Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - Printable Version

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RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

फिर वहीं दूर खड़े खड़े ही अपनी क़मीज़ उतारने लगीं। क़मीज़ उनके मम्मों के ऊपर से होती हु‌ई सर पर आयी जिसे उतार कर उन्होंने उसे बेड पर एक तरफ रख दिया। उनका गोरा जिस्म रोशनी में निहायत खूबसूरत लग रहा था। बड़े-बड़े उभरे हु‌ए मम्मे लाल रंग की ब्रा में से काी हद तक नंगे नज़र आ रहे थे और यों लग रहा था जैसे दो लाल तोपों ने अपने दहाने मेरी तरफ कर रखे हों। अम्मी के मम्मे बड़े और भारी होने के साथ-साथ काफ़ी चौड़े भी थे और ऐसा लगता था जैसे उनके दोनों मम्मों के दरमियाँ बिल्कुल को‌ई फासला नहीं था। अम्मी का बेदाग और फ्लैट पेट और बिल्कुल गोल नाफ भी नज़र आ रहे थे। मैंने सोचा के क्या अब्बू का दिमाग खराब है जो अम्मी जैसी खूबसूरत और हसीन सैक्सी औरत को चोदना नहीं चाहते? ऐसा कौन सा मर्द होगा जो अम्मी की चूत नहीं लेना चाहेगा।



अम्मी चलती हुई मेरे बेड के पास आ गईं. अब उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी. उन्होने देख लिया था के में उनके बदन को ललचाई हुई नज़रों से देख रहा था. वो ब्रा और शलवार उतारे बगैर ही बेड पर चढ़ कर मेरे साथ लेट गईं. मै हज़ारों दफ़ा अपनी अम्मी के साथ एक ही बेड पर लेटा था मगर आज की रात मामला ज़रा मुख्तलीफ़ था. । 

मैंने भी फॉरन अपने कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगा हो कर अम्मी की तरफ करवट ली और उन से लिपट गया. जैसे ही मेरा नंगा बदन उन के आधे नंगे बदन से टकराया मुझे लगा जैसे मेरे लंड में आग सी लग गई हो. अम्मी का बदन नर्म-ओ-मुलायम और हल्का सा गरम था. मेरा लंड फॉरन ही खड़ा होने लगा. अम्मी ने अपनी रानों के पास मेरे लंड का दबाव महसूस किया और मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में किसी क़िसम की ताश्वीश या शर्मिंदगी नही थी.

उसी वक़्त मेरे ज़हन में एक बहुत ही परेशान-कुन ख़याल आया। मैंने ब्लू-फिल्मों में चुदा‌ई का काफ़ी मुशाहिदा किया था और या फिर नज़ीर को अम्बरीन खाला की फुद्दी लेते हु‌ए देखा था। लेकिन आज तक मुझे किसी औरत को चोदने का इत्तेफ़ाक नहीं हु‌आ था। मेरे दिल में अचानक ये खौफ पैदा हु‌आ कि कहीं ऐसा ना हो मैं अम्मी को अपनी ना-तजुर्बेकारी की वजह से ठीक तरह चोद ना सकूँ। फिर क्या होगा? मैं इस एहसास-ए-कमतरी का भी शिकार था कि राशिद चुदा‌ई में मुझ से ज्यादा तजुर्बेकार और बेहतर था। मैंने खुद अपनी आँखों से उसे अम्मी को चोद कर उनकी फुद्दी में अपनी मनि छोड़ते हु‌ए देखा था। उसने यक़ीनन और भी क‌ई दफ़ा अम्मी की फुद्दी मारी थी और मुझे ये भी एहसास था कि वो अम्मी को तसल्लीबख्श तरीके चोदता होगा क्योंकि अगर ऐसा ना होता तो अम्मी बार-बार उसे अपनी फुद्दी मारने देतीं? आज अगर में अम्मी को राशिद जैसा मज़ा ना दे सका तो क्या होगा? अम्मी ने मुझे बताया था के अब्बू उन्हें अब कभी-कभार ही चोदते थे। उन्हें मुझ से भी मज़ा ना मिला तो वो अपना वादा तोड़ कर दोबारा राशिद से चुदवाना शुरू कर सकती थीं। ये बात मुझे हरगिज़ क़बूल नहीं थी। मुझे हर सूरत में एक काबिल मर्द की तरह अम्मी की चूत की ज़रूरियात पूरी करनी थीं। 

अम्मी मेरे चेहरे से भाँप गयीं के मुझे को‌ई परेशानी लहक़ है। उन्होंने पूछा – “क्या बात है, शाकिर? क्या सोच रहे हो?” मैं कुछ सटपटा सा मगर फिर उन्हें बता ही दिया कि – “अम्मी, आज मैं पहली दफ़ा सैक्स कर रहा हूँ और मैं डर रहा हूँ कि कहीं आपको मुझे अपनी चूत देकर मायूसी ना हो। मैं जल्दी खल्लास होने से डरता हूँ और इसी वजह से कुछ परेशान हूँ।“ 

अम्मी हंस पड़ीं और मेरा हौसला बढ़ाते हु‌ए कहा – “पहली दफ़ा सब के साथ ऐसा ही होता है। तुम फिक्र ना करो। चुदा‌ई इंसान की फ़ितरत है और रफ़्ता-रफ़्ता खुद-ब-खुद ही सब कुछ समझ आ जाता है।“ मैं उनकी बात गौर से सुन रहा था। फिर उन्होंने कहा कि – “तुम तो कम-उम्र लड़के हो... तुम से चुदवा कर तो हर औरत खुश होगी। कुछ ही दिनों में तुम इस काम में माहिर हो जा‌ओगे! और फिर मैं तो तजुर्बेकार हूँ... कितनों को... मेरा मतलब राशिद को भी सिखाया है तो वैसे ही तुम्हारी मदद भी करुँगी।” 

मैं पूर-सकून हो गया। मैंने अपने ज़हन में सर उठाते हु‌ए खौफ से तवज्जो हटाने की कोशिश की और अम्मी के गालों को ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया और अपने बाज़ू मेरी कमर के गिर्द लपेट कर मुझे अपने ऊपर आने दिया। मैंने अपने दोनों बाज़ू उनकी गर्दन में डाले और उन से पूरी तरह चिपक कर उन्हें चूमने लगा। मैंने अम्मी के होठों, गालों, ठोड़ी और गर्दन को चूम-चूम कर उनका पूरा चेहरा गीला कर दिया। वो भी इस चूमाचाटी का मज़ा ले रही थीं। फिर उन्होंने मेरे मुँह के अंदर अपनी ज़ुबान डाली तो मैंने उनकी जीभ अपने होठों में पकड़ी और उसे चूसने लगा। मेरे मुँह के अंदर मेरी और उनकी ज़बानें आपस में टकरातीं तो अजीब तरह का मज़ा महसूस होता। तजुर्बा ना होने की वजह से उनकी जीभ कभी मेरे होठों से निकल जाती तो वो फौरन उसे दोबारा मेरे होठों में दे देतीं। मुझे अम्मी की जीभ चूसने में गज़ब का लुत्फ़ आ रहा था। मेरा लंड अम्मी के नरम पेट से नीचे उनकी सलवार में घुसा हु‌आ था। 

अम्मी के चेहरे के तासुरात से लग रहा था कि कम-अज़-कम अब तक तो मैं ठीक ही जा रहा था। मैं अम्मी से बुरी तरह चिपटा हु‌आ उन्हें चूम रहा था और वो भी मेरी ताबड़तोड़ चुम्मियों का जवाब दे रहीं थीं। हमारी साँस चढ़ गयी थी। अम्मी अब वाज़ेह तौर पर बेहद गरम होने लगी थीं। उनका जिस्म जैसे हल्के बुखार की कैफियत में था। अपनी अम्मी को चोदने का ख्याल मुझे पागल किये दे रहा था। मेरे ज़हन से अब जल्दी खल्लास होने का डर भी निकल चुका था। मैंने सोचा के ब्लू-फिल्मों से सीखी हु‌ई चीजें कामयाबी से कर के अम्मी को इंप्रेस करने का यही वक़्त है। 

मैं अम्मी के ऊपर से उठ गया और उन्हें करवट दिला कर सा‌इड पर कर दिया। फिर मैंने कमर पर से उनकी ब्रा खोल कर उसे उनके जिस्म से जुदा कर दिया। इस पर अम्मी ने खुद ही अपनी सलवार और पैंटी उतार कर टाँगों से अलग कर दी। अब वो सिर्फ ऊँची हील वाली सैंडल पहने हु‌ए मुकम्मल नंगी हालत में थीं। मैंने उन्हें सीधा करने के लिये आगे हाथ ले जा कर उनके मोटे-मोटे नंगे मम्मों को हाथों में दबोच लिया और उन्हें अपनी जानिब खींचा। उन्होंने अपने खूबसूरत और दिलनशीं जिस्म को संभालते हु‌ए मेरी तरफ करवट ले ली। मैंने उनके दूधिया मम्मों को पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया। मेरी नज़र में मम्मे औरत के जिस्म का सब से शानदार हिस्सा होते हैं और मेरी अम्मी के मम्मों की तो बात ही कुछ और थी। मैंने अम्मी के दोनों मम्मों को बारी-बारी इस बुरी तरह चूसा और चाटा के उनका रंग लाल हो गया। अम्मी के निपल्स को मैंने इतना चूसा कि वो अकड़ कर बिल्कुल सीधे खड़े हो गये थे। 

मैं उनकी ये बात बिल्कुल भूल चुका था कि मम्मों के साथ नर्मी और एहतियात से पेश आना चाहिये। क‌ई दफ़ा जब मैंने उनके मम्मे ज़ोर से चूसे या दबाये तो वो बे-साख्ता कराह उठीं लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं। अपने मम्मे चुसवाने के दौरान अम्मी काफ़ी मचल रही थीं और मुसलसल अपना सर इधर-उधर घुमा रही थीं। जब मैं उनके मम्मों के निप्पल मुँह में ले कर उन पर ज़ुबान फेरता तो वो बे-क़ाबू होने लगतीं और मुझे उनके जिस्मानी रद्द-ए-अमल से महसूस होता जैसे वो अपने पूरे मम्मे मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हैं। उनके निप्पल भी बे-इंतेहा लज्ज़तदार थे। मुझे उन्हें चूसने में ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था। मेरे लंड की भी बुरी हालत हो रही थी जिसे शायद अम्मी ने महसूस कर लिया था और वो अपना हाथ मेरे अकड़े हु‌ए लंड पर रख कर बड़ी नरमी से ऊपर-नीचे फेरने लगीं। जब उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में लिया तो मुझे अपने टट्टों में अजीब किस्म का खिंचाव महसूस होने लगा।


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

कुछ देर तक अम्मी के दोनों मम्मों को चूसने के बाद मैं सरक कर अम्मी की टाँगों की तरफ आया तो उन्होंने अपनी टाँगें फैला दीं। मैं उनकी फैली टाँगों के बीच में आ गया। अब मैं उनकी दिलकश चूत का नज़ारा देख रहा था। अम्मी की चूत भी अम्बरीन खाला की चूत की तरह बगैर-बालों के बिल्कुल साफ और चिकनी थी। फूली होने के बावजूद उनकी चूत सख्ती से बंद नज़र आ रही थी। मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरा तो उन्होंने शायद गैर-इरादी तौर पर उन्होंने अपनी टाँगें बंद करने की कोशिश की मगर मैं अपने सर को नीचे कर के उनकी टाँगों के बीच में ले आया और मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर रख दिया। यहाँ भी ब्लू-फिल्में ही मेरे काम आ‌ईं। मैंने अम्मी की चूत पर ज़ुबान फेरी और उसे ज़ोरदार तरीक़े से चाटने लगा। मेरे लि‌ए चूत चाटने का यह पहला मौका था मगर जल्द ही मैं जान गया के अम्मी को खुश करने के लिये मुझे क्या करना है। अम्मी की टाँगें अकड़ गयी थीं और उनका एक हाथ मुसलसल मुझे अपने सर को सहलाता हु‌आ महसूस हो रहा था। उनके मुँह से वाक़फे-वाक़फे से सिसकने की आवाज़ आ रही थी। मैंने अपनी ज़ुबान उनकी चूत पर फेरते-फेरते उनके चूतड़ों पर हाथ फेरा तो मुझे अचानक उनकी गाँड का सुराख मिल गया। मैंने फौरन सर झुका कर उसे भी चाट लिया। गाँड चाटने से मुझे भी बहुत मज़ा आया और अम्मी को भी मज़ा आने लगा और थोड़ी ही देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया। उसका नमकीन ज़ायक़ा अपनी ज़ुबान पर महसूस कर के मुझे फख्र हु‌आ कि मैं अम्मी को फारिग करने में कामयाब हो गया था। 

उनके फारिग होने के बाद कुछ देर हम दोनों नंगे एक-दूसरे की बांहों में लेटे रहे। मुझे इस बात की खुशी थी कि मेरी कारगुजारी से अम्मी झड़ चुकी थीं मगर मेरा लंड अभी चूत की गिरफ्त से नावाकिफ था। उसकी बेचैनी को महसूस कर के अम्मी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और उसे बड़ी नर्मी से मुट्ठी में लिया और अपना हाथ ऊपर नीचे करने लगीं। मैं बहुत बार मुट्ठी मार चुका था पर अम्मी के हाथ का मज़ा ही अलग था। फिर अम्मी घुटनों के ज़ोर पर बेड पर बैठ गयीं और मेरे ऊपर झुक कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। मैंने ब्लू-फिल्मों में भी यही होते देखा था और अम्बरीन खाला ने भी नज़ीर के साथ यही किया था। मेरे लंड का टोपा अम्मी के मुँह के अंदर चला गया और वो उस पर अपनी ज़ुबान फेरने लगीं। मैंने अम्मी को राशिद का लंड भी चूसते हु‌ए देखा था। उस वक़्त तो उन्होंने काफी जल्दी में राशिद के लंड को चूसा था मगर मेरे लंड को वो बड़ी महारत और आराम से चूस रही थीं।

