Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र Sex - Printable Version

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RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

दोनों बहनों की चूत चुदाई

टिन्नी बोली- दीदी का काम कर दिया सोमू?
मैं घबरा कर बोला- दीदी का कौन सा काम?
मिन्नी बोली- वही… जिसके लिए तुम पर दीदी बार बार दाना फैंक रही थी?
मैं बोला- कौन सा दाना और कैसा दाना? बताओ न प्लीज?
टिन्नी बोली- तुम मेरे सामने प्लीज वलीज़ ना करो और सीधे से बताओ कि मेरी बारी कब की है?
मैं बोला- कौन सी बारी और कैसी बारी?
टिन्नी चेयर से उठी और मेरे बेड पर आ कर बैठ गई और आते ही मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल कर उसको घूरने लगी और फिर बोली- अच्छा है मोटा भी है और लम्बा भी है, मुझको कब चखा रहे हो यह केला?
मैं चुप रहा और फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, हँसते हुए बोला- तुम दोनों बहनें कमाल की चीज़ हो।
टिन्नी बोली- मैं रात को आपका केला खाने आ रही हूँ।
मैं बोला- मौसी जी और मौसा जी भी तो हैं क्या उनका डर नहीं है तुम को?
टिन्नी बोली- उनको मैं संभाल लूंगी वैसे भी दोनों रात को नींद की दवाई खा कर सोते हैं सो उनको कुछ पता नहीं चलेगा।
मैं बोला- मिन्नी को तो पता चल जाएगा न उसका क्या करोगी?
टिन्नी बोली- हम दोनों एक दूसरी से कुछ भी नहीं छुपाती।
मैं बोला- इतना भरोसा है तो आ जाओ अभी कुछ नमूना पेश कर देते हैं!
टिन्नी बोली- ठहरो, मैं ज़रा देख कर आती हूँ कि मिन्नी क्या कर रही है। 
यह कह कर टिन्नी गई और जल्दी ही वापस आ गई और बोली- मिन्नी तो सो रही है तुमसे सेक्स करवाने के बाद शायद थक गई होगी।
जल्दी से उसने भी अपनी साड़ी ऊपर उठा दी और मैं उसकी काली झांटों से भरी चूत को साफ़ देख सकता था, काफी उभरी हुई चूत थी।
उसने मेरे लौड़े को पैंट से निकाला और झट से मेरे ऊपर बैठ गई, अपने आप ही उसने मेरे लंड को अपनी टाइट चूत में डाला और मेरे गले में बाहों को डाल कर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी।
मैंने उसके छोटे गोल चूतड़ों को अपने हाथ में थामा हुआ था और वो मज़े से झूला झूल रही थी।
उसकी चूत टाइट और बहुत ही रसीली थी और अपनी बड़ी बहन से वो ज़्यादा जानकार और चुदक्कड़ लगी। 5-6 मिन्ट में वो झड़ गई और मेरे जिस्म से चिपक कर हल्के से काम्पने लगी।
लेकिन अभी उसका मज़ा पूरा नहीं हुआ था, मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर पैंट और शर्ट पहने ही चढ़ गया, उसके छोटे और गोल मुम्मों को हाथ से सहलाने लगा और फिर मैंने उसको ठीक ढंग से चोदना शुरू किया।
तेज़ और धीमे धक्कों से मैं उसको फिर छूटने के कगार पर ले आया, पूरा निकाल कर पूरा अंदर डालने लगा और वो चंद मिनटों में फिर से झड़ गई।
मैं जल्दी से उसके ऊपर से उठा और अपने कपड़े ठीक ठाक करने लगा और वो भी साड़ी नीचे कर के कमरे के बाहर हो गई।
उसके जाने के बाद कम्मो कमरे में आई और मुस्कराते हुए बोली- वाह छोटे मालिक, दोनों लड़कियों का काँटा खींच दिया आपने?
मैंने हैरान होकर उससे पूछा- तुमको कैसे पता चला कम्मो डार्लिंग? तुम तो सारा टाइम बाहर थी ना!
कम्मो हँसते हुए बोली- मुझ से कुछ नहीं छुपा रहता, मैंने इन लड़कियों को कल ही भांप लिया था कि दोनों ही चुदक्कड़ हैं और फिर लंच पर आपके साथ वो जो कुछ कर रही थी उसको मैं दबी आँखों से देख रही थी।
मैं बोला- वो दोनों रात को भी आने का प्रोग्राम बनाना चाहती हैं लेकिन मुझको डर लग रहा है मौसी से, वो बड़ी ही तेज़ है।
कम्मो बोली- वही तो, मेरी मानो तो इनसे दूर रहो तो अच्छा है।
मैं बोला- वो टिन्नी कह रही थी कि मौसी और मौसा जी रात को सोने की दवाई खा कर सोते हैं, तो उनको कुछ पता नहीं चलता है।
कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप की क्या मर्ज़ी है? दोनों को चोद तो बैठे हो, क्या अभी और चोदने की इच्छा है?
मैं बोला- वो तो जल्दी जल्दी की चुदाई थी, मज़ा नहीं आया ख़ास… तुम कहो तो रात को उन दोनों के साथ फिर हो जाए?
कम्मो मेरी मर्ज़ी जान गई थी, बोली- ठीक है मैं उन दोनों का इंतज़ाम कर दूंगी और मौसा मौसी को भी संभाल लूंगी।
मैं बोला- कम्मो रानी, तुम वाकयी में हीरा हो मेरे दिल में बसे प्यार का ज़खीरा हो।
रात को पारो ने खाना इस कदर लज़ीज़ बनाया कि सबने बड़ी तारीफ की ख़ास तौर से मौसा जी ने!
खाना खाने के बाद हम बच्चे बैठक में ही बैठ कर बातें करने लगे और वहीं कम्मो ने उन दोनों बहनों की मर्ज़ी जानने की कोशिश की।
मिन्नी बोली- 12 बजे तक मम्मी पापा गोली खाकर बड़ी गहरी नींद में सो जाते हैं, उस टाइम हम दोनों सोमू के कमरे में आने वाली हैं।
कम्मो बोली- वो तो ठीक है लेकिन अगर कहीं मौसी जाग गई तो फिर क्या होगा?
मिन्नी बोली- हम अभी उनके कमरे में जाएंगी और वो खुद मेरे हाथ से रोज़ की तरह अपनी दवाई खाएंगे। तब तो कोई प्रॉब्लम नहीं कम्मो दीदी?
कम्मो मुस्कराते हुए बोली- क्या कानपुर में भी यही सिस्टम था?
टिन्नी हँसते हुए बोली- काफी अरसे से यही सिस्टम चल रहा है, आप मुस्करा क्यों रहीं हैं दीदी?
कम्मो बोली- तभी शायद तुम्हारे मित्र घर में आते होंगे तुम दोनों का कल्याण करने।
मिन्नी और टिन्नी भी यह सुन कर मुस्कराने लगी।
फिर हम थोड़ी देर यों हीं ही बातें करते रहे और फिर दोनों उठ कर अपने कमरे में चली गई और मौसी भी एक बार सारे घर का क्कर लगा आई।
कम्मो मौसी के जाने के बाद मेरे कमरे में आ आकर बैठ गई।
मैंने पूछा- कम्मो तुमको मालूम था कि मौसी घर का चक्कर लगाएगी?
कम्मो बोली- मालूम तो नहीं था लेकिन ऐसा अंदाजा था कि शायद मौसी घर का चक्कर लगाएगी।
इतने में दोनों बहनें अपनी अपनी अपनी नाइटी पहन कर आ गई मेरे कमरे में और वहाँ कम्मो को देख कर चकरा गई।
मैंने कहा- कम्मो दीदी से आप लोग घबराओ नहीं, वो हमारे साथ ही रहेंगी और हम सबकी मदद भी करेंगी। पहले कमरे का दरवाज़ा तो बंद कर आओ प्लीज।
मिन्नी जा कर दरवाज़ा बंद कर आई।
मैं उठा और सबसे पहले मिन्नी और टिन्नी को होटों पर एक एक किस की और दोनों को बारी बारी से जफ़्फ़ी भी डाली।
कम्मो उठ कर आ गई और मिन्नी की नाइटी उतारने लगी और उसके बाद उसने टिन्नी की भी नाइटी उतार दी।
फिर उसने मेरा पजामा और कुरता भी उतार दिया।
जब हम तीनो नंगे हो गए तो वो खुद भी अपने कपड़े उतारने लगी।
अब हम सब एक दूसरे को देखने लगे। मिन्नी का जिस्म थोड़ा मोटापा लिए हुए था और टिन्नी का जिस्म एक कच्ची कली की तरह लग रहा था। दोनों की चूतें काले और घने बालों से ढकी हुई थी, मिन्नी के मुम्मे काफी सुन्दर लग रहे थे, एकदम सफ़ेद और मुलायम!
टिन्नी के मुम्मे अभी काफी छोटे लेकिन सॉलिड लग रहे थे। ऐसा लगता था कि दोनों बहनों के मुम्मों की चुसाई ज़्यादा नहीं हुई थी।
टिन्नी और मिन्नी ने जब कम्मो को नग्न देखा तो उनके मुख से अपने आप ही ऊऊह्ह्ह निकल गया।
दोनों कम्मो के पास गईं और उसके शरीर के साथ खेलने लगी, उसके मुम्मों, चूतड़ों से वो बहुत ही प्रभावित हुई थी।
कम्मो ने भी उसके मुम्मों को हाथ लगा कर देखा कि कैसे हैं।
कम्मो पहले मिन्नी को ले आई मेरे पास, उसने आते ही प्रगाढ़ आलिंगन किया मुझको और फिर मैं उसके लबों को चूसने लगा।
मिन्नी से मैंने पूछा- तुम मुझ से बहुत बड़ी हो इसलिए पूछता हूँ कि कैसे मुझसे चुदना पसंद करोगी?
मिन्नी ने मेरे लौड़े को देखा और उसको हाथ में लिया और फिर झुक कर उसको मुंह में लिया और थोड़ा सा चूसा और फिर खड़ी हो गई और बोली- लगता तो है कि यह लम्बी दौड़ का घोड़ा है, सबसे पहले मैं इस घोड़े पर खुद सवारी करूंगी।
कम्मो ने कहा- ठीक है आ जाओ मैदान में!
मैं जा कर बेड में लेट गया, मिन्नी आई मेरे दोनों तरफ टांगें रख कर बैठ गई और मेरा खड़ा लंड अपनी चूत में डाल लिया। मैं बड़े शांत भाव से लेटा रहा और उसको अपने घुड़सवारी के अहंकार को मिटाने के उपाय सोचता रहा।
मिन्नी ने लंड अंदर डालने की कारवाई पूरी की और अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी, उसकी चूत काफी टाइट थी और गीली भी कुछ कम थी, तो रगड़ ज्यादा रही थी।
मैं उसके मुम्मों को छूने लगा और चूचियों के साथ गोलम गोलाई का खेल खलने लगा।
मिन्नी ने धीरे से शुरू करके अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी और आँखें बंद कर के ऊपर नीचे हो रही थी और उसके हर धक्के का असर उसके मोटे मुम्मों पर पड़ रहा था जो उछल रहे थे बेरोकटोक!
मैं और कम्मो उसके मुम्मों का नाटक देख रहे थे।
लेकिन कम्मो अपने हाथ से टिन्नी की चूत को गर्म कर रही थी और हल्के से उसकी भग को रगड़ रही थी।
मिन्नी 5 मिन्ट ऐसे ही मुझको चोदती रही और फिर उसके मुंह से यह शब्द निकल रहे थे- मार दूंगी साले, तुझ को छोडूंगी नहीं, हर बार बीच में छोड़ जाता है भड़वे।
ऐसी बातों के साथ वो पागलों की तरह चोद रही थी मुझको!
मैं और कम्मो थोड़ी हैरानी से उसके इस अजीब रवैये को देख रहे थे।

फुल स्पीड से ऊपर नीचे होते हुए वो एक ज़ोर की चीख मार कर मेरे ऊपर पसर गई और उसका जिस्म ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगा। मैंने उसको एक कस के जफ़्फ़ी भी डाली हुई थी फिर भी वो बेहद कांप रही थी।
कम्मो टिन्नी को बुला लाई और उससे कहने लगी- यह देख यह क्या हो रहा है तेरी बहन को?
टिन्नी बड़े आराम से बोली- दीदी को ऐसे ही होता है जब इसका छूट जाता है। आप फ़िक्र ना करें, अभी ठीक हो जायेगी।
मैं भी उठ कर कम्मो के पीछे खड़ा हो गया और मेरा मोटा खड़ा लंड कम्मो की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था।
यह देख कर टिन्नी जल्दी से आई और कम्मो को हटा कर खुद खड़ी हो गई।
मेरी नज़र तो मिन्नी के नज़ारे पर लगी हुई थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया।
टिन्नी अब मेरे लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी और उसको अपनी चूत पर भी रगड़ने लगी।
मैंने कम्मो की तरफ देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि मैं टिन्नी के साथ शुरू हो जाऊँ।
टिन्नी से पूछा- कैसे चुदवाना है?
तो वो बोली- घोड़ी बन कर यार सोमू!
उधर कम्मो मिन्नी को होश में लाने की कोशिश कर रही थी और उसके गले और मुंह पर पानी के छींटे मर रही थी। थोड़ी देर में वो कुछ संयत हुई।
टिन्नी अपनी बहन की बीमारी की परवाह किये बगैर चुदाई के लिए घोड़ी बन गई थी और मुझको जल्दी घोड़ी पर चढ़ने के लिए उकसा रही थी।
मैं बड़ी बेदिली से टिन्नी पर चढ़ा और बगैर कुछ सोचे समझे चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी। जितनी तेज़ी से मैं उसको चोद रहा था वो और भी तेज़ी के लिए मुझको उकसा रही थी।
मैंने उसकी कमर को अपने दोनों हाथो में कस कर पकड़ा और अंधाधुंध चुदाई शुरू कर दी, टिन्नी ज़ोर से चिल्लाने लगी- तेज़ और तेज़!
कम्मो उठी और और टिन्नी के मुंह पर हाथ रख दिया और कहा- साली सबको जगा देगी, धीरे बोल!
पर उस पर कोई असर नहीं पड़ा और वो अपने चूतड़ तेज़ी से मेरे लंड की स्पीड के साथ मैच करते हुई चुदवा रही थी।
मैंने अब गहरे और तेज़ धक्के शुरू किए और साथ में उसके भग को भी हाथ से मसलना शुरू किया।
भग का मसलना जैसे निशाने पर तीर लगाना था, वो कुछ ही क्षण में ‘यह जा वो जा’ हो गई और वहीं ढेर हो गई।
कम्मो ने दोनों को कोकाकोला पिलाया और उनके कमरे में छोड़ आई।
मैंने कहा- कम्मो रानी वो तो दोनों बेकार निकली। अब क्या होगा?
कम्मो मुस्कराते हुए बोली- मैं हूँ न छोटे मालिक, चलो जी भर के चोदते हैं एक दूसरे को!
कम्मो गई और दरवाज़ा बंद कर आई और फिर शुरू हुई गुरु और शिष्य की जंग-ऐ-आज़म!
अगले दिन जब मैं कॉलेज से वापस आया और बैठक में गया तो पता चला कि मौसा मौसी कल कानपुर वापस जा रहे हैं।
उनसे पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
मैंने मिन्नी से पूछा तो वो बोली- सगाई वाली बात पूरी नहीं हो सकी है तो हम वापस जा रहे हैं।
मिन्नी ने मुझको बैठक में अकेले देखा तो मेरे पास आकर बोली- आज रात एक बार फिर से मेरी चूत चुदाई दो ना सोमू।
मैं बोला- मिन्नी, कभी नहीं, तुम को चोदना तो बहुत ही खतरनाक साबित हुआ, तुमको तो अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं।
मिन्नी बोली- नहीं, ऐसा है तुमने मेरे साथ बहुत अरसे के बाद सैक्स किया बल्कि किसी पुरुष ने मेरे साथ बहुत अरसे बाद सैक्स किया था तो उस कारण मैं अपना आपा खो बैठी थी।
मैं बोला- बिलकुल नहीं, तुम्हारे साथ चुदाई करना बहुत ही महंगा पड़ सकता है।
मिन्नी बोली- प्लीज सोमू, सिर्फ एक बार कर दो ना?
मैं बोला- क्या कर दूँ? बोलो तो सही, क्या चाहती हो तुम मुझसे?
मिन्नी बेशरम हो कर बोली- तुम्हारा लंड चाहिए मुझको।
यह शोर सुन कर कम्मो भी आ गई वहाँ- क्या बात है? क्यों शोर मचा रही हो तुम?
मैं बोला- इसको मेरा लंड चाहिए और आज ही!
कम्मो बोली- चुप रहो छोटे मालिक, मैं बात कर रहीं हूँ ना, आप जाओ न यहाँ से!
कम्मो मिन्नी को लेकर दूसरे कमरे में चली गई।
और फिर थोड़ी देर बाद मेरे कमरे में आ कर बोली- छोटे मालिक, अब थोड़ा सब्र से काम लीजिये। मैंने उसको समझा दिया है वो रात को एक बार चुदाई के लिए आयेगी। उसकी इच्छा पूरी कर देना, नहीं तो ख्वामखाह में यह बवाल खड़ा कर देगी।
रात को जब मौसा मौसी सो गए तो कम्मो मिन्नी को लाई और मैं जब गहरी नींद सोया हुआ था उसने उसको मेरे खड़े लंड से चुदवा दिया।
बाद में कम्मो ने बताया कि मिन्नी आई थी और 3 बार अपना छूटा कर चली गई थी।
लेडी प्रोफेसर की चूत


अगले दिन कॉलेज गया तो हिना गेट पर ही मिल गई और बोली- सोमू मैडम तुम को याद कर रही थी, लंच टाइम में उनको प्रोफेसर्स के कमरे में मिल लेना।
मैंने हामी में सर हिला दिया और अपनी क्लास में चला गया।
इंटरवल में मैं निर्मला मैडम से मिलने चला गया, वो अपने कमरे में अकेली ही बैठी थी तो मुझको देख कर बोली- थैंक यू सोमू, मैंने तुमको यह पूछने के लिये बुलाया है कि क्या तुम आज शाम फ्री हो?
मैं बोला- हाँ मैडम, अभी तक तो कोई प्रोग्राम नहीं बनाया है, आप बताओ क्या काम है?
मैडम बोली- आज छुट्टी के बाद मेरे साथ मेरे घर चल सकते हो क्या?
मैं बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं। आप कब जाने का सोच रही हैं?
निर्मला मैडम बोली- यही 2 बजे के करीब, वहीं तुम खाना भी खा लेना।
मैं बोला- ठीक है मैडम।
छुट्टी के वक्त मैडम मेरा कार के पास इंतज़ार कर रही थी, रास्ते में मैडम ने बताया कि उनके पति कुछ दिनों के लिए बाहर गए हैं तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना आज सोमू को अपना घर दिखा दूँ।
मैं समझ गया कि घर देखने का तो बहाना है असली काम तो वही चोदम चोदाई है।
मैडम बोली- क्यों सोमू, तुमको बुरा तो नहीं लगा मेरा ऐसे बुलाना?
मैं बोला- नहीं मैडम, मुझको क्यों बुरा लगता? आप इतनी सुन्दर हैं कोई भी आपका दीवाना हो जाए!
मैडम हंसती हुए बोली- अच्छा तुमको तारीफ करना भी आता है। क्या यह कम्मो ने ही ही सिखाया है?
मैं भी हँसते हुए बोला- नहीं मैडम, कुछ कुछ तो सोहबत और संगत ने सिखा दिया है।
जल्दी ही हम मैडम के बंगले में पहुँच गए।
बैठक में बैठे ही थे कि उनकी नौकरानी शर्बत के गिलास लेकर आई, मैंने नौकरानी की तरफ कोई ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।
खाने से फारिग होकर हम बैडरूम में आ गए।
इधर उधर की बातें चल ही रही थी कि वही नौकरानी भी बैडरूम में आ गई।
उसको देख कर मैडम ने कहा- सोमू तुम को ऐतराज़ तो नहीं अगर मेरी निम्मो भी कमरे में हमारी हेल्प के लिए रहे?
मैं बोला- नहीं नहीं मैडम। जैसा आप चाहें वही करें!
अब मैंने निम्मो को ध्यान से देखा और देख कर हैरान रह गया कि वो तो बिल्कुल कम्मो की कॉपी लग रही थी। 
मैंने मैडम से पूछा- यह निम्मो तो हमारी कम्मो जैसी ही लग रही है। कौन से गाँव की है?
निम्मो बोली- मेरा गाँव यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है, 3-4 घण्टे में बस से पहुँच जाते हैं।
मैं बोला- गाँव का नाम क्या है?
निम्मो ने गाओं का नाम बता दिया।
मैं सुन कर हैरान हो गया क्यूंकि वो तो हमारे ही गाँव का नाम ले रही थी, मैंने उससे पूछा- क्या तुम कम्मो को जानती हो?
निम्मो बोली- हाँ वो तो मेरी चचेरी बहन है।
मैं बोला- तुम को मालूम है वो आजकल कहाँ रहती है?
निम्मो बोली- सुना था कि वो गाँव छोड़ कर कहीं चली गई है।
मैंने मैडम की तरफ देखा और वो समझ गई कि हमारे घर वाली कम्मो ही इसकी बहन है।
लेकिन वो चुप रही और निम्मो से बोली- चलो शुरू हो जाओ निम्मो।
निम्मो मैडम के कपड़े उतारने लगी लेकिन मैंने उसको रोक दिया और खुद ही यह काम करने लगा।
पहले मैडम की सिल्क की साड़ी उतारी धीरे धीरे और फिर उसके ब्लाउज को खोलने लगा लेकिन साथ साथ ही मैं मैडम के लबों पर गरमा गरम चुम्बन भी देने लगा। 
मैडम का कद शायद 5 फ़ीट 5 इंच था लेकिन मेरे साथ वो एकदम फिट बैठ रही थी, उनका जिस्म भरा हुआ था, हर हिस्सा साँचे में ढला हुआ लग रहा था, कमर और पेट एकदम स्पाट और मुम्मे मस्त गोल और एकदम सीधे अकड़े हुए लग रहे थे जो 28-30 साल की उम्र में अक्सर कम ही होता है।
मैंने उनके मुम्मों को ब्लाउज के बाहर से चूसना चूसना शुरू किया और एक हाथ उनके गोल और मोटे चूतड़ों पर रख दिया और उन को धीरे से मसलने लगा।
उधर निम्मो मेरे कपड़े उतारने लगी थी, पहले कमीज और फिर पैंट उतार कर वो मेरे अंडरवियर को उतार रही थी। उसका मुंह मेरे लंड की सीध में था और जैसे ही उसने अंडरवियर को हटाया, मेरा खड़ा लंड उसके मुंह पर ज़ोर से लगा और वो पीछे की तरफ गिर गई।
यह देख कर मैडम हंसने लगी लेकिन मैं संजीदा हो रहा था और उससे प्यार से पूछा- निम्मो जी कहीं चोट तो नहीं लगी?
निम्मो पहले तो हैरान हुई और फिर ज़ोर से हंसने लगी और बोली- वाह, क्या लंड है, आँख पड़ते ही मारने लगा है यह तो?
यह कह कर वो मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी।
मैं मैडम ब्लाउज का उतार चुका था और उसकी सिल्क की ब्रा से ढके गोल मोटे और सॉलिड मुम्मों को तारीफ की नज़रों से देख रहा था। फिर वो सिल्की ब्रा भी हटा दी और वो दोनों कबूतर की तरह बाहर उछल कर निकले, तभी मैं मैडम के मुम्मों का मैं आशिक हो गया।
पेटीकोट उतारा तो मैडम की बालों से भरी हुई उभरी चूत को देख कर मैं उसका शैदाई हो गया।
मैं थोड़ा सा हट कर मैडम को ध्यान से देखने लगा।
हुस्न का मुज़स्मा था मैडम का शरीर… देखो तो देखते ही रह जाओ!
काफी मेहनत से अपने शरीर के रख रखाव में लगी थी मैडम, ऐसा साफ़ दिख रहा था।
अब मैडम का यौवन उबाल पर था और मेरा लंड भी उस पर निहाल था और मैं पूरा बेहाल था।
दूसरी तरफ देखा तो निम्मो भी अपने कपड़े उतार चुकी थी। माशाअल्लाह क्या जिस्म था उसका!
कम्मो का दूसरा रूप था लेकिन शरीर थोड़ा कसा हुआ था।
कदोकाठी वैसी ही, शक्ल में उन्नीस बीस का फरक और आँखों में कामातुरता, जिसका मतलब यह था यह भी अपनी मैडम की तरह सेक्स की भूखी थी।
अब मैं पूरी नंगी मैडम को लेकर बिस्तर की तरफ आया और उनसे पूछा- आप की कोई ख़ास पोजीशन की इच्छा है क्या?
मैडम बोली- तुम्हारे ऊपर चढ़ कर तुम से करना है।
मैं बोला- मैडम क्या करना है आपने?
मैडम थोड़ी शरमाई और फिर बोली- वही जो उस दिन किया था।
मैं बोला- नहीं मैडम, आप नाम बताओ उस दिन क्या क्या किया था?
मैडम मेरे मज़ाक को समझ रही थी फिर भी बोली- वही न!
मैं बोला- नहीं मैडम आप साफ़ साफ़ बताओ क्या करना है मुझको?
मैडम अब थोड़ी बेबस महसूस कर रही थी और वो निम्मो की तरफ देख रही थी।
निम्मो मैडम की तरफ से बोली- यह वही चोदम चुदाई के लिए कह रही हैं!
मैं बोला- देखो, मैं भी कितना नादान हूँ इत्ती से बात नहीं समझ सका… अच्छा मैडम, मैं आज अपने तरीके से आपको चोदूंगा। क्यों मंज़ूर है न मैडम?
मैडम ने हामी में सर हिला दिया।
मैंने मैडम को पलंग पर लिटा दिया, मैंने निम्मो को कहा कि वो मैडम के मुम्मों को चूसे और चाटे।
मैं अब मैडम की जांघों को फैला कर उनके बीच मुंह से उनकी चूत को चूस कर उनकी खातिर करने लगा।

