लाईट आ गई और रश्मि ने अपने कांपते बदन से मुझे धकेला और मुझे एक ज़ोर का थप्पड़ मार दिया।

रश्मि : निकल जा यहाँ से नहीं तो में अभी पुलिस को बुला दूँगी।

फिर में चुपचाप वहाँ से चला गया और दूसरे दिन मुझे मेरी ग़लती का एहसास हुआ तो मैंने उसको बहुत फोन किए.. लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और ऐसे ही तीन चार दिन निकल गये। फिर मैंने उसको एक मैसेज किया डियर रश्मि, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. पता नहीं कि मुझे उस वक़्त क्या हो गया था? और में यह सब कर बैठा और में जानता हूँ कि यह सब बहुत ग़लत है.. प्लीज हो सके तो मुझे माफ़ कर देना। मेरा तुम्हारे दिल को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था।

तो उसका बहुत दिनों तक कोई भी जवाब नहीं आया। खैर दिन बीतते गये और करीब एक महीना हो गया। फिर एक दिन मैंने अपने दोस्तों की ज़िद की वजह से एक छोटी सी पार्टी दे दी और सभी ने खुल कर दारू उड़ाई। मैंने भी बहुत दारू पी ली और फिर मुझे छोड़कर रात को सब अपने अपने घर पर चले गए। सुबह करीब 4 बजे मेरी हालत बिगड़ गई.. क्योंकि मैंने दोस्तों की ज़िद पर थोड़ी सी कच्ची शराब भी पी ली थी। तो मेरे दोस्त ने मुझे हॉस्पिटल में भर्ती किया.. वहाँ पर करीब 12 बजे तक मेरी हालत सुधरी तो मुझे डॉक्टर ने डिसचार्ज किया।

तो मेरा दोस्त मुझे स्ट्रेचर पर डाल कर गाड़ी तक ला रहा था कि तभी अचानक मैंने देखा कि रश्मि उधर से ही गुज़र रही थी और हमारी नज़रे टकराई तो मैंने शर्मिंदगी से मुहं दूसरी तरफ घुमा लिया। खैर में घर पर पहुंचा मोबाईल साइलेंट पर किया और सो गया। फिर जब सोकर उठा तो देखा कि रश्मि के 22 मिस कॉल थे। तभी दरवाजे पर नॉक हुआ और मैंने सोचा कि बाद में कॉल करता हूँ पहले देखूं कौन है? तो दरवाज़ा खोला तो आँखो पर भरोसा नहीं हुआ.. मेरे सामने रश्मि खड़ी थी। मेरा शरीर अभी भी काम नहीं कर रहा था और पूरा शरीर कांप रहा था। तो उसने मुझे पकड़ा और दरवाजा बंद किया। मुझे रश्मि ने ऐसे पकड़ रखा था कि उसकी चूचियाँ मेरी छाती से सटी हुई थी और मुझे रश्मि बेड तक ले गई और लेटा दिया?

रश्मि : एक तो खुद ग़लती करते हो और ऊपर से फोन भी नहीं उठाते?

में : ऐसी बात नहीं है में सोया हुआ था। यह मैंने सर नीचे करते हुए बोला।

रश्मि : सोए हुए थे आप तो दरवाजा इतनी जल्दी कैसे खुल गया?

में : में अभी जस्ट उठा हूँ। फोन साइलेंट पर था यह लो तुम चाहो तो देख लो।

रश्मि : पता है.. पता है.. नाराज़ हो अभी तक मुझसे.. क्योंकि मैंने उस दिन आपको थप्पड़ मार दिया था।

में : नहीं तुमने जो किया बिलकुल सही किया.. ग़लती तो मेरी ही थी।

रश्मि : अच्छा छोड़ो जाने दो भूल जाओ और यह बताओ कि यह सब कैसे हुआ?

में : कुछ नहीं कल रात थोड़ी सी कच्ची शराब पी ली थी इसलिए थोड़ी हालत बिगड़ गई।

रश्मि : अब कैसी है तबीयत?

में : पहले से बेहतर है।

रश्मि मेरे साथ ही बेड पर सटकर बैठ गई।

रश्मि : उस दिन ऐसा क्यों किया था आपने मेरे साथ?

में : मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था। में तो अंधेरे में दीवार पकड़ कर चल रहा था कि अचानक से तुम्हारा वो हाथ में आ गया.. तो मुझे बहुत मुलायम मुलायम सा लगा फिर आगे सब कुछ कैसे हो गया मुझे खुद नहीं पता।

रश्मि : चलो छोड़ो अब पुरानी बातें पहले यह बताओ कि अब तबियत कैसी है?

में : अब तो में बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ। और तुम बताओ तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?

रश्मि : वो भी ठीक ठाक चल रही है क्या अपने कुछ खाया या नहीं?

में : हाँ थोड़ा बहुत खाया था।

रश्मि : अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो क्या में चाय बना दूँ?

में : हाँ क्यों नहीं.. अपना ही घर समझो।

फिर उसने मुझे उस दिन चाय बनाकर पिलाई और फिर हमारी दोस्ती फिर से शुरू हो गई और हम एक दूसरे के घर पर आने जाने लगे। फिर एक दिन में जब उसके घर पर पहुंचा तो वो नहाने चली गई और जब नहाकर बाथरूम से बाहर निकली तो उसने शरीर पर सिर्फ टावल लपेटा हुआ था। तो में दूर से ही नजरे झुकाकर उसके बूब्स को देख रहा था। फिर वो कपड़े पहनकर मेरे पास आकर बैठ गई तो हम बातें करने। तभी उसने मुझसे पूछा कि आपकी कितनी गर्लफ्रेंड है? तो मैंने कहा कि अभी तक एक भी नहीं। उस दिन से उसके अंदर थोड़ा थोड़ा फर्क आने लगा वो धीरे धीरे मुझसे खुलने लगी। तभी एक दिन उसने मुझे फोन किया और कहा कि उसके साथ रहने वाली लड़की कुछ दिनों के लिए अपने घर पर गई है और उसे अकेले वहाँ पर डर लगता है। तो मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है और मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं.. तुम मेरे रूम पर चली आओ।

तो दूसरे दिन वो मेरे रूम पर पांच दिनों के लिए आ गई। फिर उसने मुझे चाय बनाकर दी और हमने साथ बैठकर चाय पी। फिर में तैयार होकर अपने ऑफिस चला गया और पूरे दिन रात होने का इंतजार करने लगा। तो शाम को में ऑफिस से घर पर पहुंचा उसने खाना बनाकर रखा था और हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे.. लेकिन मेरे रूम पर एक ही पलंग होने की वजह से हम एक साथ सो गए और उसे भी कोई दिक्कत नहीं थी। फिर रात को करीब तीन बजे मेरी आंख खुली और मैंने देखा कि वो मेरे ऊपर अपना एक हाथ और पैर रखकर सो रही है। तो मैंने भी थोड़ी हिम्मत करके उसके बूब्स के ऊपर हाथ रखकर सो गया। में सुबह जब उठा तो उसने कुछ नहीं कहा और में ऑफिस चला गया।

ऐसा तीन दिन तक चला और धीरे धीरे उसे भी अहसास होने लगा। एक रात को हम दोनों ने सोने का नाटक किया और थोड़ी देर बाद मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया.. लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और मैंने थोड़ी और हिम्मत करके उसके बूब्स सहलाने शुरू किए और धीरे धीरे दबाने लगा। तो वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी और आहें भरने लगी.. वो अब सिसकियाँ ले रही थी और में समझ गया कि वो अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है।

तो मैंने मौका देखकर उसके बूब्स कपड़ो के अंदर से एक हाथ चलाकर सहलाना शुरू किया। वो फिर से जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी में और जोर से बूब्स दबाने लगा और धीरे धीरे उसके कपड़े एक एक करके उतारने लगा वो भी अब मेरा साथ देने लगी और मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया और फिर में उसकी चूत पर पहुंचा और चूत चाटने लगा.. मैंने जैसे ही उसकी चूत पर अपनी जीभ रखी वो उछल पड़ी और गांड ऊपर करके चूत चटवाने लगी। फिर मैंने करीब दस मिनट तक उसकी चूत चाटी और फिर में अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में करने लगा। तो वो मानो तड़प सी गई और कहने लगी कि प्लीज अब और नहीं.. प्लीज डालो ना मुझसे अब और नहीं सहा जाता.. डालो जल्दी से अंदर।

फिर मैंने भी देर ना करते हुए लंड चूत के मुहं पर रखा और एक धक्का दिया मेरा लंड थोड़ा चूत में गया.. लेकिन उसकी एक जोर से चीख जरुर निकली। तो मैंने उसके मुहं पर हाथ रखा और थोड़ा रुका फिर जब वो थोड़ा ठीक हुई तो फिर लगा जोर जोर से धक्के देने और वो चुदाई के मजे लेने लगी। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसके दोनों पैर पकड़कर अपने कंधों पर रखे और लंड सेट किया और धक्के देने लगा। तो इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी और में एक बार मैंने फिर भी अपनी स्पीड कम नहीं की और चोदता रहा और करीब 25 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों थककर लेटे रहे। मैंने उसी दिन उसकी एक बार गांड भी मारी और उसे अपनी पूरी रंडी बना लिया।

तो दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई.. इसके बाद हमारा हर दिन चुदाई का होता था।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

माँ की बड़े पापा के साथ चुदाई

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम दीपक है और में दिखने में बहुत अच्छा हूँ। दोस्तों मुझे इस साईट पर कहानियाँ पढ़ते हुए करीब तीन साल हो चुके है और मुझे इस साईट पर सभी सेक्सी कहानियाँ बहुत अच्छी लगती है.. लेकिन दोस्तों में आज जो कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ वो एकदम सच्ची कहानी है। इसमें मेरी माँ मेरे बड़े पापा चुदी.. मेरी उम्र अभी 23 साल और यह तब की बात है जब में 19 साल था।

में आपनी माँ और पापा के साथ पटना के एक छोटे से गावं में रहता था और मेरे पापा वहाँ पर एक दफ़्तर में काम करते थे। मेरी एक छोटी बहन भी थी जो कि उस समय 3 साल की थी। फिर कुछ दिनों के बाद मेरे बड़े पापा वहाँ पर आए.. उन्हें देखकर हम सब बहुत खुश हुए हम सब रात को एक साथ सोते थे.. लेकिन उस दिन बड़े पापा के आने पर उन्होंने बोला कि में और पापा उनके साथ सोयेगें.. उन्हें कुछ बात करनी है।

तो हम सब भी राज़ी हो गये और माँ भी अकेले सोने की लिए राज़ी हो गई। रात को खाने के बाद हम सभी सोने के लए चले गये.. में बड़े पापा और पापा एक कमरे में चले गए और माँ मेरी बहन को लेकर अलग कमरे में चली गयी और उनका कमरा ठीक हमारे पास ही था। फिर रात में बड़े पापा ने पीने को एक शरबत दिया.. पापा और मैंने उनसे पूछा कि यह क्या है? तो उन्होंने बोला कि यह शिव जी का प्रसाद है इसलिए पापा ने उसे बड़े मजे से पी लिया.. लेकिन मैंने नहीं पीया क्योंकि मुझे उसमे से कुछ बदबू आ रही थी और इसलिए बड़े पापा को बुरा ना लगे मैंने बाथरूम में जाकर उसे फ्लश कर दिया और बड़े पापा समझे कि मैंने उसे पी लिया। फिर बड़े पापा ने हमसे हमारे हाल चाल के बारे में पूछा और ऐसे ही बातें करते करते पापा सो गये और मुझे भी नींद आ गई.. लेकिन में अभी पूरी तरह सोया भी नहीं था कि अचानक मैंने देखा कि बड़े पापा वहाँ से उठ कर चले गये।

तो मैंने सोचा कि वो बाथरूम रूम गये होंगे.. लेकिन ज़्यादा समय तक ना आने की वजह से मुझे कुछ शक सा हुआ और इसलिए में बाहर गया तो देखा कि माँ के कमरे से कुछ बातें करने की आवाज सुनाई दे रही थी। फिर मैंने दरवाजे के पास जाकर सीड़ियों से ऊपर के वेंटिलेटर के पास गया.. जहाँ से माँ क्या कर रही थी वो सब पूरा साफ साफ दिख रहा था और सब बातें भी साफ सुनाई दे रही थी। में वहाँ पर गया और मैंने देखा कि बड़े पापा माँ के पास में बैठे थे तो में हैरान था.. क्योंकि घर में वो एक दूसरे के मुहं तक नहीं देखते थे.. क्योंकि बड़े पापा मेरी माँ के जेठ जी है। फिर मैंने सुना कि बड़े पापा ने मेरी माँ को बोला कि (रोज़ी मेरी माँ का नाम है) में यहाँ सिर्फ तुम्हारे लिए ही आया हूँ। तब माँ ने बोला कि अभी यह नहीं हो सकता तब की बात और थी अभी सोनू (मेरा नाम) बड़ा हो गया है तभी मुझे पता चल गया कि यह सब माँ की शादी के बाद से शुरू हो चुका था। अब में बड़े पापा और माँ के बीच क्या क्या हुआ.. वो बताता हूँ।

बड़े पापा : अब मुझसे और रुका नहीं जाता जल्दी से नंगी हो जाओ.. मुझे तुम्हारे इस नंगे बदन से मज़े लूटने

है।

माँ : प्लीज ऐसे मत करो आपके छोटे भाई (मेरे पापा) और सोनू पास के कमरे में सोए है अगर उनकी नींद खुल गयी तो गजब हो जाएगा।

यह सब बातें सुनकर में तो गरम हो गया और में अपने आप पर विश्वासस नहीं कर पाता.. लेकिन अच्छा हुआ कि मैंने वो सब बात चुपचाप सुनी.. नहीं तो वरना आज में यह सब कुछ नहीं जान पाता और फिर मैंने देखा कि माँ ने बिस्तर से उठकर दरवाजा बंद कर दिया। मेरी छोटी बहन को माँ ने उसके झूले में सुला दिया और फिर वो लाईट बंद करने के लिए गयी तो बड़े पापा ने रोक दिया और बोला कि रोज़ी में तुम्हारे नंगे बदन को देखकर मज़े लेना चाहता हूँ.. प्लीज लाइट बंद मत करो।

माँ उनकी बात मानकर वहाँ से बिस्तर के पास चली आई। फिर बड़े पापा ने अपने बेग से एक शराब की बोतल और सिगरेट निकाली और माँ को कपड़े उतारने को बोला। तो मेरी माँ भी बिना कुछ बोले कपड़े उतारने लगी। पहले साड़ी उसके बाद ब्लाउज फिर ब्रा और पेंटी.. एक एक करके सब निकाल दिया और पूरी नंगी खड़ी हो गयी और में यह सब देखकर हैरान था और यह सब देखकर बड़े पापा के मुहं से पानी निकल आया और वो शराब की बोतल को पूरा पी गये।

फिर उन्होंने माँ के पास आकर माँ को कसकर पकड़ लिया और माँ को अपनी गोद में बैठा लिया और माँ के होंठो को ज़ोर ज़ोर से चूमने लगे। फिर उसके बाद बड़े पापा खड़े हो गये और अपना कुर्ता और अंडरवियर निकाल कर नंगे हो गये। उनका लंड बड़े डंडे की तरह लम्बा और भूरे कलर का था। तो यह देखकर माँ ने बोला कि भाई साहब यह क्या है यह तो पहले ऐसा नहीं था। फिर बड़े पापा ने बोला कि तब तेरी चूत भी छोटी थी.. लेकिन अब वो भी तो बड़ी हो गई है।

माँ : इसको तो आपने ही बड़ा किया है क्या आप भूल गये कि कैसे रोज रात को आप मेरे कमरे में आकर मुझे चोदते थे।

उसके बाद बड़े पापा ने माँ को बिस्तर पर लेटा दिया और माँ के पूरे चूतड़ को चूमने लगे।

बड़े पापा : क्या स्वाद है? इसको तो आज में खा जाऊंगा।

माँ : ज़रा धीरे करिए भाई साहब.. अभी तो पूरी रात पड़ी है आप जितना चाहे कर लेना.. लेकिन ज़रा धीरे।

बड़े पापा : आज तो में इस चूतड़ को चबा चबा कर चटनी बना दूंगा.. लेकिन तू ज़ोर ज़ोर से चिल्लाएगी तभी छोड़ूँगा।

माँ : अगर में जोर से चिल्लाउंगी तो गुड्डी उठ जाएगी।

बड़े पापा : फिर तो आज में तेरी चूतड़ को कुरेद कुरेद कर खोखला बना दूँगा।

फिर ऐसा कहकर बड़े पापा ने अपने पूरे दाँत माँ के चूतड़ पर दबा दिए और माँ ज़ोर से चिल्ला भी नहीं सकती थी क्योंकि उनके चिल्लाने से गुड्डी की नींद खुल जाती। तो माँ रो पड़ी और बड़े पापा से बोली कि मुझ पर दया करो भाई साहब में आपको हर दिन चोदने का मौका दूँगी बस आप काटना बंद कीजिए। तो माँ की इस आवाज़ से बड़े पापा जैसे पागल हो गये और माँ के चूतड़ को और ज़ोर से काटने लगे और बोले कि साली मुझे भाई बुलाया.. यह बोलकर एक ज़ोर से चाटा माँ के चूतड़ को लगाया और बोले कि में तुम्हारा पति हूँ और तू मेरी रंडी है.. चांटा पड़ने के बाद माँ तो जैसे दर्द से छटपटा उठी आ एम्म्म उह्ह माँ प्लीज़।

माँ : हाँ.. आप मेरे पति है और में आपकी रंडी हूँ। फिर यह बोलकर माँ अपने पेशाब को रोक नहीं पाई और सारा पेशाब बड़े पापा के मुहं पर छोड़ दिया। बड़े पापा ने भी उसको आनंद से चूस लिया। फिर जब उन्होंने माँ के चूतड़ से मुहं हटा लिया तब जाकर माँ ने राहत की सांस ली और बोली कि क्या आपको सन्तुष्टि मिली?