उन्होंने पहले तो मेरे लंड के गोल-टोपे पर अच्छी तरह अपनी ज़ुबान फेर कर उसे गीला कर दिया और फिर लंड के निचले हिस्से को चाटने लगीं। फिर इसी तरह मेरे लंड पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर उनकी ज़ुबान गर्दिश करती रही। लंड चूसते-चूसते अम्मी की ज़ुबान बहुत गीली हो चुकी थी और जब वो मेरे लंड को अपने मुँह के अंदर करतीं तो ऐसे लगता जैसे मेरा लंड पानी के गिलास के अंदर चला गया हो। कुछ ही देर में मेरा लंड टोपे से ले कर टट्टों तक अम्मी के थूक से भर गया। उनके मुँह में भी बार-बार थूक भर जाता था लेकिन वो एक लम्हे के लिये रुक कर उसे निगल लेतीं और फिर मेरा लंड चूसने लगतीं। 

यकायक अम्मी ने बड़ी तेज़ी से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। उनका चेहरा लाल हो चुका था। मेरे टोपे को उन्होंने होंठों में ले कर ज़ोर-ज़ोर से चूसा तो मेरे लंड में तेज़ सनसनहट होने लगी और मेरे टट्टे सख्त होने लगे। मुझे लगा जैसे मैं खल्लास हो जा‌ऊँगा। मैंने अम्मी को रोकना चाहा मगर उन्होंने नहीं सुना। फिर मैंने देखा कि उन्होंने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रखा हु‌आ था और बड़ी उंगली अपनी चूत के अंदर डाल कर उसे तेज़ी से अंदर-बाहर कर रही थीं।

मैं समझ गया कि उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा और वो खल्लास होने के करीब हैं। अम्मी को अपनी चूत में उंगली करते देख कर मैं भी सब्र ना कर सका उनके मुँह में ही मेरे लंड से झटकों के साथ मनि निकलने लगी। अपने मुँह के अंदर मेरी मनि को महसूस करके अम्मी ने मेरा लंड पर अपने होंठ और ज़ोर से जकड़ दिये और मेरे टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ कर दबाने लगीं। अम्मी जल्दी-जल्दी मेरी मनि निगल रही थीं लेकिन मेरे लंड से इतनी तादाद में मनि निकल रही थी कि उन्हें मुँह खोलना ही पड़ा जिससे मेरी मनि उनके होंठों और गालों पर भी गिरने लगी। अम्मी खुद भी तेज़-तेज़ साँसें लेती हु‌ई खल्लास होने लगीं। उनका मुँह खुल गया और आँखें बंद हो गयीं। मैंने जल्दी से हवा में झूलता हु‌आ उनका एक मम्मा मुठी में जक्ड़ लिया और अपना लंड फिर उनके मुँह में देने की कोशिश की मगर उन्होंने ज़ुबान से ही मेरे टोपे पर लगी हु‌ई मनि चाट ली।

फारिग होने के बाद हमारे औसान बहाल हु‌ए तो मैंने कहा – “अम्मी, आप तो कमाल का लंड चूसती हो। मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं आया। मगर मैं आपकी चूत तो चोद ही नहीं सका और आपके मुँह में ही निपट गया।“ 

उन्होंने हंस कर जवाब दिया – “अगर तुम मेरे मुँह में फरिग नहीं होते तो मुझे तुम्हारी मनी का लज़ीज़ ज़ायका कैसे मिलता। और फिर अभी तो एक ही बजा है। तुम थोडा आराम कर के अपनी ताक़त फिर से हासिल कर लो। फिर तुम अपनी बाकी मुराद भी पूरी कर लेना।“ मैंने सोचा के अब मुझे नींद तो आने से रही। लेकिन ऐसा नहीं हु‌आ। अम्मी मेरे सर पर हाथ फेरने लगीं तो मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब नींद की आगोश में चला गया। अम्मी शायद अपने तजुर्बे से जानती थीं कि झड़ने के बाद अमूमन मर्दों को नींद आ जाती है।

को‌ई एक घंटे के बाद मेरी नींद तब खुली जब मैंने अपने लंड पर एक निहायत पुरलुत्फ जकड़न महसूस की। मैंने आँखें खोली तो पाया कि मेरा तना हु‌आ लंड अम्मी की मुट्ठी में था। कमरे की ला‌इट अभी भी ऑन ही थी और अम्मी भी पहले जैसे बिल्कुल नंगी थीं और उन्होंने ऊँची ही वाले सैंडल भी नहीं उतारे थे। अम्मी ने मुस्कराते हु‌ए कहा – “शायद तुम को‌ई खुशनुमा ख्वाब देख रहे थे। तभी ये नींद में ही खड़ा हो गया।“ मैं अम्मी को लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया और उनके जिस्म को चूमने चाटने लगा। मेरा लंड बेचैन हो चुका था। मैं उस वक़्त दुनिया जहान से बेखबर था और सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी अम्मी के पुरकशिश और गदराये हु‌ए जिस्म से पूरी तरह लुत्फ़-अंदोज़ होना चाहता था। शायद क़यमत भी आ जाती तो मुझे पता ना चलता। मैं उनके ऊपर लेट कर उनका एक मम्मा पकडे हु‌ए उनकी गर्दन के बोसे ले रहा था कि अचानक अम्मी ने अपनी टाँगें पूरी तरह खोल दीं। मेरा तना हु‌आ लंड उनकी चूत के ऊपर टकरा गया। मैंने महसूस किया कि अम्मी ने आहिस्ता से अपने जिस्म को ऊपर की तरफ़ उठया और अपनी चूत से मेरे लंड पर दबाव डाला। मैं बे-खुद सा हो गया और अपना एक हाथ नीचे ले जा कर उनकी चूत को बड़ी तेज़ी और बे-दर्दी से मसलने लगा। अम्मी की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वो अब बहुत ज्यादा गरम हो रही थीं और सिसकियाँ ले रही थीं। अब अपनी अम्मी की चूत में लंड घुसाने का वक़्त आ पुहँचा था। 

मैंने अपना लंड अम्मी की चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की मगर मुझे कामयाबी नहीं मिली। अम्मी मेरी नातजुर्बेकारी को समझ गयीं। अभी मैं अम्मी की चूत में अपना टोपा घुसाने की कोशिश कर ही रहा था कि मेरी मदद करने की खातिर उन्होंने अपना हाथ नीचे किया और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाया और फिर उनकी कमर उठी और मेरा लंड अम्मी की चूत को फैलाता हु‌आ उसके अंदर समाने लगा। उनकी चूत अंदर से नरम और गीली थी। अगरचे मेरा लंड बड़ी आसानी से अम्मी की चूत के अंदर गुसा था मगर इसमें को‌ई शक नहीं था कि उनकी चूत काफी टा‌इट थी।

जैसे ही मेरा लंड अम्मी की चूत के अंदर गया मुझे उनकी चूत आहिस्ता-आहिस्ता खुलती हु‌ई महसूस हु‌ई और मेरा लंड टट्टों तक उसके अंदर गायब हो गया। उन्होंने हल्की सी सिसकी ली और अपने दोनों हाथ मेरे बाजु‌ओं पर रख कर अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर-नीचे किया ताकि मेरा लंड अच्छी तरह उनकी चूत में अपनी जगह बना ले। मैं पहली बार अपने लंड पर चूत की कसावट महसूस कर रहा था और यह एहसास नाकाबिले-बयां था। लंड अंदर जाते ही मैंने बे-साख्ता घस्से मारने के लिये अपने जिस्म को ऊपर-नीचे करने शुरू कर दिया। ये बिल्कुल क़ुदरती तौर पर हु‌आ था। 


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

अचानक अम्मी सिसकते हु‌ए बोलीं – “इतने बेकरार मत हो... तुम जल्दबाज़ी करोगे तो पूरा मज़ा नहीं ले सकोगे! जैसा मैं कहती हूँ वैसा करो।“ मैंने बामुश्किल अपने धक्कों को रोका। अम्मी ने मेरे चेहरे को अपनी जानिब खींचा और मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिये। उनके बोसे का मज़ा लेने के साथ-साथ मैंने अपने लंड के र्गिर्द अम्मी की चूत की गिरफ्त को महसूस किया। कुछ देर बाद अम्मी अपने चूतड़ हौले-हौले उठा कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगीं। उन्होंने मुझे आँखों से इशारा किया कि मैं भी धक्के मारूँ। मैंने उनकी ताल से ताल मिला कर हलके-हलके धक्के लगाने लगा। अम्मी ने एक हाथ लंबा करके चूतड़ पर रखा हु‌आ था और ज़ोर दे कर मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगीं। कुछ घस्सों के बाद मेरा लंड आसानी से अम्मी की चूत के अंदर बाहर होने लगा तो अम्मी ने अपने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी। अब हम दोनों एक दूसरे के घस्सों का जवाब पुरजोर घस्सों से दे रहे थे। मुझे अम्बरीन खाला याद आयी। वो भी इसी तरह अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर नज़ीर से चुदी थीं। अम्मी कुछ देर तो दबी आवाज़ में सिसकते हु‌ए चुदती रहीं लेकिन जब मेरे लंड के झटके तेज़ हो गये तो उन्होंने खुल कर ज़ोर-ज़ोर से “ऊँह... आ‌आहहह... ओहहह” करना शुरू कर दिया।

अम्मी को चोदते हु‌ए मैं मज़े के एक गहरे समंदर में गोते खा रहा था। उनके मुँह से निकलने वाली बेधड़क सिस्कारियाँ मुझे और भी पागल करने लगीं। इन आवाज़ों ने मेरे ज़हन को बड़ा सकून बख्शा और मेरे एहतमाद में इज़ाफ़ा हु‌आ कि मैं अम्मी को चुदा‌ई का मज़ा देने की सलाहियत रखता हूँ। कुछ देर के बाद अम्मी की साँसें तेज़ हो गयीं। उन्होंने नीचे लेटे-लेटे अपनी गाँड को गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया और मेरा सर नीचे कर के मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये और खूब कस कर मुझे चूमने लगीं। उनकी चूत में बला की कसावट आ गयी थी। 

मेरे नीचे उनके चूतड़ों की हरकत और तेज़ हो गयी। मुझे ऐसा महसूस हु‌आ जैसे अम्मी की चूत ने मेरे लंड को सख्ती से अपनी गिरफ्त में जकड लिया हो। अब मैं समझ गया कि अम्मी खल्लास होने वाली थीं। मुझे ये जान कर बहुत खुशी हु‌ई और मैं उनकी चूत में ज्यादा रफ़्तार से घस्से मारने लगा। मैं इस काबिल तो हो ही गया था कि अपनी अम्मी को चोद कर खल्लास कर सकूँ। अम्मी की चूत अब लगातार पानी छोड़ रही थी और उनके जिस्म में बुरी तरह झटके लग रहे थे। इन हालात में मेरे लिये अपने आप को संभालना मुश्किल हो रहा था। मैंने बिला सोचे समझे अपना लंड अम्मी की पानी से भरी हु‌ई चूत से बाहर निकाल लिया और उनकी बगल में लेट गया। 

अम्मी का जिस्म चंद लम्हे ऐसे ही लरजता रहा। फिर उन्होंने अपनी साँसें क़ाबू में करते हु‌ए मुझ से पूछा कि क्या हु‌आ। मैंने कहा – “मुझे फारिग होने का डर था। इसलिये घस्से मारने बंद कर दिये क्योंकि मैं और मज़े लेना चाहता था।“

वो एक बार फिर हंस कर बोलीं – “शाकिर, तुम एक घंटे पहले ही खल्लास हु‌ए हो। मर्द एक दफ़ा झड़ने के बाद दूसरी बार उतनी जल्दी नहीं छूटते? परेशान मत हो... रफ़्ता-रफ़्ता सब समझ जा‌ओगे बस थोड़े तजुर्बे की जरूरत है... चलो आ‌ओ और खुद को डिसचार्ज करो ताकि इस काम का मज़ा तो ले सको!”

मैंने उनसे पूछा कि उन्हें मज़ा आया क्या तो उन्होंने कहा कि अगर मज़ा नहीं आता तो वो दो दफ़ा खल्लास कैसे होतीं। फिर वो उठीं और घूम कर अपनी दोनों कुहनियों और घुटनों के सहारे बेड पर घोड़ी बन गयीं और अपने मस्त मोटे-मोटे चूतड़ों को ऊपर उठा दिया और बोलीं कि अब मैं उन्हें पीछे से चोदूँ। इस तरह अम्मी ने अपनी हसीन गाँड का रुख मेरी तरफ कर दिया और अपनी टाँगें भी फैला लीं। 

मैंने उठ कर अम्मी के चूतड़ों में से झाँकते हु‌ए उनकी गाँड के छोटे से गोल सुराख पर उंगली फेरी तो मेरा लंड फिर अकड़ने लगा। अम्मी की चूत अब उनके उभरे हु‌ए चूतड़ों के अंदर उनकी गाँड के सुराख से ज़रा नीचे नज़र आ रही थी। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रख कर उसे अपने टोपे के ज़रिये महसूस किया। अम्मी ने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा पीछे किया और मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में घुसेड़ दिया। अम्मी की चूत अभी भी गीली थी इसलिये मेरे लंड को उस के अंदर दाखिल होने में को‌ई मुश्किल पेश नहीं आयी। मैंने अम्मी के हसीन गदराये चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उनकी चूत में घस्से मारने लगा।

मुझे ऊपर से अपना लंड अम्मी के गहरे चूतड़ों में से गुज़रता हु‌आ उनकी चूत में अंदर-बाहर होता नज़र आ रहा था। वो भी मेरे लंड पर अपनी चूत को आगे पीछे कर रही थीं। मेरा लंड अम्मी के गदराये हु‌ए चूतड़ों के अंदर छुपी हु‌ई उनकी चूत को चोद रहा था। मैंने उनकी कमर पर हाथ रखे और उनकी चूत में घस्से पे घस्से लगाने लगा। मुसलसल घस्सों की वजह से अम्मी के चूतड़ों में एक इर्ति‌आश की सी कैफ़ियत पैदा हो रही थी और उनके चूतड़ लरज़ रहे थे। फिर मुझे अपने लंड पर अजीब किस्म का लज़्ज़त-अमेज़ दबाव महसूस होने लगा। मैंने गैर-इरादी तौर पे अम्मी की चूत में घस्सों की रफ़्तार बढ़ा दी।

अम्मी को शायद इल्म हो गया कि मैं अब फारिग होने वाला हूँ और उन्होंने भी अपने चूतड़ों को बड़े नपे-तुले अंदाज़ में मेरे लंड पर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड पर भींचना शुरू कर दिया। ताबडतोड धक्कों के बीच उनकी चूत में मेरे लंड से पानी की बौछार शुरू हो गयी। मेरे रग-रग में एक मदहोश कर देने वाली अजीब-ओ-ग़रीब लज्ज़त का तूफान उठ रहा था। ठीक उसी वक़्त अम्मी की चूत ने एक दफ़ा फिर मेरे लंड को अपने शिकंजे में कसा और अम्मी भी मेरे साथ फिर खल्लास हो गयीं। मैं अम्मी को बांहों में भींच कर उनके ऊपर पसर गया। तूफ़ान के गुजरने के बाद अम्मी ने उठ कर मेरा गाल चूमा और कपड़े उठा कर बिल्कुल नंगी ही ऊँची हील की सैंडलों में गाँड मटकाती अपने कमरे में चली गयीं। 

मुझे अपनी पहली चुदा‌ई में इतना मज़ा आया कि मेरा मन उन्हें फिर से चोदने के लि‌ए मचल रहा था। अब्बू के वापस लौटने में कुछ दिन बाकी थे। अगली रात मैं बेकरारी में करवटें बदलते-बदलते सो गया। सपने में मैं अपने लंड को सहला रहा था और दु‌आ कर रहा था कि खुदा मुझ पर मेहरबान हो जाये और अम्मी को मेरे पास भेज दे। मैंने अपने लंड को मुट्ठी में ले कर दबाया तभी मेरी नींद टूट गयी। ये क्या? अम्मी मेरे पास लेटी थीं और मेरा लंड उनकी मुट्ठी में था। उन्होंने मुस्कुरा कर पूछा – “तुम को‌ई ख्वाब देख रहे थे?” 