निम्मो भी उनके मुम्मों को चूस रही थी, मेरे हाथ मैडम के गोल चूतड़ों के नीचे थे और उनको ऊपर उठा कर मैं अपने मुंह के समांतर ले आया था।
जीभ के कमाल से उनकी भग को चूसा और फिर उनकी चूत के लबों को चूसा और काफी सारी जीभ चूत के अंदर घुमाता रहा था।
मैडम एकदम बेसब्र हो गई थी, उनका जीभ से एक बार छूट ही गया था तो अब उनकी इच्छा थी कि लंड का स्वाद चखा जाए।
अब मैं लेट गया और उनको मेरे ऊपर आने के लिए कहा, वो तो तैयार बैठी ही थी झट से मेरे ऊपर बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल कर धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी।
मैं भी नीचे से उनके सॉलिड संगमरमरी मुम्मों के साथ खेल रहा था। उधर निम्मो भी मेरे जांघों में अपने मुंह से मेरे अंडकोष को चूस रही थी।
उसके गोल और सॉलिड मम्मे काफी सुन्दर थे।
मेरा बड़ा दिल था कि उन मम्मों का भी मज़ा लूँ लेकिन मैडम की तरफ से हाँ ही नहीं हो रही थी।
थोड़ी देर में मैडम छूटने के निकट पहुँच गई थी और मैंने अब नीचे से खुद धक्के मारने शुरू कर दिए ताकि वो जल्दी छूटें तो मैं निम्मो की लूँ।
अब वो खुद ही धक्के तेज़ी से मार रही थी और मैंने उनको सपोर्ट देने के लिए अपने हाथ उनकी पीठ पर रख दिये और उसके साथ मैचिंग धक्के नीचे से मारने लगा।
चंद मिनटों में ही मैडम का छूट गया और वो मेरे ऊपर पसर गई और उनका शरीर काफी कांप रहा था, मेरे लंड को भी चूत की पकड़ फ़कड़न महसूस हो रही थी।
पूरा छूट जाने के बाद वो मेरे ऊपर से उठ गई और साइड में बिस्तर पर लेट गई।
मैंने निम्मो की तरफ देखा, उसका एक हाथ अपनी चूत में था और दूसरे से वो अपने दूधी को मसल रही थी।
मेरे दिल में रहम आ गया, मैं उठा और निम्मो को बिस्तर पर हाथ रख कर खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी प्यासी चूत में लंड घुसेड़ दिया।
वो बेहद पनिया रही थी और मेरे गरम लौड़े को महसूस करके उसकी आँखें मुंद गई और मैं धीरे धीरे धक्के मार कर उसकी चूत को जगाने की कोशिश कर रहा था, पूरा लंड अंदर डाल कर मैं फिर पूरा बाहर निकाल कर सिर्फ लंड की टिप को अंदर रख कर धक्का मार रहा था और साथ में मेरे हाथ उसके मुम्मों पर थे और उनको प्रेम से मसल रहे थे।
काफी दिनों से वंचित चूत बहुत ही जल्दी झड़ जाती है, वैसा ही हुआ निम्मो के साथ, वो चंद मिनटों की चुदाई में झड़ गई।
लेकिन मैं भी लगा रहा धक्कम धकाई में! मेरी इच्छा थी कि इस गरीब का भी काम हो जाए और थोड़ा बहुत आनन्द मैं उसको दे सकूँ तो अच्छा है।
दूसरी बार मैं बहुत ही धीरे धीरे शुरू हुआ और साथ में उसकी चूत पर हाथ रख कर उसकी भग को भी मसल रहा था। यह दोहरा हमला अक्सर औरतें ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकती और जल्दी ही हथियार डाल देती हैं।
निम्मो के साथ भी यही हुआ, अब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और 5 मिन्ट में वो दुबारा छुट गई।
जब उसकी कंपकपी कम हुई तो मैंने उसके लबों को चूमा और उसके कान में कहा- कम्मो, तुम्हारी बहन मेरे घर में रहती है।
उधर मैडम अभी भी आँखें बंद किये लेटी थी तो मैं निम्मो को छोड़ कर मैडम के पास जाकर लेट गया और उनके गालों और कानों पर चुम्मी देने लगा।
मैडम थोड़ी चौकन्नी हुई, मैंने उसके होटों को चूमना शुरू किया और फिर उनके मोटे मलाईदार मुम्मों को बारी बारी से चूसना आरम्भ कर दिया।
अब मैडम की चूत में हाथ डाला तो वो गीली हो रही थी, मैंने उनको घोड़ी बना दिया और अपने खड़े लंड को चूत में डाल कर हल्का धक्का मारा और फिच्च कर के पूरा अंदर चला गया।
अब मैं मैडम को धीरे और तेज़ के मिलेजुले हमले से चोदने लगा।
थोड़ी देर में मैडम के अंदर से उनका खुश्बूदार रस निकल पलंग की चादर पर गिर रहा था।
मैंने थोड़ा सा अपने मुंह में डाला चखने के लिए और थोड़ा मैडम के मुंह में डाल दिया। अपने ही रस को चख कर मैडम तो जैसे पागल हो गई और लगी ज़ोर ज़ोर से पीछे की तरफ धक्के मारने।
मैंने मैडम के कान में कहा- मैं आज आपके अंदर छूटा रहा हूँ ताकि शायद आपका काम बन जाए।
मैडम ने मुस्करा कर हामी भर दी।
मैंने निम्मो को कहा- दो तकिये मैडम के नीचे रख देना।
वो झट से तकिये लाई और उनको मैडमके ठीक चूतड़ों के नीचे रख दिए।
अब मैं हर धक्के में मैडम के गर्भाशय के मुंह को लंड द्वारा ढून्ढ रहा था।
थोड़ी कोशिश के बाद मैंने उसको ढून्ढ लिया और अब जैसे ही मैडम का जोरदार छूटा मैंने भी उनके अंदर गर्भाशय के मुंह पर अपनी पिचकारी छोड़ दी।
वो कोशिश कर रही थी कि वो घोड़ी का पोज़ छोड़ कर नीचे लेट जाए लेकिन मैंने उनके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था।
जब मेरा रस पूरा अंदर गिर गया तो मैंने लौड़ा निकाले बगैर ही उनको नीचे लिटा दिया और तकियों को एकदम चूत के नीचे एडजस्ट कर दिया।
फिर ही मैंने अपना लौड़ा निकाला और निम्मो को कहा कि वो उसको तौलिये से पौंछ दे।
फिर थोड़ी देर के लिए मैं मैडम के साथ ही लेट गया और एक छोटी सी झपकी भी ले ली।
आधे घंटे बाद उठा और कपड़े पहनने लगा।
मैडम भी उठ गई थी और कपड़े पहन रही थी।
मैं उनके खूबसूरत अंगों को देख रहा था जो धीरे धीरे आँखों से ओझल हो रहे थे जैसे चाँद बादलों के जमघट में ओझल हो जाता है।
जाने लगा तो मैडम बोली- मैं तुमको घर छोड़ आती हूँ!
लेकिन मैं बोला- मैं चला जाऊँगा, आप तकलीफ ना करें।
उनके बंगलो के बाहर से रिक्शा मिल गई, मैं आधे घंटे में घर पहुँच गया।
कम्मो को निम्मो के बारे में बताया सुन कर हैरान हुई कि उसकी चचेरी बहन लखनऊ में रहती है और यह बात उसको मालूम ही नहीं।
कम्मो ने मैडम का फ़ोन नंबर मेरे से लिया और मैडम के नंबर पर फ़ोन किया।
फ़ोन मैडम ने ही उठाया और कम्मो ने जब बताया वो कम्मो बोल रही है तो मैडम ने कहा- सोमू ने तुमको निम्मो के बारे में तो बताया ही होगा। मैं चाहती थी कि यह खबर मैं तुमको सुनाऊँ लेकिन लगता है सोमू ने तुमको पहले ही बता दिया है।
कम्मो बोली- मैडम, मैं निम्मो से मिलना चाहती हूँ अगर आप इजाज़त दें तो!
मैडम बोली- अभी तो मैं कहीं जा रही हूँ पर तुम और सोमू कल दोपहर में दोनों यहाँ आ जाओ तो तुम निम्मो से मिल लेना।
कम्मो ने कहा- ठीक है मैडम जी, हम दोनों कल आ जाएंगे।
मैं बोला- आज मैंने मैडम के अंदर छुटाया है।
कम्मो बोली- अभी कोई फायदा नहीं है, उनकी माहवारी कुछ दिन पहले ही खत्म हुई है।
फिर कम्मो ने बताया कि मौसा मौसी चले गए थे आपके कॉलेज जाने के बाद ही… दोनों काफी दुखी लग रहे थे।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

बालसखी से मुलाकात


आज मैंने बड़े दिनों बाद अपनी क्लास में बैठे लड़के और लड़कियों को ध्यान से देखा और परखा।
लड़कियाँ अक्सर आगे के दो बेंचों पर बैठती थी लेकिन मैं हर रोज़ आखरी बेंच पर ही बैठ पाता था.
आज जब जल्दी से मैं क्लास में घुसा तो एक लड़की जो बाहर जा रही थी वो मुझ से टकरा गई, मैंने झट उससे सॉरी कहा और अपने लास्ट बेंच पर जाकर बैठ गया।
लेकिन वो लड़की रुक कर मुझ को देख रही थी और मुझको ऐसा लगा कि वो मेरे सॉरी कहने से संतुष्ट नहीं थी, वो जल्दी से पीछे मेरे बेंच के पास आ रही थी।
मैं डर गया और चौकन्ना होकर बैठ गया।
लड़की जल्दी से मेरे पास आई, इससे पहले वो कुछ कह पाती मैंने उससे कहा- मिस, गलती मेरी थी जो आप से टकरा गया था अनजाने में, प्लीज मुझको माफ़ कर दीजिये।
वो लड़की मेरे पास आई और आते ही कहने लगी- तुम सोमू हो ना?
मैं चकरा गया और डरते हुए बोला- जी हाँ, मैं सोमू ही हूँ, क्यों कुछ ख़ास बात है क्या?
लड़की एकदम चहक उठी- अरे सोमू, मुझको नहीं पहचाना क्या?
मैं हैरान था कि मैंने इसको कब देखा है, मैंने सर हिला दिया कि मैं नहीं पहचान पाया।
तब लड़की हँसते हुए बोली- तुमको याद नहीं जब हम बहुत छोटे थे तो एक साथ खेला करते थे।
मैं बोला- सॉरी, मैंने आपको अब भी नहीं पहचाना।
लड़की बोली- अरे, वो प्रतापगढ़ वाले तुम्हारे चाचा जी हैं न, मैं उनकी बेटी हूँ।
मैं एकदम हैरान हो कर बोला- ओह्ह्ह माय गॉड, तुम पूनम हो क्या?
वो बोली- हाँ मैं पूनम ही हूँ तुम्हारी बचपन की गर्लफ्रेंड।
मैं फिर हैरान होकर बोला- लेकिन तुम आज कॉलेज मैं कैसे? पहले तो कभी देखा नहीं?
पूनम बोली- कल ही तो एडमिशन ली है इस कॉलेज में, आज पहला दिन है मेरा इस कॉलेज में और किस्मत देखो मुझको भी वही क्लास मिली जिसमें सोमू पहले से बैठा हुआ है।
मैं भी बहुत खुश होकर बोला- चलो कैंटीन चलते हैं, वहीं बातें होंगी।
पूनम बोली- नहीं सोमू, आज मेरा पहला दिन है, आज नहीं, फिर कभी सही!
मैं बोला- अच्छा यह बताओ, कहाँ ठहरी हो?
पूनम बोली- मेरे एक दूर के कजिन हैं उनके मकान में ठहरी हूँ फिलहाल!
इससे पहले मैं कुछ आगे बोल पाता, प्रोफेसर साहिब कमरे में आ गए।
लंच की छुट्टी में सीधा कैंटीन की तरफ भागा। किस्मत से पूनम वहाँ मिल गई। वो एक टेबल पर अकेली बैठ कर लंच कर रही थी।
मैं उसके पास गया, मुझको देखते ही उसका चेहरा खिल उठा, पूनम बोली- आओ लंच करो ठाकुर साहब!
मैं भी शरारत के मूड में बोला- लंच तो कर लेते ठकुराइन लेकिन मैं तो अक्सर घर में जाकर लंच करता हूँ। आओ तुमको भी घर ले चलता हूँ, लंच भी कर लेना और घर भी देख लेना।
पूनम बोली- क्या नज़दीक ही रहते हो तुम यहाँ से?
मैं बोला- हाँ पास ही है 10 मिन्ट लगते हों रिक्शा से! और सुनाओ बाकी सबका क्या हाल है, आज मम्मी को फ़ोन करता हूँ, तुम यहाँ आ गई हो पढ़ने के लिए और यह सुन कर तो वो काफी खुश होंगी।
पूनम बोली- ठीक है सोमू यार, तुम तो काफी लम्बे और तगड़े हो गए हो।
मैं बोला- ठकुराइन तुम कहाँ कम हो, तुम भी तो इतनी प्यारी और सुन्दर हो गई हो।
खाना खत्म करके हम अपनी क्लास में आ गए। पूनम मेरे ही बेंच पर बैठ गई क्यूंकि आगे के कन्या बेंच सब फुल थे।
आखिरी पीरियड खत्म होने की घंटी बजी तो मैं पूनम को यह कह कर चल पड़ा कि आज कुछ काम है सो कल मिलते हैं।
वो बोली- ठीक है ठाकुर साहब।
अगले दिन जैसे ही कॉलेज में घुसा तो पूनम के अंकल उसको छोड़ कर जा रहे थे। पूनम ने मुझको उनसे मिलवाया और वो बड़े तपाक से मिले और बोले- आप आना बेटा कभी हमारे घर में, थोड़ा दूर तो है लेकिन इतना नहीं।
मैंने ओपचारिक तौर से कह दिया- अवश्य आऊँगा।
फिर मैं और पूनम क्लास में चले गए। जाते जाते हम दोनों के हाथ और एक दूसरे को छू रहे थे और एक बार उसका हाथ मेरे लंड पर भी लगा।
पूनम देखने में काफी अच्छी लड़की लग रही थी, साड़ी और ब्लाउज में लड़कियाँ वैसे ही लड़कों से बड़ी बड़ी लगती हैं। पूनम भी मुझसे उम्र में काफी बड़ी लग रही थी।
हमारा बेंच लास्ट बेंच था क्लास में और वो भी दो सीटर था, मैं और पूनम उस पर काफी कम्फ़र्टेबल बैठे हुए थे।
दूसरी क्लास के दौरान पूनम का हाथ कई बार मेरे जांघों को टच कर रहा था और हम दोनों के घुटने भी अक्सर आपस में रगड़ खा रहे थे।
मैंने पूनम की आँखों में अपनी आँखें डाली तो वो हल्के से मुस्कराई थी और जवाब में भी मैं भी मुस्करा दिया था।
अब मैंने मौका देख कर उसकी कमर में पीछे से हाथ डाल दिया और धीरे से उसको दबा दिया।
पूनम और भी मेरे निकट आ गई लेकिन इस डर से कहीं प्रोफेसर साहिब की नज़र ना पड़ जाए, मैंने अपना हाथ हटा लिया।
लेकिन अब पूनम ने अपन दाहिना हाथ मेरे बाईं जांघ पर रख दिया और मैंने भी शरारत से उसका हाथ उठा कर अपने लंड पर रख दिया।
पहले उसने अपना हाथ ज़रा हटा लिया लेकिन फिर थोड़े टाइम बाद उसने हाथ पुनः मेरे लंड के ऊपर रख दिया।
मैंने भी अपना बायाँ हाथ बेंच के नीचे से उसकी जांघों के ऊपर रख दिया। इस तरह हम एक दूसरे के साथ खेलते रहे जब तक रिसेस नहीं हो गई।
फिर मैंने पूनम का हाथ पकड़ कर उसको उठाया और हम दोनों कैंटीन चल पड़े।
पूनम घर से खाना लाई थी जो हमने मिल कर खाया।
मेरे कुछ मित्र भी हमारे पास आये और उन सबसे मैंने पूनम को मिलवाया कि यह मेरी कजिन है।
फिर मैंने पूनम को आइसक्रीम खिलाई जो आम तौर पर गाँव में नहीं मिलती थी।
कैंटीन में ही बैठे मैंने पूनम को कहा कि वो हमारी कोठी में आकर ही रहे!
उसको यह भी बताया कि कोठी में सिर्फ मैं अकेला रहता हूँ और साथ में दो मेड्स हैं, एक कुक है और दूसरी घर की देखभाल के लिए है।
पूनम बोली- मैं तो तैयार हूँ लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा न!
मैं बोला- तुम्हारी हाँ है तो उनको मैं राज़ी कर लूंगा। मैं आज ही अपनी मम्मी से बात करूंगा। तुम राज़ी हो तभी तो?
पूनम बोली- ज़्यादा तंग तो नहीं करोगे तुम मुझको?
मैं बोला- आज तो तुम तंग कर रही हो मुझको? हर जगह हाथ रख देती हो?
पूनम बोली- अच्छा जी, और तुम जो मेरी कमर पे पीछे से हाथ रख रहे थे वो क्या था?
मैंने पूनम के कान में कहा- दो दोस्त जो इतने टाइम बाद मिले, थोड़ा थोड़ा प्यार था तो प्रकट तो करना ज़रूरी था ना! क्यों ठीक नहीं क्या?
पूनम बोली- मुझको तो याद नहीं कि तुम मुझको कभी प्यार व्यार करते थे भी या नहीं। हमेशा ही लड़ते झगड़ते थे तुम मुझसे!
मैं खिसयाना होकर बोला- वो बच्चों के झगड़े भी तो प्यार की निशानी थे, क्यों तुम नहीं मानती क्या?
पूनम प्यारी सी हंसी हंस दी- मानती हूँ यार! चलें क्लास में?
घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन किया और पूनम की सारी बात बताई तो मम्मी बोली कि अभी वो चाचाजी जी को फ़ोन करती हैं।
शाम को ही मम्मी जी का फ़ोन आ गया कि चाचा जी मान गए है, कल तुम पूनम को घर ले आना!
अब मैंने कम्मो को भी बता दिया और पूछा- क्या पूनम के यहाँ आने से हमारे खुले व्यवाहर में कोई फर्क तो नहीं पड़ेगा?
कम्मो बोली- उम्मीद तो नहीं, लेकिन कोई प्रॉब्लम हो गई तो मिल कर सोचेंगे क्या करें? 
अगले दिन पूनम क्लास में मेरे वाले बेंच पर ही बैठी थी। जब मैं उसके पास बैठा तो मैंने कहा- फिर कब आऊँ विदाई करवाने?
पूनम मुस्करा कर बोली- डोली लेकर आओगे या ऐसे ही आओगे?
मैं बोला- जैसे तुम चाहो, कहो तो डोली ले कर आ जाता हूँ… क्यों क्या मर्ज़ी है?
पूनम बोली- अभी डोली रहने दो, सिर्फ रिक्शा लेकर आ जाना।
मैं बोला- चाचा जी से बात कर ली है तुमने?
पूनम बोली- कर तो ली है लेकिन क्या यह हम ठीक कर रहे हैं?
मैं बोला- क्या तुम नहीं चाहती मेरे साथ रहना? तुम्हारे मन में कोई संदेह है तो रहने दो! मैं तो तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा था।
पूनम बोली- सोमू क्या तुम नाराज़ हो गए हो? मैं यह सोच रही थी कि जब हम साथ रहेंगे तो क्या एक दूसरे से बच पाएंगे?
मैं बोला- क्या तुम बचना चाहती हो मुझसे?
पूनम मेरी आँखों में देखती हुई धीरे से बोली- वही तो, मैं बहुत ही कामातुर हो जाती हूँ कभी कभी!
हम बातें इतनी धीरे से कर रहे थे कि शायद ही किसी के कान में पड़ी हो, फिर भी मैंने पूनम को इशारा किया और कहा- आओ क्लास के बाहर चलते हैं, यहाँ यह बातें करना सेफ नहीं।
हम दोनों उठ कर कैंटीन में चले गए और एक एक कोक पीते हुए बातें करने लगे।
मैं मुस्करा कर बोला- तुम कामातुर हो जाती हो कभी कभी लेकिन मैं तो हर वक्त कामातुर रहता हूँ। चलो अच्छी निभ जाएगी जब मिलेंगे दो महाकामातुर… तुम मेरी लेना और मैं तुम्हारी।
पूनम बोली- उफ़ सोमू, यह तुम कह रहे हो? तुम जो कल तक दूध पीते बच्चे ही थे, आज काम वासना की बातें कर रहे हो?
मैं बोला- कामवासना में तो तब से लिप्त हूँ जब से दूध पीने लगा था।
पूनम शरारतन बोली- किसका दूध पीने लगे थे और कब से?
मैं भी शरारत से बोला- जिसने भी अपनी दूधी मुझको दी मैंने उसी का जी भर के दूध भी पिया और अपना दूध भी पिलाया। यही है अभी तक के मेरे जीवन का सार… दूध पीते और पिलाते रहो!
पूनम अब ज़ोर सोर से हंसने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- मेरा भी पियोगे क्या दूध?
मैंने उस का हाथ पकड़ कर कहा- अगर तुम पिलाओगी तो ज़रूर पियूँगा और रात दिन पियूँगा।
अब पूनम सीरियस हो गई और शर्माते हुए बोली- मैं तो मज़ाक कर रही थी।
मैं बोला- मैं कौन सा सच्ची कह रहा था, मैंने तो आज तक दूध चखा ही नहीं।
अब हम दोनों हंसने लगे।
कॉलेज ख़त्म होने के बाद मैं पूनम को रिक्शा में लेकर उसके चाचा के घर ले गया।
चाचा का घर काफी छोटा था, सिर्फ 2 ही कमरे थे, मैं पूनम का समान लेकर चाची से विदाई ले आया और उनसे कहा कि वो हमारी कोठी ज़रूर आएं।
कोठी पहुँचा तो कम्मो ने पूनम का स्वागत किया और पूनम का समान मेरे साथ वाले कमरे में लगा दिया। पूनम को कमरा बहुत ही पसंद आया।
कोठी के आगे पीछे का लॉन जिसकी देखभाल माली करता था, कई तरह के फूलों से सजा हुआ था।
मैंने उसको वहाँ थोड़ा घुमाया और एक बहुत ही सुन्दर लाल गुलाब का फूल उसको भेंट किया और कहा- वेलकम टू सोमू’ज़ हाउस।
कम्मो हम सबके लिए चाय ले आई और बैठक में ही हम सबने चाय पी और साथ में लखनवी कचौड़ी भी खाई।
अब कम्मो भी आकर हमारे साथ बैठ गई।
मैंने पूनम को बताया- कम्मो ही घर की मालकिन है और सारा घर वो संभालती है।
रात को पारो ने बहुत ही स्वादिष्ट मटन कीमा और हरा पुलाव बनाया था, वो हम सब ने बड़े चाव से खाया।
खाने के बाद मैं और पूनम मेरे कमरे में आ गए और आते ही मैंने पूनम को बाहों में भर लिया।
पूनम थोड़ा कसमसाई लेकिन जब मैंने उसके लबों पर एक लम्बा और गहरा चुम्बन दिया तो उसने अपने हाथ पैर ढीले छोड़ दिए और मेरी बाँहों में झूल गई।
मैं उसकी आँखों को चूमता हुआ उसके गालों को चूम ही रहा था कि अचानक कम्मो कमरे में आ गई।
पूनम मुझसे दूर हटना चाहती थी लेकिन मैंने उसको कस के बाहों में पकड़े रखा और कहा- कम्मो हमारी गुरु है हर काम में और मैं बगैर कम्मो के आज्ञा के कोई भी काम नहीं करता। तुमको कोई ऐतराज़ तो नहीं पूनम?
पहले वो चुप रही और फिर बोली- कम्मो दीदी जब तुम्हारी गुरु है तो मेरी भी गुरु हुई ना, तो उनसे क्या पर्दा?
मैंने ज़ोर ज़ोर से तालियाँ बजाईं और पूनम और कम्मो दोनों को अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया, पूनम को किस किया और साथ ही कम्मो को भी किस किया।
मैंने पूनम को कहा- मैं तो बहुत ही कामातुर हो रहा हूँ और मैं पूनम और कम्मो की आँखों से देख रहा हूँ कि वो भी काफी कामातुर हो चुकी हैं तो यदि पूनम जी की आज्ञा हो तो श्रीगणेश करें?
पूनम बोली- मेरी आज्ञा नहीं गुरुदेव की आज्ञा चाहिए? क्यों गुरुदेव आज्ञा है?
कम्मो बोली- ज़रा सब्र करो, तुम दोनों एक दूसरे के बारे में जान तो लो?
पूनम बोली- हम एक दूसरे को खूब अच्छी तरह से जानते हैं। बचपन में सोमू की नाक अक्सर मैं ही पौंछा करती थी! क्यूँ सोमू?
मैं बोला- क्या कह रही हो पूनम? मम्मी जी तो कहती थी कि बचपन में मेरी नाक हुआ ही नहीं करती थी, यह तो जवान होने पर ही उगी थी जैसे मेरी कई चीज़ें जवानी में ही उगी हैं।
यह सुन कर पूनम झेंप गई।
कम्मो बोली- ठीक है तो वस्त्र विसर्जन करें?
पूनम बोली- कहाँ विसर्जन करना है कपड़ों को कम्मो दीदी?
मैं और कम्मो ज़ोर से हंस दिए और मैं बोला- कम्मो का मतलब है कि कपड़े उतारें क्या?
पूनम और भी शरमाई। 
लेकिन कम्मो सबसे पहले मेरे ही कपड़े उतारने लगी और जब पूनम ने मेरा लंड देखा तो वो एकदम आश्चर्य में पड़ गई।
लंडप्रकाश जी वैसे ही खड़े थे जैसी कि उनकी आदत थी,
यह देख कर पूनम बोली- अरे सोमू, यह चीज़ कहाँ से खरीद के लाये हो? इतनी मोटी और सख्त छड़ी कहाँ से चुराई?
अब हैरान होने की बारी मेरी थी, मैं हैरानी से बोला- अरे यह मेरा ही है पूनम।
पूनम ज़ोर से बोली- तुम बिल्कुल झूठ कह रहे हो! खेल खेल में मैंने जब इसको देखा था तो उस टाइम यह इत्ता सा था। यह तुम्हारा हो ही नहीं सकता सोमू चोर?
कम्मो का हंसी के मारे बुरा हाल हो रहा था और वो अपने को संभाल नहीं पा रही थी।
मैं भी खिसयाना हो कर बोला- कम्मो हंसी छोड़ो और पूनम के भी कपड़े उतारो। देखें तो सही उसने क्या कहाँ से चुराया है?
कम्मो हँसते हुए पूनम के कपड़े उतारने लगी।
जब वो पूरी नंगी हो गई तो मैंने भी उँगलियों पर गिनना शुरू किया और बोला- यह गोल गोल जो तुम्हारी छाती पे लगे हैं वो भी तुम्हारे नहीं हैं, यह शायद तुमने किसी फिल्म एक्ट्रेस के चुराए हैं और जो यह पीछे गोल और मोटे चूतड़ हैं वो भी तुम्हारे नहीं हैं और कहीं से चुराए लगते हैं। और जो यह तुम ने काले बाल नीचे लगाये हैं यहाँ पता नहीं तुमने क्या छुपा रखा है?
शर्माने की बारी अब पूनम की थी।
मैं नकली गुस्से में बोला- आप तो तीन तीन चीज़ें चुरा कर अपने ऊपर लगा ली है और मेरी एक चीज़ देख कर इतना शोर मचा रही यह लड़की उफ्फ्फ मेरी माँ!
हमारी इस नकली लड़ाई से कम्मो बड़ी खुश थी, उसकी ख़ुशी उसके होटों और आँखों से झलक रही थी।
मैं आगे बढ़ कर कम्मो के कपड़े उतारने लगा। पहले तो वो हक्का बक्का होकर मुझको देख रही थी लेकिन मैंने उसकी साड़ी खींच डाली और फिर उसका ब्लाउज भी उतारने लगा और फिर उसका पेटीकोट भी खींच डाला।
यह सारा काण्ड पूनम चुपचाप देख रही थी।
कम्मो बनावटी गुस्से में बोली- यह क्या कर रहे हो छोटे मालिक, मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो आप?
मैं बोला- मैं चेक कर रहा था कि कहीं तुम्हारे गोल मुम्मे, चूतड़ और काले बाल तो नहीं चुरा लिए पूनम ने? और अपने ऊपर लगा लिए हों क्यूंकि इस लड़की का कोई भरोसा नहीं? बचपन में यह मेरे साथ भी ऐसे ही किया करती थी!
अब तो पूनम और कम्मो मुंह में कपडा ठूंस कर ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी।
मैं भी नकली गुस्से में बोला- हंस लो हंस लो तुम दोनों… मैं जानता हूँ बचपन से ही इस लड़की की मेरे लौड़े पर नज़र थी, यह हमेशा इस को अपने ऊपर लगाना चाहती थी! क्यों है न पूनम? सच बोलना?
पूनम भी गुस्साई हुई बोली- हाँ तो थी मेरी मर्ज़ी वो मैं अब पूरी कर लूंगी। कम्मो दीदी देना ज़रा अपनी कैंची, मैं काट ही देती हूँ इस साले को! ना होगी यह लण्डी न बजेगी चूती।
पूनम गुस्से में कैंची ढून्ढ रही थी और मैं अब वाकयी में ही डर कर भाग रहा था और पूनम मुझ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। और इस भागा भागी में ना जाने कब मैंने पूनम को पकड़ लिया और उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके लबों पर एक हॉट किस जड़ दी।
उसने भी किस का जवाब किस से दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर उससे खेलने लगी।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

