Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - Printable Version

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RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

किरण इस बात से अंज़ान थी कि, विनय ने आज के लिए क्या प्लान कर रखा है….इधर विनय के लंड पर वियाग्रा का असर अब उफ्फान पर था…उसका लंड शॉर्ट्स को फाड़ कर बाहर आने के लिए मचल रहा था….पर अभी भी उसकी हिम्मत नही हो रही थी कि, वो कुछ कर सके….वो करवट के बल लेटा हुआ मामी की पीठ को देख रहा था…मामी की साड़ी और पेटिकोट मे उभरी हुई गान्ड को देख कर उसका लंड झटके पे झटके खा रहा था… करीब 20 मिनट तक वो ऐसे ही लेटा रहा….किरण को अब नींद आनी शुरू हो गई थी….उसकी आँखे नींद के कारण भारी होने लगी थी…. किरण भी सपनो की वादियों मे पहुँच चुकी थी…विनय की भी अब बर्दास्त से बाहर हो चुका था. रात के करीब 12 बाज चुके थे….किरण को अपने चुतड़ों की दरार मे कुछ गरम और सख़्त से चीज़ चुभती हुई महसूस हुई, 



जो उसकी गान्ड के छेद पर रगड़ खा रही थी….किरण अपनी गान्ड के छेद पर हो रही सरसराहट के कारण उठ गई थी…जब उसे अहसास हुआ कि, कोई मोटी और सख़्त चीज़ उसके चुतड़ों की दरार मे आगे पीछे हो रही है, तो उसने अपनी आँखे खोली तो उसका कलेजा मुँह को आ गया….उसकी साड़ी उसके चुतड़ों तक ऊपेर उठी हुई थी….उसकी पैंटी उसकी जाँघो तक नीचे उतरी हुई थी….और विनय का हाथ उसकी नाभि के पास था…विनय उससे बिकुल चिपका हुआ था…

उसका लंड किरण अपनी गान्ड के छेद पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस कर पा रही थी…जब विनय के लंड का गरम सुपाडा उसकी गान्ड के छेद पर रगड़ ख़ाता तो, किरण के रोम-2 मे मस्ती की लहर दौड़ जाती… और उसके चूतड़ आपस मे भिन्चने लगते….

किरण बहुत ज़्यादा घबरा गई थी….दूसरी तरफ वशाली पीठ के बल लेटी सो रही थे… उसके दिल मे इस बात का खोफ़ बैठा हुआ था कि, कही वशाली ने उठ कर उसे और विनय को इस हालत मे देख लिया तो, बहुत बड़ी गड़बड़ जो जाएगी….और ना ही वो विनय को माना कर सकती थी….क्योंकि अगर वो विनय को रोकती, तो विनय को पता चल जाता कि वो सो नही रही थी…इससे पहले कि किरण कुछ सोच पाती…विनय ने अपना हाथ उसके पेट से उठा कर उसकी दोनो जाँघो के बीच मे रखते हुए, उसकी ऊपेर वाली टाँग को हल्का सा उठा कर आगे की तरफ सरका दिया…जैसे ही किरण की ऊपेर वाली टाँग नीचे वाली टाँग से उतरी, तो विनय का लंड उसकी गान्ड के छेद पर रगड़ ख़ाता हुआ लंड का सुपाडा किरण की चूत की फांको के बीचो-बीच आ लगा…

अपने भानजे के लंड के सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही, उसकी चूत पिघल उठी….विनय को अपने लंड के सुपाडे पर मामी की चूत से रिस्ता हुआ गरम पानी सॉफ महसूस हो रहा था…जिसे महसूस करके विनय एक दम मदहोश हो गया था…उसने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मामी की चूत के छेद पर सेट करते हुए आगे की तरफ पुश किया तो, लंड का सुपाडा मामी की पानी से लबलबा रही चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा…”सीईईईईईईईईईईईईईईईईईई” किरण ने सिसकते हुए बेड शीट को अपनी मुट्ठी मे दबोच लिया….अपने भान्जे के लंड के गरम सुपाडे को अपनी चूत के छेद मे दहकता हुआ महसूस करते ही, किरण की आँखे मस्ती मे बंद होती चली गई….उसकी चूत के छेद ने विनय के लंड के सुपाडे को ऐसे दबाना शुरू कर दिया… जैसे उसकी चूत विनय के लंड को दबा कर अंदर की ओर ले लेना चाहती हो…

किरण जिस हालत मे थी….उसे डर था कि, कही वशाली ना उठ जाए…फिर किरण ने सोचा कि शायद विनय उस दिन की तरह थोड़ी देर अंदर रुकने के बाद ढीला पड़ जाएगा..और वो खुद ही सो जाएगा….तभी उसे अपनी चूत की दीवारो पर विनय के लंड के सुपाडे की रगड़ महसूस हुई….उसे अपनी चूत की दीवारें बुरी तरह खुलती हुई महसूस हो रही थी….विनय का लंड धीरे-2 मामी की चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसता जा रहा था….किरण को अपनी चूत पूरी तरह से भरती हुई महसूस हो रही थी…किरण अपनी मस्ती से भरी अध खुली आँखो से वशाली की तरफ देख रही थी. धीरे-2 विनय का पूरा लंड किरण की चूत की गहराइयों मे समा गया…”हाइई इस कंज़र का इतना बड़ा है…..मेरी पूरी फुद्दि भर दी…काश आज वशाली यहाँ ना होती. तो उछल -2 कर तेरे लंड को अपनी चूत मे लेती….” किरण ने मन ही मन सोचा…

विनय के लंड का सुपाडा किरण की चूत की गहराइयों मे कोहराम मचा रहा था… जिसे किरण अपनी बच्चेदानी को चूमता हुआ महसूस कर रही थी…किरण के रोंगटे रोमांच के मारे खड़े हो चुके थे….विनय कुछ देर ऐसे ही रुका रहा…फिर उसने धीरे-2 अपने लंड को बाहर निकालना शुरू किया….तो किरण को फिर से मस्त कर देने वाली रगड़ अपनी चूत की दीवारो पर महसूस हुई, तो उसने अपने दाँतों मे तकिये को दबा कर अपने आप को सिसकने से रोका….और फिर जैसे ही विनय का लंड आधे से ज़यादा बाहर आया तो, विनय ने फिर से अपने लंड को अंदर करना शुरू कर दिया….किरण अपनी चूत की दीवारो को रगड़ते हुए विनय के लंड को महसूस करते हुए मदहोश होती जा रही थी…1 घस्सा….अहह दूसरा आहह उंह सीईईईईईई ओह्ह्ह्ह तीसरा.. रुक जा विनय उंह

किरण मस्ती के सागर मे गोते खाते हुए, विनय के धक्कों को गिन रही थी….ये सोच कर कि विनय अब झड जाएगा….पर किरण क्या जाने उसके लाड़ले ने आज उसकी क्या हालत करनी है…चार ओह हाइईए आज खैर नही किरण….उंह सीईईईईईई….” इधर विनय अब धीरे-2 अपनी रफ़्तार को बढ़ाने लगा था….मामी ने किसी बच्चे को जनम नही दिया था…इसलिए उसकी चूत ममता जितनी ही टाइट थी…विनय भी आज मामी के स्वर्ग के द्वार पर पहुँच कर मदहोश हुआ जा रहा था…मामी की चूत भी अपने भानजे के लंड पर अपने कामरस का लेप लगा कर उसे चिकना बना रही थी. जिससे विनय का लंड मामी की गरम चूत मे फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था.

जब विनय का पूरा लंड किरण की चूत मे घुसता तो, विनय की जांघे मामी के चुतड़ों पर चिपक जाती….अपने चुतड़ों को विनय की जाँघो के नीचे दबते हुए महसूस करके, किरण के बदन मे कपकपि सी दौड़ जाती…किरण अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी…तभी किरण की दूसरी तरफ लेटी वशाली नींद मे हिली तो, किरण एक दम से घबरा गई….और बिना पलके झपकाए वशाली की तरफ देखती रही…पर विनय तो जैसे अपने ही धुन मे मगन था….अब वो अपने लंड को सुपाडे तक मामी की चूत से बाहर निकाल-2 कर पेल रहा था…वशाली के हिलने से खोफ़ज़ादा किरण धीरे-2 उल्टी होने लगी…ये सोच कर कि, विनय का लंड उसकी चूत से बाहर आ जाएगा….पर जैसे -2 वो पेट के बल उल्टी होती गई…वैसे-2 विनय उसके ऊपेर आता गया…

और फिर एक पल ऐसा आया कि, जब विनय अपनी मामी के ऊपेर लेटा हुआ अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था….उसने मामी की चूत मे धक्के मारते हुए किरण की कमर को दोनो तरफ से पकड़ा और उसको ऊपेर उठाने लगा….किरण को भी मजबूरी मे अपनी गान्ड को उठाते हुए घुटनो के बल होना पड़ा….जैसे ही किरण घुटनो के बल होकर डॉगी स्टाइल मे आई…विनय एक दम से जोश मे भर उठा….


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उसने अपने लंड को पूरी रफ़्तार से मामी की चूत की गहराईयो मे उतारना शुरू कर दिया…किरण ने भी हालात के सामने अपने हथियार डाल दिए…और विनय के लंड को अपनी चूत मे अंदर बाहर होते हुए रगड़ खाते महसूस करने लगी….विनय के लंड का सुपाडा जब उसकी चूत की गहराइयों मे जाकर उसकी बच्चेदानी से टकराता तो, किरण के पूरे बदन मस्ती की लहर दौड़ जाती…..