मैंने शरमा कर कहा – “मैं तो ख्वाब में आपके आने का इंतज़ार कर रहा था। मुझे गुमान ही नहीं था कि आप हकीकत में आ जायेंगी।“ 

अम्मी ने प्यार से कहा – “अब आ गयी हूँ तो जो तुम ख्वाब में करना चाहते थे वो हकीकत में कर लो।“ यह सुन कर मेरा दिल खुशी से उछलने लगा। मैंने अम्मी को अपनी बांहों में भींच लिया। फिर तो पिछली रात वाला सिलसिला फिर से शुरू हो गया और मैंने जी भर कर अम्मी को चोदा। अगली रात को भी यही हु‌आ। दिन भर मैं आने वाले इम्तिहानात के लिये दिल लगा कर पढ़ायी करता था और तीन घंटे के लिये ट्यूशन भी जाता था और रात को अम्मी और मैं चुदा‌ई करते थे। अब्बू के वापस लौटने में कुछ दिन बाकी थे। तीसरी रात को चुदा‌ई के एक दौर के बाद अम्मी ने मेरा गाल चूमते हु‌ए कहा कि – “तुम बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ!” फिर वो बोलीं कि – “राशिद दो दिनों में कईं दफ़ा उन्हें फोन करके चुदा‌ई के लिये इल्तज़ा कर चुका है और राशिद को इस तरह तड़पाना उन्हें अच्छा नहीं लग रहा।“ मैंने थोड़ा नाराज़ होते हु‌ए उनसे पूछा कि क्या मैं उन्हें चुदा‌ई में मुत्तमा‌इन नहीं कर पा रहा तो अम्मी ने समझाया कि ऐसी बात नहीं है लेकिन बेचारे राशिद के भी तो इम्तिहान हैं और वो चुदा‌ई की बेकरारी में पढ़ा‌ई में ध्यान नहीं दे पा रहा है। अगर वो दिन के वक्त राशिद से चुदवा लेंगी तो वो भी मुत्तमा‌इन हो कर दिल लगा कर पढ़ा‌ई कर सकेगा। नहीं तो कहीं फेल ना हो जाये। मैंने बहुत बे-दिल से अम्मी को अपनी रज़ामंदी दे दी। अम्मी ने खुश होकर मुझे गले लगा लिया और देर रात तक हम चुदा‌ई करते रहे। अगले दिन मेरे ट्यूशन जाने के वक़्त पे अम्मी ने राशिद को बुला लिया और मेरे वापस आने से पहले राशीद मेरी अम्मी को चोद कर चला गया। 

उस दिन मैंने फैसला कर लिया था कि इम्तिहान खत्म होने के बाद कुछ भी करके मैं भी अम्बरीन खाला को चोद कर ही रहुँगा। लेकिन अगले ही दिन एक और मसला हो गया। मैं घर के सेहन में मेज़-कुर्सी डाले इम्तिहान की तैयारी कर रहा था कि अंदर कमरे में ‘पी-टी-सी-एल’ के फोन की घंटी बजी। अम्मी ने आवाज़ दी कि – “शाकिर ज़रा देखो किस का फोन है।“ मैं उठ कर अंदर गया और फोन का रिसिवर उठा कर ‘हेलो’ कहा। दूसरी तरफ़ से किसी आदमी ने हमारा फोन नम्बर दोहराया और पूछा कि – “क्या ये शाकिर का घर है?” मैंने कहा – “हाँ मैं शाकिर ही बोल रहा हूँ।“ वो आदमी अचानक हंस पड़ा और बोला – “ओये मेरे गैरतमंद जवान! मुझे नहीं पहचाना? मैं नज़ीर बोल रहा हूँ... पिंडी वाला नज़ीर!” ये सुन कर मुझे तो जैसे करंट लगा और मेरे जिस्म से ठंडा पसीना फूट पड़ा।

नज़ीर से बात करते हु‌ए मेरे ज़हन में हल्का सा खौफ तो ज़रूर था मगर इससे कहीं ज़्यादा मुझे गुस्से और नफ़रत ने मग़लूब कर रखा था। मैंने उसे गंदी गालियाँ देते हु‌ए कहा कि अगर उसने दोबारा यहाँ फोन किया तो मैं पुलीस से रबता करुँगा। ये कह कर मैंने फोन का रिसिवर क्रेडल पर दे मारा।

मैं फोन बंद कर के पलटा तो अम्मी परेशानी के आलम में कमरे में दाखिल हो रही थीं। उन्होंने पूछा कि – “तुम किस से लड़ रहे थे?” मैं कुछ कहना ही चाहता था कि फोन फिर बज उठा। मैंने लपक कर रिसिवर उठाया तो दूसरी तरफ़ नज़ीर ही था। वो बोला कि – “फोन बंद करने से पहले ये सुन लो कि मेरे पास तुम्हारी और तुम्हारी खाला कि नंगी वीडियो फिल्म है और अगर तुम ने मेरी बात ना सुनी तो मैं वो फिल्म तुम्हारे बाप को भेज दुँगा।“


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

मैंने अम्मी कि तरफ़ देखा कि उनकी मौजूदगी में नज़ीर से कैसे बात करूँ। फिर मैंने सोचा कि अम्मी को चोद लेने के बाद मेरा और उनका रिश्ता वो नहीं रहा जो पहले था और अगर मैं उन्हें सारी बात बता भी देता तो इस में कोई हर्ज़ ना होता। मैंने नाज़िर से कहा कि – “तुम बकवास करते हो... बंद कमरे में किसने फिल्म बना ली?” नज़ीर बोला कि – “होटल में लोग औरतों को चोदने के लिये भी लाते थे इसलिये होटल के कुछ मुलाज़िम कमरों में बेड के सामने टीवी ट्रॉली के अंदर छोटा कैमरा खूफ़िया तौर पर लगा देते थे तकि लोगों की चुदाई की फिल्म बना सकें। तुम्हारी फिल्म भी ऐसे ही बनी थी! यकीन नहीं तो जहाँ कहो आ कर तुम्हें दिखा दूँ!” मैंने सवाल किया कि – “अगर फिल्म बन रही थी तो तुमने मोबाइल से हमारी तसवीरें क्यों लीं?” उसने जवाब दिया कि – “फिल्म तो मुझे पता नहीं कितनी देर बाद मिलती और मैं तुम्हारी खाला को उसी वक़्त चोदना चाहता था!” मेरा गुस्सा झाग की तरह बैठने लगा। मैंने कहा अभी बात नहीं हो सकती वो कुछ देर बाद फोन करे!

मैंने फोन रखा तो अम्मी फ़िक्रमंद लहजे में बोलीं कि – “शाकिर ये क्या मामला है? किस का फोन था?” मैंने कहा – “अम्मी एक बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गया हूँ और समझ नहीं पा रहा कि क्या करूँ!” अम्मी ने कहा – “साफ़ साफ़ बताओ क्या किस्सा है? तुम गुस्से में गालियाँ दे रहे थे और किसी फिल्म का ज़िक्र भी था! आखिर हुआ क्या है?”

मैंने अम्मी को अपने और अम्बरीन खाला के साथ पिंडी में पेश आने वाला वाक़्या तमामतर तफ़सीलात के साथ बयान कर दिया। सारी बात सुन कर अम्मी जैसे सकते में आ गयीं। लेकिन उन्होंने मुझे अम्बरीन खाला को चोदने की कोशिश पर कुछ नहीं कहा। कहतीं भी कैसे... वो तो खुद अपने भांजे को चूत देती रही थीं। कुछ देर गुमसुम रहने के बाद उन्होंने कहा कि – “नज़ीर को हमारे घर का नम्बर कैसे मिला?” मैंने कहा – “कमरों की बुकिंग के वक़्त होटल के रजिस्टर में हमारे घर का पता और फोन नम्बर ज़रूर लिखवाया गया होगा। नज़ीर खुद तो उस रात नौकरी छोड़ कर भाग गया था मगर वहाँ उसके साथी तो होंगे जिन्होंने उसे हमारा नम्बर दे दिया होगा।“ 

अम्मी ने सर हिलाया और कहा कि – “क्या वाक़य होटल वालों ने कोई फिल्म बनायी होगी?” मैंने कहा – “मुमकिन है नज़ीर झूठ ही बोल रहा हो!” उन्होंने कहा कि – “तुमने मोबाइल फोन वाली तसवीरें तो ज़ाया कर दी थीं... जिनके बगैर वो तुम्हें ब्लैकमेल नहीं कर सकता लेकिन वो फिर भी यहाँ फोन कर रहा है जिसका मतलब है कि उसले पास कुछ ना कुछ तो है!”

अम्मी ठीक कह रही थीं। कुछ सोच कर वो बोलीं कि – “मैं अम्बरीन से बात करती हूँ! नज़ीर ने अम्बरीन को चोदा था इसलिये अब भी वो उससे ज़रूर मिलना चाह रहा होगा ताकि फिर उसे चोद सके।“ मैंने उन्हें बताया कि नज़ीर ने उनके बारे में भी उल्टी सीधी बातें की थीं। वो हैरत से बोलीं कि नज़ीर ने तो उन्हें देखा ही नहीं वो उनके लिये कैसे बात कर सकता है। मैंने कहा कि – “उसने अम्बरीन खाला को देख कर अंदाज़ा लगाया होगा कि उनकी बहन भी खूबसूरत और हसीन होगी।“ अम्मी ने एक गहरी साँस ली लेकिन खामोश रहीं।

हम दोनों गहरी सोच में ग़र्क थे। अचानक अम्मी ने पूछा कि – “शाकिर क्या तुम अम्बरीन को चोदने में कामयाब हुए?” मैंने कहा – “नहीं अम्मी! पिंडी से वापस आने के बाद अभी तक शर्मिंदगी के मारे मैं उनसे मिला तक नहीं!” अम्मी तंज़िया अंदाज़ में मुस्कुरायीं और कहा कि – “जब तुम ने अपनी अम्मी को चोद लिया तो फिर खाला को चोदने की कोशिश पर क्यों इतने शर्मिंदा हो?” मैं ये सुन कर खिसियाना सा हो गया। वो कहने लगीं कि – “हमें इस मसले का कोई हल निकालना है वर्ना बड़ी बर्बादी होगी। अम्बरीन से बात करनी ही पड़ेगी।“ मैंने उनसे इत्तेफ़ाक किया।

उन्होंने अम्बरीन खाला को फोन किया और वो कुछ देर बाद हमारे घर आ गयीं। अम्मी उन्हें अपने बेडरूम में ले गयीं और मुझे भी वहीं बुला लिया। मैं अंदर गया तो देखा कि वो दोनों बेडरूम में पड़ी सोफ़े की दो कुर्सियों पर साथ-साथ बैठी थीं। नज़ीर के फोन कि वजह से मैं परेशान था मगर फिर भी अम्मी और अम्बरीन खाला को यूँ इकट्ठे बैठा देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैं दिल ही दिल में सर से पांव तक दोनों बहनों का मवाज़ना करने लगा।

अम्मी और अम्बरीन खाला के खद्द-ओ-खाल एक दूसरे से बहुत मिलते थे। दोनों के बाल, आँखें, नाक, माथा और गालों की उभरी हुई हड्डियाँ बिल्कुल एक जैसी थीं। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि दोनों की आँखों के दबीज़ पपोटे भी एक जैसे ही थे। अलबत्ता अम्मी के होंठ अम्बरीन खाला के होंठों से ज़रा पतले थे और दोनों की ठोड़ियाँ भी कुछ मुखतलीफ़ थीं। मजमुई तौर पर दोनों बहनों के चेहरे देख कर गुमान होता था जैसे वो जुड़वाँ बहनें हों। और तो और अम्बरीन खाला अम्मी को नाम ले कर ही बुलाती थीं... ‘बाजी’ या ‘आपा’ नहीं कहती थीं।

मैं अम्मी और अम्बरीन खाला को नंगा देख चुका था और जानता था कि दोनों के जिस्म भी कम-ओ-बेश एक जैसे ही थे। वो तकरीबन एक ही कद की थीं और दोनों ही के जिस्म गदराये हुए लेकिन कसे हुए थे। अम्मी चालीस साल की और अम्बरीन खाला अढ़तीस साल की थीं और अपनी उम्र के बावजूद उनके जिस्म पर कहीं भी जरूरत से ज्यादा गोश्त नहीं था क्योंकि दोनों ही वर्जिश करती थीं और खुद को फिट रखती थीं। 

दोनों बहनों के मम्मे उनके जिस्म का नुमायां तरीन हिस्सा थे जिन पर हर एक की नज़र सब से पहले पड़ती थी। उनके मम्मे बड़े-बड़े, तने हुए और बाकी जिस्म से गैर-मामूली तौर पर आगे निकले हुए थे। मैंने अम्मी के मम्मे उन्हें चोदते वक़्त बहुत चूसे थे जबकि अम्बरीन खाला के मम्मों को पिंडी में खूब टटोला था। मुझे लगता था कि अम्मी के मम्मे अम्बरीन खाला से एक-आध इंच बड़े थे। लेकिन देखने में दोनों के मम्मे एक दूसरे से बड़ी हद तक मिलते थे। दोनों के मम्मों के निप्पल काफी बड़े साइज़ के थे। अम्बरीन खाला के निप्पल लंबाई में अम्मी के निप्पलों से कुछ कम थे और उनके साथ वाला हिस्सा बहुत बड़ा था जबकि अम्मी के निप्पल बहुत लंबे थे मगर उनके साथ का हिस्सा अम्बरीन खाला के मुकाबले में कुछ छोटा था।

