Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - Printable Version

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Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

चूत देखी वहीं मार ली

लेखक- तुषार
हिदी फ़ॉन्ट बाइ मी

**** साल का मासूम सा विनय अपनी मासी के साथ हॉस्पिटल के आइसीयू के बाहर बैठा हुआ था. उसके पापा अंदर आइसीयू मे अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहे थे….एक अंजान सा खोफ़ उसकी मौसी मामा और मामी के चेहरे पर छाया हुआ था….जब कभी कोई नर्स या वॉर्ड बॉय आइक्यू से बाहर आता, तो उसके मामा (अजय) अपने जीजा के बारे मे उनसे पूछते…..पर कोई भी कुछ जवाब नही दे रहा था….विनय खोफ़जदा अपनी मौसी से चिपका हुआ था…..उसने अपनी मौसी के चेहरे की तरफ नज़ारे उठाते हुए सहमे हुए लहजे से कहा…”मौसी जी मम्मी कहाँ गयी है…..वो अभी तक आई क्यों नही…..”

शीतल: आज जाएगी बेटा….वो तुम्हारे पापा का ऑपरेशन होना है ना…उसके लिए पैसे लेने गयी है.

शीतल ने अपने भाई यानि कि विनय के मामा की ओर लाचारगी से देखते हुए कहा….अंदर विनय के पापा की हालत बेहद खराब थी…..ज़्यादा दारू पीने की वजह से उनकी दोनो किड्नी खराब हो चुकी थी. और डॉक्टर्स के पास सिर्फ़ एक ही आख़िरी रास्ता बचा था….किड्नी ट्रॅन्सप्लॅंट का….पर इतना महँगा ऑपरेशन करवाना कोई आसान काम नही था….प्राइवेट हॉस्पिटल मे जब तक आप फीस जमा नही करवा देते तो वो ऑपरेशन कहाँ करते है….उसकी मामी (किरण) उसके पास आती है…..और विनय के सर को सहलाते हुए शीतल से कहती है…”दीदी कभी सोचा नही था…आज ये दिन भी देखना पड़ेगा…..हम तो बड़ी दीदी की कोई मदद नही कर पा रहे…..”

शीतल: हां भाभी अब और कर भी क्या सकते है…..जीजा जी पिछले एक साल से बीमार है….जो हमारे पास भी था….वो भी हम ने सब जीजा जी के इलाज के लिए लगा दिया है……अब तो भगवान का ही भोरसा है…..तभी आइक्यू से एक डॉक्टर बाहर आता है….तो अजय तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ कर उसका हाथ पकड़ लेता है. “डॉक्टर साहब अब वो कैसे है……” डॉक्टर एक बार उनकी तरफ गंभीरता से देखता है….वो धीमी से आवाज़ मे कहता है…..”आइ आम सॉरी सर, पर हम उन्हे बचा नही पाए…..मेने तो आपको पहले ही कहा था कि, आप इन्हे किसी अच्छे हॉस्पिटल मे अड्मिट करवा दीजिए…..”

तभी पीछे से कुछ गिरने के आवाज़ आती है…..सब चोंक कर उस तरफ देखते है……वहाँ नीलम विनय की मम्मी खड़ी थी……जैसे वो बुत बन गये हो……उसने डॉक्टर को कहते सुन लिया था कि, अब उसका पति इस दुनिया मे नही रहा……उसके बाल बुरी तरह से बिखरे हुए थे….उसका दुपट्टा एक कंधे पर लटका हुआ नीचे फर्श पर धूल चाट रहा था….उसके सामने एक पॅकेट गिरा हुआ था….हॉस्पिटल की उस गॅलरी मे मातम सा छा जाता है…..किरण और शीतल दोनो उसी वक़्त नीलम की तरफ भागती है. रोते हुए बिलखते हुए, अजय भी अपने बेहन को उन बेहद दर्द नाक पॅलो मे सहारा देने के लिए आगे बढ़ता है……सब रो रहे थे…..और विनय बेंच पर बैठा हुआ उन सब को रोता देख अपना दिल छोटा कर लेता है…..

पर नीलम की आँखो मे आँसू नही थे……वो विनय की तरफ देखती है…..और अपनी बेहन शीतल से कहती है…..”शीतल तुम विनय को बाहर ले जाओ…..देखो मेरा बच्चा कैसे कुम्लाह गया है……” शीतल पलट कर विनय की ओर देखती है…..और फिर उसे बाहर ले जाती है….नीलम गुम्सुम सी बेंच पर बैठ जाती है…..अजय और किरण नीलम के पास बैठ कर हॉंसला देते है….पर वो खुद उस घटना से बहुत दुखी थी….उनके आँसू रोके नही रुक पा रहे थे…..”भैया आप उनकी बॉडी को घर ले जाए…और अंतिम संस्कार की तैयारी कीजिए……” ये कह कर नीलम उठ कर रिसेप्षन पर आती है…और वहाँ खड़े एक लड़के से एक पेपर और पेन मांगती है…..और उसमे कुछ लिखना शुरू कर देती है….

थोड़ी देर बाद शीतल विनय को लेकर वापिस आ गयी….और नीलम ने उसे वो पेपर फोल्ड करके अपनी बेहन शीतल को दिया…..”ये क्या है दीदी……” 

उसने सुबक्ते हुए कहा…..”इसे अभी मत खोलना….जब तुम्हारे जीजा जी का अंतिम संस्कार हो जाए….उसके बाद इसे पढ़ लेना…

.शीतल आगे से कुछ नही कहती और उस पेपर को चुप चाप अपने पास रख लेती है….पोस्टमॉर्टम के बाद विनय के पापा की बॉडी उन्हे सोन्प दी जाती है…..शीतल का घर भी उसी सहर मे था…..यहाँ पर नीलम अपने पति और बेटे विनय के साथ रहती थी……अगले दिन जब संस्कार का वक़्त हुआ तो, शीतल कुछ समान लाने के लिए स्टोर रूम मे गयी…..पर जैसे ही वो स्टोर रूम मे पहुची तो सामने का नज़ारा देख वो एक दम से चीख उठी….

उसकी बड़ी बेहन पंखे के साथ लटकी हुई थी…..गले में रस्सी थी….पता नही कब उसने फँदा लगा कर आत्म हत्या कर ली……नीलम के घर मे मातम का माहॉल और दुखमय हो गया…..थोड़ी देर में आए हुए सभी रिस्तेदार वहाँ इकट्ठा हो गया……विनय अब अनाथ हो चुका था…..सभी के मन में यही सवाल था कि, आख़िर नीलम ने ऐसा क्यों किया….उसने एक बार भी क्यों अपने बेटे के बारे में नही सोचा….क्यों उस मासूम को वो अकेला छोड़ कर चली गयी….बाप का साया तो पहले ही उसके सर से उठ गया था…..और क्यों अब उसने विनय को अपनी ममता से भी वंचित कर दिया था……



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सवाल अनेक थे…..पर जवाब किसी के पास नही था…..कहते है ना जाने वाले तो चले जाते है…..पर जिंदगी कभी नही रुकती….दोनो का अंतिम संस्कार हो चुका था….विनय को उसके मामा मामी अपने साथ अपने घर ले गये…..अब उस बेचारे का था भी कॉन….विजय के मामा भी उसी सिटी में रहते थे…..नीलम के घर के पास ही उनका भी घर था….उस रात संस्कार के बाद शीतल ने अपनी बेहन का दिया हुआ लेटर खोल कर जब देखा, तो उसके रोंगटे खड़े हो गये……उसके सारे सवालो का जवाब उस लेटर के चन्द शब्दों में संहित था…..इस बार जो शीतल की आँखो से आँसू निकले….वो सिर्फ़ पानी के नही थी….बल्की खून के आँसू थे….

पर जो उस लेटर में लिखा था…..उसे वो सब अपने तक सीमित रखना था….शीतल के दो बेटियाँ थी. एक विनय से दो साल छोटी थी…..और एक विनय की हम उम्र……जो शीतल ने अपने भाई को गोद दी हुई थी…..क्योंकि विनय के मामा की अपनी कोई संतान नही थी….क्यों नही थी…..ये मैं भी नही जानता. हां उन्हो ने अपनी संतान के लिए हर संभव जगह ठोकर ज़रूर खाई थी….पर उनके घर बच्चे की किल्कारी नही गूँजी थी……उसके बाद शीतल ने उसे अपनी बेटी दे दी थी….शीतल का एक बेटा भी था…जो सबसे छोटा था…..

उधर मामी के घर में विनय की हम उम्र उसकी बेहन वैशाली थी…..जो उसी की क्लास में थी….हां वो उस गाओं के स्कूल में पढ़ती थी…..मामा मामी और वैशाली के इलावा उनके घर में उसकी मामी की छोटी बेहन भी रहती थी…..जो वहाँ हाइयर स्टडी के लिए आई हुए थी….उसका नाम ममता था….उसकी शादी अभी 6-7 महीने पहले ही हुई थी…..शादी के बाद उसका हज़्बेंड वापिस यूके चला गया था..वो वही पर जॉब करता था…..इसीलिए शादी के बाद भी उसने अपनी स्टडी जारी रखी थी…. धीरे-2 वक़्त बीतता गया….शीतल ने विनय की ज़िम्मेदारी उसके मामा को सॉन्प दी थी…….

विनय के रूप मे उन्हे अपना बेटा मिल गया था……उसके मामा कपड़ों की दुकान चलाते थे… ज़्यादा बड़ा बिज़्नेस तो नही था…..पर दुकान अच्छी चलती थी…..विनय का अड्मिशन भी वशाली के स्कूल मे करवा दिया था…..वैशाली के साथ के कारण विनय जल्द ही अपने मम्मी पापा के गुजरने के गम से बाहर आ गया था….दोनो इकट्ठे स्कूल जाते इकट्ठे घर वापिस आते. साथ में खेलते और साथ में खाना खाते….आम भाई बहनो की तरह ही आपस में झगड़ते भी…..उनके झगडो को देख कर जब विनय की मामी गुस्सा होती तो, उसके मामा मामी को टोक देते….और कहते कि, मत डांटा करो इन्हे….यही बालपन देखने के लिए ही तो हमने पता नही कहाँ-2 धक्के खाए है…..