बालसखी की चूत चुदाई

मैं भी नकली गुस्से में बोला- हंस लो हंस लो तुम दोनों… मैं जानता हूँ बचपन से ही इस लड़की की मेरे लौड़े पर नज़र थी, यह हमेशा इस को अपने ऊपर लगाना चाहती थी! क्यों है न पूनम? सच बोलना?
पूनम भी गुस्साई हुई बोली- हाँ तो थी मेरी मर्ज़ी वो मैं अब पूरी कर लूंगी। कम्मो दीदी देना ज़रा अपनी कैंची, मैं काट ही देती हूँ इस साले को! ना होगी यह लण्डी न बजेगी चूती।
पूनम गुस्से में कैंची ढून्ढ रही थी और मैं अब वाकयी में ही डर कर भाग रहा था और पूनम मुझ को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। और इस भागा भागी में ना जाने कब मैंने पूनम को पकड़ लिया और उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके लबों पर एक हॉट किस जड़ दी।
उसने भी किस का जवाब किस से दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर उसके संग खेलने लगी।
मैं भी उसके गोल सॉलिड मम्मों को हाथ से मसलने लगा और एक हाथ उसकी काले बालों से ढकी चूत पर रख दिया, ऊँगली से चूत को टटोला तो बहुत ही पनिया रही थी।
फिर मैं ने पूनम को लबों पर एक हॉट चुम्मी दी जिसमें मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर उसकी जीभ के साथ दंगा कर रही थी।
कम्मो भी पूनम के पीछे खड़ी होकर उसके गोल मोटे चूतड़ों को प्यार से सहला रही थी।
पूनम भी बार बार अपनी चूत को मेरे लंड से छू रही थी और मेरे लंड की टिप को चूत में छुपे भग से रगड़ रही थी, साथ ही अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी।
अब कम्मो हम दोनों के बीच खड़ी होकर हम दोनों को टाइट जफ्फी डाल रही थी, पूनम अब तकरीबन मेरे से पूरी तरह चिपकी हुई थी। कम्मो के इशारे पर मैंने उसको उठा लिया अपने दोनों हाथों में और लंड को उसकी उभरी चूत के मुंह पर रख कर एक दो चक्कर कमरे के लगा आया और इस दौरान पूनम का मुंह मेरे मुंह से चिपका हुआ था और हम एक दूसरे को बहुत ही कामातुर चुम्बन देने में लगे हुए थे।
पूनम ने अपनी कमर को थोड़ा सा धक्का दिया और लंड एकदम गीली और पनियाई चूत में प्रवेश कर गया।
कम्मो ने कहा- क्या गृह प्रवेश हो गया? छोटे मालिक बधाई हो आपका ‘इत्ता’ सा पूनम की ‘उत्ती’ सी में चला गया।
मैं बोला- देखिये, ध्यान से देखिए, दो दोस्त एक दूसरे को खूब चोद रहे हैं।
और यह कह कर मैंने पूनम को पलंग की साइड में लिटा दिया और आप खड़ा होकर उसकी चूत में लंडा लंड धक्के मारने लगा।
पूनम की गोरी टांगें मेरी कमर के इर्द गिर्द हो रही थी, पूनम बहुत गर्म हो चुकी थी सो कुछ ही क्षण में धराशायी होने के लक्षण दिखाने लगी, उसकी दोनों टांगें जो मेरी कमर के इर्द गिर्द थीं, वो उन को दबा कर मेरी कमर का हिलना डुलना रोक रही थी।
जब वो छूटी तो उसकी टांगों ने मेरा घेराव पक्की तरह से कर दिया था।
वो फिर ज़रा सम्भली तो मैंने उसको बिस्तर पर पूरा लिटा दिया और खुद जल्दी से उसकी चौड़ी हुई टांगों में घुस कर अपना लौड़ा फिर उसकी चूत के हवाले कर दिया।
कम्मो भी मेरे पीछे बैठे हुई थी पलंग पर और मेरे और पूनम को पूरी मदद दे रही थी।
अब मैंने पारम्परिक आसन में पूनम की चुदाई शुरू कर दी यानि वो बिस्तर में लेटी थी और मैं उसके ऊपर लेटा था और लंड मेरा अंदर चूत में समाया था और उसकी गोल टांगें हवा में लहरा रही थी।
प्रतिद्वंदी की आँखें बंद थी, मुँह ज़रा सा खुला था और सांस ज़ोर से चल रही थी।
लेकिन मेरा लंड भी बड़ा बेरहम बना हुआ चुदाई चूत की मर्ज़ी के अनुसार कर रहा था न वो मेरी सुन रहा था न वो पूनम की सुन रहा था।
बस लगा था धक्कम पेल में और चोद रहा था ऐसे कि जैसे हम बैठे हों रेल में!
धीरे से पूरा नाभि तक अंदर डाल कर फिर उसी तरह से धीरे से निकलना उसका चूत के मुंह तक, और फिर यही खेल दुबारा और कितनी बार और लेकिन फिर जब चूत कहने लगे माशाअल्लाह क्या सोच सोच कर चोद रहा है बे? जल्दी कर साले।
मैं बीच में धक्कम पेल छोड़ कर मुम्मों को चूसना और चूचियों को गोल गोल मुंह में घुमाना भी कर रहा था।
अब पूनम ने अपनी कमर ऊपर उठा कर मुझको इशारा किया कि जल्दी करो तो मैं फिर शुरू हुआ तेज़म तेज़ धक्का धक्की में और अपने हाथों को उसके गोल सॉलिड चूतड़ों के नीचे रख कर ऐसी ज़ोर से शुरू कर दी पेलमपेल कि पूनम आनन्द में अपना सर इधर से उधर हिलाने लगी और मुंह सी आअह्हह ऊऊहहह के स्वर अपने आप निकलने लगे!
चंद मिनटों में पूनम अपनी दोनों बाँहों मेरे गले में डाल कर और टांगों को मेरी कमर में लपेट कर मेरे धक्कों को सहन करती हुई यह जा और वो जा हो गई, उसका मुंह मेरे मुंह से चिपक गया और चूतड़ मेरे लौड़े से चिपक गए।
यह देख कर कम्मो ने ताली बजाई और कहा- वाह छोटे मालिक, क्या खूब चोदा है अपनी बचपन की फ्रेंड को!
पूनम के कान के पास अपना मुंह ले जा कर कम्मो ने पूछा- अभी और आये लंडम प्रसाद या फिर थोड़ी देर ठहर के?
पूनम ने दबी ज़बान से कहा- अभी और नहीं और रात में फिर कभी नहीं।
मैं यह सुन कर हट गया पूनम के ऊपर से और अपना गीला और अकड़ा लंड निकाला और कम्मो की चूत में डाला।
कम्मो ने कहा- छोटे मालिक, आप मेरे नीचे आ जाओ अब मुझ को मेहनत करने दो आप तो थक गए होंगे।
यह कर कम्मो मेरे ऊपर आ गई और मेरा गीला लंड उसने झट से अपनी चूत में डाल लिया। 
पूनम अधखुली आँखों से यह सब देख रही थी लेकिन मैंने आँखें बंद कर लीं और कम्मो को मेहनत करने दी।
जब देखा कि पूनम को शायद नागवार लगा है तो मैंने अपना दायाँ हाथ बढ़ा कर उसको अपने नज़दीक कर लिया और उसके मोटे मुम्मों से खेलने लगा और साथ ही उसके मुंह से मुंह जोड़ कर उसको चूमने लगा।
उधर कम्मो अपनी ही धुन में मुझको कभी धीरे और कभी तेज़ ऊपर से चोद रही थी।
जब कम्मो ने देखा कि पूनम शायद बुरा मान रही है तो उसने भी पूनम की चूत में उंगली डाल कर उसके भग को सहलाना शुरू कर दिया और जब वो थोड़ी सी गरम हुई तो कम्मो बोली- पूनम, मैं नीचे आती हूँ, तुम आ जाओ और चुदा लो छोटे मालिक से!
पूनम बोली- नहीं नहीं कम्मो दीदी, आप लगे रहो, मुझको ज़रा भी बुरा नहीं लगा है।
कम्मो तब बोली- छोटे मालिक आप ज़रा रुको मैं नीचे आती हूँ और आप मुझको ऊपर से धीरे धीरे ही चोद दो!
यह कह कर कम्मो नीचे आ गई और मैं कम्मो के ऊपर चढ़ गया।
तब कम्मो ने पूनम से कहा- तुम अपनी चूत को मेरे मुंह पर रख दो।
पूनम उठ कर टांगों के सहारे बैठ गई और उसकी चूत कम्मो के मुंह पर आ गई।
अब कम्मो ने नीचे से पूनम की चूत को चूसना शुरू किया और थोड़ी देर में उसके भग को चूस रही ही थी कि पूनम एकदम अकड़ गई और ऐसा लगा कि वो झड़ गई और वो कम्मो के ऊपर से उठने लगी लेकिन कम्मो ने उसको रोक दिया।
उधर मैं ऊपर से कम्मो को धीरे धीरे चोद रहा था और उसकी गीली चूत को चोदने में बहुत आनन्द आ रहा था। पूनम की चूत को कम्मो अभी भी चाट रही थी, पूरी जीभ गोल कर के अंदर डाल रही थी या फिर उसकी भग को चूस रही थी और पूनम को अब फिर से बहुत मज़ा आना शुरू हो गया था।
मेरी चुदाई से और पूनम की चूत चुसाई से कम्मो भी जल्दी ही झड़ गई।
फिर हम तीनों बिस्तर पर लेट गए।
थोड़ी देर आराम करने के बाद पूनम बोली- अब मैं अपने कमरे में जाती हूँ।
मैंने पूनम को रोक लिया- मित्रवर कहाँ जा रहे हो?
पूनम बोली- अपने कमर्वा में जात रहीं।
मैं बोला- काहे जात हो, यहीं सोवत नाहीं का?
पूनम बोली- नहीं न, तुम डिस्टर्ब्वा होगे ना?
मैं बोला- डिस्टर्ब्वा? अभी चुदायन का मज़ा आवत रहिंन और अभो ही ससुर तुम चल पड़े. यही तो कतई ठीक नाही है रे?
यह सुन कर कम्मो और पूनम ज़ोर ज़ोर से हंस पड़ी, हमने हाथ पकड़ कर पूनम को अपने बिस्तर पर लिटा लिया।
हम तीनो एक साथ ही सो गए, एक तरफ पूनम थी और दूसरी तरफ कम्मो।
रात को मैं काफी बार उन दोनों पर चढ़ा था लेकिन यह याद नहीं किस पर कितनी बार!
सुबह जब नींद खुली तो मैं सिर्फ पूनम के साथ नंगा ही सोया था और पूनम भी पूर्ण रूप से नग्न ही थी।
कुछ देर में उसकी चूत के काले बालों से खेलता रहा और फिर उसके मम्मों को चूसने लगा उसकी चूत को हाथ लगाया तो वह काफी गीली हो रही थी।
मैं उस पर चढ़ने की सोच ही रहा था कि इतने में कम्मो चाय के कप ले कर आ गई और मुझको पूनम पर चढ़ने के लिए तैयार होते देख कर बोली- छोटे मालिक, आप तो कभी कभी कमाल ही कर देते हो. बेचारी पूनम पर आप रात में कम से कम 4 बार चढ़े थे और मेरे ऊपर 3 बार और अभी भी आप का मन नहीं भरा है?
मैं हैरान होकर बोला- हाँ, यह हो सकता है कम्मो रानी, क्यूंकि मेरा रात भर एक बार भी नहीं छूटा सो सारा माल तो मेरे अंदर ही जमा हो रहा है और वो मुझ को बार बार तुम सब को चोदने के लिए विवश कर देता है। मुझ को ऐसा लगता है जैसे मेरे लंड में हर वक्त खुजली होती रहती है और वो तभी शांत होती है जब मैं किसी लड़की पर चढ़ जाता हूँ जंगली सांड की तरह!
मैं यह बातें कर ही रहा था की पूनम की नींद खुल गई और वो मुझको और कम्मो को देख कर हैरान हो गई और अपने हाथ से अपने नंगे मम्मे और चूत को छिपाने की कोशिश करने लगी।
मैं बोला- पूनम बेबी रहने दो, हम सब ने तुम्हारा सब कुछ देख रखा है, उठो और चाय पी लो यार!
पूनम मेरे को देख कर बोली- तुम्हारी इत्ती सी तो अभी भी खड़ी है क्या मुझ पर फिर हमला करने वाले थे तुम?
मैं हँसते हुए बोला- हाँ, करने वाला ही था कि कम्मो आ गई और तुम को मेरे पंजों से बचा लिया।
कम्मो बोली- पूनम, तुम को याद है कि कितनी बार इन्होंने तुम पर हमला किया है रात भर में?
पूनम बोली- पूरी तरह तो याद नहीं लेकिन शायद यह मुझ पर 3-4 बार चढ़ा है, मेरी चूत की तो दुर्गति हो गई होगी अब तक!
कम्मो हँसते हुए बोली- घबराओ नहीं, मैंने सुबह देख लिया था, तुम्हारी चूत सही सलामत है, हाँ थोड़ी सी सूजी हुई ज़रूर है।
पूनम रोने का मुंह बना कर बोली- ज़ालिम सोमू, तुम तो मुझको बर्बाद कर दोगे… उफ़ मेरी चूत? कम्मो दीदी मैं चल तो सकूंगी ना?
कम्मो हँसते हुए बोली- चल तो पाओगी लेकिन छोटे मालिक के सहारे की ज़रूरत पड़ेगी!
पूनम रूठते हुए बोली- कभी नहीं, सोमू का सहारा लेना मतलब कई बार चुदाना। कभी नहीं… सोमु का चोदना, चूत का सत्यानाश !!! उफ़ मेरी माँ!
पूनम चाय पीने का बाद कपड़े पहन कर जाने लगी तो मुड़ के मेरी तरफ देखने लगी और मुस्कराते हुए बोली- सोमू आज रात का प्रोग्राम कितने बजे शुरू होगा?
कम्मो हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुम को हरा देगी।


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पूनम की दिल खोल कर चूत चुदाई


कम्मो हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुमको हरा देगी।
अगले दिन पूनम और मैं जब कॉलेज पहुँचे तो मेरे एक सहपाठी मित्र मिल गए और बोले- सोमू यार, तुमने नोटिस बोर्ड देखा क्या?
मैं बोला- नहीं यार, मैं तो अभी कॉलेज आया हूँ। क्या ख़ास बात लिखी है वहाँ?
वो बोला- तुम देख लो तो पता चल जाएगा। यह कौन है तुम्हारे साथ?
मैं बोला- यह पूनम है, मेरी कजिन मेरी ही क्लास में आई है अभी अभी!
दोनों ने एक दूसरे को नमस्कार किया और फिर हम तीनों नोटिस बोर्ड पढ़ने चले गए।
वहाँ एक ट्रिप के बारे में नोटिस लगा था जो उसी महीने होना था।
यह ट्रिप दिल्ली और आगरा भर्मण के बारे में था, दो रात और 3 दिन का ट्रिप था और खास तौर से इतिहास के छात्रों के लिए था, एक सौ रूपए प्रति छात्र का खर्च था, वो छात्र जो इस ट्रिप में भाग लेना चाहते थे 3 दिन में जमा करवाना था।
मैं और पूनम अपनी क्लास में पहुँचे तो वहाँ इस ट्रिप की ख़ास चर्चा हो रही थी।
मैंने पूनम से कहा- तुम चलोगी क्या इस ट्रिप में?
पूनम बोली- जाने की इच्छा तो है लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा और इतनी जल्दी पैसों का भी इंतज़ाम होना मुश्किल है तो तुम हो आओ!
मैंने कहा- मैं मम्मी पापा से पूछता हूँ और तुम भी आज घर में जाकर पूछ लेना। पैसों की फ़िक्र ना करो!
बाद में पता चला कि ट्रिप की इंचार्ज निर्मला मैडम होंगी और उनका साथ एक और लेडी प्रोफ़ेसर देंगी।
शाम को घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन से पूछ लिया और उन्होंने कहा- चले जाओ, लेकिन हर रोज़ फ़ोन ज़रूर करते रहना।
पूनम ने जब घर में पूछा तो उन्होंने कहा- क्या सोमू भी जा रहा है और पूनम ने कहा हाँ तो उन्होंने कहा ‘चली जाओ’ लेकिन अपना प्रोग्राम बताती रहना हर रोज़।
रात आई और खाना खाकर हम तीनों बैठक में बैठे दिल्ली आगरा ट्रिप की ही बात कर रहे थे।
हम तीनों ने यह जगह अभी तक नहीं देखी थी तो नई जगह देखने की उत्सुकता थी लेकिन फिर मन में संशय भी था कि आपसी चुदाई कैसे हो पायेगी।
कम्मो ने मेरी तरफ भेदभरी नज़र से देखा और शायद वो नैनीताल ट्रिप के बारे में सोच रही थी।
मैंने कम्मो से पूछा- वो नैनीताल ट्रिप के बारे में पूनम को बता दें क्या?
वो बोली- देख लो छोटे मालिक, क्या पूनम हमारा यह राज़ रख पाएगी?
पूनम बोली- कौन सा राज़ सोमू?
मैं बोला- बड़ा ही भयानक राज़ है, अगर किसी को पता चल गया तो मैं कहीं का नहीं रहूँगा, मेरी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाएंगी।
पूनम अब बहुत उत्सुक हो गई और ज़ोर देकर पूछने लगी तो मैंने कहा- कसम खाओ यह राज़ तुम किसी को नहीं बताओगी?
पूनम बोली- कसम से, तुम्हारी इत्ती सी की कसम खाती हूँ।
मैं और कम्मो दोनों हंस पड़े।
तब मैंने उसको नैनीताल ट्रिप का राज़ बताया कि कैसे चार लड़कियों ने मिल कर मेरा बलात्कार किया और एक बार नहीं, कई बार किया। और हर बार लड़कियों को कम और मुझको ज़्यादा मज़ा आया और यह था बलात्कारी मज़ा।
पूनम बोली- वो लड़कियाँ अभी कॉलेज में हैं क्या?
मैं बोला- हाँ हैं, और रोज़ मुझको पूछती हैं बलात्कार करें क्या?
पूनम बोली- आप क्या कहते हो उनको?
मैं बोला- मैं कहता हूँ अकेली हो या फिर 3-4 हैं और भी? वो हमेशा यही कहती है वही अकेली है। और मेरा जवाब होता है मैं अकेली लड़की से बलात्कार नहीं करवाता, तीन चार मिल कर आओ तो करवा भी लूंगा।
कम्मो पूनम के पीछे बैठी थी और वो मुंह में साड़ी का पल्लू डाल कर ज़ोर से हंस रही थी।
अब पूनम समझ गई कि मैं उसकी टांग खींच रहा हूँ, वो रूठने का नाटक करते हुए बोली- हमको नहीं सुननी तुम्हारी बलात्कारी कहानी।
मैं बोला- तुम सुनाओ, तुम्हारे साथ क्या हुआ था यार?
पूनम बोली- मेरे साथ क्या होना था सोमू ठाकुर? और क्यों होना था रंगीले ठाकुर?
मैं बोला- कुछ तो हुआ होगा ना जो तुम्हारी सील टूटी थी?
पूनम शर्माती हुई बोली- वो तो आम की वजह से हुआ!
मैं और कम्मो हैरान हो कर बोले- आम? कौन सा आम? कैसा आम? और उससे सील टूटने का क्या सम्बन्ध हो सकता है?
पूनम संजीदा होते हुए बोली- वो ऐसा है, जब मैं छोटी थी तो गाँव में अपने ही आमों के बाग़ में कुछ सहलियों के साथ आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ी थी लेकिन आम तोड़ने के बाद मैं जब नीचे उतर रही तो मेरा पैर फिसल गया और वहाँ में गिर गई और मेरी जो ‘वो’ है न, उससे बड़ा खून गिरा। फिर डॉक्टर ने मम्मी को बताया कि इस हादसे में सील टूट गई है।
मैंने और कम्मो ने बड़ा अफ़सोस जताया और मैंने उसको तसल्ली दी और कहा- कोई बात नहीं, नई लगवा लेना लखनऊ में!
पूनम बोली- अब नई नहीं लगती प्यारे मोहन!
मैं बोला- ऐसा क्यों? मेरा भी ‘इत्ता’ सा साला चूहा खा गया था एक रात को लेकिन कम्मो मेरे साथ गई थी और नया मोटा और बड़ा लगवा लिया था एक ख़ास दुकान थी हज़रात गंज में। क्यों कम्मो?
कम्मो तो अब हंसी के मारे सोफे के नीचे लुढ़क गई थी।
पूनम कुछ समझ नहीं पा रही थी यह क्या हो रहा है।
फिर भी वो इतना तो समझ गई थी कि मैं उसके साथ मज़ाक कर रहा हूँ।
उसने सोफे के पास एक छड़ी पड़ी देखी तो उसको उठा कर मुझ को मारने के लिए दौड़ी और मैं भी दौड़ कर बाहर निकल गया।
अब वो मेरे पीछे भाग रही थी और मैं छुपने की जगह तलाश रहा था। फिर मैं एक खुले दरवाज़े में घुस गया और वहाँ छुप गया।
पूनम ढूंढती हुई जैसे ही उस कमरे में घुसी, मैंने उसको पीछे से अपनी बाहों में दबोच लिया, मेरा खड़ा लंड उसकी गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था और वो कसमसा कर छूटने की कोशिश कर रही थी।
उसके हाथ की छड़ी मैंने अब अपने हाथ में ले ली थी और बोला- हिम्मत है तो छूट के दिखा पुन्नो?
पूनम बहुत ज़ोर लगा रही थी लेकिन मेरी भी पकड़ ठाकुरों वाली थी सो आसानी से छूटने वाली नहीं थी।
मेरा लौड़ा तो आदतन खड़ा ही था तो उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी गांड में घुसने की कोशिश में था।
इस पकड़ा पकड़ी में मेरा लंड बहुत ही अकड़ गया था तो मैं बिना कुछ सोचे समझे ही उसकी साड़ी पीछे से ऊपर उठाई और अपने लौड़े को पैंट से निकाल कर उसकी फूली हुई चूत में घुसेड़ दिया।
लौड़ा अंदर जाते ही पूनम का मुंह मेरी तरफ हुआ और मैंने झट से अपना मुंह उसके मुंह से चेप दिया, उसकी कमर को कस कर पकड़ कर मैं धीरे धीरे से लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगा।
जैसे जैसे लंड की गर्मी चूत में जा रही थी वैसे वैसे ही पूनम ढीली पड़ती जा रही थी। 
अब मैंने उसको पलंग के किनारे पर हाथ टेक कर खड़ा कर के पीछे से धुआँ धार चुदाई शुरू कर दी। मेरा लंड अब पूनम की चूत से पूरा वाकिफ हो गया था, वो उसकी हर हरकत को पहचान गया था।
थोड़ी देर में पूनम एकदम अकड़ी और फिर काफी ज़ोर से कांपी और बेड पर अपना सर रखने लगी।
मैंने उसको अपनी तरफ मोड़ा और उसके लबों पर एक गहरा चुम्बन दे दिया, वो और भी सब लड़ाई भूल कर मेरे को टाइट जफ्फी डाल कर मेरे गले में झूल गई।
फिर हम दोनों संयत हो कर बैठक में लौटे। 
और हम को देखते ही कम्मो समझ गई कि चूत चुदाई हो गई है।
पूनम मुझको छोड़ कर सीधे ही कम्मो की गोद में बैठ गई। मैं भी कम्मो की गोद में बैठने की ज़िद करने लगा और फिर हमारी धींगा मस्ती शुरू हो गई जो उम्मीद के अनुसार बिस्तर पर खत्म होनी थी सो वो वहीं ख़त्म हुई।
आज कम्मो काफी खुश लग रही थी, जब मैंने पूछा- क्या बात है?
तो वो बोली- तुम दोनों की लड़ाई देख कर मन बड़ा प्रसन्न हो रहा है। बड़े दिनों बाद इस कोठी में यह हंसी ठट्ठा हो रहा है।
मैं बोला- हाँ कम्मो, तुम शायद ठीक कह रही हो। बड़े दिनों बाद ऐसी लड़की मिली है जो बहुत ही शरारती और चुलबुली है। यह वाकयी में एक मनमोहक लड़की है, जिस घर में जायेगी वहाँ यह तूफान पैदा कर देगी।
कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, आप ठीक कह रहे हो। 
मैं बोला- सोचो ज़रा देर सोचो की बाग़ में आम खाने गई और अपनी चूत फड़वा आई। वाह वाह… क्या बात है पूनम के चाँद की! 
पुन्नो बोली- हाँ हाँ, कह लो जितना कह सकते हो। अपना नहीं देखते जब भी बाहर निकलते हो अपना बलात्कार करवा कर आते हो?
यह सुन कर मैं और कम्मो बड़े ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे.
मैं बोला- तभी मैं कहूँ, वो ससुर रिक्शा वाला भी पूछ रहा था कि सब ठीक है न कहीं बलात्कार तो नहीं हुआ तुम्हारा आज बबुआ?
यह सुन कर पुन्नो और कम्मो बहुत हंसी।
अब मैं अपने बैडरूम में आ गया और कपड़े उतार कर सोने की तैयारी में लग गया।