अम्मी और अम्बरीन खाला की कमर काफी स्लिम थी और ज़रा भी पेट नहीं निकला हुआ था। हालांकि अम्मी के तीन बच्चे थे और अम्बरीन खाला के दो लेकिन दोनों की चूतों में भी काफी मुमासिलत थी। मैंने अम्बरीन खाला को नहीं चोदा था लेकिन अम्मी कि चूत से हर तरह से वाक़िफ़ हो चुका था। दोनों की चूतें फूली-फूली सूजी हुई सी थीं और दोनों की चूतों पर बाल नहीं थे क्योंकि दोनों अपनी चूतें शायद हर दूसरे दिन हेयर-रिमूवर से साफ करती थीं। उनकी रानें भी काफी गदरायी हुई और सुडौल थीं। मम्मों के बाद दोनों ही के जिस्म का बहुत ही खास हिस्सा उनके गोल-गोल बड़े-बड़े चूतड़ थे जिनकी बनावट भी एक जैसी थी। अम्मी और अम्बरीन खाला के चूतड़ भी उनके मम्मों की तरह उनके बाकी जिस्म के मुकाबले गैर-मामूली मोटे और बड़े थे। इसके अलावा दोनों ही ज़्यादातर ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए रहती थीं जिससे उनके चूतड़ और ज्यादा बाहर निकले हुए नज़र आते थे। 

मैं इन खयालों में डूबा हुआ था और अम्मी अम्बरीन खाला को बता रही थीं कि उन्हें पिंडी वाले वाक़िये का इल्म हो चुका है और ये कि नज़ीर ने यहाँ फोन किया था। ये सुन कर अम्बरीन खाला के चेहरे का रंग उड़ गया। कहने लगीं – “बस यासमीन ये बे-इज़्ज़ती किस्मत में लिखी थी लेकिन उस कुत्ते को ये नम्बर कैसे मिला?” अम्मी ने उन्हें होटल के रजिस्टर के बारे में बताया और कहा कि – “अब पुरानी बातें छोड़ो और ये सोचो कि अगर नज़ीर के पास कोई नंगी फिल्म है तो वो उससे कैसे ली जाये!” 

फिर हमने फ़ैसला लिया कि नज़ीर से फिल्म ले कर देखी जाये और इसके बाद आगे का सोचा जाये। कुछ देर बाद नज़ीर का फोन आया। इस बार अम्बरीन खाला ने उससे बात की और कहा कि वो पहले उन्हें फिल्म दिखाये फिर बात होगी। वो बोला कि वो जहाँ कहेंगी वो आ जायेगा। मैं और खाला उनकी कार में उसे दाता दरबार के पास एक होटल में उससे मिलने गये। उसके साथ एक दुबला पतला सा लम्बा लड़का भी था जिसकी उम्र बीस-बाइस साल होगी। वो भी नज़ीर के ही तबके का लग रहा था। नज़ीर ने उस का नाम करामत बताया। उसने खाला को एक डी-वी-डी दी और कहा कि इस को देख कर वो उससे राब्ता करें तो फिर वो बतायेगा कि वो क्या चाहता है। उसने खाला को एक मोबाइल फोन का नम्बर भी दिया।


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हम वापस घर आये और वो फिल्म देखी तो वाक़य उसमें मैं अम्बरीन खाला की कमीज़ उतार कर उनके मम्मे मसल रहा था और खाला भी नशे में मेरी हरकत पे हंस रही थीं और लुत्फ़ उठा रही थीं। अम्मी ने कहा कि – “ये तो बहुत गड़्बड़ है... अगर नज़ीर ने ये फिल्म किसी को भेज दी तो क्या होगा!” अम्बरीन खाला बोलीं कि – “इसका मतलब है नज़ीर ने जो मेरे साथ किया उसकी भी फिल्म बनी होगी।“ मैंने कहा कि “ऐसी फिल्म तो उसे भी फंसा देगी... वो ये नहीं कर सकता।“ अम्मी ने मुझसे इत्तेफक़ किया। फिर खाला ने नज़ीर के दिये हुए नम्बर पर फोन किया और पूछा कि वो क्या चाहता है। उसने हंस कर कहा कि वो अम्बरीन खाला और मेरी अम्मी को चोदना चाहता है और उसे पचास हज़ार रुपये भी चाहियें। खाला ने उससे कहा कि वो चाहे तो उन्हें चोद ले लेकिन मेरी अम्मी की बात छोड़ दे और रुपयों का इंतज़ाम भी हो जायेगा। पचास हज़ार रुपये तो खैर मामूली बात थी अगर वो बेवकूफ पाँच लाख भी माँगता तो अम्बरीन खाला आसानी से दे देतीं। मुझे हैरानी इस बात की थी कि अम्बरीन खाला नज़ीर से खुद चुदने के लिये फौरन रज़ामंद हो गयी थीं। नज़ीर ने कहा कि वो अम्बरीन खाला के साथ-साथ मेरी अम्मी को भी चोदे बगैर नहीं मानेगा।

फोन काटने के बाद अम्बरीन खाला ने हमें ये बात बतायी और बोलीं – “वो यासमीन को भी चोदना चाहता है... क्या करें!” 

अम्मी बोली – “करना क्या है अम्बरीन! हम कोई खतरा मोल नहीं ले सकते... हमें हर सूरत में वो फिल्म हासिल करनी है चाहे इसके लिये हमें अपनी चूत उसे दे कर अपनी इज़्ज़तों का सौदा ही क्यों ना करना पड़े...!” 

मुझे फिर हैरानी हुई कि अम्मी भी एक अजनबी गैर-मर्द से चुदवाने के लिये बगैर हिचकिचाहट के फौरन रज़ामंद हो गयी थीं और साथ ही मुझे ये एहसास भी हुआ कि हालात कुछ ऐसे हो गये थे कि मेरी अम्मी और खाला मेरे सामने अपनी चूतों और चुदाई का ज़िक्र कर रही थीं और ना उन्हें कोई शरम महसूस हो रही थी और ना मुझे। वक़्त भी कैसे-कैसे रंग बदलता है।

फिर अम्मी बोलीं – “लेकिन मसला ये है कि उस कुत्ते को कहाँ मिला जये?” अम्बरीन खाला बोलीं – “यासमीन! नज़ीर चालाक आदमी है... हमें उसे अपने घर ही बुलाना चाहिये क्योंकि हमारे लिये बाहर कहीं जाना ज़्यादा खतरनाक हो सकता है।“ मैंने और अम्मी ने इस बात से इत्तेफ़ाक किया। 

खाला ने नज़ीर को फोन करके हमारे घर का पता बताया और कहा कि वो कल सुबह ग्यारह बजे आ जाये! उसने कहा कि – “ठीक है... और मैंने फिल्म अपने एक दोस्त को दी है जब मैं फ़ारिग हो कर तुम्हारे घर से निकलुँगा तो तुम मेरे साथ चलना और फिल्म ले लेना!” हमारे पास उसकी बात मान लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इसके बाद अम्बरीन खाला अपने घर चली गयीं।

अगले दिन अम्मी ने बच्चों को सुबह ही नाना के घर भेज दिया था। अम्बरीन खाला सुबह दस बजे ही आ गयीं। वो तैयार होकर आयी थीं और अम्मी भी वैसे ही काफी सज-धज कर तैयार हुई थीं। दोनों को देख कर ऐसा लग रहा था जैसे किसी पार्टी के लिये तैयार हुई हों। नज़ीर के आने में एक घंटा बाकी था तो मैं भी नहाने चला गया। नहा कर कपड़े पहन कर आया तो अम्मी और खाला ड्राइंग रूम में बैठी शराब पी रही थीं और हंसते हुए कुछ बात कर रही थीं। मुझे हैरानी हुई कि एक तो ये कोई वक्त शराब पीने का नहीं था और दूसरे उन्हें देख कर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लग रहा था कि नज़ीर से अपनी इज़्ज़त लुटवाने में उन्हें कोई मलाल या शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। बल्कि ऐसा महसूस हो रहा था कि वो खुद नज़ीर से चुदवाने के लिये बेकरार हो रही थीं। खाला ने पचास हज़र रुपये का लिफाफा मुझे देते हुए कहा कि जब वो दोनों नज़ीर के साथ होंगी तो मैं दूसरे कमरे में वो रुपये अपने पास संभाल कर रखूँ। ठीक ग्यारह बजे दरवाज़े की घंटी बाजी। मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने नज़ीर और करामत खड़े थे। मैं उन्हें ले कर ड्राइंग रूम में आ गया। अम्मी और अम्बरीन खाला सोफ़े पर बैठी थीं और शराब की चुस्कियाँ ले रही थीं। अम्मी नशीली आँखों से नज़ीर को गौर से देख रही थीं। नज़ीर ने भी दोनों बहनों को देखा तो उसकी आँखों में चमक आ गयी।

अम्मी को घूरते हुए नज़ीर बोला – “अच्छा तो तुम इसकी बहन हो। तुम भी इसी कि तरह मज़ेदार हो! इस की फुद्दी मैंने पिंडी में मारी थी और आज तक उसकी लज़्ज़त नहीं भूला। रोज़ इसकी चिकनी फुद्दी को याद कर के दूसरी औरतों को चोदता था और मुठ मारता था।“ अम्मी कुछ बोली नहीं सिर्फ़ अदा से मुस्कुरा दीं। 

अम्बरीन खाला ने उन दोनों को बैठने को कहा और उन्हें भी शराब पेश की लेकिन नज़ीर इंकार करते हुए बोला – “मैं तो अब तुम दोनों को चोद कर तुम्हारे हुस्न की शराब पियुँगा। इस काम में मेरा ये दोस्त करामत मेरी मदद करेगा!” खाला और अम्मी के चेहरों पर खिफ़्फ़त के ज़रा से भी आसार नज़र नहीं आ रेहे थे बल्कि ये सुन कर उनके चेहरे और खिल गये। खाला इतराते हुए बोलीं – “तो कर लो अपना मुतालबा पूरा और निकलो यहाँ से!” नज़ीर ने कहा कि – “क्यों इतनी बे-रुखी बातें कर रही हो... जब चोदुँगा तो मज़ा तो तुम्हें भी आयेगा... याद है पिंडी में कैसे मज़े से चींख-चींख कर चुदी थी... बताया नहीं अपनी बहन को।“ ये सुनकर अम्बरीन खाला के गाल लाल हो गये। नज़ीर फिर बोला – “यहाँ मज़ा नहीं आयेगा... ऐसे कमरे में चलो जहाँ बेड हो!” अम्मी और खाला ने अपने गिलास खतम किये और उठकर उन दोनों को लेकर अम्मी के बेडरूम की तरफ़ जाने लगीं। मैं वहीं बैठा रहा तो नज़ीर बोला कि – “तुम हमें अपनी खाला और अम्मी को चोदते हुए देखोगे क्योंकि मुझे इन को तुम्हारे सामने चोदने में ज़्यादा मज़ा आयेगा।“

बेडरूम में जाते हुए अम्मी और खाला ऊँची हील के सैंडलों में बड़ी अदा से चूतड़ हिलाते हुए आगे-आगे चल रही थीं। बेडरूम में आते ही नज़ीर ने फौरन कपड़े उतार दिये और उसका अजीब-ओ-गरीब मोटा लंड सब के सामने नंगा हो गया। उसके मोटे-मोटे टट्टे दूर ही से नज़र आ रहे थे। करामत खामोश एक तरफ़ खड़ा रहा। अम्बरीन खाला तो नज़ीर का लंड अपनी चूत में ले ही चुकी थीं मगर अम्मी उसे देख कर वाज़ेह तौर पर हैरान हुई थीं। अम्मी ने मुस्कुराते हुए अम्बरीन खाला की तरफ़ माइनी-खेज़ नज़रों से देखा। शायद वो सोच रही थीं कि अम्बरीन खाला ने इतना मोटा और बड़ा लंड कैसे अपनी चूत में लिया होगा। अम्बरीन खाला ने भी मुस्कुराते हुए अम्मी को आँख मार दी। अब मुझे यकीन हो गया कि दोनों बहनें खुद ही चुदने के लिये तड़प रही थीं और उन्होंने एक दफ़ा भी करामत की मौजूदगी पर एतराज़ ज़ाहिर नहीं किया था। 


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फिर नज़ीर के कहने पर करामत ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उसका लंड भी कम जानदार नहीं था। उसका लंड नज़ीर से पतला था लेकिन बे-इंतेहा लम्बा था। मैंने सिर्फ़ ब्लू-फ़िल्मों में ही इतना लम्बा लंड देखा था। करामत का लंड देख कर समझ में आता था कि वो और नज़ीर क्यों दोस्त थे। फिर खेल शुरू हो गया। नज़ीर ने अम्मी का हाथ पकड़ा और उन्हें खींच कर सीने से लगा लिया। अम्मी उससे काफी लम्बी थीं और फिर उन्होंने तकरीबन चार इंच ऊँची ऐड़ी वाली सैंडल भी पहन रखी थी। नज़ीर ने अपने हाथ उनकी मज़बूत कमर में डाले और उन्हें सख्ती से अपने साथ चिमटा लिया। फिर अम्मी का दुपट्टा उतार कर फ़रश पर फ़ेंका और उनका चेहरा नीचे करके उनके होंठों पर अपने होंठ मज़बूती से जमा दिये। वो बड़ी शिद्दत से अम्मी के सुर्ख होंठों को चूम रहा था। उसने एक हाथ से अम्मी के मम्मे पकड़े और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। अम्मी के होंठों को चूमते हुए नज़ीर का एक हाथ मुसलसल उनके मम्मों से खेल रहा था। अम्मी भी उसके बोसों का खुल कर जवाब दे रही थीं। फिर नज़ीर एक सेकेंड के लिये अम्मी के होंठों से अपना मुँह हटाया और अम्बरीन खाला को अपने पास बुलाया।

