Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र Sex - Printable Version

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RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

जब आँख खुली तो देखा कि चम्पा नीचे दरी बिछा कर सो रही थी, पंखे की ठंडी हवा में उसके बाल लहरा रहे थे और उसका पल्लू सीने से नीचे गिरा हुआ था, उसके उन्नत उरोज मस्त दिख रहे थे।
मैं भी कमरे का दरवाज़ा बंद कर के नीचे ही लेट गया और उसकी लाल धोती को उल्टा दिया और खड़े लंड को उसकी सूखी चूत में डाल दिया।
लंड को चूत में ऐसे ही पड़े रहने दिया।
लंड की गर्मी जब चूत के अंदर फैली तो चम्पा थोड़ी हिली, मैंने कस के एक धका मारा तो चम्पा की आँख खुल गई और मुझको अपने ऊपर देखकर उसने टांगें फैला दी और तब मैंने उसको फिर जम के चोदा।
2-3 बार छूटने के बाद वो बोली- बस करो सोमू, अभी रात भी तो है न।
मैं फिर बिन छुटाये उसके ऊपर से उतर गया।
आने वाली रात के बारे में सोचते हुए मेरी शाम कट गई और खाने में तंदूरी मुर्गा दबा के खाया और एक प्लेट में डलवा कर चम्पा के लिए भी ले आया क्यूंकि मैं जानता था कि नौकरों का खाना अलग बनता था और उसमें सिर्फ दाल रोटी और चावल ही होते थे।
रात जब मैं अपने कमरे में आया तो काफी गर्मी लग रही थी, मैंने जल्दी एक पतला कच्छा और बनयान पहन ली और पंखा फुल स्पीड पर कर दिया।
थोड़ी इंतज़ार के बाद चम्पा आ गई, वो बिलकुल तरोताज़ा लग रही थी।
मैंने उसके सामने तंदूरी मुर्गे की प्लेट रख दी और कहा- खाओ चम्पा, जी भर के… क्यूंकि आज रात को तुम को सोने नहीं दूंगा।
और कोल्ड बॉक्स से बंटे वाली बोतल निकाल कर गिलास में डाल दी और गिलास चम्पा को दे दिया।
वो मुर्गा और बोतल पीकर बहुत खुश हुई, फिर हम दोनों मेरे नरम बेड पर लेट गए और कमरे की हल्की लाइट जला दी और और इसी हल्की लाइट में हम दोनों एक दूसरे को निर्वस्त्र करने लगे, उसका धोती और ब्लाउज और पेटीकोट झट से उतार दिया।
तब चम्पा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- कहीं मम्मी या कोई और आ गया तो? पूरे कपड़े न उतारो सोमू!
मैं बोला- डरो मत चम्पा रानी, मेरे और मम्मी का हुक्म है कि रात में कोई मुझको नहीं तंग करेगा और न ही कोई मेरे कमरे में आएगा। पापा मम्मी भी नहीं आते कभी, तुम बेफिक्र रहो!
फिर हमारा खेल शुरू हुआ और आज मुर्गा खाकर चम्पा में कामुकता बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, वो प्यार की जंग में बढ़ बढ़ कर हिस्सा ले रही थी।
अब उसने मेरे सारे जिस्म को चूमना शुरु किया, मेरी ऊँगली भी उसकी चूत पर ही उसकी भगनासा को हल्के हल्के मसल रही थी।
फिर वो मेरे ऊपर लेट गई और मेरे लौड़े को अपनी चूत पर बिठा कर ऊपर से धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड उसकी आग समान तप्ती हुई चूत में जड़ तक चला गया।
वो बोली- सोमू, अब तुम हिलना नहीं, सारा काम मैं ऊपर से करूंगी।
चम्पा तब पैरों बल बैठ गई और ऊपर से चूत के धक्के मारने लगी। इस पोजीशन में मैंने आज तक किसी को नहीं चोदा था, मुझको सच में बहुत मज़ा आने लगा और मैं नीचे से धक्के मारने लगा जिसके कारण मेरा पूरा 7 इंच का लंड चम्पा की चूत में समां गया।
और बार बार ऐसा होने लगा।
तब चम्पा के चूतड़ एकदम रुक गए और वो एक ज़ोरदार कम्कम्पी के बाद मेरे ऊपर निढाल होकर पसर गई, चम्पा का बड़ा तीव्र स्खलन हुआ और वो बहुत ही आनन्दित हुई।
मेरा खड़ा लंड अभी भी उसकी चूत में समाया हुआ था।
मैंने थोड़ी देर उसको आराम करने दिया और फिर उसको सीधा करके उस पर चढ़ने की तैयारी करने लगा और तभी चम्पा बोली- कभी घोड़ी बना कर चोदा है किसी को?
मैंने कहा- नहीं तो, क्या यह तरीका तुम को आता है?
चम्पा बोली- मेरा मूर्ख पति कई रंडियों के पास जाता था, यह सब वो वहाँ से ही सीखा था और मेरे साथ ज़बरदस्ती करता था। सच में कभी भी अपने पति के साथ नहीं छूटी क्यूंकि मैं उसको मन में एक दरिंदा ही समझती थी।
चम्पा झट घोड़ी बन गई और मैं उसके पीछे घुटने बल बैठ गया और जैसा उसने बताया अपना लंड चम्पा की गांड और चूत बीच वाले हिस्से में टिका दिया और फिर धीरे से उसको चूत के मुख ऊपर रख कर धीरे से अंदर धकेल दिया और गीली चूत में लंड फिच कर के अंदर जा घुसा और बड़ा ही अजीब महसूस होने लगा क्यूंकि चूत की पकड़ लंड पर काफी सख्त हो गई।
चूत अपने आप ही बहुत टाइट लगने लगी, हल्के धक्कों से शुरू करके आखिर बहुत तेज़ी से धक्के मारने लगा और कमसे कम चम्पा 3 बार इस पोजीशन में छूटी और मैं भी एक ज़ोरदार फव्वारे के साथ छूट गया।
उस रात हम दोनों ने कई नए पोज़ सीखे और आज़माये। और इस गहमा गहमी में हम पूरी तरह से थक कर चूर हो गए और एक दूसरे की बाँहों में सो गए।
सुबह जब आँख खुली तो चम्पा जा चुकी थी और काफी दिन निकल आया था।
फिर यह सिलसिला बराबर जारी रहने लगा।
चम्पा संग फ़ुलवा

चम्पा के साथ गुज़ारी गई कई रातों की कहानी सिर्फ इतनी है कि हर बार कुछ नया ही सीखने को मिलता था। उसके साथ यौन सम्बन्ध अब प्राय: एक निश्चित और सुचारू ढंग से होने लगा, वो दोपहर को केवल पंखे की ठंडी हवा के लिए आती थी और हम दोनों एक दूसरे से दूर ही रहते थे और यह अच्छा ही हुआ क्यूंकि -2 बार ऐसा हुआ कि मम्मी मुझ को आवाज़ लगाती हुई मेरे कमरे तक आ गई और हम को सोया देख कर वापस चली जाती थी। 
यह देख कर हम दोनों अब सावधान हो गए थे और रात में भी हम दोनों थोड़ी देर के लिए कपड़े पूरे उतार कर चुदाई कर लेते थे। चम्पा भी अब पूरी तरह से काम का आनन्द ले चुकी थी और उसकी काम भूख अब काफी हद तक शांत हो चुकी थी। वो हर रात 3-4 बार छूट जाती थी और उसके बाद वो शांत हो कर सो जाती थी और मैं भी 1 बार शुरू रात में छूटा लेता था फिर सुबह की पहली चुदाई में फिर चम्पा को चोदते हुए उसका 2 बार और मेरा 1 बार ज़रूर छूट जाता था। 
लेकिन गज़ब की बात यह थी कि चम्पा की चूत को ऊँगली लगाओ तो वह पूरी तरह गीली ही मिलती थी।
चम्पा से पूछा तो वो बोली- मेरे पति के साथ सोते हुए मेरी चूत कभी गीली नहीं होती थी और हमेशा ही वो सूखी चूत में लंड डाल कर धक्के मार लेता और जल्दी ही छूट जाता। कभी उसने मेरे कपड़े नहीं खोले, सिर्फ धोती ऊंची करता और लंड अंदर डाल कर जल्दी जल्दी धक्के मार कर छूटा लेता और फिर जल्दी ही सो जाता… और मुझ को गर्मी चढ़ी होती थी जिसको मैं नहाते हुए शांत कर लेती थी। 
मैंने पूछा- अच्छा तो बताओ, कैसे शांत करती थी तुम अपनी गर्मी?
वो कुछ नहीं बोली और थोड़ी देर बाद कहने लगी- छोड़ो सोमू, तुम क्या करोगे जान कर, यह हम औरतों का गोपनीय राज़ है जो हम मर्दों को नहीं बताती।
‘अच्छा! मैं भी यह राज़ जान कर ही रहूँगा।’
‘नहीं न… यह औरतों की बातों को जानने की कोशिश न करो मेरे सोमू।’
उस वक्त मैं चुप कर गया और ठीक मौके का इंतज़ार करने लगा। अगले दिन मैं स्कूल के सबसे बड़े लड़के को पकड़ा जो शादीशुदा था, मैं उसको बहला कर स्कूल की कैंटीन में ले गया और उसको बंटे वाली बोतल पिलाई और फिर उसकी तारीफ की जैसे वो बहुत ही सुन्दर और स्मार्ट लड़का है।
वो जब खुश हो गया तो उससे पूछा- यार एक बात बतायेगा?
उसने कहा- पूछो छोटे सरकार!
‘यार, आज तक यह नहीं समझ आया कि औरतें जब बहुत गरम हो जाती हैं और लंड की प्यासी होती हैं और उनका पति उनके पास नहीं होता तो वे कैसे अपनी गर्मी शांत करती हैं?’
वो मुस्करा दिया और बोला- क्या बात है छोटे सरकार, यह सवाल क्यों पूछ रहे हो? आप का किसी से चक्कर तो नहीं चल रहा?
‘अरे नहीं यार, वो क्या है घर में नौकरानियों आपस में बातें कर रहीं थी कि पति बाहर गया है सो गर्मी चढ़ती है तो शांत कर लेती हूँ! कैसे शांत करती हैं ये औरतें चढ़ी हुई गर्मी? 
‘अरे यार सिंपल है, अपनी ऊँगली से चूत के ऊपर दाने को रग़ड़ लेती है और जैसे हम लड़कों का मुठ मारने से छूट जाता है वैसे ही वो सिर्फ ऊँगली से छूटा लेती हैं।’
‘अच्छा? सच कह रहे हो?’
‘हाँ भई हाँ, मैंने अपनी पत्नी का कई बार छुटाया जब मेरा जल्दी छूट जाता है तो मैं उसको ऊँगली से छूटा देता हूँ और वो खुश होकर सो जाती है या फिर उसका मुंह से छूटा देता हूँ।’
‘वो कैसे यार? बता न? अच्छा कुछ खायेगा क्या? एक समोसा ले ले यार!’ 
समोसा खाते हुए वो बोला- किसी को बताना नहीं यार, यह मुंह का तरीका बहुत कम लोगों को मालूम है।
‘घबरा नहीं यार, मैं तेरा राज़ अपने तक ही रखूँगा। अब बता, यह मुंह का तरीका क्या है?’ 
और फिर उसने मुझको मुखमैथुन करना सिखाया और कहने लगा- अगर किसी स्त्री का नहीं छूट रहा हो लंडबाज़ी के बाद भी तो यह तरीका एकदम मस्त है और आज़माया हुआ है और कितनी भी सख्त औरत क्यों न हो, काबू में आ जाती है और बार बार देती है चूत!
मैं यह सुन कर एकदम खुश हो गया और सोचा यह तरीका आज ही आज़माऊँगा। किसी तरह स्कूल खत्म हुआ और मैं बहुत बेसब्री से रात का इंतज़ार करने लगा। मुश्किल से टाइम काट कर रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया और चम्पा का इंतज़ार करने लगा।
काफी देर बाद वो आई और आ कर अपना दरी वाला बिस्तर बिछा और वहीं लेट गई।
यह देख कर मैं बोला- क्या बात है चम्पा? मेरे बिस्तर पर नहीं आ रही क्या?
चम्पा बोली- नहीं सोमू, मेरा महीना शुरु हो गया है तो कुछ नहीं कर सकते अगले चार दिन!
यह सुन कर मेरा मुंह लटक गया और मैं एकदम उदास हो गया, फिर सोचा यह 4 दिन भी बीत जाएंगे। यह सोच कर मैं सोने की कोशिश करने लगा। तभी लगा कि चम्पा उठी और बाहर चली गई और थोड़ी देर बाद वो किसी लड़की के साथ वापस आ गई।
ध्यान से देखा तो वो रसोई में हमारी बावर्चन के साथ काम करती थी, देखने में कोई ख़ास नहीं थी, थोड़ी मोटी थी लेकिन उसके उरोज और नितम्ब काफी बड़े लग रहे थे।
मुझको समझ नहीं आया कि चम्पा उसको मेरे कमरे में क्यों लाई थी। मैं उठ कर बैठ गया और चम्पा से पूछा- यह कौन है चम्पा?
‘छोटे मालिक, यह तो फुलवा है, यह आज मेरे पास सोयेगी अगर आप को ऐतराज़ न हो?’
‘पर क्यों?’ मैं बोला।
‘बस यों ही!’
वो मंद मंद मुस्कराने लगी और फिर चम्पा उठी, कमरे का दरवाज़ा बंद कर आई, मेरे बिस्तर पर बैठ गई और उसने इशारे से फुलवा को भी पास बुला लिया।
चम्पा बोली- छोटे मालिक, फुलवा मेरे बचपन की सहेली है और हमारी शादी भी साथ साथ हुई थी। हमारे पति भी एक साथ विदेश नौकरी करने गए थे और हम दोनों तब से ही लंड की प्यासी हैं. जब आपने मुझको पहली बार चोदा था तो फुलवा मेरे चेहरे को देख कर जान गई थी कि मेरी लंड की प्यासी थोड़ी शांत हुई है। और तभी उसके चेहरे की मायूसी देख कर मैंने मन ही मन फैसला किया कि छोटे मालिक को मनवा लूंगी और फुलवा को चुदवा दूंगी। बोलिए, क्या आप फुलवा को भी चोदेंगे? मैं हाथ जोड़ कर आप से विनती कर रही हूँ छोटे मालिक आप फुलवा को भी लंड का सुख दे दो जी!
मैं गहरी सोच में डूब गया कि फुलवा को चोदना ठीक होगा क्या? 
मेरे को हिचकते देख कर चम्पा बोली- सोमू मान जाओ ना?
मैं बोला- क्या तुम यहाँ रहोगी? तुम्हारे बिना मैं नहीं करूँगा कुछ भी?
‘हाँ हाँ, रहूंगी… तुम दोनों की पूरी मदद करूँगी, बोलो ठीक है न?’
मैंने हामी में सर हिला दिया।
चम्पा ने फुलवा को बाँहों भर लिया और उसके गालों को चूम लिया और मुझको भी होटों पर चूम लिया।
उसका इतना करना था कि मेरा लंड टन से खड़ा हो गया।
चम्पा ने फुलवा के कपड़े उतारने शुरू कर दिये, पहले उसकी धोती को उतारा और फिर उसका ब्लाउज उतार दिया। फुलवा का ब्लाउज जब उतरा तो उसके मोटे स्तन उछाल कर बाहर आ गए, बहुत बड़े और सॉलिड थे।
उसकी चूचियाँ भी एकदम कड़ी थीं और ख़ास तौर अपनी ओर आकर्षत कर रही थीं और चम्पा ने धीरे से उसका पेटीकोट भी उतार दिया। 
फुलवा का सारा जिस्म गोल मोल था, उसका पेट गोल और उभरा हुआ था लेकिन हिप्स और जांघें एकदम सॉलिड थे। उसकी चूत काले बालों से ढकी हुई थी, उसका मुंह झुका हुआ था और शायद सोच रही होगी ‘क्या मैं उसको पसंद करूंगा या नहीं?’
उसका भ्रम दूर करने के लिए मैंने भी अपनी कमीज और कच्छा उतार दिया और मेरा खड़ा लंड यह बताने के लिए काफी था कि मैं उसको पसंद करता हूँ, या यूँ कहो कि मेरा लंड बहुत पसंद करता है।
चम्पा खड़े लंड को देख कर ताली बजाने लगी और जल्दी से उसने मुझ को एक किस कर दी और और मुझको और फुलवा को अपनी दोनों बाहों में भर लिया और फिर फुलवा को लेकर बिस्तर पर आ गई, फुलवा को बीच में और मुझको एक साइड पर और आप दूसरे साइड में लेट गई।
फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर फुलवा के स्तनों पर रख दिया दोनों उरोजों को मेरे हाथ द्वारा मसलने लगी।
फिर उसके इशारे पर मैं खुद ही यह काम करने लगा और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर फुलवा की बालों भरी चूत पर रख दिया।
मैंने ऊँगली डाली तो वो पूरी तरह से पनिया रही थी। उसके भगनासा को हल्के से रगड़ा तो फुलवा ने अपनी कमर एकदम ऊपर उठा दी। अब मैंने उसकी चूचियों को चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ उसके चूत पर फेरना जारी रखा।
तब चम्पा ने फुलवा का हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और उसको मुठी में ऊपर नीचे करने को कहा।
फिर चम्पा ने मुझको इशारा किया कि मैं फुलवा पर चढ़ जाऊ और मैं झट उसकी टांगों के बीच आकर लंड को उसकी चूत पर रख दिया, कुछ देर लंड को हल्के से चूत पर रगड़ा और फिर चूत के मुंह पर रख कर एक धक्का मारा और घप से लंड चूत की गहराई में खो गया।
ऐसा लगा कि वो एक गर्म भट्टी में चला गया हो। मुझको कम्मो और चम्पा के साथ पहली चुदाई की याद आ गई क्यूंकि तब भी दोनों की चूतें भट्टी की तरह गर्म थीं..
अब मैंने चुदाई अपने कंट्रोल में ले ली और धीरे धीरे धक्कों के साथ चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और करीब 5 मिन्ट की चुदाई बाद वो पहली बार छूट गई।
उसके छूटने का ढंग कुछ अलग था, छूटने से पहले उसने अपनी कमर को एकदम ऊपर उठाया और मेरी कमर के साथ जोड़ दिया और ज़ोर ज़ोर से कांपना शुरू कर दिया और जब तक वो पूरी तरह नहीं छूटी वो मुझसे चिपकी रही।
मेरा लंड पूरा उसके अंदर समाया हुआ था और उसकी चूत का खुलना बंद होना लंड को महसूस हो रहा था, उसके मोटे मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे। 
थोड़ा रुक कर मैंने फिर चुदाई शुरू कर दी और धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और फुलवा एक बार फिर छूट गई और एकदम ढीली पढ़ गई लेकिन मैंने चुदाई जारी रखी और थोड़े टाइम बाद जब फुलवा तीसरी बार छूटी तो मैं अपने को नहीं रोक सका और उस के साथ मेरा भी फुवारा छूट गया और फुलवा का चेहरा एकदम खुशी से खिल उठा।
हम दोनों थक कर लेट गए और चम्पा फुलवा के होटों को चूसने लगी और उसके स्तनों को दबाने लगी। फुलवा ने ‘थैंक यू’ मुझको आँखों से ही कह दिया।
चम्पा उठी और नीचे बिस्तर बिछा कर लेट गई और फुलवा को मेरे साथ सोने का इशारा करके खुद सो गई।
10-15 मिन्ट बाद मैंने फुलवा को फिर चोदा और उसके दो बार छूटने के बाद मैंने भी छूटा लिया और करवट बदल कर सो गया।
आधी रात को मेरा हाथ फिर फुलवा के नंगे स्तनों पर लगा और फिर मेरा लंड चोदने के लिए तैयार हो गया और मैंने फुलवा की चूत को हल्के से मसला और जब उसकी टांगें फिर अपने आप खुल कर चौड़ी हो गई तो मैं जल्दी से अंदर घुसा और उसकी चूत में लंड को डाल दिया।
फुलवा की चूत अभी भी पनिया रही थी, थोड़े धक्कों के बाद वो झड़ गई लेकिन मैं अभी भी मस्ती में था तो आधा घंटा उसको चोदने के बाद ही अपना छुटाया और फिर गहरी नींद सो गया।
सुबह चम्पा ने मुझको जगाया और पूछा कि हम दोनों जाएँ क्या?
मैंने इशारे से कहा कि फुलवा को एक बार और चोदना चाहता हूँ तो फुलवा जो धोती पहन चुकी थी, धोती को उतारने लगी।
मैंने इशारे से कहा- रहने दो, धोती ऊपर उठा कर ही चोद दूंगा। 
वो फिर मेरे पास लेट गई और मैंने उसको जल्दी ही फिर तैयार कर लिया और उसकी ज़ोरदार चुदाई कर दी और उसका कम से कम 2 बार छूटने के बाद भी मैं नहीं छूटा और उसको कहा- जाओ तुम दोनों, बाकी हिसाब रात को कर लेंगे।
यह सिलसिला 4-5 दिन चला और फिर सिर्फ चम्पा ही आई, कुछ उदास दिख रही थी, मैंने पूछा- उदास क्यों हो चम्पा?
वो बोली- फुलवा नहीं आई इसलिए!
‘तो क्या परेशानी है?’
‘आप से पूछे बगैर हम उसको कैसे लाते?’
‘अरे इसमें पूछना क्या है? ले आओ न उसको!’
और चम्पा ख़ुशी ख़ुशी चली गई और थोड़ी बाद वो फुलवा को लेकर आ गई। दोनों मेरे पलंग पर बैठ गई मेरी अगल बगल… मैंने पहले चम्पा को चूमा और फिर फुलवा को।
मैं बोला- अब क्या इरादा है चम्पा रानी?
‘आप बुरा तो नहीं मान जायेंगे अगर मैं कहूं कि आप हम दोनों को बारी बारी से चोदो। आप बीच में लेट जाओ और हम दोनों को बारी बारी से चोदो जैसे पहले मुझको और फिर फुलवा को, मंज़ूर है क्या?’
‘जैसा तुम कहो चम्पा!’
‘चलो फुलवा और सोमू तुम भी कपड़े उतार दो और मैं भी उतार देती हूँ फिर आप बीच में लेट जाना ठीक है?’
‘ठीक है, या ऐसा करो कि मैं बीच में लेट जाता हूँ और तुम बारी से मेरे ऊपर चढ़ जाना और चुदाई का सारा काम तुम दोनों को करना पड़ेगा। मंज़ूर है क्या?’
दोनों ने सर हिला दिया।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