इतने में पूनम भी आ गई और मुझको नंगा लेटा हुआ देख कर ज़ोर ज़ोर से तालियाँ बजाने लगी- सोमू की शेम शेम… शेम शेम… नंग धडंग लेटा है बेशर्म कहीं का! तुझको मालूम नहीं माँ बहन का घर है कपड़े पहन कर लेटते हैं?
मैं नकली हैरानी में बोला- किधर हैं माँ बहन? कहाँ हैं वो दोनों देखूँ तो सही?
पूनम बोली- आ रहीं हैं, अभी तुम्हारे कान पकड़ती हैं।
इतने में कम्मो अंदर आ गई और मुझ को नंगा लेटे देख कर वो तो हंस पड़ी लेकिन पूनम बोली- देखिये ना सासू जी, यह आपका छोरा तो नंग धड़ंग बेशर्म हो कर लेटा है?
कम्मो हँसते हुए बोली- तो बहु, तुम भी नंग धड़ंग उसके संग लेट जाओ। तुम नहीं लेटोगी तो मैं लेट जाऊँगी।
यह कह कर कम्मो भी अपने कपड़े उतारने लगी और नग्न होकर वो मेरे ही पलंग पर आकर लेट गई और मेरे खड़े लंड के साथ खेलने लगी।
यह देख कर पूनम के मुंह पर ताला पड़ गया लेकिन वो भी पक्की ठकुराईन थी, वो भी जल्दी से अपने कपड़े उतार कर मेरे दूसरी तरफ आकर लेट गई।
मैंने भी कम्मो के मुम्मों को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में उसकी चूत में ऊँगली से उसकी भग को भी दबा रहा था।
यह देख कर पूनम अब मेरे लौड़े को पकड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन उस पर तो कम्मो ने कब्ज़ा जमाया हुआ था।
पूनम को जब और कुछ नहीं सूझा तो वो मेरे मुंह पर अपना मुंह रख कर मुझको चूमने लगी, मैं भी उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी और उस को गोल गोल घुमाने लगा।
फिर मैंने कम्मो को कहा- कम्मो, तुम आज पूनम को चुदाई की थोड़ी ट्रेनिंग दे दो। कैसे क्या करते हैं यह उसको पूरा मालूम होना चाहिये ना!
कम्मो बोली- ठीक है, पूनम तुम मेरी इस तरफ आ जाओ!
जब पूनम कम्मो की दूसरी साइड में चली गई तो मैं तब कम्मो के मुम्मे चूसने लगा, उसकी बालों से भरी चूत पर हाथ फेरने लगा और फिर उसके एकदम स्पाट पेट पर अपने हाथ फेरने लगा।
कम्मो का जिस्म बहुत ही सुंदर ढंग से तराशा हुआ एक मुजस्मा लग रहा था हालांकि उम्र के हिसाब से वो हम सबसे बड़ी थी। उसके शरीर के सारे अंग एक साँचे में ढले हुए लग रहे थे, उसके सामने पूनम का शरीर अभी एक किशोर बालिका के समान ही लग रहा था।
आज जब मैं कम्मो के बारे में सोचता हूँ तो मुझे खजूराहो के मंदिरों में तराशी हुई सुन्दर स्त्रियों के समान उसका बदन लगता है।
कम्मो इस बीच पूनम को मस्त करने में लगी हुई थी, उसके मुम्मों को चूसने के बाद वो उसके पेट से होती हुई उसकी चूत पर जा कर रुक गई।
कम्मो पूनम की चूत को चाटने लगी, पहले धीरे धीरे से उसने उसकी चूत के उभरे हुए लबों को चूमा और फिर जीभ का तिकोना बना कर उसने उसकी चूत के अंदर डाली और उसको गोल गोल घुमाई।
वहाँ से वो उसके भग पर आ गई और उसको जीभ से पहले हल्के से चाटा और फिर उसको होटों के बीच लेकर चाटने लगी।
यह करते ही पूनम की कमर एकदम ऊपर उठ गई और मैंने मौका देख कर उसके गोल छोटे मुम्मों को अपने मुंह में ले लिया और उनको और उनके चुचूकों को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा।
इस डबल अटैक से पूनम एकदम बड़ी ज़ोर से झड़ गई और उसकी दोनों गोल सफ़ेद झांगें कम्मो की गर्दन के इर्द गिर्द लिपट गई और उसके चेहरे को उन्होंने जकड़ लिया और साथ ही वो बहुत तीव्र कंपकंपी महसूस करने लगी।
मेरे भी सर को भी उसने अपनी छाती के साथ जोड़ दिया और फिर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।
देखते देखते ही वो एकदम ढीली पड़ गई.
तब कम्मो मेरी तरफ मुड़ी और पूनम की चूत के रस से भीगा हुआ मुंह उसने मेरे मुंह से जोड़ दिया और मेरी जीभ को चूसने लगी।
पूनम की चूत की भीनी खुशबू मेरे मुंह में भी आ गई और जैसे सांड मुंह ऊपर उठा कर गाय की चूत के रस को सूंघता है वैसे ही मैं भी सूंघता हुआ कम्मो के ऊपर चढ़ गया।
कम्मो की टांगें हवा में लहरा उठी अब मेरी चुदाई का पहला दौर शुरू हुआ। 
कम्मो की चूत की हर हरकत से मैं वाकिफ था और वो लंड के सब थपेड़े झेल चुकी थी इसलिए उसने आँखें बंद कर आनन्द लेना शुरू कर दिया।
क्योंकि यह लंड चूत का तमाशा पूनम के लिए खास तौर से आयोजित किया जा रहा था तो उसको इस खेल की हर चाल दिखानी ज़रूरी थी।
अब मैं पलंग पर बैठ गया और बगैर लंड को अलग किये मैंने उसको अपनी गोद में ले लिया और अब मैंने बैठ कर लंड घिसाई का कार्य शुरू किया।
थोड़ी देर इस पोज़ में चोदा कम्मो को, फिर कम्मो को इशारा किया और मैं लेट गया, कम्मो मेरे ऊपर आ गई बिना चूत लंड को अलग किये।
थोड़ी देर इस पोज़ में अपने करतब दिखाए पूनम को… फिर मेरे इशारे पर कम्मो घोड़ी बन गई और मैंने उसको इस पोज़ में खूब ज़ोर ज़ोर से चोदा। जब वह 2-3 झड़ गई तो मैंने उसको आखिरी बार फुल स्पीड से चोदा।
अब मैंने पूनम को इशारा किया तो वो भी कम्मो के साथ घोड़ी बन कर कम्मो के साथ बैठ गई।
मैंने कम्मो के ऊपर चढ़े हुए ही पूनम की चूत में हाथ लगाया तो वो अत्यंत गीली हो चुकी थी, मैं कम्मो की घोड़ी को रोक कर पूनम की घोड़ी पर जा बैठा।


पूनम को काफी देर मैंने इस तरह चोदा और उसने खुद कहा- सोमू, मैं थक गई हूँ प्लीज बस करो।
मैंने कहा- सच्ची में थक गई हो क्या?
पूनम बोली- सोमू, हाँ सच्ची में थक गई हूँ!
मैं बोला- कसम खाओ कि आगे से कभी नहीं छेड़ोगी मुझको?
पूनम बोली- कसम से… कभी नहीं छेड़ूंगी।
मैं बोला- चलो माफ़ किया इस ठकुराईन को, एक बार और छूटा ले ना अगर मन हो तो?
पूनम बोली- नहीं ना… अब और नहीं।
यह सुन कर मैंने एक आखिरी राउंड धक्कों का मारा और नीचे उतर गया।
कम्मो ने हमारे लिए शर्बत तैयार किया हुआ था, वो पी कर हम तीनों एक दूसरे की बाहों में सो गए।
कॉलेज में मिली नई दोस्त चूतें





अगले दिन कॉलेज में हम दोनों ने अपने नाम भी लिखवा दिए और पैसे भी जमा करवा दिए।

अगले हफ्ते का प्रोग्राम बना था जिसमें रात को ट्रेन से दिल्ली जाना था और एक दिन और रात दिल्ली रहना था, और अगली सुबह बस से आगरा के लिए निकलना था, वो रात आगरा में रहना था और फिर लखनऊ की वापसी थी।

मैं सोच रहा था कि मैडम साथ है तो शायद चुदाई का मौका ही न मिले पूनम या फिर किसी और लड़की के साथ!

लेकिन मेरा इस बात पर कोई बस नहीं था।

अगले दिन मैडम ने दिल्ली, आगरा जाने वाले लड़कों और लड़कियों की मीटिंग बुलाई जिसमें उन्होंने पूरा कार्यक्रम समझा दिया, यह भी बता दिया कि 2 फर्स्ट क्लास के कूपे में लड़कियाँ रहेंगी और लड़के भी इसी तरह लड़कों के लिए तय कूपे में रहेंगे।

मैंने जाने वाली लड़कियों की तरफ ध्यान से देखा, सब अच्छे घरों की लग रही थी और उनमें से मैं किसी को भी नहीं जानता था।

मीटिंग खत्म होने पर 2 लड़कियाँ मेरी तरफ आ रहीं थी, मैं रुक गया, एक लड़की बोली- क्या तुम ही सोमू ठाकुर हो?

मैं हैरानी से बोला- जी हाँ मैं सोमू हूँ, बोलिए क्या सेवा कर सकता हूँ आपकी?

तब वो लड़की मुस्कराते हुए बोली- सेवा वेवा नहीं करवानी है, बस तुम से मिलना था सो पूछ लिया। अगर खाली हो तो कुछ समय के लिए कैंटीन में आ सकते हो क्या?

मैं बोला- कोई खास काम है क्या?

वो लड़की फिर बोली- नहीं कोई खास काम नहीं था, बस सोचा कि ट्रिप पर जाने वाले लड़के लड़कियों के साथ थोड़ा परिचय कर लिया जाए!

मैं बोला- ज़रूर, चलें क्या?

उन्होंने सर हिला दिया और मैं और पूनम उन के साथ चलने लगे।

कैंटीन पहुँच कर उन्होंने अपना परिचय दिया, भरे निस्म वाली गोरी लड़की जो सलवार कमीज़ में थी उसका नाम जसबीर था और उसके साथ वाली लड़की जो थोड़ी लम्बी और गंदमी रंग वाली थी, उसका नाम नेहा था।

मैंने कहा- आप दोनों से मिल कर बड़ी ख़ुशी हुई, मेरे साथी लड़की का नाम है पूनम और मेरा नाम तो आप जानती ही हैं।

हम सबने कोकाकोला पिया और फिर बातें होने लगी।

वो दोनों ही इंटर के दूसरे वर्ष में थी यानि हम दोनों से एक वर्ष आगे थीं।

फिर जसबीर बोली- क्या आप दोनों साथ साथ रहते हैं?

पूनम बोली- जी हाँ, मैं कुछ दिनों से इनकी कोठी में ही रह रही हूँ और सोमू मेरे कजिन हैं।

जसबीर बोली- वो क्या है कि हम चाहती थी कि सोमू जी से ट्रिप पर जाने से पहले दोस्ती कर लें तो शायद ठीक रहेगा।

मैं बोला- वह तो ठीक है लेकिन इतने लड़कों से सिर्फ मुझको दोस्ती के लिए चुनना कुछ अजीब लग रहा है, क्यों पूनम? 

पूनम चुप रही लेकिन मैं बोला- चलो ठीक है हम दोनों को आपकी दोस्ती कबूल है! और हुक्म दीजिये?

अब नेहा बोली- सोमू तुम्हारे बारे में हमने बहुत कुछ सुन रखा है, हम चाहती हैं कि आप दोनों हमारे जिगरी दोस्त बन जाएँ तो अच्छा हो।

मैंने पूनम की तरफ देखा और बोला- आप दोनों कहाँ रहती हैं लखनऊ में?

नेहा बोली- आपकी कोठी के पास मेरा बंगलो है और उससे थोड़ी दूर जसबीर रहती है।

मैं बोला- अगर आप फ्री हों तो आज या कल हमारे गरीबखाने आ जाएँ तो खुल कर बातें हो सकती हैं।

जसबीर बोली- ठीक है, हम आप को बाद में बता देती हैं कि आज या कल का प्रोग्राम बन सकता है।

मैं बोला- ठीक है आज जाने से पहले बता दीजियेगा।

अगले दिन मैं पूनम क्लास के बाहर खड़े थे क्यूंकि प्रोफेसर साहिब नहीं आये थे तभी देखा जसबीर और नेहा आ रही थी।

मैं बोला- ठीक है आप आ जाओ, आप लंच करना चाहेंगी मेरी कोठी में?

नेहा बोली- नहीं लंच हम कर के आएँगी। आप दोनों गेट के पास मिल जाना तो मैं आपको अपनी कार में ले जाऊँगी। ओके?

कॉलेज की छुट्टी पर हम सब नेहा की कार में बैठ कर मेरी कोठी में पहुँच गए।

कम्मो को मैंने पहले ही फ़ोन कर दिया था सो वो नाश्ता इत्यादि टेबल लगा कर बैठी हुई थी।

हम सब बैठक में बैठ गए और कम्मो और पूनम ने नाश्ता प्लेट्स में लगा दिया।

नाश्ता और चाय पीने के बाद हम सब बैठक में सोफों पर आ बैठे और हलकी फुल्की बात चीत शुरू हो गई।

फिर मौका देख कर मैंने बात छेड़ी- हाँ, अब बताओ जस्सी जी और नेहा जी, आपका क्या प्रोग्राम है?

जस्सी ही बोली- ऐसा है सोमू यार, हम को तुम्हारे बारे में उड़ती हुए खबर लगी थी कि आप काफी रोमांटिंक हो और नैनीताल ट्रिप में आपने कुछ लड़कियों को काफी एंटरटेन किया था। इसी लिए हमने सोचा कि अगर आप हमारे दोस्त बन जाओ तो यह 3-4 दिन का बोरिंग ट्रिप अच्छा निकल जाएगा और हम एक दूसरे को काफी एंटरटेन कर सकेंगे। क्यों तुम्हारा क्या विचार है?

मैं बोला- आपने जो उड़ती हुए खबर मेरे बारे में सुनी, वो तो काफी हद तक ठीक है और मैं इस से इंकार नहीं करता लेकिन इसको दुबारा रिपीट करना क्या ठीक होगा?

अब नेहा बोली- मुझको जान कर ख़ुशी हुई सोमू कि तुम काफी फ्रैंक हो और हमारी बात को इतनी जल्दी समझ गए हो। दरअसल हमारी इच्छा थी कि हम तुम्हारे दोस्त बन जाएंगे तो हमें भी एक दूसरे को एंटरटेन करने का मौका मिल जाएगा।

मैं बोला- आप दोनों ने अपनी बात बड़े अच्छे ढंग से रख दी है, अगर आपको नैनीताल ट्रिप के बारे में पता चला है तो यह भी पता चल गया होगा कि वहाँ क्या हुआ था?

जस्सी बोली- वही तो सुन कर हमको काफी अचरज हुआ लेकिन फिर सोचा शायद वो लड़कियाँ जानबूझ कर बात बहुत बढ़ा चढ़ा कर बता रही हैं तो हम खुद इसको आज़माना चाहती हैं।

मैं अब हँसते हुए बोला- यानि आप को पूरा ज्ञान है कि मेरे से दोस्ती का मतलब क्या है और आप दोनों उसका अनुभव स्वयं करना चाहती हैं।

अब जस्सी और नेहा दोनों ही मुस्करा पड़ी।

मैंने पूनम की तरफ देखा और कहा- यह मेरी कजिन पूनम है जो मेरे साथ ही मेरी क्लास में पढ़ने के लिए आई है और मेरे साथ ही रह रही है और यह भी दिल्ली आगरा ट्रिप में जा रही है, आप दोनों कृपा करके इससे पूछ लीजिये कि क्या आपसे दोस्ती इनको बर्दाश्त होगी?

जस्सी ने पूनम से पूछा- क्यों पूनम, तुम्हारी क्या राय है हमारे साथ दोस्ती के बारे में?

पूनम बोली- मुझको तो आपके साथ दोस्ती करके बहुत ही ख़ुशी होगी। आप दोनों मुझ से बड़ी हैं और शहर की रहने वाली है तो आपकी दोस्ती से मुझको काफी फायदा होगा लेकिन यह नैनीताल ट्रिप के बारे में मुझको कुछ खास नहीं पता! हाँ, इतना जानती हूँ कि इस ट्रिप में सोमू का रेप हुआ था, शायद 3-4 लड़कियों ने इसके साथ ज़बरदस्ती की थी! क्यों सोमू? 

मैं और वो दोनों भी ज़ोर से हंस पड़ी।

जस्सी बोली- क्यों सोमू यह सही है क्या? उन 4 लड़कियों ने तुम्हारा रेप किया था?

मैं नकली गुस्से में बोला- हाँ, किया तो था लेकिन अगले दिन उनमें से दो फिर आ गई थी मेरा रेप करने के लिए लेकिन मैंने मना कर दिया।

अब जस्सी बोली- उफ़, मेरी माँ… लेकिन तुमने मना क्यों किया?

मैं बहुत ही संजीदा होते हुए बोला- मैंने उन दो को साफ़ कह दिया कि मैं सिर्फ 2 लड़कियों से रेप नहीं करवाता अगर करवाना ही है तो कम से कम 4 लड़कियाँ होनी चाहिए?

जस्सी और नेहा तो हंसी के मारे लोटपोट हो गई।

मैं उसी टोन में फिर बोला- अब आप सिर्फ दो लड़कियाँ हैं तो मेरा रेप होना तो मुश्किल है।

जस्सी बोली- क्या आप चाहते हों कि हमारे ग्रुप में 2 लड़कियाँ और हों तो काम बनेगा?

मैं बोला- नहीं नहीं, मैंने यह नहीं कहा, यह तो सिर्फ मज़ाक की बात हो रही है, वैसे पूनम को मिला कर आप 3 लड़कियाँ तो हैं इस ग्रुप में तो मेरा रेप तो आप कभी भी कर सकती हैं?

नेहा बोली- क्या अभी भी हो सकता है तुम्हारा रेप सोमू?

मैं मज़ाक की टोन में बोला- रेप करवाने वाला तो अभी भी बैठा है लेकिन रेप करने वाली लड़कियाँ भी तो होनी चाहये ना?

अब जस्सी और नेहा की सूरत देखने वाली थी, दोनों शर्म से लाल हो रही थी।

इतने में कम्मो कमरे में दाखिल हुई, कम्मो ने आते ही बोला- कौन किस का रेप कर रहा है?

मैंने कम्मो का परिचय दिया- यह कम्मो जी हैं, यह इस घर की मालकिन है और इस घर को चलाने का सारा ज़िमा इनका है। मैं इन लड़्कियों को बता रहा था कि नैनीताल में क्या हुआ था? मेरा रेप हुआ था लेकिन मैंने तभी प्रण किया था कि कम कम से तीन या चार लड़कियाँ होंगी तभी रेप करवाऊंगा नहीं तो नहीं!

कम्मो बोली- हाँ, कम से कम इतनी तो होनी ही चाहिए न।

जस्सी और नेहा बेचारी सर नीचे कर के बैठी थी।

तब पूनम ने दोनों लड़कियों से पूछा- अच्छा बताओ क्या आप दोनों सोमू का रेप करना चाहती हैं?

जस्सी बोली- करना तो चाहती हैं लेकिन हम तो सिर्फ दो ही हैं न सो कैसे सोमू का रेप कर सकती हैं?

पूनम बोली- आप घबराओ नहीं, मैं आपके साथ मिल जाती हूँ और फिर हम तीन बदमाशों से कहाँ भाग के जाएगा सोमू?

यह सुनते ही नेहा और जस्सी की बांछें खिल उठीं।

जस्सी बोली- सच्ची पूनम तुम हमारे साथ मिल जाओगी? वेरी गुड! सोमू अब तैयार हो जाओ तुम लखनऊ की तीन गुंडियों से नहीं बच सकते? हम तीनों तुमको नहीं छोड़ेंगी।

कम्मो और मैं उनकी बातें सुन कर बहुत हंस रहे थे।

मैं बोला- बस तीन ही सिर्फ? कम से कम चार तो ढूंढ के लाओ!

कम्मो बोली- छोटे मालिक, ज़्यादा ताव मत दिलाओ, नहीं तो गुंडों की सरदार भी इनके साथ मिल जायेगी?

मैं थोड़ा चकराया- यह गुंडों की सरदार कौन है जी? और कहाँ से आ रही है? हम भी तो देखें?

कम्मो अपनी छाती ठोक कर मैदान में आकर खड़ी हो गई, तीनों छोटी गुंडियाँ भी दौड़ कर अपने सरदार के साथ आ कर खड़ी हो गई।

मैं थोड़ा घबराया तो सही लेकिन फिर हिम्मत करके एक ज़ोर की दहाड़ लगाई- यह एक शेर की गर्जना है जिससे बड़े बड़े गुंडे बदमाश भी थर थर कांपते हैं! है कोई माई की लाली जो इस भूखे शेर के सामने टिक सके?

तभी चारों लड़कियाँ एकदम से मुझ पर झपट पड़ी और मुझको दबोच लिया और मुझको उठा कर मेरे वाले बैडरूम में ले गई।

मैं मन ही मन सोच रहा था कि या खुदा अब मेरे लौड़े का बचना मुश्किल है, चार चार गुंडियाँ सोमू का हरण करके ले जा रही हैं, कोई बचाये तो सही!

मेरे कमरे में पहुँचते ही सबने मिल कर मुझको निर्वस्त्र कर दिया और नेहा और जस्सी ने जब मेरा मोटा और लम्बा खड़ा लंड देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गई।

उस धींगा मुष्टि में जस्सी ने मेरे लौड़े को अपने हाथ में पकड़ लिया और नेहा ने भी उसको अपने हाथों में ले लिया।
फिर मैं उनके हाथों से छूट कर नेहा की साड़ी को उतारने लगा और बाकी की गुंडियाँ भी इस काम में मेरी मदद करने लगी।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

नेहा जब नंगी हुई तो उसके मुम्मे देख कर हम सब को बड़ा आनन्द आया क्यूंकि वो एकदम गोल और मोटे थे और बिल्कुल सॉलिड थे ज़रा भी उनमें लटक नहीं आई थी।
उसके बाद बारी आई जस्सी की, वो भी नंगी होने पर बहुत ही खूबसूरत लगी, उसके मम्मे भी मोटे और सॉलिड थे लेकिन उसकी ख़ूबसूरती दिख रही थी उसके गोल और सॉलिड लेकिन उभरे हुए चूतड़ों में थी!
क्या चीज़ थे यार… वो तो गोल गोल और उभरे हुए थे।
अब बारी थी पूनम की और उसको भी जल्द ही नंगी कर दिया गया और उसके बाद मैंने कम्मो को भी निर्वस्त्र कर दिया।
चार गुंडियों में अकेला लंडबाज़ और वो भी रेप के लिए तैयार किया जा रहा था।
जब सब मेरे लंड को सहलाने में लगी थी तो मैं उनसे बचने के लिए भाग उठा और भाग कर रसोई में चला गया जहाँ पारो मुझ को नंगा देख कर हैरान हो गई और जब मैंने उसके सामने चिल्लाना शुरू किया कि ‘बचाओ मुझको…’ तो उसने बेलन उठा लिया और मेरे साथ रसोई के बाहर आ गई और बोली- कौन है जो छोटे मालिक को तंग कर रहा है?
और जब उसने चार नंगी औरतों को देखा तो वो समझ गई और वो ज़ोर से बोली- खबरदार किसी ने भी छोटे मालिक को हाथ भी लगाया, काट के रख दूंगी।
और मैं जल्दी पारो के मोटे चूतड़ों के पीछे छुप गया और मेरा खड़ा लंड उसकी गांड में घुसने की कोशिश करने लगा।
अब कम्मो ने पारो को भी पकड़ा और बाकी मुझको पकड़ कर हम दोनों को कमरे में ले आये और सबसे पहले कम्मो ही पारो की साड़ी उतारने लगी और पूनम और नेहा भी उसको नंगी करने में लग गई।
वो बोलती रही- यह क्या कर रहे हो मेरे साथ? मेरे कपड़े क्यों उतार रही हो? 
लेकिन कौन सुनता उसकी गुहार… थोड़ी देर में वो भी नंगी हो गई और वो भी गुंडियों की पार्टी में शामिल हो गई और उसने भी मुझको घेर लिया।
अब कम्मो ने कहा- सब मेरी बात ध्यान से सुनो। सबसे पहले छोटे मालिक को लिटा दो पलंग पर और फिर सबसे पहले जस्सी उसके ऊपर चढ़ कर चोदेगी, उसके बाद नेहा और फिर पूनम की बारी है। मैं और पारो बाद में देख लेंगी।
यह सुन कर सबसे पहले दौड़ कर जस्सी मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे खड़े लंड को अपनी बालों से भरी चूत में डाल दिया।
और कम्मो ने उसकी कमर को पकड़ कर उसको ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया।
मैंने जस्सी के गोल मुम्मों के साथ खेलना शुरू कर दिया और पूनम ने नेहा के सुन्दर मुम्मों को चूसना शुरू कर दिया और पारो पूनम के मुम्मों को अपने हाथ से छूने लगी।
मैं मुंह बना रहा था लेकिन मुझको जस्सी की चूत एकदम टाइट और गीली लगी, मुझको उसको चोदते हुए बड़ा आनन्द आ रहा था।
जल्दी ही जस्सी लंड के धक्कों से छूटने के कगार पर पहुँच चुकी थी और वो बगैर किसी की मदद के अब अपने आप ऊपर नीचे हो रही थी और शीघ्र ही वो हाय हाय करती हुए झड़ गई।
कम्मो ने उसको उसकी मर्ज़ी के खिलाफ मेरे ऊपर से उठा लिया और नेहा को ऊपर आने के लिए कहा।
अब नेहा मुझको चोद रही थी और मैं उसके बहुत ही सेक्सी मुम्मों से खेल रहा था।
पारो भी अब नेहा के मम्मों को चूसने लगी और पूनम मौका देखते ही मेरे अंडकोष को सहला रही थी और उनकी टाइटनेस से बड़ी प्रभावित हो रही थी, वो मुझको लिप्स पर चूम रही थी और मैं उसके भी मोटे मुम्मों से बड़ा आनन्दित हो रहा था।
मुम्मों की गोलाई और मोटाई के मामले में इस वक्त नेहा एक नंबर पर थी और पूनम नंबर 2 पर थी। कम्मो और पारो के मुम्मे बहुत सॉलिड और बड़े थे लेकिन अब वो कन्या नहीं थी तो इस गिनती में नहीं आती थी।
जस्सी के मुम्मे हालाँकि छोटे ज़रूर थे लेकिन सॉलिड और सीधे अकड़े हुए थे और बन्दूक की नल्ली की तरह उसके चुचूक एकदम खड़े थे।
इन सब में से गांड के हिसाब से जस्सी एक नंबर पर थी और पूनम दो नंबर पर थी।
कम्मो बड़े ध्यान से मुझको देख रही थी कि मैं कहीं थक तो नहीं रहा और नेहा ने जब ऊपर से ज़ोर ज़ोर से और जल्दी धक्के मारने शुरू किये तो मैं समझ गया कि उसकी भी टाइट चूत में से भी अमृत जल निकलने वाला है।
पांच मिन्ट के बाद वो झड़ गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से पसर गई।
जब वो कुछ संयत हुई तो वो मुझको बेतहाशा चूमने लगी और मेरे सारे मुख को चूम चूम कर गीला कर दिया और कम्मो ने झट मेरा मुंह साफ़ कर दिया और नेहा की जगह पूनम को बुला लिया और कहा- चढ़ जा पूनम सूली पर!
लेकिन पूनम ने कहा- अभी नहीं, हम तो रात को भी अपना काम कर सकते हैं।
कम्मो बोली- छोटे मालिक, आपका रेप हो चुका है, आप उठ जाओ अगर चाहो तो!
मैं नकली गुस्से में बोला- कैसे उठ जाऊँ गुंडियों की रानी, जब तक तुम्हारी ना ले लूँ तो कैसे उठ जाऊँ बोलो तो? और फिर इस पुलिस वाली का क्या करें? वो साली भी तुम सबसे मिल गई थी, जब तक तुम दोनों को सज़ा नहीं दे लेता मैं कहीं भी जाने वाला नहीं।
यह सुन कर कम्मो और पारो हंसने लगी।
कम्मो बोली- छोटे मालिक, हम दोनों गुंडियों को सजा रात को दे देना लेकिन इन नई गुंडियों को तो जाने दो, बेचारियों को घर जाने में बहुत देर हो रही है और टाइम भी काफी हो गया है।
मैं बोला- अच्छा पहले यह दोनों कसम खाएँ कि ये दिल्ली आगरा ट्रिप में मेरा रेप नहीं होने देंगी और ना ही किसी और को मेरा रेप करने देंगी।
दोनों जस्सी और नेहा ने कसम खाई और कहा- हम दोनों कसम खाती हैं कि हमारे होते हुए सिवाए हमारे कोई और सोमू को रेप नहीं कर सकता। हम जब चाहें सोमू का रेप कर सकती हैं।
पूनम झट से बोल पड़ी- ऐसे कैसे कसम खा रही हो तुम दोनों? मैं तो सोमू की कजिन हूँ और उसकी बचपन की साथी हूँ और उस पर सब से ज़्यादा हक तो मेरा है। मेरी आज्ञा के बिना कोई भी सोमू को रेप नहीं कर सकता।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