विनय के जबरदस्त झटको से किरण झड़ने के करीब पहुँच गई…उसकी चूत ने अंदर ही अंदर विनय के लंड को दबाना शुरू कर दिया….किरण को अपनी चूत मे तेज खीचाव महसूस होने लगा…उसका बदन अकड़ने लगा…और फिर झड़ते हुए उसकी कमर ने झटके खाने शुरू कर दिए…झड़ते हुए किरण की चूत ने विनय के लंड को अपनी दीवारो मे ऐसा भींचा कि, विनय भी और देर ना टिक पाया…और मामी की चूत की गहराइयों मे अपने वीर्य की बोछार कर दी….विनय अपने लंड को किरण की चूत की गहराइयों मे दबाए हुए, तेज-2 साँसे लेता रहा…फिर जैसे ही विनय का लंड सिकुड कर किरण की चूत से बाहर आया…तो किरण बेड पर लूड़क गई….

विनय ने अपना शॉर्ट्स जल्दी से उठाया…और पहन कर डोर खोल कर बाहर चला गया… विनय के जाने के बाद किरण बदहवास सी उठी और उठ कर बैठते हुए अपनी चूत की तरफ देखने लगी…उसकी चूत के झान्टे और फांके दोनो उसके कामरस और विनय के वीर्य से सनी हुई थी….उसने अपनी पैंटी को पकड़ और अपनी चूत और झान्टो पर लगे हुए पानी को सॉफ किया….
तो ये देख कर किरण की आँखे खुली की खुली रह गई…कि उसके पैंटी उस पानी से पूरी तरह भीग गई थी…आज तक उसकी चूत ने भी इतना पानी नही फेंका था…



किरण ने अपनी चूत को पैंटी से सॉफ किया…और बेड पर लेट गई…..विनय भी अपने लंड को सॉफ करके वापिस रूम मे आ गया….और बेड पर लेट गया….विनय दिल ही दिल मे खुशी से झूम रहा था…वो अपनी मामी की तरफ करवट किए हुए लेटा हुआ था…मामी की कमर के कटाव को देखते हुए उसका लंड फिर से उसके शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा था…मामी के किसी तरह का विरोध और गुस्सा ना करने से विनय की हिम्मत अब बढ़ चुकी थी….वो फिर से मामी की तरफ खिसक कर मामी के पीछे से लिपट गया…जैसे ही किरण को अपनी साड़ी के ऊपेर से विनय के तने हुए लंड का अहसास हुआ तो, किरण एक दम से चोंक गई….”हाइए इस कंज़र का तो अभी भी कितना सख़्त खड़ा है….लगता है आज रात ये मुझे सोने नही देगा….और ज़रूर मुझे मरवाएगा…” हालाकी विनय के लंड के ताँव को महसूस करके किरण की चूत भी फडफडाने लगी थी….

पर उसे पास मे लेटी हुई वशाली के जाग जाने का डर था…इसीलिए अब वो और रिस्क नही लेना चाहती थी….उसने विनय के हाथ को पकड़ कर झटक दिया…और धीरे से फुसफुसा..वशाली जाग जाएगी…विनय मन ही मन मुस्करा पड़ा…किरण कहाँ जानती थी कि, विनय ने उसे नींद की गोलियाँ दे रखी है…पर वो ये बात अपनी मामी को बताने से डर रहा था…इसीलिए विनय ने भी चुप चाप सो जाना ही सही समझा…अगली सुबह जब विनय उठा तो, बेड पर कोई नही था….विनय ने टाइम देखा तो सुबह के 9 बज चुके थे….विनय जब उठ कर बाहर आया तो, किरण सभी फॅमिली मेंबर्ज़ के साथ बैठी हुई बातें कर रही थी…अजय अपनी शॉप पर जा चुका था…किरण के पापा कह रहे थे कि, वो और उनकी पत्नी आज रिस्तेदारो को कार्ड बाँटने के लिए जा रहे है…और ममता अपने पति और भाई के साथ अपने ससुराल जा रही है…..क्योंकि जब से ममता का पति अब्रॉड से वापिस आया था…वो अपने घर नही गया था….

किरण ने विनय को फ्रेश होने के लिए कहा….जब विनय फ्रेश होकर आया तो, किरण ने उसका नाश्ता टेबल पर लगा दिया…विनय नाश्ता करने लगा…नाश्ते के बाद वो वही बैठ कर टीवी देखने लगा…ममता उसका हज़्बेंड और उसका भाई ममता की ससुराल मे जाने की तैयारी कर रहे थे…किरण ने ममता को वशाली को भी साथ मे लेजाने के लिए कहा तो, ममता खुशी-2 मान गई….दोपहर के करीब 1 बजे सब लोग एक साथ घर से निकल गए…पीछे विनय और किरण घर अकेले रह गए….सब लोगो के जाने बाद किरण ने गेट बंद किया और हॉल मे आ गई….जहाँ पर विनय बैठा टीवी देख रहा था…किरण ने अपनी साड़ी के पल्लू से अपने चुचियों पर आए हुए पसीने को सॉफ करते हुए विनय की तरफ देखा तो, पाया कि वो उसके ब्लाउज के ऊपेर से झाँक रही चुचियों को तरस रही नज़रों से देख रहा था….

किरण: (होंठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए….) विनय तुम बहुत खराब होते जा रहे हो आज कल….

विनय मामी के बात सुन कर एक दम से हड़बड़ा गया…..कल रात जो भी हुआ था…वो खामोशी से हुआ था….और विनय इस बात के लिए बिल्कुल भी तैयार नही था कि, जब मामी से आमना सामना होगा तो वो क्या जवाब देगा….विनय ऐसे चोंक कर हड़बड़ाया जैसे नींद से जागा हो..”जी जी क्या…?” किरण विनय की हालत पर मुस्कुराते हुए बोली…” क्या जी जी तुम बहुत शैतान हो गए हो….कल रात कितना तंग किया मुझे….तुम्हे शरम नही आई मेरे साथ ये सब करते हुए…मे तो वशाली की वजह से तुम्हे कुछ कह भी नही पाई….” ये सुनते ही जैसे विनय की गान्ड से हवा निकल गई….उसके चेहरे का रंग एक दम से उड़ गया….वो कुछ पल अपने सर को झुकाए हुए सहमा सा बैठा रहा….”अब बोलता क्यों नही….” किरण ने विनय का हाथ पकड़ कर हिलाते हुए कहा…तो विनय ने किरण के चेहरे की तरफ देखा…..

और अपने गाले का थूक निगलते हुए बोला….”वो वो आप मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो…” विनय की बात सुन कर किरण के होंठो पर जो मुस्कान थी वो और फेल गई… “अच्छा अच्छी लगती हूँ तो वो सब करेगा मेरे साथ बोल….” किरण ने झुक कर अपने ब्लाउज मे कसी हुई चुचियों को दिखाते हुए कहा…पर विनय मामी की बात का कोई जवाब नही दे पाया…”बोल ना तुम्हे पता है तुमने कितना बड़ा ग़लत काम किया है..? “ अब विनय की हालत और पतली हो गई….किरण भी इस बात को भाँप गई थी कि, विनय बातो का खेल खेलना नही जानता….”हां पता है….” विनय ने नीचे सर झुकाए हुए कहा….”पता है फिर भी तुमने वो ग़लत काम मेरे साथ किया…?” अब विनय ने भी अपनी बात क्लियर करने का फैंसला कर लिया था…”मुझसे कंट्रोल नही होता. “ विनय ने आख़िर अपनी दिल की बात कह ही दी….

किरण: किस पर कंट्रोल नही होता..क्या कंट्रोल नही होता तुझसे…?

विनय: जब मैं आपको देखता हूँ….

किरण: मुझे देखता है तो क्या….अच्छा जैसे तू अब मेरे मम्मो को देख रहा है…


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किरण ने आग मे और घी डाल कर उसको भड़काया….”अच्छा क्या दिल करता है..जब तू मेरे मम्मो को देखता है….” विनय चुप रहा अब और आगे बोलने की हिम्मत नही हुई…”बोल क्या दिल करता है कि, मामी के मम्मो को चुसू….” किरण ने खुद ही विनय के मन मे छुपी हुई बात को कह दिया…और विनय के पास आकर सोफे के ऊपेर झुकते हुए अपनी चुचियों को उसके चेहरे के करीब ले गई…”बोल विनय तुम्हारा यही दिल करता है ना….कि तुम मेरे मम्मो को चूसो….?” विनय ने अपने सर को उठा कर मामी की आँखो मे देखा….और फिर घबराते हुए हां मे सर हिला दिया… “अच्छा मेरे मम्मे चूस कर तेरे कलेजे को ठंडक मिल जाएगी…बोल…जल्दी बोल…?” किरण ने इस बार विनय की चिन को पकड़ कर उसकी आँखो मे देखा…तो विनय ने फिर से अपने गाले का थूक गटकते हुए हां कह दिया….”हाइए विनय तू कितना बेशरम हो गया है….देख रात को तू मुझे तंग मत करना…अगर वशाली देख लेती तो तेरी क्या हालत करनी थी तेरे मामा ने तू सोच भी नही सकता….”

किरण: देख मे तुम्हे अपने मम्मे चुसवा देती हूँ…पर इससे आगे कुछ करने की कॉसिश भी मत करना….और ना दोबारा मुझे तंग करना…

ये कहते हुए किरण ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया…और विनय की जाँघो के दोनो तरफ अपने घुटनो को टिकाते हुए सोफे पर बैठ गई…उसने मुस्कराते हुए विनय की तरफ देखा….और फिर अपने ब्लाउज के हुक्स खोलने लगी..विनय ये सब अपनी हैरानी से भरी आँखो से देखते हुए अपने गले का थूक बार-2 गटक रहा था….जैसे जैसे मामी के ब्लाउज के हुक्स खुल रहे थी….वैसे वैसे विनय की आँखो के सामने मामी के ब्लॅक कलर की ब्रा में कसी हुई चुचियाँ सामने आती जा रही थी…विनय की हालत देख कर किरण अंदर ही अंदर ख़ुसी से उछल रही थी....किरण ने अपने ब्लाउज के हुक्स खोल कर अपनी ब्रा के कप्स को नीचे से पकड़ कर ऊपेर उठाया तो, उसकी चुचियाँ उछल कर ब्रा के क़ैद से बाहर आ गई…..