जब आँख खुली तो देखा कि चम्पा नीचे दरी बिछा कर सो रही थी, पंखे की ठंडी हवा में उसके बाल लहरा रहे थे और उसका पल्लू सीने से नीचे गिरा हुआ था, उसके उन्नत उरोज मस्त दिख रहे थे।
मैं भी कमरे का दरवाज़ा बंद कर के नीचे ही लेट गया और उसकी लाल धोती को उल्टा दिया और खड़े लंड को उसकी सूखी चूत में डाल दिया।
लंड को चूत में ऐसे ही पड़े रहने दिया।
लंड की गर्मी जब चूत के अंदर फैली तो चम्पा थोड़ी हिली, मैंने कस के एक धका मारा तो चम्पा की आँख खुल गई और मुझको अपने ऊपर देखकर उसने टांगें फैला दी और तब मैंने उसको फिर जम के चोदा।
2-3 बार छूटने के बाद वो बोली- बस करो सोमू, अभी रात भी तो है न।
मैं फिर बिन छुटाये उसके ऊपर से उतर गया।
आने वाली रात के बारे में सोचते हुए मेरी शाम कट गई और खाने में तंदूरी मुर्गा दबा के खाया और एक प्लेट में डलवा कर चम्पा के लिए भी ले आया क्यूंकि मैं जानता था कि नौकरों का खाना अलग बनता था और उसमें सिर्फ दाल रोटी और चावल ही होते थे।
रात जब मैं अपने कमरे में आया तो काफी गर्मी लग रही थी, मैंने जल्दी एक पतला कच्छा और बनयान पहन ली और पंखा फुल स्पीड पर कर दिया।
थोड़ी इंतज़ार के बाद चम्पा आ गई, वो बिलकुल तरोताज़ा लग रही थी।
मैंने उसके सामने तंदूरी मुर्गे की प्लेट रख दी और कहा- खाओ चम्पा, जी भर के… क्यूंकि आज रात को तुम को सोने नहीं दूंगा।
और कोल्ड बॉक्स से बंटे वाली बोतल निकाल कर गिलास में डाल दी और गिलास चम्पा को दे दिया।
वो मुर्गा और बोतल पीकर बहुत खुश हुई, फिर हम दोनों मेरे नरम बेड पर लेट गए और कमरे की हल्की लाइट जला दी और और इसी हल्की लाइट में हम दोनों एक दूसरे को निर्वस्त्र करने लगे, उसका धोती और ब्लाउज और पेटीकोट झट से उतार दिया।
तब चम्पा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- कहीं मम्मी या कोई और आ गया तो? पूरे कपड़े न उतारो सोमू!
मैं बोला- डरो मत चम्पा रानी, मेरे और मम्मी का हुक्म है कि रात में कोई मुझको नहीं तंग करेगा और न ही कोई मेरे कमरे में आएगा। पापा मम्मी भी नहीं आते कभी, तुम बेफिक्र रहो!
फिर हमारा खेल शुरू हुआ और आज मुर्गा खाकर चम्पा में कामुकता बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, वो प्यार की जंग में बढ़ बढ़ कर हिस्सा ले रही थी।
अब उसने मेरे सारे जिस्म को चूमना शुरु किया, मेरी ऊँगली भी उसकी चूत पर ही उसकी भगनासा को हल्के हल्के मसल रही थी।
फिर वो मेरे ऊपर लेट गई और मेरे लौड़े को अपनी चूत पर बिठा कर ऊपर से धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड उसकी आग समान तप्ती हुई चूत में जड़ तक चला गया।
वो बोली- सोमू, अब तुम हिलना नहीं, सारा काम मैं ऊपर से करूंगी।
चम्पा तब पैरों बल बैठ गई और ऊपर से चूत के धक्के मारने लगी। इस पोजीशन में मैंने आज तक किसी को नहीं चोदा था, मुझको सच में बहुत मज़ा आने लगा और मैं नीचे से धक्के मारने लगा जिसके कारण मेरा पूरा 7 इंच का लंड चम्पा की चूत में समां गया।
और बार बार ऐसा होने लगा।
तब चम्पा के चूतड़ एकदम रुक गए और वो एक ज़ोरदार कम्कम्पी के बाद मेरे ऊपर निढाल होकर पसर गई, चम्पा का बड़ा तीव्र स्खलन हुआ और वो बहुत ही आनन्दित हुई।
मेरा खड़ा लंड अभी भी उसकी चूत में समाया हुआ था।
मैंने थोड़ी देर उसको आराम करने दिया और फिर उसको सीधा करके उस पर चढ़ने की तैयारी करने लगा और तभी चम्पा बोली- कभी घोड़ी बना कर चोदा है किसी को?
मैंने कहा- नहीं तो, क्या यह तरीका तुम को आता है?
चम्पा बोली- मेरा मूर्ख पति कई रंडियों के पास जाता था, यह सब वो वहाँ से ही सीखा था और मेरे साथ ज़बरदस्ती करता था। सच में कभी भी अपने पति के साथ नहीं छूटी क्यूंकि मैं उसको मन में एक दरिंदा ही समझती थी।
चम्पा झट घोड़ी बन गई और मैं उसके पीछे घुटने बल बैठ गया और जैसा उसने बताया अपना लंड चम्पा की गांड और चूत बीच वाले हिस्से में टिका दिया और फिर धीरे से उसको चूत के मुख ऊपर रख कर धीरे से अंदर धकेल दिया और गीली चूत में लंड फिच कर के अंदर जा घुसा और बड़ा ही अजीब महसूस होने लगा क्यूंकि चूत की पकड़ लंड पर काफी सख्त हो गई।
चूत अपने आप ही बहुत टाइट लगने लगी, हल्के धक्कों से शुरू करके आखिर बहुत तेज़ी से धक्के मारने लगा और कमसे कम चम्पा 3 बार इस पोजीशन में छूटी और मैं भी एक ज़ोरदार फव्वारे के साथ छूट गया।
उस रात हम दोनों ने कई नए पोज़ सीखे और आज़माये। और इस गहमा गहमी में हम पूरी तरह से थक कर चूर हो गए और एक दूसरे की बाँहों में सो गए।
सुबह जब आँख खुली तो चम्पा जा चुकी थी और काफी दिन निकल आया था।
फिर यह सिलसिला बराबर जारी रहने लगा।
चम्पा संग फ़ुलवा

चम्पा के साथ गुज़ारी गई कई रातों की कहानी सिर्फ इतनी है कि हर बार कुछ नया ही सीखने को मिलता था। उसके साथ यौन सम्बन्ध अब प्राय: एक निश्चित और सुचारू ढंग से होने लगा, वो दोपहर को केवल पंखे की ठंडी हवा के लिए आती थी और हम दोनों एक दूसरे से दूर ही रहते थे और यह अच्छा ही हुआ क्यूंकि -2 बार ऐसा हुआ कि मम्मी मुझ को आवाज़ लगाती हुई मेरे कमरे तक आ गई और हम को सोया देख कर वापस चली जाती थी। 
यह देख कर हम दोनों अब सावधान हो गए थे और रात में भी हम दोनों थोड़ी देर के लिए कपड़े पूरे उतार कर चुदाई कर लेते थे। चम्पा भी अब पूरी तरह से काम का आनन्द ले चुकी थी और उसकी काम भूख अब काफी हद तक शांत हो चुकी थी। वो हर रात 3-4 बार छूट जाती थी और उसके बाद वो शांत हो कर सो जाती थी और मैं भी 1 बार शुरू रात में छूटा लेता था फिर सुबह की पहली चुदाई में फिर चम्पा को चोदते हुए उसका 2 बार और मेरा 1 बार ज़रूर छूट जाता था। 
लेकिन गज़ब की बात यह थी कि चम्पा की चूत को ऊँगली लगाओ तो वह पूरी तरह गीली ही मिलती थी।
चम्पा से पूछा तो वो बोली- मेरे पति के साथ सोते हुए मेरी चूत कभी गीली नहीं होती थी और हमेशा ही वो सूखी चूत में लंड डाल कर धक्के मार लेता और जल्दी ही छूट जाता। कभी उसने मेरे कपड़े नहीं खोले, सिर्फ धोती ऊंची करता और लंड अंदर डाल कर जल्दी जल्दी धक्के मार कर छूटा लेता और फिर जल्दी ही सो जाता… और मुझ को गर्मी चढ़ी होती थी जिसको मैं नहाते हुए शांत कर लेती थी। 
मैंने पूछा- अच्छा तो बताओ, कैसे शांत करती थी तुम अपनी गर्मी?
वो कुछ नहीं बोली और थोड़ी देर बाद कहने लगी- छोड़ो सोमू, तुम क्या करोगे जान कर, यह हम औरतों का गोपनीय राज़ है जो हम मर्दों को नहीं बताती।
‘अच्छा! मैं भी यह राज़ जान कर ही रहूँगा।’
‘नहीं न… यह औरतों की बातों को जानने की कोशिश न करो मेरे सोमू।’
उस वक्त मैं चुप कर गया और ठीक मौके का इंतज़ार करने लगा। अगले दिन मैं स्कूल के सबसे बड़े लड़के को पकड़ा जो शादीशुदा था, मैं उसको बहला कर स्कूल की कैंटीन में ले गया और उसको बंटे वाली बोतल पिलाई और फिर उसकी तारीफ की जैसे वो बहुत ही सुन्दर और स्मार्ट लड़का है।
वो जब खुश हो गया तो उससे पूछा- यार एक बात बतायेगा?
उसने कहा- पूछो छोटे सरकार!
‘यार, आज तक यह नहीं समझ आया कि औरतें जब बहुत गरम हो जाती हैं और लंड की प्यासी होती हैं और उनका पति उनके पास नहीं होता तो वे कैसे अपनी गर्मी शांत करती हैं?’
वो मुस्करा दिया और बोला- क्या बात है छोटे सरकार, यह सवाल क्यों पूछ रहे हो? आप का किसी से चक्कर तो नहीं चल रहा?
‘अरे नहीं यार, वो क्या है घर में नौकरानियों आपस में बातें कर रहीं थी कि पति बाहर गया है सो गर्मी चढ़ती है तो शांत कर लेती हूँ! कैसे शांत करती हैं ये औरतें चढ़ी हुई गर्मी? 
‘अरे यार सिंपल है, अपनी ऊँगली से चूत के ऊपर दाने को रग़ड़ लेती है और जैसे हम लड़कों का मुठ मारने से छूट जाता है वैसे ही वो सिर्फ ऊँगली से छूटा लेती हैं।’
‘अच्छा? सच कह रहे हो?’
‘हाँ भई हाँ, मैंने अपनी पत्नी का कई बार छुटाया जब मेरा जल्दी छूट जाता है तो मैं उसको ऊँगली से छूटा देता हूँ और वो खुश होकर सो जाती है या फिर उसका मुंह से छूटा देता हूँ।’
‘वो कैसे यार? बता न? अच्छा कुछ खायेगा क्या? एक समोसा ले ले यार!’ 
समोसा खाते हुए वो बोला- किसी को बताना नहीं यार, यह मुंह का तरीका बहुत कम लोगों को मालूम है।
‘घबरा नहीं यार, मैं तेरा राज़ अपने तक ही रखूँगा। अब बता, यह मुंह का तरीका क्या है?’ 
और फिर उसने मुझको मुखमैथुन करना सिखाया और कहने लगा- अगर किसी स्त्री का नहीं छूट रहा हो लंडबाज़ी के बाद भी तो यह तरीका एकदम मस्त है और आज़माया हुआ है और कितनी भी सख्त औरत क्यों न हो, काबू में आ जाती है और बार बार देती है चूत!
मैं यह सुन कर एकदम खुश हो गया और सोचा यह तरीका आज ही आज़माऊँगा। किसी तरह स्कूल खत्म हुआ और मैं बहुत बेसब्री से रात का इंतज़ार करने लगा। मुश्किल से टाइम काट कर रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गया और चम्पा का इंतज़ार करने लगा।
काफी देर बाद वो आई और आ कर अपना दरी वाला बिस्तर बिछा और वहीं लेट गई।
यह देख कर मैं बोला- क्या बात है चम्पा? मेरे बिस्तर पर नहीं आ रही क्या?
चम्पा बोली- नहीं सोमू, मेरा महीना शुरु हो गया है तो कुछ नहीं कर सकते अगले चार दिन!
यह सुन कर मेरा मुंह लटक गया और मैं एकदम उदास हो गया, फिर सोचा यह 4 दिन भी बीत जाएंगे। यह सोच कर मैं सोने की कोशिश करने लगा। तभी लगा कि चम्पा उठी और बाहर चली गई और थोड़ी देर बाद वो किसी लड़की के साथ वापस आ गई।
ध्यान से देखा तो वो रसोई में हमारी बावर्चन के साथ काम करती थी, देखने में कोई ख़ास नहीं थी, थोड़ी मोटी थी लेकिन उसके उरोज और नितम्ब काफी बड़े लग रहे थे।
मुझको समझ नहीं आया कि चम्पा उसको मेरे कमरे में क्यों लाई थी। मैं उठ कर बैठ गया और चम्पा से पूछा- यह कौन है चम्पा?
‘छोटे मालिक, यह तो फुलवा है, यह आज मेरे पास सोयेगी अगर आप को ऐतराज़ न हो?’
‘पर क्यों?’ मैं बोला।
‘बस यों ही!’
वो मंद मंद मुस्कराने लगी और फिर चम्पा उठी, कमरे का दरवाज़ा बंद कर आई, मेरे बिस्तर पर बैठ गई और उसने इशारे से फुलवा को भी पास बुला लिया।
चम्पा बोली- छोटे मालिक, फुलवा मेरे बचपन की सहेली है और हमारी शादी भी साथ साथ हुई थी। हमारे पति भी एक साथ विदेश नौकरी करने गए थे और हम दोनों तब से ही लंड की प्यासी हैं. जब आपने मुझको पहली बार चोदा था तो फुलवा मेरे चेहरे को देख कर जान गई थी कि मेरी लंड की प्यासी थोड़ी शांत हुई है। और तभी उसके चेहरे की मायूसी देख कर मैंने मन ही मन फैसला किया कि छोटे मालिक को मनवा लूंगी और फुलवा को चुदवा दूंगी। बोलिए, क्या आप फुलवा को भी चोदेंगे? मैं हाथ जोड़ कर आप से विनती कर रही हूँ छोटे मालिक आप फुलवा को भी लंड का सुख दे दो जी!
मैं गहरी सोच में डूब गया कि फुलवा को चोदना ठीक होगा क्या? 
मेरे को हिचकते देख कर चम्पा बोली- सोमू मान जाओ ना?
मैं बोला- क्या तुम यहाँ रहोगी? तुम्हारे बिना मैं नहीं करूँगा कुछ भी?
‘हाँ हाँ, रहूंगी… तुम दोनों की पूरी मदद करूँगी, बोलो ठीक है न?’
मैंने हामी में सर हिला दिया।
चम्पा ने फुलवा को बाँहों भर लिया और उसके गालों को चूम लिया और मुझको भी होटों पर चूम लिया।
उसका इतना करना था कि मेरा लंड टन से खड़ा हो गया।
चम्पा ने फुलवा के कपड़े उतारने शुरू कर दिये, पहले उसकी धोती को उतारा और फिर उसका ब्लाउज उतार दिया। फुलवा का ब्लाउज जब उतरा तो उसके मोटे स्तन उछाल कर बाहर आ गए, बहुत बड़े और सॉलिड थे।
उसकी चूचियाँ भी एकदम कड़ी थीं और ख़ास तौर अपनी ओर आकर्षत कर रही थीं और चम्पा ने धीरे से उसका पेटीकोट भी उतार दिया। 
फुलवा का सारा जिस्म गोल मोल था, उसका पेट गोल और उभरा हुआ था लेकिन हिप्स और जांघें एकदम सॉलिड थे। उसकी चूत काले बालों से ढकी हुई थी, उसका मुंह झुका हुआ था और शायद सोच रही होगी ‘क्या मैं उसको पसंद करूंगा या नहीं?’
उसका भ्रम दूर करने के लिए मैंने भी अपनी कमीज और कच्छा उतार दिया और मेरा खड़ा लंड यह बताने के लिए काफी था कि मैं उसको पसंद करता हूँ, या यूँ कहो कि मेरा लंड बहुत पसंद करता है।
चम्पा खड़े लंड को देख कर ताली बजाने लगी और जल्दी से उसने मुझ को एक किस कर दी और और मुझको और फुलवा को अपनी दोनों बाहों में भर लिया और फिर फुलवा को लेकर बिस्तर पर आ गई, फुलवा को बीच में और मुझको एक साइड पर और आप दूसरे साइड में लेट गई।
फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर फुलवा के स्तनों पर रख दिया दोनों उरोजों को मेरे हाथ द्वारा मसलने लगी।
फिर उसके इशारे पर मैं खुद ही यह काम करने लगा और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर फुलवा की बालों भरी चूत पर रख दिया।
मैंने ऊँगली डाली तो वो पूरी तरह से पनिया रही थी। उसके भगनासा को हल्के से रगड़ा तो फुलवा ने अपनी कमर एकदम ऊपर उठा दी। अब मैंने उसकी चूचियों को चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ उसके चूत पर फेरना जारी रखा।
तब चम्पा ने फुलवा का हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और उसको मुठी में ऊपर नीचे करने को कहा।
फिर चम्पा ने मुझको इशारा किया कि मैं फुलवा पर चढ़ जाऊ और मैं झट उसकी टांगों के बीच आकर लंड को उसकी चूत पर रख दिया, कुछ देर लंड को हल्के से चूत पर रगड़ा और फिर चूत के मुंह पर रख कर एक धक्का मारा और घप से लंड चूत की गहराई में खो गया।
ऐसा लगा कि वो एक गर्म भट्टी में चला गया हो। मुझको कम्मो और चम्पा के साथ पहली चुदाई की याद आ गई क्यूंकि तब भी दोनों की चूतें भट्टी की तरह गर्म थीं..
अब मैंने चुदाई अपने कंट्रोल में ले ली और धीरे धीरे धक्कों के साथ चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और करीब 5 मिन्ट की चुदाई बाद वो पहली बार छूट गई।
उसके छूटने का ढंग कुछ अलग था, छूटने से पहले उसने अपनी कमर को एकदम ऊपर उठाया और मेरी कमर के साथ जोड़ दिया और ज़ोर ज़ोर से कांपना शुरू कर दिया और जब तक वो पूरी तरह नहीं छूटी वो मुझसे चिपकी रही।
मेरा लंड पूरा उसके अंदर समाया हुआ था और उसकी चूत का खुलना बंद होना लंड को महसूस हो रहा था, उसके मोटे मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे। 
थोड़ा रुक कर मैंने फिर चुदाई शुरू कर दी और धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और फुलवा एक बार फिर छूट गई और एकदम ढीली पढ़ गई लेकिन मैंने चुदाई जारी रखी और थोड़े टाइम बाद जब फुलवा तीसरी बार छूटी तो मैं अपने को नहीं रोक सका और उस के साथ मेरा भी फुवारा छूट गया और फुलवा का चेहरा एकदम खुशी से खिल उठा।
हम दोनों थक कर लेट गए और चम्पा फुलवा के होटों को चूसने लगी और उसके स्तनों को दबाने लगी। फुलवा ने ‘थैंक यू’ मुझको आँखों से ही कह दिया।
चम्पा उठी और नीचे बिस्तर बिछा कर लेट गई और फुलवा को मेरे साथ सोने का इशारा करके खुद सो गई।
10-15 मिन्ट बाद मैंने फुलवा को फिर चोदा और उसके दो बार छूटने के बाद मैंने भी छूटा लिया और करवट बदल कर सो गया।
आधी रात को मेरा हाथ फिर फुलवा के नंगे स्तनों पर लगा और फिर मेरा लंड चोदने के लिए तैयार हो गया और मैंने फुलवा की चूत को हल्के से मसला और जब उसकी टांगें फिर अपने आप खुल कर चौड़ी हो गई तो मैं जल्दी से अंदर घुसा और उसकी चूत में लंड को डाल दिया।
फुलवा की चूत अभी भी पनिया रही थी, थोड़े धक्कों के बाद वो झड़ गई लेकिन मैं अभी भी मस्ती में था तो आधा घंटा उसको चोदने के बाद ही अपना छुटाया और फिर गहरी नींद सो गया।
सुबह चम्पा ने मुझको जगाया और पूछा कि हम दोनों जाएँ क्या?
मैंने इशारे से कहा कि फुलवा को एक बार और चोदना चाहता हूँ तो फुलवा जो धोती पहन चुकी थी, धोती को उतारने लगी।
मैंने इशारे से कहा- रहने दो, धोती ऊपर उठा कर ही चोद दूंगा। 
वो फिर मेरे पास लेट गई और मैंने उसको जल्दी ही फिर तैयार कर लिया और उसकी ज़ोरदार चुदाई कर दी और उसका कम से कम 2 बार छूटने के बाद भी मैं नहीं छूटा और उसको कहा- जाओ तुम दोनों, बाकी हिसाब रात को कर लेंगे।
यह सिलसिला 4-5 दिन चला और फिर सिर्फ चम्पा ही आई, कुछ उदास दिख रही थी, मैंने पूछा- उदास क्यों हो चम्पा?
वो बोली- फुलवा नहीं आई इसलिए!
‘तो क्या परेशानी है?’
‘आप से पूछे बगैर हम उसको कैसे लाते?’
‘अरे इसमें पूछना क्या है? ले आओ न उसको!’
और चम्पा ख़ुशी ख़ुशी चली गई और थोड़ी बाद वो फुलवा को लेकर आ गई। दोनों मेरे पलंग पर बैठ गई मेरी अगल बगल… मैंने पहले चम्पा को चूमा और फिर फुलवा को।
मैं बोला- अब क्या इरादा है चम्पा रानी?
‘आप बुरा तो नहीं मान जायेंगे अगर मैं कहूं कि आप हम दोनों को बारी बारी से चोदो। आप बीच में लेट जाओ और हम दोनों को बारी बारी से चोदो जैसे पहले मुझको और फिर फुलवा को, मंज़ूर है क्या?’
‘जैसा तुम कहो चम्पा!’
‘चलो फुलवा और सोमू तुम भी कपड़े उतार दो और मैं भी उतार देती हूँ फिर आप बीच में लेट जाना ठीक है?’
‘ठीक है, या ऐसा करो कि मैं बीच में लेट जाता हूँ और तुम बारी से मेरे ऊपर चढ़ जाना और चुदाई का सारा काम तुम दोनों को करना पड़ेगा। मंज़ूर है क्या?’
दोनों ने सर हिला दिया।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

