Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - Printable Version

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RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

मैंने थोडी देर अपने होंठ रीमा के मूत के छेद पर ही चिपकाये रखे और फिर जीभ से चाट कर आस पास के हिस्से को साफ किया जिससे अगर मूत की एक बूंद भी लगी हो वह मेरे मुँह मे चली जाये मेरा पेट रीमा का लोटे भर मूत पीकर पीकर पूरी तरह भर गया था। बहुत ही मस्त स्वाद था माँ तुम्हारे मूत कर सच मे अगर तुम रुक रुक कर मूतती तो ज्यादा मजा आता। आगे से तुम रुक रुक कर मूतना मैं मूत पीने का पूरा मजा लेकर पीना चाहाता हूँ। चल अब खडा हो जा और मेरे चूतड छोड जिससे मैं भी खडी हो संकू तू तो जंहाँ मौका मिलता है मेरे चूतडो पर टूट पडता है पता नंही तुझी क्या मिलता मेरे चूतड मे। मैंने आखरी बार रीमा के चूतड मसले और रीमा के चूतड छोड दिये और रीमा उठ कर खडी हो गयी मैं भी रीमा के बगल मे खडा हो गया।

माँ आज तुम्ने अपना मूत पीलाकर मुझे ये बता दिया की तुम मुझको कितना प्यार करती हो एक प्यार करने वाली माँ ही अपने बेटे की मूत पीने के इच्छ को पूरा कर सकती है। और ये भी साबित हो गया की तू अपनी माँ को अपने से भी ज्यादा प्यार करता है तभी तो तूने मेरा मूत पी लिया देख तेरे लंड को भी मेरा मूत कितना अच्छा लगा कैसे उछल उछल कर अपनी खुशी का इजहार कर रहा है। हाँ क्यो न हो उसकी माँ के मुँह से निकाल पीला अमृत जो है। रीमा ने आगे बढ कर मेरे माथे को चूम लिया। और मेरे लंड को पकड कर मसल दिया। एक मस्ती की लहर मेरे तन मे दौड गयी।

तूने पानी मिला दिया है न चल मे इसमे बबल बाथ मिला देती हूँ फिर हम दोनो मिल कर नाहायेगें। रीमा ने बोतल उठा कर टब के पास जाकर झुक गयी और साबुन को पानी मे डालने लगी। उसके झुकने से उसके भारी चूतड एक दम मेरी आँखो के सामने आ गये। उसकी टाँगे भी थोडी खुली हुयी थी जिसकी वजह से उसकी गाँड और उसकी चूत भी दिखायी दे रही थी। उसकी चूत खुली हुयी थी जैसे अपने प्यारे लंड को बुलाने के लिये रिझा रही हो। मैं अपने आप को रोक नंही सका और जाकर रीमा के पीछे खडा होकर एक हाथ उसके चूतडो पर फेरने लगा। और दूसरे हाथ को उसकी चूत पर फिराने लगा। साले फिर से शुरु हो गया अभी तो इतने देर तूने मेरे चूतड मसले है मूत पीते हुये अब फिर आ गया तेरा तो मन ही नंही भरता मेरे चूतडो से गाँडू कही का पर क्या करूं तेरी माँ हूँ न तेरी इच्छा तो पूरी करनी ही पडेगी रीमा ने साबुन मिलाते हुये कहा। रीमा के मेरा हाथ फेरना अच्छा लग रहा था और वह भी अपने चूतड हिला कर मजा ले रही थी। अब मुझे रीझाने और गर्म करने के लिये बार बार कुछ कहती थी। मैं नीचे घुटनो के बल बैठ कर रीमा के चूतडो को चूमने लगा। अच्छा तो अब मेरी गाँड के पीछे पड गया गाँडू चूम ले और चूम ले मेरे चूतड मुझे भी तेरे से चुम्वाने मे मजा आ रहा है कर ले अपने मन के पूरी गाँडू साले।


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

मैंने रीमा के चूतडो का चुम्बन लिये जा रहा था। फिर मैंने रीमा की गाँड का चुम्बन ले लिया और अपनी जीभ से उसकी गाँड चाटने लगा। रीमा साबुन पानी मे मिला चुकी थी और टब मे अच्छे झाग बन गये थे। रीमा ने एक झटका दिया और मेरे चहरे को अपने चूतडो से अलग कर दिया। रीमा के चूतडो के धक्के से मैं पीछे की और गिर गया। रीमा मुड कर खडी हो गयी और बोली इनको बाद मे चाटना मेरे चोदू मादरचोद अब चल अपनी माँ को नहला पहले। नहा कर थोडी ताजगी आयेगी तब मैं तेरे साथ खेलूंगी। चल अब ऐसे ही पडा रहेगा कि अपनी माँ को नहलायेगा भी। चलो माँ तुम टब मे घुस जाओ मे तुम्को नहलाता हूँ। पहले तू घुस पानी मे फिर मैं घुसंगी समझा मैंने कहा ठीक है जैसा तुम कहो माँ।

मैं पानी मे घुस कर बैठ गया। रीमा भी पानी मे आ गयी और अपने पैर मेरी तरफ बढाते हुये बोली चल मेरे पैरे साफ कर पहले। रीमा के पैर काफी सुंदर थे और उन चिकने पैरो के देख कर मेरे लंड को कुछ कुछ होने लगा। मै रीमा के पैरो को मल मल कर साफ करने लगा। रीमा ने अपना पैर मेरी जाँघ पर रख रखा था। और मैं उसके घुटने के नीचे का भाग मल मल कर साफ कर रहा था। रीमा अपने दूसरे पैर से मेरे लंड के साथ खेल रही थी। मेरे लंड को कभी अपने पैरो की उंगलियो से छेडती तो कभी अपने पैरो के तल कुचलने की कोशिश करती। वह हर समय मुझे वासना की उँचायीयो पर रखना चाहती थी। इसीलिये मेरे लंड को लगातार छेडे जा रही थी। जिससे वह टनटनाया हुये खडा रहे। मैंने उसके पैरो के उंगलियो और तलवे दोनो को अच्छे से साफ किया साबून मे रगड रगड कर और फिर उसके घुटनो तक के हिस्से को साफ किया अच्छे से।

मैंने उसका एक पैर साफ कर दिया और रीमा ने अपना दूसरा पैर मेरी जाँघो मे रख दिया जिसे मैंने साफ करना शुरु कर दिया। रीमा के चूत मेरे बिल्कुल सामने थी जब मैं उसका पैर साफ कर रहा था। उस झाटो भरी चूत कि देख कर मेरा मन मचल रहा था मैंने आगे बढ कर उसकी चूत को चूम लिया और फिर से उसके पैर साफ करने लगा। चल अब मेरी जाँघे साफ कर बहुत रगड लिये मेरे पैर कह कर रीमा ने अपनी जाँघ सामने कर दी। मैं अपनी नाक रीमा के चूत के पास रख कर सूंघी फिर अपना गाल उसकी झाँटो पर रख कर उसकी जाँघे साफ करने लगा। साथ ही साथ मैं अपना गाल उसकी चूत पर रगडता भी जा रहा था। रीमा भी पूरी मस्ती मे अपनी सेवा करवा रही थी। और मैं रगड रगड कर उसकी गोरी जाँध को साफ कर रहा था साथ ही साथ रीमा की चूत के महक को लेते हुये अपने गाल झाँटो पर रगड रहा था।

उसकी मस्त गोरी जाँघो पर मैं प्यार से हाथ फेर रहा था और साबुन मल रहा था। फिर मैंने रीमा की दूसरी जाँघ पर भी अपना गाल चूत पर रगडते हुये साबुन से साफ कर दिया। रीमा ने कहा चल अब एक तरफ बैठ जा। मैं टब से टेक लगा कर बैठ गया। मेरा छाती के उपर का हिस्सा पानी से बाहर था बाकी पानी के अंदर। रीमा घूम कर अपने चूतड मटका कर मुझे दिखाने लगी और पीछे मुड कर मुझे देख कर मुस्कुरायी। क्या देख रहा है चूतड ले और मटका के दिखाती हूँ अच्छे लगते हैं न तुझे मेरे ये चूतड और इनका उभार ले देख ले थोडी देर। थोडी देर ऐसे ही अपने चूतड मटकाने के बाद रीमा फिर मेरे उपर बैठ गयी। मेरा लंड रीमा के चूतडो के नीचे दब गया। रीमा ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड कर अपनी गाँड की दरार मे फंसा लिया। और अपनी चिकनी पीठ मेरी छाती पर टिका कर बैठ गयी। मैंने अपने हाथ उसकी बाँहो के नीचे से डाल कर उसकी चूचीयो पर रख दिये और उसके गाल का एक चुम्बन ले लिया। मेरा लंड रीमा के गाँड के दरार की कैद मे पूरी तरह जकड चुका था।


