Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र Sex - Printable Version

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RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

निर्मला मैडम का गर्भाधान

गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए।
कम्मो और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई। 
पूनम अपने कमरे में फ्रेश होने चली गई और कम्मो मेरे साथ मेरे कमरे तक आई।
कम्मो ने बताया कि कोठी में सब ठीक ठाक रहा और मम्मी जी का फ़ोन आता रहता था और वहाँ भी सब कुशल मंगल है।
तब मैंने उसको याद दिलाया- निर्मला मैडम तुमको याद कर रही थी, आज उनको फ़ोन ज़रूर कर लेना।
कम्मो ने बताया कि दो और सेठानियों से उसकी बात हुई है और वो मुझसे मिलना चाहती हैं।
तब मैंने कहा निर्मला मैडम के साथ उनका भी प्रोग्राम बना लो।
लेकिन प्रश्न यह था कि पूनम के होते हुए यह संभव नहीं था तो मैंने कहा कि अभी समय है कुछ न कुछ सोचते हैं।
इतनी देर से कम्मो से बात हो रही थी लेकिन मैंने उसको ध्यान से नहीं देखा था और जब देखा तो वो बेहद सेक्सी लगी।
मैंने लपक कर उसको बाँहों में भर लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ दे डाली और उसके धोती में लिपटे हुए गुदाज़ जिस्म को टटोलने लगा।
उसके मुम्मे वैसे ही सॉलिड थे और चूतड़ों की वही बहार थी फिर भी मैंने उसको जी भर के हाथों से महसूस किया।
तब कम्मो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मैं गर्म हो जाऊँगी और आपके कॉलेज जाने का टाइम भी तो हो रहा है। दिन को मैं आपको दिल खोल कर चोदूंगी।
मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी धोती को ऊपर उठा कर और अपनी पैंट और अन्डरवीयर को नीचे कर के अपने खड़े लौड़े के दर्शन उसको करवाये और फिर उसकी एक टांग को अपनी बगल में लेकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया, अपने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर मैं खुद ही आगे पीछे होकर उसको चोदने लगा।
जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और वो भी मेरा साथ पूरी तरह देने लगी। मैंने अपने होंट उसके होटों पर रख दिए और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर आहिस्ता से चूसने लगा।
कम्मो इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई।
हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही पूनम भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा।
यह कहते हुए वो रोने लगी।
मैंने और कम्मो ने उसको चुप करवाया और उसको तसल्ली दी कि सब ठीक हो जाएगा।
वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे।
कोठी आकर मैं आराम से नहाया और नाश्ता करने लगा, फिर आराम करने लगा क्यूंकि आज कॉलेज में ट्रिप वाले छात्रों की छुट्टी थी।
कम्मो ने थोड़ी देर बाद निर्मला मैडम से बात की और सब पूछताछ करने के बाद उसने कहा- अगर आप आज आ सकती हैं तो आ जाइए मैं फिर आप का चेकअप कर लेती हूँ, जैसा हुआ वैसा प्रोग्राम बना लेंगे।
तब कम्मो ने बताया दो सेठानियों ने भी अपना चेकअप करवाया है और वो दोनों भी गर्भाधान के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वो आप से मिलना चाहती हैं।
मैंने कहा- आने दो, लेकिन पहले मैडम का काम कर लेते हैं फिर दूसरे के बारे में सोचेंगे।
एक घंटे के बाद ही निर्मला मैडम आ गई और कम्मो उनको लेकर दूसरे बैडरूम में चली गई।
कोई 15 मिन्ट बाद ही वो दोनों बाहर आ गई।
फिर हम सब मिल कर बैठक मैं चाय पीने लगे और तब कम्मो बोली- मैंने कल का टाइम मैडम के साथ फिक्स किया है, वो आज से स्पेशल डाइट खा कर कल आएँगी।
मैडम ने हामी में सर हिला दिया।
कम्मो ने कहा- ऐसा है मैडम जी, मेरा यह सिस्टम 100% सही नहीं होता। हाँ 50-60 % यह सही बैठ रहा है और वो भी अगर सोमू वीर्य दान करे तो! मैंने इसका वीर्य लैब में चेक करवाया था और जो रिपोर्ट आई थी उसमें साफ़ लिखा था कि सोमू के स्पर्म्स बड़े ही शक्तिशाली हैं और पूरी तरह से गर्भ के लिए सक्षम हैं। इसीलिए अब तक जितनी भी सोमु के वीर्य से गर्भाधान की कोशिश की हैं वो सब 100% कामयाब हुई हैं। आशा है मैडम जी, आपके केस में भी पूरी सफलता मिलेगी हमको!
निर्मला मैडम बोली- नहीं नहीं, मुझको तुम्हारे चेकअप और ट्रीटमेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन यह जान कर मुझ को तसल्ली मिल रही है कि सोमू की वजह से मैं माँ बन सकती हूँ अगर प्रभु चाहें तो।
कल आने का वायदा कर के मैडम चली गई और हम सब अपने कामों में लग गए।
मैं खासतौर पर राम लाल चौकीदार से मिला और उसको थोड़ा बहुत इनाम भी दिया और कहा कि तुम्हारी होशियारी के कारण मेरा मन बड़ा शांत रहता है कि आप कोठी का पूरा ध्यान रख रहे हो।
अगले दिन मैं कॉलेज से मैडम के साथ ही निकला और घर आकर हम दोनों को कम्मो ने स्पेशल डाइट का लंच करवाया।
और फिर हम दोनों मेरे ही बैडरूम में सो गए, तकरीबन एक घंटे बाद ही हम जागे, फिर कम्मो ने हम दोनों को निर्वस्त्र कर दिया।
मैंने मैडम को बाँहों में भर लिया और उनके होटों को लगातार चुम्मियों से तर कर दिया और उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को काफी देर सहलाया और चूसा।
मम्मों की दोनों चूचियाँ एकदम से लंड की माफिक अकड़ गई थी और उनको चूसने के बाद में नीचे बैठ गया और मैडम की चूत में मुंह डाल कर चूत के लबों को चूसा और फिर उसकी भग को काफी देर अपने दोनों लबों में लेकर चूसता रहा और मैडम बार बार मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह को हटाती थी लेकिन मैं फिर भी अलमस्त होकर चूसता ही रहा।
अब मैंने मैडम को अपने हाथों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया, धीरे से उनको वहाँ लिटा दिया और अपने लौड़े को सीधा तान कर उनकी जांघों के बीच बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल दिया।
तपते हुए लोहे को चूत में जाते ही मैडम हाय हाय करने लगी और मुझको अपने मुम्मों के बीच लिटा कर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।
कम्मो के सिखाये मुताबिक़ मैं पहले धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और मैडम की गर्म और एकदम गीली चूत का आनंद लेने लगा।
फिर उनके मुम्मों को चूसते हुए अपनी स्पीड धीरे धीरे तेज़ करने लगा और जब मैडम नीचे से मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी। मेरी कोशिश थी कि मैडम पूरे कामुकता के जोश में आ जाएँ तो मैं अपना असली हथियार फेंकू।
थोड़ी देर में मैडम अपने पूरे जोश-ओ-खरोश में आ गई तो धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और जल्दी ही मैडम का पानी छूट गया और उन्होंने अपनी जांघों कस कर मेरे इर्द गिर्द लॉक कर दीं।
लेकिन मेरा मिशन तो अभी अधूरा था, मैं पूरी अपनी यौन शक्ति के साथ फुल स्पीड चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र हो गई कि मैडम तड़फड़ाती हुई दूसरी बार भी स्खलित हो गई और अब कम्मो ने इशारा किया और मैं अपने लंड की पोजीशन ठीक करके उसके गर्भाशय के मुंह को ढूंढ रहा था।
और जब मुझ को आभास हुआ कि गर्भाशय का मुख कहाँ है, मैंने अपना लंड का रुख उस तरफ किया और वीर्य की जोरदार पिचकारी वहाँ छोड़ दी।
गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।
मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।
और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।
मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।
इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!
मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!
अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।
मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो!

निर्मला मैडम का गर्भाधान


गाड़ी अपने ठीक समय पर लखनऊ पहुँच गई और हम सब एक दूसरे से विदा लेकर घर पहुँच गए।
कम्मो और पारो ने हमारा भाव भीना स्वागत किया और हम दोनों को गर्म गर्म चाय पिलाई। 
पूनम अपने कमरे में फ्रेश होने चली गई और कम्मो मेरे साथ मेरे कमरे तक आई।
कम्मो ने बताया कि कोठी में सब ठीक ठाक रहा और मम्मी जी का फ़ोन आता रहता था और वहाँ भी सब कुशल मंगल है।
तब मैंने उसको याद दिलाया- निर्मला मैडम तुमको याद कर रही थी, आज उनको फ़ोन ज़रूर कर लेना।
कम्मो ने बताया कि दो और सेठानियों से उसकी बात हुई है और वो मुझसे मिलना चाहती हैं।
तब मैंने कहा निर्मला मैडम के साथ उनका भी प्रोग्राम बना लो।
लेकिन प्रश्न यह था कि पूनम के होते हुए यह संभव नहीं था तो मैंने कहा कि अभी समय है कुछ न कुछ सोचते हैं।
इतनी देर से कम्मो से बात हो रही थी लेकिन मैंने उसको ध्यान से नहीं देखा था और जब देखा तो वो बेहद सेक्सी लगी।
मैंने लपक कर उसको बाँहों में भर लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ दे डाली और उसके धोती में लिपटे हुए गुदाज़ जिस्म को टटोलने लगा।
उसके मुम्मे वैसे ही सॉलिड थे और चूतड़ों की वही बहार थी फिर भी मैंने उसको जी भर के हाथों से महसूस किया।
तब कम्मो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मैं गर्म हो जाऊँगी और आपके कॉलेज जाने का टाइम भी तो हो रहा है। दिन को मैं आपको दिल खोल कर चोदूंगी।
मैं कहाँ मानने वाला था, उसकी धोती को ऊपर उठा कर और अपनी पैंट और अन्डरवीयर को नीचे कर के अपने खड़े लौड़े के दर्शन उसको करवाये और फिर उसकी एक टांग को अपनी बगल में लेकर उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया, अपने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर मैं खुद ही आगे पीछे होकर उसको चोदने लगा।
जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और वो भी मेरा साथ पूरी तरह देने लगी। मैंने अपने होंट उसके होटों पर रख दिए और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर आहिस्ता से चूसने लगा।
कम्मो इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई।
हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही पूनम भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा।
यह कहते हुए वो रोने लगी।
मैंने और कम्मो ने उसको चुप करवाया और उसको तसल्ली दी कि सब ठीक हो जाएगा।
वो जल्दी से अपना जाने का छोटा सा बैग तैयार करके ले आई और मैं उसको बस स्टैंड पहुँचा आया और उसके गाँव की बस में भी बिठा आया और उसको कुछ रूपए भी दे दिए ताकि रास्ते में कष्ट ना हो, यह भी कहा कि वो मुझको घर पहुँच कर फ़ोन ज़रूर करे और मम्मी का हाल भी बता दे।
कोठी आकर मैं आराम से नहाया और नाश्ता करने लगा, फिर आराम करने लगा क्यूंकि आज कॉलेज में ट्रिप वाले छात्रों की छुट्टी थी।
कम्मो ने थोड़ी देर बाद निर्मला मैडम से बात की और सब पूछताछ करने के बाद उसने कहा- अगर आप आज आ सकती हैं तो आ जाइए मैं फिर आप का चेकअप कर लेती हूँ, जैसा हुआ वैसा प्रोग्राम बना लेंगे।
तब कम्मो ने बताया दो सेठानियों ने भी अपना चेकअप करवाया है और वो दोनों भी गर्भाधान के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वो आप से मिलना चाहती हैं।
मैंने कहा- आने दो, लेकिन पहले मैडम का काम कर लेते हैं फिर दूसरे के बारे में सोचेंगे।
एक घंटे के बाद ही निर्मला मैडम आ गई और कम्मो उनको लेकर दूसरे बैडरूम में चली गई।
कोई 15 मिन्ट बाद ही वो दोनों बाहर आ गई।
फिर हम सब मिल कर बैठक मैं चाय पीने लगे और तब कम्मो बोली- मैंने कल का टाइम मैडम के साथ फिक्स किया है, वो आज से स्पेशल डाइट खा कर कल आएँगी।
मैडम ने हामी में सर हिला दिया।
कम्मो ने कहा- ऐसा है मैडम जी, मेरा यह सिस्टम 100% सही नहीं होता। हाँ 50-60 % यह सही बैठ रहा है और वो भी अगर सोमू वीर्य दान करे तो! मैंने इसका वीर्य लैब में चेक करवाया था और जो रिपोर्ट आई थी उसमें साफ़ लिखा था कि सोमू के स्पर्म्स बड़े ही शक्तिशाली हैं और पूरी तरह से गर्भ के लिए सक्षम हैं। इसीलिए अब तक जितनी भी सोमु के वीर्य से गर्भाधान की कोशिश की हैं वो सब 100% कामयाब हुई हैं। आशा है मैडम जी, आपके केस में भी पूरी सफलता मिलेगी हमको!
निर्मला मैडम बोली- नहीं नहीं, मुझको तुम्हारे चेकअप और ट्रीटमेंट पर कोई शक नहीं है लेकिन यह जान कर मुझ को तसल्ली मिल रही है कि सोमू की वजह से मैं माँ बन सकती हूँ अगर प्रभु चाहें तो।
कल आने का वायदा कर के मैडम चली गई और हम सब अपने कामों में लग गए।
मैं खासतौर पर राम लाल चौकीदार से मिला और उसको थोड़ा बहुत इनाम भी दिया और कहा कि तुम्हारी होशियारी के कारण मेरा मन बड़ा शांत रहता है कि आप कोठी का पूरा ध्यान रख रहे हो।
अगले दिन मैं कॉलेज से मैडम के साथ ही निकला और घर आकर हम दोनों को कम्मो ने स्पेशल डाइट का लंच करवाया।
और फिर हम दोनों मेरे ही बैडरूम में सो गए, तकरीबन एक घंटे बाद ही हम जागे, फिर कम्मो ने हम दोनों को निर्वस्त्र कर दिया।
मैंने मैडम को बाँहों में भर लिया और उनके होटों को लगातार चुम्मियों से तर कर दिया और उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को काफी देर सहलाया और चूसा।
मम्मों की दोनों चूचियाँ एकदम से लंड की माफिक अकड़ गई थी और उनको चूसने के बाद में नीचे बैठ गया और मैडम की चूत में मुंह डाल कर चूत के लबों को चूसा और फिर उसकी भग को काफी देर अपने दोनों लबों में लेकर चूसता रहा और मैडम बार बार मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह को हटाती थी लेकिन मैं फिर भी अलमस्त होकर चूसता ही रहा।
अब मैंने मैडम को अपने हाथों में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया, धीरे से उनको वहाँ लिटा दिया और अपने लौड़े को सीधा तान कर उनकी जांघों के बीच बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल दिया।
तपते हुए लोहे को चूत में जाते ही मैडम हाय हाय करने लगी और मुझको अपने मुम्मों के बीच लिटा कर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी।
कम्मो के सिखाये मुताबिक़ मैं पहले धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा और मैडम की गर्म और एकदम गीली चूत का आनंद लेने लगा।
फिर उनके मुम्मों को चूसते हुए अपनी स्पीड धीरे धीरे तेज़ करने लगा और जब मैडम नीचे से मेरा साथ देने लगी तो मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी। मेरी कोशिश थी कि मैडम पूरे कामुकता के जोश में आ जाएँ तो मैं अपना असली हथियार फेंकू।
थोड़ी देर में मैडम अपने पूरे जोश-ओ-खरोश में आ गई तो धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और जल्दी ही मैडम का पानी छूट गया और उन्होंने अपनी जांघों कस कर मेरे इर्द गिर्द लॉक कर दीं।
लेकिन मेरा मिशन तो अभी अधूरा था, मैं पूरी अपनी यौन शक्ति के साथ फुल स्पीड चुदाई में लग गया और मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र हो गई कि मैडम तड़फड़ाती हुई दूसरी बार भी स्खलित हो गई और अब कम्मो ने इशारा किया और मैं अपने लंड की पोजीशन ठीक करके उसके गर्भाशय के मुंह को ढूंढ रहा था।
और जब मुझ को आभास हुआ कि गर्भाशय का मुख कहाँ है, मैंने अपना लंड का रुख उस तरफ किया और वीर्य की जोरदार पिचकारी वहाँ छोड़ दी।
गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।
मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।
और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।
मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।
इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!
मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!
अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।
मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो!


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

मैडम की घोड़ी बना कर चूत चुदाई

गर्म वीर्य वहाँ पड़ते ही मैडम ने अपनी दोनों टांगें उठा ली और कम्मो ने झट से उनकी कमर के नीचे दो तकिये रख दिए।
मैं भी मैडम की जांघों में थोड़ी देर अपने सख्त लंड को डाल कर बैठा रहा जब तक मेरा वीर्य पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गया।
और फिर कम्मो के इशारे पर ही मैं वहाँ से उठा और अपने गीले लंड को निकाल कर मैडम के सामने ही खड़ा रहा।
मैडम ने एक हाथ बढ़ा कर मेरे गीले लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और उसको हल्के हल्के चूसने लगी।
इधर कम्मो अभी भी मैडम की टांगों को ऊंचा करके रखा हुआ था ताकि वीर्य अधिक से अधिक मात्रा में मैडम की चूत में ही रहे!
मैडम को मेरे लंड को चूसने में अति आनन्द आ रहा था, वो लगी रही चुसाई में!
अब कम्मो ने मैडम की टांगों को नीचे कर दिया था और उनकी चूत पर एक छोटा तौलिया रख दिया ताकि वीर्य ज़्यादा बाहर ना निकले।
मैडम बोली- सोमू यार, तुम तो गज़ब के चोदू हो! चूत चुदाई के तुम्हारे हुनर का तो उषा मैडम भी लोहा मान रही थी, वो कह रही थी कि यह लड़का इतनी छोटी उम्र में ही एक काफी बढ़िया चुदाई करता है। उषा मैडम के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?
मैं बोला- बहुत ही सुन्दर लेडी हैं वो लेकिन किस्मत की मारी हैं। बेचारी को इस भरी जवानी में पति छोड़ गया और उनको यौन सुख से वंचित कर गया! बहुत बुरा हुआ उनके साथ।
मैडम बोली- तुम उनकी कुछ मदद कर सकते हो क्या?
मैं बोला- कैसी मदद मैडम जी?
मैडम बोली- वही चुदाई वाली मदद! क्या तुम उनके घर जाकर चोद सकते हो जब वो चाहें या फिर या जब तुम फ्री हो?
मैं भी खुश होकर बोला- क्यों नहीं मैडम, वो खुद इतनी सुन्दर हैं कि कोई भी मर्द उनके लिए तैयार हो जाएगा।
मैडम बोली- तो ठीक है, वो कल कॉलेज में तुमसे मिल कर बात कर लेगी और प्लीज तुम हम दोनों के साथ सम्बन्ध का ज़िक्र किसी से न करना, हमारी इज़्ज़त का सवाल है।
कम्मो बोली- मैडम, छोटे मालिक ने जब यह चोदम चुदाई का कार्यक्रम मेरे साथ मिल कर शुरू किया था, तो मैंने इनके दिमाग में यह बात कूट कूट कर डाल दी थी कि इस काम के बारे में किसी से भी कभी कोई ज़िक्र ना करना वरना हम सब मुश्किल में आ जाएंगे और मुझको यह फखर है कि इन्होंने आज तक कभी किसी दूसरे को कुछ भी नहीं बताया! आप निश्चिंत रहें।
मैडम बोली- थैंक्स सोमू और कम्मो। अब बस या अभी और है? 
कम्मो बोली- मैं चाहती हूँ एक बार और इनसे चुदवा लीजिए ताकि किसी तरह की भी शंका या शक की गुंजाईश ना रहे!
मैडम खुश होकर बोली- ठीक कह रही हो पर क्या सोमू कर लेगा दुबारा इतनी जल्दी?
मैं और कम्मो हंस पड़े और तब कम्मो बोली- मैडम जी आप इनके लंड को देखिये तो सही? छुइये तो सही?चखिए तो सही!
मैडम ने मेरे लंड को देखा और हैरान रह गई कि वो तो वैसे ही खड़ा था और हवा में लहलहा रहा था!
कम्मो बोली- अब आप घोड़ी बन जाएँ तो छोटे मालिक आपको इस पोज़ में भी चोद देते हैं क्यूंकि इस पोज़ में गर्भ ठहरने की अधिक संभावना रहती है!
कम्मो ने मैडम को घोड़ी बना दिया और मुझको कहा कि घोड़ी चढ़ जाऊँ।
घोड़ी चढ़ने से पहले मैंने घोड़ी की तैयारी भी देखनी ज़रूरी समझी और उनकी चूत में हाथ लगा कर देखा, वो फिर काफी गीली हो चुकी थी, मैं जान गया कि घोड़ी भागने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
फिर मैंने मैडम के पीछे खड़ा होकर अपना सख्त लंड उनकी चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया।
अब मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर और बाहर जाने का सिलसिला बना लिया, धीरे से अंदर और फिर धीरे से बाहर और जो अंदर जाता है वो बाहर तो आता ही है, लेकिन कोशिश यह होनी चाहिए की लौड़े का सिर्फ आगे का किनारा ही अंदर रहना चाहिए और बाकी लंड ठंडी हवा खाकर फिर वापस अंदर जाना चाहिए।
इस क्रम को पूरी तरह से पालन करने से औरत का मज़ा दुगना हो जाता है क्यूंकि वो इस इंतज़ार में रहती है कि जो पूरा बाहर गया क्या वो अंदर आएगा और कितना आएगा।
मैं हाथ से मैडम की भग को भी सहला रहा था और मेरे हाथ कभी मैडम के मोटे मुम्मों को और उनकी चूचियों को भी सहला रहे थे।
लंड की हल्की स्पीड को जारी रखते हुए मैं अब पूरा लंड अंदर डाल कर उसको अंदर ही अंदर ही घुमा रहा था जिससे मुझको गर्भाशय के मुंह को ढूंढने में आसानी रहे।
अब कम्मो ने मुझको इशारा किया कि चुदाई की स्पीड तेज़ करूँ तो मैंने हाथों से मैडम के चूतड़ों को थपकी देनी शुरू कर दी और साथ ही धक्कों की स्पीड भी तेज़ कर दी और इसका मैडम की चूत ने सहर्ष स्वागत किया और वो भी वापसी धक्कों का जवाब देने लगी।
मेरे लंड को अब मैडम की चूत में एक ख़ास हलचल महसूस हुई जिसके कारण मैं समझ गया कि मैडम छूटने के कगार पर हैं और मैंने अब फुल स्पीड पर धक्के मारने शुरू कर दिए।
लंड की तेज़ स्पीड मैडम की चूत बर्दाश्त नहीं कर सकी और जल्दी ही उसने हथियार डाल दिए और एक ज़ोर की कंपकंपी मैडम के सारे शरीर में हुई और वो नीचे लेटने के लिए जैसे ही झुकी मैंने उसके चूतड़ों को अपने हाथों में ले लिया और उसको वैसे ही घोड़ी बने रहने का इशारा किया।
अब मैंने अंधाधुंध स्पीड से मैडम को चोदना शुरू किया ताकि उनकी चूत में मेरा भी छूट जाए और मेरा वीर्य उनके गर्भाशय के अंदर या फिर उसके मुंह पर छूटे।
इंजन स्पीड से मेरी चुदाई के कारण मैं जल्दी ही मैडम को दुबारा छुटाने के लिए प्रेरित करने लगा और फिर थोड़ी देर में हम दोनों का एक साथ स्खलन हुआ और कम्मो ने झट से मैडम की चूत के नीचे मोटे तकिये लगा दिए और उनके चूतड़ों को भी मैंने कस कर पकड़ लिया ताकि वो नीचे लेट ना सकें।
यह सारा खेल कम्मो का ही बनाया हुआ था और वो ही जानती थी कि इसका कितना लाभ था गर्भ धारण करने में!
कम्मो के इशारे से मैंने अपना लंड मैडम की चूत से निकाला और नीचे फर्श पर आ गया।
मेरा लंड अभी भी हवा में लहलहा रहा था मैं चुपके से कम्मो के पीछे खड़ा होकर उसकी गांड में अपना लंड डालने की कोशिश करने लगा लेकिन वो तो साड़ी पहने थी तो वो उसकी साड़ी के बाहर से गांड को रगड़ा मारने लगा।
थोड़ी देर बाद कम्मो ने मैडम को उठने दिया और उनकी चूत पर तौलिया रख दिया ताकि वीर्य बाहर ना निकले और अब उनको पलंग पर सीधा लिटा दिया।
कुछ समय बाद हम सब कपड़े पहन कर बैठक में आकर बैठ गए और कम्मो ने पहले मैडम को बादाम वाला खास दूध पिलाया और मुझ को कोकाकोला दिया और स्वयं भी वह पीने लगी।
कुछ देर बाद कम्मो ने मैडम को कहा- आज आप अपने हस्बैंड से भी सेक्स कर लेना ताकि उनको यह शक न रहे कि यह बच्चा किसी और का है। कर पाएँगी उनसे सेक्स?
मैडम थोड़ा मुंह बना कर बोली- उनको सेक्स के लिए तैयार करना थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि उनका सेक्स का मन ही नहीं करता यही तो प्रॉब्लम है!
कम्मो बोली- मैं आपको एक तरीका बताती हूँ जिसके बाद वो स्वयं ही आपके पीछे सेक्स के लिए भागेंगे।
कम्मो के इशारे पर मैं वहाँ से उठ गया और कम्मो उनको कुछ खुसर फुसर में समझाती रही और उनको दो दिन के बाद आने का भी याद कराया।
थोड़ी देर बाद मैडम मुझको और कम्मो को थैंक्स कर के अपनी कार में वापस चल पड़ी।
कम्मो पारो की चूत चुदाई गार्डन में