बड़े पापा : अरे अभी तो शुरू हुआ हूँ? आगे तेरी रसीली गांड को भी चोदना भी है.. चल अभी उल्टा लेट जा.. माँ धीरे धीरे से लेट रही थी कि तभी बड़े पापा ने माँ की गांड को एक ज़ोर से थप्पड़ लगाया और माँ के मुहं से आह्ह्ह माँ मर गयी प्लीज़.. आवाज़ निकली।

बड़े पापा : तूने सुना नहीं रंडी मैंने तुझे क्या कहा?

माँ : मुझे माफ़ करना ग़लती हो गयी जी.. माँ डरकर बोली कि आओ और मेरी गांड को फाड़ दो।

फिर बड़े पापा यह सुनकर तो पागल हो गये और झट से अपना लंड माँ की गांड के बीच में लगा दिया और कुत्ते की तरह चाटने लगे और हाथ से माँ की गांड को थप्पड़ मार रहे थे थप्पड़ की वजह से माँ की गांड पूरी लाल पड़ गई थी।

माँ : बस कीजिए अब मुझसे और इंतजार नहीं होता भाई साहब।

बड़े पापा : गुस्से से.. साली रंडी तूने फिर मुझे भाई साहब कहा आज तो तेरी ख़ैर नहीं.. ऐसा कहकर उन्होंने शराब की बोतल उठाई और माँ की गांड में एक झटके के में ही आधी घुसा डी। माँ तो दर्द के मारे पागल हो गयी।

माँ : मुझे माफ़ कर दीजिए मेरे पति आज के बाद यह भूल कभी नहीं होगी.. आप ही मेरे पति है और आप जितना चाहे मुझे चोद सकते है में आपकी रंडी हूँ।

फिर यह सुनकर बड़े पापा बहुत खुश हुए और उन्होंने बोतल को बाहर निकाल दिया और बोले कि रंडी अब तुझे चोदने में बहुत मज़ा आएगा.. चल अब सीधी लेट जा.. में तेरी चूत का मज़ा लूँगा। तो माँ भी सीधी होकर लेट गयी और अपनी चूत को अपने दोनों हाथों से फैला दिया और बोली कि आओ मेरे पतिदेव इसमे आप जो चाहो कर सकते हो।

बड़े पापा : रंडी अब आई ना तू रास्ते पर.. अब देख में कैसे तेरी चूत को कुत्ते की तरह चोदता हूँ और यह सब सुनकर और देखकर मेरी पेंट पूरी गीली हो चुकी थी। फिर मैंने देखा कि बड़े पापा अपना लंड चूत में घुसा चुके थे और उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया था और माँ भी उनका साथ दे रही थी। फिर माँ बड़े पापा को खुश करने के लिए बोल रही थी कि मुझे चोदो पति देव आपके लिए ही यह चूत मैंने सम्भाल कर रखी है इसमे आपके छोटे भाई का भी हक़ नहीं है। तो यह सब सुनकर बड़े पापा के झटके और तेज होते जा रहे थे और फिर बड़े पापा ने अपना सारा रस माँ की चूत में ही छोड़ दिया और बोला कि बता रंडी अब तेरे क्या होगा.. बेटा या बेटी? माँ वीर्य का आनंद ले रही थी और कुछ नहीं बोली शराब के नशे की वजह से बड़े पापा माँ के ऊपर ही सो गये और माँ भी सो गयी.. लेकिन में पूरी रात भर ऊपर उन दोनों को नंगे देखकर मुठ मारता रहा।

फिर सुबह 8 बजे गुड्डी के रोने की आवाज सुनकर माँ की नींद खुल गयी और माँ समझ गयी की गुड्डी को दूध पिलाने का वक़्त हो गया है इसलिए वो बड़े पापा को छोड़कर गुड्डी के पास आ गई और अपने बूब्स से दूध पिलाने लगी और इसी बीच बड़े पापा की नींद खुल गई और वो माँ को देखकर फिर कामुक हो गये और फिर वो माँ के पास गये और गुड्डी को वापस झूले में रखवा दिया.. लेकिन गुड्डी रो रही थी इसीलिए माँ ने कहा कि एक बार गुड्डी को दूध पिला दूँ फिर आप जितना चाहे पी लेना। तो यह सुनकर बड़े पापा को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने माँ के दोनों बूब्स को ज़ोर ज़ोर के थप्पड़ लगाए और बोले साली रंडी मुझसे जबान लड़ाती है.. में जो बोलता हूँ वही कर। फिर बड़े पापा का गुस्सा देखकर माँ डर गई और डर के मारे बोली कि मुझसे भूल हो गयी मेरे पति देव यह दोनों बूब्स आपके लिए ही तो है इसमे पहले आपका ही अधिकार है आओ मेरे बूब्स के नीचे और मेरे निप्पल से सारा दूध निचोड़ कर पी लीजिए।

फिर यह बात सुनकर बड़े पापा ने माँ को अपनी गोद में उठा लिया और दोनों हाथ से बूब्स को मसला और अपने होंठो से माँ के बूब्स के निप्पल को चूसा और गुड्डी वहाँ पर भूख से रो रही थी माँ सब देख रही थी.. लेकिन डर की वजह से कुछ बोल नहीं पा रही थी और बड़े पापा के गुस्से को कम करने के लिए वो बोल रही थी कि मेरे बूब्स से सारा दूध निकाल दो.. इसे चबा चबाकर चुइंगम बना दो.. यह सिर्फ आपके लिए ही बने है। फिर ऐसे करते करते बड़े पापा ने अपना मन शांत कर लिया और माँ को गोद से उतार दिया।

माँ : आपको अच्छा लगा अगर और चाहिए तो बोलो।

बड़े पापा : नहीं बस पेट भर गया।

माँ : ठीक है..

फिर यह बोलकर माँ कपड़े पहनने लगी और में भी रूम में आकर सोने की एक्टिंग करने लगा। फिर माँ रूम में आई और हम दोनों को जगाया। दोस्तों ऐसा करीब एक महीने तक चलता रहा और बड़े पापा रोज दाल, चावल के पानी में भांग मिला देते और रोज रात को माँ को चोदते थे।



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रैगिंग के बहाने बहन बनी रंडी


हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम नितिन है और मेरी उम्र 23 साल है। में मुंबई का रहने वाला हूँ और यह मेरी पहली स्टोरी है और में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आप सभी को बहुत पसंद आएगी।

यह स्टोरी मेरी बहन की चुदाई के बारे में है जिसको रैगिंग के बहाने उसके कॉलेज के कुछ सीनियर स्टूडेंट ने अपनी रंडी बना लिया। दोस्तों पहले में आप सभी को अपनी बहन के बारे में बता दूँ। उसका नाम संजना है और उसकी उम्र 23 साल है। उसका फिगर 36-30-38 है। यह स्टोरी एक साल पहले की है.. जब मेरी बहन ने MBA कॉलेज में नया एडमिशन लिया था और उसका कॉलेज का वो पहला दिन था। उस दिन उसने काली शर्ट सफेद स्कर्ट पहनी थी और अंदर एक लाल कलर की टी-शर्ट पहनी थी। सफेद कलर की पेंटी और लाल कलर की ब्रा पहनी थी। उसका स्कर्ट उसके घुटनों के थोड़ा सा ऊपर था और वो क्या गजब की लग रही थी।

जैसा कि मैंने पहले बताया कि वो उसका कॉलेज का पहला दिन था और वहाँ पर थोड़ी बहुत रैगिंग होती है और फिर कुछ कॉलेज के सीनियर लड़के और लड़कियों ने संजना और उसकी फ्रेंड्स को पकड़ लिया और उनका नाम पूछा और जाने को कहा कॉलेज का पहला दिन होने की वजह से उस दिन वहाँ पर एक ही लेक्चर हुआ और जब मेरी बहन और उसकी फ्रेंड जाने लगी तब दो सीनियर लड़कियाँ मेरी बहन के पास आई और उसको उनके साथ चलने को कहा.. मेरी बहन उनके साथ चली गयी। फिर वो मेरी बहन को कॉलेज की पीछे एक पुरानी बिल्डिंग है वहाँ पर लेकर गये और वहाँ पर जाने के बाद मेरी बहन ने उनसे पूछा कि अपने मुझे यहाँ पर क्यों बुलाया है? तो उन्होने कहा कि तुम नये स्टूडेंट हो तो यहाँ पर सभी की रैगिंग होती है और हम आज यहाँ पर तुम्हारी रैगिंग करने वाले है। तभी वहाँ पर 4 लड़के आए और वो वही कॉलेज के सीनियर लड़के थे जिन्होंने सुबह मेरी बहन से उसका नाम पूछा था।

तो मेरी बहन उनको देखकर डर गयी और कहने लगी कि प्लीज़ मुझे जाने दो। तब उन लड़को ने कहा कि तुम नई स्टूडेंट हो तो थोड़ी रैगिंग बनती है। तुम बस हम जो पूछेंगे उसका जवाब दो और यहाँ से चली जाना। तो मेरी बहन ने थोड़ा सोचा और कहा कि ठीक है आप पूछो। फिर उन्होंने पहले तो कुछ नॉर्मल सवाल पूछे और बाद में एक लड़के ने उसको पूछा कि तेरा फिगर क्या है? तो मेरी बहन बहुत चकित हुई और उसने गुस्से से पूछा क्या? तो वो लड़का कहने लगा कि बताओ नहीं तो तुझे यहाँ पर नंगा करके हम ही नाप लेंगे। फिर मेरी बहन ने उसका फिगर बताया कि तभी एक लड़का बोला कि क्या मस्त फिगर है तेरा।

फिर दूसरे लड़के ने पूछा कि तूने कौन सी कलर की ब्रा और पेंटी पहनी है? तो मेरी बहन ने डरते हुए कहा कि लाल कलर की ब्रा और सफेद कलर की पेंटी पहनी हुई है। तब तीसरा लड़का बोला कि झूठ मत बोल। तो मेरी बहन बोली कि में सच कह रही हूँ। फिर वो बोला कि मुझे तेरी बातों पर विश्वास नहीं है और तब एक लड़की बोली कि टी-शर्ट ऊपर करके बता ना.. क्यों समय खराब कर रही है? तो मेरी बहन ने गुस्से से उसको देखा। तभी वो दोनों लडकियाँ मेरी बहन के पास गयी और एक लड़की ने मेरी बहन के पीछे से हाथ पकड़ लिए और दूसरी लड़की ने उसकी टीशर्ट ऊपर कर दी और सब लड़के मेरी बहन के बूब्स को देखते ही रह गये.. क्या बड़े बूब्स है सबके मुहं से लार टपकने लगी।

फिर एक लड़का बोला कि अरे इसकी पेंटी का कलर तो दिखा। तभी उस लड़की ने मेरी बहन की स्कर्ट एक झटके में नीचे कर दी। मेरी बहन की स्कर्ट के साथ उसकी पेंटी भी निकल गयी और उसकी स्कर्ट और पेंटी दोनों जमीन पर पैरों के पास गिर गयी और मेरी बहन ने आज ही सुबह अपनी चूत को शेव किया था.. मेरी बहन की चिकनी गुलाबी चूत मस्त लग रही थी और वहाँ पर सभी मौजूद लड़के मेरी बहन की चूत को देखकर अपना लंड मसलने लगे।

तभी मेरी बहन रोने लगी और कहने लगी कि प्लीज़ मुझे छोड़ दो जाने दो मुझे। फिर जिसने मेरी बहन को पकड़ कर रखा था वो बोली कि चुप रह जा नहीं तो तुझे यहीं पर नंगा करके हम तेरे कपड़े लेकर चले जाएँगे। तो चारों लड़को ने उस लड़की को कहा कि इसे छोड़ दे। फिर एक लड़का मेरी बहन के पास आया और कहा कि देख जो हम कहेंगे वैसे कर वरना ऐसे ही नंगी तुझे रोड पर छोड़ जाएँगे। तो मेरी बहन चुप हो गयी और फिर उन लड़को ने मेरी बहन को कहा कि चल अब पूरी नंगी हो जा। तो मेरी बहन ने चुपचाप अपनी टी-शर्ट और ब्रा निकाल दिया और पूरी नंगी हो गयी और सब लड़के मेरी बहन के जवान बदन को एक भूखे कुत्ते की तरह देख रहे थे। फिर उन्होंने मेरी बहन को पैदल चलकर दिखने को कहा। फिर मेरी बहन की हिलती हुए गांड को देखकर उन सभी लड़को के लंड एकदम खड़े हो गये और सब लड़के मेरी बहन के पास गये और नजदीक से मेरी बहन को देखने लगे और सभी लड़के अपनी अपनी अंडरवियर में आ गये और मेरी बहन को चारो तरफ से घेर लिया।

फिर उन्होंने मेरी बहन को कहा कि चल रंडी अब एक एक करके सबके लंड चूस। तो मेरी बहन ने कहा कि प्लीज ऐसे मत करने को कहो मैंने यह सब कभी नहीं किया है। तब वो दोनों लड़की वहाँ पर आई और मेरी बहन को घुटने के बल बैठाया और मेरी बहन के मुहं को एक लड़के के लंड के पास ले गयी और कहने लगी कि चल चूस ले। फिर जैसे ही मेरी बहन ने उस लड़के का अंडरवियर अपने मुहं से निकाला वैसे ही उसके लम्बा, काला लंड देखकर वो चकित रह गयी और थोड़ी देर तक मेरी बहन लंड को देखती ही रह गयी। तो सभी लोग हंसने लगे और बोले कि क्यों पसंद आया क्या इसका लंड जो इतने प्यार से देख रही रही? चल रंडी अब लंड चूस लंड।

मेरी बहन उसके लंड को पहले अपनी जीभ से चाटने लगी और बड़े प्यार से चूसने लगी। तभी वो दोनों लड़कियां बोली कि देख तो क्या मस्त लंड चूस रही है एकदम अनुभवी दिख रही है। तभी एक लड़का बोला कि एकदम रंडी की तरह लंड चूस रही है और एक करके मेरी बहन ने सारे लड़को के लंड चूस लिए और सभी लड़को ने एक एक करके मेरी बहन के मुहं में अपना अपना पानी छोड़ दिया।

फिर उन्होंने मेरी बहन को लेटा दिया और उन दोनों लड़कियों ने मेरी बहन को पकड़ कर उसकी टाँगे फैला दी। फिर मेरी बहन ने जिस लड़के का लंड सबसे पहले चूसा था.. वो मेरी बहन के पैरो के बीच में लेट गया और उसने अपना लंड मेरी बहन की चूत के ऊपर रख दिया और ज़ोर से एक धक्का दिया और उसका आधा लंड मेरी बहन की चूत में घुस गया और मेरी बहन ज़ोर ज़ोर से चिल्ला उठी और वो लड़का उसको जोर जोर से चोदने लगा। मेरी बहन आ आहा आअहह आउच प्लीज़ धीरे चोद मुझे आहह कर रही थी। फिर जैसे जैसे वो ज़ोर ज़ोर से अपना लंड मेरी बहन की चूत से अंदर बाहर कर रहा था.. वैसे ही मेरी बहन और ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी। वो लड़का मेरी बहन को 20 मिनट तक चोद रहा था और फिर उसने अपना वीर्य मेरी बहन की चूत में छोड़ दिया। फिर दूसरे लड़के ने मेरी बहन को कुतिया की तरह होने को कहा।

फिर वो पीछे से मेरी बहन की चूत को चोदने लगा और मेरी बहन के बूब्स को दबाने लगा वो भी बहुत ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था और उसकी निप्पल को भी खींच रहा था। उसने भी मेरी बहन को 15 मिनट तक चोदा। फिर एक लड़का नीचे लेट गया और मेरी बहन को उसके लंड पर बैठाया और दूसरा लड़का पीछे से मेरी बहन की गांड में अपना लंड डालने लगा। तभी मेरी बहन बोली कि गांड में मत डालना मैंने कभी वहाँ पर नहीं किया है। यह बात सुनकर सभी लोग हैरान रहे गये और फिर एक लड़की ने पूछा कि क्यों री रांड तूने इससे पहले किससे चुदवाया है? तो मेरी बहन बोली किसी से नहीं। तो सभी लोग बोले कि सच बोल? फिर मेरी बहन बोली कि में बिल्कुल सच बोल रही हूँ.. मैंने कभी किसी से नहीं चुदवाया है।

तभी उस लड़के ने मेरी बहन की गांड फैलाई और अपना लंड ज़ोर से मेरी बहन की गांड में घुसा दिया.. उसने इतने ज़ोर से धक्का दिया कि मेरी बहन की गांड में उसका पूरा का पूरा लंड एक बार में ही घुस गया। फिर मेरी बहन ज़ोर से चिल्ला उठी और वो लड़का ज़ोर ज़ोर से उसकी गांड मारने लगा। फिर बोला कि सच बोल किसके साथ चुदवाया है? नहीं तो एक और लंड तेरी गांड में घुसाने को कहूँगा। तो मेरी बहन बोली कि मुझे कॉंप्लेक्स के अंकल ने कई बार चोदा है। तो यह बात सुनकर सब कहने लगे कि यह तो पक्की रंडी है और सभी लोग हंसने लगे।

वो दो लड़के मेरी बहन को 40 मिनट तक चोदते रहे और मेरी बहन की चुदाई वो दो लड़कियाँ रिकॉर्ड कर रही थी। फिर मेरी बहन अपनी चुदाई में इतनी मस्त हो गयी थी कि उसको पता भी नहीं चला की उसकी चुदाई की रिकॉर्डिंग हो रही है। फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद चारो लड़के और वो लड़कियां मेरी बहन के बदन से खेलने लगे उसकी चूत और गांड को चाटने लगे.. मेरी बहन ने भी उन दो लड़कियों की चूत और गांड चाटी और फिर मेरी बहन भी उन लड़कों से बहुत बार मस्त होकर चुदी ।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017