वैशाली तो किरण को अपनी माँ ही समझती थी…..और उसे माँ ही कहती थी…..उसे तो पता भी नही था कि, उसके मामा ने उससे गोद लिया है…पर विनय अभी भी उन्हे मामा मामी ही कहता था…..उसकी मौसी शीतल रोज दोपहर को उनके घर आती थी….उसके बच्चे भी साथ मे आ जाते थे….बच्चे आपस में मिल कर खूब धमा चोकड़ी मचाते थे….शीतल ने अपने खरचे पर एक दाई को रख लिया था….वो रोज दोपहर को अजय के घर आती, और विनय की मालिश करती….पर बंद कमरे मे…..दाई की एज कोई 65-70 साल के करीब थी….

पर फिर भी किरण को उस दाई का विनय को बंद कमरे में लेजा कर मालिश करना कुछ अटपटा सा लगता था…..पर शीतल ने कह दया था….कि वो ये सब उसके कहने पर कर रही है…..विनय धीरे -2 8थ क्लास में पहुँच गया था…दोस्तो आप तो जानते ही है ये उमेर कैसी होती है…. दुनिया भर की तमाम जानकारी हासिल करने की हसरत इस उम्र में ज़ोर लगाने लगती है…. इस उम्र का हर लड़का या लड़की हर उस चीज़ को जानने की कॉसिश करता है…..जिसे बड़े उनसे छुपा कर रखते है…..यही हाल वशाली और विनय का भी था……..


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दोपहर के 1 बजे का वक़्त था…..10थ के उस स्कूल में स्कूल बंद होने की घंटी बजाते ही बच्चों का हजूम बाहर के गेट की तरफ दौड़ा…..विनय भी अपना स्कूल बॅग कंधे पर लटकाए हुए बाहर की तरफ बढ़ रहा था….तभी पीछे से आकर वशाली ने उसका हाथ पकड़ लाया….”ओये कबूतर कहाँ उधर जा रहा है….मुझे अकेला छोड़ कर…..” वशाली ने ताव में आते हुए कहा……

विनय: घर जा रहा हूँ…..दिखाई नही देता क्या…..?

वशाली: देता है, तभी तो पूछ रही हूँ…मम्मी ने कहा है ना….स्कूल से साथ घर आया करो……

विनय: तो चलो रोका किसने है तुम्हे…..

वशाली: चलते है रूको रिंकी को भी आने दो……उसने भी तो साथ चलना है….

विनय: अर्रे मैं नही जाता उसके साथ…..बहुत दिमाग़ खराब करती है…..हर वक़्त बॅड-2 करती रहती है…..तुम्ही आना उसके साथ….

इतने में रिंकी भी आ जाती है….रिंकी का घर उनके घर के ठीक सामने था….और तीनो घर की तरफ चल पड़ते है…..रिंकी उन दोनो से दो क्लास ऊपेर यानी कि 10थ मे थी…..अभी अभी **5 की हुई थी…..जवानी की तरफ उसने पहला कदम बढ़ाया था….उनका एरिया सिटी से थोड़ा बाहर था….इसीलिए वो एरिया सिटी कम और गाओं ज़यादा लगता था….रिंकी की उम्र के साथ-2 उसमे चंचलता भी बढ़ गयी थी…..अपने से बड़ी उम्र की लड़कियों से बात करना….उनके बॉयफ्रेंड के किस्से सुनना उसे अच्छा लगता था….और वो सब सुने हुए किस्से, आगे वैशाली को सुनाती.

पर विनय अब भी इन बातों से अंज़ान था….उसे नही पता था कि, औरत मारद में क्या फरक होता है….जो बाहरी फ़र्क उसे दिखाई देता था…उसे उसी की जानकारी थी….विनय और वशाली 9थ क्लास में पहुँच गये थे….और रिंकी अब 11थ में हो गयी थी….वो स्कूल 10थ तक ही था. इसीलिए अब उसकी अड्मिशन सिटी के एक बड़े गर्ल्स कॉलेज में करवा दी गयी थी….उसके पापा उस पर बहुत कड़ी नज़र रखते थे…..सुबह स्कूल छोड़ कर आना और दोपहर को भी लेकर आना. वो लड़को से बात नही कर सकती थी….पर विनय और विशाली के साथ उनके परिवार का अच्छा मैल मिलाप था…उनके लिए तो समझो घर वाली बात थी…..

एप्रिल का मंथ था….गर्मियाँ अभी शुरू हुई थी…..स्कूल मे हाफ टाइम चल रहा था…और विनय अपने बाकी क्लास मेट्स के साथ स्कूल के ग्राउड में खेल रहा था….तभी उसे बहुत तेज पेशाब लगी….बाथरूम सेकेंड फ्लोर पर था…जब तक ऊपेर जाता तो, बीच में ही निकल जाने के संभावना थी…..इसीलिए वो भाग कर स्कूल की बिल्डिंग के पीछे गया….उस बिल्डिंग के पीछे स्कूल की पुरानी इमारत हुआ करती थी…..जो अब लगभग खंडहर बन चुकी थी….

वो भाग कर उस खंडहर बन चुकी बिल्डिंग के पास गया……अपनी पेंट खोली और अपने लंड ओह्ह सॉरी “नूनी” उस वक़्त तक तो वो अपने लंड को नूनी ही बुलाता था…बाहर निकाली और पेशाब करने लगा…..तभी उसके कानो में किसी के कराहने जैसी आवाज़ सुनाई दी….बेचारे का डर के मारे मूत भी बंद हो गया…..उसने अपने लंड को वापिस डाला और ज़िप बंद करके, एक टूटी हुई खिड़की की तरफ बढ़ा….जिस तरफ से वो आवाज़ आ रही थी…..जैसे ही वो उस खिड़की के पास पहुचा और उसने अंदर झाँक कर देखा, वो एक दम से हैरान रह गया……

अंदर जो भी थे….वो भी उसको अंदर झाँकते हुए देख कर खोफ़जदा हो गये…..अंदर स्कूल का पीयान और 10 थ का एक लकड़ा था….जो उस पीयान की गान्ड की बॅंड बजा रहा था…वही पीयान जिसको वो स्कूल से अंदर आ हुए गेट पर खड़ा देखता था…दोनो विनय को देख कर एक दम से घबरा गये….और उनसे ज़्यादा तो विनय घबरा गया….वो जल्दी से वापिस स्कूल के आगे की तरफ भागा….

पर अभी वो कुछ कदम आगे ही बढ़ा था कि, उस लड़के ने आकर उसे पीछे से पकड़ लाया… विनय ने उसकी तरफ घबराते हुए देखा…..और ठीक वैसे ही भाव उस लड़के के चेहरे पर भी थे….”दोस्त तूने अंदर जो भी देखा किसी को बताना नही…..अगर तूने किसी को बता दया तो यार मुझे स्कूल से निकाल देंगे….” विनय हैरानी से उस लड़के को गिड़गिडाता हुआ देख रहा था….उसे समझ में नही आ रहा था कि, वो क्या करे और क्या बोले….”देख दोस्त अगर तू ये बात किसी को नही बताएगा…..तो हम तुम्हे भी इस खेल मे शामिल कर लेंगे….बहुत मज़ा आता है कसम से….”

विनय ने उस चपरासी की तरफ देखा जो सहमा हुआ सा उनकी तरफ बढ़ रहा था…..”यार शाम को 6 बजे मुझे यहाँ मिलना….ये पीयान इसी स्कूल मे ही रहता है…..प्लीज़ किसी को बताना नही… ऐसा मज़ा आएगा कि तुम भी याद करोगे…..पर प्लीज़ किसी को बताना नही…..”

विनय: ओके मेरा हाथ छोड़ो नही बताता मैं किसी को…..

उस लड़के ने जैसे ही विनय का हाथ छोड़ा…..विनय भाग कर अपनी क्लास में आ गया….वो दोनो क्या कर रहे थे…..क्यों कर रहे थे….इसमे क्या मज़ा आता है…..ये तो गंदा काम है.. क्या सच में उनको मज़ा आता है….आता ही होगा तभी तो करते है….विनय के दिमाग़ में ऐसे लाखों सवाल घूम रहे थे….क्लास में पढ़ाई की तरफ उसका ध्यान उस दिन बिकुल भी नही था….जैसे ही स्कूल ऑफ हुआ, विनय अपना बॅग उठा कर स्कूल से बाहर निकला और तेज कदमो से चलता हुआ, स्कूल से घर जाने लगा…..वशाली पीछे से भागती हुई उसे आवाज़े देते रही. पर वो ना रुका……5 मिनिट की दूरी पर तो उनका घर था….

वो घर में घुसा और सीधा अपने रूम मे चला गया…..बॅग नीचे पटका और बेड पर लेट कर गहरी साँसे लेने लगा….उसका ध्यान अभी भी वही था….लेटे-2 वो सोचते-2 कब नींद के आगोश में समा गया पता ही नही चला….उसकी मामी किरण रूम में आकर देखती है कि, विनय बेड पर लेटा सो रहा था….उसने अपने शूस भी नही उतारे थे…मामी ने उसके शूस उतारे और उसे ठीक से बेड पर लिटाया और सोचा जब उठेगा तब खाना खिला दूँगी….फिर उसकी मामी रूम से बाहर चली गयी….

जब शाम को विनय उठा तो, 5 बज चुके थे…..उसने देखा कि, वो आज स्कूल यूनिफॉर्म मे ही सो गया था….कपड़े चेंज करते हुए, उसे एक दम से याद आया कि, उस लड़के ने शाम को 6 बजे स्कूल मे बुलाया था….उसने कपड़े चेंज किए…और बाहर आया तो, उसे मामी ने आवाज़ देकर रोक लिया…..”विनय कहाँ जा रहा है…..”