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

रीमा की चूचीयाँ आधी पाने मे थी और आधी पानी के बाहर थी। और उसकी घुडियाँ एक दम कडी हो चुकी थी। टब मे लेट कर नाहने का अलग ही मजा हे मेरे लाल और वह जब अपने बेटे के साथ हो तो क्या कहना। चल अब मेरा पेट और चूचीया साफ कर। तेरे लंड को भी मजा आ रहा है देख कैसे मेरे चूतडो के कैद मे से निकलने को मरा जा रहा है। इसका बस चले तो अभी मेरी गाँड मे घुस जाये साला पर मैं भी इसको अपनी चूतड की कैद मे रखूंगी। मैं रीमा की के पेट और चूचीयो के मसल मसल कर साबुन लगाने लगा। साथ ही साथ रीमा के गर्दन और पीठ का चुम्बन भी लेता जा रहा था। रीमा भी काफी गर्म हो चुकी थी और मेरे कंधे पर सर रख कर वह अपना बदन मसलवा रही थी। मैं उसकी चूचीयाँ बहुत जोर जोर से मसल रहा था। साबून लगा होने के वजह से मेरे हाथ रीमा की चूचीयो पर फिसल रहे थे। रीमा के पेट को भी मैं अपने हाथ मे पकड कर मसल देता। रीमा के मुँह से मस्ती भरी करहा निकल जाती थी। रीमा की चूचीयो का रंग धीरे धीरे गुलाबी होने लगा क्योकी मैं बहुत जोर से उसकी चूचीयाँ मसल रहा था। रीमा की चूचीयाँ और बदन पर साबुन लगाने के बाद मैंने रीमा के कंधे और बाँहो पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। उसकी मोटी माँसल बाँहो को पकड कर मसलने मे मुझे बहुत मजा आया और मेरा लंड रीमा के चूतड के नीचे और फूल कर कुप्पा हुये जा रहा था। मैं उसके कंधे और बाँहो को ऐसे मसल रहा था जैसे जोर जोर से मालिश कर रहा हूँ। रीमा मस्ती मे करहा कर आह ओह्ह के आवजे निकालते हुये अपने मजे का इजहार कर रही थी। पुरे शरीर पर साबुन लगाने के बाद मैंने रीमा के घुंडियाँ अपने हाथो मे पकड ली और जोर जोर से मसलने लगा। रीमा की घुंडियाँ बडी संवेदनशील थी मसलने के सीधा असर उसकी चूत पर होता था। घुंडियाँ मसलवाने से उसकी चूत गीली होनी शुरु हो गयी। और वह काफी गर्म हो गयी थी।

उसने अपनी टाँगे आपस मे रगडनी शुरु कर दी। और अपना एक हाथ अपने चूत पर रख कर चूत हो सहलाने लगी। मैं उसकी घुडियाँ पूरी बेदर्दी के साथ मसल रहा था। उसकी घुंडियाँ मसलने मे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। घुंडियाँ मसलते हुये मैंने अपने हाथ रीमा के होंठो पर रख दिये और एक जोर दार चुम्बन ले लिया। रीमा काफी गर्म थी और जोर जोर से अपनी चूत अपने हाथ से रगड रही थी। मैं रीमा की होंठो का रस पीते हुये उसकी घुडियाँ मसले जा रहा था। मसलने के साथ साथ कभी मैं उसकी घुडियाँ जोर से खींच देता जिससे रीमा दर्द से करहा उठती पर मैंने उसकी होंठ अपने होंठो मे दबा रखे थे जिससे उसकी चीखने की आवाज गो गो करके ही रहा जाती पर रीमा को इस दर्द मैं भी मजा आ रहा था क्योकी उसके हाथ की रफतार उसकी चूत पर बढती जा रही थी। रीमा ने अपनी जीभ निकाली और मेरे मुँह मे घुसेड दी और मैं उसकी जीभ चूसने लगा। मेरे लंड को रीमा की हरकतो के वजह से बहुत मजा आ रहा था। जब रीमा अपनी चूत से खेल रही थी तो इसकी वजह से रीमा के चूतड हिल रहे थे जिसकी वजह से उसके चूतडो के नीचे दबा मेरा लंड रगड खा रहा था जिससे मेरे लंड को बहुत ही मजा आ रहा था उसको तो ऐसा लग रहा था जैसे रीमा अपने चूतडो से मेरे लंड का मुठ्ठ मार रही है। फिर थोडी देर मजा लेने के बाद रीमा बोली चल अब मैं तुझको नहलाती हूँ। रीमा ने मुझको खडा कर दिया और खुद नीचे बैठ कर मेरे पैरो पर साबुन लगाने लगी।रीमा की चूचीयाँ आधी पाने मे थी और आधी पानी के बाहर थी। और उसकी घुडियाँ एक दम कडी हो चुकी थी। टब मे लेट कर नाहने का अलग ही मजा हे मेरे लाल और वह जब अपने बेटे के साथ हो तो क्या कहना। चल अब मेरा पेट और चूचीया साफ कर। तेरे लंड को भी मजा आ रहा है देख कैसे मेरे चूतडो के कैद मे से निकलने को मरा जा रहा है। इसका बस चले तो अभी मेरी गाँड मे घुस जाये साला पर मैं भी इसको अपनी चूतड की कैद मे रखूंगी। मैं रीमा की के पेट और चूचीयो के मसल मसल कर साबुन लगाने लगा। साथ ही साथ रीमा के गर्दन और पीठ का चुम्बन भी लेता जा रहा था। रीमा भी काफी गर्म हो चुकी थी और मेरे कंधे पर सर रख कर वह अपना बदन मसलवा रही थी। मैं उसकी चूचीयाँ बहुत जोर जोर से मसल रहा था। साबून लगा होने के वजह से मेरे हाथ रीमा की चूचीयो पर फिसल रहे थे। रीमा के पेट को भी मैं अपने हाथ मे पकड कर मसल देता। रीमा के मुँह से मस्ती भरी करहा निकल जाती थी। रीमा की चूचीयो का रंग धीरे धीरे गुलाबी होने लगा क्योकी मैं बहुत जोर से उसकी चूचीयाँ मसल रहा था। रीमा की चूचीयाँ और बदन पर साबुन लगाने के बाद मैंने रीमा के कंधे और बाँहो पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। उसकी मोटी माँसल बाँहो को पकड कर मसलने मे मुझे बहुत मजा आया और मेरा लंड रीमा के चूतड के नीचे और फूल कर कुप्पा हुये जा रहा था। मैं उसके कंधे और बाँहो को ऐसे मसल रहा था जैसे जोर जोर से मालिश कर रहा हूँ। रीमा मस्ती मे करहा कर आह ओह्ह के आवजे निकालते हुये अपने मजे का इजहार कर रही थी। पुरे शरीर पर साबुन लगाने के बाद मैंने रीमा के घुंडियाँ अपने हाथो मे पकड ली और जोर जोर से मसलने लगा। रीमा की घुंडियाँ बडी संवेदनशील थी मसलने के सीधा असर उसकी चूत पर होता था। घुंडियाँ मसलवाने से उसकी चूत गीली होनी शुरु हो गयी। और वह काफी गर्म हो गयी थी।