थोड़ी देर बाद मैडम मुझको और कम्मो को थैंक्स करके अपनी कार में वापस चल पड़ी।
जब मैडम को छोड़ कर हम दोनों वापस आ रहे थे तो मुझको पारो मिल गई और कहने लगी- वाह छोटे मालिक, आप तो मुझको भूल ही गए?
मैंने उसको खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया और कहा- पारो, तुमने कैसे सोच लिया कि मैं तुमको भूल गया हूँ? शेर अपना शिकार कभी नहीं भूलता, आज मैं तुम दोनों का शिकार रात को करूँगा, तैयार रहना।
वो दोनों जाने लगी तो मुझ को याद आया कि इन दोनों के लिए पूनम कुछ उपहार खरीद कर लाई थी और वो मेरे ही सूटकेस में पड़े थे, मैं उन दोनों के चूतड़ों को हाथ से मसलता हुआ उनको अपने कमरे में ले आया और कम्मो से कहा- वेरी सॉरी, मैं भूल गया था कि पूनम तुम दोनों के लिए कुछ चीज़ें आगरा से खरीद कर लाई थी, तुम दोनों निकाल लो अपने अपने तोहफे जो पूनम ने पसंद किये थे तुम दोनों के लिए!
वो एकदम से मेरे सूटकेस पर टूट पड़ी और एक क्षण में ही उसको खाली करके अपने तोहफे निकाल लिए जिनमें कई तरह की चूड़ियाँ और भी कई चीज़ें देख कर दोनों ख़ुशी से पागल हो गई, दोनों ही उठ कर आई और मुझको एक टाइट जफ्फी मार दी।
मैंने भी दोनों को चूमा और साथ ही उनकी चूत के ऊपर हाथ से सहला दिया।
मैंने कम्मो और पारो को कहा- आज रात तुम दोनों मुझको चोदोगी और मुझको आज तुम दोनों की गांड भी लेनी है। क्यों दोगी ना?
दोनों एक साथ बोली- छोटे मालिक, आपके लिए तो जान भी हाज़िर है यह ससुरी चूत या गांड क्या चीज़ है? आप हुक्म करो तो सही सब हाज़िर कर देंगी हम तो!
मैं थोड़ा थक गया था, थोड़ी देर के लिए सो गया।
रात को पारो ने बहुत ही उम्दा खाना बनाया और हम तीनों ने एक साथ बैठ कर खाना खाया।
दिल्ली और आगरा में खाना तो होटलों का था, उसमें घर सा आनन्द कहाँ।
फिर मैं और कम्मो अपने गार्डन की सैर करने लगे और खिली चांदनी में हम दोनों बहुत ही रोमांटिक हो गए थे। राम सिंह चौकीदार भी मेन गेट बंद कर के सोने चला गया था और हम अति सुंदर फूलों से भरे गार्डन में प्रकृति की खुशबू का आनन्द ले रहे थे।
चलते चलते हम दोनों के हाथ और दूसरे अंग एक दूसरे से टकरा रहे थे।
मैंने अपना बांयाँ हाथ कम्मो की कमर में डाल रखा था और उसको धीरे से कम्मो के नितम्बों पर फेरने लगा और फिर वहाँ से खिसकते हुए उसकी चूत पर पीछे से सहलाने लगा।
मैंने कम्मो को सीधा किया और अपने जलते हुए होंट कम्मो के मधुर और एकदम से नरम होटों पर रख दिए और हम दोनों एक मधुर चुम्बन करने लगे।
मेरी चौड़ी छाती अब कम्मो के गोल गदाज़ मुम्मों को पूरी तरह से दबा कर उसके साथ चिपकी हुई थी।
मैं कम्मो को लेकर कोई अँधेरा कोना ढूंढने लगा जहाँ ना तो चाँद की रोशनी और ना ही बिजली की चमक पहुँच सकती हो। फिर एक जगह दिखाई दी जहाँ बिल्कुल अँधेरा था और वो पेड़ पौधों से ढकी हुई थी।
मैंने कम्मो से कहा- याद है वो जगह जहाँ हमने खुले आम चुदाई की थी?
कम्मो बोली- वही ना जो नदी किनारे थी और जहाँ मैं आपको लेकर गई थी गाँव की औरतों को नंगी नहाते हुए देखने के लिए?
मैं बोला- वही तो, लेकिन तुमको शायद याद नहीं, वहाँ हमने क्या किया था?
कम्मो बोली- बिल्कुल याद है, वहाँ ही तो मैंने पहली बार खुले आम चुदाई की थी आपके संग!
मैं बोला- तो फिर उस याद को ताज़ा करने के लिए उसको दोहराते हैं हम दोनों यहाँ।
कम्मो घबरा के बोली- खुले आम सबके सामने? सारे लोग देख लेंगे छोटे मालिक।
मैं बोला- अरे पगली, क्या तुझको मेरा चेहरा दिख रहा है साफ़ साफ़? नहीं न तो कोई कैसे देख सकता है हमको? चल शुरू हो जा मेरी रानी, उतार साड़ी शुरू करें कहानी पुरानी।
मैंने उसको अपनी छाती के साथ लगा कर उसकी धोती को उतारना शुरू किया और वो भी हँसते हुए मेरे इस खेल में शामिल हो गई।
उसने खुद ही अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज के बटन खोलने लगी, मैंने भी अपना कुरता और पायजामा उतार दिया।
जब हम दोनों नंगे हो गए तो आनन्द से हमने एक दूसरे को जफ्फी डाली और हॉट चुम्मी दी एक दूसरे को!
कम्मो मेरे लंड से खेलने लगी और मैंने भी उसके मुम्मों को दबाना और चूसना शुरू किया।
मैं उसकी चूत को चूसने के लिए नीचे बैठा ही था कि मुझको एक छाया सी वहाँ आती दिखी और मैं चौंक कर उठ बैठा।
हम दोनों दम साधे चुपचाप वहाँ बैठ गए।
तब वो छाया चलते हुए हमारे और पास आई तो हम झाड़ियों के पीछे छुप गए और देखने लगे कि कौन है वो!
छाया इधर उधर देखने लगी।
तब कम्मो फुसफुसा कर बोली- अरे, यह तो पारो ही है।
मैं बोला- चुप रहो, हम भी इसको ज़रा मज़ा चखाते हैं।
मैं और कम्मो चुपके से पारो के पीछे हो गए और जैसे ही वो मुड़ी, हम दोनों ने उसको धर दबोचा। कम्मो ने उसको पीछे से जकड़ लिया और मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और उसको खींचते हुए अँधेरे हिस्से की तरफ ले गए और फिर बगैर कुछ बोले मैंने उस की धोती उतार दी और फिर उसका पेटीकोट भी उतार कर परे फेंका।
अब वो हैरान हो गई थी और तब मेरा खड़ा लंड मैंने उसकी गांड पर रख कर एक धक्का मारा तो वो पूरा का पूरा अंदर चला गया।
उधर कम्मो ने उसके मुंह पर हाथ रख कर उसको कुछ कहने से रोक दिया और मैं अब पूरी तरह से पारो को चोदने में जुट गया, ज़ोर ज़ोर से मैं पारो की गांड में धकापेली करने लगा।
वो कुछ देख ना सके, इसलिए कम्मो ने उसके मुंह पर अपना पेटीकोट डाला था और वो मुझको आँख से इशारा करने लगी ‘चोदो साली को!’
मैं और भी जोश और खरोश से उसकी चुदाई में लग गया और उसकी चूत में हाथ डाल कर उसका गीलापन अपने लौड़े पर लगा कर और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा।
मैं साथ ही साथ उसकी भग को भी मसल रहा था और वो बहुत जल्दी से एकदम गर्म हो गई और अपनी गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी।
अब मैं उसकी भग के साथ उसके मुम्मों को भी दबा रहा था और कम्मो भी उसकी चूत को मुंह से चूसने की कोशिश कर रही थी।
अब मैंने महसूस किया कि पारो की गांड अंदर से सिकुड़ने लगी है और उसका मुंह खुल रहा है और बंद हो रहा है तो मैंने धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और पारो विवश होकर जल्दी ही झड़ गई।
अब मैंने उसको सीधा किया और उसके चेहरे से कम्मो का पेटीकोट उतार दिया और तब उसने मुझको देखा और फिर कम्मो को देखा और हम दोनों तो हंसी के मारे लोट पोट हो गए थे।
तब मैंने कहा- हेलो पारो, गांड मराई का मज़ा आया क्या?
पारो हैरान थी कि यह क्या हो रहा है फिर उसको समझ आ गई कि मैंने और कम्मो ने उसको मूर्ख बनाया है।
पारो भी हंसने लगी थी और बोली- वाह, तुम दोनों ने तो मेरा पासा ही पलट दिया। मैं तो आप दोनों को चुदाई करते पकड़ना चाहती थी लेकिन तुम दोनों मेरे से भी तेज़ निकले।
मैं बोला- तुम हमको पकड़ना चाहती थी? कैसे?
पारो बोली- मैंने तुम दोनों को गार्डन में जाते देख लिया था और मैं समझ गई थी कि तुम दोनों के मन में चोर है इसलिए मैं भी तुम दोनों के साथ शामिल होना चाहती थी, मैं भी तुम्हारे पीछे चल पड़ी और साथ में ये दो चादरें भी लेकर आई थी।
मैं और कम्मो हैरान रह गए क्यूंकि हमने गार्डन में चुदाई का पहले कोई प्रोग्राम नहीं बनाया था लेकिन पारो की जबरन गांड मार कर मैं कुछ पछता रहा था, मैंने पारो से माफ़ी भी मांगी इस गलती के लिए लेकिन पारो बोली- रहने दो छोटे मालिक, मुझ को तो गांड मरवाई में बहुत ही मज़ा आया था और ऐसा आनन्द मैंने पहले कभी लिया ही नहीं।
अब कम्मो और मैं दोनों हंस पड़े तब पारो ने दोनों चादरें घास पर बिछा दी और खुद नंगी ही लेट गई और हम दोनों को भी इशारा किया कि ‘आ जाओ, लेट जाओ… यहाँ ठंडी ठंडी हवा चल रही है।’
हम दोनों भी हंस पड़े और वहाँ बैठ गए और पारो को एक कस कर जफ्फी मार दी।
मैंने पारो से पूछा- हमको किसी और ने यहाँ आते तो नहीं देखा जैसे राम लाल का परिवार या फिर और कोई?
पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, यह जगह तो बिल्कुल अँधेरे में है और बाहर का गेट तो लॉक है। और राम लाल खुद तो पीकर सो गया होगा क्यूंकि उसके बीवी बच्चे तो अपनी नानी के घर गए हैं।
पारो अब मेरे खड़े लंड से खेल रही थी और साथ में अपनी गांड में भी हाथ लगा रही थी क्यूंकि उसकी गांड मारने में शायद उसकी सूखी गांड में थोड़ी बहुत चोट लग गई थी।
मैं दोनों औरतों के बीच ही नंगा लेट गया और कम्मो की चूत में हाथ लगाया तो वो एकदम गीली थी। मैंने एक गर्म चुम्मी उसके लबों पर की और उसके मोटे और सॉलिड मुम्मों को चूसा और फिर मैं उसकी टांगों को चौड़ा करके उनके बीच बैठ गया और अपने लंड को कम्मो की चूत में डाल दिया।
लंड को अंदर डाल कर मैं यूं ही लेटा रहा कम्मो के ऊपर और तब कम्मो ने खुद ही धक्के मारने शुरू कर दिए और मुझको नीचे आने का इशारा किया।
मैं भी कम्मो के साथ ही उसके नीचे आ गया बगैर कनेक्शन तोड़े। 
अब कम्मो मुझको ऊपर से पूरी ताकत के साथ चोदने लगी और पारो मेरे अंडकोष के साथ खेलने लगी, साथ ही उसकी ऊँगली कम्मो की गांड में गई हुई थी।
थोड़ी देर में ही कम्मो हाय हाय… करती हुई झड़ गई और वो मेरे ऊपर से हट गई और उसकी जगह पारो मेरे ऊपर आ गई और अपने ख़ास अंदाज़ से मुझको चोदने लगी।
वो अपने दोनों घुटनों को नीचे मेरी दोनों तरफ रख कर सिर्फ अपनी चूत को मेरे लंड से जोड़ कर चुदाई की शौक़ीन थी।
उसकी चुदाई भी बहुत धीरे धीरे से शुरू हुई और वो मुझ को बड़े प्रेम से चोदने लगी।
उसके मोटे मुम्मे मेरे मुंह पर लटक रहे थे, मैं उनको चूसने में लग गया और उसकी चूचियों को मुंह में लेकर गोल गोल घुमाने से पारो को बड़ा मज़ा आ रहा था और वो काफी जोश से मुझको चोद रही थी लेकिन जल्दी ही वो भी झड़ गई और मेरे ऊपर से उतर कर मेरी दूसरी तरफ लेट गई।
कम्मो भी मेरे लंड से खेलने लगी, मैंने थोड़ी देर बाद उससे पूछा- क्यों कम्मो डार्लिंग, अपनी गांड जबरदस्ती मरवानी है क्या? या फिर अपने आप दे रही हो मुझको?
कम्मो मेरे लंड को हाथ से ऊपर नीचे कर रही थी सो वो थोड़ी देर बाद बोली- छोटे मालिक, जबरदस्ती क्यों करवाएँ, हम तो खुद ही तैयार हैं गांड मरवाने के लिए! लेकिन यहाँ तो क्रीम या वैसलीन तो है नहीं, कहीं मेरी गांड फट ना जाए?
मैं बोला- पारो की गांड में से उसकी चूत में से निकल रहे रस को लगा कर मज़े से चोदा था। क्यों पारो? 
पारो बोली- वो तो ठीक है लेकिन फिर भी मेरी गांड कहीं छिल गई है, मुझको मज़ा तो बहुत आया लेकिन थोड़ा दर्द भी हो रहा है।
मैं बोला- ठीक है, कमरे में जाकर कम्मो की गांड मार लेते हैं क्यों कम्मो?
कम्मो धीरे से बोली- जैसे आपकी मर्ज़ी।
मैंने कहा- चलो फिर अंदर चलते हैं, बाहर का आनन्द तो ले ही लिया है।
मैं उठ कर नंगा ही जाने के लिए तैयार हो गया लेकिन कम्मो कहने लगी- क्या करते हो छोटे मालिक? नंगे ही चल पड़े हो, कोई देख लेगा! पहले कपड़े पहन लेते हैं।
मैं बोला- इस अँधेरी रात में कौन देखेगा और कोई देखता हुआ नज़र आया तो हम तीनों दो चादरों को अपने ऊपर करके ढक लेंगे ना! 
कम्मो और पारो मुस्कराई और हम तीनों नंगे ही कमरे की तरफ चल पड़े।
मेरे दोनों हाथ कम्मो और पारो के नंगे चूतड़ों के ऊपर रखे हुए उनको मसल रहे थे और मैं मुड़ मुड़ कर कम्मो और पारो के उछलते हुए मम्मों को भी बार बार देख रहा था।
अँधेरी रात थी, हमको किसी ने नहीं देखा और हम आराम से अपने कमरे में आ गए।
मैं बोला- दिल में बहुत इच्छा थी कि कभी गार्डन में नंगा ही घूमें, वो आज पूरी हो गई, दो खूबसूरत औरतों के साथ नंगे घूम कर!पारो के दिमाग़ की दाद देनी पड़ेगी जिसने चादरों के बारे में सोचा।
पारो और कम्मो अपनी कोठरी में जाने लगी लेकिन मैंने कहा- आज रात हम तीनों एक साथ सोयेंगे। 
और फिर मैंने वो रात कम्मो और पारो की नज़र कर दी और पहले कम्मो की गांड मारी देसी घी लगा कर और फिर दोनों की बारी बारी से चूत की चुदाई की, दोनों को कम से कम 3-3 बार चोदा और फिर हम तीनों थक हार कर एक दूसरे की गले में बाँहों को डाल कर एक साथ ही सो गए।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

कॉलेज की मैडम और एक छात्रा
अगले दिन कॉलेज गया तो सबसे पहले मैंने ऑफिस में पूनम की छुट्टी की अर्ज़ी दे दी और फिर अपने क्लास में आकर बैठ गया।
लंच के टाइम नेहा मुझ को कॉरिडोर में मिल गई और कहने लगी- वो उषा मैडम तुम को याद कर रही थी, उनसे मिल लेना लंच में!
मैंने कहा- ठीक है, मिल लूंगा।
फिर उसने इधर उधर देख कर कहा- सोमू यार फिर कब मिल रहे हो?
मैं बोला- जब तुम कहो मिल लेंगे। अकेली मिलना चाहती हो कि कोई साथ और भी है?
नेहा बोली- मैं और वो जेनी तुम्हारी खासम ख़ास!
मैं बोला- जेनी मेरी ख़ासम ख़ास कैसे हो गई? मेरे लिए तो तुम ही ख़ास हो और हमेशा रहोगी।
नेहा खुश होते हुए बोली- सोमू तुम ना सिर्फ ‘उस’ में ही माहिर नहीं हो, तुम तो माहिर हो हर चीज़ में, हर फील्ड में!
मैं भी मज़ा लेते हुए बोला-अच्छा बताना कौन कौन सी फील्ड में माहिर हूँ?
नेहा बोली- तुम हर चीज़ में माहिर हो और कई चीज़ों में तो शातिर हो, जैसे अभी तुमने मेरी तारीफ की पर तुम भी जानते हो यह पूरी तरह से सही नहीं है, तुम्हारी तो ख़ास है जेनी और पूनम हम तो बस यूँ ही हैं!
मैं हँसते हुए बोला- हर एक्शन का एक रीज़न होता है हो सकता है पूनम और जेनी के बारे में भी मेरा कोई रीज़न होगा। जब मिलोगी आराम से तो बताऊँगा। और सुनाओ सब ठीक है ना?
नेहा बोली- हाँ सब ठीक है लेकिन तुम यह क्यों पूछ रहे हो?
मैं बोला- मुझको बड़ा फ़िक्र रहती है कि तुम्हारी ऊपर और नीचे की चीज़ें ठीक हैं ना?
नेहा बड़े ज़ोर से हंस दी और कॉरिडोर में जा रहे कई छात्र मुड़ कर देखने लगे कि क्या माजरा है लेकिन मैं बड़ा ही गंभीर बना रहा और बोला- नेहा जी, इस मामले में कभी कभी ऊपर नीचे के शरीर के हिस्सों में प्रॉब्लम हो जाती है। वैसे आप रात को चेक कर लेना सब पार्ट्स ठीक तरह से फंक्शन कर रहे हैं न?
नेहा अभी भी हंस रही थी और हँसते हुए ही बोली- ठीक है चेक कर लूंगी लेकिन आपको यह शक क्यों हो गया?
मैं बहुत ही रोनी सूरत बना कर बोला- वो इस लिए कि यह मेरे साथ दुर्घटना हो चुकी है जब हम वापस लौट रहे थे।
अब नेहा सीरियस हो गई और बोली- सच्ची कह रहे हो क्या? वैसे क्या हुआ था तुम्हारे साथ?
मैं बोला- जैसे ही मैं स्टेशन पर उतरा तो मुझको ख्याल आया कि शायद मैं कुछ गाड़ी में तो नहीं भूल आया? इसलिए मैंने जल्दी से अपनी जेब और सामान चेक किया लेकिन सब ठीक था फिर मैंने जेब में दुबारा हाथ डाल कर फील किया तो यह जान कर हैरान रह गया कि मेरा ‘वो’ तो गाड़ी में ही छूट गया है, मैं भाग कर गाड़ी में गया और ढूंढा तो ‘वो’ सीट के नीचे पड़ा था।
मैंने जेब से रुमाल निकाला और अपनी आँखें, जिनमें कोई आँसू नहीं था, पौंछने लगा।
अब तो नेहा का हंसी के मारे बुरा हाल था वो कभी दीवार को पकड़ कर हंस रही थी और कभी मेरे कंधे को पकड़ कर हंस रही थी।
मैंने रोनी सूरत बनाए रखी।
मैंने कहा- खैर छोड़ो, उषा मैडम से कब मिलना है मुझको?
नेहा अब संयत हो गई थी और शान्ति से बोली- उन्होंने तुमको लंच ब्रेक में बुलाया है स्टाफ रूम में!
मैंने नेहा के कान में कहा- ‘वो’ खो जाने वाली बात किसी को बताना नहीं प्लीज!
और चलते चलते मैं उसके चूतड़ों में चिकौटी काटते हुए आगे बढ़ गया।
वो चौंक कर भागती हुई आई और मुझको भी मेरे चूतड़ों पर चकौटी काट कर भाग गई।
मैंने मुड़ कर देखा और हँसते हुए स्टाफ रूम की तरफ चल दिया।
उषा मैडम मुझको देख कर बाहर आ गई और मुझको लेकर कॉलेज के लॉन पर आ गई।
उषा मैडम ने कहा- निर्मल मैडम ने बात की होगी तुमसे?
मैं बोला- जी मैडम जी, उन्होंने बात की थी, अब आप जैसा कहें वैसा ही कर लेते हैं।
उषा मैडम बोली- आज कॉलेज के बाद फ्री हो क्या?
मैं बोला- जी मैडम, फ्री हूँ।
उषा मैडम बोली- तो मेरे घर आज चल सकते हो क्या?
मैं बोला- जैसा आप कहें। कितने बजे चलना होगा?
उषा मैडम बोली- यही 2 बजे छुट्टी के बाद निकल पड़ते हैं. छुट्टी के बाद तुम मुझको मेन गेट पर मिल जाना, ठीक है?
मैं बोला- ठीक है मैडम।
फिर मैं वहाँ से वापस आ गया क्लास में!
तभी जेनी, डॉली और जस्सी मेरे क्लासरूम में आ गई और सब बड़ी सीरियस बनी हुई थी और बोली- सुन कर बड़ा दुःख हुआ आप की बहुत ही प्यारी चीज़ खो गई थी।
मैं सीरियस होते हुए बोला- हाँ, लेकिन मुझको तो आप सब का ख्याल आ रहा था कि मैं आप सबकी सेवा कैसे कर पाऊँगा? मैं यही सोच सोच कर परेशान था।
तब तीनों ने मिल कर कहा- शुक्र है कि ‘वो’ मिल तो गया, ईश्वर की बहुत ही कृपा हुई सोमू जी।
मैं मुस्कराते हुए बोला- किस पर कृपा हुई? आप पर या मुझ पर?
तीनो चहकते हुए बोली- हम सब पर!
मैं बोला- अब कभी मिलना तो हाल ज़रूर पूछ लेना भैया लाल जी का? वैसे कब मिल रही हो तुम उनको?
तीनों बोली- मिलना मिलाना तो तुम्हारे हाथ में है या फिर उनके हाथ में है।
तीनो हंसती हुई क्लास से चली गई.
छुट्टी के बाद मैं मेन गेट पर इंतज़ार करने लगा।
थोड़ी देर में उषा मैडम की कार गेट पर आकर रुकी और मैडम ने मुझको इशारा किया कि अंदर आ जाऊँ।
आगे की सीट पर मैडम के साथ कॉलेज की एक लड़की बैठी हुई थी तो मैं पिछली सीट का दरवाज़ा खोल कर कार में बैठ गया।
दस मिन्ट में हम मैडम के घर पहुँच गए और उसके साथ हम तीनों अंदर चले गए।
काफी अच्छा सा मकान था और एक नई बनी साफ सुथरी कॉलोनी में था।
मैडम ने बैठक में हमें बिठा दिया और खुद ही रसोई से शर्बत ले आई।
फिर उषा मैडम ने कहा- इनसे मिलो, यह अपने ही कॉलेज में बी. ए. की छात्रा है, इनका नाम सुधा है और सुधा, ये सोमू हैं।इन्टर फर्स्ट ईयर के छात्र हैं।
हम दोनों ने एक दूसरे को नमस्ते की।
उषा मैडम बोली- सुधा भी शौक़ीन लड़की है और मेरे साथ ही रहती है इसी मकान में, जब तुम्हारे साथ प्रोग्राम बना तो सुधा ने इच्छा जताई कि यह भी सोमू से मिलना चाहती है और सारे कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहती है अगर सोमू को कोई ऐतराज़ ना हो तो!
मैं बोला- मैडम, जब आपको कोई ऐतराज़ नहीं तो मुझको भला क्या ऐतराज़ हो सकता है। और फिर मैं तो इस कहावत में विश्वास करता हूँ… मोर एंड मेरिएर!
उषा मैडम बोली- शाबाश सोमू, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी, चलो पहले खाना खा लें।
तब हम सब खाने वाले टेबल पर बैठ गए और सुधा और मैडम ने मिल कर जल्दी ही खाना टेबल पर सजा दिया।
खाना बहुत ही अच्छा बना था और जब मैंने खाने की तारीफ की तो मैडम बोली- यह सब सुधा ने बनाया है और मैंने इसकी थोड़ी बहुत हेल्प की है।
मैं सच्चे मन से खाने की तारीफ करने लगा और मैंने देखा कि सुधा के चेहरे पर ख़ुशी की एक झलक आई थी और फिर वो नॉर्मल हो गई।
खाना समाप्त करके मैडम मुझको लेकर अपने बेडरूम में आ गई और फिर वो थोड़ी देर के लिए दूसरे कमरे में चली गई।
कुछ समय बाद दोनों उसी कमरे में से अपनी नाइटी पहन कर आई और मेरे दोनों तरफ आकर खड़ी हो गई।
मैडम बोली- सोमू, क्या हम दोनों तुम्हारे कपड़े उतारने में मदद करें?
मैं बोला- कर दीजिये। वैसे मैं अपने कपड़े सिवाय बाथरूम में, अपने आप कभी नहीं उतारता। पर उससे पहले आप दोनों सुंदरियाँ भी अपने नाइटी उतारे दें तो मुझ को बहुत आनन्द आएगा।
मैं कुर्सी पर बैठ गया और यह सेक्सी नज़ारा देखने लगा।
दोनों ने एक साथ ही अपनी नाइटी उतार दी और वो दोनों ही एक साथ हलफ नंगी हो गई।
दोनों ही शारीरिक रूप से काफी सुंदर थी, सुधा का शरीर छोटी उम्र के कारण ज़्यादा भरा हुआ नहीं था लेकिन उसकी चूत बालों से भरी थी, छोटे मुम्मे और छोटे ही गोल चूतड़ों से वो एकदम कमसिन लड़की लग रही थी।