विनय: वो मामी दोस्तो के साथ खेलने जा रहा हूँ…..

किरण: बेटा खाना खा ले पहले सुबह से नाश्ता किया हुआ है…..

विनय: ठीक है मामी जल्दी दो……


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किरण ने उसे जल्दी से खाना डाल कर दिया, और विनय ने 5-6 मिनिट में खाना खाया और बाहर निकल आया…..स्कूल की तरफ कदम बढ़ाते हुए उसे अजीब सा डर लग रहा था….अजीब -2 तरह के ख़याल मन में आ रहे थे…..जैसे तैसे वो स्कूल के बाहर पहुचा तो मेन गेट के साथ छोटे वाले गेट पर वो पीयान खड़ा था….विनय को देख कर वो मुस्कुराया…और उसे अंदर आने का इशारा काया….

विनय अंदर चला गया….उसने गेट बंद किया….और विनय को लेकर अपने रूम में चला गया. जहाँ पर वो लड़का पहले से बैठा हुआ था……”देखा मेने कहा था ना ये ज़रूर आएगा…. चल अच्छा किया जो तू आ गया….भाई हम यहाँ मस्ती करने के लिए इकट्‌ठे हुए है….” तीनो नीचे बिछाए बिस्तर पर बैठ जाते है….”दोस्त अपना नाम तो बताओ हमें…..”

विनय: विनय…..

लड़का: मेरा नाम मनीष है…..और इसका (पीयान का) रामू……

मनीष: अच्छा तो विनय. पहले ये बताओ कभी पहले किसी के साथ ऐसा कुछ किया है…..?

विनय: नही…..

मनीष: (रामू की ओर मुस्करा कर देखते हुए) इसका मतलब तू अभी बिकुल कोरा है….चलो देखते है कि तुम रामू के काबिल भी हो या नही…..

रामू: चल पहले अपनी पेंट से अपना लंड बाहर निकाल….

विनय: क्यों….

मनीष: यार वो दोपहर वाला खेल खेलना है ना….ये देख हम सब भी अपने लंड बाहर निकाल रहे है……

ये कहते हुए मनीष ने अपनी पेंट खोल कर नीचे सरका दी….उसका 5 इंच का लंड एक दम तना हुआ था….रामू ने भी अपनी लूँगी हटा कर निकाल दी…उसका काले रंग का लंड महज 4 साढ़े 4 इंच का था….जो नॉर्मल खड़ा था…..दोनो ने अपने लंड को हाथ में धीरे-2 लेकर हिलाना शुरू कर दिया….”ये कर रहे हो तुम दोनो……”

मनीष: अबे तू भी अपना लंड निकाल कर हिला जैसे हम हिला रहे है….इसे मूठ मारना कहते है…..बहुत मज़ा आता है ऐसा करने में….

विनय ने अपने शॉर्ट्स को सरका कर घुटनो से नीचे तक कर दया…..उसका लंड बिकुल सिकुडा हुआ था….और उसके बॉल्स पर चिपका हुआ था….उसने अपने लंड को हाथ मे धीरे-2 उनकी नकल करते हुए हिलाने के कोशिस की, पर उसे कुछ अहसास ना हुआ….विनय का गोरा लंड देख कर उस पीयान की आँखो मे अजीब सी चमक आ गयी…..”ला मैं कर देता हूँ…..तू अभी नया है ना….” उस पीयान ने विनय के लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया, और धीरे-2 उसे सहलाने लगा….

एक अजीब सी सरसराहट उसके बदन में दौड़ गयी…..धीरे-2 उसके लंड ने भी अपना आकार बढ़ाना शुरू कर दिया….करीब 2 मिनिट बाद ही उसके लंड में पूरा तनाव आ चुका था….जिसे देख कर उन दोनो की आँखे फटी की फटी रह गयी….”अबे ये इंसान का लंड है या गधे का…..इतनी सी उम्र में इतना बड़ा लंड साले क्या ख़ाता है…..” विनय कुछ बोलने ही वाला था कि, वो कुछ सोच कर चुप हो गया…क्या बताता कि एक 70 साल की दाई उसके लंड की रोज मालिश करती है……

रामू: यार सच में तेरा लंड तो इस उम्र में इतना लंबा और मोटा है, तो एक दो साल बाद तो ये और लंबा और मोटा हो जाएगा…..

मनीष: क्यों साले गान्ड में खुजली होने लग गयी तेरे लगता यार का लंड देख कर……

रामू: कह तो तू सही रहा है…..पर अभी इसके बारे में मैं कुछ और ही सोच रहा हूँ….

मनीष: क्या सोच रहा है बे…..मुझे भी तो बता…..

रामू: वो बाद मे बताउन्गा…..अभी तो तू जल्दी से मेरी गान्ड मार के मेरी गान्ड के कीड़ों को सुला दे…..

ये कहते हुए रामू उल्टा हो गया….और फिर क्या था….मनीष ने उसकी गान्ड मारनी शुरू कर दी….अपनी आँखो के सामने ये सब होता देख विनय का दिल बैचेन से हो गया…”आह साले तेरी गान्ड मारने मे इतना मज़ा आता है तो, लड़की की चूत मारने में कितना मज़ा आएगा…हाए रामू यार किसी की चूत दिलवा दे ना……साले इतने दिनो से झूठा दिलासा दे कर मुझसे अपनी गान्ड मरवा रहा है……”

रामू: हां मनीष बाबू दिलवा दूँगा….अभी तो आ मेरी बजा ….

लड़कियों औरतों लंड चूत गान्ड ये शब्द सुन सुन कर विनय का बुरा हाल था….शाम 7 बजे वो स्कूल से निकल कर घर की तरफ चल पड़ा…..गर्मियों के दिन थे….इसीलिए अभी अंधेरा नही हुआ था…जब घर पंहुचा तो, मामी ने हल्की सी डाँट लगाई…


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घर पहुच कर, उसने अपने स्कूल का होम वर्क किया…..होम वर्क करते-2 उसे 9 बज चुके थे….ममता रूम में आई, और उसने विनय को कहा कि, खाना लग गया है….आकर खाले…. “जी दीदी अभी आता हूँ…..” विनय ममता को दीदी कह कर पुकारता था….विनय खाना खाने चला गया. आज भी उसका मामा अभी तक घर नही आया था…..जब उसके मामा घर आते, तो तब तक विनय सो चुका होता….अजय का विनय से बेहद लगाव था…..उसकी बहन और जीजा की आख़िरी निशानी जो थी….

विनय: मामी जी मामा जी नही आए अभी तक……

किरण: बेटा दुकान के ऊपर नया गारमेंट्स का काम शुरू किया है ना…..इसलिए वो लेट आते है.

(दरअसल पिछले एक साल से उसके मामा ने खुद के गारमेंट सिलाने के लिए नयी मशीन्स लगवाई थी…अपनी ही दुकान के ऊपेर वाली मंज़िल पर….इस लिए उसके मामा रात के करीब 11 बजे आते थे…..और सुबह जल्दी ही चले जाते थे….कई-2 बार तो वो फोन करके मामी को कह देते कि वो आज वही पर रुकने वाले है…..)

उसके बाद सब ने खाना खाना खाया और सब अपने अपने रूम में सोने के लिए चले गये. वशाली तो किरण के साथ ही सोती थी…..चाहे अजय घर हो या ना हो…..दोस्तो दिन इसी तरह गुजर रहे थे….अब विनय अक्सर अपने दोस्तो के ग्रूप में होने वाले लड़कियों के जिकर को ध्यान से सुनने लगा था…..धीरे-2 उसका झुकाव अब सेक्स के लिए होने लगा था….

जून शुरू हो चुका था…..सम्मर वकेशन स्टार्ट हो गये थे…..मामा का घर बहुत बड़ा था….नीचे चार रूम्स थी…..और ऊपेर तीन…ऊपेर वाले तीनो रूम्स खाली थी…कुछ पूर्ण समान ऊपेर इन तीनो रूम्स में इधर उधर बिखरा रहता था……विनय वशाली मौसी की बेटी पिंकी और उनका बेटा अभी और साथ में वशाली की सहेली जो अब 11थ में हो गयी थी… सब लोग दोपहर को ऊपेर वाली मंज़िल पर इकट्‍ठा हो जाते…….

और खूब मस्ती करते….दिन तो स्कूल का होम वर्क करते और खेल-2 में निकल जाता….पर रात को विनय के दिमाग़ में अपने दोस्तो के साथ की हुई लड़कियों और औरतों की बातें घूमती रहती. आदमी और औरत सेक्स कैसे करते है….कितना मज़ा आता है…..ये सब उसके दिमाग़ में चलता रहता….जून में गर्मियाँ कहर ढा रही थी….उस रात को खाना खाते हुए….

ममता: दीदी मैं क्या बोल रही थी…..कि नीचे आब ठीक सोया नही जाता…..बहुत गरमी है…. आज ऊपेर छत पर सोते है……

किरण: ममता तुझे तो पता है ही ये कब आएँगे कोई पता नही….तू दोनो बच्चों को लेकर ऊपेर चली जा…..

ममता: ठीक है दीदी…..

उसके बाद जैसे ही सब ने खाना खाया, तो ममता विनय और वशाली से कहने लगी…. “चलो बच्चा पार्टी मेरे साथ आओ……और बिस्तरे ऊपेर लेकर चलो….आज हम सब ऊपेर सोएंगे….”फिर तीनो ने बिस्तरों को ऊपेर लेजाना शुरू कर दिया…फिर ममता ने एक टेबल फॅन भी उठाया और ऊपेर ले गयी….ऊपेर छत पर जाकर नीचे तरपाल बिछाई गयी, और फिर उसके ऊपेर बिस्तर बिछा दिए गये. वशाली और विनय के बिस्तर दोनो तरफ़ साइड में थे….