उसने अपनी टाँगे आपस मे रगडनी शुरु कर दी। और अपना एक हाथ अपने चूत पर रख कर चूत हो सहलाने लगी। मैं उसकी घुडियाँ पूरी बेदर्दी के साथ मसल रहा था। उसकी घुंडियाँ मसलने मे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। घुंडियाँ मसलते हुये मैंने अपने हाथ रीमा के होंठो पर रख दिये और एक जोर दार चुम्बन ले लिया। रीमा काफी गर्म थी और जोर जोर से अपनी चूत अपने हाथ से रगड रही थी। मैं रीमा की होंठो का रस पीते हुये उसकी घुडियाँ मसले जा रहा था। मसलने के साथ साथ कभी मैं उसकी घुडियाँ जोर से खींच देता जिससे रीमा दर्द से करहा उठती पर मैंने उसकी होंठ अपने होंठो मे दबा रखे थे जिससे उसकी चीखने की आवाज गो गो करके ही रहा जाती पर रीमा को इस दर्द मैं भी मजा आ रहा था क्योकी उसके हाथ की रफतार उसकी चूत पर बढती जा रही थी। रीमा ने अपनी जीभ निकाली और मेरे मुँह मे घुसेड दी और मैं उसकी जीभ चूसने लगा। मेरे लंड को रीमा की हरकतो के वजह से बहुत मजा आ रहा था। जब रीमा अपनी चूत से खेल रही थी तो इसकी वजह से रीमा के चूतड हिल रहे थे जिसकी वजह से उसके चूतडो के नीचे दबा मेरा लंड रगड खा रहा था जिससे मेरे लंड को बहुत ही मजा आ रहा था उसको तो ऐसा लग रहा था जैसे रीमा अपने चूतडो से मेरे लंड का मुठ्ठ मार रही है। फिर थोडी देर मजा लेने के बाद रीमा बोली चल अब मैं तुझको नहलाती हूँ। रीमा ने मुझको खडा कर दिया और खुद नीचे बैठ कर मेरे पैरो पर साबुन लगाने लगी।


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

मेरी जाँघो और पैरो को अपने मुलायम हाथो से उसने साफ किया। वह अपनी उंगलीयाँ बडे प्यार से मेरी जाँघो पर फिरा रही थी जिस्से मेरी उत्तेजना बढ रही थी। रीमा ने अपने हाथो को मेरे लंड से दूर ही रखा हाँ अपने चेहरे को मेरे लंड के पास ले आती और मैं अपने लंड पर उसकी गर्म साँसो को महसूस कर सकता था। इतना ही नंही साबुन लगाते हुये रीमा अपनी चूचीयाँ मेरे पैरो पर चिपका देती और एक जाँघ पर साबुन लगाते हुये दूसरी जाँघ पर अपनी चूचीयो का प्यार बरसाती। जिससे मेरा लंड मस्ती मे झूम उठता। एक जाँघ पर हाथ रगडती और दूसरे पर चूची। उसका चेहरा हमेशा मेरे लंड के पास रहता और मेरा मन करता उसका सर पकड कर अपना लंड उसके मुँह मे घुसा दूँ। एक दो बार तो उसके गाल मेरे लंड से छू भी गये थे। अच्छे से मेरी जाँघ और पैर रगडने के बाद रीमा ने मुझे घूमने को कहा। फिर मुझे घुमा कर मेरे चूतडो पर भी साबुन लगाने लगी। वह अपने हाथ प्यार से मेरे चूतडो पर फिरा रही थी। उसकी उंगलीयाँ मेरे पूरे चूतड और चूतडो के दरार में चल रहे थे। पूरी हथेली से मेरे चूतड पर साबून लगाती तो कभी हाथ मे पकड कर मसल देती। वह काफी अच्छी तरह से मसल कर मेरे चूतडो पर वह साबुन लगा रही थी। मुझे उसके हाथ अपने चूतडो पर बहुत अच्छे लग रहे थे। अब मैं अपने प्यारे बेटे के चूतड अपनी चूची से रगड रगड कर साफ करूगी ऐसा कह कर उसने अपनी चुचीयाँ मेरे चूतड पर रखी और मेरे चूतड पर मलने लगी। जैसे उसकी चूचीयाँ कोई स्पोंज हो और वह उससे मेरे चूतड साफ कर रही थी। उसकी घुंडी एक दम कडी हो चुकी थी और मेरे चूतडो मे ऐसे रगड रही थी जैसे छेद ही कर देगी। मेरे लंड एक दम तन के खडा था। रीमा काफी देर तक अपनी चूचीयाँ मेरे चूतड पर मसल मसल कर मेरे चूतड पर साबुन मलती रही फिर कभी कभी तो रीमा की घुंडी मेरे चूतड की दरार मे भी घुस जाती और रीमा पूरा उपर से लेकर नीचे तक अपनी घुंडी मेरे चूतड की दरार मे रगडती। मेरा लंड मस्ती मे तडप रहा था मैं अपने लंड को रीमा के किसी छेद मे खुसा कर चोदना चाहाता था या फिर मेरा मन करता की अपने हाथ मे पकड कर मुठठ मार लूँ

देखो मेरे बेटे के चूतड कैसे चमक गये चूची रगडायी से। तेरे साथ नहाने मे बडा मजा आ रहा है मेरे लाल बडे दिनो बाद किसी के साथ ऐसे प्यार से नहा रही हूँ नंही तो बस मर्दो के नीचे पडी रहती हूँ। और तुझे नहलाने मे भी मुझे बहुत मजा आ रहा है मेरी कोख से जना होता तो बचपन मे मैं तुझे अपने हाथ से नहलाती वह मौका मुझे तब नंही मिला तो क्या हुया आज मिल गया और आज मैं अपनी ये इच्छा जरुर पूरी करूंगी। अब मैंने अपने बेटे का पीछवाडा तो मल मल कर साफ कर दिया अब मैं अपने बेटे की पीठ पर साबुन लगाऊंगी। और रीमा ने अप्नी चूचीयाँ मेरी पीठ से चिपकायी और उनको मेरी पीठ पर रगडते हुये खडी हो गयी और खडे होकर अपनी गोरी मख्खन मलाईदार चूचीयाँ मेरे पीठ पर मलने लगी। वह अपनी चूचीयो से मेरे बदन पर साबुन लगा रही थी। और अपने हाथ मेरे कमर पर चला रही थी। उसकी हरकते उत्तेजनी मे मुझे पागल बनाये दे रही थी। उसकी घुंडिया मुझे अपनी पीठ पर बहुत अच्छी लग रही थी। वह अपनी चूचीयाँ कस के मेरी पीठ पर दबाती और मसलते हुये मेरी पीठ रगडती। अब मेरा मेरे उपर काबू रख पाना बिल्कुल मुश्किल हो गया और मैंने अपना हाथ अपने लंड पर रखा और उसने हिलाने लगा। जिससे मेरा बदन हिलने लगा और रीमा को इस बात का पता चल गया। रीमा ने आगे देखा तो मेरे हाथ पकड कर हटा दिया। ये क्या कर रहा है गाँडू मैंने तेरे को मुठ मारने की इजाज्त थोडी दी है मादरचोद जो तू लगा मुठ मारने। खबरदार जो फिर से लंड पर हाथ लगाया तो समझा बहनचोद मैंने सहमती में सिर हिला दिया।

रीमा मेरी पीठ पर साबुन लगा चुकी थी अब तेरी पीठ तो रगड दी कह कर फिर रीमा मेरे सामने आ गयी और मेरे से चिपक गयी और अपनी बाँहे मेरे गले मे डाल दी मैंने भी अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसके चूतडो पर रख दिये। अब मैं अपने बेटे की छाती रगडूंगी। रीमा अपनी चूचीयाँ मेरी छाती पर रगडने लगी। उसकी घुंडियाँ मेरे निप्पल्स से टकरा रही थी। मेरी निप्पल्स बहुत ही संवेदनशील थे रीमा के बदन के छूते ही वह खडे हो गये और इसका सीधा असर मेरे खडे लंड पर हो हुआ जो घोडे की तरह हिनहिनाने लगा। रीमा ने अपने होठों से मेरे चहरे को चुमने लगी। और मेरे होंठो को मुँह मे लेकर चूस रही थी। मेरी मस्ती बढने लगी। फिर रीमा ने अपना एक हाथ मेरे चूतड पर रखा और सहलाते हुये मेरी छाती पर अपनी चूचीयाँ मसलने लगी। मैंने अपने दोनो हाथ उसके चूतड पर रख रखे थे और उनको मसल रहा था। रीमा ने मेरे साथ भी ऐसा ही करना शुरु कर दिया। मेरा खडा लंड रीमा की गहरी नाभी से टकरा रहा था ऐसा लग रहा था जैसे अभी उसकी नाभी चोद देगा। मेरा बस चलता तो अपने लंड से रीमा की नाभी मे छेद बना देता। फिर एक और मेरे होंठो का गहरा चुम्बन लेने के बाद रीमा नीचे बैठ गयी। मेरा लंड ठीक रीमा के चहरे के पास आ गया। रीमा ने मेरे चेहरे के और आँखे उठा कर देखा और मुस्कुरायी। फिर रीमा ने टब मे से साबुन वाला पानी लेकर अपनी चूचीयो पर झाग मल लिया। जिससे उसकी चूचीयाँ और भी चिकनी हो गयी।