पहले चम्पा ने मुझ को मुंह से लेकर लंड तक चूमा और फुलवा मेरे खड़े लंड से खेलती रही।
थोड़ी देर बाद फुलवा ने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं एकदम से बिफर गया क्यूंकि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था, मुझ को लगा कि मेरा लंड फट जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और तब चम्पा मेरे लंड के ऊपर आ गई और मेरे खड़े लंड को हाथ से चूत में डाल दिया और फिर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर से नीचे धक्के मारने लगी।
उसकी चूत से टपक रहा रस मेरे लंड और अंडकोष पर गिर रहा था, मैं भी नीचे से धक्के का जवाब धक्के से दे रहा था। फुलवा मेरी छाती के निप्पलों को चूस रही थी और हम तीनों ही चुदाई में मस्त थे।
तभी चम्पा ने धक्के मारना तेज़ कर दिया और फिर उसने आखरी एक धक्का ज़ोर से मारा और वो मेरे ऊपर पसर गई, उसका रस पूरी तरह से मेरे ऊपर फैल गया और उसके उरोज मेरी छाती में दब गए।
फुलवा ने प्यार से चम्पा को मेरे ऊपर से हटाया और बिस्तर पर लिटा दिया। और फिर वो अपनी मोटी गांड को लेकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और जब लंड उसकी चूत में पूरा चला गया तो वह भूखी शेरनी की तरह से धक्के मारने लगी और जल्दी जल्दी ऊपर नीचे होने लगी।
मैं उसकी धक्के की लय को समझ पाता तब तक वो भी झड़ गई और हांपते हुए मेरे ऊपर पसर गई।
दो दो चूतों से निकला रस मेरे ऊपर फैल गया और उस रस से बहुत मादक सुगंध आ रही थी।
सारी रात यही क्रम चलता रहा, कभी चम्पा ऊपर और कभी फुलवा ऊपर! दोनों कई बार छूटी और मैं भी 2 बार छूट गया, दोनों में एक एक बार!
सुबह हुई तो हम तीनों मस्त नींद में थे लेकिन चम्पा सजग थी और टाइम पर उठ कर फुलवा को लेकर चली गई और जब मेरी चाय ले कर आई तो पलंग की चादर की हालत देख कर उसने झट चादर बदल दी और बोली कि इसको वो खुद धोएगी क्यूंकि चादर पर ढेरों चूत का रस और वीर्य फैला था।
चम्पा की होशियारी के कारण हमारा यह खेल निर्विघ्न चलता रहा।



फुलवा को गर्भ ठहर गया
अब ढलती उम्र में कभी कभी सोचता हूँ कि यह कैसे संभव हुआ कि मेरी हरकतों को बारे में मेरे माँ और पिता को कभी कोई खबर नहीं लगी.
यह सब शायद पहले कम्मो और बाद में चम्पा की होशियारी के कारण संभव हुआ। दोनों बहुत ही सतर्क रहती थी कि कभी भी हवेली में काम करने वाला नौकर या नौकरानी के मन में उठ रहे संशय को फ़ौरन दबा दिया जाये।
चम्पा का कहना था कि वो समय समय पर सब को यही कहती थी कि छोटे मालिक रात को बहुत डर जाते हैं तो किसी का उनके साथ सोना बहुत ज़रूरी था। यह कहानी इतनी प्रचलित कर दी गई कि कम्मो और फिर चम्पा का मेरे कमरे में सोना एक साधारण बात बन गई और छोटे मालिक की भलाई के लिए ही मालकिन ने यह उचित समझा है।
और फिर छोटे मालिक एक सीधे साधे लड़के हैं और उनको दुनिया दारी का कुछ भी ज्ञान नहीं।
इस बात को मेरे कमरे में रहने वाली सारी नौकरानियों के दिल में बिठा दी जाती थी और अपने शारीरिक सुख को जारी रखने के लिए ये बातें वो बार बार दोहराती थीं।
उधर मैं भी कम्मो चम्पा और अब फुलवा को बिना मांगे थोड़ा बहुत धन दे दिया करता था। जैसे कम्मो को हर महीने 100 रुपया देता था जो उसकी पगार के अलावा होता था। इसी तरह चम्पा और अब फुलवा को भी इतने ही पैसे हर महीने दे दिया करता था।
मेरी मम्मी हर महीने मुझको हज़ार रुपया जेब खर्चे के लिए देती थी और मैं जहाँ तक हो सके इन लोगों की मदद कर दिया करता था। यही हाल स्कूल में भी था, मैं हर एक दोस्त की मदद कर दिया करता था, वो सब मेरे अहसानों तले दबे रहते थे और मेरा बड़ा आदर करते थे।
शायद यही आदत मुझ को कष्टों से बचा लेती थी।
अब हर रात को हम तीनों चुदाई का यह खेल खेलते थे। कभी चम्पा नीचे होती थी और मैं उसके ऊपर और फुलवा मेरे ऊपर।
चम्पा ने नीचे से मारा गया हर धक्का मेरे ऊपर लेटी फुलवा मुको धक्का मार कर जवाब देती थी। नीचे से चम्पा और ऊपर से फुलवा के धक्कों के कारण चम्पा जल्दी ही झड़ जाती और तब फ़ोरन चम्पा अपनी जगह फुलवा को दे देती और मैं फिर उन दोनों के बीच में ही रहता।
जब दो दो बार दोनों झड़ गई तब मेरा एक बार फ़व्वारा छूटा लेकिन मैं अपना लंड फुलवा की चूत में ही डाले लेटा रहा।
मेरा लंड उसकी चूत में पूरा खड़ा था और वो धीरे धीरे नीचे से धक्के मारती रही। चम्पा एक हाथ से मेरे अंडकोष पकड़ रही थी और दूसरे की ऊँगली मेरी गांड में डाल रखी थी। उन दोनों के ऐसा करने से मुझ को बड़ा आनन्द आ रहा था। 
और फिर एक दिन हम तीनों आसमान में उड़ते हुए ज़मीन पर आ गिरे।
उस रात मैं उन दोनों को चुदाई का नया तरीका सोच रहा था की वो दोनों मुंह लटकाये कमरे के अंदर आई।
मैंने पूछा- क्या बात है?
दोनों चुप रहीं और फिर मेरे दोबारा पूछने पर चम्पा बोली- फुलवा को गर्भ ठहर गया है।
‘गर्भ? यह कैसे हुआ?’
‘हम जो हर रात को अंदर जो छुटाती थी उसी कारण हुआ है शायद?’
‘तुमको कैसे पता है कि यह गर्भ ही है?’
‘दो महीने से फुलवा को माहवारी नहीं हुई, इससे पक्का है कि वो गर्भवती है।’
मैं घबरा गया और घबराहट में कुछ कह नहीं पाया।
चम्पा मेरी हालत समझ रही थी और प्यार से बोली- सोमू, तुम घबराओ नहीं, हम इसका कोई उपाय ढूंढ निकालेंगी।
उस रात इस बुरी खबर के बाद किसी का भी चुदाई का मन नहीं किया।
अगले दिन चम्पा ने मुझको दिलासा दिलाई और कहा- मैं इस मुसीबत से छुटकारे के बारे में गाँव की पुरानी दाई से बात करूंगी। 
अगले दिन स्कूल से वापस आने पर चम्पा ने बताया- दाई कहती है कि वो गर्भ गिरवा देगी, बस कुछ रुपये देने होंगे उसको!
मैंने पूछा- कितने मांग रही है?
‘100 रूपए में काम हो जाएगा।’
मैंने झट अलमारी से 100 रुपये निकाल कर चम्पा को दे दिए। चम्पा मम्मी से एक दिन की छुट्टी ले गई और साथ में फुलवा को भी ले गई।
मेरा सारा दिन बेचैनी से गुज़रा।
अगले दिन चम्पा आई और आते ही बोली- काम हो गया छोटे मालिक, आप घबराएँ नहीं।
!
मैंने चैन की सांस ली और उस रात मैंने और चम्पा ने जम कर चुदाई की, 4-5 बार चम्पा का छुटाने के बाद हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए।
कुछ दिनों बाद फुलवा फिर वापस आ गई।
तब मैंने और चम्पा ने यह फैसला लिया कि अब से मैं फुलवा की चूत में नहीं छुटाऊँगा लेकिन चम्पा की चूत में मैं अंदर ही छुटाऊंगा क्यूंकि उसमें शायद गर्भ नहीं ठहरता।
हम ऐसा ही करते रहे और दोनों को मैं पूरा यौन आनन्द देता रहा और दोनों के चेहरे काम तृप्ति के कारण खूब चमक रहे थे।
करीब 6 महीने शान्ति से और मौज मस्ती में गुज़रे लेकिन फिर एक और मुसीबत आ गई।
एक दिन चम्पा ने बताया कि उसका पति लौट कर आ रहा है एक हफ्ते में!
‘अब कैसे होगा?’ यही प्रश्न हम तीनों के दिमाग में बार बार उठने लगा।
चम्पा के जाने के बारे में सोचने से मैं काफी उदास हो गया था। 
वो 7 दिन हमने धुआंधार चुदाई में गुज़ारे। जैसा कि तय किया गया, सारी चुदाई का केंद्र चम्पा को ही बनाया गया। फुलवा और मैंने चम्पा को पूरा प्रेम दिया।
उसकी चुदाई की हर इच्छा को पूरा किया, कभी ऊपर से कभी घोड़ी बना कर और कभी साइड से और कभी उसकी टांगों के बीच बैठ कर चम्पा की चुदाई की, मैंने और फुलवा ने उस काम में मेरा पूरा साथ दिया।
और फिर चम्पा एक दिन नहीं आई और फुलवा ने बताया कि उसका पति आ गया है और वो अब शायद नहीं आ पायेगी।
मैं चम्पा को बहुत मिस कर रहा था, चाहे फुलवा बाकायदा रोज़ आती थी, मेरी सेवा भी बहुत करती थी लेकिन चम्पा का साथ कुछ और ही रंग का था।
फुलवा मुझको रोज़ चम्पा के ख़बरें देती थी।
चम्पा के गर्भवती होने की समस्या

और फिर चम्पा एक दिन नहीं आई और फुलवा ने बताया कि उसका पति आ गया है और वो अब शायद नहीं आ पायेगी।

मैं चम्पा को बहुत मिस कर रहा था, चाहे फुलवा बाकायदा रोज़ आती थी, मेरी सेवा भी बहुत करती थी लेकिन चम्पा का साथ कुछ और ही रंग का था।

फुलवा मुझको रोज़ चम्पा के ख़बरें देती थी।

एक दिन उसने बताया कि चम्पा को उसके पति ने शराब पी कर बहुत मारा और उसके शरीर में बहुत चोटें आई हैं।

मैं बहुत व्याकुल हो गया यह सुन कर… लेकिन अपने को कुछ करने में बिल्कुल असमर्थ पाता था।

मैंने फुलवा से पूछा- क्यों मारता है वो उसको?

वो बोली- सुना है कि वो उस को बाँझ बुलाता है। कह रहा था एक दो महीने में अगर उसके बच्चा होने के आसार नहीं हुए तो वो दूसरी शादी कर लेगा। अब बताओ चम्पा क्या करे?

मैंने कुछ सोचते हुए कहा- अगर चम्पा को मैं चोदू हर रोज़ तो हो सकता है कि चम्पा को गर्भ ठहर जाए जैसे कि तुमको हो गया था।

‘लेकिन आप तो चम्पा को रोज़ ही चोदते थे न? फिर उसके तो बच्चा नहीं ठहरा?’

‘फुलवा, मैं चम्पा को चोदते टाइम अक्सर बाहर छूटा लेता था, बहुत कम ही अंदर छुटाया था। तुम एक काम करो, चम्पा से पूछो कि उसका पति कब शहर जाता है?’

उसने कहा- आज ही पूछती हूँ! वैसे भी मेरी माहवारी शुरू हो गई है सो तुम्हारे साथ चुदाई तो हो नहीं सकती। कल दोपहर को मिलते हैं। 

अगले दिन जब स्कूल से वापस आया तो वो बोली- चम्पा कह रही थी की कल शायद 2-3 दिनों के लिए शहर जा रहा है, चम्पा का पति। अब बोलो, क्या करना है आगे?

मैंने कहा- हमारी एक बड़ी अच्छी छोटी सी कुटिया है जंगल में… जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कल तुम दोपहर को चम्पा को लेकर आ जाना वहाँ, बाकी बात वहीं करेंगे। और देखो वो जगह यहाँ से सिर्फ 2 मील है और तुमको वहाँ का रास्ता हवेली का दरबान बता देगा। ठीक है?

स्कूल से आकर खाना खाने के बाद मैं अपनी साइकिल पर बैठ कर 10 मिनट में वहाँ पहुँच गया और चाबी से दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गया।

कॉटेज बोलते थे हम सब इस सुन्दर सी कुटिया या कॉटेज को, और जिसमें कभी कभी पापा जब अपने मित्रों के साथ ऐश मौज करने की इच्छा होती तो वो इस कॉटेज में आ जाते थे जहाँ सारे इंतेज़ाम पहले से किये रहते थे।

यह बड़ी एकांत जगह थी और पूरे साज़ो सामान से सजी थी। एक ड्राइंग रूम और दो बैडरूम थे जिनमें सुन्दर सोफे और पलंग बिछे थे। पीने के लिए हर किस्म की शराब वहां रखी थी लेमन सोडा और भी कई पीने के शरबत रखे थे।

यहाँ दिन रात चौकीदार रहता था जिसको मैंने पटाया हुआ था, उसको 10 रुपये दे देता था यदा कदा और वो उसी में खुश रहता था और मेरे लिए छोटे मोटे काम कर दिया करता था।

उससे मैंने पहले ही थोड़ी सी बर्फ मंगवा के रखी थी आर 3-4 लेमन सोडा की बोतलें ठंडी करने के लिए रख दी थी। 

आधे घंटे बाद चम्पा और फुलवा दोनों आई।

जैसे ही चम्पा अंदर घुसी और दरवाज़ा बंद हुआ मैंने झपट कर चम्पा को बाहों में बाँध लिया और लगातार उसको चूमता रहा और जल्दी से उसकी धोती उठा दी और अपना लौड़ा जो पूरी तरह से खड़ा था उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा।

चम्पा मेरे उतावलेपन को समझती थी, वो स्वयं ही पलंग पर लेट गई और अपनी धोती ऊपर उठा दी और अपने मम्मे ब्लाउज से निकाल दिए और मैंने बिना देरी के लंड उसमें डाल दिया और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा।

उस वक्त मैं कम्मो के सिखाये हुए सारे सबक भूल गया और चम्पा को चोदने में एकदम लीन हो गया और जब चम्पा का पहली बार छूटा तब मुझ को होश आया और मैंने अपनी स्पीड नार्मल कर दी और जब चम्पा दूसरी बार छूटी तो मैं उसके ऊपर से उतर कर उस के पलंग पर लेट गया।

तब चम्पा मुझको बेहद प्यार से चूमने लगी।

जब हम दोनों थोड़ा संभले तो मैंने बात छेड़ी- चम्पा, अब क्या करें तुम्हारे पति का?

वो रोने लगी और अपने पति को बहुत बुरा भला कहने लगी।

तब मैंने उसको रोका और कहा- देखो चम्पा, रोने से काम नहीं चलेगा, हमको यह सोचना है कि इस मुश्किल का हल क्या है। सच बताओ क्या तुम अपने पति को छोड़ना चाहती हो?

वो बोली- छोड़ कर जाऊँगी कहाँ और कैसे जिऊँगी? यह नहीं हो सकता।

‘अगर तुम्हारे बच्चा पैदा हो जाता है तो?’

‘तो शायद मेरा पति बदल जाए और मेरी इज़्ज़त करने लगे?’

‘तो प्रश्न है तुम्हारा बच्चा कैसे पैदा हो? क्या कभी तुमने डॉक्टर को दिखाया है?’

चम्पा बोली- डॉक्टर? वो क्यों?

‘अरे यह देखने के लिए कि क्या तुम्हारे अंदर कोई खराबी तो नहीं? जिसके कारण तुमको बच्चा नहीं हो रहा।’

‘नहीं कभी नहीं दिखाया डॉक्टर को।’

‘अच्छा कल चलो मेरे साथ, 4 बजे के बाद मैं तुम्हें एक अच्छी सी लेडी डॉक्टर को दिखाता हूँ, वो बता देगी कि तुमको क्या कमी है, बोलो मंज़ूर है?’

‘अच्छा जैसा तुम कहते हो सोमू… फुलवा भी जायेगी मेरे साथ!’

‘ठीक है, कल 4 बजे मुझको बस स्टैंड पर मिलना, ठीक है?’

दोनों ने सर हिला दिया और ठंडी लेमन का मज़ा लेने लगी। 

अगले दिन मैंने एक टैक्सी का अरेंजमेंट कर दिया और हम तीनों पास के कसबे में गए जहाँ डॉक्टर का नाम मेरे स्कूल के दोस्त ने पहले ही बता दिया था।

डॉक्टर की फीस देने के बाद वो दोनों तो डॉक्टर के पास चली गई और मैं बाहर बैठा रहा।

एक घंटे बाद वो दोनों बाहर आई और चम्पा और फुलवा दोनों मुस्कराते हुई आई और दोनों एक साथ बोली- डॉक्टर साहिब कहती हैं कि सब ठीक है, चम्पा में कोई खराबी नहीं। और बच्चा कैसे हो इसका भी तरीका बता दिया है। यह भी कहा है कि इसका पति भी अपनी जांच करवाये, हो सकता है उसमें कुछ खराबी हो?

चम्पा बोली- मुझको पक्का यकीन है कि उसमें ही खराबी है। साला घाट घाट का पानी पीने की आदत है उसको तो वो ही ठीक नहीं है।

हम तीनों ख़ुशी ख़ुशी वापस घर आ गए। चम्पा अपने घर चली गई और फुलवा मेरे साथ हवेली में आ गई।

रात को जब फुलवा मेरे कमरे में आई तो उसने खुल कर सारी बात बताई।

फुलवा ने बताया- डॉक्टर साहिबा ने यह भी बताया है की माहवारी के शुरू होने के बाद 10-18 दिन में अगर चुदाई की जाए तो बच्चा अक्सर ठहर जाता है। उन दिनों के पहले और बाद में बच्चा नहीं होता। छोटे मालिक यह बात तो बहुत अच्छी बताई उसने, आगे से हम चुदाई करते हुए इन दिनों में अंदर नहीं छुटाएँगे और बाकी दिनों में अंदर छुटा सकते हैं।

वो बड़ी खुश लग रही थी तो उस रात हमने सारी चुदाई के दौरान अंदर ही छुटाया।

फिर मैं बड़ी बेसब्री से चम्पा की चुदाई का उसके पति द्वारा करने का इंतज़ार करने लगा और फिर फुलवा ने बताया- चम्पा अब ख़ुशी ख़ुशी उसको चूत देती है जिससे वो बड़ा प्रसन हो गया है।

दो महीने गुज़र जाने के बाद भी जब चम्पा गर्भवती नहीं हुई तो हमको यकीन हो गया कि उसके पति में ही खराबी है। लेकिन चम्पा को कैसे गर्भवती बनाएं ताकि उसका पति उसको छोड़ने का विचार छोड़ दे?

उस रात मैंने फुलवा को तरह तरह से चोदा। हर बार से वो पूरी तरह से सखलित हो जाती थी। उसका छूटना अब काफी आम बात हो गया था।

वो लंड को डालते ही छूटना शुरू हो जाती थी और थोड़ी देर धक्के मारने के बाद ही वो ढेर सारा पानी छोड़ते हुए ढीली पड़ जाती थी। लेकिन जब मेरा लंड उसके अंदर ही पड़ा रहता था तो वो शीघ्र ही दुबारा तैयार हो जाती थी।

यह बात ख़ास तौर से उन दिनों में ज्यादा दिखाई देती थी जब उसके गर्भवती होने के दिन होते थे, वो उन दिनों कुछ ज्यादा ही बेशरम हो जाती थी और बार बार लंड अपने अंदर डालने की कोशिश करती थी।

यह देख कर मेरे मन में एक सवाल उठा- क्या चम्पा के साथ भी ऐसा ही होता होगा।

अगली बार जब चम्पा का पति शहर गया तो मैंने चम्पा को कॉटेज में बुला लिया और उसके आते ही उससे पूछा कि माहवारी के बाद कौन सा दिन है उसका?

वो बोली- शायद 10वाँ या 11वा दिन है।

मैंने कुछ कहा नहीं और फ़ौरन उसके कपड़े उतारने लगा और अपना भी पायजामा उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया और उसको भी नंगी कर दिया और फिर मैंने उसको बड़े कायदे से पूरी तरह गरम कर दिया और जब तक उसने हाथ नहीं जोड़े कि अब अंदर डालो लंड को… और नहीं सहा जाता, तब तक मैंने चूत में लंड नहीं डाला।

और जब वो पूरी तरह से गीली हुई चूत को उठा उठा कर मुझ को लंड डालने के लिए कहने लगी, तभी मैंने लंड को चूत के मुँह पर रख कर उसके दाने पर रगड़ा और थोड़ा सा अंदर डाला और चम्पा ने अपने चूतड़ उठा कर पूरा का पूरा अपने अंदर ले लिया और लगी ज़ोर से नीचे से धक्के मारने।

तभी मेरे लंड को महसूस हुआ कि उसके गर्भाशय का मुँह खुलने और बंद होने लगा तो मैंने भी अपनी पिचकारी उसके गर्भ के मुख पर रख पूरी तरह से छोड़ दी और ऐसा लगा कि मेरा लंड उसके गर्भ के मुख में अंदर तक फव्वारा छोड़ रहा है।

चम्पा की आँखें पूरी बंद थी और उसका शरीर ज़ोर ज़ोर से कांप रहा था और उसके चेहरे पर एक मंद मंद मुस्कान छाई हुई थी।

मैंने मन ही मन सोचा कि आज चम्पा ज़रूर पर ज़रूर गर्भवती हो जायेगी।

थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटी रही और फिर उसकी टांगें अपने आप ऊपर उठने लगी और एक हाथ चूत के ऊपर रख दिया ताकि वीर्य सारा का सारा अंदर ही रहे और बाहर न निकले।

आधे घंटा तक वो ऐसे ही पड़ी रही।

मैंने पूछा- पति कब वापस आ रहा है?

वो बोली- शायद 2 दिन बाद आयेगा? क्यों पूछ रहे हो?

‘कल भी आ जाना क्यूंकि मुझको लगता है कि तुम आजकल में ज़रूर गर्भवती हो जाओगी और जब पति आ जाए तो रात उससे भी चुदवाना ताकि उस को शक न हो! ठीक है?’