चूत चुदाई चलती ट्रेन में

लखनऊ से दिल्ली का सफर शुरु हुआ:
अगले दिन से हमने दिल्ली और आगरा के लिए तैयारी शुरू कर दी। कॉलेज में भी काफी गहमा गहमी थी इस ट्रिप के बारे में!
और जल्दी ही वो दिन भी आ गया जब हम सबने सफर पर जाना था। दिन भर कॉलेज में खूब चहल पहल रही और सब लड़के लड़कियाँ काफी उत्सुक थे।
हमारे ग्रुप में अभी भी केवल जस्सी और नेहा और इधर पूनम और मैं ही थे, दोपहर को एक और लड़की ने हमारे ग्रुप में शामिल होने की इच्छा ज़ाहिर की।
नेहा ने उसको कैंटीन में बुला लिया और हम सबको भी इकट्ठे कैंटीन में बुला लिया।
नेहा ने कहना शुरू किया- इनसे मिलो, यह डॉली है और मेरी ही क्लास में पढ़ती है। यह कह रही थी कि उसको कोई लड़कियों का ग्रुप नहीं मिल रहा जिस में वो शामिल हो सके यह हमारे पास आई है और हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है।
पूनम बोली- वैसे तो हमारे ग्रुप में हम तीन ही लड़कियाँ हैं लेकिन डॉली को ग्रुप में शामिल होने से पहले उसको सब कुछ बता दो ताकि वो सब समझ कर ही ग्रुप ज्वाइन करे। क्यों ठीक है सोमू?
मैंने हामी में सर हिला दिया।
तब नेहा और जसबीर उसको लेकर दूसरे बेंच में बैठ गई और उसको सब कुछ साफ़ समझाने लगी। ख़ास तौर से हमारे ग्रुप का उन्मुक्त व्यवहार उसको अच्छी तरह से समझा दिया।
फिर वो दोनों उसको लेकर हमारे पास आ गई और नेहा ने कहा- डॉली को सब समझा दिया है और उसको हमारे उन्मुक्त व्यवहार के बारे में भी बता दिया है और वो हमारे साथ ही हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है।
मैं बोला- ठीक है, हमको खुशी होगी कि आप हमारे ग्रुप में शामिल हो रहीं हैं। मुझको यह उम्मीद है कि आप चारों को एक ही कूपे में जगह मिल जायेगी और मुझ को शायद 2 बर्थ वाले या फिर 4 बर्थ वाले केबिन में जगह मिल जायेगी। और दिल्ली और आगरा में मैं सिंगल रूम प्रेफर करूँगा अगर मिल सका तो। इस तरह हम को एक दूसरे से मिलने में काफी आसानी रहेगी। क्यों गर्ल्स?
सबने हामी में सर हिला दिया।
हम लोगों को कॉलेज से जल्दी छुट्टी हो गई क्योंकि हमने तैयारी करनी थी। सो हम सबने स्टेशन पर मिलने का वायदा किया और अपने घर चले गए।
पूनम और मैंने खाना खाया और मैं अपने कमरे में आकर आराम करने लगा।
थोड़ी देर बाद पूनम भी आ गई, मेरे साथ ही मेरे पलंग पर लेट गई और धीरे से उसका हाथ मेरे कुर्ते के बटन से चलता हुआ मेरे लंड के ऊपर आ गया और पयज़ामे के बाहर से उसके साथ खेलने लगा।
लंड महाशय रात की मेहनत के बाद अभी थोड़ी सुप्त अवस्था में थे। मैंने पूनम की तरफ देखा, उसकी आँखों में देखा और फिर मैं समझ गया कि इसकी चूत चुदवाने के लिए ज़ोर डाल रही है।
मैं उठ कर दरवाज़ा बंद करके फिर लेट गया पूनम के साथ और फिर पूनम अपनी साड़ी थोड़ी सी अपनी टांगों के ऊपर ले आई थी और मेरा भी पायजामा खिसका कर नीचे कर रही थी।
मेरा लंड भी अब धीरे धीरे उन्मुक्त होने लगा था और मैंने पूनम की उठी साड़ी के अंदर हाथ डाल कर देखा, वो भी काफी गर्म हो रही थी।
पूनम ने स्वयं ही अपना ब्लाउज खोल दिया था और ब्रा को भी हटा दिया था तो उसके भी मम्मे उन्मुक्त हो चुके थे।
मैं भी पूनम की बालों से भरी चूत के साथ खेल रहा था और उसकी भग को भी सहला रहा था।
पूनम अब और इंतज़ार किये बगैर मेरे ऊपर अपनी साड़ी को समेट कर बैठ गई और अपने एक खाली हाथ से उसने मेरा लंड को चूत के अंदर डाल दिया और धीरे धीरे से ऊपर नीचे होने लगी।
यदा कदा मैं भी नीचे से धक्का लगा देता था और आहिस्ता आहिस्ता चूत और लंड की लड़ाई तेज़ होने लगी। 
मेरे धक्के तेज़ी पकड़ने लगे और फिर जब यह महसूस हुआ कि पूनम की चूत में कम्पन शुरू हो रहा है तो मैंने अपने धक्के बहुत ही तीव्र कर दिए और आखरी पड़ाव पर पहुँच कर मेरे धक्के एक रेल के इंजन की तरह तेज़ी से अंदर बाहर होने लगे थे, लंड एकदम लाल हो रहा था और उसका गुस्सा चूत को भी महसूस हो रहा था और उसने अपनी आदत के मुताबिक खुलना बंद होना शुरू कर दिया था।
पूनम एक लम्बी सांस लेकर मेरे ऊपर से नीचे आ गई और मैंने उससे पूछा- क्यों ठकुराइन, अभी और ताश का पत्ता फेंकूं या फिर अभी और नहीं?
पूनम बोली- बस करो मेरे प्यारे ठाकुर, फिर कभी देखेंगे तुम्हारी पूरी ठकुराई।
फिर हम एक दूसरे की बाँहों में बंध कर सो गए।
रात को हम सब लड़के लड़कियाँ स्टेशन पर मिले।
वहाँ दोनों मैडमों की मदद के लिए मुझको और एक दूसरी लड़की को नियुक्त किया गया।
हम दोनों ने तय किया कहाँ लड़के बैठेंगे और कहाँ लड़कियाँ बैठेंगी। अपनी 4 फ्रेंड्स को एक केबिन दे दिया और इसी तरह बाकी की चार लड़कियों को दूसरे केबिन में एडजस्ट कर दिया और बाकी बची 2 लड़कियों को दो सीट वाले कूपे में बिठा दिया।
इसी तरह लड़को को भी 4-4 वाले 2 केबिन और बाकी को 2 वाले में बिठा दिया, मैडमों को भी एक 2 वाले कूपे में एडजस्ट कर दिया।
जब गाड़ी चली तो खूब बाय बाय हुई और फिर मैं और वो दूसरी लड़की जिसका नाम रेनू था अपनी अपनी बर्थ पर बैठ गए।
थोड़ी देर बाद जब टी टी आया तो सारी टिकट्स दिखा दीं और सारे कूपे भी चेक करवा दिए।
फिर मैं और रेनू ने जाकर मैडमों को बता दिया कि सब ठीक से बैठ गए हैं और टी टी ने भी सब चेक कर लिया है।
गाड़ी सुबह 8 बजे दिल्ली पहुँचने वाली थी तो अब मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ जाकर बैठ गया। नेहा ने साड़ी, जस्सी ने सलवार सूट, पूनम ने साड़ी और डॉली ने भी सलवार सूट पहना था।
हम सब में सिर्फ डॉली ही नई थी तो पहले तो वो मुझसे कुछ झिझक रही थी लेकिन धीरे धीरे वो हम सब से वाकिफ हो गई।
मैंने सबसे पहले केबिन को लॉक किया ताकि कोई बाहर से ना आ सके।
अब सब लड़कियों खुल कर बातें करने लगी और नेहा और जस्सी ने डॉली को पिछले दिन हुई हमारी सेक्स कहानी भी बता दी और डॉली से पूछा कि अगर वो चाहे तो कार्यवाही उसी से शुरू करेंगी वो सब!
डॉली कुछ नहीं बोली लेकिन मैं समझ गया कि वो अभी झिझक रही है तो सबसे पहले सारी लड़कियाँ उठ कर मेरे पास आईं और मुझको बहुत ही हॉट किस की लबों पर!
और मैंने भी उनके चूतड़ों को सहला दिया और जस्सी के तो मम्मों को भी दबा दिया।
फिर पूनम उठ कर मेरी गोद में आकर बैठ गई और मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया, यह देख कर जस्सी और साथ में नेहा भी मुझ से आकर लिपट गई लेकिन डॉली अभी भी शरमा रही थी।
हम सब डांस करते हुए डॉली के पास गए और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने पास खींच लिया और उसके मोटे गोल मुम्मों को छूने लगा और पूनम उसके गोल उभरे हुए चूतड़ों को छेड़ने लगी।
एक ज़ोरदार चुम्मी मैंने उसके होटों पर जड़ दी और बाकी लड़कियों ने भी उसको घेर लिया और उसके जिस्म प्यार से छूने लगी।
पूनम का एक हाथ डॉली की सलवार के ऊपर से उसकी चूत पर चला गया और नेहा ने उसके चूतड़ों को मसलना आरम्भ कर दिया।
मैंने नेहा से पूछा- आप में से कौन कौन मेरा रेप करना चाहता है?
सबसे पहले नेहा और जस्सी ने हाथ उठाया और फिर पूनम ने और आखिर में डॉली ने। 
मैं बोला- नेहा, तुम फैसला करो कि कौन पहले मेरा रेप करेगा?
नेहा बोली- नई मेंबर होने के नाते तो पहली बारी डॉली की होनी चाहिए लेकिन वो शरमा रही है तो इसकी शर्म खोलने के लिये पूनम को मौका मिलना चाहिए सबसे पहले। क्यों पूनम?
पूनम बोली- नहीं, मैं तो सोमू से रोज़ चुदती हूँ तो सब से पहले जस्सी की बारी होनी चाहये क्यों जस्सी?
जस्सी बोली- ठीक है।
नेहा बोली- सेफ्टी को देखते हुए हम सबको कम से कम कपड़े उतारने चाहिएँ। साड़ी वाली को तो दिक्कत नहीं है, सिर्फ सलवार वाली को परेशानी है? 
मैं बोला- किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। सलवार वाली और साड़ी वाली, सबको सोमू पीछे से चोदेगा। ठीक है न?
सब लकड़ियाँ बोली- ठीक है, तुम पीछे से शुरू हो जाओ।
जस्सी आई और अपनी सलवार खोल कर उसको नीचे कर दिया और सीट पर हाथ रख दिया और थोड़ी झुक गई।
मैंने भी अपनी पैंट खोल कर उसको टांगों के नीचे किया और थोड़ी सी थूक लगा कर लंड पर, जस्सी की चूत में पेल दिया।
जस्सी थोड़ी गीली हो चुकी थी तो लंड एकदम फटाक से अंदर चला गया।
मैंने नेहा को इशारा किया कि सब एक दूसरे के साथ शुरू हो जाओ और एक दूसरे को खूब आनन्द दो और उनको गर्म भी कर दो।
पूनम डॉली के साथ लग गई और नेहा ने जस्सी के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए।
पूनम ने डॉली की सलवार खोल दी और उसकी सफाचट चूत में उंगली लगाने लगी और दूसरे हाथ से उसके मुम्मे दबाने लगी।
नेहा जस्सी की चूत में हाथ डाल कर उसकी भग को मसलने लगी। भग पर हाथ पड़ते ही जस्सी एकदम उछल पड़ी और स्वयं आगे पीछे होने लगी।

मैं भी धीरे धीरे शुरू हो कर गाड़ी की स्पीड से मैच करने लगा और जैसे गाड़ी के चलने की स्पीड तेज़ हो रही थी वैसे ही मैं भी अपनी स्पीड को तेज़ दर तेज़ कर रहा था। 

नेहा जो जस्सी की चूत पर ध्यान दे रही थी साथ ही उसकी चूत पर पूनम की ऊँगली भी चला रही थी। उसकी उठी हुए साड़ी में से उस की बालों भरी चूत साफ़ झलक दे रही थी और इस झलक का मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था।
मैं बार बार डॉली की सफाचट चूत को देखने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी झलक कभी मिलती थी और कभी नहीं भी मिलती थी।
अब जस्सी ने अपनी गांड जल्दी जल्दी आगे पीछे करनी शुरू कर दी थी, मैं समझ गया कि सरदारनी झड़ने वाली है, उसकी कमर को कस कर पकड़ कर मैंने गाड़ी बेहद तेज़ स्पीड पर चला दी और स्पीडी धक्कों के बाद जस्सी का छूट गया और वो मुझसे अपनी गांड जोड़ कर कंपकंपाती हुई रुक गई।
नेहा ने कहा- जस्सी का तो हो गया अब किसकी बारी है?
डॉली खुद ही बोल उठी- अब मेरी बारी है।
सबने कहा- ठीक है, चल शुरू हो जा डॉली।
मैंने कहा- डॉली के शरीर को मैंने देखा नहीं सो डॉली अपनी सलवार तो नीचे कर चुकी है अब वो अपनी कमीज भी ऊपर करे तो उस के मुम्मों के दर्शन हो जाएंगे।
नेहा ने उसकी कमीज़ ऊपर कर दी और उसकी ब्रा भी हटा दी।
सबसे पहले मैंने उसको लबों पर चूमा और फिर उसके गोल मुम्मों पर ध्यान दिया और थोड़ा उनको चूसा और उसकी सफाचट चूत को देखा भी और हाथ भी लगाया।
वो वाकयी में एकदम गीली हो चुकी थी। मैंने उसको बर्थ पर लिटा दिया और उसकी टांगों से सलवार एक पौंचा भी निकाल दिया और फिर उसकी गोरी टांगों में बैठ कर अपने खड़े लंड को उसकी चूत में धकेला।
पहले धक्के में ही लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया और डॉली के मुख से एक प्यारी सी आअहाअ निकल गई और मैं रुक गया और डॉली से पूछा- अगर दर्द हो रहा हो तो निकाल लूँ क्या?
डाली के चेहरे का रंग एकदम लाल हो गया और वो ज़ोर ज़ोर से सर हिला हिला कर नहीं नहीं कर रही थी।
सब लड़कियाँ हंसने लगी और बाद में डॉली भी हंस पड़ी।
मेरे लंड के लिए डॉली की चूत एकदम नई नकोर थी तो वो भी मज़े ले ले कर डॉली को चोद रहा था।
पूनम डॉली के उरोजों पर अटैक कर रही थी और नेहा जस्सी के मुम्मों संग खेल रही थी।
और मैं कभी स्लो और कभी तेज़ स्पीड पर धक्का धक्की में लगा हुआ था। डॉली के दोनों हाथ मेरी गर्दन में लिपटे हुए थे और उसके चूतड़ उठ उठ कर लंड मियाँ का स्वागत कर रहे थे।
वो काफी ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उको तीव्र आनन्द की अनुभूति हो रही थी।
जैसे कि उम्मीद थी, वो नए लंड के साथ पहली बार के मिलन के आनन्द को ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकी और ओह्ह करती हुई जल्दी ही झड़ गई।
उसके झड़ने के टाइम उसके शरीर में इतना तीव्र कम्पन हुआ कि नेहा और पूनम उसको पकड़ कर बैठी तब उसको कंट्रोल कर सकी।
अब नेहा की बारी थी तो मैंने उससे पूछा- ऐ मलिका ऐ आलिया कैसे चुदना पसंद करेंगी आप?
नेहा भी उसी लहजे में बोली- ऐ मेरे अदना ग़ुलाम, तुम्हारी मलिका तुम पर चढ़ाई करना चाहती है।
मैं बोला- जो हुक्म सरकारे आली, यह आपका खाविन्द आपके लिए तैयार बैठा है, हुक्म कीजिये।
नेहा खाविन्द को ख़ाकसार समझ थी पर खाविन्द का मतलब होता है पति… और मैं मन ही मन मुस्कराते हुए चुप रहा।
नेहा बोली- ऐ ग़ुलाम, हम तुम्हारा बला ए जबर (रेप) करना चाहते हैं।
मैंने सर झुका कर कहा- मलिका को पूरा अख्तियार है।
और मैं जा कर बर्थ पर लेट गया, नेहा अपनी साड़ी उठा कर मेरे ऊपर बैठ गई और लंड को अपनी चूत में खुद ही डाला।
वो भी बहुत गीली थी तो बैठते ही उसकी चूत मेरे पेट के साथ आकर जुड़ गई।
मैंने कोई धक्का मारने की कोशिश नहीं की और वो खुद ही धक्कम पेलम में लगी रही। क्योंकि वो 2 बार चुदाई देख चुकी थी सो वो भी बेहद गीली थी।
उसकी धकापेल जल्दी ही स्पीड पकड़ने लगी। मैंने उसके मुम्मों को उसके ब्लाउज के ऊपर से पकड़ा हुआ था और चुचूकों को मसल रहा था।
पूनम भी उसके चूतड़ों को सहला रही थी और जस्सी मेरे ऊपर बैठी नेहा को लबों पर चूम रही थी।
डॉली खड़े होकर पूनम के मुम्मों के साथ खेल रही थी।
हर कोई अपने काम में बिजी था सिवाए मेरे क्यूंकि मेरा लंड मेरा काम कर रहा था। 
जैसे ही नेहा को आनन्द आने लगा चुदाई का, उसने अपने धक्के तेज़ कर दिए और उसकी जांघें जो मेरे पेट से लग रही थी। अब काफी गर्म हो गई थी और मुझको महसूस हो रहा था कि वो भी जल्दी छूटने वाली है।
मैंने हुक्म के खिलाफ नीचे से ज़ोरदार धक्के मारने शुरू कर दिए और इस कोशिश में था कि नेहा जल्दी से छूटे तो मैं अपने केबिन में जाऊँ।
मुझको यह डर सता रहा था कि कहीं मैडम चेकिंग पर ना निकल पड़ें।
मैंने अब चुदाई का काम अपने हाथों में ले लिया और अपने हिसाब से स्पीड तेज़ कर दी, पूनम को इशारा किया कि वो नेहा की चूत को रगड़े और उसकी भग को सहलाये।
पूनम ने यही किया और शीघ्र ही नेहा ने चुदाई की स्पीड अपने आप तेज़ कर दी। मेरे नीचे से ज़ोर के धक्के की चूत घिसाई जल्दी ही अपना रंग लाई और नेहा एक ज़ोर की हुँकार भर कर कर धराशयी हो गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से लुढ़क गई।
लड़कियों ने मिल कर नेहा को मुझसे अलग किया और मैंने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किये और पूनम से पूछा कि क्या उसकी इच्छा है चुदवाने की?
उसने कहा- नहीं सोमू, मैं तो दिन को भी तुम्हारे साथ ही थी और तुमसे चुदी हूँ।
मैंने केबिन के बाहर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा और मैदान साफ़ देख कर मैं जल्दी से अपने केबिन की तरफ चला गया और दरवाज़ा खोल कर मैं अंदर चला गया।
मेरा साथी बड़ी गहरी नींद में सो रहा था।
मैंने घड़ी में देखा तो मुझको तीन लड़कियों को चोदने में तकरीबन एक घंटा लग गया था।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