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

फिर रीमा अपने घुटनो के बल हो गयी और मेर लंड को अपने हाथ मे पकड लिया। तो मेरे बेटे का लंड तडप रहा था अपनी माँ के हाथ का स्पर्श पाने के लिये ले बेटा तेरी माँ ने अपने बेटे के लंड को फिर से अपने हाथो मे ले लिया है मेरे लाडले। अब मैं अपने बेटे के लंड को साफ करूगी और वह भी अपनी इन गोल गोल मोटी चूचीयो से रगड कर मुझे पता है मेरे बेटे को मेरी चूचीयाँ कितनी पंसद है तभी तो मैं अपनी चूचीयो से तेरा लंड साफ करूंगी। फिर मेरे लंड को पकड कर अपनी चूचीयो के बीच रख लिया और मेरे लंड को अपनी चूचीयो मे कैद कर लिया। अपने दोनो हाथो से अपनी चूचीयो का दबाव मेरे लंड पर बनाने लगी और अच्छे से मेरे लंड को अपनी चूचीयो के कैद मे ले लिया। फिर धीरे से अपनी चूचीयाँ हिलाने लगी। और अपनी चूचीयो से मेरे लंड को चोदने लगी। बोल बेटा मजा आ रहा है माँ की मोटी छातियाँ चोदने मे अच्छा लग रहा है लंड मेरी चूचीयो के बीच घुसाने में मेरे लाल हाँ माँ बहुत मजा आ रहा है बडी कस के जकडा है तुमने मेरे लंड को अपनी चूचीयो के बीच। चूचीयाँ चोदते हुये जब कभी मेरा लंड रजनी की चूचीयो से बाहर आता रजनी अपने रसीले होंठो का एक चुम्बन जड देती। रीमा कभी कस के अपनी चूचीयाँ दबाती और मेरा लंड चोदती जिससे मैं झडने के करीब आ जाता तो कभी हल्के से लंड को चूचीयो से सहलाती। उसे लंड से खेलने का हर तरीका पता था। कफी देर तक रीमा इसी तरह मुझे तडपाती रही। मेरे मुँह से मस्ती मे आह ओह की आवाजे रीमा को भी मस्त कर रही थी। चल बेटा बहुत खेल लिये अब चल कर शावर मे नहाते हैं। ऐसा कह कर मेरा लंड पकड कर शावर की और चल दी। फिर शावर मे जाकर उसने शावर चला दिया और हम दोनो पानी के नीचे खडे हो गये। पानी हम दोनो के नंगे बदन पर गिर रहा था। रीमा ने अपना हाथ मेरे कंधो पर रख रखा था। मैं अपने हाथो से रीमा के बदन पर से साबुन हटा रहा था और उसके पूरे बदन पर हाथ फेर रहा था।

पानी मेरे बदन पर भी पड रहा था और थोडी ही देर मे हम दोनो के बदन पर से साबुन बह कर निकल गया। मैंने फिर से रीमा को और मजा देने का सोचा और उसके चहरे को चूमने लगा और उसके चहरे पर गिरने वाले पानी को भी पीता जा रहा था। फिर मैन शावर बंद कर दिया और उसके चहरे को चूमते हुये उस पर जमी पानी की बूंदो को पीने लगा। रीमा के चूत मे मेरे ऐसा करने से आग लग गयी। और उसके दिवार के सहारे अपने को टिका लिया। और मुझे अपने बदन से खेलने के खुली छूट दे दी। उसके चहरे पर जमी पनी के बूंदे मैं अपने होंठो से पी गया। फिर मैंने उसकी गर्दन पर अपने होंठ जमा दियए और उस पर जमी बूंदे पीने लगा। उसके बदन से छू कर वह पानी मेरे लिये किसी शराब से कम नंही था।

क्रमशः.......................31


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

रीमा की चूत तो मेरे होंठ उसके बदन से लगते ही गर्मी से भर गयी थी। रीमा ने अपना हाथ अपनी गोरी मुलायम टाँगो के बीच रखा और अपनी चूत से खेलने लगी। मेरी हरकतो से रीमा बहुत मजे ले रही थी और अपनी सारी गर्मी निकाल देना चाहती थी। फिर जैसे ही मैंने रीमा के कंधे से नीचे उसके बदन का पानी पीने के लिये अपने होंठ उसकी बदन पर रखे रीमा ने मुझको अलग कर दिया और बोली अबे साले अपनी ही माँ के दलाल क्या सारे बदन का पानी पियेगा अभी थोडी देर पहले तो मेरा सारे बदन को चाट कर उसका पसीना पिया है। फिर से शुरु हो गया अब फिर से मुझे चाटेगा तो मुझे फिर से नहाना पडेगा। चल तौलिया उठा और मेरे बदन को तौलिये से साफ़ कर। मैंने तौलिया लेकर रीमा के बदन को साफ करना शुरु कर दिया। बडे ही प्यार से मे रीमा के बदन को साफ कर रहा था। उसका पेट गहरी नाभी मोटी जाँघे मुलायम हाथ उसके सुंदर पैरे उसकी भारे भरकम चूचीयाँ और मस्ती से भरे उसके चूतड सब कुछ मैंने तौलिये से साफ करने मे १० मिनट लगाये। रीमा ने भी पूरे मजे लेकर मुझसे अपना बदन साफ करवाया। फिर मैंने खुद जल्दी से अपना बदन साफ कर लिया।

तभी दरवाजे पर घंटी बजी। अब कौन आ गया माँ तुमने को डू नॉट डिस्ट्रब का बोर्ड लगाया था। अरे मेरे चोदू बेटे इतनी देर हो गयी है मैंने खाने ऑडर दिया था लगता है की वह आ गया है। तू ऐसा कर तू यंही रह अंदर बाथरुम मे मैं दरवाजा बाहर से बंद कर देती हूँ और जाकर उससे खाना ले लेती हूँ। रीमा ने बाथरुम मे टंगा बाथरोब उठाया और पहन लिया। और दरवाजा बंद करके बाहर निकल गयी। मैं वही कमोड पर बैठ कर उसके दरवाजा खोलने का इंतजार करने लगा।

" मैंने सोच क्यो न अपने पाठको को अपने अगले भाग की थोडी से झलक दे दी जाये इसलिये रीमा ने बाहर जाकर क्या किया और किससे मिली वही तीसरे भाग मे रीमा का साथ देगा"

रीमा जब बाथरुम से बाहर निकली और दरवाजा बन्द कर के रूम के दरवाजे की तरफ बढी। उसने दरवाजे के पास जाकर बाहर देखा और मुस्कुरा दी। उसने अपना बाथरोब खोल कर पास के खूंटी पर टाँग दिया और पूरी नंगी हो गयी। फिर उसने दरवाजे के पीछे जाकर दरवाजा खोल दिया। आओ रजनी मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी। रजनी खाने के ट्रे लेकर अंदर आ गयी। और रीमा ने दरवाजा बंद कर दिया। रजनी काले रंग की एक भरे पूरे बदन वाली ४० साल की औरत थी। वह शादी शुदा थी और होटल मे हेड वेटर्स थी। वेटर्स के साथ साथ होटल मे आने वाले कुछ आमीर लोगो का बिस्तर भी गर्म करती थी। उसके इसके अच्छे पैसे मिल जाते थे पर वह यह काम पैसे के लिये नंही करती थी। वह यह काम मजे के लिये करती थी। ऐसा मुझे रीमा ने बाद मे बताया। उसे मर्द और औरत दौनो पसन्द थे और वह दोनो के साथ मजा लेती थी। गौरी के बदन बहुत ही माँसल था। ३८ डीडी साइज की उसकी चूचीयाँ। ४४ साइज के उसके चूतड और उसका पेट भी बाहर निकला हुया था। देखने मे वह मोटी लगती थी। पर कई जवान मर्दो को उसके तरह कि मोटी औरते ही पसन्द थी। और इसी लिये उसकी बहुत माँग थी।