भाई की दीवानी हो गयी


हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम स्वीटी चौहान है और मेरी उम्र 24 साल है। में उत्तरप्रदेश की रहने वाली हूँ और में एक स्कूल टीचर हूँ। दोस्तों आज में जो स्टोरी आप सभी के सामने रखने जा रही हूँ.. यह मेरी एक सच्ची स्टोरी है और यह स्टोरी मेरी और मेरे भाई की है। वैसे तो मुझे सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है और में इस साईट पर बहुत समय से कहानियाँ पढ़ती आ रही हूँ। में अब अपनी कहानी पर आती हूँ.. दोस्तों बचपन से ही मेरा भाई मेरे पास रहता था और उसका मुझसे बेहद लगाव भी था और अभी भी है.. क्योंकि मुझे बहुत मुश्किल के बाद भाई मिला था। तो में उसका ख़याल भी बहुत रखती थी.. वो मेरे साथ सारा दिन रहता, मेरे साथ खाना ख़ाता और जब में स्कूल से आती तो वो मेरे साथ सोता भी था। मम्मी के पास नहीं जाता था और वो मेरे साथ ही गेम खेलता था और तो और में उसको नहलाती भी थी।

फिर धीरे धीरे वो बड़ा होने लगा था और उसका मुझसे लगाव भी बढ़ने लगा था। तो जब में कॉलेज में पहुंची.. तभी मुझे सेक्स के बारे में पता चला तो फिर क्या था? एक दिन में जब कॉलेज से घर पर आई तो मेरे दिमाग में वो सब सेक्स की बातें चल रही थी और अगले दिन में अपनी एक दोस्त के घर पर गई। तो वो कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रही थी.. तो जब मैंने उससे पूछा कि तू यह क्या कर रही है? तो उसने मुझे कुछ नहीं बताया और फिर मैंने उससे कॉलेज वाली सेक्स की बात पूछी। तो उसने मुझे बहुत से फोटो दिखाए जिसमे वो गोद में बैठकर लंड पर कैसे उछल रही थी। फिर उसने लंड मुहं में लिया तो में देखकर दंग रह गई.. उसने लंड को पूरा मुहं में लिया और बड़े मजे से उसे चूस रही थी। तो मेरी चूत से भी पानी आने लगा था और यह सब देखकर मेरे जिस्म में तो आग सी लगने लगी थी और अब मेरी चूत भी एक बड़ा सा लंड मांग रही थी और फिर जब मेरी दोस्त ने कहा कि वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ भी ऐसे ही सेक्स करती है। फिर में तो जैसे पागल ही हो गई थी और बस मेरा दिमाग कह रहा था कि मुझे भी चुदना है लंड लेना है मुहं में.. लेकिन कैसे? मेरा तो कोई बॉयफ्रेंड भी तो नहीं है जिसके साथ में भी सेक्स कर सकती।

फिर मेरी दोस्त ने मुझे वो ब्लू फिल्म दे दी और मैंने घर जाकर ब्लू फिल्म देखी कि तभी मेरा भाई जो अब 19 साल का हो गया था.. वो अचानक से आ गया। तो मैंने जल्दी से ब्लू फिल्म हटा दी.. लेकिन वो मेरे पीछे पड़ गया और कहने लगा कि तुम क्या देख रही हो? फिर मैंने कहा कि कुछ नहीं देख रही.. लेकिन वो नहीं माना और में सीडी निकालना भूल गई थी और रूम से बाहर आ गई थी.. फिर क्या था? मेरे भाई ने सीडी देख ली.. लेकिन मुझे यह बात नहीं पता थी कि मेरे भाई ने वो ब्लू फिल्म देख ली है फिर वो ब्लू फिल्म में पूरी नहीं देख पाई थी तो में रात को सोने से पहले ब्लू फिल्म देखने लगी। वाह क्या ब्लू फिल्म थी? उसमे उस लड़की को पहले एक ने चोदा.. फिर उसे तीन तीन लड़को ने चोदा.. लेकिन उसने तीन लंड कैसे लिए होंगे में तो सोच सोचकर पागल हुई जा रही थी और लाईट बंद करके बेड पर सोने चली गई.. लेकिन उसने तीन लंड के वो सीन मुझे सोने नहीं दे रहे थे और उधर भाई भी करवटे बदल रहा था। फिर मैंने भाई से पूछा कि क्या हुआ? तो उसने मुझे कुछ नहीं बताया और मेरे एकदम गले लग गया और उसका लंड मेरी चूत से टच हुआ तो मेरी साँसे थम गई.. उसका लंड 8 इंच का था वो मेरे पास खाली अंडरवियर पहने हुए लेटा था फिर मेरे पास पहली बार वो ऐसे ही लेटा था और फिर वो मुझे किस करने लगा.. लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था यह सब क्या हो रहा है?

मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था और सोचने समझने की जैसे सारी शक्ति खत्म हो गई हो। फिर थोड़ी देर बाद मैंने भाई से कहा कि तुझे क्या हो गया था? तो वो बोला कि दीदी आप बहुत अच्छी हो मुझे प्यार करना है जैसे उस ब्लू फिल्म में वो लड़का कर रहा था.. दीदी बस एक बार किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.. लेकिन मैंने उसे डांट दिया। उस टाईम मन तो मेरा भी बहुत हो रहा था.. लेकिन में बहुत डर गई थी कि किसी को पता चलेगा तो कोई क्या कहेगा? फिर में पूरी रात जागती रही और सोचती रही कि मेरा भाई पहली बार मुझसे नाराज़ होकर बाहर हॉल में लेट गया है। फिर सुबह वो जब बाथरूम में नहाने गया तो में भी उसके पीछे गई उसको नहलाने के लिए तो वो मना करने लगा कि आप मत आओ बाथरूम में.. लेकिन जब मैंने ज़िद की तब उसने कहा कि अगर आप मुझे नहलाओगे तो मेरे लंड को भी साफ करोंगे और मुझे बिल्कुल नंगा करके नहलाओगे।

तो मैंने कहा कि ठीक है और में बाथरूम में घुस गई और उसने मुझसे अपना अंडरवियर उतरवाया तो मैंने उसका अंडरवियर उतार दिया और उसका लंड एकदम से खड़ा था और में उसे देखकर बहुत चकित थी.. उसका 2 इंच मोटा 7 इंच लंबा लंड था। लंड को देखकर मेरी चूत भी पागल हो गई और अब तो लग रहता था कि जैसे भाई बस अब मुझे चोद दे.. लेकिन मैंने खुद पर बहुत कंट्रोल किया और उसको नहलाने लगी.. भाई मेरा चेहरा और बूब्स देखता रहा और आज तक मुझे इस तरह से भाई ने कभी नहीं देखा था मेरे बूब्स भी सूट से निकल रहे थे और वो मेरे बूब्स को घूर घूरकर देख रहा था। फिर उसने एक हाथ मेरे बूब्स पर रखा और मुझसे बोला कि दीदी आप बहुत सेक्सी हो और आपके बूब्स उससे भी ज्यादा सेक्सी है.. क्या फिगर है आपका 34-28-36? फिर वो बोला कि दीदी क्या आपका कभी भी मन नहीं करता है सेक्स के लिए? तो मैंने कहा कि हाँ करता तो है। तो दीदी प्लीज मेरे साथ एक बार सेक्स करो ना। तो मैंने कहा कि यह ठीक नहीं है तू भाई है मेरा।

तो वो बोला कि दीदी सेक्स में भैया शैया कुछ नहीं होता है सेक्स में सिर्फ़ मज़ा देखा जाता है। तो मैंने कहा कि तुझे इतना सब कैसे पता है? तो वो बोला कि दीदी मुझे मेरे दोस्तों ने बताया है और में तो रोज ब्लू फिल्म भी देखता हूँ.. अपने दोस्तों के साथ और मेरे दोस्त तो सेक्स भी करते है.. अपनी अपनी गर्लफ्रेंड से और कुछ अपनी बहन से भी और में तो पहले बहुत डरता था.. लेकिन जब उस दिन मैंने आपको ब्लू फिल्म देखते देखा तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.. लेकिन आप तो उस रात नहीं मानी और ना आज सेक्स के लिए मान रही हो। दीदी प्लीज किसी को कुछ नहीं पता चलेगा में कह तो रहा हूँ.. बस एक बार दीदी आप मेरे साथ सेक्स कर लो। फिर में चुपचाप खड़ी सुनती रही और उसके लंड को पकड़ कर सहलाती रही और वो बोलता रहा। तो मैंने कहा कि ठीक है.. आज रात देखते है। तो वो बोला कि दीदी देखते नहीं आज रात पक्का सेक्स करेंगे। दीदी में आपका इंतजार करूंगा.. दीदी आप तैयार रहना और दीदी में आपको बहुत अच्छे से चोदूंगा.. आपको मेरे साथ सेक्स करने में बहुत मज़ा आएगा दीदी.. प्लीज़ रात में नहीं मत कहना।

फिर मैंने हाँ कर दी और रात का इंतजार करने लगी.. पता नहीं आज रात में क्या होगा मेरे दिमाग में बार बार यही आ रहा था और किसी को कुछ पता ना चल जाए.. लोग क्या सोचेंगे मेरे और भाई के बारे में क्या मेरा सेक्स करना ठीक होगा भी या नहीं.. बार बार दिमाग में यही सवाल आ रहे थे.. लेकिन इनमे से एक का भी मेरे पास कोई जवाब नहीं था। फिर में सेक्स को लेकर बहुत इच्छुक तो थी.. लेकिन मेरे भाई के साथ सेक्स करना मेरा ठीक होगा क्या? यह में खुद से सवाल किए जा रही थी। फिर मैंने उसे नहलाया और वो कपड़े पहनकर अपने रूम में चला गया.. लेकिन वो आज मुझे बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि उसे मेरी तरफ से चुदाई की हाँ जो मिल चुकी थी।

फिर वो कपड़े पहन कर स्कूल चला गया और में अपने कॉलेज.. लेकिन मैंने अपने कॉलेज अपने घर पर किसी से भी यह बात नहीं कही। फिर शाम को वो भी और में भी स्कूल, कॉलेज से घर पर लौट आए। तो वो मुझे स्माईल देने लगा.. लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपने कामो में लग गई और फिर में थोड़ा थक गई थी तो अपने रूम में लेट गई। तो ना जाने कब मेरी आंख लग गई और में गहरी नींद में सो चुकी थी। फिर ना जाने कहाँ से मेरा भाई आया और मेरे बूब्स मसलने लगा और जब मेरी नींद खुली तो मुझे पता चला और मैंने उससे पूछा कि यह क्या कर रहा है तू? तो वो बोला कि दीदी में तो बस थोड़े मजे ले रहा था। तो में वहाँ से उठी और बाहर चली आई.. में बहुत उदास थी तभी वो भी मेरे पीछे पीछे चला आया और कहने लगा कि दीदी क्या हुआ? आप उदास क्यों हो? लेकिन मैंने उसे कोई भी जवाब नहीं दिया और उठकर छत पर चली गई।

फिर मेरे जाने के थोड़ी देर बाद उसका मुझे एक मैसेज आया कि दीदी सॉरी प्लीज मुझे माफ़ कर दो। तो मैंने नीचे आकर देखा तो वो भी बहुत उदास था और कहने लगा कि दीदी मुझे पता है आप क्यों उदास है? आप हमारी चुदाई वाली बात से उदास है ना। फिर मैंने कुछ नहीं कहा और उसे गले लगा लिया। तो वो बोला कि दीदी आप इतनी उदास अच्छी नहीं लगती। मुझे नहीं करना आपके साथ सेक्स। उसका बस इतना कहना था और में बहुत चकित हो गई.. लेकिन कुछ ना बोली। फिर शाम के 6 बज चुके थे और मैंने चाय बनाई और हम दोनों ने साथ में बैठकर चाय पी। फिर कुछ घंटो के बाद रात होने लगी और मेरे दिमाग में अब भी वही बात चल रही थी।

फिर में सब कुछ भूल कर खाना बनाने लगी और बनाने के बाद हमने साथ में बैठकर खाना खाया। फिर वो टीवी देखने लगा और में कॉलेज का काम करने लगी। फिर में थोड़ी देर बाद सो गई.. लेकिन जब मेरी नींद खुली तब तक वो भी मेरे पास सो चुका था और उसका लंड अंडरवियर में खड़ा खड़ा मुझे सलामी दे रहा था और में कुछ सोचने लगी और मैंने उसकी अंडरवियर को थोड़ा नीचे किया और ध्यान से लंड को देखने लगी मुझे ना जाने क्या होने लगा और में लंड को हाथ में पकड़कर सहलाने लगी। तो धीरे धीरे उसका लंड और तनकर खड़ा हो गया। तो मैंने उसका अंडरवियर पूरा खोल दिया और लंड को जोर जोर से मसलने लगी और थोड़ी देर बाद मैंने लंड को मुहं में लिया और चूसने लगी। तब तक वो भी उठ चुका था और मुझे पूरा नंगा देखकर चकित रह गया.. लेकिन कुछ नहीं बोला और मुझे लंड चूसने से भी मना नहीं कर रहा था।

फिर मैंने उसका करीब दस मिनट तक लंड चूसा.. वो एक बार झड़ चुका था फिर भी कुछ करने को तैयार नहीं था। तो मैंने उससे कहा कि क्या अब देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी। फिर वो मेरा इशारा समझ गया और मुझे लेटाकर मेरे बूब्स पर टूट पड़ा जैसे कि वो बहुत दिनों से भूखा हो। फिर उसने मेरी निप्पल चूस चूसकर पूरी लाल कर दी और फिर वो बूब्स चूसता चूसता सीधा मेरी चूत पर आ गया। तो मैंने उसे मना किया और कहा कि नहीं अभी यह सब नहीं.. पहले तुम थोड़ा बड़े हो जाओ उसके बाद.. लेकिन वो अब कहाँ सुनने वाला था.. उसने मेरी चूत में अपना मुहं घुसाया और सूंघने लगा। फिर धीरे धीरे चूत की फांको को अपने दोनों हाथों से फैलाया और जीभ घुसाकर चाटने लगा। उसकी एक जीभ ने मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सा अहसास पैदा कर दिया और में बिना कुछ कहे उसे उसकी मर्जी का काम करने देने लगी। तो वो लगातार चूत चाटे जा रहा था.. तभी थोड़ी देर बाद में झड़ गई और वो पूरा रस पी गया। फिर उसने मुझे एक लम्बा सा लिप किस किया और दोबारा चूत के पास चला गया।

फिर उसने इस बार मेरी चूत पर लंड सेट किया और एक जोर का धक्का लगाया.. उसके इस धक्के से बस मेरी जान ही नहीं निकली एक जोर की चीख निकली जिसने पूरे रूम का माहोल बदल कर रख दिया। फिर वो मेरे मुहं पर एक हाथ रखकर थोड़ा रुका और मेरे नॉर्मल होने का इंतजार करने लगा और मेरे बूब्स को सहलाने लगा जिससे में और भी गरम होती रही। फिर उसने मेरी तरफ देखा और दूसरा धक्का दिया लंड अब मेरी गीली चूत की गहराईयों में फिसलकर पूरा समा चुका था.. लेकिन अब मेरा और उसका हाल बहुत बुरा था। हम दोनों पसीने में नहा चुके थे और हम पर चुदाई का भूत सवार था। तभी उसने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए और वो चोदने लगा। में उसकी इस चुदाई में अपनी चूत का दर्द भूल चुकी थी और उसका पूरा पूरा साथ देने लगी। फिर वो बोला कि दीदी आपकी चूत बहुत टाईट है मुझे बहुत जोर लगाना पड़ रहा है। तो मैंने कहा कि बिना चुदी चूत ऐसी ही होती है.. तू तो बस बिना रुके चोदे जा और अपनी और मेरी आज चुदाई की इच्छा पूरी कर दे.. फाड़ दे मेरी चूत और जोर से और डाल दे पूरा। फिर वो मेरी यह बात सुनकर मुझे और जोर जोर से चोदने लगा.. उसकी इस ताबड़तोड़ चुदाई ने मुझे पूरा हिला दिया था।

फिर उसकी इस चुदाई ने मुझे आज जन्नत का मज़ा दे दिया था। करीब 25 मिनट की चुदाई के बाद भी वो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था क्योंकि वो पहले ही एक बार मेरे मुहं में झड़ चुका था। फिर थोड़ी देर के बाद वो मुझे थका हुआ सा लगने लगा और वो धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और फिर अचानक से वो अकड़ने लगा और मेरी चूत में ही जोरदार धक्को के साथ झड़ गया। फिर उसके वीर्य ने मेरी चूत में गिरकर मुझे आज पूरा कर दिया था। आज यह मेरी और उसकी पहली चुदाई सफल रही.. लेकिन वो थककर मेरे ऊपर पड़ा रहा और बूब्स चूसने लगा।

तभी मैंने अपनी चूत के पास एक ऊँगली लगाकर देखा तो मेरी सील टूट चुकी थी और उसका भी लंड पहली चुदाई के दर्द से तड़प रहा। फिर वो थोड़ी देर बाद मेरे ऊपर से उठा और बाथरूम में जाकर मेरे पास आया.. उसके लंड पर बहुत दर्द था.. लेकिन वो कुछ नहीं बोला। फिर मैंने भी बाथरूम से आकर देखा तो वो बेड पर लेटा हुआ था। मैंने थोड़ा क्रीम लिया और लंड पर लगाया। फिर उसने मुझे उठकर गले लगाया और हम दोनों सो गये। उसके बाद हमने सुबह चार बजे उठकर एक बार फिर से चुदाई की और सो गए.. लेकिन सुबह ना वो स्कूल जा सका और ना में कॉलेज और फिर दिन में मौका देखकर फिर से एक बार फिर चुदाई की।