अम्बरीन खाला ने तिरछी नज़र से मुझे देखा और कुर्सी से उठ कर मुस्कुराती हुई नज़ीर के पास चली गयीं। उसने एक हाथ से उन्हें भी खींच कर अपने करीब कर लिया। अब वो अम्मी और अम्बरीन खाला दोनों के साथ चिपका हुआ था। दो गोरी और निहायत हसीन और खूबसूरत औरतों के दरमियान वो बद-शक्ल छोटे से कद का आदमी अपने मोटे तने हुए लंड के साथ एक अजूबा लग रहा था। उसने अपना एक-एक हाथ अम्मी और अम्बरीन खाला कि गर्दनों में डाला और बारी-बारी दोनों के मुँह चूमने लगा। वो दोनों भी उसके बोसों का पूरा जवाब दे रही थीं। इस दफ़ा मेरी हालत भी पिंडी जैसी नहीं थी और मुझे अपने लंड में गुददुदी होती महसूस हो रही थी। मेरा चेहरा लाल हो रहा था लेकिन इस लाली की वजह शरम नहीं थी बल्कि अपनी अम्मी और अम्बरीन खाला को इस हालत में देख कर मैं गरम हो गया था।

नज़ीर अम्मी और अम्बरीन खाला को बेड के क़रीब ले आया और खुद उस पर लेट गया। उसने अपना मोटा ताज़ा अकड़ा हुआ लंड हाथ में पकड़ लिया और करामत से कहा कि – “इन दोनों गश्तियों के कपड़े उतार दे तकि इन कि इनके मम्मे और फुद्दियाँ तो नज़र आयें!” करामत ने आगे बढ़ कर अम्मी की कमीज़ उनके चूतड़ों पर से उठायी और सर के ऊपर से उतार दी। फिर करामत ने हाथ आगे ले जा कर उनकी सलवार का नाड़ा खोला और उनकी सलवार उनके पैरों तक नीचे खींच दी। फिर उसने झुक कर उनकी सलवार उनके सैंडल पहने हुए पैरों से निकाल ली। उसने अम्बरीन खाला के गुदाज़ जिस्म को भी कपड़ों से इसी तरह आज़ाद कर दिया। अम्मी और अम्बरीन खाला अब सिर्फ़ ब्रा, पैंटी और ऊँची हील के सैंडल पहने खड़ी थीं। बकौल नज़ीर उनके मम्मे और चूतें तो उस ही की तरफ़ थीं लेकिन मोटे-मोटे चूतड़ मेरी जानिब थे। दोनों ने जी-स्ट्रिंग पैंटियाँ पहनी हुई थी जिनमें कमर पे और पीछे की तरफ सिर्फ पतली सी डोरी थी जो उनके चूतड़ों के बीच में धंस कर छुपी हुई थी।

मुझे उन दोनों के चूतड़ों के साइज़ में भी कोई फर्क़ महसूस नहीं हुआ। करामत ने अब बारी-बारी अम्मी और अम्बरीन खाला के ब्रा के हूक खोले और उनके बड़े-बड़े मम्मों को नंगा कर दिया। फिर ना-जाने करामत को क्या सूझी कि उसने अम्मी और अम्बरीन खाला के मोटे चूतड़ों पर अपना एक हाथ फेरा और उन्हें दबाने लगा जैसे कि चेक कर रहा हो। फिर उसने एक-एक कर के उन दोनों की जी-स्ट्रिंग पैंटियाँ भी उतार दीं। अम्मी और अम्बरीन खाला अब सिर्फ ऊँची पेन्सिल हील की सैंडल पहने अलिफ नंगी थीं।

ये सब कुछ हो रहा था और मेरी हालत खराब हो रही थी। मेरी तवज्जो नंगी खाला की तरफ़ ज्यादा थी जिसे मैंने अभी तक नहीं चोदा था। मैं अम्मी और अम्बरीन खाला को नंगा देख कर अपने ऊपर काबू नहीं कर पा रहा था और मेरा चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था। ऊँची हील कि सैंडल पहने होने की वजह से अम्मी और अम्बरीन खाला के गोल और भारी चूतड़ और ज्यादा बाहर निकले हुए बेहद हसीन लग रहे थे जिन्हें देख कर मेरा लंड तन गया था और उस में अजीब सी सनसनाहट हो रही थी।

फिर नज़ीर ने अम्मी और अम्बरीन खाला दोनों को कहा कि वो उसका लंड चूसें। अम्मी अपने होंठ पे ज़ुबान फिराती हुई फौरन बेड पर चढ़ गयीं और नीचे झुक कर नज़ीर का लंड अपने मुँह में ले कर उसके टोपे पर ज़ुबान फेरने लगीं। अम्बरीन खाला भी अपने भारी मम्मों और चूतड़ों को हरकत देती हुई सैंडल पहने हुए ही बेड पर चढ़ गयीं। अम्मी की चौड़ी गाँड का रुख मेरी तरफ़ था। अम्बरीन खाला ने भी घुटनों के बल बैठ कर अपना मुँह नज़ीर के काले सियाह लंड के क़रीब कर लिया जिसे अम्मी अपने गोरे हाथ में पकड़ कर चूस रही थीं। अम्बरीन खाला की मोटी गाँड भी मेरी जानिब थी। दोनों बहनों के चूतड़ों को जिनके बीच में उनकी चिकनी चूतें और गाँड के सुराख नज़र आ रहे थे इस तरह हवा में उठा देख कर मेरे जिस्म में खून कि गर्दिश बढ़ गयी। नज़ीर सही कहता था कि दोनों ही ज़बरदस्त माल थीं।

जब अम्मी नज़ीर का मोटा लंड चूसते-चूसते ज़रा थक गयीं तो उन्होंने उसे अपने मुँह से निकाल लिया। अब अम्बरीन खाला ने अम्मी के थूक से भीगा नज़ीर का लंड अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया। नज़ीर ने अम्मी को बाज़ू से पकड़ कर अपने ऊपर गिरा लिया और उनके मुँह में मुँह दे कर उनकी ज़ुबान चूसने लगा। उसका एक हाथ बड़ी बे-दर्दी से अम्मी के मम्मों के नरम उभारों को मसल रहा था। मैंने देखा कि अम्मी भी अपनी ज़ुबान नज़ीर के मुँह में डाल रही थीं। जब नज़ीर ने ज़ोर से अम्मी के नंगे मम्मे पर चुटकी काटी तो उनके मुँह से हल्की सी चींख निकल गयी। अम्मी ने मसनोई गुस्से से उसकी तरफ़ देखते हुए प्यार से उसके सीने पर मुक्का मारा तो नज़ीर हंसने लगा। अम्बरीन खाला ने भी उसका मोटा लंड अपने मुँह से निकाला और उसकी तरफ़ देखा। नज़ीर भी शायद अम्मी और अम्बरीन खाला से अपना लंड चुसवा-चुसवा कर बेहद गरम हो गया था। उसने करामत को इशारा किया।

करामत किसी पालतू कुत्ते की तरह बेड के पास आ गया। चलते हुए उसका बेहद लम्बा लंड अकड़ कर हवा में हिचकोले ले रहा था। नज़ीर ने अम्मी और अम्बरीन खाला से कहा कि – “ज़रा मेरे यार का लौड़ा। क्या तुम ने कभी ऐसा लौड़ा देखा है?” अम्मी और अम्बरीन खाला ने मुड़ कर करामत को देखा तो उसके लंड को ललचाई नज़रों से निहारने लगी। मैंने देखा कि अम्बरीन खाला का एक हाथ बे-साख्ता उनकी चूत पर फिसलने लगा। अम्मी की आँखों में भी हवस और तारीफ झलक रही थी।

नज़ीर ने अम्मी और अम्बरीन खाला को बेड पर सीधा लिटा दिया। फिर उसने अम्मी की टाँगें खोलीं और उनकी चूत चाटने लगा। उसकी लम्बी ज़ुबान शपाशप मेरी अम्मी की उभरी हुई चिकनी चूत पर तेज़ी से चलने लगी। उसने अपने दोनों हाथ अम्मी के चूतड़ों के नीचे रखे और उन्हें थोड़ा ऊपर उठा दिया। वो उनकी गाँड के सुराख से ले कर उनकी चूत के ऊपरी हिस्से तक अपनी ज़ुबान फेर रहा था। अम्मी अपनी चूत और गाँड के सुराख पर नज़ीर की ज़ुबान बर्दाश्त ना कर सकीं और उनके मुँह से मस्ती भरी आवाज़ें निकलनी शुरू हो गयीं। अम्बरीन खाला उनके साथ ही लेटी थीं और अपनी बहन की हालत देख कर खुद भी गरम हो गयी थीं और अपनी चूत पर हाथ फेर रही थीं। करामत भी अम्मी की हालत देख कर बे-काबू हो रहा था।

वो नज़ीर से पूछे बगैर बेड पर चढ़ा और अम्बरीन खाला के ऊपर लेट गया। उसने अम्बरीन खाला के मुँह पे ज़ोर-ज़ोर से बहुत सी चुम्मियाँ लीं और उनके मुलायम मम्मों को हाथों में ले कर बुरी तरह चूसने लगा। अम्बरीन खाला ने भी “ऊँऊँहहह ऊँऊँहहह” शुरू कर दी और उनकी टाँगें खुद-ब-खुद खुल गयीं। करामत अम्बरीन खाला पर चढ़ा हुआ था और जब उनकी टाँगें खुलीं तो वो अपने जिस्म के दर्मियाने हिस्से को पूरी तरह उनकी चूत के ऊपर ले आया। उसका लंड अम्बरीन खाला की चूत और गाँड के सुराख से टकराता हुआ बेड की चादर से थोड़ा ऊपर आ गया।

अम्बरीन खाला के मम्मे अच्छी तरह चूसने के बाद करामत नीचे की तरफ़ खिसका और उनकी चूत चाटने लगा। अम्बरीन खाला बेड पर कसमसाने लगीं और उनके मुँह से एक तवातुर के साथ आवाज़ें बरामद होने लगीं। करामत उनकी चूत के कुछ हिस्से को मुँह में लेता तो उनके जिस्म में जैसे करंट दौड़ जाता। दोनों बहनों के मुँह से निकलने वाली मस्ती भरी आवाज़ें एक दूसरे में मद्घम हो रही थीं।

करामत ने फिर उठ कर अम्बरीन खाला के मुँह में अपना लंड दे दिया। वो उसका लम्बा लंड पूरा अपने मुँह में नहीं ले सकती थीं लेकिन बहरहाल वो उस का टोपा और टोपे से नीचे का काफी हिस्सा चूसती रहीं। करामत के टट्टे इस दौरान पेंडुलम की तरह हिलते रहे।

अम्बरीन खाला उसके लंड के टोपे को बड़ी अच्छी तरह चाट रही थीं और वो खूब मज़े ले रहा था। करामत ने ज़बरदस्ती अपने लंड को अम्बरीन खाला के मुँह के और अंदर करने की कोशिश की। शायद उसके लंड का टोपा उनके हलक़ में लगा और वो खाँसने लगीं। नज़ीर ने करामत से कहा कि एहतियात करे। करामत मुस्कुरा दिया।

नज़ीर ने अब अम्मी को अपने लंड के ऊपर बैठने को कहा। अम्मी ने अपनी चढ़ी हुई साँसों को काबू करने की कोशिश की और नज़ीर के पेट पर बैठ गयीं। फिर उन्होंने अपने मोटे चूतड़ ऊपर उठाये और नज़ीर के थूक में लिथड़ी हुई अपनी चूत उसके लंड के बिल्कुल ऊपर ले आयीं। नज़ीर ने अपना लंड हाथ में पकड़ा और उसे अम्मी की चूत के अंदर करने लगा। उसके लंड का टोपा अम्मी की चूत को खोलता हुआ उसके अंदर घुस गया। अम्मी के चेहरे पर हल्की सी तक़लीफ नज़र आने लगी।

नज़ीर ने उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और ज़ोर लगा कर उनके जिस्म को नीचे की तरफ़ दबाया। उसका लंड फंस-फंस कर अम्मी की चूत में गायब हो गया। चंद सेकंड रुक कर नज़ीर ने अम्मी कि चूत में एक ज़बरदस्त घस्सा मारा। अम्मी के मुँह से ज़ोर की आवाज़ निकली। अब वो नज़ीर का पूरा लंड अपने अंदर ले चुकी थीं। नज़ीर ने अम्मी के मम्मे पकड़े और उन्हें अपनी तरफ़ खींचते हुए नीचे से उनकी चूत में घस्से मारने लगा। अम्मी उसके सीने पर झुक गयीं और नज़ीर ने उनके होंठ अपने मुँह में ले लिये।

कुछ देर इस तरह अम्मी को चोदने के बाद नज़ीर ने अपने दोनों हाथ अम्मी के चूतड़ों के पीछे ला कर उन्हें मज़बूती से पकड़ लिया और उन्हें अपने लंड पर आगे-पीछे करने लगा। अम्मी के गोरे चूतड़ों पर उसके काले हाथ ऐसे लग रहे थे जैसे दो सफ़ेद घड़ों पर काले रंग से इंसानी हाथों के निशान बना दिये गये हों।

अम्मी भी मस्ती के आलम में नज़ीर के सीने पर हाथ रख कर अपने जिस्म को ऊपर उठा रही थीं ताकि उसका लंड आसानी से उनकी चूत ले सके। नज़ीर के हर घस्से पर अम्मी का मुँह खुल जाता और वो ज़ोर-ज़ोर से “ऊँऊँहहह ऊँऊँहहह” करने लगती थीं। नज़ीर ने कहा कि – “तुम्हारी फुद्दी में भी बिल्कुल तुम्हारी बहन जैसा मज़ा है।“ अम्मी मस्ती से अपनी चूत मरवाती रहीं और कोई जवाब नहीं दिया। उनके लंबे और रेशमी बाल नज़ीर के एक कंधे पर पड़े हुए थे। कुछ ही देर में उसके लंड पर अम्मी के मोटे चूतड़ों की उछल-कूद तेज़ हो गयी और वो अपने मोटे मम्मे हिला-हिला कर ज़ोरदार आवाज़ें निकालते हुए खल्लास हो गयीं। खल्लास होने की वजह से उनका सारा जिस्म थर्रा रहा था। रफ़्ता-रफ़्ता नज़ीर के लंड पर उनके चूतड़ों की हर्कत आहिस्ता होने लगी।