उसने खुश होते हुए सर हिला दिया और लेमन पीकर अपने घर चली गई।

उसके अगले दिन भी चम्पा आ गई और इस तरह चोद कर उसको निहाल कर दिया।
मुझको यकीन था कि चम्पा ज़रूर गर्भवती हो जायेगी।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

फुलवा और बिंदू
जैसे की मुझ को उम्मीद थी कि चम्पा जल्दी ही गर्भवती हो जायेगी और वैसा ही हुआ। वो शायद उस दिन की चुदाई के बाद से ही गर्भवती हो गई थी क्यूंकि उसको चुदाई में अब बिल्कुल ही आनन्द नहीं आ रहा था।
और फिर सबने देखा कि उसके चेहरे पर एक चमक आ गई है जिसको देख गाँव की औरतों ने कहना शुरू कर दिया था कि चम्पा को लड़का ही होगा।
फुलवा बता रही थी कि चम्पा का पति भी काफ़ी सुधर गया था, उसकी इज़्ज़त करने लगा था और उसकी अच्छी देखभाल कर रहा था।
चम्पा की इच्छा की पूर्ति देख कर मैं भी बहुत खुश था।
फुलवा के साथ चुदाई अभी भी जारी थी और क्यूंकि फुलवा अब अकेली मेरी देखभाल कर रही थी तो हम दोनों पति पत्नी की तरह रहने लगे थे।
पर मेरे मन में शायद यह डर था कि कहीं फुलवा का पति न वापस आ जाए और मुझको फुलवा से भी हाथ धोना पड़े। 
मैं अब बड़ी कक्षा में हो गया था और मुझको काफी पढ़ना पड़ता था। इसी कारण मेरा और फुलवा का हर रोज़ का यौन कार्यक्रम नहीं हो पाता था, अब रोज़ की बजाये उसको हफ्ते में 3-4 दिन बार ही चोद पाता था और अक्सर मैं अपना नहीं छूटने देता था, मुझे उसके गर्भवती होने का भय भी लगा रहता था।
एक दिन फुलवा कमरे में आने के बाद अपने बिस्तर को बिछा लेने के बाद मेरे पलंग पर आकर बैठ गई। मुझको ऐसा लगा वो कुछ कहने की कोशिश कर रही है लेकिन किसी जिझक के कारण कह नहीं पा रही।
मैंने उसके ब्लाउज बटन खोलते हुए उससे पूछा- फुलवा, कुछ कहना है क्या? 
वो बोली- आप बुरा तो नहीं मान जाओगे?
‘ऐसी क्या बात है कि मैं बुरा मान जाऊँगा?’
‘है ऎसी ही बात।’
‘तो बोलो क्या बात है?’
‘आप वायदा करो कि बुरा नहीं मानोगे?’
‘अरे बाबा नहीं बुरा मानूंगा। बोलो क्या बात है?’
‘मेरी एक सहेली है बिंदू, 5 साल हो गए शादी को लेकिन उसको अभी तक बच्चा नहीं हुआ।’
‘तो मैं क्या कर सकता हूँ?’
‘नहीं नहीं, मैं आपको कुछ करने के लिए नहीं कह रही!’
‘तो फिर?’
‘मैं सोच रही थी मैं अकेली आपको पूरी तरह चुदाई में तसल्ली नहीं दे पाती शायद?’
‘नहीं नहीं, ऐसा मत सोचना कभी, तुम मेरे लिए काफी हो।’
‘वही तो…’ लेकिन मालकिन कह रही थी कि छोटे मालिक के लिए एक और कामवाली ढूंढनी चाहिए। इसीलिए मैं सोच रही थी कि मेरी सहेली बिंदू को यहाँ आप के काम के लिए रखवा दूँ क्यूंकि पता नहीं कब मेरा पति भी वापस आ जाए? तब आपके पास कोई कामवाली नहीं रहेगी ना!’
‘हाँ कह तो ठीक रही हो, कौन है यह बिंदू?’
‘अरे छोटे मालिक देखोगे तो देखते रह जाओगे, बिल्कुल चम्पा की तरह है उसकी बनावट, और उसका पति भी मुम्बई गया है और लौट के नहीं आ रहा।’
‘अच्छा तो कल लाना उसको, मैं देख लेता हूँ उसको?’
और फिर मैंने फुलवा को नंगी करके चोदना शुरू कर दिया, पहले धीरे और फिर बाद में तेज़ी से।
वो आम दिनों की तरह 3-4 बार छूट गई और हम नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सो गए।
अगले दिन दोपहर को वो एक काफी अच्छी दिखने वाली लड़की को लेकर आई और बोली- यह बिंदू है मेरी सेहली।
मैंने कहा- इसको काम बता दो, अगर इसको वो सब मंज़ूर हो तो मम्मी से बात कर लो।
फुलवा बोली- इसको सब समझा दिया है और जैसा हम करती हैं, वैसे ही यह भी करेगी।
‘ठीक है, कितनी उम्र इसकी?’
‘यह 21-22 की है और 4 साल शादी के बाद भी इसके बच्चा नहीं हुआ अब तक… तो बेचारी बहुत परेशान है।’
‘आखरी बार इसका पति कब आया था?’
‘2 साल हो गए छोटे मालिक!’
‘अच्छा, चलो मम्मी से पूछ लेना और मुझ को बता देना, ठीक है?’
मुझको बिंदू ठीक ही लगी और थोड़ी देर बाद मम्मी फुलवा और नई लड़की बिंदू के साथ मेरे कमरे में आई और बोली- सोमू, यह नई लड़की तुम्हारे काम के लिए रखी है तुम और फुलवा इसको सारा काम समझा देना। ठीक है न?
मैंने कहा- ठीक है मम्मी, लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूँ मुझको कामवाली लड़कियों की कोई ज़रुरत नहीं है।
‘अरे नहीं सोमू, फुलवा बता रही थी कि तुम रात को बहुत डर जाते हो कभी कभी। इसका मतलब है कि तुमको अभी भी बुरे सपने बहुत आते हैं। ये दो लड़कियाँ रहेंगी तुम्हारे पास तो पूरा ख्याल करेंगी तुम्हारा। क्यों लड़कियो? रखोगी न पूरा ध्यान?’
‘जी मालकिन!’ दोनों एक साथ बोल पड़ी।
‘अच्छा ठीक है फुलवा, तुम सोमू की पूरी देखभाल करोगी और बिंदू तुम्हारी इस काम में मदद करेगी, दोनों रात इसी कमरे में ही सोना। ठीक है?’
दोनों ने सर हिला दिया और फिर मम्मी चली गई।
तब फुलवा बिंदू को काम समझाने लगी। अभी वो बातें कर ही रही थीं, मैं सो गया। शाम को उठा तो फुलवा को आवाज़ लगाई।
जब वो आई तो मैं उससे चम्पा का हाल पूछा।
वो कहने लगी- चम्पा को बहुत उल्टियाँ आ रही हैं और बेचारी कुछ खा पी नहीं रही है। कह रही थी कि जब तबियत थोड़ी ठीक होगी तो वो आपसे मिलेगी।
मैंने कुछ सोचते हुए फुलवा से कहा- देखो मुझको इस नई कड़की के बारे में चिंता हो रही है। क्या तूने चुदाई का कार्यक्रम भी उसको बता दिया था?
फुलवा बोली- बताया तो था छोटे मालिक, लेकिन पूरी तरह खोल कर नहीं बताया था।
‘क्या तुमने उसको चुदाई के खेल के बारे में बताया था?’
वो सर नीचे करके बोली- नहीं मालिक, पूरी तरह से शायद उसको अभी समझ नहीं आया होगा। मैंने तो सिर्फ यह कहा था कि हम दोनों वहाँ मौज करेंगी।
‘अरे वाह! उसको समझा देना अभी से… वरना वो हमारे लिए मुसीबत बन सकती है फुलवा!’
मैं परेशान हो गया यह जान कर कि बिंदू की सहमति नहीं हमारे चुदाई कार्यकर्म के बारे में। यानि उसको पूरी बात की जानकारी नहीं है अभी तक।
मैं फुलवा को डाँट कर बोला- क्या फुलवा, तुमको यहाँ लाने से पहले उसकी रज़ामंदी ले लेनी थी। खैर तुम अब जाकर उसको समझा देना, अगर कुछ न नुकर करे तो वापस भेज देना या दूसरे काम पर लगा देना। समझ गई न?
फुलवा रुआंसी हो रही थी और जल्दी से बाहर चली गई। रात हुई तो खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेटा ही था कि फुलवा आ गई, साथ में बिंदू भी थी।
फुलवा मेरे दूध का गिलास लेकर आई थी और बिंदू पूरा पल्लू सर पर ढक कर खड़ी थी।
फुलवा बोली- छोटे मालिक, आज हम दोनों आप शरीर को दबाएँगी क्यूंकि बड़ी मालकिन कह रहीं थी कि आज आप बहुत थक गए होंगे स्कूल में खेल कर… हम दबाएँ आपको?
यह कहते हुए फुलवा ने मेरे को आँख का इशारा किया।
मैंने कहा- ठीक है मैं आज बहुत थक गया हूँ।
मैं बीच मैं लेट गया और वो दोनों मेरी बगल में आकर बैठ गई। पहले फुलवा ने शुरू किया और मेरे टांगों को हल्के हल्के दबाना शुरु कर दिया।
एक टांग फुलवा दबा रही थी और दूसरी बिंदू दबा रही थी। बिंदू का हाथ बहुत हल्का था जबकि फुलवा काफी ज़ोर से दबा रही थी।
मैंने आँखें बंद कर ली।
तभी महसूस किया कि फुलवा का हाथ मेरी जांघों को दबा रहा था और बिंदू अभी भी हल्के हाथ से टांग को ही दबा रही थी।
मैंने अधमुंदी आँख से देखा कि फुलवा ने बिंदू को इशारे से ऊपर को दबाने के लिए कहा।
बिंदू झिझकते हुए अपना हाथ मेरी जांघों तक ले आई, 5-7 मिन्ट ऐसे ही दबाती रहीं दोनों।
तभी फुलवा ने शरारत करते हुए अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और फिर जल्दी से हटा भी लिया।
इस हरकत से मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा और मेरा पायजामा एक तम्बू बनता गया।
मैं आँखें बंद किये पड़ा रहा और तब दबी मुस्कान से फुलवा ने बिंदू का हाथ भी मेरे लौड़े पर रख दिया और बिंदू ने झट से हाथ हटा लिया और जांघों पर दबाती रही।
फुलवा अब दबाते हुए मेरे लंड से भी खेलने लगी।
फुलवा और बिंदू की चूत चुदाई

यह प्रसंग कोई 10 मिन्ट तक चला और तब तक बिंदू की झिझक काफ़ी दूर हो गई थी। अब वो बेझिझक मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी और मेरा लंड और अकड़ गया।

फुलवा ने जानबूझ कर मेरा पयजामा लंड के ऊपर से खिसका दिया और लंड एकदम आज़ाद होकर लहलहाने लगा।

दबी आँख से मैंने देखा कि लंड को बिंदू बड़े अचरज से देख रही है और तब फुलवा के इशारे पर उसने लंड को हाथ में ले लिया और उसको अच्छी तरह देखने लगी और अपने हाथ को ऊपर नीचे करने लगी।

फुलवा एक हाथ से मेरे अंडकोष से खेल रही थी और दूसरा उसने अपनी धोती में डाल दिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।

उसने इशारे से बिंदू को भी ऐसा ही करने को कहा, तब बिंदू ने भी एक हाथ अपनी धोती के अंदर डाल दिया।

फुलवा ने मौका देख कर मुझ को इशारा किया और मैंने भी एक हाथ बिंदू की धोती में डाल दिया और सीधा उसकी चूत को छूने लगा।

उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी।

मेरे हाथ को बिंदू ने रोकने की कोई कोशिश नहीं की और मैं उसके भगनासा को हल्के हल्के रगड़ने लगा।

बिंदू अपनी जांघों को बंद और खोल रही थी और काफी गरम हो चुकी थी।

तब फुलवा ने बिंदू को पलंग से नीचे उतारा और उसके कपड़े उतारने लगी, पहले ब्लाउज उतार दिया और फिर धोती खींच दी और फिर पेटीकोट भी उतार दिया।

बिंदू ने अपना एक हाथ स्तनों पर रखा और दूसरे से चूत को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।

अब तक फुलवा भी पूरी नंगी हो चुकी थी और मैं भी एकदम नंगा हो चुका था और मेरा लौड़ा पोरे जोबन में अकड़ा था।

मैंने देखा कि बिंदू की नज़र मेरे खड़े लौड़े पर टिकी थी।

तब फुलवा ने बिंदू का हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और मेरा हाथ उसको मोटे और गोल स्तनों पर। तब मैंने बिंदू को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसको होटों को बार-बार चूमना शुरू कर दिया।

मैंने अपनी जीभ उसके मुख में डाल दी और उसकी मुंह में गोल गोल घुमाने लगा। एक हाथ मैं उसको मोटे और गोल नितम्बों पर रख कर उनको दबाने लगा।

तब फुलवा हम दोनों को धीरे धीरे पलंग की और ले आई और जैसे ही बिंदू लेट गई मैंने उसकी जांघों को चौड़ा किया और अपने खड़े लंड को उसकी चूत के मुंह पर टिका दिया और धीरे से एक हल्का धक्का मारा और लंड एक बेहद टाइट चूत में पूरा चला गया, उसकी चूत की पकड़ गज़ब की थी।

फुलवा भी अपने मुंह से बिंदू के मम्मे चूस रही थी। तभी बिंदू के मुंह से आहा ऊह्ह्ह के आवाज़ें आने लगी और फुलवा ने झट मेरा रुमाल उसके मुंह पर रख दिया ताकि कोई आवाज़ न निकल सके।

बिंदू की चूत इतनी प्यासी हो रही थी कि अब तक वो 3-4 बार छूट चुकी थी लेकिन अभी भी वो नीचे से चूतड़ ज़ोर ज़ोर से ऊपर उठा उठा कर लंड को अंदर लेती थी। उसकी आँखें पूरी तरह से बंद थीं और शायद उसको याद भी नहीं था उसको कौन चोद रहा है।

उसका केंद्र बिंदू उस वक्त सिर्फ उसकी चूत थी जिसकी 2 साल की प्यास वो बुझा रही थी.

फुलवा भी उसको उकसा रही थी, कभी उसकी गांड में उंगली डाल कर कभी उसके होटों को चूस कर।

तभी बिंदू एक आखिरी झटके से ऐसी छूटी कि ढेर सारा पानी उसकी चूत से निकला और सारे बिस्तर की चादर पर फैल गया।

बिंदू अब एकदम ढीली पड़ गई और बिस्तर में आँखें बंद करके पसर गई।

मेरा लंड तो अभी भी खड़ा था, तो मैंने लण्ड मेरे साथ लेटी हुई फुलवा की एकदम गीली चूत में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा क्यूंकि फुलवा बिंदू की चुदाई देख कर बहुत गरम हो चुकी थी और जल्दी ही झड़ गई, तब मैंने अपना भी छूटा दिया।

बिंदू अभी भी आँखें बंद किये लेटे हुए थी और उसके होटों पर पूरी तरह से यौन सुख की मुस्कान थी।

मैं दोनों के बीच लेट गया और बिंदू के एक सख्त स्तनों को दबाने लगा और धीरे धीरे उसके निप्पल खड़े होने शुरु हो, उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो फिर गीली होनी शुरू हो गई थी।

तब मैंने उसका हाथ अपने खड़े लंड पर रख दिया और वो उसको सहलाने लगी। उसने आँख खोल कर मुझ को देखा और मुस्करा कर मेरा शुक्रिया अदा किया।

मेरे लंड को खींच कर बताया- आ जाओ, फिर चढ़ जाओ।

मैं भी झट उसकी टांगों के बीच आ गया और एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। फिर 10 मिन्ट की चुदाई के बाद वो 2 बार झड़ गई।

फुलवा ने उससे पूछा- कैसे लगी छोटे मालिक की चुदाई?

उसने शर्म के मारे मुंह पर हाथ रख लिया।

मेरा लंड अभी भी खड़ा था सो मैंने फुलवा को सीधा किया और उसके ऊपर चढ़ गया।

फुलवा ने बिंदू का हाथ अपनी चूत के पास रख दिया और लंड के अंदर बाहर जाते हुए उसको महसूस करवाया।

फुलवा की चुदाई खत्म करने के बाद मैंने उससे पूछा- आखरी बार तेरे पति ने कब तुझको चोदा था?

वो बोली- 2 साल से ऊपर हो गए हैं, इस बीच मैंने किसी की ओर आँख उठा कर भी नहीं देखा लेकिन छोटे मालिक आपको देख कर पता नहीं क्यों मेरा मन किया कि आप मुझ को चोदें। और आप ने शरीर दबवाने का बहाना बना कर मेरी दिल की मुराद पूरी कर दी।

फुलवा बोली- अगर तू हमारे साथ रहेगी तो रोज़ रात को 3-4 बार चुदेगी छोटे मालिक से। लेकिन याद रख, किसी से कुछ भी नहीं कहना और मन लगा कर छोटे मालिक और मालकिन का काम करती जा… तो बहुत सुखी रहेगी। धन कपड़ा लत्ता और अच्छा खाना मिलता रहेगा। मालकिन खुश होकर इनाम में बड़ी अच्छी साड़ी भी देती हैं और छोटे मालिक भी इनाम देते हैं हम सबको। 

थोड़ी देर बाद हम तीनों सो गए और फिर कोई आधी रात को मुझको लगा कि कोई मेरे लंड को छेड़ रहा है।

आँख खोलकर देखा तो बिंदू थी जो मेरे लंड के साथ खेल रही थी।

मैंने भी उसकी चूत को हाथ लगा कर देखा तो एकदम गीली थी, मैं समझ गया कि इसकी अभी तृप्ति नहीं हुई है और फिर मैंने उसको पहले धीरे और फिर तेज़ी से चोदा, और तब तक नहीं उतरा जब तक उसने तौबा नहीं की।

इस सारी हलचल में फुलवा भी जाग गई और अपनी चूत को रगड़ने लगी। उसकी गर्मी को देखकर मैंने उसको भी चोदा। तब फुलवा ने बिंदू का हाथ मेरे अंडकोष पर रख दिया और उनको दबाने का इशारा करने लगी।

मैं चोद रहा था फुलवा को लेकिन मेरा मुंह तो बिंदू के मम्मों पर था और उसके मोटे निप्पल मेरे मुंह में गोल गोल घूम रहे थे।

इस सेक्सी नज़ारे पर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था और तब मैंने महसूस किया कि फुलवा भी छूट गई है।

मैं उतर कर बिस्तर पर लेट गया लेकिन मेरे लौड़ा सीधा तना खड़ा था। यह देख कर शायद बिंदू से रहा नहीं गया और वो मेरे लौड़े पर चढ़ बैठी, ऊपर से धक्के मारते हुए उसको कुछ मिन्ट ही हुए होंगे कि वो भी झड़ कर मेरे ऊपर पसर गई।
जल्दी ही सुबह हो गई और वो दोनों मेरे कमरे से निकल कर अपने दैनिक कार्यकर्म में लग गई और मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया।


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फुलवा और बिंदू का लेसबीयन सेक्स
मैं चोद रहा था फुलवा को लेकिन मेरा मुंह तो बिंदू के मम्मों पर था और उसके मोटे निप्पल मेरे मुंह में गोल गोल घूम रहे थे।
इस सेक्सी नज़ारे पर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था और तब मैंने महसूस किया कि फुलवा भी छूट गई है।
मैं उतर कर बिस्तर पर लेट गया लेकिन मेरे लौड़ा सीधा तना खड़ा था। यह देख कर शायद बिंदू से रहा नहीं गया और वो मेरे लौड़े पर चढ़ बैठी, ऊपर से धक्के मारते हुए उसको कुछ मिन्ट ही हुए होंगे कि वो भी झड़ कर मेरे ऊपर पसर गई।
जल्दी ही सुबह हो गई और वो दोनों मेरे कमरे से निकल कर अपने दैनिक कार्यकर्म में लग गई और मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया।
कोई आधे घंटे बाद फुलवा मेरी सुबह की चाय लाई और यह देख कर हैरान रह गई की मेरा लंड तब पूरा खड़ा था।
वो दाँतो तले ऊँगली दबाते हुए बोली- कमाल है छोटे मालिक आप का तो अभी भी खड़ा है? यह कैसे संभव हो सकता? मैं जानती हूँ कि आपने रात भर कम से कम 10 बार हम दोनों को चोदा है और फिर भी यह खड़ा है। हाय राम!!!
और उसने हाथ लगा कर पक्का किया कि लंड खड़ा है। लेकिन अजीब बात यह थी कि मुझ को थकावट या कमज़ोरी बिल्कुल महसूस नहीं हो रही थी।
कुछ दिनों बाद मेरे इम्तेहान शुरू होने वाले थे तो मैं दिल लगा कर पढ़ने में लग गया। फुलवा और बिंदू को रात में सिर्फ 1-2 बार ही चोदता था और चुदाई की सारी मेहनत उन दोनों से करवाता था।
मैं सर के नीचे हाथ रख कर लेट जाता था और वो दोनों बारी बारी से मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी यौन इच्छा पूरी करती थीं। ऐसे करते हुए कुछ दिनों में मेरे पेपर्स खत्म हो गए और अब मैं फिर फ्री था।
अब मैं चुदाई के साथ उन दोनों से उन की अपनी काम तृप्ति के बारे में सवाल करने लगा। जैसे कि अगर दो साल पति नहीं है तो यकीनन उनको काम तृप्ति नहीं मिलती होगी तो कैसे वो अपना गुज़ारा करती थी?
दोनों ही इस बारे में बताने से कतरा रहीं थी लेकिन मैंने भी उनको अपनी कसम देकर सच बताने पर मजबूर कर दिया।
पहले फुलवा बोली- पति चुदाई का ज़्यादा शौक़ीन नहीं था और शुरू शुरू में तो रोज़ रात को चुदाई करता था लेकिन 7-8 दिन बाद हफ्ते में दो दिन चुदाई पर आ गया था। उसको चुदाई के बारे कुछ ज्यादा नहीं मालूम था, लंड खड़ा किया और धोती ऊपर उठाई और अंदर डाला और जल्दी जल्दी धक्के मारे और अपना छुटा के उतर जाता और फिर सो जाता था।
उसके साथ चुदते हुए मैं एक बार भी नहीं छूटी जैसे छोटे मालिक मुझ को रात में 4-5 छूटा देते हैं, वैसा पति के साथ एक बार भी नहीं हुआ।
यह कहते हुए उसकी आँखों से आंसू गिरने लगे।
मैंने पूछा- फिर चूत को कैसे ठंडा करती थी तुम?
वो कुछ बोली नहीं और अपने पल्लू में मुंह छुपाने लगी। उसकी हिचकिचाहट ठीक थी। कोई भी औरत अपना निजी काम क्रिया के बारे में नहीं बताती आसानी से।
मैंने उसको अपनी कसम याद दिलाई, तब उसने बताया- मैं ऊँगली मारती थी चूत में।
‘कैसे?’
तब उसने चूत में ऊँगली से अपनी भगनासा को रगड़ा और कहा- यह मैं रात को बिस्तर में लेटने के बाद ऐसे चूत को शांत करती थी।
मैं बोला- अच्छा, तभी मेरी ऊँगली चूत पर पड़ते ही तुम को मज़ा आने लगता था! और तुम बिंदू क्या करती थी? 
बिंदू बोली- मैं भी ऐसे ही करती थी।
‘बिंदू, तेरे पति कैसे चोदता तुझको?’
बिंदू शर्माते हुए बोली- मेरा पति थोड़ा पड़ा लिखा था और यौन क्रिया के बारे में थोड़ा बहुत जानता था। पहली रात उसने मुझ को बड़े प्यार से चोदा। पहली कोशिश में उसका लंड चूत में जा नहीं पा रहा था तो उसने मेरे चूतड़ के नीचे तकिया रख दिया और थोड़ा सरसों का तेल अपने लंड पर लगा कर धीरे धीरे धक्के मारे जिससे मुझको दर्द तो हुआ लेकिन बहुत ही कम। पहली बार उसके करने पर मैं नहीं छूटी थी लेकिन दुबारा करने पर मेरा छूट गया और उसके बाद वो हर बार मेरा छूटा देता था। लेकिन वो ज्यादा देर कर नहीं पाता था और जल्दी ही छूट जाता था।
मैं कोशिश करती थी कि जब वो चोदे तो मैं अपनी ऊँगली से चूत रगड़ती रहती थी ताकि उसके छूटने के साथ ही मेरा भी छूट जाए। 
‘उसके जाने के बाद क्या किया तुमने?’
‘वही ऊँगली का सहारा लिया लेकिन मेरी एक सहली थी गाँव में, उसने मुझ को एक और ही तरीका सिखाया।’
‘वो क्या था?’ मैंने और फुलवा ने एक साथ ही पूछा।
वो बोली- जब मेरी सास घर पर नहीं होती थी तो मैं उसको बुला लेती थी और फिर हम दोनों करती थी।
मैंने पूछा- क्या करती थी?
वो बोली- अगर फुलवा मान जाए तो मैं उसके साथ करके दिखा सकती हूँ।
मैंने फुलवा की ओर देखा तो वो हिचकिचा रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद बोली- क्या करोगी तुम?
‘देख लेना कुछ ख़ास नहीं है यह सब?’
‘दोनों नंगी लेटी थी मेरे साथ, मैं बीच में था और वो दोनों मेरे साइड्स में लेटी थीं मुझको एक साइड में आने के लिए कहा और खुद फुलवा की बगल में लेट गई।’
अब उसने हल्के हल्के फुलवा के उरोजों पर हाथ फेरना शु्रू किया और साथ ही अपना मुंह फुलवा के मुंह से जोड़ दिया और उसको पहले हल्की और बाद मैं बड़ी गहरी किसिंग करना शुरू कर दिया। और फिर उसका एक हाथ फुलवा की चूत पर घने बालों के साथ खेलने लगा और उसकी ऊँगली कभी कभी उसकी बालों में छिपी चूत पर चलने लगी।
मैंने नोट किया कि फुलवा भी अब गर्म हो रही थी और बिंदू की चूमा-चाटी का जवाब दे रही थी, उसके भी हाथ बिंदू के चूतड़ों पर फिसल रहे थे और उसकी एक ऊँगली बिंदू की गांड में गई हुई थी।
तभी बिंदू का मुंह अब फुलवा के मम्मों के ऊपर उसके निप्पल को चूस रहा था और उधर फुलवा के चूतड़ ऊपर की ओर उठ रहे थे। अब धीरे धीरे बिंदू का मुंह मम्मों से हट कर उसकी चूत पर टिक गया था।
पास जाकर देखा कि बिंदू की जीभ अब फुलवा की भगनासा को चाट रही थी और फुलवा के चूतड़ एकदम ऊपर उठकर अकड़ रहे थे। बिंदू का मुंह और शरीर फुलवा की जाँघों के बीच था और वो अब तेज़ी से फुलवा की चूत को चूस रही थी।
फुलवा के मुख से हल्की सिसकारी निकल रही थी और उसके चूतड़ एकदम ऊपर उठे हुए थे।
बिंदू के जीभ अब बड़ी तेज़ी से फुलवा की चूत को चूस रही थी, तभी ही फुलवा का शरीर एकदम अकड़ गया और उसके मुंह से एक ज़ोर सी आआआह्ह्ह् की आवाज़ निकली और उसका सारा शरीर कंपकंपाने लगा।
धीरे आवाज़ निकल रही थी- मर गई… मर गई… उईईई उईई…
और उसकी जांघों ने बिंदू के सर और मुंह को जकड़ लिया। दोनों ऐसी ही पड़ी रहीं और फिर धीरे से फुलवा की जांघों ने बिंदू का सर और मुंह आज़ाद कर दिया और वो बुरी तरह से निढाल होकर पड़ रही और उधर बिंदू भी ऐसे लेट रही थी जैसे उसका भी पानी छूट गया हो।
मैंने बिंदू की चूत को हाथ लगा कर देखा तो वो भी सारी गीली हो रही थी और उसकी चूत से भी सफ़ेद पानी निकल रहा था। दोनों एक दूसरी के साथ लिपट कर लेटी हुई थी।
और मेरे लौड़े का भी बुरा हाल था, ऐसा लग रहा था कि अभी फट जाएगा।
हम तीनों एक दूसरे के साथ लिपट कर सो गये।