विनय अपनी मामी की कसी हुई गुदाज चुचियों और उसके काले रंग मोटे-2 निपल्स को आँखे फाडे घुरे जा रहा था…”अब जल्दी कर ऐसे क्या देख रहा है….” किरण ने अपनी राइट चुचि को पकड़ कर दबाया तो, उसके चुचि का निपल और नोकदार बन कर सामने की ओर उभर आया…विनय ने फिर से मामी की आँखो मे झाँका तो, किरण ने ऐसे बोला जैसे वो ये सब जल्द से जल्द निपटा लेना चाहती हो….विनय ने अपने काँपते हुए होंठो को खोल कर जैसे ही मामी के निपल्स पर रखा…किरण का बदन बुरी तरह से झंझणा गया….उसने मस्ती से बंद होती आँखो से विनय की तरफ देखा…और फिर जैसे ही विनय ने उसकी चुचि को अपने होंठो मे भर कर चूसा तो, उसकी आँखे बंद हो गई….उसने अपने आप को सिसकने से रोकने के लिए अपने होंठो को अपने दाँतों मे भींच लिया…और विनय के सर को पकड़ कर अपने चुचि पर दबाते हुए मस्ती भरी आवाज़ मे बोली….”सीईईई विनय जल्दी कर ना……मुझे घर का काम भी करना है…” 

विनय का लंड उसके शॉर्ट्स मे अब तन चुका था…जो उसकी जाँघो के ऊपेर बैठी मामी की गान्ड की दरार मे घुसने की कॉसिश कर रहा था…किरण भी अपने भान्जे के लंड को अपनी गान्ड की दरार मे चुभते हुए महसूस करके और मचल उठी…” ओह्ह्ह विनय…..” तभी बाहर एक दम से डोर बेल बजी…” किरण और विनय दोनो जल्दी से अलग हुए….और किरण ने अपनी चुचियों को ब्रा के अंदर करते हुए ब्लाउज के हुक्स को बंद करते हुए कहा…”जा देख कर आ कॉन आ गया इस टाइम….” किरण ने झुनझूलाते हुए कहा….विनय गेट की तरफ चला गया…जब उसने जाकर गेट खोल तो, देखा सामने रिंकी मम्मी खड़ी थी….”बेटा किरण कहाँ है….” 

साहिल: जी अंदर है….

रिंकी मम्मी अंदर चली गई तो, विनय भी उसके पीछे आ गया…..किरण ने रिंकी की माँ की तरफ देखा तो, किरण मन ही मन उसे गलियाँ देने लगी….” दीदी आप आइए बैठिए….” किरण ने अपने होंठो पर जबरन मुस्कान लाते हुए कहा…रिंकी की मम्मी सोफे पर बैठ गई…किरण ज़रा विनय को मेडिसिन की दुकान पर से ये दवाई तो मंगवा दे….मेरे बच्चे तो आज बाहर गए हुए है घूमने घर पर कोई नही है…” रिंकी मम्मी ने मेडिसिन की स्लिप और पैसे देते हुए किरण को कहा….”जी लाइए….विनय सुन जाकर बाज़ार से आंटी को ये मेडिसिन तो लादे…..” किरण ने विनय को मेडिसिन लाने के लिए कहा तो, विनय स्लिप और पैसे लेकर चला गया….”दीदी क्या लेने आप चाइ या ठंडा….” किरण ने फॉरमॅलिटीस करते हुए कहा….

“नही नही किरण तकलीफ़ करने की कोई ज़रूरत नही…तुम बैठो कहाँ गुम रहती हो आज कर दिखाई ही नही देती…..” रिंकी की माँ ने किरण का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बैठा लिया….”दीदी गुम कहाँ…घर पर मेहमान आए हुए है…इसलिए वक़्त ही नही मिलता बाहर निकलने का….” किरण ने सोफे पर बैठते हुए कहा….”तुम्हे पता भी है आज कल हमारे मोहल्ले मे क्या-2 हो रहा है….?” किरण उसकी बात सुन कर चोन्कते हुए बोली…”क्या हुआ दीदी अपने मोहल्ले मे….” 

“तुम्हे नही पता….वो जो नुक्कड़ पर घर है ना सिमरन का….”

किरण: हां दीदी….

“हां वही सिमरन पेट से है….”

किरण: तो क्या हुआ दीदी….पेट से ही तो है….

“हुआ क्यों नही….5 साल से तो उसके बच्चा नही हो रहा था…पिछले 6 महीने से उसके पति का चचेरा भाई यहाँ आया हुआ है….कॉलेज मे पढ़ता है…उसी के साथ उस कलमूहि ने चक्कर चला लिया होगा…पति तो उसका है ही मरियल सा…उससे तो उसकी तसल्ली होती नही होगी…और फँसा लिया अपने देवर को..फिर क्या..हो गई पेट से….दो दिन हो गए…रोज उनके घर इसी बात को लेकर लड़ाई हो रही है…लोग भी थू थू कर रहे है..अर्रे हरामजादी की चूत मे इतनी ही आग लगी थी तो, कॉंडम क्यों नही चढ़वा कर चुदवाती थी……”

किरण रिंकी की माँ की बातें सुन कर बुरी तरह घबरा गई….उसकी शादी को भी 7 साल हो चुके थे….और अब तक उसे कभी पेट नही ठहरा था….कल रात विनय ने उसकी चूत मे अपने लंड का पानी डाल दिया था….किरण के चेहरे का रंग ये सुन कर उड़ गया था….

अभी दोनो बातें ही कर रही थी कि, विनय वापिस आ गया…..और स्लिप और पैसे रिंकी की मम्मी को देते हुए बोला….”आंटी आज सनडे है ना….ईस्सईलिए मेडिसिन की शॉप आज 1 बजे ही बंद हो गई…रिंकी की मम्मी ने पैसे और स्लिप ली…”ओह्ह मे तो भूल ही गई थी कि आज सनडे है….अच्छा किरण अब मैं चलती हूँ….” ये कहते हुए रिंकी मम्मी खड़ी हुई और बाहर चली गई….विनय भी उसके पीछे चला गया. और गेट बंद करके जैसे ही वापिस आया तो, देखा के किरण थोड़ी सी परेशान बैठी हुई थी. पर विनय के ऊपेर तो वासना का भूत सवार हो चुका था…..किरण मन ही मन सोच रही थी कि, आज तो मेडिसिन के शॉप्स भी बंद है, आज कॉंडम भी खरीद कर नही लाए जा सकते….


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

विनय किरण के सामने जाकर खड़ा हो गया….किरण विनय की तरफ देखा तो वो समझ गई कि, विनय इस तरह उसके सामने क्यों खड़ा है….किरण के दिमाग़ मे रिंकी की मम्मी की बात घर कर गई थी….वो किसी भी कीमत पर रिस्क नही लेना चाहती थी….”क्या हुआ ऐसे क्यों खड़ा है…?” किरण ने थोड़ी सी सख्ती दिखाते हुए कहा. “वो मामी वो आप मुझे….” विनय बेचारा अपनी बात भी पूरी ना कर सका और चुप हो गया….”विनय आज मेरा मूड बहुत अपसेट है….आज और नही…तुम जाओ अपने रूम मे और पढ़ाई करो….मुझे घर का काम करने दो…”

ये कहते हुए किरण अपने रूम मे चली गई….विनय को कुछ समझ नही आ रहा था कि, अचानक से मामी को हो क्या गया है….विनय मुँह लटका कर अपने रूम मे चला आया….उसका लंड अभी भी उसके शॉर्ट्स मे कोहराम मचाए हुए था…वो बेचैन सा अपने रूम मे बैठा हुआ था….किरण घर की सफाई मे लगी हुई थी…वो सफाई करते हुए जैसे ही ममता के रूम मे पहुँची, तो झाड़ू लगाते हुए, उसकी नज़र नीचे फर्श पर गिरी कॉंडम के पॅकेट पर पड़ी….किरण ने उस पॅकेट को उठा कर देखा. तो उसके होंठो पर तेज मुस्कान फेल गई…उसके अंदर एक कॉंडम अभी भी था…किरण ने कॉंडम को ब्लाउज के अंदर रखा और जल्दी से झाड़ू लगा कर विनय के रूम मे गई…..

विनय बेड पर लेटा हुआ था…..”सो गया क्या विनय….” किरण ने बेड पर बैठते हुए कहा..तो विनय ने करवट बदल कर उसके तरफ पीठ कर ली….किरण समझ गई कि, विनय उससे नाराज़ है….किरण मन ही मन सोचने लगी कि, उसे विनय के साथ प्यार से बात करनी चाहिए थी…और प्यार से टालना चाहिए था..वो खुद विनय की वासना की आग को भड़का रही थी….और खुद ही उसे वासना की आग मे तड़पता हुआ छोड़ कर पीछे हट गई थी…ऐसा वो विनय के साथ जाने अंजाने मे दो बार कर चुकी थी…किरण वहाँ से उठी और डोर की तरफ गई…विनय ने फेस घुमा कर बाहर जाती मामी की तरफ देखा और फिर किरण डोर के पास जाकर रुक गई….और डोर को बंद करके विनय की तरफ पलटी…

ये देख विनय का दिल जोरो से धड़कने लगा…उसे समझ मे नही आ रहा था कि, आख़िर मामी चाहती क्या है…क्यों बार-2 वो उसे तड़पाती रहती है…किरण बिना कुछ बोले विनय की बगल मे लेट गई…उसने विनय के कंधे पर हाथ रख कर उसे अपनी तरफ घुमाया तो, विनय ने उसकी तरफ फेस करके करवट बदल ली….”नाराज़ हो मुझसे…?” किरण ने विनय के गाल पर हाथ रखते हुए कहा…. “आप मुझसे दूर रहिए…मुझे अब आपसे कोई भी बात नही करनी…” 

किरण: मैं जानती हूँ विनय तुम मुझसे नाराज़ हो…बार-2 मैं तुम्हारा दिल दुखा देती हूँ. पर विनय हर औरत की कुछ मजबूरिया होती है…और तुम अभी उन बातों को नही समझ सकते….जब तुम बड़े हो जाओगे तो तुम्हे पता चल जाएगा…कि तुम्हारी मामी ने तुम्हारा दिल जानबूज कर नही दुखाया है….