उधर उषा मैडम का जिस्म भरा हुआ और काफी गठा हुआ था जैसा कि मैं पहले भी देख चुका था और चूत एकदम सफाचट थी।
अब सुधा आगे बढ़ी और मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए, जब मेरे शरीर पर मेरा अंडरवियर ही रह गया तो मैंने तब उषा मैडम को घूर कर देखा और वो समझ गई और शर्माते हुए मुस्कराने लगी।
जैसे ही सुधा ने नीचे बैठ कर मेरा अंडरवियर को उतारा तो मेरा खड़ा लंड एकदम आज़ाद होकर उछल कर उसके मुंह पर जाकर लगा और डर के मारे चिल्ला पड़ी और जमीन पर गिर गई।
उषा मैडम ज़ोर से हंस पड़ी लेकिन मैं संयत रहा और हाथ पकड़ कर मैंने सुधा को ऊपर उठाया और खींच कर उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके लबों पर एक मधुर चुम्बन किया।
फिर मैं बोला- सुधा जी, कहीं लगी तो नहीं आपको? मैंने इस साले को कई बार मना किया है कि ऐसे मत उछला कर लेकिन यह ससुर मानता ही नहीं। वैसे यह इसकी प्यार की थपकी है।
अब सुधा भी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी- वाह सोमू राजा, मारा भी तो अपने लंड से, बहुत खूब!
मैंने भी एक भेद भरी नज़र उषा मैडम पर डाली और बोला- सुधा, तुम अकेली ही नहीं हो, इसके शिकार कई और भी बन चुके हैं इस के थप्पड़ों के और इकी प्यार की थपकी के।
उषा मैडम ने अपनी नज़र नीचे झुका ली लेकिन उनके लबों पर भी एक हलकी सी मुस्कान थी।
मैंने उषा मैडम के सामने झुक कर कहा- ऐ बेगमाते ऐ हिन्द, इस नाचीज़ खादिम के लिए क्या हुक्म है?
उषा मैडम भी उसी लहजे में बोली- ऐ ग़ुलाम, तुम आज मेरी और इस लौंडिया की हर तरह से मुराद पूरी करो!
मैं भी झुक कर बोला- जो हुक्म मेरी आका!
तब मैडम ने मुझको अपने नज़दीक आने का इशारा किया और मैं सुधा को साथ लेकर मैडम के पास चला गया।
मैंने जाते ही सबसे पहले मैडम के लाल होटों को अपने लबों में ले लिया और उनको चूसने लगा।
फिर मैडम को बिस्तर पर लिटा दिया और सुधा को इशारा किया कि वो मैडम के मुम्मों को चूसे और मैंने मैडम की सफाचट चूत पर अपना ध्यान केंद्रित किया और नीचे झुक कर अपने मुंह को उनकी चूत के अंदर डाल दिया और जीभ से चूत के अंदर गोल गोल घुमाने लगा और फिर जीभ से उनकी भग को छेड़ने लगा।
ऐसा करते ही मैडम की चूत अपने आप ऊपर उठ कर मेरे मुंह से चिपक गई और सुधा भी मैडम के मुम्मों को चूसने में पूरी मुस्तैदी से लगी रही और जब मैडम का एक बार मुंह से छूट गया तो वो मेरे सर के बालों को पकड़ कर ऊपर आने के लिए प्रेरित करने लगी।
मैंने मैडम की चूत के रस से भीगे अपने मुंह को मैडम के मुंह पर रख दिया और जीभ को मैडम की जीभ से भिड़ाने लगा।
सुधा अब मेरे चूतड़ों के साथ खेलने लगी लेकिन मैंने अपना लंड मैडम की चूत के मुंह पर रख दिया और सुधा ने मेरे चूतड़ों को एक धक्का ज़ोर का मारा और लंड लाल पूरा का पूरा अंदर चला गया।
अब मैं बहुत ही धीरे धीरे धक्के मारने लगा और बीच बीच में मैडम के लबों को भी चूसता रहा और सुधा भी जो मेरा अंग उसको खाली लगता वो उसको चूमने और चाटने में लग जाती और इस मदद से मैडम को अपनी चरम सीमा की ओर हम दोनों मिल कर ले जा रहे थे।
जब देखा कि मैडम को काफी आनन्द आ रहा है तो मैंने उसकी टांगों को उठा कर अपने कंधों के ऊपर रख दिया और उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख दिए और अब धक्कों की स्पीड एक दम तेज़ कर दी और इस स्पीड को जारी रखते हुए मैं अपनी पूरी ताकत से मैडम को चोदने लगा।
सुधा की तरफ देखा तो वो हैरान हुई यह सारा तमाशा देख रही थी और यह भी देख रही थी कि कैसे मैडम तड़फते हुए इधर उधर अपना सर फैंक रही थी।
मैंने महसूस किया कि मैडम का शरीर अकड़ने की स्टेज पर आ गया है, मैंने अपने धक्कों को स्लो और फ़ास्ट में तब्दील कर दिया और ऐसा करते ही मैडम का शरीर ज़ोर से कांपा और उन्होंने अपनी टांगों को मेरे दोनों और फैला कर मुझको उनमें जकड़ लिया और बहुत ही अजीब आवाज़ करते हुए वो झड़ गई।
मैंने अपना लंड जो मैडम की चूत के रस से पूरी तरह गीला हो चुका था, उसको मैडम की चूत से फट की आवाज़ करते हुए निकाला और सुधा को अपने हाथों में उठा कर बेड की दूसरी तरफ ले जाकर उसको अपने खड़े लौड़े पर बिठा दिया और मेरा गीला लंड एकदम आराम से सुधा की टाइट चूत में चला गया।
सुधा की चूत बेहद गीली और कामातुर हो रही थी, वो मेरे लंड पर बैठते ही पूरा का पूरा लंड अंदर ले गई और मेरे को एक टाइट जफ्फी मार कर मेरे लबों पर अपने जलते हुए होटों को रख दिया।
मैं नीचे से उसको धक्के मार रहा था और उसको इशारा किया कि वो ऊपर से शुरू हो जाए।
जल्दी ही हम दोनों एक व्यवस्थित ढंग से एक दूसरे को धक्के मार रहे थे।
मैंने उसके छोटे लेकिन सॉलिड मुम्मों को चूसना शुरू किया और अपने धक्कों की स्पीड बहुत ही धीरे रखी ताकि सुधा को भी पूरा मज़ा आने लगे और वो मेरे गले में बाँहों डाले मेरी आँखों में आँखें डाल कर रोमांटिक ढंग से अपनी चूत चुदवा रही थी।
क्यूंकि शायद उसको अभी तक कोई ढंग का साथी नहीं मिला था तो वो काफी सेक्स की प्यासी लगी, और मैं भी उसकी आगको समझते हुए उसको वैसे ही चोदने लगा।
जब वो पूरी तरह से कामातुर हो गई तो उसकी अपनी स्पीड ही तेज़ होने लगी और मैं रुक गया और उसको अपनी मर्ज़ी करने दी।
वो अब जल्दी जल्दी मेरे सामने से आगे पीछे होने लगी और उसकी बाहें मेरे गले में फैली थी और वो उनके सहारे वो मेरे लंड पर झूला झूल रही थी और मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर टिके थे जिनकी मदद से वो झूला झूल रही थी।
थोड़ी देर में उसका शरीर थोड़ा अकड़ा और वो एकदम से मुझको अपनी बाँहों में जकड़ कर छूट गई।
मैडम अब तक आँखें बंद किये लेटी थी और जब सुधा का छूट गया तो उसकी चूत से बहुत ही पानी निकला और सुधा जल्दी से उठ कर एक छोटा तौलिया ले आई जिससे उसने अपनी चूत का पानी पौंछा जो काफी मात्रा में मेरी जांघों पर लगा था।
मैं भी मैडम की दाईं तरफ लेट गया और सुधा भी साफ़ सफाई करके आकर मेरे दूसरी तरफ लेट गई।
वो दोनों तो ऐसी थक कर लेटी थी जैसे वो मीलों चल कर आई हों।
मैंने कोशिश की उषा मैडम को जगाने की, लेकिन ऐसा लगता था कि वो गहरी नींद सो गई थी, लेकिन सुधा अभी भी जाग रही थी और मेरे लौड़े से खेल रही थी।
मैंने उससे पूछा- क्या और चुदना है तुमको?
उसने भी इंकार में सर हिला दिया लेकिन मैंने कहा- सुधा, एक बार से क्या होगा तुम्हारा, चलो उठो मैं तुमको असली चुदाई का मज़ा देना चाहता हूँ एक गिफ्ट के तौर पर!
और मैंने उसको उठ कर पलंग के किनारे पकड़ कर खड़े होने के लिए कहा। जब उसने वो पोजीशन ले ली तो मैं भी उसके पीछे खड़ा हो गया और उसकी चूत में पीछे से अपने खड़े लंड को अंदर डाल दिया।
शुरू में धीरे और हल्के धक्के मारने से जब वो चुदाई का ढंग समझ गई तो मैंने आहिस्ता से धक्कों की स्पीड बढ़ाने लगा और मेरे दोनों हाथ सुधा के मम्मों और उसके गोल छोटे चूतड़ों से खेल रहे थे और कभी कभी उसकी गांड में भी ऊँगली डाल कर उस को और उत्तेजित कर रहे थे।
सुधा अब चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी और उसका सर बार बार उधर घूम रहा था और वो अपने चूतड़ों को स्वयं आगे पीछे करने लगी थी।
मैं उसकी चोटी अपने हाथ में लेकर उसके सर को हल्के झटके मारने लगा और वो और भी आनन्द से अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और फिर उसकी चूत में एक अजीब सा उबाल आया और वो हाय हाय करती हुई झड़ गई और उसने अपना सारा शरीर पहले जरा अकड़ा और फिर वो एकदम ढीली पड़ कर पलंग पर लुढ़क गई।
तब तक मैडम भी जाग गई थी, वो भी मेरे पीछे खड़े होकर मुझको जफ्फी डाल रही थी।
मैंने उनको सीधा किया और उनके मुंह पर ताबड़तोड़ चुम्मियाँ दे डाली और फिर उनको लेकर मैं बेड पर आ गया और घोड़ी बनने के लिए कहा, उनके गोल और उभरे हुए चूतड़ों को सहलाते हुए उसकी उभरी चूत के पीछे बैठ कर मैंने अपने अभी भी गीले लंड को उषा मैडम की चूत में घुसेड़ दिया।
मैडम ‘उई…’ कह कर अपनी गांड को इधर उधर करने लगी और जब उनको यकीन हो गया कि मैंने चूत में लौड़े को डाला है तो वो रुक कर उसका आनन्द लेने लगी।
घोड़ी की पोजीशन में मर्द का लंड पूरा चूत की आखिरी हिस्से तक जाता है और इस पोजीशन में वीर्य के छूटने से गर्भ की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है।
मैडम की चूत पुनः गीली हो चुकी थी, मैं भी जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा और पूरा अंदर बाहर करते हुए मैडम की भग को भी मसलने लगा।
मैडम भी हाय हाय करती रही और बार बार यही कह रही थी- मार डालो मुझको, फाड़ दो मेरी चूत को… साली हरामज़ादी है।
मैंने सुधा की तरफ देखा, वो भी हंस रही थी और हाथ से अपनी चूत में अपने दाने को मसल रही थी।
मैंने अब बड़े तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए ताकि मैडम जल्दी ही किनारे लग जाए और फिर मैंने उसकी गांड में अपनी मध्य ऊँगली भी डाल दी।
ऐसा करते ही वो एकदम से चिल्लाई और उनका सारा जिस्म अकड़ा और वो फिर ढीली पड़ गई।
मैडम की चूत काफी ज़ोर से मेरे लौड़े को पकड़ और छोड़ रही थी जो दूध दोहने की क्रिया के समान होता है जिससे मुझको बड़ा आनन्द आया।
अब मैं मैडम के ऊपर से उतरा और सुधा ने मेरे लौड़े को तौलिये से साफ़ किया और मैं उठ कर कपडे पहनने लगा और सुधा ने भी कपड़े पहन लिए और वो मुझको मैडम के कहने पर बाहर तक छोड़ने आई।
मैंने नंगी लेटी मैडम को बाय बाय कहा।
मैंने जाने से पहले उसके मुम्मों को हल्के से दबा दिया और चूतड़ों पर चिकोटी भी काट ली। और बाहर निकल गया।
सुधा ख़ुशी से हंस पड़ी और बोली- कल मिलना कॉलेज में ज़रूर सोमू यार, मैं तुम्हारा ढंग से शुक्रिया भी नहीं कर सकी।
मैं बोला- ज़रूर मिलेंगे।
यह कह कर मैं उन के घर से बाहर आ गया और रिक्शा पकड़ कर अपने घर वापस आ गया।

पड़ोस वाली भाभी की चूत चुदाई

शाम को मैं बैठक में बैठा था कि कम्मो आई और कहने लगी- पड़ोस वाले मिश्रा जी और भाभी आये हैं, आपसे बात करना चाहते हैं।
मैं कम्मो के साथ बाहर आया तो साथ वाले मकान के भैया भाभी बाहर खड़े थे।
मैंने कहा- आईये भैया जी, बाहर क्यों खड़े हैं।
मैं भैया भाभी को लेकर बैठक में आ गया और उनको आराम से बिठाया और पूछा- कैसे आना हुआ भैया जी? कोई काम था तो मुझ को ही बुला लेते, मैं आ जाता।
भैया बोले- नहीं सोमू, ऐसी कोई बात नहीं है, वो दरअसल मैं 2-3 दिन के लिए लखनऊ से बाहर जा रहा था तो तुम्हारी भाभी घर में अकेली पड़ जाएगी। मैंने सोचा कि अगर सोमू मान जाए तो वो 2-3 रात हमारे घर भाभी के पास रह जाए तो मुझको बड़ी तसल्ली रहेगी। पहले भी जब मैं बाहर जाता था तो मेरा भतीजा रह जाता था, कोई फ़िक्र नहीं होती थी लेकिन अब की बार वो भी अपनी नौकरी के सिलसिले में बाहर गया है, तो मजबूरी में मुझको तुमसे कहना पड़ा है।
मैं बोला- कोई बात नहीं भैया, मैं रह जाऊंगा कोई प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन अगर आप और भाभी चाहें तो हमारी कम्मो रात में आपके घर रह सकती है?
भैया बोले- वो तो बहुत ठीक होता लेकिन क्या है सोमू, मैं चाहता हूँ कि कोई मर्द घर में होता तो ही ठीक रहेगा, क्यों भागवान?
भाभी बोली- हाँ जी, आदमी का घर में रहना ही ठीक रहता है, और फिर सोमू अभी तो छोकरा ही है न, सो उसके रहने से घर में एक मर्द की कमी दूर हो जाती है।
मैंने कहा- ठीक है भैया जी, जैसा आप कहें, मैं कर लूंगा। फिर भाभी, मैं रात में कब आऊँ आपके घर सोने के लिए?
भाभी बोली- जब चाहो आ जाओ लेकिन अच्छा होगा कि अगर तुम खाना भी वहीं खा लिया करना।
मैं बोला- नहीं भाभी, मैं खाना खाकर ही आया करूँगा।
भैया बोले- तो फिर तय रहा सोमू, तुम आ जाया करना रात को 9 बजे से पहले… ठीक है?
मैं बोला- ठीक है भैया, आप बेफिक्र हो कर जाएँ अपने टूर पर, मैं घर संभाल लूंगा। आज रात से या फिर कल रात से?
भैया बोले- आज रात से आ जाओ तो ठीक रहेगा क्यूंकि मैं रात को 9 बजे के करीब घर से निकलूंगा।
मैंने कम्मो को आवाज़ दी और वो जल्दी से आ गई तब मैंने उसको सारी बात बताई तो वो बोली- ठीक है छोटे मालिक, आप जाइए इन के घर रात को, इधर मैं संभाल लूंगी।
फिर भैया भाभी विदा ले कर अपने घर चले गए.
रात को खाना खाकर मैं अपना कुरता पायजामा पहन कर भाभी के घर चला गया।
भैया थोड़ी देर पहले ही निकले थे तो हम उनकी बैठक में बैठ कर गपशप मारने लगे।
मैंने भाभी को ध्यान से देखा तो वो काफी खूबसूरत लगी, उनकी उम्र होगी कोई 27-28 के आस पास लेकिन शरीर बहुत सुगठित रखा था भाभी ने!
बातों से यह भी पता चला कि 8 साल शादी के बाद भी उनके कोई बच्चा नहीं हुआ था।
भैया काफी हैंडसम लगते थे लेकिन भाभी भी कम सुन्दर नहीं थी और दोनों की जोड़ी काफी सुंदर थी फिर किस कारण से उनके बच्चा नहीं हुआ था, यह मैंने भाभी से हिम्मत करके पूछ ही लिया।
भाभी बोली- क्या बताएँ सोमू भैया, सब भाग्य की बात है, हमने बड़ी कोशिश की लेकिन कुछ काम बना नहीं। शायद हमारी किस्मत में बच्चा नहीं है।
मैं बोला- आप उदास ना हों, शायद कोई उपाय निकल आये!
बातें करते हुए रात के 11 बज चुके थे, भाभी मुझको अपने गेस्ट रूम में ले गई जहाँ एक काफी बड़ा पलंग बिछा था और साथ ही मुझ को टॉयलेट भी दिखा दिया जो कमरे से बाहर कॉरिडोर में बना था।
साथ में उन्होंने अपना बैडरूम भी दिखा दिया जो टॉयलेट के रास्ते में ही पड़ता था, हर बार टॉयलेट जाते हुए मुझको उनके बैडरूम के सामने से गुज़रना पड़ेगा।
मैं थका हुआ था, जल्दी ही मुझको नींद आ गई।
रात को एक बार मैं टॉयलेट गया और जब वापस आया तो देखा कि भाभी सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में सोई थी और उनका पेटीकोट ऊपर खिसक कर उनकी जांघों के पास चढ़ा हुआ था। यह नजारा देख कर मैं रुक गया और बड़ी हसरत से भाभी की एकदम गोरी टांगों को देख रहा था।
भाभी थोड़ी सी हिली, उनका पेटीकोट और भी जांघों के ऊपर चढ़ गया और उनकी चूत के काले बाल नाईट बल्ब की मद्धम रोशनी में दिख रहे थे।
यह देख कर मैं थोड़ा ठिठका और एक मिनट के लिए रुका भी लेकिन फिर मैं अपने कमरे में आ गया।

आकर लेटा ही था कि मेरा लौड़ा एकदम तन गया और मैंने उसको पजामे के बाहर किया, उसपर धीरे धीरे हाथ फेरने लगा।
अभी कुछ मिन्ट ही ऐसा किया था कि एकाएक भाभी पेटीकोट में ही मेरे कमरे में चुपचाप आ गई और मैंने भी झट आँखें बंद कर ली।
फिर मैंने थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो वो मेरे खड़े लंड को बड़े ध्यान से देख रही थी।
मैंने भी आँख बंद करके सोने का नाटक किया और तब महसूस किया कि भाभी भी मेरे साथ दूसरी तरफ लेट गई थी और मेरे लंड को बड़े गौर से देख रही थी।
अब मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया था और भाभी ने तभी उसको हाथ में ले लिया था और उसको ऊपर नीचे करने लगी थी, यह देख कर मैं भी सोये हुए होने का बहाना करते हुए ही अपना एक हाथ उनकी चूत के ऊपर रख दिया और तब भाभी ने अपना पेटीकोट ऊपर खींच लिया था और मेरा हाथ पकड़ कर उन्होंने अपनी चूत के ऊपर बालों में रख दिया।
मैं समझ गया कि तवा गर्म है और अगर मैं हिम्मत करूँ तो दो चार रोटियाँ सेक सकता हूँ।
मैंने अभी भी सोये हुए होने का नाटक करते हुए अपनी बाहें भाभी के गोल गदाज़ मुम्मों के ऊपर रख दी। 
भाभी समझ गई कि मैं सोने का नाटक कर रहा हूँ और वो जल्दी ही अपने ब्लाउज और पेटीकोट को उतारने लगी और जब वो नंगी हो गई तो उन्होंने मेरा पायजामा भी उतारने की कोशिश की और मैं भी आँखें बंद किये हुए ही उनकी मदद करने लगा।
अब हम दोनों ही नंगे हो चुके थे लेकिन मैं अभी भी सोने का नाटक कर रहा था।
भाभी अब मुझको होटों पर चुम्बन कर रही थी और मेरा भी हाथ उनकी चूत के घने बालों में सैर कर रहा था। भाभी की चूत एकदम से गीली गोत हो चुकी थी और चुदने के लिए हिलोरें मार रही थी।
मैंने भी भाभी के होटों को ज़ोरदार चूमा और अपनी जीभ को उनके मुंह में डाल कर उनके मुंह का रस चूसने लगा और भाभी लगातार मेरे लौड़े को ऊपर नीचे कर रही थी।
अब भाभी एकदम पलंग पर अपनी टांगें पूरी खोल कर लेट गई और मेरे को लंड से खींचने लगी।
मैं भी आँखें बंद किये ही भाभी के ऊपर चढ़ गया और भाभी ने खुद ही मेरा लौड़ा अपनी चूत में डाला और जैसे ही मुझको महसूस हुआ कि मेरा लौड़ा पूरा अंदर चला गया है मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए और भाभी की टाइट चूत का लुत्फ़ उठाने लगा।
मैं मुंह को झुका कर भाभी के गोल और मोटे मुम्मों को चूस रहा था और उनके काके चुचूकों को भी चूस रहा था और साथ ही मैं धीरे धीरे धक्कों की स्पीड भी तेज़ करने लगा।
पूरा निकाल कर फिर पूरा डालना मेरा नियम बन गया था, और भाभी भी अपनी कमर को उठा उठा कर चुदाई का आनन्द ले रही थी और चूत की पूरी गहराइयों को मेरा लौड़ा भी नाप रहा था।
जब भाभी की चूत एकदम खुलने और बंद होना शुरू हो गई तो मुझको भी मजबूरन धक्कों की स्पीड तेज़ करनी पड़ी और फिर मैं अति तीव्रता से लौड़े को अंदर बाहर करने में लग गया। भाभी स्पीड को सहन ना कर सकने के कारण हांफ़ने लगी और मुझको अपने छाती से चिपकाने लगी।
मैंने भी अपने हाथों को भाभी की पीठ के पीछे डाल कर उनको कस कर अपने से चिपका लिया और तभी ही भाभी की चूत का पहला सोता उमड़ पड़ा और फव्वारे की तरह वो मेरे पेट को भिगोता हुआ चादर पर गिर गया।
भाभी की जो टांगें मेरे दोनों तरफ से मुझ को अपने से बाँध कर रखे हुई थी, वो अपने आप ही ढीली होती चली गई और फिर मैं भाभी के ऊपर से उतर गया।
तब भाभी ने मेरे गालों को चूमते हुए कहा- थैंक यू सोमू, तुमने मेरी वर्षों की आगशांत कर दी।
अब मैं और सोने का नाटक नहीं कर सका और वापस भाभी को अपने से चिपकाता हुआ बोला- वाह भाभी, आप तो काफी गर्म औरत हैं।
भाभी एकदम चौंक कर बोली- उफ़ सोमू, तुम जाग रहे हो क्या?
मैं बोला- हाँ भाभी जी, मैं तो शुरू से ही जाग रहा था लेकिन मुझको डर था कहीं मैं पहल करूँगा तो आप बुरा ना मान जाएँ इसलिए मैं सोने का नाटक करता रहा।
अब भाभी मुस्करा कर बोली- वाह सोमू, तुम तो गज़ब के एक्टर हो और साथ में ही एक बहुत हसीं चोदू भी हो यार! इतने महीनों से हमारे पड़ोस में रहते हो और मुझको खबर भी ना लगी कि क्या क़यामत का हीरा हमारा पड़ोसी है, वर्ना मैं तो कभी की तुमको चोद चुकी होती।
मैं भोली सूरत बना कर बोला- तो आज कैसे आपको ख्याल आया कि मैं आपके काम आ सकता हूँ?
भाभी बोली- नहीं सोमू, मैंने तो यूँ ही तुमको अपने पास रहने के लिए बुला लिया यह समझ कर कि बड़ा नादान छोकरा है और मेरे पति देव को भी तुम पर पूरा भरोसा था तो उन्होंने ही यह फैसला किया कि सोमू को रात अपने यहाँ सुला लेते हैं क्यूंकि तुम बड़े भोले लगे उनको!
मैं बोला- मैं बड़ा भोला ही था ना भाभी, नहीं तो मैं भैया के जाते ही शुरू न हो जाता? आपकी कामुकता, आँखों की प्यास तो मैंने पढ़ ली थी जब आप मेरे घर में आई थी।
फिर मैंने उठ कर कमरे की लाइट ओन कर दी और उस लाइट में भाभी का शरीर देखा जो निहायत ही खूबसूरत था, उनके मुखड़े से लेकर शुरू करने पर यही लगा कि साँचे में ढला हुआ है शरीर का हर अंग!
चेहरे और शरीर का खिलता हुआ गोरा रंग और गोल सॉलिड मुम्मों जो अभी भी अपनी पूरी सख्ती में थे और उनका एकदम स्पॉट पेट और नीचे काले बालों से ढका हुआ योनि द्वार और उस के पीछे गोल और उभरे हुए सॉलिड नितम्ब! बहुत खूब! 
मैंने कहा- भाभी जी, आपको तो कई चोदू मिल जाते अगर आप कोशिश करती तो… लेकिन आपके पति भी काफी हैंडसम हैं फिर किस चीज़ की कमी है आपको जो आप अभी भी प्यासी घूम रहीं हैं?
भाभी एक ठंडी आह भरते हुए बोली- मेरा भाग्य मेरे साथ धोखा कर गया, मेरे पति जो सबको हैंडसम लगते हैं, वो अंदर से खोखले हैं और पूरे लौंडेबाज हैं, और किसी औरत के काम के नहीं है।
मैं हैरान होकर बोला- सच कह रही हैं भाभी? वाह री किस्मत… आपका यह सुन्दर शरीर और पति लड़कों के चक्कर में!
अब मैंने भाभी को गले लगा लिया और उनके लबों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी।
मैं फिर से भाभी को गर्म करने लगा, उनकी चूत में ऊँगली से उनकी भग को मसला और मुम्मों को चूसने लगा और जब मुझको लगा कि वो पुनः जोश में आ रही है तो मैंने पूछा- क्यों भाभी, कैसे चुदना पसंद करोगी? मेरे ऊपर से या फिर घोड़ी बन कर या फिर बैठ कर या फिर लेट कर?
भाभी बोली- यह सब तरीके आते हैं तुमको सोमू यार? तुम तो लगता है, चुदाई के मास्टर हो! क्यूँ? मैं तो बहुत ही कम तरीके जानती हूँ क्योंकि मुझको सिवाए मेरे पति के और किसी ने अभी तक नहीं चोदा। पति जब शराब पी लेते है तो वो मुझको थोड़ा बहुत चोद लेते हैं, वैसे कभी नहीं। और तब भी पता ही नहीं चलता कि कब शुरू किया और कब ख़त्म हो गए वो! बहुत जल्दी झड़ जाते हैं।
[color=#333333][size=large]मैं बोला- बहुत ही दुःख हुआ कि इतना सुंदर सोने की तरह का आपका शरीर और अभी तक पति ने ठीक से नहीं भोगा ह


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

इन्दू भाभी का गर्भाधान

मैं नहा धोकर कॉलेज चला गया।
कॉलेज से वापस आने पर खाना खाते हुए कम्मो ने बताया- इन्दू भाभी आई थी, उसने अपनी सारी प्रोब्लम बताई हैं और मैंने फिर उसका सारा चेकअप किया, इन्दू भाभी तो बिल्कुल ठीक है और उसको गर्भवती होने में कोई मुश्किल नहीं आयेगी लेकिन जो उसने अपने पति के बारे में बताया है, उससे तो लगता है कि उसका गर्भ धारण करना मुश्किल है।
मैं बोला- फिर उसने क्या तय किया है?
कम्मो बोली- वो तो तुमसे गर्भ धारण करना चाहती है और आजकल उसके लिए गर्भ धारण का उत्तम समय भी है। अब आप बताओ छोटे मालिक, क्या कहते हो?
मैं बोला- तुम्हारी क्या सलाह है इस मामले में?
कम्मो बोली- आप कर दो उसका गर्भाधान, अगर आपको कोई ऐतराज़ ना हो तो?
मैं बोला- मुझको तो कोई ऐतराज़ नहीं है, कब करना होगा उसका गर्भाधान?
कम्मो बोली- आज दोपहर को कर दो उसका काम छोटे मालिक और फिर वैसे भी आपने रात को उसके घर में रहना ही है।
मैंने पूछा- तुमने इन्दू भाभी से इस बारे में बात पक्की कर ली है क्या?
कम्मो बोली- नहीं, आपसे पूछे बगैर मैं कैसे हाँ कर देती? 
मैं बोला- यह काम कहाँ करने का इरादा है?
कम्मो बोली- इन्दू भाभी कह रही थी कि उसके घर में ही कर दो तो अच्छा है!
मैं बोला- ठीक है, तुम उससे वहाँ आने की बात पक्की कर लो और फिर थोड़ा रेस्ट करके चलते हैं भाभी के घर में!
कम्मो ने हामी भर दी और थोड़ी देर बाद उसने बताया कि वो हमारा इंतज़ार कर रही है।
मैं थोड़ी देर के लिए लेट गया और आधे घंटे बाद हम दोनों भाभी के मकान में पहुँच गए जहाँ भाभी हमारा इंतज़ार बेसब्री से कर रही थी।
जैसे ही उन्होंने मुझको देखा तो जल्दी से आगे आई और मुझको कस के जफ्फी मारी और मेरे लबों को भी चूमने लगी। 
यह देख कर कम्मो मुस्करा पड़ी और फिर हम सब भाभी की बैठक में आ गए और भाभी वहाँ भी मेरी गोद में ही आकर बैठ गई।
मैं भी थोड़ा मदमस्त हो गया था तो निडरता से बोला- क्यों इन्दू भाभी, रात की चुदाई से दिल नहीं भरा क्या?
इन्दू भाभी बोली- बहुत भरा, लेकिन अब होने वाली के बारे में सोच कर मन में काफी उथल पुथल हो रही है। सोमू तुम पहले ही बता देते कि यह तुम्हारी कम्मो तो जादूगर है, इसने मेरी सारी फिकर और परेशानियों को दूर करने के उपाय बता दिए हैं।
कम्मो बोली- तो फिर शुरू हो जाओ तुम दोनों, कहाँ करना है यह सब?
भाभी बोली- उसी कमरे में जिसमें रात सोमू सोया था। चलो, सब वहीं चलते हैं।
हम भाभी के पीछे चलते हुए रात वाले मेरे कमरे में आ गए और तब कम्मो ने भाभी को घेर लिया और उनके कपड़े एक एक करके उतारने लगी।
पहले साड़ी, फिर ब्लाउज और ब्रा और आखिर में उसका पेटीकोट जब उतर गया तो कम्मो ने उसको धर दबोचा और उसके मम्मों को चूसने लगी और भाभी की बालों भरी चूत में ऊँगली डाल कर उसको तैयार करने में जुट गई और भाभी ने भी एक एक करके कम्मो के कपड़े उतार दिए।
उन दो नंगी हसीन औरतों को आपस में करते देख कर मेरा लौड़ा भी हिलौरें मारने लगा लेकिन अभी भी वो मेरे कपड़ों में ही कैद था। और जब भाभी की नज़र मेरे पैंट में बने टेंट पर गई तो वो भाग कर आई और उन दोनों ने मिल कर मेरे तन के सारे कपड़े भी उतार दिए और हम ‘एक हमाम में सब नंगे’ वाली कहावत को चरितार्थ करने लगे।
कम्मो ने भाभी को मेरा लौड़ा चूसने के लिए प्रेरित किया और खुद भी मुझ को लबों पर चुम्मियाँ देने लगी और मेरे भी हाथ कम्मो के जाने पहचाने चूतड़ों के ऊपर फिसलने लगे।
दोनों को देख कर लग रहा था कि भाभी चाहे कम्मो से साल दो साल बड़ी रही होगी लेकिन शरीर उसका ही बहुत अधिक सुन्दर और सुगठित था और फिर उसका गोरा रंग सोने पर सुहागा का काम कर रहा था।
कम्मो अब भाभी की चूत को ऊपर कर के उसको चूस रही थी और उसके चूत के लब और भग को जीभ से गोल गोल घुमा रही थी। भाभी अब अपने कंट्रोल में नहीं थी तो उनको मैंने अपने हाथों में उठा कर पलंग पर लिटा दिया और खुद उसकी गोरी जांघों के बीच बैठ कर अपना लंड उसकी चूत के बाहर उसकी भग पर ही रगड़ रहा था, भाभी बार बार अपनी कमर को उठा कर लौड़े को अंदर डालने की कोशिश कर रही थी।
लेकिन मैं भी पक्का घाघ था, हर बार लौड़े को उसकी चूत के ऊपर कर देता जिससे वो उनकी चूत के अंदर नहीं जा रहा था।
थोड़ी देर इस तरह की कश्मकश को कम्मो हँसते हुए देखती रही फिर बोली- छोटे मालिक, देर मत करो भट्टी तप रही है अपना परौंठा सेक लो जल्दी से, नहीं तो कहीं भट्टी ठंडी न पड़ जाए!
इन्दू भाभी भी अपनी कमर बार बार लंड के स्वागत के लिए ऊपर कर रही थी, उनको और ना तरसाते हुए मैंने लंड को चूत के मुंह पर रख कर एक करारा धक्का मारा और लंडम जी पूरे अंदर समा गए।
अब धीरे धीरे बाहर निकाल कर फिर ज़ोर से अंदर डाला और ऐसा मैंने कम से कम दस बारह बार किया।
दस मिन्ट की तीव्र चूत चुदाई के बाद भाभी का ढेर सारा पानी छूटा और वो मुझसे अपनी पूरी ताकत से चिपक गई और तभी मैंने भी अपने फव्वारे को छोड़ दिया।
कम्मो ने झट से भाभी के चूतड़ों के नीचे मोटे तकिये लगा दिए और जब उसने इशारा किया तब मैं उसके ऊपर से उतरा और लहलाते हुए खड़े लंड को लेकर कम्मो के पीछे खड़ा हो गया और जैसे ही उसने अपने चूतड़ों को मेरी तरफ किया मैंने झट से लंड को उसकी चूत में पीछे से घुसेड़ दिया।
कम्मो की चूत भी वाह वाह गीली हो रही थी, मैं ने भी अपनी धक्काशाही शुरू कर दी और उसकी कमर को अपने लंड से जोड़ कर हल्के और तेज़ धक्कों की स्पीड जारी रखी और थोड़े ही समय में वो अपनी टांगें सिकोड़ते हुए झड़ गई।
अब कम्मो ने भाभी को आराम नहीं करने दिया और उनको फिर तैयार करने में जुट गई और थोड़ी देर में वो तैयार हो गई।
और कम्मो ने उसको इस बार घोड़ी बना दिया था और मुझको कहा- महाराज, आपकी सवारी तैयार है, चढ़ जाइये।
मैंने भी अपने गीले लंड को तान कर भाभी की घोड़ी वाली गीली चूत में डाल दिया और पहले हल्के धक्कों से शुरू करके फुल स्पीड पकड़ कर भाभी को चोदने लगा और साथ ही उसके गोल उभरे हुए चूतड़ों पर हल्की थाप भी देने लगा।
भाभी अब काफ़ी मस्त हो कर चुदवा रही थी क्यूंकि उनको चुदाई का पूरा आनन्द आने लगा था और उनको पूरा यकीन था कि मैं उनको साथ लिए बगैर और बीच मँझदार में नहीं छोड़ जाऊंगा जैसे कि उसका पति अक्सर करता था।
भारत में बहुत ही कम ही मर्द चुदाई का असली तरीका समझते है और उसका पूरा अनुसरण करते हैं।
इसका मुख्य कारण सेक्स के ऊपर लिखी जाने वाली अच्छी सही ज्ञान देने वाली पुस्तकों का अभाव और ज़्यादातर पुरुषों का अनपढ़ होना ही है।
भाभी काफी हिल हिल कर चुदवा रही थी और उसके चूतड़ बहुत ही स्पीड से आगे पीछे हो रहे थे, जिसका मतलब था कि भाभी फिर छूटने की कगार पर थी, अब मैंने धक्कों की स्पीड इतनी तीव्र कर दी कि भाभी को अपने हिलते चूतड़ों को रोकना पड़ा और मेरे तेज़ धक्कों की मार को चुपचाप सहन करना पड़ा।
और जब शीघ्र ही भाभी का छूट गया तो कम्मो ने मुझको इशारा किया और मैंने अपने फव्वारे को भाभी के गर्भाशय के मुंह पर ही छोड़ा, भाभी इस गर्म पानी की गर्मी को महसूस करती हुए नीचे की तरफ जाने लगी लेकिन मैंने झट से उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया और तब कम्मो ने जल्दी से उसकी चूत पर रूमाल रख के नीचे तकिया रख दिया और उसको वैसे ही लेटे रहने के लिए कहा।
थोड़ी देर भाभी वैसे ही लेटी रही और कम्मो मुझको चिड़ाने के लिए भाभी के गोल उभरे हुए नितम्बों पर हाथ फेर रही थी और मुझ को दिखा कर बड़े प्यार से उन पर बार बार चूम कर मुझ और भी चिड़ा रही थी।
मैं भी अपना लौड़ा अपने हाथ में लेकर उसको दिखा दिखा कर भाभी के शरीर से रगड़ रहा था।
थोड़ी देर बाद कम्मो ने भाभी को सीधा किया और उ्नकी चूत पर रखा रुमाल भी हटा दिया जो एकदम से भाभी चूत से निकले पानी और मेरे वीर्य से भरा हुआ था, उसने मुझको वो रुमाल दे दिया सूंघने के लिए और फिर उसने भाभी को कपड़े पहना दिए और सीधा लिटा दिया।
हम दोनों भी कपड़े पहन कर अपने घर आ गए।
रास्ते में मैंने कम्मो से पूछा- यहाँ इससे पहले जो 3 गर्भाधान हुए थे, उनका क्या हुआ?
कम्मो बोली- तीनों ही ठीक चल रहे हैं और तीनों ही मेरे पास आती हैं, मुझको बाकायदा दिखा कर जाती हैं।
मैंने पूछा- और वो तुम्हारी सहेली चंचल का क्या हुआ?
कम्मो बोली- वाह छोटे मालिक, आपको तो सब याद है, चंचल भी गर्भवती हो गई थी आपसे और वो भी ठीक चल रही है। और वो भाभी भैया आये थे न, वो भाभी भी गर्भवती होकर गई थी यहाँ से और बिल्कुल ठीक चल रही हैं।
मैंने पूछा- वो गाँव वालियों का क्या हुआ?
कम्मो बोली- वहाँ 6 को गर्भवती किया था आपने, उनमें से 4 के तो लड़के पैदा हो गए हैं और वो ठीक है और वो दो के भी दिन पूरे हो चुके हैं, किसी दिन भी उनके बच्चा हो जाएगा।

मैं अब घबरा के बोला- उफ़ मेरी माँ!!! इस छोटी उम्र में ही मैं कम से कम 10-12 बच्चों का बाप बन जाऊँगा। मेरा क्या होगा? शुक्र है कि मैं यहाँ किसी भी लड़की के अंदर नहीं छुटाता, वर्ना मेरे तो बच्चों की तादाद बेहिसाब बढ़ जाती?