और ममता का बिस्तर उन दोनो के बीच में था……नीचे के तुलना ऊपेर मौसम कुछ ठंडा था….वशाली तो बिस्तर पर लेटने के 5 मिनिट में ही सो गयी….पर विनय की आँखो से नींद कोसो दूर थी….अब रात को हमेशा उसके सोच पर औरतें लड़कियों की बातें हावी रहने लगी थी…..वो आँखे बंद किए हुए लेटा हुआ ऐसे ही कुछ सोच रहा था. कि अचानक से ममता के मोबाइल की रिंग बजने लगी……

हलाकी उस समय मोबाइल आम बात नही थी……बहुत कम लोगो के पास मोबाइल हुआ करता था. मोबाइल का दौर उस समय शुरू ही हुआ था….पर ममता का हज़्बेंड यूके में रहता था. इसलिए उसने ममता को यूके वापिस जाने से पहले एक मोबाइल दिलवा दिया था…..ताकि वो बिना किसी परेशानी के ममता से बात कर सके…..ममता सोच रही थी कि, शायद विनय और वशाली दोनो सो चुके है……अब इतने दिनो बाद ममता को उसके पति का फोन आया था……तो कुछ पुरानी यादें ताज़ा होना तो लाज़मी थी….और ऊपेर से अभी नयी-2 शादी हुई थी….तो आप सोच ही सकतें है कि, उन दोनो के बीच में कैसी बातें चल रही होंगी….

ममता फोन पर बात करते हुए,लगतार अपनी कमीज़ के पल्ले के अंदर हाथ डाल कर अपनी चूत को सहला रही थी……ये देख विनय एक दम हैरान रह गया….ममता बीच-2 में सिसक पड़ती तो, विनय का दिल भी धड़क उठता….कुछ देर बात करने के बाद, उसने कॉल कट की, मोबाइल को अपने तकिये के पास रखा….और फिर दोनो बच्चों की तरफ देखा…..अंधेरे की वजह से ये अंदाज़ा लगा पाना मुस्किल था कि, किसी की आँखे तो खुली नही है….

फिर ममता ने अपनी कमीज़ के पल्ले को उठा कर अपने पेट पर रखा और अपनी सलवार का नाडा पकड़ कर खेंचते हुए, खोल दिया और फिर अपना एक हाथ अंदर लेजा कर अपनी चूत को मसलने लगी….”शियीयीयीयियी अहह” ममता अपनी चूत को मसलते हुए सिसकने लगी….ये देख विनय के लंड में अजीब सी सरसाहट होने लगी…..उसका हाथ पता नही कब अपने आप उसके शॉर्ट्स पर उसके लंड के ऊपेर आ गया…..और वो भी ममता को देखते हुए, धीरे-2 अपने लंड को शॉर्ट्स के ऊपेर से मसलने लगा….

चूत की आग कहाँ उंगलियों से ठंडी होती है….खस्स्तोर पर उनकी जो एक बार लंड का स्वाद चख चुकी हो.....ममता बदहवास सी हो गयी…..जब उंगलियों से चूत की आग ना ठंडी हुई तो, उसने अपना हाथ सलवार से बाहर निकाला, और नाडा बाँधा और सोने की कॉसिश करने लगी….विनय का ध्यान ममता की ऊपेर नीचे हो रही चुचियों पर था….जो उसके साँस लेने के साथ ऊपेर नीचे हो रही थी….विनय का हाथ अब उसके लंड पर शॉर्ट्स के ऊपेर तेज़ी से चलने लगा… ममता जो अभी आँखे बंद किए हुए सोने के कोशिस कर रही थी…..हल्की सी कपड़ो की सरसराहट ने उसका ध्यान अपनी तरफ खेंचा……

उसने लेटे-2 अपनी आँख खोल कर देखा , उसकी आँखे हैरानी से फेल गयी….विनय अपने लंड को शॉर्ट्स के ऊपेर से पकड़े हुए धीरे-2 सहला रहा था…..आज से पहले विनय को वो भोला भाला बच्चा ही समझती थी…..पर आज उसे समझ आ रहा था कि, ये बच्चा अब किशोरा अवस्था की तरफ अग्रसर है….ये देख नज़ाने क्यों ममता के होंटो पर मुस्कान फेल गयी….. उस पल तक ममता के मुँह मे विनय के लिए ऐसा कुछ नही था…..उसने अपना ध्यान दूसरी तरफ करने के लिए करवट बदल ली और विनय की तरफ पीठ कर ली…..

ममता को पता नही चला कब उसे नींद आ गयी…..सुबह के करीब 5 बजे ममता की नींद एक दम से टूट गयी….उसे अपने कुर्ते के ऊपेर कुछ दबाव सा फील हो रहा था…जैसे कोई उसकी चुचियों को धीरे-2 सहला रहा हो…..और अगले ही पल चोन्कते हुए उसकी आँखे खुल गयी…. आसमान मे हल्की-2 रोशनी हो गयी थी….उसने देखा कि, विनय का लेफ्ट हॅंड उसकी चुचि पर है. पर अब उसमे कोई हरक़त नही हो रही थी…..उसने धीरे-2 विनय का हाथ हटा कर साइड मे रखा और उठ कर नीचे चली गयी……नीचे जाते हुए ममता सोच रही थी कि, क्या विनय सच मे उसकी चुचियों को सहला रहा था…..या ये सिर्फ़ मेरा वेहम है…..हो सकता है शायद उसने सोते हुए, हाथ मेरे ऊपेर रख दिया हो…….

ममता अपने रूम मे आकर फिर से सो गयी…..सुबह हुई, तो वशाली और विनय भी उठ कर नीचे आ गये……नहा धो कर फ्रेश हुए, नाश्ता किया तो तब तक शीतल भी अपने बच्चों को लेकर किरण के घर आ गयी……गर्मियों में हमेशा लाइट का कट लग जाया करता था…..और विनय के मामा का घर इतना बड़ा और खुला था, कि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर गरमी कम होती थी. दूसरा ये भी कारण था कि, नाश्ते के बाद किरण सभी बच्चों को हाल में होम वर्क करने के लिए बैठा देती थी……जिसमे ममता उन सब की हेल्प करती थी….उन सब को पढ़ाती थी….

ममता सब बच्चों को 12 बजे तक बाँध कर रखती थी……उस दिन भी ममता जब सब को पढ़ा रही थी, तो उसके दिमाग़ में सुबह वाली घटना घूम रही थी…..वो देखना चाहती थी कि, विनय किस कदर तक इन सब बातों के बारे में जानता है…..क्या उसने जान बुझ कर उसकी चुचियों पर हाथ रखा था…..इसीलिए वो जब विजय को कुछ समझा रही थी….तो कुछ ज़्यादा ही झुक कर उसके कॉपी में कुछ लिख रही थी……आज सुबह नहाने के बाद ही एक खुली सी सलवार कमीज़ पहन ली थी…..कमीज़ के नीचे ब्रा भी नही पहनी थी….कमीज़ का गला इतना डीप था कि, जब वो झुकती तो उसकी चुचियाँ बाहर आने को उतावली होने लगती….और लगभग आधे से ज़्यादा बाहर ही आ जाती……ये सब करते हुए, वो लगातार विनय की नज़रो पर आँखे जमाए हुए थी…..

विनय ने भी एक दो बार उसके कमीज़ के गले से बाहर झाँक रही चुचियों को देखा, उसके मन में भी हलचल हुई, पर विनय उस समय नादान था…..इस कंडीशन को कैसे हॅंडेल करते है……उसे बिल्कुल भी मालूम नही था….इसलिए फिर उसने अपना सारा ध्यान पढ़ने में लगा दिया…..खैर ममता को यकीन होने लगा कि, शायद विनय सो ही रहा था…..और सोते हुए बच्चों का हाथ पैर इधर उधर हो जाना बड़ी बात नही है….


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

बच्चो ने 1 बजे तक पढ़ाई की, अब वक़्त था दोपहर के खाने का…..खाना खा कर फारिग हुए तो, बच्चों ने हुडदन्ग मचा दिया…..किरण चिल्लाई……मरो ऊपेर जाकर यहाँ मत चिल्लाओ….” बच्चे ऊपेर की मज़िल पर जैसे ही जाने लगे तो रिंकी आ गयी…..”अर्रे वशाली कहाँ जा रही है….”

वशाली: ऊपेर खेलने चल ना तू भी साथ…..

रिंकी: (धीरे से वशाली के कान मे कहती है…..) नही तू मेरे साथ चल मेरे घर तुझे एक नयी चीज़ दिखानी है……

वशाली: नही बाद मे चलेंगे…..अभी ऊपेर चल खेलते है…..

रिंकी: समझा कर ना यार बाद मे मोका नही मिलेगा…..अभी घर पर कोई नही है….सब के सामने वो चीज़ तुम्हे नही दिखा सकती…..

ऐसी कॉन से चीज़ है जो सब के सामने देखी नही जा सकती…..वशाली पहले भी कई बार रिंकी से उसके स्कूल की लड़कियों के किस्से सुन चुकी थी…….इसलिए उसके दिल मे हलचल सी होने लगी. जब रिंकी ने कहा कि, वो सब के सामने उस चीज़ को नही दिखा सकती…..”उंह चल फिर जल्दी…” उसके बाद रिंकी जैसे ही वशाली का हाथ पकड़ कर लेजाने लगी तो किरण ने रोक लिया….. “अब तुम दोनो कहाँ जा रही हो इतनी धूप मे…..”

रिंकी: वो आंटी हम हमारे घर जा रहे है…..घर पर कोई नही है ना…..इसलिए इसे भी साथ ले जा रही हूँ…..घर पर ही रहँगे…..

किरण: ठीक है पर धूप में बाहर मत निकलना….