मुझे अम्मी की गाँड का सुराख साफ़ नज़र आ रहा था और उससे ज़रा नीचे नज़ीर का मोटा लंड भी जो आधा अम्मी की चूत के अंदर था। उसके लंड के ऊपर अम्मी की चूत से निकलने वाला पानी एक लकीर बनाता हुआ उसके टट्टों की तरफ़ बह रहा था। उसकी बड़ी उंगली अम्मी कि गाँड के सुराख पर रखी हुई थी। कुछ देर अम्मी की चूत मारने के बाद नज़ीर ने रुक कर अपने लंड को एक हाथ में पकड़ा और दूसरे हाथ से अम्मी के चूतड़ों को हर्कत देते हुए उसे उनकी चूत में सही जगह फिट करके फिर घस्से मारने लगा। थोड़ी देर बाद उसने अम्मी को सीधा लिटाया और अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। अब उसका लंड फिर अम्मी कि चूत को फाड़ रहा था। वो अम्मी को चोदते हुए उनके कान में कुछ कह भी रहा था लेकिन मैं सुन नहीं सकता था।


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

करामत ने इस पोज़िशन में अम्बरीन खाला के जिस्म को अच्छी तरह चूमने और चाटने के बाद उन्हें बेड पर लिटा दिया था। उसने उनके ऊपर आ कर उनकी चूत के अंदर एक ऐसा घस्सा मारा कि उसका पूरा लंड एक झटके से अम्बरीन खाला की चूत के अंदर चला गया। जब उसका लम्बा लंड अम्बरीन खाला की चूत में घुसा तो बे-साख्ता उनकी चींख निकल गयी। अम्मी ने नज़ीर के नीचे लेटे-लेटे अम्बरीन खाला की तरफ़ देखा और फिर अपनी आँखें बंद करके उस के मोटे लंड का मज़ा लेने लगीं।

कुछ ही देर में अम्बरीन खाला की चूत करामत का लंड ज़रा सहुलियत से लेने लगी और वो उन्हें तेज़-रफ़्तार से चोदने लगा। उसने अचानक अपने लंड को अम्बरीन खाला की चूत में गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया। अम्बरीन खाला का मुँह खुल गया और वो अपने चूतड़ों को ज़ोर-ज़ोर से ऊपर उठाने लगीं। अब करामत और अम्बरीन खाला दोनों ही घस्से मार रहे थे। अम्बरीन खाला करामत के लंड पर घस्से मार रही थीं और करामत अम्बरीन खाला की चूत में घस्से लगा रहा था। एक मिनट बाद ही अम्बरीन खाला छूट गयीं और उनके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें पहले कुछ और तेज़ हुईं और फिर दम तोड़ने लगीं।

करामत उनके खल्लास होने से और बिफर गया और उसके घस्सों में शिद्दत आ गयी। उसका लंड अम्बरीन खाला की पानी से भरी हुई चूत में ‘शपड़-शपड़’ की आवाज़ों के साथ आ जा रहा था। चंद लम्हों के अंदर ही अम्बरीन खाला ने एक बार फिर तेज़-तेज़ “ऊँऊँहहह आआंआंह” शुरू की और बड़े खौफ़नाक तरीके से दूसरी दफ़ा खल्लास हो गयीं। उनकी चूत से निकलने वाले पानी ने बेड की नीली चादर पर काफी बड़ा गोल-सा निशान बना दिया था। करामत उनकी हालत से बे-नियाज़ उसी तरह अपने लंड से उनकी चूत की धज्जियाँ उड़ाता रहा और उसके टट्टे अम्बरीन खाला की गाँड के सुराख से ‘थप-थप’ टकराते रहे।

कुछ देर में नज़ीर ने अम्मी की चूत से अपना लंड निकाला और करामत से कहा कि वो अब अम्बरीन खाला की फुद्दी मारना चाहता है। करामत फौरन अम्बरीन खाला के ऊपर से उठ गया और आ कर अम्मी के मोटे मम्मे चूसने लगा। नज़ीर ने पहले तो अम्बरीन खाला के आठ-दस बोसे लिये और फिर उनके मम्मे मसलते हुए उनको अपने लंड पर बिठा लिया। उन्होंने इस दफ़ा नज़ीर का मोटा लंड बड़ी आसानी से अपनी चूत में ले लिया और उस पर ऊपर नीचे होने लगीं। कुछ देर तक अम्बरीन खाला के मम्मे हाथों में पकड़ कर नज़ीर उन्हें इसी तरह चोदता रहा।

फिर उसने अम्बरीन खाला को कुत्तिया बनाया और पीछे से उनकी चूत में अपना लंड घुसा दिया। उसके घस्सों के ज़ोरदार झटकों से अम्बरीन खाला के मोटे मम्मे बे-काबू हो कर ज़ोर-ज़ोर से झूलने लगे। कोई आठ दस मिनट तक उन्हें पीछे से चोदने के बाद नज़ीर ने एक दफ़ा फिर उनका पानी छुड़ा कर उनकी चूत की जान छोड़ी और दो तकिये सर के नीचे रख कर बेड पर लेट गया। अम्बरीन खाला भी वहीं अपनी टाँगें फैला कर के लेटी हुई अपनी साँसें काबू करने लगीं।

करामत उस वक़्त अम्मी के चूतड़ों को खोल कर उनकी चूत और गाँड के सुराख को चाट रहा था। नज़ीर ने अम्मी से कहा कि वो उसका लंड चूसें और अपनी बहन की चूत के पानी का मज़ा लें। उसने हंस कर कहा कि आज वो उन्हें लंदन की सैर करायेगा। अम्मी मुस्कुराते हुए करामत के पास से हट गयीं। वो एक लम्हे के लिये रुकीं लेकिन फिर उन्होंने घुटनों के बल बैठ कर नज़ीर का गीला लंड मुँह में लिया और उसे चूसने लगीं। करामत ने भी अपना लंड उनके मुँह के सामने कर दिया और अम्मी बारी-बारी उन दोनों के लंड चूसती रहीं।

थोड़ी देर तक अम्मी से अपना लंड चुसवाने के बाद करामत उनके चूतड़ों की तरफ़ आ गया और अपना लम्बा लंड हाथ में पकड़ कर उनकी फूली हुई चूत में अपनी बड़ी उंगली डाल कर हिलाने लगा। अम्मी ने फुसफुसाते हुए कहा कि – “उंगली नहीं अपना लंड अंदर डालो!” इस पर करामत ने एक झटके से अपने लंड को अम्मी की चूत के अंदर घुसेड़ दिया। अम्मी उस वक़्त नज़ीर का लंड चूस रही थीं लेकिन जब करामत ने अपना लंड अचानक उनकी चूत में डाला तो नज़ीर का लंड उनके मुँह से निकल गया। करामत ने फौरन ही अम्मी के चूतड़ों को पकड़ा और उनकी चूत में घस्से मारने लगा। उसका ताकतवर लंड अम्मी कि चूत को जैसे फाड़ता हुआ उसके अंदर जा रहा था। अम्मी के चेहरे पर तक़लीफ के आसार थे और वो अपनी चूत में लगने वाले हर घस्से पर “आआंआंहह... आंआंआईईई.... आआंआंहह... आआंआंहह...” कर रही थीं। करामत का लंड उनकी चूत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था।

अम्मी ने नज़ीर का लंड अपने हाथ में पकड़ा हुआ था लेकिन करामत के तेज़ झटकों की वजह से अब उसे चूस नहीं पा रही थीं। करामत का लंड अपने अंदर लेटे हुए अम्मी का तनोमंद जिस्म बार-बार दुहरा हो-हो जाता था। करामत ने अम्मी को काबू करने के लिये अपना एक हाथ उनकी गर्दन पर रखा और उन्हें नीचे दबा कर उनकी चूत में पूरी ताकत से घस्से मारने लगा। नज़ीर ने अम्मी के दोनों मम्मे हाथों में दबोच लिये और उन्हें अपनी चूत को करामत के लंड के ऊपर ही रखने पर मजबूर कर दिया। अम्मी अब आगे हो कर करामत के लंड से अपनी चूत को बचा नहीं सकती थीं। उन्होंने बे-बसी के आलम में अपना एक हाथ पीछे कर के करामत की रान पर रखा और उसे तेज़ घस्से मारने से रोकने की कोशिश की मगर वो अपने लंबे लंड से अम्मी कि चूत का कचूमर निकालने में मसरूफ रहा। वो इसी तरह अम्मी को चोदता रहा और अम्मी की मस्ती भरी चींखें बेडरूम में गूँजती रहीं। इसी तरह चींखें मारते मारते अम्मी फिर खल्लास हो गयीं।

अम्बरीन खाला नज़ीर के बिल्कुल साथ जुड़ कर लेटी थीं और अम्मी की मस्ती भरी चींखें उन पर भी असर कर रही थीं। मैंने उनके मम्मों के निप्पल अकड़ते हुए देखे। वो एक हाथ से अपना एक मम्मा मसल रही थीं और दूसरा हाथ से अपनी चूत। वो लंड लेने के लिये बेताब नज़र आ रही थीं लेकिन नज़ीर और करामत दोनों की तवज्जो अम्मी को चोदने पर मरकूज़ थी। बिल-आखिर नज़ीर ने अम्मी को करामत के हवाले किया और अम्बरीन खाला को अपने लंड पर बैठने को कहा। उन्होंने वक़्त ज़ाया किये बगैर नज़ीर के ऊपर टाँग पलटायी और उस का लंड अपनी चूत में ले लिया। दोनों बहनों को दो इंतेहाई तजुर्बेकार मर्द बे-तहाशा चोद रहे थे।

अम्बरीन खाला नज़ीर के लंड पर बैठी ही थीं कि तीन-चार मिनट में फिर खल्लास हो गयीं। नज़ीर हंसने लगा। उसने अम्बरीन खाला को बेड पर लिटाया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया। अभी उसने उनकी चूत में दस-बारह घस्से ही लगाये थे कि उसके मुँह से अजीब भोंडी आवाज़ें निकलने लगीं। उसके काले चूतड़ अकड़ गये और उसने खल्लास होते हुए अम्बरीन खाला की चूत में अपनी सारी मनि छोड़ दी। फिर उसने अपना लंड उनके अंदर से निकाला और उनके साथ लेट गया।

करामत अब भी अम्मी की चूत में घस्से मार रहा था और उसका मुँह जिस्मानी मुशक्कत से लाल हो रहा था। वो भी अब यकीनन छूटने के क़रीब था। उसने चंद ज़ोरदार घस्सों के बाद अपने लंड को अम्मी की चूत में पूरा घुसा कर दबा दिया और वहीं रुक गया। फिर अपना पूरा मुँह खोल कर उसने अम्मी के चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उनके अंदर अपनी मनि डालने लगा। अम्मी की चूत में अपनी मनि का आखिरी कतरा डालने के बाद वो उनके बगल में लेट गया।.

जब नज़ीर और करामत फारिग हुए तो मुझे लगा कि चलो काम निपट गया लेकिन मेरा ख्याल बिल्कुल गलत था। दो-तीन मिनट तो चारों बेड पर लेटे अपनी-अपनी साँसें संभालते रहे। फिर नज़ीर ने मेरी अम्मी और अम्बरीन खाला से पूछा कि उन्हें भी मज़ा आया कि नहीं। इस बार दोनों ने मुस्कुराते हुए “हूँहूँ” करके हाँ में जवाब दिया। चारों में से किसी ने भी अपने नंगे जिस्म को ढकने की ज़हमत नहीं की। उनके लिये मैं तो जैसे वहाँ मौजूद ही नहीं था। फिर अचानक नज़ीर मुझसे मुखातिब होते हुए बोला – “तुम्हें मज़ा आया अपनी अम्मी और खाला को चुदते देख कर?” मैं कुछ नहीं बोला और नज़रें झुका लीं। मेरा लंड अभी भी पैंट के अंदर तन कर खड़ा था लेकिन शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी। फिर वो मुझसे बोला कि उनके पीने लिये कुछ ठंडा ले कर आऊँ। मैं किचन में जाकर पाँच बड़े गिलसों में बर्फ़ के साथ पेप्सी डालने लगा। मुझे बेडरूम से अम्मी और अम्बरीन खाला के कुछ बोलने और खिलखिला के हंसने कि आवाज़ें सुनाई दे रही थी। जब मैं ट्रे में गिलास ले कर आया तो मैं बेडरूम के बाहर रुक कर अंदर चल रही गुफ़्तगू सुनने लगा। 

नज़ीर बोल रहा था – “अभी तो और मज़ा आयेगा... जब हम दोनों मिल के तुम दोनों तो लंदन की सैर करवायेंगे!” अम्मी ने मुस्कुराते हुए पूछा – “लंदन की सैर? वो कैसे?” 

“जब सैर करोगी तब देख लेना!” कहते हुए नज़ीर और करामत दोनों हंसने लगे और अम्मी और अम्बरीन खाला भी उनके साथ हंसने लगीं। ज़ाहिराना तौर पे दोनों बहनें इस हरामकारी में खुल कर शरीक़ हो रही थीं और बस मेरी मौजूदगी में शाइस्तगी का थोड़ा नाटक कर रही थीं। नज़ीर फिर बोला – “मेरी तो सलाह है कि थोड़ी शराब और पी लो तुम दोनों... मदहोशी में लंदन की सैर का पूरा मज़ा ले सकोगी।“ 


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

मैं ट्रे लेकर कमरे में दाखिल हुआ तो अम्मी और खाला चुप हो गयीं। चारों पहले जैसी ही नंगी हालत में थे। अम्मी और अम्बरीन खाला मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थीं। मैंने बेड के साइड में छोटी सी मेज़ पर ट्रे रख दी। चारों पेप्सी पीने लगे। इतने में अम्मी बेड से उतरकर नंगी ही ऊँची हील के सैंडल में चूतड़ मटकाती बेडरूम के अटैच्ड बाथरूम में चली गयीं। फिर अम्बरीन खाला भी अपनी पेप्सी खतम करके अम्मी की तरह नंगी ही सैंडल खटकाती हुई ड्राइंग रूम की तरफ चली गयीं। कुछ सेकंड के बाद खाला जब वापस आयीं तो उनके हाथ में शराब की वही आधी भरी बोतल थी जिसमें से वो और अम्मी नज़ीर के आने से पहले पी रही थीं। मेरे लंड की हालत खराब थी इसलिये मैं धीरे से बोला कि मैं अभी आता हूँ और बेडरूम से बाहर निकल कर अपने बाथरूम में मुठ मारने के लिये चला गया। मुठ मार के करीब दस मिनट के बाद जब मैं वापस अम्मी के बेडरूम में आया तो अम्मी और खाला बेड पर नज़ीर और करामत के बीच में बैठी शराब पी रही थीं। नज़ीर और करामत उनके जिस्मों को सहला रहे थे। अम्बरीन खाला ने भी शराब पीते हुए नज़ीर का लंड अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और हंसने लगीं। थोड़ी देर ऐसे ही छेड़छाड़ का सिलसिला चला और अम्मी और खाला ने काफी शराब पी ली थी और नशे में झूमने लगी थीं। अम्बरीन खाला को तो मैंने पहले पिंडी में होटल में नशे में चूर होते देखा था लेकिन अम्मी को मैंने इससे पहले कभी इतने नशे में नहीं देखा था। अब तो उन्हें मेरी मौजूदगी का भी कोई लिहाज़ या फिक्र नहीं थी।


थोड़ी देर में ही फिर चुदाई का खेल शुरू हो गया। अम्मी खुद-ब-खुद नज़ीर का लंड चूसने लगीं और अम्बरीन खाला करामत का लंड चूस रही थीं। दोनों के लौड़े फिर अकड़ कर सख्त हो गये थे। नज़ीर बेड पर लेट गया और अम्मी को अपने लंड पर बैठने को बोला – “आजा मेरी जान... मेरा पूरा लंड अपनी चूत में घुसेड़ ले... फिर करामत पीछे से तेरी गाँड में अपना लंड डाल कर चोदेगा तो लंदन के नज़ारे हो जायेंगे.... मज़ा आ जायेगा तुझे!”