जब रीमा अपने बॉस के साथ होटल मे रहने आयी थी रजनी ने रीमा और उसके बॉस के साथ बहुत मजे लिये थे। तभी से रीमा के नजर उस पर थी और वह चाहती थी रजनी आकर दीपक को देख ले और फिर वह दोनो मिल कर उस जवान मर्द के साथ मजे लेंगी। रजनी ने बाडर वाली हरे रंग की साडी पहनी थी। और लो कट बलाउस पहना हुया था। उसकी बडी चूचीयाँ उसके बलाउस मे नंही समा पा रही थी। और साडी पारदर्शी होने की वजह से साफ दिख रही थी। उसने ऊची ऐडी के सैंडल पहन रखे थे। जिससे उसके चूतड और भी बाहर को निकल रहे थे। अंदर आने के बाद रजनी ने रीमा को नंगा देखा और उसके गले लग कर बोली क्या दीदी मजे कर रही हो अपने बेटे के साथ। हाँ मेरी रानी बडे मजे कर रही हूँ। तुझे भी करवाउगी मजे चिंता क्यो करती है मस्त छोकरा है। जैसा मैं कहती हूँ वैसा ही करता है तेरे को भी बडा मजा आयेगा। हाँ वह तो है रीमा की चूचीयो को अपने हाथ मे लेकर मसलते हुये रजनी ने कहा।


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

रीमा ने अपने होंठ रजनी के होंठो पर रख दिये और दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगी। रीमा ने अपनी जीभ रजनी के मुँह मे घुसा दी और उसकी जीभ से जीभ भिडाने लगी। रजनी के हाथ रीमा के नंगे बदन पर चल रहे थे और और वह रीमा की चूचीयो को अपने हाथो मे पकड कर मसल रही थी। रीमा भी अपने हाथ रजनी के मोटे चूतडो पर चला रही थी। थोडी देर एक दूसरे का चुम्बन लेने के बाद दौनो अलग हो गयी। कहाँ है तुम्हारे साहब जादे जरा हम से भी तो मिलवाओ उनको। मिलवाउंगी पर अभी नही कल सुबह। कल सुबह जल्दी तैयार रहना जैसे ही मैं फोन करु मेरे कमरे मे आ जाना मैं कमरे का दरवाजा खुला रखूंगी। तुम दीपक के लिये मेरा एक गिफ़्ट होगी। ठीक है जान जैसा तुम कहो। फिर दोनो कुछ देर बात करती रही। और चली गयी। बाहर जो कुछ हुया उसका मुझे बिल्कुल पता नंही था पर अगले दिन रीमा ने मुझे ये सब बताया।

अंदर मैं सोच रहा था कि इतनी देर हो गयी अभी तक रीमा ने दरवाजा क्यो नंही खोला। करीब ५ मिनट के बाद रीमा ने दरवाजा खोला और अंदर आ गयी। रीमा पूरी नंगी थी। रीमा मेरे पास आयी और बोली खाना आ गया है चल अब और फिर रीमा ने मेरा लंड पकडा और मुझे लंड से खींचते हुये और कमरे मे ले गयी। और मैं उसके पीछे किसी पालतू कुत्ते कि तरह चलता हुया आ गया। खाना टेबल पर लगा था। पर रीमा ने एक ही प्लेट रखी थी। मेरे को रीमा ने चेयर पर बैठने को कहा मैं चेयर पर बैठा तो मेरा लंड मस्ती मे तन कर उपर की और खडा था रीमा ने मेरे लंड को अपने हाथ से नीचे के तरफ दबाया और अपने चूतड मेरे लंड पर रखे और मेरी गोदी मे बैठ गयी। मेरे लंड रीमा के बदन के भार के कारण उसके चूतडो और मेरी जाँघ के बीच दब गया। फिर रीमा अपने चूतडो का दबाव मेरे लंड पर देती हुयी बोली अब हम दोनो माँ बेटा एक ही प्लेट से खाना खायेंगे। रीमा ने रोटी का एक टुकुडा तोडा और सब्जी लगा कर खाने लगी। उसको अपने मुँह मे चबा कर रीमा ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिये और अपने मुँह का टुकुडा जीभ से मेरे मुँह मे डाल दिया। रीमा का चबाया हुयी रोटी का स्वाद ही कुछ अलग था। मैं बहुत स्वाद लेकर देर तक उसको अपने मुँह मे लेकर चबाया। कैसा है खाना। बहुत अच्छा माँ तुम्हारे मुँह मे जाने से इसका स्वाद और भी अच्छा हो गया है। रीमा ने मुझे चूम लिया। रीमा ने मुझे इसी तरह अपने मुँह से चबा चबा कर ही पूरा खाना खिलाया। मेरा लंड उसके चूतडो की कैद मे फडफडाता रहा। फिर इसी तरह हम ने पूरा खाना समाप्त किया।

फिर हमने उठ कर टेबल साफ की और बाथरुम मे जाकर हाथ साफ किये। फिर रीमा बोली पेट पूजा तो हो गयी पर मेरी चूत की भूख अभी भी बाकि है अब मेरी चूत की भूख शांत करो। हम लोग बाहर कमरे मे आ गये। रीमा सोफे पर बैठ गयी मैं उसके बगल में बैठने लगा तो बोली तू चल नीचे बैठ मेरी टाँगो के बीच और मेरे मेरे पैर और जाँघो से खेल कर मुझे गर्म कर। मैं रीमा के टाँगो के बीच बैठ गया और उसके पैरो के चूमने लगा। बडे ही सुन्दर पैर थे रीमा के। उसके तलवो को चूमा उसकी पैरो के उंगलियो को चूमा। फिर घुटनो तक उसकी टाँगो को चूमा। मैन ऐसा उसकी दोनो टाँगो के साथ किया। रीमा को बहुत मजा आ रहा था और वह गर्म होने लगी थी। रीमा ने अपनी घुंडियाँ अपने हाथ मे लेकर मसल रही थी। उसके चूत भी रसीली हो चुकी थी। मैं ५ मिनट तक उसके पैरो को प्यार करता रहा। रीमा भी मेरे चूमने से काफी गर्म हो गयी थी। रीमा ने पास मे पडा अपने पेटीकोट का नाडा उठाया और बोली ला तेरे लंड को बांध दूँ। मैंने कहा माँ अब मुझे आदत हो गयी है अब मैं इसके बिना भी कट्रोल कर सकता हूँ। मुझे पता है पर मैं चाहती हूँ इसलिये तुझे बंधवाना पडेगा। मुझे जब मैं तेरे लंड पर नाडा बाँधती हूँ तो बहुत मस्ती चढ जाती है और मेरी चूत बहुत गीली हो जाती है इसलिये नाडा बाँधना बहुत जरूरी है। और जो मैं करने जा रही हूँ उसके लिये तेरे लंड का टनटनाये रहना बहुत ही जरुरी है पता चला तूने मुठ मार लिया तो। जैसी तुम्हारी मर्जी माँ पर तुम क्या करने जा रही हो वह मैं तुझे बाद में बताऊंगी । रीमा ने फिर कस के नाडा मेरे लंड और बाल्स पर बाँध दिया।