रिंकी: जी आंटी……

उसके बाद दोनो तेज कदमो के साथ घर से बाहर निकली और रिंकी ने अपने घर के बाहर पहुँच कर गेट का लॉक खोला और फिर तेज़ी अंदर दाखिल होकर गेट बंद कर दिया….गेट की कुण्डी लगाई और दोनो सीधा रिंकी के रूम मे जाकर बेड पर लेट गयी…..”अब दिखा ना क्या दिखाना है. मुझे यहाँ सुलाने लाई है क्या…..?”

रिंकी: उफ्फ ओह नानी माँ थोड़ा साँस तो लेने दे दिखाती हूँ…..

रिंकी ने बेड से उतर कर अपने स्टडी टेबल के पास जाते हुए कहा….और फिर नीचे साइड मे रखा हुआ अपना स्कूल बॅग उठा कर टेबल पर रखा और खोल कर उसमे से कुछ निकालने लगी…थोड़ी देर बाद जब वो मूडी तो, उसके हाथ मे एक किताब थी…..

वशाली : तू मुझे ये किताब दिखाने लाई है……

रिंकी: तुझे पता ये कॉन सी किताब है……?

वशाली: नही बताएगी नही तो कैसे पता चलेगा….

रिंकी: (वशाली के पास बेड पर बैठते हुए) मेरे पतोले ये ऐसी वैसी किताब नही है…..ये देख..

रिंकी ने वशाली को जैसे ही वो किताब खोल कर पहला पेज दिखाया तो, वशाली के आँखे खुली के खुली रह गयी……मूह ऐसे खुल गया…..जैसे उसने दुनिया का अठवा अजूबा देख लिया हो. उसमे एक औरत डॉगी स्टाइल में सोफे पर थी…..और उसके पीछे खड़े आदमी का आधे से ज़यादा लंड उस औरत की चूत मे था…..ऐसी तस्वीर वशाली पहली बार देख रही थी….उसने लपक कर रिंकी के हाथ से वो किताब ले ली…..उस किताब में अडल्ट पिक्चर्स के साथ-2 सेक्स स्टोरीस भी थी….

दोनो उन तस्वीरो को पढ़ते हुए, स्टोरीस पढ़ने लगी……कुछ ही देर में दोनो बेहद गरम हो चुकी थी……वशाली और रिंकी की दोनो की चूत में तेज सरसराहट होने लगी थी. दोनो अपनी स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपनी चूतो को मसल रही थी……”हाए वशाली यार अपना टाइम कब आएगा……यार मैं तो तरस रही हूँ कि, काश मेरा भी कोई बाय्फ्रेंड हो…..तुम्हारा दिल नही करता…..”

वशाली: करता है यार…..पर अब किसी राह चलते को तो अपना बाय्फ्रेंड नही बना सकती ना….पर तू तो सहर जाती है…वहाँ पर तो बहुत से लड़के मिलते होंगे रास्ते में……

रिंकी: कहाँ यार तुम्हे तो पता है…..पापा छोड़ने जाते है…..और वैसे भी हमारा स्कूल सिर्फ़ गर्ल्स के लिए है…..मोका ही नही मिलता…..

वशाली: यार कही 10थ के बाद मम्मी पापा मुझे तेरे वाले स्कूल में अड्मिशन ना दिलवा दें…..और इस स्कूल में तो कोई ढंग का लड़का भी नही है…..

रिंकी: यार एक काम हो सकता है……अगर तू मेरा साथ दे तो…..हम दोनो की ऐश हो जाएगी.

वशाली : (उत्सक होते हुए) बोल ना….?

रिंकी: यार तू मेरी विनय के साथ किसी तरह सेट्टिंग करवा दे बस…..और मैं तेरी अपने भाई (अनूप) के साथ करवा दूँगी……

विनय अनूप और वशाली तीनो एक ही क्लास में पढ़ते थे……”ना बाबा ना ये मुझ से नही होगा…..उस भौंदू कोई अकल तो है नही…..अगर उसने मम्मी को कुछ बता दिया ना….तो समझ मेरी खैर नही….मैं नही करती उससे कोई ऐसी वैसी बात……”

रिंकी: यार तुझे बात करने के लिए कॉन कह रहा है…..तुझे उससे बात करने की ज़रूरत नही… तू बस मेरी थोड़ी सी हेल्प कर दिया कर…..देख अब हम जब तेरे घर जाएगे तो, तुम मेरी हेल्प करना ताकि मैं और विनय एक दूसरे के साथ अकेले हो सके…..बाकी मैं खुद कर लूँगी…..

वशाली: और मेरी सेट्टिंग…..

रिंकी: वो तो मैं ऐसे करवा दूँगी…….(रिंकी ने चुटकी बजाते हुए कहा….)

दोनो कलियों के चेहरे पर तेज मुस्कान फेल गयी….रिंकी ने उस बुक को जल्दी से अपने बॅग मे किताबो के बीच छुपा कर रखा और फिर बॅग बंद करके, नीचे रख दिया….दोनो घर से बाहर निकली गेट लॉक काया और वशाली की तरफ जाने लगी…..घर जाते हुए, दोनो के दिल जोरो से धड़क रहे थे…..जैसे ही दोनो घर में दाखिल हुई तो, किरण शीतल के साथ बरामदे मे फर्श पर चटाई बिछा कर बैठी हुई थी…….”क्यों धूप मे इधर उधर घूम रही हो तुम दोनो एक जगह चैन नही है तुमको…….”

रिंकी: वो आंटी घर पर बैठे बोर होने लगी थी…..इसीलिए यहाँ चले आए…..

वशाली: मम्मी हम दोनो भी ऊपेर जा रहे है खेलने……

ये कहते हुए वशाली ने रिंकी का हाथ पकड़ा और ऊपेर चली गयी…..जब ऊपेर पहुँची तो देखा विनय अपनी मौसी के बच्चो के साथ हाइड & सीक खेल रहा था….”हम दोनो को भी साथ खेलाओ….हमें भी खेलना है….” वशाली ने अपने दोनो हाथ कमर पर रखते हुए विनय से कहा…..”ठीक है तुम दोनो बाद में आए हो….इसीलिए तुम दोनो में से ही किसी एक को हम सब को ढूँढना होगा…..”

वशाली ने किरण की तरफ देखा और फिर कुछ देर सोच कर बोली……”मैं ढूंढूँगी तुम सब को…..”

विनय: ठीक है नीचे जाकर बाहर के गेट के पास 20 तक काउंट करो….हम छिपते है….

वशाली: ठीक है…….

उसके बाद वशाली नीचे चली गयी…..सब इधर उधर भागे छुपने के लिए….विनय पीछे बने हुए रूम की तरफ भगा…..पीछे की तरफ होने के कारण वहाँ बहुत अंधेरा रहता था. रिंकी भी उसके पीछे जाने लगी…..”तुम कहाँ आ रही हो….जाओ कही और जाकर छुपो….” विनय ने रिंकी को अपने पीछे आते हुए देख कर कहा….

रिंकी: मुझे समझ मे नही आ रहा कहाँ छिपु….

विनय रूम मे दाखिल हुआ, वहाँ दीवार के साथ बनी हुई एक लकड़ी की अलमारी थी…..जो खाली थी. उसने अलमारी का डोर खोला…..उसमे एक साइड मे छोटी-2 रॅक्स थी…..तो एक साइड बिना रॅक्स के थी….विनय उस में घुस गया…..”विनय मुझे अंदर आने दो….मुझे भी छिपना है….”

विनय: देख नही रही हो…यहाँ जगह कहाँ है…..

रिंकी: तुम थोड़ा पीछे हटो ना…..

रिंकी ने अलमारी के अंदर आते हुए कहा…और मजबूरन विनय को थोड़ा सा पीछे होना पड़ा…. रिंकी ने किसी तरह अपने लिए जगह बनाई, और अलमारी का डोर बंद कर दिया…..डोर बंद होते ही अंदर एक दम अंधेरा हो गया…..दोनो एक दूसरे से एक दम चिपके हुए खड़े थे….जगह ही कहाँ थी कि, उसमे दो जान एक साथ खड़े हो सके, रिंकी पीछे की तरफ पीठ टिका कर खड़ी थी…और विनय रॅक्स के साइड के साथ पीठ टिका कर खड़ा था…..कुछ देर तो उन्हे उस हालत में अड्जस्ट होने मे लग गयी……इधर रिंकी ने अपना खेल शुरू कर दिया था…..

उसने अपने दोनो हाथ सीधे नीचे लटका रखे थे….और उसके राइट वाला उल्टा हाथ विनय के शॉर्ट्स की ज़िप के ठीक ऊपेर लग रहा था….पहले तो विनय को कुछ महसूस नही हुआ, वो बाहर से आ रही आवाज़ों को सुनने की कॉसिश कर रहा था……इधर रिंकी का दिल जोरो से धड़क रहा था….वो भी इतनी समझदार नही थी….ये सब करते हुए, उसके भी हाथ पैर कांप रहे थे….अचानक से विनय को अपनी लंड पर कुछ दबाव बनता हुआ महसूस हुआ, उसने जब हाथ नीचे लेज कर चेक किया तो, पता चला कि ये दबाव रिंकी के हाथ के कारण है…..

भले ही उस समय वो खेल में मगन था…..पर अपने लंड पर शॉर्ट्स के ऊपेर से रिंकी का हाथ महसूस करके, उसके शॉर्ट्स में हलचल होने लगी…धीरे-2 उसका लंड फूलने लगा…जैसे ही रिंकी को भी इस बात का अहसास हुआ,उसने भी धीरे-2 अंजान बनते हुए, अपने उल्टे हाथ को हिलाते हुए, उसके लंड को शॉर्ट्स के ऊपेर से रगड़ना शुरू कर दिया….कुछ ही पॅलो में उसका लंड एक दम लोहे की रोड की तरह तन कर खड़ा हो चुका था….”अब तक रिंकी समझ चुकी थी, कि वो विनय को जितना भोला और नादान समझती है….असल में उतना भी भोला नही है….