दोस्तों अब चुदाई करे बिना हमे नींद नहीं आती और हम हर रोज चुदाई करते है। हमे जब भी मौका मिले बस हमे यही काम याद आता है और कुछ नहीं। मेरे भाई ने मेरी चूत बहुत मारी और उसको चौड़ी कर दिया है। अब उसका लंड बड़े आराम से अंदर चला जाता है.. ना मुझे पता चलता है और ना उसे ।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

मेरी माँ सेक्स टीचर


हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम इशिका सिहं है और में दिल्ली की रहने वाली हूँ और यहीं पर एक कॉलेज की स्टूडेंट हूँ। मेरे पापा पंजाबी हैं और मम्मी हिमाचल से हैं। दोस्तों मुझे जब भी समय मिलता है। मुझे इस साईट सभी कहानियाँ बहुत सेक्सी लगती है और अच्छी भी.. लेकिन दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है और आप सभी का ज्यादा समय ना खराब ना करते हुए में अपनी कहानी पर आती हूँ। दोस्तों मेरी मम्मी की उम्र करीब 42 साल की है और वो फिर भी बहुत सेक्सी और हॉट है। वैसे आप लोग तो जानते ही हैं आर्मी ऑफिसर्स की वाईफ कैसी दिखती हैं और कितनी बनठन कर रहती हैं। मेरी मम्मी का फिगर 39-31-42 है और वो लंबी हैं जो कि उनके जैसे बॉम्ब को बहुत सूट करता है। वो बहुत गोरी हैं और मोटी नहीं है।

दोस्तों में सेक्स के बारे में समझने लगी थी। मेरे पापा आर्मी ऑफिसर हैं और ज्यादातर टाईम व्यस्त ही रहते हैं और मम्मी घर पर बोर होती थी तो उन्होंने एक दिन पापा को कहा कि क्यों ना वो आर्मी स्कूल के बच्चो को पढ़ाने लगे? तो पापा ने भी कहा कि ठीक है.. अगर वो चाहती है तो ठीक है.. लेकिन मुझे यह अच्छा नहीं लगा.. क्योंकि कौन सी स्टूडेंट चाहेगी कि उसकी मम्मी उसकी क्लास या स्कूल में पढ़ाए? लेकिन मम्मी से बात करने के बाद वो कहने लगी कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो में प्राइमरी के छोटे बच्चो को पढ़ाउंगी।

फिर में भी बहुत खुश हो गयी क्योंकि प्राइमरी बच्चो का बिल्डिंग अलग था और मम्मी को वहाँ पर जॉब लेने में कोई भी दिक्कत नहीं हुई.. लेकिन अगले सोमवार से वो हमारी क्लास टीचर बन गयी थी और हमे पढ़ाती थी.. लेकिन मुझे बहुत दुःख हुआ उनके ऐसा करने से क्योंकि अब में अपने साथ बैठने वाले लड़के का लंड कैसे हिलती और चूसती.. क्योंकि मम्मी मुझे लड़के के साथ देखकर मुझसे नाराज हुआ करती.. अभी मुझे लंड चूसने का चस्का नया नया ही लगा था और में यह बहुत मजे से कर रही थी।

फिर एक दिन मैंने अपने उस बॉयफ्रेंड को बताया कि में उसके साथ नहीं बैठ सकती। तो वो मुझसे बिना कुछ कहे दूर हो गया और दूसरी लड़कियों पर ट्राई मारने लगा.. लेकिन सभी ने छी गंदा कहकर उसे मना कर दिया और उनमे से एक ने मम्मी से शिकायत कर दी.. लेकिन मम्मी ने कुछ नहीं किया तो में बहुत चकित रह गई। वो लड़का जिसका नाम रोहन था.. वो अब क्लास में ही मुठ मारा करता था और जब मैंने उससे पूछा तो उसने कहा कि में तेरी मम्मी को देखकर क्लास में मूठ मारता हूँ।

फिर एक दिन मम्मी ने उसे इस हालत में देख लिया जब उसका वीर्य निकलने ही वाला था। तो मम्मी ने हम सभी से कहा कि अच्छा तुम सब यह सवाल हल करो और इसी बीच जब सभी बच्चे सवाल हल कर रहे थे.. तो वो रोहन के पास गयी और उन्होंने रोहन को जल्दी से अपना लंड अंडरवियर में डालते हुए देख लिया और उसे अपने ऑफिस में बुलाया। फिर में साईन्स की क्लास के टाईम पर बहुत डर गयी कि कहीं यह मम्मी को मेरे बारे में तो नहीं बता देगा और इसलिए बचने के लिए में जब साइन्स की क्लास थी तब में क्लास से निकल कर मम्मी के ऑफिस के पीछे पहुंची जो कि थोड़ा सुनसान एरिया था और ऑफिस के पीछे बहुत छोटी छोटी खिड़कियाँ थी।

फिर में मम्मी के ऑफिस वाली खिड़की से अंदर देखने लगी और उस साईड कोई नहीं आता था क्योंकि वहाँ पर बहुत सी काँटे वाली झाड़ियां थी और में बहुत डर रही थी कि पता नहीं क्या होगा? लेकिन मम्मी ने रोहन को कहा कि छोटे शैतान यहाँ पर आओ और यह बताओ क्या कर रहे थे? तो रोहन डर के मारे बोल नहीं पा रहा था। मम्मी ने उसे समझाया कि यह सब कुछ सामान्य है और अब तुम बड़े हो रहे हो.. लेकिन तुम क्या सोचकर क्लास में मुठ मार रहे थे? क्लास में यह सब करना तो बिल्कुल ग़लत है। रोहन मम्मी के मुहं से यह सुनकर थोड़ा मस्त हो गया और उसने कहा कि मेडम आपको देखकर ही मार रहा था.. सॉरी मेडम आगे से नहीं करूँगा। तो मम्मी ने कहा कि रोहन मुझे तुम्हारे माता-पिता को बताना पड़ेगा कि तुम स्कूल में क्या पढ़ रहे हो? तो रोहन डर के मारे सॉरी कहने लगा।

फिर मम्मी उठकर दरवाजे के पास गयी और उन्होंने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया और रोहन को रोता देख मम्मी हंसने लगी और कहने लगी कि अच्छा तो फिर मुझे अपनी लुल्ली दिखा.. अगर चाहते हो कि तुम्हारे माता पिता को में कुछ भी ना बताऊँ। तो रोहन पहले तो शरमाया.. लेकिन फिर उसने कहा कि मेडम लुल्ली नहीं यह लंड है। फिर मम्मी ने कहा कि वो तो देखते है अभी क्या है? और मम्मी ने उसकी बेल्ट पकड़ कर उसको अपनी ओर खींचा और उसकी पेंट उतारी और मम्मी कहने लगी कि सज़ा तो तुम्हे मिलेगी रोहन। फिर मम्मी ने कहा कि रोहन अब तुम्हे में दिखाती हूँ मज़ा क्या होता है? और मम्मी ने रोहन का लंड देखा जो कि बहुत ज़्यादा कड़क हो गया था और बहुत मोटा था। भले ही वो ज्यादा लंबा ना हो.. मम्मी ने उसके लंड को एक उंगली से पूरा सहलाया और फिर लंड पर पकड़ बनाकर जोर से पकड़ लिया।

फिर एक हाथ से रोहन की छोटी सी गांड पकड़ कर दबाने लगी और दूसरे हाथ से उसका लंड जो कि छोटा था और वो लंड हिलाने लगी। रोहन आअहह उह्ह्ह कर रहा था और फिर मम्मी ने उसका लंड जीभ से चाटा फिर अपनी जीभ से रोहन के सुपाड़े को धीरे धीरे से सहलाने लगी। रोहन ने अपने चूतड़ टाईट कर लिए और मम्मी के मुहं की तरफ लंड से झटका मारा.. मम्मी के होंठ पर लंड ने दवाब दिया। तो मम्मी ने कहा कि बड़े बैताब हो रहे हो रोहन.. तुम्हारी यही तो सज़ा है कि में तुम्हे बहुत तड़पाऊँ। मम्मी ने फिर अपने मुहं में उसका लंड भर लिया और चूसने लगी.. मम्मी कभी कभी उसका लंड दाँत से काट रही थी जिससे वो ओउउच अया अह्ह्ह कर रहा था और मम्मी रोहन की गांड पर नाख़ून से खरोंच रही थी।

यह सिलसिला करीब 10 मिनट तक चला और रोहन अब पूरे जोश में आ गया और मम्मी के बाल पकड़ कर उनके मुहं में जोर जोर से पूरे जोश के साथ धक्के मारने लगा और मम्मी के मुहं को रोहन अब सज़ा दे रहा था। मम्मी के बाल जो कि चोटी में थे.. अब खुल गये और रोहन ने मम्मी के बाल घोड़े की पूंछ की तरह पकड़ लिए और उसने मम्मी के प्यारे से चहरे को बहुत चोदा और फिर कुछ ही मिनट में रोहन ने अपना गाढ़ा वीर्य मम्मी के मुहं में ही छोड़ दिया और फिर मम्मी ने अपने होंठ से बहते हुए वीर्य को होंठ से साफ करके चाट लिया और रोहन को पूछा कि क्यों मज़ा आया? तो रोहन ने कहा कि बहुत मज़ा आया मेडम आप दुनिया की बेस्ट टीचर हो.. मुझे प्लीज़ हमेशा ऐसी ही सज़ा देती रहना और फिर रोहन ने मम्मी की गर्दन पर किस किया और वापस क्लास जाने लगा और जाने से पहले मम्मी ने उसे कहा कि छुट्टी के बाद मेरे ऑफिस में आना और सज़ा चाहिए तो और उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए उसे जाने को कहा ।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

सास के हाथ में लंड दिया

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम लक्की है और में पंजाब के लुधियाना शहर का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र अभी 30 की है और मेरे घर पर में और मेरे पापा और मेरी वाईफ और मेरी 3 साल की बेटी साथ हम 4 लोग हैं चलो अब में आपको अपनी स्टोरी पर ले चलता हूँ मेरी सास की उम्र लगभग अभी 45 के करीब होगी.. लेकिन वो इतनी सुंदर नहीं है और उसके बूब्स भी इतने बड़े नहीं है.. लेकिन ठीक ठाक है। मेरे ससुर को गुज़रे हुए करीब अभी 10 साल हो गए है। दोस्तों यह कहानी तब की है जब मेरी शादी को 6 महीने हुए थे और मेरे पापा कुछ दिनों के लिए घर से बाहर गये हुए थे और मेरा होजरी का एक बहुत बड़ा कारोबार है। मेरी फेक्ट्री मेरे घर से 1 घंटे की दूरी पर है और फिर पापा काम से बाहर गये हुए थे। तो मेरी बीवी ने अपनी माँ मतलब मेरी सास को घर पर बुलाया हुआ था।

फिर में शाम को अपनी होजरी का काम खत्म करके घर पर पहुँचा। तो मैंने देखा कि मेरी सास मेरे घर पर आई हुई है.. लेकिन मैंने अभी तक अपनी सास के बारे में कभी भी कुछ ग़लत नहीं सोचा था। फिर रात हुई और हम लोगों ने एक साथ बैठकर खाना खाया और फिर थोड़ी बहुत इधर उधर की बातें की और फिर हम लोग सोने की तैयारी करने लगे और हम सभी लोग एक ही बेड पर सोए। मेरी बीवी बीच में सोई सुबह हुई और फिर में रोज की तरह नाश्ता करके अपने होजरी के काम में चला गया और जब शाम हुई तो मेरी वाईफ का फोन आया कि में पड़ोसी के घर पर जन्मदिन की पार्टी में जा रही हूँ। आप घर पर थोड़ा जल्दी आ जाओ मम्मी घर पर अकेली है और फिर में कुछ 1/2 घंटे के बाद घर पर आ गया और फ्रेश होने को चला गया और में वापस बाथरूम से बाहर आया और मैंने अपने कपड़े चेंज किए।

तो मेरी सास मेरे रूम में नहीं थी और जब मैंने कपड़े बदलने के लिए अपनी पेंट उतारी तो अचानक मेरी सास मेरे रूम में आ गई और उस वक़्त में सिर्फ अंडरवियर और बनियान में था। तो मेरी सास मेरी अंडरवियर की तरफ घूर घूरकर देखने लगी और मुझे बहुत अजीब सा महसूस हुआ। तो मैंने झट से अपने कपड़े पहन लिए.. लेकिन मेरी सास अब भी मेरी तरफ ही देख रही थी। तभी मेरी सास मेरे रूम में ठीक मेरे सामने बेड पर बैठ गई और मुझसे बोली कि बेटा चाय पियोगे क्या? फिर मैंने कहा कि हाँ जी.. तो वो मेरे लिए चाय बनाने चली गई और मेरे मन में वो बात सोचकर कुछ अजीब सा हो रहा था कि मेरी सास मेरी अंडरवियर की तरफ कैसे देख रही थी? तो कुछ देर बाद मेरी सास मेरे लिए चाय बनाकर ले आई.. लेकिन मेरे मन में पता नहीं उस वक्त क्या आया और मैंने अपना लंड पेंट के ऊपर से ही खुजाना शुरू किया। तभी मेरी सास मेरी पेंट की तरफ फिर से घूर घूरकर देखने लगी।

फिर मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था और में जानबूझ कर अपने लंड को पेंट के ऊपर से मसलता रहा और मेरी सास लगातार देखती रही। तभी कुछ देर बाद मेरी बीवी घर पर आ गयी और हम लोगो ने साथ बैठकर खाना खाया और सोने लगे और में जब सुबह उठकर बाथरूम में नहाने चला गया और में नहाकर अंडरवियर और बनियान में ही बाहर आ गया और सीधा अपने रूम में चला गया.. लेकिन फिर से मेरी सास वहीं पर मेरे रूम में पहले से ही मौजूद थी और मेरी बीवी सोई हुई थी। तो में जानबूझ कर अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से मसलने लगा। तभी मेरी सास मेरे अंडरवियर की तरफ देखने लगी और कुछ देर मसलने के बाद मेरा लंड धीरे धीरे अंडरवियर में खड़ा होने लगा। तभी मैंने अपनी पेंट झट से पहनी और होजरी चला गया। फिर शाम को घर आया तो मैंने अपनी सास को देखा तो मुझे बहुत अजीब सा महसूस हो रहा था। फिर रात हुई और हम लोग खा पीकर सोने की तैयारी करने लगे। फिर मेरी बीवी सो चुकी थी.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी और मेरे मन में मेरी सास का ख्याल चल रहा था और मेरा लंड मेरी अंडरवियर में तनकर खड़ा हुआ था।

तभी मेरे मन में एक ख्याल आया और में बाथरूम के बहाने उठा और बाहर गया और कुछ देर के बाद में वापस आया तो मेरे मन में पता नहीं क्या आया और में धीरे धीरे सास और अपनी बीवी के बीच में जा कर लेट गया। मेरी सास को मालूम नहीं था कि में आया हूँ। तभी थोड़ी देर के बाद मैंने सोचा कि कुछ ट्राई करता हूँ और जैसे ही मैंने अपनी सास की तरफ साईड बदली तो मेरी सास की आँख खुल गई और वो चोंक गयी.. लेकिन चुप रही और मुझे बोली कि तुम यहाँ पर क्या कर रहे हो? में बहुत डर गया और लेटा रहा और में कुछ नहीं बोला और सोने का नाटक करने लगा और सुबह होने से पहले में वापस अपनी जगह पर आ गया। फिर में सुबह उठा और मेरी सास ने मुझसे पूछा कि तुम बीच में क्या कर रहे थे? तो मैंने कहा कि क्या बीच में? आप क्या बोल रही हो? और इतना कह कर में चला गया। शाम हुई और में घर पर वापस आया और मैंने पहले अपनी सास की तरफ देखा वो घर पर ही थी.. तभी मेरी बीवी वॉशरूम चली गयी और में अपने कपड़े वहीं पर चेंज करने लगा में अंडरवियर और बनियान में था तो में जानबूझ कर अपने लंड को खुजाने लगा और बहुत देर तक खुजाता रहा मेरी सास हल्का हल्का मेरी तरफ देख रही थी इतने में मेरा लंड अकड़ना शुरू हो गया.. लेकिन इस बार मैंने अपना हाथ नहीं रोका तो मेरी सास बोली कि यह क्या कर रहे हो? तो मैंने बोला कि क्या कर रहा हूँ खुजली कर रहा हूँ।

फिर में इतना कहकर डर गया और पेंट पहनकर बाहर हॉल में बैठ गया। तभी मेरी सास बाहर आई और बोली कि क्या हुआ? लेकिन मैंने कुछ ना बोला और अपने रूम में चला गया और मेरी बीवी बाहर आ गई और वो बोली कि खाना खाएँ मैंने हाँ किया और मेरी बीवी और सास खाना बना कर वापस आई। फिर मेरी सास मेरी तरफ देखकर स्माईल पास कर रही थी मुझे समझ ना आया फिर थोड़ी देर बाद हमने खाना खाया और बीवी बर्तन रखने चली गई। तभी मैंने जानबूझ कर लंड को खुजाना शुरू किया और मेरी सास ने मेरी तरफ देखा और बाहर चली गई। मेरे मन में सोते हुए मेरी सास के कई ख्याल आ रहे थे। तभी मैंने देखा कि मेरी बीवी और मेरी सास दोंनो सो चुके है मैंने अपना लंड नाईट पेंट से बाहर निकाला और लंड को छेड़ने लगा में अपनी सास को सोचकर लंड को हाथ में लेकर हिला रहा था तो मैंने देखा कि मेरी सास मेरे लंड की तरफ देख रही थी।