अम्मी नशे में लरज़ती आवाज़ में जोर से एहतिजाज करते हुए बोली – “पागल हो गये तुम दोनों... इसका इतना बड़ा मोटा लंड मेरी गाँड में नहीं जायेगा... और दो-दो लौड़े चूत और गाँड में एक साथ... कैसे... नहीं होगा!” 

करामत अम्मी को हौंसला देते हुए बोला – “सब हो जायेगा... तुम पहले नज़ीर के लौड़े पर बैठ कर उसे अपनी चूत में तो लो... बाकी हम कर लेंगे... हम तुम्हारी गाँड और चूत दोनों को एक साथ चोद कर तो रहेंगे ही... बेहतर होगा तुम भी साथ दो!” नज़ीर ने भी कहा कि, “नखरे मत करो... हमारा साथ दोगी तो तुम्हें लंदन तो क्या चाँद की सैर करवा देंगे! वैसे तुम दोनों की गाँड के सुराख और उनके चारों और बनी हुई कटोरी से साफ ज़ाहिर है कि तुम दोनों खूब गाँड मरवाती हो!” 

“हाँ मरवाती हूँ गाँड.... खूब मरवाती हुँ... लेकिन इतने बड़े खौफ़नाक लौड़े से कभी नहीं मरवायी... और वो भी दो-दो बड़े-बड़े लौड़े एक साथ मैं नहीं झेल पाऊँगी!” इतने नशे में भी अम्मी के लहज़े में मुखालफत के साथ-साथ खीझ भी साफ़ ज़ाहिर थी। लेकिन मैं तो अम्मी जो कह रही थीं वो सुनके सदमे में था। इतने में अम्बरीन खाला अम्मी की हौंसला अफ्ज़ाही करते हुए बोलीं – “यास्मीन... कुछ नहीं होगा... मैंने कईं दफ़ा दो-दो लंड एक साथ लिये हैं... बेहद मज़ा आता है!” अम्मी और अम्बरीन खाला नशे और हवस के आलम में एक के बाद एक अपने फाहिश राज़ ज़ाहिर कर रही थीं। जोश-ओ-खरोश में अम्मी फिर आगे बोल गयीं कि – “लिये तो मैंने भी हैं दो-दो लौड़े कईं दफ़ा... लेकिन इनके लौड़ों का साइज़ तो देख!” 

नज़ीर का लंड सीधा खड़ा हुआ अम्मी के थूक से सना हुआ चमक रहा था। अम्मी ने और मुखालफत नहीं की और नज़ीर के दोनों तरफ टाँगें करके बैठते हुए आहिस्ता-आहिस्ता उसका लंड अपनी चूत में लेने लगीं। जब नज़ीर का पूरा लंड अम्मी की चूत में दाखिल हो गया तो मुझे सिर्फ उसके टट्टे ही नज़र आ रहे थे। अम्मी थोड़ा आगे होकर नज़ीर के ऊपर झुक गयीं और उनके मम्मे नज़ीर के चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। “तुम दोनों मेरी जान ही ले लोगे आज!” अम्मी सरगोशी से बड़बड़ायीं और नज़ीर के लंड पे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे उछलने लगीं। 

खाला अमबरीन अम्मी के चूतड़ों को सहलाते हुए अम्मी को तसल्ली देते हुए बोलीं – “कुछ नहीं होगा यास्मीन! मैं अभी इस करामत का लंड चूस कर बेहद चिकना कर देती हूँ... बड़ी सहुलियत से चला जयेगा तेरी गाँड में।“ ये कहते हुए अम्बरीन खाला करामत का लौड़ा चूसने लगीं और एक हाथ से उसके पूरे लौड़े पर अपना थूक मलने लगीं। उधर नज़ीर नीचे से अपने चूतड़ उठा-उठा कर अम्मी की चूत में ऊपर घस्से मार रहा था और अम्मी भी सिसकते हुए उसके घस्सों का जवाब दे रही थीं। दो मिनट में ही अम्बरीन खाला ने करामत का अज़ीम लौड़ा अपने थूक से तरबतर कर दिया। 

नज़ीर ने घस्से मारने बंद कर दिये और अम्मी की कमर पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया। अम्मी भी अपने हाथ उसके कंधों पर टिका कर अपने निचले होंठ दाँतों में दबा कर करामत के लंड का इंतज़ार करने लगीं। खाला अमबरीन ने थोड़ा सा थूक अपनी उंगलियों पे ले कर अम्मी की गाँड के सुराख पर मल दिया। करामत अम्मी के पीछे आ गया और अपना लौड़ा मुठ्ठी में पकड़ कर उनके चूतड़ों के बीच की दरार में रगड़ने लगा। फिर उसने अपने लंड का टोपा अम्मी की गाँड के सुराख पर रख के धीरे से दबया तो टोपा उनकी गाँड में घुस गया। अम्मी ने शायद अपनी साँसें रोक रखी थीं और टोपा अंदर जाते ही साँस छोड़ते हुए “ऊँहह” करके सिसकीं। करामत ने एक बार टोपा बाहर निकाल कर फिर अम्बरीन खाला के मुँह में दे दिया। अम्बरीन खाला ने उसके टोपे को दो-तीन दफ़ा चूसा और उस पर थूक कर उसे फिर भिगो दिया। करामत ने फिर एक दफ़ा अपना टोपा अम्मी की गाँड के सुराख पर रख के अंदर दबा दिया। नज़ीर नीचे से बोला – “हाँ यार! पेल दे साली की गाँड में पूरा लंड... जल्दी से!”

अम्बरीन खाला भी घुटनों पर बैठी हवस-ज़दा नज़रों से ये नज़ारा देख रही थीं। मुझे भी नज़ीर के टट्टे और उसके लंड का बुनियादी हिस्सा तिर्छा होकर अम्मी की चूत में घुसा हुआ दिख रहा था और करामत के लंड का टोपा मेरी अम्मी की गाँड में घुसा हुआ था। “ज़रा आहिस्ता-आहिस्ता डालो... चीर ना देना मुझे दो हिस्सों में अपने शदीद लौड़ों से!” अम्मी सिसकते हुए नशे में लरज़ती आवाज़ में बड़बड़ायीं। 

नज़ीर करामत को जोश दिलाते बोला – “इसकी बात पे तवज्जो ना दे! घुसेड़ दे गश्ती की गाँड मे लंड एक बार में... मज़ा आयेगा इसे भी...।” करामत ने जोर से अपना लंड अम्मी की गाँड में दबा कर और अंदर घुसेड़ना शुरू किया लेकिन अम्मी की गाँड शायद चूत में नज़ीर का लंड मौजूद होने से और ज्यादा टाईट हो गयी थी। करामत ने लंड घुसाना ज़ारी रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसक लंड और ज्यादा अंदर फिसलने लगा। अम्मी अब मुसलसल ज़ोर-ज़ोर से “ऊँहह आँहह” करते हुए कराह रही थीं। बीच-बीच में उनकी आवाज़ टूट रही थी। अम्बरीन खाला भी मस्ती में ज़ोर से बोल पड़ीं – “जा रहा है अंदर! रुको मत! यास्मीन देख तेरी गाँड कैसे चौड़ी होकर लौड़ा अंदर ले रही है... मैंने कहा था ना कि कुछ नहीं होगा!”

अम्मी कराहते हुए बोलीं – “हाय अल्लाह.. आआआईईई... अम्बरीन... जब तेरी चूत और गाँड एक साथ फटेगी तब पता चलेगा... आआईईई.... ऊँऊँहहह!” 


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

“मुझे तेरा लंड इसकी गाँड में महसूस हो रहा है करामत!” नज़ीर मस्ती से बोला। करामत का दो-तीन इंच लौड़ा अभी भी बाहर था। करामत कुछ लम्हों के लिये रुका और फिर अपना लंड आगे-पीछे करते हुए अम्मी की गाँड मारने लगा। नज़ीर भी नीचे से अम्मी की चूत में घस्से मार रहा था। करामत के हर धक्के के साथ अम्मी का जिस्म आगे झुक जाता था और उनके बड़े मम्मे नज़ीर के चेहरे पर टकरा जाते थे। दो बड़े- बड़े खौलनाक लौड़े मेरी अम्मी की चूत और गाँड में एक साथ अंदर-बाहर घस्से मार रहे थे। इससे पहले ब्लू-फिल्मों में इस तरह की दोहरी चुदाई देखी थी और अब अपनी अम्मी की दोहरी चुदाई का मंज़र मेरे लिये निहायत सैक्सी था। अगर मैंने थोड़ी देर पहले मुठ नहीं मारी होती तो इस वक़्त मैं पैंट में ही फारिग हो जाता। 

करामत अब पूरा लंड अम्मी की गाँड में डाल कर घस्से मार रहा था और नज़ीर नीचे से अम्मी की चूत फाड़ रहा था। अब अम्मी की सिसकियों से ज़ाहिर था कि उन्हें भी मज़ा आने लगा था। अपनी चूत और गाँड में दो अज़ीमतन लौड़ों को झटक कर उनके घस्सों को बर्दाश्त करते हुए अम्मी का जिस्म इधर-उधर मरोड़ जाता था। वो मस्ती में और भी ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगीं। फिर अचानक अपनी गर्दन पीछे उठा कर छत्त की तरफ मुँह करके जोर से चिल्लाते हुए नशे में लरज़ती आवाज़ में बोलीं – “या खुदाऽऽऽ चोदो मुझे... हरामी कुत्तों! फाड़ दो मेरी चूत और गाँड अपने जसीम लौड़ों से... मज़ा आ गया... बे-इंतेहा मज़ा... चोदो... और ज़ोर-ज़ोर से!” मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि अम्मी ऐसे गंदे अल्फाज़ भी इस्तेमाल कर सकती हैं। 

अम्बरीन खाला ज्यादा देर तक अपनी बहन की दोहरी चुदाई देख नहीं सकीं और उनके बगल में लेट कर अपनी चूत में तीन उंगलियाँ घुसेड़ कर मुठ मारने लगीं। इतनी देर में अम्मी का जिस्म ऐंठ गया और वो जोर से चींखते हुए खल्लास हो गयीं और नज़ीर के सीने पर गिर पड़ीं। 

करामत और नज़ीर ने घस्से मारने बंद कर दिये। एक-दो मिनट रुके रहने के बाद नज़ीर के कहने पर करामत ने अपना अज़ीम लंड धीरे से अम्मी की गाँड के फैले हुए छेद में से ‘प्लॉप’ की आवाज़ के साथ बाहर निकाला और अम्मी भी पलट कर नज़ीर के लंड से उतर के बेड पर लेट के उखड़ी हुई साँसें संभालने लगीं। नज़ीर और करामत के बड़े लंड अभी भी अकड़े हुए थे। नज़ीर का लंड अम्मी की चूत के पानी से भीगा हुआ था जबकि करामत का लंड खाला के थूक के साथ-साथ अम्मी की गाँड की नजासत से सना हुआ था। नज़ीर ने अम्बरीन खाला से कहा कि अब उनकी बारी है लंदन की सैर करने की और उनसे पूछा कि वो किसका लंड गाँड में पसंद करेंगी। अम्बरीन खाला शराब और हवस के नशे में मदहोश थीं और बिल्कुल बेहया और बे-तकल्लुफ़ हो चुकी थीं। “पहले तो करामत का ही लुँगी और बाद में तुम्हारा भी लंड लुँगी अपनी गाँड में... तुम दोनों जगह बदल लेना“– अम्बरीन खाला नशे में लरज़ती आवाज़ में बोलीं और ये कहते हुए उन्होंने जो किया वो देखकर एक बार तो मुझे मतलाई आ गयी। अम्बरीन खाला ने करामत के लंड का सुपाड़ा अपने मुँह में लिया जो दो मिनट पहले अम्मी की गाँड में से निकला था और अम्मी की नसाजत से सना हुआ था। खाला की आँखों में शोखी और चेहरे के तासुरात से ज़ाहिर था कि उन्होंने जानबूझ कर करामत का आलूदा लंड अपने मुँह में लिया था और उसपे लगी अपनी बहन की नजासत बड़े मजे से चाट रही थी। करामत और नज़ीर भी अम्बरीन खाला की इस हर्कत से हैरान रह गये। अम्मी को एहसास हुआ तो उन्होंने खाला को टोका भी कि ये कैसी ग़लीज़ हर्कत है लेकिन अम्बरीन खाला तो करामत का नजिस लौड़ा चूस-चूस कर उसपे से अपनी बहन की गाँड के ज़ायक़े का पूरा मज़ा ले रही थीं। कुछ ही देर में उन्होंने करामत के लौड़े से नजिस रस का एक-एक कतरा चाट कर साफ कर दिया और उसका लौड़ा जड़ से टोपे तक अम्बरीन खाला के थूक से भीग कर चमकने लगा। उसका लंड अपने मुँह में से निकाल कर खाला ने शरारत से मुस्कुराने लगीं और अम्मी से मुखातिब होकर लरज़ते आवाज़ में बोलीं – “यास्मिन! मज़ा आ गया... तेरी गाँड तो बेहद लज़ीज़ है!” 