रिंकी: उफ़फ्फ़ कितनी गरमी है यहाँ….विनय थोड़ा पीछे होकर खड़ा हो ना…..

रिंकी जान बुझ कर ये सब कर रही थी….विनय के मोटे लंड को अपने उल्टे हाथ पर महसूस करके, रिंकी भी गरम होने लगी थी…उसकी स्कर्ट के अंदर उसके छोटी सी पेंटी में उसकी चूत में तेज धुनकि सी बजने लगी थी…..इसलिए उसने जगह कम होने का ड्रामा करते हुए, अपनी पीठ घुमा कर उसकी तरफ कर दी…रिंकी के इस कदम ने मानो विनय के ऊपेर कहर ही ढा दिया हो….विनय का लंड जो उसके ढीले शॉर्ट्स में एक दम तन कर सीधा खड़ा था… रिंकी के घूम जाने की वजह से अब सीधा रिंकी के चुतड़ों की दरार में जा धंसा…

दोनो के मूह से एक दम से आहह निकल गयी….दोनो एक दूसरे की हालत को अच्छे से समझ पा रहे थी…..पर दोनो में से कोई कुछ बोल नही रहा था….विनय अभी इस खेल मे नया था…. शायद उसमे दिमाग़ में ये चल रहा था कि, रिंकी को अगर पता चल गया कि, उसकी नूनी खड़ी है और उसके चुतड़ों में धँसी हुई है, तो कही वो बुरा ना मान जाए…और कही वो इसकी शिकायत मामी से ना कर दे….इसीलिए वो पीछे रॅक के साथ एक दम से सट कर खड़ा हो गया….उसने अपने पेट को अंदर की तरफ खेंच कर और जगह बनाने की कॉसिश की, थोड़ी कामयाबी मिली भी, पर रिंकी तो जैसे किसी और ही धुन में मगन थी…..

उसने फिर से अपने गान्ड को पीछे की ओर सरका दिया…..इस बार तो उसको विनय का तना हुआ लंड सीधा अपनी चूत के छेद पर दस्तक देता हुआ महसूस हो रहा था…उसके पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी…..उसकी स्कर्ट लंड के दबाव के कारण पीछे से उसके चुतड़ों की दरार में धँसी हुई थी….उसके हाथ पैर अब और तेज़ी से काँपने लगे थे….काश बीच में ये स्कर्ट ना आती तो, आज मैं भी विनय के लंड को पहली बार अपनी चूत के और करीब महसूस कर पाती….ये सोचते ही उसके दिल ने जोरो से धड़कना शुरू कर दिया….

तभी रूम में किसी के कदमो की अहाट सुन कर रिंकी एक दम से हड़बड़ा गयी….उसका हाथ जो उसने सामने अलमारी की लकड़ी के बोर्ड पर रखा हुआ था….वो फिसल गया…और लकड़ी के बोर्ड में तेज आवाज़ हुई…..और अगले ही पल उस अलमारी का डोर भी खुल गया…सामने वशाली खड़ी थी….”हहा ढूँढ लिया मेने तुम दोनो को भी…..” वशाली ने हँसते हुए कहा…..


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

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दोनो जल्‍दी से बाहर आ गये…..वशाली ने ऐसे एक दम से अलमारी का डोर खोला तो विनय थोड़ा डर गया था…और कुछ ही पॅलो में उसका लंड डर की वजह से सिकुड भी गया था….”अब किसकी टर्न है….” रिंकी ने वशाली की ओर देखते हुए कहा….. “पिंकी (शीतल की बेटी) की टर्न है. “ तीनो रूम से बाहर आ गये….. अब पिंकी की बारी थी….विनय की मासी की बेटी की….अब उसे बाकी सब बच्चो को दूनढना था….इसीलिए वो काउंटिंग करने के लिए नीचे चली गयी…..सब फिर से छुपने के लिए भागे…..

पर विनय कुछ पल वही खड़ा रहा….नज़ाने क्यों उसके मन में आ रहा था कि, रिंकी इस बार भी उसके साथ ही उस अलमारी में छुपे….उसने कुछ देर तक वही खड़े होकर रिंकी और वशाली को दूसरे रूम के अंदर घुसते देखा….रिंकी ने भी डोर पर पहुँच कर एक बार फिर से विनय की तरफ देखा तो उसने उसे देख कर हल्की स्माइल दी…..पर अपने भौंदू विनय को इस स्माइल का मतलब तक नही पता था….वो बुझे हुए मन के साथ वापिस उस रूम में आया…पर नज़ाने क्यों वो उस अलमारी में दोबारा नही छुपा….वो उस रूम में पड़ी हुई चारपाई के पीछे जाकर छुप गया…..

दूसरी तरफ दोनो जिस रूम में थी…..उस रूम में घर का काफ़ी पुराना समान पड़ा हुआ था….दोनो एक टूटे हुए टेबल के पीछे छिप कर बैठी हुई थी…..”तो फिर क्या बना कुछ बात बनी कि नही…..” वशाली ने उत्सकता वश उससे पूछा…….

”तू भी ना वशाली कितनी गंदी टाइमिंग है तेरी थोड़ी और देर बाद आती तो शायद कुछ बात बन जाती…..”

वशाली: अच्छा चल मैं आ भी गयी तो क्या हुआ…..अब तू मेरे साथ क्यों छुपी है… उसके साथ ही छुप जाना था….

रिंकी: वो तो मैं नही चाहती थी कि, जिस जगह तुमने हमें पकड़ा है, कोई और उस छुपने की जगह के बारे में जान सके……देख इस बार जब पिंकी ऊपेर आएगी, तो तू खुद ही जान बुझ कर सबसे पहले पकड़ी जाना…फिर तेरा टर्न आएगा तो, मैं उसके साथ छुप जाउन्गी…..उसी अलमारी में….तू जान बुझ कर हमें मत ढूँढना जब तक हम खुद बाहर नही आ जाते….

वशाली: ठीक है…..पर ध्यान रखना कहीं मम्मी या ममता मासी ऊपेर ना जाए…..

रिंकी: तू कुछ इशारा कर देना ना….अगर उनमे से कोई ऊपेर आए तो….

वशाली: ठीक है…….

फिर रिंकी के प्लान के मुताबिक वशाली ने सबसे पहले अपने आप को पिंकी से पकड़वा लिया…. फिर पिंकी ने धीरे-2 सब को ढूँढ लिया….इस बार फिर से वशाली की टर्न थी….जैसे ही वशाली काउंटिंग करने के लिए नीचे गयी, तो सब फिर से छुपने के लिए इधर उधर कमरों में भाग गये….विनय भी फिर से उसी रूम में चला गया….रिंकी भी उसके पीछे आ गयी. विनय अभी सोच ही रहा था कि, इस बार वो कहाँ छुपे, तो रिंकी ने खुद अलमारी का डोर खोला और उसमे घुसते हुए धीरे से फुसफुसा कर विनय को अंदर आने के लिए कहा…..

विनय: नही तुम छुप जाओ…..उसमे जगह बहुत तंग है…..मैं कही और छुप जाउन्गा….

रिंकी: तू आ तो सही…हम अड्जस्ट कर लेंगे….

विनय: पर वशाली को तो अब इस छुपने की जगह का पता है….वो हमें ढूँढ लेगी…..

रिंकी: तो क्या हुआ, वैसे भी वो इस रूम में बाद में ही आएगी….कॉन सा हम दोनो की टर्न आने वाली है…..चल जल्दी आ…..

अब टाइम भी हो चुका था….वशाली किसी भी वक़्त ऊपर आ सकती थी….इसीलिए विनय ने बिना ज़्यादा सोचे समझे उस अलमारी में छुपना ही सही समझा….फिर जो वो कुछ देर पहले महसूस कर चुका था…उस अहसास को उस लरज़िश मज़े को दोबारा भी तो महसूस करना था…..इस बार रिंकी ने पहले ही अपना माइंड मेक अप किया हुआ था कि, क्या करना है और कैसे करना है…..जैसे ही विनय अलमारी के अंदर हुआ और उसने अलमारी का डोर बंद किया, तो अलमारी के अंदर बेहद अंधेरा हो गया….इतना क़ी कुछ भी दिखाई नही दे रहा था….

इस बार दोनो एक दूसरे की तरफ फेस किए आमने सामने खड़े थे….विनय को जैसे ही अपने चेहरे पर रिंकी की गरम साँसे महसूस हुई, तो उसके बदन में सिहरन सी दौड़ गयी… अगले ही पल उसे अपने शॉर्ट्स की ज़िप्प के ऊपेर से कुछ गरम सा अहसास हुआ, विनय अपने दोनो पैरो को जोड़ कर खड़ा था….जब कि रिंकी के पैर विनय के दोनो पैरो के पास फेले हुए थे. जिस समय विनय ने अलमारी का डोर बंद किया था….रिंकी ने उसी समय, अपनी स्कर्ट को आगे से कमर तक ऊपेर उठा लिया था….जो अब उन दोनो के पेट के बीच में फँसी हुई थी….और अब उसकी स्कर्ट नीचे नही हो सकती थी….दोनो के बदन एक दूसरे को टच हो रहे थे….

रिंकी की सेब के आकर की चुचियाँ विनय को अपनी चेस्ट पर दबति हुई महसूस हो रही थी…. धीरे-2 उसका लंड फिर से उसके शॉर्ट्स में अपनी औकात पर आने लगा था….जिसे महसूस करके रिंकी ने अपनी कमर को धीरे-2 हिलाना शुरू कर दिया…..इस बार तो विनय के लंड और उसकी चूत के बीच सिर्फ़ उसकी पेंटी और विनय का शॉर्ट्स ही था….