विनय: पर अब क्यों आई हो पास मेरे…?

किरण ने विनय की आँखो मे झाँकते हुए एक हाथ से अपने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए….

विनय की देखते ही देखते किरण ने अपने ब्लाउज के हुक्स खोल दिए... जैसे ही किरण का ब्लाउज खुला तो, उसकी चुचियाँ उछल कर बाहर आ गई...इस बार किरण ने ब्रा नही पहनी हुई थी...अपनी मामी की गोरे रंग की चुचियों को देख कर विनय के लंड मे तेज सरसराहट हुई...मामी की गोरी चुचियों पर ब्राउन रंग के बड़े-2 गहरे और मोटे-2 तने हुए निपल्स तो विनय की काम वासना को और भड़का रहे थे...किरण ने मुस्कराते हुए विनय की ओर देखा और फिर एक हाथ से उसके सर के नीचे रखते हुए दूसरे हाथ से अपने राइट माममे को पकड़ते हुए नोक दार बनाया और विनय के होंठो से अपने निपल को लगा दिया...विनय ने अपनी मामी की आँखो मे देखा....वो अपनी मामी की चुचियों को देखते ही सारा गुस्सा भूल गया था....

और अगले ही पल उसने किरण के निपल के साथ-2 जितना हो सकता था उसकी चुचि को मुँह मे भर लिया....किरण अपने निपल पर विनय की गरम और खुरदरी जीभ को महसूस करते ही, सिसक उठी....उसने मस्ती मे सिसकते हुए विनय को अपनी बाहों मे भर कर अपने ऊपेर खेंच लिया...मामी के ऊपेर आते ही, विनय और जोश से भर उठा...उसने किरण के निपल को अपने होंठो मे लेकर और ज़ोर-2 से दबाना शुरू कर दिया...."श्िीीईईई ओह विनय मेरीई लााअल पी ले चुस्स ले अपनी मामी के मम्मो को ओह.....आज के बाद जब तेरा दिल करेगा....मैं अपने मम्मे निकाल कर तुझे चुसवा दिया करूँगी... कभी मना नही करूँगी अपने शोना को....अह्ह्ह्ह हां और ज़ोर ज़ोर से चुस्स ओह्ह्ह्ह मेरीए बेटा....." ओह्ह्ह चूस ले बेटा…..किरण ने विनय के सर को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा…


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किरण की चूत की फांके अब फुदकने लगी थी…उसकी चूत किसी धौंकनी की तरह धुक-2 कर रही थी….चूत से कामरस सैलाब की तरह बाहर आ रहा था…विनय के तने हुए सख़्त लंड को अपनी साड़ी के ऊपेर से अपनी चूत पर महसूस करके किरण मदहोश होती जा रही थी…उसे अपनी चूत और विनय के लंड के बीच के कपड़ो की दीवार….अब बोझ लगने लगी थी…उसने अपने दोनो हाथो को नीचे लेजा कर विनय के शॉर्ट्स को दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे सरकाना शुरू कर दिया….पर विनय के उसके ऊपेर लेटे होने के कारण, विनय का शॉर्ट्स उसकी कमर से नीचे उतरा, तो विनय ने मामी के दिल की मंशा समझते हुए मामी के ऊपेर से खड़ा हो गया….और बेड पर खड़े होते हुए खुद ही अपने शॉर्ट्स को घुटनो से नीचे तक सरका दिया….

जैसे विनय का लंड बाहर आकर झटके खाने लगा तो, किरण की आँखे विनय के तने हुए 7 इंच के लंड पर अटक गई…वो पहली बार सॉफ- 2 अपने भान्जे के लंड को अपनी आँखो के सामने देख रही थी…जब-2 विनय का लंड फूँकारता हुआ झटके ख़ाता….तब-2 किरण की चूत कुलबुला उठती….किरण का हाथ खुद बा खुद ही विनय के तने हुए लंड की तरफ उठ गया…और उसने विनय के लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया….

जैसे ही किरण को अपने हाथ से विनय के लंड के तनाव का अहसास हुआ, किरण की चूत अपने भान्जे के लंड के नाम पर पिघल उठी…..अब किरण से बर्दास्त करना भी मुस्किल हो गया था. वो विनय के लंड को मूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिलाने लगी….

किरण अपनी हथेली मे विनय के लंड की नसों को फूलता हुआ महसूस करके और गरम हो चुकी थी….किरण एक दम से उठ कर बैठ गई….और उसने अपने भान्जे के लंड को गल्प से मुँह मे ले लिया…अपने लंड के सुपाडे को मामी के गरम रसीले मुँह मे महसूस करते ही विनय मस्ती से सिसक पड़ा…उसकी कमर ने आगे की तरफ झटका खाया तो, विनय का 1 इंच लंड और किरण के मुँह मे घुस गया….किरण ने विनय के लंड को पकड़ कर अपने मुँह के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…

”ओह्ह्ह मामी जी…..” विनय ने सिसकते हुए किरण के सर को पकड़ लिया…किरण पागलो की तरह विनय के लंड के सुपाडे को चाटने लगी…कभी वो अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके लंड को सुपाडे से लेकर जड तक चाटती तो, कभी उसके सुपाडे को मुँह मे लेकर चूसने लगती….

किरण ने विनय के लंड को मुँह से बाहर निकाला और बेड पर रखे हुए कॉंडम का रॅपर फाड़ कर कॉंडम बाहर निकाल लिया…विनय ने इससे पहले कभी कॉंडम नही पहना था…वो अजीब सी नॅज़ारो से कॉंडम को देख रहा था…किरण ने कॉंडम को विनय के लंड पर चढ़ाया और अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाते हुए नीचे लेट गई…और अपने जाँघो को फैलाते हुए विनय को अपने जाँघो के बीच बैठने को कहा…विनय की नज़र मामी की फूली हुई चूत पर पड़ी, तो उसके लंड ने झटके खाते हुए मामी की चूत को सलामी दी….विनय मामी की जाँघो के बीच घुटनो के बल बैठ गया….और मामी के ऊपेर झुकते हुए, मामी के रसीले होंठो पर अपने होंठो को झुकाने लगा….किरण ने अपना हाथ नीचे लेजा कर विनय के लंड को पकड़ लिया….

विनय ने सिसकते हुए अपने मामी के होंठो अपने होंठो मे भर लिया....किरण की चूत ये सोच कर फड़फ़ड़ा उठी की, मासूम सा दिखाने वाला उसका भांजा उसके होंठो का रस निचोड़-2 कर पी रहा है…उसकी चूत की दीवारे आपस मे सटाने लगी…और चूत की दीवारो के आपस सटने से चूत की लार दबाव की वजह से बाहर बह निकली….किरण ने विनय के लंड को हाथ से छोड़ दिया…और अपने दोनो हाथो से विनय के सर के बालो को सहलाते हुए अपने भान्जे को अपने होंठो का रस पिलाने लगी…किरण ने भी अपने होंठो को खोल कर ढीला छोड़ दिया…विनय पागलो की तरह अपनी मामी के गुलाबी रसीले होंठो को चूसने लगा…..नीचे विनय का लंड उसकी चूत की फांको पर रगड़ खा रहा था…

किरण अपनी चूत की फांको पर विनय के लंड की रगड़ को महसूस करके बुरी तरह मचल रही थी….वो अपनी गान्ड को इधर उधर हिलाते हुए खुद भी अपनी चूत को विनय के लंड पर रगड़ने लगी….इसी बीच विनय का लंड किरण की चूत के छेद पर जा भिड़ा….किरण ने सिसकते हुए अपने होंठो को विनय के होंठो से अलग किया….और मदहोशी से भरी हुई आँखो से विनय की आँखो मे देखते हुए बोली… “सीईईईईई विनय डाल दे पुत्तर अब ले ले अपनी मामी की फुद्दि….” विनय को भी अपनी मामी की चूत के छेद से निकल रही गरमी का अहसास अपने लंड के सुपाडे पर हो गया था… उसने अपनी गान्ड को आगे की तरफ पुश करना शुरू किया तो, विनय के लंड का सुपाडा उसकी चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा….

किरण अपने भान्जे के लंड को अपनी चूत मे रगड़ ख़ाता हुआ घुसता महसूस करके और भी ज़्यादा गरम हो गई….उसने अपने दोनो हाथो को नीचे लेजाते हुए, विनय की गान्ड के ऊपेर रख कर उसे नीचे की तरफ दबाने लगी…विनय का लंड किरण की पानी से लबलबा रही चूत की गहराइयों मे धीरे-2 उतरता चला गया…किरण को अपनी चूत की दीवारे पूरी तरह खुलती हुई सॉफ महसूस होने लगी…और फिर जब विनय का 2 इंच लंड बाहर रह गया तो, विनय ने अपनी कमर को पूरी ताक़त के साथ आगे की तरफ धकेला तो, विनय का लंड किरण की चूत की गहराइयों मे उतरते हुए उसकी बच्चेदानी से जा टकराया…उसकी जांघे मामी के चुतड़ों से टकराई तो, ठप की तेज आवाज़ पूरे रूम मे गूँज गई…”अहह उंह सबशह मेरीई शियर पुत्तरर उंह सीईईईईईई”

किरण ने सिसकते हुए विनय के फेस को अपने हाथो मे पकड़ लिया और पागलो की तरह उसके होंठो को चूमने लगी….अपनी मामी को इस तरह मस्त होता देख कर विनय ने अपने लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करना शुरू कर दिया…विनय का लंड किरण की चूत के अंदर बाहर आता हुआ उसकी चूत की दीवारो पर रगड़ ख़ाता तो, किरण के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ जाती…”अह्ह्ह्ह ओह सीईईईईईईईईई सबाश मेरीए बाबर शेररर ओह मार ले अपनी मामी की फुदी ओह आज की बाद तुझे तेरी ये मामी कभी भी नही रोकेगी…रोज दूँगी मे अपने शेर पुत्तर को अहह बोल विनय रोज लेगा नाअ मेरी….” किरण ने सिसकते हुए कहा…तो विनय का जोश और बढ़ गया….और वो और तेज़ी से अपने लंड को किरण की चूत के अंदर बाहर करने लगा….