फिर में डर गया और मैंने लंड को नीचे कपड़ो में कर दिया तो मैंने देखा कि मेरी सास अब भी मेरी तरफ ही देख रही थी थोड़ी देर हुई और मेरी आँख लग गई और रात के करीब 4 बजे मेरी नींद खुली तो मेरी सास सोई हुई थी। तभी में हिम्मत करके फिर से बीच में आकर लेट गया.. तो मैंने देखा कि मेरी सास सो रही है मैंने धीरे से अपनी सास के पैरों को अपने पैरों से टच किया तभी मेरी सास सीधी हो कर लेट गई मैंने फिर से देखा कि मेरी सास सोए हुई थी मेरा लंड पेंट के अंदर लोहे की तरह टाईट था। मैंने अपना लंड सास के हाथ से टच किया मुझे बहुत अच्छा लगा। तभी मैंने देखा कि मेरी सास अभी भी सोई हुई थी। मैंने और हिम्मत करते हुए अपना लंड बाहर निकाला और सास के हाथ पर फेरने लगा मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.. मैंने अपना लंड सास के हाथ में रख दिया और मेरी सास का हाथ हिला। तभी में डर गया और में वैसे ही रहा और देखा सास सो रही हैं और में धीरे धीरे अपना लंड उसके हाथ में रगड़ने लगा। तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरी सास का हाथ टाईट हो रहा है तभी मेरी सास ने अपने हाथ की मुठ्ठी को बंद किया में डर गया.. लेकिन मेरी सास कुछ नहीं बोली और में धीरे से अपना लंड बाहर निकालने लगा। तभी मेरी सास ने लंड की पकड़ टाईट कर दी। मैंने देखा तो मेरी सास मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़े हुई थी ।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

माँ के साथ लेस्बियन सेक्स किया

हैल्लो दोस्तों.. यह मेरी पहली कहानी है और में आशा करती हूँ कि आप सभी को मेरी यह बहुत पसंद आएगी। दोस्तों मेरा नाम श्वेता है और मेरी उम्र 19 साल है। में अपनी ज्यादा तारीफ नहीं करना चाहती क्योंकि अपने मुहं अपनी तारीफ करना अच्छा नहीं लगता.. लेकिन में इतना बता दूँ कि में दिखने में बहुत सुंदर हूँ और मेरे बड़े बड़े फिगर है। वैसे तो मेरा एक बॉयफ्रेंड भी है.. लेकिन मुझे मधु में ही रूचि थी। घर में ज़्यादातर सिर्फ़ में और मेरी माँ मधु ही रहते है और मेरा छोटा भाई हॉस्टिल में नौकरी पर है और पापा बाहर नौकरी करते है और वो 6-7 महीनो में एक या दो बार ही घर पर आते है.. घर पर अकेले बेठे बेठे बोर हो जाती हूँ। में इस साईट पर बहुत सालो से सेक्सी कहानियाँ पढ़ती आ रही हूँ और मुझे यह सब करना बहुत अच्छा लगता है।

दोस्तों मेरी माँ की शादी जब हुई तब वो 19 साल की थी और जब वो 21 की थी तब बच्चे.. लेकिन वो कभी भी सेक्स से संतुष्ट नहीं रहती थी.. क्योंकि पापा कभी भी घर पर नहीं होते थे.. वो ज्यादातर समय बाहर अपनी नौकरी पर ही रहते थे। अब मधु की उम्र 36 साल है.. लेकिन वो ऐसी लगती है जैसे मेरी बड़ी बहन हो। बहुत सेक्सी शरीर, हाईट 5.9 इंच होगी और फिगर है 34-23-38 रंग बिल्कुल गोरा और वो सफेद साड़ी पहन कर एकदम 1960 फिल्म की हिरोईन लगती है। दोस्तों अब स्टोरी शुरू करते है।

यह बात कुछ 4 महीने पुरानी है। घर पर सिर्फ़ हम दोनों ही थे और हम दोनों हमेशा से ही अपनी सभी बातें एक दूसरे से शेयर करते है और हम कभी कभी थोड़ी बहुत सेक्स से सम्बन्धित बातें भी शेयर करते थे। फिर एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड के बारे में बात कर रहे थे। तभी बातों बातों में मधु बोली कि कर लो मज़े अभी तुम्हारी उम्र है और बाद में मेरी जैसी हालत हो जानी है। तो बातों चलते चलते हम दोनों सेक्स पर आ गए और फिर मुझे पता नहीं क्या हुआ और मुझसे रहा नहीं गया और मैंने मौका देखकर बात छेड़ ही दी.. फिर मैंने कहा कि क्यों हम दोनों भी तो मज़े कर सकते है? तो मधु मुझे बड़ी हैरान सी निगाहों से मुझे देखने लगी। तो मैंने कहा कि मैंने आपको कभी बताया नहीं.. लेकिन मुझे लड़की और लड़कों दोनों में बहुत रूचि है और ख़ास तौर से आप में। तभी मधु हंसने लगी और बोली कि चल पागल.. ऐसा अजीब मज़ाक ना कर। तो उस समय मेरी भी हिम्मत टूट गयी और में भी हंसकर बोली कि में मज़ाक कर रही थी। फिर में वहाँ से उठकर आ गयी और उसके बाद से मेरी मधु में रूचि और भी बढ़ गई और मुझे सपनों में भी मधु की चूत दिखने लगी।

फिर एक दिन वो कपड़े धोकर बाहर आई तो वो बिल्कुल पसीने से भीगी पड़ी थी और उसकी ब्रा का हुक दिख रहा था.. क्योंकि वो हमेशा ढीला टॉप और जीन्स पहनती थी। मेरी तो उसके ऊपर से नज़र हट ही नहीं रही थी और में मन ही मन उसे सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में सोचने लगी। तभी मधु की नज़र मुझ पर पड़ी और वो बोली कि क्या हुआ? तो में बोली कि वो.. वो.. वो में कह रही थी कि आप नहा लो बहुत गर्मी हो रही है। वो तभी नहाने चली गयी और बाथरूम में कहीं भी अंदर झाँकने की जगह नहीं थी। बाहर उसके कपड़े उतार कर उसने सूखने के लिए छोड़ दिए थे। तो मैंने उसकी ब्रा और पेंटी उठाई और अपने रूम में ले जाकर उन्हे सूँघा और अपनी चूत में उँगलियाँ डाली.. मेरी चूत का सारा रस मैंने मधु की पेंटी पर लगा दिया और वापस वहीं पर चुपचाप ला कर रख दी।

फिर थोड़ी देर बाद वो टावल बाँधकर बाहर आई और अपने कपड़े उठाने लगी। तो उसने पेंटी को देखा और वहीं छोड़ दिया और वो कपड़े बदलने गयी तो में उसके पीछे पीछे चली गयी। वो अपने रूम में जाकर कपड़े बदलने लगी.. लेकिन उसके रूम का दरवाजा अच्छी तरह से बंद नहीं होता था तो में बाहर से उसे देखने लगी.. उसने टावल उतारा तो मेरी आखें फटी की फटी रह गयी वाह क्या फिगर है? और मेरी चूत में से बिना कुछ करे ही धीरे धीरे पानी बाहर आने लगा और मेरी पेंटी गीली होने लगी उसको देखकर में अब बहुत गरम हो चुकी थी। थी मधु ने एक स्कर्ट और शर्ट पहन ली बिना पेंटी के.. क्योंकि बहुत गर्मी थी और वो बाहर आ गयी। उसकी स्कर्ट घुटनो से ऊपर तक थी.. लेकिन में मौके के इंतज़ार में घूमती रही कि कब वो बैठे और में स्कर्ट के नीचे से नज़ारा देख सकूं। फिर वो हॉल में आकर टीवी के सामने बैठ गयी और में उसकी तरह मुहं करके बैठ गयी और उसके टाँगें खुलने का इंतज़ार करने लगी। तभी मधु की नज़र मुझ पर पड़ी और में तब भी उसके बूब्स की तरफ़ देख रही थी फिर वो कुछ बोली नहीं.. लेकिन थोड़े टाईम बाद उठकर वहाँ से चली गयी और अब मधु को भी मुझ पर शक होने लगा था और फिर यह सिलसिला चलता रहा और मधु का शक धीरे धीरे यकीन में बदल गया।

फिर एक दिन वो मुझसे बहुत तंग आकर मुझसे हंसकर कहने लगी कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि में कभी मेरी बेटी से यह बात कहूँगी.. लेकिन आज कल तेरी नज़र कुछ बदली बदली सी लगने लगी है। मेरे ऊपर तो सेक्स का भूत सवार हो रहा था और में कुछ सोचे बिना उसके बिल्कुल पास आ गयी और मधु चुपचाप खड़ी थी। फिर मैंने धीरे धीरे अपने होंठ उसके होठों से टच कर दिया और वो लम्बी लम्बी सांसे लेनी लगी और फिर उसी टाईम वो मुझे धक्का देकर चली गयी और बोलने लगी कि पागल हो गयी है क्या? यह सब ग़लत है। फिर उसके बाद बहुत दिनों तक वो यही कहती रही कि यह ग़लत है.. लेकिन वो भी क्या करती? वो भी तो कई बरसों से सेक्स की प्यासी थी। एक दिन में नहा रही थी और में कभी दरवाज़ा बंद नहीं करती क्योंकि घर में सिर्फ़ हम दोनों ही थे। मधु का ध्यान नहीं था और वो अचानक से बाथरूम में घुस आई अंदर घुसते ही वो मुझे देखकर खड़ी की खड़ी रह गयी और मुझे देखती रही और फिर मेरे और पास आकर जोर से मुझे किस करने लगी 5 मिनट हम किस करते रहे और फिर वो रुक गयी। तो मैंने कहा कि क्या हुआ? वो बोली कि अभी बस और नहीं और फिर वहाँ से वो चली गयी। में भी टावल डालकर बाहर आई तो देखा वो बाहर बैठी थी। मैंने फिर से पूछा कि क्या हुआ? तो वो बोली कि मुझे यह सब नहीं करना है और में उसके पास बैठ गयी और कहा कि बहुत मज़ा आएगा.. छोड़ो ना अब यह सब नखरे। तो वो बोली कि क्या मज़ा? तू क्या कोई मर्द है? तो में बोली कि अच्छा चलो अपनी कोई सेक्स में सोच बताओ कि तुम क्या चाहती हो? और में उसे पूरा करूँगी। फिर वो सोचने लगी और शरमाने लगी और धीरे से बोली कि कोई मुझे पकड़ कर मेरा रेप करे। तो में बोली कि चलो रोल प्ले करते है और में आज तुम्हारा रेप करूँगी।

फिर मधु कुछ टाईम तक तो ना ना करती रही और फिर बाद में मान गयी। मैंने कहा कि.. लेकिन ऐसे नहीं ढंग से करेंगे आप साड़ी पहनना में आदमी के कपड़े पहनूंगी और नकली लंड लगा लूँगी। फिर मधु ने साड़ी पहन ली और मैंने नकाब लगा कर मेरे भाई का एक कोट पेंट पड़ा था वो पहन लिया। मेरा भाई मुझसे छोटा था तो उसका सूट मुझे बिल्कुल फिट आया और फिर मैंने मधु को कहा कि तू किचन में खड़ी हो जा.. में गेट के पास से आऊंगी और यह सोचना कि तेरा सही में रेप हो रहा है। में गेट के पास चली गयी और फिर भागकर आई और मधु को पकड़ लिया और वो जोर जोर से चिल्लाने लगी। मैंने उसका ब्लाउज पकड़ा और उतारने की कोशिश की तो वो छूटकर भागने लगी। मैंने उसको पकड़कर एक जोर से थप्पड़ मारा वो नीचे गिर गयी और बिल्कुल फिल्म की हिरोईन की तरह कहने लगी कि भगवान के लिए मुझे छोड़ दो।

फिर में उसे खींचकर बेडरूम में ले गयी और दरवाज़ा लॉक कर दिया और उसे ज़बरदस्ती किस करने लगी। वो मुझे धक्का दे रही थी.. मैंने एक और जोर से थप्पड़ मारा वो जोर जोर से रोने लगी और मैंने उसे पकड़ कर उसके सारे कपड़े फाड़ दिए और अपने कपड़े भी उतार दिए और अपनी पेंटी उसके मुहं में डाल दी और सीधा एकदम से पूरा 8 इंच का मेरा नकली लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा एक बार में ही डाल दिया। फिर वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी और मैंने उसके बाद करीब 30 मिनट तक उसके बूब्स चूसे और उसे कुत्तों की तरह उसे छोड़ा और फिर मैंने उसके खींचकर उल्टा कर दिया और में बोली कि अब रंडी तेरी गांड चोदूंगा। वो बिल्कुल सहम गयी और बोली कि नहीं.. नहीं.. नहीं गांड नहीं। मैंने उसके बड़े बड़े चूतड़ो पर एक खींचकर थप्पड़ मारा तो उसके चूतड़ टमाटर की तरह लाल हो गये वो और ज़ोर से चिल्लाने लगी। मैंने नकली लंड गांड में लगाया और उसकी गांड में एक धक्के से आधा अंदर कर दिया और धीरे धीरे पूरा अंदर कर दिया और ऐसे ही उसे 1 घंटे चोदा और तब तक में बहुत थक गयी थी और में थककर उसके ऊपर ही लेट गयी। फिर हमने एक किस किया और मधु बोली कि मज़ा आ गया श्वेता। फिर हम दोनों वहीं पर सो गये और उसके बाद से हम रोज़ ऐसे ही चुदाई करने लगे।

तो दोस्तों यह थी मेरी स्टोरी आशा है आपको जरुर पसंद आई होगी।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

तड़पती बहु को ससुर ने चोदा

हैल्लो दोस्तों.. में एक गर्मागर्म देसी सेक्सी कहानी लेकर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को यह बहुत पसंद आएगी 

गोपीनाथ की पत्नी देवयानी की मौत 2 साल पहले हो गयी थी। अब वो 45 साल का एक असंतुष्ट मर्द था और अपने लंड की गरमी निकालने के लिए नई चूत की तलाश में था। उसका एक बेटा अविनाश और एक बेटी दीपा थी। बेटी की शादी गौतम के साथ हो चुकी थी जो कि फौज में काम करता था। गौतम की पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में थी और दीपा से अलग रहने पर मज़बूर था। दीपा 19 साल की जवान औरत थी.. गोरी चिट्टी, गदराया हुआ बदन, भारी चूतड़, भरी हुई चूचियाँ, मोटे होंठ, लंबा कद और कसरती जांघे। कई बार तो गोपी अपनी ही बेटी के जिस्म की कल्पना से उत्तेजित हो चुका था। वो एक ही शहर में होते हुए भी अपनी बेटी से कम ही मिलता क्योंकि वो नहीं चाहता था कि उसका हाथ अपनी ही बेटी पर लगकर इस पवित्र रिश्ते को तोड़ डाले।

अविनाश ने भी अपनी प्रेमिका सोनिया से शादी करके घर बसा लिया था। सोनिया एक साँवली 20 साल की लड़की थी.. बिल्कुल स्लिम, सेक्सी आँखें, लंबी टाँगें और भरा हुआ जिस्म। सोनिया की ज़िद थी कि वो अलग घर में रहेगी.. तो अविनाश ने अलग घर ले लिया था। गोपीनाथ अब अकेलेपन का शिकार हो रहा था कि अचानक एक दिन उसकी बहू सोनिया का फोन आया और वो बोली कि बाबूजी आप यहाँ पर चले आइए.. मुझे आपकी ज़रूरत है। अविनाश ने मुझे धोखा दिया है और में आपके बेटे से तलाक़ चाहती हूँ.. आप अभी चले आये बाबूजी।

तभी गोपीनाथ जल्दी से अपने बेटे के घर पहुँचा तो देखा कि सोनिया ने रो रो रोकर अपना बुरा हाल कर लिया था। फिर गोपीनाथ उसके पास आया और पूछने लगा कि बेटी क्या हुआ? रोना बंद करो अब और मुझे पूरी बात बताओ बेटी.. तू घबरा नहीं.. तेरे बाबूजी हैं ना? शाबाश बेटी मुझे सारी बात बताओ? लेकिन सोनिया कुछ नहीं बोली बल्कि उसने तस्वीरों का एक लिफ़ाफ़ा अपने ससुर की तरफ बढ़ा दिया। फिर गोपीनाथ ने एक नज़र जब तस्वीरों पर डाली तो हक्का बक्का रह गया। अविनाश क़िसी पराई औरत को चोद रहा था और उसकी हर तस्वीर साफ थी और एक तस्वीर में वो औरत अविनाश का लंड चूस रही थी तो दूसरी में अविनाश उसकी गांड चाट रहा था, चूत चूम रहा था और तस्वीरें बिल्कुल साफ थी और उस औरत की शक्ल भी जानी पहचानी लग रही थी। वो औरत भी बहुत सेक्सी थी। गोरी, गदराया हुआ बदन, 25-26 साल की हसीना थी। फिर गोपीनाथ बोला कि बेटी यह औरत कौन है? कब से चल रहा है ये सब कुछ?

फिर सोनिया बोली कि बाबूजी क्या आप नहीं जानते इस औरत को? ये रीना है.. मेरी भाभी जिसको आपके बेटे ने फंसाया हुआ है। आपका बेटा मुझसे और मेरी सग़ी भाभी से शारीरिक संबंध बनाए हुए है। तभी गोपीनाथ कहने लगा कि यह शरम की बात है उसको मर जाना चाहिए.. जो अपनी बहन समान भाभी को चोद रहा है और दिन रात उसके साथ चिपका रहता है। तभी सोनिया बोली कि हाँ बाबूजी और में यहाँ करवटें बदलती रहती हूँ। तभी गोपीनाथ की नज़र अब अपनी बहू के रोते हुए चेहरे पर से ऊपर नीचे होते हुए सीने पर जा रुकी। सोनिया का कमीज़ बहुत नीचे गले का था और उसके सीने का उभार आधे से अधिक बाहर खनक रहा था। तभी बूब्स की गहरी घाटी देखकर ससुर का दिल बहक उठा और गोपीनाथ जानता था कि जब औरत के साथ बेवफ़ाई हो रही हो तो वो गुस्से और जलन में कुछ भी कर सकती है। इस वक्त उसकी बहू को कोई भी ज़रा सी हमदर्दी जता कर चोद सकता था और अगर कोई भी चोद सकता था तो फिर गोपीनाथ क्यों नहीं? और ऐसा माल बाहर वाले के हाथ क्यों लगे? और बेटे की पत्नी उसके बाप के काम क्यों ना आए?