दो लेडी प्रोफेसरों की चुदाई

हमारी ट्रेन ठीक टाइम पर दिल्ली स्टेशन पर पहुँच गई और हम सब अपना अपना बैग उठाये हुए स्टेशन के बाहर आ गए।
सिर्फ दोनों मैडमों का सामान कुली ने उठाया हुआ था।
स्टेशन के बाहर एक बस हमारे लिए खड़ी थी, उसमें सामान रख कर हम होटल पहुँच गए।
मैंने और रेनू फिर होटल में कमरे अलॉट करने का काम शुरू कर दिया। हम में से एक लड़का अपने दादा के घर में रुक रहा था तो हमारे पास 10 कमरों में सिर्फ 19 छात्र ही थे तो 2-2 छात्रों को एक एक डबल बेड रूम दे दिया और एक कमरे में सिर्फ मैं अकेला ही रह गया।
मेरी फ्रेंड्स का ग्रुप साथ साथ के 2 कमरों में टिक गए थे और मैं इनके साथ वाले कमरे में अकेला ही था।
नाश्ता वगैरह करके पुनः उसी बस में बैठ कर हम दिल्ली की ख़ास जगहों में घूमने के लिए गए।
हमारे साथ दोनों प्रोफेसर इतिहास की प्रोफेसर थी, वे हर स्थान की इम्पोर्टेंस और उसका ऐतिहासक महत्व भी समझाती रही थी।
सारा दिन घूम कर हम शाम को तकरीबन 6 बजे अपने होटल पहुँच गए थे।
सब अपने कमरों में आराम कर रहे थे और होटल से चाय वगैरह मंगा कर पी रहे थे।
रात के खाने के बाद जैसे ही मैं अपने कमरे में पहुँचा, तभी निर्मला मैडम मेरे कमरे में आई और बोली- सोमू राजा, क्या कुछ टाइम हम को भी दे सकते हो?
मैं बोला- क्यों नहीं मैडम, आप हुक्म कीजिये।
मैडम बोली- थोड़ी देर बाद तुम मेरे कमरे में आ जाना, वही उस दिन वाली कहानी दोहरानी है।
मैं मन ही मन मुस्करा दिया लेकिन संजीदा होकर बोला- क्यों नहीं मैडम, जैसे आप कहें! मैं आ जाऊँगा।
यह कह कर मैडम मुझको आँख मार कर वहाँ से चली गई।
उनके जाने के बाद मैं पूनम के कमरे में गया जहाँ नेहा भी साथ ही रह रही थी, दोनों को बताया कि मैडम मुझको किसी ख़ास काम के लिए बुला रही हैं, मैं शायद रात में देर से आऊँगा उनकी सेवा करने।
दोनों थोड़ी मायूस हो गई लेकिन जब मैंने कहा कि आऊंगा ज़रूर तो वो फिर से चहक उठी।
आधे घंटे के बाद मैं मैडम के कमरे में पहुँच गया जहाँ हमारे कॉलेज की एक दूसरी मैडम भी उनके साथ रह रही थी।
हाल चाल पूछने के बाद निर्मला मैडम ने कहा- इनसे मिलो, ये हैं उषा मैडम जो मेरे साथ ही हिस्ट्री की प्रोफेसर हैं।
मैंने ध्यान से देखा उषा मैडम कॅाफ़ी सुन्दर और गठीले बदन वाली 30 वर्ष की आयु की औरत लग रही थी।
दोनों ने उस वक्त अपनी रात्रि वस्त्र पहन रखे थे।
उषा मैडम की ड्रेस काफी झीनी थी और उसमें से उनके शरीर के अंगों की एक झलक मिल रही थी और निर्मला मैडम ने भी पिंक रंग की बहुत हॉट स्लीवलेस छोटी सी ड्रेस पहन रखी जो उनके घुटनों तक ही आती थी।
कुल मिला कर दोनों बड़ी ही सेक्सी लग रही थी और उनकी यह सेक्सी ड्रेस देख कर मेरा लौड़ा तो वैसे ही मेरी पैंट में कुलबला रहा था।
निर्मला मैडम बोली- बैठो सोमू, उषा मैडम कह रही थी कि सोमू ठाकुर से मिलने की बहुत इच्छा है तो मैंने तकलीफ दी तुमको इतनी रात को!
मैं बोला- नहीं मैडम, तकलीफ कैसी, बोलिए क्या सेवा करूँ?
निर्मला मैडम बोली- सोचा उस दिन वाला खेल खेलें अगर तुम मूड में हो तो?
मैं बोला- आप तो जानती हैं मैं तो हर वक्त मूड में होता हूँ।
निर्मला मैडम- तो फिर उतारो अपने कपड़े… देख क्या रहे हो!
मैं बोला- मैं अपने कपड़े कभी आप नहीं उतारता सिवाए बाथरूम के!
अब दोनों मैडम हंसने लगी और जल्दी से मेरे कपड़े उतारने में लग गई।
मेरी पैंट और अंडरवियर उतारने के लिए जब उषा मैडम झुकी तो मेरा लौड़ा कैद से छूटे कैदी की तरह आज़ाद हो कर उषा मैडम के मुंह पर लगा।
यह देख कर निर्मला मैडम तो हंसी के मारे लोटपोट हो गई और उषा मैडम पहले तो कुछ खिसयानी हुई लेकिन जल्दी ही सम्भल कर हँसते हुए बोली- वाह, क्या चीज़ है यार सोमू तेरी तो? देखते ही थप्पड़ मार दिया ससुर ने! बहुत अच्छे!
मैंने उषा मैडम को उठाया और उनके कपड़े उतारने लगा, पहले साड़ी और फिर ब्लाउज और उसके नीचे की ब्रा खोल दी।
मैंने जान कर अपना मुंह उन के मुम्मों के पास रख छोड़ा था और जैसे ही वो ब्रा की कैद से निकले सीधे मेरे नाक से टकराये। 
मैं मज़ाकिया तौर पर एकदम पीछे हट गया और बोला- वाह मैडम जी, आपके मुम्मे ने मेरे लंड का जवाब दे दिया। क्यों ठीक है न?
दोनों मैडम ने हँसते हुए मुझको जफ़्फ़ी डाल दी और मैं भी उषा मैडम का पेटीकोट उतारने में लग गया।
उधर निर्मला मैडम ने अपने कपड़े खुद ही उतार दिए और अपनी काली झांटों के साथ खूब सेक्सी पोज़ बनाने लगी।
उषा मैडम की चूत को देखा तो वो सफाचट थी और रेजर से खूब साफ़ की गई लग रही थी।
मैंने उषा मैडम को ध्यान से देखा तो उनका शरीर एकदम सुंदर ढंग से तराशा हुआ था और उनके मुम्मे बहुत मोटे और गोल थे और काफी सख्त भी दिख रहे थे, चूतड़ गोल और उभरे हुए थे, कुल मिला कर एक निहायत ही खूबसूरत औरत थी वो!
निर्मला मैडम से उनके नंबर कुछ ज़्यादा ही थे और वो उम्र के हिसाब से 27-28 साल के आस पास रही थी, उनके नयन नक्श काफी तीखे थे हालांकि चेहरे का रंग कुछ गंदमी सा था।
मैं बोला- मैडम, अब क्या हुक्म है मेरे लिए?
निर्मला मैडम बोली- उषा मैडम के साथ पहले करो क्यूंकि इसके पति ने इसको छोड़ रखा है और कई सालों से इनको कोई अच्छा साथी नहीं मिला। मैं चाहती हूँ कि इतने सालों से जो कमी यह महसूस कर रही थी, उसे कुछ हद तक तुम पूरी करने की कोशिश करो।
मैं बोला- जैसे आप कहें, उषा मैडम को प्रसन्न करके मुझको बड़ी प्रसन्नता होगी लेकिन यह स्थान क्या इस काम के लिए उचित है?
निर्मला मैडम बोली- हाँ यह तो है, लेकिन आज तुम न उषा मैडम को अपनी चुदाई का नमूना पेश कर दो और वापस पहुँच कर हम फिर प्रोग्राम बनायेंगे।
यह कह कर मैडम मुझको लेकर उषा मैडम के पास पहुँची और मेरे को और उषा को खुद एक टाइट जफ़्फ़ी में बाँध लिया।
अब मैंने पहले उषा को और फिर निर्मला के लबों पर गर्म चुम्मी कर दी।
निर्मला मैडम ने उषा को मेरे पास धक्केल दिया और खुद अपने पलंग की तरफ जाने लगी लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ कर रोक दिया और इशारा किया कि वो भी उषा के साथ उनके चूतड़ों आदि को हाथ फेर कर तैयार करे!
निर्मला ने वैसा ही करना शुरू किया, वो उनके चूतड़ों को सहलाने लगी और मैं उषा के मुम्मों को चूमने लगा। एक ऊँगली उनकी चूत के अंदर डाल कर उनकी भग को छेड़ने लगा और महसूस किया कि वो बेहद पनिया रही थी।
उषा ने भी अपन हाथ मेरे तने हुए लौड़े पर रख कर उसके साथ खेलना शुरू कर दिया था।
मैं नीचे घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उषा के चूतड़ों को पकड़ कर उसकी चूत को अपने मुंह के साथ जोड़ दिया और अपनी जीभ से उसकी चूत के लबों को और भग को चूसने लगा।
उषा के साथ शायद कभी किसी ने ऐसा नहीं किया था तो भड़के हुए घोड़े के समान उछल पड़ी और मेरे मुंह को हटाने लगी लेकिन मैं भी उनके चूतड़ों को मज़बूती से पकड़ कर बैठा था, उनकी चूत में भग को चूसता रहा।
अब मैं उठा और उषा को अपने हाथों में उठा कर उनके मुम्मों को चूसता हुआ सारे कमरे में घूमता रहा।
उषा बार बार अपना सर इधर से उधर कर रही थी लेकिन मैं भी उनको छोड़ने वाला नहीं था।
अब मैंने उनको बेड में लिटा दिया और जल्दी से उनकी खुली हुई टांगों में बैठ कर अपना लौड़ा उनकी गीली चूत के मुँह पर रख कर थोड़ा ऊपर नीचे किया और फिर एक धक्के में लंड उस की चूत में घुसेड़ दिया।
उफ्फ… क्या टाइट चूत थी! लगता था कि उनकी चुदाई काफी समय से नहीं हुई थी।
टाइट चूत का आनन्द लेते हुए मैंने धक्काशाही बहुत ही धीरे धीरे शुरू की। लंड को पूरा निकाल कर सिर्फ शिश्न का मुंह ज़रा सा अंदर रहने दिया और फिर एक हल्का धक्का मार के लंड को फिर से पूरा अंदर डाल दिया।
यह सिलसिला कुछ देर चलते रहने दिया और फिर जब उषा मैडम की आँखें आनन्द से बंद हो गई तो मैंने अपनी चुदाई की स्पीड धीरे धीरे से बढ़ानी शुरू कर दी।
उधर निर्मला मैडम भी उषा के उरोजों को चूस रही थी और वो हाथों से निर्मला मैडम के सर को अपने चूचों के साथ कस कर जोड़ रही थी।
अब उषा भी नीचे से हर धक्के का जवाब कमर उठा कर दे रही थी।
जब मैंने महसूस किया कि मैडम अब छूटने की कगार पर हैं तो मैं अपने दोनों हाथ उषा के चूतड़ों के नीचे रख कर फुल स्पीड से धक्के मारने लगा और उषा फुसफ़ुसाहट में बोल रही थी- मार दो साली को… बहुत तंग करती है यह हरामखोर… फाड़ दो इसको… चीर दो इसको!
मैंने धक्के मारते हुए निर्मला मैडम की तरफ देखा और उन्होंने अपना अंगूठा उठा कर यह इशारा किया कि बहुत ही अच्छा कर रहा हूँ और लगा रहूँ इसी तरह!
मैंने अब पूरी ताकत से तेज़ धक्के चलाने जारी रखे और जब उषा मैडम का शरीर ज़ोर से अकड़ा और फिर एकदम मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनकी चूत खुलना बंद होना शुरू हो गई तो मैंने अपने धक्के रोक दिए।
जब कुछ मिनटों में वो ढीली पड़ कर लेट गई तो मैंने अपना लौड़ा उनकी चूत में से निकाला जो उषा मैडम के रस में पूरा भीगा हुआ था और जो उनके साथ में लेटी हुए निर्मला मैडम की चूत में डालने के लिए तैयार था लेकिन वो तो खुद ही घोड़ी बनी हुई थी तो मैं उठ कर उनके पीछे घुटनों के बल बैठ कर लंड राज को उनकी चूत के मुंह पर रख कर इंतज़ार करने लगा कि निर्मला मैडम सिग्नल करे तो मैं अपनी गाड़ी स्टार्ट करूँ।
कुछ क्षण जब मैं ऐसे ही बैठा रहा तो निर्मला मैडम ने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और अपने चूतड़ों को हिला कर सिग्नल दिया कि शुरू कर दूँ!
सिग्नल मिलते ही मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना गीला लंड निर्मला मैडम की चूत में घुसेड़ दिया।
मैडम की गीली चूत में गीला लंड क्या गया, वो तो भड़क उठी और गर्म हुई घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी। मैंने भी आराम से चोदना शुरू किया पहले धीरे और फिर तेज़ कभी पूरा बाहर और कभी पूरा अंदर।
लंड के शिश्न को चूत के मुंह पर रख कर चूत को रगड़ना ही बहुत ही आनन्द दायक है दोनों के लिए तो मैंने वही कार्यक्रम दोहराना शुरू कर दिया।
उधर देखा उषा जी भी अधखुली आँखों से यह सारा काण्ड देख रही थी और उनका एक हाथ अपने मम्मों पर था और दूसरा अपनी चूत पर था और मैंने भी हाथ आगे बढ़ा कर उषा जी की चूत को छुआ तो फिर गर्म हो रही थी।
लेकिन मैंने अपना ध्यान निर्मला मैडम की तरफ केंद्रित करते हुए तेज़ और स्लो धक्के मारने लगा।
हर धक्के का जवाब मैडम भी दे रही थी।
उनके चूतड़ों को हल्की हल्की हाथों से थाप देनी शुरू कर दी और धीरे धीरे अपनी स्पीड तेज़ करने लगा और अंदर बाहर होते हुए अपने और उन के अंगों को देख कर आनंदित होने लगा।
निर्मला मैडम की चूत से अब क्रीम जैसा रस निकलना शुरू हो गया जो रंग में क्रीम जैसा सफ़ेद और गाढ़ा था और यह देख कर मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी और मैडम की चूत से निकलती फच फ़च आवाज़ बड़ी मधुर लगने लगी।
इस आवाज़ को सुनते ही मैं समझ गया कि निर्मला मैडम ‘यह जा और वो जा…’ होने वाली है तो अब अपने जंगली घोड़े को बेलगाम छोड़ कर घोड़े और घोड़ी की लड़ाई देखने लगा।
निर्मला मैडम भी आज कुछ ज्यादा कामातुर हो रही थी, वो ज़ोर से हुंकार भरते हुए मुझ को लेकर नीचे लेट गई।
जैसे वो नीचे लेटी, मैंने उषा मैडम को गांड पर थपकी दी और उनको भी घोड़ी बनने का इशारा किया और उनके घोड़ी बनते ही निर्मला द्वारा क्रीमी लंड को उषा मैडम के अंदर डाल दिया।
इसी तरह प्यार से उषा मैडम को दोबारा चोदने के बाद मैं थोड़ा थक गया था तो मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए और दोनों मैडम को एक कस कर जफ़्फ़ी डाली और लबों पर चुम्मी करके मैं चलने के लिए तैयार हो गया।
निर्मला मैडम नंगी ही कमरे के दरवाज़े तक आई और मैंने बाहर देख कर कि मैदान साफ़ है चुपके से बाहर निकल गया।
अपने कमरे में जाने के बजाए मैंने अपने ग्रुप की लड़कियों के कमरे का दरवाज़ा खटखटा दिया तो नेहा ने जल्दी ही दरवाज़ा खोल दिया और मैं अंदर गया तो बाकी की तीनों लड़कियाँ नंगी ही बैठी हुई थी और मेरे लंड का इंतज़ार कर रही थी।
तीनों उठी और मुझको घेर लिया और एक साथ बोली- सोमू, इतनी देर कर दी तुमने? हम तो खाली बैठी थी तो हम सबने एक एक बार ऊँगली और किसिंग वगैरह से अपना काम चला लिया।
पूनम बोली- क्या हुआ था सोमू? बड़ी देर लग गई दोस्तों में?
मैं बोला- दोस्तों के साथ भी बना कर रखनी पड़ती है ना, गपशप में इतना टाइम निकल गया पता ही नहीं चला और फिर वहाँ थोड़ी सी बियर भी पीनी पड़ी।
नेहा बोली- क्यों लड़कियो, आज कुछ करने का मूड है या फिर आगरा में ही कर लेंगी हम सब?
डॉली बोली- मेरा तो एक बार कर दो सोमू प्लीज, मैंने पहली बार तुम्हारे साथ सेक्स किया है ना!
मैं बोला- क्यों लड़कियों क्या मर्ज़ी है?
सब बोली- प्लीज सोमू, तुम थके लग रहे हो तो तुम डॉली का काम कर दो, हम कल अपनी बारी ले लेंगी।
मैं बोला- ठीक है, सिर्फ डॉली का काम आज करते हैं, बाकी सबके साथ कल करेंगे। क्यों पूनम कुछ पीने को है क्या?
पूनम बोली- हाँ, कुछ कोका कोला की बोतलें मंगवा के रखी थी होटल में, तुम्हारी बचा कर रखी है, यह लो तुम्हारी बोतल।
बोतल पी कर मैं अटैच्ड बाथरूम में चला गया क्योंकि मुझको डर था कहीं प्रोफेसरों की चूत की खुशबू इन लड़कियों को मेरे लंड से न आ जाए! मैंने अपने लंड को अच्छी तरह से धोया और मुँह हाथ धोकर बाहर आ गया।
चार जवान लड़कियों को नंगी देखकर मेरा लौड़ा फिर से टन्ना टन्न खड़ा हो गया और वो चार लड़कियाँ दौड़ कर आई और मुझ पर टूट पड़ी।
मतलब कोई लंड को पकड़ रही तो कोई मेरी छाती के निप्पल को किस कर रही थी और किसी ने मेरी गांड में ऊँगली डाल रखी थी।
बारी बारी से सबने मेरे खड़े लंड को चूमना शुरू किया और फिर मेरे गोल चूतड़ों को भूखे शेर की तरह चाटने लगी।
अब नेहा ने कहा- रात बहुत हो रही है, सोमू को डॉली की चूत की चुदाई करने दो, यारो कल हम भी चुद जाएँगी इस सरकारी सांड से!
अब मैं पलंग पर बैठ गया और डॉली को अपने पास बुला लिया और सब लड़कियों को कहा कि वे इसको गर्म करें और डॉली की जांघों पर और चूतड़ों पर खूब चूमना शुरू करें।
डॉली को पलंग पर अपने पास बिठा लिया और उसको कहा- आज मैं तुमको बैठ कर चोदूंगा।
उसकी टांगों को खोल कर मैंने अपनी कमर के चारों ओर फैला लिया और उसकी सफाचट चूत को अपने लंड के ठीक सामने ले आया।
जैसे ही हम दोनों की पोजीशन ठीक हुई, मैंने उसके चूतड़ों को हाथों से उठा लिया और अपने लंड को डॉली की चूत में गृह प्रवेश करवा दिया, उसके लाल होटों को चूमते हुए और उसके मुम्मों को अपनी छाती से लगाते हुए मैंने डॉली से कहा कि अब वो मेरे को चोदे।
उसने भी झट अपने बाज़ू मेरे गले में डाल दिए और धीरे धीरे आगे पीछे होने लगी जैसे मेरे लंड पर बैठ कर झूला झूलने लगी।
बाकि लड़कियों ने यह पोजीशन पहले कभी नहीं देखी थी, सब ध्यान मग्न हो कर डॉली की चुदाई को देख रही थी कि कैसे डॉली झूले में झूलते हुए मुझको चोद रही थी और इस नए सेक्स स्टाइल से कैसे दोनों के शरीर के सारे अंग एकदम साथ जुड़े हुए थे।
अब नेहा और जस्सी ने डॉली के चूतड़ों को अपने हाथ में ले लिया और पूनम ने डॉली के मुम्मे अपने कब्ज़े में कर लिए। यानि चारों लड़कियां चुदाई में शामिल हो गई और उनकी मिली जुली हरकत से डॉली बहुत ही जल्दी छूटने के सुहाने मोड़ पर पहुँच गई थी। 
पूनम के डॉली के मम्मों की छेड़छाड़ से वो जल्दी ही अपने को रोक ना सकी और इस बार बड़े ही ज़ोरदार झटके के साथ चूत में से पानी का सैलाब उमड़ पड़ा।
वो तो नेहा चौकन्नी थी, उसने झट उसकी चूत के नीचे एक तौलिया रख दिया और बेड की चादर खराब होने से बच गई।
अब डॉली तो मेरे से चिपक कर बैठ गई थी और मुझको छोड़ ही नहीं रही थी, नेहा ने ज़ोर से कहा- वो मैडम इधर आ रही है, जल्दी करो।
तब कहीं डॉली ने मुझको छोड़ा और वो उठ कर बाथरूम में घुस गई।
सब लड़कियाँ ज़ोर से हंस पड़ी।
फिर मैं कपड़े पहन कर जल्दी से अपने रूम में आ गया और आते ही कपड़ों समेत ही बिस्तर में लेट गया और बड़ी ही गहरी नींद में सो गया।
दो औरतों और एक जवान लड़की को चोदना कोई खाला जी का खेल नहीं है, यह मुझको उस दिन महसूस हुआ।
दिल्ली से आगरा की बस में



दो औरतों और एक जवान लड़की को चोदना कोई खाला जी का खेल नहीं है यह मुझको उस दिन महसूस हुआ।
इसी कारण सुबह मेरी नींद टाइम पर नहीं खुली और मुझको पूनम ने ही आकर जगाया और जल्दी से मैं मुंह हाथ धोकर चलने के लिए तैयार हो गया।
पूनम ने ही मेरा बिखरा सामान बक्से में डाला और जल्दी से हम दोनों होटल के रेस्तराँ में पहुँच गए जहाँ सब नाश्ता कर रहे थे।
नाश्ता खत्म करने के बाद हम सब बस में बैठने के लिए चल पड़े। 
क्यूंकि मैं फिर रेनू के साथ सबको बस में बैठाने में लगा था तो सबसे आखिर में बस में चढ़ा और इसी कारण मुझको लास्ट की सीट मिली।
वो 2 वाली सीट थी, जब मैं वहाँ बैठा तो मेरे साथ वाली सीट पर एक लड़की बैठी हुई थी।
मैंने उसकी तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया और उस खाली सीट पर बैठ गया।
आगे बैठी हुई मेरे ग्रुप की लड़कियाँ मेरी तरफ देख रहीं थी और इशारे कर रहीं थी कि मैं उनकी सीट पर आ जाऊँ लेकिन मैंने मना कर दिया।
बस जब शहर के बाहर निकल गई तो मैंने साथ वाली लड़की की तरफ देखा। लड़की का रंग सांवला था लेकिन नयन नक्श गज़ब के थे और शरीर भी काफी भरा पूरा था।
वो भी अपनी आँखों की कोर से मुझको देख रही थी।
मैंने उसको हेलो किया और उसने भी बड़ी सुरीली आवाज़ में मुझको जवाब दिया।
मैं बोला- मेरा नाम सोमू है और आपका नाम क्या है?
लड़की बोली- मेरा नाम जेनी है, मैं इंटर के दूसरे साल में हूँ, आप कौन सी क्लास में हैं?
मैं बोला- मैं इंटर के फर्स्ट ईयर में हूँ लेकिन मैंने आपको कभी कॉलेज में पहले देखा नहीं?
जेनी बोली- मैं कुछ दिन पहले ही कॉलेज में आई हूँ, उससे पहले मैं अल्मोड़ा में पढ़ती थी।
मैं बोला- आपसे मिल कर बड़ी ख़ुशी हुई। 
बातों के दौरान दो बार उसका हाथ मेरी जांघों पर लगा और एक बार मेरे हाथ से भी टकराया।
मैं रात को देर से सोया था, थोड़ी नींद लग रही थी, मैं आँखें बंद कर के बैठ गया लेकिन 5-10 मिन्ट में मुझको ऐसा लगा कि कोई हाथ मेरी जांघों के ऊपर आ गया है और धीरे धीरे वो मेरी जांघों पर रेंग रहा है।
हल्के से आँख खोल कर देखा कि तो जेनी ने अपने ऊपर एक हल्की सी शाल कर रखी और उसका थोड़ा हिस्सा मेरी जांघों पर भी आ रहा था।
वहीं से शायद उसका हाथ मेरी जांघों पर चल रहा था।
मैंने भी उसकी तरफ देखा तो वो एक प्यारी सी मुस्कान बिखेर रही थी लेकिन उसने अपना हाथ नहीं हटाया था।
मैं भी उसकी मर्ज़ी समझ गया था और बस एक नज़र डाली सब ऊंघ रहे थे सो मैंने भी सब क्लियर देख कर अपना हाथ उसकी गोद में शाल के नीचे रख दिया और उसने भी अपना दायाँ हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया।
उसका बायाँ हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लौड़े पर पड़ा था और उसको हल्के से सहला रहा था और अब मैंने भी अपना हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से उसके चूत पर रख दिया था।
जेनी ने अपने बाएं हाथ से मेरी पैंट खोलने की कोशिश करने लगी थी और मैंने उसकी मदद के लिए खुद ही पैंट की ज़िप खोल दी और अपना खड़ा लौड़ा बाहर निकाल दिया ताकि जेनी को कोई दिक्क्त न हो।
जेनी ने जैसे ही मेरे खड़े लौड़े पर हाथ रखा तो उसको एक झटका लगा और उसने झट से हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मेरे हाथ ने उसको रोक दिया और मेरा दायाँ हाथ उसकी साड़ी को ऊपर करने की कोशिश करने लगा और फिर जेनी ने स्वयं ही अपनी साड़ी का एक कोना ऊपर कर दिया और मेरे हाथ को अपनी चूत पर रख दिया।
बालों से भरी हुई चूत पर इस तरह हाथ रखने से मुझको भी एक अजीब सी झनझनाहट हुई लेकिन मैंने भी हिम्मत करके हाथ को चूत पर रखे रखा और उधर वह मेरे लौड़े को अब अपने हाथ में लेकर उसके साथ खेलने लगी।
जब मैंने ऊँगली जेनी की चूत के अंदर डालने की कोशिश की तो वो अंदर नहीं जा पा रही थी क्यूंकि उसकी चूत उसके चूतड़ों के नीचे आ रही थी और इसी कारण वहाँ ऊँगली नहीं जा पा रही थी तब जेनी ने मेरी हेल्प के लिए अपने चूतड़ों को सीट में आगे की तरफ खिसका लिया।
मैंने जैसे ही जेनी की चूत में ऊँगली डाली वहाँ मुझको काफी गीलापन मिला।
जेनी भी अब बेधड़क मेरे लंड को ऊपर नीचे करके मुठी मारने की कोशिश कर रही थी जिसका उसको काफी आनन्द आ रहा था और मुझको भी कोई कम मज़ा नहीं आ रहा था।
थोड़ी देर कोशिश करने के बाद जेनी ने मेरे कान में कहा- सोमू, क्या मैं तुम्हारे लंड को चूस सकती हूँ?
मैं बोला- मुझको कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन तुम अपना देख लो कोई देख न ले तुमको?
वो बोली- तुम अपनी सीट में आगे हो जाना न सो किसी को दिखाई नहीं देगा।
मैं बोला- ठीक है कोशिश कर देखो।
वो धीरे से सीट के नीचे की तरफ बढ़ी और मैं भी थोड़ा उसकी तरफ मुड़ गया और उसने अपनी शाल अपने सर पर कर ली और मेरे और अपने को पूरा ढक लिया।
मैंने भी फुसफुसा कर कहा- ठीक है, शुरू हो जाओ।
उसने नीचे पहुँच कर मेरे लौड़े को मुंह में ले लिया और उसको आहिस्ता से लपालप चूसने लगी।
उसको बहुत ही आनंद आ रहा था लेकिन मुझको ज़्यादा फरक नहीं पड़ रहा था लेकिन मेरे हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके मुम्मों के साथ खेल रहे थे।
अच्छे सॉलिड मुम्मे थे और ब्लाउज के बाहर से ही बड़े सुंदर लग रहे थे, जेनी ने थोड़ी देर लंड को चूसने के बाद पूछा कि और या बस मैंने उसको इशारा किया कि बस करो और ऊपर आ जाओ।
जब वो ऊपर सीट पर बैठ गई तो मैंने उसकी साड़ी को उसके घुटनों के ऊपर कर दिया और उसकी चूत में उसकी भग को आराम से मसलने लगा, बायाँ हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रख कर उनको छेड़ने लगा।
भग और मुम्मों के साथ खेल में उसकी जांघें मेरे हाथ को अपने बीच में दबाने और खोलने लगी, थोड़ी देर और भग मसली तो जेनी एक कंपकंपी के साथ झड़ गई और मैंने झट से अपना रुमाल उसको दिया, उसने वो अपनी चूत के ऊपर रख लिया जिससे उसकी चूत का गीलापन उसकी साड़ी तक नहीं पहंच पाया और सारा का सारा रुमाल में समा गया।
मैंने अपना रुमाल वापस माँगा तो जेनी कहने लगी कि वो आगरा में इसको धोकर वापस दे देगी लेकिन मैंने कहा- नहीं, तुम मुझको ऐसा ही दे दो, इसमें समाई तुम्हारी चूत की खुशबू मुझको सूंघनी है और धरोहर के रूप में रखनी है।
उसने हँसते हुए कहा- यह लो अपना रुमाल… लेकिन तुम एक बहुत ही स्वीट लड़के हो।
मैंने भी जवाब में कहा- जेनी, तुम भी एक बहुत ही आकर्षक लड़की हो। अच्छा यह बताओ, क्या तुम आगरा में हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहोगी?
फिर मैंने उसको अपने छोटे से ग्रुप के बारे में बताया और कहा कि हम सब बड़े उन्मुक्त तरीके से रहते हैं और खूब सेक्स भी करते हैं मिल कर।
जेनी हैरानी से बोली- रियल सेक्स भी करते हो तुम लोग? मुझको विश्वास नहीं होता।
मैं बोला- अगर तुम भी उन्मुक्त व्यवहार के पक्ष में हो तो हम तुम को अपने ग्रुप में शामिल कर सकते हैं लेकिन सेक्स ज़रूर करना पड़ेगा। बोलो तैयार हो?
जेनी पहले तो कुछ झिझकी फिर मान गई और बोली- सेक्स किसके साथ करना पड़ेगा?
मैं बोला- पुरुष सिर्फ मैं हूँ, बाकी सब लड़कियाँ हैं तो कभी मेरे साथ और कभी आपस में! बोलो चलेगा?
जेनी बोली- चलेगा अगर तुम्हारे साथ सेक्स करना है तो दौड़ेगा।
फिर हम दोनों आँखें बंद कर के थोड़ी देर के लिए झपकी लेने लगे।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

आगरा में एक रात


जेनी बोली- चलेगा, अगर तुम्हारे साथ सेक्स करना पड़ेगा तो दौड़ेगा।
फिर हम दोनों आँखें बंद कर के थोड़ी देर के लिए झपकी लेने लगे। 
हम 4 घंटे में आगरा के उस होटल में पहुँच गए जहाँ हम सबको ठहरना था।
अब फिर मुझको और रेनू को कमरे बांटने का काम सौंप दिया गया। हम दोनों ने फिर से कमरे वैसे ही बांटे जैसे दिल्ली में और इस बार भी एक लड़का अपने रिश्तेदारों के घर रहने चला गया मैडम से पूछ कर!
वो कमरा फिर से मैंने अपने नाम कर दिया।
नहा धोकर सब आगरा घूमने के लिए तैयार हो गए और फिर बस में बैठ कर हम निकल पड़े। सब दर्शनीय स्थानों को देखने के बाद हम शाम को होटल लौटे।
सब बहुत ही थके हुए थे और अपने कमरों में जाकर आराम करने लगे।
मैं अकेला ही था अपने कमरे में तो थोड़ी देर के लिए लेट गया लेकिन थोड़ी बाद दरवाज़ा खटका और जब खोला तो पूनम खड़ी थी।
मैंने कहा- अंदर आ जाओ!
जैसे ही वो अन्दर आई, मैंने उसको बाहों में भर लिया और ताबड़ तोड़ उसके लबों पर चुम्मियों की बौछार कर दी।
मैं भूखे शेर की तरह उसके मुम्मों को ब्लाउज के बाहर से ही चूमने लगा और उसके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा और उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया और आँखों ही आँखों में उससे पूछा- हो जाए कुछ?
उस ने भी सर हिला कर अपनी रज़ामंदी दे दी।
अब मैंने अपनी पैंट के बटन खोल कर लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथों में रख दिया और खुद उसकी सिल्क की साड़ी को ऊपर उठा कर उसको बेड पर हाथों के बल झुकने के लिए कहा।
जैसे ही पूनम उस पोजीशन में आई, मैंने अपने अकड़े हुए लंड को चूत के निशाने पर बिठा कर ज़ोर का धक्का मारा और लंड फच की आवाज़ से अंदर चला गया।
अब मैं थोड़ा पीछे हटा और उसकी गोरे चूतड़ों को हाथ से सहलाता हुआ लंड घिसाई में लग गया क्यूंकि मैंने पूनम को 2-3 दिन से नहीं चोदा था तो मेरा लौड़ा और मैं स्वयं उसको बहुत मिस कर रहे थे।
अब लंड महाशय को भी जानी पहचानी चूत में बहुत आनन्द आने लगा और वो भी बड़े प्रेम से धक्के मारने लगा लेकिन मुझको भी ज़रा डर था कि कोई आ न जाए और हमारे पवित्र काम में विघ्न न डाले सो मैं तेज़ धक्केशाही में लग गया।
पूनम भी 2 दिन से चुदाई की भूखी थी, वो भी जल्दी ही चरम सीमा पर पहुँचने वाली हो गई थी और मेरे तेज़ धक्कों का जवाब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके देने लगी।
हम चुदाई में इतने मस्त थे कि हम दोनों ने देखा ही नहीं कब नेहा दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गई थी और वो मेरे तेज़ी से दौड़ते चूतड़ों को हल्के से हाथ लगाने लगी थी।
पहले तो मैं चौंका कि यह कौन अंदर आ गया है और डर के मारे मेरी सांस ऊपर नीचे होने लगी लेकिन जब मुझको महसूस हुआ कि वो नेहा ही है तो मैंने कुछ राहत की सांस ली और पूनम की चुदाई जारी रखी।
लेकिन पूनम को अभी भी मालूम नहीं हुआ था कि कमरे में कोई आ गया है।
मैंने नेहा को चुप रहने का इशारा किया और चुदाई की स्पीड और तेज़ कर दी और जल्दी ही मुझको लगा कि पूनम कुछ देर में छूटने वाली है। फिर जब मैंने कुछ बड़े ही तेज़ और गहरे धक्के मारे तो पूनम का शरीर एक प्यारी से झनझनाहट के बाद एकदम ढीला पड़ गया और वो पलंग पर पसर गई।
मैंने लंड पूनम की चूत से निकाला तो उसको नेहा जो मेरे पीछे खड़ी थी उसके हाथ में दे दिया।
मैंने नेहा को एक ज़ोर से जफ़्फ़ी मारी और उसको होटों पर गर्म चुम्मी की और पूछा- अभी करवाना है या बाद में?
वो बोली- अभी नहीं, मैं बहुत थक चुकी हूँ रात को देखेंगे। लेकिन अभी थोड़ी किसिंग और हग्गिंग कर लेते हैं।
फिर हम दोनों एक दूसरे को बड़ी हॉट किसिंग और जफ़्फ़ी मारते रहे और साथ में एक दूसरे के अंगों से भी खेलते रहे।
जब पूनम थोड़ी संयत हुई तो नेहा उसको लेकर जाने लगी तो मैंने उसको बताया कि आती बार बस में जेनी नाम की लड़की मिली थी जो मेरे साथ वाली सीट पर बैठी थी और वो भी हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है, मैंने उसको कहा कि आज रात को बाकी साथियों से पूछ कर उसको भी ले लेते हैं अपने ग्रुप में! क्यों नेहा?
नेहा बोली- ठीक है सोमू, अगर तुम पांच गायों को हरा कर सकते हो तो हमें क्या ऐतराज़ हो सकता है। मिला देना उसको, बाकी बातें हम उससे कर लेंगे।
मैं बोला- रुको तुम दोनों, वो मेरे साथ वाले कमरे में ही है मैं उसको बुला लाता हूँ।
मैंने साथ वाला कमरा खटखटाया और जेनी ने ही दरवाज़ा खोला और मुझको देख कर बोली- आओ सोमू।
मैंने कहा- ज़रा मेरे कमरे में आओगी? ग्रुप की हेड आई है, अगर तुम चाहो तो उससे बात कर लो।
जेनी बोली- ठीक है।
वो मेरे साथ चल पड़ी और मेरे कमरे में उसकी मुलाकात नेहा और पूनम से करवा दी।
मैं होटल के रेस्टोरेंट में गया और 6 कप चाय का आर्डर दे आया।
जब चाय आई तो मैंने पूनम से कहा कि वो बाकी लड़कियों को भी बुला ले, सब मिल कर चाय पिएंगे।
शाम के 7 बजे थे सो सब अपनी थकावट मिटाने की कोशिश में थे, चाय को देख कर सब बड़ी खुश हुईं।
फिर हमने साथ लाये हुए बिस्कुट और केक्स खाए और गर्म चाय पी जिसके बाद सब में थोड़ी चुस्ती आ गई।
जेनी को भी सबकी रज़ामंदी से हमारे ग्रुप में शामिल कर लिया गया।
नेहा ने कहा- आज चुदाई का प्रोग्राम कैसे बनाया जाए? कैसे कुछ नयापन लाया जाए?
सब लड़कियाँ सोचने लगी फिर जस्सी बोली- क्यों न हम सब फैंसी ड्रेस पहन कर आएँ और सोमू जिसको पहचान लेगा उसी के साथ वो करेगा। क्यूँ कैसा है यह?
नेहा और डॉली बोली- हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि हम सब एक होटल में जहाँ हमारे साथ दूसरे स्टूडेंट्स भी हैं और प्रोफेसर्स भी हैं। जो हम करें उसमें कम से कम शोर होना चाहिए और किसी का ख्वामखाह में ध्यान अपनी और आकर्षित नहीं करना चाहिए।
मैं बोला- शाबाश डॉली और जस्सी, तुम दोनों बिल्कुल ठीक कह रही हो। हमको चुपचाप काम करना चाहिए और इसलिए हमको कोई ऐसी हरकत नहीं करनी है जिससे बाकी विद्यार्थी डिस्टर्ब हों। मैं सोचता हूँ हम अपने अपने कमरे में ही रहें और एक एक करके तुम सब मेरे कमरे में आ जाना और सरकारी सांड की पूँछ हिला कर अपना काम करवा लेना।
सब बोली- यह ठीक है।
मैं बोला- यह ग्रुप सेक्स हम सब लखनऊ में मेरी कोठी में भी कर सकते हैं जहाँ जैसे हम चाहें वैसे ही करने में हम को कोई नहीं रोक सकता।
सब लड़कियों ने हाँ में सर हिला दिया।
मैं फिर बोला- आज बारी बारी से तुम मेरा बलात्कार करना और नेहा की ड्यूटी लगाई जायेगी कि वो ‘हर लड़की ने कितने धक्के मेरे ऊपर बैठ कर मुझको!’ मारे इसका रिकॉर्ड रखती जाएगी। आज सबसे पहले बारी होगी जेनी की जो ग्रुप में नई है। ठीक?
सबने ज़ोर से कहा- यस सर! 