कम्मो हंस पड़ी- अब छोटे मालिक, यही आपकी तकदीर में लिखा है शायद, वो भगवान की इच्छा है तो पूरा तो करना पड़ेगा।
मैं अपने कमरे में गया तो कम्मो भी मेरे पीछे ही आ गई तब मैं ने उसको पकड़ कर एक टाइट जफ्फी डाली और उसके मुम्मों के साथ छेड़छाड़ की और फिर कहा- सच कम्मो डार्लिंग, तुम न होती तो मेरा तो बंटाधार हो जाता और मैं कई मुसीबतों में फंस जाता। अगर तुम मुझको अपने आप पर कंट्रोल करना नहीं सिखाती तो अभी तक मैं जेल चला गया होता।
कम्मो मेरी परेशानी समझ रही थी, उसने मुझको तसल्ली देने के लिए मुझको अपनी बाहों में भर लिया और कहा- छोटे मालिक, आप फ़िक्र ना करो, मैं हूँ ना आप के साथ, मैं सब संभाल लूंगी।
मैं बोला- वो निर्मला मैडम नहीं आई थी क्या आज?
कम्मो बोली- उन्होंने कल आना है चेकअप के लिए और वो भी पक्की प्रेग्नेंट हैं।
रात का खाना खाकर मैं फिर इन्दू भाभी के घर चला गया और फिर सारी रात उनको चोदता रहा और सुबह जब उसने तौबा की तो मैंने उसको छोड़ा।
आने से पहले वो बोली- सोमू यार, तुम कभी कभी दिन के वक्त यहाँ आ जाया करो और मुझको चोद दिया करो।
मैं बोला- ऐसे नहीं भाभी जी, जब आपको बहुत खुजली सताए, आप कम्मो से बात करके मेरे घर आ जाया करो, मैं आपकी इच्छा पूरी कर दिया करूँगा, कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।
और मैं अपने घर आ गया और नहाने धोने में लग गया।


RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

कॉलेज गर्ल्ज़ जेनी और जस्सी

सुबह उठते ही मम्मी का फ़ोन आया- दशहरे के त्यौहार की छुटियाँ कब हो रही हैं कॉलेज में?
मैंने बताया कि शायद अगले हफ्ते होंगी 15 दिनों की छुटियाँ।
तब मम्मी बोली- ये छुट्टियाँ तुझको गाँव में बितानी हैं, अभी से कोठी बंद करके आने की तैयारी करनी शुरू कर लेना।
उन्होंने यह भी कहा कि कम्मो को साथ ले कर आऊँ और पारो को 15 दिन की छुट्टी दे दूँ और इन दिनों की तनख्वाह देकर उसके गाँव भेज दूँ और यह भी कह दूं कि वो छुट्टी खत्म होते ही वापस आ जाए।
मैंने कम्मो को बुलाया और मम्मी जी की सारी बातें बताई और कहा- अगले हफ्ते गाँव जाने की तैयारी शुरू कर दो।
कॉलेज में सब लड़के लड़कियाँ अपने घरों को जाने की तैयारी में जुट गए थे और कॉलेज में इसी कारण से अच्छी चहल पहल हो रही थी।
दिल्ली आगरा ट्रिप की लड़कियाँ जो हमारे ग्रुप में थी लंच ब्रेक में मेरे पास आईं और बोली- सोमू यार, सुना है तुम 15 दिनों के लिए गाँव जा रहे हो तो तुम्हारे पीछे हमारा क्या होगा? हम किसके सहारे रहेंगी?
इन सबमें से आगे जस्सी और जेनी थी।
जस्सी कहने लगी कि मेरे पेरेंट्स तो हल्द्वानी के पास एक गाँव में रहते हैं और जेनी बोली कि मेरे पेरेंट्स तो अल्मोड़ा में रहते हैं, हम दोनों का गाँव जाना मुश्किल होगा।
मैं बोला- तो फिर आप दोनों क्या चाहती हैं?
दोनों एक दूसरे का मुख देखने लगी और अब मैं उनकी दुविधा समझ गया, शायद वो चाहती थी मेरे साथ मेरे गाँव जाना… लेकिन मेरी प्रॉब्लम यह थी कि मैं उन दोनों के साथ प्रेमालाप कर चुका था और मैं नहीं चाहता था कि गाँव में जाकर मेरे माता पिता को हमारे बारे में कोई शक पड़ जाए या फिर हमसे कोई गलती हो जाए जिससे सारा भेद खुल जाए!
मैंने उन दोनों को कहा- मैं आप दोनों की प्रोब्लम को समझता हूँ लेकिन मैं आज फ़ोन पर अपनी मम्मी से बात करता हूँ, अगर उनको कोई ऐतराज़ नहीं हुआ तो तुम दोनों भी हमारे साथ चल पड़ना। क्यों ठीक है?
सब लड़कियाँ ख़ुशी खुशी चली गई।
कॉलेज से लौटने के बाद मैंने सारी बात कम्मो को बताई और उससे पूछा कि क्या करना चाहिए मुझको?
कम्मो कुछ देर सोचती रही और फिर बोली- इन दोनों को ले जाने में तो कोई दिक्क्त नहीं है लेकिन थोड़ा खतरा है कि कहीं इन लकड़ियों के मुख से कोई ऐसी बात ना निकल जाए जिससे हम सबकी पोजीशन खराब हो जाए। मैं सोचती हूँ अगर हम इन दोनों को सारी बात खोल कर समझा देंगे तो शायद कोई ऐसी गलती होने की सम्भावना कम हो जायेगी।
मैं बोला- ठीक कह रही हो तुम, मैं कल इन दोनों को यहाँ खाने और चोदने के लिए बुला लेता हूँ तब सारी बात कर लेंगे इन दोनों से!
यह कह कर मैंने कम्मो से कहा कि वो खाना खाकर आ जाए तो आगे की सारी बात भी कर लेंगे।
जब खाना खत्म करके कम्मो आई तो मैं बोला- तो तुम समझती हो कि इन दोनों के साथ चलने से और वहाँ 15 दिन रहने से कोई प्रॉब्लम नहीं होगी ना?
कम्मो बोली- कल आने दो दोनों को, फिर सोचेंगे और मम्मी जी से भी तभी बात करेंगे… क्यों ठीक है?
मैंने कम्मो के शरीर से खेलते हुए कहा- तुम कभी गलत हो ही नहीं सकती जानम, तभी तो तुम्हारी लेता हूँ, उठते बैठते लेता हूँ, जब चाहे ले लेता हूँ और तुम भी दे देती हो कभी मांगने पर और कभी बिना मांगे अपनी… …नेक सलाह!
रात को फिर मैंने अपने हरम में रहती दोनों रानियों को मस्त मलंग बन कर चोदा कभी उल्टा और कभी सीधा चोदा।
अगले दिन कॉलेज में जेनी और जस्सी को कैंटीन में लंच ब्रेक मैं बुला कर खुल कर बात की और पूछा कि आगे की बात करने के लिए क्या वो दोनों मेरे घर आने के लिए तैयार हैं छुट्टी के बाद।
दोनों तैयार हो गई और पूछने लगी कि वहाँ सिर्फ बातचीत ही होगी या फिर कुछ और भी होगा?
मैं बोला- कुछ और होना तो तुम दोनों के हाथ में है अगर तुम दोनों का हाथ चाहे तो कुछ क्या, बहुत कुछ हो सकता है!
दोनों हंसने लगी तो मैं संजीदा हो गया और उनके कान के पास मुंह ले जाकर कहा- अब सब तुम्हारे हाथ की मर्ज़ी है वो चाहे तो कुछ भी हो सकता है और वो और चाहे तो बहुत कुछ भी हो सकता है। 
दोपहर में छुट्टी के बाद हम तीनों रिक्शा पकड़ कर मेरी कोठी में आ गए। पहले हम तीनों ने जम कर खाना खाया और फिर हम सब मेरे कमरे में चले गए, जहाँ कम्मो ने बात शुरू की और उनको समझाया कि गाँव जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है सिवाए इसके कि अगर हम सब अपना मुंह बंद रखेंगे तो हम सबकी भलाई है वरना हम सब मुसीबत में पड़ सकते हैं।
तब जस्सी बोली- कम्मो आंटी, हम सब आपकी बात समझते हैं और यह भी जानते हैं कि ज़रा सी गलती भी अगर हमसे हो जाती है तो बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं। इस लिए हम दोनों आपको विश्वास दिलाती है कि हम वहाँ चुप ही रहेंगी और कोई ऐसी हरकत या बात नहीं होने देंगी। आप यकीन रखिये।
बात खत्म हो गई और कम्मो को भी तसल्ली हो गई तब मैंने कम्मो से कहा- ये लड़कियाँ अपना कुछ करवाना चाहती हैं अगर तुम्हारी आज्ञा हो तो हम कुछ या बहुत कुछ करें या फिर नहीं?
कम्मो हँसते हुए बोली- कुछ तो आप कर सकते हो लेकिन बहुत कुछ करने से पहले सोच लेना।
मैं बोला- अब कहो, आप दोनों की क्या मर्ज़ी है? थोड़ा या फिर बहुत?
दोनों ही बोली- बहुत और बहुत ही ज़्यादा होना चाहिए।
मैं भी खुश हो कर बोला- तो फिर चलो ‘गुरु हो जा शुरू…’
मैंने दोनों लड़कियों को कस कर आलिंगन में ले लिया और उनके लबों पर गरमा गरम चुम्बन दे दिए।
और फिर मैंने एक हाथ जस्सी की चूत में और दूसरा जेनी की चूत में उनकी सलवार के ऊपर से ही डाल दिया। उन दोनों की चूत के बाल ऊँगली में महसूस हो रहे थे और फिर थोड़ा चूत का गीलापन भी उंगलियों में लगने लगा।
मैंने उन दोनों को साइड बाई साइड खड़ा करके दोनों के कपडे उतारने शुरू कर दिए।
पहले जेनी और फिर जस्सी के कपड़े एक एक कर के उतरने लगे और उनके खूबसूरत जिस्म सामने आने लगे।
दोनों का ही जिस्म का रंग सफेदी लिए हुए था और दोनों की चूत पर छाये काले घने बाल चाँद में लगे दाग के समान थे, यह देख कर मेरा खड़ा लौड़ा हिलौरें मारने लगा था और बिगड़े घोड़े की तरह भाग कर उन दोनों की चूत में एंट्री मारना चाहता था।
अब मैं लेट गया और जस्सी को कहा कि वो अपनी चूत को लेकर मेरे मुंह पर बैठ जाए और जेनी को कहा वो मेरे लौड़े को मुंह में ले कर चूसे और अपनी चूत वाली साइड मेरी तरफ कर दे ताकि मैं उसकी चूत में उंगली डाल कर उसकी भग को मसल सकूँ और इस तरह हम तीनों एकदम एक दूसरे में बिजी हो गए।
सबसे पहले जस्सी, जिसकी चूत को मैं चूस रहा था, वो अपने पर कंट्रोल नहीं कर सकी और मेरे मुंह में ही झड़ गई और उसके बाद जल्दी ही जेनी जिसकी चूत में मेरी ऊँगली थी और जिसके मुंह में मेरा लंड था वो झड़ गई।
फिर हम तीनों थोड़ी देर के लिए विश्राम करने लगे।
अब मैंने जेनी से पूछा- कैसे चुदवाना पसंद करोगी तुम?
उसने जवाब में कहा- मैं खड़ी हो जाती हूँ और आप पीछे से मेरी चूत में लंड डाल कर मेरी चुदाई करो, यह पोज़ मुझको सबसे अधिक पसंद है।
मैंने जस्सी से पूछा- तुमको कौन सा पोज़ बहुत पसंद है यार?
वो बोली- घोड़ी बन कर चुदवाना मुझको बहुत ही अच्छा लगता है।
मैं बोला- जेनी अभी तुम भी घोड़ी बन कर चुदवा लो तो दोनों को साथ साथ ही चोद दूंगा और बाद में मैं तुमको खड़े पोज़ में भी चोद दूंगा। क्यों ठीक है ना?
मैंने दोनों को घोड़ी बनाया और पहले जेनी के पीछे बैठ कर अपना लंड उसकी गीली चूत में डाला और थोड़ी देर धक्के मारने के बाद उसकी चूत से लंड को निकाल कर मैंने उसको जस्सी की तड़फ रही चूत में डाल दिया और कुछ देर लंड के धक्के मारने के बाद वापस जेनी की चूत में लंड को डाला और उसको भी दोबारा बहुत देर तक धक्के मारने के बाद लंड को तभी निकाला जब वो छूट गई और फिर मैंने इत्मीनान से जस्सी को पीछे से चोदा, कभी धीरे और कभी तेज़ और साथ ही उसकी भग को भी मसला तो जस्सी भी हाय हाय करती हुई छूट गई।
मैं उन दोनों के बीच लेट गया और दोनों के सर अपनी बाजुओं के ऊपर रख कर मस्ती से आराम फरमाने लगा।
दोनों ही मेरे लौड़े को हाथ में लेकर उसके साथ खेल रही थी।
फिर मैंने अपने हाथ उनके सरों के नीचे से निकाले और दोनों को कहा- कौन मुझको ऊपर से बैठ कर चोदना चाहता है?
दोनों ने अपना हाथ खड़ा कर दिया तो मैंने कहा- पहले मेरे दाईं तरफ वाली पार्टी मुझको ऊपर से चोदेगी और दूसरी पार्टी कि जैसे मर्ज़ी वैसे कर लेंगे। क्यों ठीक है न?
दोनों बोली- ठीक है मेरे मालिक! 
सबसे पहले जेनी ने मुझको मेरे ऊपर बैठ कर चोदा और जब वो जल्दी ही थक गई और साथ ही छूट गई तो मुझको जस्सी ने भी ऊपर बैठ कर चोदा।
दोनों अब चुदाई में काफी माहिर हो गई थी और मेरे और कम्मो के सिखाये हुए तरीकों को समझ चुकी थी तो उनको मेरे साथ चुदाई का आनन्द ज़्यादा आता था।
जेनी के मोटे नितम्बों को देख कर मैं बार बार जोश में आ जाता था और अपने खड़े लंड की प्यास बुझाने की कोशिश करता था और उधर जस्सी के नितम्ब सामन्य और गोल थे लेकिन उसके मुम्मों का कोई जवाब ही नहीं था। वो ना सिर्फ मोटे और गोल थे लेकिन काफी बड़े भी थे जैसे कि शादीशुदा और बच्चों वाली औरतों के होते हैं।
उसके मम्मों के बीच सर रख कर सोने में बहुत मज़ा आएगा, यह मैं जानता था लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्यूंकि जस्सी किसी लड़की के साथ एक कमरा शेयर करती थी और जेनी भी किसी के साथ शेयर करती थी।
मैंने दोनों को कहा- तुम दोनों कि दो दो चीज़ें बहुत ही सुंदर बन पड़ी हैं, मैं चाहता हूँ कि इनका नाप ले लिया जाए अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो?
दोनों ने कहा कि उनको कोई ऐतराज़ नहीं है और तब मैं कम्मो को बुला लाया जो साथ वाले कमरे में ही लेटी हुई थी।
उसने नाप वाले फीते के साथ दोनों के पहले मम्मे नापे और फिर उनके चूतड़ों को भी नापा।
नाप के मुताबक जेनी के मुम्मे और नितम्बों का नाप यूँ था:- 34-25-36 और जस्सी के नाप यूँ था- 36-26-34. 
अभी तक नाप की कॉपी में यह नाप सबसे बड़ा था और दोनों ही प्राइज की हकदार थी तो कम्मो ने दोनों को छोटे छोटे टॉयज दिए जो उन दोनों को बहुत पसंद आये।
तब जस्सी बोली- सोमू के लंड का भी नाप लो न कम्मो आंटी? देखें तो सही यह कितना बड़ा है?
तब कम्मो ने मेरे खड़े लौड़े का नाप लिया जो निकला 7.5 इंच और तब उन लड़कियों को मेरे पिछले नाप भी दिखाए गए जिसमें वो ख़ास दवाई खाने के बाद का नाप भी था जो 8 इंच का था जो अभी तक सबसे बड़ा था।
तब दोनों लड़कियों ने कपड़े पहनने लगी तो मैंने जेनी को रोक दिया और कहा- जेनी डार्लिंग तुमको अभी पीछे से खड़ा कर के चोदना तो रह गया न… चलो तुम्हें तुम्हारे फेवरिट पोज़ में भी चोद देते हैं अभी!
जेनी बोली- नहीं सोमू राजा, अब मैं बहुत चुद चुकी हूँ और चुदवाने की इच्छा नहीं है, फिर कभी सही!
दोनों ने कपड़े पहन लिए लेकिन मैंने उससे पहले ही दोनों के मुम्मों और चूतड़ों को थोड़ी देर चूमा चाटा था, मेरी इच्छा भी पूरी हो चुकी थी।
जाने से पहले जस्सी बोली- मेरी एक सहेली है जो अभी तक कुंवारी है और उसकी बड़ी इच्छा है कि उसकी सील कोई जानकार और भरोसेमंद लड़का ही तोड़े। मैं चाहती हूँ कि सोमू जी महाराज तुम उसकी सील तोड़ो।
मैं कुछ जवाब देता उससे पहले ही जेनी भी बोल पड़ी- मेरी भी जो रूममेट है न, वो भी कुंवारी है और उसकी भी इच्छा थी कि उस की भी सील तोड़े कोई उसकी पसंद का लड़का! क्या कहते हो सोमू राजा?
मैंने कहा- यह सब बातें तुम कम्मो आंटी से ही कर लो पहले और फिर जैसे वो कहेगी उसके मुताबिक़ ही कर देना तुम दोनों।
यह कह कर मैं बाथरूम में चल गया और जब निकला तो कम्मो बोली- यही तय हुआ है कि दोनों अपनी सहेलियों को यहाँ लाएँगी और हम सब बात भी कर लेंगे और एक दूसरे को देख भी लेंगे। क्यों ठीक हैं न?
मैं बोला- कम्मो रानी, बिलकुल ठीक है। चलो मैं तुम दोनों कुंवारी लड़कियों को छोड़ आऊँ अपने अपने घर!
दोनों बोली- नहीं सोमू, हम चली जाएँगी, तुम रेस्ट करो!
उनके इंकार करने के बावजूद मैं उनको उनके घरों तक छोड़ कर आ गया।


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लूसी और रेनू की सील तुड़वाई की तैयारी

अगले दिन जस्सी और जेनी मुझको कॉलेज की कैंटीन में मिल गई, उनके साथ दो वेल ड्रेस्ड लड़कियाँ थी जिनकी आयु शायद 18-19 वर्ष लग रही थी।
जेनी ने अपनी रूममेट से मिलवाया जिसका नाम लूसी था और दिखने में काफी सुंदर और स्मार्ट थी।
फिर जस्सी ने अपनी सहेली से मिलवाया जिसका नाम रेनू था वो भी काफी सुंदर और स्मार्ट थी।
दोनों का शरीर काफी भरा हुआ था और खिलता हुआ रंग रूप था।
मैंने कहा- तुमने दोनों को समझा दिया है कि क्या करना होता है और उन दोनों का पक्का इरादा है यह काम करवाने का? आप दोनों अच्छी तरह से सोच समझ लें क्योंकि एक बार तीर निकल गया तो वापस आना सम्भव नहीं है।
दोनों ने शर्माते हुए हाँ में सर हिला दिया।
मैंने सबके लिए कोक मंगवाया और कोक पीते हुए मैंने नोट किया कि दोनों ही मुझको चोर आँखों से देख रही थी जैसे कि नई नवेली दुल्हन अक्सर अपने होने वाले पति को देखती है।
क्यूंकि लंच ब्रेक के बाद मेरा कोई पीरियड नहीं था और जेनी और जस्सी की भी कोई क्लास नहीं थी सो हमने तय किया कि हम सब घर के लिए चल पड़ते हैं, वहीं बैठ कर कम्मो के सामने सब बातें होंगी।
हम सब दो रिक्शा में चल पड़े और दस मिन्ट में मेरी कोठी पहुँच गए।
चौकीदार राम लाल ने हम सबका स्वागत किया और हम सब अंदर बैठक में जा कर बैठ गए।
जल्दी ही कम्मो भी आ गई, बड़े प्यार से सब लड़कियों से मिली खासतौर से नई लड़कियों से!
कम्मो के साथ मैं रसोई घर में गया और पारो से पूछा कि इन दो नए मेहमानों के लिए खाना पूरा हो जायेगा?
पारो ने मुड़ कर मेरी तरफ देखा और बड़े प्यार से कहा- छोटे मालिक आप चिंता ना किया कीजिये, मैंने काफी खाना बनाया हुआ है, आपकी पसंदीदा कलमी कवाब भी है और पनीर मसाला भी है, आप फ़िक्र न करें।
मैं भी चलते चलते उसके मोटे और उभरे हुए चूतड़ों पर हाथ फेरना नहीं भूला।
बैठक में कम्मो रानी अपने काम में जुटी हुई थी, वो उन लकड़ियों से सब कुछ जानने की चेष्टा कर रही थी।
फिर वो उन दोनों लड़कियों को लेकर मेरे कमरे में चली गई और मैं और जस्सी और जेनी वहीं बैठ कर उन दोनों की वापसी का इंतज़ार करने लगे।
सबसे पहले जस्सी उठ कर आई और मेरी गोद में बैठ गई और जेनी भी उसकी देखा देखी आई और अपने मम्मे मेरे बाज़ू से रगड़ने लगी और जस्सी मेरे लौड़े को पैंट के अंदर ही पकड़ने की कोशिश करने लगी।
मेरा भी एक हाथ जस्सी की गर्दन में था और उसके लबों को चूमने की कोशिश कर रहा था और दूसरे से मैं जेनी के मोटे और उभरे हुए चूतड़ों को मसल रहा था।
मेरा लौड़ा भी पैंट से आज़ादी मांग रहा था लेकिन मजबूरी थी अभी समय नही आया था कि लंड लाल को आज़ाद किया जाए।
इन दोनों जवान और खूबसूरत छोकरियों को मैं अब काफी चाहने लगा था, उसका कारण था उन दोनों के शरीर की सुंदर बनावट जिस में आकर्षण था उनके सख्त और मोटे मुम्मे और और गोल उभरे हुए नितम्ब।
इतने में कम्मो दोनों नई लड़कियों को लेकर बैठक में आ गई और कहने लगी- दोनों ही अभी कुंवारी हैं और दोनों की सील ज़्यादा सख्त नहीं है। मैंने इनको पूरी बात समझा दी और बता दिया कि पहले छोटे मालिक उनके सामने जेनी और जस्सी के साथ करके दिखायेंगे उसके बाद वो फैसल लें कि यह काम उनको करवाना है या नहीं।
चारों लड़कियों ने हाँ में सर हिला दिया। 
कम्मो बोली- छोटे मालिक पहले जेनी के साथ बिस्तर पर लेट कर पूरा शो इनको दिखायेंगे और फिर जस्सी के साथ घोड़ी बन कर प्रदर्शन करेंगे। तो फिर चलें बैडरूम में?
आगे चलते हुए कम्मो ने मुझको धीरे से कहा- लूसी तो ठीक है लेकिन वो रेनू काफी दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाएगी शायद… तो पहले आप लूसी की सील तोड़ना और फिर बाद में रेनू की। ठीक है न?
मैंने मज़ाक के मूड में कहा- जैसे मालकिन कहेगी वैसे ही तो करना पड़ेगा ना! 
कमरे में आकर कम्मो ने कहा कि सब मिल कर एक दूसरे के कपड़े उतार दें।
चारो लड़कियाँ एक दूसरे के कपड़े उतारने लगी, जैसे जेनी रेनू के कपड़े उतार रही थी और जस्सी लूसी के कपड़े उतार रही थी और फिर दोनों नई लड़कियों ने जस्सी और जेनी के कपड़े उतारने लगी।
अब सब लड़कियाँ निर्वस्त्र हो चुकी थी, केवल मैं और कम्मो ही कपड़ों में थे तो जस्सी ने पूछा- आप दोनों का क्या इरादा है?
मैं बोला- पहले हेडमिस्ट्रेस के कपड़े उतारो, फिर मेरी बारी आखिर में!
जब सब लड़कियाँ कपड़े उतारने रही थी तो मैं उनके निर्वस्त्र होने का नज़ारा देख रहा था और उनकी ख़ूबसूरती में इतना मगन हो गया कि मैं यह भूल गया कि मुझको भी अपने कपड़े उतारने हैं।
वो तो मेरा ध्यान उस समय भंग हुआ जब जेनी आकर मेरे कपड़े उतारने लगी। लेकिन वो काम शुरू करती, उससे पहले ही मैंने उसको एक गर्म चुम्मी उसके लबों पर की और साथ ही कस कर एक जफ्फी भी मारी और उसके मोटे मम्मों को अपनी छाती में क्रश कर दिया।
अब जेनी धीरे धीरे मुझको निर्वस्त्र कर रही थी जैसे ही उसने मेरी शर्ट उतारी तो वो बहुत ही आर्टिस्ट ढंग से सबके सामने झुकी जैसे सर्कस का रिंग मास्टर जब शेर से कोई करतब करवाता है तो दर्शकों की तालियों में झुक कर उनकी प्रशंसा को कबूल करता है।
वैसे ही जेनी झुकी और सब लड़कियों ने ज़ोर से तालियाँ बजाई।
और फिर उसने मेरी पैंट पर हाथ डाला और बेल्ट खोली, उसको अलग करके बटनों को खोला और मेरी पैंट को नीचे किया और जब सब के सामने मेरे टेंट नुमा अंडरवियर का नज़ारा पेश किया तो सबने ज़ोर की तालियाँ बजाई और एक बार फिर जेनी ने तालियों का अभिवादन झुक कर किया।
मैं और कम्मो इस नए ढंग के चीरहरण का नज़ारा बड़े ही आनन्द से देख रहे थे।
जब उसने मेरे अंडरवियर पर हाथ डाला तो सब लड़कियों की नज़र मेरे अंडरवियर में बने हुए टेंट पर टिक गई थी।
जेनी जो बैठ कर मेरा अंडरवियर उतार रही थी यह भूल गई थी कि मेरा लौड़ा कभी कभी बड़ी ज़ोर की किक मारता है, जैसे ही उसने मेरा अंडरवियर नीचे किया, जंगली घोड़ा बाहर निकल कर ज़ोर से जेनी के मुंह पर लगा और जेनी एकदम घबरा कर पीछे की तरफ गिर गई और अगर मैं उसको समय पर न पकड़ लेता तो उसका सर फर्श पर लगता।
यह देख कर सब लड़कियाँ ज़ोर से हंस पड़ी लेकिन मेरे सीरियस मूड को देख कर वो जल्दी ही चुप हो गई।
मैंने जेनी का हाथ पकड़ा और उसको उठाया और पूछा- जानम कहीं लगी तो नहीं?
जेनी बोली- थैंक्स सोमू, तुमने वक्त पर पकड़ लिया, नहीं तो मुझको ज़रूर चोट लगती।
मैं बोला- जेनी डार्लिंग, तुम ज़रा भी मत घबराओ, मैं हूँ न।
और यह कह कर मैंने उसके लबों पर एक चुम्मी दे दी और कस के अपने आलिंगन में ले लिया। मेरा लौड़ा तब जेनी की चूत के ऊपर मंडरा रहा था और फ़ौरन उसकी चूत के अंदर जाने के लिए बेकरार हो रहा था।
फिर मैं जेनी को लेकर अपने बेड पर पहुँचा और मैंने उसको अपनी बाँहों में उठा कर बेड पर लिटा दिया और अपने मुंह को उसकी काले बालों से ढकी चूत में डाल दिया।
उधर जस्सी लूसी के पीछे खड़ी हो गई और कम्मो ने रेनू को अपनी बाँहों में भर लिया और दोनों उन को चूमने चाटने में लग गई।
अब मैं भी जेनी के मुम्मों को चूस रहा था और साथ ही एक उंगली से उसकी चूत में उसकी भग को मसल रहा था। जब मैंने उसकी चूत में ऊँगली से फील किया तो वो बहुत गीली हो चुकी थी, मैंने कम्मो की तरफ देखा तो उसने इशारा किया कि चुदाई शुरू कर दी जाए।
मैंने जेनी के लबों पर एक गीली और गरम चुम्मी की और फिर अपना लंड जेनी की चूत पर रख दिया और उसको धीरे धीरे जेनी की चूत में डालना शुरू किया और एक बार पूरा अंदर डाल कर फिर धीरे से निकाला और यही क्रम दोहराया 5 -6 बार और फिर आहिस्ता से चुदाई की स्पीड तेज़ करने लगा।
जेनी की टांगें अब मेरी कमर को घेर कर मुझको और उकसा रही थी, मैंने धक्कों की स्पीड बहुत तेज़ कर दी और जेनी की कमर भी उठ उठ कर मेरे लंड का जवाब दे रही थी।
अब मैं जेनी की चूत की सुकड़न महसूस करने लगा और अपनी धक्कों की स्पीड अपनी चरम सीमा पर पहुँचा दी और तभी जेनी की चूत से एक ज़ोरदार फव्वारा छूटा और मेरी टांगों को भिगोता हुआ चादर पर गिर गया और उसकी टांगों ने मुझको अपनी गिरफ्त में कस लिया।
थोड़ी देर में वो ढीली पड़ गई और मैंने उसकी टांगों में से उठने से पहले उसके लबों पर बहुत ही गर्म चुम्मा जड़ दिया।
अब मैं जेनी के ऊपर से उठ गया और मेरे गीले लौड़े को नई लड़कियाँ बड़े ध्यान से देख रही थी।
जेनी की जगह अब जस्सी ने ले ली थी, वो घोड़ी बन कर बेड पर बैठी थी, मैं बेड पर चढ़ने की सोच ही रहा था कि लूसी जल्दी से आई और बैठ कर मेरे लंड को अपने मुंह में डाल लिया और गटागट उसको चूसने लगी।
कम्मो उसकी तरफ बढ़ ही रही थी कि मैंने हाथ के इशारे से उसको मना कर दिया और लूसी को अपने गीले लंड को चूसने दिया।
थोड़ी देर में वो अपनी गलती समझ गई और मेरे पास से उठ कर रेनू के साथ खड़ी हो गई।
मैं बेड पर चढ़ कर जस्सी की चूत का निशाना बनाने लगा और फिर मैंने अपना लहलहाता लंड जस्सी की चूत में डाल दिया, एक हाथ से उसके हसीन मम्मे को मसलने लगा।
जस्सी की चूत भी बहुत ज़्यादा गीली हो चुकी थी, जैसे ही लंड उस में गया, उसके मुंह से एक जोर की हाय निकल गई और लंड को पूरा अंदर तक घुसेड़ने के बाद मैंने आराम से उसको चोदना शुरू किया।
कभी धीरे कभी तेज़ वाला क्रम जारी रखते हुए मैंने लूसी और रेनू को देखा तो दोनों के हाथ अपनी अपनी बालधारी चूतों में घुसे हुए थे और वो धीरे से मेरे धक्कों को मैच करते हुए अपनी उंगली चला रही थी।
मैंने कम्मो की तरफ देखा और आँखों से इशारा किया कि वो उन दोनों को रोके वर्ना उनको छुटाने में मुश्किल आएगी।
कम्मो ने दोनों के हाथ उनकी चूतों से अलग किये और उनको जस्सी की घोड़ी बनी चुदाई को देखने के लिए प्रेरित किया।
लूसी और रेनू की चूत की सील तोड़ी