पहली बार चूत चाटी बिंदू की

बिंदू और फुलवा का आपस का प्रेमालाप देख कर मन बड़ा विचिलत हो गया था।

उधर फुलवा को शायद बिंदू के साथ प्रेम बहुत अच्छा लगा क्यूंकि वो भी उसके पीछे पीछे लगी हुई थी। मेरे सारे काम भुला कर बिंदू के पीछे लगी हुई थी।

उसको बार बार याद करवाना पड़ रहा था कि मेरे स्कूल के कपड़े निकाल दो, मेरा नाश्ता इत्यादि ला दो लेकिन वो तो बिंदू की दीवानी हो कर उसके पीछे पीछे घूम रही थी।

मैं हैरान था कि यह फुलवा को क्या जनून चढ़ा हुआ था… सोचा कि स्कूल से आ कर पूछूंगा।

स्कूल से आया तो देखा की फुलवा की आँखें तो बिंदू के ऊपर ही टिकी और उसके चेहरे से लग रहा था कि वो बिंदू की आशिक हो गई थी।

मैंने फुलवा को बुला कर पूछा- क्या हुआ है उसको?

वो बोली- कुछ नहीं हुआ है।

‘तो फिर यह बिंदू की दीवानी हुई क्यों घूम रही हो?’

वो बोली- नहीं तो। मैं तो वैसे ही हूँ जैसे कल थी।

‘अच्छा तो फिर तुम बिंदू के पीछे पीछे क्यों घूम रहीं हो?’

‘वो क्या है उसको काम बताना पड़ता है न, नई है न!’

कहीं रात की उसका मुंह चुसाई ज्यादा अच्छी लगी क्या?

‘नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं।’

‘चलो ठीक है, खाना खाने के बाद आना दोनों मेरे कमरे में!’

खाना खाने के बाद वो दोनों आई और नीचे चटाई बिछा कर लेट गई।

फुलवा जो मेरे संग ही लेटी रहती थी, आज वो बिंदिया के साथ लेट गई और लेटते ही उसके होटों को चूमने लगी।

बिंदिया तो मुझको देख रही थी, मैंने उसको आँख का इशारा किया कि वो फुलवा के साथ लगी रहे।

फिर फुलवा ने उसका ब्लाउज खोल दिया और उसके मम्मों को चूसने लगी।

बिंदिया ने भी उसकी धोती को उल्टा दी और उसको नंगी कर दिया और वो फुलवा के साथ वैसे ही खेलने लगी जैसे एक मर्द औरत के साथ खेलता है।

तभी फुलवा अपनी चूत उघाड़ कर बिंदू के मुंह की तरफ बार बार लाने लगी।

अब बिंदू ने फुलवा की चूत को चाटना शुरू कर दिया और फुलवा के मुंह से हलकी सी सिसकारी निकलने लगी, यह नज़ारा देख कर मैं भी अपना आप खो रहा था और कपड़े उतार कर मैं भी खड़े लंड को लेकर दोनों के साथ लिपट गया।

जाने क्या सूझी कि मेरा मुंह बिंदू की खाली चूत की तरफ बढ़ गया और पहले उसको सूंघा और फिर जीभ उसकी चूत पर टिका दी और हाथों से बिंदू के मम्मों को मसलने लगा।

जीभ का जैसे ही बिंदू की चूत पर लगना था कि वो अपनी कमर उठा कर मेरे मुंह को चूत में घुसाने के कोशिश करने लगी।

मैं भी लपालप जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा।

उसके चूत में से बड़ी मादक ही सुगन्धि आ रही थी, मैं एकदम पागल हो गया और एक ऊँगली को बिंदू की चूत में डाल कर गोल गोल घुमाने लगा और जीभ से उसका भग्नासा चूसता रहा।

!

थोड़ी देर में ही बिंदू ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगी और उधर फुलवा भी झड़ चुकी थी और बिंदू के मुंह को चूत में घुसड़ने की कोशिश कर रही थी।

मेरा तो छूटा नहीं था तो मैंने अपना खड़ा लंड बिंदू की टाइट चूत में डाल दिया और तेज़ी से धक्के मारने लगा।

मैं इतना उत्तेजित हो चुका था कि कुछ धक्कों में ही मैंने फ़व्वारा बिंदू की चूत में छोड़ दिया।

हम तीनों एक दूसरे से चिपके हुए लेटे थे, एक अजीब सी खुमारी हम तीनों पर छा गई थी।

कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद हम उठ कर बैठ गए और दोनों लड़कियाँ बाहर चली गई, शायद नौकरों के गुसलखाने की ओर गई होंगी।

उनके जाने के बाद मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया। 

रात को मैंने फुलवा से पूछा कि आज क्या बना है खाने में?

तो वो बोली- आज तो सिर्फ दाल सब्ज़ी है।

मैंने फुलवा को कहा कि वो रसोइये को बुलाये, मैंने उससे कुछ कहना है।

जब रसोइया आया तो मैंने उसको डांट कर कहा- यह क्या आप रोज़ दाल सब्ज़ी बना देते हो? कभी कुछ मुर्गा शुर्गा भी बनाया करो ना।

हमारा रसोईया थोड़ा बुज़ुर्ग था, वो बोला- छोटे मालिक, हुक्म करो, जो कहो बन जाएगा। वैसे मालिक और मालिकन तो बाहर खाना खा रहे हैं।

‘अच्छा तो ऐसा करो कि एक पूरा तंदूरी मुर्गा बना दो और मुझ को रात को परोस देना मेरे कमरे में, साथ में कुछ नान भी बना लेना। ठीक है?’

वो सर हिलाते हुए चला गया।

उसके जाने के बाद मैंने फुलवा को कहा- रात को तुम दोनों खाना मेरे कमरे में मेरे साथ खाओगी।

वो भी मुस्कराते हुए चली गई और मैं भी रात को आने वाले आनन्द के बारे में सोचते हुए अपनी पढ़ाई में लग गया।

रात को दोनों आ गई। फुलवा ने तो वही सादी धोती पहन रखी थी लेकिन बिंदू काफी रंगदार साड़ी पहने हुए थी।

फिर फुलवा गर्म गर्म तंदूरी मुर्गा ले आई और साथ में नान।

हम तीनों ने जी भर के खाया।

फुलवा ने पहले कभी नहीं खाया था ऐसा मुर्गा लेकिन बिंदू ने खाया था क्यूंकि क्योंकि उसका पति शौक़ीन था।

खाने के बाद हम तीनों ने सोडा लेमन भी पिया।

फिर हम बातें करने लगे और बातों में ही बिंदू ने बताया कि उसकी सहेली चंदा भी चुदवाने की बहुत शौक़ीन है। उसका पति अक्सर काम धंधे के सिलसिले में बाहर जाता रहता है और हफ्ते भर गायब रहता है और चंदा को तो रोज़ रात को लंड चाहिए ऐसा वो खुद कहती है।

‘अभी तक उसके कोई बच्चा नहीं हुआ। छोटे मालिक… अगर बुरा न माने तो उसको भी प्रेमरस पिला दो थोड़ा सा?’

मैं हैरान हो गया कि यह क्या कह रही है? मेरे घर वालों या गाँव वालों को पता चला तो वो मुझको मार देंगे, ऐसा विचार मेरे मन में आया ‘क्या मैं एक सरकारी सांड हूँ जो हर एक गाय पर चढ़ जाता है?’

मैंने साफ़ मना कर दिया, मैंने बिंदू को कहा- देख बिंदू, तेरे साथ मेरा सम्बन्ध बना फुलवा के कारण। उसने बताया था कि तुम भी लंड की बहुत प्यासी हो तो मैं मान गया। लेकिन चंदा का घर वाला यहीं है, उसने पकड़ लिया या उसको पता लग गया तो अनर्थ हो जायेगा।

बिंदू बोली- नहीं मालिक, आप उसको किसी ऐसी जगह बुला सकते हैं जो कम लोगों को मालूम हो?

‘वो तो मैं कर सकता हूँ। लेकिन इसके बारे में सोचना पड़ेगा। अच्छा मेरे इम्तेहान खत्म होने दो उसके बाद देखेंगे।’

‘अच्छा बिंदू यह बताओ, तुम्हारा पति तो तुम को अच्छा चोदता था फिर भी तुमको बच्चा क्यों नहीं हुआ?’

बिंदू बोली- क्या मालूम छोटे मालिक, मैंने तो सरकारी अस्पताल में भी दिखाया था और उन्होंने तो कहा था कि सब ठीक है। लगता है मेरे मर्दवा ही में कुछ कमी है।

‘कब आ रहा है तेरा मर्द?’

‘शायद अगले महीने आ जाएगा।’

‘अच्छा और फुलवा, तेरा मर्द कब आ रहा है?’

‘वो तो किसी टैम आ सकता है, चंपा का पति बता रहा था कि वो भी छुट्टी ले रहा है और जल्दी आ जाएगा।’

‘मेरा क्या होगा तेरे बिन फुलवा?’

‘क्यों छोटे मालिक, मेरे बाद बिंदू है न… आपकी हर तरह की सेवा करेगी। क्यों बिंदू करेगी न? वैसे बिंदू छोटे मालिक हर तरह तेरी मदद करेंगे, पैसे और कपड़े लत्ते से, क्यों छोटे मालिक करोगे न?

मैंने कहा- यह भी कोई कहने की बात है। फुलवा, ला वो मेरा बटुवा दे।

फुलवा ने बटुवा दे दिया और मैंने दोनों को 100-100 रूपए इनाम में दे दिए।

दोनों बहुत खुश हो गई, वो अपनी चटाई पर सो गईं और मैं पलंग पर सो गया, लेटे हुए सोचने लगा अगर बिंदू के बाद यह चंदा भी मिल जाती है तो क्या फर्क पड़ता है। फिर ख्याल आया कि चंदा काफी खाई खेली है यौन के मामले में। कहीं कोई बवाल न खड़ा कर दे मेरे जीवन में क्यूंकि वो काफी चंट्ट लग रही है।
मन ही मन फैसला किया कि देखेंगे वक्त आने पर।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

फ़ुलवा की चुदाई देख चन्दा चुदी
‘छोटे मालिक, मेरे बाद बिंदू है न… आपकी हर तरह की सेवा करेगी। क्यों बिंदू करेगी न? वैसे बिंदू छोटे मालिक हर तरह तेरी मदद करेंगे, पैसे और कपड़े लत्ते से, क्यों छोटे मालिक करोगे न?
मैंने कहा- यह भी कोई कहने की बात है। फुलवा, ला वो मेरा बटुवा दे।
फुलवा ने बटुवा दे दिया और मैंने दोनों को 100-100 रूपए इनाम में दे दिए।
दोनों बहुत खुश हो गई, वो अपनी चटाई पर सो गईं और मैं पलंग पर सो गया, लेटे हुए सोचने लगा अगर बिंदू के बाद यह चंदा भी मिल जाती है तो क्या फर्क पड़ता है। फिर ख्याल आया कि चंदा काफी खाई खेली है यौन के मामले में। कहीं कोई बवाल न खड़ा कर दे मेरे जीवन में क्यूंकि वो काफी चंट्ट लग रही है।
मन ही मन फैसला किया कि देखेंगे वक्त आने पर।
15 दिन के समय के बाद मेरे इम्तेहान खत्म हो गए और मेरे हिसाब से मेरे पर्चे अच्छे हुए थे और मुझ को उम्मीद थी कि मैं अच्छे नंबरों से पास हो जाऊंगा और फिर शायद मुझ को शहर जाना पड़ेगा कॉलेज की पढ़ाई के लिए।
अभी रिजल्ट आने में दो महीने का समय था तो मैं काफी रिलैक्स हो गया और रोज़ रात को फुलवा और बिंदू की चुदाई जम के कर रहा था।
बिंदू ख़ास तौर से हैरान थी मेरी यौन शक्ति देख कर क्यूंकि उसका पति तो रात में एक बार झड़ कर सो जाता था और फुलवा का पति भी हफ्ते में 2-3 बार छूटा कर थक जाता था, दोनों का लौड़ा भी दुबारा नहीं खड़ा होता था।
बिंदू कहती थी कि छोटे मालिक शायद एक समय में 10-15 औरतों को चोद सकते थे और वो भी बिना थके!
अब मैं सोचता हूँ कि वाकयी ईश्वर की मुझ पर बेइंतेहा कृपा रही जिन्होंने मुझ में इतनी अधिक यौन शक्ति दी।
कुछ लोग सोचते थे कि मैं अभी पूरा जवान नहीं हुआ था तो मेरी यौन शक्ति अभी तो बहुत ज्यादा थी लेकिन जवानी की दौड़ में हल्की पड़ जायेगी।
लेकिन मुझको यकीन था कि ऐसा नहीं होगा और मैं सारी उम्र चुदाई के मामले में पूरा सक्षम रहूँगा। मेरी यह धारणा जीवन में आगे चल कर पूरी तरह खरी उतरी। मैं काफी उम्र होने के बावजूद भी यौन क्रिया के मामले में जवान ही रहा।
अब बिंदू मेरे पीछे पड़ गई कि चंदा का भी कल्याण कर दूँ।
मैंने कहा- एक दिन चंदा को मिलवा तो दो?
तब बिंदू और फुलवा उसको लेकर हमारी कॉटेज आई। उसको देखा तो पाया कि वो बहुत ही तीखे नयन नक्श वाली सांवली सी औरत है, उम्र होगी कोई 25 के आस पास, सुन्दर सुडौल शरीर अच्छी तरह बाल बनाये हुए थे। सुन्दर साड़ी पहनी थी उसने।
मुझको देखकर ही कहने लगी- अरे यह तो छोटे लल्ला हैं। यह क्या करेंगे री बिंदू?
बिंदू बोली- दीदी, इनका कमाल दखोगी तो दांतों तले ऊँगली दबाओगी। उम्र में ज़रूर छोटे हैं, लेकिन बाकी कामों में बहुत बड़े हैं। क्यों फुलवा?
फुलवा बोली- सच कह रही है बिंदू!
‘बस रहने दो। अपने लल्ला की ज्यादा बड़ाई न करो तुम दोनों!’
चंदा की बातें सुन कर मुझ को बड़ा गुस्सा आ रहा था, मैंने कहा- छोड़ो जी, आओ ठंडा शरबत पीते हैं। फुलवा बना तो हम सबके लिए शरबत?
शरबत पीने के बाद चंदा बोली- कुछ नमूना देख लेती तो तसल्ली हो जाती।
फुलवा को अब बहुत गुस्सा आने लगा और गुस्से में बोली- रहने दो दीदी, यह काम तुम्हारे बस में नहीं है। तुम शरबत पियो और जाओ। नमूना हम दिखा देंगी कभी!
बिंदू बोली- दीदी, ऐसा करते हैं हम दोनों अपना काम शुरू करते हैं और फुलवा और छोटे मालिक अपना काम शुरू करते हैं ठीक है क्या? 
चंदा ने सर हिला दिया, तब हम सब बड़े बैडरूम में चले गए और वहाँ बिंदू चंदा को नग्न करने में लग गई और फुलवा मुझको, और फिर हम सब नंगे हो गए तो मैंने देखा कि चंदा का जिस्म एकदम सख्त और सुडौल है। उसके मम्मे बहुत अधिक मोटे लेकिन सख्त थे और पेट भी एकदम पतला और स्मूथ था और उसके चूतड़ बहुत मोटे और गोल थे।
चंदा ने जब मेरा खड़ा लंड देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गई। उसकी नज़र उस पर टिकी थी और फुलवा मेरे लंड को जानबूझ कर हवा में लहलहा रही थी।
चंदा बिंदू को छोड़ कर मेरे और फुलवा के पास आ गई और मेरे लंड को पकड़ लिया, उसको बड़े प्यार से इधर उधर करने लगी लेकिन फुलवा ने उसका हाथ हटा दिया और वो लेट गई और मुझ को अपने ऊपर लिटा लिया। 
मैंने भी अपना लंड फुलवा की गीली चूत में डाल दिया और पहले हल्के और फिर ज़ोर के धक्के मारने लगा।
मेरी कमर की स्पीड इतनी तेज़ हो जाती थी जब पूरे ज़ोर की चुदाई शुरू करता था कि कई लड़कियों की सांस फूलने लगती थी।
फुलवा के मुख से हल्की सी आवाज़ निकली और वो ढेर सारा पानी छोड़ती हुई झड़ गई।
यह सारा नजारा चंदा नज़दीक से देख रही थी।
मैंने भी लंड चूत से निकाले बैगैर ही फुलवा की फिर चुदाई शुरू कर दी। अब मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और फिर पूरा लंड बाहर निकाल कर फिर उसके अंदर डालने लगा।
हर बार 7 इंच का लौड़ा पूरा बाहर आता और फिर उसको अंदर धकेल देता।
फुलवा की चूत से रस टपकने लगा और बिंदू उस रसको ऊँगली में लेकर चाटने लगी। चंदा का एक हाथ उसकी बालों से भरी चूत में गया हुआ था और वो बहुत ज़ोर ज़ोर से अपनी भग्न रगड़ रही थी।
मैं आँखों की कोर से देख रहा था कि चंदा अब बहुत बेसब्र हो गई थी और उसने फ़ुलवा और मुझ को हटा कर अपने आप घोड़ी बन बैठी थी और मेरा लंड अपनी चूत में डाल दिया था और खुद ही वो आगे पीछे होकर धक्के मारने लगी।
उसकी चूत इतनी टाइट नहीं थी और पनिया गई होने के कारण उस में से फुच फुच की आवाज़ें आ रही थी। वो यह सब देख कर इतनी गर्म हो चुकी थी क़ि वो 15-20 धक्कों में ही झड़ गई।
लेकिन मैंने भी अपना लंड उसकी चूत से नहीं निकाला और फिर चोदना चालू हो गया।
ऐसे वो चार बार छुटी और फिर हाथ जोड़ने लगी कि छोटे मालिक निकाल लीजिये बस अब और नहीं तब मैंने ज़ोरदार चुदाई के बाद अपना छूटा लिया और साइड में लेट गया।
तब बिंदू और फुलवा ने मुझ को दबाना शुरू किया जैसे कि मैं लम्बी दौड़ के बाद बहुत थक गया हूँ। चंदा के मुख पर हैरानी साफ़ दिख रही थी।
कुछ देर चुप रह कर बोली- छोटे मालिक आपको यह सब सिखाया किसने? क्यूंकि आप जिस तरह से यह काम करते हैं उससे लगता है कि आपको सिखाने वाली खुद भी काफी माहिर थी। उसने आप को काफी अच्छी ट्रेनिंग दी है..
‘थैंक यू… लेकिन सुना है आप तो औरतों के बीच के सम्बन्ध की माहिर हैं?’
‘नहीं छोटे मालिक, मैं तो जब लंड नहीं मिलता तो गाँव वाली अनजान स्त्रियों को यह तरीका बताती हूँ बस और कुछ नहीं।’
‘गाँव वाली बेचारी औरतों को वर्षों अपने पतियों के बिना रहना पड़ता है तो उनको अपनी इच्छा को मारना पड़ता है या फिर ऊँगली का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन स्त्रियों का आपस का प्रेम उनको पथ भ्रष्ट होने से रोकता है ऐसा मेरा विश्वास है। क्यों बहनो, क्या मैं ठीक कह रही हूँ?’
दोनों ने सर हिला दिया और फिर हम सब विदा हो गए और यह प्रण लिया कि एक दूसरे के भेद नहीं बताएँगे किसी को।
मुझको इससे तसल्ली हो गई।
इस बीच मेरा बिंदू और फुलवा का खेल चलता रहा।
अब दोनों को मुझसे चुदने की जैसे आदत पड़ गई थी, वो दोनों रोज़ रात को हाज़िर हो जाती थीं और पूरी शारीरिक भूख को समाप्त कर के ही जाती थी हर रोज़ और साथ में मुझ से हर महीने की इनाम की रकम भी लेती रहीं।
जैसा कि अनुमान था फुलवा का पति भी लौट आया विदेश से, और उसका मेरे पास आना भी कम हो गया और अब सिर्फ मैं और बिंदू रह गए थे।
कुछ दिन बीतने के बाद फुलवा आई मेरे पास और बोली- छोटे मालिक, जैसे आपने चंपा को गर्भवती बनाया वैसे मैं भी बनना चाहती हूँ।
मैंने हँसते हुए कहा- कुछ नहीं किया पति ने?
‘नहीं करता तो है लेकिन मैंने महसूस किया है कि उसका वीर्य पानी की माफिक पतला है तो बच्चा होने की कोई सम्भावना नहीं है, साला 5 मिन्ट में ही झड़ जाता है और मेरी भी तसल्ली नहीं होती ज़रा सी भी।
मैंने पूछा- कितने दिन हो गए माहवारी को?
वो बोली- आज 14वाँ दिन है, अगर आप मुझ को दो दिन लगातार चोदो तो शायद मैं भी गर्भवती हो जाऊँगी।
मैंने बिंदू को बुलाया और उससे कहा- देख बिंदू, मैं और फुलवा वही काम करने वाले हैं, तुम ज़रा ध्यान रखना।
दोपहर का टाइम था तो मैंने शांति से फुलवा को दो बार चोदा और दोनों बार अपना वीर्य उसके अंदर छुटाया। 
थोड़ी देर रुकने के बाद वो चली गई और जाने से पहले मैंने उसको कल भी आने को कहा।
इस तरह दो दिन मुझ से चुदने के बाद वो फिर नहीं आई और एक महीने के बाद सुना कि फुलवा के भी पैर भारी हैं और फुलवा बड़ी खुश थी इस खबर से।
फुलवा के आने वाले मेहमान की खबर पूरे गाँव में फैल गई और सब औरतें उसको बधाई देने लगी क्यूंकि वो पूरे 3 साल शादी के बाद माँ बन पाई थी।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