किरण: ओह्ह्ह्ह विनय सीईईईईई बहुत मज़ा आ रहा है…..हाइी मुझे नही पता था कि, तू इतनी अच्छी तरह चूत मार सकता है….उंघह हाइईए सीईईईई अहह आह सबाश मेरीए बबर शेररर और जोर्र दीए मार घसा अपनी मामी की फुदी मे अहह..

किरण ने भी धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर की और उछालना शुरू कर दिया…विनय और किरण दोनो पसीने से तरबतर हो चुके थे…किरण अपनी साड़ी के पल्लू से विनय के चेहरे पर आए हुए पसीने को सॉफ करने लगी…”सीईईईईईई हाइईए अहह सदके जावा अह्ह्ह्ह हाइईए बहुत मोटा है तेरा लंड अह्ह्ह्ह उंह ओह्ह्ह्ह छोड़ विनय और ज़ोर से मार मेरी फुद्दि अहह सीईईईईईईईईई हाइी ओईईए विनय….अहह देख विनय देख निकाल दिया तेरे लंड ने तेरी मामी की चूत से पानी अह्ह्ह्ह लीई विनयययी मे तो आह आह ओह हाइी मेरी फुद्दि अहह गाइए….लीयी ईए देख ये देख मेरी चूत लगी है पानी छोड़ने अहह……..

किरण ने अपनी टाँगो को उठा कर विनय की कमर पर कसते हुए तेज़ी से अपनी गान्ड को ऊपेर की तरफ उछालना शुरू कर दिया….फिर किरण बुरी तरह विनय से लिपट गई… विनय से लिपटी हुई किरण की कमर झड़ते हुए तेज़ी से झटके खाने लगी….विनय ने भी आख़िर दो चार शॉट लगा कर मामी की चूत मे रुके हुए पानी को बाहर का रास्ता दिखा दिया…और विनय भी बुरी तरह काँपते हुए झड़ने लगा…


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विनय का लंड जब ढीला हुआ तो, उसका लंड किरण की चूत से बाहर आ गया…विनय अपने घुटनो के बल बैठ कर अपने ढीले पढ़ते हुए लंड पर चढ़े हुए कॉंडम को देखने लगा….किरण जल्दी से उठ कर बैठ गई….उसने विनय को जल्दी से पुराना न्यूज़ पेपर लाने को कहा….जो सामने टेबल पर ही पड़ा था…..विनय ने जल्दी न्यूज़ पेपर उठा कर किरण को दिया तो, किरण ने न्यूसपेपर को उसके लंड के नीचे करते हुए, एक हाथ से उसके कॉंडम को उतार कर न्यूज़ पेपर मे रख कर उसे फोल्ड कर दिया…और न्यूज़ पेपर नीचे फर्श पर रखते हुए बोली…..”जा विनय इसे ऊपेर छत पर जाकर पीछे जो खाली प्लॉट है वहाँ फेंक दे….” विनय ने जल्दी से अपना शॉर्ट्स पहना और न्यूसपेपर को उठा कर ऊपेर चला गया…किरण ने एक कपड़े से अपनी चूत को सॉफ किया….और अपनी साड़ी नीचे करके रूम से बाहर निकल कर बाथरूम मे चली गई….

जब विनय नीचे आया तो, किरण भी बाथरूम से बाहर आ चुकी थी…जब विनय सीढ़ियाँ नीचे उतर कर उसकी तरफ आ रहा था….तब वो विनय के शॉर्ट्स के अंदर उसके तने हुए हिलते लंड को देख कर हैरान रह गई…उसे अपनी आँखो पर यकीन नही हो रहा था…और दिमाग़ भी ये मानने के लिए तैयार नही हो रहा था…वो मन ही मन सोच रही थी कि, अभी-2 विनय ने उसे चोदा है….और थोड़ी देर पहले ही झड़ने के बावजूद भी उसका लंड इतनी जल्दी दोबारा कैसे खड़ा हो सकता है….किरण की नज़र उसके शॉर्ट्स मे बने तंबू पर अटकी हुई थी…जिसे देख उसकी चूत मे फिर से तेज सरसराहट होने लगी थी….एक लंबे अरसे के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ा था…और अपने भान्जे के लंड से संतुष्ट होकर जो स्वाद किरण ले चुकी थी…. वही स्वाद फिर से लेने के लिए उसकी चूत मे चीख पुकार मची हुई थी….

किरण का दिल तो कर रहा था कि, वो अभी वही फर्श पर लेट जाए…और विनय के लंड को अपनी चूत मे लेकर उससे फिर अपनी चूत मे हो रही खुजली को मिटा ले….पर प्रेगञेन्ट होने का डर उसके जेहन मे बैठ चुका था….और ना ही अब उसके पास और कोई कॉंडम था….दूसरी तरफ मामी की चूत की गरमी को अपनी लंड पर महसूस करने के बाद विनय भी फिर से मामी की चूत को चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था. किरण सोफे पर जाकर बैठ गई….विनय भी उसके पास आकर बैठ गया…किरण जानती थी कि, विनय क्यों उसके पीछे घूम रहा है….किरण ने टाइम देखा तो 2 बज रहे थे… “खाना खाओगे भूक तो नही लगी…” किरण ने विनय के बालो मे हाथ फेरते हुए कहा…तो विनय ने ना मे सर हिला दिया…”नही अभी भूख नही है….” 

अभी विनय आगे कुछ कहने की हिम्मत ही जुटा रहा था कि, डोर बेल बजी…किरण विनय को गेट पर जाकर देखने को कहा….विनय ने जाकर गेट खोला तो, देखा सामने शीतल खड़ी थी….उसके साथ उसके बच्चे भी थी….शीतल ने विनय को प्यार दिया और फिर अंदर आ गई….”आओ दीदी बैठो…” किरण ने मुस्कराते हुए कहा, तो शीतल उसके साथ सोफे पर बैठ गई…..”आज अभी को टीका लगवाने जा रही हूँ….” इसीलिए सोचा कि पिंकी को तुम्हारे यहाँ छोड़ जाती हूँ बाहर धूप बहुत है….” 

किरण: अच्छा क्या दीदी वैसे आज तो सनडे है फिर आप अभी को टीका कहाँ लगवाने जा रही है….?

शीतल: वो ये स्कूल के पास डिसपॅन्सरी है ना…वही जा रही हूँ….सरकारी डिसपॅन्सरी है…सिर्फ़ सनडे को ही खुलती है….

किरण: ओह्ह अच्छा…(तभी अचानक से किरण के दिमाग़ के घोड़े दौड़े….) दीदी मे भी चलूं आपके साथ…

शीतल: हां चल…

किरण: विनय पिंकी का ख़याल रखना….हम थोड़ी देर मे आते है….

उसके बाद किरण शीतल और अभी के साथ डिसपॅन्सरी के लिए चली गई….जब दोनो वहाँ पहुँची, तो वहाँ आगे लाइन मे दो तीन ही लोग थे….शीतल अभी को लेकर लाइन मे लग गई…किरण वही बेंच पर बैठ गई…तभी उसका ध्यान उस काउंटर पर पड़ा जहा पर लोग डॉक्टर से मिलने के बाद मेडिसिन ले रहे थे…..जब शीतल का नंबर आया और शीतल अभी को लेकर अंदर गई, तो किरण जल्दी से खड़ी हुई, और मेडिसिन वाले काउंटर पर जाकर खड़ी हो गई…तब उसके आगे सिर्फ़ एक ही औरत खड़ी थी…जब वो औरत दवाई लेकर चली गई तो, अंदर खड़ी नर्स ने किरण के तरफ देखते हुए कहा.. “लाइए स्लिप दीजिए….” 

किरण: जी वो स्लिप तो नही है….दरअसल मुझे कॉंडम चाहिए थे…..

नर्स: मेडम कॉंडम तो नही है हमारे पास….हां गर्भ निरोधक टॅब्लेट्स है. वो चाहिए तो दे देती हूँ…..

किरण: जी उससे कोई नुकसान तो नही होगा….?

नर्स: नही मेडम कोई नुकसान नही होगा….

किरण: ठीक तो फिर टॅब्लेट्स ही दे दीजिए….

नर्स ने उसे 20 टॅब्लेट्स दे दी…..और ये भी बता दिया के कब खाना खा… “जी कितने पैसे हुए…” किरण ने अपना पर्स खोलते हुए कहा….”आप यहाँ पहली बार आई है….” उस नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा….”जी…”

नर्स: ये सरकारी डिसपॅन्सरी है…यहाँ पर ये दवाए फ्री दी जाती है….

किरण: ओह्ह थॅंक्स….

किरण ने जल्दी से उन टॅब्लेट्स को अपने पर्स मे रखा और और फिर से बेंच पर आकर बैठ गई…थोड़ी देर बाद शीतल अभी को लेकर बाहर आई…”चल किरण….लग गया इसको टीका…” और फिर किरण खड़ी हुई और उसके साथ घर की तरफ चल पड़े…रास्ते मे शीतल ने भी उसे वही बात बताई….जो दो घंटे पहले रिंकी के मम्मी बता कर गई थी….बाते करते -2 दोनो घर पहुँच गई……शीतल अंदर आते ही सोफे पर पसर गई…..”विनय बेटा…”

विनय: जी मासी जी…..

शीतल: जा बेटा हम सब के लिए पानी तो ले आ….बाहर बहुत गरमी है….