फिर गोपीनाथ बोला कि बेटी घबरा मत.. में हूँ ना तेरी हर तरह की मदद के लिए। बोलो कितने पैसे चाहिए तुझे.. दस लाख, बीस लाख.. में तुझे इतना धन दूँगा कि तुझे कोई कमी ना रहेगी और कभी अविनाश के आगे हाथ नहीं फैलने पड़ेंगे। बस तुम मेरे घर की इज़्ज़त रख लो और अविनाश की बात किसी से मत कहना और तुझे जब भी किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना। गोपी ने कहा और अपनी बहू को बाहों में भर लिया। रोती हुई बहू उसके सीने से चिपक गयी और जब सोनिया का गरम जिस्म ससुर के साथ लिपटा तो एक करंट उसके जिस्म में दौड़ गया जिसका सीधा असर उसके लंड पर हुआ। तभी 45 साल के पुरुष में पूरा जोश भर गया और उसने अपनी बहू को सीने से भींच लिया और उसके गालों को सहलाने लगा।

उधर जवान बहू ने जब इतने दिनों के बाद मर्द के जिस्म को स्पर्श किया तो उसकी चूत में भी एक आग सी मच गयी और वो एक मिनट के लिए भूल गयी कि गोपीनाथ उसका पति नहीं बल्कि पति का बाप था। गोपीनाथ ने बहू को गले से लगाया हुआ था और फिर वो सोफे पर बैठ गया और सोनिया उसकी गोद में। जब अपने ससुर के लंड की चुभन बहू के चूतड़ पर होने लगी तो बहू भी रोमांचित हो उठी और वैसे भी ससुर ने पैसे देने का वादा तो कर लिया था। अब उसकी जिस्मानी ज़रूरतों की बात थी तो वो सोचने लगी कि क्यों ना अविनाश से बदला लेने के लिए उसके बाप को ही अपने जाल में फंसा लूँ? बाबूजी का लंड तो बहुत मोटा ताज़ा महसूस हो रहा है.. अगर मदारचोद अविनाश ने मेरी भाभी को फंसाया है तो क्यों ना में उसके बाप को अपना पालतू चोदू मर्द बना लूँ? और वैसे भी बुजुर्ग आसानी से पट जाते हैं और फिर औरत को एक जानदार लंड तो चाहिए ही। अब तरकीब लगानी है कि ससुर जी को कैसे लाईन पर लाया जाए? और उसके लिए खुल जाना बहुत ज़रूरी है। तभी सोनिया अपनी स्कीम पर मुस्कुरा उठी और कहने लगी कि मेरे प्यारे बाबूजी, आप कितना ख्याल रखते हैं अपनी बहू का? में आपकी बात मानूँगी और घर की बात बाहर नहीं जाने दूँगी.. यह बात कहते हुए उसने प्यार से अपने ससुर के होंठों को चूम लिया। गोपीनाथ भी औरतों के मामले में बहुत समझदार था और जनता था कि उसकी बहू को चोदने में कोई मुश्किल नहीं आएगी। तभी उसका लंड उसकी बहू के चूतड़ में घुसने लगा तो बहू भी शरारत से बोली कि बाबूजी ये क्या चुभ रहा है मुझे? शायद कोई सख्त चीज़ मेरे कूल्हों में चुभ रही है। फिर गोपीनाथ बड़ी बेशर्मी से हंस कर बोला कि बेटी तुझे धन के साथ साथ इसकी भी बहुत ज़रूरत पड़ेगी.. धन बिना तो तू रह लेगी लेकिन लंड के बिना रहना बहुत मुश्किल होगा.. मेरी प्यारी बेटी को इसकी ज़रूरत बहुत रहेगी और बेटे का तो ले चुकी है अब अपने बाबूजी का भी लेकर देख लो और अगर तुझे खुश ना कर सका तो जिसको मर्ज़ी अपना यार बना लेना।

तभी गोपीनाथ का हाथ सीधा बहू की चूची पर जा टिका और बहू मुस्कुरा पड़ी और उसने अपने ससुर के लंड पर हाथ रखा तो लंड फूंकार उठा। पेंट में तंबू बन चुका था। तभी सोनिया समझ गयी थी कि अब बेटे के बाद बाप को ही अपना पति मान लेने में भलाई है। फिर गोपीनाथ ने बहू के सर पर हाथ फैरते हुए कहा कि रानी बेटी अब ज़िप भी खोल दो ना और देख लो अपने बाबूजी का हथियार और अपने कपड़े उतार फेंको और मुझे भी अपना खज़ाना दिखा दो। तभी बहू ने झट से ज़िप खोल दी और बाबूजी की अंडरवियर नीचे सरकाते हुए लंड को अपने हाथों में ले लिया और कहने लगी कि बाबूजी आपका लंड तो आग की तरह दहक रहा है.. लगता है माँ जी के जाने के बाद से यह बेचारा प्यासा है। खैर अब में आ गयी हूँ इसका ख्याल रखने के लिए। ये बहुत बैचेन हो रहा है अपनी बहू को देख कर। फिर गोपीनाथ ने भी अब अपना हाथ कमीज़ के गले में डालकर सोनिया की चूची भींच ली और उसके निप्पल को मसलने लगा। तभी जल्दी जल्दी दोनों प्यासे जिस्म नंगे होने को बेकरार हो रहे थे और बहू ने ससुर की पेंट नीचे सरका दी और उसके लंड को किस करने लगी। फिर गोपीनाथ बोला कि बेटी तेरे बाबूजी का कैला कैसा है स्वाद पसंद आया? लेकिन बहू तो बस कैला खाने में मग्न हो चुकी थी। फिर सोनिया बोली कि बाबूजी मेरा मन तो कैले के साथ आपके आंड भी खा जाने को कर रहा है.. कितने भारी हो चुके है यह आंड.. इनका पूरा रस मुझे दे दो आज बाबूजी प्लीज।

तभी गोपीनाथ बोला कि इनका रस तुझे मिल जाएगा लेकिन उसके लिए तुमको पूरा नंगा होना पड़ेगा और अपने बाबूजी को अपने जिस्म का हर अंग दिखना पड़ेगा ताकि तेरे बाबूजी तुझे प्यार कर सकें। अपनी बेटी के अंग अंग को चूम सकें, सहला सकें और अपना बना सकें। बेटी आज मुझे अपने जिस्म की खूबसूरती दिखा दो। मुझे तो कल्पना करने से ही उतेज्ना हो रही है। मेरी रानी बेटी.. आज तेरी फिर से सुहागरात होने वाली है अपने बाबूजी के साथ। आज हम दो जिस्म एक जान हो जाने वाले हैं। बेटी क्या घर में विस्की है? लेकिन मुझे अपनी किस्मत पर विश्वास नहीं हो रहा.. अपनी रानी बेटी को आज नागन रूप में देखकर कहीं में मर ना जाऊ? में अपना मन मज़बूत करने के लिए दो घूँट पी लूँ तो बहुत अच्छा होगा। आज मेरी अप्सरा जैसी बेटी मेरी हो जाएगी बेटी तुम कपड़े उतार लो और ज़रा विस्की ले आना सोनिया मुस्कुराती हुई उठी और दूसरे रूम में चली गयी।

फिर 10 मिनट के बाद जब वो लौटी तो केवल काली पेंटी और ब्रा में थी और गोपीनाथ पूरी तरह से नंगा था। वो अपने लंड को मुठिया रहा था और वासना भरी नज़र से सोनिया को घूर रहा था और सोनिया का सांवला जिस्म देखकर उसका लंड आसमान की तरफ उठा हुआ था। कसी हुई पेंटी में उसकी बहू की चूत उभरी हुई थी और चूची तो ब्रा को फाड़कर बाहर आने को उतावली हो रही थी। सोनिया के हाथ में ट्रे थी जिसमे शराब की बॉटल रखी हुई थी जो उसने टेबल पर रखी और बाबूजी के लिए पेक बनाने लगी। तभी गोपी ने अपना एक हाथ आगे बड़ाकर उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और वो मचल गयी.. लेकिन मुस्कुरा पड़ी। बाबूजी ने अपनी बहू की चूची को मसल दिया और बोली कि बेटी क्या मेरा बेटा भी तेरी चूची को इतना प्यार करता है? इसको चूसता है? और बेटी तुम भी तो एक पेक पी लो.. अपने लिए भी पेक बनाओ। 

तभी सोनिया पहले झिझकी लेकिन फिर दूसरे ग्लास में शराब डालने लगी और जब पेक बन गये तो गोपी ने बहू को गोद में बैठा लिया और अपने हाथ से पिलाने लगा। फिर वो कहने लगी कि बाबूजी जब में पी लेती हूँ तो मेरी कामुकता बहुत बड़ जाती है और में अपने होश में नहीं रहती। तभी गोपीनाथ मुस्कुरा कर बोला कि बेटी आज होश में रहने की ज़रूरत भी नहीं है और मुझे ज़रा अपने दूध पी लेने दो। ऐसी कड़क चूची मैंने आज तक नहीं देखी है और गोपीनाथ वो चूची चूसने लगा.. जिसको कभी उसका बेटा चूसा रहा था। तभी ग्लास ख़त्म हुआ तो गोपीनाथ मस्ती में भर गया और उसने अपनी बहू को अपने सामने खड़ा किया और अपने होंठ उसकी फूली हुई चूत पर रख दिए और पेंटी के ऊपर से ही किस करने लगा।

सोनिया कहने लगी कि बाबूजी क्या एसे ही करते रहोगे या फिर बेटिंग भी करोगे? मैंने आपके लिए पिच से घास साफ कर रखी है दिखाऊँ क्या? गोपीनाथ जोर से हंस पड़ा। क्योंकि चुदाई में बेशर्मी बहुत ज़रूरी होती है और उसकी लंड की प्यासी बहू बेशर्म हो रही थी। वो कहने लगा कि बेटी मेरा लंड कैसा लगा? और में भी देखता हूँ कि तेरा पिच तैयार है.. सेंचुरी बनाने के लिए या नहीं? पिच से खुश्बू तो बहुत बढ़िया आ रही है और यह कहते हुए उसने पेंटी की इलास्टिक को बहू के कूल्हों से नीचे सरका दिया और तभी कसे हुए चूतड़ नंगे हो उठे और शेव की हुई चूत गोपीनाथ के सामने मुस्कुरा उठी। गोपीनाथ ने धीरे से पेंटी को बहू की कसी हुई जांघों से नीचे गिरा दिया और अपने बेटे की पत्नी की चूत को प्यार से निहारने लगा। चूत के उभरे हुए होंठ मानो मर्द के स्पर्श के लिए तरस गये हों। फिर गोपीनाथ ने एक सिसकी भरकर अपना हाथ चूत पर फैरा और फिर अपने होंठ चूत पर रख दिए। चूत मानो आग में दहक रही हो। फिर सोनिया कहने लगी कि ओह बाबूजी मेरे प्यारे बाबूजी क्यों आग भड़का रहे हो? इस प्यासी चूत की प्यास बुझा दो ना.. प्लीज। अब आप ही इस जवान चूत के मालिक हो.. इसको चूसो, चाटो, चोदो, लेकिन अब देर मत करो बाबूजी.. में मरी जा रही हूँ। फिर गोपीनाथ ने बहू के चूतड़ कसकर थाम लिए और जलती हुई चूत में जीभ घुसाकर चूसने लगा। जवान चूत के नमकीन रस की धारा ने उसकी जीभ का स्वागत किया जिसको गोपीनाथ पीने लगा। बहू ने अपनी जांघे खोल दी जिससे ससुर के मुहं को चूसने में आसानी हो और कामुक ससुर किसी कुत्ते की तरह चूत चूसने लगा और उधर सोनिया की वासना भड़की हुई थी और वो अपने ससुर के लंड को चूसने के लिए उतावली और गरम हो रही थी।

तभी सोनिया कहने लगी कि बाबूजी मुझे बिस्तर पर ले चलो.. मुझे भी आपका कैला खाना है आपके बेटे को तो मेरी परवाह नहीं है.. उस बहनचोद ने तो मेरी भाभी को ही मेरी सौतन बना रखा है। आप मुझे चोदकर अविनाश की माँ का दर्जा दे दो बाबूजी.. प्लीज। उधर गोपीनाथ बहू की चूत से मुहं हटाने वाला नहीं था.. लेकिन बहू का कहा भी टाल नहीं सकता था। तभी कामुक ससुर ने अपनी नग्न बहू के जिस्म को बाहों में उठाया और अपने बेटे के बिस्तर पर ले गया। बहू का नंगा जिस्म बिस्तर पर फैला हुआ देखकर गोपीनाथ नंगा हो गया और इतनी सेक्सी औरत तो उसकी सग़ी बेटी भी होती तो आज वो उसको भी चोद देता। गोपीनाथ अपनी बहू पर उल्टी दिशा में लेट गया था तो उसका लंड बहू के मुहं के सामने था और बहू की चूत पर उसका मुहं झुक गया। सोनिया समझ गयी कि उसे क्या करना है। उसने दोनों हाथों में ससुर जी का लंड थाम लिया और उस आग के शोले को मुहं में भर लिया और सोनिया गोपीनाथ के सूपाड़े को चाटने लगी। लंड को चूसते हुए उस पर दाँत से भी काटने लगी और अंडकोष को मसलने लगी।

उधर ससुर भी अपनी जीभ बहू की चूत की गहराई में मुहं घुसाकर चुदाई करने लगा। दोनों कामुक जिस्म मुहं से चुदाई करते हुए सिसकियाँ भरने लगे.. आहह उूुुउफ आआहह… तभी गोपी को लगा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो जल्दी ही झड़ जाएगा। इसलिए उसने बहू को अपने आप से अलग कर लिया और उसने बहू को लेटा लिया और उसकी जांघों को खोल कर ऊपर उठा दिया। फिर उसने अपना सुपाड़ा सोनिया की चूत पर टिकाया और चूत पर रगड़ने लगा और सोनिया सिसकियाँ भरने लगी और कहने लगी कि उफफफफफ्फ़ अहह बाबूजी क्यों इतना तरसा रहे हो? डाल दो ना और वो कराह उठी.. बाबूजी चोद डालो अपनी बहू को.. आपकी बहू की चूत मस्ती से भरी पड़ी है.. मसल डालो अपनी बेटी की प्यासी चूत को और जो काम आपका बेटा ना कर सका आज आप कर डालो। बाबूजी अब जल्दी से चोदना शुरू करो.. मेरी चूत जल रही है। तभी गोपी ने अपना सुपाडा सोनिया की चूत पर टिकाया और चूत पर रगड़ने लगा। उफफफफफ्फ़ बाबूजी.. क्यों तरसा रहे हो? डाल दो ना प्लीज कहते हुए बहू ने ससुर के लंड को अपनी दहकती हुई चूत पर रखकर चूतड़ ऊपर उछाल दिए और लोहे जैसा लंड चूत में समाता चला गया। ऊऊऊऊऊऊऊऊहह.. आआअहह.. मर गयी.. में माँ डाल दो बाबूजी.. शाबाश बाबूजी चोद डालो मुझे.. मेरी चूत जल रही है। तभी सोनिया की चूत से इतना पानी बह रहा था कि लंड आसानी से चूत की गहराई में उतर गया और बहू ने अपनी टाँगें बाबूजी की कमर पर कस दी और वो अपनी गांड उछालने लगी। ससुर बहू की साँस भी बहुत भारी हो चुकी थी और दोनों कामुक सिसकियाँ भर रहे थे। तभी गोपी ने बहु की चूची को ज़ोर से मसलते हुए धक्कों की स्पीड बढ़ा डाली और लंड फ़चा फ़च चूत के अंदर बाहर होने लगा। फिर गोपी ने बहू के निप्पल चूसना शुरू किया तो वो बेकाबू हो गयी और पागलों की तरह चुदवाने लगी। वाह! बाबूजी वाह चोद डालिए मुझे.. चोद डालो अपनी बहू की चूत.. चोदो अपनी बेटी को बाबूजी.. आह्ह बाबूजी।

फिर बाबूजी ने भी जोश में आकर धक्के और तेज़ कर दिए और इतनी जवान चूत गोपी ने आज तक नहीं चोदी थी। ऐसा बढ़िया माल उसे मिला भी तो अपने ही घर में और उत्तेजना में उसने बहू के निप्पल को काट लिया तो बहू चिल्ला उठी आआआअहह ऊऊऊऊओह ईईईईईईी माँआआ। बहू पूरी तरह से होश खो चुकी थी मदहोश हो होकर अपने ससुर की चुदाई का मज़ा ले रही थी। पूरा कमरा कामुक सिसकियों से गूँज रहा था। मुझे मार डाला आपने बाबूजी आआअहह में जन्नत में पहुँच गयी। तभी गोपी ने अपना लंड बहू की चूत की गहराईयों में उतार दिया और पागलों की तरह चोदने लगा और बहू ससुर चुदाई के परम आनंद में डूब चुके थे ससुर का लंड तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था और बहू की चूत की दीवारों ने उसको जकड़ रखा था। तभी बहू ने बिखरती साँसों के बीच कहा अह्ह्ह मर गयी में। मेरे राजा बाबूजी चोदो मुझे और ज़ोर से मेरे बाबूजी आज मेरी चूत की तृप्ति कर डालो.. आज मुझे निहाल कर दो अपने मूसल लंड के साथ मुझे चोद दो मेरे बाबूजी.. मेरी चूत किसी भी वक्त पानी छोड़ सकती है।