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

जैसे ही विनय का लंड पूरा तन कर खड़ा हुआ, वो सीधा रिंकी की छोटी सी पेंटी के ऊपेर से उसकी चूत के ठीक बीचो-2 दब गया….”श्िीीईईईई अहह” अपनी चूत पर विनय के सख़्त लंड को महसूस करते ही, रिंकी एक दम सिसक उठी…उसने अपने दोनो हाथ उठा कर विनय के कंधो पर रख लिए…..और धीरे-2 अपनी कमर को हिलाने लगी…..नीचे विनय का लंड भी अब बग़ावत पर उतर आया था….और रह-2 कर झटके खा रहा था…जिसे रिंकी अपनी पेंटी के ऊपेर से महसूस करके, मचल जाती, वो धीरे-2 मदहोश होती जा रही थी….

विनय को अपने लंड में तेज सरसराहट महसूस होने लगी थी….उसे ऐसा लग रहा था कि, जैसे उसके लंड से अभी कुछ निकल जाएगा…..जब उससे बर्दास्त नही हुआ, तो उसने अलमारी का डोर खोल दिया. और बिना रिंकी की तरफ देखे बाहर आ गया…..रिंकी बुत से बनी वही खड़ी उसे रूम से बाहर जाता हुआ देखती रह गयी…..”अर्ररे अब्ब्ब इसे क्या हो गया….इतना अच्छा काम बन रहा था. इस लड़के का भी कुछ पता नही चलता…..” रिंकी की चूत अब दहक रही थी….लंड को लेने के लिए, पर अभी उसे अपनी मंज़िल कोसो दूर नज़र आ रही थी…..

खैर उसके बाद किरण ने सब को नीचे आने के लिए कहा….टाइम काफ़ी हो गया था….इस लिए सब नीचे आ गये….वशाली रिंकी को लेकर अपने यानी कि किरण के रूम में चली गयी….वहाँ पर रिंकी ने जो भी हुआ वो सब वशाली को बता दिया…कुछ ना होने से कुछ तो होना अच्छा ही होता है….भले ही रिंकी और वशाली दोनो पूरी तरह कामयाब नही हुई थी….पर हां रिंकी ने विनय के अंदर के छुपी हुई वासना की आग को हवा ज़रूर दे दी थी….

उस रात भी ममता विनय और वशाली खाने के बाद, ऊपेर छत पर सोने के लिए आ गये…. उन्होने बिस्तर बिछाए और अपनी -2 जगह पर लेट गये…..कुछ ही देर मे वशाली तो सपनो की दुनियाँ मे पहुच गयी….पर विनय और ममता की आँखो से नींद कोसो दूर थी….एक जवान चूत जो अपने पति के लंड के लिए तरस रही थी…..और दिन गिन रही थी कि, कब उसका पति आकर उसकी प्यास को बुझायेगा….दूसरी तरफ एक नूनी जो अब लंड बन रही थी…..अपने साथ रोज हो रहे नये-2 हादसो से उत्सुक दुनिया को और जानने की लालसा लिए, अपनी सोच में मगन था….

आधा घंटा बीत चुका था….पर विनय की आँखो मे नींद नही थी….अचानक से उसने करवट बदल कर अपना फेस जैसे ही, ममता की तरफ किया तो, उसकी टीशर्ट में साँस लेने के कारण ऊपेर नीचे हो रही उसकी 36 साइज़ की चुचियों को देखते ही उसके मन मे आया…..”ममता दीदी की चुचियाँ कितनी बड़ी -2 और मोटी है…..और रिंकी की कितनी छोटी है……जब रिंकी बड़ी हो जाएगी तो उसकी भी ममता दीदी जितनी बड़ी हो जाएँगी…..”

लेटे-2 पता नही विनय को क्या हुआ, उसका दिल अब ममता की चुचियों को छूने का करने लगा. आज ममता की चुचिया उस टीशर्ट में कुछ ज़्यादा ही बड़ी और फूली हुई लग रही थी….उसने लेटे -2 ही ममता का जायज़ा लेना शुरू किया…..जब उसे यकीन हो गया कि, ममता सो रही है, तो उसने अपना एक हाथ धीरे से उठा कर ममता की राइट चुचि पर रख दिया….उसका हाथ कांप रहा था….जैसे ही ममता को अपनी चुचि पर कुछ दबाव सा महसूस हुआ, तो उसके पूरे बदन मे भी सिहरन सी दौड़ गयी……

ममता अभी तक सोई नही थी……पर वो बिना हीले डुले वैसे ही लेटी रही…..वो जानती थी उसकी चुचि पर विनय का हाथ है…….पर वो ये जानना चाहती थी कि, क्या विनय ने सोते हुए फिर से उसकी चुचि पर हाथ रख दिया है……या जान बुझ कर वो ऐसा कर रहा है….कुछ देर वैसे ही बिना हरक़त किए, विनय अपना हाथ उसकी चुचि पर रखे लेटे रहा….उफ्फ क्या नरम अहसास है, पूर्ण रूप से विकसित जवान लड़की या फिर हम ममता को औरत कह सकते है… की चुचियों को छूने का…..विनय के बदन का रोम-2 खड़ा हो चुका था……

उसे अपने अंदर एक अजीब सी बेचैनी महसूस हो रही थी…..बेचैनी कुछ करने की, वो जो उसकी उम्र के बच्चे नही करते, वो जिसे समाज आज तक उससे छुपाता चला आ रहा था…आख़िर इसमे इतना क्या मज़ा आता है…..विनय वासना के नशे में कब इतना चूर हो गया कि, उसने धीरे-2 ममता की चुचि को सहलाना शुरू कर दिया…..और जब फिर भी दिल को तसल्ली ना हुई तो, उसने ममता की चुचि को धीरे-2 दबाना भी शुरू कर दिया….विनय की इन हरकतों से ममता भी उसी पल गरम हो गयी थी…..

पर वो चुप चाप लेटी रही….दूसरी तरह वशाली सो रही थी….और खुद को गरम होता महसूस करके, ममता को लगने लगा कि, अब विनय को यही रोक देना चाहिए…वरना वो भी बहक जाएगी, और फिर उसकी आग को शांत करने वाले भी तो नही है यहाँ….और यहाँ विनय के साथ वो किसी तरह का रिस्क नही ले सकती थी…..ऊपेर वशाली थी तो, नीचे विनय के मामा मामी. पर हाथ आए इस नये बकरे को भी जाने नही देना चाहती थी…..भले ही ये बकरा अभी सेक्स के मामले में मेमना था…..

आज नही तो कल वो कभी ना कभी विनय से अपने तन की आग को बुझा कर शांत कर सकती है. ज़रूरत है तो, विनय को सही ढंग से हॅंडेल करने की….और वो कैसे करना है, ममता बखूबी जानती थी……अचानक से उसने विनय के हाथ को पकड़ लिया, और फिर झटक दिया. विनय की तो मानो जैसे गान्ड ही फॅट गयी हो…..”चुप चाप सो जाओ….” ममता ने थोड़ा सा गुस्से से कहा….और फिर दूसरी तरफ करवट लेकर लेट गयी….

विनय शुकर मना रहा था कि, ममता ने इस समय तो कोई बवाल नही किया….नही तो आधी रात को ही उसकी पिटाई हो जानी थी…..पर सुबह क्या होगा…..अगर ममता ने मामी और मामा को बता दिया तो, नही नही मैं कल सुबह उनसे माफी माँग लूँगा….कह दूँगा कि, मुझसे ग़लती से हो गया…..


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

6

अगली सुबह जब विनय उठा तो, देखा ऊपेर कोई नही था…..ना ही वशाली और ना ही ममता. वो डरता हुआ नीचे आया, विनय आज बहुत सहमा हुआ था….डर था कि, कही ममता ने रात की बात बता ना दी हो….वो कैसे अपनी मामी का सामना करेगा….जैसे ही वो नीचे आया, तो सामने से मामी किचन से बाहर निकली….विनय की तो जैसे डर के गान्ड फटने को आ गयी. पर अगले ही पल उसने राहत के साँस ली जब मामी ने मुस्कुराते हुए उससे फ्रेश होने को कहा….

विनय भाग कर बाथरूम में घुस गया….फ्रेश हुआ नाहया और फिर बाहर आया…..तो देखा ममता डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी….वो डरता हुआ डाइनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया. ममता ने बिना उसकी तरफ देखे उसकी प्लेट मे नाश्ता डाल कर उसे दिया….और फिर से किचन मे चली गयी….विनय ने जल्दी से नाश्ता ख़तम किया और उठ कर अपने रूम मे आ गया….वो अब ममता के सामने जाने से घबरा रहा था….वो उससे ऩज़रें नही मिलाना चाहता था…वो काफ़ी देर तक अपने रूम मे बैठा रहा…करीब 10 बजे वशाली रूम मे आई…..” क्या कर रहे हो भौंदू राम….” वशाली ने हंसते हुए कहा…..

विनय: तुम से मतलब…..अगर कोई काम है तो बोल…..

वशाली: वो ममता मासी बुला रही है….

विनय: (डर कर चोन्कते हुए) क्यों…..?

वशाली: क्यों आज स्कूल का होम वर्क नही करना है क्या….?

विनय: ह्म्‍म्म आता हूँ….

वशाली: जल्दी आना…..

वशाली के बाहर जाते ही, विनय ने अपने साँस को दुरस्त किया, और अपना बॅग उठा कर डरते हुए बाहर आ गया…..यहाँ उसके मासी शीतल के बच्चे पिंकी और अभी भी वशाली के साथ बैठे होम वर्क कर रहे थे….वो ममता की तरफ देखे बिना आगे बढ़ा और सब बच्चों के पीछे जाकर बैठ गया……ममता मन ही मन ये सोच कर मुस्करा रही थी, कि उसने कल बेचारे को कुछ ज़्यादा ही डरा दिया था…..खैर ममता ने नॉर्मल बिहेव करते हुए, सबको होम वर्क करवाया….उसके बाद दोपहर का खाना खाने के बाद सब ऊपर खेलने के लिए चले गये….