खाना खाने के बाद हम में से कुछ ताजमहल को चांदनी रात में देखने के लिए चले गए और बाकी सब अपने कमरों में आ गए।

हमारे ग्रुप में से कोई भी ताजमहल नहीं गया रात को!

होटल के हाल में तरह तरह की गेम्स रखी थी, सब उन को खेलने लगे और कुछ होटल के लॉन में घूमने लगे।

मैं और पूनम होटल के लॉन में बेंच पर बैठ कर बातें करने लगे।

वहाँ एक अँगरेज़ जोड़ा भी बैठा था और वो खूब एक दूसरे को किसिंग और जफ़्फ़ी डाल रहे थे और अंग्रेज़ का एक हाथ उसकी साथी की स्कर्ट के अंदर गया हुआ था।

यह मैंने पूनम को बताया और यह खुले आम होते देख कर दंग रह गई।

तब मैंने पूछा- क्या चूत में यह देख कर कुछ हरकत हुई? 

वो बोली- हो तो रही है लेकिन तुमने आज दिन को मेरी खुजली काफी मिटा दी थी। सच्ची सोमू, तुम एक दो दिन मुझको नहीं चोदते तो मैं एकदम अधूरी महसूस करती हूँ।

मैं बोला- यही हाल मेरा होता है यार पूनम, तुम जब देती हो न तो दिल खोल कर देती हो, और ऐसा लगता है कि हम दोनों एक दूसरे के पति पत्नी हैं।

फिर हम दोनों मेरे कमरे में आ गए और वहाँ पहुँच कर मैंने पूनम को फिर से पकड़ लिया और उसके होटों पर चुम्बन करने लगा।

थोड़ी देर में नेहा और बाकी सब भी वहाँ आ गए।

सब लड़कियों ने अपनी नाईट ड्रेस पहनी हुई थी, वो वहाँ आकर बारी बारी से मुझको किस करने लगी।

मैंने भी जेनी को उसके लबों पर एक ज़ोरदार किस की और उसके सारे शरीर पर हाथ फेरने लगा। खासतौर से उसके मुम्मों को उन्मुक्त करने की कोशिश करने लगा और इस काम में मुझको जस्सी भी मदद कर रही थी और डॉली जेनी के चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी।

नेहा ने आगे बढ़ कर उसकी नाईट ड्रेस को उसके सर के ऊपर से उतार दिया और सब लड़कियाँ इस नई लड़की के शरीर के गठन देख कर हैरान हो रही थी।

रंग सांवला ज़रूर था और शरीर का रंग भी थोड़ा मटमैला था लेकिन शरीर के हर अंग की बनावट देख कर सब लड़कियों विस्मित हो रही थी।

सबसे पहले नेहा ने उसको लबों पर किस की और यह देख कर सब लड़कियाँ भी उसके शरीर को छूने लगी, उसके गोल और उन्नत उरोजों के साथ खेलने और उनको चूमने लगी।

यह देख कर मैंने भी अपने कपड़ों की तरफ देखा और जस्सी ने झट आगे बढ़ कर उनको उतारना शुरू कर दिया।

जब मेरे लौड़ा पैंट की गिरफ़्त से आज़ाद हुआ तो उसका मुंह सिर्फ जेनी की तरफ ही था।

मैंने नेहा की तरफ देखा और उसने हामी में सर हिला दिया और फिर मैंने जेनी को अपनी बाहों में भर लिया उसके गर्म गर्म होटों पर एक बहुत ही गहरी चुम्मी जड़ दी।

मैंने जेनी को अपनी बाँहों में उठा लिया, उसको लेकर मैं बिस्तर पर आ गया।

नेहा ने बाकी लड़कियों को इशारा किया और वो एक दूसरी के साथ शुरू हो गईं।

मैंने जेनी को लिटा दिया और उसके मुम्मों को चूसने लगा और उसके गले के नीचे भी चूमना शुरू कर दिया।

जस्सी जेनी की चूत के साथ खेल रही थी और डॉली जस्सी के मम्मों को चूस रही थी और उधर डॉली और नेहा आपस में लगी हुई थी।

मैंने जेनी की गोल और गुदाज़ जांघों को खोला और उनके बीच बैठ गया, लंड को जेनी की चूत के ऊपर रख कर धीरे धीरे उसको अंदर धकेलने लगा। जब वो पूरा अंदर चला गया तो मैं जेनी की टाइट चूत में लंड को धीरे से अंदर बाहर करने लगा।

जेनी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी और वो सुबह वाली चूत से दोगुना गीली और लचकीली थी।

मेरा लंड एक बिगड़े हुए घोड़े के समान चुदाई में लगा था और बगैर किसी की परवाह किये धक्के पे धक्के मार रहा था। जेनी एक बार छूट चुकी थी और दूसरी बार भी छूटने की कगार पर थी। वो नीचे से बराबर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी लेकिन जब मैंने फुल स्पीड धक्कों की रेलगाड़ी चलाई तो उसके धक्के थम गए और सिर्फ मेरे लंड का अंदर बाहर होना ही दिख रहा था, पूनम मेरे चूतड़ों को दबा दबा कर पूरा अंदर जाने का इशारा कर रही थी।

कुछ और धक्कों के बाद ही जेनी की दोनों टांगें मेरी कमर के इर्दगिर्द फ़ैल गई थी और मुझको अपने गिरफ्त में जकड़ लिया था।

जेनी का जब दुबारा छूटा तो वो एकदम से कांप उठी और बड़ी देर तक उसका शरीर कंपकंपी करता रहा।

अब मैं पलंग पर लेट गया और नेहा को इशारा किया कि वो सब बारी बारी मेरा रेप करने के लिए तैयार हो जाएँ।

जेनी की हॉट चुदाई के बाद सारी लड़कियाँ चुदने के लिए बहुत ही अधिक उतावली हो रहीं थी, सबसे पहले डॉली उतरी मैदान में और पूनम और जस्सी उसको तैयार करने में लग गई, एक उसके मुम्मों को चूसने में लग गई और दूसरी उसके चूतड़ों के साथ खेलने लगी।

जब वो काफी गीली हो गई तो उसको मेरे ऊपर बिठा दिया दोनों ने मिल कर।

मैंने नेहा को इशारा किया कि वो सब कपड़े पहन कर बैठें ताकि अगर मैडम चेकिंग पर आती है तो उसको सब नार्मल मिले और मेरे बैग से ताश का पैकेट भी निकाल लें और उसको खेलने के लिए तैयार रहें।

इधर डॉली मेरे ऊपर बैठ कर ऊपर से धक्के मारने लगी लेकिन उसकी कोशिश नाकाम हो रही थी क्यूंकि उसने पहले कभी ऐसे किया नहीं था तो मैंने उसकी मदद करने के लिए नीचे से खुद ही अपना रेप शुरू कर दिया यानी ज़्यादा धक्के मैंने नीचे से मारने लगा।

थोड़ी देर में डॉली ऊपर से चुदाई को समझ गई और वो अब अपने आप मुझको चोदने लगी और मैं भी नीचे से तेज़ धक्के मारने लगा था।

साथ ही मैं उसकी चूत में ऊँगली, उसकी भग को रगड़ने लगा था और इस दोतरफा अटैक को डॉली जो वैसे भी कॅाफ़ी गर्म हो चुकी थी ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकी और जल्दी ही स्खलित हो कर मेरे ऊपर ही लेट गई।

थोड़ी देर विश्राम के बाद मैं उठा और अपने कपड़े पहन कर बैठ गया और लड़कियों को कहा- नीचे एक चादर बिछा लो, हम सब बैठ कर ताश खेलते हैं।

नेहा ने सवालिया नज़र से मुझको देखा तो मैंने उसको बताया- मुझको ऐसा लगता है आज शायद मैडम कमरों की चेकिंग के लिए आ जाएँ तो तैयार रहना चाहिए। मुझको एक दो कमरे खुलने और बंद होने की आवाज़ आई थी तो एहितयात के तौर पर हम ऐसा कर लेते हैं और बाद में चुदाई प्रोग्राम फिर शुरू कर देंगे।

मैंने कहा- ताश खेलने के साथ हम बातें भी करते जाते हैं। तो चलो यह बताओ कि सबसे पहले सेक्स किस के साथ और कब किया अगर आपको कोई ऐतराज़ न हो तो? जेनी तुम सबसे पहले बताओ।

जेनी बोली- सबसे पहले मेरे साथ एक दूर के एक कजिन ने सेक्स किया। वो ऐसे हुआ कि मेरा कजिन बॉम्बे से अल्मोड़ा घूमने आया हुआ था और हमारे घर ही ठहरा हुआ था, देखने में काफी हैंडसम और तेज़ तरार लड़का लग रहा था लेकिन मुझ पर रोज़ ही लाइन मारता था और मैं उसको अक्सर ज़्यादा भाव नहीं देती थी। लेकिन एक दिन जब मैं बाथरूम में नहाने गई तो मुझसे बाथरूम का दरवाज़ा लॉक करना छूट गया और जब मैं शरीर में साबुन लगा रही थी वो दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गया और मुझको अपनी बाहों में उठा कर बेड रूम में ले आया। इससे पहले मैं सम्भल पाती, वो मेरे ऊपर चढ़ बैठा और मेरे कंवारेपन की झिली तोड़ कर मुझको चोद डाला साले ने!

यह कह कर वो उदास हो गई लेकिन हम सबने उसको तसल्ली दी कि यह तो होना ही था एक दिन!

इतने में मेरे कमरे का दरवाज़ा खटका और मैंने फ़ौरन उठ कर दरवाज़ा खोल दिया तो बाहर दोनों मैडम खड़ी थी।

मैंने कहा- आइये मैडम जी!

दोनों धड़धड़ाती हुई कमरे में आ गई और लड़कियों और मुझको देख कर हंस पड़ी और बोली- यह चांडाल चोकड़ी क्या कर रही है?

मैं बोला- कुछ नहीं, ताश खेल रहे थे और और गपशप मार रहे थे।

निर्मल मैडम बोली- कहीं जुआ तो नहीं खेल रहे थे तुम सब?

मैं बोला- यस मैडम, जुआ तो चल रहा है, जो हारेगा या फिर हारेगी उसको एक एक कोका कोला की बोतल देनी होगी हम सबको!

मैंने टेबल पर पड़ी 10-12 बोतलों की तरफ इशारा कर दिया।

दोनों मैडम बोतलों को देख कर हंसने लगी.

मैंने कहा- क्यों मैडम जी, एक एक कोकाकोला हो जाए दोनों के लिए?

दोनों मैडम हंस पड़ी और वापस जाते हुए बोली- वेरी गुड सोमू, तुम एक अच्छे लीडर और दोस्त भी हो! कैरी ऑन!

मैं उनको दरवाज़े तक छोड़ कर दरवाज़ा बंद कर के वापस वहीं बैठ गया और मेरे साथ बैठी पूनम को मैंने एक गहरी जफी मारी और उसके होटों को चूम लिया और बोला- पून्नो, बाल बाल बचे आज तो! नहीं तो हम सब की बेइज़्ज़ती हो जाती। चलो आओ चुदाई करें।

यह सुन कर सब लड़कियाँ खूब हंस पड़ी और मैंने अब जस्सी को घेर लिया और कहा- ड्रेस मत उतारो, वैसे ही तुम्हारी ले लेते हैं, ले लूँ क्या तुम्हारी?

जस्सी भी बनती हुई बोली- क्या लेना चाहते हो मेरी सोमू राजा?

मैं भी शरारत के लहजे में बोला- वही जो तुम आगे चल कर अपने हसबंड को दोगी, उसमें से थोड़ी सी मुझको दे दो ना प्लीज?

सब लड़कियाँ जस्सी के पीछे पड़ गई और हंस कर कहने लगी- दे दो ना ज़ालिम जस्सी, जो सोमू मांग रहा है, नहीं तो हम दे देंगी अपनी उसको!

जस्सी ने मुंह बनाते हुए अपनी ड्रेस को ऊपर किया और पलंग के ऊपर झुक गई और मैंने उसके पीछे खड़ा होकर अपने खड़े लंड को उसकी चूत में डाल दिया और शुरू में धीरे और फिर तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा।

उसके चूतड़ों पर हलकी हल्की थपकी मारते हुए मैंने उसको चरम सीमा पर पहुंचा दिया और जब वो झड़ी तो मैंने उसको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी कम्कम्पी महसूस करने लगा।

उसके बाद नेहा का नंबर लगा और उसको भी उसी पोजीशन में मैंने प्यार से और पूरे अख्तयार से ज़ोरदार चोदा।

जब वो घुड़सवार भी गिर गई तो बारी पूनम की आई और वो कहने लगी- मैं तो घोड़ी चोदन पोजीशन में चुदवाऊँगी।

भला मुझको क्या ऐतराज़ हो सकता था, वो फ़ौरन बेड पर घोड़ी बन गई और बाकी लड़कियाँ मुझको दूल्हे के रूप में सजाने की कोशिश करने लगी और जस्सी की नकली चोटी को मेरे माथे में बाँध कर वो बाकायदा नकली बैंड बजाती हुए मुझको घोड़ी तक ले गई लेकिन तब तक घोड़ी खुद हंसी के मारे लोटपोट हो रही थी तो कहाँ और कौन सी घोड़ी पर चढ़ना है, यह भी समझ नहीं आ रहा था।

वहाँ एक पुरानी माला पड़ी थी, जेनी ने उसको मेरे खड़े लंड के ऊपर डाल दी और क्यूंकि घोड़ी अभी भी हंस रही थी, तो वो सब मुझको पकड़ कर कमरे का एक और चक्कर लगाने लगी।

जब वापस पहुँचे तो घोड़ी नार्मल हो चुकी थी, 4 लड़कियों ने मुझको उसके ऊपर बैठाने की कोशिश की लेकिन मैंने कहा- मैं खुद बैठ जाऊँगा, अब मेरी सुहागरात शुरू हो रही है, सब मेहमान घर जाएँ।

पूनम की सवारी करते हुए मैंने दो बार गिरने का नाटक किया और फिर लंड को चूत के मुंह पर रख कर ज़ोर का धक्का मार और जस्सी के मुंह से आवाज़ निकली- मार डाला साले ने उफ्फ्फ मेरी माँ!

मैं भी मज़ाक में बोला- अगर दर्द हो रहा हो तो निकाल लूँ क्या?

अब नेहा को कहा- धक्कों की गिनती करती जाओ ताकि पूनम की डिग्री में यह स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए कि- यह छात्रा 101 नंबरों से पास हुई।

तब सब लड़कियाँ धीरे धीरे धक्कों की गिनती बोलती रही और जब मेरी स्पीड बहुत तेज़ हो गई तो धक्कों की गिनती कर पाना मुश्किल हो गया और जस्सी अब पूनम के चूतड़ों पर ज़ोर ज़ोर से हाथों की थपकी भी मार रही थी।

थोड़ी देर में 110 की गिनती के बाद पूनम धराशयी हो गई और उसकी चूत ने अपनी हार मान ली।

इस तरह आगरा की वो रात समाप्त हुई और अगले दिन का प्रोग्राम केवल आगरा शहर घूमने का था तो जल्दी उठने की कोई बंदिश नहीं थी।
मैं लड़कियों को उनके कमरों में छोड़ कर वापस आकर गहरी नींद में सो गया।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

ट्रेन में शमा और रूबी की चूत चुदाई

इस तरह आगरा की वो रात समाप्त हुई और अगले दिन का प्रोग्राम केवल आगरा शहर घूमने का था तो जल्दी उठने की कोई बंदिश नहीं थी। मैं लड़कियों को उनके कमरों में छोड़ कर वापस आकर गहरी नींद में सो गया।
अगले दिन नाश्ता करके हम सब अलग अलग आगरा शहर घूमने के लिए निकल गए लेकिन हमारा ग्रुप एक साथ था, हम सब टैक्सी करके शहर के खास खास बाज़ारों में घूमने चल दिए।
जेनी मुझसे बहुत खुश थी और बार बार वो मेरे पास आने की कोशिश कर रही थी और जब भी अवसर मिलता वो मेरे पास आ जाती और अपने मुम्मों को मेरे बाज़ू के साथ स्पर्श करवा देती और यह मुझ को बहुत ही अच्छा लगता था।
मैं भी कोई मौका नहीं छोड़ता उसके चूतड़ों को हाथ लगाने में और उसकी रेशमी साड़ी पर मेरा हाथ उसके गोल गोल नितम्बों पर फिसल जाता था।
यह खेल बहुत ही चुपचाप चल रहा था।
सब लड़कियाँ एक चूड़ी वाले की दूकान पर जा कर रुक गई और चूड़ियाँ पसंद करने में लग गई, मैं जेनी के पीछे खड़ा होकर उसको चूड़ियों के रंगों के बारे में बता रहा था और हर बार मेरा लौड़ा जेनी के चूतड़ों में जाकर लगता था चाहे वो जाने या फिर अनजाने में ही हो लेकिन मैंने महसूस किया कि जेनी को यह अच्छा लग रहा था।
कुछ लड़कियाँ साड़ी की दूकान पर जाकर खड़ी हो गई और नए ढंग की साड़ियाँ देखने लगी लेकिन पूनम बेचारी पीछे पीछे ही खड़ी रहती थी क्यूंकि मुझको लगता था कि उसके पास शायद पैसे नहीं थे।
मैं उसके पास गया और उसके कान में कहा- पूनम महारानी, जो पसंद हो वो खरीद लो, पैसों की फ़िक्र ना करो मैं हूँ ना?
वो बोली- वो तो ठीक है, लेकिन तुमको तो चुकाने पड़ेंगे ना, आज नहीं तो कल, इसलिए जिस वस्तु के पैसे पास ना हों, उसकी कभी ना इच्छा करो, यह मेरी माँ ने मेरे कान में डाल रखा है। तो सोमू राजा, तुम बेफिक्र रहो, हमको जब ज़रूरत होगी तो ज़रूर मांग लेंगे।
मैं बोला- अच्छा तो ठीक है, तुम यहाँ से मेरी होने वाली दुल्हन के लिए तो साड़ी पसंद कर सकती हो न?
पूनम बोली- तुम्हारी होने वाली दुल्हन? कौन है? कहाँ है? बताओ तो सही?
मैं उसके कान फिर बोला- मम्मी जी ने चुन रखी है! तुम मेरा कहा मान कर उसके लिए एक सुंदर सी साड़ी चुन लो जो तुमको पसंद हो!
तब पूनम ने एक बहुत ही सुंदर साड़ी पसंद कर ली और मैंने उसके पैसे चुका दिए।
अभी थोड़ी दूर आगे गए होंगे कि दो अपने ही कॉलेज की लड़कियाँ भी मिल गई, उन्होंने मुझको घेर लिया, कहने लगी- सोमू यार तुम तो आजकल कॉलेज में छाए हुए हो और लड़कियों में ख़ास तौर पर बहुत पॉपुलर हो रहे हैगो।
मैं भी बोला- यह कैसे कह रहे हैगो? कौन सी लड़की के साथ में बहुत ही पॉपुलर हो रिया हैगो?
पहले वाली लड़की बोली- अच्छी नक़ल लगा लेते हो सोमू… लेकिन मुख्य बात को टालो नहीं, कभी हमारे साथ भी तो पॉपुलर होकर देखो ना यार?
मैं बोला- सच कह रही हो तुम? अगर यह सच है तो आज रात में ट्रेन में पॉपुलर हो जाते हैं तुम्हारे साथ भी! आप दोनों ने अपना नाम तो बताया ही नहीं? बताओ बिना नाम के कैसे पॉपुलर हो जा रहे हैगो?
मेरी नकलबाज़ी से दोनों लड़कियाँ हंस पड़ी और बोली- मेरा नाम रूबी है और इसका नाम शमा है और हम दोनों तुम्हारे ही कॉलेज में इंटर के दूसरे साल में हैं।
मैं बोला- ठीक है, आज रात को ट्रेन में अपनी पॉपुलैरिटी का टेस्ट कर लेते हैं, क्यों?
दोनों ने हंस कर कहा- ठीक है… लेकिन यह तो तुमने बताया नहीं कि इस टेस्ट में क्या करना होता है?
मैं बोला- हम सब इस टेस्ट में एक दूसरे को कहानी और जोक्स सुनाते हैं और खूब हँसते खेलते हैं, बस यही होता है पॉपुलैरिटी टेस्ट।
दोनों के चेहरे लटक गए उदासी में और फिर रूबी बोली- लेकिन मैंने तो सुना था कि आपके साथ बहुत कुछ होता है?
मैं अब मज़े लेने लगा था, मैंने बिल्कुल अनजान बनते हुए कहा- मेरे साथ बहुत कुछ क्या होता है? यह नहीं बताया गया था आप सब को?
रूबी बोली- यही मौज मस्ती!!
मैं बोला- अच्छा मौज मस्ती? हाँ वो तो बहुत होता है हमारे साथ हम सब मिल कर खूब मौज मस्ती करते हैं जैसे कल कि रात ही हम 4-5 लड़के लड़कियों ने मिल कर छुपन छुपाई खेली थी फिर ‘आई स्पाई’ जैसी गेम भी खेली थी। आप खेलना चाहोगी हमारे साथ ये गेम्स?
रूबी मेरे को घूर कर देखने लगी, शायद उसको शक हो गया था कि मैं उसके साथ मज़ाक कर रहा था।
तब शमा बोल पड़ी- हमने तो यह सुना है कि आप सब मिल कर सेक्स जैसी गेम्स भी खेलते हो?
अब मैं गंभीर हो गया और बोला- मैं नहीं जानता, यह सब तुम को कहाँ से पता चला है लेकिन अगर आप के मन में सेक्स जैसी किसी गेम को खेलने की इच्छा है तो साफ़ साफ़ कहिये न, यूं घुमा फिरा कर कहने में क्या फायदा?
तब रूबी बोली- आप का मतलब है कि आप सेक्स करने के लिए तैयार हैं?
मैं बोला- आप अगर तैयार हैं तो मैं भी तैयार हूँ और वैसे भी आप जैसी सुन्दर कन्याओं को देख कर सब को हो जाये प्यार तब भला कौन कर सकता है इंकार? अब बोलिए आप की क्या मर्ज़ी है? 
शमा बोली- आपने तो सुना ही होगा कि ‘शमा तो जलती है हर रंग में सहर होने तक…’
मैं बोला- आपका मतलब है कि आप रात से ले कर सुबह तक जलना चाहती है मेरे साथ?
शमा ने चैलेंज भरी आवाज़ में कहा- क्या आप पूरी रात से लेकर सुबह तक शमा जला सकते हैं?
मैं बोला- आप आज़मा कर तो देखिये, ज़रा करके तो देखिये और हमसे करवा कर तो देखिये? बोलिए क्या इरादा है? जल्दी कीजिये मेरे साथ आई 5-5 शमाएँ इधर ही आने वाली हैं।
रूबी ने उधर देखा जिधर पूनम, नेहा, जेनी, जस्सी और डॉली दूकान पर साड़ी देख रही थी।
रूबी और शमा दोनों बोली एक साथ- हम तैयार हैं, बोलो क्या करना होगा?
मैं बोला- मैं आप दोनों को एक 2 सीट वाला केबिन दिलवा दूंगा अगर आप आज रात ही शमा जलाना चाहती हों तो, नहीं तो लखनऊ जाकर देख लेंगे कब और कहाँ?
शमा बोली- ठीक है, मैं शमा तो आज रात ही अपनी शमा जलाना चाहती हूँ और तुम रूबी कब और कहाँ बोलो?
रूबी बोली- जब शमा जलेगी तो भँवरे तो आएंगे ही, एक आधा मेरे हिस्से भी आ जाए तो बहुत अच्छा है। मेरी भी हाँ है आज रात को शमा के साथ जलने की!
मैं बोला- आज रात को 11-12 के बीच में प्रोग्राम रख लेते हैं अगर दोनों शमा जलने के लिए तैयार हों तो!
दोनों एक साथ बोली- तैयार हैं मेरे मालिक, मेरे आका।
मैं बोला- फिर मिलते हैं होटल में!
यह कह कर मैं पूनम के पास खड़ा हो गया और कुछ ही मिनटों में उसने कह दिया- सोमू, निकालो 200 रूपए तुम्हारी होने वाली बीवी की दूसरी साड़ी खरीदी है।
मैंने झट सो उसको 200 रूपए दे दिए और बाकी सब लकड़ियों ने भी कुछ न कुछ खरीदा था, सब लड़कियाँ ख़ुशी ख़ुशी से वापसी के लिए तैयार हो गई।
होटल में लंच करके मैं तो बहुत ही गहरी नींद में सो गया और फिर शाम को उठा तो स्टेशन जाने की तैयारी शुरू हो गई और हम सब 8 बजे आगरा स्टेशन पर पहुँच गये और ट्रेन तो खड़ी थी, उसमें सामान भी रखवा दिया।
जैसा कि आते समय केबिन बांटे थे, वैसे ही अब भी बाँट दिए लेकिन इस बार रूबी और शमा को एक अलग केबिन दे दिया था जो बिल्कुल मेरे साथ वाला केबिन था और बाकी लड़कियों को भी इसी तरह एडजस्ट कर दिया।
मेरा दो सीट वाला केबिन सिर्फ मेरे अकेले के ही पास था क्योंकि एक लड़का जो अपने दादा दादी को मिलने गया था वो वापस नहीं जा सका क्यूंकि वो बीमार हो गया था।
मैं अपनी फ्रेंड्स को मिलने गया और पूछा- क्या प्रोग्राम है?
तो सबने कहा कि वो बहुत थक चुकी हैं, आज रात का कोई प्रोग्राम नहीं है।
थोड़ी देर मैं उनके पास बैठ कर अपने केबिन की तरफ वापस जाने लगा तो पूनम ने उठ कर मुझ को एक टाइट जफ़्फ़ी मार दी और मेरे होटों पर एक गर्म और जलती हुई किस कर दी, मैं भी उसको गोल गुदाज़ नितम्बों को थोड़ा मसलने लगा और फिर उसके मोटे मुम्मों की गर्मी महसूस करने लगा।
तब नेहा बोली- बस करो पूनम अब बाकी घर जा कर लेना। 
अब जाने के लिए तैयार हुआ तो जेनी ने घेर लिया और फिर सब बारी बारी से मुझको चूमने और जफ़्फ़ी डालने लगी।
वहाँ से निकला तो शमा और रूबी के केबिन में भी गया। दोनों ने सलवर सूट पहन रखा था, उन दोनों ने भी मुझ को घेर लिया और खूब चूमाचाटा और बाहों में भींचा, मैंने महसूस किया कि शमा ज़्यादा खूबसूरत थी, रूबी उससे थोड़ी कम थी।
शमा के मुम्मे और नितम्ब मोटे और उभरे हुए थे, शमा ज़्यादा सेक्सी और फ्रैंक थी और रूबी ज़रा सोच समझ कर बात करने वाली थी।
मैंने उनको धीरज रखने को कहा और फिर जल्दी से अपने केबिन में आ गया और थोड़ी देर बाद ही निर्मला मैडम मेरे केबिन में आ गई और बैठ कर बातें करने लगी।
वो कह रही थी कि मैं कम्मो को याद दिला दूँ कि उनका काम अभी बाकी है और उस कार्यक्रम के बारे में वो उनसे फ़ोन पर बात कर ले।
यह कह कर वो उठी जाने के लिए और फिर मुड़ कर अपनी नर्म बाहों में मैडम ने मुझको जकड़ लिया और एक ज़ोर की जफ़्फ़ी और हॉट किस उसने मेरे होटों पर जड़ दी और फिर वो वहाँ से चली गई।
अब मैदान साफ़ था तो मैं चुपके से साथ वाले केबिन में दरवाज़ा खटका कर अंदर घुस गया। दोनों शमाएँ जलने जलाने के लिए तैयार बैठी थी, मैंने अंदर घुस कर केबिन का दरवाज़ा लॉक कर दिया।