फिर गोपीनाथ का भी समय नज़दीक ही पहुँच चुका था और वो बहू को जकड़ कर अपनी गांड आगे पीछे करते हुए चुदाई में लग गया और कमरे में फ़चा फ़च की आवाज़ें गूँज रहीं थी। उसने पूरे ज़ोर से धक्के मारते हुए कहा कि बहु मेरी रानी बेटी चुदवा ले मुझसे। अब ज़ोर लगा कर मेरा लंड भी झड़ने के पास ही है.. ले लो इसको अपनी चूत की गहराई में मेरा लंड अब तेरी चूत में अपना पानी छोड़ने वाला है। मेरी रानी बेटी तेरी चूत ग़ज़ब की टाईट है.. में सदा ही तेरी चूत को चोदने का वादा करता हूँ.. मेरी रानी लो में झड़ा शीहहह.. मेरी बेटी मेरा लंड तेरी चूत में पानी छोड़ रहा है। मेरा रस समा रहा है तेरी प्यारी चूत में में झड़ा आआह्ह्ह्ह और इसके साथ ही उसके लंड ने और सोनिया की चूत ने एक साथ पानी छोड़ना शुरू कर दिया और दोनों निढाल होकर एक दूसरे से लिपट कर सो गये। दोस्तों इस तरह ससुर और बहू की चुदाई की शुरुआत हुई.. जो कि आज तक भी जारी है



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

शादी के बाद मम्मी की पहली नौकरी

हैल्लो फ्रेंड्स मेरा नाम विक्की है। मेरी उम्र 22 साल है दोस्तों में भी आप ही की तरह इस साईट का बहुत बड़ा दीवाना हूँ और मुझे इस साईट पर कहानियाँ पढ़ते हुए तीन साल हो चुके है। दोस्तों आज में आपको एक ऐसी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो बहुत पहले की है। पहले में आप सभी लोगो को अपने बारे में बता दूँ.. मेरे घर में 4 लोग है में, पापा, मम्मी और मेरी दीदी। मेरी मम्मी का नाम वर्षा है और वो दिखने में बहुत ही सुंदर है और मम्मी बहुत गोरी है और उनका फिगर बहुत अच्छा है। हम लोग सामान्य परिवार से है तो रहने में मेरी मम्मी बहुत ही सिंपल है वो घर मेक्सी और बाहर साड़ी या सलवार सूट ही पहनती है। मेरी मम्मी के ब्लाउज से उनकी बूब्स बाहर दिखते रहते है

हाँ तो में अब मेरी कहानी पर आता हूँ। मेरे पापा हमेशा टूर पर घर से कई कई दिनों के लिए बाहर रहा करते थे। तभी एक दिन मेरे पापा एक प्रॉजेक्ट के काम से बाहर गये हुए थे और घर पर में मेरी दीदी और मेरी मम्मी थे। तभी एक दिन नानी का कॉल आया और उन्होंने मम्मी से कहा कि बहुत दिन हो गये है.. तुम मुझसे मिलने आओ तो मम्मी ने कहा कि ठीक है और मम्मी ने पापा से फोन पर बात की और दूसरे दिन मम्मी ने ट्रेन का टिकट कराया और हम चल दिए। हमारा ऐसी कोच में रिज़र्वेशन था और भीड़ भी बहुत कम थी।

फिर हम अपने डिब्बे में पहुंचे तो वहाँ पर एक आदमी पहले से बैठा हुआ था और उसकी उम्र करीबन 45 साल की होगी और वो दिखने में बहुत ही लंबा चौड़ा था। उसकी पर्सनॅलिटी बहुत ही अच्छी थी। तभी डिब्बे में पहुंचकर मम्मी ने सारा समान सेट किया और हम बैठ गये। फिर वो आदमी हमे देख रहा था तभी थोड़ी देर बाद ट्रेन चलने लगी और हम लोग नॉर्मल बैठकर बातें करने लगे। में और मेरी दीदी खेल रहे थे और वो हमारी तरफ देख रहा था और कभी कभी मम्मी की तरफ देखकर मुस्कुरा देता था। मम्मी भी नॉर्मल व्यहवार रही थी। थोड़ी देर बाद में और मेरी दीदी ने मम्मी से कहा कि हमे ऊपर बर्थ पर जाना है और हम लोग चले गये। मेरी मम्मी ठीक उसके सामने बैठी हुई थी और वो चुपके से मेरी मम्मी को देख रहा था। फिर बीच बीच में उठकर वो समान ठीक करने के बहाने से मम्मी के बूब्स की तरफ देखता।

मम्मी ने जो कुर्ता पहना हुआ था उसमे से उनकी चूचियां दिख रही थी और वो बार बार उन्हें उठकर देखता और थोड़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा। अब उसने मेरी मम्मी से बातें करना शुरू किया.. उसने अपना नाम बताया कहा कि हैल्लो मेरा नाम सुरेश है मम्मी ने भी अपना नाम बताया उन्होंने मम्मी से कहा कि आप लोग कहाँ पर जा रहे है? तभी मम्मी ने उसे बताया कि हम इंन्दोर जा रहे है। फिर उन्होंने मेरी मम्मी से कहा कि आपके बच्चे बहुत प्यारे है और फिर मम्मी हमारी तरफ देखने लगी और मुस्कुराकर उनसे कहा कि हाँ बहुत प्यारे है लेकिन दोनों बहुत बदमाश है। फिर उन्होंने मम्मी से पूछा कि आपके पति क्या करते है? तो मम्मी ने बताया कि वो एक प्राईवेट कंपनी में है और उसके ही एक प्रॉजेक्ट के काम से बाहर गये हुए है। थोड़ी देर तक ऐसे ही दोनों बात करते रहे फिर उन्होंने मम्मी से पूछा कि आप जॉब नहीं करती क्या? तभी मम्मी ने कहा कि नहीं में अपने पति के ही ऑफीस नौकरी करती थी लेकिन बच्चो के होने के बाद मैंने नौकरी को छोड़ दिया। तभी उन्होंने कहा कि लेकिन अब क्यों नहीं नौकरी कर लेती? तो मम्मी ने कहा कि अब कहाँ नौकरी करूँगी? फिर अंकल चुप हो गये थोड़ी देर बाद अंकल ने बताया कि वो एक बहुत बड़ी कंपनी के मेनेजर पोस्ट पर है और उनके पास एक बहुत अच्छी नौकरी है और उन्होंने मम्मी से यह भी कहा कि आपके जैसी कितनी ही शादीशुदा लेडी वहाँ पर काम करती है अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो आप मेरी कंपनी में नौकरी कर सकती है।

तभी मम्मी चुप हो गयी और थोड़ी देर बाद अंकल ने कहा कि देखिए आपके बच्चे जब स्कूल जाते होंगे तब तो आप घर पर अकेले रहती होंगी.. इससे अच्छा है कि आप कोई एक नौकरी पकड़ लीजिए आपका टाईम भी कट जाएगा और घर में पैसे भी आ जाएँगे। यह कह कर उन्होंने अपना बिजनेस कार्ड मम्मी को दे दिया.. लेकिन मम्मी उनसे नहीं कहने लगी। तभी उन्होंने कहा कि देखिए में आप पर ज़ोर नहीं दे रहा हूँ अगर आपको नौकरी करने का मन करे तो आप मुझे कॉल कर दीजिएगा। फिर मम्मी ने कहा कि ठीक है और मम्मी ने कार्ड अपने पर्स में रख लिया और दोनों बातें करने लगे। फिर रात का खाना खाकर हम लोग सो गये सुबह स्टेशन आया और हम लोग नानी के घर चले गये और 15 दिन तक हम लोग वहीं पर रहे और फिर वापस अपने घर आ गए।

फिर एक दिन रात में पापा का कॉल आया और मैंने मम्मी को बात करते सुना जो वो ट्रेन वाले अंकल से बात हुई वो पूरी बात पापा को बता रही थी और फिर पापा ने कहा कि ठीक है नौकरी कर लो। फिर अगले दिन मम्मी ने कार्ड से नंबर निकाला और कॉल किया और उनसे कहा कि में नौकरी करने को तैयार हूँ। फिर मम्मी ऑफीस जाने लगी मम्मी ऑफीस स्कर्ट और शर्ट पहन कर जाती थी मम्मी की जांघे साफ दिखती थी। तभी एक दिन मम्मी ऑफीस से आई और उन्होंने कहा कि बच्चो जल्दी से तैयार हो जाओ हमे जाना है। फिर मैंने उनसे पूछा कि कहाँ पर जाना है मम्मी? तो मम्मी ने बताया कि उनके बॉस के घर में एक बहुत बड़ी पार्टी है और ऑफीस के सारे लोग जा रहे है फिर हम लोग तैयार हुए और पार्टी में चले गये.. लेकिन उनका घर बहुत दूरी पर था। सही में वो उनका फार्म हाऊस था और वहाँ पर उनकी बर्थडे पार्टी थी और ऑफीस के सारे लोग आए हुए थे।

फिर मम्मी का बॉस आया और मम्मी ने उन्हें बर्थडे विश किया और मैंने देखा कि मम्मी का बॉस और कोई नहीं वही सुरेश अंकल थे जो ट्रेन में मिले थे। मम्मी ने उन्हें गिफ्ट दिया और थोड़ी देर में पार्टी शुरू हो गयी। फिर मम्मी के बॉस ने मम्मी को डॅन्स के लिए ऑफर कर दिया और मम्मी चली गयी वहाँ पर बहुत सारे लोग डांस कर रहे थे मम्मी अंकल से चिपक कर डांस रही थी। में बार बार उनकी तरफ देख रहा था कि अंकल का हाथ मेरी मम्मी की गांड पर चला जाता था। तभी मेरी दीदी ने कहा कि में कुछ खाने के लिए लेकर आती हूँ और मैंने कहा कि ठीक है और मैंने वहीं पर एक कुर्सी पर बैठ गया। करीब 3 घंटे पार्टी चली और 12 बज गये थे.. सब जाने लगे। मम्मी ने कहा कि अब हमे भी चलना चाहिए और वो ऑटो लेने के लिए बाहर जाने लगी इतने में मम्मी के बॉस आए और उन्होंने कहा कि इतनी रात को बच्चो के साथ कहाँ पर जाओगी.. तुम आज यहीं पर रुक जाओ.. कल सुबह में छोड़ दूँगा। फिर मम्मी नहीं नहीं करने लगी लेकिन बॉस नहीं माने और मजबूरी हमे वहीं पर रुकना पड़ा.. रात बहुत हो गयी थी। 

फिर अंकल ने हमे रूम दिखाया और कहा कि बच्चो तुम लोग यहीं पर सो जाओ। तभी मैंने पूछा कि और मम्मी कहाँ पर सोएगी? तो अंकल हंसने लगे और उन्होंने कहा कि तुम मम्मी की टेंशन मत लो वो दूसरे कमरे में सो जाएगी और यह कहकर अंकल और मम्मी बाहर चले गये। करीब एक घंटा बीत गया मुझे नींद नहीं आ रही थी तो में बाहर बाल्कनी में आ गया वहाँ पर मुझे गार्डन में अंकल और मम्मी बातें करते दिखे। अंकल मम्मी को कुछ समझाने की कोशिश कर रहे थे और कुछ देर बाद अंकल ने मम्मी को अपनी तरफ खींच लिया और एक लिप किस ले लिया। मम्मी अंकल की तरफ देखने लगी.. अंकल कुछ देर तक मम्मी को ऐसे ही देखते रहे उन्होंने फिर धीरे से मम्मी के होठों पर किस किया और अब धीरे धीरे मम्मी के लिप पर किस करने लगे।

तभी मम्मी ने अपने हाथ अंकल के पीछे करके उनका साथ देने लगी.. अंकल ने अपने हाथ मम्मी के चूतड़ो पर रख दिये और धीरे धीरे मसलने लगे और कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा.. मुझे बहुत अजीब लग रहा था मैंने सोचा कि दीदी को उठा दूँ लेकिन मैंने दीदी को नहीं उठाया और चुपके से देखने लगा कुछ देर बाद अंकल ने मम्मी का हाथ पकड़ा और घर में आने लगे.. में रूम में चला आया क्योंकि वो लोग मुझे देख लेते। में कुछ देर रूम में ही बैठा रहा। अब मैंने गेट खोला और चुपके से बाहर आया.. मैंने देखा कि एक रूम की लाइट जल रही थी में वहाँ पर खड़ा हो गया और होल से देखने लगा मम्मी अंकल की गोद में बैठ हुई थी और अंकल मम्मी के होंठ पर और गले पर किस कर रहे थे। मम्मी आआहह कर रही थी मम्मी ने अंकल से कहा कि सुरेश प्लीज़ आज रात छोड़ दो मेरे बच्चे यहीं पर है। तभी अंकल ने कहा कि वर्षा आज रात मेरा बिस्तर गरम कर दे। तभी मम्मी ने कहा कि प्लीज़ सुरेश बच्चे देख लेंगे। अंकल ने कहा कि डार्लिंग तुम टेंशन मत लो तुम्हारे बच्चो को कुछ नहीं पता चलेगा.. में 6 महीने से तुम्हे चोद रहा हूँ किसी को कभी कुछ पता चला क्या? अब अंकल ने मम्मी की चैन को खोलकर साईड टेबल पर रख दिया और फिर से मम्मी को किस करने लगे। वो अपने एक हाथ से मम्मी के बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से मसल रहे थे और मम्मी को किस कर रहे थे। उन्होंने मम्मी की जीभ को अपने मुहं में ले लिया और चूसने लगे और अब अंकल ने मम्मी के ब्लाउज का बटन खोल दिया और ब्रा के ऊपर से मम्मी की छाती को चूमने लगे और निप्पल को ब्रा के ऊपर से चूसते और फिर मम्मी की ब्रा अंकल के थूक से पूरी गीली हो गई थी और अंकल ने अपना एक हाथ पीछे करके मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया और खींचकर निकाल दिया। तभी अंकल मम्मी के बूब्स को देखकर पागल हो गये। मम्मी के बूब्स बहुत बड़े थे और गोल गोल थे.. उनकी भूरे कलर की निप्पल देखकर अंकल अपने होश खो बैठे और बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगे और दबाने लगे मम्मी आअहह सस्स्शह कर रही थी मम्मी पूरी पीछे की तरफ हो गयी थी जिससे उनके बूब्स और तन गए थे अंकल पागलो की तरह मम्मी के बूब्स को चूस रहे थे और कभी वो मम्मी के निप्पल को मुहं में लेकर चूसते तो कभी मम्मी के बूब्स के पास किस करते।

तभी उन्होंने मम्मी से कहा कि वर्षा आज में तुझे रात भर चोदूंगा.. ऑफीस के दिनों में टाईम नहीं मिल पाता है.. आज तू रात भर मेरे पास रहेगी। अब अंकल ने मम्मी को लेटा दिया और मम्मी के पैर के पास बैठ गये और मम्मी के तलवे पर किस करने लगे उन्होंने मम्मी की पायल उतार दी और टेबल पर रख दी और धीरे धीरे मम्मी के पैर पर किस करते हुए मम्मी की साड़ी को उठाते गये और उठाकर उसे कमर तक कर दिया। फिर उन्होंने पहले मम्मी की पेंटी के पास सूंघा और कहा कि बहुत नमकीन खुश्बू है तेरी चूत की और मम्मी बार बार अपने हाथों से अपनी चूत छुपाने की कोशिश कर रही थी और अंकल मम्मी की जांघो को किस कर रहे थे और मम्मी आआहह उफ्फ्फ कर रही थी। अब अंकल ने मेरी मम्मी की पेंटी को निकाल कर अपने हाथों मे ले लिया और सूंघने लगे। अंकल को बहुत मज़ा आ रहा था और मम्मी अपने हाथ अपनी चूत पर रख कर छुपा रही थी तभी थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा।

अब अंकल ने मम्मी का हाथ हटा दिया और मम्मी की चूत को देखने लगे। मम्मी की चूत पर थोड़े थोड़े झांट के बाल थे और उसमे से उनकी लाल फुद्दी दिख रही थी। अंकल ने अपनी दो उंगली से मम्मी की चूत को फैला दिया और मम्मी की लाल भोस को देख कर पागल हो गये.. उन्होंने अपनी एक उंगली को अंदर डाल दिया और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे.. मम्मी एयाह्ह्ह माँआआ करने लगी और अपने चूतड़ को उठाने लगी। तभी उन्होंने कहा कि सुरेश धीरे करो दर्द हो रहा है। अंकल ने मम्मी के दोनों पैरों को फैला दिया और मम्मी की चूत को चाटने लगे और मम्मी अपने सर को इधर उधर फेंकने लगी और अपने हाथों से अपने बॉस का सर पकड़ कर बाल खींचने लगी। अंकल ने दोनों हाथों से मम्मी की जांघ को पकड़ रखा था और मम्मी की चूत को चाट रहे थे। लगभग 10 मिनट तक अंकल ने ऐसा ही किया और मेरी मम्मी की चूत को चाटा। अंकल ने जब अपना मुहं बाहर निकाला तो मैंने देखा कि मम्मी की चूत से पानी निकल रहा था। अब अंकल ने अपने कपड़े उतार लिए और मम्मी वहीं पर बेड पर लेटी हुई थी.. वो ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी। उनकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी और अंकल कुछ देर तक मम्मी को घूर कर देखते हुए अपने लंड को सहला रहे थे। कुछ देर में उनका लंड खड़ा हो गया और उन्होंने अपना लंड मेरी मम्मी के मुहं के पास लाकर रख दिया और मम्मी ने अपने हाथ से उनका लंड पकड़कर अपने मुहं में लेकर चूसने लगी। अंकल अह्ह्ह ओह्ह्ह वर्षा चूस और अच्छे से चूस और सिसकियाँ ले रहे थे। कुछ देर बाद मम्मी ने अपने मुहं से उनका लंड बाहर निकाला और अंकल के पूरे लंड पर मम्मी का थूक लगा हुआ था। अब अंकल ने मम्मी की साड़ी निकाल दी और पेटीकोट निकालकर मेरी मम्मी को पूरा नंगा कर दिया। मम्मी बेड पर अपनी टांगो को फैला कर लेटी हुई थी और अंकल अपने लंड को सहलाते हुए मम्मी पर लेट गये.. वो थोड़ी देर तक मम्मी के बूब्स को चूसते रहे और फिर एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे मम्मी अपने होंठ को अपने दांतों से दबाए हुए थी और सिसकियाँ ले रही थी और फिर अंकल ने अपने लंड को पकड़ते हुए एक जोर का धक्का दिया। मम्मी थोड़ी पीछे की तरफ हो गयी लेकिन अंकल ने एक और झटका दिया जिससे मम्मी थोड़ा और पीछे हो गयी और मम्मी के मुहं से चीख निकल पड़ी।