नई लड़की बसन्ती मेरे कमरे में सोई
पहले चम्पा और अब फुलवा दोनों ही गर्भवती हो गई तो मुझको ऐसा नहीं महसूस हुआ कि उन दोनों को गर्भवती करने में मेरा कोई रोल है लेकिन एक दिन चम्पा और फुलवा मुझको मिलने आई उसी कॉटेज में, दोनों के चेहरे चमक रहे थे और दोनों बेहद खुश थी।
चम्पा का चौथा माह चल रहा था और फुलवा अभी तीसरे माह में थी, दोनों ही मेरा आभार प्रकट कर रही थीं लेकिन मैं नहीं मान रहा था कि दोनों को गर्भवती मैंने बनाया है। मैं उनके पतियों को ही अपनी पत्नियों को गर्भवती करने का पूरा श्रेय देता था।
अब बिन्दू के साथ मेरा काम वासना का खेल चलने लगा। पहले वो मुझको फुलवा के साथ बंटाती थी लेकिन अब वो अकेले ही मेरे साथ यौन क्रीड़ा करने लगी।
मैं भरसक कोशिश करता कि मैं बिन्दू के अंदर न छुटाऊँ लेकिन कभी कभी थोड़ा सा पानी उसकी चूत में छूट जाता था। मुझको डर लगा रहता था कि कहीं वो गर्भवती न हो जाए।
बिन्दू अब काफी ज़ोर डालने लगी थी कि चंदा को भी चोदा करूँ!
‘कहाँ चोदूँ उसको?’
‘वहीं उस कॉटेज में और कहाँ!’
मैं चंदा से डरता था क्यूंकि वो उम्र की 24-25 की थी और दूसरे वो अपनी उम्र से बड़ी लगती थी। उसकी शक्ल में भोलापन नहीं था। बिन्दू के मन में शायद उसको मेरे से गर्भवती करवाने का प्लान था जो मुझको मंज़ूर नहीं था।
तभी चंदा ने कुटिल चाल खेली, वो अपनी कुंवारी छोटी बहन को मेरे पास भेजने की कोशिश करने लगी।
वो भी मैं ने मंज़ूर नहीं किया।
अब बिन्दू ने मुझको कहना छोड़ दिया और खुद मुझसे रोज़ चुदती रहती थी।
नतीजा निकलने में कुछ दिन ही बचे थे कि पड़ोस के गाँव से एक औरत अपनी लड़की के साथ मेरी मम्मी से मिलने आई।
बाद में पता चला वो अपनी लड़की को नौकरी दिलवाने मम्मी के पास आई थी।
मैं इस बात को भूल गया लेकिन एक दिन बिन्दू नहीं आई क्यूंकि उसको बुखार चढ़ा था।
दोपहर को मम्मी किसी लड़की को लेकर आई और बोली- सोमू, यह नई लड़की आई है और मैंने इसको रख लिया है। यह घर का थोड़ा काम देख लिया करेगी। लेकिन 2-3 दिन बिन्दू नहीं आ पायेगी क्यूंकि उसको बुखार हो गया है इसलिए यह तुम्हारा काम देखा करेगी जब तक बिन्दू नहीं आती। ठीक है न?
मैं बोला- ठीक है मम्मी !
‘इसका नाम बसंती है। और देख बसंती, तू छोटे मालिक से पूछ लेना कि क्या काम करवाना है, वो बता दिया करेंगे।’
यह कह कर मम्मी तो चली गई।
बसंती वहीं पर खड़ी रही।
मैंने देखा, एक पतले जिस्म वाली 18-19 साल की लड़की सामने खड़ी थी, रंग गंदमी लेकिन चेहरा पतला और बाकी शरीर धोती ब्लाउज में ढका था तो पता नहीं चला कि उसके मम्मे और नितम्ब कैसे हैं।
यानि कुल मिला कर मैं कोई ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ था इस नई लड़की से।
मैंने उसको छोटे मोटे काम बता दिए और अपने बिस्तर पर लेट गया।
शाम को वो चाय लेकर आई तो उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वो ज्यादा उत्साहित नहीं दिखी तो मैंने भी उसको परेशान करना उचित नहीं समझा।
रात को खाने के बाद वो डरते हुए कमरे में आई और चुपचाप चटाई बिछा कर और चादर लेकर लेट गई।
तब मैंने उस का डर दूर करने की खातिर बात शुरू कर दी।
उसने बताया कि वो बगल के एक गाँव में रहती है और 5 जमात तक स्कूल में पढ़ी है और अब अपनी माँ का हाथ घर के काम में बटाती है। उसकी एक छोटी बहिन भी है और एक छोटा भाई भी है, दोनों स्कूल जाते हैं।
रात सोते समय हम कभी कमरे की पूरी लाइट ऑफ नहीं करते थे लेकिन नाईट बल्ब जला कर रखते थे।
अचानक मेरी नींद रात में खुली तो देखा की बसंती का हाथ चादर के अंदर हिल रहा था। ध्यान से देखा कि उसकी आँखें बंद थी लेकिन उसका दायां हाथ उस की चूत के ऊपर हिल रहा था।
मैं समझ गया कि वो चूत में ऊँगली कर रही है और अपना छूटा लेने की कोशश कर रही थी।
फिर उसकी उंगली बड़ी तेज़ी से चलने लगी और फिर एक लम्बी गहरी सांस के साथ उसका हाथ रुक गया।
मैं समझ गया की बसंती झड़ गई है।
मेरे को पता नहीं क्या सूझी, मैं चुपके से उठा और उसके पास जाकर बैठ गया और धीरे से उसकी चादर को खींच कर ऊपर कर दी। उसकी धोती एकदम पेट पर चढ़ी हुई थी और उसका हाथ अभी तक बालों भरी चूत के ऊपर था और वो धीरे धीरे हाथ से अभी भी चूत को रगड़ रही थी।
लेकिन उस की आँखे बंद थी पर हाथ अभी भी चल रहा था, लगता था कि वो नींद में ही यह सब कर रही थी।
मैंने धीरे से उसका हाथ हटा दिया और अपने हाथ से उसकी भगनासा को दबाने लगा और उसको फिर आनन्द आने लगा।
मैं समझ गया कि वो पक्की नींद में है, मैंने अपना पायजामा खोला और खड़े लंड को उसकी चूत पर टिका दिया।
तभी देखा कि उसने भी झट से अपनी टांगें पूरी खोल कर फैला दी जिस वजह से मुझ को लंड को उसकी चूत में डालने में कोई दिक्कत आई।
मैं लंड डाल कर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, मेरा हिलना बस ना के बराबर था, धीरे से लंड अंदर और फिर धीरे से बाहर।
कोई 10 मिनट बाद उसका शरीर एकदम अकड़ा और वह पानी छोड़ बैठी।
मैं भी चुपके से उस के ऊपर से उतरा और उसके ऊपर पहले धोती और चादर ठीक कर दी और आ कर अपने बिस्तर पर लेट गया और जल्दी ही मैं सो गया।
सवेरे उठा तो बसंती चाय ले कर खड़ी थी और मेरे पायज़ामे की तरफ घूर रही थी।
जब मैंने पायज़ामा देखा तो वो तम्बू बना हुआ था और मेरा लौड़ा एकदम अकड़ा खड़ा था।
बिना शर्म किये वो मेरे लंड को घूर रही थी।
मैंने झट से चादर को अपने खड़े लंड पर डाल दिया और उसके हाथ से चाय ले ली और उसकी तरफ देखा तो वो मंत्रमुग्ध हुई चादर में छिपे मेरे लंड को ही देख रही थी।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो ऐसे क्यों कर रही थी। फिर सोचा शायद उस को रात का चुदना याद है और वो आगे बात करना चाहती है।
लेकिन वो बिना कुछ कहे खाली कप लेकर चली गई।
बसन्ती सोते सोते सेक्स करती थी

मैंने अपना पायजामा खोला और खड़े लंड को उसकी चूत पर टिका दिया।
तभी देखा कि उसने भी झट से अपनी टांगें पूरी खोल कर फैला दी जिस वजह से मुझ को लंड को उसकी चूत में डालने में कोई दिक्कत आई।
मैं लंड डाल कर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, मेरा हिलना बस ना के बराबर था, धीरे से लंड अंदर और फिर धीरे से बाहर।
कोई 10 मिनट बाद उसका शरीर एकदम अकड़ा और वह पानी छोड़ बैठी।
मैं भी चुपके से उस के ऊपर से उतरा और उसके ऊपर पहले धोती और चादर ठीक कर दी और आ कर अपने बिस्तर पर लेट गया और जल्दी ही मैं सो गया।
सवेरे उठा तो बसंती चाय ले कर खड़ी थी और मेरे पायज़ामे की तरफ घूर रही थी। जब मैंने पायज़ामा देखा तो वो तम्बू बना हुआ था और मेरा लौड़ा एकदम अकड़ा खड़ा था, बिना शर्म किये वो मेरे लंड को घूर रही थी।
मैंने झट से चादर को अपने खड़े लंड पर डाल दिया और उसके हाथ से चाय ले ली और उसकी तरफ देखा तो वो मंत्रमुग्ध हुई चादर में छिपे मेरे लंड को ही देख रही थी।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो ऐसे क्यों कर रही थी। फिर सोचा शायद उस को रात का चुदना याद है और वो आगे बात करना चाहती है।
लेकिन वो बिना कुछ कहे खाली कप लेकर चली गई।
दिन में हम कॉटेज चले गये, सोचा था कि ज़रा आराम कर लेंगे। हम बैठे ही थे कि दरवाज़ा खटका और खोला तो देखा कि वहाँ चंदा खड़ी थी और अंदर आने को उतावली हो रही थी।
अंदर आते ही उसने मेरा लंड पकड़ लिया पायजामे के ऊपर से ही उसका हाथ लगते ही लंड जी तो खड़े हो लगे फड़फड़ाने।
लंड का यह हाल देख कर चंदा ने झट से अपनी साड़ी उतार दी और जल्दी से पेटीकोट भी निकाल दिया और मुझको लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ बैठी।
वो ऊपर से ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगी और मुझको मम्मों को दबाने के लिए उकसाने लगी।
मैं भी मौके की गर्मी में बह गया और चंदा के सुन्दर शरीर को प्यार से चोदने लगा।
10-15 मिन्ट में वो दो बार छूट गई और छूटते वक्त उसने ऊपर से मुझको कस कर जकड़ लिया अपनी बाँहों में। तब वो नीचे आ गई और मुझको ऊपर से चोदने के लिए उकसाने लगी लेकिन मैं भी इस पोज़ से उकता गया था और उसको घोड़ी बना कर चोदने लगा। और फिर बहुत सारे धक्के मारने के बाद मैंने अपनी पिचकारी उसकी चूत के आखरी हिस्से तक ले जाकर छोड़ दी।
मुझको पक्का यकीन था कि मेरा वीर्य उसके गर्भाशय में ज़रूर गिरा होगा।
ऐसा लगा कि चंदा पूरी तरह से निहाल गई। 
मैं उठा और एक शरबत का गिलास बना कर उसको पकड़ा दिया और वो शरबत पीकर फिर से चुदवाने के लिए तैयार हो गई और जैसे कि मेरी आदत है, मैं उसको इंकार नहीं कर सका और उसको फिर एक बार चोद दिया।
वो जल्दी से कपड़े पहन कर वहाँ से चली गई।
मैं तो उस समय वाली चुदाई को भूल गया लेकिन बुखार के ठीक होने के बाद आई बिन्दू ने बताया कि वो चंदा तो बहुत खुश होकर गई उस दिन… कह रही थी वो ज़रूर गर्भवती हो गई होगी।
उस रात मैं बसंती को चोदने के मूड में नहीं था। इसलिए मैं उसके कमरे में आने से पहले ही सो गया लेकिन रात को मेरी नींद खुली तो देखा कि बसंती मेरे साथ ही सोई है, उसका एक हाथ मेरे खड़े लंड पर था और दूसरे से वो अपनी चूत को रगड़ रही थी।
उसकी आँखें बंद थी, पेटीकोट भी ऊपर उसके पेट पर आया हुआ था और उसकी पतली लेकिन एकदम मुलायम जाँघें हिल रही थीं।
जब उसने महसूस किया कि मेरा लंड बिल्कुल खड़ा है तो वो मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लंड को चूत में डाल दिया। मैं भी सोने का बहाना करता रहा और चुपचाप लेटा रहा, बसंती ही सारी मेहनत करती रही।
लेकिन हैरानगी इस बात की थी कि वो अभी भी आँखें बंद कर के यह सारा काम कर रही थी। उसकी चूत से बहुत पानी निकल रहा था और वो पूरी तरह से बेखबर मेरी चुदाई में मस्त थी।
जब वो पूरी तरह से चुदाई में थक गई तो वो अपने आप उतर गई मेरे ऊपर से और जा कर अपने बिस्तर पर सो गई। 
अगले दिन बिन्दू काम पर आ गई और नई लड़की को देख कर भड़क गई।
मैंने उसको शांत किया और कहा- आज रात में तुमको एक तमाशा देखने को मिलेगा।
रात में बिन्दू बहुत कमज़ोरी महसूस कर रही थी इसलिए उसकी यौन के लिए कोई उत्सकता नहीं थी। बिन्दू चटाई बिछा कर उस पर लेट गई और थोड़ी देर बाद बसंती आई और दूसरी चटाई बिछा कर उस पर लेट गई और मेरी तरफ देखने लगी।
मुझ को लगा कि वो मुझे कुछ कहना चाहती है शायद लेकिन मैं चुपचाप लेटा रहा और फिर न जाने कब मेरी नींद लग गई।
थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि कोई मेरे साथ आकर लेट गया है। मैंने हाथ लगा कर देखा तो वही बसंती ही थी।
मैंने नाईट लाइट में देखा वो धोती ब्लाउज उतार कर एकदम नंगी थी। आते ही उसने मेरा लंड खड़ा कर लिया और फिर मेरे ऊपर चढ़ गई और खुद ही अंदर डाल कर धक्के भी मारने लगी और बिन्दू बेचारी सोई रही। उसको पता ही नहीं चला कि बसंती मुझ को चोद रही थी और वो भी आँखें बंद करके।
मुझको यह समझ नहीं आ रहा था कि बसंती यह चुदाई का काम सोये हुए कर रही थी या फिर सोने का नाटक कर रही थी।
मैं आज बसंती को झकझोड़ कर जगाना चाहता था लेकिन फिर सोचा कि कल बिन्दू को यह सब दिखा कर पता लगाएंगे कि वो ऐसा क्यों कर रही है।
बसंती अपना दो बार छूटा कर कपड़े पहन कर अपनी चटाई पर सो गई।
सुबह उठा तो देखा, सिर्फ बसंती सोई है और बिन्दू बाहर जा चुकी है।
थोड़ी देर बाद वो मेरी चाय लेकर आ गई।
मैंने उससे हाल पूछा तो वो बोली- अब ठीक है।
फिर मैंने बसंती की तरफ इशारा किया और बताया- कल रात इस लड़की ने मुझको चोद डाला। साली बहुत तेज़ लगती है। तुम इसको जगाओ और बाहर जाने को कहो।
बिन्दू ने बसंती को जगाया और उसे लेकर बाहर चली गई।
बाद में जब वो आई तो मैंने उसको सारी बात बताई।
वो भी हैरान थी।
फिर हम दोनों ने फैसला किया कि रात को उसको पकड़ेंगे।
रात को बिन्दू मेरा दूध का गिलास लेकर आई और आँख से इशारा किया बसंती आ रही है।
तब बिन्दू अपनी चटाई बिछाने लगी, कुछ देर बाद बसंती भी आ गई और बिन्दू उससे बातें करने लगी। मैं भी दूध पीकर सोने का बहाना करने लगा।
दोनों लड़कियाँ भी अपने बिस्तरों पर लेट गई, थोड़ी देर बाद वो दोनों भी गहरी नींद में सो गई।
मैं और बिन्दू जाग रहे थे लेकिन आँखें बंद थी। तभी मैंने महसूस किया कि बसंती अपने बिस्तर से उठी है और मेरे बेड के निकट आई है।
वो गौर से मेरे चादर से ढके लंड को देखती रही और साथ में मुड़ कर बिन्दू को भी देख रही थी।
कुछ क्षण बाद वो अपने बिस्तर पर वापस लौट गई और सोई बिन्दू को देखने लगी। फिर धीरे से उसने अपना एक हाथ बिन्दू की चादर में डाल दिया और धोती के ऊपर उसकी चूत में फेरने लगी।
बिन्दू ने एक आँख खोल कर मुझको देखा, मैंने आंख मार कर उसको इशारा किया कि ‘करने दो वो जो कर रही है।’
बिन्दू भी बगैर हिले डुले लेटी रही।
आँख बंद किये ही बसंती ने बिन्दू की चादर और फिर धोती ऊपर उठा दी और अब आँख खोल कर उस की बालों भरी चूत देखने लगी और फिर उसने अपना मुंह बिन्दू की चूत पर लगा दिया।
बिन्दू अब आँख खोल कर इस चुसाई का आनन्द लेने लगी।
पहले बसंती धीरे से चूस रही थी और फिर उसने चुसाई की स्पीड तेज़ कर दी। ऐसा करते हुए उसके चूतड़ हवा में लहरा रहे थे और उस का पेटीकोट चूतड़ के ऊपर आ गया था।
वो चुसाई का काम इतना मग्न होकर रही थी कि उसको पता ही नहीं चला कब मैं अपने बिस्तर से उठा और उसकी गांड के ऊपर अपना खड़ा लंड टिका दिया।
फिर मैंने धीरे से लंड उसकी चूत पर रख कर एक ज़ोर का धक्का मारा कि मेरा लंड झट से उसकी चूत की गहराइयों में चला गया और उसकी गीली और बेहद गर्म चूत का आनन्द लेने लगा।
नीचे हम दोनों के बीच लेटी बसंती ने बिन्दू की चुदाई की स्पीड बढ़ा दी।
उधर बिन्दू भी पूरे जोश में थी और खूब आनन्द ले रही थी उसकी चूत की चुसाई का।
सबसे पहले बिन्दू सबसे नीचे एकदम अकड़ कर झड़ गई और फिर बसंती भी थोड़ी देर में झड़ गई।
रह गया मैं… तो मैंने भी ज़ोर ज़ोर से पीछे से धक्के मार कर कर बसंती की चूत में अपना फव्वारा छोड़ दिया।
तीनों अलग अलग होकर लेट गए।
बिन्दू ने बसंती से पूछा- यह तुम क्या कर रही थी बसंती?
वो एकदम हैरानी से बोली- मैं क्या कर रही थी? बताओ तो?
‘अरे तुम हम दोनों के साथ चुदाई कर रही थी न? तुमको नहीं पता क्या?’
‘नहीं, जब मैं सो जाती हूँ तब मुझ को कुछ याद नहीं रहता कि मैं क्या कर रहीं हूँ!’ 
‘ऐसे कैसे हो सकता है? तुमने पहले मेरी चूत की चुसाई की और फिर छोटे मालिक ने तुमको पीछे से चोदा, क्या तुमको नहीं पता?’
‘नहीं बिल्कुल नहीं पता!’
वह रोने वाली हो गई थी और बड़ी मासूमियत से हम दोनों को देख रही थी।
फिर उसने अपने नंगे शरीर को देखा और बड़ी दर्दभरी आवाज़ में बोली- मुझको कुछ याद नहीं कि मैंने क्या किया था आप दोनों के साथ!
हम दोनों हैरान थे कि यह कैसे हो सकता है? लेकिन बसंती नहीं मान रही थी, वो बार बार यही कह रही थी कि उसको कुछ भी नहीं याद कि उसने क्या किया था।
हम दोनों सोच में पड़ गए।
बसंती का व्यव्हार काफी चौंकाने वाला था।
थोड़ी देर बाद हम तीनों सो गए, सवेरे उठे तो बसंती कमरे में नहीं थी।
बाद में पता चला वो बड़ी मालकिन को बता कर नौकरी छोड़ गई थी।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