कम्मो ने दोनों के हाथ उनकी चूतों से अलग किये और उनको जस्सी की घोड़ी बनी चुदाई को देखने के लिए प्रेरित किया।
जस्सी की घुड़चुदाई मेरे लिए बहुत ही आनन्ददायक होती है यह मुझको मालूम था तो मैं मस्ती से और पूरे प्यार से जस्सी की मोटी गांड पर हाथों से थपकी मारते हुए उसको चोदने लगा्।
जस्सी और जेनी की चूत, जैसे कि बाकी की कुंवारी लड़कियों की होती है, बेहद ही टाइट थी और चूत की पकड़ लंड पर काफ़ी मज़बूत थी. 
अब समय आ गया था कि दोनों कुंवारी लड़कियों की चूत की सील को तोड़ा जाए और इसके लिए अब फिर कम्मो दोनों से पूछ रही थी कि उनको सील तुड़वानी है और इसका पक्का इरादा कर लिया है?
कम्मो ने उनको यह भी बता दिया था- अक्सर पहली चुदाई में कई लड़कियों को कोई आनन्द नहीं आता लेकिन चूत के नार्मल हो जाने पर उनको मज़ा आना शुरू हो जाता है।
कम्मो ने पूछा- क्यों जस्सी और जेनी, क्या तुमको पहली चुदाई में मज़ा आया था?
दोनों ने इंकार में सर हिला दिया।
मैंने उन दोनों से पूछा- वैसे जेनी और जस्सी, तुम्हारी सील कैसे टूटी थी?
जेनी तो काफी फ्रैंक थी सो बोली- मेरी सील तो किसी ने नहीं तोड़ी थी, वो तो मेरे गेम्स खेलने और साइकिल चलाने से टूट गई थी और फिर जब यह टूट ही गई थी सो मैं थोड़ा बहुत सब्ज़ियों का भी इस्तेमाल कर लेती थी, जैसे गाजर मूली और बैंगन का इस्तेमाल कभी कभी काफी मज़ा देता, खास तौर पर पीरियड के बाद के हॉट दिनों में… और सोमू से पहले मैंने किसी आदमी के साथ नहीं किया था, सोमु राजा ही मेरा पहला और असली लंड है।
मैंने जस्सी की तरफ देखा तो वो पहले तो शरमाई फिर थोड़ी संयत हो कर बोली- मेरे तो जीजा जी ने मेरी सील तोड़ी थी। वो क्या हुआ… मैं कुछ दिनों के लिए अपनी कजिन सिस्टर के पास पंजाब गई थी जो मैरिड थी। एक दिन मैं बाजार घूमने गई थी और जब वापस आई तो घर का दरवाज़ा खुला था और अंदर दीदी के बैडरूम में घुस ही रही थी कि दीदी और जीजा जी की आवाज़ आ रही थी जैसे वो कोई बड़ा काम कर रहे हो तो मैं बेधड़क अंदर घुस गई और देखा कि जीजाजी और दीदी चूत चुदाई में लगे हुए थे दोनों। और फिर जब उन्होंने ने मुझको देखा तो दीदी खुद उठ कर आई, मुझको खींच कर जीजाजी जी के पास ले गई और मुझको अपने पति से ही चुदवा दिया।
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मैं बोला- जस्सी के साथ बहुत ही बुरा हुआ!
कम्मो बोली- एक बात तुम सब लड़कियों को समझा दूँ कि छोटे मालिक को अपने लंड पर पूरा कंट्रोल है यानि वो किसी भी लड़की को उसकी मर्ज़ी के बगैर नहीं चोदते और अपना वीर्य कभी भी उसके अंदर नहीं छोड़ते। तो आप लड़कियाँ निश्चिंत होकर इनसे चुदा सकती हो। आप सबको मेरी गारंटी है किसी को भी कोई तकलीफ इन के कारण नहीं होगी। चलो तो फिर शुरू हो जाओ छोटे मालिक!
सबसे पहले लूसी को चोदना था तो उसको लिटा कर कम्मो ने उसकी चूत में उंगली डाल कर देखा कि वो काफी गीली है और अपनी पहली चुदाई के लिए तैयार है तो मुझको इशारा किया।
मैं बेड पर लेट गया लूसी के साथ और उसके होटों पर एक बहुत ही कामातुर चुम्मी लगा दी और अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर धीरे धीरे घुमाने लगा और उसके मुंह का रस पीने लगा।
फिर मैंने उसके मुम्मों को बारी बारी से चूमा और दोनों ही मुम्मे अच्छे मोटे और सॉलिड थे। और फिर उसकी चूत पर हाथ फेरा जो बालों से भरी थी और उसमें से बहुत ही मनमोहक खुशबू आ रही थी।
मैंने कम्मो को इशारा किया, वो जल्दी से आई और लूसी की चूत में ढेर सारी पॉण्ड्स क्रीम लगा गई, थोड़ी सी मेरे लौड़े पर भी लगा दी।
मैं अब उसकी चौड़ी टांगों में बैठ गया और अपने एकदम अकड़े लौड़े को चूत के मुंह पर रख कर दो तीन बार थोड़ा सा अंदर डाल कर निकाल लिया और फिर मैंने एक गहरा धक्का मारा लेकिन वो चूत में लगी झिल्ली से रुक गया और मैंने लौड़े को पूरा निकाल कर उसको एक बार फिर उसकी भग पर रगड़ा और फिर चूत में डाला फिर वो वहीं रुक गया।
अब मैंने लौड़ा डाले हुए ही लूसी के गोल मगर छोटे चूतड़ों के नीचे हाथ रखा और लंड को काफी ज़ोर से लूसी की चूत के अंदर घुसेड़ दिया और वो एक झटके में ही उसकी चूत में लगी झिल्ली को तोड़ते हुए ही पूरा अंदर चला गया।
तभी लूसी के मुंह से एक हल्की सी चीख निकल गई।
मैं थोड़ा रुका और लंड को पूरा अंदर रहने दिया और लूसी की चूत भी थोड़ी सी सिकुड़ने लगी और लंड को पूरी ताकत से जकड़ कर रखा हुआ था ऐसा लगा मुझको!
सब लड़कियाँ और कम्मो भी बड़े ध्यान से सील तुड़ाई देख रही थी।
अब लूसी थोड़ी रिलैक्स हुई और उसका अकड़ा हुआ जिस्म अब फिर नार्मल हो गया और अब मैंने उसको लंड से धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये।
पहले तो हर धक्के पर लूसी का शरीर हलके से अकड़ जाता था लेकिन फिर वो धीरे धीरे चुदाई की रिदम समझ गई और जब मैं तेज़ धक्कों की स्टेज पर पहुँचा तो वो भी हर धक्के का जवाब वैसे ही अपनी कमर को ऊपर उठा कर दे रही थी और उसकी चूत से अब रस निकलना शुरू हो गया था, वो जल्दी ही पहली बार लौड़े से झड़ने के लिए तैयार हो गई थी।
मेरे अंतिम कुछ धक्के इतनी तीव्र स्पीड के थे कि वो कुछ बड़बड़ाते हुए ही मेरे लंड से अपनी कमर जोड़ कर झड़ गई और मुझको उस ने ज़ोर से अपनी बाँहों में जकड़ लिया।
सब लड़कियों ने ताली बजा कर लूसी के छूटने का स्वागत किया था और जब मैं उसके ऊपर से उठा तो मैंने भी झुक कर उनकी तालियों का जवाब दिया।
तीनों लड़कियों ने लूसी को घेर लिया और उसको प्यार करने लगी।
अब कम्मो ने हम सबको कोक पिलाया और फिर कम्मो ने रेनू को बेड पर लिटा दिया और उसकी चूत में थोड़ी सी क्रीम लगा दी।
मैं अब अपने बाथरूम में घुस कर हल्का हो आया और वापस आकर अपने लौड़े पर भी ब्यूटी क्रीम लगवा ली।
रेनू को ध्यान से देखा तो वो भी काफी हसीन लगी, उसके नयन नक्श भी काफी पंजाबियों की तरह थे और रंग भी उनकी तरह सफेदी और लाली लिए हुए था। उसके मुम्मे लूसी से ज़्यादा मोटे थे लेकिन जस्सी से थोड़े छोटे थे लेकिन बहुत ही सॉलिड लग रहे थे।
रेनू की चुदाई भी तकरीबन वैसे ही चली जैसी लूसी की थी लेकिन चूत में लंड की एंट्री थोड़ी मुश्किल से हुई क्योंकि उसकी चूत का मुंह काफी छोटा था। ऐसा लगता था कि वो ज़्यादा सेक्सी फील नहीं करती थी और उंगली बाज़ी भी ज़्यादा नहीं करती होगी और ऐसा लगता था कि उसकी कामुकता का स्तर भी काफी कम था।
मैंने अपना खड़ा लंड बहुत धीरे से उसकी चूत में डाला और वो क्रीम के कारण फिसल कर अंदर चला गया थोड़ा सा और फिर आगे एक दीवार महसूस हुई।
मैं अब लंड को भूल कर उसके मुम्मे को चूसने में लग गया और उसके गोल काके चुचूकों को मुंह में रख कर होटों से इधर उधर का खेल शुरू कर दिया।
मैंने देखा कि जस्सी भी अपनी सहेली को गर्म करने में लगी हुई थी।
वो उसके मुंह से अपना मुंह जोड़ कर उसके लबों को चूस रही थी और इसका असर मुझको रेनू की चूत में हो रही हरकत से पता चल रहा था वो अब धीरे धीरे मेरे लंड से दूर भागने की बजाये अब उसके पास आ रही थी।
मैंने अब धीरे से फिर रेनू की चूत पर अटैक जारी रखा और जब लंड फिर से चूत की दीवार से टकराया तो मैंने कम्मो के इशारे के मुताबिक़ एक ज़ोर का धक्का लंड से मारा और वो चूत में छिपी दीवार को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया।
लेकिन तभी ही रेनू ने एक दिल दहला देनी वाली चीख मारी और मुझसे लिपट गई और उसका सारा शरीर पत्ते की तरह काम्पने लगा।
कम्मो फ़ौरन ही आई और उसकी चूत से बहते हुए रक्त को साफ़ करने लगी और साथ ही वो और जस्सी रेनू को सांत्वना देने लगी, कम्मो के कहने पर मैंने लंड का अंदर और बाहर आना जाना जारी रखा।
कुछ ही क्षणों में रेनू सामान्य हो गई और मैं प्यार से उसके लबों को चूसने लगा।
मैंने महसूस किया कि उसके अंदर की टेंशन अब एकदम दूर हो गई और वो चूत चुदाई का आनन्द लेने लगी।
अभी मैं उसको लंड के धीरे धक्के ही मार रहा था लेकिन अब रेनू ने नीचे से धक्कों का जवाब देना शुरू कर दिया तो मैं समझ गया कि उसको चुदाई का आनन्द आना शुरू हो गया है।
जस्सी अब रेनू के मुम्मों को चूस रही थी और जेनी उसके चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी और मैं लंड की धक्का पेली में व्यस्त था।
थोड़ी देर की तेज़ चुदाई के बाद रेनू झड़ने के निकट पहुँच गई थी और अब तपती भट्टी में गर्म लोहे की सलाख को तेज़ी से डालना और निकालना शुरू कर दिया और शीघ्र ही रेनू का जिस्म एक बार फिर अकड़ा और वो बड़े आनन्द से मुझको कस कर अपनी बाँहों में बाँध कर झड़ गई।
रेनू के झड़ते ही सब लड़कियों ने तालियों से उसका स्वागत किया और फिर सबने उसको जाकर एक प्यारी सी जप्फी मारी।
सबने रेनू से पूछा कि उसको पूरी तसल्ली हो गई और अब उसको चुदाई से कभी डर तो नहीं लगेगा?
रेनू ख़ुशी से नाचती हुई सब लड़कियों से मिल रही थी और किसिंग और जप्फी मार रही थी।
इसी दौरान में लूसी चुपचाप मेरे पास आई और मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और नीचे बैठ कर उसको चूसने लगी। मैं भी उसके मुम्मों के साथ खेलने लगा और फिर उसको उठा कर मैंने उसके लबों पर एक हॉट किस दे दी।
मैंने उसकी चूत में हाथ डाला तो वो एकदम गीली गोत हो रही थी। तब मैंने उसके कान में कहा- क्या चूत चुदवाने की और भूख लगी है?
उसने मुझको कान में कहा- सोमू, एक बार और चोद दो प्लीज!
मैंने कहा- चलो आ जाओ लूसी, एक बार नहीं जितनी बार कहोगी, तुम्हारी चूत की सेवा कर दूँगा।
मैंने उसको बाँहों में उठा लिया और उसको लेकर बेड पर आ गया और उसकी टांगें खोल कर अपने खड़े लौड़े को उसकी चूत के मुंह पर रख कर एक धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया।
अब सारी लड़कियाँ बेड के चारों ओर आकर खड़ी हो गई और लूसी की चुदाई का तमाशा देखने लगी।
चूत और लंड की लड़ाई अक्सर देखने में काफी मज़ा आता है और खासतौर पर जवान लड़के और लड़कियों को क्यूंकि यह साफ़ मसहूस होता है कि वह स्वयं इस में हिस्सा ले रहे हैं।
नई नई खुली चूत का रास्ता चाहे जितना भी खोला जाए, उसमें बहुत अधिक टाइट नेस महसूस होती है सो इसी कहावत के स्वरूप लूसी की चूत में बहुत अधिक संकीर्णता लंड लाल को महसूस होती है और इसी कारण वो अपनी तेज़ी नहीं दिखा पाता।
धीरे धीरे से तेज़ चुदाई की स्पीड बढ़ाते हुए बहुत जल्दी ही लूसी की चूत को मजबूर हो कर अपने हथियार डालने पड़े और वो एक ज़ोरदार ‘हाय…’ के साथ झड़ गई।
कम्मो ने सबसे पूछा कि और किसी को कोई चुदाने की इच्छा तो नहीं और यदि नहीं तो क्या छोटे मालिक अपना हथियार पैक कर के रख लें?
सब ने कहा- अब कोई इच्छा नहीं है, पैक कर लो अपना हथियार!
इससे पहले कि कपड़े पहनने की प्रक्रिया शुरू होती, लूसी और रेनू ने मुझको एक कस कर जफ्फी मारी और लबों पर चुम्मी की और मैंने भी उन लड़कियों के मुम्मों और चूतड़ों को छुआ और उनको यह विश किया कि बार बार वो चुदाई का आलम देखें और खुश रहें।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