विनय: जी अभी लाता हूँ….

ये कह कर विनय किचन मे गया….और पानी के बॉटल और तीन ग्लास ले आया… विनय ने सब को पानी पिलाया….और फिर ग्लास और बॉटल किचन मे रख कर वापिस आ गया… “मामी खाना दे दो….” विनय ने डाइनिंग टेबल पर बैठते हुए कहा…तो किरण उठ कर विनय के लिए खाना लेने चली गई….अभी उठ कर विनय के पास गया…” भैया मुझे वीडियो गेम लगा दो ना…” उसने विनय का हाथ पकड़ कर खेंचते हुए कहा तो, विनय वहाँ से उठ कर टीवी के पास गया…और अभी को वीडियो गेम लगा कर दी… फिर जब किरण वापिस आई तो, उसने खाना टेबल पर रखते हुए विनय की तरफ गुस्से से घूर कर देखा….दरअसल वो विनय पर इस लिए गुस्सा हो रही थी कि, उसने अभी को वीडियो गेम स्टार्ट करके दी थी…और अभी अब वहाँ से जल्दी हिलने वाला नही था….


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विनय चुप चाप बैठ कर खाना खाने लगा…किरण ने शीतल से भी खाने के लिए पूछा तो शीतल ने ये कह कर मना कर दिया कि, वो घर से खाना खा कर ही यहाँ आई थी….किरण खुद भी खाना खाने लगी…खाना खाने के बाद किरण ने अपने और विनय के बर्तन उठाए किचन मे लेजा कर धोने लगी…शीतल ने किरण से कहा कि वो अब घर जा रही है….शीतल ने अभी को गेम बंद करके चलने के लिए कहा तो, अभी ने जाने से मना कर दिया….किरण ने भी ऊपेरी मन से कहा कि, अभी को गेम खलने दो…शीतल अभी को वही छोड़ कर पिंकी को साथ लेकर अपने घर चली गई….

बर्तन सॉफ करते हुए उसने विनय को आवाज़ दी….जब विनय किचन मे गया तो किरण खीजते हुए बोली…” क्यों लगा दी तूने उसे गेम मना नही कर सकता था…” विनय सर झुका कर खड़ा हो गया…जब से किरण को गर्भ निरोधक गोलयाँ मिली थी…उसकी चूत मे हो रही खुजली कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई थी….. “चल जा अब उसके पास जाकर बैठ….” किरण ने बर्तन सॉफ करते हुए कहा….तो विनय वहाँ से निकल कर अभी के पास जाकर नीचे चटाई पर बैठ गया….विनय बार-2 पीछे घूम कर अपनी मामी की तरफ देख रहा था…किरण ने बर्तन सॉफ किए और फिर अपने रूम मे चली गई… वहाँ पहुँच कर उसने अपने साड़ी उतारी और सब कुछ उतारने के बाद एक ग्रीन कलर के मॅक्सी पहन ली…..

किरण किचन का काम निपटा कर अपने रूम मे चली गई…..विनय वही बैठा मायूस होता रहा….किरण ने अपने रूम मे पहुँच कर अपनी पहनी हुई साड़ी उतार डी…उसके बाद सारे कपढ़े उतरने के बाद किरण ने एक ग्रीन कलर के मॅक्सी पहन ली…मॅक्सी पहनने के बाद किरण हॉल मे आई और सोफे पर बैठ कर विनय को देखने लगी… दोनो के जब भी नज़रें मिलती….तो किरण मुस्करा कर विनय की तरफ देखती… “विनय भैया आप खेलो ना मुझे नींद आ रही है…..” अभी ने गेम का रेमॉर्ट विनय के तरफ बढ़ाते हुए कहा….और जैसे ही विनय ने उसका हाथ से रेमॉर्ट लिया….अभी वही चटाई पर लेट गया…किरण ने देखा कि अभी को नींद आने लगी थी…..शायद टीके का कुछ असर हो रहा था….जब किरण को यकीन हो गया कि, अभी अब गहरी नींद मे सो चुका है…तो उसने धीरे से विनय को आवाज़ दी….

विनय ने अपनी मामी की तरफ देखा, तो किरण ने उसे इशारे से अंदर चलने के लिए कहा….और खुद खड़ी होकर हॉल के साथ वाले रूम की तरफ चली गई…विनय ने भी एक बार अभी को चेक किया और खड़ा होकर स्टोर रूम की तरफ चल पड़ा….स्टोर रूम मे एक खिड़की थी जो हॉल की तरफ खुलती थी….ताकि हॉल से कुछ रोशनी स्टोर रूम मे जाती रहे…जैसे ही विनय हॉल मे पहुँचा तो, किरण ने उसका हाथ पकड़ कर अपने से सटाते हुए उसके कमर मे अपनी बाहों को डाल दिया….और उसके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया….विनय ने भी इस बार ज़्यादा देर ना करते हुए, मामी के होंठो को अपने होंठो मे लेकर चूसना शुरू कर दिया….

किरण की चूत मे भी कुलबुलाहट मची हुई थी….वो एक बार से अपने भान्जे के लंड को जल्द से जल्द अपनी चूत के अंदर महसूस करना चाहती थी…किरण विनय से अलग हुई, और अपनी नाइटी को पकड़ कर ऊपेर उठाते हुए विनय से कहा…” विनय चल जल्दी से बाहर निकाल इसे….”,किरण ने विनय के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा. और अपनी वाइट कलर की कच्छि को पकड़ कर नीचे जाँघो तक सरका दिया….और खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई…विनय अपनी मामी के पीछे जाकर खड़ा हो गया….और अपने पाजामे को नीचे सरकाते हुए अपने लंड को बाहर निकाल लिया…किरण ने थोड़ा सा आगे की तरफ झुकते हुए, अपनी गान्ड को पीछे से बाहर के तरफ निकाल लिया….”विनय चल जल्दी कर डाल दे अब अपनी मामी की फुद्दि मे अपना लंड….” 

किरण ने अपनी टाँगो को फेलाते हुए, अपनी गान्ड को ऊपेर उठा कर अपनी चूत के छेद को और बाहर की तरफ निकाल दिया…और अगले ही पल विनय के मुनसल लंड का दहकता हुआ सुपाडा किरण की चूत के साथ जा लगा….

विनय के लंड के सुपाडे की गरमी को अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही, किरण का पूरा जिस्म कांप गया….चूत ने अपने कामरस के खजाने को खोल दिया….और कुछ ही पलों मे उसकी चूत गीली हो गई…”हाइए विनय जल्दी कर डाल दे अपनी मामी की फुद्दि मे अपना लंड…आह ओह्ह्ह हाइए ओईए मार दिया अह्ह्ह्ह” विनय ने एक ही झटके मे अपना आधे से ज़्यादा लंड किरण की चूत मे पेल दिया था….किरण अपनी चूत को विनय के लंड के चारो तरफ बुरी तरह जकड़े महसूस कर रही थी…..और उसे अपनी चूत की दीवारों पर विनय के लंड के नसें सॉफ महसूस होने लगी….

किरण: आहह पुत्तर तेरा लंड तां बहुत मोटा हो गया है…..अपनी मामी की फुद्दि फाड़ कर रख दी तूने…आहह पुत्तर पर कोई परवाह नही करनी तूने मेरी…ज़ोर ज़ोर बाहर निकाल निकाल कर फुद्दि मे लंड ठोक बेटा….

विनय: धीरे अभी सुन ना ले….

किरण: नही सुनता बेटा….तू मार मेरी फुद्दि जैसे मर्ज़ी मार….

ये कहते हुए, किरण आगे की तरफ झुक गई….विनय ने अपने लंड को धीरे-2 किरण की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….विनय के लंड की रगड़ को अपनी चूत के दीवारों पर महसूस करके, किरण एक दम मस्त हो गई…और वो भी अपनी गान्ड को पीछे की तरफ धकेलते हुए, विनय के लंड को अपनी चूत की गहराइयों मे लेने के लिए मचलने लगी… विनय भी समझ चुका था कि, ये रांड़ भी अब पूरे रंग मे आ चुकी है… इसीलिए उसने किरण के चुतड़ों को दोनो हाथों से फैलाते हुए, तेज -2 झटके मारने शुरू कर दिए…..विनय के हर झटके के साथ किरण का पूरा बदन हिल जाता….और मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती…

किरण बार -2 ऐसे मुँह बना कर पीछे की तरफ विनय को देख रही थी… जैसे उसे विनय के मुनसल जैसे लंड को झेलने मे दिक्कत हो रही हो…”ओह्ह विनय आह बहुत मोटा है रे तेरा लाउडा आह लगता है आज आह अहह धीरे कर ना पुत्तर अहह तू मेरी फुद्दि फाड़ कर ही मानेगा…अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाइी कहा था तू इतने दिनो अह्ह्ह्ह….अपनी मामी का ख़याल रखा कर पुत्तर…तेरे बिना तेरी मामी की फुद्दि की सुध लेने वाला कोई नही है…”

विनय: हेया आहा आहह….तू फिकर ना कर मामी…मैं हूँ ना….तेरी फुद्दि की देखभाल के लिए अह्ह्ह्ह ईए ले…..अह्ह्ह्ह

किरण: हां बेटा एक तू ही तो है आह ले बेटा तेरी मामी की फुद्दि मूतने लगी हाई आह लीयी मैं आई और ज़ोर से अह्ह्ह्ह…..

विनय: अहह मामी भेगो दे मेरे लंड को अपनी फुद्दि के पानी से अहह अहह.

किरण: ले बेटा ले…..तेरे लिए तो है सब ले ले अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह माआ..

ये कहते हुए किरण का पूरा बदन अकड़ने लगा….मस्ती का तूफान अब ज़लज़ला बन गया था….और उसकी चूत से पानी की नदी बह निकली….विनय का लंड गीला होकर फॅक-2 की आवाज़ करते हुए अंदर बाहर होने लगा….और फिर एक हलकी सी घुर्राहट के साथ विनय के लंड ने भी किरण की चूत मे वीर्य की बोछार कर दी…..