बिन्दू को गर्भ रह गया
बसंती के जाने का दुःख किसी को नहीं हुआ क्यूंकि वो कुछ दिनों में सिर्फ मेरे साथ ही सम्बन्ध बना पाई थी। कई बार मैं सोचता था कि बसंती का व्यवहार अजीब ज़रूर था लेकिन इतना भी अजीब नहीं कि संभव न हो सके।
ऐसे किस्से तो सुनने में आते रहते थे कि अमुक को रात में चलने की आदत है या फिर बहुत अमीर होने के बावजूद भी चोरी की लत किसी किसी में पाई जाती थी।
अब मैं और बिन्दू रात भर चुदाई करते रहते थे। मेरी भरसक कोशिश होती थी कि मैं अपना वीर्य बाहर ही छुटाऊँ लेकिन फिर भी कभी अंदर थोड़ा बहुत छूट ही जाता था।
शायद इसी का परिणाम हुआ कि एक दिन बिन्दू जब मेरे कमरे में सवेरे चाय देने आई तो बहुत घबराई हुई थी।
मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसकी माहवारी इस महीने नहीं आई और उसको पक्का यकीन है कि वो गर्भवती हो गई है। उसके मुख पर चिंता के रेखाएं छाई हुई थीं, मैं भी काफी फ़िक्रमंद हो गया यह सुन कर।
सारा दिन हमारा इसी सोच में डूबा कि अब क्या करें।
लेकिन अगले दिन बिन्दू आई तो वो मुस्करा रही थी।
मैंने पूछा- क्या माहवारी वाली खबर गलत है?
बिन्दू बोली- नहीं जी, एकदम सही है। लेकिन कल रात मेरा पति घर वापस आ गया था, उसने भी चोद दिया और अब यह बच्चा मेरे पति का ही होगा न?
‘बहुत शुक्र है भगवान का… जो ऐसा हो गया, नहीं तो बड़ी मुसीबत आ जाती। लेकिन मेरा क्या होगा बिन्दू?’
बिन्दू बोली- आप फ़िक्र न करें छोटे मालिक, कोई न कोई इंतज़ाम मैं कर दूंगी आपका… अच्छा अब मैं चलती हूँ।
यह कह कर बिन्दू तो चली गई लेकिन मेरा मन उचट गया। तभी खबर आई कि मेरा रिजल्ट निकल गया है और मैं अच्छे नंबरों से पास हो गया हूँ।
यह सुन कर मम्मी पापा बहुत खुश हुए और वो मेरे शहर जाने की तैयारी करने लगे ताकि बड़े कॉलेज में दाखला ले सकूँ।
मुझको कॉलेज में दाखला लेने और शहर में जाने की कोई खास ख़ुशी नहीं हो रही थी। यहाँ चुदाई का अच्छा साधन बन गया था और मुझ को आशंका थी कि शहर में मुझको गाँव जैसा आनन्द नहीं मिल पायेगा।
शहर जाने में अभी कुछ दिन बाकी थे, मैं घूमते हुए अपनी कॉटेज में चला गया। शरबत का एक ठंडा गिलास बना कर पी ही रहा था कि दरवाज़ा खटका।
खोला तो देखा कि सामने चम्पा खड़ी थी और उसके साथ एक और औरत भी थी।
मैं चम्पा को देख कर खुश हो गया लेकिन उसके साथ खड़ी औरत को देख कर कुछ हिचकिचाहट सी होने लगी।
चम्पा बोली- छोटे मालिक, सुना आप परीक्षा में पास हो गए, सोचा बधाई दे आऊँ। इनसे मिलो, यह निर्मला है। बेचारी का पति भी बाहर गया हुआ है। मैंने सोचा कि छोटे मालिक से मिलवा देती हूँ शायद इसका भी कुछ काम हो जाए।
मैं एकदम सकपका गया और मेरे मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था।
चम्पा बोली- छोटे मालिक, इसकी भी मदद कर दो, ज़िंदगी सुधर जायेगी इस बेचारी की।
मैं बोला- कैसी मदद कर दूँ चम्पा इसकी?
‘वही जैसी आपने हमारी मदद की!’
‘अरे मैं बदनाम हो जाऊँगा अगर गाँव वालों को पता चला तो? और फिर इसका पति भी नहीं है यहाँ। कैसे होगा यह सब?’
चम्पा ने कुछ सोचते हुए कहा- ऐसा करते हैं मालिक, आप इसको आज चोद दो तो इस का भी मन और शरीर ठीक हो जायेगा।
मैंने कहा- इससे पूछ लो क्या यह इस काम के लिए राज़ी है?
चम्पा ने निर्मला से पूछा- छोटे मालिक के सामने बताओ तुम क्या क्या चाहती हो? क्या इनसे चुदवाना है या नहीं? फिर अगर तुम को बच्चा ठहर जाता है तो छोटे मालिक जिमेवार नहीं होंगे। समझी न?
निर्मला ने हाँ में सर हिला दिया।
चम्पा ने फिर कहा- ऐसे नहीं, मुंह से बताओ छोटे मालिक को कि तुम क्या चाहती हो?
तब निर्मला बोली- मैं तैयार हूँ छोटे मालिक।
उसका मुंह शर्म से लाल हो गया।
यह सुन कर चम्पा निर्मला को लेकर अन्दर कमरे में चली गई और वहीं वो उसके कपड़े उतारने लगी।
अब मैंने उस औरत को गौर से देखा, उसकी आयु होगी 20-21 और वो रंग की साफ़ थी और जिस्म भरा हुआ, उसके उरोज काफी गोल और उभरे हुए लग रहे थे।
सबसे सुन्दर उसके मोटे और गोल चूतड़ थे जिनमें से काम वासना की एक महक आ रही थी।
मुझे लगा कि निर्मला कि उसका पूरा शरीर सिर्फ चुदाई के लिए बना था। गोल गदाज़ चूतड़ों के ऊपर उस की चूत बहुत उभरी हुई दिख रही थी। उसका सेक्सी बदन देख कर मेरा दिल उसको फ़ौरन चोदने के लिए तयार हो गया।
मैंने चम्पा से कहा- ऐसे नहीं चम्पा, तुम भी आओ मैदान में, तभी बात बनेगी।
चम्पा बोली- मैं कैसे आ सकती हूँ। मैं तो अपने पति को भी पास नहीं आने देती आजकल!
‘तो फिर रहने दो…’
‘नहीं नहीं छोटे मालिक, निर्मला का तो कल्याण कर दो। मुझको कष्ट होगा, 5वाँ महीना चल रहा है।’
‘देखो चम्पा अगर तुम आती हो तो ठीक, नहीं तो निर्मला को भी नहीं?’
‘देखेंगे, पहले निर्मला को तो चुदाई सुख दीजिये फिर मैं भी आ जाऊँगी।’
यह कह कर चम्पा ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मेरे लंड को देख कर निर्मला के मुंह से ‘उई माँ’ निकल गया क्यूंकि मेरा लंड एकदम खड़ा था और 7 इंच का और लंड चूत के अंदर जाने के लिए बेताब था।
चम्पा ने निर्मला के होटों को चूमा और फिर उसके मम्मों को चूसने लगी। यह देख कर मुझ से रहा नहीं गया, मैंने उसके मोटे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया, चूचियाँ सख्त हो गई थीं, उनको मुंह में लेकर चूसा और फिर एक हाथ उसकी चूत में डाल दिया।
चूत एकदम गीली हो रही थी।
चम्पा झुक कर निर्मला के गोल चूतड़ों को चाट रही थी।
चम्पा ने निर्मला को पलंग पर लिटा दिया और मैं भी झट से उसकी फैली हुई टांगों के बीच चला गया और लंड को निशाने पर बैठा कर ज़ोर का धक्का दिया और लंड पूरा का पूरा चूत में चला गया गया।
निर्मला के मुंह से एक हल्की सिसकारी निकली और उसकी बाँहों ने मेरे को घेर लिया और अपनी छाती से चिपका लिया। कभी धीरे और कभी तेज़ धक्कों से शुरू हो गई हमारी यौन जंग…
शीघ्र ही निर्मला की चूत से पानी छूट गया और मैं तब भी अपने धक्कों में लगा रहा।
कुछ समय बाद ही निर्मला का दूसरी बार भी छूटा और वो टांगें पसार कर लेट गई।
मैंने चम्पा की तरफ देखा, उसका मुंह शारीरिक गर्मी से लाल हो रहा था और उसका दायां हाथ धोती के अंदर था।
मैंने चम्पा को पलंग पर खींच लिया और उसको घोड़ी बना कर उसको पीछे से पेल दिया लेकिन मैं बड़े ध्यान से उसको चोदने लगा। बड़े धीरे धक्के मार रहा था और पूरा लंड अंदर नहीं डाल रहा था।
उसकी चूत भी पनिया गई थी।
और इस तरह प्यार से मैं चम्पा को भी चोद दिया।
एक बार उसके झड़ जाने के बाद में उसके ऊपर से उतर गया।
तब तक निर्मला अपनी ऊँगली से अपनी भगनसा को मसल रही थी और बड़े ध्यान से चम्पा की चुदाई को देख रही थी। जैसे ही मैं चम्पा के ऊपर से हटा, निर्मला ने अपनी टांगें फ़ैला दी और मुझको अपने ऊपर आने के लिए खींचने लगी, झट से मैं चम्पा की चूत को छोड़ कर निर्मला पर चढ़ गया।
!
थोड़े धक्के मारने के बाद मैंने उसको भी घोड़ी बनने के लिए कहा और वो झट से घोड़ी बन गई।
तब मैंने उसको फुल स्पीड से चोदना शुरू किया। उसके मुंह से कुछ अजीब सी आवाज़ आ रही थी जैसे कह रही हो ‘फाड़ दो मुझको… और ज़ोर से चोदो राजा।’
जैसे वो बोल रही थी वैसे ही मेरा जोश और बढ़ रहा था और मैं पूरी ताकत के साथ उसको चोदने में लग गया। उसके अंदर बहुत दिनों का यौन इच्छा का दबा हुआ सारा जोश जैसे एक साथ बाहर निकलने के लिए उतावला हो रहा हो।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

अबकी बार जब निर्मला छूटी तो उसके चूतड़ उछलने लगे।
मैंने चुदाई रोक कर बिन्दू की तरफ देखा तो वो भी हैरान थी कि निर्मला इतनी ज्यादा गर्म हो गई थी और तभी मुझको महसूस हुआ कि पानी का फव्वारा निर्मल की चूत से निकल रहा है और मेरे लंड समेत मेरा पेट तक को भिगो दिया।
फिर अपने आप ही मेरा भी छूट गया और वो उसकी चूत की गहराई तक अंदर गया।
थोड़ी देर बाद हम तीनों संयत हुए।
मैंने चम्पा से कहा- आज से बिन्दू भी नहीं आयेगी क्योंकि उसका घरवाला वापस आ गया है।
चम्पा बोली- अच्छा तो फिर आप निर्मला को चोद लिया करना रोज़!
‘कैसे होगा यह सब? यह हमारे घर काम नहीं करती ना?’
‘तो आप इसको कॉटेज में बुला लिया करो ना, क्यों ऐसा नहीं कर सकते क्या?’
‘कर सकता हूँ लेकिन किसी ने देख लिया तो? फिर रोज़ रोज़ मुझको गर्मी में यहाँ आना पड़ेगा।’
‘बोलो फिर क्या करें? क्यों निर्मला मालिक के घर काम करोगी?’
निर्मला बोली- कर लिया करूंगी। दिन को काम कर के रात को घर आ जाया करूंगी, क्यों ठीक है?
‘नहीं, रात भी रुकना पड़ेगा तुझको!’
‘मेरी सास है न, वो शायद न माने, कोशिश करती हूँ।’
फिर वो दोनों चली गई और मैं वहीं सो गया।
अगले दिन चम्पा निर्मला को लेकर मम्मी से मिलने आई। थोड़ी देर बाद वो दोनों मम्मी के साथ मेरे कमरे में आईं। मम्मी ने आते ही कहा- सोमू, चम्पा इस निर्मला को ले कर आई है तुम्हारे काम के लिए! बोलो ठीक है यह?
मैंने कहा- मम्मी, आप जो फैसला कर लो, वही ठीक है।
मम्मी ने चम्पा को कहा- चम्पा, तुम निर्मला को सोमू का काम समझा देना। वैसे ही यह तो जल्दी शहर जाने वाला है, उसके बाद मैं देखूंगी इसको कहाँ रखें।

निर्मला की चूत चुदाई

अगले दिन चम्पा निर्मला को लेकर मम्मी से मिलने आई। थोड़ी देर बाद वो दोनों मम्मी के साथ मेरे कमरे में आईं। मम्मी ने आते ही कहा- सोमू, चम्पा इस निर्मला को ले कर आई है तुम्हारे काम के लिए! बोलो ठीक है यह?
मैंने कहा- मम्मी, आप जो फैसला कर लो, वही ठीक है।
मम्मी ने चम्पा को कहा- चम्पा, तुम निर्मला को सोमू का काम समझा देना। वैसे ही यह तो जल्दी शहर जाने वाला है, उसके बाद मैं देखूंगी इसको कहाँ रखें।
निर्मला भी काफी सुघड़ औरत थी, सबसे अच्छी चीज़ जो उसकी मुझको लगी थी वो उसकी मीठी और प्यारी आवाज़ थी। जब चम्पा ने उसको काम समझा दिया तो वो उसको लेकर मेरे पास आई और बोली- यह छोटे मालिक का कमरा है, इसको साफ़ सुथरा रखना अब तेरा काम है निर्मला! छोटे मालिक के हर काम को ध्यान से और मन लगा कर करना। जैसा वो कहें, वैसा ही करना, छोटे मालिक तेरा पूरा ख्याल करेंगे।
मैंने पूछा- क्यों चम्पा क्या यह रात रहेगी यहाँ?
‘हाँ छोटे मालिक, मैंने इसकी सास से बात कर ली है और वो मान गई है। यह अब दिन रात आप की सेवा करेगी छोटे मालिक!’
‘क्यों निर्मला? करेगी न हर प्रकार की सेवा?’
यह कहते हुए चम्पा ने मुझको आँख मारी, मैं भी मुस्कुरा दिया।
‘और सुन निर्मला तू रात में अपना बिस्तर यहाँ ही बिछाया करेगी और छोटे मालिक का पूरा ध्यान रखेगी। ठीक है न?’
‘अच्छा छोटे मालिक, मैं अब चलती हूँ!’
मैं बोला- रुक चम्पा।
मैं अपनी अलमारी की तरफ गया और कुछ रूपए निकाल कर ले आया, 100 रूपए मैंने चम्पा को दिए और 100 ही निर्मला को दे दिए। दोनों बहुत खुश हो गईं और जाने से पहले मैंने चम्पा के होंट चूम लिए और उससे कहा- देख चम्पा तुझको जब भी किसी किस्म की मदद की ज़रूरत हो तो बिना हिचक के आ जाना मेरे पास। तुमने मुझको बहुत कुछ सिखाया है।
और फिर मैंने उसको बाँहों में भींच कर ज़ोरदार चुम्मी दी और उसके चूतड़ों को हाथ से रगड़ा।
मैंने निर्मला को मेरे लिए चाय लाने के लिए कहा।
बिंदु का जाना और निर्मला का आना बस एक साथ ही हुआ। निर्मला की धोती कुछ मैली और पुरानी लग रही थी। तो मैं मम्मी के कमरे से उसके पुराने कपड़ो की अलमारी से 3-4 धोतियाँ उठा लाया और निर्मला को दे दी।
वो और भी खुश हो गई और कुछ शरमाई और फिर आगे बढ़ कर उसने मेरे होंट चूम लिए और वहाँ से भाग गई। 
मेरे कॉलेज का फैसला यह हुआ कि लखनऊ के सबसे बढ़िया कॉलेज में मेरा दाखला होगा और वहाँ मैं हॉस्टल में नहीं रहूँगा बल्कि अपनी कोठी में रहूंगा और मेरी देखभाल के लिए वहाँ खानसामा तो रहेगा ही, साथ में किसी नौकरानी का भी इंतज़ाम कर दिया जाएगा जो मेरा काम देखा करेगी जैसे यहाँ देखती है।
10 दिनों बाद मुझको लखनऊ जाना था तो मैं पूरी तरह चुदाई में लीन हो गया और निर्मला ने इसमें मेरा पूरा साथ दिया।
रात को चुदाई के बाद मैंने निर्मला से उसके पति के बारे में पूछना शुरू कर दिया। उसने बताया कि उसका पति भी बड़ा ही चोदू था, वो अक्सर रात में 3-4 बार चोदता था और उसको चुदाई के कई ढंग आते थे। जैसे वह चूत को तो चोदता था ही, वह मेरी गांड में भी लंड से चुदाई करता था।
‘अच्छा तो तुमको गांड चुदाई अच्छी लगी क्या?’
‘नहीं छोटे मालिक, मुझको चूत की चुदाई ही अच्छी लगती है लेकिन मेरे पति को गांड चुदाई की भी आदत पड़ चुकी थी तो वो हफ्ते दस दिन में एक बार गांड भी मार लिया करता था मेरी!’
‘अच्छा यह तो बड़ा ही गन्दा काम है निर्मला! तू कैसे बर्दाश्त करती थी उसकी यह गन्दी हरकत?’
‘नहीं छोटे मालिक गांड चुदाई कई मर्दों को बहुत अच्छी लगती है क्योंकि चोद चोद कर औरतों की चूत तो ढीली पड़ जाती है और अगर कहीं 3-4 बच्चे हो जाएँ तो चूत बिल्कुल ढीली पड़ जाती है और मर्द लोगों को चुदाई का मज़ा नहीं आता।
‘तुझको दर्द तो हुआ होगा बहुत?’
‘हाँ पहली बार तो हुआ था लेकिन मेरा आदमी तेल लगा कर मुझको चोदता था तो इतना दर्द नहीं होता था।’
‘पर तुझको मज़ा तो नहीं आता होगा?’
‘नहीं मुझको मज़ा नहीं आता था और बाद में पति के सो जाने पर मुझको ऊँगली करनी पड़ती थी। वैसे गाँव की कई औरतों ने मुझको बताया है उनके आदमी भी गांड मारते हैं उनकी।’
‘अच्छा यह बता तेरे पति की चुदाई से तेरा बच्चा क्यों नहीं हुआ?’
‘मेरे पति के वीर्य बड़ा ही पतला था और बहुत जल्दी ही वो झड़ जाता था।’
‘कितने साल हो गए तेरी शादी को?’
वो बोली- 3 साल हो जायेंगे अगले महीने!
वो उदास हो कर बोली।
‘इस बीच किसी और मर्द से नहीं चुदवाया क्या?’
वो शर्मा गई और बोली- नहीं छोटे मालिक!
यह कहते हुए मुझको लगा कि वो झूठ बोल रही है, मैंने कहा- मुझको लगता है तुम काफी चुदी हुई हो। सच बताना क्या किसी और से भी चुदवाया है कभी? मैं बिल्कुल बुरा नहीं मानूँगा।
वो काफी देर चुप रही लेकिन मैं उसके चेहरे के भाव पढ़ कर यह अंदाजा लगा रहा था कि सच बोलने से घबरा रही है।
‘निर्मला सच बता दो, मैं बिल्कुल किसी को नहीं बताऊँगा। कौन था वो जिससे चुदवाती रही थी तुम?’
निर्मला बोली- मेरे पड़ोस का लड़का था। हमारा गुसलखाना नहीं है तो हम या तो नदी पर नहाती हैं या फिर घर के बाहर छप्पर में कपड़ा बाँध कर नहा लेती हैं। एक दिन मैं नहा रही थी तो मुझको चुदवाने की गर्मी सताने लगी तो मैं बिना सोचे चूत में ऊँगली डाल कर अपनी तसल्ली कर रही थी कि मुझको ऐसा लगा कि कोई मुझको देख रहा है? मैं चौकन्नी हो गई और उठ कर देखा तो पड़ोस का लड़का छुप छुप कर मुझको नहाते हुए देख रहा था।
‘फिर क्या हुआ?’ मैं बोला।
‘वो भी गर्मी में आकर मुठ मार रहा था… मुझको देख कर भाग गया। उसका लंड देख कर मेरा दिल मचल गया लेकिन मैं अपनी तरफ से पहल नहीं करना चाहती थी।’
यह कहते हुए निर्मला फिर गर्म हो गई और मेरे लंड के साथ खेलने लगी, मैं भी अपना हाथ उसकी चूत पर फेर रहा था।
उसकी चूत काफी गीली हो गई थी, मैं लेट गया और उसको अपने ऊपर आने के लिए कहा, वो झट से मेरे ऊपर आ गई और मेरा लंड अपनी चूत में डाल कर मुझको ऊपर से धक्के मारने लगी।
मैं भी उसके मम्मों के साथ खेल रहा था, मेरी एक ऊँगली उसकी भगनसा को धीरे से मसल रही थी और फिर जल्दी ही निर्मला एकदम पूरे जोश में आ गई और मुझको काफी ज़ोर से चोदने लगी। उसकी कमर बड़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी, उसकी आँखें बंद थी और चुदाई का पूरा आनन्द ले रहे थी।
थोड़ी देर में ही वो ‘ओह्ह ओह्ह…’ करती हुई झड़ गई और मेरे ऊपर लेट गई। मैं उसकी मोटी गांड में एक ऊँगली डाल कर गोल गोल घुमाने लगा।
ऐसा करने से ही उसकी गांड अपने आप हिलने लगी और मेरी ऊँगली को लगा कि उसकी गांड खुल और बंद हो रही है।
दिल तो किया कि मैं भी इसकी गांड में लंड डाल दूँ लेकिन मन में बैठी घृणा ने मुझको ऐसा करने से रोक दिया।
जब वो बिस्तर पर फिर लेटी तो मैंने पूछा- फिर क्या हुआ उस लड़के के साथ?
वो बोली- वो लड़का डर के मारे मेरे पास ही नहीं आता था।
एक दिन मैं जंगल-पानी करके आ रही थी, वह लड़का मिल गया और बोला- भौजी बुरा तो नहीं माना न?
‘नहीं रे, बुरा क्या मानना है?’ मैं बोली।
‘तो भौजी हो जाए किसी दिन?’
‘क्या हो जाए?’
‘अरे वही जो भैया करते थे तुम्हारे साथ!’
धत्त… ऐसा भी कभी होता है? पिद्दी भर का लौण्डा और यह बात?’
‘पिद्दी कहाँ, तुमने मेरा लंड देख लिया था न, पूरा मर्दाना है।’
‘चल दिखा खोल कर?’
‘क्या कह रही हो भौजी? यहाँ दिखाऊँ क्या?’
‘नहीं, इधर ईख के खेत में आ जा!’
ईख के खेत में मैंने उसका लंड देखा, होगा 5 इंच का।
लेकिन मेरे ऊपर तो कामवासना का भूत सवार था, मैंने उसका लंड पकड़ लिया और उसको लिटा दिया और मैं उसके ऊपर चढ़ बैठी और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगी ऊपर से और वो 2 मिन्ट में ही झड़ गया।
लेकिन उसका लंड अभी भी अकड़ा रहा और मैं फिर उसको चोदने लगी और दूसरी बार वो 10 मिन्ट तक डटा रहा और मेरा एक बार उसके साथ ही छूट गया।
मैं चुप बैठा रहा।
निर्मला ने पूछा- छोटे मालिक, कहीं आप बुरा तो नहीं मान गए?