पर आज रिंकी नही आई थी……जब उसने वशाली से पूछा तो पता चला कि, रिंकी 3-4 दिन के लिए अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ गयी है….उस दिन विनय का खेल में मन नही लगा…इसीलिए वो ज़्यादा देर नही खेला और नीचे अपने रूम में आ गया….दोपहर को गरमी बढ़ गयी थी…इसीलिए रूम में बेड के ऊपेर लेटते ही, पंखे की ठंडी हवा से उसे नींद आने लगी….अभी कुछ ही देर हुई थी कि, बाहर से मामी की उँची आवाज़ आई, उसे समझ में तो नही आया कि, मामी क्या बोल रही है…..पर हां इतना ज़रूर समझ में आ गया था कि, मामी किसी बात को लेकर बेहद खुश है…..

अब मामी खुश क्यों है ये जानने के लिए विनय रूम से बाहर आ गया….मामी शीतल और ममता से बात कर रही थी….उसके चेहरे पर जो खुशी थी….वो देखने लायक थी… जैसे ही किरण ने विनय को देखा तो उसने अपनी दोनो बाहें फेलाते हुए, उसे अपने पास आने को कहा…..”आजा मेरा राजकुमार इधर आ अपनी मामी के पास……” विनय मामी की बाहों में जाते ही उसकी गोद में सर रख कर लेट गया…..”क्या हुआ मामी जी……”

मामी: तेरे मामा का रिश्ता हो गया है परसो मँगनी है…..?

विनय: क्या मामा का…..

मामी: धत पगले ये वाले मामा नही…मेरे छोटे भाई की, वो भी तेरे मामा ही लगते है ना…

विनय: तो आप वहाँ जा रही हो…..?

मामी: हां हम सब चलेंगे ना…..

विनय: क्या सच……

मामी: हां सच…..

उसके बाद अगले दिन सारा परिवार ममता और मामी के मायके चला गया….अगले ही दिन किरण के छोटे भाई की मँगनी हो गयी थी……जिस लड़की का मामी के भाई से रिश्ता हुआ था….वो उसी शहर की रहने वाली थी….जहाँ पर किरण और अजय का घर था….मँगनी के बाद ये तय हुआ कि, शादी के सारी तैयारियाँ किरण के घर पर ही होंगी….वही से बारात निकले गी और वही सारी रस्मे भी होंगी…..क्योंकि किरण का मायका उनके शहर से काफ़ी दूर था….सितंबर की 25 को शादी का दिन फिक्स कर दिया गया था…..क्योंकि बच्चो के इंटर्नल एग्ज़ॅम सितंबर के 23 तक ख़तम हो जाते थे.और फिर बच्चो की 7-8 की छुट्टी भी हो जाती थी……

मँगनी के अगले दिन जब सब लोग वापिस जाने के तैयार करने लगी तो, किरण की माँ ने उसे अपने पास दो दिन रुकने के लिए कहा, ताकि वो अपनी बेटी के साथ शादी के लिए कुछ खरीद दारी कर सके….किरण का भी वहाँ रुकने का बहुत मन था….आख़िर वो करीब 1 साल बाद अपने मायके आई थी….इसलिए उसने अपनी माँ को इनकार नही किया…इधर वशाली भी ज़िद्द पर अड़ गयी कि, वो मम्मी के साथ वही रहेगी…..


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

उसके बाद विनय अपने मामा और ममता के साथ अपने घर वापिस आ गया….रात को 8 बजे अपने घर पहुचे थी…..मामा जी ने रास्ते मे ढाबे से ही खाना ले लिया था….खाना खा कर सो गये….अगली सुबह जब विनय उठा तो, घर मे कोई नही था….इन बीते दिनो मे विनय ने डर की वजह से ममता से बात करना तो दूर आँख मिला कर देखा तक नही था…सुबह उठ कर वो फ्रेश हुआ, बाहर बरामदे मे आया तो देख घर एक दम सूना था….ममता के रूम का डोर अभी भी बंद था….वो काफ़ी देर तक बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठा इंतजार करता रहा….

पर ममता रूम से बाहर नही आई, दरअसल रात को उसके हज़्बेंड का यूके से फोन आया था. इसीलिए वो देर रात तक उसके साथ बात करती रही…..फिर सुबह विनय के मामा ने भी उसे 6 बजे उठा दिया था….उन्हे शॉप पर जाना था…..इसीलिए ममता ने ही सुबह उठ कर उनका नाश्ता और लंच तैयार करके दिया था….घर एक दम सूना पड़ा था….जब काफ़ी देर तक ममता नही उठी तो, विनय खुद ही किचन मे चला गया…..और अपने लिए चाइ बनाने के लिए जैसे ही उसने बर्तन उठाया तो उसे पीछे से ममता की आवाज़ सुनाई दी…..

ममता: विनय क्या कर रहे हो तुम…..?

विनय: (घबरा कर पीछे देखते हुए) वो मैं वो अपने लिए चाइ बना रहा था….

ममता: मुझे नही कह सकते थे…..?

विनय: आप उठी नही थी……

ममता: तो मुझे उठा देते…..जाओ बाहर जाकर बैठो….मैं अभी तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूँ….

विनय: जी…..

ममता: ब्रश कर लिया….

विनय: जी और नहा भी लिया….

ममता: गुड बड़े समझदार हो…..अब तुम बड़े हो गये हो….

ममता ने मुस्कुराते हुए कहा….विनय बिना कुछ बोले बाहर चला गया और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर इंतजार करने लगा…..करीब 15 मिनिट बाद, ममता दो प्लेट्स मे सॅंडविच लेकर आई और टेबल पर रख कर फिर किचन मे वापिस चली गयी…..विनय ने एक प्लेट उठा कर सॅंडविच खाना शुरू कर दिया….इतनी में फिर से ममता वापिस आई, उसके हाथ मे ट्रे थी….उसमे एक ग्लास दूध और एक कप चाइ थी…..

ममता ने दूध का ग्लास विनय के सामने रखा और चाइ का कप अपने सामने रख कर बैठ गयी और नाश्ता करने लगी…..विनय दूध के ग्लास को ऐसे देख रहा था….जैसे उसने दूध पहली बार देखा हो….

ममता: क्या हुआ पीओ ना…..?

विनय: दूध चाइ नही बनाई मेरे लिए…..?

ममता: नही दूध पी लो…..

विनय: नही मुझे अच्छा नही लगता……

ममता: (मुस्करा कर अपनी कमीज़ के गले के अंदर हाथ डाल कर अपनी ब्रा के स्ट्रॅप्स को ऊपेर खेंचती है….जिससे उसकी चुचियाँ ऊपेर को उठती है और फिर नीचे हो जाती है…..) मैं तो समझती थी कि, तुम्हे दूध ज़्यादा पसंद है……

विनय ममता की इस हरक़त से एक दम झेंप जाता है….बेचारे की कुछ बोलने की हिम्मत नही होती….विनय ने जल्दी-2 अपना नाश्ता ख़तम करना शुरू कर दिया…और साथ-2 दूध भी पीने लगा….ममता विनय की हालत देख कर मन ही मन मुस्कुरा रही थी….”अर्रे आराम से कही भागे थोड़ा जा रहा है…..” ममता ने फिर से अपनी ब्रा के स्ट्रॅप्स को ऊपर की तरफ खेंचा तो उसकी दोनो चुचियाँ फिर से उछल कर रह गयी……

विनय ममता की बात सुन कर एक दम चोंक सा गया….और हैरानी से ममता की ओर देखने लगा….”दूध का ग्लास कहीं भागा थोड़े ही जा रहा है….आराम से पीओ…” उसने फिर से मुस्कुराते हुए कहा….पर विनय ने फिर से अपने सर को झुका लिया….ममता और विनय दोनो घर में अकेले थे….इसीलिए ममता कुछ ज़्यादा ही खुल कर विनय से बात करने की कोशिस कर रही थी…वो जानती थी कि, विनय अभी बच्चा है….वो किसी भी बात को लेकर बिदक सकता है….इसीलिए उसे हर कदम सोच समझ कर उठाना था…..

पर घर मे विनय को अपने साथ अकेला पाकर उसका मन मचल रहा था….चूत में अजीब सी सरसराहट हो रही थी…..वो धीरे-2 सहजता से बात को आगे बढ़ाना चाहती थी…अभी दोनो ने नाश्ता ख़तम ही किया था कि, डोर बेल बजी…..ममता ने जाकर गेट खोला तो देखा, सामने शीतल खड़ी थी….ना चाहते हुए भी ममता जबरन मुस्कुराइ…..आज पहली बार उसे शीतल का घर आना अच्छा नही लगा था…..”नमस्ते दीदी आइए ना…” ममता ने जबरन मुस्कुराते हुए कहा…..

शीतल के साथ उसके बच्चे पिंकी और अबी भी थे……वो अपने बच्चों को लेकर अंदर आई तो, ममता गेट बंद करने लगी…..”अर्रे गेट बंद मत करो…..मैं तो बच्चों को छोड़ने आई थी…..मैं ज़रा मार्केट जा रही थी…..”

ममता: ओह्ह्ह अच्छा…..

शीतल: और बताओ मँगनी ठीक से हो गयी…

ममता: जी सब बहुत बढ़िया से हो गया…..

शीतल: चलो भगवान का शूकर है…..बधाई हो तुम्हे नयी भाभी आने वाली है घर पर.

ममता: जी आप को भी…..आइए ना थोड़ी देर तो बैठिए…..

शीतल: नही अब मैं चलती हूँ……तुम बच्चों का ध्यान रखना….और हां मेरा शोना विनय कहाँ है…..

ममता: जी वो नाश्ता कर रहा है…..

शीतल: अच्छा ठीक है दोपहर को आकर मिलती हूँ……


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