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

किरण को अपनी चूत मे ऐसे महसूस हो रहा था….जैसे विनय ने उसकी फुद्दि के अंदर सैलाब ला दिया हो….उसे अपनी पूरी चूत उसके वीर्य से भरी हुई महसूस होने लगी….किरण आज बहुत दिनो बाद झड़ी थी…जैसे ही विनय का लंड किरण की चूत से बाहर आया…तो किरण सीधी हुई, उसके सीधे खड़े होते ही, उसकी चूत से वीर्य की धार बह कर बाहर निकलते हुए, उसकी जांघों मे अटकती पैंटी की ऊपेर पड़ने लगी…. उसके देखते ही देखते उसकी पैंटी उसके वीर्य से सन गई….

किरण: हाइी मा तू इंसान है या भैंसा…..कितना पानी छोड़ता हे रे तेरा लंड अह्ह्ह्ह….

ये कहते हुए किरण ने मुस्कुराते हुए, विनय की तरफ देखा, और अपनी पैंटी और सलवार को एक साथ ऊपेर कर सलवार का नाडा बांधने लगी….

विनय: मामी सॉरी वो आप की पैंटी खराब हो गई….आप बाद मे बदल लेना….

किरण: अर्रे नही पुत्तर ऐसे कोई बात नही….अब ये पैंटी तो मैं पूरा दिन ऐसे ही पहन कर रखूँगी…

विनय: क्यों ?

किरण: (मुस्कुराते हुए) ताकि तेरे लंड का पानी मेरी फुद्दि को ठंडा रखे. हा हहा…अच्छा अब तू जा….मे थोड़ी देर बाद बाहर आती हूँ….

विनय स्टोर से निकल कर बाहर आया तो, देखा कि अभी सो रहा था…फिर मामी की फुद्दि की खुजली मिटी तो उसको नींद आने लगी…वो अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गई.. विनय वही चटाई पर अभी के साथ लेट गया….और कुछ ही पलों मे नींद ने उसे भी अपने आगोश मे ले लिया…शाम के 5 बज रहे थे….जब किरण की आँख खुली…वो उठ कर अपने रूम से बाहर आई, तो देखा विनय और अभी दोनो अभी तक हॉल मे सो रहे थे. उसने उन दोनो को जगाया और खुद किचन मे चाइ बनाने चली गई….चाइ पीने के बाद विनय अभी को उसके घर छोड़ने चला गया….इधर किरण अभी रात के खाने की तैयारी कर रही थी कि, उसका मोबाइल बजने लगा….

उसने किचन से बाहर कर अपना मोबाइल उठाया तो देखा, उसके पापा का फोन था… उसके पापा ने बताया कि, वो इस वक़्त अपने बड़े भाई के घर मे है…और आज रात वही रुकने वाले है…वो कल सुबह ही घर वापिस आएँगे…किरण ने जैसे ही कॉल कट की तो, उसके चेहरे पर तीखी मुस्कान फेल गई…अब घर पर रात पर तीन ही लोग मज़ूद होने वाले थे….एक वो दूसरा विनय और तीसरा किरण का पति अजय….जब से उनके घर किरण के मम्मी पापा आए हुए थे….तब से अजय घर पर शराब पी कर नही आ रहा था…और जब अजय रात को शराब पीकर आता था…तब वो खाना खाते ही बेड पर ढेर हो जाता था….उसने अपने पति का नंबर मिलाया…..तो थोड़ी देर बाद अजय ने कॉल पिक की…..

अजय: हेलो हां किरण बोलो….

किरण: जी वो आज मम्मी पापा अपने भाई के घर पर ही रहेंगे….कल आने वाले है. आप थोड़ा जल्दी आ जाना….घर पर आज वशाली भी नही है….

अजय: हां हां मे जल्दी आ जाउन्गा….

उसके बाद किरण ने कॉल कट की…वो जानती थी कि, ये खबर सुनने के बाद के आज उसके सास ससुर घर पर नही आने वाले है, तो वो ज़रूर दारू पी कर आएगा…और उसके बाद अजय को हॅंडल कैसे करना है…..वो ये अच्छी तरह से जानती है…

रात के 8 बज चुके थे….किरण खाना तैयार कर चुकी थी….और वो विनय के साथ हॉल मे बैठे हुए टीवी देख रही थी….कि तभी उसका मोबाइल बजने लगा….उसने मोबाइल उठा कर देखा, तो अजय की कॉल थी….अजय ने उसे बताया कि, वो आज रात नही आ सकता. एक ज़रूरी ऑर्डर है…जो उसे कल तक डिलीवर करना है….किरण ने अजय से बात करके कॉल कट की तो, उसके होंठो पर मुस्कान फेल गई….वो जानती थी कि, घर ना आने का ये अजय का बहाना है…दरअसल जब भी अजय का ज़यादा पीने का मूड होता….तो वो किरण की झिक-2 से बचने के लिए काम का बहाना बना लेता…और अपने ऑफीस मे ही रात को ठहर जाया करता था….किरण ने अपना मोबाइल सोफे पर रखा…और विनय के सर के बालो को सहलाते हुए उसके सर को अपनी जाँघो पर रख लिया…..

विनय: किसका फोन था मामी जी…

किरण: तुम्हारे मामा का….आज घर नही आएँगे…

विनय: क्या आज घर नही आएँगे….?

किरण: हां….

विनय: तो क्या आज हम सारी रात……(विनय बोलते-2 चुप हो गया….किरण उसके दिल की बात को जान कर मुस्करा उठी….)

किरण: बोल ना क्या हम आज सारी रात…

विनय: का कुछ नही….

किरण: अभी भी मुझसे छुपा रहा है….बोल ना….तू जो कहगा….वैसा ही होगा…एक बार बोल कर तो देख…..

विनय ने अपनी मामी की ऊपेर नीचे हो रही चुचियों को देखा…और अपने गाले को सॉफ करते हुए कहा….”सच…?” किरण विनय की तरफ देख कर मुस्कुराइ…और उसके बालो को सहलाते हुए बोली…”तू कह के तो देख….” विनय ने अपना सर किरण की जाँघो से उठाया और उठ कर बैठते हुए किरण की नाइटी मे ऊपेर नीचे हो रही चुचियों की तरफ इशारा करते हुए कहा….”मामी मुझे तुम्हारी चुचियों को देखना है….” किरण विनय की बात सुन कर मुस्कराने लगी…और उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली….”पहले खाना खा लेते है…फिर तुझे जो देखना होगा…वो सब दिखाउन्गी…” 


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

किरण उठ कर किचन के तरफ जाने लगी….”ये क्या मामी आपने तो कहा कि, जो भी कहूँगा वो आप करोगे….मुझे अभी देखनी है….” किरण ने मूड कर पीछे की तरफ देखा…और होंठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए विनय को चिढ़ाने लगी…किरण किचन मे पहुँची…और उसने खाना डालना शुरू किया….विनय फिर से टीवी देखने मे मगन हो गया….”विनय ज़रा इधर तो आना….” किरना ने किचन से विनय को आवाज़ लगाते हुए कहा….विनय उठ कर किचन मे गया…”जी मामी…” किरण की पीठ विनय की तरफ थी…और वो प्लेट्स मे खाना डाल रही थी…किरण एक दम से उसकी तरफ पलटी….तो विनय की आँखे खुली की खुली रह गई….किरण ने अपने एक मम्मे को अपने नाइटी के गले के ऊपेर से बाहर निकाला हुआ था….उसका मॅक्सी के बाहर लटकते हुए मम्मे को देख कर विनय के आँखे एक दम फेल गई…..


किरण: ये ले अब देख लिया…मेने कहा था ना तुझे जो देखना है….वो सब दिखाउन्गी…..चल ये प्लेट्स लेकर बाहर चल….मैं पानी लेकर आती हूँ…विनय अपनी मामी की चुचि को घुरता हुआ प्लेट्स लेकर बाहर आ गया…..किरण ने पानी की बॉटल और ग्लास लिए और बाहर आ गई….इस बार जब विनय ने किरण को देखा तो, उसके दोनो मम्मे उसकी नाइटी से बाहर लटक रहे थे….विनय का लंड अपनी मामी की बड़ी-2 चुचियों को देख कर शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा…किरण विनय के सामने चेर पर बैठ गई…और खाना खाने लगी….”और कोई फरमाइश हो तो वो भी बता दो….” विनय ने अपनी मामी की चुचियों की तरफ देखा….और फिर खाने का नीवाला निगलते हुए काँपती हुई आवाज़ मे बोला……

विनय: मामी वो मुझे वो आपको वो करते हुए देखना है…..

किरण: (मुस्कराते हुए ) क्या देखना है सॉफ-2 बोल….

विनय: आपको पेशाब करते हुए देखना है….

किरण अपने भान्जे के बात सुन कर शरम से लाल हो गई…..फिर अपने होंठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए बोली…”तू अपनी मामी को मूतते हुए देखेगा….” विनय ने किरण की बात सुन कर सर झुका लिया…और काँपती हुई आवाज़ मे बोला….”हां मामी..” ये दिमाग़ ख़याल मे आते ही कि वो अपने भान्जे के सामने अपनी चूत खोल कर पेशाब कर रही है…..किरण के बदन मे झुरजुरी सी दौड़ गई….उसने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर अपनी मेक्सी के ऊपेर से अपनी चूत को दबाते हुए विनय की तरफ देखा…”देख लेना..आज तू जो भी कहेगा….मे तेरी हर बात मानूँगी….”