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

नदी में दुल्हन को नंगी नहाते देखा
निर्मला गैर मर्दों से अपनी चूत चुदाई के किस्से सुनाती रही, मैं चुप बैठा रहा।
निर्मला ने पूछा- छोटे मालिक, कहीं आप बुरा तो नहीं मान गए?
‘नहीं नहीं… बुरा कैसा! अच्छा किया अपनी तसल्ली कर ली तुमने! सच बताना उस लड़के के इलावा किसी और से तो नहीं करवाया तुमने?’
‘नहीं नहीं छोटे मालिक, बिल्कुल नहीं!’
‘और किसी औरत या लड़की के साथ तो नहीं किया कभी?’
‘यह आप क्या पूछ रहे हैं छोटे मालिक?’
‘नहीं मैंने सुना है तुम औरतें आपस में भी खूब लग जाती हो एक दूसरी के साथ!’
वो चुप रही और उसकी यह चुप्पी से मुझको लगा कि आपसी सम्बन्ध भी थे इसके दूसरी औरतों के साथ।
‘नदी में कहाँ नहाती हो तुम सब?’
‘वही जो घाट है न उस पर ही नहाती हैं सब, लेकिन आदमियों और लड़कों का उस तरफ आना मना है।’
‘अच्छा? कोई जगह तो होगी जहाँ से कुछ देखा जा सके?’
वो हिचकते हुए बोली- है तो सही, आप देखना चाहते हैं क्या?
‘अगर तुम दिखाओ तो इनाम मिलेगा।’
वो बोली- कल देखने आ सकते हो?
‘हाँ, क्यों नहीं।’
‘अच्छा तो मैं आपको ले जाऊँगी।’
फिर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गये।
सुबह होने से पहले मैंने निर्मला को फिर चोदा और उसके गोल और मोटे चूतड़ जो एक मोटे गद्दे के समान थे, मुझको बहुत ही सेक्सी लगते थे और मैं उनको बार बार छूना चाहता था।
नाश्ता करने के बाद मैं और निर्मला दोनों नदी की ओर चल पड़े। नदी के निकट आते ही निर्मला मुझसे आगे चलने लगी और मैं उसके पीछे थोड़ी दूर पर चलने लगा।
फिर उसने मुझको इशारा किया और हम एक घनी झड़ी की ओर मुड़ गए।
काँटों से बचते हुए हम एक जगह पहुँचे जहाँ हम बिल्कुल छिप गए थे लेकिन नदी की तरफ़ हम साफ़ देख सकते थे। 
निर्मला अपने साथ एक चादर लाई थी और हमने वो बिछा ली और हम दोनों आराम से बैठ गए। फिर मैंने जगह का जायज़ा लिया और देखा कि वो तो पूरी तरह से ढकी छुपी थी और हमको कोई देख भी नहीं सकता था।
नदी पर अभी इक्का दुक्का औरतें ही नहा रहीं थीं लेकिन उनमें कोई देखने लायक नहीं थी। तो थोड़ी फुर्सत थी तो मैंने निर्मला को चूमना शुरू कर दिया, उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर उसके गोल उरोजों के साथ खेलना शुरू कर दिया।
फिर एक हाथ उसकी धोती के अंदर डाल दिया और उसकी बालों भरी चूत को मसलने लगा, वो धीरे धीरे गरम होने लगी, उसने मेरी पैंट से मेरे लंड को निकाल लिया, वो उसका हाथ लगते ही एकदम अकड़ गया।
वो उसको हाथ से हिलाने लगी, तब तक उसकी चूत भी गर्म हो कर पनिया गई थी।
निर्मला बोली- बैठ कर ही कर लेते हैं।
वो कैसे?
उसने अपनी टांगें पसार दी और धोती को ऊपर कर दिया और मुझको टाँगों के बीच मैं बैठने के लिए कहने लगी। मैं लंड को निकाल कर टांगों के बीच बैठ गया और तब वो अपने हाथ से मेरा लौड़ा अपनी चूत के मुंह पर रख कर मुझको धक्का मारने के लिए बोलने लगी।
एक ही धक्के में लौड़ा पूरा अंदर चला गया और मैंने अपने हाथ उसकी गर्दन में डाल दिए और ज़ोर से धक्के मारने लगा। वो भी जवाबी धक्के मारती रही।
उधर हमने नदी की तरफ देखा तो एक जवान नई दुल्हन नहाने के लिए कपड़े बदल रही थी।
गाँव के हिसाब से वो काफी जवान और सुन्दर लग रही थी।
उसने ब्लाउज उतार दिया बिना किसी शर्म झिझक के उसके छोटे लेकिन कठोर उरोज बाहर आ गए थे।
इधर मैं और निर्मला एक दूसरे से अपने अंगों से जुड़े थे, लेकिन हमारी नज़रें तो नदी किनारे उस नई दुल्हनिया पर अटकी थीं।
उसने सिर्फ ब्लाउज ही उतारा और पेटीकोट के साथ ही नहाने लगी। वो सारे शरीर पर साबुन लगा रही थी और खास तौर पर अपनी चूत पर तो वो 5 मिन्ट साबुन रगड़ती रही। और फिर वो नदी के अंदर चली गई और तैरती हुई थोड़ी दूर चली गई।
पानी से गीला उसका बदन चमक रहा था, जब वो नदी की सतह से ऊपर आती थी तो उसके गोल उरोज धूप में चमकते थे। ऐसा लगता था कि सोने की परी नदी में तैर रही हो।
यह सब देख कर मेरे लंड पूरे जोश में आ गया और मैंने अपने हाथ निर्मला की गांड के नीचे रखे और फ़ुल स्पीड से धक्के मारने लगा।
‘ओह्ह्ह ओह्ह…’ करती हुई निर्मला तो झड़ गई लेकिन मैं अभी भी जोश में था, आँखें उस अर्धनग्न स्त्री पर थी जो मुक्त पंछी की तरह नदी में तैर रही थी और जिसका पेटिकोट भी उसके शरीर के साथ चिपक गया था और उस गीले कपड़े में से उसकी गोल जांघें और चूतड़ साफ़ दिख रहे थे, हल्की झलक उसकी काली झांटों की भी मिल रही थी।
मैं बेतहाशा निर्मला को चूमने लगा और उसके चूतड़ जो मेरे हाथों में थे तेज़ी से आगे पीछे करने लगा।
और फिर मैंने निर्मला को घोड़ी बना दिया और उसको पीछे से तेज़ तेज़ चोदने लगा।
लेकिन मेरी नज़र उस नहाती हुई औरत पर ही थी।
जब निर्मला एक बार और छूटी तो मैं भी उसको छोड़ कर वहाँ बैठ गया, तभी वो औरत जिधर हम बैठे थे उधर आने लगी। उसके हाथ में पेटीकोट और ब्लाउज था।
मैंने घबरा के निर्मला को देखा, वो मस्त बैठी थी। मेरा डर समझते हुए उसने अपने होंटों पर ऊँगली रख कर कहा कि चुप रहूँ।
मैं हैरानी से उस आती हुई औरत को देखने लगा जो हमारी झाड़ी के निकट आ गई लेकिन 10 फ़ीट पहले रुक गई और इधर उधर देखने के बाद उसने अपना गीला पेटीकोट उतार दिया और धुला हुआ पहनने लगी।
उसी समय उसकी चूत के पूरे दर्शन हो गए। काले चमकीले बालों से घिरी चूत को उसने गीले पेटीकोट से पौंछा।
ऐसा करते समय उसकी चूत के अंदर की लाली भी दिख गई, मैं निहाल हो गया।
वो जल्दी से पेटीकोट बदल कर वापस नदी किनारे चली गई लेकिन मेरे लंड का बुरा हाल कर गई।
मेरी हालत देख कर निर्मला को तरस आया और उसने अपने मुंह से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। उसके ऐसा करते ही मेरा फव्वारा छूटा और निर्मला ने सारा रस अपने मुंह में ले लिया।
हम थक कर वहीं पसर गए।
मुझको याद आया कि यह नज़ारा मैंने पहले भी देखा था, कम्मो के साथ जब हमने चम्पा को नहाते हुए देखा था।बिलकुल वही दृश्य था लेकिन चम्पा तब बहुत ही सेक्सी लग रही थी क्यूंकि वो चुदाई का आनन्द काफी समय ले चुकी थी और यह लड़की तो नई नई शादी का आनन्द ले रही थी।
अब नदी किनारे कोई सुन्दर औरत नहीं थी जिसको देखने के लिए हम रुकते तो जल्दी ही वहाँ से चल दिए और कॉटेज में आ गए। जहाँ हमने लेमन पी फिर वहीं लेट गए।
मैंने निर्मल को कहा कि वो घर जाये, मैं बाद में आता हूँ।
वहीं यह सोचने लगा कि लखनऊ में मुझको चूत कहाँ से मिलेगी। उसका इंतज़ाम तो करना पड़ेगा। मैं चाहता था कि अभी तक मेरे पास गाँव की लड़की की तरह ही होनी चाहिए वरना वहाँ चुदाई का प्रबंध नहीं हो पायेगा।
मैंने सोचा कि यह काम तो चम्पा ही कर सकती है तो मैंने निर्मला को चम्पा को बुलाने का काम सौंपा और वो शाम को मुझको कॉटेज में मिली।
तब मैंने उसको सारी बात बताई और कहा कि मेरे मतलब की कोई गाँव वाली लड़की लखनऊ के लिए ढूंढ दे।
उसने वायदा किया कि वो जल्दी ही मेरी मर्ज़ी की लड़की ढूंढ देगी।
यह कह कर वो चली गई।
चम्पा एक नई लड़की को लाई

जैसे जैसे मेरे लखनऊ जाने के दिन निकट आ रहे थे मेरे हाथ पैर फूलने लगे और इसका मुख्य कारण था कि मेरा वहाँ की चुदाई का प्रबंध नहीं हो पा रहा था।
एक दिन शाम को घर लौटा तो देखा कि हवेली में बड़ी चहल पहल हो रही थी।
निर्मला को बुला कर पूछा- यह क्या हो रहा है हवेली में?
वो बोली- छोटे मालिक, वो लखनऊ से आपके रिश्तेदार आये हैं और मालकिन ने हुक्म दिया है कि आप जैसे बाहर से लौटें, आपको बैठक में भेज दिया जाए।
मैं सोचने लगा कि ऐसा कौन आया होगा लखनऊ से?
फिर हाथ मुंह धोकर मैं बैठक में गया तो वहाँ एक बुज़र्ग आदमी और उसके साथ उसकी जवान पत्नी और दो जवान लड़कियाँ बैठी थी। 
मुझे देखते ही मम्मी ने आगे बड़ कर मेरे को उन सबसे मिलवाया।
मम्मी ने बताया कि वो बुजुर्ग मेरे दूर के ताऊ थे और उनके साथ उनकी पत्नी और उनकी दो बेटियाँ थी जो लखनऊ में ही पढ़ रहीं थी। ताऊजी भी लखनऊ में रहते थे।
मम्मी के इशारे पर मैंने ताऊजी और ताई जी के चरण स्पर्श किये और वहीं खाली कुर्सी पर बैठ गया।
तब मैंने ध्यान से उन सबको देखा, ताऊजी हट्टे कट्टे लग रहे थे और ताई भी उनसे उम्र में काफी छोटी लग रही थी। ऐसा नहीं लग रहा था कि वो दोनों बेटियों की माँ हो, दोनों ही अच्छी दिख रहीं थी।
मैं चुपचाप बैठा रहा।
तभी ताऊ जी ने पूछा- कौन से कॉलेज में दाखिला लिया है बेटा तुमने?
मेरे बोलने से पहले ही मम्मी ने बता दिया।
दोनों लड़कियाँ एकदम चहक उठीं- अरे हम भी उसी कॉलेज में पढ़ती हैं। चलो अच्छा हुआ कि सोमू का साथ हो जाया करेगा वहाँ।
मैं भी थोड़ा मुस्करा दिया।
थोड़ी देर बाद वह परिवार वापस लखनऊ चला गया और लड़कियाँ ज़ोर देकर कह गई कि लखनऊ में आऊँ तो उन मैं उनसे ज़रूर मिलूँ। दोनों के साथ सम्बन्ध बनाने का विचार नहीं आया हालाँकि लड़कियाँ अच्छी लगी।
शाम हो गई और मैं घूमने निकल गया। घूमते हुए मैं अपनी कॉटेज की तरफ निकल गया, चौकीदार ने दरवाज़ा खोल दिया और वहाँ मैं एक लेमन की बोतल, जो आइस बॉक्स में ठंडी हो रही थी, निकाल कर पीने लगा।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, खोला तो देखा कि वहाँ चन्दा खड़ी थी।
मैं घबरा गया कि यह क्या कर रही है यहाँ।
वो अंदर आ गई और बोली- छोटे मालिक मेरा तो काम नहीं बना।
मैं बोला- तुम्हारा कौन सा काम?
‘वही गर्भवती होने का!’
‘ओह्ह, तो फिर मैं क्या कर सकता हूँ?’
‘एक बार और चोदो न?’ वो गिड़गड़ाते हुए बोली।
‘नहीं नहीं चंदा, ऐसे थोड़े होता है। मैं कल आऊँगा निर्मला के साथ, तब तुम आ जाना।’
‘किस वक़त छोटे मालिक?’
‘नाश्ता करके आ जायेंगे दोनों… ठीक है? तुम्हारी माहवारी कब हुई थी इस महीने?’
‘वो तो हो चुके हैं 10 दिन!’
‘तो फिर ठीक है। कोशिश कर देखो शायद काम बन जाए?’
मैं दरवाज़े पर उसको ले गया और बाहर कर दिया। मेरा मन बहुत घबरा रहा था कि यह क्या हो रहा है? इस तरह गाँव की सारी औरतें आने लगी तो मैं बदनाम हो जाऊँगा।
कॉटेज को ताला लगा कर मैं वापस चल दिया। 
रास्ते में मुझको चम्पा अपनी सहेली के साथ दिख गई। मैंने उसको आवाज़ दी और वो आ गई, उसकी सहेली दूर खड़ी रही और हम बातें करने लगे।
मैंने उसको चंदा की बात बताई, वो भी बहुत नाराज़ हुई, कहने लगी- कल मैं उसको खुद ले कर आऊँगी। आप उसको एक बार और चोद दो छोटे मालिक, शायद उसका भाग्य भी चमक जाए।
‘चलो, कल देखेंगे।’
‘छोटे मालिक इस लड़की को ध्यान से देखो, कैसी है?’
‘यह कौन है?’
‘इसका नाम गंगा है और इस का पति इसको छोड़ गया, बम्बई में उसने दूसरी शादी कर ली है। बेचारी बड़ी मजबूर है। मैंने इससे बात कर ली है और यह तुम्हारे लिए लखनऊ काम करने के लिए तयार है।’
‘अच्छा कल सुबह तुम इसको और उस साली चंदा को ले आना, कॉटेज में बात कर लेंगे। अच्छा मैं चलता हूँ।’
यह कह कर मैं घर वापस आ गया।
रात को निर्मला से चुदाई हो नहीं सकी क्यूंकि उसकी माहवारी शुरू हो चुकी थी।
अगले दिन मैं नाश्ता करके कॉटेज में पहुँच गया। वहाँ सिवाए चौकीदार के और कोई नहीं था। तो उसको मैंने छुट्टी दे दी।
थोड़ी देर बाद चंदा और गंगा के साथ चम्पा आ गई।
चम्पा मुझ को दूसरे कमरे में ले गई और बोली- छोटे मालिक आप पहले चंदा से निबट लो, फिर मैं आपकी गंगा से बात करवा देती हूँ।
वो बाहर गई और चंदा को लेकर आ गई, चंदा बोली- यह गंगा यहाँ क्या कर रही है? कहीं यह हमारा भांडा न फोड़ दे?
‘नहीं चंदा बहन, वो हमारे साथ है। तुम अपना काम करवाओ।’
‘नहीं। तुम ऐसा करो कि गंगा को भी यहीं बुला लो और हम दोनों के साथ छोटे मालिक कर देंगे।’
मैं बोला- ऐसा नहीं हो सकता है, मैं गंगा को बिल्कुल नहीं जानता तो उसको कैसे चोद सकता हूँ।
चम्पा बोली- गंगा की जिम्मेवारी मैं लेती हूँ, आप दोनों चुदाई शुरू करो, गंगा और मैं बाद में बात कर लेंगे छोटे मालिक से।
यह कह कर चम्पा तो बाहर चली गई और जब मैंने मुड़ कर देखा तो चंदा धोती उतार चुकी थी और ब्लाउज उतार रही थी।
इस बार मुझको चंदा को देख कर कोई ख़ुशी नहीं हो रही थी।
वो जल्दी से आई, उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और वो कुछ ही देर में पूरा खड़ा हो गया।
मैं बिस्तर पर लेट गया और उसको इशारे से अपने ऊपर आने को कहा।
वह जल्दी से आई और मेरे लौड़े के ऊपर बैठ गई, लंड को चूत में डाल दिया।
उसकी चूत एकदम गीली और भट्टी के समान तप रही थी, वो मुझ को चूम भी रही थी और एक ऊँगली से अपनी चूत भी रगड़ रही थी। पांच मिनट की चुदाई के बाद वो छूट गई और नीचे लेट गई।
लेकिन मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया।
एक हाथ से उसके गोल गोल उरोजों को मसल रहा था और दूसरी और उसके मोटे चूतड़ों को हल्के हल्के हाथ से मार रहा था। शायद हाथ की मार से उसको बहुत आनन्द आ रहा होगा क्यूंकि वो फिर झड़ गई।
अब मैंने अपनी धक्कों की स्पीड बहुत तेज़ कर दी और उसकी कमर को पकड़ कर मैं उसको फुल स्पीड से धक्के मार रहा था।तभी मैंने महसूस किया कि मेरा फव्वारा भी छूटने वाला है, मैंने लौड़ा पूरा निकाल कर फिर ज़ोर से धक्का मारा और उसको चंदा की बच्चेदानी के अंदर डाल कर मैंने अपना फव्वारा छोड़ दिया।
जब गर्म पानी चंदा की बच्चेदानी में गया तो उसने गांड एकदम ऊपर कर दी और वैसे ही गांड ऊपर करके लेट गई। उसकी कोशिश थी कि वीर्य की एक बूँद भी नीचे न गिरे।
मैं उसको वैसे ही छोड़ कर बाहर आ गया जहाँ चम्पा और गंगा बैठी थी।
चम्पा को तो कुछ नहीं हुआ लेकिन गंगा की आँखें फटी की फटी रह गई। मेरे 7 इंच के लंड को देख कर शायद वो एकदम हैरान रह गई। मेरा लंड अभी भी हवा में लहरा रहा था।
मैं चम्पा से बोला- एक लेमन मेरे लिए खोल दो और तुम सब को भी पिला दो।
और सोफे पर लुढ़क गया।
चम्पा और गंगा लेमन पीती हुई मेरे पास आ गई। चम्पा मेरे लंड को तौलिये से साफ़ करने लगी और गंगा को मेरे पसीने को सुखाने के लिए इशारा किया।
तभी चंदा कपड़े पहन कर वहाँ आई और चम्पा ने उसको समझाया- देख चंदा, छोटे मालिक कुछ दिनों में शहर चले जाएंगे। यह तेरी आखरी चुदाई है। इसके बाद तू अपने आप कुछ कर, वो तेरी मर्ज़ी है। अब तू जा, मैं और गंगा बाद में आती हैं।
उसके जाने के बाद चम्पा मेरे लंड के साथ खेलने लगी और उसके इशारे पर गंगा भी मेरे अंडकोष को हाथों में लेकर मसलने लगी।गंगा को ध्यान से देखा तो वो एक बहुत सीधी साधी लड़की लगी, दिखने में वो काफी साधारण लग रही थी।
गौर से देखा तो उसका चेहरा काफी दर्द लिए हुए था। जिसका पति उसको छोड़ गया हो, उसके मन और तन की क्या झलक दिख सकती है सिवाए कि वो दोनों ही उदासी से भरे होंगे।
उसको देखकर मेरे मन में यह इच्छा जागृत हुई कि इस बेसहारा लड़की की मदद ज़रूर करनी चाहये। मैंने उससे पूछा- कब तेरी शादी हुई थी?
वो बोली- 4 साल हो गए और सिर्फ एक साल मेरे साथ रह कर मेरा पति मुंबई चला गया और फिर लौट कर ही नहीं आया। 6 महीने पहले उसका एक साथी वापस आया और उसने बताया कि उसने वहाँ दूसरी शादी कर ली है और उसके 2 बच्चे भी हैं।
यह कहते हुए उसकी आँखों में पानी भर आया।
चम्पा ने उसको चुप कराया और फिर वो उसके कपड़े उतारने लगी।
उस का ब्लाउज उतारते ही मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। जब उसकी धोती और पेटीकोट उतरा तो वो एक कुंवारी लड़की की तरह लग रही थी, ऐसा मुझ को लगा।
उसकी चूत पर बहुत ही घने बालों का छाता बना हुआ था और उसके चूतड़ भी छोटे लेकिन गोल थे। उस मम्मे भी किसी कुंवारी लड़की की तरह ही थे, छोटे और गोल और सॉलिड थे।
जीवन में पहली बार एक कुंवारी लड़की की तरह दिखने वाली लड़की को देखा था। इससे पहले मेरे निकट आई सारी औरतें भरे जिस्म वाली थीं जिन के उरोज और नितम्ब काफी बड़े और गोल होते थे, वो काफी चुदी और मौज मस्ती कर चुकी औरतें थीं।
चम्पा बोली- छोटे मालिक कैसी है यह गंगा?
मैं बोला- यह तुम सबसे अलग लगती है, यह ऐसे लगती है जैसे कुंवारी हो अभी!
चम्पा बोली- सही कहा आपने, बेचारी बहुत ही कम चुदी है यह!
‘फिर तो चुदाई का अलग ही मज़ा आएगा। क्यों गंगा, तुम तैयार हो क्या?’
वो शर्मा गई और हाँ में सर हिला दिया। 
‘चम्पा कुछ नई तरह चुदाई करते हैं आज। तुम बताओ कैसे करें नए तरह से?’
चम्पा कुछ सोचते हुए बोली- ऐसा करते है कि गंगा को दुल्हन की तरह से सजाते हैं और फिर आप इसका घूँघट उठा कर सुहागरात वाला सारा कार्यक्रम करना।
‘वाह चम्पा, क्या आईडिया है लेकिन आज तो संभव नहीं हो सकता। उसके लिए तैयारी करनी पड़ेगी। आज क्या करें यह बताओ?’
वो चुप रही तब मैं बोला- चम्पा, आज हम तीनों चुदाई करते हैं, पहले गंगा को चोदते हैं हम दोनों फिर तुझको चोदते हैं हम दोनों।
क्यों कैसी रही यह?
‘मैं कैसे कर सकती हूँ छोटे मालिक? मेरा 5वाँ महीना चल रहा है। मुझको खतरा है, आप गंगा के साथ करो न, बेचारी दो साल से नहीं चुदी है इस की चूत।’
गंगा बोली- खतरा तो है, अगर छोटे मालिक तुम को पूरे जोश से चोदेंगे तो! वो तुझको बहुत धीरे और प्यार से चोदेंगे। क्यों छोटे मालिक?
‘हाँ बिल्कुल!’ मैं बोला।



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