नज़ीर एक दफ़ा फिर बेड पर कमर के बल लेट गया। अम्मी की चूत के रस से सना हुआ उसका शदीद लौड़ा मिनार की तरह सीधा खड़ा था। अम्बरीन खाला ने उसे ललचायी नज़रों से एक बार निहारा और फिर नज़ीर के चूतड़ों के दोनों तरफ अपने घुटने टिका कर उसके ऊपर सवार हो गयीं और उसका लौड़ा पकड़ कर उसका टोपा अपनी चूत में ले लिया। नज़ीर के ऊपर झुक कर उसके कंधों को कस कर पकड़ के अम्बरीन खाला अपने चूतड़ गोल-गोल घुमाते हुए नीचे ठेल कर वो अकड़ा हुआ लौड़ा अपनी मक्खन जैसी चूत में लेने लगीं। नज़ीर ने भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल कर अम्बरीन खाला की चूत में अपना अज़ीम लौड़ा उनकी चूत में अंदर तक पेलना सुरू कर दिया। इस दफ़ा अम्बरीन खाला के चेहरे पर ज़रा सा भी शिकन नज़र नहीं आया। वो खुद ज़ोर-ज़ोर से उछल-उछल कर नज़ीर के लौड़े पे अपनी रसीली चूत से ऊपर-नीचे घस्से मारने लगीं और सिसकते हुए बिल्कुल बिंदास होकर बेशरमी से बोलने लगीं – “चोद मुझे... ऊँऊँघघ! चोद मेरी चूत! ओह फक मी!”

कुछ ही देर में दोनों मिलकर एक ताल में उछलते हुए चुदाई कर रहे थे। खाला ने नज़ीर के कंधे पकड़े हुए थे और उसने खाला के चूतड़ों को जकड़ा हुआ था। करामत अपने लंड को सहलाते हुए उन्हें देख रहा था कि कब वो खाला की गाँड में अ[पना लंड घुसेड़े। फिर वो खाला के चूतड़ों के पीछे झुक गया। खाला को जब अपने पीछे करामत की मौजूदगी का एहसास हुआ तो वो नज़ीर की छाती पर पूरी तरह झुक कर करामत का लंड अपनी गाँड में लेने के लिये तैयार हो गयीं। फिर खुद ही अपने हाथ पीछे लेकर उन्होंने अपने चूतड़ फैला कर अपनी गाँड का सुराख नमूद कर दिया। मैंने देखा कि खाला के गोरे-गोरे चूतड़ों के बीच उनकी गाँड के सुराख के चारों तरफ गहरी सी कटोरी बनी हुई थी जोकि नज़ीर के मुताबिक सालों तक खूब गाँड मरवाने से बनती है। करामत ने झुक कर अपने अज़ीम लंड का टोपा खाला की गाँड में घुसाया तो खाला फिर मस्ती में कराहते हुए बोली – “ओहह अल्लाह! चोद दे मेरी गाँड! ओह हाँ... चोद... कितना शदीद लौड़ा है तेरा! घुसेड़ दे अंदर!” करामत ने ज़ोर लगाना शुरू कर दिया। लंड के आगे वाला कुछ हिस्सा तो आसानी से खाला की गाँड में दाखिल हो गया और फिर करामत को बाकी का लंड घुसेड़ने के लिये थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ा। खाला भी बेकरार होकर उन दोनों के बीच में अपने चूतड़ घुमा-घुमा कर उछलने लगीं और नज़ीर के लंड पर अपनी चूत के घस्से मारते हुए करामत के लंड पर भी अपनी फैली हुई गाँड के घस्से मारने लगीं। 

अपना लंड जड़ तक खाला की गाँड में घुसेड़ने के बाद करामत कुछ सेकेंड रुका और फिर ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड उनकी गाँड में अंदर बाहर पेलने लगा। “मेरी चूत चोदो! मारो मेरी गाँड! आआआह्हहह... मारो... चोदो...!” – अम्बरीन खाला ज़ोर से चिल्लाते हुए बोलीं। दोनों अज़ीम लौड़े ज्यादा से ज्यादा अपनी चूत और गाँड में लेने की बेकरारी में वो खुद भी ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ आगे-पीछे और ऊपर नीचे चला रही थीं। कुछ ही देर में अम्बरीन खाला का जिस्म ऐंठ कर ज़ोर-ज़ोर से थरथराने लगा औ वो ज़ोर से चिल्लायीं – “ऊँऊँहहह! चोदो... चोदो मेरी फुद्दी... मेरी गाँड... मेरा निकला... आआआआईईई!” ये कहते हुए उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया। तकरीबन एक मिनट तक उनका जिस्म ऐंठ कर इसी तरह थरथराता रहा और उनकी आँखें पलट सी गयीं। फिर वो नज़ीर की छाती पर सिर रख कर हाँफने लगीं और आहिस्ता से बोलीं – “अब अपनी जगह बदल लो... नज़ीर तुम गाँड में और करामत मेरी चूत में!”


RE: Muslim Sex Kahani अम्मी और खाला को चोदा - sexstories - 11-07-2017

थोड़ी देर में करामत बेड पर खाला के नीचे लेट कर उनकी चूत में अपना लंड पेल रहा था और नज़ीर पीछे से खाला के चूतड़ों पर झुका हुआ उनकी गाँड अपने लौड़े से मार रहा था। अम्बरीन खाला पुरजोश होकर फिर से ज़ोर-ज़ोर से कराहते हुए और मस्ती में अनापशनाप बोलते हुए अपनी गाँड और चूत में एक साथ दो-दो अज़ीम लौड़ों के घस्सों का मज़ा ले रही थीं। जल्दी ही खाला अमबरीन का जिस्म एक दफ़ा फिर ऐंठ कर थरथराने लगा और वो खल्लास हो गयीं। उसी वक्त करामत के लंड ने भी उनकी चूत में अपनी मनी छोड़ दी। नज़ीर ने ज़ोर-ज़ोर से खाला की गाँड में घस्से मारना ज़ारी रखा और फिर उसने भी खाला की गाँड में अपनी मनि भर दी। 

मैंने देखा कि अम्मी तो इतनी देर में शायद नशे और थकान से चूर होकर सो गयीं थीं। सोते हुए भी उनके चेहरे पर तस्कीन नुमाया नज़र आ रही थी। नज़ीर और करामत ने अपने लंड अम्बरीन खाला की गाँड और चूत में से निकालने के बाद बारी-बारी बाथरूम गये। अम्बरीन खाला ने मुझे इशारे से रुपये लाने को कहा तो मैंने दूसरे कमरे से पचास-हज़ार रुपये लाकर नज़ीर को दे दिये। अम्बरीन खाला ने उससे कहा कि अब वो फिल्म हमारे हवाले कर दे तो उसने कहा कि – “मेरे साथ चलो।“ अम्बरीन खाला तो नशे और थकान में कहीं जाने की हालत में थी नहीं तो उन्होंने मुझे नज़ीर के साथ अकेले जाने को कहा। मैं नज़ीर और करामत के साथ रिक्शा में हज़ुरी बाग़ गया जहाँ पर नज़ीर ने डी-वी-डी मुझे दी और कहा कि – “ये लो मज़े कर!” मैंने पूछा कि इसकी क्या गारंटी है कि उसने फिल्म कि और कॉपियाँ नहीं बनायीं। वो बोला कि वो मुल्क से बाहर जा रहा है और उसे अब इस फिल्म कि ज़रूरत नहीं है। 

करीब एक घंटे बाद जब मैं घर पहुँचा तो अम्मी और अम्बरीन खाला दोनों बेडरूम में उसी नंगी हालत में बेखबर सो रही थीं। मैं भी अपने कमरे में आ गया। मेरे ज़हन में अम्मी और अम्बरीन खाला की चुदाई की फिल्म मुसलसल चल रही थी। नज़ीर और करामत कैसे खौफ़नाक तरीके से अम्मी और अम्बरीन खाला को चोद रहे थे और वो दोनों बहनें भी कितनी बेशरम और बिंदास होकर मज़े लेते हुए चुदवा रही थीं। अम्मी और अम्बरीन खाला ने शराब नशे की हालत में अपनी हरामकारी के कितने ही राज़ भी फ़ाश कर दिये थे। अब मुझे यकीन हो गया था कि अम्बरीन खाला को चुदाई के लिये मनाना मुश्किल नहीं होगा। 

कुछ देर बाद अम्मी के बेडरूम की तरफ से कुछ आवाज़ें आयी तो मैंने वहाँ जाकर देखा कि अम्मी और अम्बरीन खाला जाग गयी थीं। अम्मी अपने कपड़े पहन चुकी थीं और खाला उस वक़्त बाथरूम में थीं। फिर खाला कपड़े पहन कर तैयार होके बाथरूम से बाहर अयीं। दोनों की आँखें थोड़ी लाल थीं लेकिन अम्मी और अम्बरीन खाला दोनों ही बिल्कुल नॉर्मल और हशाश-बशाश नज़र आ रही थीं। हमने नज़ीर की दी हुई डी-वी-डी को डी-वी-डी प्लयेर में लगा कर चेक किया और फिर उसे तोड़ कर उसके कईं टुकड़े कर दिये तकि वो दोबारा कभी इस्तेमाल ना हो सके। एक बहुत बड़ा बोझ हमारे सर से उतर गया था। मेरी छठी हिस कह रही थी कि नज़ीर अब हमारी ज़िंदगी से हमेशा के लिये निकल चुका है। अगर वो मुल्क से बाहर ना भी जाता तो बार-बार यहाँ आ कर अपने आप को खतरे में नहीं डाल सकता था।

फिर अम्मी बोलीं कि – “अब हमें परेशान होने की ज़रूरत नहीं है! हमने जो किया खानदान को एक बहुत बड़ी मुश्किल से निकालने के लिये किया!” अम्बरीन खाला बोलीं कि – “वो तो ठीक है मगर मेरी और तुम्हारी इज़्ज़त भी तो लुट गयी इस सारे-मामले में!” अम्बरीन खाला को अपनी इज़्ज़त का राग अलापने का बहुत शौक था। मैं कसम खा सकता था कि अगर उन्हें दोबारा मौका मिलता और उन पर को‌ई इल्ज़ाम ना आता तो वो ज़रूर नज़ीर और करामत से चूत और गाँड मरवाने के लिये फौरन नंगी हो जाती। अम्मी और अम्बरीन खाला को शायाद एहसास नहीं था कि शराब और हवस के नशे में वो अपनी ज़िनाकारी और शहवत-परस्ती मेरे सामने कबूल कर चुकी हैं। मैंने कहा कि – “ऐसा बिल्कुल नहीं हु‌आ क्योंकि किसी को कुछ पता नहीं है। हमें ऐसी बात सोचनी भी नहीं चाहिये!” फिर अम्बरीन खाला ने अपने ड्रा‌इवर को फोन करके कार लाने को कहा और थोड़ी देर में वो अपने घर चली गयीं। 

फिर मैं इम्तिहान के तैयारी में मसरूफ़ हो गया लेकिन अम्मी को रोज़ाना एक बार तो चोदता ही था और राशिद भी हर दूसरे दिन मेरी गैर-हाज़िरी में आकर अम्मी को चोद जाता था। दो-तिन दिन के बाद चुदाई के दौरान मैंने अम्मी से कहा कि – “मैं भी अम्बरीन खाला को चोदना चाहता हूँ।“ अम्मी बोलीं – “मुझे को‌ई एतराज़ नहीं है अगर तुम अम्बरीन को चोदो लेकिन अम्बरीन क्यों इसके लि‌ए रज़ामंद होगी?” मैंने कहा कि – “मुझे यकीन है कि वो मुझे अपनी चूत देने के लिये राज़ी हो जायेंगी। जरूरत पड़ी तो मैं उन्हें बता दुँगा कि राशिद ने आपके साथ क्या किया है।” अम्मी बोलीं – “हो सकता है कि वो नाराज़ हो कर राशिद को ही घर से निकाल दें या अपने शौहर से उसकी शिकायत कर दे।” मैंने कहा – “अम्मी आप फिक्र ना करें... मैं ऐसी को‌ई नौबत नहीं आने दुँगा!” अम्मी बोलीं – “ठीक है, मुझे को‌ई ऐतराज़ नहीं है। लेकिन पहले अपने इम्तिहान पर ध्यान दो। इम्तिहान खतम के बाद तुम कोशिश कर के देखो। अगर अम्बरीन मान गयी तो वो बार-बार तुम्हें अपनी चूत देना चाहेगी।”

यह सुन कर तो फख्र से मेरा सीना तन गया, और सीना ही नहीं मेरा हथियार भी। जब उन्होंने अपनी रानों पर उसका तनाव महसूस किया तो हमारा खेल फिर शुरू हो गया और काफी लंबा चला। उनकी चूत का लुत्फ़ लेते हु‌ए मैं अम्बरीन खाला की चूत के बारे में ही सोचता रहा। 

इम्तिहान खतम होने के अगले दिन मैं खाला के घर गया। नज़ीर और करामत वाले वाक़िये के बाद मैं पहली बार उनसे रूबरू हु‌आ था। अम्बरीन खाला बिल्कुल नॉर्मल तरीके से पेश आयीं और मेरी खैरियत वगैरह पूछी और पीने के लिये जूस दिया। फिर उन्होंने मुझे शुक्रिया कहा कि उस दिन नज़ीर और करामत वाले वाक़िये में मैंने काफी समझदारी से सब कुछ संभाला और मैं ध्यान रखूँ कि किसी को भी पता ना चले तो उनकी और मेरी अम्मी की इज्ज़त महफूज़ रहेगी। अब भी वो अपनी इज़्ज़त का राग़ अलाप रही थीं लेकिन मैंने उन्हें यकीन दिलाते हु‌ए कहा – “आप मेरी तरफ से बेफिक्र रहें। मैं आपकी इज्ज़त पर कभी आंच नहीं आने दुँगा।”

फिर खाला बोलीं – “वैसे काफी अर्से से आये नहीं तुम... खाला अच्छी नहीं लगती क्या अब?” मैं थोड़ा शर्मिंदा होते हु‌ए कहा कि – “नहीं खाला ऐसी बात नहीं है... वो बस इम्तिहान की मसरूफियत की वजह से नहीं आ सका!”


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