रीमा ने नाडा बहुत ही टाईट बाँधा था मेरे लंड की सारे नसे तन कर लंड पर दिखायी दे रही थी और लंड भी पत्थर के समान हो गया था। रीमा ने मेरे सर पर हाथ रखा और बोली मेरे राजा बेटे तेरे लिये तेरी रंडी माँ ने एक सप्राईज रखा है। वो क्या है माँ उसने पास मे रखा लिफाफा उठाया और मेरे को देती हुयी बोली। मैं अंदर बेडरुम मे तैयार होने जा रही हूँ। और तैयार होने के बाद मैं तुझको अंदर बुलाउंगी। तब तू ये लिफाफा खोल कर पढना। और फिर अंदर आना। ठीक है। मैंने कहा ठीक है। मैं होटल मे आने के बाद अभी तक उसके बेडरुम मे अभी तक नही घुसा था। रीमा ने मेरे गाल पर एक चुमा लिया और बेडरुम के और अपने चूतड मटकाती हुयी चली गयी। और दरवाजे पर जाकर पीछे मुड कर अपने चूतड थोडा उठा कर देखा और बोली देख जब मैं बुलाऊं तभी अंदर आना और मेरा लेटर पढना समझा नंही तो सारा मजा किरकिरा हो जायेगा और मुझे आँख मार कर अंदर चली गयी। मेरा लंड उसके मटकते चूतड देख कर मचल रहा था। पता नही रीमा ने क्या सोच रखा है रात के लिये। कुछ घंटो मे ही मुझे रीमा के साथ जो मजा अया था उसको सोच कर ही मेरा लंड मचल रहा था। पर शायद अभी बहुत कुछ बाकी था। अभी तो मुझे उसकी गाँड और चूतड से बहुत प्यार करना था थोडी ही देर में मै रीमा के चूतड और गाँड का गुलाम हो चला था।

क्रमशः.......................


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रीमा ने जाते हुये मुझे कयी मस्त राम की कहानियो के किताब दे गयी थी। और राज शर्मा के कहानिओ के ब्लॉग के बारे में बता गई थी और कहा के इसको पढो और अपने लंड को मस्त टनटना कर रखो मुझे तैयार होने मे थोडी देर लगेगी। तब तक ये मस्त चुदायी की कहानियाँ तुम्हारा साथ देंगी। मैं मस्त राम की कहानीयाँ पढने लगा और मेरा लंड जो पहले से ही खडा था और भी भूखे शेर के तरह हो गया। वह कहानियाँ सिर्फ माँ बेटे की चुदायी की रास लीला से भरी हुयी थी। रीमा को तैयार होने मे करीब१ घंटा लगा। मैंने तब तक दो तीन किताब खत्म कर दी थी। और अपने खडे लंड के साथ खेल रहा था। रीमा ने अंदर से मुझे आवाज लगायी बेटा मे तैयार हो गयी हूँ अंदर आ जा जल्दी से। रीमा की आवाज सुनते ही मेरे अंदर एक नया उत्साह आ गया और मैंने कमरे की तरफ भागा पर तभी मुझे याद आया की रीमा ने एक लेटर भी दिया था मैंने रीमा का लेटर लिया और खोल कर पढने लगा।

मेरे प्यारे मेरी रसीली चूत और भरपूर गाँड के दीवाने बेटे दीपक,

आज मैं तुमसे मिल कर बहुत खुश हूँ। तुम बिलकुल वैसे ही हो जैसा मैंने सोचा था। काश तुमने मेरी कोख से जनम लिया होता और तुम मेरे सगे बेटे होते। तुमने कुछ घंटो मे जो मुझे मजा दिया मेरी चूत को जो सुख पहुंचाया है वह तो मुझे अपने पूरी जिंदगी मैं भी नही मिला। मेरे बदन को प्यार करने वाला तुम्हारे जैसा रसीया मर्द मुझे कभी मिल ही नंही सकता और तुम्हारे अंदर जो मेरे प्रति जो स्मर्पण की भावना है वह एक बेटे के अंदर ही हो सकती है और तुम्हारी माँ भी अपने बेटे को मादरचोद बना कर आज बहुत खुश है। तुम जैसे मेरी हर बात मानते हो वह मुझे बहुत मस्त कर देता है और तुम्हारे लंड पर नाडा बाँध कर तडपाने मे मुझे जो मजा आता है उसको तो मैं बयान ही नंही कर सकती। आज हम पहेली बार मिल रहें है तो आज ये हमारी पहली रात है। औरत और आदमी के बीच पहली रात सुहाग रात होती है तो मैं इस रात हो सुहाग रात की तरह ही मनाना चाहाती थी। और मैं अंदर सुहगिन की तरह तैयार होने ही गयी थी। मेरे राजा बेटे तेरी माँ तेरा अंदर सजी धजी तेरा इंतजार कर रही है आ और आकर अपने अरमान पूरे कर ले बेटा। आज की रात तू मेरा मर्द है और मैं तेरी औरत। आज अंदर सुहाग सेज पर तू अपनी माँ को भोगेगा इसलिये आज की रात तेरी रात है बेटा आजा अब और देर न कर और अंदर आजा। आज तेरे अरमान पूरे होने के रात है और आकर तू अपने अरमान पूरे कर ले। कर ले जो करना है तुझे अपनी इस माँ के मोटे बदन के साथ जो नयी नवेली दुल्हन की तरह सजी दझी अपनी चूत खोल कर अपने लाडले बेटी की दुल्हन बनी इंतजार कर रही है।

तेरी रंडी माँ,

रीमा

और खत के अंत मे रीमा ने अपने होठो से किस करके अपने गुलाबी होठों की छाप भी छोडी थी। अब तो अपने आप को रोक पाना मेरे लिये बिल्कुल ही नामुमकिन था। मैं दौड कर बेडरुम के तरफ बढा। और रुम क दरवाजा खोल कर अंदर घुसा। रुम मे घुसते ही वहाँ का नजारा देख कर मेरे होश ही उड गये। रीमा दरवाजे के थोडी दूर पर ही खडी हुयी थी। और सामने बिस्तर सजा हुया था। उस पर फूल पडे हुये थे। और एक बडी सुन्दर से चादर बिछी हुयी थी। बिसतर बिल्कुल ऐसा ही सजा हुया था जैसे सुहागरात मे सजाते है। फूलो के खुशबू से भरपूर। रीमा पूरी एक सजी धजी खडी थी। रीमा का सारा शरीर गहनो से लदा हुया था। उसने सर पर लाल रंग की पारदर्शी चुनरी पहन रखी थी। और माथे पर माँग टीका था। और माथे पर एक बडी से बिंदी लगी हुयी थी। आखो के उपर छोटी छोटी बिंदिया लगी थी जैसे एक नयी नवेली दुल्हन लगाती है। चहरे पर काफी मेकप किया था रीमा ने। गालो पर लाली लगायी थी और होठों पर गहरे लाल रंग के लिप्सटिक जो मौके के पूरे अनुकूल थी। वैसे तो रीमा बहुत सुन्दर थी पर दुल्हन के रुप मे उसकी सुन्दरता और बढ गयी थी। उसके हाथ भी पूरे गहनो से लदे थे। दोनो हाथो मे बाजू बंध और उंगलियो मे अंगूठीयाँ और हाथो मे काफी मंहगी चूडीयाँ पहनी थी। साथ ही सोने के कडे भी पहन रखे थे। उसने कमर के उपर सिर्फ ब्रा पहन रखी थी। और उस ब्रा मे कप नही थे। उसकी चूचीयाँ पूरी नंगी थी। और उसकी घुंडियाँ एक दम तन कर खडी थी। उसने अपनी घुडियाँ और उसके आस पास का हिस्सा लिप्सटिक से लाल कर रखा था। गोरे रंग की चूचीयाँ और उस पर लाल रंग की घुंडियाँ बहुत मस्त लग रही थी और लंड कि मस्ती को बढाने वाली थी। उसका लाल रंग एक अलग ही आमंत्रण दे रहा था। उसने गले मे मंगल सूत्र और हार पहन रखा था। जो उसके गोरे रंग पर बहुत फब रहा था। उसका मंगल सूत्र ठीक उसकी चूचीयो के बीच आकर ठहरा था। उसने अपनी कमर मे सोने के तगडी बाँघ रखी नाभी के ठीक नीचे। उसकी तगडी से झालर लटक रही थी जो उसकी चूत के थोडी ही उपर थी। उसने कोच्रलस पेंटी पहन रखी थी। जिसका रंग काला था। उसकी चूत पेंटी के बीच पूरी खुली हुयी थी। उसने पैरो मे स्टाकिंग पहन रखी थी। काले रंग की। जो उसकी मोटी जाँघो के आधा ढके हुये थी। उसने पैरो मे पायल और पैरो के उंगलियो मे बिछुये पहने हुये थे। और ६ इंच हील पहनी हुयी थी। वह बिल्कुल उसी तरह से सजी हुयी थी जैसे उत्सव फिल्म मे रेखा सजी थी। वह इस समय किसी अप्सरा से कम नंही थी। उसके हाथो मे एक ट्रे थी जिसमे एक बडा गिलास रखा था। जो की पूरा भरा हुया था। उसमे कुछ पीले रंग का दर्व्य था।