निम्मो, जूही भाभी की चूत चुदाई

कुछ दिन हम सब बहुत व्यस्त रहे क्यूंकि 15 दिन के लिए गाँव जाना था, जाने की तैयारी भी करनी थी और कोठी को भी बंद करना था।
इन दिनों मैं अपने हरम की दोनों हसीनों से ही काम चला रहा था और इस कारण आज कल पारो मेरा बहुत ख्याल रखती थी क्यूंकि मैं रात को उसकी ख़ास सेवा करता था।
एक दिन मैं कॉलेज से घर आया तो कम्मो ने बताया कि दोपहर में निर्मला मैडम उसके पास आई थी अपना चेकअप करवाने के लिए, उनका पूरा चेक कर दिया था और हर तरह से ठीक है, प्रेगनेंसी ठीक चल रही है।
कम्मो आगे बोली- निर्मला मैडम कह रही थी कि वो भी दशहरे की छुट्टियों में अपने गाँव जा रही हैं लेकिन वो इस पशोपेश में हैं कि मेरी बहन निम्मो को कहाँ छोड़ के जाएँ क्योंकि वो भी घर बंद करके जा रही है अपने पति के साथ! तो मैंने उनको कह दिया है कि छोटे मालिक से पूछ कर बताती हूँ कि क्या कर सकते हैं हम?
मैं कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला- ऐसा करो, तुम मैडम को कह दो कि वो निम्मो को हमारे यहाँ छोड़ जाएँ और हम उसको अपने साथ अपने गाँव ले जाएँगे। क्यों कम्मो यह ठीक है ना?
कम्मो बोली- हमारे साथ वो दो लड़कियाँ भी हैं, तो गाड़ी में इतनी जगह नहीं होगी कि निम्मो को भी साथ ले लें।
मैं बोला- वो ठीक याद दिलाया, मैं तो भूल ही गया था। जेनी और जस्सी आज मुझको कॉलेज में मिली थी और कह रही थी कि वो अब हमारे साथ नहीं जा सकेंगी क्यूंकि उनके भाई आ रहे थे उनके गाँव से, वो उनके साथ अपने अपने गाँव जा रही हैं कल और अब वापिस आकर ही हमसे फिर मिलेंगी, तो निम्मो को ले जाने में कोई अड़चन नहीं होगी।
कम्मो खुश हो कर बोली- छोटे मालिक, आपने तो मेरे फ़िक्र को ही दूर कर दिया। अब मैं निर्मला मैडम से बात कर लेती हूँ।
यह कह कर वो निर्मला मैडम से बात करने लगी और फिर बताया कि निर्मला मैडम ने कहा है कि मैं निम्मो को आ कर ले जाऊँ क्यूंकि वो कल गाँव जा रहे हैं, तो मैं रिक्शा पर जाती हूँ और निम्मो को ले आती हूँ ठीक है न छोटे मालिक?
मैं बोला- जाओ जाकर निम्मो को ले आओ! आने जाने के पैसे हैं न तुम्हारे पास? नहीं तो मेरे से ले जाओ!
कम्मो बोली- पैसे हैं मेरे पास, मैं अभी आती हूँ निम्मो को लेकर!
एक घंटे के बाद कम्मो निम्मो और उसकी पोटली लेकर आ गई और अपनी कोठरी में उसको रखवा दिया।
रात को खाना खाकर हम सब मेरे कमरे में इकट्ठे हुए और मैंने उन सबको बताया कि मैंने टैक्सी के लिए बोल दिया है और हम कल सुबह गाँव के लिए निकल जाएंगे। इससे पहले पारो और राम लाल और बाकी कर्मचारियों का हिसाब सुबह कर कर देंगे और उनको कह देना कि वो चाहें कल या फिर परसों अपने गाँव जा सकते हैं।
मैंने कम्मो से पूछा- आज रात क्या इरादा है?
कम्मो बोली- छोटे मालिक, आज तो आपके पास तीन मोटी गायें हैं जिनको आपको हरा करना पड़ेगा। मेरा तो कोई नहीं लेकिन पारो तो कल जा रही है 15 दिन के लिए, तो उसको तो हरा करना ही चाहिए! क्यों पारो?
पारो बोली- हाँ छोटे मालिक, मेरा तो काम आज कर ही दो आप, वरना मैं आपकी याद में यूँ ही तड़पती रहूंगी।
कम्मो बोली- और हमारे बीच नई आई है निम्मो रानी, तो उसको भी आज तो अपनी पटरानी बना ही दो!
मैं बोला- जैसे तुम कहोगी, वैसा ही होगा कम्मो महारानी!
कम्मो के इशारे पर सब रानियाँ निर्वस्त्र होने लगी और जब सबने अपने कपड़े उतार दिए तो कम्मो ने निम्मो को इशारा किया कि वो मेरे भी कपड़े उतार दे!
निम्मो पहले थोड़ी झिझकी लेकिन फिर वो मेरे पास आई और एक एक कर के मेरे कपड़े उतारने लगी। लेकिन जैसे ही वो मेरे अंडरवियर तक पहुँची तो उसने अपना मुंह थोड़ा पीछे कर लिया ताकि लंडम लाल का थप्पड़ उसको इस बार न लगे।
मैंने निम्मो से कहा- पहले हुए अनुभव से सबक लिया तुमने जब लंड का थप्पड़ पड़ा था अंडरवियर उतारते हुए!
निम्मो शर्माते हुए बोली- हाँ छोटे मालिक, वो घटना भला मैं कैसे भूल सकती हूँ! बड़े जोर का लगता है यह मुंह पर!
यह सुन कर हम सब ही हंस पड़े।
फिर मैंने उन तीनों रानियों को लाइन में खड़ा कर दिया और उनके शरीर की सुंदरता को परखने लगा।
सबसे सॉलिड और अच्छी प्रकार से बने हुए शरीर का पुरस्कार तो कम्मो को ही जाता था लेकिन निम्मो उससे 2-3 साल छोटी होने के कारण उसके शरीर का अभी तक ज़्यादा इस्तेमाल नहीं हुआ था क्यूंकि वो कम्मो की तरह अधिक खुले हुए स्वभाव की नहीं थी और काफी चुपचाप और शर्माने वाली लड़की थी।
कम्मो ने ही कहा- छोटे मालिक, पहले आप निम्मो को ही चोदो, उसको शायद काफी दिनों से लंड के दर्शन नहीं हुए हैं।
मैंने निम्मो से कहा- कैसे चुदना पसंद करोगी निम्मो? जो पोज़ तुमको अच्छा लगता है, उसी से चुदाई शुरू करते हैं।
निम्मो बोली- जैसे आप चाहो, वैसे ही कर लो, मेरी कोई ख़ास पसंद नहीं है।
मैं बोला- तो चलो फिर घोड़ी बन कर ही चोद देता हूँ। घोड़ी बन जाओ निम्मो फ़ौरन।
निम्मो घोड़ी बन गई और मैंने अपने खड़े लंड को निम्मो की चूत के ऊपर रगड़ कर उसको थोड़ा गीला किया एक धक्के में उसकी टाइट चूत में लंड पूरा चला गया।
शुरू में धीरे धक्कों से चुदाई की फिर आहिस्ता से तेज़ी पकड़ ली और 10-15 धक्कों में ही जब निम्मो छूट गई तो मैंने उसको बगैर लिंक तोड़े पलट दिया और अब उसकी टांगें हवा में लहराते हुए चुदाई शुरू कर दी फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसको साइड में लिटा कर स्वयं उसके पीछे से चूत चुदाई करने लगा, उसकी एक टांग तो हवा में थी और दूसरी उसके नीचे।
इस दौरान कम्मो और पारो जो अभी तक आपस में लगी हुई थी, अब निम्मो के मुम्मों को चूसने लगी और पारो ने अपनी ऊँगली निम्मो की गांड में डाल दी।
इस डबल अटैक से निम्मो फिर बड़े ज़ोर से हिलते हुए छूट गई और मैं उसको छोड़ कर पारो की सेवा करने लग गया और जब पारो की चूत में अपना गीला लंड डाला तो वो बेहद गीली हो रही थी और उसको भी चुदाई आनन्द काफ़ी दिनों से नहीं मिला था तो वो भी कामातुर होकर चुद रही थी।
थोड़ी देर की चुदाई में वो जब 2 बार झड़ गई तो मैंने अपना ध्यान अब कम्मो की तरफ किया और उसकी जाने पहचानी चूत को भी आनंदित किया। 
उसके बाद एक बार फिर निम्मो को चोदा और पारो को भी फाइनल चुदाई की और इस तरह वो रात हम तीनों एक साथ सोये नीचे फर्श पर बिछे गद्दों पर!
सुबह जल्दी उठ कर हम सब तैयार होने में लग गए और अपने निर्धारित समय पर टैक्सी में बैठ कर गाँव के लिए चल दिए।
चार घंटे के सफर के बाद हम अपने गाँव पहुँच गये।
जैसे ही मैं हवेली में दाखिल हुआ, एकदम बहुत सारे लोगों ने मुझ को घेर लिया और बड़ी गर्म जोशी से मिलने लगे।
मैं एकदम हैरान हो गया कि ये सब कहाँ से आ गए लेकिन तभी मम्मी आ गई और कहने लगी- सोमू ये सब तुम्हारे कजिन हैं जिनसे तुम पहली बार मिल रहे हो। इन सबको हमने दशहरा यहाँ मनाने के लिए आमंत्रित किया है।
और फिर उन्होंने हम सब को एक दूसरे से मिलवाया।
जितने सारे मेहमान थे उनमें बहुत सारी भाभियाँ और लड़कियाँ थी और एक दो लड़के भी थे जिनको मैं पहली बार मिल रहा था।
मैं अपने कमरे में घुसा तो वहाँ एक बहुत ही सुंदर भाभी मेरे बेड पर लेटी हुई थी और एक मैगज़ीन पढ़ रही थी।
मुझको देखते ही वो अकचका गई और उठ के बैठ गई, उसकी साड़ी का पल्लू उसके वक्ष से ढलक गया और उनके बहुत ही सॉलिड मुम्मे जो लाल ब्लाउज में ढके थे, मेरे सामने आ गए।
भाभी बोली- तुम सोमू हो क्या?
मैं बोला- जी हाँ, और आप?
भाभी बोली- मैं जूही हूँ, तुम्हारे इलाहबाद वाले भैया की पत्नी, रिश्ते में तुम्हारी भाभी हूँ।
मैं बोला- भाभी जी, आप से मिल कर बड़ी प्रसन्नता हुई। मम्मी ने यह कमरा आपको दिया है क्या? कोई बात नहीं, मैं दूसरे कमरे में चला जाऊँगा मम्मी से बात कर के, तब तक मेरा यह बैग यहाँ पड़ा है, आप लेटी रहो।
भाभी बोली- कॉलेज में पढ़ते हो क्या लखनऊ में?
मैंने भाभी की तरफ देखा, उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू से वक्ष ढकने की कोई कोशिश नहीं की और उनके गोल और सॉलिड दिखने वाले मुम्मे मेरे सामने वैसे ही जगमगा रहे थे।
मैं मुस्करा कर बोला- हाँ भाभी, कॉलेज में हूँ वहाँ! अच्छा मैं ज़रा मम्मी से मिल कर आता हूँ।
यह कह कर मैं कमरे से बाहर आ गया और मम्मी को ढूंढने लगा जो उस समय एक और सुंदर भाभी से बात कर रही थी।
वो मुझको देखते ही वो कमरे के बाहर चली गई और तब मैंने मम्मी से पूछा- आपने बताया ही नहीं कि इतनी सारी फ़ौज आने वाली है रिश्तेदारों की?
मम्मी जी बोली- कोई बात नहीं सोमू, कुछ दिनों की ही तो बात है, एडजस्ट कर लो बेटा। मैंने तुम्हारा कमरा छेड़ा नहीं, तुम उसी में ही रहोगे, और तुम्हारे साथ वो इलाहाबाद वाली जूही भाभी और उसकी ननद रहेगी। तुमने अच्छा किया जो निम्मो को भी साथ ले आये, उसकी बड़ी मदद हो जाएगी घर के काम काज में!
मैं बोला- ठीक है मम्मी जी, जैसा आप ठीक समझो।
मैं अपने कमरे में आ गया और वहाँ भाभी के साथ एक और 18-19 साल की लड़की भी बैठी थी।
भाभी ने उसके साथ परिचय कराया और कहा- यह मेरी ननद है रिया, अलाहबाद के कॉलेज में फर्स्ट ईयर आर्ट्स की छात्रा है तुम्हारी तरह!
देखने में काफी अच्छी लगी वो और मैंने उसको अपने ख़ास अंदाज़ से देखा तो वो अच्छे मोटे मुम्मों और उभरे हुए चूतड़ों की मालिक नज़र आई।
मेरी और रिया की पटरी अच्छी बैठ गई और हम दोनों एक दूसरे से जल्दी ही घुलमिल गए।
उधर भाभी भी बार बार अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर मेरा ध्यान अपनी और आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी।
फिर हम तीनों उठ कर बैठक में आ गए और बाकी मेहमानों का इंतज़ार करने लगे।
थोड़ी देर में बाकी के जवान लड़कियाँ और दो लड़के वहाँ आ गए और मुझसे बड़े ही प्रेम पूर्वक मिले, सबसे परिचय हुआ।
लड़कियाँ कुछ तो सुंदर थी और स्मार्ट दिख रही थी और कुछ एवरेज शक्ल सूरत वाली थी।
सुन्दर लड़कियों ने पूरी कोशिश की वो मेरे ही निकट आकर बैठें लेकिन उनमें कुछ को ही सफलता मिली।
अब मैं उनके रहने और दूसरे कामों के बारे में पूरी रुचि ले रहा था और उनको वहाँ घूमने के स्थानों के बारे में बता रहा था।
फिर हम सबने बैठक में बैठ कर खाना खाया, खाना बहुत ही स्वादिष्ट बना था।
मेरे पूछने पर कम्मो ने बताया कि एक नई बावर्चिन आई है जो बहुत ही अच्छा खाना बनाती है और कई और काम भी करती है।
यह बताते हुए कम्मो कुछ मुस्कराई थी, मैं समझ गया कि मेरे मतलब की है वो!
रात को खाना खाकर हम सब अपने अपने कमरों में सोने के लिए आ गए, कुछ देर गपशप चलती रही और जब सोने का टाइम हुआ तो मैंने भाभी से कहा- मैं फर्श पर एक गद्दा बिछवा लेता हूँ, मैं वहाँ सो जाऊँगा और आप दोनों पलंग पर सो जाना।
जूही भाभी बोली- नहीं नहीं, तुम क्यों नीचे सोओगे, हम तीनो पलंग पर ही सो जाते हैं। इतना बड़ा तो पलंग है इसमें तो दो जने और सो जाएँ तो भी जगह बचती है। सोमू तुम एक साइड में सो जाओ और रिया दूसरी साइड में सो जायेगी और मैं तुम दोनों के बीच में… क्यों ठीक है ना रिया और सोमू?
रिया बोली- आज रात तो ऐसे सो कर देखते हैं और अगर कष्ट हुआ तो कल रात देख लेंगे, क्यों ठीक है ना सोमू?
मैं बोला- जैसा आप दोनों को ठीक लगे, वैसा ही कर लेते हैं।
फिर हम सबने गुड नाईट की और सो गए।
तकरीबन एक घंटे के बाद मुझको महसूस हुआ कि कोई हाथ मेरे पयज़ामे के ऊपर से मेरे लौड़े को छेड़ रहा है और मेरा लौड़ा भी बेलगाम घोड़े की तरह खड़ा होना शुरू हो गया।
पहले तो मैंने सोचा कि शायद भाभी का हाथ गलती से मेरे लौड़े के ऊपर पड़ रहा है लेकिन जब मैं दम साध कर लेटा रहा तो वो हाथ वाक़यी में मेरे अब खड़े लौड़े के साथ खेल रहा था यानि मुट्ठी मारने की प्रक्रिया कर रहा था और वो भी मेरे पायज़ामे के ऊपर से।
लेकिन मैं भी चुपचाप आँखें बंद करके लेटा रहा, इंतज़ार करता रहा कि देखो आगे क्या होता है।
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अब भाभी ने धीरे से मेरे पज़ामे को थोड़ा नीचे खिसका दिया और लंड लाल को बाहर निकाल लिया।
अब मैं भी अपने को रोक नहीं सका और आँखें बंद किये ही मैंने अपना हाथ भाभी की नाइटी के ऊपर उनके मुम्मों पर रख दिया।
यह देख कर भाभी थोड़ी झिझकी लेकिन उन्होंने फिर लंड की मुट्ठी मारनी शुरू कर दी और अब उन्होंने मेरी तरफ करवट ले ली और मेरे पज़ामे को उन्हों ने मेरी कमर के नीचे खिसका दिया और मेरे लंड को हाथ में लेकर उसको नापने लगी।
इधर मैं भी भाभी के मुम्मों को अब दबाने लगा और धीरे धीरे दूसरा हाथ उसकी चूत की तरफ ले गया।
मैंने उनकी नाइटी को अब काफी ऊपर उठा लिया और दूसरे हाथ को उनकी जांघों पर फेरते हुए उनकी चूत के पास ले जाने लगा।
अब भाभी ने अपना मुंह थोड़ा उठाया और मेरे गालों को और मेरे होटों को हल्के हल्के चूमना शुरू कर दिया।
जब उनके होंट दूसरी बार मेरे होटों पर लगे तो मैंने भी उनके लबों को अपने होटों में दबा लिया।
मेरा एक हाथ अब भी उनके मुम्मों को नाइटी के बाहर से मसल रहा था दूसरा अब भाभी की चूत के बाहर खड़ा था और जब बालों से भरी चूत में ऊँगली डाली तो उसको एकदम गीला पाया।
मैं समझ गया कि भाभी सेक्स की भूखी है और इस वक्त वो अन्तर्वासना, काम अग्नि में जल रही हैं, मैंने भी भाभी की भग को मसलना शुरू कर दिया।
भाभी ने मेरा लंड छोड़ दिया और वही अपना हाथ मेरे उंगली मार हाथ पर रख दिया और उसको और भी तेज़ी से ऊँगली चलाने के लिए प्रेरित करने लगी।
अब मैंने अपना सर उठाया और भाभी के कान के पास जाकर बहुत ही धीरे से कहा- भाभी, आप अपना मुंह दूसरी तरफ कर लो तो मैं पीछे से तुम्हारे अंदर लंड डाल दूँ?
जूही भाभी ने धीरे से कहा- ठीक है, लेकिन ज़्यादा ज़ोर से नहीं, रिया कहीं जाग ना जाये।
भाभी ने अपना सर दूसरी तरफ कर दिया और अपने चूतड़ बिल्कुल मेरे लंड के सामने ले आई।
मैंने उसकी नाइटी को अब उसके चूतड़ों के ऊपर कर दिया और उसकी चूत का निशाना पीछे से लगा दिया।
मैंने धीरे से लंड को भाभी की फूली हुए चूत के मुंह पर रख कर एक हल्का धक्का मारा और वो तकरीबन आधे से ज़्यादा अंदर चला गया।
लोहे जैसी गरम सलाख वाला लंड जब अंदर गया तो भाभी थोड़ी से कसमसाई लेकिन फिर संयत हो गई और मेरे मोटे और लम्बे लंड का मज़ा लेने लगी।
मैं भी धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर कर रहा था ताकि बिना ज़रा सा शोर किये मैं भाभी को मज़े से चोद सकूँ।
लंड के अंदर बाहर होने के साथ ही मेरे हाथ उसके एकदम मुलायम नितम्बों को बार बार छू कर आनन्द ले रहे थे।
भाभी की चूत काफी टाइट थी और उसकी पकड़ भी काफी गज़ब की थी।
कोई दस मिन्ट की चुदाई में ही भाभी का शरीर एकदम अकड़ गया और फिर ढीला पड़ गया।
अब वो उठी बाथरूम जाने के लिए तो मैं भी उठ कर उसके पीछे हो लिया और दोनों ही हम बाथरूम में साथ ही पहुँचे।
भाभी बोली- सोमू, तुम बाहर जाओ न, मुझको थोड़ा करना है।
मैं बोला- जूही भाभी, अब मुझसे क्या शर्माना, कर लो जो आपको करना है!
भाभी थोड़ी हिचकी लेकिन अभी भी मेरे खड़े लौड़े को देख कर उनके सारे ऐतराज़ काफूर हो गए। 
भाभी पॉट पर बैठ कर पेशाब करने लगी और मैं ने भी अपना खड़ा लौड़ा पयज़ामे से निकाला और सामने ही बैठ कर अपनी धार को छोड़ दिया।
वैसे मैंने यह पहली बार देखा था कि औरतें कैसे पेशाब करती है तो यह रोमांचक दृश्य देख कर मेरा लौड़ा और भी सख्ती के आलम में आ गया और मेरे पेशाब की धार दूर तक जाकर भाभी के पेशाब में शामिल हो रही थी।
यह दृश्य भाभी को बड़ा ही रोमांचक लगा और वो आँखें फाड़ कर यह सब देख रही थी।
जब हम इस क्रिया से निवृत हुए तो भाभी उठ कर अपनी नाइटी नीचे करने लगी थी लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और एक कामातुर चुम्मी लबों पर दे दी।
फिर मैंने भाभी को बाथरूम की दीवार पकड़ कर खड़ा कर दिया और उनकी गांड को ऊँचा करके और स्वयं थोड़ा झुक कर अपने लंड को उसकी उभरी चूत में पीछे से डाल दिया।
भाभी मुड़ मुड़ कर देख रही थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और जब मेरा लोहखंड उसकी चूत पर टिका कर मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा तो भाभी को तसल्ली हुई कि मैं उनकी गांड नहीं बल्कि चूत मार रहा हूँ।
भाभी के मुम्मों को अपने हाथों में लेकर धकों की स्पीड धीमे धीमे बढ़ानी शुरू की तो भाभी को अति आनन्द आने लगा क्यूंकि अब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके पूरी तरह से जवाब देने लगी।
जैसा कि मुझको उम्मीद थी, भाभी सेक्स की इतनी प्यासी थी कि वो 10 मिन्ट भी धक्कों को नहीं बर्दाश्त कर सकी और जल्दी ही तेज़ी से कांपती हुई फिर झड़ गई।
अब उन्होंने अपने आप को सीधा किया और मेरे मुंह से मुंह जोड़ कर मुझ से बेतहाशा लिपट गई और मुझ को बारम्बार चूम्मियाँ देने लगी।
कुछ समय बाद हमको समय का बोध हुआ और हम जल्दी से बाहर निकले।
पहले भाभी निकली और उसके कुछ समय बाद मैं निकला।
भाभी जाकर अपनी साइड में लेट गई और उसकी एक तरफ मैं लेट गया।
और तभी रिया उठ कर बैठ गई और आँखें मलते हुए बोली- कहाँ गए थे आप दोनों?
चौंक कर बोली- कहीं नहीं रिया, बस बाथरूम गई थी मैं!
रिया बोली- सोमू को साथ लेकर जाना पड़ा, क्या डर लग रहा था भाभी?
मैं और भाभी एकदम सकते में आ गए।
अब रिया बोली- मैं सब जानती हूँ आप दोनों क्या कर रहे थे? मेरा हिस्सा कहाँ है?
रिया और जूही भाभी की चूत चुदाई


मैं और भाभी एकदम सकते में आ गए।
अब रिया बोली- मैं सब जानती हूँ आप दोनों क्या कर रहे थे? मेरा हिस्सा कहाँ है?
भाभी बोली- कौन से हिस्से की बात कर रही हो रिया रानी?
रिया अपनी आँखें मटकाती हुई बोली- वही आप दोनों ने अभी अभी जिसका आनन्द लिया है?
भाभी पूरी घाघ थी सो बोली- हमने किसका आनन्द लिया है बहना?
रिया मुस्कराते हुए बोली- लंड और चूत के खेल का और किस का?
भाभी बोली- अरे नहीं न रे, वो खेल कौन खेल सकता है मेरे साथ?
रिया थोड़ी गुस्से में बोली- भाभीम तुम टालो नहीं… अभी अभी सोमू के साथ तुमुने चूत चुदाई का खेल खेला है। मैं सब सुन रही थी और देख भी रही थी! इतनी चुदाई तो भैया भी नहीं करते हैं तुम्हारी, जितनी सोमू ने आज तुम्हारी कर दी एक घंटे में!
अब भाभी का रंग एकदम पीला पड़ गया और वो मेरी तरफ देखने लगी और चुपचाप मेरे से उसकी मदद करने की अपील आँखों ही आँखों में करने लगी।
मैं रिया से बोला- तुमको क्या चाहिए यह बताओ रिया? इधर उधर की बातें मत करो और ना ही भाभी को ब्लैकमेल करने की कोशिश करो, समझी? अब बोलो साफ़ साफ़ कि तुमको क्या चाहिए?
रिया बोली- सोमू, मुझको भी चूत चुदाई का खेल खेलना है तुम्हारे साथ अभी!
मैं बोला- ठीक है, लेकिन आज के बाद तुम भाभी को ब्लैकमेल नहीं करोगी?
रिया बोली- कभी नहीं करूँगी, गॉड प्रॉमिस।
मैं बोला- रिया, तुमने पहले कभी चूत चुदाई का खेल खेला है किसी के साथ?
रिया थोड़ी सकपकाई लेकिन फिर हिम्मत कर के बोली- हाँ सोमू, खेला है एक दो बार!
मैं बोला- अच्छा, तुम चूत चुदाई के सब तरीके जानती हो क्या?
रिया बोली- नहीं, सारे तरीके तो नहीं जानती, एक दो से ही खेल खेला है न, तो वही जानती हूँ।
मैं बोला- खेल खेलते हुए कभी तुम्हारा पानी छूटा है?
रिया बोली- कौन सा पानी छूटता है सोमू यार? मेरा तो कभी कुछ नहीं छूटा?
मैं बोला- मैं जानता था कि तुमको चुदाई का ज़्यादा कुछ मालूम नहीं है और जब भी तुमने किया है यह काम, वो किसी नौसिखिये लौंडे के साथ… क्यों ठीक है रिया?
रिया सर झुका कर बोली- हाँ, वो नौसिखिया ही था साला, उसको तो यह भी नहीं पता था कि कौन से छेद में डालना है।
मैं और भाभी बड़े ज़ोर से हंसने लगे और जल्दी ही मैं बोला- देखो रिया, तुम अभी पूरी तरह से पक्की कली नहीं बनी हो!
रिया बोली- वही तो बनने आई हूँ यहाँ और वो भी सोमू राजा से!
मैं घबरा कर बोला- मेरे से पकी कली बनने आई हो? क्या मतलब?
रिया हँसते हुए बोली- मुझको सब मालूम है तुम्हारे बारे में! तुमने अभी तक कई पक्की कलियाँ बनाई हैं।
अब हैरान होने की मेरी बारी थी- तुमको क्या मालूम है? बताओ तो सही?
रिया बोली- मैंने तुमको सुबह भांप लिया था कि तुम बड़े पहुंचे हुए हो, तभी मैंने अपना डेरा तुम्हारे कमरे में लगवाने का फैसला किया था।
अब मैं बड़े ज़ोर से हंसा और बोला- वाह रिया रानी, बड़ी अच्छी बनाई है तुमने यह कहानी। जिसमें न कोई दम है और न ही कोई खम है!
अब भाभी बोली- सोमू, तुम बुरा नहीं मनाना, यह तो ऐसे ही गप्पें हाँक रही है, इसको किछु नहीं मालूम।
अब मैं बोला- देखो रिया, प्यार से मैं सब कुछ कर सकता हूँ और धमकी से मैं कुछ भी नहीं करता! और वैसे भी हम दो हैं और तुम अकेली हो हमारे खिलाफ बोलने वाली, सो कौन विश्वास करेगा तुम पर जानी?
लगता था कि रिया के दिमाग में यह बात बैठ गई कि मैं धमकियों से नहीं डरने वाला तो अब वो काफी नरम पड़ गई और हाथ जोड़ कर मेरे सामने झुक कर माफ़ी मांगने लगी।
मैंने भाभी की तरफ देखा और उन्होंने आँखों के इशारे से कह दिया कि माफ़ कर दो इसको!
मैंने भी यह उचित समझा और रिया से कहा- अब बताओ तुम मेरे से क्या चाहती हो? सच्ची बताना!
रिया तब गिड़गड़ाते हुए बोली- भाभी के साथ जो खेल तुमने खेला था, वही मेरे साथ भी खेल दो सोमू।
मैं थोड़ा सोचने का नाटक करते हुए बोला- ठीक है, जाओ पहले कमरे का दरवाज़ा अच्छी तरह से बंद करके आ जाओ ताकि कोई अंदर ना आ सके।
जब रिया दरवाज़ा बंद कर के आ गई तो मैं बोला- चलो पहले तुम अपने कपड़े उतारो और फिर भाभी के! ठीक है?
रिया जल्दी से अपनी नाइटी उतारने लगी और जब वो बिल्कुल नंगी हो गई तो मैंने भाभी की तरफ इशारा किया और रिया तब उनके कपड़े भी उतारने लगी।
अब दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र थी और कमरे में लगे नाईट बल्ब की मद्धम रोशनी में भाभी बड़ी सेक्सी लग रही थी क्यूंकि उनके मुम्मे कम्मो की तरह मोटे, गोल और सॉलिड थे और उनके नितम्ब भी काफी रसीले थे, खूब मोटे, उभरे हुए और मुलायम दिख रहे थे और उनकी चूत पर छाई काले बालों की घटा बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
उधर रिया भी बहुत सेक्सी लग रही थी और वो उम्र में भाभी से चार पांच साल छोटी लग रही थी। उसके मुम्मे अच्छे बड़े थे लेकिन वो भाभी का मुकाबला नहीं कर सकते थे। और उसके चूतड़ों को भी अच्छा कहा जा सकता था लेकिन वो भाभी के चूतड़ों से काफी छोटे थे और उनको पूरी तरह से भरे हुए नहीं कहा जा सकता था।
मैंने भाभी की तरफ देखा तो उन्होंने भी आँखों में ही रिया को पहले चोदने के लिए प्रार्थना की।
अब मैंने रिया को अपनी बाहों में कर कर जकड़ लिया और उसके होटों पर एक गर्म और गीली चुम्मी जड़ दी और उसके चूतड़ों पर हाथ रख कर मैं अपना लौड़ा उसकी चूत के बाहर से रगड़ने लगा।
रिया को मेरा ऐसा करने से काफी आनन्द आने लगा था और वो अपनी चूत को और खोल खोल कर मेरे लंड पर रगड़ने लगी।
रिया अब काफ़ी गर्म हो चुकी थी और वो चाहती थी कि मैं उसको चोदना आरम्भ करूँ लेकिन मैं अभी उसको सजा देने के मूड में था, मैं उसको और गर्म करने में लगा हुआ था लेकिन रिया बार बार मेरे लंड को खींच रही थी, वो चाहती थी कि मैं फ़ौरन उस पर सांड की तरह चढ़ जाऊँ लेकिन मैं उसको अभी और तरसाना चाहता था।
अब मैं रिया की भग को घिसने लगा, पहले धीरे धीरे और फिर थोड़ी तेज़ी से !
और रिया अब अपनी टांगों को बंद और खोल रही थी और भग घिसाई बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।
अब मैंने उसको अपनी बाहों में उठा कर उसकी टांगों को अपनी चारों तरफ कस लिया और अपने लंड को एक धक्के में उसकी चूत में डाल दिया।
मोटी गर्म सलाख को चूत में महसूस करके रिया तड़फ रही थी लेकिन क्यूंकि उसकी चूत मेरी कमर में कैद थी सो वो हिल भी नहीं सकती थी और मैं गरम सलाख को लेकर सारा कमरा घूम रहा था।
रिया मेरे लंड के ऊपर नीचे होना चाहती थी लेकिन वो मेरे हाथों और कमर की कैद में थी तो वो कुछ नहीं कर सकती थी।
उधर भाभी अपनी एक ऊँगली से अपनी चूत में भग को मसल रही थी और दूसरी से मुझ को इशारे कर रही थी कि मैं रिया को जल्दी चोद कर भाभी के साथ लग जाऊँ।
अब मैंने रिया को पलंग पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा। रिया अपने सर को आनन्द में इधर उधर हिला रही थी और थोड़ी देर में ही मैंने महसूस किया कि वो छूटने वाली है क्यूंकि उसकी चूत में हलचल शुरू हो गई थी, वो जल्दी जल्दी सुकड़ना शुरू हो गई थी और फिर एक ज़ोरदार धक्के के बाद रिया के शरीर में ज़ोरदार कंपकपाहट शुरू हो गई और तब उसने मुझको अपनी टांगों के बीच में कैद कर लिया।
जब रिया पूरी तरह से स्खलित हो गई तो उसने मुझको अपनी कैद से आज़ाद कर दिया और खुद निढाल हो कर पड़ गई।
मैं रिया को छोड़ कर उठा और भाभी को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनके होटों पर गरमा गरम चुम्मी जड़ दी।
भाभी मेरी और रिया की चुदाई देख कर काफी गर्म हो चुकी थी वो अब ठीक तरह से चुदने के लिए तड़प रही थी।
मैंने भाभी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी पूरी गीली चूत में अपना गीला लंड घुसेड़ दिया। एक झटके से वो पूरा का पूरा अंदर डाल दिया और उनको बेतहाशा स्पीड से चोदने लगा।
मेरी स्पीड के आगे जूही भाभी ज़्यादा देर टिक नहीं सकी और वो भी शीघ्र ही स्खलित हो गई।
अब दोनों इलाहबादी अमरूदों को वहीं छोड़ कर मैं पलंग के एक कोने में सो गया और सुबह जब नींद खुली तो वो दोनों घोड़े बेच कर सोई थी और मुझको ही उठ कर दरवाज़ा खोलना पड़ा।
सामने कम्मो चाय की ट्रे लिए खड़ी थी और कमरे में एक नज़र डालते ही वो समझ गई कि रात को क्या हुआ होगा।
कम्मो कमरे के अंदर आ गई और मैं फ़ौरन बाथरूम में घुस कर अपना कुरता पयजामा पहन कर निकल आया और आते ही कम्मो को एक कस के जफ्फी मार ली।
कम्मो ने हँसते हुए कहा- कर दिया इन दोनों का कल्याण छोटे मालिक?
मैंने उसके चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए कहा- कम्मो रानी, तुम मेरा स्वभाव तो जानती हो, मैं किसी को भी इंकार नहीं कर सकता। अब इनको जगा दो और कपड़े पहना दो नहीं तो पकड़ी जाएँगी ये दोनों।
कम्मो ने हँसते हुए पहले भाभी को जगाया और फिर रिया को उठा दिया और दोनों कम्मो को देख कर खूब शर्मा गई और भाग कर दोनों बाथरूम में चली गई।
मैं गर्म गर्म चाय पीते हुए उन दोनों की परेशानी का लुत्फ़ उठा रहा था।
कम्मो बोली- छोटे मालिक, अब बाकी लड़कियों से नहीं मिले क्या?
मैं बोला- मिला तो था बैठक में दिन को खाने के समय! क्यों कोई ख़ास बात है?
कम्मो हँसते हुए बोली- जो आपके साथ रात में हुआ, वो तो ट्रेलर था, असली फिल्म तो बाकी है।
मैं हैरान होकर बोला- यह तुम कैसे कह सकती हो?
कम्मो बोली- मैंने यहाँ आकर बहुत बातें सुनी हैं इनके बारे में, इसी लिए कहती हूँ कि बच कर रहिये!
मैं बोला- वाह री कम्मो, तेरे कुर्बान जाऊँ, लेकिन ऐसा करो ना, तुम वो सारा चुदाई प्रोग्राम कॉटेज में रखा करो ताकि यहाँ किसी को पता नहीं चले। एक या फिर दो के ग्रुप में आने दो सबको, मैं देख लूँगा।
कम्मो मुस्करा रही थी।
वो दोनों बाथरूम से निकली और चुपचाप चाय पीने लगी।
जाते हुए कम्मो बोली- छोटे मालिक, आपको नाश्ते में वो स्पेशल डाइट बना दूंगी क्योंकि आपको शायद जल्दी ही उसकी ज़रूरत पड़े।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