किरण और विनय ने जल्दी-2 खाना ख़तम किया….उसके बाद किरण ने बर्तन सॉफ करके सारा काम निपटा लिया….किचन का काम निपटने के बाद किरण ने विनय को अपने रूम मे जाकर इंतजार करने को कहा….और किरण खुद बाथरूम मे घुस गई…किरण ने अपने सारे कपड़े उतारे और अपने झान्टो से भरी चूत को देखा….तो कुछ सोच कर उसकी चूत की फांके कुलबुला उठी….उसने बाथरूम मे पड़ी हुई अजय की शेविंग किट उठाई….और शेविंग क्रीम लगा कर अपने झान्टो पर झाग बनाने लगी….फिर उसने रेजर से अपनी झान्टो के बाल सॉफ करने शुरू किए….

अपनी चूत से बालो को सॉफ करते हुए किरण की चूत ये सोच -2 कर कुलबुला रही थी कि, जब वो अपने भान्जे के सामने अपनी चूत खोल कर बैठी मूत रही होगी, तब कैसा मंज़र होगा…..

अपनी झान्टो को सॉफ करने के बाद पायल से अपनी चूत को अच्छे से धो लिया…और फिर बाथरूम का डोर खोल कर उसने विनय को आवाज़ लगाई…..विनय मामी की आवाज़ सुन कर रूम से बाहर निकाला और बाथरूम के डोर पर खड़ा हो गया…किरण ने उसे अंदर आने का इशारा किया….तो विनय बाथरूम के अंदर आया तो, अपनी मामी को पूरा नंगा देखते ही, उसका लंड उसके शॉर्ट्स को फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो उठा…किरण ने विनय के शॉर्ट्स मे झटके खाते हुए लंड को देखा, तो उसके होंठो पर कामुक मुस्कान फेल गई….”निकाल ले ना इसे बाहर क्यों क़ैद करके रखा है….” किरण ने विनय के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा….तो विनय ने अपना शॉर्ट्स दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे सरकाते हुए अपने बदन से अलग कर दिया…..

विनय के झटके खाते हुए लंड को देख कर किरण ने अपने होंठो को दाँतों मे भींचा और फिर नीचे फर्श पर अपनी मोटी गान्ड टिकाते हुए बैठ कर अपनी दोनो टाँगो को इस तरह खोल कर फेला लिया कि, उसकी चूत की फांके भी खुल गई….जिससे उसकी चूत का पानी से लबलबा रहा छेद विनय को सॉफ दिखाई देने लगा…किरण ने विनय की तरफ देखा….जो आँखे फाडे उसकी चूत की तरफ देख रहा था…”चल वहाँ बैठ जा दीवार से पीठ टिका कर…..” किरण ने सामने दीवार की तरफ इशारा करते हुए कहा तो, विनय दीवार से पीठ सटा कर नीचे फर्श पर बैठ गया….”तू अपनी मामी की चूत से पेशाब निकलता हुआ देखना चाहता था ना…” किरण ने अपनी चूत के फांको को अपनी उंगलियों से फेलाते हुए अपनी चूत का गुलाबी रसीला छेद विनय को दिखाते हुए कहा….

विनय: हां….(विनय ने अपने गले का थूक गटाकते हुए कहा…)

किरण: चल फिर देख ले….पर जब तक मेरी चूत से मूत की धार निकलेगी…तब तू मेरे सामने अपने लंड की मूठ मारेगा…बोल मारेगा ना मूठ अपनी मामी की चूत से पेशाब निकलता हुआ देख कर…..

विनय: हां मामी मारूँगा…….(विनय ने अपने लंड को मुट्ठी मे भरते हुए हिलाना शुरू कर दिया….)

किरण ने अपने दोनो हाथो को पीछे की और फर्श पर टिकाया और अपनी गान्ड को थोड़ा सा ऊपेर उठा दिया…कुछ ही पलों बाद किरण की चूत से मूट की तेज धार सीटी जैसी आवाज़ करते हुए निकल कर बाहर फर्श पर गिरने लगी….जिसे देख विनय के लंड के नसों मे खून का दौड़ा तेज हो गया…..और उसने तेज़ी से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया….”सीईईईई देख विनय देख तेरी मामी की चूत से निकलता हुए मूत देख ले बेटा….

अहह देख तेरे लिए तेरी मामी कितनी बेशरम हो गई है…..हिला अपने लंड को अपनी मामी की चूत के लिए…..” किरण ने अपने भान्जे के लंड के चमकते हुए सुपाडे को देखते हुए कहा….और दूसरी तरफ विनय अपनी मामी की चूत से निकलती मूत की धार को देख कर एक दम मस्त हो गया….किरण का मूतना ख़तम हुआ तो, विनय एक दम से उठ कर अपनी मामी की जाँघो के पास आकर बैठ गया…और झुक कर अपनी मामी की चूत को देखने लगा….


RE: Sex Porn Kahani चूत देखी वहीं मार ली - sexstories - 07-28-2018

विनय को इतने करीब से अपनी चूत को देखते देख कर किरण एक दम से शरमा गई…वो जल्दी से उठी और बाथरूम के डोर की तरफ जाने लगी….इस बात से अंज़ान कि विनय का लंड अब उसकी चूत मे घुसने के लिए कितना बेकरार हो चुका है…जैसे ही किरण बाथरूम के डोर पर पहुँची…विनय ने किरण को पीछे से कंधो से पकड़ते हुए, उसे बाथरूम के डोर के साथ सटा दिया…इससे पहले कि किरण को कुछ समझ आता….विनय ने अपने घुटनो को थोड़ा सा मोडते हुए, अपने लंड को पकड़ का किरण की चूत के छेद पर टिकाते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा….विनय के लंड का सुपाडा किरण की चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा….किरण अपने भान्जे की हिम्मत और उतावले पन को देख कर खुशी से उछल पड़ी…उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही रहा…..

किरण: श्िीीईईईईईई अहह उंह सबाश मेरीए बाबर शेर अह्ह्ह्ह कर लाइए अपनी को कोढ़ी……आहह पूरा अंदर कर दे पुतर…

किरण ने भी अपनी गान्ड को पीछे की और निकाल लिया…ताकि विनय बिना किसी परेशानी के उसकी चूत मे अपना पूरा लंड घुसा सके…..विनय का लंड मामी के कामरस से भीगी हुई चूत की दीवारो को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा….किरण के होंठो पर कामुकता से भरी तीखी मुस्कान फेल गई….विनय ने बिना एक पल गवाए बिना….अपने लंड को मामी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….किरण अपनी टाँगे फेलाए हुए पीछे से अपने भान्जे के झटको का मज़ा अपनी चूत मे लेने लगी….

अपनी मामी की बातें सुन कर विनय और जोश मे आता जा रहा था….और वो अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल-2 कर किरण की चूत मे पेलना लगा…”श्िीिइ सबाश मेरे शेररर ओह विनय बाहर चल यहाँ बहुत गरमी है…” किरण ने सिसकते हुए कहा…तो विनय ने अपना लंड किरण की चूत से बाहर निकाल लिया….किरण बाथरूम का डोर खोल कर बाहर आई, और उसके पीछे विनय भी बाहर आ गया….जैसे ही दोनो हॉल मे पहुँचे तो, किरण ने विनय को धक्का देकर सोफे पर बैठा दिया…और खुद उसके जाँघो के दोनो तरफ अपने घुटनो को टिकाते हुए, उसके ऊपेर आ गई…किरण ने विनय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए विनय की आँखो मे देखा….और फिर धीरे-2 अपनी चूत को विनय के लंड के सुपाडे पर दबाते हुए अपने चूत मे लेना शुरू कर दिया…..

किरना: ओह्ह्ह्ह विनय तेरा लंड जब अंदर जाता है….तो ऐसा लगता है….जैसे मेरी चूत तेरे लंड के टोपे को चूम रही हो…..सच मे बहुत मज़ा आ रहा है…..विनय सीईईईई उंह तुझे कैसा लग रहा है…..?

किराना ने धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करते हुए कहा….”अह्ह मामी आपकी चूत सच मे बहुत गरम है….” विनय ने अपनी मामी की बड़ी-2 चुचियों को अपनी मुत्ठियों मे भर कर मसलना शुरू कर दिया…किरण के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गई…उसने विनय की पीठ पर अपनी बाहों को कसते हुए, तेज़ी से अपने गान्ड को ऊपेर नीचे करना शुरू कर दिया….किरण की चूत के पानी से सना हुआ विनय का लंड आसानी से उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था…

.”सीईईईई ओह उंह विनय….” किरण पागलो की तरह मस्ती मे सिसकते हुए विनय के गालो और होंठो पर अपने होंठो को रगड़ रही थी….विनय तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रहा था….”ओह्ह्ह मामी उतरो नीचे बेड पर चल कर करते है….”

विनय ने सिसकते हुए किरण के चुतड़ों को मसलते हुए कहा….तो किरण उसके ऊपेर से खड़ी हो गई….और बेड पर लेट कर विनय की तरफ देखते हुए बोली….”चल आजा जल्दी अब….” विनय तो किरण से भी कही ज़्यादा बेकरार हुआ जा रहा था…वो बेड पर चढ़ा और किरण की जाँघो के बीच घुटनो के बल बैठ गया….जैसे ही विनय किरण की जाँघो के बीच मे घुटनो के बल बैठा…

उसने विनय को अपनी बाहों मे भर कर अपने ऊपेर खेंच लिया. अब विनय किरण के ऊपेर आ चुका था….किरण ने अपनी टांगो को फेला कर विनय जाँघो पर चढ़ा लाया था….दोनो के नज़रे आपस मे जा टकराई…और अगले ही पल दोनो के होंठ आपस मे कुश्ती लड़ रहे थे….

दोनो के मुँह से मुंम्मह-2 की आवाज़े आ रही थी….दोनो एक दूसरे के होंठो को बदस्तूर चूस रहे थे….किरण की बड़ी -2 चुचियाँ विनय की छाती मे धँस रही थी…किरण ने अब अपने होंठो को विनय के हवाले कर दिया था…और विनय उसके दोनो होंठो को बारी-2 अपने होंठो मे दबा -2 कर चूस रहा था…विनय का तना हुआ लंड किरण की चूत पर दस्तक दे रहा था…..


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