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कैसी लगी तुझे अपने दुल्हन मेरे लाल। आज इस दुल्हन को तुझे भोगना है आज तेरी और तेरी माँ की सुहाग रात है बेटा। बहुत मजेदार माँ बहुत ही सुंदर दुल्हन हो तुम माँ। बेटा तूने इतनी देर से मेरी चूत को इतना मजा दिया है। तो आज की रात तेरी है। मैं तेरे सामने हूँ जो करना है कर ले मेरे साथ अपने सारे अरमान पूरे कर ले। सुबह से तूने मेरी चूत झडा झडा कर इसका बुरा हाल कर दिया है की मेरी चूत भी तोबा बोलने लगी है। तो मेरे लाल इसलिये मैं तुझे अपनी चूत मे लंड नंही डालने दूंगी पर बाकी तू जो चाहे कर सकता है। हाँ चूत चुसना चहाता है तो चूस सकता है पर मेरी चूत बहुत ही संवदनशील हो चुकी है तेरा लंड नंही ले पायेगी अपने अंदर। सुबह से मेरे चूतडो के पीछे पडा है। आ अब करले अपनी हसरत पूरी। अब मैं तुझे अपने चूतडो के साथ खेलने को मना नंही करूंगी। आज के पूरी रात कर ले अपनी मर्जी की। रीमा ने अपने चूतडो और गाँड से खेलने की पूरी छूट दे दी थी। वैसे पूरी रात तू मुझे भोगेगा तो तुझे बहुत मेहनत करनी पडेगी। और पूरी रात मेहनत करने मे तुझे थोडी ताकत की जरुरत होगी। उसके लिये भी मैंने इंतजाम कर लिया है। ये ले इसी पी ले अपनी ट्रे आगे बढाते हुये बोली। अपने बेटे को ताकत देने के लिये उसकी माँ के मूत से बढ कर क्या होगा। माँ का मूत वैसे भी लंड को शक्ति देने के लिये बहुत जरुरी है। मैंने अभी अभी इस गिलास मे मूता है। देख कितनी देर से तेरे लिये बचा कर रखा था मैंने अपना मूत। खाने के बाद काफी पाने पिया था ताकि काफी मूत बना सकूं तेरे लिये। मेरे मूत से पूरा गिलास ही भर गया। इसको पीने से तेरे को पूरी रात मेरे को रौदने की ताकत मिलेगी मेरे लाल। मुझे पता है कि क्या है तेरे मन में कैसे तडप रहा है तू मेरे बदन को उधेडने के लिये और तेरा लंड तडप रहा है मेरी गाँड फाड डालने के लिये और इन सब के लिये तेरे तेरे को रात मे भी मूत की जरुरत पडेगी ताकत के लिये फिर मैं तो हुँ ही जब भी रात मे मन कर मुझे बता देना तेरे को अपना मूत पीला दूंगी।

मैं तो इतनी देर से रीमा की सुंदरता को निहार रहा था और उसके प्रेम भरे वचन सुन रहा था। रीमा के बात सुनते ही मेरा सरा शरीर मे मस्ती की एक लहर दौड गयी। रीमा ने ट्रे आगे बढा कर मूत से भरा हुया गिलास मुझे दे दिया। मैं मूत से भरे गिलास को अपनी नाक के नीचे रख कर सुंघने लगा। मूत की तीखी मस्त कर देने वाली गंध मेरी नाक मे घुस गयी। मेरा लंड नाडे मे बंधा फडफडाने लगा। बेटा मैंने तेरा लंड बाँध के रखा था क्योकी मैं नंही चाहाती थी कि कमरे मे आने से पहले तू झडे और मुझे इस रूप मे देखने का पूरा मजा न ले सके। वैसे तो तू मजा लेने के लिये आजाद है और चाहे तो नाडा खोल सकता है और कितनी भी बार झड सकता है। क्योकी आज की रात तू मेरा मर्द है और मैं तेरी औरत और मर्द को मजा देने मे औरत को खुशी होती है पर मुझे अच्छा लगेगा अगर तुम रात भर इसी तरह नाडा बाँधे रहो और करीब सुबह जाकर ही अपना नाडा खोलो। क्योकि अगर मैं तुम्हारे लंड पर नाडा बंधे हुये देखूंगी तो मेरी चूत पूरी रात गर्म रहेगी और मैं तुम्को बहुत मजा दे सकूंगी। मैं रीमा के बात का मतलब समझ गया और मैंने नाडा ना खोलने का ही विचार किया। और वैसे भी मुझे रीमा की हर बात मानने मे बहुत खुशी होती थी और मेरा लंड भी मस्त हो जाता था। फिर मैंने रीमा के मूत से भरा गिलास मुँह मे लगाया और उसका गर्म गर्म मूत पीने लगा। रीमा क मूत मैं एक बार पी चूका था और उसका स्वाद मेरे दिल मे बस गया था। उसका खारा गर्म मूत मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मैं उसको स्वाद लेकर पी रहा था। रीमा का मूत एक बार मैं सीधा रीमा की चूत से पी चुका था पर अब गिलास से मूत पीने का अलग ही आंनद आ रहा था। मैं रीमा का मूत चुसकियाँ लेकर पी रहा था और रीमा अपनी वासना भरी निगाहो से मुझे निहार रही थी और मुझे अपने मूत को पीते हुये देख रही थी। और थोडी देर मैं ही मूत पीकर गिलास खाली कर दिया। सचमुच माँ तुम्हारा मूत ये खारा गर्म मूत पीकर मेरे अंदर एक नया उत्साह भर गया है। मैंने मूत पीकर गिलास रीमा के ट्रे मे रख दिया। रीमा ने ट्रे ली और पीछे मुड कर ट्रे रखने चल दी। रीमा का गोरा बदन और उसके भारी चूतड जो उंची ऐडी की हील होने के वजह से और भी उभर आये थे और उस पर उसकी मटकती चाल अब तो मेरे लिये रुकना बिल्कुल मुशकिल था। और अब तो रीमा ने मुझे पूरी आजादी भी दे दी थी कुछ भी करने की।