हवेली के लॉन में तीन की चूत चुदाई


जाते हुए कम्मो बोली- छोटे मालिक आप को नाश्ते में वो स्पेशल डाइट बना दूंगी क्योंकि आपको शायद जल्दी ही उसकी ज़रूरत पड़े।
कम्मो की भविष्यवाणी एकदम सही निकली।
दोपहर के खाने में जो लड़की भी खाने के टेबल पर आ रही थी वो पहले मेरे पास आती थी और हल्के से मुस्करा के चली जाती थी।
खाना खाते हुए भी मेरी साथ वाली बहुत ही चुलबुली लड़की के पैर मेरे पैरों से लग रहे थे और टेबल के दूसरी तरफ वाली लड़की अपने पैरों से मेरी जांघों को छेड़ रही थी.
दोनों साइड में बैठी हुई लड़कियाँ भी बार बार अपनी कोहनियाँ मेरे बाज़ुओं से टकरा रही थी और हर बार ऐसा करने पर वो रहस्यमयी हंसी हंस रही थी।
खाने के बाद जब में हाथ धोने के लिए बाथरूम में घुसा तो मेरे पीछे 3 लड़कियाँ भी मेरे साथ अंदर आ गई और मेर दोनों तरफ खड़ी हो गई और एक मेरे पीछे खड़ी हो गई और पीछे वाली तो अपने शरीर को मेरे साथ जोड़ कर खड़ी थी और उसके गोल मुम्मे और उसकी चूत वाला हिस्सा उसकी सलवार के अंदर से मुझको पीछे से छू रहा था।
दोनों साथ खड़ी लड़कियाँ तो ऐसे जुड़ कर खड़ी थी जैसे कि वो मुझको धक्का दे कर हटाना चाहती हों वाश बेसिन से लेकिन दोनों के भी मुम्मे मुझको मेरे बाज़ुओं पर लग रहे थे और उनकी कोहनी मेरी साइड में लग रही थी।
ऐसा लग रहा था कि मैं स्वर्ग की अप्सराओं से चारो तरफ से घिरा हूँ।
यह बहुत शुक्र हुआ कि मम्मी जी वहाँ मौजूद नहीं थी वर्ना यह बेशर्मी वाला माहौल नहीं बनने देती। 
मैं रसोई में गया और कम्मो को बुलाया अपने कमरे में… उससे पूछा- यह सब क्या चल रहा है?
कम्मो हँसते हुए बोली- आपकी दिली इच्छा थी इतनी और जवान और सुन्दर लड़कियों में घिरा रहने की… वो आज पूरी हो रही है।
मैं घबराते हुए बोला- लेकिन कम्मो, कुछ तो हद होती है इन सब बातों की! तुम अभी पता लगाओ कि इन लड़कियों को बेशर्म बनने के लिए कौन उकसा रहा है और वो ऐसा व्यवाहर क्यों कर रही हैं?
कम्मो बोली- मैं जानती हूँ छोटे मालिक, इन सब के पीछे किसका हाथ है।
मैं बोला- जल्दी बताओ, किसका हाथ है?
कम्मो बोली- शायद तुमको याद हो, चंदा नाम की एक औरत तुमसे एक दो बार मिली थी कॉटेज में, तुम्हारे कॉलेज जाने से पहले?
मैं सोच कर बोला- हाँ, याद आ रहा है, वो भी बार बार गर्भवती होने की इच्छा ज़ाहिर कर रही थी लेकिन मैं नहीं मान रहा था क्यूंकि उसका पति उसके साथ रहता था तो उसको गर्भाधान की कोई ज़रूरत नहीं थी।
कम्मो बोली- बस उसी चंदा ने यह बात फैलाई है कि छोटे मालिक बड़े चोदू हैं। हमारे आने से पहले वो कुछ दिन हवेली में काम करती रही थी और इन सब लड़कियों से मिल चुकी है।
मैं हैरान रह गया और बोला- उफ़ कम्मो, अब क्या होगा? तभी ये लड़कियाँ एकदम निर्लज्ज व्यवहार कर रही हैं? लेकिन हम क्या कर सकते हैं इस मुसीबत से बचने के लिए?
कम्मो बोली- बस दो तीन दिन की बात है, जैसे ही दशहरा खत्म हुआ, ये सब चली जाएँगी अपने अपने गाँव या शहर में… लेकिन तब तक सोचना है कि इनसे कैसे छुटकारा पाया जाए!
मैं बहुत ही परेशान होते हुए बोला- कम्मो रानी, दिमाग लड़ाओ। यह तो तय है कि यहाँ इन सबकी चुदाई नहीं हो सकती और कोई जगह नहीं है जहाँ यह किया जा सकता है मम्मी और पापा के जाने बगैर!
तभी कम्मो हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, आप भी न कभी कभी भूल जाते हो! अपने गाँव वाली कॉटेज है न, यह सारा प्रोग्राम वहीं रख लिया करेंगे। क्यों छोटे मालिक?
मैं एकदम खुश होते हुए बोला- वाह कम्मो, छोटी मालकिन, तुम्हारा जवाब नहीं। हाँ, यही ठीक रहेगा। अब यह तुम्हारा काम है कि कैसे इनको कंट्रोल करो?
कम्मो बोली- मैं आज इन 6 लड़कियों से मिलती हूँ आपके कमरे में और साथ में 2 भाभियों को भी ले लेती हूँ अपने साथ, फिर हम इनको तगड़ी डांट पिलाती हैं।
एक घंटे के बाद कम्मो मुझको हवेली के बाहर लॉन में मिली और बताया कि कैसे इस समस्या को हल किया जाएगा।
कम्मो की प्लान के मुताबिक़ हर रोज़ रात को एक भाभी मेरे कमरे में सोयेगी और साथ में एक लड़की भी सोयेगी जैसे कि मम्मी जी ने फैसला किया है। भाभी बारी बारी से सोयेंगी और हर रात को एक नई लड़की रात में मेरे साथ सोयेगी। इस तरह 3 रात में तीन लड़कियाँ चुद जाएँगी और बाकी हर रोज़ एक लड़की को कॉटेज में चोदा करूँगा। इस तरह 3 दिन में 6 लड़कियों के साथ काम क्रीड़ा हो जाया करेगी।
कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप घबराएं नहीं, सब की सब अब तक कई बार अपने गाँव में चुद चुकी हैं तो इनके लिए यह कोई नई बात नहीं है। तभी यह इतनी निर्लज्ज हो रही हैं। इन सबने अपने यहाँ काम करने वाले नौकरों या फिर ड्राइवर या मालियों के साथ शारीरिक संबंध बनाये हुए हैं और चुदाई के काम में पूरी तरह से माहिर हैं।
मैं हैरान होकर बोला- अच्छा, मुझको मालूम नहीं था कि गाँव के बड़े लोगों की लड़कियाँ इतनी गिर चुकी हैं। खैर छोड़ो, वो नई बावर्चिन से तो मिलवाओ ना… देखें तो सही कैसी है वो?
कम्मो गई और थोड़ी देर में नई बावर्चिन को ले आई, काफी सुन्दर शरीर की मालिक थी, चाहे रंग सांवला था लेकिन शरीर बहुत ही आकर्षक था, खूब मोटे और गोल, सॉलिड मुम्मों के साथ खूब उभरे हुए नितम्ब उसके बड़े आकर्षक लग रहे थे और कम्मो ने बताया कि उसका नाम था परबतिया लेकिन सब प्यार से पर्बती बुलाते थे।
फुर्सत में इसके बारे में भी सोचेंगे, ऐसा मैंने फैसला किया।
रात को खाने के बाद मम्मी और पापा को गुडनाईट कह कर मैं अपने कमरे में आ गया लेकिन वहाँ रिया आई हुई थी, वो कहने लगी- हम सब लड़कियाँ और लड़के लॉन में कुछ खेलने का फैसला किया है, चलिए आप भी चलिए ना प्लीज।
मैंने कहा- ठीक है, चलो!
वो चलते चलते मेरे से टकराने से पीछे नहीं हट रही थी, उसके चूतड़ों पर हाथ फेरना और यदा कदा उसके मुम्मों को भी हाथ लगाना मैंने जारी रखा।
एक जगह थोड़ी अँधेरी थी, मैंने रिया को बाहों में भर लिया और उसके गीले लबों पर एक ज़ोरदार चुम्मी कर दी और उसकी साड़ी के बाहर से उसकी चूत और चूतड़ों पर हाथ फेरने से बाज़ नहीं आया।
लॉन में आये तो सब लड़कियाँ वहाँ एकत्रित हो गई थी और दो मरियल से लड़के भी थे उनके साथ। उन सबसे मैं ही लम्बा लड़का था सो वो सब मेरे साथ ही खेलना चाहती थी।
रिया और पार्टी ने फैसला किया कि हम सब जा कर छुप जायेंगे और सुधा हम सब को ढूंढने लगेगी।
सुधा की तरफ देखा तो वो काफी सुंदर और सुघड़ शरीर वाली लड़की थी, उसने लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी। हम सब छुप गए और जिस जगह मैं छुपा था वो कोई और नहीं जानता था, सिर्फ मैं ही जानता था कि क्यूंकि मैं बचपन में ही यहाँ खेलता रहा था।तो मैं हर छुपने वाली जगह को अच्छी तरह से जानता था। 
थोड़ी देर बाद मैंने देखा एक और लड़की छुपने की जगह ढूंढते हुए वहाँ ही आ रही थी और जैसे ही वो मेरे स्थान के पास पहुँची, मैंने हाथ बढ़ा कर उसको अपनी जगह में खींच लिया।
पहले तो वो हैरान हुई लेकिन जब उसने मुझको देखा तो तो खुश हो गई और मैंने उसको अपने से चिपटा लिया और उसको चुप रहने का इशारा किया।
जब सुधा वहाँ से चली गई तो मैंने उसको अच्छी तरह से देखा, वो भी अच्छी लगी, मैंने उसको अपने गले से लगा लिया और फिर अपने होटों को उसके लबों पर रख दिया।
मेरे अनुभवी हाथ उसके मोटे मुम्मों को दबा रहे थे और एक हाथ उसके चूतड़ों पर चल रहा था।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
वो भी अब पूरी तरह सहयोग देने लगी और अब मैंने अपने पज़ामे को नीचे खिसका दिया और अपना खड़ा लौड़ा उसके हाथ में दे दिया और लौड़े को छूते ही उसके शरीर में हल्का सा करंट दौड़ गया।
मैंने भी उसकी साड़ी पीछे से ऊपर कर दी और अपने खड़े लंड को उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा।
जब वो अंदर नहीं जा पा रहा था तो मैंने उसको थोड़ा झुकने के लिए कहा और जैसे ही वो झुकी तो मैंने लंड का फिर निशाना लगाया और खटाक से मेरा लंड उसकी गीली चूत में चला गया, मैं उसके चूतड़ों को दोनों हाथ में लेकर हल्के हल्के धक्के मारने लगा।
थोड़ी देर में ही वो लड़की भी गर्म हो गई और धक्के का जवाब अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके देने लगी और जल्दी ही मैंने उसको बड़ी तेज़ स्पीड से चोदना शुरू कर दिया।
वो लड़की चंद मिनटों में ही झड़ गई, मैंने उसको पलट कर अपनी बाहों में ले लिया और उसके मुंह पर ताबड़ तोड़ चुम्बन देने लगा और वो भी जवाब में मुझको चूमने लगी।
मैंने उसके कान में कहा- मज़ा आया क्या तुमको?
उसने भी वैसे ही जवाब दिया- थैंक यू सोमू, मेरा नाम लीलू है और आज रात को आपके साथ सोने की बारी मेरी है।
मैं बोला- ठीक है जानू, जाओ और किसी और को भेज दो यहाँ छुपने के लिए!
लीलू हँसते हुए मेरे लौड़े को झुक कर चूम कर चली गई।
थोड़ी देर में एक और लड़की को उधर आते हुए देखा, जैसे ही वो मेरे पास से गुज़री, मैंने उसको खींच लिया अपनी छुपने वाली जगह में!
वो लड़की भी शायद यह जानती थी, वो मेरे पास आते ही मुझ से लिपट गई और मुझको लबों पर चूमने लगी। मैंने भी उसको चूमना शुरू कर दिया और इस तरह मैंने उसको दीवार के सहारे खड़ा करके उसकी टांग को ऊपर कर उसकी चूत में ऊँगली डाली जो अभी तक सूखी थी।
मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर दिया तो जल्दी ही वो गीली होने लगी और अब मैंने उसको अपने हाथों पर उठा लिया और उसकी साड़ी को उसकी कमर में डाल कर उसकी चुदाई शुरू कर दी।
मुझको ऐसा लगा कि वो भी पूरी तरह से तैयार हो कर आई थी और वो अब खुद ही आगे बढ़ बढ़ कर चुदवा रही थी और उसको भी झड़ने में ज़्यादा टाइम नहीं लगा।
उसका नाम नीलू था।
लेकिन वो मेरी इस थोड़ी देर की चुदाई से पूरी तरह से खुश नहीं थी तो मैंने उसको नीचे घास पर लिटा दिया और उसकी साड़ी को पुनः ऊपर कर के पूरी मस्ती से चोदने लगा।
अब नीलू ने भी नीचे से पूरी तरह से सहयोग देना शुरू कर दिया और हम दोनों चुदाई में इतने मस्त हो गए कि हमको पता ही नहीं चला कब सुधा वहाँ आ कर चुपचाप हमारी चुदाई को देख रही थी।
जब मैंने आखिरी धक्का ज़ोर से मारा और नीलू मुझ से चिपट कर छूटने लगी तो सुधा ने हल्के से ताली मारी और ‘वाह वाह’ करने लगी तो हमको पता चला कि कोई हमारे करतब देख रहा है।
मैं तो नहीं शरमाया लेकिन नीलू एकदम शर्म से लाल पड़ गई।
मैं जैसे ही नीलू के ऊपर से उठा और अपने एकदम गीले लंड को निकाल कर खड़ा हुआ तो सुधा उसकी तरफ ही टकटकी बाँध कर देखती रह गई।
मैंने एकदम आगे बढ़ा कर सुधा को अपनी बाँहों में गिरफ्तार कर लिया और उसको बेतहाशा चूमने लगा और मैंने उसको कुछ भी बोलने का मौका ही नहीं दिया।
सुधा भी सुंदर लड़कियों में से एक थी और काफी सेक्सी लग रही थी। उसकी लाल साड़ी अपना अलग ही समाँ बाँध रही थी।
मैंने उसको कस के जफ्फी मारी और उसके कान में कहा- अभी या फिर रात में? जैसा तुम कहो?
वो बोली- रात में मेरी बारी नहीं है, अभी कर दो ना!
मैं बोला- बारी नहीं है तो क्या हुआ, मैं तुमको आज रात को एडजस्ट कर लूँगा।
वो मान गई और हम तीनों एक साथ मेरी छुपने वाली जगह से निकल कर सबके बीच में आये ही थे कि उधर से कम्मो आ गई और कहने लगी- छोटे मालिक, आपको मम्मी जी बुला रहीं हैं, जल्दी चलिए।
मैंने सबसे विदा ली और कम्मो के साथ हो लिया और जैसे ही हम थोड़ी दूर पहुँचे तो कम्मो ने कहा- छोटे मालिक, तुमको कोई नहीं बुला रहा वो तो मैंने बहाना बनाया था तो तुमको इन लड़कियों से बचाने के लिए! वैसे कितनी चोदी अभी तक?
मैं बड़ी ज़ोर से हंस दिया कम्मो की इस हरकत से और उसके चूतड़ों को टीपते हुए बोला- वाह छोटी मालकिन, तुमने मुझको बचा लिया। अभी तक सिर्फ तीन ही हुई थी।
कम्मो हँसते हुए बोली- आधे घंटे में सिर्फ तीन? मुझको लगा कि कम से कम 5 तो हो गई होंगी! चलो सस्ते में छूटे हो छोटे मालिक।
मैं धीमे से बोला- सस्ते में कहाँ? अभी तो रात बाकी है और वो दो तो तैयार खड़ी हैं चुदवाने के लिए!


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तनु भाभी, सुधा और प्रेमा की चूत चुदाई


मैं धीमे से बोला- सस्ते में कहाँ? अभी तो रात बाकी है और वो दो तो तैयार खड़ी हैं चुदवाने के लिए!
यह कह कर मैं अंदर जाने लगा तो मुझको ख्याल आया कि रात की चुदाई में कम्मो का होना बहुत ज़रूरी है तो मैंने उसको कहा कि रात में वो भी आ जाए तो अच्छा है मेरे लिए, नहीं तो यह शार्क मछलियाँ तो मुझको कच्चा खा जाएँगी।
अभी मैं अपने कमरे में पहुँचा ही था कि एक सुंदर सी भाभी और दो लड़कियाँ भी साथ आ गई। 
भाभी ने अपना नाम तन्वी बताया और कहा- प्यार से मुझको तनु के नाम से जानते हैं।
सब और पहली लड़की तो सुधा थी और दूसरी का नाम था प्रेमा।
तीनों ही दिखने में सुंदर लग रही थी और सबने साड़ी ब्लाउज पहन रखा था।
तनु भाभी की उम्र होगी कोई 22-23 की लेकिन मुझको समझ नहीं आया कि वो तो शादीशुदा लग रही थी तो उसको चुदाने की क्यों धुन सवार थी?
यह बात मैंने कम्मो को कह दी, उसने भाभी से पूछा तो भाभी बोली कि उनके पति बचपन से अफीम बहुत खाते थे तो अब उनकी यौन शक्ति बहुत ही कम हो चुकी थी और वो हफ़्तों भाभी की तरफ नज़र भी नहीं डालते थे।
मैं हैरान हो गया यह कैसी विडंबना कि इतनी सुंदर स्त्री लेकिन यौन तृप्ति से कोसों दूर!
कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप भाभी का खास ख्याल रखो क्यूंकि वो बहुत ही प्यासी है तो इन लड़कियों से पहले नंबर भाभी का लगेगा। क्यों ठीक है ना?
दोनो लड़कियाँ मान तो गई लेकिन बड़ी ही बेदिली से, उनको शायद शक था कि मैं भी उन तक पहुँचते हुए शक्तिहीन हो जाऊँगा और उनके किसी काम नहीं आ पाऊँगा।
उनका ऐसा सोचना तर्कसंगत ही था लेकिन वो शायद मेरी शक्ति से अभी तक परिचत नहीं थी।
कम्मो ने कहा कि कोई भी अपने सारे कपड़े नहीं उतारेगा क्यूंकि मम्मी जी थोड़ी दूर वाले कमरे में ही सोई थी, वो किसी समय भी आ सकती थी।
कम्मो ने उनसे कहा कि अगर उनके पास नाइटी हो तो वो पहन कर आ आएँ तो अच्छा रहेगा।
तीनों नाइटी पहनने के लिए चली गई और मैं कम्मो रानी को चूमने और छेड़ने में लग गया, कभी उसके मुम्मों को ब्लाउज के ऊपर से चूस रहा था और कभी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरता रहा और इस तरह मैंने कम्मो को भी गर्म कर दिया लेकिन कम्मो के साथ सम्भोग करने का मौका नहीं मिलने वाला था, ऐसा मैं जानता था।
थोड़ी देर में तीनों अपनी नाइटी पहन कर आ गई तो कम्मो ने दरवाज़ा बंद कर लिया और कुण्डी लगा दी।
अब तीनों ने अपनी नाइटी उतार दी और वो एकदम पूर्णतया नंगी हो गई।
अभी तक मैंने तीनों को ध्यान से नहीं देखा था, अब मैंने अच्छी तरह देखा।
तनु भाभी तो वाकयी में अच्छे जिस्म वाली और काफी सेक्सी लग रही थी, उसके गोल गोल मोटे मुम्मों और उसकी चूत पर छाये काले घने बाल चमक रहे थे और उसके गोल उभरे हुए नितम्ब अति लुभावने लग रहे थे।
सुधा और प्रेमा भी काफी सेक्सी यंग लड़कियाँ थी लेकिन उनका तनु भाभी और कम्मो के जिस्म से कोई मुकाबला नहीं था।
सुधा के उरोज छोटे और सॉलिड थे और उसके नितम्ब भी अभी अपरिपक्व लग रहे थे।
लेकिन प्रेमा काफी खूबसूरत थी, उसके उरोज भी काफी बड़े और सख्त लग रहे थे, उसके नितम्ब भी गोल और उभरे हुए थे और उसकी चूत पर छाई हुई बालों की घटा भी काफी मुलायम और घनी थी।
हर औरत या फिर लड़की की चूत पर छाए बाल ही उसका सबसे बड़ा गहना होते है क्यूंकि उन बालों के पीछे छुपे हुए ख़ज़ाने को देखने की उत्कंठा मन में तीव्र हो जाती है जबकि उनके मुम्मे और चूतड़ों को तो सब कोई देख सकते हैं चाहे वो कपड़ों में ही क्यों न लिपटे हों!
सबसे पहले तनु भाभी को मैंने चुना, उसको एक ज़ोरदार जफ्फी मारी, उसके गर्म लबों पर एक गरम सी किस जड़ दी और उसके गोल, मोटे मुम्मों को चूसने लगा और उनकी चूचुकों को मुंह में रख कर गोल गोल घुमा रहा था।
तभी कम्मो ने मेरे पजामा उतार दिया और मेरे खड़े लंड को सब के सामने उजागर कर दिया। फिर उसने मेरे कुर्ते को भी उतार दिया और मुझको बिल्कुल नंगा कर दिया और मेरे लंड के साथ खेलने लगी और यह देख कर तीनों भी दौड़ कर आई और मेरे लंड और शरीर के साथ खेलने लगी।
मैंने भाभी के मोटे नितम्बों को अपने हाथ से मसलने लगा और उसके सुंदर गोल चेहरे को चूमने लगा।
दोनों लड़कियाँ अब एक दूसरे के साथ लग गई थी जैसे कि कम्मो ने उनको बताया था और वो एक दूसरे की चूतों और मुम्मों के साथ खेल रही थी।
इधर मैंने भाभी की चूत में हाथ लगाया और उसकी चूत से टपकते रस को महसूस किया और वो रस अब उसके गोल गुदाज़ जांघों पर भी बह रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसको यौन क्रिया की कितनी तीव्र इच्छा थी।
अब मैंने तनु भाभी को चूमता हुआ उसको लेकर बेड पर ले आया, उसकी टांगों को पूरा खोल कर बीच में लेट गया और अपना खड़ा लौड़ा उसकी उबलती हुई चूत के ऊपर रख दिया, एक ज़ोरदार धक्के से तनु भाभी की चूत में लंड पूरा का पूरा का अंदर घुसेड़ दिया। 
चूत में जैसे ही जलती हुई सलाख जैसा लंड घुसा तो भाभी के मुंह से एक गर्म आह निकल गई और उसने मुझको कस कर अपने मुम्मों से लिपटा लिया।
मैं भाभी को बड़े प्यार से धीरे धीरे चोदने लगा ताकि भाभी की सोई हुए यौन शक्ति को जागृत किया जा सके और उसको सेक्स का पूरा आनन्द दिया जा सके।
अब जब भाभी को तसल्ली हो गई कि मेरा जल्दी छूटने वाला नहीं है तो वो काफी रिलैक्स हो कर चुदाई का मज़ा लेने लगी और वो अब हल्के हल्के से नीचे से मेरे धक्कों का जवाब भी देने लगी।
मैं चोदते हुए उसके मुम्मों को बार बार चूसना नहीं भूला था क्यूंकि मेरा सारा ध्यान भाभी को अपार आनन्द देने में लगा था और मेरी यह कोशिश थी कि भाभी को हर प्रकार से यौन आनन्द दिया जाए।
जब भाभी की चूत बहुत ज़्यादा गीली हो गई तो मैं अपने धक्कों की स्पीड तेज़ करने लगा और इस तेज़ स्पीड के कारण जल्दी ही तनु भाभी हाय हाय करती हुई झड़ गई।
अब मैंने तनु भाभी को घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया और उसको शुरू से ही स्पीड से धक्के मारने लगा ताकि वो फिर जल्दी ही स्खलित हो जाए।
साथ ही मैंने उसके भग को भी मसलने लगा और वो बहुत ही कामातुर होकर धक्कों का जवाब देने लगी और उसकी साँसें भी एकदम तेज़ चल रही थी।
वो फिर एक बार स्खलित हो गई और उसके शरीर में एक ज़ोरदार कंपकपी होने लगी और वो ‘आह ऊओह्ह…’ करती हुए नीचे लेट गई।
मैंने भाभी को छोड़ कर दूसरी लड़की सुधा को पकड़ लिया और उसके शरीर पर हाथ फेरने लगा, उसको एक ज़ोरदार जफ्फी डाली, पहले और फिर उसके लबों पर गर्म चुम्मी जड़ दी और उसके गोल मोटे मुम्मों को चूसना तो ज़रूरी था।
एक चुदाई के देखने के बाद कोई भी ठंडी से ठंडी औरत भी चुदाने के लिए तैयार हो जाती है, उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो बहुत ही पनिया रही थी, उसकी चूत एकदम तैयार थी चुदाई के लिए…
अब मैं झुक कर सुधा की चूत में अपना मुंह डाल कर उसकी चूत को चूसने लगा और जल्दी ही उसकी भग को भी चूसना शुरू कर दिया।
भग का चूसना था कि थोड़ी देर में ही सुधा के पानी के बाँध को एकदम से टूटने पर मजबूर कर दिया और उसका नमकीन पानी निकल कर मेरे मुंह में आ गिरा।
अब मैं उठा, सुधा को अपने हाथों में उठा लिया और उसकी चूत को लौड़े की सीध में रख कर एक ज़ोर का धक्का मारा और लंड पूरा चूत में समा गया।
मैं खड़े खड़े ही सुधा को अपने हाथों में लेकर चोदने लगा।
सुधा के दोनों हाथ मेरे गले में थे, वो मेरे हाथों के सहारे अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी और लौड़े को अंदर बाहर कर रही थी।
मैंने अब अपना मुंह उसके मुम्मों पर रख कर उसको चूसने लगा और उसके चूचुकों को मुंह में रख कर गोल गोल घुमाने लगा और थोड़ी देर में ही सुधा झड़ने के करीब आ गई, मैंने उसको अब हाथों में ही पकड़ कर धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और उसके शरीर को उछाल उछाल कर धक्के मारने लगा।
कुछ ही क्षणों में वो झड़ गई, झड़ने के बाद वो मुझ से गले में बाहें डाल कर ही चिपक गई और उसकी चूत मेरे लौड़े से भी जुड़ गई और उसके होंट मेरे होंटों से सट गए।
कमरे के एक दो चक्कर हमने ऐसे ही लगाए और फिर मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और देखा कि उसकी चूत में से बहुत सा रस टपक रहा था।
अब दूसरे लड़की जिसका नाम प्रेमा था, मेरी तरफ बढ़ रही थी लेकिन कम्मो ने उसको रोक दिया और कहा कि छोटे मालिक को थोड़ा आराम कर लेने दो और सब यह कोका कोला पियो।
कोका कोला पीते हुए तीनों ने काफी हैरत जताई क्यूंकि उनके गाँव में अभी यह ड्रिंक नहीं मिलती थी।
साल 1954 तक यह कोक अभी तक सारे भारत में नहीं फैल पाया था ख़ास तौर पर गाँव खेड़े में, इसलिए यह उनके लिए एक अजीब ड्रिंक थी लेकिन जो इसको पी लेता था वो जल्दी ही इसका आदी हो जाता था।
अब प्रेमा की बारी थी, वो मेरे आगे पीछे चक्कर लगा रही थी और मेरे खड़े लौड़े को छेड़ कर उसके कड़ेपन पर हैरान हो रही थी। वो बैठ गई और झट से मेरे लौड़े को अपने मुंह में डाल लिया और उसको बड़े प्यार से और अदा से चूसने लगी।
मैंने कम्मो को कहा- भाभी को फिर से तैयार करो, उसको रात में एक बार और चोद दूंगा क्योंकि वो सबसे ज़्यादा भूखी है।
प्रेमा के सुंदर सुडोल उरोजों को देख कर मन बड़ा ही प्रसन्न हो रहा था क्यूंकि अक्सर छोटी उम्र की लड़कियों के उरोज अपरिपक्व होते हैं लेकिन कुछ लड़कियाँ इस मामले में भाग्यशाली होती हैं और कुदरती तौर से सुन्दर और सख्त उरोजों की मालिक बन जाती हैं।
प्रेमा को लबों पर चूमने के बाद मैं उसको पलंग की तरफ ले गया घोड़ी बना कर चोदने के लिए…
तब कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप पहले भाभी को घोड़ी बना कर चोद चुके हैं तो आप प्रेमा को अब अपने ऊपर लेकर चोदो या प्रेमा को आपको चोदने दो। क्यों प्रेमा?
प्रेमा ख़ुशी से बोली- हाँ हाँ क्यों नहीं? सोमू तुम लेट जाओ और मैं ऊपर से तुमको चोदती हूँ।
मैं बेड पर लेट गया अपने लहलहाते हुए लंड को लेकर और प्रेमा मेरे ऊपर बैठ कर अपनी गीली गोत चूत में लंड को डालने की कोशिश करने लगी लेकिन वो इतना मोटा था कि वो उसकी चूत के छोटे मुंह में नहीं जा रहा था।
मैंने उसकी कमर को अपने हाथ में पकड़ा और उसको धीरे से अपने लंड के ऊपर बिठा दिया।
प्रेमा ने जल्दी पूरे लंड को अपनी बहुत ही टाइट चूत में डाल दिया और फिर अपनी कमर को एक दो बार ऊपर नीचे किया और जब उसको मज़ा आने लगा तो वो थोड़ा झुकी और मेरे लबों को अपने होटों में लेकर चबाने लगी।
मैं उसके मुंह में अपनी जीभ डाल कर उसका रस पीने लगा।
अब प्रेमा कामांध हुई मेरे ऊपर एक तरह से नाचने लगी।
वो इतनी तेज़ी से मेरे ऊपर नीचे हो रही थी कि कुछ ही क्षणों में ही वो जल्दी से स्खलित हो गई और मेरे ऊपर लेट कर काम्पने लगी और मुझको उसकी चूत के खुलने और बंद होने को अच्छी तरह से महसूस किया।
प्रेमा की चुदाई का दृश्य भाभी और सुधा बड़ी हैरानी से देख रही थी।
जब यह चुदाई का सीन खत्म हुआ तो कम्मो ने सुधा को, जो लाइन तोड़ कर आई थी, वापस ले गई और हम तीनों को रात सोने के लिए छोड़ गई कमरे में!
मैंने कमरे का दरवाज़ा लॉक किया और बेड पर लेट गया क्योंकि मैं बहुत ही थक गया था।
मेरी एक तरफ भाभी लेटी थी और दूसरी तरफ प्रेमा। 
मेरे सोने से पहले जब प्रेमा सो गई तो मैंने भाभी की चूत में ऊँगली डाली तो वो काफी गीली हो रही थी।
तो मैंने भाभी के मुम्मों को चूसा और उंगली से उसकी भग को रगड़ा तो उसने मेरे लौड़े को खींच कर ऊपर आने के लिए ज़ोर डाला।
मैं भी ना नहीं कर सका और ज़्यादा देर न लगाते हुए उसके ऊपर चढ़ कर लौड़े को उसकी चूत में डाल दिया और फिर हौले हौले भाभी को चोदने लगा।
लंड का पूरा अंदर जाना और फिर पूरा बाहर आना और फिर इसी क्रम को दोबारा दोहराना यही मेरा चुदाई का स्टाइल बन चुका था और इस स्टाइल से मैंने कई चूतों के किले फ़तेह किये थे और अपने लंड के परचम लहराए थे।
भाभी की बेचारी चूत इन हमलों के सामने कहाँ ठहर सकती थी, जल्दी ही भाभी की चूत ने भी हथियार डाल दिए और एक बार फिर उसका शरीर अकड़ा और फिर ढीला पड़ गया लेकिन मुझको अपने शरीर से पूरी तरह कस कर बाँध लिया।
यही उनका धन्यवाद देने का स्टाइल था।
मैं भी करवट लेकर प्रेमा के मोटे और मुलायम चूतड़ों को टटोलने लगा कि कहीं यह भी चुदाई के लिए तैयार हो रही हो तो इसका भी काँटा एक बार और खींच डालूँ… लेकिन नहीं, वो तो जवानी की नींद में मस्त सोई थी।
रात को मैं बड़ी गहरी नींद में सोया था लेकिन मुझको यह अहसास हो रहा था कि रात को मुझ पर भाभी और प्रेमा ने कई बार चढ़ कर अपनी खूब चुदाई की।