तभी मैंने देखा कि अंकल रुक गये और उन्होंने मम्मी के गालो को पकड़ लिया और धीरे धीरे किस करने लगे। जब मैंने नीचे की तरफ देखा तो अंकल का पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत में समा गया था और अंकल ने मम्मी से पूछा कि क्या दर्द हो रहा है? तभी मम्मी से बोला नहीं जा रहा था.. उन्होंने इतने में बोला कि हाँ। अंकल ने एक और किस किया और कहा कि कुछ देर और होगा लेकिन फिर दर्द कम हो जाएगा.. अंकल ने एक और झटका दिया और धीरे धीरे लंड मम्मी की चूत में डालने लगे। मम्मी के बूब्स आगे पीछे हिल रहे थे मम्मी आआआ ओफफफ्फ़ औहह माँ मरी में सस्स्सीए नहीं बस करो कर रही थी और अंकल अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाते हुए मम्मी की चूत के ऊपर वाले हिस्से को रगड़ रहे थे और मम्मी को धीरे धीरे चोद रहे थे और मम्मी बुरी तरह से सिसकियाँ ले रही थी पूरे रूम में मम्मी की सिसकियाँ और बेड के हिलने की आवाज़ आ रही थी।

अब अंकल ने मम्मी के निप्पल को अपने मुहं में ले लिया और तेज़ी से मम्मी को चोदने लगे। मम्मी धीरे धीरे अपने चूतड़ उठाकर उनका साथ दे रही थी। तभी थोड़ी देर बाद अंकल उठकर बैठ गये और उन्होंने मम्मी की जांघो को पकड़कर मम्मी की चूत में अपना लंड डाल दिया। तभी मम्मी ने अपने हाथ पीछे की तरफ करके बेड को पकड़ लिया। मम्मी के बूब्स और तन गये थे और अंकल के हर धक्के पर उनके बूब्स आगे पीछे हो रहे थे.. कुछ देर तक मम्मी के बॉस ने उनको ऐसे ही चोदा और फिर उन्होंने एक ज़ोर का झटका दिया और आआह्ह्ह करने लगे। जब उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कि मम्मी की चूत से उनका पानी बह रहा था और दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे। कुछ देर बाद मम्मी ने अपनी चूत से वीर्य को साफ किया और अंकल मम्मी के साथ नंगे एक ही कम्बल में सो गये। फिर सुबह जब मेरी नींद खुली तो मम्मी ने अपनी साड़ी पहन रखी थी और फिर अंकल ने हमे अपनी कार से घर छोड़ दिया ।



RE: Incest Stories in hindi रिश्तों मे कहानियाँ - sexstories - 09-13-2017

दीदी की सील मेरे सामने टूटी

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम विक्की है और मेरे घर में 4 लोग रहते है.. में मेरे पापा मेरी मम्मी और मेरी दीदी। मेरी दीदी का नाम प्रिया है और वो दिखने में बहुत सुंदर है। मेरी दीदी का फिगर बहुत अच्छा है में और मेरी दीदी हमेशा से ही साथ रहे है। मेरे स्कूल के सारे लड़के मेरी दीदी को गंदी नज़र से देखते थे। हमारे स्कूल में लड़कियों के लिए जो ड्रेस थी वो स्कर्ट और टॉप थी। फिर मेरी दीदी जब सीड़ियों से ऊपर जाती थी तो उनके क्लास के लड़के नीचे से उनकी स्कर्ट में झांकते थे। तभी एक बार मैंने उन्हें बात करते सुना कि आज प्रिया ने काले कलर की पेंटी पहन रखी है काश उसने पेंटी नहीं पहनी होती तो उसकी चूत दिख जाती और सब हसंने लगे और जैसे जैसे मेरी दीदी बड़ी होती गयी.. मेरी दीदी उतनी ही सुंदर और हॉट लगने लगी।

फिर जब हम स्कूल खत्म करके कॉलेज में आए तो मेरी दीदी दूसरे कॉलेज में चली गयी। में जिस कॉलेज में था वो दीदी के कॉलेज से 3 किमी. की दूरी पर ही था। इसलिए में दीदी को उनके कॉलेज छोड़कर अपने कॉलेज जाता था। फिर एक दिन शाम को में अकेला ही बाईक से अपने एक फ्रेंड के यहाँ पर जा रहा था तो मेरा एक्सीडेंट हो गया और मेरे सीधे पैर में फ्रेक्चर हो गया और डॉक्टर ने मुझे 2 महीने के लिए बेड रेस्ट के लिए बोला और इसकी वजह से दीदी को कॉलेज जाने में प्राब्लम होने लगी। फिर मेरी ही कॉलोनी में एक लड़का था जिसका नाम रोहन था। वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त और मेरी दीदी का क्लासमेट भी था और मेरी दोस्ती उससे क्रिकेट खेलते समय हुई थी। रोहन दिखने में बहुत स्मार्ट था और उसका शरीर भी बहुत अच्छा था। तभी एक दिन मैंने रोहन से कहा कि में जब तक ठीक नहीं हो जाता वो दीदी को अपने साथ कॉलेज ले जाए और उसने कहा कि ठीक है और अगले दिन से दीदी उसके साथ कॉलेज जाने लगी। फिर धीरे धीरे रोहन और दीदी में एक बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी और वो दोनों ज्यादातर टाईम साथ ही रहते थे।

एक दिन दीदी मुझसे बातें कर रही थी और में बेड पर लेटा हुआ था। मेरे पैर में फ्रॅक्चर था.. दीदी बार बार किसी से मैसेज में बातें कर रही थी। फिर दीदी रूम से बाहर गयी और दीदी का मोबाईल वहीं पर छूटट गया और मैंने फोन उठाकर दीदी के मैसेज पढ़े वो सारे मैसेज रोहन के थे.. मुझे उन मैसेज से कुछ गड़बड़ लगी। तभी कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.. फिर मेरा प्लास्टर खुल गया और में घूमने फिरने लगा.. लेकिन में अभी भी बाईक नहीं चला सकता था और रोज़ की तरह दीदी रोहन के साथ कॉलेज चली गयी और में घर में ही था और डॉक्टर ने मुझे कुछ दिन और आराम करने को कहा था। वो दिन के 2 बजे का टाईम था.. में कुछ समान लाने के लिए घर से बाहर निकला आते वक़्त में रोहन के घर की तरफ से आ रहा था तो मुझे रोहन की बाईक दिखी और मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि सुबह रोहन और मेरी दीदी कॉलेज गये थे तो अभी रोहन यहाँ पर क्या कर रहा है? और मुझे यह भी पता था कि रोहन के पापा और मम्मी दोनों ही जॉब करते है। तभी मैंने सोचा कि जो भी है.. चलते है.. रोहन से बातें करेंगे और मैंने बाहर का गेट खोलकर अंदर आकर घर की डोर बेल बजाई.. लेकिन किसी ने गेट नहीं खोला। में कुछ देर तक वहीं पर खड़ा था.. लेकिन कोई नहीं आया। फिर में वापस अपने घर की तरफ जाने लगा.. लेकिन में जैसे ही गेट के पास पहुंचा तो मुझे घर के अंदर से किसी की बातें करने की आवाज़ आई और में जाकर सुनने लगा.. लेकिन मुझे जो आवाज़ आ रही थी वो किसी लड़की की आवाज़ थी और वो कह रही थी कि प्लीज़ रोहन दर्द होगा.. प्लीज़ मुझे जाने दो इस पर रोहन कहता है कि कुछ नहीं होगा पहली बार दर्द होगा फिर तुम्हे मज़ा आएगा और आह्ह्ह उफ्फ्फ… की आवाज़ आ रही थी। तभी मुझे समझ में आ गया कि रोहन किसी लड़की को चोदने के लिए अपने घर लेकर आया है। 

फिर में चुपके से दूसरी साईड चला गया क्योंकि उसके घर में सिर्फ एक खिड़की थी जो कि पीछे की साईड बनी हुई थी.. में वहाँ पर चला गया और मैंने देखा कि रोहन और एक लड़की थी और दोनों किस कर रहे थे और मुझे देखकर बहुत मज़ा आ रहा था.. लेकिन उसके एक मिनट के बाद मुझे बहुत बड़ा शॉट लगा क्योंकि जब मैंने उस लड़की का चेहरा देखा तो वो कोई और नहीं मेरी दीदी प्रिया थी और मुझे यह सब देखकर बहुत अजीब सा लग रहा था कि मेरी दीदी मेरे दोस्त के साथ.. यह कैसे हो सकता है? फिर में वापस देखने लगा दीदी बार बार उससे दूर हटने की कोशिश कर रही थी और कह रही थी कि प्लीज रोहन मैंने कभी नहीं किया है.. मुझे बहुत डर लग रहा है। तभी रोहन दीदी से कहने लगा कि डरो मत प्रिया.. में बहुत धीरे धीरे से करूँगा और तुम्हे जरा भी दर्द नहीं होगा और यह कहकर उसने वापस मेरी दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और दीदी को लिप किस करने लगा। वो दीदी को किस करने के साथ साथ मेरी दीदी के बूब्स को टॉप के ऊपर से दबा रहा था और चूस रहा था और दीदी एह्ह्ह उफफ अह्ह्ह कर रही थी।

फिर वो बार बार अपना हाथ मेरी दीदी के टॉप के अंदर डाल देता और ब्रा के ऊपर से दीदी के बूब्स को दबाता। अब उसने मेरी दीदी के टॉप को निकाल दिया और वहीं ज़मीन पर गिरा दिया। मैंने पहली बार दीदी को ब्रा में देखा था। दीदी ने गुलाबी कलर की ब्रा पहन रखी थी.. रोहन मेरी दीदी के बूब्स देखने लगा और दीदी अपने हाथ से छिपाने की कोशिश कर रही थी। तभी रोहन आया और उसने दीदी का हाथ हटा दिया। उसने दीदी से कहा कि प्लीज़ प्रिया शरमाओ मत अभी बहुत मज़ा आएगा और दीदी की ब्रा ऊपर से थोड़ा सा हटाकर उनके बूब्स को चूमने लगा। दीदी बार बार पीछे हटने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन उसने दीदी को अपनी बाहों में जोर से जकड़ लिया और चूमने लगा अब उसने दीदी की ब्रा के हुक को खोल दिया और ब्रा को खींचकर निकाल दिया। मेरी दीदी के बूब्स हिलने लगे वो मेरी दीदी के बूब्स को देखकर पागल हो गया और उसने धीरे से दीदी के बूब्स पकड़े और दीदी की निप्पल को चूसने लगा। दीदी अह्ह्ह ऊउह्ह करने लगी और वो गले से लेकर दीदी की नाभि तक दीदी को किस कर रहा था। फिर उसने दीदी की जीन्स का बटन खोलकर चैन ढीली कर दी और अपना एक हाथ दीदी की पेंटी में डालकर रगड़ने लगा। दीदी उसका हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन उसने दीदी को पूरा जकड़ रखा था और दीदी की चूत में हाथ डाल कर रगड़ रहा था.. दीदी आह्ह्ह ओह्ह्ह माँआआअह्ह मरी में कर रही थी.. प्लीज़ रोहन आह्ह्ह बस करो.. लेकिन रोहन मानने वाला कहाँ था। उसने दीदी की जीन्स खोल दी और अब दीदी सिर्फ़ गुलाबी कलर की पेंटी में थी और वो नीचे अपने घुटनो के बल बैठ गया और दीदी की चूत के पास सूंघने चाटने लगा और किस करने लगा और दीदी उसके सर को पकड़े हुई थी।

फिर उसने दीदी की पेंटी निकाल ली और उसे सूंघने लगा और चाटने लगा। अब उसने अपनी पेंट भी उतार ली और वो भी पूरा नंगा हो गया और उसने दीदी से लंड चूसने के लिए कहा.. लेकिन दीदी ने मना कर दिया। फिर उसने कहा कि कोई बात नहीं.. अगली बार फिर उसने दीदी को लेटा दिया और उसने मेरी दीदी के पैरों को फैला दिया जिससे दीदी की चूत साफ साफ दिखने लगी.. दीदी ने तुरंत अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख दिया। तभी उसने कहा कि प्लीज़ प्रिया तुम शरमाओ मत और यह कहकर उसने दीदी का हाथ हटा दिया। दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था.. वो अह्ह्ह उफ्फ्फ करने लगा और वो अपना लंड सहलाते हुए कहने लगा कि आहह प्रिया क्या चूत है तेरी.. आज मज़ा आ जाएगा और मेरी दीदी की चूत पर अपना लंड लगा कर चाटने लगा और दीदी उसके बाल पकड़कर बार बार पीछे हो रही थी और वो दीदी की जांघो को पकड़ कर उन्हें आगे की तरफ खींच रहा था और दीदी की चूत चाट रहा था।

तभी दीदी की सिसकियों की आवाज़ मेरे कानो में आ रही थी। दीदी अब अपने हाथों से अपने बूब्स को पकड़कर अपने निप्पल को मसल रही थी और अपने दांतों से होंठो को दबा रही थी। मेरा दोस्त अपने घुटनो के बल बैठ गया और एक हाथ से अपना लंड पकड़कर दीदी की चूत पर रगड़ने लगा। दीदी बहुत डर रही थी। वो बार बार रोहन से कह रही थी कि प्लीज़ रोहन दर्द होगा धीरे धीरे करना और उसके लंड के रगड़ने से सिसकियां ले रही थी। तभी उसने एक धीरे से धक्का दिया और दीदी पीछे की तरफ हो गयी। उसका लंड अभी घुसा नहीं था। वो दीदी से कहने लगा कि डरो मत प्रिया कुछ नहीं होगा और उसने फिर दीदी के जांघो को कसकर पकड़ लिया और एक जोर का धक्का दिया। तभी दीदी बहुत जोर से चीख पड़ी.. माँआआ मरी में बचाओ मुझे। तभी मैंने देखा कि रोहन के लंड का टोपा दीदी की चूत में चला गया था और वो रुक गया और दीदी अपनी उंगली को दातों से दबाए हुए थी और उनकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।

तभी रोहन ने अपना लंड बाहर निकाला तो उसके लंड पर दीदी की चूत का खून लगा हुआ था और वो मेरी दीदी की तरफ देख रहा था। फिर उसने कहा कि देख प्रिया तेरी सील टूट गई.. तेरा खून लगा हुआ है और फिर उसने दीदी के पैरो को फैला दिया। तभी मैंने देखा कि मेरी दीदी की चूत से खून निकल रहा था और दीदी उठकर बैठ गयी और वो खून देखकर थोड़ा सा डर गयी थी। फिर रोहन ने कहा कि डरो मत पहली बार खून निकलता है और दीदी की चूत को जीभ से चाटने लगा और उसने अपनी जीभ से चाटकर दीदी का पूरा खून साफ किया। तभी दीदी ने उसे कहा कि रोहन मुझे बहुत दर्द हो रहा है वो दीदी के पास लेट गया और दीदी को किस करने लगा। उसने कहा कि प्रिया बस हो गया अब दर्द नहीं करेगा.. बस पहली बार दर्द होता है और वो दीदी को किस करते करते दीदी के बूब्स को मसलने लगा। तभी कुछ देर में दीदी फिर से गरम हो गयी। अब वो मेरी दीदी के ऊपर लेट गया और दीदी से अपने पैर फैलाने को कहा.. दीदी ने भी अपने पैर फैला दिए और उसने धीरे से अपना लंड मेरी दीदी की चूत में घुसा दिया और फिर धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा।

फिर दीदी अह्ह्ह ससस्स करने लगी और रोहन का आधा लंड मेरी दीदी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था। उसने चोदते चोदते दीदी से कहा कि प्रिया जब से मैंने तुझे देखा है.. में तुझे चोदना चाहता था और आज में जी भरके तुझे चोदूंगा और वो धीरे धीरे मेरी दीदी को चोदने लगा। अब उसने मेरी दीदी के निप्पल को अपने मुहं में ले लिया और ज़ोर से धक्का दिया दीदी पूरा पीछे की तरफ हो गयी और उसका पूरा लंड एक ही बार में मेरी दीदी की चूत में चला गया और वो पूरी ताक़त से मेरी दीदी को चोदने लगा दीदी चीख रही थी और वो अपने सर को इधर उधर कर रही थी। तभी थोड़ी देर चोदने के बाद रोहन झड़ गया। उसने अपना वीर्य मेरी दीदी की चूत में गिरा दिया और थोड़ी देर तक रोहन मेरी दीदी के ऊपर लेटा रहा और धीरे धीरे मेरी दीदी को चोदता रहा। कुछ देर बाद वो दीदी के ऊपर से हट गया और उसने मेरी दीदी की पेंटी उठाई और दीदी की चूत को साफ किया और फिर दोनों ने अपने कपड़े पहने और कुछ देर रोहन दीदी को किस करता रहा और उस दिन के बाद रोहन ने कई बार मेरी दीदी को चोदा है ।



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