फिर वही सिलसिला किसिंग और गर्म गर्म जफ़्फ़ियों का शुरू हो गया लेकिन मैंने अब ज़्यादा समय ना गंवाते हुए थोड़ी जल्दी शुरू कर दी और शमा की सलवार खोलने लगा तो रूबी मेरी पैंट को उतारने में लग गई।
मैंने उनको कहा- कभी भी किसी के आ जाने का काफी खतरा है यहाँ, तो कम से कम कपड़े उतारे जाएँगे ताकि कोई आ जाये तो वापस पहनने में कोई दिक्क्त न हो।
दोनों ने सर हिला कर हामी भर दी और रूबी जो मेरी पैंट खोल रही थी और जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो वहाँ कच्छे में टेंट बना देख कर हंस पड़ी और शमा को बुला कर उसको भी हैरत से दिखाने लगी।
शमा ने नीचे झक कर मेरे कच्छे को नीचे किया तो लंडम लाल एकदम उन्मुक्त होकर हवा में लहलहाने लगे।
शमा ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और रूबी मेरे अंडकोष को चूमने लगी और मेरा भी हाथ खाली न रह कर शमा की बालों भरी चूत को टटोलने लगा।
फिर मेरा दूसरा हाथ शमा के गोल गोल मुम्मों के ऊपर चला गया वो अभी भी कमीज से ढके हुए थे।
रूबी ने शमा की कमीज और ब्रा को ऊपर कर दिया जिससे उसके गोल और सॉलिड मुम्मे मेरे सामने आ गए, मैंने अपना मुंह उसके मुम्मों को चूसने को लगा दिया और दूसरे हाथ से रूबी की चूत को सहलाने के लिए लगा दिया और वो एकुदम लबालब पानी से भरी हुई थी।
दोनों ही शायद चुदाई के बारे में सोच सोच कर बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उन दोनों की चूत लपालप लंड लेने की इंतज़ार में थी।

मैं ने शमा को ऊपर किया और उसके कान में कहा- शमा जी आपकी शमा जलाएँ क्या?
शमा बोली- हज़ूर, वो तो आपके लंड को देख कर ही जल रही है सो जल्दी से अपनी जलती हुई मशाल को शमा के हवाले कीजिये सरकार मेरी।
मैं बोला- पेश है मशाल जो जलती रहे रात दिन!
यह कह कर मैंने उसको उल्टा खड़ा किया और उसके दोनों हाथ सीट पर रख कर पीछे से लंड का निशाना साधा और एक धक्के में अपने लम्बे और मोटे लंड को शमा की चूत में डाल कर उसके अंदर की शमा को रोशन करने लगा।
रूबी भी अब अपनी कमीज और ब्रा ऊपर कर के अपने मस्त गुब्बारों को उड़ने ले लिए आज़ाद करने लगी। उसके उरोज भी अलमस्त और मदमस्त थे, देखते ही शराब का नशा सा आ गया आँखों में और चूचियों को सहला कर दोनों को मरहबा कहा मन ही मन!
उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए मन ही मन कहा- माशाल्ल्लाह क्या लुत्फ़ अन्दोज़ चीज़ें हैं यह दोनों उभरे हुए गोल गुंबद!
और शमा शायद मन ही मन कह रही थी- वाह क्या मीनारे कुतब शाही है इसका लौड़ा। लम्बा और मोटा तो है ही और क्या तपते लोहे की सलाख है यह जौनपुरी केला जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो कभी ना समझ पाये।
शमा की चूत में अब काफी हलचल थी वो खुद आगे पीछे हो कर चुदाई की स्पीड को कंट्रोल कर रही थी और जब उसने इस काम में तेज़ी दिखाई तो मैं समझ गया कि यह किला फ़तेह होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा और मैंने अपना दायाँ हाथ उसकी चूत के अंदर उसकी भग मसलने की ड्यूटी पर लगा दिया।
ऐसा करते ही शमा की उछल कूद और तेज़ हो गई और वो आँखें बंद करके फुसफ़ुसा रही थी- मार डालोगे क्या… उफ़ मैं गई रे…
फिर उसके धक्के एकदम तेज़ दर तेज़ हो गये और कुछ मिन्ट में वो थोड़ी से कांपी और सीट के ऊपर लुढ़क गई और मैंने अपनी तरफ से इनामी धक्के मारे उसको सीट पर लिटा कर और फिर मैं उसकी चूत से अपने गीले लौड़े को निकाल कर रूबी की चूत को ढूंढने लगा।
रूबी यह तमाशा देख कर अपनी चूत में से निकलती आग को अपनी ऊँगली से बुझाने की कोशिश कर रही थी और अब मेरे लौड़े को आज़ाद देख कर वो लपक पड़ी और वैसे ही सीट पर झुक कर खड़ी हो गई और मेरे अग्नि बाण का इंतज़ार करने लगी।
मैंने अपने शमा की चूत के पानी से लबरेज़ हुए लौड़े को रूबी की चूत के मुंह पर रख कर अंदर धकेल दिया और एक ही झटके में पूरा जब अंदर चला गया तो रूबी उछल पड़ी और ज़ोर से चिला पड़ी- उईईइ माआ मर गई रे!
लेकिन साथ ही बड़ी मोहब्बत से उसने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्करा दी और मेरे दिल ने कहा- मर जावां गुड़ खा के, साली क्या मुस्कराई है, यार वारी जाऊं!
और फिर मैं ने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये, पूरा अंदर फिर पूरा बाहर, सिर्फ लंड की टिप अंदर, और फिर ज़ोरदार धक्का अंदर, बारमबार ऐसा करने से गिर जाती हैं बड़ी बड़ी शहसवार बेगमें और गुलामी कबूल कर लेती हैं खूबसूरत हूरें।
मैंने महसूस किया कि रूबी ज़्यादा आनन्द ले रही थी चुदाई का और बार बार मुड़ कर आँखों ही आँखों से शुक्रिया अदा कर रही थी।
मैं भी रूबी की हलीमी का कायल हो गया और इस कोशिश में लग गया कि इसको ज़्यादा से ज़्यादा लुत्फ़ अन्दोज़ करवाऊँगा।
मैं भी अब पूरी तरह से मस्त होकर चुदाई में लग गया और उसके गोल और सख्त चूतड़ों को सहलाने लगा और उसकी गांड में भी हल्की सी ऊँगली डाल दी और उसने फिर मुड़ कर एक प्यार भरी नज़र से देखा जैसे कह रही हो करते रहो गांड में भी ऐसा ही!
उधर शमा सीट पर पूरी पसर गई थी और उसकी खुली सलवार के अंदर से उसकी फूली हुई चूत के दर्शन हो रहे थे और उसमें से अभी भी थोड़ा थोड़ा रस निकल रहा था जो उसकी चूत का था और वो टप टप उसकी सलवार में गिर रहा था।
अब रूबी ने अपने चूतड़ों से इशारा किया कि तेज़ चुदाई करूँ, मैंने कमर कस के धक्कों की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी और उसकी चूत में ऊँगली डाल कर महसूस किया कि वो छूटने से ज़्यादा दूर नहीं है।
मेरी तेज़ स्पीड के आगे रूबी अब अधिक देर टिक ना सकी और हाय हाय करती हुई बहुत ज़्यादा पानी छोड़ती हुई एक सिहरन होने लगी उसके शरीर में!
मैं अब ट्रेन के फर्श पर बैठ गया और उसके नितम्बों को चूमने और चाटने लगा जिससे उसको बड़ा मज़ा आ रहा था।
अब मैं लेटी हुई शमा के गोल मुम्मों को जीभ से चाटने लगा और उसकी चूचियों का रसपान करने लगा।
शमा ने मुझको एक बहुत ही गहरी जफ़्फ़ी डाल दी और मेरे लबों को चूमने लगी, मैं भी उसके अधरों को जीभ से चूसने लगा।
अब दोनों थोड़ी संयत हो गई थी और अपने कपड़े ठीक कर रही थी, मैं भी अपनी पैंट वगैरह ठीक कर रहा था।
फिर मैंने उन दोनों को गुड नाईट कहा और जाने लगा तो शमा बोली- अब फिर कब होगी मुलाकात हम दोनों के सरताज?
मैंने भी उसी लहजे में जवाब दिया- जब आप चाहो बेगमाते-ऐ-अवध मैं आपका खाविंद आपकी खिदमत में हाज़िर रहूंगा। आप सिर्फ़ हुक्म नादिरशाही जारी कीजिये, बंदा आप की खिदमत में हाज़िर हो जाएगा।
यह कह कर मैंने उन दोनों को एक बार चूमा और केबिन का दरवाज़ा खोल कर बाहर आ गया।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

निर्मला मैडम का गर्भाधान

गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए।
कम्मो और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई। 
पूनम अपने कमरे में फ्रेश होने चली गई और कम्मो मेरे साथ मेरे कमरे तक आई।
कम्मो ने बताया कि कोठी में सब ठीक ठाक रहा और मम्मी जी का फ़ोन आता रहता था और वहाँ भी सब कुशल मंगल है।
तब मैंने उसको याद दिलाया- निर्मला मैडम तुमको याद कर रही थी, आज उनको फ़ोन ज़रूर कर लेना।
कम्मो ने बताया कि दो और सेठानियों से उसकी बात हुई है और वो मुझसे मिलना चाहती हैं।
तब मैंने कहा निर्मला मैडम के साथ उनका भी प्रोग्राम बना लो।
लेकिन प्रश्न यह था कि पूनम के होते हुए यह संभव नहीं था तो मैंने कहा कि अभी समय है कुछ न कुछ सोचते हैं।
इतनी देर से कम्मो से बात हो रही थी लेकिन मैंने उसको ध्यान से नहीं देखा था और जब देखा तो वो बेहद सेक्सी लगी।
मैंने लपक कर उसको बाँहों में भर लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ दे डाली और उसके धोती में लिपटे हुए गुदाज़ जिस्म को टटोलने लगा।
उसके मुम्मे वैसे ही सॉलिड थे और चूतड़ों की वही बहार थी फिर भी मैंने उसको जी भर के हाथों से महसूस किया।
तब कम्मो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मैं गर्म हो जाऊँगी और आपके कॉलेज जाने का टाइम भी तो हो रहा है। दिन को मैं आपको दिल खोल कर चोदूंगी।
मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी धोती को ऊपर उठा कर और अपनी पैंट और अन्डरवीयर को नीचे कर के अपने खड़े लौड़े के दर्शन उसको करवाये और फिर उसकी एक टांग को अपनी बगल में लेकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया, अपने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर मैं खुद ही आगे पीछे होकर उसको चोदने लगा।
जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और वो भी मेरा साथ पूरी तरह देने लगी। मैंने अपने होंट उसके होटों पर रख दिए और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर आहिस्ता से चूसने लगा।
कम्मो इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई।
हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही पूनम भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा।
यह कहते हुए वो रोने लगी।
मैंने और कम्मो ने उसको चुप करवाया और उसको तसल्ली दी कि सब ठीक हो जाएगा।
वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे।
कोठी आकर मैं आराम से नहाया और नाश्ता करने लगा, फिर आराम करने लगा क्यूंकि आज कॉलेज में ट्रिप वाले छात्रों की छुट्टी थी।
कम्मो ने थोड़ी देर बाद निर्मला मैडम से बात की और सब पूछताछ करने के बाद उसने कहा- अगर आप आज आ सकती हैं तो आ जाइए मैं फिर आप का चेकअप कर लेती हूँ, जैसा हुआ वैसा प्रोग्राम बना लेंगे।
तब कम्मो ने बताया दो सेठानियों ने भी अपना चेकअप करवाया है और वो दोनों भी गर्भाधान के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वो आप से मिलना चाहती हैं।
मैंने कहा- आने दो, लेकिन पहले मैडम का काम कर लेते हैं फिर दूसरे के बारे में सोचेंगे।
एक घंटे के बाद ही निर्मला मैडम आ गई और कम्मो उनको लेकर दूसरे बैडरूम में चली गई।
कोई 15 मिन्ट बाद ही वो दोनों बाहर आ गई।
फिर हम सब मिल कर बैठक मैं चाय पीने लगे और तब कम्मो बोली- मैंने कल का टाइम मैडम के साथ फिक्स किया है, वो आज से स्पेशल डाइट खा कर कल आएँगी।
मैडम ने हामी में सर हिला दिया।
कम्मो ने कहा- ऐसा है मैडम जी, मेरा यह सिस्टम 100% सही नहीं होता। हाँ 50-60 % यह सही बैठ रहा है और वो भी अगर सोमू वीर्य दान करे तो! मैंने इसका वीर्य लैब में चेक करवाया था और जो रिपोर्ट आई थी उसमें साफ़ लिखा था कि सोमू के स्पर्म्स बड़े ही शक्तिशाली हैं और पूरी तरह से गर्भ के लिए सक्षम हैं। इसीलिए अब तक जितनी भी सोमु के वीर्य से गर्भाधान की कोशिश की हैं वो सब 100% कामयाब हुई हैं। आशा है मैडम जी, आपके केस में भी पूरी सफलता मिलेगी हमको!
निर्मला मैडम बोली- नहीं नहीं, मुझको तुम्हारे चेकअप और ट्रीटमेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन यह जान कर मुझ को तसल्ली मिल रही है कि सोमू की वजह से मैं माँ बन सकती हूँ अगर प्रभु चाहें तो।
कल आने का वायदा कर के मैडम चली गई और हम सब अपने कामों में लग गए।
मैं खासतौर पर राम लाल चौकीदार से मिला और उसको थोड़ा बहुत इनाम भी दिया और कहा कि तुम्हारी होशियारी के कारण मेरा मन बड़ा शांत रहता है कि आप कोठी का पूरा ध्यान रख रहे हो।
अगले दिन मैं कॉलेज से मैडम के साथ ही निकला और घर आकर हम दोनों को कम्मो ने स्पेशल डाइट का लंच करवाया।
और फिर हम दोनों मेरे ही बैडरूम में सो गए, तकरीबन एक घंटे बाद ही हम जागे, फिर कम्मो ने हम दोनों को निर्वस्त्र कर दिया।
मैंने मैडम को बाँहों में भर लिया और उनके होटों को लगातार चुम्मियों से तर कर दिया और उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को काफी देर सहलाया और चूसा।
मम्मों की दोनों चूचियाँ एकदम से लंड की माफिक अकड़ गई थी और उनको चूसने के बाद में नीचे बैठ गया और मैडम की चूत में मुंह डाल कर चूत के लबों को चूसा और फिर उसकी भग को काफी देर अपने दोनों लबों में लेकर चूसता रहा और मैडम बार बार मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह को हटाती थी लेकिन मैं फिर भी अलमस्त होकर चूसता ही रहा।
अब मैंने मैडम को अपने हाथों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया, धीरे से उनको वहाँ लिटा दिया और अपने लौड़े को सीधा तान कर उनकी जांघों के बीच बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल दिया।
तपते हुए लोहे को चूत में जाते ही मैडम हाय हाय करने लगी और मुझको अपने मुम्मों के बीच लिटा कर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।
कम्मो के सिखाये मुताबिक़ मैं पहले धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और मैडम की गर्म और एकदम गीली चूत का आनंद लेने लगा।
फिर उनके मुम्मों को चूसते हुए अपनी स्पीड धीरे धीरे तेज़ करने लगा और जब मैडम नीचे से मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी। मेरी कोशिश थी कि मैडम पूरे कामुकता के जोश में आ जाएँ तो मैं अपना असली हथियार फेंकू।
थोड़ी देर में मैडम अपने पूरे जोश-ओ-खरोश में आ गई तो धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और जल्दी ही मैडम का पानी छूट गया और उन्होंने अपनी जांघों कस कर मेरे इर्द गिर्द लॉक कर दीं।
लेकिन मेरा मिशन तो अभी अधूरा था, मैं पूरी अपनी यौन शक्ति के साथ फुल स्पीड चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र हो गई कि मैडम तड़फड़ाती हुई दूसरी बार भी स्खलित हो गई और अब कम्मो ने इशारा किया और मैं अपने लंड की पोजीशन ठीक करके उसके गर्भाशय के मुंह को ढूंढ रहा था।
और जब मुझ को आभास हुआ कि गर्भाशय का मुख कहाँ है, मैंने अपना लंड का रुख उस तरफ किया और वीर्य की जोरदार पिचकारी वहाँ छोड़ दी।
गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।
मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।
और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।
मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।
इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!
मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!
अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।
मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो!

निर्मला मैडम का गर्भाधान


गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए।
कम्मो और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई। 
पूनम अपने कमरे में फ्रेश होने चली गई और कम्मो मेरे साथ मेरे कमरे तक आई।
कम्मो ने बताया कि कोठी में सब ठीक ठाक रहा और मम्मी जी का फ़ोन आता रहता था और वहाँ भी सब कुशल मंगल है।
तब मैंने उसको याद दिलाया- निर्मला मैडम तुमको याद कर रही थी, आज उनको फ़ोन ज़रूर कर लेना।
कम्मो ने बताया कि दो और सेठानियों से उसकी बात हुई है और वो मुझसे मिलना चाहती हैं।
तब मैंने कहा निर्मला मैडम के साथ उनका भी प्रोग्राम बना लो।
लेकिन प्रश्न यह था कि पूनम के होते हुए यह संभव नहीं था तो मैंने कहा कि अभी समय है कुछ न कुछ सोचते हैं।
इतनी देर से कम्मो से बात हो रही थी लेकिन मैंने उसको ध्यान से नहीं देखा था और जब देखा तो वो बेहद सेक्सी लगी।
मैंने लपक कर उसको बाँहों में भर लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ दे डाली और उसके धोती में लिपटे हुए गुदाज़ जिस्म को टटोलने लगा।
उसके मुम्मे वैसे ही सॉलिड थे और चूतड़ों की वही बहार थी फिर भी मैंने उसको जी भर के हाथों से महसूस किया।
तब कम्मो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मैं गर्म हो जाऊँगी और आपके कॉलेज जाने का टाइम भी तो हो रहा है। दिन को मैं आपको दिल खोल कर चोदूंगी।
मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी धोती को ऊपर उठा कर और अपनी पैंट और अन्डरवीयर को नीचे कर के अपने खड़े लौड़े के दर्शन उसको करवाये और फिर उसकी एक टांग को अपनी बगल में लेकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया, अपने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर मैं खुद ही आगे पीछे होकर उसको चोदने लगा।
जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और वो भी मेरा साथ पूरी तरह देने लगी। मैंने अपने होंट उसके होटों पर रख दिए और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर आहिस्ता से चूसने लगा।
कम्मो इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई।
हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही पूनम भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा।
यह कहते हुए वो रोने लगी।
मैंने और कम्मो ने उसको चुप करवाया और उसको तसल्ली दी कि सब ठीक हो जाएगा।
वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे।
कोठी आकर मैं आराम से नहाया और नाश्ता करने लगा, फिर आराम करने लगा क्यूंकि आज कॉलेज में ट्रिप वाले छात्रों की छुट्टी थी।
कम्मो ने थोड़ी देर बाद निर्मला मैडम से बात की और सब पूछताछ करने के बाद उसने कहा- अगर आप आज आ सकती हैं तो आ जाइए मैं फिर आप का चेकअप कर लेती हूँ, जैसा हुआ वैसा प्रोग्राम बना लेंगे।
तब कम्मो ने बताया दो सेठानियों ने भी अपना चेकअप करवाया है और वो दोनों भी गर्भाधान के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वो आप से मिलना चाहती हैं।
मैंने कहा- आने दो, लेकिन पहले मैडम का काम कर लेते हैं फिर दूसरे के बारे में सोचेंगे।
एक घंटे के बाद ही निर्मला मैडम आ गई और कम्मो उनको लेकर दूसरे बैडरूम में चली गई।
कोई 15 मिन्ट बाद ही वो दोनों बाहर आ गई।
फिर हम सब मिल कर बैठक मैं चाय पीने लगे और तब कम्मो बोली- मैंने कल का टाइम मैडम के साथ फिक्स किया है, वो आज से स्पेशल डाइट खा कर कल आएँगी।
मैडम ने हामी में सर हिला दिया।
कम्मो ने कहा- ऐसा है मैडम जी, मेरा यह सिस्टम 100% सही नहीं होता। हाँ 50-60 % यह सही बैठ रहा है और वो भी अगर सोमू वीर्य दान करे तो! मैंने इसका वीर्य लैब में चेक करवाया था और जो रिपोर्ट आई थी उसमें साफ़ लिखा था कि सोमू के स्पर्म्स बड़े ही शक्तिशाली हैं और पूरी तरह से गर्भ के लिए सक्षम हैं। इसीलिए अब तक जितनी भी सोमु के वीर्य से गर्भाधान की कोशिश की हैं वो सब 100% कामयाब हुई हैं। आशा है मैडम जी, आपके केस में भी पूरी सफलता मिलेगी हमको!
निर्मला मैडम बोली- नहीं नहीं, मुझको तुम्हारे चेकअप और ट्रीटमेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन यह जान कर मुझ को तसल्ली मिल रही है कि सोमू की वजह से मैं माँ बन सकती हूँ अगर प्रभु चाहें तो।
कल आने का वायदा कर के मैडम चली गई और हम सब अपने कामों में लग गए।
मैं खासतौर पर राम लाल चौकीदार से मिला और उसको थोड़ा बहुत इनाम भी दिया और कहा कि तुम्हारी होशियारी के कारण मेरा मन बड़ा शांत रहता है कि आप कोठी का पूरा ध्यान रख रहे हो।
अगले दिन मैं कॉलेज से मैडम के साथ ही निकला और घर आकर हम दोनों को कम्मो ने स्पेशल डाइट का लंच करवाया।
और फिर हम दोनों मेरे ही बैडरूम में सो गए, तकरीबन एक घंटे बाद ही हम जागे, फिर कम्मो ने हम दोनों को निर्वस्त्र कर दिया।
मैंने मैडम को बाँहों में भर लिया और उनके होटों को लगातार चुम्मियों से तर कर दिया और उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को काफी देर सहलाया और चूसा।
मम्मों की दोनों चूचियाँ एकदम से लंड की माफिक अकड़ गई थी और उनको चूसने के बाद में नीचे बैठ गया और मैडम की चूत में मुंह डाल कर चूत के लबों को चूसा और फिर उसकी भग को काफी देर अपने दोनों लबों में लेकर चूसता रहा और मैडम बार बार मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह को हटाती थी लेकिन मैं फिर भी अलमस्त होकर चूसता ही रहा।
अब मैंने मैडम को अपने हाथों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया, धीरे से उनको वहाँ लिटा दिया और अपने लौड़े को सीधा तान कर उनकी जांघों के बीच बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल दिया।
तपते हुए लोहे को चूत में जाते ही मैडम हाय हाय करने लगी और मुझको अपने मुम्मों के बीच लिटा कर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।
कम्मो के सिखाये मुताबिक़ मैं पहले धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और मैडम की गर्म और एकदम गीली चूत का आनंद लेने लगा।
फिर उनके मुम्मों को चूसते हुए अपनी स्पीड धीरे धीरे तेज़ करने लगा और जब मैडम नीचे से मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी। मेरी कोशिश थी कि मैडम पूरे कामुकता के जोश में आ जाएँ तो मैं अपना असली हथियार फेंकू।
थोड़ी देर में मैडम अपने पूरे जोश-ओ-खरोश में आ गई तो धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और जल्दी ही मैडम का पानी छूट गया और उन्होंने अपनी जांघों कस कर मेरे इर्द गिर्द लॉक कर दीं।
लेकिन मेरा मिशन तो अभी अधूरा था, मैं पूरी अपनी यौन शक्ति के साथ फुल स्पीड चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र हो गई कि मैडम तड़फड़ाती हुई दूसरी बार भी स्खलित हो गई और अब कम्मो ने इशारा किया और मैं अपने लंड की पोजीशन ठीक करके उसके गर्भाशय के मुंह को ढूंढ रहा था।
और जब मुझ को आभास हुआ कि गर्भाशय का मुख कहाँ है, मैंने अपना लंड का रुख उस तरफ किया और वीर्य की जोरदार पिचकारी वहाँ छोड़ दी।
गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।
मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।
और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।
मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।
इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!
मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!
अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।
मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो!


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