नदी में नहाती गाँव की औरतें


रात को मैं बड़ी गहरी नीद में सोया था लेकिन मुझको यह अहसास हो रहा था कि रात को मुझ पर भाभी और प्रेमा ने कई बार चढ़ कर अपनी खूब चुदाई की।
अगले दिन कम्मो को मैंने सुझाव दिया कि सब लड़कियों का नदी में नहाने के लिए जाने का प्रोग्राम बना लो ताकि कुछ को नदी की अपनी स्पेशल जगह में चुदाई के लिए ले जाएँगे और बाकी को अपनी कॉटेज में ले आना! इस प्रोग्राम में मुझको भी कुछ गाँव की लड़कियों को नग्न देखने का भी मौका मिल जायेगा।
कम्मो हंसने लगी- छोटे मालिक, आप भी ना… औरतों के ही दास हो! इसमें कोई शक नहीं है।
मैंने भी हँसते हुए कहा- यह सब तुम्हारा ही सिखाया हुआ है, अगर तुम मुझको चुदाई का पाठ नहीं पढ़ाती तो मैं अभी तक साधू हो गया होता, जोगी बन गया होता, बैरागी बन गया होता और हिमालय की कंदराओं में भटक रहा होता।
कम्मो बड़े ज़ोर से हंस दी और मुझसे लिपट गई और मुझको चुम्बन देती हुई बोली- वाह रे मेरे जोगी, तुम तो बन गए चूत के भोगी।
कम्मो ने सब लड़कियों को पूछा कि क्या वो नदी स्नान करने जाना चाहती हैं?
तो सबने हामी भर दी और काफी प्रसन्न लग रही थी।
कम्मो ने मम्मी जी से भी पूछा तो उन्होंने भी इजाज़त दे दी और कहा- कार का ड्राइवर आप सबको ले जाएगा और वापस भी ले आएगा।
सब लड़कियाँ और भाभियाँ भी तैयार हो गई और सबको दो चकर में कार नदी के कनारे छोड़ आई।
उनके पीछे पापा की बाइक लेकर मैं भी नदी पर पहुँच गया और एक नज़र नदी के किनारे पर डाल कर मैं अपनी झाड़ियों में जाकर छुप गया।
हमारे घर से आई लड़कियाँ और कई और गाँव की स्त्रियाँ मज़े में नहा रही थी नदी के शीतल जल में!
गाँव की औरतों में कुछ तो अधेड़ उम्र की थी, कई काफी जवान भी थी।
सबके नहाने के कपड़े कम से कम थे उनके शरीर पर!
ज़्यादातर धोती को शरीर के चारों और लपेट कर नहा रही थी और उनकी धोती जब गीली हो जाती थी तो उनके शरीर के अंग गीली धोती में से साफ़ झलक रहे थे।
एक सांवली औरत पर मेरी खास नज़र टिक गई थी क्योंकि उसके मोटे और गोल मुम्मे उसकी गीली धोती से साफ़ दिख रहे थे और गीली धोती जब उसकी चूत पर पड़ती थी तो उसकी चूत के काले बाल साफ़ दिख रहे थे।
यह दृश्य देखते ही मेरा लौड़ा एकदम तन गया और मेरी पैंट में तम्बू बन गया।
वो सांवली औरत बार बार अपनी गीली धोती को ऊपर कर के पानी निचोड़ती थी लेकिन धोती पुनः उसके मुम्मों पर चिपक जाती थी और नीचे का हिस्सा चूत पर होने के कारण चूत का दृश्य साफ़ दिख रहा था।
उसके साथ ही एक नई दुल्हन भी नहा रही थी जिसके हाथों की मेहँदी साफ़ चमक रही थी, उसने भी एक सफ़ेद मलमल की धोती पहन रखी थी जिसमें से उसका सारा जिस्म साफ झलक रहा था।
वो रंग की काफी गोरी थी तो उसके गोरेपन के बीच में उसकी चूत के काले बाल उसकी गीली धोती में चमक रहे थे।
काफी देर तक मेरी नज़रें इन दोनों महिलाओं पर टिकी रही और अब मैंने अपने घर आई मेहमान लड़कियों और भाभी को ढूंढा तो वो सफ़ेद पेटीकोट और सफेद ब्लाउज पहन कर नहा रही थी, उनके मुम्मे तो झलक रहे थे लेकिन चूत के बाल नहीं दिख पा रहे थे।
दोनों भाभियाँ एक साथ थी और कुंवारी लड़कियाँ थोड़ी दूर नहा रही थी, लड़कियों के वस्त्र भी पारदर्शी थे और मैं मज़े में उनके जिस्म की सुंदरता देख रहा था और हल्के से अपने लंड पर हाथ फेर रहा था।
थोड़ी देर में देखा, वो सांवली औरत अपने सूखे कपड़े हाथ में लिए हुए मेरी वाली झाड़ी की तरफ आ रही थी और झाड़ी के पास आकर उसने कपड़े नीचे रख दिए और इधर उधर देख कर अपनी गीली धोती को उतार कर तौलिये से अपने शरीर को पौंछने लगी।
जैसे ही उसकी गीली धोती हटी तो मैंने बड़ी साफ़ तौर से उसके मुम्मे और उसकी काली चूत पर काले बालों को देखा।
तभी देखा कि कम्मो उस सांवली औरत के पास आ गई और उससे बातें करने लगी और वो जान बूझ कर उसकी चूत और मुम्मों वाली साइड मेरी तरफ खड़े कर के मुझको पूरा नज़ारा दिखाने लगी।
सांवली औरत अभी कपड़े बदल ही रही थी कि वो गोरी दुल्हन भी अपने कपड़े लिए हुए वहाँ आ गई और वो भी कम्मो के आगे खड़ी होकर अपनी धोती उतार रही थी और उसका भी शरीर पूरा झाड़ी की तरफ था, मैं बड़े मज़े में उस के भी मुम्मों और चूत के खुले दर्शन करने लगा.
उन दोनों के जाते ही दो और औरतें वहाँ अपने कपड़े बदलने के लिए आ गई और कम्मो उनके साथ भी बातें करती रही और उन दोनों को भी गीली धोती उतारने और सूखे कपड़े पहनने में उनकी मदद करने लगी।
इन दोनों औरतों के शरीरों से लगता था वो एक या फिर दो बच्चों की माँ हैं क्योंकि उनके पेट पर बच्चा पैदा होने के निशान पड़े हुए थे और उनके मुम्मे भी थोड़े ढलके हुए लग रहे थे लेकिन उनकी चूत और चूतड़ अभी भी काफी सेक्सी लग रहे थे और उनकी चूत पर छाई हुए काले बालों की लताएँ भी काफी घनी थी। 
थोड़ी देर बाद उन दोनों ने आपस में कुछ बातें की और फिर दोनों नंगी ही बैठ गई और दोनों की चूत मेरी तरफ थी और दोनों ने एकदम पेशाब की धार छोड़ दी।
बाईं वाली की धार बहुत तेज़ थी और वो मेरे से थोड़ी दूर तक आ रही थी लेकिन जो दूसरी औरत थी उसकी धार तो पतली थी लेकिन उसकी दूरी काफी आगे तक थी।
जब दोनों का मूती प्रोग्राम खत्म हुआ तो एक बोली- मैं जीत गई, मेरी धार तो बहुत दूर तक गई थी।
लेकिन दोनों एक दूसरी से बहस करने लगी लेकिन कम्मो जो वहीं खड़ी थी, ने फैसला सुनाया कि दूसरी औरत जीत गई थी।
अभी वो सांवली और गोरी भी वहीं थी तो कम्मो ने उन दोनों को भी कहा कि वो भी मूती प्रतियोगिता रख लें और देखें कौन ज़्यादा दूर तक धार फ़ेंक सकता है।
वो दोनों भी हंस पड़ी और कम्मो ने उनको भी मेरी छुपने वाली जगह की तरफ मुंह करके मूती करने को कहा।
वो भी अपनी साड़ी उठा कर बैठ गई और कम्मो ने एक दो तीन कहा और दोनों ने भी अपने पेशाब की धार छोड़ दी और दोनों की धार भी काफी तेज़ी से निकली और मेरे काफी निकट तक आ गई।
लेकिन जो दुल्हन थी उसकी धार ज़्यादा दूर तक निकल गई और साथ ही उसकी चूत में से एक सीटी भी बज रही थी जिसको सुन कर कम्मो हैरान हो रही थी।
कम्मो ने पूछा- यह सीटी कैसी बज रही तेरी चूत से?
दुल्हन थोड़ी शरमाई और फिर बोली- वो क्या है मेरी अभी चूत की खुलवाई नहीं हुई, मेरा पति रोज़ कोशिश करता है लेकिन उसका लंड इसके अंदर नहीं घुस पाता तो मैं रोज़ ही आधी अधूरी रह जाती हूँ।
कम्मो शरारतन बोली- किसी और को चांस दे तो शायद तेरा काम बन जाए?
दुल्हन हँसते बोली- किसको चांस दूँ? कोई नज़र ही नहीं आता जो मेरी चूत के काबिल हो!
कम्मो बोली- बहुत हैं चूत के माहिर… अगर तू राज़ी हो तो अभी इंतज़ाम कर देती हूँ?
दुल्हन पहले हिचकी फिर बोली- कोई है नज़र में तुम्हारी दीदी?
कम्मो बोली- नज़र में तो है लेकिन तुमको वायदा करना पड़ेगा कि किसी को बताएगी तो नहीं?
दुल्हन बोली- मैं पक्का वायदा करती हूँ लेकिन तुमको भी वायदा करना पड़ेगा कि किसी को नहीं बताओगी और सील तोडू भी नहीं बताएगा?
कम्मो बोली- हमारी तरफ से पक्का वायदा। कोई है तेरे साथ या अकेली है?
दुल्हन बोली- मौसी आई थी लेकिन वो दिख नहीं रही शायद घर चली गई होगी।
कम्मो बोली- तो फिर चल मेरे साथ लेकिन यह जो औरतें नहा रही हैं इन में से कोई तुझको जानता है क्या?
दुल्हन ने चारों तरफ देखा और कहा- नहीं दीदी, इन में तो कोई नहीं जानता मुझको!
कम्मो उसको लेकर मेरे छुपने वाली जगह की तरफ आ रही थी और मैंने घबरा कर वो नदी की तरफ वाली साइड पर झाड़ी को आगे कर दिया ताकि वो देख न सके कि मैं नदी में नहाती हुई औरतों को देख सकता हूँ और झट ही अपने मुंह पर रुमाल रख कर के सोने का नाटक करने लगा।
थोड़ी देर में कम्मो ने मुझको उठाया- उठिए ना, देखो कौन आया है आप से मिलने?
मैं भी अंगड़ाई लेते हुए उठा और कम्मो से बोला- काहे उठावत हो हमका? बहुते ही गहरी नींद में सो रहे थे हम… और यह कौन हैं?
कम्मो बोली- यह दुल्हन हैं और आपसे मदद मांग रहीं हैं यह।
मैं बोला- कैसी मदद?
कम्मो मुस्कराते हुए बोली- इनकी शादी को दो महीने हो गए लेकिन इनके पति से इनकी सील नहीं टूट रही है तो वो सील तोड़ने में आप इनकी थोड़ी सी मदद कर दीजिये ना!
मैंने कहा- पहले पूछो तो सही कि हम इनको पसंद हैं या नहीं?
कम्मो ने जब पूछा तो वो एकदम से बोली- हाँ, पसंद तो बहुत हैं यह हम को लेकिन दीदी यह तो लड़के से लगते हैं, क्या यह काम इनसे हो सकेगा?
कम्मो बोली- ऐ जी, ज़रा अपना हथियार तो इनको दिखाइए ना!
मैं उठा और अपनी पैंट को नीचे किया और अपने खड़े लौड़े को इनको दिखाया और पुछा- क्या यह ठीक है या फिर इससे भी लम्बा चाहिए?
दुलहन शरमा गई और मुंह नीचे कर लिया और मैं भी अपना लौड़ा पैंट के अंदर डालने लगा और बोला- शायद यह इनको पसंद नहीं, कल जब दूसरा लाऊँगा तो ही काम बनेगा।
दुल्हन एकदम से घबरा के बोली- नहीं नहीं हमको तो यह बहुत ही पसंद है, बोलिए हम को क्या करना है?
कम्मो ने आगे बढ़ कर उसके ब्लाउज को उतार दिया और उसकी साड़ी भी उतार दी और सिर्फ पेटीकोट में ही उसको लिटा दिया और मेरे को इशारा किया कि मैं शुरू हो जाऊँ।
मैंने उसके पेटीकोट को ऊँचा किया और उसकी टांगें चौड़ी करके मैं अपने खड़े लंड को ले कर बैठ गया और उसकी बालों से भरी हुई चूत के कुंवारे मुंह पर लंड को रख दिया और एक दो बार लंड को अंदर बाहर किया तो वहाँ काफी मोटी दीवार पाई।
कम्मो ने अपना बैग खोला और उसमें से वैसेलिन की शीशी निकाली और ढेर सारी दुल्हन की चूत के बाहर और अंदर लगा दी और थोड़ी से मेरे लंड पर भी लगा दी और फिर दुल्हन के कान में कहा- थोड़ा दर्द होगा, बर्दाश्त कर लेना। ठीक है ना?
दुल्हन बोली- ठीक है। 
अब मैंने फिर से लंड को दुल्हन की चूत में डाला और धीरे धीरे से उसको अंदर धकेलने लगा और जब दीवार महसूस की तो एक ज़ोर का धक्का मारा और एक ही झटके में लंड पूरा का पूरा दुल्हन की चूत में चला गया और दुल्हन के मुंह से हल्की सी चीख निकली तो कम्मो ने अपने रुमाल को उसके मुंह पर रख कर दबा दिया।
और अब मैंने धीरे से लंड को निकाला और फिर एक हल्का सा धक्का मारा और अब लंड बिना किसी रोक टोक अंदर चला गया।
मैंने महसूस किया कि दुल्हन का शरीर जो एकदम से अकड़ा हुआ था, अब काफी रिलैक्स हो गया और उसकी जांघें पूरी तरह से खुल गई थी।
तब मैं धीरे से धक्कों की स्पीड बढ़ाने लगा और साथ ही उसके मम्मों को चूमने और चूसने लगा, उसके लबों पर एक बड़ी हॉट किस जड़ दी और अपना मुंह उस के मुँह पर रख कर उसकी जीभ के साथ अपनी जीभ से खेलने लगा।
उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर अब ज़ोर से धक्काशाही शुरू कर दी और कुछ ही मिन्ट में ही दुल्हन का जीवन में पहली बार पानी छूटा।
मैंने कम्मो की तरफ देखा, उसने आँख के इशारे से कहा- लगे रहो!
और अब मैंने उसको अपनी गोद में बिठा कर उसकी टांगों को अपने दोनों तरफ कर दिया और लंड को चूत में ही रखे रखे धक्के मारने लगा, साथ ही उसके गोल और सॉलिड मुम्मों को मुंह में लेकर चूसने लगा और उसकी चूचियों को मुंह में लेकर गोल गोल घुमाने लगा।
अपने हाथों को उसके चूतड़ों के नीचे रख कर अब गहरे धक्के मारने लगा और जैसे जैसे ही मैं तेज़ी पकड़ रहा था दुल्हन मेरे से और भी ज़्यादा चिपक रही थी और अब वो खुद ही मुझको चूमने और चाटने लगी थी।
मेरे धक्कों की स्पीड इतनी तेज़ होती गई कि थोड़ी ही देर में दुल्हन फिर एक बार हाय हाय… करते हुए झड़ गई और उसका शरीर एक अजीब सी झुरझुरी से कम्पित हो गया।
हालाँकि वो झड़ चुकी थी फिर भी उसकी बाहें मेरे गले में ही थी और वो मुझसे बुरी तरह से चिपकी हुई थी।
अब मैंने उसको अपने से अलग किया और फिर मैंने उससे पूछा- क्यों दुल्हनिया जी, मज़ा आया या नहीं?
दुलहन थोड़ी सी शरमाई और बोली- बहुत मज़ा आया आप से, आप तो वाकयी में जादूगर हैं।
कम्मो ने उसको उठाया, उसके शरीर पर लगे खून को साफ़ किया और कहा- आओ दुल्हन, एक बार फिर से स्नान कर लो तो सब ठीक हो जाएगा। वैसे तुम्हारा नाम क्या है?
दुल्हन बोली- मेरा नाम है जूही।
कम्मो उसको लेकर जाने लगी तो उसने मेरी तरफ देखा और फिर आकर मुझसे लिपट गई और चुंबनों से मेरा मुंह भर दिया और एक हाथ से मेरे खड़े लौड़े को फिर पकड़ लिया और बैठ कर उसको चूम लिया। 
फिर कम्मो ने उसको उठाया और उसको लेकर झाड़ी के बाहर चली गई।



RE: Porn Hindi Kahani मेरा चुदाई का सफ़र - sexstories - 05-17-2018

कम्मो उसको लेकर जाने लगी तो जूही दुल्हन ने मेरी तरफ देखा और फिर आकर मुझसे लिपट गई और चुंबनों से मेरा मुंह भर दिया और एक हाथ से मेरे खड़े लौड़े को फिर पकड़ लिया और बैठ कर उस को चूम लिया।
कम्मो ने उसको उठाया और उसको लेकर झाड़ी के बाहर चली गई।
मैंने झाड़ी से चोर झाड़ी हटाई और फिर बाहर देखने लगा।
नदी में भाभी न. 1 और 2 सफ़ेद पेटीकोट और सफ़ेद ब्लाउज में अभी भी नहा रही थी और दूसरी लड़कियाँ भी उन के आस पास नहाने में मस्त थी।
उधर गांव वाली औरतों में एक दो नई भी आई थी, वो अपने कपड़े बदलने के लिए मेरी वाली झाड़ी की तरफ ही आ रही थी।
मैंने उनको ध्यान से देखा, वो भी जवान ही लग रही थी और काफी सुन्दर शरीर वाली प्रतीत हो रही थी।
खैर मैं उनके उचित स्थान पर पहुँचने का इंतज़ार कर रहा था।
जब वो झाड़ी के निकट पहुँची तो सबसे पहले आगे वाली औरत ने अपने कपड़े नीचे रखे और बैठ कर अपनी धोती और पेटीकोट को ऊपर उठा कर पेशाब करने लगी।
उसकी चौड़ी जाँघों के बीच में से उसकी काली झांटों से ढकी चूत में से पेशाब की धार बह निकली, धार काफी तीव्र थी और काफी दूर तक जा रही थी। जब धार खत्म हो गई तो उसने अपनी चूत को पेटिकोट से पौंछा और फिर अपने कपड़े बदलने लगी।
अब तक पहली वाली ने अपना ब्लाउज उतार दिया था, उसके मोटे मुम्मे एकदम आज़ाद हो गए थे और हवा में उछल रहे थे।
अब उसने अपने पेटिकोट को भी उतार दिया और उसकी चूत सिर्फ बालों से ढकी रह गई लेकिन उसने जल्दी ही अपने शरीर के चारों तरफ एक सफ़ेद धोती को लपेट लिया और अपनी नग्नता को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी।
अब वो भी उसी जगह बैठ कर पेशाब करने लगी और जब पेशाब से फारिग हुई तो अपनी चूत को पौंछने लगी अपने उतारे हुए पेटिकोट से!
फिर वो दोनों भी मिल कर अपने कपड़े उठा कर कुछ कपड़े धोने और नहाने के लिए चली गई।
अब मैंने देखा कि कम्मो तन्वी भाभी को लेकर झाड़ी की तरफ ही आ रही थी, मैं समझ गया कि कम्मो की मर्ज़ी है कि तन्वी भाभी को यहाँ चोदा जाए।
मैं तो तैयार बैठा ही था, उन दोनों के आने से पहले ही मैंने नदी वाली साइड को बंद कर दिया था।
तन्वी भाभी ने अंदर आते ही मुझको कस कर एक जफ्फी मारी और मेरे मुंह को चूमने लगी।
मैंने भी उसके पेटीकोट में फंसे हुए चूतड़ों को हाथ फेर फेर कर सहलाना शुरू कर दिया। मैंने खुद ही उसका पेटीकोट नीचे उतार दिया और ब्लाउज को भी उतार कर फ़ेंक दिया और फिर मैंने उसको लिटा कर उसकी जाँघों के बीच बैठ कर पहले तो उसकी चूत को खूब चूमा और चाटा और जब भाभी गर्म हो गई तो मैंने लंड लाल को उनकी चूत में धीरे से डाल कर चुदाई शुरू कर दी।
भाभी काफी गर्म हो चुकी थी सो जल्दी ही वो लंड के स्वागत के लिए अपनी जाँघों को और भी चौड़ा करने लगी।
मैंने बैठे हुए ही भाभी को पूरी तन्मयता से चोदना शुरू किया और उसके गोल मुम्मों को भी साथ साथ चूसता जा रहा था। उसकी नाभि में जीभ डाली तो वो एकदम से कामातुर हो गई और जल्दी ही झड़ने की कगार पर पहुँच गई। मेरे थोड़े से प्रयत्न से ही वो अपना संयम खोकर मेरे लौड़े को चूत द्वारा गाय के थन की तरह दोहने लगी।
उसकी चूत की इस प्रक्रिया से मैं आज अपने आप को नहीं रोक सका और ढेर सारा वीर्य भाभी की चूत में छोड़ते हुए उसके ऊपर लुढ़क गया।
कम्मो यह सब देख रही थी और वो अपनी भवें टेढ़ी करके मेरी तरफ देखने लगी जैसे कह रही हो- छोटे मालिक, आपसे यह उम्मीद नहीं थी, आपने तो बेचारी भाभी का जीवन खतरे में डाल दिया।
लेकिन तन्वी भाभी को मेरे लावे के समान गर्म वीर्य से बहुत ही तृप्ति मिल रही थी और वो ऐसे दर्शा रही थी जैसे कि उसका जीवन सफल हो गया हो।
कम्मो ने कहा- भाभी, शायद तुम्हारे अंदर छोटे मालिक का वीर्य छूट गया है तुम चाहो तो नदी में फिर स्नान करके वीर्य को निकाल सकती हो?
भाभी बोली- वीर्य अंदर छूट जाने से क्या होगा?
कम्मो हँसते हुए बोली- तुम गर्भवती हो जाओगी और क्या?
भाभी बोली- अच्छा? सोमू के वीर्य में इतनी शक्ति है एक बार में ही गर्भ ठहर जाएगा? रात को तो इतनी बार तो सोमू ने किया था लेकिन शायद उसका वीर्य नहीं छूटा था तब, क्यों ठीक है न?
कम्मो बोली- हाँ भाभी, रात को उसका वीर्य नहीं छूटा था लेकिन अभी गलती से उसका वीर्य छूट गया है आपके अंदर, तो गर्भवती बनने का खतरा तो बनता है।
भाभी बोली- अच्छा, मेरी बड़ी इच्छा है कि मेरा भी अपना बच्चा हो लेकिन मेरे पति तो नाकारा है इस काम के लिए तो मैं क्या करूँ? 
कम्मो ने मेरी तरफ देखा और मैंने हां में सर हिला दिया तब कम्मो भाभी को एक तरफ ले गई और उससे कुछ पूछा जो भाभी ने बता दिया।
कम्मो मेरे पास आकर बोली- सब ठीक है, छोटे मालिक आप अगर चाहें तो भाभी भी गर्भवती हो सकती है?
मैं बोला- कम्मो, तुम अपनी तसल्ली कर लो फिर जब चाहो मैं भाभी का काम कर दूंगा।
कम्मो भाभी को लेकर बाहर चली गई और मैंने फिर झाड़ी थोड़ी सी हटाई और बाहर नदी की तरफ देखा तो कोई नई औरत नहीं आई थी लेकिन वो पहले से नहा रही लड़कियाँ अभी भी नहा रही थी।
कम्मो ने सबको इकट्ठा किया और वापस जाने के लिए ज़ोर डालने लगी, फिर वो उनको लेकर मेरी छुपने वाली झाड़ी के पास ही ले आई और कहा कि अपने अपने गीले कपड़े यहीं बदल लो।
सब लड़कियाँ कपड़े बदलने लगी लेकिन मेरी नज़र तो उन 2 लड़कियों पर ही थी जिनको मैंने अभी तक नहीं चोदा था और उनके साथ में जूही भाभी भी थी।
जूही भाभी ने सबसे पहले अपना पेटीकोट जतारा और नए पेटीकोट को पहनने लगी और इस दौरान एक बार फिर मैंने उसके शरीर को पुनः देखा, चूत पर छाई घनी काली ज़ुल्फ़ें और उसके गोल उभरे हुए चूतड़ों को देखते हुए अपने लौड़े पर भी हाथ फेर रहा था और फिर जब उसने अपने गीले ब्लाउज को उतारा तो उसके गोल और सॉलिड ख़रबूज़े उछल कर बाहर आ रहे थे जैसे कि मेरा लंड करता है कभी कभी!
भाभी काफ़ी सेक्सी चीज़ थी और उसको एक बार और चोदने का मन था।
बाकी 4 लड़कियों के शरीर से तो मैं अच्छी तरह से वाकिफ था सिर्फ उन दो लड़कियों से कोई वाकफियत नहीं हुई थी और ना ही उन्होंने चुदवाने की कोई इच्छा ज़ाहिर की थी।
अब वो दोनों भी कपड़े बदलने के लिए झाड़ी के सामने आ गई थी।
एक जो थोड़ी सांवली सी थी, जब अपना पेटीकोट उतार रही थी तो उसकी नज़र झाड़ी पर पड़ रही थी लेकिन मैं काफी पीछे की तरफ बाहर वालों की नज़र से दूर था।
जब उसने पेटीकोट का नाड़ा खोला तो वो एकदम उसकी पतली कमर से फिसल कर नीचे गिर गया, वो एकदम से नंगी हो गई और सेक्सी शरीर को देख कर मैं बड़ा ही उत्तेजित हो गया।
जब उसने अपना ब्लाउज उतारा तो उसके छोटे से उरोज गोल और सॉलिड लग रहे थे।
उसके बाद दूसरी लड़की आई वहीं कपड़े बदलने के लिए… वो गोरी चिट्टी थी और उसके अंग भी काफी सुंदर लग रहे थे।
उस लड़की ने अपने कपड़े ऐसे उतारने शुरू किये जैसे कि वो किसी ब्यूटी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हो।
सबसे पहले उसने अपना गीला ब्लाउज उतारा और उसको उतार कर वो चारों तरफ घूमी जैसे कि जज लोगों को दिखा रही हो, उसके मुम्मे काफी सुंदर थे गोल और मोटे और उन्नत उरोज लग रहे थे।
फिर उसने अपने पेटीकोट के नाड़े में हाथ डाला, सबकी तरफ देखा और फिर धीरे धीरे से नाड़े को खोलने लगी।
नाड़ा खोलने के बाद भी उसने पेटीकोट को हाथ से पकड़े रखा और फिर चारों तरफ घूम कर देखा और फिर आहिस्ता से पेटीकोट को नीचे फिसलने दिया।
उसके ऐसा करते ही सब लड़कियों ने ज़ोर से ताली मारी जैसे कि उसकी सुंदरता की तारीफ कर रही हों!
वैसे इस लड़की का शरीर काफी सुन्दर था और अभी तक जितनी भी लड़कियाँ मेरे पास आई थी उन सबसे इस लड़की का शरीर बहुत सुंदर था और वो मुझ से अभी तक चुदाने नहीं आई थी।


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