मैं रीमा के पीछे गया और घुटनो के बल उसके पीछे बैठ गया। मेर चेहरा उसके चूतडो के सामने था। जैसे ही उसने झुक कर ट्रे नीचे रखी वैसे ही उसके चूतड मेरे मुँह से टकरा गये और मैंने उसको एक चुम्बन दे दिया। रीमा के मुँह से एक आह निकल गयी। रीमा को श्याद मेरी इस हरकत की उंमीद नंही थी। तभी तो मेरी इस हरकत से रीमा एक दम से सकपका गयी। मैंने रीमा के दोनो चूतडो पर बडे ही प्यार से चुम्बन लिये और फिर अंत मे उसके चूतडो के बीच से झाँकती हुये काली झाँटो से भरी चूत का भी चुम्बन लिया फिर थोडी देर तक मैं रीमा के चूतडो को निहारता हुया उसके चूतडो को मसलने का मजा लेने लगा। उसका बदन से बहुत ही अच्छी महक आ रही थी श्याद उसने कोई पर्फूयम लगाया था। रीमा खडी हुयी सब कुछ कराती रही और मजे लेती रही उसने मुझे एक बार भी मना नंही किया। फिर मैंने रीमा से बिस्तर के तरफ चलने को कहा रीमा बोली जैसा तू बोले बेटा वर्ना मैं तो सोच रही थी की तू मुझे सारी रात ऐसे ही खडा रखेगा और मेरे चूतडो से ही खेलता रहेगा। अरे मेरी प्यरी चुदक्कड माँ सुहाग रात का मजा तो सुहाग की सेज पर ही आता है ये तो बस मैं अपनी प्यरी दुल्हन के चूतडो का थोडा मुआयना कर रहा था। रीमा एक अदा से मुस्कुरायी और बोली चल बिसतर पर चलते है कह कर वह बिस्तर की और चल दी। रीमा अपने चूतड मटकाते हुये बिस्तर की तरफ चलने लगी मैंने रीमा की कूल्हो को पकड रखा था और रीमा के चूतडो को अपनी आँखो के सामने रखना चाहाता था इसलिये मैं उसके पीछे घुटनो के बल चल रहा था और हर कदम पर उसके उसके चूतडो को चूमता जा रहा था। जब वो दाँया पैर आगे रखती तो मैं बाँये चूतड को चूमता और जब वह बाँया पैर आगे रखती तो दाँये चूतड को। रीमा को मेरा चूतड चूमना बडा ही अच्छा लग रहा था इसलिये उसने बिस्तर तक पहुंचने मे बहुत समय लगाया ताकि में पूरा मजा लेकर उसके चूतडो को चूम सकूं। रीमा बेड के पास पहुँच कर रुक गयी और मैंने उसके दोनो चूतडो पर जम कर चुम्बनो की बौछार कर दी। पागलो की तरह उसके कूल्हे पकड कर उसके चूतडो को चूमने लगा। चूतड थोडी देर चूमने के बाद मैने आगे बढने की सोची और मैं खडा हो गया। और रीमा पलट कर मेरे सामने आ गयी। अब हम दोनो एक दुसरे के बहुत पास थे।


RE: Maa Sex Chudai माँ बेटे का अनौखा रिश्ता - sexstories - 08-17-2018

लगता है मेरे बेटे को अपनी दुल्हन बह्त पंसद आयी तेरे लंड को और तेरी हरकतो को देख कर तो यही लगता है। हाँ माँ तुम्को इस रूप मे देख कर तो मैं वासना मैं पागल हुये जा रहा हूँ मैं भी बहुत खुश हूँ बेटा सच कहूँ तो आज वर्षो बाद मुझे बहुत मजा आ रहा है। मुझे भी बडा मजा आ रहा है मैंने कहा। आज हमारी सुहाग रात है मेरे लाल तू अपनी दुल्हन को क्या तोहफा देगा। पहली रात को तो पत्नी को तोहफा देने के रस्म है बोल तू क्या देगा। तू अपनी इस सुंदर मस्तानी दुल्हन को क्या देगा आज रात तोहफे में। जो तुम माँगो माँ मैं वोह देने के लिये तैयार हूँ। तुम्हारे जैसी औरत तो किसी किसी को ही मिलती है। सोच ले फिर बोले की नही दे सकता तेरी माँ कुछ भी माँग सकती है। मैंने कहा तुम माँगो माँ मैं तुम्को जरुर दूँगा। ठीक है तू कहती है तो माँग लेती। मुझे एक ऐसी चीज चाहिये जिसे पाने का मन मेरा कई सालो से है और मुझे लगता है कि मेरा ये प्यारा मादरचोद बेटा मुझे ये दे सकता है। तो बताओ माँ वोह क्या है। मुझे सुहाग रात के तोहफे मे तेरी जिदंगी भर की गुलामी चाहिये। मैं चाहती हूँ की तू जिंदगी भर के लिये मेरा गुलाम बन कर रहे मेरे साथ। जो मैं कहूँ वही करे। तू मेरी खुशी और मेरी मुँह से निकली बात को पूरा करने के लिये जिये। बोल दे सकता है ये तोहफा। मैं रीमा के तरफ देख कर मुस्कुराया रीमा कि बात सुनकर मेरा लंड भी मस्ती मे फनफना गया। वैसे तो ये मेरा भी सपना था न जाने कितनी कहानियो मे पढा था इसके बारे में और रीमा आज वही मुझसे माँग रही थी या ये कहूँ वह इस इच्छा में मेरी इच्छा पूरी कर रही थी। मैंने रीमा को ये तोहफा देने का फैसला किया और बोला हाँ माँ मैं तुम्हारा गुलाम बनने को तैयार हूँ मैं तो खुद ही ये तुमसे कहने वाला था कि ये मेरी दिली इच्छा है। पर तुम्ने तो मेरा काम इतना आसान कर दिया। ठीक है जब तू भी यही चाहाता है तो आज से तू मेरा गुलाम हुआ समझ गया। जी माँ बिल्कुल समझ गया। चल अब मैं अपने गुलाम से क्या चाहाती ये सब बाकी बात बाद मैं आज मेरी मेरे बेटे के साथ सुहाग रात है और मुझे उसका मजा लेना है। रीमा और मैं आमने सामने खडे थे। रीमा झुकी और सबसे पहले मेरे पैर छुये मैंने कहा ये क्या कर रही हो माँ। अपने पति के पैर छू रही हूँ ये तो मेरा हक है। चलो मुझे आर्शीवाद दो। खुब लंड मिले तुम्को चुदवाने के लिये और तुम्को कभी भी लंडो की कमी न हो। बडा ही अच्छा आर्शीवाद दिया तुमने। फिर रीमा के मेरे लंड को हल्के से चूमा और बोली लो पतिदेव आपकी दासी तैयार है आपके लिये जैसे चाहे वैसे मसलिये अपनी दुल्हन को। माँ दासी तुम नंही मैं तुम्हारा दास हूँ हाँ मुझे पता है पर सुहाग रात को अगर पत्नी दासी न बने तो पति को उम्र भर के लिये दास कैसे बनायेगी बोल । माँ की बात को समझते हुये मैंने सर हिला दिया।

मैंने रीमा के माथे का चुम्बन लिया और उसको अपनी बाँहो मे भर लिया। उसकी बडी बडी चूचीयाँ मेरी छाती मे धंस गयी। मैंने एक हाथ उसकी पीठ पर रखा और दुसरे हाथ को उसके चूतडो पर फिराने लगा। और उसकी गर्दन पर अपनी सांसो के गर्मी फेकने लगा। उसकी कमर को अपने हाथ मे लेकर मसलने के कोशीश करने लगा। रीमा ने भी अपनी बाँहो को मेरी पीठ पर चलाना शुरु कर दिया। रीमा का गर्म बदन मेरे बदन से चिपक गया था जो मुझे अच्छा लग रहा था। मैंने अपना एक पैर उपर उठाया और उसकी जाँघ पर रगडने लगा। मैं इन सब हरकतो से रीमा के बदन की गर्मी बढा देना चाहाता था। मैंने रीमा की गर्दन पर चुम्बन लेने लगा और उसे कस के अपनी बाँहो मे जकड लिया। उसकी चूचीयाँ पूरी तरह से मेरे सीने मे दब गयी। रीमा ने अपने हाथ मेरी पीठ पर रखे और मुझे कसके अपनी और खीचने लगी। जैसे वह मुझमे समा जाना चाहाती हो। हम दोनो के बदन वासाना की आग से जल रहे थे। मैंने एक हाथ से रीमा का चेहरा उठाया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिया और उनको चूमने लगा। वह भी पूरी मस्ती मे मेरे होंठो को चूमे जा रही थी। मैंने उसके निचले होंठ को अपने होंठो मे लेकर चूम रहा था और वह मेरे उपरी होंठ को। उसके होंठो से मैं उसकी लिप्सटिक का स्वाद मेरे मुँह मे आ रहा था। उसकी सारी लिप्सटिक मेरे चूमने से खराब हो गयी थी और मेरे होंठो पर भी लग गयी थी। हम लोग मस्ती मे पूरी तन्लीन होकर एक दूसरे के होंठो को चूम रहे थे। मैं रीमा के रसीले होंठो का सारा रस पी जाना चाहाता था। इसलिये काफी जोर से उसके होंठो के चूस रहा था हमारी आँखे मस्ती मे पूरी तरह से बंद थी।


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